मेरी बीवी रीता मर्दों से सेक्स के मजे 2

बीवी की चुदाई

एक बात मेरी पत्नी को किरण बार-बार बताये जा रही थी कि किरण के पति सूरज ने जिस दिन पहली बार मेरी पत्नी रीता को देखा था तब से वह मेरी पत्नी पर लट्टू हो गया था। किरण का कहना था कि उसके पति सूरज ने कभी भी किसी और औरत के बारे में इस तरह किरण से बात नहीं की थी।

जब भी किरण से सूरज की स्कूल के बारे में बात होती थी, तब-तब सूरज बार-बार रीता के बारे में पूछता था, और रीता की सुंदरता की उसके सेक्सीपन की तारीफ़ करते हुए नहीं थकता था।

जब मैंने मेरी पत्नी रीता को बार-बार यह कहते सुना कि किरण का पति सूरज मेरी पत्नी रीता पर वाकई में फ़िदा था, तो अचानक मेरा मन किया कि मैं इस बात को पक्का करूं। मैंने उसी शाम सूरज का दिया हुआ विज़िट कार्ड निकाला, और बिना रीता को बताये कुछ हिचकिचाते हुए सूरज को एक मेसेज भेजा जिसमें सिर्फ लिखा था, “हेलो।”

मेरे मेसेज भेजने के चंद मिनटों में ही सूरज का फ़ोन आ गया। उसने मुझसे “हेलो हाय” कहा और फिर हम लोग कुछ देर तक बोरिंग औपचारिक बातें करते रहे। मैंने महसूस किया कि सूरज रीता से बात करना चाहता था, पर शायद कह नहीं पा रहा था। जब उसने रीता के बारे में पूछा तब मैंने उसे कहा, “रीता यहीं बैठी हुई मेरी कही हुई बात सुन रही है। लो तुम उससे बात करो। मैं वाशरूम जा कर आता हूं।”

यह कह कर मैंने फ़ोन रीता के हाथ में पकड़ा कर कहा, “सूरज तुमसे बात करना चाहता है। लो बात करो।” रीता बेचारी क्या बोलती? रीता ने फ़ोन हाथ में लिया, पर उसको समझ में नहीं आया कि वह क्या बोले। मैं उसे सूरज के साथ बात करते हुए छोड़ कुछ देर के लिए वॉशरूम चला गया।

रीता ने फ़ोन में कहा, “हेलो! आप कैसे हैं?” उसके बाद की बातें मैंने सुनी नहीं पर रीता और सूरज की थोड़ी कुछ बातें हुई। मैं जब वाशरूम से वापस आया तब रीता ने आखिर में कहा, “आप यह सब बात इनसे ही कर लो।”

यह कहने के तुरंत बाद रीता ने मुझे फ़ोन पकड़ा कर कहा, “लीजिये, सूरज आपसे बात करना चाहते हैं।”

यह कहती हुई रीता अफरातफरी में उठ खड़ी हुई। मुझे लगा की शर्म से उसके गाल लाल हो रहे थे। उसने मेरी और कुछ शरारती नजर से देखा और शायद कुछ शर्माती वह रसोई में काम का बहाना बना कर चली गयी।

मैंने सूरज को पूछा, “क्या हुआ? तुमने रीता को कुछ कह दिया क्या? उसने तुमसे पूरी बात भी नहीं की?”

सूरज ने कहा, “मैंने उनसे उनका नंबर मांगा और पूछा कि क्या मैं उनसे अलग से बात कर सकता हूं? तो रीता ने तुम पर डाल दिया।”

मैंने कहा, “मैं तुम्हें रीता का नंबर व्हाट्सएप्प पर शेयर कर रहा हूं। तुम रीता से बात और मेसेज करते रहो। मैं रीता को कहूंगा तुमसे बेझिझक बात करे और जवाब दे। शुरू-शुरू में वह जरूर हिचकिचाएगी, पर तुमसे बात जरूर करेगी। आगे फिर क्या होगा यह तुम पर है।” सूरज ने भी मुझे किरण का नंबर दिया और मुझे कहा कि मैं भी किरण से बात करूं।

इस तरह सूरज की रीता से और मेरी किरण से थोड़ी बहुत “हेलो, हाय” वाली बातें और मैसेज होते रहे। मुझे अपने मन में कहीं ना कहीं यह शक था कि सूरज कई बार रीता को कुछ ऐसे मेसेज भेजता था जिसे पढ़ कर रीता डिलीट कर देती थी। कई बार मैंने देखा कि सूरज के फ़ोन कॉल आते थे रीता को। पर ना मैं पूछता था और ना वह बताती थी कि उनकी क्या बात होती थी।

हाँ कोई-कोई बार वह मुझे कह देती थी कि किरण का पति सूरज बड़ा ही बेशर्म आदमी है। पर आगे वह चुप रह जाती थी, और कुछ नहीं बताती थी। किरण का पति सूरज किरण से कहता रहता था कि किरण जल्दी से जल्दी सूरज से रीता की मुलाक़ात कराये। इधर मैं भी किरण को मिलने के लिए बेताब था।

इस बात को शायद एक दो महीने हुए होंगे कि एक बार सूरज जिस क्लब में मेंबर था उस क्लब में दिवाली की एक पार्टी का ड्रिंक और डिनर प्रोग्राम होना था। सूरज ने किरण को कहा कि वह चाहता था कि रीता और मैं भी उस पार्टी में सूरज के महमान बन कर शामिल हों। किरण ने मेरी बीबी रीता को मना लिया कि वह पार्टी में शामिल हो। वैसे भी रीता को सज धज कर बाहर जाने का शौक तो था ही।

उस शाम जब रीता ने मुझे पार्टी में जाने के लिए पूछा तो मैंने रीता से कहा कि उसके लिए मुझे एक बार किरण के पति सूरज से बात करनी पड़ेगी कि वह पार्टी किस चीज़ की है वगैराह।

मैंने सूरज से फ़ोन से बात की। हम दोनों की करीब एक घंटे से भी ज्यादा लम्बी बात-चीत हुई। जब मैंने मेरी पत्नी रीता के बारे में बात शुरू की तो सूरज मेरी बीबी की तारीफों के पुल बाँधने लगा। मैं समझ गया कि सूरज की मेरी बीवी से बात-चीत होने लगी थी। लगता था कि उन दोनों के बीच काफी मैसेज का आदान-प्रदान हो रहा था।

सूरज की काफी मीठी नजर मेरी पत्नी पर थी। कुछ तो रीता ने मुझे इशारा करके बता ही दिया था कि सूरज उसके पीछे कैसे पड़ा हुआ था। ऊपर से उस दोपहर जब सूरज से मुलाक़ात हुई थी तब से ही मैं समझ गया था कि सूरज मेरी बीबी पर तगड़ी लाइन मार रहा था।

जब किरण की बात आयी तो सूरज ने मुझे बताया कि सूरज और किरण का सम्बन्ध एक-दम खुली किताब की तरह था। किरण अगर चाहे तो किसी गैर मर्द से सेक्स करे सूरज को कोई एतराज नहीं था। जब किरण के बारे में सूरज ने ऐसी बात कह डाली तब मैंने भी सूरज से कह ही डाला कि मुझे भी मेरी बीवी रीता अगर किसी गैर मर्द से मेलजोल बढाए या सेक्स भी करे तो कोई आपत्ति नहीं है।

मुझे सूरज से बात करके यह यकीन हो गया कि सूरज मेरी बीवी को पाने के लिए बेताब था। मैं तो उसकी बीवी पर लाइन मार ही रहा था, और वह सूरज अच्छी तरह जान गया था और उसे या किरण को उसमें कोई दिक्क्त नहीं थी। आखिर में बातो-बातों में सूरज ने मुझे यह कह ही दिया कि वह रीता पर फ़िदा था। पर उसे डर था कि रीता सूरज की कोई बात का बुरा ना मानले।

मैंने सूरज से कहा कि इस बार क्लब में मिलने पर रीता को कैसे मनाना था, या क्या करना था। उसके बारे में सूरज ही कुछ सोचे और फ़ौरन उसे अमल में लाए। मैंने सूरज से कहा कि मैं अपनी तरफ से रीता को इसके लिए तैयार करने की कोशिश में लगा था। पर ज्यादा काम सूरज को करना था। सूरज ने मुझे कहा कि किरण तो मुझ से मिलने के लिए कभी से बेताब थी।

सूरज से बात होने के बाद मैंने रीता से कहा, “मेरी सूरज से बात हो गयी है। यह एक कपल पार्टी है। ड्रिंक्स वगैरह भी होंगे। हम चलेंगे पर ऐसी पार्टियों में अक्सर मर्द लोग दूसरे की बीवियों के साथ, ख़ास कर के वह जिस को लाइन मारते रहते हैं उनसे कुछ ज्यादा ही छूट ले लेते हैं, छेड़खानी करते हैं।

हालांकि कोई जबरदस्ती नहीं होती, पर कभी-कभी शरारत में या नशे के बहाने जान-पहचान वाले एक-दूसरे की बीवियों से चुम्मा-चाटी, बूब्स दबाना, गांड दबा कर सहलाना वगैरह भी कर लेते हैं। इसे आम समझा जाता है। तुम्हें यह बात समझनी होगी। तुम्हें ऐसे में नरम रवैया रखना होगा। तभी हम चलेंगे। वरना अगर तुम नाराज हो गयी और बेवजह कुछ पंगा हो जाये इससे तो बेहतर है कि हम पार्टी में ना जाए।”

मेरी बात सुन कर रीता ने कहा, “मैं जानती हूं कि आप किरण के पति की हरकतों के बारे में बात कर रहे हो। उसकी चिंता आप मत करो। मैं सूरज के बारे में काफी कुछ जान चुकी हूं। हमारी चैट भी हुई है इसके बारे में। तुम मुझसे भी यह बार-बार जताते रहते हो और मुझे पता है वह मुझ पर लाइन मार रहा है।

मुझे पता है कि वह जब भी मुझ से मिलेगा तो जरूर छेड़ेगा। किरण भी कह रही थी की सूरज मुझे मिलते ही कुछ ना कुछ करे बगैर रह नहीं सकता। मैं सूरज से निपट लूंगी। ओके? वैसे तुम यह कहो क्या तुम पार्टी में मैं किरण को नहीं छेड़ोगे क्या?”

जब मैं चुप रहा तो रीता ने कहा, “पार्टी में तुम भी किरण को छेड़ोगे। तो सूरज थोड़े ही मुझे छोड़ेगा? तुम बिल्कुल चिंता मत करो। सब ठीक होगा। जैसा तुमने कहा, मैं भी जानती हूँ कि ऐसी पार्टियों में ऐसा होता रहता है। कई मर्द और औरत एक दूसरे के साथ मौक़ा देख कर कुछ ना कुछ छेड़खानी जरूर करते हैं और करते ही रहेंगे।” रीता ने ऐसे कह कर मेरी बात पर ठंडा पानी डाल दिया।

वह पार्टी काफी यादगार रही। जैसे ही हम पार्टी में पहुंचे तो सूरज और किरण पहले से ही वहां मौजूद थे। हमारे पहुंचते ही सूरज ने रीता को अपने साथ बिठा लिया और किरण को मेरे साथ बिठाया। फिर सूरज ने रीता का हाथ अपने हाथों में ले लिया और मुझे कहा कि उस शाम मेरी पत्नी रीता सूरज के साथ ही रहेगी और उसकी पत्नी किरण मेरे साथ।

किरण ने भी फौरन मेरा हाथ उसके हाथों में ले लिया। इस तरह उस शाम के लिए सूरज ने हमारी जोड़ी को अलग-थलग कर दिया। हालांकि हम चारों सब काफी समय एक-दूसरे के साथ भी रहे।

मैं हैरान रह गया जब मैंने देखा कि पार्टी में सूरज ने काफी प्यार भरा आग्रह कर रीता को बियर पीने के लिए राजी कर लिया था। मेरे देखते ही रीता उस शाम लगभग आधी बियर की बोतल गटक गयी। मेरी पत्नी कभी भी शराब या बियर भी नहीं पीती थी। शायद यह रीता का शराब पीने का पहला अवसर था।

उस शाम मुझे कह कर सूरज मेरी पत्नी रीता को अपने साथ बाहर ताज़ी हवा में घुमाने के लिए भी ले गया। कुछ देर के बाद वह दोनों जब वापस आये तब मैंने देखा कि रीता कुछ बदली-बदली सी लग रही थी।

मैंने रीता को एक कोने में ले जा कर जब पूछा कि क्या हुआ, तब रीता मुझ पर एक सरसरी नजर डाल कर शिकायत के स्वर से कुछ कड़वाहट भरे लफ्जों में बोली, “तुम किसी गैर मर्द से मुझको छेड़वाना चाहते थे ना?

तो लो आज जो कुछ बाकी था वह भी हो गया। किरण का पति मुझे बाहर लॉन में चलते हुए एक अंधेरे से कोने में ले गया और बातें करते-करते, मुझे बांहों में जकड कर मेरे गालों को चूमने लगा और मेरे बूब्स को पकड़ कर दबाने लगा।

वह तो मेरे ब्लाउज और ब्रा को हटा कर मेरे बूब्स को नंगा कर अच्छी तरह से मसलना और चूमना चाहता था। कुछ तो वह पीया हुआ भी था। वह मुझे होंठों पर अच्छे से चूमना चाहता था, पर मैंने उसे ऐसा करने नहीं दिया।

आज किरण के पति ने तो मेरी मिट्टी पलीत कर दी। मेरा मन तो किया कि मैं खिंच कर बाहर सब के सामने ला कर सूरज की अच्छी तरह से धुनाई कर दूं। पर मुझे तुम्हारा और किरण का ख्याल आया और मैं चुपचाप बर्दाश्त करती हुई रह गयी। पर सूरज था कि मुझसे चिपकता ही जा रहा था। मैंने उसे बड़ी मुश्किल से समझाया और फिर मैं उसे बड़ी मशक्क्त करते हुए खींच कर वापस ला पायी।”

मैंने देखा कि सूरज के गालों पर रीता की लिपस्टिक के कुछ धब्बे लगे हुए थे। वह रीता ने अपनी मर्जी से लगाए थे या सूरज ने जब रीता से जबरदस्ती की तब लगे थे। यह कहना आसान नहीं था। यह सच जानने के लिए मेरे मन में एक आइडिया आया।

मैंने गुस्सा होने का दिखावा करते हुए रीता से कहा, “यह तो बड़ी गलत बात है। तुम रुको। मैं जा कर सूरज को खींच कर अब सब के सामने घसीट कर उसकी पिटाई कर उसे जलील करता हूं। वह समझता क्या है अपने आपको? वह पैसे वाला है तो क्या वह हमारी पत्नी को छेड़ेगा, और हम चुप रहेंगे?”

यह कह कर मैं जैसे ही आगे बढ़ने लगा तो मेरी पत्नी रीता ने मेरा हाथ थाम कर मुझे रोका और कुछ खिसियानी सी शकल बना कर कुछ झुंझलाती हुई बोल पड़ी, “ऐसा कुछ भी मत करना। यह सही है कि उसने मेरे साथ थोड़ी सी जबरदस्ती की, पर वह हमेशा मेरे साथ बड़ी ही इज्जत और अदब के साथ पेश आया।

उसने ज़रा भी बेअदबी या अपमानित भाषा में मुझसे बात नहीं की। मैं भी अगर चाहती तो उसे रोक सकती थी, झगड़ सकती थी, चिल्ला सकती थी। पर मैंने भी ऐसा कुछ नहीं किया। तुमने ही तो कहा था कि मुझे सूरज से कुछ नरमी से पेश आना चाहिए? मुझे अगर सूरज छेड़े तो ज्यादा सीरियसली नहीं लेना चाहिए? तो मैंने सूरज को कुछ हद तक आगे बढ़ने दिया।

मेरी गलती है कि मैंने सूरज को रोका नहीं। उसमें सिर्फ सूरज पूरी तरह जिम्मेवार है यह कहना ठीक नहीं होगा। आई ऍम सॉरी राज। मैं जानती हूं मेरे से गलती हो गयी।”

मेरी छाती के ऊपर से एक बहुत बड़ा और भारी बोझ जैसे हट गया, जब मैंने मेरी बीवी को यह सब कहते हुए सूना। बाप रे! जो काम करने के लिए बरसों से मैं तरस रहा था, वह काम किरण और सूरज ने कुछ हफ़्तों में ही कर दिया। मैं सोच भी नहीं सकता था कि कभी मेरी बीवी किसी गैर मर्द को उसका बदन छूने भी देगी।

इधर तो सूरज ने शायद मेरी बीवी के मस्त स्तनों को नंगा कर मसल भी लिए थे, और शायद मेरी बीवी के होंठों को चूम भी लिया था। मैंने मान लिया था कि जो रीता कह रही थी कि सूरज नहीं कर पाया था, वह शायद सूरज ने कर ही लिया था। आखिर बीवियों को इतना थोड़ा सा झूठ बोलने का तो हक़ है।

मैंने मेरी बीवी को अपनी बाहों में भर लिया। मेरा ऐसा बरताव देख कर रीता कुछ सकते में आ गयी। वह आश्चर्य से जब मुझे देखने लगी तब मैंने कहा, “रीता, तूने कुछ भी गलत नहीं किया। तूने जो किया या करने दिया वह सब सही किया।

मैं कह नहीं सकता कि आज मैं कितना खुश हूं। आज तूने यह सब कह कर मुझे वह तोहफा दिया है जो बेशकीमती है। तूने जो भी किया उससे मैं बहुत खुश हूं। आज तू जो मांगे वह मैं तुझे देने के लिए तैयार हूं।”

रीता भौंचक्की सी बड़े ही आश्चर्य से मुझे देखती रही। मेरी वह प्रतिक्रिया उसकी समझ से बाहर थी। पर वह उतना समझ गयी कि मैं रीता के सूरज के साथ लिपटने और चुम्मा-चाटी से नाराज नहीं हुआ था बल्कि खुश था। इसके कारण शायद रीता की छाती पर से भी खुद के दोषी होने का एक बहुत बड़ा बोझ कम हो गया था।

मैंने मेरी पत्नी से कहा, “देखो अगर मुझे पूछो तो जो हुआ अच्छा हुआ। तुमने सूरज को नहीं रोका यह बहुत अच्छा किया, क्योंकि रोकने से भी शायद वह ना रुकता, या फिर बेकार में तुम चिल्लाती और बिना वजह के ड्रामा हो जाता।

हमारे बीच में मनमुटाव भी हो सकता था। इन पार्टियों में छेड़-छाड़ चुम्मा-चाटी होती रहती है। आखिर पार्टियां ऐसी छेड़-छाड़ के लिए ही तो होती हैं। वैसे एक बात बताऊँ? तुम्हारी खूबसूरती आज पूरी निखर रही है। बेचारा सूरज तुम्हारे पीछे पागल है। वह तुमसे लिपट लिया,‌ और थोड़ी सी छुआछूत हो गयी तो क्या हुआ? उसकी तुमसे मिलने की आग को तुमने शांत कर दिया, और तो उसमें इतना परेशान होने की कोई बात नहीं।

अभी तो पार्टी शुरू हुई है। तुम सूरज के साथ बिंदास घूमो, डांस करो, लोगों से मिलो, फिरो और खूब हर तरह से एन्जॉय करो। तुम्हें अगर सूरज छेड़ रहा है तो मैं भी तो उसकी बीवी को छेड़ रहा हूं। तुम बिना कोई रोक-टोक के बिल्कुल रिलैक्स हो कर उसके साथ एन्जॉय करो।”

हर स्त्री को अपनी सुंदरता का बखान अच्छा लगता है। रीता मेरी बात सुन कर मुस्कुराई। मेरी बीवी ने मेरा हाथ ले कर चूमा। उसके दिमाग में जो खुद के दोषी होने का भाव था उसे मैंने शांत कर दिया था। उसके बाद पार्टी में रीता काफी खुश और तनाव मुक्त दिख रही थी। सूरज रीता को ले कर उसे क्लब के म्यूज़ियम और लाइब्रेरी में ले गया। वहां काफी किताबें और देखने वाली चीज़ें थीं।

सूरज और रीता कुछ समय एक साथ ही इधर-उधर घूमते रहे। मैंने महसूस किया की मेरे कहने के बाद रीता भी सूरज की हरकतों पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रही थी, या उन्हें कुछ हंस कर स्वीकार कर रही थी। मैंने एक बार सूरज को रीता के पीछे हाथ ले जा कर रीता के कूल्हों को जोर से दबाते और मसलते हुए देख लिया था। उस समय वह लोग हमसे ज्यादा दूर नहीं थे। मुझे ऐसा लगा जैसे सूरज जान-बूझ कर मुझे वह दिखाने की कोशिश कर रहा था। मुझे उससे कोई दिक्क्त नहीं थी।

जब सूरज ने रीता के कूल्हों को जोर से दबाया और शायद कूल्हे की दरार में उंगलियां घुसेड़ने की कोशिश की। तब रीता ने मुस्कुराते हुए सूरज की और देखा और फिर दोनों कुछ बातें करने में लग गए।

कुछ देर बाद जब रीता और सूरज वापस आये, तो सूरज ने मुझे और किरण को पकड़ कर एक साथ बिठाया। जब मैं कुछ हैरानी से रीता की और देखने लगा, तो रीता ने शरारत भरी मुस्कान देते हुए कहा, “इतने शर्माते क्यों हो? मेरे सामने तो बड़ी डींगे मार रहे थे कि तुम किरण को मिलते ही यह कर लोगे वह कर लोगे। अब जब किरण साथ है तो भीगी बिल्ली क्यों बने बैठे हो? मैंने ही सूरज से कहा कि किरण को तुम्हारे साथ बैठाये।”

जब भी हम कहीं बैठते तो किरण मुझ से इस तरह बार-बार खिसक कर करीब आ रही थी, जैसे वह मुझे कोई सन्देश देना चाह रही हो। मैं भी यह अच्छी तरह समझ गया था। मैं समझ गया था कि किरण और सूरज को मेरे और रीता को उन दोनों के करीब आने से कोई एतराज नहीं था। बल्कि सूरज रीता के करीब आना चाहता था और उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था अगर मैं उसकी बीवी किरण के करीब आऊं।

मैंने सुना था कि शायद रईस लोगों के सर्किल में कई बार ऐसा होता है कि एक की पत्नी दूसरे के पति के साथ एकाद रात बिता ले तो चलता है। अगर दोनों कपल्स के बीच में समझौता हो तो उसे ज्यादा आपत्तिजनक नहीं माना जाता। जब उस शाम तेज जोशीला संगीत बजना शुरू हुआ, तब सूरज ने रीता का हाथ थाम कर उसे डांस के लिए ले जाना चाहा।

रीता ने मेरी और देखा और जब मैं हंस दिया तो रीता सूरज के साथ डांस फ्लोर पर चली गयी, और अपनी कमर पर सूरज का हाथ रखवा कर जैसे ही उन्होंने डांस करना शुरू किया, तो रीता के नृत्य की करारी अदा और ठुमके देख कर सूरज एक-दम थम सा गया।

वह बड़े ही अचम्भे से रीता को नाचते हुए देखता ही रहा। रीता तो नृत्य में कमाल की तो थी ही। क्लब में काफी लोग थे। सब उनको नाचते हुए देखते ही रहे। मैं सूरज और रीता को डांस करते हुए देख रहा था। पर अचानक एक पल में देखते ही देखते वह कहां खो गए पता नहीं लगा।

मैं उनको ढूंढता ही रहा। किरण ने यह देख लिया था। किरण मुझे पकड़ कर दूसरे कोने में ले गयी और मुझसे लिपट कर बोली, “राज, तुम बड़े ही हॉट हो यार! क्या तुम अपनी बीवी को कुछ देर के लिए भी किसी और मर्द के साथ छोड़ नहीं सकते? रीता और सूरज को छोड़ो, और मुझे देखो। मैं कैसी लगती हूं तुमको? क्या मैं तुम्हें हॉट नहीं लगती?”

मुझे अपनी गलती समझ आयी। एक तरफ तो मैं डींग मारता था बीवी को आज़ाद छोड़ने की। पर दूसरी तरफ उसे सूरज के साथ कहीं नज़रों से ओझल होते हुए देख परेशान भी हो रहा था। हम हिंदुस्तानी मर्द कितना भी अपनी बीवी को आज़ादी दें, हमारे जहन में कभी ना कभी कुछ ना कुछ तो मरदाना भाव आ ही जाता है।

हम अपनी पत्नी को किसी गैर मर्द की बांहों में देख कर या ऐसा होने की संभावना से ही कुछ हद तक कतराते तो जरूर हैं।

मैंने किरण को अपनी बांहों में लेते हुए कहा, “किरण तुम भी कोई कम हॉट नहीं हो। पर क्या तुम्हें ऐसा नहीं लग रहा कि हम कुछ ज्यादा ही तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं?”

किरण ने मेरा हाथ पकड़ कर ब्लाउज पर अपनी छाती पर रखते हुए कहा, “मेरी शादी को तीन साल हो गए हैं? क्या यह कम है? तुम्हारी शादी को भी तो चार साल होने को आये हैं? यह क्या जल्दी है?” किरण को यह करते हुए देख मुझे जैसे बिजली के करंट जैसा झटका लगा। मैंने सोचा ही नहीं था कि किरण इस तरह इतनी फुर्ती से आगे बढ़ेगी।

मैंने तय किया कि जब ओखल में सिर रखा है तो मुसल से क्या डरना? मैंने किरण के ब्लाउज को ऊपर खींच, उसकी ब्रा को खिसका कर उसके एक स्तन को मेरी हथेली में ले कर उसकी निप्पल के साथ खेलने लगा।

मुझे मानना पड़ेगा, कि किरण के स्तन बहुत ज्यादा मुलायम और नरम थे। वह एक-दम फिसलन से चिकने पर फिर भी सख्त थे। किरण की एक निप्पल को अपनी उंगलियों में ले कर मैं जब उसे मसलने और पिचकाने लगा तो किरण के मुंह से एक सिसकारी सी निकल गयी।

मैंने भी मौक़ा देख कर डांस करते हुए किरण का एक हाथ पकड़ कर मेरी जांघों के बीच में रख दिया। किरण भी कोई कम नहीं थी। किरण ने भी टटोल कर मेरे लंड को पकड़ लिया और अपने हाथ में पकड़ कर बड़े ही आश्चर्य को दिखाते हुए बोली, “यार तुम्हारा भी कोई कम नहीं है। अच्छा खासा बड़ा है और मेरे साथ डांस करते हुए सख्त भी हो गया है।”

किरण ने जब मेरा लंड पतलून के ऊपर से पकड़ कर हिलाया तो मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी। इतनी अल्लड़ बिंदास औरत मैंने पहली ही बार देखी थी। पर किरण मेरा लंड पकड़ कर कुछ देर हिलाती रही।

मुझे और कुछ ज्यादा करने का मौक़ा नहीं मिला, क्यूंकि सूरज और रीता कुछ दूरी पर दिखाई दिए। मुझे यह समझने में देर नहीं लगी कि जरूर सूरज ने फिर से रीता से कुछ छेड़खानी जरूर की थी। क्यूंकि रीता के गाल लाल हो रहे थे और मुझे देख उसकी आंखे शर्म से झुकी हुई थी। मुझे यह ठीक से पता नहीं की मेरी पत्नी रीता ने या किरण के पति सूरज ने मेरी और किरण की हरकतों को देखा था या नहीं।

मैं जानने के लिए उत्सुक था कि दुबारा क्या हुआ। मुझे पूछने की जरुरत नहीं पड़ी। रीता खुद मेरे पास आयी, और किरण और सूरज ना सुन पाएं ऐसे बोली, “यार यह किरण का लम्पट पति सूरज सुधरेगा नहीं। इस बार तो डांस करते-करते पता नहीं कब हम वहां से निकल गए।

सूरज मुझे क्लब के कोई एक अंधेरे से कमरे में ले गया। वहां जाते ही दरवाजा बंद कर उसने मुझे दबोच ही लिया। जो वह पिछली बार नहीं कर पाया था उसने उससे कहीं ज्यादा इस बार कर ही लिया। उसने मेरा ब्लाउज और ब्रा खिसका कर मेरे बूब्स को मसल दिए। मुझे होंठों पर चूम भी लिया।

वहां कमरे में एक बेंच था। सूरज ने उसके ऊपर मुझे लिटा कर मेरा घाघरा ऊपर उठाया। वह अपनी पतलून खोल ही रहा था कि मैं उसे कपडे ना उतारने के लिए कह कर चिल्लाने लगी। तब कुछ घबराया हुआ सूरज मुझसे चुप रहने के लिए मिन्नतें करने लगा।”

मैंने आश्चर्य से पूछा, “क्या वह तुम्हें चुप रहने के लिए कहने लगा?”

रीता ने कहा, “हां वह बार-बार मुझे कहने लगा कि वहां काफी लोग हैं, वह आ जाएंगे और हम सब की बदनामी होगी। इसलिए बेहतर है की मैं ना चिल्लाऊं।”

मैंने पूछा, “फिर क्या हुआ?”

रीता ने कहा, “फिर क्या, मेरे चुप रहते ही वह फिर जोश में आ गया। वह मेरे ऊपर चढ़ गया। उसने मेरे मुंह पर अपनी हथेली रख कर अपनी पतलून पहने हुए ही मेरी चूत को अपने लंड ऊपर से ही धक्के मारने शुरू किये जैसे वह मुझे चोद रहा हो।

चूंकि मैंने भी साड़ी, घाघरा, पैंटी पहन रखी थी, और उसने अपना लंड नहीं निकाला था और उस समय वहां कुछ लोग कमरे के बाहर बातें कर रहे थे, तो मैं चुप रही और सूरज मेरे ऊपर चढ़ कर चुदाई वाले धक्के मारता रहा।

अगर मैं चिल्लाती तो बाहर खड़े लोग दरवाजा खटखटाने लगते और अंदर आ जाते और हमें उस हालत में पकड़ लेते। सब की बड़ी बदनामी हो जाती। पता नहीं यह आदमी मुझे देख कर इतना पागल क्यों हो जाता है? पता नहीं सूरज को उस समय क्या हो गया था?”

मैंने रीता को रोक कर पूछा, “तुम्हें क्या लगता है? वह ऐसा क्यों कर रहा था? तुमने उसे पूछा नहीं?”

रीता ने मेरी और देख कर अपने होंठ कुछ टेढ़े कर बोला, “पता नहीं तुम मर्दों का दिमाग कैसे चलता है? इसका क्या मतलब होता है यार? जब वह इस तरह की हरकतें करता है तो तुम पूछते हो वह ऐसा क्यों कर रहा है? अरे इस तरह करने से मैं उससे चुदवाने के लिए राजी हो जाउंगी क्या?”

मैंने पूछा, “इसका मतलब सूरज तुम को चोदना चाहता है?”

इस बार रीता का दिमाग झटका, “तो तुम्हें क्या लगता है? वह मेरी पूजा करना चाहता है? अरे तुमने मुझे मना किया था इस लिए मैं चुप रही और कुछ देर वह ऐसे ही धक्के मारते हुए मुझे चोदने का स्वांग करता रहा। मैं हैरान सी उसे यह सब करते हुए चुप हो कर देखती ही रह गयी।

उसके बाद मुझे चुप देख कर तो सूरज ने कुछ गजब ही कर दिया। उस अंधेरे कमरे में सूरज ने खड़े हो कर ज़िप खोल कर अपना लंड निकाला और मेरे हाथ में अपना लंड रख दिया। बापरे, क्या बड़ा था उसका लंड?

उसको जब मैंने हाथ में फील किया तो इतना हैवी था कि क्या बताऊं? शायद वह चाहता था कि मैं उसके लंड को हिलाऊं और चूसूं। मैंने गुस्से में अपना हाथ हटा दिया और उसे बोल दिया कि अगर वह रुक नहीं गया तो मैं चिल्लाऊंगी।

मैंने सूरज को उससे आगे बढ़ने नहीं दिया। ना चाहते हुए भी मुझे उसे डांटना पड़ा। मुझे लगता है सूरज अब तौबा करेगा और दुबारा ऐसी-वैसी हरकत नहीं करेगा।”

इस बार हैरान होने की बारी मेरी थी। मैं “यह क्या किया तूने?” यही बोल कर चुप हो गया। मुझे लगा कि अब तक के सब करे कराये पर मेरी बीवी ने पानी फेर दिया। मेरी बात सुन कर मेरी बीवी मुझे कुछ हैरानगी से मुझे देखती रह गयी। उसने मुझसे पूछा, “क्या मैंने कुछ गलत किया?”

मैंने कहा, “मैंने तुझे क्या कहा था?”

रीता ने जवाब में कहा,”तुमने कहा था कि मैं सूरज से नरमी से पेश आऊं। तो मैंने उसे पहले सब कुछ करने दिया ना? रोका तो मैंने उसे उसके बाद!”

मैंने अपनी हताशा दिखाते हुए कहा, “ठीक है। कोई बात नहीं। जो हो गया सो हो गया। पर अब आगे से यह रोकने टोकने की कोई बात नहीं करना, ओके? यार हम एन्जॉय करने आये हैं। अगर उसने लंड तुम्हारे हाथ में दे ही दिया था तो थोड़ा हिला देती उसे। वक्त तो था ही, और तुम लोग अकेले भी थे। चूस लेती।

तुम खुद कह रही हो की उसका लंड बहुत ज्यादा तगड़ा है। तो फिर कुछ देर के लिए ही सही, मजा ले लेती ना? मैंने तो तुम्हें कह ही दिया था कि एन्जॉय करो। सूरज तुम पर वैसे तो जबरदस्ती नहीं कर रहा है ना? थोड़ा साथ देना सीखो ना? क्यों ऐसा रंग में भंग कर देती हो?”

रीता ने बड़ी ही सरलता से कहा, “यार तुम भी कमाल हो। मैंने क्या रंग में भंग किया? भला पहली या दूसरी मुलाक़ात में कोई अचानक ऐसा करता है क्या? तुम गुस्सा क्यों होते हो? उसने थोड़ा ज्यादा किया तब मैंने उसका विरोध किया। मैं चिल्लाने की धमकी नहीं देती तो पता नहीं वह और क्या क्या करता?

वह तो मेरा घाघरा ऊपर उठा कर अपना लंड निकाल कर मेरी चूत में डाल ही देता। चिल्लाने की धमकी नहीं देती तो वह नंगी करके चोद ही देता मुझे। तुमने कहा था तो उसका साथ तो दिया ही था ना मैंने? चिल्लाई तो नहीं ना मैं? यह तो मैंने उसे बस गीदड़भबकी ही दी थी, अगर मैं चिल्लाती तो तुम यह कह सकते थे।”

मैंने पूछा, “क्या अगर सूरज ने सब कुछ कर लिया होता तो भी तुम ना चिल्लाती?”

रीता ने गरूर से अपना सिर उठाते हुए कहा, “पर आगे कुछ किया भी तो नहीं ना सूरज ने? मैं तुम्हें एक बात बताये देती हूं। मैं कोई मेमनी नहीं हूं कि कोई भी शिकारी कुत्ता या भेड़िया आये और मुझे उठा कर ले जाए। तुम मुझे अच्छी तरह जानते हो।

तुमने जब मुझे शादी के लिए या पहली बार जब चुदाई के लिए राजी किया था, तो क्या मैं ऐसे ही मान गयी थी? ऐसे ही थोड़े ही होता है? किरण कह रही थी कि सूरज भी जिद्दी है। वह जिस औरत के पीछे पड़ जाता है उसे चोदे बगैर छोड़ता नहीं।

अगर मैं उसे रोकती नहीं तो वह तो पता नहीं क्या कर देता मुझे? मुझे छोड़ता थोड़े ही? उसकी ऑफिस में कई सुन्दर लडकियां है, क्यों वह उनमें से किसी के पीछे नहीं पड़ता? पता नहीं वह मेरे पीछे ही हाथ धो कर क्यों पड़ा है? उसको मुझ में ऐसा क्या दिखा जो मेरे ही पीछे पड़ा हुआ है? यह बात मेरी समझ में नहीं आ रही।”

सूरज उस वक्त कुछ दूर खड़ा किसी से बात कर रहा था। वह हमारी बात नहीं सुन पा रहा था। पर यह बात किरण ने सुन ली। वह हम दोनों के पास आयी और उसने रीता को कोहनी मार कर कहा, “मैं सच कह रही थी। मैं मेरे पति को अच्छे से जानती हू।

मेरे पति किसी ऐरी-गैरी को पास फटकने भी नहीं देते। सच्चे हीरे की पहचान है उन्हें। सच्चे हीरे की परख एक अच्छे जौहरी को ही होती है। उनकी नजर में तू एक सच्चा हीरा है। मेरे पति अच्छे जौहरी हैं। तू कुछ भी करले वह तुझे छोड़ेंगे नहीं। बेहतर है तू मेरा कहना मान और मेरे पति का साथ दे।

यार हमारी उम्र में खुल कर चुदाई का आनंद देना चाहिए। तुम क्या बूढी हो जाओगी फिर चुदवाओगी? हम लोग अपने पति से रोज चुदवातीं ही हैं ना? तो तू अगर मेरे पति से एक दिन चुदवायेगी तो क्या हो जायगा? कौन सी तेरी ब्यूटी कम हो जायेगी?”

फिर रीता को एक बार और कोहनी मार कर अपनी आँखे मटकाती हुई किरण हस कर बोली, “अरी, एक-दूसरे की अंडरस्टैंडिंग से सब होता है। तुम्हारे पति को देख। वह तो आज भी तैयार बैठा है।

तू मान जा हम सब एन्जॉय करेंगे। तू सबसे ज्यादा एन्जॉय करेगी समझी?” रीता ने मेरी और देखा। मैंने मेरी पत्नी रीता से बड़ी ही शालीनता से आँख मिला कर अपना सिर हिला कर सहमति जताई।

मैं रीता का हाथ पकड़ कर उसे कुछ दूरी पर ले गया। मेरी पत्नी मुझे हैरानगी से देखती ही रही। वहां मैंने रीता को बड़े प्यार से अपने करीब खींच कर उसे अपनी बाहों में भर कर समझाते हुए कहा, “देख लिया? अब तो सूरज की बीवी भी तुझे कह रही है।

अब बेहतर है तू मान जा, और सूरज का साथ दे। मेरा मतलब है वह जो कर रहा है उसे मत रोक। सूरज और किरण वाकई में हम दोनों को बहुत चाहते हैं और तुम्हारे हां कहते ही हम सब साथ हो जाएंगे। हमारी बात मान जा। ओके?”

रीता ने मुंह बिगाड़ कर मेरी और तीखी नजर से देखा और फिर मेरा हाथ पकड़ कर मुझे किरण के पास ले आयी। मेरी पत्नी ने मेरे और किरण की और बारी-बारी से देखते हुए कहा,”हे राम! तुम सब लोग मिल कर मुझे पागल बना कर ही छोड़ोगे क्या?

तुम सब कह रहे हो कि मैं सूरज के साथ? मतलब राज, तुम, सूरज और किरण मिले हुए हो, और मुझे कह रहे हो की हम एक-दूसरे से, मतलब अदला बदली और? और-और तुम? तुम किरण के साथ? किरण तू बता, तू क्या चाहती है? तेरा बस चले तो तू तो मुझे अपने पति के साथ सुला कर ही छोड़े।

तेरे पति सूरज का क्या है, वह तो तैयार ही है मुझे पेलने के लिए। पता नहीं तुझे यह क्या हो गया है? तू मेरे पीछे हाथ धो कर क्यों पड़ी है? तुम सब लोग मेरे ही पीछे क्यों पड़े हुए हो?”

फिर मेरी और मुड़ कर बोली, “तुम क्या चाहते हो? तुम किरण के साथ सोना चाहते हो? ठीक है, जाओ, मैं तुम्हें इजाजत देती हूं। अगर किरण के पति को कोई दिक्कत नहीं तो मेरा क्या है?”

किरण ने जोर से हसते हुए मेरी पत्नी से कहा, “अरे बुद्धू, तू क्या समझती है अपने आपको? तू अगर इतनी ज्यादा सुन्दर है ना तो मेरे पति भी कम नहीं है। अरे तू देखना, एक बार अगर मेरे पति का जादू चल गया ना, तो तू मेरे पति की दीवानी हो जायेगी। तू खुद उनके साथ सोने के लिए तैयार हो जायेगी। मुझसे मिन्नतें करेगी उनसे चुदवाने के लिए। मेरे पति है ही ऐसे।”

किरण की खरी-खरी बात सुन कर मेरी पत्नी हैरानगी से मेरी प्रतिक्रिया देखने के लिए मेरी तरफ मुड़ी और बोली, “यह देखो, तुम्हारे सामने तुम्हारी पत्नी को यह किरण क्या कह रही है? तुमने सुना, वह मुझे तुम्हारी बीवी को अपने पति के साथ सुलाने की बात कर रही है और तुम चुप हो? तुम कुछ तो बोलो।”

मैंने अपने कन्धों को उछालते हुए कहा, “मैं क्या बोलूं तुम दोनों के बीच में? वह तुम्हारी प्यारी दोस्त जो है। वह तुमको सूरज के साथ सोने के लिए कह रही है। उसने मुझे तो कुछ नहीं कहा। सूरज के साथ सोने की और पेलने की बात तो तुमने ही शुरू की।

अब जब वह कह रही है तो तुम्हें मिर्ची क्यों लग रही है? तुम उसे जवाब दो ना? उसे कहो, तुम सूरज के साथ सोओगी की नहीं? अगर तुम सोना चाहती हो तो मुझे कोई आपत्ति नहीं।”

फिर मैं किरण की ओर घूमा और मैंने किरण से पूछा, “क्या किरण, अगर रीता सूरज के साथ सोना चाहे तो क्या तुम्हें कोई प्रॉब्लम है?”

किरण ने मेरी बाहों में आ कर कहा, “मुझे क्या दिक्क्त हो सकती है भला? तुम जो रहोगे मेरे साथ।” मेरी पत्नी रीता उसकी सखी किरण की बात सुन कर आंखें फाड़-फाड़ कर आश्चर्य से उसे देखने लगी।

हमारी बातें ख़त्म हों उसके पहले ही सूरज वहां आ पहुंचा। सूरज को देख सब चुप हो गए। सूरज ने किरण की आखरी लाइन सुन ली थी। सूरज ने कहा, “हां भाई, यह तो हमने पहले से ही तय किया था कि किरण आज की पूरी शाम राज के साथ रहेगी और रीता मेरे साथ। हम अपनी पत्नियों के साथ तो साल भर रहते हैं। एक दिन तो दूसरे की बीवी का स्वाद लें। मेरा मतलब है कि एक दिन तो दूसरे की बीवी के साथ रहने का स्वाद लें।”

फिर सूरज मेरी पत्नी की ओर घुमा और उसने रीता से पूछा, “क्यों रीता, मेरा साथ अच्छा नहीं लगा तुम्हें?”

रीता ने मेरी ओर देखा। कुछ देर पहले हुई चर्चा के बाद मेरी पत्नी के पास बोलने के लिए कुछ भी नहीं रह गया था। शायद ख़ास तौर से मुझे दिखाने के लिए सूरज के एक-दम करीब जा कर सूरज से सट कर खड़े रहते हुए मेरी पत्नी रीता ने मुझे एक पलक झपकती हुई आंख मटका कर कहा, “मुझे आपका साथ वाकई में बहुत अच्छा लगा सूरज। आपने मुझे प्यार दिया और अपनेपन का अहसास कराया। इसके लिए शुक्रिया।”

किरण के पति सूरज को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ कि उसने सही सुना था या नहीं। जो रीता उस समय तक उसकी बाहों में जाने से झिझकती थी, उसकी ओर से ऐसा बयान सूरज के लिए किसी मधुर संगीत से कम नहीं था।

मुझे लगा कि उस शाम मेरी बीवी रीता एक बात बिल्कुल समझ गयी कि किरण का पति सूरज हर हाल में उसे छोड़ेगा नहीं। और उसके विरोध में मैं या किरण उसका साथ देने वाले नहीं थे, बल्कि हम दोनों सुरज को ही सपोर्ट करेंगे।

शायद मेरी बीवी ने महसूस किया कि सूरज से लड़-झगड़ या सम्बन्ध खराब करके कोई फायदा नहीं। इसका नतीजा यही हुआ कि मुझे किरण के साथ और रीता को सूरज के साथ अब पहले जैसी झिझक नहीं रही थी। उस शाम डिनर के बाद जब हम घर जाने के लिए निकलने लगे, तब सूरज ने हमें यह कह कर रोका कि हमारे लिए एक तोहफा वह लाया था। सूरज ने अपनी कार में से दो गिफ्ट बक्से निकाले। अपनी पत्नी किरण के हाथों सूरज ने उसमें से एक मुझे दिलाया और एक रीता को।

रीता ने आगे बढ़ कर जैसे ही सूरज का धन्यवाद किया, तो सूरज ने रीता को अपनी बाहों में भर लिया, और अपने होंठ रीता के होंठों के पास ले गया। कुछ देर के लिए तो मुझे ऐसा लगा जैसे रीता और सूरज दोनों ही एक-दूसरे के होंठ चूमने के लिए उत्सुक लग रहे थे, पर आखिर में उन्होंने विचार बदल दिया। सूरज ने रीता के गाल पर एक लम्बी से किस की, और रीता ने भी बदले में सूरज को गाल पर ही चुम्मा दिया।

सूरज ने हमारा धन्यवाद करते हुए कहा कि उसे हमारा आना बहुत अच्छा लगा। मैंने भी सूरज की पत्नी किरण को खींच कर कस कर आलिंगन किया, और किरण के गालों को चूमा। रीता हम मर्दों की हरकतें हैरान हो कर देखती ही रह गयी। मेरे लिए वह बहुत ही महत्वपूर्ण दिन था।

दूसरे दिन शाम जब खाना खा कर बैडरूम में हम पहुंचे तो मैंने उन बक्सों को खोला। उसमें मेरे लिए एक कुर्ता पजामा था। काफी महंगा था। रीता ने देखा तो मुझसे लिपट कर बोली, “बहुत अच्छा है। तुम पर गजब का जच रहा है।”

जब दूसरा बक्सा खोला तो उसमें रीता के लिए तीन तरह की ड्रेस थीं। पहले निहायत ही खूबसूरत महंगी भारतीय डांसर के पहनने वाली शिष्ट सी ड्रेस थी, जिस तरह की ड्रेस अक्सर प्रसिद्द भारत नाट्यम कलाकार पहनते हैं। दूसरी ड्रेस मॉडर्न डांस ड्रेस थी जिसमें चोली जैसा टॉप और कई परतों वाला लम्बा स्कर्ट था, जो अक्सर क्लबों में डांस करने वाली नृत्यांगना पहनती है।

उस ड्रेस की खास बात यह थी कि वह बहुत ही ऊपर से गले के इर्द-गिर्द एक खूबसूरत पट्टी सा कपड़ा जो कि चौड़ा हो कर स्तनों को ढकता हुआ स्तनों के नीचे खत्म हो जाता था, और उसके नीचे बड़ा ही आकर्षक स्कर्ट था।

तीसरी ड्रेस काफी उत्तेजक, निहायत छोटी सी फ्रॉक के रूप में थी जो जांघों को चूत तक एक्सपोज़ करती थी। जिसका टॉप के नाम पर गले के इर्द-गिर्द बंधी एक छोटी सी पट्टी थी, जो चौड़ी हो कर मुश्किल से निप्पलों के अलावा कुछ और नहीं ढक पाती थी।

उसमें कमर नंगी दिखती थी, और पूरे बदन की काफी नुमाइश करती थी। जब रीता ने तीसरी ड्रेस पहनी तो उस ड्रेस में मेरी बीवी एक खूबसूरत नग्न अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

मैंने मेरी पत्नी को मेरी बाहों में भर लिया, और उसके होंठों से मेरे होंठ चिपका कर मेरी बीवी के स्तनों को मेरे हाथों से मसलते हुए बोला, “डार्लिंग, वाकई में‌ सूरज मेरा पक्का दोस्त साबित हो रहा है। मैं कई दिनों से तुम्हारे लिए बिल्कुल ऐसी ड्रेस लाने के लिए सोच रहा था।

ऐसी ड्रेस जिसको पहन कर तुम्हारा हर अंग निखर कर सामने आये। इस ड्रेस में से तो तुम्हारे बूब्स निप्पलों समेत पूरे नजर आ रहे हैं। अगर इसको नीचे खींच लिया तो तुम तो पूरी टॉपलेस ही हो जाओगी।

इन्हें पहन कर तुम कपड़े पहनी भी हो पर ऐसी दिखती हो जैसे नंगी खड़ी हो। मैंने तो सिर्फ सोचा ही कि मैं तुम्हारे लिए कुछ सेक्सी ड्रेस खरीदूं, और उधर मेरा दोस्त सूरज है कि ऐसी ही ड्रेस लेकर आ भी गया। अब तो तुम्हें यह पहन कर सूरज को भी दिखानी होगी।”

रीता ने मुझे कोहनी मार कर शरारत भरे अंदाज में हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा जी? सूरज कबसे तुम्हारा दोस्त हो गया? और क्यों नहीं होगा? अब तो तुम और सूरज दोनों ही मेरे पीछे पड़े हो। तुम दोनों क्यों, वह मेरी दोस्त किरण भी साली मेरे पीछे पड़ी है।

तुम सब मिल कर सूरज को भी तो यही सब दिखाना चाहते हो क्या? तुम देखो सूरज मेरे लिए कैसे-कैसे गिफ्ट ले कर आता है? तुम कह रहे थे ना अभी कि इसमें तो मैं कपड़े पहने हुए भी नंगी ही लगूंगी यार। क्या मुझे यह सब सूरज को पहन कर दिखाना होगा?”

मैंने कहा, “अरे ऐसा कुछ भी नहीं है। इस बॉक्स में तीन तरह की ड्रेस हैं जिसमें अच्छी खासी डिसेंट ड्रेस भी है। यह सारी तीनों ड्रेस एक काबिल डांसर के लिए है। सूरज को तुम्हारी डांस की काबलियत के बारे में पता है। एक थोड़ा सा सेक्सी है तो क्या हुआ? तुम भी तो सेक्सी हो! एक डांसर सेक्सी डांस भी कर सकती है। फिर तुम तो वैसे किसी भी ड्रेस में किसी भी लोलुप मर्द की आंखों में नंगी ही दिखोगी।

इसमें ड्रेस का नहीं आंखों का दोष है। सूरज ने भी पता नहीं कितनी बार तुम्हें अपनी आंखों से नंगी किया होगा, और सपने में कई बार चोदा भी होगा। उसमें मुझे या तुम्हें भी कोई शंका नहीं होगी। जब सूरज ने इतने प्यार से तुम्हें दिया है, तो जरूर इन्हें पहन कर उसे दिखाना होगा। और इतने प्यार से दिया हुआ गिफ्ट कभी लौटाया जाता है क्या? तुम सूरज को फ़ोन कर के थैंक यू बोल देना।”

मेरी बात सुन कर रीता के गाल शर्म से लाल हो गए। मुझे कोहनी मार कर रीता ने मुंह बना कर कहा, “तुम भी ना, आज कल बड़ी ही उट-पटांग बातें करने लग गए हो। मैं वह सेक्सी ड्रेस पहन कर सूरज के सामने नहीं जा सकती। यह तो मैं सिर्फ मेरे पति के लिए ही पहनूंगी। अगर सूरज को दिखाना है तो मैं पहला जरूर दिखाऊंगी, और शायद दूसरा भी पहन कर दिखा सकती हूं। और हां, तुम ही तुम्हारे दोस्त सूरज को इस ड्रेस के थैंक यू कह देना मैं नहीं कहूंगी।”

मैंने कहा, “ठीक है। मैं तुम्हारी तरफ से भी थैंक यू कह दूंगा। ओके?” रीता ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि मैं रीता और सूरज को मिलाने के चक्कर में था। पर पता नहीं क्यों किरण का आकर्षण मेरे मन से जा नहीं रहा था। कई बार रीता को चोदते हुए मुझे ऐसा महसूस होता था जैसे मेरे नीचे रीता नहीं किरण नंगी सोई हुई हो। मुझे जब भी ऐसा ख्याल आता था तब मेरा स्टैमिना एक-दम बढ़ जाता था और उस रात मैं मेरी बीवी की अच्छी खासी चुदाई कर लेता था।

रीता भी इसको नोटिस कर मुझे पूछती थी कि क्या ख़ास बात हुई कि मेरा स्टैमिना उस रात दोगुना या चौगुना हो गया था? उस पार्टी के बाद करीब एक-डेढ़ महीने तक इसके मामले में कोई ख़ास बात-चीत नहीं हुई। रीता और किरण दोनों ही अपने क्लास के बच्चों के टेस्ट के पर्चे चेक करने में व्यस्त हो गयी थी। मैं भी दो बार टूर पर निकल गया था। वापस आने पर कुछ ना कुछ काम में सब व्यस्त हो गए थे। उन्हीं दिनों रीता का जन्मदिवस आ रहा था।

शायद स्कूल के रजिस्टर से किरण को रीता के जन्म दिवस का पता लग गया। हम लोग हमारे जन्म दिवस कोई खास तरीके से नहीं मनाते थे। सुबह उठते एक-दूसरे को चूम लिया, बर्थडे विश की, और एकाध बार कभी बाहर से खाना मंगवा कर खा लिया तो ठीक, वरना कुछ नहीं। रात को मैं जरूर मेरी बीवी की अच्छे से चुदाई करता था और रीता भी बड़े प्यार से चुदवाती थी उस दिन। और ऐसे ही हम बर्थडे या शादी की सालगिरह मनाया करते थे।

पर इस बार जैसे ही किरण को पता चला तो किरण ने सूरज से बात की। किरण ने सूरज से यह भी कहा कि रीता की उसके पति से एक जबर्दश्त शिकायत थी कि वह कभी जन्म दिवस या शादी की सालगिरह जैसा प्रसंग बाहर पिकनिक स्पॉट या होटल में जा कर नहीं मनाते। यह सुनते ही सूरज ने किरण से कहा कि रीता का बर्थडे वह लोग (माने सूरज और किरण) बढ़िया तरीके से मनाएंगे।

जब रीता को इसके बारे में पता लगा तो उसने अपना बर्थडे मनाने के लिए साफ़ मना कर दिया। पर सूरज था कि मान ही नहीं रहा था। वह मुझे बार-बार फ़ोन कर आग्रह कर रहा था कि मैं रीता को मनाऊं। मैंने रीता को कहा कि जब सूरज इतना कह रहा है तो हां कह दो। तब रीता ने मुझे अपनी मुश्किल कही। रीता ने कहा, “पिछली बार पार्टी में सूरज ने काफी हंगामा कर रखा था। इस बार अगर वह ऐसा कुछ करेगा तो?”

मैंने कहा, “क्या किया था सूरज ने पिछली बार? हंसी मजाक में कुछ चुम्मा-चाटी ही की थी ना? तुम्हारे बूब्स ही दबाए थे ना? यार तुम भी ना, सूरज ने जो किया था उससे तुम्हें क्या फर्क पड़ गया? तुम्हारे सिर पर सींग तो नहीं उग आये ना? कई बार बस में या ट्रैन में अनजाने में या कभी जान-बूझ कर भी क्या दूसरे लोग तुम्हारी गाँड़ दबाते नहीं?

कभी भीड़ में कोई तुम्हारे बूब्स नहीं दबा देते? तो क्या हो जाता है? देखो रीता, मैं दुबारा कह रहा हूं। वह हमारा करीबी दोस्त है। ऐसे दोस्त आसानी से नहीं मिलते। जवानी के जोश में यह सब चलता रहता है। सूरज उन लफंगों से तो अच्छा है जो तुम्हें देख कर घूरते रहते हैं और अपनी आंखों से तुम्हें नंगी करते हैं।

सूरज तो तुम्हें खुल्लम-खुल्ला छेड़ता है। उसे एन्जॉय करना सीखो। उसने तुम्हारा अपमान तो नहीं किया ना? तुम पर ऐसी कोई बहुत जबरदस्ती तो नहीं की ना? सब युवा कपल्स कभी ना कभी एक-दूसरे से कुछ ना कुछ छूट लेते रहते हैं। यार, तुम इन बातों को ज्यादा सीरियसली मत लो। ओके?

रीता मेरी बात सुन कर कुछ परेशान हो कर बोली, “ठीक है। मैं भी जानती हूं कि ऐसी पार्टियों में ऐसा कुछ तो चलता रहता है। मैं मानती हूं की वह अच्छे दोस्त हैं। अच्छे दोस्त मुश्किल से मिलते हैं। किरण और सूरज अच्छे लोग है, हालांकि थोड़े पागल जरूर हैं। मैं भी इनसे बिगाड़ना थोड़े ही चाहती हूं? इसीलिए किरण और उसके पति सूरज के इस तरह के पागलपन को झेल रही हूं ना?

मैं कोई शिकायत नहीं कर रही। पर अगर हम बर्थडे मनाएंगे तो उनको अच्छा खाना खिलाना पड़ेगा। फिर तो मेरी तो रसोई में ही ड्यूटी लग जायेगी। मैं फिर आप लोगों के साथ बैठ नहीं पाउंगी।”

जब मैंने सूरज को यह कहा तो सूरज बोला, “ऐसा नहीं होगा। रीता को हमारे साथ ही बैठना होगा। रीता खाना बनाने के चक्कर में रसोई में ना फसी रहे इसका इंतजाम मैंने पहले से ही कर रखा है। रीता का बर्थडे शनिवार को है और उस दिन उनके स्कूल में छुट्टी है।

मैंने रीता के बर्थडे की पार्टी शनिवार दोपहर को नजदीक के ही एक आलिशान रिसोर्ट में रखी है। वह रिसोर्ट हमारी फैमिली की प्रॉपर्टी है। मेरे पास उसका कम्प्लीमेंटरी कार्ड है, जिसमें पचास लोगों तक का लंच और दो कमरों का दो रात तक का कोई चार्ज नहीं लगेगा। हम रिसोर्ट में केक कटिंग, पार्टी और लंच करके हमारे फ़ार्म हाउस पर पिकनिक के लिए जाएंगे।

फार्म हाउस में भी फाइव स्टार होटल की तरह सारा इंतजाम है। वहां कुछ घूमेंगे, फिरेंगे और स्विंमिंगपूल में नहाएंगे। रात रिसोर्ट में एक बडा इम्पोर्टेन्ट प्रोग्राम रखा है। उसके बाद एक मीटिंग है जिसमें मैं और किरण और आप दोनों हमारे दोस्तों के साथ रीता का जन्म दिवस मनाएंगे।

आप और रीता का होना जरुरी है। हम रात रेसोर्ट में ही बिताएंगे। सुबह हम सब अपने अपने घर चले जाएंगे। बस मैं यही चाहता हूं कि आप दोनों कुछ वक्त हमारे साथ में ही रहें और हम सब मिल कर साथ में एन्जॉय करें। सारा इंतजाम मैंने कर लिया है। इसमें कोई खर्च तुम्हें नहीं करना है। सब कुछ फ्री है। बस तुम दोनों की हां का इंतजार है।”

मेरी बीवी रीता यह सुन कर बड़ी खुश हुई। अगर उसे रसोई नहीं बनानी पड़ी तो फिर तो वह अच्छे तरीके से सज-धज कर तैयार हो कर हमारे साथ बैठ सकती थी। रीता के जन्म दिवस भी आलिशान तरीके से मनाया जाएगा और बाहर पिकनिक, एक बड़े अच्छे होटल में रुकना, खाना और पार्टी भी हो जायेगी।

रीता ने ख़ुशी-ख़ुशी थैंक्स कहते हुए सूरज की बात फ़ौरन मान ली। पर साथ में रीता ने एक और हिदायत भी दी। रीता ने शरारत भरी नज़रों से मेरी और देख कर हसते हुए कहा, “तुम सूरज को बोल देना की इस बार थोड़ा ख्याल रखे। थोड़ा कंट्रोल करे अपने आप को। मेरी और से थैंक्स भी बोल देना वह तोहफे के लिए।

तुम भुलक्क़ड हो। सूरज को थैंक्स कहना भूलना मत। और उसे बोल देना की इस बार यह रूल होगा कि वह अपनी पत्नी के साथ ही रहे और मुझे परेशान ना करे। इस बार अपनी बीवी को ही छेड़े, दूसरे की बीवी को नहीं। ओके?”

मैंने कहा, “वह तो मैं कह दूंगा, पर तुम तो सूरज को अब अच्छी तरह से जान चुकी हो। सूरज आये और तुम्हें छेड़े नहीं यह तो हो नहीं सकता। पता नहीं तुमने उस पर क्या जादू चला दिया है? तुम्हें देखते ही वह पागल हो जाता है। तो अगर वह छेड़े भी तो उसमें तुम्हारा क्या जाता है? तुम उसे क्यों रोकना चाहती हो?

अगर खुबसूरत स्त्री हैंडसम मर्द के साथ अगर एन्जॉय ना करे तो यह जवानी और खूबसूरती का क्या फायदा? करके क्या कर लेगा सूरज? बूब्स मसलेगा? चुम्माचाटी करेगा? लंड पकड़ा देगा? वह तो वैसे भी कर चुका है। फिर क्या नया करेगा? अरे जाने मन मौक़ा मिलता है तो मौज करो।

जवानी की यह घड़ियां वापस नहीं आएंगी। ऐसे जिगरी और सेक्सी दोस्त बार-बार नहीं मिलते। इसलिए यह सब बेकार की शर्म, झिझक, और नखरे छोड़ कर जुड़ जाओ हमारे साथ। फिर भी मैं सूरज को कहूंगा कि थोड़ा संयम रखे, ठीक है?”

रीता कुछ उलझन में वह ड्रेस के बारे में सोच रही थी। वह बोली, “ठीक है, ठीक है, ज्यादा लेक्चर मत झाड़ो। पर राज, अगर मेरी बर्थडे पार्टी सूरज ने दी तो जो ड्रेस सूरज ने दिया था वह सेक्सी ड्रेस मुझे पहनने के लिए तो नहीं बोलेगा?

मैं तुम्हारे लिए तो पहन सकती हूं पर किसी और के लिए नहीं। अगर उस ड्रेस को मैंने पहन लिया और अगर सूरज ने मुझे उसमें देख लिया तो मुझ पर पागल तो वह वैसे ही है, और वह ड्रेस इतना सेक्सी है कि उसमें देख कर तो पता नहीं सूरज का दिमाग कहीं छटक ना जाये।”

मैंने अपनी पत्नी को ढाढस देते हुए कहा, “नहीं, ऐसा कुछ नहीं होगा। वह सब डांस के लिए बनाये गए ड्रेस हैं। सेक्सी ड्रेस भी कोई ख़ास बुरा नहीं है। इससे छोटे ड्रेस तो तुमने पहले भी पहने हैं। तुम डांसर हो तो तुम्हें उसे भी कभी ना कभी तो पहनना ही पड़ेगा। मेरे लिए ही सही पर तुम्हारे जन्मदिवस पर तुम्हें उसे जरूर पहनना होगा। मैं चाहता हूं कि सूरज और किरण देखें की तुम सेक्सी ड्रेस में कितनी ज्यादा सेक्सी लगती हो।”

रीता ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “चलो ठीक है, मैं देखूंगी। मतलब तुम चाहते हो की सूरज और किरण मुझे नंगी देखे?” रीता ने गहरी सांस लेते हुए पूछा।

मैंने कहा, “नहीं बिल्कुल नंगी होने की बात नहीं कर रहा हूं मैं। पर छोटे सेक्सी कपड़ों में अगर वह तुम्हें देखें तो तुम्हें क्या दिक्क्त है? क्या बड़ी-बड़ी हीरोइन नहीं दिखती छोटे-छोटे ड्रेस में?”

रीता ने मेरी और ध्यान से देखा। मैं भोली सी सूरत बना कर उसे जवाब में देखने लगा। कुछ देर रुक कर रीता बोली, “चलो ठीक है अगर किरण भी ऐसा ड्रेस पहन लेगी तो मैं भी पहन लूंगी। और हां, मैं सोच रही हूं कि सूरज को पिछली बार के बारे में कहने से कोई फायदा नहीं। वह नहीं बदलने वाला। ठीक है, वह आगे क्या करता है हम देख लेंगे।

उसे खास बोलना की पिछली बार उसने जो कुछ किया था वह मैं भूल चुकी हूं। मेरे मुंह से कुछ कड़वे शब्द जो निकल गए थे उसके लिए मुझे माफ़ कर दे। बस यह सूरज से कहना कि उसे जो भी मस्ती करनी जितनी भी करनी है अपनी बीवी से ही करे। ओके?”

मुझे यह समझ नहीं आया कि रीता वास्तव में चाहती थी कि सूरज उसे ना छेड़े, या वह सूरज को यह सब याद दिला कर उसे और उकसाने की कोशिश कर रही थी कि वह उसे छेड़े? मैंने हसते हुए कहा, “ठीक है मैं उसे बोल दूंगा पर तुम भी समझती हो सब। तुम्ही सम्हाल लेना उसे।”

मैंने जब सूरज को यह सन्देश दिया तो वह सुन कर काफी खुश हुआ। सूरज ने मुझसे कहा, “राज मैं एक बात तुमसे कहना चाहता हून। मैंने देखा है कि तुम एक खुले दिमाग के आदमी हो। पिछली बार उस पार्टी में मैंने रीता के साथ कुछ ज्यादा ही छूट ली थी। हालांकि रीता थोड़ी रिजर्व्ड है और मैं जानता हूं कि वह विवाहोतर शारीरिक सम्बन्ध पसंद नहीं करती, पर फिर भी शायद तुम्हारे कहने पर उसने मेरी हरकतें बर्दाश्त की। तुमने भी मुझे इसके बारे में कोई शिकायत नहीं की।

किरण कह रही थी कि तुम मुझे ठीक से समझते हो। देखो, मैं भी तुम्हारी तरह खुले दिल का आदमी हूं। मैं आज तुम से हमारे बारे में एक गंभीर रहस्य सांझा करना चाहता हूं।” इसके बाद सूरज ने मुझे करीब आधे घंटे तक ऐसी ऐसी बातें कहीं जिसे सुन कर मेरा सर चकरा गया। पर साथ साथ में मेरे मन में किरण और सूरज के लिए सम्मान सौ गुना बढ़ गया।

अंत में सूरज ने कहा, “जैसा की मैंने कहा मेरे और किरण के बीच में पक्की अंडरस्टैंडिंग है। हम दोनों एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते हैं समझते हैं। मैं चाहता हूं कि हर कपल में ऐसी समझ हो।

ख़ास कर तुम और रीता में ऐसी समझ और एक-दूसरे के प्रति विश्वास हो यह जरुरी है। मैं हर किसी के साथ घुलता मिलता नहीं। मुझे तुम दोनों का साथ अच्छा लगता है। मैं तुम्हें और रीता को बहुत पसंद करता हूं। मैं चाहता हूं कि हम दोनों कपल्स एक-दूसरे के बहुत घने तरीके से काफी ज्यादा करीब आएं और हम चारों मिल कर अच्छे से ड्रिंक भी करें और सब तरह की मौज मस्ती करें।

हम सब कुछ करें, किसी तरह की पाबंदी ना रखें और हम चारों एक द-सरे को एन्जॉय करें। मेरी अपील है कि आप लोग हम से जुड़ जाएं। क्या तुम मेरी बात समझ रहे हो?”

मैं तो कभी से इस बात का इंतजार कर रहा था। मैंने सूरज से फ़ौरन कहा, “मैं बहुत अच्छी तरह से समझ रहा हूं सूरज। पिछली बार भी क्लब में मैंने रीता को समझाने की कोशिश की थी। उसे थोड़ा वक्त लगेगा, पर मैं और किरण मिल कर उसे समझा लेंगे।

तुम भी अपनी तरफ से जो कर रहे हो वह सही है। तुम्हारा दिया हुआ तोहफा उसे बहुत पसंद आया है। वह थैंक्स कह रही थी। रीता थोड़ा प्यार थोड़ी जबरदस्ती करते करते धीरे-धीरे मान जायेगी। वह आसानी से नहीं मानेगी। तुम्हें कुछ मशक्क्त करनी पड़ेगी।

पिछली बार की चिंता मत करो। मुझे लगता है तुम्हारी जबरदस्ती उसे पसंद है। रीता भी मानती है कि जिंदगी में अच्छे दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। रीता खुद कहती है कि ऐसी दोस्ती को निभाना चाहिए। पर साथ-साथ वह कह रही थी कि इस बार एक रूल को फॉलो करना है कि हम अपनी-अपनी बीवी से ही छेड़खानी करें, दूसरे की बीवी से नहीं।”

फिर सूरज कुछ देर तक चुप रहा और फिर बोला, “मुझे समझने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया मेरे दोस्त। राज एक बात कहूं, बुरा तो नहीं मानोगे?”

मैंने कहा, “यार सूरज, अब हम उस जगह पहुंच गए हैं जहां एक-दूसरे से कोई पर्दा नहीं रखेंगे और किसी भी चीज़ का बुरा नहीं मानेंगे। बिंदास साफ़-साफ़ बोलो, क्या कहना चाहते हो?”

सूरज कुछ झिझकते हुए बोला, “यार अपनी बीवी से तो हम रोज ही मस्ती करते हैं। आज के दिन मैं रीता से कुछ मस्ती करना चाहता था। पर रीता ने तो पहले ही अपनी-अपनी बीवी वाली शर्त रख दी है। मैं कई बार सोचता हूं कि काश और ज्यादा नहीं तो आज की रात रीता मेरी बीवी होती। मुझे माफ़ करना यार मैं कुछ ज्यादा ही बक गया।”

मैंने कहा, “यार ऐसा मत कहो। मैं एक बात कहूं? मैं भी कई बार सोचता हूं कि काश आज की रात के लिए किरण मेरी बीवी होती।”

सूरज मेरी बात सुन कर जोर से हस पड़ा, फिर कुछ सोच में पड़ गया फिर धीरे से बोला, “काश ऐसा हो सकता। खैर छोडो इन बातों को। तुम रीता को कहना कि मेरी दो प्रार्थनाएं हैं। पहली यह है कि जो मैंने अभी तुम्हें फ़ोन पर बताया वह मैं तुम्हें और रीता को आमने-सामने बताना चाहता हूं।

इसके लिए यह जरुरी है कि हम यह जो औपचारिकता का चोला पहन कर घूम रहे हैं ना, उसे निकाल फेंके और कुछ साफ़-साफ़ सीधी खुल्लम-खुल्ला बातें करें। और दूसरी बात यह है कि अगर हमें अपनी बीवी से ही प्यार करना है तो हम अपनी बीवी को एक-दूसरे के सामने एक दूसरे के देखते हुए ही खुले दिल से पूरा प्यार करेंगे। और प्यार से मेरा मतलब है हर तरह का प्यार। क्या तुम समझे मेरी बात को? फिर रीता उसके ऊपर तो पाबंदी नहीं लगाएगी ना?”

सूरज की बात से यह तो बिल्कुल शीशे की तरह साफ हो गया था कि वह रीता को चोदने के लिए बड़ा ही बेताब था। पर यह भी जानता था कि रीता उसे आसानी से घास नहीं डालेगी। उस हालात में सूरज चाहता था कि हम दोनों कपल्स अपनी अपनी बीवी को एक-दूसरे के देखते हुए सब तरह का प्यार करें।

सब तरह के प्यार में क्या-क्या शामिल होगा यह मैं पूरी तरह से समझ नहीं पाया था। मेरे लिए यह जानना बहुत जरुरी था कि सूरज इसके बारे में क्या सोच रहा था?

मैंने पूछा, “सूरज, हर तरह के प्यार से तुम्हारा क्या मतलब है?”

सूरज ने कहा, “देखो राज, हर तरह के प्यार से मतलब है कि हम वह सब करेंगे जैसा मौका होगा। मेरा कहने का मतलब है कि जहां तक हमारी पत्नियां और ख़ास करके रीता आगे बढ़ने के लिए तैयार होगी, हम वहां तक आगे बढ़ेंगे। पर हम कुछ भी ऐसा नहीं करेंगे जिससे किसी भी तरह की कड़वाहट पैदा हो।

हमारी लेडीज जब तक कोई हंगामा ना खड़ा करदे, हम उनसे छूट लेते रहेंगे। अगर मौक़ा सही हुआ तो सब कुछ ही कर लेंगे, वरना जहां कुछ मामला बिगड़ा तो रुक जाएंगे। हमें कोई जबरदस्ती नहीं करनी है। पर उनकी धीरज और इंटरेस्ट का टेस्ट भी लेना है। ओके?”

मैंने फ़ौरन सूरज से कहा, “मैं तो ओके ही हूं।”

मैंने उसी शाम को मेरी सूरज से हुई बातचीत के बारे में रीता से कहा, “मैंने सूरज को समझा दिया है। उससे मैंने बात की और उसने मुझे वादा किया है कि इस बार वह तुम्हें पिछली बार की तरह परेशान नहीं करेगा। पर उसने मुझे पूछा कि क्या हम दोनों कपल्स अपनी-अपनी बीवियों को तो एक-दूसरे के सामने दिल खोल कर प्यार कर सकते है ना? इसमें तो तुम्हें कोई एतराज नहीं?”

रीता ने अपने कंधे हिला कर कहा, “अरे ठीक है यार, सूरज से कहना कि मस्त रहे और कोई टेंशन ना ले। मैं उसके ऊपर कोई गुस्सा नहीं हूं। अगर पति अपनी बीवी से प्यार दूसरे के देखते हुए भी करे तो उसमें किसी‌ को क्या आपत्ति हो सकती है भला? चाहे जितना प्यार करना है जी भर कर करे, पर करे अपनी बीवी को।”

फिर मेरी और देख कर कुछ मुस्कुराते हुए कटाक्ष में बोली, “तुम भी मुझे जी भर कर प्यार करना सूरज के सामने, अगर तुम्हें मुझ पर प्यार आता हो तो। पर देखना उससे कहीं सूरज को जलन ना हो। कहीं ऐसा ना हो कि सूरज अपनी बीवी को छोड़ मुझसे ही ना चिपक पड़े। फिर मेरे लिए बड़ी मुश्किल हो जायेगी।”

मेरी बीवी रीता का अंतिम वाक्य सुन कर मेरे कान खड़े हो गए। इसका मतलब यह था कि रीता भी मानने लगी थी कि सूरज रीता को प्यार करने लगा था, और मेरे मेरी बीवी को प्यार करने से सूरज को जलन हो सकती थी। खास तौर से रीता ने यह कहा कि सूरज मेरी बीवी को प्यार करने पर उतारू होने पर उसे मुश्किल हो सकती है, पर उसने यह नहीं कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए या ऐसा वह बर्दाश्त नहीं करेगी। मतलब कहीं ना कहीं क्या मेरी बीवी चाहती थी कि ऐसा कुछ हो?

मैंने कहा, “सूरज की एक ही रिक्वेस्ट और भी है कि वह हमें अपने बारे में कुछ कहना चाहता है। इसके लिए उसे अनौपचारिक और बिल्कुल स्पष्ट भाषा में कुछ कहना पड़ेगा, जो शायद तुम्हें अश्लील भाषा भी लग सकती है। तो तुम्हे उस पर कोई विरोध तो नहीं ना?”

रीता ने मेरे चेहरे को देखा। वह समझने की कोशिश कर रही थी कि मेरा कहने का कोई और गलत या गहरा तात्पर्य तो नहीं। जब मैं सीधे भोले-भाले चेहरे से उसे देखता रहा, तो वह बोली, “सूरज जरूर उसके और किरण के सेक्स के बारे में ही कुछ कहना चाहता होगा। तभी तो इतनी सारी भूमिकाएं बांध रहा है।

वैसे किरण तो मुझसे पहले से ही ऐसी साफ-साफ भाषा में बात कर रही है, जिसमें वह लंड, चूत, चुदाई ऐसे शब्दों का प्रयोग कर रही है। अब तो मैं भी किरण से ऐसे ही बात करने लगी हूं। अगर सूरज हमारा जन्म दिवस इतने बढ़िया तरीके से मना रहा है तो उसकी साफ-साफ बातें भी सुन लुंगी मैं। कोई बात नहीं।”

रीता के जन्मदिवस को अभी पंद्रह दिन बाकी थे कि अचानक एक शाम को जब रीता घर पर आयी, तो ख़ुशी के मारे मेरे गले लग गयी, और मेरे गालों को चूमती हुई बोली, “राज, मुझे आज तुम्हें एक बहुत बड़ी खुशखबरी देनी है।”

मैंने आश्चर्य से पूछा, “क्या बात है? क्या खुशखबरी है?”

रीता ने कहा, “आज हमारी स्कूल के बोर्ड के डायरेक्टर ने मुझे उसके ऑफिस में बुलाया था। उसने मुझे कहा कि हमारे स्कूल ने मेरी प्रतिभा और योग्यता को स्वीकारते हुए एक ख़ास प्रोग्राम रखा है। उसमें बड़े गणमान्य व्यक्तियों को बुलाया गया है। उस प्रोग्राम में मेरा डान्स का ख़ास कार्यक्रम रखा है।

और जानते हो क्या? उस प्रोग्राम में मेरे गुरु भी आएंगे। और एक बात, वह प्रोग्राम मेरे जन्म दिवस की शाम को होने जा रहा है। पर सब से बड़ी खबर यह है कि वह प्रोग्राम उसी रिसोर्ट में होने जा रहा है जिसमें हम लोग मेरा जन्म दिवस मनाने जायेंगे।

किरण ने जब यह सुना तो कहा कि हम सारे प्रोग्राम हम वहां शाम के पहले ही करेंगे। इसका मतलब अब मुझे डांस की पूरी तैयारी करनी होगी। डायरेक्टर ने कहा है कि मुझे उस शाम के लिए खुद भी डांस करना है और स्टूडेंट्स को भी सीखा कर उनसे भी डांस करवाना है।”

मैंने रीता से कहा, “यह तो बड़ी ख़ुशी की बात है।”

रीता कुछ निराशा से बोली, “बस? क्या तुम्हारे लिए यह सिर्फ एक ख़ुशी की बात है?”

मैंने अपनी बात को सुधारते हुए कहा, “नहीं यह तो बहुत ही बड़ी खबर है।”

रीता ने खुश होते हुए कहा, “बिल्कुल, यह तो बड़ा ही अच्छा समाचार है। काश यह प्रोग्राम सिर्फ स्कूल का छोटा सा प्रोग्राम नहीं होता। काश यह और बड़ा प्रोग्राम होता, तो मेरी जिंदगी का एक बहुत बड़ा सपना पूरा होता। अब तो वह ड्रेस जो सूरज ने मुझे तोहफे में दी थी, वह बहुत ही अच्छी तरह काम आ जाएगी। तुम सूरज को भी यह समाचार दे देना, और उसको दुबारा उस ड्रेस देने के लिए धन्यवाद करना। भूलना मत।”

मैंने रीता के कन्धों को थपथपाते हुए कहा, “चलो बड़े काम की शुरुआत हमेशा छोटे काम से ही होती है। इसलिए निराश नहीं होना चाहिए, और तुम्हें बड़ी संजीदगी से इस प्रोग्राम की तैयारी करनी चाहिए।”

रीता इस समाचार से बहुत ही खुश थी। छोटा ही सही उस प्रोग्राम से मेरी पत्नी का एक सपना पूरा होने वाला था। रीता बड़े ही जोर-शोर से उस प्रोग्राम की तैयारी में दिन-रात लग गयी। मैंने सूरज को सब बता दिया। सूरज मेरी बात सुन कर बड़ा ही खुश हुआ। सूरज ने मुझे रीता को बधाई देने के लिए कहा। हालांकि शायद उसे पता ही होगा क्यूंकि किरण ने शायद इस बारे में उसके पति को अवगत कराया होगा।

रीता के जन्म दिवस के दिन तय समय पर सूरज ने अपनी बड़ी कार भेजी थी। कार देखते ही मेरी पत्नी की भौहें खिल गयी। शायद औडी मेक की कार थी। जैसे ही हम लोग कार में बैठे, हमारे आड़ोस-पड़ोस के लोग भी देखने लगे कि हम कोई बड़ी गाड़ी में बैठ कर कहीं जा रहे थे।

जब मैं और रीता सूरज के बुक किये हुए रिसोर्ट पर पहुंचे, तो रीता को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। हमारे पहुंचते ही बड़े से दरवाजे के ऊपर ही “हैप्पी बर्थडे रीता” बड़े अक्षरों में फूलों से सजाया हुआ लिखा हुआ था। जब हम अंदर दाखिल हुए तो रीता हैरान रह गयी। जब उसने देखा कि एक टेबल पर सजा कर एक बड़ा केक रखा हुआ था, जिस पर भी लिखा हुआ था “हैप्पी बर्थडे रीता।”

पर मेरी पत्नी रीता की आंखें फ़टी की फ़टी तो तब रह गयी, जब रीता की मुलाक़ात रीता और किरण के प्रधानाध्यापिका और दूसरे साथी शिक्षक गण से हुई। किरण और सूरज ने स्कूल की एक बस में सारे टीचर्स को आमंत्रण दिया था। रीता के स्कूल की प्रिंसिपल भी अपनी कार में आयी हुई थी।

रीता के स्कूल का सारा शिक्षक स्टाफ आया हुआ था। सूरज और किरण हमारे इंतजार में वहीं खड़े थे। हमारे पहुंचते ही किरण आगे आयी और उसने कहा, “आज सारे टीचर्स रीता को बधाई देने आए हैं।”

मैंने देखा कि यह सब देख कर रीता की आंखों में ख़ुशी के आंसू उभर रहे थे। उस दिन से पहले कभी भी रीता का जन्म दिवस इतनी अच्छी तरह से इतने सारे लोगों के द्वारा नहीं मनाया गया था। पार्टी में सूरज ने सब के लिए बियर और दूसरे ड्रिंक्स और खाने की व्यवस्था भी की थी।

रीता ने सारे टीचर्स के सामने वह बड़ी केक पर लगी मोमबत्ती को बुझाते ही सब लोग “हैप्पी बर्थडे टू यू रीता” गाने लगे। उसके बाद रीता ने वह केक काटी और पहले मुझे फिर सूरज और किरण को और बाद में सब को खिलाई।

सारे टीचर्स कुछ ना कुछ तोहफा ले कर आये थे। सब ने रीता को तोहफे दिए और सब को सूरज और किरण ने बड़ी हिफाजत से ड्रिंक पिलाई, खाना खिलाया और कुछ रिटर्न गिफ्ट भी दिए।

बस के साथ सब टीचर्स लौटने लगे तब स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने शाम के प्रोग्राम में सारे स्टाफ और स्टूडेंट्स के साथ प्रोग्राम के लिए वापस आने का वादा करते हुए हम से विदाई ली।

किरण और सूरज अंदर चले गए और मैंने और रीता ने सब को विदा किया। रीता इस तरह उसके जन्म दिवस के मनाने से बहुत ही ज्यादा खुश नजर आ रही थी। रीता की आंखों से खुशियों के आंसूं रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

मेरे जहन में तब रीता को सूरज के तगड़े लंड से चुदवाने की ऐसी जबरदस्त चूल उठ रही थी, कि मैं अपने उस मकसद को सिद्ध करने के लिए अधीर हो रहा था। कितने लम्बे अरसे से मैं रीता को चुदवाने के लिए सही बन्दे की तलाश में लगा हुआ था। सूरज जैसा सही बन्दा कहां मिलेगा?

मैंने उसी समय सोचा कि वही सही मौक़ा था जब रीता के ह्रदय में सूरज के प्रति आभार, संवेदना और ममता का अंकुर पनप रहा था। यदि इस मौके पर सूरज और रीता एक दूसरे के और करीब आएं और अगर रीता के मन से हीनता या दोषी होने की भावना हट जाए तो रीता के दिल में सूरज के प्रति स्वाभाविक रूप से ही आकर्षण पैदा हो जिससे मुझे रीता को सूरज से चुदवाने में रीता के ज्यादा विरोध का सामना ना करना पड़े।

रीता के स्कूल के स्टाफ को लौटा कर वापस आते हुए मैंने मेरी पत्नी रीता से कहा, “रीता, आज की पार्टी का पूरा श्रेय सूरज को जाता है। उसने इतने सारे लोगों को आमंत्रित किया, ड्रिंक्स कराये, खाना खिलाया। मुझे यह क़बूल करना पड़ेगा कि आज जो काम मुझे करना चाहिए था, वह सब काम सूरज ने किया है। सूरज ने ही आज बड़े प्यार से तुम्हारे जन्म दिवस पर एक पति की तरह जिम्मेवारी निभाते हुए यह सब इंतजाम भी किया है,‌ और इतना सारा खर्च भी किया है।“

रीता ने मेरी और देख ते हुए अपनी नम आंखों से अपनी सहमति जताते हुए अपना सर हिलाते हुए कहा, “तुम बिल्कुल सही कह रहे हो। सूरज ने ऐसा जन्म दिवस मनाया है जैसा हमने कभी नहीं मनाया। उनका जितना आभार मानें उतना कम है। उनका हमें अभी जा कर धन्यवाद करना चाहिए।”

मैंने कहा, “मैंने आज जब सूरज को थैंक यू कहना चाहा तो वह नाराज हो गया। सूरज ने मुझे स्पष्ट रूप से कहा कि वह यह काम इसलिए कर रहा है कि वह तुम्हें बहुत प्यार करता है, और इसलिए यह उसका फ़र्ज़ था। उसने सीधा मुझे पूछा कि अगर उसकी जगह मैंने एक पति होने की हैसीयत से यह किया होता, तो क्या रीता शुक्रिया कहती?”

मेरी बात सुन कर रीता सोच में पड़ गयी। कुछ देर बाद बोली, “तुमको भला शुक्रिया क्यों कहूंगी? मेरे जन्म दिवस पर सिर्फ तुम मेरे शुक्रिया करने से थोड़े ही मानते हो? हर साल तो मुझे अच्छी तरह पूरी रात चोदते हो और खुद भी और मुझ से भी सब उल्टे-पुल्टे काम करवाते हो।”

मैं समझ गया कि लंड चूसना, चूत चाटना यह सब मेरी बीवी  के लिए उल्टे-पुल्टे काम थे। हर साल हम रीता के जन्म दिवस, हमारी शादी की सालगिरह और मेरे जन्म दिवस पर धमाकेदार चुदाई अवश्य करते थे।

मैंने पूछा, “तो फिर तुम्हें सूरज का धन्यवाद करने के लिए क्या करना चाहिए?”

रीता ने मेरी बात पर कुछ देर सोचा और फिर कुछ उलझन में पड़ी हुई बोली, “हम शुक्रिया के अलावा क्या कर सकते हैं? ज्यादा से ज्यादा मैं उसके गाल पर किस कर दूंगी, ताकि वह खुश हो जाए।”

मैंने कहा, “सिर्फ गाल पर किस करने से खुश हो जाएगा सूरज? तुम्हें क्या लगता है?”

रीता ने कहा, “तो क्या तुम्हें लगता है कि मैं उन्हें होंठो पर किस करूं? तुम बताओ मैं क्या करूं?”

मैंने कहा, “बिल्कुल होंठों पर किस करनी चाहिए। होंठो पर किस करना कौन सी बड़ी बात है?। वैसे उन्होंने तो तुम्हारे बूब्स भी दबाये हैं। अगर वह संतुष्ट नहीं हों, तो तुम्हें सूरज को पूछना चाहिए कि उन्हें क्या चाहिए। मेरे हिसाब से तो जो सूरज चाहता है वह तुम्हें करना चाहिए।

जैसे तुम मुझे एक पत्नी की हैसियत से हर साल प्यार से शुक्रिया अदा करती हो, उसी तरह से तुम्हें सूरज का भी शुक्रिया अदा करना चाहिए। आज के दिन उसने तुम्हारे दोस्त का नहीं पति का कर्तव्य निभाया है। फ़ौरन जाओ और उसको ऐसे प्यार भरा धन्यवाद करो जैसे एक पत्नी अपने पति का अपने जन्मदिवस पर करती है।”

फिर रीता ने कुछ शंका की नजर से एक बार फिर मेरी और देखा और पूछा, “क्या तुम सच में चाहते हो कि मैं सूरज का वैसे ही प्यार से शुक्रिया अदा करूं जैसे मैं तुम्हें करती हूं? क्या तुम सच्चे मन से यह चाहते हो? तुम्हें कोई एतराज तो नहीं होगा? तुम्हें जलन तो नहीं होगी ना? पक्का?”

मैंने अपनी मुंडी हिला कर कहा, “जलन क्यों होगी मुझे? तुम तो भली-भांति जानती हो कि मैं क्या चाहता हूं? मैं बिल्कुल पक्का कह रहा हूं। उसने जो कुछ तुम्हारे लिए किया है, वह कमाल का है। मुझे कोई जलन नहीं बल्कि ख़ुशी होगी। तुम बिंदास जाओ और सूरज जैसे भी खुश और संतुष्ट हो उस तरह से उसको शुक्रिया कहो।”

यह सुनते ही रीता तेज़ी से भागती हुई सूरज के पास पहुंची। उस समय सूरज हम से दूर रिसोर्ट में अंदर ऑडिटोरियम हॉल में एक कोने में बैठा हुआ किसी से फ़ोन पर बात कर रहा था। यह वही हॉल था जिसमें रीता की स्कूल का प्रोग्राम होने वाला था। कुछ दूरी पर दूसरी जगह पर कुछ मिस्त्री और कारीगर शाम के लिए हॉल में सजावट को फाइनल टच दे रहे थे।

साड़ी पहनी हुई रीता भागती हुई बड़ी ही मादक और कामत्तेजक लग रही थी। रीता की साड़ी और घाघरा रीता के दौड़ने से चारों और फ़ैल रहे थे और ब्लाउज में समा पा नहीं रहे रीता के मादक उरोज ऐसे उछल रह थे, कि देखने वाले की हालत खराब हो जाए। इस सब से बेखबर रीता पहुंचते ही सूरज से लिपट गयी। सूरज ने रीता को भाग कर उसकी और आते देख कर फ़ोन बंद किया।

सूरज कुछ समझे उसके पहले रीता आ कर सूरज से लिपट गयी, और सूरज के गालों को एक बार चूमने के बाद कुछ हांफते हुए बोली, “सूरज, आपने आज जो मेरे जन्मदिवस मनाने के लिए किया है, उसके लिए शब्दों में धन्यवाद कहना छोटा सा लगेगा। मेरे पति सच्चे दिल से कहते हैं आज आप ने वह काम किया है जो उनको एक पति की हैसियत से करना चाहिए। मैं उनकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं। वह कहते हैं कि मुझे आप का वैसे ही धन्यवाद करना चाहिए जैसा मैं अपने पति का मेरे जन्मदिवस पर करती।”

सूरज ने बड़े ही आश्चर्य से रीता की पूरी बात सुनी। उस के बाद हसते हुए सूरज ने फुर्ती से रीता की बगल में होने दोनों हाथ डाल कर पकड़ कर उसे आसानी से एक झटके में अपनी बाहों में ऊपर उठाया, और अपनी कमर पर चढ़ा दिया। चौंकी हुई रीता ने भी सूरज की कमर के इर्द-गिर्द अपने पांव कस कर जकड़ लिए, ताकि वह गिर ना पड़े।

सूरज ने रीता की गर्दन को अपने बाहुपाश में ले कर मेरी पत्नी रीता के होंठो से अपने होंठ चिपका दिए, और रीता को अपना मुंह खोलने के लिए मजबूर कर दिया। रीता ने भी बिना कोई विरोध किये अपना मुंह खोल सूरज की जीभ को अपने मुंह में लिया मेरे और किरण के देखते ही सूरज और रीता एक-दूसरे के बाहुपाश में जकड़े एक-दूसरे को चुम्बन करने और एक-दूसरे की जीभ चाटने और लार निगलने में व्यस्त हो गए।

रीता नीचे फिसल ना जाए इसलिए सूरज को रीता के दोनों कूल्हों को अपने दोनों हाथों से अपनी कमर से चिपका कर रखने लिए सख्ती से जकड़ कर अपने बदन से दबा कर रखना पड़ रहा था। अगर उन्होंने कपडे नहीं पहने होते, तो देखने वालों के लिए वह चुदाई का एक बहुत बढ़िया सीन बन रहा था। जब रीता सूरज की कमर पर चढ़ गयी थी, तब उसकी साड़ी और घाघरा रीता की जांघों के ऊपर तक चढ़ गया था। रीता की जांघें नंगी हो गयी थी। पर मेरी बीवी  ने उसके ऊपर कोई ध्यान नहीं दिया था।

सूरज तो मारे ख़ुशी और उन्माद के मेरी पत्नी रीता का इस तरह का स्वैच्छिक समर्पण देख कर गदगद हो उठा। अपनी जीभ बार-बार ड़ाल कर सूरज रीता के मुंह का रस चूसने में व्यस्त हो गया। रीता भी सूरज के मुंह की लार ले कर उसे निगलते हुए आँखें बंद कर तल्लीन सी उन प्यारी घड़ियों को मनाती रही। चुम्मा लेते हुए दोनों प्रेमी एक-दूसरे के मुंह के रस को अपना मुंह इधर-उधर घुमाते हुए चूसते रहे और काफी कुछ “अच्च.. बच्च…” की आवाजें निकालते रहे।

किरण भी उसी समय उस हाल में दाखिल हो रही थी। रीता का यह साहस देख कर वह भी हतप्रभ सी रह गयी। किरण के लिए वह घड़ी अमूल्य तोहफे की तरह थी, क्यूंकि मेरी पत्नी रीता को इसके लिए पटाने में उसे काफी मशक्क्त करनी पड़ी थी। रीता का जन्म दिवस मनाने का आइडिया भी उसी के दिमाग की उपज थी।

मैंने भी हॉल के दूसरे दरवाजे से दाखिल होते हुए यह देखा। मैंने किरण की ओर देखा। मुझे देखते ही किरण चल कर मेरे पास आयी। हम दोनों दूर से ही रीता और सुरज की हरकतों को देख रहे थे। हालांकि हमें उनकी बातें सुनाई नहीं पड़ रही थी।

रीता ने सूरज से लिपट कर सूरज के कान में पूछा, “अब तो आप खुश हो ना? आप मुझसे यही चाहते थे ना?”

तब सूरज ने जवाब दिया, “रीता, एक बात पूछूं? क्या तुम सच्चा जवाब दोगी?”

रीता ने कहा, “जरूर दूंगी।”

सूरज ने कहा, “देखो रीता, मैं भी तुम्हें सच्चे दिल से बहुत बहुत प्यार करता हूं। और प्यार में शुक्रिया अथवा माफ़ी को शब्दों में बोला नहीं जाता। मैं समझ सकता हूं कि यह एक आम पब्लिक प्लेस है तो हमें यहां कुछ संयम बरतना चाहिए। पर तुमने जब यह बात छेड़ी ही है तो मुझे एक बात सच्चे दिल से बताओ कि ऐसे हालात में क्या आज दिन में शाम में या रात में मौक़ा मिलने पर तुम अपने पति का सिर्फ किस करके ही शुक्रिया अदा करती?

आज पूरी शाम और रात भर हम इसी रिसोर्ट में रहेंगे। हम कुछ देर बाद हमारे फार्महाउस के स्विमिंगपूल में स्विमिंग करने भी जाएंगे। आज हमें ऐसे कई मौके मिलेंगे जब जनता की नजरों से दूर हम अकेले होंगे। तो क्या तुम मेरे साथ भी उस समय वैसे ही मनाओगी जैसे तुम अपने पति के साथ मनाती? सच बोलो, मनाओगी क्या?”

रीता ने लाज से अपनी नजरें नीचीं कर लीं, फिर एक-दम धीरे से बोली, “बताइये आप मुझसे क्या चाहते हैं सुरज?”

सूरज ने कहा, “मैं तुम्हे सच्चे दिल से तन और मन से प्यार करना करता हूं, और तुम्हें तुम्हारा प्रेमी बन कर अपना बनाना चाहता हूं। आज अगर तुम्हें मेरा अपना पति समझ कर धन्यवाद करना है तो क्या तुम मुझे यह वादा करती हो कि तुम मुझसे अकेले में कोई भी पर्दा नहीं करोगी, और वैसे ही प्यार करोगी जैसे कि तुम अपने पति को आज करती? तुम सच सच बताओ, क्या तुम तैयार हो?”

सूरज की बात सुन कर रीता बड़ी ही उलझन में फस गयी। सूरज की बात सौ फीसदी सही थी। रीता अपने जन्मदिवस पर, मेरे जन्मदिवस पर और हमारी शादी की सालगिरह, यह तीन मौकों पर तो बगैर भूले ही हर साल रात में मुझ से बड़े प्यार से जरूर चुदवाती थी। यह हमारा पक्का नियम था।

रीता ने सूरज की बात का जवाब नहीं दिया पर होठों से होंठ मिला कर जोश से सूरज की जीभ और होठ चूसने और चाटने लगी। रीता ने बहुत कस के अपना बदन सूरज के बदन के साथ मिलाया। सूरज ने जब रीता के बदन को एडजस्ट करने के लिए उसे अपनी कमर पर कुछ ऊपर-नीचे किया, तब रीता ने अपनी चूत को सूरज के लंड से चिपका दिया और सूरज के खिसकाने पर भी रीता उस पोजीशन से नहीं हटी।

बल्कि रीता कुछ उत्तेजित सी हो कर जैसे अपने बदन को एडजस्ट कर रही हो, ऐसे अपने कूल्हे ऊपर-नीचे करके जाने-अनजाने में अपनी चूत को सूरज के लंड पर घिसने लगी, हालांकि दोनों ने सारे कपड़े पहने हुए थे। रीता की चुप्पी और उसकी मासूम सी लगती हरकतों से सूरज को पहली बार लगा कि शायद रीता उसको मूक सहमति जता रही थी। सूरज का मन कह रहा था कि शायद रीता उस रात सूरज की शयनभागिनी बन सकती थी।

करीब चार पांच मिनट के लम्बे वक्त तक दोनों एक-दूसरे को चूमते और चूसते रहे। उसके बाद सूरज ने रीता को अपने बदन से नीचे उतारते हुए कहा, “रीता अभी पूरी शाम बाकी है। हमें कुछ आराम और चाय नाश्ता करने के बाद शाम को यहीं नजदीक में ही मेरे फार्म हाउस जाना है।

वहां हम हमारे प्राइवेट स्विंमिंगपूल में कुछ देर स्विमिंग करेंगे। उसके बाद मैंने तुम्हारे लिए एक ख़ास बड़ा प्रोग्राम रखा है। तुम आज का दिन, आज की शाम, और आज की रात अपनी जिन्दगी में कभी भूल नहीं पाओगी यह मेरा वादा है। पर तुमने मेरी बात का जवाब नहीं दिया। बताओ क्या तुम मुझे एक पत्नी की तरह प्यार करने के लिए तैयार हो?”

रीता ने कुछ व्यंगात्मक स्वर में शरारत भरी मुस्कान देते हुए कहा, “सूरज जी, किरण कह रही थी कि आप को स्त्रियों के बारे में बड़ा अनुभव है। पर मुझे लगता है वह गलत थी। आपका पाला शायद विदेशी महिलाओं से ही पड़ा होगा। भारतीय नारियों से नहीं।”

सूरज ने कुछ आश्चर्य से रीता की ओर देखते हुए पूछा, “तुम ऐसा क्यों कहती हो? भारतीय नारियों में ऐसी कौन सी ख़ास बात है?”

रीता बोली, “भारतीय नारियों की एक खासियत होती है कि उनको जब मना करना हो तो साफ़-साफ़ शब्दों में सख्ती से मना करती हैं। और अगर ज्यादा आग्रह किया जाए, तो जोर से चिल्लाने लगती हैं। अगर उनका थोड़ा सा भी मन हो तो कहती है ”प्लीज ऐसा मत करो, मुझे परेशान मत करो, अब जाओ यहां से, इत्यादि।’ अगर ‘हां’ कहनी है और अगर उसका पूरा मन है, तो कहती हैं ‘पता नहीं, देखते है।’ और सवाल को टालने की कोशिश करती है। अगर कोई नारी ‘हां’ कहे तो समझना कि वह भारतीय नारी नहीं हो सकती।”

सूरज ने कुछ आश्चर्य से कहा, “अच्छा? यह तो मुझे मालुम नहीं था।“

फिर कुछ रुक कर रीता की आँखों में आँखें डाल कर सूरज ने कुछ शरारती ढंग से पूछा, “तो तुम मेरे सवाल के जवाब में क्या कहती हो? हां या ना?”

रीता ने अपनी आँखें निची कर सूरज को शरारत भरी मुस्कान देते हुए कहा, “पता नहीं। देखो क्या होता है। अब इस बात को छोड़ो भी।”

फिर रीता ने सूरज का हाथ थाम कर कुछ गंभीरता से पूछा, “पर मुझे आप से एक बात पूछनी है। आपने कहा कि आपने मेरे लिए ख़ास प्रोग्राम रखा है? आज तो मेरी स्कूल का एक फंक्शन है, जिसमें मेरा डांस भी है। तो फिर आपका क्या प्रोग्राम है? ज़रा बताइये तो सही।”

सूरज ने हंस कर आगे बढ़ते हुए कहा, “पता नहीं। अब इस बात को छोड़ो भी। यह एक सरप्राइज़ है। तुम्हें खुद ही जल्द पता लग जाएगा।”

रीता ने सूरज को कमर से पकड़ने कोशिश करते हुए मुंह कुछ रुइयां सा बना कर पूछा, “आप अभी बता नहीं सकते क्या? बताइये ना, प्लीज? क्या सरप्राइज़ है?”

सूरज ने आगे बढ़ जाते हुए कहा, “यह तुम्हारी जिंदगी का सबसे बड़ा सरप्राइज़ होगा। थोड़ा इंतजार करो।”

रीता के मुंह की लार का स्वाद सूरज की जीभ से जा ही नहीं रहा था। रीता के हाल पर खुदबखुद मुस्कुराता हुआ वह आगे बढ़ा। उसने किरण को अपने पास बुला लिया, और कुछ बातें करते हुए वह दोनों रिसोर्ट में अपने कमरे की ओर चल दिए।

सूरज से अलग होने के बाद रीता ने मेरी ओर देखा, और अचानक उसे एहसास हुआ कि मैं उसकी सारी हरकतें देख रहा था। रीता के गाल शर्म के मारे लाल हो गए जैसे उसने कोई गुनाह किया हो।

वह सीधी मेरे पास आयी, और मुझे बोली, “यार यह तो बड़ी गड़बड़ हो गयी। आप लोग ना, कुछ ना कुछ ऐसा करते हो और मुझे बड़े लफड़े में फसा देते हो। आप ने मुझे सूरज को अपने पति की तरह मान कर शुक्रिया अदा करने को कहा था।

जब मैंने जा कर सूरज को गाल पर किस की तो उन्होंने मुझे उठा कर कमर पर बिठा कर होंठों पर ही किस मार दी। मैंने उन्हें जब कहा कि मेरे पति ने आज के लिए मुझे सारे रीती रिवाज भूल कर और सारी मर्यादाओं को तोड़ कर आपको पूरे प्यार से शुक्रिया करने को कहा है, तो यह सुन कर सूरज ने मुझे साफ़-साफ़ पूछा कि ऐसे में मेरे पति क्या सिर्फ एक किस से संतुष्ट होते?

अगर मुझे उन को एक पत्नी की तरह प्यार से ही शुक्रिया करना है, तो मैं पूरी तरह वह सब करूं जो एक पत्नी-पति के लिए करती है। उनका मतलब साफ़ था। आप तो जानते ही हो कि वह मुझसे क्या चाहते हैं। आप बताओ अब मैं क्या करूं?”

मैंने कहा, “मैं जानता हूं वह तुम्हें चोदना चाहता है, तुम भी यह जानती हो। अब इस में फ़ालतू में तुम्हें परेशान होने की क्या बात है? आज सूरज और किरण ने तुम्हारे जन्म दिवस के उपलक्ष्य में कुछ प्रोग्राम रखे हैं। हम स्विंमिंगपूल में जाएंगे, उनके साथ तैरेंगे, कुछ गेम्स खेलेंगे, कुछ मस्ती करेंगे। तुम्हें आज पता चलेगा कि सूरज तुम्हें कितना प्यार करते हैं। आज हम यहां मौज मस्ती के लिए आये हैं और मौज मस्ती करेंगे। ये जवानी का समय है जिसे हमें पूरी तरह से एन्जॉय करना है।

तो मैं तुमसे यही कहूंगा कि तुम आज का दिन, आज की शाम, और आज की रात बिना रोक टोक के पूरी तरह से एक-दूसरे के साथ एन्जॉय करो और करने दो प्लीज। कल से हमें फिर से वही रोजमर्रा की बोझिल जिंदगी में वापस जुट जाना है। तो आज जो होता है, वह सब होने दो। जब हम सब एक-दूसरे से इतना प्यार करते हैं तो एक-दूसरे को एन्जॉय भी क्यों ना करें? उसमें गलत क्या है?”

रीता ने मेरी और नीची नजरें कर शिकायत के अंदाज से पूछा, “मैं जानती हूं कि तुम और किरण ने मिल कर यह सारा खेल मुझे बलि का बकरा बना कर और मुझे सूरज के हवाले हलाल कर के अपनी इच्छा पूरी करने के लिए किया है। याद रखना कि मैं तुम्हारी बीवी हूं। तुम मुझे यह साफ़-साफ़ बताओ कि तुम मुझसे क्या चाहते हो, और मैं करूं तो क्या करूं? और यह भी बताओ कि तुम मुझे सूरज को सौंप कर किरण के साथ क्या करोगे?”

बातों-बातों में रीता ने मुझे कह दिया कि वह जान गयी थी, कि मैं उसे सूरज के हवाले करने जा रहा हूं। पर उससे भी ख़ास बात यह थी कि रीता ने उसमें कोई आपत्ति नहीं जताई।

मैंने रीता से पूछा, “तुम मेरी बीवी हो और हमेशा रहोगी। आज कुछ भी होने से यह नहीं बदलेगा। तुम्हें कुछ नहीं करना है। तुम्हें सिर्फ यह देखना है कि सूरज तुम्हें पाने के लिए क्या-क्या करता है। अगर सूरज तुम्हें सही लगता है, और तुम्हारी परीक्षा में खरा उतरता है, तो ठीक है। तुम पूरी तरह से उसका साथ दो और उसके साथ पूरी तरह से एन्जॉय करो। फिर तुम्हें उसे बिल्कुल नहीं रोकना है, बल्कि मैं कहूंगा कि तुम्हें उसे पूरा सहयोग देना है। उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी करना है, आकर्षित करना है।

अगर सूरज तुम्हारे परिक्षण में पास ना हो जाता है तो तुम उसे बेशक रिजेक्ट कर के रोक लो। हम बिल्ल्कुल आगे नहीं बढ़ेंगे। पर यह निर्णय तुम्हारा होगा। और तुम्हारा जो भी निर्णय हो मैं उससे सहमत ही रहूंगा। जहां तक किरण का सवाल है, तो तुम बताओ कि मैं और किरण एक साथ मिल कर मस्ती करें तो क्या तुम्हें कोई एतराज है?”

रीता ने शरारती लहजे में मुस्कुराते हुए टेढ़ा मुंह करके कहा, “मैं अगर एतराज भी करुंगी तो क्या तुम किरण को छोड़ोगे क्या?”

मैंने भी उसी लहजे में हसते हुए कहा, “हम छोड़ने की बात नहीं करेंगे, हम चोदने की बात करेंगे।”

रीता हल्की सी मुस्कुराती हुई मेरा हाथ थाम कर रिसोर्ट में हमारे कमरे की ओर चल पड़ती हुई बोली, “ना बाबा, यह सब मुझसे नहीं होगा। मैं कुछ नहीं कर पाउंगी। तुम मेरे पति हो मेरे साथ जो तुम चाहे करो, मैं तुम्हारे साथ हूं। मैं वादा करती हूं कि मैं तुम्हारा साथ दूंगी, और पहले की तरह मैं रंग में भंग नहीं करुंगी, बस। बाकी मुझ में कुछ भी करने की हिम्मत नहीं है।”

मैंने रीता की ठुड्डी पकड़ कर रीता की आँखों में आँखें डाल कर कहा, “कोई बात नहीं। तुम अपने आप कुछ भी मत करना। मैं जो कहूं तुम वही करना। हमें पूरा साथ देना और कोई विरोध मत करना बस?”

रीता ने अपनी पलकें झुकाते हुए एक बार आँखें मटका कर हल्का सा मुस्कुरा कर मुझे कहा, “क्या मैंने कभी आपकी बात का विरोध किया है?” यह कह कर रीता ने मुझे अपनी सहमति दे दी।

मैंने यह महसूस किया कि किरण के पति सूरज के प्रति मेरी पत्नी का रवैया एक घंटे में ही कितना बदल गया था। जो पत्नी मुझे सूरज की शरारत के बारे में इतनी शिकायत कर रही थी, वह खुद ही सूरज की कमर पर चढ़ कर सूरज का उसे होंठों पर चुम्बन करना बिना विरोध स्वीकार कर रही थी। मेरे लिए वह हादसा मेरी जिंदगी का शायद सबसे ज्यादा रोमांटिक हादसा था। मुझे काफी यकीन हो चला था कि अगर कोई ख़ास गड़बड़ ना हुई तो रीता को किसी गैर मर्द से चुदवाने का मेरा सपना सूरज के द्वारा शायद उसी दिन ही पूरा होने वाला था।

पर एक बात मेरी समझ में आयी, कि लाज और शर्म के कारण रीता अपने आप कुछ नहीं करेगी। उसे थोड़ा मजबूर तो करना पड़ेगा। अक्सर हर औरत शुरुआत में चुदाई करवाने के लिए मर्द ही पहल करे यह चाहती है। रीता ने भी इशारों-इशारों में यह कह दिया।

हमने जैसे ही रिसोर्ट में कदम रखा तो पाया की सूरज और उनकी पत्नी किरण रिसेप्शन में ही एक सोफे पर बैठे हुए थे। हमें देखते ही सूरज ने खड़े हो कर हमारी अगुआई की, और हमें साथ में लेकर वह और किरण हमारे साथ हमारे कमरे की और बढ़े। सूरज ने एक स्वीट बुक करा रखा था। स्वीट में दो बैडरूम थे और बीच में एक सिटींग रूम था। हमारे कमरे में हमारा सामान आ चुका था।

सूरज ने कमरे में आते ही हमें यह हिदायत दी कि कमरे में चाय नाश्ता करने के बाद ठीक पांच बजे हमें तैयार हो कर बाहर आना था। वहां से हम नजदीक में ही सूरज के फार्महाउस पर जाएंगे। वहां सूरज के निजी प्राइवेट स्विंमिंगपूल में स्विमिंग करके हम वापस आएंगे। उसके बाद उसी रिसोर्ट में उस शाम को रीता के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में एक ख़ास सरप्राइज़ कार्यक्रम होगा, जिसमें ड्रिंक्स और डिनर भी होगा। उसके बाद रात को हम अपने कमरे में विश्राम कर दूसरी सुबह अपने-अपने घर चले जाएंगे।

रीता यह सुन कर अचम्भे से मेरी ओर देखने लगी। रीता ने मुझे कुछ गुस्से से कहा, “मेरे लिए ख़ास प्रोग्राम है, और वह भी सरप्राइज़ है? मेरा डांस तो स्कूल के छोटे से फंक्शन में ही है। इसमें क्या सरप्राइज़ है? और फिर स्विमिंग के लिए भी जाना है? यह सरप्राइज़ जरूर है। क्यों की मेरे पास कोई एक्स्ट्रा कपड़े या स्विंमिंगसुट नहीं हैं।”

मैंने सूरज की ओर देखा। सूरज ने शायद रीता की उलझन पहले से ही समझ ली थी। सूरज रीता के पास आकर बोला, “सब ने तो तुम्हें जन्म दिवस पर तोहफे दिए और तुमने स्वीकार भी किए, पर तुम्हारे जन्मदिवस पर मैंने कोई तोहफा तुम्हें नहीं दिया। मेरा भी तो हक़ बनता है तुम्हें तोहफा देने का। मेरा एक बहुत ही छोटा तोहफा है। क्या तुम स्वीकार करोगी उसे?”

रीता ने सूरज का हाथ थाम कर सूरज के हाथ को बड़े प्यार से सहलाते हुए सूरज से आँखें मिलाते हुए कहा, “सबसे बड़ा तोहफा तो मेरे जन्म दिवस मना कर आप ने दे ही दिया है। इससे बड़ा तोहफा क्या हो सकता है भला? अब मुझे कोई तोहफे की अपेक्षा नहीं।”

रीता की बात सुन कर सूरज कुछ झेंप सा गया। रीता ने भी यह देखा। मैंने रीता के पास जा कर उसके हाथ दबाए। मेरा इशारा था कि किसी अपने का दिया हुआ तोहफे को वापस नहीं करते। मेरे इशारे को समझती हुई रीता ने फ़ौरन अपनी बात को ठीक करते हुए कहा, “फिर भी अगर आप कुछ देना ही चाहते हैं तो आपकी दी हुई हर चीज़ मेरी सर आँखों पर।”

सूरज ने एक बक्सा पास में पड़े हुए टेबल के ऊपर से उठाया, और रीता को दिया, और कहा, “मेरा तोहफा बड़ा नहीं है। यह रहा मेरी तरफ से एक बहुत ही छोटा तोहफा। यह बिल्कुल छोटा है। क्या तुम उसे स्वीकार करोगी, और अगर सही लगे तो क्या उसे आज पहनोगी?”

रीता ने बक्सा लेते हुए कहा, “आपका गिफ्ट मैं कैसे मना कर सकती हूं भला? क्यों नहीं पहनूंगी मैं उसे? क्या है इसमें?”

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