बीवी के कारनामे 6

बीवी की सहेली की चुदाई

मैं सुबह से ही निकल गया साथ में वरुण और रेणु भी थे,कजल ने भरी हुई आंखों से मुझे बिदाई दी,उसका चहरा देख कर मुझहे भी रोना आ गया था….

मैं अपनी गाड़ी में बैठा अपने मोबाइल को निकलता हु सोचा था की डॉ को मेसेज कर प्लान के बारे में कुछ पूछ लेता हु,तभी मुझे याद आय की यार काजल का मेसेज चेक किया जाय,

रॉकी के कुछ मेसेज आये थे ,पहला मेसेज मेरे निकलने से पहले का था,

‘so ready फ़ॉर एडवेंचर ‘

काजल ने उसका कुछ रिप्लाई नही किया था,रिप्लाई मेरे जाने के बाद किया गया था,

‘ह्म्म्म ‘

बस इतना ही रॉकी ने शायद तुरंत मेसेज किया

‘ओके आज कुछ शॉपिंग करनी है फिर शाम से क्लब चलेंगे ‘

‘किस चीज की शॉपिंग ?’

“अरे यार तुम्हारे लिए कुछ सेक्सी लिंगरिस लेना होगा ना ,ताकि तुम कहर ढा सको ‘

रॉकी ने साथ ही कुछ स्माइल्स भी भेजे थे,

‘नही कोई जरूरत नही है मेरे पास काफी है’

‘अरे नही कुछ और सेक्सी टाइप ‘

‘क्या होता है और सेक्सी आखिर में तो उतारना ही है’

काजल ने गुस्से वाले स्माइल्स भेजे

‘तुम खुस नही हो क्या बोलो तो प्लान केंसल करे ‘

‘नही मैं ठीक हु पर ….छोड़ो ठीक है चलते है शॉपिंग के लिए ‘

‘कब आएंगे विकास सर ‘

मैं तो पड़ के चौक गया साला मुझे मेसेज में भी सर बोल रहा है,शायद कभी काजल ने उसे इस बात के लिए डांटा रहा होगा वरना अपनी आइटम के पति हो कौन सर बोलता है,

“क्या पता जब भी आएंगे तो पता चल जायेगा,मैंने रेणु को बोल रखा है की जब आओगे तो बता देना ‘

‘चलो अच्छा ही मैं आधे घंटे में पहुचता हु ,ऐसे आज पहन क्या रही हो “

रॉकी ने फिर से स्माइल भेजी

‘क्या पहनू बताओ अब तो तुम मेरे पति बनकर जा रहे हो ‘

रॉकी ने वो आंखों में दिल वाली बहुत सी स्माइल भेजी

‘वो काली वाली साड़ी ,कातिल लगती हो और साथ में हर चीज मैचिंग हर चीज मतलब हर चीज …’

इस बार काजल भी हँसी (जैसा उसने स्माइल में भेजा था)

‘ठीक है मैं रेडी हो रही हु ‘

‘मैं आधे घंटे में पहुचता हु ‘

अभी मुझे निकले 15 मिनट ही हुए थे,मैं मोबाइल एक साइड में रख एक गहरी सांस ली …..

दिल में अजीब सी चुभन हो रही थी और साथ ही उत्तेजना में लिंग भी खड़ा हो रहा था,एक अजीब सी कसीस ,चुभन ,जलन,लेकिन सब के साथ एक उतेजना और मजा भी था,

रेणु आगे वरुण के साथ बैठी थी,दोनो बातो में मसलुफ थे,दोनो के बीच क्या हुआ था वो मेरे लेपटॉप में रेकॉर्ड पड़ा था लेकिन उसे देखने का समय ही मुझहे नही मिल पा रहा था,

अब रेणु जैसा हुस्न और वरुण का जवान खून मिले तो कुछ तो होना ही था,

वहां भी मुझहे एक अच्छा बंगले नुमा घर दिया गया था,ऐसे तो घोर जंगल था लेकिन बड़ा ही सुहानी सी जगह थी ,यहां से शहर की दूरी भी उतनी ही थी जितनी की केशरगढ़ से थी,सबसे अच्छी बात थी की बाजू वाला गांव ठाकुरो का था,जो की डॉ के अच्छे दोस्त थे,वीर और बाली ठाकुर ,वो मुझसे मिलने आने वाले थे,

दूसरे बाजू था तिवारियो का गांव ….खेर मुझे क्या करना है,मुझे तो अपनी तैयारी करनी थी,

यहां नॉकरो के लिए एक कमरा था,वरुण का बोरिया बिस्तर वही डाल दिया गया था,और अंदर दो बेडरूम था जिसमे एक में मैं और एक में रेणु का समान रख दिया गया था,वरुण मिश्रा का जासूस था जो जासूसी छोड़कर रेणु के घाघरे में घुस बैठा था ,मेरे लिए इससे काम और भी आसान हो गया क्योकि मिश्रा वरुण को मेरे साथ भेजकर निसफ़क्र था ,और रेणु उसे अपने से अलग ही नही जाने देती थी,

मैंने फोन कर सबसे पहले फोन काजल को किया वो शहर के लिए निकल चुकी थी ,और आज से वही होटल में रहने वाली थी ,दूसरा काल मलीना को किया गया ,वो डॉ के पास पहुच चुकी थी घर में बोल चुकी थी की किसी रिसर्च वर्क के लिए बाहर जा रही है,वो दो दिन पहले से निकल चुकी थी ,तीसरा काल डॉ को किया जिसने बताया की वो इकबाल से मेरी मीटिंग फिक्स करा दिया है,

मैं वहां से निकल कर उस गांव में घूमने लगा ,गांव कम ये कस्बे सा था,अपने ऑफिस के बंदे जिसका नाम सुरेश था से मिल कर काम की सभी बाते भी हो चुकी थी,रात होने को थी की मेरे ऑफिस में ही एक गाड़ी आकर रुकी वहां से कुछ लोग ऑफिस में घुसे जिसे देख कर मेरे ऑफिस का स्टाफ खड़ा हो गया,

“अरे ठाकुर साहब आप यहां आइए आइये कुछ परेशानी है क्या “

वहां के मेन इंचार्ज की भी जुबान थोड़ी लड़खड़ा गई थी,6फुट 2इंच के गोरे से दो बंदे जिनके माथे में लाल रंग का तिलक था ,और चहरे में किसी राजा की तरह तेज ,सामान्य कपड़ो में थे लेकिन फिर भी खानदानी लग रहे थे ,चौड़ी छाती और बड़ी मांसल भुजाओं के मालिक ये दोनो देखने से ही इनकी शक्ति का अहसास हो रहा था,मैं अपने कुर्सी में बैठा ही था जिसे देखकर इंचार्ज को पसीना आ गया,वो ना मुझे कुछ बोल सकता था ना ही उन्हें,

“ये नए है आज ही आये है,इन्हें यहां कुछ स्पेसल काम से भेजा गया है,ऑफिसर है वन विभाग के “

उसने जिसे सफाई देते हुए कहा ,उनके और मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गई,वो मेरी तरफ बढ़े और मैं भी खड़ा होकर उनका स्वागत किया वो मुझसे हाथ मिलाकर मेरे सामने के चेयर में बैठ गए,एक बैठा लेकिन दूसरा पीछे हाथ बांधकर खड़ा रहा ,उनके साथ ही एक काले रंग का आदमी भी था,डील डौल से वो भी इनका भाई भी लग रहा था लेकिन शायद वो उनका सेवादार था,वो भी दूसरे के साथ पीछे हाथ बांधकर खड़ा रहा ,,,,

बैठे हुए शख्स ने इंचार्ज से कहा ,

“ये हमारे मित्र है …”

उनके जान में जान आई

“जाइये कुछ चाय वगेरह लाइये “

मैंने सुरेश से कहा वो झट से वहां से निकल गया

,चेयर में बैठे शख्स ने कहना शुरू किया ,

“मेरा नाम वीर ठाकुर है और ये मेरा भाई बाली ,और साथ में ये मेरा भाई कलवा है हम खून से तो भाई नही लेकिन दिल से भाई ही है….”

“मैं विकास “

“हा डॉ ने बताया था ,हम आपकी क्या मदद कर सकते है ,”

“मुझे बाजू बल चाहिए …”

“देखिए बाजू बल तो आपको इकबाल भी दिला सकता है,हमसे आपको जो भी मदद चाहिए होगी आप एक बार बोल दीजिएगा,जो काम आप करना चाहते है वो समाज के लिए बहुत जरूरी है और हम चाहकर भी इसे नही कर पा रहे है,ड्रग्स के डीलरों को तिवारियो का समर्थन मिला हुआ है और वो हमारे मुकाबले में बहुत ज्यादा ताकतवर है खासकर शहर में उनके बहुत ज्यादा वफादार है ,तो हम आपकी मदद छुपकर ही करे तो ये आपके और हमारे दोनो के लिए बेहतर होगा,”

“जी मैं आपकी बात समझ सकता हु,”

“हमारा प्रभाव इस क्षेत्र में ज्यादा है ,यहां हमरे रहते आपको कोई भी परेशानी नही होगी,बाकी इकबाल और डॉ के रहते आप चिंता मत कीजिये ,बस जिस लड़की को आप इस काम में लगा रहे है उसकी फ़ोटो आप हमे दे दीजिएगा ताकि हम उसकी सुरक्षा कर पाए …”

मैं अपने जेब से मलीना की फ़ोटो निकल कर उसे दे दिया ,

“ठीक है हमारे आदमी इसपर नजर रखेंगे “

“जी बिल्कुल बाकी जो भी हो आप हमे सूचित करे “

“जी “

सुरेश चाय लेकर आ चुका था,सभी चाय पीकर वहां से विदा लेते है,सुरेश एक चैन की सांस लेता है,

“अरे सर आप तो बड़ी पहुच वाले लगते है ,”

“क्यो “

“ठाकुरो से आपकी दोस्ती है ,मिश्रा जी आपके लिए सिफारिश करते है ,वाह …”

मैं हस पड़ा

“बस यार दोस्ती है सबसे ,तू कहा से हो और ऐसे क्यो कांप रहे थे”

“मैं भी इसी इलाके का हु सर और कांपु कैसे नही ये ठाकुर है ,आजकल तो इनसे जमीदार तिवारी भी काँपते है ,जानते है वीर ठाकुर की शादी तिवारियो की बेटी से हुई और इतना लड़ाई झगड़ा हुआ की तिवारियो के छोटे बेटे वीरेंद्र की भी जान चली गई …. और सुरेश की आंखों में कुछ आंसू आ गए …”

“अरे तुम्हे क्या हो गया ???”

मुझे सचमे समझ नही आया था,

“सर वीरेंद्र की पत्नी आरती मेरे मामा की लड़की है ,हम बचपन से साथ ही खेले थे उस बेचारी की क्या गलती थी शादी को अभी कुछ ही महीने तो हुए थे,मानता हु की ठाकुरो का दिल बहुत बड़ा है और तिवारी तो है ही कमीने पर जब भी वीर को देखता हु ना जाने आरती क्यो चहरा सामने आ जाता है,मैं लाचार हु सर मैं कुछ तो कर नही सकता, …”

सुरेश की आंखों में आंसू थे ,मैं उठकर उसे गले से लगा लेता हु जिससे शायद उसे थोड़ी शांति मिले ….

“तुम्हे क्या लगता है ये ठाकुर भरोसे के लायक है “

वो मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगा

“सर वो तो आपके दोस्त है ना “

“हा दोस्त है पर कोई सगे तो है नही ना “मैं हँसते हुए कहा

“अगर कोई जिम्मेदारी का काम इन्हें दिया जाय तो “

“सर आपको जो करना है कीजिये लेकिन मुझे इनसे दूर ही रखियेगा ,ये है तो बड़े अच्छे लेकिन वो साला बाली और कलवा एक नम्बर के कमीने भी है ,खासकर लड़कियो के मामले में,मुझे तो उनका चहरा भी देखना पसंद नही है….”

“चलो ठीक है कोई बात नही ,और मैं शायद सीधे साइट विजिट करूगा ,तुम्हारी जरूरत पड़ेगी तो काल कर लूंगा ,”

“ठीक है सर आप जैसा समझे वैसे भी मेरी यहां ज्यादा जरूरत पड़ती है ,”

मैं वहां से निकल कर अपने क्वाटर में आया ,समान जमा दिया गया था,साफसफाई भी हो चुकी थी और खाना भी रेडी था,

मैं खाना खा ही रहा था की काजल का काल आ गया ….

“हैल्लो जान खाना खा लिए “

“हा अभी बैठा हु और तुम “

“अभी खाई ,आपका काम वहां कैसे चल रहा है ,”

“आज ही तो आया हु जान ,सब कुछ जम चुका है …बस तुम्हारी बहुत याद आ रही है “

काजल कुछ देर को रुक गई शायद उसके आंखों में भी आंसू आ चुके होंगे

“मुझे भी ………”

थोड़ी देर तक दोनो ही कुछ नही कह पा रहे थे,मुझे उस सन्नाटे में कुछ आवाज आई जो काजल के तरफ से थी ,शायद किसी ने दरवाजा खोला था,पानी बहने की आवाज थी मानो बाथरूम की डोर खोली गई हो और फिर बंद की गई हो …

“कुछ तो कहो “

मैंने खामोशी तोड़ी

“आप मुझसे मिलने आओगे ना “

“जान कुछ ही दिनों की बात है …तुम यहां आ जाना “

“कब आउ…”

काजल सच में रो पड़ी थी

“अभी “

“मैं आ रही हु “

फोन काट दिया गया …

मेरे दिल ने जोर का झटका दिया सचमे काजल आ रही है ,मुझे तो यकीन ही नही हो रहा था,अभी रात के 9 बज रहे थे और ये जंगल था ,शाम यहां मुर्दो जैसे होती है और रात इतनी डरावनी और घनी की आपको अपना हाथ भी ना दिखे मैं सचमे डर गया और तुरंत ही काजल को काल लगाया …

इस बार काजल ने थोड़ी देर में काल उठाया …

“बस एक घंटा मैं और रॉकी आ रहे है…..”

“अरे सुनो तो …….”

मैं कुछ बोलता इससे पहले ही काल कट हो चुका था ,मैं फिर से काल करता हु

“बेटू रात बहुत हो चुकी है तुम कल आ जाना …”

मैंने एक ही सांस में कहा ….

“सर वो रूम में तैयार हो रही है …”

इसबार रॉकी ने काल उठाया था,

“तो तुम कहा हो “

“सर मैं तो अपने कमरे में था ,काजल ने मुझे जल्दी बुलाया और आपके पास जाने को बोला वो ऐसे बोली की मैं मना नही कर पाया ,मैं उसके रूम के बाहर खड़ा हु मुझे फोन देकर बोली की अगर आपका काल आये तो बोलना की बस एक घंटे में पहुच जाएंगे ….”

मैं जानता था की रॉकी अपने नही काजल के रूम में ही था,लेकिन मेरे लिए ये कोई विषय नही था,

“साले चूतिये हो क्या तुम लोग अभी आओगे और एक घंटे में कैसे पहुच जाओगे यहां मजाक है क्या,जानते हो कितना खतरा है यहां पर “

मैं गुस्से में आ गया था,

“सर काजल को कैसे समझाऊ ,मेरी बात तो वो सुनती नही कल एक क्लाइंट से इम्पोर्टेन्ट मीटिंग भी है और ये है की …”

मैं जानता था की किस क्लाइंट से मीटिंग थी …पर मैं अब क्या बोलू मैं थोड़ा शांत हुआ की की काजल की आवाज आई ,

और वो फोन ले ली

“जान मैं बस निकल रही हु ,और कुछ मत कहना बस एक घंटे,रॉकी बहुत अच्छी बाइक चलता है ,”

“रॉकी को दे “

“जी सर “

“अगर काजल को कुछ हुआ तो तेरे गांड में सरिया घुसा दूंगा ….”

उधर से कोई भी रिप्लाई नही आया और काल कट गया….

सुनी सी राह हो और किसी का इंतजार हो तो एक एक पल सदियों से लगते है,हल्की हवा के झोंके भी दर्द देने लगते है,और अगडाइयो में एक चुभन होती है,

घड़ी का वो कांटा आज पहली बार मुझे अपने होने का अहसास दिला रहा था,वो हर टक टक में मेरी बेताबी का इन्तहां लेने पर आमादा था,

“क्या हुआ साहब “

रेणु भी मेरे पास आकर बैठ गई

“कुछ नही काजल आने वाली है “

रेणु ने अपनी नजर थोड़ी चौड़ी कर दी

“अभी “

“हा “

“सच में साहब दीदी आपसे कितना प्यार करती है …”

मैं उसके चहरे को देखने लगा ,वो बड़ी मासूम सी लग रही थी ,ना जाने कौन सी ताकत होती है जो किसी भी का व्यवहार बदल देती है ,यही लड़की है जो कभी अपनी अदाओं से मेरे सामने मचला करती थी और आज यही है जो इतनी सभ्य और संस्कारी सी लग रही है,

दो चहरे होना शायद कोई मिथक नही है लेकिन ये पूरी तरहः से सच भी नही है,असल में माहौल और जिंदगी की मजबूरियां होती है ,कुछ आदते कुछ संस्कार जो हमे अलग अलग स्थानों में अलग अलग चहरे दिखाने पर मजबूर कर देते है…

सच ही कहा है हमारे पूर्वजो ने की जिंदगी एक माया है एक नाटक है और हम इसके किरदार…

कही वो लड़की एक बदचलन लड़की का किरदार निभाती है तो कही एक संस्कारी औरत बन जाती है ,कही कठोर तो कही नरम ,

मैं अपनी सोच में डूबा हुआ उसके चहरे पर थम गया था,वो मुझे ऐसे देखता पाकर थोड़ी शर्मा गई

“क्या हुआ साहब “

“कुछ नही आज तू अलग लग रही है,लगता है वरुण का नशा चढ़ रहा है ,

वो थोड़ी शरमाई …

“ थैंक्यू जो आपके कारण ऐसा लड़का मुझे मिला “

वो शर्मा गई थी

“कैसा “

मैं भी थोड़ी शरारत के मूड में था

“वो बहुत अच्छा है और अब तो समझ लो मेरा दीवाना हो गया है ,सोच रही हु इससे ही शादी कर लू “

मैं आंख फाडे उसे देखेने लगा इतनी जल्दी वो इसका दीवाना हो गया आखिर क्या कर दी …

“साहब आपको एक बात बताऊ मिश्रा जी रोज उसको फोन करते है और आपके बारे में पूछते रहते है,ये भी उनसे बहुत झूट बोलता है ,की वो आपके साथ है,प्लीज सम्हाल लेना अगर मिश्रा जी कुछ बोले तो …”

मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गई

“अच्छा बड़ी फिक्र हो रही है ..ठीक है और उसे बोलना की जब भी मिश्रा का फोन आये तो यही बोल दे की वो मेरे साथ है और मैं किसी काम में बिजी हु …”

“ठीक है साहब और एक बात और उसे मिश्रा ने आपकी जासूसी करने के लिए ही भेजा है ,पता नही मिश्रा को आपसे क्या ऐसा काम है ….लेकिन वो मुझे सब बताता है ..”

वो इठलाते हुए बताती है…

“ह्म्म्म ठीक है,उसे तो नही पता की तुम मुझे ये सब बताती हो “

“नही साहब मैं पागल हु क्या “

“और तुम्हारी मेडम को भी पता नही चलना चाहिए “

“जी साहब लगता है आपका उस मलीना से कोई चक्कर है ,साहब एक चीज बोलू काजल दीदी आपसे बहुत प्यार करती है उन्हें धोका मत देना ..”

उसकी आंखे बता रही थी की वो सच बोल रही है …

“मेरा कोई भी चक्कर नही है और काजल तो मेरी जान है ये तो तू भी जानती है ……”

तभी गाड़ी के रुकने की आवाज आती है,शायद दोनो पहुच गए थे,

काजल टी शर्ट सुर जीन्स में थी ऊपर एक जैकेट पहने हुए थी ,वो भागती अंदर आयी और मुझे देख कर वो दरवाजे में थी ठिठक गई,दोनो के नजर मिले और उसकी आंखे भीग गई……

वो हल्के पैरो से चलते हुए मेरे पास आई मैं अपनी जगह पर खड़ा उसे अपनी ओर आते देख रहा था,दोनो की नजर बस एक दूसरे की नजरो में ही खोई थी ,उसके पायल के थोड़े से घुंघरू हल्के हल्के से आवाज कर रहे थे,जैसे जैसे वो मेरे पास आती वो आवाज थोड़ी और बढ़ रही थी ,

इतने देर का इंतजार और अचानक ही जब वो सामने हो ……..दिल की धड़कने भी थोड़ी बढ़ ही जाती है ,वो आकर मेरे सामने खड़ी हो गई ,हम एक दूसरे को देखने के सिवा और कुछ भी नही कर रहे थे,उसका चहरा मेरे चहरे के पास आया और हमारे होठ मिल गए,मेरे हाथ अनायास ही उसके बालो में फसकर उसके चहरे को अपनी ओर खिंच रहे थे,और मेरी जीभ उसके होठो से अंदर किसी अस्तित्व की तलाश में जा चुके थे……..

हम काफी देर तक युही एक दूसरे से लिपटे हुए बस एक अहसासों की दरिया में डुबकी लगा रहे थे,पूरी दुनिया जैसे खो चुकी थी और समय कि कोई सीमा नही थी ,समय मानो खो गया था…..

जब हम एक दूसरे से अलग हुए मैंने सामने रॉकी को पाया उसके चहरे पे पसीना था,इस ठंड के मौसम में वो जंगलो से गाड़ी चलता हुआ आया था ,नियम के अनुसार उसे अभी ठंड में गुल्फ़ी बन जाना था लेकिन उसके चहरे का पसीना कुछ कहानी कह रहा था ,शायद एक जलन तो उसके सीने में भी उठी होगी,लेकिन मुझे उसपर कोई गुस्सा नही था,मेरे मन में उसके लिए कोई भी बुरा भाव नही था,ना जाने क्यो आज वो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था,उसने मेरी जान को मुझतक लाने के लिए इतनी मेहनत जो की थी ,मैं आगे बढ़कर उसके सामने अपना हाथ बढ़ाया,दोनो के हाथ मिले उसके हथेलियों से निकलने वाला पसीना मुझे उसकी मनोदशा का बयान कर रहा था,

“सॉरी यार मैंने तुम्हे जो भी कहा उसके लिए”

“कोई बात नही सर समझ सकता हु “

उसकी बात में ना ज्यादा एनर्जी थी ना ही ज्यादा हल्कापन …

मैं रॉकी को बैठने को कहा और रेणु से गर्म गर्म चाय बनाने,रेणु के होठो में हल्की मुस्कान थी …

और मैं काजल की तरफ देखा

“बहुत प्यार आ रहा था जान सॉरी ,आपसे कभी अलग नही रही ना तो अजीब लग रहा था…”

वो अपने कान पकड़कर बोलती है…

मैं उसके पास जाकर फिर से उसके गालो में एक किस ले लेता हु ,

ठंडा मौसम ,नरम बिस्तर और गर्म हमदम ये तो हर कोई चाहेगा,और आज मुझे सब मिल गया,आज फिर से हम उसी अवस्था में थे जैसे कल थे,एक दूसरे पर पूरा प्यार लुटाने को तैयार,ऐसे जैसे कल हम रहेंगे ही नही ,

सच ही है जो आज ही होता है ,और कल कभी आता ही नही,जो आज में जी लिया उसकी जिंदगी ही कुछ और होती है,वो आज में ही अभी में ही अपनी पूरी ताकत लगा देता है ,कल जाने रहे ना रहे ये मौसम ना रहे वो हमदम ना रहे….

काजल के माथे के पसीने की एक एक बून्द मेरे प्यार की ताकत का सबूत था,हर झटका इतना गहरा था की और उसकी आहे इतनी तेज की माहौल में बस हमारे प्यार की दांस्ता ही गूंज रही थी,शायद ये आवाजे वरुण के कमरे तक भी पहुच रही होंगी जहा रॉकी सोया था,

काजल के नर्म मख्खन की तरह योनि में मेरा कठोर लिंग जैसे पिघला जा रहा था,

आलिंगन के गर्म अहसास में नग्गे जिंस्मो की प्यास बुझ रही थी और प्यार प्यार और प्यार……..

सुबह की पहली किरण से पहले ही मेरी नींद खुली और मैंने काजल के चहरे को देखा जो किसी मासूम से बच्चे की तरह मुझसे लिपटी हुई थी,उसके होठो पर हल्की सी चुम्मन देकर मैं उठा मेरी नजर उसके मोबाइल में पड़ी ,अब मुझे उसके मोबाइल को छूने की जरूरत ही नही थी वो काम मैं अपने मोबाइल से ही कर सकता था,मैं अपने मोबाइल को निकल कर उसका वाट्सअप देखने लगा,रॉकी के कुछ मेसेज थे साथ ही मिश्रा जी के भी

रॉकी: आज के बाद मुझे यहां मत लाना ,तुम वहां अय्याशी कर रही हो और मैं इस ड्राइवर के साथ सो रहा हु ,उसने गुस्से वाली स्माइल साथ में भेजी थी ,मुझे उसपर थोड़ी हँसी आयी ,

मिश्रा ने काजल को बस मेसेज कर यही पूछा था की तुम वहां क्यो जा रही हो,उससे ज्यादा कुछ भी नही…

मैं फिर मोबाइल साइड में रख काजल को कस लिया इसबार वो थोड़ी कसमसाई और मेरे से लिपट गई,सुबह के अकड़े हुए लिंग ने उसकी योनि में अपना रास्ता बनाया और वो जैसे जाग गई ,मेरे बालो को सहलाती हुई मुझे खुद से जोड़ ली ,वो अभी भी अलसाई थी और मैं अभी भी निढल ही था,हल्के हल्के धक्कों ने हमे धीरे धीरे गर्म किया…..

आज कजल का अपने मिशन पर पहला दिन था और मुझे भी टाइगर और इकबाल से मिलना था,काजल कहा से शुरुवात करने वाली थी मुझे नही पता लेकिन मेरे लिए शहर जल्दी से जल्दी पहुचना बहुत जरूरी था,मैं साया बनकर काजल के साथ रहना चाहता था जो की शायद पॉसिबल ना हो पाए इसलिए अपने प्लान पर जल्द ही अमल करना बहुत जरूरी हो गया था,मैं इंतजार करने लगा की काजल कब वहां से निकलेगी,मेरे लिए एक बाइक का जुगाड़ ठाकुर साहब ने कर दिया था,जो टिपिकल बुलेट थी…

सोच रहा था की अब शायद वो cuckold वाली कहानी मेरे साथ होने वाली है,मैं बहुत नर्वस भी था और उत्तेजित भी,मैं इसे सोचकर ठंडा पड़ जाता और कभी गर्म भी हो जाता,काजल को किसी के साथ कैसे देख पाऊंगा ये खयाल ही रोंगटे खड़ा कर देता था,मुझे अपनी मजबूरी पर हताशा भी हो रही थी और वो करना जरूरी भी था,मैं चाहता तो सब से मुह मोड़कर घर में बैठ सकता था मुझे पता था की काजल वापस मेरे पास ही आएगी और मेरी होकर ही रहेगी पर फिर भी मैं घर में ही बैठकर नही रह सकता था,मैं कैसे इसे देख पाऊंगा,क्या मैं उत्तेजित हो जाऊंगा,या फिर मैं नर्वस हो जाऊंगा,या मैं सभी दायरों को छोड़कर काजल के सामने आ जाऊंगा,या मैं मिशन को बीच में छोड़ घर आ जाऊंगा,या मैं काजल के ऊपर ही गुस्सा निकल दूंगा..सब सोचकर मेरा सर फटा जा रहा था,काजल के जाने के बाद से मैं घर से निकलने की हिम्मत भी नही जुटा पा रहा था,इसका एक ही रास्ता मुझे दिखा वो था डॉ चुतिया..मैंने उसे तुरंत ही फोन लगाया

“कहा पहुचा एक घंटे में ******* यहां मिल इकबाल से मिलने जाना है “

“यार डॉ “……..मेरी आवाज में एक उदासी थी

“यार मैं समझ नही पा रहा हु की क्या करू ,” मैंने उसे अपनी सारी तकलीफे एक ही सांस में बता दी

“हम्म्म्म तू आजा और अपनी भावनाओ को साथ लेकर ही आ यहां उसकी बहुत जरूरत पड़ेगी,और वही कर जो तेरा दिल कहता है,मैं तुझे अब और नही समझूंगा,तुझे अगर काजल के ऐसा करने से कोई प्रॉब्लम हो तो तू उसका विरोध कर देना और मजा आये तो मजा लेना ,दिल हमेशा सही राह दिखता है मेरे दोस्त ,अपनी भावनाओ की कद्र करो उसके साथ चलो सफर थोड़ी मुश्किल जरूर हो जाती है पर समाज का हर बंधन जो तुम्हारे विचारों को,भावनाओ को बांध कर रखता है वो टूट जाएगा,और तुम स्वतंत्र महसूस करोगे,काजल का दुसरो के साथ संबंध बनाना तुझे इसलिए गलत नही लगता क्योकि तू इसे गलत समझता है वो इसलिए गलत लगता है क्योकि समाज इसे गलत मानता है….अभी तू समाज के बंधे नियम में चल रहा है और असली आजादी तुझे तब मिलेगी जब तू इन नियमो के बाहर जाकर अपनी संवेदनों को फैलाएगा,अपनी भावनाओ की इज्जत कर मेरे दोस्त ,वो तुझे लड़ा भी सकती है और उत्तेजित भी कर सकती है जो उस समय तुझे ठीक लगेगा वही करना….चल अब जल्दी आ जा …”

डॉ की कुछ बाते दिमाग के ऊपर से चले गई पर इतना तो समझ आ गया की कुछ भी गलत और सही नही होता,उसे गलत और सही समाज और हमारे पूर्वाग्रह (prejudices) बनाते है,और मुझे दोनो से बाहर आना होगा तभी मैं अपनी और काजल की मदद कर पाऊंगा,मैं अब बिना देर किये ही घर से निकल गया……..

“हम आपकी बात समझ रहे है डॉ साहब,हम मदद को तैयार है… “

एक मोटी सी आवाज मेरे कानो में पड़ी ,और मेरे तथा डॉ के चहरे पर मुस्कान आ गई,इकबाल भाई,अंडरवर्ड का सरगना,जितना सोचा था उससे कही ज्यादा मासूम सा आदमी ,जिसके नाम से बड़े बड़े लोग काँपते हो उसे मैं मासूम कह रहा हु ???

लेकिन वो सच में बड़ा मासूम था,व्यक्तिगत तौर पर भावनात्मक तौर पर जब की ड्रग्स और लड़कियों के धंधे में सबसे ज्यादा कमाई थी वो उसके खिलाफ था,डॉ ने मुझे बता रखा था की ये ऐसा आदमी है जिसे कोई भी बेवकूफ बना सकता है ,वो इतना सीधा है,लेकिन जब वो अपनी में आये तो फिर कहर ढा देता है इसलिए कोई भी इसे बेवकूफ बनाने से पहले 10 बार सोचता है ,

वो एक अजीब सा कैरेक्टर था,बड़े डील डौल वाला शख्स 6फुट 5इंच के करीब की लंबाई,इतना मोटा की चले तो जैसे धरती भी हिल जाय ,फुला हुआ मुह काले रंग का पठानी कुर्ता पहना हुआ,आंखों में सुरमा ,बड़ा सा पेट जैसे की पहले वाला अदनान सामी बस हाइट बहुत ज्यादा थी ,वैसा ही गोरा चिट्टा और क्यूट सा …कोई शायद ही सोच पता की ऐसा आदमी अंडरवर्ड का डॉन होगा…..

वो अपने एक बड़े से सिंहासन नुमा कुर्सी पर किसी राजा की तरह बैठा था,पूरा घर जैसे एक किला हो ,बंदूख धारी लोगो से घिरा हुआ,लोभंग और इत्रों की खुसबू चारसु आ रही थी,सामने पड़े टेबल में चिकन के बड़े बड़े फ्राइड पीस जो लाल रंग के हो चुके थे रखे थे,वो उसे ऐसे खाता था जैसे की सालो से भूखा हो ,हमारे सामने ही वो दो तीन किलो चिकन अपने पेट में समा चुका था,उसने हमे बताया था की वो इसका नाश्ता है,और हमे भी पेशकश की गई हमने प्यार से मना कर दिया था,घर पुराने जमाने का था लेकिन नए तरीके से उसे सजाया गया था,

चहरे में क्यूटनेस और शरीर से कोई राक्षस जैसा व्यक्तित्व उसे देखकर कभी मुझे हँसी भी आ जाती और कभी डर भी लगता कुल मिलाकर वो हमे बाहुबल का साथ देने को तैयार था,

हम बैठे बाते कर रहे थे की के अप्सरा सी लड़की पंजाबी चूड़ीदार कमीज पहने हाथो में चाय लिए कमरे में प्रवेश हुई ,गजब की खूबसूरती थी,समझ लीजिये की सनी लियोन चूड़ीदार कमीज पहन कर आ रही हो ,शरीर का हर कसाव साफ दिख रहा था,सर पर एक चुन्नी थी जो उसे किसी पंजाबी कन्या की तरह खूबसूरत बनाती थी,वो हमे देखकर मुस्कुराई और चाय देकर बड़ी अदा से इकबाल के गोद में आकर बैठ गई,वो इकबाल के सामने एक गुड़िया सी लग रही थी,मैं जो पहले उसकी खूबसूरती और नजाकत का दीवाना हुआ जा रहा था उसकी इस हरकत से चौक सा गया ,लेकिन डॉ सामान्य था शायद उसके लिए ये कोई नई बात ना हो ..

“ये हमारी बेगम है ,मैरी डिसूजा …”

वो हाथ जोड़कर हमे नमस्कार करती है ,मेरा दिमाग फिर से चकरा गया ये साला हो क्या रहा है,मैरी डिसूजा ???

और आदाब की जगह पर नमस्कार माजरा क्या है, मेरे चहरे का माजरा इकबाल मैरी और डॉ को समझ आ गया ,

“असल में मैरी क्रिशचन है,इकबाल भाई की लव मैरिज हुई है “

“ओह “मेरे मुख से निकला

“हमारी बेगम मैरी हमे डॉ के द्वारा दिया गया सबसे कीमती नगीना है”

मैं डॉ को देखा

“असल में इनकी शादी मैंने ही करवाई थी,दोनो अपने घर से भाग कर शादी की है ,

डॉ के चहरे में मासूमियत और कमिनियत दोनो ही झलक रहे थे,

“आप ये हम हम क्या लगाते रहते हो ,हमारी बेगम क्या होता है ,मेरी बेगम नही बोल सकते “

मैरी ने पहली बार मुह खोला था,मुझे और डॉ को हँसी आ गई वही इकबाल थोड़ा हिचकिचाया ,

“तुम नही सुधारोगी क्यो “

इसबार डॉ ने मेरी से कहा ,लगता था की बहुत पुरानी जान पहचान थी उनके बीच

“क्या डॉ आप भी,अपने जिस इकबाल से मेरी शादी करवाई थी वो तो पूरा बदल गया है,जो कभी कालेज का जवान हेंडसम मर्द हुआ करता था,आज देखो कैसे मोटे हो गए है, …अपने और इन्होंने मुझसे वादा किया था ना की ये अपना वजन घटाएंगे देखो जैसे के तैसे बस इन्हें चिकन और मटन चाहिए वो भी किलो किलो बटर लगाकर ,इनके साथ बैठो तो ऐसे लगता है जिसे की फुटबाल में बैठ गई हु,”

वहां बैठे सभी की हँसी छूट गई मैं और डॉ हस्ते रहे लेकिन बाकी लोग जैसे होशं में आये की इकबाल वही बैठा है सभी चुप हो गए ,वही इकबाल थोड़ा झेप गया ,और मैरी ने उसके गालो को पकड़ कर पप्पी ले ली ,इकबाल का चहरा फिर से खिल गया,,,…….

“ये अभी भी वही बच्ची है “

डॉ ने कहा

“अरे कहा की बच्ची डॉ साहब देख तो रहे हो ,इसके सामने मेरी एक नही चलती,ये तो इस घर की डॉन है,हम जो भी है इनके सामने इनके सेवक बन जाते है इनकी हुक्म की तामील करना ही हमारे लिए इबादत है..”

मैरी जैसे उसकी बात से बहुत भावुक हो गई और वो इकबाल के चहरे को पकड़कर उसके होठो में अपने होठो को भर दी…मेरे लिए ये किसी शॉक से कम नही था,साला मैं किसी डॉन के पास आया हु या किसी नए मैरिड कपल के पास ,वो भी सब के सामने दोनो ही एक दूसरे के मुह में जीभ डाल रहे थे,और मेरे सिवा वहां किसी को कोई फर्क भी नही पड़ रहा था जैसे की ये उनका रोज का काम है….

अलग होकर इकबाल ने मुझसे इस बात के लिए माफी मांगी ,

“अब हमे चलना चाहिए “

डॉ बोल उठा

“ठीक है विकास साहब आप हमारा और हमारे बन्दों का फोन नम्बर रख लीजिये जब भी आपको कोई काम पड़े आप फोन कर दीजिएगा ,हमारे कुछ लोग आपके आसपास ही होंगे लेकिन वो जरूरत पड़ने पर ही सामने आएंगे,ताकि टाइगर के गुर्गे उन्हें पहचान ना पाए ,”

“ठीक है खान साहब आपके मदद के लिए शुक्रिया “

“अरे साहब आप भी हमे क्यो शर्मिंदा कर रहे है,वैसे भी इससे हमारा भी काम हो जाएगा उस टाइगर से हमे भी बहुत सा हिसाब चुकाना है ,…

हम वहां से निकले और डॉ मुझे मैरी और इकबाल की प्रेम कहानी बताने लगा ,की जब मैरी स्कूल में थी तब इकबाल कॉलेज का डॉन हुआ करता था,दोनो में मोहोब्बत हो गई,लेकिन समस्या थी की घर वाले तैयार नही थे,होते भी कैसे इकबाल था आवारा और बड़ा ही खतरनाक और मैरी से लगभग 9-10 साल बड़ा भी है,और मैरी तभी स्कूल से निकली थी वो मासूम सी गुड़िया जैसे थी ..”

“उम्र का इतना अंतर ,”

“हा यार इकबाल सालो तक स्कूल और कॉलेज के पॉलिटिक्स में रहा,गुंडा गर्दी और पॉलिटिक्स का टाइम था वो ,मैं भी तभी थोड़ी दुनियादारी में आया था,तभी मेरी भी दोस्ती इकबाल और ठाकुरो तिवारियो से हो गई,साले एक नंबर के लुच्चे थे सारे के सारे ….लेकिन सब की एक बात जानदार थी की सभी बहुत अच्छे दोस्त और दिल के बहुत अच्छे थे,मैरी तब स्कूल में थी तब ये गुंडा हुआ करता था.मेरी का दिल इस गुंडे पर आ गया और उसे प्रपोज कर दी ,पहले तो इकबाल ने बहुत पीछा छुड़ाने की कोसीसे की वो किसी नादान लड़की की जिंदगी से नही खेल सकता था,लेकिन धीरे धीरे उसे भी ये भा गई…लेकिन घर वालो के सामने बड़ी मुसिबित थी,इकबाल का तो कोई नही था लेकिन मैरी एक संपन्न घर की बेटी है,इसी बात का बहस था,वो सीधा साधा परिवार ये कैसे मान जाता की उनकी मासूम सी नादान उम्र की बेटी किसी गुंडे के साथ चले जाय,वो गलत नही थे लेकिन शायद मैरी उतनी नादान भी नही थी ,उसे इस बात का आभास था की इकबाल दिल से कितना अच्छा है.घर वालो को समझने के लिए उसे एक ऐसे आदमी की जरूरत थी जो थोड़ा पढ़ा लिखा हो तो इकबाल ने मुझे चुना ,उस समय हमारी दोस्ती के कुछ ही दिन हुए थे लेकिन इस बात ने हमे एक बहुत अच्छा दोस्त बना दिया,मैरी भी शायद किसी के ऊपर सबसे ज्यादा भरोसा करती है तो वो मैं हु ,समय ने उसे एक सेक्सी लड़की बना दिया और इकबाल को फुटबाल ….पता नही अब इनका क्या होगा,मेरी हमेशा से चिंता रहती है की इकबाल जैसे भोले आदमी को मेरी धोखा ना दे ,;लेकिन मैरी हद से ज्यादा बोल्ड हो गई है और इकबाल के शिकंजे से बाहर है,उसे सम्हाल पाना इकबाल के बस का नही है….”डॉ कुछ सोच में खो जाता है,

“खैर छोड़ो यार अभी तो चलो टाइगर के पास …”

हम टाइगर के पास पहुचे और सीधे उसके केबिन में जा कर उससे मिले ………

“बड़ी देर लगा दी सर अपने तो “

मैं टाइगर की तरफ देखा और हल्के से मुस्कुराया वो मुझे आज सर से संबोधित कर रहा था,

जल्दी से आज के फुटेज दिखाओ पता नही वो लड़की आज आयी भी की नही .

मेरे सामने उसके क्लब का पूरा फुटेज था जो की एक बड़े स्क्रीन पर चल रहा था,अभी दोपहर खत्म ही हुआ था कुछ 5 बजे थे मुझे यकीन था की वो शाम को ही आने वाली थी फिर भी मैंने दिन भर का फुटेज चेक कर लिया ….

हम बैठकर बाते करने लगे और टाइगर ने केबिन में ही कुछ पैक मंगा लिए,थोडे सुरूर में मैं टाइगर के व्यक्तित्व को थोड़ा समझ पाया ,हमारी अच्छी बनने लगी थी वो साला हँसता भी है मुझे आज पता लगा था ,उसकी सेकेट्री भी हमारी बात सुनकर हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी ,वो भी एक खूबसूरत बाला थी लेकिन बहुत शालीन ….

हम किसी बहुत ही अच्छे दोस्त की तरह एक दूसरे से बात कर रहे थे,साथ ही मेरे सामने स्क्रीन खुली हुई थी मैं थोड़ी थोड़ी देर में उसे देखता उसका पूरा क्लब उसमे साफ दिख रहा था,साले ने HD कैमरा लगा रखे थे,शाम के जवान होते ही क्लब में भीड़ बढ़ने लगी तभी एक लड़की सफेद स्कर्ट पहने क्लब में प्रवेश की उसे देखकर मेरी नजर चौड़ी हो गई थी,और होठो में मुस्कान आ गई मेरी मुस्कान देखकर टाइगर और डॉ भी स्क्रीन की तरफ देखने लगे मैं उसके कन्ट्रोल कीबोर्ड पर अपना हाथ फेरा और उस लड़की के चहरे में जूम किया ….

“ले भाई तेरा शिकार …”

टाइगर उस लड़की को ध्यान से देखने लगा ,उसके चहरे में मुस्कान आ गई ,4 पैक के बाद से ही वो मेरा और मैं उसका भाई बन गया था ,,,

“साले मिश्रा ने तो कमाल की लड़की ढूंढी है कोई सोच भी नही सकता की एक विदेसी लड़की सरकार के लिए जासूसी कर रही होगी…”

मैं और डॉ एक दूसरे को देख कर मुस्कुराए ,

“भाई बस एक बात का धयन रखना इसे कुछ ना हो पाए वरना बहुत गलत हो जाएगा “

“तूने मुझे बताया था तभी मुझे समझ आ गया की तू बहुत दिमाग वाला बंदा है,फिक्र मत कर इसे भी करने दे जासूसी ,साली को लगने दे की बहुत कुछ हाथ में आ गया ,ऐसे तेरा टॉरगेट कहा है ,”

मेरे चहरे में एक मुस्कान आ गई मैंने फिर से हाथ चलाया,और क्लब के दूसरे कोने में फोकस किया

“वो तो बहुत देर से आ गए है”

एक सेक्सी सी साड़ी में लिपटी जवानी मांग में सिंदूर और हाथो में हल्की पतले मेटल की चूड़ियां ,बिल्कुल कातिल

“बहनचोद क्या माल है भाई ,”

टाइगर पहली बार ऐसे बात कर रहा था जैसे की वो कोई स्मगलर नही कोई युवा दिल्ली का लवंडा हो ,

डॉ और मेरे चहरे में मुस्कान खिल गई वही पास खड़ी टाइगर की सेकेट्री रिहाना भी उत्सुकता से काजल को देख रही थी उसके चहरे का एक्सप्रेशन बता रहा था की वो भी उसकी खूबसूरती से आकर्षित हो गई है…

“ये है मिस्टर एंड मिसेज वर्मा आदित्य इंटरनेशनल के मालीक “

टाइगर ने तुरंत मलीना के ऊपर फोकस किया

“भाई तू उसे सम्हाल और मुझे इसको सम्हालने दे ,इसके ऊपर निगरानी रखो “उसका इशारा पड़ते ही रिहाना वहाँ से निकल पडी ….

“अरे ये कहा जा रहे है”

डॉ ने सवाल किया जैसे मुझे कुछ पता हो लेकिन मुझे भी इसका जवाब नही पता था,काजल और रॉकी वहां से उठाकर जाने लगे ,

“क्या हम इसका पीछा करे ,”डॉ का अगला सवाल था

टाइगर ने मुझे एक एप्लिकेशन लिंक और एक पासवर्ड दिया ,

“तुम इससे कही से भी यहां लगे कैमरे को एक्सेस कर सकते हो ,लेकिन सभी को नही पर्सनल रूम में लगे,और कुछ इम्पोर्टेन्ट जगह का सिर्फ मेरे पास रहेगा,उसका मत मांगना अगर तुम्हे जरूरत हो तो भले मैं दिखा सकता हु लेकिन एक्सेस करने का पासवर्ड नही दे सकता …”

मेरे लिए इतना भी बहुत था,मैंने उसका वो एप्लिकेशन अपने मोबाइल में डाला और पासवर्ड से वहां लगा लगभग सभी सार्वजनिक कैमरा मेरे सामने था,मैं को देखने लगा वो लोग नीचे बने पार्किंग में दिखे वो एक कर में बैठे और वहां से चले गए,मैं डॉ को देखने लगा ,

“अब देख क्या रहा है चलो “

“शायद मुझे अकेले ही जाना चाहिए “

“हा सही कहा और मैं भी अपने काम में जाता हु कुछ प्रॉब्लम हो तो बताना “

डॉ और मैं वहां से निकल गए ,मेरे निकलने और काजल के निकलने में लगभग 10 मिनट का अंतर आ चुका था अब उसे ढूंढना मेरे लिए थोड़ा मुश्किल था,मैं सोच में पड़ गया …मैं अपनी बाइक तक पहुचा ,समय देखा कोई 10 बजे थे ,

मैंने काजल को काल लगाया ,दो ही रिंग में वो काल उठा ली

“हैल्लो जान “

“हम्म क्या कर रही है मेरी सोना “मैं आराम से बाइक में बैठ गया ,मैं अभी भी पार्किंग में था ,और अपने बुलेट में बैठा था,

“कुछ भी तो नही अभी बस आपको याद कर रही थी ,आप क्या आकर रहे हो ,”

“तुम्हे याद कर रहा हु “

मैं उसके आसपास कुछ सुनने की कोसीस था लेकिन नाकाम हो रहा था,वहां एक शांति थी शायद कार में बैठे होने के कारण था,

“कैसा रहा आज का दिन “

“कुछ खास नही वही पुराना होटल का काम ,और आपका “

“मेरा भी वही साइट विजिट वगेरह “

हम दोनो ही झूट बोल रहे थे लेकिन कितने आराम से ,कोई भी ग्लानि और चिंता नही थी ,काजल को लग रहा था की मैं उससे बहुत दूर हु और मुझे पता था की वो मुझसे बहुत दूर है…

“जान मुझे एक काम है चलना हो गया …”

काजल ने कहा

“ओक्के “

शायद वो अपने गंतव्य में पहुच गई थी वो अपने होटल तो नही गई थी क्योकि वो लगभग आधे घंटे का रास्ता था,तो फिर कहा ,मैं सोच में पड़ा था की मेरे दिमाग ने मुझे धिक्कारा साले काजल के मोबाइल का एक्सेस रखा है और सोच रहा है खोल के देख ले ,

मैं तुरन्त मोबाइल से काजल के मोबाइल को एक्सेस करने लगा ,उसके मेसेज बॉक्स में एक मेसेज आया था वो किसी जूही के नाम से सेव था,उसमे एक पता था जो की पास का ही था,मैं उस पाते को कॉपी कर अपने गूगल मेप में पेस्ट किया और मुझे वो लोकेसन दिखने लगा,ओह यहां से बस 15 मिनट का रास्ता है,ये गूगल बता रहा था ,मैं उस जगह को धयन से देखा

ये कोई घनी आबादी वाली जगह नही थी,एक एकांत सी जगह थी कुछ पेड़ पौधों से घिरा हुआ ,लगता था की कोई सरकारी जगह है जहा पर सरकारी कालोनियां बसाई गई हो ,या किसी फेक्ट्री के द्वारा अधिग्रहित जगह कुछ मकान दिख रहे थे पास ही एक पोलिस स्टेशन था,एक्ज़ेक्ट एडरेस देखने पर वो कोई एक निश्चित जगह नही थी वो एक पूरा इलाका था ,

मैं अपने हेलमेट को लगाया और उधर को निकल गया ..

मैं बस आवारा की तरह घूमता रहा छोटी सी जगह थी पर काजल की कर कही मिली ही नही ,एक छोटा सा पान का ठेला खुला दिखा जो शायद बंद करने की तैयारी में था ,मैं एक सिगरेट लेकर पीने लगा की तभी वहां एक पोलिस वेन का कर रुकी ,

“क्या बे झींगुर अभी तक बंद नही किया है “

एक औरत की आवाज ने मेरा धयन अपनी ओर खिंचा मैं जब उसे देखा तो देखता ही रह गया,शायद वो एक लेडिस इंस्पेक्टर थी कमाल की लग रही थी ,वो सिविल ड्रेश में थी और सफेद रंग की शर्ट और जीन्स पहने हुए थी ,उसके कसे उजोर बेहद आर्कषक थे,और फिगर बहुत मस्त ,चहरे से वो ज्यादा उम्र की भी नही लग रही थी लेकिन उसके शैली से ये पता लगाना मुश्किल नही था की वो बेहद कड़क अधिकारी है,मुख मंडल का तेज और बंधे हुए बाल,जीन्स से उसकी कमर का आकर भी साफ दिख रहा था की वो जरूर अपने सेहत का बहुत ध्यान रखती है ,अचानक उसकी नजर मुझसे मिली और मैं झेप कर दूसरी ओर देखने लगा ,शायद उसके चहरे पर एक मुस्कान आ गई

“जी मेडम बस बन्द करने वाला हु ,ये आपका सिगरेट “

“चल जल्दी बन्द कर के निकल “

गाड़ी जैसे ही बड़ी

“साली छिनाल रोज मुफ्त का सिगरेट पी जाती है”

दुकानदार के मुख से अनायास ही निकल गया

“कुछ भी बोल लेकिन बहुत सुंदर है कौन है ये “

मैंने उसे पूछा

“ये इंस्पेक्टर जूही है ,हमारे थाने की इंचार्ज ,”

जूही… मेरे मन में ये नाम कौंध गया मैं जल्दी से सिगरेट खत्म कर वहां से निकला और उस वेन के पीछे लगा ,कुछ देर में ही मुझे वो वेन एक जगह खड़ी दिखई दी साथ ही दिखाई दी काजल और रॉकी के साथ जूही ,काजल की गाड़ी कही नही दिख रही थी ,मैं भी थोड़ी दूर ही गाड़ी खड़ी कर छुपकर उन्हें देखने लगा वो रोड में ही खड़े थे ,जूही ने एक पैकेट दिया ,काजल उसे खोलकर देखती है और एक फ़ोटो को देखकर चौक जाती है,उनमे क्या बात हो रही थी मुझे सुनाई नही दे रहा था लेकिन जूही काजल को थोड़ा अलग ले गई और कुछ बात कर फिर से वो वेन में बैठ कर वहाँ से चल दी ,और काजल और रॉकी पैदल ही जाकर रेलवे ट्रेक पर पार किया ,मुझे अब समझ आया की उनकी गाड़ी मुझे क्यो नही दिखाई दी ,रेलवे ट्रेक सड़क से थोड़े ऊपर में था और उन्होंने गाड़ी उसपार पार्क की थी ,अब ये बात समझ नही आ रही थी की जूही और काजल में क्या संबंध है ,मैं तुरंत डॉ को फोन लगाकर सारी बात बताई …

“ओह तो साले मिश्रा ने इसमें जूही को भी लगा रखा है “

“तुम उसे जानते हो “

“बहुत अच्छे से जबसे वो एक पोलिस की कांस्टेबल हुआ करती थी ,कुछ ही सालो में उसे इतने प्रमोशन मिले की वो आज थाना इंचार्ज बन गयी है,बहुत चालू चीज है और खतरनाक भी ,गरीब घर की लड़की है ,शादी शुदा है ,पति एक साधारण सा किराने की शॉप चलता है ,गांव में रहता है ,ये लड़की अपने दम में इतना बड़ी है ,कई बड़े मिशन का हिस्सा रही ,जिस्म और खूबसूरती का इसने पूरा उपयोग किया और क्राइम ब्रांच में भी रही ,इसके जासूसी की काबिलियत के कारण इसे इतने प्रमोशन मिले,अब समझ आया की साले मिश्रा ने ही इसका ट्रांसफर यहां करवाया होगा,इससे पहले वो क्राइम में थी ,चलो ये अच्छी खबर है उसके रहने से काजल पर खतरा थोड़ा कम हो गया…”

“हम्म हमे इससे कोई प्रॉब्लम तो नही होगी “

“अरे नही उसे मैं सम्हाल लूँगा “

डॉ से बात कर मैं काजल को काल किया

“कहा हो जान हो गया तुम्हारा काम “

“हा हो गया लगता है बहुत याद आ रही है मेरी आज भी आ जाऊ क्या “

काजल ने मदहोशी से कहा ये बात पास बैठे रॉकी को बिल्कुल पसंद नही आयी होगी ,शायद इसलिए काजल की एक हँसी निकली जिसमे एक टिस भी थी,

“ह्म्म्म ऐसे अभी कहा हो तुम “

“होटल में ही हु “

“कौन सा कमरा “

“क्यो”

“बताओ तो सही “

मेरे इस सवाल से शायद काजल की हालत खराब हो रही होगी,लेकिन उसने कोई भी ऐसा रिएक्शन नही दिया जिससे मुझे कोई शक होता ,

“153 लक्सरी सुइट है”

“ओह ग्राहको की जगह तुम ही यूज़ कर रही हो..”

“अरे एक ही तो सुइट है उसमें भी कभी कोई बुकिंग नही आयी अभी तक “

“क्या हुआ हुआ आप थोड़े परेशान से लग रहे है,”काजल ने फिर से कहा

“कुछ नही जान बस यू ही मैं बहुत थक सा गया हु ,सोना चाहता हु “

“आप ठीक तो हो ना “

“हा बस थक गया हु “

“ओके जान आराम करो बाय गुड नाईट “

“गुड नाईट लव यु …”

“लव यु टू “

मैं अपनी बाइक स्टार्ट कर कुछ सोच रहा होता हु और अचानक ही मेरी गाड़ी की दिशा बदल जाती है मैं काजल के होटल की तरफ चलने लगता हु,मेरे दिल की धड़कन ना जाने किस वजह से तेज थी और मन में एक घबराहट थी,उसे दूर करने के लिए मैंने गाड़ी की रफ्तार बड़ा दी,काजल का होटल लगभग 1 घंटे की दूरी पर था,

हाइवे में तेजी से बढ़ती मेरी गाड़ी ने अचानक एक सफेद कलर की गाड़ी को क्रास किया,मुझे याद आया की ऐसी ही गाड़ी से वो दोनो गए थे,मैं थोड़ा पीछे हुआ ,रात की अंधेरे में अंदर देख पाना थोड़ा मुश्किल था लेकिन पास से गुजरते हुए मुझे अंदर का नजारा दिख ही गया,हा ये रॉकी ही था ,मैं तेजी से गाड़ी बड़ा दी और उनसे पहले होटल पहुच गया…….

बाहर खड़ा गार्ड मुझे पहचानता था अंदर रिसेप्शन में बैठा एक जवान सा युवक मुझे देखने लगा,उसे मैं भी पहली बार देखा था ऐसे भी यहां आता ही कब था…

“may i हेल्प यु sir “

“ह्म्म्म ओह हा काजल से मिलना है,”

“जी मेडम तो नही है सर ,”

“हम्म उसके रूम की चाबी दो “

“सर …?????सर वो मैं कैसे “

“वाचमैन को बुलाओ “

वो लड़का मुझे आश्चर्य से देखने लगा ,

वो वाचमैन को बुला लेता है

“इसे बताओ की मैं कौन हु “

वाचमैन लड़के दो देखता है

“अरे मेडम के हसबेंड है “वो उसके पास जाकर उसके कान में फुसफुसाता है

“ओह सॉरी सर ,लीजिये चाबी “

“सुनो मेडम को या रॉकी को मत बताना की मैं आया हुआ हु मैं उन्हें सरप्राइज देना चाहता हु ..”मैंने उसे आंख मार दी

“जी सर वो भी थोड़ा मुस्कुराया “

“और हा मेडम जब आ जाए तो शेम्पियन की एक बोतल भिजवा देना “

“ओक्के सर “

मैं काजल के बताये रूम में गया जो की आखिरी फ्लोर में था,

वहां घुसते ही लगा मानो किसी जन्नत में पहुच गया हु ,इतना बड़ा सुइट था और साथ ही बहुत ही खर्च किया गया था,मैं कभी भी होटल के मामले में नही पड़ा लेकिन आज देखकर लगा की उसके भाई ने यहां बहुत पैसा इन्वेस्ट कर दिया है ,मुझे याद आया की ये इस होटल का एक ही सुइट टाइप रूम है ,फिर भी इसे आलीशान बनाया गया था,एक ड्राइंग रूम एक बैडरूम छोटा से बार काउंटर जिसमे सजी हुई कुछ चुनिदा बोतले और मंहगे ग्लास सेट्स और बहुत सारा स्पेस जहा महंगे कालीन ,जरीदार झालरों से फैलती हुई लाइट और मांगे किंग साइज के सोफा के कारण ये बहुत ही आकर्षक लग रहा था,ड्राइंग में के ही एक ओर सीढ़िया बनी थी 5 सीढ़ियों के बाद वहां कुछ स्पेस था और एक बड़ा कांच की दीवार थी जिससे पूरा शहर साफ दिख रहा था,वहां भी बिठाने के लिए आरामदायक सोफे सजाए गए थे,पूरा शहर जगमगा रहा था,ये कोई बड़ा शहर नही था फिर भी देखने से बहुत ही सुंदर लग रहा था,शहर का आखिरी छोर भी वहां के दिख रहा था जहा से पहाड़ो की श्रृंखला शुरू हो रही थी ,सचमे यहां बैठकर दारू पीने तो मजा आ जाएगा ,मेरा ध्यान वहां बने छोटे से बार में गई जंहा सलीके से कुछ बोलत रखे थे मेरी नजर पड़ी जॉनी वॉकर स्कॉच पर जब मैं कॉलेज में हुआ करता था तो इसे पीने के सपने देखता था,मैं एक ग्लास लिया दो आइस क्यूब डाले फिर याद आया की टेस्ट खराब हो जायेगा एक निकल लिए और उस छोटे से बोलत को उठा लिया ,21 साल की ब्लेंडेड स्कॉच था,

“वाह …”मेरे मुख से अनायास ही निकल गया छोटा सा पैक बनाकर मैं पहला सिप लगाया ,जैसे जन्नत …

मैं उसे लेकर बैडरूम की तरफ बढ़ा हल्की रोशनी से जगमगाता हुआ वो कमरा किसी को भी उत्तेजित करने को काफी था आज मैं ज्यादा उत्तेजित हो रहा था ये सोचकर की इस रोशनी में काजल के अंग कैसे लगेंगे,मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई और मैं उस बिस्तर को देखने लगा ,किंग साइज के बिस्तर में अभी सफेद बेडसीट लगी थी ,बिस्तर के पास ही कांच की दीवार थी लेकिन उसमे पर्दा लगा हुआ था,जैसे ही मैंने वो पर्दा हटाया मेरे मुह से अनायस ही वाह निकल गया ,यहां सेक्स करने से खुले में सेक्स करने की फीलिंग आती होगी ,मेरे मन ने मुझसे कहा ..

वहां एक अटैच बाथरूम था,जंहा ग्लास के पीछे एक बड़ा सा बाथटब था,और एक चीज जिसने मुझे बहुत ही उतेजित किया वो था,बाथटब के पास पड़े दो कपड़े ,मेरे होठो में मुस्कान आ गई ये अब भी गीले थे,एक लाल कलर की पेंटी और ब्रा थी जिसके मखमली अहसास ने मेरे अंदर एक झुनझुनी सी भर दी,क्या ये काजल के थे,मैंने इसे कभी नही देखा था ये बहुत ही छोटे थे,लेकिन बहुत महंगे भी लग रहे थे,मैं अपने ही खयालो में खोया हुआ वहां से बाहर आया ये सोचते हुए की अमीरों के पास सच में कितनी सुविधाएं होती है,

और गरीब …मेरे हाथो में रखा एक पैक किसी की एक महीने की सेलरी थी,लगभग 4-5हजार का एक पैक रहा होगा,खैर ……मैं वहां से उठा फिर से बाहर ड्राइंग में आया और उन आराम दायक सोफे में लेटा हुआ शहर के दृश्यों को देखने लगा,एक अजीब सा सकून मेरे अंदर उतर रहा था की दरवाजा फिर से खुला ,

“तुम जाओ यार मुझे आराम करने दो ,”

काजल कमरे में आते ही चिल्लाई

“अरे मेरी बात तो सुनो हमे …”रॉकी कुछ बोलने ही वाला था की वो रुक गया दोनो ने मुझे देखा उन्हें मेरा सर ही दिखाई दे रहा होगा,क्योकि मेरा चहरा दीवार की तरफ था और पीठ सोफे से चिपका हुआ ,

“कौन है …”

काजल की आवाज तेज थी,

मैं पलटा मेरे होठो में एक मुस्कान थी और दोनो मुझे देखकर दंग ,

“आप यहां “काजल की आवाज लड़खड़ा गई,रॉकी भी मुह फाडे मुझे देख रहा था.,

मैं अब भी मुस्कुरा रहा था मैं खड़ा होकर सीधे काजल के पास गया वो मुझसे लिपट गई और हमने हल्के से किस किया वो अभी भी थोड़े शॉक में थी ,उसके हाथो में एक बेग था और वो अभी उस साड़ी में बहुत गजब की लग रही थी लेकिन थोड़ी थकी हुई थी ,

“तुमने तो कहा था की होटल में हो …”

“वो कुछ काम आ गया था तो बाहर जाना पड़ गया “रॉकी ने बात को कांटा ,मैं उसे देखा और अपना हाथ बढ़ाया उसने भी हल्के से मेरे हाथो को पकड़ा ,

“यार मुझे पता होता की तुमने इतना अच्छा रूम बना के रखा है तो मैं कब का यहां आ जाता और ये दारू वाह “

अब काजल भी मुस्कुरा रही थी .

“आपको चाबी किसने दी और किसी ने मुझे बताया भी नही की आप आये हो “

“हा जान मैंने ही कहा था,”

“बहुत बढ़िया किये “वो फिर मेरे होठो के पास आयी मैंने हल्के से उसके होठो को चूमा तभी बाहर से एक वेटर आया जिसके हाथो में शेम्पियन की बोतल थी ,वो उसे सजा कर वहां से चला गया,

“हम्म्म्म पूरी तैयारी कर रखी है जनाब ने मैं तैयार होकर आती हु “

काजल बैडरूम की ओर बढ़ गई

“आओ यार एक ड्रिंक हो जाय “मैंने रॉकी से कहा

“नही सर थोड़ा थक गया हु आराम करूँगा आप लोग इंजॉय कीजिये “

वो बिना मेरे किसी रिस्पॉन्स का इंतजार किये वहां से निकल गया ,मैंने भी दरवाजा लगाया अपना पैक खत्म कर शेम्पियन पकड़ कर बैडरूम में चला गया …

मैं बिस्तर में लेटा हुआ था कि काजल बाथरूम से निकली, मैं मुह फाड़कर उसे देखता रहा, कोई इतना सेक्सी कैसे हो सकता है,

वो काले रंग के नाइटी में थी जो कि पूरी तरह से पारदर्शी थी,उसके अंगों की हर बनावट साफ झलक रही थी, उसके काले रंग की पेंटी और ब्रा भी उसमे से झांक रहे थे,मेरे हाथों में शेम्पियन से आधे भरे हुए दो ग्लास थे,वो मुझे देखते हुए मेरे पास आ रही थी, उसकी चाल और मुस्कान दोनो ही कातिल थी,वो मेरे पास आकर मेरे बाजू में बैठी और अपने हाथों में एक ग्लास थाम लिया,

“आजकल उमंग ज्यादा बड़ गई है आपके अंदर “

“जब बीबी इतनी मदहोश करने वाली हो तो कोई किसे दूर रहे जान “

मैं एक सिप लेकर उसके होठो में अपने होठो को मिला दिया,मेरे होठो से वो शेम्पियन काजल के मुह में पहुच चुका था,वो हल्के से मुस्कुराई और एक सिप खुद लिया और मेरे मुह में उसे भर दिया,ये शराब पीने की नई अदा मुझे बहुत भा रही थी,

रात के साथ हम एक हुए और अपने प्यार की बारिस एक दूसरे पर कर दी….

काजल मेरी बनहो में सोई पड़ी थी और मैं उसके चहरे को देख रहा था,मेरे आंखों से नींद गायब थी या मैं जानबूझ कर नींद को अपने पास आने नही दे रहा था,कुछ घंटे बीते और मैं उठा पास ही पड़ा काजल का बेग लिया और और उसे खोला उसमे वही पैकेट दिखाई दिया जो की जूही ने काजल को दी थी ,उसे खोलने पर मेरी आंखे फटी रह गई मैं उसमे कुछ फोटोज थे जिसे मैं समझ नही पा रहा था की ये किसके है मैं अपने मोबाइल कर जल्दी से सारे फोटोज खिंच लिए ,इनमें दो शख्स को मैं जानता था वो था टाइगर और उसकी सेकेट्री रिहाना ,बाकियों का मुझे कोई भी पता नही था ,मैं तुरंत उसे डॉ के पास भेजा साथ ही ये भी बता दिया की ये मुझे कहा से मिले है,मैं उसे फिर से वैसे ही रख कर सोने लगा,अब जाकर काजल की बांहो में मुझे चैन की नींद आ रही थी……

कहानी में थोड़ा टर्न लाते हैं और काजल का पॉइंट ऑफ view समझते हैं कि आखिर वो अभी तक क्या सोच रही है…

मेरा नाम काजल है,मेरा जन्म एक सम्पन्न परिवार में हुआ जंहा मुझे बहुत ही प्यार मिला,मैं अपने तीन भाइयो की छोटी बहन हु,मेरे परिवार की इज्जत दूर दूर तक थी,गांव में रहने के बावजूद वो ऊंचे और आधुनिक खयालो के लोग है,

भाइयो और माता पिता के प्यार ने मुझे थोड़ा नकचढ़ी भी बना दिया,मेरी हर जरूरत पूरा करने में पूरा घर लगा होता था,लेकिन फिर भी मेरे घर वालो ने मुझे बड़ो का आदर करने और छोटो को प्यार देने के ही संस्कार दिए,

मेरी जवानी ने मेरे व्यक्तित्व में और भी निखार ला दिया ,मेरा मासूम चहरा और कसे हुए बदन ने मेरा आकर्षण बड़ा दिया,लेकिन फिर भी मेरा बचपना कभी नही गया,मेरे घर में कई नॉकर थे और मेरे घर वालो का व्यवहार उनके प्रति हमेशा प्रेमपूर्ण ही रहा ,उनका असर मुझे भी हुआ,गांव में भी लोग मुझे प्रेम की मूर्ती ही कहा करते थे,मैं चंचल थो थी लेकिन संवेदनाओ से भरी हुई ,किसी की तकलीफ मुझसे देखी नही जाती,मैं जंहा भी जाती मुझे बहुत प्यार और सम्मान मिलता था,कारण साफ था वो था मेरा लोगो के प्रति प्रेम भरा व्यवहार…

मैं लोगो को ऐसे ट्रीट करती थी जैसे की वो अजनबी नही बल्कि मेरे अपने है ,मैं किसी के लिए उनकी छोटी बहन थी तो कोई मुझे प्यार से दादी बुलाता था,मैं गांव में बहुत खुस थी जब तक की मेरी जिंदगी में मिश्रा जी नही आये ….

वो एक आकर्षक मर्द थे ,उनके व्यक्तित्व में एक अजीब सी कसक थी ,वो उस समय मेरे जिले के कलेक्टर थे,वो मेरे पिता से कुछ ही छोटे थे लेकिन फिर भी मैं उनके तरफ आकर्षित होने लगी थी ,जवानी की दहलीज में जब जिस्म की जरूरते करवटे लेती है मुझे बुरी नजरो से देखने वाला भी कोई नही था,मुझे इसका पहला आभास भी मिश्रा जी की नजरो से हुआ ,वो मुझे के अजीब से नजर से देखते थे जिससे मैं अनजान थी,पता नही क्यो धीरे धीरे मुझे वो अच्छा लगने लगा,वो कोई ऐसी बात कभी नही करते थे जिससे मुझे बुरा लग जाय,वो मेरा बहुत ही ख्याल रखते थे

जब मुझे पढ़ाई के लिए शहर जाना था तो इसकी जिम्मेदारी भी मिश्रा जी ने ले ली ,मेरे घर वाले उनपर भरोसा करते थे इसलिए मुझे भी इसपर कोई एतराज नही था,लेकिन मेरी जिंदगी बदलने वाली थी पता नही वो किस ओर जाने वाली थी ,

मिश्रा जी ने कभी मुझसे कोई भी जबरदस्ती नही की कोई कर भी नही सकता था,मेरे भाइयो ने ना सिर्फ मुझे प्यार दिया बल्कि कई कलाएं भी सिखाये जिनमे से कराटे भी एक था,मेरे भइया खुद भी एक ब्लैक बेल्ट थे और अपने भाइयो और मुझे भी उन्होंने ये ट्रेनिंग दी थी,उनका ही कमाल था की मैं छोटी उम्र से ही फिटनेस की ओर बहुत रुचि रखती थी,

कॉलेज का माहौल आम कालेजो जैसा ही था और ये वो दौर था जब अंडरवर्ड के माफिया इस शहर पर राज करते थे,उनमे से कई ने ड्रग्स का धंधा शुरू कर दिया ,और पहला शिकार हुए कालेज के बच्चे ,मैं जिस कॉलेज में पढ़ रही थी वहां अधिकतर लोग बड़े घरों से थे,और पार्टी करना क्लबो में जाना उनके लिए आम बात हुआ करती थी,इस दौर में पॉप म्यूजिक ने भारत में नया कदम रखा था जिससे एक डिस्को सभ्यता का जन्म हो रहा था,जगह जगह हिप्पी सभ्यता के लोगो का जमावड़ा मिल जाता था,और जो पार्टीयो ने नही जाता उसे लोग गवार की नजर से देखते ,स्वाभाविक है की बदलते समाज की भेंट कुछ मासूम लोग ही चढ़ते है,और इसी ड्रग्स जो की पार्टीयो में आम होने लगी थी का शिकार हुई मेरी सबसे अजीज दोस्त नेहा ,वो बेहद ही खूबसूरत थी ,और मेरी ही तरफ लोगो के साथ आराम से घुल मिल जाती थी ,लेकिन हममें एक ही असमानता थी की वो शहर में पली बढ़ी थी जबकि मैं गांव में और इस एक असमानता ने हमारे सोच में बहुत फर्क लाया था,वो बहुत खुले विचारों की लड़की थी ,उसने अपना कौमार्य बहुत कम उम्र ने ही खो दिया था,उससे ही मुझे सेक्स का पहला ज्ञान मिला उसे अधेड़ उम्र के लोग पसन्द थे और वो मिश्रा को भी लाइन मारा करती थी ,जो भी वो बहुत खुले विचारों की लड़की थी लेकिन दिल से बहुत नरम और साफ,यही हमारे दोस्ती की बुनियाद थी,वो ड्रग्स के नशे में पड़ गई और मेरी प्यारी सी नेहा ने अपनी जिंदगी बर्बाद करना शुरू कर दिया,ऐसे तो मैं भी ड्रग्स लिया करती थी पर कभी कभी मुझे अपने पर पूरा कन्ट्रोल था,ऐसे भी बचपन से कराटे ,योग ,और ध्यान की ट्रेनिंग और घर वालो के संस्कार ने मुझे कही ना कही बहुत ही प्रोटेक्ट किया था,लेकिन नेहा की हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही थी ,वो एक बहुत ही अच्छे घर की लड़की थी ,बाप के पास पैसा भी बहुत था लेकिन किस काम का….

मैंने उसे तड़फते देखा,उसे समझने की कोसीसे की लेकिन ….

मैं उसे इस दलदल से निकलना चाहती थी पर मैं मजबूर थी,मैंने पूरी बात मिश्रा जी को बताई और उन्होंने मुझसे इससे निपटने का वादा किया,मुझे नही पता था की वो ऐसे भी इस काम में लगे हुए है और इसका कारण कुछ और था,

तभी मार्किट में एक नया ड्रग्स आया जो की युवाओं की पहली पसंद बन रहा था,काम उत्तेजक उस ड्रग्स से सेक्स की इच्छा और शक्ति दोनो ही बहुत बढ़ जाती थी …सुनने में तो ये बहुत अच्छा लगता है लेकिन इसके ज्यादा प्रयोग से होने वाला नुकसान बहुत ही खतरनाक था,वो था कभी संतुष्ट ना होनी वाली सेक्स की इच्छा….अंदरवर्ड के लोग इसका प्रयोग लड़कियों को जिस्म फरोशी के धंधे में उतारने के लिए करना चाहते थे,और इसके लिए उन्हें कोई भी मेहनत नही करनी पड़ रही थी क्योकि लोग खुद ही इसे ले रहे थे वो भी ऊंचे दामो में ,और इसका प्रयोग कर मजा लेने वालो में मेरी फ्रेंड नेहा भी थी,शुरुवात तो बड़ी अच्छी हुई लेकिन ……..

वक़्त के साथ साथ नेहा की हालत एक सेक्स एडिक्ट की हो रही थी ,और उसे बचना मेरे लिए एक मात्रा मकसद बन गया था,तभी घटे एक वारदात ने मुझे हिला कर रख दिया ,पुलिस ने एक सेक्स रैकेट पकड़ा जिसमें नेहा भी शामिल थी,

मिश्रा जी की पहुच की वजह से ये बात कभी न्यूज़ में नहीं आई, लेकिन इससे ये जरूर साबित हो गया कि ये ड्रग्स क्या करा सकता हैं, इससे पुलिस और प्रशासन के भी कान खड़े हो गए, इसमें उनके भी कई नेता और अधिकारियो के शामिल होने के अंदेशे के कारण इसके खत्मे के लिए एक गुप्त समिति बनाई गई, मिश्रा जी ias होने और ईमानदार छबि के कारण उस समिति के सदस्य बने,जिसने एक टीम तैयार करने का प्रस्ताव रखा,लेकिन समस्या ये थी की इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए उसके अंदर घुसना पड़ता और वो काम करेगा कौन???

इसमें सिर्फ मर्दो से काम नही चलने वाला था इसके लिए लड़कियों को भी तैयार करना पड़ता लेकिन अंडरवर्ड के लोग अधिकार पुलिस वालो को जानते थे,और पुलिस और प्रशासन में बैठे लोगो जो इसमें शामिल है की नजर से बचाकर किसी अंदर कवर एजेंट की नियुक्ति करना संभव नही लग रहा था,उन्हें ऐसे लड़कियों की जरूरत थी जो की ना सिर्फ वहां घुस सके बल्कि बिल्कुल नए चहरे हो,ये काम मिश्रा ने अपने हाथो में लिया और एक लड़की ढूंढ ही निकली जिसे पैसे की बहुत जरूरत थी लेकिन काम उसे मिल नही रहा था,मिश्रा ने उसे पुलिस में नॉकरी दिलाने का वादा किया,और प्रारंभिक रूप के एक कांस्टेबल के जॉब में भी लगवा दिया,बिना ट्रेनिंग के ही उसे इस पहले मिशन में भेज दिया गया,

लड़की का नाम था जूही,वो एक शादीशुदा लेकिन कम उम्र की आकर्षक लड़की थी ,मिश्रा ने सभी प्रॉब्लम मुझसे शेयर की और मैं भी इस मिशन का हिस्सा बनने के लिए जिद करने लगी,तब तक मेरे और मिश्रा जी के बीच सिर्फ प्यार का रिश्ता था,लेकिन वो प्यार अपनत्व के अलावा कुछ भी नही था,मैं उसे दिलोजान से पसंद करती थी उसकी नजर भी मुझपर होती लेकिन मेरे घर वाले भी उससे कम पावरफुल लोग नही थे शायद इसिलए मिश्रा ने कभी आगे बढ़ने की हिम्मत नही की ,वही मेरे सामने पहले से कई समस्याएं खड़ी हो चुकी थी जिसका मुझे समाधान करना था,मेरा दिल रोज नेहा को देखकर रोता था,नेहा भी मेरी भावनाओ को समझती थी लेकिन उसे ये आदत ऐसे जकड़े हुए थी की उससे अलग होना उसके लिए अभी मुनासिब नही था,मैंने उसे तकिए को अपने योनि से लगाकर रगड़ते देखा था,अब वो मेरे पास ही रहती थी ,सेक्स की इच्छा इतनी घातक हो सकती है मुझे तभी समझ आया,वो रोया करती थी की कैसे भी मुझे सेक्स दिलाव ,सेक्स रैकेट में पकड़े जाने के बाद से मैंने उसका अकेले निकलना बंद कर रखा था,लेकिन उसके हालत से मजबूर होकर मुझे उसे पार्टी में जाने की अनुमति देनी पड़ती थी ,वो मुझसे इस कदर प्यार और भरोसा करती की मेरे एक ना में वो बस रोती रह जाती लेकिन कभी मेरे विरुद्ध जाने की जिद नही करती ,मेरे दिल में हमेशा कांटे चुभते थे की ना जाने मैं इसे कैसे इस दलदल से निकलू और एक गुस्सा मेरे जेहन में बस गया था की जिसने भी इसकी ये हालत की है मैं उसे मार डालूंगी…..

मिश्रा ने मेरे प्रस्ताव को टुकड़ा दिया लेकिन मेरे जिद करने पर वो भी सोचने पर मजबूर हो गए लेकिन नेहा इसके खिलाफ थी वो कभी नही चाहती थी की मैं उस दलदल में फंसु जंहा वो है ,वो खुद इस मिशन का हिस्सा बनने की जिद करने लगी थी आखिर में ये डिसाइड हुआ की दोनो ही अलग अलग रूप से इस मिशन में जुड़ेंगे,नेहा की सेक्स की भूख भी शायद यहां जाने से शांत रहे लेकिन मुझे कुछ ना हो इसके लिए मुझे कुछ अलग तरह के काम सौपे गए,मुझे ड्रग्स और सेक्स दोनो से दूर रहना था,लेकिन वक़्त क्या गुल खिलाने वाला था किसे पता था,हमारे सुरक्षा और सहयोग के लिए कुछ अंदर कवर एजेंट नियुक्त किये गए थे ,जो अलग अलग विभाग से चुने गए थे,हमे जगहों का पता लगाना था और जो लोग इसमें इन्वॉल्व है उन्हें गिरफ्तार करवाना था,ऐसे तो ये मिशन ज्यादा बड़ा नही था लेकिन उसे सफाई से करना बहुत जरूरी था,….

हमरी शुरुवात तो धमाके दार हुई जूही सचमे कमाल की थी ,उसके तीखे नयन नख़्स से लोग इतने जल्दी उसके दीवाने हो जाते की सारे सीक्रेट उगल देते,वही नेहा भी कमाल की साबित हुई और सबसे अच्छी बात ये हुई की वो इस काम से बहुत संतुस्ट थी उसने ड्रग्स लेना कम कर दिया था और वो खुस रहने लगी थी ,मेरा काम कुछ खास नही था,मैं बस निगरानी करने,इन्फॉर्म करने और वक़्त पड़े तो लड़ाई करने का काम करती थी,हमने 2 सप्ताह में ही कुल 20 लोगो को गिरफ्तार करवाया ,नेहा को पहले से सेक्स रैकेट के एजेंटों का पता था वो इसका फायदा उठा फिर से इस काम में निकल पड़ी और उसके इनफार्मेशन के बेस में जगह जगह छापे पड़ने लगे,इधर जो लोग इसमें इन्वॉल्व थे वो बौखला से गए थे,इतने छापे कई करोड़ो के ड्रग्स पकड़े गए थे,हम अपने शहर तक ही सीमित नही थे हम दूसरे जगहों पर भी जाते,कई फार्म हाउस में छापे पड़े,मैं सभी की नजरो से हमेशा ओझल ही रही लेकिन जूही और नेहा को स्पॉट कर लिया गया,इससे कोई खासा फर्क तो नही पड़ा और कई अधिकारियों को भी हमने गिरफ्तार करवाया,लेकिन जिसे मैं जानना चाहती थी वो अभी तक हमारे सामने नही आया था की आखिर इन सबके पीछे है कौन वो एक व्यक्ति जिसने पूरा जाल बिछाया है……..

कुछ समय बाद ऐसा लगने लगा की हमारा काम पूरा हो गया ,कही कोई भी वारदात नही ,ड्रग्स से पीड़ित लोगो के लिए केंद्र भी खोले गए जिसमे नेहा भी जाने लगी थी,किसी पार्टी में उस ड्रग्स का नामोनिशान नही मिलता था,आखिर 2 महीने के मेहनत के बाद शासन ने भी सोच लिया की उनका काम खत्म हो गया है,हमारी टीम को पुरुस्कार देने की बात होने लगी लेकिन मैं सामने नही आना चाहती थी ना ही नेहा,पूरा श्रेय अकेले जूही को मिला और साथ ही मिला उसे प्रमोशन ,…………

लेकिन कहानी अभी खत्म नही हुई थी,असली गुनहगार बस इसी तलाश में बैठा था की कब हम शांत हो जाय और वो अपना वॉर करे …

मैं अब भी नेहा के साथ ही रहा करती थी ,नेहा की हालत में काफी सुधार हो गया था लेकिन फिर भी उसके सेक्स का नशा गया नही था,वो कम लेकिन फिर भी क्लबो में जाया करती थी,उसके पेरेंट्स को इसके बारे में कुछ भी नही पता था,लेकिन कुदरत कभी कभी जब दुख देने में आती है तो तोड़कर ही रख देती है और ऐसा ही नेहा के साथ भी हुआ उसके माता पिता का एक एक्सीडेन्ट में देहांत हो गया ,वो इससे अंदर के टूट गई थी ,और अब वो थोड़ा चुप ही रहा करती,उसकी उदासी मुझे भी दुखी करने लगी थी,

इधर मेरे और मिश्रा जी के बीच कुछ होने लगा था,वो मेरे लिए प्यार का पहला आभास था,वो एक अजीब सी कुलबुलाहट मेरे अंदर होने लगी थी,हम दोनो को ही पता था की हमारे बीच ये सब थोड़ा अजीब था,लेकिन फिर भी मिश्रा जी का भी व्यवहार मेरे प्रति बदल रहा था,वो मुझे कभी कभी छू लिया करते और मैं जानती थी की उनकी इस छुवन में वो बात नही है जो एक अभिभावक के छूने में होती है,इम्की छुवन मेरे अंदर कुछ हिला सा देती थी,मैं अब उनके सामने बहुत शर्माने लगी थी ,मुझे लगता की मिश्रा जी मुझे देखेंगे तो उन्हें कैसा लगेगा वो क्या सोचेंगे,मैं अब कभी कभी उन्हें खुश करने के लिए ही सजने लगी थी,नेहा को अपनी उदासी ,और दुख में मेरे कारण खुस होने की एक वजह मिल गई थी,वो मुझे मिश्रा जी के नाम से छेड़ती थी,कभी कभी मिश्रा जी के सामने भी इस बात को निकाल देती हम दोनो ही इस बात को लेकर नर्वस हो जाते थे,तब वो खिलखिला कर हँसती,उसकी उस मासूम हँसी में मैं खुस हो जाती ,मिश्रा जी से नजदीकियां बढ़ाने को वो हमेशा ही जिद किया करती थी ,लेकिन मैं डरती थी वो डर एक अनजान सा डर था,उम्र की ये दूरियां,उनकी मेरे इतनी ही एक बेटी थी जिसके बारे में मिश्रा जी ने मुझे बताया था,मैं उनके बेटी के उम्र की थी और उनके साथ रिलेसन रखना ,एक डर तो था,लेकिन मिश्रा जी के अलावा किसी और की बात दिमाग में ही नही आती,लेकिन उस रात कुछ हुआ……………..

मैं और नेहा एक पार्टी में गए थे कालेज के दोस्तो के साथ बहुत दिनों के बाद हम पार्टी कर रहे थे ,बारिस का मौसम था और बारिस अपने पूरे सबाब पर थी,हम दोनो ही शराब के नशे में थे ,नेहा को सेक्स का भूत चढ़ गया,हमारे ही क्लास का एक लड़का जिससे नेहा के पुराने रिलेसन थे वो नेहा को रुकने की जिद करने लगा,पार्टी उसके ही घर हो रही थी ,नेहा भी आज पूरी तरह से तैयार थी बस मेरे हा कहने का इंतजार था,दोनो ही मुझसे परमिशन मांग रहे थे,मैं लड़के को जानती थी और नेहा भी अपने माता पिता की मौत के बाद आज खुस लग रही थी ,मैं चाहती थी की वो भी अपने नार्मल जिंदगी में वापस आ जाय,मैंने उसे हा कह दिया लेकिन मैं वहां नही रुकना चाहती थी,और मैंने मिश्रा जी को बुला लिया,मिश्रा जी ने गाड़ी भेजने की बात कही ,हम सभी दोस्त बारिश में खूब नाचे थे,

मेरी गाड़ी आयी और मैं घर की तरफ चल दी,मैं जानती थी की हो ना हो मिश्रा जी भी आज मेरे रूम में होंगे …

मैं एक लाल कलर की साड़ी में लिपटी हुई थी,बदन और कपड़े दोनो ही भीगे हुए थे,नई नई जवानी आयी थी और मादकता अपने चरम पर थी,शरीर में अभी अभी भराव आने शुरू हुए थे,मैं एक अनखिली फूल थी…

मिश्रा जी के दरवाजा खोलते उनकी नजर मेरे पूरे बदन पर गई ,उनके बेटी की उम्र की लड़की आज उनके सामने खड़ी थी अपने जवानी के उफनते शैलाब को भीगे हुए कपड़ो में छुपाते हुए,लेकिन सच तो ये था की जिस्म की मादकता भीगने पर और निखर कर आ रही थी,

वो आंखे फाड़े मुझे घूर रहे थे और मैं शर्म से मरी जा रही थी,मैं भी शराब के सुरूर में थी लेकिन इतनी बेआबरू नही थी की बहक जाऊ,मैं अंदर आने को हुई मिश्रा जी ने मुझे रास्ता दिया मैं सीधे अपने कमरे में चली गई ,मिश्रा जी ने ही हमे ये 2 bhk का फ्लेट दिलवाया था,वो कभी कभी ही आते थे,लेकिन उनके लिए एक कमरा बुक था,शराब के नशे में मैंने एक गलती कर दी ,मैं अंदर तो आ गई लेकिन कमरे को बंद करना भूल गई,दरवाजा सरकता हुआ खुल गया था जब मैं दर्पण के सामने खड़े अपने यौवन को निहार रही थी,मेरा पल्लू सरका हुआ था और मेरे बड़े तरबूज मेरे कसे ब्लाउज़ से बाहर आने को बेताब थे,दरवाजा जब सरका तो मैं उन्हें ही हाथो में पकड़े थी और मुस्कुरा रही थी ,मिश्रा जी सामने ही खड़े थे और।मुझे आश्चर्य से घूर रहे थे,ना जाने उन्होंने क्या देख लिया था लेकिन उनकी आंखों में विस्मय के बहाव साफ साफ झलक रहा था,मुझे भी इसका आभास हुआ और मैं मुस्कार उनकी तरफ देखने लगी,हमारी आंखे मिली और मैं शर्म से मूर्ति की तरह खड़ी की खड़ी रह गई,जब मुझे होश आया की मैं क्या कर रही हु मैं भागते हुए गेट को बंद करने गयी लेकिन मिश्रा जी की सब्र की सीमा तब तक टूट चुकी थी,वो आगे बढ़कर गेट तक पहुचे और मुझे उसे बंद करने से रोक लिया वो अब मेरे कमरे में थे,वो मुझे देखते ही रहे और मेरी नजर जमीन को ……..

मेरा पल्लू अभी भी गिरा हुआ था,उन्होंने अपना हाथ मेरे कमर पर रखा,गिले बदन में जैसे आग लग गई हो,मैं एकदम से कांप गई ,वो मुझे अपनी ओर खिंचे और मैं किसी गुड़िया की तरह उनसे जाकर चिपक गई ,उन्होंने अभी एक बनियाइन और निकर डाल रखी थी ,उनके छाती के घने बाल में मेरा चहरा रगड़ खा रहा था,मेरे कान उनके धड़कनों की आवाज सुन सकते थे,उनके हाथ काँपते हुए मेरे बदन को सहला रहे थे ,हम दोनो की सांसे इतनी भारी थी की इसका अहसास दोनो की कर सकते थे,लेकिन दोनो ही आगे बढ़ने से डर रहे थे,एक अजीब से फीलिंग थी ,पहली बार किसी ने मुझे इस तरह से और इस मकसद से छुवा था,मैं कुछ भी नही करना चाहती थी बस चाहती थी की बस ऐसे ही उनके सीने में सर रखे पड़ी रहू,

लेकिन कब तक वासना की आग तो दोनो में धधक रही थी ,ये वासना था या प्यार????

कहा नही जा सकता ,लेकिन वासना हम पर हावी थी,एक दूजे से सटे रहने का कारण जरूर प्यार ही था ,वो प्यार जो सालो से हमारे बीच पल रहा था आज उसे अंजाम मिलने वाला था,लेकिन अभी तो हम जिस्म की उस आग के गिरफ्त में थे जिसने हमे जला दिया था,

उनके हाथ अब मेरे कमर से होते मेरे नितंबो पर पड़े मेरी सांसे रुक गई,और उनके हाथ भी मेरी इतनी भी हिम्मत नही हो रही थी की मैं उनसे अलग हो सकू,या उन्हें रोक सकू,या उन्हें आगे बढ़ने को कहु मैं क्या चाहती थी वो तो मुझे भी नही पता था,बस पता था तो ये पल,ये पल सचमे बड़ा ही खूबसूरत था और मैं बस यही रहना चाहती थी इसके सिवा कुछ भी जो हो रहा था ,मैं उसके अहसास में ही खोये रहना चाहती थी ,मैं उनके हाथो को अपने नितंबो के ऊपर महसूस किया और मेरे मुह से एक सिसकारी अनायास ही निकली,

“आह ,”

ये सिसकारी शायद मेरे इस खेल को इजाजत देने का प्रमाण था,मिश्रा जी को वो मिल गया था जो वो चाहते है,उन्होंने हल्के से नितम्भो को दबा दिया,

“आआआ हहहह “

इस बार मेरी सिसकी थोड़ी लंबी थी,

उन्होंने मेरे चहरे को उठाया,मेरे गीले बालो से अभी भी पानी की धार बह रही थी ,और मेरे चहरे में अभी भी नमी थी,वो मेरे आंखों में देखने का प्रयास करने लगे लेकिन मैं किसी नई दुल्हन की तरह शर्मा रही थी,उनसे नजर मिलने की हिम्मत मुझमे नही थी ,उनका मुझे यू देखना मुझे बहुत भा रहा है,लेकिन वो मीठा दर्द भी सहन से बाहर हो रहा था,मैं अपने चहरे को यू दूसरी ओर किया जैसे की मैं उन्हें इसे दिखना नही चाहती ,वो नाकाम कोसीसे थी और उनके होठ मेरे गालो में पड़े,

ये शराब का नशा था की मेरे प्यार का या उस हवस का लेकिन जिंदगी की पहली होठो की छुवन ने मुझे झकझोर कर रख दिया था,

उनके होठ मेरे गालो को भिगो रहे थे ,अब मिश्रा जी थोड़े तेज हो गए थे,वो मेरे गालो को चूस रहे थे,चाट रहे थे और मैं शर्म से बेहाल हो रही थी ,लेकिन उस आनंद को शब्दो में नही बंधा जा सकता,मैं जैसे एक जन्नत में थी ,शर्म का पर्दा कह रहा था की मैं उनसे अलग हो जाऊ ,लेकिन मेरे होठो से निकलने वाली हल्की सिसकारियां और मेरे होठो की मुस्कान कुछ और ही कहानी कह रही थी,

मैं उनकी बांहो में मचलने लगी,जैसे की मैं उनकी पकड़ से आजाद होना चाहती हु,लेकिन मिश्रा जी ने मेरे होठो तक अपने होठो को पहुचने का रास्ता खोज ही लिया,उनके होठ मेरे होठो से मील कुछ देर तक मैं उसे हटाने की कोसीसे करती रही लेकिन मेरे होठो में जैसे जैसे मिश्रा जी के लार का गीलापन चढ़ता गया मेरा विरोध कमजोर पड़ता गया,आखिर में हमारे होठ मिले,वो ऐसे मिले जैसे वो इसी के लिए बनाये गए हो,मिश्रा जी जैसे मेरे होठो को खाना चाहते थे और मैं भी इतनी उत्तेजित हो गई थी की मुझे नही पता चल रहा था की मैं क्या कर रही हु ,मेरी आंखे बंद थी और मैं इस खेल के पूरे नशे में थी ,हम कब बिस्तर में जा गिर गए हमे पता ही नही चला,मिश्रा जी मेरे ऊपर थे और मेरे होठो को चूसते हुए मेरे गीले उजोरो से खेल रहे थे और मेरे हाथ उनके बालो में थी मैं उसे अपने ओर जितनी ताकत से हो सके खिंच रही थी ,वो अपने हाथ को मेरे पूरे शरीर में चला रहे थे और उनका प्रिय स्थान मेरे वक्ष थे,वो मेरे टाइट ब्लाउज के अंदर अपने हाथो को घुसने की कोसीसे करने लगे और उन्होंने उसे सरका ही दिया,वो एक खिलाड़ी के तरह हर काम में माहिर थे,उनके हाथ कब मेरे पीठ में जाकर मेरे ब्लाउज़ और ब्रा के बटनों को खोल चुका था मझे पता ही नही चला,और चलता भी कैसे मझे कहा किसी का होशं था मैं तो बस उनके होठो के जरिये ही उनमे समाना चाहती थी,मुझे क्या पता था की उनमे सामने के असली रास्ते को तो मैंने अपनी साड़ी फिर पेटीकोट फिर पेंटी के अंदर छुपा रखा है,ऐसे मेरे योनि से धार की बरसात भी हो रही थी लेकिन फिकर किसे थी ,मैं बस उसी पल में सिमट गयी थी,जो हो रहा था उसी होने दे रही थी और उसका पूरा आनन्द ले रही थी.

मिश्रा जी मेरे बूब्स तक अपनी पहुच सीधे बनाने में कामयाबी हासिल कर ही ली ,वो उसे मसल रहे थे ,और शायद उसे चूसने के लिए मेरे होठो से अपने होठो को अलग करने लगे ,लेकिन मेरा मन अभी नही भरा था मैं उनके सर बार बार खिंच लाती और वो बार बार मेरे निप्पलों को अपने मुह में भरने की कोसीस करते,आखिर जब वो इसमें सफल हुए तो मैं जैसे टूट गई,इतना आनन्द मेरे समझ और बर्दास्त के बाहर था ,मैं टूट गई मेरा शरीर अकड़ाने लगा था और जैसे मेरी योनि से एक तेज धार बही हो ,क्या हुआ था मुझे इसकी समझ नही थी पर जो भी हुआ था उसके बाद मैं पूरी तरह से थक चुकी थी,मैं किसी लाश की तरह गिर गई ,मेरे हाथ फैल गए और मिश्रा जी मेरे निप्पलों को चूसने में ही व्यस्त थे ,वो खिलाड़ी थे उन्हें पता तो चल चुका था की मेरे साथ अभी क्या हुआ है वो फिर से मेरे होठो को अपने होठो में लेकर चूसने लगे ,मेरी आंखों से खुसी के आंसू बह निकले थे,मेरे हाथ उनके सर पर चले गए और इस बार हम बिल्कुल आराम से एक दूसरे के होठो को चूस रहे थे,मैं एक कृतज्ञता के भाव से भर गई थी,जिसे की मिश्रा जी ने मुझे कोई अनमोल तोहफा दे दिया हो मैं उनके बालो को सहलाये जा रही थी,बड़े प्यार से उनके होठो को चूस रही थी ,वो भी बड़े शांत दिख रहे थे,शायद हवस अब प्यार में तबदील हो रहा था,मेरे बोब्स मेरे सीने में लटक रहे थे ,ब्रा को निकाल के फेक दिया गया था,लेकिन ब्लाउज भी उतरा हुआ था लेकिन निकला नही था,वो अभी मेरे कंधे से उतर कर मेरे हाथो के पास था वही थोड़ा सा मेरे उजोरो के नीचे सरक चुका था,वो मेरी साड़ी को हल्के से ऊपर सरकाने लगे,उनके हाथ मेरे जांघो पर चलने लगे ,मेरी आंखे इस बार खुली थी मैं उनके चहरे को एक बार प्यार से देखी और फिर उन्हें अपने ऊपर खिंच लीया मेरी आंखे फिर से बंद थी और मैं उसे बंद ही रखना चाहती थी,

मैं उनके होठो को छोड़ना ही नही चाहती थी,वो अलग होते तो उन्हें फिर से खिंच लेती,सांसे उखड़ रही थी लेकिन दम तो अभी बाकी था,उनके हाथ मेरे जांघो से होते हुए मेरे कूल्हों तक आ गए,मेरी पतली पेंटी से उनके हाथो का अहसास होते ही मेरे मुनिया ने फिर से एक धार छोड़ दी,मैंने इस उत्तेजना को पहले कभी महसूस नही कीया था ,वो गर्म सांसे वो सर्द हाथ ,वो कपकपी और यौवन की अजीब सी आग,जो जलती थी भड़कती थी और फिर एक धार सा योनि से छूट जाता और मैं फिर से निढल बिस्तर में पड़ जाती,लेकिन मिश्रा जी नही थकते थे वो मेरे बदन को रौंद देना चाहते थे और मैं भी उनके नीचे पीस जाना चाहती थी,मेरी साड़ी मेरे जांघो से ऊपर मेरे कमर पर थी ,मेरे वो गुप्त अंग जिसको मैंने सालो से छिपा रखा था वो बस एक पतले से पेंटी के अंदर कैद थे,उनके हाथ मेरे नितम्भो को मसलने में कोई भी कमी नही कर रहे थे,अब उन्होंने मेरी टांगे फैलाई जिन्हें मैंने सिकोड़े रखा था,मैं तो उनकी गुलाम बन गई थी,वो मेरी दो जांघो के बीच की एक छोटी सी सुराख को खोजने अपने हाथो की उंगलियों को वहां ले गए ,मेरे झरने दो बार बह चुके थे और इस एक छुवन से ही मेरी अंगड़ाई निकल गई ,वो फिर से रस बरसाने की तैयारी में थे,लेकिन वो झरे नही ,वो बह रहे थे,और मैं मचल रही थी,अपने उस पहले अहसास में मरी जा रही थी,उनकी उंगलियों ने मेरे सुराख को खोज ही लिया वो उसे छू कर बस सहला ही रहे थे कि …..

दरवाजे में जोरो की दस्तक हुई ,ऐसे जैसे की कोई उसे तोड़ ही देना चाहता है,मिश्रा जी घबरा गए थे वो जल्दी से उठे और अपने कपड़े ठीक करने लगे ,

“कौन है????”

मिश्रा जी की आवाज में एक अजीब सा गुस्सा और नाराजगी थी,

“सर मैं हु जल्दी खोलिए “

ये उनका पर्सनल इन्फॉर्मर था,साथ ही उनका पर्सनल ड्राइवर अरुण कुमार ,

“क्या हो गया “

वो वही से चिल्लाए

“सर इमरजेंसी है….”.

जब अरुण ने कहा तो सच में इमरजेंसी होगी,वो उठकर तेजी से दरवाजे की तरफ बड़े मैं भी जल्दी से उठाकर बाथरूम में घुस गई ,मेरी सांसे अभी भी तेज थी मैंने उसे सम्हाला और अपने कपड़े ठीक किये ,ब्रा तो फेक दिया गया था और उसे ढूंढने की मैंने जहमत भी नही की मैं साड़ी ठीक कर हल्के से बालो को सवार कर बाहर निकली ,बाहर मिश्रा जी एक सोफे में सर पकड़े बैठे थे,उनकी निगाह मुझपर गई ,अरुण की निगाह मुझपर गई ,मेरी निगाह मिश्रा जी पर थी ,मैं अपने नजरो से ही उन्हें पूछ लिया की क्या हो गया …

“नेहा और जूही का किडनैप हो गया है,उन्हें पता चल गया की वो इस मिशन में इन्वॉल्व थी “

मैं पत्थर की मूर्ति की तरह जम गई थी,

“किसने किया ये “

मैं रोना तो चाहती थी पर मेरे आंखों से आंसू गायब थे ,चहरा जड़वत हो गया था,

“काजल मैंने तुमसे कुछ बाते छुपाई है …………”

वो मेरी नजरो से नजर भी नही मिला पा रहे थे और मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था ……

चटाक एक जोरदार थप्पड़ मैंने मिश्रा जी के गालो पर लगाया ,लेकिन वो हिले भी नही,

“आप जानते थे की वो हमे आसानी से ट्रेस कर सकता है और फिर भी अपने हमे शेर के लिए किसी बकरी की तरह इस्तमाल किया ,आप तो बड़ी समाज सेवा की बात करते थे लेकिन आपने हमारा इस्तमाल अपने निजी स्वार्थ के लिए किया,मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नही थी मिश्रा जी ,मैं आपसे प्यार करती हु और अपने …”

“काजल मैं भी तुमसे प्यार करता हु ,लेकिन रोबर्टो ने जो मेरे साथ किया वो मैं नही भूल सकता,हा मैंने तुम्हारा इस्तमाल किया लेकिन क्या मैंने कोई भी जबरदस्ती तुम्हारे साथ की तुम लोग खुद ही इस मिशन का हिस्सा बने ,”

“हा हम खुद ही इसका हिस्सा बने थे लेकिन आपको हमें रोबर्टो के बारे में बताना चाहिए था,हमे तो हमेशा लगता था की हमने सभी माफिया को खत्म कर दिया है लेकिन आपने ना सिर्फ हमसे बल्कि पुलिस से भी ये बात छुपा कर रखी की असली माफिया तो रोबर्टो है,”

“मैंने तुमलोगो की सुरक्षा का हमेशा ही ध्यान रखा है काजल,मेरे आदमी मिशन के पूरा होने के बाद भी तुमपर नजर रखे थे,लेकिन ना जाने ये कैसे हो गया,वो तुमलोगो से बदला लेने के लिए बेताब है ,वो ना जाने क्या करेगा,…..तुम इससे दूर रहो अपने घर चले जाओ मैं नेहा और जूही को बचने की पूरी कोसिस करूँगा ,”

मेरे चहरे में एक व्यंग भरी मुस्कान आ गई ,

“अच्छा क्या करेंगे आप ???जानते हो कहा लेकर गए ???”

मिश्रा जी चुप थे

“मैं ढूंढ लूंगा काजल ,मैं पूरी ताकत लगा दूंगा,तुम आज ही यहां से निकलो “

“मैं कही नही जा रही हु मिश्रा जी ,अपने सिर्फ मुझे धोका नही दिया है बल्कि मेरी दोस्त को भी मुसिबित में डाला है,मैं आपसे जितना प्यार करती हु उससे कही ज्यादा मैं नेहा से प्यार करती हु,मैं उसे ढूंढूंगी …”

वो मुझे आश्चर्य से देखने लगे

“बात फैला दो की वो 2 नही 3 लडकिया थे और तीसरी अभी भी आपके साथ है,इसी शहर में वो मुझे पकड़ने को सभी कुछ करेंगे और मैं उनके पकड़ में भी आ जाऊंगी ,आप मेरे पीछे उनतक पहुच सकते है “

‘तुम सोच नही सकती काजल की वो इतना खतरनाक है ,अगर तुम उसके हाथ लग गई तो ….ना जाने वो तुम्हारे साथ क्या करेगा ,”

“मुझे इसकी चिंता नही है “

मिश्रा जी ने कुछ देर मुझे देखा और फिर

“ठीक है ,तुम्हारे शरीर में एक डिवाइस लगा देते है जिससे तुम्हे हम ट्रेक कर सकेंगे “मिश्रा जी इतना कहते हुए वहां से निकल गए ….

मुझे अब भी आश्चर्य हो रहा था की मिश्रा जी ने मुझे रोका क्यो नही ,वो इतनी जल्दी मान जाएंगे मुझे पता नही था,

‘ह्म्म्म उन्हें मुझसे ज्यादा फिक्र उस रोबर्टो को पकड़ने की है ,अपनी बीवी को तो नही बचा पाया अब उसका कारोबार तबाह करेगा ,वो भी हमे बली का बकरा बनके ‘मैंने मन में सोचा और मिश्रा जी के लिए मेरे मन में एक घृणा के भाव आ गए ,मैं सोचती रही सोचती रही मैं कुछ भी डिसाइड नही कर पा रही थी की आखिर करना क्या है…..

मेरे बालो में एक छोटा सा डिवाइस फिट के दिया गया था,मैं सामान्य तौर से ही जीवन जी रही थी,मुझे मेरे आसपास पुलिस वाले दिख जाते जो की सादे कपड़ो में थे ,मुझे मिश्रा पर गुस्सा आ रहा था ,ये पोलिस वाले चहरे से पहचान में आ रहे थे ,कोई भी इन्हें दूर से पहचान सकता था,रोबर्टो इतना बड़ा माफिया इतना चुतिया तो नही होगा की वो कदकाठी और बालो की स्टाइल से इतना पहचान ना सके की ये ट्रेंड लोग है,5 दिन बीत चुके थे और मेरे अंदर एक आग सी फैल रही थी मुझे नेहा से मिलना था पता नही उसका क्या हाल किया गया होगा ,मुझे इस बात की कोई भी फिकर नही थी की पकड़े जाने पर मेरे साथ क्या होगा ,आखिर वो दिन आया मैं हमेशा की तरह ही कॉलेज के लिए निकली दो दिनों से अपने आस पास उन पुलिस वालो को नही पाकर मैं सतर्क रहती थी ,बाकी सभी गायब थे,आखिर ये गए कहा ,तभी एक गाड़ी आकर रुकी और मुझे उसके अंदर खिंच लिया गया,अंदर जाते ही मुझे एक इंजेक्शन लगा दिया गया और मैं बेहोश हो गई ……….

जब मुझे होश आया तो मैंने खुद को एक बड़े से कमरे में पाया ,एक साधारण सा कमरा था,वहां कुछ लोग मुझे खड़े दिखे ,मैं हल्के से अपनी आंखे खोली ,कुछ आवाजे मुझे सुनाई दे रही थी ,किसी के जूतों की आवाज ,

“इसे ड्रग्स दे दिया तुमने “

“जी सर “

“और तलाशी ली “

“जी सर एक जीपीएस डिवाइस इसके बालो में लगा हुआ था ,उस वही फेक दिया हमने “

“साला मिश्रा अपने को बहुत बड़ा तीस मार खान समझता है,इस लड़की के बालो में फंसा कर जीपीएस डिवाइस लगाया था,सोचा होगा की सिक्योरिटी हटा देता हु जैसे ही किडनैप करेंगे तो उसे पता चल ही जाएगा ,हमे चुतिया समझ के रखा है,चलो लड़की को लेकर चलो रोबर्टो सर के पास “

वो लोग मुझे उठाकर ले जाने लगे मैं अब भी अपनी आंखे बन्द ही रखी थी ,हल्के से आंखे खोल कर मैं उस जगह को देखने की कोसीस कर रही थी वो एक जंगल था,सच में वो एक जंगल था,या कोई बगीचे जैसी जगह ,कोई फार्म हाउस होगा कहा लेकर आ गए थे ये लोग मुझे ,उन्होंने मुझे उस रूम से निकल कर एक बंगले जैसे जगह में ले जा रहे थे ,वहां अच्छी सजावट थी जमीन पर कालीन बिछे थे ,और शायद कुछ लोग भी थे लेकिन आवाज नही कर रहे थे,

“काजल “

मुझे पहली आवाज सुनाई दी ,इस आवाज को मैं अच्छे से पहचानती थी इसी के कारण तो मैं यहां आयी थी ,वो नेहा की आवाज थी ,

मैं उसे सुनकर भी अपनी आंखे नही खोली मुझे दो लोगो ने पकड़ रखा था,उनमे से एक बड़ा कमीना सा था ,थोड़ी ही दूरी लाने तक ना जाने कितने बार वो मेरे बड़े बड़े बूब्स से खेल चुका था ,कभी उसे दबाता तो कभी सहलाता,लेकिन मैं तो बेहोश थी ना…..

“इस पर पानी डालो और उठाओ इसे “

एक विदेशी आवाज मेरे कानो में पड़ी,और मेरे मुह में दो चार ग्लास पानी के पड़े मैंने जगाने की एक्टिंग की और चारो तरफ देखा मुझे जूही और नेहा दिखाई दिए वो बिल्कुल ठीक ही दिख रही थी बस उनकी आंखे लाल सी थी ,थोड़ी बन्द सी जैसे बहुत नशे में बैठी हो ,शायद ड्रग्स का कमाल था,कुछ लोग और वहां खड़े थे जो बॉडीगार्ड टाइप लग रहे थे,नेहा और जूही रोबर्टो के आजु बाजू में एक सोफे पर बैठे थे जैसे की वो उनकी दसिया हो ,इतने दिनों के मन के ऊहापोह में मैंने एक बात निश्चित कर ली थी वो था मिश्रा से बदला लेना.और नेहा और जूही को बचाना और इस माफिया की मा बहन एक करना,

इन सब काम को करने के लिए मुझे अपने मन को पहले से तैयार रखना था,और मैं इतने दिनों से यही कर रही थी ,मेरी नजर जैसे ही रोबर्टो पर पड़ी मैं घबराने की जगह बस मुस्कुरा दी ,जिसे देख कर वहां उपस्थित सभी लोग दंग हो गए ,

“आप ही रोबर्टो हो आपके बारे में बहुत बताया है उस मादरचोद मिश्रा ने मुझे ,कैसी है मेरी जान “

मैं नेहा की तरफ बढ़ी ,नेहा खड़ी हो गई थी ,मैं कुछ ही दूर चल कर ही गिरने को हुई मुझे अब समझ आया की मेरे अंदर कितनी सुस्ती है ,मैं इतनी कैसे थक गई हु ,मेरे जीभ भी बोलते समय थोड़े लड़खड़ा रहे थे….

नेहा खड़ी हो कर मुझे सम्हालती है ,

“तुझे भी इन्होंने ड्रग्स दे दिया ,शैतान कही के इस लड़की की क्या गलती है,जो करना है हमारे साथ करो इसे छोड़ दो ये बहुत मासूम है प्लीज् …”

नेहा के आंसू निकल गए वो रो ही पड़ी ,

“मासूम है????यानी कली फूल नही बनी है ,सर ये तो आपके लिए अच्छा तोहफा है मिश्रा का ,इन रंडियों के तो छेद में कुछ भी डालो सलियो को फर्क नही पड़ता,इसे भेजकर अच्छा किया मिश्रा ने “

एक आदमी ने कहा और बाकी हँसने लगे,

“वो तो है .बहुत सुंदर है ये इसे हम अपनी पर्सनल मिस्ट्रेस बनाएंगे “रोबर्टो की आवाज से नेहा की आंखे और भी पनिया गई ,उसने मुझे जमीन में बिठा दिया और खुद भी मेरे साथ बैठ गई,मुझमे इतनी ताकत तो थी मैं कुछ बोल सकती असल में मेरे शरीर में ये ड्रग्स पहली बार गया था और मुझे कोई सेक्सुअल फीलिंग भी नही थी इसलिए मैं इतनी सुस्त हो गई थी,जो नेहा की समझ में आ रहा था ,

जो करना है कर लेना इसी लिए तो यहां आयी हु लेकिन पहले मुझे उस मिश्रा से बदला लेना है ,रोबर्टो मैं तेरी पर्सनल रांड बन जाऊंगी खुसी खुसी बनूंगी लेकिन मेरी बस एक ही ख्वाहिश है तू मुझे उस मिश्रा के सामने चोदेगा ,उसने मेरा दिल तोड़ा है मैं उससे प्यार करती थी………”

मैं रोने लगी और रोबर्टो को कुछ कुछ समझ आने लगा ,वंहा एक शांति छा गई थी ,

“तुम्हे क्या लगता है की तेरे चमचों को वो डिवाइस खोजने पर मिली थी ,मैंने जानबूझकर उसे बाहर कर दिया था ताकि वो तुमलोगो की नजर में आ सके ,मैं तो चाहती ही थी तुम मुझे पकड़ लो और जो काम मिश्रा नही कर पाया वो तुम करो और वो भी मिश्रा के सामने ,मेरा सील तोड़ने का काम,मिश्रा मुझसे प्यार करता है और उसे मुझे जलाना है,तुम उसे ये करके दिखा दो की जिसे भी वो अपनी समझता है असल में वो तुम्हारी है,जैसे उसकी बीवी और अब मैं ….करोगे ना ….”

रोबर्टो के चहरे में एक शैतानी मुस्कान खिल गई ,जैसे उसे कोई बहुत बड़ा खजाना मिल गया हो …

“बहुत सताया है मुझे मिश्रा ने ,मेरा पूरा कारोबार ही खत्म कर दिया ,अब मैं उसके ही सामने उसकी रांड को चोदकर अपनी रांड बनाऊंगा ,बहुत खुस रहा होगा की तेरी जवानी उसे मिल रही है ,अब मैं उसे दिखाऊंगा की जो भी उसने पसंद करेगा उसे मैं उससे छीन लूंगा ….”रोबर्टो की शैतानी हँसी फिर से गूंज गई ,नेहा के चहरे में डर था लेकिन मेरे चहरे में नही मेरे चहरे में थी बस मुस्कान ……….

“रोबर्टो तुम्हे शायद पता नही की मैं कौन हु ,अब मैं पहले वाला मिश्रा नही रहा ,मैं एक आईएएस अधिकारी हु ,पुलिश तुम्हे कुत्तों की तरह ढूंढ रही होगी तुम्हारा भारत से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा,बेहतर ये ही होगा की तुम अपने को पोलिस के हवाले कर दो और लड़कियों को छोड़ दो “

मिश्रा जी बहुत गुस्से में चिल्ला रहे थे,उनके हाथ ख़ुर्शी से बंधे हुए थे ,हमे उठाये बस दो ही दिन हुए थे की मिश्रा जी को भी किडनैप कर लिया गया था,रोबर्टो को भी पता था की शहर,क्या पूरे देश की पोलिस अब उसके पीछे होगी ,लेकिन सच में ये माफिया जैसे पर्सनाल्टी का मालिक था,साले ने मुझे पाने के लिए इतना बड़ा कदम उठा दिया,मैंने तो उसे फसाने के लिए कहा था,हा मेरी भी यही इच्छा थी क्योकि यहां से भागना तो इम्पॉसिबल ही लग रहा था,तो मैंने एक चाल चल दी,लेकिन रोबर्टो साला बहुत बहादुर निकला वो सच में मिश्रा को मेरे सामने बैठा दिया,पिछले दो दिनों से मुझे सेक्स ड्रग्स की थोड़ी थोड़ी डोस दी जा रही थी,ताकि मैं मर ही ना जाऊ,लेकिन मेरे शरीर भी इसके लिए अडॉप्ट होने लगे ,आज मुझे बड़ा डोस दिया जाना था,वो भी मिश्रा जी के सामने,रोबर्टो और मिश्रा की दुश्मनी क्या थी इससे मुझे कोई भी मतलब नही था लेकिन अब रोबर्टो मिश्रा के दिल को चुरा चुरा करना चाहता था,मैं मिश्रा और रोबर्टो के सामने सर झुकाए बैठी थी,दिल की धड़कने बड़ी हुई थी,हाल में एक बड़ा सा बिस्तर लगाया गया था,जिसमे मेरे सालो के सम्हाले हुए कौमार्य को एक इटालियन ड्रग्स माफिया लूटने वाला था,गुलाब के पंखुड़ियों से उसे ऐसे सजाया गया था जैसे की मेरी सुहागरात हो,मिश्रा को यहां लाये 2 घंटे से ज्यादा हो गए थे,लेकिन अभी वो 10 मिनट पहले ही होशं में आया था ,उसे नही पता था की ये सब क्यो किया जा रहा है ,पर आशंकाओ से उसके चहरे में एक अजीब सा दर्द उठ रहा था,करीब एक घंटे पहले ही नेहा ने मुझे रोते हुए एक क्रीम,मेरे योनि में लगाने को दी थी, वो इस दुख से मरी जा रही थी की उसके कारण मुझे ये सब सहना पड़ रहा है ,लेकिन मैंने उसे कहा की आज नही तो कल ये करना ही था,और ड्रग्स के सरूर में मुझे मजा ही आएगा,फिर टेंसन कैसा,वो मुझे एक अजीब निगाहों से देख रही थी जैसे की पूछ रही हो की तुझे हो क्या गया है,लेकिन पता नही क्यो मुझे डर नही लग रहा था,मैं तो एक उमंग में थी मिश्रा के साथ हुए मेरे पहले प्रसंग की याद कर ही मेरे योनि से एक धार बह जाती थी,शायद ये उस ड्र्ग्स का कमाल था या की मेरी उफनती जवानी का,

हा ये गलत था,लेकिन ये मेरा बलात्कार नही था,मैं एक संस्कारी घर की बेटी थी जिसने कभी भी अपने मर्यादा को भंग नही किया,शायद यही वो वजह थी जिसके कारण मेर मन में एक ग्लानि का भाव आ रहा था,लेकिन अगले ही पल मेरे सामने मिश्रा के चहरे के तस्वीर आ जाती और मैं रोबर्टो से अपने यौवन को मिश्रा के सामने लुटवाना चाहती ,मैं चाहती थी की मिश्रा को उस दर्द का अहसास हो जो मुझे हुआ था,नेहा को हुआ था,जलील होने का दर्द………….

मेरी जवानी आने से लेकर आज तक अगर मैंने किसी पर जान से ज्यादा भरोसा किया था वो मिश्रा जी ही थे,मैंने उनमे ना जाने क्या क्या देखा था,जब वो शहर में मेरे पूरे पढ़ाई की जिम्मेदारी लेकर घर वालो को मनाए थे तो मुझे लगा की ये मेरे लिए भगवान है,जब वो मुझे एक अजनबी निगाहों से देखते और मेरे तन मन में एक उमंग फैल जाती तो लगता था की ये मेरे जान है,जब वो मेरे हर तकलीफ में मेरे साथ होते ,जब वो मेरा केयर करते तो लगता की मैं इनकी ही हो जाऊ…….

मेरे उम्र की उनकी बेटी भी थी लेकिन फिर भी मैंने उन्हें अपना सब देना चाहा,शायद दुनिया से लड़कर मैं उनसे शादी भी कर लेती ,लेकिन उन्होंने क्या किया,उन्होंने सोचे समझे प्लान के तहत मुझे फसाया,वो किसी भी लड़की को यहां भेज सकते थे जो की ट्रेंड हो लेकिन उन्होंने अपने सफलता के लिए और अपने बदले को पूरा करने के लिए सबको धोखे में रखा,रोबर्टो का नाम कही भी नही लिया गया ,आखिर वो चाहते क्या थे,वो चाहते थे की रोबर्टो का नाम सुनकर कोई उनसे ये ना कह दे की ये तो वही है ना जिसने आपकी बीबी से शादी की है,और आप अपना बदला लेने के लिए ये सब कर रहे है,वो इस मिशन से खुद को अलग नही करना चाहते थे,उन्होंने नए लोगो को इतने खतरनाक मिशन में लगाया क्योकि हमे स्पॉट ना किया जा सके ,वो इस कदर अपने फितूर में पागल थे की उन्होंने 3 लड़कियों की जिंदगी और इज्जत की फिक्र ही नही की ,सजा तो उन्हें भी मिलनी चाहिए थी,

हा मैंने उनसे प्यार करती थी,शायद बहुत प्यार ,शायद दिल के किसी कोने से मैं उन्हें अपना मान चुकी थी,शायद जब रोबर्टो मेरी जवानी लूटेगा तो आंखे बंद करने पर मुझे मिश्रा जी ही दिखते,लेकिन मिश्रा जी देख रहे होंगे…मैंने उनकी आंखों में भी अपने लिए प्यार देखा था ,लेकिन वो उनका फितूर उनके प्यार पर हावी हो गया,वो तो सालो से मुझे पाना चाहते थे,और आज उनके ही सामने मुझे कोई दूसरा ……ये चोट होगी उनके आत्मसम्मान पर यही रोबर्टो की इच्छा थी,और अब यही मेरी इच्छा थी………..

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