संस्कारी विधवा मां का रंडीपना 4

माँ बेटा

आरिफ अपने हाथों में एक बड़ी मोमबत्ती लिए खड़ा था, जिसे जला कर शायद वो कमरे को रोमांटिक बनाने वाला था।

मम्मी बदली हुई बेड की चादर और कमरे में महकते परफ्यूम की खुशबू को महसूस करती हैं। आगे बढ़ते हुए चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए बोली: “आरिफ जी, ये सब किस लिए? आपके हाथों में ये कैंडल?”

आरिफ: “कैंडल नाइट के लिए हैं। मैं अपने रिसॉर्ट पर खास मेहमानों को ही ये रूम सर्विस देता हूं। आप शायद आज की रात यहीं रुकेंगी, तो मैंने सोचा आपका थोड़ा मूड बदल दिया जाए। वैसे भी कविता ने मुझे आपका ख्याल रखने के लिए कहा था।”

मम्मी शर्माते हुए: “थैंक्यू आरिफ जी इस सब के लिए। अब नहाने के बाद काफी हल्का और ताज़ा महसूस हो रहा है।”

मम्मी अपने बालों से टॉवल खोलते हुए मिरर की तरफ बढ़ती हैं। आरिफ कैंडल को बेड के साइड टेबल पर रख कर अपने कदम कमरे से बाहर निकलने के लिए बढ़ाता है।

मम्मी मिरर के सामने खड़ी बालों को सुलझाते हुए आरिफ को जाता देख बोली: “आरिफ जी, आप कहां जा रहे हैं?”

आरिफ मुड़ कर मिरर की तरफ देखते हुए: “वो, मैं अब दूसरे कमरे जा रहा हूं ताकि आप यहां आराम से सो सकें।”

मम्मी आरिफ की तरफ एक शरारती मुस्कान के साथ देखते हुए: “मैं अकेले में काफी डर महसूस करती हूं। आरिफ जी, आप यहां रहेंगे तो मुझे अच्छा लगेगा।”

आरिफ चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए बोला: “ठीक है, जैसा आपको अच्छा लगे। मैं सोफे पर अपनी रात गुजार सकता हूं।”

मम्मी हल्की स्माइल के साथ शर्माते हुए मिरर में खुद को संवारने लगती हैं। आरिफ सोफे पर बैठा मम्मी को ऊपर से नीचे तक निहार रहा था।

मैं मन ही मन कहा, “साला आरिफ कितना चालाक है। मां ने अभी एक मर्द से अपना शारीरिक संबंध ठीक से बनाया भी नहीं और ये उन्हें अपने जाल में फसाने लगा था।”

मम्मी अपने होंठों पर हल्की डार्क रेड लिपस्टिक लगा कर उसे मिरर में देख होंठों को होंठों से रगड़ कर सेट कर रही थी। आरिफ उन्हें ऐसा करते बड़े गौर से देख रहा था।

आरिफ मम्मी की उभरी हुई गांड और चिकनी टांगों से अपनी नज़रें हटा नहीं पा रहा था। मम्मी पीछे मुड़ कर जब देखती हैं कि आरिफ उन्हें ही देख रहा है, तो उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान उतर आती है।

आरिफ उन्हें देख हल्की स्माइल करते हुए: “आपकी सुंदरता बेमिसाल है, इस खूबसूरत जिस्म का मालिक बना जुनैद पर सूट नहीं करता है! अब उसकी वजह से ये ट्रिप इस तरह खत्म होगा, मुझे पता नहीं था।”

मम्मी आरिफ के साथ सोफे पर बैठते हुए: “आरिफ जी, मुझे भी दुख है कि हमारा ट्रिप यहीं खत्म हो रहा है। अब राहुल से रुकने के लिए मैं और बहाना भी नहीं कर सकती हूं।”

आरिफ मम्मी की आंखों में देखते हुए बड़े उदास मन से बोला: “मुझे दुख रहेगा कि मैं आपके लिए कुछ खास नहीं कर पाया।”

मम्मी आरिफ के हाथों को अपने हाथों में लेते हुए: “ओहो आरिफ जी, कैंपिंग पर जाना वो मेरे लिए खास ही था। घर जाने के बाद मैं ये सब बहुत याद करने वाली हूं।”

आरिफ मम्मी की आंखों में डूबते हुए: “वो कैंप पर आपका थैंक्स मेरे लिए काफी यादगार रहेगा।”

मम्मी शर्माते हुए: “ओह, वो तो बस छोटा सा थैंक्स था!”

आरिफ अपने होंठों को मम्मी के होंठों के करीब लाकर, अपना एक हाथ उनकी जांघों पर रखते हुए बोला: “मेरे लिए वो बहुत खास वक्त था, यही खास पल है जो बस मैंने तुम्हारे साथ बिताया था।”

मम्मी उसकी आंखों की गहराई में डूबते हुए, अपने बदन को आरिफ के नज़दीक लाकर बड़े कामुक लहजे में बोली: “आरिफ जी, मुझे महसूस करो… मैं अभी यहीं आपके पास हूं।”

मम्मी की जांघों पर आरिफ का हाथ उन्हें गर्म और उत्तेजित कर रहा था। उनकी लंबी-लंबी सांसें भरने से चूचियां उभर कर आरिफ की मजबूत छाती से टकरा रही थी। दोनों एक-दूसरे की आंखों में खोए हुए थे। आरिफ का मूसल पजामे में अपनी हरकतें करना शुरू कर चुका था। मम्मी के होंठों पर एक प्यास उमड़ उठी थी, जो आरिफ के होंठों के बीच जाकर चूस जाने को तैयार हो चुकी थी।

आरिफ मम्मी की गर्माहट को अब समझ चुका था कि वो अब उसके जाल में फँस चुकी थी। आरिफ ने मम्मी की नंगी जाँघों पर रखा हुआ हाथ उनकी चूत के और नज़दीक रख दिया। मम्मी अपनी आँखें बंद कर लेती हैं, जिसे देख कर आरिफ समझ जाता है कि अब उसका रास्ता साफ हो गया था।

आरिफ बिना देरी किए अपने होंठों को मम्मी के होंठों पर रख देता है। मम्मी अपने नर्म और कोमल होंठों पर आरिफ के गर्म होंठ पाते ही सिसक उठती हैं। मम्मी अपने हाथों को आगे बढ़ा कर आरिफ की पीठ को जकड़ लेती हैं। आरिफ मम्मी के होंठों का रस बड़े विस्तार से चूस रहा था। उसकी यह अदा मम्मी को और पिघला रही थी, वो अब आरिफ की बाहों में कसमसाने लगी थी।

मम्मी का जिस्म अब एक नए मर्द की गर्मी पाकर ऐसे छटपटा रहा था, जैसे गर्म तवे पर पानी की बूंदें गिर जाने के बाद छटपटा कर धुआं हो जाती हैं।

मैं देखकर हैरान हो गया कि मेरी माँ इतनी जल्दी आरिफ के हवाले कैसे हो रही थी। मुझे जुनैद से मम्मी का जिस्मानी रिश्ता खत्म होने का इंतज़ार था। यहाँ मेरी माँ आरिफ के आगे अपनी टाँगें फैलाने को तैयार हो रही थी।

आरिफ मम्मी के होंठों को चूसते हुए अपना हाथ उनकी जांघों से हटा कर उनके बूब्स पर रख देता है। मम्मी आरिफ का हाथ अपने बूब्स पर महसूस करते ही अपने जिस्म में सिहर उठती हैं।

मम्मी अपनी आँखें खोल कर आरिफ के होंठों को जबरदस्त तरीके से चूसती हैं। आरिफ मम्मी की नाइटी की स्ट्रैप्स कंधों से नीचे कर उनके दोनों बूब्स आज़ाद कर देता है।

मम्मी के दोनों गोल, उभरे हुए, चमकदार बूब्स आरिफ की कातिल नज़रों को अपनी तरफ खींच रहे थे। आरिफ मम्मी के होंठों को चूसते हुए अपने एक हाथ से उनके निपल्स मसल रहा था। आरिफ का ऐसा करना मम्मी को और चरमोत्कर्ष तक ले जा रहा था।

मम्मी आरिफ के होंठों से अपने होंठ अलग कर हाँफते हुए बोली: “आरिफ जी, आप मुझसे यही चाहते थे ना? मैंने आपकी आँखों में कई बार महसूस किया था।”

आरिफ: “हाँ, जुनैद के साथ तुम्हें देख कर मुझे जलन होती थी।”

मम्मी आरिफ की आँखों में देख उसके होंठों पर अचानक एक जोरदार किस्स कर देती हैं। फिर उसके ऊपर सवार होकर अपने बूब्स आरिफ के मुँह पर रगड़ते हुए गहरी-गहरी साँसें लेती हैं। आरिफ सोफे के सिरहाने सिर टिकाए मम्मी की दोनों टांगों के बीच बैठा था। उसके हाथ मम्मी की कमर को सहलाते हुए उनकी नाइटी को ऊपर खिसका रहे थे।

मम्मी की नाइटी उनकी कमर में अटक जाती है। उनकी रसभरी, चिकनी, कोमल गांड रेड ट्रांसपेरेंट नेट वाले कपड़े की पेंटी में अब तक कैद थी। आरिफ मम्मी की दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूस रहा था। चूचियों के हर कोने पर आरिफ अपने दाँतों की हल्की चुभन से मम्मी को और कामुक किए जा रहा था।

मम्मी अपने बालों को नोचते हुए बोली: “आह… आह… ह्ह्ह… स्स्स्स… उफ़्फ्फ़… आईईईई! आरिफ जी, आपकी ये अदा मुझे कामुक कर रही है… उफ़्फ्फ़! हम ठीक तो कर रहे हैं? मैं आपके साथ हूँ, ये जुनैद को…”

आरिफ मम्मी की चूचियों से मुँह हटाते हुए बोला: “ओहो सविता, तुम अभी उस नौकर के बारे में सोच रही हो? तुम जैसी खूबसूरत हसीना मेरे जैसे कामयाब मर्द की बाँहों में अच्छी लगती हो।”

मम्मी आरिफ के होंठों को चूस कर बोली: “माफ करना आरिफ जी, आप दोनों दोस्त हैं, इसलिए मुझे सोचना पड़ा! उफ्फ्फ्फ आईईई… वैसे आप उस नौकर से ज़्यादा हॉटनेस वाले मर्द हैं।”

मम्मी उसकी गोद में बैठी हुई अपनी गांड उसके मूसल पर रगड़ कर उसे उकसा रही थी, उसका मूसल पजामे के अंदर कैद अपनी आज़ादी की गुहार लगा रहा था। उसका गठीला मोटा मूसलदार लंड अब माँ की गांड की फांकों में गहरी चुभन कर रहा था, उस चुभन से माँ चरम सुख की सीमा के नज़दीक जा रही थी।

मम्मी आरिफ की गोद से उतर कर ज़मीन पर खड़ी हुई। फिर होंठों पर एक कातिल मुस्कान लिए, उन्होंने अपने हाथ आगे बढ़ाकर आरिफ का कुर्ता उतार फेंका। आरिफ की मज़बूत छाती और गठीले बदन को देखकर मम्मी ने धीमे से कहा — “उफ़्फ़… आरिफ जी, आपके ये सिक्सपैक बदन को अकेले में देखने के लिए मैं कब से तड़प रही थी।”

मम्मी ज़मीन पर घुटनों के बल बैठती हैं, फिर उसके पजामे की डोरी खोल कर मूसलधार लंड को आज़ाद करती हैं। उसे अपनी कोमल मुट्ठी में लेते हुए बोली: “आपकी तरह आपका मूसल भी काफ़ी फ़ौलादी है। आप उस दिन नदी किनारे इसे जानबूझकर नहीं छुपा रहे थे ना… ताकि मैं देख सकूं?”

आरिफ मम्मी के खुले बालों को चेहरे से साइड करते हुए बोला: “जान, बस तुम्हें पाने के लिए…”

मम्मी शर्माते हुए बोली: “आरिफ जी, दीदी से आपकी इतनी तारीफ़ें सुनी थी कि मेरा भी मन हुआ… आपका मूसल देखने का। उफ़्फ़्फ़… आपका सुपाड़ा तो कमाल का है…”

मम्मी आरिफ की तरफ मुस्कुराते हुए लंड को ध्यान से देख रही थी। उसके आकार और मोटाई को अपने कोमल हाथों की मुट्ठी में नाप रही थी। आरिफ का लंड मम्मी के हाथों में धीरे-धीरे और मोटा, लंबा होता जा रहा था। मम्मी उसकी लंबाई और मोटाई का अंदाज़ा अपने हाथ की कलाई से लगाते हुए आरिफ की ओर शरमा रही थी।

मम्मी आरिफ को एक कातिल मुस्कान देते हुए लंड के सुपाड़े को हल्के से चूमती हैं, फिर अपनी जीभ को हल्का-सा बाहर निकालकर लंड के निचले हिस्से से लेकर सुपाड़े तक जीभ फेरती हैं।

मम्मी की इस अदा से आरिफ अपनी आँखें बंद कर लेता है, फिर एक गहरी साँस अंदर लेकर बाहर छोड़ते हुए कहता है: “आह उफ्फ… सविता, तुम बहुत हॉट हो! काश मेरी पहली मुलाकात तुमसे हुई होती!”

मम्मी इस तरीके से दो बार करती हैं, उसके लंड के चारों तरफ अपनी गीली जीभ फेरते हुए उसके मूसल का स्वाद ले रही थी। फिर मम्मी आरिफ की तरफ देखती हैं, जो अपनी आँखें बंद किए मीठे एहसास को महसूस कर रहा था। मम्मी उसके सुपाड़े को अपने होंठों के बीच जकड़ कर उसका एहसास दुगना कर रही थी, होंठों को टाइट करते हुए वो लंड को धीरे-धीरे मुँह के और अंदर तक ले रही थी।

आरिफ मम्मी के बालों में अपना हाथ फेरते हुए मीठे एहसास का पूरा मज़ा ले रहा था। उसकी हल्की और भारी “आह… उफ्फ…” की आवाज़ों से लग रहा था कि उसे बहुत मज़ा आ रहा था। मम्मी के मुँह की गर्मी उसके लंड को एक अलग जन दे रही थी। मम्मी अपने होंठों को टाइट करके सिर को ऊपर-नीचे करते हुए लंड चूस रही थी।
मम्मी कुछ देर में ही उसके लंड को अपने थूक से चिकना और चमकदार कर देती हैं। फिर उसके गोरे अंडों को मुँह में लेकर उन्हें एक अलग मज़ा देती हैं।

फिर माँ चेहरे पर मुस्कान लिए खड़ी होती हैं और अपनी पैंटी को उतार कर नाइटी को भी उतार फेंकती हैं। आरिफ को तीखी मुस्कान करते हुए उसे बिस्तर पर आने का इशारा करती हैं। मम्मी बिस्तर के पास जाकर किनारे पर लेट जाती हैं, फिर अपनी टांगों को अपने पेट की तरफ मोड़कर आरिफ को चूत की तरफ इशारा करती हैं। आरिफ मम्मी के इस अंदाज़ पर मुस्कुरा जाता है कि एक हसीन उसे अपनी चूत चाटने को बोल रही थी। आरिफ उनके करीब जाता है, फिर उनकी टांगों को फैलाकर सीधा अपनी जीभ उनकी गर्म और रस से चिपचिपी चूत पर धर देता है।
आरिफ चूत के दाने को मुंह बाहर के, उसे अंदर ही अंदर अपनी जीभ से रगड़ रहा था। मम्मी आरिफ के ऐसा करने पर हल्का-हल्का कराह रही थी।

मम्मी आरिफ के सिर को अपनी चूत में ऐसे दबा रही थी, जैसे वो उसका सिर उसमें घुसाना चाहती हों। मम्मी कराहते हुए सिसकारियाँ भरने लगी, अपनी तेज़ साँसों को सँभालते हुए बोली: “उफ्फ्फ्फ आईईईई… आरिफ जी, और करो, काटो मेरे दाने को… उफ्फ्फ्फ, प्लीज़ रुकना मत… ओह्ह… आह्ह…”

आरिफ अचानक अपना मुँह चूत से हटा कर खड़ा हो जाता है। मम्मी उसे गुस्से में देखते हुए बोली: “आरिफ जी, आप रुके क्यों? मैं तो झड़ने वाली थी!”

आरिफ अपने मूसल को मुठियाते हुए बोला: “जान, मेरा मूसल लंड तुम्हारे रस को चखना चाहता है।”

मम्मी मुस्कराते हुए बोली: “ओह, प्लीज़ जल्दी डालो मेरे अंदर अपना ये फौलादी मूसल…”

आरिफ लंड को चूत के मुहाने पर रख कर मम्मी को एक स्माइल करता है। मम्मी जवाब में अपनी टाँगें और फैला लेती हैं। फिर आरिफ हल्के धक्के में अपना मूसल मम्मी की चूत में उतार देता है। मम्मी के अंदर लंड जाते ही उन्हें जैसे तीखी मिर्ची लगने का असर होता है, जिससे वो अपनी मुट्ठियों में चादर समेट लेती हैं। वो अपनी आँखें आरिफ से मिलाते हुए एक लंबी चीख मारती हैं।

आरिफ उनके दर्द की परवाह ना करते हुए एक धक्का और मारता है, जिससे उसका पूरा मूसलदार लंड मम्मी की बच्चेदानी से जा टकराता है। पूरा लंड जाते ही माँ की एक ज़ोरदार चीख निकल जाती है, वो दर्द से कसमसा रही थी।

आरिफ अपने धक्कों की गति को तेज़ करता है, ताकि उन्हें दर्द का आनंद मज़े में मिल सके। मम्मी थोड़ी देर में ही सिसकियाँ भरने लगती हैं, वो आरिफ को अपने ऊपर बुला लेती हैं। फिर आरिफ मम्मी के ऊपर चढ़ कर उन्हें किस्स करते हुए अपने तेज़ धक्कों से चोदता है।

थोड़ी देर में मम्मी झड़ जाती हैं, पर आरिफ को अंदर झड़ने से रोक देती हैं। मम्मी आरिफ की तरफ पलट कर उसके मूसल को मुँह में लेती हैं और लंड के झड़ जाने तक उसे चूसती रहती हैं। आरिफ के मूसल की गाढ़ी मलाई चखने के बाद मम्मी उसके साथ कुछ देर आराम करती हैं। आरिफ जल्दी ही दूसरे राउंड के लिए तैयार हो जाता है। आरिफ अपने खड़े लंड को मसलते हुए कहता है, “जान, अब इसे अपनी गदराई गांड का रस चखा दो।”

मम्मी मुस्कुराते हुए लंड को हाथों में लेकर बोली: “ओह, तो जनाब को मेरे दूसरे रास्ते में जाना है? ठीक है, मैं बाथरूम से आकर मूसल के साथ कैंडल नाइट का मज़ा लेना चाहूंगी!”

जब तक मम्मी बाथरूम से बाहर आई, आरिफ ने मोमबत्तियाँ जला कर कमरा तैयार कर दिया था। मम्मी बाथरूम से बाहर आई और आरिफ से लिपट गई। उन्होंने उसके होंठों पर चुम्बनों की बौछार कर दी। आरिफ मम्मी को बिस्तर पर ले आया और उन्हें एक टट्टू पर बिठाया और उनकी गांड पर क्रीम लगा कर अपना लंड उनके मुँह पर रख दिया। मम्मी ने उसे बीच में ही रोक दिया और पहले लाइट बंद करने को कहा।

कमरे में लाइट बंद होने के बाद बस कैंडल की रोशनी रह गई थी। कमरे में इतनी ही हल्की रोशनी थी कि आरिफ मम्मी के जिस्म के हर अंग को साफ़-साफ़ देख सकता था।

अब मुझे बस कैंडल की रोशनी में उनकी परछाई और हिलते हुए बदन की कामुक आवाजें ही सुनाई दे रही थी।

मेरी सविता माँ आज एक नए मर्द से चरमसुख का अनुभव एक नए तरीके से कर रही थी। आरिफ के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाने के बाद माँ जुनैद का क्या हल निकालती हैं,

अगले दिन मैं नाश्ते के लिए बाहर बगीचे में आया और सुबह की ताज़ी हवा ली। मैंने सोचा कि आज तो जुनैद के चेहरे पर वो उदासी देखूंगा जिसे मैं कई दिनों से देखना चाहता था।

माँ का आरिफ के साथ रात गुज़ारना मुझे अच्छा तो नहीं, पर बुरा भी नहीं लग रहा था। पर यह चुदाई दोस्तों में दरार लाने के लिए आखिर काफी थी। जुनैद माँ को दिल से प्यार करता है, इसलिए उसे इसका बुरा भी दिल से लगेगा। माँ का आरिफ के साथ चुदाई सुख पाने में मुझे अपनी कामयाबी नज़र आ रही थी।

कुछ देर बगीचे में बैठे रहने के बाद मैंने मौसी को आते हुए देखा जो चेहरे पर सुबह की ताज़ी मुस्कान लिए मेरी तरफ आ रही थी।

मौसी के पास आते ही मैंने उन्हें बड़े प्यार से कहा: “गुड मॉर्निंग मौसी, और कैसी हैं? आप अकेली आई, मम्मी कहाँ हैं?”

मौसी थोड़ा हिचकते हुए बोली: “गुड मॉर्निंग, राहुल। लगता है वो अभी अपने कमरे में हैं। तुम यहीं बैठो, मैं सविता को कमरे से नाश्ते के लिए बुला कर लाती हूँ।”

मौसी तेज़ कदमों से आरिफ के कमरे के पास जाती हैं, और मैं उनके पीछे जाता हूँ ताकि देख सकूँ कि अंदर सुबह का क्या माहौल चल रहा था।

मौसी गेट को बिना नॉक किए खोल कर सीधे अंदर चली जाती हैं। मैंने गेट की हल्की खुली दरार से अंदर देखा, मम्मी अपने आधे नंगे जिस्म को सफेद चादर में समेटे लेटी हुई थी।

मौसी उन्हें ऐसा देख हैरानी की जगह चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए देख रही थी। मौसी फिर बड़े धीरे स्वर में उन्हें हल्की आवाज़ देती हैं। उनकी दूसरी आवाज़ जब मम्मी के कानों में गूंजती है तो वो आँखों को हल्का खोलकर मौसी को देख चौंक जाती हैं।

वो अपने आधे नंगे जिस्म को सफेद चादर में ढकने की नाकाम कोशिश करती हैं। मौसी आगे बढ़ कर उनके करीब जाकर बेड पर बैठ जाती हैं।

फिर मौसी उन्हें बड़े प्यारे स्वर में कहती हैं: गुड मॉर्निंग बहन, लगता है रात काफी रोमांटिक रही है?

मम्मी ने चादर से हल्का-सा सिर बाहर निकाला और मौसी से शर्माते हुए कहा: ओह दीदी, वैसा कुछ नहीं, हम बस अलग थे!

मौसी बोली: मेरी बहन, छुपाने से कुछ नहीं होगा। मैं सब समझती हूँ। आरिफ जी जैसे दमदार और गठीले मर्द… ऊपर से तुम इतनी सुंदर हो कि एक कमरे में रात गुज़ारना मुश्किल ही रहा होगा। खैर, अब तुम जल्दी से बाहर आ जाओ। राहुल नाश्ते के लिए तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है।

मम्मी मौसी को गले लगाते हुए, चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए, बोली: थैंक्स, आपको बुरा नहीं लगा। मैं बस थोड़ा सा बहक गई थी। दीदी, आप राहुल को संभालो, मैं बस पाँच मिनट में आती हूँ।

फिर मौसी के साथ बगीचे में बैठ कर मैं उनका आने का इंतज़ार कर रहा था। तभी मुझे जुनैद आता हुआ दिख जाता है। जुनैद के चेहरे पर आज वो मुस्कान नहीं थी, जो अक्सर मम्मी के साथ रहने पर उसके चेहरे पर रहती थी। उसे ऐसे उदास देख मुझे मन ही मन काफी खुशी हो रही थी, पर बात अभी यहीं खत्म नहीं हुई थी, इसका मुझे डर था।

जुनैद हमारे साथ बैठ जाता है। वह मौसी से आरिफ और मम्मी के बारे में पूछता है। फिर किसी बहाने से वह मुझसे बात करके पूछता है कि हम अभी और यहाँ रुक रहे हैं? मैंने उसे सीधा और सिंपल जवाब में बता दिया कि आज मैं और नहीं रुकने वाला, मैं मम्मी को लेकर जा रहा हूँ। मेरा स्पष्ट जवाब सुन कर जुनैद की हवा टाइट हो जाती है। मेरे जवाब में मौसी भी साथ दे रही थी।

थोड़ी देर में मैंने मम्मी को आते हुए देखा। वह नेवी ब्लू ड्रेस पहने हुए गज़ब लग रही थी। उस ड्रेस में मम्मी की गोरी त्वचा पर जैसे आसमान की रोशनी उतर आई हो। गिरती धूप की रोशनी उनके कंधों पर पड़ रही थी, जो उनकी त्वचा पर एक सुनहरी चमक की तरह तैर रही थी।

नेवी ब्लू ड्रेस उनके जिस्म पर ऐसे ढली हुई थी जैसे किसी नर्म रेशम की परछाई। ड्रेस ऐसी थी कि उनकी चिकनी बाहें और बूब्स का ऊपरी हिस्सा नंगा ही चमक रहा था। उनके कंधों से आती ड्रेस के पतले स्ट्रैप्स मम्मी के गोल आकार के बूब्स के उभारों को थामे हुए थे। मम्मी के गोल आकार के बूब्स आज ड्रेस में कुछ ज़्यादा ही उभरे हुए चमक रहे थे।

मम्मी की कोर्सेट-स्टाइल ड्रेस की कटिंग उनके जाँघों से शुरू होती है और ड्रेस का निचला हिस्सा उनके घुटनों तक खत्म हो रहा था। जब-जब वह अपने कदमों को आगे बढ़ातीं, तो ड्रेस के दो हिस्से हो जाते और उनकी चिकनी थाई और टाँगें चमक जाती थी। हर मोड़, हर घुमाव को बस इतना छूता हुआ कि नज़र खुद-ब-खुद वहीं टिक जाए।

कमर के नीचे गिरता कपड़ा हवा के साथ हल्का-सा नाच रहा था, और उस हल्की लहर में जब ड्रेस की स्लिट खुलती, तो मम्मी की गाँड साफ उभर कर चमक जाती। बस उतनी झलक मिलती कि साँस थम जाए।

मम्मी के खुले बाल हवा में हल्के-हल्के उड़ रहे थे। कुछ लटें चेहरे पर आ गिरी हुई थी, और जब वह बालों की एक लट को कान के पीछे सरकाती — तो वो मर्द के लंड में जान सी डाल देती, ऐसा उनका स्टाइल था।

वह मुस्कराते हुए धीरे-धीरे हमारी तरफ बढ़ रही थी। उस मुस्कान में वह आरिफ के साथ रात भर की चुदाई का तीखा दर्द, सुकून की राहत, और एक अजीब-सा नया जूनून भी छुपाए हुए थी। उस पल में वह सिर्फ खूबसूरत नहीं, एक हॉट हसीना लग रही थी।

उनके साथ आता हुआ आरिफ भी आज खुशी से खिल रहा था। मम्मी के साथ जिस्मानी सुख पाने के बाद आरिफ अपनी खुशी को छाती चौड़ी करके दिखा रहा था। मम्मी के साथ आता देख जुनैद आरिफ को देख आग की तरह जल रहा था। मुझे आरिफ आज आग में डाला हुआ घी जैसा लग रहा था।

मम्मी मुस्कराते हुए हमारे पास आती हैं। फिर बिना जुनैद की तरफ देखे मौसी और मुझे बड़े प्यारे स्वर में गुड मॉर्निंग कहती हैं।

मौसी ने मम्मी को अपनी बगल वाली चेयर पर बैठने का इशारा करते हुए कहा: ओहो मेरी बहन, तुम तो आज गज़ब ही ढा रही हो! काफी हॉट और सुंदर लग रही हो।

मैं मौसी का साथ देते हुए बोला: हाँ मौसी आप सही कह रही हैं, मम्मी हॉट तो काफी लग रही हैं। वैसे मम्मी, आपने यह ड्रेस पूरे ट्रिप पर नहीं पहनी, क्या आज घर जाने के लिए खास बचा कर रखी थी?

मम्मी मेरा जवाब सुन कर थोड़ा शर्माते हुए और चेहरे पर एक कातिल मुस्कान लिए बोली: हाँ ऐसा ही, पर मैंने बचा कर नहीं रखी थी। (आरिफ की तरफ देखती हुई) आरिफ जी ने मुझे गिफ्ट में देने के लिए बचाकर रखी थी!

मैं: ओह, काफी अच्छी ड्रेस गिफ्ट की है। परफेक्ट फिटिंग और हॉट लुक आप पर सूट कर रहा है।

इतना सब सुन कर जुनैद की गाँड में जैसे और आग सी लग जाती है। वह मन ही मन आरिफ को गालियाँ दे रहा होगा, इसका मुझे अंदाज़ा हो रहा था। जुनैद खामोश बैठा हुआ बस मम्मी के होंठों की मुस्कान निहार रहा था। आरिफ उसके बगल में बैठा उसे खाने के लिए नाश्ता देता है, तो
जुनैद आग में फूटते लावे की तरह बोलता है: आरिफ भाई, मेरा मन नहीं है, आप खाओ…

मम्मी उसके गुस्से को देख कर बोली: क्या हुआ जुनैद जी? आपने अभी तक कुछ खाया भी नहीं है?

जुनैद बिना कुछ बोले वहाँ से चला जाता है। मौसी, आरिफ उसे रोकते हैं तो वह मन नहीं है इतना कह कर अपने कमरे में चला जाता है। उसके जाने के बाद आरिफ, मौसी, मम्मी एक-दूसरे का चेहरा देखते रहते हैं। आरिफ मौसी और मम्मी को अपना नाश्ता पूरा करने के लिए कहता है।

अब मुझे माहौल काफी पेनिक होता नज़र आ रहा था। मैंने मन ही मन कहा, अब मुझे सब पर, खास करके मम्मी पर, नज़र रखनी पड़ेगी जब तक हम घर नहीं पहुँच जाते हैं।

मैं उनके पास से बहाना करके हट जाता हूँ। फिर मम्मी के कमरे में जाकर एक बहुत ज़रूरी काम करके आता हूँ जिसे मैंने जुनैद के लिए प्लान किया हुआ था। जिसे मैं खास तौर पर मम्मी को और अपने पाठकों को बाद में बताने वाला हूँ। मैं लौट कर फिर उनके नज़दीक आकर छुप जाता हूँ, यही सुनने के लिए कि मेरे जाने के बाद ये लोग ज़रूर कुछ बातें करेंगे।

मम्मी उदास और हल्की घबराई हुई बोली: ओह! जुनैद इस तरह गुस्सा करेगा तो राहुल को भी शक हो जाएगा। राहुल को कुछ पता लगे इससे पहले मैं ही जुनैद से बात कर लेती हूँ। आख़िर वो अब क्या चाहता है?

मौसी: सविता, रात मैंने उसे समझाया पर वो एक ही बात पर अड़ा है। वो गुस्से में यहाँ कुछ गड़बड़ ना कर दे, आरिफ जी, आप ही समझाओ?

आरिफ मम्मी को सहारा देते हुए: आप लोग शांत रहो। वो ऐसा कुछ नहीं करेगा। ठीक है, मैं उससे बात करूँगा। आप मेरी मेहमान हैं, यहाँ मैं आपके साथ हूँ!

आरिफ उन्हें अपना दिलासा देकर उनकी घबराहट को कम कर देता है। वह मम्मी और मौसी के बीच में बैठा हुआ उनके लिए फिर से खुशी का माहौल बना रहा था। फिर मम्मी मौसी के साथ अपने कमरे चली जाती हैं, और आरिफ वहाँ से अपने किसी काम के लिए निकल जाता है।

कुछ घंटे बाद मम्मी मुझे बाहर लंच करने के लिए बुलाती हैं। जब मैं वहाँ गया तो मौसी और आरिफ वहाँ पहले से बैठे हुए थे। जब हम सभी साथ मिल कर लंच करने लगे तो-

आरिफ उदास मन से बोला: मैंने आप लोगों के घर जाने का इंतज़ाम कर दिया है। आप जा रही हैं तो अच्छा नहीं लग रहा है, इतने दिन हम सभी साथ रहे!

मौसी उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोली: आरिफ जी, अच्छा तो हमें भी नहीं लग रहा है। मेरा मन तो अभी यहाँ आपके साथ और समय बिताने का था!

मम्मी मौसी की तरफ़ शर्माते हुए: दीदी, अभी चार घंटे हैं जाने में, तब तक आप आरिफ जी के साथ समय बिता सकती हैं!

आरिफ मुस्कराते हुए: सविता जी, आपको अकेला छोड़ कर हम जाएँ, यह अच्छा नहीं लगेगा। क्यों ना‌ आप भी हमारे साथ चलें?

मम्मी शर्माते हुए: आरिफ जी, मैं यहाँ राहुल के साथ कुछ देर अकेले बैठना चाहती हूँ।

मौसी को उसके साथ जाकर अपनी आग शांत करना थी, पर आरिफ का मम्मी को अपने साथ चलने के लिए कहना मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

लंच करने के बाद मौसी मम्मी को एक कातिल मुस्कान देते हुए आरिफ के साथ चली जाती हैं। फिर मैं और मम्मी कुछ देर वहाँ बैठे बातें करते हुए थोड़ा टहल रहे थे।
तभी मुझे वहाँ जुनैद आता हुआ दिख जाता है। मैं उसके आने से पहले मम्मी के पास से बहाने से हट जाता हूँ। ताकि आज जुनैद की बातें मम्मी से फाइनल हो जाएँ, और छिप कर दोनों पर अपनी नज़रें गड़ा लेता हूँ।

जुनैद मम्मी के पास आकर बड़े धीरे और उदास अंदाज़ में बोला: जान, तुम मुझसे एक बार बात तो करो। मैं उस बात के लिए माफ़ी चाहता हूँ… मुझे इस तरह अकेला ना करो!

मम्मी जुनैद की आँखों में देखते हुए: जुनैद, मैं तुम्हें चाहती थी पर राहुल के लिए इस तरह बोल कर तुमने अब मेरा दिल दुखा दिया है…

जुनैद: जान, मेरा मतलब राहुल को अकेले छोड़ने का नहीं था। हम राहुल को शादी करने के बाद बताते तो वो मान जाता, ऐसा मेरा कहना था। जान, मेरी बात को समझो, वो मान जाएगा?

मम्मी: ओह जुनैद, प्लीज़! अब मैं इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती। तुम्हारे अंदर राहुल के लिए बहुत ही गलत सोच है। तुम्हें बोलने से पहले यह भी नहीं सोचा कि राहुल बेटे ने ही तुम्हें अपने घर में जगह दी और मैंने तुम्हें अपनी इज़्ज़त दी थी…

जुनैद गुस्से में आते हुए: ओहो! तो अब तू मुझे मेरी औकात दिखा रही है! तेरे बेटे को मैंने ही वो सब सिखाया है, साली, यह मत भूल।

मम्मी उसकी आँखों में अपनी नज़र गड़ाते हुए: ज़बान संभाल के जुनैद! अब तो मैं तेरी रखैल भी बनना पसंद नहीं करूँगी। औकात में तो सिर्फ तू मेरा नौकर है, इससे ज़्यादा तेरी कोई हैसियत नहीं…

जुनैद थोड़ा और आक्रामक हाव-भाव में आते हुए: साली, रंडी! तेरे अंदर इतनी जुर्रत? जिसका बिस्तर गर्म करके आ रही है ना, तुझे उसके बारे में कुछ नहीं पता। वह तेरी जैसी को रोज़ अपने बिस्तर की रंडी बनाता है। ख़ैर, अब तूने मेरी औकात की बात छेड़ी है, रंडी, तुझे तो बर्बाद करके ही दम लूँगा।

मम्मी जुनैद को एक थप्पड़ मारते हुए: तेरे जैसा दो कौड़ी का नौकर मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता…

मुझसे अब और देखा नहीं जा रहा था, मैं माहौल को और ख़राब होने से पहले मम्मी को आवाज़ लगाते हुए उनके पास जाने लगता हूँ। जुनैद मुझे आता हुआ देख कर वहाँ से चला जाता है। जब मैं मम्मी के पास पहुँचा तो जुनैद जा चुका था।

मैं मम्मी की नरम आँखों में देखते हुए: मम्मी, जुनैद और आपके बीच क्या हो रहा था? आपके बीच किस बात को लेकर बहस हो रही थी?

मम्मी घबराते हुए: राहुल, कुछ नहीं हुआ। तुम जाकर अपना सामान पैक करो, हम यहाँ से निकल रहे हैं।

मैं थोड़ा ऊँची आवाज़ में: मम्मी, आप मुझसे क्या छुपा रही हैं? मुझे बस बताइए, जुनैद आपके साथ यहाँ क्यों खड़ा था?

मम्मी: राहुल, बोला ना कुछ नहीं हुआ तो कुछ नहीं हुआ। अब जाओ!

मम्मी फोन इस्तेमाल करते हुए मेरे पास से अपने कमरे में चली जाती हैं। मैं उन्हें अकेला छोड़ देता हूँ ताकि वो थोड़ा खुद को संभाल सकें। आरिफ और मौसी फ़ौरन मम्मी के कमरे में जाते हैं। थोड़ी देर बाद ही आरिफ कमरे से गुस्से में बाहर आता हुआ जुनैद के कमरे की तरफ जाता है। जुनैद कमरे में अपना सामान पैक कर रहा था।

आरिफ अंदर घुसते ही: जुनैद, तूने सविता के साथ अभी यह क्या किया है…?

जुनैद: भाई जान, उस रंडी ने मुझे मेरी औकात दिखाई है। उसे अब मैं इतनी आसानी से नहीं छोडूँगा। भाई जान, आप उसकी तरफ़ से बोल रहे हैं, मुझे तो लगता है आपने ही उसको मेरे खिलाफ़ भड़काया है, वरना उस साली में इतनी हिम्मत नहीं थी।

आरिफ: हाँ, क्योंकि मुझे तेरी नीयत का साफ़ पता था। तू शादी करके सिर्फ उसके पैसों पर राज करना चाहता था।

जुनैद: भाई जान, आपने मेरे साथ अच्छी दोस्ती निभाई। भाई जान, वैसे मैंने उस रंडी के जिस्म के साथ उसका बहुत कुछ लूट लिया है। अब सविता आपको मुबारक हो…

आरिफ: क्या मतलब है तेरा? सविता को अब अगर तूने यहाँ छूने की भी हिम्मत की या… तेरी वजह से मेरी इज़्ज़त पर बात आई तो जुनैद, मैं तेरे साथ बिल्कुल अच्छा नहीं करूँगा!

आरिफ उसका गिरेबान पकड़ कर उसे कमरे से बाहर लेकर जाता है, फिर अपने होटल से भी भगा देता है। अब उसका यह तमाशा देखने में मुझे मज़ा आ रहा था। मैंने मन में ही कहा कि अभी तो तुझे मेरा सबक सीखना बाकी है जो मैंने आगे का प्लान किया हुआ था।

मैं तुरंत मम्मी के कमरे में जाते ही उनसे कहा: मम्मी, यह यहाँ चल क्या रहा है? मैंने बाहर देखा, आरिफ जुनैद को भगा रहा था। आख़िर तुम मुझसे क्या छुपा रही हो?

मौसी: राहुल, शांत हो जाओ। वह उन दोनों का मामला है। यहाँ ऐसा कुछ नहीं हुआ।

मम्मी अपना सामान पैक करते हुए: राहुल, प्लीज़ तुम यहाँ शांत रहो। मैं तुम्हें घर जाकर सब बता दूँगी।

मैं यहाँ कुछ इसलिए नहीं कर रहा था कि बेगाने शहर में मैंने कुछ कहा तो मेरी माँ की ही बदनामी हो जाएगी। फिर मैं मम्मी के कहने से भी खुद को शांत कर लेता हूँ ताकि वो भी घर जाने तक नॉर्मल रहें।

मम्मी अपने सभी कपड़ों के बैग पैक करने के बाद जब वह अपना पर्सनल हैंड बैग चेक करती हैं, तो वो चौंक जाती हैं और उनकी आँखों से आँसू आ जाते हैं। मैं पास जाते हुए अंदर देखा तो मुझे कुछ समझ नहीं आया था। मैं और मौसी जैसे ही उनसे पूछने जाते हैं तो इतने में मम्मी चक्कर खाकर नीचे गिर जाती हैं। मम्मी के होश में आने के बाद उन्होंने जो बताया?

जुनैद जाते-जाते मम्मी को बहुत बड़ा ज़ख़्म देकर गया था। दोस्तों, इस बात को याद करके ही मैं आपको अपनी यह कहानी बता रहा था।

मम्मी को इस तरह चक्कर खाकर गिरते हुए देख कर मौसी और मैं घबरा जाते हैं। मैं तुरंत उन्हें बेड पर लेटाता हूं। मौसी उनके पैरों की मालिश करती हैं और उनके चेहरे पर पानी की बूँदें गिरा कर उन्हें होश में लाने की कोशिश करती हैं। कुछ देर में आरिफ भी कमरे में आ जाता है। मम्मी को इस हाल में देख उसके भी पसीने छूट जाते हैं।

मैं घबराते हुए उसे किसी डॉक्टर को बुलाने के लिए कहता हूं। आरिफ तुरंत अपनी कार लेकर निकल जाता है। वो कुछ देर में एक नज़दीकी डॉक्टर को लेकर आता है। कुछ दवाई देने और चेक करने के बाद डॉक्टर ने कहा: “घबराने वाली बात नहीं है, बस छोटा पैनिक अटैक था। थोड़ी देर में ये ठीक हो जाएंगी। आप लोग बस इनसे अभी ज़्यादा सवाल-जवाब मत करना।”

करीब एक घंटे बाद जब माँ को होश आया, वो रोते हुए बोली: “मेरा हार गायब है!”

हम सब उन्हें शांत करने में लगे हुए थे। मैं उन्हें दिलासा देता हूं कि मेरे लिए तुम कीमती हो, हार नहीं! पर मम्मी को उसे खोने का बड़ा सदमा लग गया था। फिर मम्मी जैसे-तैसे अपने आप को शांत करती हैं। आरिफ उनकी हालत को देख कर उन्हें एक दिन और होटल में रुकने के लिए बोलता है।

मैं आरिफ की इस बात पर थोड़े गुस्सैल भाव से कहा: “आरिफ, आपके होटल में हमारा इतना बड़ा नुकसान हो गया है। तुम हमें और यहाँ रुकने के लिए बोल रहे हो!”

आरिफ: “राहुल, मुझे तुम्हारे नुकसान का अफ़सोस है। मैं बस सविता जी की हालत देख रोकना चाहता था। मैं तुम्हारा कीमती हार ढूँढ़ने में पूरी मदद करूँगा। जिसने भी ये गलती करी है, मैं उसका तुम्हारे सामने बुरा हाल करूँगा, राहुल, ये मेरा वादा है!”

मौसी मेरे करीब आकर बोली: “राहुल बेटा, आरिफ जी तुमसे बड़े हैं। इन पर गुस्सा मत करो। ये तो हमारी मदद ही कर रहे हैं!”

मैं: “जुनैद का भाव मुझे आज कुछ ठीक नहीं लगा था, आरिफ। तुम्हारे साथ उसका झगड़ा होना और मम्मी के साथ उसका ज़बान लड़ाना, मुझे लग रहा है यह उसने ही किया है।”

मम्मी बेड पर लेटे हुए बोली: “राहुल, तुम्हें क्या हो गया है? प्लीज़ शांत रहो। वो ऐसा क्यों करेगा भला?”

आरिफ मम्मी की तरफ देख कर बोला: “सविता जी, राहुल को लगता है अगर जुनैद ने हार चुराया है, तो मैं उसे ढूँढ़ कर छोडूँगा नहीं…”

मैं गुस्सैल भाव में कहा: “कोई मुझे बताएगा कि आपस में झगड़े क्यों हो रहे थे?”

मेरे इस सवाल से सब एक-दूसरे के चेहरे देखने लगते हैं। कुछ देर के लिए कमरे में खामोशी सी छा गई थी।

मौसी माहौल को देखते हुए बोली: “राहुल बेटा, सविता की तबियत खराब है। ये सब बात करने का देखो अभी ठीक समय नहीं है।”

कुछ घंटे बाद हमारे घर निकलने का समय हो जाता है। सारे बैग मैंने कार के पीछे रख दिए और फिर मैं मम्मी को लेकर आया। फिर मौसी को बुलाने कमरे में गया तो देखा मौसी आरिफ की बाहों में लिपट कर उसके होंठ चूम रही थी। आरिफ मौसी की गांड को अपने हाथों से मसल रहा था।

मेरे अचानक कमरे में घुसते ही कदमों की आवाज सुन दोनों घबराते हुए एक-दूसरे की बाहों से अलग होते हैं। मौसी अपनी नज़रें झुकाए हड़बड़ी में अपने आप को संभालती हैं।

मैं उन्हें इस हाल में देख पीछे पलट कर कहा: “बाहर गाड़ी तैयार है, आ जाओ।”

इतना बोल कर मैं कमरे से बाहर आ जाता हूं और आगे वाली सीट पर बैठ जाता हूं। थोड़ी देर बाद मौसी अपनी नज़रें मुझसे नीचे किए कार में मम्मी के साथ बैठ जाती हैं। फिर हम शांत बैठे स्टेशन की तरफ निकल जाते हैं।

पूरी रात सफ़र करने के बाद हम सुबह अपने घर पहुँच जाते हैं। सफ़र की थकान उतारने के लिए हम कुछ घंटे नींद ले रहे थे। मेरी आँख दिन की दोपहरी में खुलती है। मैं फ़्रेश होने के बाद अपने कमरे में लौट रहा था, तभी मैंने दूसरे कमरे में देखा, मौसी बैग पैक कर रही थी।

मैं उनके पास गया और कहा: “मौसी, आप ये क्या कर रही हो?”

मौसी पलट कर मेरी तरफ देख कर बोली: “राहुल, वो मैं अपने घर जाने की तैयारी… तुम्हारे मौसा जी का फ़ोन आया था। अब तुम सविता का अच्छे से ख्याल रखना!”

मैं: “मौसी, आज रात तक आप रुक जाती तो मम्मी को भी अच्छा लगता।”

मौसी: “राहुल बेटा, सविता को ऐसे अकेले छोड़ के जाने का मन तो मेरा भी नहीं है, पर क्या करूँ, तुम्हारे मौसा जी का ऑर्डर है!…”

मैं मौसी से आँखें मिलाते हुए कहा: “मौसी, वैसे आपसे एक बात पूछूँ?”

मौसी थोड़ा घबराते हुए बोली: “हाँ-हाँ, पूछो! ऐसी क्या बात है?”

मैं: “आरिफ और जुनैद के बीच क्यों झगड़ा हो रहा था, और वो मम्मी के साथ भी किसी बात को लेकर बहस कर रहा था?”

मौसी: “राहुल बेटा, देखो, आरिफ-जुनैद के बीच का झगड़ा तो मुझे भी नहीं पता क्यों हो रहा था, पर इतना पता है कि जुनैद सविता से कुछ डिमांड कर रहा था।”

मैं थोड़ा हैरानी से कहा: “मम्मी से क्या डिमांड कर रहा था वो?”

मौसी मेरे कंधों पर हाथ फेरते हुए: “राहुल, अभी इस बारे में मैं तुम्हें कुछ नहीं बता सकती हूं!”

मैं थोड़ा भावुक होकर कहा: “मौसी, जुनैद ने हार चुराया है, आप मुझे बता क्यों नहीं रहीं उसके बारे में?”

मौसी: “राहुल, देखो, सविता की अभी तबियत ठीक नहीं है। ऊपर से तुम ऐसे भावुक होगे तो कुछ ठीक नहीं हो पाएगा। तुम मेरी बात को समझो, सविता के ठीक होने के बाद तुम्हें सब पता चल जाएगा।”

मैं बोला: “मौसी, आरिफ तो जुनैद का दोस्त है, उसको तो जुनैद के बारे में सब पहले से पता ही होगा। ये जुनैद की चाल थी रिसॉर्ट पर जाकर हार चुराने की। मुझे लगता है इसमें आरिफ भी कहीं मिला हुआ था।”

मौसी: “राहुल, क्या बोल रहे हो? आरिफ जी भला ऐसी गंदी हरकत क्यों करेंगें!”

मैं: “ऐसा आपको लगता है, मुझे नहीं। कल जब मैं आपको बुलाने कमरे में आया था, तो मौसी, आप वैसे आरिफ के साथ उस समय क्या कर रही थी?”

मौसी अपना चेहरा घुमा कर दूसरी तरफ देखते हुए: “कुछ भी नहीं, मैं बस उन्हें बाय बोल रही थी!”

मैं: “मौसी, मैं इतना भी बेवकूफ़ नहीं हूं जितना आप समझ रही हैं। सच बताओ क्या चल रहा था?”

मौसी उदास आँखों में नर्मी लिए बोली: “राहुल, मैं आरिफ जी के साथ बस एक दोस्त के रिश्ते से गले लगी हुई थी। बाकी अभी तुम औरत के जज़्बात नहीं समझ पाओगे…”

मैं मौसी की आँखों में देखते हुए थोड़ा नर्म लहजे में कहा: “पर ये गलत है ना, मौसा जी के होते हुए आपका आरिफ के करीब जाना?”

मौसी अपनी आँखों में हल्के आँसू लिए: “राहुल, प्लीज़ इस बारे में उनको मत बताना।”

मैं: “मौसी, मैं इस बारे में किसी को नहीं बताऊँगा, मम्मी को भी नहीं!”

मौसी राहत की साँस लेते हुए मुझे गले लगाकर कहा: “राहुल, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी कि बेटा तुम समझदार हो!”

मैं मौसी के कान में धीरे से कहा: “मौसी, लेकिन मुझे बहुत बुरा लगा था, आपको आरिफ के साथ ये सब करते हुए देख कर। आप मुझे…”

मौसी मेरी आँखों में शरारत से देखते हुए बोली: “आप मुझे क्या? तुम मुझसे खुलकर बात कर सकते हो!”

मैं अपनी नज़रें झुका कर कहा: “मौसी, आपको जब से ट्रिप पर देखा है, आपको पसंद करने लगा हूं! आपको आरिफ की बाहों में देख कर मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा था!”

मौसी अपने दोनों कोमल हाथों से मेरे गालों को पकड़ते हुए: “क्या सच में, राहुल? तुम मुझे इतना पसंद करते हो?”

मैं उनकी आँखों की गहराई में देखते हुए बड़े धीरे स्वर में कहा: “हाँ, आप इतनी हॉट हैं कि नज़र हटाने का मन ही नहीं करता!”

मैं और मौसी एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए खो से जाते हैं। धीरे-धीरे मेरी दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थी। दोनों के होंठ एक-दम करीब आ चुके थे। मौसी मेरे कंधों पर अपने हाथों से दबाव बनाए, जैसे वो मुझे किस्स करने की छूट दे रही थी। मैंने एक नज़र उनकी आँखों पर डाली जो बंद पड़ी थी। मैं उनके हल्के खुले होंठों को देख कर अपने होंठों से जोड़ दिए।

होंठों का मिलन होते ही मौसी मुझे अपनी बाहों में जकड़ लेती हैं। उनके मोटे बूब्स मेरे सीने से चिपक जाते हैं। मौसी के नर्म और मोटे होंठों को चूसने में एक अलग आनंद आ रहा था। मौसी भी मेरा पूरा साथ देने लगी थी। मौसी एक तजुर्बेकार की तरह बड़े कामुक तरीके से अपने होंठों को मेरे होंठों से मिला कर चूस रही थी। उनकी ये अदा मेरे लंड में दोगुनी जान डाल रही थी।

मेरा लंड लोअर को फाड़ कर उनकी मोटी, चर्बीदार और गुच्छेदार चूत में ठोकर मारने लगा था। मौसी अपनी आँखें खोल कर मेरी आँखों में देखते हुए मेरे एक हाथ को पकड़ कर अपने बूब्स पर रख देती हैं। मैंने मौसी के बूब्स को हल्के-हल्के दबाना शुरू किया तो मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ उठा था। क्या बताऊँ दोस्तों, ऐसा एहसास पहली बार महसूस हुआ था।

मैं जोश में मौसी के होंठों को जबरन चूसने और काटने लगा था, एक हाथ से उनके बूब्स की पूरी गोलाई नाप रहा था। मौसी अपने दोनों हाथों से मेरा चेहरा पकड़े मेरा ज़ोरदार साथ दे रही थी। वो साथ में अपनी टाँगें खोल कर मेरे खड़े लंड को चूत के मुहाने पर रगड़वाने में लगी हुई थी। हम एक-दूसरे के होंठों को चूसते हुए बेड के किनारे तक कब आ जाते हैं, पता भी नहीं चलता। मेरी कमर बेड के किनारे टिक जाती है।

मौसी मेरे होंठों से अपने होंठों को जुदा करके चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए बोली: “तुम जवान तो हो गए हो, पर लगता है तुम्हें सब मुझे ही सिखाना पड़ेगा कि औरत को कैसे खुश करते हैं!”

मैंने मौसी के टॉप्स, ब्रा सहित ऊपर किए और दोनों बड़े बूब्स की दरार में होंठों को रगड़ते हुए कहा: “तो जल्दी सिखा दो ना, मौसी!”

मैं उनके एक बूब को मुँह भर कर चूसने लगा था। मौसी मेरे बालों में अपनी हाथों की उँगलियाँ घुमाते हुए सिसकारियाँ भर रही थी। मैं एक-एक करके दोनों बूब्स के निपल्स सहला कर अच्छे से चूस रहा था। उनके बड़े गोल साइज़ के बूब्स मेरे मुँह में सही से जा भी नहीं पा रहे थे, उफ्फ, पर मज़ा बड़ा आ रहा था। मौसी नीचे मेरे लोअर का नाड़ा खोल रही थी। मौसी ने मेरा लोअर नीचे खिसका दिया और मेरे टाइट लंड को अपनी मुट्ठी में थाम लिया।
उफ्फ, उनका हाथ लगते ही मेरे अंदर का लावा सा फूट जाता है। मेरे लंड ने, पहली बार किसी औरत के हाथों में जाते ही, अपनी अँगड़ाइयाँ तोड़ना शुरू कर दिया था।

मौसी ने एक नज़र मेरे लंड की तरफ देखा, फिर मेरी तरफ एक क़ातिल स्माइल करते हुए बोली: “उफ्फ, राहुल, कितना प्यारा लंड है तेरा। लगता है अभी तक किसी की चूत का रस नहीं चखा है इसने।”

मैं: “मौसी, मैंने तो अभी तक चूत देखी भी नहीं है!”

मौसी मुस्कराते हुए: “कोई बात नहीं बेटा, पहली चूत तू आज अपनी मौसी की देखेगा…”

मैंने झट से मौसी को बेड की तरफ घुमा कर उन्हें आधा बेड पर बैठा दिया। फिर मौसी की पजामी को कमर से पकड़ कर नीचे तक उतारता गया। मौसी की पैंटी भी मैंने एक झटके में उतार फेंकी। मौसी मेरा उतावलापन देख कर कातिलाना मुस्कान दे रही थी।

मैं पहली बार चूत को इतने करीब से देख कर भावुक हो उठा था। मौसी की दोनों टांगें हवा में फैला कर अपना मुंह चूत के करीब लाकर मैं एक प्यासे कुत्ते की तरह उसकी सुगंध ले रहा था। मौसी ने मेरे सिर पर एक हाथ रखा और हल्की सिसकारी भरते हुए बोली, “राहुल बेटा, अब देख क्या रहा है? कर ले अपनी सारी हसरतें पूरी… लगा दे मेरी चूत पर अपनी मुहर!”

मैं चूत की हल्की खुली फांकों की गुलाबी दरार को देख कर खो सा गया था। वहां से आती भीनी-भीनी सुगंध को और महसूस करने के लिए मैंने अपनी नाक सीधा चूत की फांकों में टिका दी थी। उफ़! वह नरम और गर्म एहसास मुझे पागल कर रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने चूत की दरार पर अपनी जीभ फेरनी शुरू कर दी।

मौसी मेरे सिर के बालों में हाथ फेरते हुए बड़े कामुक तरीके से सिसकारियां भर रही थी। वह अपनी कमर को इधर-उधर चला कर अपनी चूत को मेरे मुंह पर रगड़ रही थी। मैं भी चूत के उस लाल दाने को अपने दांतों और होठों में दबा कर अच्छे से चूस रहा था। मौसी की चूत की फांकों से निकलता रस मुझे बड़ा ही मीठा और नमकीन लग रहा था। जोश-जोश में मैं चूत को बुरी तरह चूस रहा था, जो मौसी को पागल कर रहा था।

मौसी ने मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में लेकर नोचते हुए लंबी सिसकारियां भरी, “उफ़्फ़ आह… राहुल, खा जाओ मेरी चूत… उफ़्फ़… लग ही नहीं रहा कि तुम पहली बार किसी औरत की चूत चाट रहे हो। इतना मजा तो कोई मंझा हुआ मर्द ही देता है… आह! सविता बहन, क्या बेटा पैदा किया है तूने… उफ़्फ़, मैं गई!”

मौसी हांपते हुए अपनी कामुक आवाज को दबाए अपनी कमर को तेजी से मेरे मुंह पर रगड़ते हुए झड़ गईं। मैं उनकी चूत को फिर भी लगातार चाटे जा रहा था। जब मौसी की चूत थरथरा कर पूरी तरह निचोड़ गई, तब मैंने अपना मुंह हटाया और एक गहरी सांस लेकर अपनी जीभ होंठों पर फेरी।

झड़ने के बाद मौसी थकान भरी आवाज में बोली, “राहुल बेटा, तूने तो मौसी को खुश ही कर दिया। सोचा नहीं था कि तुम इतने जवान हो गए हो, वरना बाहर मर्द ढूंढने की जरूरत ही नहीं पड़ती।”

मैं अपने लंड को हल्की मुठ दे रहा था। मौसी बेड से उतर कर जमीन पर अपने घुटनों के बल बैठ गईं और एक कातिल मुस्कान के साथ मेरा लंड अपने हाथों में ले लिया। मौसी बोली, “उफ़्फ़, बेटा कितना कड़क लंड है तेरा! ऐसे कच्चे-कोरे लंड की प्यास हम औरतों को हमेशा रहती है।”

मैंने मौसी के बालों को पकड़ कर उनके होंठों पर अपना लंड रगड़ते हुए पूछा, “मौसी, घर में ही कोरा लंड था, फिर भी आपने उस आरिफ को अपने नजदीक आने दिया?”

मौसी ने नजरें मिलाते हुए कहा, “राहुल बेटा, यह चूत की आग औरत को मजबूर कर देती है किसी भी मर्द के पास जाने के लिए!”

इतना बोल कर मौसी ने मेरे लंड के लिए अपने होंठ खोले और उसे मुंह के अंदर भर लिया। मेरा लंड आज पहली बार किसी औरत के मुंह की गर्मी को थर्मामीटर की तरह नाप रहा था। मौसी मुंह के अंदर ही अंदर मेरे लंड के अगले हिस्से पर जीभ फेर कर मुझे पागल किए जा रही थी। मैंने अपनी आंखें बंद की तो मुझे मां की आरिफ के साथ वह बेदर्दी वाली चुदाई नज़र आने लगी।

उफ़्फ़, बड़ा ही मीठा आनंद आ रहा था। मौसी लगातार मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। मैं जोश में उनके बालों को नोचता और कभी पूरा लंड उनके मुंह में पेल देता। पूरा लंड मुंह में जाते ही मौसी छटपटा जाती और मेरी जांघों पर अपने नाखून गड़ाने लगती। मैंने गुस्से में अपना लंड उनके गले तक उतार दिया और पूछा, “मौसी, सच बताना, आपने आरिफ के साथ सेक्स भी किया है ना?”

गले में लंड फंसा होने के कारण मौसी सिर्फ ‘हूं हूं हूं’ की आवाज निकाल पाई और आंखें बड़ी करके लंड बाहर निकालने का इशारा किया। जब मैंने अपना लंड मौसी के मुंह से बाहर निकाला तो वह हांफने लगी।

मौसी बोली, “राहुल, वह सब बातें जाने दो ना!”

मैंने फिर कहा, “मौसी, मुझे सब जानना है। आखिर रिसॉर्ट पर चल क्या रहा था? मेरा इतना महंगा हार चोरी हुआ है और मम्मी का जुनैद के साथ वह झगड़ा… आप लोग मुझसे क्या छुपा रहे हो?”

मौसी घबराते हुए और अपनी आंखें नरम करके बोली, “राहुल बेटा, हां मैंने आरिफ जी के साथ चुदाई का मजा लिया है। पर सविता की बात मैं तुम्हें नहीं बता सकती। अगर मैंने तुम्हें कुछ बताया तो मैं अपनी बहन की नज़र में बुरी बन जाऊंगी। इसलिए सारा सच तुम्हें खुद सविता से सुनना होगा! मैं बस इतना कह सकती हूं कि जुनैद अब तक सविता के पैसों पर मौज कर रहा था, और आगे भी करना चाहता है!”

पूरी बात बोल कर मौसी ने मेरे अंडकोष मुंह में भर लिए और उन्हें अच्छे से चूसने लगी, जिससे मेरा गुस्सा ठंडा होने लगा। मौसी ने मेरे लंड को अपने थूक से पूरा चिकना और ठोस बना दिया था। जब मेरा सुपारी वाला हिस्सा फूल कर टमाटर जैसा लाल हो गया, तब मौसी मुस्कुराते हुए बोली, “राहुल बेटा, अब तेरा लंड बिल्कुल तैयार हो गया है। आज तेरी मौसी की चूत खुशनसीब हो जाएगी तेरे इस कोरे लंड से अपनी नथ तुड़वाकर! उफ़्फ़, अब देर ना कर बेटा… डाल दे!”

मौसी बेड के किनारे आधी गांड बेड पर और आधी बाहर करके, टांगें फैलाए अपनी चूत की फांकें खोल कर मुझे ललचाई नजरों से देख रही थी। मैं अपने लंड को हल्का मुठियाते हुए आगे बढ़ा और उसे चूत की गीली फांकों पर रगड़ने लगा। तभी मेरे मन में विचार आया कि अगर मेरे कोरे लंड की नथ मम्मी की चूत में जाकर टूटती, तो कितना अच्छा होता… मां भी खुशनसीब हो जाती।

यह विचार आते ही मैंने मौसी की चूत पर अपना लंड और तेजी से रगड़ना शुरू कर दिया। उनकी चूत किसी भट्टी की तरह तप रही थी और वह लंड के इंतजार में पानी छोड़े जा रही थी। वह बार-बार लंड अंदर डालने के लिए मुझसे गुहार लगा रही थी।
इतने में बाहर से मम्मी की आवाज आई जो मुझे ढूंढ रही थी। उनकी आवाज सुनते ही मेरा लंड बेकाबू हो गया।

मैं इतना एक्साइटेड हो गया था कि जैसे ही मौसी की चूत पर अपना लंड रखा, तुरंत झड़ गया। मौसी ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे लंड से निकली मलाई समेटी और उसे चाटते हुए एक कातिल मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा।

मौसी बोली, “कोई बात नहीं बेटा, पहली बार में ऐसा अक्सर हो जाता है। कम से कम मुझे तुम्हारी मलाई चखने का मौका तो मिला, मेरे लिए इतना ही काफी है।”

मैंने मायूस होकर कहा, “मौसी, मैं तो आपको ठीक से चोद भी नहीं पाया और अब आप चली जाएंगी। क्या आज आप रुक नहीं सकतीं?”

मौसी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और एक लंबा किस लेकर बोली, “चिंता मत करो, अगली बार जब आऊंगी तो तुम्हें खूब मज़ा दूंगी। अब जल्दी से अपने कपड़े ठीक करो, वरना अगर सविता ने देख लिया तो बड़ी गड़बड़ हो जाएगी!”

उसके बाद मैं तुरंत कमरे से निकल कर बाथरूम की तरफ भागा, ताकि मम्मी को लगे कि मैं वहीं से आ रहा हूं। फिर मम्मी के पास बैठ कर थोड़ी देर बातें की, तब तक मौसा जी भी आ गए। मौसा जी चाय-नाश्ता करते हुए मम्मी से उनकी तबीयत का हाल पूछ रहे थे और मौसी दूसरे कमरे में तैयार हो रही थी।

मैं बहाने से फिर कमरे में गया और जाते ही मौसी को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया। मौसी उस समय सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी। मैंने बिना देर किए पीछे से अपने हाथ उनके बूब्स पर जमा दिए और उन्हें जोर से दबोच लिया।
मौसी ने गर्दन घुमा कर मेरे होंठों को चूमा और प्यार से बोली, “क्या हुआ मेरे बेटे?”
मैंने उदास मन से कहा, “मौसी, आप जा रही हैं और मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है।”

मौसी ने मुस्कुराते हुए कहा, “ओहो, कहीं तुम्हारा दिल अपनी मौसी पर तो नहीं आ गया? अब तो तुम्हारे मौसा जी भी आ गए हैं, वो मुझे साथ लेकर ही जाएंगे। पर कोई बात नहीं, जाने से पहले मैं तुम्हें अपना ढेर सारा प्यार देकर जाती हूं।”

फिर मौसी मुझे पागलों की तरह किस्स करने लगी। थोड़ी ही देर में उन्होंने अपना पेटीकोट कमर तक ऊपर किया और बेड पर अपनी टांगें फैला कर लेट गई। मैंने बिना वक्त गंवाए उनकी चूत चाटना शुरू कर दिया और उन्हें झड़ा दिया। इसके बाद उन्होंने मेरा लंड चूस कर मेरा सारा वीर्य पी लिया और चाट कर उसे बिल्कुल साफ कर दिया। फिर मौसी ने मुझे जल्दी से कमरे से बाहर भेजा और खुद तैयार होने लगी।

शाम होते-होते मौसी के जाने का वक्त हो गया। मम्मी उन्हें विदा करते समय भावुक होकर रोने लगी। उनके जाने के बाद मम्मी उदास होकर अपने कमरे में बैठ गई। रात को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में लेटा यही सोचता रहा कि अब आगे क्या करूं?

अगले दो दिन मम्मी मेरे सामने कम आने लगी और ज़्यादातर अकेले ही रहने लगी थी। जब मैं अपनी शॉप पर जाता, तो वहां कुछ कस्टमर जुनैद के ना होने की वजह पूछने लगते। एक कस्टमर ने तो यहाँ तक कह दिया, “आपके पिता जी आज-कल शॉप पर दिखाई नहीं दे रहे?” यह सुन कर मेरा खून खौल जाता था; हर कोई आकर उल्टी-सीधी बातें कर रहा था।

मेरी अपनी कुछ पार्टियों के लोग भी जुनैद से ही डील करना चाह रहे थे। जब मैंने सब को जुनैद की हकीकत बताई, तो सब सुन कर हैरान रह गए। यहाँ तक कि जुनैद ने मेरी एक पार्टी से जो कहा था, वो उन्होंने मुझे बताया, “राहुल जल्द ही मेरा बेटा बनने वाला है, आप लोग फिर मेरे साथ ही डील करना। मैं उसकी माँ सविता से शादी करूँगा, तो आप लोग बधाई देने ज़रूर आना।”

पार्टी वालों ने बताया कि जब उन्हें यकीन नहीं हुआ, तो जुनैद ने उन्हें अपनी और मेरी माँ की कुछ निजी तस्वीरें दिखाई, जिनमें वो उन्हें किस्स कर रहा था और उनके साथ हमबिस्तर था।

मेरा शॉप पर बैठना मुश्किल हो गया था, गुस्से से मेरा बुरा हाल था। जुनैद शॉप पर भी हमें बर्बाद कर गया था। पर इन सब के बावजूद मेरा प्यार माँ के लिए कम नहीं हो रहा था। आखिर उन्हें इस सब से बाहर निकालना और खुश रखना अब मेरा ही फर्ज़ था।

अगले दो दिन मैंने जैसे-तैसे काटे। फिर एक रात मैं माँ के कमरे में गया, तो देखा कि वो बहुत उदास बैठी थी। उनके चेहरे पर अब वो चमक और खुशी नहीं थी, जो जुनैद की चुदाई के बाद हर रोज़ झलकती थी। माँ ने अब फैशनेबल कपड़े पहनना भी छोड़ दिया था; वो एक साधारण, पैरों तक लंबी नाइटी पहने चुप-चाप बैठी थी।

मैं उनके पास गया और कहा, “मम्मी, यह क्या है? आप हमेशा ऐसे अकेले क्यों रहती हैं? ट्रिप से आने के बाद से आप मुझसे ठीक से बात तक नहीं कर रही हैं…”

मम्मी ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “बेटा, तेरा इतना कीमती हार मुझसे खो गया, मैं बस उसी शर्मिंदगी में खुद को संभाल नहीं पा रही हूं।”

मैंने जवाब दिया, “मम्मी, मेरे लिए आप कीमती हैं, वह हार नहीं! आप एक मामूली हार के लिए अपना दिल छोटा क्यों कर रही हैं?”

मम्मी बोली, “बात बस हार की ही नहीं है…”

मैंने जोर देते हुए कहा, “मम्मी, जो भी बात है मुझे साफ-साफ बताइए ना?”

मम्मी हिचकिचाते हुए बोली, “बेटा, मैं तुझे कैसे बताऊं, मुझे समझ नहीं आ रहा है।”

मैंने उनका हाथ थाम कर कहा, “मम्मी, आपने मुझे बेटे से ज़्यादा अपना दोस्त माना है, और एक दोस्त से तो हर बात कही जा सकती है।”

तभी मम्मी ने मुझे गले लगा लिया और मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए बड़ी उदास और डरी हुई आवाज़ में बोली, “मुझे जुनैद जी के बिना इस घर में अच्छा नहीं लग रहा है, मुझे उनकी कमी खल रही है…”

मम्मी के होंठों से जुनैद का नाम सुनते ही मेरा खून खौल उठा। मैंने एक झटके में मम्मी को खुद से अलग किया और दहाड़ते हुए कहा, “मम्मी! ये क्या बोल रही हैं आप? आपको शर्म नहीं आई मेरे सामने उसका नाम लेते हुए? आपको अंदाज़ा भी है कि उसने क्या किया है?”

मम्मी घबराकर बोली, “बेटा, मेरी बात तो सुनो…”

मैं बेड से उतर कर ज़मीन पर खड़ा हो गया और तेज़ आवाज़ में चिल्लाया, “बस! मुझे अब कुछ नहीं सुनना। आपने ही जुनैद को इस घर में इतना सिर चढ़ाया कि आज उसने हमें बर्बाद कर दिया!”

फिर मैंने मम्मी को वो सब दिखाया और बताया जो जाल मैंने खुद बुना था। मैंने उन्हें वे सबूत दिखाए कि कैसे जुनैद ने मेरी पार्टियों से झूठ बोल कर मोटी रकम वसूली थी। फिर मैंने उन्हें यह भी यकीन दिलाया कि वो हार भी जुनैद ने ही गायब किया था और उसका सौदा कर रहा था। मेरी हर बात उन्हें सच लगे, इसलिए मैं बहुत ही दुखी और उखड़े हुए अंदाज़ में ये सब कह रहा था।

मम्मी यह सब देख और सुन कर दंग रह गई, वो अपना माथा पीटने लगी।

मैंने गुस्से में कहा, “जुनैद के इतना सब करने के बाद भी आपको उसके बिना अच्छा नहीं लग रहा है? माँ, आख़िर आप चाहती क्या हैं? आज आपने जिस तरह से यह बात कही है, मुझे आपको माँ कहते हुए भी शर्म आ रही है! मैं अब पुलिस कंप्लेंट करके जुनैद को उसकी सजा दिलवाकर ही रहूँगा, चाहे फिर आपसे मेरा रिश्ता रहे या ना रहे।”

इतनी बात बोल कर मैं अपने कमरे की तरफ जाने लगा। मम्मी रोते हुए मेरे सामने आकर खड़ी हो गई और बोली, “बेटा, मेरी एक बात तो सुन ले…”

पर मैं बिना रुके अपने कमरे में आ गया और अकेले में अपने किए पर रोने लगा। उधर मम्मी भी अपने कमरे में रात भर रोती रहीं।

सुबह जब मैं उठा, तो देखा कि फोन पर मौसी की चार मिस कॉल थी। मैंने जब मौसी से बात की, तो उन्होंने कहा, “राहुल बेटा, सविता की बात सुन लो। ऐसा कुछ मत करो जिससे घर की और बदनामी हो जाए। अपनी मम्मी को गलत मत समझो, वो तुमसे बहुत प्यार करती हैं! प्लीज़ मेरी बात मानो।”

मौसी की बात सुन कर मेरा गुस्सा थोड़ा शांत हुआ। सुबह से रात हो गई, पर मम्मी ने बिना कुछ खाए-पिए खुद को कमरे में बंद रखा।

अगली सुबह, मैं तैयार होकर पूरे रौब के साथ घर से निकलने लगा, तभी मम्मी अपने कमरे से बाहर आई और सीधा मेरे पैरों में गिर गई। उनकी आँखों में आंसू थे और वो बुरी तरह सिसक-सिसक कर रो रही थी।

मम्मी बोली, “राहुल, मुझे माफ कर दे! तेरे सिवा मेरा दुनिया में कोई नहीं है। अगर तू भी मुझे छोड़ कर चला गया, तो मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊंगी।”

मैंने सख्त लहज़े में कहा, “मैं आपको माफ तो कर देता, पर मुझे एक बात समझ नहीं आ रही। आखिर आप मुझे जुनैद को सजा दिलाने से क्यों रोक रही हैं?”

मम्मी काँपती आवाज़ में बोली, “बेटा, क्योंकि सच्चाई बहुत बड़ी है, तू सुन नहीं पाएगा। और शायद यह सब जानने के बाद तू मुझे अपनी माँ कहलाने के लायक भी ना समझे।”

यह सुन कर मेरा लहज़ा थोड़ा नरम हुआ। मैंने कहा, “मैं आपसे हमेशा प्यार करूँगा, बस आप बताइए तो सही कि ऐसी क्या बात है जो आप उसे सजा देने से रोक रही हैं?”

मैंने मम्मी को सहारा देकर उठाया और उन्हें सोफे पर अपने साथ बिठाया। फिर उनका सिर अपने कंधे पर रख कर मैं प्यार से उनकी पीठ सहलाने लगा।

मम्मी सिसक-सिसक कर रोते हुए बोली, “बेटा, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई थी… मैं शायद माफ़ी के लायक भी नहीं हूं!”

मैंने उनका हाथ थाम कर कहा, “मम्मी, आप मुझे बेझिझक सब बता सकती हैं। मैं आपसे वादा करता हूं कि चाहे जो हो जाए, मैं आपसे हमेशा प्यार करता रहूंगा।”

मम्मी ने सिसकते हुए कहना शुरू किया, “बेटा, तेरे पापा के जाने के बाद मैं बहुत अकेलापन महसूस करने लगी थी। दिन तो जैसे-तैसे कट जाता था, पर रातें काटनी मुश्किल हो जाती थी। हर दिन मुझे उस प्यार और साथ की ज़रूरत महसूस होती थी, जो सिर्फ एक मर्द ही दे सकता है। जुनैद जी के घर आने-जाने और उनसे बातें करने से मेरा अकेलापन दूर होने लगा था। उनके साथ समय बिताते हुए मैं भावनाओं में बह गई और भूल गई कि मैं तेरे पापा की विधवा हूं। जुनैद से मिलने वाली खुशियां मुझे उसके साथ संबंध बनाने पर मजबूर कर गई। आखिर बेटा, मैं क्या करती? मैं भी तो एक औरत हूं…”

मम्मी मेरे कंधे पर सिर रख कर फूट-फूट कर रो रही थी और उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। मैं सब कुछ जानते हुए भी यह सारी सच्चाई उन्हीं के मुंह से सुनना चाहता था।

मैंने थोड़ा भावुक और हैरान होने का नाटक करते हुए कहा, “मम्मी, आपने मुझसे इतना कुछ छुपाया? वह घर का नौकर होकर आपकी इज़्ज़त पर हाथ डालने की हिम्मत कर गया!”

मम्मी रोते हुए बोली, “माफ़ कर दे बेटा, मैं अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हूं!”

मैंने और भी नर्मी से कहा, “मम्मी, आपने मुझे अपना दोस्त माना था, फिर भी मुझे यह सब बताना सही नहीं समझा? मैं भी तो आख़िर आपकी खुशियां ही चाहता था!”

मम्मी ने सिसकते हुए जवाब दिया, “बेटा, मैंने तुझे कई बार बताने की कोशिश की, यहाँ तक कि अपने बर्थडे पर भी हिम्मत नहीं जुटा पाई। मैं एक बहुत गलत माँ हूं, तेरा इतना कीमती हार भी नहीं संभाल पाई!”

मैंने उनकी आँखों में देखते हुए गंभीर आवाज़ में कहा, “मम्मी, अब मुझे सारा सच जानना है। आख़िर उस रिसॉर्ट में क्या हुआ था?”

मम्मी सिसकते हुए बोली, “बेटा, जुनैद भले ही घर का नौकर था, पर मुझे उसमें तेरे पापा की कमी पूरी होती दिख रही थी। मुझे वह मर्द का सुख मिला जो शायद मुझे पहले कभी नहीं मिला था। उसका प्यार पाकर मैं बिल्कुल पागल हो गई थी, उसकी हर बात मानना मेरे लिए जैसे तेरे पिता जी का हुकुम हो गया था। दिन-रात मैं बस उसे ही पाना चाहती थी। मैं उसके प्यार में इस कदर अंधी थी कि रिसॉर्ट पर बर्थडे मनाना तो बस एक बहाना था, हकीकत तो यह है कि उस रात मैं जुनैद के साथ वह कीमती हार पहन कर सुहागरात मना बैठी…”

मैंने मम्मी के सामने हैरान होने का झूठा नाटक किया और कहा, “मम्मी! आप इतनी हदें पार कर गई? आपने उस दो कौड़ी के नौकर को खुद को छूने दिया? आपने एक बार भी नहीं सोचा कि वह कौन है और क्या है?”

मम्मी बोली, “बेटा, जुनैद से वह सुख पाकर मैं अंधी हो चुकी थी। ट्रिप पर उसने मुझसे कहा कि वह अब मुझसे शादी करना चाहता है। यह सुन कर मुझे खुशी हुई कि अब समाज के सामने से मेरे ऊपर से विधवा होने का बोझ हट जाएगा। मैं उसे तुम्हारा पिता बनाना चाहती थी। पर जुनैद को डर था कि अगर तुम्हें हमारा रिश्ता पसंद नहीं आया, तो हम हमेशा के लिए दूर हो जाएंगे। फिर जुनैद ने मुझसे कहा कि राहुल अब बड़ा हो गया है, हम उसे अकेला छोड़ सकते हैं। इसी बात पर रिसॉर्ट में हमारा झगड़ा हुआ था। मुझे नहीं पता था कि वह मेरे जिस्म से खेल कर हमें बर्बाद करना चाहता था। माफ कर दे बेटा, सारी गलती मेरी है… मैं उसके प्यार में इतनी अंधी थी कि उसके बच्चे की माँ बनने तक को तैयार हो गई थी।”

मम्मी यह सब कहने के बाद रोते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती हैं। मैंने हैरानी का झूठा ड्रामा करते हुए कहा, “मम्मी, आपने इतनी हदें पार करने की सोची? यहाँ तक कि उसके बच्चे की माँ? मैं आपको कैसे माफ करूँ यह सुन कर कि आपने मेरे खातिर उसे ठुकराया?”

मम्मी टूट कर बोली, “मुझे पता था बेटा, तू मुझे कभी माफ नहीं करेगा…”

मम्मी मेरे पास से उठ कर रोती हुई अपने कमरे में चली गई। उन्होंने पूरा दिन बिना कुछ खाए-पिए सिर्फ रोते हुए बिताया। मैं अपने कमरे में बैठा सोचता रहा कि मम्मी के सिवा मेरा और है ही कौन? मुझे उन्हें माफ कर देना चाहिए।

रात को मैं मम्मी के कमरे के बाहर खड़ा रहा और उन्हें तब तक आवाज देता रहा, जब तक उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। जैसे ही गेट खुला, मैंने तुरंत उन्हें अपने गले लगा लिया।

मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और आँखों में आंसू लिए कहा, “मम्मी, आपने जो भी किया, मैं उसके लिए आपको माफ करता हूं। मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं… आज के बाद आप अपनी हर ज़रूरत मुझसे शेयर करेंगी, किसी और से नहीं।”

उसके बाद से मैं मम्मी को उस उदासी से बाहर निकालने की कोशिश में लग गया। साथ ही, मैंने खुद को बदलने के लिए जिम जाना शुरू कर दिया। मम्मी को बिना बताए मैं अपनी बॉडी को सॉलिड और गठीला बना रहा था। धीरे-धीरे मम्मी जुनैद के दुख से बाहर आ रही थी और अब वो अक्सर मेरे साथ बैठ कर बातें करते हुए मेरी बॉडी पर गौर करने लगी थी। चार महीने बीतते-बीतते मेरा शरीर एक-दम कसरती और गठीला हो गया था।

जिम में कड़ी मेहनत के बाद जब मैं घर आता, तो मेरा शरीर पसीने से भीगा होता था। नहाने के बाद मैं अक्सर अपनी बॉडी पर ऑयल मसाज किया करता था।

एक दिन मैं जिम से घर आया और मम्मी को कॉफी बनाने का बोल कर नहाने चला गया। नहाने के बाद मैं कमरे का दरवाजा बंद करना भूल गया और पूरी तरह नंगा होकर अपनी बॉडी पर तेल से मसाज करने लगा। मैंने अपनी एक टांग ऊंची जगह पर रखी थी और झुक कर अपनी जांघों की मसाज कर रहा था। उत्तेजना की वजह से मेरा लंड पूरी अंगड़ाई लिए सीधा खड़ा हुआ था। मुझे मसाज करते हुए कुछ ही देर हुई थी कि तभी कमरे की चौखट पर बर्तन गिरने की आवाज हुई। मैंने मुड़ कर देखा तो…

मम्मी की नज़रें मेरे नग्न शरीर और नीचे अंगड़ाई लेते लंड पर टिक गई थी। उनके हाथ से बर्तन छूट कर ज़मीन पर गिर गया था, पर उन्हें उसका होश ही नहीं था। उनके चेहरे पर हैरानी, शर्म और एक अजीब सी तड़प के मिले-जुले भाव साफ़ नज़र आ रहे थे।

मैंने उनकी तरफ मुड़ कर देखा और जान-बूझ कर कोई हड़बड़ाहट नहीं दिखाई। अपनी जांघों पर तेल मलते हुए मैंने बहुत ही शांत आवाज़ में पूछा, “मम्मी, आप कॉफी लेकर आई थी? यह आवाज़ कैसी हुई?”

मम्मी हड़बड़ा कर अपनी नज़रें फेरने की कोशिश करने लगी, पर उनकी आँखें बार-बार मेरे गठीले शरीर और उस उत्तेजित अंग की तरफ ही जा रही थी। वो हकलाते हुए बोली, “वो… हाँ बेटा, मैं कॉफी लाई थी… पर तू… तूने दरवाज़ा क्यों नहीं लगाया?”

उनकी आवाज़ कांप रही थी। मैंने एक गहरी साँस ली और सोफे पर रखे तौलिए की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा, “अरे, शायद मैं भूल गया था। जिम की थकान इतनी थी कि बस शरीर की मालिश करने बैठ गया।” मैं जान-बूझ कर अपनी कमर पर धीरे-धीरे तौलिया लपेट रहा था, ताकि मम्मी आराम से मेरे लंड का पूरा नज़ारा ले सकें। तौलिया बांध कर जब मैं उनके पास जाने लगा, तो देखा कि मम्मी अपना चेहरा दूसरी तरफ किए खड़ी थी।

मैंने कहा, “मम्मी, आप इतनी घबरा क्यों रही हैं? आखिर माँ ही तो हैं आप मेरी!”
मम्मी ने अपनी ओढ़नी को कस कर पकड़ लिया और नीची नज़रें किए हुए बोली, “बेटा, तू अब बच्चा नहीं रहा। तेरी बॉडी… एक मज़बूत मर्द में बदल गई है। माफ करना, मुझे इस तरह तेरे सामने नहीं आना चाहिए था।”

मम्मी की ये बात सुन कर मुझे समझ आ गया कि मेरा तीर एक-दम निशाने पर लगा है। जुनैद का नशा अब उनके सिर से उतरने लगा था और मेरा नशा उन पर चढ़ रहा था। मम्मी के हाथ से कॉफी का कप लेते हुए मैंने कहा, “ओहो मम्मा, कोई बात नहीं, इसे भूल जाइए!”

उसके बाद मैं तौलिए में ही मम्मी के साथ बैठ कर डिनर करने लगा। खाना खाते वक्त मैं देख रहा था कि मम्मी बार-बार मेरी चौड़ी छाती पर ही अपनी नज़रें टिका रही थी।

इसके बाद मम्मी अक्सर मुझसे बातें करने लगी थी। मेरे शॉप जाने से पहले वो मेरा लंच तैयार कर देती और शाम को घर आते ही मेरे लिए कॉफी तैयार रखती। एक रात मैं अपने बदन पर सिर्फ लुंगी लपेटे उनके साथ डिनर कर रहा था। मैंने देखा कि मम्मी बड़ी उदास बैठी थी और खाने के निवाले को एक टक घूर रही थी।

मैंने उनके हाथ पर अपना हाथ रखा, तो वो अचानक घबरा गई। मैंने पूछा, “मम्मी, क्या हुआ? आप कहाँ खो गई हैं?”

मम्मी ने खुद को संभालते हुए कहा, “कुछ नहीं बेटा… तेरा काम कैसा चल रहा है?”

मैंने जवाब दिया, “मम्मी, काम अब अपने दम पर एक बार फिर से बढ़ा रहा हूँ, इसलिए मेहनत थोड़ी ज़्यादा बढ़ गई है। पर आप बताइए, आप क्या सोच रही थी?”

मम्मी बोली, “बेटा, मैं घर में अकेले रह कर बोर हो जाती हूँ। सोच रही हूँ कि तेरे साथ मैं भी शॉप पर चलूँ और तेरा हाथ बँटाऊँ!”

मैंने कहा, “ओहो मम्मा, आप क्यों तकलीफ उठा रही हैं? मैं अकेला सब संभाल रहा हूँ ना।”

मम्मी ने ज़ोर देते हुए कहा, “बेटा मैं देख रही हूँ, काम की वजह से तुझे सुबह बहुत जल्दी जाना पड़ता है। अब मैं भी तेरे साथ जाना चाहती हूँ।”

मैंने फिर समझाया, “मम्मी, आप घर संभालिए, मैं अकेला शॉप के लिए काफी हूँ।”

मेरी यह बात सुनते ही मम्मी ने गुस्से में मुँह फुला लिया और बोली, “तुम भी अब बिल्कुल अपने पिता जी की तरह बात करने लगे हो। वो भी कभी नहीं चाहते थे कि मैं शॉप पर जाऊँ, बस यही चाहते थे कि मैं घर संभालूँ!”

मम्मी गुस्से में उठ कर जाने लगी, तो मैं तुरंत उनके सामने खड़ा हो गया और उनके कंधों पर हाथ रखते हुए कहा, “ओहो मम्मा, आप तो गुस्सा हो गई! भला ऐसे कोई खाना छोड़ कर जाता है? ठीक है, अगर आपको मेरे साथ शॉप पर चलना है तो चलिए, पर मैं वहाँ आपको कोई काम नहीं करने दूँगा।”

मम्मी के चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई और वो बोली, “तू बिल्कुल अपने पापा पर गया है, वो भी मुझे कुछ काम नहीं करने देते थे…”

मैंने खुशी से मम्मी को अपनी बाहों में भर लिया और कहा, “पापा की हर चीज़ और हर ज़िम्मेदारी को अब मुझे ही संभालना है, तो उनके जैसा तो मुझे बनना ही पड़ेगा ना?”

मम्मी मेरी नंगी पीठ पर अपने कोमल हाथ फेरते हुए और अपना सिर मेरे सीने पर टिका कर बड़ी उदास आवाज़ में बोली, “बेटा, तेरे पापा की हर चीज़ को संभालने के लिए सिर्फ उनके जैसा दिखना काफी नहीं है। तुझे एक मज़बूत और बहादुर मर्द बन कर उनकी हर कमी को पूरी तरह से भरना होगा।”

मैंने बड़े प्यार से मम्मी का चेहरा अपने सीने से उठाया और उनके माथे को चूमते हुए अपनी छाती और डोले फुला कर बोला, “मम्मी, क्या मैं उस जुनैद से भी ज़्यादा मज़बूत और ताकतवर नहीं लग रहा?”

मेरा यह सवाल सुनते ही मम्मी की धड़कनें तेज़ हो गई। उन्होंने एक बार फिर अपनी नज़रें उठा कर मेरी आँखों में देखा। उनके चेहरे पर अब कोई डर नहीं था, बल्कि एक औरत की वो दबी हुई चाहत साफ़ झलक रही थी।

अगले दिन, नाश्ता करने के बाद मैं तैयार होकर कमरे से बाहर आया और मम्मी की तरफ मुस्कुराते हुए पूछा, “मम्मी, आपको शॉप पर चलना था ना, आप अभी तक तैयार नहीं हुई?”

मम्मी झट से बोली, “बेटा, मैं तो तैयार ही हूँ!”

मम्मी ने एक साधारण सूट-सलवार पहना हुआ था, जो पुराने फैशन का लग रहा था।

मैंने कहा, “क्या? आप ऐसे जाएँगी? ओहो मम्मा, आप शॉप की मालकिन हैं, वहाँ आपका रुतबा अलग ही दिखना चाहिए!”

मेरे काफी ज़िद करने पर मम्मी मुझे अपने कमरे में ले गई और अपनी अलमारी खोल कर बोली, “बेटा, मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा, अब तुम ही इसमें से कुछ निकाल कर दो जो मैं पहन सकूँ।”

मैंने पूरी अलमारी खंगाली और एक घुटनों तक की “क्रॉप ड्रेस” निकाल कर उनके हाथ में थमा दी। उसे देख कर मम्मी उदास होकर बोली, “बेटा, ये फैशनेबल ड्रेसेस अब मुझे चुभन देती हैं।”

तब मैंने एक बेहद खूबसूरत साड़ी निकाली, जिसका रंग पिस्ता हरा था। उस ऑर्गेंज़ा फैब्रिक में एक हल्की सी चमक थी। साड़ी के किनारों पर बारीक सुनहरी कढ़ाई और ज़री का काम था, जो उसे एक शानदार लुक दे रहा था।

मम्मी उस साड़ी को देख कर मुस्कुराई और बोली, “बस दस मिनट दो मुझे, मैं अभी तैयार होकर आती हूँ!”

फिर मम्मी कमरे के अंदर बने बाथरूम में चली गई और मैं बेड पर बैठ कर उनका इंतज़ार करने लगा। कुछ देर बाद जब मम्मी बाहर आई, तो मैं उन्हें देखता ही रह गया।

मम्मी उस लग्ज़री साड़ी में गज़ब ढा रही थी। उनके ब्लाउज का डिज़ाइन बेहद खूबसूरत था, उसका डीप वी नेक आगे से गहरा था और पीछे से वह पूरा बैकलेस डोरी वाला था। उनके उभारों का आधा हिस्सा ब्लाउज से बाहर झाँक रहा था, जिसे देख आज मेरा मन और ईमान दोनों डोल रहे थे। सुनहरे कॉपर शेड के सिल्क फैब्रिक वाला वह ब्लाउज साड़ी के साथ एक शानदार कंट्रास्ट बना रहा था, जिसकी आस्तीनें कोहनी तक थी।

मम्मी मुस्कुराती हुई बाहर आ रही थी। उनके चेहरे पर इतने दिनों बाद ऐसी खुशी देख कर मुझे भी बहुत सुकून मिल रहा था।

मम्मी मेरे पास आकर बोली, “बेटा, ऐसे क्या घूर रहे हो? मैंने ज़्यादा देर तो नहीं कर दी?”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “आज पक्का मेरी शॉप पर कस्टमरों की भीड़ लग जाएगी आपको देख कर!”

मम्मी शर्माते हुए बोली, “भला लोग मुझे क्यों देखेंगे?”

मैंने जवाब दिया, “क्योंकि आप लग ही इतनी सुंदर रही हैं!”

इसके बाद मम्मी आईने के सामने खड़ी होकर अपने बाल संवारने लगी। मैंने गौर किया कि उनकी कलाइयां सूनी थी। मैंने अलमारी से साड़ी से मैच करती हुई हरे रंग की चूड़ियाँ निकाली और उनकी कलाई पकड़ कर उन्हें पहनाने लगा। वो चूड़ियाँ उनकी कलाई पर बहुत फब रही थी।

मम्मी ने भावुक होकर मुझे गले लगा लिया और बोली, “राहुल, सच कहूँ तो आज तुम मुझे दूसरी बार एक नया जीवन दे रहे हो। मैं इस बार तुम्हें निराश नहीं करूँगी, अब मैं तुम्हारे साथ अपनी ज़िंदगी खुशियों से बिताना चाहती हूँ।”

मैंने उनकी पीठ सहलाते हुए कहा, “मम्मी, आपने मुझे कभी निराश नहीं किया। मेरी ही गलती थी कि मैंने आपकी ज़रूरतों का ख्याल नहीं रखा!”

मेरी यह बात सुनते ही मम्मी ने मुझे और भी ज़ोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया। उनके भरे हुए बूब्स मेरी मज़बूत छाती से बुरी तरह दबे हुए थे। मम्मी जब भी सांस लेती, उनके उभारों की रगड़ और उनके टाइट निप्पल्स का अहसास मेरी छाती पर किसी चुंबन की तरह महसूस हो रहा था। कुछ देर तक वो इसी तरह मुझसे लिपटी रहीं, तो मैंने शरारत से कहा, “सविता जी, अब हमें शॉप पर भी चलना चाहिए, देर हो रही है!”

मम्मी झट से मेरी बाहों से अलग हुई और मुस्कुराते हुए बोली, “जी, बस एक मिनट… मैं अभी बाथरूम से होकर आई।”

थोड़ी देर बाद हम शॉप पर पहुँच गए। मम्मी को मेरी सीट पर बैठा देख आज कस्टमर्स कुछ ज़्यादा ही दिलचस्पी ले रहे थे। कुछ लोग तो मन ही मन अंदाज़ा लगा रहे थे कि इतनी खूबसूरत महिला आखिर मेरी क्या लगती होगी।

शाम तक शॉप पर आज काफी अच्छी सेल हुई। जब हम घर लौट रहे थे और घर के थोड़े ही करीब पहुँचे थे, तभी मम्मी बोली, “राहुल, घर आने वाला है, क्या आज तुम्हें जिम नहीं जाना?”

मैंने थोड़ा हैरान होते हुए कहा, “ओहो, मैं तो बिल्कुल भूल ही गया था। खैर, अब तो घर आ ही गए हैं, जिम कल चला जाऊँगा।”

मम्मी ने ज़ोर देते हुए कहा, “जी नहीं, आपको आज ही जाना है! आप जिम जाइए, मैं यहाँ से अकेले घर चली जाऊँगी।”

जिम से लौटने के बाद जब मैं घर आया, तो देखा कि मम्मी घुटनों तक की रॉब वाली नाइटी पहने हुए थी। उन्हें देख मैं हल्का सा मुस्कुराया और फिर नहाने चला गया। नहाने के बाद जब मैं अपने कमरे में आया, तो देखा कि टेबल पर मेरे लिए मसाज तेल की बोतल और एक लूंगी पहले से रखी हुई थी।

मैं मन ही मन मुस्कुराया और खुद से कहा, “लगता है मेरी बरसों की तमन्ना पूरी होने वाली है। मम्मी के अंदर फिर से वही आग सुलग रही है, जिसे इस बार मेरा लंड ही शांत करेगा!”

मैंने कमरे का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला छोड़ दिया ताकि सविता मेरे लंड का नज़ारा ले सकें। फिर पूरी तरह नग्न होकर मैं अपनी बॉडी पर तेल की मालिश करने लगा। मैंने अपनी छाती पर तेल मल कर उसे पूरी तरह चिकना और चमकदार बना दिया।‌फिर अपनी मज़बूत जांघों पर तेल लगाते हुए धीरे-धीरे लंड पर आ गया। मैंने अपनी हथेली में ढेर सारा तेल लिया और लंड को मुठियाना शुरू कर दिया। कभी मैं लंड के सिपारे को सहलाता, तो कभी अपने मोटे अंडों पर तेल रगड़ता। मुझे ऐसा करते हुए काफी देर हो गई थी, तभी मुझे दरवाज़े के पास क़दमों की आहट और तेज़ होती साँसों की आवाज़ सुनाई दी। मैं समझ गया कि मम्मी दरवाज़े पर खड़ी होकर मुझे ही देख रही थी।

मैं दरवाज़े की तरफ देखे बिना ही लंड की मालिश करता रहा। मन ही मन मम्मी के नग्न बदन की कल्पना करते हुए मैंने अपने अकड़े हुए लंड को दरवाज़े की तरफ कर दिया, ताकि मम्मी उसे अच्छी तरह देख सकें।

थोड़ी ही देर में मेरी साँसें भारी होने लगी और मेरा लंड झड़ने की कगार पर पहुँच गया। तभी मम्मी ने बाहर से दरवाज़ा खटखटाया।

मम्मी बोली, “राहुल, क्या मैं अंदर आ सकती हूँ?”

मैंने खुद को थोड़ा संभालते हुए कहा, “हाँ-हाँ, बस एक मिनट!”

फिर मैंने फुर्ती से लूंगी उठाई और अपनी कमर पर लपेट ली। दरवाज़े के पास पहुँच कर मैंने कहा, “ओहो मम्मा, दरवाज़ा तो खुला ही था, आप फिर भी किसी मेहमान की तरह नॉक कर रही हैं?”

मैंने देखा कि मम्मी के हाथों में एक ट्रे है, जिसमें केसर और पिस्ते वाला दूध का गिलास और कुछ बादाम रखे थे। उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान और थोड़ी घबराहट साफ़ नज़र आ रही थी। बिना मेरी तरफ देखे कमरे के अंदर आते हुए वह बोली-

मम्मी: “जब बेटा बड़ा हो जाता है, तो माँ को भी उसके कमरे में पूछ कर आना पड़ता है। लो, अब यह पिस्ते वाला दूध पियो और अपनी ताकत बढ़ाओ, इसे घटाने (हस्तमैथुन की तरफ इशारा) की कोशिश मत करो।”

मैंने थोड़ा मासूम बनते हुए कहा, “ओहो मम्मा, मैं इतना बड़ा भी नहीं हुआ कि आपको पूछ कर आना पड़े! और इस बादाम-केसर की क्या ज़रूरत है?”

मम्मी ने मेरी तेल से चिकनी और चमकती छाती पर हाथ फेरते हुए कहा, “वह तो मैं देख ही रही हूँ कि तुम अब कहाँ से कहाँ तक बड़े हो गए हो! यह सब खाने-पीने से ही तो असली मर्दानगी आएगी।”

मम्मी मेरी छाती सहलाते हुए अपने ही होंठों को आपस में रगड़ रही थी और उनकी नशीली आँखें मुझे देख रही थी। मैंने मौके का फायदा उठाया और अपना एक हाथ उनकी कमर पर डाल कर उन्हें अपनी छाती से चिपका लिया।

मम्मी के मुँह से एक हल्की आह निकली, “उफ़… आराम से!”

मैंने कहा: “आपको क्या लगता है, अभी मुझमें मर्दानगी कम है?”

मम्मी मुस्कुराते हुए शरारती अंदाज़ में बोली, “है, पर अभी उतनी नहीं…”

यह सुनते ही मैंने तुरंत नीचे झुक कर मम्मी को अपनी गोद में उठा लिया। मम्मी ने मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी और डरने का झूठा नाटक करने लगी।

मम्मी बोली: “ओह बस-बस! मुझे पता चल गया कि तुम पूरे मर्द बन गए हो और अब किसी भी औरत को संभाल सकते हो!”

मैंने उन्हें गोद में लिए हुए ही अपने होंठ उनके होंठों के करीब लाकर कहा, “मुझे किसी और को नहीं, बस आपको संभालना है!”

मम्मी ने शर्माते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और एक गहरा किस्स करने के बाद बोली, “शॉप पर मुझे सिर्फ सविता ही कहा करो!”

फिर मैं मम्मी को गोद में लिए हुए ही हॉल में आ गया। रात का खाना खाने के बाद मम्मी ने मुझे एक गुड नाइट किस्स दिया और अपने कमरे में सोने चली गई। फिर रोज़ हम इसी तरह शॉप पर जाने लगे। मुझसे ज़्यादा कस्टमर्स अब मम्मी से ही डील करना पसंद करते थे। रोज़ शाम को जब मैं जिम से लौटता, तो मम्मी मेरे कमरे में पहले से ही मालिश का तेल, लूंगी और बादाम-पिस्ते वाला दूध तैयार रखती थी।

कुछ ही दिनों में हमारी आमदनी बहुत अच्छी होने लगी। जब भी मैं किसी बड़े क्लाइंट से डील करने के लिए मम्मी को साथ लेकर जाता, तो वो डील हमें मिल ही जाती थी। घर वापस आकर हम दोनों खुशी से एक-दूसरे को बाहों में भर लेते और किस्स करते। कभी-कभी तो मेरे नहाने के बाद मम्मी खुद कमरे में आती और अपने हाथों से मेरे शरीर पर तेल की मालिश करने लगती थी।

मम्मी के चेहरे पर अब एक बार फिर से खुशी का निखार आ गया था। अब वो मुझे शॉप पर राहुल बेटा कहने के बजाय राहुल जी कह कर और आप बुला कर बात करने लगी थी।

एक बार ऐसे ही हमें एक बड़े क्लाइंट से डील करने के लिए आगरा जाना पड़ा।सुबह के निकले-निकले क्लाइंट के साथ मीटिंग करते हुए हमें शाम के 8 बज गए। काम खत्म होने के बाद एक बड़े रेस्टोरेंट में नाश्ता करते हुए।

मम्मी बोली, “राहुल जी, अब और नहीं… बहुत थकान हो गई है। बस मुझे इस बात की खुशी है कि आपको यह डील मिल गई।”

मैंने अपने हाथों से उन्हें पिज़्ज़ा का एक टुकड़ा खिलाते हुए कहा, “यह डील तो मुझे मिलनी ही थी। क्योंकि आप जो मेरे साथ थी। थोड़ा और खाइए, फिर हमें घर के लिए भी निकलना है।”

मम्मी ने थकी हुई आवाज़ में कहा, “राहुल जी, मुझे नहीं लगता कि मैं अभी इतना लंबा सफर तय कर पाऊंगी।”

मैंने मुस्कुराते हुए पूछा, “क्यों ना फिर हम आज रात किसी बड़े होटल में रुक जाएं?”

होटल की बात सुनते ही मम्मी के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान छा गई। उन्हें देख कर ऐसा लगा जैसे वो मन ही मन यही चाह रही थी।

फिर मैं मम्मी को लेकर एक आलीशान होटल पहुँचा। मम्मी मुझसे थोड़ा दूर खड़ी थी और मैंने रिसेप्शन पर जाकर कमरे की बात की।

रिसेप्शनिस्ट ने हमें देख कर कहा, “सर, अभी हमारे पास सिर्फ एक ही कमरा खाली है और वह भी फर्स्ट क्लास हनीमून बेडरूम है। अगर आप कहें तो बुक कर दूँ?”

मैंने मन ही मन मुस्कुराते हुए हामी भर दी। कमरे का दरवाज़ा खोलते ही मम्मी के चेहरे पर एक कामुक और शर्मीली मुस्कान उतर आई।

मम्मी ने पलट कर मेरी आँखों में देखा, तो मैंने पूछा, “मम्मी, कैसा लगा आपको मेरा यह इंतज़ाम?”

मम्मी ने अपनी एक उंगली मेरे होंठों पर रख दी और बड़े प्यार से बोली, “सिर्फ सविता!”

मैंने मम्मी को अपनी बाहों में समेटा और उनके होंठों पर एक जोरदार किस्स किया। मम्मी कुछ देर तक मेरी बाहों से लिपटी रही और फिर फ्रेश होने के लिए बाथरूम चली गई। मैंने बाहर अपने सारे कपड़े उतार दिए और सिर्फ एक फ्रेंच अंडरवियर में खड़ा होकर आईने में अपने शरीर को निहारने लगा। थोड़ी देर बाद जब मम्मी बाथरूम से बाहर आई, तो उन्हें देखते ही मेरी आँखें फटी की फटी रह गई…

मम्मी ने एक गुलाबी साटन बाथरोब नाइट ड्रेस पहनी हुई थी, जिसकी लंबाई जांघों से काफी ऊपर उनकी गोल उभरी हुई गांड से बस हल्का सा नीचे तक थी। यह बाथरोब को एक मॉडर्न और स्टाइलिश लुक दे रहा था। हाथों की स्लीव्स और नीचे के घेरे पर चौड़ा ब्लैक फ्लोरल लेस लगा हुआ था। गुलाबी और काले रंग का यह कॉम्बिनेशन ड्रेस को काफी बोल्ड और अट्रैक्टिव बना रहा था।

नाइटी के बारीक ट्रांसपेरेंट कपड़े से उनकी नंगी चूचियों की पूरी झलक नज़र आ रही थी। नीचे उनकी लाल जालीदार पेंटी जो बस चूत की फांकों को ही कवर कर पा रही थी।

मम्मी का यह बोल्ड लुक देख कर मेरा लंड छोटे साइज के अंडरवियर से बाहर आने को हो रहा था। मम्मी मुझे ऊपर से नीचे तक देख रही थी और मैं उन्हें। मम्मी अपने चेहरे पर हल्की शर्मीली मुस्कान लिए खड़ी थी। मैं उनकी आँखों में देखते हुए अपने कदम आगे बढ़ा कर उनके नज़दीक गया और-

मैं बोला: उफ्फ, आपके आगे तो हसीनाएं फेल हो जाएं, इतना कातिल लुक…

मम्मी शर्माते हुए बोली: क्या राहुल जी, आप भी इस ढलती उम्र की तारीफें कर रहे हैं…

मम्मी हल्की शर्म के साथ मेरे अंडरवियर का उभार देख कर अपने होंठों को रगड़ रही थी। उनकी चूत में महीनों से जलती आग वो अपने होंठों से बयां कर रही थी।

मैंने मम्मी के चेहरे पर आई जुल्फों की कुछ लटें साइड करते हुए कहा: यह ढलती उम्र ही आपकी जवानी की पहली दहलीज़ लग रही है…

मम्मी मेरी आँखों में देखते हुए चेहरे पर हल्की शर्मीली मुस्कान लिए झट से मुझे अपनी बाहों में समेट लेती हैं। उनके बदन की गर्माहट मुझे अपने नंगे बदन पर साफ़ महसूस हो रही थी। मैं उनकी कमर से लेकर उभरी हुई गांड तक हाथ फेर रहा था।

मम्मी हल्के स्वर में बोली: तारीफ का काम तो तुमने किया है, इतनी बड़ी डील हासिल करके। इतनी जल्दी पापा का बिज़नेस इतनी बखूबी से संभाल लोगे, यह सोचा नहीं था!

मम्मी मेरे नंगे सीने पर हल्का सा चुंबन कर लेती हैं। मेरे पूरे बदन में एक सिहरन सी उठती है, जिसका सीधा असर लंड पर होता है। मेरा लंड पूरी तरह अपने तनाव में आना शुरू कर देता है और उसके अंदर बढ़ता जोश अब मेरे सिर पर हावी हो रहा था।

मैंने कहा: पापा की हर जगह अब मैं संभालना चाहता हूँ। अभी तक मैं पापा राजवीर और उनके नाम के लिए सब कर रहा था। पर अब मैं सिर्फ राहुल बन कर उनकी कमी, हर ज़रूरत और हर घाव को पूरी तरह से भर देना चाहता हूँ!

मेरी यह बात सुनते ही मम्मी अपना चेहरा मेरे सीने से उठा कर मेरी आँखों में देखती हैं। मैंने देखा कि उनकी आँखें हल्के आँसुओं की वजह से नम पड़ी हुई थी।
मैंने मम्मी की आँखों से गिरते आँसुओं की बूंदों को हल्के से चूमा और उन्हें एक हाथ से पोंछते हुए बोला: मम्मी, क्या अब मैं इस काबिल हूँ कि उनकी जगह पूरी तरह से ले सकूँ?

मम्मी अपने आँसुओं से भीगे चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए मुझे अपनी बाहों में कसकर बोली: हाँ, तुम पूरी तरह से काबिल हो! राहुल, मैं चाहती हूँ कि आप मेरी जिंदगी में सिर्फ एक मर्द बन कर आओ और अपने पिता की खलती हुई कमी को पूरा करो…

मम्मी की बात सुन कर मेरा दिल खुशी से झूम उठा। मैंने बड़े प्यार से उनका चेहरा अपने सीने से उठाया, उनकी आँखों में देखा और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए।

मम्मी के प्यासे होंठ जैसे इसी पल का इंतज़ार कर रहे थे। वो अपनी हथेलियाँ मेरी पीठ पर फेरते हुए मेरे होंठों को चूसने में मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने अपने हाथ उनकी कमर से नीचे, उनकी गांड के उभरे हुए हिस्से पर रखे और उन्हें दबाने लगा। मम्मी मेरी नंगी पीठ सहलाते हुए दीवानों की तरह मेरे होंठ चबाए जा रही थी।

मम्मी के बदन की गर्माहट अब मुझे पागल कर रही थी। उत्तेजना की वजह से मेरे लंड का टोपा अंडरवियर की इलास्टिक से बाहर आ गया था। हम दोनों एक-दूसरे को बड़े ही बोल्ड तरीके से चूम रहे थे और अब मम्मी की कामुक सिसकारियां निकलने लगी थी।

मम्मी गर्म साँसें लेते हुए आहें भर रही थी। मैं उनकी गांड मसलते हुए अपना हाथ उनकी पेंटी के अंदर डालने ही वाला था कि तभी मम्मी मेरे होंठों से अलग होकर अचानक घूम गईं और मेरी तरफ पीठ कर ली। मैंने उन्हें पीछे से अपनी बाहों में भर लिया और उनकी गर्दन पर कामुक अंदाज़ में चूमते हुए पूछा-

मैंने कहा: क्या हुआ सविता?

मम्मी बड़े ही धीमे स्वर में बोली: पता नहीं राहुल, बहुत अजीब सा लग रहा है!
मैंने अपने कड़क लंड को उनकी गांड की फांकों पर हल्का सा रगड़ते हुए कहा: आपको यही प्यार चाहिए, यह मुझे पता है… फिर अब क्या सोच रही हो?

मम्मी: राहुल मुझे…

मैंने मम्मी को पीछे से अपनी बाहों में और जकड़ कर बोला: मम्मी, आपको जो कहना है खुल कर कहो! मैं नहीं चाहता अब हमारे बीच कोई पर्दा रहे, आपकी खुशी के लिए मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ।

मम्मी बोली: कैसे कहूँ, राहुल मैंने तुम्हें जन्म दिया, पाल-पोस कर इतना बड़ा किया है। पर मैं तुम्हारी तरफ खिंची आ रही हूँ, जब से तुम्हारी बॉडी में ये बदलाव आया है। मैं एक माँ होकर भी अपने आप को नहीं रोक पा रही, मेरी इच्छा वही प्यार पाने की हो रही है जो एक औरत की उसके पति के साथ या कहूँ किसी मर्द के साथ करने की होती है। राहुल, तुम मेरे बेटे हो इसलिए…

मैंने झट से मम्मी को अपनी तरफ घुमा कर उनके होंठों पर अपनी उंगली रख कर बोला: बस, मुझे कुछ नहीं सुनना। अब मैं नहीं चाहता कि तुम अपना बदन फिर किसी जुनैद जैसे मर्द से मसलवाओ। अब से हम एक-दूसरे की ज़रूरत के लिए सिर्फ एक औरत और एक मर्द हैं।

इतना बोल कर मैंने मम्मी की कमर में एक हाथ डाल कर उन्हें अपने नंगे सीने से चिपका लिया, फिर उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

मम्मी अपने होंठों को कुछ सेकेंड ही चूसने देती हैं, फिर झट से वो अपने होंठों को अलग करके बोली: राहुल, एक बार और सोच लो, आगे बढ़ने से पहले… ये समाज हमें बहुत बुरा-भला बोलेगा।

मैंने कहा: समाज की माँ का भोसड़ा, मैं तुम्हें हर रूप में प्यार करूँगा चाहे दुनिया कुछ भी कहे!

मम्मी ने मेरी आँखों में आँखें डाल कर कहा: ठीक है, आज से ये सविता तुम्हारी हुई। मुझे चाहे तुम अपनी रखैल बनाओ चाहे बीवी…

मम्मी मेरे नंगे सीने को चूम कर फिर अपने होंठ मेरे होंठों की तरफ बढ़ाती हैं। मैं थोड़े जोशीले अंदाज़ में अपना एक हाथ उनकी गांड पर रख कर उसे मसलने लगता हूँ और उन्हें अपने बदन से चिपका कर उनके होंठों को लॉक कर लेता हूँ। मम्मी का इस बार मेरे होंठों को चूसने का अंदाज़ पहले से ज़्यादा जोशीला था, वो अपना एक हाथ मेरे सीने पर रखे मेरे होंठों के साथ मेरी जीभ को भी चूस रही थी।

मैं मम्मी का जोश बढ़ाने के लिए अपना हाथ सीधा उनकी पेंटी में डाल कर गांड को मसलने लगा था। मम्मी कामुक सिसकारियां लेते हुए अपने दूसरे हाथ से मेरी पीठ को नोच रही थी। मम्मी का पूरा जिस्म अब आग की तरह तपने लगा था, उनकी चूत की गर्माहट उन्हें बेकाबू करे जा रही थी।

मम्मी होंठों को अलग करके लंबी-लंबी सांसें ले रही थी। मैंने गौर किया कि अब उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान उतर आई थी।

मैंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर उनकी कमर पर बंधी नाइटी की बेल्ट पर रखा और कहा: सविता, यही मुस्कान तुम्हें और भी कातिल बनाती है!

मैंने नाइटी की बेल्ट को एक झटके में खोल दिया, जिससे वह साटन की नाइटी उनके बदन से अलग होकर दो हिस्सों में बंट गई। मम्मी के बूब्स के बीच की लाइन से लेकर उनकी पेंटी से झांकती चूत की फांकें तक अब साफ़ नज़र आ रही थी। मम्मी इस तरह मेरे सामने अर्ध-नग्न खड़ी शर्मा रही थी।

मैंने उनके कंधों पर हाथ रख कर उनकी आँखों में देखते हुए कहा: उफ़, चेहरे पर क्या नूर है! अक्सर मैं इस सुंदर चेहरे को देख कर तुम्हारे बदन की कल्पना करता था।

मम्मी शर्मीले अंदाज़ में अपनी आँखें घुमाते हुए बोली: जी, अब मैं पूरी तरह से आपकी हूँ। आपको कल्पना करने की ज़रूरत नहीं, बस हुक्म कीजिए।

मैंने मम्मी के कंधों से नाइटी को नीचे गिरा दिया, जिससे वह फर्श पर जा गिरी और मम्मी अब ऊपर से पूरी तरह नग्न हो गई। उनके गोल और भारी बूब्स के निप्पल्स पूरी तरह तने हुए थे, जिन्हें देख कर ऐसा लग रहा था मानो वो मुझे चूसने के लिए पुकार रहे हों।

मम्मी शर्म से अपनी आँखें बंद किए खड़ी थी। मैंने बड़े आराम से अपना अंडरवियर उतारकर पैरों से दूर फेंक दिया। फिर मम्मी को अपने सीने से लगाया और उनके होंठों को हल्का सा चूमते हुए कहा: आज की रात शर्माने के लिए नहीं, बल्कि सारी हदें पार करने के लिए है। अपनी आँखें खोलो और देखो, क्या मुझमें आपको अब भी वही राहुल नज़र आता है जिसे आपने जन्म दिया था?

इतना कह कर मैंने मम्मी की बंद पलकों को चूम लिया। मम्मी ने धीरे से अपनी पलकें उठाई और मेरी आँखों में देखा। मैंने अपना तना हुआ नंगा लंड मम्मी को महसूस कराने के लिए उनकी जांघों के बीच रगड़ दिया।

जांघों से लंड टकराते ही मम्मी के मुँह से एक हल्की आह निकल गई। फिर मैंने उनके एक बूब पर हाथ रख कर उसे हल्का सा दबा दिया।

मम्मी मेरी आँखों में देखते हुए बोली: उफ़ राहुल! इन्हें पिला कर ही तुम्हें बड़ा किया था। तुम्हारे जवान हाथों में मेरे बूब्स फिर से आएँगे, यह सोचा नहीं था।

मैंने अपनी गर्दन नीचे झुकाई और अपने होंठों को उनके निप्पल पर रख कर उन्हें चूसने लगा। मेरे होंठ लगते ही मम्मी के बदन में सिहरन दौड़ गई। वह हल्की सिसकारी भरते हुए अपने हाथों से मेरे बालों को सहलाने लगी। मैंने दूसरे हाथ की मुट्ठी में उनका दूसरा बूब्स दबोच लिया था।

मम्मी कामुक सिसकारियां भरते हुए बोली: आह… आह… राहुल, आराम से चूसो ना… तुम्हें फिर से अपना दूध पिला कर अच्छा लग रहा है।

मैं बदल-बदल कर उनके दोनों बूब्स चूस कर निचोड़ रहा था, मम्मी जोश में खड़े-खड़े अपनी जांघों को आपस में रगड़ रही थी।

फिर मैं सीधा खड़ा हुआ और मम्मी के होंठों को चूसकर बोला: सविता, अब मुझसे सबर नहीं हो रहा है, मुझे वो जगह देखनी है जहाँ से मेरा जन्म हुआ था!

मम्मी बोली: इसमें पूछने वाली क्या बात है, देख लो ना। यह जगह हर किसी की किस्मत में नहीं होती, पर तुम लकी हो जो इसे देखने के साथ इस्तेमाल भी करोगे। वैसे, सब खड़े-खड़े ही करना है या मुझे बिस्तर पर भी ले चलोगे?

मैंने तुरंत नीचे झुक कर मम्मी को अपनी गोद में उठा लिया और उन्हें बेड पर लिटा कर खुद भी ऊपर चढ़ गया। मेरे बेड पर चढ़ते ही मम्मी की नज़र मेरे तने हुए लंड पर पड़ी, जो आज एक-दम साफ और पूरे तनाव में खड़ा था।

मैं मम्मी की कमर के पास घुटनों के बल खड़ा था और मेरे लंड का सुपारा सीधा मम्मी के चेहरे की तरफ निशाना साधे हुए था।

जैसे ही मम्मी की नज़रें मेरे लंड पर पड़ी, उनके मुँह से निकला: ओह गॉड! उफ़… इतना प्यारा और इतना बड़ा कब हो गया ये?

मैंने लंड पर हल्का हाथ फेरते हुए कहा: मम्मी, मैंने पापा की कमी पूरी करने के लिए इस पर भी उतनी ही मेहनत की है, जितनी बिज़नेस पर।

मम्मी लंड की नसों को देखते हुए बोली: उफ़ राहुल, तुम्हारी इस मेहनत का फल मैं अपने जिस्म के हर कोने से देने को तैयार हूँ!’

मैंने कहा: ‘तो फिर आगे बढ़ो सविता, हमें रात ढलने से पहले अपने जिस्मों को एक करना है।

मम्मी बेड पर थोड़ा आगे बढ़ते हुए बोली: हाँ राहुल, मैं भी चाहती हूँ कि कल सुबह के बाद मुझे तुम्हारे पिता की विधवा बन कर ना जीना पड़े।

मम्मी ने मेरे लंड के पास आकर उसे घूरते हुए हाथ से पकड़ लिया। उनके कोमल हाथों का स्पर्श मिलते ही मेरा लंड एक झटके के साथ ऊपर-नीचे हुआ। यह देख मम्मी के चेहरे पर कामुक मुस्कान आ गई। उन्होंने अपनी आँखें बंद की और चेहरे को आगे बढ़ा कर लंड की खुशबू को गहराई से महसूस किया।

फिर एक गहरी साँस लेकर उन्होंने आँखें खोली और बोली: उफ़ राहुल, ऐसा लंड तो तुम्हारे पापा का भी नहीं था। इतना प्यारा, लंबा और मोटा… (मम्मी ने हल्के हाथ से मेरे सुपारे की चमड़ी को पीछे किया)।
उत्तेजना और हल्के दर्द के कारण मेरे मुँह से निकला: आह…

मम्मी मुस्कुराते हुए मेरी आँखों में देख कर बोली: ओहो, लगता है लंड की नसें अभी सही से खुली नहीं हैं।

मैंने मम्मी के खुले बालों में हाथ फेरते हुए कहा: हाँ मम्मी, मेरा लंड अभी तक कोरा है। मैं अपनी ज़िंदगी में सेक्स की शुरुआत आप ही से कर रहा हूँ!

मम्मी अपनी जीभ से सुपारे के चारों तरफ चाट कर बोली: उफ़… कितना मीठा स्वाद है। आज मैं खुशनसीब हूँ कि एक जवान कोरा लंड लेने जा रही हूँ… उम्म… आह।

मम्मी ने मेरे लंड पर ढेर सारे चुम्बन किए और फिर सुपारे को मुँह में ले लिया। उनकी मुँह की गर्माहट ने मुझे सातवें आसमान पर पहुँचा दिया।

मैं हल्की-हल्की सिसकारियाँ लेते हुए बोला: आह… उफ़… सविता, बड़ा मज़ा आ रहा है, बस ऐसे ही…

मम्मी एक हाथ से मेरे लंड की चमड़ी को आगे-पीछे करते हुए सुपाड़े को मज़े से चूस रही थी। उनके थूक से चिकना मेरा लंड अब उनके टाइट होंठों के बीच फिसलना शुरू हो गया था। मैं अपने दोनों हाथों से मम्मी का सिर पकड़कर उनके मुँह में लंड को तेज़ी से अंदर-बाहर कर रहा था और मम्मी मेरा लंड हलक तक बड़े आराम से ले रही थी।

मम्मी के मुँह की गर्माहट से मेरे लंड से वीर्य की बूँदें रिसने लगी थी, जिन्हें चाटने के बाद मम्मी मेरी तरफ देख मुस्कुरा देती थी। मम्मी मेरे लंड को किसी कुल्फी की तरह चूस रही थी, अब मेरे सब्र का बांध जैसे टूटने ही वाला था।

मैं गहरी सांसें भरते हुए बोला: उफ़… आह… मेरा निकल जाएगा… उफ़!
मम्मी ने लंड मुँह में लिए हुए ही मेरी आँखों में देखा और पलकें झपका कर इशारा किया; वह मेरे लंड का सारा माल पीना चाहती थी। मैंने उनका सिर मज़बूती से पकड़ा और पूरा लंड उनके हलक में उतारकर झड़ गया।

मम्मी ने पूरा वीर्य पी लिया और लंड पर लगा हुआ अंश भी चाट कर साफ़ कर दिया। मैं लंबी-लंबी सांसें लेते हुए मम्मी को बाहों में लेकर बेड पर लुढ़क गया।
मम्मी मेरे सीने पर सिर रख कर लेटी हुई थी।

मैं उनकी नंगी पीठ पर हाथ फेरते हुए बोला: माफ़ करना, मुझसे रुका नहीं गया और मैंने आपके मुँह के अंदर ही झाड़ दिया।

मम्मी ने मेरे सीने को चूम कर कहा: ओहो, इसमें माफ़ी वाली क्या बात है? एक औरत को यही तो चाहिए होता है। और तुम तो मेरे बेटे हो, तुम्हारा प्रोटीन कैसे बर्बाद होने दे सकती हूँ? उफ़ बेटा, मुझे तो तुम्हारा वीर्य पीकर ही मज़ा आ गया!

मैंने मम्मी को थोड़ा ऊपर खींच कर उनके होंठों को चूसा और बोला: असली मज़ा देने से पहले ही यह ढीला हो गया ना?

मम्मी ने लंड को अपनी मुट्ठी में लिया और बोली: इसे अब फिर से तैयार करना मेरा काम है। तुम ज़्यादा मत सोचो। पहली बार में ऐसा अक्सर हो जाता है।

मम्मी मेरे होंठों को चूसते हुए मुझे अपने ऊपर ले लेती हैं। मैं उनके होंठों को छोड़ कर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ता हूं। उनके दोनों बूब्स को चूसते और मसलते हुए मैं और नीचे गया। अब मैं मम्मी की दोनों टांगों के बीच पहुँच कर अपने होंठों को पेंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर रगड़ रहा था। मेरे ऐसा करने से मम्मी पागल हुई जा रही थी। मैंने चूत के ऊपर से ही चाट-चाट कर उनकी पेंटी को गीला कर दिया था।

फिर जैसे ही मैं मम्मी की पेंटी की इलास्टिक पर हाथ रखता हूं, मम्मी अपनी गांड़ को ऊँची कर देती हैं ताकि मैं उनकी पेंटी आराम से निकाल सकूं। पेंटी उतारते ही मैंने देखा कि उनकी चूत एक-दम साफ और बिना बालों के चमक रही थी। चूत की फांकों के बीच सफेद गाढ़ी मलाई लिए मोटे होंठ आपस में चिपके हुए थे।

मम्मी अपनी टांगें चौड़ी करके अपने पेट की तरफ मोड़ते हुए बोली: राहुल बेटा, देख लो यही वह जगह है जिसे तुम्हारे पिता ने अपने बीज से भरा था और जहाँ से मैंने तुम्हें जन्म दिया था। अब इस जगह को एक पति की तरह संभालने की बारी तुम्हारी है!

मैंने अपने दोनों हाथों से मम्मी की जांघों को और चौड़ा करते हुए अपना चेहरा चूत के करीब लाकर कहा: उफ़, क्या मस्त चूत है मम्मी आपकी! आह… सिर्फ चूत को ही नहीं, मैं आपको भी एक पति वाला पूरा प्यार दूँगा।

मैं अपनी जीभ चूत की मोटी और फूली हुई फांकों पर फेरने लगता हूं। फिर चूत की फांकों को बड़े प्यार से खोल कर अपनी जीभ उस छेद तक ले जाता हूं जहाँ से मलाई रिस रही थी। जैसे ही मैं उनके लाल दाने को होंठों के बीच दबा कर चूसने लगता हूं, मम्मी कसमसाने लगती हैं। वह अपनी कमर को हल्का-हल्का चला कर अपनी चूत को मेरे होंठों पर रगड़ रही थी।
मम्मी मेरे सिर को चूत पर दबाते हुए और कामुक सिसकारियाँ भरते हुए बोली: आह… उफ़… निचोड़ दे मेरे बेटे! इस चूत में बहुत आग है, मुझसे अब यह संभाली नहीं जाती…

मैं चूत के दाने को चूसते हुए अपनी जीभ को छेद के अंदर तक डाल रहा था। उनकी चूत से निकलता रस मेरे मुँह के अंदर जाते ही एक अलग ही मज़ा दे रहा था। मम्मी की हालत अब बिना पानी की मछली जैसी हो गई थी। मेरे चूसने से उनकी चूत की फांकें अब पूरी तरह खुल चुकी थी।

मम्मी मेरे बालों को नोचते हुए बोली: आह… राहुल, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है, बस चोद दे मेरी चूत को! उफ़… आई…

मैं चूत के अंदर जीभ डाले हुए एक हाथ से दाने को रगड़ रहा था और मम्मी कसमसाते हुए चूत का रस छोड़े जा रही थी।

मम्मी गहरी सांस बाहर छोड़ते हुए बोली: उफ़… बस बेटा, अब मुझे लंड चाहिए। मैं लंड के लिए महीनों से बेचैन हूं… उफ़!

मम्मी की तड़प को देखते हुए मैंने चूत से मुँह हटाया और उनकी गांड के नीचे एक तकिया लगा दिया।

फिर मम्मी की आँखों में देखते हुए लंड के सुपाड़े को चूत के मुहाने पर रगड़ते हुए,
मैंने कहा: सविता, यह लंड भी बरसों से इस चूत के लिए तरस रहा था। आज तुम्हें चोदकर ही मैं असली मर्द बनूँगा!

मम्मी अपनी टांगें फैलाए मेरी आँखों में देखकर बोली: मैं तुझे ऐसा मर्द बनाऊँगी कि हर औरत तेरे आगे मेरी तरह अपनी चूत खोलने के लिए तैयार हो जाएगी…

मम्मी ने अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रखा और बोली: घुसा दे राहुल…

मम्मी की चूत बहुत गर्म हो रही थी। मेरे लंड का सुपाड़ा उनके रस से गीला पड़ा था, जो एक हल्के धक्के में ही अंदर प्रवेश कर गया। सुपाड़ा अंदर जाते ही मम्मी ने एक लंबी आह के साथ अपनी आँखें बंद कर ली। मैंने उनकी चिकनी कमर को पकड़ कर दूसरा धक्का दिया, जिससे आधा लंड चूत को चीरता हुआ और अंदर चला गया।

मम्मी अपने दाँतों के बीच और हाथों की मुट्ठी में चादर को समेट रही थी। वह अपनी चूत को कभी ढीला तो कभी टाइट कर रही थी। मैंने उनकी कमर को मज़बूती से पकड़ा और एक तेज़ धक्के में अपना पूरा लंड चूत के अंदर उतार दिया।

मम्मी ने एक लंबी चीख मारते हुए कहा: उई ई ई ई मां… आह ह ह!

मैं एक बार फिर अपने लंड को बाहर निकाल कर तेज़ झटके से चूत में उतार देता हूं। मां की चूत एक-दम मेरे लंड को जकड़े हुए थी। मैं मम्मी के ऊपर लेट कर उनके होंठों को लॉक कर लेता हूं और धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करके उनकी चुदाई करने लगता हूं। मम्मी मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए नीचे से अपनी गांड भी उछाल रही थी। मेरी चुदाई से मम्मी इतनी कसमसा रही थी कि वह बार-बार मेरे होंठ काट ले रही थी।

मैंने अपने धक्कों की गति तेज़ कर दी, जिससे कमरे में मां की कामुक सिसकारियाँ और थप-थप की आवाज़ें गूंज उठी। मेरे लंड का सुपाड़ा जब भी मां की बच्चे-दानी से टकराता, तो वह अपने नाखून मेरी पीठ पर गड़ा देती थी। होंठों के साथ-साथ मैं उनके बूब्स भी मसल रहा था।

आज एक मां अपने बेटे के नीचे नंगी लेट कर उसका लंड ले रही है, यह हमारे सिवा इस होटल में कोई नहीं जान सकता था।

मम्मी अपने होंठ अलग करके हाँफते हुए बोली: राहुल बेटा, तुम चुदाई में इतने अच्छे मर्द निकलोगे पता नहीं था। वरना यह मां कब की तेरे इस लंड के नीचे आ जाती। उफ़… आह ह ह!

मैंने कहा: कोई बात नहीं मां, अब यह लंड तुम्हें खुश करने में कोई कमी नहीं छोड़ेगा।
मेरा लंड मां की चूत में तेज़ी से गोते लगा रहा था और हर धक्के पर मां के बूब्स ऊपर की तरफ जंप कर रहे थे।

मम्मी सिसकारियां भरते हुए बोली: आह आह… राहुल, तुझे बचपन में मेरे ऊपर बैठ कर घोड़े की सवारी करना पसंद था। मैं आज फिर तेरे लिए घोड़ी बनना चाहती हूं…

मैंने तुरंत लंड बाहर निकाला और मम्मी की कमर के नीचे हाथ डाल कर उन्हें पलटने का इशारा देते हुए कहा: हाँ, मुझे सवारी करके बहुत खुशी मिलती थी। पर मां, आज मैं सवारी नहीं करूँगा, बल्कि आज आपको अपने लंड की सवारी कराऊँगा!

मम्मी मेरे सामने घोड़ी बन जाती हैं। उफ़… उनके बड़े चूतड़ और मोटी जांघें पीछे से देख कर मन खुश हो जाता है। मैं पहले मम्मी की गांड़ के दोनों गोलों को चूमता हूं, फिर उनकी टांगें थोड़ी फैला कर पीछे से उनकी चूत का नज़ारा लेता हूं।

उफ़… चूत के होंठ दो हिस्सों में खुले हुए थे। उस गुलाबी नज़ारे को देख मैं अपनी जीभ उनके मोटे होंठों पर फेर देता हूं। मेरी जीभ लगते ही मम्मी अपनी गांड को इधर-उधर हिला कर अपनी चूत को मेरे पूरे मुँह पर रगड़ देती हैं। मैं चूत को अच्छी तरह चाटकर अपना लंड छेद पर टिकाता हूं और अंदर पेल देता हूं।

मेरा पूरा लंड अंदर जाते ही मम्मी घोड़ी की तरह उचक जाती हैं। मैं उनके मस्त कूल्हों को पकड़ कर धक्के देना स्टार्ट कर देता हूं।

मां को घोड़ी बना कर चोदते हुए मुझे मम्मी और जुनैद की चुदाई याद आ जाती है, कि कैसे जुनैद घर के हर कोने में मम्मी को बेरहमी से चोदता था। यह याद करके मेरा जोश और बढ़ जाता है और मैं मां की ताबड़तोड़ चुदाई करने लगता हूं। मम्मी मेरे हर झटके पर आगे खिसक रही थी और उनकी भारी गोल चूचियाँ नीचे झूल रही थी।

मम्मी तेज़ कामुक सिसकारियाँ भरते हुए बोली: आह… आह… राहुल, अचानक तुम्हें क्या हुआ? उफ़… आह… यही तो चाहिए मेरी चूत को! बेटा, रगड़ दे मुझे… आई ई ई… तुम अपने पापा से भी बड़े खिलाड़ी मर्द बनोगे। बेटा, झड़ने से पहले मुझे अपने लंड की सवारी करा देना…

मैंने मम्मी के चूतड़ों पर चार-पांच थप्पड़ रसीद दिए और बोला: चिंता मत कर मेरी रंडी, आज तुझे पूरी रात लंड की सवारी कराऊँगा।

मम्मी सिसकते हुए बोली: राहुल, मुझे इतना चोद कि मेरा रंडीपना बाहर आ जाए… उफ़… आई… बेटा, अगर असली खिलाड़ी मर्द बनना है, तो झड़ने से पहले औरत की पोजीशन बदल दिया करो, इससे तुम देर तक टिकोगे…

मैंने लंड को बाहर निकाला और बोला: अच्छा! आ फिर, तुझे लंड की सवारी कराऊँ।

मैं बगल में सीधा लेट जाता हूं। मम्मी मेरी जांघों के दोनों तरफ अपने पैर करके सीधा अपनी चूत मेरे लंड पर टिकाती हैं और धीरे-धीरे नीचे बैठ जाती हैं।

उफ़… मम्मी मेरी आँखों में देखते हुए अपने बाल खोल देती हैं, फिर अपने हाथ मेरे सीने पर रख कर गांड उछालना शुरू कर देती हैं। मां की चूचियाँ हिलती देख मेरे लंड का तनाव और बढ़ जाता है। वह मेरे खड़े लंड को चूत की पूरी गहराई तक लेकर ऊपर-नीचे हो रही थी।

थोड़ी ही देर में मम्मी का जोश सातवें आसमान पर पहुँच जाता है। वह हाँफते हुए तेज़ गति से ऊपर-नीचे होते हुए झड़ने वाली थी। उनकी चूत से हल्का रस टपककर मेरी जांघों पर गिरता है, तभी मैं मम्मी को अपने नीचे आने को कहता हूं ताकि हम साथ झड़ सकें।

मम्मी तुरंत अपनी टांगें फैला कर बोली: राहुल बेटा, जल्दी मेरी चूत में लंड डाल दे… उफ़… बेटा, आज अपनी मां की चूत अपने बीज से भर दे!

मैं मम्मी की चूत में लंड डाल कर तेज़ धक्के मारने लगता हूं। थोड़ी ही देर में मम्मी का रुका हुआ जोश फिर से आता है और हम दोनों साथ में ही झड़ जाते हैं। मेरा लंड पूरी तरह मां की चूत के अंदर खाली हो रहा था। मां मेरे गर्म वीर्य को अपनी चूत के अंदर महसूस कर रही थी। वह लंबी-लंबी आहें भर कर सिसक रही थी और उनकी चूत बार-बार टाइट होकर मेरे लंड को निचोड़ रही थी।

मैं मम्मी के ऊपर ढेर होकर लेट जाता हूं। वह मुझे अपनी बाहों में समेट कर राहत की साँस लेती हैं। कुछ देर बाद जब मेरा लंड एक फच की आवाज़ के साथ बाहर आता है, तो मैं उनके बगल में लेट जाता हूं।

मम्मी मेरे सीने और फिर होंठों को चूस कर बोली: राहुल, तुमने तो मुझे खुश ही कर दिया! ऐसी मस्त चुदाई करोगे, मुझे अंदाज़ा नहीं था। उफ़… मेरा पूरा बदन टूट गया है, तुम कमाल के मर्द बनोगे। आई लव यू राहुल…

मैंने भी उनके होंठों को चूम कर कहा: आई लव यू टू, जान! मैं आगे भी तुम्हें ऐसी ही ढेर सारी खुशियाँ देने वाला हूं।

मम्मी मेरे सीने से लग कर कुछ देर लेटी रहती हैं, फिर वह दोबारा मेरे ऊपर आकर लिप-लॉक करती हैं और मुझे दूसरे राउंड के लिए तैयार करने लगती हैं।

इस बार मैं मम्मी को बेड के किनारे लाकर, उनकी टांगें फैला कर और ज़मीन पर खड़ा होकर पीछे से चुदाई कर रहा था। थोड़ी देर बाद मैं उन्हें बेड से उतार कर झुका देता हूं और पीछे से पेलने लगता हूं। मैं हर पोज़िशन में उन्हें चोद कर उनकी चूत की गर्मी निकाल रहा था।

तीसरे राउंड में मम्मी मेरी गोद में उछल-उछल कर चुदाई करवाती हैं। उन्हें इस तरह अपनी गोद में उछाल कर मैं अपनी बॉडी की मज़बूती दिखा रहा था। इस ताबड़तोड़ चुदाई के बाद हम दोनों बेड पर ढेर हो जाते हैं और मम्मी थक कर मुझे अपनी बाहों में लेकर नंगी ही सो जाती हैं।

सुबह के करीब पाँच बजे मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड किसी गर्म और गीली जगह पर था, जिससे मेरी आँख खुल गई। मैंने देखा कि सुबह की ताज़गी के बीच मम्मी मेरे तने हुए लंड को चूस रही थी।

मैंने अपने एक हाथ से उनके सिर पर हल्का दबाव बना कर पूरा लंड उनके गले में उतार दिया। मम्मी हूं-हूं करके कुछ सेकेंड तक उसे मुँह में लिए रही, फिर लंड बाहर निकाल कर सीधा मेरे ऊपर आ गई। उन्होंने लंड को चूत के मुहाने पर सेट किया और उसे अंदर निगल गई। मैं नीचे से धक्के मारकर उन्हें चोद रहा था।

सुबह की इस चुदाई का मज़ा ही कुछ और था। इसके बाद मम्मी अपनी चूत को खुद साफ करके मेरे बगल में सो गई। जब 9 बजे मेरी आँख खुली, तो देखा कि मैं बेड पर अकेला नंगा लेटा हुआ था और मम्मी बाथरूम के अंदर नहाते हुए गुनगुना रही थी। मैं उठ कर सीधा बाथरूम में घुस गया। मम्मी पूरी नंगी खड़ी अपने बदन पर साबुन लगा रही थी। मैंने उन्हें पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया।

मम्मी ने चेहरा घुमा कर मेरे होंठों को चूसा और बोली: गुड मॉर्निंग! उठ गए? मुझे लगा आप देर तक सोएंगे।

मैंने पीछे से उनके बूब्स मसलते हुए कहा: गुड मॉर्निंग मेरी जान!

मम्मी के बदन से लिपटने पर मेरी बॉडी पर भी साबुन लग गया। मैंने शावर चालू कर दिया और हम दोनों भीगने लगे। भीगने के बाद मम्मी का बदन चमकने लगा था। मैं नीचे बैठ गया और उनकी टांगें फैला कर चूत चाटने लगा। थोड़ी देर में मम्मी ने अपना पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया। फिर वह घुटनों के बल बैठ गई और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। वह लंड का सारा रस पी गई, फिर हम एक-दूसरे को साफ़ करके बाहर आए और होटल से चेकआउट कर लिया।

घर निकलने से पहले हम आगरा का ताजमहल घूमने गए। मार्केट में मैंने गौर किया कि मम्मी की कलाइयां सूनी थी। मैं उन्हें एक अच्छे शोरूम में ले गया और उनकी साड़ी से मैच करती चूड़ियाँ दिलवाई। उनकी नाक भी बिना नथ के अधूरी लग रही थी, तो मैंने एक सुंदर सी नथ लेकर खुद उन्हें पहना दी। नथ पहनते ही मम्मी और भी ज़्यादा सुंदर लगने लगी थी।

मम्मी का पूरा लुक अब एक शादी-शुदा महिला जैसा लग रहा था। हम बाहर पति-पत्नी की तरह घूम रहे थे। मम्मी मेरी बाहों में हाथ डाले चल रही थी; हमें देख कर कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता था कि हम मां-बेटा हैं। हमने ताजमहल पर अपनी कुछ तस्वीरें खिंचवाई और शाम होने से पहले घर के लिए निकल पड़े।

घर आकर हमारा रिश्ता और भी मज़बूत हो गया। मम्मी ने मुझे अपने ही कमरे में सोने को कह दिया था। सुबह वह मेरा लंड चूसकर ही बिस्तर से उठती, फिर मुझे नंगा सोता छोड़ खुद नहाने चली जाती।

नहाने और घर का काम निपटाने के बाद वह नाश्ता बना कर मुझे जगाने आती। वह घर में अक्सर सिर्फ पेंटी और एक शर्ट या टी-शर्ट पहने रहतीं। फिर हम साथ बैठ कर नाश्ता करते। शॉप पर जाने से पहले मम्मी मुझसे अपनी पसंद की साड़ी के बारे में पूछती।

मम्मी मेरी पसंद की साड़ी पहन कर पूरा श्रृंगार करती। जब हम शॉप पर जाते, तो लोग उन्हें मेरी बीवी समझ लेते। यहाँ तक कि आस-पास के लोग मुझसे सवाल करने लगे थे कि मैंने शादी कर ली और किसी को बताया भी नहीं! मम्मी यह सुन कर शर्मा जातीं और फिर रात को बिस्तर पर जमकर चुदाई करवाती।

एक रात मम्मी ने चुदाई के दौरान कहा: राहुल, शॉप पर लोग जब तुम्हें मेरा पति समझते हैं, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है।

मैंने जवाब दिया: ठीक है, शॉप पर हम पति-पत्नी की तरह ही रहेंगे।

इसके बाद, हम जब भी किसी पार्टी या क्लाइंट से डील करने जाते, मैं मम्मी का परिचय अपनी बीवी के रूप में ही करवा देता। इससे हमें काफी अच्छी डील्स मिलने लगी और कुछ ही महीनों में हमने अच्छी-खासी इनकम कमा ली। मम्मी अब मेरे साथ पूरी तरह से खुश रहने लगी।

 

अपनी कहानी को फिलहाल के लिए यहीं समाप्त करता हूं। 

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