तभी उसने कार रोकी और दोनों उतरे और एक घर कि सामने वह आकर घंटी बजाया। दरवाज़ा खुला और सामने गुप्ता खड़ा था।
नमिता चौंक कर सुधाकर को देखी तो वह मुस्कुराया और बोला: देखा मैंने कहा था ना कि किसी नए आदमी से तुमको नहीं मिलवाऊँगा। गुप्ता और तुम तो मज़े ले ही चुके हो।
नमिता लाल हो कर बोली: गुप्ता सर आपने इनको सब बता दिया?
सुधाकर जाकर सोफ़े पर बैठ गया । गुप्ता ने धीरे से कहा: हाँ पर राज और तुम्हारी बात नहीं बतायी है।
नमिता को थोड़ी शांति मिली। वह बोली: थैंक्स।
अब गुप्ता जाकर फ्रिज से बीयर की बोतलें और ३ गिलास और कुछ नमकीन ले आया ।
सुधाकर: यार अभी तो १० ही बजे हैं । सुबह सुबह बीयर पीने का प्रोग्राम बना लिया।
गुप्ता: यार जब नमिता जैसी परी पास में हो तो क्या दिन क्या रात?
सुधाकर बोला: सच में यार तुम सही कह रही हो।
नमिता शर्माकर नज़र नीचे कर ली।
अब गुप्ता ने ३ गिलास में बीयर डाली और सोफ़े पर अकेली बैठी नमिता को गिलास दिया।
नमिता: सर मैंने काफ़ी समय से पिया नहीं है। पता नहीं पी कर बहक मत जाऊँ।
गुप्ता: बेटी, बहकोगी तभी तो मज़ा आएगा।
नमिता ने गिलास ले लिया। अब तीनो पीने लगे।
सुधाकर : जानते हो गुप्ता, कल जब मैंने बहुत दिन बाद नमिता को चोदा तो मुझे समझ आया कि कल की छोकरियाँ तो इसके सामने कहीं खड़ी ही नहीं होती। आऽऽह क्या मज़े से चुदवायी थी ये कल। देखो कल का सोचकर मेरा लौड़ा फिर खड़ा हो गया। यह बोलते हुए वह अपने उभरे हुए लौड़े को मसलने लगा।
गुप्ता: यार मैं भी २ बार मूठ्ठ मार चुका हूँ , पिछले दिनों हुई इसके साथ चुदायी को याद करके।
सुधाकर: यार ऐसी कम ही औरतें होती है जो खुलकर मज़े से चुदवाती हैं, नमिता इनमे से एक है।
गुप्ता: सच कहा यार, ये पूरा मज़ा लेती है।
नमिता की बुर पनियाने लगी थी , इस तरह की बातें सुनकर और उसको बीयर का नशा भी चढ़ गया था। गुप्ता ने उसका गिलास फिर से भर दिया।
नमिता: एक बात बताओ आप लोग कि क्या इस काम में मज़ा लेने का ठेका सिर्फ़ मर्दों का है ? क्या औरत उसने मज़ा नहीं ले सकती?
सुधाकर: किस काम मेंजानू साफ़ साफ़ बोलो ना?
नमिता: चुदायी में और क़िसमे ?
सुधाकर: हाँ जानू ज़रूर, क्यों नहीं, औरत को भी पूरा हक़ है चुदायी में मज़ा लेने का।
गुप्ता: क्या हम सिर्फ़ बातें ही करेंगे या चुदायी भी करेंगे?
नमिता: आप दो लोग हो और मैं अकेली यह नाइंसाफ़ी है मेरे साथ।
गुप्ता: कोई नाइंसाफ़ी नहीं है। भगवान ने तुमको तीन छेद दिए हैं। अभी एक और भी आ सकता है।
सुधाकर: अगर मनीष होता तो उसको बुला लेते। फिर तुम्हारे तीनों छेद भर जाते।
नमिता भी नशे में आ गयी थी वह हँसने लगी।
अब गुप्ता ने उठकर म्यूज़िक लगा दिया और बोला: चलो नमिता नाचो मेरी जान। गाना भी मादक था, – चोली के पीछे क्या है—
नमिता : मैं अकेली नहीं नाचूँगी आपको भी नाचना होगा।
तीनों खड़े हो गए। अब नमिता नशे में मस्त होकर अपनी साड़ी का पल्लू गिरकर अपने ब्लाउस को दिखाकर उस गाने पर नाचने लगी। दोनों मर्द भी मज़े से उसके साथ हाथ हिलाके नाचने लगे।
गुप्ता: बेटी,, साड़ी निकाल दो ना, नाचने में दिक़्क़त आएगी।
नमिता ने साड़ी खोल दी और ब्लाउस और पेटिकोट में ही अपनी पतली कमर और भरे हुए चूतर और चूचियाँ उछालने लगी।
राज और सुधाकर तो मस्ती से झूम उठे। क्या मादक औरत थी। अब सुधाकर आकर उसके पीछे से उसको पकड़कर अपना लौड़ा उसकी गाँड़ पर रगड़ने लगा। और गुप्ता सामने आकर उसके ब्लाउस के हुक खोलने लगा। नमिता ने उसको अपना ब्लाउस निकालने मेंमदद की।
अब वह ख़ुद सुधाकर के लंड पर अपने चूतरों को रगड़कर मस्ती से भर रही थी। गुप्ता उसकी चूचियाँ ब्रा के ऊपर से दबा रहा था। फिर सुधाकर ने उसकी ब्रा का हुक भी खोला और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ जिनके निपल्ज़ तने हुए थे, सामने आ गए। दोनों ने एक एक चुचिपकड़ ली और मस्ती से दबाने लगे। उसके निपल्ज़ को भी वह दोनों दबा कर नमिता की जवानी में आग लगा रहे थे। तभी गुप्ता ने उसके पेटिकोट के नाड़े को खोलकर उसको गिरा दिया और अब उसको पैंटी में देखकर दोनों मर्द जैसे पागल हो गए। उन दोनों ने नमिता को नाचने के लिए छोड़ दिया और उसकी मस्त छातियों को उछलते हुए देखते हुए वो दोनों नंगे हो गए। उनके काले मोटे लौड़े हवा में लहरा रहे थे। अब वह दोनों नमिता से चिपक गए और गुप्ता उसके होंठ चूसने लगा और सुधाकर उसकी चुचि दबाते हुए उसकी पैंटी उतारने लगा। गुप्ता ने नीचे होकर उसकी पैंटी उसके शरीर से अलग कर दी। और उसका नंगा भरा बदन देख कर दोनों उसके बदन के एक एक अंग से खेलने लगे। गुप्ता ने उसकी बुर में तीन ऊँगली डाल दी और वह सीइइइइइइइ कर उठी। उधर सुधाकर का खड़ा लौड़ा भी उसकी गाँड़ के छेद में ठोकर मार रहा था।
अब गुप्ता उसको सोफ़े पर बैठाया और उसके सिर को पकड़कर नीचे को दबाया, नमिता समझ गयी कि वह लंड चूसने का इशारा है।
उसने गुप्ता के लौड़े को सहलाया और फिर उसके सुपाडे को चाटकर मज़ा ली और फिर पूरा लौड़ा मुँह मेंलेकर चूसने लगी। गुप्ता और सुधाकर उसके मुँह को ऊपर नीचे होते देखकर मस्त हो रहे थे। सुधाकर उसकी चूचियाँ दबाने लगा।
फिर गुप्ता हट गया और सुधाकर उसकी जगह नमिता के मुँह के सामने आ गया। अब नमिता ने सुधाकर का लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
अब गुप्ता बोला: यार चलो बेडरूम में चलते हैं।
फिर तीनों बेडरूम में पहुँचे और नमिता को लिटाकर दोनों उसके एक एक साइड में आकर उसकी एक एक चुचि दबाने लगे और फिर मुँह में लेकर चूसने लगे।
नमिता की आऽऽऽऽऽऽऽऽहहह निकलने लगी। वह मस्ती से दोनों के सिर को अपनी छातियों पर दबाने लगी। गुप्ता का हाथ उसके पेट को सहलाते हुए उसकी बुर को सहलाने लगा। और सुधाकर भी उसकी जाँघों को दबाकर मस्त होकर उसकी चुचि और ज़ोर से चूसने लगा। नमिता की हाऽऽऽऽऽऽय्य्य्य्य कमरे में गूँजने लगी।
अब गुप्ता नीचे की ओर गया और उसकी टांगों को मोड़कर उसकी मस्त बुर को देखकर झुका और उसको चूमने लगा और फिर जीभ से उसको चाटने लगा। नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके अपने चूतरों को उछालने लगी। उधर सुधाकर उसकी एक चुचि पी रहा था और एक दबा रहा था।
गुप्ता उठकर एक क्रीम ले कर आया और सुधाकर को दिया।सुधाकर मुस्कुरा कर क्रीम के लिया।
अब गुप्ता बोला: बेटी,उस दिन जैसे मुझ ओर चढ़ी थी वैसे ही आज भी चढ़ जाओ।
ये कहता हुआ वह लेट गया। सुधाकर नमिता को छोड़ दिया। अब नमिता आकर गुप्ता की जाँघों पर बैठी और उसका लौड़ा पकड़कर अपनी बुर में सेट करके उसपर धीरे से बैठ कर उसको पूरा अंदर कर ली। अब नमिता उसके ऊपर उछलने लगी और बूढ़े गुप्ता को चोदने लगी।
अब नमिता को अपने चूतरों पर सुधाकर के हाथों का अहसास हुआ और वह समझ गयी कि आज सुधाकर का मोटा लंड उसकी गाँड़ फाड़ने वाला है। जब उसने उछलते हुए अपनी गाँड़ के छेद में सुधाकर की ऊँगली घुसते हुए महसूस की तो वह रुक गयी ताकि वह उसकी गाँड़ में अच्छी तरह से क्रीम लगा ले। अब उसके उठी हुई गाँड़ सुधाकर के सामने थी । वह मस्ती से उसको देखकर उसपर अपना मुँह ले जाकर उसको चाटने लगा और फिर जीभ से उसकी गाँड़ को चोदने लगा। नमिता की बुर में मोटा लौड़ा तो फंसा हुआ था ही और उसकी गाँड़ में जीभ की चुदायी से वह भड़क उठी और चिल्लायी आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह मज़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽ आऽऽऽ हैएएएएएएए। उईइइइइइइइइइ ।
अब सुधाकर ने दो ऊँगली में ढेर सारा क्रीम लिया और उसकी गाँड़ में डालकर उनको आगे पीछे करने लगा। वह भी मस्ती से अपनी कमर हिला कर गुप्ता के लंड को और सुधाकर की उँगलियों को निगलने लगी। तब सुधाकर ने अपने लौड़े पर भी क्रीम लगायी और अपने लौड़े के सुपाडे को उसकी गाँड़ के छेद पर रखा और एक झटके से अपना सुपाड़ा उसकी गाँड़ में पेल दिया। नमिता चीख़ी: आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह मरीइइइइइइइइइ।
सुधाकर ने परवाह ना करते हुए एक और झटका मारा और क़रीब क़रीब पूरा लौड़ा अंदर हो गया।
नमिता: आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह फट गयीइइइइइइइइइ मेरीइइइइइइइ गाँड़।
अब गुप्ता ने नीचे से कमर उठाकर धक्का लगाया और नमिता ऊपर की ओर उछली और सुधाकर का लंड उसकी गाँड़ में धँस गया।
बस अब नमिता भी मस्ती में आ चुकी थी। गुप्ता उसकी चूचियाँ दबा रहा था और नमिता उछल कर दो दो लौड़ों का मज़ा के रही थी।
थोड़ी देर बाद गुप्ता ह्न्म्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा। उधर सुधाकर ज़ोर ज़ोर से नमिता की गाँड़ मारे जा रहा था। कमरा थप्प ठप्प की आवाज़ से भर गया था। सुधाकर की जाँघें नमिता के चूतरों से टकरा कर दोनों को मस्ती से भर रही थी। अब सुधाकर ने अपनी ऊँगली उसकी बुर के दाने पर रखा और उसको रगड़ने लगा। नमिता आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह मैं गयीइइइइइइइइइ करके झड़ने लगी। अब सुधाकर भी उसकी गाँड़ में झड़ने लगा।
अब तीनों बिलकुल थक कर लेट गए।
बूढ़ा गुप्ता भी थक कर पड़ा हुआ था। सुधाकर भी ५० के आसपास तो था , वह भी थक गया था।
अब नमिता कराहते हुए उठी और बोली: पता नहीं गाँड़ मारने में आप लोगों को क्या मज़ा आता है, यहाँ अभी दो दिन दुखेगी।
नमिता चौंक कर सुधाकर को देखी तो वह मुस्कुराया और बोला: देखा मैंने कहा था ना कि किसी नए आदमी से तुमको नहीं मिलवाऊँगा। गुप्ता और तुम तो मज़े ले ही चुके हो।
नमिता लाल हो कर बोली: गुप्ता सर आपने इनको सब बता दिया?
सुधाकर जाकर सोफ़े पर बैठ गया । गुप्ता ने धीरे से कहा: हाँ पर राज और तुम्हारी बात नहीं बतायी है।
नमिता को थोड़ी शांति मिली। वह बोली: थैंक्स।
अब गुप्ता जाकर फ्रिज से बीयर की बोतलें और ३ गिलास और कुछ नमकीन ले आया ।
सुधाकर: यार अभी तो १० ही बजे हैं । सुबह सुबह बीयर पीने का प्रोग्राम बना लिया।
गुप्ता: यार जब नमिता जैसी परी पास में हो तो क्या दिन क्या रात?
सुधाकर बोला: सच में यार तुम सही कह रही हो।
नमिता शर्माकर नज़र नीचे कर ली।
अब गुप्ता ने ३ गिलास में बीयर डाली और सोफ़े पर अकेली बैठी नमिता को गिलास दिया।
नमिता: सर मैंने काफ़ी समय से पिया नहीं है। पता नहीं पी कर बहक मत जाऊँ।
गुप्ता: बेटी, बहकोगी तभी तो मज़ा आएगा।
नमिता ने गिलास ले लिया। अब तीनो पीने लगे।
सुधाकर : जानते हो गुप्ता, कल जब मैंने बहुत दिन बाद नमिता को चोदा तो मुझे समझ आया कि कल की छोकरियाँ तो इसके सामने कहीं खड़ी ही नहीं होती। आऽऽह क्या मज़े से चुदवायी थी ये कल। देखो कल का सोचकर मेरा लौड़ा फिर खड़ा हो गया। यह बोलते हुए वह अपने उभरे हुए लौड़े को मसलने लगा।
गुप्ता: यार मैं भी २ बार मूठ्ठ मार चुका हूँ , पिछले दिनों हुई इसके साथ चुदायी को याद करके।
सुधाकर: यार ऐसी कम ही औरतें होती है जो खुलकर मज़े से चुदवाती हैं, नमिता इनमे से एक है।
गुप्ता: सच कहा यार, ये पूरा मज़ा लेती है।
नमिता की बुर पनियाने लगी थी , इस तरह की बातें सुनकर और उसको बीयर का नशा भी चढ़ गया था। गुप्ता ने उसका गिलास फिर से भर दिया।
नमिता: एक बात बताओ आप लोग कि क्या इस काम में मज़ा लेने का ठेका सिर्फ़ मर्दों का है ? क्या औरत उसने मज़ा नहीं ले सकती?
सुधाकर: किस काम मेंजानू साफ़ साफ़ बोलो ना?
नमिता: चुदायी में और क़िसमे ?
सुधाकर: हाँ जानू ज़रूर, क्यों नहीं, औरत को भी पूरा हक़ है चुदायी में मज़ा लेने का।
गुप्ता: क्या हम सिर्फ़ बातें ही करेंगे या चुदायी भी करेंगे?
नमिता: आप दो लोग हो और मैं अकेली यह नाइंसाफ़ी है मेरे साथ।
गुप्ता: कोई नाइंसाफ़ी नहीं है। भगवान ने तुमको तीन छेद दिए हैं। अभी एक और भी आ सकता है।
सुधाकर: अगर मनीष होता तो उसको बुला लेते। फिर तुम्हारे तीनों छेद भर जाते।
नमिता भी नशे में आ गयी थी वह हँसने लगी।
अब गुप्ता ने उठकर म्यूज़िक लगा दिया और बोला: चलो नमिता नाचो मेरी जान। गाना भी मादक था, – चोली के पीछे क्या है—
नमिता : मैं अकेली नहीं नाचूँगी आपको भी नाचना होगा।
तीनों खड़े हो गए। अब नमिता नशे में मस्त होकर अपनी साड़ी का पल्लू गिरकर अपने ब्लाउस को दिखाकर उस गाने पर नाचने लगी। दोनों मर्द भी मज़े से उसके साथ हाथ हिलाके नाचने लगे।
गुप्ता: बेटी,, साड़ी निकाल दो ना, नाचने में दिक़्क़त आएगी।
नमिता ने साड़ी खोल दी और ब्लाउस और पेटिकोट में ही अपनी पतली कमर और भरे हुए चूतर और चूचियाँ उछालने लगी।
राज और सुधाकर तो मस्ती से झूम उठे। क्या मादक औरत थी। अब सुधाकर आकर उसके पीछे से उसको पकड़कर अपना लौड़ा उसकी गाँड़ पर रगड़ने लगा। और गुप्ता सामने आकर उसके ब्लाउस के हुक खोलने लगा। नमिता ने उसको अपना ब्लाउस निकालने मेंमदद की।
अब वह ख़ुद सुधाकर के लंड पर अपने चूतरों को रगड़कर मस्ती से भर रही थी। गुप्ता उसकी चूचियाँ ब्रा के ऊपर से दबा रहा था। फिर सुधाकर ने उसकी ब्रा का हुक भी खोला और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ जिनके निपल्ज़ तने हुए थे, सामने आ गए। दोनों ने एक एक चुचिपकड़ ली और मस्ती से दबाने लगे। उसके निपल्ज़ को भी वह दोनों दबा कर नमिता की जवानी में आग लगा रहे थे। तभी गुप्ता ने उसके पेटिकोट के नाड़े को खोलकर उसको गिरा दिया और अब उसको पैंटी में देखकर दोनों मर्द जैसे पागल हो गए। उन दोनों ने नमिता को नाचने के लिए छोड़ दिया और उसकी मस्त छातियों को उछलते हुए देखते हुए वो दोनों नंगे हो गए। उनके काले मोटे लौड़े हवा में लहरा रहे थे। अब वह दोनों नमिता से चिपक गए और गुप्ता उसके होंठ चूसने लगा और सुधाकर उसकी चुचि दबाते हुए उसकी पैंटी उतारने लगा। गुप्ता ने नीचे होकर उसकी पैंटी उसके शरीर से अलग कर दी। और उसका नंगा भरा बदन देख कर दोनों उसके बदन के एक एक अंग से खेलने लगे। गुप्ता ने उसकी बुर में तीन ऊँगली डाल दी और वह सीइइइइइइइ कर उठी। उधर सुधाकर का खड़ा लौड़ा भी उसकी गाँड़ के छेद में ठोकर मार रहा था।
अब गुप्ता उसको सोफ़े पर बैठाया और उसके सिर को पकड़कर नीचे को दबाया, नमिता समझ गयी कि वह लंड चूसने का इशारा है।
उसने गुप्ता के लौड़े को सहलाया और फिर उसके सुपाडे को चाटकर मज़ा ली और फिर पूरा लौड़ा मुँह मेंलेकर चूसने लगी। गुप्ता और सुधाकर उसके मुँह को ऊपर नीचे होते देखकर मस्त हो रहे थे। सुधाकर उसकी चूचियाँ दबाने लगा।
फिर गुप्ता हट गया और सुधाकर उसकी जगह नमिता के मुँह के सामने आ गया। अब नमिता ने सुधाकर का लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
अब गुप्ता बोला: यार चलो बेडरूम में चलते हैं।
फिर तीनों बेडरूम में पहुँचे और नमिता को लिटाकर दोनों उसके एक एक साइड में आकर उसकी एक एक चुचि दबाने लगे और फिर मुँह में लेकर चूसने लगे।
नमिता की आऽऽऽऽऽऽऽऽहहह निकलने लगी। वह मस्ती से दोनों के सिर को अपनी छातियों पर दबाने लगी। गुप्ता का हाथ उसके पेट को सहलाते हुए उसकी बुर को सहलाने लगा। और सुधाकर भी उसकी जाँघों को दबाकर मस्त होकर उसकी चुचि और ज़ोर से चूसने लगा। नमिता की हाऽऽऽऽऽऽय्य्य्य्य कमरे में गूँजने लगी।
अब गुप्ता नीचे की ओर गया और उसकी टांगों को मोड़कर उसकी मस्त बुर को देखकर झुका और उसको चूमने लगा और फिर जीभ से उसको चाटने लगा। नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके अपने चूतरों को उछालने लगी। उधर सुधाकर उसकी एक चुचि पी रहा था और एक दबा रहा था।
गुप्ता उठकर एक क्रीम ले कर आया और सुधाकर को दिया।सुधाकर मुस्कुरा कर क्रीम के लिया।
अब गुप्ता बोला: बेटी,उस दिन जैसे मुझ ओर चढ़ी थी वैसे ही आज भी चढ़ जाओ।
ये कहता हुआ वह लेट गया। सुधाकर नमिता को छोड़ दिया। अब नमिता आकर गुप्ता की जाँघों पर बैठी और उसका लौड़ा पकड़कर अपनी बुर में सेट करके उसपर धीरे से बैठ कर उसको पूरा अंदर कर ली। अब नमिता उसके ऊपर उछलने लगी और बूढ़े गुप्ता को चोदने लगी।
अब नमिता को अपने चूतरों पर सुधाकर के हाथों का अहसास हुआ और वह समझ गयी कि आज सुधाकर का मोटा लंड उसकी गाँड़ फाड़ने वाला है। जब उसने उछलते हुए अपनी गाँड़ के छेद में सुधाकर की ऊँगली घुसते हुए महसूस की तो वह रुक गयी ताकि वह उसकी गाँड़ में अच्छी तरह से क्रीम लगा ले। अब उसके उठी हुई गाँड़ सुधाकर के सामने थी । वह मस्ती से उसको देखकर उसपर अपना मुँह ले जाकर उसको चाटने लगा और फिर जीभ से उसकी गाँड़ को चोदने लगा। नमिता की बुर में मोटा लौड़ा तो फंसा हुआ था ही और उसकी गाँड़ में जीभ की चुदायी से वह भड़क उठी और चिल्लायी आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह मज़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽ आऽऽऽ हैएएएएएएए। उईइइइइइइइइइ ।
अब सुधाकर ने दो ऊँगली में ढेर सारा क्रीम लिया और उसकी गाँड़ में डालकर उनको आगे पीछे करने लगा। वह भी मस्ती से अपनी कमर हिला कर गुप्ता के लंड को और सुधाकर की उँगलियों को निगलने लगी। तब सुधाकर ने अपने लौड़े पर भी क्रीम लगायी और अपने लौड़े के सुपाडे को उसकी गाँड़ के छेद पर रखा और एक झटके से अपना सुपाड़ा उसकी गाँड़ में पेल दिया। नमिता चीख़ी: आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह मरीइइइइइइइइइ।
सुधाकर ने परवाह ना करते हुए एक और झटका मारा और क़रीब क़रीब पूरा लौड़ा अंदर हो गया।
नमिता: आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह फट गयीइइइइइइइइइ मेरीइइइइइइइ गाँड़।
अब गुप्ता ने नीचे से कमर उठाकर धक्का लगाया और नमिता ऊपर की ओर उछली और सुधाकर का लंड उसकी गाँड़ में धँस गया।
बस अब नमिता भी मस्ती में आ चुकी थी। गुप्ता उसकी चूचियाँ दबा रहा था और नमिता उछल कर दो दो लौड़ों का मज़ा के रही थी।
थोड़ी देर बाद गुप्ता ह्न्म्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा। उधर सुधाकर ज़ोर ज़ोर से नमिता की गाँड़ मारे जा रहा था। कमरा थप्प ठप्प की आवाज़ से भर गया था। सुधाकर की जाँघें नमिता के चूतरों से टकरा कर दोनों को मस्ती से भर रही थी। अब सुधाकर ने अपनी ऊँगली उसकी बुर के दाने पर रखा और उसको रगड़ने लगा। नमिता आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह मैं गयीइइइइइइइइइ करके झड़ने लगी। अब सुधाकर भी उसकी गाँड़ में झड़ने लगा।
अब तीनों बिलकुल थक कर लेट गए।
बूढ़ा गुप्ता भी थक कर पड़ा हुआ था। सुधाकर भी ५० के आसपास तो था , वह भी थक गया था।
अब नमिता कराहते हुए उठी और बोली: पता नहीं गाँड़ मारने में आप लोगों को क्या मज़ा आता है, यहाँ अभी दो दिन दुखेगी।
नमिता बाथरूम से बाहर आयी और कपड़े पहनने के लिए कपड़े उठायी।
सुधाकर बोला: जानू अभी से क्यों कपड़े पहन रही हो। अभी एक राउंड और करेंगे।
नमिता: आप लोग में इतनी जान भी बाक़ी है क्या? हा हा ।
गुप्ता: जानू अभी एक घंटे में हम फिर तय्यार हो जाएँगे । आओ ना लेटो हमारे साथ। नमिता लेट गयी। सुधाकर और गुप्ता भी बाथरूम से फ़्रेश होकर आए। वो दोनों उसके अग़ल बग़ल लेट गए।
सुधाकर अब उसकी एक चुचि दबा रहा था और गुप्ता भी उसके पेट को सहला रहा था और बीच बीच में उसकी चुचि भी दबा देता था।
थोड़ी देर मे वह दोनों उसकी चुचि चूसने लगे।
तभी नमिता का फ़ोन बजा। राज था लाइन पर।
नमिता: आप दोनों एकदम चुप रहिए, राज का फ़ोन है। नमिता उठकर ड्रॉइंग रूम में आ गयी। गुप्ता भी उसके पीछे पीछे आ गया। नमिता ने इशारा किया कि बेडरूम का दरवाज़ा बन्द कर दो ताकि सुधाकर ना सुन ले।
गुप्ता मुस्करा के दरवाज़ा बंद किया और आकर नमिता के फ़ोन से अपना कान सटा कर राज की बातें सुनने लगा।
राज: माँ कहाँ हैं आप? ऑफ़िस में?
नमिता : और कहाँ होऊँगी?
राज : माँ सारी आपकी बहुत याद आ रही थी इसलिए फ़ोन किया।
नमिता: चल पढ़ाई पर ध्यान दो कल पेपर है।
राज: माँ वही सोच रहा था कि कल पेपर अच्छा करके आपके दूध ब्रा में से देखूँगा और ख़ूब दबाऊँगा।
नमिता शर्मा गयी और गुप्ता को देखी , फिर बोली: अच्छा कर लेना सब पर नम्बर तो ला के दिखा पहले।
अब गुप्ता का लौड़ा माँ बेटे की बात सुनकर खड़ा होने लगा। उसने नमिता का हाथ अपने लौड़े पर रख दिया। और उसकी चूचियाँ दबाने लगा।
नमिता: आह ।
राज: माँ क्या हुआ?
नमिता: कुछ नहीं एक पाँव टेबल से टकरा गया।
अब गुप्ता उसकी चूचियाँ चूसने लगा।
राज: माँ आपकी चूचियाँ याद आ रही है। आप आ जाओ ना घर। मुझे आपकी चूचियाँ दबानी है।
नमिता: आऽऽहहह क्या बक रहा है?
राज: माँ देखो आप भी गरम होकर आह कर रही हो।
मैं आपके चूतर भी सहलाना चाहता हूँ।
नमिता की बुर पर गुप्ता की ऊँगली चलनी शुरू हुई।
नमिता: हाऽऽऽऽऽय बस कर उलटीसीधी बातें।
राज सोच रहा था कि माँ उसकी बातों से उत्तेजित हो रही है। पर सच्चाई तो कुछ और ही थी।
गुप्ता माँबेटे की बातों से मस्त हुए जा रहा था।
राज: माँ मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया है। अब मुझे मूठ्ठ मारने में मदद कर दो ताकि उसके बाद मैं शांत होकर पढ़ सकूँ।
गुप्ता ने नमिता को इशारा किया कि चालू करो और उसकी चुचि चूसने लगा। नमिता का हाथ अब गुप्ता के खड़े लौड़े को सहला रहा था।
नमिता: बोल क्या करूँ?
राज: आज आप ऐसा करो कि मैं सिर्फ़ सुनूँगा आप कोई भी गरम बात करो। चाहो तो आप जब अपना रस निकालती होंगी तो क्या करती हो यही बता दो।
नमिता: कुछ भी बोलता है। मैं फ़ोन काट रही हूँ।
राज: माँ इसमें क्या है आप मेरी मूठ्ठ भी मारती हैं तो अपनी भी तो अपनी बुर भी तो झाड़ती होंगी ना।
गुप्ता ने नमिता को इशारा किया कि वो जैसे कहता है करो।
नमिता: अच्छा चल कहती हूँ पर जल्दी से झड़ जा तू। मैं अपने बिस्तर पर लेटी हूँ और अपनी छातियाँ सहला रही हूँ।
राज: आप नंगी हो?
नमिता: और क्या ? हाँ नंगी हूँ।
गुप्ता भी मुस्करा के इशारा किया हाँ तुम नंगी हो। अब वो उसकी चुचि फिर से चूसा ।
नमिता: अब मैं अपने निपल्ज़ को अंगूठे और ऊँगली के बीच रख कर दबा रही हूँ।
राज: आह्ह्ह्ह्ह्ह माँआऽऽ
नमिता: अब मैं आऽऽहहहह कर रही हूँ। अपने दूध मैं अपने मुँह में लेकर चाट रही हूँ। अब मेरा हाथ अपनी बुर को सहला रहा है और अब मेरी ऊँगली बुर के अंदर जा रही है।
गुप्ता ने तीन ऊँगली उसके बुर में डाल दी।
राज: माँ ओओओओओओह्ह्ह्ह्ह
नमिता: आऽऽहहहह ह्म्म्म्म्म्म्म अब मेरी उँगलियाँ तेज़ी से अंदर बाहर हो रही हैं। मैं एक हाथ से अपनी छाती दबा रही हूँ।अब मेरी उँगलियाँ भीग गयी है मेरे अपने रस से।
राज: माँ हाय्य्य्य्य्य्य्य फिर क़याऽऽऽऽऽऽऽ हुआआऽऽऽऽ
नमिता: आह अपनी बुर के दाने को सहला कर मैं आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगी। उइइइइइइइइइइइइइ
राज: माँआऽऽऽऽऽऽऽ मैंने भी गयाआऽऽऽऽऽऽ।
नमिता: चल अब साफ़ करके पढ़ने बैठ नालायक।
राज ने फ़ोन काट दिया।
गुप्ता माँ बेटे की बातों से बहुत गरम हो गया था। उसने नमिता को कहा: यहाँ सोफ़े पर घुटनो के बल बैठो , मैं पीछे से चोदूंग़ा ।
नमिता भी बहुत गरम हो गयी थी, वह सोफ़े पर चढ़ गयी और अपने चूतरों को उठाकर बाहर की ओर कर दिया।
उसकी गाँड़ और बुर देखकर गुप्ता अपना मुँह वहाँ डाल दिया और गाँड़ और बुर चाटने लगा। तभी दरवाज़ा खुला और सुधाकर उन दोनों को इस हालत में देखकर मुस्कराया । अब वह आकर सोफ़े के दूसरे किनारे में आ गया और अपना आधा खड़ा लौड़ा नमिता के मुँह में दे दिया। नमिता उसको चूसने लगी। तभी नमिता अपनी बुर को चटवा कर मस्त हो गयी थी। अब गुप्ता ने अपना लौड़ा उसकी बुर में पेला और चोदने लगा।
नमिता लौड़े को चूसते हुए चुदवा रही थी । सुधाकर उसकी चूचियाँ भी मसल रहा था। अब नमिता अपनी गाँड़ पीछे दबाकर पूरा लौड़ा अंदर ले रही थी। अब गुप्ता ह्म्म्म्म्म्म्म करके झड़ गया। उसने अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया।
नमिता: आह्ह्ह्ह्ह सर आप चोदो ना हाय्य्य्य्य्य्य्य बहुत खुजाऽऽऽऽऽऽ रही है।
सुधाकर सामने से पीछे आया और एक ही झटके में लौड़ा अंदर कर के पूरे ज़ोर से चुदाई करने लगा। नमिता भी कमर हिला हिला कर चुदवा रही थी। नमिता की आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह फाड़ दोओओओओओओओओओ जैसी आवाज़ें निकल रही थीं। फिर सुधाकर भी ह्न्म्म्म्म्म्म्म्म करके और नमिता भी हाय्य्य्य्य्य्य्य गईइइइइइइइइ कहके झड़ गए।
अब सब शांत हो गए थे। सबने कपड़े पहने और सुधाकर नमिता को बोला: आज ऑफ़िस आने की ज़रूरत नहीं है। फिर वह दोनों बाहर आकर अपने अपने रास्ते चल पड़े।
सुधाकर बोला: जानू अभी से क्यों कपड़े पहन रही हो। अभी एक राउंड और करेंगे।
नमिता: आप लोग में इतनी जान भी बाक़ी है क्या? हा हा ।
गुप्ता: जानू अभी एक घंटे में हम फिर तय्यार हो जाएँगे । आओ ना लेटो हमारे साथ। नमिता लेट गयी। सुधाकर और गुप्ता भी बाथरूम से फ़्रेश होकर आए। वो दोनों उसके अग़ल बग़ल लेट गए।
सुधाकर अब उसकी एक चुचि दबा रहा था और गुप्ता भी उसके पेट को सहला रहा था और बीच बीच में उसकी चुचि भी दबा देता था।
थोड़ी देर मे वह दोनों उसकी चुचि चूसने लगे।
तभी नमिता का फ़ोन बजा। राज था लाइन पर।
नमिता: आप दोनों एकदम चुप रहिए, राज का फ़ोन है। नमिता उठकर ड्रॉइंग रूम में आ गयी। गुप्ता भी उसके पीछे पीछे आ गया। नमिता ने इशारा किया कि बेडरूम का दरवाज़ा बन्द कर दो ताकि सुधाकर ना सुन ले।
गुप्ता मुस्करा के दरवाज़ा बंद किया और आकर नमिता के फ़ोन से अपना कान सटा कर राज की बातें सुनने लगा।
राज: माँ कहाँ हैं आप? ऑफ़िस में?
नमिता : और कहाँ होऊँगी?
राज : माँ सारी आपकी बहुत याद आ रही थी इसलिए फ़ोन किया।
नमिता: चल पढ़ाई पर ध्यान दो कल पेपर है।
राज: माँ वही सोच रहा था कि कल पेपर अच्छा करके आपके दूध ब्रा में से देखूँगा और ख़ूब दबाऊँगा।
नमिता शर्मा गयी और गुप्ता को देखी , फिर बोली: अच्छा कर लेना सब पर नम्बर तो ला के दिखा पहले।
अब गुप्ता का लौड़ा माँ बेटे की बात सुनकर खड़ा होने लगा। उसने नमिता का हाथ अपने लौड़े पर रख दिया। और उसकी चूचियाँ दबाने लगा।
नमिता: आह ।
राज: माँ क्या हुआ?
नमिता: कुछ नहीं एक पाँव टेबल से टकरा गया।
अब गुप्ता उसकी चूचियाँ चूसने लगा।
राज: माँ आपकी चूचियाँ याद आ रही है। आप आ जाओ ना घर। मुझे आपकी चूचियाँ दबानी है।
नमिता: आऽऽहहह क्या बक रहा है?
राज: माँ देखो आप भी गरम होकर आह कर रही हो।
मैं आपके चूतर भी सहलाना चाहता हूँ।
नमिता की बुर पर गुप्ता की ऊँगली चलनी शुरू हुई।
नमिता: हाऽऽऽऽऽय बस कर उलटीसीधी बातें।
राज सोच रहा था कि माँ उसकी बातों से उत्तेजित हो रही है। पर सच्चाई तो कुछ और ही थी।
गुप्ता माँबेटे की बातों से मस्त हुए जा रहा था।
राज: माँ मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया है। अब मुझे मूठ्ठ मारने में मदद कर दो ताकि उसके बाद मैं शांत होकर पढ़ सकूँ।
गुप्ता ने नमिता को इशारा किया कि चालू करो और उसकी चुचि चूसने लगा। नमिता का हाथ अब गुप्ता के खड़े लौड़े को सहला रहा था।
नमिता: बोल क्या करूँ?
राज: आज आप ऐसा करो कि मैं सिर्फ़ सुनूँगा आप कोई भी गरम बात करो। चाहो तो आप जब अपना रस निकालती होंगी तो क्या करती हो यही बता दो।
नमिता: कुछ भी बोलता है। मैं फ़ोन काट रही हूँ।
राज: माँ इसमें क्या है आप मेरी मूठ्ठ भी मारती हैं तो अपनी भी तो अपनी बुर भी तो झाड़ती होंगी ना।
गुप्ता ने नमिता को इशारा किया कि वो जैसे कहता है करो।
नमिता: अच्छा चल कहती हूँ पर जल्दी से झड़ जा तू। मैं अपने बिस्तर पर लेटी हूँ और अपनी छातियाँ सहला रही हूँ।
राज: आप नंगी हो?
नमिता: और क्या ? हाँ नंगी हूँ।
गुप्ता भी मुस्करा के इशारा किया हाँ तुम नंगी हो। अब वो उसकी चुचि फिर से चूसा ।
नमिता: अब मैं अपने निपल्ज़ को अंगूठे और ऊँगली के बीच रख कर दबा रही हूँ।
राज: आह्ह्ह्ह्ह्ह माँआऽऽ
नमिता: अब मैं आऽऽहहहह कर रही हूँ। अपने दूध मैं अपने मुँह में लेकर चाट रही हूँ। अब मेरा हाथ अपनी बुर को सहला रहा है और अब मेरी ऊँगली बुर के अंदर जा रही है।
गुप्ता ने तीन ऊँगली उसके बुर में डाल दी।
राज: माँ ओओओओओओह्ह्ह्ह्ह
नमिता: आऽऽहहहह ह्म्म्म्म्म्म्म अब मेरी उँगलियाँ तेज़ी से अंदर बाहर हो रही हैं। मैं एक हाथ से अपनी छाती दबा रही हूँ।अब मेरी उँगलियाँ भीग गयी है मेरे अपने रस से।
राज: माँ हाय्य्य्य्य्य्य्य फिर क़याऽऽऽऽऽऽऽ हुआआऽऽऽऽ
नमिता: आह अपनी बुर के दाने को सहला कर मैं आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगी। उइइइइइइइइइइइइइ
राज: माँआऽऽऽऽऽऽऽ मैंने भी गयाआऽऽऽऽऽऽ।
नमिता: चल अब साफ़ करके पढ़ने बैठ नालायक।
राज ने फ़ोन काट दिया।
गुप्ता माँ बेटे की बातों से बहुत गरम हो गया था। उसने नमिता को कहा: यहाँ सोफ़े पर घुटनो के बल बैठो , मैं पीछे से चोदूंग़ा ।
नमिता भी बहुत गरम हो गयी थी, वह सोफ़े पर चढ़ गयी और अपने चूतरों को उठाकर बाहर की ओर कर दिया।
उसकी गाँड़ और बुर देखकर गुप्ता अपना मुँह वहाँ डाल दिया और गाँड़ और बुर चाटने लगा। तभी दरवाज़ा खुला और सुधाकर उन दोनों को इस हालत में देखकर मुस्कराया । अब वह आकर सोफ़े के दूसरे किनारे में आ गया और अपना आधा खड़ा लौड़ा नमिता के मुँह में दे दिया। नमिता उसको चूसने लगी। तभी नमिता अपनी बुर को चटवा कर मस्त हो गयी थी। अब गुप्ता ने अपना लौड़ा उसकी बुर में पेला और चोदने लगा।
नमिता लौड़े को चूसते हुए चुदवा रही थी । सुधाकर उसकी चूचियाँ भी मसल रहा था। अब नमिता अपनी गाँड़ पीछे दबाकर पूरा लौड़ा अंदर ले रही थी। अब गुप्ता ह्म्म्म्म्म्म्म करके झड़ गया। उसने अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया।
नमिता: आह्ह्ह्ह्ह सर आप चोदो ना हाय्य्य्य्य्य्य्य बहुत खुजाऽऽऽऽऽऽ रही है।
सुधाकर सामने से पीछे आया और एक ही झटके में लौड़ा अंदर कर के पूरे ज़ोर से चुदाई करने लगा। नमिता भी कमर हिला हिला कर चुदवा रही थी। नमिता की आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह फाड़ दोओओओओओओओओओ जैसी आवाज़ें निकल रही थीं। फिर सुधाकर भी ह्न्म्म्म्म्म्म्म्म करके और नमिता भी हाय्य्य्य्य्य्य्य गईइइइइइइइइ कहके झड़ गए।
अब सब शांत हो गए थे। सबने कपड़े पहने और सुधाकर नमिता को बोला: आज ऑफ़िस आने की ज़रूरत नहीं है। फिर वह दोनों बाहर आकर अपने अपने रास्ते चल पड़े।
नमिता घर पहुँची तो राज को देखा कि वह ड्रॉइंग रूम में ही पढ़ रहा था। उसने देखा कि माँ थोड़ी सी तकलीफ़ से चल रही थी। वह बोली: बेटा मैं अभी आराम करूँगी। खाना साथ ही खाएँगे १ घंटे के बाद।
यह कहकर वह अंदर चली गयी।
राज को याद आया कि ऐसे ही कुछ दिन पहले भी वह मुश्किल से चल पा रही थी जब वह एक लड़के से चुदवा कर आइ थी। उसे पता चल गया था उस दिन माँ के मोबाइल पर आए SMS से ।
आज भी उसकी चाल वैसी ही थी। उसे याद आया कि जब उसने आयशा की गाँड़ मारी थी तब वह भी कुछ ऐसे ही अजीब तरह से चल रही थी और बोल रही थी कि गाँड़ बहुत दुःख रही है।
उसको पूरा विश्वास हो गया कि माँ चुदवा के और गाँड़ भी मरवा के आयी है। पर पता कैसे चले?
वह उठा और खिड़की से झाँकने लगा।
नमिता ने अपना पर्स टेबल पर रखा और अचानक उसको वह भारी लगा। उसने पर्स खोलकर देखा और हैरानी से २ गड्डियाँ नोटों की निकाली। उसने देखा कि वह दो लाख रुपए थे। वह सोचने लगी , ये काम गुप्ता का तो हो नहीं सकता। ज़रूर सुधाकर ने ही इसे रखा होगा।
उसने पैसों को अल्मारी में रखा और सुधाकर को लैंड लाइन से फ़ोन लगायी।
राज हैरानी से सब देख रहा था और उसके मन में कई प्रश्न उठने लगे थे? राज भाग कर ड्रॉइंग रूम में पैरलेल फ़ोन उठाकर उनकी बातें सुनने लगा।
नमिता: हेलो सर,
सुधाकर: हाँ बोलो नमिता।
नमिता: सर ये पैसे क्यों आपने दिए? आपने तो मुझे वैश्या बना दिया।
पहले मज़ा लिया और फिर पैसे दिए।
सुधाकर: देखो तुम मुझे ग़लत समझ रही हो। मैं तुम्हारे पति का दोस्त था। उसके जाने के बाद मैंने हमेशा तुम्हारा ख़याल रखा है। हाँ ये सच है कि तुमको भी मर्द की ज़रूरत थी और मुझे भी औरत की , क्योंकि उन्ही दिनों मेरी बीवी भी गुज़र गयी थी। याद है हमने शादी का भी सोचा था पर हम दोनों ने अपने अपने लड़कों का सोच कर शादी नहीं की। हाँ हम दोनों में सम्बंध हो गया।
नमिता: पर ये पैसे क्यों?
सुधाकर: देखो कल मैंने ऑफ़िस में तुमको कहा था ना कि राज की पढ़ाई का ख़र्च मैं उठाऊँगा। सो मैंने अपना वादा पूरा किया।
नमिता: मुझे लगा कि आपने आज के सेक्स की क़ीमत दी है, मैं बहुत ही अप्सेट हो गयी थी।
सुधाकर हँसते हुए बोला: बाप रे तुम्हारा छेद इतना महँगा है क्या? बुर के एक लाख और गाँड़ के एक लाख? हा हा ।
नमिता भी हँसकर बोली: अभी एक छेद का पेमेंट बाक़ी है? मुँह का। हा हा ।
सुधाकर: पर एक के साथ एक फ़्री भी तो था। गुप्ता ने भी तो चोदा था।
नमिता: हा हा सच कह रहे हैं आप!
सुधाकर : पर एक बात बोलूँ, बहुत मज़ा आया डबल चुदायी में । मुझे तो तुम्हारी टाइट गाँड़ बहुत मज़ा दी।
नमिता: आपको मज़ा और मुझे सज़ा। मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही हूँ।
आपका इतना मोटा है कि मेरी गाँड़ ही फट गयी।
सुधाकर: चलो कोई दवाई लगा लो।
नमिता : हाँ अभी लगाती हूँ। अच्छा थैंक यू फ़ोर मनी । बाई।
नमिता ने फ़ोन काट दिया।
राज ने भी फ़ोन रखा और अपना खड़ा लौड़ा सहलाते हुए सोचने लगा कि माँ आज गुप्ता और सुधाकर अंकल दोनों से एक साथ चुदवा कर आयी है। और गाँड़ भी मरवायी है।
शायद मैंने जब फ़ोन किया तो वह चुदवा रही होगी।
वह अपने कमरे के बाथरूम में गया और मूठ्ठ मारकर शांत हुआ ।
अब वह सोचने लगा कि क्या उसकी माँ छिनाल है?
थोड़ी देर सोचने के बाद उसने फ़ैसला किया कि नहीं वह छिनाल नहीं है। एक सामान्य सी औरत है जिसे सभी आदमी या औरतों की तरह सेक्स चाहिए। पति के ना होने की वजह से वह ग़ैरों से चुदवा रही है।
और आजकल तो वह ख़ुद भी उसको उत्तेजित कर देता है। अपने आप को शांत करने के लिए भी वह चुदवाने के लिए तरसती होगी।
चलो बहुत जल्दी मैं ही उनकी प्यास शांत कर दूँगा, वह सोचने लगा।
अचानक उसे याद आया कि उसे पढ़ना चाहिए क्योंकि पेपर तो कल ही है। वह पढ़ने बैठ गया।
नमिता भी थोड़ा आराम करके खाना लगायी और राज को आवाज़ दी। वह अभी भी गाँड़ में दर्द महसूस कर रही थी। उसको चलने में भी थोड़ी दिक़्क़त हो रही थी। दवाई लगाने से थोड़ा आराम तो मिला था।
तभी राज आया और उसके पास आकर बैठा । दोनों खाना खा रहे थे। नमिता: बेटा, पढ़ाई पूरी हो गयी।
राज: हाँ माँ मैंने दोहरा भी लिया है। पक्का है कि बहुत अच्छे नम्बर आएँगे, आप देखना।
नमिता: बेटा, मेहनत करोगे तो फल ज़रूर मिलेगा।
राज मुस्कुराते हुए उसकी छातियों को इशारा करके बोला: हाँ माँ आम भी तो फल ही है। वह तो मिलेगा ना?
नमिता: बदमाश बस हमेशा उलटा सीधा ही सोचता है?
राज: माँ आप थकी हुई दिख रही हो जाओ आराम कर लो। मैं अपनी पढ़ाई करता हूँ।
बस उस दिन और कुछ नहीं हुआ।
रात के खाने के बाद भी राज ने माँ को गुड नाइट किया और बिलकुल तंग नहीं किया। वह जानता था कि माँ ज़बरदस्त चुदवा कर आयी है और उसकी गाँड़ भी दुःख रही है। इसलिए उसने नमिता को तंग नहीं किया।
हालाँकि नमिता उसके इस व्यवहार परिवर्तन से थोड़ा हैरान थी।
अगली सुबह नमिता चाय लेकर जब उसके कमरे मेंपहुँची तो वह पढ़ाई कर रहा था और माँ को गुड मॉर्निंग किया और खड़े होकर उससे लिपट गया। नमिता राज की इच्छा के अनुसार सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में थी और उसने ब्रा और पैंटी भी पहनी हुई थी ।
नमिता ने भी उस प्यार किया। जब नमिता चाय लेकर वापस जाने लगी तो राज ने ध्यान से देखा कि उसकी चाल अब ठीक थी। शायद गाँड़ का दर्द ठीक हो चला था। वह फिर से पढ़ाई में जुट गया।
बाद में तय्यार होकर वह माँ के साथ बहुत हो गम्भीर मुद्रा में नाश्ता किया।
नमिता: क्या बात है? बहुत चुप चुप है?
राज: मो मैं अपना ध्यान नहीं बटाना चाहता क्योंकि आज पहला पेपर है, और मुझे ९०% नम्बर लाने हैं।
नमिता: मैंने तो तुमको ८०% का ही लक्ष्य दिया था।
राज: माँ मैं कोशिश करूँगा कि उससे भी ज़्यादा लाऊँ ।
नमिता : शाबाश बेटा। मैं सच में आज बहुत ख़ुश हूँ।
राज: माँ अगर मैं ९०% नम्बर ले आया तो मुझे एक और इनाम चाहिये।
नमिता मुस्कुरा के बोली: बोल क्या चाहिए? ८०% में तो मैं तुम्हें ब्रा के ऊपर से मज़ा तो लेने दूँगी ही?
राज : मैं चाहूँगा कि जैसे आप अभी ब्लाउस और पेटिकोट में रहती हो आगे से ब्रा और पेटिकोट में रहो।
नमिता: हट नालायक ऐसे भी कहीं होता है।
राज: अच्छा कम से कम कभी कभी तो ब्रा और पेटिकोट में रह जाया करना?
नमिता: अच्छा चलो देखेंगे। पहले नम्बर तो ला के दिखा।
अब वह मुस्कुरा के बोला: माँ कोई अच्छी सी ब्रा पहन कर रहना ,मैं तो पक्का नम्बर ले ही आऊँगा।
अब वह नमिता से लिपट कर प्यार किया और उसने उसके होंठ को थोड़ा सा छू लिया अपने होंठ से और बाई करके चलने लगा स्कूल के लिए।
नमिता: रुको एक मिनट। वह अंदर से दहीं और शक्कर लायी और एक चम्मच उसके मुँह में डालके उसको प्यार करके विदा की।
राज के जाने के बाद वह भी तय्यार होकर ऑफ़िस पहुँची।
क़रीब ११ बजे उसको सुधाकर ने बुलाया। और कुछ काम दिया और कहा कि वह एक मीटिंग के लिए जा रहा है।
नमिता उसको बोली: सर आज से राज के टेस्ट्स चालू हो रहे हैं, तो मैं चाहूँगी कि अगले कुछ दिन मैं आधे दिन ही काम करूँगी।
सुधाकर उसके पास आकर उसको बाहों में लेकर चूमा और उसकी चूतरों को दबाकर बोला: ज़रूर , राज की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दो। फिर उसकी छाती दबाकर बोला: जानू गाँड़ का दर्द अब कैसा है?
नमिता: अभी ठीक है!
सुधाकर: चलो मैं निकलता हूँ।
वह नमिता के होंठ चूसकर बाहर चला गया। नमिता उसकी हरकतों से गरमा गयी।
अब वह भी अपनी सीट पर बैठ कर काम करने लगी।
उधर राज के हाथ में जैसे ही टेस्ट पेपर आया उसकी मुँह खिल उठा। उसने पूरे ध्यान से पेपर किया। पेपर के लिए पहले दो पिरीयड्ज़ थे। बाद में सामान्य पढ़ाई होनी थी और आख़री पिरीयड में टेस्ट पेपर जाँचकर मिलने थे।
उधर नमिता का फ़ोन क़रीब १२ बजे बजा , कोई अंजाना नम्बर था।
नमिता: हेलो , कौन ?
उधर से: नमिता मैं राकेश बोल रहा हूँ।
नमिता: ओह भय्या जी आप? ये राज के ताऊजी थे। और राज के पापा से ३ साल बड़े थे। अभी ४८ साल के होंगे।
राकेश: बहु वो क्या है, कि कोर्ट आया था पर पेशी आगे को टल गयी। अब मेरी वापसी की ट्रेन तो ३ बजे की है। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ, तो तुम्हें फ़ोन कर लिया कि तुम्हारे और राज के हाल जान लूँ?
नमिता : अच्छा किया आपने फ़ोन करके। हम दोनों ठीक है ।
राकेश और उसकी पत्नी वैसे भी उनको कभी कभी फ़ोन करते रहते थे। नमिता भी अपने ज़ेठ और जेठानी का सम्मान करती थी क्योंकि ये दोनों राज के पापा की मृत्यु के समय उनको काफ़ी मदद किए थे।
नमिता: भय्या जी आप खाना खाकर जायिये ना। मैं अभी घर जा ही रही हूँ। आप घर आ जाओ।
राकेश: अरे तुम फ़ालतू मैं परेशान होगी।
नमिता: भय्या जी आपके लिए कैसी परेशानी?
राकेश: चलो मैं आता हूँ।
नमिता १५ मिनट में अपने घर पहुँची और पीछे से राकेश भी आ गया। नमिता ने झुककर उसके पैर छुए। उसके नीचे झुकने से उसका पल्लू सामने ख़सक कर गिर गया। ब्लाउस में कसे उसके बड़े बड़े मम्मे और उनके बीच की गहरी घाटी जैसे राकेश को घायल कर गयी। राकेश हमेशा से ही नमिता पर बुरी नज़र रखता था पर कभी जता नहीं पाया।
आज वह इस विधवा औरत का फ़ायदा उठाना चाहता था।
राकेश ने उसको कंधे से पकड़ कर उठाया और उसकी बाहों को सहला कर बोला: ख़ुश रहो। फिर उसको ऊपर से नीचे तक देख कर उसकी छातियों को देखते हुए बोला: बहुत भर गया है तुम्हारा बदन । पिछली बार जब तुम्हें देखा था तो इतनी सेक्सी नहीं थी तुम?
नमिता राकेश के मुँह से खुल्लम खुल्ला यह सुनकर चौंक गयी।
वह बोली: क्या भय्या जी आप भी कुछ भी बोल रहे हैं।
राकेश: अरे मैं एकदम सही बोल रहा हूँ। तुम पहले से बहुत ही आकर्षक दिखने लगी हो।
नमिता: अच्छा बैठिए मैं आपके लिए पानी लाती हूँ।
वह किचन से गिलास लायी और ड्रॉइंग रूम में रखे फ्रिज से बोतल निकालने के लिए झुकी और राकेश के बदन में झुरझूरी दौड़ गयी। आऽऽहहह क्या पिछवाड़ा है। पतली कमर में इतने बड़े नितम्ब उसने बहुत दिन बाद देखा था। उसका लौड़ा तनने लगा।
जब नमिता उसको पानी दे रही थी तभी वह समझ गयी कि राकेश जिस तरह से उसकी छातियाँ देख रहा था, उसके इरादे नेक तो नहीं ही थे।
नमिता: भय्या जी, आप बैठिए मैं खाना बनाती हूँ।
राकेश: देखो मैंने बहुत देर से नाश्ता किया है, मुझे बिलकुल ही भूक नहीं है। तुम यहीं बैठो बातें करते है।
नमिता उसके सामने के सोफ़े में बैठ कर बोली: और सुनाइए भाभीजी कैसी हैं? और हमारी भतीजी कैसी है?
राकेश: अरे शर्मिला ( राकेश की बीवी ) बहुत मज़े में हैं’। वह मस्त रहती है। और शीना ( उसकी बेटी ) भी मज़े में है।वह अब कॉलेज के पहले साल में है।
नमिता: बहुत दिन हो गए सबको देखे हुए कभी लेकर आइए ना सबको।
राकेश: राज भी तो बड़ा ही गया होगा।
नमिता: हॉ अब वह भी अगले साल कॉलेज जाएगा।
राकेश: एक बात कहूँ आज तुम इतनी सुंदर दिख रही हो कि दिल बेईमान हो रहा है।
नमिता: छी भय्या जी आप भी क्या बोल रहे हैं। मैं आपके छोटे भाई की पत्नी हूँ।
राकेश: वह होता तो और बात थी पर अब जब वह नहीं रहा तो वैसे भी मुझे तुम्हारा ख़याल रखना चाहिए।
यह कहकर वह खड़ा हुआ और नमिता के आँखों के आगे उसके पैंट में बना हुआ तंबू झूल गया। अब वह आकर नमिता से सट के बैठ गया। और उसकी जाँघ पर हाथ रख कर बोला: देखो तुम्हारा रूप तो इतना मादक है कि ऋषि मुनि का भी मन डोल जाए तो मैं तो एक साधारण इंसान हूँ।
नमिता: भय्या जी , भाभी का भी तो सोचिए, कि आप उनको धोखा दे रहे हैं।
राकेश: हा हा, किसकी बात कर रही हो? शर्मिला और मैं सेक्स के मामले में बिलकुल खुले विचारों के है ?
नमिता: मतलब?
राकेश: देखो, सुरेश और उसकी पत्नी विमला हमारे घर अक्सर आते रहते हैं। तुम विमला को तो जानती हो ना, मेरी इकलौती साली है, और मस्त माल है। हम चारों सेक्स का खुल कर मज़ा लेते हैं। जब मेरे या सुरेश में से कोई टूर पर जाता है तो दूसरा बंदा दोनों औरतों को सम्भाल लेता है।
नमिता: याने आप अपनी साली के साथ करते हो वह भी अपनी बीवी की जानकारी में?
राकेश अब उसके कंधे पर हाथ रखकर बोला: देखो रानी सेक्स का मज़ा लेने में रिश्ते का कोई मतलब नहीं है। जो पसंद आए उसे चोदो पर उसकी मर्ज़ी से, कभी ज़बर्दस्ती नहीं करना।
नमिता: मुझे तो बड़ा अजीब लग रहा है।
राकेश: अब तक तो राज की भी गर्ल फ़्रेंड होंगी और वह भी चुदायी शुरू कर चुका होगा।
नमिता हड़बड़ाकर : मुझे नहीं पता उसके बारे में। जहाँ तक मैं जानती हूँ उसकी कोई गर्ल फ़्रेंड नहीं है।
राकेश का हाथ अब उसके कंधे से होता हुआ उसकी एक चुचि तक पहुँचा और वह उसको दबाते हुए बोला: रानी, अगर तुम चाहो तो मैं शर्मिला को ले आऊँगा और राज अपनी तायी से चोदने की ट्रेनिंग ले लेगा।शर्मिला को कुँवारे लड़कों को चोदना बहुत पसंद है।
नमिता उसका चेहरा देखती रह गयी , उसकी बातें उसको गरम कर रही थी और वह चाह कर भी राकेश का हाथ अपनी चुचि से हटा नहीं पायी।
नमिता: छी आप भी कुछ भी बोलते हैं। भाभी ऐसा कभी नहीं कर सकती।
राकेश: जब उससे मिलोगी तब समझोगी उसको।
नमिता: तो क्या आपको इसपर कोई इतराज नहीं होता कि वह किसी से भी चु- मतलब करवा लेती हैं?
राकेश: अरे वह भी मज़ा करती है और मैं भी फिर किस बात का इतराज ? जब वह अपनी बहन को मुझसे चुदवा रही है तब क्या समस्या है?
ये कहते हुए उसके उसकी चुचि और निप्पल ऐंठने शुरू किए।अब नमिता भी मस्त हो गयी थी। और उसने तिरछि नज़र से उसके पैंट के तंबू को देखा और राकेश ने उसे देखते हुए देख लिया । वह मन ही मन मुस्कुराया और उसका हाथ पकड़कर अपने तंबू यानी लौड़े पर रख दिया। नमिता की आह निकल गयी। और नमिता के हाथ ने अपने आप उसका लौड़ा दबाना शुरू कर दिया।
राकेश: राज कितने बजे तक आएगा?
नमिता: क़रीब एक घंटे में ।आऽऽऽऽऽहहहह । धीरे से दबाइए ना भैय्या जी।
राकेश उसके होंठ चूमते हुए अपना दूसरा हाथ उसके जाँघ से सहलाता हुआ उसकी बुर तक ले गया। और नमिता की हाऽऽय्यय निकल गयी। अब वह भी उसके लौड़े को दबा कर मस्ती से भरी जा रही थी। उसकी बुर पूरी तरह गीली हो गयी थी।
राकेश: वैसे एक बात कहूँ आजकल शीना को देखकर भी मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है। निर्मला ने तो मुझे कह दिया है कि जब चाहो उसकी सील तोड़ दो। पर मैं चाहता हूँ किउसकी सील कोई लड़का तोड़े । मैं तो बाद में भी उसको चोद लूँगा।
नमिता: आऽऽहहह शीना आपकी बेटी है, उसको भी चोदना चाहते हैं?’
राकेश: अरे बेटी है तो क्या हुआ ? अगर वह भी राज़ी होगी तभी चोदेंग़े कोई ज़बर्दस्ती तो करेंगे नहीं। वैसे निर्मला कह रही है कि शीना मुझसे ही सील तुड़वाना चाहती है। आजकल बार बार पापा कहकर मेरे गोद में बैठ जाती है और मेरे खड़े लौड़े पर अपनी गाँड़ रगड़ती है।
नमिता अब बहुत गरम हो गयी थी। उधर वह अब उसको से चिपका लिया और उसके होंठ चूसने लगा।
राकेश: चलो ना बेडरूम में चलते हैं, राज के आने के पहले एक राउंड तो कर ही लें।
उसने खड़े होकर नमिता को एक बच्ची की तरह गोद में उठाया और उसके होंठ चूसते हुए बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया।
फिर वह अपने कपड़े खोल दिया और पूरा नंगा ही गया। नमिता ने उसके मर्दाने बदन को देखा तो उसका पानी छूटने सा लगा। पूरा शरीर कसरती और लौड़ा भी पूरे ८ इंच का लम्बा और मोटा। वह समझ गयी कि राज का लौड़ा भी इसी अपने ताऊ पर गया है।
अब वह आकर उसपर लेट गया और उसके गाल ,गर्दन और होंठ चूसने लगा। अब वह उसके ब्लाउस के हुक खोलने लगा। फिर उसके ब्लाउस और ब्रा भी निकाल कर उसके बड़े बड़े मम्मों को दाबकर चूसने लगा। वह भी मस्त होकर उसके बालों से खेल रही थी। फिर उसने उसकी साड़ी ऊपर उठा दी और उसकी जाँघों को सहलाकर वह उनको चूमे लगा। अब उसने पैंटी में ऊँगली डालकर उसको नीचे उतार दिया। उसकी फूली हुई मस्तानी बुर देखकर वह मस्ती से भर कर उसकी बुर को चूमकर चाटने लगा।
वह बहुत मस्त होकर अपने कमर उछाल कर मज़ा ले रही थी बुर चटकाने में। फिर वह उसकी टाँगें उठाकर उसके घुटनों को मोड़ कर उसने उसकी बुर में अपना लौड़ा लगाकर उसके अंदर पेल दिया और नमिता की आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह को ध्यान ना देकर पूरी मस्ती से चुदायी करने लगा।
अब नमिता भी अपनी गाँड़ उठा उठा के चुदवा रही थी।
दोनों पूरी तरह से ज़बरदस्त चुदायी का मज़ा के रहे थे। अब नमिता की चुचि दबाकर वह उसके होंठ चूसते हुए ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।
नमिता की आऽऽऽह और उइइइइइइइइइ कमरे में गूँजने लगी। वह भी ह्म्म्म्म्म्म कहकर चुदायी मेंमस्त था। फिर वह दोनों चिल्लाके झड़ने लगे।
अब राकेश उसके ऊपर से हटा और बाथरूम गया । उधर वह भी उठकर अपने कपड़े पहनी और फिर राकेश पानी पी कर उसको चूमकर फिर आने का कहकर चला गया। उसने कहा : अगली बार निर्मला और शीना को भी लाउँगा।सब मिलकर चुदायी करेंगे।
नमिता: ओह चलिए बाद में देखेंगे।
नमिता ने उसके जाने के बाद घड़ी देखी। अभी भी आधा घंटा था राज के आने में। वह अब अपने बेटे के लिए तय्यार होने लगी। उसने जाकर स्नान किया और अपने लिए नयी एक फ़ैन्सी लेस वाली ब्रा और पैंटी पहनी। फिर एक छोटा सा ब्लाउस पहना जिसमें से उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ आधी नंगी दिख रही थी। फिर उसने एक पेटिकोट पहना जिसमें से उसकी पैंटी और चूतरों का उभार बहुत मादक दिख रहा था।
वह आज अपने बेटे पर एक ऐसा जादू करने जा रही थी जो हमेशा उसपर काम करेगा। उसने शीशे में ख़ुद को देखा और अपने आप पर मुग्ध हो गयी।
तभी उसके मन में आया कि पता नहीं उसका पेपर कैसा हुआ होगा? उसने मन ही मन में निश्चय किया कि वह उसे तभी अपना शरीर देगी अगर वह उतने नम्बर लाएगा जो उसके साथ तय हुआ है।
तभी दरवाज़ा खुला और राज ने अंदर प्रवेश किया। उसके हाथ में पेपर था और उसका चेहरा उतरा हुआ था। उसने बैग सोफ़े पर रखा और चुपचाप पेपर माँ के हाथ में दे दिया—
यह कहकर वह अंदर चली गयी।
राज को याद आया कि ऐसे ही कुछ दिन पहले भी वह मुश्किल से चल पा रही थी जब वह एक लड़के से चुदवा कर आइ थी। उसे पता चल गया था उस दिन माँ के मोबाइल पर आए SMS से ।
आज भी उसकी चाल वैसी ही थी। उसे याद आया कि जब उसने आयशा की गाँड़ मारी थी तब वह भी कुछ ऐसे ही अजीब तरह से चल रही थी और बोल रही थी कि गाँड़ बहुत दुःख रही है।
उसको पूरा विश्वास हो गया कि माँ चुदवा के और गाँड़ भी मरवा के आयी है। पर पता कैसे चले?
वह उठा और खिड़की से झाँकने लगा।
नमिता ने अपना पर्स टेबल पर रखा और अचानक उसको वह भारी लगा। उसने पर्स खोलकर देखा और हैरानी से २ गड्डियाँ नोटों की निकाली। उसने देखा कि वह दो लाख रुपए थे। वह सोचने लगी , ये काम गुप्ता का तो हो नहीं सकता। ज़रूर सुधाकर ने ही इसे रखा होगा।
उसने पैसों को अल्मारी में रखा और सुधाकर को लैंड लाइन से फ़ोन लगायी।
राज हैरानी से सब देख रहा था और उसके मन में कई प्रश्न उठने लगे थे? राज भाग कर ड्रॉइंग रूम में पैरलेल फ़ोन उठाकर उनकी बातें सुनने लगा।
नमिता: हेलो सर,
सुधाकर: हाँ बोलो नमिता।
नमिता: सर ये पैसे क्यों आपने दिए? आपने तो मुझे वैश्या बना दिया।
पहले मज़ा लिया और फिर पैसे दिए।
सुधाकर: देखो तुम मुझे ग़लत समझ रही हो। मैं तुम्हारे पति का दोस्त था। उसके जाने के बाद मैंने हमेशा तुम्हारा ख़याल रखा है। हाँ ये सच है कि तुमको भी मर्द की ज़रूरत थी और मुझे भी औरत की , क्योंकि उन्ही दिनों मेरी बीवी भी गुज़र गयी थी। याद है हमने शादी का भी सोचा था पर हम दोनों ने अपने अपने लड़कों का सोच कर शादी नहीं की। हाँ हम दोनों में सम्बंध हो गया।
नमिता: पर ये पैसे क्यों?
सुधाकर: देखो कल मैंने ऑफ़िस में तुमको कहा था ना कि राज की पढ़ाई का ख़र्च मैं उठाऊँगा। सो मैंने अपना वादा पूरा किया।
नमिता: मुझे लगा कि आपने आज के सेक्स की क़ीमत दी है, मैं बहुत ही अप्सेट हो गयी थी।
सुधाकर हँसते हुए बोला: बाप रे तुम्हारा छेद इतना महँगा है क्या? बुर के एक लाख और गाँड़ के एक लाख? हा हा ।
नमिता भी हँसकर बोली: अभी एक छेद का पेमेंट बाक़ी है? मुँह का। हा हा ।
सुधाकर: पर एक के साथ एक फ़्री भी तो था। गुप्ता ने भी तो चोदा था।
नमिता: हा हा सच कह रहे हैं आप!
सुधाकर : पर एक बात बोलूँ, बहुत मज़ा आया डबल चुदायी में । मुझे तो तुम्हारी टाइट गाँड़ बहुत मज़ा दी।
नमिता: आपको मज़ा और मुझे सज़ा। मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही हूँ।
आपका इतना मोटा है कि मेरी गाँड़ ही फट गयी।
सुधाकर: चलो कोई दवाई लगा लो।
नमिता : हाँ अभी लगाती हूँ। अच्छा थैंक यू फ़ोर मनी । बाई।
नमिता ने फ़ोन काट दिया।
राज ने भी फ़ोन रखा और अपना खड़ा लौड़ा सहलाते हुए सोचने लगा कि माँ आज गुप्ता और सुधाकर अंकल दोनों से एक साथ चुदवा कर आयी है। और गाँड़ भी मरवायी है।
शायद मैंने जब फ़ोन किया तो वह चुदवा रही होगी।
वह अपने कमरे के बाथरूम में गया और मूठ्ठ मारकर शांत हुआ ।
अब वह सोचने लगा कि क्या उसकी माँ छिनाल है?
थोड़ी देर सोचने के बाद उसने फ़ैसला किया कि नहीं वह छिनाल नहीं है। एक सामान्य सी औरत है जिसे सभी आदमी या औरतों की तरह सेक्स चाहिए। पति के ना होने की वजह से वह ग़ैरों से चुदवा रही है।
और आजकल तो वह ख़ुद भी उसको उत्तेजित कर देता है। अपने आप को शांत करने के लिए भी वह चुदवाने के लिए तरसती होगी।
चलो बहुत जल्दी मैं ही उनकी प्यास शांत कर दूँगा, वह सोचने लगा।
अचानक उसे याद आया कि उसे पढ़ना चाहिए क्योंकि पेपर तो कल ही है। वह पढ़ने बैठ गया।
नमिता भी थोड़ा आराम करके खाना लगायी और राज को आवाज़ दी। वह अभी भी गाँड़ में दर्द महसूस कर रही थी। उसको चलने में भी थोड़ी दिक़्क़त हो रही थी। दवाई लगाने से थोड़ा आराम तो मिला था।
तभी राज आया और उसके पास आकर बैठा । दोनों खाना खा रहे थे। नमिता: बेटा, पढ़ाई पूरी हो गयी।
राज: हाँ माँ मैंने दोहरा भी लिया है। पक्का है कि बहुत अच्छे नम्बर आएँगे, आप देखना।
नमिता: बेटा, मेहनत करोगे तो फल ज़रूर मिलेगा।
राज मुस्कुराते हुए उसकी छातियों को इशारा करके बोला: हाँ माँ आम भी तो फल ही है। वह तो मिलेगा ना?
नमिता: बदमाश बस हमेशा उलटा सीधा ही सोचता है?
राज: माँ आप थकी हुई दिख रही हो जाओ आराम कर लो। मैं अपनी पढ़ाई करता हूँ।
बस उस दिन और कुछ नहीं हुआ।
रात के खाने के बाद भी राज ने माँ को गुड नाइट किया और बिलकुल तंग नहीं किया। वह जानता था कि माँ ज़बरदस्त चुदवा कर आयी है और उसकी गाँड़ भी दुःख रही है। इसलिए उसने नमिता को तंग नहीं किया।
हालाँकि नमिता उसके इस व्यवहार परिवर्तन से थोड़ा हैरान थी।
अगली सुबह नमिता चाय लेकर जब उसके कमरे मेंपहुँची तो वह पढ़ाई कर रहा था और माँ को गुड मॉर्निंग किया और खड़े होकर उससे लिपट गया। नमिता राज की इच्छा के अनुसार सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में थी और उसने ब्रा और पैंटी भी पहनी हुई थी ।
नमिता ने भी उस प्यार किया। जब नमिता चाय लेकर वापस जाने लगी तो राज ने ध्यान से देखा कि उसकी चाल अब ठीक थी। शायद गाँड़ का दर्द ठीक हो चला था। वह फिर से पढ़ाई में जुट गया।
बाद में तय्यार होकर वह माँ के साथ बहुत हो गम्भीर मुद्रा में नाश्ता किया।
नमिता: क्या बात है? बहुत चुप चुप है?
राज: मो मैं अपना ध्यान नहीं बटाना चाहता क्योंकि आज पहला पेपर है, और मुझे ९०% नम्बर लाने हैं।
नमिता: मैंने तो तुमको ८०% का ही लक्ष्य दिया था।
राज: माँ मैं कोशिश करूँगा कि उससे भी ज़्यादा लाऊँ ।
नमिता : शाबाश बेटा। मैं सच में आज बहुत ख़ुश हूँ।
राज: माँ अगर मैं ९०% नम्बर ले आया तो मुझे एक और इनाम चाहिये।
नमिता मुस्कुरा के बोली: बोल क्या चाहिए? ८०% में तो मैं तुम्हें ब्रा के ऊपर से मज़ा तो लेने दूँगी ही?
राज : मैं चाहूँगा कि जैसे आप अभी ब्लाउस और पेटिकोट में रहती हो आगे से ब्रा और पेटिकोट में रहो।
नमिता: हट नालायक ऐसे भी कहीं होता है।
राज: अच्छा कम से कम कभी कभी तो ब्रा और पेटिकोट में रह जाया करना?
नमिता: अच्छा चलो देखेंगे। पहले नम्बर तो ला के दिखा।
अब वह मुस्कुरा के बोला: माँ कोई अच्छी सी ब्रा पहन कर रहना ,मैं तो पक्का नम्बर ले ही आऊँगा।
अब वह नमिता से लिपट कर प्यार किया और उसने उसके होंठ को थोड़ा सा छू लिया अपने होंठ से और बाई करके चलने लगा स्कूल के लिए।
नमिता: रुको एक मिनट। वह अंदर से दहीं और शक्कर लायी और एक चम्मच उसके मुँह में डालके उसको प्यार करके विदा की।
राज के जाने के बाद वह भी तय्यार होकर ऑफ़िस पहुँची।
क़रीब ११ बजे उसको सुधाकर ने बुलाया। और कुछ काम दिया और कहा कि वह एक मीटिंग के लिए जा रहा है।
नमिता उसको बोली: सर आज से राज के टेस्ट्स चालू हो रहे हैं, तो मैं चाहूँगी कि अगले कुछ दिन मैं आधे दिन ही काम करूँगी।
सुधाकर उसके पास आकर उसको बाहों में लेकर चूमा और उसकी चूतरों को दबाकर बोला: ज़रूर , राज की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दो। फिर उसकी छाती दबाकर बोला: जानू गाँड़ का दर्द अब कैसा है?
नमिता: अभी ठीक है!
सुधाकर: चलो मैं निकलता हूँ।
वह नमिता के होंठ चूसकर बाहर चला गया। नमिता उसकी हरकतों से गरमा गयी।
अब वह भी अपनी सीट पर बैठ कर काम करने लगी।
उधर राज के हाथ में जैसे ही टेस्ट पेपर आया उसकी मुँह खिल उठा। उसने पूरे ध्यान से पेपर किया। पेपर के लिए पहले दो पिरीयड्ज़ थे। बाद में सामान्य पढ़ाई होनी थी और आख़री पिरीयड में टेस्ट पेपर जाँचकर मिलने थे।
उधर नमिता का फ़ोन क़रीब १२ बजे बजा , कोई अंजाना नम्बर था।
नमिता: हेलो , कौन ?
उधर से: नमिता मैं राकेश बोल रहा हूँ।
नमिता: ओह भय्या जी आप? ये राज के ताऊजी थे। और राज के पापा से ३ साल बड़े थे। अभी ४८ साल के होंगे।
राकेश: बहु वो क्या है, कि कोर्ट आया था पर पेशी आगे को टल गयी। अब मेरी वापसी की ट्रेन तो ३ बजे की है। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ, तो तुम्हें फ़ोन कर लिया कि तुम्हारे और राज के हाल जान लूँ?
नमिता : अच्छा किया आपने फ़ोन करके। हम दोनों ठीक है ।
राकेश और उसकी पत्नी वैसे भी उनको कभी कभी फ़ोन करते रहते थे। नमिता भी अपने ज़ेठ और जेठानी का सम्मान करती थी क्योंकि ये दोनों राज के पापा की मृत्यु के समय उनको काफ़ी मदद किए थे।
नमिता: भय्या जी आप खाना खाकर जायिये ना। मैं अभी घर जा ही रही हूँ। आप घर आ जाओ।
राकेश: अरे तुम फ़ालतू मैं परेशान होगी।
नमिता: भय्या जी आपके लिए कैसी परेशानी?
राकेश: चलो मैं आता हूँ।
नमिता १५ मिनट में अपने घर पहुँची और पीछे से राकेश भी आ गया। नमिता ने झुककर उसके पैर छुए। उसके नीचे झुकने से उसका पल्लू सामने ख़सक कर गिर गया। ब्लाउस में कसे उसके बड़े बड़े मम्मे और उनके बीच की गहरी घाटी जैसे राकेश को घायल कर गयी। राकेश हमेशा से ही नमिता पर बुरी नज़र रखता था पर कभी जता नहीं पाया।
आज वह इस विधवा औरत का फ़ायदा उठाना चाहता था।
राकेश ने उसको कंधे से पकड़ कर उठाया और उसकी बाहों को सहला कर बोला: ख़ुश रहो। फिर उसको ऊपर से नीचे तक देख कर उसकी छातियों को देखते हुए बोला: बहुत भर गया है तुम्हारा बदन । पिछली बार जब तुम्हें देखा था तो इतनी सेक्सी नहीं थी तुम?
नमिता राकेश के मुँह से खुल्लम खुल्ला यह सुनकर चौंक गयी।
वह बोली: क्या भय्या जी आप भी कुछ भी बोल रहे हैं।
राकेश: अरे मैं एकदम सही बोल रहा हूँ। तुम पहले से बहुत ही आकर्षक दिखने लगी हो।
नमिता: अच्छा बैठिए मैं आपके लिए पानी लाती हूँ।
वह किचन से गिलास लायी और ड्रॉइंग रूम में रखे फ्रिज से बोतल निकालने के लिए झुकी और राकेश के बदन में झुरझूरी दौड़ गयी। आऽऽहहह क्या पिछवाड़ा है। पतली कमर में इतने बड़े नितम्ब उसने बहुत दिन बाद देखा था। उसका लौड़ा तनने लगा।
जब नमिता उसको पानी दे रही थी तभी वह समझ गयी कि राकेश जिस तरह से उसकी छातियाँ देख रहा था, उसके इरादे नेक तो नहीं ही थे।
नमिता: भय्या जी, आप बैठिए मैं खाना बनाती हूँ।
राकेश: देखो मैंने बहुत देर से नाश्ता किया है, मुझे बिलकुल ही भूक नहीं है। तुम यहीं बैठो बातें करते है।
नमिता उसके सामने के सोफ़े में बैठ कर बोली: और सुनाइए भाभीजी कैसी हैं? और हमारी भतीजी कैसी है?
राकेश: अरे शर्मिला ( राकेश की बीवी ) बहुत मज़े में हैं’। वह मस्त रहती है। और शीना ( उसकी बेटी ) भी मज़े में है।वह अब कॉलेज के पहले साल में है।
नमिता: बहुत दिन हो गए सबको देखे हुए कभी लेकर आइए ना सबको।
राकेश: राज भी तो बड़ा ही गया होगा।
नमिता: हॉ अब वह भी अगले साल कॉलेज जाएगा।
राकेश: एक बात कहूँ आज तुम इतनी सुंदर दिख रही हो कि दिल बेईमान हो रहा है।
नमिता: छी भय्या जी आप भी क्या बोल रहे हैं। मैं आपके छोटे भाई की पत्नी हूँ।
राकेश: वह होता तो और बात थी पर अब जब वह नहीं रहा तो वैसे भी मुझे तुम्हारा ख़याल रखना चाहिए।
यह कहकर वह खड़ा हुआ और नमिता के आँखों के आगे उसके पैंट में बना हुआ तंबू झूल गया। अब वह आकर नमिता से सट के बैठ गया। और उसकी जाँघ पर हाथ रख कर बोला: देखो तुम्हारा रूप तो इतना मादक है कि ऋषि मुनि का भी मन डोल जाए तो मैं तो एक साधारण इंसान हूँ।
नमिता: भय्या जी , भाभी का भी तो सोचिए, कि आप उनको धोखा दे रहे हैं।
राकेश: हा हा, किसकी बात कर रही हो? शर्मिला और मैं सेक्स के मामले में बिलकुल खुले विचारों के है ?
नमिता: मतलब?
राकेश: देखो, सुरेश और उसकी पत्नी विमला हमारे घर अक्सर आते रहते हैं। तुम विमला को तो जानती हो ना, मेरी इकलौती साली है, और मस्त माल है। हम चारों सेक्स का खुल कर मज़ा लेते हैं। जब मेरे या सुरेश में से कोई टूर पर जाता है तो दूसरा बंदा दोनों औरतों को सम्भाल लेता है।
नमिता: याने आप अपनी साली के साथ करते हो वह भी अपनी बीवी की जानकारी में?
राकेश अब उसके कंधे पर हाथ रखकर बोला: देखो रानी सेक्स का मज़ा लेने में रिश्ते का कोई मतलब नहीं है। जो पसंद आए उसे चोदो पर उसकी मर्ज़ी से, कभी ज़बर्दस्ती नहीं करना।
नमिता: मुझे तो बड़ा अजीब लग रहा है।
राकेश: अब तक तो राज की भी गर्ल फ़्रेंड होंगी और वह भी चुदायी शुरू कर चुका होगा।
नमिता हड़बड़ाकर : मुझे नहीं पता उसके बारे में। जहाँ तक मैं जानती हूँ उसकी कोई गर्ल फ़्रेंड नहीं है।
राकेश का हाथ अब उसके कंधे से होता हुआ उसकी एक चुचि तक पहुँचा और वह उसको दबाते हुए बोला: रानी, अगर तुम चाहो तो मैं शर्मिला को ले आऊँगा और राज अपनी तायी से चोदने की ट्रेनिंग ले लेगा।शर्मिला को कुँवारे लड़कों को चोदना बहुत पसंद है।
नमिता उसका चेहरा देखती रह गयी , उसकी बातें उसको गरम कर रही थी और वह चाह कर भी राकेश का हाथ अपनी चुचि से हटा नहीं पायी।
नमिता: छी आप भी कुछ भी बोलते हैं। भाभी ऐसा कभी नहीं कर सकती।
राकेश: जब उससे मिलोगी तब समझोगी उसको।
नमिता: तो क्या आपको इसपर कोई इतराज नहीं होता कि वह किसी से भी चु- मतलब करवा लेती हैं?
राकेश: अरे वह भी मज़ा करती है और मैं भी फिर किस बात का इतराज ? जब वह अपनी बहन को मुझसे चुदवा रही है तब क्या समस्या है?
ये कहते हुए उसके उसकी चुचि और निप्पल ऐंठने शुरू किए।अब नमिता भी मस्त हो गयी थी। और उसने तिरछि नज़र से उसके पैंट के तंबू को देखा और राकेश ने उसे देखते हुए देख लिया । वह मन ही मन मुस्कुराया और उसका हाथ पकड़कर अपने तंबू यानी लौड़े पर रख दिया। नमिता की आह निकल गयी। और नमिता के हाथ ने अपने आप उसका लौड़ा दबाना शुरू कर दिया।
राकेश: राज कितने बजे तक आएगा?
नमिता: क़रीब एक घंटे में ।आऽऽऽऽऽहहहह । धीरे से दबाइए ना भैय्या जी।
राकेश उसके होंठ चूमते हुए अपना दूसरा हाथ उसके जाँघ से सहलाता हुआ उसकी बुर तक ले गया। और नमिता की हाऽऽय्यय निकल गयी। अब वह भी उसके लौड़े को दबा कर मस्ती से भरी जा रही थी। उसकी बुर पूरी तरह गीली हो गयी थी।
राकेश: वैसे एक बात कहूँ आजकल शीना को देखकर भी मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है। निर्मला ने तो मुझे कह दिया है कि जब चाहो उसकी सील तोड़ दो। पर मैं चाहता हूँ किउसकी सील कोई लड़का तोड़े । मैं तो बाद में भी उसको चोद लूँगा।
नमिता: आऽऽहहह शीना आपकी बेटी है, उसको भी चोदना चाहते हैं?’
राकेश: अरे बेटी है तो क्या हुआ ? अगर वह भी राज़ी होगी तभी चोदेंग़े कोई ज़बर्दस्ती तो करेंगे नहीं। वैसे निर्मला कह रही है कि शीना मुझसे ही सील तुड़वाना चाहती है। आजकल बार बार पापा कहकर मेरे गोद में बैठ जाती है और मेरे खड़े लौड़े पर अपनी गाँड़ रगड़ती है।
नमिता अब बहुत गरम हो गयी थी। उधर वह अब उसको से चिपका लिया और उसके होंठ चूसने लगा।
राकेश: चलो ना बेडरूम में चलते हैं, राज के आने के पहले एक राउंड तो कर ही लें।
उसने खड़े होकर नमिता को एक बच्ची की तरह गोद में उठाया और उसके होंठ चूसते हुए बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया।
फिर वह अपने कपड़े खोल दिया और पूरा नंगा ही गया। नमिता ने उसके मर्दाने बदन को देखा तो उसका पानी छूटने सा लगा। पूरा शरीर कसरती और लौड़ा भी पूरे ८ इंच का लम्बा और मोटा। वह समझ गयी कि राज का लौड़ा भी इसी अपने ताऊ पर गया है।
अब वह आकर उसपर लेट गया और उसके गाल ,गर्दन और होंठ चूसने लगा। अब वह उसके ब्लाउस के हुक खोलने लगा। फिर उसके ब्लाउस और ब्रा भी निकाल कर उसके बड़े बड़े मम्मों को दाबकर चूसने लगा। वह भी मस्त होकर उसके बालों से खेल रही थी। फिर उसने उसकी साड़ी ऊपर उठा दी और उसकी जाँघों को सहलाकर वह उनको चूमे लगा। अब उसने पैंटी में ऊँगली डालकर उसको नीचे उतार दिया। उसकी फूली हुई मस्तानी बुर देखकर वह मस्ती से भर कर उसकी बुर को चूमकर चाटने लगा।
वह बहुत मस्त होकर अपने कमर उछाल कर मज़ा ले रही थी बुर चटकाने में। फिर वह उसकी टाँगें उठाकर उसके घुटनों को मोड़ कर उसने उसकी बुर में अपना लौड़ा लगाकर उसके अंदर पेल दिया और नमिता की आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह को ध्यान ना देकर पूरी मस्ती से चुदायी करने लगा।
अब नमिता भी अपनी गाँड़ उठा उठा के चुदवा रही थी।
दोनों पूरी तरह से ज़बरदस्त चुदायी का मज़ा के रहे थे। अब नमिता की चुचि दबाकर वह उसके होंठ चूसते हुए ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।
नमिता की आऽऽऽह और उइइइइइइइइइ कमरे में गूँजने लगी। वह भी ह्म्म्म्म्म्म कहकर चुदायी मेंमस्त था। फिर वह दोनों चिल्लाके झड़ने लगे।
अब राकेश उसके ऊपर से हटा और बाथरूम गया । उधर वह भी उठकर अपने कपड़े पहनी और फिर राकेश पानी पी कर उसको चूमकर फिर आने का कहकर चला गया। उसने कहा : अगली बार निर्मला और शीना को भी लाउँगा।सब मिलकर चुदायी करेंगे।
नमिता: ओह चलिए बाद में देखेंगे।
नमिता ने उसके जाने के बाद घड़ी देखी। अभी भी आधा घंटा था राज के आने में। वह अब अपने बेटे के लिए तय्यार होने लगी। उसने जाकर स्नान किया और अपने लिए नयी एक फ़ैन्सी लेस वाली ब्रा और पैंटी पहनी। फिर एक छोटा सा ब्लाउस पहना जिसमें से उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ आधी नंगी दिख रही थी। फिर उसने एक पेटिकोट पहना जिसमें से उसकी पैंटी और चूतरों का उभार बहुत मादक दिख रहा था।
वह आज अपने बेटे पर एक ऐसा जादू करने जा रही थी जो हमेशा उसपर काम करेगा। उसने शीशे में ख़ुद को देखा और अपने आप पर मुग्ध हो गयी।
तभी उसके मन में आया कि पता नहीं उसका पेपर कैसा हुआ होगा? उसने मन ही मन में निश्चय किया कि वह उसे तभी अपना शरीर देगी अगर वह उतने नम्बर लाएगा जो उसके साथ तय हुआ है।
तभी दरवाज़ा खुला और राज ने अंदर प्रवेश किया। उसके हाथ में पेपर था और उसका चेहरा उतरा हुआ था। उसने बैग सोफ़े पर रखा और चुपचाप पेपर माँ के हाथ में दे दिया—
