मम्मी जुनैद से लिपटी हुई उसे किस्स कर रही थी, सब के सामने और सब के बीच। सब लोग तालियां बजा कर जुनैद और मम्मी का सेलिब्रेशन कर रहे थे। मैं उनसे काफी दूर खड़ा यह सब देख रहा था। मम्मी सब के सामने बिना शर्म के जुनैद से लिप-लॉक किए हुए थी। दोनों एक-दूसरे के होंठ चूसने के बाद अलग हुए, फिर एक-दूसरे की आंखों में देखते रहे। मम्मी शर्म से अपना सिर जुनैद के सीने में छुपा लेती हैं।
पास में खड़े एक कपल ने कहा: यह सबसे अच्छा सेलिब्रेशन था, जुनैद तुमने कमाल ही कर दिया।
आरिफ ने कहा: हाँ जुनैद, तुमने रिसॉर्ट का माहौल ही बना दिया। बस एक छोटा-सा किस्स और सविता जी, हम सभी की तरफ से, यस सविता जी।
सब के कहने पर मम्मी ने जुनैद के गले में अपने दोनों हाथ डाले, फिर उसे एक ज़बरदस्त लिप-किस्स करके उसके बगल में खड़ी हो गई।
जुनैद ने मम्मी की कमर में अपना हाथ डालते हुए कहा: यह तो मेरी जान का बर्थडे सेलिब्रेशन था, आज हमारी प्यारी-सी सुहागरात भी है।
आरिफ के अलावा वहाँ खड़े तीन कपल ने कहा: जुनैद, तुम बहुत खुश-नसीब हो। सविता जी को आज तुम खूब प्यार देना।
फिर मौसी मम्मी के पास जाकर धीरे से कुछ बोली, जिसके बाद मम्मी जुनैद से अलग होकर बाकी लोगों के साथ बात करने लगी। जब मम्मी का सब के सामने नाटक खत्म हुआ, तब मैं उनके पास गया और मौसी को उनका फोन देते हुए बोला-
मैं: ओहो मौसी, आपका फोन काफी ढूँढने के बाद मिला है। मैंने तो पार्टी भी मिस कर दी।
मौसी बोली: सॉरी राहुल, मैंने तुम्हें परेशान किया। पर तुमने कुछ मिस नहीं किया है।
मैं मन ही मन सोचा: यह तो मौसी की चाल थी। मुझे कमरे में फोन लेने भेजना। ताकि मेरे ना होने पर सब के बीच जुनैद मम्मी को किस्स कर सके।
मम्मी जुनैद के साथ खड़ी एक कपल से हँसते हुए बातें कर रही थी। मैं उनके पास गया तो मम्मी ने मेरा परिचय उनसे कराया। सामने खड़ी औरत देखने में काफ़ी सुंदर थी। उम्र लगभग 35 के आस-पास लग रही थी। वो एक जवान लड़के के साथ थी जिसकी उम्र मुझे करीब 23 साल लगी। परिचय में उस औरत ने अपना नाम काजल बताया।
काजल ने मुझसे हाथ मिलाते हुए मुस्कुरा कर कहा: हेलो राहुल, आपकी मम्मी वाक़ई बहुत लकी हैं कि उन्हें आप जैसा बेटा मिला है। काश सविता जी की जगह मैं होती और मेरे पास भी आपके जैसा बेटा होता… तो मैं भी इनके साथ खुल कर एन्जॉय कर पाती। वैसे, आपका हार काफ़ी शानदार है। यह शायद जुनैद ने ही आपको गिफ्ट किया होगा?
मम्मी हल्की सी शर्मीली मुस्कान के साथ बोली: नहीं काजल, यह हार राहुल ने ही मुझे गिफ्ट किया है। और वैसे भी, राहुल सिर्फ़ मेरा बेटा नहीं, बल्कि मेरा सबसे अच्छा दोस्त भी है। इसी वजह से मैं अपनी ज़िन्दगी खुल कर एन्जॉय कर पाती हूँ।
काजल मम्मी के गले लगते हुए, उनके कानों के पास धीरे से बोली: ठीक है सविता जी, आज की रात जम कर एन्जॉय करना। जुनैद जैसे मर्द कम ही होते हैं, जो औरतों को सच में चरमसुख दे सकें। गुड बाय।
उनके जाते ही, मम्मी ने जुनैद की तरफ़ एक कातिलाना मुस्कान डाली और फिर मेरी ओर देखकर बोली: बेटा, अभी मैं कुछ लोगों से मिल लूँ… फिर तुम्हारे पास आ जाती हूँ।
मम्मी जुनैद की बाहों में हाथ डाले सब लोगों से मिल रही थी। हर कोई मम्मी के गले में पड़े मेरे गिफ़्ट किए हुए हार की तारीफ़ कर रहा था।
इधर मेरी नज़र दूसरी तरफ़ पड़ी, जहाँ मौसी आरिफ के साथ एकांत में बैठ कर बातें कर रही थी। मेरे मन में शक हुआ, कहीं ये दोनों कुछ और ही खिचड़ी तो नहीं पका रहे? मैं चुप-चाप उनके पीछे जाकर छिप गया और उनकी बातें सुनने लगा।
मौसी बड़े अपनत्व से बोली: आज अपनी बहन सविता को इतना खुश देख कर मुझे बड़ी खुशी हो रही है। काश वो ऐसे ही हमेशा मुस्कुराती रहे।
आरिफ हल्की मुस्कान के साथ बोला: आप दोनों बहनों का प्यार वाकई काबिल-ए-तारीफ़ है। और अब तो सविता ऐसे ही मुस्कुराती रहेगी… आखिर उसे जुनैद इतना प्यार जो दे रहा है। आज तो दोनों अपनी हसीन रात भी बिताने वाले हैं। जुनैद वाकई लक्की है कि उसे सविता जैसी हसीना मिली।
मौसी ने शरारती अंदाज़ में कहा: आरिफ़ जी, कहीं आपको जुनैद से जलन तो नहीं हो रही?
आरिफ ने हंसते हुए उसकी तरफ़ झुक कर कहा: मैं अपने दोस्त से जल नहीं सकता। (फिर मौसी का हाथ अपने हाथों में लेकर बोला) … मेरे पास भी तो एक हसीन चीज़ है। बस आप हां कह दीजिए, फिर हमारी रात भी हसीन बन सकती है।
मौसी उसकी बात सुन कर हल्का-सा शर्मा गई। उनकी नज़रें नीचे झुक गई और वो कुछ पल चुप रही।
फिर धीरे से बोली: मैंने कभी इस तरह नहीं सोचा था… कि कोई मुझे भी इतनी हसीन नज़र से देखेगा। आपकी तारीफ़ों ने सच में मेरा दिल जीत लिया है।
आरिफ़ ने मुस्करा कर अपनी बाहें फैलाते हुए कहा: मुझे सच में खुशी है कि आपने मुझे स्वीकार कर लिया।
मौसी ने हल्की झिझक के साथ अपनी पलकों को उठाया और आरिफ़ की आँखों में झाँकने लगी। कुछ देर उसकी नज़रों में डूबी रही, फिर धीरे-धीरे खुद को उसकी बाहों में समेट लिया।
आरिफ़ ने उन्हें ऐसे भींचा जैसे ठंडी रात में कोई रजाई ओढ़ लेता है। मौसी बिना किसी संकोच के उसके बदन से लिपट गई, मानो बरसों से बुझी प्यास को किसी मर्द की गर्मी ने अचानक जगा दिया हो। दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे कि तभी कदमों की आहट पास आई।
जुनैद मम्मी को बाहों में थामे वहाँ पहुँच गया। उसने हल्की-सी खाँसी करते हुए चुटकी ली: लगता है, भाईजान… हमने आपको डिस्टर्ब कर दिया?
जुनैद की आवाज़ सुनते ही मौसी झट से आरिफ़ की बाँहों से निकल कर एक तरफ बैठ गई, उनके गाल लाल हो उठे थे।
आरिफ़ थोड़े हकलाते हुए बोला: न-नहीं… हम तो बस इस खुशी के मौके पर छोटा-सा हग कर रहे थे।
जुनैद मुस्कुराया और बोला: भाईजान, चांदनी रात हो चुकी है… अब हमें आगे का कार्यक्रम शुरू कर लेना चाहिए।
आरिफ़ ने संभलते हुए कहा: हाँ, बिल्कुल! मैंने आपका रूम पहले से तैयार कर दिया है। पहले सब मिल कर डिनर कर लेते हैं, फिर आप दोनों अपनी… सुहागरात का पूरा लुत्फ़ आराम से उठाना।
जुनैद खिलखिलाते हुए बोला: भाईजान, मैं तो कहता हूँ लगे हाथ आप अपना रूम भी तैयार कर लीजिए।
आरिफ और जुनैद खड़े होकर बाहर निकलने लगे तो मौसी ने हल्के स्वर में कहा: आप लोग चलिए… हम बस पाँच मिनट में राहुल के साथ आते हैं।
दोनों के जाते ही मम्मी मौसी के पास खिसक कर बैठ गई। उन्होंने मौसी का हाथ थाम लिया, उनके चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी।
मम्मी बोली: दीदी, मेरा दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा है मुझे अजीब लग रहा है। समझ नहीं पा रही कि जो कर रही हूँ वो सही है या ग़लत।
मौसी ने प्यार से मम्मी के कंधे पर हाथ रख दिया: अरी सविता, तू कुछ ग़लत नहीं कर रही। घबराने की ज़रूरत नहीं है। राहुल को कुछ पता नहीं है। ज़िंदगी एक बार मिलती है यहाँ खुल कर मज़ा ले, जुनैद तुझे खुश रखेगा।
मम्मी की आँखें नम हो गई, उन्होंने मौसी को कस कर गले लगाया और बोली: माफ करना दीदी… आप आरिफ के साथ जिस तरह… सब ठीक तो है ना?
मौसी की आवाज़ में उदासी उतर आई: सविता, अब तुझसे क्या छुपाऊँ? जब से तेरे जीजा की तबियत बिगड़ी है, उन्होंने मेरे जिस्म की तरफ देखना ही छोड़ दिया। कब तक मैं खुद को रोकती? आरिफ को देख कर मेरी दबाई हुई चाहतें फूट पड़ी।
मम्मी ने मुस्कराकर माहौल हल्का करने की कोशिश की: तो फिर दीदी, आप तैयार रहिए। आज रात आरिफ अपने मूसल से आपकी जम कर ठुकाई करने वाला है।
मौसी ने शरारत से मम्मी के गाल खींचे: नालायकी मत कर! लेकिन हाँ, मुझे भी उम्मीद है कि वो मेरी अच्छी खासी ठुकाई करे। वैसे… ये मूसल सच में इतना दमदार होता है क्या?
मम्मी हँस पड़ी: दीदी, खुद ही देख लेना… चलो अब, मैं राहुल को बुलाती हूँ।
थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे फोन किया। मैं उनके पास पहुँचा और सब साथ में डिनर करने बैठे। खाने के बाद मैंने जान-बूझ कर सबसे पहले गुड नाइट कह दिया। मम्मी ने मुझे गले लगाया और हल्की-सी किस्स देकर कमरे में चली गई।
मैं अपने कमरे में जाकर खिड़की के पास ऐसी जगह ढूँढ़ने लगा जहाँ से मम्मी की सुहागरात देख सकूँ। कुछ देर बाद मौसी मम्मी को हाथ पकड़ कर सजाए हुए कमरे में लेकर आई। पूरा कमरा फूलों से महक रहा था, गुलाबों की खुशबू फैली थी।
मौसी ने मम्मी को धीरे से बिस्तर पर बैठाया, उनका लहँगा चारों तरफ गोलाई में फैला दिया और लंबा घूँघट डाल दिया।
उन्होंने मम्मी को गले लगा कर फुसफुसाया: मेरी बहन… अब आराम से जुनैद से सुहागरात का मज़ा लेना। गुड नाइट।
उसी वक्त जुनैद आरिफ के साथ कमरे में आया।
आरिफ ने हँसते हुए कहा: भाई, आज भाभी को जी भर कर मज़ा देना।
फिर उसने मौसी की कमर में हाथ डाल लिया और बोला: चलो जान, अब हमें भी निकलना चाहिए।
जुनैद ने कमरे का दरवाज़ा धीरे से बंद किया और लॉक लगा दिया। माहौल में फूलों की महक और हल्की सी घबराहट घुल गई थी। वो धीरे-धीरे मम्मी के करीब आया…
जुनैद अपने हाथों में एक खिला हुआ गुलाब लेकर मम्मी के करीब जाता है। मम्मी बेड के बीचों-बीच लंबा घूंघट किए बैठी हुई थी। जुनैद फूलों से सजे बेड के किनारे पर बैठ जाता है और मम्मी को निहारने लगता है।
मम्मी घूंघट के अंदर से प्यारे स्वर में बोली: जी, आप उधर बैठ कर ऐसे कुछ सोचते हुए क्या निहार रहे हैं?
जुनैद गुलाब की सुगंध लेते हुए बोला: यही कि आज शुरुआत कहां से की जाए, ताकि हमारी रात हसीन गुजर सके। तुम्हें दुल्हन के लिबास में निहारने का मज़ा ही कुछ और है।
जुनैद मम्मी के करीब बैठ जाता है, फिर हल्के हाथों से धीरे-धीरे घूंघट उठा कर माथे तक कर देता है। मम्मी अपनी पलके झुकाए, चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए बैठी हुई थी। उनका चेहरा आज रोज़ के मुकाबले और ज्यादा निखर रहा था।
जुनैद अपने हाथों में लिए गुलाब को मम्मी के माथे से फेरते हुए जैसे-जैसे होंठों के पास लाता है, मम्मी के बदन में सिहरन उठने लगती है। मम्मी अपनी प्यारी पलके उठा कर जुनैद की तरफ देखती हैं। जुनैद उस फूल को गर्दन से फेरते हुए मम्मी की उभरी हुई क्लीवेज पर रगड़ता है। जैसे वह मम्मी को बस तड़पाना चाहता हो।
मम्मी की आंखें नम और नशीली होती जा रही थी। वह जुनैद की तरफ इस तरह हवस भरी निगाहों से देख रही थी, जैसे आज पहली बार वह उसके साथ हमबिस्तर हो रही हों।
जुनैद उस फूल को चूमते हुए बोला: मेरी जान, आज तुमने मुझे सब के सामने किस्स करके खुश कर दिया। इस दिन का हम कब से इंतज़ार कर रहे थे।
मम्मी नशीली आंखों से उसकी आंखों में देखते हुए बोली: जुनैद जी, फिर अब किस बात का इंतज़ार है? मुझे और क्यों तड़पा रहे हो?
जुनैद करीब जाकर उसका चेहरा ऊपर उठाकर आंखों में आंखें डालते हुए बोला: जान, आज हम सब कुछ बिस्तर पर करने वाले हैं। तुम्हारे जिस्म के हर एक कोने पर अपने निशान छोड़ दूंगा, ताकि तुम अपने उस पति को फिर कभी याद ना कर सको।
मम्मी अपने तड़पते, प्यासे होंठों को उसके होंठों के नज़दीक लाकर धीरे स्वर में बोली: उसे याद करती तो मैं आपको इस दुल्हन के लिबास में ना मिलती। मेरे जिस्म का रोम-रोम तुम्हारे मूसल का दीवाना है।
जुनैद ने दोनों हाथों से मम्मी का चेहरा बड़े प्यार से पकड़ कर उनके माथे को चूमते हुए कहा: मैं ज़िंदगी भर तुम्हें अपने मूसल का प्यार देना चाहता हूँ।
दोनों कुछ देर चुप-चाप एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे, फिर जुनैद मम्मी के होंठों पर लपक कर अपने होंठ रख देता है।
मम्मी, जुनैद के होंठ लगते ही मोम की तरह पिघलने लगती हैं। वो अपनी आँखें बंद कर उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगती हैं। जुनैद जैसे ही होंठ चूसते हुए मम्मी के बूब्स पर हाथ रखता है, वो सिहर उठती हैं और अपने पैर को दूसरे पैर से रगड़ती हैं। जुनैद चोली के ऊपर से ही बूब्स की गोलाई नाप रहा था।
दोनों एक-दूसरे के होंठ चूसते हुए बिस्तर पर लेट जाते हैं। फिर जुनैद मम्मी को तड़पाने के लिए अपने होंठ उनसे अलग कर लेता है।
मम्मी तब उसे खा जाने वाली नज़रों से देख बोली: यूँ मेरे बदन को तड़पा कर मत देखो ज़ालिम, मैं आग-सी जल रही हूँ।
फिर अपने होंठों को होंठों से रगड़ते हुए उसका कुर्ता पकड़ कर अपने क़रीब खींच लेती हैं। जुनैद उसकी जलती हुई आँखों में देख कर अपने होंठ मम्मी के होंठों पर रखने ही जाता है कि तभी मम्मी हँसते हुए गोल घूम कर पेट के बल लेट जाती हैं, और उसकी तरफ़ देख एक क़ातिलाना मुस्कान देती हैं।
जुनैद अपनी एक उंगली को उनकी गर्दन से धीरे-धीरे फेरते हुए चोली के नज़दीक लाकर बोला: तो तड़पाना हमें ही नहीं, हमारी जान को भी आता है।
इतना कहते ही वो चोली की डोरियाँ खोल देता है। डोरी खुलते ही चोली के दोनों हिस्से अलग हो जाते हैं। जुनैद झुक कर उनकी नंगी पीठ को ऊपर से नीचे तक चूमता है। चूमते हुए जब भी मम्मी की चर्बी पर अपने दाँत लगाता, माँ के मुँह से आह… आह… उफ़्फ… की आवाज़ निकल रही थी।
फिर वो दूसरी तरफ करवट लेकर एक हाथ से चोली उतार अपने से दूर फेंक देती है। तभी जुनैद मम्मी की नंगी चूचियों की चमक और उनके उभार को देख कर उन पर टूट पड़ता है। एक बूब्स को मुँह में लेकर दूसरे को ज़ोर से दबाता है। मम्मी अपनी आँखें बंद किए उसके सिर पर हाथ फेरती हुई—
माँ: आह… आह… उफ्फ… जालिम! कब से तड़पा रहा है… आह आह… ऐसे ही निचोड़ दे मुझे।
जुनैद और ज़ोर से माँ के बूब्स चूसने व दबाने लगता है। उसके चूसने से माँ का पूरा बदन अकड़ रहा था। माँ कामुकता से अपने पैरों को बिस्तर पर कभी रगड़ती, कभी इधर-उधर फेंकती। उनके पैरों की पायल की छन-छन कमरे में गूंज उठती।
दोनों बूब्स का रस चूसने के बाद जुनैद पेट को चूमते-चूसते हुए मम्मी की नाभि पर आ जाता है। मम्मी इससे और पागल हुई जा रही थी।
मम्मी (छटपटाते हुए कामुक अंदाज़ में): आह… आह… हहह… जुनैद जी, बस करो… आह उफ्फ्फ… क्यों तड़पा रहे हो? मैं… ममम… ऐसे ही झड़ने जा रही हूँ।
जुनैद (हांफते हुए): जान, तूने मुझे सुहागरात के लिए कितने दिन अपने आप को छूने नहीं दिया। तुझे पता है, मैंने खुद को कैसे रोके रखा!
मम्मी (कामुकता से): मेरे राजा… अपना सारा गुस्सा मेरे दोनों होलों में मूसल डालकर निकालो। आज मैं तुम्हारे मूसल से पूरी तरह तृप्त होना चाहती हूँ।
मम्मी हाथ आगे बढ़ा कर जुनैद का कुर्ता उतार फेंकती है, फिर उसके बालों में अपनी उंगलियाँ फँसा कर उसे ज़ोरदार किस करती हैं। मम्मी अपने रसदार होंठ चुसवाते हुए जुनैद को अपने ऊपर लेकर लेट जाती हैं। जुनैद की मज़बूत छाती मम्मी की नर्म चूचियों को रगड़ रही थी।
एक-दूसरे को चूसते-चूसते दोनों लिपट कर करवट बदलते हैं। मम्मी जुनैद के ऊपर आकर उसे जबर्दस्त चूसने लगती है। वो जुनैद के होंठों से गले पर आती हैं, फिर उसकी मज़बूत छाती पर उतर कर दोनों निपल्स को चूमती और चूसती हुई नीचे आती हैं। फिर जुनैद के पजामे का नाड़ा एक झटके में खोल कर उसे पैरों से उतार फेंकती हैं।
मम्मी उसके अंडरवियर के ऊपर से ही लंड के उभार पर अपने होंठ फेरती हैं। जुनैद मम्मी का सिर पकड़ कर अपने लंड पर रगड़ते हुए कहा: साली, आज तू इस मूसल के लिए बहुत बेताब लग रही है?..
मां उसका अंडरवियर उतार कर उसके मूसल पर अपने कोमल होंठ फेरते हुए बोली: जुनैद जी, बेताब तो इसे पहली बार देख कर ही हो गई थी, जब आप बीच रास्ते में कार रोक कर पेशाब कर रहे थे। और आज तो सुहागरात पर इसे पाकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।
मम्मी लंड के सुपारे को मुंह में भर लेती है। जुनैद का लंड आज काफी चिकना और फूला हुआ लग रहा था। उसके लंड की नसें फूली हुई चमक रही थी। मम्मी अपना पूरा फोकस लंड पर रखती है।
जुनैद मम्मी के बाल पकड़ कर अपना लंड चुसवाते हुए: आह उफ्फ… साली, तू मजेदार है, तेरी जैसी और कोई मुझे खुश नहीं कर सकती! उफ्फ्फ्फ आह…
मम्मी जुनैद की तरफ अपनी निगाहें किए हुए, एक हाथ से लंड का निचला हिस्सा पकड़े सुपारा मुंह में लिए चूस रही थी। पूरे कमरे में चूड़ियों की खन-खन, लंड चूसने की घाप-घाप, सुर्रप-सुर्रप की आवाज़ें गूंज रही थी। जुनैद लेटा हुआ अपनी टांगे फैला देता है, ताकि मां उसका मूसल अच्छे से चूस सके।
मम्मी अपनी जीभ उसके चिकने अंडों पर फेरते हुए, लंड के अगले सिरे तक लाकर उसे फिर मुंह में भर लेती। मम्मी एक हाथ से लंड पकड़े हुए थी, और आधा मुंह में लेकर अपना सिर धीरे-धीरे, कभी तेजी से ऊपर-नीचे कर रही थी। उनका जोश आज वाकई और दिनों से ज्यादा दिख रहा था। वो काफी देर की लंड चुदाई के बाद—
मां हांफते हुए बोली: जुनैद जी, बस अब और नहीं रहा जाता, मेरी चूत अब मूसल के लिए फड़फड़ा रही है।
जुनैद उठ कर बैठा और मम्मी के बालों में अपने हाथ फेरते हुए कहा: मेरी जान, मूसल चूत में नहीं, गांड में जाना है, जिसके लिए तुमने मुझे इतने दिन तड़पाया।
मम्मी जुनैद के सीने पर हल्के हाथों से मुक्के मारते हुए बोली: मूसल को जहाँ डालना है डालो, पर मुझे शांत करो जुनैद जी, प्लीज़ मैं तड़प रही हूँ!
जुनैद तुरंत बेड से उतर कर ज़मीन पर खड़ा हो गया। मम्मी बेड के किनारे पर आकर अपने लहंगे का नाड़ा खोल देती हैं। जुनैद माँ का लहंगा पकड़ता है, तो माँ अपनी गांड हल्की ऊँची कर देती हैं, जिससे जुनैद माँ का भारी लहंगा आराम से उनके पैरों से निकाल देता है। माँ ने अंदर लाल रंग की सिल्क फैंसी पैंटी पहनी हुई थी, जो आगे चूत के हिस्से से काफी गीली हो गई थी।
जुनैद माँ की टाँगें पकड़ कर उन्हें और आगे खींचता है, ताकि वह माँ की पैंटी आराम से उतार सके। जुनैद माँ की चिकनी टाँगों को चूमते हुए उनकी जाँघों तक आता है। फिर उनकी मस्त, रस भरी जाँघों को थोड़ी देर चूसते और काटते हुए उनकी पैंटी पर आता है। फिर अपने दोनों हाथों से पैंटी को पकड़ कर धीरे-धीरे उनकी जाँघों से नीचे लाकर पूरी उतार देता है। मम्मी अब पूरी नंगी हो गई थी, उनके बदन पर बस मेरा हार ही चमक रहा था। मम्मी जुनैद की तरफ देख कर अपनी टाँगें फैलाती हैं। मैंने जब उनकी गांड के छेद में कुछ चमकती चीज़ देखी, तो मैं हैरान हो गया कि आखिर वह क्या चीज़ थी।
जुनैद मम्मी को बेड के बिल्कुल कोने पर लाता है, फिर उनकी टाँगे फैला कर उनकी चूत की फाँकों के बीच देखते हुए मुस्कराते बोला: मेरी जान, मेरे तोफे ने तुम्हें बुरी तरह गर्म कर दिया है… देखो तो, चूत कैसे गीली पड़ी है।
फिर अपनी गलियों को चूत के दरम्यान घिसता है। मम्मी उसके हाथ चूत पर लगते ही और भी तड़प उठती हैं। वो बिना पानी की मछली की तरह फड़फड़ा रही थी। मम्मी अपने हाथ आगे बढ़ा कर जुनैद का सिर पकड़ कर अपनी चूत पर रख देती हैं। जुनैद अपनी जीभ चूत पर चलाना शुरू कर देता है।
मम्मी, जुनैद के बालों में अपनी उंगलियाँ फँसाए लंबी सिसकारियाँ भरते हुए बोली: आह्ह्ह… आह्ह… जुनैद जी उफ्फ्फ्फ्फ… तुम्हारा ये बट्ट प्लग, मेरे अंदर कब से तैयार था… प्लीज़ अब मुझे और मत तड़पाओ… आह्ह्ह… जुनैद जी, तुम बहुत जालिम हो…
जुनैद जीभ के साथ अपनी दो उंगलियाँ चूत में डाल कर उसके ऊपरी हिस्से को कुत्ते की तरह चूस रहा था। मम्मी इस मज़े का एहसास सातवें आसमान पर उड़ते हुए ले रही थी, उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ती जा रही थी।
वो कपकपाती, कामुक आवाज़ों में बोली: आह्ह्ह… आह्ह्ह… जुनैद जी, बस और नहीं… रुक जाओ… प्लीज़… मैं झड़ रही हूँ… उफ्फ्फ्फ्फ्फ… आह्ह्ह्ह्ह्ह…
मम्मी, जुनैद के मुँह में झड़ जाती हैं। झड़ने के बाद उन्हें काफ़ी रिलैक्स मिलता है। वो जुनैद का सिर ऊपर उठाती हैं, जो अब भी उनकी चूत का रस चाट रहा था।
मम्मी उसकी आँखों में देखते हुए बोली: जुनैद जी… अब मुझे वो दर्द दो, जो पहली सुहागरात पर नहीं मिला था।
मम्मी अपनी टाँगें फैला कर अपने पेट की तरफ मोड़ लेती हैं। मैंने गौर किया कि उनकी गांड के छेद में कुछ गुलाबी हीरे जैसा चमक रहा था। मैं हैरान था कि यह नई चीज़ क्या है, जो मम्मी अपने छेद में घुसाए हुए थी।
जुनैद, मम्मी की तड़प को देखते हुए बोला: जान, मैं तुझे दर्द भी प्यार से दूँगा, क्योंकि तू मेरे दिल में बस गई है।
जुनैद मम्मी के नीचे एक तकिया रखकर उनकी गांड को और ऊँचा कर देता है। फिर जाँघों को थोड़ा और फैला कर उस चीज़ को गौर से देखता है जो उनकी गांड में घुसी हुई थी। जुनैद अपना हाथ आगे बढ़ाकर उस चीज़ को हल्के हाथों से धीरे-धीरे बाहर निकालता है। जैसे-जैसे वह चीज़ बाहर आ रही थी…
माँ दर्द से, आह… उफ़्फ़… जुनैद जी, बस अब इसे निकाल दो। अब इसकी जगह अपना मूसल डाल दो। उफ़्फ़…
जब वह पूरी बाहर निकली, तो मैंने देखा कि वह चीज़ आगे से नुकीली थी और उसके पीछे का हिस्सा धीरे-धीरे मोटा होता जा रहा था। वह देखने में एक क्रिस्टल के रंग का था। जब मैंने उसे खोजा तो पता चला कि वह एक बट प्लग था।
जैसे ही वो बाहर आया, मम्मी ने एक लंबी गहरी साँस लेते हुए कहा: आह.. इतनी देर तक इसे अंदर रखना बहुत मुश्किल था। आह उफ़्फ़ इईईईई..
मैंने देखा कि मम्मी की गांड का छेद एक इंच खुला हुआ था। उसके अंदर का गुलाबी माल साफ़ दिखाई दे रहा था, मम्मी धीरे-धीरे अपना छेद सिकोड़ रही थी।
जुनैद ने एक क्रीम उठाई और अपने मूसल पर लगाते हुए कहा: तो जानू, अब तुम दर्द के लिए तैयार हो ना? मेरा मूसल पहले तुम्हारी गांड में जाएगा!
मम्मी ने हल्की मुस्कान के साथ जुनैद से कहा: मूसल के लिए कोई भी दर्द ठीक है, पर थोड़ी नरमी बरतो जुनैद जी।
जुनैद गांड के छेद पर भी थोड़ी क्रीम लगाता है, वो एक उंगली पर ढेर सारी क्रीम लेकर गांड में डाल कर अंदर लगाता है। मम्मी होने वाले दर्द का एहसास जुनैद की आँखों में देख कर कर रही थी, क्योंकि अब उसे जुनैद के मोटे मूसल से मिलने वाला था। जुनैद अब ज़्यादा समय ना लगाते हुए अपना लंड गांड के छेद के पास लाता है और मम्मी की तरफ देख कर लंड डालने की सहमति लेता है।
मम्मी हल्की मुस्कान के साथ सिर हिला कर हाँ में जवाब देती हैं और अपनी टांगों को और अच्छे से पेट की तरफ मोड़ लेती हैं। जुनैद अपना लंड हल्का-हल्का गांड के हॉल पर रगड़ता है। मम्मी दर्द के डर से बार-बार गांड के हॉल को सिकोड़ रही थी। उसके चेहरे पर लंड लेने की बेताबी और होने वाले दर्द की झलक साफ़ दिखाई दे रही थी, लेकिन सुहागरात में मूसल अपनी गांड में लेने की बेताबी उन्हें अपनी टांगें फैलाने पर मजबूर कर रही थी।
जुनैद अपनी आँखों से मम्मी को हिम्मत देते हुए मूसल को गांड के छेद में डालने का प्रयास कर रहा था। वैसे तो मम्मी ने बट्ट प्लग लगा कर अपने छेद को पहले ही ढीला और नर्म कर लिया था।जुनैद धीरे-धीरे मम्मी की आँखों में आँखें डाल कर अपने लंड के सुपारे को गांड में प्रवेश कर देता है।
हल्का सा सुपारा अंदर जाते ही उसकी आँखों में देखते हुए, मम्मी एक लंबी सिसकारी भरती हुई बोली: आह आह ह ह ह.. उफ्फफफ सी सी सी आई.. ओहो ओहो, काफी मोटा है, जुनैद…
जुनैद अपने टोपे को डाल कर हल्का-हल्का अंदर-बाहर करता है। उसका मूसल जैसे-जैसे अपनी जगह बनता, मम्मी को एक चीनी जैसी राहत महसूस होती गई।
जुनैद धीरे-धीरे अपने मोटे मूसल को और अंदर की तरफ ढकेल रहा था। मम्मी की गांड की स्किन लंड के हिसाब से चीरती जा रही थी। वह अपने दांत पीसते हुए जुनैद को देख रही थी। मम्मी का दर्द से बुरा हाल हो रहा था। मम्मी छटपटा रही थी और अपनी मुठ्ठी में बेड की चादर समेट रही थी। वह बिना पलके झपकाए जुनैद को देख रही थी।
जुनैद का आधा लंड मम्मी के अंदर समा गया था, पर अभी बचा हुआ हिस्सा मूसल के आगे वाले हिस्से से भी मोटा था। मम्मी अपने एक हाथ को पीछे लाकर लंड का जायजा लेती हैं, जो अभी आधा बाहर था, और उससे और हैरान होती हुई मां, चेहरे पर दर्द और डर के भाव लिए, बोली: जुनैद जी, रेहम करो! अभी तो आपका आधा ही गया है, उससे ही मेरा बुरा हाल हो गया। पूरा जाएगा तो मैं मर ही जाऊंगी। उफ्फफफ सीईई.. काफी जलन हो रही है… आह ह उफ्फफफ, ऐसा दर्द!
जुनैद, मां की चूत को हल्के हाथों से छूते हुए, कहा: जान, बस थोड़ा दर्द और सह लो, फिर मैं तुम्हें सच में सेर का मज़ा दूँगा।
जुनैद, दर्द को राहत में बदलने के लिए, चूत को थोड़ा रब करना शुरू कर देता है, जिससे मां को दर्द में भी अब मज़ा महसूस होने लगा। धीरे-धीरे मां की सिसकारियां निकलनी शुरू हो जाती हैं। जुनैद चूत को और तेज़ रगड़ता है और साथ में एक-दो उंगलियां भी डाल देता है। जब जुनैद को लगा कि मां अपने दर्द पर काबू पा चुकी है, तो उसने अपने मूसल को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
मां को अब मज़ा और दर्द दोनों मिल रहे थे, तो वह भी कामुक हो कर लंबी-लंबी सिसकारियां ले रही थी। फिर जुनैद ने अचानक हमला किया और अपना आधा मूसल भी मम्मी की गांड में उतार दिया।
मां, दर्द से चीखती हुई, बोली: आई ईई ईई… जालिम, तूने मुझे मार डाला! उफ्फफफ, आईईईई… मां सीईईईई, आह ह ह ह… बहुत दर्द हो रहा है, जालिम, रेहम कर! आई आईईईईईई ई!
जुनैद अपनी चूत में डाली हुई उंगलियों को और तेज़ अंदर-बाहर करता है, साथ में वह चूत के दाने को भी अपने अंगूठे से रगड़ रहा था।
मां: उफ्फफफ, उफ्फफफ… आईईईई… जुनैद जी, एक तरफ दर्द देकर भी मुझे मज़ा दे रहे हो! आह आह आह ह ह ह… तुम ही असली मर्द हो, जुनैद! ई लव यू, ई ई ई लव… चोदो मुझे और चोदो।
जुनैद अपने मूसल को आगे-पीछे करते हुए चूत भी मसल रहा था। उसका ऐसा करना अब मम्मी को बहुत मज़ा दे रहा था। धीरे-धीरे जुनैद के हल्के धक्के तेज़ होते जा रहे थे, और मम्मी उसकी आँखों में देख कर उसका हौसला बढ़ा रही थी।
जुनैद कुछ देर में मम्मी की दोनों टांगे मजबूती से पकड़ कर अपने धक्के तेज करता है, मम्मी अब सातवें असमान पर उड़ते हुए गांड चुदाई का मजा ले रही थी।
मम्मी उसकी आँखों में देखते हुए अपने दोनों बूब्स खुद मसलती, कामुक सिसकारियां भरती हुई बोली: आह आह आह उफ़ उफ़… जुनैद जी… आह ह हहहह, आह आहहह ह… तुम कमाल के मर्द हो, मज़ा ही आ गया इस सुहागरात।
जुनैद मम्मी की दोनों टांगे वी-टाइप फैला कर तेज़ धक्कों से चोद रहा था। उसके हर धक्के मम्मी को एक-एक इंच हिला रहे थे। फिर जुनैद बेड पर चढ़ कर मम्मी को घोड़ी पॉजिशन में चोदना शुरू करता है। जुनैद मां के बड़े कूल्हों को मजबूत हाथों में पकड़ कर तेज़ धक्के मार रहा था। तेज़ धक्कों से जुनैद की थाई मां के चूतड़ों से टकरा रही थी। पूरे कमरे में थप-थप और मां की कामुक आवाज़ें गूंज रही थी।
मां की चूत लगते ही थरथरा रही थी, उनके चूत से रस टपक कर बेड शीट पर गिर रहा था। कुछ देर में मम्मी जुनैद को अपने ऊपर आने के लिए बोलती हैं। जुनैद मां की दोनों टांगों के बीच आकर मूसल के जोरदार धक्कों से चुदाई करता है। मां एक बार फिर जुनैद के साथ लंबी-लंबी सिसकारियां भरती हुई झड़ जाती हैं। थोड़ी देर की तेज़ चुदाई पर जुनैद मां की गांड में ही झड़ जाता है।
एक लंबी चुदाई के बाद, जुनैद कुछ देर मम्मी के ऊपर ही लेटा रहता है, जब उसका मूसल ढीला होकर गांड से बाहर निकल रहा था। उसके मूसल के साथ उसका ढेर सारा वीर्य भी बाहर आ रहा था। जुनैद मां के ऊपर से उतर कर बगल में लेट जाता है।
मम्मी उसके सीने से चिपक कर उसके होंठों पर किस की बौछार करती हुई बोली: ओह, जुनैद जी, आपने तो मुझे खुश ही कर दिया। बक्के में मेरी ऐसी चुदाई पहली सुहागरात पर नहीं हुई थी। आज आपने मुझे दर्द के साथ एक अलग ही खुशी दी है। ई लव यू।
जुनैद मम्मी के होठों को अपने दांतों के बीच काटते हुए बोला: मुझे भी तेरी चुदाई करके बहुत मज़ा आया। तेरी टाइट गांड को खोलने में एक अलग ही मज़ा था।
मम्मी थोड़ी उदास होते हुए बोली: काश, जुनैद जी, मैं आपको अपनी सील-पेक चूत भी सुहागरात पर दे पाती, तो आज मुझे और भी खुशी मिलती।
जुनैद: पर वो नामर्द के किस्मत में थी। पर जान, मेरी नजर में तेरी गांड भी सील-पैक से कम नहीं थी।
मम्मी जुनैद से लिपटते हुए बोली: थैंक्यू, जुनैद जी। आपने मुझे विधवा औरत की जिंदगी से बाहर निकाल दिया। अगर आप मुझे नहीं मिलते, तो मैं उस उदास ज़िंदगी से बाहर ही नहीं आ पाती।
मम्मी अपने होंठों से जुनैद के होंठ लॉक कर लेती हैं, और जुनैद मम्मी का बदन मसलना शुरू कर देता है। मां उसके ऊपर लेटी हुई उसे जबरदस्त चूस रही थी, अपनी चूचियों को उसके सीने में रगड़ते हुए, मूसल को भी चूत में गर्म कर रही थी।
थोड़ी देर की गर्मी के बाद मां फिर से चुदाई के लिए उतारू हो जाती हैं। वह एक हाथ पीछे करके जुनैद का मूसल चूत में सैट कर लेती हैं। फिर जुनैद नीचे से धक्के लगाते हुए मम्मी की चुदाई करने लगता है, मां उसके मोटे मूसल पर उछलते हुए बड़ी कामुक मोन महसूस कर रही थी।
पूरे कमरे में एक बार फिर से मम्मी की सिसकारियों और थप-थप की आवाज़ गूंज उठी। मां बड़े कामुक तरीके से उसके मूसल पर घुड़सवारी कर रही थी। वह कभी अपने खुले बालों में हाथ फेरती और कभी बालों को नोचने लगती।
जुनैद थोड़ी देर में मम्मी को काबू में ले लेता है, मम्मी अपने हाथों से चूत फैला रही थी। जुनैद मम्मी की चूत में जोरदार धक्के लगाते हुए गांड पर थप्पड़ मार रहा था। उसके थप्पड़ों से मां की गोरी गांड लाल हो रही थी।
मां की घमासान चुदाई देख कर मैं दो बार झड़ चुका था। एक तरफ मेरे मन में यह ख्याल आ रहा था कि जब जुनैद मां को इतना बुरा हाल कर रहा है, तो आरिफ मौसी का क्या हाल कर रहा होगा। मां की सुहागरात रात ना होती, तो मैं मौसी की चुदाई देखना पसंद करता। मेरी आँखें अब जवाब दे रही थी, पर मां की चुदाई से मैंने अपनी आँखों को थोड़ी देर हिम्मत दी।
फिर मैंने देखा कि जुनैद हांफते हुए घूर रहा था; वह झड़ने के करीब आ रहा था।
मां उसकी प्रतिक्रिया को समझते हुए बोली: जुनैद जी, चूत में नहीं… आह ह… मुझे मुंह में लेना है, बस, मैं हो जाऊँ… उफ्फ़… आईईई… सीईईई…
मां झड़ने के बाद तुंरत अपना मुंह जुनैद के मूसल के नीचे खोल कर बैठ जाती हैं, जुनैद लंबी लंबी गुरहट्टा के साथ मां के मुंह में अपना सारा मल निकाल देता है। मां उसका सारा वीर्य पी जाती हैं, फिर उसके मूसल पर भी लगा वीर्य को चाट लेती हैं। फिर मम्मी आराम से लेट कर जुनैद के पास लिपट जाती हैं, अपना सिर उसके सीने पर रखकर चैन की नींद सो जाती हैं।
चुदाई पूरी होने के बाद, मैंने सोचा, क्यों ना मैं भी अब सो जाऊँ। लगभग दो घंटे की नींद लेने के बाद मेरी आँखें फिर खुलीं, और मम्मी की सिसकारियां मेरे कानों में गूंज उठीं। मैं एक बार फिर उस जगह गया और देखा कि मां व्यस्त थी, और जुनैद मां की गांड चुदाई कर रहा था। उसके लंड में अब भी पहले जैसा ही तनाव था, और वह मां की गांड में तेज धक्कों से चोद रहा था।
मेरी मां थोड़ी देर में गांड में बट्ट प्लग लगा कर उसका मूसल चूत में घुसा लेती हैं। उनकी हवास देख कर मैं चौंक जाता हूँ कि मेरी मां के अंदर कितनी आग है। फिर उनकी ताबड़तोड़ चुदाई देख कर मैं सोने चला जाता हूँ।
अगले दिन सुबह मेरी आँख खुली तो मैंने पहले समय देखा, 9 बज रहे थे। मैं रात मुठ मार कर नंगी हालत में ही सो गया था। मैं इतना लेट सो कर उठा कि सोचने लगा कहीं कोई मेरे कमरे में ना आ जाए। मैं तुरंत बिस्तर से उठ कर बाथरूम जाकर नहाने लगा।
फिर मैं तैयार होकर बाहर बगीचे में गया तो उधर कोई दिखाई नहीं दिया। फिर होटल की किचन कैंटीन में जाकर देखा, उधर भी मुझे कोई नज़र नहीं आ रहा था। फिर लौट कर बगीचे में आया तो देखा, जुनैद और आरिफ होटल के पीछे से आ रहे थे। दोनों आपस में बातें करते हुए काफी हँस और मुस्कुरा रहे थे। आरिफ और जुनैद ने गहरे पीले रंग का कुर्ता-पायजामा पहन रखा था।
मैं उनके पास गया और माँ और मौसी के बारे में पूछा तो वे दोनों एक-दूसरे के चेहरे देखने लगे।
मैंने फिर कहा: जुनैद, क्या बात है? मम्मी और मौसी कहाँ हैं?
जुनैद बोला: वो लोग अभी तक सो रही हैं।
मैंने आश्चर्य से कहा: क्या! वो लोग अभी तक सो रही हैं? उन्हें नाश्ता नहीं करना? मैं जाकर बुला लाता हूँ।
तभी आरिफ ने मुझे रोकते हुए कहा: राहुल, मैंने उनके कमरे में नाश्ता भिजवा दिया है। वो कल रात की पार्टी से बहुत थक गई थी, इसलिए आज देर तक आराम करना चाहती हैं।
जुनैद, आरिफ की बात पर हामी भरते हुए बोला: हाँ सर, उन्हें अभी आराम करने दो। मैं आपके लिए नाश्ता लेकर आता हूँ। फिर हम राफ्टिंग का मज़ा लेने चलते हैं।
फिर मैंने नाश्ता किया और उसके बाद जुनैद और आरिफ के साथ राफ्टिंग के लिए जाना पड़ा। वहाँ जाकर मेरा मन नहीं लग रहा था। काफ़ी समय बीतने के बाद हम शाम तक रिसॉर्ट लौट आए।
मैं फ़्रेश होकर सीधा मम्मी के पास चला गया। मम्मी अपने कमरे में बैठी हुई फ़ोन चला रही थी।
मम्मी ने बड़ा ही सुन्दर गाउन पहन रखा था, जो गर्म और नरम कपड़े से बना था। वह हल्के क्रीम रंग का था और घुटनों से थोड़ा नीचे तक आ रहा था। मम्मी की नंगी टाँगें देख कर लग रहा था जैसे उन्होंने नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा हो। दिन भर के आराम ने जैसे उनके बदन को और निखार दिया था। उनके चेहरे का नूर, होंठों की लाली और नाक की चमकती नथ उन्हें क़ातिल बना रही थी।
मैं अंदर जाते ही बोला: ओह मम्मी, क्या हुआ आपको? आप सुबह नाश्ते के समय भी नहीं मिलीं और आपने मुझे कुछ बताया भी नहीं।
मम्मी ने मुझे देखते ही अपना फ़ोन साइड में रख दिया और बोली: माफ करना राहुल, मुझे पता है तुम मुझसे नाराज़ हो रहे होगे। कुछ ख़ास नहीं बेटा, बस कल रात की पार्टी में मुझे काफ़ी थकान हो गई थी। इसलिए मैंने देर तक आराम करने का सोचा। वैसे तुम्हें राफ्टिंग करना अच्छा तो लगा ना?
मैं मुँह बनाते हुए बोला: बकवास! मैं यहाँ आपके साथ घूमने आया था, पर आप हैं कि मेरी तरफ़ ध्यान ही नहीं देती!
मम्मी ने मेरे गाल अपने नर्म हाथों में लेते हुए कहा: ऐसा नहीं है राहुल। तुम होटल में अकेले बोर ना हो जाओ, इसलिए मैंने जुनैद से कहा था कि वो तुम्हें राफ्टिंग पर ले जाए।
मैंने थोड़ी और नाराज़गी जताते हुए कहा: मम्मी, आप मुझसे भी तो कह सकती थी। आप हर बात में जुनैद को ही आगे क्यों करती हैं? मुझे समझ नहीं आता कि आप उसे इतनी ख़ास अहमियत क्यों देती हैं।
मेरी बात सुन कर जैसे उनके चेहरे का नूर उड़-सा गया। वो कुछ देर तक चुप-चाप मेरी तरफ देखती रहीं।
फिर मम्मी की आँखें नम हो गई और उन्होंने धीमे स्वर में कहा: बेटा, मेरे लिए तो तुम ही सबसे ज़्यादा ख़ास हो… इतने ख़ास कि मैं शब्दों में भी नहीं बता सकती। लेकिन इसके लिए मुझे माफ़ करना कि मैं यह बात तुमसे कह नहीं पाई।
उन्होंने आगे कहा: बोलो, क्या मैं अपने कान पकड़ लूँ? (और यह कहते हुए उन्होंने सचमुच अपने कान पकड़ लिए।)
मैंने उनके हाथों को कानों से अलग करते हुए कहा: अब मुझे शर्मिंदा मत करो, इसकी ज़रूरत नहीं है।
मम्मी हल्की मुस्कान के साथ बोली: तो फिर तुम्हारा ग़ुस्सा शांत करने के लिए मैं क्या करूँ? होंठों पर एक किस दूँ या फिर एक झप्पी?
मैं उनकी बातों पर मुस्करा दिया, तो मम्मी ने तुरंत मुझे अपनी बाहों में भर लिया।
मम्मी ने मुझे किस किया, मेरे होंठों को चूसते हुए बोलीं: मेरा तेरी मौसी से भी मिलना नहीं हुआ… आज पूरा दिन ऐसे ही निकल गया। राहुल, तुम ज़रा बाहर घूम लो, मैं थोड़ी देर उनसे मिलने जाती हूँ।
जब मैं कमरे से बाहर निकला तो देखा, शाम काफ़ी ढल चुकी थी। सूरज की जगह अब चाँद की रोशनी जगमगा रही थी। मम्मी अपने कमरे से निकल कर मौसी के कमरे के बाहर खड़ी होकर उन्हें फ़ोन कर रही थी। कुछ देर बाद मौसी ने कमरे का दरवाज़ा खोला और मम्मी को देख कर ख़ुश हो गई।
मौसी ने एक बेहद सेक्सी ड्रेस पहन रखी थी, जो नीचे से फ़्रॉक जैसी उनके घुटनों तक आ रही थी। ऊपर से उन्होंने मुलायम और गर्म कपड़े का एक कोट पहन रखा था।
मौसी कमरे को बंद कर मम्मी के साथ बगीचे की ओर जा रही थी। उनके चेहरों पर हल्की मुस्कान और शर्माए हुए भाव साफ़ नज़र आ रहे थे।
मौसी रात वाली जगह पर जाती है, जहाँ बैठने के लिए दो सोफ़े लगे हुए थे। यह जगह काफ़ी एकांत और रोमांस लायक थी, बीच में आग जलाने की व्यवस्था का पूरा साधन मौजूद था। मौसी मम्मी के साथ एक सोफ़े पर बैठ जाती हैं, दोनों ही एक-दूसरे को देख शर्माती जा रही थी।
मम्मी ने मौसी का हाथ अपने हाथों में थाम कर शर्मीले स्वर में कहा: बस दीदी, प्लीज़ ऐसे मत देखो।
मौसी बोली: क्यों? मैं तो बस तुम्हारी ख़ूबसूरती देख रही हूँ। अब शरमाओ मत मेरी बहन… सुहागरात काफ़ी दर्द भरी रही क्या? जुनैद तो ज़रूर बेरहम हो गया होगा। वैसे भी तुम्हारा पीछे वाले हॉल में पहली बार था, और वो तो हर मर्द की पसंदीदा जगह होती है।
मम्मी बोली: दीदी, आप मेरी टांग क्यों खींच रही हो? आप बताओ… आप क्यों पूरा दिन आराम कर रही थी? आरिफ ने भी तो आपको जम कर मज़ा दिया होगा! वैसे आपका तो आगे ही था ना?
मौसी शर्मीले स्वर में बोली: उफ़… आगे लेना ही काफ़ी तकलीफ़देह था, अगर पीछे लेती तो अभी तक मेरी चाल बिगड़ गई होती। वाक़ई में मूसल बड़ा दमदार है… उफ़्फ, आरिफ जी का सुपारा तो किसी मशरूम जैसी मोटी छतरीदार आकृति का है। उसके मूसल की मोटाई तो…
मम्मी शर्मा कर मौसी को रोकते हुए बोली: ओहो दीदी बस भी, आप तो बिल्कुल पुरानी कविता बनती जा रही हैं जैसे कॉलेज टाइम में थी।
मौसी मम्मी को अपने गले लगाते हुए बोली: मेरी बहन, कल रात की बात ही अलग थी। आरिफ की दमदार चुदाई ने मेरा जिस्म निचोड़ कर रख दिया। ऐसा मीठा एहसास तो जवानी में ही महसूस किया था, और आज तेरी वजह से फिर से कर पाई हूँ। थैंक्यू सविता… हम आज फिर से पुरानी दोस्त बन पाई हैं।
मम्मी बोली: लगता है दीदी, फिर आपका दिल आरिफ पर अटक गया है… आगे कुछ और?
मौसी ने अपनी आँखें घुमाते हुए और गर्दन हिलाते हुए कहा: अरे, ऐसा कुछ ख़ास नहीं करना… बस मस्ती और मज़ा ही! वैसे ये लोग अभी तक आए क्यों नहीं? मेरा तो ठंड से बदन अकड़ता जा रहा है।
मैं तो हैरान रह गया… मौसी तो मां से भी दो क़दम आगे निकली। मौसी का खुले अंदाज़ में यह कहना कि चुदाई सिर्फ़ मस्ती और मज़े के लिए है… सुन कर मैं मन ही मन बोला – पक्का मौसी कॉलेज के टाइम से ही चुदक्कड़ रही होंगी।
कुछ देर में आरिफ और जुनैद आते हुए दिखाई दिए। जुनैद को देखते ही मां के चेहरे पर हल्की मुस्कान उतर आई।
मौसी आरिफ के लिए अपनी बाहें फैला कर खड़ी हो गई और बोली: ओहो जान… हम लोग कब से आपके इंतज़ार में यहाँ बैठी हैं।
आरिफ मुस्कराते हुए मौसी के क़रीब आकर उनसे लिपटते हुए बोला: मेरे लिए इस तरह अपनी बाहें फैलाना… तुम्हारी यही अदा मुझे बेहद पसंद आती है।
मम्मी मौसी के पास से हट कर जुनैद के पास आ जाती हैं। वह एक बार मौसी की तरफ देखती हैं, जो आरिफ से लिपटी हुई थी।
फिर मम्मी हल्की शर्म के बाद खुद को जुनैद की बाहों में सौंप देती हैं। जुनैद मम्मी के शर्माते हुए चेहरे को ऊपर उठा कर उनके होंठों पर अपने होंठ रख देता है। मम्मी भी अपने होंठ उसके होंठों से मिला कर चूसने लगती हैं।
आरिफ उनकी तरफ देख कर बोला: लगता है इन ठंडी वादियों में हमारी हसीनाओं के जिस्म की गर्माहट कम हो रही है… क्यों सविता जी?
मम्मी अपने होंठों को जुनैद से अलग कर शर्माते हुए उसके सीने में सिर छुपाए थी।
तभी जुनैद बोला: सविता जी की इसमें कोई गलती नहीं है, आरिफ भाई… हमें ही इन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए था।
इसके बाद मौसी आरिफ के साथ एक सोफ़े पर उसकी बाहों में लिपट कर बैठ जाती हैं। उनके सामने जुनैद भी मम्मी को अपनी बाहों में लेकर बैठ जाता है।
सब एक-दूसरे को देख कर हंसी और मुस्कराहट का माहौल बना रहे थे। मम्मी, मौसी के पास होने से खुद को थोड़ा शर्मिंदा महसूस कर रही थी। मगर मौसी आँखों के इशारों से मम्मी को इस पल को एन्जॉय करने की सहमति दे रही थी।
दोनों ही कपल अपनी हसीनाओं को लेकर सुहाने मौसम का लुत्फ़ उठा रहे थे। एक तरफ मेरी मां जुनैद के होंठों को चूम रही थी, तो दूसरी तरफ मेरी मौसी आरिफ के होंठों को चूस रही थी।
आरिफ मौसी के साथ ज़्यादा ही रोमांटिक हो रहा था। वह उनके होंठ चूसते हुए अपने हाथ मौसी के बूब्स पर रख रहा था। मौसी उसका हाथ बार-बार ऐसे हटा देती, जैसे खुले में आरिफ को और बेक़ाबू होने से रोक रही हों।
आरिफ हालात को समझते हुए, जुनैद की तरफ बिना देखे बोला: जुनैद भाई, अब तो अपनी हसीनाओं की थकान मिट गई है… तो प्रोग्राम डिनर का करें या फिर बेडरूम का?
जुनैद के होंठ अभी मम्मी के होंठों से चिपके हुए थे। वह तुरंत अपने आप को संभालते हुए बोला: भाईजान, यह तो हमारी हसीनाएँ ही बता सकती हैं।
मौसी मम्मी की तरफ देख कर बोली: मेरा तो आज डिनर का कोई ख़ास मन नहीं है।
मम्मी उनकी तरफ देख हल्की मुस्कान लिए बोली: पूरे दिन सोने की वजह से मेरा भी नहीं है… लेकिन राहुल को क्या बोलूँ, यह समझ नहीं आ रहा।
जुनैद बोला: जान, उसे हम बता देंगे कि आज सब अपने-अपने कमरों में डिनर करने वाले हैं।
आरिफ बोला: तो फिर सब का बेडरूम प्रोग्राम पक्का हुआ… वैसे भी मुझे अपनी जान को डिश में खाना है!
मौसी अपने होंठ आरिफ के होंठों पर रख कर बोली: ठीक है, थोड़ी देर में आ जाना।
फिर मौसी आरिफ की गोद से उतर कर ज़मीन पर खड़ी हो जाती हैं। उन्हें देख कर मम्मी भी जुनैद के होंठ चूस कर, मौसी के साथ कमरे की तरफ निकल जाती हैं।
उनके जाने के बाद आरिफ अपना लंड मलते हुए बोला: भाई, ये सालियाँ क्या आइटम हैं! कल रात कविता की टाइट चूत चोदने के बाद तो मज़ा ही आ गया। इन संस्कारी रंडियों के पति इन्हें कभी सही से मसल नहीं पाए थे। अब इन्हें पता चल गया है कि हमारे मूसल ही इन्हें असली चरमसुख दे सकते हैं।
जुनैद थोड़ी हसरत से आरिफ की तरफ देख कर बोला: भाईजान, आप कविता को कुछ भी कहो… पर सविता तो मेरी जान बन चुकी है।
आरिफ ने जुनैद के कंधों पर हाथ रखते हुए कहा: ओहो… तो भाईजान, आपका सविता के साथ क्या इरादा चल रहा है?
जुनैद हल्की आवाज़ में बोला: यार, सविता मेरे दिल में बस गई है। अब उसके हुस्न के अलावा मुझे कुछ नज़र ही नहीं आता। बस अब मैं सविता से शादी करना चाहता हूँ… ताकि उसे मुझसे पति का प्यार मिले और मुझे वो सब, जो मुझे चाहिए।
आरिफ बोला: क्या सच में? भाई, अगर तू भाभी का साथ निभाना चाहता है, तो मैं तेरे साथ हूँ।
जुनैद बोला: भाई, अभी मैंने इस बारे में सविता से बात तो नहीं की है… लेकिन ट्रिप के ख़त्म होने तक ज़रूर करना चाहता हूँ। उम्मीद है, मैं तुम्हें जल्द ही खुशख़बरी दूँगा।
जुनैद की बातें सुन कर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। मेरा माथा गर्म आग बबूला हो गया। मैं मन ही मन सोचने लगा कि मैं ऐसा नहीं होने दूँगा। मेरी मां, जुनैद को मेरा बाप बना दे, यह मुझे मंजूर नहीं हो सकता। बस, अगर जुनैद इसकी सूरत बनाए, मैं इसका अंत कर दूँगा।
फिर मैं बगीचे की तरफ आया। तभी मम्मी का फ़ोन आया। मैंने कहा: ओह मम्मी, आप कहाँ हैं? मैं कब से आपको ढूँढ रहा था।
मम्मी ने कहा: राहुल, मैं अभी दीदी के साथ हूँ। आज डिनर मैं अपने कमरे में ही करने वाली हूँ। तुम डिनर करके सो जाना। गुड नाइट बेटा।
मैं थोड़ी देर वहीं खड़ा रहा और मन ही मन सोचने लगा कि आज रात अपने पाठकों को मौसी की चुदाई दिखाई जाए।
मौसी की रस भरी चूत कैसी होगी, यही सोच कर मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर मैंने उनके कमरे के चारों तरफ़ घूम कर एक अच्छी जगह ढूंढी, जहाँ से उनकी चुदाई आराम से देख सकूँ।
मैं उस जगह पर गया और अपनी निगाहें उनके कमरे में टिका दीं। अंदर मुझे कुछ स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था, बस बाथरूम से कुछ गुनगुनाने की आवाज़ें आ रही थी। मैं समझ गया कि मौसी अभी नहा रही थी, ताकि वह अपने महकते जिस्म से आरिफ को खुश कर सकें। थोड़ी देर बाद जब मौसी बाथरूम से बाहर आई, मेरी आँखें उन्हें देखकर चौंधिया गई और मेरे मुंह से उफ़्फ़ निकल गया।
मौसी जैसे ही बाथरूम से बाहर आई, उनका बदन काले बेबी डॉल नाइटी में लिपटा हुआ था। हल्के पारदर्शी कपड़े से उनकी दूध सी गोरी चमड़ी झलक रही थी। ऊपर की तरफ़ गहरे कट से उनके गोल-गोल बूब्स आधे बाहर थे, बीच की दरार गहरी खाई की तरह भरी हुई चमक रही थी।
पतली डोरी उनकी गर्दन के पीछे बंधी थी, जिससे उनके कंधे और उभरी हुई पीठ और भी ज्यादा निखर रहे थे। नाइटी की झीनी परत नीचे तक जाते-जाते उनकी चिकनी जाँघों को खुला छोड़ रही थी। चलते हुए हर बार नाइटी सरक कर उनकी गोल-मटोल गांड का घेरा दिखा देती थी।
अंदर उन्होंने ब्रा-पैंटी तक नहीं पहनी थी, जिससे कपड़े के आर-पार गुलाबी निप्पल और झाँकती हुई चूत की लाइन साफ़ नज़र आ रही थी। उनके गीले बाल कंधों पर लटक रहे थे और जिस्म से नहाने की भीनी खुशबू फैल रही थी। होंठ लाल लिपस्टिक से चमक रहे थे, और आँखों में ऐसी शरारती प्यास थी कि कोई भी मर्द उनका ये रूप देख अपनी नज़रें हटा ही नहीं सकता था।
मौसी का ये हुस्न बस एक इशारा कर रहा था, कि ये नाइटी सिर्फ़ देखने के लिए नहीं, बल्कि फाड़ देने के लिए पहनी हुई थी।
मौसी देखने में किसी पूरी पॉर्न MILF से कम नहीं लग रही थी। उनका स्लिम-फिट फिगर, सी-कट कमर और पीछे को निकली हुई मोटी गांड बस लंड को खड़ा करने के लिए काफी थी। उन्हें इस हाल में कोई भी कमजोर लड़का देख ले, तो बिना छुए ही पेंट में झड़ जाए।
मौसी आइने के सामने खड़ी होकर अपने आप को निहार रही थी। काली बेबी डॉल नाइटी से बाहर झाँकते उनके बूब्स और नीचे झलकती जाँघें जैसे खुद उन्हें ही मदहोश कर रही थी। उन्होंने अपनी जुल्फें सँवारते हुए होंठों पर हल्की मुस्कान डाली और फिर अपने ही होंठों को होंठों से रगड़कर चाटा। इसके बाद एक कातिलाना नज़र गेट की ओर फेंकी, जैसे अब वो आरिफ का बेसब्री से इंतजार कर रही हो।
कुछ ही पल बाद गेट खुलने की आहट होती है। मौसी फौरन पलट कर उसी तरफ देखती हैं। आरिफ अंदर आता है और उसे देखते ही मौसी के चेहरे पर शरारती मुस्कान जम जाती है। उधर आरिफ मौसी को इस हुस्न भरे रूप में देख कर वहीं थम सा जाता है। दोनों की आँखें टकराती हैं और कुछ पलों तक एक-दूसरे में खो जाती हैं।
जैसे ही आरिफ कमरे का गेट लॉक करता है, उसका सब्र टूट जाता है। वो झपट कर मौसी की तरफ बढ़ता है। मौसी भी जैसे इसी लम्हे का इंतजार कर रही थी। वो आरिफ से चिपकते ही अपने होंठ उसके होंठों पर रख देती है।
अब दोनों के होंठ बेतहाशा एक-दूसरे को चूसने लगते हैं। आरिफ के हाथ सीधे मौसी की नंगी गांड तक पहुँच चुके थे, वो उसकी मुलायम फाँकों को दबाते-खोलते फिरा रहा था। मौसी उसके गले और पीठ पर अपने नाखून गड़ाती हुई और भी करीब खींच रही थी। उनकी साँसें तेज़ और गर्म हो चुकी थी।
आरिफ का लंड उसके पजामे में तड़प रहा था और मौसी ने शरारत से एक हाथ नीचे सरका कर पजामे के ऊपर से ही उसे मसलना शुरू कर दिया। आरिफ की कराहें उनके होंठों में ही घुल रही थी। दोनों की वासना अब किसी भी पल उफान मार कर फट पड़ने वाली थी।
मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मौसी इतनी गर्म मिज़ाज औरत होंगी। मेरे दिमाग में बार-बार यही सवाल गूँज रहा था, क्या ये सब सिर्फ़ एक तगड़े मूसल लंड का कमाल था, या माँ और मौसी जैसे जिस्मों में वैसे ही ज़्यादा आग भरी होती है? मेरा मन तरह-तरह की गंदी बातें सोचते हुए और भी गरम हो रहा था।
करीब दस मिनट तक आरिफ लगातार मौसी के होंठ चूसता रहा। दोनों की ज़ुबानें पागलों की तरह एक-दूसरे में फँसी हुई थी। फिर आखिरकार आरिफ ने होंठ अलग किए और हाँफते हुए बोला: डार्लिंग… इस तरह की गर्मा-गर्म एंट्री मेरी लाइफ़ में पहले कभी नहीं हुई।
मौसी शरारती मुस्कान के साथ बोली: अगर तुम थोड़ी देर और लगाते… तो शायद मैं खुद तुम्हें ढूँढते-ढूँढते बाहर चली आती।
आरिफ ने दोनों हाथ मौसी की गांड पर कसकर रख दिए और दबाते हुए बोला: उसमें तो मुझे और मज़ा आता बेबी। पूरा रिसॉर्ट हमारा है, जहाँ मर्ज़ी तुम्हें नंगा कर सकता हूँ।
मौसी उसकी आँखों में देखते हुए होंठ चाट कर बोली: लेकिन फ़िलहाल… हमें यहीं कमरे में करना चाहिए। इन चार दीवारों के बीच मेरी सिसकारियाँ सिर्फ़ तुम ही सुनो। मैं नहीं चाहती कि तुम्हारे अलावा कोई और मेरे जिस्म को देखे।
मौसी को ये कहाँ पता था कि इन चार दीवारों के बीच मैं भी छुपा हुआ था। उनकी सिर्फ़ सिसकारियाँ ही नहीं, उनका हर इंच सुलगता जिस्म देखने वाला भी मैं ही था।
मौसी ने आरिफ का कुर्ता उतारते ही उसे ऊपर से पूरा नंगा कर दिया। मेरे होश उड़ गए। आरिफ की साइजदार बॉडी अब तक कपड़ों के अंदर छुपी हुई थी। उसकी चौड़ी, गोरी और कड़क छाती, सख़्त उठी हुई सिसक पेक, और मांसल बाज़ू… सब देख कर मैं समझ गया कि औरतें क्यों उस पर मरती होंगी। मजबूती और कट्स में तो आरिफ, जुनैद से भी कहीं आगे था।
मौसी कुछ पल के लिए वहीं खड़ी उसकी बॉडी को निहारती रह गई। उनकी आँखें आरिफ के हर कट, हर मांसपेशी पर घूम रही थी। फिर धीरे-धीरे पास आकर उन्होंने अपनी कोमल, गीली होंठों से उसकी छाती पर किस्स की बौछार कर दी। हर किस्स के साथ आरिफ का लंड पजामे के अंदर ही जोर से फड़क रहा था, मानो बाहर निकलने को मचल रहा हो।
फिर अचानक मौसी की नज़र उसके तड़पते मूसल पर अटक गई। उन्होंने होंठों को अपने ही होंठों से दबाते हुए शरारती आवाज़ में कहा: आरिफ जी… आपका ये मूसल मेरे होंठों का रस पीने के लिए बेक़रार है। इसे तो अब आज़ाद करना ही पड़ेगा।
आरिफ ने होंठ चाटते हुए मुस्कुरा कर जवाब दिया: जान… सिर्फ़ होंठों का ही नहीं, तेरी चूत का भी ये प्यासा है।
इतना कह कर आरिफ चार कदम पीछे हट कर बेड के किनारे आ खड़ा हुआ। मौसी उसकी आँखों में झाँकते हुए झुक गई और उसके पजामे का नाड़ा खोल दिया। आरिफ बैठ गया, अपनी टाँगे चौड़ी कर ली। मौसी घुटनों के बल उसके बीच में आकर बैठ गई और पजामा खींच कर पैरों से उतार फेंका।
अब सामने सिर्फ़ उसका लंड खड़ा था। मोटा, गोरा, और इतना ज़्यादा आकर्षक कि मैं छुप कर भी खुद को रोक नहीं पा रहा था। मौसी हल्के हाथों से उसे मुठियाने लगी, उनकी आँखें सीधे आरिफ की आँखों में टिकी हुई थी। आरिफ ने अपने हाथ से मौसी की खुली जुल्फें चेहरे से साइड की और उन्हें और भी दीवाना कर दिया।
आरिफ का लंड देख कर मुझे वही बात याद आ गई जो मौसी ने एक बार मम्मी से कही थी। वाकई… आरिफ का मूसल किसी घोड़े जैसा था। उसकी गोरी चमड़ी, और ऊपर से छतरी जैसी मोटी, उभरी हुई सुपारी। जुनैद के लंड के मुकाबले ये सिर्फ़ मोटा ही नहीं, बल्कि औरत के लिए चुंबक जैसा खिंचाव वाला था।
मौसी ने अपने गुलाबी होंठ हल्के से खोले और धीरे से उन्हें आरिफ के मोटे लंड के अगले सिरे पर रख दिया। उनके गर्म होंठ जैसे ही उसके सुपारे को छुए, आरिफ की सांसें तेज़ हो गई। मौसी ने होंठों को और चौड़ा किया और धीरे-धीरे पूरा मोटा, छतरी जैसा सुपारा अपने मुँह के अंदर भर लिया।
आरिफ का मोटा सिरा उनके होंठों को इतना खींच रहा था कि उनके गाल फूल गए। फिर मौसी ने अपना सिर हल्के-हल्के आगे–पीछे हिलाना शुरू किया। हर बार जब उनका मुँह आरिफ के गोरे लंड पर चढ़ता-उतरता, उनका गीला लार का रस उसके चारों ओर फैल जाता।
उनकी जीभ सुपारे के चारों ओर लगातार घूम रही थी, कभी टिप पर चाटती, कभी पूरे घेरे को सहलाती। साथ में उनका हाथ भी लंड की जड़ को कस कर मुठिया रहा था। वो सच में किसी पॉर्नस्टार जैसी तड़प और भूख के साथ उसे चूस रही थी।
आरिफ ने उनकी खुली जुल्फों में हाथ फेरा और हांफते हुए बोला: आह… जान, तुम तो कमाल चूसती हो… उफ़्फ्फ… तुम सच में अद्भुत हो।
मौसी उनकी आँखों में देखते हुए और भी दीवानी हो गई। वो लंड को कभी धीरे-धीरे लॉलिपॉप की तरह चूसती, तो कभी तेज़-तेज़ अपने गले तक उतार लेती। उनका यह अदांज इतना गंदा और सेक्सी था कि सिर्फ़ आरिफ ही नहीं, मैं भी छुपकर कांप रहा था।
करीब दस मिनट की नॉन-स्टॉप चुसाई के बाद आरिफ का गोरा मूसल चमचमा उठा था, उसकी मोटा टोपा लाल हो चुकी थी और पूरा लंड मौसी की लार से भीग कर चिकना हो गया था।
अब मौसी धीरे से खड़ी हुई और आरिफ की बाहों में समा गई। आरिफ ने उन्हें कस कर सीने से लगाया और पीछे से उनकी नाइटी की डोरी खोल दी। डोरी ढीली पड़ते ही उनकी पूरी पीठ नंगी हो गई और नाइटी सरक कर कमर पर आ रुकी।
आरिफ की आँखें जैसे ही मौसी के उभार पर पड़ी, उसने होंठों पर जीभ फेरी और झुक कर उनके रसीले, बड़े-बड़े बूब्स को बारी-बारी से पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया। मौसी सिसकियों में कराह उठी और दोनों हाथ उसकी गर्दन में डाल कर अपने उभार और भी मुँह की तरफ दबाने लगी।
आरिफ कभी चूसता, कभी निचोड़ता, और मौसी हर बार उसके सिर को कस कर अपनी छाती पर दबा देती। कुछ ही पल में उनकी नाइटी पूरी तरह उतर गई और वो नंगी होकर बेड पर चढ़ गई।
उन्होंने अपनी आँखों से आरिफ को खींचते हुए एक उँगली से इशारा किया: आओ… अब मैं तुम्हें अपने पूरे जिस्म का स्वाद चखाती हूँ।
मौसी की रसीली चूत देखते ही मेरा लंड हिलोरे मारने लगा। उनकी पूरी क्लीन शेव पिंकी चूत ऐसे चमक रही थी जैसे अभी-अभी फूल की कली खिली हो। मोटे-मोटे गीले होंठों के बीच हल्के गुलाबी रंग की पंखुड़ियां बाहर झांक रही थी। बीच की लंबी दरार नीचे जाकर उनकी टाइट गांड के छेद से मिल रही थी।
आरिफ धीरे से उनके करीब आया और दोनों टाँगें चौड़ी करके फैला दी। फिर अपना मोटा मूसल उनकी भीगी दरार पर रख कर हल्के-हल्के रगड़ने लगा। मौसी ने होंठ दाँतों में दबा कर एक कातिल मुस्कान दी और उसकी आँखों में खो गई।
जैसे ही आरिफ ने अपना गरम टोपा उनकी चूत के मुहाने पर दबाया, मौसी की आँखें ऊपर की तरफ घूम गई और वो लंबी सिसकारी लेकर कराह उठी: आहहह्ह्ह्ह… उफ़्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़्फ़… आरिफ्फ्फ़… रुक जाओ… उंम्म्म… आईईईई…
लेकिन आरिफ का जोश थमने वाला नहीं था। उसने उनकी टाँगों को और फैलाया और एक हल्के झटके में अपना आधा मोटा लंड चूत में उतार दिया।
मौसी ने चीखते हुए दोनों हाथ बेड की चादर में गड़ा दिए: आआआईईईईईईईई… ओह्ह्ह्ह… आरिफ्फ़्फ़… मेरी चूत अभी इतनी बड़ी नहीं हुई… तुम्हारा ये घोड़े जैसा लंड तो मैं पहली बार ले रही हूँ… आह्ह्ह… प्लीज़… धीरे करो…
उनकी साँसें हाँफ रही थी, आँखें भीग गई थी, मगर जिस्म का हर रोम रोम उस मोटे मूसल की चोट से काँप रहा था। आरिफ ने कस कर उनकी कमर थामी और धीरे-धीरे अपने लंड को चूत में आगे-पीछे सरकाने लगा। हर धक्का उनकी भीगी दरार को और खींच रहा था।
वो उनके कान में झुक कर गरम सांस छोड़ते हुए बोला: जान… आज से तेरी चूत सिर्फ़ मेरे लंड की आदत डालेगी। धीरे-धीरे दर्द ख़त्म होगा और तेरे अंदर तड़प बस जाएगी… मेरी हर धड़कन के साथ।
आरिफ अपने आधे लंड को ही अंदर-बाहर करता हुआ मौसी की चुदाई में डूबा था। हर धक्का उनकी भीगी दरार को थोड़ा-थोड़ा और खोल रहा था। मौसी दर्द से कराह रही थी, लेकिन कब उनका गीला रस उस मोटे लंड को फिसला कर पूरा अंदर तक निगल गया, उन्हें खुद भी पता नहीं चला।
अब उनकी चीखें बद्दुआ जैसी दर्द भरी आवाज़ से बदल कर मस्त सिसकारियों में ढल चुकी थी। वो दोनों टाँगें पेट तक मोड़ कर पूरी फैलाए लेटी थी और हर झटके के साथ अपने जिस्म को आरिफ की मस्ती में सौंप रही थी।
मौसी के होंठ काँप रहे थे, आँखें बंद होकर उलटने लगी और वो बेसुध होकर कराह रही थी: आहह्ह्ह… उफ़्फ्फ्फ़्फ़… हम्म्म्म्म… म्म्म्म… हाँ आह आह… आरिफ़्फ़्फ़… मजा ही आ गया… इस तरह की चुदाई तो किसी ने कभी नहीं दी मुझे… तुम्हारी ताक़त ने तो मुझे इस मूसल का गुलाम बना दिया है… उफ़्फ़्फ़्फ़… आईईईई…
वो कराहते-कराहते हाँफ उठी, फिर होंठ काटते हुए बोली: अब समझ में आता है क्यों मेरी बहन सविता जुनैद की चुदाई से पागल रहती है… ये मूसल तो चूत को जकड़ कर सीधा बच्चेदानी तक धँस जाता है… उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़…
आरिफ ने मुस्कुरा कर मौसी को पकड़ कर घोड़ी की तरह पलटा। वो बिस्तर पर घुटनों के बल झुकी और उनकी गोल, उभरी हुई गांड उसकी आँखों के सामने उभर आई।
मैंने दूर से देखा, क्या जबरदस्त गांड थी! एक-दम टाइट गोलाई, जिस पर अगर हल्की थपकी पड़े तो पूरी गांड का गोला थरथराने लगे। उनका पिछवाड़ा किसी फिल्मी हसीना से कम नहीं था। गांड का छेद हल्का फैला हुआ, डार्क ब्राउन रंग लिए, जैसे कोई खुला फूल सजा हो।
आरिफ ने बिना वक्त गँवाए अपना मूसल फिर से उनकी चूत पर सैट किया और एक ही जोरदार धक्का मारा। पूरा मोटा लंड एक बार में ही चीरता हुआ उनकी भीगी दरार से सरक कर गहरे अंदर घुस गया।
मौसी चीख उठी, उनके हाथ पलंग की चादर में जकड़ गए: आआआह्ह्ह्ह्ह्ह… उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़… जालिम! घोड़े की तरह ठोक दिया लंड एक ही बार में… सीधा बच्चेदानी तक जा लगा… आह्ह्ह्ह्ह्ह… उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़… आज तो सच में मर्द घोड़े की घोड़ी बन गई मैं… उह्ह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह…
उनकी चीखों और सिसकारियों से पूरा कमरा गूंज रहा था, और आरिफ़ एक-दम जानवर की तरह उनके अंदर अपना लंड ठोक रहा था। आरिफ अब और भी तेज़ धक्के मारने लगा। हर बार जब उसका मूसल मौसी की गहराई तक घुसता, उनकी बड़ी गांड की गुदगुदी थरथराहट से पूरा बेड हिल उठता।
मौसी हांफते हुए अपनी सांस रोक-रोक कर सिसकारी भर रही थी: आहहह… उफ्फ्फ्फ आरिफ… इतना गहरा… हाय मम्म्म… मेरी चूत तो फट जाएगी… उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ…
उनकी भीगी चूत अब हर धक्के पर छप-छप की आवाज़ कर रही थी। आरिफ की जांघ जैसे ही उनके कूल्हों से टकराती, मौसी का पूरा बदन कांप उठता।
कुछ ही देर में मौसी ने अपनी कमर और भी ऊपर उठा कर आरिफ का पूरा मूसल निगल लिया और चीखते हुए बोली: आहहह… मैं झड़ गई… उफ्फ्फ्फ… निकाल मत… ऐसे ही ठोकते रहो…
उनका बदन ढीला पड़ गया और वो हांफते हुए बेड पर लुढ़क गई। लेकिन आरिफ अब तक एक बार भी नहीं झड़ा था। उसने तुरंत मौसी को पलट कर सीधा किया और उनकी टांगें उठा कर अपनी कमर पर टिका दी। मौसी की आँखों में उस वक्त अजीब सा संतोष और पिघलती हुई प्यास थी। उन्होंने होंठ भींच कर खुद को समर्पित कर दिया।
“आरिफ… तू तो मुझे मार ही डालेगा आज… उफ्फ्फ्फ्फ्फ…,” मौसी ने उसके चेहरे की तरफ देखते हुए कराह कर कहा।
आरिफ ने उनकी आँखों में देखते हुए लगातार जोरदार धक्के मारे। हर धक्के पर मौसी का सीना ऊपर उछल रहा था, उनकी गर्दन पीछे झुक चुकी थी।
आरिफ ने दांत भींचते हुए कहा: मौसी… आज मैं तुझे पूरा भर दूँगा…
कुछ ही देर में उसने एक गहरी कराह भरी और अपना मूसल पूरी तरह उनकी चूत में गाड़ कर वहीं थम गया। गरम गाढ़ा वीर्य मौसी की गहराइयों में भरने लगा। मौसी की आंखें बंद हो चुकी थी और वो उसकी पीठ को कस कर पकड़ कर होंठ चूमने लगी।
धीरे-धीरे वीर्य उनकी चूत से बह कर बाहर आने लगा। मौसी ने हाथ बढ़ा कर उंगली से वीर्य उठाया, होंठों तक ले जाकर चाटते हुए मुस्कराई: हम्म्म… तेरे रस का स्वाद ही अलग है आरिफ…
कुछ देर आराम के बाद मौसी खुद उसके कान में फुसफुसाई: अबकी बार मेरी गांड मार… आज मुझे पूरा मर्द घोड़ा चाहिए।
रात भर आरिफ ने दो बार मौसी की गांड फाड़ी, और मैं बाहर से सब कुछ देखता-सुनता अपनी ही आग में जलता रहा। मैं मानो कसम खा चुका था… उस रात मैं भी दो-दो बार झड़ चुका था, बिना छुए बस उनकी कराहों और थरथराती गांड को देख कर।
सुबह आँख खुलते ही मैं नहाने चला जाता हूँ। फिर मैं जल्दी से तैयार होकर बाहर आया तो देखा, जुनैद मम्मी के कमरे से बाहर निकल रहा था। जुनैद अपनी सीधी नज़रें किए हुए बगीचे की तरफ जा रहा था। मैंने भी उसे रोकना सही नहीं समझा और उसके पीछे ही चल दिया।
आरिफ़ बगीचे में नाश्ते की टेबल के पास खड़ा, जुनैद को आता हुआ देख कर मुस्कुरा रहा था। जुनैद उसके करीब जाकर हँसते हुए हाथ मिलाता है।
आरिफ़ उसे सीधा हग करते हुए बोला, “यार, तुम्हारी मुस्कान बता रही है कि रात काफी अच्छी गुजरी है?”
जुनैद उसकी पीठ थपथपाते हुए बोला, “भाईजान, सब आपकी मेहरबानी से हो रहा है। वैसे, कविता के साथ आपकी रात कैसी कटी?”
आरिफ़ मुस्कराते हुए बोला, “यार, कैसे बताऊँ… कविता तो रात की वो चाँदनी है जो अँधेरे में बिखर जाए तो पूरी रात जगमगा दे!”
जुनैद बोला, “मतलब भाईजान, कविता आपका कुछ ज़्यादा ही ख्याल रख रही हैं!”
फिर दोनों हँसते हुए टेबल के पास लगी चेयर पर बैठ जाते हैं। मैं उनके नज़दीक जाकर ‘गुड मॉर्निंग’ कहते हुए उनके साथ बैठ गया। खुले आसमान के नीचे ठंडी वादियों की सुबह में, गार्डन में मैं, जुनैद और आरिफ़ टेबल पर बैठे नाश्ता कर रहे थे।
तभी हम सबकी नज़र मम्मी पर जाती है, जो अपने बालों को लहराते हुए होंठों पर हल्की मुस्कान लिए हमारी तरफ ही आ रही थी।
उन्होंने गुलाबी रंग की पतली स्ट्रैप वाली शॉर्ट ड्रेस पहन रखी थी। डीप नेक से उनके भारी-बड़े बूब्स आधे से ज़्यादा झाँक रहे थे। हर कदम पर उनके गोल-मटोल उभार ड्रेस के कपड़े को खींच रहे थे। कमर पर टाइट फिटिंग उनकी S-कट बॉडी को और निखार रही थी। नीचे, छोटी स्कर्ट के किनारों से उनकी चिकनी जाँघें चमक रही थी।
मम्मी जैसे ही मुस्कराती हुई हमारी तरफ बढ़ीं, उनकी हिलती हुई गांड और हर कदम पर उछलते-बुलबुलाते बूब्स ने पूरा माहौल ही गर्म कर दिया। हल्की हवा उनके खुले बालों और ड्रेस को हिला रही थी, जिससे उनके सीने की गहराई और भी साफ़ नज़र आ रही थी।
जुनैद और आरिफ़ – दोनों की नज़रें एक-दम जमी रह गई। उनके होंठों पर चाय का कप तो था, लेकिन आँखें सिर्फ मम्मी के जिस्म पर टिकी हुई थी।
मम्मी मेरी चेयर के पीछे आती हैं, और झुक कर मेरे गालों को चूमते हुए मुझे ‘गुड मॉर्निंग’ कहती हैं। मैं मम्मी की चूचियों का स्पर्श और उनका भार अपने कंधों पर साफ़ महसूस कर रहा था। मेरे सामने बैठे आरिफ़ और जुनैद मम्मी की चूचियों की दादर झाँक रहे थे।
मम्मी जान-बूझ कर अपने झुके हुए उभार दिखाते हुए बोली, “क्या हुआ? सब ऐसे क्यों देख रहे हो… नाश्ता कर रहे हो या मुझे निगल रहे हो?”
आरिफ़ अपने होंठों से चाय का कप हटाते हुए बोला, “सविता जी, आपको इस रूप में देख कर कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता कि आप एक जवान बेटे की माँ हैं!”
मम्मी मुस्कराते हुए बोली, “आरिफ़ जी, आप भी ना, अच्छा मज़ाक करते हैं।”
मम्मी, जुनैद और मेरे बीच में लगी चेयर पर बैठ जाती हैं। जुनैद मम्मी की तरफ देख कर उनका नाश्ता बढ़ाता है। थोड़ी देर में मौसी अपनी कमर बलखाते हुए होंठों पर हल्की मुस्कान लिए आती हैं।
मौसी भी मम्मी की तरह ही ड्रेस पहने हुई थी, बस ड्रेस का रंग लाल था और लंबाई उनके घुटनों तक थी। मौसी की चाल में साफ़ फर्क नज़र आ रहा था कि वो रात अपनी जमा की हुई गांड चुदवाई थी। उनके खिलते हुए चेहरे के नूर ने उनके दर्द को छुपाया हुआ था, जो रात भर मोटे मूसल से बेरहमी से चुदाने के बाद अपने अंदर एक मीठा सा दर्द लिए हुए था।
आरिफ़, जो अभी तक अपनी निगाहें मम्मी पर टिकाए हुए था, अब मुस्कराते हुए मौसी को देख बोला, “हम सब आपका ही इंतज़ार कर रहे थे।”
मौसी आरिफ़ के साथ उससे चिपक कर बैठती हैं, फिर चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए बोली, “अच्छा जी, इंतज़ार करने वाले नाश्ता शुरू तो नहीं करते हैं?”
मौसी की बात सुनते ही मम्मी और जुनैद के हाथ थम जाते हैं, जो चाय का कप होंठों पर लगने ही वाले थे। मम्मी अपनी हँसी को काबू करते हुए बस मौसी की तरफ मुस्करा देती हैं।
जुनैद, आरिफ़ की तरफ देखते हुए मुस्करा कर बोला, “कविता, हमें लगा आप देर तक आराम करेंगी, इसलिए हम नाश्ता करने लगे। वैसे, हमने आपको आते हुए देखा – आप ठीक से चल नहीं पा रही थी!”
मौसी तिरछी नज़र से आरिफ़ की तरफ मुस्कराते हुए बोली, “रात आरिफ़ जी का घोड़ा…”
मम्मी उन्हें रोकते हुए बोली, “ओहो, आप लोग बस भी करो। दीदी, आप भी ना! जुनैद जी, प्लीज़ आप नाश्ता करो।”
फिर सभी चुप-चाप अपना नाश्ता खत्म करके थोड़ी बहुत बातें करते हैं। मैंने अपनी तिरछी नज़रों से जुनैद की तरफ देखा, जिसका एक हाथ काफ़ी देर से टेबल के नीचे था।
मैंने बिना किसी शक के फ़ोन का कैमरा चालू किया, फिर टेबल के नीचे चलते हुए फ़ोन की स्क्रीन में देखा। जुनैद का हाथ मम्मी की नंगी जाँघों को सहला रहा था। वो मम्मी की नंगी जाँघों को सहलाता हुआ अपना हाथ उनकी चूत वाले हिस्से तक ले जा रहा था। मम्मी बातें करते हुए जुनैद की तरफ देख कर कामुक नज़रों से उसे रोकने की कोशिश कर रही थी। मम्मी अपने आप को इस तरह काबू किए हुए थी कि उनके संत-संवार रूप को देख कर किसी को भी नीचे होने वाली हरकतों का अंदाज़ा ना हो।
मैंने उन्हें बातों में उलझाने के लिए आरिफ से कहा, “तो हम आज कहीं जाने वाले हैं, या फिर होटल पर ही दिन बिताने वाले हैं?”
आरिफ, जो अपने फोन में लगा हुआ था, एक-दम से अपनी साँसों को थाम कर बोला, “नहीं-नहीं… मैं तो यहाँ बोर नहीं होना चाहूँगा! सबकी मर्ज़ी हो तो मैं एक सुंदर जगह ले जाने के लिए तैयार हूँ।”
मौसी ने आरिफ के हाथों पर अपने हाथ रखते हुए कहा, “आरिफ जी, जगह हॉट और रोमांच से भरी होनी चाहिए, जहाँ हम अपने इस पल को यादगार बना सकें। क्यों सविता बहन?”
मम्मी अपनी साँसों को रोकते हुए, एक गहरी साँस लेती हुई हड़बड़ी में बोली, “हाँ-हाँ, आप सही कह रही हैं!”
मौसी के साथ-साथ आरिफ की भी नज़र एक-दम मम्मी के चेहरे पर गई, जिनके हाव-भाव पूरे हवा में उड़ते हुए लग रहे थे।
मैंने फिर एक नज़र नीचे डाली और फोन में देखा, मम्मी अपनी टाँगें पूरी फैलाए बैठी थी, जुनैद का हाथ आराम से मम्मी की चूत सहला रहा था।
आरिफ मौसी की तरफ आँख मारते हुए बोला, “लगता है सविता जी तो किसी और ही दुनिया में खोई हुई हैं?”
मम्मी अपने आप को सँभालते हुए शर्माते हुए बोली, “ऐसा कुछ नहीं है आरिफ जी, राहुल की इच्छा घूमने की है तो मैं ज़रूर जाऊँगी। बस दीदी ने जैसा कहा वैसी ही जगह हो।”
आरिफ बोला, “हाँ-हाँ, बिल्कुल रोमांच लायक जगह है! लगता है, जुनैद भाई, तुम कुछ बोल नहीं रहे हो, शायद तुम्हारा मन होटल में ही रहने का है?”
जुनैद मम्मी की तरफ देख कर बोला, “भाईजान, ज़्यादा तो नहीं, पर अभी थोड़ी देर रुकने का मन है।”
मम्मी एक हाथ से अपने बालों को साइड करती हैं, फिर जुनैद की तरफ देख कर थोड़ी शर्मीली मुस्कराहट के साथ बोली, “आप लोग बात करें, मुझे ज़रा बाथरूम जाना है।”
मम्मी चेयर से उठते समय अपने कपड़ों को ठीक करती हैं, फिर एक नज़र जुनैद की तरफ देख कर कमरे की ओर जाने लगती हैं। आरिफ अपनी हवस भरी आँखों से उन्हें जाते हुए उनकी बलखाती गांड देख रहा था।
कुछ देर बैठे रहने के बाद जुनैद बोला, “मुझे रूम में कुछ काम है भाईजान, मैं आपको बाद में मिलता हूँ।”
इतना कह कर जुनैद चला जाता है। उसकी बातों से साफ़ लग रहा था कि जुनैद किसी काम से नहीं, बल्कि मेरी माँ की आग शांत करने गया था।
मौसी मुस्कराते हुए आरिफ की आँखों में इशारे से बोली, “अब हम यहाँ बैठ कर क्या करें, हम भी चलते हैं।”
मौसी आरिफ़ के साथ अपने कमरे में चली जाती हैं।
मैं मन ही मन सोचने लगा — दोनों औरतें आज ज़्यादा ही गर्म हो रही हैं। मैं अपने कमरे में गया। बगल से आती माँ की तेज़ सिसकारियाँ सुन कर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया था। मैं फ़ौरन उस विंडो के पास गया जहाँ से माँ की सुहागरात देखी थी।
अंदर मैंने देखा मम्मी बेड के किनारों को पकड़े झुकी हुई थी, मेरी माँ सुबह वाली सेक्सी ड्रेस उतार कर बस ब्रा में थी।
पीछे जुनैद पूरा नंगा खड़ा होकर माँ की चूत में लंड डाल कर तेज़ धक्के मार रहा था, मेरी माँ तेज़ साँसों के साथ हाँफते हुए बड़ी कामुक सिसकारियाँ भर रही थी।
दोनों की तबातोड़ चुदाई देख कर लग रहा था जैसे कमरे में आते ही जुनैद ने माँ की चुदाई शुरू कर दी थी। ब्रा से बाहर निकली हुई माँ की गोल चूचियाँ जुनैद के हर धक्कों पर तेज़ी से हिल रही थी, साथ में उनके बड़े और मोटे कुल्हे थरथरा रहे थे।
माँ अपनी गर्दन घुमा कर जुनैद की तरफ़ दर्द में मुस्कराते हुए बोली: “आह आह आह आह ह ह ह ह ह… जुनैद जी, और तेज़, और तेज़ चोदो मुझे… उफ्फ्फ्फ उफ्फ्फ्फ, आईईईई सीईईईई आह ह… जालिम, तूने मुझे सबके बीच में इतना गर्म कर दिया था… उफ्फ, मेरा बेटा उधर ना होता तो तेरा मूसल चूत में घुसा लेती… आह आह हहहह… अब बुझा दे मेरी प्यास…”
जुनैद माँ के कूल्हों पर थप्पड़ मारते हुए कहा: “जान, सब के बीच तेरा बेटा भी बैठा हुआ है। ये पता होने के बाद भी मेरा हाथ तूने ही अपनी चूत पर रखा था। उफ्फ्फ्फ जान, अब तुम्हें राहुल को दिखाना चाहिए कि उसके बाप के जाने के बाद जुनैद ने उसे कितना बेहतर माँ को चरमसुख दिया है!”
माँ हाँफते हुए बोली: “आह आह… हाँ हाँ जुनैद जी, ज़रूर दिखाऊँगी राहुल को कि मैं आपके मूसल से कितना खुश और तृप्त हुई हूँ! उफ्फ्फ्फ आईईईई सीईईईई… जुनैद जी, और तेज़ ठोको मुझे… सातवें आसमान का आनंद लेना है, जो राहुल का बाप कभी नहीं दे सकता था।”
माँ अपनी टाँगों को पूरी फैला लेती हैं ताकि जुनैद का मूसल आराम से उनकी बच्चेदानी तक ठोकर मार सके। कुछ और ताबड़तोड़ धक्कों के बाद जुनैद अपना मूसल माँ की चूत से बाहर निकालता है, तो माँ उसे चूत की जगह गांड में डालने के लिए कहती हैं। जुनैद माँ की गांड पर ढेर सारा थूक लगा कर अपने चूत के रस से चिकना लंड छेद पर रखते ही गांड में आधा धकेल देता है। माँ गांड में आधा लंड जाते ही चीख उठती हैं, तीखे दर्द को अपने अंदर संभालने की कोशिश करती हैं।
जुनैद माँ के कूल्हों को फैला कर हल्के-हल्के धक्कों से गांड चोद रहा था, जुनैद का पूरा मूसल गांड में जाते ही मेरी माँ, जो बेड को पकड़े झुकी हुई थी, वो सीधी खड़ी हो गई थी। माँ अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाकर जुनैद की कमर पकड़े हुई थी। जुनैद माँ को खड़ी हुई पर ही अपना मूसल उसकी गांड में ठोक रहा था। माँ के चेहरे पर दर्द से मिलता सुकून उनकी कामुक सिसकारियों में बदल रहा था। धीरे-धीरे माँ भी अपनी गांड को आगे-पीछे करते हुए मूसल से गांड चुदाई का मज़ा ले रही थी।
जब माँ को दर्द से पूरी राहत मिलती है, तो फिर से पहले की तरह बेड को पकड़े झुक जाती हैं। जुनैद अपने हाथों को आगे लाकर माँ के लटकते बूब्स को पकड़ कर तेज़ धक्कों से उसकी चुदाई कर रहा था। माँ हाँफते हुए झड़ रही थी, उनकी चूत से रस टपक कर ज़मीन पर गिर रहा था।
थोड़ी देर बाद जुनैद भी हाँफते हुए माँ की गांड में झड़ जाता है।
जुनैद झड़ने के बाद जब अपना मोटा मूसल लंड माँ की गांड से निकालता है, तो एक पाक की आवाज़ गूंज उठती थी।
मेरी माँ जब सीधी खड़ी हुई तो उनकी गांड से जुनैद का गाढ़ा वीर्य रिसते हुए उनकी जाँघों तक आ गया।
माँ जुनैद की तरफ मुस्कान भरी आँखों से देखती हैं, फिर उसके सीने से लिपट कर उसके होंठों को चूमते हुए बोली,
“जुनैद जी, सुबह की ताज़ी चुदाई से तो मेरा जिस्म और भी तरो-ताज़ा लग रहा है, उफ्फ… अब मुझे फिर से तैयार होना पड़ेगा!”
जुनैद माँ के एक बूब्स को हल्के हाथों से दबाते हुए बोला, “जान, तैयार होने की क्या ज़रूरत? वैसे भी हमें दो घंटे बाद जाना है। जब तक मैं इस फूल जैसे खिलते जिस्म के साथ जी भर के खेल लेता हूँ।”
मम्मी मुस्कराते हुए बोली, “जुनैद जी, आपकी ताकत का जवाब नहीं है। मेरे दोनों हॉल चोदने के बाद भी आपका मेरे जिस्म से खेलने का मन है।”
मम्मी जुनैद का हाथ पकड़े हुए बेड पर आती हैं, फिर जुनैद के लेटने के बाद मम्मी को अपने ऊपर खींच लेता है।
मम्मी उसके होंठों को चूसते हुए बोली, “जुनैद जी, अभी सुबह का समय ही चल रहा है, कहीं राहुल मुझे ढूँढते हुए कमरे में न आ जाए… हमें रुक जाना चाहिए।”
जुनैद मम्मी की गांड को दोनों हाथों से दबाते हुए बोला, “जान, राहुल अब समझदार है, वो अपनी मम्मी को डिस्टर्ब नहीं करना चाहेगा।”
मम्मी जुनैद के ऊपर नंगी लेटी हुई मुस्कराते हुए उसे किस्स करने लगती हैं।
मैं मन ही मन बोला, “जुनैद, तू कितना भी मम्मी को अपने मूसल से बेहला ले, तुझे तो तेरी औकात जल्द ही पता चल जाएगी।”
फिर अपने कमरे में मुझे आराम करते हुए समय का पता ही नहीं चला, कब दो घंटे गुजर जाते हैं। जब कमरे के गेट पर किसी ने नॉक किया तो मुझे होश आया कि हमें तो घूमने जाना था।
मैं जल्दी से बाहर आया और देखा मौसी आँखों पर काला चश्मा लगाए, आरिफ़ की बाहों में अपना हाथ डाले, उससे चिपक कर खड़ी हुई थी। मैं उनके साथ खड़े होकर मम्मी का इंतज़ार करने लगा।
थोड़ी देर में ही मम्मी कमरे से बाहर आती हैं, हाथ में छोटा हैंडबैग लिए, आँखों पर चश्मा, सुबह वाली सेक्सी ड्रेस… उफ्फ, क्या क़यामत लग रही थी।
मम्मी के पीछे से जुनैद कमरे से बाहर आता है, जो शायद मम्मी का ही बैग लिए हुए था। उसे देखते ही मेरा मूड खराब हो जाता है, लेकिन खुद पर काबू रखते हुए मैं बस मम्मी की तीखी मुस्कान को ही देखता रह गया।
उसके बाद हम लोग एक टूर पर निकल जाते हैं, जिसका पता बस आरिफ़ को ही था।
हम पहाड़ों की ऊँचाइयों को छूते हुए, उनके बीच रास्तों से होते हुए अपनी मंज़िल की तरफ जा रहे थे। इस सफ़र का सुहाना मज़ा तो जुनैद, मौसी और माँ के बीच बैठ कर लूट रहा था।
आरिफ ड्राइव कर रहा था और मैं उसके साथ आगे वाली सीट पर बैठा हुआ था। कुछ घंटों के सफ़र के बाद हम अपनी मंज़िल पर पहुँच जाते हैं।
यहाँ का नज़ारा वाकई में सुंदर और रोमांचक था। खैर, मेरे लिए तो नहीं — मैं सिंगल जो आया था — पर इसका मज़ा तो जुनैद माँ के साथ और आरिफ़ मौसी के साथ उठाने वाले थे।
फिर हम लोग कार से उतर कर घाटी की तरफ जा रहे थे। कच्चे और पथरीले रास्तों पर मम्मी हल्के ऊँची एड़ी वाली हिल्स पहनने के कारण बार-बार फिसल रही थी। जुनैद माँ को इस दिक्कत में देख कर उनके करीब आता है, फिर माँ की कमर में एक हाथ डाल कर उनका एक हाथ अपने कंधे पर रख कर चलने लगता है। मम्मी अब हर बार फिसलती तो उसके सीने से लिपट जाती थी।
मौसी दोनों को देख कर तीखी मुस्कान के साथ बोली: “वाह जुनैद, तुम इतने केयरिंग भी हो, मुझे अब पता चल रहा है! सविता बहन तो लकी हैं, जिन्हें तुम जैसा मर्द बिना ढूँढे मिल गया।”
मम्मी, मौसी से शर्माते हुए, जुनैद की बाँहों में लिपटते हुए बोली: “दीदी… जुनैद…”
फिर कुछ देर चलने के बाद हम लोग एक नदी के पास पहुँचते हैं। नदी किनारे काफ़ी लंबे घने पेड़ और बड़े-छोटे पत्थर पड़े हुए थे। नदी में बहते पानी की रफ़्तार काफ़ी कम और शांत नज़र आ रही थी। नदी से थोड़ी दूरी पर कुछ लोगों ने अपने कैंपिंग टेंट लगाए हुए थे। कुछ कपल्स नदी किनारे पत्थरों पर बैठे इस सुंदर नज़ारे का रोमांस करते हुए लुत्फ़ उठा रहे थे।
मम्मी और मौसी, दोनों की नज़र रोमांस करते कपल्स पर गई, तो एक-दूसरे को देख कर हल्की-सी मुस्करा दी। आरिफ़ अपने दोनों हाथों को आसमान की तरफ फैलाते हुए बोला: “तो कैसी लगी जगह? है ना रोमांच लायक?”
मम्मी शर्माते हुए बोली: “हाँ आरिफ़ जी, जगह तो काफ़ी सुंदर है।”
फिर आरिफ़, मौसी का हाथ थामे हमें पूरी घाटी घुमाने लगा। धीरे-धीरे घूमते हुए कब दिन ढलकर शाम हो गई, पता ही नहीं चला।
फिर नदी किनारे, लोगों से दूर बैठी हुई मम्मी नदी की लहरों को देख बोली: “इन सुंदर नज़ारों को देख कर तो मेरा मन कर रहा है कि आज की रात यहीं बिता ली जाए!”
आरिफ़ मम्मी की तरफ़ मुस्कुराते हुए बोला: “जैसा आप कहें, मैं यहीं पर कैंपिंग टेंट लगवा देता हूँ।”
मौसी उत्सुकता से बोली: “सच में आरिफ़ जी, हम रात टेंट में बिताने वाले हैं? ओह! फिर तो बहुत मज़ा आएगा, क्यों सविता बहन?”
मम्मी मेरी तरफ़ देख कर थोड़ा उखड़े अंदाज़ में बोली: “हाँ, पर खुले में कैसे?”
आरिफ़ मम्मी की भावनाओं को समझते हुए बोला: “आप चिंता मत करें, सभी के टेंट अलग-अलग लगने वाले हैं, और राहुल का हम खास ही इंतेज़ाम जमाने वाले हैं।”
आरिफ़ की बात सुन कर मम्मी शर्माते हुए जुनैद की तरफ़ देखती हैं। उसकी आँखों में देख कर कुछ इशारा-सा करती हैं। जुनैद तुरंत खड़ा होता है और मुझे अपने साथ चलने के लिए कहता है।
फिर जुनैद कार को घुमा कर उस जगह लाता है जहाँ हम रुकने वाले थे। नदी और कार — दोनों से काफ़ी दूर, जुनैद कैंपिंग टेंट लगा रहा था।
मैं मन ही मन सोच रहा था, आरिफ़ ने मेरे लिए क्या खास सोचा था? आरिफ़ और जुनैद आखिर यहाँ मेरी माँ और मौसी के साथ कैसी रंगीनियाँ बनाने वाले थे?
यही सब सोचते हुए मेरा लंड भी खड़ा हो रहा था और मुझे एक तरफ़ गुस्सा भी आ रहा था। साला, इस सुंदर जगह का लुत्फ़ मेरा नौकर माँ को चोद कर उठाने वाला था, और मैं बस उन्हें देख कर अपना लंड मसलने वाला था। जुनैद रात रुकने की पूरी व्यवस्था अच्छे से कर रहा था।
उसने दो कैंप अच्छे से तैयार किए थे, और तब तक शाम पूरी तरह ढल चुकी थी। थोड़ी देर में मम्मी हमारे पास अकेली आ जाती हैं। मम्मी जुनैद का काम देख, उससे काफ़ी बातें कर रही थी।
मैं माँ को जुनैद के साथ बातें करते हुए अकेला छोड़ कर टॉयलेट करने कुछ दूर चला गया। पेशाब करने के बाद जब मैं लौटने लगा, तभी मुझे कुछ हल्की सिसकारियाँ और फुसफुसाने की आवाज़ें सुनाई दीं।
मैं मन ही मन सोचने लगा – “यहाँ ज़रूर कोई कपल रोमांस कर रहा होगा।”
यही सोच कर मैं उलटे पैर मम्मी की तरफ़ जाने लगा, तभी मुझे आरिफ़ का नाम सुनाई दिया, जो मौसी ले रही थी। मैं दबे पाँव जाकर एक बड़े से पत्थर के पीछे देखा।
आरिफ़ एक पत्थर पर बैठा हुआ मौसी के बूब्स चूस रहा था। मेरी मौसी के दोनों बूब्स उनके ड्रेस से बाहर निकले हुए थे, और वो ज़मीन पर खड़ी आरिफ़ के बालों में अपनी उंगलियाँ फेरते हुए उसे बूब्स चूस रही थी।
मैं तो देख कर अचंभित रह गया कि मेरी मौसी इस तरह खुले में अपने बूब्स खोल कर एक मर्द को मज़े से चुसा रही थी। शायद इसी खुलेपन में सेक्स रोमांस करने के लिए मौसी आरिफ़ को इस जगह लाने के लिए कह रही थी।
आरिफ़ मौसी के बूब्स चूसने के बाद उन्हें नीचे बैठने का इशारा करता है। मौसी भी बिना देरी किए, आरिफ़ की टाँगों के बीच नीचे पंजों के बल बैठ जाती हैं। फिर आरिफ़ की आँखों में देख कर मुस्कराते हुए उसका पायजामा खोल कर पैरों में गिरा देती हैं।
फिर मौसी बड़े प्यार के साथ आरिफ का मुरझाया हुआ, गोरी चमड़ी वाला मूसल अपने कोमल हाथ में लेती हैं। फिर मूसल को हल्के हाथ से मुठियाते हुए अपनी जीभ अगले हिस्से पर इस तरह फेरती है जैसे कोई आइसक्रीम चाट रही हों। मौसी पूरे सुपाड़े को जीभ से चाट कर उसे मुंह में भर लेती हैं, फिर धीरे-धीरे अपने होंठों की कसावट से मूसल को आगे-पीछे करते हुए चूसती हैं। मौसी के कोमल होंठों की चुसाई से आरिफ का मूसल कुछ सेकंड में ही अपने तनाव में आ जाता हैं, आरिफ मौसी का सिर पकड़े उनके मुंह में मूसल झड़ तक डाल देता है।
मौसी मोटे मूसल को गले तक लेने के बाद जब उन्हें तकलीफ होती है, तो वो आरिफ की जांघों को अपने नाखून से नोचने लगती हैं। फिर आरिफ उनका दर्द को समझते हुए अपना मूसल बाहर निकलता हैं, मौसी हांफते हुए उसकी आँखों में देख कहती, “आरिफ जी अपने तो मेरी जान ही ले ली थी, आह.. आपका ये मोटा सुपाड़ा मेरे गले में फँस जाता है।”
आरिफ़ बड़े प्यार से मौसी के गालों को सहलाते हुए कहा: “जान, तुम्हें ही तो सुपाड़े को जड़ तक लेने में सुकून मिलता है।”
मौसी हल्की मुस्कान लिए बोली: “सुकून तो मिलता है, जब आपका मूसल चूत की गहराई में जाकर मेरी कोख की जड़ में टकराता है। आरिफ़ जी, बड़ा मीठा आनंद आता है, बच्चेदानी पर जब आपका सुपाड़ा महसूस करती हूँ!”
मौसी पूरी बात कहते ही चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए फिर मूसल मुँह में घाप कर लेती हैं। आरिफ़ मौसी के बालों को आगे से साइड करके अपना मूसल उनके होंठों के बीच जाता हुआ देखने लगता है। वाकई में मौसी बड़े शिद्दत से उसका लंड चूस रही थी। उनके चेहरे की मुस्कान, होंठों की लाली उन्हें मिल रहे परम चरमसुख को बयाँ कर रही थी।
दोनों खुले आसमान के नीचे, एक पत्थर की आड़ लिए अपनी कामवासना में डूबे हुए थे। मेरे कानों तले जब हल्की खड़खड़ाहट की आवाज़ आई, तो मैं समझ गया कि इधर कोई आ रहा था। मैंने तुरंत अपनी नज़र मौसी से हटा कर दूसरी तरफ देखा।
मम्मी अपने बालों को सँवारती हुई आरिफ़ और मौसी की तरफ ही आ रही थी। शायद वो आरिफ़ और मौसी को कैंप तैयार होने की खबर देने आ रही थी। नंगा कांड मौसी कर रही थी, पर दिल मेरा थम-सा गया था। मैंने अपने आप को सँभाला और छुपा लिया ताकि कोई मुझे ना देख ले।
मौसी, आरिफ़ की आँखों में देख कर बड़े चाव से उसका लंड चूसने में मग्न थी। उन्हें ज़रा-सा भी होश या खबर नहीं थी कि कोई उनकी तरफ आ रहा था। मम्मी जैसे ही अपनी नज़र सामने करती हैं, उनका होश उड़ जाता है। कुछ देर तक उनकी निगाहें आरिफ़ के मोटे मूसल पर ही टिकी रहती हैं, जो मौसी के थूक से और भी चिकना और चमचमाता हुआ था। आरिफ़ का गोरा मूसल, धर लंड पूरी तरह तनाव में आसमान की सीध में खड़ा हुआ था।
मम्मी को जब कुछ सेकंड में होश आया, तो वो एक-दम से हल्की ऊँची आवाज़ में बोली: “ओह गॉड, आप लोग भी ना, खुले में ही शुरू हो गए?”
मम्मी शर्मीली मुस्कान के साथ अपना एक हाथ अपनी आँखों पर रख लेती हैं। मम्मी की आवाज़ सुनते ही आरिफ़ और मौसी चौंक जाते हैं। मौसी के चेहरे से तो मुस्कान ही गायब हो गई थी।
वो अपना सिर नीचे कर, अपने खुले बूब्स ड्रेस के अंदर छिपाने लगी थी। आरिफ़ अपने लंड को छिपाने की नाकाम कोशिश करते हुए बोला: “सविता भाभी, माफ़ करना! हमें नहीं पता था आप इधर आएँगी।”
मौसी हल्की मुस्कान लिए बोली: “बहन, इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। ये सब आरिफ़ जी का ही आइडिया था, यहाँ आकर हम खुले में मज़े करेंगे।”
मम्मी शर्माते हुए बोली: “दीदी, आप ना… खैर, मैं ही यहाँ से जाती हूँ, आप लोग अपना काम जारी रखें!”
मम्मी शर्मीली मुस्कान के साथ अपना हाथ आँखों से हटाती हैं, फिर आरिफ़ के मूसल को अपनी तीखी नज़रों से देख कर मुस्कराते हुए उल्टे पाँव चली जाती हैं।
मम्मी के कुछ दूर जाते ही मैं उधर से खड़ा हुआ और दबे पाँव उनके पीछे जाने लगा। मम्मी सीधा कैंप की तरफ़ अपनी गांड को बलखाते हुए चल रही थी। जुनैद कैंप की डोरियाँ टाइट करने में लगा हुआ था।
मम्मी, जुनैद के पास पहुँचते ही, उससे पीछे से लिपट कर बड़े लाड़ में बोली: “क्या जुनैद जी, आप कब से काम में ही लगे हो?
मेरा काम कब करोगे, मैं कब से इंतज़ार कर रही हूँ!”
जुनैद घूम कर मम्मी की आँखों में देख बोला: “क्या बात है, मेरी जान रोमांस के मूड में हो रही हैं?”
मम्मी अपना एक हाथ जुनैद के पायजामे में डाल कर, उसके होंठों के करीब आकर, गर्म साँसें छोड़ते हुए बोली: “जुनैद जी, इसलिए तो हम यहाँ आए हैं! ताकि रोमांस कर सकें!”
मम्मी इतना कहते ही अपने होठों को जुनैद के होठों पर रख देती हैं, मम्मी उसके लबों को चूसते हुए एक हाथ से उसका मूसल लंड भी पायजामे के अंदर मसल रही थी। जुनैद माँ का जोश और उनकी कामुकता को देख कर अपना हाथ उनकी गांड पर फेरने लगता है, धीरे-धीरे जुनैद मां की गांड से नीचे तक की ड्रेस ऊपर उठा कर उनकी नंगी गांड मसलता है।
मैंने देखा, माँ ने अपनी ड्रेस के नीचे पैंटी भी नहीं पहनी थी। मैं मन ही मन बोला – साली, लगता है होटल से ही बिना पैंटी के आई थी। देखते ही देखते माँ का जोश सातवें आसमान पर जा रहा था। जुनैद का तो पता नहीं, पर मुझे साफ़ समझ आ रहा था कि मेरी माँ ज़रूर आरिफ़ का गोरा, मोटा, छतरीनुमा मूसल देख कर गर्म हुई थी।
मैंने मन ही मन कहा — उफ़्फ़… होती भी क्यों ना, आरिफ़ का इतना मस्त, मोटा, सुपाड़ा वाला लंड जो देखा था — वो भी अपनी बहन के होंठों के बीच चूसते हुए।
माँ, जुनैद के होंठों को चूसते हुए उसका पायजामा नीचे खिसका रही थी। जुनैद, माँ के होंठों को चूसते हुए बीच में रुक कर बोला: “क्या बात है, मेरी जान? मुझे भी तो बताओ, तुम बड़ी गर्म हो रही हो। अभी थोड़ी शाम और ढल जाने दो, कहीं राहुल आ गया तो सारा प्लान खराब हो जाएगा।”
मम्मी: “जुनैद जी, मुझे अभी बस आपका मूसल अपने मुँह में चाहिए, और ऐसी कोई बात नहीं है।”
जुनैद मां को कैंप के पीछे लेकर जाता है, उधर अपना पायजामा पैरों में गिरा कर लंड सीधा मां के मुँह में उतर देता हैं। मां जुनैद का मूसल पूरे जोश में चूस रही थी, उन्हें खुले में लंड चूसते हुए मेरी भी कोई फ़िक्र नहीं हो रही थी। मम्मी लंड को चूसते हुए अपने हाथों से जुनैद का लंड तेजी से मुठा रही थी।
मां के हाथों की रफ्तार होठों की गर्माहट के आगे जुनैद ज़्यादा देर टिक नहीं पाया, वो हाँफते हुए तेज गुर्राहट के साथ अपना वीर्य मां के मुँह के निकल देता हैं। मां मुस्कराते हुए जुनैद का सारा रस एक बार में ही गटक जाती हैं, और कुछ रस लंड पर लगा हुआ उसे अपनी जीभ से चाट लेती हैं।
माँ मुस्कराते हुए खड़ी होती हैं और जुनैद को अपनी बाँहों में भर लेती हैं। जुनैद, माँ के होंठों को हल्का-सा चूमते हुए बोला:“जान, अब बताओ भी — क्या बात थी जो तुम्हें गर्म कर रही थी?”
मम्मी शर्मीली मुस्कान लिए बोली: “कुछ खास नहीं, जुनैद जी। बस एक कपल को रोमांस करते देख लिया था।”
मम्मी की बात सुन कर, मैं मन ही मन सोचने लगा कि मौसी और आरिफ़ की बात आखिर जुनैद को क्यों नहीं बताई?
कहीं माँ आरिफ़ के मूसल की ओर तो आकर्षित नहीं हो रही हैं?
उफ़्फ़… मैं भी न जाने क्या-क्या सोचने लगा था।
कुछ देर बाद सब लोग कैंप के पास इकट्ठा होते हैं। मैं नोटिस कर रहा था कि मम्मी आरिफ़ से शर्माते हुए अपनी नज़रें चुरा रही थी। आरिफ़ और मौसी — दोनों ही जुनैद के बनाए कैंप की तारीफ़ कर रहे थे। मौसी जब भी मम्मी की तरफ़ देखती, तो दोनों एक-दूसरे से शर्मा जाती थी।
कुछ देर बातें करने के बाद, आरिफ़ अपनी कार के पास जाकर आग जलाने की ज़रूरत की सारी चीज़ें लेकर आया और जुनैद की तरफ़ देख कर बोला: “भाई, मैं इन लकड़ियों में चिंगारियाँ लगा कर आग जलाता हूँ, ताकि हमें इस ठंडे मौसम में थोड़ी गर्माहट मिल सके। क्यों कविता जी?”
मौसी मुस्कराते हुए बोली: “बिलकुल आरिफ़ जी, इस नदी किनारे ठंडा मौसम और ऊपर खुले आसमान के नीचे जलती आग के सामने बैठने में तो और भी मज़ा आएगा।”
आरिफ़: “हम आज रात इस पल को मिल कर यादगार बना देंगे, क्यों सविता जी?”
मम्मी, आरिफ़ से नज़रें मिलाए बिना, शर्मीली मुस्कान के साथ बड़े धीमे स्वर में बोली : “हाँ, बिल्कुल आरिफ़ जी।”
आरिफ़ खुश होते हुए बोला: “बस, अब एक चीज़ की कमी है। जुनैद को थोड़ा कष्ट करना होगा। थोड़ा और अंधेरा होने से पहले सब के लिए खाने का इंतज़ाम करना होगा।”
मुझे ये कुछ अजीब-सा लगा कि आज सारे काम जुनैद ही संभाल रहा था। शायद आरिफ़ ने जुनैद से कम बाँट लिया हो, ऐसा सोच कर मैंने भी इस बात पर ज़्यादा ग़ौर नहीं किया था।
थोड़ी देर बाद जब जुनैद जाने लगता है, तो मौसी यह बोल कर चली जाती हैं कि वो अपना पसंदीदा डिनर लेंगी। उनके जाने के बाद मैं आरिफ़ और मम्मी के साथ बैठा हुआ था।
मैंने नोटिस किया कि आरिफ़ बार-बार मम्मी की तरफ ही देख रहा था। फिर मैंने सोचा कि आरिफ़ को माँ के साथ अकेले छोड़ दूँ, ताकि उसके मन का पता लगाया जा सके। फिर मैंने वैसा ही किया — उधर से एक बहाना बना कर कार की तरफ़ फोन लेने आ गया।
कुछ पाँच मिनट बाद उधर जाकर मैं छुप कर आरिफ़ को देखने लगा।
कुछ देर पहले तक जो आरिफ मम्मी से दूर बैठ कर बातें करता था, वो आज मम्मी के बिल्कुल नजदीक जाकर उनके करीब बैठा हुआ था। मम्मी आरिफ से शर्माते हुए अपना फेस दूसरी तरफ करे हुए थी। साला कमीना आरिफ अपनी तिरछी नजरों से मां के उभरते बूब्स की क्लीवेज झांक रहा था।
आरिफ बड़े धीरे स्वर में कुछ बोल रहा था, इसलिए मैं उनकी बातें सुनने के लिए थोड़ा और करीब चला जाता हूं।
आरिफ: सविता तुम अब पहले से भी ज्यादा खूबसूरत होती जा रही हों। लगता हैं तुम्हें जुनैद का प्यार बाखूबी ही असर किया हैं।
मम्मी शर्माते हुए एक छोटी हसी के साथ बोली: आरिफ जी आप भी ना, मैं पहले से ही ऐसी थी!
आरिफ: सविता जी मुझे बहुत अच्छे से याद हैं जब आप मेरे होटल में राहुल के साथ पहली बार आई थी, उस समय आपके चेहरे का नूर उदासी में कही छुपा हुआ था। आपकी नजरों में एक अकेलापन सा मैंने काफी गौर से देखा था। पता नहीं मुझे ये बात आज कहनी चाहिए या नहीं, पर तुम्हारे जाने के बाद मेरी नज़रें बस तुम्हें ही ढूंढ रही थी। मैं कितने दिन तक अपने दिल को समझता रहा कि मैंने आखिर उस दिन तुमसे बात क्यों नहीं करी थी। शायद उस दिन तुमसे बात करी होती, तो आज जुनैद की जगह मैं…
मम्मी आरिफ की आँखों में देखते हुए बोली: आरिफ जी आप रुक क्यों गए?
आरिफ: सविता जी मुझे नहीं लगता आज उस बात का कोई मतलब है। आज जुनैद की वजह से ही हम दुबारा मिल पाए हैं। वैसे आपको मेरे रिसॉर्ट पर आना और यहां घूमना जिंदगी को खुल कर एन्जॉय करना अच्छा तो लग रहा है ना?
मम्मी: आरिफ जी सच में मैं उस समय अपने आप से इतना टूट चुकी थी, कि मुझे कुछ समझ नहीं आता था, कि मैं अपनी जिंदगी की दूसरी सूरत कहा से शुरू करूं। राहुल ने जुनैद को घर में जगह नहीं दी होती तो शायद आज मैं इस पल का एन्जॉय नहीं कर पाती
फिर थोड़ा शर्माते हुए, आरिफ की आँखों में देख: ये समय का खेल है! आरिफ जी यहां आकर ही मुझे पता लगा कि जीवन का असली आनंद कैसे लिया जाता हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा मैं इस चीज के लिए आपको कैसे थैंक्स बोलूं?
आरिफ मुस्कुराते हुए बड़ी हसरत से मम्मी की तरफ अपनी बाहें फैला कर बोला: जैसे आपको अच्छा लगे? और मेरे दिल को खुशी मिल सकें!
मम्मी शर्माते हुए बिना कुछ बोले कुछ देर आरिफ की आँखों में देखती रहती हैं। फिर होंठो पर एक लंबी मुस्कान लिए आरिफ के सीने से लिपट जाती हैं।
आरिफ अपने एक हाथ को मम्मी की पीठ पर फेरते हुए बोला: ये अल्लाह का ही शुक्र है, इस तरह ही सही, पर आज दुबारा मिल तो सकें हैं!
मम्मी कुछ एक मिनट उसके सीने से लिपटी रहती हैं। फिर अपने हाथों को आरिफ की कमर से लिपटे हुऐ छोड़ के अपना जिस्म उसके सीने से अलग कर लेती हैं।
फिर मम्मी अपनी पलकें उठाए आरिफ की आँखों में बड़े कामुक अंदाज में देखते हुए डूब जाती हैं। आरिफ मम्मी की आँखों में देखते हुए अपने होंठ उनके होंठो के नज़दीक ला रहा था।
मम्मी आरिफ की गर्म सांसे महसूस करते हुए धीरे-धीरे अपनी आँखें बंद कर लेती हैं। फिर अपने लबों को हल्का सा खोल कर अचानक आरिफ के होंठो पर रख देती हैं।
ये देख मैं एक-दम से हैरान रह गया था, आखिर मेरी मां ये क्या कर रही थी। मुझे मां से ये उम्मीद नहीं थी कि वो आरिफ को किस्स करेगी।
मम्मी अपनी आँखें बंद कर आरिफ़ के होंठों को कुछ देर चूसती हैं, फिर अपने होंठों को आरिफ़ से अलग करते हुए चेहरे पर एक शर्मीली मुस्कान लिए बोली: “आरिफ़ जी, आपने इतना कुछ किया… ये मेरी तरफ़ से थैंक्स था।”
फिर मेरे पास आने से पहले मम्मी आरिफ़ से कुछ दूरी बना लेती हैं। आरिफ़ अपनी लाई हुई लकड़ियों में आग जलाने लगा था।
कुछ देर में जुनैद मौसी के साथ डिनर लेकर आ जाता है, फिर हम सभी आग के चारों तरफ़ गोल घेरे में बैठ गए। रात का अंधेरा अपने उफान पर छाया हुआ था, आसमान में चंद तारों की रोशनी चमचमा रही थी। सभी आग के सामने बैठे डिनर खाने का पूरा मज़ा उठा रहे थे। डिनर करने के बाद जुनैद मम्मी की तरफ़ देख कर कुछ इशारा करता है।
मम्मी मुस्कराते हुए मेरे पास आकर बड़े प्यार से बोली: “राहुल बेटा, अब सोने का समय हो गया है। तुम्हारा सोने का इंतज़ाम कार में कर दिया गया है, ताकि तुम उधर आराम से सो सको।”
मैं थोड़ा चौंकते हुए बोला: “मम्मी, आप किधर सोने वाली हैं? मतलब… यहाँ तो बस दो ही कैंप हैं?”
मम्मी बोली: “बेटा, मौसी मेरे साथ एक कैंप में एडजस्ट कर लेंगी। तुम चिंता मत करो, हम आराम से सो सकते हैं। तो, गुड नाइट मेरे बेटे।”
मम्मी को गुड नाइट बोलने के बाद मैं कार की तरफ चला जाता हूँ, जो थोड़ी दूर ही पार्क थी। कुछ देर कार में बीतने के बाद मैं फिर उनके कैंप की तरफ चला जाता हूँ। मैं उन्हें एक बड़े से पत्थर की आड़ लिए देख रहा था।
चारों अभी तक आग के सामने बैठे हुए थे। माहौल ऐसा था कि दोनों कपल अब अपने-अपने में खोए हुए थे। एक तरफ़ जुनैद, मम्मी को अपनी बाँहों में लिए बैठा था, तो दूसरी तरफ मौसी, आरिफ़ की गोद में बैठी उसकी आँखों में देख रही थी।
माँ और मौसी के चेहरों से साफ़ झलक रहा था कि आज वे बिना किसी झिझक के मर्द का पूरा मज़ा इस खुले आसमान के नीचे लेने वाली थी। आरिफ़, कपड़ों के ऊपर से ही मौसी के बूब्स हल्के हाथों से मसलते हुए उनके होंठों को चूस रहा था, लेकिन उसकी निगाहें तब भी मम्मी पर ही टिकी हुई थी।
जुनैद, मम्मी के होंठों को चूसते हुए अपना एक हाथ उनकी ड्रेस में डालने की कोशिश करता है, तो मम्मी उसका हाथ वहीं अपने हाथ से रोक रही थी। जुनैद तब भी नहीं मानता। तो माँ अपने होंठों को जुनैद से अलग करते हुए बोली: “जुनैद जी, हमें कैंप में चलना चाहिए।”
जुनैद बोला: “जान, ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता। हमें यहाँ कोई नहीं देखने वाला है।”
मम्मी शर्माते हुए एक बार मौसी की तरफ़ देखती हैं, जो अपने बूब्स कपड़ों के ऊपर से ही आरिफ़ से मसलवा रही थी। फिर आरिफ़ की तरफ़ देखती हैं, जो उन्हें ही देख रहा था। जब माँ की आँखें आरिफ़ की आँखों से मिलती हैं, तो उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान ठहर जाती है।
मम्मी फिर जुनैद के होंठों पर अपने होंठ रख कर, उसका हाथ अपनी जाँघों से होते हुए ड्रेस के अंदर डाल कर चूत पर रखवा लेती हैं। जुनैद अब नीचे से माँ की चूत मसल रहा था और उनके होंठों को भी चूस रहा था।
दोनों तरफ अब माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका था, बस लकड़ियों की जलती आग अब शांत होकर अंगारों में बदल चुकी थी।
जुनैद के चूत मसलने से माँ कुछ देर में ही पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। वो अपने होंठों को अलग करके बार-बार जुनैद को कैंप में चलने के लिए कह रही थी। जब जुनैद से भी रहा नहीं गया, तो वो तुरंत खड़ा होकर मम्मी को अपनी गोद में उठा लेता है। फिर मम्मी को अपनी गोद में लेकर कैंप की तरफ चल पड़ता है।
मैंने देखा, जब जुनैद ने माँ को अपनी गोद में उठाया हुआ था, तो मुझे माँ की नंगी गांड पूरी दिखाई दे रही थी। उनकी गांड के होल में लगा वो बट प्लग भी मुझे दिख रहा था, और मेरे अलावा आरिफ़ भी अपनी तिरछी नज़रों से देख रहा था।
जुनैद और मम्मी के कैंप में जाने के बाद, आरिफ़ मौसी को उधर ही पूरी तरह नंगी कर देता है। फिर मौसी को एक पत्थर पर झुका कर पीछे से अपना मोटा मूसल एक बार के धक्के में पूरा घुसा कर चोदना शुरू कर देता है। मौसी आज खुले आसमान के नीचे अपनी टाँगे फैलाए आरिफ़ के धक्कों से अपनी चुदाई का मजा ले रही थी। उनकी कामुक सिसकारियां खुले में कहीं खो सी रही थी।
आरिफ की मस्त चुदाई से मौसी थोड़ी देर में थरथरा कर एक गहरी साँस लेते हुए झड़ जाती हैं, खुद के झड़ने के बाद मौसी उसके साथ कैंप के अंदर जाकर उसके मूसल पर जोरदार घुड़सवारी करके आरिफ़ को संतुष्ट कर रही थी।
उनकी पूरी ज़ोरदार चुदाई देखने के बाद मैं कार में जाकर सो गया था। सुबह के छह बजे जब मैं सोकर उठा, तो कार से निकल कर सीधा कैंप की तरफ चल दिया। उधर जाकर मैंने देखा, मम्मी कैंप के बाहर तैयार होकर जुनैद के साथ खड़ी हुई थी। मम्मी का लुक आज बहुत सुंदर लग रहा था। मम्मी ने एक पीले रंग की छोटी ड्रेस पहनी हुई थी, जो बस उनकी गांड से नीचे, चिकनी जाँघों तक आ रही थी।
ड्रेस का ऊपरी हिस्सा काफ़ी डीप नेकलाइन और पतली स्ट्रैप्स वाला था। ड्रेस का फैब्रिक टेक्सचरदार और उभरा हुआ था, और इसके हेमलाइन किनारों पर सफ़ेद रंग की लेस लगी हुई थी। इस ड्रेस में मेरी माँ एक-दम कातिल और गदराई-सी लग रही थी।
उफ़्फ़… माँ के बड़े, गोल बूब्स जैसे उस ड्रेस में समा ही नहीं पा रहे थे, उनका उभार साफ़ नज़र आ रहा था। ड्रेस का कपड़ा पतला और बारीक होने से उनकी अंदर की लाल ब्रा साफ़ नज़र आ रही थी। उनके कंधों पर ड्रेस की स्ट्रैप के साथ ब्रा की लाल पतली स्ट्रैप भी दिख रही थी।
उनके घुँघराले और कंधे तक लंबे खुले हुए बाल उन्हें और भी सुंदर दिखा रहे थे, और माँ ने गले में एक पतला पेंडेंट वाला हार पहना हुआ था।
मेरी माँ आज किसी पॉर्न मूवी की MILF लग रही थी! पर उनके साथ खड़ा हुआ जुनैद देख कर सुबह ही मेरा माथा गर्म हो गया। मैं हल्के कदमों से मम्मी के पास जाकर बोला: “गुड मॉर्निंग, मम्मी! आज आप इस ड्रेस में काफ़ी सुंदर लग रही हैं। वैसे, ये ड्रेस मैंने पहले नहीं देखी?”
माँ मुस्कराते हुए मेरे गालों को चूमते हुए बोली: “गुड मॉर्निंग, बेटा! थैंक्यू, तुम्हें ये ड्रेस पसंद आई।”
(फिर मम्मी जुनैद की तरफ हल्की मुस्कान के साथ देखते हुए बोली): “ये ड्रेस मुझे जुनैद जी ने ख़ास गिफ्ट की है।”
ये सुन कर तो मेरा खून और खौल गया, मन ही मन कर रहा था — यही जुनैद को अपने लात-घूँसों से सुला दूँ! खैर, मैंने अपने आप पर कंट्रोल किया और झूठे मन से कहा: “अच्छा है।”
मम्मी मुस्कराते हुए बोली: “राहुल, मैं अभी जुनैद के साथ नदी का नज़ारा देखने जा रही हूँ, तुम फ़्रेश होकर उधर ही आ जाना।”
मैंने फ़्रेश होने के बाद एक बार चारों तरफ देखा। मौसी और आरिफ नहीं आ रहे थे, तो मैंने उन्हें नज़रअंदाज़ किया और मम्मी की तरफ, नदी किनारे चल दिया।
उधर जाकर मैंने देखा, जुनैद मम्मी की कमर में अपना हाथ डाले बैठा था, और मम्मी उसके कंधे पर सिर रख कर सुबह का नज़ारा देख रही थी। मैं थोड़ा करीब जाकर उनके पीछे एक पत्थर के पीछे छिप कर उनकी बातें सुनने की सोचने लगा।
मम्मी बड़े प्यारे स्वर में बोली: “जुनैद जी, इतनी सुहानी सुबह तो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। आपके साथ यहाँ आकर तो मेरा जीवन ही सफल हो गया है। आप मुझे ना मिले होते तो शायद आज मैं औरत की हर खुशी को भूल गई होती…”
जुनैद माँ के गालों को पकड़ कर, उन्हें बोलते हुए ही उनके होंठों पर होंठ रख कर चूमते हुए बोला: “जान, मैंने तुम्हें यही सब खुशी देने का वादा किया था, जो मैं दे भी रहा हूँ! मैं अब आगे भी चाहता हूँ कि तुम्हें इससे ज़्यादा और बेहतर औरत की खुशी दूँ, पर…”
मम्मी, जुनैद के होंठों को ज़ोर से चूसने के बाद उसकी आँखों में देखते हुए बोली: “मुझे हर वो खुशी चाहिए जिसकी हर औरत तमन्ना करती है… पर क्या, जुनैद? बोलो?”
जुनैद माँ के होंठों को कुछ देर चूमता रहा, फिर बोला: “मैं ये बात तुम्हें कई दिनों से कहना चाहता था, पर आज मैं तुम्हें कह देना चाहता हूँ! जान, तुम कब तक इस तरह चोरी-छिपे प्यार करती रहोगी? मैं तुमसे शादी करके समाज के सामने खुलकर प्यार करना चाहता हूँ। मैं तुम्हें अपने बच्चे की माँ बना कर हर खुशी दूँगा।”
जुनैद की बात सुन कर मेरा पारा चढ़ गया और पैरों तले ज़मीन खिसक गई। मेरा खून ज्वालामुखी की तरह उबल रहा था।
मैं मन ही मन बोला: “अब बहुत हो गया! जुनैद का गेम बजाना ही पड़ेगा। माँ की खुशी के लिए मैंने उसकी उससे चुदाई करवाना बर्दाश्त किया, पर ये शादी मैं बर्दाश्त नहीं करूँगा!”
माँ के चेहरे का होश उड़ गया था, और उनके होंठ खुले के खुले रह गए थे। माँ कुछ देर बिना कुछ बोले, जुनैद की आँखों में बड़ी नरमी से देखती रहीं।
फिर अपने चेहरे पर हल्की मुस्कान लाकर बोली: “जुनैद जी, मैं आपकी कदर करती हूँ। आपने मुझे हर खुशी दी है! आप मेरी इतनी खुशी चाहते हैं, ये सुन कर मुझे बहुत अच्छा लगा, पर इतना बड़ा फैसला मैं अकेले नहीं ले सकती।”
अब मेरा खून पूरी तरह खौल चुका था। मैं मन ही मन बोला: “माँ, इससे पहले कि तुम कुछ और बोलो, मुझे कुछ करना होगा!”
मैं अपनी जगह से खड़ा हुआ और माँ को दूर से ही आवाज़ लगा कर उनके पास चला गया। जब मैं उनसे चार कदम दूर था, तभी मम्मी बड़े धीरे स्वर में बोली: “मैं इस बारे में बाद में बात करूँगी।”
फिर माँ मेरी तरफ ऐसे मुस्कराते हुए देखती हैं, जैसे कुछ हुआ ही नहीं था। मेरे पास आने से माँ उससे तो दूर हो गई थी, पर मैं तो चाहता था कि मम्मी उससे और भी ज़्यादा दूर रहें। थोड़ी देर बाद हम वहाँ से कैंप की तरफ लौट आए, फिर सभी साथ बैठ कर नाश्ता करने लगे। मौसी मम्मी के चेहरे की तरफ देखती हैं, जो उदास बैठी हुई थी।
मौसी मम्मी के हाथ पर अपना हाथ रख कर धीरे से बोली: “क्या हुआ, मेरी बहन? ऐसे उदास क्यों बैठी हो?”
मम्मी उनकी तरफ देख धीरे से बोली: “नहीं दीदी, ऐसी कोई बात नहीं है। बस मेरा मन नहीं लग रहा। अब यहाँ से हम होटल जाने वाले हैं ना?”
आरिफ़ बोला: “सविता जी, अब जब यहाँ आए हैं, तो पूरा घूम कर ही होटल जाएंगे! मैं अभी आपको यहाँ की एक और खूबसूरत जगह दिखाना चाहता हूँ। यहाँ की पुरानी झील, जहाँ हर कोई जाना चाहता है।”
माँ जुनैद की तरफ देखते हुए बोली: “बस इसके बाद मैं अब और कहीं नहीं जाऊँगी।”
फिर जुनैद जल्दी से अपना कैंप खोल कर चलने की तैयारी कर देता है। कार में बैठे मम्मी और जुनैद दोनों ही खामोश सफर कर रहे थे।
ये खामोशी मुझे आज बहुत अच्छी लग रही थी। मम्मी अगर उसे शादी करने से मना कर दें फिर जुनैद की जगह मैं उनकी जिंदगी में हर खुशियां देने को तैयार था।
फिर हम सभी झील किनारे पहुंच कर थोड़ी देर आराम करते हैं। कुछ खाने के बाद आरिफ हमें पूरी झील के चारों तरफ घुमाता है। पहाड़ों से झरने की तरह पानी नीचे पत्थरों पर गिर रहा था, कुछ कपल अपनी माशूकाओं के साथ मौज-मस्ती में और कुछ पानी में नहाने का मजा ले रहे थे।
आरिफ उन्हें देख कर मम्मी की तरफ मुस्कराते हुए बोला: तुम्हें इस झरने का मजा एक बार लेना चाहिए। देखो और लोग कैसे अपनी हसीनाओं के साथ मजा कर रहे हैं।
आरिफ मम्मी से काफी ज़िद करने के बाद उन्हें पानी में जाने के लिए मना लेता है, मम्मी आरिफ का हाथ पकड़े जांघों तक आने वाले पानी में चली जाती हैं। इधर मैं मौसी और जुनैद के साथ बैठा हुआ उन्हें देख रहा था। मम्मी को आरिफ के साथ हाथ पकड़े हुए देख जुनैद जलन महसूस कर रहा था।
जुनैद थोड़ा जलते भाव से मौसी से बोला: देखो, सविता जी कैसे मस्त एन्जॉय कर रही हैं, शायद आरिफ के साथ आपको उधर होना चाहिए?
मौसी मुस्कराते हुए: जुनैद जी, मैं गहरे पानी में जाने से बहुत डरती हूं, फिलहाल तो मैं वॉशरूम जाना चाहती हूं। जुनैद, मेरे साथ चलो ना, जहाँ हो?
जुनैद मौसी की तरफ हंसते हुए कहा: यहाँ दूर-दूर तक कोई वॉशरूम नहीं मिलेगा, पर मैं आपके लिए एक अच्छी जगह ढूंढ देता हूं।
मौसी बात को समझ जाती हैं कि उन्हें जगह देख कर खुले में ही जाना पड़ेगा। मौसी थोड़ा शर्माते हुए जाने के लिए तैयार हो गई थी। फिर जुनैद मौसी को हल्के घने जंगल की ओर लेकर जा रहा था। मुझे जुनैद का मौसी के साथ जाना अच्छा नहीं लग रहा था।
मैं जुनैद पर नज़र रखने के लिए उसके पीछे दूरी बनाए हुए जाने लगा था। कुछ दूर जाकर जुनैद मौसी को एक बड़े से पत्थर के पीछे जाने का रास्ता दिखा रहा था। पत्थर के आस-पास काफी घनी झाड़ियाँ उगी हुई थी, मौसी को हल्की झाड़ियों से होकर पत्थर के पीछे जाना था।
मौसी बोली: ओह जुनैद, मैं इन झाड़ियों से नहीं जा पाऊंगी, मुझे तो डर लग रहा है! तुम्हें भी मेरे साथ पत्थर तक चलना होगा।
जुनैद हंसते हुए: ओह, आप औरतें भी ना, हर चीज़ से पता नहीं क्यों इतना डरती हैं!
मौसी: सविता होती तो तुम मना नहीं करते, अब प्लीज़ मेरे साथ चलो ना!
फिर जुनैद मौसी को झाड़ियों से होते हुए पत्थर तक ले गया, फिर जुनैद कुछ चार कदम जाकर रुका और मौसी पत्थर के पीछे चली जाती हैं।
मौसी एक बार पीछे मुड़ कर देखती हैं कि उन्हें जुनैद या कोई और देख तो नहीं रहा है। चारों तरफ देखने के बाद मौसी अपना मैक्सी-टाइप टायर्ड स्कर्ट उठा कर अपनी कमर तक कर लेती हैं।
मैंने देखा, मौसी ने अंदर बहुत स्टाइलिश पैंटी पहनी हुई थी। पैंटी के पीछे की पतली पट्टी वाला कपड़ा उनकी बड़ी गांड की दरार में घुसा हुआ था। मौसी अपनी पैंटी को पकड़ कर हल्के हाथों से नीचे करती हुई उसे घुटनों तक कर लेती हैं। फिर बिना देरी के मौसी ज़मीन पर अपनी टांगे थोड़ी करके बैठ जाती हैं।
उफ्फ, क्या गांड थी मौसी की नीचे बैठते ही दोनों फाँके अलग हो जाती हैं, उनकी गोरी चिकनी और उभरी हुई बड़ी गांड देख कर तो मेरा लंड खड़ा हो गया था। मौसी एक गहरी साँस लेकर बाहर छोड़ती हैं, तब उनकी आह की कामुक आवाज़ मेरे कानों से ज़्यादा जुनैद के कानों में गूंज उठी थी।
जिसे सुनते ही जुनैद के चेहरे पर हल्की मुस्कान ठहर जाती है, वो एक बार अपने दाएँ-बाएँ देख कर अपनी गर्दन पीछे घुमा कर पत्थर के उस पार देखता है।
मौसी एक बार फिर हल्की आह भरते हुए मूतना शुरू कर देती हैं। उनकी सुनहरी धार बड़ी तेज आवाज़ के साथ, सार-सार.. करते हुए चूत से निकल रही थी। मौसी की गांड देखते ही जुनैद की आँखें थोड़ी हो गई थी, वो उन्हें देखते हुए एक हाथ से पजामे के ऊपर से मूसल को मुठिया रहा था। मुझे मन ही मन गुस्सा आया कि साला, मेरी माँ को तो चोद चुका, अब मौसी पर भी अपनी हवस भरी गंदी नज़र रख रहा था।
मौसी के मूत की धार जैसे-जैसे कम हो रही थी, वैसे-वैसे हल्की धार चूत की फाँकों से होते हुए पीछे गांड के हॉल के पास गिर रही थी। कुछ देर में ही मौसी का पूरा पेशाब ज़मीन को गीला करने में खत्म हो जाता है। पानी से धो लेने के बाद मौसी अपनी पैंटी पहनने के लिए उठती हैं। फिर हल्की सी गर्दन घुमा कर जैसे ही पीछे देखती हैं, जुनैद उन्हें पीछे हटता हुआ नज़र आ जाता है।
मौसी जुनैद के अचानक मुड़ जाने से समझ जाती हैं कि वो उन्हें देख रहा था। फिर चेहरे पर एक मुस्कान लिए वो जल्दी से अपने कपड़े ठीक कर लेती हैं। फिर मौसी धीरे-धीरे कदमों से चल कर जुनैद के पास आकर उसकी आँखों में आँखें डाल कर बोली: “तो जनाब, चोरी-छुपे एक औरत को पेशाब करते निहार रहे थे?”
जुनैद अपनी आँखों को घुमाते हुए बोला: “मैं तो बस साँप और बिच्छू की निगरानी कर रहा था, कहीं वो आपके पास ना आ जाए!”
मौसी उसके पजामे में बने तंबू को देख कर मुस्कराते हुए बोली: “साँप मेरे करीब आता भी कैसे, आपने तो उसे अपने पजामे में कैद जो कर रखा था?”
मौसी अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसका लंड मुट्ठी में पकड़ते हुए बोली: “जुनैद जी, आपका तना हुआ मूसल बता रहा है कि आपने मुझे अच्छे से देखा है?”
जुनैद एक हाथ मौसी की कमर में डाल कर उन्हें अपने सीने से चिपकाते हुए बोला: “आप जैसी गदराई माल को कोई नामर्द ही होगा जो नहीं देखना चाहेगा!”
मौसी “उफ्फ” की आवाज करते हुए अपने होंठ उसके होंठों के नज़दीक लाकर बोली: “आप जैसे मर्द को मौके देखने के नहीं, कुछ करने के दिए जाते हैं!”
जुनैद इतना सुनते ही अपने होंठ उनके होंठों पर रख देता है, मौसी एक हाथ से उसका मूसल मसलते हुए उसके होंठों को बेदर्दी से चूस रही थी। जुनैद धीरे-धीरे पीछे खिसक कर पत्थर से अपनी कमर टिका देता है। फिर मौसी की सफेद स्लीवलेस क्रॉप टॉप को बूब्स के ऊपर कर उनके बूब्स को अपने मजबूत हाथों से मसलने लगा था।
दोनों कुछ सेकंड में ही पूरे उफान पर आ गए थे, उनका जोश सातवें आसमान को छूने को तैयार हो रहा था। मुझे मौसी का इतना जल्दी जुनैद के साथ ये सब कर लेना किसी रंडीपना से कम नहीं लग रहा था।
जुनैद मौसी के होंठों को छोड़ कर रसीले बूब्स की ओर बढ़ता है, एक बूब्स को अपने होंठों में दबाते हुए कहा: आज तुम उस मूसल का स्वाद चखोगी जिसे तुमने अपनी बहन के लिए चुना था!
मौसी हल्की दबी हुई आवाज में हाँफते हुए: हां जरूर… उफ्फ्फ्फ आईईईई जुनैद, यहां कोई आ ना जाए। आराम से चूसो… उफ्फ्फ्फ आह आह हहहहहह… सविता को मैंने पहले कभी इतना मॉडर्न राजवीर उसके पति के लिए बनते नहीं देखा था, उफ्फ्फ्फ… तुम्हारे मूसल ने विधवा से उसे जवान बना दिया है।
जुनैद बूब्स को चूसते हुए: राहुल, मान जाए तो? मैं सविता को अपनी बेगम बना कर उसे नई ज़िंदगी देना चाहता हूँ!
मौसी चौंकते हुए: क्या बात कर रहे हो, जुनैद? तुम सविता से शादी करना चाहते हो? शायद राहुल को सविता के साथ तुम्हारा ये रिश्ता पसंद ना आए! तुम्हें थोड़ा और समय लेना चाहिए।
जुनैद अपने पजामे का नाड़ा खोल देता है, जिससे उसका पजामा पैरों में गिर जाता है। मौसी उसके काले फन फैलाए मूसल को देख कर अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए नीचे बैठती हैं और बिना देरी किए लंड मुंह में भर लेती हैं। मौसी उसकी आँखों में देख, लंड का सुपाड़ा मुंह में लिए चूस रही थी और एक हाथ से उसके काले अंडों को सहला रही थी।
जुनैद मौसी के होंठों के बीच फंसे अपने लंड को और अंदर ढकेल देता है। गले तक लंड जाते ही मौसी छटपटाते हुए अपना सिर पीछे कर हाँफते हुए—
मौसी बोली: उफ्फ्फ्फ… जुनैद जी, आराम से मुंह में डाल रहे हों, चूत में नहीं जो पूरा मूसल निगल जाऊंगी।
मौसी एक बार फिर अपने होंठों को उसके लंड पर टाइट करती हैं और धीरे-धीरे आधा मूसल मुंह में डाल लेती हैं। जुनैद अपने लंड पर मौसी के होंठों की कसावट पाकर मां को याद करते हुए-
जुनैद ने कहा: उफ्फफफ.. तुम बिल्कुल सविता की तरह चूस रही हो, आह आह ह ह। राहुल का बाप बनाने में तुम मेरी मदद करोगी?
ये बोल कर जुनैद अपना मूसल मौसी के मुंह में पूरा ठूस देता है। मौसी कुछ सेकंड में ही छटपटाते हुए “हु-हु” की आवाज़ करने लगती हैं और अपना सिर हाँ में हिला देती हैं। तो जुनैद जब भी रहम नहीं करता तो मौसी अपना सिर हाँ में हिला देती हैं।
जुनैद हाँ का जवाब पाने के बाद मुस्कराते हुए अपना मूसल मुंह से बाहर निकाल लेता है। मौसी फ़ौरन खड़ी होकर जुनैद को एक ज़ोरदार किस्स करती हैं।
फिर मौसी अपने दोनों हाथों को पत्थर पर टिका कर, टाँगें फैला कर झुकते हुए बोली: “जुनैद, तुम्हारे लिए कोशिश करूंगी!”
जुनैद मौसी के पीछे आया और ड्रेस को कमर तक उठा कर उनके कूल्हों पर एक ज़ोरदार चपेट मारते हुए, अपना मूसल चूत के मुहाने पर रखते हुए बोला: “साली, बस कोशिश करने से मेरा काम नहीं चलेगा।”
जुनैद एक झटके में पूरा मूसल चूत में उतारते हुए बोला: “तुझे मेरा ये काम करना होगा!”
मौसी अपनी चीख को दबाते हुए: आई ई ईईईईईईई आह ह.. हां हां, जुनैद जी तुम्हे शादी की क्या ज़रूरत पड़ी हैं, सविता तो वैसे ही तुम्हारी रखैल है? उफ्फफफ आईईईई सीईईईई… हाएं मर डाला…
जुनैद मौसी के कूल्हों को पकड़ कर एक तेज़ धक्का मारता है, जिससे उसका पूरा मूसल मौसी की बच्चेदानी से टकरा कर उनकी चीख निकल जाती है। मौसी अपनी चीखों की आवाज़ दबाने के लिए अपनी गर्दन घुमा कर जुनैद को लिप्स लॉक किए हुए थी। जुनैद मौसी के कूल्हों को मज़बूती से पकड़े अपने तेज़ धक्कों पर धक्के मार रहा था।
जुनैद शायद अपने मूसल लंड से मौसी की गर्मी निकाल कर उन्हें मनाना नहीं चाह रहा था। मौसी भी उसके लंड की दासी बनती नज़र आ रही थी, जो उसके इतने तेज़ धक्कों की चोट अपनी चूत पर लगवा रही थी। कुछ देर की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद जुनैद झड़ने पर आता है, तो वह अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाते हुए मौसी को गरज कर पूछता है।
मौसी हाँफती हुई उसे अपनी चूत में ही झड़ जाने को कहती हैं। मौसी अपनी चूत में लंड ढीला होने तक उसे जकड़े रहती हैं। दोनों गले मिल कर एक ज़ोरदार किस्स कर रहे थे। तभी मैं उधर से जल्दी से झील की तरफ आ जाता हूँ।
झील के पास आकर मैंने देखा, आरिफ बिना कुर्ता पहने मम्मी के साथ बैठा हुआ था। मम्मी मुस्कराते हुए अपना एक हाथ…
झील किनारे मम्मी और आरिफ अपना आधा पैर पानी में डाले एक पत्थर पर बैठे हुए थे। आरिफ बिना कुर्ता पहने मम्मी के बगल में बैठा था। मम्मी, आरिफ की तरफ देख कर मुस्कराते हुए उसकी बॉडी के सिक्स-पैक अपने कोमल हाथ से छू रही थी। आरिफ मम्मी की आँखों में देख कर कुछ कह रहा था, जो मुझे दूर से सुनाई नहीं दे रहा था।
मैं उनके नज़दीक जाने लगा, तभी मम्मी की नज़र मुझ पर पड़ जाती है। वो आरिफ से अलग होकर मेरी तरफ देख कर मुस्कुराती हैं।
मैं उनके नज़दीक गया और बोला: “मम्मी, अब हमें ट्रिप यहीं खत्म करनी चाहिए। मुझे अपने काम पर भी ध्यान देना है।”
मम्मी मुझे गले लगाते हुए बोली: “राहुल, देखो ना कितना मज़ा आ रहा है यहाँ! प्लीज़ एक दिन और रुक जाओ, देखो आरिफ जी कितनी अच्छी जगह हमें टूर करा रहे हैं।”
मैं थोड़ा गुस्से के भाव में बोला: “मम्मी, मज़ा आपको आ रहा होगा, पर मुझे नहीं!”
इतना बोल कर मैं मम्मी से दूर चला जाता हूँ और एक शांत जगह अकेले बैठ कर सोचने लगा कि अब कैसे भी मम्मी को घर लेकर जाना होगा।
कुछ देर सोचने के बाद, मैंने एक प्लान बनाया। अपनी पार्टी को फोन करके जुनैद के लिए एक जाल बुन दिया था।
फिर एक घंटे बाद हम सभी रिसॉर्ट पहुँच कर आराम करने लगे थे। मैं अपने कमरे में लेटा रहा, पर मुझे नींद नहीं आई, तो मैं बाहर आ गया। बाहर आकर मैंने देखा, मम्मी होटल के बगीचे में टहल रही थी। वो एक ही जगह पर कुछ सोचते हुए चक्कर लगा रही थी।
मुझे मम्मी के चेहरे पर एक उलझी हुई उदासी नज़र आ रही थी। उनका खामोश इधर-उधर टहलना बता रहा था कि वो जुनैद के बारे में ही सोच रही थी। कुछ देर खड़े रह कर मैंने देखा, मौसी आरिफ के कमरे से निकल कर तेज़ कदमों से मम्मी के पास आती हैं, फिर मम्मी मौसी के साथ एक बेंच पर बैठ जाती हैं।
मम्मी को मौसी के साथ बैठा देख मैं समझ गया कि वो दोनों जुनैद की बातें करने वाली हैं। फिर मैं धीरे से उनके पीछे जाकर छिप गया, जहाँ से उनकी बातें सुन सकता था।
मौसी मम्मी के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए बोली: “क्या हुआ सविता, ऐसे अचानक मुझे यहाँ क्यों बुला लिया?”
मम्मी उदास आवाज़ में बोली: “दीदी, बात ही कुछ ऐसी है कि मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूँ। आपको सब पता ही है, जुनैद और मेरा रिश्ता काफ़ी समय से चल रहा है।”
मौसी हैरानी से: “हाँ, पर हुआ क्या?”
जुनैद से सब पता होने के बाद भी मौसी का इस तरह मम्मी के सामने भोली बन जाना मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था! आगे –
मम्मी: “दीदी, जुनैद मुझसे शादी करना चाहता है। अब वो मुझे समाज के सामने अपनाना चाहता है। उसके दिल में मेरे जिस्म की हवस है या प्यार का पागलपन, ये मुझे नहीं पता, पर मैं भी उसे पसंद करती हूँ! दीदी, मेरे जिस्म को मर्द की ज़रूरत है, जिसे जुनैद मेरा पति बन कर पूरी कर सकता है। पर इस बात को राहुल बेटा नहीं समझेगा?”
मौसी मम्मी को गले लगाते हुए: “मेरी बहन, मैं समझ सकती हूँ कि तुम जुनैद को पसंद करती हो। मैं तुम्हारी दीदी होने के नाते तुम्हें कुछ सलाह देना चाहती हूँ।”
मम्मी थोड़ा भावुक होते हुए: “हाँ दीदी, बताओ मैं क्या करूँ?”
मौसी: “ये मर्द कभी एक जिस्म के दीवाने नहीं रहते। इन्हें हमसे ज़्यादा सुंदर मिल जाए तो उससे भी नोच खा सकते हैं। बहन, अभी तुम आज़ाद हो। शादी के बाद मर्द का बदल जाना भी औरत को दुख देता है। ये जिस्म की आग तो बिना किसी रिश्ते के भी बुझाई जा सकती है। तुम इतनी सुंदर हो कि हर मर्द दीवाना बन जाए। रही बात तेरी पसंद की तो, राहुल को सब सच बताओ। वो मान गया तो अच्छी बात है, लेकिन अगर राहुल नाराज़ हो गया तो जुनैद के साथ तुम्हें भी अपनी माँ कभी स्वीकार नहीं करेगा। अब तुम्हें देखना है कि तुम्हारे लिए जुनैद ज़रूरी है या राहुल बेटा। उम्मीद है, तुम्हें मेरी बात समझ आ गई होगी।”
मम्मी आँखों में आँसू लिए मौसी के कंधे पर सिर रखते हुए बोली: “दीदी, आपकी हर कही बात मैं समझ गई हूँ। मैं राहुल की मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं करूँगी। वो मेरी ज़रूरत ही नहीं, मेरी ज़िंदगी भी है!”
माँ के मुँह से अपने लिए इतना प्यार सुन कर मुझे बहुत ख़ुशी होती है, पर बात यहीं खत्म नहीं होती। इसके लिए मम्मी मेरे पास बात करने आएँगी, ये मुझे पक्का यक़ीन था।
फिर जैसे-जैसे दिन ढल रहा था, आगे क्या होगा यही सोच कर मेरे दिल की धड़कनें बढ़ रही थी। कुछ दो घंटे बीत जाने के बाद मैंने देखा, जुनैद मम्मी के कमरे में जा रहा था। मैं उसके चेहरे के भाव देख कर समझ गया कि वो ज़रूर मम्मी से बात करने जा रहा है।
कमरा अंदर से बंद हो जाने के बाद मैं अपनी जगह पर गया और मम्मी के कमरे के अंदर देखा। मम्मी सुबह वाली ड्रेस उतार कर एक गर्म, मुलायम कपड़े का घुटनों तक का कोट पहने हुई थी।
मम्मी आईने के सामने खड़ी होकर अपने बालों को सुलझा रही थी। जुनैद उनके पीछे खड़ा उन्हें अपनी बाहों में जकड़े हुए उनके गालों को चूम रहा था।
मम्मी नखरे दिखाते हुए बोली: “ओह जुनैद जी, छोड़ो ना! कोई आ जाएगा।”
जुनैद मम्मी के कानों की लो को अपने होंठों में दबाते हुए बोला: “जान, कोई आ भी गया तो तुम्हें मुझसे अलग नहीं कर पाएगा।”
मम्मी चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए बोली: “वैसे तो मैं खुद अलग नहीं होना चाहूंगी, पर राहुल आ गया तो आपकी इन मज़बूत बाहों से मुझे निकलना ही पड़ेगा, जुनैद जी।”
जुनैद बोला: “जान, मेरे राहुल का बाप बन जाने के बाद तुम्हें उसे भी शर्माने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। फिर मैं कहीं भी और कभी भी तुम्हें प्यार कर पाऊँगा। जान, ये नेक काम हम घर जाने से पहले ही कर लेते हैं, ताकि घर जाकर हम एक नई ज़िंदगी शुरू कर सकें।”
मम्मी जुनैद की तरफ घूम कर उसकी आँखों में देखते हुए बोली: “जुनैद जी, हम इतना बड़ा फैसला अकेले कैसे ले सकते हैं? मुझे तुम्हारे लिए पहले राहुल से सलाह लेनी पड़ेगी। आखिर वो मेरा बेटा है।”
जुनैद गुस्से भरे भाव और ऊँचे स्वर में बोला: “जान, राहुल इस फैसले को पसंद नहीं करेगा, मुझे पता है। हम शादी करने के बाद उसे सरप्राइज़ दे सकते हैं। जान, तुम उसकी चिंता क्यों करती हो? वो जवान है और अब समझदार भी हो गया है। वो अपने आप को संभालना जानता है। हम उसके बिना अपनी एक नई दुनिया बसा सकते हैं, आई प्रॉमिस सविता!”
मम्मी आँखों में आँसू लिए थोड़ा गुस्से भरे भाव में बोली: “जुनैद, मैं तुम्हें बिना शादी किए भी अपना पति मानती थी। तुम्हारे साथ हर एक वो लम्हा मैंने तुम्हें अपना पति मान कर ही बिताया था। तुम चाहते हो कि मैं अपने बेटे को छोड़ कर तुम्हें प्यार करूँ, तो वो मैं नहीं कर सकती। बस, इसके आगे मैं कोई बात नहीं करना चाहती।”
मम्मी जुनैद के सामने से हट कर अपने कदम गेट की तरफ बढ़ा देती हैं। जुनैद उनके पीछे कदम बढ़ाते हुए बोला: “जान, मेरा ये कहने का मतलब नहीं था!”
मम्मी अपने कदम बिना रोके बोली: “मुझे अकेला छोड़ दो, तुमसे अब मैं कोई बात नहीं करना चाहती।”
मम्मी आँखों में हल्के आँसू लिए कमरे से बाहर निकल जाती हैं। फिर जब मैं उनके पीछे गया तो देखा। मम्मी होटल की एकांत जगह पर अकेली बैठी रो रही थी। मम्मी रोते हुए मौसी को फोन करती हैं और अपने पास आने के लिए कहती हैं।
थोड़ी देर में मौसी आरिफ के साथ आती हैं। फिर मम्मी के बगल में बैठ कर पहले उनके आँसू पोंछती हैं। मम्मी की दूसरी साइड में आरिफ बैठा हुआ था। वो उनकी पीठ को सहलाते हुए मौसी से मम्मी के रोने का कारण पूछता है।
फिर कुछ बातें मौसी ने बताईं तो कुछ बातें मम्मी रोते हुए बता देती हैं। आरिफ मम्मी को अपनी तरफ घुमा कर उनका सिर अपने कंधे पर रखते हुए बोला: “जुनैद की बात बहुत गलत है। उसे ऐसे तुम्हें अपने बेटे से अलग होने के लिए नहीं कहना चाहिए था। सविता, मैंने तुम्हें अपने रिसॉर्ट पर अपनी मर्ज़ी से बुलाया था। मैं तुम्हें यहाँ कोई तकलीफ़ नहीं होने दूँगा।”
मम्मी हल्का रोते हुए बोली: “आरिफ जी, अब मैं यहाँ रह कर जुनैद का चेहरा भी नहीं देखना चाहती। राहुल को ये सब पता लगा तो पता नहीं वो क्या सोचेगा?”
मौसी बोली: “बहन, चिंता मत कर। मैं और आरिफ जी तेरे साथ हैं, कुछ नहीं होने दूँगी।”
मैंने सोचा, अब मेरे यहाँ खड़े रहने से काम नहीं चलेगा, मुझे कुछ करना ही होगा। मैं उधर से तुरंत मम्मी के पास गया, तो मम्मी मुझे देख कर अपना सिर आरिफ के कंधे से हटाते हुए अपने आप को संभालती हैं।
मैं सब के चेहरे पर उदासी देख बोला: “क्या हुआ? सब इतने उदास क्यों बैठे हैं? मम्मी, आपको क्या हुआ? आपके माथे से इतना पसीना क्यों आ रहा है?”
मम्मी घबराते हुए बोली: “कुछ नहीं बेटा, बस सिर में हल्का दर्द है।”
मैं: “क्या आपने दवाई खाई या नहीं? मैं अब यहाँ और नहीं रुकूँगा, हम कल अपने घर के लिए निकल रहे हैं।”
मम्मी बड़े धीमे स्वर में बोली: “राहुल, कुछ नहीं… बस हल्का-सा दर्द है। घबराने वाली कोई बात नहीं है, मैं दवाई लेने ही जा रही थी।”
मौसी: “राहुल, तुम चिंता मत करो, मैं सविता के साथ हूँ। तुम कमरे में डिनर करके आराम कर सकते हो।”
आरिफ बीच में रोकते हुए बोला: “राहुल अकेले बोर हो जाएगा, क्यों ना सब मेरे कमरे में चलते हैं? उधर सविता जी के लिए मेरे पास दवाई है और राहुल हमारे साथ डिनर भी कर लेगा।”
मम्मी आरिफ की इस बात पर ‘हाँ’ कर देती हैं। उसके बाद हम आरिफ के कमरे में डिनर करते हैं। आरिफ डिनर करते हुए मुझे एक दिन और रुकने के लिए मना रहा था, पर मैंने अपने काम का बहाना बना कर रुकने से मना कर दिया था।
फिर डिनर करने के बाद जब मैं बाथरूम से बाहर आने लगा, तभी मैंने सुना,
मौसी बड़े धीमे स्वर में बोली: “सविता बहन, जुनैद और तुम्हारे बीच बातें और ना बिगड़ें, इसलिए आज तुम्हें यहीं आरिफ जी के कमरे में रुकना चाहिए। मैं जुनैद के पास जाकर उसे समझाने की कोशिश करती हूँ।”
मम्मी के एक “हाँ” कहने के बाद कमरे में पूरी शांति छा गई थी। फिर बाथरूम से बाहर आने के बाद मैं अपने कमरे में जाने की बात कह कर वहाँ से निकल गया था।
बाहर खड़ा मैं यही सोचने लगा कि मौसी जुनैद के पास जा रही हैं, और मम्मी आरिफ के साथ यहाँ अकेली रहेंगी, मुझे अब आरिफ पर नज़र रखनी चाहिए।
मैंने ऐसा ही किया। मौसी के जाने के बाद मैंने आरिफ के कमरे पर नज़र रखी। अंदर देखा तो मम्मी अब भी बेड पर पहले की तरह अपना गर्म कोट पहने लेटी हुई थी।
आरिफ कुछ देर में बाहर से आता है, फिर बेड के किनारे बैठ कर मम्मी का माथा अपने हाथों से छूते हुए बोला —
“सविता जी, आपका माथा काफी गर्म हो रहा है। क्या आप अब तक जुनैद के बारे में ही सोच रही हैं? आपको अब इतना नहीं सोचना चाहिए।”
मम्मी उठ कर बेड के सिरहाने कमर टिकाए बैठती हुई बोली: “आरिफ जी, इतने दिन मेरे साथ संबंध में रहने के बाद जुनैद राहुल को मुझसे अलग करने की कैसे सोच सकता है? मैंने उसे अपने परिवार जैसा माना, उसे हर वो प्यार दिया जो मैं एक पति को दे सकती थी… उफ्फ, मुझे बहुत दुख होता है।”
आरिफ थोड़ा मम्मी के करीब जाकर उनके कंधे पर अपना हाथ रखते हुए बोला:
“सविता, वो नौकर है, ये जान कर भी तुमने उसे इस लेवल पर पहुँचाया था। सब कुछ मिलने के बाद जुनैद को ऐसा नहीं करना चाहिए था। मेरी तुम्हें सलाह है कि तुम्हें अब जुनैद को दिल से निकाल देना चाहिए, वो मर्द तुम्हारे स्टैंडर्ड के लायक नहीं है।”
मम्मी अपनी आँखों में आँसू लिए आरिफ को अपने गले से लगते हुए बोली: “आरिफ जी, मैंने उस पर भरोसा किया था!”
आरिफ मम्मी की पीठ को सहलाते हुए बोला: “मैं तुम्हें अपना समझ कर ही सलाह दे रहा हूँ।”
आरिफ का इस तरह मम्मी को सलाह देना मुझे ठीक भी लग रहा था, लेकिन एक तरफ शक भी हो रहा था, आखिर वो अपने दोस्त के साथ ऐसा क्यों कर रहा था? मेरे मन में यह विचार आया कि कहीं आरिफ मम्मी को जुनैद से अलग करके अपनी तरफ तो नहीं खींच रहा है? यह सोचते हुए मेरे पैर वहीं जम गए कि आरिफ आगे क्या करने वाला है।
मम्मी आरिफ की बाहों से अपने आप को अलग करती हैं, फिर अपने माथे पर आए पसीने को पोंछते हुए बोली: “आरिफ जी, मुझे दवाई खाने के बाद काफी गर्मी महसूस हो रही है, मेरा मन अभी ठंडे पानी से नहाने का कर रहा है।”
आरिफ मुस्कराते हुए बोला: “मैं भी आपको यही कहने वाला था, नहाने से आपको हल्का और ताज़ा महसूस होगा।”
मम्मी शर्माते हुए बेड से उठ कर बाथरूम चली जाती हैं।
आरिफ बेड पर बिछी चादर को समेट कर तुरंत फूलों से बनी नई परफ्यूम-छिड़की चादर बिछा रहा था। उसका ऐसा करना मुझे समझ नहीं आया — वो करना क्या चाहता था?
थोड़ी देर बाद जब मम्मी बाथरूम से बाहर आईं, तो मैं देखता ही रह गया।
मम्मी ने लाल रंग की बेबी डॉल सेक्सी लॉन्जरी नाइटवियर पहन रखी थी। लाल, चमकदार साटन फ़ैब्रिक का कपड़ा उन्हें एक चिकना, चमकता और मुलायम लुक दे रहा था। नाइटवियर इतनी छोटी थी कि बस उनकी चिकनी जांघों तक आ रही थी। वी-शेप गले वाली ड्रेस के कंधों पर पतली एडजस्टेबल स्ट्रैप्स थी, जो उनकी दो भरी चूचियों को थामे हुए थी। चूचियों की क्लीवेज की गहराई साफ नज़र आ रही थी, और दो अंगूर जैसे टाइट निप्पल उभरे हुए थे।
मम्मी अपने सिर पर तौलिया बाँधे बाथरूम से बाहर आती हैं। आरिफ उन्हें देखता ही रह जाता है। मम्मी उसे इस तरह देखते हुए अपने चेहरे पर हल्की शर्मीली मुस्कान लिए आगे बढ़ती हैं।
