पति ने दोस्त को बुलाके पत्नी को प्रेग्नेट करवया 8

बीवी की चुदाई

आपने मेरी पिछली कहानी “नयी डगर, नये हमसफ़र” में पढ़ा कि कैसे मेरे बॉस ने मुझे धोखे में रखा जिसकी वजह से मुझे कुछ ऐसा निर्णय लेने पड़े कि अपनी इज्जत दूसरे के हाथ देनी पड़ी।

अब मैं संभल कर कदम रख रही थी। पर फिर कुछ ऐसा हुआ कि जिसकी वजह से मेरी जिंदगी 360 डिग्री घूम गई। ये कहानी उसी घटने के बारे में है।

मेरे पड़ोस में एक आंटी रहती है। मेरी उनसे ठीक ठाक जान पहचान है। उनसे अक्सर बातें होती रहती हैं।

एक दिन शाम को ऑफिस से घर लौटी थी, तभी घर के मेन गेट पर वो मुझे मिल गई। उनके साथ एक लड़की भी थी, कोई 20-22 साल की होगी। आंटी ने बताया कि वो उनकी भाभी सुमन है और वो उसकी बुआ है।

सुमन का कॉलेज खत्म हो गया था और इंटर्नशिप के लिए हमारे शहर में कुछ महिनो के लिए आई थी। क्या शहर में सुमन की बुआ के सिवाए कोई उसकी जान पहचान का नहीं था।

सुमन कुछ माहीं यहीं रहने वाली थी. वो एक सामान्‍य कद कथी की लड़की थी। आँखों पर मोटा चश्मा लगा था, लम्बी सी गुथी हुई छोटी थी।

वो पुराने डिज़ाइन के ढीले ढाले सलवार कुर्ता पहनने हुई थी। कुल मिलाकर वो एक बोरिंग सी लड़की थी। वो मुझे देखते ही मेरी फैन हो गई थी। मैं उस वक्त ऑफिस के कपड़ो में था। घुटनों तक टाइट स्कर्ट और सफेद टाइट शर्ट, और खुले सीधे बाल।

वो खुद बहनजी की तरह लग रही थी पर शायद उसको मेरा पहनना पसंद आया था। वो मेरे से बात करने में रुचि दिखा रही थी।

मैं थोड़ा थकी हुई थी तो मैंने उसको डिनर के बाद मिल्ने का बोलकर घर के अंदर चली गई। उसके बाद मैं उसके बारे में भूल ही गई थी।

रात को मैं अपने पति और बच्चे के साथ टहलने को निकली। गेट पर देखा तो सुमन खड़ी थी। उसने बताया कि वो काफी समय से मेरा ही इंतजार कर रही थी।

मैंने उसका परिचय अपने पति से करवाया। हम लोग अब चलते हुए गार्डन तक पहुँचे। बच्चे को वहा लगे झूले पर बैठा दिया और वही हम गोल गोल चक्कर लगा टहलने लगे।

पति अपनी जॉगिंग के लिए अलग चले गए। मैं और सुमन बात कर रहे हैं. वो मेरी और मेरे पति की तारीफ कर रही थी।

सुमन: “दीदी, आप दोनो की जोड़ी बहुत अच्छी है। दोनो बहुत सुन्दर हो”

मैं : “धन्यवाद। देखो, हमारी उम्र में ज्यादा फर्क नहीं है तो तुम मुझे मेरे नाम प्रतिमा से भी बुला सकती हो।”

सुमन: “ठीक है प्रतिमा। दरसल मैं एक छोटे शहर से हूं। आप इतना सुंदर दिखती हो, इतने अच्छे कपड़े पहनती हो। मैं भी अब ऑफिस जाती हूं, तो इस तरह जाना चाहती हूं”

मैं : “तुम एकदुम सीधी साधी रहती हो, तुम्हें इस तरह रहना ठीक नहीं लगता?”

सुमन: “पापा मम्मी हमेशा पढ़ायी को कहते रहते थे, इसलिए सारा ध्यान पढ़ाई में ही लगाया। कभी सजने का सोचा ही नहीं। कपड़े भी मम्मी ही खरीदती है। मुझे तो ज्यादा पता ही नहीं चलता”

मैं : “अब तो तुम नौकरी करोगी, फिर सब तुम्हें करना पड़ेगा। धीरे-धीरे सीख जाओगी”

सुमन: “कॉलेज में सब लड़कियाँ बन गई थीं। मैं ऐसी सिंपल रहती थी। मेरी कोई सहेली ही नहीं बनती थी। लड़के भी सारे उन आधुनिक लड़कियों से बात करते थे”

मुख्य: “अब तो पढ़ई भी ख़तम हो गई, अब तो कोई चिंता नहीं। तुम्हें अगर मॉडर्न बनना है तो बन जाओ”

इसी तरह कुछ दिन गुजरे, उसमें कोई बदलाव तो नहीं आया पर वो अब मुझे अपना दोस्त ढूंढने लगी थी। स्वभाव की वो अच्छी थी तो मुझे भी अच्छी लगी।

एक सप्ताह चला गया था और हम लोग रोज शाम को साथ में चलते थे। मुझे हमसे एक सहेली मिल गई थी तो पति दूसरे दिन से ही अलग से चलकर चले जाते थे।

सुमन मुझसे और मेरे बच्चे से अब गुलमिल गई थी। रोज वो मेरी किसी ना किसी चीज को लेकर मेरी तारीफ करना नहीं भूलती। आख़िर एक हफ़्ते बाद उसने अपने दिल की ख़्वाहिश राखी।

सुमन: “कुछ समय पहले मुझे शादी के लिए देखने के लिए कुछ लड़के भी आए थे। किसी से कोई जवाब ही नहीं आया।”

अभी घरवाले लड़का ढूंढ रहे हैं। पता नहीं कोई ख़राब लड़का ना पसंद कर ले वो अब”

मुख्य: “ऐसा क्यों बोल रही हो, कोई अच्छा लड़का मिल जाएगा”‘

सुमन: “समझ ही नहीं आ रहा, क्या करू। आप ही मेरी मदद कर दो ना। मुझे भी देखने पहनने में अपना जैसा मॉडर्न बना दो”

मुख्य: “ठीक हूं कर दूंगी। तुम्हें इंटरशिप के पैसे तो मिलते हैं ना। थोड़ा खर्चा होगा पर तुम भी मॉडर्न बन जाओगी”

सुमन: “पैसों की चिंता नहीं। मैंने पैसे बचाए हैं, अब तो थोड़े पैसे कमाने भी लगी हूँ”

मुख्य: “मैं तुम्हें 5 चीजें बताता हूं, इनको तुम ठीक करलो। पहले तो अपना पुराने जमाने का चश्मा हटा कर कोई मॉडर्न फ्रेम का चश्मा लो। हो सके तो कॉन्टैक्ट लेंस लगवा लो”

सुमन: “ठीक है, मेरे पड़ोस की लड़की ने भी कॉन्टैक्ट लेंस लगवाए थे। मैं वो करवा लुंगी”

मुख्य: “दूसरा, अपने बालों में हमेशा छोटी घूंट बंद कर दो। बाल सीधा करवा लो, ताकि कभी खुले भी रख सको। चाहिए तो कभी रबर बैंड या क्लिप से बंद कर लो। या फिर बन बना लो”

सुमन: “मुझे आपके खुले बाल बहुत पसंद हैं। जब आप बन बने हों और दो झूले सामने से निकलती हों तो आप कयामत लगती हो”

मुख्य: “अब ज्यादा मास्क मत लगाओ। तीसरी बात सुनो। ब्यूटी पार्लर रेगुलर जाया करो और मेकअप लगाया करो। वैसे तुम्हारी त्वचा अच्छी है तो ज्यादा जरूरी नहीं पड़ेगी”

सुमन: “मैं कभी ब्यूटी पार्लर नहीं गई। बस बाहर से देखा है और लड़कियों को बात करते सुना है”

मुख्य: “ठीक है एक बार जाओगी तो सब पता चल जाएगा। चौथी बात, अपने कपड़े बदलने होंगे। ये धीरे सिंपल कपडे छोड़ो. तुम्हारा फिगर अच्छा है. कुर्ता पहनना है तो थोड़ा टाइट पहनना। आरामदायक हो तो जींस, स्कर्ट और शर्ट भी पहन सकती हो। खरीदो को आधुनिक डिज़ाइन वाली पोशाक पहनाओ। जरूरी नहीं छोटे कपडे पहनो, पर डिजाइन मॉडर्न हो”

सुमन: “मुझे आपके कपड़े बहुत पसंद हैं। मुझे ऐसे ही चाहिए”

मुख्य: “आखिरी बिंदु। ऐसे पांव घसीटते हुए मत चलो। अदा के साथ चलो और बात करो। मैंने जो बातें कही हैं उनको अपने के बाद तुममें आत्मविश्वास आ जाएगा और चल अपना आप बदल ही जाएगी”

सुमन: “आपकी सब बातें मुझे मंजूर हैं, पर मैं ये सब अकेले नहीं कर सकती। आपके लिए ही ये सब मेरी मदद करनी होगी”

मुख्य: “ठीक है। पर अपने घर वालों को पूछ लेना, उनको कोई शिकायत तो नहीं है। वरना वो आकार मुझे बोलेंगे की लड़की को क्या बना दिया”

सुमन: “जब से लड़के वालों ने रिजेक्ट किया है, मम्मी पापा तो बोलते हैं अच्छे से रहा कर। बुआ ने भी बोला यहां रह रही है तो सब सीख जा।”

मुख्य: “ठीक है तो इस वीकेंड पर मैं तुम्हारी साड़ी शॉपिंग करवा देती हूं। तुम अपनी बुआ के साथ जाकर तुम्हारे कॉन्टैक्ट लेंस की बात कर लेना”

अगले वीकेंड पर मैंने उसके साथ जाकर उसे अलग-अलग तरह से कपड़े खरीदने में मदद की। फिर उसको ब्यूटी पार्लर ले गई, और उसके बालों और चेहरे का मेकओवर कर दिया। चेहरे के अनचाहे बाल हटवे. आइब्रो और वैक्सिंग करवायी.

फिर मैं उसको अपने घर ले आई और उसको नए कपड़े पहना कर उसकी बुआ के पास ले गई। उसकी बुआ एक बार तो पहचान ही नहीं पाई।

सुमन की सोशल मीडिया प्रोफाइल पर कोई दोस्त नहीं था, उसका कोई फोटो भी नहीं था। उसने पहली बार अपना फोटो लेकर अपनी प्रोफाइल पर लगाया था।

उसके कॉन्टैक्ट लेंस भी आ चुके थे और वो दिखाने मेरे घर आये थे। मेरे पति को यकीन नहीं हुआ कि ये वही सुमन है। आजतक सुमन अशोक की तारीफ करती थी, आज अशोक ने सुमन की तारीफ की तो वो बहुत खुश हुई।

सुमन अपने बदलाव से अब बहुत खुश थी, उसका आत्मविश्वास एक अलग स्तर पर जा चूका था। 2 सप्ताह में मेरा समय बदल गया।

सुमन: “मैंने जब अपनी फोटो भेजी, जब मम्मी पापा को भेजा तो वो खुशी से पागल हो गई। उन्हें रिश्तेदारों को फोटो भेजकर शुरू कर दिया। बोल रहे थे कि कुछ रिश्ते आए हैं”

मुख्य: “अच्छा है, कोई अच्छा सा लड़का पसंद कर लो फिर”

सुमन: “इंटर्नशिप के लिए कुछ नहीं है। मैंने बोला है कि उसके बाद ही लड़के को देखना शुरू करेंगे।”

मुख्य: “वो भी ठीक है, अब तो तुम खुश हो ना?”

सुमन: “देखने मुझे तो आपने मुझे टिपटॉप कर दिया है। पर मेरे अंदर को मैं कैसे सुधारू। कभी किसी लड़के से बात तक नहीं। पहले जब लड़के मुझे देखें आते थे तो मेरी बोलती ही बंद।”

मुख्य: “बात करना कोई सिखाता है क्या?”

सुमन: “कृपया एक बार। एक बार थोड़ा आइडिया लग जाएगा तो फिर बात करते-करते सीख जाऊंगी”

मुख्य: “ठीक है, मैं बात करती हूं”

मैंने घर आकर अशोक को पूछा, उसने अनाकानी की। उसको समझ नहीं आया वो क्या ट्यूशन देगा किसी लड़की को। पर मैंने उसको मनाया कि ऐसे ही उसकी प्रैक्टिस करवा देना लड़के से क्या बात करनी है। अशोक को मनाना पड़ा.

सुमन शाम को घर आकर मेरे पति के साथ बात करने की प्रैक्टिस करने लगी। वो जो जो सीखती है वो ऑफिस में जाकर ट्राई करती है। शुरू में दिक्कत आती है, पर धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास आता है।

अगले हफ्ते उसकी नई फरमाइश आ गई।

सुमन का ख्याल तो मैंने कर दिया था और अशोक ने उसको ये भी सिखाया था कि लड़के से बात कैसे करते हैं। मुझे लगा अब उसकी समस्या का समाधान हो चुका होगा पर वो अब एक नई समस्या के साथ मेरे सामने हाजिर थी।

मैं: “अब तो ख़ुश हो तुम सुमन?”

सुमन: “कॉलेज टाइम में जब मैं लड़कियों से उनके बॉयफ्रेंड की बातें सुना करती थी तो मुझे लगता था कि क्या फालतू बातें करती हैं। कैसे अनहोन किस किया, कहां गुम गए, कहीं होटल में जाकर सब कुछ कर लिया। लेकिन अब समझ में आ रहा है वो फालतू नहीं थी। मैंने कॉलेज की मस्ती मिस कर दी। मैं अब वो मस्ती वाले दिन जीना चाहती हूं।”

मुख्य: “तेरे लिए तो घर वाले लड़का ढूंढ रहे हैं ना?”

सुमना: “शादी तो मैं 2-3 साल नहीं करूंगी। पर कॉलेज वाली लाइफ में अभी जीना चाहती हूं। आप मेरी मदद करो।”

मुख्य: “मैं क्या मदद करूँ! पहले तो तुम्हें बॉयफ्रेंड ढूँढना पड़ेगा”

सुमन: “एक लड़का है मेरी नज़र में”

मुख्य: “कहा, मुझे ऑफिस दो?”

सुमन: “हा”

मुख्य: “तुम तो कह रही थी ऑफिस में सब बोरिंग लड़के हैं”

सुमन: “नहीं, एक नया लड़का मिला है”

मुख्य: “बात होती हैं हमसे?”

सुमन: “सामान्य बात होती है। पता नहीं वो मुझमें दिलचस्पी रखती है भी या नहीं”

मुख्य: “तो पता लगा”

सुमन: “कैसे पता लगाओ, आप ही बताओ”

मुख्य: “वो तुम्हारी तरफ़ ध्यान देता है या फिर तुम्हारी ख़ूबसूरती की तारीफ करता है या नहीं, या तुम्हारे कपड़े की”

सुमन: “बात करते वक्त ही देखता है बाकी तो नहीं देखता। और तारीफ तो वो नहीं करता”

मुख्य: “हो सकता है उसकी पहले से कोई गर्ल फ्रेंड हो”

सुमन: “कभी बताया तो नहीं, आपको कभी ऐसा कोई मिला?”

अब मैं उसको कैसे बताती हूं, मेरा बॉस राहुल, हमसे तारीफ निकालने के लिए क्या नहीं किया था। जैसा कि आपने मेरी पिछली कहानी “नयी डगर नये हमसफर” में पढ़ा ही था।

सुमन: “कहा, खो गई आप…आपके साथ ऐसा कभी हुआ क्या?”

मुख्य: “हां एक मिला था ऐसा लड़का”

सुमन: “आपके जैसी खूबसूरत लड़की को कोई मर्द ना देखे हो ही नहीं सकता। किसी मर्द ने आपकी तारीफ नहीं की, ऐसा कौन था?”

मुख्य: “था एक, छोड़ो उसकी बात”

सुमन: “नहीं नहीं, बताओ। आपने क्या किया फिर, मैं भी वही करूंगी”

मुख्य: “नहीं तू रहने दे, वो गलत रास्ता था”

सुमन:”आपके तारिके ने काम किया की नहीं? उसने तारिफ़ की आपकी फिर?”

मुख्य: “कुछ कोशिशों के बाद तारीफ तो की थी”

सुमन: “बस फिर मैं भी वो तारिका अपनाउंगी। आप बताओ क्या करना है”

मुख्य: “यहां पर गार्डन में नहीं। कल शाम जब अशोक वॉक पर चलेगा तब मैं तुम्हें घर बुलाऊंगी”

अगली शाम अशोक के चलने पर जाने के बाद मैंने उसको घर बुलाया। हम दोनों एक दूसरे के सामने सोफे पर बैठे थे।

मुख्य: “मैंने जो किया था, जरूरी नहीं तुम भी यहीं करो। कल को तुम्हारे साथ कुछ गलत हुआ तो मेरा नाम मत लेना”

सुमन: “आप सिर्फ बताओ, सारी जिम्मेदारी मेरी अगर कुछ गलत हुआ तो”

मैंने जो तारिका अपने बॉस राहुल पर अजमाया था, वो अब मैं सुमन को बताने लगी।

मुख्य: “हां तो सुनो, मैंने अपनी शर्ट का बटन थोड़ा खोल कर उसके सामने थोड़ा झुका और अपना क्लीवेज दिखाया था। उसके चेहरे के एक्सप्रेशन बदल गए थे। थोड़ी तारीफ भी की थी। मतलब वो मुझमें दिलचस्पी थी, उसको वो पसंद आया था”

सुमन: “मुझे बताओ, कैसे करना है, कितना झुकना है”

मुख्य: “तुमने अभी टीशर्ट पहनना है, पर ठीक है, तुम थोड़ा आगे झुको”

सुमन अब सोफ़े पर बैठी ही आगे की तरफ झुकी, उसका थोड़ा सा ढीला टीशर्ट थोड़ा आगे से खुला, मैंने उसको और झुकने को कहा। उसके मम्मो का उभार टीशर्ट के अंदर से दिखने लगा।

सुमन: “बस इतना झुकने से काम हो जाएगा? उसकी तरफ देखना। उसके हाव भाव बदल जाएंगे। उसके बाद उसका तुम्हारे साथ रवैया बदल जाएगा। तारीफ करने लगेगा तो समझ लेना काम हो जाएगा”

सुमन: “ठीक है मैं कल ही ट्राई करूंगी”

अगले दिन शाम को मैं बगीचे में घूमने गया। सामने से सुमन चलती हुई आई। मेरा हाथ पकड़ कर बेंच पर बैठा दिया और खुश होकर बताने लगी।

सुमन: “कमाल का आइडिया था आपका। उसकी शकल देखने लायक थी। बात करते वक्त परेशान हुआ था”

मुख्य: “इतना क्या कर दिया तुमने?”

सुमन: “आपने बताया उतना ही किया। उसने जो बटन वाला पीली शर्ट दिलाई थी आपने, वो पहनना था। ऊपर के 2 बटन खोल कर पूरा झुक गई थी”

मैं: “क्या?? 2 बटन खोल दिये!! पागल, 2 बटन खोलने के बाद तो खड़े-खड़े ही काफी कुछ दिख जाता है।”

झुकने पर तो गदर मच गया होगा। कुछ किया तो नहीं उसने फिर?”

सुमन: “नहीं, आंखें फाड़ ही रहा। मुझे इतना मजा आया कि मैं दूसरी बार फिर झुकी, फिर उसकी हालत खराब”

मुख्य: “कुछ पकड़ लेता तो? ये बता तारीफ़ की या नहीं”

सुमन: “तारीफ़ तो नहीं कि पर उसकी आँखों में दिख रही थी। आगे बताओ क्या करना है, आपने कुछ किया था?”

मुख्य: “मैंने फिर कुछ नहीं किया, फिर एक पार्टी में उसने मेरे साथ डांस किया था, तब वो मेरे करीब आ गया था और दिल खोल कर तारीफ की थी”

सुमन: “मुझे तो डांस आता ही नहीं है, आप मुझे डांस सिखाओगी, चलो अभी”

मुख्य: “अभी नहीं, कल शाम को मैं वॉक पर नहीं जाऊंगी, अशोक के वॉक पर जाने के बाद मैं तुम्हें बुला लूंगी”

अगली शाम अशोक के वॉक पर जाते ही मेरी क्लास फिर से शुरू हुई। इस बार डांस के स्टेप सिखाने लगी। उसने थोड़े बहुत कदम सीख लिए।

मुख्य: “डांस तो सीख रही हैं, ऑफिस में कैसे करेगी। उसके घर जायेगी या डिस्को में”

सुमन: “वो मैं संभाल लुंगी। आप कल शाम थोड़ी सी और प्रैक्टिस करवा देना”

मुख्य: “अगले 2-3 दिन नहीं, मैं ऑफिस में लेट हो जाऊंगी काम है। पर तुमने जितना सिखाया उतना काफी है इस काम के लिए। बाकी काम तो वो लड़का खुद ही कर देगा”

वो ख़ुशी ख़ुशी चली गयी. अगले कुछ दिन मेरा हमसे मिलना नहीं हो पाया। उसके अगले दिन हम फिर मिले और उसकी कहानी जानी।

मुख्य: “डांस किया की नहीं?”

सुमन: “पूछो मत, कहा काहा से नहीं पकड़ा उसने मुझे। मेरी कमर और पेट से तो हाथ हटा ही नहीं रहा था। दो बार मेरा सीना उसके सीने से टकराया भी”

मैं: “तुम्हें क्या डिस्को में ले गया था वो?”

सुमन: “नहीं, उसके घर पर ही डांस किया था”

मुख्य: “तुम तो एक्सपर्ट होती जा रही हो। पर ध्यान रखना कुछ गलत हरकत न करे। लेने के देने पड़ जायेंगे। मुझे मत बोलना फिर कि पहले क्यों नहीं बताया”

सुमन: “कुछ भी हो, मुझे तो बहुत अच्छा लगेगा”

मुख्य: “उसने कुछ दिलचस्पी दिखाई की नहीं?”

सुमन: “पास होकर डांस कर रहा था, यही काफ़ी है”

इसके कुछ दिनों बाद एक दिन मैं मेरे घर पर थी और मेरे पति अशोक ने मुझे कुछ बताया।

अशोक: “तुम्हारी ये सुमन तो मेरे गले पड़ गई”

मुख्य: “क्यू!! क्या किया उसने?”

अशोक: “मेरे गले लग गई थी, उसको छुड़ाया तो रोने लगी। कहने लगी गलती हो गई, बुआ को मत बताना। तुम्हें भी बताने से मना किया। क्या सिखा रही हो उसको, पहले तो बड़ी भोली थी”

मुख्य: “मैं कल ही बात करती हूं हमसे”

अगली शाम वो चलने पर नहीं आई थी। बहार भी कहीं दिखी नहीं. 1-2 दिन मैंने इंतजार किया पर वो कहीं दिखी नहीं तो मैं खुद ही उसकी बुआ के घर पहुंच गई।

वो अपनी बुआ के पास ही बैठी थी, मुझे देखते ही अंदर चली गई। मैंने उसको बाहर बुलाया. उसकी रोने वाली हालत थी. मैंने उसको उसकी बुआ के सामने डेटना ठीक नहीं समझा।

मैं उसको चलने के बहाने अपने साथ बाहर ले आई। सोचा उसके मुँह से उसकी कहानी भी सुन लू। क्योंकि अपने पति अशोक की आदत तो मैं जानती ही थी।

मुख्य: “क्या हुआ? एक दो दिन से दिख नहीं रही”

सुमन: “नहीं बस ऐसे ही, तबीयत ठीक नहीं थी”

मुख्य: “तबीयत तो ठीक दिख रही है, क्या हुआ? कुछ छुपा रही हो!”

वो हल्की सी रुआसी हो गई.

सुमन: “मुझे खेद है, मुझे पता है आपको अशोक ने बता दिया होगा”

मुख्य: “क्या बता दिया, बताओ क्या बात है?”

सुमन: “आप कुछ दिन देर से आ रही थी तब मैं आपको बिना बताए अशोक से डांस सीख रही थी। उस दिन थोड़ा बैलेंस बिगड़ गया था तो अशोक ने संभाल लिया। गलती से उनका हाथ मेरी छत पर लग गया और मेरे…माँ दब गई। मुझे तो करंट सा लगा। पहली बार किसी मर्द ने वहा छुआ था। मेरा कंट्रोल चला गया। दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था। उन्हें हाथ हटा कर सॉरी बोला पर मैंने उनका हाथ पकड़ कर फिर अपनी छत पर लगा दिया, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।”

मुख्य: “मैंने तुम्हें बोला था, जोश में होश मत खोना। कोई बाहर का बदमाश लड़का निकलता तो तेरे साथ क्या हो सकता था पता है! और तुमने तो अपने ऑफिस के लड़के के साथ किया था ना! और सीखना ही था फिर अशोक के पास क्यों गई, मुझे बोल देती”

सुमन: “मैं एक स्टेप भूल गई थी तो आपके घर गई थी। आप नहीं थे तो अशोक के साथ ऐसे ही वो एक स्टेप किया तो अच्छा लगा। फिर मैंने उन्हें ही सीखना शुरू कर दिया। अशोक को बोला था कि मैं उनसे डांस सीख रही हूं वो आपको नहीं बताती। मेरे ऑफिस में जो लड़का है, मैंने उसको डांस सिखाने का वादा किया पर मुझे तो आता ही नहीं, इसलिए पहले मैं खुद अशोक से सीख रही थी”

मुख्य: ‘और तुम जो मुझे कहानी सुना रही थी कि डांस करते वक्त लड़के ने यहां हाथ लगाया, वाह लगाया, वो क्या था!’

सुमन: “वो सब अशोक से डांस सीखते वक्त ही हुआ था”

मुख्य: “तो तुम डांस सीखने के बहाने मेरे पति का फ़ायदा उठा रही थी?”

सुमन: “नहीं मेरा ऐसा मकसद नहीं था। मैं ये सब सोच कर अशोक से डांस नहीं सीख रही थी। वो तो बस कदम बढ़ा गए थे”

मुख्य: “तुम्हारे लिए वो ऑफिस का लड़का पूरा नहीं पड़ रहा क्या!”

सुमन: “वो बहुत शर्मिला हैं। मेरी तरफ पहली बार छोटे से शहर से आया है यहां इंटरशिप के लिए। धन से बात भी नहीं करता। मैं ही आगे बढ़कर बात करती हूं”

मुख्य: “भोला लड़का है ट्रो अच्छा है ना, कोई चालाक होता तो तेरा फायदा उठाता”

सुमन: “मैं जो चाहती थी वो तो नहीं करता ना! मुझे देखता तो रहता है अप्रैल, आगे बढ़कर मुझसे बात करने की हिम्मत नहीं होती उसकी”

मुख्य: “तुम उसके साथ घूमने फिरने जाया करो। तुम खुद बोल दिया करो उसको। कभी कॉफी डेट, मूवी डेट, लंच पर या ऐसे ही साथ घूमने जाओ। तुम्हारे साथ आने से मन करे तो अलग बात है”

सुमन: “ठीक है मैं ये सब ट्राई करूंगी, पर आप मुझसे नाराज़ मत होना अब”

उसके अगले कुछ सप्ताह अच्छे से चले गए। सुमन अब मेरे सिखाए अनुसर आगे बढ़कर हमारे लड़के के साथ कभी कॉफी, तो कभी लंच या मूवी डेट पर जाती है।

अब वो थोड़ी खुश नजर तो आ रही थी, पर फिर उसके बाद वो फिर नई फरियाद लेकर आई।

सुमन: “अब मैं और मेरा बॉयफ्रेंड काफी टाइम के साथ गुजरते हैं। वो बात भी कर लेता है। पर उसके आगे नहीं बढ़ रहा है”

मुख्य: “अब तुम्हें कितना आगे बढ़ाना है?”

सुमन: “कॉलेज में जो लड़कियां बातें करती थी, किस करना और बाकी का सारा काम। वो कब होंगे! वो तो नाम ही नहीं लेता”

मुख्य: “तुम्हें क्या शादी के पहले ये सब काम करने हैं क्या?”

सुमन: “हां, मतलब…कॉलेज में लड़कियां बोलती थी कि शादी के पहले कर लेना चाहिए। थोड़ा एक्सपीरियंस मिलता है। शादी के बाद दिक्कत नहीं आती फिर। आपने शादी के पहले नहीं किया क्या?”

मुख्य: “दूसरे क्या करते हैं तुम छोड़ो। तुम क्या चाहते हो! तुम्हें तुम सब अभी कोशिश करना चाहते हो?”

सुमन:”हां, मतलब इसमें कोई बुरी है क्या?”

मुख्य: “सबकी अलग-अलग सोच होती है। किसी को अपना पहला संबंध अपने पति के साथ ही मनाना पसंद होता है। अगर शादी के पहले किया तो जिंदगी भर पति से छुपाना पड़ सकता है”

सुमन: “मुझे शादी के पहले ट्राई करना है”

मुख्य: “वो तो डर की बात है, उसने तुमने कभी किस भी किया है!”

सुमन: “नहीं किया, उस लड़के को कैसे बोलूं कि मुझे किस कर दे। शर्म नहीं आएगी मुझे!”

मुख्य: “वो लड़का तो आगे बढ़कर बोल नहीं रहा। अगर तुम भी शर्म करोगी तो फिर तुम्हारा काम होने से रहेगा”

सुमन: “तो क्या करु, बोल दू उसको”

मुख्य: “करना है तो बोलना पड़ेगा। पर पहले माउथ स्प्रे ले लेना। डोनो माउथ स्प्रे करके फिर किस करना, ज्यादा अच्छा लगेगा”

सुमन: “ठीक है मैं ट्राई करके उसका मन बनाती हूं”

उसने थोड़े दिन तक लड़के का मूड बदला कि वो भी तैयार है या नहीं। फिर आख़िर एक दिन आकर उसने बताया कि उन दोनों का पहला चुंबन हो गया है।

उसके बाद जब भी वो किसी डेट पर जाते तो मौका देखकर किस कर ही लेते। इस तरह थोड़े दिन और वो खुश हैं। फिर एक दिन उसने अपने अगले मन की मुराद राखी।

उसने कहा कि वो और उसका ऑफिस वाला बॉयफ्रेंड अब फिजिकल होने को तैयार है। मगर कहा करे ये समस्या है।

वो लड़का जिसके कमरे में रहता है, वही उसका मकान मालिक अपने परिवार के साथ रहता है तो वाह करना मुमकिन नहीं है। सुमन अपनी बुआ के साथ रहती हैं तो बुआ के घर नहीं जा सकतीं।

मैंने उसको बोला कि वो होटल में जा सकता है। पर उसने बताया कि ये उन दोनों का पहला मौका है। दोनों ही वर्जिन हैं और घबराए हुए हैं। होटल में जाने से दोनों घबराए हुए हैं।

उनको घर जैसा कोई सुरक्षित जगह चाहिए। सुमन की फरमाइश थी कि वो मेरे घर में अपनी वर्जिनिटी तोड़ना चाहती है। मैंने उसको साफ मना कर दिया पर वो गिड़गिड़ाने लगी।

बाहर होटल सेफ ना हो तो क्या उसको अपने घर में करने दो! मैंने बहाना मार दिया कि मैं अपने पति को पूछ कर बताऊंगी।

रात को जब मैं अपने पति के साथ अकेली थी तब मैंने उनको सुमन की फरमाइश के बारे में बताया।

अशोक: “हाँ तो क्या हुआ, करने दो हमारे घर में। उनका पहला अनुभव है, कहाँ जायेंगे बेचारे। तुम तो सुमन की लव गुरु बनी हो, जब उसका आखिरी काम होने वाला है तो मदद कर दो”

मुख्य: “अब हम क्या हमारा घर ऐसे कमो के लिए किराय पर देंगे!”

अशोक: “हम थोड़े ही कोई पैसा ले रहे हैं। मदद के लिए एक-दो घंटे के लिए कमरा दे रहे हैं”

मुख्य: “मुझे ठीक नहीं लग रहा है। और फिर हमारा बच्चा अभी छोटा है। उसका क्या करेंगे?”

अशोक: “वैसे भी मेरी मम्मी उसको अपने यहां छोड़ कर जाने को बोल रही थी। क्या शुक्रवार को शाम को मैं उसे छोड़ देता हूं। अगले दिन छुट्टी पर फिर ले आएंगे। तुम उन दोनो को शुक्रवार की शाम को बुला लो”

मुख्य: “उसकी बुआ को पता चलेगा तो। सारा इल्जाम हम पर आएगा कि हमने ही उनकी लड़की को बिगाड़ा”

अशोक: “ज्यादा बहाना मत बनाओ। तुम चाहती ही नहीं कि उसका कुछ हो। तुम्हें कहीं हमसे जलन तो नहीं हो रही!”

मुख्य: “मैं क्यों जलने लगी। मैं तो आगे पीछे का सब सोच रही थी। तुम्हें कोई समस्या नहीं तो मैं उनको हा बोल देती हूं”

अगली शाम मैंने सुमन को बोल दिया कि शुक्रवार की शाम मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ आ सकती हूं। वो बहुत खुश हुई और मुझे गले लगा लिया।

रात 8 बजे का प्रोग्राम फिक्स हो गया। शुक्रवार की शाम भी फिर आ गई। डिनर हम 7 बजे तक कर लेते हैं। उसके बाद मेरे पति हमारे बच्चे को लेकर अपनी मम्मी के यहां छोड़ने चले गए।

मैं अकेली उन दोनों को कैसे संभालूंगी ये सोच कर पति को मैंने 8 बजे से पहले घर आने का बोल दिया। इधर 8 बजे और उधर सुमन का मुझे फोन आ गया।

सुमन: “बुआ ने मुझे किसी काम में फंसाया है, मैं 10-15 मिनट के लिए आ जाऊंगी। मेरा बॉयफ्रेंड सौरभ हमारे मोहल्ले में पहुंच गया है। मैंने उसको आपको यहां भेजा है, उसको थोड़ी देर संभाल लेना”

मेरे पति भी घर पर नहीं पहुँचे थे और अब एक अंजान मर्द किसी खास मकसद से मेरे घर आ रहा था; और जिसके लिए आ रहा था वो सुमन तो यहाँ नहीं होगी।

मुझे थोड़ा डर लगा, पर ओखली में सर दिया तो फिर मसल से क्या डरना। दरवाजे की घंटी बजाओ, मुझे लगा सौरभ आया होगा, पर दुआ कर रही थी कि मेरे पति हो।

दरवाज़ा खोला तो सामने एक 21-22 साल का नौजवान खड़ा था। गोरा चित्त और बड़े घुंघराले बालों वाला। दिखने में मैं बहुत हैंडसम था.

सुमन ने अच्छा लड़का पकड़ा था अपनी वर्जिनिटी तोड़ने के लिए। पर उसने कहा था कि वो लड़का भी वर्जिन है। हमें खुबसूरत नौजवानों को देख नहीं लगा कि उसके पहले से कोई गर्लफ्रेंड नहीं होगी या कभी ये काम नहीं किया होगा।

जिस तरह मैं उसको देखता ही रह गई थी उसी तरह वो भी मेरे चेहरे को ताकत ही रह गया। उसने भी कभी इतनी हसीन औरत नहीं देखी थी शायद।

उसने बताया कि वो सौरभ है और सुमन ने यहां आने को बोला है। मैंने उसको अंदर लिया और सोफे पर बैठाया। मैं भी उसके सामने बैठ गयी.

शकल से बहुत भोला लग रहा था। वो चुप चाप बैठा था और उसकी नजरें शरमाते हुए मेरी छठी को घूर रही थी।

मैंने हमें स्लीप शर्ट और शॉर्ट्स पहनने का मौका दिया। वो मेरे मम्मो के उभर को देख खो चूका था। मुझे फिर सुमन की कोई बात याद आयी।

सुमन ने बताया था कि उसने झुक कर अपने मम्मे इसी सौरभ को दिखाए थे। अभी मेरे मम्मे शर्ट के अंदर हैं तो उसकी ये हालत है तो असल में देख लेगा तब क्या हालत होगी।

सुमन ने बताया था कि उसका क्लीवेज देख कैसा सौरभ पागल हो गया था। एक बार तो मेरे आदमी में थोड़ी शरारत सूझी कि जो सुमन ने सौरभ पर कोशिश की थी मैं भी कर के देखती हूं कि उसकी क्या हालत होती है।

फिर ये सोच अपने विचारों पर काबू पाया कि ये यहां पर सुमन को चोदने आया है और मैं बीच में क्यों हड्डी बनूं। वैसे भी मैं घर पर उसके साथ अकेली थी थोडा डरता है।

उसकी नज़र अभी भी मेरी छत पर जमी हुई थी। वो बिना पलक झपकाए चुपचाप बैठा था। मैंने ही उसका मौन व्रत तोड़ने का सोचा।

मुख्य: “तुम पानी लोगे?”

उसने मुझे अनसुना कर दिया, क्यों कि उसका सारा ध्यान तो मेरी छठी पर था। मैंने उसको और जोर से बोल कर जगाने की कोशिश की।

मुख्य: “तुम पानी लोगे”

उसका ध्यान एकदुम से भंग हो गया, और लड़खड़ाते हुए उसकी आवाज निकली।

सौरभ: “एनएन..नहीं, हां पानी चलेगा”

उसकी हालत देख मेरी एक मुस्कान निकली और मैं उठ कर किचन में चली गई। मैं भी सोचने लगी कैसा लड़का है। दिखने में इतना सुंदर पर कमो में एकदम कच्चा लगता है।

मैं अब पानी के गिलास में भर ट्रे में रख लाने लगी पर फिर रुकी। मैंने सोचा थोड़ा और मजा लिया जाए इस भोले लड़के का। देखे तो सही सुमन के छोटे मम्मे देख जो इसकी हालत हुई बताई थी, अगर मेरे मेरे मम्मे भी ऐसे देखेंगे तो उसकी क्या हालत होगी।

मैंने जल्दी से अपनी शर्ट के बटन खोल कर शर्ट को निकाला। फिर अपना ब्रा खोल कर साइड में रखा। मैंने फिर अपना शर्ट पहन लिया परंतु ऊपर का एक बटन खुला रखा।

शर्ट को थोड़ा ऊपर से चौड़ा कर अपना क्लीवेज दिखाते हुए मैं ट्रे लेकर बाहर आई। मेरी आहट सुन उसने अपना मोबाइल नीचे रखा और मुझे एकटक देखता रहा।

वो मेरे सीने का भाग ज्यादा खुला देख पा रहा था। उसके सामने आकर मैं झुक गई और गिलास उसकी तरफ बढ़ा दी। उसको तो जैसे मेरी छती के अलावा कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था। मेरे झुकते ही उसको मेरे मम्मे का नंगा उभार दिख रहा था।

मुख्य: “पानी!”

मगर उसे कुछ सुनाई भी नहीं दे रहा था। लग रहा था इतने सुडोल मम्मे उसने पहली बार इतने करीब से देखे थे और वो भी इतने खुले।

उसकी आंखें मोटी थी पूरी खुली थी और मुंह भी खुला का खुला था। मैंने भी उसके चेहरे पर उड़ती हवाओं को कुछ सेकंड देखने के मजे लिए।

फिर उसको झकझोरते हुए पानी की याद दिलायी। उसने मेरी छती से बिना नजर हटाये वो गिलास पकड़ने की कोशिश की। मैंने खुद ने ही उसको वो ग्लास उसके हाथ के पास

लाकर पकड़ा दिया.

जब मैं सीधा खड़े हुई तो जकर उसकी पलकें झपकी। वो अब पानी पीकर अपनी प्यास बुझाने लगा। पर नज़रे बराबर मेरे सीने पर थी।

उसने पानी पिया और मैं खाली गिलास लेने को उसके सामने फिर झुकी। उसको एक बार फिर मेरे मम्मो के उपहार की थोड़ी झलक मिली। मैंने ट्रे आगे की, पर उसने ग्लास को ट्रे में रखा ही नहीं।

उस भोले इंसान को इतना भी नहीं पता था कि औरत को इस तरह नहीं घूरते। जरूर बहार भी कभी ऐसी हरकत कर उसने मार खायी होगी।

मुझे सुमन से जलन सी होने लगी. किसी भी औरत के लिए ऐसे कुंवारे भोले आदमी से चोदने का मौका मिले तो खुश ही होगी।

सुमन का भोला-भाला बॉयफ्रेंड सौरभ मेरे घर आया था और अकेले में मैंने उसे सामने झुका अपना क्लीवेज दिखाया उसको छेड़ने के मजे ले रही थी।

वैसे भी मेरी ऐसी गंदी नियत नहीं थी कि मैं सुमन के बॉयफ्रेंड पर बुरी नजर डालूं। उल्टा वो खुद ही मुझे बुरी नज़र से देख रहा था।

मैंने खुद ही उसके हाथ से ग्लास लेकर ट्रे में रखा और फिर सीधी हुई। तब जाकर उसका ध्यान फिर टूटा और उसने सॉरी बोला।

मैं अब किचन में ग्लास रख बाहर आ गई और उसके सामने सोफे पर तांगे क्रॉस कर बैठ गई। कभी वो मेरे सीने को देखता तो कभी मेरे चेहरे और नंगी जांघों को देखता।

मैं तो उसे देख रही थी तो जब भी हमें नज़र मिलती थी मैं थोड़ा मुस्कुरा देता था और वो भी। जिस काम के लिए वो यहां आया था शायद इसलिए वो शर्मा भी रहा था।

कुछ देर बाद उसने मुझसे शर्मा के नज़रे मिलाना ही बंद कर दिया और सिर्फ मेरी छती को घूरने में ध्यान लगाया।

मैंने भी उसको ध्यान से देखा। वो बार-बार अपने हाथ से अपनी पैंट एडजस्ट कर रहा था। मैंने देखा कि उसकी पैंट में उसका लंड बार-बार खड़ा हो रहा था जिसे वो दबा कर छुपा रहा था।

शायद मेरे अंग प्रदर्शन को देख कर ही उसका लंड खड़ा हो गया था। Uski baarik pant se uske lund ka ubhaar chupaye nahi khup raha tha.

उसके लंड का आकार का अंदाज़ा मुझे हो गया था। वो था तो भोला लड़के पर उसके लंड का साइज उसके भोलेपन से कहीं ज्यादा बड़ी थी।

मुझे लग गया आज तो सुमन की पहली चुदाई बहुत यादगार होने वाली है। जिन महिलाओं के पेटियों का लंड छोटा होता है वो ऐसे भोले लड़के के बड़े लंड के लिए तड़पते हैं।

मैं खुशकिस्मत थी कि मेरे पति का कद लंबा था और उनके लंड का साइज भी काफी अच्छा था। सौरभ अपने कड़क होते लंड से परेशान हो रहा था और मैं उसकी हालत देख मन ही मन हंस रही थी।

तबही डोरबेल बाजी. शायद सुमन होगी या हो सकता है मेरे पति लौट आए हो।

सुमन के भोले भाले बॉयफ्रेंड सौरभ को छेड़ने के लिए मजे लेने के बाद उसका लंड तो मैंने बिना मेहनत के ही बैठे-बैठे कड़क कर दिया था।

डोरबेल बजाने के बाद मैंने दरवाजा खोला तो सामने सुमन थी। वो तेजी से अंदर आ गई और सौरभ की तरफ बढ़ी।

मैंने दरवाजा बंद किया और हॉल में आ गई। सुमन खड़े खड़े शर्मा रही थी. सुरभ और वो एक दूजे को देख, बिना बोले कभी नज़र झुका लेते तो कभी एक दूजे की आँखों में देखते।

दोनों का पहला मौका था तो शर्म करना बंटा, पर इतना शर्म करेंगे तो अपना काम कैसे करेंगे! मैंने भी थोड़ा इंतज़ार किया पर वो दोनों हिले ही नहीं। मुझे ही आगे बढ़कर उनको बोलना पड़ा।

मुख्य: “मैंने बिस्तर पर नई चादर बिछा दिया है, तुम लोगों को अंदर जाना है या नहीं!”

उन दोनो ने मेरी तरफ़ देखा और शर्म के मारे दोनो के मुँह एकदुम लाल हो गये। मुझे ही वापसी बोलनी पड़ी “जाओ जल्दी, देर मत करो तुम्हारी बुआ बुला लेगी”।

डोनो ने एक दूसरे को आँखों में जैसा इशारा किया और सौरभ उठा खड़ा हुआ। उसके खड़े होते ही मुझे उसकी पैंट से खड़ा होता हुआ लंड अब अच्छे से दिखा।

उसका लंड सच में और बड़ा लग रहा था। मुझे सुमन की थोड़ी चिंता भी हुई। वो इतनी पति दुबली, ये बड़ा लंड कैसे बर्दाश्त करेगी।

सुमन अब आगे आगे और सौरभ उसके पीछे चलने लगा। डोनो ने बेडरूम के दरवाजे में घुस कर दरवाजा बंद कर दिया।

मैं टीवी लगा सोफे पर बैठ गई। यार मैं बहुत सवाल चल रहे थे. दोनों का पहला मिलन कैसा होगा! काश मैं भी वाह होती और देख पाती। दोनों का पहला अनुभव देखने का मौका पाना चाहता था।

टीवी चालू थी पर मैं टीवी नहीं देख रही थी। यार मेरा बेडरूम के अंदर ही था. तकरीबन 10 मिनट हो चुके थे.
अभी तक अशोक भी नहीं आया था. सोचा उसको फोन करूं कि तभी बेडरूम का दरवाजा थोड़ा खुला और सुमन ने अपना मुंह बाहर निकाला।

उसने मुझे इशारे से अपने पास बुलाया। मैंने इशारे में ही पूछा क्या हुआ. पर वो मुझे अपने पास बुलाने लगी। शायद उन्हें किसी चीज़ की ज़रूरत थी। मैं उठ कर उसके पास चली गयी।

मेरे आदमी में ख्याल आने लगे कि इनको क्या जरूरत पड़ गई, लाइट का स्विच नहीं मिला, या टिश्यू पेपर या कपड़े की जरूरत है।

मुख्य: “क्या हुआ?”

सुमन: “आप अंदर आओ”

मुख्य: “मैं अन्दर आकर क्या करूँ! क्या काम हैं बोलो”

सुमन: “एक बार अंदर तो आओ, बताती हूं”

उसने दरवाजा थोड़ा और खोला और जैसे जैसे मैं दरवाजे के पास आई उसने दरवाजा और खोले हुए मुझे अंदर ले लिया। वो अभी भी दरवाजे की आड़ में छुपी हुई थी।

दरवाजे के साथ-साथ अंदर आते हुए मैं उसे ही देख रही थी। अंदर आते ही उसने दरवाजा बंद कर दिया और फिर मेरी तरफ मुड़ी।

मैं पहली बार उसको पूरा नंगा देख रही थी। उसकी गोरी दुबली काया पर उसके छोटे मम्मे भी बड़े दिख रहे थे। नीचे नज़र गई तो बुरा लगा।

उसकी आज पहली चुदाई थी और उसने अपनी चूत के बाल तक साफ नहीं किये थे। वैसे तो ब्यूटी पार्लर जाकर उसने चेहरा सुधार लिया था पर चूत की सफाई के बारे में कोई थोड़े ही बताएगा उसको।

Uski chut की शायद उसने कभी सफ़ाई ही नहीं की थी। 2 इंच लंबे बाल उगे हुए थे. उन बालों के पीछे छुप कर उसकी चूत तो नज़र ही नहीं आ रही थी।

पता नहीं लड़की की चूत के बालो को देख कर सौरभ क्या सोच रहा होगा। मैंने अब पीछे मुड़कर देखा, वाहा सौरभ बिस्तार पर बैठा था। उसकी पीठ मेरी तरफ थी. उसके शरीर पर भी कोई कपड़ा नहीं था।

वो हमारी तरफ ही देख रहा था. उसका गोरा बदन और अच्छी सी शारीरिक थी। उसकी सुडोल गांड का हिसा दिख रहा था। अगर वो सीधा बैठा होता तो शायद मुझे उसके मोटे लंड के दीदार भी हो जाते। मैंने फिर सुमन की तरफ देखा।

मैं: “तुम दोनो ऐसी हालत में हो तो मुझे क्यों अंदर बुलाया?”

सुमन: “हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है। आप ही मदद करो कैसे शुरू करना है”

मुख्य: “कैसी बातें कर रही हो! ये चीज कोई सिखाता है क्या! तुम्हारा बॉयफ्रेंड मेरे सामने नंगा है, मुझे शर्म नहीं आएगी क्या!”

सुमन: “ऐसे मत करो, इतनी मदद की है मेरी, थोड़ी सी और कर दो। हम दोनो को इसका बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है”

मुख्य: “तुम दोनो ने कभी कुछ सुना, पढ़ा, हां देखा नहीं है क्या? ये चीजें सिखाई थोड़े जाती हैं। ये अपने आप कुद्रुति रूप से आती हैं। बच्चे को कभी कोई मां का दूध पिलाना सिखाता है क्या?”

सुमन: “थोड़ा आइडिया है, पर डर लग रहा है। कुछ गड़बड़ हुई तो! एक बार बता दो हम सही कर रहे हैं या नहीं”

मुख्य: “तुम्हें करना है तो करो। जब तुम्हारी शादी होगी तो तब तुम क्या करोगी; तब भी किसी की मदद लोगे क्या। कुछ होमवर्क तो करके आना था ना”

सुमन: “मुझे लगा सौरभ को आता होगा, पर उसको भी कुछ नहीं पता। वो मेरे भरोसे आया है। बड़ी मुश्किल से मौका मिला है। वेस्ट मत होने दो। थोड़ा सा बता दो प्लीज”

मुख्य: “इसमें बताना क्या है! तुम नीचे लेटो और उसे ऊपर आकर तुम्हारे अंदर डालना है बस, हो गया। फिर सब अपना आप हो जाएगा”

सुमन: “हमने 2-3 बार कोशिश की, नहीं हुआ, तभी तो आपको बुलाया है”

मुख्य: “अच्छा चलो तुम इधर आकर बिस्तार पर लेटो”

कभी सोचा नहीं था कि बालिग लोगों को मैं चुदाई करना सिखाऊंगी। डोनो ही इतने डब्बू होंगे मैंने सोचा नहीं था। जरूर सौरभ अपनी मां के आंचल से बाहर नहीं निकलेगा। ऐसे दोस्त भी नहीं मिलेंगे जो इसको इन सब चीज़ों के बारे में बात करे या कुछ वीडियो दिखाए।

फिल्हाल मैं सुमन को लेकर बिस्तार के पास लाई और उसको बिस्तार पर ले आया। सौरभ ने थोड़ा आगे खिसक कर सुमन के लिए जगह बनाई।

सुमन बिस्तर पर लेट गई। उसके शरीर पर सिर्फ उसकी चूत के बालों का गुच्छा ही उबर कर दिख रहा था। एक औरत होने के नाते सुमन की बजाये मुझे शर्म आ रही थी।

सौरभ शायद पहली बार किसी लड़की की चूत देख रहा होगा और उसे ये बाल दिखायी दे रहे थे। सुमन ने लड़कियों की इज्जत मिट्टी में मिला दी थी।

मैंने सुमन को अपने पैर छोड़े करने को कहा और उसने अपना तांगे एक दूसरे से दूर कर दिया। अब उसके बालों के बीच से उसकी चूत की गुलाबी पतली दरार दिखने लगी थी।

मैं सौरभ को सुमन की दोनों टैंगो के बीच बैठने को बोला। वो पहली बार सीधा हुआ. मैंने देखा कि उसके लंड की जड़ो में भी बड़े बड़े बाल उगे हुए थे।

मैंने लगभाग अपना माथा पिट लिया। वो दोनो ही एक जैसे थे। जितने घने घुंघराले बाल उसके सर पर उतने ही घने घुंघराले बाल लंड के वाहा भी थे।

थोड़ी देर पहले पैंट में उसका लंड बहुत बड़ा नजर आ रहा था पर अभी वो नरम था। लंड का कुछ हिसा उसका लंड के नीचे के बालों में छुपा था और 2 इंच ही बाहर लटका था।

शायद इतनी देर से बैठे रहने से वो नरम पड़ चुका था। अभी आगे का क्या बताति, पहले उसको कड़क करना जरूरी था, पर कैसे बोलती।

मुख्य: “पहले सौरभ को तैयार करना पड़ेगा, इसका सामान अभी नरम पड़ा है। सुमन तुम इसे रगड़ कर कड़क करने की कोशिश करो। ये तुम्हारा पहला सबक है”

सुमन ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उस लछिले लंड को हाथ लगाते ही डर के मारे हाथ पीछे खींच लिया, जैसे किसी जीव जंतु को हाथ लगा दिया हो।

मुख्य: “हाथ लगाने से इतना डरोगी तो आगे का काम कैसे करोगी। चलो तुम हाथ लगाओ।”

मैंने अब आगे सुमन पर झुकी और उसकी हथेली की उंगलियों का रोल बनाते हुए उसको बताने लगी कि इसके बीच में लंड फंसा कर रगड़ना है।

फिर मैंने सौरभ की तरफ देखा। उसकी नज़र फिर मेरी छत पर टिकी थी। मुझे याद आया थोड़ी देर पहले उसको अपना क्लीवेज दिखाने के लिए मैंने अपनी शर्ट का बटन खोला था, वो तो मैंने बंद ही नहीं किया था। मेरे झुकने से उसको फिर मेरे मम्मो का थोड़ा उधार दिख रहा होगा

मैंने देखा अब सौरभ के लंड में थोड़ी हलचल हुई और वो हिला था। मैंने फिर सुमन को ऐसे ही झुके हुए बोला कि वो अब सौरभ के लंड को हाथ लगा लेगी पर वो हाथ लंड के पास ले जाकर छूटे ही फिर हटा देती है।

पर इस बीच मेरे झुके रहने से सौरभ को मेरे मम्मो के दर्शन बराबर हो रहे थे जिस से उसका लंड अपने आप कड़क हो रहा था। शायद सुमन को हाथ लगाने की भी ज़रूरत नहीं थी।

फिर भी मुझे अपना काम करना ही था। मैंने सुमन का हाथ पकड़ा और सौरभ के लंड की तरफ खिंच कर ले गयी। वो डर के मारे अपना हाथ लगतर पीछे ला रही थी इसलिए मुझे थोड़ा जोर लगाना पड़ रहा था।

वो ऐसे डर रही थी जैसी लड़कियाँ छिपकली या कॉकरोच से डरती हो। मैं उसका हाथ जैसे ही सौरभ के लंड के पास ले गई उसने हाथ पीछे खींच लिया।

मैं तो वैसे ही अपना हाथ सौरभ की तरफ तेजी से ले जा रही थी तो सुमन का हाथ बर्बाद ही मेरा हाथ बनकर
सौरभ के लंड को छू गये. मैंने अपना हाथ शर्म के मारे हटा दिया।

सुमन: “देखा आपने भी हाथ हटा दिया ना। गंदा लगता है ना?”

मैं: “ये तुम्हारा दोस्त है इसलिए हटाया। मैं पराये मर्द का क्यू पकड़ू!”

सुमन: “नहीं, बहुत गंदा लगता है। आप पहले पकड़ कर दिखाओ”

मुख्य: “पागल है क्या! मैं क्यू पकड़ू। ऐसे गैर मर्द का लंड कौन पकड़ता है”

सुमन: “आप एक बार पकड़ कर दिखाओ तो मुझे यकीन हो कि इसको पकड़ भी सकते हैं। ये मेरा दोस्त है, गैर थोड़े ही हैं। वैसे भी आप तो सिखा रही हो ना”

मैं अभी भी झुकी हुई थी, और अब तक सौरभ का लंड थोड़ा और कड़क हो चुका था। उसके बालों के बाहर ही उसका लग्भाग 4-5 इंच का लंड दिख रहा था।

पहले भी पैंट के अंदर सौरभ के लंड को देखकर पूरा देखने की इच्छा तो थी ही, अब पकड़ने का मौका भी था। हालांकी पकडने में कोई हर्ज तो नहीं था। मेरे लिए ये एक मौका था सौरभ के एक्सप्रेशन देखने का।

मुख्य: “ठीक है एक बार मैं पकड़ कर बताती हूं”

मैने अब अपनी उंगली सौरभ के लंड पर लपेट दी। उसका लंड एकदम गरम था और काफी कड़क हो चुका था। मेरे पकड़ाते ही वो पूरा हिल गया। उसका मुँह खुला हुआ था और गहरी आह सा भर रहा था।

मैंने अब अपना हाथ उसके लंड पर रगड़ना शुरू किया और सौरभ की पहली बार आहेन शुरू हो गई।

मुख्य: “देखो सुमन इस तरह अपने हाथ में लेकर रगड़ो”

सुमन अब हिम्मत करते हुए हाथ लंड के पास लाई और मैंने सौरभ के लंड को छोड़ा। उसका लंड अब 7 इंच लम्बा और काफी मोटा हो गया था। वो चुदाई के लिए तैयार था.

सुमन ने अब सौरभ का लंड पकड़ा. कड़क लंड को पकड़ा उसको थोड़ा अच्छा लगा। उसने लंड को अपनी मुट्ठी में भींच लिया। उसको अब अच्छा लग रहा था और उसने उसको रगड़ना भी शुरू कर दिया।

मुख्य: “चलो अब वो तैयार हैं। मैं बता कर जाती हूं कि शुरुआत कैसे करनी है, फिर तुम दोनों करते रहना”

सुमन के मन में लंड को पकड़ने का डर मैंने भगा दिया था और उसने मुझे भी सौरभ का लंड छूने का मौका मिल गया था।

अब आगे का काम शुरू हुआ तो सुमन ने ना चाहते हुए भी सौरभ के लंड से हाथ हटा लिया और फिर तांगे छोड़ कर लेट गई। सौरभ अब सुमन की दोनों तांग के बीच आकर बैठ गया।

मैंने सुमन की चूत के नीचे इशारा कर सौरभ को बताया कि लंड कहां डाल रहा है। मेरे कहने पर उसने सुमन की जांघो को खींच कर अपनी मुड़ी हुई जांगो पर रख दिया। उसका लंड अब सुमन की चूत के पास था।

सौरभ ने अब अपने लंड को पकड़ कर उसकी चोंच को मेरी बताई जगह पर सुमन की चूत में डालना शुरू किया।

मगर लंड की थोड़ी सी चूंचे ही सुमन तड़प कर पीछे हट गई।

सुमन: “जलन हो रही है। इसको कुछ तो लगेगा”

मुख्य: “कुछ नहीं लगा है, तुम ऐसे ही डर रही हो। एक बार अंदर जाने दो फिर धीरे-धीरे अच्छा लगेगा। पहली बार ऐसा ही लगता है। चलो फिर लेटो”

सुमन एक बार फिर लेट गई। मगर एक बार फिर वही रिपीट हुआ और वो हट गई।

मुख्य: “अच्छा ठीक है, पहले उंगली से ट्राई करते हैं। सौरभ तुम उंगली को उसी जगह रखो”

अब सौरभ ने अपनी उंगली ली और सुमन की बालों के बीच से उसकी चूत के छेद के पास ले आया। उंगली छुटे ही सुमन पूरा हिल गई पर मैंने उसको पकड़ लिया।

सौरभ ने अब धीरे-धीरे अपनी उंगली अंदर डाली शुरू की पर थोड़ी उंगली अंदर जाते ही सुमन फिर उछल पड़ी और लगबघ रोते हुए उठ कर बैठ गई।

सुमन: “नहीं, मुझसे नहीं होता। बहुत गुदगुदी और जलन होती है”

मुख्य: “ऐसे ही तो मजा आएगा। एक बार जाने तो दो अंदर”

सुमन: “मुझे नहीं करना”

मुख्य: “नहीं करना था तो सबका टाइम खराब किया! चलो कपड़े पहन लो वापस”

सौरभ बेचर्गी से मेरी शक्ल देख रहा था। उसका तो पूरा मूड बन चूका था।

मुख्य: “कोई ज़्यादा गुदगुदी नहीं होती, थोड़ा सा सहन कर लो”

सुमन: “ये गुदगुदी सहन कैसे करती हैं! मैं आपकी उंगली करती हूं, फिर देखती हूं आप कैसे सहन करती हूं”

मुख्य: “मैं दूसरो के सामने नंगी क्यों होऊंगी भला?”

सुमन: “तो फिर आप कपड़ा धक कर रखना, कुछ नहीं दिखेगा”

मुख्य: “इसमें करके दिखाने जैसा क्या है! ये होता ही है। शरीर को थोड़ा टाइट रखो बस”

सुमन: “तो फिर एक बार कर के बता दो ना प्लीज”

मैं सौरभ की शकल देखने लगी. मुझे ये सब नहीं करना था. पर नहीं करूंगी तो सुमन आगे बढ़ ही नहीं पाएगी। वैसे भी कपड़ा ढका रहेगा तो कोई समस्या नहीं होगी।

मैं मान गई और एक चादर ले लिया ढकने के लिए। सुमन की जगह अब मैं लेट गई और चादर ओढ़ लिया। चादर के अंदर ही मैंने अपना शॉर्ट्स और पैंटी को घुटनों तक नीचे खिसका दिया।

इस बीच सौरभ मुझे लगतार देख रहा था। चादर के अंदर होती हरकतों को वो महसुस कर सकता था। मुझे पता था वो मुझे भी नंगी देखना चाहता है पर मैं उसकी वो इच्छा तो पूरी नहीं कर सकती थी।

सुमन मेरे पास बैठ गई. मेरे बोलते ही उसने चादर में हाथ घुसाया और मेरी नंगी टैंगो के सहारे वो मेरी चूत के करीब तक आ गई।

मैं उसको दिशा बताती हूं कि उसको कहां उंगली डालनी है। मैंने अपनी तांगे छोड़ी कर ली और जल्दी ही उसकी पतली सी उंगली मेरी चूत के अंदर घुसना शुरू हो गई।

उसकी उंगली पतली थी पर अंदर जाने पर गुदगुदी तो होती ही है। मैं थोड़ा मुस्कुरा कर हल्का सा हिल सी गई। उसने पूरी उंगली मेरी चूत में उतार दी।

सुमन: “गुदगुदी हो रही है?”

मुख्य: “थोड़ी तो होती ही हैं”

सुमन: “मेरी उंगली पतली और छोटी हैं इसलिए। मोती उंगली जाए तो पता चले। सौरभ तुम डालो अपनी उंगली”

सुमन ने अपनी उंगली से निकल कर हाथ चादर से बाहर निकाल दिया।

मुख्य: “मैंने सिर्फ तुम्हें उंगली डालने की इज्जत दी थी, वो भी तुम्हें दिखाने के लिए। तुमको मैंने दिखाया है तो मैं अब उठती हूं”

सुमन ने मुझे उठने से पहले ही रोक कर लिया रखा।

सुमन: “सौरभ की मोती उंगली लो तो आपको पता चलेगा”

मुख्य: “बिल्कुल नहीं। हर किसी मर्द की उंगली अपने अंदर लेने का मतलब पता है? अशोक को पता लगा तो झगड़ा हो जाएगा”

सुमन: “आपके पति हैं कहा! हम नहीं बताएंगे, आप सौरभ को उंगली डालने दो प्लीज़”

मुख्य: “बात अशोक को पता चलने की नहीं है। मैं खुद तैयार नहीं हूं। ऐसे कैसे हर किसी को हाथ लगाने दो।”

मैं तो हाथ भी नहीं मिलाती अंजान लोगो से फिर ये तो बहुत डर की बात है”

सुमन: “सौरभ जान पहचान का है। ये समझ लो सौरभ डॉक्टर हैं और आप जांच करा रहे हैं।”

मुख्य: “ऐसे कैसे समझ लू। चलो छोड़ो मुझे जाने दो”

सुमन: “इतना आगे आकार इतनी छोटी सी बात को लेकर मत जाओ। हम दोनो भी तो आपके सामने यहां नंगे बैठे हैं। फिर आपने तो चादर भी ढक रखा है”

सौरभ: “सुमन को दिखाने के लिए मैं थोड़ा सा ही लगाऊंगा, थोड़ा लगाने दो ना प्लीज। सुमन को साबित करना है बस। प्लीज!!”

पहली बार सौरभ ने इतनी लंबी बात कही थी। उसके चेहरे पर बेचारगी थी। और कोई होता तो मैं कभी नहीं मानती पर वो एक भोला भाला मासूम लड़का लग रहा था।

फिर मुझे उसको ये भी मालूम था कि हर लड़की सुमन की तरह चूत पर बाल उगाए नहीं रहती, लड़किया साफ सुधरी भी रहती है। मैं एक बार फिर मान गयी.

सौरभ मेरे दूसरी तरफ आकार बैठा। उसने अपनी तरफ से चादर में हाथ डाला और उसका हाथ सीधे मेरी जांघ पर पड़ा।

उसके हाथ बहुत नरम थे और मैं उसके हाथ छूटे ही थोडा हिल सी गई। उन दोनों को आश्चर्य हुआ कि अभी तो चूत को छुआ भी नहीं और मैं हिल गई थी।

वो मेरी नंगी चिकनी जांघ पर धीरे धीरे हाथ फिराते हुए मेरी चूत के पास ले आया। मेरी चिकनी चूत पर हाथ फिराते हुए वो जैसी चूत के बालों को ढूंढ रहा था।

पर मेरी चूत तो सफ़ाचट थी, उसको बाल कहा मिलते। मैंने ही उसको बोला कि “यही जगह है, उंगली थोड़ा नीचे ले जाओ और अंदर डालो”। उसके चेहरे के भाव बदल गये।

सुमन के जंगल को देखने के बाद मेरा सपाट मैदान महसुस कर उसको सुखद आश्चर्य हुआ था। उस सपात मैदान में वो अपनी उंगली मेरी चूत की दरार तक आराम से ले आया।

मैंने अपने पाँव छोड़े हुए उसकी उंगली के लिए जगह बनाई। उसकी उंगली अब धीरे-धीरे मेरी चूत में घुसना शुरू हुई।

उसके लंड की तरह उसकी उंगली भी मोटी ही थी. मेरी एक आह निकली. मगर सुमन को जताने के लिए कि गुदगुदी दबा सकते हैं मैंने थोड़ा सहन किया।

उसकी उंगली पूरी तरह मेरी चूत में जा चुकी थी। पहली बार चूत की गर्मी मिलने से उसको भी अच्छा लगा और वो खुद ही अपनी उंगली अंदर घुमा कर महसुस करने लगा कि अंदर क्या होता है।

मगर इधर उंगली होने से मेरी हालत खराब होने लगी। मैं बिस्तर को कस कर पकड़े सिस्किया रोकने की कोशिश कर रही थी। मैं जितना तड़पती, वो उतनी ही उंगली ज्यादा कर मेरे मजे ले रहा था।

सुमन मेरी हालत देख खुद नशे में जा रही थी. मुझे गुदगुदी करने में मजा आ रहा था, ये जान कर उसकी भी इच्छा होने लगी थी।

मैं सौरभ को उंगली करने से रोकना चाहती थी पर हमें मजे के मारे रोक नहीं पा रही थी। सोचा और कुछ नहीं तो उसकी उंगली से ही चुद जाती हूं।

पर सुमन ने उसको उंगली निकाल देने को कहा। उसने एक बार तो अनसुना कर दिया। मुझे अच्छा लगा. पर दूसरी बार सुमन ने सौरभ को लगभग पूरा हिला कर उसकी उंगली बाहर निकालने को बोला तो उसने मन मार कर अपनी उंगली मेरी चूत से बाहर निकाली।

मैं तड़पती हुई रुक सी गई। चादर के नीचे मैंने अपने कपड़े वापस पहने की भी कोशिश नहीं की थी।

सुमन: “अब मैं करवाउंगी”

मुख्य: “समझ में आ गया? नहीं आया तो एक बार और बता देती हूँ”

सौरभ: “सुमन तुम निश्चित हो कि करने दोगी। उंगली की मोटी तो कम होती है मेरे लंड की मोटी ज्यादा होगी”

ये बोलकर सौरभ ने अपना लंड आगे कर दिया। उसका लंड अभी भी कड़क होकर सर उठाये खड़ा था। सुमन एक बार तो घबरा गई।

सुमन: “हा..शायद कर लुंगी, तुम मुझ पर पहले उंगली ट्राई करो”

मेरा कोई मौका नहीं था. मैंने अपना शॉर्ट्स और पैंटी ऊपर किया और चादर हटा कर बिस्तर से उतार आई। अभी भी मेरी चूत में हलचल मची थी.

अब सुमन बिस्तार पर पैर छोड़ कर लेट गई। सौरभ ने पहले बताया अनुसर पोजीशन ली और अपनी उंगली सुमन की चूत पर रख अंदर डालने लगा।

सुमन बिस्तार पर पूरा हिल गई और सौरभ ने अपनी उंगली तेजी से उसके अंदर डाल दी। सुमन जालान के मारे जोर से झलकती रही. कुछ सेकंड्स चीखने के बाद वो कहते हुए थोड़ा शांत हुई।

सौरभ ने अब अपनी उंगली उसकी चूत में अंदर बाहर करना शुरू किया और सुमन तड़प उठी। वो सिसकियाँ मार रही थी और मजे भी ले रही थी।

थोड़ी देर वो अपनी चूत में उंगली करवा के मजे लेती रही और मैं ये देख वहा खड़े कहदे तड़पती रही। और देखा नहीं गया तो मैंने ही उनको अब आगे बढ़ने को बोला ताकि फिर मैं वहां से जा सकूं।

सौरभ ने अब अपनी उंगली निकाली और पोजीशन बना कर अपना लंड सुमन की चूत से जोड़ दिया।

जैसे ही उसने लंड चूत में डालना शुरू किया सुमन की चीख निकलने लगी। उसके लंड का आगे का तीखा भाग उसकी चूत में घुसा ही था कि वो जोर से चिल्लाए उसको रुकने को बोलने लगी और गहरी सांसें लेने लगी।

थोड़ी देर रुकने के बाद उसने सौरभ को लंड थोड़ा और अंदर डालने को बोला। उसने आधा इंच और लंड अंदर घुसाया नहीं कि वो फिर चिपक गई और पीछे खिसक गई और लंड बाहर निकल गया।

सुमन: “ये बहुत मोटा है, मुझसे नहीं हो रहा”

मुख्य: “अंदर तो जाने दो एक बार, फिर एडजस्ट हो जाएगा”

सुमन: “वो ही तो नहीं हो रहा”

सौरभ का लंड अब तड़पते हुए फड़फड़ा कर ऊपर नीचे हो रहा था। जैसा मुझे ही बुला रहा था। क्या तुमने मेरे लिए मौका था अपनी अधूरी इच्छा पूरी करने का!

अब सुमन वो लंड लेगी या मुझे ही उनकी मदद करानी पड़ेगी, ये आगे जाने।

मेरी चूत में उंगली होते देख सुमन ने भी अपनी चूत में उंगली तो करवा ली, मगर वो सौरभ का लंड अपनी चूत में नहीं ले पा रही थी। मैं उसको समझने का प्रयास कर रही थी। सौरभ का लंड देख मेरी थोड़ी इच्छा जागने लगी थी.

मगर मैंने अपने आप को रोका। मेरे पति अशोक को पता चला तो क्या होगा! वैसे भी अब करना ठीक नहीं होगा जब कि सुमन सामने गवाह हो।

सुमन: “मेरी हिम्मत नहीं हो रही, अब ये मेरे से नहीं होगा। सौरभ तुम जाओ आज नहीं हो सकता”

सौरभ: “आज नहीं हुआ तो आगे होगा, इसकी क्या गारंटी है?”

मुख्य: “देख लो सुमन, तुम्हें हिम्मत करनी है तो कर लो। बेवजह डर रही हो तुम”

सुमन: “कहना आसान है, आप खुद करो तो पता चले, इसका साइज देखा!”

मुख्य: “मैं तो करती ही हूं। सारी शादी शुदा औरतें करती ही हैं। तुम्हारी शादी होगी फिर तो तुम्हें करना ही पड़ेगा”

सुमन: “पता नहीं कैसे करते हैं! इतना मोटा अनादर कैसे जाता है इतने छोटे से छेद में”

मुख्य: “अरे तुम बस हमारे पास बैठ जाओ, अपने आप अंदर चले जायेंगे”

सुमन: “क्या सबका इतना बड़ा ही होता है! आपने कभी इतना बड़ा लिया होगा!! आप ये लेकर बताओ”

ये तो मैं ही जानती थी कि मैंने जोसेफ का घोड़ा जितना मोटा लंड भी अपने अंदर लिया ही था (जैसा कि आपने मेरी)

पिछली कहानी “नयी डगर नये हमसफ़र” में पढ़ते हैं)। फिर सौरभ का लंड तो उसके सामने थोड़ा छोटा ही था।

मुख्य: “मुझे क्या पड़ी है किसी का लेने की, मेरा पति है मेरे पास”

सुमन: “मुझे लगता है आप भी डर गई ये साइज़ देखकर, इसलिए बहाने मार रही हो। अशोक से अनुमति लेकर कर लो”

मुख्य: “कोई बीवी अपने पति से इजाजत लेकर भला किसी और मर्द से करवाती है क्या? उनके सामने तो शर्म से और भी ना ले पाउ”

सुमन: “तो फिर एक बार लेकर बताओ। आपको भी पता चले इतना मोटे लंड का क्या मतलब होता है”

मुख्य: “मुझे नहीं लेना, तुम्हें लेना है तो ले लो, वरना बंद करते हैं ये सब। तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता”

सुमन: “आपने उंगली लेकर बताया तो मैंने फिर उंगली ली ना? एक बार ये लंड लेकर बताओ, शायद मेरी भी हिम्मत हो जाये”

जब सौरभ मेरी चूत में उंगली कर मुझे वश में कर रहा था तब अगर सुमन मुझे ये चुनौती देती तो मैं शायद मान भी जाती पर अब मेरा वो नशा थोड़ा उतर चुका था।

मैं हमसे अंजान आदमी का लंड लेना नहीं चाहती थी पर सुमन को कभी साबित भी नहीं करना था कि मैं इतना मोटा लंड ले सकती हूं। दूसरा, सौरभ को दिखाना था कि हर लड़की की चूत सुमन की तरह बालो वाली चूत जैसी नहीं दिखती।

यार मैं कहीं ना कहीं मैं तैयार भी थी. खास तौर पर इस तरह भी, वो कोई ठरकी मर्द नहीं था, भोला भला सौरभ था, जिसने कभी कुछ किया ही नहीं था।

सुमन: “इतना क्या सोच रही हो प्रतिमा। चाहे तो कपड़ा ढक कर करवा लो”

मुख्य: “नहीं ठीक है, कपड़ा ढका होगा तो तुम देख कर सीखोगे कैसे। मैं करती हूं, पर अशोक को पता नहीं चलना चाहिए, वादा करो”

उन दोनों ने मेरी हा में हा मिला वादा किया कि मेरे पति को पता नहीं चलेगा।

मैंने अपना शॉर्ट्स और पैंटी उतार दी। सौरभ मेरी सफाचट चूत को पहली बार देख फूला नहीं समा रहा था। उसको भी पता चला बिना बालो वाली चूत कैसी दिखती है।

सुमन भी मेरी सफाचट चूत को देख समझ गई थी कि चूत को कैसे रखना चाहिए।

सौरभ नीचे लेता था और मैं अब डोनो तरफ पाव फेल कर सौरभ के लंड के ऊपर बैठ गयी। मेरी चूत खुल गई और उसका गीलापन सौरभ के लंड को छू गया।

उसके गरम लंड को छू कर मेरी चूत भी खुश हो गई। मैंने उसका लंड उठाया और थोड़ा ऊपर होते हुए उसके लिए जगह बनाई और लंड को अपनी चूत के मुँह पर रख दिया।

वो बार-बार उतावला हो अपने लंड की टोपी को मेरी चूत में डाल रहा था। फिर मैंने ही थोड़ा नीचे बैठे हुए उसके लंड का 2 इंच हिस्सा अपनी चूत में ले लिया।

उसका लंड सच में बहुत मोटा था. मेरी चूत काफी खुल चुकी थी और मैं हल्का दर्द महसूस कर सकती थी।

मैं हमसे दर्द से उबरी भी नहीं कि सौरभ ने अपना लंड एक इंच और अंदर घुसा दिया और मेरे मुँह से एक कराह निकल गया।

मेरा दर्द देख सौरभ रुक गया. सुमन के सामने मैं हिम्मत नहीं हारना चाहती थी। मैंने धीरे-धीरे नीचे बैठना शुरू किया और उसके मोटे लंड को अपनी चूत में समाना जारी रखा।

अपने होंथ भींचे मैंने दर्द की आवाज दबाये उसका पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया। फिर धीरे-धीरे उसकी तरह, फिर ऊपर उठते हुए उसका लंड थोड़ा बाहर भी निकल गया।

एक बार उसका लंड पूरा चिकना हो गया तो फिर मुझे इतनी परेशानी नहीं हुई। मैं अब थोड़ा जोर लगाता हूं उठक बैठक करते हुए उसके लंड को अपनी चूत में रगड़ते हुए अंदर बाहर करने लगी थी।

बीच बीच में मेरी एक आधी सिस्की जरूर निकल जाती है। पर सौरभ के लिए ये मजेदार अनुभव था। वो जोर जोर से सिसकियाँ निकाल अपनी पहली चुदाई का मजा ले रहा था। कमरे में सिर्फ सौरभ की सिसकियाँ गूँज रही थी।

मुख्य: “देख लिया सुमन, अब तुम कर सकती हो या और कुछ देखना है”

मैंने सवाल सुमन को पूछा था पर चुदाई के नशे में सौरभ बीच में बोल पड़ा।

सौरभ: “थोड़ी देर और करके देखते हैं, मुझे थोड़ा और सीखना है”

सुमन: “हां ठीक है, मुझे भी और हिम्मत जुटानी है”

मैं सुमन की लव गुरु बनी थी पर अब उसके ही बॉयफ्रेंड को चोद रही थी और वो मुंह तक रही थी। मैं कुंवारे सौरभ को उसकी पहली चुदाई के मजे दिलवा रही थी।

मैंने कभी सोचा नहीं था कि लव गुरु बंटे मैं इस स्थिति में आ जाऊंगी। मैं थोड़े आगे झुकते हुए ऊपर नीचे हो कर चोद रही थी और सौरभ सिस्किया मारते हुए मेरे शर्ट में उछलते हुए मेरे मम्मो को देख रहा था।

ब्रा नहीं पहने होने से मेरे मम्मे शर्ट के अंदर ही अच्छे से उछल रहे थे। मैं उसकी तड़प को समझ सकती थी, पर आगे बढ़कर अपनी शर्ट खोलती और अपने शुद्ध मम्मे दिखा उसकी ये इच्छा भी शांत करती।

सौरभ के हाथ मेरी कमर पर थे. धीरे धीरे वो अपने हाथ थोड़ा ऊपर खिसकते हुए मेरे मम्मो के नीचे तक ले आया था। मेरे उछलते हुए मम्मे जब भी नीचे जाते तो उसकी उंगलियों को थोड़ा छू जाते।

एक वक्त ऐसा आया कि हमसे सहन नहीं हुआ और उसने अपना एक हाथ मेरे उछाले मम्मे पर रख थाम लिया। फिर वो एक अपराधी की तलाश मुझे देखने लगा कि जैसे उसने गुनाह कर दिया हो।

मैंने उसको चोदना जारी रखा और कुछ रिएक्ट नहीं किया। उसने खुश होकर अपना दूसरा हाथ भी मेरे दूसरे मम्मे पर रख उसको थाम लिया।

मेरे मम्मो का उछलना अब थोड़ा कम हो गया था और मम्मो के साथ उसके हाथ भी हल्के से हिल रहे थे।

कुछ सेकंड के बाद उसने मेरे दोनों मम्मे छोड़ दिए और उनको उछालने का मजा लेने लगा।

मुझे भी लगा कि इसको असल में उछालते हुए मम्मे दिखाने चाहिए। मैंने एक हाथ से अपनी शर्ट के बटन खोलना शुरू किया पर उछालने के कारण मुझे बटन खोलने में थोड़ी समस्या हुई।

सौरभ ने लेते हुए ही अपना हाथ ऊपर कर मेरी मदद की और मेरे बटन खोलने लगा। बटन खुलते ही उसको मेरे मम्मो के थोड़े दर्शन होने लगे।

सारे बटन खोलते ही उसने मेरे शर्ट को मम्मो के सामने से हटा दिया और उसने भूतपूर्व नज़ारे के दर्शन किये। वो मेरे नंगे मम्मो को अब उछलते हुए देख सकता था।

वो भाव विभोर हो इस नजारे का लुत्फ़ ले रहा था। सुमन तो वैसे ही मेरे मम्मों के साइज की तारीफ करती थी, उसको भी इतने बड़े मम्मे जो चाहिए थे।

उसने मेरे शर्ट को मेरे कंधो से हटा पूरा निकाल मुझे नंगा कर दिया था। सुमन ने एक बार भी नहीं कहा कि उसने अब सीख लिया है और अब वो मेरी जगह बनाना चाहती है। इसलिए मैं भी सौरभ के ऊपर से नहीं उतरी और उसको चोद रही थी।

तभी डोरबेल बाजी, मैं चोदते हुए घबरा कर रुक गई। सौरभ को ये अच्छा नहीं लगा और वो मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़े मुझे ऊपर नीचे होने को बोलने लगा।

मुख्य: “अशोक आ गया होगा, मुझे उतारना है”

सुमन ने वहां पड़ी चादर ओढ़ कर अपने नंगे शरीर को ढक लिया था।

सुमन: “नहीं, मेरी बुआ ही होगी, मैं उनको भगा के आती हूँ, आप लोग चालू रखो”

मुख्य: “अशोक हुआ तो!”

सुमन: “तो फिर मैं बाहर से ही आवाज लगा दूंगी”

मुख्य: “नहीं, मुझे जोखिम नहीं लेना, सौरभ मुझे जाने दो”

मगर सौरभ ने मुझे पकड़े रखा और मुझे जोर लगा के अपने ऊपर पूरा ले दिया। मेरे मम्मे उसके सीने से दब गए और उसने एक हाथ से मेरी पीठ और दूसरे से मेरी कमर को पकड़ कर अपने सीने से चिपकाए, नीचे से ही झटके मारने शुरू कर दिए।

सुमन वाहा से रावण हुई और दरवाजा खोल बाहर चली गई। मैं दुआ करने लगी कि अशोक ना हो। इधर सौरभ जोर जोर के झटके मार रहा था और मेरी हालत और खराब हो रही थी।

मैं उसको थोड़ी देर रुकने को बोल रही थी पर वो मान ही नहीं रहा था। इतना करने के बाद कौन रुकना चाहेगा, वो भी पहली चुदाई में।

मेरी खुद की सिस्की निकलनी शुरू हो गई थी। मुझे थोड़ा डर भी लगा कि मैं तो थोड़ा ही करने के लिए उस पर चढ़ी थी तो कंडोम भी इस्तेमाल नहीं किया था। अब वो पूरा कर लेगा तो मैं कहीं प्रेग्नेंट न हो जाऊं।

वो तो वैसे ही अनाड़ी हैं, उसको कुछ पता भी नहीं चलेगा। वो और जोर की सिसकियाँ मारने लगा। वो बेफिक्री से मुझे चोदता रहा।

हम दोनों की सिस्कियों को तोड़ते हुए फिर एक आवाज आई।

“सुरक्षा के लिए कंडोम तो लगा लिया होता”, ये अशोक की आवाज़ थी। मेरी सिस्किया एकदम बंद हो गयी. अशोक ने मुझे सौरभ के साथ चोदते हुए देख लिया था।

मेरे पति की आवाज क्या मेरा भ्रम था हां एक सच्ची थी।

मौका देख सुमन की मदद के बहाने मैं सौरभ से चुदवाने लगी थी। पर अशोक ने मुझे सौरभ को चोदते हुए देख लिया था।

पर सौरभ को तो जैसा कोई फ़र्क ही नहीं पड़ा और मुझे चोदता रहा। मैंने उसके कंधों पर जोर की चिकोटी काटी और वो चिपके हुए रुका।

मैं उसके ऊपर से उतरी, तब तक अशोक बेडरूम के दरवाजे से बाहर जाता दिखा। मुझे हमारा वक़्त ऐसा लगा जैसे मेरा संसार लूट गया।

मेरे जोड़े तले जमीन खिसक चुकी थी। सुमन बिस्तार के पास चादर ओढ़े एक अप्राधि की तरह खड़ी थी। मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया, उसने मुझे आवाज क्यों नहीं दी थी। मैंने उसको गुस्से से देखते हुए जैसे बिन कहे सवाल पूछा था।

सुमन ने घबराए हुए जवाब दिया: “मैंने तो आवाज लगाई थी, पता नहीं आपने सुना भी नहीं और करते रहे”

मुझे तो उसकी कोई आवाज़ नहीं आयी थी। कहीं मेरी और सौरभ की सिसकियों में उसकी आवाज दब तो नहीं गई! अब मेरी
किस्मत बुरी थी तो मैं उसको क्या दोष देती।

मुझे लग गया कि लव गुरु बनते मेरे खुद के घर में आग लग चुकी है। मेरा तलाक अब होने ही वाला है। घर वालो और पड़ोसियो को पता चलेगा तो मेरी क्या इज्जत रह जायेगी।

मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और अब मुझे अशोक के गुस्से का सामना करना था। एक पति के लिए इस से बुरा क्या हो सकता है कि वो अपनी बीवी को अपने ही बिस्तर में किसी और मर्द के साथ चोदते हुए पकड़े।

मेरा गला सुख चुका था। मुझे अब बाहर जाना था अशोक से मिलना और मेरे कदम भारी हो चुके थे। बड़ी मुश्किल से अपने जोड़े को घसीटते हुए मैं बाहर हाल में आई। अशोक सोफे पर बैठा टीवी देख रहा था।

मैं हमसे थोड़ी दूर जाकर खड़ी हो गई। मैंने अपनी नजर झुक ली और जमीन पर अपनी नजर गड़ा ली। तभी उस ज़मीन पर मैंने अशोक के पाँव देखे। वो मेरे सामने खड़ा था.

किसी भी पल उसका दंडनाता थप्पड़ मेरे गाल पर पड़ सकता था और मैंने अपने आप को मजबूर बना लिया। उसके हाथ मेरे दो कंधों पर पड़े।

अशोक: “इतना शर्मा क्यों रही हो? मेरी तरफ देखो”

वो शायद मेरा चेहरा ऊपर करवा कर अच्छे से थप्पड़ मार मेरा गाल लाल करना चाहता था। मैंने अपनी मुंडी नीचे ही राखी।

अशोक: “क्या मैं तुमसे नाराज नहीं हूं। मैं खुली सोच वाला पति हूं। जिस काम से तुम खुश हो, उसमें मेरी भी खुशी है।”

मुझे अभी भी अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था जो मैंने सुना था।

मुख्य: “मुझे खेद है”

ये कहते हुए मैं लगभाग रो पड़ी थी। उसने अपनी उंगलियों में मेरी थुड्डी पकड़ी और मेरा चेहरा ऊपर किया। मैंने शर्म के मारे अपनी आंखें ही बंद कर ली थीं।

मेरे झर-झर आँसू निकल पड़े। अशोक ने मेरे वो आंसू पोंछ लिए। वो एक दम शांत था जैसा उसको कोई फ़र्क ही नहीं पड़ा कि मैं अंदर क्या गुनाह कर रही थी।

अशोक: “तुम्हारा काम पूरा हुआ कि नहीं ये बताओ?”

मैंने आंखें बंद कर लीं, अपना बगीचा फिर झुका ली। उसने मेरे कंधों पर हाथ रख मुझे दिलासा दी।

अशोक: “तुम बुरा महसूस मत करो। मेरी नजर में इसमें कुछ भी गलत नहीं है। तुम्हारी खुशी के लिए मैं बहुत कुछ कर सकता हूं। फिर तुम्हें अगर ये करने में मजा आ रहा था तो मुझे दुख क्यों होगा भला। तुम बिल्कुल चिंता मत करो, मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।” अगर तुम्हारा पूरा नहीं हुआ है तो, जाओ पूरा कर लो, मैं बोल रहा हूं, मेरी अनुमति है तुम्हें”

मुझे हमेशा हाय अशोक पर शक था। ऐसे कई मौके आए जब मुझे लगा कि उसके अलावा दूसरी औरत से संबंध होंगे, उसके विचार इस मामले में मुझे आजाद थे, ये पता था पर अपनी बीवी को भी वो इतनी आजादी दे सकता है ये मुझे अब पता चला।

मैं अभी भी मूर्ति बनके नज़र झुकाए खड़ी थी। वो मेरा हाथ पकड़ मुझे बेडरूम की तरफ ले जाने लगा। मैं वही जाम गई थी.

वो लगभाग मुझे खड़ेदाता हुआ मुझे फिर बेडरूम में ले आया। वाहा बिस्तर पर सुमन चादर ओढ़े अभी भी बैठी थी। पास में सौरभ भी बिना कपड़ो के निराश बैठा था।

अशोक: “सुमन, यही तुम्हारा बॉयफ्रेंड है ना?”

सुमन: “हा। क्षमा करें! हम दोनों से हो नहीं पा रहा था तो हमारी ही रिक्वेस्ट पर प्रतिमा मदद कर रही थी। इसमें इनका कोई दोष नहीं। ये तो मन कर रही थी, हमने ही इनको फोर्स किया था”

अशोक: “तुम सब लोग घबराओ मत। मैं नाराज नहीं हूं। तुम लोग अच्छे से कर रहे थे, मैंने ही रंग में भांग डाल दिया। मैं तो सिर्फ सुरक्षा के लिए बोल रहा हूं सुरक्षा के लिए। अगर दोनों का पूरा नहीं हुआ तो पूरा करवा लाया हूं। बताओ पूरा हुआ की नहीं”

सौरभ: “पूरा तो नहीं हुआ था”

अशोक: “हां तो फिर करलो पूरा, मेरी अनुमति है। चलो प्रतिमा कर लो, मुझसे शर्माओ मत। मुझे अपना दोस्त समझो”

मगर मैं अपनी जगह से तस से मस नहीं हुई। अशोक ही मुझे धक्के मारते हुए बिस्तार के पास लाया और जबरदस्त लेता दिया। मैं बार-बार उठने की कोशिश कर रही थी और एक तरफ से अशोक मुझे लेते रख रहा था और सुमन को दूसरी तरफ आ मुझे पकड़ने को कहा।

सुमन और अशोक ने मुझे दोनो तरफ से पकड़ लिया। मुझे समझ नहीं आया ये क्या चल रहा है।

अशोक: “चलो सौरभ, कंडोम लाए हो ना?”

सौरभ: “हा लाया हूँ”

अशोक: “हां तो फिर पहनो जल्दी, पूरा नहीं करना क्या! मगर तुम्हारा लंड तो ठंडा पड़ा है”

हम तीनों अभी भी मुझे शॉक दे रहे थे और अशोक की शकल देख रहे थे, उसके चेहरे पर एक भी झटका नहीं था।

अशोक: “अच्छा बताओ सुमन, तुम दोनो को क्या समस्या आ रही थी। हो सकता है कि मैं भी कुछ मदद करूँ”

सुमन: “सौरभ का सामान बहुत बड़ा है तो मुझे बहुत जलन और दर्द हो रहा था। इसलिए प्रतिमा पहले करके बता रही थी कि, कुछ दर्द नहीं होता”

अशोक: “सामान क्या होता है! लंड बोलो। ये इतना कितना बड़ा लंड है, हम भी देखेंगे। जरा कड़क करके बताओ”

सुमन: “मैं कर देती हूं, आज ही सिखाया है”

अशोक: “पहले उंगली से ट्राई करके तुम्हारा छेद थोड़ा खोल देता तो उसका लंड चला जाता ना। लवगुरु तुमने सिखाया नहीं!”

सुमन: “वो बताया था प्रतिमा ने, उंगली से तो हो रहा था। पर सामान..मतलब लंड ज्यादा बड़ा है तो मैं अंदर ले नहीं पाई”

अशोक: “पहली बार उंगली करना भी तो एक कला है। तुम्हें किसी अनुभवी आदमी की उंगली की जरूरत है। मैं बताता हूं उंगली से छेद कैसे खोलता हूं। सुमन तुम्हें कोई समस्या है तो नहीं मैं तुम्हारे अंदर उंगली डालूं तो!”

सुमन: “अगर मेरी समस्या हल हो जाए तो मुझे कोई समस्या नहीं। मैं तो वैसे भी इसी काम के लिए आई थी। क्या फर्क पड़ता है सौरभ हो या आप।”

अशोक: “ठीक है। प्रतिमा तुम इजाजत दो तो मैं सुमन की चूत का छेद उंगली सी थोड़ा खोल दूं”

मेरे मुँह पर तो कबसे ताला लगा हुआ था। अशोक तो फिर भी मेरी परमिशन ले रहा था, मैंने तो उसकी परमिशन के बिना ही ना सिर्फ उंगली करवा ली थी परंतु लंड तक ले लिया था। मैंने सिर्फ गार्डन हिला कर हमी भर दी।

अशोक ने सुमन को लेने के लिए बोला और मैंने बिस्तार से उतर कर उसको जगह दी। सुमन ने अपना चादर हटाया और अंदर से अपना पूरा नंगा बदन दिखाया।

मैं अशोक का चेहरा ही देख रही थी, जो सुमन के नंगे बदन को देख घूर रहा था और जैसे लार टपका रहा था। मेरा उस पर शक शायद सही था। लडकिया उसकी कामजोरी थी.

अशोक ने सुमन को बिस्तर पर पाव चौड़े कर लेता दिया और वो खुद उसके पास जाकर बैठ गया और उसकी चूत के गाल अपनी दो उंगलियों से चोदते हुए उसका छेद थोड़ा खोल दिया।

मुझे थोड़ा बुरा तो लगा, पर थोड़ी देर पहले मैं खुद किसी दूसरे मर्द से अपनी चूत में उंगली करवा चुकी थी।

अशोक ने अब अपनी एक उंगली सुमन की चूत में धीरे-धीरे डालते हुए अंदर बाहर रगड़ते हुए उसको मजे दिलाना शुरू किया। सुमन अब सिस्किया मारते हुए मजे लेने लगी.

सौरभ: “ऐसी उंगली तो वो पहले ही मेरे से करवा चुकी है”

अशोक: “अरे मैं गोल-गोल घुमा कर थोड़ा बड़ा करूंगा। शादी के बाद मैंने प्रतिमा का भी तो…”

मुझे उसकी भी बात रुकनी पड़ी. वो कैसे हमारे बेडरूम के सीक्रेट लोगो को बता रहा था। अशोक थोड़ी देर और सुमन की चूत में उंगली करता रहा।

मुझे लगने लगा वो उसकी मदद की बजाए एक कुंवारी चूत के खुद मजे ले रहा था। थोड़ी देर बाद उसने उंगली निकाली और सौरभ को तैयार रहने को बोला।

मगर सौरभ का लंड तो कमजोर पड़ा था। अशोक ने उसको अपना लंड कड़क करने को बोला पर सुमन तो पहले ही सीख चुकी थी तो उसने उठकर सौरभ के लंड को रगड़ना शुरू कर दिया।

सुमन: “ये भी प्रतिमा ने सिखाया है, मर्द को तैयार कैसे करते हैं”

अशोक ने मेरी तरफ देखा और मैं शरमाये बिना नहीं रह पाई। कुछ देर रगड़ने के बाद अब सौरभ का लंड फिर से तैयार है। अशोक अब सौरभ के लंड का साइज़ देख इम्प्रेस हुआ। उसको शायद समझ आ गया कि मैंने क्यों सौरभ का लंड पहले अपने अंदर लिया था।

अशोक ने सुमन को लिया और सौरभ को उसकी दोनों टांगों के बीच बैठ कर अपना लंड अंदर डालने की हिदायत दी।

सुमन पाव चोद कर लेती थी और सौरभ उसकी चूत के पास लंड लाकर अंदर डालने का प्रयास करने लगा। उसने अपने लंड की टोपी सुमन की चूत में डाली।

सौरभ ने फिर एक झटके में टोपी के पीछे का एक इंच लंड सुमन की चूत में उतार दिया और उस झटके से सुमन जोर से चिल्लाई और सौरभ को लात मारते हुए अपने से दूर किया और अपनी चूत पकड़ कर बैठ गई।

अशोक: “अरे ये तो पूरा अनाड़ी है, ऐसे एक झटके में थोड़े ही डालते हैं। साइज तो देखना चाहिए। सुमन का पहला मौका है, अगर पहली बार ही इतना दर्दनक होगा तो बेचारी फिर कभी नाम नहीं लेगी। ये दोनों नए हैं, इनको पहली बार किसी जानकर के साथ शुरुआत करनी चाहिए।” चाहिए। प्रतिमा तुमने ठीक ही किया सौरभ के साथ करके।”

मैं अशोक की नियत समझ गई थी। जब से उसने सुमन को नंगा देखा था, ऐसी कच्ची कली को देखा उसका तो मन ही मन हो गया। इसलिए वो चांस मारने की फिराक में था।

मैं उसको क्या दोष देती, थोड़ी देर पहले मैं खुद अपने कपड़े खोल कर सौरभ के साथ चुदवा रही थी।

सुमन: “आप जानकर हो आप ही हमारी मदद कर दो। एक तो मेरे सौरभ उंगली कर रहा था और एक आप, दोनों में फर्क तो महसूस हो रहा था मुझे। आप ही कर दो मेरे साथ, मैं तो वैसे भी सोच कर आई थी आज करना ही है”

अशोक के साथ चुदवाने को अब सुमन भी तैयार हो गई थी। कहीं वो डैमेज कंट्रोल तो नहीं कर रही। उसकी वजह से मैं अपने पति के इंतजार में गिर गई थी तो वो उसके बदले अशोक को मजे देना चाहती थी।

अशोक: “प्रतिमा तुम्हारी अनुमति हो तो मैं सुमन की पहली चुदाई कर देता हूँ। तुम भी तब तक सौरभ के साथ पूरा कर लो, उसको भी पूरा अनुभव मिल जाएगा”

सुमन: “मैं तो रिक्वेस्ट कर रही हूं, आप दोनों मान जाओ तो हम दोनों के भविष्य के लिए अच्छा है। मेरे मन से एक डर निकल जाएगा जो सौरभ ने भुगतान कर दिया है”

मुख्य: “कैसी बात करती हो, ऐसा कोई पति-पत्नी किसी और के सामने करते हैं क्या?”

सुमन: “आपने सौरभ की उंगली लेकर मुझे हिम्मत दी थी, अब हिम्मत के लिए अशोक को चोदने दो मेरे साथ”

उस बेवकूफ़ ने मेरा एक और राज मेरे पति के सामने खोल दिया। अशोक मेरी तरफ देखने लगा और मैं नजरे चुराने लगी।

अशोक: “किसी की मदद के लिए थोड़ा बहुत समझौता करना पड़ता है, इसमें क्या है। प्रतिमा तुमने अच्छी कोशिश की, पर आधी लंबी कोशिश से इनका फायदा नहीं होगा”

अशोक ने बिल्कुल भी बुरा नहीं माना कि मैंने मर्द को अपनी चूत में उंगली और लंड डालने दी थी। मुझे थोड़ी राहत तो मिली थी। अशोक ने तो मेरी इजाजत लेकर सुमन की चूत में उंगली की थी पर मैंने तो उसकी इजाजत भी नहीं ली थी।

अशोक: “प्रतिमा, तुम बोलो तो हम दोनो दोनो की पूरी मदद कर देते हैं”

मेरे मुँह पर तो वैसे ही ताला लगा हुआ था। मैंने बस गार्डन हिला दी. और अशोक को दूसरे निमंत्रण की जरूरत नहीं पड़ी।

अशोक और सुमन एक दूसरे से चुदवाने को तैयार हो गए। अशोक खुद मुझे सौरभ के साथ चोदने को बोल चुका था।

वाहा की परिस्थिती कुछ ऐसी हो गई थी कि मेरे पति सुमन के लव गुरु बन उसको चोदना सिखाएँगे और मुझसे ये चाहते थे कि मैं सौरभ की लव गुरु बन उसको चोदना सिखाऊँ।

अशोक ने जल्दी से अपने सारे कपड़े निकाल दिए और नंगा हो गया। अशोक का लंड भी लंबा था पर सौरभ के जितना मोटा नहीं था, तो शायद सुमन को थोड़ा आसान रहेगा।

अशोक ने पोजीशन ले ली. सुमन की दोनो टैंगो के बीच घुटनो के बाल बैठते हुए उसने अपने लंड की टोपी को सुमन की चूत से छुआ दिया और थोड़ा अंदर ढकेल दिया। सुमन की एक बहन निकली.

अशोक वही चूत के मुँह पर अपना लंड गोल घुमा कर चूत के छेद को जैसा चौड़ा कर रहा था। सुमन मजे के मारे आहेन भर रही थी।

अशोक ने अब एक एक सेंटीमीटर अपना लंड सुमन की चूत में घुसाना शुरू किया। सुमन मुँह खोलने आह आह करने लगी.

धीरे धीरे करते अब अशोक का 3 इंच लंड सुमन की चूत के अंदर जा चुका था और अशोक ने रुक कर सुमन का हाल चाल पूछा कि वो ठीक तो है।

सुमन को हल्का दर्द तो था पर अब कहीं ना कहीं उसने मन में ठान लिया कि वो पहला अनुभव लेकर रहेगी। ऊपर से अशोक का लंड सौरभ की तरह इतना मोटा भी नहीं था कि उसको बहुत ज्यादा दर्द होता है।

अशोक अब अपने लंड का बाकी हिस्सा हिसा भी धीरे धीरे सुमन की चूत में पूरा अंदर उतारने लगा। सुमन अब दर्द से कराह रही थी। उसको सांस लेने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी।

अशोक ने उसको थोड़ा समय देते हुए बिल्कुल कोई हरकत नहीं की और ऐसे ही अपना लंड चूत में घुसा रहा।

थोड़ी देर करने के बाद सुमन थोड़ी शांत हुई। अशोक ने उसको बताया कि अब वो अपना लंड बाहर निकालेगा।

सुमन ने अपने शरीर को थोड़ा टाइट कर लिया और अशोक ने धीरे-धीरे 2-3 इंच लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया।

बहार निकलते वक्त भी सुमन की कराहत चालू थी। अशोक फिर रुक गया, और धीरे-धीरे उसने अपना लंड फिर अंदर उतार दिया।

इस बीच वो लगतार सुमन से बात कर रहा था कि अब वो क्या करने वाला है ताकि सुमन का शरीर तैयार रहे। इसी तरह उसने 5-6 बार अपना लंड 2-3 इंच अंदर बाहर कर दिया था।

सुमन की चूत अब उसके लिए थोड़ा एडजस्ट हो चुकी थी।उसकी कहते अब थोड़ी हल्की हो चुकी थी और सिर्फ सिसकियों ने उनकी जगह ले ली थी। अशोक ने अब सुमन को बोला कि वो पूरा लंड अंदर बाहर करेगा।

सुमन ने उसको इज्जत दी और अशोक ने अब अपना 5-6 इंच का लंड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया था। मगर उसकी रफ़्तार काफ़ी धीमी थी। लंड जैसा हाय सुमन की चूत में जाता वो दर्द के मारे सिसकारी भारती और लंड बाहर निकलता रहता है आह भारती।

ये सब खेल सौरभ प्यासी निगाहों से देख रहा था। मेरी भी ये सब देख गरम होकर इच्छा हो रही थी।

अशोक: “प्रतिमा तुम भी सौरभ की मदद करो, इधर आ जाओ। और सौरभ तुम्हें भी जाने दो”

अब सौरभ जाने दो। मगर मैं ये काम अपने पति के सामने कैसे करूँ! पहला ही पकड़ी गई थी, हालांकी सुमन ने थोड़ा संभल लिया था पर फिर भी मैं गलत तो थी ही।

अशोक: “आओ ना, मैं बोल रहा हूं। मैं इतनी मेहनत कर रहा हूं, तुम भी करो। लव गुरु तो तुम ही हो, नए लोगों को कुछ सिखाओ। पहले इसका लंड कड़क करो।”

उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खींच कर उधर जाने को बोला। मैं अब बिस्तर के दूसरी तरफ आ गई जहां सौरभ लेता था।

अब तो अशोक ने खुद ही बोल दिया था। अशोक तो सुमन को चोद ही रहा था, मैं क्या सौरभ के साथ पूरे मजे नहीं ले सकती! एक अंतरकलह चल रहा था.

होली वाले दिन भी मुझे ये संकेत मिले थे कि शायद अशोक मुझे किसी और के साथ सुला कर खुद कहीं मजे लेना चाहता था। जो आप पहले मेरी कहानी “होली के रंग, कर गए डांग” में पढ़ चुके हैं)

सौरभ को वैसे ही अशोक की अनुमति मिल चुकी थी तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा। मैं सौरभ के पास बैठ गई और उसने मेरा हाथ पकड़ कर उसके लंड पर रख दिया।

उसका लंड एक चुम्बक की तरह मेरे हाथ से चिपक गया और मेरी हथेली अपने आप ही उसके लंड को अपने में समेट कर उसको पकड़ लिया। उसने मेरी कलाई पकड़ कर उसको थोड़ा हिलाया और अब मैं उसका लंड रगड़ने लगी। सौरभ की सिस्कारिया निकलने लगी.

इस बीच अशोक की रफ़्तार अब बहुत ज्यादा थी और वो मध्यम गति से सुमन को बराबर चोद रहा था और सुमन की सिसकियाँ अब लगतर आ रही थी। सुमन को अब चुदाई का मजा पता लग चुका था।

अशोक: “प्रतिमा, अगर सौरभ का लंड तैयार हो तो चोदना शुरू करो”

मुख्य: “मैंने पहले सिर्फ इनको दिखाने के लिए किया था। अब मैं ऐसा नहीं कर सकती”

सुमन: “ये सिर्फ आपके सामने शर्मा रही हैं। आप नहीं होते तो शायद कर लेतीं”

अशोक: “ऐसा है तो मैं अपनी आंख पर पट्टी बांध लेता हूं।”

ये कह कर अशोक ने आगे झुकते हुए तकिये के पास पड़े उसके आई मास्क को उठा कर पहन लिया।

अशोक: “लो अब मैं नहीं देख रहा, तुम कर लो”

अशोक जब खुद ही किसी लड़की को चोदने के मजे ले रहा था तो मैं क्यों अपने अरमानों का गला घोटू! मैंने सोचा मुझे कर लेना चाहिए, वैसे भी सौरभ के मैंने इतने मजे के लिए, वो तो मेरे लिए वैसे ही तड़प रहा है।

ऊपर से सौरभ का मोटा लंड, मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही थी पर शर्म भी आ रही थी। हां फिर एक जलन थी, मेरा पति मेरी आंखें के सामने किसी को चोद रहा है तो मैं क्यों ना करू!

सुमन उधर से मुझे हाथ जोड़ इशारा कर रही थी कि मुझे करना चाहिए। पास में एक चुदायी पहले ही हो रही थी तो मैंने सोच लिया कर ही लेती हूं, वैसे भी अशोक आंख पर बंधी पट्टी से देख नहीं पा रहा था..

अशोक के हाथ पकड़े जाने के बाद उनकी नज़र में एक अपराधी तो बैन ही गई थी, अब वही गुनाह दोहराना मुझे कोई नुकसान नहीं था।

मैंने अपनी पैंटी और शॉर्ट्स फिर खोल दिये और सौरभ के ऊपर फिर चढ़ कर बैठ गयी। मैंने एक बार फिर उसका मोटा लंड अपनी चूत के हवाले कर दिया और उसके तड़पते लंड को भी मेरी चूत की गर्मी में राहत मिली।

अब मैं ऊपर नीचे उछलते हुए चोदने लगी। उसका ध्यान एक बार फिर मेरे शर्ट के अंदर उछलते हुए मेरे मम्मो पर था पर मैं अब उसको वो नहीं दिखा सकती थी, क्यों की पति पास में ही थी।

सौरभ भी बीच बीच में एक दो झटके मेरी चूत में डाल ही देता। पर अधिकतार चुदाई मैं ही कर रही थी। मुझे पता था कि वो अनाड़ी था, उतावलेपन में गलत तरीके से मेरी चूत में लंड डालेगा तो मुझे चोट भी लग सकती थी।

सुमन की सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी। सौरभ भी पहली चुदाई में सिसकियाँ मार रहा था। अशोक की बीच बीच में आहेन निकल रही थी। मैं अपनी आहेन दबा रही थी।

हम पति पत्नी लवगुरु बन कर दो कुंवारो को एक ही बिस्तार पर एक साथ उनकी पहली चुदाई के मजे दिला रहे थे। सुमन की कराहतो से उसके दर्द का पता चल रहा था।

शायद कहीं ना कहीं हमारा निर्णय सही था। सौरभ अगर सुमन को चोदता तो सुमन के लिए बहुत बुरा होता। सौरभ के लिए भी अच्छा था कि उसको मेरी जैसी अनुभव औरत को चोदने का मौका मिला।

सबसे ज़्यादा फ़ायदा तो अशोक का था। उसको एक कुंवारी चूत की सील तोड़ने का मौका मिला था। शायद इसी लालच में तो कहीं उसने मुझे माफ़ नहीं कर दिया था।

तभी सुमन की तेज चीखो के साथ हमारा ध्यान भंग हुआ। वो अब झड़ने के करीब आ गई थी. मुझे याद आया किसी ने सुरक्षा का उपयोग नहीं किया था।

मैंने सौरभ को इशारा किया कि मेरे पास कंडोम पड़े। उसने मुझे एक कंडोम पकड़ा दिया। इस बीच सुमन अपने तकिए को खींचते हुए इतना जोर से सीख रही थी जैसे कोई उसको शिकारी से पीट रहा हो।

वो बाएं और दाएं अपनी मुंडी को तेजी से हिलाते हुए तेज दिखते हुए जीवन में पहली बार झड़ चुकी थी। परंतु अशोक के लंड के पड़ते लगते झटके से वो अब भी रह कर आहेन भर रही थी।

मैंने वो कंडोम सुमन की तरफ उछाला ताकि वो अशोक को दे सके। हालांकी अशोक को कंडोम की ज़रूरत नहीं थी, वो तो वैसे ही बाप नहीं बन सकता। पर सुमन-सौरभ को दिखाने के लिए पहनना जरूरी था।

सुमन ने कंडोम के पैकेट को खोल कंडोम बाहर निकाला और घूरने लगी। वो पहली बार कंडोम देख रही थी। उसे देखते-देखते ही अशोक ने एक दम अपनी गति बढ़ाते हुए तेज आहेन भरना शुरू कर दिया।

अशोक अब कभी भी झड़ सकता था। ऐसे में वो अपना लंड कंडोम पहनने के लिए बाहर नहीं निकलेगा ये मुझे पता था।

झड़ने के बाद वो आई मास्क हटाएगा तो मुझे सौरभ को चोदते हुए देख लेगा। मैंने सौरभ को इशारा किया कि वो सुमन से वो कंडोम ले ले ताकि वो खुद पहन सके।

अशोक को तो कंडोम की जरूरत नहीं पर मुझे तो था कि सौरभ पहन ले। इधर अशोक सुमन पर पूरा लेट गया और अच्छे से ऊपर नीचे रगड़ते हुए सुमन को चोदने लगा।

मैं अब सौरभ के ऊपर से हटी और उसके हाथ से कंडोम ले उसके लंड पर पहन लिया। मैं एक बार फिर सौरभ पर चढ़ने वाली थी कि अशोक घरे धक्के मारते हुए बहुत कड़ा हो गया था। मुझे लग गया वो अब झड़ने वाला है।

मैं सौरभ पर वापस चढ़ते हुए रुक गई। मैं बिस्तर से उतरी और वहां नीचे पड़े शॉर्ट्स को उठा लिया और उसमें से अपनी पैंटी अलग कर निकाल दी। अशोक की आवाज़ अब शांत हो चुकी थी और वो सुमन की कुंवारी चूत को पहली बार नहला चुका था।

मैं अब अपनी पैंटी पहनने लगी कि सौरभ को लगा कि मैं उसको अधूरा छोड़ कर अब जाने वाली हूं तो उसने मेरा शर्ट पीछे से पकड़ मुझे खींचा।

मैं पीठ के बल उस पर गिर पड़ी। मैं तुरेंट फिर उठि। पीछे देखा तो अशोक अभी भी सुमन के ऊपर लेता हुआ था और कोई हरकत नहीं कर रहा था। मैने जल्दी से अपनी पैंटी पहन ली।

जैसे ही मैंने शॉर्ट ऊपर उठा कर पहनना, अशोक उठ कर बैठ गया और अपना आई मास्क निकाला और मुझे शॉर्ट पहन कर देखा।

अशोक: “हमारा तो काम हो गया, तुम शर्माओ मत कर लो पूरा”

मगर मैंने कुछ नहीं बोला. अशोक ने सौरभ को देखा. उसके लंड पर साफ सुथरा कंडोम चढ़ा था।

सुमन: “प्रतिमा को आपके सामने आने में शर्म आती होगी इसलिए नहीं कर रही।”

अशोक: “ठीक है मैं बाहर चला जाता हूं। चलो सुमन अपने कपड़े उठा लो, हम बाहर चलते हैं, इन दोनों को अकेला छोड़ दो।”

अशोक अपने कपड़े उठाये ऐसे ही नंगे बाहर चला गया। सुमन ने भी अपने कपड़े उठाए और बाहर जाते मुझसे कह गई कि मैं अच्छे से सौरभ को चोदना सिखाउ और अशोक की चिंता ना करु, वो बाहर उसको संभाल लेगी।

पति की इजाजत तो मिल ही गई थी और वो अब वाहा भी नहीं। मुझे एक बार फिर वो गलती कर लेनी चाहिए थी!

अशोक और सुमन की चुदाई ख़त्म हो गई थी और अशोक कमरे से बाहर चला गया ताकि मैं खुल कर सौरभ को चोद सकूँ।

सुमन मेरे करीब आई और मेरी कमर पर मेरे शॉर्ट्स पर हाथ रखा और उसे नीचे खिसकाने लगी। मैंने उसकी कलाई पकड़ उसको रोकना चाहा पर तब तक उसने मेरे शॉर्ट्स को पैंटी सहित मेरे कदमों में गिरा दिया।

मैं झुक कर उन्हें फिर उठाने लगी पर उसने मेरे दोनों हाथ पकड़ के लिए और मुझे बिस्तार के किनारे पर बैठा दिया। सौरभ ने पीछे से मेरे कधो पर हाथ रख मुझे थामा। और फिर सुमन ने मेरे पाँव में अटके शॉर्ट और पैंटी को पूरा बाहर निकाल दिया।

पीछे से सौरभ ने अब मेरे हाथों को दोनो तरफ फैलाते हुए पकड़ लिया। सुमन ने अब बिना विरोध के मेरे शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया। मैं हल्की आवाज में उसको मना कर रही हूं कि मेरे कपड़े ना खोलें।

उसने मेरे शर्ट के सारे बटन खोल दिये और फिर सौरभ सुमन ने मिल कर मेरा शर्ट भी उतार कर मुझे पूरा नंगा कर दिया। उन दोनों ने जैसे ही मेरा हाथ छोड़ा मैं उठने लगी पर सौरभ ने मुझे पीछे खींच कर बिस्तार पर लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ कर बैठ गया।

सुमन भी अब बाहर चली गई और जाते-जाते दरवाजा अटका गई। वाहा तीनो लोग यही चाहते थे कि मैं भी हमें हमाम में खुद को रस में डुबो दूं।

मैंने सोचा अब सौरभ को भी चोदने का मौका देना चाहिए। देखु तो सही वो खुद कैसे करता है।

वो मेरी दोनों टैंगो को चौड़ी कर बीच में बैठा और मेरी चूत पर अपनी उंगली रगड़ते हुए उसने अपना लंड वहां से छू लिया।

वो अपने कंडोम चढ़ाए लंड को अब मेरी चूत में धीरे धीरे डालता है। शायद अब वो सीख गया था कि आराम से करना होता है। फिर उसने धीरे-धीरे लंड वापस बाहर निकाला। थोड़ी देर वो ऐसे ही धीरे धीरे अपना लंड मेरी चूत में अंदर बाहर कर रहा है।

उसके बाद वो रुका और एक झटके में अपना लंड तेजी से मेरी चूत में पूरा उतार दिया, मेरी एक आह निकली और वो पूरा मुझ पर लेट गया।

उसका सीने मेरे मम्मे को दबाये मुझे चोदने का मजा लेने लगा।अब तक मैं उसके ऊपर आकर कंट्रोल कर रही थी कि उसका कितना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर होगा पर अब कंट्रोल उसके पास था।

उसने पूरा मजे लेते हुए अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया था और 4 इंच का लंड अंदर बाहर करते हुए मुझे चोद रहा था।

वो अच्छा खासा जोर लगा के चोद रहा था और बाकी का काम उसके लंड की मोटाई कर रही थी। हम दोनो की सिस्किया चालू थी.

थोड़ी देर चोदने के बाद उसकी शक्ति धीरे-धीरे कम होती जा रही थी, पर उसके लंड की रगड़ बर्बाद थी तो मजा बराबर आ रहा था।

मैंने अपने तांगे मोड़ कर उसकी कमर पर लपेट दी थी और अपने दोनों हाथों से उसकी पीठ को पकड़ रखा था।

फिर उसने अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी। मेरा मजा दुगुना हो गया और मैंने आंख बंद कर ली उसको उत्साहित करना शुरू किया कि वो मुझे जोर से चोदे।

शायद मेरी बातें सुनकर या फिर वो झड़ने वाला था इस करण से, चाहे कोई भी वजह रहा हो, वो जबरदस्त तरीके से जोर जोर से मुझे चोदता रहा।

जल्दी ही वो दहाड़े मरते हुए चूत की गहराई में जाकर झड़ गया। इसके बाद उसने कुछ हल्के झटके मारे और शांत सा हो गया। शायद मैंने इतनी देर उस पर चाड कर जो चुदाई की थी, उसका काफी सारा काम पहले ही चुका था।

मेरा काम तो उसने पूरा ही नहीं किया था। मैंने अभी भी आँखें बंद की हुई थी और मैंने दूसरे जोश के साथ उसको मुझे जोर से चोदने को बोलते हुए खुद ही अपनी गांड को ऊपर नीचे उछालते हुए अपनी चूत को उसके लंड पर रगड़ रही थी।

उसकी ताकत तो जैसे ख़तम हो क्योंकि थी पर मेरे जोश और तड़प को देखते हुए उसने हल्के झटके मारना शुरू किया। मुझे झगड़ा था तो मैंने उसको और जोश दिलाया।

मुख्य: “चलो सौरभ, मेरा नहीं करोगे पूरा! जोर लगाओ…आह आह हा ऐसे…और जोर से…जोर से मारो…मेरे मम्मे पसंद हैं ना…चूसने दूंगी तुम्हें…ऊह आआआहह…हाआ ऐसे जोर से करो…वाआहह…उहह”

मेरे मम्मों को चूसने के जोश में उसने पता नहीं कहा से अपनी ताकत फिर से जुटाई। मैं तेज आहेन भारत चिल्ला रही थी और वो शुद्ध जोश के साथ मुझे चोदते हुए सिस्किया मार रहा था।

उसका जोश ठंडा ना पड़े इसलिये मुख्य लगता है उसका नाम लेकर मुझे जोर से चोदने को बोलती जा रही थी और उसकी तारीफ कर रही थी।

मैं: “ऊह आह सौरभ…अपने मोटे लंड से मुझे पूरा मजा नहीं दिलाओगे क्या! उफ़ हा ये वाला मोटा लंड…ये ही चाहिए मुझे…चोद दो मुझे…जितना जोर से चोद सकते हो…डाल दो मेरी चूत में…आआआह उईई माआ…।”

उसने इतना जोर पहले नहीं लगाया था जितना अभी लग रहा था और उसने इसी जोश में मेरा काम पूरा कर ही दिया। मैं झड़ते हुए उसके मोटे लंड की याद में मैं बहुत जोर से 3-4 बार चिल्लाया।

झड़ते वक्त मैंने लगभाग उसे अपनी दोनों टैंगो से उसकी कमर जकड़े हुए उसको दबा ही दिया था। एक बार झड़ने के बाद मैंने अपने टैंगो की पकड़ उसकी कमर से ढीली की और मेरे शांत होते ही उसने भी थक कर हिलना बंद कर दिया।

मैंने अब अपनी आंखें खोली, मुझे शर्मिंदगी महसूस करने के लिए बिस्तार के पास में मेरे पति अशोक और सुमन खड़ी थीं। मेरी काटो तो खून नहीं वाली हालत थी. कहा तो मुख्य पति के सामने शर्मा के चोदने से बच रही थी और अभी भी सौरभ को पूरा उत्तेजित करते हुए मुझे चोदने को बोल रही थी।

मैं इतनी देर कैसे पटाक पटक कर चुदती हुई सौरभ को चोदने को बोल रही थी। शायद अशोक इतनी देर से वो सब देख रहे थे और मजे ले रहे थे।

मैंने सौरभ को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश की पर वो जोंक की तरह मुझसे चिपका हुआ था। फिर उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और मेरे मम्मों को चूसने लगा।

मैने उसकी पीठ पर थोड़ा मुक्का मारते हुए उसको हटाने की कोशिश की पर वो कहा मन्ने वाल था। वो पगलो की तरह कभी मेरे निपल चूसता तो कभी मेरे मम्मे के उभारो को अपने मुँह में भर लेता।

मैं उसको रोकती रही पर वो नहीं मानता। जैसी दुनिया ख़तम होने वाली है और उसको आखिरी मम्मे चूसने को मिले हो। अशोक और सुमन ये देख हंस रहे थे. उनको तो इसमें भी मजा आ रहा था.

अशोक: “तुम्ही ने इसको मम्मे चूसने का लालच दिया था, अब चूसने दो उसको”

मैने जोर लगाते हुए सौरभ को बिस्तार पर एक तरफ पटका और बिस्तार से उतार अपने कपड़े उठाए ऐसे ही नंगी वॉशरूम की तरफ भागी।

वॉशरूम में आकर मैंने महसुस किया कि मैंने कितने मजे के लिए अभी बाहर। फिर दुख भी हुआ कि अशोक ने मुझे मजे लेते हुए पकड़ लिया था। शुद्ध शरीर में एक कपकपी सी हो रही थी। अपने आप पर थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था कि मैंने एक ही गलती दो बार की थी।

कपड़े पहनने के बाद भी मैं बहुत देर तक बाहर नहीं आई। जब लगा बाहर कोई आहट नहीं है तो मैं बाहर आ गई और चादर ओढ़ कर लेट गई।

थोड़ी देर बाद अशोक कमरे में आया। वो मेरे पास आकर चादर में घुस गया और मुझे अपनी बाहों में भर लिया।

अशोक: “तुम्हारे दोनों स्टूडेंट गए। बोल रहे थे बहुत मजा आया। तुम्हें भी मजा आता है तो छुपाती क्यों हो? मुझे तो आज बहुत मजा आया। तुम्हारे सामने सुमन को चोदने में भी और तुम किसी के साथ चुदते हुए मजे लेते देखना भी। मैं तो कभी से ये एक्सपेरिमेंट करना चाहता था, पर सोचा तुम्हें कैसे मनौ। आज तो सब कुछ अपने आप ही हो गया।

मैं कुछ नहीं बोलती और मुंह दूसरी तरफ कर लेती रही। मुझमें एक अपराध बोध था. जिस काम के लिए मैं हमेशा अशोक को बुरा समझती थी वो ही काम तो मैं खुद कर रही थी।

अशोक: “तुम बुरा मत महसूस करो। मेरी कसम, सच सच बताओ तुम्हें अच्छा लगेगा की नहीं”

मुख्य: “हा”

अशोक: “तुम बोलो तो हम ये प्रयोग करें”

मुख्य: “नहीं, मजा आया इसका मतलब नहीं कि हम इसे अपनी आदत बना लें। समाज की नजर में ये सब गलत हैं”

अशोक: “हमने बंद कमरे में किया है, समाज को कैसे पता चलेगा। ये राज चार दीवारों के बीच ही रहेगा।”

मुख्य: “वो सौरभ तो भोला भला था इसलिए मैं मान गई। वर्ना लोग कितने खराब होते हैं। वो फ़ायदा उठा सकते हैं। पहले भी लोगों ने फ़ायदा उठाया ही है ना!”

अशोक: “हम भरोसेमंद लोगों को ही चुनेंगे। बहुत सारे कपल्स होंगे जो हमारी तरह ऐसे प्रयोग करना चाहते होंगे।”

मुख्य: “मगर मैं इसको अपनी आदत नहीं बनाना चाहती। हमारे रिश्ते पर इसका गलत असर होगा। सोचो तुम किसी और को चाहने लगो और मैं किसी और को तो! हमारी शादी तो टूट जाएगी, हमारे बच्चों का क्या होगा!”

अशोक: “तुम इतना ओवर एनालिसिस क्यों कर रही हो! हम साल में 1-2 बार ही करेंगे। इससे तो हमारा भरोसा और भी बढ़ेगा। काई पति पत्नी छुप कर ये काम करते हैं। हम दोनो एक दूसरे की परमिशन से एक साथ करेंगे”

मुख्य: “फिर भी, तुम्हें ये ग़लत नहीं लगता?”

अशोक: “कुछ ग़लत नहीं। हम कई बार रोल प्ले भी तो कर चुके हैं। हम कुछ और किरदार बनाते हैं।”

मुख्य: “पर ऐसे कमो में हम किसका भरोसा करे!”

अशोक: “वो मुझे छोड़ दो। मैं अच्छे कपल ढूंढ़ लूंगा। मैं क्या बोलता हूं, हम एक नहीं 2 से ज्यादा कपल्स के साथ ये करते हैं। क्या इससे हमें ज्यादा चॉइस मिलेगी और ज्यादा मजा आएगा। इतने कपल्स में कोई एक तो हमारी पसंद का मिलेगा”

मुख्य: “मुझे डर लग रहा है। तुम क्या करना चाह रहे हो”

अशोक: “अरे कुछ नहीं होगा, कुछ गड़बड़ हुआ तो हम मना कर देंगे। एक बार कोशिश करके तो देखो”

मैंने अशोक के सामने मजे लेकर उसको मौका दे दिया था कि वो आगे ऐसे और प्रयोग करे। खुद मजे लेने के बाद मैं उसको आगे के लिए मना कैसे बोलती हूं।

लव गुरु बनने के चक्कर में मेरी जिंदगी में एक बहुत बड़ा बदलाव आ गया, जहां हम पति पत्नी एक दूसरे की इज्जत से दूसरे में अपनी खुशी ढूंढने का प्रयोग करने को तैयार थे।

इसके बाद कभी सौरभ मेरे घर नहीं आया। क्या घटने के 2 हफ्ते बाद ही उन दोनों की इंटर्नशिप ख़त्म हो गई और वो हमारे शहर से चले गए। 2 महीने बाद सुमन की बुआ ने खबर दी कि सुमन की सगाई होने वाली है।

मैं खुश थी कि मेरी वजह से उसका रिश्ता तय हो गया था और वो खुश होगी। हालांकी इसके लिए मुझे त्याग करना पड़ा था।

इस घाटना के करीब 1 साल बाद मुझे एक मेल मिला, जो सौरभ ने भेजा था। उसमें उसकी शादी का कार्ड और एक पत्र था जिसका मुझे धन्यवाद बोलते हुए अपनी शादी में जरूर आने का निमंत्रण था।

उसने बहुत मन से वो कार्ड भेजा था और मुझे उसका अपनेपन से भेजा निमंत्रण अच्छा लगा। उसने बताया कि वो शादी से नफ़रत करता था पर मेरी वजह से उसका मन परिवर्तन हुआ। उसने उसकी मम्मी के सामने मेरी इतनी तारीफ की थी, उसकी मम्मी भी मुझसे मिलना चाहती थी।

उसके साथ मैंने जो भी किया था मेरी नज़र में गलत था। मैं अब फिर से उसका सामना नहीं कर सकती थी।

मगर मेरे पति ने जब वो कार्ड देखा तो अनहोनी ने फैसला किया कि हमें जाना चाहिए। क्यों की शादी हमारे शहर के पास में ही थी। काफ़ी अनाकनि के बाद मुझे मन्ना पड़ा।

मैं और अशोक उसकी शादी में गये थे। सौरभ उसकी माँ का इकलौता लड़का था। उसकी कोई असली या चचेरी बहन नहीं थी तो उसकी मां ने मुझे ही मुहबोली बहन बनने का बोलकर उसकी कुछ रस्में निभाने को कहा था।

मुख्य शायद पहली ऐसी बहन थी जिसने अपने मुहबोले भाई के साथ चुदवाया था और अब उसकी शादी में बहन की रस्म निभा रही थी। मुझे मन में बहुत बुरा लग रहा था पर सबके सामने मन भी नहीं बोल सकता था। अशोक को तो सब पता ही था, तो उसने मुझे सिखाया मुझे कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

यार मुझे बहुत बुरा लग रहा था। पर बहन बनने का एक फ़ायदा भी हुआ। सौरभ ने बहन का कर्ज उतारते हुए मुझे एक राज बताया कि उस दिन जो हम चारो के बीच हुआ था वो सब एक्सीडेंटली नहीं हुआ था। हमारे सबके पीछे अशोक और सुमन का हाथ था। उन्हें मिल कर मुझे ट्रैप करने के लिए प्लान करना था, ताकि अशोक मुझे रेंज हाथ पकड़ सके और उसके पीछे अशोक का क्या मकसद था ये सौरभ को भी नहीं पता था।

हालांकी मुझे अब पता चल गया कि अशोक का मकसद क्या था। उसका मकसद था कि पहले तो वो मुझे चोदते हुए हाथ पकड़ें, जिस से मैं डर के कामजोर पड़ जाऊं और फिर वो मुझ पर मेहरबानी दिखाते हुए माफ कर दे और उसके बदले मुझे दूसरे कपल्स के साथ एक्सचेंज करने के लिए मना सके।

जब से सौरभ से पता चला कि मेरा चोदते हुए पकड़े जाने के बाद मेरे पति का प्लान था और सुमन ने उसका साथ दिया था, मैं गुस्से से भर चुकी थी।

पर ये सच जानने में मुझे काफी देर हो गई थी। क्या एक साल के गैप में मैं और अशोक कपल एक्सचेंज के इवेंट में जा चुके थे। मेरी आगे की कहानियों में जानिए हमारा ये पार्टनर एक्सचेंज का प्रयोग, क्या क्या रंग दिखता है।

मुझे बहुत दुख हुआ कि कपल एक्सचेंज में मुझ पर जो कुछ भी बीता उसके जिम्मेदार अशोक और सुमन हैं।

अशोक पर तो मेरा वैसा भी भरोसा नहीं था, सुमन पर! मैंने उसके लिए क्या नहीं किया और उसने मुझे ही धोखा दे दिया। वो तो मेरी भी गुरु निकली, मुझे ही डबल क्रॉस कर दिया।

गुस्सा तो मुझे बहुत आया, और सोच लिया जिस दिन मुझे सुमन मिलेगी उससे मैं जिन कर बदला लुंगी। पति पर भी गुस्सा था, पर उनका मैं क्या बिगाड लुंगी। उनको मुझसे जो फ़ायदा उठना तो उठे ही चुके थे। उनका कुछ बुरा करूंगी तो मेरी ही जिंदगी में आग लगेगी।

मुझे लगता था कि मैं सुमन की लवगुरु हूं। पर मैंने तो सिर्फ सुमन को अच्छा दिखाने में मदद की थी। उसकी शरीरिक जरूरत का लवगुरु तो अशोक निकला, जिसने मेरी पीठ पीछे सुमन की मदद की थी। उसके अहसान के बदले सुमन ने अशोक की मदद की थी मुझे फ़साने में।

मैंने अशोक को इस बारे में कुछ नहीं बताया कि मुझे उसकी चाल पता चल गई थी। अब उसको बताने का कोई फ़ायदा भी नहीं था। मैं उसको जरूरत पड़ने पर ही बताना चाहती थी। हम वापस घर तो आ गए पर मैं बहुत निराश थी। मुझे सुमन को सबक सिखाना था कि असली गुरु कौन है।

मुझे जल्दी ही मौका मिल गया। 2 महीने बाद ही सुमन की बुआ ने बताया कि सुमन की शादी होने वाली है। फिर सुमन ने शादी का कार्ड भी भेजा, मुझे विशेष रूप से आमंत्रित किया था कि उसके जीवन में आए बदलाव में मेरा बहुत बड़ा हाथ था।

वैसे देखा जाए तो मेरे जीवन में जो बदलाव आया था उसमें सुमन का भी हाथ था। उसकी वजह से मैं एक गलत रास्ते पर जाने के लिए मजबूर हो गई थी। मुझे रह-रह कर वो समय याद आ रहा था जब मेरे पति ने मुझे सौरभ के साथ चोदते हुए रेंज हाथो पकड़ा था।

मैंने अब वहां लिया कि मैं सुमन से बदला लेकर रहूंगी। सुमन की वजह से मेरे पति ने मुझे रंगे हाथ पकड़ा था, अब मैं भी उसको चोदते हुए उसके नए पति से रंगे हाथ पकड़वाउंगी।

मगर मैं सुमन की जिंदगी तो ख़राब नहीं करना चाहती थी। हमसे बदला लेने के चक्कर में कहीं उसकी शादी खतरे में ना पड़ जाए।

मैं नहीं चाहती थी कि मेरे कारण उसके घर वाले भी बदनाम हो जाएं और दूल्हे के घर वाले भी परेशान हों, और उनको नुक्सान हो।

मुझे कोई ऐसा तरीका लगाना था कि सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। सुमन का भी मुझे फ़ोन आया कि वो चाहती थी कि मैं उसकी कुछ शॉपिंग में मदद करूँ और शादी से पहले ही उसके घर पहुँच जाऊँ। मैं जितनी जानकारी थी जूता रही थी।

सुमन से पता चला कि उसके होने वाला पति ने मेडिकल की पढ़ाई की है और अभी-अभी प्रैक्टिस शुरू की है। मैंने अपने मास्टर प्लान पर काम शुरू कर दिया।

सुमन की कोई सहेली तो थी नहीं, तो उसने मुझे खास तौर पर बोला कि मुझे पूरी शादी के दौरन उसके साथ ही रहना है। वो तो मुझे 2 दिन जल्दी आने को बोल रही थी पर मुझे अपने प्लान को भी फुल प्रूफ करना था।

उसकी शादी वाले दिन दोपहर को मैं उसके घर पहुँची। मुझे देख वो बहुत खुश हुई। उसकी जिंदगी का इतना महत्वपूर्ण मौका था और वो अपने लुक और कपड़ो को लेकर थोड़ा कन्फ्यूज थी।

मन ही मन मैंने भी सोचा, मेरे आने से ये जितना खुश हैं उतना ही दुखी मैं अपने जाने से पहले करके जाऊंगी।

सुमन अपने घर में अकेली लड़की थी, तो उसके पिता ने लड़के को अच्छा खास दहेज भी देने का इंतेजाम किया था। वैसे तो सुमन अब काफी अच्छी दिखने लगी थी पर फिर भी दूल्हा चाहता था तो अपने जैसा कोई डॉक्टर ढूंढ सकता था। शायद उसे भी दहेज का लालच मिल गया था या कोई लड़की नहीं मिलेगी।

सुमन ने लड़के का फोटो दिखाया तो कुछ मामला समझ में आया। लडका दिखने में साधारण था.

सुमन ने भी सोचा लड़का डॉक्टर है तो भविष्य सुरक्षित है। अब सब कुछ मुझे तो नहीं लगता। सुमन साधारण लड़कियों से थोड़ी अच्छी दिखती थी तो लड़के को भी कोई समस्या नहीं हुई होगी हा करने को।

लड़के को देखते ही मैं समझ गई कि ये मेरा आसान शिकार होना चाहिए। सुमन से बात करके पता चला कि अब वो नौकरी करने लगी थी पर उसका इन मामलों में ज्ञान अभी भी उतना नहीं था।

शादी का प्रोग्राम कुछ इस तरह था कि शाम को बारात आएगी और स्वागत के बाद वरमाला और कुछ दूसरी रस्म पूरी की जाएगी। आधी रात होते होते शादी पूरी हो चुकी होगी। मगर विदाई का कार्यक्रम अगली सुबह होना था।

मैंने ये सब प्रोग्राम पहले ही पता लगा लिया था और उसके अनुरूप मेरा प्लान भी था। उनकी शादी के बाद से सुबह विदाई तक के समय में मुझे अपना काम ख़त्म करना था।

एक चीज मुझे वहा जाकर पता चली कि उनके रिवाज के अनुसार दूल्हा दुल्हन को पांव में एक धागा पहनाया जाता है, जो कि दुल्हन के ससुराल में शादी के बाद ही खोला जाता है।

जब तक ये धागा नहीं खुलता तब तक लड़के की सुहागरात नहीं हो सकती थी। ये रिवाज का मुख्य फ़ायदा उठाने वाली थी।

मुझे पता था मैं बहुत बड़ा जोखिम लेने जा रही थी। थोड़ी सी भी गड़बड़ हुई तो मैं बड़ी मुसीबत में प्रशंसक थी। मैंने दोपहर से ही अपने प्लान पर काम शुरू कर दिया था। मैंने सुमन के दिमाग में बातें शुरू कर दी थीं।

मुख्य: “सुमन तुम खुश तो हो ना इस शादी से?”

सुमन (शर्माते हुए): “हा बहुत! आपकी वजह से ही मैं ऐसा दिखने लगी हूं और अच्छे लड़कों के रिश्ते आने शुरू हुए”

मुख्य: “बाकी सब ठीक हैं ना?”

सुमन: “मतलब!”

मुख्य: “तुम्हारे डॉक्टर साहब तो इंजेक्शन लेकर तुम्हारी सर्जरी के लिए तैयार होंगे”

सुमन: “कैसी सर्जरी!”

मुख्य: “सुहागरात की बात कर रही हूं। उन्हें तो तैय्यारी कर ली होगी, तुम्हारी तैय्यारी कैसी रह रही है?”

सुमन: “इसके लिए भी कोई तय्यारी करनी पड़ी है क्या?”

मुख्य: “अब ये मत कहना कि तुमने कोई तैयारी नहीं की है अभी तक”

सुमन: “मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है!”

मुख्य: “अच्छा ये बताओ तुम्हारा और दूल्हे के बीच अभी तक कुछ हुआ नहीं!”

सुमन: “वो तो दूसरे शहर का हैं, बस सगाई पर मिले थे, फिर फोन पर बातें होती हैं”

मुख्य:”दूल्हे के सुहागरात को लेकर कितने अरमान होंगे और तुम उसके अरमानों पर पानी फेर दोगी तो! पता चला तुम करवा ही नहीं पाई या बहुत जल्दी झड़ गई तो उसको पूरा मजा कैसे आएगा!”

सुमन: “उस दिन आपने और अशोक ने सब कुछ सिखाया तो था”

मुख्य: “उस बात को कितना टाइम हो गया है पता है! इस बीच तूने कभी नहीं कराया”

सुमन: “मुझे तो बस एक अनुभव लेना था वो ले लिया। अब मुझमें आत्मविश्वास है कि मैं पवन के साथ करवा लुंगी”

पवन उसके होने वाले पति का नाम था।

मुख्य: “एक साल पहले तुमने एक बार किया और उसके दम पर तुम कह रही हो कि तुम्हारी सुहागरात की तैयारी पूरी हो गई। काम से कम शादी के 2-3 दिन पहले से तैयारी करनी पड़ती है, ताकि शरीर सुहागरात के लिए तैयार रहे और बहुत देर तक मजे ले पाएं”

सुमन: “पर इसके लिए तैयारी की क्या ज़रूरत है?”

मुख्य: “तुम सच में बहुत भोली हो। तुमने कभी बैचलर पार्टी का नाम सुना है?”

सुमन: “हाँ थोड़ा बहुत”

मुख्य: “ये दूसरे देशों का फैशन है। लड़कियों की पार्टी में लड़कों को बुलाया जाता है जो उनको मजा दिलाता है। इसी तरह लड़कों की पार्टी में किराय पर लड़कियों को बुला कर लड़के मजे लेते हैं। इस बहाने वो प्रैक्टिस करते हैं अपनी सुहागरात की”

सुमन: “मगर वो विदेशो में होता है, हमारे यहाँ तो नहीं होता!”

मुख्य: “आज कल होने लगा है। पर हमारे देश में तो ये काम खुले खुले में नहीं होता ना। तो लड़कियां दूसरे तारिके अपनाती हैं”

सुमन: “मगर आपने तो कहा था कि शादी के पहले लड़की नहीं दिखती है। पहली बार अपने पति से ही करवाना चाहिए”

मुख्य: “जो लड़की शादी के पहले दूसरे मर्दों के साथ प्रैक्टिस नहीं करती, वो खुद ही प्रैक्टिस कर लेती है या अपनी सहेलियों की मदद लेती है”

सुमन: “मगर बिना लड़कों के प्रैक्टिस कैसे करते हैं?”

मुख्य: “पहले तो टूल नहीं होते थे, तब उंगली या घरेलू सामान से काम चलते थे। अब तो मार्केट में टूल आने लग गए हैं। रबर के लंड मिलते हैं बाजार में, जिस से लड़की प्रैक्टिस कर लेती हैं”

सुमन: “तो मैं अब क्या करू?”

मुख्य: “इतना जल्दी तो वो टूल मिलेगा नहीं”

सुमन: “उंगली से कर लेते हैं ना”

मुख्य: “उससे कुछ नहीं होगा। मैंने बताया ना, 2-3 दिन तक प्रैक्टिस करनी पड़ती है। अब तुम्हारे पास एक ही तारिका बची है”

सुमन: “क्या?”

मुख्य: “किसी लड़के की मदद लेनी पड़ेगी। तुम्हारी नज़र में कोई लड़का है। कभी तुम्हें घूरता हो, या तुम्हें लगता है तुम मुझमें दिलचस्पी रखते हो”

सुमन: “मुझे तो ऐसा कोई याद नहीं। जो भी होगा देखा जाएगा”

मुख्य: “तुम्हें अपनी शादी सफल करनी है या बिगाड़नी है?”

सुमन: “मगर मैं अब क्या करूँ, आपने पहले बताया होगा तो अच्छा था। मैंने बोला था ना आपको जल्दी आने के लिए”

मुख्य: “तुम्हारी सुहागरात कब है? उसके पहले कोई इंतेजाम करना होगा”

सुमन: “वो तो कल रात को होगी। पर मुझे ये ठीक नहीं लग रहा। शादी तो आज ही है। इतने मेहमान होंगे, ये ठीक नहीं”

मुख्य: “मुझ पर भरोसा है ना? मैं सब संभाल लूंगी। तुम बस अपना मन बना लो कि तुम्हें करना है। 2-3 दिन सही, एक बार अभ्यास कर लो तो भी फायदा मिलेगा”

सुमन: “नहीं रहने देते हैं। मुझे बहुत डर लग रहा है”

मुख्य: “तुम्हें अभी डर लग रहा है तो सोचो सुहागरात में क्या होगा! पहली रात अगर पति खुश नहीं होगा तो जिंदगी भर वो बात मन में रहेगी। फर्स्ट इंप्रेशन इज लास्ट इंप्रेशन”

सुमन: “बात तो ठीक है पर अब क्या करें?”

मुख्य: “शादी में शाम को इतने लोग आएंगे, कोई ना कोई तो मिल ही जाएगा। तुम चिंता मत करो, मैं हूं ना।”

सुमन: “मगर शादी में कितने रिश्ते होंगे, तुम सब कैसे मैनेज होगे?”

मुख्य: “12 बजे तक शादी ख़त्म हो जाएगी, उसके बाद मैं किसी और के साथ तुम्हारी सुहागरात का इंतेजाम करवा दूंगी। हमें बस एक कमरे की जरूरत है जहां कोई ना आए”

सुमन: “बाराती सब कम्युनिटी हॉल में रहेंगे। वाहा बहुत सारे रूम हैं। मैं पापा को बोल कर हम दोनों के लिए एक अलग रूम ले लुंगी”

मुख्य: “फिर तो काम हो गया”

सुमन: “कुछ गड़बड़ तो नहीं होगी ना? मेरे तो हाथ जोड़ी कांप रहे हैं”

मैं: “हम सबकी चिंता अब मुझ पर छोड़ दो। चलो तुम्हें ब्यूटी पार्लर नहीं जाना। मैं चलती हूं तुम्हारे साथ। रास्ते में कम्युनिटी हॉल भी जाकर आएंगे ताकि लोकेशन देख ले कैसा प्लान करना है”

सुमन: “अच्छा हुआ आप आ गयी, वरना मेरा क्या होता!”

मुख्य: “मुझे पता था, तुम्हें ये सब सलाह देने वाला कोई नहीं है। अब मैं जो बोलू वो करती रहना”

मैंने कम्युनिटी हॉल जाकर कमरा पसंद करवा लिया और आस-पास की जगह के बारे में भी मालूमात कर ली। उसके साथ ब्यूटी पार्लर जा कर उसका दुल्हन वाला मेकअप करवा लिया।

शाम होते होते उसके साथ-साथ मैं भी तैयार थी। मैंने एक लहंगा पहना और ऊपर चोली। साथ में एक दुपट्टा भी था, जो कि चोली से झांकते मेरे खुले बदन को ढक रहा था।

वैसे मैं ज्यादा मेकअप लगाती नहीं, पर उस दिन जरूरी था, अपने प्लान को पूरा करने के लिए मुझे किसी को इम्प्रेस करना था।

मेरी नज़र बराबर उस मर्द को ढूंढ रही थी जो कि सुमन को चोदने के लिए मान जाए और मेरे अनुसर काम करे। दुल्हन साइड के रिश्तेदारो में से तो किसी को ले नहीं सकती थी। हमसे मामला बिगड सकता था। मुझे इंतज़ार था बारात का, उसमें से किसी को पकड़ना था।

हम लोग कम्युनिटी हॉल में जहां शादी का प्रोग्राम होना था। हमने जाते ही अपने चुने हुए कमरे पर कब्ज़ा कर चाबी अपने पास रख ली थी। किसी और को हमारे कमरे में आने भी नहीं दिया था।

रात को बारात भी धूम धाम से आई। खिड़की से मेरी नज़र अपने शिकार को ढूंढ रही थी। बार-बार मन में दुआ कर रही थी कि सब कुछ प्लान के हिसाब से हो जाए बस।

मैं अब दुल्हन बनी सुमन को लेकर वरमाला के लिए ले गयी। स्टेज पर दुहन के साथ खड़ी थी। नीचे से सारे लोगो का ध्यान दुल्हन में कम और मुझ पर ज्यादा था।

सब को सुमन ने यहीं बताया था कि मैं उसकी सहेली हूं। भले ही मेरी शादी को 7 साल हो गए थे और एक बच्चा भी था पर मैंने अपने आप को जिस तरह से बनाए रखा था, सब लोगो को ये गलतफहमी थी कि मैं कुंवारी लड़की हूं।

सुमन की बुआ ने बताया कि कुछ लोगों ने मेरे बारे में पूछा भी था कि कौन सी लड़की है और उनके समाज की हूं या नहीं, उनके लड़के के लिए बहुत मुझे ढूंढ रहे थे।

रस्में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थीं और सबके बीच दूल्हे का दोस्त रॉकी लफंगे वाली हरकत कर रहा था।

वैसे तो दूल्हे के दोस्त मजाक करते ही हैं, पर वो मजाक की आड़ में मेरे साथ कुछ ज्यादा ही फ्लर्ट कर रहा था। उसको भी ये गलतफहमी थी कि मैं दुल्हन की कुंवारी सहेली हूं।

बहुत देर तक उसको इग्नोर किया, फिर गुस्सा भी आया। फिर सोचा उसको बता ही देती हूं कि मैं शादीशुदा हूं और उसकी अच्छी खबर लेती हूं।

मगर फिर मैंने सोचा मुझे भी सुमन को फ़साने के लिए ऐसे ही लड़के की तलाश थी जिसका किरदार थोड़ा ढीला हो। उसके बाद मैंने उसके फ़्लर्ट का प्यार से जवाब देना शुरू कर दिया।

उसको पहले तो अजीब लग कि इतनी देर में मैंने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी और अब अचानक से हमसे प्यार से बात कर रही थी। फिर उसको ग़लतफ़हमी हुई कि मैं शायद उसमें दिलचस्पी रखता हूँ।

सुमन को फ़साने के लिए मुझे एक लड़के की तलाश थी और शायद वो लड़का मुझे रॉकी में मिल गया था।

मैं दुल्हन की पूंछ बनी हुई थी और वो दूल्हे का। इस चक्कर में हम चारों साथ-साथ हैं। ऐसा नहीं था कि सिर्फ रॉकी का ध्यान ही मुझ पर था। दूल्हा बना पवन भी दुल्हन को देखने की आड़ में मुझे ताड़ रहा था।

कभी खबर हमारी नज़र भी मिल जाती है और मैं नकली मुस्कान के साथ उसको अच्छा सा रिस्पॉन्स देती है जैसे वो कोई राजकुमार हो। सबके बीच में मैंने उसकी तारीफ भी बहुत की, क्यों कि आख़िर बकरा तो उसको भी बनाना ही था।

पवन भी मुझे अपनी साली मानकर मेरे साथ हंसी मज़ाक कर रहा था और रॉकी का साथ दे रहा था मुझे छेड़ने के लिए।

मैंने भी पवन को बोल दिया था कि जीजाजी साली आधी घर वाली होती हैं तो मेरा भी ध्यान रखना। पवन मेरे मुँह से तारीफ़ सूरज फूला नहीं समा रहा था।

अभी तक सब कुछ मेरे प्लान के हिसाब से सही जा रहा था। मैंने पवन और रॉकी को शीशे में उतार दिया था। मैं एक फूल थी और वो मेरे भंवरे बन चुके थे।

सुमन को बोलकर मैंने उसकी स्कूटी को कम्युनिटी हॉल में ही मंगवा लिया था और चाबी मेरे पास ही थी। Uski Jarurat Baad Me Padne Wali The.

10 बजे तक अधिकारी मेहमान खाना खाकर जा चुके थे। डोनो तरफ के कुछ खास रिश्तेदार ही बचे थे। जैसा की सोचा था, आधी रात के बाद शादी की सारी रस्में ख़त्म हुई।

बचे खुचे खास लोग को सामुदायिक भवन की दूसरी मंजिल पर बने कमरे दिए गए। मैंने और सुमन ने तो पहले ही अपना कमरा रिजर्व कर लिया था।

अधिकारी लोगो के लिए नीचे हाल में ही बिस्तर लगा दिए थे। उनको सिर्फ एक चेंजिंग रूम दिया था। इसी तरह दूल्हे और उसके 3 दोस्तों के लिए एक अलग कमरा दिया गया।

मैं सुमन के साथ उसके कमरे में आ गई थी और उसको बताया कि मैं रॉकी को तैयार कर लुंगी उसके साथ चुदाई करने के लिए। सुमन पहले तो घबरा गई, क्यों रॉकी तो उसके पति पवन का जिगरी दोस्त हैं। मगर मैंने उसको ये बोलकर शांत कराया कि ऐसे काम करके क्यू कोई किसको बताएगा। वो खुद नहीं फंस जाएगा. फिर सुमन मान गई.

मुझे अपने प्लान के लिए पवन और रॉकी के अलावा किसी को काम पर नहीं रखना था। सुमन को उसके कमरे में थोड़ा इंतजार करने का बोलकर मुख्य दूल्हे के कमरे के पास आई और मैंने रॉकी को अलग से बाहर बुलाया। वो कुत्ते की दम की तरह जिभ लपलपता मेरे पीछे आ भी गया।

मुख्य: “रॉकी ​​तुम्हें मैं कैसी लगी?”

रॉकी: “बहुत जोर का लगी। क्या मुझसे शादी करने का इरादा है? मैं एकदम तैयार हूं, आज ही कर लेते हैं”

मुख्य: “तुम शादी के काबिल भी हो या नहीं। सिर्फ नाम के रॉकी हो या सच में हो?”

रॉकी: “आजमा के देख लो। बस एक मौका तो दो परी”

मुख्य: “मेरा नाम तो परी नहीं”

रॉकी: “जैसा दिखोगी वैसा ही तो नाम दूंगा। कपड़ों में एक दम परी लग रही हो”

मुख्य: “इतनी पसंद आयी मैं तुम्हें?”

रॉकी: “इति अच्छी लड़की कभी देखी ही नई मैंने”

मुख्य: “तो फिर क्या इरादा है?”

रॉकी: “इरादे तो नेक नहीं हैं। तुम इजाज़त दो तो अपना इरादा दिखा दो”

मुख्य: “इरादे कहा दिखाओगे? यहाँ खुले में”

रॉकी: “अंदर कमरे में चलते हैं”

मुख्य: “वाह तो तुम्हारे दूसरे दोस्त भी बैठे हैं”

रॉकी: “तुम ऑर्डर करो, सबको भगा देता हूँ”

मुख्य: “तो फिर भगाओ बाकी सबको”

रॉकी: “भागा तो दू, पर पहले बताओ तुम्हारा इरादा क्या है?”

मुख्य: “मैं अंदर आऊंगी, बातें होंगी, फिर अपना इरादा बताऊंगी”

रॉकी: “5 मिनट दो, अभी सबको बाहर निकलता हूं। दूल्हे को रहने दो? मेरा जिगरी है। हम दोनो के बीच कुछ छुपा नहीं हैं”

मुख्य: “दूल्हे से कोई समस्या नहीं है। बाकी के दोनों दोस्तों को भगा दो। सुबह तक वापस नहीं आना चाहिए वो दोनों”

रॉकी: “अच्छा तो रात भर का प्रोग्राम है! मैं अभी आता हूं काम खत्म करके। तुम मुझे यहीं मिलो”

कुछ मिनटों के बाद वो अपने 2 दोस्तों को कमरे से खड़ा हुआ बाहर लाया और उनको नीचे हॉल में दूसरे लोगो के साथ सोने का बोल भागा दिया। फिर मेरी तरफ मुस्कुराहट देखने लगा।

रॉकी: “देखो कर दिया काम। और बोलो क्या ऑर्डर है”

मुख्य: “तुम तो बड़े काम के आदमी लगते हो”

रॉकी: “तुमने मौका ही नहीं दिया पहले”

मुख्य: “तुमसे एक जरूरी काम है, कर पाओगे?”

रॉकी: “मैं तो जरूरी कमाओ के लिए ही बना हूं”

मुख्य: “रहने दो तुमसे नहीं हो पाएगा”

रॉकी: “ऐसा कोई काम नहीं जो मैं नहीं जी कर पाउ। बोल कर देखो”

मुख्य: “कभी किसी लड़की को खुश किया है? वैसा वाला खुश”

रॉकी: “अरे मैं तो हर काम का एक्सपर्ट हूं। तुम बस हां बोलो और मजा देखो। तुम्हारी चीख नहीं निकल दी तो मेरा नाम नहीं”

मुख्य: “मेरी नहीं किसी और की गालियां निकलनी हैं”

रॉकी: “क्या यार, मुझे लगा तुम्हारे साथ करना है। तुम हां बोलो, तुम्हारे साथ करने को तैयार हूं।”

मुख्य: “मेरे साथ करने का मौका दूंगी, उसके बदले क्या कर सकते हो?”

रॉकी: “तुम मुझे अपना साथ देने दो, जो बोलूंगा”

मुख्य: “मैं तुम्हें मुझे चोदने दूंगी, मगर पहले मेरा एक काम करो। किसी और को चोदना है”

रॉकी: “पहले अपने साथ करने दो। फिर एक क्या 10 लड़कियों को भी चोद दूंगा”

मुख्य: “मैं किसी भी नई चीज को इस्तमाल करने से पहले परखती हूं। मेरे साथ करने से पहले तुम्हें टेस्ट देना पड़ेगा किसी और के साथ करके”

रॉकी: “चाहे जो टेस्ट ले लो मेरी जान। बोलो किसको चोदन हैं”

मुख्य: “सुमन को”

रॉकी: “क्यू मज़ाक कर रही हो? मेरे ऐसे ही मजे ले रही हो!”

मुख्य: “सच बोल रही हूँ। बोलो करोगे मेरा काम पूरा?”

रॉकी: “तुम मज़ाक तो नहीं कर रही? तुम गंभीर हो? मुझे फ़सा तो नहीं कर रही?”

मुख्य: “मैं गंभीर हूं। बोलो क्या बोलते हो, करोगे?”

रॉकी: “कुछ समझ नहीं आ रहा। सुमन की अभी-अभी शादी हुई है, वो क्यों करने देगी। मुझे सुमन के साथ जबरदस्ती नहीं करनी। मैं वैसा नहीं हूं”

मुख्य: “सुमन भी तैयार है, कोई जबरदस्ती नहीं करनी”

रॉकी: “मगर वो क्यों तैयार होगी! उसकी तो आज ही शादी हुई है, कल सुहागरात है!”

मुख्य: “तुम आम खाओ, पेड़ मत गीनो”

रॉकी: “नहीं, मुझे गड़बड़ लग रही है। ऐसे टाइम पर कोई कैसे मान सकता है”

मुख्य: “तुम्हें यकीन नहीं तो मैं तुम्हें हमसे मिलवाती हूं”

अब मैं रॉकी को लेकर सुमन के रूम तक आई। सुमन की शकल पर डर साफ था. रॉकी को देख उसकी हालत खराब थी।

मैं: “सुमन तुम रॉकी के साथ चुदवाने को तैयार हो ना?”

सुमन तो सिर्फ मेरी शकल देखते ही रह गयी. फिर एक नजर रॉकी को देखते हुए रोनी सूरत बना ली। मुझे डर लगा कहीं वो घबरा कर मन ही ना कर दे।

मैं: “घबराओ मत। मैंने रॉकी से बात कर ली है। वो हमारी मदद करने को तैयार है। वो कभी भी पवन को इस बारे में नहीं बताएगा। क्यों रॉकी तैयार हो ना?”

रॉकी: “हा…मतलब सुमन तैयार हैं तो ठीक हैं।”

सुमन: “तुम वादा करो कभी पवन को नहीं बताओगे”

रॉकी: “सज्जनों वाला वादा”

रॉकी अभी भी कन्फ्यूज है कि सुमन ये सब क्यों करवा रही है और वो भी शादी की रात। सुमन अभी भी दुल्हन के कपड़ो में सजी थी। उसको तो बिन दूल्हे ही सुहागरात मनाने का मौका था।

मुख्य: “सुमन को सुहागरात के पहले एक अनुभव लेना है ताकि तुम्हारे दोस्त को कल सुहागरात में खुश रख सके। तुम इसकी चुदाई अच्छे से करके इसकी प्रैक्टिस करवा लो”

रॉकी मुँह खुला रख मेरी बातें सुन रहा था। उसको अब तक लगता था कि वो ही खुली सोच रखता है, पर यहाँ दो लड़कियाँ बहुत दूर की सोच के साथ खड़ी थीं।

मुख्य: “रॉकी, तुम्हें कंडोम लाना पड़ेगा”

रॉकी: “ले आता हूँ”

मुख्य: “सुमन तुमने बताया था ना कि यहां 24 घंटे वाली मेडिकल शॉप है जो रात को खुली रहती है”

सुमन: “हां वो सरकारी अस्पताल के बाहर हैं”

सुमन ने उसको रास्ता बता दिया और उसको सुमन की स्कूटी की चाबी पकड़ दी। मैंने पहले ही पता कर लिया था कि वह दुकान वहां से 20 मिनट की दूरी पर थी और उसको आने जाने में 40-50 मिनट लगने वाले थे।

मुख्य: “रॉकी ​​सुनो, कंडोम लेने तुम अकेले जाओगे। तुम क्या लेने जा रहे हो किसी को मत बताना”

रॉकी: “ठीक है। पवन मुझे ढूंढेगा तो?”

मुख्य: “पवन की चिंता मत करो। मैं पवन के साथ रहूंगी, वो तुम्हें नहीं ढूंढेगा”

रॉकी: “ठीक है मैं चलता हूँ”

मुख्य: “वापस आकर सीधे इसी कमरे में आ जाना। बाहर दस्तक देना”

रॉकी अब वहां से रावण हुआ।

मुख्य: “सुमन मैं अब पवन के पास जा रही हूं, मुझे उसको व्यस्त रखना है।”

सुमन: “मुझे बहुत डर लग रहा है”

मैं: “अब पीछे मत हटना, अब तो रॉकी को भी पता लग गया है। अब नहीं किया तो वो गुस्से में पवन को भी बता सकता है। डरो मत और हमारे दिन कैसे मजे के लिए वैसे ही लेना। जितनी अलग-अलग पोजीशन तुमने उस दिन देखी थी वो सब अभी ट्राई कर लेना। याद है ना?”

सुमन: “आपको वाली पोजीशन तो अब भी याद है। मैं वैसे ही करूंगी। सब ठीक तो होगा ना?”

मुख्य: “तुम अगर आज मजे लेकर करोगी तो आगे हमेशा सब ठीक होगा। जैसे ही रॉकी आ जाए मुझे एक मिस कॉल करना, ताकि मैं ज्यादा ध्यान रखूं और किसी को तुम्हारे रूम की तरफ नहीं आने दूं”

सुमन: “ठीक है। काम होते ही फिर मिस कॉल कर दो?”

मुख्य: “हां ठीक है, पर चुदाई शुरू होती ही मिस कॉल करना मत भूलना”

सुमन: “नहीं भूलूंगी”

मुख्य: “ठीक है मैं पवन को संभालती हूं। बिलकुल मत शरमाना, असली सुहागरात की तरह चुदवाना। एकदुम खुल कर मजे लेना। कपड़े खोलने में शरमाना मत”

सुमन: “मैं पूरा ध्यान रखूंगी”

मैं सुमन को वही छोड़ कर उसके कमरे से बाहर आई। पर आते-आते उसके कमरे के इंटरनल लॉक की चाबी लेते आये। उसको चोदते हुए पकड़वाना जो था.

मैं अब सीधा पवन के कमरे तक पहुंच गई और दस्तक दी। पवन तो वैसे भी अकेला था. उसने दरवाजा खोला और मुझे देख खुश हो गया।

पवन: “क्या आप अकेले हैं। रॉकी ने मेरे बाकी दोस्तों को बाहर निकाल दिया ये बोलकर कि आप और सुमन यहां बात करने आने वाले हैं। आप अंदर आ जाओ, सुमन नहीं आई?”

मुख्य: “नहीं, सुमन तो थक कर सो गयी है”

मैं अब कमरे में आ गई और दरवाजा लॉक कर दिया।

पवन: “रॉकी आपसे मिलने गया था, कहाँ गया वो?”

मुख्य: “वो मुझे थोड़ा बदन दर्द था तो उसको दवा लेने बाहर भेजा है”

पवन: “इसकी क्या ज़रूरत थी। डॉक्टर घर में मौजुद हैं”

मुख्य: “मैंने सोचा आज आपकी शादी है तो आज आपको डिस्टर्ब ना करुं”

पवन: “क्या बात कर दी। आपने ही तो कहा था कि साली आधी घर वालो होती हैं। फिर घर वाली को कोई समस्या है तो मैं ही हल करुंगा ना। बताओ कहां पर दर्द है”

मुख्य: “आप चिंता मत करो। मैंने सोचा आप अकेले होंगे तो बता दूं और थोड़ी देर आपका साथ भी दे दूं”

पवन: “बहुत अच्छा किया आप आ गई। आपसे अच्छे से बात भी नहीं हो पाई हमें धोखा दिया। पहले मैं आपका दर्द कम देता हूं। बताइए कहां दर्द है”

मुख्य: “थोड़ा कमर और पीठ में दर्द है”

पवन: “चलो आप यहाँ बिस्तर पर लेट जाओ। मैं देखता हूँ”

एक तरफ मैंने रॉकी को सुमन के साथ सेट कर दिया था तो दूसरी तरफ मैं पवन के कमरे में आ गई अपने प्लान के लिए और उसे भी तैयार करने के लिए।

रॉकी को कंडोम लेन का बोल बाहर भेज दिया ताकि इतने समय में मैं पवन को तैयार कर सकूं। मैं पवन के कमरे में गई बदन दर्द के बहाने और वो मेरे दर्द का इलाज करने के लिए तैयार था।

मैंने अब अपना दुपट्टा निकाल कर रख दिया, जिस से मेरी ढकी हुई पतली कमर और सीना अब दिखने लगा। पवन मेरा बदन देखता ही रह गया।

मुख्य: “क्या हुआ? आपकी तबीयत तो ठीक है ना। आप थके हुए लग रहे हैं!”

पवन: “कुछ नहीं। तुम्हारे आते ही सब थकन मिट गई। तुम आराम से ले लो मैं चेक करता हूँ”

मैने अब अपने खुले बालों को मोड़ते हुए सर पर झुदा बनाने लगी। दोनों हाथ ऊपर जाते ही मैंने छठी को फूल कर आगे कर दिया।

मेरे डोनो मम्मे चोली के ऊपर से उबर कर थोड़ा बाहर दिखने लगे। पवन की आँखें मेरी छटी देख कर चमक उठी।

बाल सिर पर बांधने के बाद मैं बिस्तर की तरफ मुड़ी। मेरी चोली के पीछे से काफ़ी खुली खुली सी थी। मेरी नंगी गोरी पीठ देख पवन की नियत और भी खराब होगी ये मुझे पता था।

मैं अब बिस्तर पर जाकर सीने के बल उल्टा लेट गई। मैंने अब पवन की तरफ देखा। मेरी नंगी पीठ, कमर और उबरी हुई गांड को देख शायद उसको अभी खुद के ऑपरेशन की जरूरत थी।

पवन आंखें फाड़ कर मेरे फिगर को ही देख रहा था। उसने कुर्ता और पायजामा पहन रखा था। कुछ सेकंड में ही उसके पजामे में उसका लंड खड़ा हो चुका था।

मैं ये सब करना तो मजबूरी थी पर नहीं चाहती थी। सुमन को किसी के साथ चोदते हुए देखने के बाद पवन भड़क सकता था और शादी तोड़ सकता था। मैं इतना बुरा तो नहीं हो सकती थी कि सुमन की शादी ही तुड़वा दूं। पवन को शांत रखने का एक ही तरीका था कि जो गलती सुमन करेगी वो ही गलती पवन भी करेगी।

इसी आधार पर मैं पवन को मना सकती थी कि वो सुमन से शादी ना तोड़े और उसको माफ कर दे। मगर
सुमन का पकड़े जाने के घाव हमेशा सुमन के साथ रहेंगे जैसे मुझे हुआ था।

पवन जब कुछ देर तक ऐसे ही खड़े मुझे लेता हुआ देखता ही रहा तो मुझे ही उसको बुलाना पड़ा। रॉकी के सुमन को चोदना शुरू करने से पहले तक मुझे अपना काम ख़तम करना था।

मुख्य: “क्या हो गए जीजाजी! कहाँ खो गए?”

पवन थोड़ा झिम्प सा गया और आगे बढ़कर बिस्तार पर मेरे पास आकर बैठ गया। मैंने उसका कैम्पटा हुआ हाथ अपनी कमर पर महसुस किया और मैंने जानबुझ कर एक लम्बी आह भारी”

पवन: “क्या हुआ? याहा बहुत दर्द हो रहा है?”

मुख्य: “नहीं, आपका हाथ लगता ही थोड़ी राहत मिली”

पवन ने अब खुश होकर मेरी कमर के अलग-अलग भागो में अपनी उंगली सहलाना शुरू कर दिया। बीच बीच में अपनी उंगली मेरे कमर पर दबा कर पूछ भी लेता कि वाहा दर्द हो रहा है या नहीं।

वो डॉक्टर का काम और मेरे शरीर के मजे ज्यादा ले रहा था। फिर उसने फोकस मेरी पीठ पर किया जो चोली के बीच से बड़ी खिड़की के रूप में दिख रही थी।

वो अपनी सारी उंगली मेरी पीठ पर घुमाए मजे ले रही थी और मैं भी गरम हो रही थी। मैं अब ऐसे ही सिसकियाँ मारता हूँ उसको सुना रही थी।

मैं: “आह जीजाजी, आपके हाथों में तो जादू है। दर्द तो गायब हो गया।” आप ऐसे ही मसाज करते रहोगे तो मुझे नींद आ जायेगी”

पवन अब आराम से चेक करने की बजाये मसाज मूड में आ गया था। वो अपने दोनो हाथों से अब मजे लेकर मेरे शरीर को महसुस कर रहा था।

मैने भी अपनी सिस्किया बंद करते हुए धीरे धीरे शांत हो गई। मैं आंख बंद कर लेट गई ताकि उसको लगे कि मैं सो गई हूं।

वो लगतार बोले जा रहा था जैसे मुझसे बात कर रहा हो। पर उसको मुझसे कोई जवाब नहीं मिल रहा था। फिर वो रुक गया.

उसने मुझे आवाज़ लगाई, पर मैंने जवाब नहीं दिया। उसको अहसास हो गया कि मैं सो चुकी हूं। उसने अब अपना हाथ बहुत ही हल्के से मेरे शरीर पर घुमाना शुरू किया। मेरे सोए हुए होने का फ़ायदा उठा वो अब पागल तारिके से मेरे बदन को छू रहा था।

उसकी उंगली रह-रह कर कमर से मेरे लहंगे में एक इंच अंदर घुस जाती है। जल्दी ही उसने अपनी पूरी हथेली खोल कर मेरे लहंगे के ऊपर गांड पर रख दी।

इतनी देर से मेरे गांड के उपहार को देखने के बाद उसे लहंगे के ऊपर से छूकर उसको करार मिला। फिर हल्का हल्का सा हाथ हिला कर मेरी गांड पर फेरते हुए महसूस करने लगा।

उसने एक बार फिर मुझे आवाज़ लगाई पर मैंने जवाब नहीं दिया। उसने मेरी चोली पर बंधे धागे की वो गांठ खोल दी जो गर्दन के नीचे बांधी थी।

अब वो मेरी गर्दन से पीठ तक ऊपर से नीचे पूरा हाथ घूम रहा था। फिर उसने चोली की दूसरी डोरी की गांठ पकड़ ली जो मेरे पीठ पर बांधी थी।

थोड़ा खिंचते हुए उसने दूसरी गांठ भी खोल कर पीछे से चोली पूरी हटा दी थी। मैं अब पीछे से टॉपलेस हो चुकी थी।

वो दोनों हाथों को ऊपर से नीचे मेरे कंधे से लेकर कमर तक घुमा रहा था.

मेरे अंदर हलचल हो रही थी. कुछ ही सेकंड में उसने अपना हाथ हटा दिया। मुझे लगा कहीं वो डर तो नहीं गया।

मगर फिर मैंने अपने जोड़े में सारी सी महसुस की। मेरा लहंगा अब मेरे जोड़े पर ऊपर उठ रहा था और साथ ही उसका हाथ मेरी चिकनी टांगों पर लहंगे के साथ ऊपर आ रहा था। घुटनो तक आते वो रुक गया।

फिर वो अपना हाथ मेरी जोड़ी पर और लहंगे के थोड़े अंदर डाल मेरी जांघो के थोड़े भाग को छूने लगा।
समय जा रहा था और मुझे जल्दी से काम ख़तम करना था। कहीं ऐसा न हो कि पवन शुरू भी न हो और उधर रॉकी शुरू हो जाए।

मुझे सुमन का मिसकॉल अभी भी नहीं आया था। मगर वो कॉल करना भूल भी सकती है। मेरा सारा प्लान फेल हो सकता है.

मैने अब अपनी आंखें खोल हल्की सी आह भारी। ये देख उसने जल्दी से अपना हाथ मेरी टैंगो से हटा दिया और मेरा लहंगा थोड़ा नीचे खींच दिया। मगर मेरी चोली तो पीछे से खुली थी। वो बैंड कैसे करता है का उपयोग करें।

पवन: “वो चोली की गांठ बीच में आ रही थी तो मैंने सोचा खोल कर मसाज कर दू”

मुख्य: “कोई बात नहीं, जैसा आपको ठीक लगे। मुझे तो नींद आ गई थी।”

पवन: “अब कैसा है तुम्हारा दर्द?”

मुख्य: “ये दर्द तो ठीक हो गया। पर आप किसी समस्या वाले डॉक्टर को जानते हैं?”

पवन: “मुझे बताओ क्या समस्या है। मैं गाइनो ही हूँ”

मुझे अच्छे से पता था कि वह स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। अगर वो ना बोलता फिर भी मैं तैयार थी।

मुख्य: “वो मुझे वहां कभी-कभी अंदर बहुत दर्द होता है। अंदर कुछ महसुस होता है। इसलिए चेक करवाना था”

पवन: “तो मैं हूँ ना। अभी चेक कर लेता हूँ। चलो सीधा चलो अब”

चोली तो मेरी पीछे से खुली थी ही। पर मैंने परवा कि बिना अपनी चोली को सीने से पकड़ा और पलटी मार कर सीधा लेट गई। चोली मेरे सीने पर ढीली हो ऐसे ही मम्मो को ढके पड़ी थी। मैं चोली पकड़े हुए लेती रही.

पवन: “चलो अपने पाँव मोड़ लो। मुझे उंगली डाल कर चेक करना पड़ेगा”

मुख्य: “आपके पास दस्ताने नहीं हैं क्या? आपके हाथ गंदे हो जायेंगे”

पवन: “मेरी चिंता मत करो। हाथ गंदे होने से ज्यादा जरूरी तुम्हारा चेकअप है”

मैं अब अपने पांव मोड़ के लिए। पर लहंगा अभी भी मेरे जोड़े को ढके हुए था। बेसबरी से उसने मेरा लहंगे को ऊपर उठाया और लहंगे का निचला बॉर्डर पकड़ा।

इस से पहले कि वो मेरा लहंगा उठाता, मैंने अपने कमर के साइड में बंधे लहंगे के नादे की तरफ इशारा किया।

मुख्य: “लहंगा यहाँ से खुलेगा”

वो तो लहंगा उठा कर ही काम चला लेता पर अब मैं खुद उसको लहंगा खोलने की इजाजत दे रही थी। अँधेरे को क्या चाहिए दो आँखें!

उसने एक बड़ी मुस्कान के साथ मुझे धन्यवाद बोला और लहंगे के किनारे को छोड़ कर अब लहंगे के नादे को पकड़ उसकी गांठें खोल दी। पवन ने अब लहंगे को कमर से थोड़ा ढीला किया और कमर से नीचे खींच लिया।

मैंने भी अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाया उसके लिए जगह बनाई और उसने लहंगे को मेरी गांड से नीचे उतारते हुए घुटनों से होते हुए मेरे जोड़े से बाहर निकाल दिया।

वो अब मेरी खुबसूरत नंगी जांघो और पैंटी को देख पा रहा था। उसके बाद उसने बिना समय गवाए अपने दोनों हाथ मेरी कमर के दोनों तरफ लाकर मेरी पैंटी को पकड़ उसे भी लहंगे की तरह मेरे जोड़े से पूरा बाहर निकल मुझे नीचे से पूरा नंगा कर दिया।

मैंने शर्मा के अपनी दोनो तांगे बंद कर राखी थी और छुट छुपा दी।

पवन: “अरे शर्माओ मत। मैं अभी जीजा नहीं, डॉक्टर हूँ”

उसने मेरी दोनों टैंगो को डर कर बीच में जगह बनाई और पहली बार मेरी चूत के दर्शन किये।

उसके हल्के से कांपते हुए हाथ अब मेरी चूत की तरफ बढ़े। उसके लिए ये किसी सपने से कम नहीं था। पूरी शादी के दौरन वो मुझे नज़रे बचा कर घूर रहा था और अब मैं उसके सामने नंगी थी।

उसकी एक उंगली जल्दी ही मेरी चूत की दरार के सहारे थोड़ा अंदर ऊपर नीचे रगड़ रही थी। इतनी देर पीठ और कमर की मालिश से मेरी चूत में पानी वैसे ही थोड़ा बहुत बनने लगा था।

उसकी उंगली की पागल रगड़ से अब वो पानी बाहर भी आने लगा था। उसकी उंगली धीरे-धीरे अब मेरी चूत के अंदर जाना शुरू हो गई थी।

मैं नशीला चेहरा बनाने आहेन भरने लगी थी। मैंने अपनी आवाज़ अब पागल कर ली थी। उसने अब उंगली रगड़ना बंद किया और उंगली मेरी चूत के छेद में अंदर उतार दिया।

जैसे जैसी उंगली अन्दर गई मैं लम्बी सिसकियाँ मारने लगी। वो मुझे रिलैक्स रिलैक्स बोलते हुए शांत होने को कह रहा था।

उसने अपनी उंगली मेरी चूत के अंदर पूरी दाल अंदर ही उंगली घुमाना शुरू किया। मैं जोर जोर से सिस्किया मारे मजे ले रही थी.

पवन: “जैसा ही तुम्हें दर्द हो मुझे बताना”

ये कहकर उसने अपनी उंगली को मेरी चूत से बाहर निकाला और फिर धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लगा। मेरे सर मुझे नशा चढ़ने लगा.

वो मुझे लगता है पूछे जा रहा था कि दर्द हो रहा है और मैं बगीचे में हिलते हुए आहे भर रही थी।

मेरे लिए वो मजा थोड़ा असहनीय हुआ तो मैंने अपना एक हाथ उठा कर उसके कांधे को पकड़ लिया। पीछे से मेरी चोली वैसे ही खुली थी तो हाथ उठते ही मेरी चोली मेरे मम्मो से थोड़ा ऊपर उठ गई और कंधे से निकल गई।

उसने अपना वो हाथ मेरे नंगे कंधे पर रख दिया और अपनी उंगली लगाता मेरी चूत में चलता रहा। मैं अब भी उसका कंधा पकड़े थी और मेरा एक मम्मा चोली से बाहर आ चूका था।

वो मेरे कंधे को दबाए मुझे रिलैक्स होने को कह रहा था। उसका मेरे कंधे पर पड़ा हाथ अब आगे बढ़ते हुए कंधों के अगले हिस्से और सीने के पास था।

उसका वो हाथ ऊपर आता जा रहा था और जल्दी ही मेरे मम्मे के उभारो को छू गया। उसने अपनी हथेली मेरे सीने पर फैला दी।

उसने फिर मेरा वो हाथ पकड़ा जो मैंने उसके कंधे पर रखा था और उसे मेरे सिर के ऊपर ले जाकर रख दिया। जिस से मेरी चोली मेरे एक मम्मे से पूरी हट गई। चोली हटे ही उसको मेरे पूरे नंगे मम्मे दिख गए और उसका गला सुख सा गया।

मुख्य: “ओह जीजाजी, मेरे कपड़े निकल गये”

पवन: “हिलो मत, चेक अप होने तक ऐसे ही रहो थोड़ी देर”

इसी तरह उसने मेरा दूसरा हाथ भी उठाया और उसको भी सर के पास कर दिया। मेरी चोली मेरे दोनों हाथों की कलाई में अटकी थी और सिर के ऊपर थी।

मेरे दोनो गोल बड़े मम्मे उसकी आंखो के सामने थे। उसकी नज़र अब मेरी चूत की बजाय मेरे मम्मो पर थी। मगर उसकी उंगली लगती थी मेरी चूत को चोद रही थी।

अब ये मुहबोली साली क्या जीजा को चोद कर उसको ठंडा कर पायेगी ताकि वो अपनी दुल्हन को अपने दोस्त के हाथों से चुदते हुए सहन कर पाये

मेरे चेकअप के बहाने पवन ने मुझे पूरा नंगा कर दिया था और मेरे मम्मों को देखते हुए मेरी चूत में उंगली करने के मजे लेता रहा।

पवन: “दर्द हो रहा है अभी यहाँ?”

मुख्य: “नहीं, अभी ऊपर हो रहा है चाटी पर”

ये कहना था कि उसने एक हथेली से मेरा एक मम्मा दबा लिया। फिर वो मम्मे को अच्छे से मसलने लगा।

पवन: “यहाँ दर्द हो रहा है?”

मुख्य: “हा, डोनो मैं हो रहा है”

उसने जल्दी से अपनी उंगली मेरी चूत से निकाली और दूसरी हथेली से मेरा दूसरा मम्मा दबोच मसलने लगा। जैसा आता घूंटथे हैं वैसे वो अब मेरे डोनो मम्मे मसल रहा था।

मुख्य लगतार आहेन भर मजे ले रही थी. दीवार पर लगी घड़ी पर नजर गई, आधे घंटे से थोड़ा ज्यादा समय हो चुका था। समय जा रहा था और मुझे जल्दी करनी थी।

मुख्य: “आआहह जीजाजी, मीठा मीठा सा दर्द हो रहा है अब”

मैंने अपने हाथों में फैंसी चोली को पूरा बाहर निकाल दिया।

उसने जैसा मेरा इशारा पाकर मेरे मम्मे छोड़े और अपना कुर्ता निकाल दिया। फिर अपना बनियान निकला ऊपर से नंगा हुआ।

वो बिस्तर पर ही खड़ा हुआ और मुझे उसका कड़क लंड उसके पजामे को फाड़ बाहर आता दिखायी दिया। उसने जल्दी से अपना पायजामा और अंडरवियर भी निकाल दिया।

वो मेरी दोनो तांगे चोदी कर बीच में बैठ गया। मैंने अपने पैर लम्बे कर दिए और वो मेरे ऊपर लेट गया। उसका सीना मेरे मम्मो पर पड़ा और मेरे मम्मो दब गये।

उसके होंठ सीधे मेरे मुंह की तरफ आए और मैंने मुंह दूसरी तरफ कर उसके होठों को अपने गालों पर ले लिया। वो पगलो की तरह मेरे गालों को चूमने लगा।

फिर अपना लंड पकड़े मेरी चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा। मैं अपना हाथ नीचे ले गई और उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया उसके लंड को अपनी चूत के छेद के पास ले गई।

वो आगे पीछे हो ऐसे ही झटके मार रहा था।मुख्य उसका लंड अपनी चूत के छेद के थोड़े अंदर ले जाकर छोड़ दिया और उसने एक झटके के साथ मेरे अंदर अपने लंड का काफी हिस्सा अंदर डाल दिया।

फिर वो धीरे धीरे जोर लगा कर पूरा लंड मेरी चूत में घुसा चुका था। वो अब बिना रुके लगतर तेज तेज झटके मार मुझे चोदने लगा।

पवन: “ओह प्रतिमा, आआह, मजा आ गया। अब चैन मिला, कितनी देर तड़पाया मुझको”

मैं: “जीजाजी, ये क्या कर रहे हैं। शादी सुमन से और सुहागरात मेरे साथ…आआह धीरे करो…कोई सुन लेगा”

पवन: “अरे, ऐसी ख़ूबसूरत साली हो तो कौन धीरे करेगा….आआआहह आआहहह”

मैं अपना प्लान पहले ही बना कर आई थी तो इंजेक्शन लगवाने के लिए आई थी, जिससे मैं प्रेग्नेंट नहीं हो सकती थी। वैसे भी उसको इन सब चीज़ों की कहा चिंता थी।

थोड़ी देर पहले ही उसकी शादी हुई थी और अभी वो किसी और लड़की के साथ अपनी सुहागरात मना रहा था। चोदते हुए वो लगता है अपने होठों पर लाना चाह रहा था।

पर मैं एक तरफ़ मुँह मोड में उससे बच रही थी ताकि वो मेरे होठों को ना चूस पाए। सर के नीचे तकिया था तो मैं ज्यादा मुंह नीचे नहीं ले जा पा रही थी और रह-रह कर उसके होठों का थोड़ा हिस्सा मेरे होठों को साइड से छू ही जाता।

मैं भी मन में सोच रही थी, ले ले थोड़ी देर मजे पवन, फिर अपनी खुद की बीवी को अपने ही दोस्त के साथ चोदते हुए देखेगा तो इसका मजा गायब हो जाएगा।

चोदते हुए उसने मेरी हालत तो ख़राब कर दी थी। तलवार की तरह अपना लंड चलाते हुए वो मेरी चूत पर वार कर रहा था।

पवन: “ओह्ह प्रतिमा, अपने होठों पर किस करने दो”

मुख्य: “मेरे नीचे के होठों की हालत तो आपने खराब कर रखी है अब क्या ऊपर के होठों को भी खराब करोगे! नीचे के होठों से कपड़े में छिप जाएगी मगर ऊपर के होठों को कैसे छुपाऊंगी? आप मेरे नीचे के होठों से ही काम चलाओ जजजी”

पवन: “ओहो…दोनो होठों को एक साथ चूमने का मजा लेना है मुझे..इधर करो मुंह..”

फिर उसने अपने दोनों हाथों से मेरे चेहरे को पकड़ कर सीधा कर दिया। मैंने अपना चेहरा फिर से कोशिश की कि पर उसने दोनों हाथों से कास कर मेरा चेहरा पकड़ा था।

उसके होंथ अब मेरे होंथ की तरफ बढ़े। मेरे पास बचने का कोई रास्ता नहीं था। मैंने अपने होंथ बंद कर लिए।

उसने अपने होठों को मेरे होठों पर रख दिया। मैंने हौंथ नहीं खोले तो उसने चोंच मारना शुरू कर दिया। मगर मैंने अपने होंथ नहीं खोले।

फिर उसने मेरी चूत में 2-3 बहुत जोर के घरे झटके मारे। मेरे पांव तो खुले ही थे तो मुझे झटका बहुत अंदर तक महसुस हुआ और दर्द के मेरी आह निकली और मेरे होंठ खुल गए।

इस से पहले कि मैं संभल पाती उसके होठों ने मेरे एक नाजुक गुलाबी होठों को अपने अंदर समा लिया। फिर वो मेरे होठों को बुरी तरह चूसने लगा जैसे मुँह में चॉकलेट रख ली हो।

वो अपने होठों से मेरे होठों को हल्के हल्के काट रहा था। तभी मेरे फोन की घंटी बाजी। मैं ख़ुशी के मारे फुली नहीं समाई।

शायद सुमन का फोन था और रॉकी ने उसे चोदना शुरू कर दिया था। फ़ोन की घंटी सुन उसने मुझे चूमना बंद कर दिया।

मुख्य: “शायद सुमन का फ़ोन होगा। मुझे जाना है”

ये सुन उसको दुगुना जोश आ गया और रुक रुक कर तेज तेज घरे झटके मारने लगा और साथ ही तेज आवाज निकलने लगा। मैं भी उसके झटको से दर्द के मारे सिसकियाँ निकालती रही।

मेरे पास अब बिल्कुल समय नहीं था। मैंने उसकी पीठ पर हाथ रखा और खुद ही नीचे से धक्के मारने लगी। हम दोनो एक साथ धक्के मार एक सुर में तेज तेज सिसकियाँ मार रहे थे।

मैं: “ओह जीजाजी, जोर से”

पवन: “हा ये .लो उहह ये लो आआहह”

Main: “Jijaji jaldi…oooyii maa …aur jor se ….aur andar daalo jijaji …aaayeeee ….tej maaro aur tej”

पवन: “आआययी प्रतिमा….ऊऊहह …आआहह ….”

और अगले कुछ मिनट में हाय पवन ने अपना गरम पानी मेरी चूत में खाली कर दिया।

वो मेरे ऊपर ही लेता था पर मैंने उसको अपने ऊपर से हटा लिया और पहले फोन चेक किया। वो सुमन का ही मिस कॉल था.

मुख्य: “सुमन जाग गई है। शायद मुझे ढूंढ रही है। कहीं यहां ना आ जाए। आप जल्दी से कपड़े पहन लो”

मुख्य बिस्तर से उठी और अपनी पैंटी उठा कर पहन ली और फिर चोली और लहंगा पहन लिया। तब तक पवन ने भी अपना कुर्ता पायजामा पहन लिया।

कपडे पहने उसके हाथ जोड़ी अभी भी कांप रहे थे। मैं अब दुपट्टा ओढ़ कर तैयार थी। आइने मैंने देखा तो मेरी लिपस्टिक मेरे होठों के आस पास फेली हुई थी।

पवन ने जब मेरे होठों को जबरदस्त चूमने की कोशिश की थी तब ये सब हो गया था। मैंने हाथों से जल्दी से फेली हुई लिपस्टिक पोंछ डाली।

फ़ोन आये 10 मिनट हो जायेंगे. इस से पहले कि अगला मिस कॉल आए मुझे पवन को सुमन के रूम तक ले जाना था। मेरे प्लान अब उसका अंत तक पहुंचने वाला था।

मैं: “जीजा जी आपने मेरे साथ बहुत गलत किया। शादी की रात कोई अपनी साली के साथ ऐसा करता है भला?”

पवन: “तो फिर जीजा साली कौन सी रात को करते हैं?”

मुख्य: “ये मजाक की बात नहीं है, आपने बहुत बड़ी गलती की है। बाहर किसी को पता लग गया तो?”

पवन: “आप किसी को बोलना मत प्लीज, वो सब अपने आप ही हो गए। कंट्रोल ही नहीं हुआ मुझसे”

मुख्य: “हम दोनो इसको भूल जाते हैं, कुछ नहीं हुआ। मैं अब जाती हूं”

पवन: “ठीक है”

मुख्य: “आप आ रहे हो सुमन से मिलने के लिए”

पवन: “अभि?”

मुख्य: “अभी क्या हुआ? डर लग रहा है कि सुमन को हमारा सच पता चल जाएगा”

पवन: “आप क्या उसको बता दोगी?”

मुख्य: “नहीं बताउंगी, चलो”

हमें बेचारे को क्या पता था कि वो अब क्या देखने वाला था। वो मेरे साथ चलने को तैयार हो गया था। पर फिर मैंने सोचा अगर सुमन को रंगें हाथ नहीं पकड़ सके तो क्या होगा।

मुझे पता नहीं था कि रॉकी वैपिस आया था, और अगर हमें मिस कॉल के हिसाब से वो आ भी गया होगा तो अभी वो चोद रहे होंगे या काम ख़त्म हो चुका होगा।

हम पवन के कमरे का दरवाजा तक आ गए थे और मैंने पूरा कन्फर्म करने के लिए उसे वही रोका।

मुख्य: “मैं देखती हूं, सुमन जाग भी रही है या नहीं। जाग रही होगी तो आपको बुलाने आ जाउंगी”

पवन वही रुक गया. मैंने उसका दरवाजा बंद कर दिया। देखा तो रॉकी दरवाजे के पास ही कान लगाये खड़ा था। उसको तो अभी सुमन के रूम में होना चाहिए। कहीं उसका काम ख़तम तो नहीं हो गया।

मैं अब रुआसी हो गई. पवन के साथ फालतू में चुदाई करवायी. खाया पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना। काश मैं जाते ही पवन के साथ चुदवा लेती तो इतना टाइम बर्बाद नहीं होता।

मुख्य: “तुम्हारा सुमन के साथ हो गया?”

रॉकी: “अभी शुरू कहा किया”

मुख्य: “मतलब! तुम अभी भी आये हो?”

रॉकी: “मैं तो गया ही नहीं, मैं यहां खड़ा सब सुन रहा था, तुम और पवन अंदर जो कर रहे थे मुझे पता है”

मुख्य: “ऐसा कुछ नहीं है। तुम्हें जो काम दिया है वो करो”

रॉकी: “अच्छा, वादा करो मुझसे किया और मजे पवन को दिला रही हो”

मुख्य: “तुमको मैंने वादा किया है वो तुम्हें मिल जाएगा। अभी तुम जल्दी जाओ। सुमन कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही है”

मेरा प्लान तो यही था कि एक बार रॉकी सुमन के साथ कर ले फिर तो पवन के हाथ पकड़ा ही जाएगा। फिर उसको भागना पड़ेगा और मुझे उसके साथ कुछ नहीं करना पड़ेगा। पर उसको मेरी नियत पर शक हो चुका था।

रॉकी: “मुझे बहुत बड़ा झोल लग रहा है। तुम बहुत पहले हुई चीज लग रही हो। मुझे तुम पर यकीन नहीं है। अब पहले तुम अपना वादा पूरा करो फिर मैं तुम्हारा काम करूंगा”

मैं: “अब मैं तुम्हें कैसे दिलवाऊं। पहले तुम्हें सुमन को ही चोदना पड़ेगा। मैंने तुम्हारी बात हमसे करवाई है ना!”

रॉकी: “पूरा ना सही, थोड़ा एडवांस तो दे ही दो”

मुख्य: “तुम्हें ब्याज सही सब दे दूंगी। एक काम करो कंडोम की ज़रूरत नहीं, तुम उसके बिना ही सुमन के साथ कर लो”

रॉकी: “वो नहीं मानी तो?”

मुख्य: “तुम चलो मेरे साथ, उसको पूछ लेते हैं”

मैं और रॉकी अब सुमन के कमरे तक पहुँचे। हालांकी चाबी मेरे पास थी, फिर भी मैंने दरवाजे पर दस्तक दी। सुमन ने दरवाजा खोला. हम दोनो कमरे में गए और इतनी देर से इंतज़ार करती सुमन परेशान थी।

सुमन: “प्रतीम आप कह रह गए, ना हाय ये रॉकी आया इतनी देर। मैंने आपको कॉल करने की कोशिश भी की”

मुख्य: “सुमन एक समस्या है, ये कंडोम नहीं लाया। तुम उसके बिना करवा सकती हो?”

सुमन: “नहीं, मैं प्रेग्नेंट हो गई हूं। मैं इसके बच्चे की मां नहीं बनना चाहती”

मुख्य: “जरुरी नहीं कि एक बार चोदने से ही प्रेग्नेंट हो जाए। झड़ने से पहले रॉकी अपना लंड बाहर निकाल देगा। नहीं तो सेफ्टी के लिए तुम कल इमरजेंसी पिल ले लेना”

रॉकी: “टाइम पर लंड बाहर निकलने की गारंटी नहीं है। गोली के साइड इफेक्ट भी होते हैं”

मैंने अब रॉकी को घूरा। एक तो उसने काम नहीं किया उल्टा बिगाड़ रहा था।

सुमन: “नहीं नहीं, मुझे नहीं करना”

मुख्य: “अच्छा ठीक है। रॉकी, तुम जल्दी जाकर कंडोम लेकर आओ”

रॉकी: “तुम भी मेरे साथ चलो”

मुख्य: “कंडोम इतना भारी होता है कि तुम्हें दो लोग चाहिए उठाने के लिए”

रॉकी: “वो दुकान बहुत दूर है, मैं रास्ते में बोर हो जाऊंगा। कोई बात करने वाला तो होना चाहिए ना!”

मुख्य: “तुम कुछ ज्यादा ही नाटक नहीं कर रहे हो?”

रॉकी: “ठीक है, मैं अपने दोस्त अमित विनीत को लेकर जाता हूं। जिनको मैंने थोड़ी देर पहले रूम से बाहर निकाला था”

मुख्य: “पूरे शहर में ढिंढोरा नहीं पीटा है”

रॉकी: “तो फिर तुम चलो ना”

मुख्य: “किस मुहर्त में इसको काम सौपा मैंने! चलो मैं आती हूं तुम्हारे साथ”

सुमन: “आप कपड़े बदलो कार्लो”

मुख्य: “अभी टाइम कहा बचा है। हम अभी आते हैं, तुम तैयार रहना”

मैं और रॉकी अब कम्युनिटी हॉल के बाहर आ गये। मैं जोश जोश में आ तो गई पर रात के 2 बजने वाले। इतनी रात में एक औरत का बाहर निकलना सुरक्षित नहीं था।

मुख्य: “तुम लेकर आ जाओ ना, इतनी देर रात एक औरत का बाहर निकलना ठीक नहीं है”

रॉकी: “मैं हूं ना साथ में। मैंने सुना है कि ये इलाका बहुत सुरक्षित है, यहां कोई चोरी लूट नहीं होती है। घबराओ मत”।

रॉकी ने स्कूटी स्टार्ट की और मैं उसके पीछे बैठ गई। पुरा रास्ता सुनसान था, रास्ते में सिर्फ कुत्ते और गाए सोई हुई थी। कोई इंसान तो दिखाया ही नहीं दिया.

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