नौकरानी के घर का दूध 2

नौकर नौकरानी

मैने जल्दी जल्दी अपना लंड तेल से चिकना किया
और फिर उसकी गांद मे तेल लगाने लगा. एकदम सांकरा और छोटा छेद था, वो सच
बोल रही थी की अब तक उसकी गांद मे कभी किसी ने लंड नही डाला था. मैने
पहले एक और फिर दो उंगली डाल दी. वो दर्द से सिसक उठी. “धीरे बाबूजी,
दुख़्ता है ना, दया करो थोड़ी अपनी इस नौकरानी पर, हौले हौले उंगली करो”
मैं तैश मे था. सीधा उसकी गांद का छेद दो उंगलियों से खोल कर बोतल लगाई
और चार पाँच चम्मच तेल अंदर भर दिया. फिर दो उंगली अंदर बाहर करने लगा
“चुप रहो बाई, चूत चुस्वा कर मज़ा किया ना, अब जब मैं लंड से गांद
फाड़ुँगा तो देखना कितना मज़ा आता है. तेरी चूत के रस ने मेरे लंड को
मस्त किया है, अब उसकी मस्ती तेरी गांद से ही उतरेगी”. मंजू सिसकते हुए
बोली पर उसकी आवाज़ मे प्यार और समर्पण उमड़ पड़ रहा था “बाबूजी, गांद
मार लो, मैने तो खुद आपको ये चढ़ावे मे दे दी है, आपने मुझे इतना सुख
दिया है मेरी चूत चूस कर, ये अब आपकी है, जैसे चाहो मज़ा कर लो, बस ज़रा
धीरे मारो मेरे राजा” अब तक मेरा लंड भी पूरा फनफना गया था. उठ कर मैं
मंजू की कमर के दोनो ओर घुटने टेक कर बैठा और गुदा पर सुपाड़ा जमा कर
अंदर पेल दिया. उसके संकरे छेद मे जाने मे तकलीफ़ हो रही थी इसीलिए मैने
हाथों से पकड़ कर उसके छ्छूतड़ फैलाए और फिर कस कर सुपाड़ा अंदर डाल
दिया. पक्क से वह अंदर गया और मंजू दबी आवाज़ मे “उई माँ, मर गयी रे” चीख
कर थरथराने लगी. पर बेचारी ऐसा नही बोली की बाबूजी गांद नही मराववँगी.
मुझे रोकने की भी उसने कोई कोशिश नही की. मैं रुक गया. ऐसा लग रहा था
जैसे सुपादे को किसी ने कस के मुठ्ठी मे पकड़ा हो. थोड़ी देर बाद मैने
फिर पेलना शुरू किया. इंच इंच कर के लंड मंजू बाई की गांद मे धंसता गया.
जब बहुत दुख़्ता तो बेचारी सिसक कर हल्के से चीख देती और मैं रुक जाता.
आख़िर जब जड़ तक लंड अंदर गया तो मैने उसके कूल्हे पकड़ लिए और लंड धीरे
धीरे अंदर बाहर करने लगा. उसकी गांद का छल्ला मेरे लंड की जड़ को कस कर
पकड़ा था, जैसे किसीने अंगूठी पहना दी हो. उसके कूल्हे पकड़ कर मैने उसकी
गांद मारना शुरू कर दी. पहले धीरे धीरे मारी. गांद मे इतना तेल था कि लंड
मस्त फॅक फॅक करता हुआ सतक रहा था. वह अब लगातार कराह रही थी. जब उसका
सिसकना थोड़ा कम हुआ तो मैने उसके बदन को बाहों मे भींच लिया और उस पर
लेट कर उसके मम्मे पकड़ कर दबाते हुए कस के उसकी गांद मारने लगा. मैने उस
रात बिना किसी रहम के मंजू की गांद मारी, ऐसे मारी जैसे रंडी को पैसे
देकर रात भर को खरीदा हो और फिर उसे कूट कर पैसा वसूल कर रहा हूँ. मैं
इतना उत्तेजित था कि अगर वह रोकने की कोशिश करती तो उसका मुँह बंद करके
ज़बरदस्ती उसकी मारता. उसकी चूंचियाँ भी मैं बेरहमी से मसल रहा था, जैसे
आम का रस निकालने को पिलपिला करते है. पर वह बेचारी सब सह रही थी. आख़िर
मे तो मैने ऐसे धक्के लगाए की वह दर्द से बिलबिलाने लगी. मैं झाड़ कर
उसके बदन पर लस्त सो गया. क्या मज़ा आया था. ऐसा लगता था की अभी अभी किसी
का बलात्कार किया हो. जब लंड उसकी गांद से निकाल कर उसे पलटा तो बेचारी
की आँखों मे दर्द से आँसू आ गये थे, बहुत दुखा था उसे पर वह बोली कुच्छ
नही क्योंकि उसीने खुद मुझे उसकी गांद मारने की इजाज़त दी थी. उसका
चुम्मा लेकर मैं बाजू मे हुआ तो वह उठकर बाथरूम चली गयी. उससे चला भी नही
जा रहा था, पैर फैला कर लंगड़ा कर चल रही थी. जब वापस आई तो मैने उसे
बाँहों मे ले लिया. मुझसे लिपटे हुए बोली “बाबूजी, मज़ा आया? मेरी गांद
कैसी थी?” मैने उस चूम कर कहा “मंजू बाई, तेरी कोरी कोरी गांद तो लाजवाब
है, आज तक कैसे बच गयी? वो भी तेरे जैसी चुदैल औरत की गांद ! लगता है
मेरे ही नसीब मे थी” वो मज़ाक करते हुए बोली “मैने बचा के रखी बाबूजी आप
के लिए. मुझे मालूम था आप आओगे. अब आप कभी भी मेरी गांद मारो, मैं मना
नही करूँगी. मेरी चूत मे मुँह लगाकर आपने तो मुझे अपना गुलाम बना लिया.
बस ऐसे ही मेरी चूत चूसा करो मेरे राजा बाबू, फिर चाहे जितनी बार मारो
मेरी गांद, पर बहुत दुख़्ता है बाबूजी, आपका लंड है कि मूसल और आप ने आज
गांद की धज्जियाँ उड़ा दी, बहुत बेदर्दी से मारी है मेरी गांद! पर तुमको
सौ खून मांफ है मेरे राजा, आख़िर मेरे सैयाँ हो और मेरे सैयाँ को मेरे ये
छ्छूतड़ इतने भा गये, इसकी भी बड़ी खुशी है मुझे” उसकी इस अदा पर मैने उस
रात फिर उसकी बुर चूसी और फिर उसे मन भर के चोदा. इसके बाद मैं उसकी गांद
हफ्ते मे दो बार मारने लगा, उससे ज़्यादा नही, बेचारी को बहुत दुख़्ता
था. मैं भी मार मार कर उसकी कोरी टाइट गांद ढीली नही करना चाहता था. उसका
दर्द कम करने को गांद मे लंड घुसेड़ने के बाद मैं उसे गोद मे बिठा लेता
और उसकी बुर को उंगली से चोद्कर उसे मज़ा देता, दो तीन बार उसे झड़ाकार
फिर उसकी मारता. गांद मारने के बाद खूब उसकी बुर चूस्ता,

उसे मज़ा देने
को और उसका दर्द कम करने को. वैसे उसकी चूत के पानी का चस्का मुझे ऐसा
लगा, की जब मौका मिले, मैं उसकी चूत चूसने लगता. एक दो बार तो जब वह खाना
बना रही थी, या टेबल पर बैठ कर सब्जी काट रही थी, मैने उसकी साड़ी उठाकर
उसकी बुर चूस ली. उसको हर तरह से चोदने और चूसने की मुझे अब ऐसी आदत लग
गयी थी की मैं सोचता था की मंजू नही होती तो मैं क्या करता. यही सब सोचते
मैं पड़ा था. मंजू ने अपने मम्मों पर हुए ज़ख़्मों पर तेल लगाते हुए मुझे
फिर उलहना दिया “क्यों चबाते हो मेरी चून्चि बाबूजी ऐसे बेरहमी से. पिछले
दो तीन दिन से ज़्यादा ही काटने लगे हो मुझे” मैने उसकी बुर को सहलाते
हुए कहा “बाई, अब तुम मुझे इतनी अच्छि लगती हो कि तेरे बदन का सारा रस
मैं पीना चाहता हूँ. तेरी चूत का अमरित तो बस तीन चार चम्मच निकलता है,
मेरा पेट नही भरता. तेरी चूंचियाँ इतनी सुंदर है, लगता है इनमे दूध होता
तो पेट भर पी लेता. अब दूध नही निकलता तो जोश मे काटने का मन होता है” वह
हंसते हुए बोली “अब इस उमर मे कहाँ मुझे दूध छूतेगा बाबूजी. दूध छ्छूटता
है नौजवान छ्हॉकरियों को जो अभी अभी माँ बनी है.” फिर वह चुप हो गयी और
कपड़े पहनने लगी. कुच्छ सोच रही थी. अचानक मुझसे पुच्छ बैठी “बाबूजी, आप
को सच मे औरत का दूध पीना है या ऐसे ही मुफ़्त बतिया रहे हो” मैने उसे
भरोसा दिलाया की अगर उसके जैसे रसीली मतवाली औरत हो तो ज़रूर उसका दूध
पीने मे मुझे मज़ा आएगा. “कोई इंतज़ाम करती हूँ बाबूजी. पर मुझे खुश रखा
करो. और मेरी चूंचियों को दाँत से काटना बंद कर दो” उसने हुकुम दिया. उसे
खुश रखने को अब मैने रोज उसकी बुर पूजा शुरू कर दी. जब मौका मिलता, उसकी
चूत चाटने मे लग जाता. मैने एक वी सी आर भी खरीद लिया और उसे कुच्छ ब्लू
फिल्म दिखाई. टेप लगाकर मैं उसे सोफे मे बिठा देता और खुद उसकी साड़ी
उपेर कर के उसकी बुर चूसने मे लग जाता. एक घंटे की कैसेट ख़तम होते होते
वह मस्ती से पागल होने को आ जाती. मेरा सिर पकड़कर अपनी चूत पर दबा कर
मेरे सिर को जांघों मे पकड़कर वह फिल्म देखते हुए ऐसी झड़ती की एकाध घंटे
किसी काम की नही रहती. रात को कभी कभी मैं उसे अपने मुँह पर बिठा लेता.
उच्छल उच्छल कर वो ऐसे मेरे मुँह और जीभ को चोद्ति की जैसे घोड़े की
सवारी कर रही हो. कभी मैं उससे सिक्स्टी नाइन कर लेता और उसकी बुर चूस कर
अपने लंड की मलाई उसे खिलाता. मंजू बाई मुझ पर बेहद खुश थी और मैं राह
देख रहा था कि कब वह मुझ पर मेहरबान होती है. एक इतवार को वह सुबह ही
गायब हो गयी. सुबह से दोपहर हो गयी. फिर दोपहर से शाम फिर शाम से रात पेर
मंजू बाई का कुच्छ अता पता नही था की वो कहाँ गयी है ओर क्यों गयी है.
मैं लेटा लेटा उसकी इंतज़ार करता करता सो गया. रात की नींद के बाद मैं जब
सुबह उठा तो मंजू वापस आ गयी थी. चाय लेकर खड़ी थी. मैने उसकी कमर मे हाथ
डाल कर पास खींचा और ज़ोर से चूम लिया. “क्यों मंजू बाई, कल से कहाँ गायब
थी. मुझे कल सुबह से चम्मच भर शहद भी नही मिला. कहाँ गायब हो गयी थी?” वह
मुझसे छूट कर मुझे आँख मारते हुए धीरे से बोली, “आप ही के काम से गयी थी
बाबूजी. ज़रा देखो, क्या माल लाई हूँ तुम्हारे लिए!” मैने देखा तो दरवाजे
मे एक जवान लड़की खड़ी थी. थोड़ी शर्मा ज़रूर रही थी पर तक लगाकर मेरी और
मंजू के बीच की चुम्मा चॅटी देख रही थी. मैने मंजू को छ्चोड़ा और उससे
पुछा कि ये कौन है. वैसे मंजू और उस लड़की की सूरत इतनी मिलती थी की मैं
समझ गया कि ये “कन्या” कौन है. मंजू ने भी पुष्टि की “बाबूजी, ये गीता
है, मेरी बेटी. बीस साल की है, दो साल पहले शादी की है इसकी. अब एक बच्चा
भी है” मैं गीता को बड़े इंटेरेस्ट से घूर रहा था. मंजू बाई उसे क्यों
लाई थी यह भी मुझे थोड़ा थोड़ा समझ मे आ रहा था. गीता मंजू जैसी ही
साँवली थी पर उससे ज़्यादा खूबसूरत थी. शायद उसकी जवानी की वजह से ऐसी लग
रही थी. मंजू से थोड़ी नाटी थी और उसका बदन भी मंजू से ज़्यादा भरा पूरा
था. एकदम मांसल और गोल मटोल, शायद माँ बनने की वजह से होगा.

उस लड़की का कोई अंग एकदम मन मे भरता था तो वह
था उसकी विशाल छाती. उसका आँचल ढला हुआ था; शायद उसने जान बूझकर भी
गिराया हो. उसकी चोली इतनी तंग थी कि छातियाँ उसमे से बाहर आने को कर रही
थी. चोली के पतले कपड़े मे से उसके नारियल जैसे मम्मे और उनके सिरे पर
जामुन जैसे निप्पालों का आकार दिख रहा था. निप्पालों पर उसकी चोली थोड़ी
गीली भी थी. मेरा लंड खड़ा होने लगा. मुझे थोड़ा अटपटा लगा पर मैं क्या
करता, उस छ्छोकरी की मस्त जवानी थी ही ऐसी. मंजू आगे बोली. “उसे मैने सब
बता दिया है बाबूजी, इसीलिए आराम से रहो, कुच्छ च्छुपाने की ज़रूरत नही
है” मेरा लंड अब तक तन्ना कर पूरा खड़ा हो गया था. मंजू हँसने लगी “मेरी
बिटिया भा गयी बाबूजी आपको. कहो तो इसे भी यहीं रख लूँ. आप की सेवा
करेगी. हां इसकी तनखुवा अलग होगी” उस मतवाली छ्हॉकरी के लिए मैं कुच्छ भी
करने को तैयार था. “बिल्कुल रख लो बाई, और तनखुवा की चिंता मत करो” “असल
बात तो आप समझे ही नही बाबूजी, गीता पिच्छले साल ही माँ बनी है. बहुत दूध
आता है उसको, बड़ी तकलीफ़ भी होती है बेचारी को. बच्चा एक साल को हो गया,
अब दूध नही पिता, पर इसका दूध बंद नही होता. चून्चि सूज कर दुखने लगती
है. जब आप मेरा दूध पीने की बात बोले तो मुझे ख़याल आया, क्यों ना गीता
को गाँव से बुला लाउ, उसकी भी तकलीफ़ दूर हो जाएगी और आपके मन की बात भी
हो जाएगी? बोलो, जमता है ना बाबूजी?” मैने गीता की चून्चि घुरते हुए कहा
“पर इसका मर्द और बच्चा?” “उसकी फिकर आप मत करो, इसका आदमी काम से च्छेः
महीने को शहर गया है, इसीलिए मैने इसे मायके बुला लिया. इसकी सास अपने
पोते के बिना नही रह सकती, बहुत लगाव है, इसीलिए उसे वहीं छ्चोड़ दिया
है, ये अकेली है इधर” याने मेरी लाइन एकदम क्लियर थी. मैं गीता का जोबन
देखने लगा. लगता था कि पकड़ कर खा जाउ, चढ़ कर मसल डालूं उसके मतवाले रूप
को. गीता भी मस्त हो गयी थी, मेरे खड़े लंड को देख कर. लंड देखते हुए
धीरे धीरे खड़े खड़े अपनी जांघें रगड़ रही थी. “सिर्फ़ दूध पीने की बात
हुई है बाबूजी, ये सम्झ लो.” मंजू ने मुझे उलाहना दिया. फिर गीता को मीठी
फटकार लगाई “और सुन री छिनाल लड़की. मेरी इजाज़त के बिना इस लंड को हाथ
भी नही लगाना, ये सिर्फ़ तेरी अम्मा का है” “अम्मा , ये क्या? मेरे को भी
मज़ा करने दे ना & कितना मतवाला लंड है, तू बता रही थी तो भरोसा नही था
मेरा पर ये तो और खूबसूरत निकला” गीता मचल कर बोली. उसकी नज़रें मेरे लंड
पर गढ़ी हुई थीं. बड़ी चालू चीज़ थी, ज़रा भी नही शर्मा रही थी, बल्कि
चुदने को मरी जा रही थी. “बदमाश कहीं की, तू सुधरेगी नही, मैने कहा ना
फिर देखेंगे. अभी चोली निकाल और फटाफट बाबूजी को दूध पीला.” मंजू ने अपनी
बेटी को डाँटते हुए कहा. मंजू अब मेरे लंड को पाजामे के बाहर निकाल कर
प्यार से मुठिया रही थी. फिर उसने झुक कर उसे चूसना शुरू कर दिया. उधर
गीता ने अपना ब्लओज़ निकाल दिया. उसकी पपीते जैसे मोटी मोटी चूंचियाँ अब
नंगी थीं. वह एकदम फूली फूली थी जैसे अंदर कुच्छ भरा हो. वजन से वो लटक
रही थी. एक स्तन को हाथ मे उठाकर सहारा देते हुए गीता बोली “अम्मा देख
ना, कैसे भर गये है मम्मे मेरे, आज सुबह से खाली नही हुए, बहुत दुखाते
है” “अरे तो टाइम क्यों बर्बाद कर रही है. आ बैठ बाबूजी के पास और जल्दी
दूध पीला उनको. भूखे होंगे बेचारे” मंजू ने उसका हाथ पकड़ कर खींचा और
पलंग पर मेरे पास बिठा दिया. मैं सिरहाने से टिक कर बैठा था. गीता मेरे
पास सरकी, उसकी काली आँखों मे मस्ती झलक रही थी. उसके मम्मे मेरे सामने
थे. निप्पालों के चारों ओर तश्तरी जैसे बड़े गोले थे. पास से वी मोटे
मोटे लटके स्तन और भी ज़यादा रसीले लग रहे थे. अब मुझसे नही रहा गया और
झुक कर मैने एक काला जामुन मुँह मे ले लिया और चूसने लगा. मीठा कुनकुना
दूध मेरे मुँह मे भर गया. मेरी उस अवस्था मे मुझे वह अमृत जैसा लग रहा
था. मैने दोनो हाथों मे उसकी चून्चि पकड़ी और चूसने लगा जैसे की बड़े
नारियल का पानी पी रहा हूँ. लगता था मैं फिर छ्होटा हो गया हूँ. आँखें
बंद करके मैं स्तनपान करने लगा. उधर मंजू ने मेरा लंड मुँह मे ले लिया.
अपनी कमर उछाल कर मैं उसका मुँह चोदने की कोशिश करने लगा. वह महा उस्ताद
थी, बिना मुझे झड़ाए प्यार से मेरा लंड चुसती रही. अब तक गीता भी गरमा
गयी थी. मेरा सिर उसने कस कर अपनी चूचियो पर भींच लिया जिससे मैं छ्छूट
ना पाउ और उसका निपल मुँह से ना निकालूं. उसे क्या मालूम था की उसकी उस
मतवाली चून्चि को छ्चोड़ दूँ ऐसा मूरख मैं नही था. उसका मम्मा दबा दबा कर
उसे दुहाते हुए मैं दूध पीने लगा. अब वह प्यार से मेरे बाल चूम रही थी.
सुख की सिसकारियाँ भरती हुई बोली “अम्मा, बाबूजी की क्या जवानी है, देख
क्या मस्त चूस रहे है मेरी चून्चि, एकदम भूखे बच्चे जैसे पी रहे है. और
उनका यह लंड तो देख अम्मा, कितनी ज़ोर से खड़ा है

अम्मा, मुझे भी चूसने
दे ना!” मंजू ने मेरा लंड मुँह से निकाल कर कहा “कल से, आज नही, वो भी
अगर बाबूजी हां कहें तो! पता नही तेरा दूध उन्हें पसंद आया है कि नही”
वैसे गीता के दूध के बारे मे मैं क्या सोचता हूँ, इसका पता उसे मेरे
उच्छालते लंड से ही लग गया होगा. आख़िर गीता का स्तन खाली हो गया. उसे
दबा दबा कर मैने पूरा दूध निचोड़ लिया. फिर भी उसके उस मोटे जामुन से
निपल को मुँह से निकालने का मन नही हो रहा था. पर मैने देखा की उसके
दूसरे निपल से अब दूध टपकने लगा था. शायद ज़्यादा भर गया था. मैने उसे
मुँह मे लिया और उसकी दूसरी चून्चि दूह कर पीने लगा. गीता खुशी से चाहक
उठी. “अम्मा, ये तो दूसरा मम्मा भी खाली कर रहे है. मुझे लगा था कि एक से
इनका मन भर जाएगा.” “तो पीने दे ना पगली, उन्हें भूख लगी होगी. अच्च्छा
भी लगा होगा तेरा दूध. अब बकबक मत कर, मुझे बाबूजी का लॉडा चूसने दे ठीक
से, बस मलाई फेकने ही वाला है अब” कह कर मंजू फिर शुरू हो गयी अब दूसरी
चून्चि भी मैने खाली कर दी तब मंजू ने मेरा लंड जड़ तक निगल कर अपने गले
मे ले लिया और ऐसे चूसा की मैं झाड़ गया. मुझे दूध पिलवा कर उस बिल्ली ने
मेरी मलाई निकाल ली थी. मैं लस्त होकर पिछे लुढ़क गया पर गीता अब भी मेरा
सिर अपनी चूची पर भींच कर अपनी चून्चि मेरे मुँह मे ठूँसती हुई वैसे ही
बैठी थी. मैने किसी तरहा से उसे अलग किया. गीता मेरी ओर देख कर बोली
“बाबूजी, पसंद आया मेरा दूध?” वह ज़रा टेंशन मे थी कि मैं क्या कहता हूँ.
मैने खींच कर उसका गाल चूम लिया. “बिल्कुल अमरित था गीता रानी, रोज
पिलाओगी ना?” वह थोड़ी शर्मा गयी पर मुझे आँख मार कर हँसने लगी. मैने
मंजू से पुचछा “कितना दूध निकलता है इसके थनो से रोज बाई? आज तो मेरा ही
पेट भर गया, इसका बच्चा कैसे पीता था इतना दूध” मंजू बोली “अभी ज़्यादा
था बाबूजी, कल से बेचारी की चून्चि खाली नही की थी ना. नही तो करीब इसका
आधा ही निकलता है एक बार मे. वैसे हर चार घंटे मे पीला सकती है ये.” मैने
हिसाब लगाया. मैने कम से कम पाव डेढ़ पाव दूध ज़रूर पिया था. अगर दिन मे
चार बार यह आधा पाव दूध भी दे तो आधा पौना लीटर दूध होता था दिन का. दिन
मे दो तीन पाव देने वाली उस मस्त दो पैर की गाय को देख कर मैं बहक गया.
मंजू को पुच्छा “बोलो बाई, कितनी तनखुवा लेगी तेरी बेटी?” वो गीता की ओर
देख कर बोली “पाँच सौ रुपये दे देना बाबूजी. आप हज़ार वैसे ही देते हो,
आप से ज़्यादा नही लूँगी.” मैने कहा कि हज़ार रुपये दूँगा गीता को. गीता
तुनक कर बोली “पर काहे को बाबूजी, पाँच सौ बहुत है, और मैं भी तो आपके इस
लाख रुपये के लंड से चुदवंगी रोज . हज़ार ज़्यादा है, मैं कोई कमाने
थोड़े ही आई हूँ आपके पास.” मैने गीता की चून्चि प्यार से दबा कर कहा
“मेरी रानी, ज़्यादा नही दे रहा हूँ, पाँच सौ तुम्हारे काम के, और पाँच
सौ दूध के. अब कम से कम मेरे लिए तो बाहर से दूध खरीदने की ज़रूरत नही
है. वैसे तुम्हारा ये दूध तो हज़ारों रुपये मे भी सस्ता है” गीता शर्मा
गयी पर मंजू हँसने लगी “बिल्कुल ठीक है बाबूजी. बीस रुपये लीटर दूध मिलता
है, उस हिसाब से महीने भर मे बीस पचीस लीटर दूध तो मिल ही जाएगा आपको”
गीता ने एक दो बार और ज़िद की पर उस रात मंजू ने मुझे अपनी बेटी नही
चोदने दी. बस उस रात को एक बार और गीता का दूध मुझे पिलवाया. दूध पिलाते
पिलाते गीता बार बार चुदाने की ज़िद कर रही थी पर मंजू आडी रही. “गीता
बेटी, आज रात और सबर कर ले. कल शनिवार है, बाबूजी की छुट्टी है. कल सुबह
दूध पिलाने आएगी ना तू, उसके बाद कर लेना मज़ा” गीता के जाने के बाद मैने
मंजू को ऐसा चोदा की वह एकदम खुश हो गयी. “आज तो बाबूजी, बहुत मस्त चोद
रहे हो हचक हचक कर. लगता है मेरी बेटी बहुत पसंद आई है, उसी की याद आ रही
है, है ना?

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