अब तक मेरा धीरज जवाब दे चुका था। “ठीक है तो चलो टेस्ट करके देखते हैं” हमने उसको घर के अंदर आने को कहा और उसके अंदर आते ही तुरंत दरवाजा बंद कर दिया और उस सब्जी वाली औरत पर झपट पड़ा। फटाफट उसका साड़ी ब्लाउज खोल दिया और उसका नंगा बदन देख कर पागल हो गया। बड़ी बड़ी चूचियां, भारी भारी गांड़, फूला हुआ बूर, झांटों से भरा हुआ। झट से अपना कपड़ा खोल कर वहीं जमीन पर उसको दबोच लिया और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाना और मसलना शुरू कर दिया। मेरा लौड़ा का पूरा साईज देख कर तो उसका होश ही उड़ गया।
“हाय राम, आपका लौड़ा तो बहुत बड़ा है। मेरा बुर फाड़ दीजियेगा। मर जाऊंगी मैं। मत खाइए (चोदिए) हमको।” घबराकर बोली।
“अरे चखने तो दे, तू खुद बोलेगी पूरा खा (चोद) लीजिए हमको।” हम बोले और उसकी फूली हुई बुर किसी कुत्ते की तरह चपड़ चपड़ चाटने लगा। उसकी चूत से पेशाब का गंदा महक आ रहा था मगर हमको उस महक से और ज्यादा जोश चढ़ गया। जोश में आ कर और जोर जोर से सड़प सड़प चाट चाट कर उसको पागल कर दिया।
“आआ्आ्आह राजा, इस्स्स, हाय हाय ओ्ओ्ओ्ओह, अब चोद डालो जी, और मत तड़पाओ राजा” वह गरमा के पागल की तरह बोलने लगी। लोहा गरम था, हमने फटाक से उसके पैर फैला कर उठा लिया, दोनों पैर को अपने कंधे पर चढ़ा लिया और अपना लौड़ा उसकी चूत पर टिका कर एक जोर का धक्का लगा दिया। मेरा लौड़ा उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा जड़ तक घुस गया।
“आ्आ्आह मां मर गई, ओ्ओ्ओ्ओह मेरी बुर फट गई रे बप्पा,” रोने चीखने लगी।
“चुप साली रंडी, एकदम चुप। देख पूरा लंड घुस गया है, थोड़ी देर में ही तू बोलेगी और चोद और चोद।” मैं बोला। इसके बाद उसकी चूतड़ को नीचे से पकड़ कर जम कर चुदाई चालू कर दिया। उसकी चूचियों को चूसने लगा। अब वह भी मस्त हो गई थी और मजे से चूतड़ उछाल उछाल कर हमारे हर धक्के का जवाब देने लगी। “आह राजा, ओह चोदू, इस्स्स इस्स्स उह्ह्ह उह्ह्ह, चोद डालो जी, फाड़ दो मेरी बुर, खा जाओ हमको” बोलती जा रही थी। हम भी दुगुने जोश में भर के भकाभक चोदने लगे। चुदक्कड़ औरत की तरह वह भी इस्स्स इस्स्स करके चुदवाती रही। रुक रुक कर एक घंटे तक चोदता रहा और फिर खलास हो कर वहीं जमीन पर लुढ़क गया। सब्जी वाली तो कितनी बार खलास हूई पता नहीं मगर जब हम उसे चोद कर छोड़ा तो वह एक दम थक कर चूर हो गई थी, पसीने से लथपथ हो गई थी और कुतिया की तरह हांफ रही थी। जब थोड़ी सांस में सांस आई तो “राज्ज्ज्जआ्आ्आ, हम अब तेरी हो गई बलमा, बहुत मस्त चुदक्कड़ हो जी।” बड़ी खुशी से झूम कर बोली।
हम भी बोले, “अब तू रोज सबेरे जब सब्जी लाएगी, हम पहले तुझको चोदेंगे फिर सब्जी खरीदेंगे। तू बड़ी मस्त माल है रानी।” फिर क्या था, सब्जी वाली को रोज़ चोदने लगा। उस सब्जी वाली का नाम पार्वती था मगर हम उसको पारो बोलते थे। हम उसको जैसा मर्जी वैसा चोदता था। चोद चोद के बुर का तो भोंसड़ा बना दिया, गांड़ चोद चोद के और बड़ा कर दिया, चूची एक एक किलो से डेढ़ डेढ़ किलो का बना दिया। वह हमारी गुलाम बन गई थी।
एक दिन हम पारो को चोद रहे थे उसी समय तेरे नानाजी का ड्राइवर करीम आ गया। हम दरवाजा अंदर से बंद नहीं किए थे, वह सीधा अंदर आ कर हम दोनों को नंगे चुदाई करते हुए देख लिया।
“अरे साला हरामी हरिया, अकेले अकेले माल चोद रहे हो? हमारा जरा भी ख्याल नहीं आया मादरचोद? मुझको भी चोदने दे नहीं तो मालिक को बता दूंगा।”
हम घबड़ा गये और बोले, “अरे करीम भाई, मालिक को काहे बताओगे, तुम भी चोद लेना, पहले हम को चोद लेने दे।”
्यह सुनकर पारो बोली, “नहीं नहीं, दो दो लोगों हम नहीं चोदावेंगे।”
“साली हरामजादी, हमको चोदने नहीं देगी तो मालिक को बता दूंगा। सोच लो”। करीम बोला।
“हे भगवान ये हम कहां फंस गए। ठीक है ठीक है, चोद लीजिएगा, मगर मालिक को मत बताइएगा।” घबड़ाई हुई पारो बोली।
“ठीक है हरिया तेरे बाद मैं चोदुंगा। मैं चोदने के लिए तैयार हो रहा हूं।” कहते हुए फटाफट अपना कपड़ा खोल कर रेडी हो गया। उसका लंड भी कम नहीं था। सामने का चमड़ा कटा हुआ था, इसलिए बड़ा सा फूला हुआ सुपाड़ा पूरा दिख रहा था, लंड पूरा 9 इंच लम्बा और तीन इंच मोटा था।
हम जैसे ही चोद कर उठे, तुरंत करीम पारो पर सवार हो गया और चुदी हुई बुर में एक ही बार में भक्क से अपना लंड ठोक दिया। पारो चीख पड़ी क्योंकि उसका सुपाड़ा बहुत बड़ा था। करीम को उसकी चीख चिल्लाहट से क्या मतलब था, वह तो भूखा भेड़िए की तरह टूट पड़ा और दनादन चोदने लगा।
“हाय मार डाला रे, आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह, मैया रे, बप्पा रे,” कहते हुए रो रही थी, चीख रही थी, छटपटा रही थी मगर करीम हरामी कई दिन से चूत का भूखा, कुत्ते की तरह चोदे जा रहा था। वह भी हट्टा-कट्टा पठान था, रगड़ रगड़ के चोद रहा था।
“साली रंडी, अभी हरिया चोद रहा था तो खूब मज़ा आ रहा था और अभी हम चोदने लगे तो लगी मैया बप्पा करने।” बोलते हुए आधा घंटा तक भकाभक चोदा। पारो शुरू में तो कुछ देर रोती रही फिर उसको मजा मिलने लगा और अब बड़बड़ाने लगी थी, “आह राजा ््ज््ज्््ज््ज्ज््ज््ज्््ज््ज्जा आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह ओ्ओ्ओ्ओह, चोद डाल, मार डाल, रंडी बना लें, कुत्ती बना ले, खूब मज़ा आ रहा है रे हरामी, बुर चोद।”
हम उनकेे चुदाई को देख कर और उनका बकबकाना सुन कर हंस रहे थे। उनका चुदाई देख कर खूब मज़ा आया। जब दोनों खलास हो गये तो पारो बोली, “तुम दोनों बहुत बड़े चुदक्कड़ हो जी। बहुत मजा दिया तुम दोनों ने। अब तुम दोनो ही हमको चोदना, आज से तुम दोनो ही हमारे मरद हो।” उसका बुर फ़ूल कर पावरोटी हो गया था मगर वह बहुत खुश थी।
फिर तो हम-दोनों का चांदी हो गया। खूब मज़ा किए हम दोनो मिल कर।
इतना सुनते सुनते मैं फिर उत्तेजित हो गई और पापा के ऊपर चढ़ कर बोली, “बस करो पापा, बाकी बाद में बता देना, अभी तो फिर एक बार चुदने का मन हो गया है। आप वैसे ही लेटे रहिए, मैं ऊपर से आपके लंड पर बैठ कर चुदवा लूंगी।” कहते हुए मैं उसके खड़े लंड पर भच्च से बैठ गई और ऊपर नीचे उछल उछल कर चुदने लगी। फिर पूरी तरह खल्लास हो कर उन्हीं के ऊपर पड़ गई।
“बहुत बड़ी रंडी हो गई है रे तू। बहुत सीख गई है। ख़ूब मजा करेंगे हम।” वे बोले और मझे चूम लिए। “हां पापा यह सब आप लोगों की कृपा है जिसके कारण आज मैं ऐसी हो गई हूं।” मैं बोली। हमने घड़ी देखा तो 8 बज चुका था। हम थके हुए थे मगर उठे और कपड़े पहन कर तैयार हो गए और नानाजी, दादा जी और बड़े दादाजी का इंतजार करने लगे।
रात करीब 8:30 बजे नानाजी, दादाजी और बड़े दादाजी बाजार से वापस आए। उस समय तक मैंने और मेरे बाप ने अपना अपना हुलिया ठीक कर चुके थे। दोनों ही अपने अपने हवस की प्यास अच्छी तरह बुझा चुके थे। हालांकि इस दौरान की धमाचौकड़ी, गुत्थमगुत्थी और धींगामुश्ती में हम बुरी तरह थक गये थे मगर नहा धो कर काफी हद तक सामान्य दिख रहे थे।
“कैसी हो बिटिया? ठीक से आराम की ना?” नानाजी ने पूछा।
“हां नानाजी, खूब बढ़िया से आराम की” अपने चोदू बाप को आंख मारते हुए मुस्कुरा कर बोली।
पापा भी मुस्कुराहट छिपाते हुए किचन के अंदर गये। इतने में मेरा मोबाइल बज उठा। यह मम्मी का कॉल था। वह पूछ रही थी कि हम ठीक ठाक पहुंचे कि नहीं। मैं ने बताया कि हम ठीक ठाक पहुंच गए हैं। मेरे और मम्मी के बीच हो रही इस वार्तालाप को सभी सुन रहे थे और सबके चेहरे काले पड़ गये थे, मगर मैं सहज भाव से बातें कर रही थी। अब मैं क्या बताती कि बस में उनकी बेटी के साथ पांच पांच बूढ़ों ने क्या क्या कुकर्म किया, और अभी अभी तीन घंटों के अंदर उनके आशिक हरिया ने (मेरे बाप ने) उनकी बेटी के साथ नाजायज संबंध बनाते हुए तीन तीन बार वासना का नंगा खेल खेलकर मनमाने ढंग से अपनी हवस मिटाई और मुझे छिनाल बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। यह अलग बात है कि मैं भी इस खेल में स्वेच्छा और पूर्ण समर्पण के साथ बराबर की हिस्सेदार रही और हर एक पल का लुत्फ लेती हुई अपने ही बाप के अद्भुत लंड और उनकी चुदाई की दीवानी हो गई।
अभी मैं मम्मी से बात कर ही रही थी कि और किसी का कॉल आने लगा। मैं ने मम्मी को बाय किया और देखा कि यह सरदारजी का कॉल था। मैं धक् से रह गई। समय देखा तो रात के 9 बज रहे थे।
“हैलो” मैं ने कॉल उठाया।
“हैल्लो मेरी छमिया, क्या हाल है?” उधर से सरदारजी की आवाज आई।
“क्या हुआ बोलिए सरदारजी, कैसे याद किया?” मैं खीझ कर बोली।
“बस तेरी मदमस्त चूत की याद आ रही थी इसलिए याद किया मेरी जान, अभी आ सकती हो तो मेरे घर में आ जाओ, तेरी बहुत याद आ रही है रानी।” बड़े घटिया तरीके से बात कर रहा था।
मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था मगर गुस्से को बमुश्किल काबू में कर के बोली, “नही, मैं अभी इतनी रात में नहीं आ सकती सरदारजी”
“क्या कहा, मुझे ना कहती है कुतिया। तेरा वीडियो अपलोड करूं क्या?” सरदार जी फुंफकार उठे।
मेरा भेजा घूम गया। बड़ी मुश्किल से अपने गुस्से को काबू में कर के बोली, “ठीक है सरदारजी आती हूं, मगर जल्दी छोड़ दीजियेगा,”
“अरे मेरी रानी, एक घंटे में छोड़ दूंगा।”
“फिर ठीक है, अपने घर का पता बताईए।” मैं बोली।
“तू लालपुर चौक आ जा, मैं वहीं मिलूंगा।”
“ठीक है, आ रही हूं,” कहकर मैंने फोन काट दिया। फिर मैंने उन बूढ़े आशिकों से कहा “मैं एक घंटे में उस सरदारजी को निपटा कर आती हूं” फिर मैंने हरी पापा को आवाज दी, “चाचा जी चलिए जरा सरदारजी को निपटा कर आते हैं।”
फिर मैं अपने बाप को साथ ले कर नानाजी के कार से ही निकल पड़ी। तीनों बूढ़े असहाय भाव से मुझे देखते रह गए। करीम ड्राईवर ही कार ड्राइव कर रहा था। मैं पीछे की सीट पर पापा के साथ बैठी थी। मैं ने उनको समझा दिया कि सरदारजी के घर के बाहर मेरा इंतजार करें। जैसे ही कार स्टार्ट हुआ, पापा ने मुझे कमर से पकड़ कर अपनी ओर खींच कर सटा लिया। बांया हाथ मेरी कमर पर था और दाहिने हाथ से मेरी चूचियों पर हाथ साफ करने लगा। फिर जैसे ही मुझे चूमने को था, मैं ने उन्हें आंख दिखाई।
रीयर व्यू आइने में करीम चाचा ने हमारी हरकतों को देख लिया और बोला, “यह क्या हो रहा है हरिया? साले अकेले अकेले?”
पापा हड़बड़ा गये। “अरे कुछ नहीं भाई”।
“क्या कुछ नहीं साले। मुझे उल्लू समझा है? हमने सब कुछ देख लिया है। लगता है तूने अकेले अकेले इस पर हाथ साफ कर लिया है। मुझे भूल गए क्या साले हरामी? याद है ना, आजतक हम मिल बांट कर खाए हैं। हां तो कम्मो बिटिया, हम पर भी थोड़ी मेहरबानी कर देना, नहीं तो मालिक को सब बता दूंगा।” वह बोला।
मैं घबराकर बोली, “नहीं करीम चाचा, प्लीज घर में किसी को कुछ मत बताइएगा। मैं आपकी ख्वाहिश पूरी करने को तैयार हूं।”
मुझे पापा पर गुस्सा आ रहा था, “न जगह देखा न माहौल देखा, बस शुरू हो गये।” मैं ने पापा को डांटा। पापा खिसिया कर मुझ पर से हाथ हटा लिए। करीम चाचा को इस बात का ज़रा भी आभास नहीं था कि हरी मेरा सगा बाप है। पता नहीं इस प्रकार के अनैतिक रिश्ते के बारे में जानकर उनकी प्रतिक्रिया क्या होती।
खैर मैंने बात को दूसरी ओर मोड़ दिया और कहा, “देखिए फिलहाल तो हम उस सरदारजी से निपट लें, उसके बाद आपको जो करना है कर लीजिएगा।”
“ठीक है, तो अभी सरदारजी से निपटने के लिए तुम्हारा प्लान क्या है?” पापा ने पूछा।
” उसकी टेंशन आप लोग मत लीजिए। आप लोग केवल बाहर मेरा इंतजार कीजियेगा। मुझे उससे वह वीडियो हासिल करना है बस। जरूरत पड़ी तो बुला लूंगी। जैसे ही मेरा काम हो जाएगा, मैं आ जाऊंगी। फिर हम वापस लौट चलेंगे,” मैं ने पूरे आत्मविश्वास से कहा।
करीब 15 मिनट में हम लालपुर चौक पहुंचे। चौक के पास एक पेट्रोल पंप के पास ही सरदारजी खड़े थे। मैं ने करीम चाचा को थोड़ा किनारे कर के कार खड़ी करने को कहा और कार से उतर कर सरदारजी के पास गयी। जैसे ही उसने मुझे देखा, उसकी बांछें खिल गईं। वे झक्क सफेद रेशमी चूड़ीदार पाजामा और कुर्ता में थे। लाल पगड़ी में खूब फब रहे थे।
“गुड ईवनिंग सरदारजी” मैं पास पहुंच कर बोली।
“गुड, तुम बिल्कुल समय पर आ गई हो। चलो यहीं सामने मेरा घर है।” वे प्रसन्नता से बोले।
मैं ने सामने एक आलिशान बंगला देखा, जिसका गेट खुला था। गेट पर कोई पहरेदार नहीं था। मैं सरदारजी के पीछे पीछे गेट के अंदर आई तो सरदारजी ने गेट बंद कर सिटकनी लगा दिया लेकिन ताला नहीं लगाया। उस सुनसान आलिशान बंगले में लाईट जल रही थी जिसका मुख्य द्वार बंद था किन्तु सिर्फ उढ़का हुआ था। सामने बरामदा था जिसे पार कर के मुख्य द्वार तक आए। ढकेलने से ही दरवाजा खुल गया और हम ड्राइंग रूम में आये। ड्राइंग रूम में पहले से एक काला कलूटा भीमकाय हब्शी बैठा हुआ था। करीब 50 – 55 की उम्र का। लाल लाल होंठ बाहर की ओर निकले हुए थे, गोल चेहरा, सर पर अधपके घुंघराले बाल, नशे से बोझिल आंखों को बड़ा बड़ा करके मुझे वहशी अंदाज में देखने लगा। टेबल पर विदेशी दारू की आधी खाली बोतल और दो ग्लास आधी खाली थी और सामने एक प्लेट पर काजू और बादाम रखा हुआ था। इसका मतलब ये लोग पहले से पी रहे थे।
” Come gurpreet, oh so this the girl. So young? She will die if I will fuck her. (आओ गुरप्रीत, ओह तो यह है लौंडिया। इतनी कम उमर की? इसको चोदेंगे तो यह तो मर ही जाएगी।)” उस दैत्य ने अंग्रेजी में कहा, शायद उसे हिंदी बोलना नहीं आता था।
“डोंट वरी सर, इसे कुछ नहीं होगा। मैं जानता हूं। आप आराम से जैसे मर्जी चोद सकते हैं।” सरदार बोला। उसका boss हिंदी समझता था।
उनकी बातें सुन कर पहले तो घबराई, मगर फिर संभल कर बोली, “यह क्या सरदारजी, आप तो रंडी की तरह किसी के सामने भी मुझे परोसे दे रहे हैं।”
“चुपचाप मेरे boss को खुश कर दे, नखरे न कर। सर चलिए इसे बेडरूम में ले कर चलते हैं।” सरदार बोला।
“नहीं, आप ये ग़लत कर रहे हैं। आपके पास मेरा वीडियो है तो इसका मतलब आप किसी से भी मुझे चुदवा लीजिएगा?” मैं ने विरोध किया।
“चुप साली रंडी, चुपचाप चल बेडरूम में।” गाली देता हुआ मेरा हाथ पकड़ा और बड़े से बेडरूम में ले आया।
मैं सोच रही थी कि अगर सरदार अकेला होता तो आराम से उसका मोबाइल छीन लेती और वीडियो डिलीट कर देती, मगर यहां तो दो दो पहलवान मौजूद थे। मैं ने फिलहाल चुपचाप उसकी बात ली, फिर भी मैं उपयुक्त मौके की ताक में थी। मैं थोड़ी घबराई हुई थी, उस लंबे चौड़े भैंस जैसे पहलवान टाईप हब्शी को कैसे झेल पाऊंगी। जब वह खड़ा हुआ तो देखा, उसका कद करीब करीब छः फुट नौ इंच के करीब रहा होगा। हमारे पीछे पीछे वह हब्शी भी झूमता हुआ अंदर आया और सरदार को बोला, ” Now you stay outside till i am fucking her. (अब तुम बाहर रुको जब तक मैं इसे चोद रहा हूं।) Come baby, lets have fun. (आओ बेबी हम मजा करें)।”
सरदार आज्ञाकारी नौकर की तरह चुपचाप बाहर निकल गया। उसका boss मेरे पास आया और मुझे अपनी मजबूत बाहों में भर कर चूमने लगा। मैं 5 फुट 8 इंच कद की होती हुई भी उसके सामने बच्ची लग रही थी। मैं ने कोई विरोध नहीं किया और उसकी बांहों में बंधी उससे सहयोग करने लगी। वह मेरे कपड़े उतारने लगा। मेरे तन से पूरा कपड़ा उतार कर नंगी कर दिया और आंखें फाड़कर मेरी मदमस्त जवानी का दीदार करने लगा। (oh so beautiful and sexy) ” ओह इतनी सुन्दर और सेक्सी।” मैं चाहती थी कि जल्दी इसे निपटा कर फारिग हो जाऊं और सरदार की खबर लूं। मैं खुद ही बेशरम हो कर उस हब्शी के पैंट शर्ट को उतारने लगी। ज्यों ही उसका पैंट खुला मैं उसकी चड्डी देख कर दंग रह गयी। चड्डी सामने से फूल कर विशाल लंड की चुगली कर रहा था। डरते हुए जैसे ही उसकी चड्डी नीचे की, भयानक काला और मोटा करीब चार इंच और लंबा करीब दस इंच का लौड़ा उछल कर मेरे सामने आ गया। मैं घबराकर एक कदम पीछे हट गई।
इससे पहले कि मैं उस हौलनाक दृश्य के सदमे से उबर पाती, हब्शी ने ने मुझे गोद में उठा लिया और बेड पर लिटा कर पागलों की तरह मुझ पर टूट पड़ा। बड़ी बेरहमी से मुझे चूमना चाटना, मेरी चूचियों को मसलना और चूसना शुरू कर दिया। डर और घबराहट के बावजूद उसकी उत्तेजक हरकतों से मैं भी उत्तेजित हो गई और, “ओह आह इस्स्स इस्स्स” करने लगी। मेरी चूत पनिया उठी थी।
अब उसका ध्यान मेरी चुद चुद कर फूली हुई पनियाई चूत की ओर गया। उसकी खुशी मैं स्पष्ट देख रही थी। वह भी समझ गया कि मै बिल्कुल तैयार माल हूं। मुझे चोदने में उसे कोई समस्या नहीं होगी। वह पहले अपने लंबे और मोटे जीभ से मेरी चूत चाटना शुरू किया। मैं बेहद चुदासी के आलम में पूरा पैर फैला कर छटपटाती हूई अपनी कमर नीचे से उछालने लगी और उत्तेजना के मारे मेरी सिसकारियां निकलने लगीं। बिना यह सोचे कि उसके विशाल लंड से चुदने से मेरी चूत का क्या हाल होगा मैं बड़बड़ाने लगी, “अब चोद भी लीजिए सर, और मत तड़पाईए।” इस्स्स इस्स्स करने लगी।
“Yes my bitch, now I’m going to fuck your nice cunt, get ready” (हां मेरी कुतिया, अब मैं तेरी सुंदर चूत को चोदने जा रहा हूं, तैयार हो जाओ।) उस हब्शी ने जब मेरा यह हाल देखा तो मेरे दोनों पैरों को फैला कर उठाया और अपने कंधे पर रख लिया और अपना गधे सरीखे विशाल लौड़े का सुपाड़ा मेरी चूत के मुहाने पर रख कर रगड़ना शुरू किया और बोला।
“हां अब चोद भी डालिए सर”, मैं बेताबी से बोली।
उस ने मेरी कमर को कस के पकड़ा और धीरे धीरे मेरी चूत में डालने लगा। “yes take it” (हां ले ले) उसका विशाल सुपाड़ा जब मेरी चूत को फैलाता हुआ अन्दर जाने लगा तो ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत फट जायेगी।
मैं चीख पड़ी। “ओ्ओ्ओ्ओह धीरे धीरे सरजी, मेरी चूत फट रही है, अम्म्म्म्म्माआआआआ”। उसने धीरे धीरे दबाव बढ़ाते हुए पूरा 10” मेरी चूत में भोंक दिया। सरसराते हुए उसका लंड जब घुस रहा था तो ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत अपनी सीमा से बाहर फैलता जा रहा हो और फटने के कागार पर पहुंच गया हो। उसका भीमकाय लंड मेरी चूत की दीवारों को बुरी तरह रगड़ता जा रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था मानो उसका घुसना अंतहीन हो। मेरे गर्भाशय के अंदर तक घुसता चला जा रहा था। घुसाने के बाद फिर धीरे धीरे बाहर करने लगा, उसी तरह चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ। तीन चार बार धीरे धीरे अंदर बाहर करने के बाद दर्द कहां गायब हुआ पताही नहीं चला। चूत की दीवारों पर उसके मोटे और लम्बे लंड का घर्षण इतना आनंद दायक था कि बयां करना मुश्किल था। अब मैं जोश में आ गयी थी और अपनी चूतड़ उछालने लगी थी। धीरे धीरे चोदने की रफ़्तार बढ़ाता गया।
मैं आनन्द विभोर हो रही थी, “हां सरजी, आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह, बहुत मजा आ रहा है राजा”।
“Yes dear, oh my bitch, nice pussy, tight pussy, ah fucking hole, oh my whore” (हां डियर, ओह मेरी कुतिया, टाईट चूत, चुदाई की छेद, ओह मेरी रंडी) बोलते हुए चोदे जा रहा था। ऐसा लग रहा था मानो कोई भैंस किसी बछिया को चोद रहा हो। मैं खुद चकित थी कि इस दानव जैसे व्यक्ति के दानवी लन्ड से चुदती हुई कैसे इतनी आनंदविभोर हो रही थी? जब उन्होंने देखा कि मैं भी मस्ती में डूब कर चदाई का पूरा लुत्फ ले रही हूं, तब उन्होंने चुदाई का आसन बदला, मेरे पैरों को अपनी कमर पर लपेट लिया और मुझे अपनी गोद में उठा लिया, मेरी गांड़ के नीचे अपने दोनों मजबूत हाथों का सहारा दिया और खड़े खड़े चोदने लगा। मैं उसकी गर्दन पर अपनी बाहों को लपेटे हवा में झूलती हुई बड़े आराम से चुद रही थी। मेरी चूत में उनका फनफनाता भीमकाय लंड नीचे से सर्र सर्र किसी इंजन के पिस्टन की तरह फच्चाफच अंदर बाहर हो रहा था। मैं उनके बदन से किसी छिपकली की तरह चिपकी हुई चुदाई के इस अद्भुत आनंदमय अनुभव से गुजर रही थी इसी बीच उस हब्शी ने सरदार को आवाज लगाई। सरदार तुरंत दरवाजा खोल कर अंदर आया और अंदर की गरमागरम कामलीला देख कर मुस्कुरा उठा।
“यस सर” किसी आज्ञाकारी कुत्ते की तरह बोला।
“Bring one more peg” (एक पैग और लाओ) उन्होंने कहा।
“नहीं, एक नहीं, बोतल में बची सारी ले आओ और ग्लास भी” मैं मस्ती के आलम में चुदती हुई बोली। मैं चुदने के आनंद में डूबी जरूर थी मगर अपना उद्देश्य नहीं भूली थी।
” Ok, bring the bottle and glass as this sweety said” (ठीक है बोतल और ग्लास ले आओ जैसे ये स्वीटी बोली) उन्होंने कहा।
सरदार ने तुरंत वैसा ही किया, बोतल, पानी और ग्लास बेड के साईड वाले टेबल पर रखा और बाहर चला गया।
हब्शी उसी अवस्था में मुझे लिए दिए एक पैग चढ़ाया तो मैं ने दूसरे पैग के लिए उकसाया, “एक पैग और लीजिए ना”।
उसने दूसरा पैग भी चढ़ा लिया। दो पैग ले लेने के बाद वह और आक्रामक ढंग से पूरी रफ्तार के साथ चुदाई में मशगूल हो गया। मैं ने महसूस किया कि अब वह कुछ ही देर में खल्लास होने वाला है क्योंकि उसका लंड थोड़ा और फूल गया था और चुदाई के चर्मोत्कर्ष का भाव उसके चेहरे पर स्पष्ट देख रही थी। मैं भी चरम आनंद से कुछ ही पल दूर थी। फिर क्या था, उन्होंने मुझे अपने से इतने कस के चिपका लिया मानो मेरी जान ही निकल जाएगी और मेरी कोख में ज्वालामुखी का लावा उगलना शुरू कर दिया। “yessssss im cumming my bitch ooooooh sweet darling” (हां मैं झड़ रहा हूं मेरी कुतिया ओह प्यारी) उसके मुंह से बोल उबल पड़े। “आआ्आ्आह मैं भी गयी राज्ज्ज्जाओ्ओ्ओ्ओह्ह्ह्हह” अद्भुत था वह स्खलन। मैं भी स्खलन के उस आनंदमय पलों में अपनी चूत से उनके लंड को दबोच कर उससे निकलते वीर्य के हर कतरे को तबतक चूसती रही जब तक वह पूरी तरह खल्लास हो कर किसी भैंसे की तरह डकारते हुए लुढ़क नहीं गया।
“Oh sweet little fucking bitch, nice body, nice cunt. Entirely enjoyed fucking you.” (ओह प्यारी छोटी सी चुदक्कड़ कुतिया, सुन्दर तन, सुन्दर चूत। तुम्हे चोद कर पूरा मजा आया।” वह बोल पड़ा।
“मुझे भी बड़ा मजा आया राजा। आज से पहले किसी ने मुझे ऐसा नहीं चोदा था। आई लव यू टू।” मैं भी बोली।
मैं भी पूरी तरह तृप्त हो कर कुछ देर के लिए निढाल हो गई थी मगर फिर मैंने अपना होश संभाला और मनुहार करके प्यार से उस हब्शी को तीन पैग और पिला दिया। जब वह पूरी तरह नशे में टुन्न हो गया तो मैं उठी और कपड़े पहन कर कमरे से बाहर आई। सामने सरदार सोफे पर बैठा बेकरारी से इंतजार करता मिला।
बड़ी बेशर्मी से मुस्कुराते हुए बोला, “अरे तूने इतनी जल्दी कपड़े क्यों पहन लिया लौंडिया, साहब को खुश कर दिया ना? अब चल मुझे खुश कर दे। चल फिर से उतार कपड़े, या मैं खुद उतारूं।”
“नहीं, पहले आप मेरा वीडियो डिलीट कीजिए” मैं बोली।
“ठीक है मैं डिलीट कर दूंगा, मगर तुझे चोदने के बाद।” वह धूर्तता पूर्वक मुस्कुराते हुए बोला।
“ठीक है, मगर आप पहले वादा कीजिए।” मैं बोली।
“चल मैंने वादा किया, अब तू जल्दी अपने कपड़े उतार और मुझे चोदने दे।” उसने बड़ी बेताबी से कहा।
मैं मजबूरी में फिर से कपड़े उतार कर नंगी हो गई, मगर इस बार चुदने के लिए नहीं बल्कि सरदार के कब्जे से मोबाइल हथियाने के लिए। मेरे नग्न जिस्म को भूखी नजरों से देखते हुए बोला, “अहा मेरी जान, तू सच में बड़ी धांसू माल है। मां कसम, आज तुझे चोद चोद कर सारी कसर निकालूंगा।”
“सरदारजी, पहले अपने कपड़े तो उतारिए। देखिए तो आपका पैजामा फटने को हो रहा है।” मैं उसके लंड की तरफ इशारा करते हुए बेशर्मी से बोलीं।
“हा हा हा हा, हां री कुतिया, तुझे चोदने के लिए मेरा लौड़ा अब से फनफना रहा है। अभी उतारता हूं,” कहते हुए कपड़े खोलने लगा। जैसे ही वह नंगा हुआ, उसका गधा सरीखा लौड़ा उछल उठा और बंदूक की तरह तन गया।
“देख मेरा लौड़ा तेरी चूत में घुसने को कितना बेकरार है,” कहता हुआ नंग धड़ंग वह मेरी ओर बढ़ा और जैसे ही मुझे बांहों में लेने को हुआ, मैं फुर्ती से झुकाई दे कर उसके कुर्ते की ओर झपटी और पलक झपकते उसका मोबाइल मेरे कब्जे में था।
“अब बोल कमीने।” मैं फुंफकार उठी। सरदार फिर भी बाज नहीं आया। “साली कुतिया, चुपचाप मोबाइल मेरे हवाले कर वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।” गुर्रा कर बोलते हुए मेरी ओर बढ़ा ही था कि मेरा एक भरपूर किक उसके पेट पर पड़ा। प्रहार इतना जबरदस्त था कि वह आह करता हुआ पेट पकड़कर दोहरा हो गया। अत्यधिक पीड़ा से उसका चेहरा विकृत हो गया। शैतानी, ढिठाई, धूर्तता की जगह उसके चेहरे पर आश्चर्य और अविश्वास का भाव था। मेरी आंखों में उसने जाने क्या देखा कि सहम सा गया। मैं ने क्रोध के आवेश में एक जबरदस्त मुक्का उसके जबड़े पर जड़ दिया। फिर तो उसे सम्भलने का मौका ही नहीं दिया और जी भर के लात घूंसों की बरसात कर बेदम कर दिया। मैं ने उसे अच्छी तरह से ठुकाई करके अपने मन की भंड़ास निकाली। “भड़वे साले हरामी, हराम का माल समझ रखा है। ब्लैकमेल करके दलाली करने का इतना ही शौक है तो जा के अपनी मां बहन और बेटी की दलाली कर मादरचोद। ले मैं वीडियो डिलीट कर रही हूं, दम है तो उठ और रोक कर दिखा।” वह कराहता हुआ फर्श पर पड़े असहाय भाव से मुझे वीडियो डिलीट करते देखता रहा।
फिर मैं मैं उसकी ओर मुखातिब हो कर खूंखार नजरों से घूरती हुई पूछी, “और कहीं वीडियो सेव किया है तो वह भी जल्दी बता दे वरना इससे भी बुरा हाल करूंगी।”
“और कहीं नहीं है मेरी मां, मुझे माफ़ कर दे,” वह बड़ी बेचारगी से बोला।
मैं ने उसके चेहरे को पढ़ा और आश्वस्त हुई कि वह झूठ नहीं बोल रहा है फिर भी कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती थी। मैंने देखा कि यह सब करते हुए करीब 45 मिनट लगा। मैं दौड़ कर बाहर निकली और करीम चाचा और पापा को अंदर बुलाया। उन्होंने आकर अंदर का जो नजारा देखा तो देखते रह गए। बाहर अंधेरे में उन्होंने मुझे ठीक से देखा नहीं मगर अंदर रोशनी में मुझ मादरजात नंगी साक्षात चंडी रूप को आंखें फाड़कर अपलक देखते रह गए। मेरे पापा मेरे नग्न शरीर का भोग लगा चुकने के बावजूद इस नए रूप को एक टक निहार रहे थे। करीम चाचा की भूखी नज़रें तो मेरे नग्न जिस्म से ही चिपक गईं थीं। आंखें फाड़कर कभी मेरे नग्न दपदपाते कामुक शरीर को और कभी मेरे कहर बरसाते चेहरे को और कभी उधर पिट पिट कर बेहाल फर्श पर पड़े कराह रहे नंग भुजंग सरदार को देख रहे थे।
“अब आपलोग देखते मत रहिए, घर की पूरी तलाशी लीजिए, कंप्यूटर, लैपटॉप, सीडी, सब कुछ। पूरी कहानी मैं बाद में बताऊंगी।” मैं बोली। सरदार कराहता हुआ बोला, “अरे मैं बोल रहा हूं, और कहीं कुछ नहीं है।”
मैं ने गौर से उसके चेहरे को देखा और समझ लिया कि वह सच कह रहा है, फिर भी उसे धमकाते हुए कहा, “अभी तो मैं छोड़ रही हूं, साले हरामी, अगर फिर कभी ऐसी हरकत की तो कसम से मैं तुम्हें ज़िंदा नहीं छोड़ूंगी।” मेरी धमकी से वह गिड़गिड़ा कर माफ़ी मांगते हुए बोला, “और कहीं नहीं है मेरी मां। अब और आगे से फिर कभी ऐसी हरकत नहीं करूंगा। मुझे बख्श दो, मैं तेरे पांव पकड़ता हूं।”
“ठीक है, ठीक है, जा माफ किया।” कहते हुए उसके बेडरूम में गयी और हब्शी के मोबाइल से उसका नंबर लिया, वह बेसुध सोया पड़ा था। फिर सरदार का नंगा फोटो खींच कर उसे कहा, “देख कमीने, तेरा नंगा फोटो मेरे पास है। फिर कभी मुझ से पंगा मत लेना।” फिर मैंने पापा और करीम चाचा से कहा, “अब चलिए हमारा काम हो चुका है,” कहते हुए दरवाजे की ओर कदम बढ़ाई कि पापा ने टोका, “अरे पहले कपड़े तो पहन ले, ऐसी ही नंगी चलने का इरादा है क्या?”
अब मुझे होश आया कि मैं अबतक इनके सामने नंगी ही थी। शर्म और खीझ के मारे मैं ने सरदार को एक और लात जमा दिया, “इस हरामी की वजह से मैं होशो-हवास खो बैठी थी” फिर कपड़े पहन कर उनके साथ बाहर निकल पड़ी। कार से हम करीब 15 मिनट में घर पहुंचे। रास्ते में मैं ने उन्हें संक्षेप में सारी घटना बताती रही।
करीम चाचा ने मुझे याद दिलाया कि मैं ने आते वक्त क्या वादा किया था, “बिटिया, तूने मुझ पर मेहरबानी करने का वादा किया था, याद है ना?”
“हां बाबा हां, मुझे सब याद है, भूली नहीं हूं मैं। मगर आज नहीं, आज मैं बहुत थकी हुई हूं। कल जो मर्जी कर लीजिएगा।” मैं बोली। एक घंटे पन्द्रह मिनट के बाद फिर से हम नानाजी के घर के अंदर थे। घर में सब बड़ी बेकरारी से हमारा इंतजार कर रहे थे। जैसे ही हम घर के अंदर घुसे, सबने सवालों की झड़ी लगा दी। मैं ने पूरी घटना का संक्षिप्त विवरण दिया और अपनी कामयाबी के बारे में बताया। सुन कर सबने राहत की सांस ली। फिर हमने साथ में खाना खाया और अपने अपने कमरों में सोने चले गए। मैं दिनभर में सात लोगों से चुद चुद कर सबसे ज्यादा थकी हुई थी और ऊपर से सरदार की मरम्मत करने में अतिरिक्त ऊर्जा खर्च कर बैठी, अतः बिस्तर पर पड़ते ही गहरी निद्रा के आगोश में चली गई।
सवेरे करीब 6 बजे मेरी नींद खुली। बाहर से (नौकर हरिया) मेरे पापा की आवाज सुनाई दी, “बिटिया उठ जाओ, सवेरा हो गया है”।
मैं अलसाई सी उठी, “हां चाचा, उठ गई।” कल दिन भर की भाग दौड़ और चुदाई की थकान से पूरा बदन टूट रहा था। हब्शी की चुदाई से तो मेरी चूत फूल कर कुतिया की तरह बाहर निकल गई थी। जोश जोश में कल सरदार की ठुकाई के समय मुझे पता ही नहीं चला, मगर आज सवेरे महसूस हो रहा था कि हब्शी के लंड से मेरी चूत की क्या दुर्दशा हुई थी। उस बनमानुष ने मेरी चूचियों का भी बड़ी बेरहमी से मर्दन किया था अतः मेरी चूचियां भी सूज कर लाल हो गई थीं और मीठी मीठी टीस उठ रही थी। सवेरे से लेकर रात तक में सात मर्दों से चुद चुकी थी, कुल मिलाकर 9 बार, (अपने बाप की तीन चुदाई को मिला कर)। धीरे धीरे मैं पूरी रंडी बनती जा रही थी। मैं आहिस्ता आहिस्ता वासना की गुलाम बनती जा रही थी। मुझे इसका अहसास था किन्तु अब मुझे इसमें मजा आने लगा था। मेरे साथ जो कुछ घट रहा था इसका मुझे कोई मलाल नहीं था। आज का सवेरा फिर एक नये दिन की शुरुआत थी, जिसके गर्भ में क्या था यह सिर्फ मेरा भगवान ही जानता था। मैं आज के दिन को अन्य दिनों की तरह भगवान को समर्पित करते हुए नहा धो कर फ्रेश होकर बाहर आई। नहाने धोने से कल की थकान में थोड़ी कमी हुई मगर लगता था नींद अब तक पूरी नहीं हुई।
“मालिक, नाश्ता लगा दूं?” हरी चाचा मेरे नानाजी से पूछ रहे थे।
“लगा दो भाई, मैं इन दोनों को भी बुलाता हूं। अरे रघु, केशू को लेकर नाश्ता करने आ जाओ भाई।” मेरी ओर मुखातिब हो कर बोले, “बिटिया तू ठीक से सोई कि नहीं?”
“मैं ने ठीक से आराम कर लिया नानाजी।” मैं बोली।
“अभी नाश्ता करके हमलोग मार्केटिंग के लिए जाएंगे, तुम भी साथ चलोगी क्या?।” नानाजी ने पूछा।
“नहीं मैं नहीं जाऊंगी। यहां आसपास घूमना पसंद करूंगी।” मैं ने कहा।
“ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी” नानाजी ने कहा।
नाश्ता करते वक्त नानाजी ने बताया ” आज तेरे दादाजी का जन्मदिन है, सो हम आज शाम को यहां पार्टी करेंगे।”
“ओह, हैप्पी बर्थ डे दादाजी” कहते हुए मैं चहक उठी और दादाजी के गले लग कर चूम उठी। बाकी लोग ईर्ष्या पूर्ण नजरों से दादाजी को देख रहे थे।
“वाह दादाजी, आज हम सब दादाजी का बर्थ डे धूमधाम से मनाएंगे” मैं ने उत्साह से कहा।
करीम चाचा ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए वे उनके साथ बाजार नहीं जा पाएंगे।
“ठीक है करीम कोई बात नहीं, तुम आराम करो, मैं कार चला लूंगा। हम दो तीन घंटे में वापस आएंगे” कहते हुए नानाजी दादाजी और बड़े दादाजी के साथ बाजार निकल पड़े।
ज्यों ही वे बाजार की ओर निकले, करीम चाचा मेरी ओर मुखातिब हुए और बोले, ” तो बिटिया रानी, अब क्या इरादा है?”
“क्या मतलब?” मैं चकित हो कर बोली। अभी अभी तो उन्होंने नानाजी को कहा था कि तबियत खराब है।
“क्या मतलब क्या? तू खूब समझ रही है मैं क्या कह रहा हूं। अनजान मत बन। मुझे भी थोड़ा मजा लेने दे बिटिया। चल बेडरूम में।” बड़े अश्लील ढंग से मुस्कुराते हुए बोला।
मेरे पापा असहाय भाव से हमें देखते रहे।
“तू भी चल ना रघु साथ में, बड़ा मजा आएगा। आजतक तो दोनों मिलकर खूब मज़ा लूटे हैं। आज भी साथ साथ मज़ा लूटेंगे। क्या बोलती हो बिटिया?” करीम चाचा ने पापा और मेरी ओर बेहद कामुक भाव से देखते हुए कहा।
पापा ने मेरी ओर असहाय भाव से देखा, लेकिन शायद वे तो खुद भी यही चाहते थे, तुरंत बोल पड़े, “ठीक है, ठीक है, चलो मैं भी चलता हूं।”
इधर मैं सोच रही थी कि मैं ने भी क्या किस्मत पाई है, एक बार जो वासना के दलदल में उतरी तो मुझसे मिलने वाला हर मर्द मुझे भोगने के लिए लालायित ही मिलता गया। उसी कड़ी में अभी अभी वैसा ही योग मेरे सामने था जिससे न ही मैं बच निकल सकती थी न ही बचना चाहती थी, उल्टे मैं रोमांचित हो रही थी उन दो दो मर्दों की सामुहिक भोग्या बनने की कल्पना मात्र से। अपने पापा के लंड का स्वाद तो चख ही चुकी थी, अब करीम चाचा का नया अजनबी लंड मेरी चूत का इंतजार कर रहा था और मैं भी तो रोमांचित हो रही थी, एक तो करीम चाचा का अजनबी लौड़ा और उस पर अपने पापा के साथ सामुहिक मैथुन।
“कितने चालाक हो करीम चाचा, तबीयत खराब होने का बहाना करके मेरे साथ मौज करने का मौका निकाल ही लिया। चलिए चलिए जो करना है कर लीजिए। बिना किए आप मानिएगा थोड़ी।” बोलती हुई उनके साथ बेडरूम में चली गई।
जैसे ही मैंने कमरे में प्रवेश किया, बड़ी बेताबी से मुझे सामने से बांहों में जकड़ कर करीम चाचा ने चूमना शुरू कर दिया। करीम चाचा भी मेरे पापा की तरह ही हट्ठे कट्ठे 55 साल के पहलवान से कम नहीं थे। तोंद थोड़ा निकला हुआ था मगर थे मजबूत कद काठी के। कद करीब 5 फुट 11 इंच होगा। इधर पापा ने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और खुद भी पीछे से मुझे दबोच लिया और मेरी चूचियों को दबाने लगे। कितने हरामी थे मेरे पापा। खुद तो रिश्ते को शर्मशार करके मेरे साथ मुंह काला किया और अब पराए मर्द के सामने परोस कर पुनः मेरे साथ सामुहिक संभोग के लिए तत्पर थे। रिश्ते नाते की मुझे भी कौन सी परवाह थी, मैं तो खुद भी उनकी कामुकता भरी चेष्टाओं से वासना की अग्नि में झुलसने लगी थी और बड़ी बेकरारी से मेरे साथ होने वाली कामक्रीड़ा का आनंद लेने को लालायित हो उठी थी। मैं अब वासना के खेल का पूर्ण आनंद लेने के लिए हमारे बीच के नाते रिश्ते के तारों को छिन्न-भिन्न करके अपने अंदर की सारी भावनाओं को समूल नष्ट कर देने का मन बना चुकी थी और इसके लिए जरूरी था कि हमारे बीच किसी प्रकार का कोई राज़, राज़ न रहे और हम सब एक दूसरे के लिए खुली किताब बन जाएं। मुझे ही इसकी पहल करनी थी।
“हाय पापा, इतनी बेसब्री और बेरहमी से अपनी बेटी की चूचियों को मत मसलिए ना। मैं कहीं भागी जा रही हूं क्या? पूरी की पूरी आप लोगों की ही तो हूं।” मैं ने जानबूझ कर करीम चाचा के सामने हमारे रिश्ते का पर्दाफाश कर दिया।
करीम चाचा अविश्वसनीय नज़रों से आंखें फाड़कर कभी मुझे देखते कभी नौकर हरिया को।
“साले कमीने, तूने अपनी बेटी को भी नहीं छोड़ा।” वे बेसाख्ता बोल उठे।
मेरे पापा करीम चाचा के सामने इस तरह आकस्मिक हुए रहस्योद्घाटन से तनिक लज्जित और किंकर्तव्यविमूढ़ हो गये, मगर मैं ने मामला संभाल लिया और बोली, “क्या फर्क पड़ता है चाचा, नाना, दादा, पापा, चाचा, भाई या पति सब बाद में, पहले तो सब मर्द ही हैं ना, कभी न कभी किसी न किसी स्त्री को चोदेंगे ही। मैं बेटी, नतनी, पोती, भतीजी, बहन या पत्नी बाद में हूं, पहले एक स्त्री हूं, जिसकी आज नहीं तो कल किसी न किसी मर्द से चुदाई तो होनी ही है।” फिर पापा की ओर कनखियों से देखती हुई बोली, “वैसे भी किसी ने मुझसे कहा था, लंड ना चीन्हे बेटी। लीजिए, अब मैं कहती हूं, चूत ना चीन्हे रिश्ते नाते। पिछले पांच दिनों में नानाजी, दादाजी, बड़े दादाजी और पापा के अलावा चार अजनबी बूढ़ों ने मुझे मनमर्जी ढंग से चोद चोद कर रंडी बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है क्या? खुद भी बेशरम हो कर मजा लिए और मुझे भी चुदाई का मज़ा लेना सिखा दिया। सच पूछिए तो मैं इन लोगों की शुक्रगुजार हूं और अहसानमंद भी। अब और ज्यादा दिमाग मत चलाइए, चलिए शुरू हो जाईए, जो आग आप लोगों ने लगाई है पहले उसे बुझा तो दीजिए।” मैं बिना लाग-लपेट के बेशर्मी से बोल उठी।
मेरी बातों ने पापा की शर्मिंदगी को खत्म तो किया ही, साथ ही साथ उस गरमागरम माहौल की आग में घी का काम भी किया।
“वाह बिटिया वाह, अब आएगा मज़ा।” हवस के पुजारी करीम चाचा की आंखों में वासना की भूख चमक उठी। बिल्कुल वहशी जानवर की तरह मुझ पर टूट पड़े और आनन फानन में मेरे शरीर को कपड़ों से मुक्त कर दिया और मेरी नंगी दपदपाती काया को अपलक लार टपकाती नजरों से निहारते हुए अपनी किस्मत पर रश्क करने लगे।
“अब दीदे फाड़ कर क्या देख रहे हैं, पहले कोई नंगी स्त्री नहीं देखी है क्या? अपने कपड़े भी तो उतारिए, कि मैं उतार दूं?” मैं किसी खेली खाई छिनाल की तरह बोल उठी। मैं वास्तव में वासना की ज्वाला में जल रही थी।
करीम चाचा मानों तंद्रा से जाग उठे और पलक झपकते मादरजात नंगे हो गए। पूरे शरीर पर बाल भरे हुए थे, किसी रीछ की तरह। सर पर अधपके घुंघराले बाल और लंबोतरे चेहरे पर बेतरतीब लंबी दाढ़ी। दोनों जांघों के बीच सामने झूलता कोयले की तरह काला 9 इंच लंबा लंड, मगर भयानक मोटा, चार इंच के करीब। लंड के सामने का चमड़ा कटा हुआ, सुपाड़ा चिकना और टेनिस बॉल की तरह गोल। एक बार तो मैं अवाक रह गई, उनके लंड के दर्शन से। मेरी तंद्रा भंग हुई जब किसी भूखे भेड़िए की तरह करीम चाचा मुझ पर टूट पड़े। मुझे अपनी मजबूत बांहों में दबोच कर बिस्तर पर गिरा दिया और बेहताशा चुम्बनों की बौछार करने लगे। इधर मेरे पापा भी मादरजात नंगे हो कर मेरे नंगे जिस्म में पीछे से चिपक गये।
“हाय राम इतनी बेसब्री किस बात की, आराम से कीजिए ना” मैं बोली।
“अब क्या आराम से, इतनी मस्त माल पहली बार मिली है मुझे। अब तो बर्दाश्त नहीं हो रहा है बिटिया।” कह कर करीम चाचा मेरे मुंह में अपनी जीभ घुसा कर चुभलाने लगे और मेरी चूचियों को बेरहमी से मसलने लगे। मेरी सिसकारियां उनके मुंह से बंद थीं। मेरे पीछे मेरे पापा मेरी गांड़ को चाट रहे थे। मेरी गांड़ को दोनों हाथों से फैला कर मेरे गुदा मार्ग में जीभ डाल कर चाट रहे थे। मेरी उत्तेजना अपने चरम पर थी। मैं पागलों की तरह चाचाजी की बांहों में कसमसा रही थी। अब करीम चाचा ने एक हाथ की उंगली मेरी चूत में भच्च से पेल दिया। इस आकस्मिक हमले से मैं चिहुंक उठी। इधर मेरी चूत में करीम चाचा की उंगली घुसी और दूसरे ही पल मेरी गांड़ में मेरे पापा ने उंगली घुसा दी। इस दोतरफे हमले से मैं छटपटा उठी।
“आह हरामियों, ओ्ओ्ओ्ओह उफ्फ, इस्स्स्स।” मैं सिसक उठी। मैं दो दो पहलवानों के बीच परकटी पंछी की तरह फड़फड़ा कर रह गई। मैं दाहिने करवट पर लेटी थी, सामने करीम चाचा बांए करवट ले कर और पीछे मेरे पापा दाहिने करवट लेकर मेरे नग्न शरीर से खेल रहे थे। मैं पागल होती जा रही थी। मेरी सिसकारियां सुन कर दोनों ने समझ लिया कि लोहा गरम है और प्रहार करने का उचित अवसर यही है। करीम चाचा ने मेरा बायां पैर उठा कर अपने कमर पर चढ़ा लिया और अपना मूसल जैसा लौड़े का सुपाड़ा मेरी गीली चूत के मुहाने पर रखा और एक करारा धक्का दिया। मैं पीड़ा के मारे चीख उठी, क्योंकि उनका सुपाड़ा इतनी देर में मेरे अनुमान से कहीं अधिक बड़ा हो चुका था। मेरी चूत को सीमा से बाहर फैला कर उनका मोटा लौड़ा करीब चार इंच घुस चुका था। मेरी आंखें फटी की फटी रह गई। सांस थम सा गया था।
“हाय मम्मी मर गई। फट गई रे बप्पा मेरी चूत।” मैं चीखी।
“चुप हरामजादी। एकदम चुप्प्प साली कुतिया, इतना लौड़ा खाने के बाद भी मरने की बात करती है। अभी देख तुझे कितना मज़ा आएगा। हिलना मत।” कहते हुए उस वहशी दरिंदे ने एक और जबर्दस्त प्रहार कर दिया और मेरी चूत को चीरता हुआ उनका लौड़ा पूरा जड़ तक अन्दर पैबस्त हो गया।
“आ्आ्आ्आ्आह” किसी हलाल होती मेमने की तरह मेरी दर्दनाक कराह निकल गई। अभी मैं इस दर्दनाक प्रहार की व्यथा से उभरी भी नहीं थी कि पीछे से मेरे पापा ने अपने लौड़े से मेरी गांड़ में हमला बोल दिया। एक भयानक धक्के से मेरे गुदा द्वार को फैलाता हुआ आधा लंड भीतर ठोंक दिया।
“हाय राम मार डाला रे आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह।” मैं कराह उठी।
अब पापा गुर्राए, “चुपचाप रह और मेरा लौड़ा अपनी गांड़ में पूरा घुसाने दे कुतिया।” कहते कहते एक और हौलनाक धक्का मारकर पूरा लौड़ा जड़ तक पेल दिया। मेरी घुटी घुटी आह निकल पड़ी। ऐसा लगा मानो मेरी गांड़ फट गई और उनका 9″ लंबा लंड मेरी अंतड़ियों को चीर डाला हो।
मैं दांत भींच कर दोनों लौड़ों को बमुश्किल अपने अंदर समाहित कर स्थिर हो गई। उन्होंने भी मेरी स्थिति को समझा और कुछ पल उसी स्थिति में स्थिर रहे।
परंतु आश्चर्यजनक रूप से कुछ ही पलों में दर्द छूमंतर हो गया और मैं खुद ही चुदासी रंडी की तरह बोल पड़ी, “आह ओह अब ठीक है, अब चोदिए जी।”
उन वहशी भेड़ियों को तो मुंहमांगी मुराद मिल गई। पहले धीरे धीरे अपने लंड को आगे पीछे करने लगे फिर ठापों की रफ़्तार बढ़ाने लगे। मैं उनके बीच पिसती हुई दोनों लौड़ों से चुदती आनंद के समुद्र में गोते लगाने लगी। दोनों के धक्के एक साथ लग रहे थे और मुझे हिलने की भी आवश्यकता नहीं थी। ऐसा लग रहा था मानो दोनों के लंड आपस में मिलने की कोशिश में मेरे गर्भाशय और अंतड़ियों के बीच की दीवार को फ़ाड़ डालने की जद्दोजहद में लगे हों।
“आह मेरी रानी, ओह मेरी बिटिया, ले मेरा लौड़ा, ओह रे कुतिया, ओह मेरी जान, मेरी रंडी चूतमरानी बुर चोदी,” करीम चाचा बोले जा रहे थे और चोदे जा रहे थे।
“ओह मेरी लंड रानी, तेरी गांड़ पहले क्यों नहीं चोदा। क्या मस्त गांड़ है बेटी, आह बहुत मजा आ रहा है मेरी गांड़ मरानी हरामजादी रंडी। आह ओह ले लौड़ा, हुम हुम हुं हुं।” गंदे गंदे अल्फाज़ उनके मुंह से उबल रहे थे।
मैं भी कहां कम थी। दो दो पहलवानों के बीच पिसती हुई दो दो लौड़े से चुदती मस्ती के सागर में डूबती उतराती बड़बड़ाने लगी थी, “चोद हरामजादों, बेटीचोदों, नानी को चोदा नानी चोद, मां को चोदा मादरचोद, अब बेटी को भी चोद ले, अपनी रानी बना लें, रंडी बना ले, कुतिया बना ले चुदक्कड़ों, कुत्तों, आह आह ओह ओह ओह ओ्ओ्ओ्ओह आ्आ्आ्आ्आह।”
वे दोनों बड़े ही अच्छे साझेदारों की तरह इतनी अच्छी तरह तालमेल बैठा कर चोद रहे थे कि मैं सातवें आसमान पर पहुंच गई। कभी करीम चाचा और पापा अगल बगल से चोदते, कभी चाचा नीचे और पापा ऊपर तो कभी पापा नीचे और करीम चाचा ऊपर, मगर मैं हर हाल में उनके बीच पिसती हुई मजे लेती रही। पूरे बेड को मानो हमलोगों ने कुश्ती का अखाड़ा बना दिया हो। इस दौरान मैं एक बार उत्तेजना के चरमोत्कर्ष में बेहद हाहाकारी स्खलन से गुजरने लगी, “आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह अम्म्म्म्म्माआआआआ मैं गई््ई्््ई््ई्््््ई्््ई््ई् ” मेरे निढाल होते शरीर को संभाल कर दोनों खड़े हो गए और मुझे हवा में उठा लिया और आगे पीछे से लगातार चोदते रहे। लगातार होती चुदाई से मैं दुबारा उत्तेजित हो उठी और पूर्ण रूप से अपने आप को उनके सुपुर्द कर दिया कि अब जैसे चाहो चोद लो। वे दोनों जंगली जानवरों की तरह मुझे भंभोड़ रहे थे, झिंझोड़ रहे थे, निचोड़ रहे थे, मेरे शरीर का सारा कस बल निकाल रहे थे। मैं उनकी चुदाई क्षमता की कायल होते हुए मदहोशी में चुदती हुई अपूर्व सुख के सागर में डूब गई थी।
अंततः करीब 40 मिनट बाद पसीने से लथपथ, “आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह ले्ल्ल्ले मेरा लौड़ा रस” उन्होंने मुझे कस के मुझे दबोच कर अपना मदन रस मेरी चूत और गांड़ में पिचकारी की तरह छर्र छर्र उंडेलने लगे और उसी समय मैं भी दुबारा झड़ने लगी।
“हाय राज्ज्जा ओह लंड्ड्डराज्ज्जा आह्ह्ह्ह्ह्ह इस्स्स्स्स्स्स मैं गई,” चरम सुख के वे अकथनीय पल, मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं। अद्भुत, स्वर्गीय, अनिर्वचनीय। फिर हम तीनों खल्लास हो कर नंग धड़ंग निढाल बिस्तर पर लुढ़क गए। पूर्ण संतुष्टी की मुस्कान उन बूढ़ों के होंठों पर खेल रही थी। देर पहले शेर की तरह सर उठाए उनके विशाल लंड बड़ी मासूमियत से चूहों की तरह दुबक गए थे। मैं ने आज जो सुख पाया उसके लिए उन दोनों की शुक्रगुजार थी। हम निढाल जरूर थे मगर एक दूसरे के नंगे जिस्म से अब भी चिपके हुए थे। मुझे उन पर बहुत प्यार आ रहा था। मैं उनको बारी बारी से चूम उठी।
“सचमुच मेरे राजाओ, खूब मज़ा दिया आप लोगों ने। आई लव यू बोथ।” मैं बोल उठी। करीम चाचा तो निहाल हो उठे।
मेरे गालों को सहलाते हुए बोले, “तू सच में हरिया के लंड की मस्त उपज है रानी। आज तक इतना मजा नहीं आया जितना आज आया। क्या मस्त बदन है तेरा। चोद के दिल खुश हो गया। तू सच में मस्त माल है। हरिया तू सही में किस्मत वाले हो, इतनी जबरदस्त खूबसूरत सेक्सी बेटी मिली है तुझे।”
पापा गर्व से बोले, “अरे आखिर बेटी किसकी है।”
“अब बेटी वेटी कुछ नहीं, मुझे सिर्फ कामिनी बोलिए। बड़े आए बेटी बोलने वाले। एक लौंडिया आपके लंड से पैदा हुई, आपसे चुदवाने के लिए, बस यही याद रखिए।” मैं बड़ी बेशर्मी से बोली।
“हां हां, तू बस एक खूबसूरत लौंडिया हो, जिसका नाम कामिनी है और हम इस लौंडिया के चुदक्कड़। अब ठीक है?” पापा बोले।
“हां अब ठीक है मेरे चोदू बलमा।” मैं उन दोनों के लंड को सहलाते हुए बोली। “अच्छा कल आपने चार औरतों को चोदने की कहानी सुनाई, बाकी औरतों के बारे में भी तो बताईए।” मैं पूछी।
“करीम, आगे की कहानी तू बता दे भाई” पापा बोले।
“ठीक है तो सुनो। सब्जी बेचने वाली औरत से हम दोनों साझेदार हो गये थे। एक दिन तेरे बाप को सब्जी वाली के साथ चुदाई करते हुए मैं ने रंगे हाथ पकड़ लिया। दोनों फर्श पर ही चुदाई में बिजी थे। बिल्कुल नंगे। उस दिन मैं मालिक को जल्दी छोड़ कर आ गया था। दरवाजा सिर्फ उढ़का हुआ था। दरवाजा ज्योंही खुला मैं अंदर का सीन देख कर दंग रह गया। यह हरिया सब्जी वाली को कुतिया बना कर चोद रहा था।”
“यह क्या हो रहा है?” मैं जोर से बोला। नंगी सब्जी वाली की बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर मेरा लौड़ा टनटना उठा था। उसकी फूली हुई भैंस जैसी चूत को देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया था। मैं उसे चोदने के लिए पागल हो गया था। मैं उसे धमकाते हुए बोला, “देख मैं ने तुम दोनों को चुदाई करते हुए रंगे हाथ पकड़ा है। मुझे भी चोदने दे नहीं तो मालिक को बता दूंगा।” मैं ने धमकी दी तो सब्जी वाली गिड़गिड़ाने लगी।
“मालिक को मत बताइएगा बाबूजी, आप चाहो तो हमें चोद लीजिएगा।” सब्जी वाली औरत बोली।
“ठीक है तो हरिया, तू पहले चोद ले फिर मैं इसे चोदुंगा।” ब्लैकमेल कर के सब्जी वाली को मुझसे चुदने के लिए मना लिया।
जब तक हरिया उस औरत को चोदता रहा, मैं कपड़े उतार कर चोदने के लिए तैयार हो गया। हरिया चोद कर उस औरत को छोड़ा, मैं फनफनाता लौड़ा उठाए उसकी ओर बढ़ा, लेकिन उस औरत ने ज्यों ही मेरा लौड़ा देखा, डर के मारे रोने लगी, “बाप रे इतना मोटा लंड, हम तो मर ही जाएंगेे। मेरी बुर फट जायेगी। हमें मत चोदिए ना।” वह रोती हुई बोली।
“चुप साली रंडी, चुपचाप चोदने दे।” कहते हुए झपट कर उसे पकड़ लिया और उसके थल थल करती चूचियों को मसलते हुए उसके दोनों पैरों को फैला कर अपना लौड़ा उसकी झांटों से भरी हुई भैंस जैसी फूली बुर के मुहाने पर रखा और घप्प से एक जोरदार धक्का मारकर आधा लंड घुसा दिया। “ले रंडी हुम्म्म्म”
वह दर्द के मारे बिलबिला कर जोर से चिल्ला उठी, “आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह फाड़ दिया रे फाड़ दिया मेरा बूर। मार दिया मा्आ्आ्आ।”
मैं ने गुस्से से उसको दो झापड़ रसीद कर दिया और गुर्रा कर बोला, “चोप्प साली बुर चोदी रंडी, चुपचाप चोदने दे।” कहते हुए एक और जोर का धक्का मारकर पूरा लौड़ा उसकी बुर में उतार दिया। वह रो रही थी, छटपटा रही थी मगर मैं ने उसे छोड़ा नहीं, इतने सालों बाद तो चोदने के लिए एक औरत मिली थी, कैसे छोड़ देता। फिर तो दे दनादन चोदने लगा और कुछ ही देर में उसका रोना चिल्लाना बन्द हो गया और खूब उछल उछल कर चुदवाने लगी, “आह ओह राजा चोद साले हरामी फाड़ दो मेरी बुर, आह आह।”
“अब आ रहा है ना मज़ा साली हरामजादी कुतिया बुर चोदी, इसी के लिए इतना नाटक कर रही थी चूत मरानी” मैं बोला। आधे घंटे की घमासान चुदाई के बाद जब मैं अपना आठ साल से जमा लौड़ा रस उसकी चूत में छोड़ने लगा तो वो कुतिया भी पागल की तरह मुझसे चिपट गई और उसका भी काम तमाम होने लगा। “हाय राजा हम तो गये आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह मां ््आ इस्स्स्स मस्त चुदक्कड़ हो जी। हमको मां बना दो राज्ज्ज्जा आ्आ्आह।”
“हां रे कुतिया आज तुझे पेट से कर देता हूं हर्र्र्र्र्रामजादी रं्रं्रं्ड्ड्ड्डी आह ओह आह।” जब तक मेरे लंड का रस अपने बूर से पूरा नहीं चूस लिया, हम से चिपटी रही। उसके बाद तो हम दोनों ने मिलकर उस दिन के बाद ऐसा चोदा कि दो महीने बाद पता चला कि सच में वह पेट से हो गई और हमको बोली, “हम इस बच्चे को जन्म देंगे। आप दोनों ही इस बच्चे के बाप हो। हमरे मरद से तो बीस साल में भी बच्चा नहीं हुआ। अब बच्चा पैदा होने के बाद ही आप लोगों को चोदने देंगे नहीं तो बच्चा खराब हो जाएगा।”
हम घबड़ा गये कि तब तक हम कैसे दिन काटेंगे। हमको चोदने का चस्का लग गया था। बिना चोदे हमें चैन कैसे मिलेगा। फिर भी मन मसोस कर मैं बोला, “ठीक है, आज से हम तुझे नहीं चोदेंगे। मगर तब तक हम कैसे दिन काटेंगे?”
“अरे हम इसका गांड़ तो चोद ही सकते हैं ना। कम से कम पांच छः महीने तो आराम से गांड़ मार सकते हैं।” तेरे पापा बोले।
“नहीं बाबा आप लोगों का लंड बहुत बड़ा है। मेरा गांड़ फाड़ दोगे।” घबराकर वह बोली।
“ठीक है तो चलो अभी देख लेते हैं। अगर तकलीफ होगा तो नहीं चोदेंगे।” मैं बोला।
वह झिझकते हुए राजी हो गई। हमें तो मुंहमांगी मुराद मिल गई। फटाफट कपड़े खोल कर उसे कुतिया बना दिया और पहले हरिया अपने लंड में तेल लगा कर उसकी मोटी मोटी गोल गोल गांड़ को फैलाया और गांड़ के सुराख के पास लंड का सुपाड़ा टिका कर धीरे धीरे दबाव बढ़ाने लगा। हरिया के लंड का सुपाड़ा सामने से नुकीला होने के कारण अपने आप रास्ता बनाता हुआ अन्दर घुसता चला गया। लेकिन कुछ दूर घुसने के बाद वह चिल्ला उठी क्योंकि लंड पीछे की तरफ तो मोटा था। अब एक बार लंड को छेद मिल गया तो तेरा बाप कैसे छोड़ देता। “हाय राम मार डाला रे आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह फाड़ दिया, छोड़ हरामी” वह चिचिया उठी। हरिया कहां मानने वाला था, एक जोरदार धक्का लगाया और पूरा लंड अन्दर पेल दिया। “मां अम्मा मार दिया मादरचोद, आह” चिल्ला उठी। हरिया कुछ नहीं बोला बस चुपचाप चोदने में लग गया।
दो मिनट बाद ही पारो मस्त हो गई और बोलने लगी, “आह ओह राजा, चोद हरामी चोद मादरचोद हमारा गांड़ चोद बाबू।,” हम समझ गए मामला फिट हो गया। फिर क्या था पहले हरिया चोदा फिर हम चोदे। “बहुत मस्त है रे रानी तेरा गांड़। हम पहले काहे तेरी गांड़ पर ध्यान नहीं दिये।” मैं बोला।उस दिन के बाद हम छः महीने तक उसके गांड़ से काम चलाए। उसकी मोटी मोटी गोल गोल गांड़ को चोद चोद कर हमने और ज्यादा फैला दिया था। जब उसके मां बनने के लिए दो महीने बाकी थे और पेट गुब्बारे जैसा फूल गया था तब हमने उसको चोदना छोड़ा। आखिरी महीने में तो उसका पेट इतना बड़ा हो गया था कि बड़ी मुश्किल से चल फिर सकती थी। फिर उसको 46 साल की उम्र में जुड़वां बच्चे हुए। एक लड़की और एक लड़का। दोनों का वजन लगभग ढाई ढाई किलो था। लड़की का नाम करीम से करिश्मा और लड़के का नाम हरिया से हरीश रखा। बच्चे पैदा होने के बाद तो उसकी चूचियों का साइज़ और बढ़ गया और झूल गया था। चूत तो भोंसड़ा बन गया था। हम तीनों के बीच प्यार तो हो गया था मगर चुदाई में अब वह मजा नहीं रहा।
उसे भी समझ आ गया था कि हमारे बीच अब चुदाई में वह रस नहीं रहा। फिर भी कभी कभी चुदाई हो ही जाता था। हम दोनों अब दूसरी औरतों को चोदने के फिराक में लग गए।
पिछले अंक में आपने पढ़ा कि किस तरह नानाजी के ड्राइवर करीम चाचा ने मेरे बाप के साथ मिलकर मुझसे अपनी वासना की आग बुझाई। उन लोगों के बीच इतना बढ़िया तालमेल था कि जब दोनों मिलकर मुझे भोग रहे थे, उनके गठे शरीर के बीच पिसती हुई और उनके विशाल लिंगों से बिंधती हुई भी मैं संभोग सुख के अपार समुंदर में डूब गई थी। करीम चाचा नौवें व्यक्ति थे जिन्होंने मेरे तन से अपनी काम क्षुधा शांत की। करीम चाचा और मेरे बाप ने बड़ी ही बेरहमी और धमाचौकड़ी मचाते हुए मेरे बदन का उपभोग किया। अभी भी मुझे चोदने के बाद नंग धड़ंग मेरे अगल बगल लेटे मेरे नंगे तन को सहलाते हुए अपने पिछले दिनों की विभिन्न औरतों से हुई चुदाई की कहानी सुना रहे थे। यह मेरी ही जिज्ञासा थी जिसे अब करीम चाचा पूरी कर रहे थे। मैं सोच रही थी कि पिछले पांच दिनों में ही मैं किस तरह अलग अलग परिस्थितियों से गुजरती हुई पूरी तरह छिनाल औरत बन गई थी। इस दौरान मैं ने अपने अंदर एक अजीब तरह का परिवर्तन महसूस किया। मैं जानती थी कि मेरी मर्जी के बगैर कोई मुझसे जबरदस्ती नहीं कर सकता था, केवल सरदार वाले एपिसोड को छोड़ कर, जो कि मैं समझती हूं एक अपवाद था। लेकिन उस घटना के कारण अब मेरे अंदर एक शैतानी कीड़ा कुलबुलाने लगा था, शैतानी विचार सर उठाने लगा था कि साधारण तौर पर बिना किसी विरोध के प्रेममय आपसी सहमति से संभोग क्रिया की तुलना में यदि कोई मेरा बलात्कार करे तो शायद उसका रोमांच और मज़ा कुछ और होगा। बलात्कार करने वाला पूरी शिद्दत से मेरे साथ बलात्कार करे, उसे संतोष हो कि हां उसने जबरदस्ती मेरी इज्जत लूट ली और मैं उस दौरान रोती कलपती विरोध करती बलात्कार की शिकार होने का नाटक करती रहूं तो शायद उसका अलग ही लुत्फ होगा। हां यह और बात है कि मेरा बलात्कारी मेरी पसंद का हो।
खैर यह तो मेरे दिमाग में कुलबुलाते कीड़े की बात थी। फिलहाल तो मैं करीम चाचा के मुख से विभिन्न स्त्रियों के साथ हुए उनके शारीरिक संबंधों के बारे में सुन कर मज़े ले रही थी। “आप लोगों का कांटा तो चौथी औरत में ही अटका हुआ है। सब्जी वाली के बाद और कितने औरतों को अपना शिकार बनाए?” मैं पूछी।
“हां तो मैं बता रहा था कि सब्जी वाली के बाद नये शिकार की तलाश में थे। सौभाग्य से बहुत जल्दी दो और औरतें मिली। तेरे नानाजी के घर के पीछे जो घर बना है, जिसमें हम रहते हैं, उस घर के बनते समय कुछ मजदूर काम करने के लिए आते थे। उनमें दो औरतें भी थीं। एक करीब पैंतीस साल की थी और दूसरी करीब चालीस साल की। पैंतीस साल वाली सांवले रंग की करीब पांच फुट लंबी दुबली पतली चुलबुली औरत थी, छोटी छोटी चूचियां किसी 16 साल की लड़की की तरह, हां चूतड़ थोड़ा बड़ा था, नाम था कमला। चालीस साल वाली कोयले की तरह काली मगर भारी बदन वाली गठे शरीर की, भरी भरी बड़ी बड़ी चूचियां, बड़ा सा चूतड़, पांच फुट आठ इंच ऊंची, काली थी मगर देखते ही लंड खड़ा हो जाता था, नाम था उसका हीरा। इन दोनों औरतों को देख कर हम दोनों इन्हें चोदने का प्लान बनाने लगे। इनके साथ दो कुली और दो बूढ़े मिस्त्री भी काम करने आते थे। पीछे एक गोदाम था जिसमें सीमेंट राड वगैरह रखा जाता था। मिस्त्री लोग और एक कुली दोपहर को खाना खाने घर जाते थे क्योंकि उनका घर पास में ही था। दोनों रेजा और एक कुली खाना लेकर आते थे और यहीं गोदाम में खाना खाते थे। कमला थोड़ी हंसमुख स्वभाव की औरत थी और थोड़ी चालाक भी। हम उनसे मेल जोल बढ़ा कर पटाना चाहते थे। बातों ही बातों में हमें पता चला कि कमला का आदमी भी मजदूर है और पास के खदान में काम करता है। उसके दो बच्चे हैं। हीरा का आदमी रिक्शा चालक है और उसका कोई बच्चा नहीं है। कमला दो ही दिन में समझ गई कि हम किस किस्म के आदमी हैं। उसने हमारी नज़रों से ही समझ लिया था कि हम किस चक्कर में हैं। हम उनसे बात करते तो हमारी नजरें उनकी चूचियों और कमर से नीचे ही चिपकी रहती थीं।
हम लोग थोड़ा हंसी मजाक भी कर लेते थे। पानी वगैरह पीने के लिए वे लोग घर से ही मांग लेते थे। तीसरे दिन एक कुली जो यहीं खाना खाता था, तबीयत खराब होने के कारण नहीं आया। उस दिन दोपहर को खाना खाने के पहले कमला जब पानी लेने आई तो हरिया ने उसे अंदर बुलाया। हमने दरवाजा के अंदर चिकने फर्श पर थोड़ा तेल गिरा दिया था। जैसे ही उसने वहां पांव रखा वह फिसली और गिरने लगी। हरिया तो पहले से तैयार था, उसने उसे दोनों हाथों से पकड़ लिया लेकिन खुद भी संभल नहीं पाया क्योंकि उसका एक पैर फिसलन भरी फर्श पर पड़ा और कमला को लिए दिए फर्श पर गिर पड़ा। वह जानबूझकर ऐसे गिरा कि वह नीचे और कमला उसके ऊपर। हरिया सिर्फ लुंगी पहने हुए था। हरिया का लंड ठीक कमला की चूत पर टिक गया था। कमला उठने की कोशिश में दुबारा गिर पड़ी, इस बार ऐसा लगा जैसे हरिया के लंड का सुपाड़ा उसकी साड़ी समेत उसकी चूत में कुछ अंदर घुस गया हो।
कमला चिहुंक उठी, “हाय राम ई का?” कमला चौंककर बोली। हरिया को महसूस हुआ कि यहां के गांव देहात की औरतों की तरह कमला ने भी अंदर कुछ नहीं पहना है। बड़ी चालाकी से हरिया ने फर्श पर गिरे तेल से अपने लंड को लसेड़ कर उसे उठाने के बहाने नीचे हाथ डाला और खड़े होने की कोशिश की, इस कोशिश में वह भी जानबूझ कर दुबारा गिरा, मगर इस दुबारा गिरने के बहाने उसकी साड़ी उसकी कमर तक उठा दी और अपने लंड के ऊपर से लुंगी का पर्दा हटा दिया। इस बार वह उसी के ऊपर गिर पड़ा और ऐसा गिरा कि तेल से लिथड़ा उसके लंड का सुपाड़ा कमला की चूत के अंदर फच्च से घुस गया। यह संयोग नहीं था, हमारा पहले से बना बनाया प्लान था। कमला के मुंह से घुटी घुटी आह निकल गई।
“हाय दादा ई का? हटिए।” वह बोल पड़ी। उसका हाथ अनायास ही अपनी चूत की तरफ गया और यह महसूस कर कि हरिया का लंबा और मोटा सा लन्ड उसकी चूत में धंसा हुआ है, घबड़ा गई। लंड के साइज़ का अनुमान करके कांप उठी। भयानक दर्द हो रहा था जिसके कारण वह तड़प उठी थी। वह जितनी बार उठने की कोशिश करती है उतनी बार गिरती और उसी प्रकार हरिया जितनी बार उठने का उपक्रम करता उतनी बार जानबूझ कर गिर जाता और इस क्रम में हर बार थोड़ा थोड़ा करके पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया। कमला दर्द के मारे हलकान होती हुई रोने चिल्लाने लगी।
“हाय हाय मर जाएंगे, हाय राम हटिए हटिए फाड़ दिया मेरा बूर”
जब हरिया ने देखा कि पूरा लंड घुस गया है तो थोड़ा रुका और बोला, “हम का करें बोलो। उठना चाहते हैं तो गिर पड़ते हैं। तुम ही हटो ना ” उसने तो जीत का झंडा गाड़ दिया था।
“हाय दैय्य्य्याआ्आ्आ्आ हम कैसे हटेंगे, तेरा लंड मेरा बूर में फंसा हुआ है, ओह्ह्ह मर जाऊंगी, जल्दी निकालो न्न्न्न्न्ना” वह रो रही थी। चुदी चुदाई औरतों के लिए भी खौफनाक हरिया का लंबा और मोटा लंड सच में उस दुबली पतली औरत की छोटी सी चूत के लिए किसी क़यामत से कम नहीं था। उसकी चूत फैल कर हरिया के गधे जैसे लंबें और मोटे लंड से फंस कर चिपक गई थी।
हरिया करवट ले कर नीचे आ गया और कमला को अपने ऊपर करके बोला, “चल अब तू ही उठ जा” जबकि वह जानता था कि उसके लिए भी उठना आसान नहीं था। जितनी बार भी उठने की कोशिश करती, हरिया का लंड थोड़ा निकल जाता था लेकिन फिर जैसे ही वह फिसल कर गिरती, फिर घप्प से घुस जाता था।
वह दर्द से हाय हाय कर उठती थी, “हाय राम मार डाला रे बप्पा, फाड़ दिया मेरा बूर”। मगर इसी तरह कुछ ही देर में लंड अंदर बाहर होने से कमला की चूत थोड़ी ढीली हुई और दर्द की जगह अब उसे मज़ा आने लगा था। उसने उठने की कोशिश करना बंद कर दिया और थोड़ी शरमाते हुए हरिया के ऊपर लद गयी, एक प्रकार से अपने आप को हरिया के हवाले कर दिया। हरिया समझ गया कि अब कमला पूरी तरह उसके काबू में आ चुकी है। उसने लुंगी पूरा हटा दिया और धीरे-धीरे नीचे से धक्का लगाने लगा और इधर कमला भी शरमाते हुए अपनी कमर चलाने लगी थी। मैं दरवाजे के बाहर खड़े हो कर सारा नज़ारा देख रहा था।
जब मैं ने देखा कि अब तवा गरम है और दोनों मस्त हो कर चुदाई का मजा ले रहे हैं, उसी वक्त कबाब मैं हड्डी की तरह वहां पहुंच कर बोला, “यह क्या हो रहा है?”
मेरी आवाज़ सुनकर कमला तो हड़बड़ा गई मगर हरिया उसी तरह नीचे से कमला को चोदता रहा और बोला, “अरे कुछ नहीं भाई, हम फिसल कर गिर पड़े हैं, आकर हमें उठा लो।”
मेरे सामने कमला की चिकनी गांड़ खुली हुई मुझे निमंत्रण दे रही थी। मैं अपने लंड में पहले से तेल लगा कर सिर्फ लुंगी पहने हुए था, उन्हें उठाने के लिए आगे बढ़ा और उठाने के बहाने झुका और सामने से लुंगी हटा कर फिसलते हुए कमला के ऊपर गिर पड़ा। मेरा लंड ठीक कमला की गोल चिकनी गांड़ के सुराख पर था। मैं ने उठाने के बहाने कमला की चूचियों को पीछे से पकड़ कर दबाते हुए जोर लगाया और तेल से चुपड़े लंड का सुपाड़ा उसकी टाईट गांड़ में फच्च से घुसा दिया।
जैसे ही मेरा मोटा सुपाड़ा उसकी गांड़ में घुसा, कमला चीख पड़ी, “हाय रा्मर्र्र्र्र मेरा गां्ड़्ड्ड् फट्ट्ट गय्य्य्या”।
“अरे चिल्लाती क्यों है, उठा रहा हूं ना।” कहते हुए और जोर लगाया तो उसका गांड़ फैलाता हुआ मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुसा दिया।
उसकी गांड़ का छेद फटने फटने को हो गया जिसमें कारण दर्द के मारे और जोर से चीख पड़ी, “आ्आ्आ्आ्आह फाड़ दिया रे मेरा गांड़” और रोने लगी।
मैं बोला, “अरे रोती क्यों है, उठा रहा हूं ना”। उठाने के बहाने और एक जोरदार धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड उसकी गांड़ में पेल दिया।
इस बार उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसकी सांस कुछ देर के लिए रुक गई, किसी हलाल होती हुई बकरी की तरह उसके मुंह से दर्दनाक आवाज निकल पड़ी। “हाय मां्म््म्म्््म््म्््म््म्म््म््म्््म््म्म्आह, मर जाएंगे, छोड़िए हमको, मेरा गां्ड़ फा्फा्ड़ दिया ओ्ओ्ओ्ओ्ओ्ओह्ह्ह्ह्ह्” मैं उसकी आवाज को अनसुना करते हुए धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा। धीरे धीरे उसकी गांड़ थोड़ी ढीली हो गई और दर्द जब खत्म हुआ तो उसे मज़ा आने लगा और शरमाते हुए वह भी क़मर चलाने लगी। अब नीचे से हरिया और ऊपर से मैं कमला को चोदने लगे। कमला की शर्म धीरे-धीरे खत्म होने लगी और आह उह करने लगी। हम लोगों ने किला फतह कर लिया था। अब मैं चोदता हुआ उसका ब्लाऊज़ खोल दिया और उसकी नींबू जैसी चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा।
वह अब मस्ती में भर गई थी और बड़बड़ाने लगी थी, “आह राजा, ओह राजा, चोदिए जी, चोद लीजिए, आह मज़ा आ रहा है ओह्ह्ह आह्ह्ह्।”
हम दोनों अब पूरी तरह मस्त हो कर चोद रहे थे, “हां कमला, तेरी चूत बड़ी मस्त है,” हरिया बोला, “हां रानी तेरी गांड़ का जवाब नहीं, ऐसा गांड़ पहली बार चोदने को मिला है, आह साली कुतिया इसी के लिए इतना रोना गाना कर रही थी, साली रंडी,” मैं बोल पड़ा।
” हम सब समझती हूं, साले कुत्ते हरामी, हमको चोदने के लिए इतना ड्रामा किया था मादरचोदो, मगर आह्ह्ह्ह खूब मज़ा आ रहा है, आह मेरा बुर में लौड़ा धांस धांस के चोद, मेरा गांड़ में लंड ठोक ठोक के चोद आह्ह्ह्ह ओ्ह्ह्ह्ह मा्म्म्म्म्मां,” वह पागलों की तरह बड़ बड़ करती हुई मजे से चुदवा रही थी।
यह सब होते हुए करीब 15 मिनट हो चुका था, पानी लाने में देरी होने के कारण कमला को पुकारते हुए हीरा भी आ गई और खुले दरवाजे से उसने जो कुछ देखा तो सन्न रह गई। मुंह खुला का खुला रह गया। कमला आंखें बंद कर मस्ती में हम दोनों से खुल कर चुद रही थी और उसके मुंह से आनन्द के मारे सिसकारियां निकल रही थी।
कुछ देर हीरा बुत बनी हमें चुदाई में मग्न देखती रही, फिर अचानक जैसे नींद से जाग उठी और बोली, “हाय राम इहां ई का हो रहा है?”
हमारी मस्तीभरे चुदाई में बाधा, कमला हड़बड़ा गई, मगर हमने उसको छोड़ा नहीं और हीरा की ओर देख कर मैं बोला, “अरे हम गिर गये हैं, उठ नहीं पा रहे हैं, आकर जरा सहायता कर दो ना, वहां दरवाजा में खड़े खड़े क्या तमाशा देख रही है।” मैं जानता था कि वह जैसे ही आएगी, फिसल कर गिर पड़ेगी और हम उसका भी शिकार कर लेंगे। वैसा ही हुआ, जैसे ही उसने दरवाज़े के अंदर कदम रखा फिसली और सीधे हमारे ऊपर गिरने लगी। हरिया कमला को लिए दिए एक तरफ हो गया और मैं कमला को छोड़ कर पलट गया, मेरा लौड़ा कमला की टाईट गांड़ से फच्चाक से निकल कर हीरा के स्वागत में सर उठा कर खड़ा हो गया था। हीरा सीधे मेरे ऊपर आ गई। मैं इसके लिए पहले से तैयार था इसलिए हीरा को अपनी बाहों में सम्भाल लिया। मेरा टनटनाया लौड़ा साड़ी के ऊपर से ही सीधे हीरा की चूत से टकराया। मैं ने थोड़ा एडजस्ट कर के अपने कमर को हल्का सा धक्का दिया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी साड़ी समेत उसकी चूत में थोड़ा सा धंस गया था। मैं समझ गया कि यह यहां की देहाती औरतों की तरह यह भी चड्डी वड्डी नहीं पहनी है। वह चौंक उठी, “हाय राम” उसका हाथ झट से अपनी चूत की तरफ गया तो मेरा तन्नाया हुआ लंड से टकरा गया। मेरे टनटनाए गर्म और मोटे लंड का अहसास कर तुरंत उठने की कोशिश करने लगी मगर फिर गिर पड़ी।
“अरे हट, तू हमें उठाने आई है कि हमारे ऊपर गिरने” कहते हुए मैं उसे उठाने के बहाने नीचे से हाथ लगाया और अनजान बनते हुए उसकी साड़ी को कमर तक उठा दिया मानो यह सब उसे उठाने की कोशिश में हुआ हो। कमर से नीचे अब वह पूरी तरह नंगी थी और मेरा गधा सरीखा लौड़ा उसकी काली काली फूली हुई झांट से भरी हुई चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। वह हड़बड़ा गई और फिर उठने की कोशिश की लेकिन इस बार भी उसकी कोशिश सफल नहीं हुई और मेरे ऊपर गिर पड़ी। इस बार उसका गिरना उसके लिए क़यामत से कम नहीं था क्योंकि इस बार मैं ने अपने लौड़े को ठीक पोजीशन में रखा था, जैसे ही वह गिरी मेरा लौड़ा भच्च से उसकी भैंस जैसी बुर को फाड़ता हुआ सुपाड़ा समेत आधा अन्दर घुस गया। दर्द के मारे उसके मुंह से लंबी चीख निकल पड़ी, “आ्आ्आ्आ्आ्आआ्आ फट्ट्ट्टट््ट गया मेरा बू््ऊ्ऊऊ््ऊ्ऊर ओ्ओओ्ओ््ओ््ओ मा्मा्मां।”
मैं बनावटी झल्लाहट से बोला, “हट साली, खुद मेरे लौड़े पर गिर रही है और मां मां चिल्ला रही है।” वह जितनी कोशिश करती जा रही थी, मेरा लौड़ा धीरे धीरे उसकी बुर को फाड़ता हुआ घुसता चला जा रहा था।
अंततः मेरा पूरा लंड उसकी बुर के अंदर घुस गया और वह दर्द से बिलबिला उठी, “मईर देले गो, हाय रे फाईड़ देले हमर बूर के ( मार दिया मां, हाय फाड़ दिया मेरा बूर को)” चीख चीखकर रोने कलपने लगी।
“चुप साली हरामजादी, तू खुद मेरे लंड में गिर रही है और चिल्ला रही है, हट मेरे ऊपर से” मैं ने बनावटी गुस्से से डांटा। उसको भी लगने लगा कि यह एक एक्सीडेंट है, अतः फिर उठने की कोशिश करने लगी लेकिन असफल रही। जितनी बार कोशिश करती उतनी बार मेरा लौड़ा अंदर बाहर होता।
“हाय रे मोय आईज मोईर जाबों (हाय, मैं आज मर जाऊंगी)। माय रे बाप रे” चिल्ला चिल्ला कर रोने लगी थी। लेकिन यह कुछ ही देर की बात थी, फिर तो उसे भी मजा आने लगा और शरमाती हुई अपने आप कमर चलाने लगी। उसकी सिसकारियां निकलने लगी थी। अब मैं समझ गया कि अब खुल के चोदने का समय आ गया है।
मैं बोला, “अब क्या हुआ? अब काहे हटती नहीं है?”
वह शरमाती हुई कमर चलाती धीरे से बोली, “अच्छा लग रहा है अब”
“ओह तो यह बात है। सीधे बोल ना चुदवाने का मन हो गया है।” मैं बोला और उसको नीचे करके दोनों पैरों को फैलाकर घपाघप चोदना शुरू किया। वह अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को जकड़ कर चुदाई का मजा लेने लगी, “आह राजा ओह बाबू खूब मज़ा आ रहा है जी, और जोर से चोदिए राजा, ओह ओह”
अब मैं पागल हो गया था, उसकी ब्लाऊज को खोल कर बड़े बड़े चूचियों को दबाने और मसलने लगा और धकाधक चोदने लगा। “साली रंडी इसी के लिए इतना नाटक कर रही थी हरामजादी कुतिया अभी देख कैसा मज़ा आ रहा है।” मैं बोल रहा था।
“हां राजा ओह सैंया, ओह चोदू, चोद हरामी चोद, साले कुत्ते हम सब समझते हैं, हमको चोदने के लिए ड्रामा किया मादरचोद, चोद हरामजादा, अपना मोटा लौड़ा से आह ओ्ओ्ओ्ओह” अब वह शर्मोहया को ताक में रखकर चुदने लगी थी।
उधर हरिया कमला को उलट पलट कर चोदने में लगा हुआ था। कमला भी खूब मज़ा ले रही थी। करीब आधे घंटे तक हमने उनको चोद चोद कर पगली कर दिया था और वो दोनों हमारे चुदाई की दिवानी हो गई थी। आधे घंटे बाद जब हम खलास हुए, तब तक तो वे दोनों हमारे लौड़ों की पुजारन बन चुकी थी। चुदाई के बाद जब हम उठे तो हीरा और कमला की हालत देखने लायक थी। उठने के लिए तेल वाले जगह से लुढ़क कर फर्श के भूखे भाग में गये। चुदने के बाद उनकी चूत फूल कर पावरोटी की तरह हो गई थी। खड़े हो कर ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। सबसे बुरी हालत कमला की थी। फिर भी कमला मुझसे बोली, “मेरा गांड़ आधा चोद कर छोड़ दिया ना”
“तू अभी रुक, पांच मिनट बाद तेरी गांड़ की चटनी बनाता हूं।” वह ना ना करती रही मगर मैं उसे उठा कर सोफे पर झुका कर कुतिया बना दिया और उसकी गांड़ चाटने लगा। कुछ ही देर में मेरा लौड़ा फिर खड़ा हो गया और वह भी मस्ती में आह ओह करने लगी। उसी समय उसके गांड़ में थूक लगा कर अपना लौड़ा पेल दिया। “हाय हाय” कर उठी वह। फिर तो पूरी कुतिया की तरह पन्द्रह मिनट तक चोदने के बाद ही उसे छोड़ा। इस दौरान हीरा और हरिया हमारी चुदाई के लिए तालियां बजाते रहे। कमला तो ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।
उस दिन के बाद से जबतक घर का काम नहीं खत्म हुआ हम दोनों कमला और हीरा को रोज मौका निकाल निकाल कर अदल बदल के चोदने लगे। इसी दौरान पता चला कि हीरा गर्भवती हो गई है। लेकिन तब तक घर का काम भी तकरीबन खतम हो गया था। घर काम खत्म होने के बाद भी हम कमला को चोदने पहुंच जाते थे और पास के जंगल में ले जाकर चोद लेते थे। फिर काम के सिलसिले में कमला का आदमी कमला को लेकर अंडमान चला गया। इधर बच्चा होने के साल भर बाद हीरा एक दिन आई और बोली कि उसे हमारी बहुत याद आती है। हमने उसको बच्चा जो दिया था। वह हमारी अहसानमंद थी। हमारे लंड की दीवानी तो थी ही। हमारे अहसान के बदले उसने हमें कहा कि हम जब चाहें उसे चोद सकते हैं। हमें और क्या चाहिए था। । बच्चा होने के बाद उसकी चूचियों का साइज़ और बड़ा बड़ा हो गया था, दूध से थलथला कर भरा हुआ। उसी समय वहीं पर हम दोनों ने उसे पूरी नंगी करके उसके कोयले जैसे काले बदन को पूरे दो घंटे तक जम के चोदा, उसकी थलथलाती चूचियों को दबा दबा कर चूसा और दूध पिया, बुर चोदा, गांड़ चोदा, लंड चुसवाया। जी भर के मन मुताबिक मजा लिया। फिर धीरे धीरे हमारा मिलना कम हो गया। अभी तो वह भी करीब 55 साल की हो गई है, लेकिन अभी भी कभी कभी मिलते हैं तो उसको चोदने का अलग ही मजा मिलता है।”
इतना सुनते सुनते मैं इतनी उत्तेजित हो उठी थी कि बेसाख्ता बोल पड़ी, “बस बस, अभी इतना ही बताईए। मैं सुन कर बहुत गरम हो गई हूं। आप लोगों का लंड भी टनटना गया है। एक बार फिर से मुझे भी उन्हीं रेजा लोगों के जैसा समझ लीजिए और वही कीजिए जैसे उनके साथ किया था” मैं उत्तेजना के अतिरेक में पागल हो कर बोल उठी। मुझे क्या पता था कि इस तरह मैं ने दो वहशी जानवरों के अंदर के राक्षसों को जगा दिया है। फिर तो क़यामत आ गया। दोनों खुंखार दरिंदे मुझ पर टूट पड़े और करीम चाचा मेरी चूचियों को इतनी बुरी तरह मसलने लगे कि मैं चीख पड़ी। “आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह्, धीरे धीरे ओ्ओ्ओ्ओ्ओ्ह्ह्ह्ह, मार ही डालोगे क्या?” मैं तड़प उठी।
“चुप साली बुर चोदी रंडी, अभी तू हीरा है। अभी तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूं” कहता हुआ मुझे पलट दिया और टांगें फैला कर अपना मूसल लंड मेरी पनियायी बुर के मुहाने पर रख कर एक ही झटके में पूरा जड़ तक सर्र से पेल दिया। अचानक एक ही बार में पूरा लंड अन्दर घुसा तो एकबारगी उठे दर्द से बिलबिला उठी। “आह हरामी धीरे”
“बंद कर चिल्लाना हरामजादी कुतिया, तू अभी रेजा है। हरिया तू इसकी गांड़ का भुर्ता बना, आज साली बुर चोदी को सच का रंडी रेजा बना दे।” कहता हुआ बड़ी बेरहमी से मेरी चूत में भकाभक लंड ठोकने लगा। और करवट ले कर ख़ुद नीचे आ गया और मैं उसके ऊपर। मेरी गांड़ जैसे ही ऊपर हुई मेरा बाप अपना फनफनाता लौड़ा भच्च से एक ही करारे धक्के से पूरा का पूरा मेरी गांड़ में उतार दिया। एक ही बार में सड़ाक से जब उसका लंड मेरी गांड़ में घुसा तो मैं दर्द के मारे तड़प उठी। “हाय धीरे करो ना प्लीज”
” कुतिया अब बोलती है धीरे करो चूत मरानी अभी बोल रही थी रेजा जैसे चोदो, साली तू अभी रेजा है, अभी मैं तेरी गांड़ का भुर्ता बनाऊंगा, गांड़ का गूदा निकाल दूंगा रंडी कहीं की” बोलते हुए मेरा बाप मेरी गांड़ का कचूमर निकालने लगा।
मैं ने खुद उनके अंदर के जानवर को जगाया था इसलिए मुझे भुगतना ही था। दांत भींचे चुदती जा रही थी। मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मेरा बलात्कार हो रहा हो। धीरे धीरे मुझे इसमें अद्भुत आनंद का अनुभव होने लगा। “ओह आह चोद बेटी चोद, हरामी मादरचोद, कुत्ते, मुझे रंडी बना, कुतिया बना, आह ओह” मैं बोल रही थी। दोनों मुझे पैंतीस मिनट तक जंगली जानवरों की तरह नोचते खसोटते हुए भंभोड़ते रहे और उनकी हर हरकतों और गालियों से मुझे बेहद मज़ा आ रहा था। सबसे पहले मैं खलास हुई फिर करीम चाचा खलास होने वाले थे, अचानक ही उन्होंने अपना लौड़ा मेरी चूत से निकाल कर मेरे मुंह में ठूंस दिया और फचफचा कर मुझे अपना नमकीन और कसैला वीर्य पिलाने लगे और मैं हलक में उतारने को वाध्य हो गई। जैसे ही करीम चाचा हटे मेरे पापा भी अपना लौड़ा मेरी गांड़ से निकाल कर मेरे मुंह में घुसा दीए और फचफचा कर अपना मदन रस उंडेलने लगे। मैं उनका वीर्य भी पीने को वाध्य हो गई। उनके लंड से निकलने वाले एक एक कतरे को पीना पड़ा क्योंकि पूरे स्खलन के दौरान उनका लंड मेरे मुंह में अड़ा हुआ था।
अब हम थक कर चूर हो गये थे। “हां तो हमारी हीरा, हमारी कमला, हमारी रंडी रेजा, कैसा लगा रेजा बन के?” करीम चाचा पूछे।
“आह पूछिए मत, बहुत मजा आया। आप लोग सचमुच में बहुत हरामी और प्यारे जंगली कुत्ते हो। प्यारे चुदक्कड़ जंगली जानवर।” मैं बोली और उनके नंगे जिस्म से लिपट कर प्यार भरा चुम्बन दे बैठी।
वे दोनों पूर्ण संतुष्टि के भाव लिए मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।
अब तक आपने पढ़ा कि किस तरह मेरे पापा हरिया और करीम चाचा ने मिलकर अपनी हवस मिटाने के लिए दो और औरतों का शिकार किया। दोनों औरतें मजदूर रेजा थीं। उनकी कामुकता भरी कथा सुनते सुनते मैं इतनी उत्तेजित हो गई थी कि उत्तेजना के आवेग में उन हवस के पुजारियों के अंदर के जंगली जानवर को जगा बैठी, जिसके परिणामस्वरूप वे दोनों वहशी दरिंदे की तरह बड़े वहशियाना तरीके से मेरी चीख पुकार की परवाह किए बगैर मेरे जिस्म पर अपनी दरिंदगी का नमूना पेश कर डाला। बेरहमी से नोचते खसोटते रौंदते हुए मेरे शरीर को ऐसा भंभोड़ा कि मैं हाय हाय कर उठी। आश्चर्यजनक रूप से उनकी उस दरिंदगी भरी चुदाई के दौरान आरंभिक पीड़ा के पश्चात एक अलग ही प्रकार के आनंद से रूबरू हुई जिसका बयां करना मुश्किल है। करीब दो घंटे के दौरान उनकी चुदाई यात्रा कथा में पांचवीं और छठी औरत के साथ कामोत्तेजक शारीरिक संबंधों के बारे में सुनते हुए दो बार चुदी।
फिर मैंने कहा, “बस अभी का बहुत हो गया, बाकी कहानी बाद में सुनुंगी, अभी मुझे थोड़ा आराम करने दीजिए। नानाजी लोग आते होंगे। शाम को दादाजी का जन्मदिन भी मनाना है। आज मैं उन्हें सरप्राइज गिफ्ट करना चाहती हूं। उसकी तैयारी भी करनी है।” कहती हुई उसी तरह नंगी ही उठी और अपने कपड़े समेट कर अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर धम से गिर गई और करीब एक घंटे तक सोई। करीब बारह बजे नानाजी और बाकी सब लोग बाजार से वापस लौट आए। उन लोगों ने काफी सारी खरीददारी की थी।
“लो बिटिया यह तेरे लिए” कहते हुए नानाजी ने एक कैरी बैग मुझे थमा दिया। मैं ने उत्सुकता से बैग के अंदर देखा तो उसमें सुंदर लाल रंग का लहंगा चोली था।
मैं खुशी से चहक उठी, “थैंक्स नानाजी”। फिर मैंने पूछा, “बर्थडे केक का आर्डर दिया कि नहीं?”
“हां वह शाम को आ जाएगा” नानाजी ने बताया।
“बर्थडे ब्वॉय का नया कपड़ा?” मैं पूछी।
“शाम को पहनेगा तो देख लेना” नानाजी ने उत्तर दिया।
“सजावट के लिए सामान लाए कि नहीं” मैं पूछी।
“बैलूनों का एक पैकेट है” नानाजी ने बताया।
फिर हम दोपहर का भोजन करके अपने अपने कमरे में आराम करने चले गए। शाम को करीब साढ़े चार बजे मैं उठी और मेरे पापा हरिया और करीम चाचा के साथ मिलकर ड्राइंग रूम को अच्छी तरह सजा दिया। मैं ने म्यूजिक के लिए टीवी का ही इस्तेमाल करने का निश्चय किया। स्मार्ट टीवी था इसलिए पेनड्राइव में कुछ खास किस्म के गानों को लोड किया। फिर नहा धो कर सजने संवरने लगी। मेरे उरोजों का उभार पिछले पांच छः दिनों की वासना के नग्न खेल में गुत्थमगुत्थी भरी कामक्रीड़ा के दौरान दब कुचल कर थोड़ा और बढ़ गया था इसलिए ब्रा थोड़ी छोटी पड़ रही थी लेकिन किसी तरह मुश्किल से पहन ही ली। ब्रा मेरे उरोजों को बड़ी मुश्किल से संभाले हुए था। नया लहंगा चोली पहन कर अच्छी तरह मेकअप वगैरह करके अपने बालों को करीने से संवारा लेकिन बाल खुला ही रहने दिया। चोली लो कट होने के कारण मेरे सीने के उभारों का काफी नग्न हिस्सा चोली के ऊपर से स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था। दोनों उरोजों के बीच की दरार की गहराई भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। चोली ऊपर से तो लो कट थी ही, नीचे से भी काफी ऊपर थी। मेरे उभारों से बमुश्किल डेढ़ इंच नीचे तक। पीठ का हिस्सा करीब करीब पूरा ही खुला हुआ था। चोली की हालत देख कर मैं ने भी जानबूझ कर लहंगा को नाभी से काफी नीचे पहना, करीब तीन इंच नीचे। मेरे लंबे पांवों के कारण लहंगा जमीन से फिर भी काफी ऊंचा था। आईने के सामने अपने को खूब अच्छी तरह निहारा, क़यामत लग रही थी मैं। आज इन मर्दों पर बिजली गिराने का इरादा था। मैं ठान चुकी थी कि आज इनके मन से सारी ग्लानी (सरदारजी वाले एपिसोड से उपजी, खास कर दादाजी, बड़े दादाजी और नानाजी के) दूर कर दूंगी और इनके अंदर के वही पुराने आत्मविश्वास से भरे मर्दों की मर्दानगी को उभाड़ कर उनके दिल की हसरतों, अरमानों को बिल्कुल बेबाक तरीके से पूरा करने का पूरा अवसर प्रदान करूंगी। अब मैंपूरे शरीर पर खुशबूदार परफ्यूम स्प्रे करके तैयार हो गई।
करीब सात बजे मेरे कमरे के दरवाज़े पर दस्तक हुई और मेरे पापा की आवाज आई, “बिटिया नीचे ड्राइंग रूम में आ जाओ, सब आ चुके हैं।”
“ठीक है आप चलिए मैं आती हूं”, कहते हुए मैं दरवाजे की ओर बढ़ी। जब मैं कमरे से निकल कर सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी तो सबकी निगाहें मुझ पर टिक गई थीं। सब आंखें फ़ाड़ कर एक टक मुझे देखते रह गए थे। मैं उनके नज़रों की ताब न ला सकी और तनिक शरम से लाल हो उठी। मैं ने महसूस किया कि सबके कलेजे में छुरियां चल गयीं थीं।
सन्नाटा छा गया था जिसे नानाजी की आवाज़ ने भंग किया, “आओ बिटिया हम तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहे थे”।
मैं ने देखा कि नानाजी, दादाजी और बड़े दादाजी एकदम बदले रूप में चमक रहे थे। क्लीन शेव करके नये कपड़ों में खूब फब रहे थे। लंबे चौड़े दादाजी और बड़े दादाजी के बगल में ठिंगने कद के नानाजी भी बुलडोग जैसे चेहरे के बावजूद फब रहे थे। मेरे आते ही जैसे महफ़िल में जान आ गई। मैं ने अपने पापा याने हरिया और ड्राईवर करीम के बारे में पूछा कि वे कहां हैं, उन्हें भी बुला लीजिए। आज की पार्टी में घर के सभी सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक है। उनके बिना पार्टी अधूरी होगी। नानाजी ने उन लोगों को भी बुला लिया। अब हमारी महफ़िल में पांच पुरुष और मैं एकमात्र स्त्री थी। सबकी भूखी नजरें मुझ पर थीं जिन्हें मैं बखूबी समझ रही थी। मैं जान बूझ कर अपनी चाल ढाल और नजरों से उन सबके दिलों पर छुरियां चला रही थी। फिर सेन्टर टेबल पर एक बड़ा सा सजा हुआ केक रखा गया। उसपर एक ही बड़ा सा मोमबत्ती जलाया गया क्योंकि दादाजी की उम्र के अनुसार 65 मोमबत्ती जलाना संभव भी नहीं था। दादाजी ने फूंक मारकर उसे बुझा दिया और सबने उन्हें अपने अपने ढंग से जन्मदिन की बधाई दी। मैं ने भी उन्हें बधाई देते हुए सबके सामने ही उनसे लिपट कर एक गरमागरम चुम्बन दिया। सब के सब ईर्ष्या से जल भुन गये। फिर दादाजी ने केक काटा और सबको एक एक टुकड़ा दिया। मैं ने एक टुकड़ा उठा कर दादाजी को खिलाया। करीब तीन चौथाई केक बच गया तो मैंने कहा कि उसे अभी वैसा ही रहने दिया जाए। मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। फिर मैंने दादाजी को बड़े सोफे पर अकेले बैठा दिया।
उन्हें फूल गुच्छा दिया गया, उपहार दिया गया और जब मेरी बारी आई तो मैंने बड़े मादक अंदाज में कहा, “मैं आज दादाजी को खास उपहार देना चाहती हूं लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि आप सब को यह मान लेना पड़ेगा कि यहां आप सब एक ही स्तर के मर्द हैं और मैं सिर्फ एक स्त्री। आपस में कोई नौकर, ड्राईवर मालिक वाली भावना नहीं होनी चाहिए। आपलोग स्वतंत्रता पूर्वक व्यवहार कीजियेगा, इसमें न ही मुझे कोई आपत्ती होगी और न ही आपलोगों के बीच किसी प्रकार की आपत्ती और मतभेद होना चाहिए। छोटे बड़े का लिहाज बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यहां जो कुछ भी होगा, इस दौरान हम जो कुछ भी अनुभव करेंगे, अपने अपने लफ्जों में बिना लाग-लपेट के बेहिचक व्यक्त करेंगे। हम सब इस कमरे में अपने मन के अनुसार कुछ भी करने को बिल्कुल आजाद हैं, इस बात का ख्याल रखना है कि दादाजी की इच्छा का भी हमें मान रखना है।”
“ठीक है, ठीक है, ऐसा ही होगा” सब बेसब्री और उत्सुकता से एक स्वर में बोल उठे।
“ठीक है तो आपलोग अपनी अपनी जगह पर बैठ जाईए। आज हम सब खुल कर दादाजी के जन्मदिन में मज़ा करेंगे। आपलोग सिर्फ इतना याद रखियेगा कि आज के मुख्य अतिथि दादाजी हैं और दादाजी की इच्छा का सम्मान हम सब को करना है।” मैं बोली।
“ठीक है बाबा ठीक है, अब तुम्हें जो उपहार देना है जल्दी दो, ज़रा हम भी तो देखें क्या उपहार है।” नानाजी बेसब्री से बोले।
“आप लोग शराब तो अवश्य लाए होंगे?” मैं ने पूछा।
“यह भी कोई पूछने की बात है? राघव का जन्म दिन हम ऐसे ही सूखे सूखे थोड़े मनाएंगे।” नानाजी ने कहा। “तो फिर बोतल निकालिए और सबके लिए ग्लास भी” मैं बोली।
“सबके लिए मतलब? तू भी पिएगी क्या?” नानाजी बोले।
“अरे नहीं बाबा, मैं दारू नहीं पीती हूं। मेरे लिए कोल्डड्रिंक चलेगा।” मैं बोली। नानाजी ने फटाफट शराब की बोतल, पानी, सोडा और ग्लास ला कर सेंटर टेबल पर रख दिया।
“ऐसे नहीं, सबके लिए जाम तैयार कर के रखिए।” मैंने कहा। उन्होंने वैसा ही किया। मेरे लिए एक ग्लास में फैंटा ओरेंज डाला। मैं ने पेनड्राइव म्यूजिक सिस्टम में लगा कर जानी मेरा नाम का गाना,
“हुस्न के, लाखों रंग, कौन सा, रंग देखोगे, आग है, ये बदन, कौन सा अंग देखोगे।” चुना और सबकी ओर मुखातिब हो कर कहा, “अभी मैं इस गीत पर नृत्य प्रस्तुत करूंगी और नृत्य के दौरान मेरे इशारे को समझ कर उसी के अनुसार ठीक वैसा ही आप लोग भी कीजियेगा। ठीक है?”
“ठीक है ठीक है” सबने एक स्वर से कहा। मैंने म्यूजिक सिस्टम चालू कर दिया। मैं जब पेन ड्राइव लगा रही थी उसी दौरान नानाजी ने चुपके से मेरे ग्लास में शराब मिला दिया था जिसका मुझे पता ही नहीं चला और उसका नशा बाद में बहुत धीरे-धीरे मुझ पर होने लगा था। जैसे ही गाना चालू हुआ, मैं ने नृत्य शुरू किया। नृत्य करते करते दो तीन मिनट बाद मैंने हाथ पीछे ले कर चोली की रस्सी खोल दी और धीरे धीरे चोली उतारने लगी। मैं ने उन्हें इशारा किया ऐसा ही करने के लिए। वे भी फटाफट अपने कुर्ते उतारने लगे। कुछ पलों में ही मैं चोली से मुक्त हो गई और चोली दादाजी की ओर उछाल दिया। उधर वे सभी भी कुर्ते उतार कर बनियान में आ गए। मैं ने नृत्य करते करते बारी बारी से सबको जाम थमाया और मैं अपने ग्लास का कोल्डड्रिंक गटक गई, थोड़ा अजीब सा स्वाद लगा लेकिन माहौल की गर्मी और कोल्डड्रिंक की मिठास के कारण मैं ने उस पर ध्यान नहीं दिया। मैं अब कमर से ऊपर सिर्फ ब्रा में थी। कसे हुए ब्रा से बमुश्किल संभले हुए अपने उन्नत उरोजों को मादक अंदाज में हिलाते और अपनी कमर लहराते हुए दो तीन मिनट तक नृत्य करते करते मैं ने एक झटके में लहंगा नीचे गिरा दिया और उन्हें भी ऐसा करने का इशारा किया। उन्होंने फटाफट अपने पैजामे को अवांछित वस्तु की तरह अपने तन से अलविदा कर दिया और बनियान और अंडरवियर में आ गए। नानाजी नें शराब का पहला पैग खत्म होते ही दूसरा पैग बना दिया और उसी तरह मेरे ग्लास में भी शराब मिस्रित कोल्डड्रिंक भर दिया। अब तक वे काफी उत्तेजना में आ चुके थे और सबके अंडरवियर विशाल तंबुओं की शक्ल अख्तियार कर चुके थे। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में बड़े ही कामुक अदाओं के साथ कमर मटकाते हुए थिरक रही थी। मेरी पैंटी के सामने फूली हुई योनि स्पष्ट नामुदार हो रही थी। मेरे उत्तेजक नृत्य को देखते हुए भूखे भेड़ियों की तरह अपनी आंखों में वहशी जानवरों की चमक लिए हुए सब के सब फिल्म के खलनायक प्रेमनाथ की तरह अपनी जगह पर बैठे बैठे गद्देदार सोफे पर उछल रहे थे। थिरकते हुए मैं ज्यों ही दादाजी के पास पहुची, उन्होंने मुझे खींच कर अपनी गोद में बैठा लिया और मेरे उरोजों को मसल दिया और चूम लिया। “अब तू मुझे अपने हाथों से पिला” दादाजी बोले। मैं तनिक चिहुंक उठी थी क्योंकि मैं असंतुलित हो कर सीधे उनके विशालकाय तंबू की शक्ल अख्तियार किये हुए सख्त लिंग पर बैठ गई थी। ऐसा लगा मानो मेरी पैंटी और उनके अपने अंडरवियर को फाड़ कर उनका फनफनाता लिंग मेरे नितंबों की दरार में धंस गया हो। मैं गनगना उठी। फिर भी मैं ने उनकी गोद में बैठे बैठे अपने हाथों से दादाजी को दूसरा पैग पिलाया आखिर वे आज के बर्थडे ब्वॉय जो ठहरे। दूसरा पैग पिलाने के बाद उठ गई और फिर से नृत्य करते हुए अपनी कसी हुई ब्रा का हुक खोल दिया और एक झटके से अपने उरोजों को ब्रा से मुक्त कर दिया। मेरी नग्न कबूतरियां फड़फड़ा कर उनके सामने तन कर खड़ी हो गयीं। इस बार मेरे इशारे का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं थी, उन्होंंने आनन फानन में अपने अपने बनियान उतार फेंके। उधर सबने दूसरा पैग भी खत्म किया और मैं कोल्डड्रिंक का दूसरा ग्लास भी गटक गई। ड्राइंगरुम के अंदर वासना की गर्मी और उत्तेजना अपने चरम पर थी। बहुत ही अश्लील माहौल बन चुका था। बड़ी मुश्किल से उन्होंने अपने को नियंत्रित कर रखा था। उनके अंडरवियर फट पड़ने के कागार पर थे। अब मैं ने थिरकते हुए पैंटी के ऊपर से ही अपनी उंगली योनि के ऊपर फिराने लगी। वे लोग भी अंडरवियर के ऊपर से ही अपने अपने लिंग सहलाने लगे। मैं एक उंगली से पैंटी को नीचे सरकाने लगी।
“और थोड़ा नीचे, और नीचे” सब एक स्वर में बोल उठे। धीरे धीरे पैंटी से मेरी योनि की दरार दिखने लगी। उनके मुख से सिसकारियां निकलने लगी। फिर मैंने पूरी की पूरी पैंटी एक झटके में निकाल फेंका और मादरजात नंगी हो गई, फिर क्या था वे भी लगभग मेरे ही साथ, या फिर मुझसे भी पहले, पूरे नंगे हो गये, मुझ पर टूट कर भंभोड़ डालने को बेताब। शराब का नशा धीरे धीरे सभी पर चढ़ रहा था और मुझ पर भी कोल्डड्रिंक में मिले शराब ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। मेरे कहने की आवश्यकता नहीं थी, नानाजी ने तीसरा पैग बना कर सबको दिया और सभी ने एक ही सांस में तीसरा पैग भी अपने हलक में उतार दिया। इधर पहला गीत खत्म हुआ और भोजपुरी में दूसरा गीत चालू हुआ, “हाय बेदर्दी बलमा जरा धीरे धीरे”।
इससे पहले कि वे मेरी ओर बढ़ते, मैं ने उनको रोका और कहा, “अभी थोड़ा सब्र कीजिए, एक खेल बाकी है।” कहते हुए मैं ने केक का एक टुकड़ा लिया और दादाजी के मूसलाकार लिंग पर पोत दिया। फिर मैं झुक कर अपने जीभ से उनके लिंग को ऊपर से नीचे तक चाट चाट कर साफ़ करने लगी।
मेरे इस उत्तेजक हरकत से दादाजी के मुंह से कामुक आहें निकलने लगी थी। “आह बिटिया।”
मैं ने टोका, ” बिटिया नहीं, कामिनी बोलिए, रंडी बोलिए, कुतिया बोलिए, मगर बिटिया मत बोलिए”।
” हां रे बुर चोदी कुत्ती चाट मेरा लौड़ा, चूस हरामजादी” अब दादाजी जोश में आ गए थे। इसी बीच बाकी लोगों ने बचा खुचा केक मेरे पूरे नंगे बदन पर मल दिया था और मेरे नंगे तन को कुत्तों की तरह चाटने लगे।
जैसे ही मैंने दादाजी का लिंग चाट कर साफ़ किया, दादा जी बोल उठे, “चल अब हम सब इसे एक साथ चोदेंगे।”
“एक साथ? नहीं बाबा नहीं, एक साथ नहीं, मर जाऊंगी, प्लीज।” मैं ने घबराने का नाटक किया और उनसे छूट कर भागने लगी।
“पकड़ साली हरामजादी कुतिया को, आज इसको सब मिलकर कुत्ती बना देंगे” दादाजी बेहद वहशियाना ढंग से बोले।
सब मेरे पीछे भागे, “भाग कर जाएगी कहां साली बुर चोदी,” नानाजी बोले। अंततः मैं जानबूझ कर गिर पड़ी और सबने मिलकर मुझे दबोच लिया। सबने मिलकर मुझे उठाया और सेंटर टेबल पर लिटा दिया।
“नहीं नहीं सब एक साथ नहीं” मैं चिल्लाने लगी मगर अब शुरू हुआ काफी देर से कामोत्तेजना की अग्नि में धधकते नंग धडंग भूखे, शराब के नशे के सुरूर में डूबे, कामुक वहशी जानवरों का कामुकता पूर्ण बेहद वहशियाना खेल। उनको दादाजी की तरफ से हरी झंडी मिल गई, एक साथ मुझ पर टूट पड़े। एक एक उरोजों को नानाजी और बड़े दादाजी आपस में बांट कर बेरहमी से मसलने और चूसने लगे। दादाजी मेरी फूली हुई योनि पर टूट पड़े और पागलों की तरह चाटने और चूसने लगे।
मेरे पापा मेरे मुंह के पास अपना टनटनाया लिंग लाए और बोले, “ले चूस मेरा लौड़ा साली चूतमरानी रंडी”। करीम चाचा मेरे नितंबों को फैला कर गुदा मार्ग में जीभ डाल कर चाटने लगे। मुझमें भी अब तक नशे का असर हो चुका था और मैं पागलों की तरह उनकी कामुकता की पराकाष्ठा को पार करते हुए वासना के इस बेहद घिनौने कृत्य में संलिप्त सिसकारियां भरने लगी थी। पांच मिनट में ही मैं उत्तेजना के चरमोत्कर्ष में पहुंच कर अभूतपूर्व स्खलन में डूब गई। मेरे शरीर की थरथराहट को सबने महसूस किया मगर वे अपने हवस और नशे में डूबे मुझे भंभोड़ने में लगे रहे। उनके सम्मिलित कामकेली से मेरी काम पिपाशा पुनः जागृत हो गई और मैं संभोग के लिए छटपटाने लगी। दादाजी ने तुरंत मुझे उठा कर फर्श के कालीन पर लिटा दिया और मेरे पैरों को फैला कर मेरी योनि में अपना लिंग अड़ाया और एक भीषण प्रहार से पूरा का पूरा लिंग एक ही बार में मेरी योनि में ठोंक दिया।
“ले बुर चोदी हमारा लौड़ा तेरी बुर में” इतनी बेरहमी से उन्होंने प्रहार किया था कि मेरी घुटी घुटी आह निकल पड़ी। उन्होंने मुझे कस के पकड़ा था और मुझे लिए दिए एक करवट हो गये।
पीछे से पहले से तैयार करीम चाचा ने मेरे नितंबों को फैला कर गुदा द्वार में अपना भीमकाय लिंग का सुपाड़ा टिका कर एक ही जोर के झटके से सटाक से पूरा नौ इंच लम्बा लिंग मेरी गुदा में भोंक दिया। “ले साली कुतिया मेरा लौड़ा अपनी गांड़ में”।
नशे में होने के बावजूद भीषण प्रहार से मैं तीव्र पीड़ा के मारे चीख पड़ी, “हाय मादरचोद, साले कुत्ते, गांड़ फाड़ दिया रे्रे्रे्रे्रेए्ए्ए्ए आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह”।
मगर मेरी चीख पुकार की किसे पड़ी थी, सब के सब जंगली जानवर बन चुके थे। मुझे उसी हालत में लिए हुए दादाजी सोफे पर बैठ गए। सामने मेरी योनि में दादाजी का लिंग घुसा हुआ था, पीछे मेरी गुदा में करीम चाचा का विशाल लिंग धंसा हुआ था, सोफे के पीछे से मेरे पापा अपना खौफनाक लिंग मेरे मुंह में डाल चुके थे और मेरे एक हाथ में नानाजी का लिंग, दूसरे हाथ में बड़े दादाजी का लिंग था। मैं पूरी तरह उन वासना के भूखे भेड़ियों के चंगुल में फंसी अपने तन को पिसते देखने और किसी हलाल होते हुए मेमने की तरह विवशता में पीड़ा और आनंद मिस्रित स्थिति में खुद को उनके रहमो करम पर छोड़ दिया। अब मैं पांच नशे और उत्तेजना में मदहोश, विभिन्न रंग रूप और शरीर के साथ, हवस के भूखे जंगली जानवरों सरीखे मर्दों से पिसती, उनके विकृत सामुहिक संभोग में लिप्त हो गई। उनके विभिन्न आकार, लंबाई और मोटाई के लिंग, मेरे तन के हर उपलब्ध छिद्रों में या मेरे हाथों की मुट्ठियों में थे और वे अपनी अपनी कामक्षुधा तृप्त करने के लिए जी जान से मुझ पर पागलों की तरह पिल पड़े थे।
करीम चाचा अपने विशाल लिंग को मेरी गुदा में अंधाधुंध ठोंकते हुए मेरे उरोजों को बेहद वहशियाना तरीके से दबा रहे थे और बोल रहे थे, “गांड़ मरानी कुतिया, आज तेरी गांड़ का भुर्ता कर दूंगा, साली रंडी, ओह तेरी गांड़ का गूदा निकाल दूंगा आह छिनाल”,
इधर दादा जी मेरी कमर को सख्ती से पकड़े हुए मेरी योनि में अपने लिंग को दनादन पेलते हुए बोल रहे थे, “हां मेरी बुर चोदी चूत मरानी कुत्ती, साली हरामजादी, रंडी की औलाद, कुतिया की बेटी, छिनाल चूत मरानी, आज तेरी बुर का ऐसा भोंसड़ा बनाऊंगा कि तेरी मां याद आ जाएगी, आह ओह चूत की चटनी बना दूंगा”।
मेरी हालत की किसे परवाह थी, मैं ने तो खुद उन्हें खुला निमंत्रण दे कर उनके अंदर के जंगली जानवरों को जगाया था।
मेरे पापा मेरे मुंह में अपने लंबे और टेढ़े लिंग से मेरे साथ मुखमैथुन करते हुए बड़बड़ कर रहे थे, “चूस हरामजादी मेरा लौड़ा, खा कुतिया मेरा लंड, आह ओह मां की लौड़ी”।
मैं उनकी अश्लील बातों और कामुक हरकतों से उत्तेजित नानाजी और बड़े दादाजी के फुंफकारते लिंगों को अपनी मुट्ठियों पकड़े उन्हें हस्तमैथुन का सुख प्रदान कर रही थी और वे भी अश्लील गालियों के साथ हस्तमैथुन का मज़ा ले रहे थे। “साली मूठमारनी रंडी, मूठ मार कुतिया की औलाद, रंडी की चूत” बड़े दादाजी दहाड़े।
वे सब अपने अपने ढंग से मेरे तन से अपनी वासना की आग शांत करने में लिप्त हो गये। पन्द्रह बीस मिनट बाद सर्वप्रथम दादाजी ने मेरी कमर को सख्ती से पकड़ कर अपने से चिपका लिया और अपना वीर्य मेरी कोख में छर्र छर्र भरने लगे। ज्यों ही वे स्खलित हो निवृत्त हुए और हटे, उनका स्थान मेरे पापा ने लिया और धकाधक चोदने में मशगूल हो गए। करीब पांच मिनट बाद वे भी अपने वीर्य को मेरी कोख में भरने लगे, “आ्आ्आ्आ्ह बुर चोदी”।
अब मेरा मुंह स्वतंत्र था, मैं भी अपशब्दों की बौछार कर बैठी, “आह मादरचोद, कुत्ते साले हरामी, सूअर की औलाद, रंडी बना दे, अपने बच्चों की मां बना दे कुतिया बना दे हरामी आह मैं गई” कहते हुए मैं भी खल्लास हो गई। मगर जैसे ही मेरे पापा खल्लास हो कर हटे बड़े दादाजी ने मेरी चूत में धावा बोला और धकाधक चोदने लगे।
करीब दो मिनट में ही वे भी मेरी चूत में वीर्य उंडेलने लगे, “आ्आ्आ्आ्आह बुर चोदी आज तुझे हम सब मिलकर पेट से कर्र्र्र्र्र् देंगे आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह्।”
मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी मगर अब मेरे नानाजी और करीम चाचा का लंड अपनी चूत में लेना बाकी था। मैं चाहती थी कि आज सबके सब मेरी चूत में ही वीर्य डालें। आठ दस दिन पहले मेरी माहवारी बंद हुई थी और मुझे लग रहा था कि इस समय संभोग से मुझे गर्भ ठहर सकता है किंतु मुझे इसकी रंच मात्र भी परवाह नहीं थी। इस वक्त तो मैं उन बूढ़ों के सामुहिक चुदाई के अपार आनंद में डूब गयी थी। मैं ने करीम चाचा को मेरी चूत परोस दी। मैं जानती थी कि नानाजी का लौड़ा मेरी चूत में फंस जाएगा अतः सबसे अंत में मैं उनको मौका देना चाहती थी। करीम चाचा ने आव देखा न ताव झट से अपने गधे जैसे लंड को एक ही बार में मेरी चुदी चुदाई बुर में उतार दिया और लगे भकाभक चोदने। “आ्आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह मेरी घुटी चीख निकल पड़ी।
“साली बुर चोदी कुतिया तीन तीन लोगों से चुदवा ली है और अभी मेरे लौड़े से चुदने में तेरी चूत फट रही है रंडी कहीं की, देख मैं तुझे कैसे चोदता हूं,” कहते कहते करीब दस मिनट और भयानक ढंग से पटक पटक कर चोदा और फ़िर अपना वीर्य मेरी कोख में भर कर निढाल हो गया। अब बारी आई नानाजी की। उस बुलडोग बूढ़े ने मुझे कुतिया की तरह झुका कर पीछे से कुत्ते की तरह मेरी चूत में अपना लौड़ा ठोंक दिया और लगे दनादन चोदने।
“हरामजादी बहुत इंतजार कराया, मां की लौड़ी कुतिया।” नानाजी बोले।
“हाय मेरे बूढ़े बलमा। आप ही तो एक कुत्ते हो जिसकी मैं कुतिया हूं। मुझे अपनी कुतिया बना के चोद मेरे कुत्ते रज्ज्ज्ज्जा, मुझे अपने पिल्लों की मां बना दे मादरचोद आ्आ्आ।” मैं बोली।
“हां रे मेरी कुत्ती, अभी मैं तुझे गर्भवती करता हूं साली चुदक्कड़ रंडी, तुझे मेरे कुत्तों की मां बना दूंगा बुर चोदी, आह आह ओह ओह ओह ओह ओ्ओ्ओ्ओह,” बोलते हुए करीब दस मिनट चोदते रहे और फिर अपना वीर्य मेरी कोख में फचफचा कर भरने लगे और इसी समय “आह रज्ज्ज्ज्आ्आ्आह्ह्ह् मैं गई रे मादरचोद” मैं भी चुदाई की मस्ती के चरमोत्कर्ष में तीसरी बार छरछरा कर झड़ने लगी। तभी “आ्आ्आ्आह” दर्दनाक चीख निकल पड़ी जब मैं ने अपनी चूत के अंदर विशाल गेंद की शक्ल अख्तियार कर चुके नानाजी के लंड से फंस गई। मैं ने छूटने की हल्की सी कोशिश की लेकिन उनका लंड गांठ इतना बड़ा हो चुका था कि मेरी चूत फटने फटने को होने लगी। मैं पीड़ा के मारे स्थिर हो गई और अपने को उसी हालत में छोड़ दिया।
“साले कमीने कुत्ते आखिर मुझे अपनी कुतिया बना ही लिया, बेटी चोद, आह ओ्ह्ह्ह्ह” मैं कुतिया की तरह उनके लौड़े से फंसी बड़ बड़ करती रही। करीब बीस मिनट तक हम कुत्ते कुतिया की तरह आपस में जुड़े रहे उसके बाद उनका लंड सामान्य हुआ और “फच्चाक” की आवाज से मेरी चूत से बाहर निकल आया। हमारी चुदाई को सभी बड़े ही आश्चर्य, अविश्वास और कौतूहल से देख देख मजा लेते रहे। यह कार्यक्रम करीब दो घंटे तक चलता रहा था। सभी मर्दों ने जी भर के मनमाने ढंग से मुझे चोदा और अपने अंदर की ग्लानी से मुक्त हो कर मानो हवा में उड़ने लगे थे। सभी खुश थे और मैं भी बेहद खुश थी कि इन पांच वहशी दरिंदों की दरिंदगी भरी कामक्रीड़ा में शामिल हो कर उनकी सामुहिक भोग्या बन कर अकेले दम पर उनकी काम पिपाशा शांत कर सकी। मुझे अपनी क्षमता पर नाज़ हो रहा था, यह और बात है कि इस तरह मैं बड़ी ही बेशरम, नीच, छिनाल बनती जा रही थी। हम सभी थके मांदे पूरी तरह संतुष्ट निढाल नंग धड़ंग अवस्था में फर्श पर बिछे कालीन पर पड़े हुए थे।
मेरी चूचियों और सीने पर नानाजी और बड़े दादाजी के दांतों के लाल लाल निशान पड़ गये थे। करीम चाचा ने इस बेदर्दी से मेरी चूचियों को मसला था कि अभी भी दर्द कर रहा था जो कि चुदाई की मस्ती में मुझे महसूस नहीं हुआ था। मेरी चूत तो फूल कर किसी चुदी हुई कुतिया की तरह बाहर की ओर उभर आई थी। मेरी गांड़ का तो करीम चाचा ने सच में भुर्ता बना दिया था।
अचानक नानाजी, दादाजी से बोले, “अरे रघु, तूने चोदते समय कामिनी को रंडी की औलाद, कुतिया की औलाद क्यों कहा था?”
“यह सच है। इसकी मां सही में छिनाल ही थी। चाहे अनचाहे वह रंडी बनी। मेरा बेटा बच्चा पैदा करने के काबिल नहीं है यह बात मैं जान गया था, उस डॉक्टर से जिसने उसकी जांच की थी। उसका वीर्य बहुत पतला था। उसके वीर्य में शुक्राणु नहीं के बराबर थे या बहुत कमजोर थे जो लाइलाज था। फिर भी मेरी बहु गर्भवती हुई। मैं चकित था और एक दिन मैं ने अकेले में उससे पूछ ही लिया, “बहु सच बताओ, किसका बच्चा तेरे पेट में पल रहा है?” वह सन्न रह गई।
मैं बोला, “देखो मुझे पता है कि मेरा बेटा बाप नहीं बन सकता है। तूने किसके साथ मुंह काला किया है? मुझे सच बताओ तो मैं कुछ नहीं बोलुंगा, क्योंकि यह हमारे परिवार की इज्जत का सवाल है। तू गर्भवती है, सभी खुश हैं, हमारे खानदान का चिराग आने वाला है इस ख्याल से मैं भी खुश हूं। अब बता कौन है वह आदमी?” डरते डरते और रोते रोते उसने हरिया का नाम लिया। मैं ने उसे कहा कि यह बात और किसी को पता नहीं चलना चाहिए। फिर उसने इस लौंडिया को जन्म दिया। हम थोड़े निराश हुए लेकिन एक संतान होने की खुशी परिवार में थी। मुझे इस बात की तसल्ली थी कि मेरी बहु मां बन सकती है।
मैं ने कामिनी के पैदा होने के एक साल बाद बहु से कहा, “अब हमें खानदान चलाने के लिए एक बेटे की जरूरत है। मैं नहीं चाहता कि तुम फिर से बाहर के किसी मर्द के बच्चे को जन्म दो, जब घर में ही मेरे जैसा मर्द उपलब्ध है तो क्यों नहीं मुझसे ही संभोग करके गर्भधारण करती हो?”
मेरे इस प्रस्ताव से वह हत्प्रभ रह गई फिर बोली, “हाय राम, ससुरजी आप के साथ?”
“हां मेरे साथ। क्यों, मुझमें क्या खराबी है? चुपचाप मेरी बात मान लो वरना ठीक नहीं होगा।” मैं बोला। असल में जब से मुझे पता चला कि बहु लक्ष्मी बाहर के मर्द से चुद चुकी है, मैं उसे अलग ही नजर से देखने लगा था। उसके मस्त जवान नंगे बदन को अपनी बाहों में भर कर चोदने का ख्याल बार बार मेरे दिमाग में घूमता रहता था। मैं ने इसी बहाने से उसे मजबूर किया और चोदा।
यह सब मेरे इस चचेरे बड़े भाई केशव को एक दिन पता चला तो मुझसे बोला, “साले मादरचोद, अकेले अकेले इतने मस्त माल में हाथ साफ कर रहे हो? मुझे भूल गए हरामी? मैं भी बहु को चोदुंगा।” मैं क्या करता। राजी हो गया और बहु को केशव से भी चुदने के लिए मजबूर किया। फिर ठीक नौ महीने बाद इसका भाई पैदा हुआ। इस तरह मैं कुछ हद तक अपनी बहु लक्ष्मी को रंडी बना दिया।”
“ओह दादाजी आप तो बहुत बड़े हरामी निकले। मेरी मां को भी रंडी बना दिया।” मैं बोली।
नानाजी भी बेसाख्ता बोल उठे, “साले मादरचोद मेरी बेटी को इस हरामी हरिया के साथ साथ तुम दोनों भी चोद लिए? बड़े कमीने हो साले हरामियों।”
अगले भाग में आप विस्तार से जानेंगे कि किस तरह से मेरे दादाजी और बड़े दादाजी का मेरी मां के साथ अनैतिक संबंध स्थापित हुआ।
