मुझे प्यार करो 10

माँ बेटा

रात के धमाकेदार चुदाई से मां बेटे दोनों मस्त हो चुके थे,,, छत पर चुदाई करने का मजा ही कुछ और था इस बात का एहसास सुगंधा को भी था और अंकित को भी,, चार दिवारी के अंदर चुदाई करने में जितना मजा आता है उससे कहीं ज्यादा मजाक खुले आसमान के नीचे छत पर करने में आता है अंकित इसी बात से बेहद खुश नजर आ रहा था और सुबह-सुबह जिस तरह से एक बार फिर से सुगंधा अपनी जवानी की बरसात अपने बेटे पर करके गई थी उसे अंकित पूरी तरह से संतुष्ट हो गया था और उसे यकीन हो गया था कि उसकी मां पूरी तरह से छिनार बन चुकी है,,,,,, सुगंधा भी छत पर से अपने कपड़े समेट कर नीचे चली गई थी लेकिन वह कपड़े नहीं पहनी थी ऐसे ही चली गई थी और यह देखकर अंकित मंद मंद मुस्कुरा रहा था हालांकि वह भी कपड़ा पहनना जरूरी नहीं समझ रहा था।

अपनी मां की तरह अंकित भी अपने कपड़ों को हाथ में लेकर नीचे पहुंच चुका था नीचे पहुंच कर देखा तो उसकी मां नंगी ही घर की सफाई करने में लगी हुई थी यह देखकर अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,,।

क्या बात है कपड़े क्यों नहीं पहनी,,,

मुझे नहीं लगता कि अब तेरे सामने कपड़े पहनने की मुझे जरूरत पड़ेगी,,, (सुगंधा झाड़ू लगाते हुए बोली,,,)

बात तो तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो तब तो आज दिन भर ऐसे ही रहना और सच कहूं तो बिना कपड़ों के और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो,,,।

वह तो मुझे पता ही है कि यह तो किस लिए कह रहा है ताकि जब तेरा मन करे तब मेरी चुदाई कर ले ताकि कपड़े उतारने का झंझट ही खत्म हो जाए,,, ।

(अपनी मां की बात सुनकर अंकित हंसने लगा क्योंकि उसकी मां सच कह रही थी अंकित के मन में कुछ ऐसा चल रहा था और वैसे भी अब जिस तरह का दोनों के बीच रिश्ता बन चुका था दोनों के बीच बिल्कुल भी झिझक नहीं रह गई थी अंकित जब चाहे तब अपनी मां की चुदाई कर सकता था इस तरह का दमखम वह अपनी मां के सामने दिखा चुका था,,, अंकित अपने कपड़ों को वही धोने के लिए छोड़ दिया और बाथरूम में चला गया वैसे तो अपनी मां को नंगी देखकर एक बार फिर से उसके लंड ने अंगड़ाई लेना शुरू कर दिया था लेकिन अब हाथ से हिलाना उचित बिल्कुल भी नहीं था जब चोदने के लिए इतनी खूबसूरत औरत पास में हो तो फिर हाथ से हिलाना मतलब पूरी तरह से बेवकूफी दिखाना और अंकित इस समय कोई भी बेवकूफी दिखाना नहीं चाहता था।

घर की सफाई करने के बाद सुगंधा भी नहा कर तैयार हो चुकी थी और खाना बना रही थी की तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,,, सुगंधा खाना बनाते हुए अंकित को आवाज लगाते हुए बोली,,,)

देख तो अंकित कौन है,,,?

ठीक है मम्मी,,, (इतना कहकर अंकित अपने कमरे में से बाहर निकला और दरवाजा खोलने लगा वैसे नहाने के बाद दोनों ने कपड़े पहन लिए थे,,, इसलिए इस समय कोई दिक्कत पेश नहीं आ रही है वरना किसी के आने पर जल्दी-जल्दी में कपड़े पहनना पड़ता अंकित तुरंत जाकर दरवाजा खोला तो सामने सोचा आंटी खड़ी थी जिसे देखते ही अंकित के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और यह मुस्कान उसके चेहरे पर क्यों तैर रही थी इस बात को सुषमा अच्छी तरह से जानती थी और वह भी जवाब में मुस्कुरा दी,,,,, वैसे जब से उसने अंकित से चुदवाई थी और यह सिलसिला दो बार हो चुका था लेकिन दोनों बार अंकित ने स्वर्ग की शेर उसे कराया था जिसके साथ में वह दिन रात डूबी रहती थी और इस समय यहां पर आने का खास मकसद भी उसका यही था कि अगर घर में वह अकेला होता तो एक बार फिर से वह अपनी टांगें खोल देगी इसलिए अंकित को दरवाजे पर देखते ही वह बोली,,,)

सुगंधा घर पर है क्या,,,,? (बहुत धीरे से और उत्सुकता दिखाते हुए सुषमा ने यह बात बोली थी जिसका मतलब अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि समय कुछ होने वाला नहीं है फिर भी वह थोड़ा मजा लेना चाहता था वह देखना चाहता था कि सुषमा उसका जवाब सुनकर कैसा बर्ताव करती है इसलिए अंकित बोला,,,)

नहीं,,,,,,,।

(इतना सुनते ही सुषमा एकदम से खुश हो गई और घर में घुस गई अंकित भी एकदम से मौके का फायदा उठाते हुए अपना एक हाथ सुषमा की खबर में डाला उसे अपनी तरफ खींचकर उसके होठों पर अपने होंठ रख दिया क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां को रसोई घर से अगर बाहर निकलना हुआ तो थोड़ा समय तो लग जाएगा और उसके चूड़ियों की खनक की आवाज से वह जान जाएगा अंकित की हरकत से सुषमा एकदम पानी पानी हो गई दो बार तो उसने अंकित की मर्दानगी को देख चुकी थी,,, लेकिन इस समय जिस तरह की पूर्ति उसने दिखाया था उससे उसकी पर पानी छोड़ने लगी थी क्योंकि एकदम से उसे अपनी तरफ खींच कर उसके होठों का चुंबन करने लगा था सुषमा भी उसकी पूरी तरह से सहकार देती इससे पहले ही रसोई घर से आवाज आई,,,)

कौन है अंकित,,,?
(और इतना सुनते ही सुषमा के तो होश उड़ गए वह एकदम से घबरा गई और अंकित से अलग हो गई,,, और अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,,)

सुषमा आंटी है मम्मी,,,,।

हरामजादी तुझे शर्म नहीं आती,,, मम्मी घर पर है और तू इस तरह की हरकत कर रहा है,,,(सुषमा एकदम धीरे से बोली तो अंकित भी जवाब देते हुए बोला,,,)

क्या करूं आंटी तुम्हें देखकर मुझे रहा नहीं गया,,,,,।

रहा तो मुझे भी नहीं जा रहा है इसीलिए तो यहां पर आई थी लेकिन तेरी मां तो घर पर ही रहती है,,,,,(सुषमा धीरे से बोल ही रही थी कि तभी रसोई घर से आवाज आई,,,,,)

सही समय पर आई हैं,,,, ले चाय नाश्ता तैयार है ले जाकर दे दे तो,,,,,

रुको मैं अभी आता हूं,,,,,(अंकित मुस्कुराते हुए रसोई घर में चला गया और सुषमा उसे देखकर मन ही मन उसे बहुत सारी गालियां दे रही थी,,,, क्योंकि अंकित में उसके चेहरे पर छाई खुशी को पल भर में ही दुख में बदल दिया था अंकित के साथ एक बार फिर से शारीरिक संबंध बनाने की खुशी अंकित ने हीं उसके हाथों से छीन लिया था,,,, और सबसे ज्यादा डर सुषमा को इस बात का था कि जो कुछ भी हुआ था उसे सुगंधा ने अपनी आंखों से देख नहीं ली वरना गजब हो जाता,,,, सुषमा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी की उम्र में वह सुगंधा से चार-पांच साल बड़ी थी सुगंधा उसका सम्मान करती थी और अगर अपनी आंखों से वह उसके ही बेटे के साथ इस तरह के अस्त-व्यस्त हालत में देख लेती तो उसके मन पर क्या गुजरती,,, अगर यह सब होता भी तो अंकित के ही कारण होता उसने सच-सच जो नहीं बताया था,,,, सुषमा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें यहां से वह इस तरह से जा भी नहीं सकती थी क्योंकि वह सुबह-सुबह उसके घर आई थी और इस बात को सुगंधा जान गई थी अगर वह इस तरह से ही चली गई तो वह क्या सोचती,,, इसलिए सुषमा भी पीछे-पीछे रसोई घर के दरवाजे पर पहुंच गई,,,,, उसने देखी तो अंकित कप में चाय निकल रहा था और कटोरी में थोड़ी नमकीन लिया हुआ था,,,, यह देखकर सुषमा बोली,,)

अरे इसकी क्या जरूरत थी मैं तो ऐसे ही आ गई थी क्योंकि तीन-चार दिन से तुमसे मुलाकात नहीं हुई इसलिए खबर पूछने आ गई थी,,,।

अरे मैं बिल्कुल ठीक हूं,,,,(रोटी बेलते हुए सुगंधा बोली,,,, यह सुनकर सुषमा भी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

भगवान करें तुम इसी तरह से मुस्कुराती रहो खुश रहो,,,,।

बस तुम अपना आशीर्वाद बनाए रखना हम लोग इसी तरह से खुश रहेंगे क्यों अंकित,,,,।(अंकित की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली वैसे सुगंधा के कहने का मतलब कुछ और था जो कि अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह भी मुस्कुराते हुए बोला)

क्यों नहीं सुषमा आंटी अगर आपका आशीर्वाद रहा तो हम लोग इसी तरह से मजा करते रहेंगे खुश रहेंगे,,,,।

(सुगंधा भी जानती थी कि उसका बेटा किस लिए बोल रहा है,,,,,, अंकित आगे कुछ बोल पाता सुगंधा ही बोल पड़ी)

अच्छा अंकित एक काम कर यहां सारा सामान बिखरा पड़ा है ,,,, यहां पर कहां बैठकर चाय नाश्ता करेंगे यहां सही नहीं लग रहा है तू अपने कमरे में ले जा और वहीं पर अपनी सुषमा आंटी को चाय नाश्ता करा दे,,,।

अरे सुगंधा में बोल रही हूं इसकी क्या जरूरत है,,, मैं तो ऐसे ही आई थी बता तो रही हूं,,,,(सुषमा औपचारिकता निभाते हुए बोली उसकी बात सुनकर सुगंधा बोली,,,)

अरे तो क्या हो गया तुम हमारी शुभचिंतक हो और सुबह-सुबह इस तरह से हमारे घर आए हो यह तो बहुत खुशी की बात है और वैसे भी तुम्हारी मैं बहुत इज्जत करती हूं इस तरह से सुबह-सुबह बिना कुछ खिलाएं वापस भेजना ठीक नहीं है। (तवे पर रोटी रखते हुए सुगंधा बोली)

मम्मी ठीक कह रही है सुषमा आंटी,,,,(हाथ में चाय नाश्ते की प्लेट लेते हुए अंकित बोला और सुषमा अंकित की तरफ देखकर सुगंधा से नजर बचाकर अंकित को गुदगुदाने लगी वह गाली दे रही थी जिसे अंकित समझ गया था और मुस्कुरा रहा था सुषमा समझ गई थी कि चाय पिलाए बिना ये लोग मुझे वापस भेजने वाले नहीं है इसलिए वह बोली,,,)

तुम भी चलो ना सुगंधा,,,, साथ में चाय पीते हैं,,,।

फिर किसी दिन अभी मुझे बहुत कम है और देख रही हो रोटी बना रही हूं अगर ऐसे ही छोड़ दी तो गुंथा हुआ आटा खराब हो जाएगा,,,।

चलिए ना आंटी मम्मी चाय पीने की यही खड़े-खड़े चाय ठंडी हो गई तो पीने में मजा नहीं आएगा।

अंकित ठीक कह रहा है जो अंकित के कमरे में बैठकर पी लो यहां सारा सामान बिखरा पड़ा है,,,।

ठीक है तुम मां बेटे चाय पिलाए बिना भेजोगे नहीं,,,(इतना कहकर सुषमा अंकित के कमरे की तरफ जाने लगी औरअंकित भी प्लेट लेकर रसोई घर से बाहर निकल गया और सुगंध सुषमा की बात कर मुस्कुरा रही थी,,,,, सुषमा अंकित के कमरे में प्रवेश कर चुकी थी और अंकित भी पीछे-पीछे चाय नाश्ते की प्लेट लेकर अपने कमरे में पहुंच चुका था,,, अंकित को देखते ही एकदम गुस्से से सुषमा अंकित पर गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

हरामजादे तुझे शर्म नहीं आती, अगर तेरी मां हम दोनों को देख लेती तो क्या सोचती,,,।

इसमें सोचने का क्या है मम्मी को भी लगता कि सुषमा की बुर में कुछ ज्यादा है जवानी फूट रही है,,,,।(चाय नाश्ता की प्लेट को अपने बिस्तर पर रखते हुए अंकित बोला तो उसकी इस तरह की बात को सुनकर सुषमा एकदम से हैरान होते हुए बोली।)

बाप रे बाप तू इतनी गंदी बातें भी करता है,,,।

क्यों क्या लगता हैं जब तुम्हारी बुर में लंड डालकर चोद सकता हूं तो इस तरह की बात नहीं कर सकता,,,।

हाय दैया इतना हरामि हो गया है तो मैं तो तुझे एकदम सीधा-साधा समझती थी और तुझे एक नंबर का हरामि निकला रे,,,,।

क्यों तुम्हें क्या लगता है सीधा-साधा रहता तो तुम्हारी बुर में लंड डालता,, और हां तुम बना बनाया काम क्यों बिगाड़ रही थी,,,,।

बना बनाया काम में कुछ समझी नहीं,,,(आश्चर्य जताते हुए सुषमा बोली,,,)

मम्मी को क्यों बुला रही थी साथ में चाय पीने के लिए।

ले इसमें क्या हो गया अगर बुला दी तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा,,,,।

तुम समझ नहीं रही हो मम्मी को रोटी बनाने में 10 मिनट तो लगेगा ही और 10 मिनट तक अगर हम दोनों इस कमरे में अकेले हैं तो सोचो,,,,,।

(अंकित के कहने के मतलब को सुषमा समझ गई थी और वह बोली)

पागल हो गया है क्या,,,? तेरी मम्मी घर पर ही है नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं मैं तो सोचा तू अकेला होता तो मजा करेंगे लेकिन तेरी मम्मी भी साथ में है और जब तेरी मम्मी घर में है तो इस तरह की बातें सोचना भी नहीं,,,,

क्या आंटी क्यों घबरा रही हो ऐसा कुछ नहीं होगा,,,,। मैं मम्मी को अच्छी तरह से जानता हूं जब वह रोटी बनाती है तो रोटी बिना बने वह कहीं भी नहीं जाती और ना ही घर का छोटा सा काम कर सकती है। (ऐसा कहते हुए अंकित हीरे से दरवाजे को बंद कर दिया लेकिन कड़ी नहीं लगाया क्योंकि वह जानता था की कड़ी लगाना उचित नहीं है उसकी मां को शक हो सकता था और वह तुरंत फिर से उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और एक बार फिर से उसे अपने बदन से सटा लिया अंकित की हरकत से सुषमा एकदम से घबरा गई वह अंकित की खेत से आजाद होना चाहती थी इसलिए वह उसकी बाहों में कसमसाते हुए उससे अलग होने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

बेवकूफी मत कर बाद में कभी कर लेंगे अभी जाने दे,,,।

ऐसा मौका फिर कहां मिलेगा,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित सुषमा के होठों पर फिर से अपने होंठ रखकर उसके होठों का रसपान करने के साथ-साथ उसकी चूची को ब्लाउज के ऊपर से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,,, सुषमा उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश लगातार कर रही थी लेकिन अंकित की हरकत से उसके बदन में भी सुरसुराहट होने लगी थी वह अंकित की कैद से आजाद तो होना चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर ऐसी हालत में सुगंध एवं दोनों को देख लिया तो वह सुगंधा की नजर से एकदम से गिर जाएगी क्योंकि एक पड़ोसन होने के नाते सुगंधा और उसका बहुत अच्छा रिश्ता था सुगंधा हमेशा उसका सम्मान करती थी,,, और वह नहीं चाहती थी कि उसकी मां इस हालत में उसे देखें इसलिए मजबूर होकर वह ना चाहते हुए भी अंकित की बाहों की पकड़ से आजाद होना चाहती थी लेकिन अंकित पूरी तरह से उसके ऊपर छत चला जा रहा था एक हाथ से उसकी चूची दबाते हुए दोनों हाथों से ब्लाउज के ऊपर से उसकी दोनों चूचिया पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया था। जिससे ना चाहते हुए भी सुषमा के बदन में शुरूर छाने लगा था आंखों में मदहोशी छाने लगी थी। फिर भी वह छूटने की कोशिश करना तो छोड़ दी थी लेकिन मुंह से बोली,,,)

रहने दे अंकित फिर कभी कर लेना तेरी मां देख ले तो गजब हो जाएगा मेरा घर से बाहर निकलने दुभर हो जाएगा,,,, मत कर जाने दे मुझे,,,,।

ऐसे कैसे जाने दु चाची,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित कुर्ती दिखाते हुए एकदम से सुषमा को दीवार की तरफ घुमा दिया और दीवार से सटाकर जल्दी-जल्दी सुषमा की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा और अंकित को सुषमा की साड़ी कमर तक उठाने में बिल्कुल भी देर नहीं लगी जैसे ही साड़ी कमर तक उठी उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से झलक और यह देखकर अंकित की आंखें मदहोशी से भरने लगी कि सुषमा चड्डी नहीं पहनी थी और यही देखकर अंकित उत्तेजित होता हुआ उसकी गोरी गोरी गांड पर दो-चार चपत लगाते हुए बोला,,)

हाय मेरी जान पूरी तैयारी से आई थी अंदर चड्डी भी नहीं पहनी हो,,,,।

आई तो तैयारी से ही थी लेकिन अब मुझे जाने दे,,,।

ऐसे कैसे जाने दुं,(और इतना कहने के साथ ही साड़ी को कमर तक उठाए हुए एक हाथ से पकड़े हुए अंकित अपने पेंट की बटन खोलने लगा और तुरंत उसे अपने घुटनों तक नीचे खींच दिया,,, सुषमा की बुर में जाने के लिए अंकित का लंड पूरी तरह से तैयार था। और देखते ही देखते अंकित ने अपने लंड को सुषमा की गुलाबी बुर में डाल भी दिया क्योंकि उसकी बुर भी अंकित की हरकतों से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसलिए इस स्थिति में भी बड़े आराम से अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में धीरे-धीरे अंदर तक घुस गया था और अंकित तुरंत सुषमा की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,।

सुगंधा की उपस्थिति में सुषमा यह सब नहीं करना चाहती थी वह जानती थी कि सुगंधा घर पर ही है रोटी बना रही थी ऐसे में अंकित उसे अपने कमरे में चाय पिलाने के बहाने ले जाकर उसकी चुदाई कर रहा था डर तो अभी भी सुषमा को बहुत लग रहा था लेकिन जिस तरह से अंकित का लंड उसे मजा दे रहा था वह पूरी तरह से मस्त होने लगी थी। उसकी आंखें बंद होने लगी थी दीवार से सटी हुई वह मजे लेते हुए अब धीरे-धीरे अंकित का सहकार करने लगी थी उसे मदद करने लगी थी और एवज में वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को बाहर की तरफ निकल दी थी ताकि आराम से अंकित उसकी चुदाई कर सके अंकित पागलों की तरह अपनी कमर को हिला रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसके पास समय काम है और वह इस कम समय का भी भरपूर आनंद लेना चाहता था,,,, अंकित के हर धक्के के साथ सुषमा स्वर्ग का आनंद ले रही थी वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी अंकित की कमर किसी मशीन की तरह चल रही थी,,, मस्त मदहोश होते हुए सुषमा के मुंह से हल्की-हल्की शिसकारी की आवाज निकल रही थी जिसे वह काबू में किए हुए थी क्योंकि वह जानती थी कहीं यह आवाज सुगंधा में सुन ली तो गजब हो जाएगा,,,,,,,

एकाएक अंकित बिना कुछ बोले अपने लंड को सुषमा की बुर से बाहर निकाल लिया यह देखकर सुषमा धीरे से बोली,,,।

क्या हुआ,,,?

(लेकिन उसके क्या का जवाब अंकित देना नहीं चाहता था वह तुरंत उसका हाथ पकड़ कर एकदम से बिस्तर पर ले आए और चाय वाली प्लेट को हाथ से पकड़ कर जमीन पर रख दिया और तुरंत उसकी दोनों टांगों को खोलकर एकदम से उसके ऊपर झुक गया और पागलों की तरह उसे बांहों में लेकर धक्के पर धक्का लगाने लगा,,,, सुषमा का मजा और भी ज्यादा बढ़ गया हुआ पूरी तरह से पागल होने लगी और वह भी अंकित को अपनी बाहों में कस ली तकरीबन 5 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद अंकित के अंदर से उसका गरम लावा सुषमा की बुर को भिगोने लगा। सुषमा भी झड़ रही थी उसे भी अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई थी वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी।
अंकित धीरे से अपने लंड को सुषमा की बुर से बाहर निकाला और उसे उसके ही पेटीकोट से साफ करके पेंट पहन लिया और सूचना भी अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके बिस्तर पर बैठ गई और चाय की चुस्की लेने लगी अभी तो ही चुस्की और चाय की ली थी कि तभी सुगंधा की दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई और यह देखकर सुषमा एकदम से घबरा गई थी और यह सोचकर खुश हो रही थी कि अच्छा हुआ जल्द ही काम खत्म हो गया और अंकित ने दरवाजे की कड़ी नहीं लगाया था। अपनी मां को दरवाजे पर देख कर अंकित के चेहरे पर भी थोड़ी घबराहट आ गई थी लेकिन सब कुछ ठीक था इसलिए वह निश्चिंत हो गया था। सुगंधा भी कुछ देर तक वहीं बैठी रही इधर-उधर की बातें करती रही और फिर सुषमा जब उठ कर चली गई तब वह फिर से काम में लग गई।)

एक बार फिर से अंकित मौके का फायदा उठाते हुए सुमन की मां की चुदाई कर चुका था वैसे तो सुमन सबसे पहले लाइन में थी लेकिन सुमन की चुदाई अभी तक उसने नहीं किया था लेकिन उसकी मां की चुदाई वह तीन बार कर चुका था और तीनों बार उसे तृप्त कर चुका था भले ही वह उचित समय उसकी मां को नहीं दे पाया था लेकिन कम समय में ही सुमन की मां अंकित की चुदाई से तृप्त हो चुकी थी और बार-बार उसे एहसास होता था कि जैसे अभी भी उसके गुलाबी गली में अंकित का लंड चहलकदमी कर रहा हो,,, सुमन की मा जा चुकी थी लेकिन जाते-जाते एक अद्भुत अनुभव और आनंद अपने जेहन में समेटे गई थी,,, ।

लेकिन वह इस बात से हैरान थी कि अंकित वाकई में जैसा दिखता है वैसा बिलकुल भी नहीं है वह अंकित को बेहद सीधा-साधा लड़का समझती थी लेकिन तीन मुलाकातों में ही उसकी सोच पूरी तरह से बदल चुकी थी उसे समझ में आ गया था कि अंकित भले ही दिखता सीधा-साधा है लेकिन अंदर से तो एक मर्द ही है और एक मर्द औरत को किस तरह से खुश रखता है उसका हुनर वह बेखुबी जानता था,,, सुमन की महेश बात से भी हैरान थी कि उसने कभी भी अंकित के मुंह से असली शब्द नहीं सुने थे लेकिन वह कैसा बेशर्मों की तरह उसके सामने चुदाई की बातें कर रहा था लंड की बातें कर रहा था उसे बिल्कुल भी परवाह नहीं था कि वह क्या सोचेगी,, और शायद इसलिए भी की अंकित उसकी दो बार चुदाई कर चुका था और वाकई में जब औरत की चुदाई कोई मर्द करने लगता है तो उसे औरत के सामने वह पूरी तरह से बेशर्म बन जाता है और उसके सामने कुछ भी कहने से बिल्कुल भी नहीं हीचकीचाता,,,, और वही हाल अंकित का हो गया था। सुमन की मां अंकित की हिम्मत की मां ही मन दादा दे रही थी क्योंकि वह कभी सोची नहीं थी कि अपनी मां की उपस्थिति में वह इस तरह की हरकत कर बैठेगा जबकि वह खुद डर रही थी,,, एक औरत होने के नाते इस तरह के कदम उठाने में वह बेहद घबरा रही थी और उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जिसके कैमरे में वह चाय पीने के लिए जा रही है उसी के कमरे में उसकी चुदाई होने वाली है जबकि वह अंकित से चुदवाने ही आई थी,, लेकिन सुगंधा की उपस्थिति में वह हिम्मत नहीं कर पाई थी। और अपने अरमानों के पंख को वह समेट चुकी थी,,,, वह थोड़े गुस्से में थी वह घर से निकल जाना चाहती थी लेकिन जिस तरह से सुगंधा ने उसे चाय पीने के लिए रोक ली थी वह जा भी नहीं सकती थी।

लेकिन जितना वह अंकित को समझती थी उससे कहीं ज्यादा वह चालक और औरतों के मामले में एकदम लंपट था,,,, उसे अच्छी तरह से याद था कि जब वहां का उसके घर आया था सुमन से परीक्षा के बारे में कुछ सलाह लेने के लिए तो वह बाथरूम का दरवाजा खोलकर एकदम नंगी नहा रही थी और उसकी नजर उसे पर पड़ गई थी तो वह एकदम से शर्मा गया था लेकिन वह यह नहीं जानती थी कि इस एक पल के दीदार के बदले में अंकित बेझिजक उसकी चुदाई करने लगेगा,,,, सुमन की मां अपने मन में यह सोचकर हैरान हो रही थी कि कैसे अपनी मां के सामने सीधा-साधा बनाकर चाय और नाश्ते की प्लेट को लेकर के वह उसे चाय पिलाने के लिए अपने कमरे में लेकर गया था और बड़ी चालाकी दिखाते हुए दरवाजे को बंद करने के बाद उसने कड़ी भी नहीं लगाया था शायद इस बात को वह जानता था कि अगर दरवाजा अंदर से बंद रहेगा तो उसकी मां को शक होगा कि ऐसा क्या हो रहा है जो अंकित ने दरवाजा बंद कर लिया है क्योंकि वह तो चाय पिलाने के लिए अपने कमरे में लेकर गया था। और जब अंकित अपनी मनमानी करने पर उतारू हो गया था तो सुमन की वॉइस बात से डर रही थी कि कमरे का दरवाजा तो खुल ही है अगर सुगंधा आ गई तो गजब हो जाएगा,,, लेकिन उसकी बात ना मानते हुए अंकित अपने ही मन की कर रहा था वह दरवाजे पर कड़ी नहीं लगाया था और अपनी हरकतों से उसे पूरी तरह से मदहोश कर दिया था जबकि वह इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी और वह भी सुगंधा की उपस्थिति में,,,।

पर वह गलत थी की अंकित नादान है दो बार उसने जरूर उसकी चुदाई किया था उसे ऐसा लग रहा था कि उसके कहने पर उसकी प्यास को देखते हुए अंकित ने ऐसा किया था लेकिन उसका भ्रम एकदम से टूट गया था जब उसके ना चाहने के बावजूद भी उसके इनकार करते हुए भी अंकित अपनी हरकतों से उसे पूरी तरह से मदद कर दिया था जो कि इस बात का सबूत था कि अंकित औरतों को खुश करने का हुनर अच्छी तरह से जानता था और उसकी हरकतों से मदहोश होकर सुमन की मां इनकार नहीं कर पाई थी। और कमरे का दरवाजा खुला होने के बावजूद भी उसके हाथों की कठपुतली बनकर वह उससे चुदवाने लगी थी,,, और वह हैरानी इस बात से भी थी कि इन सबके बावजूद भी उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी अंकित ने जिस तरह से उसे दीवार से सटाकर पीछे से उसकी चुदाई किया था और फिर थोड़ी ही देर बाद उसे बिस्तर पर लेट कर जमकर अपनी कमर हिला कर उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति करवाया था वह काबिले तारीफ थी इसलिए मन ही मन वह अंकित को धन्यवाद देते हुए सुगंधा के घर से चली गई थी और इस बात की भनक घर में होने के बावजूद भी सुगंधा को बिल्कुल भी नहीं हो पाई थी।

मां बेटे दोनों घर में काम लीला का प्रचंड खेल खेल रहे थे जिसकी कोई सीमा नहीं थी जब भी दोनों को मौका मिलता दोनों एक दूसरे में समाने की पूरी कोशिश करते थे और कामयाब हो जाते थे, क्योंकि घर में उन दोनों के सिवा कोई था भी नहीं उन दोनों को रोकने रोकने वाला कोई नहीं था इसलिए दोनों को किसी बात का डर भी नहीं था। और कभी-कभी तो मां बेटे दोनों घर में नंगे ही घूमते थे खाना बनाना,,, खाना खाने से लेकर के दिनचर्या के हर जरूरत को वह बिना कपड़ों के ही पूरा करते थे और उन्हें बिना कपड़ों में घर में रहना बहुत अच्छा भी लगता था लेकिन अंकित कोई बात की तकलीफ हो जाती थी कि बार-बार उसका लंड अपनी मां की जवानी देखकर खड़ा हो जाता था। और फिर अपनी मां की बुर में डालने के नाम से से रहा नहीं जाता था इस बात से सुगंधा भी परेशान थी लेकिन उसे बहुत मजा आता था। अंकित पूरी तरह से स्वर्ग का शुख भोग रहा था और वाकई में उसे ऐसा लगता था कि जीवन में इससे बड़ा सुख कोई हो ही नहीं सकता और कुछ हद तक यह बात सही ही थी क्योंकि कुछ महीने पहले वहां औरत के साथ संभोग रत होने की सिर्फ कल्पना किया करता था,,, और आज वह जब चाहे तब अपनी मां की बुर में लंड डालकर अपनी जवानी की प्यास बुझा सकता था लेकिन धीरे-धीरे यह प्यास बढ़ने लगी थी।

ब्लाउज की डिलीवरी लेने से पहले एक दिन शाम को मां बेटे दोनों बैठकर चाय पी रहे थे अंकित के मन में कुछ और चल रहा था वह चाय की चुस्की लेते हुए कुछ सोच रहा था यह देखकर सुगंधा बोली।

क्या सोच रहा है,,,,?

मैं सोच रहा था कि कुछ अलग करते हैं,,,,।

अब जो कुछ भी हम लोग कर रहे हैं इससे अलग क्या होगा,,,।

करना तो यही है लेकिन कुछ अलग तरीके से,,, अच्छा एक बात बताओ उस दिन दर्जी की दुकान में तुम्हें मजा आया था कि नहीं।

बिल्कुल आया था उसे दिन तो मेरी बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी,,, खासकर के दर्जी की आंखों के सामने जो कुछ भी हो रहा था उससे तो मेरी हालत और ज्यादा खराब हो रही थी।

और दर्जी की हालत,,,!

सच कहूं तो वह तो पागल हुआ जा रहा था मेरी जवानी देखकर हालांकि वह कुछ करने लायक तो था नहीं लेकिन फिर भी उसके भी अरमान मचल रहे थे यह उसका चेहरा देखकर साफ पता चल रहा था।

और सोचो मम्मी अगर उसे दिन में उसे दरजी के सामने तुम्हारी साड़ी उठाकर तुम्हारी चुदाई करने लगता तो,,,।

हाए हाए काश ऐसा हो पाता कितना मजा आता ,,,,(सुगंधा एकदम से रंगीन ख्यालों में खोते हुए बोली)

बस यही तो मैं कहना चाहता हूं,,,,।

क्या कहना चाहता हैं,,,,!(सुगंधा आश्चर्य से हाथ में चाय का कप लिए हुए अंकित की तरफ देखते हुए बोली)

अच्छा एक बात बताओ तुम उस दरजी को पहले से जानती हो।

बिल्कुल भी नहीं मैं तो पहली बार उसकी दुकान पर गई थी इसके बारे में कुछ महीने पहले एक औरत ने मुझे बताई थी,,,।

इसका मतलब है कि उस दर्जी से कोई मेलजोल नहीं है वह ना तो तुम्हें जानता है और ना ही तुम उसे जानती हो और वह यह भी नहीं जानता कि तुम कौन हो कहां रहती हो क्या करती हो।

हां बिल्कुल,,,, ना तो मैं उसके बारे में कुछ जानती हो नहीं वह मेरे बारे में कुछ जानता है और तूने देखा तो वह दुकान भी कितनी दूर है वहां पर हम लोगों का आना-जाना भी नहीं होता।

बस तब तो बात बन गई,,,(अंकित एकदम से खुश होता हुआ बोला)

यह तु क्या बोल रहा है,,,, मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,।

मैं तुम्हें समझता हूं जब मर्द और औरत के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो जाता है और वह दोनों बार-बार चुदाई का सुख भोगते हैं तो मर्द और औरत अपने यह सुख को और भी बढ़ाने की सोचते हैं,,,, अच्छा सच बताना तुम भी इस मजे को और भी ज्यादा बढ़ाना चाहती हो कि नहीं ताकि और ज्यादा मजा आए,,,।

हां क्यों नहीं मैं क्या कोई भी औरत इस मजे को बढ़ाना ही चाहिए बल्कि कम थोड़ी ना करना चाहेगी।

बस यही तो मैं कहना चाहता था और अभी-अभी तुम कहीं की अगर मैं उसे दिन दरजी के सामने तुम्हारी साड़ी उठाकर तुम्हारी चुदाई करने लगता तो तुम्हें और भी ज्यादा मजा आता।

हां तो,,,?(सुगंधा फिर से हैरान होते हुए अपने बेटे की तरह देखते हुए बोली,,,,)

मैं चाहता हूं कि तुम्हें मैं वह सुख दूं,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा कुछ देर सोचने लगी और जैसे ही अपने बेटे की बात के कहने का मतलब को वह समझ पाई हो एकदम से हैरान हो गई और तपाक से बोली)

पागल हो गया क्या तू मैं किसी अनजान के सामने साड़ी उठाकर तुझसे चुदवाऊं,,,,, नहीं नहीं यह मुझे बिल्कुल भी नहीं होने वाला और अपने इस घटिया से युक्ति को अपने मन में ही रख।

मेरी बात समझने की कोशिश करो अनजान के सामने चुदवाने के लिए बोल रहा हूं किसी अनजान से चुदवाने के लिए नहीं मेरे से चुदवाने के लिए बोल रहा हूं।

नहीं नहीं मुझे यह बिल्कुल भी नहीं हो पाएगा पागल हो गया है क्या तू किसी ने हमें देख लिया तो गजब हो जाएगा और वह दर्जी अगर वह दर्जी कुछ करने लगा तो।

तुम्हें लगता है वह कुछ कर पाएगा बल्कि वह तो मजा ले रहा था उसे भी देखने में मजा आएगा,,,,, मम्मी मान जाओ ना बहुत मजा आएगा सारी जिम्मेदारी मेरी रहेगी।
(अपने बेटे की बात सुनकर जहां एक तरफ वह हैरान हो रही थी वहीं दूसरी तरफ उसकी युक्ति से उसके मन में भी गुदगुदी होने लगी थी वह तो अपने मन में कल्पना भी करने लगी थी कि कैसे सब कुछ होगा उसे कल्पना में सबको साथ दिखाई दे रहा था कि वह दर्जी की दुकान में है और उसका बेटा उसकी साड़ी कमर तक उठाकर काउंटर पर झुककर पीछे से उसकी चुदाई कर रहा है और वह दर्जी पागलों की तरह उसे देखकर अपने धोती के ऊपर से अपने लंड को मसाला है जो की बेजान सा पड़ा हुआ था। इस तरह की कल्पना से उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी लेकिन फिर भी इसमें डर भी बहुत था किसी के देखे जाने का डर था किसी के द्वारा पकड़े जाने का डर था समझ में बदनामी का डर था इन सब के बावजूद भी अंकित अपनी मां को मनाने की पूरी कोशिश कर रहा था और बोला।)

कुछ नहीं होगा मम्मी तुम एक बार मान तो जाओ,,, देखी थी ना कितनी देर तक हम दोनों उसके दुकान में थे लेकिन एक भी ग्राहक नहीं था। एकदम खाली दुकान थी और वह दर्जी भी कुछ नहीं कर पाएगा

अरे जरूरी है,,,, कि उस दिन भी दुकान में कोई ना हो,,,,, अगर कोई दुकान में हुआ तब क्या करेंगे,,,,।

(अपनी मां की यह बात सुनकर अंकित के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी थी क्योंकि उसने जिस तरह से यह बात की थी कि अगर कोई दुकान में हुआ तब क्या करेंगे इसका मतलब साफ था कि वह भी मन ही मन तैयार थी,,,, इसलिए अंकित खुश होता हुआ अपनी मां से बोला,,,)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो अगर दुकान में कोई हुआ तो हम दोनों जैसा बिल्कुल भी नहीं करेंगे बस मौका मिलेगा तो ही यह सब करना है जरूरी नहीं है कि जो काम की मन में ठान कर जा रहे हैं उसे किसी भी हालत में पूरा ही करना है,,,,।

लेकिन यह सब होगा कैसे,,,,,(कुछ देर सोचने के बाद वहां हाथ में लिया हुआ कप टेबल पर रखते हुए बोली,,,) मेरा मतलब है कि हम दोनों साथ में जाएंगे तो क्या उसे शक नहीं होगा…?

मैं जानता था तुम यही कहोगी मैं अपने मन में सब सोच रखा हूं हम दोनों साथ में जाएंगे ही नहीं मैं तकरीबन अर्धा घंटा पहले ही दुकान पर पहुंच जाऊंगा और दर्जी को सबकुछ समझा दूंगा,,,, कोई दिक्कत नहीं होगी,,,,।

मुझे तो बहुत डर लग रहा है,,,!

इसमें डरने की कोई जरूरत नहीं है जरा यह सोचो अगर हम दोनों सफल हो गए तो कितना मस्त अनुभव होगा जिंदगी भर याद रहेगा और यह भी तो सोचो तुम अपनी गर्म जवानी से उस दर्जी की हालत खराब कर दोगी,,,,,।

अगर वह भी कुछ करने की कोशिश किया तो।

साले का मुंह तोड़ दूंगा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,,। कल ही डिलीवरी लेने जाना है कुछ में मन में फिट कर लिया हूं कैसे क्या करना है तुम बस एक ग्राहक के तौर पर ही वहां जाना बाकी सब कुछ में संभाल लूंगा,,,।

अंकित मुझे तो डर लग रहा है तो कुछ ज्यादा ही नहीं हवा में उड़ रहा है।

कल तुम्हें पता चलेगा की हवा में उड़ने में कितना मजा आता है तुम्हारी जवानी का जोश ही मुझे पागल बना रहा है,,,(अंकित एकदम से हाथ आगे बढ़कर अपनी मां की चूची को ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए बोला)

तू सच में बहुत पागल हो गया है,,,,।

क्या करूं तुम्हारी गदराई जवानी का नशा ही कुछ ऐसा है कि एक बार दिमाग पर चढ़ जाता है तो उतरने का नाम ही नहीं लेता,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी उसे इस बात की खुशी थी कि उसका बेटा पूरी तरह से उसकी जवानी की कैद में गिरफ्त हो चुका था,,, उम्र के ईस पड़ाव पर पहुंच चुकी औरत को और क्या चाहिए जब एक जवान लड़का पूरी तरह से उसकी जवानी के नशे में डूब गया हो दिन रात उसे पाने की कोशिश करता हो और उसमें अपना सुख ढूंढता हो यही तो सुगंधा को भी चाहिए था,,,,,,,, अपने बेटे की बात सुनकर सुगंध चाय का खाली कप टेबल पर से उठाते हुए और खुद भी कुर्सी से उठते हुए बोली,,,)

चल अच्छा रहने दे जब देखो तब अपनी मनमानी पर उतारू रहता है,,,,, किसी दिन किसी को पता चल गया ना तो लेने के देने पड़ जाएंगे।

किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा,,,,

(सुगंधा हाथ में चाय का खाली कब लिए हुए उसे घर के पीछे की तरफ ले जाने लगी क्योंकि कुछ बर्तन वहां भी रखे हुए थे धोने के लिए,,,,, लेकिन वहां पर पहुंचते ही वह,,,, झूठे बर्तन में चाय का कप रखते हुए अपनी साड़ी उठाकर पेशाब करने के लिए बैठ गई तब तक पीछे से अंकित भी पहुंच गया था अपनी मां को पेशाब करते हुए देखकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखते ही उसकी आंखों में मदहोशी छाने लगी और वह एकदम से, अपनी मां के पीछे पहुंच गया और अपना एक हाथ उसकी दोनों टांगों के बीच से ले जाते हुए अपनी हथेली को एकदम से उसकी बुर पर रख दिया जिससे उसकी पेशाब रुक गई और पेशाब की धार उसकी हथेली को पूरी तरह से भिगो दी अंकित की ईस हरकत पर सुगंधा एकदम से चौंक गई और बोली,,,)

तू सच में एकदम हरामी हो गया है क्या कर रहा है मेरी पैसाब रोक दिया,,,, हटा अपनी हथेली,,,,।

मुझे बताई क्यों नहीं कि तुम मुतने जा रही हो,,,।

पागल हो गया क्या आप सब कुछ तुझसे बता कर करूंगी,,,,।

करना चाहिए था ना क्योंकि मेरा बड़ा मन कर रहा था तुम्हारी बुर चाटने को,,,,।

तो चाट लिया होता,,,, (सुगंधा भी अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली) इस तरह से पेशाब रोकने की जरूरत क्या है और अब हाथ हटा मुझे पेशाब करना है,,,,.

ऐसे नहीं पहले बताओ की बुर चटवाओगी कि नहीं,,,,

तू सच में पागल हो गया है मैंने कभी इंकार की हूं क्या,,,,?

यह हुई ना बात,,, (इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां की बुर पर से अपनी हथेली को हटा लिया लेकिन अपनी हथेली को अपनी मां की बुर के सिधान से बिल्कुल भी नहीं हटाया,,,,, और बोला,,,) अब मुतो,,,

(अपने बेटे की हरकत से उसकी बातों से सुगंधा उत्तेजना से गदगद हो गई थी उससे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी जिसे उसके बेटे ने ही रोक दिया था इसलिए वह चाहते हुए भी अपनी पेशाब को नहीं रोक पाई और उसकी बुर से फिर से पेशाब की धार फूटने लगी क्योंकि उसके बेटे की हथेली पर पड़ने लगी सुगंध को समझ में नहीं आ रहा था कि इतने में उसके बेटे को कौन सा मजा मिल रहा है लेकिन यह तो अंकित ही जानता था कि अपनी मां की बुर से निकलने वाली पेशाब की धार को अपनी हथेली पर महसूस करके उसे कितना उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसका लंड खड़ा हो गया था,,,,, वह पूरी तरह से मस्त हो गया था,,, लेकिन सुगंधा शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी,,,, वह पूरी तरह से पेशाब नहीं कर पाई थी और अपनी पेशाब को रोक दी थी , क्योंकि उसे शर्म महसूस हो रही थी और वह अपने बेटे की हथेली पर मुतना नहीं चाहती थी,,, इसलिए अधूरे पर ही वह उठकर खड़ी हो गई,,,,, लेकिन अंकित का मन कहां मानने वाला था वह अपनी मां की बुर से पेशाब की बुंदो को चखना चाहता था उसके स्वाद का मजा लेना चाहता था,,,,, और जैसे ही उसकी मां उठ कर खड़ी हुई वह अपनी साड़ी को नीचे गिराती ईससे पहले ही अंकित अपनी मां की साड़ी को कमर से ही पकड़ लिया और उसे इस स्थिति में एकदम से दीवार से सटा दीया जहां पर उसकी मां पेशाब कर रही थी,,,,,

शाम का समय था घर के पीछे बड़ा सा मैदान था जो कि निचले स्तर पर था वहां पर कुछ बच्चे खेल रहे थे,,,,, जिनका शोर उन दोनों को एकदम साफ सुनाई दे रहा था लेकिन जिस तरह से अंकित ने अपनी मां की कमर पर ही उसकी साड़ी पकड़कर उसे दीवार से सटाया था,,, सुगंधा की सांसें ऊपर नीचे हो गई थी,,, वैसे भी इस समय वहां साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनी थी इसलिए सारा काम आसान नजर आ रहा था सुगंधा की सांसों पर नीचे हो रही थी वह बेहद गहरी चल रही थी और गहरी जल्दी सांसों के साथ ही उसके ब्लाउज में तने हुए उसकी दोनों चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी और जिस तरह से वहां अपने बेटे की तरफ देख रही थी उसकी आंखों में भी मदहोशी और जवानी का नशा एकदम साफ दिखाई दे रहा था। वह जानती थी कि इस समय उसका बेटा क्या करने वाला है लेकिन इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी बुर पर उसकी पेशाब की बूंदे अभी भी लगी हुई है और अगर उसका बेटा उसकी बुर चाटेगा तो उसकी पेशाब की बुंद को भी चाट जाएगा,,,, लेकिन वह ईस समय अपने बेटे को रोक नहीं सकती थी,,,,, और देखते ही देखते अंकित अपने घुटनों के बल बैठकर,,, अपने होठों को अपनी मां की गुलाबी बुर से सटा दिया,,।

और उसे चाटना शुरू कर दिया, अंकित विश्वास को अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां की बुर पर पेशाब की बुंद लगी हुई है और वह खुद उसका स्वाद लेना चाहता था इसलिए वह पूरी तरह से आनंद के सागर में डूबने लगा क्योंकि उसकी मां की बुर पर लगे हुए पेशाब की बूंद का स्वाद एकदम खारा नमकीन था वह तो पागलों की तरह अपनी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया अपने दोनों हाथों को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे दबाते हुए उसकी बुर चाट रहा था अपने बेटे की बुर चटाई से सुगंधा एकदम आनंदित हो उठी और तुरंत अपनी टांग उठा कर उसके कंधे पर रख दे और वह भी अपने दोनों हाथों से अपने बेटे का कर पकड़ कर उसे अपनी बुर पर दबाना शुरू कर दी,,,,, अपनी मां का जोश देखकर अंकित की हालत खराब हो रही थी और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह भी पागलों की तरह अपनी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया था जितना हो सकता था उतना अपना जीभ अंदर की तरफ ले जाकर उसकी मलाई चाट रहा था।

लेकिन तभी सुगंधा के बदन में सनसनाहट फैलने लगी उसे महसूस होने लगा कि वह अपने पेशाब को अधूरा ही छोड़ दी थी जो कि इस समय जोर मार रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और जिस तरह से उसका बेटा उसकी बुर चाट रहा था पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी,,,,, और उसे महसूस होने लगा था कि उसकी पेशाब अब हुई तब हुई ऐसे हालात पर पहुंच चुकी थी वह अपने आप पर बहुत काबू करने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा हो नहीं रहा था क्योंकि उसके बेटे की थी उसकी बुर में सनसनी फैला रहा था जिससे वह बेकाबू हुई जा रही थी। और लाख रोकने के बावजूद भी वह अपने पेशाब के जोर को रोक नहीं पाई और अगले ही पल भर भला कर उसकी बुर से पेशाब की बार फूटने लगी जो सीधा उसके बेटे के मुंह में गिर रही थी,,,,, शुरू में तो अंकित को समझ में ही नहीं आया कि यह क्या हो रहा है लेकिन जैसे उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी मां की बुर से पेशाब की धार फुट रही है तो वह एकदम से तर गया वह एकदम से मदहोश हो गया और अपने मुंह को पूरी तरह से खोल दिया,,,,, और अपनी मां की बुर से निकलने वाली नमकीन धार को अपने गले के अंदर उतरने लगा यह सब सुगंधा अपनी आंखों से देख रही थी उसकी आंखों में मदहोशी खुमारी छा रही थी वह पूरी तरह से पागल हुए जा रही थी,,,,,

वह पूरी कोशिश की थी अपनी बुर से निकलने वाली पेशाब की धार को रोकने के लिए और उसकी यह कोशिश कुछ हद तक पेशाब की धार को रोकने में कामयाब होती नजर आ रही थी लेकिन धार इतनी बेकाबू थी कि वह सफल नहीं हो पाई रुक-रुक के उसके बेटे के मुंह में गिरती रही और जब उसे लगने लगा कि अब उससे नहीं संभल पाएगा तो वह एकदम से छूट गई और गहरी सांस लेते हुए अपनी पेशाब की धार को अपने बेटे के मुंह में गिरने लगी और उसका बेटा उसे अमृत की धार समझ कर अपनी गले के नीचे लेने लगा वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था मदहोश हो चुका था आज पहली बार उसे इस तरह से आनंद प्राप्त हो रहा था वरना वह अपने मां की बुर की चटाई तो बहुत बार कर चुका था लेकिन पहली बार उसके पेशाब का स्वाद ले रहा था और यह अनुभव सुगंधा के लिए भी पहली बार का था। मां बेटे दोनों पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे सुगंधा के मुंह से तो शिसकारी की आवाज फूट रही थी,, और बड़े तेजी से फूट रही थी क्योंकि वह जानती थी कि इस समय उसकी शिसकारी की आवाज बच्चों के खेल के शोर में दब जाएगा,,,, इसलिए को खुलकर मजा ले रही थी।

पूरी तरह से तृप्त होने के बाद अंकित अपनी मां की बुर पर से अपने होठों को हटाया और गहरी सांस लेता हूं अपनी मां की तरफ देखने का मां बेटे दोनों की नजर आपस में टकराई और सुगंध शर्मा से पानी पानी होने लगी,,,, अपनी मां की दोनों जांघों को कस के पकडते हुए अंकित उठकर खड़ा हो गया,,,,, उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा दिखाई दे रहा था,,,, वह पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था जिसका एहसास सुगंधा को हो रहा था क्योंकि इस समय उसका हाथ उसके पेंट के आगे वाले भाग पर था ,जिसमें विशाल तंबू बना हुआ था,,,, अंकित अपनी मां के मुंह को अपने हाथ से पकडते हुए बोला,,,।

आज क्या पिला दी मेरी रंडी मेरा लंड पागल हुआ जा रहा है,,,, चल घूम जा,,,, (उसके कंधे पकड़कर उसे घूमाते हुए बोला सुगंधा भी बिल्कुल भी देर नहीं की दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी होने में क्योंकि वह जानती थी कि आप उसका बेटा क्या करने वाला है उसकी बुर में भी आग लगी हुई थी,,, वह दीवार पकड़कर खड़ी हो गई थी उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी जिससे उसकी नंगी गांड एकदम से उजागर दिखाई दे रही थी और अंकित उस पर दो-चार चपत लगाता हुआ बोला,,,)

साली भोसड़ा चोदी तेरी गांड मुझे पागल बना देती है पता नहीं क्या हो जाता है मुझे,,,,,, (गांड पर चपत पर चपत लगाता हुआ अंकित बोले जा रहा था और सुगंधा नजर पीछे घूमर अपनी गांड की तरफ देखते हुए,, आहहहह आहहहहह,, ऊहहहहहह मां बोले जा रही थी,,,,,,, सुगंधा समझ गई थी कि उसका बेटा पूरी तरह से मदहोश हो चुका है आज उसकी जमकर चुदाई करने वाला है इसीलिए वह पीछे नजर घुमा कर अच्छी रही थी और अंकित अपने पेट की बटन खोलकर एक साथ अपनी अंडरवियर और पेंट को घुटनों तक नीचे खींच दिया,,,,, और उसका विशाल लंड फुंफकारने लगा,,,,, जिसे वह हाथ में पकड़ कर किसी हथौड़े की भांति अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर पटकने लगा जो कि इस समय चपत लगाने की वजह से टमाटर की तरह लाल हो चुकी थी,,,, अंकित जिस तरह से अपने मोटे लंड को अपनी मां की गांड पर पटक रहा था सुगंधा को अपनी गांड पर किसी हथोड़े के ही माफिक चलने का एहसास हो रहा था,,, वह मस्त हुए जा रही थी।

और फिर देखते ही देखते अंकित अपनी मां की गांड की एक भाग को पड़कर थोड़ा सा खींचते हुए उसके गुलाबी छेद को देखने लगा और जैसे ही उसकी गुलाबी गली नजर आई,, अंकित अपने मतवाले सांड को गली में घुसने के लिए उसे रास्ता दिखा दिया,,, और अगले ही पर गली गीली पाकर अंकित का लंड पहले प्रयास नहीं अंदर तक घुस गया और अंकित अपनी मां की कमर पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया,,,, एक बार फिर से अंकित घर के पीछे खुले में उजाले में अपनी मां की चुदाई कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि यहां पर भी उसे देखने वाला कोई नहीं था क्योंकि घर के पीछे बड़ा मैदान था और उसमें बच्चे खेल रहे थे उन बच्चों का शोर सुगंधा की मदमस्त शिसकारी की आवाज को दबा दे रही थी।

अंकित अपनी मां को हुमच हुमच कर चोद रहा था,,,, उसे बहुत मजा आ रहा था अपनी मां की जवानी का स्वाद उसके होठों पर अभी भी लगा हुआ था जिसे वह बार-बार अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपने होठों से चाट ले रहा था। अंकित अपनी जवानी के जैसे अपनी मां को पूरी तरह से हिला दे रहा था, सुगंधा को भी मजा आ रहा था अपने बेटे का जोश देखकर वह भी अपनी बड़ी-बड़ी गांड को पीछे की तरफ दे मार रही थी,,,, तकरीबन 20 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद मां बेटे दोनों झड़ने लगे,,,,,, दोनों मस्त हो चुके थे। दोनों संतुष्ट होने के बाद साथ में बैठकर बर्तन भी मांज रहे थे,,,, सुगंधा और उसका बेटा कल के दिन के लिए बेताब नजर आ रहे थे एक अलग अनुभव के लिए।

सारी मर्यादाओं की दीवार गिरा कर अपने संस्कारों को ताक पर रखकर सुगंधा अपने बदन की प्राथमिक जरूरत को पूरी कर रही थी और जो उसका हक भी था लेकिन तरीका गलत था क्योंकि वह अपने ही बेटे के साथ शारीरिक सुख भोग रही थी जो कि यह समाज के नजरिए से बिल्कुल गलत था लेकिन अब उसे समाज के परवाह नहीं थी ऐसा नहीं था कि वह समाज के प्रति बिल्कुल लापरवाह हो चुकी थी,,, अच्छी तरह से जानती थी की चारदीवारी के अंदर वह और उसका बेटा क्या कर रहे हैं यह किसी को पता नहीं था इसलिए समाज के नजर में तो वह दोनों मां बेटे ही थे लेकिन घर के चार दीवारी के अंदर वह दोनों मर्द और औरत का सुख भोग रहे थे। कुछ महीने पहले अंकित कभी सोचा भी नहीं था कि उसका जीवन इस तरह से बदल जाएगा इतना तो होता है ताकि एक मर्द होने के नाते एक औरत से उसे शरीर सुख जरूर मिलेगा लेकिन अपनी ही मां से मिलेगा यह कभी उसने सोचा नहीं था। इसलिए मां बेटे तृप्ति की गैर मौजूदगी में घर में जहां चाहे कहां चुदाई का खेल खेलना शुरू कर देते थे बाथरूम में बाथरूम के बाहर रसोई घर में कमरे में घर के पीछे या छत पर कोई भी जगह बची नहीं थी जहां दोनों की चुदाई के किस्से ना लिखे जाते हों,,,, ।

इन सबके बावजूद अंकित के मन में कुछ और अलग करने का कर रहा था जिसके बारे में उसने अपनी मां को का भी दिया था और जिस तरह का अनुभव उन लोगों का था उसे देखते हुए सुगंधा भी नानुकुर करते हुए इस खेल में शामिल हो चुकी थी अब वह दोनों दर्जी की आंखों के सामने चुदाई का सुख भोगना चाहते थे,,, सुगंधा भी इस खेल में शामिल हो चुकी थी उसे भी नए अनुभव की तलाश थी और इससे अच्छा अनुभव से मिलने वाला नहीं था क्योंकि दर्जी की दुकान का अनुभव उसे पहले ही मिल चुका था वह दर्जी की आंखों में अपनी जवानी के टपकते रस को पीने की चाहत देखी थी वह जानती थी कि उसकी मदहोश कर देने वाली जवान देखकर दर्जी की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी उम्र के ईस पड़ाव में दर्जी कुछ करने लायक बिल्कुल भी नहीं था लेकिन देख कर जिस तरह का सुख से मिल रहा था उसे देखकर सुगंधा भी मदहोश हो जाती थी। और यही अपनी मदहोशी का वह थोड़ा और बढ़ाना चाहती थी एक नए अनुभव के साथ वह देखना चाहती थी कि अनजान मर्द के सामने चुदवाने में कैसा महसूस होता है। वह इस अनुभव से पूरी तरह से गुजर जाना चाहती थी।
वह देखना चाहती थी कि अनजान मर्द के सामने उसका बेटा उसके साथ किस तरह की शारीरिक हरकत करता है। दर्जी की दुकान में जो कुछ भी हुआ था वह शारीरिक छेड़छाड़ से ज्यादा कुछ नहीं था। सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी लेकिन यह भी जानती थी कि औरतों की टांगों के बीच पहुंचने का रास्ता ही शारीरिक छेड़छाड़ से शुरू होता है अब तक का सफर तो दर्जी की आंखों के सामने एकदम सही था जिस तरह से उसका बेटा दर्जी की आंखों के सामने उसके अंगों से छेड़खानी कर रहा था दबा रहा था दो अर्थ वाली बातें कर रहा था वह सब कुछ दर्जी के सोच के परे था तू किधर जी कभी सोचा भी नहीं था कि एक अनजान लड़का एक अनजान औरतों के साथ पहली मुलाकात में इस तरह की छेड़छाड़ करने पर उतारू हो जाएगा और वह औरत भी उसे अनजान लड़के की छेड़छाड़ से इतना मजा लेगी,,,, अब ईसी छेड़खानी को अपने बेटे के कहे अनुसार एक घमासान चुदाई में बदलते हुए देखना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा एक अनजान मर्द के सामने कैसे उसके कपड़ों को उसके बदन से अलग करता है,,, कैसे उसकी आंखों के सामने ही अपने मर्दाना अंगों को उसके कोमल अंग में प्रवेश करने की हिम्मत दिखा सकता है और वह खुद कैसे एक अनजान मर्द के सामने उसके नजरिया में अनजान लड़के से चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है यही सब देखने के लिए तो सुगंधा बेताब नजर आ रही थी और जब जब इस बारे में सोच रही थी तब तब उसकी बुर पानी छोड़ दे रही थी।

अंकित अपने मन में दर्जी की दुकान की सारी रूपरेखाएं तैयार कर लिया था उसे अच्छी तरह से मालूम था कि वहां क्या करना है बस उसकी मां को अंजान बने रहना है उसे दरजी के सामने यह बिल्कुल भी नहीं जताना है कि वह दोनों पहले से ही एक दूसरे को जानते हैं या दोनों के बीच में रिश्ता क्या है तभी इस खेल का मजा दुगना हो पाएगा,,,, इस बात से मां बेटे दोनों अवगत थे कि वह दर्जी से उन दोनों का दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं था ना ही वह उन दोनों को जानता था नाहीं यह दोनों उस दरजी को भली-भांति जानते थे,,, उस दर्जी से केवल उन दोनों का ग्राहक और अनजान लड़के का ही संबंध था। मां बेटे दोनों इस समय पर उसे दर्जी की दुकान पर पहुंच जाना चाहते थे क्योंकि उस समय पर उसकी दुकान में बिल्कुल भी ग्राहक नहीं रहते थे और यही समय इस जगह था एक नए अनुभव के लिए,,, मां बेटे दोनों जल्दी से तैयार हो चुके थे। वैसे तो सुगंधा साड़ी के नीचे चड्डी नहीं पहनना चाहती थी लेकिन अंकित नहीं उसे चड्डी पहनने के लिए बोला था, क्योंकि वह देखना चाहता था जब वह दर्जी के सामने उसकी चड्डी उतारता है तो दर्जी की क्या हालत होती है और अपने बेटे की बात मानकर सुगंधा ने भी चड्डी पहन ली थी। पीले रंग की साड़ी में सुगंधा कयामत लग रही थी बस अपने हाथों से पीछे ब्लाउज की डोरी नहीं बांध पा रही थी तो अंकित खुद आगे बढ़कर अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को बांधने लगा,,, और इस दौरान वह अपनी मां के कंधों पर चुंबनों की बारिश भी करने लगा।

ईस हरकत से अंकित के साथ-साथ सुगंधा भी मदहोश होने लगी,, उत्तेजना के वश होकर अंकित पीछे से अपनी मां को बाहों में भरकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसके दोनों चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था और अपने पेंट में बने तंबू को अपनी मां के पिछवाड़े से रगडना शुरू कर दिया था। जिस तरह के हालात थे उसे देखते हुए मां बेटे दोनों पूरी तरह से उत्तेजित होने लगे और अंकित अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था । इसलिए वह किसी से मैं अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा और सुगंधा का भी मन होने के बावजूद वह अपने बेटे का दोनों हाथ पकड़ कर उसे रोक दी और बोली,,,।

अगर यही सारा जोश दिखा देगा तो दर्जी की दुकान पर क्या करेगा,,, कहीं ऐसा ना हो कि दरजी की आंखों के सामने टांय-टांय फिश हो जाए,,,,‌

अरे ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा तुम साड़ी तो उठने दो,,,(ऐसा बोलते हुए अंकित फिर से अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा तो फिर से उसकी मां उसे रोकते हुए बोली,,,)

नहीं अभी नहीं अब जो कुछ भी होगा दर्जी की दुकान में ही होगा इस तरह से तो मेरा जोश ठंडा पड़ जाएगा।

ओहहहहह इसका मतलब मेरी रानी दर्जी की आंखों के सामने चुदवाने के लिए बेताब है।

अब तू आग ही ऐसी लगा दिया है तो कर भी क्या सकती हूं,,,,,।

तो फिर चलो मेरी रानी दैर किस बात की है,,,।

तो चल मेरे राजा रोका किसने है,,, लेकिन 1 मिनट,,,

अब क्या हुआ,,,?

पहले अपने राजा को तो,,,,(उंगली से अपने बेटे की पेंट की तरफ इशारा करते हुए जिसमें अच्छा खासा तंबू बना हुआथा) बैठने के लिए बोल इस हाल में बाहर जाएगा तो कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा,,,,

अरे यार यह साला बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है इसीलिए तो तुम्हारी बुर में डाल रहा था।

समझा इस कहानी सारा भेद न खोल दे,,,,।

रुको मैं अभी ठीक कर देता हूं,,,,(इतना का करो अपनी मां के कमरे से बाहर निकलने लगा तो सुगंध भी उसके साथ कमरे से बाहर आ गई और अंकित अपनी मां की आंखों के सामने ही बाथरूम के बाहर ही जहां पर पानी जाने के लिए नाली बना हुआ था जहां पर कभी-कभी सुगंधा ही बैठकर पेशाब कर लेती थी वही तो खड़े-खड़े पेशाब करने लगा,,, सुगंधा दोनों हाथ को आपस में बांधकर खड़ी होकर मुस्कुरा रही थी वह अपने बेटे के लंड को देख रही थी जो कि इस समय पूरी औकात में आकर खड़ा था और अंकित उसे हाथ में लेकर हिलाते हुए मुत रहा था,,,, अंकित अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)

तुम्हारे साथ रहने पर यह बैठने का नाम ही नहीं लेता।

हां लग तो ऐसा ही रहा है इसकी ड्यूटी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है,,,।

हां पहले सिर्फ मुतने के काम आता था,,,, लेकिन अब यह दिन रात तुम्हारी सेवा में लगा रहता है इसलिए इसका ऐसा हालत है।

चल कोई बात नहीं मेरे लिए दिन रात ड्यूटी करेगा तभी तो तनख्वाह भी बराबर मिलती रहेगी।

तनख्वाह के लिए ही तो ड्यूटी पर लगा हुआ है। (इतना कहते हुए अंकित पेशाब कर चुका था और अपने लंड को पकड़ कर झांकते हुए आखिरी पेशाब की बूंद को भी नीचे गिरा देना चाहता था,,, लेकिन अंकित के इस हरकत पर सुगंधा सिहर उठी थी अगर इस समय बाहर न जाना होता तो वह खुद अपने घुटनों के बल बैठकर उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर देती,,,,,,, थोड़ी देर में मां बेटे दोनों घर से बाहर निकाल कर और दरवाजे पर ताला लगा कर ऑटो का इंतजार कर रहे थे थोड़ी ही देर में उन दोनों को ऑटो भी मिल गया था अंकित जानबूझकर थोड़ा पहले घर से निकला था ताकि वह अपनी मां से पहले दर्जी की दुकान पर जा सके और कुछ बातचीत कर सके अंकित को पूरा यकीन था कि दरजी उसकी बात को मान जाएगा आखिरकार बुढ़ापे में कुछ कर नहीं सकता था तो अपनी आंखों से देख कर मजा तो ले सकता था। और यह भी देखता कि आजकल की औरतें कितनी बेशरम हो चुकी है। थोड़ी बहुत और बातें थी जिस मां बेटे ऑटो में बैठे-बैठे साझा कर रहे थे। थोड़ी ही देर में दोनों ऑटो से उसे दर्जी की दुकान से थोड़ा सा पहले एक चौराहे पर पहुंच गए जहां पर उन्होंने रिक्शा रुकवा कर वहीं पर उतर गए और प्लान के मुताबिक अंकित अपनी मां से पहले ही पैदल चलता हुआ उसे दुकान में पहुंच चुका था और यह देखकर उसके खुशी का ठिकाना न था कि आज भी इस समय पर दुकान में कोई नहीं था दुकान पर पहुंचते ही वह दुकान में दाखिल होते हुए दर्जी की तरफ देखकर मुस्कुराया और बोला।

नमस्कार चाचा जी,,,,

अरे बेटा तुम आओ आओ,,,, आज कैसे आना हुआ,,,,(दर्जी भी अंकित की तरफ देखकर मुस्कुराया और उत्साहित होता हुआ बोला,,, अंकित भी बात को गोल-गोल घुमाए बिना ही बोला)

अरे भूल गए चाचा जी आज हुआ औरत आने वाली अपना ब्लाउज लेने,,,, कहीं वह आकर चली तो नहीं गई।
(अंकित की बात सुनकर वह दर्जी मुस्कुराया और मुस्कुराते हुए बोला)

नहीं नहीं बेटा अभी तक तो आई नहीं है हो सकता है अब आने वाली हो,,,,, लेकिन तुम्हें उससे क्या काम है,,,,(दर्जी भी उत्सुकता दिखाते हुए बोला)

भूल गए चाचा जी उस दिन क्या हुआ था कितना मजा आया था उस औरत का नाप लेने में,,,।
(अंकित की बात सुनकर दर्जी भी जैसे किसी ख्याल में खो गया था और उसे दिन की हरकत के बारे में सोचने लगा था उसके चेहरे पर उसे दिन की हरकत याद आते ही चमक बढ़ने लगी थी और वह मुस्कुराते हुए बोला)

कैसे भूल सकता हूं बेटा उसे औरत ने तो मेरी भी हालत खराब कर दी है दिन रात मेरे सपने में आती है।

क्या कह रहे हो चाचा वैसे तुम्हारा कहना भी ठीक है जब उसे औरत ने इस उम्र में तुम्हारी हालत खराब कर दी है तो सोचो मेरी क्या हालत कर दी होगी,,, अब तुमसे क्या छुपाना चाचा रात भर उसकी याद में लंड पकड़ कर हिलाना पड़ता है,,,, कसम से ऐसी औरत अगर बिस्तर पर मिल जाए तो मजा ही आ जाए।

लेकिन आज क्या करने आए हो बरखुदार,,,,

आज किस्मत आजमाने आया हूं,,,,, अगर आज किस्मत ने साथ दिया तो तुम्हारी इसी दुकान में आज उसकी चुदाई करूंगा और तुम्हारी आंखों के सामने।
(इतना सुनते ही वह दरजी जोर-जोर से हंसने लगा और हंसते हुए ही बोला,,,)

पागल हो गए हो क्या बेटा तुम्हें क्या लगता है कि वह औरत इस दुकान में मेरी आंखों के सामने तुम्हें करने देगी,,,,।

हां बिल्कुल चाचा मुझे पूरा विश्वास है उसे दिन मैं उसके बदन की प्यास को समझ गया था वह अंदर से बहुत प्यासी है,,,,,।

चाहे जो भी हो बेटा इस तरह से कोई औरत अनजान लड़के से और अनजान आदमी के सामने यह सब करना बिल्कुल भी पसंद नहीं करेगी।

अगर मैं करके दिखा दिया तो,,,,।

अगर,,,, (थोड़ा सोचने के बाद) तुमने वाकई में ऐसा कर दिखाया तो जो बोलोगे वह हार जाऊंगा,,,,,

चलो फिर तय हुआ और अगर मैं ऐसा नहीं कर पाया तो मैं तुम्हें ₹500 दूंगा नगद,,,,,।

चलो मंजूर है,,, (फिर से वह हंसते हुए बोला अंकित उसके हंसने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था क्योंकि वह जानता था कि कोई भी औरत इस तरह से अपने जिस्म का सौदा नहीं करती किसी अनजान मर्द से अनजान दुकान में और अनजान आदमी के सामने चुदवाने के लिए कभी तैयार नहीं होगी,,, लेकिन यह तो सिर्फ दर्जी के नजरिए से था उसकी नजर में अंकित और सुगंधा तो अनजान ही थे और उसका कहना सत प्रतिशत सच था लेकिन इस बात से वह अनजान था कि यह खेल मां बेटे दोनों मिलकर खेल रहे थे इसलिए उसकी दुकान में चुदाई होना निश्चित था।)

लेकिन थोड़ा बहुत तुम्हें मेरा साथ देना होगा बस मेरी हां में हां मिलाना है,,,,।

चलो कोई बात नहीं इतना तो मैं कर ही सकता हूं,,, (ऐसा कहते हुए वह धोती के ऊपर से अपने लंड को खुजलाने लगा था शायद वह आने वाले समय के बारे में सोच कर मस्त हो रहा था,,,,)

वैसे चाचा जी आज वह आएगी तो सही ना,,,,

आना तो चाहिए क्योंकि डिलीवरी आज ही देनी थी और वैसे भी मैं उसे जानता नहीं हूं नई-नई ग्राहक है। अगर पहले पता होता तो शायद मुफ्त में उसको ब्लाउज सी कर देता बदले में मैं भी उसकी चुदाई कर देता,,,,।

वह चाचा जी मान गए,,,, वैसे चाचा जी सच-सच बताना इस उम्र में खड़ा होता है कि नहीं।
(इतना सुनकर वह दर्जी फिर से हंसने लगा और हंसते हुए बोला)

हो तो जाता है लेकिन बहुत कोशिश करना पड़ता है।

चलो कोई बात नहीं अगर खड़ा हो गया तो तुम भी मजे ले लेना।

(इतना सुनकर वह फिर से जोर-जोर से हंसने लगा)

अच्छा चाचा जी आज भी ग्राहक नहीं है क्या बात है,,,?

तुम्हारी किस्मत बहुत तेज है तुम ऐसे समय पर आते हो जिस समय ग्राहक बिल्कुल भी नहीं रहते और तुम्हारी किस्मत का सितारा कितना बुलंद है यह भी देखना बाकी है अगर वह इस समय आ गई तो मैं भी समझ जाऊंगा कि तुम्हारी किस्मत का तारा बहुत बुलंद है।

लग तो ऐसा ही रहा है चाचा जी लेकिन एक और गुजारिश है,,,,।

बोलो आज तो तुम्हारी हर एक हसरत को पूरा कर दूंगा जो कुछ भी मेरे बस में होगा।

है तो तुम्हारे ही बस में अगर वह आ गई तो दुकान का दरवाजा मैं बंद कर दूंगा अगर तुम्हें एतराज ना हो तो।

बिल्कुल बेटा इसमें एतराज वाली कौन सी बात है आखिरकार सब कुछ सही हुआ तो मुझे भी कुछ देखने को मिल जाएगा बरसों से आंखें तरस गई है।

बहुत बड़े उस्ताद हो चाचा जी,,, (इतना कहकर अंकित हंसने लगा,,,,, थोड़ी देर तक वह दोनों इधर-उधर की बातें करते रहे अंकित बार-बार दरवाजे की तरफ देख रहा था तकरीबन 20 मिनट गुजारने के बाद ही सुगंधा दुकान की सीढ़ियां चढ़ रही थी,,,, और उसे पर सबसे पहले नजर दर्जी की गई दरजी एकदम से उत्साहित हो गया और अंकित की तरफ देखते हुए बोला)

वह बेटा तुम्हारी तो किस्मत का तारा सच में बहुत बुलंद है,,,, अब आएगा मजा,,,।

बस चाचा जी इसी पल का तो इंतजार था,,,,,।

(दुकान में दाखिल होते हुए सुगंधा दर्जी की तरफ देखते हुए बोली,,,)

चाचा जी मेरा ब्लाउज तैयार है,,,,

बिल्कुल तैयार है तुम बैठो मैं लेकर आता हूं,,,, (इतना कह कर दरजी धीरे से कुर्सी पर से उठा और दरवाजा खोलकर अंदर की तरफ चला गया उसके जाते ही मां बेटे दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुराने लगे और अंकित अपना अंगूठा ऊपर करके सब कुछ ठीक है यह दर्शाने लगा,,,, और एक अच्छा सा ब्लाउज अपने हाथ में ले लिया जिसकी डिजाइन बहुत ही बेहतरीन थी और जैसे ही वह दर्जी सिल हुआ ब्लाउज लेकर आया उसे देखते ही अंकित दर्जी से बोला,,,)

उस्ताद मैडम को यह ब्लाउज पसंद आया है इसकी डिजाइन बहुत ही बेहतरीन लग रही है और मैडम जी इस तरह का ब्लाउज सिलवाना चाहती है।

तो क्या हुआ इसमें दिक्कत क्या है आखिर कल ब्लाउज सिलने के लिए तो हम लोग बैठे हैं यहां पर,,,,, (सिल्वर ब्लाउज को काउंटर पर रखता हुआ दरजी बोला और धीरे से कुर्सी पर बैठ गया,,,, और अंकित थोड़ा सा गंभीर होता हुआ दर्जी से बोला)

लेकिन उस्ताद मैडम जी का नाम और इस ब्लाउज का नाप अलग है और आप तो जानते हैं की नाप लेने के लिए अगर ऐसा ब्लाउज सिलवाना है तो क्या करना होता है,,,,।
(अंकित दर्जी की तरफ देख रहा था लेकिन दरजी समझ नहीं पा रहा था कि उसे क्या बोलना है लेकिन फिर भी और थोड़ा दिमाग लगाकर बोला)

हां तो सब कुछ बता दो अगर सिलवाना है तो,,,,
(दर्जी की बात सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और अपनी मां की तरफ देखकर बोला)

देखिए मैडम अगर आपको इतनी बेहतरीन डिजाइन का ब्लाउज सिलवाना है जो कि एकदम नाप का हो तो इसका नाप देना होगा लेकिन कहते हुए मुझे थोड़ा शर्म आ रही है,,,,,।

शर्म कैसी शर्म,,, मैं कुछ समझी नहीं,,,,!

देखिए मैडम जी इस तरह का ब्लाउज हम दो-तीन कस्टमर के लिए ही सिलते हैं जो कि हमारे खास हैं और उनके कहने के मुताबिक ही इस तरह का ब्लाउज सिला जाता है अगर आपको भी ऐसा ब्लाउज सिलवाना है तो आपको अच्छी तरीके से नाप देना होगा ताकि ब्लाउज पहनने के बाद आपको कोई शिकायत ना रह जाए।

हां तो दिक्कत क्या है ले लो ना नाप ,नाप लिए बिना कैसे सिलोगे,,,,।

आप समझ नहीं रही है इसका नाम देने के लिए आपको अपना ब्लाउज उतरना होगा तभी ठीक से नाप ले पाऊंगा,,,,,,।
(अंकित की बात सुनकर दरजी के माथे से पसीना टपक रहा था उसकी हालत खराब हो रही थी,,,, सुगंधा दर्जी की तरफ सवालिया नजरों से देखने लगी। अंकित की हिम्मत देखकर दरजी भी थोड़ा जोश में आ गया था लेकिन थोड़ा घबरा भी रहा था लेकिन जिस तरह से सुगंध उसकी तरफ देख रही थी दरजी को बोलना ही पड़ गया,,, की)

यह सच कह रहा है इसलिए हम यह ब्लाउज किसी और के लिए नहीं सिलते जिसके लिए अभी सिलते हैं उन्हें इस तरह का नाप देना पड़ता है और हम सामने से नहीं बोलते हैं किस तरह का ब्लाउज हम सिलना चाहेंगे यह सही कह रहा है हमारे पास दो-तीन ही ग्राहक ऐसे हैं जिनके पास इस तरह का ब्लाउज है,,, अगर तुम्हें भी इस तरह का ब्लाउज सिलवाना है तो ब्लाउज उतार कर ही नाप देना होगा,,,,, (ब्लाउज उतार कर बोलते हुए दर्जी की हालत खराब हो रही थी और वह अपने हाथ से अपने लंड को हल्के से मसलते हुए बोल रहा था और उसकी हालत को देखकर सुगंध मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,, लेकिन फिर भी वह सहज बनी रही वह अपने चेहरे पर हैरानी के भाव लाते हुए बोली)

क्या कह रहे हैं,,,,?

देखिए मैडम जी,,, यह ब्लाउज की डिजाइन है इतनी खास है कि जो कोई भी कस्टमर यहां ब्लाउज सिलवाने आती है उसकी नजर इस पर पड़ी ही जाती है लेकिन हम लोग खुद इनकार कर देते हैं हम आपको भी इंकार कर सकते थे लेकिन हमें मालूम है कि यह ब्लाउज आपके ऊपर और भी ज्यादा खूबसूरत लगेगा इसलिए हम सब यह बता रहे हैं वरना बात आई गई हो जाती है।

सच में डिजाइन तो बहुत अच्छी है लेकिन,,,,

लेकिन क्या मैडम जी मुझे मालूम है कि तुम्हारे शरीर पर यह ब्लाउज बहुत खूबसूरत लगेगा और तुम्हारी खूबसूरती भी और भी ज्यादा बढ़ जाएगी इसलिए हीचकीचाए बिना नाप दे दीजिए सिलवा लीजिए यह ब्लाउज,,,।

लेकिन ब्लाउज उतार कर,,,!

तो इसमें क्या हो गया देखो ब्लाउज उतरवा कर हम लोग इसलिए नाप लेते हैं ताकि गोलाई का सही माप समझ में आ सके और तभी आरामदायक ब्लाउज हम लोग सी पाते हैं और अगर ब्लाउज के ऊपर दोगी तो दो-तीन डोर इधर-उधर हो जाएगा। तब आपको भी मजा नहीं आएगा पहनने में।

क्या सच में औरतें इस तरह से नाप देती है।(थोड़ा शंका जताते हुए वह बोली)

तो क्या मैडम जी,,,, जैसे डॉक्टर और वकील से कुछ नहीं छुपाना चाहिए इस तरह से दर्जी से भी कुछ नहीं छुपाना चाहिए तभी तो वह सही नाप का ब्लाउज सिलकर दे पाएगा,,,,

(अंकित और सुगंधा की बातों को सुनकर दरजी के माथे पर तो पसीना उपस आया था इस उम्र में उसकी हालत खराब हुई जा रही थी और सुगंधा के हाव-भाव को देखकर वह समझ गया था कि यह जल्द ही तैयार हो जाएगी नाप देने के लिए,,,, इसलिए आने वाले पल के बारे में सोचकर उसका दिल जोरो से धड़क रहा था। दर्जी को अंकित पर पूरा यकीन हो गया था कि वह अपनी बातों में उसे औरत को जाल में फंसा लेगा,,,, जबकि ऐसा होना निश्चित था क्योंकि दरजी नहीं जानता था कि यह दोनों केवल नाटक कर रहे हैं असल में दोनों मां बेटे हैं और अगर इस बात को वह जान लेता कि यह दोनों मां बेटे हैं तो उसके दिल पर क्या गुजरती वह तो कभी सोच भी नहीं सकता था की मां बेटे के बीच में इस तरह का रिश्ता भी हो सकता है क्योंकि वह उम्र दराज था और शायद इस अनुभव से वह गुजरा ना हो या यह भी हो सकता है कि, वह भी इस तरह का अनुभव ले चुका हूं खैर यह तो बात की बात थी लेकिन अभी जो हालात दुकान में बने हुए थे वह पूरी तरह से दरजी को गर्म किए हुए था,,, दर्जी क्या खुद मां बेटे की पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुके थे सुगंधा की बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी तो अंकित का लंड पेंट में तंबू बना चुका था,,,, एक बार फिर से गहरी सांस लेते हुए सुगंधा अपनी सारी शंकाओं को दूर करते हुए बोली,,,)

क्या सच में ऐसा करना होगा,,,,!

देखो मैडम इस ब्लाउज के लिए हम सबको नहीं बताते जिन्हें यह डिजाइन पसंद आ भी जाती है तो उन्हें कभी भी हम इस तरह का ब्लाउज सिलकर नहीं देते क्योंकि हम भी शरीर का गठीलापन देखते हैं हमारी आंखों से पता चल जाता है कि यह ब्लाउज किसके बदन पर ज्यादा खूबसूरत लगेगा कहीं किसी को भी यह ब्लाउज पसंद आ गया और वह पहले हो लेकिन उसके ऊपर वह डिजाइन अच्छी ना लगती हो या उसके गोली के माफिक ना आती हो तब तो हम लोगों का धंधा खराब हो जाएगा इसलिए हम लोग इस ब्लाउज के बारे में उन्हें कस्टमर से बात करते हैं जो इस ब्लाउज के लायक होते हैं और इस समय तुम इस ब्लाउज के लायक हो तुम पहनोगी तो ऐसा लगेगा कि जैसे कोई अप्सरा ब्लाउज पहनी हुई हो।

धंधा करना कोई तुमसे सीखे कितनी चिकनी चुपड़ी बातेंकरते हो,,,,(सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)

नहीं नहीं मैडम जी चिकनी चुपड़ी बातें मैं नहीं कर रहा हूं जो हकीकत है वही कह रहा हूं क्यों चाचा जी मैं ठीक कह रहा हूं ना मैडम किसी फिल्म की हीरोइन नहीं लगती है,,,,।

बात तो तुम एकदम ठीक कह रहे हो बेटा मैडम को देखते ही मुझे तो अपने जमाने की फिल्मों की हीरोइन याद आ जाती है।
(दर्जी एकदम मस्त होता हुआ बोला उधर जी की बात सुनकर सुगंधा मन ही मन खुश हो रही थी उसे एहसास हो रहा था कि दरजी उसकी जवानी के जाल में पूरी तरह से लपटता जा रहा है,,,, सुगंधा एक बार फिर से हल्के से मुस्कुराते हुए लेकिन दरवाजे की तरफ देखते हुए बोली,,,,)

मैं तैयार हूं लेकिन,,, क्या नाप यहीं पर देना होगा,,,,!

(अंकित अपनी मां के ईशारे को समझ गया था इसलिए वह एकदम से उत्साहित होता हुआ बोला,,)

जी बिल्कुल,,,,

लेकिन,,,,(फिर से दरवाजे की तरफ देखते हुए वह बोली तो अंकित एकदम से दर्जी की तरफ देखतेहुए बोला,,,)

मैं समझ गया मैडम आप चिंता ना करें मैं अभी दरवाजा बंद किए देता हूं,,,।

हां बेटा दरवाजा बंद कर दो वैसे भी इस समय कोई ग्राहक आता नहीं है,,,,,।
(गहरी सांस लेता हुआ वह दर्जी बोला क्योंकि अब उसकी भी हालत खराब होने वाली थी उसकी आंखों के सामने जो उसने अब तक नहीं देखा था ऐसा दृश्य दिखने वाला था,,, वैसे तो वह भी जीवन में संभोग सुख से वंचित नहीं होगा लेकिन यह निश्चित था के उसने अपनी जिंदगी में इतनी खूबसूरत औरत की नंगी चूचियों को नहीं देखा होगा और नहीं कभी अपनी आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत को एक नौजवान लड़के से अपने ही बेटे की उम्र के लड़के से चुदवाते हुए देखा होगा इसलिए उसके तन बदन में भी उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी या यूं कह लो कि उत्तेजना का तूफान आ रहा था,,,, अंकित भी बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था इसलिए वह जल्दी से जाकर दरवाजा बंद कर दिया था इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था कि दरवाजा बंद होने के बाद दुकान के अंदर केवल वह और उसकी मां के साथ-साथ केवल दर्जी ही होगा और कोई नहीं होगा क्योंकि वह दर्जी की हालत को अच्छी तरह से समझ रहा था,,,, उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उन दोनों को संभोग रत देखकर दर्जी भी पूरी तरह से मदहोश हो जाएगा उत्तेजित हो जाएगा लेकिन वह कुछ कर सकते की स्थिति में नहीं होगा क्योंकि उम्र का तक आज जो है और वैसे भी अगर उसकी जगह कोई और होता तो शायद यह खतरा अंकित कभी सर मोल ना लेता क्योंकि एक खूबसूरत जवान से भरी हुई औरत को नंगी देखकर कोई कुछ भी कर सकता है।

अंकित जल्दी से दरवाजा बंद करके वापस अपनी जगह पर आ चुका था सुगंधा की हालत खराब हो रही थी क्योंकि अब उसे वह कर रहा था जो उसने आज तक कभी नहीं की थी। अंकित बिल्कुल भी देर ना करते हुए वह सीधा मुद्दे की बात पर आते हुए बोला।

मैडम जी अब जल्दी से अपना ब्लाउज उतार दो,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा के तन बदन में मदहोशी का रस घुलने लगा,,, वह जानबूझकर दर्जी की तरफ सवालिया नजरों से देखने लगी तो अंकित ही बोला,,,)

आप बिल्कुल भी चिंता ना करें मैडम चाचा जी के देखरेख में ही नाप लिया जाता है ।

(उत्तेजना के हमारे सुगंधा का गला सूख रहा था वह अपने थूक से अपने गले को गिला करने की कोशिश करते हुए अपने दोनों हाथ उठाकर साड़ी के आड़ में ही अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी यह देखकर अंकित दर्जी की तरफ मुस्कुराता हुआ देखने लगा तो दर्जी भी आंखों से ही ईसारा किया कि मान गए उस्ताद असली उस्ताद तो तू ही है,,,, क्योंकि दर्जी ने कभी सोचा नहीं था कि वाकई में वह नौजवान लड़का है ऐसा कुछ कर पाएगा अब तो उसकी हालत और भी ज्यादा खराब होने लगी थी वह सुगंधा की तरफ देख रहा था सुगंध अपनी नाजुक उंगलियों से अपने ब्लाउज का बटन खोल रही थी,,, सच कहा जाए तो दर्जी को इस तरह का दृश्य देखे लगभग तीन दशक बीत चुके थे,,,, अपनी पत्नी के देहांत के बाद वह अपना सारा ध्यान सिर्फ अपने धंधे में ही लगाया था औरतों की तरफ उसका ध्यान गया ही नहीं था इसलिए तो आज अपनी आंखों के सामने इस तरह का दृश्य देखकर वह पागल हुआ जा रहा था लेकिन वह लाचार था कि उसकी मर्दाना अंग अब जवाब दे दिया था उम्र का तकाजा उसके मर्दाना अंग को शिथिल कर दिया था,,,,

सुगंधा धीरे-धीरे ब्लाउज का बटन खोल रही थी और उसकी चूड़ियों की खनकी की आवाज से पूरी दुकान मदहोशी के रस में डुबी जा रही थी,,,, अंकित की हालत खराब हो रही थी अंकित भी अपनी मां को इस तरह से ब्लाउज का बटन खोलता हुआ देखकर अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था जबकि उसके लिए यह दृश्य कोई पहली बार का बिल्कुल भी नहीं था लेकिन फिर भी आज का माहौल ही कुछ ऐसा था कि अंकित को सब कुछ पहली बार जैसा लग रहा था वह एक अनजान आदमी के सामने अपनी मां को ब्लाउज का बटन खोलता हुआ देख रहा था इससे उसकी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ गई थी उसका लंड पेंट में तंबू बना चुका था जिसे वह बार-बार अपने हाथ से दबाने की कोशिश कर रहा था और सुगंधा नजर नीचे का हुए धीरे-धीरे अपने ब्लाउज के सारे बटन को खोल चुकी थी,,,, सुगंधा को अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि उसकी पेंटि पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,, ब्लाउज का बटन खोलकर अंकित की तरफ देखने लगी और बोली।)

अब ठीक है,,,,!

इसे उतार तो दो तभी ना अच्छे तरीके से नाप ले पाऊंगा,,,,।
(सुगंधा के पास इनकार करने का कोई कारण नहीं था वह अंकित की बात मानते हुए अपने ब्लाउस को उतार दी और वही काउंटर पर रख दी और इस समय वह साड़ी के पल्लू की आड़ में अपनी दोनों जवान को छुपाने की नहीं बल्कि दिखाने की कोशिश कर रही थी लेकिन अपने हाथों से नहीं बल्कि अपनी पारदर्शी साड़ी से,,, दर्जी पागल हो जा रहा था क्योंकि पारदर्शी साड़ी से उसकी दोनों चूचियां पीले रंग की ब्रा में एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,,, और उस दरजी को यह भी एहसास हो रहा था कि उसकी बड़ी-बड़ी चूची है उसके छोटे से ब्रा में ठीक तरह से समा नहीं पा रही थी जिससे उसकी आदत से भी ज्यादा चूचियां बाहर दिखाई दे रही थी और यह देखकर वह मन ही मन दुआ कर रहा था कि काश वह अपनी साड़ी के पल्लू को हटा ले तो सब कुछ देखने को मिल जाए और ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बात अंकित सुन रहा था और इस बार अंकित एकदम से अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपने हाथ से ही उसका पल्लू हटाते हुए बोला,,,)

पल्लू को तो हटा दो ताकि तेरी तरह से दिखाई दे और मैं अच्छे से नाप ले सकूं,,,,,,(अंकित पल्लू हटा दिया था और यह देखकर दर्जी की हालत खराब होने लगी थी उसे लग रहा था कि वह जरूर कुछ ना कुछ बोले की लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था वह अंकित को कुछ भी नहीं बोली थी बल्कि आगे बढ़ाने की इजाजत दे दी थी यह देखकर तो दर्जी और भी ज्यादा हैरान हो गया था दर्जी अपने मन में ही बोल रहा था कि पता नहीं साली यह सब सच में ब्लाउज सिलवाने के लिए कर रही है कि उसकी बुर में आग लगी हुई है,,, और आज उसकी ही दुकान में हुआ अपनी बुर की आग बुझाना चाहती है। सुगंधा गहरी गहरी सांस ले रही जिसके साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी यह देखकर दर्जी का ईमान डोल रहा था और अंकित पर उसे गुस्सा आ रहा था थोड़ी जलन हो रही थी कि काश वह अंकित की जगह होता तो कितना मजा आता,,,,, अंकित अपनी मां की भरी हुई चूचियों की तरफ देखते हुएबोला,,,)

चाचा जी फीता देना तो,,,,

यह लो बरखुदार,,,(अपने गले में लपेटे हुए फीता को अपने हाथ से निकलते हुए आगे बढ़कर अंकित के हाथ में थमाते हुए बोला,,,, अंकित तुरंत दरजी के हाथ में से वह फीता ले लिया,,,, और अपनी मां की चुचियों का नाप लेने के लिए उसके करीब पहुंच गया सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था वह बार-बार नज़रे नीचे करके दर्जी की तरफ देख ले रही थी ,दरजी की हालत उससे छुपी नहीं थी,,,, वह समझ सकती थी कि दरजी के दिल पर इस समय क्या गुजर रही होगी ,,,, क्योंकि वह देख रही थी कि बार-बार दर्जी का हाथ उसके दोनों टांगों के बीच पहुंच जा रहा था। अंकित मुस्कुराता हुआ अपनी मां की चूचियों की तरफ देखते हुए बोला,,,,)

बहुत खूबसूरत और बड़े-बड़े गोलाई है आपके,,,,।
(अंकित की बात सुनकर दरजी एकदम सन्न रह गया उसे फिर लगा कि इस बार वह जरूर कुछ ना कुछ बोले की लेकिन वह कुछ बोली नहीं बस मुस्कुरा दी यह देखकर दरजी के तो होश उड़ गए क्योंकि अंकित खुले शब्दों में उसके कस्टमर से बात कर रहा था। और हैरानी वाली बात यह थी कि वह कुछ बोल नहीं रही थी वह मुस्कुरा रही थी जिसका मतलब साफ था कि उसकी बातें उसे अच्छी लग रही थी धीरे-धीरे दर्जी को यकीन होने लगा था कि यह नौजवान लड़का जिसे इरादे से यहां आया है वह अपना इरादा पूरा करके ही जाएगा,,,,,।)

दोनों हाथ फैलाओ,,,,,।

(अंकित की बात मानते हुए सुगंधा अपने दोनों हाथों को खोलकर फैला दी और अंकित एकदम से देखो उसके पीछे की तरफ लाकर उसकी दोनों चूचियों के बीच से वह फीता रखकर नाप लेने लगा वह बार-बार फाइट को कस दे रहा था जिससे सुगंधा एकदम से उसकी तरफ लड़खड़ा कर पहुंच जा रही थी और उसकी दोनों चूचियां अंकित की छाती से स्पर्श हो जा रही थी और यह सब अंकित दरजी को दिखाते हुए कर रहा था इसलिए तो दर्जी की आंखें फटी की फटी रह गई थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था थोड़ी देर तक फीते को उसी तरह से पकड़े रहने के बाद वह बोला,,,)

ब्रा का कपड़ा मोटा है ना,,,।

(अंकित के सवाल पर सुगंधा सिर्फ हां मै सिर हिला दी,,,,,)

तब तो मैडम आपको अपनी ब्रा भी उतरना पड़ेगा,,,,।

(यह सुनकर दरजी अपने मन में ही बोला बाप रे यह क्या कह रहा है रे अभी थप्पड़ मार देगी,,,,, लेकिन अपनी बात में उसे दरजी को भी शामिल करते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

क्यों उस्ताद सही कह रहा हूं ना,,,,।
(दर्जी को तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या जवाब दे वह आश्चर्य से अंकित की तरफ तो कभी सुगंधा की तरफ देख रहा था तो अंकित ही बोला ,,)

अरे उस्ताद याद है ना अपनी वह बंगले वाली कस्टमर ब्रा पहनकर जिसे अपना नाप दी थी और उसका ब्लाउज खराब हो गया था तो कितनी बहस बाजी हुई थी हम लोगों में और उसके बीच फिर उसके बाद मेरी समझाने पर उसे अपनी ब्रा उतार कर फिर से अपनी नाप दी और तब जाकर उसका ब्लाउज सही से सिल पाए थे,,,,।

अरे हां याद आया,,,,, यह लड़का सही कह रहा है मैडम,,,,, अगर उसका कपड़ा मोटा है तो एक दो डोरा इधर-उधर हो जाएगा तब हमसे ना कहना कि अच्छा नहीं सिले हो,,,,।

(सुगंधा अपने बेटे की चालाकी पर हैरान थी जिसे वह पुत्र समझती थी वह धीरे-धीरे कितना चालाक हो चुका था उसकी चालाकी पर वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी और दर्जी की तरफ देखकर मन ही मन उसे गाली देते हुए बोल रही थी,,, साला हरामजादा कितना हारामी है देखो तो सही एक औरत की नंगी चूचियों को देखने के लिए कितना झूठ बोल रहा है,,,,,,,,, फिर भी सुगंधा गहरी सांस लेते हुए बोली।)

क्या इसे भी उतारना होगा,,

बिल्कुल मैडम,,,,,, और थोड़ा जल्दी करिए कस्टमर के आने का समय हो जाएगा तो नाप भी नहीं ले पाऊंगा,,,,,(हाथ में फीता लिए हुए अंकित बोला,, अंकित के कहने के मतलब को सुगंधा अच्छी तरह से समझ रही थी, वह मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझ रही थी वह जानती थी कि उन दोनों के पास समय पर्याप्त नहीं है जो कुछ भी करना था जल्दी करना था अगर कोई कस्टमर आ गया तो पूरा मामला खराब हो जाएगा इसलिए तुरंत अपने हाथ पीछे की तरफ ले जा करके वह अपने ब्रा का हुक खोलने लगी वैसे तो वह बड़े आराम से यह काम कर लेती थी लेकिन इस समय उसके मन में भी कुछ चंचलता चल रही थी। उसके दिमाग में भी खुरापात चल रहा था इसलिए वह अंकित से बोली,,,,)

देखना तो मेरा हुक नहीं खुल रहा है जरा,,,,,(इतना ही कह पाए थे कि अंकित एकदम से उत्साहित होता हुआ बोला)

जी मैडम अभी खोल देता हूं,,,(और इतना कहने के साथ है यह अपनी मां के पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसके ब्रा का हुक खोलने लगा यह देखकर तो दर्जी की हालत खराब होने लगी उसे ऐसा महसूस होने लगा कि बिना खड़े हुए ही उसके लंड से पानी निकल जाएगा वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था माथे पर पसीना वापस आया था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसे उम्मीद नहीं थी कि वह ऐसा कुछ बोल जाएगी,,,, और थोड़ी ही देर में अंकित अपनी मां की ब्रा का हुक खोल दिया था उसकी ब्रा एकदम से ठीक ही हो गई थी जिसे सुगंध अपने हाथों से बरा का कब पकड़ कर उसे अपनी चूचियों से जैसे किसी फल से उसका छिलका अलग करते हैं इस तरह से उसे अलग करते हुए उसे भी काउंटर पर रख दी उसकी नंगी चूचियां एकदम हाहाकार मचा रही थी दर्जी की नजर उसकी चूचियों पर पड़ी तो वह एकदम से पागल हो गया क्योंकि उसने कभी सोचा नहीं था की चूचियां इस तरह से भी तरासी हुई हो सकती है,,,,, एकदम तनी हुई गोलाकार जरा भी ढीलापन और लचक नहीं था इसलिए तो,,,, दर्जी ठीक तरह से देखने के लिए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया था पानी पीने के बहाने और नजर भरकर सुगंधा की चूचियों को देखने के बाद में काउंटर पर पड़े ग्लास को अपने हाथ में ले लिया और पानी पीकर अपने सूखते हुए गले को गिला करने की कोशिश करने लगा,,,,, ब्रा का हुक खोलने के बाद अंकित फिर से अपनी जगह पर आ गया था और अपनी मां की चूचियों को देखकर मदहोश होता हुआ बोला,,,)

एक बात कहूं मैडम बुरा मत मानना,,,।

कहो,,,,,

मैंने अपनी जिंदगी में आज तक इतनी खूबसूरत और गोल-गोल चूचियां नहीं देखा,,,,, और शायद हमारी उस्ताद ने भी इतनी खूबसूरत चुची नहीं देखे होंगे,, क्यों उस्ताद,,,,(दर्जी की तरफ देखे बिना ही अंकित बोल और दर्जी अपने मन में ही बोला यह साला मुझे क्यों बीच में घसीट रहा है लेकिन यह बात सच थी दर्जी अपने मन में मान रहा था कि वाकई में उसने नौकरी इतनी खूबसूरत औरत अपनी जिंदगी में अपनी दुकान में देखा था और ना ही इतनी खूबसूरत नंगी चूचियों को देखा था इसलिए तो आश्चर्य से उसकी आंखें फटी पड़ी थी,,,,,, अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) अब देखना मैडम ब्लाउज का नाप कितना फिट बैठता है आपकी गोलाईयो पर ना एक डोर आगे और ना एक डोर पीछे एकदम कैसा होगा एकदम आरामदायक पहनोगी तो तुम्हें भी लगेगा कि वहां कितना खूबसूरत ब्लाउज मैं आज पहनी हुं,,,।

सिर्फ बातें करने से कुछ नहीं होता एक बार सील कर दे दो और मैं पहन लूं तब जानू,,,,।

यह बात है,,,, इसका मतलब है मैडम की आप हम पर शक कर रही हैं कि हम लोग इतना अच्छा ब्लाउज सी पाएंगे कि नहीं,,,,।

वह तो है ही,,,,,।

तो लो अभी नाप ले लेता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से पिता को उसके पीछे से घुमाया और फीते की किनारी को और नाप का फीता उसकी दोनों चूचियों के बीच रखते हुए,,, दर्जी की तरफ देखते हुए बोला,,,,)

44,,,,,

(और थूक को निगलते हुए दर्जी नाप नोट करने लगा,,,,,,,, और फिर अंकित कंधे से नीचे की तरफ उसकी चूची हो के नीचे तक नाप लेने लगा ऐसा करते हुए वह जानबूझकर अपनी हथेली का दबाव उसकी नंगी चूचियों पर बढ़ा दे रहा था वह केवल दरजी को दिखा रहा था और दर्जी देखकर हैरान भी था क्योंकि वह औरत कुछ बोल नहीं रही थी इस बात से दर्जी की आंखें आश्चर्य से फटी जा रही थी। तभी अंकीत अपनी मां से बोला,,)

अब मैडम थोड़ा पीछे घूम जाओ,,,,,।

(इतना सुनते ही सुगंधा पीछे की तरफ घूम गई और उसकी पीठ अंकित की तरफ थी और अंकित दर्जी की तरफ देखते हुए अपने दोनों हाथों की हथेलियां को गोल-गोल दबाते हुए इशारा कर रहा था कि अब उसकी चूची दबाएगा,,,, अंकित का इशारा समझते ही दरजी के पसीने छूटने लगे उसे डर था की कहीं ,ईस हरकत पर वह उसे थप्पड़ ना मार दे,,,,,, अंकित फिर से पिता लेकर के अपनी मां की दोनों चूचियों पर रख दिया और इस बार दोनों हाथों से हल्के से अपनी मां की चूची दबा दिया सुगंधा के तन बदन में मदहोशी जाने लगे उसके चेहरे का रंग सुर्ख लाल होने लगा और अपने बेटे की हरकत पर उसके मुंह से हल्की सी आह निकल गई,,,, और उसकी आहह की आवाज दर्जी के कानों तक बड़े आराम से पहुंच गई थी क्योंकि वह जानबूझकर इस तरह की आवाज निकाली थी। इस मदहोश कर देने वाली आवाज को सुनकर दो दर्जी का दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा उसे डर लग रहा था कि कहीं उसे दिल का दोरा ना पड़ जाए,,,,,

अभी इस बात को इस मामले को आगे बढ़ाने से कोई मतलब नहीं निकल रहा था,,,,, इसलिए वह दर्जी से बोला,,,,।

पूरा नाप हो गया ना उस्ताद,,,।

हां बिल्कुल तूने अच्छे से नाप ले लिया,,,,(गहरी सांस लेता हुआ वह दर्जी बोला)

तो अब मैं अपने कपड़े पहन लुं,,,,,

कुछ देर और ऐसे ही रहने दो मैडम,,,(और इतना कहने के साथ ही पीछे से ही वह अपने दोनों हाथों में अपनी मां की दोनों चूचियों को भरकर हल्के हल्के दबाने लगा और इस बार फिर से सुगंधा मस्त होते हुए हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज लेते हुए बोली,,)

यह तुम क्या कर रहे हो,,,सहहहहह,आहहहहहह छोड़ो मुझे,,,,,।

तुम बहुत खूबसूरत हो मैडम मैं आज तक इतनी खूबसूरत औरत नहीं देखा,,,,।

नहीं देखा तो आज देख लिया ना अब मुझे जाने दो कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,,।

(दर्जी यह सब देखकर मदहोश हुआ जा रहा था और जिस तरह से उसने कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा यह बात कही थी उसे देखकर दरजी को समझते देर नहीं लगी कि आप यह चारों खाने चित हो गई है,,,,)

दरवाजा तो बंद है मैडम अंदर क्या हो रहा है किसी को पता नहीं चलेगा मैं तो पागल हो जाऊंगा तुम्हारी खूबसूरती में डूब जाऊंगा,,,,,,।

नहीं रहने दो ऐसा करना ठीक नहीं है,,,, तुम्हारे उस्ताद,,,(सुगंधा मदहोश होते हुए दर्जी की तरफ देखते हुए बोली)

वह कुछ नहीं बोलेंगे मैडम बस थोड़ी देर और मुझे दबा लेने दो,,,,,,।

सहहहहहवआहहहहह बस थोड़ी देर उसके बाद में चली जाऊंगी,,,,,।

बिल्कुल मैडम चली जाना,,,, लेकिन इतनी खूबसूरत चुची को मैं अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहता इसे दबाने का सुख पूरी तरह से भोग लेना चाहता हूं,,,,आहहहहह कितनी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां है मैडम तुम्हारी,,,,, लगता है तुम्हारे पति बहुत मेहनत करते हैं,,,,,,,।

बहुत मेहनत करते हैं तभी तो ऐसी तनी हुई है,,,,,,।(सुगंधा भी मदहोश होते हुए बोली दरजी पूरी तरह से पस्त हुआ जा रहा था वह जानता था कि जिस इरादे से वह लड़का दुकान में आया था वह अपना इरादा पूरा कर लेगा और उसे अपने शर्त हारने का डर बिल्कुल भी नहीं था उसे इस बात की खुशी थी कि आज सब कुछ सही हुआ तो आज वह बेहद खूबसूरत औरत की चुदाई अपनी आंखों से देख पाएगा,,,,)

लेकिन फिर भी मैडम कौन से तेल से मालिश करती हो मुझे भी बता दो ताकि मैं भी मौका आने पर किसी को बता सकूं,,,,।

सरसों के तेल से मालिश करती हूं दिन में दो बार तभी तो एकदम गोल है,,,,,

ओहहहहह मैडम तभी तो तुम एकदम हीरोइन की तरह लग रही हो,,,,(अंकित पागलों की तरह अपनी मां की दोनों चूचियों को दबाते हुए बोला उसके इस तरह से स्तन मर्दन से सुगंधा एकदम चुदवासी हुए जा रही थी,,,,,, उसकी बुर से लगातार मदन रस का बहाव हो रहा था,,,, अंकित जितना हो रहा था उतनी जोर-जोर से अपनी मां की चुचियों को दबा रहा था और दर्जी को ऐसा दिख रहा था कि वाकई में यह च उसके हाथ में पहली बार आई है कुछ देर तक इसी तरह से दबाने के बाद सुगंधा भी नाटक करते हुए बोली,,,)

बस अब हो गया ना अब मुझे कपड़े पहन लेने दो,,,(इतना कहते हुए सुगंधा खुद ही घूम गई और अंकित गहरी गहरी सांस लेता हुआ अपनी मां की चूचियों को ही देखता रह गया और खुश होता हुआ बोला)

बहुत मजा आया आज का दिन मुझे जिंदगी भर याद रहेगा,,,,,।

मुझे भी जिंदगी भर याद रहेगा की मुझे इस तरह के दरजी मिले थे,,,(ब्रा को अपने हाथ में लेकर उसे पहनना ही वाली थी कि अंकित बोला)

मैडम बुरा ना मानो तो क्या मैं एक बार इसे मुंह में लेकर पी सकता हूं,,,,,,,।(अंकित की बात सुनकर तो दरजी के होश उड़ गए उसकी सांस उखड़ रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी आंखों के सामने यह सब क्या हो रहा है लेकिन उसे भी बहुत मजा आ रहा था बस वह अपनी उम्र और शरीर को लेकर परेशान था वरना इस खेल में वह भी कूद गया होता अंकित की बात सुनकर सुगंधा अंकित की तरफ देखने लगी और फिर अपनी छातियो को उभारते हुए बोली,,,)

लो लेकिन ज्यादा देर तक नहीं,,,,।
(बस क्या था अंकित तो पूरी तरह से अपनी मां की दोनों चूचियों पर टूट पड़ा और बारी-बारी से दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया दर्जी अपने मन में ही कह रहा था कि वाकई में यह औरत एकदम चुडक्कड़ है यह नौजवान लड़का सही कह रहा था,,,, अंकित तो पागल हुआ जा रहा था लेकिन उसकी मां भी मदहोश हो चुकी थी एकदम छिनार बन चुकी थी एकदम रंडी की तरह एक अनजान आदमी के सामने अपने बेटे से अनजान बनकर मस्ती के सागर में डुबकी लगा रही थी। उसे भी बहुत मजा आ रहा था उसका बेटा सच कह रहा था कि इस खेल में बहुत मजा आएगा वह अपने मुंह से गरमा गरम शिकारी की आवाज निकाल कर दर्जी की हालत को और ज्यादा खराब कर रही थी,,,, तकरीबन 10 मिनट तक अपनी मां की चूचियों को पीने के बाद वह धीरे से अपना एक हाथ नीचे की तरफ लेकर और साड़ी के ऊपर से ही अपनी मां की बुर को मसलने लगा,,,, यह देख कर तू दरजी के बदन में आग लग गई अब बैठे-बैठे इस नजारे को देखना उचित नहीं खाऊंगा उठकर खड़ा हो गया था और खड़े-खड़े देख रहा था उसे समझ में आ गया था कि यह औरत वाकई में बहुत ज्यादा चुदवासी है वह अपने मन में ही सोचने लगा है तो बड़े घर की लेकिन शायद इसका पति से खुश नहीं कर पाता है इसीलिए इस तरह से मजा ले रही है,,,,, अंकित पागलों की तरह साड़ी के ऊपर से अपनी मां की बुर को दबा रहा था मसल रहा था अपनी हथेली में तो बोल रहा था जिससे सुगंधा पानी पानी हो रही थी लेकिन कुछ देर बाद वह जानबूझकर एकदम से अपने बेटे से अलग होते हुए बोली,,,,)

बस अब ज्यादा नहीं,,,,(गहरी सांस लेते हुए सुगंधा पूरी और धीरे से अपनी ब्रा को पहनने लगी इस बार वह खुद ही अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर के अपनी ब्रा के हक को बंद कर ले और अंकित अपनी मां का ब्लाउज लेकर उसके सामने खड़ा था उसे थमाने के लिए लेकिन प्लेान के मुताबिक दोनों एक दूसरे की तरफ देख रहे थे एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे,,,,, दर्जी भी यह सब देख रहा था उसे लगने लगा था कि आज वह शर्त जीत जाएगा लेकिन शर्त जीतने की खुशी उसके चेहरे पर बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि उसका शर्त जीतने का मतलब था कि एक खूबसूरत नजारा अपनी आंखों से ओझल होता हुआ देखना जिसके लिए वह तैयार नहीं था लेकिन सुगंधा को देखकर वह समझ गया था कि अब यह खेल आगे बढ़ने वाला नहीं है,,,,, अंकित अपने हाथ में ब्लाउज लिए हुए ही किसी रोमांटिक हीरो की तरह अपनी मां से बोला,,,)

सच में आज का दिन मुझे जिंदगी भर याद रहेगा,,,।

और मुझे भी,,,(अपने ब्रा के कप को अच्छे से व्यवस्थित करते हुए सुगंधा बोली,,)

क्या आपका पता मिल सकेगा,,,,।

बिल्कुल भी नहीं घर पर मेरी जवान लड़की और जवान बेटा है,,,,,(और ऐसा कहकर अंकित की आंखों में देखने लगी अंकित भी अपनी मां की मदहोश भरी आंखों में पूरी तरह से डुबने लगा और दर्जी के आश्चर्य के बीच कुछ ऐसा हुआ जिसकी दर्जी को भी उम्मीद नहीं थी और ना ही अंकित को क्योंकि अंकित की आंखों में देखते हुए सुगंधा एकदम से अंकित के करीब पहुंच गई और उसके होठों पर चुंबन करने लगी दोनों के होंठ एकदम से आपस में भिड़ गए,,,,, अंकित पागलों की तरह अपनी मां को बाहों में भरकर उसके होठों का रसपान करते हुए साड़ी के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को मसलना शुरू कर दिया उसे दबाना शुरू कर दिया यह देखकर दर्जी का पसीना छूटने लगा हुआ पागल हुआ जा रहा था वह भी इस खेल में कूदने की कोशिश कर सकता था लेकिन वह जानता था कि उससे कुछ होने वाला नहीं है,,,,

मदहोश होता हुआ अंकित है एक बार में ही अपनी मां के बराबर को फिर से को दिया और उसकी नंगी चूचियों को दोनों हाथों से दबाते हुए उसके होठों का रिस्पांस करने लगा दोनों पागल हुए जा रहे थे मदहोशी के सागर में डूबते चले जा रहे थे,,,, दोनों के मुंह से हल्की-हल्की कराहने और शिसकारी की आवाज आ रही थी,,,, सुगंधा पूरी तरह से बेशर्म बन चुकी थी वह कभी सोची नहीं थी कि अनजान मर्द के सामने खड़ी होकर वह अपने बेटे से इस तरह की हरकत करवाएगी और करेगी वह पूरी तरह से छिनार बन चुकी थी इस खेल में कितना मजा आ रहा था यह मां बेटे ही बता सकते थे वह पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूब के चले जा रहे थे और अपने साथ दर्जी की भी हालत खराब कर रहे थे,,,,,, मौके की नजाकत को अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए एकदम से अपनी मां को काउंटर की तरफ घुमा दिया और उसकी साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा अब सुगंधा उसे रोकने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रही थी,,, क्योंकि वह अभी यही चाहती थी देखते ही देखते अंकित अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया था उसकी नंगी गांड जो कि उसकी पैंटी में लिपटी हुई थी उसे देखकर अंकित की हालत तो खराब हो ही रही थी उसे दरजी को लग रहा था कि उसे दिन का दौरा पड़ जाएगा वह काउंटर की तरफ झुक कर सुगंधा की बड़ी-बड़ी गांड को देख रहा था और सुगंध टेबल पर घुटने दिखाकर अपनी आंखों को बंद करके इस पल में पूरी तरह से डूबने लगी थी,,,,,।

उस्ताद औरत पूरी तैयार है क्या मस्त बड़ी बड़ी गांड है देखो तो सही,,,, इस औरत की बड़ी-बड़ी गांड देखकर तुम्हारा भी लंड खड़ा होने लगेगा,,,,,,(अंकित जोर-जोर से अपनी मां की गांड पर चपत लगाते हुए उसे अपनी हथेली में लेकर दबोच ले रहा था,,,,, और फिर एक झटके से अपनी मां की पेंटी को एकदम से नीचे की तरफ खींच दिया और उसके पैरों से बाहर निकाल दिया और दर्जी की हालत और ज्यादा खराब करने के लिए उसे पेंटिंग को काउंटर पर ही रख दिया जहां पर वह दर्जी खड़ा था,,,, कमर से नीचे और ऊपर सुगंधा पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी बस कमर में उसकी साड़ी और पेटीकोट फसा हुआ था और अंकित बिल्कुल भी वक्त गवाई बिना अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपनी मां की गांड में अपना मुंह डाल दिया और उसकी गुलाबी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा एकदम से सिहर उठी और अपनी गांड को अपने बेटे की तरफ खेलने लगी अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर पागलों की तरह उसकी बुर की चुदाई कर रहा था,,,,, यह देख कर दर्जी से रहा नहीं जा रहा था उसके पास में ही काउंटर पर उसे खूबसूरत औरत की पेंटी पड़ी थी जिसे वह अपने हाथों में ले लिया और उसे उलट पलट कर देखने लगा शायद उसके जीवन में उसने कभी भी पेंटिं को अपने हाथ में नहीं लिया था क्योंकि उसकी उम्र को देखते हुए ऐसा ही लग रहा था कि उसकी बीवी पेंटी पहनती नहीं थी,,,, सुगंधा अपनी आंखों को खोलकर दर्जी की तरफ देख रही थी उसकी आंखों में मदहोशी थी एक नशा था और दर्जी के हाथों में अपनी पैंटी देखकर उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई थी उसका गीलापन दर्जी देखकर पागल हो रहा था,,,, और पेंटी के उसे हिस्से को अपनी उंगलियों से दबा दबा कर देख रहा था जो हिस्सा सुगंधा के मदन रस से गिला हो चुका था और वह बोला,,,)

मैडम की बुर तो बहुत पानी छोड़ रही है बेटा,,,(वह भी ईस मौके का पूरा फायदा उठा लेना चाहता था भले कुछ करके ना सही लेकिन औरत के अंगों के बारे में खुले तौर पर बोलकर ही मजा ले रहा था और वैसे भी बुर शब्द बोलने में उसे बहुत मजा आ रहा था उसके चेहरे को देखकर सुगंधा समझ गई थी,,,,, और इससे भी उसे दर्जी का मन भरने वाला नहीं था वह सुगंधा की पेंटिंग को उसकी आंखों के सामने ही अपने चेहरे से लगा लिया और उसकी खुशबू को अपनी नाक से अंदर की तरफ खींचने लगा यह देखकर तो सुगंधा पानी पानी होने लगी,,,,,, पूरी दुकान में उसकी शिसकारी की आवाज गुंज रही थी। अंकित समझ गया था कि अब देर नहीं लगना चाहिए इसलिए वह तुरंत उठकर खड़ा हो गया और अपने पेंट की बटन खोलकर एकदम से अपनी पैंट और अंडरवियर दोनों घुटनों तक खींच दिया,,,, और उसका लंबा मोटा लंड एकदम से हवा में झूलने लगा जिसे देखकर दर्जी की भी हालत खराब हो गई,,,, और वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और काउंटर पर खड़े हुए ही वह अपना हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर एक दो बार हिलाते हुए बोला,,,,)

यह औरत तुम्हारे ही लायक है बेटा तुम ही इसकी गदराई जवानी का रस निकाल सकते हो,,,
(सर जी मैं जिस तरह से उसके लंड को पकड़ कर ही आया था अंकित एकदम से सिहर उठा था और यह हरकत सुगंधा ने भी अपनी आंखों से देखी थी। और वह दरजी के मन में क्या चल रहा था वह अच्छी तरह से समझ रही थी उसे एहसास हो रहा था कि समय दरजी अपने मन में यही सोच रहा था कि काश उसका भी इसकी तरह होता तो कितना मजा आ जाता और दर्जी की हरकत पर सुगंधा अपने बेटे की मर्दाना ताकत पर गदगद होने लगी दर्जी की बात सुनकर अंकित भी बोला,,,)

सही कह रहे हैं उस्ताद,ये औरत एकदम मस्ताई घोड़ी है,,, इस पर काबू पाने के लिए मेरे जैसे घोड़े की ही जरूरत है देख नहीं रहे,ये औरत कितना पानी छोड़ रही है,,,,,।

सही कह रहे हो बेटा में तो इसकी चड्डी देखकर ही अंदाजा लगा लिया,,,(चड्डी को अपने हाथ में लेकर अंकित की तरफ दिखाते हुए वह बोला, सुगंधा तो शर्म से मरी जा रही थी उत्तेजना से पानी पानी हुई जा रही थी,,,,,) अब जल्दी से इसकी बुर में अपना लंड डाल दो इससे रहा नहीं जा रहा है,,,,(इतना कहकर वह दर्जी काउंटर पर झुकते हुए अपना हाथ सुगंधा की गांड की तरफ लाया और उसकी टांगों के बीच से अपनी हथेली को उसकी बुर पर रखकर हल्के हल्के सहलाने लगा शायद इतने से ही वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था सुगंधा भी उत्तेजना से सिहर उठी थी,,,,, दर्जी के हाथ लगाने के बाद तो वह और भी ज्यादा व्याकुल हो गई अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए,,,,,। कोई और वक्त होता तो शायद सुगंधा दरजी को कभी हाथ भी नहीं लगाने देती ,, लेकिन इस समय का हालात कुछ और ही था दर्जी की वजह सही है तो मां बेटे दोनों उत्तेजना के चरम शिखर पर विराजमान हो चुके थे और एक अद्भुत अविस्मरणीय अनुभव से गुजर रहे थे। और ऐसा सुगंधा ने दर्जी को करने भी थे शायद इसी से ही उसे आनंद प्राप्त हो रहा था।

अंकित चढ़ाई करने के लिए तैयार हो चुका था वह दर्जी की आंखों के सामने ही अपने मोटे तगड़े लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए अपनी मां की दोनों टांगों के बीच से उसे ले जाकर के उसके गुलाबी छेद से सटा दिया और दर्जी की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए बोला,,,,।

आहहहह उस्ताद साली की बुर बहुत गर्म है,,,,।

डाल दे बेटा अंदर गम बुर वाली औरत ज्यादा मजा देती है,,,,।

बस उस्ताद धीरे-धीरे अंदर जा रहा है लेकिन इसकी बुर बहुत कसी हुई है,,,।

तब तो तू बहुत किस्मत वाला है क्योंकि कसी हुई बुर बहुत किस्मत वालों को ही मिलती है,,,।

क्यों मैडम जा रहा है ना लड़के का लंड,,,।
( दर्जी के इस बात पर सुगंधा शर्म से पानी पानी होने लगी लेकिन वह कुछ बोली नहीं बल्कि उसके इस बात का जवाब वहां अपने लाल-लाल होठों को अपने दांत से काट कर दी वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि उसके बेटे का लैंड उसके बुर की गहराई तक घुस गया था और अंकित अपनी मां की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था वह दर्जी की आंखों के सामने अपनी मां की चुदाई कर रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था आज उसका लंड कुछ ज्यादा ही कड़क महसूस हो रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे लोहे का रोड हो गया हो,,,, दर्जी को ललचाने के लिए सुगंधा अपने मुंह से सिसकारी की आवाज निकल रही थी।

सहहहह आहहहह ऊईईईईई मां,,,,,ऊमममममम,,,, बहुत मोटा है रे तेरा आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है,,,,आहहहहहह और जोर-जोर से चोद,,,,।

(सुगंधा के मुंह से इतना सुनकर दर्जी की हालत और ज्यादा खराब होगी और काउंटर पर पूरी तरह से झुकी हुई थी उसके दोनों खरबूजे काउंटर पर ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी थाली में सजा कर रखे गए हो जिसे देखकर दरजी के मुंह में पानी आ रहा था वह पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था और उसकी चूची को पकड़ने की लालच का वह रोक नहीं पाया वह धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और दोनों हाथों से सुगंधा की चूची पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया इतने से ही दर्जी पूरी तरह से मस्त हो गया,,,,, सुगंधा भी मस्ती के सागर में पूरी तरह से डुबकी लगा रही थी उसे अच्छा लग रहा था उसने कभी सोचा नहीं थी कि कोई अनजान मर्द इस तरह से उसके अंगों से खेलेगा,,, लेकिन यह सब उसके बेटे की देन थी जो वह यह सब करने पर मजबूर हो चुकी थी और ऐसा करने में उसे मजा भी आ रहा था तभी सुगंधा को न जाने क्या सुझा वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर,,, दर्जी की लूंगी के दोनों पट को खोलने लगी और अगले ही पल उस दर्जी का लंड एकदम से सुगंधा की आंखों के सामने आ गया,,, जिसमें तनाव आ चुका था और वह एकदम से झूल रहा था लेकिन उसे देखने के बाद सुगंधा इतना तो समझ गई थी की जवानी के दिनों में यह पूरी तरह से तबाही मचा दिया होगा,,,,, सुगंधा की इस तरह की हरकत से तो दर्जी पूरी तरह से बावला हो गया,,, और अपने दोनों हाथों का कसाव सुगंधा के खरबुजो पर बढ़ाने लगा,,,, सुगंधा अपने होशो हवास में ऐसा कभी नहीं करती लेकिन इस समय उसके दिमाग पर वासना पूरी तरह से हावी हो चुका था और वह धीरे से उसे दर्जी का लंड अपने हाथ में पकड़ ली और उसे धीरे-धीरे हिलाने लगी,,,,, और पीछे से अंकित ताबड तोड़ धक्के पर धक्का मार रहा था,,,, वह जमकर अपनी मां की चुदाई कर रहा था।

लेकिन सुगंधा की हरकत दर्जी सह नहीं पाया और उसके लंड से पिचकारी छूट गई जो सीधा सुगंधा के हथेली को भिगो दिया दर्जी की हालत देखने लायक थी वह पूरी तरह से पस्त हो चुका था लेकिन अभी भी सुगंधा की दोनों चुचियो को थामे हुए था। सुगंधा के मुंह से लगातार शिसकारी की आवाज निकल रही थी। वह चरम सुख के करीब पहुंच चुका था और धीरे से अपने हाथ को कमर पर से हटाकर अपनी मां के कंधों पर रख दिया और उसे किसी लगाम की तरह अपनी तरफ खींचते हुए अपनी कमर को जोर-जोर से आगे पीछे करके ही आने लगा और देखते ही देखते मां बेटे दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,, अंकित अपने मन की कर चुका था यह अनुभव मां बेटे दोनों के लिए यादगार बन गया था,,,,, दरवाजे पर दस्तक हो रही थी बाहर शायद कस्टमर आ गया था यह देखकर मां बेटे दोनों जल्दबाजी दिखाने लगे और सुगंधा जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहने लगी अच्छा हुआ कि उसके बेटे ने उसकी साड़ी निकाल कर उसे पूरी तरह से नंगी नहीं किया था वरना हड़बड़ाहट में वह ठीक तरह से कपड़े भी नहीं पहन पाती,,,, अपने कपड़ों को दुरुस्त करने के बाद अंकित जाकर दरवाजा खोल दिया,,,, दो औरतें खड़ी थी अपना ब्लाउज सिलवाने के लिए वह दोनों के अंदर आते हैं अंकित और उसकी मां दोनों ब्लाउज वाला थैला लेकर दुकान से बाहर निकल गए और दर्जी कुर्सी पर बैठकर गहरी गहरी सांस ले रहा था। जल्दबाजी में सुगंधा ने सिले हुए ब्लाउज के पैसे भी नहीं चुकाई थी और अब शायद इसकी जरूरत भी नहीं थी।

एक अद्भुत रोमांचक एहसास के साथ दुकान के बाहर ग्राहकों को देखकर मां बेटे दोनों तुरंत दर्जी की दुकान से बाहर निकल गए थे वह दोनों किसी की नजर में नहीं आना चाहते थे इसलिए वहां ज्यादा देर खड़े रहने का कोई मतलब नहीं था क्योंकि उन दोनों का मकसद पूरा हो चुका था उन दोनों को जो करना था उन दोनों ने दर्जी की आंखों के सामने उसकी दुकान में कर चुके थे और जल्दबाजी में सुगंधा अपना सीधा हुआ ब्लाउज लेना बिल्कुल भी नहीं भूली थी लेकिन जल्दबाजी में उसे पैसा देना भूल चुकी थी,,,, 5 मिनट के अंदर ही वह दोनों चौराहे पर पहुंच चुके थे दोनों का दिल बड़ी तेजी से धड़क रहा था दोनों के चेहरे पर संतुष्टि का एहसास था दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे और मन ही मन में कह रहे थे कि आज एक अद्भुत एहसास लेकर लौटे हैं।

दोनों ऑटो में बैठ चुके थे अब उसे क्षेत्र में रुकना उन्हें ठीक नहीं लग रहा था इसलिए वह जल्द ही ऑटो पर बैठकर घर पहुंच चुके थे। वैसे तो सुगंधा को कुछ सब्जियां भी खरीदनी थी लेकिन जो कुछ भी मां बेटे में सर जी की दुकान के अंदर किए थे उसे देखते हुए वह कहीं भी खड़ी रहना नहीं चाहती थी और सीधा घर पहुंच चुकी थी। घर पर पहुंचते ही मां बेटे एक दूसरे को देखकर हंस रहे थे क्योंकि आज उन दोनों ने दरजी को बेवकूफ जो बना दिया था तभी सुगंधा को याद आया कि उसने तो दर्जी को ब्लाउज की सिलाई के पैसे दिए ही नहीं इसलिए वह अपने बेटे से बोली।

अरे अंकित उसे दरजी को तो ब्लाउज के पैसे दी ही नहीं वैसे ही ब्लाउज उठा लाइ।

तो क्या हो गया आज उसे उसके जीवन में पैसे से भी ज्यादा सुख जो मिल गया था उसके आगे पैसे की कोई अहमियत नहीं है और अच्छा हुआ कि उसे पैसे नहीं दी देख नहीं रही थी कैसे तुम्हारी चूचियों को दबा रहा था,,,,, (अंकित की बात सुनते ही सुगंधा शर्मा से लाल हो गई) तुम्हें लगता है कि इसके बाद उसे कुछ पैसे देने चाहिए बल्कि उसे हमें पैसे देने चाहिए थे.।

धत् तुझे क्या मैं धंधे वाली लगती हूं जो उससे पैसे लुं,,, (हाथ में लिया हुआ ठेला टेबल पर रखते हुए वह बोली और कुर्सी खींचकर उस पर बैठ गई,,,)

दुकान के अंदर तो ऐसा ही लग रहा था कि जैसे तुम कोई धंधे वाली हो,,, (अंकित भी कुर्सी खींचकर ठीक अपनी मां के सामने बैठ गया )

अच्छा अब तुझे मैं धंधे वाली लगने लगी ना,,, (गुस्से से अपने बेटे की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली)

नहीं नहीं ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं कि तुम धंधे वाली हो लेकिन तुम्हारी हरकतें जो थी लाजवाब थी तुम्हारे चरित्र से एकदम बाहर निकल कर जो तुमने काम की हो वह कोई फिल्म की हीरोइन हीं कर सकती है। अच्छी नहीं तुमने अपनी जवानी से दरजी के पसीने छुड़ा दि,,,,।

सच में दर्जी की तो हालत खराब हो गई,,, (आंखों में अद्भुत नशा लिए हुए सुगंधा बोली)

मैं दावे से कह सकता हूं अगर उसकी मर्दाना ताकत उसके साथ होती तो वह बिना कहे तुम्हारी चुदाई कर देता,,,,

हमममम,,,,, (अपने बेटे की तरफ देखकर अपनी आंखों को नचाते हुए वह बोली,,,)

हां मम्मी में सच कह रहा हूं देखी नहीं दरजी पूरी तरह से अपने अंदर जवानी महसूस कर रहा था। उस दिन तो तुम्हें बेटी कह रहा था लेकिन आज देखो इस बेटी की चूची जोर-जोर से दबा रहा था और पागल हुआ जा रहा था,,,,
(इस बार फिर से सुगंधा के चेहरे पर शर्म की लाली नजर आने लगी वह शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे कर ले और अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

उसका चेहरा देखी होती जवानी से भरी हुई एक औरत को अपनी आंखों के सामने चुदवाते हुए देखकर कुछ ना कर सकने की तड़प उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी,,, आज तो वह भी अपनी बढ़ती उम्र से नाराज होकर होगा कितनी जल्दी उसकी उम्र क्यों बढ़ गई अगर उसकी उम्र भी कुछ तौर पर सही होती तो शायद अभी मजा ले पाता,,,।

तू बहुत उसे दरजी को मजा दिलाने के फिराक में है।

ऐसा नहीं है मुझे तो गर्व महसूस हो रहा है कि तुम्हारी जवानी देखकर दर्जी की हालत खराब हो गई थी तुम्हारी चूची दबाते दबाते देखी उसकी तड़प कितनी बढ़ गई थी कुछ न करने की स्थिति में वह केवल छूकर ही मजा ले रहा था देखी थी ना कैसे अपना हाथ आगे बढ़कर तुम्हारी बुर को हल्के से सहलाया था इतने से ही वह जन्नत का मजा लूट रहा था।

तू सच कह रहा है दरजी सच में आज पूरी तरह से पागल हो गया था मेरी बुर पर हाथ लगाकर उसके चेहरे की रूपरेखा जिस तरह से बदली थी मुझे तो लग रहा था कि वह अपने धीरे लंड से ही कुछ कर सकने की कोशिश कर सकता था।

और हां मुझे लग रहा था कि तुम भी दरजी को मजा देने के फिर आंख में थी और उसे पूरा मजा भी दी हो,,,।

वह तो खुद मजा ले रहा था।

वह तो ठीक है लेकिन तुम्हें क्या हो गया था कि उसकी लूंगी में से उसके लंड को बाहर निकाल ली थी।

(अपने बेटे की बात सुनकर एक तरफ बस शर्म से पानी पानी हो रही थी वहीं दूसरी तरफ वह हंस भी रही थी और हंसते हुए अपने बेटे सेबोली)

उसकी हरकत जिस तरह से थी मैं देखना चाहती थी कि उसकी टांगों के बीच कुछ हरकत हो रही है कि नहीं।

फिर तुमने क्या देखी,,,,?

वैसे लूंगी के अंदर जो मैंने देखी उससे अंदाजा लगा सकती हूं कि अपनी जवानी के दिनों में वह भी कहर बरसाया होगा,,,,।

यह बात है,,, (अंकितमुस्कुराते हुए बोला)

हां सच में उसका लंड पर अच्छा खासा ही था बस उम्र के हिसाब से उसमें अकड़ नहीं थी वह ढीला ही था।

लेकिन तुम्हारे हाथ लगाते ही उसमें जान आ गई थी मैंने देखा था।
(अपने बेटे की बात सुनकर वह फिर से हंसने लगी,,)

हां मैंने देखी थी उसके लंड को जैसे ही मैं हाथ में पड़ी उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो गई थी और मैं भी उसे पर थोड़ा दया खा गई थी।

दया खा गई थी मैं कुछ समझा नहीं,,,

अरे मेरा मतलब है कि हम दोनों को इतना अच्छा अनुभव उसकी दुकान में ही तो मिला अगर वह नहीं होता उसकी दुकान नहीं होती तो इतना अच्छा समय हम दोनों कैसे गुजार पाते एक अद्भुत अनुभव से कैसे गुजार पाते हैं यह सब उसे दरजी के ही कारण तो हुआ था इसलिए मैं सोच रही थी कि इसका थोड़ा सा एहसान चुका देना चाहिए और मैं वही की जो मेरी जगह कोई और औरत होती तो करती।

साले का पानी निकाल दी तुमने,,,।

छी,,, सोच कर ही इस समय थोड़ा अजीब लग रहा है।

उसे समय तो बहुत मजा आ रहा था मुझे तो डर लग रहा था कि कहीं तुम उस बुड्ढे का लंड अपने मुंह में ना ले लो,,,,

पागल हो गया क्या,,,?

नहीं नहीं दर्जी की दुकान में सच में तुम एकदम छिनार हो गई थी और इतना मजा मुझे आया कि शायद ऐसा मजा अब कभी मिलेगा नहीं,,, वैसे सोच कर थोड़ा अजीब लगता है लेकिन एक अनजान के सामने चुदाई करने में जो मजा आता है उसका एहसास आज ही होरहा है।

तू सच कह रहा है अंकित पहले तो मुझे भी अजीब लग रहा था लेकिन जैसे-जैसे तेरी हरकतों से मेरे बदन में नशा छाने लगा मैं भी थोड़ा-थोड़ा खुलने लगी और उसके बाद तो जो मजा आया कि पूछ मत अभी तक मेरा शरीर झनझना रहा है,,,,।

तुम्हारी साड़ी उठाया कर तुम्हारी गांड पर जब चपत लगाया तो दर्जी का तो कलेजा ही मुंह को आ गया था शायद उसने अपनी जवानी में इस तरह की हरकत औरत के साथ नहीं किया था।

तू भी तो उसे पूरी तरह से पागल करने के इरादे में था मुझे लगा कि तू बस चोदना शुरू कर देगा लेकिन पीछे से मेरी गांड चाट रहा था।

आप क्या करूं तुम्हारी गांड देखता हूं तो न जाने क्या हो जाता है और वैसे भी तुम्हारी गांड चाटते हुए देख कर वह दर्जी पूरी तरह से पस्त हो गया था।

अभी तक उसको होश ही नहीं आया होगा,,,, (सुगंधा हंसते हुए बोली)

मुझे तो लगता है आज के दिन को याद करके वह बार-बार अपने हाथ से ही काम चलाएगा। वैसे अब कब चलोगी दर्जी की दुकान पर।

अब इस बारे में सोचना भी मत उधर का रास्ता ही भूल जाना अब वहां कभी जाना ही नहीं है मैं नहीं चाहती कि भविष्य में उसे दरजी को पता चले कि हम दोनों के बीच का रिश्ता क्या है हो सकता है कभी उसे दर्जी की दुकान पर जाएं और कोई पहचान का मिल जाए तो सारा भांडा फूट जाएगा,,,।

तुम सच कह रही हो अब हमें वहां जाना नहीं चाहिए वैसे भी जो मजा है वहां मिला है उसके साथ हमें पैसे भी मिल गए हैं उसकी सिलाई ना देकर।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी,,,, वैसे उसका बेटा सच ही कह रहा था दर्जी की दुकान से माया और पैसे दोनों वापस लेकर लौटे थे दोनों मां बेटे,,,,, सुगंधा को महसूस हो रहा था कि उसे नहाना चाहिए क्योंकि उसे समय जवानी के जोश में उसे उसे दर्जी का स्पर्श तो मजा दे रहा था और उसने खुद जवानी के नशे में चुदाई का सुख भोगते हुए उसके लंड को पकड़ ली थी और उसका पानी निकाल दी थी और उसका पानी उसके हथेली को भिगो दिया था उसे समय तो उसे अजीब नहीं लगा लेकिन अब सोच कर ही उसे बड़ा अजीब लग रहा था उसे घिन्न आ रही थी अपने ही बदन से कोई और समय होता तो वहां दरजी को कभी अपने पास भी भटकने नहीं देती लेकिन उसे समय का माहौल उसे पूरी तरह से पागल कर दिया था और उसे अच्छी तरह से याद था कि उसे दर्जी ने उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथों से दबाया था मजा लिया था और उसकी बुर पर भी अपनी हथेली रगड़ा था इसलिए उसे इस समय नहाने की जरूरत थी ऐसा उसे महसूस हो रहा था और वह तुरंत कुर्सी पर से उठकर बाथरूम में चली गई नहाने के लिए।

अंकित भी कुर्सी पर से उठा और घर के पीछे की तरफ वह भी नहाने के लिए चल दिया थोड़ी देर में मां बेटे दोनों नहा कर कपड़े पहन चुके थे सुगंधा चाय बना रही थी,,,, चाय पीने के बाद अंकित बाहर टहलने के लिए चला गया क्योंकि थोड़ा अंधेरा हो गया था और उसकी मां खाना बना रही थी,,,, वह सड़क के किनारे इधर-उधर टहल ही रहा था कि तभी सामने से सुमन और उसकी मां आई हुई नजर आ गई सुमन और उसकी मां दोनों अंकित को देखकर मुस्कुराने लगे क्योंकि अंकित को लेकर दोनों के मन में अलग-अलग चाहती थी दोनों किसी भी तरह से अंकित को पाना चाहते थे जिसमें सुमन की मां कामयाब हो चुकी थी वह तीन बार अंकित से चुदाई का सुख भोग चुकी थी लेकिन अभी तक सुमन सिर्फ ऊपर से ही मजा ली थी अभी तक अंकित के लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस नहीं की थी जबकि एहसास उसे पहले दिन से ही हो गया था,,, जब वह सुमन के घर में किचन में अनजाने में ही उससे टकरा गया था और जिस स्थिति में सुमन अंकित से टकराई थी उसका पिछवाड़ा पूरी तरह से उसके आगे वाले भाग से सात गया था और इस समय सुमन को एहसास हुआ था कि अंकित कि टांगों के बीच गजब का हथियार है। उसी दिन से वह अंकित से चुदवाना चाहती थी लेकिन कामयाब नहीं हो पाई थी। अंकित के करीब पहुंचकर मां बेटी दोनों एक साथ बोले।

अरे अंकित यहां क्या कर रहे हो।

कुछ नहीं आंटी बस ऐसे ही टहल रहा था,,, (अंकित मुस्कुराते हुए बोला तो उसके मुस्कुराते हुए चेहरे को देखकर सुमन की मां मां ही मन में बोली कि देखो अभी कितना भोला भाला लग रहा है और अकेले में उसे पास आए तो उसकी बुर का भोसड़ा बनाने से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटता,,,, अंकित की बात सुनकर सुमन की मां बोली।)

घर पर अब आते नहीं हो क्या बात है सिर्फ परीक्षा के दिन ही सुमन की याद आती थी। परीक्षा खत्म रिश्ता खत्म।

तुम सही कह रही हो मम्मी उसके बाद तो अंकित कहीं दिखाई ही नहीं देता,,,, मतलब निकल गया तो।

अरे नहीं नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है,,,, तुम तो जानती हो तृप्ति दीदी घर पर नहीं है इसलिए थोड़ा बहुत काम में हाथ बंटाना पड़ता है,,, इसलिए समय नहीं मिलता।

तो चलो घर पर चाय पिलाती हूं,,, (सुषमा मुस्कुराते हुए बोली उसकी बात सुनकर अंकित अपने मन में ही बोला अब तो मुझे तुम्हारे दूध पीने की आदत पड़ गई है चाय से काम बनने वाला नहीं है,,,, लेकिन ऐसा सिर्फ वह मन में ही बोला अगर सुमन साथ में ना होती तो शायद वह ऐसा बोल भी देता लेकिन सुमन के सामने ऐसा हुआ बोल नहीं सकता था लेकिन फिर भी औपचारिकता निभाते हुए वह बोला)

और किसी दिन आंटी अभी तो खाना खाने का समय होगया है।

तो चलो ना खाना ही खा लेते हैं,,, (सुमन भीमुस्कुराते हुए बोली)

नहीं दीदी किसी और की घर पर खाना बन रहा है अगर तुम्हारे वहां खा लूंगा तो घर का खाना नुकसान हो जाएगा।

बहुत समझदार हो गया है तू,,, (सुषमा बोली)

ऐसी बात नहीं है आंटी फिर मम्मी को भी अकेले खाना खाना पड़ेगा,,,,,

हां वह तो है,,,,, (सुषमा बोली)

चलो कोई बात नहीं किसी और दिन और वैसे तुम घर पर आया जाया करो,,,,, और पढ़ाई में जरूरत हो तो पूछ लिया करो।

जी दीदी जरूर पूछ लूंगा,,,,, (पढ़ाई में मदद की बात को अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था और वैसे भी सुमन ही थी जो उसे पहली बार अपने खूबसूरत अंगों को दिखाई थी और उसे जी भर कर खेलने का मौका दे और वह अच्छी तरह से जानता था की पढ़ाई में मदद मांगने के बहाने अगर वह उसके घर जाएगा तो उसे पढ़ाई में मदद की जगह और भी ज्यादा कुछ मिलेगा जिसे वह खुद प्राप्त करना चाहता है,,,,

थोड़ी ही देर में उन दोनों के जाने के बाद अंकित भी अपने घर पहुंच गया खाना बनकर तैयार हो चुका था मां बेटे दोनों साथ में खाना खाकर सोने के लिए छत पर पहुंच गए और फिर से एक बार घमासान चुदाई का खेल खेलते रहे जब तक की दोनों का मन भर नहीं गया यह सिलसिला रोज का हो गया था मां बेटे दोनों एक भी दिन एक भी पाल चुदाई का सुख भोगने से पीछे नहीं हट रहे थे,,,,, अंकित को साथ दिखाई दे रहा था कि अब उसकी मां कुछ ज्यादा ही खुश रहने लगी थी और उसकी खुशी का कारण अंकित अच्छी तरह से जानता था क्योंकि उसकी खुशी का कारण वह खुद था इसलिए वह अपनी मां को बेइंतहा मोहब्बत करने लगा था उसे पूरा सुख देने की कोशिश में लगा रहता था।

कुछ दिनों बाद मां बेटे दोनों सब्जी खरीदने के लिए बाजार पहुंच चुके थे,,,,, तभी बाजार में नूपुर और उसका बेटा राहुल भी मिल गया नूपुर को देखते ही सुगंधा खुश होते हुए बोली,,,,।

अरे नुपुर यहां कैसे,,,?

मैं भी सब्जी खरीदने आई हूं तुम भी तो सब्जी खरीदने आई हो ना,,, (अंकित की तरफ देखकर) और बेटा कैसे हो?

बिल्कुल ठीक हूं आंटी आप कैसी हैं।

देख लो कैसी हो जैसा तुम छोड़े थे वैसे ही हूं,,,,
(नूपुर की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुरा रही थी लेकिन वह नूपुर के कहने के मतलब को नहीं समझ पा रही थी,,,, जिसे अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था अंकित जानता था कि पिछली मुलाकात में नूपुर के साथ उसने क्या किया था डाइनिंग टेबल के नीचे छिपकर उसके पति की मौजूदगी में ही उसकी रसीली बर का स्वाद चखा था और वह पल उसके लिए बेहद अद्भुत और आनंददायक था निश्चित तौर पर अगर उस दिन राहुल के पिताजी घर पर मौजूद न होते तो उसी दिन अंकित नूपुर की चुदाई कर दिया होता लेकिन राहुल के पिता की मौजूदगी में ऐसा हो नहीं पाया था,,,,, सुगंधा भी राहुल की तरफ देखकर उसका भी हाल समाचार नहीं और बोली,,,)

इस बार तुम पढ़ने के लिए गए नहीं,,,?

जाने वाला आंटी लेकिन अभी थोड़ा समय लग जाएगा,,,,।(अंकित अच्छी तरह से देख रहा था कि राहुल बात करते समय उसकी मां की चूचियों की तरफ ही देख रहा था क्योंकि पीले रंग की साड़ी और पीले रंग के ब्लाउज में गजब की लग रही थी,,,, अंकित जानता था कि उसकी मां लो कट ब्लाउज पहनी हुई थी जिसमें से उसकी आधी से ज्यादा चूचियां पारदर्शी साड़ी में दिखाई देती थी। और उसे देख कर राहुल मन ही मन ललच रहा था। अंकित यह देखकर मन ही मन गुस्सा हो रहा था वह जानता था कि राहुल उसकी मां की जवानी क्या आकर्षण में मस्त है,,,,, इधर-उधर की बात करने के बाद नूपुर बोली,,,)

तुम तो नहीं बैठ कर बातें करो हम दोनों सब्जियां खरीद कर आते हैं,,,,,।

ठीक है आंटी,,,,,।

(सुगंधा और नूपुर दोनों सब्जी खरीदने के लिए मार्केट के अंदर प्रवेश कर गई थी और उन्हें चाहते हुए राहुल देख रहा था और अंकित अच्छी तरह से जानता था कि राहुल किसे देख रहा था राहुल अंकित की मां को ही देख रहा था खास करके उसके भारी भरकम गोलाकार पिछवाड़े को देख रहा था सुगंधा की गांड देखकर वह पूरी तरह से मस्त हो गया था और पेट के ऊपर से अपने लंड को दबा दिया था यह देखकर अंकित को बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था,,,,, राहुल अंकित से बोला,,,)

चल जब तक दोनों सब्जी खरीद कर आते हैं सबसे कम दोनों चाय पी लेते हैं,,,,,,(और इतना कहकर राहुल अंकित का हाथ पकड़कर एक छोटी सी दुकान पर गया जहां पर चाय समोसे मिल रहे थे,,,, उस दुकान के बाहर तीन-चार बड़े-बड़े लंबे पत्थर रखे हुए थे जिस पर लोग बैठकर गप्पे लड़ाते हुए चाय समोसे का लुफ्त उठा रहे थे। राहुल जानबूझकर अंकित को ऐसी जगह पर ले जाकर बैठाया जहां पर दूसरा कोई नहीं था जहां पर वह आराम से अंकित से बात कर सकता था और वह खुद दुकान पर गया और चाय समोसे लेकर आया,,,,, एक समोसा और चाय अंकित को थमा कर खुद उसके पास बैठ गया और चाय की चुस्की लेते हुए अंकित से बोला,,,,)

एक बात कहूं अंकित बुरा मत मानना।
(अंकित समझ गया था कि राहुल किस बारे में बात करना चाहता था और वह देखना चाहता था कि वह क्या बोलना चाहता है इसलिए वह बोला)

हां बोलो क्या बात है,,,,।

यार तेरी मां गजब की लगती है एकदम फिल्म की हीरोइन,,,,।
(राहुल की बात सुनकर अंकित कुछ बोला नहीं बस उसकी तरफ देखने लगा और चाय की चुस्की लेने लगा अंकित का हाव भाव देखकर राहुल को लगने लगा था कि वह कुछ भी बोलेगा अंकित सुनेगा क्योंकि ऐसे भी राहुल अंकित को थोड़ा दब्बू किस्म का लड़का समझता था,,,,)

देख नाराज मत होना मैं एकदम सही कह रहा हूं तूने शायद गौर नहीं किया होगा लेकिन तुझे छोड़कर बाकी सब ने गौर किया होगा कि तेरी मां फिल्म की हीरोइन लगती है एकदम गजब की लगती है तेरी मां का जिस्म एकदम तराशा हुआ है,,,,,

यह सब क्या बोल रहे हो यार किसी और बारे में बात करो,,,,,(अंकित जानबूझकर अपना ले जा थोड़ा ठंडा रख कर बोल रहा था ताकि राहुल को लगेगी उसे फर्क नहीं पड़ रहा है और इसी बात का फायदा उठाते हुए राहुल बोला)

यार जब तेरी मां आसपास हो तो किसी और के बारे में बात करने का मतलब ही नहीं होता मैं तो तेरी मम्मी को देखा ही रह गया यार पीली साड़ी में एकदम कयामत लगती है मेरी मां तो तेरी मां के सामने कुछ भी नहीं है,,,,।

लेकिन मुझे तो तुम्हारी मम्मी ज्यादा ही अच्छी लगती है,,,,।

(राहुल को अंकित की तरफ से इस तरह का जवाब मिलेगा इसकी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए वह थोड़ा आश्चर्य से अंकित की तरफ देखने लगा लेकिन थोड़ी देर में सहज बनते हुए मुस्कुराने लगा और बोला)

घर की मुर्गी दाल बराबर ऐसा ही होता है लेकिन तुम हकीकत से वाकिफ नहीं हो तुम्हारी मम्मी मेरी मम्मी से लाख गुना ज्यादा खूबसूरत और गर्म औरत है उसकी चूची देख हो कितनी बड़ी-बड़ी है तुम्हें शायद गौर नहीं किया होगा लेकिन मैं अभी-अभी गौर किया ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने के लिए पागल रहती है तुम्हारी मां की चूचियां,,,,,।
(राहुल की बातें सुनकर अंकित को गुस्सा आ रहा था लेकिन वह किसी तरह से अपने गुस्से को दबा ले गया था क्योंकि वह भी उसकी मां के बारे में बातें जो करने लगा था इसलिए वह भी जवाब देते हुए बोला)

अपना अपना नजरिया है मैं भी तुम्हारी मां की चूचियां देखा थोड़ा सा अपना सीना आगे की तरफ कर दे तो शायद ब्लाउज का एक दो बटन अपने आप ही टूट जाए,,,,(चाय की चुस्की लेटा हुआ राहुल की तरफ देखते हुए वह बोला राहुल तो एकदम हैरान था)

चाहे कुछ भी हो लेकिन मुझे तो तेरी मां बहुत अच्छी लगती है जाते समय देखा किसी भी साड़ी में तेरी मम्मी की गांड आहहहा हाहाकार मचा रही थी। मेरा तो लंड खड़ा हो गया।

मेरा भी कुछ ऐसा ही हालत था तुम्हारी मम्मी की गांड देखकर,,,,,।
(फिर से राहुल हैरान हो गया अभी तक वह जी अंकित से मिला था उसे अंकित में और आज के अंकित में जमीन आसमान का फर्क था,,,, दोनों का रवैया एकदम अलग था फिर भी ,,, राहुल को मजा आ रहा था अंकित से बात करने में,,,, थोड़ी देर खामोश रहने के बाद राहुल फिर से बोला,,,)

अच्छा एक बात बता अंकित तूने कभी अपनी मां को बिना कपड़ों के देखा है।

बिल्कुल भी नहीं और तुम,,,,,

मैंने तो बहुत बार देखा हूं यार कसम से औरत का जिस इतना खूबसूरत होता है कि मर्द पागल हो जाता है,,,,,,।

कैसे और कहां देखें तुमने,,,,।

कपड़े बदलते हुए नहाते हुए,,,,

ओहहह,,,,, तो क्या तुम्हारी मम्मी बिना कपड़ों के नहाती है,,,,,।

बिल्कुल सही और वह बाथरूम का दरवाजा भी बंद नहीं करती अनजाने में मैंने देख लिया था और मैं यही सोच रहा हूं कि अगर तुम भी अपनी मां को बिना कपड़ों के देखोगे तो तुम्हारी क्या हालत होगी मेरी तो सोच कर ही हालत खराब हो रही है लंड पूरी तरह से औकात में आकर खड़ा है सच कहूं तो तुम्हारी मां को याद करके मुठ मारने का मन कर रहा है।
(राहुल इस तरह की बातें करके अंकित का मन बहकाना चाहता था,,,, मौका देखकर राहुल बोला)

तो तुमने तो अपनी मां को बहुत बार बिना कपड़ों के देखे हो तो उसके बारे में भी सोच कर मुठ मारते होंगे।

बिल्कुल ठीक कह रहे हो तुम बहुत बार ऐसा हुआ है मैं अपनी मां के बारे में सोच कर बहुत बार मुठ मारा हूं और वैसे भी इसमें कोई गलत बात नहीं है। और तुम्हारी भी उम्र तो हो चुकी है मुठ मारने वाली और चोदने वाली। तुमने मारा है अपनी मां के बारे में सोचकर मुझे तो पूरा यकीन है कि कभी ना कभी तो तुम अपनी मां को बिना कपड़ों के देखे होंगे पेशाब करते हुए कपड़े बदलते हुए नहाते हुए,,,,,।

(राहुल की बात सुनकर अंकित थोड़ा सोचने लगा और फिर वह राहुल को थोड़ा जलाने के लिए बोला जो की हकीकत ही था)

हां तुम ठीक कह रहे हो एक बार अनजाने में मैंने मम्मी को पेशाब करते हुए देख लिया था,,,।

सचमें,,,(एकदम उत्साहित और खुश होते हुए राहुल बोला)

हां अनजाने में देख लिया था वैसे कोई मेरा इरादा नहीं था,,,।

कहां देखा था यार बताना,,,,,।

छत पर जब हम लोग सो रहे थे तब आधी रात को मेरी नींद खुली तो देखा मम्मी बगल में नहीं थी,,,।

बगल में नहीं थी मतलब कि तुम दोनों साथ में ही सोते हो,,,,।

पागल साथ में सोते हैं लेकिन एक ही बिस्तर पर नहीं सोते हैं समझे मेरी नींद खुली तो देखा कि बगल वाले बिस्तर पर मम्मी नहीं थी,,,,(अंकित जाने अनजाने में ऐसी बात नहीं करना चाहता था जिससे राहुल को शक होगी उसकी तरह उन दोनों के बीच भी कुछ हो रहा है)

फिर ,,,,फिर क्या हुआ,,,(चाय के कप से आखरी घूंट भरता हुआ वह बोला)

फिर क्या मैं नींद में इधर-उधर देखने लगा उठकर बैठ गया लेकिन सामने की तरफ देखा तो छत के कोने पर मम्मी पेशाब कर रहे थे।

हाए,,,,, क्या गजब का नजारा होगा यार,,,(अपने पेट के आगे वाले भाग पर हाथ रखते हुए) किस अवस्था में थी तेरी मम्मी,,,,.

किस अवस्था में क्या जैसे औरत पेशाब करने के लिए बैठी रहती है वैसे ही थी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और पीछे से सब कुछ दिख रहा था।

ओहहहहह ऐसा लग रहा है कि जैसे मेरे सामने कोई फिल्म चल रही है और सच-सच बता तेरी हालत खराब हो गई होगी ना।

इसमें कौन सी हालत खराब होने वाली बात है मैं जब जान गया की मम्मी सामने है तो मैं फिर से सो गया,,,।

धत् तेरी की तू कैसा मर्द है रे मर्द है भी कि नहीं मुझे समझ में नहीं आ रहा है अपनी आंखों के सामने इतना खूबसूरत है तेरे से देखने के बाद भी तू शांत होकर सो गया मैं होता तो इस समय तेरी मां के पीछे पहुंच जाता और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसकी गांड से रगड़ने लगता,,,,,।

तुम क्या अपनी मां के साथ ऐसा ही करते हो,,,,।

करने का तो बहुत मन करता है लेकिन मम्मी करने नहीं देती मैं वही सोच रहा हूं कि अगर तेरी जगह में तेरी मम्मी का बेटा होता तो अब तक तो तेरी मम्मी की चुदाई कर दिया होता,,,,,।

जैसे अपनी मम्मी की चुदाई करता है ना,,,,।
(राहुल एकदम से अंकित की तरफ देखने लगा और बोला)

पागल हो गया है क्या,,,,, बस सोचता हूं करता नहीं लेकिन हां मौका मिला तो तेरी मम्मी की चुदाई जरूर करूंगा,,,,,।

मेरी मम्मी के बारे में तो सोचना भी मत वह तेरी मां की तरह नहीं है,,,,।

तेरा क्या मतलब है कि मेरी मां की तरह नहीं है।

चल रहने दे मैं अपनी आंखों से देखा हूं तेरी मम्मी तेरे लंड पर कूद रही थी पागल की तरह चुदवा रही थी और तू अपनी मां को मस्त होकर चोद रहा था धक्के पर धक्के दे रहा था,,,,,।

(अंकित की बात सुनकर राहुल एकदम से घबरा गया उसे उम्मीद नहीं थी किया अंकित इस तरह से कुछ कह देगा जिसमें सच्चाई थी लेकिन फिर भी वह निकाल करते हुए बोला)

देख तू झूठ मत बोल समझा मैं तेरी मां के बारे में उल्टा सीधा बोल रहा हूं तो इस तरह से मेरे से बदला ले रहा है।

बदला नहीं ले रहा हूं मैं सच कह रहा हूं,,, मैंने यह सब अपनी आंखों से देखा दोपहर के समय मैं तुझसे मिलने तेरे घर आया था और तुम लोग जल्दबाजी में घर का दरवाजा बंद करना ही भूल गए थे हल्के से धक्का देने पर दरवाजा खुल गया था और मैं इधर-उधर ढूंढता हुआ तेरी मां के कमरे तक पहुंच गया था और खिड़की से मैं सब कुछ देख लिया था कि तुम दोनों किस तरह से चार दिवारी के अंदर मर्द और औरत का खेल खेलते हो,,,,, मैं तो उस दिन देख कर एकदम से चौंक गया कि कोई बेटा कैसे अपनी मां को चोद सकता है,,,, और कैसे एक मां अपने ही बेटे से खुलकर नंगी होकर मस्त होकर रंडी की तरह चुदवा सकती है मैं तो एकदम हैरान हो गया था मैं उसी समय तुम दोनों का आवाज लगाना चाहता था लेकिन मैं ऐसा कर नहीं पाया क्योंकि तुम दोनों एकदम से आपस में खो चुके थे दिन दुनिया से बेखबर होकर एक दूसरे में समा गए थे मुझे आज भी याद है,,,, कि तेरा लंड तेरी मां की बुर के अंदर बिना रुकावट के अंदर बाहर हो रहा था सच कहूं तो पहली बार में किसी औरत की चुदाई देख रहा था और मुझे उम्मीद नहीं नहीं था की पहली बार में ही मैं मां बेटे की चुदाई देखूंगा,,,, तभी मैं समझ गया था कि तेरी मां पूरी गर्म जवानी की है और शायद अपनी जवानी की गर्मी तेरे बाप से बुझा नहीं पाती है इसलिए तेरा सहारा ले रही है।
(मौका देखकर अंकित चौका मार दिया था चौका नहीं छक्का मार दिया था,,,,, अंकित के मन में इस समय कुछ और चल रहा था और राहुल के तो पसीने छूट रहे थे,,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था किसकी चोरी इस तरह से पकड़ी जाएगी मां बेटे को ऐसा ही लग रहा था कि घर की चार दिवारी के अंदर जो कुछ भी वह दोनों कर रहे थे वह किसी को कानों कान खबर तक नहीं थी लेकिन राहुल कि यह गलतफहमी दूर हो चुकी थी क्योंकि अंकित अपनी आंखों से पूरी फिल्म देख लिया था अब इंकार करने का कोई रास्ता भी नहीं था इसलिए राहुल धीरे से बोला,,,)

देख अंकित यह बात किसी को मत बताना,,,,

इसके बदले मुझे क्या मिलेगा,,,,

चुप रहने के बदले तो दो-चार समोसे और खा ले,,,,।

तो सच में बेवकूफ है आंखों के सामने पकवान पड़ा है और तू चाय समोसे से मेरा मुंह बंद करना चाहता है।

मैं समझा नहीं,,,,।

देख बात एकदम सीधी है उसे दिन तुम मां बेटे की चुदाई देखकर मेरा भी लंड खड़ा हो गया था,,, मन तो मेरा उसी दिन कर रहा था कि तुम दोनों के साथ में भी जुड़ जाऊं और जिंदगी में पहली बार चुदाई का सुख प्राप्त करूं लेकिन मैं अपने आप को रोक रह गया था और इस तरह का ख्याल अपने मन में दोबारा कभी नहीं लाया था लेकिन आज तेरी बातें सुनकर एक बार फिर से मेरे अरमान जाग गए हैं।

तु कहना क्या चाहता है मे कुछ समझा नहीं।

मैं यह कहना चाहता हूं कि जैसे तू मजा लेना है वैसे मैं भी मजा लेना चाहता हूं मैं भी तेरी मां को चोदना चाहता हूं उसी दिन से तेरी मां के बारे में याद करके बार-बार मेरा लंड खड़ा हो जाता है।

तू पागल हो गया क्या,,,?(गुस्से में थोड़ा जोर से राहुल बोला तो आसपास बैठे हुए लोग उन दोनों की तरफ देखने लगे यह देखकर अंकित बोल)

थोड़ा धीरे बोल चिल्लाएगा तो तू ही बदनाम होगा,,,,,

देख अंकित में तेरे हाथ जोड़ता हूं,,, मैं तेरी मां के बारे में कुछ नहीं बोलूंगा लेकिन तु यह अपने मन से ख्याल निकाल दे।

मेरी मां के बारे में तो वैसे भी अब तु कुछ बोलने लायक नहीं है,,,, लेकिन तेरी मां को याद करके मेरी हालत खराब होने लगी है मैं सच में तेरी मां को चोदना चाहता हूं जिसमें तू ही मेरी मदद करेगा।

(अंकित की बात सुनकर राहुल एकदम क्रोधित हो रहा था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था लेकिन फिर भी अंकित की बात सुनकर वह बोला)

अगर मैं इसमें तेरी मदद ना करूं तो,,,,।

तो तू ही सोच कर तुम मां बेटे की सच्चाई तेरे पापा को पता चल गई तो अगर तुम मां बेटे की सच्चाई धीरे-धीरे समझ में सबको पता चलने लगी तो,, तो सोच तेरी मम्मी भी टीचर है और अगर यह बात स्कूल में फैल गई तब क्या होगा तेरी मां कभी भी घर से बाहर नहीं निकल पाएगी लोग तेरी मां के बारे में तेरे बारे में कैसे किसी बातें करेंगे तुम मां बेटे की इज्जत एकदम से खाक में मिल जाएगी साथ में तुम दोनों अपने आप की भी इज्जत ले डुबोगे अगर मेरी बात नहीं मानोगे तो।

(अंकित पूरी तरह से खुले शब्दों में उसे धमकी दे रहा था और इसका अंजाम राहुल अच्छी तरह से समझ रहा था राहुल के पसीने छूट रहे थे वह जानता था कि अगर अंकित यह बात किसी को बता दिया तो मां बेटे का जीना मुश्किल हो जाएगा समझ में मुंह दिखाने के लायक दोनों नहीं रह जाएंगे और वह धीरे से बोला)

लेकिन मम्मी नहीं मानेगी,,,,(अपना चेहरा नीचे झुकाते हुए बोला,,,)

मम्मी तो तेरी मान ही जाएगी तू मानेगा कि नहीं यह बता,,,,, यही बात में तेरी मम्मी को बोल दूंगा तो वह मेरे सामने अपनी टांगे खोलने में बिल्कुल भी देर नहीं करेगी आखिरकार इज्जत बचाने के लिए वह इतना तो कर ही सकती है जब तेरे सामने टांग खोल सकती है तो मैं भी तो तेरी मां का बेटा जैसा ही हूं,,,,

लेकिन यह सब होगा कैसे,,,,,

तू तैयार है कि नहीं पहले यह बता,,,

तेरी बात मानने के सिवा मेरे पास और कोई रास्ता भी तो नहीं है,,,,,
(राहुल की बात सुनकर अंकित मन ही मन प्रसन्न होने लगा क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि अब उसे क्या करना है वैसे भी उसकी मां पहले सही तैयार थी बस इस खेल में उसके बेटे को शामिल करना था। राहुल की बात सुनकर अंकित खुश होता हुआ बोला,,,)

अब आएगा असली मजा,,,

लेकिन जो तू कह रहा है क्या तुझे लगता है की मम्मी तैयार हो जाएगी।

यह सब तु मुझ पर छोड़ दे,,, मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तेरी मां को क्या चाहिए उसे मोटा तगड़ा लंंड चाहिए जो कि मेरे पास है और अगर ऐसा ना होता तो वह तेरे पापा से ही खुश रहती तेरे साथ यह सब कभी नहीं करती इसलिए कैसे करना है यह सब तु मुझ पर छोड़ दे,,,, बस चल तू दोपहर में घर पर मौजूद मत रहना मैं तेरे घर पहुंच जाऊं और उसके बाद तू 1 घंटे बाद आना,,,,,,, वैसे तेरे पापा घर पर रहते हैं कि नहीं दोपहर में,,,।

नहीं वह तो ऑफिस में रहते हैं,,,।

तब तो सारा मामला फिट है तो तय रहा कल मैं तेरे घर आऊंगा,,,,,

(इतने में नूपुर और सुगंधा दोनों सब्जी लेकर वहां पहुंच गई,,,, राहुल का दांव पूरी तरह से उल्टा पड़ गया था,,,, उसे अपने आप पर ही गुस्सा आ रहा था कि ना वह इस तरह की बातें छेड़ता और ना ही अंकित इस तरह का खेल उसके साथ खेलता,,,, वैसे भी राहुल अपने मन में यही सोच रहा था कि जैसा अंकित चाहता है उसकी मां, वैसा कभी नहीं करेगी,,,, लेकिन फिर भी उसके मन में शंका बना हुआ था कि जिस तरह से अंकित उसे मां बेटे के बीच के रिश्ते के बारे में बोलकर उसे मजबूर कर दिया था वही बोलकर उसकी मां को भी मजबूर कर सकता है तब उसकी मां के पास भी उसके साथ हम बिस्तर होने के सिवा और कोई रास्ता नहीं होगा,,,,,,,, नूपुर अपने बेटे के साथ और सुगंधा अपने बेटे के साथ घर की तरफ निकल गए थे लेकिन अब अंकित के मन में कोई और ही खिचड़ी पक रही थी,,,,)

राहुल का दांव पूरी तरह से उल्टा पड़ गया था, वह कभी सोचा भी नहीं था कि दब्बू सा दिखने वाला अंकित मौका मिलने पर शेर की तरह हमला करेगा,, हकीकत अब यही थी कि राहुल पूरी तरह से दब चुका था राहुल कभी सोचा भी नहीं था कि घर की चार दिवारी के अंदर वह और उसकी मां मिलकर जो गुल खिलते हैं वह किसी को कानों कान तक खबर पड़ेगी लेकिन यहीं पर उसकी सोच मार खा गई थी,,, अब उसे पछतावा हो रहा था कि उसने अंकित के साथ दोस्ती किया ही क्यों क्योंकि ना तो वह उससे दोस्ती करता और ना ही उसका घर में आना-जाना होता और ना ही वह उन दोनों को चुदाई का सुख भोगते हुए देख पाता,, अब उसकी यही गलती उसके गले की हड्डी बन चुकी थी।

कहां पर वह अंकित की मां की जवानी की तारीफ करके अपने मन में उसे भोगने की लालसा को उसके सामने जागरुक कर रहा था और कहां अंकित ने ही गांव पलट कर पूरी तरह से अब राहुल की मां को चोदने का इरादा बना दिया था जिसमें आप राहुल ही उसका साथ देने वाला था और इसके सिवा उसके पास कोई रास्ता भी नहीं था। राहुल इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अगर अंकित उसके राज को किसी को बता दिया तो मां बेटे दोनों किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाएंगे और ना ही समझ में उनकी कोई इज्जत रह जाएगी घर से निकलना दुभर हो जाएगा,,,, राहुल अपने मन में यही सोच रहा था कि उसकी ही गलती है अभी तक अंकित इस राज को अपने सीने में दबा कर रखा था लेकिन उसकी वजह से ही वह एकदम से उसकी मां को चोदने का इरादा बता दिया था,,,, ना ही वह उसकी मां के बारे में कुछ असली बातें करता और ना हीं अंकित यह सब करने पर मजबूर होता,,,, राहुल को समझ में नहीं आ रहा था कि अब यह सब होगा कैसे,,,, क्योंकि एक मर्द होने के नाते वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर किसी मर्द को इतना अच्छा मौका मिलेगा तो वह वाला इस मौके को अपने हाथ से कैसे जाने देगा,,,, वैसे भी वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां कोई सामान्य दीखाव वाली औरत नहीं थी पूरी तरह से जवानी से भरी हुई थी एक मर्द को अपनी तरफ ललचाने के काबिल उसका हर अंग सक्षम था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसकी बड़ी-बड़ी गांड जिसे पाने के लिए मोहल्ले के हर मर्द तैयार रहते थे और न जाने कितने लोग उसकी मां को याद करके रोज अपना पानी निकाल देते थे ऐसी औरत को चोदने के लिए भला अंकित कैसे इंकार करेगा।

राहुल के पास अब खामोश रहने के सिवा अब कोई रास्ता नहीं था उसे यकीन हो चुका था कि अंकित उसकी मां के साथ अपनी मनमानी करके ही रहेगा अगर उसकी मां नहीं मानेगी तो जैसा वह उसे बोलकर खामोश कर दिया है वही बात हुआ उसकी मां से भी बोलेगा और भला ऐसी कौन सी औरत होगी जो अपनी इज्जत को नीलाम होने देगी बल्कि और से अपनी इज्जत को बचाने के लिए कोई भी शर्त मानने को तैयार हो जाती है,,, अब वह समझ गया था कि उसे केवल अब मुख प्रेछक ही बनना था,,,, खिलाड़ी अब बदल चुका था उसकी मां की खूबसूरत नितंबों नुमा मैदान पर अंकीत बल्लेबाजी करने वाला था,,,, लेकिन यह ख्याल उसके मन में आते ही राहुल सोचने लगा के भला अंकित कर क्या लगा,,,, राहुल को ऐसा था कि अंकित दूसरे लड़कों की तरह चालक और औरतों के मामलों में तेज बिल्कुल भी नहीं है अगर किसी लालच वश वह उसकी मां को चोदने के लिए तैयार हो चुका है तो,,, वह टीक ही नहीं पाएगा,,,, जैसे ही उसकी मां अपने बदन से अपने कपड़े उतारना शुरू करेगी उसके नंगे बदन को देखकर अंकित का लंड पानी फेंक देगा,, और ऐसे हालात में उसकी खुद की बेइज्जती हो जाएगी और वह दोबारा उसकी मां के साथ संबंध बनाने के बारे में सोच भी नहीं सकेगा यह सोचकर राहुल मन ही मन में प्रसन्न हो रहा था,,,, क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां के साथ संबंध बनाने के लिए मां और तन दोनों से तैयार रहना पड़ता है उसकी मां की बेकाबू बेलगाम जवानी किसी सामान्य मरदे के काबिल है ही नहीं उसके लिए तो उसके जैसा सांड़ ही चाहिए,,,, अपने मन में यह सोचकर राहुल प्रसन्न होने लगा,,,,।

दूसरी तरफ अंकित को ज्यादा ही उत्सुक था क्योंकि अब उसे एक नई बुर मिलने वाली थी चोदने के लिए जो पहले से ही उससे चुदवाने ने के लिए बेकरार थी। अंकित कुर्सी पर बैठकर राहुल के बारे में ही सोच रहा था कि कैसे वह उसकी मां के बारे में गंदी बातें करके मजा ले रहा था उसे नहीं मालूम है कि उसकी और उसकी मां की नाकाम उसके हाथ में है बस उसे खींचने की देरी है और लगाम खींचते ही कैसे काबू में आ गया एकदम से शांत पड़ गया अब तक मजा आएगा जब उसकी आंखों के सामने उसकी मां के कपड़ों को उतार कर नंगी करूंगा और उसके गुलाबी बुर में अपना लंड डालकर अपनी मर्दाना ताकत दिखाऊंगा तब उसे समझ में आएगा की असली मर्द किसे कहते हैं,,,, अंकित अपने मन में यह बात सोच कर बहुत खुश हो रहा था क्योंकि वह उन दोनों मां बेटों को हम बिस्तर होते हुए देखा था और इस समय वह राहुल के लंड को भी देखा था,,, और उसी समय उसे एहसास हो गया था कि अगर राहुल की जगह वह खुद होता तो उसकी मां की हालात पूरी तरह से खराब कर देता अपने मोटे तगड़े लंड से,,,, वैसे भी अंकित किसी भी तरह से राहुल से बदला लेना चाहता था क्योंकि वह आए दिन उसकी मां के बारे में कुछ ना कुछ बोला ही करता था उसकी खूबसूरती के बारे में उसके अंगों के बारे में जिसे सुनकर अंकित मन ही मन क्रोधित हो जाता था,,,, लेकिन अब उसे मौका मिल चुका था अब तक के सारे अपमान का बदला लेने का,,,, इसलिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर लेना चाहता था उसे बड़ी बेसब्री से दोपहर का इंतजार था,,,,।

और उसका यह इंतजार खत्म भी हो गया दोपहर के 1:00 रहे थे उसकी मां अपने कमरे में आराम कर रही थी क्योंकि 20 मिनट पहले ही वह जमकर अपनी टांगें खोलकर अपने बेटे से चुदवाई थी,,,, अपने बेटे से जमकर चुदवा लेने के बाद उसे नींद भी बहुत गहरी आई थी,,,, लेकिन फिर भी वह अपनी मां से कुछ जरूरी काम के लिए बोलकर ही घर से निकला था और वैसे भी सुगंधा का काम हो चुका था इसलिए वह भी गहरी नींद में सो गई थी,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था वह मुख्य सड़क पर आकर ऑटो पकडकर सीधा उसके घर के सामने उतर गया,,,, घर के मुख्य गेट पर राहुल उसका इंतजार कर रहा था अंकित को देखते ही उसे थोड़ा तो गुस्सा आया लेकिन वह कर भी क्या सकता था,,,, जैसे ही अंकित उसके पास आया वह बोला,,,,।

देख अंकित अगर मम्मी नहीं मानी तो तु फिर यहां से चले जाना और फिर कभी भी इस राज को किसी को बताना नहीं,,,,।

तू चिंता मत कर मेरे दोस्त ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि मेरा औजार तेरे से कुछ ज्यादा ही बड़ा है उसे दिन देखा था मैंने तेरे लंड को जब तेरी मां की बुर में अंदर बाहर हो रहा था,,,, बिस्तर पर तेरी मां बहुत मजे ले लेकर उछल रही थी मेरा तो मन उसी समय तेरी मां को चोदने के लिए तड़प उठा था लेकिन तुम दोनों का रिश्ता देखते हुए मैं तुम दोनों को शर्मिंदा नहीं करना चाहता था इसलिए वहां से चुपचाप चला गया था लेकिन रात दिन सोते जागते मेरी आंखों के सामने तेरी मां की नंगी गांड ही दिखाई देती थी आज मौका मिला है तेरी मां की मद मस्त जवानी को अपनी आंखों से पीने का अपने लंड से रगड़ने का,,,, (राहुल अंकित की इस बात पर की तेरे औजार से ज्यादा लंबा और मोटा उसका औजार है इस बात को सुनकर वह अंदर ही अंदर बहुत गुस्सा हुआ था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था फिर भी अंकित की बात सुनकर वह बोला,,,)

बातों से कुछ नहीं होता करके दिखाना पड़ता है कहीं ऐसा ना हो कि मेरी मां कपड़े उतारे और तेरा लंड पानी फेंक दे,,,,।

देखना हो तो आधे घंटे बाद आ जाना दरवाजा खुला छोड़ दूंगा,,,, और अपनी आंखों से देखने की तेरी मां कितना मजा ले लेकर मुझसे चुदवाती है,,,,,, (और इतना कहकर वह आगे बढ गया और राहुल अपनी आंखों में क्रोध लिए हुए वहां से हट गया,,,,,, अंकित दरवाजे पर पहुंचकर डोर बेल बजाने लगा,,,, थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला दरवाजा खोलने वाली राहुल की मा ही थी और अंकित को दरवाजे पर देख कर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे वह खुश होते हुए बोली,,,,)

अंकित तु बहुत दिनों बाद आया,,,,।

बहुत दिनों बाद कहां परसों ही तो बाजार में तुमसे मुलाकात हुई थी,,,,,।

वह तो मुलाकात हुई थी लेकिन उस दिन के बाद तो तू दिखाई नहीं दिया,,,, मुझे लगा कि तू डर गया है,,,,।

मैं भला डर जाऊं ऐसा हो नहीं सकता,,,,।

ओ हो फिल्मी डायलॉग मारने लगा है,,,, सिर्फ डायलॉग ही करने आता है कि कुछ और भी मारने आता है,,,।

मौका देकर तो देखो बहुत कुछ मारने आता है,,,,,।

चल आजा अंदर दरवाजे पर ही खड़ा-खड़ा सब बातें करेगा क्या,,,, (मुस्कुराते हुए नूपुर बोली और नूपुर की बात सुनकर अंकित घर में प्रवेश कर गया और नूपुर दरवाजा बंद करके उसकी कड़ी लगा दी,,,,, और अंकित से बोली,,,)

बोल ठंडा पिएगा या गरम,,,,?

किसी बातें कर रही हो आंटी ना ठंडा ना गम मुझे तो कुछ नमकीन पिला दो,,,,।

ऊमममममम,,,, पहली बार में ही इतना शरारती हो गया है,,, (अंकित के कहने का मतलब को समझ कर नूपुर शरारती अंदाज में मुस्कुराते हुए बोली)

आप क्या करूं शरारती तो होना पड़ेगा जब टीचर ही इतनी शरारती है तो विद्यार्थी को तो थोड़ा बहुत असर दिखाना होगा,,,,।

ओहहह ,,,, बातें तो तू बहुत अच्छी करता है पता नहीं काम अच्छा करता है कि नहीं,,,।

क्यों उस दिन मेरा काम अच्छा नहीं लगा क्या,,,,,?

ऊमममम,, (अंकित की तरफ देखकर अपनी आंखों को गोल-गोल नचाते हुए) बहुत अच्छा लगा था तभी तो तेरी याद सता रही थी और तू है कि उस दिन के बाद तो दिखाई ही नहीं दिया,,,,

कोई बात नहीं आज आ गया हूं बाकी की कसर पूरी कर दूंगा,,,,

टिक तो पाएगा ना,,,

क्यों नहीं गीली पिच पर भी मैं कम से कम 35 40 मिनट आराम से बल्लेबाजी कर सकता हूं,,।

ऊमममम ऐसे ही बल्लेबाज कि मुझे जरूरत थी,,,,।

अच्छा आंटी सबसे पहले मुझे एक गिलास ठंडा पानी पिला दो वह क्या है ना धूप ज्यादा है तो प्यास लग गई।

पानी क्या तुझे मैं अपना दूध पिला देता लेकिन क्या है ना बीच में से दूध नहीं निकलता,,, लेकिन फिर भी चूसने में ज्यादा मजा आएगा,,,,।

वह कसर तो तुम्हारी बुर से पूरी हो जाएगी उसका नमकीन चटकार पानी चाटकर,,,,।
(अंकित के मुंह से बुर शब्द सुनकर नूपुर की सांस ऊपर नीचे हो गई उसे उम्मीद नहीं थी कि अंकित इस तरह से खुले शब्दों में उसके खूबसूरत अंग का नाम ले लेगा लेकिन उसने जिस तरह से नाम लिया था उसे यकीन हो गया था कि अंकित जैसा दिखता है वैसा ही नहीं नूपुर शर्म से पानी पानी हो रही थी और उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी और वह अंकित से मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अच्छा तु रुक मैं अभी पानी लेकर आती हूं,,,, (इतना कहकर वह किचन में चली गई और मौका देखकर जल्दी से दरवाजे की कड़ी खोल दिया दरवाजा बंद तो था लेकिन उसमें कड़ी नहीं लगी थी जिससे राहुल आराम से घर में आ सके और दरवाजा खोलकर वह तुरंत अपनी जगह पर आकर खड़ा हो गया तब तक नूपुर किचन में से ठंडे पानी का गिलास लेकर आई और उसे थमाते हुए बोली,,,)

पानी थोड़ा ज्यादा ठंडा है कहीं ईसे पीने के बाद ठंडा मत पड़ जाना नहीं तो मैं तड़पती रह जाऊंगी,,,, (नूपुर साड़ी के ऊपर से ही अपनी बर को खुजलाते हुए बोली यह उसकी तरफ से संपूर्ण रूप से आमंत्रण था लेकिन फिर भी ठंडा पानी पीते हुए अंकित बोला)

अंकल तो नहीं है,,?

नहीं वह तो ऑफिस गए हैं शाम को 7:00 बजे ही लौटेंगे और राहुल अभी अभी घर से बाहर के आए हैं वह भी एक-दो घंटे बाद ही वापस आएगा,,,,
(बिना पूछे ही नूपुर राहुल के बारे में बता दीजिए क्योंकि उसके पास अब समय नहीं था वह जल्द से जल्द अपने कमरे में अंकित को ले जाना चाहती थी और नूपुर का जवाब सुनकर अंकित मुस्कुराते हुए बोला)

मतलब है कि आज हम दोनों के पास बहुत मौका है और बहुत समय भी है,,,,।

समय तो बहुत है और मैं गंवाना नहीं चाहती चल मेरे कमरे में,,,,,(इतना कहने के साथ ही नूपुर उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने कमरे में ले गई और कमरे का दरवाजा बंद कर दी कमरे में प्रवेश करते ही अंकित ने खिड़की की तरफ देखा जो की खुली हुई थी उसका एक पट बंद था और दूसरा पट पूरा बंद नहीं था और इतना तो बहुत था राहुल को कमरे के अंदर देखने के लिए,,,,,, नूपुर की हालत देखकर अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था कि नूपुर की इस समय क्या हालत हो रही है इस समय उसकी दोनों टांगों के बीच आग लगी हुई थी जिसे बुझाना उसका फर्ज बन चुका था,,,,,, अब समय आ चुका था नूपुर के सामने अपनी कलाबाजियां दिखाने का औरत को खुश करने का कितना हुनर जानता है,,, वह सारे हुनर आजमाने का,,, इसलिए वह नूपुर का हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच लिया नूपुर एकदम से उसके सीने से जा लगी और उसके खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हथेलियां में भरकर उसकी आंखों में देखने लगा नूपुर की आंखों में वासना साफ दिखाई दे रहा था,,,, अंकित का लंड पेट में तंबू बना लिया था और जिस तरह से नूपुर उसके बदन से सट गई थी नूपुर को अपनी दोनों टांगों के बीच अंकित का लंड दस्तक देता हुआ महसूस हो रहा था,,,। अंकित उसके होठों की तरफ अपने होठों को बढ़ाते हुए बोला,,,,)

तुम बहुत खूबसूरत हो आंटी,,,,।

आंटी नहीं नूपुर,,,,,,(नूपुर इतना बोली और खुद ही अपने होठों को ऊपर करके अंकित के होठों से सटा दी दोनों के होंठ जो एकदम प्यासे थे आपस में मिलते ही एक दूसरे में समा जाने की पूरी कोशिश करने लगे अंकित पागलों की तरह नूपुर के लाल लाल होठों का रसपान करने लगा और अपने दोनों हथेलियां को उसके भारी भरकम नितंबों पर रखकर साड़ी के ऊपर से उसे जोर-जोर से दबाने लगा मसलने लगा,,,, नूपुर के प्रति अंकित की झिझक उसी दिन खत्म हो चुकी थी जब वह डाइनिंग टेबल के नीचे बैठकर उसकी बुर की चटाई किया था,,,,, इसलिए तो आज खुलकर नूपुर से मजा ले रहा था नूपुर भी उसकी बाहों में पिघलने लगी थी इसकी मजबूत हथेलियां को अपनी गांड पर महसूस करके वह मदहोश हो रही थी,,,, अंकित पागलों की तरह उसके होठों का रसपान करते हुए उसकी बड़ी-बड़ी गांड से खेल रहा था और धीरे-धीरे उसकी साड़ी ऊपर की तरफ उठा रहा था देखते ही देखते वह नूपुर की साड़ी को कमर तक उठा दिया था और उसकी गुलाबी रंग की पेंटी में कैद उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर मसल रहा था दबा रहा था,,,,।

दूसरी तरफ राहुल को घर की दूरी पर खड़े 20 मिनट हो चुके थे और वह अपने घर के मुख्य गेट को ही देख रहा था उसे ऐसा था कि कुछ ही देर में वह रोने वाली शक्ल लेकर उसके घर से निकलता हुआ दिखाई देगा लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ था तो वह कुछ देर तक और वहीं खड़ा होकर इंतजार करने की सोच और वैसे भी जो समय अंकित ने दिया था अभी वह समय नहीं हुआ था,,,,,, लेकिन बाहर इंतजार करके राहुल की भी हालत खराब हो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अंदर क्या हो रहा होगा कहीं अंकित उसकी मां को भी ब्लैकमेल करके उसके साथ शारीरिक संबंध बना लिया तो क्या होगा और ऐसा भी तो हो सकता है कि एक टीचर होने के नाते उसकी मां पूरी तरह से अंकित को दबाव में लेकर यह भी कह सकती है कि जो कुछ भी तो कह रहा है मैं तेरी मां से बता दूंगी तब वह शायद इस डर से वहां से निकल जाए और अगर ऐसा हो गया तब तो मजा आ जाएगा लेकिन राहुल ने अंकित की आंखों में वासना का तूफान देखा था ऐसा लग रहा था कि जैसे आज पहली बार हुआ किसी औरत से हम बिस्तर होने जा रहा है पहली बार चुदाई का सुख भोगने जा रहा है इसलिए राहुल को एहसास हो रहा था कि उसकी मां को चोदने के लिए अंकित कुछ भी कर सकता है,, खैर अभी इन सब बातों का वक्त बिलकुल भी नहीं था सिर्फ बाहर खड़े होकर इंतजार करना था,,,,।

कमरे के अंदर अंकित पूरी तरह से नूपुर की जवानी पर छाने लगा था,,,, वह नूपुर की बड़ी-बड़ी गांड को दबाते हुए उसकी पेंटिंग में हाथ डालकर उसकी नंगी गांड का स्पर्श महसूस करके पागल हुआ जा रहा था,,,,, अभी तक दोनों का चुंबन टूटा नहीं था दोनों की लार एक दूसरे के मुंह में आराम से चले जा रहे थे जिसे वह दोनों आराम से गले के नीचे उसे उतार भी ले रहे थे,,, अंकित नूपुर की गांड पर रह रहकर चपत भी लगा दे रहा था जिससे उसकी गोरी गोरी गांड टमाटर की तरह लाल हो गई थी लेकिन नूपुर को ईस चपत से नूपुर को बहुत मजा आ रहा था वैसे तो इस तरह का सुख वह अपने बेटे से भी ले चुकी थी लेकिन आज बात ही कुछ और थी आज पहली बार हुआ किसी गैर मर्द से इस तरह का आनंद ले रही थी,,,, जो कि वह भी उसके बेटे की ही उम्र का था। अंकित इस अवस्था में ही अपने दोनों बाजुओं को उसके नितंबों से टिका दिया और उसे अपनी गोद में उठाकर बिस्तर की तरफ ले जाने लगा नूपुर एकदम से घबरा गई उसे उम्मीद नहीं थी कि अंकित उसे उठा लेगा और वह घबराते हुए बोली,,,)

अरे रे यह क्या कर रहा है मैं गिर जाऊंगी मुझे नीचे उतार,,,,,।

मुझ पर भरोसा नहीं है क्या,,,,, रोज कसरत करता हूं दो गिलास दूध रोज पीता हूं,,,, पर मुझे तो लग रहा है कि शायद इसी दिन के लिए कसरत करता हूं ताकि तुम्हें खुश कर सकूं,,,,(और ऐसा कहते हुए अंकित बिस्तर के पास पहुंच गया और नरम नरम करते पर नूपुर को पटक दिया नूपुर गद्दे पर गिरते ही एक दो बार ऊपर की तरफ उछल गई वह एकदम से मस्त हो चुकी थी,,, उसे यकीन नहीं था कि अंकित में इतनी ताकत होगी कि वह उसे आराम से उठा लेगा लेकिन आज उसकी ताकत देखकर उसकी बुर पानी छोड़ रहे थे उसे बहुत आनंद आ रहा था और वह मुस्कुरा रही थी,,,,, वह बिस्तर पर पीठ के बेलेटी हुई थी उसकी साड़ी जांघों तक उठी हुई थी उसकी मोटी मोटी जांघों को देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था,,,,, वह बिस्तर पर घुटनों के बल आगे बढ़ता हुआ बोला,,,)

वाह कसम से तुम्हारी जवानी तो बहुत गदराई है,,,, आज तो बहुत मजा आ जाएगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही हुआ नूपुर की टांगों के बीच जगह बनाने लगा,,, और नूपुर भी अपनी टांगों को खोलने लगी वह मदहोश हुए जा रहे थे पागल हुए जा रही थी उसकी आंखों में खुमारी छाई हुई थी,,,,, आज वह उसे दिन का अधूरा कार्य पूरा कर लेना चाहते थे उसकी गहरी चलती सांसों के साथ-साथ ब्लाउज में कहे तो उसके दोनों कबूतर भी पंख फड़फड़ा कर बाहर आने को आतुर नजर आ रहे थे लेकिन शायद अभी अंकित का ध्यान उसके फड़फड़ाते हुए कबूतरों पर नहीं पहुंचा था,,,,, देखते ही देखते अंकित गहरी सांस लेता हुआ उसकी मोटी मोटी जांघो पर जीभ रखकर चाटना शुरू कर दिया अंकित की हरकत से नूपुर कसमसाने लगी वह आनंदित होने लगे उसे मजा आ रहा था क्योंकि अंकित उसकी जांघों को अपनी जीभ से चाट रहा था,,,, अंकित को शायद इस बात का ज्ञान था कि औरत का हर एक अंक मलाईदार होता है हर जगह चाटने पर केवल आनंद ही प्राप्त होता है इसलिए वह नूपुर की गोरी गोरी जांघों को चाटता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ रहा था,,,, नूपुर सर के नीचे तकिया लगाए अंकित को ही देख रही थी,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,, और अगले ही पल अंकित उसकी गुलाबी रंग की पेंटि के बीचों बीच अपनी नाक रखकर उसकी बुर वाली जगह को सुंघने लगा,,, उसमें से उठ रही मादक खुशबू अंकित केतन बदन में उत्तेजना का तूफान भर रही थी।

अंकित अपनी जी बाहर निकाल कर गुलाबी रंग की पेटी के ऊपर से ही उसकी बुर वाले हिस्से को चाटना शुरू कर दिया जो की बुर गीली होने की वजह से उसके आगे वाला हिस्सा गीला हो चुका था और चिपचिपा रहा था अंकित पागलों की तरह उस पर अपनी जीभ फिरा फिराकर उसे चाट रहा था,,,, नुपुर की सांसें उखड़ रही थी,,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि हम किस तरह की हरकत करेगा वह पूरी तरह से उसे अपनी हरकत से पागल कर रहा था,,,,, नूपुर केतन बदन में आग लगी हुई थी वह पागल हुए जा रही थी उसे अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी जिसकी वजह से वह खुद ही अपने दोनों हाथों को ब्लाउज के ऊपर से अपनी चूचियों पर रखकर उसे दबा रही थी और अपनी टांगों को मोड़ने की कोशिश कर रही थी जिसे अंकित अपने दोनों हथेलियां से दबाकर उसे स्थिर कर दिया था क्योंकि वह जानता था कि जिस तरह की हरकत हुआ कर रहा है उससे नूपुर की तड़प और ज्यादा बढ़ जाएगी।।।

सहहहह आहहहहहह ऊमममममम,,,,आहहहहह अंकित तू तो मुझे पागल कर दिया है रे,,,ऊमममममम,,,,आहहहहहहहह मैं मर जाऊंगी मुझे इतना मत तड़पा,,,,,,,सहहहहहहहह,,,,(ऐसा कहते हुए वह खुद ही अपनी चूचियों को दबा रही थी मसाला रही थी यह देखकर अंकित भी समझ गया था कि नूपुर पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी है,,,, इसलिए वह अगले ही पल अपनी दो उंगली को उसके गुलाबी रंग की पेंटिं के छोर को पकड़कर उसे दूसरी तरफ खींच दिया जिससे उसके गुलाबी पर एकदम से उजागर हो गई और उत्तेजना के मारे उसकी बुर पहले से कचोरी की तरह फुल चुकी थी जिससे पेंटी का दूसरा हिस्सा आराम से दूसरी ओर टिक गया था,,,,, नूपुर की बुर को देखकर अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हो गई क्योंकि साफ दिखाई दे रहा था कि अभी कुछ घंटे ही हुए थे उसे अपनी बुर पर से बाल को साफ किए हुए इसलिए उसकी बुक एकदम चिकनी दिखाई दे रही थी एकदम गुलाबी,,,,, एेसी बुर को चाटने में अंकित को बहुत मजा आता था,,,,, वह पागलों की तरह राहुल की मां की बुर पर टुट पड़ा,,,, और जैसे ही नूपुर अंकित की के को अपनी बुर पर महसूस की एकदम से उत्तेजना से भर गई और अपनी कमर को एकदम से ऊपर की तरफ उछाल दी जिसे अंकित अपने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ कर पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया उसकी बुर पहले से ही पानी छोड़ रही थी,,,, जिससे अंकित को चाटने में भी बहुत मजा आ रहा था। नूपुर पूरे बिस्तर पर तड़प रही थी पागल हो रही थी वह जिस तरह से उसकी बुर की चटाई कर रहा था शायद ही राहुल ने ऐसी चटाई किया हो। इसलिए तो नूपुर पागल हुए जा रही थी मदहोश हुए जा रही थी,,,। कुछ देर तक अंकित इसी तरह से नूपुर की बुर की चटाई करता रहा उसकी मलाई को गटकता रहा,,,,,।

दूसरी तरफ राहुल से रहा नहीं जा रहा था वह काफी देर से बाहर खड़ा इंतजार कर रहा था लेकिन अभी तक अंकित घर से बाहर नहीं निकला था इसलिए उसे भी कुछ संदेह होने लगा कि उसने उसकी मां को भी डरा धमका कर उसके साथ मनमर्जी करने लगा है इसलिए वह तुरंत अपने घर की ओर चल पड़ा,,,, घर पर पहुंच कर वह धीरे से दरवाजा खोलने के कोशिश किया तो दरवाजा अपने आप खुल गया जैसा कि अंकित ने उसे बता रखा था वह धीरे से कमरे में प्रवेश किया और दरवाजा बंद करके करिए लगा दिया और धीरे-धीरे इधर-उधर नजर घुमा कर देखने लगा कि आखिरकार दोनों है कहां वह दोनों ना तो डाइनिंग हॉल में थे और ना ही किचन में थे नहीं उसके कमरे में थे अब उसके पास उसकी मां का ही कमरा रह जाता था और अभी तक दोनों नजर नहीं आ रहे थे इसलिए राहुल का दिल जोरो से धड़क रहा था वह धीरे-धीरे चोर कदमों से अपनी मां के कमरे की तरफ आगे बढ़ने लगा,,,,, उसके मन में घबराहट भी हो रही थी कि ना जाने कमरे में क्या हो रहा होगा और वह मन ही मन दुआ भी कर रहा था कि ऐसा कुछ भी ना हो जैसा कि अंकित ने कहा था और यही सोचता हुआ वहां अपनी मां के कमरे के पास पहुंच गया तो दरवाजा बंद था लेकिन खिड़की खुली हुई थी उसका पट हल्का सा खुला हुआ था और वह खिड़की के पास खड़ा हो गया और अंदर देखने की कोशिश करने लगा दोपहर में भी अंदर ट्यूब लाइट जल रही थी जिसकी दूधिया रोशनी में सबको साफ नजर आ रहा था और जब राहुल ने अपनी नजरों को स्थिर किया तो उसकी आंखों के सामने उसकी मां का बिस्तर दिखाई देने लगा जिस पर वह खुद अपनी मां के साथ रोज मजा लेता था,,,,, और बिस्तर पर जो नजर उसे दिखाई दिया उसे देखकर वह पूरी तरह से स्तब्ध रह गया आश्चर्य और हैरानी से उसकी आंखें फटी के फटी रह गई।

अंदर की बिस्तर पर की स्थिति उसे साफ दिखाई दे रही थी उसे साथ दिखाई दे रहा है कि उसकी मां बिस्तर पर पीठ केवल लेटी हुई थी उसकी दोनों टांगें खुली हुई थी और यह शायद उसने अंकित के लिए ही खोल कर रखी थी और अंकित उसकी मां की दोनों टांगों के बीच छाया हुआ था और जिस तरह से उसका सर ऊपर नीचे हो रहा था उसे यकीन हो गया था कि अंकित उसकी मां की बुर चाट रहा था यह देखकर उसकी आंखों में शोले भड़कने लगे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, लेकिन जब गौर से अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को देखा तो उसके होश उड़ गए क्योंकि वह इस पल का आनंद ले रही थी मजा लूट रही थी उसके चेहरे के हाव-भाव बता रहे थे कि अंकित की हरकत से वह पूरी तरह से आनंदित हो चुकी थी,,,,,,, राहुल के पास अब करने के लिए कुछ नहीं रह गया था सिवाय अंदर का दृश्य देखने के,,,, कुछ देर तक अंकित इस तरह से उसकी मां की बुर की चटाई करता रहा यह देखकर ना चाहते हो कि ना जाने क्यों राहुल का लंड खड़ा होने लगा था वह पहली बार अपनी मां को इस रूप में देख रहा था पहली बार वह किसी गैर मर्द के साथ देख रहा था। अपनी मां की मस्ती को देखकर वह अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पा रहा था कि यह उसकी मां है क्योंकि नूपुर अपने बेटे से हमेशा कहती थी कि वह किसी गैर मर्द के बारे में सोच भी नहीं सकते लेकिन आज कैसे अपने कमरे के अपने ही बिस्तर पर उसके ही दोस्त के साथ मजा लूट रही थी।

अब ऐसे मजा नहीं आ रहा है,,,(नूपुर की बुर से अपने होठों को हटाकर गहरी सांस लेते हुए वह नूपुर की तरफ देखते हुए बोला तो उसकी बात सुनकर नूपुर भी मदहोशी भरे स्वर में बोली)

तब कैसे मजा आएगा,,,,?
(दोनों कि ईस तरह की बातें राहुल के कानों में बड़े आराम से पहुंच रही थी राहुल अपनी मां की बात सुनकर एकदम हैरान था क्योंकि लगी नहीं रहा था कि जैसे वह पहली बार अंकित के साथ इस अवस्था में मजा ले रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे दोनों कई बार इस तरह से मजा लुट चुके हैं,,,,,, नूपुर की बात सुनकर अंकित बोल कुछ नहीं बस अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर उसकी चड्डी को पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ खींचने लगा,,,यह देख कर राहुल की आंखें उत्तेजना से और ज्यादा फटने लगी जब उसने देखा कि अंकित का साथ देते हुए उसकी मां भी अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा दी थी ताकि वह उसकी चड्डी को आराम से उतार सके,,,, यह देख कर तो उसके हौसले एकदम से पस्त हो गए वह समझ गया कि उसकी मां को भी बहुत मजा आ रहा है,,,,, वह कभी सोचा नहीं था कि उसको छोड़कर उसकी मां किसी दूसरे लड़के से इस तरह से मजा लुटेगी,,,, लेकिन उसे यकीन करना ही पड़ा क्योंकि जो कुछ भी हो रहा था वह उसकी आंखों के सामने हो रहा था किसी से सुनी सुनाई बात नहीं थी,,,, इसलिए राहुल भी अपने दिल पर पत्थर रखकर अपनी मां की काम लीला को देखने लगा,,,, देखते ही देखते अंकित उसकी मां की चड्डी को उसके नंगी चिकनी टांगों से खींचकर बाहर कर दिया था और वह कमर के नीचे नंगी हो चुकी थी चड्डी के निकल जाने के बाद अंकित राहुल की मां की गुलाबी बुर को प्यासी आंखों से देख रहा था,,,, और गहरी सांस लेता हुआ बोला,,,)

वाह नूपुर तुम्हारी बुर तो एकदम गुलाबी है एकदम चिकनी ऐसा लग रहा है कि जैसे अभी-अभी क्रीम लगाकर बुर की सफाई की हो,,,,।

तु एकदम ठीक कह रहा है,,,, सुबह ही क्रीम लगाकर साफ क्यों ऐसा लग रहा था कि जैसे तेरे आने का एहसास मुझे हो गया था,,,,।(नूपुर की बात सुनकर; अंकित मुस्कुराने लगा लेकिन राहुल सच में पड़ गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या यह हालात दोनों के बीच पहले भी मुकम्मल हो चुके हैं या आज पहली बार है क्योंकि ऐसा लग ही नहीं रहा था कि उसकी मां पहली बार उसके साथ हम बिस्तर हो रही थी यही सोचकर तो उसका दिमाग पूरी तरह से चकरा जा रहा था,,,, अंकित को और ना ही नूपुर को इस बात का एहसास हुआ था की खिड़की पर राहुल खड़ा है वह दोनों अनजान थे,,,, अंकित अपनी हथेली को नूपुर की गुलाबी बुर पर रखकर उसे पूरी तरह से ढंक लिया था और उसे मसल रहा था अंकित की हरकत से नूपुर कसमसा रही थी उत्तेजना से बदहवास हो रही थी। वह अपनी उत्तेजना पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रही थी इसलिए लगातार अपनी चूचियों से खेल रही थी उसे दबा रही थी और अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन इस समय वहां अंकित के हाथों में थी और अंकित औरतों को खुश करने का तरीका अच्छी तरह से जानता था। इसलिए तो वह अपनी हथेली को जोर-जोर से नूपुर की दर पर रगड़ रहा था और उसकी हथेली पूरी तरह से उसके मदन रस से गीली हो चुकी थी। अंकित पागल हुआ जा रहा था मदहोशी के सागर में डूबता चला जा रहा था अपनी मां के बाद आज पहली बार उसे इतनी खूबसूरत औरत चोदने को मिलने वाली थी हालांकि दो औरतें उससे पहले भी चोदने को मिल चुकी थी जिसके साथ वह मजा लूट चुका था लेकिन वह दोनों थोड़ा उम्र दराज हो चुकी थी । लेकिन नूपुर उसकी मां की हम उम्र थी दोनों में केवल 19 ,,,20 का ही फर्क था दोनों लाजवाब थी जवानी से भरी हुई थी मर्दों को पानी पानी करने में पूरी तरह से सक्षम थी. कुछ देर तक इसी तरह से राहुल की मां की बुर से खेलने के बाद एक बार फिर से अंकित अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर रखकर उसकी मलाई चाटना शुरू कर दिया,,,,, नूपुर एकदम व्याकुल होने लगी मदहोशी में और उत्तेजना में वह अपने सर को दाएं बाएं पटकने लगी उसे बहुत मजा आ रहा था अंकित अपनी हरकत से उसे पूरी तरह से आनंदित कर दिया था।

नूपुर को इस बात का एहसास हो रहा था कि इतना मजा उसे आज तक अपने बेटे से भी नहीं मिला था। अंकित तो अपनी काम लीला के सफर में उसे पूरी तरह से मदहोश बना दिया था अभी तो मंजिल पर पहुंचना बाकी था,,,,,, ट्यूबलाइट की दूधियां रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई देरहा था वैसे तो दोपहर का समय था लेकिन कमरे में दोपहर में भी अंधेरा ही रहता था क्योंकि यह अंदर की तरफ कैमरा था और इसकी खिड़की भी बाहर की तरफ ना खुलकर कमरे के अंदर की तरफ ही खुलती थी जिससे बाहर की रोशनी कमरे में नहीं आ पाती थी और दोपहर में भी ट्यूबलाइट जलाना पड़ जाता था। अंकित पूरी तरह से राहुल की मां को मदहोश कर देने के इरादे से उसकी बुर की चढ़ाई कर रहा था वह अपनी नाक के आगे वाला भाग भी उसकी बुर पर रगड़ रहा था जिससे उसका आनंद दुगना होता जा रहा था,,,, और तभी अंकित राहुल की मां की उत्तेजना और आनंद दोनों एक साथ बढ़ाते हुए अपनी एक उंगली को उसकी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया अंकित इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि जिस तरह की जवानी से भरी हुई है एक उंगली से कुछ होने वाला नहीं है लेकिन फिर भी यह तो बस शुरुआत थी क्योंकि थोड़ी देर बाद वह अपनी दूसरी उंगली भी उसकी बुर में डाल दिया था और उसे अंदर बाहर कर रहा था कमरे के अंदर राहुल की मां और अंकित दोनों पूरी तरह से मजा लूट रहे थे और खिड़की के बाहर खड़ा राहुल हैरानी से अपनी मां की बेशर्मी और उसका रंडीपन देख रहा था हालांकि यह सब देखकर उसके लंड में भी उत्तेजना आ चुकी थी,,, यह जानते हुए भी की बिस्तर पर उसकी मां दूसरे लड़के के साथ मजा लूट रही है यह नजारा नहीं देखने के बजाय वह अपनी मां को मजा लूटते हुए देख रहा था और न जाने की उसे यह सब देखकर मजा भी आ रहा था।

सससहहहहह आहहहहह ऊमममममम आहहहहहहहह सहहहहहहहह यह क्या कर रहा है रे,,,,आहहहहहहहह मुझे कुछ-कुछ होने लगा है,,,,ऊमममममम ,,,(ऐसा कहते हुए राहुल की मां अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठाकर उसे गोल-गोल घूमा रही थी ऐसा करने में उसे भी बहुत मजा आ रहा था,,,,, राहुल उसकी कमर था में उसे नियंत्रण में किए हुए था,,,,,,, थोड़ी ही देर में नूपुर की हालत खराब होने लगी उसका बदन अकड़ने लगा अंकित समझ गया कि उसका पानी निकलने वाला है इसलिए वह उसकी कमर को और जोर से अपने दोनों हथेलियां में दबोच लिया और राहुल की मां भल भला कर अंकित के मुंह में ही झड़ने लगी अपना मदन रस उसके मुंह में छोड़ने लगी और अंकित भी कहां पीछे हटने वाला था वह भी अमृत की बूंद की तरह राहुल की मां की बुर से निकलने वाले मदन रस को जीभ से तब तक चाटता रहा जब तक की उसका मदन रस का रिसाव बंद नहीं हो गया,,,, राहुल की मां का पानी निकल चुका था वह गहरी गहरी सांस ले रही थी आंखों को बंद किए हुए वह पूरी तरह से इस एहसास में डूब चुकी थी और अंकित धीरे से उसकी टांगों के बीच से उठने लगा और बिस्तर से नीचे उतरने पर उसकी नजर खिड़की पर गई तो देखा की खिड़की पर राहुल खड़ा था दोनों की नजर आपस में टकराई राहुल शर्मा के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका लिया और अंकित मुस्कुराने लगा,,,,, अंकित बिना कुछ बोले आंख के इशारे से ही राहुल को उसकी मां अधनंगी हालत में दिखाते हुए,,, अपने अंगूठे और उंगली को मोड़कर गोल बना लिया और अपने दूसरे हाथ की उंगली को उसे गोली के अंदर बाहर करके इशारे करने लगा कि अब तेरी मां की चुदाई करने जा रहा हूं,,,, अंकित के इस व्यवहार से राहुल पूरी तरह से शर्मिंदा हो गया था,,,,, और उसे अपनी गलती का एहसास भी हो रहा था ना वह अंकित को छेड़ता और ना उसे आज यह दिन देखना पड़ता,,,,।

अंकित बिस्तर से नीचे उतर गया था उसके पेंट में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था,,,, अब वह राहुल को भी और जलाना चाहता था उसे पूरी तरह से मजा चखना चाहता था क्योंकि पहले दिन से ही राहुल उसकी मां को प्यासी नजरों से देखा था उसके बारे में गंदे विचार अपने मन में लाता था और अपने विचारों को उसके सामने प्रकट भी कर देता था हालांकि उसे समय अंकित कुछ कर नहीं पता था लेकिन आज हालात उसके पक्ष में थे,,,, राहुल पूरी तरह से उसकी मुट्ठी में था और उसकी मां भी इसलिए वह इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहता था कि भविष्य में राहुल अपनी गलती को दोबारा दोहरा ना सके,,,,, खिड़की पर खड़ा राहुल भी अंकित के पेंट में बने तंबू को देख रहा था,,, और अपने मन में सोच रहा था कि अब थोड़ी देर में अंकित का लंड उसकी मां की बुर की गहराई नाप रहा होगा,,,,, लेकिन अभी भी राहुल के मन में शंका थी कि अंकित उसकी मां को चोदने में टिक पाएगा कि नहीं। और अंकीत था की इस खेल में पूरी तरह से माहिर हो चुका था एक मंजा हुआ खिलाड़ी बन चुका था,,,,, इसलिए तो वह राहुल को और ज्यादा चिढ़ाने के उद्देश्य से अपने तंबू को अपनी हथेली में जोर से पकड़ कर एकदम से गहरी सांस लेते हुए मदहोश होने का नाटक करते हुए बिस्तर के करीब जाने लगा और अपने तंबू को पकड़े हुए ही वह बोला,,,,।

क्या हुआ आंटी सो गई क्या,,,,?

(अंकित की बात सुनकर राहुल की मां ने अपनी आंखों को खोल दी और अंकित की तरफ देखने लगी लेकिन बोली कुछ नहीं वह पूरी तरह से इस मदहोशी के पल में डूब चुकी थी और अंकित राहुल की मां की तरफ आगे बढ़ते हुए उसी तरह से अपने तंबू को पकड़े हुए बोला,,,)

मुझे मालूम नहीं था कि तुम इतनी ज्यादा खूबसूरत हो लेकिन आज पता चल रहा है कि तुम सच में किसी अप्सरा से कम नहीं हो,,,,,,,(वैसे तो अंकित हकीकत में उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था लेकिन इस समय वहां राहुल को जल भी रहा था अपनी बातों से अपने हुनर से,,, और अंकित की बात सुनकर राहुल की मां के चेहरे पर मुस्कुराहट तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

वह तो मैं पहले से ही हूं लेकिन आज तेरी नजर मुझ पर पड़ी है इसलिए तू ऐसा कह रहा है,,,,,,।

चाहे जो भी हो,,, मुझे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि मैं और तुम एक ही कमरे में हैं,,,,,(बिस्तर पर नूपुर के बेहद करीब बैठते हुए अंकित बोला और ईतना बोलने के साथ ही वह अपने दोनों हथेलियां को नूपुर के चूचियों पर रखकर जो कि अभी भी ब्लाउज में कैद थी वह जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, एक बार फिर से राहुल की मां बिस्तर पर मचलने लगी और अंकित राहुल की मां की चूचियों से खेलते हुए बोला,,,)

ओहहह आंटी तुम्हारी चुचीया तो एकदम खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी है,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,,,,,, और देखते ही देखते अंकित अपने हाथों से उसके ब्लाउज का बटन खोलकर ब्लाउज को उसकी बाहों से अलग कर दिया और इस समय उसके बदन पर साड़ी के साथ-साथ उसकी गुलाबी रंग की ब्रा भी थी जिसे वह खोला नहीं बल्कि उसे दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठा दिया और अगले ही पल उसकी खरबूजे जैसी दोनों चूचियां हवा में लहराने लगी यह देखकर अंकित से रहा नहीं गया और तुरंत वह उसकी एक चूची को अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया यह देखकर राहुल की भी हालत खराब होने लगी एक तरफ उसके मन में अपनी मां के प्रति तिरस्कार की भावना भी प्रकट हो रही थी दूसरी तरफ वह अपनी मां की बेशर्मी को देखकर उत्तेजित भी हुआ जा रहा था वह अपनी आंखों के सामने अंकित को अपनी मां की चूची पीते हुए देख रहा था वह दोनों हाथों से दबा दबा कर पी रहा था,,,,, हैरानी की बात यह थी कि उसकी मां को भी बहुत मजा आ रहा था। फिर वह अपने मन में सोचने लगा कि जब उसे देखकर न जाने क्यों अच्छा लग रहा है तो उसकी मां तो बिस्तर पर एक अनजान लड़के से मजा ले रही है उसे तो अच्छा लग ही रहा होगा,,,,,,।

माहौल पूरी तरह से बेशर्मी से भरा हुआ था क्योंकि राहुल की आंखों के सामने उसकी मां एक रंडी की तरह उसके दोस्त अंकित को मजा दे रही थी उसका पूरा साथ दे रही थी राहुल को तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि बिस्तर पर उसकी मां है क्योंकि वह कभी सोचा नहीं था कि उसकी मां इस तरह से किसी दूसरे लड़के के साथ भी मजा लेगी जैसा उसके साथ लेटी है,,,, फिर वह अपने आप को यह सोचकर संतुष्ट करने लगा कि आखिरकार औरत को उसकी बुर की गर्मी चरित्रवान रहने ही नहीं देती अगर ऐसा होता तो उसकी मां खुद अपने बेटे से ना चुदवाती,,,, ऐसा सोच कर राहुल अपने मन को मना रहा था अपने आप को दीलासा दे रहा था और फिर आंखों के सामने बिस्तर पर जिस तरह का गरमा गरम दृश्य दर्शाया जा रहा था उसे देखकर वह खुद भी आनंद लेने लगा उसका खुद का लंड पेंट में खड़ा हो चुका था। कमरे के अंदर का नजारा ही पूरी तरह से आनंदित कर देने वाला था अगर उसकी जगह कोई और होता तो शायद वह भी अंदर घुस जाने का प्रयास करता। लेकिन वह किसी तरह से अपने आप पर संयम रखें हुए था क्योंकि वह जानता था कि अंदर जो कुछ भी हो रहा है अभी उसमें उसका कोई भी किरदार नहीं है और अंकित भी अपना किरदार जबरदस्ती खड़ा कर दिया है और उसके किरदार को उसे मजबूरन देखना पड़ रहा है वरना वह अपनी मां के पास किसी को भटकने भी नहीं देता।

राहुल इस बात से हैरान हुआ जा रहा था कि जब अंकित उसकी मां की दोनों चूचियों को भारी-बड़ी से मुंह में लेकर पी रहा था उसी समय उसकी मां अपने हाथों से अपनी साड़ी को खोल रही थी वह पूरी तरह से बेसब्र हुए जा रही थी,,,,, अपनी मां का उतावलापन देखकर अनायस ही राहुल अपने मन में बोला।

साली रंडी दूसरे का लंड लेने के लिए कितना तड़प रही है कि खुद ही अपनी साड़ी खोल रही है,,,,(रंडी शब्द उसके होठों पर अचानक ही आ गया था,,,, आज तक वह अपने मुंह से अपनी मां के लिए रंडी शब्द का प्रयोग नहीं किया था बल्कि यह जानते हुए भी की उसकी मां उससे चुदवाती है लेकिन आज अचानक ही अपनी मां को दूसरे लड़के के साथ मजा लेता देखकर उसके लिए वह रंडी शब्द का संबोधन कर रहा था,,,,, और देखते ही देखते उसकी मां अपनी साड़ी को खोल चुकी थी वैसे भी कपड़ा उतारने की कोई जरूरत नहीं थी ऊपर और नीचे दोनों जगह से वह नंगी हो चुकी थी बस उसके कपड़े उसकी कमर में फंसे हुए थे लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी होकर मजा लूटना चाहती है। अंकित राहुल की मां को अपने हाथों से साड़ी खोलता हुआ देखकर उसकी एक हथेली अपने आप ही उसकी बुर पर आ गई और फिर से वह उसकी बुर से खेलना शुरू कर दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपने हाथ को उसकी बुर से हटाना ही नहीं चाहता था क्योंकि कोई ना कोई बहाने से वह अपनी हथेली को उसकी बुर पर रख ही दे रहा था,,,, अंकित अपने हुनर से राहुल की मां की चूचियों को पी कर टमाटर की तरह लाल कर दिया था और राहुल की मां भी अंकित की हरकत से पूरी तरह से मत हो चुकी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकित ने उसके चूचियों के आकार को थोड़ा सा और ज्यादा बढ़ा दिया है क्योंकि उसे अपनी चूची आज कुछ ज्यादा बड़ी लग रही थी,,,,,,, जी भरकर स्तनपान करने के बाद,,, अंकित राहुल की मां की चूचियों से अपने मुंह को हटा लिया और गहरी गहरी सांस लेता हुआ नूपुर के खूबसूरत चेहरे को देख रहा था नूपुर का खूबसूरत चेहरा टमाटर की तरह उत्तेजना से लाल हो चुका था और एक बार फिर से उसके लाल-लाल होठों को देखकर अंकित व्याकुल हो गया और उसके होठों पर अपने होंठ रखकर फिर से चुंबन करना शुरू कर दिया और नूपुर की उसकी पीठ पर हाथ रखकर उसका हौसला बढ़ने लगी यह सब राहुल से देखा नहीं जा रहा था लेकिन यह सब देखकर उसे मजा भी आ रहा था।

होठों की लाली चाटने के बाद अंकित धीरे से बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और अपने आप ही अपने कपड़े उतारने लगा इसके लिए नूपुर खुद व्याकुल नजर आ रही थी उसकी नज़रें उसके पेंट में बने तंबू पर ही टिकी हुई थी और यह सब खिड़की पर खड़ा राहुल देख रहा था वह यह भी देख रहा था कि उसकी मां लाल चाहिए आंखों से अंकित के लंड की तरफ देख रही थी मानो जैसे उसे पूरा का पूरा गले के अंदर निगल जाएगी,,,,, राहुल का मन कुछ ज्यादा ही तड़प रहा था क्योंकि उसे पूरा यकीन था कि उसकी मां अंकित के लंड को मुंह में लेकर जरूर चूसेगी क्योंकि उसे ऐसा करने में बहुत मजा आता था एक तरह से का को की मर्द का लंड नूपुर के लिए खिलौना था जिसे सेवा जी भरकर खेलना चाहती थी और खेलती भी थी। अंकित नूपुर की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए अपने पेट की बटन खोल रहा था और देखते ही देखते वह अपने अंदर बियर सही थी अपनी पेट को अपने पैरों से निकलकर एक तरफ कर दिया और नूपुर की आंखों के सामने एकदम नंगा हो गया उसका लंड पूरी तरह से हवा में लहराने लगा जिसे देखकर नूपुर की आंखों की चमक एकदम से बढ़ने लगे और तो और राहुल की भी हालत एकदम से खराब हो गई जब वह अंकित के लंड को देखा,,,, और देखता ही रह गया उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि वाकई में अंकित का लंड उसके लंड से कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा था,,,, न जाने क्यों राहुल के तन बदन में भी सुरसुराहट होने लगी उसकी भी नजर अंकित के लंड से बिल्कुल भी हट नहीं रही थी। और नूपुर की तो आंखों में तूफान नजर आने लगा बहुत पागलों की तरह बदहवास सी आंखें फाड़े अंकित के लंड को देखती ही रह गई,,,, उसे रहा नहीं जा रहा था वह अपने दोनों हाथों की कोहनी का सहारा लेकर अपने आप को थोड़ा ऊपर उठे और प्यासी नजरों से देखते हुए बोली।

बाप रे इतना मोटा और इतना लंबा कौन से तेल से मालिश करता है रे,।

किसी भी तेल से नहीं आंटी यह तो तुम्हारी जवानी देखकर कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है,,,।

हाय दैया मैंने तो आज तक ऐसा लंड नहीं देखी,,,।

क्या आंटी बहुत सारे लंड देख चुकी हो क्या,,?
(अंकित की बातें सुनकर नूपुर एकदम से सकपका गई और खुद ही अपनी बात को संभालते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं मेरा मतलब है कि मैं कभी सोच भी नहीं सकती की लंड इतना मोटा और लंबा भी हो सकता है,,,,
(जहां एक तरफ नूपुर की बात सुनकर उसका बेटा राहुल अंदर ही अंदर जल रहा था वहीं दूसरी तरफ अंकित मन ही मन प्रसन्न हो रहा था उसे यकीन हो जाना था कि वाकई में उसकी मां अब तक छोटे लंड से चुदवाती आ रही थी लेकिन आज उसका लंड अपनी बुर बर मे लेगी तो एकदम मस्त हो जाएगी,,,,, और यह सोचकर अंकित अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए उसे एकदम से नूपुर के चेहरे के करीब ले आया और धीरे से खिड़की की तरफ देखा ,वह जानबूझकर राहुल को यह सब दिखाना चाहता था राहुल यह सब देख भी रहा था,,,,, उसे न जाने क्यों यह सब अच्छा लगने लगा था वह देखना चाहता था कि उसकी मां किस तरह से उसके लंड को मुंह में लेकर चुसती है उसे संभालती है,,,, और उसके आश्चर्य के बीच उसकी मां खुद ही अपना उठाकर बधाई और एक हाथ से अंकित के लंड को पकड़ कर उसके मोटे आलू बुखारे जैसे सुपाड़े को अपने मुंह में भरकर चुसना शुरू कर दी।, वाकई में नूपुर को एहसास हो रहा था कि अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है जिसे वह ठीक तरह से अपने मुंह में नहीं ले पा रही थी। लेकिन आज जो एहसास जो आनंद उसे महसूस हो रहा था वह उसे कभी महसूस नहीं हुआ था जितना हो सकता था वह अपने मुंह को खोलकर अंकित के लंड का स्वागत कर रही थी।

अंकित बिस्तर के नीचे खड़ा था और राहुल की मां बिस्तर पर लेटी हुई थी और राहुल खिड़की पर खड़े होकर यह सब देख रहा था अपनी मां की बेशर्मी को देख रहा था उसके रंडी पन को देख रहा था लेकिन इस बात को वह भी झुटला नहीं सकता था कि उसे भी मजा आ रहा था,,,,, अंकित राहुल की जलन को और ज्यादा बढ़ाने के लिए खिड़की में मुस्कुराते हुए देखा और उसकी मां के सर पर हाथ रखकर उसके रेशमी बालों को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिया वह इस तरह से नूपुर के मुंह को चोद रहा था और अंकित को जला रहा था,,,,, देखते ही देखते अंकित अपना होना दिखाते हुए पूरा का पूरा लंड उसकी मां के गले तक उतार दिया था उसकी मां को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से मस्त थी उसके मुंह से गोगो,,,,,,गोगो,,,,,, की आवाज आ रही थी,,,,, और कुछ सेकेंड के बाद अंकित उसे वापस बाहर निकाल ले रहा था ऐसा वह दो-तीन बार किया उसे बहुत मजा आ रहा था। और नूपुर को भी बहुत मजा आ रहा था पहली बार लंड उसके गले की गहराई तक गया था क्योंकि राहुल का लंड उसके मुंह में ही खत्म हो जाता था,,,,, अंकित पूरी तरह से मस्त होकर राहु की मां को पूरा मजा दे रहा था वह कभी उसे चूसने देता तो खुद उसे चुसवाता तो कभी अपनी कमर आगे पीछे करके उसके मुंह को चोदना शुरू कर देता,,,, नूपुर खुद हैरान थी अंकित की कलाबाजियों को देखकर उसके हुनर को देखकर जिसे वह नादान लड़का समझती थी वह पूरा खिलाड़ी बन चुका था और कैसे खिलाड़ी बन गया यह वह नहीं जानती थी लेकिन आज बिस्तर पर उसे खिलाड़ी की जरूरत ही अनाड़ी की नहीं क्योंकि अंकित को कुछ सीखना नहीं पड़ रहा था बल्कि अंकित ही उसे सब कुछ एक नए अनुभव के साथ सीखा भी रहा था और अच्छे से एहसास भी करा रहा था।

कुछ देर इसी तरह से मजा लेने के बाद अंकित राहुल की मां के मुंह में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया जो कि उसके थूक और लार से पूरी तरह से सना हुआ था और यह अच्छा ही था क्योंकि ऐसे में उसकी बुर में डालने में आसानी रहती ,,,,, लेकिन मुंह से लंड निकल जाने के बाद अंकित का बुरा हाल था क्योंकि वह अभी राहुल की मां के मुंह में से अपने लंड को बाहर निकलना नहीं चाहता था वह कुछ देर तक और उसके मुंह में ही अपना लंड ठुंस कर अपना माल गिरा देना चाहताथा लेकिन उसकी बुर को चोदने की तड़प भी बढ़ चुकी थी जिसके चलते उसे अपने लंड को उसके मुंह में से बाहर निकालना पड़ा,,, और यही हाल नूपुर का भी था वह भी ललचाई आंखों से अंकित के लंड की तरफ देख रही थी जिस पर उसका थूक और लार लगा हुआ था,,, शायद वह भी अभी कुछ देर तक और उसे चूसना चाहती थी,,,,, अंकित अब बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था वह एकदम से राहुल की मां की कमर के नीचे अपने दोनों हाथ डाला और उसकी कमर पकड़ कर उसे बिस्तर की दूसरी तरफ खींच लिया जिससे उसका आधा शरीर बिस्तर के बाहर हो गया और वह बिस्तर पर लेटी रह गई,,,, अंकित जल्दबाजी दिखाते हुए पेटिकोट की डोरी खोलने लगा और पेटिकोट की डोरी खोलते ही एक बार फिर से उसके पेटीकोट को पकड़ कर बाहर की तरफ खींचने लगा और राहुल की मां उसका साथ देते हुए फिर से अपनी गांड को ऊपर उठा ले और अगले ही पल वह बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी थी उसके दोनों पैर जमीन पर टिके हुए थे और वह खुद बिस्तर पर लेटी हुई थी,,,,, अंकित अपने लंड को पकड़ कर ही आते हुए खिड़की की तरफ देखा राहुल उसे ही देख रहा था उसे मालूम था कि अब क्या होने वाला है वह जानता था कि थोड़ी ही देर में उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में खो जाएगा। अंकित राहुल की मां की दोनों टांगों के बीच आ गया और अपने लंड को हिलाते हुए बोला।

आज तो मजा आ जाएगा,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपने दोनों हाथों से उसकी मोटी मोटी जांघे पकड़ कर उसे खोल दिया और अपने मोटे आलू बुखारे जैसे सुपाड़े को राहुल की मां की बुर से सटा दिया,,,,, मोटे तगड़े सुपाड़े की गर्मी और स्पर्श अपनी बुर पर महसूस करते हैं राहुल की मां एकदम से मस्त हो गई और यह मस्ती राहुल ने भी अपनी मां के चेहरे पर देखा था और अगले ही पल बुर का गीलापन पाकर अंकित अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा बुर की चिकनाहट पाकर फिसलता हुआ अंकित का लैंड राहुल की मां की बुर में प्रवेश करने लगा हालांकि यह काम थोड़ा सा मुश्किल था क्योंकि अभी तक उसकी बुर में राहुल का लंड जाता था लेकिन आज अंकित का लंड उसमें जा रहा था जो मोटाऊ और लंबाई दोनों में अंकित से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था। अंकित दोनों हाथों से उसकी मोटी जांघों को पकड़े हुए था,,,, राहुल की मां भी है सब अपनी आंखों से देखना चाहती थी इसलिए अपने हाथ की दोनों कहानी का सहारा लेकर अपने चेहरे को उठाकर अपनी नजरों को दोनों टांगों के बीच स्थिर कर दी थी और अपनी गुलाबी छेद में,,, अंकित के मोटे तगड़े लंड को घुसता हुआ देख रही थी उसके चेहरे का भाव पल-पल बदलता जा रहा था जैसे-जैसे अंकित का। लंड अंदर की तरफ सरक रहा था वैसे-वैसे राहुल की मां के चेहरे की रूपरेखा बदलती जा रही थी ,,,,, उसके लाल-लाल होठ खुले हुए थे उसकी नंगी चूचियां सांसों की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही थी और पानी भरे गुब्बारे की तरह हिलोरें खा रही थी,,,,।

अंकित की मेहनत धीरे-धीरे रंग ला रही थी हालांकि इस क्रिया को करने में वह भी पसीने से तरबतर हो चुका था लेकिन पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था वह पूरी मेहनत कर रहा था राहुल की मां पर छा जाने के लिए और वह अपने निश्चय पर अड़ग भी था देखते ही देखते हैं उसका बम पिलाट लंड उसकी बुर की गहराई में पूरी तरह से खो चुका था और यह देखकर राहुल की मां आश्चर्यचकित थी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि राहुल का मोटा तगड़ा लंड पूरी तरह से उसकी बुर में घुस जाएगा,,, जो कि अब एक तरह से उसकी भी विजय थी वह पूरी तरह से सक्षम थी मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई में छुपा लेने के लिए इसलिए उसके चेहरे पर भी मुस्कान तैरने लगी थी और वह अंकित से बोली,,,।

बाप रे मुझे तो उम्मीद ही नहीं थी कि तेरा लंड मेरी बुर में पूरा का पूरा घुस जाएगा,,,,(राहुल की मां की बात सुनकर अंकित मुस्कुरा दिया और तिरछी नजर से राहुल की तरफ देखने लगा जो की शर्म से पानी पानी हो जा रहा था वह सोच नहीं था कि उसकी मां इतनी बड़ी बेशर्म बन जाएगी उसकी बातें आज पूरी तरह से रंडी की तरह लग रही थी,,,,, राहुल की मां की बात सुनने के बाद अंकित बोला,,,,)

आंटी तुम खूबसूरती की वह बला हो जो अपनी बुर में गधे के लंड को भी पूरा का पूरा ले लेगी,,,, ।

धत्,,,, बेशर्म,,,,,।

बेशर्म बनने में ज्यादा मजा है आंटी पहले में सीधा-साधा था तब तुम देती नहीं थी लेकिन आज बेशर्म बन गया हूं तो देखो तो आगे खोल कर दे रही हो,,,,(राहुल कीमां की कमर दोनों हाथों से पकड़ कर अंकित अपनी कमर हिलाता हुआ बोला,,,,)

मैं तो शुरू से तुझे देना चाहती थी लेकिन तू ही लेने से इनकार करता था ना जाने किस बात का डर था तेरे मन में कि मेरी ले नहीं पा रहा था,,,,,,,।

मुझे क्या मालूम था आंटी की तुम मुझे देना चाहती हो पहले दिन से ही तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरा लैंड बार-बार खड़ा हो जाता था तुम्हें किचन में खाना बनाते देखकर मेरे लंड की जो हालत हो रही थी ना बात नहीं सकता तुम्हारे बारे में रात दिन में सोचता रहता था,,,,,,, और अपने आप से ही बात करते हुए बोलता था कि कब मुझे आंटी को चोदने को मिलेगा,,,,,(अंकित तिरछी नजर से राहुल की तरफ देखते हुए बोला हुआ अपनी बातों से राहुल को पूरी तरह से शर्मिंदा कर देना चाहता था और राहुल हो भी रहा था)

आज मिल गया ना मौका तुझे,,,,।

हां आंटी आज तुम्हारी दया से मुझे मौका भी मिल गया और सच कहूं तो मुझे बहुत मजा आ रहा है तुम्हारी बुर में लंड डालने में मैं कभी सोचा नहीं था कि तुम्हें चोदने में मुझे इतना मजा आएगा बस तुम्हें छोड़ना चाहता था लेकिन आज पता चल रहा है कि जैसे लग रहा है कि मैं किसी खूबसूरत हीरोइन की चुदाई कर रहा हूं,,,,,ऊफफ,,,, इस उम्र में भी तुम्हारी बुर कितनी कसी हुई है,,,,,,आहहहहहह हर झटका के साथ कितना मजा आ रहा है,,,,।

मुझे भी बहुत मजा आ रहा है,,,,,,आहहहहह आहहहहह ऊमममममम तेरा बहुत मोटा और लंबा भी तो है,,,,।

ऐसा कुछ भी नहीं है आंटी यह तो आज खुशी में कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा लगने लगा है अंकल जी से ज्यादा मोटा और लंबा नहीं होगा,,,,,।

धत् किसकी बात कर दिया तूने अगर वह इस लायक होते तो मुझे तेरे साथ यह सब करने की तकलीफ नहीं उठानी पड़ती,,,

क्यों आंटी,,,,,

अरे वह अब इस लायक नहीं है कि मेरी प्यास बुझा सके,,,, और उनके हथियार भी छोटा और पतला है,,,,,

ओहहहहह तब तो अच्छा ही है आंटी अगर ऐसा ना होता तो मुझे तुम्हारी सेवा करने का मौका कैसे मिल पाता,,,,,(राहुल की तरफ देखते हुए अंकित बोला ,,,,)

तू सच कह रहा है और मुझे आज एहसास हो रहा है कि यह मौका तुझे पहले ही दे देना चाहिए था मैं तो ऐसा लग रहा है की हवा में उड़ रही हूं तेरा लंड सीधा मेरे बच्चेदानी तक जाकर टकरा रहा है,,,,,आहहहहह आहहहहह ,,ऊईईईईई मां

तो आंटी कहीं ऐसा ना हो जाएगी तुम्हारे बच्चेदानी में बच्चा रुक जाए और राहुल के लिए भाई मिल जाए (बेशर्मी से हंसते हुए अंकित राहुल की तरफ देखते हुए बोला तो राहुल भी अंकित की बात सुनकर एकदम से सन्न रह गया,,,,, वह अपनी मां का जवाब सुनना चाहता था और अंकित की बात सुनकर उसकीमां बोली,,,,)

काश ऐसा हो पाता मेरे पेट में तेरा बच्चा होता तो मुझे और मजा आ जाता लेकिन ऐसा हो नहीं सकता क्योंकि मैं ऑपरेशन करा ली हुं,,,,।

ओहहहहह आंटी यह क्या कि तुमने मेरे बाप बनने का सपना तोड़ दी,,,,,।

चल हरामी बडा आया बाप बनने अपना काम कर,,,।

वही काम तो कर रहा हूं आंटी,,,(और ऐसा कहते हुए जोर-जोर से धक्का लगाने लगा लेकिन अपनी मां की बात सुनकर राहुल एकदम शर्मिंदा हो गया था क्योंकि इस तरह की बात उसकी मां ने उसके साथ कभी नहीं की थी लेकिन अंकित के साथ मिलकर वह बच्चे की बात कर रहे थे उसके बच्चे की मां बनने की बात कर रही थी यह सब राहुल को शर्मिंदा कर रहा था लेकिन जिस तरह से अंकित उसकी मां की चुदाई कर रहा था वह देखकर उसकी उत्तेजना पूरी तरह से बढ़ चुकी थी और वह भी अपने पेटं से अपने लंड को बाहर निकाल कर हीलाना शुरू कर दिया था। इस समय तीन लोग मजा ले रहे थे दो लोग कमरे के अंदर और एक कमरे के बाहर तीनों अपने-अपने काम में लगे हुए थे लेकिन अंकित कुछ ज्यादा ही मजा ले रहा था,,,,, नूपुर की बड़ी-बड़ी चूचियों को उसकी छाती पर लहराते हुए देखकर अंकित से रहा नहीं गया और अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर उसकी दोनों चूचियों को थाम लिया और उन्हें जोर-जोर से दबाते हुए अपनी कमर लाना शुरू कर दिया उसे बहुत मजा रहा था राहुल की मां की चुदाई करने में,,,,,, लेकिन घंटों से अंकित का लंड खड़ा का खड़ा था जो कि अब राहुल की मां की बुर की गर्मी पाकर पिघलने के लिए तैयार हो चुका था वह झड़ने के कगार पर आ चुका था इसलिए वह अपने धक्को को तेज कर दिया था एकदम रफ्तार में,,,, खिड़की पर खड़ा राहुल यह सब देखकर पूरी तरह से मत हुआ जा रहा था वह भी जोर-जोर से मुठ मार रहा था,,,, नूपुर भी दूसरी बार झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी उसका बदन आकर रहा था और अंकित उसके कंधों को दोनों हाथों से पकड़ कर एकदम से नियंत्रण में किए हुए जोर-जोर से उसे पेल रहा था,,, और अगले ही पल राहुल की मां और अंकित दोनों एक साथ झड़ने लगे साथ में दीवार पर राहुल भी झड़ने लगा,,,,, अंकित मस्त होता हुआ राहुल की मां पर झुक गया था और उसे अपनी बाहों में भरकर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था,,,, और झड़ रहा था ।

अंकित का यह पहला स्खलन था राहुल की मां की बुर में,,,, अंकित पूरी तरह से मस्त हो चुका था वह कभी सोचा नहीं था कि राहुल की मां उसे चोदने को मिलेगी,,,,, नूपुर भी मस्त हो चुकी थी वह भी, अंकित को अपनी बाहों में जकड़ कर उसके लंड से नीकली बौछार में पूरी तरह से डुब रही थी उस साफ तौर पर एहसास हो रहा था कि,,, अंकित के लंड से निकली पिचकारी उसके बच्चेदानी पर बौछार मार रही थी,,, वह पूरी तरह से संतुष्टि के एहसास में डूबती चली जा रही थी अपनी आंखों को बंद करके वह मदहोशी में खो गई थी और अंकित की कमर रहे रहकर झटका खा रही थी,,, यह सब राहुल अपनी आंखों से देख रहा था वह यह देखकर हैरान था कि उसकी मां को अंकित से चुदवाने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था। लेकिन अब कोई फायदा नहीं था। अब उसे भी एहसास हो गया था कि औरत के चरित्र का कोई भरोसा नहीं होता कल तक उसे ऐसा ही लगता था कि उसकी मां उसके साथ वफादार है लेकिन अगर वफादारी होती तो अपने ही बेटे के साथ संबंध क्यों बनाती ,,,, यही सोच कर वह अब अफसोस नहीं कर रहा था,,,। राहुल को ऐसा लग रहा था कि आप झड़ने के बाद अंकित चल जाएगा और वह यही सोचकर वहीं कुछ देर तक खड़ा रहा।

अंकित राहुल की मां की बुर में से अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाला जो कि उसके मदन रस में पूरी तरह से डूब कर टपक रहा था,,, नूपुर लेते-लेते ही अंकित के लंड की तरफ देखी जो कि अभी भी पूरी तरह से अपनी औकात में ही खड़ा था यह देखकर वह हैरान हो गई और। बोली।

बाप रे झड़ने के बाद भी तेरा तो खड़ा है,,,।

तो क्या आंटी मर्द का लंड है ढीला थोड़ी ना पड़ेगा,,,,।
(अंकित की बात सुनकर नूपुर मन ही मन मुस्कुरा रही थी लेकिन यह सोचकर हैरान भी थी कि उसके बेटे का लंड तो झडने के बाद तुरंत ढीला पड़ जाता था लेकिन अंकित का तो अभी भी बना हुआ था,,,,,, नूपुर गहरी गहरी सांस ले रही थी ,,,बिस्तर पर लेटी हुई उसका यह मादक रूप नग्न अवस्था में कुछ ज्यादा ही उत्तेजक लग रहा था अंकित बिस्तर से नीचे खड़ा था और वह भी अपनी कमर पर हाथ रखकर राहुल की मां की नंगी जवानी कोई देख रहा था उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि अभी-अभी उसने राहुल की मां की चुदाई किया है क्योंकि राहुल की मां को चोदने का सपना वह भी देखा करता था,,,, जब तक उसकी खुद की मां के साथ नजदीकियां नहीं बनी थी तब तक वह राहुल की मां के ही बारे में सोचकर मुठ मारा करता था । लेकिन जैसे ही उसकी नजदीकी अपनी मां के साथ बनी है उसका ध्यान नूपुर के ऊपर से हट गया था लेकिन आज फिर वह अपनी चाहत को राहुल की मां के साथ पूरा कर लिया था इसलिए वह अपने आपको बेहद भाग्यशाली समझ रहा था क्योंकि उसके जीवन में अब चुदने वाली चार औरतें थी एक उसकी नानी दूसरी उसकी मां तीसरी सुमन की मां और चौथी राहुल की मां अभी तक उसने उम्र दराज औरतों की चुदाई का सुख भोगा था,,,, लेकिन इस उम्र की औरतों को चोदने में जितना मजा उसे मिल रहा था वह सोच भी नहीं सकता था। नूपुर को भी लग रहा था कि उसकी चुदाई करने के बाद अंकित अपने घर चला जाएगा इसलिए वह उठकर बैठ गई थी,,,, और अंकित रह रहकर कर नजरों से खिड़की की तरफ देख ले रहा था जहां पर अभी भी राहुल अपनी जगह पर बना हुआ था। राहुल को जलाने के उद्देश्य से वह उसकी मां से बोला,,,)

कैसा लगा आंटी,,,,?

पूछ मत कैसा लगा मैं बात नहीं सकती आज इतना मजा आया कि मैं कभी सोच भी नहीं सकती की चुदाई में इतना मजा आता होगा।

क्यों ईससे पहले चुदवाने में इतना मजा नहीं आया,,,

तभी तो तुझे कह रही हूं सच में मुझे इतना मजा पहले कभी नहीं आया क्योंकि तेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है,,, इसकी रगड़ एकदम साफ तौर पर मुझे अंदर तक महसूस हो रही थी।

इसका मतलब कि तुमने अभी तक अपनी बुर में मोटा और लंबा लंड नहीं ली थी,,,,।

हां मैं सच कह रही हूं मैं तो पहली बार तेरे जैसा लंड देख रही हूं इससे पहले मैंने सिर्फ किताबों में ही देखी थी और वह भी अंग्रेज लोगों का लेकिन पहली बार उस तरह का देसी लंड देख रही हूं।

ओहहहहह तुम तो बहुत चालू हो गंदी किताबें पढ़ती हो,,,

तो इसमें क्या हो गया बहुत से लोग हैं जो छुप छुप कर यह किताबें पढ़ते हैं,,,,,।

क्या राहुल को यह सब मालूम है,,,,।(चोर नजरों से राहुल की तरफ देखते हुए)

नहीं उसे बिल्कुल भी नहीं मालूम,,,,, भला यह सब बातें बेटे को बताते हैं क्या,,,,?

अगर उसे पता चल गया तो की उसकी मां गंदी किताबें पढती है,, उसके ही दोस्त से चुदवाती है तब क्या होगा,,,,।

लेकिन यह सब उसे पता ही नहीं चलेगा,,,,
(नूपुर इस बात से बेखबर थी की खिड़की पर उसका बेटा खड़ा होकर उसकी काम लीला को अपनी आंखों से देख रहा है और उसकी बातों को सुन भी रहा है,,, राहुल की मां की बात सुनकर अंकित अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,)

अगर मान लो उसे यह सब पता चल गया कि उसकी मां गंदी किताबों की शौकीन है और उसके ही दोस्त से चुदवा रही है, तब क्याहोगा,,,?

तब तो सच में गजब हो जाएगा,,,,,,

लेकिन उसका मुंह बंद करने का भी तरीका मेरे पास है ज्यादा चिंता करने की कोई बात नहीं है,,,,।

वह क्या,,,,?(एक हाथ से अपनी चूची दबाते हुए वह बोली,,)

उसके लिए भी अपनी टांगें खोल देना राहुल भी तो मेरे ही उम्र का है तुम्हारी जवानी देखकर उसका भी लंड खड़ा हो जाता होगा,,(खिड़की पर खड़े राहुल की तरफ देखते हुए) तुम्हारी गुलाबी बुर देखकर उसे रहा नहीं जाएगा और वह सारी बातों को बुलाकर तुम्हारी बुर में अपना लंड डाल देगा।

धत्,,,, कोई अपने बेटे के लिए ऐसा करता है क्या?

क्यों नहीं तुम्हें तो ऐसा करना ही होगा अगर हम दोनों के बीच क्या चल रहा है अगर राहुल को पता चल गया तो उसका मुंह बंद करने के लिए तुम्हें उसके मुंह में अपनी चूची ठुंसना ही पड़ेगा तभी वह शांत होगा,,,,।

नहीं नहीं मुझसे तो ऐसा नहीं हो पाएगा,,,,
(नूपुर इस गलतफहमी में थी कि अंकित को उसके और उसके बेटे के बीच के रिश्ते के बारे में कुछ भी नहीं मालूम है जबकि अंकित सब कुछ जानता था और वह जानबूझकर इस तरह की बातें कर रहा था ताकि आगे चलकर राहुल के साथ मिलकर वह दोनों उसकी मां की चुदाई कर सके,,,, और दूसरी तरफ खिड़की पर खड़ा राहुल अपनी आंखों से अपनी मां की कम लीला देखकर और दोनों की बातें सुनकर इतना तो समझ गया था कि इन दोनों का रिश्ता आज का पहला तो बिल्कुल भी नहीं है यह दोनों पहले से ही इस काम लीला में लगे हुए हैं बस वही गलतफहमी में रह गया था,,,,, राहुल की मां की बात सुनकर अंकित बोला)

अभी तुम्हें ऐसा लगता है लेकिन जिस दिन हम दोनों की चोरी पकड़ी जाएगी तब तुम्हें समझ में आएगा तब तुम खुद ही अपने बेटे के लिए अपनी टांगें खोल दोगी अपनी गुलाबी बुर का छेद उसके सामने परोस दोगी,,,,
(अंकित की बातें सुनकर नूपुर की हालत खराब हो रही थी उसके बदन में फिर से उत्तेजना का तूफान उठ रहा था और अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और तुम्हारा गुलाबी छेद देखकर तुम्हारे बेटे से भी रहा नहीं जाएगा आखिरकार अभी तो मेरी तरह जवान है तुम्हारी बुर देखकर उसका भी लंड खड़ा हो जाएगा वह यह नहीं देखेगा कि उसके सामने टांग खिलाए कौन लेटी है उसकी मां है या कोई और,,, उसे तो बस तुम्हारा गुलाबी छेद दिखाई देगा जिसमें वह जल्द से जल्द अपने लंड को डालकर अपना गरम लावा तुम्हारी बुर में डालने के लिए तड़प उठेगा।

क्या वह ऐसा कर सकता है,,,?

क्यों नहीं मेरी जान,,,, वह जरूर ऐसा करेगा,,,,
(राहुल की मां के लिए जान शब्द का प्रयोग करके अंकित ने आग में घी डालने का काम किया था क्योंकि उसकी यह बात सुनकर राहुल पूरी तरह से शर्मिंदा हो गया था,,,, लेकिन राहुल की मां बहुत खुश हो गई थी और वह तुरंत बोली,,,)

तुम मुझे मेरी जान का कर ही बुलाया कर मुझे अच्छा लगताहै,,,,,

तुम्हारी बुर में लंड डालने के बाद तुम मेरी जान बन गई हो,,,,,,।

अच्छा अगर तेरी मां दोनों टांगें खोल दे तो क्या तू भी बिना कुछ सोचे समझे उसकी बुर में लंड डाल देगा,,,,।
(राहुल की मां की बात सुनकर अंकित थोड़ा सोच में पड़ गया था वैसे तो वह अपनी मां की बुर में रोज ही लंड डालता था इसलिए इसमें कोई नई बात नहीं थी और राहुल की मां के मुंह से यह बात सुनकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी अगर यह बात उससे नहीं बहुत पहले की होती तो शायद वह गुस्से में उसके गाल पर तमाचा मार सकता था लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल चुके थे इसलिए वह थोड़ा सोच समझ कर बोला)

जैसा कि मैं बोला मैं भी जवान हूं अगर सच में मेरी मां मेरी आंखों के सामनेअपनी टांगे खोल देगी तो उसकी गुलाबी पर देखकर मेरा भी खड़ा हो जाएगा लेकिन मैं कुछ करुंगा कि नहीं करूंगा यह हालत पर निर्भर रखता है अगर मैं भी अपनी मां को किसी गैर मर्द के साथ रंगे हाथ पकड़ लूंगा तो शायद मैं भी वही करूं जो राहुल को करने को कह रहा हूं।

ओहहहहह तब तो तुझे मजा ही आ जाएगा क्योंकि तेरी मां तो मुझे भी ज्यादा खूबसूरत है यह बात मानता है ना तू।

बात तो तुम सही कह रही हो मेरी जान मेरी मां तुमसे भी ज्यादा खूबसूरत है लेकिन इस समय मेरे दिल की रानी तुम हो,,,,(और ऐसा कहते हुए अंकित अपनी लंड को पकड़े हुए राहुल की मां के करीब पहुंच गया अपने मोटे तगड़े लंड को हथौड़े की तरह उसके चेहरे पर पटकने लगा और रगड़ने लगा और राहुल की मां को यह अलग दुनिया की कल्पना करवाते हुए बोला,,,)

सोचो मेरी जान अगर ऐसा सच हो गया तो कितना मजा आएगा एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर मैं तुम और तुम्हारा बेटा तीनों नंगे होकर मजा लूटेंगे मैं तुम्हारी बुर चाटुंगा तो तुम्हारा बेटा तुम्हारी चुची दबाएगा तुम्हारी बारी से हम दोनों का लंड मुंह में लेकर चूसोगी,,,,, सोचो कितना मजा आएगा एक ही बिस्तर पर घमासान मच जाएगा कभी मैं तुम्हारी बुर में डालूंगा तो कभी तुम्हारा बेटा तुम्हारी बुर में डालेगा जब तुम तुम्हारे बेटे का लंड अपनी बुर मे लोगी तो मैं तुम्हारी गांड मारूंगा,,,,,।

(गांड मारने वाली बात सुनकर राहुल की मां एकदम से मदहोश हो गई और अपने लाल-लाल होठों को खोलकर तुरंत अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी जिसपर उसके बुर का मदन रस लगा हुआ था,,,,,, यह सब खिड़की पर खड़ा राहुल अपनी आंखों से देख रहा था एक बार झड़ जाने के बाद अंदर का दृश्य देख कर अपनी मां की बेशर्मी देख कर फिर से उसका लंड अंगड़ाई ले रहा था। आज उसकी मां पूरी तरह से रंडी बन चुकी थी लेकिन आप उसकी मां का रूप राहुल को अच्छा लग रहा था और वह भी अंकित की बातों की कल्पना कर रहा था वह भी सोच रहा था कि अगर सच में अंकित जैसा कह रहा है वैसा हो जाए तो मजा ही आ जाए,,,,, राहुल सोच रहा था कि एक बार झड़ने के बाद अंकित अपने घर चला जाएगा लेकिन उसके आश्चर्य का ठिकाना न था क्योंकि झड़ने के बाद उसकी मां की बुर में से उसका लंड निकलने के बाद भी ज्यो का त्यों खड़ा का खड़ा ही था,,,, इस बात से राहुल पूरी तरह से हैरान था क्योंकि उसका एक बार झड़ने के बाद काफी समय लगता था खड़े होने में शायद इसीलिए उसकी मां पूरी तरह से अंकित पर पागल हो चुकी थी इसीलिए तो उसके लंड को फिर से मुंह में लेकर चूस रही थी जिस पर उसकी बुर की मलाई लगी हुई थी।

गहरी सांस लेते हुए राहुल की मां एक बार फिर से अंकित को मस्त कर रही थी और अंकित दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर के उसके दोनों खरबुजो को पकड़ कर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया था,,,, उसे पूरा यकीन था कि उसने अपनी बातों से राहुल की मां के मन में कल्पनाओं का रंग भर दिया है जो की बहुत ही जल्द पूरा होने वाला है और वह भी इस अनुभव के लिए काफी उत्सुक था,,,, उसे भी देखना था कि एक ही बिस्तर पर तो मर्दों के साथ एक औरत कैसे निपटती है,,, और इस बात के लिए भी उत्सुक था कि इस समय पता भी चलेगा कि असली मर्द कौन है उसका बेटा या वह खुद और उसे पूरा यकीन था कि उसकी मां के सामने असली मर्द वह खुद ही साबित होने वाला है,,,, अंकित पागलों की तरह उसकी दोनों चूचियों को दबाता हुआ अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था। अंकित पूरी तरह से मस्त हो चुका था कमरे के अंदर एक बार फिर से कम लीला शुरू हो चुकी थी,,,, शुरू शुरू में जब अंकित नूपुर को इतना जानता नहीं था तब उसे देखकर वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि वह एक शिक्षिका होने के बावजूद भी अंदर से एक प्यासी औरत है,,,, उसे नहीं मालूम था कि मौका मिलने पर मोटा तगड़ा लंड भी वह एक झटके में अपनी बुर की गहराई में ले लेती है। लेकिन अब सारे भ्रम टूट चुके थे। लेकिन यह भरम टूटने के बाद उसे जो आनंद प्राप्त हो रहा था वह अविस्मरणीय था इस पल को वह कभी भूलने वाला नहीं था,,,,

अंकित उसके बालों में लगे हुए बक्कल को अपने हाथों से खोल रहा था अभी तक उसके बाल उलझे हुए थे लेकिन अब अंकित राहुल की मां के रेशमी बालों को खोलना चाहता था खुले बालों में उसकी सुंदरता को देखना चाहता था और अगले ही पल वह बक्कल निकाल कर उसके उलझे हुए बालों को उलझाने लगा खुले बालों में राहुल की मां और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी जिससे अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी वह जोर-जोर से उसकी दोनों चूचियों को दबाना फिर से शुरू कर दिया,,,,,,,,, अंकित का लंड फिर से नूपुर के थुक और लार में सनने लगा था और यह सब खिड़की पर खड़ा राहुल देख कर मदहोश हुआ जा रहा था वह फिर से अपने लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया था मुठीयाना शुरू कर दिया था। अंदर का नजारा देखकर उसे भी मजा आ रहा था,,, अब अभी पूरी तरह से हकीकत से बाकी हो चुका था हालात को अपना लिया था इसलिए वह इस समय मजा ले रहा था वरना कमरे के अंदर का दृश्य देखकर वह अंदर ही अंदर झूलस जाता। अंकित की सांस ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि राहुल की मां अपनी जीभ की कलाबाजियां दिखा रही थी,,, जब जब वह लंड के पेशाब वाले छेद पर अपनी जीभ लगाकर घूमाती तो अंकित के बदन में सनसनी फैल जाती,,,, वह एकदम से मचल उठता। और नूपुर उसके नितंबों पर अपनी हथेली रखकर उसे अपनी ओर खींच लेती नूपुर का इस तरह से उसके नितंबों पर अपनी हथेली रखकर दबाना उसे भी बेहद आनंददायक लग रहा था,,,,,

कुछ देर तक इसी तरह से मजा लेने के बाद अंकित धीरे से अपने लंड को फिर से उसके मुंह में से बाहर खींच लिया।,,, और राहुल की मां से बोला।

घोड़ी बन जाओ मेरी रानी,,,,,।
(उसका इतना कहना था कि राहुल की मां बिल्कुल भी देर नहीं की घोड़ी बनने में,,,,, वह तुरंत बिस्तर के किनारे घुटनों के बल झुक गई और घोड़ी बन गई,, उसकी बड़ी-बड़ी फैली हुई गांड देखकर अंकित की हालत खराब हो गई और उसे रहने क्या वह तुरंत दो चार चपत उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर लगा दिया और उसकी गोरी गोरी गांड टमाटर कितने लाल हो गई यह सब राहुल अपनी आंखों से देख रहा था और यह भी देख रहा था कि अंकित के हर एक हरकत का उसकी मां खुलकर मजा ले रही थी उसकी गांड पर चपत लगाते हुए अंकित बोला,,,)

वह मेरी रानी कितनी मस्त गांड है तुम्हारी,,, मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारी गांड देखकर तुम्हारे बेटे का भी लंड खड़ा हो जाता होगा,,,,,।

सहहहह आहहहहह,,,, धीरे से ,,,,लगती है,,,,(इससे ज्यादा नूपुर कुछ बोल नहीं पाई,,,,,, वह अंकित की बात का जवाब नहीं देना चाहती थी क्योंकि यह सच ही था उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर अक्सर उसके बेटे का लंड खड़ा हो जाता था अंकित खिड़की की तरफ देखते हुए फिर से दो चार चपत उसकी मां की गांड पर लगा दिया,,,, और फिर झुककर गांड की बड़ी-बड़ी दोनों फांकों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे थोड़ा सा फैलाते हुए उसके गुलाबी छेद पर अपने होंठ रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,, और खुद ही लगातार अपने हाथ से ही अपने लंड को मुठिया रहा था यह देखकर राहुल की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी क्योंकि राहुल जानता था कि अगर वह इस तरह की हरकत करता तो तुरंत उसके लंड से पानी फेंक देता लेकिन अंकित अभी भी टिका हुआ था यही उसके लिए हैरानी की बात थी। थोड़ी देर तक अंकित इसी तरह से मजा लेता रहा और राहुल की मां को मजा देता रहा लेकिन अब उससे रहा नहीं जा रहा था क्योंकि राहुल की मां भी अपनी भारी भरकम बड़ी-बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेल दे रही थी जिसका मतलब साफ था कि अब वह अपनी बुर में उसके लंड को लेना चाहती थी। इसलिए अंकित धीरे से खड़ा हुआ और फिर अपने लंड को उसके गुलाबी छेद से सटाकर उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और पहले ही प्रयास में अपना पूरा का पुरा लंड कचकचा कर उसकी बुर में डाल दिया,,,,, उसके पहले ही प्रहार में राहुल की मन एकदम से अपने आप को संभाल नहीं पाई और आगे की तरफ लुढ़क गई,,, लेकिन अंकित उसकी कमर को पकड़कर उसे थाम लिया और फिर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,,।

राहुल एकदम साफ तौर पर देख रहा था कि अंकित का मोटा तगड़ा लंड पुरा का पूरा अंदर जाता था और सुपाड़ा छोड़कर बाकी का हिस्सा बाहर आ जाता था और अंकित जोर लगाकर फिर से लंड को पूरा का पूरा अंदर ठेल देता था जिससे हर एक प्रयास में हर एक प्रहर में उसकी मां के मुंह से आह निकल जाती थी जिसे सुनकर अंकित के साथ-साथ वह खुद मस्त हो जाता था और जोर-जोर से अपने लंड को मुठीयाता था राहुल सोचा नहीं था कि अंकित कभी उसकी मां को घोड़ी बनाकर छोड़ पाएगा जबकि वह खुद अंकित की मां को चोदना चाहता था लेकिन सब कुछ उल्टा हो गया था,,,, मजबूरन उसे खिड़की पर खड़े होकर अपने ही मां को घोड़ी बने देखना पड़ रहा था,,, पूरे कमरे में उसकी मां की गरमा गरम सिसकारियां गुंज रही थी अंकित ताबड़तोड़ धक्के पर धक्के लगा रहा था,,,, उसकी काम ऐसी लग रही थी जैसे कोई मोटर हो जो बिना रुके चल रही थी और जो मजा हुआ राहुल की मां को दे रहा था राहुल पूरी तरह से हैरान था यह सब देखकर।

अंकित बिना रुके अपनी मंजिल पर पहुंचाना चाहता था और तकरीबन 25 मिनट की चुदाई के बाद दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी राहुल की मां का बदन अकड़ने लगा वह अपनी गांड को झकझोर कर पीछे की तरफ मार रही थी और अंकित पूरी ताकत लगा दे रहा था अपने लंड को उसकी बुर में डालने में,,,, और फिर एकदम से राहुल की मां की चीख निकल गई और वह झड़ने लगी चार-पांच धक्के के बाद अंकित भी अपना गरम लावा राहुल की मां की बुर में डालना शुरू कर दिया वह दोबारा झड़ चुका था आज जो मजा उसे मिला था वह कभी भूलने वाला नहीं था। अपनी प्यास बुझा लेने के बाद,,, वह दोनों अपने-अपने कपड़े पहनने लगे,,,, यह देखकर राहुल समझ गया था कि अब नाटक पर पर्दा पड़ चुका है इसलिए उसका वहां खड़ा रहना उचित नहीं था इसलिए वह सीधा घर के बाहर निकल गया और सामने सड़क के आगे जाकर अंकित का इंतजार करने लगा थोड़ी ही देर में अंकित भी उसे घर से निकलता हुआ दिखाई देने लगा वह अंकित से मिलकर कुछ बातें करना चाहता था जो उसकी समझ के परे था।

राहुल की मां की जमकर चुदाई करने के बाद अंकित घर से बाहर निकल गया था आज उसने जी भर कर अपनी मनमानी किया था राहुल की मां के साथ ऐसा नहीं था कि उसमें राहुल की मां की अनुमति नहीं थी वह भी पूरी तरह से मत हो चुकी थी अंकित से चुदवाकर और हकीकत तो यह है कि अपने बेटे से ज्यादा मजा आज उसे अपने बेटे के दोस्तके साथ आया था,,,, क्योंकि अंकित ने उसे जी भर कर संतुष्टि का एहसास दिलाया था। पहली मुलाकात सही अंकित के मन में राहुल की मां बस गई थी उसका खूबसूरत गोलाकार मुखड़ा बड़ी-बड़ी चूचियां और बड़ी-बड़ी गांड वह पूरी तरह से राहुल की मां को नंगी देखना चाहता था उसे अपनी बाहों में भरकर प्यार करना चाहता था और उसकी यह चाहत आज पूरी हो चुकी थी और वह भी उसके ही बेटे की आंखों के सामने,,,, अंकित इतना जो जानता था कि आज नहीं तो कल राहुल की मां की चुदाई वह जरूर करेगा लेकिन ऐसी हालत में करेगा यह वह नहीं जानता था।

चेहरे पर संतुष्टि का एहसास नहीं अंकित राहुल के घर से निकल चुका था। मुख्य सड़क पर चलते हुए उसे आगे एक दुकान के पास राहुल खड़ा मिल गया उसे पूरा यकीन हो गया कि राहुल उसका इंतजार कर रहा है इसलिए बेझिझक वह हाथ हिलाकर उसे सड़क के दूसरी तरफ आने का इशारा किया,,,। अंकित के मन में कोई मलाल नहीं था बल्कि उसके चेहरे पर तो विजय के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे ऐसा लग रहा था कि जैसे आज कोई जंग जीत कर आया हो,,,, पहले जब कभी वह राहुल से मिलता था तो थोड़ा दबा दबा सा रहता था क्योंकि सही मायने में राहुल को वह मर्द समझता था क्योंकि वह औरतों के मामले में उससे 10 कदम आगे था और जब उसने उसे अपनी आंखों से ही अपनी मां की चुदाई करते हुए देखा तब तो वह एकदम से हैरान हो गया,,,, और सच में राहुल उसे खुद से 10 कदम आगे लगने लगा था क्योंकि अभी तक वहां औरतों के मामले पूरी तरह से कच्चा था वह औरत और मर्द के बीच के संबंध का सुख कभी प्राप्त ही नहीं कर पाया था हालांकि चाहता बहुत था लेकिन अपनी अभिलाष को पूरी नहीं कर पाता था लेकिन आज वह राहुल से 20 कदम आगे निकल चुका था क्योंकि आज वह राहुल की आंखों के सामने ही उसकी मां की जमकर चुदाई किया था। और वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी चुदाई देखकर राहुल का पानी निकल गया था क्योंकि उसकी मां खुद इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी बुर में जितना भी लंड जा चुका था उससे कहीं ज्यादा लंबा और मोटा अंकित का था। और वैसे भी अंकित जानता था कि राहुल उसकी मां की खूबसूरती का दीवाना हो चुका है और वह उसे भोगने का सपना देख रहा है और यही बात अंकित को बुरी लगी थी इसलिए वह उसके मन की सोच और उसकी बातों का बदला लेने के लिए उसकी आंखों के सामने उसकी मां की चुदाई करना ही उचित समझा। और वह ऐसा कर भी दिया।

राहुल उदास चेहरा लिए हुए सड़क की दूसरी तरफ आ गया था जहां से अंकित आगे बढ़ रहा था राहुल को देखते ही उसके पास पहुंचकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला।

यहां क्यों खड़ा है कोई बात है क्या,,?

मुझे तुझसे कुछ बात करनी है,,,,।

हां तो करना क्या हुआ,,,,?

यह नहीं कहीं बैठकर बात करते हैं,,,,।

तो चल ठीक है आज,,,, वह जो चाय की दुकान दिख रही है ना,,,(आपके इशारे से दुकान दिखाते हुए) चल वहां चाय पीते हुए बात करते हैं और चाय मेरी तरफ से,,,(अंकित मुस्कुराते हुए बोला और उसकी मुस्कुराहट देखकर राहुल की जान जल रही थी लेकिन अब हालात उसके हाथ में बिल्कुल भी नहीं थे पर थोड़ी देर में दोनों उसे चाय की दुकान पर पहुंच गई चौकी एक टूटी-फूटी लकड़े के पाटी से बनी हुई थी,,,,, बड़े से पेड़ के नीचे चाय की है दुकान अच्छी ही लग रही थी इस समय भी चार-पांच ग्राहक बैठकर चाय पी रहे थे और गप्पे लड़ा रहे थे राहुल उन ग्राहकों से थोड़ी दूरी पर जाकर बड़े से पत्थर पर बैठ गया और अंकित थोड़ी देर में चाय का दो कप और साथ में एक-एक समोसा लेकर इस जगह पर पहुंच गया और राहुल को थमा दिया,,, वैसे तो राहुल चाय पीना नहीं चाहता था क्योंकि उसके मन में तो कुछ और ही चल रहा था अपनी मां को लेकर लेकिन फिर भी अंकित जिद करते हुए बोला,,,)

अब पी भी ले जो होना था हो गया उसके बारे में सोचकर अपने दिमाग को खराब मत कर यह तो एक न एक दिन होना ही था,,,,,(अंकित की बात सुनकर ना चाहते हुए भी हाथ आगे बढ़ाकर वह समोसा और चाय ले लिया,,,, और उसके पास में ही बैठकर अंकित मुस्कुरा कर मजा लेटा हुआ बोला)

बोल कैसी लगी तेरी मां की चुदाई मजा आया ना,,,, मुझे पूरे यकीन है कि तुझे देखने में भी बहुत मजा आया होगा नंगी होने के बाद तेरी मां तो किसी हीरोइन से कम नहीं लगती,
(अंकित की बात सुनकर राहुल गुस्से में उसे देखने लगा तो अंकित फिर से मुस्कुराते हुए बोला)

तुझे क्यों गुस्सा आ रहा है तूने डाला मैंने डाला एक ही बात है ना और तू भी तो अपनी मां की बुर में न जाने कितनी बार अपने लंड को डाल चुका है,,, आज मैं भी डाल दिया तो इसमें कौन सा पहाड़ टूट पड़ा,,,,,,। वैसे यार राहुल,,,(चाय की चुस्की लेते हुए) तेरी मां है बहुत गर्म औरत मेरा तो मन ही नहीं भर रहा था और सच बताऊं तो इस उम्र में भी तुझसे चुदवाने के बावजूद तेरी मां की बुर अभी भी कसी हुई है,,,, जब जब मेरा लंड तेरी मां की बुर की गहराई नापता, मुझे लगता कि जैसे मैं कोई लड़की की चुदाई कर रहा हूं,,, कसम से आज तो तेरी मां ने मुझे बहुत मजा दी है,,,,,।

चलो रहने दे चलने पर नमक मत छिड़क,, मैं तुझे सीधा-साधा लड़का समझता था लेकिन तू तो साला मेरे से भी ज्यादा हारामी निकला,,,(चाय की चुस्की लेते हुए)

चल मैं तो तेरे से ज्यादा हरामी हूं लेकिन तू तो मादरचोद है,,,, मुझे पहले से ही थोड़ा बहुत शक होता था कि जिस घर में इतनी खूबसूरत औरत रहती है उसे घर का जवान लड़का भला कैसे सब्र कर सकता है।

तेरे घर में भी तो तेरी खूबसूरत मन है तेरी जवानी से भारी हो गया ना फिर तो कैसे सब्र करके रहता है तो भी तो यह सब करता होगा घर में,,,,,

मैं भी यह सब कर सकता था लेकिन मेरी मां तेरी मां जैसी नहीं है अगर काश तेरी मां की तरह मेरी मां भी गर्म औरत होती तो मजा ही आ जाता,,,,(अंकित जानबूझकर सहज होकर जवाब दे रहा था क्योंकि वह जरा भी गुस्सा दिखाना नहीं चाहता था और वैसे भी जो कुछ भी वह कह रहा था वह सच ही था जिस घर में दो जवान औरत हो और एक जवान लड़का हो तो भला ऐसे में घर का माहौल संस्कारी कैसे रह सकता है,,,, लेकिन फिर भी अंकित यहां पर यह नहीं जताना चाहता था कि उसकी तरह वह भी घर में अपनी मां की चुदाई करता है बल्कि यह दिखाना चाहता था कि उसकी मां की तरह उसकी मां बिल्कुल भी नहीं है। वह बहुत सीधी शादी औरत है और वह इस बारे में कभी सोच भी नहीं सकती और शायद अंकित की बात पर राहुल को भरोसा भी हो रहा था। लेकिन फिर भी अंकित की बात सुनकर राहुल बोला,,,)

तेरी मां तो मेरी मां से भी ज्यादा खूबसूरत और गर्म औरत दिखाई देती है अगर किसी तरह से तू अपनी मां को पटा ले तब तो घर में ही तुझे रोज चुदाई करने को मिल जाए और तेरे पास तो तेरी मां है और तेरी बहन भी है दोनों जवानी से भरी हुई है और एक ही बिस्तर पर दोनों को साथ लेकर सोएगा तो तुझे और मजा आएगा,,,,।

ऐसा में भी पहले सोचता था लेकिन अब ऐसा सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्यों,,,?(चाय की चुस्की लेते हुए आश्चर्य से राहुल बोला)

क्योंकि अब तेरी मां जो मिल गई है जब मन करेगा तेरे घर पहुंच जाऊंगा और कभी घोड़ी बनाकर तो कभी गोद में उठाकर कभी बाथरूम में तो कभी किचन में हर जगह पर तेरी मां की चुदाई करूंगा और मुझे भी अच्छी तरह से मालूम है कि तेरी मां को मेरे साथ चुदवाने में ज्यादा मजा आता है क्योंकि तेरा लंड मेरे से छोटा और पतला है,,,,।

(अंकित की आवाज सुनकर राहुल मन ही मन में घुट कर रह गया क्योंकि अंकित अपनी बातों से उसकी मर्दानी की को कमजोर साबित कर रहा था और जहां तक मर्दानगी की बात थी अंकित के मुकाबले इसकी मरदान की थोड़ा काम जरूर थी लेकिन जब तक अंकित उसकी मां की चुदाई नहीं किया था तब तक वही अपनी मां की प्यास बुझाता था लेकिन अब उसे भी एहसास हो गया था कि एक बार अंकित के लंड को अपनी बुर में लेने के बाद उसकी मां को उसके लंड से ज्यादा मजा नहीं आएगा,,,, कुछ देर शांत रहने के बाद राहुल बोला।)

चल यह सब बात रहने दे,,,, तो मुझे यह बात की तुम दोनों का चक्कर बहुत पहले से चल रहा है ना,,,,।
(इतना सुनते ही अंकित हंसने लगा और उसको हंसता हुआ देखकर राहुल अंदर ही अंदर बहुत क्रोधित होने लगा लेकिन वह खुलकर अंकित का विरोध नहीं कर सकता था उसे कुछ बोल नहीं सकता था क्योंकि उसे इस बात का डर था कि अगर वह उससे झगड़ा करने की कोशिश करेगा तो अंकित सब कुछ बता देगा,,, और अब तो वह खुद उसकी मां को चोद चुका है अगर इस बात को वह दोस्तों में बता दिया तो उसका तो घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा,,,,,, इसलिए वह अंकित को कुछ बोल भी नहीं पा रहा है लेकिन फिर भी वह अंकित को हादसा हुआ देखकर बोला,,,)

तू हंसक्यों रहा है,,,?

मैं इसलिए हंस रहा हूं कि जो कुछ भी आज हुआ है और अब होने वाला है इसके पीछे केवल तू ही जिम्मेदार है,,,,।

मैं जिम्मेदार हूं,,, मैं कुछ समझा नहीं,,,,, (हैरान होते हुए राहुल बोला)

अरे बेवकूफ तो इसलिए जिम्मेदार है कि ना तो मुझसे मिलने ना मुझसे दोस्ती करता और ना अपने घर आने का निमंत्रण देखा तु शायद नहीं जानता तू सच कह रहा है पहले से तेरी मां और मेरा चक्कर चल रहा है और यह सुबह तब हुई जब मैं पहली बार तेरे घर गया पहली बार में ही तेरी मां की आंखों में मैं पूरी तरह से बस गया तेरी मां ने न जाने मुझ में क्या देख लिया कि मेरी दीवानी हो गई,,,,,, ।

यह क्या कह रहा है तू,,,,?

मैं बिल्कुल सच कह रहा हूं,,,, और यह भी सच है कि जैसे पहली मुलाकात में तेरी मां मुझे पसंद करने लगी थी वैसे मैं भी पहली मुलाकात नहीं तेरी मां की जवानी का दीवाना हो गया था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां दिन रात मेरी आंखों के सामने नाचती थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड हमेशा से मैं नंगी देखना चाहता था,,,,,, (अंकित की बातें सुनकर राहुल की आंखें आश्चर्य से फटी जा रही थी उसे एहसास हो रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है सच में वह उसकी वजह से ही हो रहा है,,,, वह तो खुद अंकित से मेलजोल बढ़कर उसकी मां की जवानी का रस चखना चाहता था लेकिन यहां तो सारा मामला उल्टा हो चुका था,,,,,) तुझे शायद नहीं मालूम की एक दिन तेरी गैरमौजूदगी में मैं जब तेरे घर गया वैसे तो मैं बहुत बार तेरी गैर मौजूदगी में तेरे घर जा चुका हूं लेकिन एक दिन तेरे पिताजी भी वहीं मौजूद थे और में तेरे पिताजी से छुपाने के लिए डाइनिंग टेबल के नीचे छप गया था तेरे पिताजी को तो भनक तक नहीं लगी कि घर के अंदर कोई और भी है।

फिर,,,, (चाय के खाली कब को एक तरफ रखते हुए आश्चर्य से राहुल बोला)

फिर क्या था,,,, मैं डाइनिंग टेबल के नीचे से ही तेरी मां से मजा लेने लगा तेरी मां को पहले डर लग रहा था लेकिन मेरी हरकतों से तेरी मां एकदम गरम होने लगी और अपने पति की मौजूदगी में अपनी साड़ी को धीरे-धीरे कमर तक उठा दी डाइनिंग टेबल की वजह से तेरे पिताजी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह तो अपनी ही धुन में थे और देखते ही देखे तेरी मां की दोनों टांगें खुल गई तेरी मां की गुलाबी बुर देखकर तो मेरी आंखों में जवानी का नशा छाने लगा,,,,, (यह सब सुनकर राहुल की सांसें ऊपर नीचे हो रही थी) और फिर मैं धीरे से तेरी मां की दोनों टांगों के बीच अपने होंठ को लेकर और तेरी मां की बुर चाटने लगा और तुझे सच बताऊं तो वह हम मेरा पहला मौका था जब मैं किसी औरत की बुर को इतनी करीब से देख रहा था और उसकी बुर को चाट रहा था और सच कहूं तो सही मायने में तेरी मां मेरे लिए संभोग के मामले में असली टीचर है उसी ने मुझे सबकुछ सिखाया है,,,,, (राहुल हैरानी से अंकित की बातों को सुन रहा था उसे तो अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था उसे नहीं मालूम था कि उसकी मां उसे इतना बड़ा धोखा देगी उसकी पीठ पीछे उसके ही दोस्त के साथ रंगरलिया मनाएगी,,, अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

तेरी मां से मिलने से पहले मुझे तो मालूम ही नहीं था औरत क्या होती है औरत का खूबसूरत जिस्म क्या होता है औरत के जिस्म से उसके अंगों से कैसे मजा लिया जाता है यह सब कुछ मुझे तेरी मां सिखाई और सच बताऊं उसे दिन तेरे पापा की मौजूदगी में जो तेरी मां ने किया था उसे तो याद करके ही मेरा लंड अभी भी खड़ा हो जाता है,,,, तेरी मां की कचोरी जैसी पूरी हुई बुर को चाट कर में अपने आप को धन्य समझने लगा,,,, और मुझे पूरा यकीन था कि एक न एक दिन मुझे तेरी मां की बुर चोदने को भी मिल जाएगी लेकिन ऐसी हालत में मिलेगी यह मैं नहीं जानता था यह सब में तेरे पीठ पीछे ही करने वाला था लेकिन तूने ही मुझे वह घुसा दिया मेरी मां के बारे में गंदी बातें बोलकर,,,,।

मैंने तो सिर्फ बोला लेकिन तूने तो कर डाला,,,,।

हां तो मजबूर भी तो मुझे तो नहीं किया और वैसे भी तू चिंता मत कर तेरी और तेरी मां के बीच जो कुछ भी चल रहा है इस बारे में मैं तेरी मां को बिल्कुल भी नहीं बताया हूं वह तो बिल्कुल अनजान है कि मैं यह सब जानता हूं और जो कुछ भी हो रहा है तेरी आंखों के सामने हो रहा है वह अनजान है मासूम है,,,,, मैं तो कहता हूं जो कुछ भी हो रहा है अब उसे होने दे तेरे नाराज होने से अब मामला बदलने वाला नहीं है क्योंकि तेरी मां को मेरे लंड की आदत पड़ चुकी है जब कभी भी उसका मन होगा मुझे अपने घर बुलाएगी और चुदवाएगी,,, और वैसे भी तु बाहर पढ़ने के लिए चला जाएगा तब सोच तब तो हम दोनों बेफिकर हो जाएंगे किसी का डर नहीं रहेगा तेरे पापा के जाने के बाद ही मैं दिन भर तेरे घर में रहूंगा दिन भर तेरी मां की चुदाई करूंगा और वापस अपने घर आ जाऊंगा किसी को कानो कान खबर तक नहीं पड़ेगा लेकिन अब तुझे पता चल गया है तो मैं तो कहता हूं तो भी इस मौके का फायदा उठा।

मौके का फायदा,,,, (हैरानी से अंकित कि तरफ देखते हुए वह बोला,,,)

हां मौके का फायदा खिड़की में से तूने अपनी मां की चुदाई तो देखा,,,,, लेकिन क्या मेरी बात पर गौर किया जब मैं तेरी मां को कह रहा था कि अगर हम दोनों को इस हालत में राहुल देख लिया तो क्या होगा और हम दोनों के बीच जो कुछ भी चल रहा है इस बारे में कर रहा हूं उनको पता चल गया तो क्या होगा,,,,,। तुझे पता है तेरी मां ने क्या बोला,,,,, (अंकित की बात सुनकर राहुल कुछ बोला नहीं बस उसे देखे जा रहा था तो अंकित ही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तेरी मां को पूरा विश्वास है कि इस बारे में तुझे कुछ भी पता नहीं चलेगा लेकिन मैंने तेरी मां के विश्वास को तोड़ने की कोशिश करते हुए बता दिया कि अगर ऐसा हो गया तो ज्यादा कुछ करना नहीं है राहुल को भी इस खेल में शामिल कर लेना है,,,,।

क्या ऐसा हो सकता है,,,, (अंकित की बात को खिड़की पर खड़े होकर उसने भी सुना था और मन में ही कल्पना भी करने लगा था उसे भी कल्पना करने में अच्छा लग रहा था कि अगर एक ही कमरे में वह तीनों एक ही बिस्तर पर मजा लेंगे तो कितना मजा आएगा)

बिल्कुल हो सकता है,,,।

लेकिन कैसे,,,?

यह सब तो मुझ पर छोड़ दे लेकिन क्या तू तैयार है मजा लेने के लिए,,,,,।

(राहुल को अंकित की बात ठीक लगी थी अब मलाल करने से कोई फायदा नहीं था बल्कि उसे भी इस खेल में कूद कर मजा लेना था इसलिए वह हां मैं सर हिला दिया… राहुल की हामी देख कर अंकित मन ही मन खुश होने लगा और वह राहुल से बोला,,,)

देख इस बारे में निश्चिंत रहे कि मैं यह जानता हूं कि तेरे और तेरी मां के बीच क्या चल रहा है इस बारे में तेरी मां को मैं कभी बताऊंगा नहीं,,,,, और देख तुझे क्या करना है जब मैं तेरी मां की चुदाई कर रहा हूं तब तो एकदम से कमरे में आ जाना और एकदम से हैरान हो जाना ऐसा लगना चाहिए कि तू एकदम से परेशान हो गया है और उसे समय भी तेरी मां तेरी आंखों के सामने मेरी बाहों में अपने आप को देखकर एकदम से डर जाएगी घबरा जाएगी और उसकी घबराहट का फायदा कैसे उठाने में अच्छी तरह से जानता हूं बस तू थोड़ा नाटक करना गुस्सा दिखाने का,,,,।

क्या सच में सब कुछ वेसा ही होगा जैसा तू सोचता है,,,,,।

जो मैं सोचता हूं वैसा ही करके दिखाता हूं,,,, इसलिए तु निश्चित रहे देखना हम तीनों को बहुत मजा आएगा।

लेकिन यह सब किस दिन करनाहै,,,,।
(राहुल की उत्सुकता देखकर मुस्कुराते हुए अंकित बोला)

तड़प रहा है एक बिस्तर पर हम तीनों को देखने के लिए ना,,,,,,,,,( इतना सुनकर राहुल शर्म से अपनी नजरों को नीचे झुका लिया,,,, यह देखकर अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) कोई बात नहीं,,, अब आज का दिन तो निकल गया रविवार को भी गुजर जाने दे क्योंकि रविवार को तेरे पापा घर पर ही होंगे उसे दिन कुछ नहीं कर सकते सोमवार के दिन तेरे पापा ऑफिस चले जाएंगे उसके बाद मजा ही मजा आएगा,,,,(इतना सुनकर राहुल के भी चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,, यह देखकर अंकित बोला)

यह हुई ना बात,,,,।

(और इतना कहकर दोनों फिर से अपने-अपने घर की तरफ निकल गए)

अंकित ने सारा मामला तय कर लिया था पूरी तरह से माहौल बना लिया था जिस तरह से वह उत्सुक था उससे भी कई ज्यादा राहुल उत्सुक नजर आ रहा था,,, अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि राहुल कितना बेशर्मी की अपनी आंखों के सामने अपनी मां की चुदाई देखकर खुद उत्तेजित हो गया है और उसके साथ मिलकर अपनी मां को चोदने के लिए तैयार हो गया है,,, यह एक नया अनुभव होगा राहुल के लिए भी अंकित के लिए भी इसलिए राहुल और अंकित दोनों उसे दिन के लिए बेहद उत्सुक थे जब वह दोनों एक साथ मिलकर नूपुर की चुदाई करेंगे,,,, अंकित तो सोच कर ही मदहोश हुआ जा रहा था,, उसे अच्छी तरह से मालूम था कि इसमें कोई दिक्कत आने वाली नहीं थी क्योंकि दोनों की दुखती रग वह अच्छी तरह से जानता था,,,,।

शाम को अंकित अपने घर पहुंचा,, तो देखा कि उसकी मां घर पर नहीं थी इसलिए वह,,, अपने पड़ोस में सुषमा आंटी के घर पहुंच गया,,, दरवाजे पर दस्तक देने के बाद दरवाजा खोलने वाली सुमन ही थी सुमन तो अंकित को देखकर एकदम से खुश हो गई और एकदम चहकते हुए बोली,,,।

अंकित तु,,,,,,

क्या दीदी तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे कि मुझे पहली बार देख रही हो,,,,।

अरे बेवकूफ अकेले में मुझे दीदी मत बोला कर मुझे नाम लेकर बुलाया कर सुमन,,,।

क्यों अभी तुम अकेली हो क्या,,,,?

इसीलिए तो कह रही हूं सुमन का कर बुलाया कर चल जल्दी से आजा घर में,,,।
(सुमन की बात सुनकर अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था क्योंकि उसे यकीन हो चला था कि आज उसके लंड के लिए जवान बुर का प्रबंध हो चुका है,,, लेकिन वह सुमन के सामने नादान बनने की कोशिश करते हुए बोला।)

आंटी नहीं है तब किसी और दिन आऊंगा,,,,।

अरे बेवकूफ ऐसा मौका फिर कहां मिलेगा,,, (एकदम से अंकित का हाथ पकड़ कर घर के अंदर खींचते हुए सुमन बोली और अगले ही पल अंकित घर के अंदर खड़ा था और सुमन जल्दी से दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी,,,,, अंकित तो बहुत खुश हो रहा था वह तो जल्द से जल्द बेताब था सुमन के कमरे में पहुंचने के लिए क्योंकि अभी तक उसके जीवन में जितने भी बुर चोदने के लिए आई थी वह थोड़ी उम्र दराज थी हालांकि सभी बुर से उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई थी लेकिन,,, आज वह एक नए अनुभव को महसूस करना चाहता था फिर जवान लड़की की बुर में अपना लंड डालना चाहता था वह देखना चाहता था कि उम्र दराज औरत और एक जवान लड़की की बुर की कसाव कैसी होती है,,,,, अंकित चाहता तो दरवाजा बंद होने के साथ ए सुमन को अपनी बाहों में लेकर अपना काम खरीद शुरू कर सकता था लेकिन सुमन के सामने हुआ अभी नादान था सुमन को नहीं मालूम था कि वह कितना हरामि हो चुका है इसलिए वह सुमन की बात सुनकर फिर से बोला,,,)

लेकिन आंटी कहां गई है,,,,,?

आंटी ही नहीं तेरी मम्मी भी साथ में गई है तभी तो कह रही हुं,,,हम दोनों के पास बहुतअच्छा समय है,,,,,

लेकिन,,,,(अंकित का इतना कहना था कि सुमन एकदम से उसे अपनी तरफ खींचकर उसे अपनी बाहों में भर ली और उसके होठों पर अपने देखते हुए होठ रखकर उसका चुंबन करने लगी,,,,, और अंकित के शब्द उसके गले में ही अटक गए अंकित पूरी तरह से मत हो चुका था वह सोच नहीं था कि सुमन इतनी जल्दी बाजी दिखाएंगी सुमन पूरी तरह से उसे अपनी आगोश में ले ली थी और उस पर हावी होना शुरू हो गई थी,,,। सुमन की हरकत से अंकित का लंड बहुत जल्द ही अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था जो सीधे सलवार के ऊपर से ही सुमन की गुलाबी पर के ऊपर शासक दे रहा था जिसका एहसास सुमन को हो गया था और वह अंकित के होठों का रसपान करते हुए सीधा एक हाथ नीचे की तरफ लाई और पेंट के ऊपर से ही अंकित के लैंड को पकड़ कर दबाना शुरू कर दी,,,, सुमन की हरकत से अंकित मदहोश होने लगा,,,,,, यह मदहोशी उसे अत्यधिक उत्तेजना का एहसास करा रही थी,,,,, कुछ पल के लिए समान अपने होठों को अंकित के होठों से अलग करी और गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)

बाप रे अंकित तेरा तो बहुत मोटा है बहुत जल्दी तैयार हो गया,,,,,।
(नादान बनने की वजह से अंकित कुछ बोल नहीं पाया और वह भी गहरी सांस लेता हुआ सुमन के खूबसूरत चेहरे को देख रहा था सुमन वापस उसके होठों से अपनी होंठ को सटा दी एक बार फिर से दोनों प्रगाढ़ चुंबन में डूब गए,,,,,,,, अंकित से अब रहा नहीं जा रहा था अंकित भी पूरी तरह से उत्तेजना में डूब रहा था वह जानता था कि नादान बनने से कोई फायदा नहीं है अगर नादान बनते रहा तो मजा नहीं ले पाएगा इसलिए बस सीधी अपने दोनों हाथों को सलवार के ऊपर से ही सुमन के गोलाकार नितंबों पर रख दिया और उन्हें दबाना शुरू कर दिया अंकित की हरकत से सुमन भी हैरान हो गई लेकिन उसकी हरकत का मजा लेने लगी क्योंकि उसकी दोनों मजबूत हथेलियां में उसके नितंबों का आधा भाग भरा हुआ था जिसे अंकित पूरी ताकत से जोर-जोर से दबा रहा था मसल रहा था, एक जवानी से भारी खूबसूरत लड़की को और क्या चाहिए,, वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,,। कुछ देर तक चुंबन का सुख भोगने के बाद अपने रसीले होठों को सुमन अंकित के होठों से अलग की हालांकि अभी भी उसके हाथ में अंकित का लंड था जिसे वह पेंट के ऊपर से ही जोर-जोर से दबा रही थी और उसके एहसास में डूब रही थी अंकित गहरी सांस लेता हुआ फिर से अपने मन की शंका को जताते हुए बोला,,,,,)

अगर आंटी आ गई तो,,,,,,,।

मेरे राजा तेरी मां और मेरी मां 1 घंटे से पहले आने वाली नहीं है,,,,,।

ऐसा क्यों,,,?

क्योंकि वह दोनों हॉस्पिटल में किसी को देखने के लिए गई है और जिस हॉस्पिटल में गई है वहां से आने-जाने में ही आधे घंटे हो जाते हैं अब समझ गया ना,,,,, चल अब जल्दी से मेरे कमरे में,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित का हाथ पकड़ कर वह अपने कमरे की तरफ ले जाने लगी अंकित तुम्हारी खुशी के फूला नहीं समा रहा था अभी कुछ देर पहले ही वह राहुल की मां की जमकर चुदाई कर क्या रहा था और आते ही सुमन की गुलाबी बुर उसे मिलने वाली थी,,,,, फिर भी अपनी तरफ से नादानी दिखने में अंकित कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहता था इसलिए वह फिर से बोला।)

लेकिन फिर भी मान लो अगर आंटी आ गई तो तब क्या खाओगी क्या जवाब दोगी तुम तो अपने साथ-साथ मुझे भी फंसा दोगी,,,,।

(इतना सुनते ही अपने कमरे के बाहर ही सुमन रुक गई और अंकित की तरफ देखते हुए बोली)

तुझे तेरी मां की कसम है सच-सच बताना तुझे मजा आ रहा है कि नहीं,,,।

आ रहाहै,,,(कुछ देर खामोश रहने के बाद अंकित बोला और यह सुनकर सुमन मुस्कुराने लगी और फिर से उसे अपने कमरे में ले जाते हुए बोली,,,)

तू सच में बहुत बड़ा बेवकूफ है अगर इतना मौका किसी और को मिला होता तो अब तक तो शायद वह मेरी चुदाई भी करके चला गया होता लेकिन दोगे कि घबरा रहा है अरे बुद्धू बाहर दरवाजा बंद है अगर वह लोग आ भी जाएंगे तो दरवाजे पर दस्तक तो देंगे हम दोनों को पता तो चल जाएगा और रही बात की मेरी मां को शक हो गया तो क्या बोलेंगे तो यह देख,,,,(इतना कहने के साथ ही कुछ किताबें टेबल पर फैला दी और बोली) बोल दूंगी की तुझे पढ़ा रही थी समझ गया ना,,,,,।

वाह दीदी तुम तो बहुत चालाक हो,,,,।

दीदी नहीं बेवकूफ सुमन बोला कर,,,, दीदी बोलकर अपनी बहन की चुदाई करेगा क्या,,,,,(इतना कहने के साथ वह खुद ही अपने कुर्ते को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाते हुए बोली,,,) तुझे मालूम है ना आप तो क्या करने जा रहा है और फिर भी मुझे दीदी बोल रहा है ऐसे तो तू अपनी बहन पर भी चढ़ जाएगा,,,,,(सुमन की बात सुनकर अंकित कुछ बोल नहीं पाया हालांकि उसकी बातें सुनकर उसे बहुत मजा आ रहा था उसे इसमें कुछ भी बुरा नहीं लग रहा था क्योंकि जब वह अपनी मां की चुदाई कर सकता है तो अपनी बड़ी बहन की चुदाई करने में कैसी झिझक,,, और देखते ही देखते सुमन अपना कुर्ता उतार कर बिस्तर पर फेंक दे इस समय उसकी छाती पर क्रीम कलर की ब्रा उसकी चूचियों की शोभा बढ़ा रही थी,,,,, वाकई में उम्र के हिसाब से सुमन की चूचियां कुछ ज्यादा ही पड़ी थी क्योंकि उसके ब्रा में समा नहीं पा रही थी,,,,, अंकित के सामने कुर्ता उतार देने के बाद सुमन फिर से मदहोश होने लगी और एक बार फिर से वह अंकित को अपनी बाहों में भर ली,,,, अंकित भी जैसे अपनी नादानी के कवच से बाहर निकलता हुआ अपने एक हाथ को ब्रा के ऊपर से ही रखकर सुमन की चूची को दबाना शुरू कर दिया यह देखकर सुमन बोली,,,)

हां बेटा ऐसे ही तभी तो मजा आएगा चलो इतना तो तू जानता ही है,,,,,,(और इतना कहने के साथ ही अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले गई और अपने हाथों से ही ब्रा का खोलकर अपनी ब्रा को अगले ही पल अपने बदन से अलग करके कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी हो गई उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम तनी हुई थी गोलाकार खरबूजे की तरह जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था अंकित आंख मारे सुमन की चूचियों को ही देख रहा था यह देखकर सुमन मुस्कुराते हुए बोली,,,)

देख क्या रहा है रे तेरे लिए ही तो उतारी हूं,,,,, चल जल्दी से ईसे मुंह में लेकर पीना शुरूकर दे,,,,,।
(सुमन की तरफ से इशारा पाते हैं अंकित ने बिल्कुल भी देर नहीं किया और धीरे से अपने प्यासे होठों को सुमन की चूची पर रखकर उसकी निप्पल को पीना शुरू कर दिया यह देखकर सुमन एकदम से मत हो गई मदहोश हो गई और तुरंत अपने दोनों हाथों को उसके सर पर रखकर इसका दबाव अपनी छातीयो पर बढ़नेा लगी,,,,, अंकित भी मदहोश होने लगा और अपने दोनों हाथों को उसकी कमर पर रखकर हल्के हल्के उसे दबाते हुए बारी-बारी से उसकी दोनों चुचियों का रसपान करने लगा अंकित को बहुत मजा आ रहा था पहली बार जवान लड़की की चूची का मजा लूट रहा था वैसे तो यह माया हुआ पहले भी ले चुका था और अभी सुमन के ही साथ लेकिन उसे समय समय का अभाव था अंदर एक डर था लेकिन इस समय अंकित के मन में भी किसी भी प्रकार का डर नहीं था वह तो जानबूझकर सुमन के सामने घबराने की कोशिश कर रहा था क्योंकि वह उसकी मां को भी जानता था अगर कुछ ऐसी वैसी बात हो गई तो वह जानता था कि उसे क्या कहना है,,,, क्योंकि वह खुद सुमन की मां को कुछ बोलने लायक नहीं छोड़ा था।

बारी-बारी से अंकित सुमन की दोनों चुचियों का मजा लूट रहा था ऐसा लग रहा था कि वह सुमन की सूची नहीं बल्कि दशहरी आम को दोनों हाथों में लेकर बारी-बारी से उसका रस चूस रहा हो अंकित की हरकत से सुमन भी मदहोश हो गई थी उसकी आंखें बंद हो गई थी और वह बार-बार उत्तेजना को काबू में करने के लिए अपने होंठ को ही अपने दांत से चबा ले रही थी,,,,,, लेकिन इस बीच सुमन पेंट के ऊपर से बार-बार उसके लंड को पकड़ ले रही थी,,,, जी भरकर चूचियों की चुसाई करने के बाद अपने आप ही अंकित के दोनों हाथ फिर से सलवार के ऊपर से ही सुमन की गांड पर आ गए और वजह से उन्हें दबाना शुरू कर दिया मसलना शुरू कर दिया,,,,, सुमन से रहा नहीं जा रहा था पेट के ऊपर से जिस तरह का आकार का आभास हो रहा था उसे देखकर सुमन समझ गई थी कि अंकित का लंड उसकी बुर में जाते ही धमाल मचा देगा,,,, इसी तरह से कुछ देर तक अंकित को मजा देने के बाद वह बिस्तर पर बैठ गई उसकी दोनों टांगें बिस्तर से नीचे थी अंकित ठीक उसकी दोनों टांगों के बीच खड़ा था उसके पेंट में तंबू बना हुआ था,,,,, सुमन उसके शर्ट के बटन को खोलने लगी यह देखकर अंकित भी ऊपर से अपने शर्ट के बटन को खोलने लगा,,,,। और अगले ही पल अंकित अपने शर्ट को अपने बदन से अलग करके उसे बिस्तर पर फेंक दिया,,,,,,।
शर्ट के उतर जाने के बाद सुमन प्यासी नजरों से अंकित के पेंट में बने तंबू की तरफ देख रही थी और धीरे-धीरे पेंट की बटन को खोल रही थी,, यह देखकर अंकित अपने मन में ही सोचा की कितनी बड़ी छिनार है जैसी मां है वैसी बेटी भी है लेकिन मजा बहुत देती है,,,,,, सुमन के नरम नरम उंगलियां बटन खोलते समय उसके लंड से स्पर्श हो जा रही थी जिससे उसकी अकड़ और ज्यादा बढ़ रही थी और सुमन थी कि जल्द से जल्द अंकित के नंगे लंड के दर्शन करना चाहती थी,,,,, और फिर देखते ही देखिए सुमन जल्दबाजी दिखाते हुए अंकित के पेट का बटन खोलती हो रहा उसके पेंट को अंडरवियर सहित खींचकर उसके घुटनों तक लाकर छोड़ दी अगले ही पल उसकी आंखों के सामने अंकित का मोटा तगड़ा लंड लहराने लगा जिसे देखकर सुमन के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में की पानी आ गया और एक नजर अंकित की तरफ देखकर वह मुस्कुराते हुए अपने लाल-लाल होठों को खोल दी और अगले ही पल आइसक्रीम के कौन की तरह सीधा आलू बुखारे जैसे मोटे सुपाड़े को वह अपने मुंह में भरली और उसे चूसना शुरूकर दी,,,,, एकदम से अंकित की आंखें बंद हो गई और वो गहरी सांस लेता हुआ एकदम से इस एहसास में डूबने लगा,,,,, अंकित पागल हुआ जा रहा था,,,, वह धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके हीलाना शुरू कर दिया था। सुमन को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि अंकित का लैंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था वह सीधा उसके गले की गहराई तक जा रहा था ऐसा करने में उसे थोड़ी दिक्कत हो रही थी लेकिन इस मदहोश कर देने वाले पल को अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहती थी थोड़ा दिक्कत ही सही लेकिन वह इस सुख को भी महसूस कर लेना चाहती थी,,,, सांस लेने में थोड़ी तकलीफ होने के बावजूद भी होगा बढ़िया आराम से अंकित के लंड को अपने गले तक उतार ले रही थी और उसे ऐसा करने में बहुत मजा आ रहा था,,,, और अंकित अपने दोनों हाथों के नीचे की तरफ लाकर उसके दशहरी आम को पकड़ कर जोर से दबा भी रहा था।

लेकिन सुमन की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में तूफान सा उठ रहा था वह तूफान को शांत करना चाह रही थी। इसलिए वह अपने मुंह में से अंकित के लंड को बाहर निकाली,,,, अंकित मदहोश हो जा रहा था उसे लग रहा था कि अब सुमन अपनी बुर में लंड डलवाएगी,,, क्योंकि वह जल्दी से जल्दी काम खत्म करके अपने घर चले जाना चाहता था वह नहीं चाहता था कि उसकी मां आ जाए,,, इसलिए अपने हाथों से घुटनों में फंसी पैंट और अंडरवियर को निकाल कर एकदम नंगा हो गया और ईस दौरान सुमन भी अपनी जगह से ऊठ कर खड़ी हो गई और अपनी सलवार का नाडा खोलने लगी यह देखकर तो अंकित की आंखों में चमक बढ़ने लगी देखते-देखते सुमन अपनी सलवार उतार कर एक तरफ रखनी और अपनी पैंटी को नाजुकों गलियों में फंसा कर उसे नीचे की तरफ खींचने लगी यह देखकर अंकित के लंड कि अकड़ और ज्यादा बढ़ने लगी और यह सब समान अपनी आंखों से देख कर मन ही मन और ज्यादा उत्साहित हो रही थी,,,,। अगले ही पर सुमन और अंकित दोनों ही कमरे में पूरी तरह से नंगे खड़े थे सुमन पूरी तरह से नंगी थी उसकी नंगी जवानी देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था,,,,, सुमन अंकित का हाथ पकड़ कर उसे बिस्तर पर पीठ के बल लेट दी और बोली,,,,।

अब आएगा असली मजा,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह बिस्तर पर घुटनों के बल चढ़ गई,,, और फिर से अंकित के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, अंकित की मदहोशी लगातार बढ़ती जा रही थी वह मस्त हुआ जा रहा था आज उसमें सबर नहीं था वह जल्द से जल्द अपने लंड को सुमन की गुलाबी बुर में डालकर एहसास कर लेना चाहता था कि जवान लड़की की बुर चोदने में कैसा महसूस होता है। लेकिन ऐसा लग रहा था कि अभी समय नहीं आया था,,,,, लेकिन अगले ही पर सुमन ने जो हरकत की उसे देखकर खुद अंकित का लंड पानी फेंकने के कगार पर आ गया था,,,, वह अंकित के लंड को चूसते हुए ही दोनों टांगों को फैला कर अंकित के ऊपर चढ़ गई और अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को एकदम से उसके चेहरे पर रखकर रगड़ना शुरू कर दी,,, ऊपर कुछ बोल नहीं रही थी क्योंकि उसके मुंह में अंकित का लंड था लेकिन अगले ही पल सुमन के इशारे को अंकित अच्छी तरह से समझ गया था इसलिए दोनों हाथों से उसकी गांड को पकड़ कर वह अपने प्यास होठों को उसके गुलाबी छेंद से सटा दिया,,, और पागलों की तरफ उसे चाटना शुरू कर दिया क्योंकि इससे पहले भी वह सुमन की बुर को चाट चुका था,,,, उसकी पूरी एकदम चिकनी थी बाल का रेशा तक नहीं था उसे पर ऐसा लग रहा था कि जैसे आज ही क्रीम लगाकर साफ की हो इसलिए अंकित को कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था उसकी बुर चाटने में। सुमन मदहोशी के सागर में पूरी तरह से डूब चुकी थी वह अपनी गांड को अंकित के चेहरे पर पटक रही थी। और पागलों की तरह अंकित के लंड को चुस रही थी,,, अंकित को तो इस बात का डर था कि कहीं वह झड़ ना जाए,,,, लेकिन फिर भी बड़ी मुश्किल से वह टिका हुआ था,,, इन सबके बावजूद वह अपनी उंगली और अपने जीभ की करामात दिखाते हुए सुमन को एक बार झड़ चुका था वह झाड़ चुकी थी अपना पानी निकल चुकी थी और वह भी अंकित के चेहरे पर।

सुमन पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी लेकिन उसका चुदासपन बरकरार था उसे अपनी बुर में अंकित का लंड चाहिए था इसलिए वह धीरे से अंकित के लंड के ऊपर सवार होने लगी एक हाथ से अंकित के लंड को पकड़कर वह धीरे-धीरे अपने गुलाबी बुर के छेद को उसके सुपाड़े पर रखने लगी,,,, पहले से ही अंकित का लंड सुमन के लार और थूक से सना हुआ था और यही हाल उसकी बुर का भी था इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं हुई सुमन को अंकित के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए लेकिन उसकी मोटाई और लंबाई का एहसास उसे अपनी बुर में अच्छी तरह से महसूस हो रहा था इसलिए तो उसके पसीने छूट गई थी लेकिन देखते ही देखते सुमन पूरी तरह से अंकित के ऊपर बैठ चुकी थी और उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में खो चुका था यह देखकर सुमन के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह खुद ही अंकित के कंधों को पकड़ कर अपनी गांड उस पर पटकना शुरू कर दी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,, अंकित का मोटा थोड़ा लंड उसकी बुर में रगड़ता हुआ अंदर तक जा रहा था और बाहर आ रहा था,,,,, दोनों को काफी समय हो गया था इसलिए दोनों के पास समय काम था इसलिए ज्यादा बात ना करते हुए सुमन जोर-जोर से अपनी गांड को पटक रही थी कुछ देर तक इसी तरह से पटकने के बाद भी अंकित के लंड का पानी नहीं निकला लेकिन वह फिर से झड़ गई,,, अंकित के मर्दानगी को देखकर वह पूरी तरह से पानी पानी हो रही थी और अगले ही पल अंकित ने पूरी कलाबाजियां दिखाता हुआ उसे अपनी बाहों में भर लिया और एकदम से घूम गया और सुमन अगले ही पल उसके नीचे आ गई और वह उसके ऊपर छा गया,,,, यह कैसे हो गया यह सुमन को भी पता नहीं चला।

अंकित पूरी तरह से सुमन को अपने काबू में कर लिया था और फिर उसकी दोनों टांगों को थोड़ा और अपने हाथों से खोलकर ऐसा करारा करारा धक्का लगा रहा था कि वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,,, हर धक्के के साथ उसकी चीख निकल जा रही थी लेकिन इस चीज में भी उसे आनंद ही आनंद मिल रहा था,,,, सुमन आज असली मर्द से चुदवा रही थी इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था अंकित अब अपनी सारी कलाबाजिया दिखा रहा था,,,,, वह उसकी दोनों चूचियों को दोनों हाथ से पकड़ कर बारी-बारी से चूसते हुए धक्के पर धक्के लगा रहा था ऐसा करने से सुमन को और ज्यादा मजा आ रहा था सुमन के नीचे से अपनी गांड ऊपर की तरफ पहुंचने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंकित की मजबूत जांघों के नीचे वह पूरी तरह से दबी हुई थी,,,, इस अवस्था में तकरीबन आधे घंटे तक चुदाई करने के बाद दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,,।

थोड़ी देर में अंकित अपने कपड़े पहन कर अपनी घर आ चुका था और सुमन इस चुदाई से मदहोश होकर बिना कपड़े पहने ही बाथरूम में पेशाब करने के लिए चली गई थी हालांकि वह अंकित को छोड़ने के लिए दरवाजे तक आई थी और धीरे से दरवाजा खोलकर उसे बाहर निकालने के बाद वह इस अवस्था में बाथरूम में पेशाब कर रहे थे और फिर इसके बाद नहा कर अपने आप को तरोताजा महसूस करा रही थी। और अंकित तो पूरी तरह से मस्त हो चुका था आज एक नया एहसास मैं वह पूरी तरह से डूबा हुआ था लेकिन उसे इस बात का भी एहसास हुआ था कि जितना मजा उसे अपनी मां की बुर चोदने में आता था उतना मजा उसे सुमन की बुर चोदने में नहीं आया था हालांकि मजा बराबर आया था लेकिन जो एहसास उसे अपनी मां के साथ आ रहा था उसे दोनों के बीच फर्क 19 20 का ही लगा ज्यादा कुछ खास फर्क नहीं था और इस बात से अंकित को और ज्यादा गर्व होने लगा कि उसकी मां की बुर जवान लड़की की तरह ही कसी हुई थी।

तकरीबन 2 घंटे बाद उसकी मां वापस लौटी थी वह काफी थकी हुई थी इसलिए ज्यादा कुछ खास खाने में बनाई नहीं दाल चावल बनाकर वह आराम करना चाहती थी और वैसे भी आज अंकित अपनी मां को परेशान नहीं करना चाहता था क्योंकि आज के दिन भर राहुल की मां और सुमन की जमकर चुदाई कर चुका था वह भी थक चुका था इसलिए वह भी बिना कुछ किए सो गया,,,, सुबह जब छत पर धूप आने लगी तो उसकी नींद खुली और बगल में देखा तो उसकी मां उठकर जा चुकी थी इसलिए धीरे से उठकर खड़ा हुआ और कुछ देर ठंडी हवा लेने के बाद वह धीरे से नीचे आ गया और आते ही किचन से आ रही आवाज की तरफ आगे बढ़ गया और किचन के दरवाजे पर खड़ा होकर देखा तो अपनी मां को देखा ही रह गया उसकी मां नहा कर तैयार हो चुकी थी लेकिन आज उसके बदन पर साड़ी नहीं थी पर की सलवार और कमी थी और यह देखकर वह पूरी तरह से चौंक गया और हैरान होता हुआ बोला।

यह क्या पहनी हो मम्मी,,,,।

कपड़े पहनी हूं नंगी तो नहीं हुं ना,,,,।

मैं यह नहीं कह रहा हूं लेकिन पहली बार मैं तुम्हें सलवार और कमीज में देख रहा हूं।

क्यों तुझे अच्छी नहीं लग रही है क्या,,,,?

पूछो मत आज तो तुम 20 साल की जवान लड़की लग रही हो मैं तो पहले पहचान ही नहीं पाया मुझे लगा कहीं तृप्ति दीदी तो नहीं आ गई,,,,, मैं तो घबरा ही गया था।

क्यों तुझे अपनी बड़ी बहन में और मुझ में कोई फर्क नहीं दिखाई देता।

सलवार कमीज में तो बिल्कुल भी फर्क नहीं दिखता मम्मी मैं तो सच में अभी हैरान हूं तुम तो आज अपनी उम्र को भी पीछे छोड़ दिया आज पूरी तरह से जवान लग रही है वैसे तो तुम जवान हो ही लेकिन आज यह जवानी 20 साल कम हो गई है।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंध पूरी तरह से मत हुए जा रही थी और उसकी बातें सुनकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार से मदन रस का बहन हो रहा था क्योंकि आज बरसों बाद वह भी सलवार कमीज पहनकर अपने आप को एकदम जवान महसूस कर रहे थे एकदम लड़की की तरह जिसका असर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच हो रहा था,, अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली)

चल अच्छा रहने दे मुझे खाना बनाने दे और जा जाकर जल्दी से नहा ले मैं नाश्ता तैयार कर देती हूं,,,,।

नाश्ता तो आज तैयार हो गया है,,,,,, तुम्हें सलवार कमीज में देखकर मेरा मन नहीं मानता आज तो मैं तुम्हारा दूध पीकर नाश्ता करूंगा,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने लगा यह देखकर सुगंधा के तन बदन में हलचल सिमटने लगी और वह मुस्कुराने लगी और अपने आप को अपने बेटे से बचने की कोशिश करने लगी अपने कदमों को पीछे लेने लगे यह देखकर अंकित और भी ज्यादा उत्साहित होकर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ते हुए बोला) आज तो तुम मेरे यहां से किसी भी कीमत पर बच नहीं सकती आज तो तुमने यह नया रूप धारण की हो इसे देखकर तुम मेरा लंड खड़ा हो गया है मुझे लग रहा है कि जैसे मेरी आंखों के सामने मेरी मां नहीं बल्कि कोई नौजवान लड़की खड़ी है जो पूरी तरह से जवानी से भरी हुई है,,,,,, जिनके अंग अंग से मधुर रस टपक रहा है और आज यह मधुर रस में अपने मुंह से पिऊंगा,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित तुरंत अपनी मां का हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खींच लिया सुगंध अपने आप को संभाल नहीं पाई और उसकी छाती से लग गई उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम से अंकित की छाती से बने लगी अंकित तुरंत उसे अपनी बाहों में भरकर अपने दोनों हाथों को उसकी सलवार के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को टटोलना लगा जो कि वाकई में सलवार में कुछ ज्यादा ही बड़ी लग रही थी,,,,,,)

अरे छोड़ मुझे खाना बनाने दे,,,, अभी तो पूरा दिन बचा है लगता है रात की कसर पूरा करने का इरादा है क्या,,?(अपने बेटे की पकड़ से अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करते हुए वह बोली लेकिन जितना वह छुड़ा रही थी उतना ज्यादा अंकित उसे अपनी बाहों में जकड़ रहा था और वह एकदम से उसके लाल-लाल होठों के करीब अपने होंठ ले जाते हुए बोला,,,,)

वैसे सच कहूं तो मेरा इरादा बिल्कुल भी नहीं था लेकिन तुम्हारा यह रूप देखकर मुझे रहा नहीं जा रहा है अगर मैं आज इस समय कुछ नहीं किया तो फिर मुझसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं होगा,,,,।

अरे हरामि छोड़ मुझे दाल जल जाएगी,,,,,।

दाल जल जाएगी उसकी चिंता मुझे बिल्कुल भी नहीं है अगर मैं अभी कुछ नहीं किया तो मेरी दाल नहीं गलेगी,,,,,(और इतना कहने के साथ ही एकदम से अपने होंठ को अपनी मां के लाल लाल होठों पर रख दिया और उसका रसपान करते हुए बड़ी जोर-जोर से अपनी मां की गांड को दबाना शुरू कर दिया वैसे भी सुगंध खुद अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए आज यह सलवार कमीज पहनी थी वह अपनी उम्र से और ज्यादा कम दीखना चाहती थी,,,, और उसकी यह युक्ति काम कर गई थी, अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ और अपनी उम्र की तारीफ सुनकर वह पहले नहीं समा रही थी उसका उत्साह और ज्यादा बढ़ गया था और अपने बेटे की हरकत से वह भी उन्मादित हो गई थी,,,,, अगले ही पलवा भी अपने बेटे का साथ देने लगी धीरे-धीरे अंकित आगे बढ़ने लगा वह अपनी मां की सलवार को खोलना चाहता था लेकिन उसे खोलने से पहले वह अपनी मां की कमीज को दोनों हाथों से पकड़कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा जिसमें सुगंधा भी उसका साथ देते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठा दी और अगले ही पल अंकित ने अपनी मां की कमीज को उतार कर एक तरफ फेंक दिया और इस समय वह किचन के अंदर सलवार और पुराने खड़ी थी सलवार के साथ जिस तरह का वह ब्रा पहनी थी उसकी चूचियां खरबूजे की तरह और ज्यादा बड़ी-बड़ी दिखाई दे रही थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था अंकित प्यासी नजरों से अपनी मां के खूबसूरत बदन को निहार रहा था,,,और सुगंधा शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए थी। अंकीत पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था वह जल्दी से बिना कुछ बोले अपनी मां को एकदम से गोद में उठा लिया,,,, अंकित की हरकत पर सुगंधा एकदम से घबरा गई,,,और बोली,,,,।

अरे अरे यह क्या कर रहा है नीचे उतर मुझे गिर जाऊंगी,,,,।

मेरे हाथों से तुम नहीं गिर सकती,,,,,, अब ले चलता हूं तुमको कमरे में वहीं पर मजा लूटेंगे,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां को गोद में लिए हुए ही किचन से बाहर निकल गया और गोद में उठाए हुए उसे उसके ही कमरे में ले जाने लगा सुगंधा के कमरे का दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था वह कमरे में दाखिल होते हैं अपनी मां को बिस्तर पर पटक दिया और खुद के कपड़े उतारना शुरू कर दिया,,,,,, अपने कपड़े उतार कर वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गया,,,, अपनी मां की मदद करने वाली जवानी को सलवार कमीज में देखकर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था,,, यह देखकर सुगंधा की बुर भी पानी छोड़ने लगी,,,,,, अंकित बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था वह जल्दी से अपनी मां की सलवार की डोरी खोलने लगा यह देखकर सुगंधा बोली,,,)

तू अपनी मनमानी किए बिना मानेगा नहीं ना,,,,।

सवाल ही नहीं उठता,,,(और इतना कहने का साथ है वह एक झटके में अपनी मां की सलवार की डोरी को खींचकर खोल दिया और दोनों हाथों से पेंटी सहित सलवार को नीचे खींचने लगा जिसमें उसकी मां भी सहयोग कर रही थी अगले ही पर अंकित अपनी मां को कमर के नीचे से एकदम नंगी कर दिया,,,,,, अंकित अपनी मां की बुर देखा तो पूरी तरह से पनीआई थी,,, यह देखकर कर वह मुस्कुराने लगा और बोला,,,)

तुम तो पूरी तैयार हो चुकी हो,,,,,।

(इतना कहने के साथ ही हुआ है अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बनाने लगा,,,,,, सुगंधा भी उत्तेजित हो चुकी थी,,,,, अंकित अपनी मां की कमर पकड़ कर उसे अपनी जांघों पर खींच लिया,,,,, और फिर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,,,, वैसे तो सुगंधा इसी के लिए ही सलवार कमीज पहनी थी लेकिन उसका बेटा इतनी जल्दबाजी दिखाएगा उसे नहीं मालूम था,,,, उसे नहीं मालूम था कि इस उम्र में भी वह सलवार कमीज में हुस्न की मल्लिका लगती है,,,,, वह भी अपने बेटे का पूरा साथ दे रही थी,,,, अंकित तब तक अपनी मां की चुदाई करता रहा जब तक की वो अपनी मां का पानी नहीं निकाल दिया और खुद भी झड़ नहीं गया,,,,,।)

अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को सलवार कमीज में देखकर अंकित की आंखों में वासना की चमक एक बार फिर से फैल चुकी थी और वह अपनी मां के साथ मनमानी कर चुका था वैसे तो सुगंधा ने भी अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए ही सलवार कमीज पहनी थी ऐसा नहीं था कि उसका बेटा उसकी तरफ आकर्षित नहीं था बस वहां रोज नए-नए तरकीब आजमाती थी अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए,,,, सलवार में उसकी बड़ी-बड़ी गांड और ज्यादा कसी हुई और उभार दार लग रही थी। जिसे देखकर अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया था और पूरी तरह से अपनी मां की जवानी को अपने काबू में करके उसे उसके ही कमरे में ले जाकर के जमकर उसकी चुदाई किया था।

रात को खाना खाने के बाद,, अंकित ऊपर छत पर जाकर बिस्तर लगा रहा था अब मां बेटे को छत पर सोने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था क्योंकि गर्मी का महीना था और छत पर ठंडी हवा चलती थी जिसे गर्मी में राहत मिलती थी और दोनों छत पर खुले आसमान के नीचे संभोग का रोग मजा लेते थे जिसका आनंद दोगुना हो जाता था,,,, ऐसे ही अंकित छत पर बिस्तर लगा रहा था तभी उसकी मां सीढ़ियां चढ़कर छत पर पहुंची तो अपनी मां को देखकर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि इस समय उसकी मां कुछ भी नहीं पहनी थी एकदम नंगी थी और अंकित को देखकर मुस्कुरा रही थी अंकित तो बिस्तर लगाना ही भूल गया था वह अपनी मां को ही पति आंखों से देख रहा था उसका मुंह खुला का खुला रह गया था और गहरी सांस लेते हुए अपनी मां को देखकर बोला।

बाप रे तुम तो पूरी कयामत लग रही हो क्या इरादा है आज,,,

इरादा क्या है जो रोज रहता है वही इरादा आज भी है,,, (इतना कहते हुए सुगंधा एकदम मादक चल भरते हुए छत की दूसरी तरफ जाने लगी जहां पर पीछे मैदान का हिस्सा था और वहां जाकर छत की दीवार पकड़ कर उसे पर अपने हाथ की कोनी लेकर खड़ी हो गई अपनी गांड को पीछे की तरफ निकल कर और पीछे बैठकर बिस्तर लगा रहा अंकित अपनी मां के इस नए रूप को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो गया,,,,, और वह अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,, और चलता हुआ अपनी मां के पास आया और अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखकर उसे रगड़ कर सहलाते हुए मदहोश होता हुआ बोला,,,,)

आज तुम्हारा इरादा कुछ ज्यादा ही खतरनाक लग रहा है मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि आज बिना कपड़ों के तुम एकदम नंगी छत पर आ गई हो,,,।

क्यों इसमें नया क्या लग रहा है रोज छत पर कपड़े पहन कर आई थी और जो मेरे कपड़े उतार कर नंगी कर देता था आज तुझे ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ेगा इसलिए पहले ही से कपड़े उतार कर नंगी होकर आई हुं,,,, (अपने बेटे की तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर सुगंधा बोली)

कसम से तुम्हारा यह रूप और तुम्हारी अदा मुर्दे के लंड को भी खड़ा कर दे,,, (इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां की गांड पर जोर से चपत लगाया)

आऊचच,,,,,, थोड़ा धीरे से तू तो रोज मेरी गांड को लाल कर देता है,,,,।

तुम्हारी गांड है ही इस लायक की क्या बताऊं,,,, (गांड को फिर से सहलाते हुए) लेकिन एक बात बताओ रोज तो तुम इस तरह से खड़ी होने में नाटक करती हो और आज अपने आप से ही इस तरह से खड़ी हो कोई देख लेगा तो,,,.

यहां से भला कौन देखेगा बुद्धू पहले यह तो देख में खड़ी कहां हूं पीछे की तरफ खड़ी हूं यहां पर चारों तरफ मैदान ही मैदान है सामने की तरफ खड़े रहने में डर है,,,।

ओहहह,,,, बात तो सही है,,, लेकिन आज मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है।

तुझसे तो रोज रहा नहीं जाता,,, सुबह भी कहां तुझसे रहा जा रहा था अपनी मनमानी करने के बाद ही तो मुझे छोड़ा ।

तुम छोड़ने लायक नहीं चोदने लायक चीज हो,,,।

वो तो में हुं ही,,,,, (मैदान की तरफ देखते हुए) देख रहा है ये खूबसूरत नजारा,,,, चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है अगर इस अंधेरे में औरत और मर्द कुछ करना चाहे तो आराम से कुछ भी कर सकते हैं क्योंकि कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।

कहीं तुम्हारा तो कुछ करवाने का इरादा नहीं है इस अंधेरे में,,,,।

इरादा तो बहुत कुछ है,,, (इतना कहने के साथ ही सुगंधा घूम गई और गांड को छत की दीवार से टिकाकर अपनी दोनों टांगों को खोल दी ,, यह अंकीत के लिए ईशारा था और अंकीत ईस ईशारे को अच्छी तरह से समझता था और तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गया और अगले ही पल अपने प्यार से होठों को अपनी मां की दहकती हुए बुर पर रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,, सुगंधा एकदम से मस्त हो गई और दीवार को कस के पकड़कर अपनी कमर को थोड़ा सा और आगे की तरफ कर दी ताकि उसका बेटा आराम से उसकी बुर की चटाई कर सके, वैसे ही अपनी मां को नंगी देखकर अंकित की आंखों में मदहोशी छा गई थी वह अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर अपनी मां की बुर को पागलों की तरह चाट रहा था और जैसे-जैसे उसकी जीभ बुर पर फिसल रही थी वैसे-वैसे सुगंधा की हालत खराब हो रही थी वह मदहोश हो रही थी और अपनी आंखों को बंद करके इस पल को पूरी तरह से जी लेने की कोशिश कर रही थी,,,, सुगंधा पूरी तरह से निश्चित थी सबसे ऊंची छत होने का उसे पूरा फायदा मिल रहा था,,,, वह पूरी तरह से नंगी होकर अपनी जवानी का मजा लूट रही थी,,,,, अपने बेटे के सर को रह रहे कर वह सहला दे रही थी और अपनी बुर की किसी एक जगह उसकी जीभ को महसूस करके वही स्थिर भी कर दे रही थी जो कि उसकी तरफ से यह इशारा था कि उसी जगह पर उसे ज्यादा मजा आ रहा है।

छत पर गरमा गरम शिसकारीयो की आवाज गुंज रही थी,,, उसकी सिसकारीयो की आवाज सुनकर अंकित का जोश बढ़ रहा था,,,, और इसी जोश की बदौलत अंकित अपनी मां की बुर में एक साथ दो उंगलियां पेल रहा था। जिससे उसकी मां को भी बहुत मजा आ रहा था। वैसे आज चांदनी रात बिल्कुल भी नहीं थी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था इसलिए दूर से भी किसी के देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी वैसे तो जिस जगह पर दोनों खड़े थे वहां पर वैसे भी किसी की नजर पडने वाली नहीं थी। कुछ देर तक इसी तरह से अपनी मां को मस्त करने के बाद,,, अंकित धीरे से अपनीमां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उठकर खड़ा हो गया और अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को देखकर गहरी गहरी सांस लेने लगा सुगंधा की भी सांस ऊपर नीचे हो रही थी और अगले ही पल सुगंधा खुद अपने बेटे को अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का रसपान करने लगी और अंकित तुरंत उसे भी अपनी बाहों में दबोच कर अपने दोनों हथेलियां को उसकी नंगी गांड पर रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया वह भी पूरी तरह से जोश से भरा हुआ था, सुगंधा बावली हुई जा रही थी उसकी सांसों की गति के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी अंकित की छाती से रगड़ खा रही थी। और यह एहसास दोनों को गर्म कर रहा था,, दोनों के बीच चुदाई का खेल रोज चल रहा था लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे सब कुछ नया-नया सा हो पहली बार सब कुछ हो रहा है दोनों का एहसास इतना गजब का था कि दोनों का मन एक दूसरे से भरता ही नहीं था और यह बहुत जरूरी भी होता है मर्द और औरत के बीच,,,।

अगर सभी मर्दों और औरत के बीच इसी तरह का एहसास होने लगे तो शायद मर्द दूसरी औरत की तरफ कभी देखे बिना लेकिन ऐसा होता है नहीं है मर्द अक्सर एक औरत से मन भर जाने के बाद दूसरी औरत की तरफ आकर्षित हो जाता है लेकिन यहां पर सुगंधा को लेकर अंकित पूरी तरह से वफादार था जब तक की दूसरी औरतों से खुद आगे से निमंत्रण ना दे क्योंकि जो सुख जो संतुष्टि उसे अपनी मां से मिल रहा था ऐसा एहसास उसे दूसरी औरतों से नहीं मिल पाता था हालांकि मजा बहुत आता था लेकिन वह एहसास और संतुष्टि उसे अपनी मां से ही मिलता था इसीलिए वहां जब भी अपनी मां को देखा था तब उत्तेजित हो जाता था और हर बार नया एहसास लेकर उसकी चुदाई करता था,, अपनी मां के लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से जोर-जोर से दबोच रहा था दबा रहा था इस बीच सुगंधा भी अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर के पेंट के ऊपर से ही उसके खड़े लंड को दबा रही थी। और देखते ही देखे अपनी उंगलियों का सहारा लेकर वह पेट के बटन को खोलकर अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल और उसे हाथ से मुट्ठीयाने लगी हालांकि इस बीच वह अपने होठों को बिल्कुल भी अपने बेटे के होंठ से अलग नहीं की। अंकित का मन मचल रहा था अपनी मां की बुर में डालने के लिए लेकिन उस पड़ाव पर पहुंचने से पहले का सफर उसे बेहद रोचक और उन्मादित कर देने वाला लग रहा था। इसीलिए तो वह बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिख रहा था और वैसे भी दोनों के पास काफी समय था दोनों के पास समय का अभाव बिल्कुल भी नहीं था।

कुछ देर तक इसी तरह से आनंद लेने के बाद अंकित अपनी मां से कुछ पल के लिए अलग हुआ सिर्फ अपने कपड़े उतारने के लिए और जैसे ही वह निर्वस्त्र हो गया फिर से अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया वैसे भी इस खेल को खेलने में सबसे योग्य अवस्था नग्न अवस्था ही होती है इसमें संभोग का एहसास पूरी तरह से मर्द और औरत को डुबो देता है।और ईस समय मां बेटे दोनों इस एहसास में पूरी तरह से डूबे हुए थे दोनों एक दूसरे को बाहों में भरकर एक दूसरे के अंगों को खंगाल रहे थे दबोच रहे थे पकड़ रहे थे ऐसा करने में दोनों को मजा आ रहा था,,,, तभी सुगंधा से रहा नहीं गया और सुगंधा धीरे रे से नीचे की तरफ बैठने लगी और देखते-ही देखते वह अपने घुटनों के बल बैठ गई। अंकित जानता था कि अब उसकी मां क्या करने वाली है इसलिए अंकित अपनी मां की तरह ही छत की दीवार को पकड़ कर जो की 4 फीट की थी,, खड़ा हो गया और अपने लंड को थोड़ा और आगे की तरफ कर दिया,,, सुगंधा मुस्कुराकर अपने बेटे की तरफ देख और बिना अपने बेटे के लंड को हाथ लगाए उसे सीधा अपने लाल-लाल होठों को खोलकर उसे अंदर ले ली,, और चूसना शुरू कर दी अंकित एकदम से गहरी सांस लेता हुआ मदहोश हो गया और अपनी मां की तरफ देखने लगा उसकी मां भी अपने बेटे के लंड को मुंह में लिए हुए उसे ही देख रही थी। अंकित अपनी आंख के इशारे से ही मानो कह रहा हो कि पूरा अंदर तक ले लो,, क्योंकि अगले ही पल सुगंधा पूरा का पूरा लंड अपने गले के नीचे तक उतार ली थी,,, उसे सांस लेने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन जो आनंद जो उत्तेजना उसे महसूस हो रही थी उसके आगे यह थोड़ी सी तकलीफ कुछ भी नहीं थी इसीलिए तो सुगंधा पूरी तरह से मस्त हो गई थी। सुगंधा घुटनों के बल और थोड़ा आगे की तरफ झुक कर बैठी हुई थी,,, ‍ जिससे अंकित को उसकी मां की बड़ी-बड़ी गाड़ी एकदम साफ दिखाई दे रही थी और वह अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर के उसकी बड़ी-बड़ी गांड को सहलाते हुए उसे जोर-जोर से दबा रहा था और मजा ले रहा था।

सुगंधा अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चुस चुस कर एकदम मस्त कर दी थी,,,, अंकित पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की बुर में घुसने के लिए इसलिए वह अपनी मां के दोनों हाथ को पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाया और छत की वही 4 फीट की दीवार को पकड़ कर घोड़ी बना दिया और खुद अपनी मां के पीछे आ गया उसकी बड़ी-बड़ी गांड अंधेरे में भी चमक रही थी जिसे अंकित को कोई परेशानी नहीं हो रही थी और अगले पल वह अपने लंड को उसके गुलाबी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा एकदम मस्त हो गई अंकित पागलों की तरह पहले ही धक्के से अपनी मां को पूरी ताकत से चोद रहा था। सुगंधा तो जैसे हवा में उड़ रही थी,, पूरी ताकत से छत की दीवार को पकड़ कर वह अपने बेटे की प्रहार को झेल रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था उसके मुंह से हर धक्के के साथ चीख निकल जा रही थी और वह बहुत खुलकर चीख की आवाज निकल रही थी और शिसकारी भी भर रही थी। अंकित को अपनी मां की चुदाई करने में बहुत मजा आता था वह पूरी तरह से मस्त हो जाता था असली मर्दानी की दिखाने का अवसर उसे अपनी मां के साथ ही मिलता था। जिसमें वह खरा भी उतरता था। अंकित अपनी मां के साथ प्राप्त अनुभव का पूरा उपयोग कर रहा था वह कभी अपनी मां की कमर पकड़ लेता तो कभी दोनों चुचियां को जोर-जोर से दबाता हुआ धक्के पर धक्के लगाता तो कभी कंधों को दोनों हाथों से पकड़ कर लगाम की तरह अपनी तरफ खींचता ऐसा करने में अंकित को तो मजा ही रहा था उसकी मां भी पूरी तरह से मस्त हो जा रही थी। थोड़ी ही देर में दोनों का बदन एकदम से अकड़ने लगा और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,,।

वासना का तूफान शांत हो चुका था अपनी मां से अलग होकर बिस्तर पर नंगा बैठकर अंकित गहरी गहरी सांस ले रहा था उसकी मां दीवार से सट कर खड़ी होकर अपने बेटे को ही मुस्कुरा कर देख रही थी। औरबोली।

तू सच में पूरा सांड है।

तुम भी एकदम छिनार हो,,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से इतना सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी,,,, दोनों के बीच कुछ देर तक ईसी तरह से बातचीत चलती रही तो सुगंधा अपने बेटे से बोली।)

रुक मैं अभी आती हूं,,,।

क्यों कहां जा रही हो,,,?

बाथरूम,,,।

तो यही कर लो ना,,,,।

समझ कर दो नंबर,,,,।

ओहहहहह,,,,, तो यह बात है,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी जगह पर खड़ा हो गया और खुले मैदान की तरफ देखते हुए बोला) तो बाहर क्यों नहीं चली जाती देखो कोई बाहर देखने वाला भी नहीं है,,,,

इसी तरह से,,,।

तो क्या एकदम नंगी होकर चांदनी रात तो है नहीं की कोई देखेगा तो दिख जाओगी एकदम अंधेरा है देखने पर भी नहीं दिखाई देता और एक नया अनुभव भी मिल जाएगा,,,।

नहीं नहीं मुझे तो डर लगता है,,,।

अरे चलो ना मैं भी इसी तरह से चलता हूं मजा आ जाएगा,,,,।

कोई देख लेगा तो,,,।

कोई नहीं देखने वाला,,,, आधी रात से भी ज्यादा समय हो रहा है सब गहरी नींद में सो रहे होंगे और वैसे भी रात एकदम अंधेरी है चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है कुछ दिखाई दे रहा है तुम्हें तुम खुद ही देखने की कोशिश करो,,,(मैदान की तरफ इशारा करते हुए अंकित बोल तो सुगंधा भी मैदान की तरफ देखने लगी वाकई में मैदान में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और अपने बेटे की बात सुनकर उसके बदन में भी उत्सुकता जागने लगी,,,,,, वह सोच में पड़ गई तो यह देखकर अंकित फिर से बोला,,,,)

तुम बिल्कुल भी मत डरो मैं भी इसी तरह से चलता हूं कोई नहीं देखेगा,,,,।

तू पता नहीं क्या-क्या करवाएगा मुझसे,,,,।

जिस जिस चीज में मजा मिलेगा वह सब करवाऊंगा तुमसे,,,,,,,अब चलो,,,, मजा आ जाएगा,,,(इतना कहकर वह खुद सीढीयो से नीचे उतरने लगा,,, अपने बेटे की हिम्मत देखकर सुगंधा भी हिम्मत करके उसके पीछे-पीछे चल दी,,, देखते ही देखते दोनों घर के पीछे पहुंच चुके थे लकड़ी के छोटे से दरवाजे को खोलकर अंकित सबसे पहले मैदान की तरफ आगे बढ़ा वह भी पूरी तरह से अपनी मां की तरह ही नंगा था उसके पीछे-पीछे सुगंधा भी बाहर निकलने लगी लेकिन वह चारों तरफ नजर घूमाकर देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है जबकि इस समय उसे कोई देखने वाला नहीं था चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ था,,,, 2 मीटर की दूरी दोनों में हो जाए तो वह दोनों खुद ही नहीं दिखाई दे रहे थे। अंकित को तो बहुत मचा रहा था पहली बार हुआ एक नंगा होकर इस तरह से मैदान में घूम रहा था खुली हवा में उसे अच्छा एहसास हो रहा था उसका लंड झूल रहा था और जब वह चलता था उसका लंड का वजन उसे साफ महसूस हो रहा था सुगंधा भी अपने बेटे के पीछे-पीछे आगे बढ़ रही थी वह भी पूरी तरह से नंगी थी शीतल हवा उसके नंगे बदन को छूकर गुजर जाती तो उसके बदन में सिहरन सी दौड़ जाती थी,,, अंकित आगे आगे चला जा रहा था सुगंधा पीछे-पीछे कभी-कभी अंकित तोड़ने लगता तो सुगंधा भी नंगी उसके पीछे दौड़ने लगती थी वाकई में खूब मदहोश कर देने वाला नजारा था,,, लेकिन इस खूबसूरत नजारे को देखने वाला इस समय वहां कोई नहीं था सिवाय अंकित के,,,,।

अरे बस कर अब झाड़ियों के अंदर तक जाएगा क्या,,,।

हां तो क्या हो गया तुम्हें सौच भी तो करना है,,,,।

लेकिन झाड़ियों के अंदर जाना जरूरी है,,, मुझे डर लग रहा है,,,,,।

किस बात का यहां कोई देखने वाला नहीं है,,, देखो तो सही कितना अच्छा लग रहा है,,,।

अरे मुझे भूत का डर लग रहा है।
(इतना सुनकर अंकित जोर-जोर से हंसने लगा क्योंकि वह जानता था कोई उसके हंसने की आवाज कोई सुनने वाला नहीं था और वह हंसते हुए बोला)

तुम भी कहां यह बेकार की बातों में मानती हो,,, अगर भूत हुआ भी तो तुम्हें डराएगा नहीं,,,।

मुझे क्यों नहीं डराएगा,,,,!

तुम्हारी खूबसूरती देखकर वह भी तुम्हारा दीवाना हो जाएगा और तुम्हारी चुदाई करेगा,,,।

धत् पागल,,,,,, कुछ भी बोलता रहता है अब तु यहीं पर रुक,,,, बड़े जोरों की लगी है,,,,,(इतना कहने के साथ ही पास में बड़ा सा पत्थर था वह उसके पीछे चली गई,,,, और वहीं बैठकर सौच करने लगी,,,, अंकित भी हंसता हुआ वहीं पर रुक गया लेकिन फिर जैसे कुछ याद आया हो वह एकदम से बोला,,,)

अरे लेकिन पानी का डब्बा लाना तो भूल ही गए,,,।

ओहहह,,,(सुगंधा को भी एकाएक याद आया) अब क्या होगा,,,!

तुम चिंता मत करो तुम बैठकर कर लो मैं अभी पानी का डब्बा लेकर आता हूं,,,,।

नहीं नहीं,,,, तू कहीं मत जा मुझे डर लगता है,,,।

लेकिन गांड कैसे धोओगी,,,,।

मैं कुछ कर लूंगी तु चिंता मत कर लेकिन यहां से जाना नहीं,,,,,।

ठीक है,,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को थोड़ी राहत हुई उसे अच्छी तरह से मालूम था की आस स्थिति में क्या करना है,,,, और सौच कर लेने के बाद,,, वह मिट्टी का पत्थर ढूंढने लगी अपनी गांड पोंछने के लिए,,,, और वह खड़ी होकर थोड़ा आगे बढ़ गई और मिट्टी के पत्थर का छोटा सा टुकड़ा ढूंढ़ने लगी अंकित जहां पर खड़ा था वहां से उसकी मैं एकदम साफ दिखाई दे रही थी अंकित भी समझ गया था कि उसकी मां अब क्या करने वाली है,,,, और अगले ही पल सुगंधा को छोटा सा मिट्टी का टुकड़ा मिल भी गया जिससे वह अपनी गांड पोंछ रही थी लेकिन यह देखकर अंकित का लंड फिर से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया,,,, और बिना कुछ बोल सीधा अपनी मां के पीछे पहुंच गया,, और एकदम से उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया सुगंधा तो पल भर के लिए घबरा गई थी क्योंकि उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा उसके पीछे आ गया है अंधेरा ही करना था कि उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन अगले ही पल अंकित ने बोला,,,,)

बस ऐसे ही रहना,,,,।

(खुला वातावरण पाकर और अपने बेटे के सामने सौच करते हुए वह भी उत्तेजित हो गई थी और अंकित अंधेरे में ही अपने लंड के सुपाड़े को इधर-उधर रगड़कर अपनी मां के गुलाबी छेद को ढूंढ ही लिया और अगले ही फल उसका पूरा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में था और वह पीछे से अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था,,, सुगंधा भी पूरी तरह से मदहोश हो गई थी। खुला मैदान पाकर वह जोर-जोर से सिसकारी लेना शुरू कर दी थी क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी इस तरह की आवाजे किसी के कानों में पडने वाली नहीं थी, और अंकित जमकर अपनी मां की चुदाई कर रहा था और तब तक चुदाई करता रहा जब तक कि वह अपनी मां का पानी नहीं निकाल दिया और साथ में खुद भी झड़ नहीं गया,,,, फिर दोनों वापस घर की ओर लौट आए,,, घर पहुंच कर सुगंधा ने पानी से अपनी गांड को साफ की,,,, और अपने बेटे के साथ छत पर आकर बिस्तर पर लेट गई दोनों बहुत खुश थे दोनों को बहुत मजा आया था। सुगंधा अपने बेटे से बोली।)

कहां से आता है तेरे दिमाग में ऐसे ऐसे ख्याल,,,।

क्यों तुम्हें मजा नहीं आया क्या,,,!

मजा तो बहुत आया तभी तो कह रही हूं,,,,, लेकिन अब यह मजा कुछ दिन का ही है,,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित थोड़ा हैरान हो गया और एकदम से अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला)

कुछ दिन का क्यों,,,?

क्योंकि कुछ ही दिन में तेरी बड़ी बहन आ जाएगी फिर ऐसा मौका कहां मिलने वाला है फिर तो पता नहीं मौका मिलेगा भी कि नहीं,,,,।

हां मम्मी मैं तो भूल ही गया था कि अपने दोनों के सिवा तृप्ति भी है,,, हम दोनों जिस तरह से रहते थे मैं तो भूल ही गया था कि मेरी कोई बड़ी बहन भी है।

वही तो कह रही हूं तेरी बड़ी बहन जाएगी तब क्या होगा मुझे तो तेरे बिना एक पल भी रहा नहीं जाता।

मुझे भी कहां रहा जाता है,,,, जब तक तुम्हारी बुर में,,,(अपनी मां की बुर पर हथेली रखकर उसे सहलाते हुए) लंड डालकर पानी नहीं निकाल देता तब तक मुझे नींद नहीं आती,,,,

अब कर भी क्या सकते हैं उसे आने से तो रोक नहीं सकते,,,, मैं सोच रही थी कि,,,।

क्या सोच रही थी,,,?

मैं सोच रही थी कि जब तक तृप्ति नहीं आ जाती क्यों ना हम दोनों कहीं घूमने चलते हैं बहुत मजा करेंगे,,,,।

यह बात तो तुमने बहुत अच्छी कही लेकिन कहां,,,?

नैनीताल चलते हैं पहाड़ियों में वहां मजा आएगा हम दोनों को कोई पहचानेगा भी नहीं हम दोनों कुछ भी कर सकते हैं,,,,,।

तुम सच कह रही हो हम दोनों को कोई वहां जाने वाला भी नहीं होगा जैसे मन वैसे घूमेंगे,,, लेकिन पैसे,,,!

तु इसकी चिंता मत कर पैसे है मेरे पास,,,,।

वाह मम्मी तुम तो महान हो,,,,,, मजा आ जाएगा पहाड़ियों में,,,,,ऊममममम,(इतना कहने के साथ है यह वहां एकदम से अपनी मां की गर्दन पर चुंबन करने लगा हथेली से तो वह अपनी मां की बुर को सहला ही रहा था एक बार फिर से सुगंधा की बुर कचोरी की तरह हो गई थी और अपनी खुशी जाहिर करते हुए अंकित अपनी मां के ऊपर चढ़ गया और सुगंधा भी अपनी दोनों टांगें खोलकर अपने बेटे का स्वागत करने लगी अंकित फिर से अपनी मां की बुर में अपने लंड को डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था और तीसरी बार चुदाई करने के बाद वह अपनी मां के ऊपर ही ढेर हो गया,,,,, सुबह जब नींद खुली तो वह अपनी मां के ऊपर ही सो रहा था धीरे से वह अपनी मां के ऊपर से हटा दो उसका लंड भी बुरे में से बाहर निकल गया यह देखकर वह मुस्कुराने लगा उसकी मां की भी नींद खुल गई थी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अब जल्दी से नैनीताल चलने की तैयारी करो थोड़े बहुत कपड़े भी खरीदने होंगे,,,,।

मेरे पास तो सब कुछ है तुम बस एक जींस और टॉप खरीद लेना एकदम पटाखा लगोगी,,,।

यह सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और धीरे से छत से नीचे चली गई।

तृप्ति के आने से पहले सुगंधा अपने बेटे के साथ नैनीताल घूमने जाना चाहती थी वैसे तो वहां घूमने जाने का उसका बहुत पहले से मन था। लेकिन वह कभी जा नहीं पाई थी अब तो उसके पास उसके बेटे के रूप में उसका साथी भी था जिसके साथ वहां पर जाकर वह मजे लूट सकती थी और वहां घूम कर आनंद भी ले सकती थी इस बारे में सुनकर अंकित भी बहुत खुश हुआ था वह भी अपनी बहन के आने से पहले खुलकर अपनी मां के साथ मजा ले लेना चाहता था इसलिए वह भी तैयार हो गया था और अपनी मां को जरूरी कपड़े लेने के लिए भी बोल दिया था।

लेकिन वहां जाने से पहले अंकित को एक जरूरी काम पूरा करना था और वह भी राहुल के साथ मिलकर,,, वह ईस काम को अधूरा नहीं छोड़ना चाहता था,,, सोमवार का दिन था और सुबह जल्दी वह तैयार हो गया था। घर से उसे 10:00 निकलना था,,, जिस तरह से अंकित को सोमवार का बड़ी बेसब्री से इंतजार था उसी तरह से राहुल को भी इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार था। घड़ी में 10 बजाते ही वह घर से निकल गया था वह अच्छी तरह से जानता था कि इस समय राहुल के घर पर उसके पापा नहीं होंगे इस बारे में उसने राहुल की मां को कुछ भी नहीं बताया था। अपने घर पर भी बहुत जरूरी काम का बात कर वहां घर से निकल चुका था राहुल के घर जाने के लिए,,, दूसरी तरफ राहुल भी अपने घर से काम का बहाना बनाकर निकल चुका था क्योंकि वह जानता था कि जिस उद्देश्य को पुरा करना था उसके लिए उसे इस समय घर पर होना जरूरी नहीं था वह अपनी मां को अंकित के साथ एकांत देना चाहता था ताकि दोनों अपनी काम लीला में मशगूल हो सके। सब कुछ पहले से ही तय था जैसा अंकित ने बताया था ठीक वैसा ही राहुल कर रहा था इस समय राहुल अंकित के हाथों की कठपुतली बन चुका था उसके पास उसकी बात मानने के सिवा और कोई चारा नहीं था। अपने घर से निकल कर वहां कुछ दूरी पर उसी जगह पर जाकर खड़ा हो गया जहां पर उसे दिन वह अंकित का अपने घर से निकलने का इंतजार कर रहा था।

थोड़ी ही देर में ऑटो पकड़कर अंकित उसके घर पहुंच चुका था राहुल सब कुछ वहीं खड़े खड़े देख रहा था वैसे तो उसका मन नहीं मान रहा था वह अभी इसी समय घर पर पहुंच जाना चाहता था लेकिन वह जानता था कि इस समय उसका घर पर जाना उचित नहीं था अगर खेल का असली मजा लेना है तो कुछ देर बाद ही उसका वहां जाना उचित था इसलिए वह धीरे के साथ वही खड़ा होकर इंतजार करने लगा देखते ही देखते अंकित दरवाजे पर पहुंच कर डोर बेल बजाने लगा,,, चूड़ियों के खनकने की आवाज सुनकर अंकित को एहसास हो गया कि राहुल की मां दरवाजा खोलने के लिए आ रही थी,,, और उसने जल्दी से दरवाजा भी खोल दी उसे लगा कि उसका बेटा वापस आ गया है लेकिन दरवाजे पर अंकित को देखकर एकदम से खुश हो गई अंकित भी राहुल की मां को देखकर एकदम खुश होते हुए बोला।

गुड मॉर्निंग आंटी,,,,।

कितनी बार बोली कि जब अकेले हो तो मुझे नूपुर कहा कर,,।

ओके गुड मॉर्निंग मेरी जान नूपुर,,,,।

(इतना सुनकर नूपुर मुस्कुराने लगी,,,, पीले रंग की साड़ी में उसका गोरा बदन और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था और उसने लो कट ब्लाउज पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसकी आधे से ज्यादा चूचियां बाहर दिखाई दे रही थी अंकित की नजर उसकी चूचियों पर ही टिकी हुई थी जिसे देखकर नुपुर बोली,,,)

दूध पीने का इरादा है क्या,,,?

तुम्हारे पास आऊंगा तुम्हारा दूध ना पियूं ऐसा भला कैसे हो सकता है,,, मेरी रानी तुम्हारा दूध पीने के लिए ही तो इतनी दूर से तुम्हारे घर आया हूं,,,।

क्यों आज मम्मी ने चाय नहीं बनाई क्या,,,?

चाय तो बनाई थी लेकिन आज मेरा दूध पीने का मन कर रहा था,,,।

तो अपनी मां का ही पी लिया होता तेरी मां का दूध तो मेरे से भी ज्यादा खूबसूरत और स्वादिष्ट है।

अब यह तो पता नहीं लेकिन मुझे तो तुम्हारा दूध पीने की आदत पड़ गई है,,,।

तो आज़ा मेरे राजा देर किस बात की है,,,।(नूपुर मुस्कुराते हुए बोली,,)

क्यों आज घर पर कोई नहीं है क्या,,,?

तभी तो कह रही हूं,,,,,,, राहुल के पापा ऑफिस गए हैं शाम को 6:00 7:00 बजे ही वापस आएंगे

और राहुल,,,,,!(सब कुछ जानते हुए भी जानबूझकर अंकित बोला)

वह भी अभी-अभी किसी काम से बाहर किया है वह भी दो-चार घंटे से पहले आने वाला नहीं है उसकी आदत ऐसी ही है।

ओहहह तब तो उसकी आदत अच्छी है,,,, लेकिन साला समझ नहीं आता इतनी खूबसूरत घर में औरत है और वह छोड़कर बाहर घूम रहा है।

जैसे तु सुगंधा जैसी खूबसूरत औरत को घर में छोड़कर मेरे पास आया है।
(इतना सुनकर अंकित हंसने लगा और हंसते हुए वह घर में आ गया घर में प्रवेश करते ही वह राहुल की मां को अपनी बाहों में लेकर उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने वाला और जानबूझकर अपने पैर से दरवाजा बंद कर दिया लेकिन उसकी कड़ी नहीं लगाया,,, नूपुर को लगा कि अंकित ने दरवाजा बंद कर दिया है वह एकदम से अंकित की बाहों में पिघलने लगी अंकित उसके होठों का रसपान करते हुए,, उसके गोलाकार बड़े-बड़े नितंबों को दोनों हाथ से लेकर दबाना शुरू कर दिया पहले स्पर्श से ही नूपुर के बदन में थरथराहट होने लगी वह मदहोश होने लगी अंकित की बाहों में न जाने कैसी कशिश की वह अंकित की बाहों में आते ही पिघलने लगती थी उसके जवानी का रस धीरे-धीरे उसकी बुर से पिघल रहा था जिसकी वजह से उसकी पैंटी गीली होने लगी थी। अंकित भी पूरे जोश के साथ उसे अपनी बाहों में कसके उसके अंगों से खेल रहा था उसके होठों का रस पी रहा था। अभी कुछ देर पहले ही वह नही हुई थी इसलिए उसके बालों से भीनी-भिनी खुशबू आ रही थी जिससे मदहोशी और ज्यादा बढ़ जा रही थी।

उसकी खूबसूरत बदन से खेलते हुए अंकित उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे एकदम से उठा लिया और डाइनिंग टेबल पर बिठा दिया उसकी ताकत देख कर एक बार फिर से नूपुर एकदम से अचंभित हो गई थी,,, इस तरह से आज तक उसके बेटे ने कभी उसे उठाकर डाइनिंग टेबल पर बिठाया नहीं था शायद इतना उसमें दम ही नहीं था इस बात का एहसास नूपुर को हो रहा था अंकित पूरी तरह से राहुल की मां की जवानी पर छा चुका था वह उसके होठों का रसपान करते हुए उसके ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया था और नूपुर पेंट के ऊपर से ही उसके कड़े लंड को सहला रही थी। अंकित राहुल की मां के ब्लाउज का बटन एक-एक करके खोल रहा था और उसे उसके ब्लाउज का बटन खोलने में बहुत मजा आ रहा था क्योंकि उसकी चूचियां एकदम तनी हुई थी और उसने अपनी चूचियों के आकार से कम ही नाप का ब्लाउज पहनी हुई थी जिससे वह और भी ज्यादा बड़ी लग रही थी,,,, ब्लाउज का आखिरी बटन बंद करते हुए वह मदहोश होता हुआ बोला।)

तुम्हारी चूची बहुत बड़ी है,,,,,।

तेरे लिए ही है।

अंकल को नहीं पिलाती क्या,,,?

अंकल अब पीने लायक नहीं रह गए इसलिए तो तुझे पीला रही हूं,,,।

यह तो और भी अच्छा है माल किसी का मजा कोई और ले रहा है,,,,।

धत् बदमाश,,,, मैं तो तेरी माल हूं,,,,,,।

ओहहहहह मेरी जान,,,(ब्लाउज का आखिरी बटन खोलने के साथ ही ब्लाउज को उसकी बाहों से अलग करते हुए अंकित उसके गर्दन पर चुंबनों की बौछार कर दिया और अगले ही पल उसका ब्लाउज डाइनिंग टेबल के नीचे पड़ा हुआ था लाल रंग की ब्रा उसकी गोल गोल गोरी चुचियों को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रही थी,,,, अंकित पूरी तरह से मदहोश हो चुका था दोनों हाथों से उसकी गोलाइयों को पकड़कर हल्के हल्के उसे दबाने के साथ ही एक बार फिर से उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया अंकित का मां नूपुर के किसी भी अंक से पूरी तरह से बाहर ही नहीं रहा था वह मदहोश हो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एक ही समय में वह क्या-क्या कर डाले राहुल की मां के साथ उसकी आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था,,,, और अगले ही पल वह ब्रा को नीचे से पड़कर एकदम से उसे ऊपर की तरफ खींचकर चूचियों से ऊपर कर दिया और उसकी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम से तन गई उसकी ईस हरकत से नूपुर को थोड़ा दर्द का एहसास हुआ लेकिन जैसे ही अंकित ने उसकी चूची पर अपना मुंह रखकर पीना शुरू किया वह एकदम से मस्त हो गई। अंकित दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाता हुआ दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रहा था और नूपुर मदहोशी भारी निगाहों से अंकित को देखकर गहरी गहरी सांस ले रही थी उसे अपनी उत्तेजना संभाली नहीं जा रही थी,,,, अंकित अपनी हरकतों से उसे मदहोश कर दिया था वह तड़प रही थी मचल रहे थे और अंकित था कि उसकी दोनों चूचियों को गेंद की तरह दबा दबा कर उसका रस चूस रहा था,,,,,,।

अपनी उत्तेजना को काबू में करने के लिए राहुल की मां अपना हाथ पेंट के ऊपर से ही उसके लंड पर रखकर उसे जोर-जोर से दबा रही थी,,, जिससे अंकित का भी जोश बढ़ता चला जा रहा था और वह अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर उसके ब्रा का होकर एकदम से खोल दिया और उसकी ब्रा को भी निकाल कर डाइनिंग टेबल के नीचे फेंक दिया उसका ब्लाउज और ब्रा फर्श पर पड़े हुए थे उसकी साड़ी का पल्लू डाइनिंग टेबल से नीचे लहरा रहा था और अंकित एकदम से उसे अपनी बाहों में भरकर उसकी गर्दन पर चुंबन करते हुए उसकी नंगी चूचियों को अपनी छाती पर महसूस करके मस्त हो रहा था। औरत को खुश करने की कला अंकित अच्छी तरह से जानता था और इसका एहसास राहुल की मां को भी हो गया था इसलिए तो राहुल की मां उसकी हाथों की कठपुतली बनी हुई थी क्योंकि वह जानती थी कि अंकित जो कुछ भी करेगा उसमें उसका ही भला है। अंकित जोश में अपनी भुजाओं का बल दिखाते हुए उसे करके अपनी छाती से चांप ले रहा था जिससे उसकी हड्डियां भी कडकड़ा जा रही थी। उसकी हरकत और उसका दम देखकर बार-बार राहुल की मां के मुंह से करने की आवाज निकल जा रही थी और वह बोल भी रही थी।

बाप रे एकदम सांड जैसा दम है तेरे में,,,,,, मेरी हड्डियां मत तोड़ देना,,,,।

तुम्हारी हड्डियां नहीं टूटेगी बल्कि तुम्हारी बुर जरूर चौड़ी हो जाएगी आज आज मैं तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,।

तो बनते मेरे राजा तुझे रोका किसने है मैं तो चाहती हूं कि तू मेरी बुर को अपने लंड से फाड़ डालें भोसड़ा बना दे मेरी बुर का इसकी अकड़ को ढीली कर दे,,,,सहहहहहह ।

ऐसा ही होगा मेरी रानी आज सरसों का तेल से मालिश करके आया हूं अपने लंड की आज तेरी बुर में जाकर तेरी नशे ढीली कर देगा,,,,(ऐसा कहते हुए वह अपना शर्ट निकालकर जमीन पर फेंक दिया और अपने पेंट का बटन खोलने लगा,,, नूपुर प्यासी नजरों से अंकित की हरकत को देख रही थी बहुत जल्द से जल्द अंकित के लंड का दर्शन कर लेना चाहती थी,,,, देखते ही देखते अंकित भी जल्दबाजी दिखाता हुआ अपना पेट भी उतार कर फर्श पर फेंक दिया और पूरी तरह से राहुल की मां की आंखों के सामने नंगा हो गया,,,, उसका कसरती बदन जितना आकर्षक था उसे भी कहीं ज्यादा कर सकता उसका मोटा तगड़ा लंबा लैंड जो उसकी टांगों के बीच झूल रहा था,,,, जिसे देखकर नूपुर की बुर पानी पानी हो रही थी। नूपुर से ज्यादा उसकी बुर ललाईत थी अंकित के लंड को अपने अंदर लेनेके लिए,,,, अंकित राहुल की मां के मन की मनसा को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह अपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था और इसे देखकर नूपुर की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी अंकित डाइनिंग टेबल के करीब अपनी दोनों टांगों को खोलकर अपनी कमर को आगे की तरफ कर दिया था जो की राहुल की मां के लिए एक ही सहारा था और इसी सारे को राहुल की मां अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए डाइनिंग टेबल पर बैठे-बैठे ही वह पूरी तरह से झुक गई और अपने लाल-लाल होठों को खोलकर अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,।

बड़ा ही गजब का नजारा था एकदम मदहोशी भरा, वासना से लिप्त,,,,, ऐसा लग रहा है ताकि जैसे कोई गंदी फिल्म चल रही हो लेकिन इस समय यह नजारा देखने वाला तीसरा कोई नहीं था कुछ देर बाद राहुल इस खेल में शामिल होने वाला था लेकिन अभी भी कुछ समय बाकी था। बाहर खड़ा-खड़ा राहुल अपने मन में बहुत सारी बातें सोच रहा था वह भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था अपने पेट में बने तंबू को छुपाने के लिए वह एक जगह बड़े पत्थर पर बैठ गया था क्योंकि वह अपने मन में ही अपनी मां को लेकर अंकित के साथ कल्पना कर रहा था कि वह इस समय उसकी मां के साथ क्या कर रहा होगा और उसकी मां कितनी बेशर्मी से एक रंडी की तरह उसके साथ मजा ले रही होगी,,, यह सब सो कर उसे रहा नहीं जा रहा था वह भी जल्द से जल्द उन दोनों के बीच शामिल हो जाना चाहता था लेकिन वह जानता था कि जो समय निश्चित किया गया था उसी समय पर उसे जाना था। इसलिए वह भी अपने लंड को पकड़ कर अपने मन को दिलासा दे रहा था,,,,।

कमरे के अंदर डाइनिंग टेबल पर तो घमासान बचा हुआ था अंकित अपनी कमर को जोर-जोर से हिला रहा था इस समय वह राहुल की मां के मुंह को ही छोड़ रहा था उसके लाल-लाल होठों का कसाव अपने लैंड पर महसूस करके वह ऐसा ही सोच रहा था कि जैसे उसका लंड उसकी गुलाबी बुर में जा रहा हो,,,, राहुल की मां भी पूरी तरह से मत हो चुकी थी वह भी एक रंडी की तरह उसके दोनों नितंबों को पकड़कर उसके लंड की चुसाई कर रही थी,,,, अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिससे उसका मुंह भरा हुआ था लेकिन फिर भी वह पूरा का पूरा उसे अपने गले में निगल लेना चाहती थी,,,, अंकित इतना ज्यादा बावला हो चुका था कि वह रुकने का नाम नहीं ले रहा था और नूपुर भी उसका बराबर का साथ दे रही थी इस वजह से अंकित एकदम झड़ने के कगार पर आ चुका था वह अपने लंड को नूपुर के मुंह में से बाहर निकाल लेना चाहता था क्योंकि किसी भी वक्त उसके लंड से पिचकारी निकलने वाली थी और वह राहुल की मां से बोला,,,,।

ओ मेरी जान मेरा निकलने वाला है,,,,, मुझे निकाल लेने दो अपने लंड को,,,,(ऐसा कहकर अंकित अपनी कमर को पीछे लेने की कोशिश किया लेकिन राहुल की मां उसके नितंबों पर अपने हथेलियों का कसाव बढ़ाकर उसे रोके रह गई,,, अंकित समझ गया कि राहुल की मां क्या चाहती है और इसलिए अपनी थकान को और ज्यादा तेज कर दिया और अगले ही पल उसके लंड से पिचकारी निकलना शुरू हो गया जो की नूपुर के गले में सीधा बौछार मार रहा था और वह उसे अपने गले के नीचे उतार रही थी चूस रही थी पी रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा उसने आज तक अपने बेटे के साथ नहीं की थी लेकिन अंकित के साथ वह ऐसा करने पर मजबूर हो चुकी थी और वह तब तक अंकित के लंड को अपने मुंह में से नहीं निकाली जब तक कि वह उसके लंड की मलाई को पूरा चूस नहीं ले गई,,,, अंकित के साथ भी ऐसा पहली बार हो रहा था उसके जीवन में ऐसा मौका बहुत बार आया था लेकिन कभी भी उसे नहीं मुंह के अंदर अपनी पिचकारी नहीं निकाला था लेकिन आज वह भी नूपुर की हरकतों के आगे मजबूर हो चुका था और एक नए सुख और एक नए अनुभव के साथ वह झड़ने लगा था,,,,, झड़ जाने के बाद भी अंकित का लंड अभी भी खड़ा ही था जिसे वह बाहर निकाल कर धीरे-धीरे दिला रहा था और उसे पर लगे थुक और लार को फर्श पर गिरा रहा था,,,, मदहोशी में गहरी सांस लेता हुआ वह बोला।)

बाप रे तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी बहुत मजा आया,,,उफफफ,,,,,

(नूपुर की साड़ी के पल्लू से अपना मुंह साफ करते हुए वासना भरी नजरों से अंकित की तरफ देख रही थी और बोली)

बहुत गरम-गरम था रे,,,,,, बहुत गाढी मलाई है तेरी,,,,।

तो क्या पहली बार में ही तुम मां बन जाओगी,,,,।

चल रहने दे मुझे नहीं बनना मां,,,,(इतना कहने के साथ ही वह डाइनिंग टेबल से नीचे उतर गई,,, और साड़ी के पल्लू को हाथ में लिए हुए ही वह बाथरूम की तरफ जाने लगी तो अंकित बोला,,,)

कहां जा रही हो,,,?

पेशाब करने जा रही हूं कर लो नहीं तो तू अपना लंड डालेगा तो अपने आप पेशाब छुट जाएगी,,,,,,(इतना सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और वह बोला)

चलो मैं भी चलता हूं मुझे भी पेशाब लगी है,,,,(इतना कहने के साथ ही वह भी नूपुर के पीछे-पीछे बाथरुम में आ गया नूपुर का बाथरूम काफी बड़ा था इसलिए दो लोगों की उपस्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था नूपुर अपनी साड़ी कमर तक उठा ली थी और अपनी लाल रंग की पेटी को एक हाथ से नीचे की तरफ सरका रही थी यह देखकर अंकित आगे पड़ा और खुदाई उसकी पेंटिं को पकड़कर उतारने लगा,,, और अगले ही पल वह घुटनों के बल बैठकर उसकी पेंटि को उतार कर बाथरूम मे हीं छोड़ दिया,,,,, उसकी आंखों के सामने नूपुर की कचोरी जैसी फुली हुई बुर थी एकदम चिकनी उसमें से मादक खुशबू आ रही थी,,,, उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर और उसमें से आ रही मादक खुशबू की वजह से अंकित अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और अगले ही पर अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर रख दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया यह देखकर नुपुर एकदम से मदहोश हो गई और बोली,,,)

अरे रुक तो जा मुझे पेशाब तो कर लेने दे,,,,।
(लेकिन अब अंकित रुकने को तैयार ही नहीं था वह तो पागलों की तरह उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया था,,,,, उसकी हरकत से नूपुर भी एकदम मदहोश हो गई मस्त हो गई और खुद ही अपनी टांग उठा कर उसके कंधे पर रख ले और उसके सर पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे और ज्यादा अपनी बुर से सटाने लगी वह अपने पेशाब को रोक दी थी लेकिन रहाणे कर उसकी बुर से पेशाब की बूंदे बाहर निकल जा रही थी जिसे अंकित मस्त होकर चाट रहा था उसे मजा आ रहा था और बाथरूम में नूपुर की सिसकारी गूंज रही थी,,,, अंकित का लंड फिर से खड़ा हो गया था,,,, वैसे एक बार झड़ने के बाद भी उसमें कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था लेकिन इस समय जिस तरह से वह राहुल की मां की बुर की चटाई कर रहा था उसके बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था जिसके चलते उसका लंड अपनी औकात से बाहर आ गया था वह जल्द से जल्द राहुल की मां की बुर में घुस जाना चाहता था जिसे अंकित खुद अपने हाथ से मुठीया रहा था और उसकी बुर चाट रहा था। राहुल की मां मदहोश हो चुकी थी उसकी बुर में भी चीटियां रंग रही थी वह राहुल के लंड को अपनी बुर में महसूस करना चाहती थी उसकी गहराई में ले लेना चाहती थी,,,,, कुछ देर इसी तरह से उसकी बुर चाटने के बाद अंकित गहरी सांस लेता हुआ उठकर खड़ा हो गया और अपने लंड को उसकी बुर के आगे रखकर हिलाने लगा और बोला,,,)

अब मुतो ईस पे,,,,।

(इतना सुनकर नूपुर एकदम से शर्मसार हो गई शर्म से पानी पानी हो गई भले ही उसके हरकतें एकदम रंडी वाली थी लेकिन इस तरह से उसने कभी हरकत नहीं की थी अंकित ने उसे अपने लंड पर पेशाब करने के लिए बोली थी यह मदहोशी की चरम सीमा थी,,,, जिसे सुनकर नूपुर का दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह आश्चर्य से अंकित की तरफ देख रही थी अंकित समझ गया था कि नूपुर के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह एकदम से अपने लंड को पकड़ कर उसके सुपाड़े को उसके गुलाबी छेद से रगड़ते हुए बोला,,,)

मुतो मेरी रानी,,,,,सहहहहह बहुत गर्म बर है तुम्हारी बौछार मारो अपनी पेशाब कैसे पर तैयार कर दो इसे अपनी बुर में लेने के लिए,,,,,,आहहहहह आज तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,,, बहुत घमंड है ना तुम्हें अपनी बुर पर आज इसका घमंड चूर-चूर कर दूंगा,,,,, ताकि किसी और के पास जाओ तो उसे फटी बुर मिले,,,,,।

(अंकित की मदहोशी भरी गंदी बातें सुनकर नूपुर से भी रहा नहीं किया और उसकी बुर से अगले ही पर पेशाब की धार निकलने लगी जो सीधा अंकित के लंड के सुपाड़े पर पड़ रही थी और उसके लंड को भिगो रही थी,,,,, अंकित एकदम से मत हो गया अपनी आंखों को बंद करके वह अपने लंड को पकड़े हुए ही बोला,,,)
आहहहहहा गजब,,,,ऊममममम एकदम गरम पैसाब है तुम्हारी,,,,ऊममममम मेरी रानी एकदम धार मारो इस पर,,आहहहहहह ,,,,,,,।

(अंकित की मदहोशी देखकर नूपुर दोनों हाथों से अपनी साड़ी पकड़ कर अपनी कमर को आगे की तरफ करके पेशाब की धार और जोर से मार रही थी और अपनी बुर के गुलाबी छेद को उसके लंड के सुपाड़े से रगड़ भी रही थी जिससे अंकित की उत्तेजना एकदम से बढ़ गई थी और जैसे ही नूपुर के पेशाब की धार कमजोर पड़ी वह एकदम से अपने लंड के सुपाड़े को उसकी बुर के छेद में डाल दिया और दोनों हाथों से उसकी बड़ी-बड़ी गांड पकड़कर अपने तरफ खींच लिया,,,, जिससे एकदम से रगड़ खाता हुआ उसका लंड उसकी बुर में समा गया,, नूपुर एकदम से आश्चर्यचकित हो गई क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि इस समय अंकित उसकी बुर में लंड डाल दूंगा लेकिन यह सब एकाएक हुआ था और आलम यह था कि अंकित का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में घुस चुका था और अंकित उसे अपनी बाहों में लेकर खड़े-खड़े अपनी कमर हिला रहा था,,,,, अंकित की हरकत से नूपुर पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी मस्त हो चुकी थी। वह बाथरूम में चुदाई का मजा लूट रही थी और अंकित पूरा जोश में आकर उसे चोदता हुआ बाथरुम की दीवार से सटा दिया था उसके धक्के एकदम तेज हो चुके थे और वह जोश में उसकी दोनों टांगें उठाकर अपनी कमर पर लपेट लिया था वह राहुल की मां को अपनी गोद में ले लिया था,,,,, नूपुर हैरान थी अचंभित थी वह बार-बार अंकित की भुजाओं का बल देख रही थी वाकई में अंकित में बहुत दम था वह अपने मन में ही ऐसा बोल रही थी अंकित उसे दीवाल से सटाकर उसकी गोद में उठाकर उसकी बुर का भोसड़ा बनाने में लगा था,,,,, एक बार झड़ने के बावजूद अंकित का हौसला बुलंद था वह धक्के पर धक्के लगा रहा था और हर धक्के के साथ नूपुर की बुर की अंदरूनी दीवारें भलभलाकर पानी छोड़ रही थी,,,, और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे बाथरूम में नूपुर की चुदाई का कोई इरादा नहीं था लेकिन मदहोशी इस कदर बढ़ की चुकी थी कि अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया था और बाथरूम में ही वहां राहुल की मां की जमकर चुदाई कर दिया था।

अपनी गोद में से उतर कर वह नूपुर की साड़ी को भी खोल दिया और उसकी पेटिकोट का नारा खींचकर उसकी साड़ी को भी बाथरुम में गिरा दिया और नंगी ही उसका हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम से बाहर ले आया अंकित जानता था कि नूपुर का कमरा कौन सा है,,,, ऐसा लग रहा था कि आज वह नूपुर को बिल्कुल भी आराम करने नहीं देगा वह नूपुर को बाथरूम से बाहर आते ही गोद में उठा लिया था। और गोद में उठाए हुए ही वह उसे कमरे की तरफ ले जा रहा था कमरे का दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था वहां कमरे में पहुंचते ही नरम गद्दे पर राहुल की मां को पटक दिया,,,,, राहुल की मां एकदम से मस्त हो चुकी थी क्योंकि अंकित ने इसकी जबरदस्त चुदाई किया था,,,,, अपने लंड को हिलता हुआ वह बिस्तर की तरफ आगे बढ़ने लगा लेकिन एक नजर घूमर वह खिड़की की तरफ देखने लगा कि कहीं खिड़की बंद तो नहीं है लेकिन खिड़की उसे दिन की तरह ही खुली भी थी और दरवाजा की कड़ी भी नहीं लगी थी क्योंकि इस समय दरवाजा बंद करना जरूरी नहीं था क्योंकि नूपुर को ऐसा ही लग रहा था कि घर का मुख्य दरवाजा बंद है ‌। लंड को हिलाता हुआ वह घुटनों के बाल बिस्तर पर चढ़ने लगा और बोला,,)

कैसा लगा मेरी जान,,,,,

बाप रे तूने तो मेरी हड्डियां चूर-चूर कर दिया,, क्या खाता है रे जो तेरे में इतना दम है।

खाता नहीं हूं पीता हूं और वह भी तुम्हारा दूध इसलिए मेरे में इतना दम है,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित दोनों हाथों से राहुल की मां की टांगे पकड़ कर खोल दिया और फिर उसकी बुर पर अपना मुंह लगाकर चाटना शुरू कर दिया जो कुछ देर पहले उसकी बुर की मलाई और उसके लंड की मलाई से सना हुआ था,,,, बाहर खड़ा राहुल भी अब समय हो चुका था यह सोचकर अपने घर की तरफ आगे बढ़ने लगा पेट में अभी भी उसके तंबू बना हुआ था अपनी मां के बारे में सोच सोच कर देखते ही देखते वह अपने घर के दरवाजे पर पहुंच गया और धीरे से उसे खोला तो आराम से दरवाजा खुल गया वह समझ गया कि यह सब अंकित का ही करा धरा है वह मुस्कुराने लगा,,,, धीरे से दरवाजा बंद करके वह आगे बढ़ा तो देखा डाइनिंग टेबल के नीचे उसकी मां की ब्रा और ब्लाउज पड़ा हुआ था और पास में ही अंकित के कपड़े भी पड़े हुए थे इतना तो वह समझ गया था कि इस समय उसकी मां और अंकित दोनों नंगे ही है और दोनों की काम लीला शुरू हो चुकी है और फिर बाथरूम की तरफ देखा तो बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था,,,, अंदर झांक कर देखा तो उसकी मां की साड़ी पेटीकोट और चड्डी तीनों पड़ी थी वह समझ गया कि अंकित कितना बड़ा हरामी है क्योंकि जाते समय वह देखा था उसकी मां पीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी और इस समय साड़ी बाथरूम में पड़ी थी जिसका मतलब साफ था कि दोनों खुलकर मजा लूट रहे थे,,,,।

राहुल के पेंट में बना हुआ तंबू उसे परेशान करने लगा था,,,,, राहुल इधर-उधर देख रहा था लेकिन कहीं भी वह दोनों दिखाई नहीं दे रहे थे वह समझ गया था कि इस समय वह दोनों कमरे में ही है उसका दिन चोरों से धड़क रहा था वह धीरे-धीरे कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था और देखते ही देखते हैं वह अपनी मां के कमरे के पास पहुंच चुका था हल्की सी खुली खिड़की में से अंदर झांक कर देखा तो हैरान रह गया उसका सोचना बिल्कुल सही था,,, इस समय उसकी मां और अंकित दोनों पूरी तरह से नंगे थे उसकी मां अपनी टांगें खोलकर अंकित से अपनी बर चटवा रही थी और यही सही समय था कमरे के अंदर दाखिल होने का और वह एकदम से दरवाजा खोलकर कमरे में दाखिल हो गया एकदम से दरवाजा खुलने की आवाज से अंकित और राहुल की मन एकदम से दरवाजे की तरफ देखने लगे तो राहुल को दरवाजे पर खड़ा देखकर नूपुर एकदम से हैरान हो गई उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और अंकित हैरान होने का नाटक करने लगा वह एकदम से नूपुर की टांगों के बीच से हटके और बिस्तर पर बैठ गया उसके चेहरे पर एकदम डर के भाव आ गए थे ऐसा हुआ जानबूझकर कर रहा था और नूपुर भी एकदम से घबराकर बिस्तर पर पड़ी चादर को उठाकर अपने नंगे बदन को छुपाने की कोशिश कर रही थी।

सब कुछ नाटक के तहत चल रहा था राहुल और अंकित सब कुछ जानते थे नूपुर बिल्कुल अनजान थी वह तो एकदम से घबरा गई थी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि इस समय राहुल घर पर आ जाएगा। और वह कभी सोची नहीं थी कि उसका बेटा उसे इस हालत में किसी अजनबी के साथ दिखेगा अजनबी क्या उसके ही दोस्त के साथ दिखेगा यह देखकर उसके दिल पर क्या गुजर रही होगी यह सोचकर नूपुर एकदम से घबरा गई थी उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,, राहुल को यह सब देखकर गुस्सा होने का नाटक करना था वह अपनी मां के चेहरे पर डर के भाव को अच्छी तरह से देख रहा था और उसे यह सब देखकर मजा भी आ रहा था लेकिन मन में यही सोच रहा था कि यह उसकी वही मन है जिसने उसे वादा की थी किस तरह की हरकत में किसी और के साथ कभी सपने में भी करने की नहीं सोच सकती लेकिन आज उसकी आंखों के सामने सब कुछ साफ वह अपने वादे से मुकर गई थी अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए उसके ही दोस्त का सहारा ले रही थी शायद इसलिए कि उसका लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा था जिसे राहुल अपनी आंखों से देख चुका था और उसे भी इस बात का एहसास था कि उसकी मां को उससे भी ज्यादा सुख वह दे रहा था फिर भी नाटक करते हुए राहुल जोर से चिल्लाया।

यह सब क्या हो रहा है,,,,?
(इतना के करवा कभी अपनी मां की तरफ देखा है तो कभी अंकित की तरफ दोनों शर्मसार होकर अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए थे किसी को कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी और वैसे भी अंकित को ऐसा ही जताना था कि जैसे वह पकड़ा गया हो और पकड़े जाने पर ऐसी हालत में एक मर्द की क्या दशा होती है बस वही उसे यहां पर दर्शाना था,,,,, नूपुर के तो चेहरे का रंग ही उड़ गया था वह चादर में अपना मुंह छुपा ली थी। यह सब देख कर राहुल फिर से जोर से बोला,,,,)

यह क्या हो रहा है मम्मी मेरी पीठ पीछे तुम यह सब करती हो मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है,,, मुझे तो ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं कोई सपना देख रहा हूं क्योंकि हकीकत की तो मुझे उम्मीद ही नहीं थी कि तुम इस तरह से गिर जाओगी,,,,,। और टू अंकित तू तो मेरा सबसे अच्छा दोस्त था ना तूने दोस्त की पीठ पीछे ही यह कांड कर डाला मैं तो तुझे अपना भाई जैसा समझता था मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि तू इस तरह की हरकत करेगा मेरे ही घर में घुसकर अपने ही दोस्त की मां के साथ इस तरह का व्यवहार करेगा। और मम्मी तुम यह तुमने क्या कर डाला,,,, अगर यह सब पापा को पता चलेगा तो क्या होगा कुछ सोची हो अगर यह सब बातें बाहर पहुंच गई तो समझ में क्या इज्जत रह जाएगी इस बारे में कभी सोची हो।

नहीं ऐसा कभी नहीं होगा यह सब बातें बाहर नहीं जाएंगे मुझ पर भरोसा कर राहुल,,,।

हरामजादे तू तो चुप ही रहे,,,,, तुझे शर्म नहीं आई अपनी मां जैसी औरत के साथ इस तरह का व्यवहार करते हुए,,,,, अरे यही सब करना था तो अपनी मां के साथ कर लिया होता,, वह तो अकेली थी ना उनको तो यह सबकी ज्यादा जरूरत थी,,,,,।

यह क्या कह रहा है राहुल को तू बात को समझने की कोशिश कर इस तरह से चिल्ला मत कोई सुन लेगा तो गजब होजाएगा,,,।

गजब क्या हो जाएगा गजब तो हो गया है,,,,। मैं जिसे सीधी-सादी औरत समझता था वह खुलकर यहां मजा ले रही है मेरे घर से बाहर जाती ही वैसा हो रहा है इसका मतलब यह सब पहले भी हो चुका था है ना मम्मी,,,,,,।
(इतना सुनकर नूपुर अपना मुंह चादर में छुपा कर रोने लगी उसके सिसकने की आवाज कमरे में गूंज रही थी,,,,, वह इस बात से रो रही थी कि वह कभी सोची नहीं थी कि वह अपने बेटे को छोड़कर किसी दूसरे मर्द के साथ अपनी जवानी की प्यास बुझाएगी,,,, वह इस बात से रो रही थी कि उसके बेटे को सब कुछ पता चल गया था कि उसकी मां अपनी प्यास बुझाने के लिए किसी भी मर्द का सहारा ले सकती है। जबकि राहुल नाटक कर रहा था और इस बात का उसे बिल्कुल भी पता नहीं था क्योंकि वह नहीं जानती थी कि अंकित अपनी आंखों से दोनों की काम लीला को देख चुका है,,, अगर इस बात का उसे पता होता तो यह सब की नौबत ही नहीं आती। नूपुर रोए जा रही थी यह देखकर अंकित राहुल को समझाने की कोशिश करता हुआ बोला,,,)

इसमें आंटी की कोई गलती नहीं है राहुल तो समझने की कोशिश कर।

हां इसमें तुम दोनों की कोई गलती नहीं है इसमें तो सारी गलती मेरी ही है यही कहना चाहता है ना तो तुम दोनों मेरे पीठ पीछे रंगरलिया मना रहे हो,,, और सारी गलती मेरी है हां मेरी ही गलती है कि मैं तुम दोनों को यह सब करने का मौका दे दिया मुझे घर से बाहर जाना ही नहीं चाहिए था तुझे मैं अपने घर पर ले आया यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी तुझे घर पर लाना ही नहीं चाहिए था तुझे मैं घर पर लाया अपनी मां से मिलाया यही मुझसे गलती हो गई और यही मेरी गलती भी है,,,,।

सब गलती तेरी ही है राहुल,,,, (अंकित इस तरह से बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया एकदम नंगा वह अपने बदन को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था उसका लंड अभी भी अकड़ में था जिस पर बार-बार राहुल की नजर चली जा रही थी और वह अंकित के लड को देखकर मन ही मन जल भी रहा था,,, अंकित की बात सुनकर राहुल बोला)

मेरी गलती पागल हो गया है क्या तू,,,?

हां तेरी ही गलती दिमाग को शांत कर ले तब मैं तुझे बताता हूं कि तेरी गलती कहां पर है,,,,

यह सब तु क्या बकवास कर रहा है,,,,।

मैं बकवास नहीं कर रहा हूं राहुल बिल्कुल सच कह रहा हूं,,,, (ऐसा कहते हुए अनूपपुर की तरफ देख ले रहा था नूपुर जो अभी भी चादर से अपना मुंह ढके हुए थी और रो रही थी,,,,, वह धीरे से राहुल को आंख मारता हुआ बोला,,,)

तो पूरी तरह से जवान हो चुका है हो चुका है कि नहीं सच-सच बताना,,,,।

हां हो चुका हूं तो,,,,,।

मेरी पूरी बात तो सुन अब तुझे इतना तो समझ में आता ही होगा कि मर्द और औरत के बीच किस तरह का रिश्ता होता है,,,,।

चलिए अभी मैं जानता हूं लेकिन इस तरह की बात करके क्या फायदा,,,।

अरे बेवकूफ यही तो मैं बताना चाहता हूं,,,, तेरी मम्मी कितनी खूबसूरत है इस बात से तू अनजान नहीं है और तू यह भी जानता होगा कि,,, तेरी मां को देखकर ना जाने कितने लड़कों का लंड खड़ा हो जाता होगा,,,,।
(अंकित जानबूझकर यह सब बातें कर रहा था और नूपुर चादर में मुंह छुपाए अंकित की बात को सुनकर हैरान थी कि यह क्या बकवास कर रहा है राहुल के साथ और उसकी बात सुनकर राहुल भी बोला)

यह क्या बकवास है अंकित तू इस तरह से कैसे मुझसे बात कर सकता है,,,।

मैं तुझे बताता हूं मैं सिर्फ तुमसे पूछ रहा हूं यह एकदम सहज है सच-सच बताना ऐसा होता है कि नहीं।

हां होता ही होगा मुझे क्या मालूम,,,।

और मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अपनी मां को देख कर तेरा भी लंड खड़ा हो जाता होगा कभी कबार हां या ना में जवाब देना ज्यादा कुछ मत बोलना,,,।

हां,,,,,, (राहुल अपनी मां की तरफ देखा हुआ बोला जो की चादर में मुंह छुपाए हुए अभी भी बैठी हुई थी और रो रही थी,,, राहुल का जवाब सुनकर अंकित उसे आंख मारते हुए बोला)

बस यही तो मैं कहना चाहता था तेरी मां अभी भी पूरी तरह से जवान है और तू अपने पापा को देख क्या तुझे लगता है कि तेरे पापा तेरी मम्मी की प्यास को बुझा सकते होंगे उनकी जरूरत को पूरी कर सकते होंगे,,,।
(इतना सुनकर एकदम से बोल पड़ी)

यह तु क्या कह रहा है अंकित,,,!

तुम चुप रहो आंटी तुम कुछ मत बोलो मैं सबको समझा देता हूं तुम्हें कुछ बोलने की जरूरत नहीं है।

लेकिन अंकित यह तो क्या बकवास कर रहा है,,,, मैं भला यह सब कैसे बोल सकता हूं।

तुझे बोलना पड़ेगा राहुल क्योंकि तू अब बड़ा हो चुका है जवान हो चुका है बिल्कुल मेरी तरह एक औरत के मन को तू समझता होगा अगर नहीं समझता होगा तो तो सबसे बड़ा बेवकूफ है,,,, इस उम्र में औरतों की ख्वाहिश कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है और मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि आंटी अंकल से बिल्कुल भी खुश नहीं रहती और अंकल कभी कोशिश भी नहीं करते होंगे कि आंटी को खुश कर सके आखिरकार उम्र का तकाजा ही ऐसा है क्यों आंटी जी अंकल के साथ कभी हम बिस्तर होती हो,,(यह सुनकर नूपुर को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोल कभी अपने बेटे की तरफ तो कभी अंकित की तरफ देख रही थी यह देखकर अंकित बोला) घबराओ मत आंटी बस सच बताओ हां या ना में जवाब दो,,,।

नहीं,,,(कितना का कर हुआ फिर से अपनी नजर को नीचे झुका ली यह देखकर राहुल अंकित की तरफ देखने लगा पर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

देख लिया सुन लिया अपनी मम्मी का जवाब अरे पागल इस उम्र में औरत को मर्द की ज्यादा जरूरत होती है और इस उम्र में तेरे पिताजी तेरी मम्मी के साथ कुछ नहीं कर सकते हैं ऐसे में औरत भला क्या करेगी,,,,।

तेरे कहने का मतलब है कि अगर आदमी खुश ना कर सके तो औरत किसी को भी घर मत बुलाकर मजा ले सकती है,,, (यह बात राहुल गुस्से में बोल रहा था और उसकी बात सुनकर अंकित बोला)

अरे बेवकूफ तू जरा सा ध्यान दिया होता तो ऐसी नौबत ही ना आती,,,,।

क्या मतलब,,,,?

मेरा मतलब साफ है अब तुझे बुरा लगेगा अच्छा यह मैं नहीं कह सकता लेकिन बात एकदम खरी है,,,।

क्या,,,?

अगर तू अपनी मां का ध्यान दिया होता उसकी जरूरत को पूरा करता है तो शायद मेरी जगह इस समय तू बिस्तर पर होता,,,,।
(इतना सुनकर राहुल एकदम हैरान होने का नाटक करने लगा और यही हाल नूपुर का भी था दोनों मां बेटे एक दूसरे को देख रहे थे दोनों नाटक कर रहे थे राहुल अपनी तरफ से नाटक कर रहा था और नूपुर अपनी तरफ से नाटक कर रही थी इस बात को अंकित अच्छी तरह से जानता था एक दूसरे को देखने के बाद नूपुर बोली)

यह तु क्या कह रहा है अंकित,,,? (यही बात राहुल ने भी बोला)

तू पागल हो गया क्या भला एक बेटा अपनी मां के साथ,,,,,

क्यों नहीं इस उम्र में हम लड़कों को क्या चाहिए,,,, बुर,,,,,, और इस समय तेरे घर में तेरी जरूरत कौन पूरा कर सकता है,,,,,, तेरी मां,,,,,, तुझे बुर चाहिए और तेरी मां को लंड चाहिए दोनों एक दूसरे की जरूरत पूरी कर सकते हैं,,,,।
(मां बेटे दोनों एक दूसरे को देखकर हैरान थे दोनों एक दूसरे को आश्चर्य से देख रहे थे तभी राहुल बोला)

तू सच में पागल हो गया है क्या तू भी अपने घर में ऐसा ही करता है क्या,,,?

देख राहुल अगर सच में तेरी मां की तरह प्यासी अगर मेरी मां होती तो मैं भी यही करता लेकिन मेरी किस्मत खराब है कि मेरी मां इस तरह की हरकत नहीं करती।(अंकित की बात सुनकर राहुल जानबूझकर नाटक करते हुए बोला)

नहीं नहीं मुझसे ऐसा नहीं होगा,,,,।

चल रहने दे अपने आप को झूठा दिलासा मत दे मैं जानता हूं कि इस समय अपनी मां को नंगी देखकर तेरा भी मन उसे चोदने को कर रहा है,,,,।

नहीं यह झूठ है,,,, मैं भला ऐसा कैसे सोच सकता हूं,,,।

(राहुल की बात सुनकर अंकित मुस्कुरा था उसकी तरफ आगे बढ़ा नूपुर दोनों को देख रही थी और तभी अंकित अपना हाथ आगे बढ़कर पेट के ऊपर से ही राहुल के लंड को पकड़ लिया जो कि इस समय खड़ा था और पेट में तंबू बनाया हुआ था अंकित की हरकत पर राहुल बोला,,,)

यह क्या कर रहा है तू,,,,,।

मैं बता रहा हूं कि तेरा मन इस समय क्या कर रहा है,,,, (एकदम से उसके पेंट के तंबू को अंगूठे और उंगली से पड़कर उसे तंबू को हिलाते हुए नूपुर की तरफ देखा और बोला,,,) देख रही हो आंटी तुम्हारे बेटे को तुम्हें नंगी देखकर इसका भी लंड खड़ा हो गया है तो बताओ तुम क्या कह सकती हो,,,,,।
(नूपुर बड़े ध्यान से राहुल के पेट में बने तंबू को देख रही थी और अंकित को देख रही थी वैसे तो वह अपने बेटे से रोज चुदवाती थी लेकिन अंकित के सामने वह अनजान बनने की कोशिश कर रही थी क्योंकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि अंकित को यह सब नहीं मालूम है लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी अंकित फिर से अपना पासा फेंकते हुए बोला,,,)

अच्छा राहुल तू मेरा अच्छा दोस्त है लेकिन जो कुछ भी तूने इस समय कमरे में देखा है क्या तू अपने पापा को बता देगा,,,,,।

जरूर बता दूंगा मैं पापा से कुछ भी नहीं छुपाऊंगा कि तुम्हारे पीठ पीछे मम्मी यह सब करती है,,,।

नहीं नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,,,,।

नहीं मैं तो बता दूंगा मम्मी क्योंकि तुम अच्छी मम्मी नहीं हो,,,,,,
(राम की बात सुनकर अंकित उसे समझाने की कोशिश करता हुआ बोला,,,)

यह क्या कर रहा है राहुल अभी-अभी तो तूने बोला कि तू बड़ा हो गया जवान हो गया है और तू इतनी नादानी वाली बात कर रहा है यह सब जो तूने देखा अपने पापा को बता देगा तो फिर क्या तेरी मां इस घर में रह पाएगी कभी खुशी से रह पाएगी,,,।

चाहे जो भी हो लेकिन मैं बता दूंगा,,,,,,।

अच्छा एक बात बता तेरा तो खड़ा हो गया अपनी मां को नंगी देखकर अगर तुझे मौका मिल जाए अपनी मां के ऊपर चढ़ने का उसे चोदने का तो क्या फिर भी बता देगा,,,,,।
(अंकित की बात सुनकर राहुल कुछ देर तक सोचने लगा वह कभी अपनी मां की तरफ तो कभी अंकित की तरफ देख रहा था,,,,, यह देखकर अंकित बोला)

ज्यादा सोच विचार मत कर ऐसा मौका बार-बार नहीं आता सच बता क्या तू अपनी मां को चोदना चाहेगा,,, (अंकित राहुल को आंख मारते हुए बोला और वह भी ज्यादा देर ना लगाते हुए बोला)

क्या मम्मी ऐसा करने देगी,,,,।(अपनी मां की तरफ देखते हुए राहुल बोला)

बिल्कुल करने देगी तो अगर अपने पापा को यह सब नहीं बताया तो तेरी मम्मी भी तेरे लिए अपनी टांगें खोल देगी,,,, और तू ही सोच तेरा भी जुगाड़ हो जाएगा और तेरी मां का भी जुगाड़ हो जाएगा तुम दोनों जब चाहे तब एक दूसरे की प्यास बुझा सकते हो और इस बात का किसी को कानों कान खबर तक नहीं पड़ेगी चार दिवारी के अंदर तुम दोनों पति-पत्नी की तरह रहोगे तेरे पापा को भी नहीं पता चलेगा,,,,,।

(इतना सुनकर राहुल के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह अपनी मां की तरफ देखने का वैसे तो दोनों के बीच पहले से ही सब कुछ चल रहा था लेकिन इस समय दोनों अपनी अपनी तरफ से अनजान बनने का नाटक कर रहे थे और नूपुर हैरान थी,,,, इसलिए अंकित नूपुर की तरफ आगे बढ़ा और बोला,,,)

क्या सोच रही हो आंटी देख नहीं रही हो तुम्हें नंगी देखकर तुम्हारे बेटे का लंड खड़ा हो गया है क्योंकि साथ ही सारा है कि अगर मौका मिले तो यह तुम्हारी चुदाई कर सकता है और अगर ऐसा हो गया तो घर में ही तुम्हारे लिए जुगाड़ बन जाएगा,,,,,।
(इस पल नूपुर के लिए हां कहना कोई ज्यादा बड़ी बात नहीं थी वलेकिन वह इस तरह से अंकित के सामने खुलकर हां कहने में हिचकीचा रही थी। वह कभी अपने बेटे को तो कभी अंकित को देख रही थी यह देखकर अंकित फिर से बोला,,,)

देखो आंटी जो काम तो मेरे साथ कर रही हो वहीं काम तुम अपने बेटे के साथ भी कर सकतीहो,,, बस टांगे खोलकर लंड ही तो अंदर बाहर करवाना है।(अंकित की बात सुनकर नूपुर के बदन में अजीब सी लहर उठ रही थी वह आश्चर्य से अपने बेटे की तरफ देख रही थी राहुल की अपनी मां की तरफ देख रहा था यह देखकर अंकित अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और बोला)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो आंटी हम जैसे लड़कों को सिर्फ बुर चाहिए और इस समय तुम्हारे बेटे के लिए तुम्हारी बुर से अच्छी बुर हो ही नहीं सकती,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित राहुल की तरफ आगे बढ़ने लगा और वह पूरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए अपने हाथों से ही राहुल के पेंट को खोलने लगा अंकित की हरकत देखकर राहुल के तन्मय में अजीत की हलचल होने लगी देखते ही देखते अंकित उसके पेट को उसके घुटने तक खींच दिया वाकई में उसका लंड खड़ा हो गया था,,,,,, और अंकित अपने हाथ से उसके लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करके हिलाते हुए बोला,,,) आंटी तुम्हारे बेटे का लंड तैयार हो चुका है तुम्हारी बुर में घुसने के लिए,,,,(यह सुनकर नूपुर शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली और अंकित इस तरह से घुटनों के बल फिर से बिस्तर पर चढ़ गया और राहुल की मां की तरफ आगे बढ़ने लगा देखते ही देखते वह एकदम से राहुल की मां को अपनी बाहों में भरकर बिस्तर पर लेट गया और उसके ऊपर चढ़कर उसके होठों का रसपान करने लगा अपने बेटे के सामने नूपुर को शर्म महसूस हो रही थी लेकिन अंकित की हरकत उसके बदन में बेशर्मी का रस घोल रहा था वह मस्त हो रही थी,,,, अंकित उसके लाल लाल होठों का रसपान करते हुए उसकी चूची को दबा रहा था और फिर उसके एक तरफ लुढ़क गया और उसकी चूची को हाथ में पकड़ कर दबाते हुए राहुल को इशारा करके अपने पास आने के लिए बोला,,,,, नूपुर शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली थी अपनी मां की बंद आंखों को देखकर राहुल भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया और अपनी मां के बगल में आकर लेट गया वह धीरे से अपनी मां की चूची पर हाथ रख तो उसकी मां अपनी आंखों को खोलकर उसे देखने लगी और फिर से अपनी आंखों को बंद कर ले यह इशारा था कि वह अंकित के सामने अब कुछ भी कर सकता है,,,, अंकित राहुल को दिखाते हुए उसकी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया फिर से देखकर राहुल भी दूसरी चूची को अपने मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया यह देखकर अंकित बोला,,,,)

यह हुई ना बात अब तो अपनी मां को रात दिन खुश करते रहना,,,(ऐसा कहते हुए फिर से उसकी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसकी मोटी मोटी जांघों को पकड़कर सहलाने लगा,,,, राहुल बहुत खुश नजर आ रहा था क्योंकि वह आज अपने दोस्त के साथ मिलकर अपनी मां की चुदाई करने जा रहा था एक नया सुख एक नया अनुभव को महसूस करने जा रहा था और इस अनुभव को महसूस करने के लिए तीनों एकदम ललाईत थे,,,,, कुछ देर राहुल की मां की चूची को पीने के बाद अंकित धीरे-धीरे फिर से उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच गया और उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,,, और राहुल अपनी मां के सिरहाने घुटनों के बल बैठकर अपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था यह देखकर नूपुर अपने आप से ही अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के लंड को पकड़ ली और उसे हिलने लगी,,,, अंकित जानता था कि यह सब उन दोनों के लिए नया बिल्कुल भी नहीं था वह दोनों पक्के खिलाड़ी थे,,, देखते ही देखते नूपुर धीरे से अपना सर उठा कर अपने बेटे के लंड को मुंह में भर ली और उसे चूसना शुरू कर दी वैसे तो अपने बेटे को रोज ही इस तरह का सुख प्रदान करते थे लेकिन आज वह अपने बेटे को कुछ ज्यादा ही खुश कर देना चाहती थी क्योंकि आज वह उसकी उम्मीदों पर खड़ी नहीं उतरी थी क्योंकि वह कभी सोचा नहीं थी कि उसका बेटा उसे ही हालत में दिखेगा इसलिए वह अपनी नजरों में थोड़ा शर्मिंदगी का एहसास कर रही थी इसलिए अपने बेटे को की जान से मजा दे रही थी,,,,

राहुल मस्त होने लगा था अपनी आंखों को बंद करके अपनी कमर पर हाथ रखकर वह इस एहसास में पूरी तरह से डूब चुका था,,,, अंकित यह सब देखकर और भी ज्यादा उत्तेजित होकर उसकी बुर को चाट रहा था पागलों की तरह उसे पर अपनी जीभ को घुमा रहा था अपनी उंगली डालकर अंदर बाहर कर रहा था,,,, नूपुर को दोनों तरफ से आनंद ही आनंद प्राप्त हो रहा था लेकिन इस समय उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि ज्यादा मजा अंकित ही दे रहा था उसकी हरकतें पूरी तरह से उसे काम विभोर कर दे रही थी,,,, वह मस्त हो चुकी थी और रह कर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी जिसे अंकित अपनी दोनों हाथों से पकड़ कर उसे काबू में किए हुए था रहे रह कर वह अपनी नाक के आगे वाले भाग को भी उसकी बुर में डालकर रगड़ रहा था जिससे नूपुर का मजा दुगना हो जा रहा था,,,,,, अंकित एक साथ अपनी दो उंगलियों को उसकी बुर में डालकर बड़ी तेजी से अंदर बाहर कर रहा था वह जानता था कि इस तरह से नूपुर झड़ जाएगी और ऐसा ही हो रहा था उसके बदन की अकड़ बढ़ने लगी थी वह अपने बेटे के लंड को पूरा अपने मुंह में लेकर चूस रही थी और अंकित की उंगलियों का मजा लूट रही थी,,, फिर देखते ही देखते हो एकदम से अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा दी और उसकी बुर से मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी जो की सीधा अंकित के मुंह में गिर रही थी अंकित पूरी तरह से मस्त होकर नूपुर के मदन रस को चाट रहा था पी रहा था गले के अंदर उतर रहा था और फिर धीरे-धीरे बस शांत होने लगी लेकिन इस दौरान भी वह अपने बेटे के लंड को मुंह में भरी हुईथी,,, यह सब देख कर अंकित वह भी घुटनों के पास नूपुर के सिरहाने पहुंच गया और अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसके चेहरे पर रगड़ने लगा उसके गरम सुपाड़े से उसके गोरे-गोरे गाल की मालिश करने लगा। यह एहसास नूपुर को मदहोश कर रहा था अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसने में इतना मजा नहीं आ रहा था जितना कि अंकित की हरकत से आ रहा था,,,,

वह पागल हो रही थी मस्त हो रही थी,,,, मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रही थी अंकित अपनी कला बजिया से नूपुर की मां को पूरी तरह से अपने काबू में करने की कोशिश कर रहा था भले हुआ इस समय दो मर्दों के साथ थी लेकिन वह इस कोशिश में पूरी तरह से लगा हुआ था कि उसकी मां को उसकी तरफ से ही ज्यादा मजा आए और ऐसा हो भी रहा था अंकित अपने लंड को छोर से पकड़कर हथौड़े की तरह अपने सुपाड़े को उसके गाल पर पटक रहा था उसके चेहरे पर रगड़ रहा था,,,, हालांकि इससे नूपुर को हल्की चोट तो महसूस हो रही थी लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था,,, यह सब देखकर राहुल के भी तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अंकित की हरकत को देख रहा था उसके मोटे-मोटे लंड को देख रहा था और महसूस कर रहा था कि उसकी मां एकदम से गदगद हो जा रही थी जब जब उसके लंड का सुपाड़ा उसके गाल से रगड़ खाता था। अंकित अपने लंड के सुपाडे को उसके लाल-लाल होठों से रगड़ने लगा तो नूपुर अंकित की तरफ देखने लगी और धीरे से अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल दी और अंकित के लंड को अपने मुंह में भर ली ,,,,, और से चूसना शुरू कर दी अंकित पागल हुआ जा रहा था उसके बेटे के सामने इस तरह की हरकत करते हुए उसे और भी ज्यादा उत्तेजना का एहसास हो रहा था और वह एक हाथ से उसकी बड़ी-बड़ी चूची को दबा रहा था यही हरकत राहुल भी कर रहा था और अंकित की तरफ देख रहा था दोनों की आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था दोनों एकदम मस्त हो चुके थे,,,,, कुछ देर तक लंड चुस्वाने के बाद,,,, अंकित धीरे से अपने लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाला और फिर पीठ के बल लेट गया,,,, और नूपुर से बोला)

अब ऊपर आ जाओ मेरी जान,,,,(इतना सुनकर नूपुर उठकर बैठने लगी और उसके ऊपर आने लगी तो वह फिर से बोला,,,) ऐसे नहीं गांड मेरी ऊपर रखो,,,,(इतना सुनकर वह समझ गई कि उसे क्या करना है वह तुरंत अपनी गांड को अंकित के मुंह के ऊपर रख दी और उनकी दोनों हाथों से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को पकड़ कर पहले जोर-जोर से चपत लगाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उसकी बेटे की आंखों के सामने ही उसकी मां की गांड को लाल कर दिया,,,,, और फिर उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया राहुल यह सब अपनी आंखों से देख रहा था वह भी मत हुआ जा रहा था वह अपनी मां की गांड को धीरे-धीरे सहला रहा था और बार-बार उसकी कमर पर उसकी पीठ पर चुंबन कर ले रहा था और नूपुर अंकित के लंड को फिर से मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी थी,,, धीरे से राहुल फिर से नीचे की तरफ गया और घुटनों के बल बैठकर अपने लंड को अपनी मां के चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया अपने बेटे को खुश करने के लिए वह धीरे से अंकित के लंड को बाहर निकाल और अपने बेटे के लंड को चूसने लगी और बारी-बारी से यह मजा वह दोनों को दे रही थी,,,,, लेकिन राहुल की हालत खराब हो रही थी वह अपने आप को ज्यादा देर तक रोक नहीं पाया और उसके लंड से पिचकारी निकल गई,,,,,, वह झड़ने लगा अपनी मां के मुंह के अंदर ही,,,,, उसका पानी निकल चुका था लेकिन अंकित अभी भी बरकरार था काफी देर से वह इसी स्थिति में था और यह देखकर राहुल भी हैरान था,,,,, झड़ जाने के बाद वह गहरी सांस लेता हुआ एक किनारे पर बैठ गया और दोनों की काम लीला को अपनी आंखों से देखने लगा यह देखकर अंकित जानबूझकर बोला,,,)

क्या राहुल इतनी जल्दी झड़ गया तुझे पता है ना तेरी मम्मी को जमकर चुदाई की जरूरत है ऐसे ही रहा तो फिर कैसे काम चलेगा मुझे ही बार-बार आना पड़ेगा,,,,(यह सुनकर राहुल शर्मिंदा हो गया और नूपुर शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली वह फिर से अंकित के लंड को चूसना शुरू कर दी थी,,,,, अंकित नूपुर की गांड पर जोर से चपत लगाता हुआ बोला,,,)

बस मेरी रानी अब उठ जाओ अब तुम्हारी चुदाई का समय आ चुका है राहुल का तो खड़ा होने में समय लगेगा,,,, तब तक नहीं तुम्हारी चुदाई करुं,,,,।(अंकित की बात सुनकर राहुल की मां धीरे से उसके ऊपर से उठकर बैठ गई वह शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी जैसा अंकित कह रहा था वैसा ही कर रही थी देखते ही देखते वह अपने घुटनों को अंकित के कमर के इर्द-गिर्द रखकर धीरे से एक हाथ नीचे की तरफ ले गई और अंकित के लंड को पकड़कर उसे अपने गुलाबी छेद से सटा दी और अपनी भारी भरकम गांड का वजन उसके लंड पर धीरे-धीरे बढ़ने लगा जिसकी वजह से उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में सरकना शुरू कर दिया था,,, और देखते ही देखते नूपुर अंकित के लंड पर पूरी तरह से बैठ गई और उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में खो गया,,,, यह देखकर राहुल हैरान हो गया,,,, क्योंकि राहुल के लंड से अंकित का लंड 2 इंच ज्यादा लंबा था और मोटा भी था लेकिन उसकी मां बड़े आराम से उसे अपने अंदर ले ली थी। देखते ही देखते वह धीरे से अपनी गांड को ऊपर उठाती और फिर नीचे गिरा देती ऐसा करते हुए अपनी मां को देखकर उत्तेजित होने लगा था और अंकित उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर उसका जोश बढ़ाते हुए बोला,,,)

बस मेरी रानी ऐसे ही बहुत मजा आ रहा है तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,, अब देखना तुम्हारा बेटा भी रोज तुम्हारी चुदाई करेगा,,,,, क्यों राहुल अब चोदेगा ना अपनी मां को रोज,,,,(इतना सुनकर राहुल शर्म के मारे अपनी नज़रें नीचे झुका लिया यह देखकर अंकित बोला) ऐसे शर्माएगा तो कैसे काम चलेगा तुझे मालूम होना चाहिए कि तेरी मां मत चुदवाती है उसे रोज सुबह शाम लंड चाहिए अब यह जिम्मेदारी तेरे पर है,,,,,,आहहहहहह आहहहहह देख राहुल कितना मजा आ रहा है तेरी मां कितनी रंडी की तरह अपनी गांड पटक रही है। आहहहह आहहहहह आहहहहह ऐसे ही मेरी रानी।

(इस तरह के शब्दों को सुनकर और अपनी मां के लिए इस तरह की बात अंकित के मुंह से सुनकर राहुल के तन-बाद में अजीब सी हलचल हो रही थी वह उत्तेजित हो रहा था फिर से उसका लंड खड़ा हो रहा था वैसे तो कोई और समय होता है तो इस तरह की बातें किसी और के मुंह से अपनी मां के लिए सुनकर वह उसे मारने के लिए तैयार हो जाता लेकिन इस समय महोली कुछ ऐसा था कि राहुल के तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था उसे मजा आ रहा था खास करके अपनी मां के लिए अंकित के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर तो उसकी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी। और वह फिर से बिस्तर पर खड़ा हो गया था और अपनी मां के सामने आकर कमर पर हाथ रखकर वह अपनी मां को देख रहा था उसकी मां समझ गई कि उसके बेटे को क्या चाहिए इसलिए वह धीरे से अपने मुंह को आगे बढ़ाकर अपने बेटे के लंड को मुंह में ले ली और चूसना शुरू कर दी,,,,, अंकित उसकी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर दशहरे आम की तरह दबाता हुआ नीचे से भी अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रहा था जिससे हर बार अंकित का लंड उसके बच्चेदानी से टकरा जा रहा था और वह एकदम से मस्त हो जा रही थी,,,,,, बिस्तर पर घमासान मचा हुआ था नूपुर अपने बेटे और बेटे के दोस्त के साथ मिलकर अपनी जवानी की प्यास बुझाने में लगी हुई थी,,,, राहुल की मां को खुश करने में अंकित बिल्कुल भी कसर बाकी नहीं रख रहा था,,,, एक बार झड़ जाने के बाद उसका लंड दोबारा झड़ने के लिए तैयारी नहीं था वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था झटका लगा रहा था और राहुल की मां भी जोर-जोर से अपनी गांड पटक रही थी फिर भी उसका लंड खड़ा का खड़ा था लेकिन राहुल का लंड फिर से खड़ा हो चुका था,,,,, यह देखकर अंकित राहुल की मां से बोला,,,)

रुक जाओ मेरी रानी अब तुम्हारे बेटे की बारी है मैं भी तो देखो एक बेटा अपनी मां को चोदता है तो कैसा दिखाई देता है,,,,,(अंकित के मुंह से ऐसा सुनकर नूपुर अपने मन में ही बोल रही थी कि ऐसा क्यों कर रहा है मुझे तेरे साथ ज्यादा मजा आता है मेरे मजा को किरकिरा मत कर लेकिन ऐसा हुआ खुलकर नहीं बोल सकती थी इसलिए धीरे से अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा ले जिससे अंकित का लंड उसकी बुर से बाहर निकल गया,,,,, अपनी बारी का नाम सुनकर राहुल के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे,,,,, और वह खुशी के मारे अपनी मां के लाल-लाल होठों को चूसना शुरू कर दिया था और यही मौका देखकर अंकित अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया था और अपने लंड को उसी समय नूपुर के होठों पर रगड़ना शुरू कर दिया था जिससे उसके लंड का सुपाड़ा राहुल के भी होठों से रगड़ खा रहा था उसकी गर्मी राहुल को और ज्यादा मदहोश कर रही थी और फिर अचानक ही राहुल अपने प्यासे होठों को खोल दिया पर मौका देखकर अंकित अपने लंड के सुपाड़े को राहुल के मुंह में डाल दिया,,,, यह देखकर नूपुर एकदम से हैरान हो गई और उसकी हैरानी तब बढ़ गई जब उसका बेटा बड़े आराम से अंकित के लंड को चूसना शुरू कर दिया क्योंकि राहुल का भी आकर्षक अंकित के लंड की तरफ कुछ ज्यादा ही बढ़ चुका था वह उसे पकड़ना चाहता था दबाना चाहता था उसे मुंह में लेकर चूसना चाहता था ऐसा वह पहले कभी नहीं किया था और नहीं कभी ऐसा उसका करने का मन करता था लेकिन अंकित के लंड को देखकर उसके मन में अजीब सी अभिलाषा जाग गई थी और अपनी वही अभिलाषा को इस समय राहुल पूरी कर रहा था,,,, अंकित के साथ भी ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था लेकिन इस समय उसे मजा आ रहा था राहुल जिस तरह से उसके लंड को चूस रहा था वह पूरी तरह से गदगद हुआ जा रहा था और फिर और ज्यादा मजा को बढ़ाने के लिए वह राहुल के मुंह में से लंड को बाहर निकाल कर सीधा नूपुर के मुंह में डाल दे रहा था नूपुर भी उसके लंड का स्वागत करते हुए अपने लाल-लाल होठों को खोल दे रही थी ऐसा वह बारी से कर रहा था मां बेटे दोनों मजे लेकर उसके लंड को चुस रहे थे। कुछ देर इसी तरह से मजा लेने के बाद अंकित ही नूपुर को लेट जाने के लिए बोला और नूपुर की पीठ के बल लेट गई अपनी दोनों टांगें खोलकर,,,,,, यह देखकर राहुल घुटनों के बल बैठकर अपनी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया और अंकित के मन में न जाने क्या सुझी,,,, वह सीधा राहुल के पीछे पहुंच गया और उसकी गांड को दोनों हाथों से थाम लिया,,,, और ढेर सारा थुक अपने लंड पर चुपडने लगा,,,,, और उसकी गांड के छेद पर भी ठोक उंगली से लगने लगा जब वह थूक लगा रहा था तो राहुल को मजा आ रहा था उसके बदन में अजीब सी सरसराहट हो रही थी,,,,,।

इस बारे में नूपुर को कुछ मालूम ही नहीं था वह अपनी आंखों को बंद करके मजा ले रही थी। लेकिन राहुल को अंदेशा हो गया था कि अंकित क्या करना चाहता है लेकिन वह न जाने क्यों उसे रोक नहीं पा रहा था क्योंकि उसके बदन में मदहोशी छा चुकी थी मस्ती की लहर उठ रही थी,,,,, और अगले ही पल अंकित अपने मोटे सुपाड़े को उसकी गांड के छेद पर सटा दिया,,,,, राहुल एकदम से मचल उठा अंकित उसकी कमर पड़कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा थुक की चिकनाहट पाकर अंकित के लंड का सुपाड़ा धीरे-धीरे अंदर की तरफ सरकने लगा,,,,, ऐसा राहुल ने पहले कभी करवाया नहीं था इसलिए उसे दर्द हो रहा था उसके चेहरे के भाव बदल रहे थे लेकिन इस बीच लगातार वह अपनी मां की बुर की चटाई कर रहा था,,,,, अंकित अच्छी तरह से जानता था कितने जल्दी उसका सुपाड़ा उसकी गांड के छेद में घुसने वाला नहीं है इसलिए वह धीरे-धीरे बार-बार अपने थूक से उसे और ज्यादा चिकना बना रहा था। और अंकित की हरकत से राहुल का बदन थरथरा रहा था,,,, देखते ही देखते अंकित की मेहनत रंग ला रही थी और उसका मोटा सुपाड़ा काफी मशक्कत के बाद राहुल की गांड में प्रवेश कर चुका था,,,,, और फिर अंकित का हौसला बढ़ने लगा वह राहुल की कमर पड़कर एक बार फिर से जोर से धक्का मारा और उसका आधा लंड उसकी गांड के अंदर प्रवेश कर गया लेकिन राहुल दर्द से ठीक पड़ा उसकी चीखने की आवाज सुनकर नूपुर अपनी आंखों को खोलकर देखने लगी तो राहुल के चेहरे का अभाव पूरी तरह से बदल चुका था वह अपनी नजर पीछे की तरफ घूम कर देखी तो हैरान रह गई उसकी गांड के पीछे अंकित उसकी कमर पकड़ कर खड़ा था उसे समझने देने लगी कि अंकित यह क्या कर रहा है और वह एकदम से बोल पड़ी।

यह क्या कर रहा है अंकित,,,,,?

क्या करूं मेरी रानी तुम्हारे बेटे की गांड भी तुम्हारी जैसी खूबसूरत है मुझसे रहा नहीं गया,,,,,।
(अंकित का जवाब सुनकर वह राहुल की तरफ देखने लगी राहुल गहरी गहरी सांस ले रहा था उसका मुंह खुला हुआ था और अंकित देख देख आधा बचा लंड की उसकी गांड में ठेल दिया एक बार फिर से राहुल चेक पड़ा उसकी चीज की आवाज सुनकर नूपुर अंकित से बोली,,,)

इसकी गांड मत फाड़ देना,,,,, तू तो सच में बहुत हारामी है मेरे बेटे की गांड मारने लगा मेरे सामने,,,,।

इसके बाद तुम्हारी बारी है मेरी जान,,,,, ।
(इतना सुनकर नूपुर एकदम से सहम गई क्योंकि आज तक उसने कभी गांड नहीं मरवाई थी और अपने बेटे की हालत देखकर उसका हौसला पस्त हो चुका था लेकिन थोड़ी देर में उसके बेटे के चेहरे का हाव-भाव बदलने लगा उसके चेहरे पर दर्द की जगह आनंद की रेखाएं साफ दिखाई देने लगी उसके चेहरे पर मस्ती की आभा नजर आने लगी,, अंकित उसकी कमर पकड़ कर उसकी गांड मार रहा था अब आराम से उसका लंड पर बाहर हो रहा था और यह सब देखकर नूपुर अपने घुटनों के बल बैठ गई और अपनी बुर को अपने बेटे के मुंह से सटा दी और उसका बेटा उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया और अंकित से गांड मारने का मजा लूटने लगा,,,, राहुल की गांड मारने का इरादा अंकित का बिल्कुल भी नहीं था लेकिन वह जानबूझकर ऐसा कर रहा था वह राहुल को उसकी मां की आंखों के सामने जरूर करना चाहता था ताकि भविष्य में वह कभी उसकी मां के बारे में कुछ बोल ना सके,,,,, लेकिन राहुल की गांड में लंड डालकर उसे भी बहुत मजा आ रहा था क्योंकि यह उसका पहला मौका था जब वह किसी लड़के की गांड में लंड डाला था,,,,, देखते ही देखते नूपुर भी घोड़ी बन गई और उसका बेटा राहुल पीछे से अपनी मां की बुर में लंड डालने लगा क्योंकि गांड में लंड डालने की औकात उसमें बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह अपने लंड की क्षमता को अच्छी तरह से जानता था और वह अपनी मां को छोड़ रहा था और पीछे अंकित उसकी गांड मार रहा था।

लेकिन इस बार भी राहुल ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया और झड़ने लगा और अंकित अभी भी बरकरार था,,,,,, अंकित का काम हो चुका था वह राहुल को उसकी मां के सामने ही जलील कर चुका था उसकी गांड मार कर इसलिए उसकी गांड में से धीरे से लंड को बाहर निकाला और उसे उसकी मां के ऊपर से हटा दिया और खुद पीछे जगह बना लिया नूपुर को लग रहा था कि अंकित उसकी गांड में लंड डाल देगा लेकिन इस बार उसने उसके गुलाबी छेद में ही डालकर उसकी प्यास को बुझाने की पूरी कोशिश करने लगा और धक्के पर धक्का लगाने लगा राहुल की मन एकदम मस्त हो चुकी थी उसे बहुत मजा आ रहा था अंकित से चुदवाने में उसके मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज गुंज रही थी,,,, और इस बार राहुल की मां के साथ-साथ अंकित का भी गरम लावा निकलने लगा और राहुल की मां की बुर को पूरी तरह से भर दिया,,,,, और उसके ऊपर पसर गया तीनों बिस्तर पर लेटे हुए थे। नूपुर के ऊपर अंकित लेटा हुआ था और राहुल एक तरफ लेटा हुआ था तीनों मत हो चुके थे राहुल को अपनी गांड के छेद में दर्द महसूस हो रहा था लेकिन जो मजा उसे मिला था वह कभी सोचा भी नहीं था,,,,, राहुल को खुश करने के लिए अंकित लेटे हुए ही अपना हाथ आगे बढ़ाया और राहुल के लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,)

क्यों मेरे राजा मजा आया ना,,,,,।
(इतना सुनकर वह मुस्कुराने लगा नूपुर को बड़ी जोर की पेशाब लगी हुई थी,,,,, वह धीरे से उठकर बैठ गई और चादर अपने बदन पर लपेट कर जाने ही वाले थे कि अंकित अपना हाथ आगे बढ़कर उसके बदन से चादर को खींच लिया और उसे नंगी कर दिया और बोला,,,,)

अब हम दोनों के सामने तुम्हें यह सब पहनने की जरूरत नहीं है,,,,, (इतना सुनकर नूपुर शर्मा गई और कमरे से बाहर निकल गई अंकित जानता था कि वह कहां गई है इसलिए वह राहुल से बोला)

तू भी चलेगा,,,,।

कहां,,,?

बाथरूम तेरी मां मुतने गई है,,,,, । चल बाथरूम में उसकी चुदाई करते हैं,,,,,।

(इतना सुनकर वह उठकर खड़ा हो गया अंकित भी बिस्तर से नीचे उतर गया और दोनों बाथरूम की तरफ जाने लगे बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था अंदर राहुल देखा तो सच में उसकी मां बैठकर पेशाब कर रही थी,,,,, वह दोनों भी अंदर घुस गए और दोनों भी पेशाब करने लगे तीनों एक साथ पेशाब कर रहे थे,,,, और जैसे ही नूपुर के साथ करके उठकर खड़ी हुई अंकित तुरंत उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया उसे बाहों में भरकर फिर से उसके होठों का रस पीने लगा फिर से उसकी गांड पर अपने हाथ घुमा कर उसे मदहोश करने लगा उसे उत्तेजित करने लगा देखते ही देखते हो फिर से उत्तेजित होने लगी और इस बार अंकित पहले की तरह उसे अपनी गोद में उठा लिया और उसकी बुर में लंड डालकर चोदना शुरू कर दिया यह देखकर राहुल एकदम हैरान हो गया था क्योंकि वह बड़े आराम से उसकी मां को गोद में लेकर उसकी चुदाई कर रहा था पीछे की जगह खाली थी यह देखकर अंकित राहुल को बोला,,,,)

पीछे से तू भी डाल,,,,,,
(इतना सुनकर वह अपनी मां के पीछे पहुंच गया और अपनी मां की गांड के छेद में लंड डालने की कोशिश करने लगा,,,,, अपनी मां का भूरे रंग का छेद देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और लंड का सुपड़ा उसे पर रगड़ रहा उसमें डालने की कोशिश कर रहा है और अंकित था कि जोर-जोर से गोद में उठाई हुई उसकी मां को चोद रहा था उसकी मां पूरी मस्ती के साथ मजा ले रही थी। लेकिन राहुल के लिए मंजिल तक पहुंचना बड़ा मुश्किल था वह अपने लंड के सुपारी को अपनी मां की गांड के छेद पर ही रगड़ रहा था और ऐसा करते हो इतना ज्यादा मदहोश हो गया था कि वह फिर से झड़ गया,,,,, लेकिन अंकित पूरा जोर लगाकर चुदाई कर रहा था अंकित की गोद में भी राहुल की मां पूरी तरह से मशाल जा रही थी अपनी भारी भरकम गांड को वह अपनी तरफ से भी कोशिश करके ऊपर उठा रही थी लेकिन ऐसा वह कर नहीं पा रही थी जो कुछ भी कर रहा था उनकी कोई कर रहा था जब राहुल चढ़ गया तो वह गोद में उठाए हुए ही बाथरूम की दीवार से उसकी मां को सत दिया और फिर से अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया और तब तक हिला था जब तक कि वह एक बार फिर से राहुल की मां का पानी नहीं निकाल दिया,,,,,,।

मां बेटे दोनों एकदम से थक चुके थे,,,,, नूपुर की हालत को देखकर अंकित अपने कपड़े पहनने लगा था,,,,,, आज जो मजा तीनों को मिला था इस बारे में तीनों ने कभी कल्पना भी नहीं किया था अंकित अपना काम करके जा चुका था।

नूपुर की चुदाई करके अंकित बहुत बड़ी विजय प्राप्त कर चुका था क्योंकि वह नूपुर की चुदाई नहीं किया था बल्कि नूपुर के साथ-साथ उसके बेटे की गांड मार लिया था,,, वह भी उसकी मां की आंखों के सामने ही जिसका विरोध उसकी मां ने बिल्कुल भी नहीं किया था बल्कि उसे पल का वह पूरी तरह से मजा लूटी थी उसे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था कि उसकी आंखों के सामने उसका बेटा गांड मरवा रहा था,,,, शायद एक मोटे और लंबे लंड की लाना जिस तरह से उसकी मां को थी उसी तरह से उस पल के लिए उसके बेटे के मन में भी वही लालच जाग चुकी थी और ऐसा करके अंकित ने राहुल के अहंकार पर वह पूर्ण विराम लगा चुका था। लेकिन पहली बार तीन लोगों के साथ एक ही बिस्तर पर मजा लेने में जो उसे आनंद प्राप्त हुआ था,, वह उसके लिए जिंदगी भर के लिए यादगार बन गया था। वह कभी सोचा भी नहीं था कि उसके जीवन में ऐसा फल आएगा कि वह एक बेटे के साथ मिलकर उसकी आंखों के सामने उसकी मां की चुदाई करेगा और उसकी भी गांड मारेगा, इसलिए तो अंकित का उत्साह पूरे चरम पर था। अब उसे तैयारी करनी थी नैनीताल जाने की और वह भी अपनी मां के साथ एक नए अनुभव के लिए एक नए एहसास के लिए।

अंकित अपने घर पहुंच चुका था और वह नैनीताल जाने की तैयारी में अपनी मां के साथ जुड़ चुका था। कुछ जरूरी कपड़े और सामान उसकी मां बाग में भर रही थी ज्यादा सामान ले नहीं जाना था केवल अपने-अपने कपड़े ले जाना था,,, इस बात को सुगंध भी अच्छी तरह से जानती थी कि यह नैनीताल का सफर उनके जीवन का बेहद यादगार सफल करने वाला है क्योंकि आज तक वह अपने पति के साथ कभी हनीमून पर नहीं जा पाई थी नहीं उसके पति ने उसे कहीं घूमाने ले गए थे,,,, जब से शादी करके आई थी इसी घर में थी हनीमून भी उसी घर में हुआ था लेकिन जिस तरह से हालात बदले थे अपने बेटे के साथ ही वह हम बिस्तर होकर शारीरिक संबंध बना रही थी जो मजा अपने पति और प्रेमी से लेना चाहिए था वह मजा उसे उसका बेटा दे रहा था उसे देखते हैं उसे पूरा आत्मविश्वास था कि जो कभी उसके जीवन में बनी हुई है उसे कमी को उसका बेटा नैनीताल ले जाकर के जरूर पूरा करेगा। सुगंधा खुशी-खुशी पैकिंग कर रही थी क्या करना है कैसे करना है सब कुछ अपने मन में सोच रही थी यह पहला मौका था जब वह अपने बेटे के साथ कहीं घूमने जा रही थी किसी रिश्तेदार के वहां नहीं बल्कि कहीं दूर ऐसी जगह जहां लोग घूमने जाया करते हैं अपने पति के साथ अपनी प्रेमिका के साथ लेकिन वह अपने बेटे के साथ जा रही थी,,, वह अकेले ही पैकिंग कर रही थी क्योंकि अंकित बस की टिकट लेने गया था। उसे बस की टिकट मिल चुकी थी अंकित ने जानबूझकर बस में केबिन बुक करवाया था जिसमें सफर के दौरान भी वह और उसकी मां दोनों मजा ले सके।

अंकीत घर पहुंचता है तो देखता है कि उसकी मां पैकिंग कर रही थी वह बिस्तर के पास झुकी हुई थी और झुकाने की वजह से उसकी भारी भरकम जवानी से भरी हुई गांड को ज्यादा ही उफान मार रही थी। यह देखकर अंकित से रहा नहीं जाता उसके जवानी का जोश बढ़ने लगता है और वह पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में जकड़ लेता है,,,, कुछ पल के लिए सुगंधा घबरा जाती है लेकिन जल्द ही एहसास हो जाता है कि पीछे उसका बेटा है वह फिर भी पैकिंग करते हुए मुस्कुराते हुए बोलती है।

टिकट मिला क्या,,,,?

मिल गई मम्मी और वह भी केबिन की मजा ही आ जाएगा,,,।

केबिन की क्यों,,,?

अरे केबिन में केवल हम दोनों ही रहेंगे जाते समय भी मजा करेंगे,,,।

नहीं नहीं बस में कुछ भी नहीं किसी को पता चल गया तो,,,,।

अरे कुछ भी नहीं होगा और तुम तो हिम्मत वाली हो घबराती क्यों हो दर्जी के सामने हिम्मत दिखाई थी ना कितना मजा आया था,,,, बस में भी मजा आएगा।

तु सच में बहुत हारामी हो गया है,,,।

आखिर बेटा किसका हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां की साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर कमर तक उठा दिया यह देखकर सुगंधा उसे रोकने की कोशिश करते हुए बोली)

क्या कर रहा है जब देखो तब शुरू हो जाता है,,,

क्या करूं मुझे रहा नहीं जाता तुम्हारी जवानी देखकर बार-बार मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,(अपनी मां की नंगी गांड पर अपने पेंट में बना तंबू रगडते हुए अंकित बोला,,,)

तो समझ कर रख इसको तेरे साथ-साथ यह भी मुझे ज्यादा परेशान करने लगा है,,,(सुगंधा इस तरह से कपड़ों को बैग में भरते हुए बोली)

तो फिर थोड़ा सा और परेशानी झेल लो,,,, थोड़ा सा अपनी टांगों को खोल दो और इसी जगह दे दो अपनी गुलाबी गली में,,,,

नहीं नहीं मुझे अभी बहुत काम है,,,, वैसे बस कब की है,,,।

रात को 8:00 की है,,,

तब तो बिल्कुल भी समय नहीं है यह सब छोड़ तू भी जल्दी से जरूर का सामान देख ले कहीं कुछ छूट न जाए,,,

मेरी जरूरत का सामान तो मेरी बाहों में है इसे मैं कैसे छोड़ सकता हूं,,,,।

(अपने बेटे कि ईस तरह की बातों को सुनकर सुगंधा एकदम से मुस्कुराने लगी और अपने बेटे की जीद पूरी करने के लिए अपनी टांगों को खोल भी दी जिससे उसकी गुलाबी गली एकदम से नजर आने लगी यह देखकर अंकित से रहने गया और जल्दबाजी दिखाते हुए अपनी पेंट की बटन खोलकर घुटनों तक नीचे खींच दिया लंड पूरी तरह से तैयार था,,, और अगले ही पल अंकित अपनी मां की गुलाबी बुर में अपना लंड डालकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया था और इस दौरान भी सुगंधा सिसकारी भरते हुए जरूर का सामान बैग में भर रही थी,,,, अंकित तब तक अपनी मां की चुदाई करता है जब तक की वह अपनी मां का पानी नहीं निकाल दिया और खुद भी नहीं झढ़ गया,,,,।

शाम हो चली थी रास्ते के लिए सुगंधा नाश्ता तैयार कर रही थी,,, अंकित भी मदद कर रहा था क्योंकि 8:00 बजे उसे बस स्टॉप पर पहुंचना था,,, रात भर का सफर था दूसरे दिन सुबह 10:00 बजे तक वालों नैनीताल पहुंच जाते ,,,, जल्दी-जल्दी सुगंधा नाश्ता तैयार करके बाथरूम में नहाने के लिए घुस गई क्योंकि जाने से पहले नहा लेना चाहती थी क्योंकि गर्मी का समय था इसलिए खाना बनाते समय पसीने से वह तरबतर हो चुकी थी बाथरूम में पहुंचते ही वह अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नहा रही थी,,, यह देखकर अंकित का मन फिर से डोल गया और वह भी अपने सारे कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस गया इस बार सुगंधा से रहा नहीं गया क्योंकि बार-बार उसका लंड उसकी गांड पर रगड़ खा रहा था और वह तुरंत नीचे घुटनों के बल बैठ गई और अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरूकर दी,,, अंकित पूरी तरह से मदहोश हो गया बाथरूम में वह अपनी आंखों को बंद करके एकदम मदहोशी में खोने लगा,,, उसे मजा आ रहा था क्योंकि उसे उसकी मां मस्त कर रही थी अद्भुत सुख प्रदान कर रही थी,,,, एक बार फिर से अंकित अपनी मां की बुर में लंड डालना चाहता था उसे छोड़ना चाहता था लेकिन सुगंधा का मन इस समय कुछ और कह रहा था। सुगंधा थी कि अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकालने का नाम ही नहीं ले रही थी और तब तक चुसती रही जब तक की उसका बेटा उसके मुंह में ही झड़ नहीं गया।

एक बैग हाथ में लेकर अंकित घर से बाहर निकल गया उसकी मां दरवाजे पर ताला लगा रही थी वैसे तो वह अपनी पड़ोसन सुमन से सब कुछ बता देना चाहती थी लेकिन वह बताना उचित नहीं समझी और वहां से वह दोनों मुख्य सड़क पर आए और ऑटो पकड़कर बस स्टैंड पर पहुंच गए,,, बस स्टैंड पर काफी भीड़ थी। थोड़ी देर में बस में अपना सामान रखकर वह दोनों अपने केबिन में जाकर बैठ गए बस में काफी भीड़ थी एक भी एक्स्ट्रा सीट नहीं बची थी बैठने के लिए,,, यह सब देखकर अंकित अपनी मां से बोला कि अच्छा हुआ मैंने केबिन वाली सीट बुक कराया यहां हम लोग आराम से सोते हुए चले जाएंगे और मजे करते हुए,,, तकरीबन आधे घंटे तक बस वहीं पर खड़ी रही है इसके बाद बस के कंडक्टर ने एक बार आवाज लगा कि कहीं कोई रहे तो नहीं किया है लेकिन सारे लोग बैठ चुके थे और थोड़ी देर बाद वह ड्राइवर को चलने के लिए बोला और थोड़ी ही देर में बस हाईवे पर दौड़ने लगी,,,, गर्मी का महीना था इसलिए थोड़ी बहुत गर्मी का एहसास हो रहा था अंकित थोड़ी सी खिड़की को खोल दिया जिससे ठंडी हवा अंदर आ रही थी और दोनों को राहत पहुंच रही थी,,, अंकित और उसकी मां दोनों लेते हुए थे बस में अभी रोशनी थी क्योंकि लाइट जल रही थी तकरीबन 1 घंटे के सफर होने पर कंडक्टर ने बस की लाइट बंद कर दिया बस में अंधेरा छा गया क्योंकि सबके सोने का समय हो रहा था और कुछ लोग तो सो भी गए थे। अंकित अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुराया उसकी मुस्कुराहट के मतलब को सुगंधा अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए इशारे में ही उसे मना करने लगी लेकिन अंकित कहां मानने वाला था वह एकदम से अपनी मां को अपनी बाहों में जाकर लिया और उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसके नितंबों को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया आखिरकार सुगंधा कब तक इनकार कर पाती अपने बेटे की हरकत से वह भी मदहोश होने लगी,,।

बस अपनी रफ्तार में हाईवे पर भागती चली जा रहीथी बस में किसी के भी बातचीत करने की आवाज नहीं आ रही थी मतलब साफ था कि सब लोग सो चुके थे। लेकिन मां बेटे दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि बस में एक नया अनुभव होने मिलने वाला था,,,, अंकित एक हाथ से अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते देखते वह अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोलकर ब्रा के ऊपर से अपनी मां की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया बस हिचकोले खा रही थी इसलिए दोनों को और ज्यादा मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई झूला झूला रहा हो,,,, अंकित अपनी मां की चूचियों को मुंह में लेकर पीना चाहता था उसे दबाना चाहता था इसलिए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर के उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा तो उसकी मां बोली।)

यह सब मत उतार ऐसे ही मजा ले ले यहां पर सारे कपड़े उतारना अच्छा नहीं है।

अरे मम्मी कुछ नहीं होगा सब लोग सो रहे हैं और वैसे भी हम लोग केबिन के अंदर है कोई देखने वाला नहीं है।

फिर भी मुझे यह सब अच्छा नहीं लग रहा है,,,,।

अरे अभी अच्छा लगने लगेगा रुको तो सही,,,,(सुगंधा उसे रोकते रह गई लेकिन उसकी एक नहीं सुना और अंकित अपनी मां की ब्रा का हक खोलकर उसके बदन से ब्रा को भी अलग कर दिया कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी नंगी चूचियां खरबूजे की तरह गोल-गोल थी जो की केबिन की लाल रोशनी में और भी ज्यादा चमक रही थी और किस तरह नहीं किया और वह तुरंत अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और बारी-बारी से मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया सुगंधा जो अब तक अपने बेटे को रोक रही थी वह भी मजा लेने लगी वह भी मस्त होने लगी,,,, अपनी मां की चूचियों को पीता हुआ अंकित एक हाथ अपनी मां की साड़ी के अंदर डाल दिया और उसके गुलाबी बुर को मसलने लगा जो की पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,, अंकित अपनी हरकतों से अपनी मां को पूरी तरह से मदहोश कर दे रहा था अपने बेटे की हरकत से सुगंधा भी मस्त हो रही थी मजा ले रही थी उसे इस बात की खुशी थी कि उसका बेटा उसे हर तरह से शुख प्रदान कर रहा था। अंकित अपनी एक उंगली को अपनी मां की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर कर रहा था जो की मदन रस से पूरी तरह से चिपचिपी हो चुकी थी यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला।

तुम तो इंकार कर रही हो लेकिन तुम्हारी बुर तो कुछ और ही कहानी कह रही है,,,,।

उसे कहने दे मैं तो नहीं कह रही हूं ना,,,।

तुम्हारे कहने ना खाने से क्या होता है मियां बीबी राजी तो क्या करेगा काजी,,,।

अच्छा तो मेरी बुर तेरी बीवी हो गई है।

तभी तो मेरा साथ दे रही है तुम भले ना दो लेकिन वह तो मेरा साथ दे रही है मेरी हरकतों से पानी छोड़ रही है।

तभी तो कहती हूं तुम दोनों शैतान हो चुके हो और तुम दोनों की शैतानी में मेरा जीना हराम हुआ है,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर अंकित हंसते हुए अपनी मां की साड़ी को खोलने लगा यह देखकर सुगंधा फिर से बोली,,,,)

नहीं रहने दे इसको तो रहने दे,,,, ऊपर का तो खोल दिया है नीचे का रहने दे,,, साड़ी उठाकर कर ले,,,।

क्या मम्मी तुम भी कितना मजा आ रहा है देखो तो सही बस कभी अनुभव ले लो कितना मजा आएगा जब बस में नंगी होकर चुदवाओगी,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां की साडी को खोलने लगा अौर सुगंधा उसे बिल्कुल भी रोक नहीं रही थी क्योंकि भले ही वह उसे रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंदर ही अंदर वह भी चाहती थी कि बस में वह नंगी होकर चुदवाए,,, देखते ही देखते अंकित अपनी मां की साड़ी को खोलकर एक तरफ रख दिया और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) देखना तुम एकदम जवान हो जाओगे लगेगा ही नहीं की तुम दो बच्चों की मां हो ऐसा अनुभव करो कि कि जैसे तुम अपने प्रेमी के साथ हो या अपने पति के साथ हो,,,, (ऐसा कहते हुए वह अपनी मां के पेटीकोट का नाडा भी खींच कर खोल दिया अपने बेटे की हरकत से सुगंधा उत्तेजना से सिहर उठी उसके बदन में मदहोशी का नशा घुल रहा था,,,, वह कुछ बोलने लायक नहीं थी बस अपनी रफ्तार में आगे बढ़ती चली जा रही थी और बस के हिसकोले में उन दोनों का बदन भी हिल रहा था दोनों को मजा आ रहा था एक अलग ही नशा छा रहा था हल्की सी खिड़की खुली होने की वजह से ठंडी ठंडी हवा दोनों के बदन को ठंडक देने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन वातावरण की शीतलता जवानी की गर्मी के आगे घुटने टेक दे रही थी। अंकित की आंखों में वासना का तूफान उठ रहा था वह बस में अपनी मां को चोदने के लिए बेकरार हुआ जा रहा था,,,, और देखते ही देखते हो अपनी मां के पेटीकोट को खींचकर उसके वचन से अलग कर दिया पेटिकोट को निकलते समय उसकी मां भी उसका पूरा सहयोग करते हुए अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा दी थी जिससे उसका पेटिकोट आराम से निकल सके,,,,।

सुगंधा के बदन पर अब केवल उसकी छोटी सी पेटी रह गई थी जो उसकी बुर को ढकी हुई थी उसके खूबसूरत हसीन और बेशकीमती खजाने को ढके हुए थी,,,, अंकित अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को बस की लाल रोशनी में देखता ही रह गया वह जल्द से जल्द अपनी मां की पैंटी उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर देना चाहता था इसलिए एकदम से हाथ आगे बढ़ाया और अपनी मां की पेंटिं को दोनों हाथों में पकड़ लिया उसकी मां भी एक बार फिर से अपनी गांड को ऊपर उठा दी और अंकित ने बिल्कुल भी देर नहीं किया अपनी मां की चड्डी उतारने में देखते ही देखते बस के अंदर सुगंध पूरी तरह से नंगी हो गई एक अद्भुत एहसास के साथ वह गहरी गहरी सांस ले रही थी अपने बेटे की हरकत से वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी एक नई जिंदगी की रही थी एक नई खुशी के साथ। बस में सभी लोग सो चुके थे गहरी नींद में लेकिन मां बेटे की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी दोनों मदहोशी के सागर में डुबकी लगाने को तैयार थे देखते ही देखते अंकित भी अपने कपड़े को उतार कर नंगा हो गया उसका लंड पूरी तरह से तैयार था उसकी मां की बुर में घुसने के लिए लेकिन अभी अंकित इस मजे को और भी दुगना कर देना चाहता था इसलिए वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया और उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर अपना मुंह रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया। सुगंधा मदहोश होने लगी वह अपनी टांगों को थोड़ा और खोल दे क्योंकि सोने लायक जगह कही थी बैठने लायक भी जगह थी इसलिए टांगे खोलने में उसे ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी,,,,, अंकित लपालप अपनी मां की बुर को चाट रहा था उसके नमकीन रस का स्वाद ले रहा था और जितना हो सकता था उतना जीभ अंदर डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,।

सुगंधा अपने आप पर काबू किए हुए शिसकारी ले रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,, रह रह कर वह अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी,,, मां बेटे दोनों पूरी तरह से गर्म हो चुके थे अब समय आ गया था सुगंधा की चुदाई करने का इसलिए वह धीरे से उठा और अपनी मां की टांगों के बीच जगह बनाते हुए उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया उसकी आधी गांड उसकी जांघों पर आ गई और फिर अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की बुर की गहराई नापने लगा अंकित कमर हिला हिला कर अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया मां बेटे दोनों के लिए ही बस के अंदर चुदाई का यह पहला अनुभव था,,,, इससे पहले बस का अनुभव सुगंधा को तब हुआ था जब वह अपने छोटे भाई के घर जा रही थी,,,, लेकिन उसे समय केवल रगड़ स्पर्श यही सब चल रहा था आज बस के अंदर वह खुलकर चुदवा रही थी,,, सुगंधा को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसका बेटा सही कह रहा था कि आज वह अपने आप को एकदम जवान लड़की की तरह महसूस करेगी और ऐसा ही वह महसूस कर रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह दो बच्चों की मां नहीं बल्कि एक जवान खूबसूरत लड़की है जो अपनी प्रेमी के साथ चुदाई का शुख भोग रही है।

आखिरकार 25 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद अंकित का अलावा उसकी मां की बुर को भरने लगा इस दौरान सुगंध दो बार झड़ चुकी थी,,,, इसके बाद दोनों अपनी कपड़े पहनकर आराम करने लगे और जल्द ही दोनों को नींद आ गई,,,, तकरीबन 3:30 बजे बस एक स्टॉप पर रुकी,,,, कुछ यात्री सोए रह गए और कुछ यात्री उतर गए,,,, अंकित की भी नींद खुल गई वह अपनी मां को जगाया क्योंकि उसे भी पेशाब लगी थी और सोचा कि उसकी मां भी इसी समय पेशाब कर ले तो अच्छा होगा,,,,, मां बेटे दोनों उतर कर पेशाब करने के लिए चले गए पेशाब करने के बाद मां बेटे दोनों वही ढाबे पर आकर बैठ गए क्योंकि वहां पर भी बहुत से लोग बैठे हुए थे और चाय पानी कर रहे थे,,, अंकित और उसकी मां भी वहीं पर बैठकर चाय पीने लगे तभी सामने से एक ऑटो आया और उनके पास रुक गया उसमें से एक औरत तकरीबन 30-35 साल की थी वह उतरी उसके साथ उसका आदमी भी था उसे भी कहीं जाना था वापस के कंडक्टर से बात करने लगी उसे पर ज्यादा ध्यान न देते हुए अंकित चाय पीते अपनी मां से बात करने लगा कुछ देर पहले जिस तरह का मजा हम दोनों में लिया था उसका एहसास अभी तक दोनों के चेहरे पर दिखाई दे रहा था दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे,,,, तभी वह कंडक्टर उसे औरत और उसके आदमी को लेकर उनके पास आया और सुगंधा से बोलने लगा,,,,।

बहन जी अगर आपको दिक्कत ना हो तो क्या आप इन्हें बैठ सकती हैं,,,।

(उसे कंडक्टर की बात सुनकर मां बेटे दोनों कंडक्टर की तरफ तो कभी उसे औरत की तरफ तो कभी उसके आदमी की तरफ देखने लगे तभी उसका आदमी एकदम से हाथ जोड़ते हुए बोला)

देखिए दीदी यह मेरी बीवी है इसकी बहन की तबीयत खराब है और इसे जल्दबाजी में जाना पड़ रहा है बच्चे घर पर है इसलिए मैं जा नहीं सकता और आप तो देख ही रही हो 3:30 बज रहे हैं इस समय कोई बस मिलने वाली नहीं है और इसका वहां पहुंचना जरूरी है,,,,,।

लेकिन भाई साहब इसमें हम क्या कर सकते हैं आप तो कंडक्टर से बात करिए ना बस उनकी है बस तो उन्हें लेकर जाना है,,,(सुगंधा उस आदमी से बोली)

आप बिल्कुल ठीक कह रही है दीदी लेकिन बस में बिल्कुल भी जगह नहीं है,,,, यह भाई साहब बता रहे हैं कि आप दोनों केबिन बुक किए हैं अगर उसने मेरी बीवी को जगह दे देंगे तो वह भी समय पर पहुंच जाएगी निश्चिंत होकर,,, क्योंकि रात का समय है और औरतों का इस तरह से सफर करना ठीक नहीं है आप एक औरत है इसलिए आपके सहारे मैं यह आपसे बात कर रहा हूं,,,,,।

(अंकित को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह अपने मन में सोच रहा था अगर यह औरत उनके साथ बैठ जाएगी तो उन दोनों का मजा किरकिरा हो जाएगा और सुगंध अपने मन में सोच रही थी कि मजा तो वह दोनों ले चुके हैं और अब कुछ ही घंटे की बात है और वैसे भी वह अब सोने वाली है कुछ करने वाले तो है नहीं इसलिए उसके मन में यही चल रहा था कि अगर इसे अपने साथ बिता भी लेंगे तो कोई दिक्कत नहीं होगी और वैसे भी उसे औरत को देखकर और जिस तरह से उसका पति मिन्नतें कर रहा था सुगंधा का दिल पिघल गया,,,, इसलिए वह बोली,,,)

चलिए कोई बात नहीं कुछ घंटे की ही तो बात है वैसे आपको जाना कहां है,,,,।

नैनीताल से एक स्टॉप पहले ही उतरना है,,,।

चलो ठीक है कोई बात नहीं एक औरत को इसलिए मैं तुम्हारी मदद कर रही हूं,,,,(सुगंधा की बात सुनकर वह औरत के भी चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और उसका आदमी जल्दी से कंडक्टर से टिकट कटाया इसके बाद वह तीनों अपने केबिन में आकर बैठ गए उसका पति बस के बाहर खिड़की में देखता रहा जब तक की बस चली नहीं गई,,,, दोनों के बीच में सुगंधा जानबूझकर लेटी हुई थी क्योंकि वह एक औरत थी और वह नहीं चाहती थी कि उसका बेटा उसके साथ सोए वैसे तो उसे अपने बेटे पर भरोसा था लेकिन फिर भी वह एक औरत होने के नाते एक औरत का जलन उसके अंदर कुछ पल के लिए पनप गया था। बस फिर से हाईवे पर अपनी रफ्तार से भागती चली जा रही थी अंकित अपने मन में ही सोच रहा था कि अगर यह औरत साथ में ना होती तो अपनी मां को बाहों में लेकर वह चैन की नींद सोता,,,, लेकिन कोई बात नहीं जो काम दोनों को करना था वह काम तो कर चुका था इसलिए वह भी मन मार कर सोने लगा थोड़ी ही देर में तीनों को नींद आ गई,,,,, तकरीबन 1 घंटे बाद बस फिर से एक जगह पर रुक गई,,,, कुछ देर पहले ही उसे औरत की नींद खुली थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी लेकिन वह किसी को कुछ कह नहीं पा रही थी जब बस रुकी तो उसे रहने क्या और वह सुगंधा को जगाने की कोशिश करने लगी लेकिन वह गहरी नींद में सो रही थी इसलिए वह ना चाहते हुए भी अंकित को जागने लगी और अंकित एकदम से उठकर बैठ गया वह बोला,,,)

क्या हुआ,,,?

मेरे साथ जरा नीचे चलो ना,,,,।

क्यों क्या हुआ,,,,,?

अब मैं कैसे बताऊं,,,,, मुझे बाथरूम जाना है,,,,,(यह सुनकर अंकित का मन हिचकोले खाने लगा वैसे भी बस की लाल रोशनी में वह कुछ और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी लेकिन फिर भी अंकित उसे पर से नजर हटाकर खिड़की से बाहर देखने की कोशिश करते हुए बोला कि वह लोग है कहां पर,,,,, और वह उसे औरत से पूछा)

लेकिन बस खड़ी कहां पर है,,,?

मुझे यह तो नहीं मालूम लेकिन आप जल्दी चलो तो मेरा भी काम हो जाएगा नहीं तो अगर बस शुरू हो गई तो,,,,,,(इतना कहकर वह रुक गई अंकित समझ गया था कि मामला गंभीर था इसलिए वह उसके साथ चलने को तैयार हो गया दोनों केबिन से नीचे उतरे और अंकित उसे बस से नीचे लेकर आया बस एक पेट्रोल पंप पर खड़ी थी जहां पर बस में ईंधन भरा जा रहा था,,,, पेट्रोल पंप के पास ही एक छोटी सी चाय की दुकान थी जो कि इस समय भी चालू थी और बस का ड्राइवर कंडक्टर दोनों वहीं पर बैठकर चाय पी रहे थे बाकी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था,,,, वह औरत शरमाते हुए अंकित से बोली,,,)

कहां जाऊं,,,?
(उसके इस सवाल पर उसकी मासूमियत पर अंकित उसे पर पूरी तरह से फिदा हो चुका था और वैसे भी वह देखने में बहुत सुंदर थी इस बात का एहसास अंकित को अभी हो रहा था उसके चमकते मोती जैसे दांत बहुत खूबसूरत थे उसका गोल चेहरा अच्छी नैन नक्श और उसके छातियों का उभार उसकी जवानी की पूरी कहानी कह रहा था,,,,, उसकी बात सुनकर वह अपने चारों तरफ देखने लगा और बोला,,,)

देखो यहां पर हम दोनों के सिवा कोई पैसेंजर नीचे उतरा नहीं है और यहां पर काफी अंधेरा भी है इसलिए ज्यादा दूर तक जाना ठीक नहीं है ऐसा करो तुम यह सामने की झाड़ी के पास बैठ जाओ,,,,,।

(अंकित का इतना कहना था कि वह औरत अपने पेशाब की तीव्रता को रोक नहीं पा रही थी और तुरंत जाकर उसके सामने झाड़ियां के पास गई और साड़ी कमर तक उठाकर अपनी पैंटी को नीचे करने लगी वह कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी में थी अंकित उसकी जल्दबाजी को अच्छी तरह से समझ रहा था,,,,, अंधेरा कुछ ज्यादा ही था लेकिन इतना भी अंधेरा नहीं था कि वह उसे औरत को देखना सके वह औरत एकदम साफ दिखाई दे रही थी क्योंकि दोनों के बीच की दूरी केवल 2 मीटर की ही थी दोनों के बीच ज्यादा दूरी नहीं थी और उसे औरत ने अंकित के सामने बिल्कुल भी शर्म नहीं की थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह थोड़ी देर और रखेगी तो शायद वह अपने कपड़े को गीला कर लेगी,,, वह अपनी पैंटी को अपने हाथों से नीचे करके वहीं पर बैठ गई थी साड़ी उसकी कमर तक थी बैठे हुए भी अपनी साड़ी को पीछे से उठाई हुई थी,,,, जिससे उसकी भरपूर गांड एकदम साफ दिखाई दे रही थी और यह नजारा देखकर तो अंकित का लंड एकदम से खड़ा हो गया था,,,, अंकित उसकी भरपूर जवानी को अपनी आंखों से देख रहा था वह अपनी आंखों को दूसरी तरफ घूमा भी नहीं रहा था क्योंकि इतना खूबसूरत है की आंखों के सामने जो नजारा था उसे देखने का लालच हुआ अपने मन से रोक नहीं पा रहा था,,,,

उसकी बुर से निकलने वाली सीटी की मधुर ध्वनि अंकित के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,,, जिसे सुनकर अंकित व्याकुल हो रहा था मदहोश हो रहा था और वह पेशाब कर रही औरत पीछे नजर घुमा कर यह देखने की कोशिश कर रही थी कि कहीं अंकित चला तो नहीं किया लेकिन जब उसने देखी कि कहीं पीछे ही खड़ा है और उसे ही देख रहा है तो वह राहत की सांस ली और फिर से पेशाब करने में मशगूल हो गई थोड़ी देर में वह पेशाब करके खड़ी हो गई और अपने हाथों से पेंटी को ऊपर की तरफ खींचने लगी उसकी नंगी गांड का उभार देखकर अंकित को यह समझते देर नहीं लगी कि वह पूरी तरह से जवानी से पकी हुई थी,,,,, वह अंकित के पास आई और बोली।

अब चलो,,,,(उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव में चला रहे थे क्योंकि काफी देर से वह पेशाब की तीव्रता से जूझ रही थी और अब जाकर उसे राहत महसूस हुई थी अंकित उससे बोला,,,)

तुम चलो मैं चाय लेकर आता हूं,,,,,।(इतना सुनकर वह औरत बस में चढ़ गई और अंकित जल्दी से दो कप चाय लेकर आ गया क्योंकि वह चाहता था कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी,,,, वैसे भी अंकित को अपनी मां की आदत अच्छी तरह से मालूम थी वह जानता था कि जब उसकी मां जमकर चुदवाती थी तो सोती भी एकदम गहरी नींद में थी,,,, अंकित चाय लेकर जब बस में पहुंचा तो वह औरत के बिन के पास ही खड़ी थी यह देखकर अंकित उससे बोला,,,,)

क्या हुआ तुम खड़ी क्यों हो केबिन में चलो,,,।

मैं उपर चढ़ नहीं पा रही हूं,,,,,
(यह सुनकर अंकित के तन बदन में गुदगुदी होने लगी वह चाय के कप को एक सीट के किनारे रख दिया और उसे औरत को केबिन में चढ़ाने की कोशिश करने लगा,,, इस दौरान वह जानबूझकर उसे औरत के भारी भरकम गोलाकार नितंबों पर हाथ रखकर उसे ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगा जिसमें उसे औरत ने बिल्कुल भी ऐतराज नहीं किया और वह केबिन में चढ़ गई लेकिन इस दौरान अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह भी चाय का कप उसे औरत को थाम कर वह भी केबिन में चला गया और केबिन को बंद कर लिया वह देखा तो उसकी मां एकदम गहरी नींद में सो रही थी,,,, और नींद में होने की वजह से वह एक किनारे पर आ चुकी थी जिसे अंकित को खूबसूरत के पास में ही सोना था इस बात की खुशी अंकित के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी वह एकदम से खिड़की वाली जगह पर पहुंच गया और वह औरत बीच में आ गई दोनों चाय पी रहे थे बस अभी भी खड़ी थी दोनों एक दूसरे से बात करने लगे बात ही बात में उसे पता चला कि उसका नाम मनीषा है और वह अपनी बहन से मिलने के लिए जा रही थी वैसे तो उसकी तबीयत ज्यादा खराब तो नहीं थी लेकिन फिर भी उससे मुलाकात करना जरूरी था।

उस औरत से अंकित को यह भी पता चला कि,,,, उसे अभी बच्चा नहीं था यह बात सुनकर अंकित बोला,,,।

लेकिन तुम तो मतलब कि तुम्हारे पति तो बता रहे थे कि बच्चों को छोड़कर आए हैं,,,।

वह उनकी बहन के बच्चे हैं जो साथ में ही रहते हैं इसलिए ऐसा कह रहे थे,,,,।

(एक भी बच्चा ना होने की बात सुनकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी वह अपने मन में ही सोचने लगा कि इसका मतलब माल एकदम कड़क है,,,, दोनों की चाय खत्म होती इससे पहले ही बस चल पड़ी,,,, अंकित आजमाना चाहता था कि यह औरत उसका साथ देगी कि नहीं इसलिए वह पैर फैला कर लेटा हुआ था और लेते-लेते दोनों बात करने लगे थे इस दौरान अंकित जानबूझकर अपने पैर को उसके पैर से स्पर्श कर रहा था और अंकित को एहसास हो रहा था कि वह औरत अपने पैर को बिल्कुल भी हटाने की कोशिश नहीं कर रही थी अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी थी,,,, दोनों पीठ के बोल लेते हुए थे और अंकित एकदम से उसकी तरफ करवट लेकर एक हाथ के सहारा लेकर अपनी गर्दन को उठाकर उससे बात करने लगा क्योंकि वह उसकी चूचियों को देखना चाहता था और उसे उसकी चूची दिखाई भी दे रही थी क्योंकि साड़ी का पल्लू एक तरफ हट गया था और उसकी बड़ी-बड़ी चूची उसके ब्लाउज में कैद लाल रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,, चूचियों के बीच की गहरी लकीर उसकी चूचियों के आकार को साफ बयां कर रही थी,,,, तभी अंकित उससे बोला,,,)

अगर हम लोग तुम्हें साथ में नहीं बैठाते तब क्या करती,,,,।

फिर क्या हमें घर जाना पड़ता और फिर दो-तीन दिन लग जाते,,,,।

इसका मतलब हमने सही किया तो मैं साथ में आने के लिए बोलकर,,,,।

बिल्कुल सही किया वैसे आप लोग भी बहुत अच्छे हैं तभी तो मेरे पति आप लोग के भरोसे छोड़कर गए हैं,,,,।

वैसे तो अच्छी तो तुम भी हो और खूबसूरत भी,,,।
(अंकित की यह बात सुनकर वह एकदम से शर्मा गई अंकित अच्छी तरह से जानता था कि औरत अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर पिघलने लगती है और इस समय यही हो भी रहा था,,, वह शरमाते हुए बोली)

लेकिन मेरे पति तो कहते हैं कि कुछ महीने और रुक जाता तो तुमसे कई गुना खूबसूरत औरत मुझे मिलती,,,।

देखो मनीषा जी मेरी बात का बुरा बिल्कुल भी मत मानना बस स्टॉप पर मैं तुम्हारे पति को देखा हूं और सच कहूं तो तुम दोनों जिनकी जोड़ी कुछ खास नहीं है तुम आसमां हो तो वह जमीन है कोई मिल नहीं है तुम गुलाब का खूबसूरत फूल हो और तुम्हारी खूबसूरती देखकर तो तुम्हारे पति बगीचे के माली भी नहीं लगते,,, क्यों ठीक कहा ना,,,,।

(अंकित की बात सुनकर वह हंसने लगी और फिर कुछ सोच में पड़ गई और बोली)

तुम बिल्कुल सही कह रहे हो वैसे यह शादी मेरे मन मर्जी की नहीं हुई है मैं किसी और से प्यार करती थी,,,, लेकिन वह शादी नहीं करना चाहता था बस दोस्ती रखना चाहता था,,,।

मतलब है कि प्यार के नाम पर उसने कुछ और,,,

नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था,,,, वह मुझसे प्यार तो बहुत करता था लेकिन अपने परिवार वालों के खिलाफ नहीं जा पाया मेरी और उसकी बात बहुत लोगों को मालूम हो चुकी थी इसलिए मेरे पिताजी जल्दबाजी में मेरी शादी कर दिए।

तो क्या तुम ईस शादी से खुश हो,,,,।

मुझे तो नहीं लगता,,,(गहरी सांस लेते हुए,,,, अंकित को उसका दर्द समझ में आ गया था और अभी तक उसके बच्चे भी नहीं थे इसका मतलब साफ था कि उसका पति कोई काम का नहीं था अंकित उसकी आंखों में देख रहा था वह भी अंकित की आंखों में देख रही थी तो उन्होंने एक दूसरे की आंखों की गहराई में डूब रहे थे अंकित से रहा नहीं किया और वह तुरंत अपने होठों को उसके होंठ पर रख दिया पल भर के लिए वह औरक एकदम से हिचकीचाई अंकित ने अपने होठों को वापस उसके होठों से अलग कर लिया और उसकी आंखों में देखने लगा लेकिन इस बार वह औरत हल्के से अपने होठों को ऊपर की तरफ करने की कोशिश करने लगी और यह देखकर हम किस रहा नहीं किया और अंकित फिर से उसके होठों पर टूट पड़ा और दोनों एकदम से मदहोश होने लगी अंकित उसके लाल-लाल होठों का रस पीने लगा वह औरत भी उसका पूरा साथ दे रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे पहली बार हुआ किसी पुरुष संसर्ग का आनंद ले रही थी,,,, बगल में ही सुगंधा गहरी नींद में सो रही थी उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि केबिन के अंदर क्या हो रहा है क्योंकि कुछ देर पहले ही वह काम क्रीड़ा का आनंद लेकर सो गई थी। अंकित फिर से उसे आजमाना चाहता था और फिर से उसके होठों से अपने होठों को अलग कर दिया और गहरी गहरी सांस लेता हुआ उसके खूबसूरत चेहरे को देखने लगा इस बार अंकित कोई भी पहल करना नहीं चाहता था और उसका यह सब्र रंग लाया,,, वह औरत अपने हाथ की कहानी का सहारा लेकर अपनी गर्दन को ऊपर उठे और खुद ही अपने हाथ को अंकित के होठों पर रख दी बस अब सब्र जवाब दे चुका था अंकित एकदम से उसे औरत पर टूट पड़ा और उसके होठों का रसपान करते हुए ब्लाउज के ऊपर से उसकी चुचियों का दबाना शुरू कर दिया,,,,।

चूचियों पर हथेलियो का कसाव से उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि आज वह एक अच्छे मर्द के पाले पड़ी थी,,,, अंकित पागलों की तरह उसकी दोनों सूचियां को दबाता हुआ उसके होठों का रसपान कर रहा था अंकित का लंड खड़ा हो चुका था,, अंकित बिल्कुल भी देर ना करते हुए पूरी मजबूती के साथ उसे अपनी बाहों में भरकर अपने ऊपर खींच लिया वह औरत अंकित के ऊपर थी और अंकित दोनों हाथों से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को साड़ी के ऊपर से दबा रहा था मसल रहा था और नीचे से उसका तना हुआ लंड उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था,,, लंड की चुभन को अपनी बुर के ऊपर महसूस करते ही वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद होने लगी। उसे एहसास होने लगा कि अंकित के पास मोटा तगड़ा लंड है जो उसकी प्यास पूरी तरह से बुझा सकता है इसलिए वह भी अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पेट के ऊपर से अंकित के लंड को दबाए अंकित पागल हुआ जा रहा था मदहोश हुआ जा रहा था,,,,, वह गहरी सांस लेते हुए फिर से अंकित की तरफ देखने लगी और उसकी मां की तरफ देखने लगी अंकित समझ रहा था कि उसके मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बोला।

अभी उठने वाली नहीं सुबह होगी तभी उठेगी तुम बिल्कुल चिंता मत करो,,,,(इतना सुनकर उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वहां अंकित की टांगों के पास आ गई और अपने हाथों से उसके पेंट की बटन खोलने लगी अंकित तो पागल हुआ जा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि सफर के दौरान इतनी खूबसूरत औरत उसे मिलेगी जो उसे भरपूर मजा देगी,,,, देखते ही देखते वहां अंकित के पेट की बटन खोलकर दोनों हाथों से उसकी पेंट और अंडरवियर दोनों नीचे खींच दी और अंकित के लंड को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई अंकित उसके चेहरे के हाव-भाव कोई देख रहा था,,,,, वह जानता था कि उसके मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बोला,,,,)

क्या हुआ तुम तो शादीशुदा हो यह सब देख चुकी होगी फिर क्यों हैरान हो रही है।

इतना बड़ा इतना मोटा बाप रे,,,,।

क्यों तुम्हारे पति का नहीं है क्या ऐसा,,,।

बीत्ता भर का है,,,, इसके सामने तो बच्चा ही है,,,,।
(यह सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और वह एकदम से उसे अपने मुंह में लेकर भर ली और उसे चूसना शुरू कर दी अंकित को मजा आ रहा था उसे एहसास हो रहा था कि यह औरत कितनी प्यासी है अपने पति से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है और वाकई में जितनी खूबसूरत वह औरत थी उसके हिसाब से उसे उसका पति नहीं मिला था उसे खुश करने वाला भी पति नहीं मिला था इसलिए अंकित अपने मन में सोच रहा था कि जितना भी समय मिलता है आज उसे जी भर कर खुश कर देगा शायद किस्मत ने ही इसे उसके साथ केबिन में भेजी है,,,, अंकित अपना हाथ उसके सर पर रखकर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा रहा था जिससे उसका लंड उसके गले के गहराई तक घुस जा रहा था उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी फिर भी वह लंड को बाहर नहीं निकाल रही थी वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,,, अंकित कुछ देर इसी तरह से मजा लेने के बाद बोला,,,)

तुम्हें एक काम करो अपनी गांड मेरे मुंह पर रख दो ताकि मैं तुम्हारी बुर की चटाई कर सकूं तुम्हें भी मजा मिलेगा और मुझे भी,,,.
(अंकित के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए वह जल्दी से अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी पैंटी को बैठे-बैठे अपनी टांगों से बाहर निकाल दी और उसे अपने पर्स में रख दी,,,, और जैसे अंकित बोला था वैसे ही अपनी भारी भरकम गांड को उसके मुंह पर रख दी अंकित दोनों हाथों से उसकी मुलायम गांड को पकड़ कर उसकी गुलाबी पर को चाटना शुरू कर दिया उसमें से मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी क्योंकि अभी-अभी उसने इसमें से पेशाब की थी जिसकी बूंदे अभी भी उसकी बुर पर लगी हुई थी जिसे अंकित अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया,,,, वह औरत पूरी तरह से मदहोश हो रही थी मस्त हो रही थी इस तरह का सुख आज तक उसके पति ने उसे कभी नहीं दिया था इसलिए वह पागलों की तरह अपनी गांड को अंकित के चेहरे पर पटक रही थी रगड़ रही थी गोल-गोल घूम रही थी अंकित पूरी तरह से उसे मजा दे रहा था अपनी दो उंगली एक साथ उसकी बुर में डालकर अपने लंड के लिए जगह भी बना रहा था उंगली डालने पर उसे एहसास हो गया था कि वाकई में उसकी बुर में पतला लंड ही गया था तभी तो उसकी बुर अभी भी कसी हुई थी। दो उंगली एक साथ उसकी बुर के अंदर बाहर करने से वह अपनी उत्तेजना को संभाल नहीं पाई और भलभला कर झड़ने लगी उसका मदन रस अंकित की नाक और मुंह में घुसने लगा जिसे वह अपनी जेब से चाटना शुरू कर दिया और तब तक चाटता रहा जब तक कि वह चाटकर एकदम चिकना नहीं कर दिया,,,,, लेकिन वह हैरान थी कि अभी भी अंकित के लंड से पानी नहीं निकला था वह ज्यो का त्यों खड़ा था,,,,,

थोड़ी ही देर में वह अंकित के ऊपर से अपनी गांड को उठाई और अंकित के लंड को एक हाथ से पकड़ कर उसे मुठियाने लगी घुटनों के बाल उसकी जांघों के ईर्द गिर्द जगह बनाकर एक हाथ से अंकित के लंड को पकड़ी और अपनी गुलाबी छेद को उसके सुपाड़े पर रख दी जल्द ही उसे एहसास हो गया कि वाकई में अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था जो उसकी बुर में आराम से नहीं घुस पा रहा था लेकिन फिर भी वह पूरी मसक्कत कर रही थी और उसकी मेहनत रंग ला रही थी हालांकि इस दौरान वह पसीने से करवात्तर हो चुकी थी लेकिन फिर भी धीरे-धीरे अंकित का लंड उसके गुलाबी गली में जगह बना था वह अंदर की तरफ आगे बढ़ रहा था और जैसे-जैसे अंदर घुस रहा था वैसे-वैसे उसके चेहरे का हाव-भाव बदल रहा था। देखते ही देखते वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड उसके लंड पर रखते चली गई अपना दबाव बनाते चली गई और अंकित का लंड उसकी बुर की गहराई में खो गया तब जाकर उसे सुकून मिला और यह देखकर वह भी हैरान थी कितना मोटा तगड़ा लंड उसने बड़े आराम से अपनी बुर में ले ली थी हालांकि उसे लेने के लिए थोड़ी बहुत मशक्कत करनी पड़ी थी लेकिन फिर भी उसने कर दिखाई थी,,,,,

चेहरे पर पसीने की बूंदे ऊपस आई थी लेकिन अब उसे अच्छा लग रहा था वह अपनी गांड को धीरे-धीरे अंकित के लंड के ऊपर पटक रही थी मोटा तगड़ा लंड सब कुछ रगड़ हुआ अंदरूनी एहसास दिलाता हुआ बर के अंदर बाहर हो रहा था,,,, अंकित ब्लाउज का बटन खोलकर उसकी दोनों चूचियों को बाहर निकाल कर दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया था और नीचे से भी धीरे-धीरे अपनी कमर को ऊपर उछाल रहा था,,,,, उसने आज तक इस तरह के एहसास को कभी महसूस नहीं की थी इसलिए वह आनंद के सागर में गोते लगा रही थी देखते ही देखते वह जोर-जोर से अपनी गांड को अंकित के लंड पर पटक रही थी अब बड़े आराम से अंकित का लंड उसकी बुर कीगहराई नाप रहा था लेकिन उसे इस बात का डर भी था कि कहीं अंकित की मां जाग न जाए,,,, कुछ देर तक वह अंकित के लंड पर इसी तरह से कूदती रही लेकिन अंकित अब जोर-जोर से धक्के लगाना चाहता था उसे एहसास दिलाना चाहता था की असली मर्द कैसे चोदता है।

इसलिए अंकित अब आसन बदल चुका था वह पीठ केवल लेटी हुई थी और अंकित उसकी दोनों टांगों को खोलकर उसे एहसास दिला रहा था असली चुदाई का वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था बस अपनी रफ्तार में आगे बढ़ रही थी और हिचकोले खा रही थी जिसे किसी दूसरे को शक भी नहीं हो रहा था कि केबिन के अंदर क्या हो रहा है वह जोर-जोर से उसे औरत की चुदाई कर रहा था वह पूरी तरह से पल में जा रही थी उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि जिंदगी में पहली बार हुआ इस तरह की चुदाई का सुख प्राप्त कर रही थी और देखते ही देखते अंकित उसकी बुर में अपना लावा उगलने लगा,,,,, कुछ देर तक अंकित उसके ऊपर ही लेटा रह गया और फिर धीरे से उसके बगल में लेट गया,,,,, दोनों फिर से कुछ देर तक बात करते हैं 5:00 चुका था थोड़ी देर में उजाला होने वाला था,,, एक बार फिर से वह अंकित के लंड का मजा लेना चाहती थी अंकित का पेंट अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था और बातचीत के दौरान धीरे-धीरे खड़ा हो चुका था लेकिन अंकित को नहीं मालूम था कि उसके मन में क्या चल रहा है वह तो सोच रहा था कि बस हो गया लेकिन तभी वह फिर से अपने हाथ में उसके लंड को पकड़ लिया और मुस्कुराने लगी फिर किया था एक बार फिर से दोनों के बीच चुदाई का खेल शुरू हो गया और इस बार अंकित ने पूरा दम लगा दिया उसकी चुदाई करने में वह पूरी तरह से मचल उठी थी उसका बदन तड़प उठा था उसकी जवानी का रस पूरी तरह से अंकित ने नीचोड़ दिया था।

थोड़ी देर बाद उसका स्टॉप आ गया अंकित उसे नीचे तक छोड़ने आया जाते समय उसकी आंखों में आंसू था क्योंकि एक ही रात में अंकित ने उसे वह प्यार दिया था जिसके बारे में वह कभी सपने भी नहीं सोची थी हालांकि इस दौरान अभी तक सुगंधा की आंख नहीं खुली थी और अंकित फिर से आकर केबिन में लेट गया था उजाला हो चुका था नैनीताल भी आने वाला था इसलिए अंकित ने अपनी मां को जगाया और सुगंधा जैसे ही जागी वह बोली।

वह कहां गई,,,?

वह तो कब से उतर गई उसका स्टॉप आ गया था,,,।

चलो कोई बात नहीं वह भी समय से अपने घरपहुंच गई,,,,(अपनी मां की बात सुनकर अंकित मन ही मन खुश हो रहा था उसे इस बात की खुशी थी कि उसकी मां पास में लेटी हुई थी और उसके पास में ही वह एक दूसरी औरत की जमकर चुदाई किया था लेकिन उसे बिल्कुल अहसास तक नहीं था थोड़ी देर बाद उन दोनों का भी स्टॉक आगे और वह दोनों भी नीचे उतर गए)

मां बेटे दोनों नैनीताल पहुंच चुके थे यह सफर दोनों के जीवन का यादगार सफर बन चुका था सुगंधा के लिए भी और अंकित के लिए भी अंकित ने कभी सोचा नहीं था कि बस में भी उसे एक रूप सुंदरी को भोगने का मौका मिल जाएगा,,, शादीशुदा विवाहित जीवन होने के बावजूद भी उसकी बुर इतनी कसी हुई थी कि अंकित को यकीन नहीं हो रहा था लेकिन या कोई ख्वाब नहीं था कोई कल्पना नहीं था जो कुछ भी था सभा हकीकत ही था बस में उसने जी भर कर आनंद लिया था अपनी मां के साथ भी और उस अनजान औरत के साथ भी,,,, बस से नीचे उतर कर कुछ देर वह लोग वहीं पर बैठे रहे चाय नाश्ता किया क्योंकि सुबह का समय था और बस के सफर की वजह से दोनों के बदन में थकान महसूस हो रही थी। यहां के बारे में वालों को ज्यादा जानते नहीं थे बस सुगंधा का सपना था कि वह नैनीताल घूमने जाएं अपने पति के साथ तो उसका यह सपना पूरा नहीं हो सका लेकिन अपने बेटे के साथ वह अपना सपना को पूरा करके जवानी के दिनों की ख्वाहिश को पूरा कर लेना चाहती थी।

इस जगह के बारे में ओटो वाले से बेहतर कोई नहीं जान सकता था,,, इसलिए वह दोनों एक ऑटो के पास गए और उसे यहां की जानकारी लेने लगे वह ऑटो वाला अच्छा इंसान था इसलिए उन्हें एक सस्ते से होटल में लेकर गया,,, होटल भले ही सस्ता था लेकिन सुविधा बहुत ही अच्छी थी होटल में सारी सुविधाएं नियुक्त थी सुगंधा ने उस ऑटो वाले को उसका किराया दी और धन्यवाद कहकर होटल में आ गई,,,, काउंटर पर लेडिस नहीं थी एक 30 32 साल का युवा बैठा हुआ था उसने ऊपर के कमरे की चाबी दे दिया हालांकि उसकी नजर सुगंधा पर ही थी सुगंधा को इस बात का एहसास हो रहा था इसलिए वह अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक कर रही थी और उससे काउंटर वाले आदमी से अपनी नज़रें बचा रही थी,,,, उसे काउंटर वाले आदमी ने सुगंधा से पूछा था कि कितने देर के लिए कमरा चाहिए,,, लेकिन सुगंधा ने जब तीन-चार दिनों के लिए कहा तो वह उसे देखा ही रह गया था क्योंकि ज्यादातर इस होटल में कपल आते थे और वह मजे लौटकर वापस चले जाते थे दो-तीन घंटे के लिए ही बहुत कम लोग ही एक-दो दिन के लिए कमरा बुक करते थे लेकिन सुगंधा ने तीन-चार दिनों के लिए कमरा बुक की थी इसलिए वह हैरानी से देख रहा था,,,,। सुगंधा सीढ़ियां चल रही थी तो उसे काउंटर वाले आदमी ने अंकित को इशारे से अपने पास बुलाया और बोला।

यार कहां से ले आए इस आइटम को,,,।
(उसकी बात सुनकर अंकित थोड़ा हैरान हुआ और हैरानी से पूछा)

क्यों क्या हुआ,,,?

यार क्या चीज है यार तुम्हारी तो किस्मत खुल गई और वह भी तीन-चार दिनों के लिए दिन-रात लगे रहो,,,।
(अंकित उसे काउंटर वाले की बात को अच्छी तरह से समझ गया था इसलिए ज्यादा कुछ बोला नहीं और मुस्कुरा कर वहां से चला बना उसे इस बात की खुशी थी कि वह काउंटर वाला आदमी उन दोनों को मां बेटा नहीं समझ रहा था बल्कि कोई कपल ही समझ रहा था,,,, और वह यही सोच रहा था कि यह दोनों तीन-चार दिनों के लिए मजा करने आए हैं,,, देखते ही देखते अंकित अपनी मां के पास पहुंच चुका था और उसकी मां कमरे का नंबर देख रही थी और जो चाबी पर नंबर लिखा हुआ था उसी कमरे के सामने आकर खड़ी हो गई अंकित को अपने पीछे आता देखकर वह मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखें और अंकित भी मुस्कुरा कर अपनी मां के पास पहुंच गया और बोला,,,)

तुम्हें मजे की बात बताऊं,,,,।

मजे की बात क्या है मजे की बात बता तो सही,,,(इतना कहकर वह उस चाबी से दरवाजा खोलने लगी,,,, और धीरे से कमरे में दाखिल हो गई पीछे-पीछे अंकित भी देख लिए हुए कमरे में दाखिल हो गया और धीरे से दरवाजा बंद कर दिया,,,, कमरा ज्यादा बड़ा नहीं था लेकिन सुसज्जित था,,,, एक बड़ा सा बेड था दो तकिया रखा हुआ था साफ सुथरी चादर थी पास में ही टेबल रखा हुआ था ड्राइवर वाला और उसे पर नाइट लैंप रखा हुआ था सामने ही खिड़की थी जिस पर परदे लगे हुए थे और सुगंधा कमरे में दाखिल होते ही सीधा जाकर खिड़की पर के पर्दे को हटाने लगी और परदे के हटते ही सुगंधा खिड़की को खोल दी खिड़की के खुलते ही ठंडी हवा एकदम से कमरे में प्रवेश कर गई जो दोनों के बदन को ठंडक प्रदान कर रही थी खिड़की के सामने ही मुख्य सड़क थी नजारा काफी अच्छा था और कमरे से सटा हुआ बाथरूम भी था,,, कम पैसे में फाइव स्टार से कम सुविधा बिल्कुल भी नहीं थी कैमरा देखकर मां बेटे दोनों काफी प्रसन्न नजर आ रहे थे,,, दोनों हाथ बांधकर खिड़की से मुख्य सड़क पर देखते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली,,,।)

तु कोई मजे की बात बता रहा था,,,,।

अरे हां मैं तो बताना भुल ही गया,,,, यह होटल में लोग अक्सर दो-तीन घंटे के लिए ही कमरा बुक करते हैं,,,।

मतलब,,,,

अरे मेरा मतलब है कि दो-तीन घंटे के लिए कपल लोग कमरा बुक करते हैं तो सोच लो क्या करने के लिए करते होंगे,,,

क्या करने के लिए,,,?(सुगंधा को थोड़ा-थोड़ा शक हो रहा था लेकिन फिर भी वह अपने बेटे के मुंह से जानना चाहती थी)

चुदाई,,,,,,।

ओह,,,,,,,।

और सबसे ज्यादा मजे की बात यह हुई थी होटल वाला हम दोनों को मां बेटा नहीं बल्कि एक कपल ही समझ रहा है,,,,।

क्या बात कर रहा है,,,(एकदम से हैरान होते हुए)

हां मम्मी,,,, वह हम दोनों को मां बेटा बिल्कुल भी नहीं समझ रहा है कपल ही समझ रहा है।

लेकिन तुझे कैसे मालूम,,,,

जब तुम सीढ़ियां चढ़ रही थी तो उसने मुझे इशारे से अपने पास बुलाया था,,,, और पूछ रहा था कि इतना जबरदस्त आइटम कहां से लेकर आया यार,,,,, मैं समझ गया कि यह तुम्हें क्या समझ रहा था और बोल रहा था तीन-चार दिन तक तो मजे ही मजे हैं,,,, वह तुम्हें धंधे वाली समझ रहा था ‌।

(अपने बेटे के मुंह से धंधे वाली का जिक्र सुनते ही वह आश्चर्य से अपने मुंह पर हाथ रख ली और बोली)

हाय दइया क्या सच में वह मुझे एक गंदी वाली समझना है तभी वह इस नजर से मुझे देख रहा था। और यह होटल भी लगता है इसी काम के लिए नहीं है तभी उस रिक्शा वाले ने भी,,, हमें इस होटल में लेकर आया और शायद वह भी हम दोनों को मां बेटा नहीं बल्कि कपल ही समझ रहा है।

यह तो हम लोगों के लिए और भी अच्छा है कि सब लोग हमें कपल ही समझ रहे हैं और हम लोग मजे करने के लिए आए भी हैं यहां पर,,,,।

तब तो सच में यह बहुत खुशी की बात है,,,,।

(अपनी मां को खुश होता हुआ देखकर अंकित एकदम से उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके नितंबों पर हाथ रखकर जोर से दबाते हुए अपने बदन से सटा लिया,,,, यह देखकर सुगंधा उसके बदन से अलग होने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

अरे अरे तू तो फिर से शुरू हो गया नहा तो लेने दे पहले,,,,,।

क्या हुआ मेरी जान आज हम दोनों साथ में नहाएंगे,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित उसे एकदम से अपनी गोद में उठा लिया सुगंधा एकदम से घबरा गई लेकिन उसे अपनी बेटी की ताकत पर पूरा यकीन था वह सीधा बाथरूम के दरवाजे के पास पहुंच गया गोद में होने की वजह से सुगंधा जानती थी कि वह बाथरूम का दरवाजा नहीं खोल पाएगा इसलिए खुद ही हाथ आगे बढ़ाकर बाथरूम का दरवाजा खोल दी,,,, बाथरूम का दरवाजा खुलते ही बाथरूम देखकर मां बेटे एकदम से खुश हो गए पूरे बाथरुम में रंगीन टाइल्स लगी हुई थी और सोच के लिए इंग्लिश टॉयलेट लगा हुआ था यह देखकर तो सुगंधा एकदम से खुश हो गई लेकिन वह परेशान थी कि इसका उपयोग कैसे किया जाता है,,,,, लेकिन यह सब अभी उसके दिमाग में ही चल रहा था और अंकित के दिमाग में कुछ और चल रहा था अंकित पागलों की तरफ से अपने बाहों में भरकर उसके बदन पर चुंबनों की बौछार कर दिया था और एक हाथ से उसकी साड़ी को उसके कंधे से पकड़ कर नीचे गिरा दिया था और उसकी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया था,,,,, सुगंधा फिर भी उसे रोक रही थी,,, लेकिन अंकित कहां मानने वाला था। देखते ही देखते हो अपनी मां के भजन से साड़ी को खोलकर अलग कर दिया इस समय वह बाथरूम में केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी और अंकित उसे बाहों में भरकर पेटिकोट सहित उसकी गांड को जोर-जोर से दबा रहा था मसल रहा था और सुगंधा को मजा भी आ रहा था,,, अंकित कुछ ज्यादा ही जोश में था क्योंकि वह उसे होटल वाले में उसकी मां को धंधे वाली समझकर उसके जोश को और भी ज्यादा बढ़ा दिया था।

अंकित पागलों की तरह अपनी मां के बदन से प्यार कर रहा था। सुगंध को खराब रखने का सवाल ही नहीं उठाता था क्योंकि यह सब करने के लिए ही तो वह दोनों यहां आए थे वह भी अपने बेटे का साथ देने लगी पागलों की तरह वह भी चुंबन का जवाब चुंबन से दे रही थी अंकित ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां के दोनों खरबूजा को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था यह देखकर सुगंधा भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर पेंट के ऊपर से अपने बेटे के लंड को दबाना शुरू कर दी जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आकर तंबू बनाया हुआ था,,,, मां बेटे दोनों एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे लेकिन अब सुगंधा से ही सबर नहीं हो रहा था,,, वह अपने हाथ से ही अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगे और यह देखकर अंकित से रहने की और वह खुद ही अपनी मां की पेटिकोट की डोरी को पड़कर खींच लिया कमर पर कई हुई पेटिकोट एकदम से ढीली हो गई लेकिन फिर भी उभरे हुए नितंबों पर वह टिकी थी जिसे अंकित खुद अपने हाथों से ढीली करके उसे कमर से ही छोड़ दिया और सुगंधा की पेटिकोट उसके कदमों में जा गीरी। सुगंधा भी अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी अंकित अपनी मां की चूचियों को ब्रा में देखकर और ज्यादा चुदवासा हो गया,,, और वह जोर-जोर से चूचियों को मसलने लगा रगड़ने लगा वह जितनी ज्यादा जोर लगाता था उतना ज्यादा सुगंधा को मजा आता था एक तरफ हुआ अपनी मां की चूचियों से खेल रहा था और दूसरी तरफ सुगंधा अपने बेटे के पेंट के बटन खोल रही थी वह भी इतना ज्यादा चुदवासी हो चुकी थी कि इससे ज्यादा देर नहीं लगी अपने बेटे के पेंट के बटन को खोलने में,,, और अगले ही पल वह अपने बेटे के मोटे तगड़े लड को हाथ में लेकर हीला रही थी और मदहोशी भरे स्वर में बोली।

तू तो पूरा तैयार है रे,,

मैं तो इस समय तैयार हो गया था जब वह होटल वाले ने तुम्हें धंधे वाली समझा था मेरी रंडी,,,,(अंकित अच्छी तरह से जानता था कि आप उसकी मां को क्या चाहिए इसलिए इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां के कंधों को पकड़ कर उसे नीचे की तरफ झुकने लगा और अपने बेटे के इशारे को समझ कर सुगंध अगले ही पल घुटनों के बल बैठ गई और अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, अंकित एकदम मस्त हो गया पहली बार वह लोग किसी होटल में मजा लूट रहे थे और अभी घर से छः सात सौ किलोमीटर दूर,,, अंकित अपनी कमर पर हाथ रखकर मत आवाज आ रहा था इतनी खूबसूरत बाथरूम में पहली बार वह अपनी मां के मुंह में लंड डालकर मदहोश हो रहा था,,,,, दोनों बाथरूम में थे जिसमें टॉयलेट भी बना हुआ था लेकिन होटल वालों ने इतना अच्छा इंतजाम किया था कि बाथरूम में भीनी भीनी फूलों की खुशबू आ रही थी जिससे उन दोनों का एहसास ही नहीं हो रहा था कि वह दोनों किस जगह पर है,,,, अंकित अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था और सुगंधा भी पूरा का पूरा लंड अपने गले में उतर कर कुछ देर चुसती और फिर उसके सुपाडे को अपने होठों तक लेकर आती और फिर उसे अंदर ले लेती यही क्रिया वह बार-बार दोहरा रही थी ऐसा करने से अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी,,,। अंकित मस्त हो रहा था ऐसा लग रहा था कि वाकई में आज वह किसी रंडी के साथ था क्योंकि उसकी मां आज लंड चुसाई में और भी ज्यादा करतब दिखा रही थी। कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेटते रहे इसके बाद सुगंधा से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था इसलिए वह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर उठकर खड़ी हो गई,,,।

अभी भी उसके बदन पर ब्रा और पैंटी थी और वह उसे निकले बिना ही दीवाल पर दोनों हाथ रखकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को गोल-गोल हिलने लगी और अपने बेटे को अपने करीब बुलाने लगी उसे ललचा रही थी शायद अंकित भी अपनी मां के मन की बात को अच्छी तरह से समझ गया और तुरंत वह अपनी मां को पीछे से पकड़ लिया लेकिन इस बार उसने अपनी मां के वस्त्र को उतारने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं किया बल्कि अपनी मां की पेटी के चोर को एक हाथ से पकड़कर उसे दूसरी तरफ खींच दिया जिससे उसकी गुलाबी बर एकदम से उजागर हो गई अंकित को जीतने की जरूरत थी उतना अंग उसकी आंखों के सामने कचोरी की तरह फुला हुआ दिखाई दे रहा था इससे ज्यादा अंकित को क्या चाहिए था अंकित ने अपने लंड पर थोड़ा सा थुक लगाया और इस अवस्था में ही अपनी मां की बुर में लंड डाल दिया उसकी कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, पूरे बाथरुम में सुगंधा की गरमा गरम शिसकारी की आवाज गुंजने लगी,,,, सुगंधा के मन में बिल्कुल भी घबराहट नहीं थी इसलिए वह खुलकर शिसकारी ले रही थी वैसे भी इस होटल में अब उसे किसी बात की दर नहीं थी क्योंकि होटल वाला भी उसे धंधे वाली औरत ही समझ रहा था। अंकित लगातार धक्के पर धक्के लगा रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड रगड़ हुआ उसकी मां की बुर की गहराई में घुस जा रहा था अंकित ब्रा के ऊपर से अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर अपनी कमर जोर-जोर से हिला रहा था।

आहहहह आहहहहह और जोर से चोद हरामजादे,,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह बहुत मोटा लंड है तेरा,,,, बहुत मजा आ रहा है मुझे और जोर-जोर सेधक्के लगा,,,,।

और जोर से धक्के लगाऊंगा तो तेरी बुर फट जायेगी रे रंडी,,,,।

तो फाड़ डालना रोका किसने हैं,,,, मेरे राजा।।

तेरी बुर फट जाएगी तो मजा नहीं आएगी मेरी रानी इसीलिए संभाल कर तेरी चुदाई करनी पड़ती है,,,,,

इतना ख्याल है तुझे मेरा,,,,।

तेरा नहीं मेरी रानी तेरी बुर का तेरी बर को चोदे बिना मुझे चैन कहां मिलता है,,,,।

मतलब हरामजादे तुझे सिर्फ मेरी बुर से ही प्यार है मेरी चुदाई से मतलब है।

भोसड़ा छोड़ी तेरे पास बुर नहीं होती तो मतलब ही खत्म हो जाता,,,(अपनी मां की चूचियों को जोर-जोर से मसलते हुए धक्के लगाते हुए अंकित बोला,,)

बड़ा मादरचोद है रे तू,,,,,

तू भी तो छिनार है मेरे पास इतना दमदार लंड ना होता तो,,, किसी और से गांड मरवा रही होती।

क्या तुझे ऐसा लगता है,,,।

मुझे तो बहुत कुछ लगता है मेरी जान तेरी बुर में इतनी गर्मी है कि,,, तेरी बुर में गधे का भी लंड घुस जाए तो भी तेरी गर्मी शांत नहीं होगी,,,,,आहहहहहह लेकिन साली तू मजा भी बहुत देती है,,,,।

(मां बेटे दोनों के बीच इस तरह की अश्लील बातें हो रही थी और चुदाई में अश्लील बातें जब मिल जाती है तो मजा दोगुना हो जाता है और यही दोनों के साथ हो रहा था दोनों एक दूसरे को गाली गलौज से बातें कर रहे थे दोनों एक दूसरे को अपनी बातों से नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन दोनों को मजा भी बहुत आ रहा था,,,,, अंकित के दिमाग में एक छवि उमट रही थी जिसे उसने राहुल की गंदी किताब में देखा था जिसमें एक अंग्रेज टॉयलेट पोट के ऊपर बैठकर एक औरत को अपने लंड पर बैठाया था और इस समय मौका भी सही था और दस्तूरभी,,,, अंकित धीरे से अपने लंड को अपनी मां की बुर में से बाहर निकाल और सीधा जाकर के टॉयलेट पोट पर बैठ गया सुगंधा को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह गहरी सांस लेते हुए अपने बेटे को ही देख रही थी,,,, अंकित जानता था कि उसका इशारा उसकी मां समझ जाएगी,,, इसलिए अंकित बोल कुछ नहीं बस अपने लंड को धीरे-धीरे मुठीयाना शुरू कर दिया और अपनी मां की दोनों टांगों के बीच घूर-घूर कर देख रहा था,,,, सुगंधा समझ गई थी कि आप क्या करना है इसलिए वहां अपनी ब्रा और पैंटी को भी उतार कर एकदम नंगी हो गई और सीधा जाकर के अपने बेटे की गोद में बैठ गई हालांकि वह एकदम से बैठ गई थी जिसकी वजह से उसका लंड उसकी बुर में घुस नहीं था इसलिए अंकित अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर अपने लंड को पकड़ लिया था और उसकी मां भी धीरे से अपनी गांड को ऊपर उठा ली थी और अगले ही पल उसका पूरा लंड उसके गुलाबी बुर में घुस गया था और वह अपनी बाहों को अपने बेटे के गले में डालकर जोर-जोर से कूदना शुरू कर दी थी। इस अवस्था में सुगंधा को भी ज्यादा मजा आ रहा था।

अंकित कुछ भी नहीं कर रहा था जो कुछ भी कर रही थी उसकी मां ही कर रही थी,,,, इस दौरान सुगंधा एक बार झड़ चुकी थी लेकिन अंकित झड़ने का नाम नहीं ले रहा था लगातार कूदते हुए सुगंधा काफी थक चुकी थी पसीने से तरबतर हो चुकी थी इसलिए अंकित अपनी मां की कमर पकड़कर उसे ऊपर उठाने लगा सुगंधा भी अपने बेटे के लंड के ऊपर से खड़ी हो गई वह गहरी गहरी सांस ले रही थी वह बेहद आनंदित नजर आ रही थी लेकिन थकी हुई थी अंकित इंग्लिश टॉयलेट का पूरा मजा लूट लेना चाहता था इसलिए धीरे से वह भी इंग्लिश टॉयलेट पर से उठकर खड़ा हो गया और अपनी मां को टॉयलेट पकड़कर झुका दिया इस अवस्था में उसकी मां सच में कोई अंग्रेज औरत दिखाई दे रही थी जिसे देखकर अंकित का लंड फटने को तैयार था,,,, अंकित पीछे से अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया और इस बार वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था हर धक्के के साथ सुगंधा आगे को लुढ़क जाती थी क्योंकि वह अपने बेटे के जबर्दस्त प्रहार को झेल नहीं पा रही थी हालांकि आनंद तो उसे बहुत आ रहा था और अंकित भी अपनी मां की कमर को थामे हुए था वरना वह गिर जाती और तब तक धक्के पर धक्का लगता रहा जब तक कि वह फिर से अपनी मां का पानी नहीं निकाल दिया और खुद भी नहीं झढ़ गया। दोनों का काम खत्म हो चुका था अंकित तो गहरी सांस लेता हुआ बाथरुम के अंदर ही बैठ गया और मुस्कुराता हुआ अपनी मां को देख रहा,,, था। सुगंधा भी जो अभी तक घोड़ी बनाकर झुकी हुई थी वह धीरे से टॉयलेट पोट पर बैठ चुकी थी,,,,,

बाप रे मजा आ गया घर से बाहर निकल कर इतना मजा आता है चुदवाने में मैं तो पहली बार महसूस कर रही हूं,,,,,।

मैं भी तो पहली बारी आया हूं मैं कहां किसी को लेकर आता हूं,,,।

मुझे तो लेकर आया ना,,,।

तभी तो ज्यादा मजा आ रहा है,,,,(इतना कहकर अंकित है धीरे से खड़ा हो गया और बाथरूम में लगे फुहारें को देखने लगा,,, और दीवार में लगे हैंडल को घुमा दिया तो उसमें से झरझारा कर पानी गिरने लगा जो कि सीधे उसके सर पर गिर रहा था वह एकदम से मत हो गया,,,,,,, लेकिन तभी दूसरी तरफ सुगंधा सौच करने लगी थी वैसे तो अपने बेटे के सामने वह बहुत बार पेशाब की थी लेकिन आज पहली बार वह सौच कर रही थी। लेकिन आज उसे बिल्कुल भी शर्म नहीं महसूस हो रही थी वह तो पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी अंकित को इस बात का एहसास हो गया था वह अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था और देखते ही देखते अपने बदन पर साबुन भी लगाना शुरू कर दिया,,,, साबुन भी बाथरुम में रखा हुआ था बेहद सुगंधित जिसे लगाकर अंकित अपने आप को तरो ताजा महसूस कर रहा था,,,,, देखते-देखते उसके पूरे बदन पर झाग ही झाग दिखाई देने लगा। तब तक उसकी मां सौच कर चुकी थी लेकिन इसके आगे का सिस्टम उसे समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि अब उसे अपनी गांड धोना था वह इधर-उधर देख डाली उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अंकित अपनी मां को ही देख रहा था और फिर आश्चर्य से सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखने लगी तो अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,,।

क्या हो गया,,,,?

अरे इसमें तो पानी का सिस्टम कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,।

अरे जब करने के लिए दिया है तो पानी का भी तो सिस्टम दिया होगा,,,,।

मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है तू ही देख ले,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर अंकित इस अवस्था में अपनी मां के बेहद करीब पहुंच गया उसके पूरे बदन पर झाग ही झाग दिखाई दे रहा था यहां तक की उसका लंड भी साबुन के झाग में छुपा हुआ था अंकित अपनी मां के करीब आ गया और टॉयलेट के सिस्टम को समझने लगा वह हर एक बटन दबाकर देख रहा था तो कहीं ऊपर से पानी चालू हो जा रहा था तो कहीं बंद हो जा रहा था लेकिन नीचे से कुछ समझ में नहीं आ रहा था तो फिर एक बटन जो टॉयलेट पोट के पीछे लगा हुआ था वह उसे दबा दिया तो नीचे से पानी एकदम से निकाला और सुगंधा की गांड पर फवारा करने लगा सुगंधा पहले तो एकदम से घबरा गई और फिर हंसने लगी क्योंकि इंग्लिश टॉयलेट बनाने वाले ने कितना सोच समझकर बनाया था कि बटन दबाते ही पानी का फवारा गांड के छेद पर ही जा रहा था और अपने आप गाना साफ हो रही थी लेकिन इससे सुगंधा का मन नहीं माना और वह टॉयलेट पोट से नीचे उतरकर बैठ गई और उसके पास ही टॉयलेट में एक फुवारा लगा हुआ था जिसमें पाइप जुड़ी हुई थी उसे फुहारे को अपने हाथ में लेकर वह अपने बेटे से बोली,,,,।

इसे चालू कर दे,,,,।

(अंकित ने फुहारे का बटन चालू कर दिया उसमें से पानी निकलना शुरू हो गया और उसे पानी को अपनी हथेली में लेकर सुगंध अपनी गांड धोने लगी,,,, यह देखकर अंकित जोर-जोर से हंस रहा था और सुगंधा भी मन ही मन में मुस्कुरा रही थी,,,,, थोड़ी देर बाद दोनों मां बेटे नहा कर बाथरूम से बाहर निकल गए,,,, होटल में ही खाने की सुविधा भी थी रेस्टोरेंट भी था अंकित ने फोन लगाया और खाने का ऑर्डर दे दिया,,,, सुगंधा अभी तक मखमली टावल ही लपेटी हुई थी कपड़े नहीं पहनी थी क्योंकि घर से दूर होटल में इस अवस्था में उसे अच्छा लग रहा था,,,, एक बार फिर से अंकित के दिमाग में शरारत सुझने लगी वह अपनी मां से बोला,,,)

थोड़ा मजा लेना चाहती हो मम्मी,,,,।

कैसा मजा,,,(आश्चर्य से अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,,)

मैं तुम्हें बताता हूं देखना अभी 10 15 मिनट में ही वेटर खाना लेकर कमरे में आएगा,,,,

तो,,,,।

देखो मेरी बात समझने की कोशिश करो वैसे भी होटल वाले तुम्हें धंधे वाली समझ रहे हैं।

हां तो यह तो मैं जानती हूं,,,,।

मैं कहता हूं कि अगर वह वेटर खाना लेकर कमरे में आए तो खाना लेने के लिए तुम जाना दरवाजे पर तब उसका रिएक्शन देखना और इस समय तुम अपनी टॉवल भी गिरा देना उसकी आंखों के सामने तुम एकदम नंगी हो जाओगी तब देखना उसकी हालत क्या होती है,,,।

धत् पागल हो गया क्या,,,,?

अरे इसमें क्या हो गया होगा थोड़ी ना कुछ करेगा लेकिन उसकी हालत देखने एकदम खराब हो जाएगा,, और तुम्हें देखने के बाद बाथरूम में जाकर उसे मूठ मारना पड़ेगा,,,,।

नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली हूं,,,(अपने बेटे की बात सुनकर वह मुस्कुराते हुए बोली उसे अपनी बेटी की बात सुनकर गुस्सा भी आ रहा था और वह अपने मन में सोच भी रही थी कि वाकई में अगर उसे वेटर के सामने वह नंगी हो जाए तो उसकी क्या हालत होगी.. और यही सोच कर उसका दिल धक-धक कर रहा था अंकित फिर से अपनी मां को समझाते। हुए बोला,,,,)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो वैसे भी हम लोग को यहां कोई पहचानता नहीं है सिर्फ उसका रिएक्शन देखना उसकी हालत देखना उसके चेहरे का हाव-भाव देखना वह पूरी तरह से पागल हो जाएगा।

अगर उसने कुछ किया तो,,,।

अरे वह कुछ नहीं करेगा,,,,।
(अंकित का इतना कहना था कि तभी डोर बेल बजने लगी और अंकित एकदम से उत्साहित हो गया और बिस्तर पर जाकर लेट गया और बोला)

जाओ जल्दी से बिल्कुल भी मत घबराना मैं हूं ना देखना बहुत मजा आएगा दर्जी की दुकान का याद है ना कितना मजा आया था यहां भी ऐसा ही मजा आएगा,,,,।
(सुगंधा के पास अब कोई दूसरा रास्ता नहीं था वैसे भी उसके बेटे कि इस तरह की युक्ति उसे खुद भी आनंदित कर देती थी इसलिए वह इनकार नहीं कर पाई और इस हालत में टावल लिपटा हुआ,,, आधी चूचियां दिखाई दे रही थी और आधी जांघ तक टावल लिपटा हुआ था,,, बार-बार डोर बेल की आवाज आ रही थी सुगंधा कभी अपन बेट की तरफ देख ले रही थी तो कभी दरवाजे की तरफ देख ले रही थी अंकित बार-बार उसे इशारा करके दरवाजे के पास जाने के लिए कह रहा था दरवाजा खोलने के लिए कह रहा था और फिर सुगंधा को अपने बेटे की बात माननी ही पड़ी,,,, वह दरवाजे के पास पहुंच गई उसका दिल जोरो से धड़क रहा था समझ में नहीं आ रहा था कि क्या होगा,,,‌ लगातार डोर बेल बजने की वजह से सुगंधा धीरे से दरवाजा खोल दे दरवाजा खुलते ही सामने बेटर दोनों हाथ में ऑर्डर के मुताबिक खाना लिया हुआ था और वह सुगंधा को देखा ही रह गया अभी-अभी सुगंध बाथरूम से नहा कर निकली थी उसके बदन पर टॉवल लपेटा हुआ था और कुछ भी नहीं था इस रूप में वह बेटर सुगंधा को देखा तो देखता ही रह गया,,,, औपचारिकता निभाते हुए वह बोला।

गुड मॉर्निंग मैडम,,,

गुड मॉर्निंग,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह दरवाजा को पूरा खोल दिया और वह बेटर खाना लेकर कमरे में आ गया और टेबल पर खाना रखने लगा,,,, टेबल पर खाना रखते हुए वह बार-बार सुगंधा की तरह देख ले रहा था और मुस्कुरा दे रहा था सुगंध भी जवाब में मुस्कुरा दे रही थी,,, सुगंधा उस वेटर की नजर को अच्छी तरह से समझ रही थी क्योंकि उसे वेटर की नजर बार-बार उसकी चूचियों की तरफ और उसकी मोती मोती जांघों की तरफ टिक जा रही थी,,, खाना रखने के बाद वह तूने तो दोनों हाथ पीछे की तरफ करके खड़ा हो गया और औपचारिकता दिखाते हुए बोला।)

और भी किसी की चीज की जरूरत हो तो बुला लीजिएगा मैडम,,,,।

जी जरूर,,,,,

इतना सुनकर होगा हम मुस्कुराते हुए दरवाजे के पास आया और एक बार फिर से,, सुगंधा की तरफ देखकर मुस्कुराया और सुगंधा ने पहले से ही अपनी टॉवल को ढीली छोड़ रखी थी जो एकदम से उसके बदन से ढीली होकर उसके कदमों में जा गिरी और उस वेटर की आंखों के सामने सुगंधा पूरी तरह से नंगी हो गई,,,, सुगंधा ऐसा बर्ताव करने लगी जैसे कि यह सब अनजाने में हुआ हो वह तुरंत नीचे झुक कर टावर उठने लगी लेकिन उसे वेटर ने सब कुछ देख लिया था सुगंधा की कातिलाना जवानी को देखकर उसके पेंट में एकदम से तंबू बन गया था जिसका एहसास सुगंधा को भी हो रहा था,,,,, टॉवल उठाकर वह फिर से अपने बदन पर लपेटते हुए बोली।

माफ कीजिएगा,,,,।

कोई बात नहीं मैडम,,,,।(इतना कहने के बाद भी वह वहां से जाने क्यों तैयार नहीं था तो उसके चेहरे का भाव पूरी तरह से बदल गया था उत्तेजना के मारे उसका चेहरा तमतमा रहा था,,,, वह बेटर कमरे से चला जाए इसलिए दरवाजा को पकड़ कर उसे बंद करने के लिए एक कदम आगे बढ़ाते हुए वह बोली,,)

मुझे किसी चीज की जरूरत पड़ेगी तो मैं फिर से फोन करूंगी,,,,,।

ठीक है मैडम मैं फोन का इंतजार करूंगा इतना कहकर वह कमरे से बाहर निकल गया और सुगंधा ने तुरंत दरवाजा बंद कर दी तब जाकर राहत की सांस ली,,,,।

(यह सब देखकर अंकित हंस रहा था और उसके बाद दोनों हंसने लगे खाना खाने के बाद दोनों आराम करना चाहते थे क्योंकि काफी थक चुके थे,,,,, शाम के जब 6:00 बजे तो वह दोनों उठकर बाहर जाने के लिए तैयार हो गए)

अंकित और उसकी मां दोनों होटल से बाहर निकल चुके थे घूमने के लिए बाहर का नजारा देखने के लिए,,, लेकिन आज सुगंधा ने साड़ी नहीं पहनी थी बल्कि एक शर्ट और जींस पहनी थी जिसमें वह गजब की कयामत लग रही थी कई हुई जींस में उसकी बड़ी-बड़ी गांड वाकई में कयामत ढा रही थी। यह पहली बार था जब सुगंधा ने इस तरह के कपड़े पहने थे इसलिए थोड़ा उसे अजीब लग रहा था बार-बार अंकित अपनी मां का पिछवाड़ा देखकर मस्त हो जा रहा था और अपनी मां से बोल भी रहा था।

बाप रे मम्मी तुम तो आज एकदम बम लग रही हो। किसी फिल्म की हीरोइन से कम नहीं लग रही हो ,आज देखना सब की नजर तुम्हारे पर ही होगी।

धत् मुझे तो बड़ा अजीब लग रहा है,,,,, इस तरह के कपड़े मैंने पहले कभी नहीं पहनी तेरी जीद में पहनना पड़ रहा है,,, और यह हाई हील की सेंडल चलने में भी तकलीफ दे रही है,,,,।

कोई बात नहीं लेकिन यह तो सोचो कितनी गजब लग रही हो आईने में अपने आप को देखी नहीं पूरा रूप बदल गया है तुम्हारा,,,,।
(अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी वह दोनों फुटपाथ पर चल रहे थे और वाकई में उसके बेटे के के अनुसार आने जाने वालों की नजर सुगंध पर ही टिकी हुई थी ब्लू रंग की जींस और व्हाइट कलर की टीशर्ट में सुगंध का यह नया रूप वाकई में गजब का लग रहा था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां व्हाइट शर्ट में एकदम कसी हुई दिखाई दे रही थी और आज उसने बालों को गोल बनाकर क्लिप लगा ली थी जिससे उसका खूबसूरत चेहरा और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगा था इस तरह के कपड़े में इसी तरह के बाल शोभा देते हैं इस बात को वह अच्छी तरह से जानती थी,,,। सैंडल पहने होने की वजह से सुगंधा धीरे-धीरे चल रही थी और साथ में अंकित भी धीरे-धीरे चल रहा था वह जानता था कि,,, उसकी मां को हाई हील सैंडल पहन कर चलने की आदत बिल्कुल भी नहीं थी। अंकित मजे लेते हुए चल रहा था वह आते जाते लोगों को देख रहा था और उसे अच्छा लग रहा था कि आते-जाते लोग उसकी मां को प्यासी नजरों से देख रहे थे यह देखकर वह अपनी मां से बोला)

देख रही हो मम्मी कैसे तुम्हें सब लोग देख रहे हैं ऐसा लग रहा है कि जैसे कोई फिल्म की हीरोइन फुटपाथ पर चल रही हो,,,,।

धत् लोगों की नजर कितनी गंदी है देख नहीं रहा है वह लोग क्या देख रहे हैं,,,।

मुझे मालूम है और वह लोग देख भी क्या सकते हैं तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूची और बड़ी-बड़ी गांड और देखते हैं तो देखने दो कौन सा वह लोग तुम्हें चोद पाएंगे बल्कि तुम्हारी खूबसूरत जवान तो उन लोगों का पानी निकाल देगी देखना यह लोग घर जाकर अपने हाथ से हिला कर काम चला लेंगे,,,।

तू बहुत शैतान है इस तरह की बातें करता है,,,,।

तो इसमें गलत क्या है मैं तो जो भी कह रहा हूं सही कह रहा हूं मर्दों की नजर औरतों की बड़ी-बड़ी चूची और बड़ी-बड़ी गांड पर ही रहती है और जिसके पास जुगाड़ नहीं रहता वहां उसके बारे में सोच कर हाथ से हिला कर काम चलाते हैं,,,।

तू भी इसी तरह से काम चलाता था क्या,,?

बिल्कुल भी नहीं मेरी किस्मत जरा दूसरों से अलग है क्योंकि सीधे मुझे तुम्हारी गुलाबी बुर मिल गई हिलाने का मौका ही नहीं मिला बस डालने से ही शुरुआत हो गई।

हम्म,,,, बडा आया किस्मत वाला,,,, (मुंह बनाते हुए सुगंधा बोली,,)

हां तो क्या समझ रही हो किस्मत वाला ही हुं ना,,, तुमि जरा सोचो यह आते जाते लोग जो तुम्हें देख रहे हैं प्यासी नजरों से उनके लंड की क्या हालत होती होगी वह तुम्हें देख कर भी कुछ कर नहीं सकते सिवा हिलाने के और मैं हूं देखो जब चाहे तब तुम्हारी पटक कर ले सकता हूं,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी,,, वह दोनों आपस में बात करते हुए आगे बढ़ते चले जा रहे थे वहां पर ढेर सारी होटल थी यहां से ज्यादा बाहर के लोग इधर घूमने आए थे,,, जिसकी वजह से सड़कों पर लोगों की भीड़भाड़ अच्छी खासी दिखाई दे रही थी फुटपाथ पर खाने के स्टाल भी लगे हुए थे जहां पर कुछ लोग बैठकर चाय नाश्ता कर रहे थे खाना खा रहे थे आपस में गप्पे लड़ा रहे थे,,,, अंकित को यह सब नजारा देखकर बहुत अच्छा लग रहा था उसकी मां भी बहुत खुश थी आखिरकार उसके जीवन का सपना जो पूरा हो रहा था उसने आज तक कहीं घूमने नहीं गई थी सिवाय रिश्तेदार के घर के लेकिन आज पहला मौका मिला था उसे अपने बेटे के साथ घूमने का जीवन का असली सुख भोगने का और इस अवसर को वह अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी,,,,

देखते ही देखते दोनों एक झरने के पास पहुंच गए झरना बेहद खूबसूरत था उसके चारों तरफ रेलिंग लगी हुई थी ताकि कोई आगे ना जा सके क्योंकि झरने का पानी नीचे खाई में गिर रहा था अंकित और उसकी मां भी रेलिंग पकड़ कर झरने की खूबसूरती को देखने लगी एक अलग ही संगीत बज रहा था पानी के गिरने का हवा के बौछार के साथ पानी के छिटे उन दोनों के बदन को ठंडक दे रहे थे,,,,,, और भी लोग वहीं पर खड़े होकर इस नजारे का लुफ्त उठा रहे थे,,, तभी सुगंध को अपने नितंबों पर हाथ से सहलाने का एहसास हुआ उसे लगा कि अंकित है लेकिन वह कुछ बोली नहीं और झरने को ही देखती रही लेकिन तभी जोर से नितंबों को अपनी हथेली में कसने के एहसास से वह पीछे मुड़कर देखी तो एक अनजान आदमी उसकी गांड को सहला कर आगे निकल गया था,,, वह कुछ बोल पाती यआ समझ पाती ईससे पहले ही वह आगे निकल गया था सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखने लगी तो वह उसके पास नहीं खड़ा था बल्कि चार-पांच लोगों के बाद वह दूसरी तरफ खड़ा था,,, सुगंधा एकदम से घबरा गई और वह जल्दी से अपने बेटे के पास जाकर खड़ी हो गई लेकिन वह अपने बेटे से बात नहीं पाई की कुछ देर पहले उसके साथ क्या हुआ था। कुछ देर तक दोनों वहीं पर खड़े होकर झरने का मजा लेते रहे,,, वैसे भी इस समय अंकित अपनी मां की खूबसूरती को जींस और टीशर्ट में देखकर मस्त हो गया था। बार-बार उसका लंड खड़ा हो जा रहा था जिसे तैसे करके वह अपने को शांत रखे हुए था।

इसके बाद दोनों थोड़ी ऊंचाई पर चढ़ने लगे,,, वैसे ईस टेकरी पर कोई चढ़ नहीं रहा था लेकिन अंकित और उसकी मां दोनों यहां मजा लेने के लिए आए थे इसलिए ऊंची टेकरी पर चढ़ने लगे वैसे तो यहां कोई रास्ता नहीं था चारों तरफ घनी झाड़ियां ही थी और छोटी-मोटी पगडंडी थी जिससे कभी कभार लोग ऊपर जाते थे और नीचे आ जाते थे,,, देखते ही देखते दोनों ऊपर की तरह चढने लगे सुगंधा आगे आगे चल रही थी और अंकित पीछे-पीछे पहाड़ी चढ़ते समय सुगंधा के कदम जिस तरह से ऊपर नीचे पड़ रहे थे उसकी भारी भरकम गांड ऐसा लग रहा था की जेसे जींस फाड़ कर बाहर आ जाएगी। और अंकित यह नजारा देखकर मत हो रहा था वह पीछे-पीछे चलते हुए अपनी मां से बोला।

वाह क्या गांड है,,,, साड़ी में जानलेवा तो लगते ही थी लेकिन जींस में तो कातिलाना लग रही है,,,।

देखना कहीं तेरा कत्ल ना हो जाए,,,।

मेरी जान मेरी कत्ल के लिए तो हथियार की जरूरत ही नहीं है तुम बस अपनी गांड दिला दो और मेरा कत्ल हो जाए,,,,।

बड़ा शायर बन रहा है तू,,,, (आगे आगे चलते हुए सुगंधा बोली,,,)

बस तुम्हारी खूबसूरती देखकर मुंह से शब्द निकल जाते हैं और वह शायरी बन जाती है।

तो तेरे पास सिर्फ मेरी गांड के लिए शायरी है और किसी चीज के लिए नहीं,,,,।

शायरी तो बहुत है मेरी जान बस एक-एक करके अपने कपड़े उतार कर दिखाती जाओ और मैं शायरी बोलता चला जाऊं तुम्हारी बुर पर तुम्हारी चुची पर तुम्हारी खूबसूरती पर,,,।

बड़ा छिनरा शायर है तू,,,,

तू भी तो मेरी जान छीनरपन से भरी हुई है,,,।

चल ये सब छोड़ मुझे बड़ी जोर की पेशाब लगी हुई है बता क्या करूं।

क्या करूं,,, अरे कहीं भी बैठ जाओ और मुतना शुरू कर दो इसमें मैं क्या कर सकता हूं,,,,।

अरे बेवकूफ यह तो मैं भी जानती हूं कि मुझे ही मुतना है,,,, तेरा पकड़ कर नहीं मुतने वाली में,,,।

हाय काश कैसा हो जाता कि तुम मेरा पकड़ कर मुझे पेशाब करवाती,,,,।

बस कर मजनू की औलाद यह देखा कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा है ना,,,,।

अरे मेरी रानी यहां कोई नहीं आने वाला है इतनी देर से हम लोग ऊपर चढ़ रहे हैं कोई दिखाई दिया ना तो नीचे उतारते हुए कोई दिखाई दिया ना कोई चढ़ते हुए यहां कोई आने वाला नहीं है कहीं भी बैठ जाओ,,,,।
(सुगंधा को भी इस बात का एहसास था कि इस छोटी सी पहाड़ी पर कोई आने जाने वाला नहीं था लेकिन फिर भी अपनी तसल्ली के लिए वह इधर-उधर देखकर निश्चिंत हो जाना चाहती थी,,, इसलिए वह चारों तरफ नजर दौड़ा रहने के बाद एक पेड़ के पास गई और अपने जींस की बटन खोलने लगी जिसकी बटन खोलते हुए वह बोली,,,)

जींस पहनने में यही सब दिक्कत रहती है साड़ी पहनी होती तो आराम से उठकर बैठ जाती लेकिन इसे तो खोलना पड़ेगा,,,,।

तो इसमें क्या हो गया बटन ही तो खोलना है कौन सा जींस को फाड़ देना है,,,,।

तुझे आज बहुत बातें आ रही है,,,,, चल होटल में तुझे बताती हूं तुझे छूने भी नहीं दूंगी तब हाथ से हिला कर काम चला लेना,,,।

मेरी जान मेरा तन तन आया हुआ लंड देखकर तुम खुद ही मेरे लंड पर कूदने लगोगी,,,।
(अपने बेटे किस बात का वह बिल्कुल भी जवाब नहीं दे पाई क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि वह खुद उसके लंड के बिना नहीं रह पाती थी. धीरे-धीरे वह जींस के बटन को खोल चुकी थी और दोनों हाथों से जींस के किनारे को पकड़ कर नीचे की तरफ सरका रही थी साथ में वह अपनी काले रंग की पेंटि को भी अपनी उंगलियों में दबा ली थी और देखते ही देखते वह अपनी जींस और पैंटी को एक साथ अपनी घुटनों तक खींच कर ले आई अंकित पीछे खड़ा यह सब देख रहा था जींस में उसकी मां वैसे भी क़यामत लग रही थी और पहली बार अपनी मां को जींस उतारते हुए देखकर पूरी तरह से मस्त हो चुका था उसका खुद का लंड बवाल मचाने को तैयार हो चुका था,,, सुगंधा नीचे बैठकर पेशाब कर रही थी और उसकी बुर में से निकलने वाली सीटी की आवाज पूरे वातावरण में गूंज रही थी और इस आवाज को सुनकर अंकित खुद बावला हो गया था,,,, वह भी धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल लिया था जो की पूरी औकात में आकर खड़ा हो चुका था और उसे हिलाते हुए अपनी मां से बोला,,,,)

वैसे तो तुमको बहुत बार पेशाब करते हुए देख चुका हूं लेकिन जींस में देखकर तो मेरी हालत खराब हो रही है कसम से तुम हमेशा जींस पहना करो रोज ना जाने कितनों का पानी खड़े-खड़े निकाल दोगी।

नहीं तू रहने दे बस यही तक घर पर जाकर मुझे यह सब मत कहना वैसे कि मुझे इन सब में अच्छा नहीं लगता,,,।

तो किसने अच्छा लगता है मेरी जान साड़ी में ताकि जल्दी से काम निपटाया जा सके ना पेशाब लगे तो साड़ी उठाकर बैठ जाओ चुदवाने का मन हो तो साड़ी उठाकर शुरू हो जाओ,, ।

तो क्या सच ही तो है इसमें तो मुझे ठीक से पैर फैला कर बैठा भी नहीं जा रहा है।

तो कहां तुम्हें बैठे ही रहना है खड़ी भी तो होना है,,, (अपने लंड को धीरे-धीरे मुठीयाता हुआ अंकित बोला उसकी मां को साफ करने में मशगूल थी,,, उसे नहीं मालूम था कि पीछे खड़ा उसका बेटा अपने लंड को हिला रहा था थोड़ी ही देर में बुर से निकलने वाली सीट की आवाज एकदम से शांत हो गई वह पेशाब कर चुकी थी और धीरे से उठकर खड़ी हो गई। और इसी मौके की तक में अंकित था जैसे ही वह खड़ी होकर अपनी जींस को ऊपर चढ़ने लगी वह सीधा जाकर के अपनी मां से फट गया और अपने लंड को उसकी गांड पर रगड़ते हुए उसे एकदम से पेड़ से सटा दिया,,,, सुगंधा किसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी वह एकदम से हड़बड़ा गई थी,,, अंकित पागलों की तरह शर्ट के ऊपर से अपनी मां की दोनों चुचियों का दबाना शुरू कर दिया था और अपने लंड को उसकी गांड की दरार में धंसाना शुरू कर दिया था यह सब देखकर सुगंधा इधर-उधर देखने लगी और बोली,,,।)

हाय दैया यह क्या कर रहा है रे कोई देख लेगा तो,,,।

पागल हो गई हो क्या यहां कौन देखने वाला है,,,,,।

अरे फिर भी थोड़ा झाड़ी के अंदर चल यहां करने की जरूरत नहीं है,,,,।

नहीं मैं तो यही करूंगा कोई देख नहीं रहा है,,,, (और इतना कहने के साथ वह अपनी मां की टीशर्ट में नीचे से अपने दोनों हाथ को डाल दिया और चूचियों को दबाना शुरू कर दिया वह एकदम से हैरान हो गया था कि टी-शर्ट के अंदर उसकी मां ब्रा नहीं पहनी थी उसकी चूचियां एकदम से नंगी थी वह एकदम से हैरान होते हुए अपनी मां से बोला,,,)

यार तुमसे एकदम छिनार हो टी शर्ट के अंदर कुछ पहनी नहीं हो,,,,।

तो इसमें क्या हो गया थोड़ी ना किसी को दिखाई दे रहा है,,,।

दिखाई नहीं दे रहा है लेकिन तुम्हारा यह चॉकलेटी कैडबरी शर्ट से बाहर भाले की तरह तनी दिखाई देती है,,,, (अंकित अपनी मां की निप्पल को दोनों हाथों की उंगलियों से पकड़ कर उसे ज़ोर से मसलते हुए बोला अपनी बेटी की हरकत से सुगंधा पानी पानी होने लगी वह दोनों हाथों से पेड़ को पकड़कर अपने बेटे की हरकतों का आनंद ले रही थी।)

सहहहहह आहहहह,,,,,,,, थोड़ा धीरे-धीरे बहुत जोर-जोर से मसलता है तू,,,।

जोर से मसलने में ही तो ज्यादा मजा आता है,,,,, (ऐसा कहते हो कि अपने दोनों हाथों को अपनी मां की चूचियों पर उलझाया हुआ था और अपने लंड को अपनी मां की गांड की दरार में उलझाया था। लंड की चुभन सुगंध को अपनी गांड की दरार में बहुत ही अच्छी लग रही थी वह मस्त हो रही थी और इस तरह से खुले में वह पहली बार अपने बेटे के साथ इस तरह के हालात में मजा ले रही थी उसे मजा आ रहा था देखते ही देखते अंकित अपनी मां की चूचियों को और करते हुए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था वह जानता था कि उसका लंड उसकी मां की बुर में अभी प्रवेश नहीं कर रहा है लेकिन फिर भी वह लंड की रगड़ से ही मस्त हो रहा था,,,, गांड के बीचोंबीच लंड की रगड़ उसे मदहोश कर रही थी। अंकित से अब रहा नहीं जा रहा था वह बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को जींस और टीशर्ट में देखकर उसके जवानी के लावा उबाल मार रहा था,,,, और वह एकदम से अपनी मां की टी-शर्ट में से अपने दोनों हाथ को बाहर निकाला और अपनी मां के कंधों को पकड़ कर उसे नीचे छुपाने लगा उसकी मां भी पेड़ पड़कर नीचे झुक गई जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम गोलाई ली हुई गांड एकदम से बाहर निकल आई,,, जिसे देख कर तो अब अंकित से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था पर तुरंत अपने लंड को अपनी मां की गुलाबी गली में प्रवेश कर दिया और उसकी कमर को पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया।

शाम ढल रही थी लेकिन अभी भी उजाला था इसलिए उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था घनी झाड़ियों के बीच पेड़ पकड़ा कर वह अपनी मां की चुदाई कर रहा था उसकी मां भी खुलकर शिसकारी ले रही थी यहां आकर उसे बहुत सुकून मिल रहा था आंखों को भी और बुर को भी उसे तो ऐसा ही लग रहा था कि जैसे सच में वह अपने बेटे के साथ यहां पर हनीमून पर आई थी,,,,, जींस पहने होने की वजह से सुगंधा से अपनी टांग खोली नहीं जा रही थी जींस में उसे थोड़ा आशाए महसूस हो रहा था वह बार-बार अपनी टांगे खोलने की कोशिश करती थी लेकिन जींस की वजह से उसके टांगे फेल नहीं रही थी इसका एहसास अंकित को हो गया था दो-चार धक्के लगाने के बाद अंकित अपनी मां की बुर में से लंड को बाहर निकाल लिया क्योंकि अब उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था,,, देखते देखते वह नीचे झुक गया और अपनी मां की जींस को नीचे की तरफ खींचना शुरू कर दिया,,, सुगंधा को एहसास हो गया था किसका बेटा क्या करने जा रहा है इसलिए वह इधर-उधर देखते हुए बोली।)

यह क्या कर रहा है अंकित जिंस मत उतार कोई आ गया तो गजब हो जाएगा,,,,

अरे मम्मी यहां कोई नहीं आने वाला है देख रही हो शाम ढल रहा है सब अपने-अपने होटल की तरफ जा रहे हैं यहां कौन आने वाला है इसलिए निश्चित हो जाओ,,,, (और ऐसा कहने के साथ ही वह अपनी मां की जींस को उसके पैरों से निकलना शुरू कर दिया सुगंध भी अपने बेटे के कंधे को पकड़ कर उसे सहारा देते हुए एक-एक करके अपनी टांग को उठाकर जींस को अपनी टांगों से बाहर निकलवा दी ,,,,जींस निकल जाने के बाद उसे अच्छा महसूस हो रहा था,,,,, अंकित अपनी मां के टांगों को खोलता हुआ बोला)

जींस में टांगे नहीं खोल पा रही थी ना,,,,।

हा रे तू सच कह रहा है मैं कब से पैर फैलाना चाहती थी लेकिन फैला नहीं पा रही थी अब अच्छे से चुदवाने में मजा आएगा,,,,, (इतना कहकर वह भी मस्ती से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने लगी,,,, अंकित कुछ देर तक अपनी मां को इसी तरह से चोदता रहा लेकिन उसका पानी निकालने का नाम नहीं दे रहा था जबकि उसकी मां एक बार अपना पानी निकल चुकी थी सुगंधा को भी मजा आ रहा था धीरे-धीरे हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था,,, ठंडी ठंडी हवा चल रही थी जिसका एहसास दोनों को और भी ज्यादा मदहोश बना रहाथा,,,,, अंकित अपनी कमर हिलता हूं अपनी मां की शर्ट को भी निकाल दिया था वह इस समय पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसे बिल्कुल भी आपत्ति नहीं थी नंगी होने में क्योंकि इस तरह से खुले में उसे और भी ज्यादा मजा आ रहा था। अपनी मां की चुदाई करते हुए धीरे से फिर से अपने लंड को बाहर निकाल लिया और अपनी मां की मां पड़कर उसे अपनी तरफ घूमा लिया और उसे अपनी बाहों में भर लिया,,,,, गदराई जवानी को अपनी बाहों में लेकर उसकी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी उसका लंड बार-बार फिर से उसके बुर पर रगड़ खा रहा था और सुगंधा उसके लंड को अपनी बुर में लेना चाहती थी क्योंकि काम खत्म किए बिना ही उसके बेटे ने लंड को बाहर निकाल लिया था,,, इसलिए सुगंधा अपने हाथ को नीचे की तरफ ले गई और अपने बेटे के लंड को अपनी बुर का रास्ता दिखा दे इस अवस्था में भी अंकित का लंड बड़े आराम से उसकी बुर में जाने लगा अंकित अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर खड़े-खड़े उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया,,,,

कैसा लग रहा है पहाड़ी पर चुदवाने में,,,

पूछ मत मेरे राजा कितना मजा आ रहा है ऐसा लग रहा है कि जिंदगी का असली सुख बस यही है,,,।

सच में यही जिंदगी का असली सुख है ,, इसके आगे तो सारे सुख फीके हैं,,,, (वह लगातार अपने लंड को अपनी मां की बुर में अंदर बाहर कर रहा था,,,, थोड़ी ही दूर पर उसे बड़ा सा पत्थर दिखाई दे रहा था अंकित धीरे से अपनी मम्मी को बाहर निकाल दिया यह देखकर उसकी मम्मी बोली)

क्या हुआ निकाल क्यों लिया,,,,!

ऊपर देखो,,, (सुगंधा भी बड़े से पत्थर की तरफ देखने लगी उसे देखकर उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था तो अंकित ही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) चलो उस पत्थर पर तुम्हारी चुदाई करते हैं,,,
(अपने बेटे की बात सुगंधा मान भी गई और बिना कुछ बोले उसे पत्थर की तरफ आगे बढ़ गई वह पूरी तरह से नंगी थी और जिस तरह से वह चल रही थी अंकित बावला हुआ जा रहा था उसे बहुत अच्छा लग रहा था जिस तरह से उसकी मां नंगी ही आगे बढ़ रही थी देखते ही देखते मां बेटे दोनों बड़े से पत्थर के पास पहुंच चुके थे पत्थर के पास पहुंचने के बाद सुगंध अपने बेटे से बोली,,)

अब,,,,?

अब क्या,,,, (इतना कहने के साथ ही हो अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और एकदम से उठाकर उसे पत्थर पर बैठा दिया,,,,, और अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बोला,,,) अब अपनी टांग खोल कर लेट जाओ,,,,।
(इतना सुनते ही सुगंधा पीठ के बल लेट गई फिर अपनी दोनों टांगों को खोल दी उसकी गुलाबी पर एकदम से चमक रही थी उसे पर उसके मदन रस की बूंदे लगी हुई थी जिसे देखकर अंकित से रहा नहीं गया और वह अपने प्यास होठों को अपनी मां के बुर पर रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया सुगंधा एकदम से मदहोश हो गई और अपना हाथ आगे बढ़कर उसके सर पर रखकर उसे अपनी बुर पर दबाना शुरू कर दी अंकित भी पागलों की तरह अपनी मां की बुर को चाटना शुरूकर दिया सुगंधा उत्तेजना के मारे जोर-जोर से शिसकारी लेना शुरू कर दी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसकी गरमा गरम शिकारी की आवाज इस पहाड़ी पर कोई सुनने वाला नहीं था,,,, अंकित मस्त हो चुका था वह अपनी दो उंगली को एक साथ अपनी मां की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए उसकी मलाई को चाट रहा था एक बार फिर से अंकित ने अपनी उंगली से ही उसकी बुर का पानी निकाल दिया था,,,, अब अंकित से भी रहा नहीं जा रहा था वह तुरंत अपने लंड को अपनी मां की बुर से सटा दिया और जोरदार करारा धक्का लगाया लंड पहली बार में ही उसके बच्चेदानी से जा टकराया जिसकी वजह से सुगंधा के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई लेकिन यह चीख पल भर में ही मदहोशी में बदल गई,,,,

गरमा गरम शिसकारी का आनंद लेते हुए,,, अंकित जोर-जोर से अपनी मां की बुर की चुदाई कर रहा है और तब तक चुदाई करता रहा जब तक इस बार उसका पानी नहीं निकल गया,,, दोनों मस्त हो चुके थे कुछ देर तक उसे बड़े से पत्थर पर ही सुगंधा लेटी रह गई और फिर धीरे से अंकित नहीं उसे बड़े पत्थर पर से अपनी मां को नीचे उतारा,,,, और वह अपने कपड़े को पहन कर फिर से पहाड़ी से नीचे आ गई थी,,,, जब उन दोनों का होटल कुछ दूरी पर रह गया था तो वह लोग पास में ही एक चाय की दुकान पर बैठकर चाय पी रहे थे जहां पर एक औरत भी बैठकर अकेले ही चाय पी रही थी तकरीबन उसकी मां की उम्र की तो नहीं बल्कि चार-पांच साल उसे बड़ी ही थी अंकित बार-बार उसे ही देख रहा था क्योंकि इस उम्र में भी वह बेहद कयामत की तरह लग रही थी,,,। चाय की चुस्की लेते हुए अंकित बार-बार उसे चोर नजर से देख ले रहा था क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उसकी मां यह देखें कि वह किसी और को देख रहा है,,,, वहां से बैठे-बैठे भी होटल दिखाई दे रहा था वह औरत अपनी ही मस्ती में बैठकर चाय पी रही थी। तभी सुगंधा अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई है देखकर अंकित बोला,,,।

क्या हुआ,,,,?

मुझे बड़ी जोरों की पेशाब लगी है,,,, (इधर-उधर देखते हुए वह बोली ताकि कोई उसकी बात सुन ना ले,,,, लेकिन अभी अंकित की चाय खत्म नहीं हुई थी वह कुछ देर वही बैठना चाहता था इसलिए अपनी मां से बोला,,)

अच्छा तुम चलो मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं,,,,।

ठीक है जल्दी आ जाना,,,, (इतना कहकर वह वहां से होटल की तरफ आगे बढ़ गई,,,,, और अंकित वहीं बैठकर उस औरत को देखता रहा तभी वह औरत अपनी जगह से उठी और चलती बनी अंकित अभी तक उसी को ही देख रहा था उसकी मदहोश कर देने वाली गांड कैसी हुई साड़ी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी लेकिन तभी उसकी नजर गई कि जहां पर वह बैठी हुई थी वह अपना पर्स वहीं पर भूल चुकी थी और वह आगे निकल गई थी इससे अच्छा मौका उनकी के पास कोई और नहीं था उससे बात करने के लिए वह जल्दी से परसों उठाया और उसके पीछे भागता हुआ गया और उसे आवाज देते हुए बोला,,,)

मैडम जी रुकीए,,,, ।
(लेकिन वह अंकित की बात को सुन नहीं रही थी और आगे अपनी ही धुन में चली जा रही थी तो एकदम से अंकित उसके पास पहुंच गया और उसके आगे खड़े होकर बोला)

अरे मैडम जी रूक चाहिए मैं कब से आपको आवाज दे रहा हूं और अपने की सुन नहीं रही है,,,।

मुझे,,,,( वह आश्चर्य से बोली,,,)

हां आपको,,,,

लेकिन किस लिए,,,,?

आप वहां पर अपना पर्स भुल आई थी,,,,।
(इतना सुनते ही उसकी आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई,,,, और वह तुरंत हाथ आगे बढ़ाकर अंकित के हाथ से अपने पर्स को ले ली और उसे खोलकर देखने लगी,,,, सब कुछ ठीक-ठाक था वह अपने पर्स को पाकर खुश थी,,,)

देख लीजिए सब कुछ ठीक-ठाक है ना,,,,।

तुम इसे खोल कर देखे नहीं,,,,।

मैं कैसे देख सकता हूं यह आपका है,,,,।

तुम नहीं जानते कि तुमने मुझे कितनी बड़ी मुसीबत से बचा लिए हो,,,,

मुसीबत से में कुछ समझ नहीं,,,,।

ईस पर्स में किसी की अमानत है,,, यूं समझ लो की किसी के दहेज की रकम है,,, और कल ही मुझे इस बैंक में जमा करना था अगर तुम मुझे यह मेरा पर्सनल लौट आते तो बहुत बड़ी मुसीबत आ जाती। तुम शायद जानते नहीं कि इसमें डेढ़ लाख रुपए हैं,,,।
(डेढ़ लाख रुपये शब्द सुनकर अंकित के तो होश उड़ गए लेकिन वह अपने चेहरे पर बिल्कुल भी इस बात का भाव आने नहीं दिया और वह एकदम से सहज बना रहा और बड़े आराम से जवाब दिया,,,)

अब इसमें क्या है मुझे तो नहीं मालूम,,, लेकिन यह जानता हूं कि यह पर्स आपका है इसलिए मैंने आपको दे दिया,,,

तुमने बहुत अच्छा किया बेटा कोई और होता तो यह पर्स लेकर रफुचक्कर हो गया होता वैसे क्या तुम यहीं रहते हो,,,।

जी नहीं यहां तो में घूमने के लिए आया हूं,,,।

ओहहह,,,, मैं भी यहां किसी काम से आई थी।

आप कहां ठहरी हैं,,,।

वह सामने होटल दिखाई दे रहा है ना वहां पर,,,, चलो मेरे साथ आज का डिनर मेरी तरफ से,,,,

जी अभी तो मैं नहीं आ सकता मुझे काम है,,,।

चलो कोई बात नहीं लेकिन कल जरूर आना,,,,

कितने दिनों के लिए रुकी है,,,

बस कल का ही दिन है शाम को मैं चली जाऊंगी,,,,।

चलिए कोई बात नहीं तो कल मैं आपसे मिल लुंगा,,, 12:00 के करीब,,,,,

बहुत अच्छे लेकिन आना जरूर क्योंकि तुम्हारा मेरे ऊपर बहुत बड़ा एहसान है मेरे साथ अगर खाना खा लोगे तो मैं समझूंगी मैं भी तुम्हारे लिए कुछ की हूं,,,।

यह बात है तब तो मैं जरूर आऊंगा,,,,।

ठीक है अभी मैं चलती हूं लेकिन कल तुम्हारा इंतजार करूंगी,,,,,।

जरूर,,,,,,।

(इसके बाद वह औरत अपने होटल की तरफ जाने लगी अंकित खड़ा होकर उसकी कसी हुई गांड को ही देखता रह गया,,,, और अपने मन में सोचने लगा कि अगर उसे औरत की खूबसूरती का दीवाना ना हो गया होता तो आज उसके हाथ डेढ़ लाख रुपए लग जाते लेकिन फिर अपने मन में सोचने लगा कि इस तरह का पैसा किस काम का जो किसी की खुशियों को छीन कर मिलता हो और इतना सोचकर वह अपने होटल की तरफ चल दिया)

अंकित बहुत खुश था क्योंकि जिस तरह से उसे अंजान औरत ने अच्छे तरीके से उससे बात की थी उसे लगने लगा था कि उसका काम जरूर बन जाएगा वैसे तो उसे उम्मीद नहीं थी लेकिन फिर भी वह कोशिश करने में मानता था और अब तक वह कोशिश करके ही इस मुकाम तक पहुंचा था। उस औरत की सादगी उसका भोलापन अंकित को भाग गया था दो-चार साल वह औरत उसकी मां से बड़ी ही थी लेकिन फिर भी उसका बदन काफी कसा हुआ था थोड़ा सा भारी बदन भले ही था पर आकर्षक पूरा था तभी तो पहली नजर में ही वह औरत अंकित को पूरी तरह से भा गई थी और उसे पूरा उम्मीद था कि बिस्तर पर वह उसे संतुष्ट करने में समर्थ है। उस अंजान औरत से मुलाकात के बाद वह अपने होटल लौट आया।

अपने कमरे में दाखिल हुआ तो उसकी मां नहाने की तैयारी कर रही थी यह देखकर वह बोला।

इस समय क्यों नहाने जा रही हो,,,?

पहाड़ी पर बड़े से पर्वत पर नंगी ही लेटा दिया था धूल मिट्टी लगी हुई है,,,।

ओहहह तब तो नहा लो अच्छा ही है रात को बिस्तर पर धूल मिट्टी नहीं लगेगी,,, (अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,, उसकी बात सुनकर सुगंधा बोली)

तेरी वजह से ही धूल मिट्टी लगी है मुझे क्या मालूम था कि तु मेरे सारे कपड़े उतार कर नंगी कर देगा,,, वैसे मानना पड़े तो कहीं भी कभी भी शुरू पड़ जाता है देखा नहीं है कि कौन सी जगह परहै।

इसमें मेरी गलती नहीं है सारा दोश तुम्हारा ही है।

अच्छा यह तो वही हो गया कि उल्टा चोर कोतवाल को डांटे,,,,।

अरे सच कह रहा हूं उसमें तुम्हारी गलती है पहाड़ियों पर चढने से पहले मेरा कोई ऐसा इरादा नहीं था तुम्हारी गांड ही इतनी खूबसूरत है कसी हुई जिसे देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा,,, और मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाया। वैसे भी तुम्हें मेरी आंखों के सामने पेशाब करने नहीं बैठना चाहिए था,,,।

अब ऐसा क्यों मुझे लगेगी तो पेशाब तो करना ही होगा ना,,, तुझे अपनी नजर घूमा लेना चाहिए था।

अच्छा भला ऐसा हो सकता है की आंखों के सामने इतना खूबसूरत नजारा दिखाई दे रहा और मेरे जैसा जवान लड़का अपनी नजर दूसरी तरफ घूमा ले,, सच कहूं तो तुम्हें पेशाब करता हुआ देखकर ही मेरा लंड खड़ा हुआ था,,,, तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हारा बेटा तुम्हें हर तरीके का सुख दे रहा है। घर की चार दिवारी में छत के ऊपर दर्जी की दुकान में और यहां पहाड़ी के ऊपर तुम तो सच में गंदी फिल्मों की हीरोइन हो गई हो।
(अंकित की यह बातें सुगंधा को बहुत अच्छी लग रही थी वह मन ही मन उसकी बातें सुनकर प्रसन्न हो रही थी वह बाथरूम के दरवाजे के पास खड़ी थी,,,, बाथरूम में जाने से पहले वह एकदम से अपनी टी शर्ट को उतारती हुई बोली,,,)

तेरे कपड़ों पर भी धूल मिट्टी लगी है तु भी आकर नहा ले,तभी बिस्तर पर तुझे आने दूंगी वरना नीचे ही सोना पड़ेगा,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर अंकित समझ गया कि उसकी मां क्या चाहती है इसलिए मुस्कुराने लगा और वह बाथरूम के अंदर प्रवेश कर पाती ईससे पहले ही वह फुर्ती दिखाते हुए अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया और यह देखकर सुगंधा मुस्कुराते हुए बाथरूम के अंदर घुस गई,,, बाथरूम इतना बड़ा था कि बार-बार मां बेटे दोनों बाथरूम के अंदर ही मजा ले रहे हैं इस समय भी सुगंधा टॉयलेट पोट पर बैठ गई और अपनी दोनों टांगें खोल दी क्योंकि बाथरूम में प्रवेश करते ही वह अपने बाकी के कपड़े भी उतार करना नहीं हो गई थी और अंकित अपनी मां का यही सर अच्छी तरह से समझता था मुस्कुराता हुआ वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच गया और अगले ही पल वह अपनी मां की बुर में समा गया,,,,। थोड़ी देर बाद दोनों मां बेटे नहा कर बाथरूम से बाहर आ गए थे और अपने अपने कपड़े पहन कर बिस्तर पर बैठकर इधर-उधर की बातें कर रही थी देखते ही देखते घड़ी में 9:00 बज गया था अब उन दोनों के खाने का समय हो रहा था,,, इसलिए दोनों अपने कमरे से निकाल कर बाहर आ गए क्योंकि होटल में ही रेस्टोरेंट भी था। जब वह दोनों नीचे उतर कर आए तो देख सड़क पर रोशनी ही रोशनी थी रात का नजारा ही कुछ और था और वह दोनों कुछ देर के लिए होटल से बाहर आ गए मुख्य सड़क पर।

यहां की चकाचौंध मां बेटे दोनों को अच्छी लग रही थी। सभी होटल रोशनी से सजी हुई थी और यह शायद हमेशा का नजारा था क्योंकि इस तरह की खूबसूरत लाईटे ही बाहर से आने वाले प्रवासी लोग को आकर्षित करती हैं वैसे भी मां बेटे दोनों के लिए यह पहली रात थी इसलिए दोनों यहां की चकाचौंध से काफी प्रभावित हुए थे दोनों को अच्छा लग रहा था लोग सड़क पर आ जा रहे थे गाड़ियां चल रही थी नव युगल हाथ में हाथ डालकर घूम रहे थे,,, मां बेटे कुछ ऐसे जोड़े को भी देखे थे जिनमें उम्र का काफी अंतर था जैसा कि उन दोनों के बीच यह देखकर दोनों का एहसास हो रहा था कि उनकी तरह ही बहुत से लोग हैं जो इस तरह के रिश्ते से आनंद लेते हैं। कुछ देर तक वहां खड़े रहने के बाद वह दोनों वापस होटल के रेस्टोरेंट मेंआ गए,,, वहां पर भी काफी लोग बैठे हुए थे कुछ लोग होटल में रुके हुए थे वह भी थे और जो नहीं रुके थे वह लोग भी खाना खाने के लिए आए थे। टेबल पर दोनों बैठे ही थे कि सुबह वाला वेटर मुस्कुराता हुआ उन दोनों के पास है और बोला।)

बोले होते तो मैं कमरे में ही खाना पहुंचा दिया होता,,,(सुगंधा की तरफ देखते हुए वह बोला तो सुगंधा शर्म के मारे अपनी नजरे नीचे झुका ली,, अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था कि वह ऐसा क्यों बोल रहा है इसलिए वह भी चुटकी लेता हुआ बोला,,,)

क्यों सुबह जो नजारा देखे थे फिर से देखना है क्या,,,?
(अंकित की बात का वह कुछ जवाब नहीं दे पाया बस मुस्कुरा दिया उसके चेहरे से ही लग रहा था कि वह बहुत कुछ देखना चाहता था,,,,, उसकी हालत को देखकरअंकित धीरे से उसे अपने पास बुलाया और उसके कान में बोला,,,)

मुठ मार कि नहीं इसके नाम की,,,,।
(अंकित की बात सुनकर वह बेटर एकदम से चौक किया और आश्चर्य से अंकित की तरफ देखने लगा तो अंकित मुस्कुराते हुए बोला) मैं समझ सकता हूं तुम्हारी हालत अच्छा यह बताओ तुम्हें कैसी लगी,,,

बहुत गजब की है मेरी आंखों के सामने से वह नजारा हट ही नहीं रहा है,,,,।

चिंता मत करो जब तक मैं इस होटल में हूं तब तक तो यह मेरे साथ रहेगी जाते-जाते में तुम्हारी मुलाकात इससे करा दूंगा लेकिन इसका चार्ज कुछ ज्यादा है,,,,।

कितना,,,,?(हैरानी से सुगंधा की तरफ देखते हुए बोला सुगंधा शर्म के मारे अपनी नज़रें उठा नहीं रही थी,,,)

यह मान लो कि तुम्हारी तनख्वाह चली जाएगी इसका मजा लेने में,,,।

बाप रे,,,,,।

कोई ज्यादा थोड़ी है यार सुबह जलवा तो तुमने देख ही लिया है जब जलवा देखकर तुम्हारी हालत हो गई है तो सोचो इस अवस्था में पूरी तरह से तुम्हारी बाहों में आएगी तब तुम्हारी क्या हालत होगी,,,,।

बात तो तुम सच कह रहे हो,,,,,।

तो फिर क्या इंतजाम करके रखना तुम्हारी बात करवा दूंगा यहां से जाने से पहले,,,,।

जरूर करके रखूंगा,,,,,।

पहले जाकर हमारे लिए कुछ खाने के लिए लेकर आओ बहुत भूख लगी है,,,,,।

ठीक है सर मैं अभी लेकर आता हूं,,,,(इतना कहकर वह सुगंधा की तरफ देखते हुए वहां से चला गया,,,, वेटर के जाते ही सुगंधा अपने बेटे को आंख दिखाते हुए बोली,,,)

कितना बेशर्म हो गया है रे तू अपनी ही मां का सौदा कर रहा है,,,,।

तुम्हें तो खुश होना चाहिए देख नहीं रहे हो अपनी पूरी तनख्वाह देने को तैयार हो गया है बस एक रात के लिए,,,,।

तू ही जाकर सो के साथ और ले ले पूरी तनख्वाह,,,।

मुझे थोड़ी ना अपनी पूरी तनख्वाह देगा मेरे पास बुर नहीं है ना उसे तो तुम्हारी बुर चाहिए दोनों चुचीया चाहिए जिसे देखकर वह पागल हो गया था,,,,।

बाप रे बहुत बेशर्म हो गया है तू जल्द ही तेरा इलाज करना होगा नहीं तो सच में तु मेरा सौदा कर देगा,,,,

लोग तुम्हारी मुंह मांगी कीमत देने को तैयार है,,,,

चल अब रहने दे बंद कर अपनी बकवास वह खाना लेकर आ रहा है,,,, (तिरछी नजर से वेटर की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली,,,, ओर वह वेटर टेबल पर खाना रखकर वहीं खड़ा हो गया टेबल छोड़कर उसका जाने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था लेकिन तभी मैनेजर ने उसका नाम लेकर बुलाया और उसे जाना पड़ा,,, उसकी हालत देखकर मां बेटे दोनों खुश हो रहे थे सुगंधा को तो कुछ ज्यादा ही खुशी थी उसे इस बात पर गर्व हो रहा था कि इस उम्र में भी लोग उसे पाने के लिए तरस रहे थे,,,, थोड़ी देर में मां बेटे दोनों ने खाना खाकर खाने का बिल चुका दिया और अपने कमरे की तरफ आगे बढ़ गए रात के 10:30 बज चुके थे कमरे में प्रवेश करते हैं अंकित दरवाजा बंद किया और अपनी मां को एकदम से अपनी गोद में उठा दिया और उसे ले जाकर के बिस्तर पर पटक दिया सुगंधा भी यही चाहती थी वह नहीं चाहती थी कि उसका बेटा थकान से कर होकर सो जाएं वह चाहती थी कि उसका बेटा जी भर कर उसकी चुदाई करके थक कर सो जाएं,,,,।

बिस्तर पर जाने से पहले वह अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया और उसकी मां के बदन पर अभी भी सारे वस्त्र थे इस समय वह साड़ी पहनी हुई थी और देखते ही देखते नग्न अवस्था में अंकित बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी मां को अपनी बाहों में भरकर उसके लाल लाल होठों का रसपान करने लगा वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था कमरे की लाइट जल रही थी इसलिए ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, सुगंधा के तन बदन में मदहोशी जा रही थी वह भी अपने बेटे का पूरी तरह से साथ दे रही थी। वह खुद अपने हाथों से अपने ब्लाउज का बटन खोल रही थी क्योंकि वह जल्दी से जल्द अपने दोनों खरबूजा को अपने बेटे के मुंह में डाल देना चाहती थी और ऐसा ही की ब्लाउज का बटन खोलने के साथ ही वह अपनी ब्रा को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे खोल भी नहीं ऊपर की तरफ खींच दी जिससे उसके दोनों कबूतर पंख फड़फड़ाने लगे और अपनी मां की हरकत को देखकर अंकित से भी रहा नहीं गया और वह तुरंत अपने मुंह में उसकी एक चूची को भरकर पीना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को दबाना शुरू कर दिया,,,, बिस्तर पर मां बेटे दोनों पागल हो जा रहे थे अंकित का मोटा तगड़ा लंड साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था। और यह सुगंधआ से बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के अपने बेटे के लंड को पकड़ कर जोर-जोर से दबा रही थी।

बिस्तर पर घमासान मचा हुआ था चुदाई से पहले काम क्रीड़ा का खेल पूरे जोर पर था। सुगंधा पागल हो जा रही थी इस समय वह पूरी तरह से चुदास से भरी हुई थी वह अपने बेटे के लंड को छोड़ कर दोनों हाथों से साड़ी पकड़कर उसे ऊपर की तरफ खींच रही थी क्योंकि उसके बेटे का लंड बार-बार उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था जिससे उसकी बुर पानी पानी हो रही थी,,, इस समय अपनी बुर की गर्मी उसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही है वैसे भी दिन भर जो कुछ भी हुआ था उसे उसके बाद में उत्तेजना का तूफान उठा हुआ था खास करके उसे वेटर के सामने जिस तरह से उसका बेटा बात कर रहा था वह उसके दिमाग पर पूरी तरह से छप चुका था और उसे कुछ पल के लिए ऐसा ही लग रहा था कि जैसे वह वास्तव में एक धंधे वाली है और जिसका डिमांड बहुत ज्यादा है। अंकित भी अपनी मां की हरकत को समझ गया था इसलिए वह भी अपना वजन अपनी मां के ऊपर से थोड़ा सा हल्का कर दे रहा था जिससे उसकी मां अपनी साड़ी को देखते-देखते अपनी कमर तक उठा दी थी और कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी हो गई थी उसके नंगेपन का एहसास अंकित को तब हुआ जब उसके लंड का सुपाड़ा उसकी मां की गुलाबी छेद पर रगड खाने लगा यह गरम एहसास अंकित के तन-बदन में आग लगाने लगा,,, और वह पल भर के लिए अपनी मां की चूची को अपने मुंह से बाहर निकालते हुए बोला,,,)

चड्डी नहीं पहनी हो क्या मेरी जान,,,,।

सहहहह ,,,,, नहीं मेरे राजा मुझे मालूम था इसलिए चड्डी नहीं पहनी थी,,,, (इतना कहने के साथ ही वह अपने दोनों हाथों को अपने बेटे की गांड पर रखकर हल्का सा दबाव बनाने लगे जिससे लंड का सुपाड़ा बुर की चिकनाहट पाकर अंदर की तरफ से सरकने लगा,,,, इस बार अपनी मां की हरकत और उसके इस तरह के जवाब से अंकित अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाया और अपनी कमर का दबाव अपनी मां की बुर पर बढ़ाने लगा जिससे उसका मोटा तगड़ा लंड बुर में प्रवेश करने लगा और देखते ही देखते, अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में घुस गया और अंकित अपनी मां की चूची को फिर से मुंह में भरकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया। यह चुदाई बड़ी जल्दबाजी में शुरू हुई थी अंकित इतनी जल्दबाजी दिखाने नहीं चाहता था और ना ही कभी दिखाया था लेकिन आज उसकी मां शायद अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई थी जिसके चलते अंकित को भी उसकी भावनाओं की कदर करके इतनी जल्दी उसकी चुदाई करना पड़ रहा था लेकिन फिर भी इस जल्दबाजी में भी एक अलग ही मजा था अंकित अपनी मां की चूचियों को बारी-बारी से पीता हुआ अपनी कमर को जोर-जोर से हिला रहा था नीचे से उसकी मां भी पूरा जोर लगा रही थी धक्के लगाने में,,,,, पूरा मौका माहौल होने के बावजूद भी इस समय बिस्तर पर अंकित पूरी तरह से नंगा था बल्कि उसकी मां अर्धनग्न अवस्था में थी उसके बदन पर अभी भी उसके सारे कपड़े थे बस उठे हुए थे। बदन में जितने की जरूरत थी उतना अंग खुला हुआ था उसकी चूची नंगी थी और उसकी बुर में लंड घुसा हुआ था भला एक औरत और एक मर्द को इससे ज्यादा क्या चाहिए।

अंकित बड़ी-भारी से अपनी मां की दोनों चूचियों को मुंह में भरकर पीता हुआ उसे जोर-जोर से दबाता हुआ अपनी कमर को हिला रहा था अंकित भी अपने दोनों हथेलियां को अपने बेटे की नंगी गांड पर रखकर इसका दबाव बना रही थी उसकी शिसकारी की आवाज पूरे कमरे में घुस रही थी वैसे भी इस समय वह अपनी शिसकारी की आवाज को दबाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी क्योंकि वह दोनों होटल के कमरे में थे और इस होटल के कमरे में अक्सर यही काम होता है जिस मां बेटे दोनों निश्चिंत थे अंकित भी अपनी मां की सिसकारी की मदहोश कर देने वाली आवाज को सुनकर और भी ज्यादा मस्त हो जा रहा था,,, अंकित का मोटा तगड़ा लंड हर धक्के के साथ उसके बच्चेदानी पर ठोकर लग रहा था और सुगंध भी हर धक्के के साथ हर किसी आह की आवाज निकाल देती थी जिससे वातावरण और भी ज्यादा मदहोश हो जाता था। देखते ही देखते दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी सुगंधा का वादा न करने लगा तो अंकित तुरंत अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर के उसे करके अपने सीने से लगा लिया और अपने धक्कों को बेहद तेज गति से चलने लगा झड़ते समय सुगंधा को अपने बेटे का हर धक्का स्वर्ग का सुख दे रहा था उसकी बुर से मदन रस की पिचकारी फुट पड़ी थी और दो-चार धक्को के साथ अंकित भी अपनी मां की बुर में झड़ने लगा था।

दोनों झड़ चुके थे दोनों मस्त हो चुके थे दोनों एक दूसरे की बाहों में असीम सुख का एहसास लिए हुए एक दूसरे के अंगों को सहला रहे थे। थोड़ी देर बाद अंकित अपनी मां के ऊपर से उठने लगा तो धीरे से उसका लंड उसकी मां की बुर से बाहर आ गया लेकिन अभी भी उसमें ज्यादा फर्क नहीं था अभी भी वह कड़क ही था धीरे से वह बिस्तर पर बैठ गया उसकी मां भी अपनी साड़ी को सिधी करने की शुध में नहीं थी वैसे भी सुगंधा अपने बेटे के साथ इस तरह का सुख भोग कर पूरी तरह से रंडी बन चुकी थी उसकी आंखों में आप अपने बेटे के सामने शर्म बिल्कुल भी नहीं रह गई थी। अंकित अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए देख कर बोला।

बहुत मजा देती हो मेरी जान,,,,, तुम्हें चोदकर तो जो मजा मुझे मिलता है पूछो मत।

मुझे भी तो बहुत सुख देता है,,,, मेरे जीवन का सपना था कि मैं अपने पति के साथ इसी तरह से कहीं घूमने जाऊंगा और जिंदगी का मजा लूटुं,,, लेकिन मेरा वह सपना सपना ही रह गया था।

लेकिन अब तो तुम्हारा सपना पूरा हो गया है ना मेरे साथ आकर,,,,।

हां तु सच कह रहा है,,, मैं कभी सोचा भी नहीं थी कि तेरे साथ मुझे यहां आना पड़ेगा,,, लेकिन तेरे साथ आकर मुझे असली सुख मिल रहा है बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा,,,,।

(इतना सुनकर मुस्कुराता हुआ अंकित बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और नंगा ही बालकनी में आकर कुर्सी पर बैठ गया और बाहर करने जा रहा देखने लगा बाहर सड़क सुनसान हो चुकी थी. बस इक्का दुक्का वाहन हीं गुजर रहा था। ठंडी ठंडी हवा चल रही है अपनी मां की चुदाई करने पर जिस तरह की गर्मी का एहसास उसे बिस्तर पर हो रहा था,,, यहां बालकनी में उसकी मां की जवानी की गर्मी धीरे-धीरे वातावरण की ठंडी शीतल हवा में फुर्र हो रही थी थोड़ी ही देर में सुगंध भी अपने बदन पर चादर लपेटे उसके पास आकर कुर्सी पर बैठ गई,,,, अंकित ने देखा तो उसकी मां के बदन पर ना तो साड़ी था ना तो ब्लाउज वह पूरी तरह से नंगी थी बस चादर लपेटे हुए थी। यह देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला।)

क्या हुआ कपड़े उतार कर नंगी हो गई,,,।

तो क्या कपड़े पहन कर मजा नहीं आ रहा था,,,।

तो यह चादर क्यों लपेटी हो,,, इसे भी हटा दो तो ज्यादा मजा आएगा,,,,।

धत् कोई देख लेगा तो,,,,

12:00 बजने वाले हैं देख रही हो सड़क सुनसान हो चुका है कोई देखने वाला नहीं है।

चलेगा कोई बात नहीं मैं ऐसे ही ठीक हूं,,,

जैसी तुम्हारी मर्जी मुझे तो ऐसा ही अच्छा लग रहा है,,, (ऐसा कहते हुए अंकित कुर्सी पर बैठे अपनी दोनों टांगों को हल्के से खोल दिया, चुदाई करने के बाद,, उसका लंड हल्का सा मुरझा गया था लेकिन फिर भी टांगों के बीच लटका हुआ उसका हथियार बेहद शानदार लग रहा था जिस पर सुगंधा की नजर बार-बार चली जा रही थी। और यही वह हथियार था जिसे देखकर वह अपने सारे हथियार रख दी थी और घुटने के बल हो गई थी एक तरह से वह अपने बेटे की मर्दानगी के आगे घुटने टेक दी थी। बातों का दौर यूं ही चल रहा था मां बेटे दोनों आपस में बात करते हुए सुनसान सड़क को देख रहे थे ठंडी ठंडी हवा चल रही थी पहाड़ी इलाका होने की वजह से वातावरण में धुंध सा फैला हुआ था।बेहद आहलादक मौसम था। सुगंधा की नजर बार बार अंकीत के लटके हुए लंड पर चली जा रही थी। जिसे देखकर फिर से सुगंधा की आंखों में खुमारी छाने लगी थी और वह बात करते हुए अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेट की मुरझाए लंड को थाम ली और उसे हिलाने लगी,,, यह देखकर अंकित मुस्कुराने लगा और वह भी अपना हाथ चादर में डालकर अपनी मां की कचोरी जैसी हुई बुर को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा दोनों एक दूसरे के अंगों से खेलना शुरू कर दिए थे दोनों की आंखों में खुमारी छाने लगी थी,,,, अद्भुत सौंदर्यात्मक वातावरण में मां बेटे फिर से मदहोश हो रहे थे सड़क पूरी तरह से सुनसान हो चुकी थी क्योंकि धीरे-धीरे घड़ी में पौने एक का समय हो रहा था,,,,

उत्तेजना के मारे सुगंधा थूक से अपनी सूखे हुए गले को गिला करने की कोशिश कर रही थी और अंकित अपनी मां की बुर से हालाते सहलाती है अपनी एक उंगली को उसके अंदर प्रवेश कर कर अंदर बाहर करने लगा था अंकित को महसूस हो रहा था कि उसकी मां की बुर में अभी भी गर्मी बरकरार थी अंकित को अपनी ऊंगलियो में बुर के अंदर की तपन महसूस हो रही थी,,,,, उत्तेजना के हमारे सुगंधा का चेहरा लाल हो चुका था वह कुर्सी पर बैठे-बैठे ही अपने होठों को अपने बेटे के चेहरे की तरफ आगे बढ़ाने लगी तो अंकित भी अपनी होठों को अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा दिया और अगले पल दोनों के होंठ आपस में मिल गए और दोनों एक दूसरे के होठों का रसपान करना शुरू कर दिए धीरे-धीरे अंकित का लंड फिर से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था,,,, जिसकी गर्माहट सुगंधा को अपनी हथेलियां में महसूस हो रही थी और इसका सीधा असर उसे अपनी गुलाबी गली में महसूस हो रही थी जो की बार-बार मदन रस छोड़ रही थी। कुछ देर तक मां बेटे इसी तरह से खेलते रहे और चुंबन का आनंद लेते रहे। दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि यही सुख भोगने के लिए तो वह लोग कितनी दूर यहां पर आए थे और अगर इस अनमोल समय को सोकर गुजार देंगे तो यहां आने का उनका कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा।

अंकित धीरे-धीरे अपनी मां के बदन पर से चादर को हटा रहा था और देखते-देखते कुर्सी पर वह पूरी तरह से नंगी हो गई थी मां बेटे दोनों बालकनी में नंगे थे किसी के देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि बालकनी में अंधेरा था वह लोग सब कुछ देख सकते थे लेकिन कोई और उन्हें नहीं देख सकता था इसी मौके का फायदा उठाते हुए अंकित अपनी मां को कुर्सी पर से उठाने लगा उसकी मां भी उसका इशारा पाकर कुर्सी पर से उठकर खड़ी हो गई थी,,, अंकित अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ठीक अपने सामने खड़ी कर दिया और उसके नितंबों की लकीर के ऊपरी हिस्से पर चुंबनों की बारिश कर दिया उसके चुंबन से मदहोश होकर सुगंधा खुद-ब-खुद अपनी गांड को उसके सामने परोसती और आगे की तरफ झुक कर बालकनी की रेलिंग पकड़कर खड़ी हो गई,,,, अंकित पागलों की तरह अपनी मां की गांड पर इधर-उधर चुंबनों की बारिश करने लगा गोरी गोरी गांड पर अंकित अपने होठों से मोहर लगा रहा था सुगंधा का मन बहक रहा था वह पागल हो जा रही थी अब उसे भी बिल्कुल भी डर नहीं था की बालकनी पर इस अवस्था में खड़ी होने पर कोई उसे देख लेगा तो क्या होगा वैसे भी वह निश्चित हो गई थी उसे भी इस बात का एहसास हो गया था की बालकनी में जहां पर वह खड़ी है वहां पर पूरी तरह से अंधेरा था और वहां पर कोई देख नहीं सकता था इसलिए तो वह खुलकर मजा ले रही थी वह थोड़ा सा और झुककर अपने टांगों को फैला दी थी ताकि उसकी गुलाबी बुर को उसका बेटा आराम से देख सके और उस पर भी अपने होठों से मोहर लगा सके,,,, और ऐसा ही हुआ अंकित अपनी मां की गुलाबी छत पर अपने होंठ ट रखकर उसे चाटने लगा यह जानते हुए भी की उसकी बुर से अभी भी उसका ही लावा टपक रहा था,,, जो कि उसकी मां की मदन रस से मिला हुआ था।

अंकित अपनी मां की गांड की दोनों फांकों को दोनों हाथों से पकड़कर उसकी बुर चाट रहा था उसे मजा आ रहा था और धीरे-धीरे सुगंध भी शिसकारी ले रही थी,,,, लेकिन तभी अंकित शरारत करते हुए अपनी जीभ को उसकी गांड के भुरे रंग के छेद पर रखकर उसे अपनी जीभ से कुरेदने लगा और सुगंधा को अपने बेटे बेटी की यह हरकत इतनी लाजवाब लगी कि वह पूरी तरह से मचलने लगी मत होने लगी मदहोशी उसके नसों में पूरी तरह से छाने लगी,,,, वह मदहोश होकर अपनी गांड को पूरी तरह से एकदम कड़क कर दे रही थी,,, उसे अपनी उत्तेजना संभाले नहीं संभाल रही थी वह अपनी गांड को गोल-गोल घूमाते हुए अपने बेटे के चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दी थी और अंकित पागलों की तरह अपनी मां की गांड का छेद चाट रहा था उसमें से निकलने वाली मादक खुशबू उसे मदहोश कर रही थी उसे और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी वह एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर जोर-जोर से हिला रहा था क्योंकि इस हरकत की वजह से उससे भी अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,,,,,।

सहहहहह,,,, आहहहहह क्या मस्त गांड है रे तेरी कसम से ऐसी कहा तो मैं आज तक नहीं देखा इतनी खूबसूरत है इसे चाटने में मुझे और ज्यादा मजा आ रहा है,,,,, ऊमममममम,,,,,, ऊमममममम,,,,

तो चाट हरामजादे तुझे रोका किसने है घुस जा मेरी गांड के अंदर,,,,, आहहहहहह सहहहहहहहह बहुत मजा आ रहा है जीभ घूमा घूमा कर चाट,,, ऊमममममममम।

(सुगंधा पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी बालकनी की रेलिंग पड़े वह पीछे नजर घुमाए अपने बेटे की हरकत को देखते हुए अपनी बड़ी-बड़ी गांड को गोल-गोल घूमा रही थी उसके चेहरे पर रगड़ रही थी और अंकित पागलों की तरह अपनी मां की गांड के छेद को चाट रहा था। अंकित दोनों हाथों से अपनी मां की भारी भरकम गांड को पकड़े हुए था वह भी पूरी तरह से मत हो गया था उसका लंड बगावत पर उतारू हो गया था कुछ देर तक किसी तरह से अपनी मां की गांड की चटाई करता रहा क्योंकि अब उसके मन में कुछ और चल रहा था फिर धीरे से वह अपनी एक उंगली को अपनी मां की गांड के छेद में डालने की कोशिश करने लगा यह देखकर उसकी मां गांड को आगे की तरफ ले ली और उसे बोली।)

यह क्या कर रहा है,,,?

बहुत मजा आ रहा है मैं भी देखना चाहता हूं गांड का छेद कितना मजा देता है,,,,।

धत् ,,,,, इसमें कौन सा मजा आएगा,,,,।

मजा तो आ रहा है डालने दो,,,,,,(इतना कहने के साथ ही हुआ है अपनी आधी उंगली अपनी मां की गांड के छेद में डाल दिया सुगंधा को अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन वह भी इनकार नहीं कर पाई और तब तक अपने बेटे की हरकत से उसे भी मजा आने लगा अंकित अपनी उंगली को उसकी गांड के छेद में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,,,,,)

कैसा लग रहा है मेरी रानी,,,,,

सहहहहह अच्छा लग रहा है मेरे राजा,,,,ऊममममम तू तो मुझे पागलकर देगा,,,,,।

पागल तो तू मुझे कर दी,,,, गुलाबी बुर के साथ-साथ तेरी गांड का छेद भी लाजवाब है,,,,,आहहहहह कितना गरम है अंदर से,,,,,

ठंडी ठंडी हवा में गर्माहट दे रही है ना मेरी गांड,,,,

तु है ही इतनी गर्म चीज के बर्फ भी गिरने लगेगी तो भी तू मुझे गरम कर देगी,,,,,आहहहहह दूसरी उंगली डालकर देखता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह दूसरी उंगली को भी अंदर प्रवेश कराने की कोशिश करने लगा यह देख कर सुगंधा बोली)

तू भी घुस जा अंदर ले ले मजा पूरा,,,,

घुसने जैसा होता तो मैं कब का घुस गया होता,,,, लेकिन इसमें तो मैं अपना लंड डालूंगा,,,,।
(लंड डालने वाली बात सुनकर वह एकदम से घबरा गई और बोली,,)

नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल भी मत करना मेरी गांड का छेद छोटा है और तेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा है घुस नहीं पाएगा,,,,,।

लेकिन उंगली तो आराम से चली गई देखो मेरी दो उंगली तुम्हारी गांड में है,,,,,आहहहहहह कितने आराम से अंदर बाहर हो रही है मजा आ रहा है ना तुमको,,,,।

मजा तो आ रहा है लेकिन तेरा लंड अंदर डालकर कहीं मजा सजा ना बन जाए,,,,।

ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा,,,, आज नया अनुभव ले लेते हैं जैसे कहते हैं ना गाली देते समय तेरी गांड मार लूंगा तो आज मैं तेरी गांड मारना चाहता हूं,,,,,।

मुझे डर लग रहा है,,,,

डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है आज तक मेरे लंड में तुम्हें दुनिया का हर सुख दिया है तो तुम्हारी गांड मारने में भी सुख देगा,,,, तुम ही सोचो यहां से नया अनुभव लेकर जाओगे गांड मरवाने का,,,,आहहहहह कितना मजा आएगा ना जब मैं तुम्हें खाऊंगा की आज मैं तुम्हारी गांड मारूंगा,,,,,ऊमममममम देखो तो सही इतना कह कर ही मेरे लंड की हालत खराब हो रही है,,,, और वैसे भी आज तुम्हारी मदहोश कर देने वाली जवानी की एक तरह से परीक्षा है अगर तुम गांड मरवाने में सफल हो गई तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत के साथ-साथ बहादुर हो जाओगी।

मुझे नहीं बनना बहादुर औरत मुझे गांड नहीं मरवाना,,,,।

ऐसा कैसे हो सकता है मेरी जान अब तो तुम मुझे पागल कर रही हो,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी दोनों गलियों को गोल-गोल घूमता हुआ अपनी मां की गांड के छेद नहीं अपने लंड के लिए जगह बना रहा था सुगंधा चाहे कितना भी इंकार कर ले लेकिन अपने बेटे की हरकत से उसे भी मजा आ रहा था,,,, वह भी पल में जा रही थी तभी तो अपनी गांड कौन-कौन घूमा रही थी और उंगली का मजा ले रही थी,,,,, अंकित धीरे से अपनी उंगली को अपनी मां की गांड के छेद से बाहर निकाल और फिर उसके पीछे खड़ा हो गया अपने मोटे तगड़े लंड को हाथ में लेकर और उसके सुपाड़े पर ढेर सारा थद चुपड दिया,,,,, सुगंधा जानती थी कि आप उसका बेटा क्या करने वाला है और वह यह भी जानती थी कि इनकार करने का कोई मतलब नहीं है जब कोई बात उसके बेटे के मन में आ जाती है तो उसे पूरा करके ही मानता है और इसमें भी कोई शक नहीं था कि उसके बेटे की हर हरकत से उसे आज तक आनंद ही मिलता रहा था इसलिए वह भी इनकार नहीं कर पाई और जैसे ही लंड का मोटा सुपाड़ा सुगंधा को अपनी गांड के छोटे से छेद पर महसूस हुआ वह पूरी तरह से गनगना गई,,,,,

ऊमममममममम,,,,सहहहहह मत कर मेरे राजा,,,,

मुझे मत रोको मेरी रानी मुझे आज करने तो मनमानी इसमें तुम्हारा ही भला है,,,, मैं जानता हूं इस बारे में तुम कभी सोची भी नहीं थी और अभी तक तो मैं भी नहीं सोचा था लेकिन तुम्हारी गांड का छेद इतना लाजवाब है कि आज इसमें डालने का मन कर रहा है,,, (सुपाड़े को अपनी मां की गांड के छेद से सटाए हुए ही वह बोला,,,)

मेरी गांड फट जाएगी तेरे लंड से,,,,

बिल्कुल भी नहीं एकदम आराम से डालूंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही हुआ अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर उसके सुपाड़े को अपनी मां की गांड के छेद में डालने की कोशिश करने लगा,,,, थूक कि चिकनाहट पाकर लंड का सुपड़ा धीरे-धीरे सरकने लगा लेकिन सुगंधा को अपनी गांड के छेंद में बहुत दर्द महसूस हो रहा था इसलिए उसकी गांड को आगे की तरफ लेने की कोशिश करने लगी लेकिन अंकित एक हाथ से उसकी कमर को पकड़ कर फिर से अपनी तरफ खींच लिया,,,,, जो की एक तरह से उसकी मां के लिए जा रहा था कि आज वहां बिना गांड मरवाए जा नहीं पाएगी,,,, अंकित पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन उसे भी एहसास हो गया था कि वाकई में उसकी मां की गांड का छेद सुपाड़े के मुकाबले छोटा था,,,, बार-बार अंकित थूक लगा रहा था ढीला करने की कोशिश कर रहा था और उसकी एक कोशिश रंगला रही थी आधा लंड का सुपाडा सुगंधा की गांड के छेद में प्रवेश कर चुका था,,,, यह देखकर अंकित का हौसला बढ़ने लगा था लेकिन सुगंधा को बहुत दर्द हो रहा था,,,, वह बार-बार उसे निकालने के लिए कह रही थी लेकिन अंकित टस से मस नहीं हो रहा था। और फिर से जोर लगाने लगा और इस बार उसके लंड का सुपाड़ा उसकी मां की गांड के छेद के छल्ले में प्रवेश कर चुका था,,,, यह अंकित के लिए विजय की शुरुआत थी उसके माथे पर पसीने की बूंदे ऊपर आई थी वाकई में इस कार्य में कुछ ज्यादा ही मेहनत लग रही थी इस बात का एहसास अंकित को अच्छी तरह से हो रहा था जो कि इस ठंडी हवा में भी उसके पसीने छुड़ा दे रही थी।

बहुत दर्द कर रहा है अंकित,,,,।

चिंता मत करो मेरी जान मुंह घुस गया है तो बाकी का अंग घुस ही जाएगा‌।

लेकिन मेरी जान चली जाएगी इतना दर्द कर रहा है,,,

पागल हो गई हो क्या अभी देखना कितना मजा आएगा और इस बार अंकित बाकी बचे लंड पर फिर से थूक लगाने लगा और फिर से जोर लगाकर उसे अंदर की तरफ डालने लगा धीरे-धीरे लंड सरक रहा था गांड का छल्ला काफी कसा हुआ था लेकिन फिर भी थूक की चिकनाहट उसे अंदर सरकने में मदद कर रही थी,,, सुगंधा अपने दर्द को अच्छे लेने के लिए बालकनी की रेलिंग को बड़े कस के पकड़ी हुई थी,,,, अपने दांतों को दबाई हुई थी ताकि उसके मुंह से चीख ना निकल जाए और मन ही मन में अपने बेटे को गाली दे रही थी कि हरामजादे को आज गांड मारने का मन कैसे करने लगा,,,, देखते-ही-देखते अंकित की मेहनत रंग ला रही थी उसका आधा लंड उसकी मां की गांड में घुस चुका था और अब अंकित समझदारी दिखाते हुए आधे लंड से ही अपनी मां की गांड मारना शुरू कर दिया था,,, वैसे भी अंकित का लंड इतना लंबा तो था ही की आधा लंड भी उसकी मां को पूरा लंड का मजा दे रहा था ,,,, अंकित धीरे-धीरे अपने लंड को बाहर निकलता है और उसे अंदर की तरफ धीरे से ही डालता और सिर्फ आधा ही लंड क्योंकि वह जानता था कि पूरा जाने में उसकी मां को ज्यादा दर्द करने लगेगा अंकित को बहुत मजा आ रहा था वाकई में गांड के छेद का कसाव उसके आनंद को और भी ज्यादा बढ़ा दिया था। अंकित अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से थामे अपनी कमर को हिला रहा था बालकनी के अंदर मां बेटे पूरी तरह से निर्वस्त्र थे और वह भी एकदम खुले में लेकिन घड़ी में 2:00 बज रहे थे और इस समय पूरा मोहल्ला सुनसान था सड़क पर कुत्ता भी दिखाई नहीं दे रहा था क्योंकि पहाड़ी इलाका होने की वजह से ठंडक बढ़ने लगी थी। लेकिन ऐसे ठंडे माहौल में भी अंकित अपनी मां के पसीने छुड़ा रहा था।

अंकित को मजा आ रहा था आदि लंड से ही वह अपनी मां की गांड मारने में सफल हो चुका था एक तरह से अंकित के लिए यह ऐतिहासिक जीत की शुरुआत थी,,, क्योंकि वह जानता था कि इससे पहले उसकी मां कभी गांड मरवाने का सपना भी नहीं देखी थी और आज वह हकीकत में इन पहाड़ों की वादियों में टांग फैलाए गांड मरवा रही थी,,,,,।

अब कैसा लग रहा है मेरी जान,,,,,।

अब थोड़ा ठीक लग रहा है,,,,,ऊमममममम।

थोड़ा नहीं बहुत ज्यादा तुम्हारी गांड का छल्ला कुछ ज्यादा ही कसा हुआ है मेरा लंड एकदम दब दब के अंदर की तरफ जा रहा है मेरी जगह कोई और होता तो गांड के छेद के मुहाने पर ही झड़ जाता,,,।

अच्छा होता काम से कम यह दर्द तो नहीं झेलना पड़ता,,,।

दर्द के आगे ही तो असली मजा है शुरू-शुरू में बुर में लेने में भी तुम्हें दर्द होता था याद है ना लेकिन कितने आराम से अब ले लेती हो ऐसे ही गांड के छेद में भी होगा,,,, बहुत मजा आएगा अभी तो आधा गया है,,,।
(इतना सुनते ही सुगंधा चौंकते हुए बोली)

क्या,,,?

हां मेरी जान क्योंकि तेरे बेटे का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा है,,,(और इतना कहने के साथ ही कच कचा के अंकित अपने आधे बचे लंड को भी अपनी मां की गांड में ठुंस दिया,,,, एकदम से उसके मुंह से चीख निकल गई लेकिन जल्द ही वह अपने आप पर काबू कर ली क्योंकि जोर से चीख निकालने का मतलब था कि किसी को उसकी चीख सुनाई दे देती मौके की नजाकत को अंकित अच्छी तरह से समझता था इसलिए अपने लंड को उसकी गांड में डालकर उसी स्थिति में एकदम से रुक गया। और अपनी मां के दर्द को कम करने के लिए उसकी गर्दन पर चुंबनों की बौछार करने लगा साथ नहीं दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर उसके दोनों चूचियों को थाम लिया और उसे हल्के हल्के मसलने लगा,,,,,, अंकित बहुत मदहोश हो चुका था आनंदित हो गया था उसके बदन में उत्तेजना परम शिखर पर थी वह पूरी तरह से पागल हो गया था अपनी मां की गांड मार कर,,,,,, और उसकी मां कोई सुन ना ले इसलिए धीरे से अपनी भड़ास निकालते हुए बोली,,,)

मादरचोद रंडी की औलाद ,,,, मैं तुझसे कह रही हूं कि मुझे दर्द हो रहा है इसलिए एक साथ अपना पूरा लंड डाल दिया,,,,।

पूरा नहीं जानेमन आधा तो पहले ही डाल चुका था बस आधा डाल दिया,,, और मुझे रंडी की औलाद क्यों कह रही हो क्या तुम रंडी हो,,,।

तूने बना दिया जो कसर बाकी थी तूने पूरा कर लिया गांड मार कर,,,,,

यह तो तुम्हें मजा देने के लिए किया हूं,,,,।

मेरे पास लंड होता तो तेरी गांड में डाल देती और पता चला की गांड मरवाने में कितना दर्द होता है।

लेकिन ऐसा हो नहीं सकता क्योंकि तुम्हारे पास मखमली बुर है जिसका मैं दीवाना हुं,,,,।

तो बुर चोदना चाहिए था ना गांड क्यों मार रहा है।

तुम्हारे बदन का कोई भी छेद मेरे लिए अनमोल है,,,, मैं सब छेद में डालकर देखना चाहता हूं।( अपनी बातों के जादू में अपनी मां को फंसाते हुए वह अपनी मां की चूचियों को धीरे-धीरे से मसल कर उसकी उत्तेजना को पटाने की कोशिश कर रहा था और उसकी मेहनत रंग ला रही थी धीरे-धीरे दर्द से कराहने की आवाज मस्ती की शिसकारी में बदलने लगी,,,,, अंकित फिर से अपने लंड को बाहर निकाल कर धीरे से अंदर की तरफ डालने लगा थोड़ा सा दिक्कत हो रहा था लेकिन धीरे-धीरे यह दिक्कत भी खत्म हो गई अब बड़े आराम से अंकित का लंड उसकी मां की गांड में अंदर बाहर हो रहा था अभी वह धीरे-धीरे अपनी मां की गांड चुदाई कर रहा था लेकिन जैसे ही सुगंधा की शिसकारी की आवाज बढ़ने लगी वह अपनी कमर की रफ्तार को बढ़ाने लगा,,,,, अपनी मां की दोनों चूचियों को थाने वह बालकनी में अपनी मां की गांड मारना शुरू कर दिया था उसे बहुत मजा आ रहा था गांड का छल्ला काफी कसा हुआ था जिससे उसका मजा बढ़ता ही जा रहा था,,। मां बेटे दोनों कभी सोचा नहीं थे कि अपने घर से इतनी दूर पहाड़ियों में आकर वाला खुले में इस तरह से चुदाई का मजा लूटेंगे,,,, वाकई मे ईस जगह पर किसी का भी डर नहीं था किसी के भी देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी अगर देख भी लेता तो उन दोनों का क्या बिगाड़ देता क्योंकि यहां पर उन दोनों को कोई जानता ही नहीं था इसलिए तो दोनों खुलकर मजा लूट रहे थे।

अब कैसा लग रहा है मेरी रानी,,,।

बहुत मजा आ रहा है,,,,,आहहहहह तूने मेरी गांड के सारे तार खोल दिए हैं,,,।

तार खुल गए तभी तो मजा लूट रही हो,,,,आहहहहह आहहहहह अब देखो कितने आराम से मेरा लंड अंदरघुस रहा है,,,,।

मैं कभी सोचा भी नहीं थी कि मेरी गांड के छोटे से छेद में तेरा मोटा लंड घुस जाएगा,,,,,,आहहहहहह लेकिन इसकी रगड़ा रह रहकर थोड़ा सा दर्द जरूर देती है।

दर्द थोड़ा सा लेकिन मजा ढेर सारा,,, और तुम्हें क्या चाहिए,,,,,आहहहहहह आहहहहहहहह देखो तो सही चोदते समय मेरे भी मुंह से यह सब निकल जा रहा है। सच में बहुत मजा आ रहा है तुम्हारी गांड मारने में अब तक तो मैंने सुना ही था लेकिन आज मार कर भी देख लिया,,,,,आहहहहहह (अंकित पूरी तरह से मत हो चुका था इससे पहले अंकित ने राहुल की मां की गांड मरा था लेकिन उससे भी ज्यादा मजा आज उसे अपनी मां की गांड मारने में आ रहा था, गांड मारने का भी अनुभव दिलचस्प होता जा रहा था अंकित के लिए,,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से बालकनी में खड़े होकर अपनी मां की गांड मारता रहा काफी देर से खड़े होने के कारण उसकी मां की टांगे दर्द करने लगी थी और वह अपने बेटे से बोली,,,)

खड़े-खड़े तो मेरी टांगे दर्द करने लगी,,,,,,।

यह बात है चलो फिर अंदर बिस्तर पर तुम्हारी गांड मारता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपने लंड को अपनी मां की गांड के छेद से बाहरनिकाल लिया और फिर अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे कमरे के अंदर ले आया कमरे के अंदर आते ही सुगंध को मालूम था कि उसे क्या करना है वह जल्दी से बिस्तर पर घोड़ी बन गई और अपनी बारी भर काम करने को हवा में उठा दे अंकित बिस्तर के नीचे ही खड़ा रह गया क्योंकि यही पोजीशन सही भी थी,वह बिस्तर के नीचे खड़े होकर फिर से अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां की गांड में छेद में डाल दिया इस बार बिना दिक्कत के उसका पूरा लंड गांड के छेद में प्रवेश कर गया यह देखकर अंकित के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह फिर से अपनी मां की कमर पकड़कर उसकी गांड मारना शुरू कर दिया अपनी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाने के लिए सुगंध अपने हाथ को नीचे की तरफ लाकर अपनी बुर में अपनी एक उंगली डालकर उसे अंदर बाहर कर रही थी,,,, तकरीबन 20 मिनट की और गांड मराई के बाद अंकित के लंड से वीर्य का फव्वारा फुट पड़ा जो उसकी मां की गांड के छेद को भरने लगा,,,,, अंकित अपनी मां की गांड के छोटे से छेद पर भी विजय प्राप्त कर चुका था।

मां बेटे दोनों काफी थक चुके थे क्योंकि घड़ी में तीन बज चुके थे सुगंधा नंगी ही बाथरूम में गई और बैठकर पेशाब करने लगी उसे अपनी खबर में दर्द महसूस हो रहा था क्योंकि आज उसके बेटे ने कुछ ज्यादा ही मेहनत कर दिया था गांड के छेद में भी दर्द महसूस हो रहा था जिसका कारण वह अच्छी तरह से जानती थी। मां बेटे दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर बिस्तर पर लेटे हुए थे यहां पर मां बेटे दोनों का पहला दिन और पहली रात थी जो की पूरी तरह से सफल हो चुकी थी इसके बाद वह दोनों नींद की आगोस में चले गए।

रात भर गांड मराने के बाद सुगंधा की नींद खुल गई सुबह के 6:00 बजे रहे थे वैसे भी कोई काम नहीं था इसलिए जल्दी उठने का कोई मतलब नहीं था 6:00 बजे आंख खुलने के बावजूद भी वह कुछ देर तक यूं ही बिस्तर पर लेटी रही,,, अंकित अभी भी उसकी बाहों में गहरी नींद में सो रहा था। रात भर जमकर मेहनत जो उसने किया था,,, सुगंधा स्नेह भरी नजरों से अपने बेटे को देख रही थी,,, कुछ महीने पहले उसने कभी सोचा भी नहीं थी कि उसका रिश्ता अपने ही बेटे के साथ इस तरह से गहरा हो जाएगा,,, इस बात को वह भी मानती थी कि वह पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी शर्म का उसकी आंखों में अब नामोनिशान नहीं था क्योंकि वह जानती थी शर्म करने से कोई फायदा नहीं है बेशर्म बनने के बाद ही उसे जीवन का असली सुख प्राप्त हुआ था और इस सुख को वह खोने नहीं देना चाहती थी। रात के बारे में वह सोच रही थी उसका बेटा कितना शैतान हो चुका था उसे जीवन का हर सुख दे भी रहा था और ले भी रहा था,,, वह सोची नहीं थी कि उसके बदन का अनमोल अंग का लेने के बावजूद भी वह इस कदर से उसकी गांड मारेगा,,, उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा है उसके गांड के छेद के लिए जिद करेगा क्योंकि अक्सर मर्द औरत की बुर के लिए ही पागल होते हैं लेकिन अब उसे एहसास होने लगा था कि मर्द की प्यास केवल औरत की बुर से नहीं मिटती,, बल्कि उसे एहसास होने लगा था कि औरत के बदन का हर एक छेद मर्दों के लिए प्यास बुझाने का साधन होता है,,,, अपने बेटे की जीद को देखकर वह इस समय मुस्कुरा रही थी।

देखते ही देखते घड़ी में 6:30 बज चुके थे अभी भी अंकित गहरी नींद में सो रहा था चादर के अंदर मां बेटे दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में थे,,,, सुगंधा को अपनी गांड के छेद में हल्का-हल्का दर्द महसूस हो रहा था इसका कारण वह अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी उसके बेटे का लंड कोई साधारण लंड नहीं था जिसकी वजह से उसे अपनी गांड के छेद में दर्द महसूस हो रहा था इतना तो बुरे में डलवाने पर भी दर्द नहीं हुआ था। वह धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतरी और आईने में अपने आप को देखने लगी नग्न अवस्था में वह रूप की रानी लग रही थी अपनी कमर पर हाथ रखकर अपने बदन को इधर-उधर घूमाकर अच्छी तरह से देख लेने के बाद वह बाथरूम के अंदर घुस गई,,,, और सौच करने लगी अब उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में गांड मराने में कितना दर्द होता है रात को तो उसे भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन इस समय सौच करते समय उसके गांड में कुछ ज्यादा ही दर्द हो रहा था,,,, जैसे तैसे करके वह काम निपटा ली,,, लेकिन अब उसे दर्द ज्यादा कर रहा था चलने में भी तकलीफ हो रही थी। वह नहा कर अपने नंगे बदन पर टावर लपेटकर बाहर आ गई तब तक अंकित भी जा चुका था अपनी मां को टावल में देखकर वह मुस्कुराते हुए बोला,,,।

गुड मॉर्निंग मम्मी,,,, कैसी गुजरी रात मजा आ गया ना,,,।

हरामजादे मजा तो आ गया लेकिन तूने मेरी गांड की हालत खराब कर दिया है।

क्यों क्याहो गया,,,,?

गांड में बहुत जोर का दर्द हो रहा है चला भी नहीं जा रहा है,,,,।

कोई बात नहीं शुरू शुरू में ऐसा होता है दो-चार घंटे में एकदम सही हो जाएगा रात को फिर गांड मरवाने लायक हो जाओगी,,,।

इस बारे में अब सोचना भी मत,,,, अब तो तुझे गांड के छेद पर हाथ भी लगाने नहीं दूंगी,,,,

यह बात है,,, चेहरे से मत करना नहीं तो अभी फिर से पटक कर गांड मार लूंगा,,,,।

तुझे क्या मैं मजाक कर रही हूं सच में बहुत दर्द कर रहा है,,,,।

अच्छा कोई बात नहीं मेरी जान कुछ दिन तक उस छेंद के बारे में सोचूंगा भी नहीं।

चल जाकर तु भी नहा ले,,

ठीक है,,, (इतना कहकर हुआ अभी बाथरुम में चला गया और थोड़ी देर में नहा कर बाहर आ गया,,,, फोन करके दोनों ने नाश्ता मंगवाया,,,, नाश्ता करने के बाद सुगंधा फिर से बिस्तर पर लेट कर आराम करने लगी,,,, उसे सच में बहुत दर्द कर रहा था ठीक से चला नहीं जा रहा था,,, जिसकी वजह से अभी उसे कहीं जाने की इच्छा नहीं हो रही थी अंकित भी वहीं बैठ रहा और अपनी मां से बातचीत करता है देखते ही देखते फिर से दोनों सो गए तकरीबन 11:00 बजे फिर से अंकित की आंख खुली तो वह देखा उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी,,,, वह धीरे से उठाकर अपनी मां को बिना बताए तैयार होकर कमरे से बाहर निकल गया क्योंकि आज उसे उसे अनजान औरतों से मिलना था जिसने उसे लंच के लिए बलाई अपने होटल से निकाल कर वह सड़क पर चहल कदमी करता हुआ आगे बढ़ गया,,, प्रचंड गर्मी के महीने में भी यहां पर मौसम खुशनुमा था या देखकर अंकित को भी हैरानी हो रही थी लेकिन उसे बहुत अच्छा लग रहा था इस तरह का मौसम उसके शहर में बहुत कम ही देखने को मिलता है,,, आते जाते लोगों से अच्छे लग रहे थे ज्यादातर लोग बाहर के ही थे,,, अंकित की नजर खूबसूरत लड़की हो पर काम खूबसूरत औरतों पर ज्यादा चली जा रही थी क्योंकि उसका मां अक्सर औरतों पर ज्यादा जाता था खास करके अंकित को औरतों की बड़ी-बड़ी गांड आकर्षित करती थी साड़ी में उभार ली हुई बड़ी-बड़ी चूचियां उसके मुंह में पानी ला देती थी और यही हाल था जब वह चाय पीते हुए उसे अंजान औरत को देखा था पल भर में ही उस औरत को भोगने का ख्याल उसके मन में आ गया था,,, और उसकी किस्मत भी इतनी तेज थी कि आज उसके साथ खाना खाने के लिए जा रहा था वैसे तो उसे पक्का यकीन नहीं था कि खाना खाने के बाद उसे औरत के साथ उसका कोई रिश्ता बन पाएगा या नहीं लेकिन फिर भी मन में उम्मीद की किरण बनी हुई थी और यही उम्मीद की किरण लिए हुए वह उसे औरत से मिलने के लिए चला जा रहा था।

उसे औरत ने जिस होटल के बारे में बताया था उसे होटल के सामने अंकित खड़ा हो चुका था पहले इधर-उधर देखने के बाद जब उसे वह औरत कहीं दिखाई नहीं दी तो वह होटल के अंदर प्रवेश करने लगा और उसकी किस्मत अच्छी थी कि सामने ही टेबल पर बैठकर चाय पीते हुए वह औरत उसे दिखाई दे गई और उसे औरत को देखते ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और यही हाल उसे औरत का भी था अंकित को देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कान करने लगी थी शायद वह अंकित का ही इंतजार कर रही थी,,,, वह और जल्दी से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और हाथ दिखा कर उसे अपनी तरफ बुलाने लगी अंकित को पक्का यकीन हो गया कि वह भी उसका इंतजार कर रही थी उसके पास जाते ही वह उसे नमस्ते किया और पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गया,, होटल के रेस्टोरेंट में काफी भीड़ थी क्योंकि यह खाने का समय था और सब लोग अपने-अपने पसंद का खाना खा रहे थे,,,, मुस्कुराते हुए उसे अंजान औरत ने अंकित से बोली।

मुझे तो उम्मीद नहीं था कि तुम इधर आओगे,,,

आटा कैसे नहीं आपने खाने के लिए बुलाई थी और मुझे भूख लगी और आपकी याद आ गई,,,।
(अंकित की हाजिर जवाबी सुनकर वह औरत मुस्कुराने लगे और बोली)

बड़े हाजिर जवाबी हो,,

ऐसा कुछ भी नहीं है बस आपको देखकर इस तरह के जवाब निकल जा रहे हैं।

यह बात है,,,, चलो अच्छा बताओ क्या खाओगे तुम्हारी पसंद का खाना मंगाते हैं,,,,

नहीं नहीं ऐसा कैसे चलेगा आखिरकार अपने आमंत्रित दिया है तो आपके ही पसंद का मैं खाऊंगा मैं अपनी तरफ से कुछ भी नहीं बताने वाला कि मैं क्या खाना चाहता हूं आप जो कुछ भी खिलाओगी मैं खा लूंगा,,।

बात करने में तो उस्ताद हो,,,, बातों में कोई तुम्हें हर नहीं सकता,,,। अच्छा चलो मुझे जो अच्छा लगता है वही मंगा लेती हूं लेकिन यहां नहीं,,,(कुर्सी पर दोनों हाथ रखकर इधर-उधर देखते हुए वह बोली)

फिर कहां,,,,?

यहां काफी भी है मेरे कमरे में ही चलते हैं वहां आराम से बात करते हुए खाना खाएंगे यहां पर ठीक से बात नहीं कर सकते देख नहीं रहे हो शोर शराब कितना हो रहा है,,,।

आप बात तो सही कह रही हो तो चलिए फिर आपके कमरे पर ही चलते हैं,,,,।
(इतना कहकर दोनों उठकर खड़े हो गए वह अनजान औरतों जल्दी से काउंटर पर गई और अपना आर्डर बोलकर अंकित को साथ लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी वह सीढ़ियां चढ़ रही थी कई हुई साड़ी में उसकी मस्त भराव दार गांड अंकित के होश उड़ा रही थी अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देखा ही रह गया था जैसे-जैसे वह कदम उठाकर सीडीओ पर रख रही थी वैसे-वैसे उसकी भारी भरकम गांड का कटाव उसके लंड की अकड़ को बढ़ाना शुरू कर दिया था,,,, अंकित के मुंह में पानी आ रहा था देखते ही देखते दोनों होटल के कमरे के पास पहुंच चुके थे। अंकित के मन में लहर उठ रही थी,, उसे अंजान औरत ने कमरे का दरवाजा खोली और कमरे में प्रवेश करने लगी पीछे-पीछे अंकित भी कमरे में प्रवेश कर गया,,, उसने दरवाजा बंद कर दी,,,, अंकित को इस होटल का कमरा भी काफी खूबसूरत लग रहा था हर एक समान बड़े सलीके से रखी हुई थी किंग साइज बेड था दो कुर्सियां थी एक मैज रखी हुई थी और एक खूबसूरत खिड़की थी जिस पर परदे लगे हुए थे और उसे औरत ने पर्दे को खोलकर कुदरत धूप को कमरे में आने का आमंत्रण दे दी और कुर्सी पर बैठ गई खाली पड़ी कुर्सी पर अंकित भी बैठ गया और दोनों आपस में बातचीत करने लगे,,,, अंकित और वह अनजान औरत दोनों आमने-सामने बैठे हुए थे,,, मैज पर एक छोटा सा गुलदस्ता रखा हुआ था,,,।

बातचीत के दौरान उस औरत ने बताया कि वह बैंक में काम करती है कल वह अपने बारे में पूरी जानकारी नहीं दि थी लेकिन आज सब कुछ बताने लगी थी,,,, अंकित उसकी बातों को कम उसके खूबसूरत चेहरे पर ज्यादा ध्यान दे रहा था लाल-लाल भरे हुए होंठ देखकर ही अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर उसके होठों का रसपान करने के लिए तड़प रहा था,,, आसमानी रंग की साड़ी में वह आसमान से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी,,, लॉ कट ब्लाउज में इसकी भारी भरकम चूचियों की गहरी लकीर किसी झरने की घाटी से काम नहीं लग रही थी जिसमें अंकित का मन डूब जाने को कर रहा था। अंकित की नजर बार-बार उसकी चूचियों पर चली जा रही थी जिसका एहसास उसे अंजान औरत को हो रहा था और वह बार-बार अपनी साड़ी को दुरुस्त करने की कोशिश भी कर रही थी लेकिन पारदर्शी साड़ी में वह ज्यादा कुछ दुरुस्त करने में सामर्थ नहीं थी और उसे इस बात से हैरानी भी हो रही थी कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसकी चूचियों की तरफ प्यासी नजरों से देख रहा था। लेकिन इस हैरानी के साथ-साथ उसे अपनी जवानी पर गर्व भी महसूस हो रहा था क्योंकि वह तीन बच्चों की मां थी और तीनों जवानी की दहाने पर कदम रख चुके थे उनमें से एक का तो दो-तीन महीने बाद विवाह तय करना था मतलब की 3 महीने बाद वह सास बन जानी थी और इसके बावजूद भी एक जवान लड़का उसे प्यासी नजरों से घर रहा था भला इससे बड़ी गर्व की बात उसके लिए क्या हो सकती थी ‌

अंकित भी अपने बारे में सब कुछ उसे बताता चला गया लेकिन सच्चाई कम झूठ ज्यादा था वह अपने बारे में कुछ भी सच नहीं बोल रहा था क्योंकि वह अपने चरित्र को परदे मे हीं रखना चाहता था उसने उसे औरत को अभी नहीं बताया था कि यहां पर वह अपनी मां के साथ घूमने आया है क्योंकि,, वह नहीं चाहता था कि वह औरत उसे शंका की नजर से देखें,,,, बातचीत का दौर चल ही रहा था कि तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी और दस्तक की आवाज सुनकर वह औरत अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

लगता है खाना आ गया,,,,,(और इतना कहकर वह दरवाजे की तरफ कदम आगे बढ़ा दी,,, दरवाजा खोली तो सामने बैटरी था जो खाना लेकर खड़ा था और मुस्कुरा था वह कमरे में दाखिल हुआ मैच पर खान की प्लेट रखकर औपचारिकता निभा कर वहां से चला गया,,,,, खाना काफी मसालेदार दिखाई दे रहा था साथ में चपाती थी सलाद था और लस्सी का बड़ा-बड़ा गिलास भी था लेकिन साथ में,,, बियर की बोतल भी थी जिसे देखकर अंकित को हैरानी हुई और वह बियर की बोतल की तरफ देखकर उसे औरत की तरफ देखने लगा जो की कुर्सी पर बैठते हुए मुस्कुराते हुए बोली,,,)

चिंता मत करो यार ज्यादा कुछ नहीं ठंडी बीयर है कभी कबार जब मैं इस तरह से घूमने जाती हूं तो अकेले रहती हूं तो पी लेती हूं बड़ा अच्छा लगता है।

कोई तुम्हें खत नहीं,,,।

किसी को पता ही नहीं है तो रहेगा क्या मैं तुमसे कहीं तो घर पर कभी नहीं पीती बाहर कहीं जाती हूं तभी और अकेले रहती हूं तभी अपना यह शौक पूरा कर लेती हूं,,,,‌

नशा होता होगा।

ज्यादा खास नहीं बस हल्की सी खुमारी छाने लगती है,,,,।

तुम भी ले सकते हो थोड़ा सा,,,।

नहीं नहीं बिल्कुल नहीं,,,,,।

चलो कोई बात नहीं तो तुम लस्सी पी लेना,,,।
(और इतना कहकर दोनों खाना ,खाना शुरू कर दिए,,, साथ में बातचीत का दौर भी शुरू हो चुका था अंकित को उसे औरत से बातचीत करने में बड़ा मजा आ रहा था वह औरत भी बड़ी खुश मिजाज थी,,, बात करते हुए बीच-बीच में वह बियर के केन को मुंह से लगाकर घूंट भर भर कर बियर भी पी रही थी वैसे तो अंकित को बड़ा अजीब लग रहा था लेकिन वह औरत जिस अंदाज से पी रही थी कुछ पल के लिए तो उसका भी मन मचल उठा कि वह भी एक बार टेस्ट करके देखे लेकिन फिर अपने मन को उसने मना लिया,,,,,, अंकित धीरे-धीरे लस्सी पी रहा था खाना खा रहा था,,,,, उस औरत ने तो लस्सी नहीं पी लेकिन जब देखी थी अंकित की लस्सी खत्म हो चुका है तो वह खुद अपनी लस्सी उसकी तरफ आगे बढ़ा दी,,,, पहले तो अंकित इनकार करता रहा क्योंकि वह उसके हिस्से की लस्सी थी वह उसे बार-बार उसे पीने के लिए कहता था लेकिन वह मना कर रही थी और वह अपने हिस्से की लस्सी अंकित को पिलाना चाहती थी और अंकित का मान रखते हुए वह लस्सी के गिलास को अपने होठों से लगाकर बस एक घूंट लस्सी पीकर वह अंकित की तरफ ग्लास बढ़ाते हुए बोली,,,)

लो बस तुम्हारी बात मान ली लेकिन अब तुम्हें भी मेरी बात माननी नहीं होगी लोग यह भी लस्सी पी जाओ क्योंकि मैं बियर पी रही हूं ना इसलिए लस्सी नहीं पी पाऊंगी,,,,।
(उस औरत का अंदाज देखकर और उसकी झूठी लस्सी को खुद पीने के बारे में सोचकर अंकित का लंड खड़ा होने लगा था वह मदहोश हो रहा था वाकई में वह औरत काफी दिलचस्प खूबसूरती के साथ-साथ काफी सुलझी हुई भी थी अंकित को इस तरह की औरतें काफी पसंद थी,,,, उस औरत की बात मानते हुए मुस्कुरा कर अंकित उसके हाथ से लस्सी का क्लास ले लिया लेकिन इस दौरान उसकी उंगली उसे औरत की उंगली से स्पर्श हो गई जिससे अंकित के बदन में हलचल सी मच गई और यह ऐसा शायद उसे औरत के तन बदन में भी हो गया वह भी शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,,, अंकित उसकी झूठी लस्सी को पीने लगा इस बात का अहसास होते ही उसे अनजान औरतों के तन बदन में हलचल सी होने लगी,,,,, क्योंकि वह सोची नहीं थी कि उसकी झूठी लस्सी वह पिएगा लेकिन बियर की खुमारी उसकी आंखों में उसके दिलों दिमाग पर छाने लगी थी और न जाने क्यों उसे इस समय एक जवान लड़के के सामने उत्तेजना महसूस होने लगी थी। बातचीत के दौरान उसने अपना नाम भी बताइ अनामिका,,,, जिसे सुनकर अंकित बोला,,,)
वह आपका नाम तो बेहद खूबसूरत है अनामिका मैं पहली बार इस तरह का नाम सुन रहा हूं मुझे बहुत अच्छा लगा आपका नाम और मेरा नाम अंकित है,,,।

अंकित,,,,, वाकई में तुम्हारा नाम में काफी गहराई है तुमसे मिलने के बाद किसी के मन में भी तुम अंकित हो जाओगे ऐसा तुम्हारा चरित्र है,,, मुझे भी तुम्हारा नाम बहुत अच्छा लगा,,,।
(खाना खत्म हो चुका था दोनों ने पेट भर के खाना खाया था लेकिन इस समय अंकित से ज्यादा खुमारी उसे अंजान औरत की आंखों में और उसके बदन में छाई हुई थी वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और अंकित से बोली,,,)

तुम यही बैठो मैं पेशाब करके आती हूं,,,,।(बेझिझक बिना शर्माए उसऔरत ने पेशाब करने वाली बात बोली थी जिसकी अंकित को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी लेकिन उसके मुझे पेशाब करने वाली बात सुनकर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था बाथरूम भी ठीक कुर्सी के पीछे ही था जैसा कि उसके होटल के कमरे में था वह औरत बाथरूम का दरवाजा खोले और बाथरूम के अंदर घुस गई दरवाजा तो उसने बंद की लेकिन दरवाजे की कड़ी नहीं लगे जो की दरवाजा अपने आप ही हल्का सा फिर से खुल गया अंकित सो रहा था कि दरवाजा बंद हो गया इसलिए दरवाजे की तरफ अपने सर घूमाकर देखने लगा था लेकिन उसकी हालत तब खराब हो गई जब देखा कि दरवाजा तकरीबन आधा फीट जितना खुल चुका था,,, और वह औरत उसे साफ दिखाई दे रही थी,,, अब अंकित के मन में गुदगुदी होने लगी वह औरत अपने ही आप में मस्त थी उसे यह पता भी था कि नहीं के दरवाजा खुला है या बंद है वह अपनी साड़ी दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगी थी,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि उसे यह नजारा देखना चाहिए कि नहीं देखना चाहिए बड़े कशमकश में उसका मन भरा पड़ा था,,,, क्योंकि उसे औरत के मन में क्या चल रहा है इस बात को अंकित नहीं जानता था,,,, लेकिन अंकित तो अंकित था औरतों के मन में जगह बनाना उसे अच्छी तरह से आता था,,,, अगले पल के खूबसूरत नजारे को देखे बिना उसका मन मानने वाला भी नहीं था। बाथरूम के अंदर वह औरत का मुंह अभी दरवाजे की तरफ था,,,,, अंकित जानता था कि ईस अवस्था में अगर वह बैठेगी तो उसे ज्यादा कुछ खास दिखाई नहीं देगा,,,, क्योंकि वह कुर्सी पर बैठा हुआ था और वह पेशाब करने के लिए नीचे बैठेगी, साड़ी की वजह से दोनों टांगों के बीच की उसकी पतली दरार दिखाई देने वाली नहीं थी लेकिन फिर भी अंकित के लिए इतना ही बहुत था कि वह उसकी आंखों के सामने बैठकर पेशाब करने जा रही थी।

अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, उम्र दराज होने के बावजूद भी पल की खूबसूरती लिए हुए थी वह, मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित करने का हर एक अंग लाजवाब और उठाव लिए हुए था। वह साड़ी अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे उठा रही थी आंखों में अजीब सी खुमारी छाई हुई थी,,, तभी अचानक वह नजर उठाकर अंकित की तरफ देखने लगी अंकित की नजर उसकी नजर से मिल गई दोनों की नजरे आपस में टकराई अंकित तो घबरा गया लेकिन वह मुस्कुरा दी,,,, उसकी मुस्कुराहट अंकित के लिए हरी बत्ती का संकेत था अंकित मन ही मन एकदम से प्रसन्न हो गया क्योंकि उसकी मुस्कुराहट साफ बता रही थी कि वह क्या चाहती है और मुस्कुराने के बाद वह तुरंत दूसरी तरफ घूम गई साड़ी को इस तरह से पकड़े हुए और उनकी समझ गया कि आप उसे क्या दिखाने वाला है उसकी हालत है तुमसे खराब हो गई उसका मन एकदम से मदहोश होने लगा तकरीबन तीन फीट की दूरी पर ही बाथरूम के अंदर एक जवान खूबसूरत औरत हालांकि जवान तो नहीं कह सकते लेकिन जिस तरह से उसकी कद काठी और बदन की बनावट थी जवान औरतों को पानी पिला दे इस तरह की उसकी जवानी निखरी हुई थी,,,, वह अब पेशाब करनेवाली थी,,,, अंकित की जगह कोई भी होता तो उसका भी मन मदहोश हो जाता उसे औरत को पाने के लिए उसका मन मचल उठता और यही अंकित का भी हाल हो रहा था,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा पहले उसे औरत का मुंह उसकी तरफ था लेकिन अब उसकी पीठ उसकी तरफ हो चुकी थी,,, अंकित समझ गया था कि बियर का नशा उसकी आंखों में पूरी तरह से मदहोशी का रस घोल रहा था वह इस बात से अनजान बिल्कुल भी नहीं है कि बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है वरना उसे देखकर मुस्कुराती नहीं।

साड़ी धीरे-धीरे उठने लगी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे खूबसूरत नजारे के ऊपर से पर्दा उठ रहा हूं ताकि दर्शक गण उसे अच्छी तरह से देख सके देखते ही देखते उसकी मोटी मोटी जांघें उजागर हो गई,,,, मक्खन जैसी मोटी मोटी केले के तने की जैसी जांघों को देखकर अंकित का मन मचाने लगा उसका ईमान डोलने लगा,,, सांसों की गति उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं थी यही हालत उस औरत की भी हो रही थी उसकी सांसों की गति भी भारी चल रही थी,,, देखते देखते वह अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठाती और कमर तक साड़ी उठते ही उसकी भारी भरकम गोलाई लिए हुए गांड मरुन रंग की पेंटी में कैद नजर आने लगी,,,, और वह अपनी मरुन रंग की पेंटी को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, अंकित का मन कर रहा था किसी समय बाथरूम में घुस जाए और अपनी मनमानी कर ले लेकिन अभी भी वह अपने आप को संभाले हुए था अपने मां पर काबू किए हुए था क्योंकि उसे पक्का यकीन नहीं था कि वह क्या चाहती है उसे ऐसा लग रहा था कि शायद हो सकता है कि बियर के नशे में हुआ ऐसा कर रही हो और अगर वह अंदर जाएगा तो अगर उसे ऐसा कुछ महसूस ना हो और वह शोर मचा दे तब तो लेने के देने पड़ जाएंगे इसलिए वह अपने मन को नियंत्रण में रखकर वहीं बैठे रहकर उस नजारे को देखने लगा,,, पेंटी धीरे-धीरे उतर रही थी,,,, घुटनों तक आने के बजाय वह पूरी तरह से अपनी टांगों में से पेंटी को उतार कर एक तरफ रख दी थी साड़ी के अंदर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, यह सब अंकित को पूरी तरह से हैरान कर दे रहा था कि आखिरकार उसने अपनी पैंटी पूरी तरह से निकल क्यों दी,,,,। फिर देखते ही देखते हो नीचे बैठ गई पेशाब करने के लिए उसकी गोल-गोल नंगी गांड मक्खन जैसी गोराई लिए हुए पूरे बाथरुम में अपनी आप अभी कह रही थी और अंकित की आंखों की चमक के साथ-साथ उसकी वासना को भी बढ़ा रही थी।

अगले ही पल उसकी बुर से सिटी की मधुर आवाज सुनाई देने लगी जिसका मतलब साथ था कि उसके बुरे से पेशाब की धार फूट रही थी अंकित यह मधुर ध्वनि सुनकर पूरी तरह से मचल उठा मदहोश हो गया उसका लंड इस कदर कड़क हो गया कि मानो जैसे पेंट फाड़ कर बाहर आ जाएगा,,, अंकित का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था,,,,, और वह औरत अपने हाथ को अपनी नंगी गांड पर रखकर हल्के हल्के सहलाने लगी और नजर घूमर अंकित की तरफ देखने लगी एक बार फिर से दोनों की नजर आपस में टकराई लेकिन इस बार दोनों की आंखों में वासना दिखाई दे रहा था शर्म बिल्कुल भी नहीं थी,,, दोनों की आंखों में मदहोशी का नशा छाया हुआ था दोनों एक दूसरे की आंखों में डुब जाना चाहते थे,,,, वह अपनी गांड को सहलाते हुए पेशाब कर रही थी और अंकित को अपनी निगाहों से घायल कर रही थी,,, उसकी इस अदाकारी मदहोशी भरी हरकत से अंकित चारों खाने चित हो गया था,,, उसे अब समझ में आ गया था कि वह औरत क्या चाहती है,,, फिर भी वह पहला मौका उस औरत को ही देना चाहता था। दोनों के बीच नैन मटक्का का पूरी तरह से जारी था,,,, देखते ही देखते वह औरत पेशाब कर चुकी थी,, वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई,,,, और फिर बाथरूम से बाहर आ गई,,,, वह मुस्कुरा रही थी उसकी आंखों में चमक दिखाई दे रही थी और यह चमक कोई आम चमक रही थी बल्कि वासना की चमक थी मदहोशी की चमक थी ,किसी को पाने की लालसा थी।

अंकित उसको आजमाना चाहता था देखना चाहता था कि वह क्या करती है इसलिए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और बोला,,,।

खाना खिलाने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया अब मुझे चलना चाहिए,,,,,।

बेवकूफ हो क्या,,,,?

बेवकूफ मैं कुछ समझा नहीं,,,!(आश्चर्य जताते हुए अंकित बोला,,,)

इसमें तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है तुम्हारी उम्र का दोस्त है कि तुम कुछ समझ नहीं पा रहे हो अगर थोड़े और बड़े होते तो शायद समझ गए होते,,,।
(अंकीत समझ गया था कि वह किस बारे में बात कर रही है,,, लेकिन फिर भी वह कुछ बोला नहीं,,, और शायद उसने अच्छा ही किया कुछ ना बोलकर क्योंकि वह एकदम से अंकित के कार्यवाही और उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींच कर उसके होठों पर अपने होंठ रख दी और एकदम से मस्त हो गई,,,, अंकित तो पहले से ही एकदम उत्तेजित होता वाला था उसे औरत की हरकत को देखा करो अभी कहां पीछे हटने वाला था वह भी तुरंत अपना एक हाथ उसकी कमर में डाला उसे भी कस के अपनी तरफ खींच लिया पेट में बना तंबू साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक देने लगा जिसका एहसास उसे पागल बनाने लगा और साथ ही अंकित उसके लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर उसके होठों का रसपान करने लगा और उसकी चिकनी कमर को दोनों हाथों से कस के पड़कर मसलने लगा,,,,, अपनी बुर पर साड़ी के ऊपर से ही लंड की ठोकर को महसूस करके वह एकदम से मदहोश होने लगी और अपनी कमर को गोल-गोल घूमाकर उस एहसास को और ज्यादा बढ़ाने लगी। अंकित पागलों की तरह उसके होठों का रस पीते हुए,,, अपने दोनों हाथों को उसके गोलाकार नितंबों पर लाकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया उसकी हरकत से वह औरत और ज्यादा मदहोश होने लगी,,,,, वह तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से उसके लंड को पकड़ के और उसकी मोटाई और लंबाई के एहसास को महसूस करके वह बोली,,,)

बाप रे तुम तो पहले से ही तैयार हो गए हो,,,,।

क्या करूं तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरा लंड बेकाबू हो गया,,,,(अंकित एकदम से अश्लील शब्दों में बात करते हुए बोला,,,)

मेरा नाम अनामिका है मुझे नाम लेकर बुलाओ,,,,।

ओहहह अनामिका मेरी जान,,,,,।

तुम तो बहुत चालाक हो मैं तो तुम्हें बुद्धू समझ रही थी,,,,।

तुम्हारी गांड देखकर जो बुद्धू बना रहेगा वह सच में बुद्धू ही होगा,,,, तुम्हारा नखरा देखकर ही नहीं समझ गया था कि तुम्हारी बेलगाम जवान को लगाम की जरूरत है,,,,।

और वह लगाम तुम्हारे पास है,,,(इतना कहने के साथ ही हुआ औरत एकदम से घुटनों के बल बैठ गई और अंकित के पेंट का बटन खोलने लगी अंकीत पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था। वह औरत खेली खाई थी कब क्या करना है उसे अच्छी तरह से मालूम था इसलिए वह पल भर में ही उसकी पेंट को खोलकर एकदम घुटनों तक नीचे खींच दी और उसके दमदार लंड को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और वह हैरान होते हुए बोली,,,)

बाप रे इतना मोटा और लंबा मैं तो पहली बार देख रही हूं,,,,। यह तो मेरी बुर फाड़ देगा,,,,।

पहली बार देख रही हो क्या ऐसा,,,।

मैं झूठ नहीं बोलूंगी कसम से अपनी जिंदगी में मैं पहली बार इतना दमदार लंड देख रही हूं आज तो मजा ही आ जाएगा,,,(इतना कहने के साथ ही वह बिना कुछ सोचे समझे एकदम से लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी अंकित एकदम से मत हो गया अंकित को समझते देर नहीं लगी कि यह औरत कितनी तेज है वह पूरी तरह से बेहतर में बन चुकी थी कल तक वह जिसे सीधी शादी औरत समझ रहा था वह अंदर से पूरी तरह से रंडी थी और सही मायने में देखा जाए तो एक औरत रंडी बनने के बाद ही मर्द को असली मजा देती है,,,, आइसक्रीम कौन की तरह वह गपा गप अपने गले तक अंकित के लंड को लेकर चूस रही थी,,, उसकी चुसाई से अंकित मदहोश हुआ रहा था,,, आंखें बंद हो चुकी थी वह छत की तरफ देखते हुए अपनी कमर को होले होले से आगे पीछे कर रहा था,,,, इस तरह से वह उसे औरत के मुंह को छोड़ रहा था और वह औरत भी अपने लाल-लाल होठों का छल्ला बनाकर होठों का कसाव लंड पर बढ़ा रही थी जिससे अंकित का मजा बढ़ता जा रहा था,,,।

सहहहहह आहहहहह,,,,, अनामिका तुम तो बहुत मस्त हो आज तक ऐसा किसी ने नहीं चूसा तुम तो पूरी खिलाड़ी हो आज बिस्तर पर मजा आएगा आज कोई टक्कर की खिलाड़ी मिली है,,,,ऊममममम आहहहहह पूरा गले तक ले लो,,,आहहहहह बस ऐसे ही मेरी जान,,,,ऊमममममममम,,आहहहहह,,,,,सहहहहहह कसम से तुम बहुत मस्त हो,,,,,ऊमममममममम,,,,

इसी तरह से अंकित मजा लेते रहा पूरे कमरे में सिर्फ इस समय अंकित किसी शिसकारी गुजारी थी वह औरत उसे पूरी तरह से मदहोशी के कगार पर ले आई थी,,,,,, लंड इतना मोटा और लंबा था कि गले तक लेकर उसे औरत की भी हालत खराब हो जा रही थी उसकी आंखों से भी पानी टपक जा रहा था लेकिन फिर भी वह छोड़ने को तैयार नहीं थी शायद वह सच ही कह रही थी कि इतना दमदार लंड उसने अपने जीवन में आज तक नहीं देखी थी इसलिए इतना खेल रही थी,,,, कुछ देर तक यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा फिर वह खुद ही धीरे से लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल दी,,, दोनों की हालत खराब थी दोनों की सांस ऊपर नीचे हो रही थी अंकित उसके दोनों हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और फिर उसे एक बार फिर से कसके अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। और धीरे से उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते ही देखते उसे औरत के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर वह ब्लाउज को अलग कर दिया जिस रंग की वह चड्डी पहनी थी उसी रंग की ब्रा भी पहनी थी ब्रा के ऊपर से ही अंकित उसकी दोनों चूचियों को जोर जोर से दबा रहा था मसल रहा था उस औरत को बहुत मजा आ रहा था,, बरसों के बाद उसे इंसानियत प्राप्त हो रहा था,,,, कुछ देर इसी तरह से दबाने के बाद अंकित एकदम से उसकी बाहों को पकड़ कर उसे दूसरी तरफ घुमा दिया और उसकी पीठ को अपनी छाती से लगाकर कैस के दोनों चूचियों को दबा दबा कर फिर से उसे मजा लेने लगा और फिर ब्रा का होकर खोलकर उसकी ब्रा भी उसके बदन से अलग कर दिया कमर के ऊपर से वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसकी नंगी चूचियां खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी थी लेकिन उम्र के हिसाब से हल्की सी लड़की हुई थी फिर भी इस उम्र में इस तरह की कड़क चूचियां वाकई में एक औरत के लिए गर्व की बात थी।

अनामिका मेरी रानी तुम्हारी चूचिया कितनी बड़ी-बड़ी है इसे दबाने में तो बहुत मजा आ रहा है,,,।

मुंह में लेकर पियोगे तो और ज्यादा मजा आएगा,,(मदहोशी भरी आवाज में वह बोली तो अंकित से रहने क्या वह तुरंत फिर से उसे दूसरी तरफ घूमा लिया, जिससे उसकी चूचीया उसकी आंखों के सामने हो गई और अंकित बिना देर किए उसकी दोनों चूचियों को बारी बारी से अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया,,,,, अब सिसकारी लेने की बड़ी उसे औरत की थी,,,, अंकित की हरकत से स्तन मर्दन से स्तनपान से हो पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी।)

सहहहहह आहहहहह,,,,,ऊमममममममम,ओहहहहह मेरे राजा और जोर-जोर से दबा दबा कर पी,,,ऊमममममम,,,,,, बहुत मजा आ रहा है,,,,आहहहहहहहह,,,,,,(अंकित के बालों को सहलाते हुए उसका हौसला बढ़ाते हुए वह बोल रही थी और अंकित दोनों चूचियों पर टूट पड़ा था,,,,, खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों को पीकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था मदहोश हो चुका था,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से उसकी दोनों चूचियों की सेवा करता रहा और अपने हाथ से उसके कमर में बड़ी साड़ी को खोलना रहा देखते-देखते वह उसकी साड़ी को खोल कर साड़ी को नीचे फर्श पर फेंक दिया था,,,, इस समय कमरे के अंदर वह केवल पेटीकोट में थी और अंकित जानता था कि पेटिकोट के अंदर उसने पेंटिं भी नहीं पहन रखी है,,,, अंकित खुद अपने पैरों के सहारे से अपनी पेंट निकाल दिया था,,,,, कमर के नीचे वह भी नंगा हो चुका था और वह औरत एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के अंकित के नंगे लंड को पकड़ कर हिला रही थी उसकी गर्मी उसकी बुर को बार-बार पिघला रही थी,,,, अंकित से रहा नहीं जा रहा था उसकी चूचियों से खेलते खेलते अब वह उसे पुरी तरह से नंगी कर देना चाहता था,, उसकी ईच्छा अब उसे नंगी देखने को कर रही थी, इसलिए वह पेटिकोट की डोरी को पकड़कर खींच दिया,, जिससे उसकी कमर पर कसी हुई पेटिकोट की गिठान खुल गई लेकिन कमर से नीचे सरकी नहीं,, उसे नीचे सरकाने के लिए अंकीत को खुद ही अपनी ऊंगलियो का सहारा लेकर उसे कमर से ढीला कर दिया और फिर अपने हाथों से ही उसे नीचे की तरफ सरकारी लगा क्योंकि अपने आप पेटिकोट सरक कर उसके कदमों में गिरने वाला नहीं थी कारण था उसका उठाव लिया हुआ नितंब,, उसका उभारदार नितंब उसके पेटीकोट को एक खुंटे की तरह अटकाया हुआ था,,,, लेकिन अगले ही पल अंकित ने उसके पेटीकोट को भी उसके कदमों में गिरा दिया और वह पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,।

बंद चारदिवारी के अंदर नग्नता औरत का प्रमुख गहना होता है,,, क्योंकि चारदीवारी के अंदर मर्द औरत के पहने हुए गहने नहीं बल्कि नग्नता का गहना देखना पसंद करता है,,, इसलिए पूरी तरह से उसे औरत को नंगी कर देने के बाद अंकित दो कदम पीछे हट गया और ऊपर से नीचे तक उसकी नंगी जवान को देखने लगा और देख के उसके मुंह से आह निकल गया क्योंकि तीन-तीन जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसके बदन की बनावट 30 साल की औरत को भी पानी भरवा दे इस तरह की थी,,,, अंकित उसकी नंगी जवान देखकर उसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाया।

ओहहहहह क्या बात है मैं आज तक तुमसे ज्यादा खूबसूरत औरत नहीं देखा नंगी होने के बाद तो तुम आसमान से उतरी हुई परी लग रही हो,,, कसम से आज तो मजा ही आ जाएगा,,,,।(अपने खड़े लंड को एक हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए अंकित बोल तो उसकी हरकत और उसकी अश्लील बातों को सुनकर उसे औरत की बुर से पानी की बूंद अमृत की धार की तरह नीचे टपक गई,,,, यह देखकर अंकित के मुंह में पानी आ गया और वह उस औरत को धक्का देकर नरम नरम गद्दे पर गिरा दिया,,,,,, उस औरत को लग रहा था कि अब उसकी चुदाई होगी,,, इसलिए वह बेशर्मी दिखाते हुए अपनी दोनों टांगों को अपने आप ही खोल दी थी और उसका जी भर कर स्वागत कर रही थी लेकिन अंकित अपने बाकी के भी कपड़े को निकाल कर पूरी तरह से नंगा हो गया और घुटनों के बाल बिस्तर पर चढ़कर उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच गया उत्तेजना और मदहोशी के कारण उसे औरत का गला सूख रहा था जिसे वह अपने थुक से गिला करने की कोशिश कर रही थी,,,, सांसों की गति बढ़ती जा रही थी उसके पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लौट रही थी,,,, जिसे देखकर अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी,,,, माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था,, अंकित की किस्मत बड़ी तेज थी उसे यहां आने से पहले नहीं मालूम था कि तो अनजान औरतों के साथ उसकी तरह से मुलाकात होगी उन्हें भोगने का सुख प्राप्त होगा,,, इसलिए अंकित अपनी किस्मत पर इतरा भी रहा था। अपनी आंखों से वह जी भर कर उसे औरत की नंगी जवान को देख लेना चाहता था इसलिए इस अवस्था में भी ऊपर से नीचे तक उसे घुर रहा था वैसे तो होगा औरत पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी लेकिन जिस तरह से अंकित उसे निहार रहा था उसकी आंखों में शर्म दिखाई दे रहा था और अपनी आंखों को बंद कर ली थी अपनी ही बेटे के उम्र के लड़के के साथ वह अपनी नजर नहीं मिला पा रही थी।

खुली खिड़की से शीतल हवा पूरे कमरे को ठंडक प्रदान करने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसे औरत की गर्म कर देने वाली जवानी वातावरण की ठंडक को ऊष्मा में बदल दे रही थी,,, अंकित धीरे से उसकी दोनों टांगों के बीच से अपने दोनों हाथ को लेकर और उसकी कमर को पकड़ कर थोड़ा आगे की तरफ खींच लिया और दोनों हाथों के सहारे से उसके नितंबों को पड़कर उसे हल्का सा ऊपर की तरफ उठा लिया ताकि अपनी क्रिया को वह बड़े आराम से अंजाम तक ले जा सके और देखते ही देखते अपने प्यास होठों को उसकी कचोरी जैसी पूरी हुई बुर पर रख दिया वह औरत एकदम से मचल उठी और अपने आप ही उसकी कमर हल्के से ऊपर की तरफ उठ गई,, उसकी हरकत से साफ पता चल रहा था कि उसे कितना मजा आया था कितना मदहोशी उसके बदन पर छाई थी और अंकित पागलों की तरह उसकी गुलाबी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,, बुर की पतली दरार से बाहर जाती हुई गुलाबी पत्तियों को वह अपनी होठों के बीच लेकर पागलों की तरह चाट रहा था चूस रहा था और वह पत्तियां उसे औरत को अत्यधिक आनंद दे रही थी वह मचल रही थी तड़प रही थी दोनों हाथों से बिस्तर पर बिजी चादर को पड़कर अपनी उद्देश्य न को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह तो बेलगाम घोड़ी थी बेलगाम जवानी की मालकिन थी,,, लाख कोशिश करने के बावजूद भी वह अपनी मदहोशी औरत देखने को काबू में नहीं कर पा रही थी जिसकी वजह से पूरे कमरे में उसकी सिसकारी की आवाज गुंज रही थी और अंकित थकी उसकी तड़प और सिसकारी की आवाज को सुनकर अपनी हरकतों को और ज्यादा बढ़ा दे रहा था जितना हो सकता था उतनी जीभ अंदर की तरफ डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश कर रहा था,,,। उसे औरत का बदन सुगंधा से थोड़ा सा ज्यादा था,,, उसकी चूचियों के साथ-साथ उसकी गांड भी थोड़ी सी बड़ी थी जिसका भोग लेने में अंकित को ज्यादा मजा आ रहा था।

सहहहहह आहहहहह ऊमममममममम,,,,ओहहहहह मेरे राजा तूने तो मुझे पागल कर दिया रे,,,,आहहहहहह कितना मजा आ रहा है बुर चटवाने में,,,,आहहहहहह और अंदर जीभ डाल दे मैं कभी सोचा नहीं थी कि इस उम्र में भी कोई मेरी बुर इस तरह से चाटेगा,,,,,आहहहहहहहह आजीवन का असली मजा ले रही हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना हाथ आगे बढ़कर अंकित के सर पर रख दिया और उसके चेहरे का दबाव अपनी बुर पर बढ़ाने लगी उसकी हरकत से मस्त होकर अंकित पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया चाट चाट कर उसके गुलाबी बुर को लाल कर दिया था,,, उसका मदन रस अंकित के होठों से टपक रहा था उसकी नाक पर लग चुका था उसका चेहरा उसके बदन से भेज चुका था लेकिन फिर भी अंकित पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था शायद इस क्रिया में अंकित को भी ज्यादा मजा आ रहा था और उसे औरत को भी वह औरत रहने कर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी,,,, भारी भरकम शरीर होने के बावजूद भी उसे औरत की स्फूर्ति और ताकत को देखकर अंकित का जोश और ज्यादा बढ़ रहा था। और देखते ही देखते हो उसने अपनी तो उंगली को उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करके हिलना चालू कर दिया और साथ में उसकी चटाई भी जारी रखा। बिस्तर पर घमासान मचा हुआ था। शायद इस औरत ने इस तरह का सुख कभी प्राप्त नहीं की थी ,इसलिए तो अपनी मोटी मोटी जांघों को खोलकर पागल हुई जा रही थी,,,, अंकित उसकी कचोरी जैसी खुली हुई बुर को इसलिए भी पागलों की तरह चाट रहा था क्योंकि उसे पर बल का रेशा तक नहीं था शायद आज ही उसने क्रीम लगाकर अपनी बुर के बाल को साफ की थी,,,, इस उम्र में भी वह सफाई का इतना ध्यान रखती है यह जानकर अंकित का दिल अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था। अंकीत की हरकत के कारण उस औरत का सब्र खोता चला जा रहा था, अपनी जवानी की गर्मी को वह जल्द से जल्द शांत करना चाहती थी इसलिए वह अंकित से मिन्नतें करते हुए बोली।

सहहहहह आहहहहह मेरे राजा मुझसे बर्दाश्त नहीं होता जल्दी से अपना लंड मेरी बुर में डाल दे मेरी बुर की गर्मी बढ़ती जा रही है अब यह तेरी उंगली से शांत होने वाली नहीं है,,,,ऊमममममम,आहहहहहह जल्दी से चोद मुझे,,,,,,,आहहहहहहहह,,,,.

(उस औरत की तडप देखकर अंकित की भी हालत खराब हो रही थी वह भी जल्द से जल्द अपने मोटे तगड़े लंड को औरत की गुलाबी बुर में डाल देना चाहता था,,,,, और वैसे भी लोहा गर्म हो चुका था बस हथौड़ा मारने की देरी थी,,,,, अंकित भी धीरे से उसके बुर के मदन रस से सने हुए अपने चेहरे को उसकी बुर से अलग किया,,,और उस औरत की तरफ प्यासी नजरों से देखने लगा उसके चेहरे पर अपनी बुर की मलाई लगी हुई देखकर वह शर्म से पानी पानी हो गई उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और अंकित भी उसके लाल-लाल होठों को देखकर एक बार फिर से उसकी तरफ झुका और उसकी ही मलाई से सने अपने होठों को उसके होठों पर रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा,,,, उसे औरत ने भी अपनी बुर की मलाई को चाटना शुरू कर दी उसके होठों को पीना शुरू कर दी अंकित का लंड बार-बार उसकी बुर पर फिसल रहा था,,, जिससे अंकित को तो मजा आ रहा था लेकिन वह औरत तड़प जा रही थी क्योंकि उसके लंड का मोटा सुपाड़ा उसकी गुलाबी पत्तियों से रगड़कर दूसरी तरफ फिसल जा रहा था जबकि वह जाती थी कि उसका लंड उसकी बुर में घुस जाए चार-पांच बार जब इस तरह से उसका लंड अपने आप फिसल कर इधर-उधर भागने लगा तो उसे रहा नहीं गया और वह अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने हाथ से उसके लंड को पकड़ कर उसके बैगनी सुपाड़े को अपनी गुलाबी गली का रास्ता दिखा दी,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी अंकित को उसकी बुर का कसाव एकदम साफ महसूस हो रहा था,,, और शायद ऐसा भी हो सकता था की पहली बार इतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में प्रवेश कर रहा था,,, लेकिन अंकित को मजा आ रहा था। लंड बुर की अंदरूनी दीवारों में रगड़ता हुआ अंदर की तरफ जा रहा था और यह रगड़ अंकित और उस औरत को दोनों को बेहद आनंदित कर दे रही थी,,, औरत तो जीवन में पहली बार इतनी मोटी और लंबे लंड को अपनी बुर में लेकर मदहोश सी हो गई थी पहली बार उसे ऐसा लग रहा था कि वाकई में कोई मर्दाना लंड उसकी बुर में जा रहा था,,,,।

आंखों को बंद करके हुआ इस पल का मजा लूट रही थी इस एहसास को अपने अंदर बटोर रही थी और अंकित उसकी मदहोश कर देने वाली पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों पर लेटे हुए अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में उतार चुका था और फिर धीरे से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठकर फिर से धप्प से नीचे मार दिया था एक बार फिर से अंकित का लंड उसकी बुर में घुस गया था ऐसी क्रिया वह बार-बार लेकिन धीरे-धीरे कर रहा था उसे औरत की तड़प और ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी उसकी गुलाबी पतली दरार छल्ला नुमा हो चुकी थी,,,, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि आज उम्र के इस पड़ाव पर उसके गुलाबी बुर का द्वारा पूरी तरह से खुल चुका था,,,, उसकी गर्दन पर चुंबनों की बारिश करता हुआ धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ा रहा था और वह औरत अपनी मोटी मोटी जांघों को फैलाए हुए उसके हर एक धक्के को सह रही थी। धीरे-धीरे कमरे में फचार फचार की आवाज गूंजने लगी यह आवाज उसे औरत की ओर से निकले हुए मदन रस और अंकित के लंड के गुत्थमगुत्था होने से निकल रही थी। इस तरह की आवाज काफी हद तक दोनों को मदहोश कर रही थी। अंकित उसकी आंखों में देखते हुए धीरे से बोला।

अब कैसा लग रहा है मेरी जान,,,,(अपने बेटे की उम्र से अपने लिए जान शब्द सुनकर वह पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन जिस एहसास में वह डूबी हुई थी उसे एहसास को बताना भी जरूरी था इसलिए वह जवाब देते हुए बोली)

मैं कभी सोची भी नहीं थी कि किसी का लंड इतना लंबा और मोटा भी हो सकता है,,, मैं तो सच में धन्य हो गई तेरे लंड को अपनी बुर में लेकर,,,आहहहह आहहहहह ,,,(उसकी ऐसी मदहोशी भरी बात को सुनकर अंकित से रहा नहीं जा रहा था और वह जल्दी-जल्दी धक्का मारना शुरू कर दिया जिससे उसकी आह निकल जा रही थी,, उसकी बात सुनकर अंकित भी बोला,,,)

सच कहूं तो मैं भी कभी सोचा नहीं था कि तीन-तीन बच्चों की मां का बदन इतना खूबसूरत हो सकता है सच में तुम्हें कोई देख ले तो उसका लंड खड़ा हो जाए नंगी होने के बाद तो तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो तभी तो आज मेरी हालत खराब हो गई और तुम्हारी बुर किस उम्र में भी अंदर से कितनी गर्म है ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं बुर में नहीं बल्कि किसी भट्टी में अपना लंड डाल रहा हूं,,,, मेरी जगह कोई और होता तो अह तक उसका पानी निकल गया होता,,,,

तू बिल्कुल सच कह रहा है मैं भी हैरान हूं कि तेरा तक पानी नहीं निकला कसम से तू ही असली मर्द है जिसकी भी तेरी शादी होगी वह तो तुझे पाकर एकदम धन्य हो जाएगी,,,।

तुम धन्य हुई क्या मेरी जान,,,।

पूछ मत मेरे राजा की आज मैं कितनी खुश हूं अच्छा हुआ तेरे से मुलाकात होगी वरना असली सुख में कभी अपने जीवन में भोग ही नहीं पाती,,,,,आहहहहह आहहहहह ऊमममममम आहहहहहह मेरे राजा,,,,,

यह बात है तब तो तुम आज की चुदाई जिंदगी भर याद रखोगी,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित उसे करके अपनी बाहों में भरकर जोर-जोर से धक्के पर धक्का लगना शुरू कर दिया अब तो उसे औरत की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी उसके तेज धकको को वह सह नहीं पा रही थी उसके मुंह से आह आहहह की आवाज निकल रही थी और इस तरह की आवाज इस बात का सबूत था कि उसे बहुत मजा आ रहा था भले ही वह अंकित के धक्को को सह नहीं पा रही थी लेकिन जो आनंद उसे प्राप्त हो रहा था वह उसे पूरी तरह से मदहोश कर रहा था। यह चुदाई अंकित को भी जिंदगी भर याद रहने वाली थी वह कभी सोचा नहीं था किस तरह से किसी औरत को छोड़ने का सबसे प्राप्त होगा और वह भी बैंक कर्मचारी की,,,बुर का कसाव अंकित को भी मदहोश बना रहा था अंकित बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था मोटी मोटी जांघों से उसकी जांघें टकरा रही थी,,। कुछ देर तक किसी अवस्था में चुदाई करने के बाद धीरे से अंकित घुटनों के बल बैठ गया हालांकि अभी भी उसका लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था वह अपने लंड को बिल्कुल भी उसकी बुर से निकल नहीं रहा था और फिर आने पर रखा हुआ तकिया उठाकर वह उसकी गांड के नीचे लगाने लगा तो वह भी अपनी गांड को ऊपर उठा ले उसकी गांड थोड़ी सी ऊपर आ गई और इस अवस्था में अंकित उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर से लपेटकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, वह औरत अंकित के अद्भुत काम शैली को देखकर मंत्र मुग्ध हो गई थी,,, आज तक उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह अच्छे-अच्छे का पानी निकाल देती है लेकिन आज उसके ही बेटे के उम्र का लड़का उसका पानी नीचोड़ रहा था। खिड़की से ठंडी ठंडी हवा कमरे में बराबर आ रही थी लेकिन फिर भी दोनों के बदन से पसीना टपक रहा था।

अंकित खेल में अच्छी तरह से माहिर हो चुका था इसलिए वह जानता था कि औरत को कैसे सुख दिया जाता है बिना थके बिना हारे,,,, तभी तो एक औरत मर्द की दीवानी हो जाती है,,,, तभी अंकित के धक्को को अपनी बुर की गहराई में महसूस करके उसका बदन मचलने लगा,,,,, उसकी आंखें बड़ी-बड़ी होने लगी और उसके चेहरे का रंग एकदम लाल होने लगा और वह बोली,,,,।

आहहहह आहहहहहह और जोर से जोर-जोर से धक्के लगा मेरे राजा मेरा निकलने वाला है मेरा होने वाला है मैं कभी सोचा नहीं था कि कोई जवान लड़का इस तरह से मेरी चुदाई करेगा मैं तो पागल हो जाऊंगी मेरा पानी निकलने वाला है,,,,,आहहहहहहहह जोर-जोर से मेरे राजा और जोर-जोर से फाड़ दे मेरी बुर को ,,भोसड़ा बना दे,,,आहहहहहहहह,,,
(अंकित समझ गया था किसका पानी निकलने वाला है यह झड़ने वाली है इसलिए उसका साथ देते हुए वह फिर से अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ के नीचे लेकर और उसे करके अपनी बाहों में भरकर अपनी कमर को जोर-जोर से उसकी बुर पर पटकने लगा और देखते ही देखे उसका बदन अंकीत की बाहों में अकड़ने लगा,,, और वह झड़ने लगी,,,,,, झड़ते समय वहां बेहद मासूम लग रही थी अंकित को उसे पर और ज्यादा प्यार आ रहा था वह उसके होठों पर अपने होठकर उसके फोटो का रसपान करते हुए उसके स्खलन का मजा ले रहा था,,,, हालांकि अंकित अपने धक्कों की गति को बिल्कुल भी कम नहीं किया था,,,, थोड़ी देर में उसका बदन एकदम तुमसे ढीला पड़ने लगा,,,, वह पूरी तरह से झड़ चुकी थी उसके बटन में दम नहीं रह गया,,, और झड़ने की वजह से उसकी बुर की चिकनाहट बढ़ चुकी थी और रगड़ का एहसास थोड़ा काम हो रहा था इसलिए अंकित भी कुछ पल के लिए अपने लंड को उसकी बुर से बाहर निकाला और उसके ही पेटीकोट से उसकी बुर की मलाई को साफ करने लगा ताकि दोबारा लंड जाए तो रगड़ महसूस हो,,,, वह औरत अंकित की काबिलियत को देखकर मंत्र मुग्ध हो गई थी एक औरत को खुश करने का तरीका वह अच्छी तरह से जानता था,,, इससे ज्यादा भला एक औरत मर्द से क्या चाहत रख सकती है,,, जो मर्द खुद ही एक औरत को अच्छी तरह से खुश करना जानता हो हर सुख देना जानता हो। अंकित पेटीकोट से अच्छे से उसकी बुर की मलाई साफ करने के बाद मुस्कुराता हुआ उसकी तरफ देख कर बोला।)

बस मेरी रानी अब पलट जाओ पीछे से तुम्हारी चुदाई करूंगा,,,,।
(अंकित की बात सुनकर उसे औरत को थोड़ा शंका हुआ कि वह पीछे से उसे अच्छी तरह से नहीं चोद पाएगा क्योंकि पीछे से उसकी गांड बड़ी-बड़ी होने के कारण लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई तक नहीं पहुंच पाता था अब तक तो उसके साथ ऐसा ही हो रहा था लेकिन वह कुछ बोली नहीं वह भी देखना चाहती थी कि अंकित क्या कर लेता है क्योंकि पीछे से करवाने में उसे भी बहुत मजा आता था लेकिन वह आज तक पीछे से असली सुख प्राप्त नहीं कर पाई थी और अंकित के कहते ही वह बिस्तर पर पलट गई और घोड़ी बन गई बिस्तर के किनारे अपनी दोनों टांग नीचे लटका कर वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में ऊपर उठा दी थी ,,,, इसकी भारी भरकम गोल-गोल गांड को तोप की तरह उठी हुई देखकर अंकित से रहा नहीं गया और वह उसकी गोरी गोरी गांड पर दो-चार शपथ लगाकर उसे टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,, वह औरत अंकित की हरकत पर कुछ बोल नहीं पाई और अंकित अपने लंड पर अपना थूक लगाकर उसे गीला कर लिया और थोड़ा सा थुक उसके गुलाबी छेद पर भी लगा दिया,,,, और एक नए अनुभव के लिए पीछे से वह अपने लंड को उसकी गुलाबी बुर में डालने लगा लंड फिर से धीरे-धीरे अंदर की तरफ सड़क गया और अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर फिर से धक्का लगना शुरू कर दिया वह औरत एकदम से हैरान हो गई क्योंकि पीछे से भी बड़े आराम से उसका लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा था बल्कि हर एक धक्का उसके बच्चेदानी से टकरा रहा था,,,, उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि आज उसके बरसों की अभिलाषा भी पूरी होने वाली थी वह फिर से मदहोश और उत्तेजित होने लगी,,,,।

उसे खुश करने में अंकित कोई भी कसर बाकी नहीं रख रहा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर चउत लगाता हुआ वह आगे बढ़ रहा था,,,, वह रह रहकर धीरे से अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को थाम कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और इस समय इस अवस्था में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां लगाम का काम कर रही थी और उसे औरत को भी मजा आ रहा था,,,,, देखते ही देखते घड़ी में तीन का समय हो चुका था समय इतनी जल्दी कैसे गुजर गया दोनों को पता ही नहीं चल रहा था वाकई में चुदाई का जो आनंद है वह किसी और चीज में नहीं मिलता जिसमें इंसान अपना पूरा वक्त भूल जाता है और बस सुख प्राप्त करने में लगा रहता है और यही इस समय अंकित और वह औरत कर रही थी। अंकित पीछे से पूरी तरह से उस औरत पर छा चुका था दोनों को देखने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे घोड़ी के ऊपर घोड़ा चढ़ गया हो,,, गरमा गरम शिसकारी की आवाज फिर से कमरे में गुंजने लगी,,,, तकरीबन इस अवस्था में 25 मिनट की और जमकर चुदाई करने के बाद अंकित और वह औरत एक साथ झड़ने लगे,,,,, झड़ने के बाद अंकित भी पस्त हो चुका था और उसके ऊपर ही पसर गया,,,,,,,, उसे औरत ने तो जिंदगी में आज अद्भुत सुख की प्राप्ति की थी वह कभी सोचा नहीं थी कि चुदवाने में वाकई में इतना अत्यधिक आनंद मिलता है आज कुछ ज्यादा ही उसे मजा मिल गया था,,,,,।

थोड़ी देर बाद अंकित अपने लंड को उसकी बुर में से बाहर निकाला जो कि अभी भी खड़ा ही था ज्यादा लचक पन उसमें नहीं आया था यह देखकर तो वह और भी ज्यादा हैरान हो गई थी,,, अंकित धीरे से बाथरूम में चला गया और पेशाब करने लगा तब तक वह सीधी हुई और पीठ के बल लेट कर गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,, पेशाब करने के बाद अंकित बाथरूम के दरवाजे तक आया और दीवार का सहारा लेकर मुस्कुरा कर उसे औरत की तरफ देखने लगा वह भी अंकित की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी,,, अंकित अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा और बोला।

बताओ ऐसा मजा कभी मिला था?

बिल्कुल भी नहीं,,, मैं तो कभी सोचा भी नहीं थी कि इसमें इतना ज्यादा मजा भी आता होगा जितना मजा आता था बस उसने ही लेती थी लेकिन आज शायद मेरी औकात से ज्यादा मुझे आनंद मिल रहा है,,,।

समय नहीं है नहीं तो आज एक ही दिन में तुम्हें चांद तारे सब दिखा देता,,,(ऐसा कहते हुए वह बिस्तर के पास आया और पीठ के बल लेट गया,,, मौका देखकर उसे औरत ने भी हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ ली और उसे हल्के हल्के हिलाते हुए बोली,,,)

तुम सच कह रहे हो हमें थोड़ा और पहले मिलना चाहिए था 5:00 बजे तो मैं यहां से चली जाऊंगी और 3:30 बज चुके हैं,,,।

तुम ही सोचो में 11:00 बजे यहां पर आया हूं और 3:30 बज चुके हैं इस बीच सिर्फ तुम्हारी एक ही बार चुदाई हुई है,,, और एक ही बार में तुम पूरी तरह से मस्त हो गई हो अगर पूरा दिन मिले तो सोचो क्या हो जाएगा,,,,।

मैं भी यही सोच रही हूं। और पछता भी रही हूं इतना अच्छा मौका मिला है और आज ही मुझे जाना भी है,,,।

आज रात तक नहीं रुक सकती,,,

बिल्कुल भी नहीं,,,(लंड को हल्के हल्के हिलाने से वह पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था एकदम कड़क हो गया था,,,, उसकी गर्मी और उसके कडप्पन को अपनी हथेली में महसूस करके एक बार फिर से वह मदहोश होने लगी और इससे आगे कुछ बोले बिना ही वह एकदम से उठकर बैठ गई और झुक कर लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, अंकित फिर से मस्त होने लगा और वह हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,, दोनों फिर से मदहोश होने लगे लेकिन इस बार वह औरत पूरी तरह से कमान संभाल लेना चाहती थी,,, और वह खुद अंकित के लंड पर सवार होके और उसके कंधे पर हाथ रखकर अपनी गांड को जोर-जोर से उसके लंड पर पटकना शुरू कर दी,,, अंकित को इससे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता था तरबूज चाकू पर गिरे या चाकू की तरबूज पर,कटने वाला तो तरबूज ही था और इसके बाद मजा ही मजा उसे औरत की इस क्रिया से भी अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी अंकित उसकी कमर पकड़ लेता था तो कभी उसकी चूची दबा देता था तो कभी उसे अपनी तरफ झुक कर उसके होठों को चूमने लगता था और यह सिलसिला तकरीबन 15 मिनट तक और चला और दोनों एक बार फिर से झड़ गए,,, समय भी काफी हो चुका था अंकित को अपने होटल पहुंचना था वरना उसकी मां परेशान हो जाती क्योंकि वह तीन-चार घंटे से अपने होटल से गायब था बिना बताए,,,।

वह औरत बाथरूम में चली गई और पेशाब करने लगी उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज अंकित को साफ सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर वह मुस्कुरा रहा था इसके बाद वह बाहर निकली और कपड़े पहने लगी अंकित तब तक कपड़े पहन चुका था,,,, अंकित बात ही बात में उससे पूछा,,,।

यहां पर कोई अच्छी जगह है घूमने लायक,,,,।

हां जरूर है यहां से तकरीबन पांच छः किलोमीटर की दूरी पर एक झरना है जिसे देखने के लिए लोग ऊपर तक जाते हैं वहां से खूबसूरत नजारा दिखाते हैं बहुत खूबसूरत जगह भी है तुम घूमना चाहो तो वहां घूम सकते हो मुझे तो आज जाना है वरना मैं तुम्हें घुमा देती,,,।

कोई बात नहीं,,,, तुमने तो मुझे स्वर्ग का सुख प्रदान की हो,,,,।
(यह सुनकर वह मुस्कुराने लगी अंकित गई मुस्कुरा दिया और फिर जाते-जाते उसे एक बार फिर से अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का चुंबन किया और वहां से निकल गया,,, जब अपने होटल के कमरे में पहुंचा तो उसकी मां बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार कर रही थी उसे देखते ही सवालों की झड़ी लगा दी अंकित एकदम शांत होकर जवाब देते हुए बोला,,,)

तुम सो रही थी इसलिए मैं तुम्हें जगाना ठीक नहीं समझा और इधर-उधर घूमता रहा मुझे एक नहीं बताया कि यहां से 5 से 6 किमी की दूरी पर एक खूबसूरत चलना है वहां पर लोग घूमने के लिए जाते हैं हम लोगों को भी वही चलना चाहिए घूमने के लिए,,,।

अब आज तो नहीं हो पाएगा कल चलते हैं,,,।

कोई बात नहीं चल चलेंगे,,, तुम खाना खाई कि नहीं,,,।

खाना नहीं खाए बस चाय नाश्ता की हुं,,,।

अभी खाना है तो मंगवा लो,,,।

नहीं नहीं ऐसे भी मुझे अभी भूख नहीं है अब रात को ही खाएंगे,,,,।
(इतना कहकर बा बालकनी में आकर कुर्सी पर बैठकर बाहर का नजारा देखने लगी और अंकित भी पास में ही पड़ी कुर्सी पर जाकर बैठ गया उसकी मां को सख्त नहीं हुआ कि यह तीन-चार घंटे से कहां था किसके साथ था,)

उस बैंक कर्मचारी महिला से मिलकर अंकित बहुत खुश था। पुरूष औरत को अंकित ने जी भर कर खुश भी किया था। अंकित ने उसे औरत को उम्मीद से कहीं ज्यादा गुना खुशी किया था वरना इस उम्र में वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि उसे एक जवान लड़के से इतना सुख मिलेगा और वह भी अनजाने में ही। अंकित ने जी भरकर उसे बैंक कर्मचारी औरत की चुदाई किया था इस उम्र में भी वह इतनी लाजवाब और हुस्न की मल्लिका थी कि अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया था। उसे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि वह औरत इतनी जल्दी उसके साथ हम बिस्तर होने को तैयार हो जाएगी वैसे शारीरिक सुख प्राप्त करने की पहले उसने ही की थी जिससे अंकित का काम आसान हो गया था।

होटल पहुंचकर उसने अपनी मां को यही बताया कि वह थोड़ा घूमने के लिए चला गया था । रात भर अंकित ने जिस तरह से अपनी मां की गांड मरा था उसके बदले में दर्द होने लगा था खास करके गांड के छेद में और उसे चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी इसलिए वह ज्यादा कुछ करी नहीं बस होटल के कमरे में ही दिनभर आराम करती रही। शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो रहा था तब मां बेटे दोनों की नींद खुली दोनों को भूख भी बहुत ही जोरों की लगी थी थोड़ा फ्रेश होकर वह दोनों नीचे आए और अपने होटल के रेस्टोरेंट में खाना ना खाकर वालों को अपने होटल से बाहर निकल गए और अंकित अपनी मां को इस होटल में लेकर आया जहां पर वहां दिन में आया था और बैंक कर्मचारी की जमकर चुदाई किया था यहीं पर उसने खाना भी खाया था और यहां का खाना उसे अच्छा लगा था इसलिए वह अपनी मां को यहां लेकर आया था। रेस्टोरेंट में बैठकर दिन में जो कुछ भी अंकित ने खाया था वही फिर से आर्डर कर दिया और थोड़ी ही देर में दोनों के टेबल पर ऑर्डर का खाना आ गया सुगंधा को भी यहां का खाना अच्छा लग रहा था। पेट भरकर खाने के बाद दोनों भुगतान करके रेस्टोरेंट से बाहर निकल गए और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करके घूमते रहे। देखते देखते रात के 9:30 बज चुके थे वैसे भी यहां पर रात का नजारा कुछ ज्यादा ही खूबसूरत दिखता है इसलिए समय कभी दिया उन दोनों को पता ही नहीं चला। थोड़ी ही देर में दोनों अपने कमरे में पहुंच गए।

दोनों बालकनी में बैठे हुए थे अंकित अपनी मां से बोला,,।

बस अब दो दिन और रह गए हैं दो दिन जी भर कर मजा ले लो फिर ना जाने कब यहां आना होगा।

मुझे तो नहीं लगता कि अब यहां पर कभी आना होगा।

ऐसा क्यों कह रही हो।

अरे हम दोनों ही थोड़ी ना घर पर हैं तृप्ति भी तो है और उसे लेकर यहां पर तो आ नहीं सकते।

अरे जब उसकी शादी हो जाएगी अपने घर चली जाएगी तब तो हम दोनों यहां पर खुलकर मजा ले सकेंगे।

तब तो यहां आने की क्या जरूरत है घर पर ही खुलकर मजा लेंगे वैसे भी अब एक-दो साल में तृप्ति की शादी करनी पड़ेगी उसके बाद तो मजा ही मजा है और वैसे भी इसी जगह पर दोबारा आओगे तो इन लोगों को शक नहीं होगा क्योंकि होटल वालों को तो यही लगता है कि मैं धंधे वाली हूं।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और मुस्कुरातेहुए बोला)

सच में अगर तुम धंधे वाली होती तो तुम्हारा एक रात का सबसे ज्यादा चार्ज होता।

कितना होता मेरा चार्ज,,,?(सुगंधा भी अपने बेटे की बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोली)

कम से कम 8 से 10000 के बीच तो रहता ही एक रात की लेकिन जो भी इतना पैसा चुका था जी भर कर तुम्हारी जवानी का रस निचोड़ भी लेता रात भर में,,,,।

तू तो बिना पैसे खर्च किए मेरी जवानी का रस निचोड़ रहा है।

मैं तुम्हारा ग्राहक थोड़ी ना हूं और वैसे भी तुम्हारी जैसी छिनार पर चढ़ने के लिए मुझे पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है।

छिनार,,,,(झूठ मुठ का गुस्सा दिखाते हुए सुगंधा अपने बेटे की तरफ देख कर बोली।)

तो क्या छिनार ही तो हो और तुम्हें चोदने के लिए मुझे पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है मेरा मोटा तगड़ा लंबा लंड देखकर तुम्हारी बुर पानी छोड़ देती है।

(अपने बेटे की आवाज सुनकर सुगंधा जोर-जोर से हंसने लगी क्योंकि वह जानती थी कि उसके बेटे का कहना बिल्कुल सही था वैसे उसका ईमान कभी नहीं डगमगाता लेकिन अपने बेटे का मोटा तुम्हारा लंड देखकर उसे न जाने क्या हो जाता है,,, फिर भी अपने बेटे की बात सुनकर धीरे से वह बोली,,)

पता नहीं तेरे मुंह से छिनार शब्द सुनकर मुझे क्या होने लगता है।

क्या होने लगता है गुस्सा आने लगता है क्या?

गुस्सा तो नहीं आने लगता लेकिन तेरे पर प्यार आने लगताहै।

तो चलो प्यार करते हैं बिस्तर खाली है।

ना बाबा ना आज की रात तो कुछ भी नहीं कल जो तूने रात भर मेरी गांड मरा है तब से अभी तक मेरी गांड दर्द कर रही है।

गांड नहीं मारूंगा तुम्हारी बुर मारूंगा।

आज तो तुझे छूने भी नहीं दूंगी। आज कुछ नहीं आज आराम करते हैं,,,,।

क्या मम्मी आराम करने के लिए जिंदगी पड़ी है यहां जो काम करने के लिए आए हैं उसे तो करना हीहोगा ना।

यह तुझे गांड मारने से पहले सोचना चाहिए था।

क्या मम्मी तुम भी इतनी मस्त जवानी की मालकिन हो फिर भी छोटे से छेद में लेकर इतना तड़प रही हो। तुम्हारी जगह में औरत होता तो कब से घोड़ी बनकर फिर से तैयार हो जाता गांड मरवाने के लिए।

अच्छा बच्चु यह तो तुम इसलिए कह रहा है ना कि तू औरत नहीं है इसलिए औरत होता ना तो तुझे पता चलता है कि मर्द मजा भी देता है और दर्द भी देता है। मेरे पास भी लंड होता तो यह बात तुझे अच्छे से समझा देती।(इतना कहकर सुगंधा हंसने लगी और उसकी बात सुनकर अंकित भी हंसने लगा वह भी अपनी मां की बात को मानते हुए आज की रात कुछ न करने का फैसला कर लिया वह भी आराम करना चाहता था क्योंकि दिन भर उसने दूसरी औरत की शिव जो किया था वह दोनों बालकनी से कमरे में आ गए सोने से पहले सुगंध अपने कपड़े उतारने लगी कपड़े उतारने के बाद अपनी मां को ब्रा और पेटी में देखकर अंकित की आंखों में वासना का तूफान नजर आने लगा इस समय उसकी मां का गदराया बदन ब्रा और पेंटि में और भी ज्यादा आकर्षक लग रहा था। जिसे देखकर अंकित का मन देखने लगा और वह पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में कस लिया।

यह क्या कर रहा है आज आराम करना है और कुछ नहीं करना है,,,।

यह कैसे हो सकता है ,,,मेरी आंखों के सामने तुम कपड़े उतार रही हो और कहती हो कि मैं कुछ ना करूं यह तो यही हो गया कि बिल्ली को दूध की रखवाली करने के लिए बोल रही हो।

ना तुम्हें दूध हूं और ना ही तो बिल्ली है समझ गया ना इसलिए अपना दिमाग ज्यादा मत लगा,,,(सुगंधा अपने आप को अपने बेटे की बाहों के कैद से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी अंकित अपनी मां को पीछे से अपनी बाहों में पड़े हुए था और इस दौरान अपनी पेट में बना हुआ तंबू लगातार अपनी मां की गांड पर धंसा रहा था जिससे सुगंधा के भी तन बदन में लहर उठने लगी थी वह ऊपर से तो इंकार कर रही थी लेकिन अंदर से उसकी भी कामाग्नि भड़कने लगी थी लेकिन वह अपने बेटे को आगे बढ़ने नहीं देना चाहती थी क्योंकि वह उसे आज ऐसा कुछ भी न करने के लिए पहले से ही बोल रखी थी और अगर इस समय वह अपनी बेटी को कुछ करने देगी तो वह खुद ही अपने बेटे की आंखों के सामने छिनार साबित हो जाएगी। उसे शर्म महसूस हो रही थी वह बार-बार अपने बेटे की कैसे आजाद होना चाहती थी लेकिन इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसे अपनी बाहों की कैद से आजाद होने नहीं देगा। सुगंध को इस बात का एहसास हो गया था कि उसका बेटा अपनी मनमानी करके ही मानेगा क्योंकि वह जानती थी कि जब उसकी बेटी का लंड खड़ा हो जाता है तब बिना पानी निकाले शांत नहीं होता लेकिन फिर भी इस दौरान वह अपने आप को पूरी कोशिश कर रही थी छुड़ाने को लेकिन अंकित की भुजाओं का बोल कुछ ज्यादा ही था वह ब्रा के ऊपर से उसकी चुचियों को पदकर दबाना शुरू कर दिया था। वैसे भी अंकित औरत को खुश करने का उनमें कामाग्नि भड़काने का होना अच्छी तरह से जानता था और इस समय वह अपनी मां के साथ वही कर रहा था। जब अंकित को एहसास होने लगा कि उसकी मां की पकड़ ढीली पड़ रही थी और उसके मुंह से हल्की-हल्की गर्म शिसकारी की आवाज निकलने लगी है तो अंकित के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे। वह समझ गया कि अब उसका काम बन गया है, वह अपनी मां की पीठ पर अपनी हथेली रखकर दबाव बनाते हुए उसे एकदम से बिस्तर पर झुका दिया और सुगंधा भी जानती थी कि इस समय अंकित अपनी मनमानी किए बिना मानने वाला नहीं है इसलिए वह भी विवश होकर बिस्तर पर झुक गई वैसे भी उसके बदन में भी उत्तेजना के चिंगारी भड़कने लगी थी। उसे सिर्फ इस बात का डर था कि कहीं इस बार भी उसका बेटा उसके गुलाबी छेद की जगह उसके भूरे रंग के छेद में अपना लंड ना डाल दे।

मौके की नजाकत को देखते हुए अंकित एकदम से अपनी मां की पेंटिं को पकड़कर नीचे खींच दिया और उसके घुटनों तक लाकर छोड़ दिया,,, और खुद अपनी पेंट का बटन खोलकर पेट को भी घुटनो तक लाकर अटका दिया क्योंकि अब अंकित के पास बिल्कुल भी समय नहीं था वह जल्द से जल्द अपने लंड को अपनी मां की बुर में डाल देना चाहता था और ढेर सारा थुक अपने सुपाड़े पर लगाकर धीरे से अपनी मां के गुलाबी छेद में सरकाना शुरू कर दिया तब जाकर सुगंधा की जान में जान आई कि उसका बेटा उसे चोदने के लिए लंड उसकी बुर में डाला है ना की उसकी गांड के छेद में,,, अपनी मां के इनकार करने के बावजूद भी अंकित अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था वैसे उसका भी मन आराम करने कोई था लेकिन अपनी मां को ब्रा और पेटी में देख कर और उसकी कई हुई जवान को देखकर एक बार फिर से उसकी मन बहक गया था,,, अंकित तब तक अपनी कमर हिलता रहा जब तक कि वह अपनी मां को संतुष्ट करके अपना पानी उसकी बुर में डाल नहीं दिया। मां बेटे दोनों फिर से संतुष्ट हो चुके थे। अपनी पैंटी को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींचते हुए सुगंधा शरारत भरे स्वर में अपने बेटे से बोली।

सच में तू एकदम मादरचोद हो गया है।

इसमें कोई शक है क्या? तुम्हारे जैसी मां हो तो बेटे को मादरचोद बनने से कोई नहीं रोक सकता। (ऐसा कहते हुए अंकित भी अपनी पेंट को ऊपर की तरफ खींचा और उसका बटन बंद करने लगा इसके बाद मां बेटे दोनों एक दूसरे को बाहों में भरकर गहरी नींद में सो गए सुबह दोनों के लिए जल्दी खुल गई नहा धोकर तैयार होने के बाद अंकित उसे जगह पर जाने के लिए जहां के बारे में उसे बैंक वाली औरत में बताई थी वह पूछताछ करने के लिए नीचे रेस्टोरेंट में आ गया था थोड़ी देर में उसकी मां भी नीचे आ गई थी अंकित इस वेटर से उसे जगह के बारे में पूछ रहा था जिसे अपनी मां की नंगी जवानी का दर्शन कराया था और उसके एहसान के बदले में वह वेटर पूरी तरह से अंकित का खास हो गया था। क्योंकि होटल से जाते-जाते अंकित उसे इस बात का दिलासा दिया था कि उसके जाने के बाद वह उस औरत को उसके हाथों सौंप देगा जिसके साथ वह एक दिन के लिए पूरा मजा ले सकेगा। और इस बात का लालच उस वेटर के मन में बस गया था। सुगंधा की खूबसूरत बदन को याद करके ना जाने कितनी बार वह अपने हाथ से हिला कर काम चला लिया था। अपनी मां के साथ बैठकर वह उस वेटर से नाश्ता मंगवाया और उस जगह के बारे में पूछने लगा,,, उस वेटर को उसे जगह के बारे में अच्छी तरह से मालूम था इसलिए उसने जल्द ही एक गाड़ी का बंदोबस्त भी कर दिया था उन लोगों के नाश्ता करते-करते कार आकर होटल के सामने रुक गई थी। मां बेटे दोनों वेटर के कार्य को देखकर मन ही मन बहुत खुश हो रहे थे। इस बात से सुगंधा खुश होते हुए अपने बेटे से बोली।

वेटर तो बहुत काम का इंसान निकला।

काम का इंसान तो है ही हम दोनों का काम कुछ ज्यादा ही कर रहा है पता है किस लिए।

किसलिए,,,!(सुगंधा आश्चर्य से अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली)

वह इसलिए की मैंने उस वेटर से बात किया हूं कि जब मैं इस होटल से जाऊंगा तब मैं उसे औरत को मतलब कि तुम्हें उसे सौंप दूंगा एक रात के लिए खूब मजा करना लेकिन खर्चा भी ज्यादा होगा जिसके लिए बहुत तैयार हो गया था।

हरामजादा वह भी और तू भी,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित हंसने लगा दोनों ने नाश्ता खत्म कर चुके थे। सुगंधा अपना पर्स अपने हाथ में लेकर उठकर खड़ी हो गई अंकित भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,,, और दोनों होटल से बाहर आ गए कार की तरफ कार का ड्राइवर दोनों को नष्ट करता हुआ देखकर खुद भी नष्ट करने के लिए रेस्टोरेंट में बैठ गया था और वह इशारे से दोनों को कर में बैठ जाने के लिए कह रहा था सुगंधा अपनी भारी भरकम गांड लेकर कर का दरवाजा खोलकर अंदर बैठने को हुई तो झुकाने की वजह से उसकी भारी भरकम गांड का उभार को ज्यादा ही बाहर की तरफ निकल आया जिसे देखकर कार का ड्राइवर एकदम से मत हो गया और नजर भरकर सुगंधा की गांड को भी देखता रह गया,,, यह सब करते हुए अंकित की नजर उसे कर ड्राइवर पर चली गई थी और उसका ड्राइवर की हरकत को देखकर वह मन ही मन मुस्कुरा रहा था। थोड़ी देर में मां बेटे के कार में बैठने के बाद वह ड्राइवर भी अपनी सीट पर आकर बैठ गया और आते ही उसने बातचीत की शुरुआत करते हुए बोला।)

तुम दोनों पहली बार आए हो क्या यहां पर,,,(ऐसा कहते हुए उसने कार को स्टार्ट कर दिया,,,, जवाब में अंकित बोला,,,)

जी हां,,,, हम दोनों पहली बार इधर आए हैं,,,वैसे तुम दोनों की जोड़ी काफी अच्छी लग रही है।

जी शुक्रिया,,,( अंकित मुस्कुराते हुए बोला तो सुगंधा भी कोई ड्राइवर की बात पर मुस्कुराने लगी थी,,, क्योंकि उसे भी इस बात का एहसास हो गया था कि वह ड्राइवर भी उसे वही समझ रहा है जो वेटर ने दोनों को समझा था,,,, उसे इस बात की खुशी थी कि कोई भी उन दोनों को मां बेटा नहीं समझ रहा था वरना दिक्कत आ जाती,,, अंकित जानता था कि उसे ड्राइवर की मन में क्या चल रहा है इसलिए वह पहले ही सब कुछ साफ करते हुए उस ड्राइवर से बोला)

यह मेरी कॉलेज की मैडम है लेकिन इन्हें देखकर कोई कह नहीं सकता कि तो बच्चों की मां है आज भी एकदम जवान और कैसे हुए बदन की मालकिन है।

बात तो तुम यार एकदम सही कह रहे हो,,, मैं भी देख कर हैरान रह गया,,,,।

खूबसूरत है ना,,,,।

खूबसूरत,,,, सच कहूं तो महीनों बाद में इतनी खूबसूरत औरत देख रहा हूं यह तो तुमने बताया कि तो बच्चों की मां है तब मुझे पता चल वरना तो मुझे लगी नहीं रहा था,,,,।
(उसे ड्राइवर की बात सुनकर सुगंधा के तन-बदन में गुदगुदी होने लगी थी उसे इस बात का डर हो रहा था कि उसे देखकर कोई बोल नहीं सकता था कि वह दो बच्चों की मां है,,,,,, कार के मिरर में वह ड्राइवर बार-बार सुगंधा कोई देख रहा था सुगंधा शर्म के मारी अपनी नज़रें नीचे झुका ली थी,,,,, उसके मन में भी कई सवाल घूम रहे थे इसीलिए थोड़ी देर बाद कुछ सोच विचार करके वह बोला,,,)

अगर बुरा ना मानो तो मैं एक बात पूछूं,,,।

हां हां पूछो पूछो इसमें कौन सी बात है,,,,।

क्या उनके पति को तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है इस बात का पता नहीं है ‌।

बिल्कुल भी नहीं,,,, ईनके पति बैंक कर्मचारी हैं दिनभर ऑफिस के काम में लगे रहते हैं उनके लिए समय ही नहीं निकलने और तुम तो देख ही रहे हो अपनी आंख से की जवानी से भरी हुई औरत को पैसे से ज्यादा किस चीज की जरूरत ज्यादा रहती है और वही जरूरत इनके पति पूरा नहीं कर पा रहे हैं,,,,(अंकित अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला तो उसकी मां गुस्से से उसे आंख दिखाने लगी,,,, अंकित की बात सुनकर वह ड्राइवर भी एकदम से खुश होता हुआ बोला)

तुम बिल्कुल सही कह रहे हो औरत को इस उम्र में सबसे ज्यादा प्यार की जरूरत होती है ना कि पैसे की इसीलिए तो औरतों के कदम बहक जाते हैं,,,, अब देखो ना मेरी उम्र 40 साल होने को आ गई लेकिन मैंने एक भी दिन अपनी पत्नी को छोड़कर कहीं गया नहीं हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि ऐसे में कोई दूसरा फायदा उठा सकता है,,,,।

तो तुम्हें क्या लगता है कि मैं फायदा उठा रहा हूं,,,।

नहीं नहीं मैं यह बात नहीं कह रहा हूं सर जी मैं तो अपना तजुर्बा बता रहा हूं उनके पति को हमेशा इनका साथ रहना चाहिए उनकी जरूरत को पूरी करना चाहिए अगर ऐसा होता तो शायद यह भी तुम्हारे साथ यहां ना आती।

ऐसा मत कहो मैं तुमसे इतना प्यार करता हूं कि उनके बिना रह नहीं सकता और यहां पर इन्हें प्यार करने के लिए ही तो लाया हूं,,,।

पर इन्होंने अपने पति से बहाना कौन सा मारा।

औरतों के पास बहानों की कमी होती है क्या,,,, इन्होंने कह दी की कॉलेज का काम है तीन-चार प्रोफेसर लोग दूसरे कॉलेज में जा रहे हैं बस यही कहकर घर से निकल गई है तीन दिन हो गया है जी भर कर मजा ले रही है,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित एकदम से बेशर्म बनता हुआ यह जानते हुए भी कि वह ड्राइवर कर की मिरर में उन दोनों को देख रहा है वह एकदम से अपनी मां की चूची पर हाथ रख कर दबा दिया सुगंधा एकदम से चौंक गई और अंकित का हाथ हटाने लगी लेकिन ड्राइवर नहीं अंकित की हरकत को देख लिया था और एकदम से मस्त हो गया था,,, ड्राइवर की हालत खराब हो गई थी उसे इस समय अंकित से बहुत जलन हो रही थी कि इतनी खूबसूरत औरत उसके हाथ में थी जिसके साथ वह जब चाहे तब मजा ले सकता था मिरर में देखकर ड्राइवर ने सुगंधा की चूचियों के आकार का अंदाजा लगा लिया था और मन ही मन गर्म आहे भर रहा था,,,, सुगंधा के हाथ हटाने से अंकित फिर से अपने हाथ को उसकी चूची पर रखकर दबाने लगा सुगंधा बार-बार ऐसा कर रही थीऔर अंकित बार-बार अपनी हरकत को दोहरा रहा था,,,,, ड्राइवर की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, सुगंधा शर्मा रही थी उसे उस ड्राइवर के सामने अंकित किस तरह की हरकतें अच्छी नहीं लग रही थी। अंकित के बताएं अनुसार वह दोनों यहां पर 3 दिन से थे और 3 दिन से मजा ले रहे थे इसका मतलब साफ था कि वह औरत भी मजा लेने के उद्देश्य से ही यहां पर आई थी लेकिन इस समय कर के अंदर उसके सामने वह शर्मा रही थी इसीलिए वह उसकी शर्म दूर करने के लिए बोला।)

कोई बात नहीं तुम दोनों कुछ भी कर सकते हो यहां कोई बोलने वाला नहीं है और वैसे भी कार के अंदर किसी को कुछ दिखाई नहीं देगा,,,,।

लो सुन ली कार के अंदर हम दोनों कुछ भी कर सकते हैं,,,, इन्हें बिल्कुल भी ऐतराज नहीं होगा और वैसे भी कर के अंदर शीशा चढ़ा हुआ है बाहर से किसी को कुछ दिखाई नहीं देगा,,,,।

नहीं यहां कुछ भी नहीं मुझे शर्म आती है,,,।

शर्माइए नहीं मैडम,,, बाहर से आने वाले लोग अक्सर कर के अंदर यह सब करते ही रहते हैं और हम लोगों को इस बात का बुरा भी नहीं लगता क्योंकि यहां पर आते ही इंजॉय करने के लिए इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो जब तक हम उसे जगह पर पहुंचेंगे तब तक तुम दोनों जन का काम खत्म हो जाएगा,,,।

अरे वह ड्राइवर साहब ड्राइवर हो तो आपके जैसा,,,(ऐसा कहने के साथ ही अंकित एकदम से अपनी मां की खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया उसके लाल-लाल होठों पर अपने हाथ रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा सुगंधा शर्म के मारे पानी पानी हो रही थी वह अनजान ड्राइवर के सामने यह सब नहीं करना चाहती थी लेकिन अंकित मान ही नहीं रहा था,,, जब अंकित को भी लगने लगा की सुगंधा मानने वाली नहीं है इसलिए वह उस ड्राइवर के सामने ही बोला,,)

क्या करती हो मेरी जान ड्राइवर साहब से शर्माने की जरूरत नहीं है हम कहां अपने शहर के अंदर यह सब कर रहे हैं कि कोई देख लेगा यह शहर यह जगह हम दोनों के लिए अनजान है यहां पर हम दोनों को कोई नहीं जानता इसलिए तो यहां खुलकर मजा लेने के लिए आए हैं,,,।

यह बिल्कुल ठीक कह रहे हैं यहां परआने वाले लोग इसीलिए खुलकर यहां मजा लेते हैं क्योंकि यहां पर उन्हें कोई पहचानता नहीं है कोई जानता नहीं है तुम पहले नहीं हो पहले भी कई लोग मेरी कार के अंदर मजा ले चुके हैं बस जाते समय 50 100 ज्यादा दे देते हैं,,,, वह लोग भी खुश हो जाते हैं और हम लोग भी खुश हो जाते हैं,,,,,।

इन्हें भी ₹100 दे देंगे,,,,।(इतना कहने के साथ ही फिर से वह ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची दबाना शुरू कर दिया)

क्या कर रहे हो अंकित,,,,,,,,।

वही जो हमें करना चाहिए थोड़ी देर में हम लोग वहां पर पहुंच जाएंगे लेकिन कर के अंदर चुदाई करने का जो मजा है वह नहीं ले पाएंगे क्यों ड्राइवर साहब सही कह रहा हूं ना,,,।

बिल्कुल सही कह रहे हो कार के अंदर चुदाई करने का अपना अलग ही मजा है मैं भी कभी खबर अपनी बीवी को कार में बिठाकर ऐसे ही निकल पड़ता हूं और एक अच्छी सी जगह देखकर खड़ी कर देता हूं और फिर हम दोनों शुरू हो जाते हैं क्योंकि काले रंग के शीशे के अंदर किसी को कुछ दिखाई नहीं देता अक्सर हम लोग ऐसी जगह पर कर खड़ी करते हैं जहां पर लोगों का आना-जाना कुछ ज्यादा ही रहता है जैसे सब्जी मार्केट किसी कपड़े की दुकान के सामने ऐसी जगह पर कुछ ज्यादा ही मजा आता है तुम्हें भी इस तरह का मजा लेना चाहिए इसमें कोई हैरत नहीं है। (कार का ड्राइवर जानबूझकर उन दोनों को इस तरह की बातें करते हो गुस्सा आ रहा था ताकि वह दोनों उसकी आंखों के सामने ही चुदाई का खेल शुरू कर दे और वह अपनी आंखों से देख कर मस्त हो जाए। उसके तन बदन में खुद गुदगुदी हो रही थी उत्तेजना से उसका भजन कंपन कर रहा था,,, वह तो चाहता था कि कब वह उस औरत की नंगी चूचियों के दर्शन करें उसकी नंगी जवान को अपनी आंखों से देखें,, जबकि उसकी कार में आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था,,,,, उसे ड्राइवर की बात को सुनकर अंकित भी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अपनी मां से बोला,,,)
तुम ही सोचो जरा इसमें कितना मजा आता है,,,, भूल गई दर्जी और होटल का वेटर उन दोनों की हालत क्या हो गई है बस वैसा ही मजा हमें इस मोटर गाड़ी में लेना है,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा गहरी सांस लेते हुए कुछ देर तक सोचने लगी वह भी जानती थी कि अनजान लोगों के सामने मजा लेने में अत्यधिक उत्तेजना और संतुष्टि का एहसास होता है क्योंकि दो बार इसका एहसास उसे हो चुका था दो बार वह अनजान लोगों के साथ मजा ले चुकी थी और उन पर अपनी जवानी का जलवा बिखेर चुकी थी अब शायद बारी था ड्राइवर का उसकी हालत देखकर ही पता चल रहा था कि वह कितना ज्यादा उत्सुक था आगे का नजारा देखने के लिए,,,, ऐसा नहीं था कि अपने बेटे की हरकत से उसे मजा नहीं आ रहा था उसे भी अत्यधिक आनंद की अनुभुति हो रही थी,,, उसकी बुर भी पानी छोड़ रही थी। कुछ देर सोचने के बाद सुगंधा खुद एकदम से अपने बेटे के चेहरे को अपने दोनों हाथों में ले ली और उसके होठों पर अपने होंठ रखकर चुंबन करने लगी,,,,, मिरर में यह सब एकदम साफ दिखाई दे रहा था और ड्राइवर ने मिरर को थोड़ा व्यवस्थित भी कर लिया था ताकि पिछले सीट का सारा नजारा उसे बड़े आराम से दिखाई दे सके सुगंधा की हरकत से तो ड्राइवर की हालत एकदम से खराब हो गई, उसकी ईस हरकत से ड्राइवर समझ गया था कि वाकई में यह औरत कितनी प्यासी है तभी तो अपना शहर छोड़ कर इधर मजा लेने आई है,,,,, ड्राइवर की हालत खराब हो रही थी वह एक किनारे से धीरे-धीरे गाड़ी आगे बढ़ा रहा था क्योंकि वह जानता था कि जिस तरह का नजारा उसकी पिछली सीट पर दर्शाया जा रहा है उसे देखते हुए कभी भी उसका एक्सीडेंट हो सकता है इसलिए वह एहतियात के तौर पर गाड़ी धीरे चल रहा था।

अंकित मौके की नजाकत को समझते हुए एकदम से ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूचियों पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे दबाना शुरू कर दिया और अपनी मां के लाल लाल होठों पर रस पीना शुरू कर दिया,,,, मां बेटे दोनों मोटर गाड़ी की पिछली सीट पर बैठकर मस्त हो गए थे,,, इस शहर का नजारा बेहद खूबसूरत था अक्सर लोग मोटर गाड़ी में बैठकर बाहर की तरफ देखते हुए खूबसूरत नजारे का आनंद लेते हैं लेकिन इस समय मां बेटे के पास बिल्कुल भी समय नहीं था क्योंकि बाहर के खूबसूरत नजारे से थी अत्यधिक आनंदित कर देने वाला नजारा अंदर खुद दोनों दर्शा रहे थे। ड्राइवर बार-बार मिरर में पीछे का नजारा देखकर मस्त हुआ जा रहा था। उससे जब रहा नहीं जाता था तो खुद पीछे मुड़कर देख लेता था,,,, वह अच्छी तरह से जानता था कि औरत की उम्र थोड़ा ज्यादा थी और लड़के की उम्र कम थी,,,, ड्राइवर दोनों की उम्र के अंदर कोई अच्छी तरह से समझता था दोनों मां बेटे की उम्र की थी लेकिन वह जानता था की मां बेटे इस तरह की हरकत कभी नहीं कर सकते और वह जमाने को देख चुका था उसे मालूम था कि मर्द से ज्यादा औरत इस कदर प्यासी होती है कि वह अपनी मनमानी करने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाती है जिसका नमूना वह अपनी ही कार में देख रहा था,,,,, उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि इस उम्र में भी यह जवान लड़का कितना तेज है एक औरत के अंगों से खेलना अच्छी तरह से जानता है इसलिए तो लगातार उसके होठों का रसपान करते हुए अपने दोनों हाथ की उंगलियों को उलझा दिया था सुगंधा के ब्लाउज के बटन खोलने के लिए और जैसे-जैसे ब्लाउज का बटन खोल रहा था वैसे वैसे ड्राइवर की हालत एकदम खस्ता होते चली जा रही थी।

मोटर कार में अद्भुत आनंदित कर देने वाला वासना से भरा हुआ दृश्य दर्शाया जा रहा था ड्राइवर की हालत पतली होती चली जा रही थी घर से निकलते समय वह कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी मोटर गाड़ी के अंदर एक खूबसूरत जवान औरत और एक जवान लड़का पूरी तरह से बेशर्म होकर एक दूसरे से मजा लेंगे,,, इस समय उसके खुद के आनंद की कोई सीमा नहीं थी वैसे तो ड्राइवर एकदम शरीफ इंसान था लेकिन इस समय जो कुछ भी उसकी कार के अंदर हो रहा था वह उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर दिया था,,,,, अंकित देखते-देखते अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी ब्रा को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींच दिया और उसके दोनों कबूतर एकदम से आजाद होकर हवा में उड़ने लगे,,, ड्राइवर की तो आंखें फटी की फटी रह गई मिरर में सुगंधा की नंगी चूचियों को देखकर उसके होश उड़ गए,,,, मिरर में देखकर उसकी उत्तेजना शांत नहीं हो रही थी उसका मन बेकाबू हुआ जा रहा था। इसलिए वह गाड़ी को एकदम धीमे चलते हुए बार-बार पीछे की तरफ देख ले रहा था पीछे देखने में से कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था उसने आज तक इतनी गोलाकार लिए हुए मदमस्त कर देने वाली चुचियी नहीं देखा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र में दो बच्चों की मां होने के बावजूद ईस औरत की चूची में इतना कसाव और तनाव कैसे बरकरार रह सकता है,,,,, वह भी अपने मन में यह सोच ही रहा था कि अंकित तुरंत अपने मुंह को अपनी मां की चूची पर रखकर उसे पीना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसकी चूची पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया यह सब ड्राइवर के लिए अनदेखा अनजाना सा था आज उसकी आंखों के सामने ऐसा लग रहा था कि कोई ब्लू फिल्म चल रही थी।

ड्राइवर उत्तेजना से ग्रस्त हुआ जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह धीरे-धीरे मोटर गाड़ी को आगे बढ़ा रहा था ताकि उसे मोटर गाड़ी की कहानी किसी से टक्कर ना हो जाए क्योंकि हालात जिस तरह से बने हुए थे निश्चित तौर पर ऐसे में एक्सीडेंट होने का अनुपात बढ़ जाता है और ड्राइवर नहीं चाहता था कि उसका एक्सीडेंट हो। सामान्य तौर पर यह ड्राइवर पैसेंजर के बैठने पर गाड़ी का शिशा खोल देता था, लेकिन आज वह ऐसा नहीं कर पाया था क्योंकि शीशा नीचे करने का मतलब था एक खूबसूरत दृश्य पर पर्दा पर जाना और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहता था उसकी खुशी सेक्स लाइफ नीरस थी जिसमें कभी कबार ही वह अपनी बीवी के साथ संबंध बना पाता था क्योंकि दिन भर इतनी थकान हो जाती थी कि वह घर जाकर एकदम से थक कर कर हो जाता था और खाना खाकर बिस्तर पर लेट जाता था उसकी ईस हरकत से उसकी बीवी भी परेशान थी,,,, उन दोनों को देखकर कर वह अपने मन में एक तरह का कल्पना भी कर रहा था कि वह जिस तरह से अपने बीवी के साथ पेश आ रहा था उसकी जरूरत को पूरी नहीं कर रहा था हो सकता है कि उसकी बीवी भी किसी जवान लड़के के साथ यह सब करती हो,,, क्योंकि सुगंधा की उम्र लगभग लगभग उसकी बीवी की उम्र जितनी ही थी या हो सकता है दो-चार साल आगे पीछे लेकिन फिर भी दोनों की चाहत एक थी। इसलिए वह देखना भी चाहता था कि अपने पति से प्यार न पाकर एक घरेलू औरत की सहायता तक एक जवान लड़की के साथ मजा लेने के लिए तड़प पड़ती है और वही तड़प इस समय सुगंधा में दिखाई दे रही थी।

कर की सीट पर पीछे कर आराम से टिकाकर वह अपने बेटे से अपनी चूची मर्दन और स्तनपान का भरपूर मजा ले रही थी और यह सब वह ड्राइवर देखकर मस्त हुआ जा रहा था। वह अंकित को देख कर कुछ सीखने की कोशिश कर रहा था अंकित किस तरह से औरत को खुश कर रहा था यह उसके लिए अध्ययन का विषय था।
उसे साफ दिखाई दे रहा था कि एक जवान लड़का अपनी से बड़ी उम्र की औरत या यूं कह लो कि अपनी मां की उम्र की औरत के साथ बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिख रहा था सब कुछ बड़े आराम से कर रहा था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों से बड़े प्यार से खेल रहा था उसे मुंह में लेकर चूस रहा था दबा रहा था ऐसा सब कुछ कर रहा था जिससे एक औरत को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है जबकि वह खुद अपनी बीवी के साथ आज तक ऐसा नहीं कर पाया था बस जब भी उसका मन करता था चढ़कर उतर जाता था कभी मन हुआ तो ब्लाउज के ऊपर से दबा देता था क्या नंगी चूची को दोनों हाथ में लेकर बस हल्का सा दबा दबा कर मजा लेता था,,,, उसे इस बात का ज्ञान नहीं था कि औरतों की चुची से जी भर कर खेलने पर औरत को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है,,,, कार को धीरे-धीरे चलते हुए वह बार-बार मिरर की तरफ तो कभी नजर पीछे घूमा कर देख ले रहा था,,,, उसे यह भी दिखाई दे रहा था की चूचियों से प्यार से खेलते खेलते, जोर से दबा दे रहा था जिससे सुगंधा की चीज तो निकल जा रही थी लेकिन उसे आनंद भी बहुत आ रहा था जो कि उसके चेहरे के भाव को देखकर पता चल रहा था,,,,।

मां बेटे दोनों कभी सोचा भी नहीं थी कि इस तरह से चलती कर के अंदर वह दोनों जवानी का मजा लूटेंगे सुगंध को एहसास हो रहा था कि उसका बेटा जहां मौका देखा है शुरू हो जाता है यह भी नहीं दिखता है कि कभी कुछ गड़बड़ हो गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे चलती बस में तो ठीक था कि दोनों का केबिन अलग था जिसमें वह दोनों खुलकर मजा लूट रहे लेकिन करा के अंदर कब कैसे इंसान मिल जाए क्या भरोसा,,,, लेकिन यह भी उसे मालूम था कि अपनी हरकतों से उसका बेटा उसे पूरी तरह से मस्त भी कर देता है जाने अनजाने में ऐसा सुख प्रदान करता है कि इसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। और इस समय भी उसका बेटा ही वही कर रहा था जिसमें सुगंधा को भी मजा आ रहा था,, मदहोशी के इस आलम में बार-बार सुगंधा की नजर और ड्राइवर की नजरों से टकरा जा रही थी पहले शुरू शुरू में तो सुगंधा शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ले रही थी लेकिन इस बात का एहसास उसे भी हो रहा था कि यह जगह उसके लिए बिल्कुल नहीं थी यहां पर उसे कोई जाने वाला नहीं था पहचान वाला नहीं था ना कोई रोकने वाला था ना रोकने वाला था इसलिए वह भी थोड़ी हिम्मत दिखा कर जब से कुछ ड्राइवर से नजर मिलती तो वह ड्राइवर को देखने लग जाती थी इसका असर यह हो रहा था कि ड्राइवर शर्मा कर अपनी नजर को वापस दूसरी तरफ घुमा ले रहा था,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से मजा लेने के बाद अंकित अपने पेट की बटन खोलने लगा यह देखकर सुगंधा हैरान होने लगी वह अपनी आंखों को बड़ी करके अंकित की तरफ देखकर उसे इशारा भी कर रही थी कि यह सब यहां पर मत कर लेकिन वह मुस्कुराता हुआ अपनी मां की एक नहीं सुना होती अपने पेंट की बटन खोलकर पेंट को घुटने तक नीचे खींच दिया मिरर में यह सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,,, अभी भी अंकित का लंड उसके अंडरवियर के अंदर केद था जो कि अच्छा खासा उभार बनाया हुआ था,,,, ड्राइवर की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि करा चलाए या कहीं पर रोक दे और यह सब कुछ अपनी आंखों से इत्मीनान से देखें,,,, लेकिन यह हाईवे काफी छोटा था कार कहीं पर भी रोका नहीं जा सकता था इसलिए मजबूरी में उसे चलाना ही था।

सड़क के दोनों तरफ बड़े-बड़े पेड़ लगे हुए थे जो आपस में ऊपर जाकर मिल जाते थे और एक अद्भुत खूबसूरत दृश्य को उपसाते थे जिसे देखकर वातावरण की खूबसूरती को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता था। वैसे तो मां बेटे को यहां के खूबसूरत नजारे को देखकर एक अद्भुत और अविस्मरणीय प्रवास का आनंद लेना चाहिए था लेकिन इस समय दोनों अपनी जवानी की प्यास बुझाने में लगे हुए थे,,,,, अंडरवियर के ऊपर अपने लंड पर हाथ रखते हुए अपनी मां की तरफ देखकर अंकित बोला,,,,,

देखो जान तुम्हारी जवानी देखकर कैसे खड़ा हो गया है,,,,,(अपनी मां की उम्र को जान कहकर संबोधन करना अंकित को तो बहुत अच्छा लगता था लेकिन ड्राइवर एकदम हैरान था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एक जवान लड़का अपनी बड़ी उम्र की औरत के साथ इतना खुलकर कैसे मजा ले सकते हैं ऐसा लग ही नहीं रहा था कि दोनों की उम्र में काफी अंतर है ऐसा लग रहा था कि दोनों हम उम्र ही हैं,,,, ड्राइवर को एहसास हो रहा था कि वाकई में दोनों कितने बेशर्म है लेकिन उनकी बेशर्मी से ड्राइवर को भी कुछ सीखने को मिल रहा था कुछ देखने को मिल रहा था जिसका उपयोग अपने जीवन में करके अपनी नीरस जिंदगी को रंगीन बना सकता था। अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा की बेशरम बन चुकी थी उसे यह सब करने में भी अच्छा लगने लगा था इसलिए बिना कुछ सोचे समझे अपना हाथ अपने बेटे के अंडरवियर के उभार पर रखकर हल्के हल्के सेहराने लगी हालांकि वह कुछ बोल नहीं रही थी लेकिन उसकी निगाहें सब कुछ बयां कर रही थी मिरर में यह सब देखकर ड्राइवर की सांस ऊपर नीचे हो रही थी वह धीरे से मिरर को थोड़ा सा और नीचे की तरफ कर दिया ताकि पिछली सीट का पूरा नज़ारा वह देख सके,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था की सुगंधा अपनी हथेली को उसके अंडरवियर पर रखकर हल्के-हल्के सहला रही थी और अंकित एकदम मदहोश हुआ जा रहा था,,,,, यह सब देखकर ड्राइवर हैरान भी था और देखते ही देखते सुगंधा दोनों हाथों से उसके अंडरवियर को पकड़ कर खींचने लगी,,, अंकित भी मौके की नजाकत को समझते हुए अपनी गांड को सीट पर से थोड़ा सा ऊपर उठा लिया और सुगंधा अंडरवियर को तुरंत नीचे की तरफ खींचकर उसके घुटनों तक लाकर छोड़ दी,,,, अंडरवियर की कैद से आजाद होते ही अंकित का मोटा तगड़ा लंड एकदम से हवा में लहराने लगा जिसे देखकर सुगंधा की आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई उसके चेहरे की प्रसन्नता और उत्तेजना ड्राइवर को एकदम साफ दिखाई दे रही थी उसकी उत्तेजना और आंखों की चमक देखकर ड्राइवर को हैरानी हो रही थी और अंदर ही अंदर उसे एक दुख भी हो रहा था। यह दुख उसे अपनी बीवी को लेकर था।

तभी मिरर में उसने देखा की सुगंधा अपने हाथ को आगे बढ़ाकर अंकित के लंड को पकड़ कर हीलाना शुरू कर दी थी और मुस्कुरा रही थी,,,,,, उसकी मुस्कुराहट देखकर अंकित ड्राइवर से बोला,,,,।

देख रहे हो ड्राइवर साहब यही फर्क होता है जवान लड़कियों से और दो बच्चों की मां से मजा लेने में अभी उनकी जगह कोई जवान लड़की होती तो इस तरह की हरकत नहीं करती हाथ से नहीं पकड़ती लेकिन देख रही हो तो बच्चों की मां को मेरे बिना कुछ बोल ही वह अपने हाथ में लेकर कैसे खेल रही है मेरे लंड से,,,,,,(अंकित की बात सुनकर ड्राइवर पीछे मुड़कर देखे बिना नहीं रह सका और जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो सुगंधा के हाथ में उसका लंड देखकर उसकी भी आंखें फटी की फटी रह गई उसे एहसास होने लगा था कि वाकई में अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था वह कुछ पल के लिए अपनी नजर अंकित के लंड से हटा ही नहीं पा रहा था,,,, वह उसे देखता ही रह गया था,,, तभी सुगंधा की बात उसके कान में पड़ी जो उसकी शंका को हकीकत का स्वरूप दे रही थी वह अपनी कल्पनाओं के घोड़े को बड़ी तेजी से भगा भी रहा था वह सुगंधा के मुंह से सुना वह अपने बेटे के लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए बोल रही थी।

ऐसा मोटा तगड़ा लंड हो तो कौन सी औरत दीवानी नहीं हो जाएगी कौन सी औरत इसे पकड़ कर खेलेगी नहीं,,,,।
(सुगंधा की बात उसके दिल पर हथौड़े की तरह चल रही थी वह अपनी बीवी को लेकर कल्पना कर रहा था और उसके मन में चल रही शंका को एक हवा से मिल गई थी सुगंधा की बात सुनकर वह अपने मन में यही सोच रहा था कि वाकई में वह अपनी बीवी को सुख नहीं दे पा रहा है तो उसकी बीवी भी किसी जवान लड़की को ढूंढ कर इस तरह से मजा लेती होगी वह तो दिन भर इस तरह से गाड़ी चलाता है अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए लेकिन इस बीच उसे यही गलती हो जाती है कि वह अपनी बीवी को सुख नहीं दे पाता और हो सकता है कि उसकी बीवी भी इस औरत की तरह जवान लड़के में अपना सुख ढूंढ़ रही हो और अगर एक बार जवान लड़के का चस्का लग गया तो वह उसे कभी भाव भी नहीं देगी,,,, यह सब सोच कर उसका दिल बैठ जा रहा था वह अपनी बीवी के बर्ताव के बारे में सोचने लगा कि वाकई में जब वह अपने घर पहुंचता है तो उसकी बीवी भी ऐसा कुछ पहन नहीं करती कि जैसे उसका मनु उत्तेजित हो जाए और वह अपनी बीवी से शारीरिक संबंध बनाने के लिए तड़प उठे वह उसे खाना पर उसका आराम से करवट लेकर सो जाती है यह सब सोच कर उसके शंका के बदले गिरने लगे थे वह अपने मन में यही सोचने लगा था कि उसकी बीवी भी इसी तरह से जवान लड़की के साथ मजा लूट रही होगी। वह अपने मन में यह सब सो रहा था कि इसी बीच मिरर के अंदर सुगंधा नीचे झुकती हुई दिखाई दी और अगले ही पल माध्यम से झुक गई ड्राइवर को एहसास हो गया कि वह क्या करने के लिए नीचे झुकी है और वह मिरर में ना देख कर पीछे की तरफ नजर घुमा कर देखने लगा तो हैरान रह गया। वह पूरा का पूरा लंड अपने मुंह में लेकर चूस रही थी।

ड्राइवर हैरान परेशान हो गया उसके माथे पर से तो पसीना टपकने लगा उत्तेजना और शंका में उसका दिल बैठ जा रहा था पिछली सीट पर जो कुछ भी हो रहा था वह उसे पूरी तरह से मदहोश और मस्त कर दिया था लेकिन उसे नजारे से वह अपनी बीवी के बारे में कल्पना करने लगा था,,,, वह अपने मन में सोच रहा था किस तरह की हरकत तो उसकी बीवी ने आज तक उसके साथ नहीं की थी,,,,, अभी वह यह सब सो ही रहा था कि तभी अंकित ड्राइवर से बोला,,,)

देख रहे हो ड्राइवर साहब इस उम्र की औरत की प्यास बुझती नहीं है इन्होंने अपने पति के साथ इस तरह की हरकत कभी नहीं की कभी भी उसके लंड को हाथ में लेकर हिलाई नहीं है ना तो मुंह में लेकर चूसी लेकिन यहां देखो बिना कुछ बोले हाथ में लेकर खेल भी रही थी और मुंह में लेकर चुस भी रही है,,,।(अंकित की बात सुनकर अपने माथे से रुमाल से पसीना साफ करते हुए ड्राइवर बोला)

देख रहा हूं,,,।

और हां मैंने तो कभी देखा नहीं लेकिन इन्होंने ही खुद बताया कि उनके पति का लंड मेरे लंड से आधा भी नहीं है और पतला है,,,, और अब आप ही सोचो भला पतले और छोटे लंड से इस औरत की प्यास बुझ पाएगी कभी,,,, बड़ी-बड़ी चूचियां बड़ी-बड़ी गांड गुलाबी बर मुझे नहीं लगता कि इनका पति ने खुश कर पाता था तभी तो यह मेरे पास आई है,,,, और हां ड्राइवर साहब इस उम्र की औरतें मोटे और लंबे लंड को ज्यादा पसंद करती है और खास करके जवान लंड को जो इनकी बुर में जाकर बुर का भोसड़ा बना दे देख रहे हो कैसे चूस रही है मलाई कोन की तरह,,,,,आहहहहह मैं तो पागल हो जाऊंगा वाकई में इस उम्र की औरत कुछ ज्यादा ही मजा देती है बिल्कुल भी नखरे नहीं करती,,,ऊमममममम पूरा गले तक लेकर चूसो मेरी जान,,,,,आहहहहहहहह ,,,,,,आहहहहहह बहुत मजाआ रहा है,,,,,।

(अंकित कि ईस तरह की बातें ड्राइवर को एकदम से परेशान कर रही थी मजा तो उसे भी आ रहा था लेकिन अपनी बीवी के बारे में कल्पना करके वह हैरान हो गया था,,,,, वाकई में दो बच्चों की मां यह औरत उसे पागलों की तरह प्यार कर रही थी इस तरह का मजा तो आज तक उसकी बीवी ने उसे कभी भी नहीं दी,,, ड्राइवर इस बारे में बहुत कुछ सोच रहा था वह अपने मन में यही सोच रहा था कि दुनिया के हर मर्द कोई इसी तरह का सुख चाहिए भले ही वह किसी भी उम्र का हो लेकिन खुद की बीवी इस तरह का सुख अपने पति को क्यों नहीं दे पाती बल्कि दूसरे मर्द को जी जान लगाकर हर एक सुख देती है जिससे वह पागल की तरह उसके आगे पीछे घूमता रहता है अब इसमें गलती किसकी है दुनिया की मर्दों की जो घर की जवाबदारी निभाने के लिए घर से बाहर निकाल कर मजदूरी करते हैं या फिर इस तरह की औरतों को जो पति को तो इस तरह का सुख नहीं देती लेकिन अपने आशिकों को खुलकर मजा देती है अगर अपने पति को किस तरह का आनंद दे तो भला पति घर पर पहुंच कर बीवी से प्यार क्यों ना करें। बीवी इस तरह का प्यार नहीं करती तभी वह घर जाकर खाना खाकर सो जाता है उसे एहसास तक नहीं होता कि उसके बिस्तर पर एक खूबसूरत औरत सोई है जिसे प्यार चाहिए और जिसका फर्ज बनता है कि अपने पति को प्यार देना चाहिए लेकिन ऐसा दोनों के बीच कुछ भी नहीं होता। ड्राइवर के दिमाग में यही बातें चल रही थी कि इन सब में गलती किसकी है मर्द की है या औरत की,,,,,, उसे सबसे ज्यादा गलती औरत की दिखाई दे रही थी क्योंकि पिछली सीट पर वही औरत थी जो घर पर अपने पति से प्यासी थी अपने घर पर अपने पति से प्यार नहीं पाती लेकिन बाहर अपने आशिक के साथ खुलकर मजा लूट रही थी और उसका आशिकों से मजा भी दे रहा था शायद इसका कारण भी यही था कि वह औरत खुद खुलकर उस मर्द को आनंद कर रही थी जो कि अपने पति के साथ वह ऐसा कुछ भी नहीं करती थी वह इस तक में रहती थी कि उसका पति सिर्फ उससे प्यार करें उसे संतुष्ट करें शायद वह औरत इस बात को भूल जाती है कि शारीरिक संबंध मर्द और औरत के बीच आपसी एहसास को दर्शाता है ना कि किसी एक की जिम्मेदारी को दर्शाता है दोनों को चाहिए कि दोनों आपस में खुलकर प्यार करें ताकि दोनों में किसी बात की कमी दिखाई ना दे लेकिन मामला पूरी तरह से उल्टा हो चुका था।

गाड़ी को धीरे चलते हुए ड्राइवर बार-बार पीछे की तरफ देख ले रहा था अंकित के चेहरे पर बदलते भाव को देख ले रहा था और उसे औरत की बेशर्मी को देख ले रहा था जो इस समय अपने बेटे की उम्र के लड़के को संपूर्ण सुख देने के इरादे से उस पर टूट पड़ी थी,,,, आधा सफर पूरा हो चुका था आधा सफर बाकी था और दोनों का भी आधा सफर बाकी रह गया था जिसे पूरा करने के लिए सुगंधा धीरे से अपने मुंह से अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल दी और गहरी गहरी सांस लेने लगी अंकित बिना शर्माए अपनी मां को सिर पर थोड़ा सा पीछे की तरफ झुका दिया जिसे सिर्फ अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा लेकिन भारी भरकम गांड के नीचे दबे होने की वजह से उसकी साड़ी ऊपर की तरफ उठ नहीं पा रही थी जिसे सुगंधा खुदाई अपने हाथों से ऊपर की तरफ खींच मिलेगी यह सब ड्राइवर को मिरर में दिख रहा था उसकी गोरी गोरी चिकनी टांगों को देखकर ड्राइवर कमाई गया था और जैसे ही साड़ी जांघों तक आई तो उसके होश उड़ गए,,,, शायद वह पहली बार किसी गोरी औरत को इस अवस्था में देख रहा था और अपने मन में बोल भी रहा था कि बाप रे अपनी खूबसूरत और गोरी औरत को तो आज वह पहली बार देख रहा है घर में उसकी बीवी थोड़ा सा दबे रंग की थी इसलिए उसे नहीं मालूम था की गोरी औरत नंगी होने के बाद कैसी दिखती है वह सिर्फ कल्पना किया करता था लेकिन आज अपनी आंखों के सामने उसकी कल्पना साकार हो रही थी देखते-देखते सुगंध अपनी साड़ी को कमर तक उठा रही थी और साड़ी के अंदर उसकी ब्लू रंग की चड्डी साफ दिखाई दे रही थी,,,,, सुगंधा की ब्लू रंग की चड्डी ड्राइवर की आंखों की चमक को बढ़ा रही थी क्योंकि उसकी बीवी साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनती थी साड़ी के अंदर वह नंगी ही रहती थी,,, पहले तो खुद ड्राइवर को भी यह सब सामान्य लगता था लेकिन आज अपनी पिछली सीट पर एक औरत को ब्लू रंग की चड्डी पहने हुए देखकर उसे एहसास होने लगा कि उसके जीवन में कितनी बड़ी कमी है वह भी अपनी बीवी को इसी अवस्था में देखना चाहता है,,, क्या हो सकता है कि अपने आशिक के पास जाने से पहले वह भी इस तरह की चड्डी पहन लेती हो जिसे उतार कर उसका आशिक एकदम मस्त हो जाता होगा यह सब ख्याल ड्राइवर को उत्तेजना के साथ-साथ परेशानी भी दे रही थी।

सुगंधा सीट पर लेट चुकी थी और अंकित अपने दोनों हाथ को आगे बढ़कर अपनी मां की चड्डी को पकड़ कर नीचे की तरफ खींचने लगा था एक बार फिर से सुगंध अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी गांड को ऊपर उठा दी और अंकित बिना देर की अपनी मां की चड्डी को उसके बदन से अलग कर दिया,,, अपनी मां की चड्डी को बगल में रखते हुए वह बोला,,,।

ड्राइवर साहब एक बात मानना पड़े इस उम्र की औरत की चड्डी अपने हाथों से उतारने में जो मजा मिलता है वाकई में वह मजा किसी और चीज में नहीं है,,, तुम भी कभी ऐसा मजा लेना बाहर की औरत के साथ दिल खुश हो जाएगा,,,,(अपने बेटे की इस तरह की बात सुनकर सुगंधा के तन बदन में आग लगी हुई थी वह उत्तेजना की जान शिखर पर पहुंच चुकी थी अब उसे ड्राइवर से बिल्कुल भी शर्म नहीं लग रही थी इसलिए वह अपनी एक टांग को एकदम से फैला कर ड्राइवर की सीट के बगल में कर दी एकदम उसके चेहरे के पास ड्राइवर की तो हालत खराब होने लगी एक खूबसूरत औरत की टांग अपने सर के पास महसूस करके वह नजर पीछे घूम करके देखा तो सुगंध अपनी हथेली से अपनी बुर को मसल रही थी,,,, ड्राइवर की हालत और ज्यादा खराब होने लगी ड्राइवर नजर पीछे घूम कर आश्चर्य से फटी आंखों से इस खूबसूरत नजारे को देख रहा था और सुगंध भी अपनी हथेली को अपनी बुर पर रगड़ते हुए अपनी उंगलियों को खोल दे रही थी ताकि उंगलियों के बीच से वह ड्राइवर उसकी बुर के दर्शन कर सके ड्राइवर को एहसास हो रहा था कि उसकी पूरे दिन चिकनी थी बाल का रेशा तक नहीं था ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी-अभी क्रीम लगाकर साफ की हो,,,,,,, सूरज एकदम से अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसकी हथेली को उसकी बुर से हटाते हुए उसकी चिकनी बुर को देखकर उसकी तारीफ करते हुए बोला,,,।

आहहहहह क्या मस्त बुर है एकदम कचोरी की तरह खुली हुई एक जवान लड़के को और क्या चाहिए,,,,, देख रहे हो ड्राइवर साहब ऐसी चिकनी बुर देख कर तो मुर्दे का भी लंड खड़ा हो जाए,,,,(अंकित की बात सुनकर ड्राइवर नजर पीछे घूमाकर नजर भरकर सुगंधा की बुर को देखने लगा,,,, ड्राइवर की आंखों की चमक बता रही थी कि वह कितना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था उसकी उत्तेजना को देखकर अंकित बोला,,,)

मुझसे मिलने के पहले यह अपनी बर के सारे बाल साफ करने की क्रीम लगाकर और घर पर बालों वाली बुर लेकर घूमती रहती है,,,,, हम लड़कों को अपना गुलाम बनाने के लिए औरतों को ढेर सारा होना रहता है मैं तो पागल हो जाता हूं इसकी चिकनी बुर देखकर,,,(अंकित कि ईस तरह की बात सुनकर ड्राइवर एकदम हैरान हो जाता है यह सोचकर मजबूर होने के लिए की यह सब वाकई में क्या है उसने तो अपनी बीवी की बुर को चिकनी होते हुए कभी नहीं देखा था हमेशा उसके बाल के गुच्छे बुर पर दिखाई देते हैं वह कभी क्रीम लगाकर अपनी बुर को साफ नहीं की थी या ऐसा भी हो सकता है कि अपने आशिक से मिलने से पहले वह भी क्रीम लगाकर अपनी बर के बाल साफ कर देती हो अगर ऐसा करती भी होगी तो उसे कहां पता चलने वाला है दो-तीन महीने में एकाद बार तो वह अपनी बीवी की बुर को देखता है,,, ऐसा कभी नहीं हुआ कि वह अपनी बीवी की चिकनी बुर को देखा हो उस पर हल्के हल्के बाल रहते हैं,,,, अपने मन में ऐसा सोच ही रहा था कि कभी उसे ख्याल आया कि एक बार वह अपनी बीवी की बुर पर हल्के हल्के बाल देखा था लेकिन उस समय उसे कुछ समझ में नहीं आया वह सामान्य बना रहा लेकिन आज अपनी आंखों से यह सब देखकर उसे विश्वास होने लगा था कि उसकी बीवी का भी चक्कर किसी जवान लड़के के साथ है वह भी उससे मिलने से पहले अपनी बुर के बाल साफ कर लेती होगी,,,, यह सब सोच कर उसका दिमाग खराब हुआ जा रहा था और इसी बीच, अंकित अपनी मां की टांगों के बीच झुकता हुआ उसकी बुर पर अपने होठ रख दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया,,, ड्राइवर सामने देखने में व्यवस्था लेकिन अंकित की हरकत से उसकी मां के मुंह से एकदम से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी।

सहहहहह आबहहहहह मेरेराजा,,,,
(इतना सुनते ही ड्राइवर अपनी नजर पीछे घूमा कर देखा तो उसके होश उड़ गए अंकित उसे औरत की बुर को चाट रहा था पागलों की तरह जीभ डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था ड्राइवर यह सब देखकर एकदम से हैरान हो गया उसे तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था उसने सिर्फ सुन रखा था कि यह सब भी होता है लेकिन आज अपनी आंखों से यह सब देख रहा था और इस बात से और ज्यादा हैरान हो रहा था कि उसे लड़के की हरकत से पिछली सीट पर टांगे फैलाए औरत को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,, यह देखकर ड्राइवर हैरान था यह कैसा खेल है भला एक जवान लड़का एक औरत की बुर को कैसे चाट सकता है जहां से वह पेशाब करती है क्योंकि आज तक ऐसा उसने कभी नहीं किया था,,,, और नहीं कभी इस बारे में सोचा था क्योंकि उसे भी बड़ा अजीब लगता था सोचकर ही लेकिन आज अपनी आंखों से देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह यह सब क्या देख रहा है। जिस कार्य को करने में उसे घिन्न आता था और उसने आज तक ऐसा काम किया भी नहीं था इस कर को यह जवान लड़का पागलों की तरह कर रहा था और उसकी हरकत से वह औरत मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि भला इस तरह की हरकत से एक औरत इतना आनंदीत कैसे हो सकती है,,,, तभी ड्राइवर के कानों में फिर से सुगंधा के आनंदित होने की सरकारी की आवाज सुनाई देने लगी,,,)

सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,ऊमममममममम ओहहहहह मेरे राजा और जोर-जोर से चाटो,,,,ऊममममम पूरी मलाई चाट जाओ,,ओहहहहह मेरे राजा तू तो मुझे पागल कर देगा,,,,,,।

(सुगंधा की गरमा गरम सिसकारी और उसकी मदहोशी भरी बातें सुनकर ड्राइवर हैरान था उसे यकीन तो नहीं हो रहा था लेकिन अपनी आंखों के सामने जो कुछ भी हो रहा था उसे देखकर इस कार्य को करने में औरत को कितना मजा आता है,,, उसने तो आज तक अपनी औरत के साथ ऐसी कोई हरकत किया नहीं था लेकिन उसे हल्का-हल्का याद आ रहा था कि एक बार शुरू शुरू में जब उसके कोई औलाद नहीं थे तब उसकी औरत उसके ऊपर चढ़ने की कोशिश की थी अपनी भारी भरकम गांड को उसके चेहरे पर रखने की कोशिश की थी लेकिन उसने उसे धक्का देकर हटा दिया था क्योंकि उसकी हरकत उसे पसंद नहीं थी उसे समय तो वह अपनी बीवी की तरफ से इसे सामान्य हरकत ही समझ रहा था लेकिन आज सुगंधा की हरकत और उसकी हालत को देखकर उसे एहसास होने लगा था कि उसकी औरत भी उसके साथ शायद इसी तरह का सुख लेना चाहती थी इसी तरह का मजा लेना चाहती थी और वह मुझे नहीं बोल पा रही थी तो खुद ही अपनी बुर को उसके होठों पर रखना चाहती थी जिसे वह हटा दिया था,,,,, बरसों पहले हुई इस हरकत के बारे में आज सोचकर ड्राइवर हैरान को जा रहा था उसे एहसास हो रहा था कि उसकी औरत भी इस तरह का सुख भोगने चाहती थी और उसने कभी ऐसी हरकत को अंजाम नहीं दिया था तो ऐसा भी हो सकता है कि इस तरह का सुख वह अपने आशिक से प्राप्त करती हो और और अपनी पिछली सीट पर जवान लड़के की हरकत को देखकर उसे यकीन हो गया था कि लड़के इस तरह की हरकत करने से बिल्कुल भी बाज नहीं आते उन्हें भी शायद यह सब करने में मजा आता है,,,, उसकी बीवी की भी बुरे कोई आशिक चाट रहा होगा उसे सुख दे रहा होगा तभी तो उसके बाद से उसने कभी भी अपने मन की इच्छा जाहिर नहीं होने दी थी। यह सब सो कर ड्राइवर के माथे से पसीना टपकने लगा था और पिछली सीट पर घमासान मचा हुआ था अंकित पागलों की तरह अपनी मां की बुर चाट रहा था और सुगंधा दोनों हाथ से अपने बेटे के सर को पकड़ कर अपनी बुर पर दबाई हुई थी,,,, तभी सुगंधा की आवाज बड़ी जोर से आने लगी,,,)

ओहहह मेरे राजा मेरे को गई मेरा होने वाला है मेरा निकलने वाला है मैं जा रही हूं मेरे राजा जोर-जोर से चाट,,,,(उसका इतना कहना था कि ड्राइवर पीछे नजर घुमा कर देखा तो उसके होश उड़ गए सुगंधा की बुर से मदन रस के पिचकारी फूट पड़ी थी जो अंकित के चेहरे को पूरी तरह से भिगोने लगी थी ड्राइवर पहली बार किसी औरत को इस तरह से झड़ते हुए देख रहा था उसे तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह पूरी तरह से उत्तेजना से मदहोश हो चुका था मस्त हो चुका था उसका लंड भी खड़ा हो चुका था इस तरह के कड़कपन का एहसास उसे कभी पहले नहीं हुआ था जैसा आज हो रहा था)

बाप रे तुमने तो मेरे चेहरे को गीला कर दी,,,,(अपने मुंह को अपनी मां की बुर से हटाते हुए अंकित बोल तो ड्राइवर उसके चेहरे को देखने लगा और मुस्कुरा दिया वाकई में सुगंधा के बुरे से निकलने वाली पिचकारी उसे भिगो दी थी अंकित अपनी मां के पेटीकोट से ही अपने चेहरे को साफ करने लगा,,,,, ड्राइवर को लग रहा था कि झड़ने के बाद दोनों का काम खत्म हो चुका था लेकिन तभी सुगंधा अपनी बर को फिर से अपनी हथेली से मसलते हुए बोली)

चला जा मेरे राजा डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में बुझा दे मेरी प्यास,,,,आहहहह बिल्कुल भी देर मत कर तू सच कह रहा था कार के अंदर कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,,,।

(सुगंधा की बात सुनकर ड्राइवर हैरान था उसे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था कि दो बच्चों की मां अपनी प्यास बुझाने के लिए अपने बेटे की उम्र के लड़के से मिन्नते कर रही थी,,,, और घर पर अपने पति को ऐसा सुख कभी नहीं देती होगी जो एक जवान लड़के को दे रही थी,,,,, ड्राइवर के मन में दुख हो रहा था कि एक औरत इस उम्र मे पहुंचकर अपनी खुशियों का अपनी जरूरत का कितना ख्याल रखती है कि अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए अपने पति से बेवफाई करके अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ इस कारण आती है अपनी जरूरत को पूरा करती है अपनी इज्जत उसे देती है और एक मर्द जो अपने घर की जरूरत को पूरा करते-करते मर जाता है वह कभी भी अपने सुख को इस तरह से बाहर की औरतों में नहीं ढूंढता,,,, और अगर ढूंढता भी होगा तो इस तरह से बेशर्म तो नहीं बन जाता जिस तरह से यह औरत अनजान मर्द के सामने खुलकर मजा लूट रही है और वह भी अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ। अपनी मां की प्यास को बुझाने का चुम्मा अपने कंधे पर लेकर अंकित अपनी पेंट को पूरी तरह से कार के अंदर ही निकाल दिया और कमर के नीचे से नंगा हो गया,,,, ड्राइवर लगातार अपनी नजर को पीछे बनाया हुआ था कभी मिरर में तो कभी खुद पीछे नजर घूमाकर सब कुछ देख रहा था अंकित के लंड को देखकर उसके मन में भी इस बात का एहसास होने लगा कि काश उसका लैंड कितना मोटा और लंबा होता तो वह भी अपनी पत्नी को शरीर सुख अच्छी तरह से दे सकता था और देखते-देखते उसकी आंखों के सामने अंकित अपनी मां की बुर में अपना लंड डाल दिया और उसे अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया।

ड्राइवर को ऐसा था कि काफी देर से लंड खड़ा होने की वजह से और चुसाई करवाने के बाद दो-तीन मिनट में ही उसका पानी निकल जाएगा लेकिन वह हैरान होता चला गया जब धीरे-धीरे समय गुजरने लगा वह अपनी मां की चुदाई बड़े जोरों से कर रहा था उसकी रफ्तार बिल्कुल भी काम नहीं हो रही थी यहां तक कि उसे अपनी गाड़ी के अंदर फच्च फच्च की आवाज बड़ी तेजी से सुनाई दे रही थी,,,और वह ईस बात को जानता था कि ईस तरह की आवाज उस औरत की बुर से ही आ रही थी,,,, इस तरह की आवाज को सुनकर ड्राइवर मदहोश हो रहा था उसे भी एहसास हो रहा था कि वाकई में उसने अब तक अपने जीवन में कितना अच्छा समय सिर्फ थकान के मारे गंवा दिया था अपनी जरूरत को पूरा करने में अपने परिवार की जरूरत को पूरा करने में गवा दिया था जबकि अपनी शारीरीक जरूरत को अनदेखा कर दिया था। अंकित पागलों की तरह अपनी मां की चुदाई कर रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड बड़ी आराम से उसके गुलाबी छेंद में अंदर तक जाता था और बाहर आ रहा था,,, हर धक्के के साथ सुगंधा के मुंह से आहहहहह आहहहहह की आवाज निकल रही थी यह देखकर ड्राइवर अंदर ही अंदर दुखी हो रहा था कि अपने पति को छोड़कर एक जवान लड़के के साथ मजा लेते हुए कैसी-कैसी आवाज निकाल रही है यह औरत,,,,, काफी देर तक इसी अवस्था में अंकित अपनी मां की चुदाई करता रहा और गाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही,,,, अंकित को एहसास हो रहा था कि अब आसन बदलने का समय आ चुका था,,, इसलिए वह धीरे से अपने लंड को अपनी मां की बुर से बाहर निकाला,,,, और खुद सीट पर बैठ गया अपनी टांगें फैला कर,,,।

ड्राइवर यह सब अपनी आंखों से देख रहा था वह देखना चाहता था कि अब क्या होने वाला है उसे लग रहा था कि शायद अंकित का पानी निकल चुका है लेकिन ऐसा नहीं था शायद अंकित के इशारे को उसकी मां समझ गई थी और वह धीरे से अपनी जगह से उठकर बैठ गई और फिर अपने बेटे की तरफ मुंह करके घूम गई और घुटनों के बाल उसके घुटनों के इर्द-गिर्द अपने घुटनों को रखकर अपनी भारी भरकम गांड को अपने बेटे के लंड पर रखने लगी,,, और देखते ही देखते ड्राइवर की आंखों के सामने अंकित का मोटा तगड़ा लंड सुगंधा के गुलाबी बुर के अंदर खो गया,,,, और सुगंधा अपने बेटे के कंधों को पकड़ कर अपनी गांड को पटकना शुरू कर दी,,,, और तब तक पटकती रही जब तक की दोनों का पानी नहीं निकल गया,,,, मां बेटे पूरी तरह से फिर से प्राप्त हो चुके थे एक अनजान इंसान के सामने और वह भी चलती गाड़ी के अंदर और यह सब देखकर ड्राइवर भी मत हो चुका था उसे एहसास हो रहा था कि उसने अपने जीवन में कितनी बड़ी गलती कर दिया है अपनी पत्नी की प्यास को ना बुझा कर,,, मां बेटे दोनों अपने कपड़े को दुरुस्त करके बैठ चुके थे और थोड़ी देर में वह स्थान आ चुका था जहां पर आने के लिए उन्होंने कार कों किराए पर लिया था।

दोनों कर से उतर चुके थे और निश्चित की गई रकम के अलावा ₹100 का नोट भी उस ड्राइवर को देने लगे लेकिन ड्राइवर ने लेने से इनकार कर दिया,,, तो अंकित बोला।

क्यों क्या हुआ यह तो आपने पहले ही बता दिया था कि 50 100 लोग ज्यादा देकर जाते हैं तो हम भी ₹100 दे रहे हैं ले लो,,,।

नहीं नहीं मुफ्त में इतना खूबसूरत नजार तुम दोनों जलने दिखाया है वह कभी जिंदगी भर में बोलने वाला नहीं और मुझे यह सब देखकर कुछ सीखने को भी मिला है इसलिए मैं यह ₹100 नहीं ले सकता,,,,,(इतना कहकर वह फिर से अपनी कार में बैठ गया वैसे तो वह रुकना चाह रहा था लेकिन यहां पर कितना समय लगता है इस बारे में मां बेटे दोनों नहीं जानते थे इसलिए उसे जाने के लिए कह दिए थे और वैसे भी उसे ड्राइवर की आंखों के सामने जो काम लीला दोनों ने दिखाया था उसे ड्राइवर को वह दोनों ज्यादा देर तक साथ में नहीं रख सकते थे,,, वह ड्राइवर मुस्कुराता हुआ चला गया था।

मोटर गाड़ी में एक अनजान ड्राइवर के सामने मजा लेने के बाद मां बेटे दोनों अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच चुके थे। सुगंधा को धीरे-धीरे महसूस हो रहा था कि वह कितनी बड़ी बेशर्म हो चुकी है,,, अनजान लोगों के सामने संभोग सुख प्राप्त करने का जो आनंद होता है वह तो पूरी तरह से मस्त कर देता है लेकिन इस मजे के पीछे जो खतरा रहता है उसे बात से सुगंधा बिल्कुल भी अनजान नहीं थी वह जानती थी कि इस तरह की हरकत करते हुए अगर सामने वाला इंसान दुष्ट प्रवृत्ति का हुआ तो लेने के देने पड़ सकते हैं लेकिन अभी तक उसकी किस्मत इतनी तेज थी कि, अभी तक उसके साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी इसलिए तो उसकी हिम्मत दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। लेकिन इस तरह की हरकत करने में जो सुख से मिल रहा था उसे बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी उसे इस बात का एहसास था कि उसके बेटे ने धीरे-धीरे उसे पूरी तरह से रंडी बना दिया था जो किसी के भी सामने अपनी टांगें खोलकर अपने देश कीमती खजाने को दिखाने से बिल्कुल भी कतराती नहीं थी। दर्जी के सामने होटल में वेटर के सामने, और फिर कार में ड्राइवर के सामने, धीरे-धीरे सुगंधा का अनुभव बढ़ता जा रहा था।

मां बेटे दोनों गंतव्य स्थान पर पहुंच चुके थे यहां पर पहुंचते ही लोगों की भीड़ दिखाई दे रही थी। भीड़ देखकर करो ना इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में पर्यटक के लिए यह स्थल कितना मायने रखता है,,,, मोटर गाड़ी के अंदर जिस तरह का व्यायाम मां बेटे ने किया था उससे उन्हें थोड़ी बहुत थकान महसूस हो रही थी और उन्हें ताजगी की जरूरत थी, और सामने ही एक छोटी सी चाय की दुकान थी जिस पर ईक्का दुक्का लोग ही बैठे थे मां बेटे को यही जगह उचित लगी चाय पीने के लिए। और दोनों चाय की छोटी सी दुकान पर पहुंच कर चाय पीने के लिए,, दुकानदार ने चाय को गर्म करके दो कप चाय निकाल कर दे दिया साथ में दो पाव भी दिया खाने के लिए वैसे पांव के लिए सुगंधा नहीं बोली थी क्योंकि उसे थोड़ी बहुत भूख लगी हुई थी। मौसम बहुत सुहाना था दिन के 11:00 बज रहे थे लेकिन फिर भी बादल की वजह से धूप बिल्कुल भी नहीं थी और ठंडी ठंडी हवा बह रही थी यही मौसम तो सही होता है कहीं भी घूमने के लिए,, मौसम का आनंद लेते हुए मां बेटे दोनों चाय की चुस्की लेने लगे और साथ में पाव का स्वाद भी। चाय पीने के बाद कुछ देर तक दोनों मां बेटे वहीं पर बैठे रहे लोगों को देखते रहे थोड़ी ही दूर पर झरना बह रहा था उसके नीचे गिरने का शोर दोनों के कान में सुनाई दे रहा था तेज चलती हवाओं के साथ पानी की बौछारें भी हवा में खुलकर वातावरण को और भी ज्यादा ठंडक प्रदान कर रही थी झरना देखने के लिए थोड़ी ऊंचाई पर जाना पड़ता था और लोग धीरे-धीरे पहाड़ी भी चढ़ रहे थे यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला।

चढ़ने के लिए तैयार तो होना थोड़ी चढ़ाई ज्यादा है,,, ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचोगी तो ज्यादा मजा आएगा देखने में,,,,।

कोई दिक्कत नहीं है तेरे पर जब चढ़ाई कर ली तो यह क्या है,,, (सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली,,, तो अपनी मां की बात सुनकर अंकित भी मुस्कुराते हुए बोला)

बात तो तुम सही कह रही हो जब तुम मेरे लंड पर चढ़ाई कर सकती हो तो कहीं भी चढ़ सकती हो वैसे कहो तो मैं तुम्हें लंड पर बिठाकर ही ऊंचाई पर पहुंचा दुं,,,,।

नहीं नहीं इसकी जरूरत नहीं है,,,, फिलहाल मुझे किसी और चीज की जरूरत है,,, (अपनी नजर को इधर-उधर घूमाते हुए वह बोली तो अंकित पूछा )

किसकी जरूरत है मेरे होते हुए,,?

किसी अच्छी जगह की झाड़ियां से घिरी हुई जगह जहां पर मैं बैठकर ईत्मिनान से पेशाब कर सकूं,,,।

ओहहह यह बात है मुझे तो लगा किसी और का लेने का विचार है।

बच्चु अगर किसी और का लेने लग गई ना तो देख कर हिलाने के सिवा और कुछ नहीं रह जाएगा तेरे पास,,,, (अपनी आंखों को नचाते हुए सुगंधा बोली और अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगी, यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला,,)

वह देखो पान की दुकान के पीछे घनी झाड़ियां है वहीं पर जाकर कर लो वहां कोई है भी नहीं,,,,।

हां तु ठीक कह रहा है मुझे वही जाना चाहिए,,, (इतना कहकर वह अपने बेटे के द्वारा बताए गए पान की दुकान की तरफ जाने लगी अंकित वहीं पर बैठा रह गया और देखते-देखते सुगंधा अपनी गांड मटकाते हुए पान की दुकान के पास पहुंच चुकी थी,,,, सुगंधा इधर-उधर बराबर नजर रख रही थी कि कहीं कोई देख ना ले और वैसे भी पान की दुकान के पास कोई खड़ा नहीं था इसलिए वह निश्चिंत थी और जल्द ही पान की दुकान के पीछे पहुंच गई, पान की दुकान लकड़ी के बड़े-बड़े पाटी से बनी हुई लकड़ी की ही दुकान थी,,, जो जगह-जगह से थोड़ी टूटी हुई थी,,,, जल्द ही सुगंधा पान की दुकान के पीछे पहुंच चुकी थी घनी झाड़ियां के पास लेकिन अंकित को उसकी मां दिखाई नहीं दे रही थी क्योंकि घनी झाड़ियां बड़ी-बड़ी थी लेकिन पान की दुकान वाले की हरकत उसे एकदम साफ दिखाई दे रही थी उसे इस बात का एहसास हो गया था कि उसकी दुकान के पीछे एक खूबसूरत औरत गई थी और क्या करने गई थी यही देखने के लिए अपनी दुकान में से पीछे की तरफ देख रहा था यह देखकर अंकित की आंखों की चमक बढ़ गई और अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और सीधा पान की दुकान के पास पहुंच गया,,,, दुकानदार अभी भी दुकान में बैठे-बैठे ही लकड़ी की टूटी हुई पाटी में से पीछे की तरफ देख रहा था। वह नहीं जानता था कि अंकित वहीं खड़ा है वह पीछे देखने में ही मशगुल था। अंकित को बड़ा अजीब लग रहा था कि वह पीछे देख क्या रहा है क्योंकि वह तो दुकान में बैठा हुआ था और उसकी मां ठीक दुकान के पीछे पेशाब करने के लिए गई थी लेकिन तभी अंकित ने ध्यान दिया और वह भी इस दिशा में देखने लगा जहां से वह पान की दुकान वाला देख रहा था।

जब थोड़ा बहुत अपनी नजर को स्थिर करने के बाद उसे जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर तो उसके होश उड़ गए क्योंकि पान की दुकान में बैठे-बैठे वह दुकान वाला उसकी मां को पेशाब करते हुए देख रहा था जिस जगह को उसकी मां और वह सुरक्षित समझ रहे थे वह जगह पूरी तरह से असुरक्षित थी क्योंकि दुकानदार की दुकान की लकड़ी की पाटीयां टूटी हुई थी और उस पाटी में से सब कुछ दिखाई दे रहा था,,,, अंकित ने देखा कि उसकी मां दूसरी तरफ मुंह करके पेशाब कर रही थी और उसके दाएं और घनी घनी झाड़ियां थी,,, वह इस बात से निश्चिंत थी की घनी झाड़ियों के सहारे बैठे होने की वजह से उसे कोई देख नहीं पाएगा,,, लेकिन वह कहां जानती थी कि जिस पान की दुकान का सहारा लेकर घनी झाड़ियों में बैठकर पेशाब कर रही थी ताकि कोई देख ना ले वही पान की दुकान वाला ही उसे नजर भर कर देख रहा था अंकित को भी उसकी मां की जवानी से भरी हुई नंगी गांड दिखाई दे रही थी और पान की दुकान वाला प्यासी नजरों से उसकी मां को देखा हुआ पेंट के ऊपर से अपने लंड को मसल रहा था,,, वैसे तो किसी गैर इंसान के सामने अपनी मां के साथ मजे लेने में उसे बिल्कुल भी दिक्कत महसूस नहीं होती थी लेकिन इस समय न जाने क्यों पान की दुकान वाले पर उसे गुस्सा आने लगा और वह एकदम से जोर से बोला।

यह क्या हो रहा है,,,?
(इतना सुनते ही वह दुकानदार एकदम से चौंक गया और एकदम से अंकित की तरफ देखने लगा वह घबरा गया था वह कुछ बोल पाता इससे पहले ही अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

तुम्हें शर्म नहीं आती एक औरत को पेशाब करते हुए देख रहे हो तो मैं यह सोचना चाहिए कि वह औरत शर्म के मारे तुम्हारी दुकान के पीछे झाड़ियो के बीच जाकर पेशाब कर रही है ताकि कोई देखने नहीं और तुम उसके इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उसे देख रहे हो,,,, अगर लोगों को पता चलेगा कि तुम इस तरह की हरकत करते हो तो तुम्हारा क्या हाल होगा पता है,,,।

अरे नहीं नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना मैं तो अनजाने में देख लिया था मुझे क्या मालूम की कोई औरत मेरे दुकान के पीछे पेशाब करने के लिए बैठी है,,,,,।(अंकित की बात सुनकर वह दुकान वाला घबरा गया था)

चलो कोई बात नहीं अब इस तरह से गलती मत करना,,,।

नहीं नहीं बेटा बिल्कुल भी नहीं,,,,,।

ठीक है,,,, मुझे कुछ चिंगम दे दो मैं वही लेने आया था और देखा तो तुम कुछ ओर ही काम में लगे हुए हो,,,।

(इतना सुनते ही वह दुकान वाला एकदम से बोतल में से चिंगम निकाल कर देने लगा तब तक वहां पर दो-तीन ग्रह और भी आ चुके थे लेकिन ईस बीच सुगंधा पेशाब कर चुकी थी और उठकर खड़ी हो गई थी,,,,, अंकित नहीं चाहता था कि उसे दुकान वाले को पता चले कि उसका और औरत के बीच मां बेटे का रिश्ता है या किसी प्रकार का रिश्ता है इसलिए वह तुरंत चिंगम लेकर वहां से थोड़ा दूर चला गया था,,,, और थोड़ी देर में उसकी मां भी इधर-उधर नजर घुमा कर देखते हुए उसके पास पहुंच चुकी थी,,,, अपनी मां को देखकर अंकित बोला,,,)

बहुत देर लगा दी मुतने में,,,,।

क्यों क्या हुआ जब तक निकलेगा नहीं तब तक तो करना ही पड़ेगा ना,,,,।

बात तो सही है लेकिन जिसका सहारा लेकर पीछे बैठी थी वही तुम्हें नजर भर कर देख रहा था,,,।

कौन ,,,?(एकदम से चौंकते हुए सुगंधा बोली)

वो पान की दुकान वाला,,,, (पान की दुकान की तरफ देखते हुए अंकित बोला तो सुगंध भी उसी तरफ देखने लगी और आश्चर्य जताते हुए बोली)

लेकिन,,,,, वह तो दुकान में है,,,।

वह तो दुकान में है लेकिन जिस दुकान में है उसकी लकड़ी की पाटी टूटी हुई है और वहां से उसे तुम्हारी गांड एकदम बराबर दिखाई दे रही थी,,, (अंकित मुस्कुराते हुए बोला तो सुगंधा के चेहरे पर शर्म की लाली छा गई) चलो कोई बात नहीं मैंने उसे समझा दिया हूं कि इस तरह की हरकत दोबारा मत करना वरना लेने के देने पड़ जाएंगे,,,,।

बाप रे मुझे तो लगा था कि कोई देखे ही नहीं रहा है,,,।

सबको ऐसा ही लगता है कि वह लोग सुरक्षित है लेकिन उन्हें देखने वाले कहीं ना कहीं से मिल ही जाते हैं,,,।

अच्छा है कि यहां पर हम लोगों को कोई नहीं जानता,,,।

तभी तो इतनी दूर आए हैं मजा लेने के लिए,,, अब चलो 11:30 यही बज गए हैं अब हमें चलना चाहिए,,,।

ठीक है,,,,।
(और इतना कहकर मां बेटे दोनों पहाड़ी पर संभल कर ऊपर की तरफ आगे बढ़ने लगे,,, जगह-जगह पर छोटी-छोटी सीढ़ियां बनी हुई थी जिस पर चढ़ते समय सुगंधा की भारी भरकम गांड और भी ज्यादा उभार लिए नजर आती थी,, वैसे तो अंकित हो जाएगी अपनी मां को नंगी देखा था लेकिन हर वक्त उसकी हर एक अदा एक नई सी उमंग अंकित के तन बदन में जगा देती थी,, और उसे ऐसा ही लगता था कि जो कुछ भी वह देख रहा है वह पहली बार देख रहा है। सुगंधा आगे आगे चल रही थी और अंकित पीछे-पीछे चल रहा था,,,। मौसम सुहाना होने की वजह से गर्मी के मौसम भी ठंडक महसूस हो रही थी और यही यहां की खासियत थी और यही मौसम मां बेटे के लिए उचित भी था वरना गर्मी में पहाड़ी पर चढ़ना कितनी मुसीबत खड़ी कर देता है लेकिन इस समय दोनों को कोई भी दिक्कत नहीं आ रही थी। ठंडी ठंडी हवा चल रही थी मौसम का साथ बराबर मिल रहा था साथ में और भी लोग थे जो ऊपर की तरफ जा रहे थे और कुछ लोग नीचे की तरफ आ रहे थे। आने वालों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव साफ दिखाई दे रहे थे जिससे साफ पता चल रहा था कि वाकई में ऊपर से नजारा देखने में ज्यादा आनंद आता है। इसलिए तो मां बेटे दोनों खुशी-खुशी ऊपर की तरफ चढ़ रहे थे। कुछ लोग और भी थे जो अंकित के साथ-साथ ऊपर चढ़ रहे थे और अंकित उन लोगों को देख रहा था उन लोगों की नजर उसकी मां की भारी भरकम गोलाकार गांड पर ही टीकी हुई थी जिसे देखकर वह अलग वापस में धीरे-धीरे बात कर ले रहे थे,,,,।

कुछ देर तक और कुछ दूरी तक यह सिलसिला चलता रहा हालांकि अंकित को इन सब बातों का बिल्कुल भी बुरा नहीं लग रहा था बल्कि उसे तो अच्छा लग रहा था। कि उसकी मां की जवानी देखकर ना जाने कितनों का खड़ा हो जाता है,,,, कुछ देर बाद वह लोग आगे निकल गए क्योंकि सुगंधा को थोड़ी सी थकान महसूस हो रही थी और वह धीरे-धीरे ऊपर की तरफ चढ़ रही थी। रास्ते में थोड़ी-थोड़ी दूर पर झुग्गी वाली नाश्ते की दुकान भी थी‌। जिसमें कुछ लोग बैठकर रेस्ट कर रहे थे और नाश्ता भी कर रहे थे। यह सब देखकर सुगंधा और उसके बेटे को अच्छा ही लग रहा था। लेकिन चढ़ते चढ़ते काफी थकान महसूस हो रही थी जगह-जगह पर पत्थर की कुर्सियां भी रखी हुई थी जिस पर लोग बैठ कर आराम भी कर ले रहे थे पहाड़ी पर चढ़ते समय छोटे-बड़े पेड़ जंगली झाड़ियां सब कुछ था जिससे यहां का नजारा बेहद खूबसूरत लग रहा था और वैसे भी आसमान में धीरे-धीरे बादल छा रहे थे हवाएं चल रही थी थकान होने के बावजूद भी गर्मी का एहसास नहीं हो रहा था। गहरी सांस लेते हुए सुगंधा एक जगह पर खड़ी हो गई और कमर पर अपने दोनों हाथ रखते हुए अंकित से बोली।

बाप रे मुझसे तो चढ़ा नहीं जा रहा है,,,, मैं तो थक गई।

इतनी जल्दी थक गई तुम तो बहुत सवारी की हो फिर इतनी जल्दी कैसे थक गई,,,।
(सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा किस बारे में बात कर रहा है इसलिए उसकी तरफ आंख दिखाते हुए बोली,,)

ज्यादा बातें मत बना,,,,, देख रहा है तो मेरी हालत खराब हो रही है और तुझे कुछ और ही सुझ रहा है।

अब इसमें मेरी गलती थोड़ी ना है तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत साथ में रहेगी तो कोई भी इंसान वही सोचेगा जो मैं सोच रहा हूं,,,,।

चल अपनी बकवास बंद कर और कुछ देर तक यहीं पर मुझे आराम करने दे,,, (इतना कहने के साथ ही पेड़ के नीचे रख बड़े से पत्थर वाली कुर्सी पर सुगंधा का टीका कर बैठ गई और अपनी सांसों को दुरुस्त करने लगी,,,,, अंकित क्या करता है भाभी अपनी मां के साथ वही बैठ गया देखते देखते घड़ी में 2:00 बज चुके थे नीचे से तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि इस पर चढ़ने में इतना ज्यादा समय लग जाएगा ऐसा लग रहा था कि यह रहा लेकिन वाकई में ऊंचाई कही थी और ऊंचाई काफी होने पर ही तो अच्छा नजारा दिखाई देगा,,,, अंकित भी अपनी मां के पास बैठकर आराम करने लगा कुछ लोग नीचे उतर रहे थे उनमें एक वृद्ध महिला भी थी जिसकी तरफ देख कर अंकित बोला।)

देख लो मम्मी दादी की उम्र की है लेकिन कितनी तेजी से नीचे उतर रही है और एक तुम हो की जवानी से भरी हुई हो तो भी थक गई।

इसमें क्या है मैं भी जल्दी से चढ़कर उतर सकती हूं लेकिन पहले अंदाजा नहीं था ना कि इतनी चढ़ाई चढनी पड़ेगी,,,,,।

हां बात तो तुम सही कह रही हो मुझे भी पहले ऐसे ही लग रहा था लेकिन मुझे भी लगने लगा है कि कुछ ज्यादा ही ऊंचाई पर है। चलो कोई बात नहीं कुछ देर नहीं बैठकर आराम कर लेते हैं वैसे भी अभी हमारे पास बहुत समय है,।
(इतना कहकर अंकित और उसकी मां कुछ देर तक वहीं पर आराम करने लगे तकरीबन 20 मिनट के बाद सुगंध अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और बोली)

चल अब हमें चलना चाहिए वैसे भी देख रहा है मौसम बेईमान हो रहा है। (आसमान में काले काले बादल की तरह देखते हुए सुगंधा बोली)
तुम्हें देखकर तो कोई भी बेईमान हो जाए मौसम की क्या बात है।

बड़ा शायरी करने लगा है।

तुम जैसी हसीना साथ में हो तो कोई भी शायर बन जाए।

अच्छा चल शायरी बाद में करना पहले ऊपर चलते हैं। हम लोग थोड़ा देर कर दिए चढ़ने वालों की संख्या बहुत कम है और उतरने वाले की संख्या देख ज्यादा है।

इस बारे में हमें मालूम नहीं था वरना हम लोग भी इस समय उतर रहे होते लेकिन चलो देखा जाएगा।
(इतना कहकर मां बेटे फिर से ऊपर की तरफ चढ़ने लगे तकरीबन 1 घंटे की ओर चढ़ाई के बाद मां बेटे दोनों एकदम ऊंचाई पर पहुंच चुके थे ऊंचाई पर पहुंचते ही मालूम एकदम खुश नजर आने लगे क्योंकि यहां से वातावरण और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रहा था काले काले बादल ऐसे लग रही थी कि जैसे ठीक उनके सर के ऊपर ही है और हाथ ऊपर करके वह कभी भी बदल को पकड़ सकते हैं,,, अभी भी काफी लोग ऊंचाई पर थे और झरने की खूबसूरती का मजा ले रहे थे चारों तरफ रेलिंग बनाई हुई थी ताकि कोई गिरना सके रेलिंग पकड़ कर बहुत से लोग झरने को देख रहे थे मां बेटे भी खुश होते हुए झरने की खूबसूरती को देख रहे थे उनसे उठ रहा शोर वातावरण में एक अद्भुत संगीत पैदा कर रहा था तेज चलती हवाओं के साथ पानी की बूंदे मां बेटे के बदन को ठंडक दे रही थी। ऊंचाई पर थोड़ा बगीचा जैसा बना हुआ था लोग झरना देखने के बाद बैठकर आपस में बातें कर रहे थे और अपने समय व्यतीत कर रहे थे काफी खूबसूरत नजारा था कुछ देर तक झरने को देखने के बाद मां बेटे दोनों एक जगह पर बैठ गई और ठंडी ठंडी हवाओं का मजा लेने लगी कुछ लोग अपने साथ नाश्ता लेकर आए थे और बैठकर नाश्ता कर रहे थे। इतनी चढ़ाई करने के बाद मां बेटे दोनों को भी भूख का एहसास हो रहा था लेकिन इतने ऊपर कुछ खाने के लिए मिलने वाला था नहीं इसलिए अपने मन को मना कर वह लोग वातावरण का ही मजा ले रहे थे।

देखते देखते 2 घंटे का समय बीत चुका था और शाम के 5:30 बजने लगे थे और लोगों की भीड़ कम होती चली जा रही थी धीरे-धीरे सभी लोग नीचे उतर चुके थे लेकिन मां बेटे अभी भी ऊंचाई पर वातावरण की खूबसूरती का मजा ले रहे थे,,,,, हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था क्योंकि शाम ढल रही थी। अभी भी दोनों कुर्सी पर बैठे हुए थे अंकित अपनी मां से बोला।)अब हमें भी चलना चाहिए सब लोग जा चुके हैं केवल हम दो ही ऊपर रह गए हैं और अब कोई ऊपर आने वाला नहीं है।

मैं भी तो इसी पल का इंतजार कर रही थी मैं देखना चाहती हूं कि इस समय झरने का नजारा कैसा दिखता है,,,, (और इतना कहने के साथ ही सुगंधा अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और चेहरे का आदमी करते हुए वापस रेलिंग के पास आ गई और वहां से झरने का नजारा देखने लगी जो की काफी खूबसूरत दिखाई दे रहा था क्योंकि ठीक सामने ही सूरज डूब रहा था एकदम चमकता हुआ और डूबते समय उसकी खूबसूरती झरने की वजह से और भी ज्यादा बढ़ गई थी,,,, यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला)

तुम सही कह रही हो मम्मी कितना खूबसूरत नजारा दिख रहा है,,,, लोगों को इस समय का नजारा देखना चाहिए,,,,, मेरे पास कैमरा नहीं है नहीं तो फोटो ले लेता,,,।

हां तो सही कह रहा है अगर अपने साथ कैमरा होता तो जगह-जगह पर हम लोग फोटो खींच लेते जो हमारी यादों को संयोजने में काफी काम आता।

हां लेकिन एक बात की मुसीबत हो जाती है अगर तिरुपति यह सब देखते तो उसे ऐसा ही लगता कि उसकी गैर हाजिरी में मां बेटे मजा लूट रहे हैं।

हां तो यह सच ही तो है हम दोनों मजा ही तो लूट रहे हैं और क्या कर रहे हैं यहां पर इतनी दूर,,,, अपनी जिंदगी के इस पल को यादगार बनाने जिंदगी का हर वह सूख लेने जो केवल एक पति पत्नी ले सकते हैं,,, (ऐसा कहते हुए सुगंधा अपने होठों को अपने बेटे की होठ की तरफ ले गई और उसके होठों पर अपने हाथ रखकर चुंबन करने लगे लेकिन इस सामान्य चुंबन को मदहोशी के आलम में डूबोते हुए अंकित अपना एक हाथ अपनी मां की कमर पर डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसके होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया दोनों मदहोश होने लगे इस समय कैसे भी ऊंचाई पर कोई भी नहीं था केवल मां बेटे के सिवा दोनों चुंबन का मजा लेते हुए डूबते सूरज के नजारे को देखकर और भी ज्यादा उत्तेजित हो रहे थे अंकित का लंड पेंट में खड़ा होने लगा था,,,, किसी के न होने का फायदा उठाते हुए अंकित एकदम से अपनी मां को घुमा दिया और उसकी पीठ अपनी तरफ करके पीछे से उसे अपनी बाहों में भर लिया और तुरंत उसके ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया। ऐसे खूबसूरत वातावरण मां बेटे दोनों मदहोश हुए जा रहे थे ब्लाउज में कसी हुई चूचियां ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने को आतुर नजर आ रही थी सुगंधा अपनी मां की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही जी भरकर रगड़ रहा था मसल रहा था और सुगंधा उत्तेजना के मारे अपनी गोलाकार गांड को अपने बेटे के लंड से सटाकर रगड़ रही थी जो कि इस समय पेंट में तंबू बनाया हुआ था और साड़ी के ऊपर से ही उसे अपनी गांड पर उसकी चुभन साफ महसूस हो रही थी।

मां बेटे दोनों मदहोश हुए जा रहे थे अंधेरा धीरे-धीरे बढ़ रहा था इतनी ऊंचाई पर झरने की खूबसूरती देखने के लिए इस समय मां बेटे के सिवा दूसरा और कोई वहां पर नहीं था क्योंकि सब लोग नीचे जा चुके थे लेकिन मां बेटे एक अलग ही दुनिया में अपने लिए खुशी ढूंढ रहे थे देखते ही देखते दोनों मदहोशी के आलम में पूरी तरह से डूबने लगे थे और मौके का फायदा उठाते हुए अंकित अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया था सुगंधा भी निश्चिंत थी क्योंकि दोनों एकांत में यह सब कर रहे थे वैसे तो यह जगह एकांत बिल्कुल भी नहीं थे लेकिन शाम ढलते ही यह जगह पूरी तरह से सुनसान हो जाती थी यहां पर कोई भी ठहरता नहीं था। इसलिए किसी की गैर हाजिरी में सुगंधा भी निश्चिंत होकर अपने बेटे से मजा लूट रही थी,,,, अंकित की सांस भारी हो चली थी अपनी मां की गर्दन पर चुंबनों की बारिश करते हुए वह लगातार अपनी मां की चूचियों को दबाता हुआ उसके ब्लाउज का बटन खोल रहा था और देखते ही देखते वह अपनी मां के ब्लाउज का आखिरी बटन भी खोल दिया था,,, लाल रंग की ब्रा में उसके दोनों कबूतर फड़फड़ा रहे थे और अंकित उन दोनों कबूतर के फड़फड़ाते हुए पंखों को अपनी हथेली में दबोच कर उन्हें काबू में कर लिया था,,, मां बेटे दोनों अब नजारे का नहीं बल्कि समय की नजाकत का आनंद लूट रहे थे क्योंकि मौका भी था और दस्तूर भी था। सुगंधा भी कुछ काम नहीं थी वह अपने बेटे की संगत में पूरी तरह से छिनार बन चुकी थी,,, और अपना छिनर पन दिखाते हुए अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को दबाना शुरू कर दी।

एक दूसरे की जवानी की मदहोशी में मां बेटे पूरी तरह से खो चुके थे,,, उन्हें इस बात का भी एहसास नहीं था कि आसमान में काले बादल मंडराने लगे थे किसी भी वक्त बारिश पड़ सकती थी,,,,, इस बात से बेखबर अंकित अपनी मां की ब्रा को नीचे से पकड़ कर एकदम से ऊपर उठा दिया जिससे उसके दोनों कबूतर एकदम से आजाद हो गए और अगले ही पल वह उन कबूतरों को अपनी हथेली में दबोच लिया और उन्हें दबाने लगा,, अंकित पूरी तरह से मस्त हो चुका था अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को आसमान के नीचे खुली पहाड़ी पर निचोड़ते हुए वह एकदम से मदहोश हो गया था अपनी मां की गर्दन पर चुंबनों की बारिश करते हुए और लगातार उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाते हुए वह मादक स्वर में बोला,,,।

सहहहह मम्मी तुम्हारी जवानी लाजवाब है मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है,,,, आज तुम्हें इस पहाड़ी पर ही चोदूंगा ताकि जिंदगी भर तुम्हें याद रहे,,,,।(इतना कहने के साथी अंकित एकदम से उसे पड़कर अपनी तरफ घूम लिया और उसकी कमर में एक हाथ डालकर उसे संभाल लिया क्योंकि वह गिरने जैसी हो गई थी उसकी नंगी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह लहराने लगी थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और तुरंत बिल्कुल भी देर के लिए बिना अपनी मां की चुची को मुंह में लेकर पीना शुरू करदिया,,,,, अपने बेटे की हरकत से सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान होने लगी उसकी आंखें बंद होने लगी और वह अपने बेटे के स्तन मर्दन और स्तन चुसाई से आनंदित होने लगी,,,, लेकिन तभी अचानक बादल की गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी और सुगंधा ने अपनी आंखों को खोल दी,,, सुगंधा कुछ समझ पाती ईससे पहले ही पानी की बूंदें गिरने लगी,,, तब जाकर मां बेटे दोनों को इस बात का एहसास हुआ कि बड़े जोर की बारिश आने वाली है क्योंकि चारों तरफ घने बदल छाए हुए थे और बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई थी। मौके की नजाकत को समझते हुए अंकित अपनी मां की चूची पर से अपना मुंह हटा लिया और चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा चारों तरफ बादल ही बादल थे और बारिश पड़ना शुरू हो गई थी,,, सुगंधा जल्दी से अपनी ब्रा को नीचे करके अपने ब्लाउज का बटन बंद करते हुए बोली।

बाप रे तो बारिश पड़ने लगी अब क्या करें,,,।

करना क्या है जल्दी से यहां से चलना होगा कहीं तूफानी बारिश में हम लोग फंस ना जाए,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां का हाथ पकड़ लिया और पहाड़ी से नीचे उतरने लगा लेकिन नीचे उतरने में खतरा बहुत था क्योंकि बारिश बड़ी तेज हो चुकी थी और अपनी बहन शुरू हो गया था ऐसे में पैर फिसलने का डर था इसलिए अंकित अपनी मां से बोला,,,) आराम आराम से पैर रखना कहीं पैर फिसल गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,,।

हम लोगों को भी नीचे उतर जाना चाहिए था,,,(सुगंधा घबराहट भरे स्वर में बोली)

उधर तो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा खूबसूरत नजारा और ऊपर से तुम्हारी जवानी का मजा जो लेना था,,,,, कोई बात नहीं किनारे किनारे से धीरे-धीरे आगे बढ़ती रहो,,,,(अंकित अपनी मां का हाथ थाम है किनारे से धीरे-धीरे नीचे उतर रहा था बारिश पल भर में ही बड़े जोर से होने लगी थी और पहाड़ी से नीचे पानी बहने लगा था,,, बादलों की गड़गड़ाहट से माहौल पूरी तरह से डरावना होता जा रहा था मां बेटे दोनों को इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में वह दोनों खतरे में पढ़ चुके थे यह उन दोनों के लिए कोई बड़ी मुसीबत से काम नहीं थी क्योंकि यहां के मौसम के बारे में वह दोनों बिल्कुल भी नहीं जानते थे,,,, और यहां पहाड़ी पर वह लोग रुक भी नहीं सकते थे क्योंकि रुकने के लिए कोई जगह ही नहीं थी नीचे उतरना जरूरी था फिसलने का डर भी बराबर बना हुआ था लेकिन अंकित धीरे-धीरे अपनी मां को संभालता हुआ नीचे उतर रहा था,,, तेज चलती हवाओं के साथ-साथ बात को की गड़गड़ाहट सुगंधा के तन बदन न में डर भर दे रही थी। पल भर में ही सुगंधा की जवानी की गर्मी शांत हो चुकी थी। अब उसे डर लग रहा था वह जल्द से जल्द पहाड़ी से नीचे उतर जाना चाहती थी,,,,, 1 घंटे जैसा समय गुजर चुका था लेकिन अभी भी वह लोग पहाड़ी के ऊपर ही थे,,, इतनी तेज हवा चल रही थी कि दूर-दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन तभी अंकित को झुग्गी दिखाई दी जिसमें लालटेन जल रही थी उसे देखकर अंकित को थोड़ी हिम्मत हुई और अपनी मां से बोला,,,)

वह देखो झुकी दिखाई दे रही है और उसमें लालटेन भी जल रही है क्योंकि उसकी रोशनी दिखाई दे रही है जरूर वहां कोई ना कोई होगा।

हां होना तो चाहिए क्योंकि ऊपर चढ़ते समय दो-तीन झुग्गीया मिली थी जिसमें नाश्ता बिक रहा था,,,, हो सकता है कोई रुक गया हो।

चलो चलकर देखते हैं,,,,,।(अपनी मां का हाथ थामे हुए अंकित धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था और थोड़ी ही देर में वह झुग्गी के पास पहुंच चुका था। ताड़पत्री की बनी झुग्गी में दरवाजे जैसा कुछ भी नहीं था बस दरवाजे के लिए तड़पत्री का ही उपयोग करके आगे पर्दा जैसा लटका दिया गया था जो की हवा की झोंके से बार-बार उड़ रहा था,,,, पहले तो अंकित झुग्गी के पास में ही खड़ा होकर आवाज लगाते हुए बोला,,)

कोई,है क्या,,,?
(इतना कहकर अंकित खामोश हो गया लेकिन चार-पांच सेकेंड बाद ही वह दोबारा बोल पाता इससे पहले ही झुग्गी के पर्दे के पास एक औरत आकर खड़ी हो गई और बोली,,,)

आप लोग इतनी तेज बारिश में यहां,,,, आप लोगों को तो चले जाना चाहिए था।

जी,,, अब क्या बोलूं कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

आप लोग बाहर से आए हैं,,,।

जी हां,,,।

तभी यहां के मौसम के बारे में तुम्हें अंदाजा नहीं है लेकिन फिर भी तो सब लोग जब नीचे उतर रहे थे तुम्हें उतर जाना चाहिए था।

अब क्या कहूं ऊपर का नजारा इतना खूबसूरत था की पहली बार इधर आए हैं तो देखे बिना मन नहीं माना और यहां के मौसम के बारे में कुछ मालूम नहीं था इसलिए फस गए।

(अंकित की बात सुनकर वह सुगंधा की तरफ देखी जो पानी में पूरी तरह से भेज चुकी थी उसके कपड़े उसके बदन से चिपक गए थे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में इस कदर से उलझ गई थी कि उसका आकार एकदम साफ झलक रहा था ब्रा के अंदर के धोने के बावजूद भी उसके निप्पल एकदम कठोर होकर साड़ी के बाहर तक नजर आ रहे थे यह देखकर मुस्कुराते हुए वह बोली)

चलो कोई बात नहीं अंदर आ जाओ,,,।
(उसका इतना कहना था कि अंकित और उसकी मां दोनों उसे झुग्गी के अंदर प्रवेश कर चुके थे,,,,, वैसे तो यह जगह रहने लायक बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन इस तरह के तूफानी बारिश में यही समय उन दोनों के लिए महल के समान था,,,, दोनों बुरी तरह से भीगे हुए थे यह देखकर वह औरत बोली,,,)

आप दोनों तो पूरी तरह से भीग चुके हो और आप लोगों के पास सूखे कपड़े भी नहीं है।

जी हां अब कर भी क्या सकते हैं,,,।(सुगंधा शरमाते हुए बोली)

लेकिन इस तरह से तो आप दोनों की तबीयत खराब हो जाएगी,,, वैसे तो कहना नहीं चाहिए लेकिन हालात को देखते हुए मुझे कहना पड़ रहा है कि,,, आप मेरी साड़ी पहन लो,,, गीले कपड़े में कब तक रहोगी वैसे भी यह भारी सब सुबह तक बंद होने वाली नहीं है क्योंकि यह रोज का काम है,,,,(उसकी बात सुनकर सुगंधा उसकी तरफ देखने लगी और फिर अपने बेटे की तरफ देखने लगी तो अंकित बोला )

यह बिल्कुल ठीक कह रही है गीले कपड़ों में तबीयत खराब हो जाएगी,,,, तुम जल्दी से कपड़े बदल लो,,,।

और आप भी वैसे तो आपके लिए मर्दों वाले कपड़े तो मेरे पास नहीं है लेकिन टावल लपेट सकते हो।

जी शुक्रिया,,,,।
(उसका इतना कहना था कि उस औरत ने जल्दी से रस्सी पर से उतार कर अपनी साड़ी और पेटिकोट दे दी उसके पास ब्लाउज नहीं था लेकिन फिर भी साड़ी से वह अपनी चूचियों को ढक सकती थी इसलिए वह बोली,,,)

ये आपके लिए काफी रहेगा, लेकिन माफी चाहूंगी कि इसका ब्लाउज मेरे पास नहीं है।

कोई बात नहीं इतना मेरे लिए काफी है,,,,,(इतना कहकर वह उसे औरत के हाथ से साड़ी और पेटीकोट ले ली उसे औरत ने अंकित को एक छोटा सा टॉवेल दी और बोली,,)

मैं पीछे वाले गांव में रहती हूं और यहां पर समोसे चाय बेचकर थोड़े बहुत पैसे कमा लेती हूं वैसे तो मुझे भी यहां से चले जाना चाहिए था लेकिन आज थोड़ा देर हो गई और बारिश तेजी से शुरू हो गई तो मुझे भी यहां रुकना पड़ रहा है,,,,।

तुम्हारे घर पर कोई नहीं है जो तुम्हें यहां से लेकर जा सके,,।

पति है दो बच्चे हैं पति बिल्कुल नकारा है सर आपके नशे में हमेशा डूबा रहता है इसलिए तो मुझे यह काम करना पड़ता है। घर का खर्चा चलाने के लिए,,,।

इसका मतलब तुम्हें यहां लेने कोई नहीं आएगा,,,।

नहीं,,,,।

तो घर कैसे जाओगी,,,।

वह तो अब सुबह ही जाना पड़ेगा क्योंकि बारिश बंद होने वाली नहीं है और मुझे छोटी सी नहर से होकर गुजरना पड़ता है जो इस तरह की बारिश से एकदम भर जाती है,,,,,।

ओहहह,,, तो तुम्हारे बच्चों को खाना पानी कौन देगा,,,,,।

मेरी छोटी बहन साथ में रहती है वह संभाल लेती है बच्चों को,,,।

चलो तब तो ठीक है,,,,(इतना कहकर वह दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को उतारने लगी,,,,, वह औरत अंगीठी के पास बैठकर सुगंधा कोई देख रही थी उसका गोरा खूबसूरत बदन उसे भी अच्छा लग रहा था,,,, लेकिन एक बात उसे समझ में नहीं आ रही थी कि वह निश्चिंत होकर एक जवान लड़के के सामने अपने कपड़े उतार रही थी और वह लड़का भी उसे देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहा था और अपने कपड़े भी उतार रहा था। उस औरत का दिमाग घूम रहा था क्योंकि वह दोनों को मां बेटा समझ रही थी लेकिन जिस तरह से दोनों अपने कपड़े उतार रहे थे और वह भी एक दूसरे के इतने करीब खड़े होकर उसे एहसास होने लगा कि वह दोनों मां बेटे बिल्कुल भी नहीं है,,,, दोनों के बीच का रिश्ता कुछ और ही कहानी कह रहा था। उस औरत को दोनों की उम्र में अंतर साफ दिखाई दे रहा था और बाकी अंतर मां बेटे की उम्र का ही था लेकिन दोनों को निश्चिंत होकर एक दूसरे के सामने कपड़े उतारते हुए देखकर उसे समझते देर नहीं लगेगी दोनों के बीच प्रेमी प्रेमिका का रिश्ता है लेकिन उम्र के बीच की दूरी कुछ ज्यादा ही थी फिर अपने मन में उसे सवाल का जवाब देते हुए खुद ही बोली प्यार कहा उम्र देखता है,,, वह अभी इतना सोच ही रही थी कि सुगंधा अपनी साड़ी उतार कर एक तरफ रख दी थी और इस समय ब्लाउज और पेटीकोट में थी पानी में भीगा हुआ उसका ब्लाउज और पेटीकोट उसके बदन से एकदम चिपक सा गया था,, जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम गांड एकदम साफ आकार लिए हुए नजर आ रही थी,,,। तब तक अंकित अपनी टीशर्ट निकाल कर एक तरफ रख दिया था और इसकी चौड़ी चिकनी छाती को देखकर उस औरत के तन बदन में एक अजीब सी लहर उठने लगी।

(जो कुछ भी यहां चल रहा था उसके चलते अंकित के दिमाग में फिर से खुरापात चलने लगी थी,,,, और जैसे ही उसे औरत ने अपना ध्यान दूसरी तरफ की अंकित धीरे से अपनी मां को बोल दिया कि क्या करना है अपने बेटे की बात सुनकर वह थोड़ा गुस्से में उसकी तरफ देखने लगी लेकिन अब तक का अनुभव उसका बेहद यादगार था इसलिए वह अपने बेटे की बात मानने में कोई हर्ज नहीं समझ रही थी इसलिए वह अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी। वह जानती थी कि यहां पर उसे कोई नहीं जानता इस औरत से उसका कोई संबंध नहीं था कोई लेना-देना नहीं था तो उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी होने में कोई हर्ज नहीं था। बल्कि अपनी हरकत से वह उसे भी एक अद्भुत एहसास और उत्तेजना का अनुभव देना चाहती थी। इसलिए वह अपना ब्लाउज का बटन धीरे-धीरे खोलना शुरू कर दी थी दूसरी तरफ उसे औरत को अंकित के पेंट में अच्छा खासा उभार दिखाई दे रहा था जिसे देखकर वह शर्म के मारे अपनी नजर को नीचे झुका ली थी,,, मां बेटे दोनों की हरकत को देखकर उसे औरत की हालत खराब हो रही थी दोनों के बीच के उम्र के अंदर को देखकर वह अपने मन में यही सोच रही थी कि यह दोनों कितने बेशर्म है कि एक दूसरे के सामने कपड़े बदल रहे हैं,,, अभी वह यही सोच रही थी कि तब तक सुगंधा अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी और ब्लाउज को अपने हाथों से उतार रही थी,,, झुग्गी के अंदर एक लालटेन जल रही थी जिसकी पीली रोशनी में सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, और देखते ही देखते सुगंधा अपने ब्लाउस को अपने बदन से अलग करके उसे भी अपनी साड़ी के ऊपर फेंक दी इस समय वह उसे औरत की आंखों के सामने केवल पेटिकोट और लाल रंग की ब्रा में खड़ी थी उसका गोरा बदन लालटेन की पीली रोशनी में चमक रहा था,,, एक तरह से सुगंधा के गोरे बदन के प्रति उस औरत का भी आकर्षण बढ़ता जा रहा था उसके मन में ऐसा ही हो रहा था कि बड़े घर की औरतें कितनी खूबसूरत और सुंदर होती है इनका बदन कितना मक्खन मलाई की तरह होता है।
सुगंधा के बदन से टपकती हुई पानी की बूंदे उसकी सुंदरता और मादकता को और भी ज्यादा बढ़ा दे रहा था।

तीनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी सिर्फ हवा और बारिश का शोर सुनाई दे रहा था वातावरण भयानक जरूर हो जा रहा था लेकिन झुग्गी के अंदर पूरी तरह से मदहोशी छाई हुई थी, अंकित के पेंट में बना हुआ अच्छा खासा उभार झुग्गी वाली औरत के तन बदन में अजीब सा हलचल पैदा कर रही थी और अंकित जानबूझकर अपनी पेंट उतार नहीं रहा था क्योंकि वह जानता था कि चोर नजरों से वह औरत उसकी तरफ ही देख रही थी और उसकी नजर उसके मर्दाना अंग पर ही टिकी हुई थी यह एहसास अंकित के बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर रही थी,,,, सुगंधा के पीठ उस औरत की तरफ थी,, अंगीठी जल रही थी और वह कुछ देर पहले रोटियां सेक रही थी लेकिन दोनों के आने के बाद वह रोटी नहीं बना पाई थी और जब सो रही थी की रोटी बनाएं तभी उन दोनों धीरे-धीरे अपने बदन से वस्त्र को उतार रहे थे और यह देखने में उसके खुद के बदन में मदहोशी का नशा घुल रहा था। साड़ी और ब्लाउज करने के बाद अब बारी थी ब्रा की,,,, एक अनजान औरतों के सामने एक जवान लड़के के पास खड़े होकर अपनी ब्रा को उतार देने में खुद कितनी बेशरम है इस बात का एहसास उस औरत को जल्द ही होने वाला था और सुगंधा जल्द ही यह एहसास उस औरत को दिलाने वाली थी,,,, उसे पूरा विश्वास था कि यह औरत भी अब उन दोनों को मां बेटा तो बिल्कुल भी नहीं समझेगी और यही तो वह चाहती थी। यही सोच कर अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ लेकर आई और अपनी ब्रा का हुक खोलने लगी वैसे तो सुगंधा बड़े आराम से अपनी ब्रा का हुक खोल देती थी लेकिन इस समय उस औरत के सामने वह नाटक कर रही थी,,, कुछ देर इधर-उधर करने के बाद वह अपने बेटे से बोली ‌।

मुझसे तो खुल ही नहीं रहा है तू ही खोल दे,,,।
(सुगंधा के मुंह से इतना सुनते ही उस औरत की हालत एकदम से खराब हो गई क्योंकि वह कभी सोची नहीं थी कि इस तरह से कोई औरत अपने बेटे के उम्र के लड़के से इस तरह की हरकत करने को कहेगी और अभी किसी और के सामने इतने से ही वह औरत समझ गई थी कि यह कितनी बेशरम औरत है जो मजा लेने के लिए अपना घर बार छोड़कर एक जवान लड़की के साथ इधर आई है। अपनी मां की बात सुनकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला।)

कोई बात नहीं अभी खोल देता हूं यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है,,,,,(अंकित भी बेशर्मी की सारी हत्या पर करता हुआ उसे अनजान औरत के सामने बोला वह भी उसे औरत को जताना चाहता था कि वह दोनों आपस में कितना खुल चुके हैं और अंकित की यह बात को सुनकर वह औरत कल्पना कर रही थी कि यह दोनों आपस में कितना मजा लूटने होंगे और यह जवान लड़का ना जाने कितनी बार अपनी मां की उम्र की औरत के कपड़े उतार कर नंगी किया होगा तभी तो बोल रहा है कि यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है वह अभी इतना सोच ही रही थी कि तब तक अंकित अपनी मां की ब्रा कहो खोल दिया और दोनों पट्टी को पकड़ कर उसके कंधे से ब्रा को आगे की तरफ हल्का सा खींच कर छोड़ दिया यह देखकर उसे अनजान औरतों के तन बदन में उत्तेजना की लहर रोकने लगी लालटेन की पीली रोशनी में सुगंध की नंगी चिकनी पीठ एकदम साफ दिखाई दे रही थी एकदम खूबसूरत आकर्षक जिस पर बिल्कुल भी दाग धब्बे नहीं थे और सुगंध अपने हाथ से ब्रा को उतार कर उसे भी अपने साड़ी के ऊपर फेंक दी कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, उस औरत के मन में सुगंधा की नंगी चूचियों को देखने की जिज्ञासा जाग रही थी लेकिन वह अपने मुंह से बोल नहीं पा रही थी और देखते-देखते सुगंध अपनी पेटिकोट की डोरी को अपने हाथों से टालने लगी तो यह देखकर उस अंजान औरत की सांसे थमने लगी,,,

अब तक मां बेटे इस तरह का अद्भुत क्रियाकलाप अंजन मर्द के सामने ही करते आ रहे थे लेकिन आज उन्हें मौका मिला था एक औरत के सामने इस तरह की हरकत करने का, क्योंकि यहां उन दोनों को कोई बोलने वाला था और ना हीं कोई टोकने वाला था और वैसे भी तूफानी बारिश में जो की के अंदर उसे औरत के सिवा और कोई नहीं था और इस समय वह उस औरत के सामने अपनी मनमानी कर सकते थे। क्योंकि अभी तक उसने उन दोनों को एक बात के लिए भी टोकी नहीं थी। और देखते ही देखते सुगंधा अपनी पेटिकोट की डोरी को खींचकर अपनी पेटीकोट को अपनी कमर से ढीली कर दी थी लेकिन पानी में गीली होने की वजह से उसके बदन से चिपकी हुई थी। उसे अंजान औरत का दिल जोरो से तड़प रहा था और अंकित के पेंट में तंबू का आकार बढ़ता जा रहा था,,,, सुगंधा अपनी पेटिकोट उतारती ईससे पहले ही अंकित अपनी पेंट को उतारने लगा अपने पेंट का बटन खोलते समय वह मुस्कुरा कर उस अंजान औरत की तरफ देखा भी था लेकिन वह अनजान औरत उससे नजर मिलते ही वह शर्म के मारे अपनी नजर नीचे झुका ली थी। उस औरत की आंखों में शर्म थी लेकिन मां बेटे की आंखों में शर्म बिल्कुल भी नहीं थी वह दोनों बेशर्म हो चुके थे। देखते ही देखते अंकित अपनी पेंट उतार दिया था उसके बदन पर केवल उसका अंडरवियर ही रह गया था और वह भी अच्छा खासा तंबू बनाया हुआ। अंडरवियर में बने तंबू को देखकर उस अंजान औरत की आंखों में चमक आ गई क्योंकि वह भी दो बच्चों की मां थी उसे भी एक मर जाना अंदर की सरकार का कितनी लंबाई का होता है इसका एहसास था लेकिन आज उसकी आंखों ने जो देखा था शायद वह कभी सोचा भी नहीं थी कि किसी मर्द का लंड इतना मोटा और लंबा भी हो सकता है हालांकि अभी तक उसने सिर्फ उसे अंडरवियर में देखी थी उसके संपूर्ण आकार को अपनी आंखों से नहीं देखी थी लेकिन फिर भी वह अंदाजा लगा रही थी और उसका अंदाजा ही उसके बदन में हलचल मचा रहा था,,,, कुछ देर से कुछ स्थिति में रहने के बाद अंकित छोटी सी टावल को अपनी कमर पर लपेटकर अपनी अंडरवियर को भी अपने हाथों से नीचे की तरफ खींचने लगा था यहां पर अंकित ने थोड़ी बहुत मर्यादा दिखाया था कि अंजान औरत के सामने पूरी तरह से नंगा नहीं हुआ था। लेकिन फिर भी अंडरवियर उतारने के बाद जिस तरह का तंबू उसके तोलिया में बना हुआ था,,, उसे देखकर उस औरत की बुर गीली हो रही थी।

और सुगंधा अपनी पेटीकोट को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ खींच रही थी क्योंकि गिरी पेटिकोट उसकी मोटी मोटी गांड से चिपक गई थी फिर भी जैसे तैसे करके वह अपनी पेटीकोट को अपने बदन से अलग कर रही थी और देखते ही देखते हो अपनी पेटीकोट को अपने बदन से अलग कर चुकी थी। उस अंजान औरत की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी लाल रंग की ब्रा के साथ-साथ उसकी लाल रंग की चड्डी अंजान औरत के तन बदन में आग लग रही थी गोरे बदन पर लाल रंग कुछ ज्यादा ही जंच रहा था वह अनजान औरतों सुगंधा की खूबसूरती से आकर्षित हो चुकी थी क्योंकि पहली बार अपनी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत औरत को कपड़े उतारते हुए देख रही थी। सुगंधा उसकी आंखों के सामने केवल चड्डी में खड़ी थी उसकी पीठ उस औरत की तरफ थी उस औरत को लग रहा था कि अब यह अपनी चड्डी भी ऐसे ही उतार देगी लेकिन उसने ऐसा नहीं की वह अपने बेटे से बोली।

जरा मुझे पेटिकोट देना तो,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित पेटिकोट उठाकर अपनी मां को देने लगा जो कि इस समय चड्डी में ही थी। और अपने बेटे से पेटिकोट लेकर वह अपने सर के ऊपर से डालकर उसे धीरे-धीरे अपनी कमर तक लाई और अपनी मदमस्त कर देने वाली बड़ी-बड़ी गांड को रखने के बाद अपना एक हाथ अंदर डालकर धीरे-धीरे अपनी चड्डी को भी नीचे सरकाने लगी और वह औरत अंगीठी के पास बैठकर सुगंधा की इस क्रियाकलाप को देखकर मदहोश हो रही थी उसके लिए यह सब कुछ बिल्कुल नया था उसकी ब्रा नई थी उसकी चड्डी नई थी क्योंकि यह सब वह नहीं पहनती थी वह औरत गांव कस्बे की रहने वाली थी जहां पर साधारण कपड़े ही पहने जाते थे क्योंकि इतने पैसे होते नहीं थे कि वह लोग इस तरह की सुख सुविधा में जीवन व्यतीत करें,,, साड़ी के नीचे वह केवल पेटिकोट और ब्लाउज ही पहनती थी इसलिए अपनी आंखों के सामने एक खूबसूरत औरत को इन वस्त्रो में देखकर उसकी आंखों में भी एक अजीब सी चमक नजर आ रही थी,,, देखते ही देखते सुगंधा अपनी चड्डी को अपने घुटनों के नीचे तक सरकारी थी और उसके बाद पैर से ही वह अपनी चड्डी अपने पैर से अलग कर दी थी,,,, और यह सब हुआ एकदम सहज होकर कर रही थी यह सब देखकर उसे औरत के मन में यही चल रहा था कि यह दोनों आपस में कितना मजा लूटे होंगे दोनों को एक दूसरे की उम्र से भी कोई समस्या नहीं है तभी तो दोनों आपस में इतने खुल चुके हैं कि एक दूसरे के सामने कपड़े बदलकर निर्वस्त्र होना उन दोनों के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। थोड़ी ही देर सुगंधा भी उसे औरत के दिए हुए वस्त्र पहन चुकी थी केवल ऊपर ब्लाउज नहीं था जिससे साड़ी के ऊपर से उसकी दोनों चूचियां एकदम साफ झलक रही थी लेकिन अभी तक उसे औरत ने सुगंधा की मदहोश कर देने वाली दोनों गोलाइयों को नहीं देखी थी।

झुग्गी में लकड़ी का तक्खता रखा हुआ था,,, जिस पर बैठ भी सकते थे और आराम से दो लोग सो भी सकते थे उसी पर अंकित बैठ चुका था उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसके मर जाना अंग को देखने की लालच उसे औरत में साफ दिखाई दे रही थी। सुगंधा की औपचारिकता दिखाते हुए जाकर उसके पास बैठ गई थी क्योंकि वह खाना ही बना रही थी और उससे मुस्कुराते हुए बोली।

आपको तकलीफ देना तो नहीं चाहते थे लेकिन क्या करें हम लोग इस मुसीबत में पड़ गए और खामखां तुम्हें तकलीफ दे रहे हैं।

ऐसी कोई बात नहीं है अगर आप लोग नहीं आते तो मुझे अकेले ही रात गुजारना पड़ता लेकिन अब आप लोग हैं तो एक सहारा मिल गया है।
(उस औरत की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और बोली)

खाना बना रही थी क्या,,,?

हां,,,, और आप लोगों को भी तो भूख लगी होगी।

बहुत जोरों की,,,,।

चिंता मत करो मैं आप लोगों के लिए भी बना देती हूं,,,,।

आप बहुत अच्छी हैं इतना कोई दूसरों के लिए नहीं सोचता सुबह जाने से पहले,,,, हम लोग एक रात का पैसा भी दे देंगे जिससे तुम्हारी थोड़ी मदद हो जाएगी।

अरे नहीं दीदी,,,, मैं तो इंसानियत के लिए ये सब कर रही हूं,,,,।
(उस औरत ने अपनेपन में सुगंधा को दीदी कहकर संबोधन करने लगी,,,, जिसे सुनकर सुगंधा बहुत खुश हो रही थी और खुश होते हुए बोली।)

देखा तुमने मुझे दीदी कहकर बुलाई हो तो बड़ी दीदी होने के नाते जाते समय जो कुछ भी मैं दूं उसे रख लेना प्यार समझ कर।

क्या दीदी आप भी,,,,।

वैसे तुम्हारा नाम क्या है,,,,?

बिंदिया,,,,,,।

बहुत प्यारा नाम है,,,, लाओ में तब तक सब्जी काट देती हूं,,,,,(इतना कहकर पास में ही पड़े आलू और प्याज को अपनी तरफ खींचकर वह एक चाकू ले ली और उसे काटना शुरु कर दी सुगंधा के प्यार भरे बर्ताव से उसे औरत को भी अपनापन महसूस हो रहा था और उसे औरत की नजर लालटेन की रोशनी सुगंधा की छाती पर चली जा रही थी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि उसकी छाती कुछ ज्यादा ही बड़ी थी उसकी चुचियों का आकार एकदम गोलाकार था जो की साड़ी के ऊपर से अच्छा खासा एहसास हो रहा था)

थोड़ी ही देर में सुगंधा और बिंदिया में काफी अच्छी दोस्ती हो गई दोनों एक दूसरे से हंसी मजाक करते हुए खाना बनाने में लग गए थे सब्जी कट चुकी थी, बिंदिया गर्म तवे पर रोटी पका रही थी और उसकी नजर बार-बार सुगंधा के दोनों गोलियों पर चले जा रही थी जो की साड़ी में उसकी झलक बराबर मिल रही थी और बिंदिया के इस नजर का एहसास सुगंधा को भी हो रहा था,,, अंगीठी की गर्मी के कारण सुगंधा के बदन में भी थोड़ी गर्मी महसूस होने लगी थी उसे अब राहत महसूस हो रही थी नहीं तो सच में अगर यह झुग्गी ना मिलती तो मां बेटे दोनों बीमार हो जाते,,, तख्ते पर बैठकर अंकित दोनों की बातचीत सुन रहा था और दोनों को देख रहा था,,, अंकित की नजर बिंदिया पर थी शुरू शुरू में तो वह भी दिया पर ध्यान नहीं दे पाया था लेकिन अब उसे गौर से देख रहा था और उसे एहसास हो रहा था कि झुग्गी में भी चांद खिल सकता है,,,, अंकित को एहसास हो रहा था की बिंदिया भी देखने में खूबसूरत तकरीबन उसकी उम्र 35 से 40 के बीच की ही थी उसके बताएं अनुसार दो संतान की मां होने के बावजूद भी बदन का कसाव अभी बरकरार था।

और शायद इसलिए कि उसकी जवानी का रस शायद उसका पति पूरी तरह से निचोड़ नहीं पा रहा था क्योंकि उसने ही बताई थी कि वह शराबी है और कोई काम का नहीं है इसलिए उसे काम करना पड़ रहा है और दिनभर जो इस तरह से वह घर चलाने के लिए काम करती है यही सब का नतीजा है की जवानी अभी भी बरकरार थी लंबी कद काठी तीखे नैन नक्श, छाती की शोभा बढ़ा रहे दो संतरे ब्लाउजके कसाव पता चल रहा था कि दोनों संतरे रस से भरे हुए थे,,, रंग हल्का सा दबा हुआ था लेकिन बला की खूबसूरत दिखाई दे रही थी। वह अभी बिंदिया की खूबसूरती को अपनी आंखों से देख ही रहा था कि तभी भी बिंदिया सुगंधा से बोली।

एक बात कहूं दीदी,,,।

हां बोलो,,,,।

आप बहुत खूबसूरत हो,,,।
(उसकी बात सुनकर सुगंधा मुस्कुरा कर उसे एक टक देखने लगी तो फिर से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।)

नहीं दीदी मैं सच कह रही हूं तुम बहुत गोरी हो मैं यहां से तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखी।

तुम भी तो खूबसूरत हो,,,।

तुम्हारी जितनी थोड़ी हूं,,,, (बिंदिया शरमाते हुए बोली)

मैं भी सच कह रही हूं तुम मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत हो क्योंकि तुम्हारा दिल बहुत खूबसूरत है वरना, कौन इस तरह से सहारा देता है।

इसमें कोई बड़ी बात नहीं है दीदी हम गांव देहाती लोग घर पर आए लोगों को भगवान की तरह समझते हैं और इस समय तुम मेरे लिए भगवान की तरह इसलिए तो मैं तुम्हारी सेवा कर रही हूं।

तुम्हारे विचार कितने अच्छे हैं,,,, वैसे तो मैं टीचर हूं लेकिन जिंदगी का सबक तुमसे सीख रही हूं।

तुम टीचर हो दीदी सच में लोगों को पढ़ाती हो,,,।

हां,,,,,, हम लोग शहर में रहते हैं यहां गर्मियों की छुट्टी में घूमने के लिए आए थे।
(सुगंधा की बात सुनकर बिंदिया अंकित की तरफ देखने लगी वह मुस्कुरा रहा था तो बिंदिया बोली)

वैसे तो दीदी तुम दोनों जन की जोड़ी अच्छी लग रही है। लेकिन,,,, (बिंदिया के मन में दोनों की उम्र को लेकर सवाल उठ रहा था लेकिन फिर भी वह अपनी बात को बदलते हुए बोली) दीदी मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही है। तुम्हारे बच्चे तो होंगे ही,,,।

हां मेरे दो बच्चे हैं और वह भी जवान एक लड़की एक लड़का,,।

वही तो,,,, बच्चे और पति के होने के बावजूद भी तुम घूमने के लिए इतनी दूर आ गई क्या तुम्हारे पति को मालूम नहीं है।

बिल्कुल भी नहीं,,,, (बिंदिया की बात सुनकर सुगंधा के जन्मदिन में भी हलचल होने लगी थी वह समझ रही थी की बिंदिया क्या जानना चाहती है,, और एक अंजान औरत होने के नाते सुगंधा को इस बात का डर बिल्कुल भी नहीं था कि अगर इसे कुछ भी पता चलेगा तो वह किसी को बचाने वाली है क्योंकि यहां वैसे भी सुगंधा को कोई नहीं जानता था इसलिए अपनी बात को नमक मिर्च लगाते हुए वह बोली) मैं अपने घर पर यह कह कर आई हूं कि स्कूल से शिक्षकों लोग का घूमने का प्लान है और मैं जाना नहीं चाहती थी लेकिन प्रिंसिपल ने जबरदस्ती सबको आने के लिए मजबूर कर दिया है बस फिर क्या है, हम दोनों यहां पहुंच गए।

बाप रे तुमको झूठ बोलने में डर नहीं लगा,,,।

डर कैसा प्यार किया तो डरना क्या तुम शायद नहीं जानती अगर तुम्हें भी प्यार हो जाए तो तुम्हें भी डर बिल्कुल भी नहीं लगेगा और वैसे भी हम दोनों का मजा लेना था स्कूल में छुट्टी हो चुकी थी तो यहां आने का प्रोग्राम बना लिए।
(सुगंधा की बातें सुनकर बिंदिया के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता होगा दोनों एक दूसरे से अपनी जवानी की गर्मी शांत करते थे और यह सब सोच कर उसके खुदके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,,, वह अपनी मन में यही सोच रही थी कि शहर की ओर से कैसे अपने पति से झूठ बोल देती हैं जबकि गांव में औरत यह सब बातें सोच भी नहीं सकती,,, और यह शायद बिंदिया का ऐसा मानना था क्योंकि वह सीधी शादी घरेलू औरत थी उसे औरतों के इस रंग के बारे में नहीं मालूम था की ओर से कितनी चालाक होती है अगर वह किसी गैर मर्द से प्यार करने लगे तो घर को तबाह भी कर सकती हैं। तवे पर रोटी को पलटते हुए बिंदिया बोली।)

तब तो तुम दोनों बहुत मजा लूटते होगे।

यह भी कोई कहने की बात है,,,, तुम ही सोचो बिंदिया इस उम्र में पति घर की जिम्मेदारी पूरी करने में ही लग जाता है बच्चों को देखना पड़ा ही खर्च यह सब देखते-देखते उसके बदन में औरत को खुश करने वाला जोश रहता ही नहीं है मेरे पति का भी यही हाल हो गया था दिनभर ऑफिस का कामकाज बच्चों की पढ़ाई की टेंशन घर पर आते ही खाना खाकर सो जाते हैं,,, मोटाई भी बढ़ गई है,,, तोंद इतनी बड़ी निकली है कभी भी बिस्तर पर साथ ही नहीं देते तुम तो मुझे देख ही रही हो क्या तुम्हें लगता है कि इस उम्र में मुझे पति के बिना रात गुजारने में मजा आती होगी।

अब मैं क्या कहूं दीदी,,, (बिंदिया शरमाते हुए बोली और सुगंधा उसके सामने एकदम बेशर्म बनना चाहती थी,,,,,)

मेरी भी तो जरूरत है मेरी भी तो खुशियां है,,,, और सच कहूं मेरे पति जिंदगी की भाग दौड़ में इस कदर उलझ गए की समय से पहले पूरे हो गए,,,, मुझे समझ में आ गया था कि अब मेरी जरूरत मेरे पति पूरा नहीं कर सकते तो मुझे एक जवान लड़के की तलाश होने लगी,,, और तभी मार्केट में मुझे एक दिन यह मिल गया,,,।

मार्केट में,,,,,

अरे हां उसका भी किस्सा बड़ा दिलचस्प है,,,, वह क्या है ना कि मैं सब्जी खरीदने के लिए मार्केट गई थी। सब्जियां तो मैंने खरीद ली लेकिन जब थैला देखने लगी तो मेरा पर्स गायब था। मैं इधर-उधर ढुंड़ने लगी लेकिन पर्स मेरे पास था ही नहीं तो मिलता कहां से,,, मुझे सब्जी लेना भी जरूरी था। मैं एकदम परेशान हो गई और सब्जी वाले से मेरी कोई जान पहचान नहीं थी कि वह उधार कर लेता,,, तब ये मेरे पास आया और बोला,,, ।

क्या हुआ आंटी कोई तकलीफ है क्या,,,?

क्या कहा आंटी,,,(आश्चर्य जताते हुए बिंदिया बोली)

हां इसमें सबसे पहले मुझे आंटी कहकर ही बुलाया था।

बाप रे।

अरे सुनो तो,,,, तो मेरे मन में भी कुछ ऐसा बिल्कुल भी नहीं था मैं इससे बोली,,,।

हां बेटा मैं पर्स घर पर भूल गई हूं और इस समय मेरे पास बिल्कुल भी पैसे नहीं है सब्जी खरीदने के लिए।

बेटा,,,,!(एक बार फिर से आश्चर्य से बिंदिया बोली)

कहां बेटा मैं इसे बेटा ही कही थी क्योंकि मुझे आंटी कह कर बुलाया था तब शायद हम दोनों के पीछे सब कुछ होने की आशंका ही नहीं थी।

फिर,,,,।
(बिंदिया की उत्सुकता देखकर सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी, क्योंकि वह मनगढ़ंत कहानी बिंदिया को बता रही थी और अपनी मां की चालाकी को देखकर उसकी बातों को सुनकर अंकित भी तख्ते पर बैठा बैठा मुस्कुरा रहा था,,,, इन सब बातों से सुगंधा की बुर पसीज रही थी। और यही हाल बिंदिया का भी था,बिंदिया के बदन में भी काम भावना जागरूक हो रही थी,,,, बरसात बड़े जोरों से हो रही थी छल छल करके पानी झुग्गी से लगकर पहाड़ से नीचे गिर रहा था बादलों के गरजने की आवाज लगातार आ रही थी लेकिन इस समय झुकी के अंदर माहौल पूरी तरह से मदहोशी के आलम में डूबने लगा था,,,, सुगंधा अपनी बातों को अपने शब्दों के रस में घोलकर बिंदिया के कानों में उतार रही थी,,,, सुगंधा को बताने में मजा आ रहा था और बिंदिया को सुनने में,,, और इन दोनों की बातों को सुनकर अंकित उत्तेजित हो रहा था सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,)

मेरी बात सुनकर यह अपनी जेब टटोलने लगा,,, और अपनी जेब से ₹100 का नोट निकाल कर मेरे हाथ में रख दिया,,,, मैं लेने से इंकार करती रही लेकिन यह जबरदस्ती मेरी हथेली में 100 का नोट रखकर मेरी मुट्ठी को बंद कर दिया यह सब इसने अपने हाथों से किया था पल भर के लिए तो मेरे बदन में अजीब सी हलचल हो गई थी क्योंकि एक जवान लड़का इस तरह से मेरा हाथ पकड़ लिया था मेरी मुट्ठी बंद कर दिया था मेरी मुट्ठी में 100 का नोट रख दिया था यह सब मेरे लिए अजीब था,,,,,, उस समय तो मैंने सब्जी वाले को पैसे दे दिए और जो पैसे बचे वह मैंने इसे लौटा भी दिए,,,, लेकिन मैं इससे बोली,,,

तुझे मेरे घर चलना होगा पैसे लेने के लिए,,,,, पर मालूम है इसने क्या कहा,,,?

क्या कहा,,,?

यह बोल कोई बात नहीं मुझे पैसे नहीं चाहिए।

ओहहह,,,(बिंदिया बोली)

लेकिन मैं कैसे पैसे ले सकती थी इसे पैसे लौटना भी जरूरी था इसलिए मैं इसे समझते हुए बोली,,, बेटा तूने मेरी मदद किया है लेकिन मुझे तुझे पैसे लौटाने ही होंगे इसके लिए तुझे मेरे घर चलना पड़ेगा,,, लेकिन यह इनकार करता रहा,,,,, फिर ना जाने कैसे यह तैयार हो गया और यह जब तैयार हुआ तो मेरे चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे मैं खुश हो गई क्योंकि मैं किसी का बोझ नहीं लेना चाहती थी मुझे जल्द से जल्द इसके पैसे लौटाने थे और मैं इसे घर लेकर आ गई। घर पर उसे समय कोई नहीं था मेरे दोनों बच्चे ट्यूशन गए हुए थे और मेरे पति ऑफिस में थे मैं इसे अपने घर लाई बिठाई और पैसे देने से पहले मैं इसका शुक्रिया अदा करना चाहती थी और मैं इसे बोली कि तू यहीं बैठ में चाय बनाकर लाती हूं।

दीदी तुम्हारा मन में कुछ था घर ले जाने से पहले,,,

नहीं बिल्कुल भी नहीं यह मुझे आंटी जो बोला था और मैं इसे बेटा बोल रही थी तो मेरे मन में ऐसा कुछ भी नहीं था लेकिन चाय बनाने के लिए मैं किचन की तरफ जाने लगी और उसे दौरान
(और इतना कहकर में किचन की तरफ जाने लगी लेकिन इस दौरान मैं किचन में जाते हुए अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी कमर में खोंस दी थी और यही अदा इस लड़के पर भारी पड़ गई यह मुझे ना जाने कैसे गंदी नजर से देखने का क्या क्योंकि इससे पहले इसकी आंखों में भी मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था कि यह ऐसा कुछ कर सकता है है ना अंकित,,,)

हां बिल्कुल मार्केट के अंदर तो मैं इसलिए मदद किया था कि यह बहुत परेशान दिखाई दे रही थी तो मैं मानवता के नाते उनकी मदद कर दिया था मेरे मन में भी ऐसा कुछ भी नहीं था लेकिन घर पर पहुंच कर जब मैं सोफे पर बैठा था तो यह किचन की तरफ जा रही थी उस समय मुझे कहना तो नहीं चाहिए लेकिन जब बात खुल ही गई है तो बता दूं कि इनका पिछवाड़ा देखकर मुझे ना जाने क्या हो गया कसी हुई साड़ी में इनका पिछवाड़ा और भी ज्यादा बड़ा दिखाई दे रहा था उससे पहले मेरे मन में कुछ भी नहीं था लेकिन इनका पिछवाड़ा देखते हैं मेरी आंखों में न जाने कैसे चमक आ गई,,,,,,,।
(अंकित की बात को सुनकर तो बिंदिया के होश उड़े जा रहे थे आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था और यह सब बातें उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल मचा रही थी अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) यह तो किचन के अंदर चली गई लेकिन मेरे अंदर एक तड़प जगने लगी,,,,.

फिर,,,(धीरे से बिंदिया बोली,,,, उसकी उत्सुकता देखकर सुगंधा को भी मजा आ रहा था)

फिर क्या मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ करने का मैं अपने अंदर हिम्मत जुटा रहा था क्योंकि घर पर कोई था भी नहीं,,,,,, थोड़ी देर में यह चाय बना कर ले आई,,, मैंने चाय पिया,,,,, मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ करने को लेकिन मेरी हालत खराब थी मैं चाय पी कर उठकर खड़ा हो गया,,,,,, मेरे पेंट में तंबू बन चुका था,,,,। और उनकी नजर मेरे तंबू पर पहुंच गई थी और तंबू देखकर में ईन्हें मुस्कुराते हुए देखा था।

तंबू,,,,(आश्चर्य से बिंदिया बोली वह अंकित के कहने का मतलब समझ नहीं पाई थी लेकिन उसकी बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी थी तो बिंदिया भी समझ गई कि वह किस बारे में बात कर रहा है इसलिए वह एकदम से शर्मा गई और कुछ पल के लिए अपनी नजर नीचे झुका ली,,,,,,,)

ये अपने पर्स में से पैसे निकाल कर मुझे देने लगी लेकिन मुझे ना जाने क्या सोचा मैं एकदम से इनका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींच कर अपनी बाहों में भर लिया यह कुछ समझ पाती इससे पहले ही में इनके लाल लाल होठों पर अपने होंठ रख दिया और अपने दोनों हाथ को सीधा इनके पिछवाड़े पर रखकर दबाना शुरू कर दिया। पहले तो यह अपने आप को मेरी बाहों की कैद से छुड़ाने लगी लेकिन जल्दी एहसास होने लगा कि इनकी जरूरत क्या है यह अपने आप को एकदम से ढीला छोड़ दी,,,, यह एकदम से मेरे सामने समर्पण हो गई यह देखकर मेरी हिम्मत और बढ़ने लगी और धीरे-धीरे मेरे बदन से इनके बदन से वस्त्र दूर होने लगे,,, और उसी सोफे पर लिटा कर जिंदगी का मजा लिया,,,,
(अंकित अपनी बात पूरी भी नहीं किया था कि तभी सुगंधा बोल पड़ी)

तब से हम दोनों साथ में ही हैं रोज बाजार में मुलाकात करने लगी यह मुझे न जाने कितनी होटलों मे ले गया,,,

होटल में,,,(बिंदिया सुगंधा के कहने के मतलब को समझ नहीं पाई थी । तो सुगंध मुस्कुरा कर समझते हुए बोली,,,)

अरे बुद्धू करने के लिए,,,।

ओहहह ,,,(बिंदिया एकदम से शर्मा गई,,,,)

जब कोई घर पर नहीं होता तो यह घर पर ही आ जाता था पर मुझे जो इसे मजा मिल रहा था मैं कभी सोचा भी नहीं थी इसलिए तो आज तक किसका साथ नहीं छोड़ी और यह भी मेरा दीवाना बना फिर रहा है।

बाप रे तुम दोनों की तो कहानी भी गजब है,,,,,। तुम्हारी दिलचस्प कहानी सुनने में तो सब्जी भी नहीं बन पाई.

तो जल्दी से बनाओ मुझे तो बड़े जोरों की भूख लगी है,,, लेकिन इससे पहले मुझे बड़ी जोरों की पेशाब लगी है,,,(इतना कहते हुए सुगंधा अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) करना कहां है बिंदिया,,,,।

जब सब कुछ ठीक रहता है तब तो यह पीछे ही,,(हाथ से झुग्गी के पीछे की तरफ दिखाते हुए) कर लेते हैं लेकिन इतनी तूफानी बारिश में पीछे बैठ भी नहीं पाओगी फिसल जाओगी,,,,

तो अब,,,,,।

आगे,,,,(अंकित की तरफ देखते हुए) अगर कोई दिक्कत ना हो तो

(बिंदिया के कहने के मतलब को सुगंधा अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए वह बोली)

तुम इसकी चिंता मत करो यही आगे बैठना है ना,,,,
(सुगंधा को केवल उसके इजाजत की जरूरत थी क्योंकि किसी के घर में भी इधर-उधर पेशाब करना उचित तो बिल्कुल भी नहीं था,, भले ही वह छोटी सी झुग्गी थी लेकिन बिंदिया उसमें रहती थी और झुग्गी में तो कोई बाथरूम था नहीं जहां पर सुगंधा बिना बोले ही पेशाब करने के लिए चली जाती,,,, लेकिन बिंदिया हैरान थी क्योंकि सुगंधा जहां पर बैठकर पेशाब करने के बारे में पूछ रही थी वहीं पास में ही अंकित भी था और बिंदिया के नजरिया से भले ही दोनों के बीच कितने ही आपसी नजदीकी संबंध बन गए हो लेकिन फिर भी औरत की एक मर्यादा होती है वह इस तरह से किसी बंद के सामने बैठकर पेशाब करना शुरू नहीं कर देती और खास करके तब जाऊंगा किसी गैर इंसान के सामने हो लेकिन सुगंधा के व्यवहार को देखकर बिंदिया का दिल जोरो से धड़क रहा था, और अंकित मन ही मन उत्तेजित हुआ जा रहा था वह अपने मन में सोच रहा था कि उसकी मां पूरी तरह से एक मजी हुई खिलाड़ी बन चुकी है वरना अनजान लोगों के सामने तो वह ठीक तरह से बात करना भी पसंद नहीं करती थी। मुस्कुराते हुए सुगंधा झुग्गी के मुख्य द्वार पर पहुंच चुकी थी जहां पर दरवाजे के नाम पर केवल ताड पत्रि का पर्दा लटका हुआ था,, सुगंधा धीरे से उसे प्लास्टिक के पर्दे को खोलकर बाहर की तरफ देखने लगे बाहर अंधेरा अंधेरा था तेज चलती हवाएं और बारिश का शोर सुनाई दे रहा था पैरों के पास से ही पानी बड़े जोरों से पहाड़ी से नीचे की तरफ जा रहा था सुगंधा पल भर के लिए अपने मन में सोचने लगी कि अगर सर छुपाने के लिए यह झुग्गी ना मिलती तो आज उन दोनों का क्या होता,,,।

यही सोचते हुए वह साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ ली थी और बिंदिया की तरफ देखे बिना ही वहां अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी बिंदिया अंगीठी पर कढ़ाई रखते हुए सुगंधा की तरफ ही देख रही थी वह देख रही थी कि यह औरत कितनी बेशरम हो चुकी है एक शिक्षिका होने के बावजूद भी शर्म और मर्यादा नाम मात्र का भी नहीं है इसके अंदर यह सोचकर वह अंकित की तरफ देखने लगी अंकित भी बेझिझक अपनी मां की तरफ ही देख रहा था,,, और अंकित को देखकर बिंदिया अपने मन में सोच रही थी कि यह लड़का भी कितना बेशर्म है अपनी मां की उम्र के साथ मजे लूट रहा है,,, यह भी तो कोई बहाना बनाकर इसके साथ यहां पर आया होगा घरवालों को दोनों बेवकूफ बनाकर मजे लूट रहे हैं । बेटे की उम्र का है लेकिन एक पति होने का सुख भोग रहा है। जितनी औरत छिनार है उतना ही बेशर्म लड़का भी है हमारे गांव में होता तो दोनों की उम्र देखकर लड़का कभी भी यह सब नहीं करता बल्कि गांव के लड़कों में एक इस उम्र पर पहुंची महिला के प्रति कितनी इज्जत होती है चाचा मौसी या बड़ी मम्मी कह कर ही बुलाता है लेकिन यह शहर के लड़के कितने बेशर्म होते हैं कि अपनी मां की उम्र की औरत पर भी चढ़ने से बिल्कुल भी नहीं शरमाते। बिंदिया यह सब सो ही रही थी कि तब तक सुगंधा पुरी की पूरी साड़ी अपनी कमर तक उठा दी थी,,,, उसकी बड़ी-बड़ी जवानी से भरी हुई गांड देखकर खुद बिंदिया की बुर में पानी आ गया था। उसकी नजर में भी वासना और कामुकता एकदम साफ दिखाई दे रहे थे बहुत सुगंधा को ही देख रही थी और कढ़ाई में मसाले डाल रही थी। सुगंधा की जवानी से भरी हुई गांड देखकर बिंदिया अपने मन में बोली।

साल लड़का का भी कोई दोष नहीं है जब औरत ही इतनी खूबसूरत और जवानी से भरी हुई हो तो भला लड़का करके क्या सकता है जब औरत खुद मजा देने के लिए तैयार है तो कोई भी मजा लेने के लिए तैयार हो जाएगा वह यह नहीं देखेगा कि उसकी उम्र कितनी है, देखो तो सही कितनी खूबसूरत गोरी गोरी गांड है चिकोटि काट दो तो गांड टमाटर की तरह लाल हो जाए।ऐसी चिकनी गांड देखकर तो कीसी का भी मन फिसल जाए। अभी वह अपने मन में सोच ही रही थी कि तभी वह एकदम से नीचे बैठ गई और पेशाब करने लगी बारिश के शोर शराबे में भी उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज बिंदिया के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रही थी। जिसे सुनकर बिंदिया का मन मदहोश हुआ जा रहा था। गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड मक्खन की तरह लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रही थी। जिसे देखकर बिंदिया मंत्र मुग्ध हुई जा रही थी। बिंदिया हैरान भी थी,आश्चर्य से उसकी आंखें फटी जा रही थी उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि एक औरत अपने बेटे के उम्र के लड़के की आंखों के सामने अपनी साड़ी उठाकर पेशाब करने बैठी हुई है इस बारे में सोचकर ही बिंदिया की हालत खराब हो रही थी,,, वह खुद जब कभी भी पेशाब करने जाती थी तो पेड़ के पीछे या जंगली झाड़ियां के बीच में जाती थी ताकि कोई उसे देखने दे और बैठने से पहले भी बार-बार वह चारों तरफ नजर घुमा कर देख लेती थी कि कहीं कोई उसे देख तो नहीं रहा है और यह बेशर्म औरत छिनार की तरह पेशाब करने बैठी हुई थी। बिंदिया एक हाथ मैं चमची लेकर मसले को चल रही थी और अपना पूरा ध्यान सुकांत पर लगाई हुई थी। थोड़ी देर में वह पेशाब करके उठ खड़ी हुई थी और वापस बिंदिया के पास आकर बैठ गई थी। उसने जिस तरह की हिम्मत दिखाई थी या शायद वह ऐसा बार-बार करती थी इस बारे में पूछने की हिम्मत बिंदिया कि बिल्कुल भी नहीं हुई।

वह दोनों फिर से बातें करने लगे तब तक सब्जी पक रही थी लेकिन अंकित के मन में भी बहुत कुछ चल रहा था उसके मन में आज अपनी मां के सामने बिंदीया की चुदाई करने की इच्छा जागरुक हो रही थी और इस बात को अंकित अच्छी तरह से जानता था कि ऐसा कभी हो सकता है जब भी दिया खुद दोनों का साथ दे उत्तेजित हो जाए चुदवासी हो जाए और एक औरत को चुदवासी कैसे बनाना है यह हुनर अंकित अच्छी तरह से जानता था इसलिए वह धीरे से तख्ते पर से उठकर खड़ा हो गया और बोला।

मुझे भी बड़े जोरों की पेशाब लगी है अगर आप बुरा ना मानो तो मैं भी यही कर लूं,,,।
(इतना सुनते ही बिंदिया की बुर उत्तेजना से फूलने पिचकने लगी क्योंकि उसे विश्वास हो गया था कि जब औरत इस तरह से बेशरम बनाकर गांड दिखाते हुए पेशाब कर सकती है तो यह जवान लड़का तो उससे भी ज्यादा बेशर्म होगा वह जरूर वहीं खड़ा होकर पेशाब करेगा और जिस तरह का तंबू उसके तोलिया में बना हुआ था बिंदिया का दिल जोरो से धड़कने लगा था वह भी अपनी आंखों से उसके मर्दाना अंग को देखना चाहती थी क्योंकि उसे भी महीनों गुजर गए थे लंड देखें। इसलिए वह अंकित की बात सुनते ही बोली।)

हां हां कोई बात नहीं, इतनी तेज बारिश में जा भी कहां सकते हो वहीं पर कर लो जहां पर दीदी ने की।
(इतना सुनते ही अंकित का मन प्रसन्नता से भर गया,,, वह भी तुरंत उसी जगह पर पहुंच गया जहां पर उसकी मां बैठकर पेशाब कर रही थी वह जानता था कि वहां से उसका लंड बिंदिया को एकदम साफ दिखाई देगा और कुछ ही देर में पता चल जाएगा कि बिंदीया इस खेल में आगे बढ़ना चाहती है कि नहीं,,, और देखते ही देखते अंकित पूरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए अपने टॉवल को अपनी कमर से खोल दिया पल भर में ही वह अपनी मां और उस औरत की आंखों के सामने एकदम से नंगा हो गया,,, सुगंधा भी उसकी तरफ देख रही थी और बिंदिया भी, दोनों का दिल बड़ी जोरों से धड़क रहा था सुगंधा अपने बेटे की हरकत को अच्छी तरह से जानती थी किसी गैर की मौजूदगी में सब करते हुए उसके बेटे को अच्छा लगता था और धीरे-धीरे उसके बेटे ने उसे भी यह लत लगा दिया था। बिंदिया की सांस ऊपर नीचे हो रही थी उसकी आंखों के सामने अंकित का मोटा तगड़ा लंड एकदम टनटना कर खड़ा था लालटेन की पीली रोशनी में उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था। अंकित जानता था कि दोनों औरतें उसकी तरफ ही देख रही है इसलिए वह उन दोनों की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपने लैंड के जड़ को अपनी उंगलियों के सहारे पकड़ कर हल्के-हल्के ऊपर नीचे करके हिलाना शुरू कर दिया था और मुतना शुरू कर दिया था, सुगंधा के लिए तो यह रोज कथा लेकिन बिंदिया की हालत खराब हो रही थी उसकी सांसों की गति एकदम भारी हो चली थी सुगंधा को यह सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था वह देख रही थी की बिंदिया मदहोश हो रही थी,,, उसके ब्लाउज में कैद उसकी चुचीया सांसों की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही थी।
झुग्गी के अंदर का नजारा पूरी तरह सहमत हो स हुआ जा रहा था दोनों औरतें मस्त हो रही थी दोनों की आंखों में वासना का तूफान उठ रहा था सुगंधा के लिए यह कोई नई बात नहीं थी लेकिन बिंदिया के लिए तो उसकी आंखों के सामने कुआं था और वह प्यासी थी बस उसे कुएं के पास जाना था प्यास बुझाने के लिए लेकिन यह 2 मीटर की दूरी भी मर्यादा और संस्कार की बड़ी-बड़ी दीवारें जैसी लग रही थी जिसे कूद कर पार कर जाना बहुत कठिन था,,, लेकिन जिस तरह के हालात बन चुके थे उसे देखते हुए बिंदिया के लिए संस्कार और मर्यादा की दीवार को लांघ जाना मुश्किल नहीं लग रहा था। अंकित एक औरत के मन में चुदासपन की लहर भरने में माहिर था। और वही युक्ति वह इधर भी आजमा रहा था उसके लंड से पेशाब की धार निकल रही थी और वह उसे पकड़ कर ऊपर नीचे करके हिला रहा था एक तो वैसे ही अंकित का लंड सामान्य लंड से 2 इंच ज्यादा ही था और उसकी मोटाई खरे की तरह थी जिसे देखकर बिंदिया की बुर पनिया रही थी,,,, अंकित ऊपर नीचे करके हिलाता हुआ पेशाब कर रहा था उसने अभी तक ना तो अपनी मां की तरफ देखा था और ना ही बिंदिया की तरफ क्योंकि वह जानता था कि ऐसे हालात में उसे बोलने की कोई जरूरत नहीं है जो कुछ भी कहना है उसका मर्दाना अंग ही बात को आगे बढ़ा रहा था और आंखों ही आंखों में बात आगे बढ़ भी रही थी।
अपने मर्दाना अंग का भरपूर दर्शन कराने के बाद अंकित टॉवल को फिर से अपनी कमर से लपेट लिया था,,, लेकिन टनटनाया हुआ लंड अभी भी तंबू का शक्ल लिया हुआ था जिस पर बिंदिया की नजर बराबर बनी हुई थी उसे एहसास हो रहा था कि उसकी बुर पानी पर पानी छोड़ रही थी और ऐसा उसके साथ बहुत दिनों बाद हो रहा था बहुत दिनों क्या महीनो गुजर गए थे,,, अपना जलवा भी खेलने के बाद अंकित फिर से अपनी जगह पर आकर बैठ गया था और दोनों औरतें खाना बनाने में लग गई थी थोड़ी ही देर में खाना बनकर तैयार हो चुका था,,, बिंदिया ने तीन थाली लगा दी थी,,,, इस समय मां बेटी के लिए यह ताड़पत्रि की बनी झुग्गी किसी महल से कम नहीं थी क्योंकि ऐसी तूफानी बारिश में और पहाड़ के ऊपर उसे सहारा मिलना मुश्किल था लेकिन दोनों की किस्मत तेज थी कि वह दोनों ऐसी तूफानी बारिश में झुग्गी के अंदर आराम से थे भी और खाने का भी प्रबंध हो चुका था,,, तीनों बड़े चाव से खाना खा रहे थे खाना खाते हुए अंकित बिंदिया की तारीफ करते हुए बोला।

वाह क्या खाना बना है जी तो करता है कि तुम्हारे हाथ चूम लु इतना स्वादिष्ट खाना मैंने आज तक नहीं खाया,,,,।
(अंकित की बात सुनकर बिंदिया मन ही मन बहुत खुश हो रही थी और सुगंधा बनावटी गुस्से के साथ उसकी तरफ देख रही थी जिसे देखकर अंकित बात को संभालते हुए बोला)

तुम भी बहुत अच्छा खाना बनाती हो,,, लेकिन मैं कभी सोचा नहीं था कि ऐसी तूफानी बारिश में और अभी इस पहाड़ पर ऐसा खाना खाने को मिल जाएगा। (ऐसा कहकर मुस्कुराने लगा,,,,, थोड़ी ही देर में दोनों खाना खा चुके थे,,,,, अब सोने की तैयारी करना था ऐसा बिंदिया सोच रही थी लेकिन अभी तो पूरा खेल बाकी था सुगंधा और अंकित के लिए तो यह पल हनीमून से बिल्कुल भी कम नहीं था। अभी भी बरसात का जोर बिल्कुल भी कम नहीं हुआ था,,,,, तेज हवाएं रह रहे कर ताड़पत्री की सरसराहट को बढ़ा दे रही थी,,,, वातावरण एकदम ठंडा हो चुका था लेकिन फिर भी झुग्गी के अंदर मदहोशी की गर्मी बरकरार थी, बिंदिया सुगंधा से बोली।

दीदी तुम दोनों तख्ते पर सो जाओ,, मैं यहीं पर बिछा लेती हूं,,,।
(यह सुनकर सुगंधा बोली,,,)

तुम नीचे सोओगी,, नहीं नहीं यह तुम्हारा घर है हम लोग तो पराए हैं बाहर से आए हैं हम लोग नीचे सो जाएंगे।

यह क्या कह रही हो दीदी मैं तुमको दीदी कह रही हूं तो पराए कैसे हो गए,,, वैसे भी तुम मेहमान हो और मेहमान को कोई नीचे सुलाता है क्या और वैसे भी मैं तख्ते पर नहीं सोती मैं नीचे ही बिछाकर सोती हुं,,,, इसलिए तुम्हें तख्ते पर ही सोना होगा।

तुम भी ना एकदम छोटी बहन की तरह जीद करती हो।

तुम्हारी बहन ही तो हूं,,,,,।
(दोनों की बातें सुनकर अंकित मन ही मन मुस्कुरा रहा था लेकिन इस दौरान उसकी नजर बिंदिया के दोनों गोलाई पर टिकी हुई थी,,, सामान्य से दिखने वाले ब्लाउज के अंदर उसकी मदहोश कर देने वाली चूचियां हाहाकार मचा रही थी,,, बिंदिया की बात सुनकर सुगंधा भी मुस्कुरा रही थी सुगंध कभी सोची नहीं थी कि अंजान औरत उसकी इतनी मदद करेगी इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली।)

तुम्हारा यह एहसान में जिंदगी भर नहीं बोलूंगी अगर तुम ना होती तो आज हम दोनों का न जाने क्या होता,,,।

ऐसी कोई बात नहीं है तेरी बल्कि आज की रात में जिंदगी भर नहीं बोलूंगी कि मेरे घर आप जैसे मेहमान आए थे,,,,।
(दोनों मुस्कुराने लगे और बिंदिया अपनी बिस्तर के पास चली गई और जाकर लेट गई हफ्ते पर अंकित लेटा हुआ था लेकिन जिस तरह से वह लेता था उसका तो लिया उसकी जांघों को पूरी तरह से खोल दिया था और हल्का-हल्का उसके लंड की झलक दिखाई दे रही थी जो की लालटेन की पीली रोशनी में बिंदिया को साफ तौर पर दिखाई दे रहा था। उसके पास में ही सुगंधा भी लेट गई,,,,,, देखते ही देखते तकरीबन 20 मिनट का समय गुजर चुका था लेकिन तीनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी,, तीनों अपने-अपने तरीके से आगे की रणनीति तय कर रहे थे। बिंदिया को इस बात का एहसास था कि यह दोनों जरूर कुछ ना कुछ करेंगे इसलिए उसे नींद नहीं आ रही थी और सुगंधा एक बार फिर से किसी गैर के सामने शरीर सुख प्राप्त करने की कामना में जाग रही थी और अंकित अपने काम कलाओं से बिंदिया को भी इस खेल में शामिल करने के जुगाड़ में था। इसलिए वह धीरे से अपनी मां के कान में बोला।)

तो शुरू करें इसलिए अब तक तो हम दोनों ने किसी गैर मर्द के सामने इस तरह का सुख प्राप्त किया है लेकिन आज किसी औरत के सामने यह सब करके कैसा महसूस होता है यह देखने वाली बात है तैयार होना।

बिल्कुल मेरे राजा,,,,,(इतना कहने के साथ ही सुगंधा अपने बेटे के लंड पर अपना हाथ रख कर उसे सहलाने लगी यह देखकर बिंदिया की हालत खराब होने लगी,,, बिंदिया की सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,, उसे जिस बात की उम्मीद थी वही उसकी आंखों के सामने हो रहा था,,,, वह अपनी आंखों को बंद की हुई थी ताकि उन दोनों को लगे कि यह सो रही है लेकिन हल्के से अपनी आंखों को खोलकर देख ले रही थी लेकिन बिंदिया की सोच इस बात है के लिए गलत थी कि वह दोनों को लग रहा था कि वह सो रही है बल्कि वह दोनों जानते थे की बिंदिया जाग रही है ऐसे हालात में एक औरत के मन में क्या चलता है वह क्या सोचती है यह सब कुछ अंकित को अच्छी तरह से मालूम था। सुगंधा देखते ही देखते अपने बेटे के लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दी थी और अंकित अपनी मां के लाल-लाल होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था,,,, बिंदिया के लिए यह सब अद्भुत था इस तरह कर जा रहा है उसने आज तक कभी अपनी आंखों से अच्छी नहीं थी कि उसकी आंखों के सामने ही एक मर्द और एक औरत इस तरह का हरकत कर रहे हो इसलिए उसके बदन में भी मदहोशी छा रही थी। देखते ही देखते मां बेटे दोनों मदहोश होने लगे। मां बेटे दोनों जानते थे की बिंदिया जाग रही है लेकिन फिर भी अंकित जानबूझकर अपनी मां से बोला।)

बिंदिया रानी सो तो गई है ना,,,,,।

पता नहीं रुक देख कर बताती हूं,,,,(दोनों आपस में जानबूझकर धीरे में बात कर रहे थे ताकि बिंदिया को बिल्कुल भी शक ना हो कि वह दोनों को मालूम है कि वह जाग रही है और सुगंधा भी एक मजे हुए हीरोइन की तरह एक्टिंग कर रही थी वह हल्के से उठकर देखने लगी तो भी दिया जानबूझकर एकदम अपनी आंखों को बंद करके और गहरी गहरी सांस लेने लगी यह देखकर मुस्कुराते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली)

बिंदिया तो घोड़े बेचकर सो रही है,।

चलो अच्छा हुआ अब हम दोनों आराम से कुछ भी कर सकते हैं,,,,(एक बार फिर से अंकित अपनी मां को अपनी बाहों में भरते हुए बोला और यह सब बिंदिया सुन रही थी बल्कि अंकित और उसकी मां जानबूझकर अपनी बातों को उसके कानों तक पहुंचा रहे थे,,,, दोनों की बातें सुनकर बिंदिया का दिल जोरो से धड़क रहा था,,,,,, वह कुछ देर तक अपनी आंखों को बंद किए हुए लेटी रही,,,, वैसे तो सोते समय वह लालटेन बुझा कर सोती थी लेकिन आज जानबूझकर लालटेन जलने दे रही थी क्योंकि उसकी पीली रोशनी में उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था और वह सब कुछ देखना चाहती थी,,,,, अपनी मां के लाल लाल हो तो कर रहे चूसते हुए धीरे से अपने होठों को अपनी मां के होठों से अलग करते हुए अंकित बोला,,)

अच्छा हुआ की बिंदिया रानी के पास दूसरा ब्लाउज नहीं था।

क्यों,,,,(अपने बेटे के लंड को हिलाते हुए वह बोली,,,)

क्योंकि उसे उतारने के लिए मेहनत नहीं करनी होगी बस साड़ी का पल्लू हटा दो और दोनों कबूतर आंखों के सामने पंख फड़फड़ाते हुए दिखाई देने लगेंगे,,,,(इतना कहने के साथ ही हुआ अपनी मां के छाती पर से साड़ी के पल्लू को हटा दिया और उसकी छाती को नंगी कर दिया उसकी बड़ी-बड़ी चूची है तड़प रही थी अंकित के मुंह में जाने के लिए और अंकित अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर दबाते हुए बोला)

देख रही हो जानेमन तुम्हारी चूचियां तड़प रही है मेरे मुंह में आने के लिए।

तो देर किस बात की है राजा मुंह में लेकर चुस जी भर कर,,,,,,।

(दोनों की बातें बेहद रसीली थी दोनों की बातों को सुनकर बिंदिया की टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल हो रही थी वह अपने मन में सोच रही थी कि यह दोनों अपनी जिंदगी में कितना मजा लूट रहे हैं भले ही दोनों के बीच उम्र की कभी न मिटने वाली खाई है लेकिन फिर भी दोनों ने अपने हौसले से अपनी उम्र की सीमा को खत्म करके एक दूसरे की बाहों में जिंदगी का वह सुख प्राप्त कर रहे हैं जो सुख प्राप्त करने की इच्छा हर एक मर्द और औरत में होती है। देखते ही देखते झुग्गी के अंदर सुगंधा के सिसकने की आवाज आ रही थी वह मस्ती के सागर में डूब रही थी इस तरह की आवाज सुनकर बिंदिया अपने आप पर काबू नहीं कर पाई और धीरे से अपनी आंखों को खोलकर तख्ते की तरफ देखने लगी,,,,, सामने का नजारा देखकर उसके बदन में कंपन होने लगा वह मद होश होने लगी उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी,,,, लालटेन के पीली रोशनी में बिंदिया को सुगंधा की बड़ी-बड़ी चूचीया एकदम साफ दिखाई दे रही थी। जिसे देखने के लिए बिंदिया काफी देर से तड़प रही थी उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में सुगंधा की चूचियां लाजवाब थी एकदम गोल कसी हुई खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी भला ऐसी चुचीया पाने के लिए कौन सा मर्द होगा जो कुछ भी करने को तैयार नहीं हो जाएगा,,,, बिंदिया यह देखकर शिहर उठ रही थी कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर दबा भी रहा था और बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रहा था और इस दौरान वह अपने हाथ में उसके लंड को लेकर जोर जोर से हिला रही थी वाकई में बिंदिया को एहसास हो रहा था कि लड़के में दम बहुत ज्यादा है क्योंकि आज तक उसने खुद इतना मोटा और लंबा लंड नहीं देखी थी,,, वह खुद अपने मन में यह सोचकर मस्त हो रही थी कि जब इस तरह का लंड बुर में जाता होगा तो कितना मजा आता होगा,,,,,।

अंकित पागलों की तरह अपनी मां की दोनों चूचियों पर टूट पड़ा था यह जानते हुए भी की बिंदिया अपनी आंखों से उन दोनों के काम कला को देख रही थी,, अंकित को अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था क्योंकि 1 मीटर की ही दूरी पर एक खूबसूरत जवान से भरी हुई औरत अपनी जवानी की तड़प को काबू में करने की कोशिश करते हुए उन दोनों की कम लीला को देख रही थी भला ऐसे में कौन सी औरत होगी जो अपनी कामुकता को काबू में कर पाएंगी अंकित को पूरा विश्वास था कि आज की रात उस औरत की बुर पर भी उसके लंड का नाम लीखा है। इसलिए तो वह उसे औरत को और भी ज्यादा मदहोश करने की कोशिश करते हुए पलों की तरह अपनी मां की चूची को दबा रहा था पी रहा था मसल रहा था और उसकी मां भी कुछ काम नहीं थी वह अपने बेटे के मोटे से बड़े लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर उसे मुठिया रही थी।। सुगंधा की हरकत को देखकर बिंदिया अपने मन में सोचने लगी की,,, अगर वाकई में किसी भी औरत को इतना मोटा तगड़ा लंड मिल जाए तो वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो जाएगी,,,, तब वह बिल्कुल भी नहीं सोचेगी कि समाज क्या कहेगा समाज क्या सोचेगा पकड़ी जाएगी कि नहीं पकड़ी जाएगी यह सब ख्याल उसके मन से एकदम से गायब हो जाएगा बस उसकी आंखों के सामने उस मर्द का मोटा तगड़ा लंड झुलता हुआ दिखाई देगा,,,,,।

मदहोशी अपनी चरम पर था। मां बेटे एक दूसरे के अंगों को सहलाने और दबाने में लगे हुए थे। अंकित के बदन से तौलिया छूट गया था वह पूरी तरह से नंगा हो चुका था,,, लालटेन की पीली रोशनी में अंकित का मोटा तगड़ा लंड और भी ज्यादा भयानक लग रहा था। और इस बीच लगातार बिंदिया की बुर से मदन रस बह रहा था जो देखते-देखते उसके पेटीकोट को गीला कर रहा था। बहुत दिनों बाद आज बिंदिया की बुर ने इतना सारा पानी निकाली थी,,,, बिंदिया की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी। ईस बीच सुगंधा धीरे से उठकर बैठ गई उसकी सांसे उसकी चूचियों की गति को ऊपर नीचे कर रही थी। बिंदिया फिर से अपनी आंखों को बंद कर ली थी उसे इस बात का डर था कि कहीं सुगंधा उसे देख ना ले की वह जाग रही है,,,। लेकिन वह जानती थी की बिंदिया जाग रही है उसके उठकर बैठते ही वह अपनी आंखों को बंद कर ली थी इस बात का एहसास सुगंधा को हो गया था इसलिए वह मुस्कुरा रही थी,,,,,, अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर अंकित बोला।

जरा सोचो यह भी हमारे हनीमून जैसा ही है कितना अच्छा मौसम है इतना तो पैसा देकर भी इस तरह का माहौल नहीं बना सकते थे अच्छा हुआ कि हम लोग यहां रह गए और बारिश पड़ने लगी।

तू सच कह रहा है बिंदिया कितनी अच्छी औरत है मुझे इस बात का दुख है कि इसका पति शराबी है वरना तू ही देख कितनी जवानी से भरी हुई है इस वक्त तो उसे अपने पति की बाहों में होना चाहिए।

अगर पति सुख नहीं दे पा रहा है तो मेरा तो कहना ही की है किसी जवान मर्द की बाहों में होना चाहिए क्योंकि बिंदिया पूरी तरह से प्यार करने की चीज देखो तो सही कद काठी से तुम बराबर है ना तो ज्यादा मोटी हो ना तो ज्यादा पतली एकदम मांसल बदन है गोल गोल चूचियां और उभरी हुई गांड एकदम चोदने लायक,,,आहहहहहहहह ,,,,,(ऐसा कहते हुए वह उत्तेजना में अपनी मां की चूची पकड़ कर दबाने लगा वैसे तो कोई और समय होता तो अपने बेटे के मुंह से किसी और औरत की खूबसूरती की तारीफ सुनकर सुगंधा जल भुन जाती लेकिन इस समय उसके बदन में जिस तरह का खुमार छाया हुआ था उसके चलते सुगंधा को अपने बेटे की बातें और भी ज्यादा मदहोश कर देने वाली लग रही थी और यह सब बिंदिया सुन रही थी एक जवान लड़के के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर बिंदिया के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,, और वह जिस तरह से खुलकर उसे भी मजा लेने के लिए बोल रहा था पल भर के लिए बिंदिया सोचने पर मजबूर हो गई थी कि,, क्या वह भी ऐसा कर सकती है? (अपनी सवाल का जवाब उसे खुद ही अपने अंदर से मिल रहा था इसका एक मां कह रहा था क्यों नहीं कर सकती आखिर तू भी तो एक औरत है औरत भी अपनी खुशी के लिए जीती है,,, अपनी जरूरत के लिए जीती है पेट भरना भी जरूरी है क्योंकि भूख लगती है लेकिन बदन की जरूरत को भी पूरा करना महत्वपूर्ण है क्योंकि समय-समय पर जिस तरह से भूख लगती है इस तरह से औरत को भी मर्द की जरूरत का एहसास होता है। एक मन उसे समझा रहा था कि अपनी आंखों से देख ले क्या हो रहा है एक औरत है जो अपने पति से संतुष्ट नहीं है सुख सुविधा से निपुण है टीचर है स्कूल में पढ़ाती है लेकिन फिर भी अपनी जरूरत को नजर अंदाज नहीं करती आखिरकार यह भी तो एक औरत है इसके भी तो कोई मर्यादा है संस्कार है परिवार है लेकिन फिर भी अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए चली आई एक जवान लड़के को अपने साथ लेकर यहां पर और देखो कैसे मजा लूट रही है।

तू अच्छी है कि यह औरत अच्छी है,, जो इस समय मजा लूट रही है और तो अपने परिवार की जरूरत पूरी करते-करते अपनी उम्र भी को दे रही है इस उम्र में तो तुझे भी एक मर्द की जरूरत है जो तुझे जी भर कर प्यार करे तेरी जरूरत को पूरा कर सके लेकिन तू है कि अपनी जरूरत को एक तरफ रख कर मर्यादा और संस्कार में गिरकर बस अपने जीवन को घसीट रही हैं जी नहीं रही है। तू भ्रम में जी रही है और यह औरत सच्चाई में जी रही है उसकी जरूरत है एक मर्द और वह अपनी जरूरत पूरी करने के लिए उम्र भी नहीं देख रही है अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ मजा लूट रही है तू ही जरा सोच जीवन का असली मजा तो यह लूट रही है,,, तुझे भी यही करना चाहिए और अगर तो यह सब करने भी लगेगी तो जरूरी नहीं है कि किसी को पता चल अब देख ले तेरी आंखों के सामने यह दोनों घर से बहाना करके इतनी दूर आ गए हैं और मजा लूट रहे हैं घर पर भी यह दोनों मजा लूटते थे और अभी तक किसी को पता भी नहीं है असली चुदाई किसे कहते हैं यह जवान लड़का इस औरत को अच्छी तरह से महसूस करवा रहा है। और यह जरूरी भी है इस उम्र में औरत की जरूरत और भी ज्यादा बढ़ जाती है औरत की जवानी और भी ज्यादा निकल जाती है शायद इस उम्र में जाकर उसका पति उसे तरह का प्यार बिल्कुल भी नहीं दे सकता जितना कि यह जवान लड़का उसे दे रहा है। तभी तो इस समय बिस्तर पर घमासान मचा हुआ है,,, अपने मन की इस तरह की बात सुनकर बिंदिया धीरे से अपनी आंखों को खोलकर सामने का नजारा देखने लगी सामने सुगंधा अपने बेटे के लैंड को पकड़ कर मुठिया रही थी और अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर दबा रहा था यह नजारा देख कर भी दिया अपने मन में सोचने लगी की सुगंधा की जगह वह होती तो कितना मजा आता है एक जवान लड़का कितना सुख दे सकता है इसका एहसास ही उसके बदन में गुदगुदी कर रहा था। बिंदिया अभी यह सब सोच ही रही थी कि तभी उसे जो सुनाई दिया उसे सुनकर वह एकदम से सन्न रह गई सुगंधा की बात उसके कानों में पड़ी वह अपने बेटे से बोल रही थी।आज मैं तेरा लंड चूस चूस कर इसका रस निकाल दूंगी,,,, देखना आज मैं तुझे इतना मस्त कर दूंगी कि तू मेरे इशारे पर नाचने लगेगा।

मैं तो पहले से ही तुम्हारे इशारे पर नाच रहा हूं तभी तो तुम्हारे साथ यहां आ गया अपना परिवार छोड़कर तुम जितना मजा मुझे दोगी उससे दुगना मजा में तुम्हें दूंगा।

यह बात है अब देख में क्या करती हूं,,,।
(लंड चूसने वाली बात सुनकर बिंदिया के तन बदन में सिहरन से उठने लगी थी। क्योंकि आज तो कुछ नहीं कभी इस बारे में सोची ही नहीं थी और ना ही कभी इस क्रिया को की थी इसलिए यह सब उसे बेहद अद्भुत लग रहा था वह धीरे से अपनी आंखों को खोलकर सामने का नजारा देख रही थी लालटेन की पीली रोशनी में उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था सुगंध भी यह सब उसे दिखाना चाहती थी इसलिए वह बिंदिया की तरफ बिल्कुल भी नहीं देख रही थी। और अगले ही पल वह धीरे से नीचे झुकी और अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड पर अपनी जीभ गिरने लगी लालटेन की पीली रोशनी में अंकित के मोटे तगडे लंड का मोटा सुपड़ा एकदम तमतमा रहा था,,, जिस पर सुगंधा अपनी जीभ फिरा रही थी यह नजारा देख कर बिंदिया के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी जी बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं थी आज उसकी आंखों के सामने वह दृश्य दिखाई दे रहा था कभी सोच भी नहीं सकती थी कि एक औरत मर्द का लंड मुंह में लेकर चुस्ती भी है। देखते ही देखते सुगंधा अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी थी, बिंदिया की हालत खराब हो रही थी,,,, उत्तेजना के मारे उसकी बुर कचोरी की तरह फूल गई थी इतनी मदहोशी और उत्तेजना उसे पहले कभी महसूस नहीं हुई थी बाहर बारिश का जोर बराबर का बना हुआ था तेज हवा ही रह रहकर ताड़पत्री को हिला दे रही थी लेकिन तख्ते पर मां बेटे का हौसला बिल्कुल भी पसंद नहीं हो रहा था एक मर्द को एक खूबसूरत औरत का साथ ऐसे मौसम में अगर ना हो तो यह मौसम बेहद डरावना हो जाता है लेकिन इस समय मां बेटे दोनों कोई दूसरे का साथ था दोनों जवानी का मजा लूट रहे थे इसलिए यह मौसम उनके लिए किसी वरदान से काम नहीं था क्योंकि यहां आने से पहले वह कभी सोच भी नहीं थे कि यहां पर उन्हें इस तरह के माहौल का सामना करना पड़ेगा जो की बेहद मदहोशी से भरा हुआ था।

सहहहहह आहहहहह मेरी रानी तुम कितना मस्त चुस्ती हो,,,,ऊममममम ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं,,,,(अपनी मां के सर पर हाथ रखकर वह हल्के हल्के से उसे पर दबाव बनाता हुआ मदहोशी भरे स्वर में बोला,,,,, जिसे सुनकर बिंदिया के होश उड़े जा रहे थे क्योंकि उम्र में अंकित सुगंधा के बेटे के जैसा था बिंदिया के नजरिया से और बिंदिया यही सब देखकर हैरान थी क्योंकि वह अपनी मन में सोच रही थी कि अपनी मां की उम्र की औरत को यह लड़का कितनी आराम से रानी के घर संबोधन कर रहा है जबकि जब उसके और उसके पति के बीच रिश्ता अच्छा था तब भी उसके पति ने इस तरह से प्यार से उसे नहीं बुलाया था बल्कि इस तरह से प्यार भी नहीं किया था बस अपनी जरूरत पूरी होने पर बिस्तर से खिसक लेता था। इसलिए इस समय अंकित की रसभरी बातें बिंदिया को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी। बिंदिया को साफ तौर पर दिख रहा था की सुगंधा की हरकत की वजह से अंकित के चेहरे के भाव जिस तरह से बदल रहे थे उसे यकीन हो चला था की क्रिया को करवाने मैं मर्द को बहुत मजा आता है, बिंदिया कि सांसे एकदम गरम हो चली थी,, सुगंधा के मुंह से मोटा तगड़ा लंड गले तक ले लेने की वजह से,गगगगगग,,,,,गगगगगग,,,, जैसी आवाजें निकल रही थी,,, अौर सुगंधा बड़ी मस्ती के साथ अपने बेटे के लंड को चुस भी रही थी। अपनी आंखों के सामने यह सब होता हुआ देख कर बिंदिया हैरान परेशान हुए जा रही थी वह कभी सोची भी नहीं थी की मर्द औरत से इस तरह से भी सुख प्राप्त करता है और औरत को भी यह सब करने में मजा आता है। कुछ देर तक इसी तरह से सुगंधा अपने बेटे के लंज को चुसती रही,,, बिंदिया के लिए यहां हैरानी का सबब इसलिए भी था कि अभी तक उसका पानी नहीं छुटा था जबकि उसे अच्छी तरह से याद था कि बहुत परेशान हुआ था जब वह अपने पति के साथ थोड़ा बहुत मजा लेती थी तो बिना डाले ही उसका पानी निकल जाता था,,, लेकिन अंकित का पानी अभी तक नहीं निकला था इस बात से वह काफी हैरान थी क्योंकि वह बहुत देर से उसके लंड को टनटनाए हुए देख रही थी।सुगंधा अपने मुंह से अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल देते और गहरी गहरी सांस ले रही थी,,, अंकित अपनी मां को देखकर मुस्कुरा रहा था सुगंधा भी अंकित की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी,,, तभी अंकित अपनी मां से बोला।

अब उतार दो अपने कपड़े को अब इसकी कोई जरूरत नहीं है,,, नंगी हो जाओ मेरी रानी तुम बिस्तर पर नंगी ही अच्छी लगती हो,,,,,

अरे धीरे बोल कही यह सुन लेगी तो गजब हो जाएगा,,,।

कुछ गजब नहीं होगा देख नहीं रही हो घोड़ा बेचकर सो रही है,,,, और अगर जाग भी गई तो क्या हो जाएगा मेरा मोटा सा बड़ा लंड देखकर इसकी बुर खुद पानी छोड़ रही होगी, मैं तो कहता हूं अगर यह जाग जाए तो इसे भी खेल में शामिल कर लेते हैं काफी दिनों से इसे भी शायद लंड नहीं मिला है,,, और अगर आज की रात जमकर इसकी चुदाई कर दुं तो इससे बड़ा यहां रुकने का इसके लिए मुआवजा क्या हो सकता है इसे वह मजा दूंगा की यह जिंदगी भर याद रखेगी,,,,।

मुझे नहीं लगता कि यह तैयार होगी,,,,।

तैयार तो हो जाएगी बस एक बार नींद इसकी खुल जाए और हम दोनों को देख ले तो इसकी बुर खुद ही तड़प उठेगी लंड लेने के लिए,,,,।

( अंकित और उसकी मां जानबुझ कर ईस तरह की बातें कर रहे थे ताकि बिंदिया उन दोनों की बातों को सुन सके न जाने क्यों इस समय सुगंधा को भी लगने लगा था कि अगर बिंदिया खेल में शामिल हो जाए तो मजा आ जाए,,, वाकई में यह सब सुनकर बिंदिया के भी अरमान मचलने लगे थे कुछ पल के लिए वह भी कल्पना करने लगी थी कि अगर सच में ऐसा हो जाए तो इस जवान लड़के का लंड उसकी बुर में जाएगा तो कितना मजा आएगा यह सब सोच कर उसके तन बदन में हलचल सी होने लगी थी,,,,, वह अपनी आंखों को धीरे से खोल ले रही थी वैसे जिस जगह पर वह सोई हुई थी वहां पर थोड़ा सा अंधेरा था इसका फायदा उसे बराबर मिल रहा था और जहां पर वह दोनों मजा ले रहे थे वहां लालटेन की पूरी रोशनी बनी हुई थी। अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा अपनी साड़ी को अपनी कमर से खोलने लगी अंकित तो पहले से ही नंगा था,,, देखते-देखते सुगंधा अपने बदन से साड़ी को खोलकर एक तरफ रखनी और पेटिकोट की डोरी को खोलने लगी और अगले ही पल पेटिकोट की डोरी खोलते ही उसका पेटिकोट उसकी कमर पर ढीली पडने लगा,,,, जिसे बैठे-बैठे ही सुगंधा अपने हाथों के सहारे से उसे अपनी कमर के नीचे सरकाने लगी बिंदिया यह सब देख रही थी। सुगंधा की यह अदा उसे बेहद उत्तेजित कर देने वाली लगी थी जब वह पेटीकोट को सरकाने के लिए अपनी भारी भरकम गांड को तख्ते से थोड़ा ऊपर उठा ली थी। और देखते ही देखते वह अपनी पेटीकोट को उतार कर पुरी नंगी हो गई थी। यह सब देखकर बिंदिया के तन बदन में भी चुदास की लहर उठ रही थी, उसे बड़ा ताज्जुब हो रहा था कि एक औरत अपने बेटे की उम्र के लड़के के सामने बेझिझक अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी कैसे हो सकती है जबकि आज तक उसने कभी अपने हाथों से यह काम नहीं की थी वैसे तो वह अपने जीवन में बिस्तर पर कम ही बार निर्वस्त्र हुई थी और जितनी बार हुई थी उसके पति ने हीं अपने हाथों से किया था वह खुद से अपने कपड़े कभी नहीं उतारी थी।

सुगंधा पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी मां बेटे दोनों निर्वस्त्र थे इस बात को लेकर बिंदिया काफी हैरान थी कि इन दोनों को इस बात का एहसास नहीं है कि वह दोनों किसी गैर औरत के सामने इस तरह की हरकत कर रहे हैं उन्हें ईस बात से बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता कि अगर वह जाग गई तो क्या होगा। फिर भी जो कुछ भी हो रहा था वह बिंदिया के लिए काफी उत्तेजित कर देने वाला था,, संपूर्ण रूप से अपनी मां को नग्न अवस्था में देखकर अंकित उसे अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का रसपान करते हुए उसकी चिकनी पीठ पर अपनी हथेलियां फिराने लगा फिर धीरे से उसे तख्ते पर पीठ के बल लेटा दिया,, और उसकी दोनों टांगों को अपने हाथों से खोलकर नजर भर कर उसके गुलाबी क्षेत्र को देखने लगा,, बिंदिया को सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,, उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी बुर को देखकर वह कितना प्रसन्न और उत्तेजित नजर आ रहा है। अभी वह इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी अंकित बिंदिया को सुगंधा की दोनों टांगों के बीच झुकते हुए नजर आ रहा था और अगले ही पर जो नजर उसने अपनी आंखों से देखी उसे देखते ही उसके बदन में सुरसुराहट सी होने लगी, पल भर के लिए उसे समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है। इस बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं थी एक मर्द भला एक औरत के उस अंग को क्यों मुंह लगाएगा जिसमें से पेशाब की धार निकलती है। लेकिन यह तो सिर्फ उसकी सोच थी उसकी आंखों के सामने तो इसके विपरीत हो रहा था और पल भर में ही बिंदिया को एहसास होने लगा कि, इस क्रिया को करने में जितना मजा अंकित को आ रहा था उससे ज्यादा मजा सुगंधा को भी आ रहा था,,, बिंदिया को साफ दिखाई दे रहा था कि, अपनी बुर चटवाते हुए सुगंधा तख्ते पर कसमसा रही थी तड़प रही थी मदहोश हो रही थी,,, लेकिन ठीक उसके सामने बिंदिया की भी हालत सुगंधा जैसी ही थी भले ही उसकी बुर की चटाई नहीं हो रही थी लेकिन तड़प उतनी ही थी जितना की सुगंधा के तन बदन में मदहोशी छाई हुई थी वह सोचने पर मजबूर हो चुकी थी की औरत के लिए असली सुख क्या है। उसे खुद को कैसा सुख मिल रहा है क्या हुआ सुखी है क्या एक औरत को जिस तरह की संतुष्टि मिलनी चाहिए क्या उसे मिल रही है सीधी-सादी संस्कारी बने रहने में कौन सा आनंद उसे मिल जा रहा है जबकि उसकी आंखों के सामने एक समाज की उच्च पदवी पर विराजमान औरत बनकर जिंदगी के सारे सुख भोग रही है एक औरत होने का सुख भोग रही है। बिंदिया अपने आप से ही सवाल कर रही थी पूछ रही थी क्या उसे भी दूसरी औरतों की तरह बन जाना चाहिए संस्कारी सीधी शादी औरत बने रहने में अब तक उसे कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ था एक औरत का जो असली सुख होता है वह भी उससे कोसों दूर जा चुका था धन दौलत ना सही लेकिन अपनी खुशी के लिए तो वह जी ही सकती है,,,,,

अपने मन में चल रहे इस तरह के द्वंद से वह हैरान परेशान हुए जा रही थी उसे लगने लगा था कि वह जो जिंदगी की रही है वह बिल्कुल भी ठीक नहीं है परिवार के गुजर बसर के लिए तो ठीक लेकिन उसके खुद के लिए यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था की जवानी के जी दहलीज पर वह पहुंच चुकी थी वहां पर उसे मर्द का साथ भरपूर चाहिए था। ऐसा प्यार जो उसके अरमानों को पंख दे खुली हवा में उड़ने के लिए जैसा की यह औरत एक जवान लड़के का साथ प्रकार इस समय बिस्तर पर मजे लूट रही थी बिल्कुल इसी तरह से काफी सोच विचार करने के बाद बिंदिया अपने मन में सोचने लगी कि उसे भी इस औरत की तरह जिंदगी जीनी चाहिए आज की रात अगर वह इसके साथ हम बिस्तर हो भी जाती है तो किसी को कानों कान खबर तक नहीं पड़ेगी की रात उसके साथ क्या हुआ एक ही रात में हुआ जीवन का अद्भुत सुख प्राप्त कर लेगी जो सुख उसे आज तक वैवाहिक जीवन में नहीं मिला आज की रात वह उन सारे सुख विकल्पों को पूरा कर लेगी अपने जीवन में आए रिक्त स्थान की पूर्ति कर लेगी। अब बिंदिया भी मन बना ली थी और अपनी आंखों को खोलकर सामने के घमासान युद्ध को देख रही थी जो की और भी ज्यादा रोमांचक और मादकता से भरता चला जा रहा था। उसे साफ दिखाई दे रहा था कि अंकित सुगंधा की बुर को स्वाद ले लेकर चाट रहा था वह पागलों की तरह सुगंधा की टांगों के बीच टूट पड़ा था और सुगंधा मदहोशी के चरम पर पहुंच चुकी थी,,, हालात बिल्कुल खराब होते जा रहे थे सुगंधा के बदन में कंपन हो रहा था वह अपनी टांगों को खोलकर जी भरकर अपने बेटे को माया दे रही थी उसकी मोटी मोटी केले के समान चिकनी जांघें लालटेन की पीली रोशनी में चमक रही थी जिसे देखकर बिंदिया का ईमान डोल रहा था। बिंदिया को एहसास हो रहा था कि यह औरत वस्त्र में जितनी खूबसूरत लग रही थी उससे भी ज्यादा खूबसूरत और उत्तेजक बिना वस्त्र के लग रही है वाकई में निर्वस्त्र अवस्था में और औरत की खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जाती है।

 

ऊममममम आहहहहहह मेरे राजा तू तो मुझे पागल कर दिया है,,,,,,सहहहहह आबहहहहह पूरी जीभ डालकर चाट आहहहहह,,,,,,ऊमममममममम,,,(अपने बेटे के बालों को पकड़कर सुगंधा कसमसा रही थी उसके मुंह से लगातार सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,, जो की बारिश की तेज आवाज में दब के रह जा रही थी लेकिन उसकी शिसकारी की आवाज बिंदिया के कानों तक जरूर पहुंच रही थी जिसे सुनकर बिंदिया के भी अरमान मचलने लगे थे) ऊममममम जल्दी-जल्दी चाट मेरे राजा मैं पागल हुई जा रही हूं बुर चटवाने में सच में बहुत मजा आता है और तू बड़े अच्छे से चाटता भी है,,,आहहहहह आहहहहहहहह ,,,,,,ऊममममम,,,,, मुझे कुछ हो रहा है,,,,,,आहहहहहहहह मेरा पानी निकलने वाला है मैं झड़ रही हूं मेरे राजा,,,,,,।
(इतना सुनते ही बिंदिया की हालत एकदम से खराब हो गई अपने आप ही उसकी हथेली साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर आ गई और वह साड़ी के ऊपर से अपनी बुर को मसलने लगी,,,,, अपनी मां की बात सुनकर अंकित भी एकदम से पागल हो गया और अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को दोनों हाथों से पकड़ कर पागलों की तरह लप सब करके चाटना शुरू कर दिया मां बेटे दोनों जानते थे की बिंदिया उन दोनों की हरकत को देख रही है, इसलिए दोनों उसके सामने और भी ज्यादा आक्रामक रवैया अपना रहे थे और बिंदिया के भी सब्र का बांध टुटता नजर आ रहा था वह भी साड़ी के ऊपर से ही अपनी कचोरी जैसी खुली हुई बुर को जोर-जोर से मसल रही थी और अपनी आंखों से सामने के नजारे का आनंद ले रही थी,,,,,, तभी सुगंधा के मुख से जोरदार की चीख की आवाज निकली)

आहहहहह आहहहहहह ऊईईईई मां,,,आहहहहहहहह(वह दोनों हाथों से अपने बेटे का कर पकड़ कर अपनी बुर पर दबा दी थी और झड़ना शुरू कर दी थी सुगंधा के मुंह से निकलने वाली चीख की आवाज को सुनकर बिंदिया एकदम से सन्न रह गई थी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में सुगंधा को अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था वरना इस तरह से सीखने की आवाज तो आज तक उसके मुंह से भी कभी नहीं निकली थी,,,,,, बिंदिया यह देखकर और भी ज्यादा हैरान थी कि झड़ने के बाद भी अंकित उसके बुर से निकलने वाले नमकीन पानी का आनंद ले रहा था उसे चाट चाट कर अपने गले के भीतर उतार रहा था। बिंदिया यह देखकर और भी ज्यादा मदहोश हुए जा रही थी कि, एक बेटे की उम्र का लड़का अपनी मां की उम्र की औरत को केवल चाट कर ही झाड़ दिया था,,, कुछ देर तक अपनी मां की बुर में भिड़े रहने के बाद उसकी सारी मलाई चाटने के बाद वह धीरे से अपना मुंह ऊपर की तरफ उठाया उसके होठों से उसकी मां की बुर से निकलने वाले मदन रस का लार टपक रहा था जिसे देखकर बिंदिया पानी पानी हो रही थी। अंकित के चेहरे पर संतुष्टि के भाव साफ नजर आ रहे थे वह मुस्कुरा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने जग जीत लिया हो और वाकई में इस उम्र के लड़के के लिए यह जग जीतने वाली ही बात थी क्योंकि उसके साथ उसका हम बिस्तर एक खूबसूरत औरत थी जो दो बच्चों की मां थी ऐसी औरत को काबू में कर पाना एक जवान लड़के के लिए बहुत बड़ी बात होती है और इस खेल में जवान लडका भारी पड़ रहा था। जवान लड़के के साथ सुख भोगने के अरमान बिंदिया के मन में भी मचलने लगे थे,,,, गांव के अंदर इस उम्र के लड़के को बिंदिया बेटा कह कर ही बुलाती थी लेकिन इस समय इस तूफानी बारिश में बेटे की उम्र के लड़के में एक जवान मर्द उसे नजर आ रहा था जो उसकी इच्छाओं की पूर्ति कर सकता था उसे संतुष्ट कर सकता था। वह भी इस खेल में शामिल होना चाहती थी लेकिन कैसे यह उसे समझ में नहीं आ रहा था वह अपने मन में यह सब सो रही थी कि कब तक अंकित ताकते के नीचे उतरकर खड़ा हो चुका था उसका लंड अभी भी टांडा आया हुआ था इस बात की हैरानी बिंदिया के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी, क्योंकि अभी तक उसका लंड बरकरार था उसका पानी नहीं छूटा था और एक औरत के लिए इससे भला हैरत अंगेज क्या बात हो सकती है।

बिंदिया अपनी नजरों को फिर से सामने स्थिर कर दी थी,,,,, माहौल पल पल मदहोश होता चला जा रहा था बाहर बारिश का शोर और बारिश का जोर रुकने का नाम नहीं ले रहा था बिंदिया भी अपने मन में सोच रही थी कि अगर वह इन दोनों को आसरा ना देती तो इन दोनों का क्या होता अगर वह सच में इन दोनों को आसरा ना देती तो इसमें उसका ही घाटा होता वह अपनी आंखों से एक उम्र दराज औरत और एक जवान लड़के का काम कल नहीं देख पाती दोनों की प्रेम लीला को अपनी आंखों से देखा नहीं पाती और यह ना देख पाती की एक मर्द औरत के बीच उम्र की खाई कोई मायने नहीं रखती,,,,, शायद यह बात इस समय सच ही साबित हो रही थी की कमर के नीचे उम्र की कोई सीमा नहीं होती। क्योंकि मर्द और औरत के बीच का असली प्रेम कमर के नीचे से ही शुरू होता है और खत्म होता है। अपने लंड को हिलाते हुए अंकित अपनी मां से बोला,,,।

ओहहह मेरी रानी आज तुम्हारी ऐसी है चुदाई करूंगा कि तुम लंगड़ा कर चलोगी,,,,।

ना बाबा ना ऐसा बिल्कुल भी मत करना क्योंकि अभी हमें पहाड़ी से नीचे भी उतरना है कहीं ऐसा ना हो कि मुझे गोद में उठा कर तुझे नीचे उतरना पड़े।

कोई बात नहीं जानेमन तुम्हें तुम्हें गोद में लेकर चाहे जहां घूम सकता हूं तुम्हारे जैसे खूबसूरत औरत इतना मजा दे रही है तो इतना तो मै कर ही सकता हूं,,,,।

तो क्या तू सिर्फ मेरे साथ मजा लेने के लिए है।

अरे नहीं नहीं रानी मैं तो तुमसे प्यार करता हूं और प्यार में मजा भी तो जरूरी है,,,,, देखो ना कितनी देर से मेरा लंड खड़ा है,,,,,।

वह तो मैं देख ही रही हूं कैसे दिखा दिखा कर बिंदिया को मुत रहा था,,,।

बात तो तुम सही कह रही हो बिंदीया देख भी रही थी और सच कहूं तो बिंदिया को चोदने का बहुत मन कर रहा है,,,,।
(अंकित के मुंह से इतना सुनते ही बिंदिया अपने मन में बोली हाय दैया यह तो मेरी चुदाई के लिए तड़प रहा है,,,, मेरी बुर पानी छोड़ रही है मुझे ही कुछ करना होगा वरना हाथ में आया हुआ इतना सुनहरा मौका जाता रहेगा और आज की रात उसके जीवन में फिर कभी नहीं आने वाली। यही सोच कर बिंदिया परेशान हो रही थी की सुगंधा बोली।)

तुझे क्या लगता है बिंदिया तुझसे चुदवाएगी वह गांव की औरत है,,, मुझे नहीं लगता कि तेरे सामने वह अपनी दोनों टांगे खोलेगी।

क्यों नहीं खोलेगी मेरी रानी मेरा मोटा तगड़ा लंड देखकर कोई भी औरत अपनी टांगे खोलने पर भी बस हो जाती है,,,, मैं भी बिंदिया की आंखों में साफ देखा था उसने आज तक मेरे जैसा लंड कभी सपने में भी नहीं देखी थी।
(अंकित की आवाज सुनकर बिंदिया हैरान थी वह सच में पड़ गई थी कि इस उम्र का नौजवान लड़का एक औरत के मामले में इतना चालाक कैसे हो सकता है वाकई में उसके मन में यही चल रहा था लंड को देखकर और यह बात सच ही है कि आज तक उसने ऐसा लंड अपने सपने में भी नहीं देखी थी अब तो अंकित की बातों को सुनकर उत्तेजना के मारे बिंदिया की बुर फूलने पिचकने लगी थी। अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)
तुम देखना मेरी रानी अगर बिंदिया एक बार इसे अपनी बुर में ले लेगी ना तो मेरी दीवानी बन जाएगी मेरी गुलाम बन जाएगी मेरे सामने अपने आप ही दोनों टांगें खोल देंगी। मैं तो खुद ही तड़प रहा हूं ईसकि मुलायम बुर में अपने लंड को डालकर ककड़ी की तरह चीरने के लिए,,,आहहहहह काश ऐसी तूफानी बारिश में मुझे मिल जाती तो इसकी ऐसी की तैसी कर देता,,,,,।

चल ये सपने देखना बंद कर,,, अभी तो मेरी प्यास बुझा तेरा लंड देखकर मेरी बुर फिर से पनियाने लगी है,,,,ऊमममममममम,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी हथेली अपनी बुर पर रखकर मसलने लगी,,,,, मां बेटे दोनों इस तरह की बातें जानबूझकर कर रहे थे क्योंकि वह लोग जानते थे की बिंदिया जाग रही है अंकित उसके तन बदन में भी चुदास की लहर भरना चाहता था और उसकी यह युक्ति काम कर रही थी मां बेटे दोनों की कामुक हरकतें और अंकित कि ईस तरह की बातें बिंदिया की बुर में भी हलचल मचा रही थी वह भी बेकरार हो रही थी इस खेल में शामिल होने के लिए बस कोई बहाना नहीं मिल रहा था,,,,,, अंकित भी अपनी मां की कामुक बातों को सुनकर उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसकी आधी गांड तख्ते के किनारे करके उसकी टांगों को अपनी कमर पर लपेट लिया और अपने लंड को उसकी बुर पर जोर-जोर से पटकने लगा जैसे-जैसे वह पटक रहा था वैसे-वैसे सुगंधा के मुंह से कामुक आवाज निकल रही थी जिसे सुनकर बिंदिया के तन बदन में उतेजना की चिंगारी फूट रही थी । क्योंकि अब उसे मालूम था कि क्या होने वाला है वह यह देखने के लिए मचल रही थी कितना मोटा तगड़ा लंड इस औरत की बुर में आराम से चला जाता है या मस्सकत करनी पड़ेगी,,,,, और देखते ही देखते बिंदिया की आंखों के सामने ही राहुल अपनी मां के बुर में अपना मोटा तगड़ा लंड डालने लगा वैसे तो सुगंधा अपने बेटे के लंड को बड़े आराम से अपनी बुर के अंदर ले लेती थी लेकिन इस समय बिंदिया के सामने वह जानबूझकर नाटक करते हुए दर्द भरी कराहने की आवाज निकाल रही थी,।

आहहहहह ,,,ओहहहहह मां आराम से रे आहहहहहह तेरा बहुत मोटा है ऐसा लगता है जैसे गधे का लंड है धीरे-धीरे अंदर डाल एक साथ मत डाल दिया कर मुझे दर्द होता है,,,,,आहहहहहह,,,,।
(अंकित भी अपनी मां के इस नाटक में साथ देते हुए बोला)

चिंता मत करो मेरी रानी एकदम मक्खन की तरह अंदर जाएगा देखो कैसे अंदर की तरफ जा रहा है धीरे-धीरे सरक रहा है तुम्हारी बुर का पानी मेरा काम आसान कर देता है,,,,,ऊमममममम बहुत गर्म है जानेमन बुर नहीं है भट्टी है,,, मेरी जगह कोई और होता तो तुम्हारी भट्टी में कब का पिघल कर ढेर हो जाता।

यह बात तो माननी पड़ेगी मेरे राजा तू असली मर्द है सच में तेरी जगह कोई और होता तो मेरे पकड़ने से ही पानी फेंक देता,,, लेकिन तू घोड़े की तरह डंटा रहता है,,,

तभी तो तुम्हारे साथ हूं वरना मेरी जगह किसी और को ले आती,,,

 

तेरी जगह ले सके ऐसा कोई मर्द ही नहीं है,,,,,,आहहहहह आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है,,,,ऊमममममममम,(वह अपनी बात पूरी कर पाते उससे पहले ही अंकित अपने लंड को धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था और वह एकदम से मतवाली होने लगी थी उन दोनों की बातें सुनकर बिंदिया की बुर पिघल रही थी,,,, वह मदहोश हो रही थी वह जोर-जोर से साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को मसल रही थी लेकिन अब इससे भी उसका काम नहीं चल रहा था,,,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था कि अंकित की कमर हौले हौले से आगे पीछे हिल रही थी वह सुगंधा को चोद रहा था,,,महीनो गुजर गए थे बिंदिया को अपनी बुर में लंड लिए लंड भी किया था हाथ के अंगूठे जितना इसलिए इस समय दोनों की चुदाई देखकर बिंदिया के तन बदन में आग लगी हुई थी उससे रहा नहीं जा रहा था,,, सुगंधा की मदहोशी उसके अरमानों को पंख दे रही थी वह भी सुगंधा की तरह मस्त होना चाहती थी मजा लेना चाहती थी,,,, अपनी जवानी की गर्मी बर्दाश्त ना कर सकने की वजह से बिंदिया अपना हाथ अपनी साड़ी के अंदर डाल दी थी और अपनी नंगी बुर पर अपनी हथेली रखकर उसे मसलना शुरू कर दीजिए जो की पूरी तरह से पानी से चिपचिपी हो गई थी। अपनी कमर हिलाते हुए अंकित बिंदिया की तरफ देख ले रहा था और जब जब वह बिंदिया की तरफ देखता बिंदिया अपनी आंखों को बंद कर ले रही थी,,,, लेकिन अंकित जानता था कि वह सब कुछ देख रही है उसकी तेज चलती सांस उसकी साड़ी के अंदर घुसा हुआ उसका हाथ उसकी कहानी को साफ बयां कर रहा था और बिंदिया की हालत को देखकर अंकित मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,,,, वैसे भी अंकित ने बातों ही बातों में बिंदीया को चोदने की अपनी मंसा को साफ जाहिर कर दिया था।

कई औरतों की संगत में आकर अंकित इतना तो जान ही चुका था कि एक मोटे तगड़े लंड के दर्शन करने के बाद औरत की स्थिति क्या होती है। अंकित समझ गया था की बिंदिया अपनी बुर में भी उसके लंड को लेना चाहती है चुदवाना चाहती हैं बस शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही है। उसकी इसी तड़प को उसकी हवास को और ज्यादा बढ़ाते हुए अंकित अपने दोनों हाथों को आगे बढ़कर अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को थाम लिया था जो की पानी भरे गुब्बारे की तरह छाती पर लोट रहे थे। अपनी मां की चूचियों को दबाता हुआ अंकित के धक्के तेज हो गए थे,,,,, बर और लंड का मिलन एक अद्भुत संगीत को पैदा कर रहा था जो की झुगी के अंदर मदहोशी के वातावरण में गूंज रहा था और यह मदहोश कर देने वाली आवाज बिंदिया के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रही थी। सुगंधा के मदहोशी भरी शिसकारी की आवाज को सुनकर बिंदीया को इस बात का एहसास हो रहा था कि छुड़वाने में सुगंधा को कितना आनंद आ रहा था। उम्र के ईस पड़ाव पर पहुंचकर बिंदिया को लगता था कि अब उसके जीवन से यह सुख दूर हो चुका है लेकिन आज अपनी आंखों से देख कर उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि औरत के अंदर से यह सुख प्राप्त करने की इच्छा कभी नहीं जाती बस वह अपनी मजबूरियों के कारण अपनी इच्छा को अपने अंदर दबा ली जाती है क्योंकि वह जानती थी कि बिस्तर पर मजा ले रही सुगंध उस उम्र में 8-10 साल बड़ी थी जब वह उम्र के ईस पड़ाव पर पहुंचकर खुलकर एक जवान लड़के से मजा ले सकती है तो वह तो अभी भी पूरी तरह से जवानी के दहलीज पर ही है तो वह क्यों नहीं मजा ले सकती यह सोचते हुए वह अपनी एक उंगली को अपनी बर के अंदर डालकर अंदर बाहर करना शुरू कर दी थी और अपनी आंखों से सुगंधा की चुदाई को देख रही थी अंकित के धक्के बहुत जबरदस्त है उसके हर धक्के के साथ तख्ते पर लेटी हुई सुगंधा हचमचा जा रही थी,,, अगर अंकित अपने हाथों से उसकी चूचियों को आजाद कर देता तो वह पानी भरे गुब्बारे की तरह उसके हर एक धक्के के साथ लहरा उठती लेकिन अंकित अपनी मां की चूचियों को पकड़कर एक आधार बनाया हुआ था जिसकी वजह से जोर-जोर से धक्का लगाने में उसे आसानी हो रही थी।

फच्च फच्च की आवाज से पूरी झुग्गी गूंज रही थी, इस तरह की आवाज बिंदिया को और भी ज्यादा मदहोश बना रही थी,,, माहौल पूरी तरह से मदहोशी के साए में पल रहा था,,,, मां बेटे दोनों को किसी गैर के सामने चुदाई करने में कुछ ज्यादा ही मजा आने लगा था। दोनों के लिए शर्म की कोई सीमा नहीं थी। उनके लिए सर्वोच्च केवल आनंद ही था संभोग में मिल रहा सुख ही उनके लिए प्राथमिकता थी यह मायने नहीं रखता था कि वह दोनों किसके सामने चुदाई का सुख भोग रहे हैं बस उन्हें मजा आना चाहिए । और ऐसा हो भी रहा था मां बेटे दोनों जानते थे कि एक जवान औरत उन्हें चुदाई करते हुए देख रही है और यही एहसास उन दोनों की उत्तेजना को और भी ज्यादा बढ़ा रहा था कुछ देर तक अंकित इसी अवस्था में अपनी मां की चुदाई करता रहा यह सब बिंदिया के लिए आश्चर्यजनक था क्योंकि अभी तक अंकित का पानी नहीं निकला था और सुगंधा की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी।

तकरीबन 3 घंटे का समय गुजर चुका था लेकिन इस बीच बरसात बिल्कुल भी काम नहीं हुई थी तेज हवाएं तेज बारिश ऐसा लग रहा था कि दोनों को यही रोकने के लिए ही माहौल बिगड़ा था। बिंदिया से बर्दाश्त नहीं हो रहा था अंकित का हर एक धक्का उसके अरमानों को मदहोश कर रहा था। इस अवस्था में चुदाई करने के बाद वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाला और अपनी मां से बोला।

बस मेरी जान अब घोड़ी बन जाओ पीछे से तुम्हारी लेना चाहता हूं,,,, पीछे से तुम्हारी लेने का मजा ही कुछ हो रहा है तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड आंखों के सामने देखकर मेरा जोश और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

तु मुझे उलट पलट कर मेरी हालत खराब कर देता है,,,,,(धीरे से अपनी स्थिति को बदलते हुए सुगंधा बोली और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) सच कहूं तो तेरा इस तरह से मेरा हालत खराब कर देना ही मुझे अच्छा लगता है,,,,,, ले बन गई घोड़ी अब बन जा तू मेरा घोड़ा,,,,,(सुगंधा घोड़ी बनते हुए बोली और अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर एकदम से मत हो गया और दो चार चपत लगाते हुए बिंदिया की भी उत्तेजना को बढ़ाते हुए वह बोला)

आहहहहह अब लग रही है ना मेरी छिनार,,,,(छिनार सब सुनते ही बिंदिया की बर फुदकने लगी,,, यह शब्द एकदम देहाती था लेकिन इस शब्द में इतनी मदहोशी थी कि इसे सुनने के बाद औरत एकदम मस्त हो जाती थी और खास करके चुदाई करवाते समय और यही हाल शायद इस समय सुगंधा के भी हो रहा था क्योंकि उसके चेहरे पर उत्तेजना साहब झलक रही थी और वह अपने बेटे की बात सुनकर बोली,,,)

मैं तो पहले से ही तेरी छिनार बन चुकी हूं अब जमकर ले अपनी छिनार की मेरी बुर का भोसड़ा बना दे डाल दे अपने गधे जैसे लंड को मेरी बुर में।

ओहहह मेरी रंडी मेरी भोसड़ा चोदी तेरी इस तरह की बातें यह तो मुझे पागल बना देती है तभी तो तेरे पीछे पागल बना फिर रहा हूं अब देख मेरा कमाल तेरी बुर का भोसड़ा बना देता हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर दूसरे हाथ को अपनी मां की गांड पर रखकर उसके गुलाबी छेद में डाल दिया और पहले ही धक्के में पूरा का पूरा अंदर घुसेड़ दिया हल्का सा सुगंधा के मुंह से चिकनी की आवाज निकली थी और फिर सब कुछ बराबर हो गया था,,,,, अंकित जोर-जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया था और सुगंधा भी अपने मुंह से जोर-जोर से आवाजें निकल रही थी क्योंकि यहां पर किसी के सुने जाने का बिल्कुल भी डर नहीं था बिंदिया को छोड़कर और वैसे भी बिंदिया को वह जानबूझकर इस तरह की आवाजें सुना रही थी। बिंदिया के तन बदन में हलचल सी मची हुई थी इस तरह की आवाज सुनकर उसकी खुद की उंगली उसकी बुर में बड़ी तेजी से अंदर बाहर हो रही थी,,,, बिंदिया इस बात से भी हैरान थी की सुगंधा की गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी थी लेकिन फिर भी पीछे से अंकित का लंड बड़े आराम से उसकी बुर की गहराई तक पहुंच रहा था जिसका कारण साफ था अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिसके कारण बड़े आराम से वह बुर की गहराई तक घुस जा रहा था।

अंकित पूरा जोर लगा दिया था अपनी मां को चोदने में क्योंकि यहां पर वह किसी गैर औरत के सामने अपनी मर्दाना ताकत का प्रदर्शन कर रहा था वह बिंदिया को दिखाना चाहता था की असली चुदाई किसे कहते हैं ताकि वह मदहोश होकर खुद अपनी टांगें खोल दे और वाकई में अंकित का जोश और उसकी चुदाई देखकर बिंदिया के तन बदन में अजीब सी हलचल सी मच रही थी वह अपने मन में सोचने लगी थी कि अगर अंकित का लंड उसकी बुर में जाएगा तब तो वह उसकी बुर के सारे धागे खोल देगा और सवाल यह भी था कि क्या उसका लंड आराम से उसकी बुर में घुस पाएगा नहीं सोचते हुए वह मस्त हो रही थी और अपनी दूसरी उंगली को भी अपनी बुर में प्रवेश करा दी थी,,,,, अंकित की कमर बड़ी रफ्तार से आगे पीछे हो रही थी उसको अंदर की हालत खराब हो रही थी ऐसे ठंडा मौसम में भी उसके माथे से पसीना टपक रहा था और यही हाल अंकित का भी था दोनों की स्थिति को देखकर बिंदिया को इस बात का एहसास हो रहा था कि वह दोनों कितनी मेहनत कर रहे थे। एक बार फिर से सुगंधा झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी उसका बदन अकड़ रहा था अंकित भी ज्यादा दूर नहीं था झड़ने में अपनी मां का अकडता हुआ बदन देखकर अंकित एकदम से उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया था,, और तेज धक्के लगाते हुए मां बेटे दोनों झड़ने लगी थी दोनों के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे दोनों को झड़ता हुआ देखकर बिंदिया से भी रहा नहीं किया और उसकी बुर से भी मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा,,,, बिंदिया के लिए पहली बार था जब वह कई सालों बाद अपनी उंगली का सहारा लेकर अपनी जवानी की गर्मी को शांत कर रही थी और इस खेल में उसे ज्यादा मजा आया था लेकिन वह जानती थी की असली खेल वह नहीं बल्कि सुगंधा खेल रही थी तख्ते पर। वह अपनी संतुष्टि के लिए यह सब कुछ कर रही थी लेकिन उसे देखकर जो हरकत में कर रही थी उसे उसे संतुष्टि नहीं बल्कि उसकी जवानी की आग और भी ज्यादा भड़कने वाली थी।

अपनी मां की चुदाई करके अंकित धीरे से उससे अलग हुआ और कुछ देर वहीं बैठकर गहरी गहरी सांस लेने लगा वह बिंदिया को इस खेल में कैसे शामिल किया जाए इसी बारे में सोच रहा था। और धीरे से उठकर इस जगह पर खड़ा होकर पेशाब करने लगा बिंदिया के लिए हैरानी की बात यह थी कि झड़ने के बावजूद भी उसका लंड ज्यों का क्यों खड़ा था,,,। क्योंकि बिंदिया जानती थी कि झड़ने के बाद उसने अपने पति के लंड को खड़ा होते हुए नहीं देखी थी इसलिए वह हैरान थी और वह जिस तरह से उसे पकड़ कर पेशाब कर रहा था बिंदिया का धैर्य एकदम से टूट गया था लेकिन वह कुछ कर सकते की स्थिति में नहीं थी वह शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी ना तो इस खेल में शामिल हो पा रही थी पेशाब करने के बाद वह फिर से अपनी मां के पास आए और लेट गया और फिर से उसकी चूचियों को दबाकर मजा लेने लगा उसकी मां बोली।

क्यों फिर से तेरा मन कर रहा है क्या,,,?

तुम्हें क्या लगता है कि मेरा मन भर जाएगा माहौल देख रही हो वातावरण देख रही हो कितना मदहोश कर देने वाला वातावरण है ऐसे में अगर मैं सो गया तो मेरी मर्दानगी पर धिक्कार है।

(अंकित की यह बात सुनकर बिंदिया गदगद हो गई,,, क्योंकि एक औरत का हौसला बढ़ाने के लिए इसी तरह की मर्दानगी की जरूरत होती है और अंकित की है बात सीधा उसके दिल में उतर गई थी वह अपने मन में ही बोल रही थी कि इसे कहते हैं असली मर्द जो औरत को खुश करने के लिए कुछ भी कर सकता है। अपने बेटे की बात सुनकर सुगंध मुस्कुराते हुए बोली)

अरे वह बड़ा आया मर्द,,,, सिर्फ मेरी चुदाई करके तु अपने आप को मर्द समझ रहा है। एक साथ दो औरतों की चुदाई करके दोनों को बराबर का मजा दे तब तु असली मर्द कहलाएगा,,,,।

यह बात है लेकिन दूसरी औरत लाऊं कहां से,,,, यहां दूसरी औरत तो है लेकिन घोड़े बेचकर सो रही है। इसकी जगह अगर शहर की औरत होती तो अब तक हम दोनों के साथ मजा ले रही होती।

हां रे तू सच कह रहा है हाय रे इसकी किस्मत,,, इसके घर में एक जवान मर्द आया है जो इसकी जवान को निचोड़ कर पानी पानी कर सकता था और यह है कि घोड़े बेचकर सो रही है जाने दो हमें क्या,,,, आजा मैं ही तेरे लिए दो औरतों से कम नहीं हूं,,,,।

ओहहहहह मेरी जानेमन तू तो मेरे लिए पूरी दुनिया हो,,,(ऐसा कहते हुए अंकित लेते हुए की अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया और उसके खूबसूरत चेहरे पर चुंबनों की बारिश करने लगा मां बेटे दोनों जानबूझकर इस तरह की बातें करके बिंदिया को उकसा रहे थे कि वह भी इस खेल में शामिल हो जाए इसमें सुगंधा भी न जाने क्यों अपने बेटे को दूसरी औरत से बांटना चाहती थी वह भी इसका सुख और अनुभव प्राप्त करना चाहती थी और यही अंकित के लिए भी सुनहरा मौका था दो औरतों को एक साथ चोदने का। मां बेटे दोनों की बातों को सुनकर बिंदिया के तन-बदन में उत्तेजना के लहर उठ रही थी वह भी अपने आप को ही खुश रही थी कि इतनी हिम्मत नहीं दिखा पा रही है कि वह भी उन दोनों के पास पहुंच जाए और सीधा अंकित के लंड को पकड़ के बस इससे ज्यादा कुछ कहने और करने की जरूरत थी नहीं उसे अंकित खुद ही समझ जाता कि उसे क्या चाहिए। बिंदिया अपनी आंखों के सामने फिर से दोनों को आपस में मदहोश होते हुए देख रही थी,,, अंकित अपनी हथेली को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे अपनी तरफ खींच रहा था अपने लंड से सता रहा था वह फिर से पागल हुआ जा रहा था और यह देखकर बिंदिया हैरान भी थी कि अभी-अभी वह अपनी मां की चुदाई करके चढ़ा था और फिर से उसे छोड़ने के लिए तैयार हो गया था,,, अभी तक तो वह केवल दोनों को प्रेमी प्रेमिका ही समझ रही थी इस बात से वह बिल्कुल अनजान थी कि उसकी आंखों के सामने प्रेमी प्रेमिका नहीं बल्कि मां बेटे काम लीला कर रहे थे अगर इस बात को पहचान ली थी तो शायद सुनते ही उसकी बुर से पानी फेंक देता।

लेकिन अब बिंदिया के सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था,,, वह एक प्यासी औरत थी और उसकी आंखों के सामने कुआं था जो उसकी प्यास बुझा सकता था लेकिन अपनी प्यास बुझाने के लिए उसे कुएं के पास जाना जरूरी था। वह गहरी सांस लेकर आगे के बारे में सोच रही थी धीरे-धीरे 4 घंटे का समय गुजर चुका था,,, समय उसके पास भी काम था वह जी भर कर आज की रात जवान लड़के से मजा ले लेना चाहती थी को क्यों जानती थी कि ऐसी रात अब उसके जीवन में शायद ना भी आए,,, और वह इस बात से निश्चित तिथि की वह दोनों इधर के रहने वाले बिल्कुल भी नहीं थी और आज रात को जो कुछ भी होगा वह किसी को पता भी नहीं चलने वाला,,,, ऐसा मौका भला कब मिलने वाला था अगर वह इस तरह की हरकत गांव कहीं किसी लड़के से करती तो शायद आज नहीं तो कल बात खुल जाती और फिर बदनामी हो जाती लेकिन यह दोनों गैर थे पर आए थे दूसरे शहर से आए थे और खुद मजा लूट रहे थे इसलिए यह राज, राज ही रहने वाला था काफी सोच विचार करने के बाद बिंदिया से रहा नहीं गया और वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई,,,,, मां बेटे दोनों बिंदिया को देख रहे थे लेकिन उसकी तरफ बिल्कुल भी ध्यान न देने का नाटक कर रहे थे बिंदिया चलते हुए सुगंधा के पास आई और सुगंधा की तरफ देखने लगी,,,, सुगंधा भी बिंदिया की तरफ देखते हुएबोली,,,।

क्या हुआ,,,,,,, जाकर सो जाओ,,,,,(ऐसा जानबूझकर बोल रही थी वह जानती थी कि वह अपने बेटे के साथ किस अवस्था में है दोनों संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में थे ऐसे में कोई जवान औरत इस तरह का नजारा देखकर भला कैसे चैन की नहीं सो पाती सुगंधा की बात सुनकर वह बोली कुछ नहीं बस उसके पास तख्ते के ऊपर बैठ गई और उन दोनों को देखने लगी,,,,, अंकित मदहोश हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी युक्ति कम कर गई थी वह उसकी मदहोशी को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और बिंदिया की तरफ देख भी रहा था लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, यह खूबसूरत नजारा देखकर बिंदिया की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और उसकी सांसों की गति के साथ उसकी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जो की ब्लाउज में एकदम साफ दिखाई दे रही थी सुगंधा भी समझ गई थी कि अब उन दोनों का काम हो चुका है,,, इसलिए सुगंधा को न जाने क्या सुझा और वह अपना हाथ बिंदिया की तरफ आगे बढ़कर ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची को दबाना शुरू कर दी,,, सुगंधा कि ईस तरह की हरकत से बिंदिया एकदम से मदहोश हो गई,,,, और अपनी मां की हरकत देखकर अंकित भी हैरान था क्योंकि उसे मालूम था कि एक औरत के साथ उसका यह पहली बार का इस तरह की हरकत हो रही थी और इसे देखकर वह और भी ज्यादा उत्तेजित होकर अपनी मां की चूची को जोर जोर से पीना शुरू कर दिया था उसका एक हाथ अभी भी उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर टिका हुआ था और सुगंध ब्लाउज के ऊपर से ही बिंदिया की चूची को दबा दबा कर उसे मस्त कर रही थी।

बिंदिया का भी यह पहला मौका था जब वह किसी औरत के साथ मजा ले रही थी वरना वह कभी सोची कि नहीं थी की औरत के साथ भी ऐसा कर सकते हैं हालांकि अभी तो केवल शुरुआत पर थी लेकिन जैसे ही सुगंधा का हाथ उसे अपनी चूची पर महसूस हुई थी वह एकदम से मदहोश हो गई थी बिंदिया की चूची दबाने में सुगंधा को भी मजा आ रहा था,,,,, सुगंधा बिंदिया के चेहरे पर बदलते भाव को देख रही थी उसे एहसास हो रहा था की बिंदिया को मजा आ रहा था इसलिए वह बिंदिया से बोली।

कैसा लग रहा है बिंदिया,,,,?

वह शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पाई बस अपनी आंखों को बंद करके इस एहसास में डूबने लगी दूसरी तरफ अंकित एक साथ दोनों औरतों का मजा लेने के लिए तैयार हो चुका था इसलिए अपनी मां की गांड पर से अपना हाथ हटाकर वह बिंदिया की दूसरी चूची को थाम लिया था,,, ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने में अंकित को मजा आ रहा था उसकी चूचियां पूरी तरह से तो हथेली में नहीं आ रही थी लेकिन फिर भी अंकित को अंदाजा हो गया था की बिंदिया की चूचियां उसकी मां की तरह बड़ी-बड़ी नहीं थी ,संतरे की तरह गोल-गोल थी जिसे अपनी हथेली में लेकर दबाने में मजा आ रहा था,,,,, अपने बेटे की हरकत से सुगंधा भी उत्तेजित हो रही थी वह खुद हैरान थी की वह कैसे अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को दूसरी औरत के साथ मजा लेते हुए देख रही है। वरना ऐसा वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी, कुछ देर तक दोनों मां बेटे इसी तरह से मजा लेते रहे और बीवी अपनी आंखों को बंद करके मदहोशी के सागर में डूबने के लिए तैयार हो चुकी थी सुगंधा चुची को दबाते हुए धीरे से बोली,,,)

अगर मजा लेना है तो इसे उतार दो नंगी हो जाओ हम दोनों की तरह,,,,, तभी ईस खेल का मजा ले पाओगी।
(सुगंधा और अंकित की हरकत से बिंदिया मदहोशी में डूबती चली जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी। अच्छी तरह से जानती थी की सुगंधा की बात मानना यहां पर उचित था बिना कपड़े उतारे इस खेल का मजा लेना जायज बिल्कुल भी नहीं था,,,,, इसलिए वह बिना कुछ बोले अपने आप को तैयार कर चुकी थी निर्वस्त्र होने के लिए अपनी आंखों को बंद करके गहरी गहरी सांस ले रही थी अभी भी उसके कंधे पर साड़ी का पल्लू था जिसे अंकित अपने हाथ से नीचे गिरा दिया था साड़ी का पल्लू छाती से हटते ही उसकी भरपूर जवानी से भरी हुई ब्लाउज में कैद चूचियां दिखाई देने लगी थी अंकित की आंखों की चमक बढ़ती जा रही थी क्योंकि आज उसके लिए भी यह सुनहरा मौका था अपनी मां की आंखों के सामने किसी गैर औरत की जवानी का मजा लेने का वह देखना चाहता था कि उसकी हरकतों का उसकी मां पर कैसा प्रभाव पड़ता है। इसलिए वह खुद ही धीरे से उठ कर बैठ गया और अपने हाथों से बिंदिया के ब्लाउज का बटन खोलने लगा विद्या कोई एहसास पूरी तरह से मत कर दे रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी चूचियां कुछ ज्यादा ही उछलना शुरू कर दी थी उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल होता जा रहा था। सुगंधा लगातार एक हाथ से ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची दबा रही थी,,,, धीरे-धीरे करके अंकित बिंदिया के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया,,,, और जैसे ही ब्लाउज के दोनों पट अलग हुए अंकित की आंखों में चमक बढने लगी भले ही उसकी चूचियां आकार में खरबूजे जैसी बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन फिर भी एकदम गोलाकार संतरे की तरह तनी हुई थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आने लगा। अंकित से रहा नहीं किया और अपने दोनों हाथों को उसकी दोनों चूचियों पर रखकर अपनी हथेली में दबाने लगा और मदहोश होता हुआ बोला।)

बाप रे कितनी खूबसूरत चुचीया है तुम्हारी,,, देखो मम्,,,,(इतना कहकर वह एकदम से खामोश हो गया क्योंकि उसके मुंह से अनजाने में मम्मी शब्द निकलने वाला था और इस बात पर सुगंधा भी गौर की थी और उसे आंख निकाल कर देखने लगी थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि किसी भी रूप में उन दोनों का रिश्ता बिंदिया के सामने जाहिर हो लेकिन अंकित अपने शब्दों को संभाल लिया था और आगे अपनी बात को बढ़ाते हुए बोला।) मेरी जानेमन इतनी खूबसूरत चुचिया देखो तो सही मैं तो पागल हुऐ जा रहा हूं इन्हें मुंह में लेने के लिए,,,,,,आहहहहहहहह ,,,,,(बिंदिया खामोशी निशब्द उसके पास कहने के लिए बिल्कुल भी शब्द नहीं थे मां बेटे दोनों की हरकतों में वह पूरी तरह से खो चुकी थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके जीवन में यह पल आएगा कि वह इस तरह से मजा लुटेगी,, उत्तेजना के मारे उसकी सांस उखड़ रही थी और अंकित उसे और भी ज्यादा उत्तेजित करते हुए धीरे से बोला।)

बोलो बिंदिया क्या मैं तुम्हारी चुची को मुंह में लेकर पी सकता हूं बहुत खूबसूरत चुचिया है तुम्हारी,,,,सहहहहह हमममममममम(इस तरह की बातें करते हुए उससे इजाजत मांग कर अंकित उसे पूरी तरह से लज्जित और उत्तेजित कर देना चाहता था वह अपने मुंह से इजाजत देने में समर्थ बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी,,,,, लेकिन जो उसके होंठ नहीं बोल पा रहे थे उसका खूबसूरत चेहरा बोल रहा था वह पूरी तरह से इजाजत दे रहा था अंकित को आगे बढ़ाने के लिए इसलिए अंकित धीरे से अपने प्यासे हो तो को आगे बढ़ाया और अगले ही पल विद्या की चूची पर रखकर उसे हल्के से अपने होठों के बीच उसके खजूर को दबा दिया वह एकदम से सिहर उठी उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज फुट पड़ी। यह नजारा बेहद अद्भुत था खास करके सुगंधा के लिए क्योंकि उसका बेटा उसकी आंखों के सामने ही गैर औरत की चूची को मुंह में लेकर पी रहा था एक औरत होने के नाते सुगंधा यह सब बर्दाश्त नहीं करती लेकिन इस समय के हालात कुछ और ही थे। क्योंकि उसके बदन में भी एक अजीब सी हलचल मची हुई थी किसी गैर औरत के साथ मजा लेने के लिए यह उसका पहला मौका था जब वह किसी औरत के अंगों से खेल रही थी इस समय सुगंधा का भी हाथ बिंदिया की चूची पर थी जिसे वह हल्के हल्के दबा रही थी। बिंदिया की सांसे गहरी चलने लगी थी आंखों को बंद किए हुए वह इस पल में पूरी तरह से खोने लगी थी। और अंकित अपनी कामकला से दोनों औरतों को प्रभावित कर रहा था अंकित धीरे-धीरे उसकी चूची के खूबसूरत खजूर को मुंह में लेकर चूस रहा था उत्तेजना के मारे बिंदिया के चूची के निप्पल पूरी तरह से कड़क हो चुके थे जिसे चूसने में अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।

बिंदिया की बुर मदन रस से डूबने लगी थी, अंकित पूरी तरह से उसकी जवानी पर छाया हुआ था,,,, तीनों में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था झुग्गी में खामोशी छाई हुई थी सिर्फ तेज बारिश और तेज हवाओं का ही शोर सुनाई दे रहा था कुछ देर तक अंकित इसी तरह से बिंदिया की चुची को पीता रहा और बिंदिया के चेहरे पर बदलते भाव को देखता रहा,,,, अंकित इस खेल को और भी ज्यादा रोमांचक बना देना चाहता था इसलिए वह धीरे से बिंदिया की चूची को अपने मुंह में से बाहर निकाल दिया हालांकि सुगंधा के हाथ अभी भी उसकी दूसरी चूची ची पर टिके हुए थे,,,, अंकित तख्ते पर से नीचे उतर गया था,,, और बिंदिया के पास जाकर खड़ा हो गया वह अभी भी अपनी आंखों को बंद किए हुए थे। वह धीरे से बिंदिया को बोला।

आंखों को खोलो बिंंदिया आंखें बंद करके पूरा मजा नहीं ले पाओगी,,,,

अंकित सही कह रहा है पूरा मजा लेना है तो थोड़ा बेशर्म बनना पड़ेगा बेशर्म बनने के बाद ही इस खेल में ज्यादा मजा आता है,,,,(सुगंधा बिंदिया की चूची को दबाते हुए बोली,,,, तो वह शरमाते हुए धीरे-धीरे अपनी आंखों को खोली ठीक अपने पास में अंकित को खड़ा देखकर वह एकदम से शर्म से पानी पानी होने लगी क्योंकि वह पूरी तरह से निर्वस्त्र रहा और आंख खोलते ही उसकी नजर सीट है अंकित के मोटे तगड़े लंड पर चली गई थी जो कि टनटनाया हुआ था। उसे शरमाता देखकर अंकित समझ गया था इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोला।)

शर्माओ मत बिंदिया तुमने शायद अपने आप पर गौर नहीं की हो तुम बहुत खूबसूरत हो।(औरत को लाइन पर लाने का हुनर अंकित अच्छी तरह से जानता था वह जानता था कि किसी भी औरत की खूबसूरती की तारीफ करो तो वह एकदम से पिघल जाती है और इस समय यही हो रहा था एक जवान लड़के के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह पानी पानी हो रही थी,,, वह कुछ बोल पाती या कोई प्रतिक्रिया दे पाती इससे पहले ही अंकित धीरे से अपने प्यासे होठों को उसकी तरफ आगे बढ़ाने लगा उसका चेहरा शर्म से और ज्यादा लाल होने लगा और देखते ही देखते अंकित उसके लाल-लाल होठों पर अपने हॉट रख दिया वह एकदम से मचल उठी उसकी बुर से पानी का फव्वारा फूट पड़ा वह साड़ी के अंदर झड़ने लगी थी। क्योंकि किसी गैर मर्द के द्वारा उसके होठों का चुंबन चुदाई से काम नहीं था,,, इस तरह से प्यार भरा चुंबन उसके पति ने भी कभी नहीं लिया था और ना ही कभी उसने इस तरह का अनुभव की थी इसलिए तो वह झड़ रही थी उसके बदन में कंपन हो रहा था और अंकित उसकी उत्तेजना का फायदा उठाते हुए, एकदम से उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकित फूलों का रस चूस रहा हो उसे बिंदिया के होठों का चुंबन उसकी चुसाई बेहद मदहोश कर देने वाली लग रही थी। यह चुंबन अंकित को बेहद उत्तेजित कर रही थी जिसके चलते उसके होठों का रस पीते हुए अंकित उसकी चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया था बिंदिया के तो होश उड़े जा रहे थे आनंद की कोई सीमा नहीं थी वह अधिक आनंद का अनुभव कर रही थी। अंकित ने उसकी चूचियों को दबा दबा कर टमाटर की तरह लाल कर दिया था ऐसा लग रहा था कि जैसे पहली बार बिंदिया को उसकी चूची दबाने वाला मिला हो। क्योंकि इस तरह से तो उसके पति ने भी उसकी चूची को दबा दबा कर लाल नहीं किया था ऐसा लग रहा था कि आज की रात अंकित उसकी जवानी का सारा रस निचोड़ डालेगा।

बिंदिया शर्मा रही थी उसकी तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी लेकिन सुगंधा के हाथों का मजा हुआ पूरा ले रही थी सुगंधा की हरकत सेवा हैरान भी थी क्योंकि वह नहीं जानती थी कि एक औरत औरत के अंगों से मजा लेती होगी क्योंकि सुगंध उसकी एक चूची को बराबर लेकर दबा रही थी लेकिन तभी सुगंधा भी अपने प्यास होठों को उसकी एक चूची पर रख दी और उसकी निप्पल को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दी यह बिंदिया के लिए और भी ज्यादा हैरतअंगेज था वह एकदम से मस्त हो गई सुगंधा का यह पहला अनुभव था जब वह किसी औरत की चूची को मुंह में लेकर पी रही थी,,,, सुगंधा आनंदित हो रही थी बिंदिया का दिमाग काम करना बंद कर दिया था क्योंकि होठों पर अंकित भिड़ा हुआ था और चूची पर उसकी मां,,,, तभी बिंदिया को अपनी साड़ी के अंदर हथेली सरकती हुई महसूस हुई उसका मुलायम एहसास बिंदिया को और भी ज्यादा मदहोश कर रहा था क्योंकि उसे समझते देर नहीं लगी थी कि जो हाथ उसकी साड़ी के अंदर जा रहा था वह अंकित का नहीं बल्कि सुगंधा का था और एक औरत को इस तरह से मजा लेता देखकर बिंदिया मस्त हुए जा रही थी,,,, देखते ही देखते सुगंध अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर डाल चुकी थी और सीधा उसकी हथेली उसके गुलाबी बुर पर पहुंच चुकी थी सुगंधा को इस बात की हैरानी बिल्कुल भी नहीं हुई थी कि बिंदिया की बुर मदन रस की चिपचिपाहट से भरी हुई थी‌। अपनी हथेली पर मदन रस की चिपचिपाहट महसूस करते ही सुगंधा बोली।

बाप रे बिंदिया तुम तो बहुत ज्यादा पानी बहा रही हो।
लगता है आज लंड को पूरा निगल जाओगी,,,।

(इतना सुनकर बिंदिया एकदम से शर्मा गई और बोली)

क्या दीदी तुम भी !

और नहीं तो क्या,,,,क्या मुझे नहीं मालूम है कि औरत की बुर कब पानी छोड़ती है आज तो तुम्हारी खैर नहीं है,,,,,(अपनी हथेली को जोर-जोर से उसकी बुर पर रगड़ते हुए बोली सुगंधा के स्पर्श और उसकी हथेली के रगड़ से बिंदिया और भी ज्यादा मदहोश हो रही थी बार-बार बिंदिया की नजर अंकित के टनडनाए लंड पर चली जा रही थी वह उसे छूना चाहती थी पकड़ना चाहती थी उसकी गरमाहट को महसूस करना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि मोटे-मोड लंड को पकड़ने से कैसा एहसास होता है बार-बार उसकी आंखों के सिधान को देख कर अंकित मस्त हुआ जा रहा था और उसके होठों के रस को बड़ी तेजी से चूस रहा था,,, और उसकी इच्छा की पूर्ति के लिए वह अपना हाथ बढ़ाकर उसके हाथ को पकड़ लिया और सीधा उसे अपने लंड पर रख दिया,,, बिंदिया की हथेली जैसे ही उसके लंड पर पड़ी उसकी गर्माहट और मोटाई का अहसास होते ही वह एकदम से गनगना गई और डर के मारा अपना हाथ पीछे खींच ली,,, उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी एक तरह से उसे झटका सा लगा था क्योंकि उसने अपने जीवन में आज पहली बार इतना मोटा और लंबा लंड देख रही थी उसे हाथ में लेकर तो हुआ एकदम से मस्त हो गई थीं। उसकी तेज चलती सांसों को देखकर अंकित समझ गया था कि उसके मन में क्या चल रहा है इसलिए वह अपने होठों को उसके होठों से अलग किया और मुस्कुराते हुए बोला।

क्या हुआ बिंदिया ऐसा पहली बार देख रही हो क्या,,,?
(उसकी बात सुनकर बिंदिया कुछ बोल नहीं पाई बस आश्चर्य से कभी उसकी तरफ तो कभी उसके लंड की तरफ देख रही थी,,,,, यह देखकर मुस्कुराता हुआ अंकित फिर से अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपने लंड पर रखते हुए बोला,,)

घबराओ मत यह तुम्हें काट नहीं खाएगा बल्कि तुम्हें इतना मजा देगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,(ऐसा कहते हुए अंकित उसकी हथेली को अपने लंड पर रख दिया और उसकी हथेली पर अपनी हथेली रखकर उसे पर अपना कसाव बढ़ाने लगा उत्तेजना के मारे बिंदिया गनगना रही थी लेकिन अब वह कुछ कर भी नहीं सकती थी और अंकित बड़ी चालाकी से अपनी हथेली को उसकी हथेली पर रखे हुए अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया,,,,, अंकित की हरकत से बिंदिया मदहोश हुए जा रही थी और उसकी उत्तेजना बिल्कुल भी कम नहीं हो रही थी क्योंकि सुगंधा लगातार उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर को अपनी हथेली से रगड़ रही थी उसे गर्माहट दे रही थी मां बेटे दोनों उसे पूरी तरह से मस्त किए हुए थे। अंकित औरत के मन को पढ़ना अच्छी तरह से जानता था वह उनके मन में घुसकर उनकी मां की बात को उगलवा लेता था यहां पर भी अंकित कुछ देर तक बिंदिया की हथेली पर अपना हाथ रखकर अपने लंड को मुठीयाते हुए उसका हौसला बढ़ा रहा था। जब अंकित को एहसास होने लगा कि उसकी हथेली अपने आप चलने लगी है तो धीरे से अपना हाथ बिंदिया के हाथ के ऊपर से हटा लिया और मुस्कुराता हुआ बिंदिया की तरफ देखकर बोला,,,)

तुम इतना डर क्यों रही हो,,,,! तुम तो औरत हो यह तो तुम्हारा पसंदीदा खिलौना है तुम्हें तो जी भर कर खेलना चाहिए था लेकिन तुम घबरा रही हो ।

बहुत मोटा और लंबा है,,,,,(बस इतना ही बिंदिया के मुंह से निकाला और वह शर्मा कर अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली,,,,, बिंदिया की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली,,,)

लेकिन हम औरतों को लंबा और मोटा ही पसंद है शायद तुम्हारे जीवन में तुमने ऐसा कभी देखी नहीं हो इसलिए तुम घबरा रही हो तुम्हारे पति का भी ऐसा नहीं है ना,,,(लगातार बिंदिया की बुर को मसलते हुए सुगंधा उसे मदहोश करते हुए बोली तो उसकी बात सुनकर बिंदिया धीरे से बोली)

नहीं मेरे पति का ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तभी तो मैं घबरा गई ऐसा देखकर।

इससे पहले तुम्हें क्या लग रहा था लंड छोटा होता है।

बिल्कुल दीदी मैं तो यही सोचती थी लेकिन आज पहली बार ऐसा देखकर मेरी सोच एकदम से बदल गई।

तुम्हारी सोच क्या मेरी खुद की बदल गई थी मैं तो कुछ देर तक देखते ही रह गई थी कि वाकई में असली है या नकली मेरे पति का भी छोटा और पतला है मैं तो पहली बार इसका देख कर पागल ही हो गई थी,,,,,, देखो तुम्हारे हाथ में कितना अच्छा लग रहा है तुम ठीक से पकड़ भी नहीं पा रही हो इतना मोटा और लंबा है,,,।
(सुगंधा की बात सुनकर बिंदिया फिर से शर्मा गई,,,, क्योंकि वह बड़े आराम से अब अंकित के लंड को मुठिया रही थी अंकित मत हुआ जा रहा था और अपना एक हाथ उसकी चूची पर रखकर उसे मसल रहा था सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

असली मजा तो तब मिलेगा जब तुम इसे मुंह में लेकर चुसोगी,,,, एकदम मस्त हो जाओगी,,,,,।
(अपनी मां के मुंह से यह बात सुनकर अंकित एकदम से मस्त हो गया क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि उसकी मां किसी गैर औरत को अपने बेटे का लंड चुसने के लिए उकसाएगी। लेकिन बिंदिया सुगंधा की बात सुनकर उसे सवालिया नजरों से देख रही थी हालांकि इस दौरान वह लगातार अंकित के लंड को मुठिया रही थी अंकित ऐसे ही हवा में उड़ रहा था। उसके मन में उठ रहे सवाल को शायद सुगंधा समझ गई थी इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)
तुम देखी नहीं मुझको कि मैं इसके लंड से कैसे मजा ली सच कहूं तो बहुत मजा आता है। मैं तुम्हारी भावना को समझ सकती हूं क्योंकि तुम गांव की हो शायद यह सब करना तुम्हें पसंद नहीं होगा लेकिन शहर में औरतें इसी तरह से मजा लेती है और इसमें मजा भी बहुत आता है,,, औरत अपनी इस कला से मर्द को दीवाना बना देती है। तुमने कभी अपने पति के साथ ऐसा नहीं की होगी ना।
(अंकित की बात सुनकर बिंदिया केवल ना मे सिर हीला दी उसकी ना सुनकर पल भर का भी विलंब किए बिना अंकित अपने लंड को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से बिंदिया के हाथ को हटाते हुए एकदम से उसकी तरफ सुपाडे को उठाता हुआ बोला,,,)

लो अब यह कर लो जिंदगी का असली सुख ईसी में है,,,,,,,।
(अंकित की हरकत को देखकर बिंदिया का गला उत्तेजना से सूखने लगा वह अपने सूखने गले को अपने थूक से गीला करने की कोशिश करते हुए कभी अंकित के लंड की तरफ तो कभी सुगंधा की तरफ देख रही थी,,, सुगंधा जानती थी कि शुरू-शुरू में एक मर्यादा सील और संस्कारी औरत के मन में हिचकीचाहट होती है,,, इसलिए सुगंधा उसके मन से हिचकीचाहट को दूर करते हुए बोली।)

डरो मत बिंदिया,,, तुम्हें आज ऐसा मजा मिलेगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी शायद इसीलिए हम दोनों का इधर आना हुआ है,,,, और तुम्हारा यहां रुकना हुआ है,,, डरो मत शरमाओ मत ले लो इसका मुंह में और आंख बंद करके चूसना शुरू कर दो और सोचो जैसे तुम्हारे मुंह में आइसक्रीम का कोन है,,,,,।
(सुगंधा की बात सुनकर बिंदिया कोई प्रतिक्रिया दे पाती इससे पहले ही अंकित उसके सर पर हाथ रखकर और अपनी कमर को थोड़ा ऊपर की तरफ उचका कर बिंदिया के मुख नीचे की तरफ करने की कोशिश करने लगा बिंदीया अपने आप को रोक नहीं पाई क्योंकि वह खुद अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती थी क्योंकि उसने सुगंधा को देखी थी इस क्रिया को करते हुए तभी से उसके मन में लंड चूसने की लालच जाग रही थी लेकिन वह शर्म के मारे अपने मुंह से कुछ बोल नहीं पा रही थी पर उसका काम मां बेटे दोनों ने आसान कर दिया था,,,,, अगले ही पर वह खुद अपने लाल-लाल होठों को हल्का सा खोल दी थी यह देखकर अंकित के चेहरे पर सुकून भरी मुस्कराहट आ गई थी और अंकित ने अपने सुपाड़े को उसके लाल-लाल होठों से छुआ दिया एक बार फिर से लंड के सुपाड़े के स्पर्श से बिंदिया गनगना गई। लेकिन अपने होंठ को नहीं हटाई और देखते ही देखते उसके काम को आसान करते हुए अंकित खुदाई अपने लंड को धीरे-धीरे उसके लाल लाल होठों के बीच से अंदर की तरफ गुजारने लगा,,, कुछ ही पल में अंकित का मोटा सुपाड़ा उसके मुंह के अंदर था और वह धीरे-धीरे अपनी जीभ को उस पर घूमाना शुरू कर दी थी,,, उसकी हरकत से अंकित के तन बदन में मदहोशी का नशा घुलने लगा, वह अपनी आंखों को बंद करके एक नई दुनिया में प्रवेश करते हुए बोला।

आहहहहह आहहहा बहुत मजा आ रहा है,,,,,ऊमममममम लाजवाब बिंदिया,,,,,ओहहहहह तुम तो बहुत मस्त चुस रही हो,,,,,आहहहहहह आहहहहहहहह ऐसे ही जीभ घूमाकर,,,,ऊमममममममम।

(अंकित की बात सुनकर बिंदिया की हिम्मत बढ़ रही थी क्योंकि यह वह पहली बार कर रही थी और यह सबसे गंदा अपनी आंखों से देखकर मस्त हो रही थी पहली बार वह अपने बेटे को अपनी आंखों के सामने किसी दूसरी औरत के साथ मजा लेते हुए देख रही थी वह कुछ बोल नहीं रही थी बल्कि इस पल का मजा ले रही थी शायद इसलिए क्योंकि बिंदिया उनके खास पहचान की नहीं थी उन दोनों का रिश्ता दूर-दूर तक कहीं से भी अपना नहीं था दोनों अनजान थे इसलिए शायद सुगंधा अपने बेटे को बिंदिया के साथ मजा लेने दे रही थी और खुद भी ले रही थी वरना एक औरत होने के नाते कोई भी औरत अपने साथी मर्द को किसी गैर औरत के साथ नहीं बांटती। सुगंधा भी अपनी आंख से पहली बार देख रही थी कि एक औरत लंड कैसे चुसती है हालांकि इस क्रिया को वह अपने बेटे के साथ कई बार कर चुकी थी लेकिन यह पहला मौका था जब अपनी आंखों से यह सब देख रही थी। लेकिन अभी तक वह सिर्फ सुपाडे को अपने मुंह में गोल-गोल घूमा रही थी,,,,, सुगंधा का भी मन चूसने को कर रहा था और वह अपनी चुसाई से बिंदिया का हौसला बढ़ाना चाहती थी,,,, इसलिए वह धीरे से उठकर बैठ गई और तख्ते के किनारे झुक गई और बिंदिया के गाल पर चुंबन करने लगी बिंदिया की मदहोशी और ज्यादा बढ़ने लगी,,,,, यह देख कर अंकित की हालत खराब होने लगी,, क्योंकि उसके लिए भी है पहला मौका था जब उसके साथ दो औरतें थी इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। एक बार वह अपनी मां की चुदाई कर चुका था इसलिए वह जानता था कि इस बार उसका लंड और ज्यादा देर तक टिका रहेगा और जब औरत दो और बिस्तर एक तब मर्द का ज्यादा देर तक टिके रहना है उसकी मर्दानगी की असली निशानी है और अंकित को अपनी मर्दानगी पर पूरा भरोसा था।

सुगंधा गहरी गहरी सांस लेते हुए बिंदिया के गाल पर चुंबनों की बौछार लगा दी थी और अंकित धीरे से अपने लंड को बिंदिया के मुंह में से बाहर निकाला और अपनी मां के लाल-लाल होठों पर रगड़ने लगा मौका देखकर सुगंधा भी अपने होंठ को खोल दी और धीरे-धीरे पूरा लंड गपक गई,,,, सुगंधा अपने बेटे के लंड को गले तक ले कर चुस रही थी। और बिंदीया गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,, कुछ देर चूसने के बाद सुगंधा अपने मुंह से लंड निकाल कर बिंदिया की तरफ आगे बढ़ा दी फिर भी दिया उसे धीरे से अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और इस बार भाभी सुगंधा की तरह अपने गले तक जितना हो सकता था अंदर लेकर चूस रही थी और सुगंधा उसकी चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दी थी। खेल पूरी तरह से मदहोशी के चरम पर पहुंच चुका था दोनों औरतें अंकित के लंड को बारी बारी से चूस रही थी अंकित भी अपना लंड बाहर निकाल कर दोनों के गाल पर होंठ पर जी भरकर रगड़ रहा था दोनों औरतें मस्त हो चुकी थी,,,,, कुछ देर तक यह सिलसिला चलता रहा अंकित मानो जैसे किसी रियासत का राजा हो और उसकी दोनों रानियां उसे खुश करने में लगी थी।

अंकित धीरे से बिंदिया की बांह पकड़कर उसे तख्ते पर से खड़ी किया, और एकदम से उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींच लिया और उसके होठों पर अपने होंठ रखकर फिर से उसके होठों का रसपान करने लगा इस दौरान वह अपने दोनों हाथों को उसकी भारी भरकम नितंबों पर रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया था,,,, बिंदिया मदहोश हुए जा रही थी,, सुगंधा भी अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई थी और बिंदिया के हाथ को पकड़ कर उसे अपनी चूची पर रखती थी दबाने के लिए बिंदिया भी सुगंध का इशारा समझ चुकी थी इसलिए वह भी सुगंधा की चूची को दबाना शुरू करती थी उसे एहसास हो रहा था की सुगंध की चूची उसकी चूची से कहीं ज्यादा बड़ी और गोलाकार थी और उसे दबाने में मजा भी आ रहा था बिंदिया का भी है पहला मौका था जब वह किसी औरत की चूची से खेल रही थी। साड़ी के ऊपर से ही बिंदिया की गांड को जोर-जोर से दबाते हुए अंकित धीरे-धीरे उसकी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया था यह एहसास होते ही बिंदिया का बदन कम आने लगा क्योंकि वह जानती थी कि थोड़ी देर में अंकित उसे नंगी कर देगा,,,, और ऐसा ही हुआ अंकित बिंदिया की साड़ी खोलकर साड़ी को नीचे गिरा दिया था और वह सिर्फ केवल पेटीकोट में थी,,,, अंकित की बाहों में बिंदिया मचल रही थी कसमसा रही थी अपनी जवानी की गर्मी को पिघला रही थी देखते ही देखते अंकित ने पेटिकोट की डोरी को अपने हाथ से पकड़ा और उसे खींच दिया पेटिकोट की डोरी कमर से एकदम ढीली पड़ चुकी थी लेकिन नितंबों के उभार के आधार पर टीकी हुई थी। जिसे अंकित अपने हाथों की उंगलियों के सहारे से नीचे की तरफ सरकाने लगा वह बिंदिया को नंगी कर रहा था अपनी मां की आंखों के सामने,,, इसका एहसास उसे भी था इसलिए उसके बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी और देखते ही देखते वह अपनी मां की आंखों के सामने ही उसकी पेटीकोट को उसके कदमों में गिरा दिया और वहां उसकी बाहों में एकदम से नंगी हो गई। पेटिकोट के उसके कदमों में गिरते ही सुगंधा की नजर एकदम से उसके नितंबों के ऊभार पर गई जो की बेहद आकर्षक लग रही थी वैसे तो बिंदिया किसी भी सूरते हाल में सुगंधा जैसी खूबसूरत और आकर्षक बदन वाली नहीं थी लेकिन फिर भी एक औरत को दूसरी औरत ही अच्छी लगती है यहां पर भी सुगंधा बिंदिया की खूबसूरती पर आकर्षित हुए जा रही थी,,,,

सुगंधा धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाकर बिंदिया की सुडौल गांड पर हाथ रखकर उसे सहलाने लगी बिंदिया को भी सुगंधा की हरकत अच्छी लग रही थी,,,,, पूरी तरह से नंगी करने के बाद उत्तेजना में अंकित फिर से उसे अपनी बाहों में कस लिया था और उसकी गांड पर दोनों हाथ रखकर जोर-जोर से दबा रहा था हालांकि उसकी गांड पर सुगंधा का भी हाथ था वह भी मजे ले रही थी और बिंदिया थी कि पानी पानी हुए जा रही थी,,,,, सुगंधा उसकी गांड को सहलाते हुए बोली।

वैसे तो तुम भी बहुत खूबसूरत हो बिंदिया तुम्हारी गांड की खूबसूरती देखकर तो मेरे मुंह में पानी आ रहा है। सच में तुम भी दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी अपने बदन को एकदम कसा हुआ बनाकर रखी हो,,,।
(एक औरत के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर बिंदिया के तन बदन में हलचल सी मच रही थी उसे अच्छा लग रहा था और गर्व महसूस हो रहा था जो कि आज तक उसे ऐसा महसूस नहीं हुआ था,,, क्योंकि जिंदगी की भागदौड़ में अपने परिवार को संभालने की प्राथमिकता में वह अपने आप पर बिल्कुल भी ध्यान ही नहीं देती थी वह यह बात भी भूल चुकी थी कि वह भी एक औरत है खूबसूरत है जवानी से भरी हुई है लेकिन इस बात का एहसास उसे अब हो रहा था,,,,,, अंकित पागलों की तरह उसकी गर्दन पर उसके गाल पर उसके होठों पर चुंबनों की बारिश कर दे रहा था वह भी कभी सपने में नहीं सोची थी की बेटे की उम्र का लड़का उसकी खूबसूरती पर इस तरह से पागल हो जाएगा। धीरे से उसे बाहों में नहीं होगी अंकित अपने हाथ को उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर रखकर मसलने लगा बिंदिया कसम सनी लगी उसके मुंह से अजीब अजीब सी आवाज निकलने लगी।

ऊममममम,आहहहहहहहह,,,ऊमममममममम ओहहहहह,,,,,सहहहहहहहह आहहहहहआहहहहह,,,,(और अंकित था किस तरह की आवाज सुनकर और भी ज्यादा जोश से भर जा रहा था,,,,, उसे अपनी मां की तरफ से पूरी छूट मिल चुकी थी इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था इसलिए वह इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहता था वह एकदम से दीदी आपकी कमर पकड़ कर उसे अपनी गोद में उठा दिया और धीरे से तख्ते पर लाकर लेटा दिया उसकी मर्दाना ताकत को देखकर बिंदिया भी पानी पानी हो गई उसे उम्मीद नहीं थी कि वह उसे इतनी आसानी से उठा लेगा,,,, वह तख्ते पर लेटी हुई थी अपनी दोनों टांगों को आपस में सताए अपनी जवानी को छुपाने की भरपूर कोशिश कर रही थी दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसकी बुर केवल पतली दरार के रूप में दिखाई दे रही थी और हल्के हल्के बाल उगे हुए थे,,,,,, उसको इस तरह से शर्माते हुई देखकर अंकित बोला)

शर्माने से कोई फायदा नहीं है,,, मजा लेने के लिए तुम्हें भी छिनार बनना पड़ेगा तभी तुम खुलकर मजा ले पाओगी,,,।
(अपने लिए अंकित के मुंह से छिनार शब्द सुनकर वह शर्म से पानी पानी हो गई और अपनी आंखों को बंद कर ली उसकी यह अदा अंकित को उसका दीवाना बना रही थी अंकित धीरे से उसकी टांगों को खोलने लगा वह शर्माने लगी देखते-देखते अंकित उसकी दोनों टांगों को फैला दिया था उसकी गुलाबी बुर एकदम साफ दिखाई दे रही थी बिंदिया की गुलाबी बुर देखकर अंकित की आंखों में चमक साफ दिखाई दे रही थी,,,, बरसात अपने जोर पर था,,, ऐसा लग रहा था कि सुबह तक बारिश रुकने वाली नहीं है,,, और यही तो तीनों चाहते भी थे बारिश में चुदाई का मजा ही कुछ और होता है,,,, अंकित धीरे से उसकी दोनों टांगों के बीच तख्ते पर अपना घुटना रखकर तख्ते के ऊपर चढ़ गया और धीरे-धीरे उसकी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा बिंदिया अपनी आंखों को खोल चुकी थी उसे लग रहा था कि अब अंकित अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालेगा सुगंधा तख्ते के नीचे खड़ी होकर मुस्कुराते हुए यह सब देख रही थी लालटेन के पीली रोशनी में सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था। देखते ही देखते अंकित अपने हाथ को आगे बढ़कर बिंदिया की बुर को अपनी उंगली से हल्के से खोलने लगा उसमें से मादक खुशबू उठ रही थी और उसे मादक खुशबू को अंकित धीरे से अपनी नाक उसे पर रखकर जोर से खींचने लगा मादक खुशबू उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा भर रही थी,,,, अंकित बुर की मादकता भरे नशे मैं डूबने लगा था और अपने ही पर अपने प्यास होठों को वह बिंदिया की बुर पर रख दिया वह इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी उसका बदन एकदम से अकड़ गया और अगले ही पल वह अपनी गांड को ऊपर की तरफ हवा में उठा ली वह उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुकी थी अंकित बिल्कुल भी देर ना करते हुए उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और उसे फिर से तख्ते पर दबाते हुए उसके गुलाबी बुर को पागलों की तरह चाटना शुरू कर दिया।

बिंदिया कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि कोई जवान लड़का उसकी बुर को चाटेगा प्यार करेगा उसे अद्भुत आनंद देगा यह सब बिंदिया के लिए सपने से कम नहीं था,,,,,, अंकित बिंदिया के ऊपर छा चुका था। वह उसकी मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर उसे काबू में किए हुए उसकी बुर की चटाई कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि बिंदिया यह सब पहली बार करवा रही थी जिससे वह अपनी उत्तेजना को काबू में नहीं कर पा रही थी और तख्ते पर छटपटा रही थी। और यही अंकित कौर भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था बिंदिया की छटपटाहट देखकर सुगंधा से भी रहा नहीं जा रहा था, वह खड़े-खड़े ही अपनी हथेली से अपनी बुर को मसल रही थी,,,,, लेकिन सुगंधा ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाई वह भी धीरे से तख्ते के ऊपर चढ़ गई,,,,, और अगले ही पल उसने वह हरकत की जिसके बारे में अंकीत ने कभी सोचा नहीं था,,, सुगंधा की पीठ अंकित की तरफ थी और सुगंधा अपने घुटनों को बिंदिया के कंधों के ईर्द-गिर्द रखकर उसके मुंह के ऊपर अपनी गांड किए हुए थी अभी तक बिंदिया को भी समझ में नहीं आ रहा था की सुगंध क्या कर रही है लेकिन अंकित समझ गया था कि उसकी मां क्या करने वाली और उसकी यह सजा उसे और ज्यादा उत्तेजित कर दी थी और वह बिंदिया की बुर को चाट रहा था,,,, देखते ही देखते सुगंधा तख्ते के आगे की तरफ झुक गई और घुटनों के बाल हो गई लेकिन इस दौरान वह अपनी बुर को बिंदिया के चेहरे पर रगड़ने लगी,,,, बिंदिया की हालत खराब होने लगी क्योंकि उसके बुर से निकलने वाला मदन रस उसके चेहरे को भिगो रहा था पहले तो थोड़ा अजीब लगा लेकिन बार-बार सुगंधा अपनी बुर की पतली दरार को उसके होठों पर रगड़ रही थी और अपने आप ही बिंदिया के होंठ खुल गए और वह सुगंधा की जवानी के आकर्षण में खोते हुए अपने आप ही उसकी बुर को चाटना शुरू कर दी,,,,।

बुर से निकलने वाले मदन रस का स्वाद बिंदीया के लिए एकदम नया था हल्का कसैला खारापन लिया हुआ मदन रस धीरे-धीरे उसे अच्छा लगने लगा और वह अपने दोनों हथेलियों को सुगंधा की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसकी बुर को चाटना शुरू कर दी यह देखकर अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी वह बिंदिया की बुर में एक साथ अपनी दो उंगली डालकर अंदर का मुआयना करने लगा कि उसका लंड आराम से जा पाएगा कि नहीं जल्द ही अंकित को एहसास होने लगा कि वाकई में उसकी बुर में बहुत दिनों से लंड नहीं घुसा था क्योंकि बुर एकदम कसा हुआ था। उसका कसाव बरकरार था,, आज उसे फिर से कस३ हुई बुर चोदने के लिए मिलने वाली थी इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। देखते ही देखते झुग्गी के अंदर सुगंधा की सिसकारी की आवाज गुंजने लगी थी सुगंधा अपनी बड़ी-बड़ी भारी भरकम गोल-गोल गांड को गोल-गोल घूमाते हुए बिंदीया के चेहरे पर रगड़ रही थी। बिंदिया को सुगंधा की हरकत देखकर ताज्जुब भी लग रहा था कि एक औरत औरत के साथ इतना मजा कैसे ले सकती है लेकिन इस बात को इनकार भी नहीं कर पा रही थी कि वाकई में औरत के साथ भी ज्यादा मजा आता है। बिंदिया को भी एहसास होने लगा था कि वाकई में बेशर्म बनने में ही ज्यादा मजा है। कुछ देर तक अंकित अपनी उंगली को गोल-गोल घूमता हुआ बिंदिया की बुर में अपने लंड के लिए जगह बना रहा था। फिर धीरे से उठकर खड़ा हो गया क्योंकि उसकी कमर थोड़ा दर्द करने लगी थी वह अपना हाथ इधर-उधर घूम कर अपने आप को व्यवस्थित करने लगा और फिर जब उसे आराम महसूस हुआ तो हुआ फिर से घुटनों के बल बिंदिया की टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा,,,,, अंकित जानता था कि अब समय आ गया था वीडियो की चुदाई का वह बिंदिया की तरफ देख रहा था बिंदिया उसकी मां की गांड और बुर चाटने में व्यस्त थी वह अपनी मां की बेशर्मी को भी देख रहा था। छिनार बनने के बाद उसकी मां और भी ज्यादा खूबसूरत लगती थी।

वह धीरे से बिंदिया की गांड के नीचे अपने दोनों हाथ को ले जाकर के उसे थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठाया और अपनी जांघों पर रख दिया बिंदिया का बदन कमसाने लगा क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि अब अंकित क्या करने वाला है और अगले ही पर बिटिया को अपनी बुर पर अंकित के मोटे तगड़े लंड की धमक सुनाई देने लगी अंकित अपने लंड के सुपाड़े को उसकी बुर पर पटक रहा था जिससे बिंदीया की हालत खराब हुए जा रही थी,,,,,,, अंकित ढेर सारा तोक अपने लंड की सुपाड़े के साथ-साथ उसकी बुर पर भी गिराया ताकि चिकनाहट बरकरार रहे,,, और अगले ही पल अपने मोटे तगड़े सुपाड़े को बिंदिया की गुलाबी छेद पर रखकर उसे अंदर की तरफ ठेलने लगा। बिंदिया खुशी से भावुक हुए जा रही थी क्योंकि वह कभी सोची भी नहीं थी कि अब उसे किसी मर्द के द्वारा शरीर सुख मिलेगा वह इस उम्मीद को छोड़ ही चुकी थी लेकिन आज की रात उसके जीवन में बदलाव लेकर आया था और वह अंदर ही अंदर बहुत खुश नजर आ रही थी मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को अपनी बुर के मुहाने पर महसूस करके ही गदगद हुए जा रही थी। धीरे-धीरे अंकित अपने सुपाड़े को अंदर की तरफ सरका रहा था। बिंदिया की सांस ऊपर नीचे हो रही थी। लेकिन इसके बावजूद भी वह सुगंधा की खूबसूरत रसीली बुर को चाटने की लालच को रोक नहीं पा रही थी और लगातार जीभ से चाट भी रही थी। बिंदिया को भी एहसास हो रहा था कि वाकई में अंकीत लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिसे अंदर लेने में उसे भी तकलीफ हो रही थी।

फिर भी बुर की अंदरूनी चिकनाहट पाकर अंकित का मोटा तगड़ा लंड भी धीरे-धीरे अंदर की तरफ प्रवेश कर रहा था और जैसे-जैसे अंदर की तरफ घुस रहा था वैसे-वैसे खुद अंकित के चेहरे का हाव-भाव बदल रहा था उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,, काफी मशक्कत करने के बाद अंकित का लंड का सुपाड़ा बिंदिया की गुलाबी बुर के अंदर प्रवेश कर चुका था यह अंकित के लिए किसी फतेह से कम नहीं था। जैसे-जैसे अंकित आगे की तरफ बढ़ रहा था वैसे-वैसे भी दिया की हथेली का कसाव सुगंधा की भारी भरकम गांड पर बढ़ता जा रहा था। बारिश के ठंडा मौसम के बावजूद भी अंकित के माथे पर पसीना टपक रहा था क्योंकि उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसे कितनी मेहनत लग रही थी लेकिन उसकी मेहनत रंग भी ला रही थी। देखते देखते अंकित का आधा लंड बिंदिया की बुर में प्रवेश कर चुका था काश यह नजारा बिंदिया अपनी आंखों से देखी तो और भी ज्यादा मस्त हो जाती लेकिन फिर भी उसकी मदहोशी चरम पर थी क्योंकि वह सुगंधा की खूबसूरत बुर की चटाई कर रही थी जिस पर आज तक केवल अंकित ही विजय प्राप्त कर पाया था। माहौल पूरी तरह से मदहोश हो चुका था तेज झोंका के साथ ताड़पत्री अंदर की तरफ उड़ कर आ जा रही थी लेकिन फिर भी तेज तूफानी बारिश में यह ताड़ पत्री किसी महल से कम नहीं था। अंकित का आधा लंड घुस चुका था, बस आधा घुसाना बाकी था,, अंकित दोनों हाथों से बिंदिया की कमर को थाम लिया था,,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर वह उत्तेजित वह जा रहा था चार बोतलों का नशा उसकी आंखों में साफ दिखाई दे रहा था बिना शराब पिए ही वह नशे में धुत्त हो चुका था क्योंकि यह शराब नशा नहीं था बल्कि दो दो जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरतों का नशा जिसके नशे के आगे दुनिया का हर नशा फीका पड़ जाता है।

अगले प्रहार के लिए अंकित पूरी तरह से तैयार हो चुका था और कचकचा कर जोरदार प्रहार किया इस बार बाकी बचा लंड बुर के अंदरूनी भाग में सारी अड़चनो को दूर करता हुआ सीधा चलकर उसके बच्चेदानी से टकरा गया और सुगंधा की बुर चाटने के बावजूद भी उसके मुंह से चीख निकल पड़ी।

हाय दइया मर गई रे,,, आहहहहहह क्या घुसा दिया तूने मेरी बुर में,,,,आहहहहहहहह,,,.
(उसकी चीख सुनकर सुगंधा समझ गई थी कि उसके बेटे का लंड उसकी बुर में घुस चुका है और वह पीछे की तरफ नजर घूमर अंकित की तरफ देख रही थी अंकित ने धीरे से अपनी आंख दबाकर उसे आंख मार और सुगंधा उसका हौसला बढ़ाते हुए बोली)

बस बस हो गया पूरा घुस चुका है अब देखना कितना मजा आएगा मेरी रानी बस तुम मेरी बर चाटो,,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी गांड को उसके चेहरे पर रगड़ने लगी और पटकने लगी हालांकि वह दर्द से बिलबिला गई थी लेकिन सुगंधा के सूझबूझ से थोड़ी ही देर में उसका दर्द एकदम से गायब हो गया और वह आनंद के सागर में गोते लगाने लगी और अंकित उसकी कमर पकड़ कर धीरे-धीरे उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया वाकई में बिंदिया को चोदने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, सुगंधा अपने हाथ से अपनी चूची को दबाते हुए लगातार अपनी गांड को बिंदिया के चेहरे पर पटक रही थी। इस क्रिया को करने में सुगंधा को भी बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी पहली बार वह किसी औरत के साथ मजा रोक रही थी पहली बार वह किसी औरत को अपनी बुर बर चटवा रही थी। और पल भर के लिए भी उसे ऐसा नहीं लगा था कि उसे औरत के साथ मजा नहीं आ रहा है बल्कि उसे और ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि वह बिंदिया के साथ मनमानी कर रही थी बिंदिया का चेहरा पूरी तरह से उसके मदन रस में सन चुका था। बिंदिया को भी मजा लेता देखकर सुगंधा उसके ऊपर से धीरे से उठकर वहीं पास में ही बैठ गई और बिंदिया की चुदाई देखने लगी,,,, उसकी चूची को धीरे-धीरे दबाते हुए वह बोली।

मुझे तो लग रहा था मेरी रानी अपनी बुर में नहीं ले पाएगी लेकिन देखो तो सही कितने आराम से अंदर बाहर हो रहा है,,,,,।
(उत्तेजना और चेहरे से बिंदिया का मुंह खुला हुआ था और गहरी गहरी सांस ले रही थी और सुगंधा की बात सुनकर वह अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर वह अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगी वाकई में उसे आश्चर्य हो रहा था कि अंकित का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से उसकी बुर की गहराई तक घुस रहा था और हर एक धक्का उसके बच्चेदानी पर ठोकर लगा रहा था जहां तक आज तक उसने कभी लंड को महसूस नहीं कर पाई थी। बिंदिया खुलकर मजा ले रही थी उसके मुंह से हल्के हल्के शिसकारी की आवाज निकल रही थी,,,,, बिंदिया को मजा लेता देखकर सुगंधा से भी रहा नहीं गया और सुगंधा बिंदिया के ऊपर चढ़कर अपनी गांड को अपने बेटे की तरफ करके वह बिंदिया के ऊपर झुक गई और अपने बेटे से बोली,,,,,)

मुझे भी पेल मेरे राजा,,,, मेरी बुर में भी अपना लंड भर दे मेरे बच्चे,,,,,आहहहह मुझे रहा नहीं जा रहा मेरे राजा,,,,,,(ऐसा कहकर वह अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को अंकित की आंखों के सामने नचाने लगी,,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर हम किसी रानी के और वह धीरे से अपने लंड को बिंदिया की बुर में से बाहर निकाला और अपनी मां की बुर में डाल दिया,,,,,, अपनी मां की कमर पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया दूसरी तरफ बिंदीया के मुंह पर सुगंधा की बड़ी-बड़ी चूचियां दशहरी आम की तरह लटक रही थी जिसे देखकर बिंदिया से रहा नहीं गया और वहां सुगंधा की दोनों चूचियों को पकड़कर बारी-बारी से अपने मुंह में डालकर चूसना शुरू कर दी,,,, सुगंधा को दोनों तरफ से मजा मिल रहा था पीछे से अंकित मजा दे रहा था और आगे से बिंदिया,,,, कुछ धक्के अपनी मां की बुर में लगाने के बाद वह अपनी मां की बुर में से लंड को बाहर निकाला और वापस बिंदिया के बुर में डाल दिया ऐसा करके वह बार-बार बारी-बारी से अपनी मां और बिंदिया दोनों की चुदाई कर रहा था। सुगंधा तो नहीं लेकिन बिंदिया पूरी तरह से हैरान थी उसे बड़ा ताज्जुब हो रहा था कि एक जवान लड़का दो उम्र में बड़ी औरतों को कैसे आराम से चोद रहा है,, वाकई में इसे ही असली मर्द कहते हैं। दोनों औरतों को बराबर मजा मिल रहा था। दोनों औरतों के मुंह से सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,,,, लेकिन बिंदीया अपने चरम पर पहुंचने वाली थी उसका बदन अकड़ रहा था इसका एहसास अंकित को हो गया था इसलिए वह बिंदीया पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देते हुए उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने लंड को बड़ी तेजी से अंदर बाहर कर रहा था और उसका हर एक धक्का बिंदिया को संतुष्टि का एहसास दिला रहा था बिंदीया कभी सोची भी नहीं थी कि इस तरह से की चुदाई होती है इतनी जबरदस्त और धमाकेदार चुदाई उसने आज तक नहीं करवाई थी इसलिए तो वह पानी पानी हुई जा रही थी हर एक धक्के पर वह हवा में जैसे उड़ रही हो।

देखते ही देखते बिंदिया के मुंह से निकलने वाली शिसकारी की आवाज तेज हो गई।

सहहहहह आहहहहह मैं झढ़ने वाली हूं दीदी,,,,आहहहह आहहहहह मुझे कुछ हो रहा है,,,,ऊमममममममम आहहहहहहहह और जोर से चोदो मुझे आहहहहहह।

चिंता मत कर मेरी छिनार तुम दोनों छिनार को आज पानी पानी कर दूंगा,,,,आहहहहहह बहुत कसी हुई बुर है तेरी आज तुझे चोदने में मुझे बहुत मजा आ रहा है और तुझे पूरी तरह से छिनार बना दूंगा,,, मेरी भोसड़ा चोदी,,,आहहहहहह आहहहहहल कितनी गम बुर है तेरी,,,,,,ऊमममममममम,,,(अंकित लगातार गंदी गालियां देते हुए बिंदिया की चुदाई कर रहा था लेकिन बिंदिया को उसकी गाली का बिल्कुल भी बुरा नहीं लग रहा था बल्कि अंकित के मुंह से निकलने वाली गाली सुनकर उसका जोश और भी ज्यादा बढ़ जा रहा था उसका आनंद बढ़ रहा था उसे ज्यादा मजा आ रहा था। देखते ही देखते हैं वह सुगंधा की चूचियों को दोनों हाथों से कस के पकड़ ली क्योंकि वह झड़ने के एकदम कगार पर थी,,,,, अंकित भी जोर-जोर से धक्के लगा रहा था अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर के अंदरूनी दीवारों पर रगड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था जिससे दोनों का मजा दुगना हो जा रहा था। और फिर अगले ही पल बिंदिया भल भला कर झड़ने लगी,,,,,, झड़ते समय उसका पूरा बदन एकदम कड़क हो गया था शायद बरसों बाद वह इस तरह का सुख प्राप्त कर रही थी अंकित भी एक पल के लिए भी अपनी रफ्तार कम किए बिना ही उसकी चुदाई कर रहा था वह तब तक उसकी चुदाई करता रहा जब तक कि वह एकदम शांत नहीं हो गई। लेकिन अब बारी थी सुगंधा की सुगंध पूरी जोश से भरी हुई थी अपने बेटे को बिंदिया की चुदाई करते हुए देखकर कर वह मदहोश हो चुकी थी। वह फिर से अपनी गांड को हिलाना शुरू कर दी क्योंकि अभी भी उसके बेटे का लंड अभी भी बिंदिया की बुर में घुसा हुआ था,,,,,, उससे रहा नहीं जा रहा था और वह मदहोश होते हुए अपने बेटे से बोली।

आप क्या घुसेड के बेठा है मेरे राजा,,,, इस छिनार की बुर में,,,, अभी छिनार की बुर में से अपने लंड को निकाल कर अपनी इस छिनार की बुर में डाल दे,,,, डाल दे मेरे बेटे अपने लंड को अपनी मां की बुर में,,,, चोद मुझे फाड दे अपनी मां की बुर,,,,।
(सुगंधा की बात सुनकर अंकित एकदम से हैरान हो गया क्योंकि वह खुद ही अपने मुंह से उन दोनों के रिश्ते को बिंदीया के सामने उजागर कर रही थी बिंदीया भी सुगंधा की बात सुनकर एकदम हैरान हो गई थी,,,,, उसे तो अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था कि यह वह क्या बोल रही है लेकिन अपनी मां की बात सुनकर अंकित की पूरी तरह से जोश में आ गया था और अपनी मां के सुर में सुर मिलाते हुए वह भी बोला,,,)

चिंता मत कर मेरी रंडी मां,,,, मेरी छिनार आज तेरा बेटा तेरी बुर का कैसे भोसड़ा बनाता है देखना,,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित अपने लंड को बिंदिया के बुर में से निकाल कर सीधा अपनी मां की बुर में डाल दिया जिससे सुगंधा की चीख निकल गई और उसकी चीकू की आवाज सुनकर अंकित खुश होता हुआ बोला।)

ले भोसड़ा चोदी बहुत चुदवाने का मन है ना तेरा ले अपनी मां के भोसड़े में कैसे लंड डाला जाता है देख मैं तुझे दिखा रहा हूं,,, मेरी रंडी छिनार।

(दोनों की बातें सुनकर बिंदिया हैरान हो गई थी। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था दोनों एक दूसरे को प्रेमी प्रेमिका बताते थे लेकिन अब एक दूसरे को मां बेटा कहकर संबोधन कर रहे हैं गंदी गंदी गालियां दे रहे हैं इन दोनों के बीच रिश्ता क्या है कैसा रिश्ता है यह सब भी दिया को समझ में नहीं आ रहा था लेकिन जिस तरह से दोनों एक दूसरे को मां बेटे के रिश्ते में संबोधन करके चुदाई का मजा लूट रहे थे वह बिंदिया के तन बदन में भी आग लग रहा था। अंकित तब तक अपनी मां को चोदता रहा जब तक की दोनों झड़ नहीं गए। झड़ने के बाद अंकित कुछ देर तक अपनी मां के ऊपर पसर गया था और अभी भी बिंदिया सुगंधा के नीचे ही थी और उसकी दोनों चूचियों को हाथों से पकड़ कर दबा रही थी। तीनों झड़ चुके थे तीनों की जवानी की गर्मी शांत हो चुकी थी धीरे से अंकित अपनी मां की बुर में से लंड को बाहर निकाल लिया, कुछ देर वह इस तख्ते पर बैठा रह गया दोनों औरतें पीठ के बल लेट कर गहरी गहरी सांस ले रही थी अंकित में जो मजा उन्हें दिया था वह दोनों कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी सुगंधा तो हालांकि रोज ही इस तरह का मजा लूट रही थी लेकिन बिंदिया के लिए यह नया था उसकी सोच से परे था। तीनों एक दूसरे की तरफ देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहे थे बिंदिया भी मुस्कुरा रही थी लेकिन उसके मन में तूफान मचा हुआ था वह दोनों के रिश्ते के बारे में पूछना चाहती थी लेकिन पूछने की हिम्मत नहीं हो रही थी थोड़ी देर बाद सुगंधा धीरे से उठकर दरवाजे की तरफ जाने लगी क्योंकि उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी उसे देखकर बिंदिया भी उठकर खड़ी हो गई और उसकी तरफ जाकर वह भी उसके साथ ही बैठ गई पेशाब करने के लिए बारिश अभी भी हो रही थी लेकिन अब थोड़ा कम हो गई थी,,,, दोनों को पेशाब करता हुआ देखकर अंकित से भी रहा नहीं गया और वह भी जाकर दोनों के पास खड़ा होकर पेशाब करने लगा,,,,, मां बेटे तो इस तरह से कई बार पेशाब कर चुके थे साथ में मिलकर लेकिन किसी तीसरी औरत के साथ दोनों मां बेटे का यह पहला अनुभव था चुदाई का भी और पेशाब करने का भी तीनों संपूर्ण रूप से नग्न वस्था में ही थे। बिंदिया को पेशाब करता हुआ देखकर,,, अंकित फिर से उत्तेजित होने लगा था दो बार झड़ चुका था लेकिन किसी गैर औरत को पेशाब करते हुए देखकर वह फिर से मदहोश हो रहा था बिंदिया पेशाब कर चुकी थी इसलिए उसका हाथ पकड़ कर उसे खड़ी कर दिया बिंदिया कुछ समझ पाती इससे पहले ही वह फिर से उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों का रसपान करने लगा। यह देखकर सुगंध मुस्कुराते हुए बोली।

देखिए मेरे बेटे की ताकत को दो बार पानी निकल चुका है लेकिन फिर भी तुम्हारी जवानी देखकर इसका लंड खड़ा हो गया इसे कहते हैं असली मर्द,,,(सुगंधा साफ तौर पर बिंदिया को बता रही थी कि अंकित मेरा लड़का है और यह सुनकर बिंदिया भी सकपका जा रही थी लेकिन अपने मुंह से पूछने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी और अंकित उसकी जवानी से फिर से खेलना शुरू कर दिया था देखते देखते वह बिंदीया को अपनी गोद में उठा लिया था उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर में लपेटकर वह अपने लंड को उसकी बुर में डालने की कोशिश कर रहा था लेकिन जिस तरह से वह अपनी गोद में उठाया था बिंदिया डर रही थी इसलिए वह बोली।

मुझे नीचे उतारो मुझे डर लग रहा है कहीं गिर गई तो।

चिंता मत कर बिंदिया रानी यह मेरा बेटा है तेरा वजन तो मेरे से कम है मेरा बेटा मुझे भी अपनी गोद में लेकर चुदाई करता है,,,,(ऐसा कहते हुए वह खुद ही अपने बेटे के लंड को पकड़ कर बिंदिया की बुर के मुहाने पर रखकर अपने बेटे को रास्ता दिखा रही थी अंकित ठीक तरह से उसे गोद में उठाए हुए अपनी कमर को ऊपर की तरफ उसका कर अपने लंड को दुनिया की बुर में डाल दिया उसे गोद में उठाए हुए चोदना शुरू कर दिया बिंदिया हैरान थी उसके दिमाग में ढेर सारे सवाल चल रहे थे और जिस तरह से उनकी तो उसकी चुदाई कर रहा था उसकी मर्दाना ताकत को देखकर वह आश्चर्य में पड़ गई थी,,,, क्योंकि कुछ भी हो उसका वजन कम बिल्कुल भी नहीं था लेकिन बड़े आराम से अंकित उसे गोद में उठाकर उसकी चुदाई कर रहा था,,,,, बिंदिया की बड़ी-बड़ी गांड उसकी गोद में उछल रही थी यह देखकर सुगंध से रहा नहीं गया और वह बिंदिया के पीछे जाकर वह भी उसके नितंबों के नीचे हाथ रखकर उसकी गोलाकार गांड पर अपनी बुर को रगड़ने लगी बिंदीया हैरान परेशान होकर चुदाई का मजा ले रही थी। उन दोनों के बीच के रिश्ते का सवाल तो उसके दिमाग में घूम ही रहा था लेकिन जिस तरह का सुख अंकित उसे दे रहा था वह पूरी तरह से भूल चुकी थी और इस पल में अपने आप को खो दी थी। बिंदिया एकदम मस्त होकर अपनी बाहों का हार अंकित के गले में डाल दी थी।

अरे आराम से अंकित का लंड उसकी बुर मे फचर फीचर करके अंदर बाहर हो रहा था जिससे बिंदिया को भी मजा आ रहा था वह कभी सोचा नहीं थी कि उसे इस तरह का सुख एक ही रात में मिल जाएगा एक ही रात में आज अंकित ने उसे औरत होने का सुख प्रदान किया था एक औरत होने का गर्व का एहसास दिलाया था। अंकित तब तक अपनी कमर हिलता रहा जब तक कि वह बिंदिया को संतुष्ट करके खुद नहीं झड़ गया,,,, इसके बाद तीनों एक ही तख्ते पर एक दूसरे की बाहों में सो गए लेकिन अभी-अभी बिंदिया के मन में उन दोनों के रिश्ते को लेकर सवाल घूम रहा था,,,,।

बरसात बंद हो चुकी थी। पंछियों की आवाज के साथ ही तीनों की नींद खुलने लगी,,, वासना का तूफान शांत होने के बाद बिंदिया अपनी हालत पर गौर की तो शर्म से पानी पानी हो गई और जल्दी से अपने कपड़े पहन कर अपने नंगे बदन को छुपाने की कोशिश करने लगी सुगंध मुस्कुरा रही थी उसके कपड़े भी सूख चुके थे इसलिए वह अपने कपड़े पहनकर तैयार हो गई थी अंकित अभी भी नंगा था और दोनों औरतों को देखकर मुस्कुरा रहा था बड़ी हिम्मत करके बिंदिया अंकित के लंड की तरफ देखते हुए बोली।

दीदी कल रात से ही मेरे मन में एक सवाल घूम रहा है अगर इजाजत हो तो पूछुं,,,।

हां पूछो,,,,।

तुम दोनों के बीच रिश्ता क्या है पहले तो तुम दोनों कह रहे थे कि प्रेमी प्रेमिका हो तुम दोनों की उम्र देखकर लगता नहीं है लेकिन रात को चुदाई करवाते समय तुम बेटा बोल रही थी और यह तुम्हें मम्मी कह रहा था मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूं।
,(बिंदीया की बात सुनकर मां बेटे दोनों मुस्कुराने लगे और बड़े इत्मीनान से सुगंधा जवाब देते हुए बोली)

देखो इस शहर में हम दोनों को कोई नहीं जानता कि हम दोनों कौन हैं कहां से आए हैं अगर कोई जानता भी होगा तो प्रेमी प्रेमिका के रूप में लेकिन तुम एकदम खास बन चुकी हो इसलिए तुम्हें मैं बता रही हूं कि हम दोनों के बीच क्या रिश्ता है यह मेरा बड़ा बेटा है और मैं इसकी मां हूं,,,,।

क्या,,?(इतना सुनते ही बिंदीया के होश उड़ गए,, उसे अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था इसलिए वह फिर से बोली,,,)

मुझे यकीन नहीं हो रहा है सच-सच बताओ ना दीदी,,,,।
(इस बार अपने लंड को हिलाते हुए अंकित मुस्कुराते हुए बिंदिया से बोला)

हम दोनों सच कह रहे हैं मेरी छिनार यह मेरी मां है और मैं इसका बेटा और मेरे से बड़ी एक बहन है जो नानी के वहां गई है हम दोनों घर पर अकेले थे इसलिए मजा करने के लिए इधर आ गए,,,,।

बाप रे तुम दोनों मां बेटे हो मुझे तो अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा है,,,,,।

मैं सच कह रहा हूं मेरी जान,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित बिंदिया कहां पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया वह अभी भी पूरी तरह से नंगा था और इस तरह की बात करते हुए उसका लंड खड़ा हो गया था और सही मायने में मां बेटे दोनों के बीच के रिश्ते को जानकर खुद भी दिया की बुर में पानी का उबाल उठ रहा था और जल्दी अंकित बिना देर किए उसे घोड़ी बना दिया और उसकी साड़ी को उसकी कमर तक उठते हुए पीछे से उसकी बुर में लंड डाल दिया वह कुछ बोल पाती समझ पाती इससे पहले अंकित अपने लंड को उसकी बुर में डालकर उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया था और वह भी अपनी मां की आंखों के सामने,,,, बिंदिया भी एकदम से उत्तेजित हो गई थी वह कभी सपने में नहीं सोची थी की मां बेटे के बीच में इस तरह का रिश्ता हो सकता है और आज सोचने का तो दूर वह अपनी आंखों से देख ली थी की मां बेटे के बीच भी शारीरिक संबंध स्थापित हो सकता है बस दोनों के बीच समझदारी होना चाहिए जरूरत होना चाहिए,,,, यहां से जाते-जाते अंकित उसे एक बार फिर से चुदाई का सुख प्रदान कर रहा था ब्लाउज के ऊपर से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर दबाता हुआ अपने धक्के को तेज कर दिया था और ना चाहते हुए भी बिंदिया को अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं हो पा रहा था और उसके मुंह से शिकारी की आवाज निकल रही थी यह देखकर सुगंधा भी खुश हो रही थी सुगंध से भी रहा नहीं गया और वह ठीक बिंदिया की आंखों के सामने खड़ी होकर अपनी साड़ी कमर तक उठा दी थी लेकिन इस बार बिंदिया ही अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर सुगंधा की कमर पड़कर उसे अपनी तरफ खींच ली और अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर रखकर से चाटना शुरू कर दी मां बेटे के साथ-साथ बिंदिया भी मदहोश हो रही थी बिंदिया को तो डबल सुख मिल रहा था आगे से भी और पीछे से भी बिंदिया पागलों की तरह सुगंधा की बुर को चाट रही थी और अंकित मस्त होकर बिंदिया की चुदाई कर रहा था और सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक के तीनों झड़ नहीं गए।

जाते-जाते सुगंधा बिंदिया को पैसे देने लगी तो इंकार करने लगी लेकिन जबरदस्ती सुगंधा ने उसे ₹500 दे दिए क्योंकि सुगंधा जानती थी कि उसकी माली हालत ठीक नहीं थी और जो रात को उसने आसरा दी थी उसके लिए वह रकम भी कम थी। और एक अद्भुत अनुभव भी प्रदान की जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल सकती थी जाते-जाते बिंदिया की आंखें नम थी सुगंधा भी भावुक हो गई थी लेकिन जाना भी जरूरी था,,,,, कुछ दूरी तक बिंदिया उन दोनों को छोड़ने भी आई थी क्योंकि बीच रास्ते से ही होकर उसे गांव जाना था।

सुगंधा और उसका बेटा एक अद्भुत अनुभव के साथ पहाड़ी से नीचे उतर चुके थे पहाड़ी पर चढ़ने से पहले उन्हें इस बात का अहसास तक नहीं था की पहाड़ी के ऊपर दोनों के साथ क्या होने वाला है लेकिन यह पूरा अनुभव उन दोनों की जिंदगी का यादगार अनुभव बनकर रह गया था अंकित की तो किस्मत बहुत तेज थी और रोज उसे एक नहीं औरत मिल रही थी जो उसके साथ हम बिस्तर हो जाती थी तेज तो पानी बारिश तेज हवाएं इन सब के बीच सर छुपाने का आसरा और उसे झुग्गी के अंदर एक खूबसूरत औरत,,, जो मां बेटे की कामवासना को देखकर खुद कामवासना में तड़पने लगी थी और दोनों के साथ खुद भी चुदाई का अद्भुत आनंद प्राप्त की थी।

धीरे-धीरे सुगंधा को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि वह अपने बेटे की संगत में पूरी तरह से छिनार बन चुकी थी,,, वह कभी अब सपने में भी नहीं सोची थी कि वह अपने बेटे को किसी और औरत के साथ साझा करेगी लेकिन हालात के आगे वह मजबूर हो चुकी थी वह खुद इस अवसर का पूरा लाभ ले लेना चाहती थी एक औरत के साथ आनंद लेने का यह उसका पहला अनुभव था जो की पूरी तरह से यादगार बन कर रह गया था अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को किसी गैर औरत को चोदते हुए देखना वाकई में बेहद बेशर्मी भरा था। लेकिन इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि बेशर्म बनने के बाद ही जीवन का असली मजा मिलता है लेकिन फिर भी वासना का तूफान शांत होने के बाद इस बारे में वह सोच रही थी कि ऐसा करना ठीक नहीं था वरना ऐसे तो उसके बेटे की आदत बन जाएगी और वह कुछ कर नहीं पाएगी। इसलिए पहाड़ी से नीचे उतरते समय वह अपने बेटे को बोली।

देख अंकित आज रात जो कुछ भी होगा ऐसा अब दोबारा नहीं होना चाहिए।
(अपनी मां के कहने का मतलब को अंकिता अच्छी तरह से समझ रहा था फिर भी नादान बनने का नाटक करते हुए बोला)

मैं कुछ समझा नहीं तुम क्या कहना चाह रही हो,,,?

यही की किसी गैर औरत के साथ आज के बाद कभी संबंध मत बनाना मैं यह सब बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी।
(अंकित को इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में एक औरत के लिए उसका साथी मर्द कितना मायने रखता है अगर उसकी जानकारी में वह मत किसी और और के साथ संबंध बनाने लगे तो यह रिश्ता उसे औरत को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होता और यहां पर उसकी मां को भी यही एहसास हो रहा था अपनी मां की बात सुनकर वह मुस्कुराते हुए बोला)

क्या बात कर रही हो मम्मी तुम्हारे होते हुए भला कोई और औरत के साथ में कैसे संबंध बन सकता हूं वह तो एक ही झुग्गी में उसे औरत के सामने मजा लेने के चक्कर में उसे भी चुदाई का सुख दे दिया देख नहीं रही थी कैसे तड़प रही थी हम दोनों को देखकर।

हां वह तो देख ही रही थी हम दोनों जब मजे ले रहे थे तब साड़ी के ऊपर से ही वह अपनी बुर मसल रही थी।

सच में मम्मी वह नजारा देखकर तो मैं एकदम से हैरान हो गया था,,,, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हर एक औरत में वजन की प्यास हर पल मौजूद रहती है बस उसे प्यास को जगाने वाला चाहिए।

तू सच कह रहा है अब मुझे ही देख ले मुझे देखकर लगता है कि मैं इस हद तक चली जाऊंगी।

बिल्कुल भी नहीं मम्मी मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि एक दिन मैं तुम्हें चोदूंगा और तुम बड़े आराम से मेरा ले लोगी,,,, जब यह सब हम दोनों के बीच शुरू नहीं था तब तुम्हें देखा था तो मुझे कुछ ऐसा महसूसी नहीं होता था कि तुम एक औरत हो मैं एक मरता हूं मुझे तुम्हारे साथ यह सब करना चाहिए लेकिन धीरे-धीरे ना जाने यह सब कैसे बढ़ने लगा मुझे पता नहीं चला।

मुझे भी,,, शायद यह सब तब से शुरू होगा जब मेरी तबीयत खराब होने पर तो मुझे दवा खाना ले गया था।

हां हां तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो वहां पर जिस तरह की स्थिति बनी हुई थी धीरे-धीरे मन में तुम्हारे प्रति एक अजीब सा आकर्षक होने लगा था जब मैं तुम्हारे पेशाब का टेस्ट कराने के लिए तुम्हें बाथरूम में लेकर गया अपने हाथ से तुम्हारी साड़ी कमर तक उठाया तुम्हारी चड्डी उतारा और जब उस परखनली को पेशाब का नमूना लेने के लिए तुम्हारी बुर पर लगाया तो उसे समय मेरे बदन में कंपकंपी छा गई थी।

पहली बार देखा था ना,,, (सुगंधा मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफदेख कर बोली)

पहली बार मैं तो पागल ही हो गया था तुम्हारा वह अंग देखकर,,,, क्योंकि मुझे पहले इसका अंदाजा भी नहीं था कि औरत की बुर कैसी दिखाई देती होगी।

उस समय खड़ा हुआ था,,, (फिर से चुटकी लेते हुए सुगंधा बोली)

एकदम से बिल्कुल भी समय नहीं लगा था मेरे लिए तो वह पल सच में बेहद यादगार था।

छुवा था तूने हाथ लगाकर,,,,

परखनली को तुम्हारी बुर के छेंद से सटाते हुए मेरी उंगली हल्के से तुम्हारी फुली हुई बुर पर स्पर्श हो रही थी,,,, मैं तो पागल हुआ जा रहा था अगर सच में घर में ऐसा कुछ हुआ होता तो इस समय में तुम्हारी बुर में लंड डाल दिया होता लेकिन गनीमत था कि उस समय दवा खाने में थी।

ओहहह मतलब तब से तो मुझे चोदने के लिए जुगाड़ लगा रहा था।

बिल्कुल उसे दिन से तुम मेरी नजर में एकदम से बदल गई तुम्हारे अंदर में एक औरत को देखता था।

बहुत हरामी है तू,,

तुम्हारी जैसी खूबसूरत मा जिसकी होगी उस बेटे को हरामी बनने से कोई नहीं रोक पाएगा ,,,।(अंकित मुस्कुराते हुए बोला उसकी मां भी हंस रही थी दोनों धीरे-धीरे पहाड़ी उतर चुके थे मिट्टी गीली होने की वजह से दोनों संभाल कर पर रख रहे थे,,, सुबह का मौसम और पहाड़ी इलाका कुल मिलाकर बहुत ही खूबसूरत वातावरण बना हुआ था ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी भीनी भीनी खुशबू आ रही थी और पहाड़ी पर चढ़ने वाले अभी कोई नजर नहीं आ रहे थे,,, वैसे भी आज यहां पर आखिरी दिन था अब उन्हें वापस लौटना था,,, पहाड़ी से नीचे उतर कर मां बेटे चाय की दुकान पर गए और गरमा गरम चाय की चुस्की लेने लगी उसे चाय वाले के पहले ग्राहक ही वह दोनों मां बेटे थे क्योंकि अभी-अभी वह चाय की दुकान खोला ही था,,,, इतनी सुबह-सुबह उन दोनों को पहाड़ी से उतरता हुआ देखकर वह खुद हैरान था इसलिए वह उन लोगों से पूछ भी लिया।

अभी तो पहाड़ी पर कोई चढ़ेगा नहीं और तुम दोनों ऊपर से उतर रहे हो मैं कुछ समझा नहीं।

अरे चाचा जी कल रात को उतरते समय हम दोनों तेज बारिश में फंस गए थे,,,, चारों तरफ अंधेरा इतनी तेज बारिश तेज हवा नीचे उतरना मुश्किल था तो ऊपर जो दुकान लगती है ना चाय की वहां पर कोई नहीं था तो हम दोनों उसी में रात भर रुके रह गए।

ओहहह तब तो तुम दोनों अच्छा कीए कि वहीं रुक गए अगर नीचे उतरने की कोशिश करते तो पैर फिसल जाता और लेने के देने पड़ जाते,,,।

वह तो है चाचा जी ,,, अच्छा यह बताइए कि हमें हमारे होटल तक जाना है वहां के लिए गाड़ी कहां से मिलेगी।

बस 5 मिनट का रास्ता है आगे चले जाइए चौराहा पर तुम्हें गाड़ी मिल जाएगी।

बहुत-बहुत धन्यवाद,,,(इतना कहकर मां बेटे दोनों कुर्सी पर से उठकर खड़े हो गए और पैसे देकर चलते बने अंकित जाते-जाते नजर घुमा कर चाय वाले को देखने लगा और वही हुआ जो अपने मन में सोच रहा था उसे चाय वाले की नजर उसकी मां की मटकती हुई गांड पर ही टिकी हुई थी और वह मुस्कुराते हुए अपनी मां से बोला,,,)

साला यहां कोई भी ऐसा मर्द नहीं है जो औरत को चोदने की नजर से ना देखता हो,,,।

क्या मतलब मैं कुछ समझी नहीं,,,,।अभी चाय वाला बात करने में कितना सीधा लग रहा है लेकिन तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड को ही घुर रहा था सच में अगर तुम्हें अकेले पास आए तो यह लोग तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना देंगे।

धत् हरामी मैं किसी को हाथ न लगाने दुं,,,,।

वह तो तुम नहीं लगते दोगी ना लेकिन सामने वाला तुम्हारी थोड़ी ना सुनने वाला है वह तो तुम्हें गोद में उठा कर ले जाएगा और पटक कर चोद देगा अभी देख लो कल ही तुम पेशाब करने के लिए पान की दुकान के पीछे गई थी और पान की दुकान वाला क्या कर रहा था प्यासी नजरों से तुम्हें पेशाब करता हुआ देख रहा था,,,।

यह तो हम औरतों की खूबसूरती का ही कमाल है कि हमें हर एक क्रिया करते हुए मर्दों को देखना अच्छा लगता है भले ही हम लोग नंगी होकर नहा रहे हो मुत रहे हो या कुछ भी कर रहे हो हर हाल में हम लोगों को देखना मर्द की फितरत रहती है।

हां तभी खड़ा कर देती हो सबका सालों के पास जुगाड़ नहीं रहता तो हाथ से हिला कर ही काम चला लेते हैं,,,,।

अब देखना यह चाय वाला भी पीछे जाकर दिला कर ही आएगा,,,।

इतना देखने के लिए हम लोगों के पास समय नहीं है चलो जल्दी से गाड़ी पकड़ कर हमें होटल भी जाना है आज घर के लिए वापस भी लौटना है।

हां रे अंकित मैं तो भूल ही गई कि आज यहां पर आखिरी दिन है सच में बहुत मजा आया तीन-चार दिनों में तो ऐसा लग रहा है कि तीन-चार साल यहां पर रुक गए। और यह सब तेरी वजह से हो रहा है मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि मैं यहां पर कभी घूमने आऊंगी इतना मजा करूंगी और वो भी इस उम्र में,,,।

उम्र का क्या रखा है मम्मी,,,, किसी के सामने टांग खोल दोगी तो तुम्हें पाने के लिए किसी भी उम्र के मर्द हद तक गुजरने को तैयार हो जाएंगे।

बातें बनाना तो कोई तुझसे सीखे,,,, चल वह देख सामने एक कार खड़ी है,,,,।

(दोनों कार के पास आकर होटल का नाम बताएं और कर में बैठ गए थोड़ी देर में वह कार वाला उन्हें होटल के सामने उतार दिया,,, वह दोनों होटल में जाने लगे तो सामने से वही वैटर आता हुआ दिखाई दिया जैसे सुगंध अपनी जवानी का जलवा दिखाइए और अनजाने में ही उसे देखकर वह मुस्कुरा दी,,, वह वेटर सुगंधा को अपनी तरफ देखकर मुस्कुराता हुआ पाकर अंदर से उसके अरमान मचलने लगे,,,, उसका दिन बन गया था,,, और जब से सुगंधा होटल में आई थी और जब से वह वैटर सुगंधा की नंगी जवान को अपनी आंखों से देखा था तब से रोज उसका नाम लेकर दो बार मुठ मारता था,,,,।
मां बेटे दोनों अपने कमरे में पहुंच चुके थे बेहद थक चुके थे इसलिए कुछ देर तक आराम करना चाहते थे। शाम को 5:00 बजे तक दोनों को होटल में रुकना था उसके बाद यहां से निकल जाना था आराम करते-करते 12:00 बज चुके थे। नहाने से पहले वह दोनों खाना खा लेना चाहते थे इसलिए दोनों फ्रेश होकर नीचे आए और खाना खाने लगे,,,, खाना खाने के बाद दोनों वापस अपने कमरे में चले गए और फिर से आराम करने लगे,,,, देखते ही देखते चार बज चुके थे अंकित बाथरूम में नहाने के लिए चला गया था सुगंध का नहाना बाकी था वहां बिस्तर पर बैठी हुई थी और यहां पर जो कुछ भी उन दोनों के साथ हुआ था जो पल उन दोनों ने साथ में गुजारा था उसके बारे में सोच कर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, की तभी डोर बेल बजने लगी सुगंधा धीरे से बिस्तर पर से उठकर खड़ी हो गई और दरवाजा खोलने के लिए आगे बढ़ गई,,,,, दरवाजा खोली तो सामने वही बैटर था जो सुगंधा की जवानी के दर्शन कर चुका था सुगंधा को देखकर वह मुस्कुराया,,, सुगंधा भी उसे देखकर औपचारिकता दिखाते हुए मुस्कुराने लगी सुगंधा की मुस्कुराहट को हरी बत्ती का सिग्नल समझ कर वह एकदम से कमरे में दाखिल हो गया उसके इस व्यवहार पर सुगंधा हैरान होते हुए बोली,,,)

पर हमने तो कोई ओर्डर नहीं किया,,,।

(वह वैटर जानता था कि 5:00 बजे यह दोनों होटल का कमरा खाली कर देंगे। और अंकित ने मजाक मजाक में उससे वादा भी किया था कि जाने से पहले वह सुगंधा को एक रात के लिए उसे सौंप देगा बस उसे एक रात का चार्ज उसे दे देना है, क्योंकि वह बेटा सुगंधा को धंधे वाली औरत समझता था और अंकित ने भी उसे अपनी मां को धंधे वाली बात कर ही उससे वादा किया था,इसीलिए वह यहां पर आया भी था,,,, सुगंधा की बात सुनकर वह मुस्कुराते हुए धीरे से दरवाजा बंद करते हुए बोला।)

मैं जानता हूं कि आपने कुछ भी आर्डर नहीं किया है लेकिन मैं आपके लिए आया हूं,,,
(उसका व्यवहार देखकर सुगंधा को घबराहट होने लगी और डरने लगी)

मेरे लिए,, मैं कुछ समझी नहीं,,,,

वह तुम्हारे साथ जो साहब थे ना उन्होंने ही मुझे बोला था कि जाने से पहले वह तुम्हें मेरे हाथों सौंप देंगे एक रात के लिए मैं पैसे भी लाया हूं,,,,।
(इतना सुनते ही सुगंधा के होश उड़ गए सुगंधा जानती थी कि उसका बेटा उसे धंधे वाली बताया था और यह भी बताया था कि वह एक रात के लिए उसके साथ मजे लेना चाहता है जिसके एवज में वह पैसे भी देगा,, लेकिन यह सब मजाक ही था जिसे वेटर सीरियसली ले लिया था। और इस समय उसे अपनी आंखों के सामने अपनी कमरे में देखकर सुगंधा के होश उड़ गए थे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कह क्या करें इस समय अंकित बाथरूम में था उसे तो मालूम भी नहीं था वह नहाने में मगन था,,,,,, उसकी बात सुनकर बड़ी नम्रता से सुगंधा बोली,,)

देखो तुम्हें गलतफहमी हो गई है,,,।

कोई गलतफहमी नहीं हुई है मैं पैसे भी लाया हूं,,, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं मेरी जान,,,(इतना कहने के साथ ही वह आगे बढ़कर एकदम से सुगंधा को अपनी बाहों में कस लिया और उसके होठों पर चुंबन करने की कोशिश करने लगा लेकिन सुगंधा अपने आप को बचाने लगी,,,,, अपनी बाहों में कस के पकड़े हुए वह तुरंत अपने दोनों हाथों को सुगंधा की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर दबाते हुए उसके होठों को चूमने की कोशिश कर रहा था और सुगंधा बचने की कोशिश कर रही थी,,,,)

छोड़ मुझे हरामजादे,,, मैं कोई धंधे वाली नहीं हूं,,,,।

मैं पैसे लाया हूं मेरी,,, जान,,,,, तुम ऐसा क्यों कर रही हो मुझे भी मजा दिखा दो जैसा उसे लड़के को तीन दिन से मजे दे रही हो,,,,,ओहहह मेरी रानी,,,,,(ऐसा कहते हुए वह लगातार सुगंधा के लाल लाल होठों को अपने होठों से स्पर्श करना चाहता था,,, लेकिन सुगंधा उसे ऐसा करने नहीं दे रही थी लेकिन इस दौरान सुगंधा को महसूस हो रहा था कि वह पूरी तरह से उत्तेजित अवस्था में था उसका लंड खड़ा हो चुका था जो की साड़ी के ऊपर से उसे अपनी बुर पर ठोकर लगता हुआ महसूस हो रहा था,,,, वह शोर मचा कर अपना मजाक बनाना नहीं चाहती थी लेकिन अब बात उसकी इज्जत पर आ चुकी थी इसलिए वह अपने बेटे को आवाज लगाते हुए बोली,,,)

अंकित मुझे बचा,,,,,, अंकीत,,,,,।
(अब सुगंधा थोड़ा जोर से बोली थी और उसकी आवाज अंकित के कानों तक पहुंच चुकी थी क्योंकि सावर चालू होने की वजह से उसके शोर में कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था लेकिन सुगंधा के जोर से बोलने पर वह अपनी मां की आवाज सुन लिया था और उसे एहसास हो गया था कि जरूर कोई बात है उसके पास कपड़े पहनने का भी समय नहीं था क्योंकि वह नंगा नहा रहा था,, बिना कपड़े पहने वह एकदम से बाथरूम से बाहर आ गया और बाहर आकर देखा तो उसकी मां उसे वेटर की बाहों में थी जो उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था और उसकी मां अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी यह देखकर तो अंकित का दिमाग एकदम से खराब हो गया,,,, और वह जोर से चिल्लाया,,,।

हरामजादे तेरी यह हिम्मत,,,(और इतना कहने के साथ ही वह आगे बढ़कर उस वेटर का कोलर पकड़ कर एकदम से खींच लिया,, वह वेटर अंकित का रवैया देख कर एकदम से घबरा गया वह कुछ कर पाता समझ पाता इससे पहले ही अंकित दो चार मुक्का उसके पेट पर लगा चुका था वह एकदम से गस्त खाकर गिर गया था,,,, अंकित के दो-चार मुक्के में ही वह ढेर हो गया था अंकित गुस्से से उसे और करने जा रहा था तब तक उसकी मां उसे रोकते हुए बोली।

रहने दे बेटा कहीं कुछ हो गया तो खामखा लेने के देने पड़ जाएंगे,,,,,,।

(वह दर्द से कराह रहा था,,, लेकिन सुगंधा के मुंह से बेटा सबसे सुनकर वह हैरान हो गया था वह हैरानी से नीचे पड़ा ऊपर नजर घूमाकर सुगंधा की तरफ और अंकित की तरफ देख रहा था यह देखकर अंकित समझ गया था कि उसके मन में क्या चल रहा है,,,, वह उसके मन में उठ रहे शंका को दूर करते हुए बोला।)

देख क्या रहा है हरामजादे यह मेरी मां है और मैं इसका बेटा हूं कुछ समझ में आया मैंने तुझे मजाक में कहा था क्योंकि तू मेरी मां को धंधे वाली समझ रहा था।

(अंकित की बात सुनकर उस वेटर के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अंकित की बात का उसे बिल्कुल भी भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि पहले दिन ही जो नजर उसने कमरे के अंदर देखा था वहां पर अंकित भी मौजूद था भला एक मां अपने बेटे की मौजूदगी में पूरी तरह से नंगी कैसे हो जाएगी,,,, इसलिए वह अपनी शंका का समाधान चाहता था इसलिए दर्द से कराहते हुए बोला)

मुझे तुम्हारी बात पर भरोसा नहीं हो रहा है उस दिन कमरे के अंदर यह मेम साहब मेरे सामने पूरी तरह से नंगी हो गई थी तो भी तो वहीं मौजूद थे भला एक मां अपनी बेटी के सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी कैसे हो सकती है।

मैं जानता हूं मेरे बच्चे तेरे मन में यही सब चल रहा था और मैं तो मजा लेने के लिए कह दिया था कि धंधे वाली मैं इसके साथ यहां मजा लेने के लिए आया हूं लेकिन मैं तुझे आज सच-सच बता देता हूं कि यह मेरी मां है और यहां पर हम दोनों मजा लेने के लिए आए हैं।

मां बेटे होकर मजा लेने के लिए मैं अभी भी कुछ समझ नहीं पा रहा हूं यार तुम लोग मुझे पागल कर दोगे,,,,।
(उसकी हालत देखकर सुगंधा के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी और वह सहज होते हुए मुस्कुरा कर बोली)

यह सही कह रहा है मैं इसकी मां हूं ना कि एक धंधे वाली,,,, तुझे तो मजाक मजाक में इसने कह दिया था कि मैं धंधे वाली हूं क्योंकि तू मुझे यही समझ ही रहा था,,,,

लेकिन एक मां अपने बेटे के साथ और एक बेटा अपनी मां के साथ यह सब कैसे कर सकता है,,,,।

ऐसे ,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित एकदम से अपनी मां के गरदन में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचा और उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,, यह देख कर वह वेटर एकदम से दंग रह गया,,,, तभी उसकी नजर अंकित के लंड पर पड़ी जो की पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,,, वह देखता ही रह गया क्योंकि उसका खुद का अंकित से आधा भी नहीं था,,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी इतना मोटा और लंबा लंड वह जिंदगी में पहली बार देख रहा था अचानक ही उसके मुंह से निकल गया।)

बाप रे इतना मोटा और लंबा,,,,।

(उसकी आवाज सुनकर अंकित अपनी मां के होठों को अपने मुंह से आजाद किया और उसकी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला)

यही वजह है जो मेरी मां मेरे से मजा लेती है। अब कुछ समझ में आया,,,,,।

समझ गया तेरा हथियार देखकर ही मैं समझ गया,,,,, बाप रे इतना बड़ा,,,,,, तब तो तेरी मां के लिए तू ही बराबर है मेरे से यह संतुष्ट होने वाली भी नहीं है,,,,।

क्यों तेरा ऐसा नहीं। है क्या,,,?

अब जाने दे यह सब बात कर कोई फायदा नहीं है मैं तो तुम दोनों को कुछ और ही समझ रहा था।

अब यह सब जाकर बाहर मत बताना वरना मैं मैनेजर को बता दूंगा कि तू मेरी रानी के साथ बदतमीजी कर रहा था फिर तेरी नौकरी चली जाएगी।

नहीं ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,,(एकदम से वहां अंकित के पैर पकड़ लिया और ऐसा करने में अंकित का लंड उसके गाल पर रगड़ खा गया जिससे वह मदहोश हो गया,,, यह देखकर अंकित बोला,,)

मुंह में लेने का विचार है क्या,,,?

नहीं नहीं,,,,, लेकिन इसे पकड़ कर देखना जरूर जाऊंगा क्या मैं इसे,,,,।

हां हां बिल्कुल,,,,,।

(अंकित की इजाजत बातें ही वह अपना हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ लिया वाकई में उसे एहसास हो रहा था कि सही मायने में लंड किसे कहा जाता है उसकी हथेली पूरी गर्म हो चुकी थी,,,, लेकिन फिर वह जल्दी से उसे छोड़ दिया और कमरे से बाहर निकल गया यह देखकर सुगंधा जोर-जोर से हंसने लगी.. अपनी मां को हंसता हुआ देखकर अंकित भी मुस्कुराते हुए बोला।)

अभी मैं नहीं होता तो तुम्हारी चुदाई कर दिया होता।

वह तो कर ही दिया होता तूने धंधे वाली जो बता दिया था,,,, साला बोल रहा था कि पैसे लेकर आया हूं।
(इतना सुनते ही अंकित भी जोर-जोर से ऐसे ही लगा थोड़ी देर में दोनों नहा कर तैयार हो चुके थे अपना कपड़ा पैक करके बैग लेकर वह दोनों होटल से निकल चुके थे बस अड्डे पर जहां से वह लोग बस पकड़ कर अपने शहर के लिए रवाना हो चुके थे)

उसे वेटर को मजा चखाकर अंकित अपनी मां को लेकर बस में बैठ गया था अपने बेटे की हिम्मत और मर्दाना ताकत के बारे में सोचकर सुगंधा गर्व महसूस कर रही थी,, क्योंकि जिस तरह से होटल के अंदर स्थिति को अपने नियंत्रण में अंकित ने लिया था वह काबिले तारीफ थी और इस बारे में सोचकर गर्व से उसकी छाती फूल रही थी,, उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि अगर होटल के अंदर सही समय पर उसका बेटा ना होता तो वह वेटर उसके साथ जबरदस्ती कर लेता,,, वह अपने मन में यह भी सोच रही थी कि भले ही उसका बेटा उसे दूसरों के सामने गंदी औरत या रंडी कहकर बुलाए लेकिन फिर भी वह थी तो एक सीधी शादी औरत बस अपने बेटे की संगत में थोड़ी छिनार बन गई थी लेकिन ऐसा छिनार नहीं की किसी के साथ भी सो जाए वह अपने बेटे को छोड़कर किसी और के बारे में कभी सोच भी नहीं सकती थी।

लेकिन किसी गैर के सामने मजा लेने का नशा जिस तरह से अंकित में उसे लगाया था वह काफी हद तक उसे मदहोश कर देता था लेकिन इस बात से वह अनजान बिल्कुल भी नहीं थी कि कभी-कभी यह है मजा उसके लिए आफत बन सकता है जो की होटल के कमरे में बन भी चुका था। वह महसूस कर रही थी की पहली बार वह किसी गैर मर्द की बाहों में थी और वह भी जबरदस्ती उसके हाथ को अपने ऊपर महसूस करके वह अजीब सा महसूस कर रही थी उसे साफ एहसास हो रहा था कि उस अनजान मर्द का स्पर्श उसे बिल्कुल भी रोमांचित नहीं किया था। बल्कि वह उसके स्पर्श से डर महसूस कर रही थी घबराहट महसूस कर रही थी लेकिन उसे अच्छी तरह से याद था कि वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था अपनी बाहों में भरकर वह जिस तरह से उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था उसके लंड की चुभनों से अपनी बर के ऊपर साफ महसूस हुई थी जिससे वह अंदाजा लगा ली थी कि वह कितना ज्यादा उतावला और उत्तेजित है। लेकिन इन सबके बावजूद भी सुगंधा कभी भी किसी भी गैर मर्द के बारे में ना तो सोचती थी और नहीं उसके साथ कोई संबंध बनाने के बारे में इच्छा रखती थी।

बार-बार उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ जा रही थी अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर अंकित बोला।

क्या हुआ मुस्कुरा क्यों रही हो,,,?

मुस्कुराने की तो बात है,,,, हम औरतें तो तेरे लंड की दीवानी है ही लेकिन वहां मर्द भी तेरे लंड का दीवाना हो गया था।

समय नहीं था नहीं तो सच में पूरा लंड उसके मुंह में डालकर कस हुआ था और फिर उसकी गांड भी मार लेता,,,।

छी,,,,,, तू सच में ऐसा करता।

फिर क्या देख नहीं रही थी उसकी आंखों की चमक वह पूरा का पूरा अपने मुंह में लेना चाहता था। मुझे पूरा विश्वास था कि अगर समय होता तो अगर मैं उसकी तुम्हारे सामने गांड भी करने को कहता तो वह मरवाने के लिए तैयार हो जाता है।

धत् औरतों की गांड तक तो ठीक मर्दों की गांड मारने में क्या मजा,,,,।

यह तो वही जाने जो मरवाते हैं मारने वाले को तो सिर्फ पानी निकालने से मतलब,,,,।

चाहे वह मर्द ही क्यों ना हो ‌।

अब जिसके पास जुगाड़ नहीं है उसे तो मर्दों से ही काम चलाना पड़ता होगा और अगर मर्द नहीं मिले तो फिर हाथ से हिला कर काम चलाना पड़ता है बस पानी निकलने से मतलब और हां जिसके पास जुगाड़ है उसकी तो हर रात सुहागरात होती है जैसे कि तुम मेरी जान।

तू बहुत हरामी है,,, मेरी भी गांड मार कर हालत खराब कर दिया था तुने।(ऐसा कहते हुए उसे समय का दर्द का एहसास दिलाते हुए सुगंधा का हाथ अपने आप ही उसकी कमर पर पहुंच गया था,,,)

मजा भी तो बहुत दिया था वह तो मैं हूं कि तुम्हारी गांड की गहराई तक लंड पहुंच गया था मेरी जगह कोई और मर्द होता तो तुम्हारी गांड के छेद के ऊपर ही ढेर हो जाता पानी निकाल के,,,,,।

ऐसा क्यों जैसे तू करता है वैसा दूसरे भी करते उनका भी चला जाता,,,।

बिल्कुल भी नहीं जाता मेरी जान तुम्हारा छेद एकदम छल्ले की तरह है एकदम कसा हुआ,, तुम्हारे छल्ले को भेदने के लिए असली मर्द चाहिए बिल्कुल मेरी तरह जो मेहनत करके तुम्हारी गांड की गहराई तक पहुंचे और एहसास दिलाए की लंड क्या चीज है,,, याद है ना 2 दिन तक कमर पर हाथ रख कर चल रही थी।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बोली कुछ नहीं बस मुस्कुरा दी,,, यह देखकर अंकित भी चुटकी लेते हुए बोला)

सब याद रहता है तुम्हें बस याद दिलाने की जरूरत पड़ती है।

क्यों नहीं आखिरकार तेरे साथ बिताया हुआ है कि कल मेरे लिए यादगार है। अब कल से वही सब शुरू हो जाएगा।

कोई बात नहीं सारे काम के बीच में मजा भी तो है मैं और तुम,,,,।
(अपने बेटे के कहने के मतलब को समझ कर सुगंधा के चेहरे पर शर्म की लाली छा गई लेकिन फिर अगले ही पल उसके चेहरे पर फैली हुई शर्म की लाली ओझल होने लगी और वह चिंतित स्वर में बोली)

अब तो कुछ ही दिनों में, तृप्ति भी आ जाएगी तब हम दोनों को समय कहां मिल पाएगा।

समय मिलता नहीं है निकालना पड़ता है और देखना मिल ही जाएगा समय हम दोनों को जब तृप्ति घर के बाहर जाएगी तो हम दोनों घर के अंदर मजा करेंगे,,,।

और कभी उसे इस बात का पता चल गया तो मैं तो कहीं की नहीं रह जाऊंगी,,,।

ऐसा कभी नहीं होगा,,,।

यह तो कह रहा है ना अगर हो गया तब क्या करेगा। कैसे हम दोनों उससे नज़रें मिला पाएंगे,,,,।

बात तो सही है,,, लेकिन ऐसा भी तो हो सकता है कि हम दोनों को मजा लेते देखकर उसके मन में भी उमंगे जागने लगे।

धत्,,,, ऐसा बोलना भी नहीं,,,।

अरे मैं सही में नहीं कह रहा हूं लेकिन एक बात कह रहा हूं कि ऐसा भी तो हो सकता है वह गुस्सा भी हो सकती है और हम दोनों को देखकर खुद आनंदित भी हो सकती है और कहीं वह भी खेल में शामिल होने की सोचने लगे तब।

नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता,,,, वह बहुत सीधी-सादी है इस खेल में उसे शामिल करना ठीक नहीं है।

सीधी शादी तो तुम भी थी संस्कारी मर्यादा वाली तुम्हें देखकर कोई का भी नहीं सकता कि बंद कमरे के अंदर तुम अपने ही बेटे से मजा लेती हो, बोलो कोई कह सकता है, कोई बता सकता है कि हम दोनों के बीच मां बेटे के अलावा और कौन सा रिश्ता है। कोई नहीं बता सकता ना।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा सोच में पड़ गई थी,,, वह कुछ बोल पाती से पहले अंकित फिर से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)
मम्मी कोई किसी के मन में बैठा नहीं है कोई किसी के मन की बात जान नहीं सकता और यह मन भी समय-समय पर बदलते रहता है भले ही तृप्ति एकदम सीधी-सादी भोली भाली लेकिन उम्र के साथ यह भोलापन बदलते रहता है उसका मन भी बदलता ही होगा,,,,,, इसीलिए कह रहा हूं अगर सोचो उसके मन में भी मजा लेने की बात आ गई तब क्या करोगी।

मैं उसे समझाऊंगी कि यह सब गलत है,,,।

हां और वह समझ जाएगी पागल हो गई हो तुम वह यह नहीं रहेगी की मां बेटे हो करके तुम दोनों आपस में मजा ले रहे हो तो मुझे कैसे कह रहे हो कि यह सब गलत है जरूर इसमें मजा आता होगा तभी तो तुम दोनों आपस के मां बेटे के रिश्ते को भूलकर औरत और मर्द बनाकर मजा लूट रहे हो।

(अंकित की बात सुनकर सुगंधा फिर से सोच में पड़ गई थी क्योंकि वह जानती थी कि अंकित का कहना गलत नहीं है वह जो कह रहा है वह भी मुमकिन है अगर सच में ऐसा हो गया तब तो गजब हो जाएगा,,,,, इसलिए वह अपने बेटे से बोली।)

नहीं मैं नहीं चाहती कि ऐसा कुछ भी हो और ऐसा नहीं होगा देख लेना हम दोनों सलामती के साथ यह सब करेंगे जब वह घर पर नहीं होगी तभी यह सब करेंगे अगर वह घर पर होगी तो हम दोनों के बीच मां बेटे का ही रिश्ता होगा मर्द और औरत का नहीं तु मुझसे 10 कदम दूर ही रहना,,,,।अरे यार तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करती मम्मी मैं यह नहीं कह रहा हूं की तृप्ति को यह खेल में शामिल हो जाना चाहिए मैं भी जानता हूं कि यह सब गलत है यह तो हम दोनों एक दूसरे की जरूरत पूरी कर रहे हैं मेरी भी यही जरूरत है और तुम्हारी भी यही जरूरत है अगर हम दोनों एक दूसरे से जरूर पूरी न करें तो हम दोनों के कदम बैठ सकते हैं मेरा किसी और के साथ रिश्ता हो सकता है और तुम्हारा किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात हो सकता है लेकिन उसमें कितनी बदनामी है,, तुम्हारा पद देखते हुए क्या तुम्हें लगता है कि अगर तुम्हारा किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात हो जाए और वह तुम्हें बदनाम करने लगे थे तुम घर के बाहर निकाल पाओगी किसी को अपना मुंह दिखा पाओगी।

बिल्कुल भी नहीं,,,,।

बस यही तो मैं तुम्हें समझाने की कोशिश कर रहा हूं,,, तुम उसे समय घर से इसलिए बाहर नहीं निकलना चाहेगी कि कोई तुम्हें भला बुरा ना कह दे तुम्हारे चरित्र पर उंगली ना उठा दे,,,, और इसीलिए मैं तुम्हें समझा रहा हूं कि अगर तर्प्ति ने हम दोनों को मजे लेते हुए देख ली तो वह कैसे शांत रह सकती है कैसे उसका मुंह बंद किया जा सकता है क्या उसे समझाया जा सकता है कि हम दोनों जो कर रहे हैं वह ठीक है या गलत है हम दोनों को ऐसा करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए यह तो पूरी दुनिया जानती है की मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता बिल्कुल भी जायज नहीं है लेकिन घर की बंद चार दिवारी के अंदर यह सब होता ही रहता है जब तक दूसरों को पता नहीं चलता तब तक सब कुछ ठीक है,,,, तृप्ति भी बड़ी है मुझसे बड़ी है जवान है उसकी भी सहेलियां होगी जो इस तरह से मजा लेती होगी उसे इस बारे में बताती होगी तो क्या उसका मन बहकता नहीं होगा और अपनी आंख के सामने ही जब वह देखेगी कि उसकी मां और उसका छोटा भाई आपस में मजे ले रहे हैं तो वह कैसे अपने आप को रोक पाएगी उसे तो खुली छूट मिल जाएगी,,,, कि घर में ही वह मजा ले सकती है बदनाम होने का डर नहीं है जैसा कि हम दोनों ले रहे हैं।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को एहसास हो रहा था कि उसकी बात में सच्चाई है लेकिन वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि इस खेल में उसकी बेटी भी शामिल हो इसलिए वह अपने बेटे से बोली,,)

अगर सच में कहीं ऐसा हो गया तो क्या तू अपनी बड़ी बहन के ऊपर चढ़ जाएगा।

उसकी मर्जी जैसा कि तुम्हारे ऊपर चढ़ गया था अगर वह जाएगी तो जरूर ऐसा करूंगा क्योंकि मैं नहीं चाहता कि वह बाहर जाकर इस तरह का मजा ले हम दोनों को देखने के बाद जहां पर बदनामी का डर हो ऐसा भी हो सकता है कि जिसके साथ वह जिस्मानी संबंध बनाए वह उसे बहला फुसला कर दूसरों के साथ भी मजा लेने के लिए मजबूर कर दे,,,,,।

तू सच कह रहा है आजकल ऐसा ही होता है लेकिन फिर भी मैं चाहूंगी कि उसे इस बारे में बिल्कुल भी पता ना चले हम दोनों को अब संभल कर रहना होगा खास करके तू अपनी हरकतों पर लगाम लगा लेना जहां भी देखता है गांड पर हाथ रख देता है।

अब क्या करूं तुम्हारी गांड है ही इतनी खूबसूरत कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाता।

रोक नहीं पाता,,,(मुंह बनाते हुए सुगंधा अपने बेटे की बात को दोहराते हुए बोली और यह देखकर अंकित हंसने लग जाते समय भी वह दोनों बस में केबिन बुक किए थे ताकि दोनों को कोई डिस्टर्ब ना कर सके,,,, शाम ढलने लगी थी ठंडी ठंडी हवा चल रही थी और इस तरह की बातों ने सुगंधा के तन बदन में फिर से आग लगा दिया था इसलिए सुगंधा बोली कुछ नहीं बस केबिन के अंदर धीरे से उठकर बैठ गई और अपनी साड़ी को धीरे-धीरे कमर तक उठाने लगी,,,,, यह देख कर अंकित समझ गया कि उसकी मां क्या चाहती है इसलिए वह भी धीरे से अपनी पेंट की बटन खोलकर पेट को घुटनों तक की नीचे खींच दिया इस तरह की बातों से वह भी उत्तेजित हो गया था जिसका एहसास उसे उत्तेजित कर रहा था और उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा था सुगंधा देखते ही देखते हुए अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी पैंटी को भी धीरे से अपने बदन से अलग कर दी,,, और फिर वह अपने बेटे के कमर के इर्द-गिर्द घुटना रखकर बैठ गई, अंकित को कुछ भी करने की जरूरत नहीं थी सुगंधा खुद ही अपनी लपलपाती हुई बुर पर अपने बेटे का लंड पकड़ कर उसका सुपाड़ा सटा दी और अपनी भारी भरकम गांड का वजन उस पर बढ़ाने लगी देखते ही देखते अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में छुप गया डूब गया और फिर अपने बेटे के कंधे को पड़कर वह अपनी कमर को जोर-जोर से पटकने लगी।

चलती हुई बस में इस तरह का मजा लेने का आनंद ही कुछ और था जिसका एहसास मां बेटे दोनों को अच्छी तरह से हो गया था इसलिए अंकित भी देर ना करते हुए अपने हाथ को आगे बढ़कर अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया और बटन खोलने में से ज्यादा समय नहीं लगा,,,, और अपनी मां की ब्रा को नीचे से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ खींच दिया जिससे उसके दोनों कबूतर आजाद हो गए और अगले ही पल अंकित उसे अपनी दोनों मुट्ठी में भरकर उसकी आजादी को छीन लिया,,,,,।

अंकित को मजा आ रहा था अंकित अपनी मां की चूची में व्यस्त था और सुगंधा अपने बेटे के लंड पर अपनी गांड जोर-जोर से पटक रही थी,,,, सुगंधा अत्यधिक उत्तेजित हो चुकी थी ना चाहते हुए भी उसके मन में ख्याल आ रहा था कि अगर इस खेल में उसकी बेटी भी शामिल हो गई तो नजर किस तरह का होगा वह अपनी आंखों को बंद करके कल्पना कर रही थी,,,, वह इस समय कल्पना कर रही थी कि मां बेटी के साथ उसकी बेटी भी पूरी तरह से नंगी बिस्तर पर है और इसी तरह से वह अपने बेटे के लंड पर कुद है और उसकी बेटी अपनी गुलाबी बुर को अपने भाई के मुंह पर रखकर उस पर अपनी बुर रगड़ रही है और अंकित भी पूरी तरह से मस्त होकर अपनी बहन की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी बुर को मलाई की तरह चाट रहा है,,,,, इस तरह की कल्पना सुगंधा को मदहोश कर रही थी,,, बस में खिड़की से आ रही ठंडी हवा भी उसकी जवानी की गर्मी को शांत करने में नाकाम साबित हो रही थी। अपनी बेटी के बारे में सोच कर वह जोर-जोर से अपनी गांड को पटक रही थी,,,, और अंकित भी कुछ काम नहीं था वह भी अपनी आंखों को बंद करके अपनी मां की चूची को जोर-जोर से दबाते हुए अपनी बड़ी बहन के बारे में सोच रहा था।

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उसकी कल्पनाओं का घोड़ा भी बड़ी तेजी से दौड़ रहा था वह अपनी मन में यह सोच रहा था कि उसके लंड के ऊपर उसकी मां नहीं बल्कि उसकी बड़ी बहन बैठी हुई है और उसका मोटा तगड़ा बड़ा लंड उसकी बहन की बुर की गहराई में घुसा हुआ है,,, उसे दर्द महसूस हो रहा है लेकिन वह नीचे से अपनी कमर उछाल उछाल छल कर अपनी बहन की चुदाई कर रहा है,,, और लगातार उसके दोनों संतरे को अपने हथेली में लेकर दबा रहा है,,,,, मां बेटे दोनों पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे वातावरण की ठंडी हवा दोनों के ऊपर बेसर थी क्योंकि दोनों के ऊपर वासना का भूत जो सवार हो चुका था वासना की गर्मी वातावरण की ठंडक से शांत होने वाली नहीं थी वासना की गर्मी केवल सुगंधा की गर्म जवानी ही शांत कर सकती थी और इस समय सुगंधा पूरी कोशिश में लगी हुई थी अपनी और अपने बेटे की गर्मी उतारने में।

तकरीबन 25 मिनट तक अपने बेटे के लंड पर गांड पटकने के बाद दोनों का बदन अकडने लगा,,,, सुगंधा नीचे झुककर अपने बेटे को अपनी बाहों में भर ली जिसकी वजह से नीचे झुकने के कारण उसकी बड़ी-बड़ी गांड थोड़ी सी ऊपर उठ गई थी और यही मौका देखकर अंकित चढ़ाने से पहले अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे से जोर-जोर से धक्के पर धक्का लगने लगा और तब तक लगाता रहा जब तक की दोनों का पानी निकल नहीं गया।

दूसरे दिन सुबह वह लोग अपने शहर पहुंच चुके थे ,,, अपने शहर के बस स्टैंड पर उतरकर रिक्शा पकड़ कर वह दोनों अपने घर पहुंच चुके थे। काफी थके होने की वजह से वह लोग आराम करने लगे।

देर शाम को मां बेटे दोनों की नींद खुली,, तो अपने आप को अपने घर में पाकर दोनों को थोड़ी निराशा जरूर हुई लेकिन यह उनका खुद का घर था इसलिए यहां आना जरूरी था लेकिन जो मजा उन्हें तीन दिनों के अंदर मिला था वह दोनों जिंदगी भर भुलने वाले नहीं थे हर एक पल हर एक घंटा मदहोशी से भरा हुआ था,दोनों ने वहां पर कितना मजा किया था इस बात का जिक्र एक दूसरे को छोड़कर दोनों किसी और से कभी कर भी नहीं सकते थे। अंगड़ाई लेते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली,,।

बाप रे बहुत गहरी नींद लग गई थी।

हां वह तो है तीन दिन तक ठीक से ना तुम सो पाई हो ना मैं सो पाया हूं।

जगाया भी तो तूने हीं था।

आप कर भी क्या सकते हैं साथ में इतनी खूबसूरत औरत हो तो भला सोकर कोई वक्त बिताएगा क्या अगर सच में कोई सोकर वक्त बिताएगा इतनी खूबसूरत औरत साथ में होने के बावजूद भी तो दुनिया में उससे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं होगा।

मतलब की तु समझदार है!

बिल्कुल सही समय का सदुपयोग करना जानता हूं तुम्हारे साथ बिताया हुआ हर एक पल बहुत कीमती है इसलिए उसका समय कैसे बिताना है कैसे उपयोग करना है मैं यह अच्छी तरह से जानता हूं।

क्या जानता है,,?( सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)

यही कि तुम्हारे साथ जितना भी पल रहो लंड को तुम्हारी बुर में डाले रहो,,, तभी समय का सही उपयोग किया कहा जाएगा वरना सब कुछ बेकार है।

सच में तु बहुत बदमाश हो गया है,,।

बदमाशी करने में ही तो असली मजा है। तुम भी थोड़ी सी बदमाशी करती हो तभी तो मुझे इतना मजा देती हो जब शरीफ थी तो ना तुम मजा ले पा रही थी ना मैं मजा ले पा रहा था बस दोनों तड़प कर सो जाते थे।

अच्छा यह सब बदमाशी है।

तो क्या एक छिनार की बदमाशी,,, अगर तुम पर पुस्तक लिखा जाए तो उसका शीर्षक यही होना चाहिए छिनार की बदमाशी।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी और हंसते हुए बोली,,,)

च्छा यह बात है अब तो लेखक बनना चाहता है और किताब भी अपनी मां पर ही लिखना चाहता है।

किताब में मुख्य भूमिका में तुम और मैं कितना मजा आ जाए अगर सच में मैं किताब लिखना शुरू कर दूं तो हाथों-हाथ बिक जाएगी,,,।

अच्छा जब लोगों को पता चलेगा कि छिनार की बदमाशी पुस्तक में मां बेटे के बीच के अवैध संबंध को लेकर कहानी लिखी हुई है तो क्या इसे कोई खरीदेगा।

क्या बात कर रही हो मम्मी हांथो हाथ बिक जाएगी किसी को पता भी नहीं चलेगा की किताब कब दुकान पर आती है और कब बिक जाती है। लोग किताब लेने के लिए लाइन लगा कर रखेंगे।

क्या ऐसी किताबें लोग पढ़ते हैं।

क्यों नहीं पढ़ते हैं पिताजी की किताब हम दोनों ने पढे तो थे कितनी रसीली किताब थी पढ़कर ही लंड खड़ा हो जाता था और सच कहो तो किताब पढ़ने के बाद ही तुम्हें चोदने का मन मेरे दिमाग में एकदम बन गया था।

हां यह बात तो है किताब का हर एक करना एक अलग ही मदहोशी की कहानी कह रहा था सच में उसे पढ़ने के बाद कोई भी मर्द हो या औरत अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाता अगर जुगाड़ हो तो चुदाई या तो फिर हाथ से ही काम चला लेता इसके बावजूद भी कहानी को पढ़ने के बाद इस जुगाड़ में लग जाता कि कब उसके नीचे कोई आए जैसे कि तू। मैं देख रही थी तू कहानी जिस तरह से पढ़ रहा था तेरा लंड एकदम से खड़ा था तेरे पेट में तंबू बना हुआ था,,,

तुम्हारी बुर भी तो पानी छोड़ रही थी,,,,।

धत् ऐसा नहीं था,,,।

बिल्कुल ऐसा ही था मेरी जान जब पंखे की सफाई के लिए तुम टेबल पर चढ़ी थी तो तुम्हारी दूर से मदन रस की बूंद गिरकर टेबल पर अपनी आभा बिखेर दी थी जो मैं अपनी आंखों से देखा था,,,, अब तुम चाहे लाख इनकार करो लेकिन मैं नहीं मानने वाला क्योंकि मैं अपनी आंखों से देखा था।

अच्छा तो तु मेरी साड़ी के अंदर देख रहा था।

क्या करूं मैं अपनी लालच को रोक नहीं पाया था वह पल बेहद मदहोशी से भरा हुआ था और तुम भी तो मुझे अपनी बर दिखाना चाहती थी इसलिए तो अपनी चड्डी निकाल दी थी।

धत्,,,, झूठा,,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा शर्मा गई और मुस्कुराने लगी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा जो कुछ भी कह रहा है वह सच कह रहा है इस बात से वह पहले इनकार करें लेकिन हकीकत उसे भी पता थी वह जानबूझकर अपनी चड्डी निकाल कर अपने बेटे को वाकई में अपनी बुर के दर्शन कराना चाहती थी क्योंकि जितनी आग अंकित के बदन में लगी हुई थी उतनी ही आग उसके बदन में भी लगी हुई थी। अपनी मां की खूबसूरत चेहरे को शर्म से लाल होता देखकर अंकित मुस्कुराते हुए बोला।)

होठ भले इनकार कर रहे हो लेकिन तुम्हारा चेहरा झूठ नहीं कह पा रहा है देखो कितना शर्म से लाल हो गया है,,,,।

तू सच में हरामी है लगता है तूने बराबर मुझ पर नजर रखा हुआ था,,,, लेकिन तुझे कैसे पता चला कि मैं पंखा साफ करने से पहले चड्डी पहनी हुई थी।

जब मैं किताब पढ़ रहा था और किताब पढ़ कर जब मैं अलमारी में उसे रख दिया तब किसी बात को लेकर हम दोनों के बीच कुश्ती हुई थी पता है मैं तुम्हें लेकर बिस्तर पर गिर गया था और तुम्हारी टांग ऊपर उठ गई थी तुम्हारी साड़ी एकदम कमर तक आ गई थी तब मैं तुम्हारी चड्डी देख लिया था और उसके बाद जब पंखा साफ कर रही थी तब तुम चड्डी नहीं पहनी थी। इस बीच तुम कमरे से बाहर गई थी तभी निकल कर आ गई थी।

मेरी एक एक हरकत पर नजर रख रहा था है ना।

क्या करूं तुम्हें पाने का जो ख्वाब मन में बसा रखा था उसके लिए यह सब करना जरूरी था।

और आखिरकार तेरा ख्वाब पूरा हो गया जो मन में तूने सोचा था वह करके दिखा ही दिया। छिनार की बदमाशी। लेकिन तू अगर कहानी लिखेगा तो हम दोनों का जिक्र भी दिखेगा तो सबको पता नहीं चल जाएगा की कहानी मैं दोनों किरदार हम दोनों हैं। फिर तो हम दोनों की बहुत बदनामी हो जाएगी।

बेवकूफ थोड़ी ना हूं हरकतें हम दोनों की होगी सोच हम दोनों की होगी लेकिन किरदार के नाम अलग होंगे।

क्या नाम रखेगा किरदार का,,,,।

ऊममममम (कुछ देर सोचने के बाद) नूपुर और राहुल,,,,,,! यह कैसा रहेगा,,,.

पागल हो गया है क्या,,,(अपने बेटे को आंख दिखाते हुए) वह मेरी अच्छी सहेली है इस तरह से तो वह बदनाम हो जाएगी…

लेकिन उन दोनों के बीच भी तो यही रिश्ता है जैसा हम दोनों के बीच है।

तो क्या हो गया वह दोनों भी तो आपस में अपनी जरूरत को पूरा कर रहे हैं वैसे उन दोनों पर मुझे बहुत पहले ही शक हो गया था। लेकिन पूरी जानकारी तो नहीं है लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि हम दोनों के बीच में शारीरिक संबंध जरूर होगा। वरना एक बेटा अपनी मां से इतना खुलकर नहीं रहता की बाजार में उसकी गांड पर हाथ रख दे।

तुम देखी थी ऐसा करते हुए।

हां बिल्कुल दखी थी,,, वैसे अगर सच में कहानी लिखा जाए तो शुरुआत कैसे होगी कहानी की।

तुम बताओ तुम तो टीचर हो तुम्हें तो कहानी लिखने का ज्ञान होना चाहिए।

ऐसा थोड़ी ना है की मां बेटे के ऊपर में कहानी लिखने में महारथ हासिल की हूं,,,,।

चलो कोई बात नहीं फिर भी अगर लिखोगी तो कैसे लिखोगी यह तो बताओ,,,,।

हममममम,,,,, शुरुआत इस तरह से होगी,,,, अगर मैं अपनी आत्मकथा लिखूं इस शीर्षक के साथ तो ऐसे लिखूंगी,,,,।

आज बड़े सबेरे मेरी नींद खुल गई थी,,, जल्दी से घर का काम खत्म करके मुझे नहाना था लेकिन काम खत्म करते-करते एक घंटा जैसा समय गुजर गया था,,, मेरा बड़ा बेटा अभी तक अपने कमरे में सो रहा था मैं अपने कपड़े लेकर सीधा बाथरूम में चली गई लेकिन बाथरूम का दरवाजा टूटा हुआ था जिसकी वजह से दरवाजे की कड़ी नहीं लग पाती थी इसे बनवाना था लेकिन अभी पैसे का जुगाड़ नहीं था,,, मैं कुछ देर दरवाजे को ही देखती रही, फिर अपने मन में सोची अभी तो मेरे बेटे को उठने में समय है तब तक तुम्हें नहा लूंगी और यह सोचकर मैं अपनी साड़ी खोलना शुरू कर दी,,,, मैं मन में गीत गुनगुना रही थी, देखते देखते मैंने साड़ी अपने बदन से अलग करके उसे बाथरूम में ही रख दी,

एकदम बराबर जा रही हो आगे बढ़ती रहो,,,(अपनी मां के मुंह से कहानी के शब्द सुनकर अंकित उत्साहित हो रहा था और अपनी मां का हौसला बढ़ाते हुए आगे बढ़ने को बोल रहा था,,, सुगंधा भी अपने बेटे के मुंह से तारीफ सुनकर उत्साहित हो गई और वह भी बात को आगे बढ़ते हुए बोली।)

आगे सुन,,,,,, वैसे तो मैं अक्सर ब्लाउज और पेटीकोट में ही ना आई थी लेकिन आज सुबह जल्दी उठ जाने की वजह से न जाने क्यों मेरा मन अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नहाने का कर रहा था इसलिए मैं अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी वैसे ना जाने क्यों ब्लाउज का बटन खोलने में मेरे मन में अजीब सी हलचल हो रही थी क्योंकि बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था अगर बाथरूम का दरवाजा बंद होता तो मैं एकदम सहज रहती लेकिन दरवाजा खुला होने की वजह से तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी इसके बावजूद भी एक निश्चित भाव मेरे चेहरे पर बना हुआ था और मैं धीरे-धीरे अपने ब्लाउज के सारे बटन खोलकर ब्लाउज को उतारने लगी ब्लाउज के उतरने के बावजूद भी मेरे बदन पर मेरी लाल रंग की ब्रा मेरी चूचियों की शोभा बढ़ा रही थी। मेरे गोरे रंग पर लाल रंग की ब्रा खूब जच रही थी,,,, कुछ पल के लिए मैं अपनी नजरों को नीचे करके अपनी दोनों गोलियों को देखने लगी जो की लाल रंग की ब्रा में और भी ज्यादा खूबसूरत और मादक लग रही थी,,,, देखते ही देखते मैं अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले गई और ब्रा का हुक खोलने लगी, अगले ही पल मेरी कई हुई बड़ी-बड़ी चूचियों पर से ब्रा का कसाव एकदम से ढीला पड़ गया और मैं अपनी ब्रा को भी उतार कर साड़ी के ऊपर रख दे कमर के ऊपर में पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी अपनी नंगी चूचियों को देखकर खुद मेरे ही बदल में अजीब सी हलचल हो रही थी मुझसे रहने गया और मैं अपने दोनों हाथों में अपनी दोनों गोलाइयों को भरकर हल्के से दबा दी और मेरे मुख से हल्की सी शिसक की आवाज फूट पड़ी।
(अपनी मां के मुंह से इतना सुनते ही हौसला अफजाई करते हुए अंकित बोल पड़ा)

वाह मम्मी वाह तुम तो लेखक को भी पीछे छोड़ दोगी क्या गजब का कहानी बना रही हो और आगे बढ़ती रहो,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुरा दी,,,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

मैं खुद अपनी ही आवाज पर शर्मा गई और मेरे चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,,,, वैसे सच कहूं तो मेरी ख्वाहिश दब चुकी थी पति के जाने के बाद से मेरे चूचियों को अपने हाथों में लेकर दबाने वाला कोई नहीं था वैसे तो दबाने वाले बहुत मिल जाती है लेकिन मैं खुद ही आगे बढ़ना नहीं चाहती थी क्योंकि मेरा बेटा बड़ा हो गया था अपने बेटे की परवरिश में मैं अपनी भावनाओं को दबा दी थी,,,, लेकिन अचानक की मेरे हाथों से ही आज मेरे मन की प्यास थोड़ी सी भड़क गई थी लेकिन फिर भी अपने आप को संभालते हुए मैं अपने पेटिकोट की डोरी पर दोनों हाथों की नाजुक उंगलियों को ले गई और पेटिकोट की गिठान खोलने लगी,,,, देखते ही देखते मैंने पेटिकोट की डोरी को अपनी उंगली से पकड़ कर खींच दी और मेरी पेटिकोट मेरी कसी हुई गांड पर एकदम से ढीली हो गई,,,।
(इतना सुनते ही अंकित बोल पड़ा)

बाप रे मम्मी तुम तो मेरा लंड खड़ा कर रही हो क्या गजब की रचना है तुम्हारी,,,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा फिर से मुस्कुरा दी और आगे बोली,,,)

फिर भी मेरी नितंबों का उभार उन्नत था गजब का आकार लिया हुआ था जिस पर मेरी बेटी को टिकी हुई थी अगर सपाट नितंब होते तो मेरी पेटिकोट गिर कर मेरे कदमों में पड़ी होती लेकिन उन्नत नितंबों की वजह से मेरी बेटी को टिकी हुई थी जिसे मैं अपनी नाजुक हूं कैसे पकड़ कर उसे धीरे से हल्का सा खोली और इस अवस्था में अपनी उंगलियों से छोड़ दी और मेरी पेटिकोट एकदम से मेरे कदमों में जगी थी और मैं बाथरूम के अंदर संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था होने के कगार पर थी क्योंकि अभी भी मेरे नंगेपन को ढकने के लिए मेरी लाल रंग की पेंटि मेरे बदन पर थी,,,, मेरी सांसें थोड़ी भारी हो रही थी मैं अपनी दोनों टांगों के बीच अच्छी तो मेरी पेटी का आगे वाला भाग कचोरी की तरह खुला हुआ था मुझे समझते देर नहीं लगी कि मेरी हरकत से मेरा बदन उत्तेजित हो रहा था,,, मेरी हालत देखकर मुझे खुद पर हंसी आ रही थी,,,, मेरी फूली हुई पेंटी वाला भाग मुझे फिर से उत्तेजित कर रहा था ना चाहते हुए भी मेरी हथेली अपने आप ही उसे पर चली गई और मैं हल्के से अपनी हथेली का दबाव उसे पर बनाकर अपनी आंखों को बंद करके उसे पल को महसूस करने लगी जो की काफी मदहोश कर देने वाला था,,,, मेरी हालत खराब हो रही थी समय की नजाकत को देखते हुए मुझे जल्दी से नहा लेना था मैं अपनी पैंटी को उतारने लगी और अगले ही पल बाथरूम के अंदर में पैंटी उतार कर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी मैं बाथरूम के अंदर थी जिसका दरवाजा टूटा हुआ था और खुला हुआ था घर में मेरे बेटे किसी और कोई नहीं था और वह गहरी नींद में सो रहा था उसकी गहरी नींद का ही फायदा उठाकर में बाथरूम के अंदर पूरी तरह से नंगी हुई थी वरना बाथरूम का दरवाजा बंद करने के बावजूद भी मैं अपने बदन से सारे कपड़े इसलिए नहीं उतारती थी ताकि मैं कहीं बहक ना जाऊं,,,,।

लेकिन आज शायद मेरी किस्मत में कुछ और लिखा था मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थी बाथरूम के अंदर अपने आप को नंगी करके मेरे बदन में मदहोशी की लहर उठ रही थी मुझे रहा नहीं जा रहा था और मैं अपनी दोनों टांगों को हल्के से खोलकर अपनी गुलाबी बुर को देख रही थी जिस पर हल्के हल्के बालों का गुच्छा बना हुआ था क्योंकि बुर के बालों की सफाई किए हुए मुझे चार-पांच महीने बीत गए थे वैसे भी इसकी सफाई का कोई मतलब नहीं था क्योंकि बुर को चिकनी करके मैं किसे दिखाती,,,, इसे देखने वाला कोई नहीं था इसलिए मैं सिर्फ सफाई के खाती हूं साल में एक या दो बार ही बालों की सफाई करती थी लेकिन फिर भी बालों के बीच की मेरी पतली दरार गुलाबी लकीर बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही थी जो की बदन में हल्की उत्तेजना के कारण कचोरी की तरह फुल गई थी। मुझे नहाना था, मुझे खाना बनाना था नाश्ता तैयार करना था लेकिन न जाने क्यों मैं अपने भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थी ऐसा बरसों बाद हुआ था जब मैं अपने बस में नहीं थी और इसी के कारण मेरी हथेली कब मेरी बर पर पहुंच गई मुझे पता ही नहीं चला नंगी बुर पर हथेली रखकर बदन में अजीब सी सनसनाहट होने लगी पूरे बदन में उत्तेजना की लहर दोड़ने लगी मेरी आंखें अपने आप बंद होने लगी,,,,।

बाप रे मम्मी तुम तो मेरा लंड खड़ा कर दी हालत खराब कर दी सच में अगर इस तरह की कहानी लिखी जाए तो अपने आप ही पानी निकल जाए सिर्फ पढ़कर ही आगे बताओ आगे एक प्रकरण तो पूरा कर दो,,,,।

धत् हारामी तू मुझसे ना जाने क्या-क्या करवाएगा,,,।

अभी तो करवाने के लिए बहुत कुछ है मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि मेरी जिस तरह की हालत हुई है तुम्हारे मुंह से कहानी सुनाने में तुम्हारे कहने में भी तुम्हारी बुर पानी छोड़ रही होगी सच सच बताना छोड़ रही है कि नहीं,,,, बता दो नहीं तो साड़ी उठाकर देख लूंगा,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा शर्मा से पानी पानी में जा रही थी वह जानती थी कि उसका बेटा सही कह रहा था इसलिए वहां में सर हिला दी यह देखकर अंकित मुस्कुराने लगा और अपनी मां से बोला,,)

कहानी सुपरहिट है आगे बताओ,,,,,।

मेरी हालत खराब हो रही थी मुझे रहा नहीं जा रहा था बाथरूम का दरवाजा खुला था यह मैं जानती थी कि अगर मेरा बेटा आ गया तो मुझे इस हालत में देख लेगा तब बन जाने मेरे बारे में क्या सोचेगा लेकिन इस पल मुझे इसकी परवाह बिल्कुल भी नहींथी,,,। बस मजा लेने को दिल कर रहा था और इसी चक्कर में मेरा दूसरा हाथ मेरी चूची पर चली गई थी जो कि मेरी चूची इतनी बड़ी थी कि मेरे एक हाथ में ठीक तरह से आती भी नहीं थी फिर भी मैं बारी-बारी से दोनों चूचियों को दबा रही थी,,,, आंखों को बंद करके मदहोश हुए जा रही थी हालात पूरी तरह से खराब थी , बुर से निकलने वाले मदन रस के कारण मेरी हथेली चिपचिपी हो गई थी,,,, मेरी हथेली पर मेरे झांट के बाल टूट कर बिखरे हुए थे,,,, मुझसे मेरी उत्तेजना काबू में बिल्कुल भी नहीं हो रही थी,,,, और मैं एक फैसला ले ली जो मैंने आज तक कभी नहीं की थी। मैं अपनी बीच वाली होली अपनी बुर के अंदर प्रवेश कराने लगी और मेरे लिए हैरानी की बात यह थी कि मात्र उंगली प्रवेश के कारण ही मेरी बुर में दर्द महसूस होने लगा था यह शायद इसलिए कि पति के जाने के बाद से मैं अपनी बुर में उंगली तक नहीं डाली थी ताकि मेरी भावनाएं काबू में रहे और मैं कभी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने के लिए तड़प ना उठु और इसीलिए मेरी बुर का संकरापन बढ़ने लगा था वह एकदम कस चुकी थी मात्र उसमें से पेशाब करने का ही काम हो रहा था इसलिए मुझे हल्का सा दर्द महसूस हो रहा था और इस बात का गर्व भी हो रहा था कि मेरी बर एकदम जवान लड़की की तरह कसी हुई हो चुकी थी,,,।

ना चाहते हुए भी मेरे मन में यह ख्याल आ गया कि अगर वाकई में मुझे किसी के सामने हम बिस्तर होना पड़ेगा तो सामने वाला कितना खुश किस्मत होगा की उसे गदराई जवानी के साथ-साथ कसी हुई पर मिल रही है चोदने को,,,,।
(अपनी मां के मुंह से निकलने वाली इस बात को सुनकर अंकित से रहा नहीं गया और वह अगले ही पल अपने पेंट का बटन खोल कर अपने पेंट को घुटनों से नीचे खींच दिया और अपने खड़े लंड को हाथ में लेकर मुठीयाने लगा,,,, यह देखकर सुगंधा मुस्कुराने लगी तो अंकित बोला)

कसम से मम्मी रहा नहीं जा रहा है क्या गजब की कहानी बता रही हो ऐसा लग रहा है कि जैसे सब कुछ मेरी आंखों के सामने हो रहा है,,,,। अब आगे बताओ,,,।

धत् शाम ढल गई है खाने का बंदोबस्त भी करना है अब रहने दे,,,,।

प्लीज मम्मी कहो ना जब तक की पानी नहीं निकल जाता,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा अपने बेटे के खड़े लंड की तरफ अच्छी और मुस्कुरा कर अपनी बात को आगे बढ़ाने लगी,,,)

धीरे-धीरे मेरी उंगली मेरी बुर के अंदर घुस चुकी थी और मैं उसे अंदर बाहर करने लगी थी। मेरी हालत खराब हो चुकी थी एक खांसी में अपनी चूची को दबा रही थी और दूसरे हाथ की उंगली से अपनी बुर की गर्मी शांत करने में लगी थी। मेरी मदहोशी बढती जा रही थी मुझे भूल गई थी कि बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है लेकिन मैं निश्चिंत थी क्योंकि मैं जानती थी कि मेरा बेटा अभी सो रहा होगा,,,, तभी धीरे से मैं अपनी आंखों को खुली तो मेरे होश उड़ गए मेरे पैरों तले जमीन खिसकने लगी क्योंकि मेरी आंखों के सामने दीवार के पीछे छुप कर मेरा बेटा मुझे ही देख रहा था और जब मैं उसके हाथ की हरकत पर ध्यान दी तो मेरे होश उड़ गए,,, मुझे समझते देर नहीं लगी कि मेरा बेटा मुझे देखकर मुठ मार रहा था। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं मैं अजीब सी अवस्था में फंसी हुई थी मैं अपने बेटे की आंखों के सामने पूरी तरह से नंगी थी,,, मैं अपने आप को अपने बेटे की नजरों से छुपाने के बारे में सोच ही रही थी कि अभी मैं सोने लगी कि अगर वह जान जाएगा कि मैं उसे देख ली हूं तो वह शर्मिंदा हो जाएगा मैं न जाने क्यों अपने मन में ऐसा सोचने लगी कि मुझे ऐसा करना है कि मेरे बेटे को पता ही ना चले कि मैं उसे देख ली हूं,,,, और मेरी यही सोच मेरे पतन का कारण बनने वाली थी,,, मैं देख रही थी कि मेरा बेटा मुझे इस अवस्था में देखकर अपना लंड हिला रहा था मैं उसकी मनोस्थिति को समझ सकती थी। मैं जानती थी कि एक औरत को नंगी देखकर किसी भी मर्द का मन बह जाएगा और वह इस तरह की हरकत करने पर उतारू हो जाएगा लेकिन मुझे यह बात हजम नहीं हो रही थी कि इस तरह की हरकत करने वाला मेरा बेटा है और वह भी अपनी मां को देखकर इस तरह की हरकत कर रहा है यही सब सो कर मेरी हालत खराब हो रही थी लेकिन इस दौरान भी मेरी उंगली बराबर अंदर बाहर हो रही थी।

मुझे पूरा यकीन था कि मेरा बेटा पहली बार मुझे नग्न अवस्था में देख रहा था,,, मेरे हाथ में मेरी चूचियां थी तो और दूसरे हाथ की उंगली बुर में खुशी हुई थी अजीब सी स्थिति बनी हुई थी। देखते ही देखे मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी मेरा बदन अकड़ने लगा और मेरा पानी निकलता है इससे पहले एक बार फिर से मेरी नजर अपने बेटे पर पड़ी और सीधा उसके लंड पर चली गई उसके लंड को देखकर मेरा दिमाग एकदम से सन्न रह गया और मेरी बुर से भलबला कर पानी निकलने लगा मैं झढ़ने लगी,,, मेरे मुंह से अजीब अजीब सी आवाज ही नहीं कर रही थी जिसे सुनकर शायद मेरा बेटा समझ गया था कि मैं किसी स्थिति में पहुंच चुकी हूं इसलिए वह वहां पर ठहरना उचित नहीं समझा और फिर से अपने कमरे में चला गया शायद उसका काम अभी बना नहीं था वह अपना पानी निकालने के लिए गया था लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी इस अवस्था में अपने बेटे के कमरे तक जाऊं मैं झड़ चुके थे मेरा काम हो चुका था लेकिन मेरी हरकत की वजह से मां बेटे के बीच की मर्यादा टूटने के कगार पर आ चुकी थी। क्योंकि मेरी बेटी का लैंड मेरी आंखों में बस चुका था ना मोटा और लंबा शायद ही मैंने कभी देखी थी जहां तक मेरा ख्याल था कि मेरी आंखों के सामने आज तक मेरे पति का ही लंड आया था और मुझे पूरी तरह से याद है कि जिस तरह से मेरे बेटे का लंड था मोटा और लंबा उसके हिसाब से मेरे पति का उसके आधा भी नहीं था।

(इतना कहकर सुगंधा गहरी सांस लेते हुए चुप हो गई और अपने बेटे की तरफ देखने लगी जोर जोर से अपने लंड को हिला रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था लेकिन अपनी मां को खामोश देखकर वह समझ गया था कि अब उसे क्या करना है इसलिए वह बिल्कुल भी देर ना करते हुए एकदम से अपनी मां को बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दिया और उसकी दोनों टांगों को को खोलते हुए उसकी साड़ी को ऊपर की तरफ ले जाने लगा और अगले ही पल हुआ अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया था और उसकी लाल रंग की चड्डी को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ खींचने लगा था जिसमें सहायक बनते हुए सुगंधा खुद अपनी भारी भरकम गांड को कुछ पल के लिए हवा में ऊपर उठा दी थी जिससे उसकी चड्डी बाहर निकल जाए और अगले ही पल वह कमर के नीचे नंगी हो चुकी और अंकित अपने मोटे तगड़े लंड को बिना कुछ बोले अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,,, दोनों के बीच किसी को सुधार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों खामोश हो चुके थे क्योंकि दोनों की कहानी सुगंधा की जुबानी दोनों सुन चुके थे दोनों पागल हो चुके थे अंकित तब तक अपनी मां को चोदता रहा जब तक की दोनों का पानी नहीं निकल गया,,,,।

वासना का तूफान शांत होने के बाद धीरे से अंकित अपनी मां के ऊपर से उठा और मुस्कुराते हुए अपनी मां की तरफ देखकर बोला।)

बाप रे अगर सच में तुम कहानी लिखो तो तुम्हारी पहली कहानी है सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगी। जो तुम्हारी अलमारी में से किताब मिली थी उससे भी गजब की कहानी थी यह बाथरूम के अंदर अपनी मां को नंगी नहाता हुआ देखकर और अपनी उंगली से अपनी प्यास बुझाता हुआ देखकर वाकई में किसी भी बेटे का मन एकदम से बहक जाए और कुछ ना कर सकने की स्थिति में वह मुठ मारे बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकता,,,,,।

(सुगंधा धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतरी और फर्श पर गिरी हुई अपनी लाल रंग की चड्डी को उठाकर उसे पहनने लगी और पहनते हुए बोली)

क्या सच में मैं अगर कहानी लिखूं तो अच्छा लिख पाऊंगी,,,।

बिल्कुल गजब की कहानी लिखोगी अगर तुम लिखोगी तो,,,,।
(शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो गया था,,,,, सफाई करने के बाद सुगंधा खाना बना रही थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,,, अंकित कुर्सी पर बैठा हुआ था और दरवाजे पर दस्तक की आवाज सुनकर कुर्सी पर से उठकर खड़ा हुआ और जाकर दरवाजा खोलने लगा दरवाजा खुलते ही सामने देखा तो सुषमा आंटी थी सुषमा आंटी को देखकर ही अंकित मुस्कुराते हुए बोला।)

नमस्ते चाची,,,,,।
(अंकित को देखकर सुषमा के चेहरे पर प्रश्ननता के भाव नजर आ रहे थे,,, क्योंकि तीन-चार दिनों से उसने अंकित को अच्छी नहीं थी और उसका मन बहुत कर रहा था अंकित से चुदवाने का,,,,, इसलिए वह अंकित से बोली,,,)

कहां चले गए थे बेटा,,,,।
(रसोई में खाना बना रही सुगंधा सुषमा की आवाज सुनकर एकदम से दौडती चली आई क्योंकि उसे डर था कि कहीं अंकित सच्चाई ना बता दे,, की वह दोनों नैनीताल घूमने के लिए गए थे इसलिए वह सुषमा से बोली,,,)

अरे कहीं नहीं एक स्कूल की सहेली थी उसके घर पर शादी का फंक्शन था । वहीं तीन दिन ठहरना था।

अरे लेकिन बता कर तो जाती मैं देखी तो दरवाजे पर ताला लगा है मुझे लगा कहीं गए होंगे मार्केट करने लेकिन एक दिन बीत गया दो-तीन बीत गया पानी है तो ताला हटाने का नाम ही नहीं ले रहा था मैं तो चिंता करने लगी कि आखिरकार ऐसा क्या हो गया कि बिना कुछ बताइए लोग चले गए वरना कहीं भी जाते हो तो बता कर ही जाते हो।

अरे हम लोग इतनी जल्दबाजी में थी कि किसी को बताना ही भूल गए वरना बस छूट जाती तो गजब हो जाता जल्दबाजी में निकले थे इसलिए किसी को बता नहीं पाए,,,,।

चलो अच्छा है यहां तो कहीं वरना तुम लोगों के बिना तो अच्छा ही नहीं लग रहा था,,,, और हां पड़ोस में शर्मा जी के घर शादी है तुम्हारे घर भी निमंत्रण है दरवाजा बंद था तो लोग मुझे ही देकर गए थे।

शादी कब है चाची,,,।

शादी परसों है कल लेकिन फंक्शन में भी जाना है कल हल्दी की रसम है खाना पीना भी वही है इसलिए कल शाम को खाना बनाना नहीं।

चलो अच्छा हुआ तुमने बता दी,,,।

अच्छा ठीक है अब मैं चलती हूं,,,, नमस्ते

नमस्ते,,,,,(मां बेटे दोनों एक साथ सुषमा को नमस्ते बोली और सुषमा वहां से चली गई,,,, उसके जाते ही सुगंधा अपने बेटे से बोली,)

मुझे तो लगा कि तु कहीं बता ना दे कि हम लोग नैनीताल गए थे,,,,।

अरे मुझे बेवकूफ समझती हो क्या,,,? लेकिन अच्छा हुआ कि तुम आकर बता दे वरना में कोई और बहन बताने वाला था लेकिन तुम्हारा वाला कुछ ज्यादा बेहतर था क्योंकि दीदी के आने के बाद कहीं जिक्र हुआ कि हम लोग दो-तीन दिन के लिए कहीं गए थे तो तुम्हारा वाला बहाना एकदम ठीक है वह तो कभी पूछेंगे नहीं की कौन सी सहेली किसके घर,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंध मुस्कुराती और फिर वापस अपनी गांड मटका कर रसोई घर की तरफ जाने लगी)

सुगंधा बड़े ही सफाई से सुषमा को समझाने में कामयाब हो गई थी कि वह अपनी स्कूल की सहेली के घर शादी के फंक्शन में गई थी,, वैसे तो वह सुषमा को कुछ भी बता सकती थी लेकिन उसे इस बात का डर था कि कहीं सुषमा तृप्ति के आने पर यह बात की जिक्र छेड़ दे तो वह तृप्ति से क्या बोलेगी,,, इसलिए सुगंधा ने सुषमा से ऐसा बहाना बनाई थी कि इस बारे में अगर उसकी बेटी को भी पता चले तो वह उससे पूछ नहीं पाती क्योंकि उसे भी नहीं मालूम है कि स्कूल में उसकी मां की कौन-कौन सहेली है। लेकिन सुषमा ने जाते-जाते यह अच्छी खबर दी थी कि दूसरे दिन ही शादी में उसका निमंत्रण है खाना मत बनाना हल्दी की रस्म थी।

हल्दी की रस्में में जाने के लिए मां बेटे दोनों तैयार हो रहे थे शाम का वक्त था,, सुगंधा और अंकित के बीच ऐसी कोई मर्यादा नहीं रह गई थी जिसके चलते सुगंधा को शर्म करना पड़े इसलिए वह बाथरुम से नहाकर नंगी ही चलते हुए अपने कमरे में गई यह सब अंकित कुर्सी पर बैठा देख रहा था अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देखकर उसकी भावनाएं भड़कने लगी थी लेकिन फिर भी अपने मन पर काबू करके अपनी मां की कातिल अदा को देख रहा था, सुगंधा की बड़ी-बड़ी गोरी गांड हमेशा से उसकी सबसे बड़ी कमजोरी रही थी,,, और इस समय भी सुगंधा की गदराई और मटकती गांड अंकित के मन पर छुरियां चला रही थी सुगंधा अपने बेटे की तरफ मुस्कान का बाण फेंकते हुए अपने कमरे में चली गई,,, अंकित ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठ नहीं पाया और वह भी उठकर अपनी मां के कमरे में चला गया और बिस्तर पर जाकर बैठ गया उसकी मां नंगी ही अलमारी से कपड़े निकाल रही थी। बड़ा ही लुभावना दृश्य था,,, नितंबों के बीच की पतली दरार और पतली कमर के मोड पर बनती पतली सी लकीर किसी भी मर्द के लंड को खड़ा करने में सक्षम थी वैसे भी मर्दों को औरतों के अंगों का कटाव से बने हुए पतली लकीर कुछ ज्यादा ही अपनी तरफ आकर्षित करती है। बिस्तर पर बैठा अंकित अपनी मां की हर एक क्रियाकलाप को देख रहा था। सुगंधा अलमारी में से अपने पसंदीदा कपड़े को ढूंढ रही थी और बार-बार अंकित की तरफ देखकर मुस्कुरा दे रही थी। उसका इस तरह से मुस्कुराना अंकित को उत्तेजित कर रहा था।

अगर मां बेटे के बीच शारीरिक संबंध स्थापित न हो गया होता तो शायद सुगंधा का इस तरह से मुस्कुराना अंकित के लिए एक सुनहरा आमंत्रण का इशारा हो सकता था। लेकिन मां बेटे के बीच बहुत ही गहरा रिश्ता बन चुका था अंकित जब चाहे तब अपनी मां की चुदाई कर सकता था इसलिए वह अपनी भावनाओं पर काबू करके बैठा हुआ था क्योंकि वह दोनों हल्दी की रस्म में जा रहे थे उसकी मां तैयार होने जा रही थी अभी-अभी नहा करने के लिए थे इसलिए उसके बदन से उठ रही मादक खुशबू पूरे कमरे में फैली हुई थी, फिर भी अंकित से रहा नहीं गया तो वह अपनी मां से बोला।

सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो।

कपड़े पहने बिना ही तुझे खूबसूरत लग रही है कपड़े तो पहन लेने दे,,,।

मुझे तो तुम बिना कपड़े के ही बहुत खूबसूरत लगती हो,,।

अगर खूबसूरत लग रही हो तो क्या ऐसे ही बिना कपड़ों के हल्दी की रस्म में चली जाऊं।

मैं तो कहता हूं ऐसे ही चलो बहुत मजा आएगा।

हां ताकि सारे मोहल्ले का खड़ा हो जाए मेरी लेने के लिए।

बात तो सही है जब तुम कपड़े पहन कर मोहल्ले में चलती हो तो वैसे भी न जाने कितनों का खड़ा हो जाता होगा और बिना कपड़ों के जाओगी तो मुझे तो लगता है कि पानी ही निकल जाएगा।

और किसी ने दबा के चोद दिया तो।

इतनी किसी की हिम्मत नहीं है और वैसे अगर किसी ने हिम्मत दिखा कर दिया तो मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारे गुलाबी बुर के द्वारा तक उसका लंड पहुंच ही नहीं पाएगा,।

ऐसा क्यों,,,,?

क्योंकि तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड की गहरी दरार लंड को तुम्हारी बुर के छेद तक पहुंचने से पहले ही पिघला देगा उसका पानी निकाल देगा,,,।

(अपने बेटे कि ईस तरह की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी,,,, और हंसते हुए बोली लेकिन इस बीच वह पीले रंग की चड्डी अलमारी में से निकाल कर उसे हाथ में लेकर इधर-उधर घूमा रही थी)

लेकिन तेरा तो बड़े आराम से पहुंच जाता है।

क्योंकि तुम्हारी गांड का इलाका मेरा है मैं इसकी हर एक गली से बाकी हूं कैसे कहां से गुजरना है सब जानता हूं तभी तो मैं मंजिल तक पहुंच जाता हूं लेकिन अनजान लोग तुम्हारी गहरी घाटी में खो जाएंगे मंजिल तक कभी पहुंच ही नहीं पाएंगे इधर-उधर भटकते रह जाएंगे,,,,।
(इस बात पर सुगंधा जोर-जोर से हंसने लगी,,,, और हंसते हुए अपनी पीले रंग की चड्डी को पहनने लगी,,,,, उसे टांगों में डालकर मोती मोती जांघों के ऊपर खींचकर अपनी गुलाबी बुर को उसमें छुपाते हुए उसके इलास्टिक को परखने के लिए उसे ज़ोर से अपने हाथों से छोड़ दि और इलास्टिक जाकर एकदम से कमर से चिपक गई,,,, पीले रंग की चड्डी में सुगंधा की गोरी गोरी गांड बहुत ही खूबसूरत लग रही थी यह देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।)

तुम्हारे गोरे रंग पर पीला रंग कुछ ज्यादा ही जंचता है,,, देखना किसी के सामने साड़ी कमर तक मत उठा देना वरना वह उठने के लायक नहीं रह जाएगा वही खुशी से दम तोड़ देगा।

बस कर हरामी तू तो मुझे हंसा हंसा कर मार देगा,,,,,(अंकित की हर एक बात पर सुगंधा को हंसी आ रही थी। और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) जा जाकर जल्दी से तू भी तैयार हो जा….

मुझे तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा मैं तो तुम्हें तैयार होते हुए देखना चाहता हूं इसलिए यहां बैठा हूं।

ओह हो,,,,, तू तो ऐसा कह रहा है जैसे कि मुझे कभी देखा ही नहीं है। हारामी तूने मुझे हर हाल में इतनी बार देख लिया कि इतनी बार तो तेरा बाप भी कभी नहीं देखा था।

तभी तो मैं बाप से 10 कदम आगे हूं,,,।

ऐसे ही आगे रहना तभी तो मेरी जरूरत को तु पूरी कर पाएगा,,,,(अलमारी में से पीले रंग की ब्रा निकाल कर उसे अपने हाथ में डालते हुए बोली)

तुम चिंता मत करो तुम्हारी जरूरत पूरी करने के लिए तो मैं हमेशा हाजिर हूं तुम्हारी खिदमत में,,,,।
(अंकित अपने जवाब से अपनी मां को खुश कर दे रहा था देखते ही-देखते सुगंधा ब्रा और पैंटी पहन चुकी थी और फिर पेटिकोट पहन कर उसकी डोरी को बांध दी थी फिर उसके बाद ब्लाउज पहनने लगी जो की पीछे से डोरी वाली थी,,,, अंकित जानता था कि उसकी मां ब्लाउज की डोरी को बंद नहीं पाएगी इसलिए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और उसकी मां कुछ कहती है इससे पहले ही वहां ब्लाउज की डोरी को अपने हाथों में ले लिया यह देखकर उसकी मां मुस्कुराने लगी और बोली।)

मेरी जरूरत को अच्छी तरह से समझता है तु।

समझता हूं तभी तो तुम्हारे साथ तुम्हारे कमरे में हूं वरना बाहर बैठकर इंतजार कर रहा था।

बड़ा हाजिर जवाबी हो गया है तु।

तुम्हारे साथ रहना है तो हाजिर जवाबी बनना ही पड़ेगा तुम एक तीर छोड़ो हम दो तीर छोड़ेंगे,,,।

वाह मुकाबला टक्कर का है,,,।

बात तुमसे मुकाबले की आएगी तो चक्कर का बनना पड़ेगा वरना तुम्हारी गर्म जवानी के आगे ढेर होने में ज्यादा देर नहीं लगेगा।

(बातों ही बातों में अंकित अपनी मां की ब्लाउज की डोरी को कस दिया था उसके बदन पर सब कुछ पीले रंग का ही था पारदर्शी पीले रंग की साड़ी सुगंधा की खूबसूरती में चार चांद लग रही थी अपनी मां को पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद अंकित देखकर बोला।)

कसम से कह रहा हूं मम्मी आज हल्दी के रसम में न जाने कितनों का लंड खड़ा हो जाएगा और न जाने कितने लोग तुम्हारे नाम के मुठ मारेंगे,,,,।

और तू क्या करेगा,,,?

मै,,,,(गहरी सांस लेता हुआ अपनी मां के करीब गया और पीछे से अपनी बाहों में भरकर अपनी कमर को जोर-जोर से अपनी मां की गांड पर आगे पीछे करके हिलने लगा और बोला) घर पर आकर पटक कर तुमको पेलूंगा,,,,,.

धत्,,,, तब की तब करना अभी छोड़ मुझे,,,, और जाकर जल्दी से तैयार हो जा दूसरों की बात करते हैं तेरा खुद का खड़ा है जो कि रोज मेरी ले रहा है फिर भी,,,,,,।

अब क्या करूं तुम्हारी जवानी को सलामी देने के लिए यह सबसे पहले तैयार हो जाता है,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा फिर से हंसने लगी,, थोड़ी ही देर में दोनों हल्दी की रस्म में पहुंच चुके थे,,, बहुत अच्छा खासा माहौल बना हुआ था सुगंध को देखकर मोहल्ले की औरतें आपस में धीरे-धीरे बातें करने लगी थी क्योंकि इस बात का एहसास दिला रही थी की सुगंधा की खूबसूरती से कहीं ना कहीं उन्हें जलन हो रही थी और कुछ लोग खोलकर सुगंधा से मिल रही थी और उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रही थी जिसमें खुद शर्मा जी की बीवी भी थी वह सुगंध को देखकर एकदम से अपनी जगह से उठकर आई और सुगंधा का हाथ पकड़ कर बोली)

अरे वह सुगंधा सच कहूं तो दुल्हन तो तुम ही लग रही हो,,, तुम इधर आकर हमारी महफिल में चार चांद लगा दिया और हां तुम्हें नाचना होगा तुम बहुत अच्छा नाचती हो,,,,,।

क्या कह रही हो मैं कहां अच्छा नाचती हूं,,,।

तुम अच्छा नाचती हो मैं देखी थी और आज बिल्कुल भी बहाना नहीं चलेगा आखिरकार मेरी बेटी की शादी है,,,,।
(शर्मा जी की बीवी की बात सुनकर सुगंधा बोली कुछ नहीं बस मुस्कुरा रही थी,,,, सुगंधा औरतों के बीच जाकर बात कर रही थी और अंकित एक तरफ कुर्सी पर बैठा हुआ था कि तभी वहां पर सुमन आ गई सुमन भी पीले रंग की ड्रेस पहनी हुई थी पीले रंग का सलवार पीले रंग की कुर्ती में वह भी बहुत खूबसूरत लग रही थी अंकित को देखकर वह मुस्कुराते हुए बोली)

अच्छा हुआ तुम इधर अभी तुम तो ऐसे गायब हो गए थे जैसे कहते कि सर से सिंग गायब हो जाती है कहां चले गए थे,,,,(पास वाली कुर्सी को अपनी तरफ खींच कर ठीक अंकित के सामने बैठते हुए वह बोली, सुमन की मौजूदगी में अंकित थोड़ा उत्तेजित हो रहा था क्योंकि कई हुई सलवार में उसकी जवानी खुल खुल कर सामने आ रही थी,,,, उसकी बात सुनकर अंकित बोला)

मम्मी की सहेली थी उसके घर शादी थी वहीं चले गए थे,,,,।

चलो अच्छा हुआ कि सही समय पर आगे वैसे तुम बहुत हैंडसम लग रहे हो।

पीले रंग की सलवार कुर्ती में तुम भी बहुत खूबसूरत लग रही हो,,,।

सच में,,,

बिल्कुल मैं झूठ नहीं कह रहा।

(अंकित की बात सुनकर समान खुश होने लगी तभी सामने से शर्मा जी आते हुए दिखाई दिए और सुमन को आवाज लगाकर बोले)

बेटी सुमन,,,, जाकर थोड़ा हाथ बंटा लो मेहमानों को थोड़ा चाय पानी भी कराना है,,,, जाकर देखो तो सही तुम्हारी चाची क्या कर रही है।

जी चाचा जी मैं अभी जाती हूं,,,,,(इतना कहकर वह कुर्सी से उठकर खड़ी हो गई,,, और अंकित की तरफ देखकर बोली।)

तुम भी आ जाओ अंकित हाथ बंटाओगे तो अच्छा रहेगा क्यों चाचा जी।

हां हां अंकित बेटा तुम भी साथ में जो मैहमानो को चाय पानी पिलाओ,,,।

जी चाचा जी मैं भी जाता हूं,,,,(इतना कहकर वह भी कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया,,, और दोनों शर्मा जी के घर में प्रवेश कर गए,,,, जितना बाहर खूबसूरत सजाया हुआ था उतना ही घर के अंदर की भी सजावट मेहमानों का ध्यान अपनी तरफ खींच रही थी। शर्मा जी का घर भी बड़ा था,,,, अंतर जाते ही शरबत के क्लास की ट्रे रखी हुई थी सुमन एक हाथ में उसे उठा ली और अंकित को भी एक ट्रे लेने के लिए बोली वह भी सुमन की बात मानकर ट्रे उठा लिया यह देखकर शर्मा जी की बहू उधर आई और सुमन को मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

अच्छा हुआ तुम आ गई सुमन मेहमानों को तुम जल्दी-जल्दी शरबत पिलाओ काफी देर हो गई है।

जी भाभी कोई चिंता की बात नहीं है मैं आ गई हूं ना और यह मेरे साथ अंकित भी आ गया है यह काम तुम हम पर ही छोड़ दो।

ओह अंकित तुम,,,, तुम्हें देखकर अच्छा लगा क्योंकि तुम अक्सर कहीं आते जाते नहीं हो।

जी भाभी जी,,,,,,।

अच्छा तुम दोनों मेहमानों को देखो मैं रसोई का काम देख लेती हूं,,,,।

ठीक है भाभी,,,,,।
(इतना कहकर अंकित और सुमन दोनों मेहमानों को शरबत परोसने लगे,,,,, देखते ही देखते अंकित और सुमन दोनों मिलकर सभी मेहमानों को शरबत पिला चुके थे लेकिन खुद के लिए शरबत नहीं बचा था तो वह लोग शर्मा जी की बहू से बोले शर्मा जी की बहू उन्हें बताई कि,,,)

ऊपर वाले कमरे में जहां सारा रसोई का सामान पड़ा है वहीं पर शरबत बनाने का पाउडर भी पड़ा है बिस्तर पर जाकर ले आओ और बनाकर पी लेना देखो बुरा मत मानना सुमन बिल्कुल भी समय नहीं है।

अरे भाभी जी इसमें बुरा मानने वाली कौन सी बात है यह भी तो हमारा ही घर है हम काम नहीं करेंगे तो कौन करेगा क्यों अंकित।

जी भाभी जी आप चिंता मत करो हम लोग बना लेंगे अपने लिए,,,,,।

ठीक है तब तक मे रसोई का काम देख लेती हूं,,,,(इतना कहकर शर्मा जी की बहू रसोई का काम देखने के लिए चली गई और अंकित सुमन के साथ सीढ़ियां चढ़ता हुआ ऊपर आ गया,,,, अंकित को नहीं मालूम था की रसोई का सामान कौन से कमरे में रखा हुआ है,,,, इसलिए वह सुमन से बोला,,,)

रसोई का सामान कौन से कमरे में रखा है सुमन दीदी,,,।

अरे बुद्धू कितनी बार कहीं हूं कि अकेले में मुझे दीदी मत बोला कर,,,, चल मैं तुझे बताती हूं मैं यहां आती जाती रहती हूं इसलिए मुझे सब मालूम है,,(इतना कहकर सुमन अंकित का हाथ पकड़ कर गैलरी की तरफ ले जाने लगी उसके मन में कुछ और चल रहा था क्योंकि सारे मेहमान नीचे थे ऊपर कोई नहीं था और देखते ही देखते सुमन अंकित को लेकर रसोई के समान वाले कमरे में आ गई जो की काफी बड़ा था चारों तरफ रसोई का सामान पड़ा हुआ था क्योंकि शादी वाला घर था इसलिए सामान भी ज्यादा था इतना सारा सामान देखकर अंकित सुमन से बोला)

इतना सारा सामान है शरबत का पाउडर कहां रखा है कैसे पता चलेगा।

अरे बुद्धू यहां तुझे शरबत का पाउडर ढूंढने के लिए लाइ हु क्या,,,?

फिर,,,,!

(अंकित का इतना कहना था कि सुमन एकदम से उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दी एकदम मदहोशी में वह उसके होठों का चुंबन करने लगी पल भर में ही अंकित के तन-बदन में भी उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी पहले तो अंकित उसकी बाहों से छूटने की कोशिश कर रहा था क्योंकि शादी वाला करता यहां पर कोई भी आ सकता था लेकिन सुमन के बदन की गर्माहट उसे उत्तेजित करने लगी और वह भी एकदम से उत्तेजित होकर अपने दोनों हथेलियां को एकदम से उसकी सलवार के ऊपर से उसकी गांड पर रख दिया और उसे दबाना शुरूकर दिया,,,, दोनों मदहोश होने लगे अंकित पहले भी सुमन की चुदाई कर चुका था इसलिए आगे बढ़ने में अंकित को कोई भी दिक्कत पेश नहीं आ रही थी,,,, अंकित तो सुमन को देखकर ही उत्तेजित होने लगा था पीले रंग की उसकी सलवार में कसी हुई गांड उसके होश उड़ा रही थी लेकिन वह नहीं जानता था कि इसी मौके पर सुमन की जवानी का मजा उसे मिलेगा इसलिए वह दोनों हाथों को कसकर उसके दोनों नितंबों की फांक पर रखकर जोर-जोर से दबा रहा था,,,,, अंकित के हाथों में अपनी जवानी सौंप कर सुमन मदहोश हो रही थी दोनों एक दूसरे के मुंह में अपनी जीभ डालकर चुम्मा चाटी कर रहे थे,,,, इस दौरान सुमन जल्दबाजी दिखाते हुए एकदम से अंकित के पेंट की बटन खोलने लगी अंकित का होश उड़ा जा रहा था वाकई में सुमन बहुत तेज लड़की थी इस बात को अंकित पहले से ही जानता था क्योंकि जवानी का मजा सबसे पहले उसने ही अंकित को चखाई थी।

सुमन देखते ही देखते अंकित की पेंट की बटन खोलकर उसके मोटे-तगड़े लंड को उसके अंडर बियर से बाहर निकाल ली जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आकर फूंफकार रहा था। काफी दिनों बाद सुमन के हाथ में अंकित का मोटा तगड़ा लंड आया था जिसकी गर्मी से उसकी बुर का लावा पिघल रहा था उसकी बुर गीली हो रही थी,,,, उससे रहा नहीं जा रहा था,,,, वह धीरे से अंकित के होठों से अपने होठों को अलग की और फिर जल्दी से घुटनों के बल बैठ गई अंकित उसे घुटनों के बाल बैठा देखकर मदहोश होने लगा क्योंकि उसे मालूम था कि अब सुमन क्या करने वाली है लेकिन फिर भी वह शंका जताते हुए सुमन से बोला,,,।

कोई आ गया तो सुमन,,,,(वह दरवाजे की तरफ देखते हुए बोला जो की हल्का सा खुला हुआ था और उसे अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे पूरा बंद कर दिया लेकिन उसे पर कड़ी नहीं लगी थी, अंकित की बात सुनकर समान बोली,,,)

यहां कोई नहीं आने वाला है देख नहीं रहे हो सब अपने आप में ही मस्त हैं तब तक तो हम दोनों अपना काम खत्म करके यहां से चले जाएंगे,,,(इतना कहने के साथ ही सुमन अंकित के मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में भर ली और से चूसना शुरू कर दी अंकित तो पल भर में ही हवा में उड़ने लगा क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी की हल्दी की रस्म जैसे फंक्शन में उसे इस तरह का जिस्मानी सुख मिलेगा अंकित पागल हुए जा रहा था धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था सुमन भी अंकित के नितंबों को दोनों हाथ से पड़कर अपना मुंह आगे पीछे करके उसकी लंबाई को नाप रही थी देखते ही देखते अंकित उसके सर के बाल को पकड़ कर अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाने लगा एक तरह से हुआ सुमन के मुंह को ही चोद रहा था,,,, नीचे ढोलक के बचने की आवाज दोनों को साफ सुनाई दे रही थी लोगों के हंसने की आवाज खुश होने की आवाज के बीच सुमन के मुंह से मदहोशी की आवाज निकल रही थी वह पागल हो जा रहे थे उसकी बुर मदन रस से डूब चुकी थी जो कि उसकी पेंटिं को गीली कर रही थी,,,, कुछ देर तक सुमन इसी तरह से लंड चुसाई का मजा लेती रही लेकिन,, उसके पास समय का अभाव था इस बात से वह अच्छी तरह से वाकिफ थी इसलिए जल्दी से उठकर खड़ी गई और अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी अंकित भी जानता था वक्त की अहमियत को इसलिए पर अपनी पेट को जो उसके घुटनों में फंसी हुई थी उसे थोड़ा नीचे करके अपने पैरों में कर लिया और अपने लंड को पड़कर मुठीयाते हुए सुमन को देखने लगा जो की चुदवाने के लिए तैयार हो रही थी। दोनों उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुके थे दोनों भूल चुके थे कि वह दोनों कौन सी जगह पर हैं शादी के माहौल में बंद कमरे के अंदर दोनों जवानी का मजा लूटने में लगे थे।

सुमन अपनी सलवार की डोरी खोलकर अपनी चड्डी सहित उसे नीचे खींच कर अपनी घुटनों में फंसा ली और फिर अपनी गोल-गोल बड़ी-बड़ी गांड को अंकित को दिखाते हुए मुस्कुरा कर बेड का सहारा लेकर घोड़ी बन गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दे जितना हो सकता था लेकिन इतना पर्याप्त था टांग को खोलते ही उसका गुलाबी छेद नजर आने लगा जो की पूरी तरह से मदन रस में डूबा हुआ था,,,, यह देखकर अंकित सिरहाने गया और वह नीचे छुककर जीभ से उसकी बुर को चाटने लगा,,, अंकित की हरकत से सुमन मस्त होने लगी वह एकदम से अपने हाथ को पीछे की तरफ लाकर अंकित के सर पर रख दिया और उसके सर पर दबाव बनाते हुए उसे और भी ज्यादा प्रेरित करने लगी बुर चाटने के लिए,,,,, अंकित भी पागलों की तरह उसकी बुर चाट रहा था उसके मदन रस को अपने गले के अंदर उतर रहा था लेकिन समय का अभाव दोनों को था इसलिए जल्दी से वह उठकर खड़ा हो गया और अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गीली बुर पर लगाकर,,, जोरदार प्रहार किया और पहले ही प्रयास में अंकित का मोटा तगड़ा लंड सुमन की नाजुक बुर को चीरता हुआ उसके बच्चेदानी से जाकर कराया जबरदस्त प्रहार के कारण सुमन के मुंह से हल्की सी चेक निकल गई थी क्योंकि उसे नहीं मालूम था की पहली बार में ही अंकित तेज प्रहार कर देगा। लेकिन अंकित के तेज प्रहार के कारण वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी अंकित उसकी कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था अंकित उसकी चुदाई कर रहा था वह भी सुमन की बहुत दिन के बाद ले रहा था। इसलिए उसे भी बहुत मजा आ रहा था।

सुमन भी नहीं सोची थी की शादी के माहौल के बीच वह शर्मा जी के घर में घुसकर उनके ही कमरे में चुदाई का मजा लौटेगी लेकिन यह ख्याल उसके मन में पहले बिल्कुल भी नहीं था शरबत पीने का मन दोनों का था लेकिन शरबत का पाउडर लेने के लिए रसोई का सामान जा रखा था वहां आना था और कमरे में अंकित को अकेला देखकर सुमन का मन बहकने लगा था शरबत को छोड़कर उसका केला खाने का मन कर रहा था और इसीलिए आज वह जवानी का मजा लूट रही थी अंकित जोर-जोर से चोद रहा था वैसे भी अपनी मां को तैयार होता देखकर करवा काफी हद तक उत्तेजित हो गया था लेकिन उसे समय वह अपनी मां के साथ कुछ कर नहीं पाया था उसी की कसर वह सुमन के ऊपर उतार रहा था और सुमन को मदहोश कर रहा था सुमन हल्की हल्की सिसकारी की आवाज ले रही थी क्योंकि वह जानती थी कि जोर से आवाज निकालने का मतलब था कि मुसीबत में पड़ना और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी। वह चुदाई का मजा भरपूर ले रही थी सुमन की बड़ी-बड़ी गांड पर रह रहकर अंकित जोर-जोर से चपत लग रहा था जिससे उसकी गोरी गोरी गांड टमाटर की तरह लाल हो गई थी और वह कुर्ती के ऊपर से ही उसकी चूची को मसल रहा था जिससे सुमन का मजा दुगना होता चला जा रहा था लेकिन दोनों मदहोश हो रहे थे सुमन काफी दिनों बाद अंकित के साथ मजा ले रही थी इसके लिए उसकी सांसे जल्दी उखड़ने लगी उसका बदनाम करने लगा और वह एकदम से झड़ने के कगार पर पहुंच गई,,,, इसका अहसास होते ही हम की जोर-जोर से धक्के लगाने लगा लेकिन इस बीच धडाम की आवाज के साथ कमरे का दरवाजा खुला तब तक सुमन झड़ना शुरू कर दी थी लेकिन दरवाजा खोलने की आवाज से वह एकदम से चौंक गई थी दोनों पीछे नजर घुमा कर देखें तो शर्मा जी की बहू खड़ी थी उन दोनों को इस अवस्था में देखकर वह अपने मुंह पर आश्चर्य से हाथ रख ली थी और बोली ।

हाय दइया यह तुम दोनों क्या कर रहे हो,,,,,?

(इतना सुनते ही अंकित की हालत खराब हो गई और वह धीरे से अपने लंड को सुमन की बुर से बाहर निकाल लिया सुमन झड़ रही थी इसलिए मदहोशी में इस तरह से खड़ी रह गई थी क्योंकि उसमें हिम्मत नहीं थी. लेकिन अंकित एकदम से चौंक गया था क्योंकि उसकी छवि मोहल्ले में सीधे लड़के की थी लेकिन आज शर्मा जी की बहू ने मोहल्ले की ही लड़की की चुदाई करते हुए उसे पकड़ ली थी अंकित घबरा गया था एकदम से बोला)

भाभी जी,,,,,,

क्या भाभी जी तुम दोनों तो शरबत का पाउडर लेने के लिए उठा देना और यहां तो कुछ और ही खेल खेल रहे हो,,,,,।
(शर्मा जी की बहू की बात सुनकर धीरे से सुमन खड़ी हुई और अपनी पेंटी के साथ अपनी सलवार को ऊपर खींच ली वह भी काफी शर्मिंदा थी शर्मा जी की बहू के सामने शर्मा जी की बहू बोली)

तुम्हारे बारे में सुमन तो मैं सिर्फ सुन रखी थी लेकिन आज मैं अपनी आंखों से देख ली तुम्हारी करतुतों को,,,,

मुझे माफ कर देना भाभी यह सब किसी को बताना नहीं है मुझसे गलती हो गई,,,,,।

गलती हो गई अगर यह सब में नीचे जाकर बता दूं तो क्या इज्जत रह जाएगी तुम दोनों की,,,, तुम अंकित सुगंधा चाची के लड़के हो ना एक टीचर के लड़के होने के बावजूद कितनी गंदी हरकत करते हो।
(शर्मा जी की बहू की बात सुनकर अंकित रोने जैसा हो गया लेकिन तब तक शर्मा जी की बहू की नजर अंकित के खड़े लंड पर चली गई उसे देखकर वह एकदम से दंग रह गई उसे देखकर वह अपने मन में सोचने पर मजबूर हो गई कि आखिरकार इतना बड़ा लंड किसी का होता है क्या,,,? शर्मा की बहू तो देखते ही रह गई उसने जिंदगी में इतना मोटा तगड़ा और लंबा लंड नहीं देखी थी,,,, इसलिए अंकित के लंड को देखकर हैरान थी उसकी खुद की बोलती बंद हो गई थी आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था लेकिन सुमन काफी परेशान थी वह एकदम से हाथ जोड़कर बोली।)

प्लीज भाभी ऐसा बात किसी को मत बताना मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं तुम्हारे पैर पडती हूं,,,,।
(शर्मा जी की बहू जो यह सब देखकर काफी गुस्से में थी लेकिन अंकित के मोटे तगड़े लंड को देखकर उसका गुस्सा एकदम से गायब हो गया था उसके मन में अजीब सी उलझन होने लगी थी और बदन में थरथराहट होने लगी थी,,,,,, उसके मन में कुछ और चलने लगा था वह सुमन की बात सुनकर एकदम नरम लहजे में बोली ,,,)

अच्छा अच्छा ठीक है मैं किसी से नहीं कहूंगी,,,,(इतना कहकर शर्मा जी की बहू कमरे के अंदर रसोई कहां रखा सामान में से मिर्ची का बड़ा पैकेट निकाल कर सुमन को थमाते हुए बोली,,,)

यह ले मिर्च का पैकेट इसे जल्दी से रसोईया को दे देना,,,,,

ठीक है भाभी लेकिन किसी को कहोगी तो नहीं,,,,।

बिल्कुल भी नहीं कहूंगी लेकिन तुझे भी मेरा एक काम करना होगा तभी यह राज, राज रह पाएगा,,,,।

कौन सा काम भाभी आप जो कहोगी मैं वह करने को तैयार हूं,,,,,।

(सुमन की बात सुनकर शर्मा जी की बहू आगे बड़ी और बिस्तर पर रखा हुआ तारा और चाबी अपने हाथ में लेकर सुमन को थमाते हुए बोली)

यह ले ताला और चाबी जाते समय दरवाजा बंद करके उसे पर मार देना और यह चाबी अपने हाथ में ही रखना कोई कुछ मांगे तो तू ही इधर आना और अगर कोई ना भी मंगाए तो बिना कहे आधे घंटे के अंदर चली आना और कोई ना हो तो दरवाजा खोल देना,,,।

(खेली खाई सुमन शर्मा जी की बहू के कहने के मतलब को समझ गई थी इसलिए उसके चेहरे पर परेशानी के भाव एकदम से चले गए और वह मुस्कुरा दी यह देखकर शर्मा जी की बहू बोली,,,)

जल्दी जा रसोईया को दे दे वरना यहां कोई और आ जाएगा,,,,और जैसा बोली हुं वैसा ही करना।

ठीक है भाभी,,,,(इतना कहकर सुमन कमरे से बाहर निकल गई उसके सर से बहुत बड़ी मुसीबत टल गई थी और वह समझ गई थी कि अब शर्मा जी की बहू अंकित के साथ क्या करने वाली है और जाते-जाते दरवाजा बंद करते हुए मुस्कुरा कर दोनों की तरफ देखी अंकित सवालिया नजरों से सुमन की तरफ देख रहा था लेकिन इस बात का एहसास उसे हो गया था कि अब बंद कमरे में शर्मा जी की बहू के साथ उसे क्या करना है।)

अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था अनजाने में ही आज एक और बुर उसे मिलने वाली थी चोदने के लिए,, इतना तो अंकित समझ गया था कि जिस तरह से शर्मा जी की बहू ने सुमन को ताला चाबी दी थी दरवाजे पर लगाने के लिए आज उसकी किस्मत का ताला एक बार फिर खुलने वाला था। लेकिन इस तरह से एकाएक किसी औरत के साथ अंकित ने शारीरिक संबंध नहीं बनाया था बहुत ही कम समय में उसने केवल बस के अंदर सफर के दौरान उसे अनजान औरतों के साथ ही संबंध बना पाया था फिर भी उसके साथ संबंध बनाने में थोड़ी बहुत बातचीत का जरिया बना हुआ था और वह उसे पेशाब करने के लिए बस के नीचे ले गया था इन सब के दौरान दोनों के बीच अच्छी खासी बातचीत हुई थी जिससे अंकित को उसे चोदने में कोई परेशानी नहीं हुई थी,,,।

लेकिन यहां पर मामला कुछ अलग ही था शर्मा जी की बहू को वह ठीक तरह से कभी जनता भी नहीं था भले ही वह उसी मोहल्ले में शादी करके आई थी लेकिन आज शर्मा जी की बहू से अंकित की पहली मुलाकात थी और वह पहली बार ही शर्मा जी की बहू को देख भी रहा था इतने कम समय में किसी औरत के साथ दैनिक सुख प्राप्त करना और उसे प्रदान करना यह बड़ा कठिन कार्य था,,,, और वैसे भी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि शर्मा जी की बहू इतनी जल्दी तैयार कैसे हो गई उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए,,, यह अंकित के मन में सवाल घूम रहा था लेकिन वह शर्मा जी की बहू के बारे में नहीं जानता था शर्मा जी की बहू को इस घर में आए 3 साल गुजर चुके थे इन 3 साल में उसका पति 3 महीने भी उसके साथ बराबर नहीं था घर में उसके ननद की शादी थी और खुद उसका भाई काम में इस तरह से डूबा हुआ था कि हल्दी वाले दिन भी वह घर नहीं आ पाया था वह कल आने वाला था इसी से अंदाजा लगा सकते थे कि शर्मा जी की बहू अपनी जवानी के दौर का खुलकर मजा नहीं ले पा रही थी रोज रात को बिस्तर पर अपनी टांगों को आपस में रगड़कर अपनी भावनाओं को मार कर सोना उसके दिनचर्या हो चुकी थी,,,। लेकिन वह बेहद सीधी शादी और मर्यादा सील औरत थी। सुमन और अंकित को रंगे हाथ पकड़ने के बावजूद भी उसके मन में ऐसा कुछ भी नहीं था कि वह अंकित के साथ जवानी का मजा ले सके लेकिन अनजाने में उसकी नजर अंकित के मर्दाना अंग पर चली गई थी जिसे देखकर उसके होशो हवास उड़ गए थे क्योंकि अपने पति के अंग को देखकर वह अंकित के अंग के बारे में सोच रही थी जिसके आगे उसके पति का कुछ भी नहीं था और यही देखकर उसके मन में भी काम भावना प्रज्वलित होने लगी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि यही सही मौका है मजा लेने का ना किसी बात का डर क्योंकि वह खुद उसे रंगे हाथ पकड़ चुकी है इससे दोनों का राज राज ही रह जाएगा और वैसे भी अंकित उसके मोहल्ले का लड़का था और अंकित के बारे में सुनी थी कि वह बहुत सीधा-साधा लड़का है लेकिन आज अपनी आंखों से उसका सिधापन देखकर खुद उसकी भावनाएं बहकने लगी थी। अंकित के मोटे तगड़े लंड़ को अपनी बुर में लेने के लिए उसकी भावनाएं तेज हो चुकी थी इसीलिए वह जो नहीं करना था वही करने के लिए तड़प उठी थी।

धीरे-धीरे शर्मा जी की बहू अंकित की तरफ आगे बढ़ रही थी अंकित शर्मा के मारे नजर नीचे झुका ले रहा था वैसे वह शर्मा जी की बहू को नजर भर कर देख चुका था विवाहित होने की वजह से उसका शरीर जवानी से भरा हुआ था उसके अंग अंग में मादकता छलक रही थी ब्लाउज के अंदर कैद उसकी दोनों चूचियां कबूतर की भांति आजाद होने के लिए पंख फड़फड़ा रहे थे वैसे भी शर्मा जी की बहू की चूचियां खरबूजे जैसी बड़ी थी और उन्हें संभालने के लिए ब्लाउज का साइज छोटा था जिसकी वजह से ब्लाउज के बटन जहां लगे होते हैं वहां का कपड़ा कुछ ज्यादा ही खिंचा हुआ था जिससे ऐसा लग रहा था कि शर्मा जी की बहू की जवानी छलक रही हो। मोटी मोटी बांहें मांसल चिकनी कमर और ऊपर से गहरी नाभि कुल मिलाकर जवानी से भरी हुई शर्मा जी की बहू काम देवी लग रही थी। और ऐसी खूबसूरत नारी की जवानी का रस चखने वाला कोई नहीं था लेकिन आज यह सुनहरा मौका अंकित को प्राप्त हुआ था। इसलिए अंकित भी अपने आप को अंदर से तैयार कर रहा था वैसे भले ही वह शर्मा जी की बहू को देखकर घबरा गया था लेकिन वहां अपने लंड को पेट के अंदर छुपा नहीं पाया था उसका लंड अभी भी पेंट के बाहर अपना हुनर दिखाने के लिए सीना ताने खड़ा था,,,, जिस पर शर्मा जी की बहू की नजर बराबर लगी हुई थी,,, दरवाजा बंद होने के बाद दरवाजे पर ताला लगाने की आवाज अंकित को साफ सुनाई दे रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं दोनों पकड़े न जाए,, लेकिन शर्मा जी की बहू की मौजूदगी से उसमें हिम्मत आ रही थी और घर भी उसी का था तो जब सैया कोतवाल तो डर कांहे का यह मुहावरा यहां अंकित पर बराबर फिट बैठ रहा था,,, शर्मा जी की बहू की मुस्कान पूरी कहानी बयां कर दे रही थी कि उसके मन में क्या चल रहा है,,, वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए अंकित की तरफ आगे बढ़ रही थी उसकी चूड़ियों के खनक की आवाज से पूरा कमरा मदहोश हुआ जा रहा था वैसे भी हल्दी की रस्म थी इसलिए वह भी तैयार हुई थी और सही कहा जाए तो वह खुद एक दुल्हन की तरह लग रही थी पीली साड़ी में उसका गोरा रूप खिल उठा था।

यह तुम क्या कर रहे थे सुमन के साथ,,,?

ककककक,,, कुछ नहीं भाभी,,,!(अंकित थोड़ा डरते हुए बोला)

यह अगर कुछ नहीं था तो बहुत कुछ किया था अब छुपाने की कोई जरूरत नहीं है मैंने सब अपनी आंखों से देख ली हूं सुमन के बारे में तो मैं अपने कानों से सुन चुकी थी और आज अपनी आंखों से देख भी ली लेकिन तुम तो मोहल्ले के सबसे सीधे लड़के थे तुम कैसे ही इन सब पचड़े में पड़ गए,,,,,।

वो ,,,वो,,,, मैं कुछ करना नहीं चाहता था भाभी में तो यहां शरबत के पाउडर के लिए आया था लेकिन सुमन ही यह सब करने पर मजबूर कर दी,,,,।

ऊममम वह तो मैं देख ही रही हूं तुम्हारे पास हथियार ही इतना जानदार है कि कोई भी लड़ने के लिए मैदान में उतर जाए,,,(इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ ले जो की पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था उसकी गर्माहट अपनी हथेली में महसूस करके उसकी पसीजने लगी,,,, और अचानक उसके मुंह से निकल गया,,,,) सहहहहह आहहहहहह इतना मोटा और लंबा तो मैं आज तक नहीं देखी कौन सा तेल लगाता है रे ईस पर,,,,।

कोई भी तो नहीं भाभी यह ऐसा ही है,,,।

बाप रे यानी नेचुरल तौर पर ऐसा ही है अगर इसकी सरसों के तेल की मालिश की जाए तो यह तो और भी ज्यादा लेट्ठ बन जाएगा,,,(मदहोश होते हुए शर्मा जी की बहू अंकित के लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर उसे मुट्ठीयाने लगी,,,,, शर्मा जी की बहू की हरकत से अंकित की हालत खराब हो रही थी उसे मजा भी आ रहा था और उसे इस बात का डर था कि कहीं कोई आना जाए इस बात का डर तो उसके मन से निकल चुका था कि शर्मा जी की बहू कुछ करेगी क्योंकि वह शर्मा जी की बहू की हालत को समझ गया था वह जानता था कि अब ये बिना चुदवाए मानने वाली नहीं है,,,,, फिर भी जानबूझकर नाटक करते हुए अंकित बोला,,,)

यह क्या कर रही हो भाभी,,,,?

वही जो एक औरत को करना चाहिए सच-सच बताना सुमन की कितनी बार लिया है,,,,,।
(यह सुनकर अंकित कुछ बोल नहीं पाया खामोश हो क्या तो शर्मा जी की बहू फिर से अपनी बात को दोहराते हुए बोली,,,)

बताना घबरा क्यों रहा है कितनी बार लिया है सुमन की जिस तरह से तू धक्के लगा रहा था मुझे तो लगता है कि बहुत पहले से यह सब चल रहा है। (शर्मा जी की बहू मादक अदा से अपनी मुट्ठी में भरकर अंकित के लंड को धीरे-धीरे मुठिया रही थी ऐसा करने में उसे तो आनंद ही रहा था अंकित की भी हालत खराब हो रही थी,,, शर्मा जी की बहू के इस तरह के सवाल और उसकी हरकत से अंकित मदहोश हो रहा था उसे मजा आ रहा था फिर वह धीरे से बोला,,,)

तीन बार,,,,

ओहहहहह बहुत मजा आता है यह सब करने में सुमन की गांड भी बड़ी-बड़ी है लेने में तो मत हो जाता है तेरा चेहरा बता रहा है,,,,।
(शर्मा जी की बहू इस तरह की बातें करेगी अंकित को उम्मीद नहीं थी लेकिन इस तरह की बातें सुनकर अंकित के तन बदन में आग लग रही थी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी एक औरत का पहली बार में ही एक जवान लड़के के साथ इस तरह की बात करना कितना मदहोश कर देने वाला पल होता है,,,,,,, फिर वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) वह तो छिनार है लेकिन तुझे भी छिनरपन सीखा दी है,,,, मजा आ रहा था ना उसकी लेने में सच-सच बताना अब मुझसे छुपाने की जरूरत नहीं है,,,,,।(वह उसी तरह से धीरे-धीरे मुठिया रही थी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले लेकिन मजा बहुत आ रहा था इस सवाल पर भी वह कुछ बोल नहीं पाया,,,,, तो शर्मा जी की बहू फिर से बोली।)

बताना शर्मा क्यों रहा है,,,, मजा आया ना सुमन की लेने में,,,,

जजज,,,जी जी भाभी,,,,,।
(अंकित का जवाब सुनकर वह मुस्कुराने लगी उसकी आंखों में मदहोशी भरी हुई थी उत्तेजना से उसकी आंखें मदहोश हुए जा रही थी,,, और वह मुस्कुराते हुए फिर से बोली,,,)

कितनी बार पानी निकाला,,,,,।

एक भी बार नहीं,,,,।

मतलब तुम दोनों का काम अधूरा रह गया धत् गलत समय पर आ गई,,,,,,।

मेरा मतलब है कि सुमन का निकल गया था मेरा नहीं निकला,,,,,।

(इतना सुनकर शर्मा जी की बहू मादक अंदाज में मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ देखकर बोली)

कोई बात नहीं मेरे राजा मैं निकाल दूंगी तेरा,,, वैसे भी लड़कियों से ज्यादा मजा भाभिया देती हैं,,,,, उससे भी बड़ी-बड़ी चूची मेरी है और गांड जो तुझे बहुत पसंद आएगी,,,,,,(और इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू एकदम से अपना मुंह अंकित के लंड की तरह बधाई और अगले ही पल उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू करती अंकित तो सातवें आसमान में उड़ने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह सब हकीकत है उसे तो सब कुछ सपना ही लग रहा था,,, क्योंकि भला कौन यकीन कर पाएगा कि शादी वाले घर में जाने पर पहली मुलाकात में ही इस घर की बहू अपनी देने के लिए तैयार हो जाएगी,,,,, लेकिन यह सपना नहीं हकीकत था और इस हकीकत में अंकित डूबने लगा था अपनी आंखों को बंद करके इस पल का मजा लेने लगा था शादीशुदा होने के कारण एक मर्द को खुश करना शर्मा जी की बहु अच्छी तरह से जानती थी,,, वह पूरा का पूरा अपने गले तक उतार कर उसे कस रही थी शायद इस तरह का लंड उसे पहली बार मिला था,,,, और यह हकीकत ही था अंकित के लंड को चूसते हुए शर्मा जी की बहू अपने मन में यही सोच रही थी कि काश ऐसा लंड उसके पति का होता तो कितना मजा आता फिर अपनी मन में सोचने लगी कि अगर उसके पति का ऐसा होता भी तो उसे कौन सा मजा मिलने वाला था साल भर में तो 15 दिन के लिए ही आता है उसमें से ज्यादातर थककर सो जाता है,,,, वह अपने मन ही मन में सोच रही थी कि ऐसे आदमी को पाकर उसकी जिंदगी खराब हो गई। क्योंकि वह जवानी से पूरी तरह से भरी हुई थी ऐसे में हर रात उसे मर्द का साथ चाहिए था जो उसकी जवानी को अपनी बाहों में कस के दबोच कर उसका रस निकाल दे लेकिन यह सब सिर्फ उसका ख्वाब था उसकी कल्पना थी ऐसा मर्द अभी तक उसके जीवन में नहीं आया था लेकिन आज जैसे उसका भाग्य खुल गया था क्योंकि इस तरह के लंड के बारे में वह कभी कल्पना भी नहीं की थी और आज उसे उम्मीद से दुगना कल्पना से परे प्राप्त हो रहा था।

वह अपने मन में सोचने लगी थी कि वाकई में पति से ज्यादा मजा तो मोहल्ले के देवर देते हैं अगर सच में वह मोहल्ले के देवर से दिल लगा ले तो रोज रात को बिस्तर पर करोड़ बदल कर सोना नहीं पड़ेगा बल्कि देवर की बाहों में जवानी का असली सुख प्राप्त करके वह चैन की नींद सोएगी,,,,, पल भर में ही शर्मा जी की बहु बहुत कुछ सोच ली थी इस तरह के हालात में वह मर्यादा सील औरत की छवि को पूरी तरह से बदलकर रख दी थी,,, शर्मा जी की बहू संस्कारी औरत थी और उसके संस्कार के बारे में पूरा मोहल्ला जानता था उसकी इज्जत करता था उसे सम्मान देता था लेकिन इसके विपरीत उसका एक ऐसा विरोध था जो माहौल के हिसाब से पूरी तरह से बदल चुका था शर्मा जी की बहू में इस समय एक छिनार जागरूक हो गई थी जो अपने वतन की प्यास बुझाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो चुकी थी। वह पागलों की तरह अपने मुंह को ही ऊपर नीचे आगे पीछे करके अंकित के लंड का मजा ले रही थी। अंकित भी धीरे-धीरे खुलने लगा था क्योंकि वह जानता था कि अगर मजा लेना है तो उसे भी मैदान में उतरना पड़ेगा इस तरह से शर्माने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि शर्मा जी की बहू खुद मजा लेना चाहती है इसलिए वह एक हाथ शर्मा जी की बहू के सर पर रखकर अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिया था उसके ईस हरकत पर शर्मा जी की बहू मदहोश हुई जा रही थी अपने दोनों हाथों को अंकित के नितंबों पर रखकर उसे कसके दबाते हुए उसके लंड की चुसाई कर रही थी,,,,, शर्मा जी की बहू इस बात से भी हैरान थी कि अभी तक अंकित के लंड से पिचकारी नहीं निकली थी इतनी देर में तो उसका पति थककर सो भी ज्यादा उसे प्यासी छोड़कर लेकिन अंकित के मर्दाना ताकत को देखकर उसकी मां प्रसन्नता से चूमने लगा था क्योंकि उसे यकीन हो चला था कि अंकित उसकी प्यास को बुझा सकता है,,,, वह कुछ देर तक इसी तरह से अंकित को खुश करती रही फिर धीरे से उसके लंड को अपने मुंह में से बाहर निकले और धीरे से उठकर खड़ी हो गई उसका चेहरा उत्तेजना से लाल टमाटर की तरह हो गया था लंड मोटा और लंबा होने की वजह से उसे गले तक लेकर जो हिम्मत उसने दिखाई थी उसके चलते उसकी आंखें भी बड़ी-बड़ी हो गई थी। उसका खूबसूरत चेहरा देखकर अंकित की प्रसन्न दिखाई दे रहा था और वह धीरे से अपने लंड को पकड़ कर एक असली मर्द की तरह उसे मुठीयाते हुए मदहोशी भरी नजरों से शर्मा जी की बहू की तरफ देख रहा था। उसकी हरकत को देखकर शर्मा जी की बहू को एहसास होने लगा कि आज उसका पाला असली मर्द से पड़ा है,,, वह मुस्कुराते हुए अंकित से बोली।

क्या ऐसा मजा सुमन देती है,,,,?

बिल्कुल भी नहीं भाभी और तुम्हारी तरह हिम्मत नहीं दिख पाती बस ऊपर ऊपर से चुसती है वह कहती है की उसे इतने मोटे और लंबे लंड से डर लगता है,,,,(अंकित जानबूझकर इस तरह की बातें बना रहा था क्योंकि वह आज शर्मा जी की बहू को जमकर चोदना चाहता था,,,, अंकित की बात सुनकर शर्मा जी की बहू मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

इसलिए तो कहती हूं सुमन से ज्यादा मजा मेरी जैसी भाभिया ही दे पाएंगी,,,(, इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू अपने ब्लाउस को बिना खोले नीचे से ऊपर की तरफ करने लगी उसकी ब्रा भी साथ में ऊपर सरक रही थी,,,, देखते ही देखते अपने हाथों से ही बिना ब्लाउज खोलें वह अपनी एक बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी च को अपनी ब्लाउज से बाहर निकाल दे जो कि नीचे की तरफ लुभा रहा था शर्मा जी की बहू की हरकत को देखकर वह समझ गया था कि उसे क्या करना है इसलिए अंकित धीरे से आगे बढ़ा और उसे हाथ में लेकर दबाते हुए बिना कुछ बोलेगी उसकी खजूर जैसे निप्पल को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया उसकी इसी से शर्मा जी की बहू मदहोश होने लगी मत होने लगी उसकी आंखें अपने आप बंद होने लगी और अंकित अपनी हरकत को बढ़ाते हुए दूसरे हाथ को ब्लाउज के ऊपर रखकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया लेकिन अंकित जानता था कि इस तरह से पूरा मजा मिलने वाला नहीं है इसलिए वह कुछ देर तक किसी तरह से मजा लेने के बाद एकदम से गहरी सांस देता हुआ उसकी चूची से अपना मुंह हटाया और अपने हाथों से उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,,, शर्मा जी की बहू मदहोश हो चुकी थी मस्त हो चुकी थी उत्तेजना और कुमारी उसकी आंखों में सवार हो चुकी थी क्योंकि महीनों बाद उसे इस तरह का सुख मिल रहा था,,, क्योंकि तकरीबन 8 महीने जैसा समय गुजर गया था उसके पति को बाहर गए, तब से वहां बिस्तर पर अकेले ही करवट बदलकर अपने दिन गुजर रही थी लेकिन आज उसका दिन था आज उसकी मनोकामना पूरी होने वाली थी क्योंकि आज वहां असली मर्द की बाहों में थी असली मर्द के हाथों में खेल रही थी।

देखते ही देखते अंकित उसके ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी ब्रा को नीचे से पकड़ कर ऊपर की तरफ कर दिया और उसके दोनों दशहरी आम एकदम से आजाद हो गए शर्मा जी की बहू की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था वह दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर-जोर से दबाने लगा और इस बार अपने होठों को एकदम से उसके लाल-लाल होठों पर रखकर उसके होठों पर रसपान करने लगा अंकित की हरकत से शर्मा जी की बहू भी एकदम मदहोश और व्याकुल हो गई उसके दोनों हाथ अंकित की पीठ पर चली गई और वह भी उसका साथ देते हुए एक दूसरे के मुंह में अपनी जीभ को डालकर मजा लेने लगे,,, अंकित इस खेल का असली खिलाड़ी था भले ही शर्मा जी की बहू शादीशुदा थी लेकिन फिर भी वह अच्छी तरह से समझता था की चुदाई के मामले में शर्मा जी की बहू अनुभव हीन चुदाई के असली सुख सेवा वंचित थे उसे नहीं मालूम था की असली चुदाई किसे कहते हैं इसलिए अंकित अपने काम कला के सारे दांव पेच इधर आजमा लेना चाहता था,,, इसलिए तो उसकी चूचियों पर से हाथ हटाकर वह एकदम से अपने दोनों हाथों को उसके भारी भर के पिछवाड़े पर ले गए और साड़ी के ऊपर से ही उसकी बड़ी-बड़ी गांड को मसलने लगा दबाने लगा उसकी हरकत से, शर्मा जी की बहू के तन बदन में चुदाई का रंग चढ़ने लगा,,,, वह आनंदित होने लगी और वह भी उत्तेजना से अपने दोनों हाथों को अंकित के नितंबों पर रखकर जोर-जोर से दबाने लगी हालांकि इसकी हरकत से अंकित को भी बहुत मजा आ रहा था। दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के अंगों को दबोच रहे थे इस दौरान अंकित का खड़ा लंड साड़ी के ऊपर से ही शर्मा जी की बहू की बुर पर ठोकर मार रहा था। जिसका एहसास शर्मा जी की बहू को मदहोश कर रहा था वह जल्द से जल्द अंकित के लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,,,, इसलिए वह मादक स्वर में बोली।

ओहहह अंकीत सहहहहह आहहहहहह मुझसे रहा नहीं जा रहा है रे,,,,,,आहहहहहह,,,,, कुछ कर अंकित मैं पागल हो जा रही हूं डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में,,,,,(ऐसा कहते हुए शर्मा जी की बहू अंकित के लंड को अपने हाथ से पकड़ ली और साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर वाली जगह पर जोर-जोर से रगड़ने लगी उसका दबाव बनाने लगी.. उसकी हरकत से अंकीत भी मदहोश हुआ जा रहा था,,,,, लेकिन फिर भी इससे भी शर्मा जी की बहू को बर्दाश्त नहीं हो रहा था देखते-देखते वह अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी पड़कर उसे कमर तक उठा दी कमर तक साड़ी उठते ही उसकी आसमानी रंग की चड्डी दिखाई देने लगी क्योंकि आगे से काफी फली हुई थी और एकदम गीली भी हो चुकी थी जो कि उसके मदन रस के बदौलत ही वह भीग गई थी,,,, अपनी चड्डी के ऊपर से ही शर्मा जी की बहू अंकित के लंड को उसके सुपाड़े को जोर-जोर से अपनी बुर वाली जगह पर रगड़ रही थी। उसका गीलापन अंकित को अपने सुपाड़े पर अच्छे तरीके से महसूस हो रहा था। अंकित अभी भी उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर चूस रहा था उसकी चुसाई करने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,, फिर देखते ही देखते अंकित अपने एक हाथ को सीधा उसके चड्डी के अंदर डाल दिया और उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर रखकर उसे अपनी हथेली में दबोचने लगा जिससे शर्मा जी की बहू की हालत और ज्यादा खराब होने लगी वह एकदम से मदहोश होने लगी और खुद ही अपनी गांड को गोल गोल घूमा कर अपनी बुर को अंकित की हथेली पर नचाने लगी,,,,, शर्मा जी की बहू के मुख से हल्की-हल्की शिसकारी की आवाज निकल रही थी जिससे पूरा कमरा मदहोशी में डूबा हुआ था,,,, अंकित की हथेली पूरी तरह से चिपचिपी हो चुकी थी अंकित शर्मा जी की बहू की बुर की गहराई और कसाव का जायजा लेना चाहता था इसलिए धीरे से अपनी बीच वाली उंगली को उसमें प्रवेश कराने लगा,,,, अंकित की हरकत से शर्मा जी की बहू एकदम से मचलने लगी। उसकी मदहोशी बढ़ती जा रही थी उसे अपनी जवानी की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी।

धीरे-धीरे अंकित अपना हुनर दिखाता हुआ अपनी उंगली को पूरा का पूरा उसकी बुर में प्रवेश कर दिया था उंगली के प्रवेश करते ही शर्मा जी की बहू एकदम से मदहोश होने लगी उसे मजा आने लगा ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकित ने अपनी उंगली नहीं बल्कि अपना लंड डाल दिया हो,,, और वैसे भी जो औरत पूरी तरह से जवानी से भरी हुई है और रात को करोड़ बदल कर अपनी रात गुजर रही हो ऐसी औरत के लिए तो मर्द की उंगली भी लंड के बराबर होती है,, बुर के अंदर की गर्माहट और कसाव पन महसूस करके अंकित बेहद खुश नजर आ रहा था क्योंकि शादीशुदा होने के बावजूद भी आज उसे कई हुई बुर मिलने वाली थी चोदने के लिए,,, शर्मा जी की बहू की जवानी की धधक और अपनी तड़प देखकर अंकित से सब्र करना मुश्किल हुआ जा रहा था इसलिए वह एकदम से शर्मा जी की बहू को अपनी गोद में उठा लिया वह एकदम से घबरा गई लेकिन तुरंत उसके कंधे का सहारा ले ली उसने यह बात बोली भी कि कहीं गिर मत देना लेकिन अंकित जानता था कि उसे अब क्या करना है वह बिना कुछ बोले उसे कमरे में बिछे हुए नरम-नरम गद्दे पर उसे ले जाकर के पटक दिया,,,, अंकित की हरकत से उसकी साड़ी एकदम कमर तक उड़ गई थी उसकी मोटी मोटी जांघें ट्यूबलाइट की रोशनी में चमक रही थी,,,,, शर्मा जी की बहू की गदराई जवानी और गदराई जांघें अंकित के होश उड़ा रही थी उसे बर्दाश्त करना आप मुश्किल हुआ जा रहा था वह एकदम से बिस्तर के ऊपर झुका और शर्मा जी की बहू की चड्डी को दोनों हाथों से थाम लिया और एक झटके से उसे नीचे की तरफ सरकने लगा जिसमें खुद शर्मा जी की बहू उसकी मदद करते हुए अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा ली और अंकित अगले ही पल उसके बदन से उसकी चड्डी को अलग कर चुका था।

शर्मा जी की बहू का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि अब उसे लगने लगा इसलिए अब उसके बरसों की ख्वाहिश पूरी होने वाली है एक मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में प्रवेश करने वाला है,,,, और ऐसा होना ही था अगर अंकित की जगह कोई और होता तो अब तक उसकी बुर में लंड डालकर झढ़ भी गया होता लेकिन ऐसे ही नहीं औरतें अंकित की दीवानी हो जाती है क्योंकि अंकित को औरत को खुश करने का काम कला अच्छी तरह से मालूम था वह औरत को खुश करने में महारथ हासिल किया था उसका यह हुनर हमेशा औरतों को घुटना टेकने पर मजबूर कर देता था। अंकित बिस्तर के नीचे खड़ा था और शर्मा जी की बहू बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी अपनी दोनों टांगें फैलाएं उसकी गुलाबी बुर एकदमसाफ दिखाई दे रही थी अंकित तो उसकी बुर को देखता ही रह गया था,,,, उसकी कसी हुई बुर की बनावट देखकर कोई कह नहीं सकता था कि यह शादीशुदा है अभी भी एकदम कुंवारी बुर की तरह दिखाई दे रही थी हल्के हल्के बल से सुशोभित उसकी गुलाबी बुर खड़े-खड़े किसी भी मर्द का पानी निकाल देने में सक्षम थी। अंकित से रहा नहीं गया और वह उसकी बुर की तारीफ करते हुए बोला,,,।

वह भाभी क्या बुर हैं तुम्हारी सुमन तो तुम्हारे आगे कुछ भी नहीं है,,,,,।
(अंकित के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ खासकर के अपनी बुर की तारीफ सुनकर शर्मा जी की बहू फुले नहीं समा रही थी,,,,,, वह शर्म के मारे अपनी नज़रें इधर-उधर घूमा ले रही थी नीचे से ढोलक की आवाज लगातार आ रही थी लोगों के हंसने की नाचने गाने की आवाज आ रही थी नीचे का माहौल पूरी तरह से शादी वाला था और ऊपर के कमरे का माहौल शादी के बाद का सुहागरात वाला था,,,, जिसमें आज दुल्हन ननद की भाभी बनी हुई थी और पति मोहल्ले का जवान लड़का था। अपनी जवानी की गर्मी शर्मा जी की बहू से बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए वह अंकित से बोली।)

अंकित अब डाल दे अपना लंड मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,।

मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है भाभी,,,(ऐसा कहते हुए अंकित घुटनों में फंसी अपनी पेट को नीचे छुपाकर दोनों हाथों से निकाल कर अलग कर दिया कमर के नीचे हो पूरी तरह से नंगा हो चुका था शर्मा जी की बहू को लगने लगा कि अब उसके अरमान पूरे होने वाले हैं और अंकित धीरे-धीरे घुटनों के बाल उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच गया लेकिन शर्मा जी की बहू की सोच के विपरीत अगले ही पर अंकित अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर रख दिया और उसे चाटने लगा अंकित की इस हरकत के लिए शर्मा जी की बहू बिल्कुल भी तैयार नहीं थी उसे उम्मीद नहीं थी कि जवान लड़का उसकी बुर की चटाई करेगा जो कि उसकी यह दिली ख्वाहिश थी क्योंकि आज तक उसके पति ने उसे इस तरह का सुख कभी नहीं दिया था। इसलिए मोहल्ले के लड़के से इस तरह का सुख प्रकार शर्मा जी की बहू उत्तेजना और खुशी से गदगद हुए जा रही थी वह एकदम से अपने दोनों हाथ को अंकित के सर पर रखकर उसके मुंह को अपनी बउुर के ऊपर दबाना शुरू कर दी और अंकित भी जितना हो सकता था उतनी अपनी जीत को इसकी गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था कुछ देर तक अंकित इसी तरह से शर्मा जी की बहू को मदहोश बनाता रहा व्याकुल बनाता रहा वह बिस्तर पर तड़प रही थी छटपटा रही थी अंकित के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए लेकिन अंकित उसे तड़प रहा था असली खेल से वाकिफ कर रहा था और शर्मा जी की बहू भी इस तरह की छटपटाहट और तड़प कभी भी बिस्तर पर महसूस नहीं की थी आज वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह साक्षात कामदेव के हाथों में मदहोश हुए जा रही है उसे यकीन हो चला था कि अंकित कामकला में पूरी तरह से माहिर था।लेकिन अब शर्मा जी की बहू की मदद कर देने वाली जवानी की चमक में अंकित भी होने लगा था वह भी जल्द से जल्द शर्मा जी की बहू को भोगना चाहता था क्योंकि धीरे-धीरे समय व्यतीत होता चला जा रहा था कोई भी किसी भी समय यहां आ सकता था,,,, इसलिए धीरे से अंकित शर्मा जी की बहू की गुलाबी पर से अपने मुंह को ऊपर की तरफ उठाया उसके हॉट पर उसके मुंह पर उसका मदन रस लगा हुआ था जो कि उसके मुंह से टपक रहा था यह देखकर शर्मा जी की बहू शर्म से पानी पानी होने लगी उसका चेहरा और का लाल हो गया अंकित यह देखकर मदहोश होने लगा और अगले ही पर उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी जांघो पर चढ़ा लिया,,, धीरे-धीरे वह अपने मोटे सुपर को शर्मा जी की बहू के नाजुक गुलाबी बुर के अंदर प्रवेश करने लगा जैसे-जैसे लंड अंदर की तरफ आगे बढ़ रहा था वैसे-वैसे शर्मा जी की बहू के चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे,,,, शर्मा जी की बहू को भी इस बात का हिसाब से हो रहा था कि वाकई ने उसकी बुर में आज मर्दाना लंड घुस रहा था उसकी हालत खराब हो रही थी उसे दर्द महसूस हो रहा था लेकिन ना तो वह रुकने वाली थी और ना ही अंकित को अपने वाला आधा लंड घुसने के बाद अंकित ने करारा चोट लगाया और अंकित का पूरा का पुरा लंड सडसडाता हुआ उसकी बुर की गहराई में खुशियां उसके बच्चेदानी से टकरा गया और उसके मुंह से चीख निकल गई लेकिन उसकी चीख की आवाज ढोलक की आवाज के बीच दब गई अगर शादी वाला करना होता तो उसके चिखने की आवाज जरूर कोई ना कोई सुन लेता,,, लंड की मोटाई और लंबाई के घुसने का दर्द शर्मा जी की बहू के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,, लेकिन अंकित यह देखकर हैरान था कि वह बिल्कुल भी उसे रोकने के लिए नहीं कह रही थी शायद यह पल उसके लिए बेहद कीमती था ऐसा मजा उसने जिंदगी में कभी नहीं ली थी इसलिए वह अपने दर्द को पी गई थी इस अद्भुत अवसर को जीने के लिए,,,,।

 

अंकित पूरा काम कर चुका था उसका पूरा का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में घुस चुका था वह भी हैरान थी क्योंकि वह अपने मन में इस बात की शंका जाता रही थी कितना मोटा और लंबा लंड उसकी बुर में घुस पाएगा कि नहीं लेकिन सब कुछ बढ़िया आराम से हो गया था थोड़ा दर्द झेल लेना जरूर पड़ा था लेकिन उसके बाद सब कुछ आनंद के सागर में गोते लगाने जैसा था अंकित शर्मा जी की बहू की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था वह उसे चोद रहा था,, कसी हुई बुर में लंड डालने का अपना अलग ही मजा होता है इस बात का एहसास अंकित को भी था इसलिए अंकित के चेहरे पर प्रसन्नता और उत्तेजना के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे। अंकित पसीने से तरबतर हो चुका था आखिरकार कोई भी चीज पाने के लिए मेहनत तो करनी पड़ती है,,, लेकिन यह मेहनत रंग ला रही थी अंकित शर्मा जी की बहू पर पूरी तरह से छा चुका था उसे अपनी बाहों में भरकर धक्के लगना शुरू कर दिया था क्योंकि अब समय दोनों के लिए बहुत कम था कुछ देर तक इसी तरह से अंकित शर्मा जी की बहू की चुदाई करता रहा और शर्मा जी की बहू का बदन करने लगा वह करने वाली थी उसके मुख से अजीब अजीब सी आवाज निकल रही थी,,,, और अंकित के धक्के तेज हो गए वह झड़ने लगी थी वह एकदम से अंकित को अपनी बाहों में कस ली थी जिंदगी में पहली बार वह इस तरह का चरम सुख प्राप्त की थी वह एकदम गदगद हुए जा रही थी।

शर्मा जी की बहू एक बार झड़ चुकी थी और अंकित धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल दिया था शर्मा जी के बहू को लग रहा था कि काम खत्म हो गया है वह बिस्तर से नीचे उतरकर अपने कपड़े पहन रही थी कि अंकित उसे पकड़कर घोड़ी बना दिया और बोला,,।

कहां जा रही हो भाभी अभी तो मेरा निकला नहीं है,,,।
(यह सुनकर शर्मा जी की बहू हैरान हो गई क्योंकि अभी कुछ देर पहले ही वहां सुमन की चुदाई करके उसे संतुष्ट कर चुका था और एक बार उसे खुद संतुष्ट कर चुका था लेकिन उसका खुद का पानी नहीं निकला था शायद यही असली मर्द की पहचान होती है और वह खुशी-खुशी फिर से घोड़ी बन गई उसकी गोल-गोल बड़ी-बड़ी गांड देखकर अंकित की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह एकदम से पीछे से शर्मा जी की बहू की गुलाबी बुर में अपना लंड डाल दिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और तब तक उसकी चुदाई करता रहा जब तक उसका पानी नहीं निकल गया लेकिन इस दौरान उसका पानी निकालते निकालते दरवाजे पर दस्तक होने लगी थी सुमन बाहर आ चुकी थी क्योंकि दस्तक देते हुए वहां बता रही थी कि वह समान है नहीं तो दोनों घबरा जाते की कही कोई आ तो नहीं गया,,,,, दोनों अपने-अपने कपड़े पहन कर अपने आप को दुरुस्त कर लिए थे शर्मा जी की बहू के चेहरे पर संतुष्टि के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे,,,, कपड़े पहन लेने के बाद शर्मा जी की बहू बोली।

दरवाजा खोलो सुमन,,।
(अगले ही पल दरवाजा खुला और सुमन ने शर्मा जी की बहू की तरफ देखकर चुटकी लेते हुए बोली)

वह भाभी तुम्हारा चेहरा तो खिला-खिला दिखाई दे रहा है इसका मतलब है कि आज बहुत मजा ली हो,,,।

तो क्या मेरी लाडो आज तो मजा ही आ गया,,,,(गाल पर चुटकी भरते हुए शर्मा जी की बहू बोली और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)
अब धीरे से दरवाजा बंद कर दे और नीचे आजा किसी को शक ना होने पाए,,,,,।(इतना कहकर शर्मा जी की बहू नीचे चली गई और थोड़ी देर बाद सुमन और अंकित दोनों मुस्कुराते हुए नीचे आ गए अभी भी हल्दी की रस्म जारी थी और वह दोनों हल्दी की रस्म में शामिल हो गए।

ऐसा लगने लगा था कि अंकित जहां-जहां जाता था वहां वहां औरतें हाथ होकर उसके पीछे पड़ जाती थी उसकी किस्मत बड़ी तेज थी उसके दोनों हाथों में हमेशा लड्डू रहते थे वह कभी सोचा भी नहीं था कि हल्दी की रस्म में जाने पर दो-दो बुर उसे चोदने को मिल जाएगी,,,, सुमन की तो वह लेता ही रहता था लेकिन सुमन ने जिस तरह से हिम्मत दिखाई थी उसकी हिम्मत देखकर अंकित को वह अपने मुकाबले की लड़की लगने लगी थी लेकिन जब उसने शर्मा जी की बहू को देखा जो उन्हें रंगे हाथ पकड़ ली थी वह कभी सोचा भी नहीं था कि शर्मा जी की बहू उसे मौके का पूरा फायदा उठाएगी जो की पूरी सजी धजी थी और किसी दुल्हन से काम नहीं लग रही थी,, वह भी अंकित के मोटे तगड़े मुसल को देखकर अपना आपा खो दी थी अपने चरित्र को एक तरफ रखकर वह उसे पाल का पूरा आनंद ले लेना चाहती थी और उसने वैसा ही की,,,,।

तभी तो कहा जा रहा था कि जैसे अंकित की किस्मत को पंख लग गए हो, हल्दी की रस्म खत्म होने के बाद खाना खाने के बाद मां बेटे दोनों घर लौट आए थे,,,, घूम करने के बाद मां बेटे दोनों के लिए यह दूसरी रात थी पहली रात तो वैसे ही गुजर चुकी थी खाना दोनों खा चुके थे इसलिए खाना बनाने का झंझट बिल्कुल भी नहीं था इसलिए थोड़ी देर बैठकर आराम करने के बाद मां बेटे दोनों छत पर आ गए,,, गर्मी की वजह से सुगंधा साड़ी उतार कर गाउन पहन ली थी,,, गाउन भी पारदर्शक था जिसमें सब कुछ दिखाई दे रहा था दोनों के बीच इतनी बार संबंध बन चुके थे कि, आपस में दोनों इस तरह से रहते थे कि एक दूसरे के अंगों को देखने के बाद भी उन लोगों को असहज बिल्कुल भी महसूस नहीं होता था,,, दोनों हमेशा सामान्य बने रहते थे, अंकित छत पर चटाई बिछाने लगा, सुगंधा रात में अपने मोहल्ले का नजारा देखने लगी धीरे-धीरे सभी के घरों की लाइटें बंद हो रही थी किसी के घर में अंधकार छा गया था तो किसी के घर में जीरो का बल्ब जल रहा था,,, गहरी सांस लेते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली।

असली सुकून तो अपने घर पर ही आकर मिलता है,,,।

तुम सच कह रही हो मम्मी होटल का कमरा चाहे जितना महंगा हो चाहे जितना सुविधा से भरा हो लेकिन जो सुकून अपने घर पर चटाई पर सोने में मिलता है वैसा सुकुन गद्दे पर भी सोने में नहीं मिलता,,,,।

लेकिन यह सुकून अब कुछ दिनों का है,,, (मोहल्ले की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली तो अपनी मां की बात सुनकर अंकित अपनी मां की तरफ देखने लगा और बोला)

कुछ दिनों का मतलब,,,!

अरे बुद्धू छुट्टियां खत्म होने वाली है तेरी बड़ी बहन भी तो आएगी फिर हम दोनों के बीच का यह रिश्ता पता नहीं कैसे आगे बढ़ेगा,,,,।

ओहहह यह बात है,,, मैं समझा कौन सी बात हो गई चिंता करने की कोई बात नहीं है आए दिन समय तो मिल ही जाएगा,,,,।

मिल तो जाएगा लेकिन रात को तेरी बाहों में जो सुकून मिलता है वह तब नहीं मिल पाएगी मुझे तो तेरी बाहों में ही नींद आने लगी है एक आदत सी पड़ गई है पता नहीं तृप्ति के आने के बाद यह सब कैसे चलेगा।

अरे बिल्कुल चलेगा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करना,,, मैं हूं ना सब संभाल लूंगा,,,,, और हां आज शर्मा जी के घर बहुत मजा आया तुम्हारा डांस देख कर तो मैं आश्चर्यचकित हो गया तुम इतना अच्छा नाचती हो एक बार पहले भी देख चुका हूं लेकिन तब तुम्हारी तरफ देखने का नजरिया कुछ और था

और अब,,,,!(अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए सुगंधा बोली)

अब तो तुम्हें नाचते हुए देखा तो ऐसा लग रहा था कि बस तुम्हें देखा ही रहो तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में कैद जब तुम हाथ हिला हिला कर नाच रही थी तो ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त तुम्हारा ब्लाउज का बटन टूट जाएगा और तुम्हारे दोनों कबूतर हवा में लहराते लगेंगे,,,,।

धत् हरामी,,,,,,।

अरे सच कह रहा हूं मोहल्ले की औरतें तो तुम ही को देख रही थी कुछ औरतें तो तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड के बारे में बातें कर रही थी सच में उन्हें सुनकर तो मेरा इस समय खड़ा हो गया था,,,।

क्या बातें कर रही थी,,,?(उत्सुकता दिखाते हुए सुगंधा बोली)

बोल रही थी कि चाहे जो भी हो सुगंधा की गांड सच में इस उम्र में भी एकदम कसी हुई है,,,, हमारी तो ढीली होने लगी है,,,,।

यह कौन कह रहा था,,,,।

शर्मा जी के बगल में जो घर है ना,,,,।

ओहहह ,,,,, सच में वह ऐसा कह रही थी,,,।

बिल्कुल मम्मी तुम्हें नाचते हुए देख कर ना जाने कितनी औरतें की गांड जल गई होगी,,,,, लेकिन मजा बहुत आया मेहंदी की रस्म में,,,,।

हां यह बात तो है शर्मा जी ने अच्छा व्यवस्था किया था,,, कल तो बारात आएगी कल भी शादी में जाना होगा,,,,।

हां वह तो है,,,,, लेकिन न एक बात मुझे समझ में नहीं आई,,,।

क्या,,,?

शर्मा जी का बेटा हल्दी की रस्म में नहीं था सोचो उसकी खुद की बहन की शादी है और वह समय पर घर पर ही नहीं है ऐसे में शर्मा जी को कितनी दिक्कत सहनी पड़ी होगी सारा ताम-झाम व्यवस्था उन्ही को देखना पड़ा होगा,,,,।

हां बिल्कुल,,,,,, मैं और सुमन दीदी खुद लोगों को शरबत बांट रहे थे देखी तो थी तुम,,,,, शर्मा जी खुद बोले थे मदद करने के लिए।

अरे यह तो अच्छी बात है लड़की की शादी में मदद करना ही चाहिए,,,,।
(अंकित अभी भी चटाई पर बैठा हुआ था और उसकी मां दीवार पकड़ कर खड़ी होकर रात का नजारा देख रही थी तभी अंकित अपनी मां से बोला,,)

मैंने सुना की शर्मा जी का बेटा छः छः महीना घर पर नहीं आता,,,।

हां मैं भी कल ही सुनी और से बात कर रही थी क्योंकि हल्दी की रस्म के दिन भी वह नहीं आया था,,,।

तब तो बहुत बेकार है,,, मैं तो यह भी सुना की शर्मा जी का बेटा घर पर इतने दिनों तक नहीं आता जरूर उसकी बीवी का किसी के साथ चक्कर है तभी तो एकदम बनी ठनी रहती है।

नहीं नहीं ऐसा बिल्कुलभी नहीं है आते जाते खुद उससे कई बार मुलाकात हो चुकी है कितनी सीधी है ऐसा वह कर नहीं सकती,,।

सीधी तो तुम भी थी,,, और दुनिया की नजर में अभी भी सीधी हो लेकिन मैं ही जानता हूं की कितनी बड़ी छिनार हो,,,,।

तू भी तो दुनिया के नजर में सीधा-साधा हैलेकिन मैं भी जानती हूं कि तू कितना बड़ा मादरचोद है।

मादरचोद बनाया किसने मेरी रानी,,,,,(इतना कहकर अंकित अपनी जगह पर खड़ा हो गया क्योंकि बात करने के दरमियान सुगंधा अपनी गांड को हिला रहे थे यह एक तरह से उसका इशारा था अपने बेटे को अपने पास बुलाने का और अंकित अपनी मां के इशारे को अच्छी तरह से समझता था अंकित समझ गया था कि उसकी मां को क्या चाहिए,,, इसलिए तुरंत अपनी मां के पीछे पहुंच गया और उसे अपनी बाहों में भरकर गाउन के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाने लगा,,,, और अपने बेटे की हरकत देखकर वह मदहोश होते हुए बोली,,,)

मैंने बनाई,,,, और मुझे करो है कि मैं तुझे मादरचोद बनाई हूं वरना मेरी यह जवानी कोई और भोग रहा होता,,,,,।

ऐसा मैं कभी नहीं होने देता मेरी जान,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां के अकाउंट की पट्टी को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ बांहों से सरकाने लगा,,, हैरानी की बात यह थी कि, गाउन के अंदर उसने ब्रा नहीं पहनी थी जिसकी वजह से अंकित को अपनी मां की चुचियों तक पहुंचने में बिल्कुल भी देर नहीं लगी थी और वह अपनी मां की नंगी चूची को दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर दिया था,,,,, तभी सुगंधा को एहसास हुआ कि वह जहां पर खड़ी थी वहां किसी की भी नजर पहुंच सकती थी इसलिए वह अपने बेटे से बोली रुक जा थोड़ा पीछे चल,,, कोई देख लेगा,,,।

कोई नहीं देखेगा मेरी रानी सब लोग सो गए हैं देखो,,, पूरा मोहल्ला शांत है,,,,।

अरे बुद्धू जैसे हम दोनों जग रहे हैं वैसे ओर भी लोग होंगे जो जाग कर यही खेल खेल रहे होंगे।

यह बात है,,,,, तो आ जाओ पीछे मेरी जान,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित पीछे से अपनी मां को पकड़ कर उठा दिया और थोड़ा पीछे लेकर आ गया जहां से वह लोग तो देख सकते थे लेकिन दूसरे लोग की नजर वहां नहीं पहुंच सकती थी मदहोशी सुगंधा के बदन में भी जाने लगे थे इसलिए वह बिल्कुल भी देर नहीं की और अपने हाथों से अपना गाउन निकालकर पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,, इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था कि कुछ दिनों बाद इस तरह से खुलकर वह मजा नहीं ले पाएगी भले चोरी छिपे अपने बेटे के साथ संभोग सुख प्राप्त कर ले लेकिन इस तरह से खुलकर आनंद लेना तब मुमकिन नहीं हो पाएगा इसलिए वह जितना हो सकता था उतना मजा ले लेना चाहती थी,,,,, अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को चांदनी रात में देखकर एक बार फिर से अंकित का मन बहकने लगा और वह भी अपनी मां की तरह अपने कपड़े उतारने में बिल्कुल भी देर नहीं किया और मैं भी अपनी मां की तरह एकदम नंगा हो गया,,,, अपनी मां के पिछवाड़े के स्पर्श से ही अंकित का लंड लोहे के रोड की तरह खड़ा हो चुका था जिसे देखकर सुगंध से रहा नहीं की और अपने घुटनों के बल बैठ गई और अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, अपनी मां की हरकत से अंकित मदहोश होने लगा और वह अपने दोनों हाथों को उसके सर पर रखकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया उसकी मां भी इस खेल में उसका बराबर साथ दे रही थी उसके होठों का कसाव पूरा मुंह खोलने के बावजूद भी लंड के ऊपर बराबर बना हुआ था,,, सुगंधा की मदहोशी बढ़ते जा रही थी,,,,।

हल्दी की रस्म में जो जो हुआ था वह सब कुछ अंकित नमक मिर्च लगाकर अपनी मां को बताया था लेकिन यह बात बिल्कुल भी नहीं बताया था कि शर्मा जी के घर में सुमन और शर्मा जी की बहू के साथ उसने क्या किया था इस बात का एहसास अंकित को अच्छी तरह से था कि भले ही वह जब घूमने गया था तो पहाड़ी पर अपनी मां की आंखों के सामने गैर औरत के साथ उसने संबंध बनाकर उसे संतुष्टि प्रदान किया था तब उसकी मां कुछ नहीं बोली थी लेकिन वह जानता था कि ऐसा यहां पर चलने वाला नहीं है उसे समय उसकी मां मदहोश थी उत्तेजित थी और इसी बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसे औरत से अब दोबारा मुलाकात होने वाली नहीं है इसलिए वहां अपने बेटे द्वारा उसके साथ संबंध बनाने पर बिल्कुल भी ऐतराज नहीं जताई थी लेकिन यहां पर अगर वह किसी के साथ संबंध बनाता है और उसकी मां को इस बात की खबर पड़ जाती है तो वह कभी भी अपने बेटे को माफ नहीं करेगी क्योंकि एक औरत होने के नाते औरत कभी भी ऐसे मर्द को किसी और से बांटना नहीं चाहती जिसके साथ वह हम बिस्तर होती है जिसके साथ उसे संतुष्टि का एहसास मिलता है जिससे वह प्यार करने लगती है इस समय अंकित सुगंधा के लिए बहुत कुछ था,,,, इसलिए वह कभी नहीं चाहेगी कि उसका बेटा किसी गैर औरत के साथ संबंध बनाएं अपनी मां की भावनाओं को अंकित अच्छी तरह से जानता था इसलिए सुमन और शर्मा जी की बहू के बारे में अंकित ने कुछ बताया नहीं था।

कुछ देर तक अंकित और उसकी मां इसी तरह से मजा लेते रहे लेकिन इसके बाद अंकित अपनी मां को पीठ के बल लिटाकर उसकी दोनों टांगों के बीच मुंह डाल दिया और अपने लंड घुस के मुंह में डाल दिया दोनों इस तरह से एक दूसरे के अंगों को मजा दे रहे थे ऐसा करने में अंकित को भी बहुत मजा आता था वह अपनी मां की दोनों मोटी-मोटी जांघों को खोलकर उसकी गुलाबी छेद को अपनी जीभ से पागलों की तरह चाट रहा था,,, और सुगंधा भी अपने बेटे को पूरा मजा देने में लगी हुई थी,,,,, कुछ देर तक दोनों मजा लेने के बाद अंकित अपनी मां के ऊपर से उठकर बगल में बैठकर और अपनी मां को घोड़ी बनने के लिए बोला चटाई बिछी हुई थी चटाई के ऊपर अपनी दोनों घुटनों के नीचे तकिया लगाकर वह अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा दे जिसे देखकर अंकित मुस्कुरा दिया और अपनी मां की गोरी गोरी गांड पर चांदनी रात में थप्पड़ लगाने लगा और उसकी गोरी गोरी गांड को पल भर में ही टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,, और फिर अपने लिए जगह बनाकर उसके गुलाबी छेद में अपना लंड डाल दिया अंकित को अपनी मां की चुदाई पीछे से करने में कुछ ज्यादा ही मजा आता था। क्योंकि इस अवस्था में वह अपनी मां की बुर की गहराई तक बढ़िया आराम से पहुंच जाता था और उसकी मां को भी संतुष्टि का एहसास होता था अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़े हुए वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था । हर धक्के के साथ सुगंधा मदहोश हुए जा रही थी उसकी हालत एकदम मस्त हो चुकी थी,, छत के ऊपर खुले आसमान के नीचे वह अपनी बेटी से चुदाई का आनंद लूट रही थी।

आज वह जानबूझकर अपने घुटनों के नीचे दोनों तकिया लगा कर रखी थी क्योंकि उसके बेटे के थक्के इतनी तेज होते थे कि वह आगे की तरफ सड़क जाती थी जिसकी वजह से उसके घुटनों में दर्द के साथ-साथ जख्म भी हो जाता था लेकिन उस पल के आनंद के समय इस बात का इस दर्द का एहसास उसे नहीं होता था लेकिन दूसरे दिन जब वह घुटनों को देखी थी तो वह छिला हुआ दिखाई देता था,, इसलिए आज वहां नरम नरम तकिया लगाई थी और तकिया लगाने के बाद उसका जोश और उत्तेजना और ज्यादा पड़ गया था अंकित अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था,,, देखते ही देखते मां बेटे दोनों का बदन अकडने लगा और अंकित पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में कस के दबोचा हुए तब तक धक्का लगातार जब तक की उसके लंड से लावा की आखिरी बुंद तक उसकी मां की बुर में गिर नहीं गई,,,, दोनों काफी थक चुके थे, दूसरा राउंड लेने में दोनों की हिम्मत गवाही नहीं दे रही थी क्योंकि हल्दी की रस्म में सुगंधा नाच नाच कर थक गई थी तो अंकित अपनी कमर हिला हिला कर थक गया था,,, इसलिए दोनों एक दूसरे की बाहों में नग्न अवस्था में ही गहरी नींद में सो गए,,,।

आज शाम को विवाह था बरात आने वाली थी जिसकी तैयारी में सुगंधा सुबह से ही जुट गई थी,, क्योंकि हल्दी की रस्म में जो उसने अपनी जवानी के आकर्षण का समां बांध रखी थी उसे बरकरार रखना बेहद जरूरी हो चुका था। अपने बेटे के मुंह से दूसरी औरतों के द्वारा अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह पूरी तरह से सातवे आसमान पर पहुंच चुकी थी इसलिए आज वह कोई कमी रहने देना नहीं चाहती थी इसलिए अलमारी में से अपनी पसंदीदा साड़ी को ढूंढ रही थी और बहुत ही जल्द उसे अपनी आसमानी रंग की साड़ी भी मिल गई थी आसमानी रंग की साड़ी के साथ-साथ उसी के मैचिंग का पेटीकोट और ब्लाउज निकलकर वह अलमारी के दूसरे खाने में अपनी ब्रा और पैंटी ढूंढ रही थी,,,, लेकिन आसमानी रंग कि ना तो ब्रा थी और ना हीं पेंटी थी,,,, इसलिए वह थोड़ी उदास हो गई,, वह उदास होकर बिस्तर पर बैठी थी कि तभी अंकित वहां पर आकर और अपनी मां को उदास देखकर उसके पास में बैठ गया और बोला।

क्या हुआ मम्मी तुम्हारा मुंह उतरा हुआ क्यों है,,,?

आप क्या करूं शाम को बरात आने वाली है आज में अपने लिए आसमानी रंग की साड़ी पसंद की थी उसके मैचिंग का ब्लाउज और पेटीकोट तो मिल गया लेकिन आसमानी रंग की ना तो ब्रा है और ना हीं पेंटी है।

तो इसमें क्या हो गया लाल रंग की पहन लो,,,।

नहीं मेरा मन नहीं मान रहा है आसमानी रंग की ब्रा और पेटी होती तो मजा आ जाता पहनने में,,,।

तुम ऐसे कह रही हो जैसे तुम्हारा आशिक बारात में आने वाला है और तुम अपनी साड़ी उठाकर उसे अपनी पैंटी और ब्रा दिखाने वाली हो,।(अंकित चुटकी लेटा हुआ बोल तो अपने बेटे की बात सुनकर गुस्सा दिखाते हुए सुगंधा बोली,,,)

धत् हरामी अपनी मां के बारे में ऐसा बोलते हुए तुझे शर्म नहीं आती मेरा कौन सा आशिक है तेरे सिवा, जिसे मैं साड़ी उठाकर अपनी ब्रा और पेटी दिखाऊंगी,,,,।

अरे मम्मी मैं तो मजाक कर रहा था तुम बेवजह सीरियस हो जाती हो,,,।

तू बात ही ऐसा करता है कि दिमाग खराब हो जाता है एक तो ऐसे ही इसका मैचिंग नहीं मिल रहा है दिमाग घुमा हुआ है और तुम है कि इस तरह की बात करके और दिल जलाता है,,,,।

कोई बात नहीं लेकिन मैं तो ठीक ही कह रहा था साड़ी के अंदर कुछ भी पहनो कहां किसको दीखने वाला है,,,।

अरे बेवकूफ तू नहीं समझ रहा है एक ही रंग का सब कुछ होगा तो अपने मन को थोड़ा शांति मिलती है आत्म विश्वास बढ़ता है,,,,,।

ओहहह यह बात है तो चलो अभी खरीद देते हैं,,, जल्दी से तैयार हो जाओ अभी मार्केट चलते हैं,,,,,।

अभी,,,,(आश्चर्य से सुगंधा बोली)

हां तो क्या हुआ,,,?

धत् अगर गाड़ी होती तो कितना अच्छा होता है अभी जाकर जल्दी से लेकर चले आते,,,।

यह बात है अच्छा तुम रुको मैं अभी मोटरसाइकिल का बंदोबस्त करके आता हूं,,,(इतना कहते हुए अंकित कमरे से बाहर निकल गया उसकी मां उसे बुलाते रह गए लेकिन वह सुना नहीं और घर से निकल गया सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि यह कहां से मोटरसाइकिल का बंदोबस्त करके आएगा इसे चलाना आता भी है कि नहीं,,,, थोड़ी देर में अंकित शर्मा जी के घर पहुंच चुका था जहां पर शादी की तैयारी चल रही थी वहां पर पहुंचने पर वह शर्मा जी की बहू को ढूंढ रहा था क्योंकि शर्मा जी के घर पर मोटरसाइकिल थी और शर्मा जी की बहू ही उसे मोटरसाइकिल दे सकती थी,,, अंकित को मोटरसाइकिल चलाने आता है इस बात को ज्यादा लोग बिल्कुल भी नहीं जानते थे सिर्फ उसका एक दोस्त जानता था जिसका मोटरसाइकिल उसने चलाना सीखा था ज्यादा तो नहीं चलाया था लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि वह चला लेगा,,, इधर-उधर देखते हुए थोड़ी देर में उसे शर्मा जी की बहू दिखाई थी जो कि खुले बालों में बहुत खूबसूरत लग रही थी और सही समय पर उसकी नजर भी अंकित पर पड़ गई तो अंकित को देखकर वह मुस्कुरा दी और अंकित के बुलाई बिना ही वह तुरंत उसके पास पहुंच गई और बोली,,,)

तु यहां क्या कर रहा है,,,,?

तुम्हारा इंतजार कर रहा था कल जो तुमने मजा दी हो रात भर में सो नहीं पाया,,,,।
(अंकित की बात सुनकर शर्मा जी की बहू शर्माने लगी और इधर-उधर देखने लगी कि कहीं कोई उसकी बात तो नहीं सुन रहा है लेकिन वहां पर कोई नहीं था इसलिए वह भी मुस्कुरा कर बोली)एकदम सांड है तू अभी तक मेरी कमर दुख रही है।

मजा भी तो बहुत आया था ना भाभी,,,,,।

मैं भी रात भर सो नहीं पाई रात भर तेरी याद आती रही,,,,(शर्मा जी की बहू भी शरमाते हुए बोली)

तो क्या इरादा है भाभी फिर से,,,,(इतना ही कहा था कि शर्मा जी की बहू इधर-उधर देखते हुए बोली)

देख तो आए तो चारों तरफ मेहमानी मेहमानी ऐसे में मौका मिलना बहुत मुश्किल है,,,,, लेकिन चिंता मत कर मौका मिलते ही हम दोनों फिर से मजाकरेंगे,,,।

मुझे तुमसे यही उम्मीद थी बाकी सच में तुम इतनी खूबसूरत हो कि मैं तो पागल हो गया तुम्हें पागल तुम्हारे आगे सुमन तो कुछ भी नहीं है शादीशुदा होकर भी तुम्हारी बुर एकदम कसी हुई है,,,।
(अंकित के पूछे अपनी तारीफ सुनकर खास करके उसके मुंह से बुर शब्द सुनकर शर्मा जी की बहू एकदम से गनगना गई और इधर देखने लगी,,,, और शरमाते हुए बोली)

धत्,,, थोड़ा धीरे बोल कोई सुन लेगा तो गजब हो जाएगा ‌।

कोई सुनने वाला नहीं है तभी तो कह रहा हूं,,,,, सच कहूं तो तुम मुझे अपना दीवाना बना दि हो,,,,,।

बाद में मिलना मुझे अभी बहुत काम है,,, वैसे शाम को जल्दी आ जाना थोड़ा हाथ बंटा लेना,,,,।यह भी कोई कहने की बात है भाभी,,,, जरूर आऊंगा,,,, वैसे आज थोड़ा मौसम ठंडा है,,,।

ठंड तो है मुझे डर है कि कहीं बारिश ना हो जाए देख रहे हो बादल भी है बारिश हो गई तो शादी का मजा किरकिरा हो जाएगा,,,,।

बारिश का महीना तो अभी आया नहीं है लेकिन कोई भरोसा भी नहीं है,,,,।

चलो अच्छा ठीक है मैं जा रही हूं,,,,(इतना कहकर शर्मा जी की बहू जाने वाली थी कि अंकित आवाज लगाते हुए बोला)

सुनो भाभी,,,,।

हां बोलो,,,(एकदम से रुक कर अंकित की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली)

तुम्हारी मोटरसाइकिल मिलेगी बस बाजार जाकर वापस आना है,,,,।

हां जरूर रुको मैं चाबी लेकर आती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही वह घर के अंदर की तरफ जाने लगी है अपनी गांड मटका कर अंकित की नजर उसके पिछवाड़े पर ही थी जो कई हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही ऊभरी हुई नजर आ रही थी उसके पिछवाड़े को देखकर अंकित अपने मन में ही बोला कपड़े के अंदर जितनी खूबसूरत लगती है कपड़े के बिना उससे भी ज्यादा खूबसूरत दिखती है,,,,,, शर्मा जी की बहू जैसे गई थी वैसे ही वापस आ गई और मुस्कुराते हुए मोटरसाइकिल की चाभी अंकित के हाथ में थमा दी,,,,, और बोली,,,)मोटरसाइकिल की चाबी सीधे मुझे ही देना,,,।

क्यों भाभी चाचा जी बोलेंगे क्या,,,?

नहीं नहीं कोई बोलेगा नहीं बस ऐसे ही कह रही हूं चाबी मुझे ही देना किसी और को मत दे देना,,(इतना कहते हुए शर्मा जी की बहू मुस्कुराने लगी और घर के अंदर चली गई अंकित तुरंत मोटरसाइकिल के अंदर चाबी लगाया और पहले ही की में मोटरसाइकिल स्टार्ट हो चुकी थी यह देखकर अंकित एकदम खुश हो गया था,,,,,, और जैसे-जैसे उसके दोस्त ने उसे चलाना सिखाया था ठीक वैसे-वैसे ही वह कलच दबाकर एक्सीलेटर को धीरे-धीरे देने लगा और मोटरसाइकिल धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी यह देखकर अंकित बहुत खुश हो रहा था और सीधा जाकर अपने घर के सामने खड़ी कर दिया और मोटरसाइकिल का होरन दबाने लगा होरन की आवाज सुनकर तुरंत सुगंधा दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई और अपने बेटे को मोटरसाइकिल पर बैठा देखकर खुशी से समा नहीं रही थी, और उत्साहित होते हुए बोली,,,)

बाप रे मुझे तो अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा है तुझे मोटरसाइकिल चलाने आती है।

तो क्या मम्मी क्या समझती हो मुझको,,,।

लेकिन यह तूने सीखा कब,,,,?

सब यही पूछ लगी जल्दी से आओ रास्ते में सब बताता हूं,,,,,।
(इतना सुनकर सुगंधा तुरंत अपने कमरे में गई और पर्स और थैला लेकर बाहर आ गई दरवाजे को बंद करके उसे पर ताला लगाकर वह सीधा मोटरसाइकिल पर अपने बेटे के पीछे बैठ गई भारी भरकम गांड रखकर बैठते हुए उसे बेहद उत्तेजना का अनुभव हो रहा था अपने बेटे के कंधे पर हाथ रखकर वह बोली,,,)

अब चल,,,,।

(अगले ही पल मोटरसाइकिल सड़क पर दौड़ रही थी,,, रास्ते में उसने अपनी मां को सब कुछ पता है कि उसने कैसे मोटरसाइकिल सीख लिया था,,,, सुगंधा को अपने बेटे पर बहुत गर्व हो रहा था लड़की इस बात का दुख भी था कि वह अपने बेटे को मोटरसाइकिल खरीद कर नहीं दे सकती थी,,,, कपड़े की दुकान पर पहुंचकर, सुगंधा जल्दी से कपड़े की दुकान में गई और थोड़ी ही देर में अपनी पसंदीदा ब्रा और पेंटी खरीद कर वापस आ गई,,, अपनी मां को 15:20 मिनट में ही आता देखकर अंकित खुश होता हुआ बोला,,,)

क्या हुआ इतनी जल्दी मिल गया,,,!

अरे अच्छा हुआ जल्दी मिल गया करना दो-चार दुकान ढूंढना पड़ता,,,,।

फैशन तो सिर्फ तुम्हारा ही है मम्मी,,,, वरना भला कौन औरत परेशान होती है की साड़ी के अंदर कौन से कलर का पैंटी पहनना है,,,,।

अच्छा यह बात है,,,(मोटरसाइकिल के पीछे बैठते हुए) अब आना मेरे पास साड़ी के नीचे कुछ पहनी नहीं रहूंगी तब पता चलेगा तुझे,,,,।

नहीं नहीं मम्मी ऐसा बिल्कुल मत करना साड़ी के अंदर कुछ पहनी रहती हो तभी जोश बढ़ जाता है,,,,(मोटरसाइकिल में कीक मारते हुए अंकित बोला,,, मोटरसाइकिल स्टार्ट हो चुकी थी और उसे आगे बढ़ाते हुए बोला,,) इसे पहनने के बाद सबसे पहले मुझे ही दिखाना की कैसी लग रही हो..

अरे मादरचोद मैं सिर्फ तुझे ही दिखाऊंगी तुझे दिखाने के बाद क्या लगता है किसी और को दिखाऊंगी क्या,,,,?

तुम्हारे मुंह से गाली बहुत अच्छी लगती है,,,,।

तु मुझे मजबूर कर देता है गाली देने के लिए,,,।

अच्छा ही तो है गाली सुनने को मिलती है,,,, अच्छा मम्मी अपने पास भी इस तरह की मोटरसाइकिल हो तो कितना मजा आ जाए ना मार्केट जाने में बिल्कुल भी समय ना लगे,,,।

बात तो तु ठीक कह रहा है लेकिन इतने पैसे अभी है नहीं,,,,।

अरे मैं लेने के लिए नहीं कह रहा हूं मैं तो सिर्फ बता रहा हूं कि अपने पास मोटरसाइकिल हो तो मजा आ जाए मैं कमाने लगूंगा तो खुद ही खरीद लूंगा,,,,।

तू कमाने लगेगा तो मुझे भी सहारा मिल जाएगा,,,,।

चिंता मत करो,,,,,,, जल्द ही कमाने लगूंगा,,,,,।
(थोड़ी देर में अंकित अपने घर के सामने पहुंच चुका था सुगंधा मोटरसाइकिल से नीचे उतर चुकी थी और दरवाजे का ताला खोल रही थी यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला,,,)

तुम चलो मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं मोटरसाइकिल देकर,,,,।

ठीक है जल्दी आना,,,,।

अरे अगर वहां कोई काम निकल गया तो आने में देर हो जाएगी वैसे भी शादी वाला घर है कोई ना कोई काम तो निकलता ही रहता है इसलिए चिंता मत करना,,,,।

ठीक है जा,,,(इतना कहकर सुगंधा दरवाजा खोल दी और घर में प्रवेश कर गई और अंकित मोटरसाइकिल आगे बढ़कर शर्मा जी के घर पहुंच गया,,,,, दिन के 12:00 बज रहे थे और यह वही समय था जो शादी वाले घर में भी कुछ देर के लिए सन्नाटा छा जाता है लोग आराम कर रहे होते हैं क्योंकि थोड़ी देर आराम करने के बाद ही इतना काम रहता है कि सुबह तक समय ही नहीं मिलता मोटरसाइकिल खड़ी करके हाथ में चाबी लिए हुए अंकित इधर-उधर देख रहा था लेकिन शर्मा जी की बहू कहीं नजर नहीं आ रही थी,,,, तो अंकित धीरे से घर में प्रवेश करने लगा सामने ही शर्मा जी की बीवी कुछ काम कर रही थी अंकित को देखते ही बोली,,,,)

आओ,, बेटा,,,,,, क्या ढूंढ रहे हो,,,,?

अरे कुछ नहीं चाची भाभी जी को ढूंढ रहा था,,,,,।

बहु तो ऊपर वाले कमरे में है,,,,,।

कुछ काम था क्या,,,?

नहीं उनका सामान देना था इसलिए जा जाकर ऊपर ही दे दे और हां शाम को सुगंधा को बोलना पूरी तैयारी के साथ आएगी,,, तेरी मां तो एकदम हीरोइन की तरह नाचती है और दिखती भी हीरोइन की तरह वह शादी में आती है तो चार चांद लग जाते हैं कह देना जल्दी आएगी,,, ऐसा ना हो की बारात आ जाए तब आए,,,,।

जी नहीं चाची मम्मी जल्दी आएगी मुझसे कह रही थी कि जल्दी जाना होगा क्योंकि शादी में तो वैसे ही ढेर सारे काम आते हैं थोड़ा बहुत हाथ भी बंटाना होगा,,,।

तेरी मम्मी बहुत समझदार है जा जाकर मिलने में भी चलती हूं थोड़ा देर सो लेती हूं फिर उसके बाद सोने का समय नहीं मिलेगा,,,,,।

ठीक है चाची,,,,,।

(शादी वाला घर होने के बावजूद भी घर में कुछ देर के लिए सन्नाटा छाया हुआ था क्योंकि मेहमान भी अपनी कमरे में आराम कर रहे थे और अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि शर्मा जी की बहू इस कमरे में हो जहां पर दोनों की मुलाकात हुई थी तो मजा आ जाए,,,, यही सोचता हुआ वह सीढ़ियां चढ़ने लगा,,, और उसी कमरे के पास गया तो देखा कमरे का दरवाजा बंद था और उसे पर ताला लगा हुआ था यह देखकर अंकित को थोड़ी निराशा हुई और वह शर्मा जी की बहू को दूसरे कमरे में ढूंढने लगा तो दूसरी तरफ के कमरे के पास पहुंच कर देखा तो कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था,,,, सभ्यता दिखाते हुए अंकित सीधे दरवाजा खोलने के बजाय दरवाजे पर दस्तक देना ठीक समझा,,,,, दस्तक देते ही अंदर से शर्मा जी की बहू की ही आवाज आई जिसे सुनकर अंकित एकदम से खुश हो गया,,,,।

कौन है,,,,?

मैं हूं भाभी अंकित,,,,,,,।

अरे तु है,,,,(इतना कहने के साथ ही बिस्तर पर से वह उठने लगी वैसे तो दरवाजा बंद था लेकिन चूड़ियों के झांकने की आवाज से अंकित को एहसास हो गया था कि वह बिस्तर से खड़ी हो रही थी और उसके पायल की खनक बता रही थी कि वह दरवाजे के करीब आ रही थी अगले हीरे से दरवाजा खोली और मुस्कुराते हुए उनकी तरफ देखने लगी और बोली)

बहुत जल्दी आ गया मुझे तो लगा कि शाम को आएगा,,,।

जी नहीं भाभी काम जल्दी खत्म हो गया तो आ गया लीजिए आपकी चाबी,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित कमरे के अंदर नजर घुमाई तो देखा बिस्तर पर एक खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी जिसके चेहरे पर थोड़ी निराशा थी लेकिन दिखने में वह बहुत खूबसूरत थी उसके चेहरे पर बदन पर हल्दी लगी हुई थी अंकित को समझते देर नहीं लगी की इसी की शादी है शादी से बात को शर्मा जी की बहू भी भांप गई थी इसलिए मुस्कुराते हुए बोली)

यह रजनी है मेरी ननद आज इसी की शादी है,,,,।

वह तो दिखाई दे रहा है लेकिन दीदी उदास क्यों है,,,?
(दीदी शब्द सुनकर रजनी दरवाजे की तरफ देखने लगी और शर्मा जी की बहू बोली)

किसी भी लड़की के लिए अपना घर छोड़कर दूसरे के घर जाना बड़ा दुखदाई होता है,,,, रजनी इसीलिए चिंतित हैं कि अब वह पराया हो जाएगी,,,,,।

अब कर भी क्या सकते हैं भाभी यह तो दुनिया का रिवाज है कुछ दिन पहले मैं भी यही सोच रहा था कि मेरी बड़ी दीदी भी शादी करके कुछ ही साल में दूसरे के घर चली जाएगी तब हम लोग कैसे रहेंगे,,,,।

चल कोई बात नहीं यह तो होना ही है,,,,,।

ठीक है भाभी अब मैं चलु शाम को आऊंगा,,,,।

अरे कहां जा रहे हो थोड़ा काम है शाम के लिए थोड़ा रसोई का सामान इकट्ठा करना है चलो मेरे साथ,,,, रजनी को तो ले नहीं जा सकती एक तो वैसे ही यह परेशान है,,,,,।

ठीक है भाभी चलो मुझे भी घर जाना है जल्दी काम खत्म करके,,,,,।

घर क्यों जाओगे,,,,?

अरे भाभी मुझे भी तो थोड़ा बहुत आराम करना होगा शाम को ही वापस आ जाना है।

चल अच्छा ठीक है रसोई वाला काम खत्म कर दे फिर चले जाना,,,,, अच्छा रजनी तुम आराम करो,,,,।

ठीक है भाभी,,,,,।

दरवाजा बंद कर लो,,,(कमरे से बाहर निकलते हुए शर्मा जी की बहू बोली और फिर जल्दी से रसोई वाले कमरे में आ गई अंकित और शर्मा जी की बहू दोनों कमरे के अंदर थी , शर्मा जी की बहू जल्दी से उत्साहित होते हुए कमरे का दरवाजा बंद कर दी,,, यह देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

 

मैं सोचा नहीं था कि दोबारा इतनी जल्दी मौका मिलेगा,,,।

सोची तो मैं भी नहीं थी तो सही समय पर चाबी वापस देने के लिए आया है,,,।

भैया अभी तक नहीं है क्या,,,?

मरने दे हरामजादे को ना बीवी की फिक्र है ना अपनी बहन की शाम को आएगा,,,, मैं तो गुस्से में बोल दी की आना ही मत,,,।

यह तो अच्छा हुआ मुझे बार-बार मौका मिल जाएगा,,,।

हां हरामजादे तुझे तो मौका ही चाहिए,,,,,(इतना कहकर शर्मा जी की बहू खुद ही उसे अपनी तरफ पकड़ कर खींच ली और अपनी बाहों में भर ली और तुरंत अपने होठों को अंकित के होठों से सटा दी अंकित एकदम से मदहोश हो गया और तुरंत ही उसके दोनों हाथ शर्मा जी की बहू की भारी भरकम गांड पर पहुंच गई जिसे साड़ी के ऊपर से ही अंकित जोर-जोर से दबाने लगा मसलने लगा,,,)

कोई आएगा तो नहीं ना भाभी,,,,।

कुछ देर के लिए तो कोई नहीं आएगा सब लोग अपने-अपने कमरे में आराम कर रहे हैं,,,,,।

ओहहहहह भाभी तुमसे अच्छा कौन है,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से उसके होठों पर अपनी हॉट रखकर फिर से उसके लाल-लाल होठों का मधुर रस पीने लगा इसी के साथ उसकी गांड को बराबर से दबाता हुआ मसलने लगा,,, बच्चे ना होने की वजह से और अपनी जवानी के दौर में होने की वजह से शर्मा जी की बहू की गांड एकदम खुशी हुई थी जिसे दबाने में अंकित को बेहद आनंद की अनुमति हो रही थी कदकाठी में भी वहां अंकित से थोड़ा सा छोटी थी इसलिए अंकित का मजा दुगना होता जा रहा था,,,,, अंकित शर्मा जी की बहू की हिम्मत की दाद दे रहा था क्योंकि जिस तरह से शादी वाले घर में वह बड़ी बहू होने के बावजूद भी कमरे के अंदर उसके साथ संभोग सुख प्राप्त की थी आज भी उसी तरह से ही अपनी ननद को बेवकूफ बना कर उसे लेकर कमरे में घुस गई थी। वह कभी सोचा नहीं था कि उसके मोहल्ले में एक औरत इतनी हिम्मत वाली होगी लेकिन इस बात का उसे अब एहसास हो गया था कि हर घर में अनैतिकता पनपता ही है चाहे जिस रूप में इससे कोई बच नहीं सकता,,,, शर्मा जी की बहू के पीछे सबसे बड़ा प्रमुख कारण था उसके पति की बेरुखी,,, जो पालन पोषण में तो अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था लेकिन अपनी पत्नी के शारीरिक संतुष्टि के लिए उसकी जिम्मेदारी शून्य थी उसमें वह बिल्कुल भी खरा नहीं उतर रहा था जबकि शादी के तीन ही वर्ष हुए थे शर्मा जी की बहू खूबसूरत थी कद काठी में आकर्षक थे अंगों का उठाव और उभार काम भावना जगाने के लिए पर्याप्त थी लेकिन फिर भी उसका पति उससे अलग था अपने काम में व्यस्त था इसलिए उसके काम में व्यस्त होने की वजह से शर्मा जी की बहु कामग्रस्त हो चुकी थी।

शर्मा जी की बहू की बड़ी-बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों से दबाते हुए अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि कितना बेवकूफ पति है इतनी खूबसूरत बीवी को घर में अकेला छोड़कर बाहर काम रहा है अगर मैं इसकी जगह होता तो अपनी बीवी को बिल्कुल भी अकेला नहीं छोड़ता बल्कि जब मौका मिलता तब इसकी बुर में लंड डाल देता,,,,, यही सब सोचता हुआ अंकित धीरे-धीरे शर्मा जी की बहू की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा और शर्मा जी की बहुत तेज होते हुए अपने हाथ को सीधा उसके पेंट के उभरे हुए भाग पर रखकर जोर-जोर से लंड को पकड़कर मसलने लगी,,,,, दोनों मदहोश हुए जा रहे थे दोनों तैयार हो चुके थे,,,, दोनों में से कोई किसी से कम नहीं था लगातार दोनों के होंठो का चुंबन प्रगाढ़ होता जा रहा था। देखते ही देखते शर्मा जी की बहू के होठों का रस पीने में तल्लीन हुआ अंकित शर्मा जी की बहू की साड़ी को उसकी कमर तक उठा दिया था और उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों में लेकर जोर जोर से दबा रहा था,,, अंकित इतना अत्यधिक उत्तेजित हो जा रहा था कि उसकी पेंटिं में दोनों हथेलियां को डालकर उसकी नंगी गांड को दबाने की कोशिश कर रहा था,,,,,, अंकित की हरकतों से उत्तेजित हुई शर्मा जी की बहू अपने होठों को उसके होठों से अलग करके गहरी सांस लेते हुए बोली।

जो भी करना जल्दी करना,,,,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो भाभी,,,,, जो भी होगा मजेदार होगा,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित एक बार फिर से उसे अपनी गोद में उठा लिया और चलता हुआ बिस्तर पर लाकर पटक दिया अंकित की भुजाओं का बल वह पहले भी देख चुकी थी,,,, वह अंकित की ईस हरकत से आनंदित हो जाती थी,,, बिल्कुल भी देर करना उचित न समझते हुए अंकित में अपने दोनों हाथों को उसकी चड्डी पर रखकर नीचे की तरफ खींचने लगा शर्मा जी की बहू भी उसका सहयोग करते हुए अपनी भारी भरकम गांड को कुछ पल के लिए हवा में ऊपर उठा दी जिससे अंकित उसकी चड्डी को उतार सके और अगले ही पल शर्मा जी की बहू का सहयोग पाकर अंकित एक झटके में उसकी चड्डी उसके बदन से अलग कर दिया,,,, और उसकी भरी हुई जवान को नंगी देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला।)

भाभी आज से तुम्हारी बुर कचोरी जैसी फुली है।

तेरे लिए ही फुली है खुश हो गई है तुझे देख कर,,,।

तब तो इसकी खुशी बढ़ानी पड़ेगी,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित उसकी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाकर उसकी मोटी मोटी जांघों के बीच से अपने दोनों हाथ को ले जाकर के उसकी कमर को पकड़ लिया और उसे थोड़ा सा ऊपर उठाते हुए उसकी कचोरी जैसी फुली हुई गुलाबी बुर पर अपने होंठ सटा दिया,,,,, अंकित के हरकत से शर्मा जी की बहू एकदम से मदहोश हो गई। और मचलते हुए उसकी गांड अपने आप ही थोड़ी ऊपर की तरफ उठ गई और अंकित पूरी तरह से उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी पर छाने लगा पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया था,,,, बिस्तर पर शर्मा जी की बहुत तड़प रही थी मचल रही थी और हल्की-हल्की से शिसकारी की आवाज निकल रही थी। इसी तरह के प्रेम के लिए वह तड़प रही थी जिस तरह की उसकी गदराई जवानी थी उसे बिस्तर पर अंकित जैसा ही मर्द चाहिए था,,, जोश की जवानी को अपनी बाहों में लेकर निचोड़ सके,,,, शर्मा जी की बहू दोनों पैरों को अंकित के कंधों पर रखकर उसे अपनी बुर की तरफ दबाव बना रही थी यह एक अद्भुत काम कल था औरत की तरफ से मर्द को मदहोश करने का जिसमें अंकित भी चारों खाने चित्त हुआ जा रहा था। रह रहकर शर्मा जी की बहू अपने पैर का दबाव बराबर बनाकर उसे अपनी बुर से अलग होने नहीं दे रही थी क्योंकि उसकी जांघें मोटी मोटी थी जिससे वह अंकित पर बराबर का अंकुश कसी हुई थी।

अंकित भी कम नहीं था वह उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढाते हुए दोनों हाथ को उसके ब्लाउज के ऊपर लेकर और ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया और नीचे अपनी जीभ से लपालप उसकी बुर की मलाई चाट रहा था,,,, अंकित की हरकतों से शर्मा जी की बहू कंहर रही थी मदहोश हो रही थी अंकित हर तरफ से उसे खुश करने की कोशिश कर रहा था वह बिस्तर पर जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी,,,,, और फिर देखते ही देखते वह ब्लाउज का बटन खोलने लगा अपनी क्रिया को जारी रखते हुए वह एक साथ ढेर सारी क्रियाओ को अंजाम दे रहा था,,,, अगले ही पाल वहां शर्मा जी की बहू के ब्लाउज के सारे बटन खोल चुका था और ब्रा के ऊपर से उसकी चूची को दबा रहा था शायद इससे शर्मा जी की बहू को कम आनंद की प्राप्ति हो रही थी इसलिए वह खुद ही अपने दोनों हाथों से अपनी ब्रा को ऊपर की तरफ खींच दी और अपने दोनों दशहरी आम को खुला छोड़ दी,,,, नंगी चूची को अपने हाथ में लेकर अंकित पागल हो जा रहा था वैसे भी शर्मा जी की बहू की चूचियां बड़ी-बड़ी थी। जिस पर ज्यादा मेहनत हुआ नहीं था फिर भी वह पूरे आकार में खीली हुई थी अगर पर्याप्त मात्रा में इस पर मेहनत किया जाए तो शर्मा जी की बहू की छाती पर दो-दो चांद नजर आने लगे।

 

साड़ी कमर तक उठी हुई थी ब्लाउज का बटन खुला हुआ था नंगी चूचियां अपना खेल खेल रही थी,,,, शर्मा जी की बहू अपनी मोटी मोटी जांघों से अंकित को दबाए हुए थी और अपने दोनों हथेलियां को उसकी पीठ पर उसके सर पर रखकर सहला रही थी दबा रही थी। कुल मिलाकर दोनों अपनी अपनी तरफ से पूरी कोशिश में लगे हुए थे क्योंकि बिस्तर पर संभोग कैसे पहले और संभोग के साथ मर्द और औरत का दोनों का समान अधिकार होता है कि दोनों एक दूसरे को अपनी तरफ से संपूर्ण रूप से आनंदित करें तभी जाकर संभोग का असली सुख प्राप्त होता है और इस समय शर्मा जी की बहू भी वही क्रिया कर रही थी जो अंकित कर रहा था इसलिए दोनों अत्यधिक आनंद को महसूस कर रहे थे लगातार शर्मा जी की बहू की बुर से मदन रस का बहाव हो रहा था जिसे अंकित अपनी जीभ से बार-बार चाट कर अपने गले के अंदर उतार ले रहा था,,,,, दोनों हाथ से उसकी चूचियों को दबाते हुए उनकी धीरे से अपने हाथ को नीचे की तरफ ले आया और शर्मा जी की बहू की गुलाबी छेंद में अपनी दो ऊंगलियो को एक साथ डालकर उसे गोल-गोल घूमाने लगा जिससे शर्मा जी की बहू के बर्दाश्त के बाहर होने लगा और वह बार-बार अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठने लगी जिसे अंकित नीचे दबाने की कोशिश करते हुए उसे लगातार आनंदित कर रहा था,,,,।

अंकित तीन तरफ से शर्मा जी की बहू पर छाया हुआ था एक हाथ से उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से दबा रहा था दूसरे हाथ की दो उंगलियों को उसके गुलाबी छेद में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए उसे मजा दे रहा था और जब और होठों से तो लगातार उसके गुलाबी बुर की चटाई कर रहा था,,,, शर्मा जी की बहू कभी सोची भी नहीं थी किस तरह से भी मर्द औरत को मजा देते हैं एक ही साथ तीनों तरफ से बचाया हुआ था शर्मा जी की बहू का गोरा मुखड़ा टमाटर की तरह लाल हो चुका था,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी सांसों की गति के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे अंकित काबू में रखने की पूरी कोशिश कर रहा था,,,, थोड़ी देर में दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,, पंखा फुल स्पीड में चल रहा था लेकिन पंखे की हवा दोनों की जवानी की गर्मी को शांत करने में सक्षम बिल्कुल भी नहीं थी। देखते ही देखते शर्मा जी की बहू का बदन अकड़ने लगा उसके चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे वह दोनों हाथ से अंकित का सर पकड़कर उसे अपनी बुर पर जोर-जोर से दबाने लगी,,,, अंकित समझ गया था कि अभी झड़ने वाली है इसलिए वह जितना हो सकता था उतनी जीभ को अंतर डालकर उसकी मलाई को चाटते हुए अपनी दोनों उंगलियों को बड़ी तेजी से अंदर बाहर कर रहा था और फिर देखते ही देखते वह झड़ने लगी उसकी बुर से मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा लेकिन अंकित उसकी पर से निकलने वाले मदन रस की एक बुंद को भी नीचे गिरने नहीं दिया अपनी जीभ से उसे चट कर गया।

शर्मा जी की बहू झड़ चुकी थी और यह चुदाई से नहीं बल्कि अंकित की कामुक हरकतों से झड़ी थी,,, इसलिए शर्मा जी की बहू कुछ ज्यादा ही प्रसन्न नजर आ रही थी वह अंकित पर पूरी तरह से निछावर हो चुकी थी वह कभी सोचा भी नहीं थी कि एक जवान लड़का एक शादीशुदा औरत को इतना मजा देता होगा,,,, अंकित धीरे से अपने मुंह को शर्मा जी की बहू की बुर से हटकर गहरी गहरी सांस ले रहा था उसके होठों से शर्मा जी की बहू के बुर का मदन रस टपक रहा था जिसे देखकर शर्मा जी की बहू शर्म से पानी पानी हो गई,, धीरे से उठकर बिस्तर पर बैठते हुए शर्मा जी की बहू अपने साड़ी को एक तरफ करके अपनी पेटीकोट से उसके मुंह पर लगा अपने मदन रस को साफ करने लगी। खेल अभी खत्म नहीं हुआ था खेल तो अब शुरू हुआ था अंकित अंकित धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतर गया और बिस्तर के नीचे खड़ा होकर अपने पेंट की चेन को खोलने लगा,,,, यह देखकर शर्मा जी की बहू घुटनों के बाल आगे बड़ी और उसका हाथ पकड़ कर पेंट पर से उसका हाथ हटा दी और खुद उसके पेंट की बटन खोलने लगी,,, झड़ने के बावजूद भी वह काफी उत्तेजित दिख रही थी पेंट में बना तंबू की तरफ वह आकर्षित हुए जा रही थी देखते ही देखते वह अंकित के पेट की बटन खोलकर अंडरवियर सहित उसे घुटनों तक नीचे खींच दी उसका लहराता हुआ लंड देखकर उसकी आंखों की चमक बढ़ने लगी,,,, वह कुछ बोली नहीं बस अंकित की तरफ देखकर एकदम से अपने लाल-लाल होठों को खोली और अगले ही पल मोटे सुपाड़े को अपने होठों के बीच रखकर चूसना शुरू कर दी,,,, एकदम से अंकित मत हो गया अपनी आंखों को बंद करके इस पल में वह खोने लगा। देखते ही देखते शर्मा जी की बहू अंकित के पूरे लंड को अपने गले तक उतार कर चूसना शुरू कर दी, शर्मा जी की बहू की यही अदा तो अंकित को घायल कर देती थी उसे शर्मा जी की बहू का गुलाम बनने के लिए मजबूर कर देती थी।

सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,, गजब भाभी,,,,, तुम बहुत मस्त हो,,,, मैं कभी सोचा भी नहीं था कि तुम इतना अच्छा चुसाई करती हो,,,,ऊमममममममम,,,,,,,(अंकित की बात सुनकर शर्मा जी की बहू का जोश पढ़ने लगा और वह सुपाड़े पर अपनी जीभ को गोल-गोल घूमाने लगी जिससे अंकित का मजा बढ़ने लगा था,,,, अंकित शर्मा जी के बहू के सर पर दोनों हाथ रखकर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था देखते ही देखते धीरे-धीरे वह शर्मा जी की बहू के मुंह को ही चोदना शुरू कर दिया,,,,, वह कभी सोचा भी नहीं था कि मोहल्ले में ही उसे इतना मजा मिलेगा पहले सुषमा आंटी फिर सुषमा की लड़की और अब शर्मा जी की बहू उसके हाथों में तो चारों तरफ से लड्डू ही लड्डू आ रहे थे,,,, अपनी किस्मत पर अंकित को बहुत गर्व होने लगा था जहां लोग मोहल्ले की खूबसूरत औरतों को देखकर केवल आंहे भरा करते थे और बेकाबू होकर अपने हाथ से ही काम चलाया करते थे वही अंकित को सामने से औरतें अपने पास बुलाती थी हम बिस्तर होने के लिए।

शादी वाले घर में उसे इतनी खुली छूट मिलेगी वह

कभी सोचा भी नहीं था मेहमान हर कमरे में मौजूद थे आराम कर रहे थे और ऐसे में घर की बड़ी बहू मोहल्ले के जवान लड़के के साथ हम बिस्तर होकर मजा लूट रही थी,,,, शर्मा जी की बहू भी इस बात से हैरान हो जाती थी कि इतनी देर पीटने के बाद भी अंकित के लंड का पानी नहीं छुटता था,,,, और यही उसकी सबसे बड़ी खुशनसीबी भी थी जितनी कमी उसके पति ने उसके जीवन में महसूस कराया था उतना ही मजा अंकित उसे दे रहा था उसके सोच के विपरीत और कभी सोची नहीं थी कि जीवन में उसे इतना सुख प्राप्त होगा,,,, अंकित का लंड इतना मोटा और लंबा था कि बड़े आराम से उसके गले तक पहुंच रहा था और उसके होठों का छल्ला बना हुआ था,,,, कुछ देर तक शर्मा जी की बहू इसी तरह से अंकित को मजा देती रही और फिर अंकित धीरे से अपने लंड को उसके मुंह से बाहर निकाल दिया क्योंकि अब उसका मन उसे चोदने को कर रहा था,,,, इसलिए शर्मा जी की बहू के मुंह में से लंड को बाहर निकाल कर वहां अपने हाथ में लेकर उसे हिला रहा था चेहरे पर उत्तेजना के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे उत्तेजना से अंकित का चेहरा तमतमा रहा था,,,, वह शर्मा जी की बहू को आदेश देते हुए बोला।

अब घोड़ी बन जाओ मेरी जान समय आ गया है तुम्हारी सवारी करने का,,,,।

बहुत मन कर रहा है मैं तुम्हारा मेरी सवारी करने का,,,।

तो क्या भाभी तुम जब घोड़ी बन जाती हो तो मुझे घोड़ा बनना ही पड़ता है,,,।

यह बात है तो ले तेरी घोड़ी तैयार हो गई है,,,(इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू पलंग के किनारे हाथ की कोहनी को नीचे रखकर और घुटनों के पर बैठकर घोड़ी बन गई अपनी भारीभरकम गांड को हवा में उठाते हुए अंकित के सामने परोसती यह देखकर अंकित की उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुंच गई और वह गोरी गोरी गांड पर चपत लगाए बिना नहीं रह पाया,,,, फिर उसके बाद अंकित को शर्मा जी की बहू का गुलाबी गली एकदम साफ दिखाई दे रही थी बिल्कुल भी देर ना करते हुए अंकित अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर से सटा दिया और एक ही धक्के में पूरा का पूरा उसके अंदर डाल दिया,,, अंकित के इस हरकत से उसकी चीख निकलते निकलते रह गई थी वह तो वह अपने आप पर काबू कर ले गई थी वरना उसकी चीज सुनकर सभी लोग कमरे के बाहर इकट्ठा हो गए होते। शर्मा जी की बहू की चुदाई शुरू हो चुकी थी। बड़ी बड़ी गांड लड़के के साथ पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे शांत तालाब में कोई पत्थर फेंक दिया हो। और वैसे भी चोदते समय लहराती हुई गांड देखकर अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती थी इसलिए अंकित लगातार उसकी गांड पर चपत लगाते हुए धक्के लगा रहा था शर्मा जी की बहू चादर को दोनों हाथों से जोर से पकड़े हुए अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन नाकाम हो जा रही थी। अंकित की हर धक्के के साथ शर्मा जी की बहू को परम आनंद प्राप्त हो रहा था।

देखते ही देखते अंकित उसकी दोनों चूचियों को दोनों हाथ में पड़कर लगाम की तरह कसके अपनी कमर हिला रहा था ऐसा लग रहा था कि सच में वह घोड़ी की सवारी कर रहा हूं शर्मा जी की बहू पसीने से तरबतर हो चुकी थी लेकिन थमने का नाम नहीं ले रही थी वह अंकित का बराबर सामना कर रही थी। वैसे भी यह खेल ऐसा था जिसमें एक का भी थक जाना दूसरे के हौसले को पस्त कर देता था,,, लेकिन यहां पर दोनों खिलाड़ी टक्कर के थे दोनों किसी से हार मानने को तैयार नहीं थे ना पीछे हटने को तैयार थे कुछ देर तक ईसी तरह से पीछे से ही शर्मा जी की बहू की लेता रहा। अंकित तो नहीं देखा था लेकिन शर्मा जी की बहुत थक गई थी घुटनों के बल घोड़ी बने हुए उसका घुटना दर्द कर रहा था क्योंकि हर धक्के के साथ हुआ आगे की तरफ पत्थर जा रही थी जिसे सहारा देकर अंकित ही उसे फिर से व्यवस्थित कर रहा था लेकिन इस तरह से अंकित का मजा किरकिरा हो जा रहा था इसलिए वह पीछे से शर्मा जी की बहू की गुलाबी छेद से अपने लंड को बाहर निकाल दिया और फिर उसे पीठ के बल लेटा दिया उसकी दोनों टांगों को खोल दिया,,, उसकी गुलाबी बुर छल्ले नुमा खुली हुई थी जिसे अंकित नहीं अपने लंड से बनाया था और एक बार फिर से उसमें घुसा कर उसे चोदना शुरू कर दिया था,,,, अंकित और शर्मा जी की बहू कमरे के अंदर मजा लूट रहे थे घर के सभी सदस्य कुछ देर के लिए आराम फरमा रहे थे लेकिन काफी देर होने की वजह से जब उसकी भाभी वापस नहीं लौटी तो रजनी अपने कमरे से बाहर निकल आई और धीरे-धीरे चलते हुए उसे कमरे में जाने लगी जहां शादी के रसोई का सारा सामान रखा हुआ था और जब वहां पहुंची तो अच्छी दरवाजा बंद था और वह अभी अंदर से और हल्की-हल्की अजीब सी अंदर से आवाज आ रही थी रजनी को तो पहले को समझ में नहीं आया लेकिन एक जवान लड़का और जवान भाभी को कमरे के अंदर होने की शंका से ही रजनी के अजीब से लहार उठने लगी वह अंदर देखने की कोशिश करने लगी लेकिन वहां खिड़की नहीं था इसलिए वह दरवाजे के की होल से अंदर देखने की कोशिश करने लगी।

उसे अंदर का सब कुछ दिखाने लगा था लेकिन अभी कुछ समझ में नहीं आ रहा था चित्र स्पष्ट नहीं था लेकिन जैसे ही धीरे-धीरे चित्र स्पष्ट होने लगा उसकी आंखें फटी की फटी रह गई अपनी आंखों के सामने का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसे साफ दिखाई दे रहा था कि बिस्तर पर उसकी भाभी लेटी हुई थी उसकी दोनों टांगें हवा में खुली हुई थी और उसकी टांगों के बीच अंकित झुका हुआ था और अपनी कमर को जोर-जोर से हिला रहा था अभी तक सिर्फ यही नजारा दिखाई दे रहा था रजनी के तो होश उड़ गए थे उसके बदन में अजीब सी झुनझुनी छाने लगी थी,,,, लेकिन अगले ही पल उसे अंकित का लंड दिखाई दिया जिसे देखकर उसकी हालत और भी ज्यादा खराब हो गई,,, इतना मोटा और तगड़ा लंड हुआ भी जिंदगी में पहली बार देख रही थी,,, रजनी के कॉलेज में उसका एक बॉयफ्रेंड था जिसके साथ वह दो-तीन बार मजे ले चुकी थी लेकिन जो नजर वह अपनी आंखों से देख रही थी उसे देखकर उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसके बॉयफ्रेंड का लंड इससे आधा ही था। रजनी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सामने का दृश्य इतना मादकता से भरा हुआ था कि वह अपने आप को रोक भी नहीं पा रही थी अंदर के नजारे को देखने से,,,, इसलिए वह बार-बार उसे छोटे से छेद से अपनी आंख को सटा दे रही थी। जिस बेरहमी से अंकित उसकी भाभी की चुदाई कर रहा था उसे देखकर रजनी के रोंगटे खड़े हो गए थे लेकिन यह भी उसे साथ दिखाई दे रहा था कि उसकी भाभी कितना मजा ले रही थी वह बराबर उसे अपनी बाहों में जकड़े हुए थी,,,,।

रजनी ज्यादा देर तक वहां खड़ी नहीं रह पाई और अपने कमरे में आ गई वह अपनी भाभी के बारे में सोचने लगी वह कभी सोचा नहीं थी कि उसकी भाभी इस तरह का गंदा काम करेगी लेकिन एक औरत होने के नाते वह इसके पीछे के कारण को जानने की कोशिश करने लगी और उसे एहसास होने लगा कि इसमें उसके भाई की ही गलती है जो साल में बड़ी मुश्किल से एक महीना जैसा ही उसके साथ रहता था ऐसे में भला एक जवान औरत क्या कर सकती है थोड़ी देर तक अपनी बिस्तर पर बैठे रहने के बाद उसे दरवाजा खोलने की आवाज आई वह अपनी भाभी को बिल्कुल भी दोष देना नहीं चाहती थी,,,, लेकिन वह अपने कमरे के बाहर आकर खड़ी हो गई वह अपनी भाभी की तरफ देखी तो अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर रही थी,,,, उसे दरवाजे पर खड़ी देखकर उसकी भाभी को किसी प्रकार की शंका हो इससे पहले ही वह अपनी भाभी को आवाज लगाते हुए बोली।

भाभी एक जरूरी काम था,,,।

हां बोलो क्या हुआ,,,?

लहंगा ढीला है उसे टाइट करना है अभी अभी मैं पहन कर देखी तो लहंगा ढीला है,,,।

ओहहह यह तो दिक्कत वाली बात हो गई,,,,, तुम दुकान तो देखी हो ना जहां से लहंगा सिलवाई थी।

हां देखी हूं,,,,,।

अच्छा एक काम करो,,,,,(इतना कहकर वह अंकित की तरफ देखने लगी जो सीढीयो से नीचे की तरफ जा रहा था उसे आवाज लगाते हुए बोली,,,) अंकित,,,,,(अपना नाम सुनकर अंकित रुक गया और पीछे की तरफ नजर घुमा कर देखने लगा) इधर आना तो बहुत जरूरी काम है,,,,,
(शर्मा जी की बहू की बात सुनकर अंकित उसके पास पहुंच गया और बोला)

क्या हो गया भाभी,,,,?

देख अंकित जो लहंगा शादी में पहनना है वह ढीला है उसे टाइट करना है तो एक काम कर रजनी को मोटरसाइकिल पर बैठ कर दरजी के वहां चला जा वह जल्दी से टाइट करके दे देगा,,,,,।

ठीक है मैं चला जाता हूं,,,।

अरे अकेले नहीं जाना है रजनी को साथ में लेकर जाना है,,,,।

ठीक है दीदी चलो,,,,,।

रुको मैं लहंगा लेकर आती हूं,,,(इतना कहकर रजनी कमरे के अंदर गई और लहंगे वाला तेरा अपने हाथ में ले ली वैसे तो अंकित के साथ जाने का उसका बिल्कुल भी मन नहीं था क्योंकि कुछ देर पहले उसने अंकित के उत्तेजित रूप को देखी थी और उसकी आंखों के सामने अंकित की हिलती हुई कमर बार-बार दिखाई दे रही थी लेकिन फिर भी उसे जाना जरूरी था क्योंकि शाम को यही पहनना भी था अगर ढीला रह जाएगा तो पहनने में उसे ही दिक्कत होगी,,,,, थोड़ी देर में अंकित मोटरसाइकिल पर बैठ कर रजनी को दर्जी के वहां ले जा रहा था दर्जी की दुकान अंकित ने देखा नहीं था इसलिए मोटरसाइकिल चलाते हुए वह बोला,,,,)

 

कहां पर जाना है दीदी,,,,?

थोड़ा दूर है सीधा चलते रहो,,,,,(बहुत धीरे-धीरे रजनी बोल रही थी वैसे तो अंकित रजनी को दीदी बोल रहा था लेकिन जिस तरह से वह बैठी हुई थी उसके बदन का स्पर्श अंकित को मदहोश कर रहा था मौसम थोड़ा बादल छाया हुआ था ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त बारिश गिरने लगेगी और इसी बारे में वह रजनी से बोला,,)

कहीं बारिश ना गिरने लगे नहीं तो शादी में दिक्कत हो जाएगी।

मैं भी यही देख रही हूं कल तक बदल नहीं था लेकिन आज देखो,,,,,।

बारिश पड़ेगी भी तो इतना नहीं पड़ेगी थोड़ा बहुत पडकर बंद हो जाएगी सीजन नहीं है ना अभी,,,।

हां यह तो है,,(बातचीत के दौरान रजनी का मन कर रहा था कि वह उसे उसकी भाभी और उसके बीच के संबंध के बारे में पूछे लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,, अभी वह यह सोच रही थी कि तभी अंकित बोल पड़ा)

भैया नहीं आया अभी तक उन्हें तो पहले ही आ जाना चाहिए शादी वाला दिन है बहन की शादी है लेकिन फिर भी देखो,,,,।(अंकित की बात सुनकर रजनी समझ गई थी कि यह सब भाभी नहीं इसे बताया है और शायद इसी दुख का वह अपने पति से बदला भी ले रही है और यह वास्तविक भी है जवानी से भरी हुई औरत कब तक मर्द से दूर रह सकती है रजनी अपने मन में ही अपने भाई को बुद्धू कहने लगी थी अंकित की बात सुनकर वह बोली)

काम में बिजी है ना इसलिए शाम तक पहुंच जाएंगे,,,।

फिर भी दीदी घर में बड़ा भाई हो तो शादी वाले दिन कितनी मदद मिलती है मैं देख रहा हूं कि चाचा जी अकेले ही दौड़ रहे हैं अगर भैया होते तो शायद उन्हें आराम मिल जाता,,,,।

(रजनी को इस बात का अच्छी तरह से एहसास था की शादी वाले घर में एक बहन की शादी होने पर भी उसका बड़ा भाई घर में हाजिर नहीं था कामकाज नहीं देख रहा था अरे ऐसा कौन सा काम होता है की छुट्टी नहीं मिलती इस बात का दुख रोशनी को भी था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाई तकरीबन आधा घंटा मोटरसाइकिल चलाने के बाद दरर्जी की दुकान आई थी यह काफी दूर ही था,,,, शहर से थोड़ा बाहर,,,, बीच रास्ते में गांव जैसा था सड़क के दोनों तरफ खेत ही खेत थे इस जगह पर अंकित पहली बार आ रहा था रजनी के द्वारा बताए गए जगह पर मोटरसाइकिल को रोकते हुए अंकित बोला,,,)

बाप रे दीदी तुम्हें कोई और जगह नहीं मिली इतनी दूर आकर लहंगा सिलवाई हो,,,।

यह अच्छा सिलते हैं इसलिए यहां आई थी,,,।

चलो कोई बात नहीं जल्दी से इसे टाइट करवा लो,,,,।
(इतना कहकर दोनों दर्जी की दुकान पर चले गए,,, दर्जी आराम कर रहा था वैसे तो कोई और समय होता तो शायद इस समय वह लहंगा बिल्कुल भी टाइट नहीं करता लेकिन शादी वाला मामला था इसलिए वह भी जल्दी से उठकर अपना काम करने लगा तकरीबन 15 20 मिनट के बाद वह लहंगा को दुरुस्त कर दिया था लेकिन फिर भी एक बार उसे पहन कर देखना जरूरी था इसलिए रजनी अंदर वाले कमरे में चली गई और थोड़ी देर में उसे पहन कर देख ली और बाहर आकर बोली,,,)

अब ठीक है,,,,।

क्या करते हो चाचा यह जानते हुई भी की दुल्हन का लहंगा है फिर भी इतना ढीला सिल दिए,,,।

अब क्या करें बेटा कभी इधर-उधर हो जाता है लेकिन अब एकदम सही हो गया है बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,।

ठीक है चाचा अब चलते हैं,,,,,,।
(अंकित से बातचीत के दौरान अंकित के प्रति रजनी का भी आकर्षण बढ़ने लगा था उसे लगने लगा था कि अंकित बेहद आकर्षक लड़का है उसे बातचीत करने में कितना अच्छा लग रहा था कुछ देर पहले उसने कमरे में भाभी की चुदाई देखी थी जिसे देखकर अभी तक उसके बाद में अजीब सी हलचल हो रही थी क्योंकि उसकी भाभी को चोदने वाला उसके साथ था और उसके पास इतना मोटा तगड़ा लंड था कि जिसके बारे में वह कभी सपने भी नहीं सोची थी। अब अंकित को लेकर उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी अंकित मोटरसाइकिल पर रजनी को बैठक आगे बढ़ गया था लेकिन देखते ही देखते बरसात की बूंदें गिरने लगी वह जिस जगह से गुजर रहा था दोनों तरफ खेत थे एक तरफ टूटी हुई झोपड़ी थी,,,, वैसे तो दोनों भी चुके थे लेकिन फिर भी इतनी तेज बारिश में मोटरसाइकिल लेकर जाना उचित नहीं था इसलिए जल्दी से मोटरसाइकिल खड़ी करके वह दोनों झोपड़ी के अंदर घुस गए,,,,, दोनों ने कभी सोचा नहीं था कि इतनी तेज बारिश शुरू हो जाएगी।

 

अच्छा हुआ तुम्हारा लहंगा प्लास्टिक के थैले में ही वरना भीग जाता तो शाम तक सूखने में दिक्कत आती,,,।

बादल देखकर ही में प्लास्टिक की थैली लेकर आई थी।

यह तो तुमने बहुत अच्छा की दीदी,,, लेकिन अब यहां रुकना पड़ेगा देख रही हो कितनी तेज बारिश है कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है हवा भी तेज है,,,,।

सच में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है अच्छा हुआ कि यह झोपड़ी दिख गई वरना इतनी तेज बारिश में मोटरसाइकिल चलाना भी तुम्हारे लिए मुश्किल हो जाता।

हां तुम सही कह रही हो और एक तो शादी भी आज तुम्हारी है दुल्हन को सही सलामत घर तक पहुंचाना मेरी जिम्मेदारी है,,,,(इतना कहकर अंकित मुस्कुराने लगा और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर रजनी भी मुस्कुरा दी तभी आसमान में जोरदार बिजली कड़की और रजनी एकदम घबराकर अंकित के सीने से लग गई पल भर के लिए अंकित को कुछ समझ में नहीं आया लेकिन जैसे उसे एहसास होने लगा कि उसकी बाहों में एक जवान खूबसूरत लड़की है जो पूरी तरह से पानी में भीगी हुई है जिनके अंग से मादक खुशबू उठ रही थी उस मादक को खुशबू में धीरे-धीरे अंकित खोने लगा,,,, और अनजाने में उसे सहारा देते हुए उसकी पीठ पर अपने दोनों हाथ रख दिया अंकित के बदन की गर्माहट रजनी के तन बदन में आग लगाने लगी अनजाने में ही वह उत्तेजित होने लगी थी,,,, लेकिन जल्दी ही उसे एहसास हुआ कि वह गलत कर रही है आज उसकी शादी है आज वह दुल्हन बनने वाली है ऐसे में उसका इस तरह से देखना उचित नहीं है इसलिए वह धीरे से अंकित के बदन से अलग हुई वह शर्मा रही थी,,,, अंकित भी अच्छी तरह से उसके मन की दशा को समझ पा रहा था इसलिए वह बोला,,,।

भले तेज बारिश है लेकिन कितनी अच्छी बारिश है कोई और समय होता तो ऐसी बारिश में भीगने का मजा ही कुछ और होता,,,, तुम्हें बारिश में भीगना अच्छा लगता है।

बहुत अच्छा लगता है ,,,,(वह नजर झुकाए हुए ही जवाब दी,,,,) कॉलेज जाते समय अक्सर बारिश पड़ने लगती थी लेकिन मैं कभी घर से छाता नहीं ले जाती थी ताकि मैं भीग सकुं,,,।

तुम बिल्कुल मेरी तरह हो मुझे भी भेजना बहुत अच्छा लगता है खास करके स्कूल जाते समय,,,,।
(दोनों में इसी तरह से बातें होती रही,,,,, लेकिन अब रजनी को बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह शर्मा के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी लेकिन जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह धीरे से अंकित से बोली,,,,)

तुम जरा अपनी नजर दूसरी तरफ घूमाना तो,,,।

क्यों क्या हुआ,,,?

अरे समझा करो इमरजेंसी है,,,,।
(इतना सुनकर अंकित समझ गया और हल्की सी मुस्कुराहट के साथ बोला)

ओहहह यह बात है कोई बात नहीं लेकिन तुम पूरी तरह से भीग चुकी हो ऐसे में अगर कर भी लोगी तो पता नहीं चलेगा,,,।

 

धत्,,,(अंकित की बात सुनकर रजनी शर्मा से पानी पानी हो गई अंकित ने नजर को दूसरी तरफ घुमा दिया था रजनी से बर्दाश्त करना मुश्किल था इसलिए वह धीरे से अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी और सलवार की डोरी खोलने के साथ ही अपनी पैंटी सहित वह सलवार को घुटनों तक खींच कर वहीं पास में ही झोपड़ी के अंदर ही पेशाब करने के लिए बैठ गई और भला ऐसा कैसे हो सकता है कि इतने करीब एक जवान खूबसूरत लड़की पेशाब करने बैठी हो और अंकित उसे देखे बिना रह सका हो,,,, बार-बार कर नजरों से अंकित रजनी की तरफ देख ले रहा था उसकी गोरी गोरी गांड एकदम सुडौल थी,,, पूरी तरह से जवान हो चुकी थी , जवानी से उसका हरेक अंग भर चुका था,,, अंकित अपने मन में सोचने लगा कि आज की रात शादी करने के बाद अपने पति को जी भर कर मजा देगी,,, बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज अंकित को मदहोश कर रही थी, रजनी लाख कोशिश कर रही थी कि उसकी दूर से सीट की आवाज ना निकले लेकिन वह इस प्राकृतिक प्रक्रिया को रोक नहीं पा रही थी उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज अंकित के कानों तक एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,,,थोड़ी ही देर में रजनी पेशाब कर चुकी थी वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई लेकिन अनजाने में ही वह नजर घूमाकर देखी तो अंकित को अपनी ओर ही देखता हुआ पाकर वह शर्म से पानी पानी हो गई,,, और थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,,)

तुम्हें शर्म नहीं आती एक लड़की को पेशाब करते हुए देखने में,,,,,,(इतना कहकर वह अपनी सलवार ऊपर उठा पाती और अंकित कुछ बोल पाता इससे पहले ही फिर से जोरदार बिजली चमकी और इस बार वह अपनी सलवार ऊपर उठाए बिना ही एकदम से अंकित की तरफ भागी और फिर से उसके सीने से लग गई इस बार मामला कुछ अलग था,, इस बार रजनी की सलवार उसके घुटनों में फंसी हुई थी घुटनों के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी थी और इस मौके को अंकित अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था और अगले ही पर मौका देखकर अंकित अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ पर रखने के बजाय उसके नितंबों पर रख दिया और उसे दबाना शुरू कर दिया वह जानता था कि इस समय रजनी के मन में क्या चल रहा होगा,,,,, वह धीरे-धीरे रजनी की गांड को दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया रजनी एकदम से सन्न रह गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि अंकित उसके साथ इस तरह की हरकत कर देगा,,,, उसकी सांसे गहरी चलने लगी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन उसकी बात का जवाब अंकित देते हुए बोला,,,)

तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की अगर इतने पास में बैठकर पेशाब कर रही हो तो देखने में कोई हर्ज नहीं है,,,,।
(अंकित की हरकत और उसका जवाब सुनकर रजनी एकदम से गनगना गई उसका काबू खुद पर नहीं था वह बेकाबू हो जा रही थी अंकित की हरकतें उसे पागल बना रही थी वह कभी सोच ही नहीं थी कि इस तरह से वह किसी मर्द के हाथ का खिलौना बन जाएगी कठपुतली बन जाएगी क्योंकि इस समय रजनी उसके हाथों से छूटने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी वह अपने हालात को अच्छी तरह से समझ रही थी इस समय वह अजीब सी दुविधा में थी उसकी सलवार और उसकी पेंटि उसकी घुटनों में फंसी हुई थी उसकी नंगी गांड पर अंकित की मजबूत हथेलियां थी,,,,, जिसकी वजह से वह बेकाबू हुए जा रही थी,,, फिर भी हिम्मत करके वह बोली।)

तुम मुझे दीदी कहते हो,,,,।

लेकिन तुम मुझे भैया का कर नहीं बुलाई,,,।

यह गलत है अंकित किसी को पता चल गया तो गजब हो जाएगा आज मेरी शादी है,,,,,(वह अपनी तरफ से आखिरी कोशिश कर रही थी इन सब से बाहर निकालने के लिए लेकिन इस दौरान अंकित के पेंट में बना हुआ तंबू सीधे उसकी नंगी बुर पर ठोकर लगा रहा था जिससे वह बदहवास हुए जा रही थी वह जानती थी कि अंकित अब उसे छोड़ने वाला नहीं है क्योंकि कुछ देर पहले वह अंकित की चुदाई देख चुकी थी उसकी भाभी को बड़ी बेरहमी से वह पेल रहा था,,,, अंकित अपने पेट में बना तंबू बराबर उसकी बुर पर रगड़ते हुए बोला,,,)

आज तुम्हारी शादी है तभी तो तुम्हें एक मुख्य अध्याय पढ़ना चाहता हूं जिसकी जरूरत तुम्हें कल रात को महसूस होगी मैं तुम्हें खिलाड़ी बना देना चाहता हूं एक ही बार में ताकि तुम अपने पति को अपना गुलाम बना सको,,,,।

नहीं अंकित यह गलत है किसी को पता चल गया तो मेरी बदनामी हो जाएगी,,,,(रजनी का मन बराबर बना हुआ था लेकिन फिर भी वह जानबूझकर अपने आप को बहकाने की कोशिश कर रही थी लेकिन इस दौरान अंकित धीरे से अपनी पैंट की बटन खोल दिया था और अपने खड़े लंड पर रजनी की हथेली रख दिया था जिसकी गर्माहट पाकर रजनी एकदम से मदहोश हो गई थी और तुरंत अपना हाथ पीछे खींच ली थी लेकिन अंकित पीछे हटने वाला नहीं था वह तुरंत फिर से उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रखकर उसे पर अपनी हथेली रख दिया और उसे पर दबाव बनाने लगा थोड़ी देर में रजनी पिघलने लगी और दूसरे हाथ को उसकी गांड पर से हटकर सीधा उसकी बुर पर रख दिया जो की पानी छोड़ रही थी गीली हो रही थी उसकी चिपचिपाहट अंकित को अपनी उंगलियों पर साफ महसूस हो रही थी,,,,,।

ओहहहहह रजनी तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हारा पति बहुत खुशकिस्मत है जो तुम्हें पाया है लेकिन मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि जो मजा में तुम्हें आज दूंगा वह तुम्हें जिंदगी भर याद रहेगा ऐसा मजा तुम्हारा पति तुम्हें कभी नहीं दे पाएगा और कल रात के लिए मैं तुम्हारा रास्ता खोल देना चाहता हूं ताकि तुम्हें दर्द ना हो अगर मेरे जैसा मोटा और लंबा होगा तो अगर इससे छोटा हुआ तो तुम बड़े आराम से हंसते-हंसते ले लोगी,,,,, बताओ मेरा मोटा लंबा है ना,,,,।

(रजनी को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले लेकिन फिर भी अंकित की बात सुनकर वह हां मैं सर हिला दि,,उसके चेहरे पर शर्म की रेखा एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,,, देखते ही देखते अंकित अपनी हथेली को इसकी दर पर जोर-जोर से रगड़ने लगा मसलने लगा उसे मदहोश करने लगा बाहर बारिश बड़े जोरों से हो रही थी अंकित अपने मन में सोच रहा था कि अच्छा हुआ कि रुकने के लिए उसने यह झोपड़ी पसंद किया वरना ऐसा सुनहरा मौका उसके जीवन में दोबारा कभी नहीं आता,,,, अंकित यह तो जानता था कि रजनी पूरी तरह से तैयार हो चुकी है लेकिन फिर भी उसे और ज्यादा खोलने के लिए उसका आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है इसलिए वह धीरे से नीचे घुटनों के बल बैठ गया और बड़े गौर से रजनी की गुलाबी बुर को देखने लगा,,, जो की पूरी तरह से एकदम चिकनी थी ऐसा लग रहा था कि आज ही क्रीम लगाकर साफ की हो इसलिए वह मुस्कुराते हुए रजनी की तरफ देखा और बोला ,,,,

आज ही लगता है क्रीम लगाकर साफ की हो अपने पति के लिए है ना ,,,,
(यह सुनकर रजनी एकदम शर्म से अपनी आंखों को बंद कर ली क्योंकि अंकित की बात में सच्चाई थी और यह सच्चाई उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी,,,, रजनी कुछ समझ पाती इससे पहले ही अंकित अपने प्यास होठों को उसके गुलाबी पर पर रख दिया उसे चार्ट में लगा यह देखकर करते हो रजनी का पर एकदम साथी आसमान पर पहुंच गया वह एकदम से मदहोश हो गई और उसके बाद में एकदम से अकड़न बढ़ गई और वह अपने पैर के अंगूठे के बल खड़ी हो गई,,,, उसकी उत्तेजना और उत्साह देखकर अंकित समझ गया था किस तरह की हरकत आज तक उसके साथ किसी ने नहीं किया था और यह बात सच थी भले ही वह तीन-चार बार अपने बॉयफ्रेंड के साथ मजा ले चुकी थी लेकिन इस तरह की हरकत उसके बॉयफ्रेंड ने उसके साथ कभी नहीं किया था इसलिए वह इस समय अत्यधिक आनंद महसूस कर रही थी। अंकित अपनी हरकतों से उसे काम बिह्वल बना दे रहा था। पागलों की तरह अंकित उसे मजा दे रहा था उसकी बुर को चाट रहा था वैसे भी उसकी चिकनी बुर को चाटने में अंकित को बहुत मजा आ रहा था अंकित की जीभ लपालप चल रही थी रजनी उत्तेजना से पागल हुए जा रही थी। उसका पूरा बदन कसमसा रहा था उसके पैरों में कंपन हो रहा था,,,, वह ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी लेकिन अंकित उसके नितंबों को पड़कर उसे सहारा दिए हुए था देखते देखते रजनी झड़ने लगी और इस तरह से झड़ने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,,,,,।

बाहर तेज बारिश हो रही थी कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था तेज हवा चल रही थी यहां पर किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी ,,,, क्योंकि यह जगह शहर से थोड़ा बाहर थी और इतनी तेज बारिश में यहां कोई आने वाला नहीं था इसलिए अंकित पूरी तरह से निश्चिंत था। रजनी झड़ चुकी थी उसका पानी निकल चुका था झड़ते समय जिस तरह के आनंद की अनुभूति उसे हो गई थी वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी उसके बदन में अभी भी कंपन हो रहा था,,,, मौके की नजाकत को देखते हुए अंकित धीरे से उठकर खड़ा हुआ और रजनी की आंखों में देखने लगा रजनी शर्मा के मारे मेरी जा रही थी अपनी आंखों को नीचे झुका कर वह अपने आप को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही थी कि तभी अंकित उसे बिल्कुल भी मौका ना देते हुए अपने होठों को उसके होंठ पर रख दिया उसकी कमसिन गुलाबी होंठ दहक रहे थे और अंकित होठों को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था,,,, रजनी फिर से मदहोश होने लगी एक बार छोड़ने के बाद अंकित किसी भी तरह से रजनी को सहज होने देना नहीं चाहता था क्योंकि वह जो कुछ भी करना चाहता था वह उसकी मदहोशी की हालत नहीं कर सकता था इसलिए उसके होठों का रसपान करते हुए अंकित फिर से अपने दोनों हथेलियां को उसकी नाजुक गांड पर रख दिया और उसे पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और इस दौरान वह अपने पेंट में बने तंबू को बराबर उसकी नंगी बुर पर रगड़ रहा था,,, रजनी के बदन में कसमाशाहट बढ़ती जा रही थी वह अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं थी कुछ देर पहले जो नजर उसने अपनी आंखों से देखी थी उसे महसूस होने लगा था कि वही नजारा अब उसके साथ होने वाला है,,, आने वाले पाल के बारे में सोच कर ही रजनी घबरा गई थी।

 

क्योंकि दरवाजे के की होल से उसने अंकित के लंड की झलक देखी थी मोटा तगड़ा लंबा ऐसा उसने आज तक नहीं देखी थी इसलिए उसकी लंबाई और जाकर को देखते हुए उसके मन में शंका थी कि अगर अंकित उसके साथ भी उसकी भाभी की तरह करने लगा तो क्या हुआ उसके मोटे तगड़े लंड को अपनी नाजुक बुर में ले पाएगी कि नहीं यह सवाल उसके लिए अहम था,,, वैसे भी आज की रात बीतने के बाद कल की रात उसके लिए सुहाग वाली रात थी कल की रात को उसका पति उसके साथ अपनी मनमानी करने वाला था जिसके लिए वह अपने आप को तैयार कर चुकी थी लेकिन इस तैयारी के बीच में कभी सोची नहीं थी कि उसका पाला ऐसे जवान लड़के से पड़ेगा जिसके पास मोटा तगड़ा और लंबा लंड होगा। उसकी पूरी तैयारी गड़बड़ा चुकी थी लेकिन मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर में महसूस करने का एहसास उसे गदगद किए हुए था। अपनी इस लालच को वह रोक भी नहीं पा रही थी। इसीलिए तो एक बार फिर से अंकित की बाहों में वह पूरी तरह से मचलने लगी थी। कल रात की सुहागरात औपचारिकता बस थी लेकिन असली सुहागरात ऐसा लग रहा था कि आज शाम को ही हो जाने वाली थी। तेज बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। ऐसा लग रहा था कि यह तेज बारिश इन दोनों के लिए ही हो रही थी इन दोनों को पर्याप्त समय देने की कोई साजिश रच रही हो लेकिन इस साजिश में भी अपना अलग मजा था। और इस मजे को दोनों भरपूर ले रहे थे।

कुछ देर तक अंकित इसी तरह से रजनी के नितंबों के मर्दन के साथ साथ रजनी के लाल लाल होठो का रसपान करता रहा,,,, लेकिन अब समय आ गया था आगे बढ़ने का, अपने होठों को उसके होठों से अलग करके गहरी सांस लेता हुआ वह रजनी के खूबसूरत चेहरे को देखता रह गया रजनी शरम के मारे अपनी नजरों को नीचे झुकाए इस पल का आनंद ले रही थी,,,, लेकिन अब अंकित रजनी से कुछ और करवाना चाहता था वह सुख प्राप्त करना चाहता था जो कल उसका पति उसे करवाने वाला था उसे देने वाला था रजनी के कंधों पर दोनों हाथ रखकर उसे पर दबाव बनाता हुआ बिना कुछ बोले अंकित उसे नीचे झुकने का इशारा करने लगा जवानी से भरी हुई रजनी को भी मालूम था कि अंकित क्या करवाना चाहते हैं और सही मायने में देखा जाए तो वह अपने आप को रोक भी नहीं पा रही थी क्योंकि कंधे पर दबाव पढ़ते ही वह बिना कुछ बोले बिना कोई सवाल जवाब के नीचे की तरफ झुकती चली गई और अगले ही पल वह अपने घुटनों के पल बैठी हुई थी ठीक उसकी आंखों के सामने अंकित का मोटा तगड़ा लंड लहरा रहा था जिसे देखकर रजनी की आंखों की चमक बढ़ती जा रही थी। रजनी खुद अंकित के मोटे से बड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती थी उससे प्यार करना चाहती थी वह देखना चाहती थी कितना मोटा तगड़ा लंड मुंह में जाता है तो कैसा लगता है उसे चूसने में कितना आनंद आता है,,,, लेकिन फिर भी अपने संस्कारों का आखिरी बार बचाव करते हुए वह अंकित से बोली।अब हमें चलना चाहिए,,,,!

ऐसी तेज बारिश में कहां जाओगी रजनी रुकना ही पड़ेगा तो क्यों ना मजा लिया जाए वैसे भी कल की रात तुम्हारी सुहागरात है कल तुम्हारा पति तुम्हारे साथ यही सब करेगा इसलिए कल की रात के लिए तुम आज से ही अपनी तैयारी कर सकती हो ताकि कल रात को तुम्हें घबराहट ना हो झिझक ना हो,,,(अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए उसके सुपाड़े को धीरे-धीरे रजनी के खूबसूरत गानों पर रगड़ते हुए अंकित अपनी बात रख रहा था वह अच्छी तरह से जानता था कि रजनी बिल्कुल भी इनकार नहीं कर पाएगी लेकिन यह सब कुछ औपचारिक भर था। अंकित की हरकत से रजनी गरम हो रही थी वह बार-बार जानबूझकर अपने लाल-लाल होठों को खोल दे रही थी ताकि अंकित खुद अपने हाथों से अपने लंड को उसके मुंह में डाल सके लेकिन अंकित उसे तड़प रहा था मदहोश बना रहा था क्योंकि संपूर्ण रूप से मदहोशी में डूबी हुई औरत ही असली सुख देती है। और इस समय धीरे-धीरे रजनी डूबती चली जा रही थी उसकी आंखों में खुमारी का नशा छा रहा था। रजनी को तड़पाने में अंकित को मजा आ रहा था बार-बार अंकित अपने मोटे सुपाड़े को उसके होठों से रगड़कर हटा ले रही थी और जब-जब सुपाड़ा होठों से स्पर्श होता था तब तब रजनी के होशो हवास उड़ जाते थे,,,,, वह मचल उठती थी उसे अपने मुंह में लेने के लिए कुछ देर तक अंकित उसे इसी तरह से तड़पता है और फिर अपने मोटे तगड़े सुपाडे को उसके लाल-लाल होठों के बीच रख दिया जिसे रजनी बड़ी ही शालीनता से अपने होठों को बीच रखकर हल्के-हल्के उसे चूसना शुरू करती है उसके ऊपर अपने होंठ फीराना शुरू कर दी यह सब अंकित को मदहोश बना रहा था एक तो तूफानी बारिश ऊपर से एक जवान लड़की का साथ उसे अत्यधिक उत्तेजना का एहसास करा रहा था।रजनी मदहोश हो चुकी थी। लंड ईतना मोटा था की पूरा होंठ खोलने के बावजूद भी वह ठीक तरह से उसे अपने मुंह के अंदर नहीं ले पा रही थी इसी बात से वह और भी ज्यादा उत्तेजित और मदहोश हो चुकी थी लेकिन इस बात का डर उसके मन में बराबर बना हुआ था कि उसकी बुर के अंदर इतना मोटा तगड़ा लंड घुस पाएगा कि नहीं,,,, लंड चूसते हुए रजनी अपनी भाभी के बारे में सोच रही थी किसकी भाभी कितने आराम से इतना मोटा तगड़ा लंड अपनी बुर में लेकर मजा लूट रही थी,, थोड़ा धीरे रखेगी तो वह भी बढ़िया आराम से इसे अंदर ले पाएगी ऐसा कहकर वह अपने आप को ही मना रही थी धीरे-धीरे अंकित की कमर हिलना शुरू हो चुका था। दोनों मदहोश हुए जा रहे थे,,,, अभी तक रजनी को अपनी भाभी के चरित्र को लेकर थोड़ी बहुत शंका जाग रही थी लेकिन अब यह शंका धीरे-धीरे खत्म होने लगी थी क्योंकि वह खुद अपनी भाभी के रास्ते पर थी और इस बात से वह इनकार नहीं कर सकती थी कि एक औरत को मर्द की कितनी जरूरत होती है। देखते देखते रजनी बड़े आराम से अंकित के लंड को अपने गले के नीचे उतारने लगी थी,,,, इस झोपड़ी में आसरा लिए दोनों को आधा घंटा से ज्यादा समय गुजर चुका था लेकिन अभी बारिश ना रख रही थी ना थम रही थी और बारिश के साथ-साथ अंकित भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था,,,, ऐसा लग रहा था कि बे मौसम की है बारिश इन दोनों के लिए ही आई थी ताकि यह दोनों एक हो सके मजा ले सके रजनी सुहागरात से पहले सुहागरात का आनंद ले सके और वह भी अपने पति से नहीं गैर मर्द से,,,। कुछ देर तक अंकित इसी तरह से मजा लेता रहा आनंद लेता रहा,,,, और फिर धीरे से अपने लंड को रजनी के मुंह में से बाहर निकाल लिया रजनी की सांस ऊपर नीचे हो रही थी इतना मोटा लंड गले तक उतार लेने की वजह से उसकी आंखें बाहर को निकल आई थी,,,, वह गहरी गहरी सांस लेते हुए ललचाई नजरों से अंकित के लंड को भी देख रही थी जिसके ऊपर से उसके मुंह का लार टपक रहा था। रजनी की बांह पकड़कर अंकित रजनी को खड़ी किया उसकी सलवार और पेंटी अभी भी उसके घुटनों में फंसी हुई थी।

पल भर के लिए अंकित रजनी को नंगी कर देना चाहता था इसलिए उसकी सलवार को अपने पैर से नीचे की तरफ सरकाते हुए अपने हाथों का प्रयोग करके वह रजनी की कुर्ती को पकड़ लिया और उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा,, रजनी को एहसास हो गया था कि अंकित क्या करने वाला है अनजान जगह पर नंगी होने में रजनी को भी झिझक महसूस हो रही थी,, लेकिन आने वाले पल की मदहोशी के एहसास में वह पूरी तरह से डूब चुकी थी और ना चाहते हुए भी अपने दोनों हाथों को ऊपर उठकर अंकित का सहयोग करने लगी,,,, और रजनी का सहयोग प्रकार अंकित को बिल्कुल भी देर नहीं लगी उसकी कुर्ती उतारने में, कुर्ती उतर जाने के बाद उसकी लाल रंग की ब्रा में कैद उसके दोनों अमरूद और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहे थे जिसे अंकित उसकी ब्रा पड़कर ऊपर उठकर दोनों अमरुद को अपने हाथों में भर लिया था और उसे दबाते हुए अगले ही पल तुरंत उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था रजनी मदहोश होने लगी बदहवास होने लगी,,, और उत्तेजित अवस्था में वह खुद अपने पैर का सहारा लेकर अपनी सलवार और पेटी दोनों को अपने पैरों से बाहर निकाल दी थी और एकदम नंगी हो चुकी थी,,, मदहोशी के आलम में वह पूरी तरह से भुल चुकी थी कि वह किस जगह पर है,,,, यह एक चालू सड़क थी जिस पर हमेशा वहां आते जाते थे लेकिन तेज बारिश के चलते अभी यहां से एक भी ना तो वाहन गुजरा था ना ही कोई इंसान गुजरा था,,, इसलिए रजनी की हिम्मत बढ़ चुकी थी,,, अंकित जी जान से उसकी दोनों चूचियों को मुंह में लेकर जी भर कर पी रहा था अभी रजनी की चुचियों का आकार सुगठित नहीं था अभी वह अमरुद जैसे ही छोटे-छोटे थे लेकिन इन्हें दबाने में और मुंह में लेकर पीने में बहुत मजा आ रहा था,,,, अंकित को साफ पता चल रहा था कि रजनी की चूचियों पर मेहनत नहीं हुई थी इसलिए वह पूरे शबाब में खेली नहीं थी लेकिन खूबसूरती के मामले में वह बेहद हसीन दिखाई दे रही थी। कुछ देर तक अंकित रजनी की चूचियों से अपना मन बहलाता रहा और रजनी अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर हिम्मत दिखाकर अंकित के लंड को पकड़ कर हीला रही थी मुठिया रही थी। उसे बहुत अच्छा लग रहा था उसकी गर्माहट उसे उत्तेजित कर रही थी और उसकी बुर को पगला रही थी।

थोड़ा सा अपनी गांड पर उठाओ,,,,।
(अंकित की यह बात सुनकर रजनी शर्म से गड़ी जा रही थी लेकिन इस समय अंकित की बात मानना बेहद जरूरी था क्योंकि अंकित उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति करवाने वाला था इसलिए वह भी अंकित की बात मानते हुए अपनी नंगी गांड को थोड़ा ऊपर उठा दे और झोपड़ी के मोटे लकड़ी को पकड़ कर वह सहारा ले ली अब इस हालत में रजनी की खूबसूरत गांड और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आ रही है अंकित तो उसे देखते ही रह गया और दोनों हथेलियां को गांड पर रखकर उसे हल्के हल्के से सहलाने लगा,,, रजनी का गुलाबी छेद एकदम साफ दिखाई दे रहा था जिसे देख कर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था अपने लंड को उसमें घुसाने से पहले अंकित धीरे से अपनी एक उंगली को उसकी बुर में डालकर गोल-गोल घुमा कर अपने लिए जगह बनाने लगा लेकिन उंगली डालने पर भी रजनी एकदम कसमसा जा रही थी। इसलिए वहां रजनी का हौसला बढ़ाते हुए बोला।

बहुत अच्छे रजनी तुम कल की रात के लिए तैयार होने जा रही हो आधी तैयार हो गई हो बस आधी बाकी है कल देखना तुम अपने पति पर जो जलवा दिखाओगी कि वह जिंदगी भर तुम्हारा गुलाम बन जाएगा,,,,,,,।
(अंकित के समझाने के बावजूद भी रजनी अच्छी तरह से जानती थी इसलिए वह शरमाते हुए बोली)

आराम से डालना तुम्हारा बहुत मोटा और लंबा है,,,।
(यह सुनकर अंकित मुस्कुरा दिया और बोला)

चिंता मत करो एकदम आराम से करूंगा क्योंकि कल तुम्हारी सुहागरात है और अपने पति के सामने फटी बुर लेकर जाओगी तो क्या सोचेगा इसलिए बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,, जैसी तुम मुझे दे रही हो वैसा ही मैं तुम्हें लौटा दूंगा,,, चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है एक खरोंच तक नहीं आएगी,, एकदम मक्खन मलाई की तरह ही रहेगी।(अंकित रजनी को पूरा आश्वासन दे रहा था,,,, रजनी को अंकित पर विश्वास तो था लेकिन हालात विपरीत थे, रजनी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी गुलाबी बुर का छेद छोटा था और अंकित के लंड की मोटाई और लंबाई उस छेंद से काफी बड़ी थी,,, रजनी का दिल जोरो से तड़प रहा था क्योंकि अब महा मुकाबला शुरू होने वाला था वह झोपड़ी के अंदर की बड़े से लकड़ी को पकड़ कर झुकी हुई थी उसकी गांड हवा में लहरा रही थी और अंकित उसकी गुलाबी छेद को देखकर अपने लंड के सुपाड़े पर ढेर सारा थूक लगा रहा था और फिर उसकी गुलाबी बुर पर भी ढेर सारा थूक लगाकर उसे चिकनाहट देने लगा,,, और इस तरह की हरकत पर भी रजनी की हालत खराब हो रही थी क्योंकि वह अपनी उंगलियों से उसकी बुर को कुरेद रहा था। दोनों के अंगों को बराबर चिकना कर लेने के बाद अंकित धीरे से अपने लंड को पकड़ कर, उसके मोटे सुपाड़े को रजनी के गुलाबी बुर पर सटा दिया,,, दहकता हुआ लंड का सुपाड़ा इस समय रजनी को ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो जैसे गर्म लोहे का रोड उसकी बुर से सटा दिया हो। वह एकदम से गनगना गई उसकी गांड हल्की सी ऊपर उठ गई थी जिसे अंकित अपनी हथेली का दबाव उसे पर बना कर फिर से उसे व्यवस्थित कर दिया और फिर धीरे-धीरे उसे अंदर की तरफ ठेलने लगा,,,,।
वाकई में रजनी की बुर एकदम कसी हुई थी,,, इसका एहसास अंकित को हो गया था इसलिए वह रजनी से बोला।

पहले कभी चुदवाई नहीं हो क्या,,,?

धत्,,,,,,, बिल्कुल भी नहीं,,,,,(अंकित की बात को रजनी एकदम से जानकारी दी थी और इस बात की खुशी उसके चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी कि अंकित को लग रहा था कि उसकी बुर में उसका लंड पहली बार घुसने जा रहा है जबकि सब चाहिए थी कि वह दो-तीन बार मजे ले चुकी थी लेकिन अंकित जैसा लंड नहीं ली थी,,,, रजनी का जवाब सुनकर अंकित अपना प्रयास जारी रखते हुए बोला।)

बाप रे तभी तो एकदम कसी हुई है,,,, अच्छा हुआ कि तुम सुहागरात के पहले मुझे मिल गई वरना तुम्हारा पति तो बिल्कुल भी रहम नहीं करता और तुम्हें बहुत दर्द होता लेकिन देखना मैं तुम्हें ऐसे करूंगा कि दर्द का मजा ज्यादा आएगा,,,,,(अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में रजनी को उलझाते हुए अंकित आगे बढ़ रहा था,,, गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों को खोलता हुआ अंकित के लंड का सुपाड़ा धीरे-धीरे आगे की तरफ चिकनाहट पाकर सरक रहा था,,,, जैसे-जैसे सुपाड़ा अंदर की तरफ सरक रहा था वैसे-वैसे रजनी की हालत खराब होती जा रही थी उसे दर्द का एहसास हो रहा था,,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था,,, अंकित आज बिना मजा लिए उसे छोड़ने वाला नहीं था बारिश भी उसका पूरा साथ दे रही थी,,, देखते देखते वह अपने संपूर्ण सुपाड़े को बुर के अंदर सरकाने में सफल हो गया,,, रजनी की सांस ऊपर नीचे हो रही थी वह कस के लकड़े को पकड़े हुए खड़ी थी,,,, उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी की शादी वाले दिन ही वह मोहल्ले के ही लड़के से चुदवाएगी,,,, सुपाड़ा घुस चुका था रजनी काफी हिम्मत वाली थी क्योंकि वह दर्द को बर्दाश्त कर ले गई थी,,,, अंकित लंड पर से अपने हाथ को हटाकर दोनों हाथों से उसकी चिकनी कमर को थाम लिया था। और फिर धीरे-धीरे थोड़ा बहुत प्रयास करके लंड के सुपाड़े को और अंदर डालने की कोशिश कर रहा था,,, थोड़ा-थोड़ा लंड अंदर की तरफ जा रहा था। अंकित चालाकी दिखाते हुए जितना घुसा था उतना ही थोड़ा सा बाहर निकाल कर उतना ही अंदर डालकर अपनी कमर धीरे-धीरे हीला रहा था। इतने से ही रजनी को मजा आ रहा था उसके चेहरे के हाव-भाव बदलते जा रहे थे गोरा मुखड़ा टमाटर की तरह लाल हो चुका था।

सामाजिक तौर पर देखा जाए तो रजनी अपनी वैवाहिक जीवन की शुरुआत के दिन ही गैर मर्द के साथ संबंध बना रही थी जो कि यह पूरी तरह से अपने पति के प्रति समर्पण नहीं बल्कि, छिनर पन था क्योंकि शादी वाले दिन ही वह मजा ले रही थी,,,, लगातार रजनी की बुर अंदर से पसीज रही थी जो की चिकनाहट का काम कर रही थी और चिकनाहट पाकर अंकित का मोटा लंड धीरे-धीरे अंदर की तरफ सरक रहा था। अंकित का हौसला बढ़ रहा था और फिर अंकित ने थोड़ा दम लगाया और इस बार उसका आधा लंड घुस गया लेकिन आधा लंड घुसने से रजनी के मुंह से हल्की सी कराने की आवाज निकल गई,,,।

आहहहहह धीरे से,,,,,,,

कोई बात नहीं रजनी बस थोड़ा सा और बाकी तुम हो बहुत खूबसूरत तुम्हारा नंगा बदन तो और भी ज्यादा खूबसूरत है देखना कल रात को जब तुम्हारा पति तुम्हारे कपड़े उतार कर नंगी करेगा तो वह तुम्हें देखता ही रह जाएगा पहली रात से ही वह तुम्हारा गुलाम बन जाएगा,,,,,,(इस तरह की बातें करके अंकित रजनी को बहला रहा था,,,, अंकित के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर दर्द में भी रजनी के चेहरे पर उत्तेजना के साथ-साथ प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे उसे अच्छा लग रहा था इस तरह से अंकित के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना इस बार अंकित ने ज्यादा देर नहीं लगाया और रजनी की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर जोरदार धक्का लगाया और उसका लंड कचकचा कर बुर के अंदरूनी गलियारे में सारी अडचनो को दूर करता हुआ एकदम से जाकर उसके बच्चेदानी से टकरा गया इस पर रजनी के मुंह से जोरदार चीख निकल गई लेकिन अच्छा हुआ की बारिश का शोर होने की वजह से उसकी आवाज कोई सुन नहीं सकता था इसीलिए तो अंकित भी निश्चिंत था लेकिन वह जानता था कि उसकी हरकत से रजनी को दर्द हो रहा है इसलिए वह एकदम से रुक गया और रजनी की नंगी चिकनी पीठ को सहलाने लगा और बोला,,,,।

बस बस हो गया रजनी चिंता मत करो पूरा घुस गया है तुम तो कमाल की लड़की हो,,,,।

आहहहहह मुस्कुराने जाना है जल्दी से इसे निकालो,,, तुम तो मेरी फाड़ डालें मैं अपने पति को क्या मुंह दिखाऊंगी अगर वह मेरी फटी हुई बुर देखेगा तो,,,,,आहहहहहह मुझसे रहा नहीं जा रहा है जल्दी से निकालो इसे,,,।

अरे कुछ भी नहीं हुआ है चिंता मत करो तुम्हारी बुर सलामत है एकदम मखमल की तरह,,,, कुछ भी नहीं हुआ है अभी यह दर्द खत्म हो जाएगा रुको,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित दोनों हाथों को आगे की तरफ ले आया और रजनी के दोनों अमरुद को पकड़ कर दबाते हुए उसकी पीठ पर चुंबनों की बारिश करने लगा अंकित औरत को संभालना अच्छी तरह से जानता था वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अगर इस बार वह रजनी की बुर से अपने लंड को बाहर निकाल दिया तो रजनी उसे दोबारा कभी डालने नहीं देगी,,,,,, इसलिए जल्दबाजी से नहीं बल्कि अंकित समझदारी से काम लेना चाहता था लगातार रजनी के मुंह से दर्द से करने की आवाज निकल रही थी लेकिन इस बीच अंकित उसके दर्द को कम करने की कोशिश करते हुए उसकी चूचियों को हल्के हल्के दबा रहा था मसल रहा था और पीठ पर चुंबनों की बारिश किए हुए था। अब वह रजनी के बुर में घुसे हुए अपने लंड में किसी प्रकार की हरकत नहीं कर रहा था,,,, धीरे-धीरे अंकित की मेहनत रंग लाने लगी और रजनी के मुंह से आ रही दर्द से कराहने की आवाज कम होने लगी। मौका देखकर अंकित अपने लंड को धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया वह रजनी को चोदना शुरू कर दिया था देखते ही देखते रजनी का दर्द पूरी तरह से गायब हो गया और उसके मुख से गरमा गरम शिकारी की आवाज फूटने लगी जिसे वह खुद दबाने की कोशिश नहीं कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि यहां पर उसकी मदहोशी भरी आवाज को सुनने वाला कोई नहीं था,,,, देखते ही देखते अंकित के धक्के तेज होने लगे हर धक्के के साथ रजनी के मुंह से मदहोश कर देने वाली आवाज निकल रही थी जिसे सुनकर अंकित का जोश बढ़ता जा रहा था अंकीत लगातार उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर लगाम की तरह कस रहा था और पीछे से उसे पेल रहा था,,,, रजनी भी हैरान थी क्योंकि इतना मोटा तगड़ा लंबा लंड बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,,,।

अब कैसा लग रहा है रजनी,,,?

पूछो मत बहुत अच्छा लग रहा है मैं तो डर रही थी कि आज तो मेरी फाड़ ही डालोगी फिर मैं अपने पति को क्या मुंह दिखाऊंगी।

तुम खामखा डर रही थी देखो वैसा कुछ भी नहीं हुआ है तुम जैसी मुझे दी हो वैसे ही एकदम मक्खन की तरह अब देखो कितने आराम से तुम मेरे मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में ले रही हो,,, (अंकित रजनी की कमर में अपनी कमर को हिलता हुआ बोला)

सहहहह आहहहहह,,,,,,,,,ऊमममममममम,,,,,, कुछ ज्यादा ही मोटा है तुम्हारा।

तभी तो तुम इतना मजा आ रहा है सच कहूं तो मर्द के पास इतना मोटा और लंबा लंड हो तो औरत गुलाम बन जाती है,,,,, तभी तो मुझे भी मजा आ रहा है तुम्हें चोदने में,,,, तुम्हारी शादी तो मेरे साथ होनी चाहिए थी दिन रात तुम्हें मजा देता,,,,,।
(अंकित किस बात पर रजनी कुछ बोल नहीं पाई बस मजा लेती रही वाकई में उसे बहुत मजा मिल रहा था अंकित का मोटा तगड़ा लंड रगड़ रगड़ कर अंदर बाहर हो रहा था,,,,, अंकित जोर-जोर से अपनी कमर हिला रहा था,,, हर धक्के के साथ रजनी पस्त हो जा रही थी अगर वह उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़े ना होता तो रजनी उसके एक धक्के को भी सहने लायक नहीं थी,,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से खड़े-खड़े ही उसकी चुदाई करता रहा लेकिन अब आसन बदलना चाहता था,,, इसलिए वह धीरे से रजनी की बुर में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया,,,,, रजनी को इतना मजा आ रहा था कि अंकित की हरकत पर वह थोड़ा सा अंदर ही अंदर गुस्सा होने लगी क्योंकि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह बाहर क्यों निकाल दिया लेकिन अगले ही पल जब वह देखी कि वह अंदर बिछी हुई घास में पीठ के बल लेट गया था और अपने लंड को हिला रहा था तो उसके इशारे को वह समझ गई थी,,,।

लेकिन इस क्रिया को करने में वह शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी वह कुछ देर तक इसी तरह से खड़ी रही तो अंकित खुद हाथ आगे बढ़ाकर उसका हाथ थाम लिया और उसे अपनी तरफ खींचने लगा,,,, रजनी भी जानती थी कि अब शर्म करने से कोई फायदा नहीं है इसलिए वह भी व्यवस्थित जगह बनाकर अंकित के लंड के ऊपर अपनी गुलाबी बर को रखकर अपनी गांड का दबाव उसे पर बनाने लगी और देखते ही देखते अंकित का मोटा तगड़ा है उसकी बुर की गहराई में खो गया और अंकित उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर नीचे से धक्का लगने लगा इसके जवाब में रजनी जोर-जोर से अपनी गांड को उसके लंड पर पटकना शुरू कर दी दोनों आनंदित हो उठे दोनों को बहुत मजा आ रहा था। रजनी संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में इस क्रिया को करते हुए एकदम छिनार लग रही थी,,,, अंकित को ऐसी ही लड़कियां ज्यादा पसंद करती लेकिन इस बात से वह इनकार नहीं कर पा रहा था कि सुमन से ज्यादा मजा रजनी दे रही थी,,,,,, धीरे-धीरे बारिश का जोर काटने लगा था और झोपड़ी के अंदर अंकित और रजनी अपने चरम सुख की तरफ बढ़ते चले जा रहे थे जब ऐसा लगने लगा कि आप अंकित का पानी निकल जाएगा वह धीरे से रजनी की जगह को पड़कर उसे एकदम से रोक दिया और अपने लंड को बाहर की तरफ खींचकर सुखी घास में उसे पीठ के बल लेटा दिया,,,, उसकी दोनों टांगों को खोलकर वह एकदम से उसके ऊपर छा गया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा बिल्कुल इस तरह जैसा कि रजनी ने कमरे के अंदर अपनी भाभी को अंकित के साथ देखी थी रजनी मदहोश में जा रही थी मस्त हो जा रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था और देखते ही देखते दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर झड़ना शुरू कर दिए,,,,।

रजनी एकदम मस्त हो चुकी थी सुहागरात से पहले वह सुहागरात के टेस्ट में पास हो चुकी थी। बारिश का जोर घटने लगा था वासना का तूफान शांत होने लगा था और वह दोनों अपने-अपने कपड़े पहनने लगे थे,,,,, बारिश पूरी तरह से शांत नहीं हुई थी झिलमिल झिलमिल बरस रही थी लेकिन उनकी जानता था कि अब उसे निकलना पड़ेगा इसलिए वह रजनी से बोला।

अब हमें चलना चाहिए काफी देर हो गई है,,,।

तुम ठीक कह रहे हो लेकिन जो कुछ भी यहां हुआ इस बारे में किसी को मत बताना वरना मैं बदनाम हो जाऊंगी,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं भी एक टीचर का लड़का हूं अगर इस तरह की बातें समझ में फैलने लगी तो मैं भी तो बदनाम हो जाऊंगा इसलिए तुम फिकर मत करो यह राज राज ही रहेगा,,,,।
(दोनों मोटरसाइकिल पर बैठकर घर की तरफ निकल गए थे लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे थे आगे बारिश का जोर एकदम कम था जितनी बारिश उन दोनों जहां रुके थे वहां हो रही थी इतनी बारिश यहां बिल्कुल भी नहीं थी यह देखकर अंकित और रजनी दोनों राहत के साथ लेने लगे क्योंकि शादी का माहौल है ऐसे में इतनी तेज बारिश मुसीबत खड़ा कर सकती थी थोड़ी देर में दोनों घर पर पहुंच चुके थे यहां पर भी बारिश हुई थी लेकिन हल्की-फुल्की कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आई थी इसके बाद मोटरसाइकिल रखकर अंकित अपने घर पर चला गया और शाम को सही समय पर अपनी मां के साथ शादी में हाजिर हो गया जैसा उसकी मां चाह रही थी वैसा ही हुआ वाकई में सभी क्या आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी सुगंधा अंकित का तो काम हो चुका था शर्मा जी के घर की बहू और उसकी बेटी दोनों की जमकर चुदाई कर चुका था दोनों की जवानी का मजा चक चुका था इस शादी का सबसे बड़ा फायदा इस को हुआ था इसके बाद बरात आने से लेकर के बारात की विदाई तक अंकित वहीं रुक रहा और सभी रस्मों में वह बराबर का मदद करता रहा,,,,,।

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