मैं सलवार पहने बैठी थी जिसे आज ही मेरे लिए लाया गया था मेरी नजर जमीन पर थी ,पता नही क्यो पर मैं मिश्रा जी से नजर नही मिला पा रही थी,मेरे पास एक आदमी आकर बैठा मेरे हाथो को पकड़ कर रुई से सहलाने लगा ,मुझे समझ आ गया था की वो मुझे इंजेनक्शन देने वाला था,जूही और नेहा दूसरे कमरे में थे,मैं नही चाहती थी की वो ये सब देखे,रोबर्टो आष्चर्यजनक रूप से मेरी बात मान रहा था,अब वो बिस्तर में बैठा था,वो हाल बहुत बड़ा था और चारो ओर उसके कुछ 10 लोग भी खड़े थे,शायद इन सबके सामने ही मुझे नंगा किया जाना था,लेकिन मुझे तो बस मिश्रा जी से शर्म आ रही थी,वो इंजेनक्शन मेरे अंदर गया ,ये उसका फूल डोस था,5 मिनट के अंदर ही मेरी आंखे लाल हो गई ,पूरा शरीर गर्म हो गया,लगा की मैं मतवाली हो रही हु,मेरे चहरे में एक अजीब सी मुस्कान आ गई ,कुछ तो मैं होश में थी और कुछ उस नशे के गिरफ्त में ,मैंने पहली बार अपनी आंखे उठाई सामने मिश्रा जी मुझे घूर रहे थे,जितना उन्हें चिल्लाना था वो उतना चिल्ला चुके थे,मेरे होठो में मुस्कान देख कर उनके आंखों में दहसत आ गई ,
मैं इठलाती हुई खड़ी हुई देखा रोबर्टो भी मुस्कुरा रहा है,मैं मिश्रा जी की तरफ जाने लगी ….
“मिश्रा जी ….सालो से कहना चाहती थी आपसे आज कह ही देती हु ,I LOVE YOU…..”
मैं जाकर मिश्रा जी के गालो में एक किस किया,
“काजल तुम ये क्या कर रही हो,प्लीज् …समझो बात को तुम्हे ड्रग्स दिया गया है,सम्हालो खुद को आज नही सम्हाल पाई तो इससे उबरना मुश्किल हो जाएगा तुम्हारे लिए”
मैं मिश्रा जी के आंखों में देखने लगी,उन्हें मेरी चिंता तो थी,लेकिन मेरे होठो की मुस्कान और बढ़ गई
“पहले बोलो की आप भी मुझसे प्यार करते हो “
मैं एक बच्ची की तरह उनके पास जाकर उनका गाल खिंचने लगी”
“मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु काजल प्लीज् इसे अपने पास मत आने दो …”उनके आंखों से आंसुओ के दो बून्द गिर गए और एक पल को ही सही मेरा दिल भी उनके लिए पिघल गया लेकिन शायद रोबर्टो को ये बहुत पसंद आया ,वो मेरा हाथ खिंच कर मुझे अपने गोद में बिठा लिया…
बिस्तर और मिश्रा जी के बीच थोड़ी ही दूरी थी,
रोबर्टो ने मेरे सफेद कमीज के ऊपर से ही अपनी उंगलियों को मेरे निप्पलों पर गोल गोल घुमाया ,मुझे एक करेंट सा लगा,
“देख मिश्रा ये लड़की कैसे मेरे छूने से ही मचल रही है,इसे भी वैसे ही चोदउँगा जैसे तेरी बीवी को चोदा था,ये भी मेरी दीवानी हो जाएगी ,तू अब मान ले की तू एक नामर्द है”उसकी शैतानी हँसी पूरे कमरे में गूंज गई
“इसे भी अपने साथ इटली ले जाऊंगा और इसे अपनी रखैल बना कर रखूंगा,इसे भी अपने बच्चों की मा बनाऊंगा जैसे की तेरी बीवी को बनाया था,”
वो फिर हंसा ,मिश्रा जी के आंखों में आंसू आ गए जाने कितने दिनों का वो दर्द दबा कर बैठे थे वो एक बारी पूरे ताकत से छूटने की कोसीस किये लेकिन छूट नही पाए,वो अपनी नजर झुकाकर बैठ गए ,
“नही मिश्रा तुझे तो देखना ही होगा,”
उसने एक लड़के को बुलाया ,
“इसका सर झुकने नही देना,और ना ही आंखे बंद करने इसे देखने दो की ये जिससे भी प्यार करता है उसे मैं किसे इससे छीन लेता हु …”
मिश्रा जी की मजबूरी उनके चहरे से साफ झलक रही थी,
रोबर्टो की उंगलिया जैसे जैसे मुझे हल्के हल्के सहला रही थी मेरे तन में एक अजीब सी आग बढ़ रही थी,शरीर जलने सा लगा था,होठ सुख रहे थे,आंखे किसी अनजाने नशे में बन्द हो रही थी,कुछ भी समझने के हालात अब नही रहे थे,मैं नदी की धार में बहना चाहती थी,किसी उम्मीद के बगैर की ये धार मुझे कहा पहुचायेगी मैं रास्ते का ही पूरा मजा लेना चाहती थी,और इसलिए मैंने आंखे बंद कर ली,मैं उस अहसास में खोते चली गई,मेरे उन्नत उजोरो की चोटियों को रोबर्टो सहला रहा था,मेरे निप्पल अपने आप ही कड़े होते जा रहे थे,ऐसे तो ये अहसास मुझे पहले भी हो चुका था लेकिन इस बार बात अलग थी,मैं ड्रग्स के नशे में भी थी,और हल्की से हल्की छुवन के प्रति बेहद संवेदन शील हो गई थी,रोबर्टो भी जैसे इस बात को अच्छे से जानता था,वो कोई भी जल्दबाजी करने के मूड में नही था वो बड़े आराम से मेरे जिस्म से खेल रहा था,
उसके उंगलिया अब मेरे गले तक पहुची फिर गालो को सहलाते हुए मेरे होठो तक मेरे होठ कप रहे थे,किसी अनजाने से सुख में खोये हुए ,उसने मेरे होठो के दोनो पोरो के बीच अपनी एक उंगली घुसा दी,मैं उसे चूसने लगी मेरे आंख अब भी बंद थी,और मैं उसके गोद में अपने को समर्पित कर चुकी थी,उसके एक हाथ की हथेली ने मेरे उरोजों को पूरे ताकत से मसला ,
“आह आह मिश्रा जी “
मेरे मुह से निकली इस सिसकारी से मिश्रा जी भी चौके जरूर होंगे लेकिन रोबर्टो के होठो में एक मुस्कान सी आ गई होगी,वो जरूर मिश्रा जी को देखकर मुस्कुराया होगा,और मिश्रा जी के आंखों से कुछ बून्द टपक ही गए होंगे,
वो मेरे उरोजों को फिर से हल्के हल्के दबाने लगा ,मैं नशे में और भी मस्त होने लगी मेरे होठो से सिसकारियां रुक ही नही रही थी,की उसने अपनी उंगली मेरे होठो से निकाली और अपने होठो को मेरे होठो से मिला दिया,दोनो ही होठ मिलकर गीले हो गए थे,एक दूसरे के लार से भीग चुके थे,जब उनके जीभ की छुवन मेरे जीभ पर पड़ी तो मैंने भी अपने जीभ को उससे रगड़ दिया………..
रोबर्टो ने मुझे अपने से अलग कर बिस्तर में लिटा दिया मैं उससे अलग नही होना चाहती थी ,मैं बार बार ही उसके होठो पर अपने होठो को मिलाने की कोसीसे करने लगी ,लेकिन वो मुझे बिस्तर के बीचो बीच लिटा कर ही माना,मेरे बाल अब खुले हुई बिखरे थे,सांसो के तेज चलने से सीना ऊपर नीचे हो रहा था,मेरी टांगे बिस्तर में पसरी हुई बस किसी का रास्ता जोह रही थी,मेरे हाथ फैले हुए किसी की राह देख रहे थे,कोई आ जाए तो उसे बांहो में भर लू,रोबर्टो ने कुछ गुलाब की पंखुड़ियां मेरे गालो पर फेक दी ,उसके कोमल अहसास से मेरी आंखे आधी खुली मैंने रोबर्टो को देखा और हल्के से शर्मा के हँस पड़ी ,वो मेरे कानो के पास अपने होठो को लाया और उसने हल्के से फूक मार दी ,
“आह ह्म्म्म “मैं एक बार मचल सी गई मैंने अपना चहरा दूसरी ओर कर लिया रोबर्टो मेरे चहरे को अपनी ओर कर फिर से मेरे गालो में एक पप्पी ले ली ,
“तुम बहुत खूबसूरत हो काजल ,आज हमारी सुहागरात है,अपने पति को प्यार नही करोगी “
वो मेरे कानो में फुसफुसाया ,मैं जैसे शर्म से डूबी जा रही थी,मुझे ये क्या हो गया था,मैं शर्मा रही थी लेकिन चाहती थी की वो अपनी मनमानी करे और मुझे रौंद कर रख दे ,मुझे मसले ,मुझ पर चढ़ जाय ,
लेकिन मैंने ना में सर हिलाया,मेरे होठो पर मुस्कान थी लेकिन आंखे नशे में आधे खुले हुए थे,नशा वासना का था की ड्रग्स का पता नही लेकिन सच में बहुत मजा आ रहा था,उसकी आवाज में मुझे और भी मदहोश कर दिया था,रोबर्टो अब मेरे ऊपर चढ़ गया और
“तुम मुझे जान ही कहा करो मेरा नाम अब से मत लेना ,अपने पति का नाम नही लेते “
वो मेरे ऊपर था,और मैंने बिना कुछ कहे उसे अपने बांहो के घेरे में बांध लिया,जैसे की मैंने उसे अपनी स्वीकृति दे दी हो,
वो मेरी नजाकत भरे व्यवहार से जैसे मेरा दीवाना हुआ जा रहा था,वो मेरी ओर झपटा मेरे होठो को अपने होठो से भरकर चूसने लगा,इसबार तो उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी,वो जैसे उसे खा ही जाना चाहता था,मैं भी पागलो की तरह उसे चूसे जा रही थी,उसका ताना हुआ लिंग मेरे जांघो के बीच रगड़ खा रहा था और उसने एक बार जोर से उसे जानबूझ कर रगड़ा ,मेरे मुह से एक जोर की सिसकारी निकल गई
“ओओह ह ह जान….”मैंने उसे जोरो से कस लिया
वो अपने हाथो का जादू दिखाने लगा मेरे पूरे शरीर में उसके हाथ बिना किसी बाधा के घूम रहे थे,वो मेरी जांघो को सहला रहा था,और उसका था मेरी कमीज के अंदर जाने लगा ,वो मेरे नंगे पेट को सहलाने लगी ,मैंने अपनी योनि में एक जोरो को खजली का अहसास किया और मेरे कमर हवा में उचकने लगे ,जो की उसकी कमर से टकराकर फिर से बिस्तर में आ जाते उसे भी जैसे इसका अहसास हो गया था,वो मेरे कमीज को निकल कर फेक देता है,मेरी भारी चुचिया जो की मेरे ब्रा में मश्किल से कैद थे वो उसके हाथो में आकर बहुत खुस लग रहे थे,मेरी आंखे दर्द में भी मिलने वाले मजे से अपने आंसू छोड़ रही थी,उसने देर ना करते हुए मेरी सलवार को भी निकाल फेक ,और अपने को सभी कपड़ो से आजाद किया ,मेरे बचे दो कपड़ो को भी निकलने में देरी नही की ,मेरी चिकनी योनि जिससे बहुत देर से पानी बह रहा था और जो क्रीम की मालिस के कारण और भी चिकना हो गया था,वो रोबर्टो के उंगलियों का अहसास करते ही एक जोर का धार छोड़ दिया ,मैं जैसे थक कर गिरी मेरे हलक से जोर की चीख निकली ……………
रोबर्टो ने बड़े प्यार से मुझे देखा और मेरे ऊपर आ कर फिर से मुझे चूमना शुरू कर दिया ,जब मैं फिर से उसके किस का रिप्लाई देने लगी तो वो अपने कड़े लिंग को मेरी योनि के ऊपर रगड़ने लगा ,मेरी योनि के दोनो पोरो के बीच जब उसके लिंग का अहसास मुझे हुआ तो मेरे पूरे सरीर में एक करेंट सा लगा ,मैंने अपने कमर को उछाला लेकिन मेरी योनि का छेद अभी इतना बड़ा नही हुआ था उसका लिंग फिसल गया ,वो जोरो से हंसा लेकिन मैं मजाक के मूड में नही थी,जैसे बहुत सी चींटियां एक साथ मेरी योनि को काट रही हो और वो खुजली बहुत ही मीठी थी ,उसे बुझाने के लिए मुझे उसे किसी चीज से उसे जोरो से रागड़ने का मन हो रहा था,रोबर्टो बिना कुछ कहे अपने लिंग को अपने हाथो से पकड़कर मेरे योनि के मुख पर लाया और धीरे धीरे उसे अंदर करने लगा,वो नेहा के दिए क्रीम का असर था या मेरे योनि से रिस रहे चिपचिपे तरल पदार्थ का लेकिन उसका सुपाड़ा आसानी से मेरे अंदर आ गया ,जैसे कोई चीज मेरे अंदर टूट गई हो ,मैं चिल्लाई ,लेकिन वो दर्द बड़ा ही मजेदार था,
“आह जान आह ….”
दोनो की ही सांसे भारी थी और दोनो ही कुछ देर के लिए रुक गए थे,,,
रोबर्टो मेरे होठो को चूसता हुआ जोर से धक्का लगा देता है ,और उसका पूरा लिंग मेरे अंदर समा गया…
“ओ ओ ओ ह ओह ओह आह आह आह जाआआननन”
जैसे उसका लिंग किसी बहुत ही सकरी सी नली में धस गया हो वो थोड़ी भी हलचल नही कर पा रहा था ,रोबर्टो ने जोरो से उसे खिंचा और मैं फिर से जोरो से चीख पड़ी ,फिर उसने पूरे ताकत से उसे अंदर किया मैं फिर से चीखी ,लेकिन थोड़ी ही डरे में चीखों ने सिसकियों का स्थान ले लिया था मैं बस आह आह करने लगी थी,
मेरे अंदर जब उसका लिंग जाता तो मैं मेरे भगसिसन को रगड़ जाता और मेरे पूरे शरीर में उस अहसास से एक मजे का जन्म होता ,मैं जैसे इसे कभी भी खत्म नही करना चाहते थी ,लेकिन मैं बार बार इस सुखद अहसास से टूट जाती और मेरे योनि से एक जोरो की धार फुट पड़ती ये ना जाने कितनी बात हुआ हर बार मैं रोबर्टो के कंधे पर अपने दांतो को गड़ा देती थी,कभी वो मेरे निप्पलों को खा जाता कभी मैं अपने नाखूनों को उसके पीठ गड़ा कर उसे चिर देती कभी वो मेरे कंधों पर अपने दांतो से निशान बना देता ,वो भी पूरी ताकत लगा रहा था और मैं भी ,लेकिन दोनो ही इंसान ही थे ,उसने भी जोरो की धार मेरे योनि में छोड़ दी ,मुझे लगा जैसे किसी ने तपते तवे में पानी की एक बाल्टी उड़ेल दी हो ,मैं जोर से झटके खाकर शांत हो गई वो भी मेरे ऊपर मुर्दो सा गिर गया,मैं उनके बालो को अपने हाथो से सहलाने लगी,मुझे पहली बार ये अहसास हुआ की किसी को अपना पूरा अस्तित्व सौप देना क्या होता है,और उसका मजा क्या होता है,मुझे सचमे ऐसा लगा की जो शख्स मेरे साथ सोया है वही मेरा सबकुछ है और पूरी दुनिया जैसे कुछ पालो के लिए मेरे लिए खत्म हो गई थी,
मेरी आंखे पहली बार खुली और मिश्रा जी पर मेरी नजर पड़ी उनका कपड़ा खुला हुआ था उन्हें नंगा कर दिया गया था ,ये कब हुआ मुझे पता भी नही चला वो अब भी बंधे थे लेकिन उनका लिंग पूरी तरह से अकड़ा हुआ था,वो मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे किसी बच्चे की टॉफी छीनकर कोई उसके ही सामने खा रहा हो ,मेरे चहरे पर मुस्कान आ गई जैसे मैं उन्हें और भी चिढ़ाना चाहती थी,रोबर्टो की वीर्य की धार मेरे योनि से बाहर बह रही थी जो मुझे बहुत सुकून दे रही थी ,मैं उसे सहलाने लगी और उसे चूमने लगी,
थोड़ी देर तक हम ऐसे ही पड़े रहे ,अब मेरा नशा खत्म हो चुका था,शायद हम नींद में चले गए थे,जब मेरी आंखे खुली तो वो मेरे ऊपर ही सोया था,मैं भी उसे उठाना नही चाहती थी, मुझे कुछ आभास हुआ ,कमरे में लोग भी बोर से खड़े थे बेचारे करते भी क्या ,ये सब देखकर भी कुछ कर नही पा रहे थे,मेरा दिमाग अचानक ही किसी घटना को परख गया था,नेहा और जूही जिस कमरे में थे मैंने वहां नजर दौड़ाई मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ….
रोबर्टो भी उठ चुका था ,वो उठाकर बैठा,मैंने भी अपने कपड़े पहनने शुरू किये उसने मुझे मना किया लेकिन मैंने उसे कहा की अभी नही जब आप और मैं रहेंगे तो कभी कपड़े नही पहनूँगी वो ऐसे खुस हो रहा था जैसे की मैं सच में उसकी नई पत्नी हु ,उसके वीर्य के साथ ही कुछ खून के धब्बे भी बिस्तर में पड़ चुके थे,
“मजा आया की नही काजल “
“बहुत मजा आया ,ये मैंने पहले क्यो नही किया …”मैं मदहोशी में बोली
“अब तो रोज होगा फिक्र मत करो “वो भी मुस्कुराया
“एक बात बोलू “
“हा “
“आपकी मेरे जितनी एक बेटी भी है ना “
वो मुझे अजीब निगाहों से देखने लगा
“हा क्यो “
“मैं कसम खाती हु की उसे भी ऐसे ही चुड़वाऊंगी “मैं जोरो से हँसी उसके चहरे में आयी पूरी खुसी जाती रही
“मादरचोद “उसने हाथ उठाया ही था की दरवाजे के टूटने की आवाज आयी ,नेहा और जूही जिस कमरे में थे वहां से गैस के गोले फेके गए,और धुवा पूरे कमरे में फैलने गया,गालिया चलने की आवाजे आने लगी ….रोबर्टो ने मुझे देखा और वहां से भागने लगा ……………
चारो तरफ अफरा तफरी मची थी और गोलियो की आवाजे आ रही थी,मैंने किसी तरह मिश्रा जी को खोला और उनके इशारे में हमे जगह दी गई लेकिन निकले किधर से ये ही समझ नही आ रहा था,अभी तक नेहा और जूही का कोई भी पता नही लग पाया था,वो एक तरफ फंस गए थे ,वही दोनो ओर से गोलियां चलने लगी,अचानक ही हमे एक हेलीकाफ्टर की आवाज सुनाई दी ,उस घने जंगल में ये हेलीकॉप्टर कहा से आया और कहा था,ऐसे मुझे कैसे पता होता,मैं तो एक रूम से बाहर नही गई थी,जब वो हमे नजर आया तब तक वो बहुत ऊपर जा चुका था,वहां खड़े पोलिस वालो ने तुरंत फोन करना शुरू कर दिया,रोबर्टो उसमें बैठा हमारे तरफ हाथ हिला रहा था,लेकिन हमारी आंखे तब चौड़ी हो गई जब जूही और नेहा भी उसके साथ थे,उनकी हालत बदहवास थी ,उसने उन्हें रस्सियों से बांध रखा था और वो हेलीकॉप्टर से बंधे झूल रहे थे,रोबर्टो के चहरे पर कमीनी मुस्कान आयी ,उसने अपने आंखों के पास दो उंगलिया करके मुझे देख लेने का इशारा किया और पहले जूही फिर नेहा की रस्सियों को कांट दिया,दोनो ही जमीन पर गीर गए,मेरे हलक से एक चीख निकली जिसने भी ये मंजर देखा वो चीख पड़ा,बचाव दस्ता जल्दी से उस ओर मुड़ा जहा उनके गिरने की आशंका थी,रोबर्टो को लोग जिन्हें उसने शायद मरने के लिए ही रखा था वो ज्यादा देर तक नही टिक पाए,जंगलो को छान मारा गया जूही एक पेट में फसी मिली लेकिन नेहा का कही पता नही चला,एक्सपर्ट्स ने हवा की दिशा और हेलीकॉप्टर की दिशा और जूही के मिलने की जगह,और जूही और नेहा को गिराने के बीच के समय के अंतर से जो डेटा निकला उससे यही पता चला की नेहा उस झरने में गिर गई होगी ,लेकिन बॉडी का कही भी पता नही चला ,नदी के साथ साथ बहुत खोज के महीनों तक चली लेकिन फिर भी कोई परिणाम नही ,वो नदी जाकर बांग्लादेश से होकर बंगाल की खड़ी में चले जाती थी,भारत के बोडर से बाहर होने के कारण खोज भी रुक गई और नेहा की फाइल सीक्रेट रूप से गायब कर दी गई , वजह साफ थी शासन की बदनामी,इस पूरे कांड को वहां के पेपरों ने बड़े बड़े शीर्षकों में छापा लेकिन मेरा और नेहा का नाम ही गायब था,मिश्रा और जूही को हीरो बना दिया गया,जूही को और प्रमोशन मिल गया,कहा गया की बड़े गैंग का पर्दाफाश,रोबर्टो का नाम फिर से गायब था,उसका जिक्र ही कही नही था,पता नही क्यो मिश्रा उसका नाम छुपा रहा था,कोई तो बड़ा कारण रहा होगा,
इधर नेहा के दुख में मैं पागलो सी हो गई थी,बड़ी मुश्किल से खुद को सम्हाल रही थी,मेरा साथ देने वाला कोई भी नही था,मिश्रा को मैं नेहा की मौत का जिम्मेदार समझने लगी थी और उससे दूरी बनाये हुए थी ,वो मेरे रूम भी आता लेकिन मैं उससे बात तक नही करती ,वो अपने कमरे में सोता ,साथ बैठकर खाना भी खाते लेकिन मुझे तो उसे देखना भी पसंद नही था,,मैं वो रूम नही छोड़ना चाहती थी,क्योकि उसमे नेहा की यादे जुड़ी हुई थी,……………………
प्रजेंट में …
मैं एक गहरी सांस लेकर उठ गई ,बिता हुआ समय तेजी से मेरे आंखों के सामने इस गुजर गया ,मेरे बाजू में विकाश जी सोए थे,मेरे पति जिन्हें मैं सबसे ज्यादा प्यार करती हु,आज ही मैं जूही से मिली ,मिश्रा ने उसे मेरी मदद के लिए यहां भेज है ,अब वो इंस्पेक्टर बन गई है,वो भी पूरे थाने की मालकिन .इतने कम सालो में उसने इतने प्रमोशन पाए,वो सच में बहुत ही बहादुर लड़की है,उसे भी सेक्स का भूत सवार रहता है और वो भी अपने पति से दिलो जान से प्यार करती है ,लेकिन मेरे और उसके स्वभाव में जमीन आसमान का अंतर है, उसके पति उसे संतुस्ट ही नही कर पाते ,लेकिन मेरे विकाश जी ….वाह ,कितना प्यार करते है वो मुझे,जब हम पहली बार मिले थे तो मुझे यकीन ही नही आया था की गांव में पला बढ़ा ये लड़का मेरे भावनाओ को समझेगा,मैंने जब उन्हें अपने वर्जिन ना होने के बारे में बताया तो वो बस हँस पड़े ,उन्होंने इसे मेरी कमी नही माना ,वो बहुत ही भोले भाले है,मैं सच में लक्की हु की मुझे इनके जैसा पति मिला,समझदार है,बेहद प्यार करने वाले है…..
मुझे देखने उनसे पहले भी कई लड़के आये ,वो उनसे ज्यादा पढ़े लिखे थे,कोई बड़ी नॉकरी में था तो कोई बड़े पैसे वाला लेकिन मैं किसी को भी धोखे में नही रखना चाहती थी,लेकिन मैं जैसे ही किसी को अपने वर्जिन ना होने की बात बताती वो शादी तोड़ देता,मेरे घरवालों को भी ये समझ नही आ रहा था की आखिर ये हो क्या रहा है,मैंने अपनी बड़ी भाभी को सबकुछ बता दिया था,लेकिन इतना ही की शहर में एक बॉयफ्रेंड था,उससे ज्यादा उन्हें नही बता पाई क्या कहती की ना जाने कितनो के साथ…भाभी ने भैया के कानो में ये बात डाली की मैं बिना सच बताये शादी नही करना चाहती,मेरे भइया मुझसे बेपनाह प्यार करते है.उन्होंने भी बात को समझा,तभी कही से उन्हें विकास जी के बारे में पता चला(अब मुझे पता है की मिश्रा जी ने ये रिश्ता किसी के माध्यम से भिजवाया था)उस ड्रग्स ने और नेहा की जुदाई ने मुझे पागल बना दिया था,जब मैं अच्छी होती तो सामान्य होती लेकिन जैसे ही कोई भी दुख टेंशन मेरे दिमाग में आता मैं बेचैन हो जाती मुझे सिर्फ शराब की तलब लगती फिर सेक्स की ,अब मुझे समझ आ रहा था की नेहा की हालत आखिर कैसे रहती रही होगी,मैं पार्टीयो में जाने लगी,वहाँ मैंने कुछ बॉयफ्रेंड भी बना लिए ,मेरे लिए ये कभी मुश्किल नही था,लड़के मेरे पीछे दुम हिलाते फिरते थे लेकिन मैं अपने रेस्पेक्ट को कभी कम होने नही दिया,जिससे भी सेक्स किया उसकी गुलाम बनकर नही बल्कि उसकी मालकिन बनकर….
लेकिन मुझे विकाश जी ने गुलाम बना लिया ,पहले मुझे लगता था की मैं इनके साथ खुस नही रहूंगी,इनकी पोस्टिंग जंगल में थी,मैं हमेशा से बड़े घर में रहने वाली और इनके पास था सरकारी क्वाटर ,मैं नाजो से पाली बढ़ी थी,अपना हुक्म सबपर चलाया था,लेकिन मैं घर वालो को भी दुखी नही करना चाहती थी,मैंने इनसे शादी कर ली,पहली रात में ही मुझे पता चला की आखिर प्यार नाम की भी कोई चीज होती है,लेकिन मेरे लिए तब भी प्यार और अपने हवस में फर्क करना आसान नही था,मैं उनके साथ जितना समय बिताते गई मैं इनकी होने लगी,पहली बार लगा की अगर कोई मुझे मेरे दुखो और वासना की आग से निकाल सकते है तो ये है,इनके प्यार ने मुझे जीत लिया,मैं भी इन्हें भरपूर प्यार देना चाहती थी,लेकिन मेरी भी कुछ मजबूरियां थी,
इसी बीच इनका काम फिर से बढ़ गया,किसी प्रोजेक्ट के कारण ये बहुत बिजी हो गए थे,मैं अपने को कब तक सम्हाल पाती,और एक दिन अचानक वो हुआ जो नही होना चाहये था,प्यारे हमारे घर का नॉकर था,रातो को जब मुझे नींद नही आती और शराब की तलब लगती तो मैं छटपटा जाया करती थी,मैं बाहर हवा खाने निकल जाती ,एक रात मैं ऐसे ही बाहर निकली और प्यारे के कमरे से आ रही आवाजो ने मेरा ध्यान खिंच लिया ,वहां प्यारे के अलावा कुछ लोग और भी थे,वो हमारा ड्राइवर रघु था ,एक लड़की की भी आवाज आ रही थी,
मैं उसके कमरे की तरफ बढ़ने लगी ,
“आह नही ना ,”
मुझे पायलों और चूड़ियों की आवाज सुनाई दी ,साथ ही लड़की की सिसकारी,मैंने गौर किया ये तो रघु की बीवी रेणु थी, ये लोग यहां क्या कर रहे है,??????????
“आह मेमसाहब “प्यारे ने गरजते हुए कहा ,मैं थोड़ी डर गई,आसपास देखने लगी,कही मैं इन्हें दिख तो नही गई,लेकिन मैं कही से भी इन्हें दिख नही सकती थी वो कमरे के अंदर थे और मैं बाहर ,
“मेमसाहब को याद करके इस रांड को चोद रहा है साले”इसबार रघु था,
मैं चौक गई ,जिनसे मैं इतने अपनेपन से बात किया करती थी वो ही मेरे बारे में ऐसी बाते कर रहे है,उससे ज्यादा मैं इसलिए चौक गई क्योकि रेणु रघु की पत्नी थी और उसे उसके ही सामने प्यारे चोद रहा है…..
मेरी हालत खराब हो गई थी,की आखिर मेरे घर में ये क्या हो रहा है,अगर मैं नार्मल होती तो हो सकता है मैं दरवाजा खटखटा कर अंदर चले जाती ,लेकिन मेरी गर्मी भी इससे बढ़ रही थी,और मैं अब किसी की इज्जत भी थी मैं नॉकरो के मुह नही लगना चाहती थी ,मैंने सुबह होते ही इन्हें बताने का फैसला किया …
मैं एक झीनी सी नाइटी में थी जिसे मैंने विकाश जी को रिझाने के लीये पहना था,लेकिन काम के बोझ में उन्होंने मेरे साथ कुछ भी नही किया ,मैं भी बेशर्म बनकर उनसे कोई फरमाइस नही करना चाहती थी,वो बड़े प्यार से मुझे देखकर रह गए और किस करके ही रो गए ,मेरी तड़फने बढ़ रही थी,बहुत दिनों के बाद मैंने ऐसे गन्दे शब्द सुने थे ,जिससे मैं बहुत गर्म हो गई थी,
शादी के बाद के लिए मेरी भाभियों ने मुझे कुछ महंगे लेगिंस लेकर दिए थे,उनमे से ही एक मखमली पेंटी मैं पहने हुई थी,जो अब गिला हो गया था,मेरे हाथ भी उसके ऊपर चले गए थे,मैं अपनी पेंटी में हाथ घुसाकर अपनी जांघो के बीच के छेद को सहला रही थी,हल्के हल्के बालो वाली मेरी योनि भीगने के कारण बालो में भी कुछ बून्द पड़ चुके थे,ये शादी के बाद पहली बार था जब मैं विकास जी के अलावा किसी और से उत्तेजित हो रही थी,
उधर से आवाजे बढ़ गई
“बोल ना मादरचोद प्यारे डार्लिंग ,मैं तुम्हारी काजल हु ,और तुम्हारी रंडी हु चोदो मुझे …बोल “
प्यारे शायद बहुत ही उत्तेजना में था वो जोरो से बोला ,रेणु के कुछ ना कहने पर वो एक झापड़ उसे लगा दिया ,
सच में मुझे उसके ऊपर बहुत ही गुस्सा आ रहा था लेकिन उसके ऐसा बोलने से मेरे अंदर कुछ हो सा गया,इसबार रेणु ने उसकी बात दुहरा दी ,
“हा मादरचोद मैं काजल हु ,तेरी मालकिन काजल ,चोद मुझे जोर से चोद “
“आह काजल,वह काजल मेरी जान ओह ओह “
प्यारे के आवाज ने मुझे और भी उत्तेजित कर दिया था,मेरी आंखे बंद हो गई,मुझे शहर के मेरे बॉयफ्रेंड की याद आ गई जो ऐसे ही मेरा नाम लेकर मुझसे सेक्स किया करते थे,मैंने दो उंगलिया अपने गीली हुई योनि के छेद में घुसा दी ,मेरे मुह से भी एक सिसकारी निकली पर वो बहुत ही धीरे थी,
मेरी आंखे बंद हुई और ….उधर से
“काजल मेरी जान ,ओह ओह “
“आह आह चोद मादरचोद अपनी काजल को “
प्यारे की आवाज में मैं खो सी गई थी ,वासना का उफान चरम में था,मैंने आंखे बंद ही किया था की मुझे एक झटका लगा,मेरे आंखों के सामने प्यारे की तस्वीर उभर कर आयी ,उसकी आवाज तो मेरे कानो में आ ही रही थी ,ऐसा लगा की वो अभी मेरे ऊपर चढ़ा मुझे धक्के मार रहा है,मैंने जोरो से अपनी आंखे खोली …मेरी सांसे बहुत तेज थी ,
मुझे अपनी स्थिति का अहसास होते समय लगा ,लेकिन जैसे ही मुझे समझ आया की मेरे साथ ये क्या हुआ मैं भागती अपने घर में घुस गई,किचन में जाकर पानी पिया और उनके बगल में जाकर सो गई,लेकिन आंख बंद करने पर वही तस्वीर और कानो में वही आवाज……..
मैंने जोरो से योनि में उंगली डालकर हिलाने लगी,तब तक की मैं झर ना गई,लेकिन फिर मुझे याद आया की मैं कौन हु ,मैं अब कोई कालेज की लड़की नही बल्कि एक पत्नी हु जिसका पति अब भी मेरे बाजू में सोया था……..
उस वाकये को याद कर अभी मेरे माथे में पसीना गया यही वो रात थी जंहा से मेरे जिंदगी में आये उस मोड़ की शुरुवात थी जंहा से मैं अपने मालिक विकास जी के लिए भी बेवफा हो गई ….
मैं पुरानी बातो को सोचकर थोड़ी घबरा गई,विकाश जी अभी भी मेरे साथ सोए हुए थे,होटल के इस आलीशान कमरे में ,जिसे मेरे भैया ने किसी खास गेस्ट के लिये बनाया था और जंहा से पूरे शहर का नजारा दिखता था,ऐसे तो अभी तक कोई गेस्ट इसमें रहने नही आया लेकिन अब मैं इसका इस्तमाल किया करती थी,….
मैं उठकर कांच की दीवार के पास आ गई,हाथो में शेम्पियन का एक ग्लास था,प्यारे के बारे में सोचकर मुझे अपने पर गुस्सा आ रहा था ,मैं उस रात में डूबे शहर को देखने लगी और फिर से अपनी यादो में खो गई….
उस रात से मेरा प्यारे को देखने का नजीरिया ही बदल गया था,मैंने पहले तो रात की बात विकास जी को बतानी चाही लेकिन वो काम के कारण मेरी बात बिना सुने ही चले गए वो ऐसे भी बहुत अपसेट थे मैं उन्हें फिर से अपसेट नही करना चाहती थी,लेकिन प्यारे और मेरे बीच कुछ होने लगा,वो मेरे पास आने की कोसीसे तो हमेशा ही करता था,लेकिन अब मुझे पता चल गया था की उसके दिल में मेरे लिए क्या है,
मैं थोड़ी शरारती तो बचपन से थी,और कालेज में नेहा के साथ रहकर मैंने लड़को तो टिस करना भी सिख लिया था,इसमें मुझे और नेहा को बहुत मजा आता जब कोई लड़का हमारी जवानी को देखकर पागल हो जाता लेकिन कुछ भी नही कर पता,उनके चहरे में आये भाव से हम खिलखिलाकर हँस पड़ते,नेहा के जाने के बाद ये सब कम हो गया था,लेकिन पता नही मुझे इस बुड्ढे को जलाने की सूझी ऐसे भी मैं घर में बैठी बैठी बोर हो जाती थी ,सोचा की इससे थोड़ा टाइम पास भी हो जाएगा और इस बुढ्ढे को भी थोड़ा मजा आ जाएगा,साथ ही कही ना कही इससे मुझे भी बहुत मजा आने वाला था,अभी हाल के समय में विकास जी की बेरुखी से मैं थोड़ी बेचैन रहने लगी थी,इसी बहाने मैं भी थोड़े मजे करने की सोची …………..
मुझे कभी कभी रेणु के व्यवहार पर भी शक होता,वो मुझे सेक्सुअली उकसाने की कोसीसे करती,उसे शायद लागता हो की मैं एक नई नई दुल्हन हु और मुझे कुछ भी नही पता,लेकिन उसे नही पता था की जिस खेल के बारे में वो मुझे समझना चाहती है मैं उसने एक्सपर्ट थी,मुझे ये जानना था की रेणु रघु के होते हुए भी प्यारे के साथ क्यो सेकस कर रही थी,और रघु उसका साथ क्यो दे रहा था,मैं प्यारे से अब ज्यादा हँस हँस कर बाते किया करती,मेरे आवाज में एक मदहोशी होती थी,मैं उसे इतना टिस करती की कभी कभी उसके लूस पेंट में उसका लिंग अकड़ जाता ,मैं अकेले में बहुत हस्ती और प्यारे पूरी कसर रेणु के उपर निकाला करता था,
कुछ ही दिन बीते और प्यारे और रेणु भी मुझसे खुलने लगे,रेणु ने धीरे धीरे मुझे प्यारे के बारे में सब कुछ बता दिया,उसका जोर बस इसपर था की प्यारे कितना अच्छा सेक्स करता है और कैसे उसे संतुस्ट करता है इसलिए वो ये सब कर रही है,लेकिन उसने ये नही बताया की रघु भी इस खेल में शामिल था,समझने को मैं सब समाझ रही थी की रेणु असल में प्यारे के बोलने पर ही ये सब मुझे बोल रही है ताकि मेरे अंदर प्यारे के लिए एक उत्सुकता का जन्म हो ,मैं भी भोली भाली सी उसका साथ देती और उसकी बातो को झूठे आश्चर्य से सुनती थी,वो बहुत ही खुस होते और मैं मन में मुस्कुराती ,हम दोस्तो की तरह रहने लगे थे,प्यारे मुझे छूने की हिम्मत तो नही करता लेकिन हमेशा ही मेरे साथ फ्लर्ट करने की कोसीसे करता था,मैं भी उसे मुसका कर जवाब दे देती थी,
इधर विकास जी से प्यार का परवान चढ़ता गया लेकिन साथ ही प्यारे के कारण दिन भर मैं गीली रहने लगी थी,विकास जी से रात में तो सुख मिल जाता था,पर सुबह और दोपहर पूरा समय तो प्यारे ही सामने होता था,
एक दिन मैं रात को जागी,प्यारे आज अकेले ही था,वो भी कमरे के बाहर निकाला हुआ बैठा था,
वो मुझे देखते ही खड़ा हो गया ,
“अरे काका आज नींद नही आ रही आपको “
मेरे चहरे में एक शरारती मुस्कान आ गई ,
“कुछ नही बिटिया मुझे तो अक्सर रातो में नींद नही आती ,”
वो उदास सा कहने लगा,मैं उसके पास जाकर उसके कमरे के चौखट में ही बैठ गई ,ये पहली बार था जब प्यारे मेरे इतने करीब था,मैं और विकास जी अभी अभी ही प्यार के समुंदर में डुबकी लगाए थे ,मेरे शरीर से सेक्स के बाद आने वाली एक मनमोहक खुसबू अभी भी आ रही थी,प्यारे जैसे एक गहरी सांस लिया ,उसका लिंग उसके लुंगी में तन गया,मेरी नजर जैसे ही उसपर गई मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ,वो थोड़ा नर्वस था,
“आपकी खुसबू बड़ी ही कमाल की है बिटिया “
वो झिझकते हुए कहा और मैं शर्माने की एक्टिंग करने लगी ,
वो इससे बहुत खुस हुआ,
“मैं रातो को अपने को बड़ा अकेला पाता हु,काश मेरी बीवी अब भी जिंदा होती “
वो फिर से एक गहरी सांस लेकर कहता है,साले ने अपना गेम खेलना शुरू कर दिया,जैसे मुझे पता नही की वो कितना अकेला होता है,लेकिन मैं अनजान बनती रही ,
“अरे हम लोग तो है ना आपके साथ “मैंने बड़ी ही मासूमियत से कहा
“हा लेकिन रात को कहा “
“अरे काका रात में भी तो आपके साथ बैठी हु ,आप बोलो तो मैं विकास जी को जगा लाती हु “
मैंने अपना भोलापन कायम रखा था,वो बुरी तरह से चौका
“अरे नही नही …”थोड़ा सा रिलेक्स हुआ
“वो वो साहब को क्यो तकलीफ देती हो ,बेचारे थक जाते होंगे काम से “
“हा थक तो जाते है,ठीक है अब मैं ही आपके पास आकर आपसे बाते किया करूँगी “
प्यारे की तो जैसे बांछे खिल गई ,उसे मेरी बात से इतनी खुसी हुई की उसके गले से कोई शब्द ही नही फुट रहा था,उसे शायद लग रहा था की उसका प्लान कामियाब हो रहा है और मैं भी उसे यही यकीन दिलाना चाहती थी,
“हा बिटिया बिल्कुल बिल्कुल “
“चलिए आपको चाय पिलाती हु ,मैं कालेज के दिनों में रातो को काली चाय पिया करती थी,जब भी मुझे नींद नही आती थी,आपको भी पिलाती हु ,जब आपको नींद नही आया करे मुझे बुला लिया कीजिये ,ये मेरा नंबर है आप मेसेज कर दिया कीजिये मैं अगर जागते रहु तो आ जाऊंगी ..”
शायद प्यारे को ये यकीन ही नही हो रहा था की उसके साथ सचमे ये हो रहा है,इतनी जल्दी उसे ये सब मिल जाएगा उसने नही सोचा होगा,खैर मैं उसे उसके ही रूम में चाय बनाकर पिलाने लगी,हम थोड़ी देर बाते करते जिसमे वो अक्सर अपने अकेले होने का रोना रोता और मैं उसे दिलासा दिलाती ,एक दो दिनों तक यही चलता रहा,अब प्यारे मेरे पास बैठने में झिझकता नही था ,लेकिन अब भी वो मुझसे दूर ही रहता,एक दिन हम ऐसे ही बैठे चाय पी रहे थे…और प्यारे अपने अकेले होने के बात पर रो रहा था,
“अच्छा काका एक बात बताइये ,”
“हा हा बोलो बहु “
“आप हमेशा मुझसे कहते है की आप अकेले है ,लेकिन रेणु तो मुझे कोई अलग ही कहानी सुनाती है,”
प्यारे को पता था की रेणु मुझे क्या कहानी सुनाती है,लेकिन फिर भी वो अनजान बनने लगा
“क्या,क्या कहानी सुनाती है बहुरानी “
साला ठरकी बुड्डा एक तरह तो मुझे चोदने के ख्वाब रखता है और दूसरी तरफ मुझे बड़े ही प्यार से बाहुरानी बुला रहा है,मैं उसे कुछ शब्दो में तो नही कहा,उसकी आंखे मेरी आंखों में गड़ी जा रही थी,हा प्यारे एक नॉकर था,और उसकी उम्र भी थोड़ी ज्यादा थी लेकिन था बड़ा ही सॉलिड टाइप का मर्द ,आर्मी में रहा था और कई दिनों तक खेती की थी,शाररिक परिश्रम का असर उसके व्यक्तित्व पर दिखता था वो भी कोई मिश्रा जी की उम्र का था,45-50 लगभग ,लेकिन मिश्रा जी से बहुत ही ताकतवर था,उसके मसल्स अभी भी गठीले थे,छाती के बाल पसीने से भीग कर मर्दानगी की खुसबू छोड़ते,और जैसे वो रेणु के साथ सेक्स करता था उसकी स्टेमना पर भी मुझे ताजुब्ब होता था,हा मैं उसके प्रति थोड़े आकर्षित तो महसूस करती थी ,ये गलत था,अब मैं शादी शुदा लड़की थी ,जिसका पति अभी अभी उसे निचोड़कर बिस्तर में सोया हुआ है,और मैं एक नॉकर के कमरे में उसके साथ ऐसी बाते कर रही हु,…….
हा ये गलत तो था,लेकिन बड़े पाप का मजा भी बड़ा होता है,मैं प्यारे को बस टिस करना चाहती थी ,लेकिन उसके प्रति मेरा आकर्षण मेरे योनि से बहते पानी से मुझे आभास होने लगा था,वो एक गर्म सांसे छोड़ कर वहां से जाना चाहती थी लेकिन अपने ही बात में फंस चुकी थी ,मैं अपने खयालो में ऐसे खोई थी की मुझे आभास नही हुआ की वो अभी अभी मेरे पास बैठा है,और उसने मुझसे कुछ पूछा है,मैं सही और गलत के फेरे में फसी हुई थी,
“अरे बताइये ना की रेणु ने आपसे क्या कहा “वो मेरे कंधे पर हाथ रखता है
“आप ठीक तो हो “
ये उसका ऑफिसियली मुझपर किया पहला स्पर्श था,मैं होशं में आयी,मेरी सांसे थोड़ी उखड़ रही थी,पता नही इस स्पर्श में क्या था ,या मेरे मन में एक दबी हुई कोई आकांक्षा थी जो फुट पड़ी थी,मेरी योनि ने अपने पानी का रिसाव बड़ा दिया था ,जैसे उसे आशंका हो की कोई कड़ा सा रॉड मेरे अंदर जाने वाला हो ,लेकिन ऐसा नही होने वाला था,मेरे मुह से एक आह निकलने से रह गई थी,योनि में वही खुजली होनी शुरू हो गई थी जिसकी मैं आदी हो चुकी थी,मैं वहां से निकल जाना चाहती थी ,मैं एक नॉकर के सामने बेआबरू नही होना चाहती थी,मेरे दिमाग ने मुझे रोका था,अगर मैं अभी शादी शुदा नही होती और किसी पार्टी में किसी हेंडसम लड़के के साथ होती तो मैं उसेके नीचे रात भर खुद को रगड़ाती रहती,लेकिन अब माहौल ही कुछ दूसरा था,मैं ऐसे किसी से भी अपने को मसला नही सकती थी,ये अलग बात है की मैं अभी भी चाहती थी की कोई मुझे जोरो से बिस्तर में रगड़ कर रख दे ,खुजली बढ़ने लगी थी और अब मेरे सामने योनि में उंगली डालने के सिवा कोई चारा भी नही था,मैं उठने वाली थी,लेकिन प्यारे को भी मेरे सांसो का पता चल गया ,उसे समझ आ गया था की मैं गर्म हो चुकी हु,उसने एक चांस लेने की सोची ,वो अपना हाथ मेरे पीठ से होता हुआ मेरे कंधे तक ले गया,और उस अपने हथेलियों से मसलने लगा,
“बताओ ना क्या कहा रेणु ने “
इसबार उसकी आवाज में अजीब सा हरामीपन था,जैसे वो जानता था की मैं कुछ नही कह पहुंगी लेकिन उसे याद कर गर्म हो जाऊंगी ,लेकिन मेरी खुजली और मन के उथलपुथल ने ऐसे भी मेरे दिमाग की मा बहन कर रखी थी,मैं उठी और उसके गालो में एक जोरदार थप्पड़ मारा ,मुझे अपनी ऊर्जा को बाहर निकलने का ये नया जरिया मिल गया था,गुस्सा ….
“तुम्हे शर्म नही आती एक शादी शुदा लड़की के साथ ऐसा करने से,और मुझे पूछते हो की क्या कहा उसने तुम्हे नही पता क्या की क्या कहा उसने मुझे ,मैं साफ साफ बता देती हु काका मेरे घर में ये सब नही चलेगा ,वरना मैं विकास जी को ये सब बता दूंगी और आपकी नॉकरी गई समझो ….आप अकेले है इसका मतलब नही की एक जवान शादी शुदा लड़की के साथ …….आपके बच्चों की उम्र भी उससे बड़ी है “
वो बस मुझे ऐसे देखने लगा जैसे की वो कोई ख्वाब देख रहा हो ,उसे तो समझ ही नही आ रहा था की आखिर सच क्या है,पहले वाला सीन सच था जिसमे मैं एक नाजुक सी ,शरमाई सी ,और बेकाबू होती काजल थी ,या अभी अभी वाली काजल सच है जो की उसके गालो में थप्पड़ मार कर उसे चेतावनी दे रही है,वो बस मुझे देखने लगा ,और मैं वहां से जल्दी से अपने कमरे में भागी,मैं बाथरूम में जाकर जल्दी से अपनी नाइटी को ऊपर कर अपनी पेंटी निकाल फेकी ,वो बहुत ही गीली हो चुकी थी मैं ने अपनी दो उंगलिया अपने योनि में डाली ,सच में गर्म गर्म योनि थी मेरी ,जैसे कोई भट्टी तप रही हो ,मैं उंगलियों को अंदर बाहर करने लगी ,मेरी आंखे बंद हो गई ,मैं बाथरूम के फर्श पर बैठ गई थी,टांगे फैला कर जितना उंगली अंदर जा सकता था किया,मुझे जल्दी से झडना था,शांत होना था,मेरी आंखे बंद हुई और पहली तस्वीर आई प्यारे की ,
“मेमसाहब आह “जैसे वो मुझे चोद रहा हो जोर जोर से ,मैं अपनी सांसो को सम्हालते हुए विकास जी को देखने की कोसीसे करने लगी लेकिन बार बार प्यारे विकास जी की जगह में आ जाता था,आखिर मैंने अपने को छोड़ दिया और अपने खयालो में ही प्यारे से कुतिया बने चुदने लगी,जैसे मुझे लगा की वो मेरी कमर को पकड़े हुए मुझे जोर जोर से धक्के मार रहा हो और मैं चिल्ला रही हु ,
“आह प्यारे साले कुत्ते क्या कर दिया तूने अब चोद चोद मादरचोद “
मैं ये सच में बोल रही थी ,बाथरूम के अंदर अच्छा था की विकास जी गहरी नींद में थे वरना मेरे मुह से ये सब सुनकर ना जाने उनके ऊपर क्या बीतती ,
“चोद मादरचोद चोद …”
“हा मेडम मेरी बाहुरानी तेरी चूत फडूंगा आह …”
मेरे कान अपने आप ही प्यारे की आवाज को दोहराने लगे ,
“हा मादरचोद बुड्ढे साले कुत्ते चोद चोद “मानो मैं रोने लगी मेरी उंगली बहुत ही तेज हो गई थी मैं झरने वाली थी .
“आहहहहहहहह ओ ह आआआआ ओ ह “
मैं इतने जोरो से झड़ गई,और जैसे मैं मुर्दा सी हो कर वही पड़ी रही ,कुछ देर बाद जब मुझे होश आया की मैंने क्या किया है तब मेरे होठो में बस एक मुस्कान थी ,वहां मुझे कोई भी देखने वाला नही था लेकिन मेरी आंखों में शर्म आ गई थी……..
“तुम लोग समझ के क्या रखे हो मुझे मैं क्या कोई रंडी हु “
रेणु की बात से मेरा दिमाग फटा जा रहा था,ना जाने प्यारे ने उसे क्या पाठ पढ़ा के रखा था की सुबह से ही वो प्यारे के बारे में बोले जा रही थी,वो मुझे ये समझने की कोसीसे कर रही थी की प्यारे कितना अच्छा मर्द है और मैंने जो उसे थप्पड़ मारा वो गलत था,
“नही दीदी मैं ये कब बोली “
“तो और क्या बोलना चाहती है कि तेरी तरह मैं भी उसके साथ वो सब करू,तेरा पति नामर्द है तो मेरी क्या गलती है,”
मेरा दिमाग खराब होने लगा था
“अरे दीदी आप तो बुरा मान गई ,वो …….,वो मैं …….,वो मैं ये बोलना चाहती थी की वो इतना बुरा भी नही है जितना आप समझती है ,वो अच्छा इंसान है ,,वो भी अपने किये पर शर्मिंदा है लेकिन वो चाहता है की आप विकास जी से उसकी शिकायत मत करे ,वो बेचारा आखिर जाएगा कहा और वो मेरे साथ मेरी मर्जी से करता है तो …….”
मेरा गुस्सा खत्म हो चुका था मैं हल्के से मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी,
“तो क्या “
“तो आप हमारे रिस्ते को सहमति दे दीजिये,घर के काम में कोई भी बाधा इससे नही आएगी ,मैं प्रोमिश करती हु ,लेकिन मेमसाब आप तो समझती है ना ,जब टांगो के बीच खुजली होती है तो कुछ भी नही सूझता,अगर वो बुड्डा ही उसे मिटा दे तो क्या परेशानी है,”
इसबार हम दोनो ही हँस पड़े
“ठीक है ठीक है तू अपनी खुजली मिटा लेकिन अगर विकास जी को पता चला ना तो पता नही क्या कर जाए …इसलिए सम्हाल के “
“अरे मेडम आप हो ना साहब को सम्हालने के लिए”
वो मचलती हुई बोली
“अच्छा …खुद गलत काम करो साथ ही मुझे भी घसीटो “
“दीदी आप कितनी अच्छी हो ,सच में अगर मेरे से आपके लिए कुछ हो सके तो बताना मैं सब कुछ करूँगी आपके लिए “
मैं उसे हल्के हल्के मुस्कुराकर देखने लगी
“क्या करेगी ??/”
“प्यारे से आपके लिए बात करू “
वो जोरो से हँसने लगी
“तू फिर से शुरू हो गई ना ,मेरे पति के सामने वो क्या है …??”
“सच में दीदी ऐसे आप हो बड़ी किश्मत वाली जो ऐसे पति मिले है सच में साहब बहुत ही बढ़िया है काश मेरे पति भी ऐसे होते,मुझे इतना प्यार करते ??”
रेणु ये सच में कह रही थी या मुझे मस्का लगा रही थी ये तो नही कहा जा सकता लेकिन सच में विकास जी थे तो कमाल के जब भी प्यार करते दिलो जान लगा देते थे,इतनी खुसी तो मुझे कोई भी नही दे पाया ,अगर उनकी जगह कोई और होता तो मैं शायद कब की बहक गई होती ,आग तो मेरे अंदर भी थी वो भी बाकियों से कुछ ज्यादा ,लेकिन फिर भी मैं उनके प्यार के सहारे ही अपने को सम्हाल पाती थी ,
“तो मेडम मैं जाऊ”
“कहा ???”
“प्यारे के पास वो नाराज बैठा है आज “
मुझे हँसी आ गई .
“हा ठीक है जा मना अपने प्यारे को “
रेणु के जाने के बाद ही मैं आदत के मुताबित उसके कमरे के बाहर जाकर खड़ी हो गई,वही उसका रोल प्ले और वही मेरा मचल जाना ,पता नही क्यो लेकिन मुझे भी इसमें बहुत ही मजा आने लगा था,प्यारे कुछ कुछ फिर से सामान्य हो गया मैं भी उससे खुल के बात किया करती लेकिन कभी उसे इतना आगे बढ़ने नही देती की मेरे शरीर से खेले ,
तभी मेरी जिंदगी में एक तूफान आया ………….
उस दिन विकास जी काम में गए हुए थे,मैं तैयार होकर अपने कमरे से बाहर निकली,मेरे बाल अब भी गीले थे ,मैं हमेशा ही नई दुल्हन की तरह सज कर रहती थी ,अभी शादी को भी ज्यादा वक्त नही बिता था ,मुझे घर में भी साड़ी पहनना और चूड़ियां सिंदूर लगाकर रखना अच्छा लगता,मैं श्रृंगार कर अपने कमरे से बाहर निकली ,लगा जैसे की कोई आया हुआ है ,मैं बाहर आयी तो देखकर दंग रह गई ये तो मिश्रा जी थे,ये यहां क्या कर रहे है और इन्हें मेरे घर का पता कहा से चला ,मुझे देखकर वो खड़े हो गए,प्यारे उन्हें चाय पिला रहा था,
मिश्रा जी मुझे देखते ही खड़े हो गए ,
“आप यहां ??????”
मेरी नजर प्यारे पर पड़ी वो मेरे चहरे के भावों को नापने की कोसीसे कर रहा था लेकिन मैने तुरंत खुद को सम्हाला
“अरे आप बैठिये ना बहुत दिनों बाद याद आयी आपको मेरी ,”मैं झूठी मुस्कुराहट अपने चहरे में लाते हुए कहा
“हा बस इधर से गुजर रहा था तो सोचा मिलता चलू ,विकास कहा है “
“बहुत अच्छा किया ,विकास जी तो आफिस गए हुए है ,काका आप जाइये जरूरत होगी तो आपको बुला लुंगी “मैं प्यारे की तरफ घूमी वो भी चुपचाप ही वहां से चला गया….
“क्या लेने आये है आप यहां “मैंने मिश्रा को गुस्से से देखा
“काजल तुम अब भी मुझसे नाराज हो ,मैं तुम्हे आज भी उतना ही प्यार करता हु “
“देखिए मिश्रा जी मेरा दिमाग खराब मत कीजिए ,निकल जाइये मेरे घर से मैं अपनी जिंदगी में बहुत खुस हु और आपको यहां का पता किसने दिए मेरे भइया ने ???”
मिश्रा जी ने एक गहरी सांस ली
“काजल तुम मुझसे अलग हो गई थी लेकिन मैं तुमसे कभी भी अलग नही हुआ ,विकास से तुम्हारी शादी करवाने वाला भी मैं हु और तुम्हे यंहा लाने वाला भी मैं हु ,मैं अब रिटायर हो चुका हु और यही रहता हु ,जो हुआ उसे मैं बदल तो नही सकता काजल लेकिन …तुम चाहो मुझे जो सजा दो लेकिन कम से कम मुझसे बात तो करो सालो से तुमने मुझसे बात ही नही की है “
मिश्रा जी रोने लगे थे ,उनके रोने में एक पीड़ा थी ,वो बुजुर्ग आदमी मेरे बाप की उम्र का था और मेरे सामने इस तरह रो रहा था,कभी वो मेरे लिए भगवान हुआ करता था,मैं उससे प्यार किया करती थी ,वो ही तो मेरा पहला प्यार था,जिसकी हो जाने के कभी सपने देखे थे ,जिसकी बांहो में पूरी जिंदगी गुजरना चाहती थी,आज ओ ही मेरे सामने बैठा ऐसे रो रहा था,भले ही उसने मेरे साथ कुछ भी किया हो लेकिन मेरे दिल में उसके लिए प्यार खत्म तो नही हो गया,दिल के किसी कोने में वो आज भी जिंदा था,मैं सोफे में उसके बाजू में जाकर बैठ गई,मुझे सचमे बहुत बुरा लग रहा था,उसने जो किया उसकी सजा तो मैंने उसे दे दी थी,सालो से मैंने उनसे बात भी नही किया था,अब शायद समय आ चुका था की मैं अपने जख्मो को भुला कर उनसे बात करू ,मैंने अपना हाथ उनके बालो में रखकर सहलाया ,वो मुझसे लिपट गए ………
“काजल मुझे माफ कर दो मैं सच में बड़ा ही स्वार्थी हो गया था,लेकिन ये सच है की मैंने तुमसे दिलो जान से प्यार किया है ,लेकिन मैं भी अपने फर्ज और राजनीतिक दबाव में मजबूर था,मेरे फर्ज ने मुझे बांध रखा था,मेरा कैरियर भी बड़े खतरे में था काजल ,अगर मैं रोबर्टो का नाम उछाल देता तो वंहा मार्किट में बड़ा प्रभाव पड़ता और साथ ही कई नेता जिनके शेयर रोबर्टो से जुड़े हुए कंपनी में थे उसके भाव गिर जाते,मेरे ऊपर उस समय बड़ा प्रेशर था की मै इस खेल को खत्म भी करू और रोबर्टो का नाम भी उछलने ना पाए….मेरी समझ में कुछ भी नही आया था काजल ….”
वो मुझसे लिपटे हुए थी थे मैं भी उन्हें अपने से अलग नही कर रही थी ,बीती बातो को याद करके मेरे आंखों में भी आंसू आ गए थे,मेरे साथ हो हुआ वो तो हो गया लेकिन नेहा ????क्या वो वापस आ पाएगी ,मेरे दिमाग में उसकी एक तस्वीर घूम गई ,
“मैं जानता हु काजल की तुम क्या सोच रही हो …नेहा का दुख तो मुझे भी होता है ,वही तो है जिसने हमे मिलाया था,जिसने तुम्हारे मन में मेरे लिए प्यार के बीज बोए थे ,सच मानो काजल मैं भी उसे बहुत चाहता था,उसके साथ जो भी हुआ वो मैं कभी नही भूल पाऊंगा ,”
मिश्रा जी का चहरा मेरे सीने में दबा हुआ था ,उनके आंसू मेरे अब भी बह रहे थे ,मैं अभी अभी नहा कर निकली थी ,मेरे शरीर में गीलापन अब भी था शायद वो मिश्रा जी के चहरे पर भी लग रहा होगा,उनके आंसू मेरे उजोरो के बीच से होते हुए नीचे को बह रहे थे ,इस समय हमारे मन में कोई भी वासना तो नही थी लेकिन सालो बाद हमारे शरीर एक दूजे के संपर्क में आये थे,
मेरे मन में एक रुदन गूंज गया था ,बीती बातो को मैं जितना भुलाने की कोसीसे करती वो उतना ही सर उठाकर मेरे सामने आ जाता था,मैं तो अपने दुनिया में खुस थी लेकिन ये मिश्रा जी ने आकर मुझे फिर से उसी यादो के देश में धकेल दिया था,मैं सोचती रही और मेरा सर भारी होने लगा,चिंता दुख ये ही तो मेरे दुश्मन थे ,मैं फिर से बेचैन होने लगी ,और इसका एक ही इलाज मुझे पता था वो था नशा या सेक्स लेकिन किसीसे ,मिश्रा जी से????
नही इनसे तो मैं मरकर भी सेक्स नही करना चाहती थी ,लेकिन मेरे आँसू भी अभी बंद नही हुए थे मैं फ्रस्ट्रेशन में आ गई थी मैं मिश्रा को दिखाना चाहती थी की उसके कारण मैं क्या से क्या बन गई हु ,उसने मुझसे जो चीज छीनी थी वो था मेरा इनोसेंटनेस मेरी मासूमियत ,सभी चीजे मेरे दिमाग में ही चल रही थी मेरे जिस्म में कोई भी हरकत अभी तक नही हुई थी मैं ऊपर निगाह करके देखा मुझे प्यारे दिखाई दिया वो खिड़की में खड़े होकर हमारी बात सुन रहा था, साला हरामी मेरे मन एक उसके लिए एक गाली निकली ,मैं अभी और भी गुस्से में आ गई
“ये इधर आ “
मैं जोरो से चिल्लाई ,प्यारे कांपता हुआ मेरे पास आया उसने मेरे गुस्से का नमूना तो देखा ही था ,मैं अब मिश्रा जी के सीने से निकालकर अलग हो चुकी थी ,प्यारे मेरे सामने आकर खड़ा हो गया ,
“मादरचोद क्या देख रहा था तू खिड़की से ,की मैं इससे चुदवा रही हु की नही “
गुस्से में मेरे मुह से ऐसी गालिया निकली जिसके बारे में अभी तक मिश्रा जी और प्यारे दोनो ने ही कल्पना नही की होगी ,मैं गुस्से में कांप रही थी ,सालो का गुस्सा था ,जो मैं कभी मिश्रा के ऊपर निकलना चाहती थी वो सभी जमा हो कर मेरे अवचेतन में भरा हुआ था आज मौका देखकर अचानक ही निकल रहा था मेरे स्वभाव में ये गुस्सा ही शायद उसी अवचेतन की दमित भावनाओ का नतीजा था,मेरी आंखे लाल होने लगी थी ,रोंगटे खड़े हो रहे थे,शरीर और मन दोनो में एक अनजानी सी जलन फैल रही थी ,
मेरे कदम आप ही आप प्यारे के पास चले गए और एक जोर का थप्पड़ मैंने उसके गालो में लगा दिया ,वो आंखे फाडे मुझे देखने लगा ,
“घूर क्या रहा है मादरचोद आंखे निकाल लुंगी “प्यारे जैसा ताकती मर्द भी मेरी बात से कांप गया ,मिश्रा जी भी कांप रहे थे ,एक नाजुक सी लड़की का ख़ौफ़ दो मर्दो के चहरो पर साफ झलक रहा था ,तभी रेणु की इंट्री हुई उसने भी मुझे प्यारे को मारते और गली देते सुन लिया था वो स्तब्ध सी दरवाजे में आकर ही रुक गई ,मेरे नजर उसपर पड़ी ,
“लो आ गई तेरी रांड “मैंने रेणु को देखते हुए ,रेणु वहां से उल्टे पाव भागने को हुई लेकिन मैंने फिर से चिल्लाया ,
“रुक साली आयी है तो चुद के ही जाएगी तू यहां से इधर आ “वो नजर झुकाए हुए हमारे पास आयी,वो एक सस्ती सी साड़ी में थी लेकिन गजब की सेक्सी लग रही थी ,उसके जिस्म का भराव मर्दो को हिलाने पर मजबूर कर देने वाला था ,
“अबे कुत्ते चल सुरु हो जा अपनी रांड के साथ “
प्यारे ने फिर से मुझे प्रश्न भरी नजरो से देखा जैसे पूछ रहा हो की क्या करना है ,दशहत उसकी आंखों में साफ झलक रही थी और अब मुझे इसमें मजा आने लगा था ,लेकिन मेरा गुस्सा अभी भी बाकी था वो गुस्सा प्यारे या रेणु के लिए नही था वो तो मिश्रा के लिए था,उसका नाम याद आते ही मैं मुड़कर उसकी ओर देखी ,वो भी घबराए हुए सोफे में बैठे थे ,अपनी भोली भाली सी काजल को ऐसी हरकत करते देखते ,उस दिन उन्होंने मेरा एक रूप देखा था जब रोबर्टो ने मेरी जवानी ली थी ,लेकिन उस दिन की बात और थी आज बात और है ,उन्हें देखते ही मेरे दिमाग में जैसे शैतान सवार हो गया ,और होठो में एक शैतानी मुस्कान आयी ,
मैं जाकर उनकी गोदी में बैठ गई ….
“मेरा सोना बाबू ,इतने दिनों से मुझसे अलग था,….अब मैं आपको वो मजा दूंगी जो आप हमेशा से चाहते थे,”मैं मिश्रा जी के गालो में उंगली घुमाई ,मेरे बदले व्यवहार से वो और भी ख़ौफ़ में आ गए ,मैं प्यारे की तरह देखने लगी ,
“तू मुझे चोदने के सपने देखता है ना ,आज तेरा वो सपना पूरा होगा ,आजा तुझे जन्नत की सैर कराती हु “
मैं उंगलियों के इशारे से प्यारे को अपने पास बुलाया ,मिश्रा के शरीर में डर की एक ठंडी दौड़ गई वही प्यारे अब भी मुझे आश्चर्य से देख रहा था ,
“मादरचोद समझ नही आता तुझे इधर आ “मैं जोरो से चिल्लाई मैं अभी भी मिश्रा जी की गोद में बैठी थी ,
“नही काजल ,तुम ये क्या कर रही हो “उनकी काँपती हुई आवाज मेरे कानो में आयी
“आपको खुस करने की कोसीस कर रही हु बाबू …”
मैं प्यार से उनसे कहा और उनके होठो में अपने होठो को घुसा दिया ,मिश्रा जी के आंखों में आंसू आ गए ये क्यो आये थे मुझे नही पता लेकिन इससे मेरे दिल को बहुत ही सुकून मिल रहा था,उनकी जीभ अब भी हरकत में नही आयी थी लेकिन मैं उनके होठो को चूसे जा रही थी ,अब प्यारे भी हमारे पास आ कर खड़ा हो गया था ,मैंने से नीचे बैठने का इशारा किया वो घुटनो के बल मेरे पैर के पास बैठ गया था ,उसका चहरा जमीन को देख रहा था,शायद वो मेरे पल पल बदलते हुए मूड से घबरा गया था ,पता नही की मैं अगले पल क्या कर जाऊ,मैं मिश्रा जी के होठो से अपने को हटाया और प्यारे के बालो को पकड़ा ,उसे अपने एड़ियों के पास ले गई ,
“चाट इसे “
मैं उसके चहरे पर अपने पैर की उंगलियों को रगड़ने लगी ,मैं रेणु को भी अपने पास बुलाया और प्यारे के लिंग की तरफ इशारा कर के कहा ,
“इसे चाटना तेरा काम है ….”रेणु बेचारी मेरे बात को समझ तो नही पाई लेकिन वो भी अपने घुटनो के बल बैठ गयी प्यारे अब भी मेरे एड़ी और उंगली के पास अपना मुह टिकाए बस देख रहा था ,घबराहट में उसके दिल की धड़कने इतनी बढ़ गई थी की उसकी आवाज मुझतक पहुच रही थी ,मैंने रेणु को उसके लिंग को निकाल कर चूसने का इशारा किया वो बेचारी किसी रोबोट की तरह मेरे इशारे पर नाचने लगी थी ,वो झुककर प्यारे के लिंग को उसके पैजामे से निकलने का प्रयास कर रही थी ,मैंने प्यारे के कपड़े निकाल देने का आदेश दिया कुछ ही पल में वो मेरे सामने नंगा बैठा था ,रेणु झुककर बडी मुश्किल ने उसके मुरझाए हुए लिंग तक पहुच पा रही थी ,मैंने अपना पैर उठा लिया ताकि वो सीधा बैठ पाए और रेणु को उसके लिंग को अपने मुह में डालने में कोई परेशानी ना हो,अब प्यारे सीधा बैठा था,वो अब भी अपने घुटनो पर था और मैं
उसके मुह में अपने पैरो की उंगलियों को रगड़ने लगी ,जैसे ही प्यारे के लिंग में रेणु का नरम होठ स्पर्श हुआ ,उसके मुह से एक आह निकली और उसने मेरे उंगली को अपने होठो के अंदर ले लिया ,मिश्रा जी अब भी बुत बनकर खड़े थे,प्यारे मेरी उंगली को धीरे धीरे चूसने लगा था,और उसका लिंग भी रेणु के मुह में खड़ा होने लगा था,रेणु की लार उसे भिगो रही थी,प्यारे उत्तेजित होने लगा और उसका सर जोर जोर से मेरे उंगलियों पर चलने लगा ,मैं उसके सर को वहॉ से हटा कर अपने पैरो पर ले आयी ,वो धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था,मेरे दोनो पैरो को चूमते हुए वो एड़ियों तक पहुचा मैंने अपनी साड़ी घुटनो तक उठा ली,इससे प्यारे का जोश और भी बढ़ गया था,मैं मिश्रा जी के ऊपर खुद को पूरी तरह से छोड़ दिया और उनके हाथ को पकड़कर अपने उरोजों में टिका दिया ,इसका कोमल अहसास शायद मिश्रा जी को पसन्द आया उनके हाथो ने भी अपना काम करना शुरू कर दिया ,मैंने अपना पल्लू नीचे गिरा दिया,अब मेरे स्तनों को मिश्रा जी साफ तौर से देख रहे थे,जिसका नतीजा उनके पेंट में मुझे अहसास होने लगा ,उनके हाथ अब भी आराम से मेरे उजोरो को सहला रहे थे,प्यारे ने मेरे एड़ी तज का सफर पूरा किया और मैंने रेणु को रुकने को कहा दोनो ने पहली बार मुझे ऊपर उठाकर देखा,मेरी नजर थोड़ी बंद हो चुकी थी ,मेरे जिस्म में आग बढ़ गई थी और मैं अब ठंडा होना चाहती थी,मेरी नजारे नशीली हो चुकी थी ,मिश्रा जी का हाथ मेरे उजोरो को अंदर से छूने को बेताब हो रहा था वो मेरे ब्लाउज के अंदर हाथ घुसने का प्रयास कर रहे थे,मैंने उनका साथ देते हुए अपने ब्लाउज़ के ऊपर के दो बटन खोल दिए और प्यारे के सर को पकड़कर अपनी साड़ी के अंदर धकेला,मैंने अपनी टांगे जरा फैला दी ताकि प्यारे आराम से अंदर जा सके वो मेरी साड़ी उठाने को हुआ मैंने उसका हाथ वही रोक दिया ,
“जितना कहा जाय उतना कर “
मैंने अपनी सांसो को काबू में करते हुए कहा ,वो अपने हाथो को तुरंत ही पीछे ले लिया ,मैंने उसके सर को अपनी साड़ी में घुसा दिया वो मेरी जांघो को चाटने लगा ,
“आह आआआआआ हहहहहहह “ मेरी सांसे तो तेज हो ही चुकी थी अब आहे भी निकलने लगी थी ,मैं बार बार आहे ले रही थी ,वही मिश्रा जी को जैसे जन्नत मिल गई हो वो मेरे ब्लाउज़ के अंदर अपने हाथ ले जाकर मेरे उरोजों को मसल रहे थे मैं थोड़ा हटकर अपने हाथ पीछे कर के अपने ब्रा को भी खोल दिया लेकिन अभी मैंने ब्लाउज़ को और ना ही ब्रा को अपने शरीर से अलग किआ था,मिश्रा जी का हाथ उनके अंदर से ही मेरे नंगे स्तनों को मसलने लगा था,मेरे जोश की इंतहा हो रही थी ,प्यारे अब मेरे जांघो के बीच तक पहुच गया था,वो मेरे योनि को पेंटी के ऊपर से चाट रहा था,मैं जोरो जोरो से आहे भर रही थी ,उसके लार और मेरे कामरस से मेरी पेंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी ,मैं अपने पैरो को फैला कर और प्यारे के सर को और भी जोरो से अपने जांघो के बीच दबाने लगी थी वो भी किसी कुत्ते के तरह इसे चाटा जा रहा था,वो अपने हाथ उठकर मेरी पेंटी को साइड करने की कोसीसे कर रहा था लेकिन मैं उसे बार बार रोक देती थी ,उसने इसके लिए अपने दांतो का प्रयोग किया ,मैंने उसे मना नही किया लेकिन वो ज्यादा सफल नही हो पाया था,वो अपने दांतो से मेरे पेंटी के एक साइड को पकड़कर उसे हटाने लगा ,अपने दांतो और नाक की मदद से वो थोड़ा कामियाब हुआ और उसने अपनी जीभ मेरी योनि में ऊपरी दीवारों में सीधे रगड़ दी ,मेरे लिए ये अंतिम क्षण था मैं जोरो से झड़ी, मैं प्यारे के सर को जोरो से दबाया,शायद वो सांस भी नही ले पा रहा था वो छटपटाया लेकिन मुझे इसकी कोई परवाह नही थी ,,…थोड़ी देर में ही मैं मर्दो जैसी मिश्रा जी की छाती में गिर गई,मिश्रा जी अब भी मेरे स्तनों को दबा रहे थे और आहे ले रहे थे ,वही प्यारे अब भी मेरे योनि का रस पी रहा था,और रेणु ये सब बस खड़े होकर देख रही थी,थोड़ी ही देर में मेरी आंखे खुली और मुझे अपने होने का अहसास हुआ,सच में मैं शांत हो गई थी ,बड़ी गहरी शांति थी ,मेरी आग शांत हो चुकी थी,मैं आंखे खोली और प्यारे का सर हटाने लगी लेकिन उसपर तो अभी पागलपन सवार था वो मेरी योनि को नही छोड़ा ,मैंने अपने को थोड़ा अरजेस्ट किया और एक जोर का लात उसकी छाती में लगाया ,मैं कराटे में चैंपियन थी और ताकत से भरपूर थी,भले ही मेरा शरीर कोमल लगे लेकिन उसमे ताकत बहुत थी और साथ ही था टेक्निक ,इससे प्यारे थोड़ा दूर जा गिरा और रोनी सी सूरत बनाकर मुझे देखने लगा ,उसे देखकर मिश्रा जी भी जल्दी से अपना हाथ निकाल कर बैठ गए,इससे मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गई ,मैं वहां के उठाकर अपने कमरे में आयी मेरी नजर विकास जी और और मेरे फ़ोटो पर पड़ी मेरा पूरा श्रृंगार बिखर गया था ,मैंने खुदको थोड़ा संवारा और जाकर विकास जी के फ़ोटो को किस किया,
“मुझे माफ कर देना जान लेकिन मैं खुद को अब इससे नही रोक पाऊंगी ,मैं मजबूर हु अपनी आग के हाथो,ना जाने कब ये भड़क जाय और मैं अपने जिस्म के हाथो में मजबूर हो जाऊ,लेकिन वादा है मेरा आपको प्यार करने में मैं कभी भी कमी नही करूँगी….मैंने फिर से उसे चूमा और अपने बाथरूम में चली गई,मैं जब निकली पता नही मिश्रा जी प्यारे और रेणु वंहा थे या नही मैं इतनी थक चुकी थी की मैं सीधे बिस्तर में पड़ी और मेरी नींद ही लग गई…….
वर्तमान में
मेरे हाथो में अब भी शराब का ग्लास था,मैंने एक नजर विशाल जी पर डाली समय देखा अभी 3 बज चुके थे,
मेरी योनि से फिर से रिसाव शुरू हो चुका था,प्यारे मिश्रा और रेणु ….मैं उस कांच की दीवार को देखते हुए फिर से उन अतीत की यादो में खो गई अब एक नाम मेरे जेहन में आया रॉकी…
रॉकी से मिलने से पहले की कुछ और बातें थी जैसे अब मैं और रेणु और प्यारे खुल चुके थे,ये हमारे रोज का काम था,कभी कभी मैं रातो को प्यारे के पास जाती थी ,लेकिन मैं उससे कभी भी शारीरिक संबंध स्थापित नही किया,वो मेरी चाटने में ही खुस था,उस दिन के बाद से मिश्रा जी फिर से कभी मेरे घर नही आये,लेकिन उनका खयाल अब भी मेरे दिमाग में था,प्यारे अक्सर मेरा नाम लेकर रेणु के साथ सेक्स करता था,मैं भी वँहा मौजूद होती थी बस यही मेरे लिए मजा था(ऐसे ही एक रात की आवाज विकास ने सुनी थी ,प्यारे काजल का नाम लेकर रेणु से सेक्स कर रहा था और काजल भी अपनी आवाज से उसे और भी उत्तेजित कर रही थी लेकिन विकास को लगा की प्यारे कजल के साथ सेक्स कर रहा है ),मेरा अतीत जो भी था लेकिन अब मैं विकास जी को धोखा नही देना चाहती थी ,लेकिन मेरी जिंदगी में फिर से मोड़ उस समय आया जब मेरे जीवन में रॉकी आया ,मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके गयी हुई थी,मैंने भइया को बताया की मैं घर में बोर हो जाती हु ,उन्होंने कहा की तेरे ही इलाके में कुछ दूरी पर एक पुराना होटल बिक रहा है उसे देख लो ,पसंद आये तो उसमे काम करा कर उसे फिर से शुरू कर लेंगे ,मुझे आईडिया जम गया लेकिन मैं विकास जी से बात करना चाहती थी ,भइया वँहा के ही किसी बंदे को मेरे साथ काम में रखना चाहते थे ,तभी उन्हें मिश्रा जी का ध्यान आया और उन्होंने उसे रॉकी की बारे में बताया,रॉकी मेरे भैया का भी परिचित था तो भइया ने हा कह दिया,मैं मायके में थी और उसी समय ना जाने क्यो विकास जी का विहेवियर मेरे लिए बदल रहा था,मुझे कुछ समझ नही आया लेकिन वो ना मुझे काल करते ना ही मेसेज ,मैं इस बात से थोड़ी दुखी तो थी लेकिन फिर भी घर के माहौल में मेरा वो दुख भूल गया ,लेकिन एक दिन भइया को पता चला की विकास जी अपने किसी दोस्त के साथ बार में बैठे शराब पी रहे थे तो मैं चौकी क्योकि अभी तक मुझे उनके शराब पीने का पता नही था,साथ ही उन्होंने ये भी बताया की वो थोड़े चिंतित लग रहे थे ,मेरे दिमाग में पहली बात यही आयी की कही विकास जी को मेरे और प्यारे के बारे में पता तो नही चल गया है,पूरा परिवार उन्हें फोन लगा था लेकिन उन्होंने किसी का काल नही उठाया और मैं बेचैन हो गई हम रात में ही घर के लिये निकल गए,लेकिन वँहा उनका कोई भी पता नही था,जब वो आय तो उन्हें देखकर या उनके व्यवहार को देखकर ये तो नही लगा की वो मुझसे गुस्सा है ,बल्कि हमारा प्यार और भी बढ़ गया था,
दिन बीते और मैंने प्यारे से हर रिस्ते तोड़ लिया यहां तक की मैंने रेणु को भी बार बार घर आने से मना कर दिया ,प्यारे इस बात को लेकर छटपटाया लेकिन वो मेरा गुस्सा जानता था , मैं रॉकी से होटल के सिलसिले में मिली और पहली ही बार एक दूसरे को देखते हुए हम अवाक रह गए ,
रॉकी मेरे उन सब लड़को में से एक था जिसके साथ मेरे शाररिक संबंध थे,,ऐसे तो एक दूसरे को देखे और मिले काफी वक्त हो चुका था ,और हम दारू के नशे में 2-3 बार ही मिले थे लेकिन हमे एक दूसरे को पहचानने में बिल्कुल भी देर नही लगी ,लेकिन वो भी समझदार निकला उसने कोई भी एक्सप्रेसन अपने चहरे में नही लाया,यंहा तक की पुरानी बातो को वो तब भी बीच में नही लाया जब हम अकेले होते,लेकिन कब तक ,उसे देखकर मेरे अंदर भी कोई आग उठ जाती थी ,और वो भी थोड़ा नर्वस हो जाता था,लेकिन हम आगे नही बढ़ रहे थे,लेकिन धीरे धीरे रॉकी थोड़ा आगे बढ़ने की कोसीसे करने लगा ,मुझे भी ये अच्छा लगता था और मैं भी उसका साथ देने लगी थी ,उसके लिए इतना खाफी था ,आग जब लग जाती है तो कोई भी प्यार ,समाज ,धर्म की समझ दिमाग में नही आती वही मेरे साथ हो रहा था,रॉकी एक जवान और बहुत ही खूबसूरत लड़का था,गठीले बदन का मालिक ,वो मुझे बहुत आकर्षित करता था,वो मुझे जिम में एक्सरसाइज करने को इनवाइट किया ,वो मेरा पहला दिन था ,उसने मेरे लिए एक स्पोर्ट टीशर्ट खरीदा था ,साथ ही एक स्पोर्ट टाउसर ,वो इतने कसे हुए थे की मेरे एक एक अंग उससे झांकने को बेताब होते,
“ये क्या लेकर दे दिया है तुमने “
मैंने रॉकी को झूठे गुस्से से कहा
“एक बात तो सच है काजल तुम इसमें बहुत सेक्सी लग रही हो ,शरीर तो तुम्हारा पहले से ही कमाल का है बस थोड़ा और कस जाय तो मजा आ जाए ,”
“अच्छा तुम्हे क्या मजा आने वाला है इसमें “
वो मुझे ऊपर से नीचे तक ऐसी हवस भरी नजरो से देखा की मुझे भी शर्म आ गई
“क्या हम वो नही कर सकते जो कभी हमारे बीच हुआ था”
मेरी नजर उसके नजर से मिली ,वो सीरियस था,हवस की आग उसके चहरे पर साफ झलक रही थी ,वो लाल हुआ जा रहा था,मैंने अपना सर ना में हिलाया
“क्यो “
मैंने बिना कुछ बोले ही उसे अपना मंगलसूत्र दिखाया ,
“सच में काजल किसी को पता नही चलेगा “मेरी हँसी छूट गई
“अच्छा तो तुम मुझे मेरे पति से धोखा करने कह रहे हो “
मैंने मुस्कुराते हुए उससे कहा …
“नही काजल जब तक चोर पकड़ा नही जाता तब तक वो चोर नही होता,और हमारे बारे में किसी को कभी पता नही चलेगा “वो मेरे पास आने लगा लेकिन मैंने उसे रोक दिया
“मेरी आत्मा को तो ये बात पता रहेगी ना रॉकी ,उससे कैसे छुप जाएगा “
रोकी के चहरे में एक अजीब सी मुस्कान खिल गई
“तुम्हे क्या लगता है की मुझे पता नही की तुम क्या चाहती हो ,तुमने अपने नीचे शायद गौर नही किया ,तुम्हारी चुद इतनी गीली हो गई है की तुम्हारे टाउसर को भी भीगा दी रही है ,”वो तो हँसने लगा लेकिन मुझे अपने पर बहुत गुस्सा आया ,वो टाउसर था ही इतना कसा हुआ की मेरी पेंटी से पूरी तरह से चिपक गया था,मुझे तोड़ी शर्म आने लगी ,
“अब ये सब बात छोड़ो,और मुझे सिखाओ जो मुझे सीखने ये सब पहनाया है “मैंने उसे शरारती निगाहों से देखते हुए उससे कहा ,वो भी थोड़ा नार्मल होकर मुझे सीखने लगा ,ऐसे मैं बचपन से ही एक्सरसाइज कर रही थी ,लेकिन उससे सीखना और जानबूझ कर अनजान बनना बहुत कामुक था ,मुझे इसमें बहुत मजा आ रहा था और मेरी योनि इतना पानी छोड़ रही थी की लगने लगा की काल से सेनेटरी पेड पहनकर आना पड़ेगा …….ये ख्याल आते ही मेरे होठो में मुस्कान आ जाती थी ,उसके गठीले कटाव को अपने मुलायम हाथो से सहलाना ,मुझे पूरी तरह से उत्तेजित कर देता था,जब उसके कड़े हाथ मेरे कमर या नितम्भो पर पड़ते तो मैं सिहिर उठती थी,लेकिन इस अहसास का हम दोनो ही मजा ले रहे थे ,इससे आगे की मैं नही सोच रही थी ,मुझे ये नही पता था की रॉकी क्या सोच रहा था ,लेकिन वो बस हाथो को रखता,कभी सहलाता लेकिन मसलने की कोसिस नही करता था,यही चीज मुझे और भी उत्तेजित कर देती थी ,पहला दिन खत्म होते होते मैं पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी लेकिन एक दोस्त की तरह ही हमने एक दूसरे की भावनाओ की कद्र करते हुए आगे नही गए,मुझे रॉकी की ये चीज भा गई ,मेरे दिमाग में ये बात कौध गई की अगर मुझे किसी के साथ शाररिक संबंध बनाना हो तो वो रोकी ही होगा ,लेकिन अभी नही मैं अपने ही उलझनों में पड़ी थी ,मुझे नही पता था की मैं सही कर रही हु या गलत,हा दुनिया की नजरो में ये गलत ही था लेकिन फिर भी एक जिस्म जो की आग से भर रहा है वो नियमो को नही मानता,शायद एक दिन मैं टूट ही जाने वाली थी,आखिर विकास जी का प्यार मुझे कब तक बचाता,मेरा अतीत भी मेरे पीछे थाजो बार बार मुझे हवस की आंधियो में डूबा देता था,वो ड्रग्स का नशा भी मेरे खून में मिला हुआ था जो हर बार सेक्स करने पर फिर से एक्टिव हो जाता था,मेरी योनि की खुजली को मिटाना मेरे लिए बहुत मुश्किल हो रहा था और मेरे लिए एक रॉकी वो एक रास्ता था जंहा मैं बिना किसी बदनामी और किसी डर के अपने जिस्म को शांत कर सकती थी ,रॉकी था भी अट्रैक्टिव दिखने में बात करने में ,,वो एक गबरू जवान था जो मेरे जैसी औरत को शांत करने में माहिर था,मेरे लिए रॉकी एक बढ़िया साधन था लेकिन मैं इंतजार में थी ,उस बंधन के टूटने के जो शादी के बाद मैंने अपने लिए बनाय थे ………..
उस रोज की बात है जब मैं अपना काम खत्म कर जिम में एक्सरसाइज करने पहुची ,रॉकी पहले से अपने वर्कआउट में बिजी था,हम अधिकतर शाम को घर जाने से पहले ही कुछ एक्सरसाइज किया करते थे ,तब जिम खाली होता था,अभी हमने अपने हेल्थ सेंटर को पूरी तरह से ओपन नही किया था ,मैं अपने ड्रेश चेंज कर रॉकी के पास पहुची वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगा मैं भी जवाब में मुस्कुराई,मैं उसके पास आकर बैठ गई ,
“अरे थोड़ा स्ट्रेचिंग और वार्मअप कर लो फिर एक्सरसाइज शुरू करना “
“अरे यार आज मूड नही हो रहा है थोड़ा रिलेक्स करना चाहती हु “
“अगर ऐसे ही आलसी जैसे करोगी तब तो हो गया काम ,आराम के लिए 2 दिन तो होते है ना ,चलो जल्दी से स्ट्रेचिंग करो “
मैं भारी मन से मुह बनाकर खड़ी हुई असल में कंट्रक्शन का काम चल रहा था और मैं सच में थक जाती थी ,
“यार रॉकी छोड़ो ना “
“ऐसे कैसे ,अच्छा आज थोड़ा लाइट कर लेते है ,लेकिन अगर कंटिन्यू नही होगी तो फिर मसल्स जाम हो जाएंगे ,”
“तो अकेले कैसे करू थोड़ी मदद तो कर “
वो मुस्कुराता हुआ खड़ा हुआ ,उसे पता था की स्ट्रेचिंग में उस मेरे शरीर को छूने का पूरा मौका मिलता है और कभी कभी मैं बहुत ही गर्म हो जाती थी ,वो खड़ा होकर मेरे पास आया पहले कुछ स्ट्रेच मैंने खुद से किये फिर मैं लेट गई और रॉकी मेरे दाएं पैर को उठा कर मेरी छातियों से लगाने लगा ,मैं पहले भी स्ट्रेचिंग किया करती थी तो मेरे पैर उठकर मेरे सर के पीछे जमीन से भी लग जाता था जिसे हम हलासन कहते है ,वो मेरे पैरो को एड़ियों को स्ट्रेच करने लगा ,फिर उसका हाथ मेरे जांघो पर गया मेरे मुह से एक आह निकली और मैंने आंखे बंद कर ली ,रॉकी को समझ आ रहा था की मैं थोड़ी गर्म हो रही हु ,वो अपने मजबूत हाथो से मेरे जांघो को सहला रहा था और थाई के मसल्स को लूस करने कोसीसे कर रहा था लेकिन उसकी इस हरकत ने मेरे अंदर के कीड़े को जिंदा कर दिया,मै अपने शरीर को ढीला छोड़कर उसके हाथो के स्पर्श का अहसास करने लगी मेरी आंखे अब भी बंद थी ,आज मैं एक स्पर्ट हॉट पेंट पहने ही जो मेरे घुटनो से ऊपर बस मेरे कमर के हिस्से को ढक रहा था,रॉकी का हाथ मेरे नग्गे जांघो को छू रहा था,वो मेरे पैरो को हवा में उठाकर मुझेसर्वांग आसन करने की मुद्रा में ला दिया वो मेरे कूल्हों पर अपने हाथ रखकर मसलने लगा ,मैं थोड़ी देर वैसे ही रहकर हलासन की मुद्रा में चली गई ,अब मेरा पैर मेरे सर के पीछे था और मेरे कूल्हे रॉकी के कमर से टकरा रहे थे,ऐसे तो इसे करने में मुझे रॉकी की कोई मदद की जरूरत नही थी लेकिन इसका एक फायदा ये होता था की मैं गर्म हो जाती थी और मेरा आलस भाग जाता था ,थोड़ी देर में ही मेरा सांस भरने लगा और मैं सामान्य स्थिति में आ गई ,पता नही रॉकी के दिल में क्या आया वो मेरे पेट में अपना हाथ रखकर थोड़ा सा सहलाया ,मेरी टीशर्ट खिसक कर ऊपर चली गई थी जिससे मेरे पेट का स्थान साफ नंगा था,वो अपनी एक उंगली मेरे नाभि में घुसा कर हिला दिया मैं हँस पड़ी ..
“क्या कर रहे हो यार “
वो बिना कुछ कहे ही मेरे कमर के नीचे को सहारा देकर उठाने लगा,अब मैं किसी समकोण त्रिभुज की तरह हो गई थी मेरे कमर और पेट गले तक जमीन से ऊपर थे सर नीचे टिका था और पैर लंब बनाते हुए जमीन से टिके थे ,इसे योग में सेतुबंधासन या ब्रिज पोज भी कहते है,रॉकी मेरे कूल्हों को फिर से मसलता हुआ मेरे थोड़ा नीचे होकर मेरे नंगे पेट को चुम लिया ,मैं थोड़ा हँसी लेकिन हिल नही सकती थी ,मैं सामान्य होकर उसे झूठे गुस्से से देखा वो थोड़ा मुस्कुराया ,मैं मन में सोचने लगी की क्या मैं ज्यादा आगे जा रही हु ,लेकिन मुझे लगा की ये तो नार्मल है ,मैं फिर अपना मुह जमीन की ओर कर लेट गयी ,और अपने कोहनियों के सहारे थोड़ी उठी,मैं plank pose में थी ,इससे मेरे पेट और कमर के मसल्स में पूरा जोर पड़ रहा था,रॉकी मेरे पीछे आकर मुझे घूरने लगा ,मुझे पता था की वो मेरे किस अंग को देख रहा है ,मैं पास लगे दर्पण में अपने को देखी ,सचमे मेरे कूल्हे इतने भरे हुए और कसे हुए लग रहे थे की कोई भी मर्द इसे देखकर मचल जाय वो तो मेरा पुराना आशिक था,मैं फिर से अपने हाथो के सहारे अपने शरीर को उठाने लगी जबकि मेरा पैर अब भी जमीन पर था ,एक तीर के नोक की तरह मेरा शरीर उठ गया था, downword dog pose ,रॉकी मेरे पेट को पकड़कर मुझे सहारा देने के बहाने मेरे कमर से नीचे मेरी योनि के पास वाले हिस्से को छूने लगा था,मैं अपनी आंखे बंद कर कुछ देर उसी स्थिति में टिकी रही फिर से सामान्य होकर मैं भुजंगासन करने की स्थिति में आयी ,अब मेरे हाथ जमीन पर थे और पैर जमीन पर थे ,मेरा धड़ किसी धनुष की तरह उठा था,ये बाकियों से आसान था इसलिए रॉकी मेरे पीछे आकर मेरे ऊपर ही लेट गया मैं उसका भार भी उठा पा रही थी ,उसका हाथ मेरे स्तनों पर जाकर उसे मसलने लगा ,मेरा दिमाग थोड़ा खराब हुआ लेकिन इतने देर से हो रहे वॉर ने मुझे थोड़ा कमजोर भी तो कर दिया था,मैं लेटकर थोड़ा रिलेक्स करने लगी ,वो अभी भी मेरे पीछे था और मेरे ऊपर सोया था ,मैं पेट के बल सोई हुई थी ,मैंने उसका अकड़ा हुआ लिंग अपने कूल्हे पर गड़ाता हुआ पाया ,मेरे होठो से एक मुस्कान निकल गई लेकिन मैं कोई भी एक्ट नही करना चाह रही थी मैं उसका कोई भी जवाब नही दे रही थी ,उसकी हिम्मत और भी बढ़ गई और वो मेरे स्तनों को मसलने लगा ,वो अभी अभी बहुत आराम से उसे सहलाते हुए मसल रहा था,मेरे होठो पर मुस्कान और बढ़ गई और साथ ही मेरी योनि का पानी थोड़ा ज्यादा ही निकलने लगा था,वो फिर से मेरे कूल्हों पर अपने लिंग का वॉर करता है ,
“आह रॉकी “
मैं पलट कर उससे लिपट गई ,अब उसका कड़ा अकड़ा हुआ लिंग मेरी योनि के मुहाने पर रगड़ खा रहा था ,मैं बहुत ही पागल सी हो गई थी मैं उसे फिर से कस कर जकड़ लिया वो मेरे होठो पर अपनी जीभ घुसने की कोसीसे करने लगा लेकिन मैं उसके लिंग की दीवानी थी ना की उसके साथ मुझे इंटिमिसि चाहिए थी ,थोड़ी देर तक वो अपनी जीभ मेरे मुह में घुसने का प्रयत्न भी करने लगा आखिर मैंने अपना मुह खोल कर उसे उसमे जगह दे दी ,लिप किश के सबसे बढ़ी खासियत ये ही की वो जिस्म से ज्यादा भी कुछ चीजो को जोड़ देती है ,इसमें एक इमोशन का प्रवाह एक दूसरे के लिए हो जाता है ,मेरी पकड़ रॉकी पर जोरो से बढ़ने लगी थी वही रॉकी मुझे पागलो की तरह किस कर रहा था,आज से पहले भी मुझे इस तरह किस कर चुका था लेकिन आज वो पागलो जैसे किस कर रहा था,शायद मैंने उसे बहुत तड़फाय था,मेरी और उसकी सांसे भारी होने लगी थी तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी मैं उसे देखने के मूड में तो नही थी लेकिन ये विकास जी का काल था,मैंने उनके लिए अलग ही रिंगटोन सेट कर रखा था,मैंने रॉकी को धक्का देकर हटाया …
“अरे छोड़ो ना काल को “
“विकास जी का काल है “
“जाने दो ना तो आओ मेरे पास “
“छोड़ो मुझे “
मैं उसे हटा कर काल रिसीव कर लिया ,मेरी सांसे अभी भी बहुत तेज थी ,
“क्या कर रही हो जान कब आओगे “
“बस थोड़ी देर जान ,वो अभी एक्सरसाइज कर रही थी “
मैं उनसे बात कर रही थी की रॉकी पीछे से आकर मेरे कूल्हे पर जोर से चाटा लगा दिया ,मैं हल्के से मुस्कुराई लेकिन उसे झूठे गुस्से से नजर दिखाई .काल रखकर जैसे ही मुड़ी रॉकी ने मुझे फिर से पकड़ लिया ,
“ये साला तेरा पति पूरा फ्लो ही बिगड़ दिया “
“तमीज से बात कर मेरे पति है वो “
“लेकिन तू तो मेरी है
मैं उसे हल्के हल्के मुस्कुराकर देखने लगी
“क्या करेगी ??/”
“प्यारे से आपके लिए बात करू “
वो जोरो से हँसने लगी
“तू फिर से शुरू हो गई ना ,मेरे पति के सामने वो क्या है …??”
“सच में दीदी ऐसे आप हो बड़ी किश्मत वाली जो ऐसे पति मिले है सच में साहब बहुत ही बढ़िया है काश मेरे पति भी ऐसे होते,मुझे इतना प्यार करते ??”
रेणु ये सच में कह रही थी या मुझे मस्का लगा रही थी ये तो नही कहा जा सकता लेकिन सच में विकास जी थे तो कमाल के जब भी प्यार करते दिलो जान लगा देते थे,इतनी खुसी तो मुझे कोई भी नही दे पाया ,अगर उनकी जगह कोई और होता तो मैं शायद कब की बहक गई होती ,आग तो मेरे अंदर भी थी वो भी बाकियों से कुछ ज्यादा ,लेकिन फिर भी मैं उनके प्यार के सहारे ही अपने को सम्हाल पाती थी ,
“तो मेडम मैं जाऊ”
“कहा ???”
“प्यारे के पास वो नाराज बैठा है आज “
मुझे हँसी आ गई .
“हा ठीक है जा मना अपने प्यारे को “
रेणु के जाने के बाद ही मैं आदत के मुताबित उसके कमरे के बाहर जाकर खड़ी हो गई,वही उसका रोल प्ले और वही मेरा मचल जाना ,पता नही क्यो लेकिन मुझे भी इसमें बहुत ही मजा आने लगा था,प्यारे कुछ कुछ फिर से सामान्य हो गया मैं भी उससे खुल के बात किया करती लेकिन कभी उसे इतना आगे बढ़ने नही देती की मेरे शरीर से खेले ,
तभी मेरी जिंदगी में एक तूफान आया ………….
उस दिन विकास जी काम में गए हुए थे,मैं तैयार होकर अपने कमरे से बाहर निकली,मेरे बाल अब भी गीले थे ,मैं हमेशा ही नई दुल्हन की तरह सज कर रहती थी ,अभी शादी को भी ज्यादा वक्त नही बिता था ,मुझे घर में भी साड़ी पहनना और चूड़ियां सिंदूर लगाकर रखना अच्छा लगता,मैं श्रृंगार कर अपने कमरे से बाहर निकली ,लगा जैसे की कोई आया हुआ है ,मैं बाहर आयी तो देखकर दंग रह गई ये तो मिश्रा जी थे,ये यहां क्या कर रहे है और इन्हें मेरे घर का पता कहा से चला ,मुझे देखकर वो खड़े हो गए,प्यारे उन्हें चाय पिला रहा था,
मिश्रा जी मुझे देखते ही खड़े हो गए ,
“आप यहां ??????”
मेरी नजर प्यारे पर पड़ी वो मेरे चहरे के भावों को नापने की कोसीसे कर रहा था लेकिन मैने तुरंत खुद को सम्हाला
“अरे आप बैठिये ना बहुत दिनों बाद याद आयी आपको मेरी ,”मैं झूठी मुस्कुराहट अपने चहरे में लाते हुए कहा
“हा बस इधर से गुजर रहा था तो सोचा मिलता चलू ,विकास कहा है “
“बहुत अच्छा किया ,विकास जी तो आफिस गए हुए है ,काका आप जाइये जरूरत होगी तो आपको बुला लुंगी “मैं प्यारे की तरफ घूमी वो भी चुपचाप ही वहां से चला गया….
“क्या लेने आये है आप यहां “मैंने मिश्रा को गुस्से से देखा
“काजल तुम अब भी मुझसे नाराज हो ,मैं तुम्हे आज भी उतना ही प्यार करता हु “
“देखिए मिश्रा जी मेरा दिमाग खराब मत कीजिए ,निकल जाइये मेरे घर से मैं अपनी जिंदगी में बहुत खुस हु और आपको यहां का पता किसने दिए मेरे भइया ने ???”
मिश्रा जी ने एक गहरी सांस ली
“काजल तुम मुझसे अलग हो गई थी लेकिन मैं तुमसे कभी भी अलग नही हुआ ,विकास से तुम्हारी शादी करवाने वाला भी मैं हु और तुम्हे यंहा लाने वाला भी मैं हु ,मैं अब रिटायर हो चुका हु और यही रहता हु ,जो हुआ उसे मैं बदल तो नही सकता काजल लेकिन …तुम चाहो मुझे जो सजा दो लेकिन कम से कम मुझसे बात तो करो सालो से तुमने मुझसे बात ही नही की है “
मिश्रा जी रोने लगे थे ,उनके रोने में एक पीड़ा थी ,वो बुजुर्ग आदमी मेरे बाप की उम्र का था और मेरे सामने इस तरह रो रहा था,कभी वो मेरे लिए भगवान हुआ करता था,मैं उससे प्यार किया करती थी ,वो ही तो मेरा पहला प्यार था,जिसकी हो जाने के कभी सपने देखे थे ,जिसकी बांहो में पूरी जिंदगी गुजरना चाहती थी,आज ओ ही मेरे सामने बैठा ऐसे रो रहा था,भले ही उसने मेरे साथ कुछ भी किया हो लेकिन मेरे दिल में उसके लिए प्यार खत्म तो नही हो गया,दिल के किसी कोने में वो आज भी जिंदा था,मैं सोफे में उसके बाजू में जाकर बैठ गई,मुझे सचमे बहुत बुरा लग रहा था,उसने जो किया उसकी सजा तो मैंने उसे दे दी थी,सालो से मैंने उनसे बात भी नही किया था,अब शायद समय आ चुका था की मैं अपने जख्मो को भुला कर उनसे बात करू ,मैंने अपना हाथ उनके बालो में रखकर सहलाया ,वो मुझसे लिपट गए ………
“काजल मुझे माफ कर दो मैं सच में बड़ा ही स्वार्थी हो गया था,लेकिन ये सच है की मैंने तुमसे दिलो जान से प्यार किया है ,लेकिन मैं भी अपने फर्ज और राजनीतिक दबाव में मजबूर था,मेरे फर्ज ने मुझे बांध रखा था,मेरा कैरियर भी बड़े खतरे में था काजल ,अगर मैं रोबर्टो का नाम उछाल देता तो वंहा मार्किट में बड़ा प्रभाव पड़ता और साथ ही कई नेता जिनके शेयर रोबर्टो से जुड़े हुए कंपनी में थे उसके भाव गिर जाते,मेरे ऊपर उस समय बड़ा प्रेशर था की मै इस खेल को खत्म भी करू और रोबर्टो का नाम भी उछलने ना पाए….मेरी समझ में कुछ भी नही आया था काजल ….”
वो मुझसे लिपटे हुए थी थे मैं भी उन्हें अपने से अलग नही कर रही थी ,बीती बातो को याद करके मेरे आंखों में भी आंसू आ गए थे,मेरे साथ हो हुआ वो तो हो गया लेकिन नेहा ????क्या वो वापस आ पाएगी ,मेरे दिमाग में उसकी एक तस्वीर घूम गई ,
“मैं जानता हु काजल की तुम क्या सोच रही हो …नेहा का दुख तो मुझे भी होता है ,वही तो है जिसने हमे मिलाया था,जिसने तुम्हारे मन में मेरे लिए प्यार के बीज बोए थे ,सच मानो काजल मैं भी उसे बहुत चाहता था,उसके साथ जो भी हुआ वो मैं कभी नही भूल पाऊंगा ,”
मिश्रा जी का चहरा मेरे सीने में दबा हुआ था ,उनके आंसू मेरे अब भी बह रहे थे ,मैं अभी अभी नहा कर निकली थी ,मेरे शरीर में गीलापन अब भी था शायद वो मिश्रा जी के चहरे पर भी लग रहा होगा,उनके आंसू मेरे उजोरो के बीच से होते हुए नीचे को बह रहे थे ,इस समय हमारे मन में कोई भी वासना तो नही थी लेकिन सालो बाद हमारे शरीर एक दूजे के संपर्क में आये थे,
मेरे मन में एक रुदन गूंज गया था ,बीती बातो को मैं जितना भुलाने की कोसीसे करती वो उतना ही सर उठाकर मेरे सामने आ जाता था,मैं तो अपने दुनिया में खुस थी लेकिन ये मिश्रा जी ने आकर मुझे फिर से उसी यादो के देश में धकेल दिया था,मैं सोचती रही और मेरा सर भारी होने लगा,चिंता दुख ये ही तो मेरे दुश्मन थे ,मैं फिर से बेचैन होने लगी ,और इसका एक ही इलाज मुझे पता था वो था नशा या सेक्स लेकिन किसीसे ,मिश्रा जी से????
नही इनसे तो मैं मरकर भी सेक्स नही करना चाहती थी ,लेकिन मेरे आँसू भी अभी बंद नही हुए थे मैं फ्रस्ट्रेशन में आ गई थी मैं मिश्रा को दिखाना चाहती थी की उसके कारण मैं क्या से क्या बन गई हु ,उसने मुझसे जो चीज छीनी थी वो था मेरा इनोसेंटनेस मेरी मासूमियत ,सभी चीजे मेरे दिमाग में ही चल रही थी मेरे जिस्म में कोई भी हरकत अभी तक नही हुई थी मैं ऊपर निगाह करके देखा मुझे प्यारे दिखाई दिया वो खिड़की में खड़े होकर हमारी बात सुन रहा था, साला हरामी मेरे मन एक उसके लिए एक गाली निकली ,मैं अभी और भी गुस्से में आ गई
“ये इधर आ “
मैं जोरो से चिल्लाई ,प्यारे कांपता हुआ मेरे पास आया उसने मेरे गुस्से का नमूना तो देखा ही था ,मैं अब मिश्रा जी के सीने से निकालकर अलग हो चुकी थी ,प्यारे मेरे सामने आकर खड़ा हो गया ,
“मादरचोद क्या देख रहा था तू खिड़की से ,की मैं इससे चुदवा रही हु की नही “
गुस्से में मेरे मुह से ऐसी गालिया निकली जिसके बारे में अभी तक मिश्रा जी और प्यारे दोनो ने ही कल्पना नही की होगी ,मैं गुस्से में कांप रही थी ,सालो का गुस्सा था ,जो मैं कभी मिश्रा के ऊपर निकलना चाहती थी वो सभी जमा हो कर मेरे अवचेतन में भरा हुआ था आज मौका देखकर अचानक ही निकल रहा था मेरे स्वभाव में ये गुस्सा ही शायद उसी अवचेतन की दमित भावनाओ का नतीजा था,मेरी आंखे लाल होने लगी थी ,रोंगटे खड़े हो रहे थे,शरीर और मन दोनो में एक अनजानी सी जलन फैल रही थी ,
मेरे कदम आप ही आप प्यारे के पास चले गए और एक जोर का थप्पड़ मैंने उसके गालो में लगा दिया ,वो आंखे फाडे मुझे देखने लगा ,
“घूर क्या रहा है मादरचोद आंखे निकाल लुंगी “प्यारे जैसा ताकती मर्द भी मेरी बात से कांप गया ,मिश्रा जी भी कांप रहे थे ,एक नाजुक सी लड़की का ख़ौफ़ दो मर्दो के चहरो पर साफ झलक रहा था ,तभी रेणु की इंट्री हुई उसने भी मुझे प्यारे को मारते और गली देते सुन लिया था वो स्तब्ध सी दरवाजे में आकर ही रुक गई ,मेरे नजर उसपर पड़ी ,
“लो आ गई तेरी रांड “मैंने रेणु को देखते हुए ,रेणु वहां से उल्टे पाव भागने को हुई लेकिन मैंने फिर से चिल्लाया ,
“रुक साली आयी है तो चुद के ही जाएगी तू यहां से इधर आ “वो नजर झुकाए हुए हमारे पास आयी,वो एक सस्ती सी साड़ी में थी लेकिन गजब की सेक्सी लग रही थी ,उसके जिस्म का भराव मर्दो को हिलाने पर मजबूर कर देने वाला था ,
“अबे कुत्ते चल सुरु हो जा अपनी रांड के साथ “
प्यारे ने फिर से मुझे प्रश्न भरी नजरो से देखा जैसे पूछ रहा हो की क्या करना है ,दशहत उसकी आंखों में साफ झलक रही थी और अब मुझे इसमें मजा आने लगा था ,लेकिन मेरा गुस्सा अभी भी बाकी था वो गुस्सा प्यारे या रेणु के लिए नही था वो तो मिश्रा के लिए था,उसका नाम याद आते ही मैं मुड़कर उसकी ओर देखी ,वो भी घबराए हुए सोफे में बैठे थे ,अपनी भोली भाली सी काजल को ऐसी हरकत करते देखते ,उस दिन उन्होंने मेरा एक रूप देखा था जब रोबर्टो ने मेरी जवानी ली थी ,लेकिन उस दिन की बात और थी आज बात और है ,उन्हें देखते ही मेरे दिमाग में जैसे शैतान सवार हो गया ,और होठो में एक शैतानी मुस्कान आयी ,
मैं जाकर उनकी गोदी में बैठ गई ….
“मेरा सोना बाबू ,इतने दिनों से मुझसे अलग था,….अब मैं आपको वो मजा दूंगी जो आप हमेशा से चाहते थे,”मैं मिश्रा जी के गालो में उंगली घुमाई ,मेरे बदले व्यवहार से वो और भी ख़ौफ़ में आ गए ,मैं प्यारे की तरह देखने लगी ,
“तू मुझे चोदने के सपने देखता है ना ,आज तेरा वो सपना पूरा होगा ,आजा तुझे जन्नत की सैर कराती हु “
मैं उंगलियों के इशारे से प्यारे को अपने पास बुलाया ,मिश्रा के शरीर में डर की एक ठंडी दौड़ गई वही प्यारे अब भी मुझे आश्चर्य से देख रहा था ,
“मादरचोद समझ नही आता तुझे इधर आ “मैं जोरो से चिल्लाई मैं अभी भी मिश्रा जी की गोद में बैठी थी ,
“नही काजल ,तुम ये क्या कर रही हो “उनकी काँपती हुई आवाज मेरे कानो में आयी
“आपको खुस करने की कोसीस कर रही हु बाबू …”
मैं प्यार से उनसे कहा और उनके होठो में अपने होठो को घुसा दिया ,मिश्रा जी के आंखों में आंसू आ गए ये क्यो आये थे मुझे नही पता लेकिन इससे मेरे दिल को बहुत ही सुकून मिल रहा था,उनकी जीभ अब भी हरकत में नही आयी थी लेकिन मैं उनके होठो को चूसे जा रही थी ,अब प्यारे भी हमारे पास आ कर खड़ा हो गया था ,मैंने से नीचे बैठने का इशारा किया वो घुटनो के बल मेरे पैर के पास बैठ गया था ,उसका चहरा जमीन को देख रहा था,शायद वो मेरे पल पल बदलते हुए मूड से घबरा गया था ,पता नही की मैं अगले पल क्या कर जाऊ,मैं मिश्रा जी के होठो से अपने को हटाया और प्यारे के बालो को पकड़ा ,उसे अपने एड़ियों के पास ले गई ,
“चाट इसे “
मैं उसके चहरे पर अपने पैर की उंगलियों को रगड़ने लगी ,मैं रेणु को भी अपने पास बुलाया और प्यारे के लिंग की तरफ इशारा कर के कहा ,
“इसे चाटना तेरा काम है ….”रेणु बेचारी मेरे बात को समझ तो नही पाई लेकिन वो भी अपने घुटनो के बल बैठ गयी प्यारे अब भी मेरे एड़ी और उंगली के पास अपना मुह टिकाए बस देख रहा था ,घबराहट में उसके दिल की धड़कने इतनी बढ़ गई थी की उसकी आवाज मुझतक पहुच रही थी ,मैंने रेणु को उसके लिंग को निकाल कर चूसने का इशारा किया वो बेचारी किसी रोबोट की तरह मेरे इशारे पर नाचने लगी थी ,वो झुककर प्यारे के लिंग को उसके पैजामे से निकलने का प्रयास कर रही थी ,मैंने प्यारे के कपड़े निकाल देने का आदेश दिया कुछ ही पल में वो मेरे सामने नंगा बैठा था ,रेणु झुककर बडी मुश्किल ने उसके मुरझाए हुए लिंग तक पहुच पा रही थी ,मैंने अपना पैर उठा लिया ताकि वो सीधा बैठ पाए और रेणु को उसके लिंग को अपने मुह में डालने में कोई परेशानी ना हो,अब प्यारे सीधा बैठा था,वो अब भी अपने घुटनो पर था और मैं
उसके मुह में अपने पैरो की उंगलियों को रगड़ने लगी ,जैसे ही प्यारे के लिंग में रेणु का नरम होठ स्पर्श हुआ ,उसके मुह से एक आह निकली और उसने मेरे उंगली को अपने होठो के अंदर ले लिया ,मिश्रा जी अब भी बुत बनकर खड़े थे,प्यारे मेरी उंगली को धीरे धीरे चूसने लगा था,और उसका लिंग भी रेणु के मुह में खड़ा होने लगा था,रेणु की लार उसे भिगो रही थी,प्यारे उत्तेजित होने लगा और उसका सर जोर जोर से मेरे उंगलियों पर चलने लगा ,मैं उसके सर को वहॉ से हटा कर अपने पैरो पर ले आयी ,वो धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था,मेरे दोनो पैरो को चूमते हुए वो एड़ियों तक पहुचा मैंने अपनी साड़ी घुटनो तक उठा ली,इससे प्यारे का जोश और भी बढ़ गया था,मैं मिश्रा जी के ऊपर खुद को पूरी तरह से छोड़ दिया और उनके हाथ को पकड़कर अपने उरोजों में टिका दिया ,इसका कोमल अहसास शायद मिश्रा जी को पसन्द आया उनके हाथो ने भी अपना काम करना शुरू कर दिया ,मैंने अपना पल्लू नीचे गिरा दिया,अब मेरे स्तनों को मिश्रा जी साफ तौर से देख रहे थे,जिसका नतीजा उनके पेंट में मुझे अहसास होने लगा ,उनके हाथ अब भी आराम से मेरे उजोरो को सहला रहे थे,प्यारे ने मेरे एड़ी तज का सफर पूरा किया और मैंने रेणु को रुकने को कहा दोनो ने पहली बार मुझे ऊपर उठाकर देखा,मेरी नजर थोड़ी बंद हो चुकी थी ,मेरे जिस्म में आग बढ़ गई थी और मैं अब ठंडा होना चाहती थी,मेरी नजारे नशीली हो चुकी थी ,मिश्रा जी का हाथ मेरे उजोरो को अंदर से छूने को बेताब हो रहा था वो मेरे ब्लाउज के अंदर हाथ घुसने का प्रयास कर रहे थे,मैंने उनका साथ देते हुए अपने ब्लाउज़ के ऊपर के दो बटन खोल दिए और प्यारे के सर को पकड़कर अपनी साड़ी के अंदर धकेला,मैंने अपनी टांगे जरा फैला दी ताकि प्यारे आराम से अंदर जा सके वो मेरी साड़ी उठाने को हुआ मैंने उसका हाथ वही रोक दिया ,
“जितना कहा जाय उतना कर “
मैंने अपनी सांसो को काबू में करते हुए कहा ,वो अपने हाथो को तुरंत ही पीछे ले लिया ,मैंने उसके सर को अपनी साड़ी में घुसा दिया वो मेरी जांघो को चाटने लगा ,
“आह आआआआआ हहहहहहह “ मेरी सांसे तो तेज हो ही चुकी थी अब आहे भी निकलने लगी थी ,मैं बार बार आहे ले रही थी ,वही मिश्रा जी को जैसे जन्नत मिल गई हो वो मेरे ब्लाउज़ के अंदर अपने हाथ ले जाकर मेरे उरोजों को मसल रहे थे मैं थोड़ा हटकर अपने हाथ पीछे कर के अपने ब्रा को भी खोल दिया लेकिन अभी मैंने ब्लाउज़ को और ना ही ब्रा को अपने शरीर से अलग किआ था,मिश्रा जी का हाथ उनके अंदर से ही मेरे नंगे स्तनों को मसलने लगा था,मेरे जोश की इंतहा हो रही थी ,प्यारे अब मेरे जांघो के बीच तक पहुच गया था,वो मेरे योनि को पेंटी के ऊपर से चाट रहा था,मैं जोरो जोरो से आहे भर रही थी ,उसके लार और मेरे कामरस से मेरी पेंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी ,मैं अपने पैरो को फैला कर और प्यारे के सर को और भी जोरो से अपने जांघो के बीच दबाने लगी थी वो भी किसी कुत्ते के तरह इसे चाटा जा रहा था,वो अपने हाथ उठकर मेरी पेंटी को साइड करने की कोसीसे कर रहा था लेकिन मैं उसे बार बार रोक देती थी ,उसने इसके लिए अपने दांतो का प्रयोग किया ,मैंने उसे मना नही किया लेकिन वो ज्यादा सफल नही हो पाया था,वो अपने दांतो से मेरे पेंटी के एक साइड को पकड़कर उसे हटाने लगा ,अपने दांतो और नाक की मदद से वो थोड़ा कामियाब हुआ और उसने अपनी जीभ मेरी योनि में ऊपरी दीवारों में सीधे रगड़ दी ,मेरे लिए ये अंतिम क्षण था मैं जोरो से झड़ी, मैं प्यारे के सर को जोरो से दबाया,शायद वो सांस भी नही ले पा रहा था वो छटपटाया लेकिन मुझे इसकी कोई परवाह नही थी ,,…थोड़ी देर में ही मैं मर्दो जैसी मिश्रा जी की छाती में गिर गई,मिश्रा जी अब भी मेरे स्तनों को दबा रहे थे और आहे ले रहे थे ,वही प्यारे अब भी मेरे योनि का रस पी रहा था,और रेणु ये सब बस खड़े होकर देख रही थी,थोड़ी ही देर में मेरी आंखे खुली और मुझे अपने होने का अहसास हुआ,सच में मैं शांत हो गई थी ,बड़ी गहरी शांति थी ,मेरी आग शांत हो चुकी थी,मैं आंखे खोली और प्यारे का सर हटाने लगी लेकिन उसपर तो अभी पागलपन सवार था वो मेरी योनि को नही छोड़ा ,मैंने अपने को थोड़ा अरजेस्ट किया और एक जोर का लात उसकी छाती में लगाया ,मैं कराटे में चैंपियन थी और ताकत से भरपूर थी,भले ही मेरा शरीर कोमल लगे लेकिन उसमे ताकत बहुत थी और साथ ही था टेक्निक ,इससे प्यारे थोड़ा दूर जा गिरा और रोनी सी सूरत बनाकर मुझे देखने लगा ,उसे देखकर मिश्रा जी भी जल्दी से अपना हाथ निकाल कर बैठ गए,इससे मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गई ,मैं वहां के उठाकर अपने कमरे में आयी मेरी नजर विकास जी और और मेरे फ़ोटो पर पड़ी मेरा पूरा श्रृंगार बिखर गया था ,मैंने खुदको थोड़ा संवारा और जाकर विकास जी के फ़ोटो को किस किया,
“मुझे माफ कर देना जान लेकिन मैं खुद को अब इससे नही रोक पाऊंगी ,मैं मजबूर हु अपनी आग के हाथो,ना जाने कब ये भड़क जाय और मैं अपने जिस्म के हाथो में मजबूर हो जाऊ,लेकिन वादा है मेरा आपको प्यार करने में मैं कभी भी कमी नही करूँगी….मैंने फिर से उसे चूमा और अपने बाथरूम में चली गई,मैं जब निकली पता नही मिश्रा जी प्यारे और रेणु वंहा थे या नही मैं इतनी थक चुकी थी की मैं सीधे बिस्तर में पड़ी और मेरी नींद ही लग गई…….
वर्तमान में
मेरे हाथो में अब भी शराब का ग्लास था,मैंने एक नजर विशाल जी पर डाली समय देखा अभी 3 बज चुके थे,
मेरी योनि से फिर से रिसाव शुरू हो चुका था,प्यारे मिश्रा और रेणु ….मैं उस कांच की दीवार को देखते हुए फिर से उन अतीत की यादो में खो गई अब एक नाम मेरे जेहन में आया रॉकी…
रॉकी से मिलने से पहले की कुछ और बातें थी जैसे अब मैं और रेणु और प्यारे खुल चुके थे,ये हमारे रोज का काम था,कभी कभी मैं रातो को प्यारे के पास जाती थी ,लेकिन मैं उससे कभी भी शारीरिक संबंध स्थापित नही किया,वो मेरी चाटने में ही खुस था,उस दिन के बाद से मिश्रा जी फिर से कभी मेरे घर नही आये,लेकिन उनका खयाल अब भी मेरे दिमाग में था,प्यारे अक्सर मेरा नाम लेकर रेणु के साथ सेक्स करता था,मैं भी वँहा मौजूद होती थी बस यही मेरे लिए मजा था(ऐसे ही एक रात की आवाज विकास ने सुनी थी ,प्यारे काजल का नाम लेकर रेणु से सेक्स कर रहा था और काजल भी अपनी आवाज से उसे और भी उत्तेजित कर रही थी लेकिन विकास को लगा की प्यारे कजल के साथ सेक्स कर रहा है ),मेरा अतीत जो भी था लेकिन अब मैं विकास जी को धोखा नही देना चाहती थी ,लेकिन मेरी जिंदगी में फिर से मोड़ उस समय आया जब मेरे जीवन में रॉकी आया ,मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके गयी हुई थी,मैंने भइया को बताया की मैं घर में बोर हो जाती हु ,उन्होंने कहा की तेरे ही इलाके में कुछ दूरी पर एक पुराना होटल बिक रहा है उसे देख लो ,पसंद आये तो उसमे काम करा कर उसे फिर से शुरू कर लेंगे ,मुझे आईडिया जम गया लेकिन मैं विकास जी से बात करना चाहती थी ,भइया वँहा के ही किसी बंदे को मेरे साथ काम में रखना चाहते थे ,तभी उन्हें मिश्रा जी का ध्यान आया और उन्होंने उसे रॉकी की बारे में बताया,रॉकी मेरे भैया का भी परिचित था तो भइया ने हा कह दिया,मैं मायके में थी और उसी समय ना जाने क्यो विकास जी का विहेवियर मेरे लिए बदल रहा था,मुझे कुछ समझ नही आया लेकिन वो ना मुझे काल करते ना ही मेसेज ,मैं इस बात से थोड़ी दुखी तो थी लेकिन फिर भी घर के माहौल में मेरा वो दुख भूल गया ,लेकिन एक दिन भइया को पता चला की विकास जी अपने किसी दोस्त के साथ बार में बैठे शराब पी रहे थे तो मैं चौकी क्योकि अभी तक मुझे उनके शराब पीने का पता नही था,साथ ही उन्होंने ये भी बताया की वो थोड़े चिंतित लग रहे थे ,मेरे दिमाग में पहली बात यही आयी की कही विकास जी को मेरे और प्यारे के बारे में पता तो नही चल गया है,पूरा परिवार उन्हें फोन लगा था लेकिन उन्होंने किसी का काल नही उठाया और मैं बेचैन हो गई हम रात में ही घर के लिये निकल गए,लेकिन वँहा उनका कोई भी पता नही था,जब वो आय तो उन्हें देखकर या उनके व्यवहार को देखकर ये तो नही लगा की वो मुझसे गुस्सा है ,बल्कि हमारा प्यार और भी बढ़ गया था,
दिन बीते और मैंने प्यारे से हर रिस्ते तोड़ लिया यहां तक की मैंने रेणु को भी बार बार घर आने से मना कर दिया ,प्यारे इस बात को लेकर छटपटाया लेकिन वो मेरा गुस्सा जानता था , मैं रॉकी से होटल के सिलसिले में मिली और पहली ही बार एक दूसरे को देखते हुए हम अवाक रह गए ,
रॉकी मेरे उन सब लड़को में से एक था जिसके साथ मेरे शाररिक संबंध थे,,ऐसे तो एक दूसरे को देखे और मिले काफी वक्त हो चुका था ,और हम दारू के नशे में 2-3 बार ही मिले थे लेकिन हमे एक दूसरे को पहचानने में बिल्कुल भी देर नही लगी ,लेकिन वो भी समझदार निकला उसने कोई भी एक्सप्रेसन अपने चहरे में नही लाया,यंहा तक की पुरानी बातो को वो तब भी बीच में नही लाया जब हम अकेले होते,लेकिन कब तक ,उसे देखकर मेरे अंदर भी कोई आग उठ जाती थी ,और वो भी थोड़ा नर्वस हो जाता था,लेकिन हम आगे नही बढ़ रहे थे,लेकिन धीरे धीरे रॉकी थोड़ा आगे बढ़ने की कोसीसे करने लगा ,मुझे भी ये अच्छा लगता था और मैं भी उसका साथ देने लगी थी ,उसके लिए इतना खाफी था ,आग जब लग जाती है तो कोई भी प्यार ,समाज ,धर्म की समझ दिमाग में नही आती वही मेरे साथ हो रहा था,रॉकी एक जवान और बहुत ही खूबसूरत लड़का था,गठीले बदन का मालिक ,वो मुझे बहुत आकर्षित करता था,वो मुझे जिम में एक्सरसाइज करने को इनवाइट किया ,वो मेरा पहला दिन था ,उसने मेरे लिए एक स्पोर्ट टीशर्ट खरीदा था ,साथ ही एक स्पोर्ट टाउसर ,वो इतने कसे हुए थे की मेरे एक एक अंग उससे झांकने को बेताब होते,
“ये क्या लेकर दे दिया है तुमने “
मैंने रॉकी को झूठे गुस्से से कहा
“एक बात तो सच है काजल तुम इसमें बहुत सेक्सी लग रही हो ,शरीर तो तुम्हारा पहले से ही कमाल का है बस थोड़ा और कस जाय तो मजा आ जाए ,”
“अच्छा तुम्हे क्या मजा आने वाला है इसमें “
वो मुझे ऊपर से नीचे तक ऐसी हवस भरी नजरो से देखा की मुझे भी शर्म आ गई
“क्या हम वो नही कर सकते जो कभी हमारे बीच हुआ था”
मेरी नजर उसके नजर से मिली ,वो सीरियस था,हवस की आग उसके चहरे पर साफ झलक रही थी ,वो लाल हुआ जा रहा था,मैंने अपना सर ना में हिलाया
“क्यो “
मैंने बिना कुछ बोले ही उसे अपना मंगलसूत्र दिखाया ,
“सच में काजल किसी को पता नही चलेगा “मेरी हँसी छूट गई
“अच्छा तो तुम मुझे मेरे पति से धोखा करने कह रहे हो “
मैंने मुस्कुराते हुए उससे कहा …
“नही काजल जब तक चोर पकड़ा नही जाता तब तक वो चोर नही होता,और हमारे बारे में किसी को कभी पता नही चलेगा “वो मेरे पास आने लगा लेकिन मैंने उसे रोक दिया
“मेरी आत्मा को तो ये बात पता रहेगी ना रॉकी ,उससे कैसे छुप जाएगा “
रोकी के चहरे में एक अजीब सी मुस्कान खिल गई
“तुम्हे क्या लगता है की मुझे पता नही की तुम क्या चाहती हो ,तुमने अपने नीचे शायद गौर नही किया ,तुम्हारी चुद इतनी गीली हो गई है की तुम्हारे टाउसर को भी भीगा दी रही है ,”वो तो हँसने लगा लेकिन मुझे अपने पर बहुत गुस्सा आया ,वो टाउसर था ही इतना कसा हुआ की मेरी पेंटी से पूरी तरह से चिपक गया था,मुझे तोड़ी शर्म आने लगी ,
“अब ये सब बात छोड़ो,और मुझे सिखाओ जो मुझे सीखने ये सब पहनाया है “मैंने उसे शरारती निगाहों से देखते हुए उससे कहा ,वो भी थोड़ा नार्मल होकर मुझे सीखने लगा ,ऐसे मैं बचपन से ही एक्सरसाइज कर रही थी ,लेकिन उससे सीखना और जानबूझ कर अनजान बनना बहुत कामुक था ,मुझे इसमें बहुत मजा आ रहा था और मेरी योनि इतना पानी छोड़ रही थी की लगने लगा की काल से सेनेटरी पेड पहनकर आना पड़ेगा …….ये ख्याल आते ही मेरे होठो में मुस्कान आ जाती थी ,उसके गठीले कटाव को अपने मुलायम हाथो से सहलाना ,मुझे पूरी तरह से उत्तेजित कर देता था,जब उसके कड़े हाथ मेरे कमर या नितम्भो पर पड़ते तो मैं सिहिर उठती थी,लेकिन इस अहसास का हम दोनो ही मजा ले रहे थे ,इससे आगे की मैं नही सोच रही थी ,मुझे ये नही पता था की रॉकी क्या सोच रहा था ,लेकिन वो बस हाथो को रखता,कभी सहलाता लेकिन मसलने की कोसिस नही करता था,यही चीज मुझे और भी उत्तेजित कर देती थी ,पहला दिन खत्म होते होते मैं पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी लेकिन एक दोस्त की तरह ही हमने एक दूसरे की भावनाओ की कद्र करते हुए आगे नही गए,मुझे रॉकी की ये चीज भा गई ,मेरे दिमाग में ये बात कौध गई की अगर मुझे किसी के साथ शाररिक संबंध बनाना हो तो वो रोकी ही होगा ,लेकिन अभी नही मैं अपने ही उलझनों में पड़ी थी ,मुझे नही पता था की मैं सही कर रही हु या गलत,हा दुनिया की नजरो में ये गलत ही था लेकिन फिर भी एक जिस्म जो की आग से भर रहा है वो नियमो को नही मानता,शायद एक दिन मैं टूट ही जाने वाली थी,आखिर विकास जी का प्यार मुझे कब तक बचाता,मेरा अतीत भी मेरे पीछे थाजो बार बार मुझे हवस की आंधियो में डूबा देता था,वो ड्रग्स का नशा भी मेरे खून में मिला हुआ था जो हर बार सेक्स करने पर फिर से एक्टिव हो जाता था,मेरी योनि की खुजली को मिटाना मेरे लिए बहुत मुश्किल हो रहा था और मेरे लिए एक रॉकी वो एक रास्ता था जंहा मैं बिना किसी बदनामी और किसी डर के अपने जिस्म को शांत कर सकती थी ,रॉकी था भी अट्रैक्टिव दिखने में बात करने में ,,वो एक गबरू जवान था जो मेरे जैसी औरत को शांत करने में माहिर था,मेरे लिए रॉकी एक बढ़िया साधन था लेकिन मैं इंतजार में थी ,उस बंधन के टूटने के जो शादी के बाद मैंने अपने लिए बनाय थे ………..
उस रोज की बात है जब मैं अपना काम खत्म कर जिम में एक्सरसाइज करने पहुची ,रॉकी पहले से अपने वर्कआउट में बिजी था,हम अधिकतर शाम को घर जाने से पहले ही कुछ एक्सरसाइज किया करते थे ,तब जिम खाली होता था,अभी हमने अपने हेल्थ सेंटर को पूरी तरह से ओपन नही किया था ,मैं अपने ड्रेश चेंज कर रॉकी के पास पहुची वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगा मैं भी जवाब में मुस्कुराई,मैं उसके पास आकर बैठ गई ,
“अरे थोड़ा स्ट्रेचिंग और वार्मअप कर लो फिर एक्सरसाइज शुरू करना “
“अरे यार आज मूड नही हो रहा है थोड़ा रिलेक्स करना चाहती हु “
“अगर ऐसे ही आलसी जैसे करोगी तब तो हो गया काम ,आराम के लिए 2 दिन तो होते है ना ,चलो जल्दी से स्ट्रेचिंग करो “
मैं भारी मन से मुह बनाकर खड़ी हुई असल में कंट्रक्शन का काम चल रहा था और मैं सच में थक जाती थी ,
“यार रॉकी छोड़ो ना “
“ऐसे कैसे ,अच्छा आज थोड़ा लाइट कर लेते है ,लेकिन अगर कंटिन्यू नही होगी तो फिर मसल्स जाम हो जाएंगे ,”
“तो अकेले कैसे करू थोड़ी मदद तो कर “
वो मुस्कुराता हुआ खड़ा हुआ ,उसे पता था की स्ट्रेचिंग में उस मेरे शरीर को छूने का पूरा मौका मिलता है और कभी कभी मैं बहुत ही गर्म हो जाती थी ,वो खड़ा होकर मेरे पास आया पहले कुछ स्ट्रेच मैंने खुद से किये फिर मैं लेट गई और रॉकी मेरे दाएं पैर को उठा कर मेरी छातियों से लगाने लगा ,मैं पहले भी स्ट्रेचिंग किया करती थी तो मेरे पैर उठकर मेरे सर के पीछे जमीन से भी लग जाता था जिसे हम हलासन कहते है ,वो मेरे पैरो को एड़ियों को स्ट्रेच करने लगा ,फिर उसका हाथ मेरे जांघो पर गया मेरे मुह से एक आह निकली और मैंने आंखे बंद कर ली ,रॉकी को समझ आ रहा था की मैं थोड़ी गर्म हो रही हु ,वो अपने मजबूत हाथो से मेरे जांघो को सहला रहा था और थाई के मसल्स को लूस करने कोसीसे कर रहा था लेकिन उसकी इस हरकत ने मेरे अंदर के कीड़े को जिंदा कर दिया,मै अपने शरीर को ढीला छोड़कर उसके हाथो के स्पर्श का अहसास करने लगी मेरी आंखे अब भी बंद थी ,आज मैं एक स्पर्ट हॉट पेंट पहने ही जो मेरे घुटनो से ऊपर बस मेरे कमर के हिस्से को ढक रहा था,रॉकी का हाथ मेरे नग्गे जांघो को छू रहा था,वो मेरे पैरो को हवा में उठाकर मुझेसर्वांग आसन करने की मुद्रा में ला दिया वो मेरे कूल्हों पर अपने हाथ रखकर मसलने लगा ,मैं थोड़ी देर वैसे ही रहकर हलासन की मुद्रा में चली गई ,अब मेरा पैर मेरे सर के पीछे था और मेरे कूल्हे रॉकी के कमर से टकरा रहे थे,ऐसे तो इसे करने में मुझे रॉकी की कोई मदद की जरूरत नही थी लेकिन इसका एक फायदा ये होता था की मैं गर्म हो जाती थी और मेरा आलस भाग जाता था ,थोड़ी देर में ही मेरा सांस भरने लगा और मैं सामान्य स्थिति में आ गई ,पता नही रॉकी के दिल में क्या आया वो मेरे पेट में अपना हाथ रखकर थोड़ा सा सहलाया ,मेरी टीशर्ट खिसक कर ऊपर चली गई थी जिससे मेरे पेट का स्थान साफ नंगा था,वो अपनी एक उंगली मेरे नाभि में घुसा कर हिला दिया मैं हँस पड़ी ..
“क्या कर रहे हो यार “
वो बिना कुछ कहे ही मेरे कमर के नीचे को सहारा देकर उठाने लगा,अब मैं किसी समकोण त्रिभुज की तरह हो गई थी मेरे कमर और पेट गले तक जमीन से ऊपर थे सर नीचे टिका था और पैर लंब बनाते हुए जमीन से टिके थे ,इसे योग में सेतुबंधासन या ब्रिज पोज भी कहते है,रॉकी मेरे कूल्हों को फिर से मसलता हुआ मेरे थोड़ा नीचे होकर मेरे नंगे पेट को चुम लिया ,मैं थोड़ा हँसी लेकिन हिल नही सकती थी ,मैं सामान्य होकर उसे झूठे गुस्से से देखा वो थोड़ा मुस्कुराया ,मैं मन में सोचने लगी की क्या मैं ज्यादा आगे जा रही हु ,लेकिन मुझे लगा की ये तो नार्मल है ,मैं फिर अपना मुह जमीन की ओर कर लेट गयी ,और अपने कोहनियों के सहारे थोड़ी उठी,मैं plank pose में थी ,इससे मेरे पेट और कमर के मसल्स में पूरा जोर पड़ रहा था,रॉकी मेरे पीछे आकर मुझे घूरने लगा ,मुझे पता था की वो मेरे किस अंग को देख रहा है ,मैं पास लगे दर्पण में अपने को देखी ,सचमे मेरे कूल्हे इतने भरे हुए और कसे हुए लग रहे थे की कोई भी मर्द इसे देखकर मचल जाय वो तो मेरा पुराना आशिक था,मैं फिर से अपने हाथो के सहारे अपने शरीर को उठाने लगी जबकि मेरा पैर अब भी जमीन पर था ,एक तीर के नोक की तरह मेरा शरीर उठ गया था, downword dog pose ,रॉकी मेरे पेट को पकड़कर मुझे सहारा देने के बहाने मेरे कमर से नीचे मेरी योनि के पास वाले हिस्से को छूने लगा था,मैं अपनी आंखे बंद कर कुछ देर उसी स्थिति में टिकी रही फिर से सामान्य होकर मैं भुजंगासन करने की स्थिति में आयी ,अब मेरे हाथ जमीन पर थे और पैर जमीन पर थे ,मेरा धड़ किसी धनुष की तरह उठा था,ये बाकियों से आसान था इसलिए रॉकी मेरे पीछे आकर मेरे ऊपर ही लेट गया मैं उसका भार भी उठा पा रही थी ,उसका हाथ मेरे स्तनों पर जाकर उसे मसलने लगा ,मेरा दिमाग थोड़ा खराब हुआ लेकिन इतने देर से हो रहे वॉर ने मुझे थोड़ा कमजोर भी तो कर दिया था,मैं लेटकर थोड़ा रिलेक्स करने लगी ,वो अभी भी मेरे पीछे था और मेरे ऊपर सोया था ,मैं पेट के बल सोई हुई थी ,मैंने उसका अकड़ा हुआ लिंग अपने कूल्हे पर गड़ाता हुआ पाया ,मेरे होठो से एक मुस्कान निकल गई लेकिन मैं कोई भी एक्ट नही करना चाह रही थी मैं उसका कोई भी जवाब नही दे रही थी ,उसकी हिम्मत और भी बढ़ गई और वो मेरे स्तनों को मसलने लगा ,वो अभी अभी बहुत आराम से उसे सहलाते हुए मसल रहा था,मेरे होठो पर मुस्कान और बढ़ गई और साथ ही मेरी योनि का पानी थोड़ा ज्यादा ही निकलने लगा था,वो फिर से मेरे कूल्हों पर अपने लिंग का वॉर करता है ,
“आह रॉकी “
मैं पलट कर उससे लिपट गई ,अब उसका कड़ा अकड़ा हुआ लिंग मेरी योनि के मुहाने पर रगड़ खा रहा था ,मैं बहुत ही पागल सी हो गई थी मैं उसे फिर से कस कर जकड़ लिया वो मेरे होठो पर अपनी जीभ घुसने की कोसीसे करने लगा लेकिन मैं उसके लिंग की दीवानी थी ना की उसके साथ मुझे इंटिमिसि चाहिए थी ,थोड़ी देर तक वो अपनी जीभ मेरे मुह में घुसने का प्रयत्न भी करने लगा आखिर मैंने अपना मुह खोल कर उसे उसमे जगह दे दी ,लिप किश के सबसे बढ़ी खासियत ये ही की वो जिस्म से ज्यादा भी कुछ चीजो को जोड़ देती है ,इसमें एक इमोशन का प्रवाह एक दूसरे के लिए हो जाता है ,मेरी पकड़ रॉकी पर जोरो से बढ़ने लगी थी वही रॉकी मुझे पागलो की तरह किस कर रहा था,आज से पहले भी मुझे इस तरह किस कर चुका था लेकिन आज वो पागलो जैसे किस कर रहा था,शायद मैंने उसे बहुत तड़फाय था,मेरी और उसकी सांसे भारी होने लगी थी तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी मैं उसे देखने के मूड में तो नही थी लेकिन ये विकास जी का काल था,मैंने उनके लिए अलग ही रिंगटोन सेट कर रखा था,मैंने रॉकी को धक्का देकर हटाया …
“अरे छोड़ो ना काल को “
“विकास जी का काल है “
“जाने दो ना तो आओ मेरे पास “
“छोड़ो मुझे “
मैं उसे हटा कर काल रिसीव कर लिया ,मेरी सांसे अभी भी बहुत तेज थी ,
“क्या कर रही हो जान कब आओगे “
“बस थोड़ी देर जान ,वो अभी एक्सरसाइज कर रही थी “
मैं उनसे बात कर रही थी की रॉकी पीछे से आकर मेरे कूल्हे पर जोर से चाटा लगा दिया ,मैं हल्के से मुस्कुराई लेकिन उसे झूठे गुस्से से नजर दिखाई .काल रखकर जैसे ही मुड़ी रॉकी ने मुझे फिर से पकड़ लिया ,
“ये साला तेरा पति पूरा फ्लो ही बिगड़ दिया “
“तमीज से बात कर मेरे पति है वो “
“लेकिन तू तो मेरी है
मेरा दिमाग उसके लिए फिर से खराब हो गया मैंने एक जोर का धक्का देकर उसे अपने से अलग किया और गरजि
“खबरदार जो उनके बारे में ऐसा बोला तो ,मैं सिर्फ उनकी हु समझ गया ,अब चल वो बुला रहे है देर हो रही है मुझे “
वो थोड़ी देर के लिए मुझे देखता रहा ,वो जानता था की अगर मैंने ना कह दिया तो मुझे मनाना असंभव होगा ,वो अपनी गलती पर थोड़ा दुखी जरूर हुआ फिर मेरे पीछे पीछे कमरे से निकल गया ………..
नोट = दोस्तो जितने भी आसन मैंने ऊपर कहानी में बताये है ,उसे आप सभी नेट से सर्च कीजिये और अपनी जीवन में स्थान दीजिये ,आप किसी भी लिंग के हो ये अपनी सेक्स लाइफ में चार चांद लगा देगा ,……..
वर्तमान में ….
रॉकी के बारे में सोच सोच कर और गुजरे हुए पुराने यादो को महसूस कर मेरे अंदर की आग फिर से भड़क उठी थी मेरी योनि ने रस छोड़ना शुरू कर दिया था,मैं अपने आधे ग्लास को एक ही सिप में पूरी तरह से खाली कर उठी मेरी नजर विकास जी पर पड़ी,कितनी मासूमियत से सोए हुए थे ,मैं उनके पास जाकर उनके गालो में एक किस ले लिया ,मेरी नजर मेरे मोबाइल पर गई जो अभी अभी बीप की आवाज से मुझे सतर्क किया था,मेसेज रॉकी का ही था,
‘आज सुबह की एक्सरसाइज जिम में मैं तैयार होकर आता हु ‘
मैंने समय देखा अभी 4 ही बजे थे लेकिन ये हमारे उठाने का समय था,अगर अभी घर में होते तो विकास जी भी उठ जाते,थे ,जब से विकास जी ने रॉकी को देखा था वो भी एक्सरसाइज,योगा और जॉगिंग में बहुत ध्यान देने लगे थे,मुझे लगता है की उन्हें रॉकी से थोड़ी जलन होती होगी ,वी आजकल अपने हेल्थ पर बहुत ही ध्यान देते है जिसका असर मुझे बिस्तर में भी देखने को मिलता है ,वो अब बिस्तर में कमाल के होते जा रहे है ,मुझसे खुसनशिब लड़की और कौन होगी जिसके पास एक बॉडीबिल्डर बॉयफ्रेंड है ,बहुत प्यार करने वाला और संतुस्ट करने वाला पति है और कुछ पुराने कुत्ते है जो की मेरे इशारों पर मेरी चाटते है ….
मेरे चहरे में फिर से एक मुस्कान आ गई ,रात को विकास जी के साथ किये प्यार के बाद मैंने एक झीनी सी नाइटी बस पहने थी अंदर कुछ और नही पहना था,मैंने अपनी योनि की दीवार पर अपनी उंगली चलाई ,सच में बहुत गीली हो गई थी ,मैं मुस्कुराते हुए अपने बाथरूम में जाने लगी तभी किसी ने कमरे में दस्तक दी ,वो बहुत ही हल्की सी दस्तक थी ,मैं नही चाहती थी की विकास जी की नींद खुल जाय मैंने तुरंत जाकर दरवाजा खोल दिया ,रॉकी खड़ा हुआ मेरे हुस्न को निहार रहा था ,उसे देखता हुआ देखकर मुझे बहुत शर्म और गर्मी एक साथ ही महसूस हुई ,मैंने आंखों से उसे इशारा किया ,की क्या देख रहा है ,वो मेरे बूब्स की तरफ उंगली दिखा दिया ,मैं उसे प्यार से एक चपत मारी ,शायद उसका हौसला उससे और भी बढ़ गया ,वो अपने हाथो को मेरे कमर में ले जाकर खिंचता है और मुझे अपने से सटा लिया ,
मैं उसे धक्के से अपने से दूर हटाई ,और ना में इशारा किया ,
“तुम चलो मैं तैयार होकर आती हु “
“तुमने तो पागल बना दिया है काजल “वो फिर से अपने हाथ बढ़ाने लगता है ,मैं बीच में ही उसका हाथ झडक देती हु ,
और आंखों में सही का गुस्सा दिखती हु ,
“बोला ना समझ नही आता “मेरे शब्द अब थोड़े कठोर थे ,
वो मायूस सा चहरा बनाये जिम के लिए निकल पड़ता है ,मैं पीछे मुड़ी विकास जी अब भी अपने सपनो में खोये हुए थे ,मैं बाथरूम में घुस गई ,तैयार होकर मैं जाने को हुई मैंने अपना फेवरेट जिम कॉस्ट्यूम पहना था,टाइट स्पोर्ट स्लेवलेस टीशर्ट और छोटा सा स्पोर्ट निकर जो मेरे घुटनो के ऊपर और कमर के कुछ ही नीचे थे ,वो बहुत ही कंफर्टेबल था,मैं फिर से विकास जी के चहरे में किस करके चली गई ……………
(दोस्तो अब कहानी कभी विकास के तो कभी काजल की नजरो से चलेगी ,काजल की बची हुई पास्ट की बाते समय समय पर क्लियर होती जाएंगी )
विकास की नजरो से ——-
गालो में पड़ा एक प्यार भरा किस और मोबाइल की बीप ने मेरी नींद तोड़ी ,मुझे आभास हो गया था की ये मेरे उठाने का समय है ,मैं आजकल लगभग 4 बजे ही उठ जाय करता हु ,जब पत्नी इतनी हसीन और गर्म हो तो उसे संतुस्ट करने के लिए अपने को भी फिट रखना जरूरी होता है ,मैं हल्के से आंखे खोलकर देखने लगा ,मैं नही चाहता था की काजल को मेरे जगाने का पता चले ,वो मेसेज पड़ती है और फिर अपने योनि में उंगली ले जाकर उसे सहलाती है ,मेरे दिमाग की दही हो रही थी की आखिर इस मेसेज में ऐसा क्या था ,वो बाथरूम जाने को हुई लेकिन तभी किसी ने दवाज़े पर दस्तक दी ,जैसा की मुझे पूरा यकीन था वो रॉकी ही रहा होगा,आज काजल से प्यार करने के बाद से ही पता नही उसने अपने अंतःवस्त्र पहने थे या नही ,जितना मुझे पता था वो बस अपने झीनी सी नाइटी में ही बाहर गई होगी ,मैं उठकर उसे देखने लगा ,रॉकी ही था जो उसे पकड़े हुए था लेकिन काजल ने उसे अपने से दूर हटा लिया ,मुझे पता था की मेरे होते इस रॉकी की दाल नही गलने वाली है ,काजल ने उसे गुस्से में कुछ कहा,ये मुझे उसके मायूस चहरे को देखकर ही आभास हो गया था,काजल फिर से आयी और बाथरूम में गुस गई ,मैंने जल्दी से अपना मोबाइल खोलकर उसके मेसेज देखे ,रॉकी ने वो मेसेज भेजा था और उसमे जिम आने की बात थी ,इसपर काजल ने अपने योनि में उंगली क्यो की ,मेरे दिमाग से बाहर थी ,काजल कभी मेरे समझ ने नही आयी ,मुझे बस इतना ही पता था की वो मुझसे और मैं उससे दिलो जान से मोहोब्बत करते है …….
काजल तैयार होने लगी मैं अब भी सोने की एक्टिंग कर रहा था,थोड़ी ही देर में वो अपने कपड़े पहन कर तैयार हुई और फिर से मेरे गालो में किस कर वँहा से चली गई ,मैं उसे जाते हुए देखने लगा ,उसकी निकर उसके जांघो में कसी हुई थी और उसके उठे हुए गोल गोल कूल्हे पूरी तरह से कपड़े में चिपके हुए झांक रहे थे ,मेरा लिंग तो फुंकार मारने लगा था ,दिल किया की जाकर उसे फिर से बिस्तर में पटक दु ,लेकिन मैं तो रुक गया ,अब पता नही रॉकी का क्या हाल होने वाला था ,,,,,,
मैं धीरे से उठा और फ्रेश होकर बाहर निकाला अब तो रोज ही एक्सरसाइज की आदत सी हो गई थी ,मैं जिम की तरफ जाने लगा ,बड़े कांच के सीसे लगे थे जंहा से अंदर का पूरा नजारा साफ दिख रहा था ,अंदर केवल काजल और रॉकी ही थे ,अभी रॉकी सपोर्ट कर रहा था और काजल बेच प्रेस कर रही थी ,काजल के उन्नत स्तनों को देखकर किसी का भी मन पिघल जाय पता नही बेचारा रॉकी किस तरह अपने को कंट्रोल में कर रहा था ,जब वो उठी तो उसकी नजर मुझपर गई वो हल्के से मुस्कुराई मैं अंदर गया और उससे लिपट गया ,
“बड़ी जल्दी उठ गए आप “
“रोज ही उठ जाता हु”
“मुझे लगा की आज आप देर से उठाओगे इसलिए डिस्टर्ब नही की “
“ह्म्म्म तो ये है तुम्हारा जिम ,बहुत बढ़िया है ,इसे देखकर तो कोई भी बॉडी बनाना चाहेगा “
रॉकी को लगा होगा की मैं जिम की बात कर रहा हु लेकिन मैंने ये काजल के कूल्हों को दबाकर कहा था ,वो मुझे हल्के से चपत लगा देती है और रॉकी की तरफ इशारा करती है ,
काजल की हर अदा में उमंग था ,एक नशा सा था,और इसके दीवाने बहुत थे,जिनमे सबसे बड़ा दीवाना तो मैं ही था,जो उसकी खुसी के लिए हर दुख सहने को तैयार बैठा था ,मैं बस उसे निहारता रहा और साथ ही साथ थोड़ी मोड़ी एक्सरसाइज भी कर रहा था ,लेकिन सच में काजल की अदाएं मेरे लिए भी जानलेवा थी ,मैं जोश में भरकर ज्यादा वेट भी उठा लेता था और फिर काजल मुझे देखकर हँस देती ,रॉकी मेरे मौजूदगी के कारण हर काम सम्हल कर रहा था ,वो किसी भी प्रकार का कोई भी जोखिम लेने को तैयार नही था,एक्सरसाइज के बाद रूम में जाकर मैंने अपनी सुबह से इकट्ठी की हुई पूरी भड़ास काजल के ऊपर निकाल दी ,हम दोनो फिर से अपने बिस्तर पर नंगे थे ,
“ठीक है जान अब मैं चलता हु ,”
दोनो के होठ मिले
“फिर कब मिलोगे “
“आज फिर से आ जाऊ क्या “
मैं उसके बदन को सहलाते हुए कहा
“नही रोज इतने दूर आने की जरूरत नही है “
“तो …”
“मैं आ जाऊंगी “
“अच्छा तो तुम्हे दूर नही होगा “
“आपके लिए कुछ भी “
“कुछ भी नही चाहिए “
“तो क्या चाहिए “
“तुम “
वो मेरे आंखों को देखने लगी ,हा मेरी बात 100 प्रतिशत सच थी ,
“मैं तो आपकी ही हु “
वो मेरे सीने से आकर लग गई ,ना जाने क्यो पर उसे छोड़ने का मन ही नही होता था ,
“मुझे जाना है “
“हम्म्म्म “
“क्या ह्म्म्म “
“कुछ नही बस …..”उसकी आंखों में पानी था
“क्या हुआ “
“सॉरी जान “
“क्यो “
“बस ऐसे ही “
“पागल “
मैंने फिर से अपने होठो को उसके होठो से मिला दिया ,ये सिलसिला चलता ही रहा जब तक की रॉकी ने हमे नाश्ते के लिए नही बुला लिया ,मैं नाश्ता कर अपनी मंजिल को निकल गया ,और जैसे मुझे लगा था वो भी मेरे पीछे ही निकलने वाले थे ,
“मलीना कहा है “
मैं डॉ के पास पहुच चुका था,मैं उसके घर में था,जंहा मलीना रुकी हुई थी ,
“वो निकल चुकी है ,अपने काम को लेकर वो बहुत वफादार है ,तुम्हारी तरह नही जिसे हर रात अपनी पत्नी की बांहो में ही चाहिए “
डॉ के तंज पर मेरी मुस्कुराहट बढ़ गई ,साला डॉ
“साले मेरी बीवी है ही इतनी खूबसूरत तो मैं क्या करू ,और तेरी क्यो जल रही है इतनी “
“भाई हमने शादी ही इसलिए नही की क्योकि हर खुसी दुख लेकर आती है ,अभी जिस खूबसूरती को लेकर तू खुश हो रहा है उसी को लेकर रोयेगा भी ,जब वो खुसबसूरती को दूसरा उपयोग करेगा “
सच में कभी कभी लगता है की इस डॉ को मार ही डालू लेकिन साला सच ही तो बोल रहा था,
“क्या करू यार मैं तो दीवाना ही उसका ,जब भी सोचता हु की वो किसी भी कारण से मुझसे अलग हो जाएगी तो कांप जाता हु “
“खैर छोड़ आज का क्या प्लान है “डॉ को जब लगा की मेरा मूड थोड़ा खराब हो रहा है उसने जल्दी से अपनी बात बदल दी
“हमारा कुछ प्लान भी था क्या “
“बनाना तो पड़ेगा ऐसे तू रोज टाइगर के ऑफिस में जाकर क्या करेगा ,बस रिहाना (टाइगर की सेकेट्ररी) को ही निहारेगा “
“है तो वो भी माल ,तू बता की क्या करना है और जूही ने रिहाना की फ़ोटो काजल को क्यो दी होगी”
“क्या पता जूही से बात तो नही हो पाई है मेरी और हो भी जाय तो उससे सब कुछ निकलवाना मुश्किल है “
“तो अब “
“चलते है टाइगर के अड्डे में देखते है तेरी बीवी के कारनामे “
मैं डॉ को झूठे गुस्से से देखा क्योकि मेरे मन में भी काजल को देखने की तीव्र इच्छा हो रही थी,
मैंने मोबाइल से अपने उसके ऑफिस के कैमरे को एक्सेस किया लेकिन काजल और रॉकी कही नही दिखे शायद वो यंहा आये ही नही थे ,
हम टाइगर के ऑफिस पहुचे ,अब गार्ड भी हमे पहचानने लगे थे इसलिए बस हमारी तलाशी लेकर ही हमे अंदर भेज देते थे,टाइगर वँहा नही था लेकिन रिहाना बैठी हुई थी ,
“हाय रिहाना कैसी हो ?”
यू तो हम कभी भी उससे डायरेक्ट बात नही करते थे लेकिन आज कर रहे थे,क्योकि टाइगर कही दिख नही रहा था ,
“आइये बैठिए “उसने बड़े प्यार से कहा
“टाइगर कहा है “
“अरे आपके पास तो कैमरे के एक्सेस है देख लीजिये “
“सभी के तो नही है ना “
वो हल्के से मुस्कुराई और और दीवार में लगे बड़े से tv स्क्रीन की तरफ उंगली की जिसमे बहुत से कैमरा के फुटेज देख रहे थे ,मैं देखकर चौक गया की टाइगर ,रॉकी और काजल के साथ बैठा हुआ था ,वो भी ऐसे जगह जहा का फुटेज मैं एक्सेस नही कर पा रहा था ,यानी ये कोई दूसरी जगह थी, लग तो बार जैसे ही था …
“ये कौन सी जगह है और टाइगर अपने टारगेट को छोड़कर यहां क्या कर रहा है “
“कुछ भी नही आपकी मालकिन पर इनका दिल आ गया है वो दोनो को फसाने के फिराक में है आपका काम भी बन जाएगा और उनलोगों भी थोड़ा मजा उठा लेंगे ,और रही टारगेट की बात तो वो हमारे निशाने पर ही है ,वो अभी गोदामो में गई है छानबीन करने ,उसे वही करने दो जिसके लिए वो आयी है “
मैं डॉ की तरफ देखा वो मुझे आंखों ही आंखों से सांत्वना देता है ,मैं बैठा हुआ उस फुटेज को देखने लगा जिसमे साफ दिख रहा था की काजल टाइगर को बहुत भाव दे रही थी और रॉकी बस बैठा हुआ दारू गटक रहा था ,काजल टाइगर से हँस हँस कर बाते किये जा रही थी ,आवाज तो आ नही रही थी लेकिन टाइगर जरूर कुछ ऐसा बोल रहा था जिससे काजल उससे इम्प्रेश हुए जा रही थी ,वो कभी कभी अपनी आंखे चौड़ी कर लेती कभी उसे झूठा गुस्सा दिखाते हुए हाथो से मारती ,वही सब नारी सुलभ काम जो एक लड़की किसी को आकर्षित करने के लिए करती है और वही जो एक लड़की किसी के आकर्षित होने पर करती है ,थोड़ी देर में ही रॉकी उठाकर वॉशरूम जाता है और टाइगर काजल से कुछ ऐसी बात बोलता है जिससे उसका चहरा थोड़ा घबरा जाता है ,वो थोड़ी अधीर हो जाती है ,तभी वो उससे कुछ कहती है और टाइगर मुस्कुराता है साथ ही वो कैमरे की तरफ देखता है जैसे की हमे ही देख रहा हो ,वो अपना मोबाइल निकाल कर किसी को काल करता है ,और काजल से थोड़ा दूर हो जाता है ,तब तक रॉकी भी आ चुका था ,ये काल रिहाना को किया गया था,
“हा ,हा आ चुके है ,जी हा ,हा देख रहे है “
वो हमारे तरफ देखकर मुस्कुराती है ,
“ओके “
वो काल रखती है इधर टाइगर भी काल रखकर उन लोगो के पास जाकर उनसे बात करने लगता है ,काजल लाल साड़ी में कमाल की लग रही थी ,
“क्या कह रहा था टाइगर “
“आप लोगो को पूछ रहा था ,और आपसे कहा है की आपकी मालकिन जल्द ही उनके साँचे में ढलने वाली है “
मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई थी ,क्या करू समझ नही आ रहा था ,मैं अपने आप से कहने लगा तू इसका मजा लेगा मजा लेगा,लेकिन दिल की गहराइयों से इस बात को अब भी स्वीकार नही कर पा रहा था ,
तभी स्क्रीन की तरफ ध्यान गया और काजल और टाइगर उठाकर किसी दूसरे कमरे में चले गए जबकि रॉकी अब भी बैठा हुआ दारू ही पी रहा था ,साला रॉकी के ऊपर मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था ,
“क्या हुआ सर आप इतने बेचैन क्यो लग रहे है ,”
“कुछ नही ये साला टाइगर कर क्या रहा है उसे अपने काम से काम रखने बोलो “मेरा दिमाग खराब हो रहा था वही रिहाना मुस्कुराने लगी
“और उस कमरे का फुटेज कहा है “
“सर वो टाइगर सर का प्राइवेट कमरा है ,आप अधीर ना हो टाइगर सर किसी से जबरदस्ती नही करते ,जब तक उनका मन नही होगा वो कुछ भी नही करेंगे ,और ऐसे भी वो आपकी मालकिन है बीवी नही ….सही कहा ना सर “
मैं थोड़ा झेप गया ,मैं जिस तरह से व्यवहार कर रहा था ये ना तो मेरे ना ही काजल के मिशन के लिए उपयुक्त था मैं थोड़ा शांत हुआ ,
“हा लेकिन यार थोड़ी जलन तो होती है ना हम यंहा बैठे बस देख रहे है और तुम्हारा सर साला बड़े मजे कर रहा है “
रिहाना फिर से हँसी ,आप लोगो के लिए कुछ मंगावू ,
“ आई थिंक विस्की की जरूरत पड़ेगी हमे “डॉ ने कहा
रिहाना मुस्कुराते हुए इंटरकॉम से विस्की का ऑर्डर दे देती है ,
लगभग 15 मिनट बीत जाता है और हमे काजल और टाइगर बाहर निकलते हुए दिखते है ,काजल के बाल बिखरे हुए वो उन्हें सम्हाल रही थी ,उसके होठो की लिपिस्टिक भी थोड़ी बिगड़ गई थी ,टाइगर के चहरे में एक विजयी मुस्कान थी और वो फिर से कैमरे में देखता है और आंख मार देता है मेरे दिल के साथ झांटे भी सुलग जाती है मैं विस्की को एक ही बार में अपने हलक के अंदर उतार लेता हु ,काजल के होठो में भी रॉकी को देखकर मुस्कान आती है ,वही रॉकी ठगा सा उसे देख रहा था,मेरे अंदर पता नही क्या बवाल मचा मैं उठ कर जाने लगता हु ,
“कहा जा रहा है ,”डॉ जानता था लेकिन फिर भी वो पूछा
“कुछ नही कुछ काम याद आ गया “
मैं निकल कर जा रहा था की रास्ते में मुझे टाइगर मिल गया
“यार तेरी माल तो जबरदस्त है ,क्या रसीले होठ है उसके मजा आ गया,कुछ दिन और फिर देखना उसकी रसीली चुद भी भर दूंगा हा हा हा “
मैं उसे बस एक बेबस सी मुस्कान देकर बाहर जाने लगा
“अरे कहा जा रहा है “
“काम है थोड़ा आता हु थोड़ी देर में “
मेरे आंखों में आंसू थे और मैं नही चाहता था की टाइगर उसे देखे मैं जल्दी से बाहर निकला और मलीना को काल लगाया ,
“मैं तो अभी गोदाम में हु क्या हुआ “
“डॉ के घर पहुच जल्दी “
मैं फोन रखकर सीधे डॉ के घर पहुच गया ,और एक विस्की की बोलत उठाकर पीने लगा ,मैंने जितना सोचा था ये उतना आसान नही था,मलीना के आते ही मैं उसपर ऐसे झपटा जैसे की कोई भूखा भेड़िया अपने शिकार पर
“क्या हुआ आपको “
वो बोल ही पाई थी लेकिन मैं उसे पास की दीवाल से सटा दिया ,वो एक काले रंग के फ्रॉक में थी ,मैं उसे पलटा और उसकी पेंटी नीचे कर अपना लिंग उसके अंदर घुसा दिया ,
“आह मार डालोगे क्या क्या हुआ है आपको “
मैंने उसकी बिल्कुल नही सुनी ,उसकी योनि अब भी सुखी थी मैं तेल की एक बोलत उठा लाया और फिर उसे लगा कर जोर जोर से धक्के मारने लगा वो बेचारी बिना कुछ कहे बस रो रही थी और बड़ी मुश्किल से अपने हाथो के सहारे दीवाल से टिकी हुई थी ,फच फच की आवाज से कमरा गूंज रहा था ,जब मलीना शांत हुई तो मेरा साथ देने लगी लेकिन वो ज्यादा देर तक नही टिक पाई ,मेरी नजरो में काजल का वो रूप और टाइगर की कही बात घूम रहे थे ,लाल साड़ी में लिपटी हुई काजल ,बिखरे हुए बाल नंगी कमर में टाइगर का मजबूत हाथ ,और होठो के लिपिस्टिक का फैला होना ,
“मादरचोद मादरचोद “
“आह क्या हुआ है जान आह …कुछ आह….बताओ आह …’मैं उसके मुह को अपने हाथो से दबा कर बंद कर दिया और उसे धक्के लगाने लगा वो एक बार झड़ी ,और सुस्त हो गई लेकिन बड़ी मुश्किल से ही सही अपने पैरो में खड़ी थी वो पूरी तरह से झुके जा रही थी मैं उसके कमर को पकड़े हुए धक्के पर धक्के लगा रहा था आखिर में मेरा वीर्य भी निकाला मैंने अपने लिंग को उसकी योनि से निकाला ही था की पिचकारी फूटी और सीधे मलीना के बालो तक गई पहली धार मलीना के बालो में फस गई ,वही फिर छोटी छोटी धार उसके पीठ ,कूल्हों और कमर के बाकी हिस्सो को भिगो दिया …..
वो मुझसे अलग हुई मैं जमीन में ही लेट गया ,
