मेरी बीवी रीता मर्दों से सेक्स के मजे

बीवी की चुदाई

सच्चे प्यार में नफरत और घृणा का कोई स्थान नहीं होता। हालांकि प्यार और नफरत एक ही सिक्के के दो पहलु हैं। जिससे हम बड़ा ही उत्कट प्यार करते हैं, उनसे हमें जब प्यार में ठुकराया जाता है तो या तो हम अपने आप से नफरत करने लगते हैं, और कुछ आवेश में हमारी घटिया सोच से प्रभावित होकर कई बार अपने अमूल्य जीवन को दाँव पर लगा देते हैं। या फिर नफरत के मारे उसी क्षणिक आवेश में आ कर हम जिसे प्यार करते हैं उसे हानि पहुँचाने के बारे में सोचते हैं।

उन्नीस सौ साठ के दशक में एक गाना बहुत सुप्रसिद्ध हुआ था। उस गाने के बोल थे “अगर मुझसे मोहब्बत है, मुझे सब अपने ग़म दे दो, इन आँखों का हरेक आंसू मुझे मेरे सनम दे दो।” इस गाने को राजा मेहंदी अली खान साहब ने लिखा था, और सुरों में खूबसूरती से सजाया था श्री मदन मोहन जी ने।

इसे बड़ी ही सुरीली आवाज में लता मंगेशकर जी ने गाया था। पाठकों से अनुरोध है कि इस गाने को अगर आपने ना सुना हो, तो जरूर सुनें। इस गाने में प्यार करने का एक अद्भुत फलसफा बताया गया है, जिसे हमें और आपको और पूरे समाज को समझना चाहिए। जिससे समाज में प्यार फैले, नफरत नहीं।

इस कहानी का सिद्धांत तत्व भी इसी गाने पर आधारित है। इस कहानी को पोर्न मत समझिये। यह जीवन की सच्चाई है, और यह फलसफा प्यार को बढ़ाता है नफरत को नहीं। प्यार ही मोहब्बत पा सकता है। नफरत सिर्फ नफरत और दुःख को ही जन्म देती है।

इस कहानी में एक पहेली जो अक्सर हमें उलझा देती है उसका भी विवरण किया गया है। शादी की परंपरा जो हमारे सारे समाज में कई सदियों से चलती आयी है, उसे एक सवाल पहले से लेकर अब तक परेशान कर रहा है। और वह है, “अंदरूनी ही या बाहरी भी?”

इसे इंग्लिश में अनुवाद करने से शायद बेहतर समझ आये। सवाल है “Exclusive only or Inclusive also?”

तात्पर्य है, जैसा की हम जानते हैं, पुरुष और स्त्री के वैवाहिक सम्बन्ध में पुरुष और स्त्री के बीच होता मैथुन या सम्भोग एक मुख्य कारण है। क्या इस सम्भोग या मैथुन की प्रक्रिया में किसी भी रूप में बाहरी पुरुष अथवा स्त्री का औचित्य स्वीकार्य है? यह प्रश्न सदियों से शादी के रिवाज को चुनौती देता आया है या दे रहा हो ऐसा लगता है। इस कहानी में मैंने अपने पात्रों के द्वारा इस जटिल प्रश्न का सरल उत्तर ढूंढने की कोशिश की है।

इस कहानी का मुख्य पात्र सूरज मेरी कहानियों का एक ख़ास प्रशंसक है। उससे मेरा इलेक्ट्रॉनिक संदेशों का काफी आदान-प्रदान का परिणाम यह कहानी है। मैंने उन बोरिंग संदेशों को कहानी में प्रवेश नहीं दिया। बस रसिकता भरे प्रसंगों से ही कहानी को सजाने की कोशिश की है। उम्मीद है पाठकों को पसंद आएगी।

मुझे नहीं पता वह सब कैसे हो गया। पर हाँ यह सच है, कि वह हो गया जो कभी सोचा भी नहीं था। अब जब सोचता हूँ तो लगता है जैसे वह सब सपना था। पर मैं आज जब उस घटना का प्रभाव मेरे और मेरी बीवी रीता पर देखता हूँ, और हमारी इस समय की मानसिकता को पहले की हमारी मानसिकता से तुलना करता हूँ, तो लगता है की वह सच ही था।

मेरा नाम राजकुमार है। मुझे सब राज कह कर बुलाते हैं। अब मेरे और मेरी बीवी रीता के बीच सेक्स के बारे में पहले जैसे अंतर मतभेद नहीं है। शादी के बाद कुछ समय तक सिर्फ मैं ही सेक्स के बारे में खुली सोच रखता था। अब रीता भी समझने लगी है कि सेक्स भी जिंदगी का एक अहम् हिस्सा है। पर वह जिंदगी का सिर्फ एक अहम् हिस्सा ही है। वह जिंदगी नहीं है।

यह उस समय की बात है जब हमारी शादी को करीब तीन साल हो चुके थे। हमने तय किया था कि शादी के पांच साल तक हम दोनों हमारी फॅमिली आगे नहीं बढ़ाएंगे। मतलब बच्चा नहीं पैदा करेंगे और अपने-अपने व्यवसाय पर ध्यान दे कर कुछ धनराशि इकट्ठी करके बाद में परिवार बढ़ाएंगे।

रीता मध्यम वर्ग के परिवार से पली हुई उसी संस्कृति में ढली एक घरेलु लड़की थी। माँ बाप की आय ठीक ठाक ही थी, जिसके कारण रीता की अच्छी पढ़ाई हुई। रीता को सजने सँवरने का बड़ा ही शौंक था। वह थी भी कमाल की सुन्दर। शायद उस समय उनके स्कूल, कॉलेज और शायद पूरे शहर में रीता जितनी खूबसूरत लड़की नहीं होगी।

इतना सुन्दर गोल गोरा चेहरा कि देखने वाले की नजर ही ना हटे। रीता के चेहरे की खासियत यह थी, कि उसके चेहरे पर कहीं भी कोई दाग़ या तिल या ऐसा कुछ नहीं था, जो चेहरे की उज्ज्वलता को दूषित कर सके। चेहरे के सारे नाक-नक्श एक-दम सम्पूर्ण रूप से परिपूर्ण थे।

रीता की आँखों की तीखी भरी हुई और तेज नुकीली भौंहे, नीली नशीली आँखें, सुन्दर भँवराले लम्बे कूल्हे तक लटकते हुए बाल, तीर कमान से होंठ, मोहक नासिका, अत्यंत सुन्दर चिबुक, लम्बी आकर्षक गर्दन, नाभि के नीचे साड़ी पहने हुए पतली कमर जो वह अक्सर खुला ही छोड़ देती थी।

उससे कहीं आगे फूल कर निकलते मादक मस्त भरे और उभरे हुए स्तन मंडल, जो उसके ब्लाउज और ब्रा के बंधनों को नहीं मानते थे। बखूबी सुन्दर उभरे हुए आकर्षक कूल्हे, और इतनी करारी और सुडौल कमल की डंडी के समान जाँघें, कि अगर वह जाँघें दिख जाएँ तो इंसान उन जाँघों के ऊपर ही ना देख पाए।

इन सबसे ज्यादा नशीली थी रीता की एक तीखी कटार सी नजरें। इतने मीठे मधुर बोल कि मन करता था सुनते ही रहें और रीता की हिरणी सी चाल। जब रीता चलती थी तो सब रुक जाते थे। चलती हुई रीता की कमर का चटकना, उसके कूल्हों का मटकना और उसके स्तनोँ का ऊपर नीचे झटकना; कुल मिला कर रीता की सुंदरता को मात्र सुन्दर नहीं, अवर्णनीय अथवा अतुलनीय सुन्दरता की श्रेणी में रख देते थे।

रीता अपने कॉलेज में ना सिर्फ अलग-अलग स्टाइल के भारतीय नृत्य कला के लिए सुप्रसिद्ध थी, वह हिंदी फ़िल्मी और पाश्चात्य संगीत नृत्य में भी निष्णात थी। रीता की माँ को नृत्य कला में काफी दिलचशस्पी थी, जिसके कारण बचपन से ही रीता के संस्कारों में नृत्य कला के लिए रस था।

बचपन से ही उनके शहर के नृत्य के उस्तादों से प्रशिक्षण पाने के कारण रीता बहुत कम उम्र से ही नृत्य कला में पारंगत होने लगी थी। रीता स्कूल में एक प्रखर नृत्यकार यानी डांसर थी, और उसे स्कूल और कॉलेज में कई प्रशंशा-पत्र, मेडल्स और तोहफे मिले थे। उत्तर भारत के एक बड़े ही प्रखर नृत्यकार गुरु महाराज से रीता ने शिक्षा प्राप्त की थी।

हालांकि रीता शायद मौक़ा मिलने पर शोहरत और पैसे कमा सकती थी। पर रीता के पिता रीता के नृत्य कला को व्यवसाय बनाने के पक्षधर नहीं थे। रीता की अद्भुत सुंदरता देख मैंने रीता से शादी के लिए हाँ कहने में कोई समय नहीं गंवाया। पर रीता ने तपाक से “हाँ” नहीं कहा।

जब मैं रीता से मिला और मैंने शादी के लिए हमारे माँ बाप को “हाँ” कही, तो रीता का मुझसे पहला सवाल था-

रीता: आपने हाँ कह दी, इसका मतलब यह थोड़े ही है कि मैं भी हाँ कह दूँगी? मैं इतनी आसानी से नहीं हाँ कहने वाली। अगर मुझे वाकई में पाना है, तो मशक्क्त करनी पड़ेगी।

यह कह कर रीता ने अपने माँ बाप से कहा कि उसे सोचने का कुछ वक्त चाहिए।‌ पर मैं रीता से शादी करने के लिए कटिबद्ध था। मैंने भी तय कर लिया था, कि शादी करूंगा तो रीता से ही। उसके बाद की कहानी लम्बी है, जिसमें मैं रीता के पीछे करीब एक साल तक लगा रहा।

मैं उसे कॉलेज ले जाता, कभी घर छोड़ता, कभी उनके घर के छोटे-मोटे काम कर देता। यह सब करते-करते मैंने रीता के माँ बाप और बड़े बुजुर्गों सहित रीता की भी रजामंदी हासिल कर ही ली।

फिर आखिर में मेरी एक साल की कड़ी मेहनत और तपस्या के बाद हमारी शादी हो ही गयी। शादी की पहली रात भी रीता ने चुदवाने के पहले मुझसे बड़ी मिन्नतें करवायीं, और वादे करवाए, तब कहीं जा कर आखिर में अपनी साड़ी का पल्लू खोला, और अपने खूबसूरत नंगे बदन के दर्शन करवाए और उसे छूने दिया।

रीता की सबसे बड़ी और मेरी सबसे ज्यादा मनपसंद सुंदरता का प्रतीक था रीता के शरीर का एक-एक अंग का परफेक्शन। जैसे रीता के स्तन खड़े रहने पर या लेटे रहने पर भी झूल नहीं जाते थे। जैसे अक्सर और स्त्रियों के होते हैं।

रीता की निप्प्लें भी परफेक्शन का नमूना सी थीं। हलकी सी चॉकलेट रंग की दोनों निप्पलेँ जिसको हम गोरे रंग की और हलके से गेहूँ वर्ण के रंग की कह सकतें हैं, वह उत्तेजित अवस्था में कोई सुन्दर मंदिर के अर्ध-गोलाकार गुंबद सामान परफेक्ट एरोला के बीचो-बीच शिखर के रूप में अकड़ फूली हुईं सख्त स्थिति में रहतीं थीं।

रीता के चेहरे, पेट, कूल्हे या चूत के ऊपरी उभार इत्यादि पर मैंने कभी कोई बल नहीं देखे। अक्सर हमारे गालों में आँखों के निचे या कपोल पर पच्चीस साल की उम्र के बाद झुर्रियां या चमड़ी का लटक कर उभर जाना नजर आने लगता है। रीता की उम्र से उनमें कोई फर्क नहीं पड़ा।

मैं मानता हूँ कि इसका कारण शायद भगवत कृपा और मन को हमेशा शांत, आनंदी रखना और बदन को नृत्य आदि व्यायाम कर फिट रखने के लिए सदैव सजग रहना ही था।

अपने स्कूल और कॉलेज में मेरी पत्नी काफी संयम-पूर्ण और आदर्श कन्या के रूप में जानी जाती रही थी।

हालांकि कई लड़कों ने रीता पर लाइन मारने की नाकाम कोशिश कई बार की थी। कई लड़के रीता के पीछे ऐसे पड़ गए थे, कि रीता को उन्हें दुत्कार कर भगा देना पड़ता था।

रीता का “अरंगेत्रम” (शिक्षा पाने के बाद स्टेज पर पहला डांस परफॉरमेंस) मुंबई के सन्मुन्खानंद हॉल में हुआ था।

उसका लाइव वीडियो मुझे रीता के पिता ने दिखाया था। हालांकि शादी के बाद भी रीता कहीं-कहीं डांस परफॉरमेंस देती रहती थी। पर घर की जिम्मेदारियां रीता पर हावी हो रहीं थीं। शादी के बाद मैंने हमारे घर में रीता के डांस करते हुए कुछ वीडियो रिकॉर्ड किये थे, जिनमें एक था जिसमें मैंने रीता को काफी पतले पारदर्शी कपडे पहना कर डांस करने पर मजबूर किया था।

उस वीडियो में कहीं श-कहीं रीता का घाघरा हवा में उड़ता दिख रहा था, और तब उसकी चूत तक की नंगी करारी जांघें साफ़-साफ़ दिखती थीं। उसी वीडियो में एक बार रीता का ब्लाउज और ब्रा खिसकने से कुछ पलों के लिए रीता के स्तनों और निप्पलेँ भी बाहर निकल आयीं थीं।

जब रीता ने वह वीडियो देखा, तो वह रिकॉर्डिंग के बाद मुझसे उस वीडियो को डिलीट ना करने के लिए काफी नाराज हुई थी। पर बाद में रोमांटिक मूड में कभी कभी हम वह वीडियो देख कर मजे लेते थे।

रीता की तमन्ना थी एक बड़ी नृत्यकार बनने की। परन्तु माँ बाप, हालांकि वो रीता की कला के कायल थे, पर वह जानते थे कि कला की दुनिया में एक औरत के लिए अपने कैरियर को आगे बढ़ाना कितनी दुष्कर चुनौती थी और उससे निपटना आसान नहीं था। उस कारण रीता की अद्भुत कला होने के बावजूद भी वह ज्यादा आगे बढ़ नहीं पायी। पर इस बात का अफ़सोस रीता के जहन में जरूर था।

मैं एक साधारण मेहनतकश मध्यमवर्गीय इंसान था। और एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। काम काफी होता था। ट्रैवेलिंग जॉब थी। महीने में मैं करीब 10 से 20 दिन ट्रेवल करता था। मेरी बीवी रीता मेरी नौकरी और मेरे घर से इतने लम्बे अर्से तक दूर रहने से बोर हो जाती थी।

रीता की पढ़ाई करने के बाद एक नृत्य प्रशिक्षक बनने की ख्वाहिश थी। सो कुछ धनोपार्जन और कुछ अपनी बोरियत दूर करने के लिए उसने एक स्कूल में कला शिक्षक की नौकरी ले ली। वह सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक बच्चों को प्रशिक्षण देती थी।

स्कूल अच्छा था। तनख्वाह ठीक ठाक थी। हमारी आमदनी में रीता के जॉब के कारण कुछ इजाफा जरूर हो जाता था। उसे ज्यादा काम नहीं रहता था, तो वह घर और स्कूल दोनों काम सम्भाल पाती थी।

रीता के स्कूल ज्वाइन करने के करीब एक-आध महीने बाद स्कूल में ही एक दूसरी लड़की किरण ने भी ज्वाइन किया। जब स्कूल के दूसरे टीचरों ने किरण के बारे में सुना तो सब दॉंतों तले उंगली दबा गए।

किरण ने सायन्स में मास्टर्स डिग्री, सामाजिक शास्त्र में डिग्री, तत्वदर्शन में डिग्री हासिल की थी और योग विद्या में वह निष्णात थी। जब उसने स्कूल में एक निम्न क्लास टीचर के लिए अर्जी दी, तो स्कूल का बोर्ड भी अचम्भे में था।

किरण तो प्राधानाध्यापक होने के लायक थी, पर उसने सिर्फ कनिष्ठ पद के लिए ही आवेदन भरा था। जब किरण को पूछा गया कि वह क्यों उच्चतर पद के लिए आवेदन नहीं करना चाहती, तब किरण ने कहा की वह सिर्फ बच्चों को पढ़ाना चाहती थी। उसे प्रशाशनिक जिम्मेदारियां उठाने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। किरण मात्र साधारण शिक्षक की नौकरी ही करना चाहती थी।

चूँकि मेरी पत्नी रीता और किरण एक ही उम्र के थे, तो पहले ही दिन से उनकी मुलाक़ात और जान-पहचान हो गयी थी। इसके अलावा दोनों का मायका करीब के गाँव में था। रीता और किरण दोनों के माँ-बाप की आर्थिक स्थिति भी करीब-करीब एक बराबर ही थी। इसलिए रीता और किरण एक-दूसरे से काफी करीबी महसूस करने लगीं थीं और उनमें काफी बातचीत होने लगी थी।

किरण की शादी सूरज से हुई थी, जो एक रईस घराने से था। तो जाहिर है शादी के बाद किरण की आर्थिक स्थिति जरूर बदल गयी थी।

वैसे क्लास रूम में और दूसरे शिक्षकगण या विद्यार्थियों के साथ किरण का व्यवहार एक दम सुलझे हुए परिपक्व शिक्षक का था। पर किरण जब मेरी पत्नी रीता को मिलती थी, तब उसके व्यवहार में अमूल परिवर्तन आ जाता था। वह एक छोटी सी लड़की की तरह व्यवहार करने लग जाती थी। रीता की समझ से यह बाहर था।

वह कई बार इसके बारे में किरण से भी पूछती रहती थी। तो किरण का एक ही जवाब था कि रीता के साथ किरण रीता की सह-शिक्षिका नहीं बल्कि एक बालिका जैसे महसूस करती थी। किरण को लगता था जैसे रीता उसकी कोई बड़ी बहन हो।

रीता भी किरण को अपनी छोटी बहन की तरह समझती थी और प्यार करती थी। वह भी खुले दिल से किरण से अपनी सारी बातें शेयर करती थी। जब किरण ने एक बार रीता से पूछा कि उसकी जिंदगी की कौन सी ऐसी ख्वाहिश है जो वह मौक़ा मिले तो पूरी करना चाहेगी।

तब रीता ने बेझिझक कहा था कि रीता की एक सबसे बड़ी ख्वाहिश थी कि जिंदगी में जब भी कभी मौक़ा मिले, तब वह गणमान्य कला के प्रशंषकों के सामने एक बार अपना नृत्य का प्रोग्राम करके सारे कला के जगत को वह अपना हुनर दिखाना चाहती थी।

किरण और मेरी पत्नी रीता दोनों ही लंच के समय या ब्रेक के समय मिलते और आपस में एक-दूसरे की घरेलु समस्याओं और चुनौतियों के बारे में बात करते रहते थे। जहां तक मुझे याद है, किरण और मेरी पत्नी रीता की पहली मुलाक़ात या बातचीत शिक्षक कक्ष में पहली बार कुछ ऐसे हुई थी।

किरण को स्कूल में जॉब लिए हुए शायद तीसरा या चौथा दिन था। मेरी पत्नी रीता जब एक फ्री पीरियड में शिक्षक कक्ष में पहुंची तो वहाँ पहले से किरण अकेली बैठी हुई थीं। उस दिन शायद कुछ कार्यक्रम था जिसमें दूसरे शिक्षक व्यस्त थे। रीता और किरण ने एक दूसरे को ‘हलो’ कह कर अपनी जान-पहचान की। पहली बार देखते ही दोनों महिलाओ में एक-दूसरे के प्रति एक तरह का तादात्म्य का भाव हुआ।

पहले दो-चार मिनट के परिचय में ही किरण के सवालों की झड़ी चालू हो गयी। स्कूल कैसा है और बाकी के शिक्षक, प्रधानाचार्य कैसे हैं से लेकर उसने रीता से उसकी शादी से पहले और उसके बाद के पता नहीं कितने सारे सवाल पूछ डाले।

पहली ही मुलाक़ात में इतने सारे सवाल-जवाब सुनना रीता को कुछ अजीब जरूर लगा, पर किरण का भोला सा चेहरा देख रीता किरण को टोक या रोक नहीं पायी और किरण के सवालों का जवाब देती गयी।

किरण बिंदास शरारती स्वभाव की थी। किरण दिखने में काफी सेक्सी थी। पतली कमर, लम्बी काठी और काफी भरे हुए स्तनों और आकर्षक नितम्बों वाली किरण को देखते ही कोई भी मर्द ललचा जाए ऐसी उसकी फिगर थी। लम्बी गर्दन, काले घने लम्बे घुंघराले बाल, गोरे-गोरे भरे हुए गाल, काली नशीली आँखें और गोरा लंबा चेहरा किसी भी मर्द को आकर्षित करने के लिए काफी था।

स्कूल में अपॉइंटमेंट मिलने पर ही कुछ टीचर्स और बड़े स्टैंडर्ड में पढ़ते बच्चों में से कुछ किरण को लाइन मारने लगे थे। किरण भी तो उन्हें निराश नहीं करती थी। किरण हरेक को बड़ी सुन्दर मुस्कान दे कर आगे निकल जाती थी। यह भी एक अजूबा था कि किरण पुरे स्कूल में किसी को घास नहीं डालती थी। वह सिर्फ मेरी पत्नी रीता से ही मिलती-जुलती थी और नजदीकियां बना कर रखती थी।

मेरी पत्नी रीता के मुताबिक़, किरण काफी बातूनी थी। जब किरण रीता से मिलती थी तब बोलना शुरू हो जाती थी, तो उसे रोकना मुश्किल था। उसकी काफी बातें बिना सिर पैर की होतीं थीं। स्कूल में फ्री पीरियड या ब्रेक होते ही किरण मेरी बीवी रीता के साथ मिलने का मौक़ा नहीं चूकती थी। किरण के साथ मेरी सीधी-सादी बीवी रीता को एक बड़ी दिक्कत थी। किरण रीता के साथ सेक्स के बारे में खुल कर बातें करने से नहीं झिझकती थी।

किरण के मन में जब-जब जो कुछ आया, वह रीता को बोल देती थी। मेरी बीवी को यह समझ नहीं आ रहा था कि किरण सिर्फ उसके साथ ही इतनी घनिष्ठ क्यों थी।

किरण मेरी पत्नी को एक उलाहना बार-बार देती रहती थी। उसका कहना था कि स्त्रियों को अपने जीवन में कुछ ना कुछ जातीय प्रयोग करने ही चाहिए। जातीय प्रयोग से उसका मतलब था विवाहेतर जातीय सम्बन्ध। ज्यादातर स्त्रियां विवाह के पहले सेक्स नहीं करतीं और विवाह के बाद अपने पति के अलावा दूसरे मर्दों से सेक्स करने का या तो उनका मन नहीं होता या उनको मौक़ा नहीं मिलता।

अगर पति या ससुराल वाले ज्यादा ही संकुचित विचार वाले हों तो ऐसा सोचना भी एक बहु के लिए काफी चुनौती भरा होता है। शादी के बाद अक्सर महिलायें अपने पति से सेक्स करके संतुष्ट होने की कोशिश और दावा भी करती हैं। कई औरतों का कद बढ़ जाता है और वह मनपसंद मर्दों को आकर्षित नहीं कर पातीं।

ख़ास कर जो औरतें खूबसूरत होती हैं और जिनकी फिगर मर्दों को आसानी से आकर्षित कर सकती है उनके लिए तो बहुत जरुरी है वह विवाहेतर जातीय सुख का उपभोग करें। यह किरण के स्पष्ट विचार थे। किरण मानती थी कि सुन्दर स्त्रियों को तो बिलकुल ही सिर्फ अपने पति से सेक्स करके अपनी खूबसूरत जवानी जाया नहीं करनी चाहिए।

किरण और मेरी पत्नी रीता के बीच कई बार इस मसले पर बात-चीत होती थी, और किरण मेरी पत्नी को हर बार यही कहती थी कि रीता जैसी खूबसूरत औरत को अपनी खूबसूरत जवानी का कीमती समय कुछ मौज मस्ती में बिताना चाहिए और सिर्फ घर परिवार, रसोई इत्यादि और रोजमर्रा के चक्कर में ही खूबसूरत जवानी को जाया नहीं करना चाहिए।

अगर एक खूबसूरत जवान औरत जिस पर कई हैंडसम और सशक्त मर्द आकर्षित हो सकते हैं उसने अगर एक से अधिक मर्दों से सेक्स के मजे नहीं लिए, तो फिर उसकी खूबसूरती और जवानी का कोई फायदा नहीं।

रीता का जवाब होता था कि वह अपने पति से (माने मुझसे) सेक्स करके खुश थी, और उसको दूसरे मर्दों से सेक्स करने की कोई इच्छा या आवश्यकता नहीं थी। हर बार किरण उसको “धत जूठी” कह कर ताने मार कर कहती थी कि जब तक रीता किसी दूसरे मर्द से सेक्स नहीं करती, उसे कैसे पता की एक तगड़े मर्द से सेक्स करके कितना आनंद आता है।

किरण उसे अपने अनुभव के बारे में बताती थी। एक तगड़ा जवान और तंदरूस्त मर्द जब एक खूबसूरत युवा औरत को पूरे जोर से, प्यार भरी बेरहमी से, और अलग अलग पोजीशन में (सोते हुए, खड़े, अपनी गोद में उठा कर, अपनी कमर पर चढ़ा कर, आगे से पीछे से) चोदता है तो उस औरत के पूरे बदन और उसके दिमाग को कितना उत्तेजक सुकून मिलता है। वह किरण काफी विस्तार से मेरी पत्नी को बता कर उसे उकसाने में लगी हुई थी।

मेरी पत्नी रीता भी किरण की ऐसी उकसाने वाली बातें सुन कर पहले तो किरण की बातों को नकार देती थी, पर धीरे-धीरे दबी आवाज में किरण के अनुभवों के बारे में घुमा फिरा कर पूछती और किरण को और भी अनुभव शेयर करने के लिए प्रेरित करती रहती। किरण भी अच्छी तरह मेरी पत्नी की मनोदशा समझती थी, और उसके विशाल अनुभव के पिटारे से चंद किस्से सुनाने में कोई परहेज नहीं करती थी।

जब भी मौक़ा मिलता, मेरी पत्नी रात को बिस्तरे में मुझे किरण से हुई सारी बातें बताती और उसकी उत्तेजना मुझसे शेयर करती। मैं भी मेरी पत्नी किरण की कही बातों का समर्थन करता और कहता कि हमें भी यह सब एन्जॉय करने के लिए कुछ ना कुछ करना चाहिए। मैं हमेशा रीता से कहता कि कोई भी उसका मनपसंद मर्द हो तो वह मुझे बताये और मैं उससे मिल कर अपने तरीके से कुछ ऐसी व्यवस्था कर दूंगा, कि सब कुछ परदे में रह कर हो जाए और हम सब एन्जॉय करें।

मौका मिलते ही किरण मेरी पत्नी रीता को अपनी और उसके पति की सेक्स लाइफ के बारे में बात करने लग जाती थी। रीता मुझे कहती थी कि उसकी दोस्त किरण जब रीता से बात करती थी तो आधी पागल ही लगती थी। बात यहां तक सीमित नहीं होती थी। किरण अपने पति के लम्बे कद, फुर्तीली बॉडी, उसका तगड़ा लण्ड, सख्त बदन और उसकी सेक्स की भूख के बारे में बात करते नहीं थकती थी।

उसका पति किरण को किस पोजीशन में लिटा कर उसके ऊपर चढ़ कर किरण को कैसे चोदता था, और उस टाइम किरण की उसके पति सूरज के लम्बे और मोटे लण्ड से चुदवाने से कैसे जान निकल जाती थी, या किरण कैसे सूरज के ऊपर चढ़ कर उसका लण्ड अपनी चूत में डालती थी वगैरह, यह सब कहती रहती थी।

किरण ने यहां तक कह दिया कि जब किरण के पति उसे चोदते थे तो वह “गांड फाड़” चुदाई करते थे। मतलब चूत फट जाए ऐसे चोदते थे। मेरी पत्नी रीता कोशिश करती थी कि वह किरण को यह सब बोलने से रोके, पर किरण कहाँ सुनने वाली थी?

जब भी किरण को मौक़ा मिलता वह अपने सेल फ़ोन से अपनी और रीता की कभी साथ में तो कभी अलग से कई तरीके की अदा और पोज़ में तस्वीरें खींचती और खिंचवाती रहती थी। कई बार तो जब कोई आस-पास ना हो तब ऐसे सेक्सी पोज़ देकर अपनी तस्वीर रीता से खिंचवाती थी, कि रीता परेशान हो जाती थी।

कई बार किरण रीता को जबरदस्ती खाली क्लास रूम की बेंच पर या लॉन की हरी-हरी घास पर लिटा कर पल्लू हटा रीता के स्तनों को आधे दिखा कर तस्वीर खींच लेती थी। अपने हाथ को अपनी जांघों के बीच में डाल कर भी वह वीडियो खींचती थी।

किरण और रीता अपनी बचपन की, कॉलेज की, शादी की, हनीमून की और भी कुछ फोटो और वीडियो एक दूसरे के साथ शेयर करती रहतीं थीं। किरण की तो कई बिंदास बिकिनी वगैरह में ढेर सारी आधी नंगी फोटोज़ और वीडियो थीं। मेरी बीवी की भी कुछ उत्तेजक तस्वीरें और वीडियो मैंने खींचीं थीं।

कुछ रीता को बता कर और कुछ उससे छिपा कर। खैर बाद में वह छिपा कर ली हुई फोटो और वीडियो भी रीता से मैंने शेयर की थीं। एक बार रीता ने वह फोटो और वीडियो किरण के बार-बार आग्रह करने पर उसको दिखाये, पर शेयर नहीं किये। पर किरण कहाँ मानने वाली थी?

किरण ने रीता का फ़ोन लेकर मौक़ा मिलते ही चोरी-चोरी उन तस्वीरों और वीडियो को व्हाट्सप्प से अपने फ़ोन पर डाउनलोड कर लिए। उनमें रीता के वह डांस का भी वीडियो था जिसमें डांस करते हुए रीता की जांघें, कूदते हुए स्तन और एक दो बार उछलती हुई निप्पलें दिखाई पड़ रहीं थीं।

जब भी मौक़ा मिलता था, तब किरण रीता को उन फोटोज और वीडियो दिखा कर उसकी टाँग खींचती रहती थी, और रीता की खिसियानी शकल देख कर खिलखिलाकर हंस देती थी।

मेरी पत्नी रीता मुझे कहती थी कि किरण की इस तरह की उटपटांग बातें सुन कर वह भी कई बार काफी उत्तेजित हो जाती थी। उसकी चूत भी गीली हो जाती थी। पर वह किरण की तरह पागल नहीं थी। वह अपनी मर्यादा में रहना जानती थी।

सबसे पहले जब एक दोपहर स्कूल के बाद किरण मेरी पत्नी रीता को आग्रहपूर्वक अपने बंगलो पर ले गयी, तो रीता किरण के विशाल घर की सजावट, ऐश्वर्य और सुख साधनों की भरमार देख कर दंग रह गयी। किरण ने फिर रीता को अपना बैडरूम दिखाया।

वहाँ किरण ने रीता को सेक्स के कई उपकरण दिखाए जिन्हें देख कर रीता हैरान हो गयी। नकली लण्ड, चूत, वायब्रेटर इत्यादि उपकरणों को देख कर मेरी पत्नी की बोलती बंद हो गयी।

रीता के कहने के अनुसार उस दोपहर को किरण ने मेरी पत्नी को अपने बैडरूम में ले जा कर अपनी बाहों में भर लिया। रीता को आलिंगन करते हुए किरण कह रही थी, “रीता, मैं सच कह रही हूँ, काश मैं मर्द होती तो इसी समय तुम्हारे सारे कपड़े निकाल कर तुम्हें ऐसे तगड़े से चोदती, कि तुम अपने पति को भी भूल जाती। तुम इतनी खूबसूरत हो कि तुम्हें कोई भी तगड़ा हैंडसम मर्द जब कहो तब चोदने के लिए राजी हो जाएगा। पता नहीं तुम क्यों अपनी इस खूबसूरत जवानी को इस तरह अपने पुराने फटीचर ख्यालों में बर्बाद कर रही हो जबकि तुम्हारा पति भी तुम्हें इतना सपोर्ट कर रहा है।”

जब मेरी पत्नी ने किरण की बाँहों में लिपटी हुई इस बात पर कुछ नहीं बोली और आश्चर्य से किरण को देखती रही, तब किरण ने बरबस मेरी बीवी के होंठों से अपने होंठ चिपका दिए और अपनी जीभ रीता के मुंह में डाल कर रीता के मुंह का रस चूसने लगी।

रीता किरण की हरकतों से स्तब्ध किरण के बाहुपाश में बेबस अपने मुंह में किरण की जीभ पाकर बरबस उसे भी चूसने लगी। इस तरह रीता का सकारात्मक रवैया देख कर किरण ने फ़ौरन मेरी पत्नी की साड़ी और घाघरा उठा कर उसकी पैंटी को ऊपर से सहलाना शुरू किया।

बार-बार मेरी पत्नी का किरण का हाथ हटाने की कमजोर कोशिश के बावजूद किरण डटी रही, और रीता की पैंटी हटा कर उसने मेरी बीवी की चूत में उंगली डाल कर रीता की चूत को अपनी उँगलियों से चोदना शुरू कर दिया।

रीता जब किरण को रोकने की नाकाम कोशिश करने लगी, तब किरण ने कहा, “अब यह पवित्रता वाला ड्रामा बंद करो और मेरे साथ एन्जॉय करो। तुम्हारी चूत में से जिस तरह पानी रिस रहा है यह बताता है कि तुम कितना उत्तेजित हुई हो और तुम्हारा कितना मन है।” किरण की बात सुन कर रीता चुप। उसने फिर किरण को रोकना बंद कर दिया।

पर फिर किरण का हाथ जब रीता के ब्लाउज के बटन खोलने में लगा, तो फिर रीता ने उसे रोकना चाहा। मेरी बीवी रीता के बार-बार रोकने पर भी जब किरण ने मेरी पत्नी का ब्लाउज और ब्रा निकाल दिए, तब रीता के नंगे स्तनों को देख कर किरण की उत्तेजना का ठिकाना नहीं रहा।

पलक झपकते ही किरण रीता के निप्पलों से अपने होंठ चिपका कर एक छोटे से बच्चे की तरह मेरी बीवी के स्तनों में से जैसे दूध चूस रही हो, उस शिद्द्त से पूरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। किरण की हरकतें अब रीता के लिए भी असहज होती जा रहीं थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह किरण का विरोध करे या अपने उकसाये हुए बदन की बात सुने।

किरण ने रीता के स्तनों को खूब चूसा, चूत को चाटा, वाइब्रेटर से मेरी बीवी को कई बार झड़ने का मौक़ा भी दिया, और काफी कुछ किया। रीता भी आखिर बेबसी में किरण की बाहों में चली गयी, और किरण के साथ रीता ने उस दोपहर को वह सब किया जो उसने जिंदगी में सोचा नहीं था कि वह करेगी।

जब किरण ने मेरी पत्नी रीता को अपनी कार में हमारे घर छोड़ा, तो रीता बेचारी ऐसी हालत में थी जैसी पहले कभी नहीं थी। यह उसके जीवन का एक अनूठा अनुभव था।

किरण ने रीता के साथ ऑटो क्लिक टाइमर सेट करके किरण रीता को चूम रही थी, या कपड़े पहने हुए लिपट कर जैसे उसे चोद रही हो ऐसे पोज़ में कई फोटो लिए।

एक दो वीडियो भी लिए जिसमें किरण रीता को किस कर रही थी। रीता किरण की इन हरकतों से इतनी ज्यादा परेशान थी, कि उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह सब मुझे किस मुंह से बताये कि रीता किरण के साथ इस तरह के करतब में शामिल हो गयी थी।

किरण अपने पति सूरज की भी अलग-अलग पोज़िशन में फोटो और वीडियो लेती रहती थी। कभी जिम में, कभी कसरत करते हुए, कभी खाली निक्कर में तो कभी किरण के साथ प्यार जताते हुए। सूरज की खाली निक्कर पहने स्विमिंग पूल की कुछ फोटोज, तो कुछ फोटोज और वीडियो किरण और सूरज की स्विंमिंगपूल में मस्ती करते हुए साथ में।

ऐसी कई फोटोज और वीडियोज़ किरण कई बार रीता को दिखाती रहती थी। कई बार वह पागल लड़की अपने पति की ऐसी फोटो या वीडियो रीता को दिखाती थी, जिसमें सूरज का खड़ा हुआ लण्ड निक्कर में तम्बू बनाता हुआ दिख रहा हो।

ऐसी फोटो या वीडियो दिखा कर किरण हंस कर बोलती थी, “देखा मेरे पति का लण्ड? कैसा तगड़ा है रे! सॉलिड है ना? चाहिए तुझे यह लण्ड? बोल, मैं इंतजाम कर दूंगी। एक बार बोल दे।”

रीता यह सब देख और सुन कर बड़ी गुस्सा हो कर किरण को डांट देती थी, पर किरण पर उसका कोई असर नहीं होता था। पर वैसे रीता किरण को पसंद करने लग गयी थी।

मेरी पत्नी रीता एक अच्छी श्रोता थी। वह बोलती कम थी और सुनती ज्यादा थी। किरण का हिसाब-किताब उल्टा सा था। चूंकि रीता ज्यादातर किरण की यह सारी बातें चुपचाप हैरान सी सुनती रहती थी, किरण को भी सुनाने का और प्रोत्साहन मिल जाता था। इस कारण किरण की जुबान अपने पति के बारे में और उनकी सेक्स लाइफ और सेक्स की चर्चाओं के बारे में बात करते रूकती ही नहीं थी।

मैं भी किरण के बारे में रीता से सुन-सुन कर स्वाभाविक रूप से किरण की ओर ज्यादा आकर्षित होने लगा था। मूलतः मुझे किरण का सेक्स के मामले में बिंदासपन बहुत आकर्षित करता था। मेरी पत्नी रीता के सेक्स के बारे में कुछ रूढ़िवादी संकुचित विचारों से कई बार मैं परेशान हो जाता था।

मैं चाहता था कि मेरी पत्नी गैर मर्दों से मिले, उनसे जान-पहचान बढ़ाए और अगर उनमें से किसी के साथ भी उसका मेलजोल बढ़ता है तो मैं मेरी पत्नी को पूरी तरह से सपोर्ट करने के लिए तैयार था।

मेरे कई दोस्त और पड़ोसी जो मेरी नजर में कुछ हद तक रीता को पसंद आ सकते थे, उनके बारे में मेरी पत्नी रीता से मैं बात करता रहता था, ताकि शायद मेरी रीता उस मर्द की ओर आकर्षित हो। कुछ को तो मैं घर बुलाता रहता था, या रीता के साथ उनके घर जा कर उनसे बातचीत करने का अवसर ढूंढता रहता था।

मेरा आशय यह होता था कि रीता उनके बारे में क्या सोचती थी। क्या उसे कहीं किसी कोई मर्द में कुछ ज्यादा दिलचस्पी हो सकती है ताकि मैं उन दोनों को करीब लाने की कोशिश कर सकूँ। पर हर बार रीता मेरी मेहनत पर ठंडा पानी फेर देती थी। या तो वह उन मर्दों की तरफ देखती भी नहीं थी, या फिर मुझे साफ़-साफ़ कह देती थी कि मैं अपना टाइम जाया कर रहा था।

ऐसा नहीं था कि मेरी पत्नी रीता मेरा आशय नहीं समझती थी। मैंने उसे कई बार कहा था, कि मैं चाहता था कि मेरी बीवी का कोई मर्द बॉयफ्रेंड बने, और रीता उसके साथ छेड़छाड़ करे, या कुछ ज्यादा छूट ले। रीता ने शुरू में विरोध करने की नाकाम कोशिशों के बाद मेरी इन हरकतों का विरोध करना बंद कर दिया था।

कई बार वह उन मर्दों के बारे में अपनी नापसंदगी भी बता देती थी। इसलिए मेरे मन में आस थी कि कभी ना कभी तो मेरी पत्नी को कोई गैर मर्द पसंद आएगा। रीता ने कभी मेरी इस मुहिम का विरोध अगर नहीं किया तो समर्थन भी नहीं किया। मैं उसके मन की बात समझ ही नहीं पा रहा था।

मुझे ऐसा लगता था जैसे अगर घर में मैं रीता पर काम कर रहा था तो स्कूल में किरण मेरी पत्नी रीता पर काम कर रही थी। स्कूल में किरण को अभी एक या दो महीने हुए होंगे कि एक दिन जब फिर दोनों महिलायें शिक्षक कक्ष में अकेली मिलीं, तो किरण रीता से मिलते ही कहने लगी, “मालूम है, कल रात को मेरे पति ने क्या किया?”

जब बिना बोले रीता ने किरण की और देखा तो किरण बोली, “अरे बुद्धू, हर पति रात को बैडरूम में सोने से पहले अपनी पत्नी को क्या करता है?”

मेरी बीवी बेचारी स्तब्ध सी किरण को बड़े आश्चर्य से देखती ही रही। किरण ने कहा, “सूरज मेरी नाइटी उठा कर मेरी चूत पर हाथ फिराते हुए बड़े खुश हो रहे थे, क्यूंकि मैंने अपनी चूत पिछले ही दिन साफ़ करवा रखी थी। वह मेरी चूत को फील करते हुए पूछने लगे कि मेरी चूत मैंने किस बॉयफ्रेंड के लिए साफ़ कर रखी है?”

रीता बाँवरी सी अचंभित खड़ी हुई किरण को देखती ही रही। पत्थर की मूरत सी स्तब्ध मेरी बीवी की ओर देख कर मुंह फुला कर किरण हंस कर बोली, “मैं क्या बताती? पर मैं भी कोई कम थोड़े ही हूँ? मैंने तपाक से मेरे पति को जवाब देते हुए कहा, क्यों? बॉयफ्रेंड ही क्यों? क्या मेरी गर्लफ्रेंड नहीं हो सकती? मैंने मेरी चूत मेरी गर्लफ्रेंड रीता के लिए साफ़ करवा रखी है। हम जब मिलते हैं तब मौक़ा मिलते ही हम एक दूसरे की चूत पर हाथ फिरा कर तसल्ली करते हैं कि हमने हमारी चूत साफ़ रखी है या नहीं। इतना ही नहीं जब मौक़ा मिलता है तब हम एक दूसरे से मौज मस्ती करने का भी नहीं चूकते।”

किरण की बात सुन कर रीता के पाँव के नीचे से जैसे जमीन खिसक गयी हो ऐसा उसे लगा। मेरी भोली-भाली बीवी समझ नहीं पायी कि उसे क्या प्रतिक्रिया देनी चाहिए। रीता कुछ सहमी हुई डरती हुई कुछ झुंझलाहट दिखाती बोली, “अरी! यह तू क्या बक रही है? क्या तूने अपने पति से मेरे बारे में ऐसी बात कही? यार तू भी कमाल है! तेरी बात सुन कर क्या सोचेंगे वह मेरे बारे में?”

किरण ने हँसते हुए कहा, “क्या सोचेंगे मेरे पति तुम्हारे बारे में? अरी जब उन्होंने मेरे मुंह से तुम्हारे बारे में सब कुछ सूना तो वह तो तुझसे बड़े ही प्रभावित  हो गए। तेरी अलग-अलग पोज़ में खींची वह हनीमून वाली झकास सेक्सी खूबसूरत फोटो मैंने उनको दिखायीं। मैंने उनको हमारी उस दोपहर की बातें भी बतायीं जब मैंने तुम्हारे बूब्स को शिद्द्त से चूसा था।

वह फोटो जो हमने साथ में ली थीं वह भी दिखायीं। हमारी दोपहर के करतूतों वाली बात सुन कर मेरे पति कहने लगे, क्या? रीता इतनी एडवांस्ड भी है? क्या रीता और तुम दोनों एक दूसरे की चूत पर हाथ फिराते रहते हो? अरी मेरे पति तो तुम्हारी वह डांस वाली वीडियो देख और तुम्हारे डांस के बारे में सब सुनते ही पागल से हो गए।“

किरण की बात सुन कर रीता का दिमाग ठनक गया। अपने सिर पर हाथ पटकती हुई रीता बोली, “तू क्या कह रही है? तूने मेरा वह डांस वाला मेरे पति का धोखे में शूट किया हुआ गंदा वीडियो भी तुम्हारे पति को दिखा दिया? ऐसा कोई करता है क्या? तू पागल तो नहीं हो गयी?”

किरण जोर से हंस पड़ी और बोली, “मैंने तो हमारे बीच की सारी बातें उनसे कह डालीं। तुम्हारी सादगी, भोलापन, निष्कपटता और सच्चाई के बारे में सुन कर तो वह अचंभित हो गए। वह तो तुझसे मिलने के लिए बड़े बेचैन हैं। मुझे कहने लगे, किरण मुझे मिला दो ना तुम्हारी सखी से! तुमसे मिलने के लिए मेरी कितनी मिन्नतें करने लगे हैं यार। मुझे तो मजा आ गया। यह पहली बार हुआ कि किसी औरत की वीडियो, फोटो देख कर और उसके बारे में सुन कर बिना तुमसे मिले ही मेरे पति इस कदर तुम्हारे दीवाने हो गये हैं।“

फिर कुछ रुक कर चारों और देख कर कि कोई सुन तो नहीं रहा, किरण ने रीता के कान के पास अपना मुंह ले जा कर धीरे से पर उत्तेजना में फुदकते हुए कहा, “सुन, जब भी मैं तुम्हारे बारे में बात करती हूँ ना, तो मेरी बात सुन कर उनका तगड़ा मोटा लण्ड घोड़े के लण्ड की तरह खड़ा ही हो जाता है।

यार! मुझे नंगी देख कर भी उनका ऐसा नहीं खड़ा होता। पता नहीं तेरी शक्ल में या तेरे किरदार में कैसा जादू है। अब तो वह तुझे मिले बगैर नहीं छोड़ेंगे। और अगर वह तुझे मिल गए तो तुझ पर उनका जादू चलना निश्चित है। तू समझ ले कि मेरे पति से तेरा चुदना तय है। तूने तो कमाल ही कर दिया यार! आज तक मेरे पति ने कभी भी किसी औरत के बारे में इतनी जिज्ञासा नहीं दिखाई।”

फिर कुछ शांत हो कर किरण रीता के एक-दम करीब आ कर चारों और देख कर रीता के कानों में बोली, “यार एक बात और बता दूँ, मेरे पति बड़े ही हैंडसम है। अभी तक तो तूने उनकी तस्वीरें ही देखीं हैं। जब तू उन्हें एक बार आमने-सामने देख लेगी ना, तो सब को भूल जायेगी तू। तू मेरे पति पर ही फ़िदा हो जायेगी। देखियो, अपने आपको समभाल के रखियो जब तुम मेरे पति से मिलो तो।

यह ध्यान रखियो की वह मेरे पति हैं। वह रोज जिम जाते हैं। उन्होंने अपनी तगड़ी बॉडी बनायी है और उनके लण्ड का क्या कहना! ऐसा तगड़ा लण्ड है कि जो औरत उनके लण्ड से एक बार भी चुद गयी, तो समझो गयी काम से! मैं तो मेरे पति के लण्ड को “गांड़ फाड़” लण्ड कहती हूँ। हालांकि वह कोई गांड़ नहीं मारते। पर ऐसा तगड़ा उनका लण्ड है। एक बार चुदने के बाद तो वह औरत उनको कभी छोड़ेगी नहीं।”

फिर दुबारा चारों और देख कर किरण ने रीता के कान में फुसफुसाते हुए बोली, “देख रीता किसी को मत बताना। मैंने मेरे पति से उनका लण्ड देख कर ही शादी के लिए हाँ कहा था। पर यार एक बात बड़ी अच्छी है। मेरे पति हैं शो बिज़नेस में। उनके दफ्तर में एक से बढ़ कर एक सुन्दर लडकियां हैं। वह देखते रहते सबको हैं पर मेरे पति कभी किसी औरत के चंगुल में फंसते नहीं।

उनका सिद्धांत है, बिज़नेस के साथ प्लेज़र को मिक्स नहीं करना। वह दोनों को अलग रखते हैं। इसीलिए मैं आज तक निश्चिन्त हूँ। पर तेरे साथ तो कोई बिज़नेस है ही नहीं। सिर्फ प्लेज़र है। हम एक दूसरे से बिल्कुल खुले हुए हैं। वह मुझे हँसते हुए कई बार साफ़-साफ़ कहते हैं कि वैसे तो वह किसी लड़की को घास नहीं डालते, उनको कोई लड़की पसंद ही नहीं आती। पर अगर उन्हें कोई पसंद आ गयी तो वह उसे बगैर चोदे छोड़ते भी नहीं।

सूरज के कॉलेज में भी एक लड़की सूरज को पसंद आ गयी थी। बड़े बाप की बेटी थी वह। बड़ा घमंड रखती थी। बड़े नखरे करती थी वह। बड़ी सती बनने का दिखावा करती थी। उसने बड़ी कोशिश की बचने की पर सूरज से बच नहीं पायी। आखिर में सूरज ने उसे मना ही लिया और उसे चोद ही डाला। वह मुझे सब बताते हैं।” किरण ने गर्व से अपना सिर उठा कर कहा।

मेरी पत्नी रीता किरण की बातें स्तब्ध सी खड़ी सुनती रही। किरण ने तो सारी हदें पार कर दी थीं। यह लड़की रीता को क्या-क्या कहानियां सुना रही थी और क्यों किरण यह सब उसे सुना रही थी? रीता ने किरण को कुछ डाँटने के लहजे में कहा, “यार यह सब तू क्या बक रही है? और तूने यह सब क्या मुसीबत मेरे लिए खड़ी कर दी है? किरण, तूने अपने पति से ऐसा क्यों कहा? कभी-कभी एकाध बार गलती से ऐसा कुछ हो गया तो तूने उसे बढ़ा-चढ़ा कर अपने पति को क्यों कह दिया? क्या हम दोनों ऐसा कुछ करते रहते हैं? हमारे बीच ऐसा कोई रिश्ता है क्या? अगर तू ऐसा करेगी तो मैं तुझसे रिश्ता नहीं रखूंगी।”

मेरी पत्नी की यह बात सुन कर किरण रीता के करीब खिसक आयी। उसने फिर चारों और देखा कि कहीं कोई कुछ देख तो नहीं रहा है। फिर किरण ने स्कूल के टीचर रूम में कुछ ऐसा किया जो मेरी पत्नी ने जिंदगी में कभी सोचा नहीं था। रीता कुछ सोचे या करे उसके पहले किरण रीता के साडी और पेटीकोट ऊपर उठा कर, उसकी पैंटी हटा कर बड़े प्यार से अपनी दो उंगलियां रीता की चूत में डाल कर, कुछ देर उन्हें अंदर बाहर करती हुई बच्चे की तरह खिलखिला कर हंसती हुई बोली, “क्यों नहीं है हमारे बिच ऐसा कोई रिश्ता? आज भी तेरी चूत कितनी गीली है री?

क्या तुमने मेरे साथ उस दोपहर को एन्जॉय नहीं किया था? क्या तुम उस दोपहर को कई बार झड़ नहीं गयी थी? और जहां तक आज की बात है तो लो भाई! अब दुबारा करने पर हमारे बीच ऐसा रिश्ता पक्का हो गया।”

मेरी पत्नी रीता ने उसी शाम को मुझे उन दोनों के बीच की बातचीत, उस दोपहर को किरण के बंगलो पर हुआ वाक्या, और किरण द्वारा रीता की चूत को उंगली से चोदने की बात मुझे कही। मैंने जब रीता से यह सूना तो मेरा दिमाग भी ठनक गया। मैंने रीता की चूत पर हाथ फिराते हुए रीता से कुछ मुस्कुराते हुए पूछा, “रीता सच-सच बताना, तुमने जब किरण के साथ यह सब किया, तब तुम्हें कैसा फील हुआ?”

रीता मेरी और सख्त नजर से देखने लगी पर कुछ ना बोली। फिर कुछ देर बाद बोली, “राज, तुम भी लो मजे! मैं क्या करती? किरण एक पागल औरत लगती है मुझे। इस तरह दो औरतें कभी एक दूसरे के साथ करती हैं भला? जब किरण ने पहली बार मेरी चूत पर ऐसे हाथ फिराया तो मेरा ऐसा हाल हुआ कि काटो तो खून ना निकले।

तब तक तो किरण सिर्फ बातें करती रहती थी, पर उस दिन तो किरण ने मेरी चूत पर भी हाथ फिरा लिया और पता नहीं क्या-क्या किया। मेरी समझ में यह ही नहीं आ रहा था कि मैं करती तो क्या करती? पता नहीं। उसे और उसके पति को जिंदगी में सेक्स के अलावा शायद कुछ नजर ही नहीं आता। मेरे से तो जब देखो किरण सेक्स की ही बातें करती रहती है। यह औरत मेरा सत्यानाश करने पर ही तुली है ऐसा मुझे लग रहा है।

उस दिन तो राज सच कहूं? किरण की बातें सुन-सुन कर ना मेरी टांगों के बीच में से भी पानी रिसने लगा था यार! मैं उस दिन आपे से बाहर हो रही थी। मेरा दिमाग ही काम नहीं कर रहा था।”

मेरी पत्नी का यह रिएक्शन देख कर मुझे काफी अच्छा लगा। शायद भगवान ने किरण को मेरे काम में सहायता करने के लिए भेजा हो ऐसा मुझे लगा। अब तक जो काम मैं कर नहीं पाया था वह किरण बखूबी कर रही थी। किरण जाने-अनजाने मेरी बीवी के दिमाग में सेक्स के बारे में जो नकारत्मक भाव था उसे ख़त्म करके सेक्स के बारे में मेरी पत्नी के ह्रदय के कोई अँधेरे कोने में गड़ी हुई कामनाएं कुरेद-कुरेद कर बाहर निकालने का काम कर रही थी।

मैंने मेरी पत्नी से कहा, “रीता, यार यह कपल मुझे सही लगता है। क्यों ना तुम एक बार किरण के हस्बैंड से मिल लो। वह तो तुम्हें मिलने के लिए मर रहा है। तुम जैसे ही किरण को कहोगी तो किरण उसके पति से बात करेगी और वह फ़ौरन तुमसे मिलेगा।”

मेरी पत्नी ने मेरी बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “मुझे कोई नहीं मिलना किरण के हस्बैंड से। तुमने सुना नहीं किरण क्या कह रही थी? किरण कह रही थी कि उसका हस्बैंड एक बार अगर किसी के पीछे पड़ जाता है तो उसको बख्शता नहीं। किरण तो यहां तक कह रही थी कि कॉलेज में एक लड़की के पीछे सूरज ऐसा पड़ गया था की आखिरकार लड़की को मानना ही पड़ा और उस लड़की को चुदवाने के लिए मना कर उसे चोद कर ही छोड़ा सूरज ने।

मुझे तो डर है कि कहीं उसके मन में मेरे लिए कोई ऐसे ही विचार ना हों। ऐसे ही वह किरण के पीछे पड़ गया था। किरण खुद कह रही थी कि किरण को भी सूरज ने शादी से पहले ऐसे ही फँसा कर खूब चोदा था। आखिरकार किरण को अपनी बीवी बना कर ही छोड़ा सूरज ने। राज, मैं नहीं चाहती कि किरण का पति सूरज मेरे पीछे पड़ जाये। क्यूंकि, क्या पता वह मेरे पीछे पड़ गया तो मैं बेकार की झंझट में फँस जाउंगी।”

मैंने पूछा, “क्यों? तुम कौन से झंझट में फसोगी यार बताओ तो? तुम तो शादीशुदा हो। तुम इतना क्यों डरती हो उससे? क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि वह इतना हैंडसम है की तुम देखते ही उसके वश में आ जाओगी?”

रीता ने कहा, “हैंडसम तो बहुत है वह और मजबूत भी है। ऊंचा कद लम्बे हाथ, चौड़ा सीना, बड़ी बड़ी आँखें, आकर्षक चिबुक, यह देखो।”

फिर मुझे किरण के पति सूरज का जिम में कसरत करते हुए एक टॉपलेस पेट में छः गठीले स्नायुओं वाला पिक्चर दिखाया जिसमें वह काफी लंबा, शशक्त, हैंडसम और मजबूत दिख रहा था। और एक वीडियो भी दिखाया जिसमे किरण और उसका पति सूरज एक बीच(Beach) पर थे जिसमें सूरज छोटी सी निक्कर पहने था। सूरज की जाँघों के बीच उसके उभरे हुए लण्ड का बड़ा सा तम्बू साफ़ दिख रहा था। किरण सूरज के पास बैठे हुए उसके लण्ड पर हाथ फिरा रही थी। मैं भी वह देख कर उत्तेजित हो गया।

मैंने कहा, “तू यह मत सोच कि किरण का पति सूरज तेरे पीछे नहीं पड़ा है। अरे किरण ने कहा नहीं कि वह तो तुम्हारे पीछे पड़ ही गया है? पर पीछे पड़ा भी हो तो क्या हो जाएगा? ऐसे थोड़े ही होता है कि कोई मर्द जब चाहे जिस औरत को चाहे, चोद दे?

पर एक बात तो माननी पड़ेगी। सूरज दूसरों नाहिम्मत मर्दों से कई गुना अच्छा है। तूने तो देखा है कि कई मर्द छिप कर तुझ पर नामर्द की तरह लाइन मारते हैं, या टिका टिप्पणी करते हैं। सूरज एक ऐसा सॉलिड मर्द है जो खुल कर सामने आकर तुझे पाने की और चोदने तक की बात करता है।

मुझे लगता है कि तुझे सूरज से जरूर मिलना चाहिए। एक बार देखो तो सही कि क्या उसमें उतना दम है, जैसा किरण कह रही है?”

रीता ने मेरी और एक सरसरी नजर से देखा और पूछा, “अच्छा? और अगर उसमें उतना दम हुआ और वह मुझे चोदने पर उतारू हो गया तो? फिर तुम क्या करोगे?”

मैंने अपना सिर पटकते हुए कहा, “चोदने के लिए उतारू हो जाने से वह तुम्हें चोद ही देगा ऐसा जरुरी तो नहीं? तुम्हारी मर्जी के बगैर वह तुम्हें कैसे चोदेगा? और अगर वह चोदने का मौक़ा मिलने पर तुम्हें चोद भी देता है तो क्या तुम्हारे सिर पर सींग उग जाएंगे? तुम्हें अपनी प्रोटेक्शन का ध्यान रखना है बस। तुम इतनी घबराती क्यों हो?

रीता मैंने तुम्हें कई बार कहा है कि अगर हमारी पसंद का पात्र मिलता है तो हम दोनों को बिंदास एन्जॉय करना चाहिए। मुझे कोई दिक्कत नहीं अगर तुम्हारी पसंद का तगड़ा गैर मर्द तुम्हें प्रोटेक्शन के साथ चोदे तो। जहां तक मेरा सवाल है, तो अगर किरण का पति तुम्हें चोदेगा तो तुम्हारी दोस्त किरण को मैं थोड़े ही छोडूंगा? तुम मुझे किरण से मिला दो फिर देखो मैं क्या चक्कर चलाता हूँ।”

रीता ने कुछ नरम पड़ते हुए कहा, “अच्छा तो यह बात है! तो तुम किरण को चोदना चाहते हो और फँसा मुझे रहे हो। ओ मिस्टर, तुम यह अच्छी तरह समझ लो। मैं किसी से नहीं घबराती। मैं कोई भेड़ बकरी नहीं हूँ, कि किसी से आसानी से डर जाउंगी। तुम चिंता मत करो।

वैसे भी किसी में इतना दम नहीं है कि मुझे इतनी आसानी से पा ले। जहां तक तुम्हारा सवाल है, तुम किरण से मिलो उसमें मुझे कोई दिक्कत नहीं। मुझे पता है तुमसे कुछ होने वाला नहीं है। किरण बड़ी तेज-तर्रार है। वह तुम्हारे चक्कर में नहीं फँसने वाली।”

मैंने कहा, “तुम्हें अपने पति में विश्वास नहीं है क्या? और मान लो कि अगर मैं किरण को चोद नहीं भी पाया, तो कोई बात नहीं। तुम तो सूरज से चुदवा ही लो। तुम्हें सूरज जैसे किसी तगड़े गैर मर्द से चुदवाना ही मेरी सबसे बड़ी इच्छा है।”

“हाँ वह तुम्हारे पागलपन के बारे में तो मैं अच्छी तरह से जानती हूँ।” रीता ने मुंह बनाते हुए कहा।

मैं मेरी पत्नी को कई बार यह समझाने की कोशिश कर रहा था कि उसे सेक्स के बारे में कुछ लचीलापन अपनाना चाहिए। मेरा मतलब था कि मैं चाहता था कि मेरी बीवी रीता सेक्स के मामले में कोई रूढ़िवादी बीवी का सख्ती वाला रवैया छोड़ अगर कोई मर्द उससे छेडछाड़ करे तो उसका साथ दे।

मेरी यह कामना थी कि जब भी मौक़ा मिले कोई और मर्द मेरी बीवी को अपनी तगड़ी मर्दानगी से अच्छी तरह चोदे, और उसे तगड़ी वाली चुदाई का सुख दे, जो हर मर्द अपनी बीवी को नहीं दे पाता और शायद मैं भी उसे दे नहीं पाया था।

हालांकि मेरी बीवी के मुताबिक़ मेरी बीवी मेरी चुदाई से बड़ी ही खुश थी। पर मैं अपने मन ही मन में जानता था कि शादी के कुछ सालों के बाद चुदाई में औरत और मर्द दोनों को वह मजा नहीं आता जो शादी के तुरंत बाद आता है।

पर मेरी बीवी थी कि वह मेरे अलावा किसी भी मर्द को छूना तो दूर, उसे अपने करीब आने देने की बात सोचने के लिए ही मना कर रही थी। शायद जो काम मैं तब तक कर नहीं पाया था, वह काम किरण अच्छी तरह कर रही थी।

किरण देखते ही देखते मेरी बीवी की चूत तक पहुंच गयी। फर्क सिर्फ यही था कि किरण औरत थी। पर खैर रीता ने किसी औरत को ही सही पर अपनी चूत छूने दी यह मेरे लिए किरण की एक बहुत बड़ी सफलता थी।

मैंने महसूस किया कि किरण अपनी नादानियत, सरलता और अपने भोलेपन से मेरी पत्नी रीता से सेक्स के बारे में बात करके रीता के करीब जा कर रीता के सेक्स के बंद किये हुए दरवाजे को धीरे-धीरे खोलने का काम कर रही थी।

किरण के मेरी पत्नी रीता की चूत के छूने और उंगली करने वाली रात जब रीता बिस्तर पर आयी, तो उसका आलम कुछ और ही था। मुझे साफ़-साफ़ महसूस हो रहा था कि मेरी बीवी कुछ कहे या ना कहे, उसे किरण का उसकी चूत पर हाथ फिराना और उँगलियों से उसकी चूत को चोदना उतना बुरा नहीं लगा था, जितना वह दिखाने की कोशिश कर रही थी।

उस रात रीता ने मेरे लंड को मुंह में लेकर बड़ी शिद्दत से ना सिर्फ चूसा बल्कि अपनी टांगें खोल कर मुझसे अपनी चूत चटवायी, और फिर मेरे ऊपर चढ़ कर मेरा लंड अपनी चूत में लेकर खूब चुदाई की।

मेरे साथ-साथ वह भी झड़ गयी और झड़ते हुए मुझे बार-बार यह कहती जा रही थी कि किरण बिल्कुल एक पागल लड़की है जिसके सर पर सिर्फ सेक्स ही सवार था। शायद उसे यह पता नहीं था कि मैं उसकी चूत को किरण की चूत समझ कर उसे बड़ी मस्ती से चोदे जा रहा था।

किरण की शादी को भी करीब चार साल हो चुके थे और अभी उन्हें कोई बच्चा नहीं था। किरण का पति सूरज एक बिजनेसमैन था। उनके परिवार का मसाले का होलसेल का कारोबार था। उनका व्यापार काफी फैला हुआ था। पर किरण का पति सूरज शो बिज़नेस में था और एक नामी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी का मालिक था।

वैसे तो किरण को पैसे कमाने के लिहाज से नौकरी करने की कोई जरूरत नहीं थी, पर किरण भी घर में बैठ कर सिर्फ हाउसवाइफ बन कर रहना नहीं चाहती थी, और इसीलिए उसने यह नौकरी ली थी। सूरज के घर में किसी को किरण के नौकरी करने से कोई आपत्ति नहीं थी।

कई बार ऊपरवाला भी सोच समझ कर जोड़ी बनाता है। किरण की तरह किरण का पति सूरज भी सेक्स के मामले में बिंदास था। सेक्स के मामले में सूरज की और से किरण को कोई रोक-टोक नहीं थी।

शादी के समय सूरज और किरण ने शायद एक समझौता कर लिया था, कि शादी के बाद भी एक दूसरे को किसी गैर मर्द या औरत से सेक्स के बारे में छानबीन या सवाल जवाब नहीं करेंगे।

रीता ने मुझे किरण के कई खूबसूरत फोटोज दिखाए। किरण की बिंदास तस्वीरें देख कर मैं तो पागल सा हो गया। इतनी खूबसूरत औरत और ऐसी बिंदास! रीता ने मुझे किरण और उसके पति सूरज के बारे में इतनी सारी बातें कह डालीं थी, कि मैं भी किरण और सूरज को मिलने के लिए काफी उतावला हो रहा था।

मेरी किरण और किरण के पति सूरज से पहली मुलाक़ात तब हुई, जब मैं एक दोपहर रीता को लेने के लिए उसकी स्कूल में पहुंचा हुआ था। उस दिन स्कूल बस की हड़ताल थी। सुबह मैं रीता को स्कूल छोड़ अपने दफ्तर गया हुआ था। दोपहर को सूरज भी किरण को लेने के लिए स्कूल पहुंचा हुआ था।

जैसे ही स्कूल के गेट में से किरण के साथ रीता बाहर आयी, रीता ने किरण से मेरा परिचय कराया तो फ़ौरन मुझे देख कर किरण आ कर मुझसे लिपट गयी और रीता की और देख कर बोल पड़ी, “अरे यार तेरा पति तो बड़ा स्मार्ट, हैंडसम और हॉट है! अब तक तूने क्यों उसे मुझ से छिपा कर रखा था?”

उस वक्त भौंचक्का होने की बारी मेरी थी। एक तरफ इस लड़की का पति थोड़ी ही दूर खड़े हमें देख रहा था, तो दूसरी और मेरी पत्नी बाजू में खड़ी किरण को मेरी बाँहों में देख रही थी। पर किरण को तो जैसे इन बातों से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था।

मेरे लिए वह पहला अनुभव था, जब इतनी सेक्सी, सुन्दर, युवा और पत्नी की इतनी करीबी दोस्त मुझसे इस तरह आलिंगन करने लगे। किरण का ऐसा व्यवहार देख कर मैं कुछ देर तक तो स्तब्ध सा खड़ा कुछ बोल ही नहीं पाया।

मेरी पत्नी रीता मेरी उलझन देख खिलखिला कर हंसने लगी और बोली, “मैंने आप से कहा ना था? यही मेरी दोस्त किरण आधी पागल है। अब आपका भी उससे परिचय हो ही गया। यह ऐसी ही है।”

दूसरी और किरण के पति की प्रतिक्रया खुल कर हँस रही मेरी बीवी रीता को देख कर अजीबोगरीब सी थी। मेरी बीवी रीता को देख कर किरण के पति सूरज की ऑंखें चौंधियाँ सी गयीं।

सूरज रीता को ऐसे देखने लगा जैसे उसने इससे पहले इतनी सुन्दर सेक्सी औरत पहले देखि ही ना हो। जैसे ही किरण ने उसके पति सूरज से मेरी पत्नी रीता की पहचान कराई, सूरज मेरी बीवी को काफी देर तक ऊपर से निचे तक बिना कुछ बोले एक टक निगाहें ताकता हुआ देखता ही रहा।

उस समय माहौल कुछ अजीब सा हो गया। देखने वाले को ऐसा लगता होगा जैसे मेरी पत्नी किरण के पति सूरज के सामने बिल्कुल बिना कपड़े पहने हुए नग्न खड़ी हो और सूरज पहली बार किसी अत्यंत खूबसूरत नग्न स्त्री को अपने सामने खड़ा देख रहा हो।

किरण ने अपने पति को कोहनी मार कर कहा, “अरे, तुम घर में तो इतनी ज़िद कर रहे थे और बार-बार मुझसे कह रहे थे कि रीता से मिला दो। अब जब मेरी सेक्सी दोस्त रीता खुद आपके सामने खड़ी है तो आप इस तरह बुत से खड़े हुए चुप-चाप रीता को देख क्यों रहे हो? क्या हो गया तुम्हारी मर्दानगी को?”

अपनी बीवी से इस तरह का उलाहना सुनने के बाद सूरज कुछ झुंझलाया हुआ आगे आया और उसने रीता का हाथ थामा। हम सब रोडसाइड पर खड़े थे। अब आगे सूरज उसके साथ क्या करेगा इस असमंजस में फँसी और सूरज के लम्बे, बलशाली गठे हुए बदन को निहारती कुछ हड़बड़ाई घबराई हुई मेरी पत्नी रीता बेबस, असहाय सी सूरज के साथ उस का हाथ थामे चल पड़ी।

सूरज रीता को अपने साथ रोडसाइड पर लगी लम्बी कार की कतार के पीछे दूसरी तरफ यह कह कर ले गया, ताकि आता जाता ट्राफिक उन्हें डिस्टर्ब ना करे। पर रीता को पकड़ कर ले जाने का असली कारण था कि मैं, किरण और आते-जाते वाहन सूरज और रीता की हरकतें देख ना सकें।

वहाँ सूरज ने रीता को अपने करीब खींच कर अपनी बाहों में लपेट लिया। फिर रीता के बदन को कार के दरवाजे के ऊपर टिका कर उसके ऊपर अपने पूरे बदन का वजन दे कर रीता को कार और अपने बदन के बीच में कस कर दबा कर सूरज अजीब तरीके से रीता को आलिंगन करता रहा।

दरअसल सूरज कार की दूसरी तरफ रीता के साथ खड़ा रीता की गांड के दोनों कूल्हों को अपने हाथों में दबाते हुए रीता के अंग से अंग मिलाते हुए रीता की चूत में अपने लंड से कुछ धक्के मार कर नजदीकी आलिंगन करता रहा।

कुछ देर तक वैसे ही अपनी बाहों में जकड़े हुए काफी घनिष्ठ सा आलिंगन करने के बाद सूरज ने रीता को छोड़ दिया। यह सब मेरी भौंचक्की सी खड़ी पत्नी रीता समझ सके उसके पहले चंद पलों में ही हो गया।

सूरज की जाँघों के बीच खड़ा उसका लंड मेरी बीवी की जाँघों के बीच छिपी चूत में कपड़ों के माध्यम से घुसने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ था। यह हालात मेरी बीवी के लिए अकल्पनीय थे। मैंने भी कार के पीछे से यह सारी हरकत देख ली थी।

अपने होशोहवास समभालते हुए सूरज ने मेरी बीवी के गालों पर एक हलकी सी चुम्मी देते हुए उसके कानों में कहा, “रीता, तुम तुम्हारी तस्वीरों और वीडियो से कहीं ज्यादा खूबसूरत हो।” फिर सूरज सीधे खड़े हुए, और मेरी ओर कार के ऊपर से देखते हुए बोला, “राज तुम वाकई में बहुत भाग्यशाली हो कि रीता दिन रात तुम्हारे साथ रहती है। किरण बिल्कुल सही कह रही थी। तुम्हारी रीता कमाल की कमसिन सुन्दर है। मैं क्या बताऊं मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं है।”

और फिर रीता की और सर घुमा कर सब सुनें ऐसे बोला, “रीता तुम वाकई में बहुत ही ज्यादा सुन्दर हो।” इस तरह किरण के पति सूरज द्वारा ताकत से खींच कर सूरज के सख्त बदन से लिपटाये जाने पर और उस तरह जोश से गाल पर चुम्बन किये के बाद और सूरज के अंग से अंग मिला कर किये हुए उतने ताकतवर आलिंगन के बाद मेरी बीवी रीता को ऐसा एहसास हुआ, कि अगर आस-पास में आते-जाते लोग ना होते, तो किरण का पति उसे वहीं के वहीं रीता के और अपने कपड़े निकाल कर नंगी रीता को जमीन पर लिटा ही देता और खुद उस पर सवार हो कर रीता को वहीं चोदने लग जाता।

किरण के पति सूरज ने अपनी बाहों में रीता को ऐसे जकड़ा था कि रीता को छोड़ने के बाद सूरज की उंगलियों के निशान मेरी बीवी की पीठ पर दिखने लगे थे। रीता ने सूरज के तगड़े लंड को भी अपनी चूत को कोंचते हुए महसूस किया था।

उस समय मेरी पत्नी की क्या मनोदशा होगी, वह तो वहीं जाने।सूरज के आलिंगन के उस पूरे घटनाक्रम के दरम्यान मेरी पत्नी रीता तो बेचारी मुझे देखती ही रही। कुछ देर के लिए वह कुछ भी बोलने लायक नहीं रही थी। जब सूरज ने मेरी पत्नी की सुंदरता की तारीफ़ की, तो बरबस ही रीता के मुंह से निकल पड़ा, “थैंक यू।”

उस समय अगर कोई और बीवी होती तो शायद काफी लाल-पीली हुई होती। पर किरण का भी जवाब नहीं था। वह इठलाती हुई बड़े ही जोश के साथ कुछ देर तक तालियां बजाने के बाद रीता का हाथ अपने हाथ में लेकर अपने पति से बोली, “देखा, मैंने कहा था ना? मेरी दोस्त किसी खूबसूरत एक्ट्रेस से कम नहीं। अरे मैं खुद अगर मर्द होती तो राज से रीता को कभी का उड़ा कर ले गयी होती।”

सूरज ने अपनी बीवी किरण का हाथ थाम कर किरण को प्यार से मेरी और हलके से धकेलते हुए कहा, “डार्लिंग, तुम औरत ही रहो और रीता को उड़ाने का काम मुझे करने दो? राज बड़ा ही हैंडसम है। तुम राज को उड़ा कर ले जाओ मुझे कोई दिक्क्त नहीं।”

किरण अपने पति की बात सुन कर इठलाती हुई मेरे पास आयी और मुझे प्यार भरी नज़रों से देखती हुई मुझसे चिपक कर खड़ी हो गयी। मेरी पत्नी रीता सूरज के इस तरह कस कर किये हुए तगड़े आलिंगन के बाद जैसे एक तरह की तंद्रा में हो ऐसे बर्ताव कर रही थी।

किरण ने उसे अपने पति के बहुत ज्यादा सेक्सी होने के बारे में पहले से ही इतना डरा दिया था। ऊपर से सूरज ने भी रीता को इस तरह सेक्सी आलिंगन, चुम्मा आदि किया तो रीता समझ गयी थी कि सूरज ने उसे चोदने का मन बना लिया था।

इस आशंका से वैसे ही रीता आधी बावरी हो गयी थी। सूरज के पहली मुलाक़ात में ही उसे इस तरह का इतना तगड़ा सेक्सी आलिंगन देने के कारण वह बहुत नर्वस और ढीली पड़ गयी थी। रीता के चेहरे पर जिस तरह सूरज की हरकतों से हवाइयां उड़ रहीं थी, उसे देख कर मुझे लग रहा था कि उस समय मेरी बीवी की पैंटी और उसका घाघरा तक उसकी चूत से निकले हुए पानी से जरूर भीग गया होगा।

सूरज से मेरी मुलाक़ात भी औपचारिकता से कुछ बढ़ कर लगी मुझे। सूरज मेरे करीब आया और मुझसे हाथ मिलाता हुआ बोला, “तुम दोनों से मिल कर बहुत अच्छा लगा मुझे। देखो राज, मेरी बात को ध्यान से सुनना और समझना।

अच्छे दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। जीवन में अच्छे दोस्तों से दोस्ती बनाये रखना। मुझे तुम और तुम्हारी पत्नी अपना बहुत ही करीबी और अच्छा दोस्त समझना। तुम मुझसे और किरण से दोस्ती करके निराश नहीं होंगे।”

यह कह कर सूरज ने अपनी जेब में से अपना विज़िट कार्ड निकाला, और मेरे हाथ में थमा दिया। उसमें सूरज और किरण दोनों के सेल फ़ोन नंबर थे। सूरज ने कहा, “तुम मुझे या किरण को आधी रात में भी फ़ोन कर सकते हो। याद रहे मुझे या किरण को बेधड़क फ़ोन करने से बिल्कुल मत हिचकिचाना।”

सूरज के फ़ोन पर उसके बाद तुरंत ही एक फ़ोन कॉल आ गया। शायद कुछ जरुरी सा कॉल था। हमने एक दूसरे से “हेलो, हाय” किया और वह अपनी कार में और मैं अपनी मोटर साइकिल पर बैठ कर, अपनी-अपनी पत्नीयों के साथ, हम दोनों अपने-अपने घर जाने के लिए निकल पड़े।

इस मुलाक़ात के दूसरे दिन जब रीता और किरण मिले तब किरण रीता का हाथ पकड़ कर एक तरफ ले गयी, और किरण ने रीता की पीठ थपथपाते हुए रीता से कहा, “रीता, कल मेरे पति ने कुछ ज्यादती ही कर दी थी तुम्हारे साथ। पर तुमने उसका साथ दिया इसके लिए थैंक यू यार।

मेरे पति ने उनके इस तरह के बर्ताव के लिए सॉरी कहा है। सॉरी कहते हुए उन्होंने तुम्हारे लिए यह उपहार भेजा है। मेरे पति जब भी सॉरी अथवा थैंक यू कहते है, तो कोई ना कोई उपहार जरूर भेजते हैं।” यह कह कर किरण ने अपने हैंडबैग में से एक निहायत ही खूबसूरत पर्स निकाला और रीता के हाथ में थमा दिया।

पर्स काफी खूबसूरत और महंगा था। रीता कुछ हिचकिचाए या मना करे उसके पहले ही किरण ने वहां से चलते हुए कहा, “मेरे पति ने दोनों हाथ जोड़ कर यह रिक्वेस्ट की है कि इसके लिए तुम मना मत करना। तुम्हारे साथ की इस मुलाक़ात के बाद मेरे पति तो वाकई तुम्हारे दीवाने हो गए हैं। वह फिर से तुमसे मिलना चाहते हैं।” रीता जाती हुई किरण को देखती ही रह गयी।

रीता ने जब पर्स खोला तो उसके अंदर “थैंक यू” लिखी हुई एक पर्ची मिली और स्त्रियों के प्रसाधन का कुछ महंगा सामान भी मिला।

रीता किरण और सूरज के ऐसे अपनापन भरे बर्ताव से खुश हो कर क्लास में चली गयी। इस मुलाक़ात के बाद किरण और रीता का रिश्ता काफी घना होता गया। रीता की स्कूल में किरण शिक्षक अच्छी मानी जाती थी। बच्चों को अच्छे तरीके से पढ़ाती थी और शिक्षक वर्ग और बच्चों में काफी लोकप्रिय थी।

वैसे किरण काफी परिपक्व थी पर जैसे ही क्लास ख़तम होता था और रीता से मिलती थी तो किरण की शक्सियत एक-दम बदल जाती थी। रीता के कहने के अनुसार तो किरण जब रीता से मिलती थी, तो मिलते ही वह एक शिक्षक नहीं एक चुलबुली नटखट छोटी सी नन्ही लड़की बन जाती थी।

किरण रीता का हाथ थाम कर उससे कई तरीके की बातचीत करने लगती थी। अक्सर किरण का कहना यही होता था कि जिंदगी जीने के लिए है, रोने-धोने के लिए नहीं। रोने-धोने के लिए तो पूरा जीवन पड़ा है। जवानी तो मौज करने के लिए है और रीता को भी बिंदास हो कर जिंदगी का आनंद लेना चाहिए।

रीता घर वापस आ कर किरण की कही हुई बात जब मुझे कहती थी, तब मैं उसे यही कहता था कि मेरा भी वही मानना था कि जिंदगी को एन्जॉय करना चाहिए।

किरण ने अपनी जिंदगी के बारे में मेरी पत्नी रीता से कई तरह की बातें की। किरण ने शादी के पहले अपने एक बॉयफ्रेंड से शारीरिक सम्भोग का आनंद लिया था। यह बात किरण ने उसके पति सूरज को शादी से पहले बता दी थी। सूरज ने भी किरण की इस बात को स्वीकार कर लिया था। उसे इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी।

सूरज के भी शादी से पहले कुछ लड़कियों से शारीरिक सम्बन्ध थे। यह सब सुन कर रीता काफी हैरान थी। रीता उसकी जो भी बात किरण से होती थी उसके बारे में मुझे बताती रहती थी।

रीता की परवरिश कुछ अलग से माहौल में होने के कारण उसके लिए किरण की बातों को एक-दम स्वीकार करना कुछ मुश्किल सा तो था। पर टीवी इंटरनेट और दूसरे मीडिया के माध्यमों से मर्यादाओं का दायरा छोटा होता जा रहा था। वह रीता भी समझ रही थी।

कॉलेज के समय की जवानी की तरंगें रीता ने भी अनुभव की होंगी। रीता ने मुझे यह भी कहा था कि कॉलेज में उसके पीछे दो लड़के पड़े हुए थे। उसकी दोस्ती उनसे हुई थी और वह दोनों लड़के रीता से छेड़-छाड़ करते रहते थे। पर रीता ने उन्हें ज्यादा मौक़ा नहीं दिया और बात वहीं ख़तम हो गयी। यह रीता का कहना था। वास्तव में कुछ हुआ या नहीं वह तो रीता ही जाने।

मेरी पत्नी रीता एक साधारण माध्यम वर्ग के परिवार से थी और उसी तरह के संस्कार उसके माता-पिता ने उसे दिए थे। अक्सर हमारे यहां माध्यम वर्ग के परिवार में लड़कियों को हिदायत दी जाती है कि वह लड़कों से ज्यादा घना संपर्क ना रखें और अकेले में, सुनी, अनजानी या अंधेरी जगहों पर लड़कों से ना मिलें। लड़कियों के जाने-आने के समय पर भी माँ-बाप काफी सख्त निगरानी रखते हैं। आजकल के माहौल में यह ठीक भी है।

रीता को अक्सर उसके कॉलेज में रीता के दोस्त लड़के लडकियां पटाखा कह कर बुलाते थे। इससे आपको अंदाजा हो जाएगा कि रीता दिखने में काफी खूबसूरत थी। रीता के फिगर की ख़ास बात यह थी कि उसके मम्मे और उसके नितम्ब भारी और फ़ौरन ध्यान आकर्षित करने वाले थे।

रीता के स्तनों के लिए मैं यही कहूंगा कि रीता के स्तन भारी होने के बावजूद भी जब नंगे होते थे कभी झुके हुए नहीं होते थे। रीता के स्तनों की निप्पलें हमेशा ऊपर की ओर दिखती हुईं उत्तेजक स्थिति में फूली ही नजर आतीं थीं। रीता ने अपना वजन काफी नियंत्रण में रखा था। चेहरा गोल और नाक नक्श काफी सुरम्य और सरल होने के कारण रीता निहायत ही खुबसुरत दिखती थी।

रीता काफी हद तक कमल हसन की बेटी श्रुति हसन की तरह दिखती थी। मैंने पहली बार रीता को देखते ही उसका नाम श्रुति रख दिया था। हालांकि रीता को यह नाम और तुलना दोनों पसंद नहीं थे। वह कहती थी, “मैं रीता ही ठीक हूँ।”

रीता कई बार मुझसे किरण से हुई बातों का जिक्र करती थी। वह कहती थी कि किरण और सूरज अपने जीवन में काफी खुले विचार रखते हैं। रीता के संस्कार उस तरह के विचारों से मेल नहीं खाते थे। तब मैं उसे यही कहता था कि शादी के कुछ सालों बाद पूरी परिपक्वता आने पर शादीशुदा जोड़े अनुभव करने लगते हैं कि जैसे हमें खाने में, कपड़े पहनने में, और घूमने फिरने में विविधता चाहिए, वैसे ही हमें सेक्स में भी कभी-कभी कुछ-कुछ विविधता चाहिए।

हाँ यह सच है कि साधारणतया तो घर का खाना ही अच्छा होता है पर कभी-कभी बाहर का खाना चाहिए। वैसे ही सेक्स में भी कुछ विविधता बुरी नहीं होती। यही मैं रीता को समझाने की कोशिश कर रहा था। पर शायद मुझसे कहीं ज्यादा किरण रीता को समझा रही थी और शायद मुझसे कहीं ज्यादा रीता की दोस्त किरण मेरी पत्नी रीता को समझा भी पा रही थी।

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