अंकित का यह कहना कि उसे समय उसने ठीक से देखा नहीं था यह बात सुगंधा के तन बदल मदहोशी का रस घोल रही थी,,,,उसे साफ एहसास हो रहा था कि उसका बेटा कितना झूठ बोल रहा था अगर उसे बर के आकार के बारे में भूगोल के बारे में पता ना होता तो वह परखनली को सीधे-सीधे उसकी बुर की गुलाबी छेद पर कैसे रख पाता जहां से पेशाब निकलती है,,, लेकिन फिर भीअपने बेटे का यह झूठ उसे अच्छा लग रहा था क्योंकि इससे नए सिरे से शुरुआत करने का मौका जो मिल रहा था,,,एक बार फिर से दोनों के बीच खामोशी छा चुकी थी आधी रात का समय गुजर चुका था और दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि जिस तरह के हालात दोनों के बीच पैदा हो रहे थे उसे देखते हुए दोनों को इस बात का अंदाज़ हो रहा था कि आगे चलकर दोनों के बीच कुछ ना कुछ होने वाला है इसलिए दोनों एक दूसरे की बातों में मग्न होकर मदहोश हुए जा रहे थे।
अंकित अपने आप को दुनिया का सबसे भाग्यशाली बेटा समझ रहा था क्योंकि उसके साथ उसकी मां एकदम गंदे शब्दों में बात कर रही थी गंदी बातें कर रही थी ऐसी बातें जो लड़के लड़के आपस में किया करते हैं,,,, इस तरह की बातें अक्सर अंकित के दोस्त आपस में किया करते थे जिसका हिस्सा खुद अंकित होता था उसे दिन सब बातों में मजा आता था शुरू-शुरू मेंजब कोई उसे मां की गाली देता था या उसकी मां के बारे में कोई अप शब्द कहता था तो उसे बहुत बुरा लगता था और अंकित तुरंतउससे मारपीट कर लेता था क्योंकि वह अपनी मां के बारे में कभी भी इस तरह के गंदे शब्दों को सुनने के लिए तैयार नहीं था लेकिन धीरे-धीरे दोस्तों की संगत में खास करके राहुल की संगत में वहबिगड़ने लगा था उसे इस तरह की बातें अच्छी लगने लगी थी और जिस तरह का माहौल घर में बनता जा रहा था उसे देखते हुए वाहन धीरे-धीरे बिगड़ने लगा था औरतों की तरफ आकर्षित होने लगा थाखास करके अपनी मां के तरफ उसका आकर्षण कुछ ज्यादा ही बढ़ता जा रहा था भले ही वह उसकी सगी मां की लेकिनजिस तरह से अंकित का नजरिया बदलने लगा था उसमें उसे अपनी मन नहीं बल्कि एक खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरत नजर आती थी जिसे पाने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार था । इसीलिए तोआधी रात का समय हो चुका था लेकिन फिर भी उसकी आंख में नींद तक नहीं थी वह जाग रहा था अपनी मां का साथ दे रहा था उसकी बातों का जवाब दे रहा था और जवाब भी और सवाल भी पूरी तरह से अश्लीलजिसका जवाब देने में भी अंकित को मजा रहा था और खुद उसकी मां को ऐसे सवाल पूछने में मजा आ रहा था,,,
सुगंधा की बुर पूरी तरह से पनिया चुकी ऐसे ऐसे सवाल उसके जेहन में गूंज रहे थे जिसे पूछते हुए उसकी बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी सवालों का सिलसिला काम नहीं हो रहा था और अपने बेटे का जवाब सुनकर वह मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रही थी,,, उम्र के इस दौड़ में उसकी पूरी इतना पानी छोड़ रही थी इतना तो वह जवानीके दौर में भी पानी नहीं छोड़ी थी इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था और इसीलिए तो वह आश्चर्यचकित थी,,, अपने स्कूल में ही वह वह अपने ही साथी शिक्षक के मुंह से सुन चुकी थी जो कि वह लोग आपस में बात कर रहे थे सुगंधा वहां मौजूद नहीं थी और वहकमरे से गुजर रही थी तो अंदर से बहुत टहाको की आवाज आ रही थी जिसे सुनकर वह रुक गई थी,,, और कान लगाकर सुनने की कोशिश कर रही थी तो जो बातें उसने सुनी उसे सुनकर वह एकदम से सन्न रह गई थी,,,क्योंकि अंदर से आवाज आ रही थी कि 40 की उम्र में औरत इतनी जवानी से भर जाती है कि रात भर उसकी बुर में लंड डालकर चोदते रहो फिर भी उसकी प्यास बुझने वाली नहीं रहती तभी तो40 की उम्र में अपने पति से उसे वह सुख नहीं मिल पाता इसलिए वह जवान लड़कों को पसंद करती है और उनके जवान लंड को अपनी बुर में लेकर अपना पानी निकालती है उसके इस बात से बाकी के लोग भी सहमत नजर आ रहे थे और जोर-जोर से हंस रहे थे,,, और हैरानी की बात यह थी की सुगंधा ऐसे शख्स के मुंह से ही सब बातों को सुन रही थी जिसे वह चरित्र का धनी समझते थे लेकिन उसे दिन से वह इंसान सुगंधा की नजर से एकदम से उतर गया था और वह उससे दूरी बनाने लग गई थी।
पहले सुगंधा उसे इंसान को बहुत अच्छा इंसान समझने की चरित्र का धनी समझती थी क्योंकि अक्सर वह सुगंधा के साथ सभ्यता से पेश आता था इसलिए उसके सानिध्य में उसके साथ रहकर सुगंधा को कभी भी असहज महसूस नहीं हुआ था लेकिन उसे दिन अनजाने में ही उसका सारा भरम टूट चुका था क्योंकि औरतों की बढ़ती उम्र के साथ उनकी कामवासना बढ़ जाती है इस बात को तो वह सुनकर हैरानी थी लेकिन आगे की जो बात उसने अपने कानों से सुनी,,, उसे सुनकर तोउसे ऐसा लग रहा था कि इसी समय जमीन फट जाए और वह जमीन के अंदर समा जाए क्योंकि वह जो कुछ भी सुनी थी वह अपने बारे में सुनी थी और उसी इंसान से सुनी थी जिसे वह एकदम सभ्य इंसान समझती थी,,, एक तो वह उम्र में भी उससे बड़ा था इस तरह से वह उसे मन में अपने बड़े भाई का दर्जा देती पर उसके मुंह से अपने लिए गंदी बात सुनकर उसके होश उड़ गए थे वह कह रहा था कि अपने पूरे स्टाफ में सबसे ज्यादा खूबसूरत और जवानी से भरी हुई सुगंधा है,,,, उसकी गदराई गांड देख कर तो मेरा लंड हमेशा खड़ा हो जाता है,,,जैसे ही यह शब्द सुगंधा के कान में पड़े थे उसे तो ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई पिघलता हुआ शीशा उसके कानों में डाल रहा हो उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था,, वह दरवाजा खोलकर रूम में घुस जाना चाहती थी और दो चार थप्पड़ उसके गाल पर लगा देना चाहती थी,,,,
लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हुई लेकिन फिर उसे सभ्य इंसान का साथ देते हुए दूसरा बोल पड़ा,,,।
तुम सही कह रहे हो मेरी भी यही हालत होती है मैंने तो न जाने कितनी बार उसके बारे में कल्पना करके मुठ भी मारा है,,,,।
मैं हमेशा सही कहता हूं कसम से बहुत किस्मत वालों को ऐसी औरत चोदने को मिलती हैलेकिन शायद उसके पति के किस्मत में भी ज्यादा दिन तक उसकी बुर चोदने के लिए नहीं लिखा था,,,,अगर मुझे मौका मिल जाए तो मैं तो रात भर उसकी बुर में लंड डालकर पड़ा रहुं,,,,उफफफ,,, एेसी बेलगाम घोड़ी को चोदने में कितना मजा आएगा,,,,, इससे ज्यादा सुगंधा सुन नहीं सकी,,, और भारी मन से वह आगे कदम बढ़ा दीदिन भर उसका मन स्कूल में नहीं लग रहा था घर पर आकर भर रोने लगी उसे यकीन नहीं हो रहा है इतना अच्छा इंसान समझती थी वही उसके बारे में इतनी गंदी धारणा रखता है,,,, इस बात से वह काफी परेशान हो गई थी और तकरीबनइस सब में से निकलने के लिए उसे 15 20 दिन जैसे लग गए थे,,, लेकिन यह सब की बात थी जब वह पूरी तरह से मर्यादा से बंधी हुई थी,,, संस्कारी थी उसके मन में गलत भावना ने कदम नहीं रखा था। लेकिन इस समय उसे बात को याद करके उसे उस इंसान की बातें सच लगने लगी थी,,,अपनी हालत पर गौर करके उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि वाकई में वह कितनी जवानी से भरी हुई हैकुछ इस तरह का उसके भजन में मदहोशी जा रही है उसे देखते हुए उसे पूरा यकीन था कि अगर उसकी बुर में मोटा सा बड़ा लंड रात भर उसकी चुदाई करें तो वह रात भर चुदवाती रहे,,,
जिस बात को लेकर वह काफी दिन तक परेशान थी आज इस बात को याद करके उसे अपने आप पर गर्व महसुस होता था,,,उसे अब अच्छा लगता था कि लोग उसे प्यासी नजर से देखते हैं गंदी नजर से देखते हैं उसके साथ रात भर कुछ भी करने को तैयार रहते हैं और उसके बारे में कल्पना करके अपने हाथ से हिला कर काम चलाते हैं,,, इस उम्र में भी मर्द उसकी तरफ आकर्षित होते हैं जवान लड़के उसकी तरफ आकर्षित होते हैं यह सब उसके लिए गर्व महसूस करने वाली बात थी,,,,,, सुगंधा को आज की रात बेहद रोमांचक लग रही थी क्योंकि आज दोनों के बीच में एकदम अश्लील और खुले शब्दों में बात हो रही थीसुगंधा इससे पहले बुर लंड गांड जैसे शब्दों का प्रयोग खुले तौर पर नहीं की थी और ना ही इस तरह का शब्दों का प्रयोग करके कभी अपनी सहेलियों से बातें करती थी लेकिन आज अपने बेटे के साथ इस तरह की बातें करके उसकी बुर पनडुब्बी बन चुकी थी।
दोनों के बीच की खामोशी को सुगंधा खुद तोड़ते हुए बोली।
हो सकता है तो सही कह रहा हैलेकिन किसी मर्द को खास करके तेरे जैसे जवान लड़के को ऐसा मौका मिलेगा तो वह अंगों को देखने के लालच को रोक नहीं पाएगा क्योंकि तू अच्छी तरह से जानता है कि एक जवान होते लड़के के लिए औरत का नंगा बदन कितना मायने रखता है और खास करके उसे देखने के लिए तो वह हमेशा तड़पता रहता है,,,,
हो सकता है तुम सच कह रही हो लेकिन उस समय के हालात कुछ और थे,,, मेरे लिए तुम्हारा स्वास्थ्य ही सर्वोपरि था और जिस तरह के हालात थे तुम शायद ठीक तरह से परिचित नहीं थी कि तुम्हें होश तक नहीं था मुझे तो डर लग रहा था कि कहीं कुछ गंभीर बीमारी तो नहीं हो रही हैइसलिए मैं घबराया हुआ था और आनन फानन में बाथरूम में जाना पड़ा था क्योंकि तुम्हें तो खड़े होने का होश नहीं था तो तुम कैसे यूरिन का सेंपल दे पाती,,,,,, सब कुछ इतनी जल्दी-जल्दी हुआ था कि मैं कुछ भी ठीक से देखा नहीं पाया था इसलिए मैं सच कह रहा हूं कि नाम सुना हूं लेकिन देख नहीं पाया हूं,,,,।
तेरी बातों से तो लग रहा है कि देखने की इच्छा कुछ ज्यादा ही है तेरे मन में,,,।
नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है मैं तो बस ऐसे ही कह रहा था तुम पूछ रही थी तो मैं बता रहा हूं,,,,(ऐसा कहते हुए भी अंकित के मन में चल रहा था की खास उसकी मां उसके मन की बात जान जाती और इस समय अपनी साड़ी उठाकर अपनी बुर के दर्शन करा देती तो मजा आ जाता,,,,, सुगंधा अपने बेटे की बात सुनकर बोली)
कोई बात नहीं मैं अच्छी तरह से जानती हूं तेरी उम्र के लड़कों की चाहत यही होती है औरतों के अंगों को देखना,,,,
लेकिन मैं दूसरों की तरह नहीं हूं,,,,
वह तो मैं जानती हूं वरना तु कह ना देता कि अभी मुझे दिखा दो,,,,,,,(ऐसा कहकर वह अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी,,,बार-बार उसकी नजर अपने बेटे के पेंट में बने तंबू पर चली जा रही थी और उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसके बेटे की क्या हालत हो रही होगी। उसे पूरा यकीन था क्या करें समय को अपने बेटे को बोल दे की चल सब कुछ भूल जा कि तेरे सामने कौन है,,, तु यह भी भुल जा की तेरे सामने तेरी मां है,,, इतना कहकर अगर टांगे खोल दु तो निश्चित तौर पर वह बिना कुछ सोचे समझे अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर देगा,,,, और ऐसा सोचकर वह गहरी सांस लेने लगी,,,, फिर कुछ देर तक सोचने के बाद वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)
अच्छा आगे उस बेटे ने क्या किया अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखकर,,,,
उसके आगे कहां पढ पाया था,,, पढ़ा होता तो ना पता चलता कि उसके आगे उसने क्या किया,,,,।
अच्छा चल तू ही बता कि उसके आगे उसने क्या किया होगा,,,,।
ऊममममम,(कुछ देर सोचने के बाद,,,,अपनी मां का यह सवाल सुनकर उसके मन में भी बहुत कुछ चलने लगा था यहां पर उसे अच्छी तरह से मौका मिल चुका था अपने मन की बात बताने के लिए एक बेटे के मन में अपनी मां को उसे अवस्था में देखकर कैसे-कैसे विचार आते हैं उसे विचार को अपनी मां के सामने रखने के लिए और इसी के जरिए उसके मन में भी क्या चल रहा है यह बताने के लिए इससे अच्छा मौका नहीं था इसलिए वह बोला,,,) मेरे ख्याल से तो जिस तरह की अवस्था बनी हुई थी जिस तरह से वह लड़का अपनी मां को पेशाब करते हुए देखकर उत्तेजित हो गया था उसे देखते हुए वह लड़का भी बाथरुम में प्रवेश कर गया होगा,,,,।
अगर ऐसा हुआ होगा तब उसकी मां उसे बाथरूम में देखकर क्या कही होगी क्या सोच रही होगी अपने बेटे की हरकत पर यह भी बता,,,,,।
कर क्या रही होगी लड़का तो पहले से ही अपनी मां को उसे अवस्था में देखकर मस्त हो गया थाऔर उसके मन में अपनी मां के साथ कुछ गलत करने का विचार भी आ रहा था जिसके चलते वह अपने आप को रोक नहीं पाया होगा और बाथरूम में चला गया होगा और पीछे से शायद वह भी अपनी मां की तरह ही बैठकर अपने लंड को,,,,(अंकित इस बार बेझिझक लंड शब्द का प्रयोग कर दिया था जिसे सुनकर सुगंधा की भी हालत खराब हो गई थी,,,) बाहर निकाल कर अपनी मां की गांड से सटा दिया होगा,,,,.
(अंकित किस तरह की बातें सुगंधा के तन बदन में आग लग रही थी खास करके उसके गुलाबी छेड़ दे मैं तो जवानी के रस का उबाल आ रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कह क्या करेंवैसे तो यहां पर उसे ऐसा ही लग रहा था कि कुछ कहने की जरूरत नहीं थी बल्कि कुछ करने की जरूरत थी लेकिन फिर भी अपने आप को स्वस्थ करके अपने बेटे का जवाब देते हुए बोली)
इसके बाद उसकी मां क्या की होगी इसका कुछ अंदाजा है,,,,।
( अब अपनी मां के ईस सवाल पर वहअपनी मां का राय जानना चाहता था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह इसका बेहद सीधा-साधा जवाब देते हुए बोला।)
करना क्याअपने बेटे की हरकत पर वह गुस्सा आ गई होगी और अपने बेटे के गाल पर दो-चार थप्पड़ रसीद कर दी होगी,,,,,।
(अपने बेटे की बात पर सुगंधा मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए अपनी राय रखते हुए बोली,,,)
ऐसा भी हो सकता है कि उसकी मां अपने बेटे की हरकत से एकदम से घबरा गई होगी लेकिन अपने बेटे की हरकत से मस्त भी हो गई होगी,,,।
ऐसा क्यों उसे तो गुस्सा आना चाहिए ना,,,!
यह तो हालात पर निर्भर रखता है,,,,जरा दिमाग लगाकर सो ऐसा भी तो हो सकता है कि घर में केवल मां बेटे ही रहते हो,,,(सुगंधा अपनी बातों में अपने मन की मंशा बता रही थीवह अपने बेटे को जताना चाहती थी की मां बेटे के बीच कितना कुछ हो सकता है एकांत पाकर एक दूसरे की जरूरत को देखते हुए,,) हो सकता है कि उसकी मां का केवल वही सहारा हो,,,, और बरसों से उसी हालात में अपना जीवन गुजार रही हो,,,, और अपने बेटे की इस तरह की हरकत से उसके मन में बरसों से दबी हुई चाहत एकदम से जाग रही हो एक पुरुष संसर्ग के लिए वह तड़प रही हो,,,, उसके बेटे ने अपनी कामुक हरकत से उसके बदन में उत्तेजना का संचार भर दिया होजिसे देखते हुए अपने बेटे की हरकत से वह एकदम से मदहोश हो गई हो और कुछ भी कर सकते की स्थिति में बिल्कुल भी ना हो और अपने बेटे की हरकत पर आनंद लेने लगी हो,,,,
(अंकित अपनी मां की बात सुनकर अच्छी तरह से समझ रहा था कि वह उसे औरत के बारे में नहीं बल्कि अपने बारे में नहीं बता ही है और उसकी इस तरह की बातें सुऐसानकर अंकित के तन-बदन में उत्तेजना कि लहर रूठ रही थी उसे भी आशा की किरण नजर आ रही थी,,,,मन ही मन में अपनी मां की बात सुनकर प्रसन्न नजर आ रहा था लेकिन फिर भी अपनी मां की इस बात पर जान बुझ कर ऐतराज जताते हुए बोला,,,,)
ऐसा कैसे हो सकता है मम्मीअपने बेटे की हरकत पर से एक मां होने की ना तो उसे गुस्सा आ जाना चाहिए क्योंकि एक मां कभी नहीं जाएगी कि उसका बेटा उसके साथ इस तरह की हरकत करें,,,(ऐसा सवाल ापूछ कर अंकित अपनी मां के मन में क्या चल रहा है यह जानने की कोशिश कर रहा था वह इसलिए पूछ रहा था कि अगर कभी वह उत्तेजित अवस्था में इस तरह की हरकत कर दे तो उसकी मां कैसा बर्ताव करेंगे उसके साथ और अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली,,,)
मैं वही तो तुझे बता रही हूं अगर वह बरसों से अकेली रह रही होगी तो अपने बेटे की इस तरह की हरकत से वह मस्त हो जाएगी मदहोश हो जाएगी उसकी आंखों में नशा छाने लगेगा और वह उसे समय वही करेगी जो एकांत पाकर एक मर्द और औरत करते हैं,,,,
लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है वह दोनों तो मां बेटे हैं ना,,,,।
तो समझने की कोशिश नहीं कर रहा है भले ही वह मां बेटे हैं लेकिन हालात ऐसे हो जाते हैं किमां बेटे होते हुए भी दोनों को अपने बीच के रिश्ते को भूलना पड़ता है और अपने बदन की प्यास अपने बदन की जरूरत को पूरा करने के लिए मां बेटे की जगह मर्द और औरत बनना पड़ता है।
बाप रे क्या ऐसा भी हो सकता है,,,,(जानबूझकर अपनी मां की बात सुनकर हैरान होने का नाटक करते हुए अंकित बोला,,)
अरे घर की चार दिवारी के अंदर क्या-क्या होता है कहां किसी को पता चलने वाला है,,,,।
बात तो तुम ठीक कह रही होचार बीमारी के अंदर मां बेटे के बीच क्या खिचड़ी पक रही है कहां किसी को पता चलेगा और अगर सच में इस तरह का रिश्ता दोनों के बीच बन जाता है तो बेटा तो यह किसी को बताएगा नहीं और ना ही मा ही किसी को बताएगी क्योंकि इसमें दोनों के इज्जत जाने का डर बना हुआ है और ऐसे में मां बेटे के बीच यह राज राज ही रह जाता है,,,,,,(अंकित भी नहले पर दहला फेंकते हुए बोला,,,,सुगंधा अपने बेटे का जवाब सुनकर मुस्कुरा रहे थे इतना तो उसे भी एहसास हो रहा था कि उसकी तरह ही उसके बेटे के भी मन में उसे पाने की तरफ बढ़ती जा रही है लेकिन पहल नहीं कर पा रहा है फिर कुछ देर खामोश रहने के बाद वह एकदम से पूछ बैठी)
अच्छा यह बात उसे लड़के की तरह तेरे मन में भी मुझे देखकर इसी तरह की भावनाए जागती है क्या,,,,क्या तू भी मुझे पेशाब करते हुए देखा है और देखा है तो क्या तो भी उसकी तरह मुझे गंदी नजर से देखता है,,,(इस सवाल को पूछते हुए सुगंधा की बुर से पानी टपक रहा था,,,,, अपनी मां के सवाल पर अंकित भी थोड़ा सा चौक गया फिर अपने आप को एकदम सहज करते हुए बोला,,)
यह कैसी बातें करें मम्मी भला मैं तुम्हें गंदी नजर से कैसे देख सकता हूं और वैसे भी मैं तुम्हें कभी उस लड़के की तरह पेशाब करते हुए थोड़ी ना देखा हुं,,,,
क्या तू सच कह रहा है क्या सच में तूने मुझे कभी भी पेशाब करते हुए नहीं देखा है,,,।
नहीं बिल्कुल भी नहीं और नहीं कभी मेरे मन में इस तरह के ख्याल आते हैं,,,, मैं उस लड़के की तरह थोड़ी ना हूं,,,,।
(सुगंधा अपने बेटे का जवाब सुनकर उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा सरासर झूठ बोल रहा था उसे न जाने कितनी बार पेशाब करते हुए चोरी चुपके देख चुका है यहां तक की उसके करीब खड़ा रहकर भी उसे पेशाब करते हुए देख चुका है,,,,,लेकिन फिर भी सुगंधा खामोश थी वह कुछ ज्यादा बोलना नहीं चाहती थी,,,, रात काफी हो चुकी थी लेकिन अभी भी सुगंध के मन में बहुत कुछ चल रहा था वह देखना चाहती थी इस समय उसका बेटा क्या करता है,,,, इसलिए वह अपने हाथ को ऊपर ले जाकर आलस को मरोड़ते हुए बोली,,,,)
रात काफी हो चुकी है अब हमें सोना चाहिए,,,,,।
तुम ठीक कह रही हो मम्मी,,,,ज्यादा रात हो चुकी है देख रही है चारों तरफ सन्नाटा छा गया है हम दोनों को बात करते-करते लगभग 3 घंटे तो हो चुके हैं,,,,।
सही कह रहा है तू चल अब सो जा सुबह जल्दी भी तो उठना है,,,,,,(ऐसा कहकर वह पहले ही चटाई पर लेट गईअंकित का मन नहीं था लेकिन फिर भी उसे लेटना जरूरी था अपनी मां की बात मानते हुए और वह भी लेट गया सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे को अब नींद आने वाली नहीं है,,,, इसलिए वह जाग रही थी तकरीबन आधा घंटा गुजरने के बाद वह धीरे से उठकर बैठ गई और अपने बेटे की तरफ देखें तो वह जल्दी से अपनी आंखों को बंद कर लिया वह जाग रहा था इस बात का एहसास सुगंध को अच्छी तरह से था और वह चाहती भी थी उसका बेटा जागते रहे,,,, सुगंधा को बड़े जोरों से पेशाब लगी हुई थी और वह पेशाब को बड़े देर से रोक कर रखी थी इसी समय के लिए,,,,वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई चूड़ियों के खनकने की आवाज से वातावरण मदहोश होने लगा था,,,,, वह इस बात से अपने बेटे कोनिश्चित कर लेना चाहती थी कि वह सो रहा है इसलिए वह धीरे से छत के कोने की तरफ जाने लगी जैसे-जैसे कदमों की आवाज दूर जा रही थी वैसे-वैसेअंकित धीरे-धीरे अपनी आंखों को खोल रहा था और अपनी मां को देख रहा था उसकी मां उसे चांदनी रात में एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,, और से तेरा यकीन ताकि उसकी मां पेशाब करने जा रही है उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई है और इसलिए अंकित का दील जोरों से धड़कने लगा था।
अंकित एकदम चौकन्ना था वह अपनी मां का एक बार फिर से वही रूप देखना चाहता था उसे पेशाब करते हुए देखना चाहता था ऐसा नहीं था कि आज वह पहली बार अपनी मां को पेशाब करते हुए देखने जा रहा था वह कई बार अपनी मां को ईस अवस्था में देख चुका था और इसी के चलते वह पूरी तरह से बदल भी चुका था,,,,)
आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था,,, लेकिन मां बेटे दोनों की आंखों में नींद कोसों दूर नजर आ रही थी,,, दोनों बस जानबूझकर एक दूसरे को नींद में होने का बहाना बनाकर उलझा रहे थेसुगंधा अच्छी तरह से जानते थे कि जिस तरह की वार्तालाप मां बेटे के बीच हुई थी जिस तरह से उसका बेटा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसे देखते हुए उसे नींद आने वाली नहीं है और इसी का फायदा उठाकर वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो चुकी थी,,,उसे काफी जोर से पेशाब भी लगी हुई थी और बड़े देर से लगी हुई थी लेकिन शायद इसी समय के लिए वह अपने पेशाब को रोक कर रखी हुई थी ताकि सही समय पर इसका सही उपयोग कर सके,,,, अपनी युक्ति को आजमाने में भी उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था इस तरह से वहां कई बार अपने मन मेंउठ रही युक्ति को अपने बेटे पर आजमा चुकी थी और उसका असर भी वह अच्छी तरह से देख चुकी थी।
अंकित लेटा हुआ था,,, अंकित को लग रहा था कि उसकी मां को ऐसा लग रहा है कि वह सो रहा है और सिर्फ वह सोने का नाटक कर रहा था जबकि उसकी मां को अच्छी तरह से मालूम था कि उसका बेटा जाग रहा है बस वह सोने का नाटक कर रहा है,,,, और वैसे भी जिस तरह की हरकत वह करने जा रही थी ऐसे में अंकित का जागते रहना बेहद जरूरी है क्योंकि उसे मूड में होने से वह अपनी हरकत को अंजाम नहीं दे सकती थी,,,वैसे तो उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी और उसका पेशाब करना भी बेहद जरूरी था अगर अंकित गहरी नींद में सो रहा होता तो भीसहज रूप से उसका पेशाब करना जरूरी था लेकिन तब कोई मायने नहीं रह जाता सिर्फ उसे राहत महसूस होती ,उत्तेजना नहीं ,मदहोशी नहीं,,,, और एक मां के लिए कितनी शर्मसार कर देने वाली बात होती है जब वह वासना में युक्त होकर अपने बेटे के सामने इस तरह की हरकत करती है जिससे उसका खूबसूरत अंग नग्न अवस्था में उसके बेटे को देखने को मिल जाएएक अजीब सी हलचल उसके मन में होती है और इस समय वही हलचल वही शर्मसार कर देने वाला असर सुगंधा के तन बदन में महसूस हो रहा था,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा थाशांत वातावरण में उसके चूड़ियों की खनक और पायल की झनक वातावरण में एक मादकता सा भर दे रहे थे,,,अपनी मां की चूड़ियों की खनखन की आवाज अंकित के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रहा था और वह इस आवाज को सुनकर मदहोश हुआ जा रहा था उसकी उत्तेजना चरम शिखर पर पहुंच चुकी थी।
आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा है था लेकिनवातावरण में अंधेरा नहीं था क्योंकि चांदनी रात थी चांदनी रात में सब कुछ दिखाई दे रहा था,,, वैसे तो वासना की पूर्ति के लिए लोग अंधेरी रात का ही चयन करते हैं लेकिन इस समय हालात कुछ और थे और सुगंधा अपनी वासना की पूर्ति के लिए चांदनी रात का चयन की थीऔर उसे इस बात की खुशी थी कि इस समय अंधेरा बिल्कुल भी नहीं था चांदनी रात की चांदनी भरी उजाले में उसकी हरकत उसके बेटे को अच्छी तरह से देखने को मिलेगी। इसकी भारी भरकम गोरी गोरी गांड चांदनी रात में चमकती हुई उसके बेटे को दिखाई देगी और वह अच्छी तरह से जानते थे कि इस अद्भुत नजारे को देखकर उसके बेटे के तन बदन में वासना का तूफान उठने लगेगा वह देखना चाहती थी कि इसके बाद उसका बेटा क्या करता है,,,। अपने अंदर उठ रहे वासना को तूफान को कैसे शांत करता है यही देखने के लिए वह अंदर ही अंदर तड़प रही थी,,,,।
अपनी युक्ति को आजमाने के लिए तो उसके तन-बदन मेंउत्तेजना की लहर उठ तो रही थी मदहोश हो रही थी लेकिन वह अपने आप से एक सवाल भी कर रही थी कि जब वह इतना कुछ करने को तैयार है तो क्यों नहीं एक कदम आगे बढ़ाकर खुद क्यों नहीं अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड़ लेती,,,क्यों नहीं अपने बेटे से कह देती कि बस अब रहा नहीं जाता डाल दिया अपने लंड को मेरी बुर में और बन जा मादरचोद,,,, मत डर किसी से भी ना मुझसे ना समझ सकेकोई तेरा साथ देने वाला नहीं है तुझे अपनी जरूरत को मेरे साथ ही पूरी करनी पड़ेगी मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तू भी मुझे चोदने के लिए तड़प रहा है तेरा लंड मेरी बुर में जाने के लिए मचल रहा है,,, तो आज मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को तोड़ दे गिरा दे मर्यादा की दीवार को और समा जा मेरे अंदर,,,, बुझा दे अपनी मां की जवानी की प्यास,,,, बरसों से तेरी मां बिस्तर पर तड़प रही है बरसों से तेरी मां की बुर में लंड नहीं गया,,,, मैं तेरे लिए छिनार बनने को तैयार हूं तु भी मेरे लिए मादरचोद बन जा,,,,, सुगंधा अपने मन में इस तरह की बात तो को बार-बार सोचती थीबार-बार उसके मन में इस तरह के सवाल उठाते थे कि इतना कुछ होने के बावजूद भी अपने बेटे से इतना क्यों नहीं कह पा रही है जिसे दोनों का रास्ता आसान हो जाए दोनों अपनी मंजिल तक पहुंच पाए,,,।
इस तरह का सवाल मन में बार-बारउठना देखकर वह खुद ही अपने सवालों का जवाब अपने आप को देते हुए बोलती थी कि नहीं ऐसा करना उचित नहीं है उसका बेटा उसके बारे में क्या सोचेगा कहीं ऐसा ना हो कि उसकी हरकत से उसका बेटा उसे छिनार कह दे रंडी का कर पुकारने लगेऔर वैसे भी इस तरह के हालात चल रहे हैं एक न एक दिन उसका बेटा इस तरह के शब्दों का प्रयोग करने वाला है लेकिन इस समय उसके पहल से मामला पूरी तरह से उसके पक्ष में नहीं होगा उसके बेटे को नाहक ही इस बात की शंका होने लगेगी क्योंकि जब उसकी मां अपने बेटे के सामने इतना बेशर्मी दिखा रही है तो,, बाहर न जाने कितने लोगों से चुदवाती होगी,,,, बस इसी बात का डर सुगंधा के मन में रहता था और इसीलिए वह इतना कुछ हो जाने के बावजूद भी, खुले शब्दों में अपने बेटे से कुछ कह नहीं पाती थी। और इसीलिए दिन रात तड़पती रहती थी,,,,।
धीरे-धीरे सुगंधा अपनी गांड मटकाते हुए छत के कोने तक पहुंच चुकी थी,,, इसकी भारी भरकम बड़ी-बड़ी गांड कसी हुई साड़ी पहनने की वजह से कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आती थी और वह जानबूझकर अपनी गांड मटका कर चल रही थी क्योंकि वह जानती थी तो उसका बेटा देख रहा है अंकित अपनी मां की हरकत को उसके खूबसूरत नजारे को पीठ के बल लेटकर हल्की खुली नजरों से देख रहा था,, पल पल अपनी मां की हरकत देख कर अंकित का दील जोरों से धड़का था,,। सोचने को तो अंकित भी बहुत कुछ सोच रहा था और इस समय भी अपनी मां को देखकर उसके मन में ढेर सारी भावनाएं उमड़ रही थी,,, वह भी जानता था कि उसके उसकी मां के बीच बहुत सारी बातें हो चुकी थी और ऐसी बातें जो मां बेटे के बीच संभव नहीं है ऐसी बातें केवल पति पत्नी और प्रेमी प्रेमिका के बीच ही संभव होती है,,,, और वह अपनी मां की बातों के मतलब को अच्छी तरह से समझता था। सुषमा आंटी और अपनी नानी की चुदाई करने के बाद वह औरतों का अच्छी तरह से समझने लगा थावह अपनी मां के कहने का मतलब कुछ इस तरह से समझ रहा था वह जानता था कि उसकी मां का भी हाल पड़ोस की सुषमा आंटी और उसकी नानी की तरह ही है उसकी मां को भी मोटा तगड़ा लंड चाहिए,,,,।लेकिन पहल करने से उसे भी इस बात का डर था कि उसकी मां उसके बारे में क्या सोचेगी,,,, वह भी यही सोचेगी कि उसका बेटा उसेगंदी नजर से देखा है और इसमें सच्चाई भी है और उसकी मां को पता भी है लेकिन जाहिर करने में या पहल करने में उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां उसे गलत ना समझने लगेऔर सब कुछ हालात पर उसने छोड़ दिया था कि जो कुछ भी होगा वह हालात पर निर्भर करेगा।
अंकित का दिल जोरों से धड़कने लगा था क्योंकि उसकी मां अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ ली थीऔर अंकित को इस बात का आभास हो गया था कि अब क्या होने वाला है अंकित की आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था अपनी मां को कई बार नग्न अवस्था में देखने के बावजूद भीवह इस समय भी अपनी मां को कमर से नीचे नंगी होते हुए देखने के लिए तड़प रहा था। अौर सुगंधा जो उसका बेटा देखना चाहता था उसे वही नजारा दिखाने के लिए खुद उत्सुक थी। और इसके लिए उसने अपनी कमर कस ली थी,,, अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी को पकड़कर वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी,,,और यह नजारा देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी खूबसूरत नाटक के शुरू होने के पहले पर्दा ऊपर उठ रहा हो लेकिन यहां पर इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए दर्शक के रूप में केवल उसका बेटा ही था,,,, उसे ही अपनी मां की मदमस्त जवान देखकर शोर मचाना था सिटी बजाना था उसका हौसला बढ़ाना था और यह सब कुछ करने के लिए अंकित तैयार था लेकिन फर्क इतना था की नाटक देखकर लोग जोर-जोर से तालियां बजाते हैं सीटियां बजाते हैं यहां पर अंकित को सिर्फ अपनी आंखों का सहारा लेना था अपने हाथ का सहारा लेना था जितना खूबसूरत उत्तेजक नजर उतनी अत्यधिक मादकता भरी अंकित की हरकत होनी थी,,, और इसके लिए अंकित पूरी तरह से तैयार था।
अंकित की आंखों के सामने उसकी दुनिया की सबसे खूबसूरत हसीन औरत खड़ी थीजो अपने हाथों से अपनी साड़ी पकड़कर ऊपर की तरफ उठा रही थी,,, सुगंधा धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी और देखते ही देखते उसकी खूबसूरत मांसल चिकनी पिंडलियां दिखाई देने लगी थी,,,, अंकित के होश उड़ते चले जा रहे थे अंकित अपनी आंखों को सेंक रहा था,,,,, वातावरण मेंठंडक का एहसास था लेकिन अपनी आंखों के सामने गरमा गरम दृश्य देखकर उसके माथे से पसीना टपक रहा था,,,देखते ही देखते सुगंध अपनी साड़ी को अपनी मोटी मोटी जांघों तक उठा दी थी उसकी मोटी मोटी जांघें केले के तने के समान दिखाई दे रही थी,, जिसे देख कर पेट के अंदर अंकित का लंड पूरी तरह से अकड़ने लगा था। अंकित को अब हल्का-हल्का अपने लंड में दर्द महसूस होने लगा था,,, क्योंकि जब से मां बेटे छत पर आए थे तब से अंकित का लंड खड़ा का खड़ा ही था वह बिल्कुल भी शांत होकर बैठा नहीं था। सुगंधा भी अपने बेटे को तिल तिल तडपा रही थी।और उसे ऐसा करने में बेहद आनंद की अनुभूति होती थी उसे अच्छा लगता था जब उसका बेटा उसकी नंगी जवानी देखकर तड़प उठता था।
जांघों तक अपनी साड़ी उठाकरसुगंधा यह तसल्ली कर लेना चाहती थी उसका बेटा उसे देख रहा है कि नहीं इसलिए वह हल्के से अपनी नजर पीछे घूमाकर अपने बेटे की तरफ देखने लगी चांदनी रात में सबको साथ दिखाई दे रहा थाऔर पीछे देखने के बाद उसके चेहरे पर प्रश्न आता के भाव में जलने लगे वह इस बात से खुश हो गई कि उसका बेटा उसे ही देख रहा था और अंकित अपनी मां की नजरों को देखकर तुरंत अपनी आंखों को बंद कर लिया था और अपनी आंखों को बंद किए हुए हैं वह अपने मन में सोच रहा था कि,,, उसकी मां उसकी तरफ क्यों देख रही है,,,वह तय नहीं कर पा रहा था कि उसकी मां यह देखने के लिए पीछे नजर घुमा कर देख रही है की कही वह जाग तो नहीं रहा है या फिर यह देखने के लिए की वह गहरी नींद में सो तो रहा है ना जब तो नहीं रहा है यही अंकित अब समझ नहीं पा रहा था,,, और कुछ देर तक अपनी आंखों को बंद किए रहा,,,हालांकि अंकित का दिल बड़ी जोरों से धड़कता है उसके दिल की धड़कन बड़ी रफ्तार से चल रही थी। अपनी मां की मदमस्त जवानी की गर्मी का असर उसे अपने बदन में अच्छी तरह से महसूस हो रहा था उसके माथे से पसीना टपक रहा था,,,कुछ देर खामोश रहने के बाद अपनी आंखों को बंद किए रहने के बाद वह धीरे से अपनी आंखों को खोलकर फिर से छत के कोने की तरफ देखने लगा जहां पर उसकी मां साड़ी को अभी भी जांघों तक उठाए खड़ी थी।
अंकित का दिमाग ठनक रहा था,,क्योंकि वह जानता था की औपचारिक रूप से जब कोई औरत पेशाब करने जाती है तो तुरंत अपनी साड़ी कमर तक उठकर बैठ जाती है लेकिन उसकी मां अभी भी खड़ी थी साड़ी जांघों तक उठाएं, जिसका मतलब साफ था कि उसकी मां उसे ही दिखाने के लिए यह सब पैंतरा रच रही थी लेकिन यह बात उसे समझ में नहीं आ रही थी कि उसकी मां को तो ऐसा ही लग रहा था कि बस सो रहा है फिर वह ऐसा क्यों कर रही हैफिर अपने ही सवाल का बात खुद जवाब देते हो बोला कि शायद किसी तरह से वह सोच रही है कि अंकित जाग जाए और उसे पेशाब करते हुए देख ले क्योंकि गंदी किताब में जिस तरह का वर्णन था,,, इस किताब के बारे में दोनों के बीच देर तक बातचीत हुई थी शायद किसी का असर उसके दिलों दिमाग पर छाया हुआ था,,यह सब सोचने के बाद अंकित अपने मन में सोचा कि चलो चाहे जो भी हो, उसकी मां को एहसास नहीं होना चाहिए कि वह जाग रहा है। इसलिए वह फिर से कर नजरों से अपनी मां की तरफ देखने लगा, अंकित सोने के कुछ देर पहले ही अपने बदन पर चादर डाल लिया था इसलिए वह निश्चित था,, आंखों के सामने का नजारा पूरी तरह से गर्माहट पकड़ लिया था।
सुगंधा अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी थी उसकी नंगी बड़ी-बड़ी गांड एकदम साफ दिखाई दे रही थी और अंकित के लिए हैरानी की बात यह थी कि उसकी मां साड़ी के नीचे चड्डी नहीं पहनी थी,,,, अंकित को अच्छी तरह से याद था कि दोपहर में उसकी मां चड्डी पहनी थी लेकिन पंखा साफ करने से पहले अपनी चड्डी उतार दी थी और उसके बाद उसे खूबसूरत नजारा देखने को मिला था और उसमें से टपका हुआ मदन रस का स्वाद भी चखने को मिला था,,, उसके बाद वह नहाई भी थी लेकिन यह नहीं मालूम था कि नहाने के बाद वह चड्डी पहनी थी कि नहीं लेकिनआप अपनी आंखों के सामने अपनी मां को बिना चड्डी में देखकर सबको साफ हो गया था कि नहाने के बाद भी उसकी मां चड्डी नहीं पहनी थीएक औरत का इस तरह से साड़ी के अंदर चड्डी ना पहनना मर्द के लिए वाकई में उत्तेजित कर देने वाली बात होती है। और इस समय वही हो रहा था,,,सुगंधा अपने बेटे की आंखों के सामने कमर तक साड़ी उठाएं अपनी नंगी गांड दिखाते हुए खरीदी उसे बड़े जोरों के पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह पूरा नजारा दिखा देना चाहती थी अपने बेटे को।
चांदनी रात की चांदनी में सुगंध की चमकती हुई गांड अंकित के होश उड़ा रहे थे सुगंधा भी अपने बेटे की उत्तेजना को बढ़ाने के लिए,,अपनी दोनों हथेलियां को अपनी नंगी गांड पर रख कर हकीकत कैसे ला रही थी मानो कि जैसे अपने बेटे को इशारा कर रही हो अपने पास बुलाने के लिए,,,,वैसे तो सुगंध अपने बेटे को पहल करने के लिए अपनी तरफ से सारे हथकंडे अपना चुकी थी लेकिन,, अंकित भी टस से मस नहीं हो रहा था और वह भी केवल अपनी मां के लिए ही बाकी सुमन की मां और राहुल की मां के साथ वह अपनी तरफ से आगे बढ़ चुका था राहुल की मां के घर में जब डाइनिंग टेबल पर राहुल के पिताजी आ चुके थे तब वह धीरे से डाइनिंग टेबल के नीचे जाकर छुप कर राहुल की मां की बुर को तब तक चाटता रहा था जब तक की उसका पानी न निकल गया था,,, और सुमन की मां के साथ वह अपनी तरफ से ही मनमानी किया था,,, दोपहर में जब उसके घर आई थी तब वह राहुल की तरफ आकर्षित हुई थी लेकिन वह सुमन की मां की हरकतों को अच्छी तरह से समझ गया था और उसके साथमनमानी करते हुए उसकी चुदाई कर दिया था जिससे सुमन की मां भी बेहद प्रसन्न नजर आ रही थी लेकिन अपनी मां की सारी हरकतों को जानने के बावजूद भी वह अपनी मां के साथ ऐसा नहीं कर पा रहा था पहल नहीं कर पा रहा था यही उसकी भी सबसे बड़ी विवसता थी।,,,
सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था उसकी बुर पानी छोड़ रही थी पेशाब निकलने से पहले उसकी बुर से मदन रस का बहाव लगातार हो रहा था जो उसकी जांघों को भीगो रहा था,,,, सुगंधा भी तिल तिल तड़प रही थी,,,, इस समय सुगंधा को बड़ी जोरों की पेशाब लग चुकी थी उससे अपनी पेशाब की तीव्रताबिल्कुल भी काबू में नहीं हो रही थी क्योंकि वहां पेशाब लगे हुए कुछ ज्यादा ही समय गुजर चुके थे इसलिए वह तुरंत एकदम से अपनी गांड अपने बेटे की तरफ लहराते हुए नीचे बैठ गई,,,और अंकित अपनी मां की ईस हरकत पर पूरी तरह से पानी पानी हो गया था,, वह तुरंत चादर के अंदर से ही अपने लंड को अपने पेंट के ऊपर से जोर से पकड़ लिया और उसे दबाने लगा और अगले ही पलअंकित के कानों में उसकी मां की बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज सुनाई देने लगी जो कि इसे शांत वातावरण में कुछ ज्यादा ही शोर मचा रही थी,,,अंकित अपनी मां की बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज को सुनकर उसकी मधुर ध्वनि को सुनकर पूरी तरह से मदहोश होने लगा था इस ध्वनी को वह पहले भी कई बार सुन चुका था जो कि उसकी मां की बुर से ही निकलती थी,,,, और यही उसे अपनी मां को नग्न अवस्था में देखने के लिए प्रेरित करता था।अंकित की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी और वह धड़कते दिन के साथ अपनी मां को पेशाब करते हुए देख रहा था और सुगंध भी अपने बेटे की उत्तेजना को बढ़ाने के लिए अपने दोनों हथेलियां को अपनी भारी भरकम गांड पर रखकर हल्के हल्के सहला रही थी और मुत रही थी,,,,
सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटाउसे पेशाब करता हुआ देखकर उसके मन में उसे चोदने की भावना जाती है लेकिन वह झूठ बोल रहा था कि ऐसी कोई भावना उसके मन में नहीं जाती क्योंकि वह अपने बेटे की हरकत को उसकी हालत को अच्छी तरह से गौर से देखी थी जब वह पेशाब करती थी,, और इस समय भी उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसके बेटे की भावनाएं उमड रही होगी उसे चोदने के लिए उसे पाने के लिए,,,, और यही तो वह चाहती थी,,,काफी देर से पेशाब रोके रहने की वजह से बड़े देर तक उसकी बुर से पेशाब की धार फूट रही थीऔर उसके शोर में पूरा वातावरण मदहोश हुआ जा रहा था लेकिन इसे दूर से निकलती हुई मधुर ध्वनि को सुनने वाला केवल इस समय उसका बेटा ही था और वह उसे ही सिर्फ सुनाना चाहती थी,,पहले जब मां बेटे में किसी भी प्रकार का शारीरिक आकर्षण नहीं था तब कभी जब बाथरूम मेंसुगंधा पेशाब करने के लिए बैठी थी तो अपने बेटे की मौजूदगी में अपने पर से निकलने वाली सिटी की आवाज को दबाने की कोशिश करती थी कि उसके बेटे को यह आवाज सुनाई ना दे लेकिन आज आलम और माहौल इस तरह का बन चुका है की वजह खोज कर अपने बेटे को दूर से निकलने वाली सिटी की आवाज को सुनाना भी चाहती थी और पेशाब करते हुए उसे दिखाना भी चाहती थी।
अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखकर अंकित जोर-जोर से पेंट के ऊपर से अपने लंड को दबा रहा था मसल रहा था,,,और ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति भी हो रही थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने इस समय उसकी मां पेशाब कर रही थी और अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखकर इस तरह की हरकत करने में जो आनंद मिलता है वह किसी और चीज में नहीं मिलता इस बात का एहसास अंकित को अच्छी तरह से था। इसलिए तो इस तरह की क्रिया करने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,, लेकिन देखते ही देखते हैं बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज कमजोर पड़ने लगी उसका शोर मचाना कम होने लगा,, जो कि इस बात का संकेत था की सुगंधा की पेशाब का जत्था कम हो रहा था। देखते ही देखते सुगंधा की बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज एकदम से बंद हो गई और उनकी समझ गया कि उसकी मां पेशाब कर चुकी है,,,, अंकित अपनी मां की गोल-गोल गांड को देखकर एकदम चुदवासा हुआ जा रहा था,,, पेशाब कर लेने के बाद सुगंधा अपनी गांड को झटकने लगीऐसा करके वह अपनी बुर में फंसी हुई पेशाब की आखिरी बुंद को भी निकाल देना चाहती थी,,,, और ऐसा करने के बाद वह धीरे से खड़ी हो गईअंकित को लग रहा था कि उसकी मां एक खूबसूरत नाटक पर फिर से पर्दा गिरा देगी लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था उसकी मां उसी तरह से अपनी सारी कमर तक उठाए खड़ी थी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां अभी भी ऐसा क्यों की है।
फिर सुगंधा इस हालत में साड़ी कमर तक उठाए हुए ही छत की दूसरी तरफ जो की पास में ही पानी भर लोटा रखा हुआ था वह लोटे को उठाई और उसमें से पानी पीने लगी लेकिन इस बीच भी वह साड़ी कमर तक उठाए हुए थी,,,,अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां ऐसा क्यों कर रही है और वह पानी पीने के बाद लोटे को नीचे रख दी और फिर अंकित की तरफ देखने लगी और जैसे ही सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखी अंकित तुरंत अपनी आंखों को बंद कर लिया मानो कि जैसे गहरी नींद में सो रहा हो,,,, अपने बेटे की हरकत देखकर सुगंधा मन ही मन में मुस्कुराते हुए मन में ही बोली,,, वाह बेटा कितना शरीफ बनने का नाटक कर रहा है बस इशारा मिल जाए तो अभी बुर में लंड पेल दे,,,,,, चलो कोई बात नहीं यही तो मैं चाहती हूं,,,,,और अपने मन में ऐसा कहते हुए वह साड़ी कमर तक उठाए हुए ही अपने बेटे की पास कदम बढ़ाने लगी और बिस्तर के पास पहुंचकर,,,, मुस्कुराई और साड़ी कमर तक उठाए हुए ही लेट गई,,,, अंकित को अपनी मां के अपने पास होने का एहसास हो रहा था उसका बिस्तर तककरीब आना उसके चूड़ियों की खनक से उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी मां बिस्तर पर लेट चुकी थी लेकिन वह आंख खोलने से डर रहा था कि कहीं उसकी मां उसे देख ना ले,,,,।
तकरीबन आधा घंटा गुजर चुका था किसी भी तरह की हलचल उसे अपनी मां की तरफ से महसूस नहीं हो रही थी तो उसे यकीन होकर की उसकी मां सो गई है और वह धीरे से अपनी आंख खोल औरअपनी नजरों को अपनी मां की तरफ घूम कर देखा तो उसके होश उड़ गई उसकी मां दूसरी तरफ करवट लेकर लेटी हुई थी और हैरान कर देने वाली बात यह थी कि अभी भी उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी कमर के नीचे वह एकदम नंगी थी,,,, यह नजाराअंकित के लिए बेहद असहनीय था पल भर के लिए उसे लगाकर यह नजारा देखकर उसके लंड से पानी फेंक देगा लेकिन किसी तरह से वह अपने आप को संभाल ले गया था,,,,हालत अब बिल्कुल भी अंकित के काबू में नहीं था उसकी आंखों के सामने उसके बगल में एक ही चटाई पर उसकी खूबसूरत मदहोसी से भरी हुई मां कमर के नीचे एकदम नंगी होकर लेटी हुई उसकी भारी भरकम गांड ईतने करीब से देख कर अंकित की हालत खराब हो रही थी।लेकिन यह जानना चाहता था की गहरी नींद में है कि नहीं और यही देखने के लिए वह धीरे से बोला,,,।
मम्मी,,,, ओ मम्मी,,,,, मम्मी जाग रही हो कि सो रही है,,,,,,।
(सुगंधा की तरफ से कोई भी आवाज नहीं आई कोई भी जवाब नहीं आया वह जाग रही थी लेकिन गहरी नींद में होने का नाटक कर रही थी उसका दिल भी जोरों से धड़क रहा थाएक बार अपनी मां को आवाज लगाने के बाद वह फिर से पूरी तरह से तसल्ली कर लेना चाहता थाइसलिए इस बार वह अपना हाथ आगे बढ़कर अपनी मां के कंधे पर रखकर उसे हल्के से हिलाते हुए बोला)
मम्मी ,,,,,मम्मी सो गई हो क्या,,,,,
(लेकिन इस बार भी सुगंधा की तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं हुई तो उसकी आंखों में वासना की चमक नजर आने लगी उसकी आंखों के सामने उसकी मां की नंगी गांड थी और वगैरह लिखते सो रही थी यह मौका उसे पहले कभी मिला नहीं था आजइस अद्भुत नजारे को इस अद्भुत पल को महसूस करके वह पूरी तरह से मदहोश हो जा रहा था वह अपने आप में बिल्कुल भी नहीं था,,,,वह धीरे से अपने ऊपर से चादर हटाया उसकी मां उससे एक फिट की दूरी पर सो रही थी बस उसके करवट लेने की देरी थी और अंकित भी अपनी मां के बदन से सट जाता,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था वह अपने ऊपर से चादर हटाकर अपनी मां की तरफ देखता रहा अभी भी उसके बदन में किसी भी प्रकारकी प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी किसी भी प्रकार का हलचल नहीं हो रहा था यह देखकर वह मन ही मन खुश हो रहा था। पेंट में उसका लंड तंबू बनाए हुए था। जिसे वह हाथ से जोर-जोर से दबा रहा थालेकिन उसे एहसास होने लगा था कि अब इतने से काम चलने वाला नहीं है और यह मौका उसे मिलने वाला नहीं है,,,,दूसरी तरफ सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था वह बेहद उत्सुक हो चुकी थी यह देखने के लिए उसका बेटा क्या करता है,,,,,
अंकित की उत्तेजना और वासना दोनों बढ़ती जा रही थी अपनी मां की नंगी गांड देते हुए पेट के ऊपर से लंड दबाने में जो आनंद उसे मिल रहा था वह उसे खुल कर लेना चाहता था,,, इसलिए वह धीरे से पेंट की बटन खोलने लगा,,,, और देखते ही देख अपने पेट को अपने हाथ से सरका कर वह घुटनों के नीचे कर दिया,,,, अब उसके हाथ में उसका टन टनाया हुआ नंगा लंड था जिसे वह अपने मुट्ठी में दबाकर मुठिया रहा था यह क्रिया उसके लिए बेहद उतेजना से भर देने वाली साबित हो रही थी,,,,कुछ देर तक वह इस क्रिया को अपनी मां की नंगी गांड देखकर बार-बार दोहराता रहा लेकिन इतने से ही उसका मन नहीं भर रहा था अपनी मां को निश्चित होकर गहरी नींद में सोता हुआ देखकर उसका लालच बढ़ने लगा था,,,,और दूसरी तरफ उसकी मां की हालत खराब हो रही थी किसी भी प्रकार की हलचल प्रतिक्रिया न देखकर उसे लगने लगा था कि उसका बेटा आज भी बुद्धू बना वहाकर सो गया है इसलिएवह करवट लेकर उसकी तरफ देखना चाहती थी और ऐसा करने के लिए वह तैयार ही थी कि तभी अंकित भी अपनी तरफ से प्रतिक्रिया करते हुए अपनी मां की तरफ सरक गया था और जैसे ही उसकी मां पलटी लेने के लिए अपने आप को तैयार कर ही रही थी कि तभी उसे अपनी गांड पर अपने बेटे का लंड चूसता हुआ महसूस होने लगा और वह एकदम से गनगना गई,,,, उसके होश उड़ गए आज उसकी कामुक हरकत कम कर गई थी इसका एहसास उसे होने लगा,,,,उसका दिल जोरो से धड़कने लगा था उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी थी लेकिन वह किसी तरह से अपने आप को संभाले हुए थी।
अंकित की सांस उखड़ रही थी उसकी हालत एकदम से खराब हो रही थी क्योंकि यह पहला मौका था जब वह अपने लंड को अपनी मां की नंगी गांड से सटा दिया थाऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी लंड का मोटा तगड़ा सुपाड़ा गरमा गरम उसकी मां की नंगी गांड पर सटा हुआ था,,, इस एहसास से उसे इस बात का डर था कि उसके लंड से पानी न फेंक दे और अंकित की मां की बुर पानी पर पानी छोड़ रही थी,,,कुछ देर तक अंकित अपनी मां के बदन में हलचल न होता देखकर उसी तरह से अपने लंड को उसकी गांड से सटाए रहा और फिर धीरे सेजब मामला पूरी तरह से शांत रहा तो वह अपने लंड को अपने लंड कैसे पानी को अपनी मां की नंगी गांड से रगड़ना शुरू कर दिया ऐसा करने में उसे मदहोशी जा रही थी उसका दिल जवाब दे रहा था बार-बार उसका मन कह रहा था कि ऐसा मत कर बस डाल दे अपनी मां की बुर में लेकिन ऐसा करने में उसे इस बात का डर था कि अगर उसकी मां जाग जाएगी तो गजब हो जाएगा,,,,लेकिन फिर भी जो कुछ भी वह कर रहा था यह भी उसके लिए बेहद आनंद आया था उसके लिए भी और उसकी मां के लिए भी,,,,सुगंधा की तो हालत पाल-पाल खराब होती जा रही थी उसकी बुर कचोरी कि तरह फुल चुकी थी,,,अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी थी उसे विश्वास हो गया था कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही है और वह भी दिन भर काम की थकान की वजह से शायद वाकई में उसे गहरी नींद लग गई थी ऐसा वह सोचकर अपनी हरकत को बढ़ाने के लिए अपने आप को तैयार करने लगा।
अभी तक तो वह अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां की गांड की उभार पर रगड़ रहा था लेकिन अब उसका मन कुछ और करने को कर रहा था इसलिए वह अपने लंड को सुपाड़े को गांड की दरार मेंप्रवेश करने लगा अच्छी तरह से जानता था कुछ इस तरह से उसकी मां लेती हुई थी ऐसे हालात में उसके लंड का उसकी बुर के छेद तक पहुंचना नामुमकिन था,,, गांड की दरार में भी अपने लंड को हल्के हल्के से अंदर की तरफ डालकर मजा लेने लगा लेकिन उसे एहसास होने लगा था की सबसे बड़ी गंद होने की वजह से गांड की दरार भी गहरी हो जाती है,,,,और इसीलिए अंकित का लैंड गहराई तक जा रहा था उसका आधा घंटा उसकी मां की गांड की दरार की गहराई तक पहुंच चुका थाऔर यह अंकित के लिए बेहद खुशी की बात थी और उससे भी ज्यादा खुशी की बात यह थी कि अभी तक उसकी मां के बदन में हलचल बिल्कुल भी नहीं हुई थी,,,और अंकित धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया उसकी कमर के हिलने के साथ ही अंकित का लंड सुगंधा की गांड की दरार केऊपर से नीचे तक लहराने लगा जिसकी रगड़ जिसकी गर्माहट सुगंधा की बुर का पानी ढीला कर रही थी,,,, कुछ देर तक यह सिलसिला चलता रहा सुगंधा अपनी सांसों को काबू में किए हुए अपने बेटे की हरकत का आनंद ले रही थी,,,अपने बेटे के लंड की मोटाई और लंबाई का एहसास उसे बड़ी अच्छी तरह से हो रहा था और उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में उसका लंड अगर उसकी बुर में घुस गया तो ,, बुर का भोसड़ा बनकर ही बाहर निकलेगा,,,,
सुगंधा का मन तो कर रहा था कि अपना हाथ पीछे की तरफ ले जाकर अपने बेटे का लंड पकड ले और उसे अपने गुलाबी छेद की गली का रास्ता दिखा दे,,,लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हुई और अपने बदन में जरा भी हलचल करने की भी उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि उसे इस बात का डर था कि उसके बदन में जरा सी भी हलचलउसके बेटे की हरकत को रोक देगा वह घबराकर फिर ऐसी हरकत नहीं करेगा और वह इस हरकत का मजा लेना चाहती थी उसे रोकना नहीं चाहती थी वह देखना चाहती थी कि इससे भी ज्यादा उसका बेटा क्या कर सकता है,,,, इसलिए वह निश्चित होकर इस तरह से लेती रही और अपने बेटे की हरकत का मजा लेती रही।
अंकित की सांस ऊपर नीचे हो रही थी,,, काफी देर तक उसकी मां के बदन में हलचल नहीं हो रही थी इसलिए वह अपने बदन में और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और वह धीरे से अपना हाथ अपनी मां की कमर पर रख दिया कमर के ऊपर वाले हिस्से पर जहां से नितंबों का शुरुआत होता है उसकी उभार का शुरुआत होता है अपनी मां की नंगी गांड पर हाथ रखते हुए उसके भजन में उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से होने लगा और सुगंधा को भी इस बात का एहसास होने लगा कि उसके बेटे का लंड फुल रहा
था,,, अपनी मां की कमर पर हाथ रखते हीअंकित की उत्तेजना बढ़ने लगी तो वह धीरे से अपने आप को थोड़ा नीचे की तरफ कर दिया और अपनी कमर पर आगे की तरफ ठेलने लगा जिसके चलते उसका लंड उसकी मां की गांड के निचले स्तर मैं उसके नितंबों से बीचों-बीच से अंदर की तरफ से सरकने लगाऔर धीरे-धीरे अंदर की तरफ जाने लगा यह एहसास अंकित के तन बदन में उसकी उत्तेजना को बढ़ाने के लिए काफी थाऔर सुगंधा भी मदहोश हुए जा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसके बेटे का लंड अब कौन सी दिशा में आगे बढ़ रहा है,,,,
सुगंधा अपनी सांसों को रोके हुई थीऔर जिस तरह से उसके बेटे का लंड अंदर की तरफ आगे बढ़ रहा था उसे देखकर उसे अपने बेटे के लंड की मजबूती और उसकी ताकत का अंदाजा लग रहा था,,, जांघो के बीच से रगड़ता हुआ अंकित का लंड उसकी मां की गुलाबी छेद की तरफ आगे बढ़ रहा था,,,, अंकित के सुपाड़े में उसकी मां की बुर की गर्मी महसूस होने लगी थी और यही हाल सुगंधा का भी था,, सुगंधा भी अपनी बुर पर अपने बेटे के लंड के सुपाड़े की गर्मी को महसूस करके बार-बार पिघल रही थी,,,, देखते ही देखतेअंकित के लंड का सुपाड़ा उसकी मां की गुलाबी छेद द्वार पर एकदम से स्पर्श हो गया,,,, सुगंधा काफी देर से उत्तेजना का अनुभव कर रही थी मदहोश हो रही थी,,,लेकिन इस बार अपने बेटे के मजबूत लंड के सुपाड़े का स्पर्श उसकी गर्मी को वह बर्दाश्त नहीं कर पाई और भलभला कर झड़ने लगी उसकी बुर से मदन रस का फवारा फुट पड़ा,,,, जिसका एहसास अंकित को अपने लंड पर हो रहा था,,,, और अपनी मां के मदन रस का फवारावह भी अपने लंड पर बर्दाश्त नहीं कर पाया और वह भी एकदम से अपने लंड से पानी की पिचकारी फेंकने लगा जो कि सीधा सुगंध को अपनी बुर के गुलाबी छेद पर महसूस हो रहा था,,, सुगंधा एकदम से गदगद हो गई वह इस फव्वारे को अच्छी तरह से जानती थी,,,, वह एकदम से चादर को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी मुट्ठी में भींच लीऔर यही हाल अंकित का भी था झड़ने समय वह अपनी मां की कमर को जोर से पकड़ लिया था लेकिन जैसे उसे एहसास हुआ कि उसकी मां जाग जाएगी वह तुरंत अपने हाथ को उसकी कमर से हटा लिया था।
वासना का तूफान शांत हो चुका था अंकित धीरे से अपनी मां की जांघों के बीच से अपने घंटे को बाहर निकाला जो कि इस समय भी पूरी तरह से खड़ा था लेकिन अबउसका पानी निकल चुका था जो कि जहां को पूरी तरह से भिगो दिया था यह देखकर अंकित थोड़ा सा कपड़ा गया और तुरंत अपनी चादर से अपनी मां की टांगों पर लगा हुआ उसके पानी को साफ करने लगाऔर फिर वापस पेट के बल लेट कर आसमान की तरफ देखने लगा और कब नींद की आगोश में चला गया उसे पता ही नहीं चला,,,, सुबह उसकी नींद जल्दीखुल चुकी थी लेकिन वह अपनी मां के सामने जल्दी जागना नहीं चाहता था क्योंकि अभी भी उसकी मां की साड़ी कमर तक उठी हुई थी,,,और वह अपनी मां को यह बिल्कुल भी जताना नहीं चाहता था कि रात को उसने उसके साथ कोई गलत हरकत किया था इसलिए वह सोने का नाटक करके लेट ही रह गया लेकिन इस बार दूसरी तरफ मुंह करके लेटा था ताकि उसकी मां उठे तो उसे बिल्कुल भी शक ना हो,,,,थोड़ी देर में सुगंधा की नींद खुली तो अपनी स्थिति को देखकर वह खुद ही शर्मा गई,,, अपनी बुर पर उसे चिपचिपाहट महसूस हो रही थीवह जानती थी कि ऐसा क्यों हुआ है लेकिन वह बिना कुछ बोले अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और वह अपने बेटे को जगाए बिना ही सीढ़ी से नीचे उतर आई,,,
रात को देर तक जागने की वजह से सुबह जल्दी नींद नहीं खुली थी उजाला हो चुका था इसलिए आज वॉकिंग पर जाने के लिए वह तैयार नहीं थीवह घर की सफाई करने लगी थी अंकित भी धीरे से होकर अपनी जगह पर बैठ गया और वह भी धीरे से सीढ़ियां उतरकर नीचे आ गया लेकिन वह अपनी मां से नजर नहीं मिल पा रहा था। औरअपने आप को सहज करने के लिए दैनिक क्रिया में लग गया था मां बेटे दोनों को सब कुछ मालूम था कि रात को क्या हुआ था लेकिन दोनों एक दूसरे से अंजान बने थे अंकित को ऐसे लग रहा था कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी उसे कुछ नहीं मालूम था जबकि सुगंधा सब कुछ जानती थीऔर वह भी अपनी तरफ से खामोश थी अपने बेटे को कुछ बोलना नहीं चाहती थी क्योंकि उसे इस बात की खुशी थी कि उसका बेटा इतनी हिम्मत दिखा पाया था के बिना उसकी बुर में लंड डाले ही उसका पानी निकाल दिया था।
रात को जो कुछ भी हुआ था उसे लेकर सुगंधा काफी उत्साहित थी क्योंकिउसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसका बेटा कुछ ज्यादा हिम्मत दिखाया था बस थोड़ा और हिम्मत दिखा देगा तो रात को ही काम बन जाता है इस बात को सोचकर होगा मन ही मन मुस्कुरा रही थी लेकिन अपने आप पर गुस्सा भी कर रही थी कि जब उसका बेटे ने इतनी हिम्मत दिखाई तो वह थोड़ी हिम्मत क्यों नहीं दिखा पाई उसे भी तो कुछ करना चाहिए थाआखिरकार वह भी तो एक औरत है उसकी भी तो चाहत है उसकी भी तो प्यास है जिस चीज की भुख उसके बेटे को है उसी चीज की भुख तो उसे भी है,,,, फिर क्यों नहीं आगे बढ़ पाई क्यों नहीं अपने बेटे का साथ दे पाई,,,, सुगंधा को अच्छी तरह से हिसाब सो रहा था कि उसका बेटा उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए उत्साहित हो चुका था,,,वह तो शायद उसकी नादानी थी उसे औरत के गुलाबी छेद के बारे में कुछ ज्यादा मालूम नहीं था वरना वह अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डाल देता,,,, इस बात को सोच कर वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,, उसी को समझ में नहीं आ रहा था मंजिल उसे ज्यादा दूर नजर नहीं आ रही थी,,, पवित्र रिश्ता की मर्यादा में भी अब उसे वासना की सुनहरी कीरन नजर आ रही थी।
उसे एहसास होने लगा था कि आप बहुत दिन ज्यादा दूर नहीं है जब उसके बेटे का लंड उसके गुलाबी छेद की गहराई नाप रहा होगा,,, रसोई घर मेंरोटी को तवे पर रखकर वह अपने बेटे के बारे में और रात को जो कुछ विवाह उसके बारे में सोच कर मदहोश रही थी गरम हो रही थी जिसका सीधा असर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर पड़ रहा था। उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसका बेटापूरे शिद्दत के साथ उसकी बुर में लंड डालने की कोशिश कर रहा था इसलिए तो उसकी दोनों जांघों के बीच से अंदर तक ठेलने की कोशिश कर रहा था,,,और उसकी रात की उस कोशिश को याद करके इस समय सुगंधा के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी उसके होठों पर मुस्कुराहट थी,,इस बात के लिए नहीं कि उसका बेटा असफल कोशिश कर रहा था वहीं से बात से मुस्कुरा रही थी कि उसके बेटे को औरतों के बारे में भी कुछ ज्यादा ज्ञान नहीं है उसे यह भी नहीं मालूम की मर्द अपने लंड को औरत के किस अंग में डालता है शायद इसीलिए वहां असफल हो गया था वरना जिस तरह की उसकी कोशिश थी वह जरूर कामयाब हो जाता अगर उसे संभोग के बारे में जरा सा भी ज्ञान होता तो,,, अपने बेटे की इस अज्ञानता पर सुगंधा को ज्यादा गुस्सा नहीं आ रहा था वह इस बात से ज्यादा खुश थी की अगर दोनों के बीच कुछ हुआ तो उसे सीखाने में ज्यादा मजा आएगा,,,,।
सुगंधा तवे पर रोटी को चिमटी से पलट रही थी क्योंकि वह एकदम गरम हो चुकी थी और गर्म होकर फूल रही थी यह देखकर सुगंधा को एहसास होने लगा कि इसी तरह से हीऔरत की बुर का ध्यान होता है जब वह गर्म हो जाती है तो एकदम से कचोरी की तरह फूल जाती है उसमें से रस टपकने लगता है जिसे पीने के लिए दुनिया का हर एक मर्द तड़पता है ,,, सुगंधा अपने मन में सोच रही थी दुनिया के हर एक मर्द की तरह उसका बेटा भी औरत की बुर से मज़ा लेना चाहता होगा वह भी उसे चाटना चाहता होगा उसमें अपना लंड डालना चाहता होगा,,, बस थोड़ा डर अपनी मर्यादा और अज्ञानता की वजह से कुछ कर नहीं पा रहा है और जब कल रात कुछ करने की कोशिश किया तो औरत की बुर के भूगोल का ज्ञान न होने की वजह से कुछ कर नहीं पाया,,,, सुगंधा रोटी को तवे पर से उतारकर थाली में रखते हुए सोच रही थी कि अब उसे भी कुछ करना होगातृप्ति के गए 2 दिन गुजर चुके हैं लेकिन दोनों के बीच कुछ हो नहीं पाया है अगर इसी तरह से आंख मिचोली चलती रही तो तृप्ति भी घर पर आ जाएगी और फिर दोनों के बीच कुछ भी नहीं हो पाएगा,,, मां बेटे के बीच कुछ हो इसीलिए तो तृप्ति को गांव भेजी थी। अपने मन में यह सोचकर वह थोड़ा परेशान हो गई और अपने आप को ही दिलासा देते हुए बोली।
नहीं नहीं ऐसा नहीं होने दूंगी सुनहरा मौका में अपने हाथ से जाने नहीं दूंगी तृप्ति को जिस वजह से उसकी नानी के मन भेजी हूं उस वजह को पूरा जरूर करूंगी वरना मेरे जैसी बेवकूफ औरतकोई भी नहीं होगी आखिरकार इतना कुछ होने के बावजूद भी वह अभी भी प्यासी की प्यासी है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा अब मुझे ही कुछ करना होगा अपने आप को ऐसा दिलासा देकर वह फिर से खाना बनाने में लग गई,,,,।खाना बनाते समय वह बार-बार दरवाजे की तरफ देख रही थी लेकिन वह जानती थी कि इस समय अंकित घर पर नहीं था नहाने के बाद नाश्ता करके वह तुरंत बाहर निकल गया था,,, वैसे तोसुगंधा अपने बेटे को रोकना चाहती थी लेकिन वह रोक नहीं पाई थी रात को जो कुछ भी हुआ था उसकी खुमारी अभी भी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी और वह अपने बेटे से नजर नहीं मिला पाती इसलिए वह कुछ बोल नहीं पाई,,,।
दोपहर में खाना खाने के बादसुगंधा घर की सफाई में लग गई थी और बर्तन साफ कर रही थी,,,, साफ सफाई कर लेने के बाद वह अंकित के कमरे के पास आई और दरवाजा खोलकर देखी तो अंदर अंकित नहीं था वह सोच में पड़ गई कि अंकित गया कहां,,,, सुगंधा थोड़ा परेशान हो रही थीक्योंकि सुबह भी वह अपने बेटे से बात नहीं कर पाई थी और इस समय भी वह घर पर मौजूद नहीं था इसलिए वह घर के दरवाजे तक आई और बाहर की तरफ देखने लगी दोपहर का समय होने की वजह से सड़के सुनसान थी। इक्का दुक्का वहां नहीं सड़क पर आते जाते दिखाई दे रहा हैगर्मी इतनी थी की सुगंधा का खुद का मन घर से बाहर निकलने को नहीं हो रहा था इसलिए वह सोच रही थी कितनी गर्मी में उसका बेटा बाहर कहां चला गया,,,फिर अपने मन में सोचने लगी कि शायद रात वाली घटना को लेकर उसके मन में जरूर कुछ चल रहा है इसलिए वह उस नजर नहीं मिला पा रहा है,,, अगर सच में रात वाली घटना से उसका जमीर जाग गया तो सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा,,, इतना जो कुछ भी वह बेशर्मी दिखाई थी अपने बेटे के सामने सब बेकार हो जाएगा अपनी मंजिल तक पहुंचाने के लिए जिस तरह का रास्ता उसने चुना था जिस तरह से बेशर्मी को अपनाया था अपने अंदर एक रंडी पन को जगाया था वह सब कुछ बेकार हो जाएगा,,,,अपने मन में उठ रहे इस तरह के ख्याल से सुगंधा परेशान हो रही थी विचलित हो रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। फिर अपने आप से ही बोली नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं होगा,,,, और ऐसा वह अपने मन में सोचते हुए वह अपने कमरे की तरफ जाने लगी,,,,।
अपने कमरे पर पहुंचते ही दरवाजे पर खड़े होकर वह फिर से कुछ सोचने लगी और फिर धीरे से दरवाजा खोली जो कि सिर्फ बंद था उस पर सिटकनी नहीं लगी थी,,,और जैसे ही दरवाजा खुला सामने बिस्तर पर अंकित बैठा था उसे देखकर सुगंधा के चेहरे पर मुस्कुराहट तैरने लगी और वह राहत की सांस लेने लगी लेकिन अपनी मां को दरवाजे पर देखकर अंकित तुरंत असहज हो गया और बिस्तर के नीचे को छुपाने की कोशिश करने लगा यह देखकर सुगंधा बोली,,।
क्या हुआ अंकित क्या छुपा रहा है,,,( कमरे में प्रवेश करते हुए सुगंधा बोली,,,,अपनी मां को कमरे में प्रवेश करता हुआ देखकर अंकित थोड़ा घबरा गया था और घबराहट भरे स्वर में बोला)
ककककक,,, कुछ नहीं कुछ भी तो नहीं,,,,,
(तब तक सुगंध बिस्तर तक पहुंच चुकी थी और वह बिस्तर पर ;बिछे गद्दे को उठाकर देखने लगी तो उसके नीचे वही गंदी किताब थी जिस किताब ने दोनों को अपने मंजिल तक पहुंचने में मदद कर रहा था,,, उसे किताब को देखकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए अपने बेटे से बोली,,,)
ओहहहह तो यह बात है किताब पड़े बिना रहा नहीं जा रहा है क्यों ऐसा ही है ना,,,
नहीं नहीं मम्मी ऐसा कुछ भी नहीं है,,,
तो ईसे छुपा क्यों रहा था,,,,(किताब के पन्ने को पलटते हुए सुगंधा बोली,,,,,,सुगंधा जिस तरह से अपने हाथ से किताब का पन्ना पलट रही थी यह देखकर अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी थी और वह अपने मन में सोचने लगा था कि इतना कुछ तो दोनों के बीच हो रहा है इतनी ढेर सारी गंदी बातें इस किताब को लेकर हो चुकी है तो अब क्यों अपनी मां से घबरा रहा है शर्मा रहा है,,,,,,, इसलिए वह थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए बोला,,,)
नहीं ऐसा कुछ भी नहीं मम्मी वह तो किताब ऐसी है ना की,,,,, अब क्या बताऊं किताब ही ऐसी है कि तुम्हें दरवाजे पर देखकर मैं थोड़ा डर गया,,,,,
डरने की जरूरत नहीं हैतुझे अच्छी तरह से याद होना चाहिए कि मैं ही तुझे इस किताब को पढ़ने के लिए बोलीअगर ऐसा कुछ होता तो मैं तुझे यह किताब देती ही नहींऔर इस किताब को पढ़ने पर तुझे थप्पड़ लगा दी होती लेकिन मैं जानती हूं कि तू अब बड़ा हो चुका है समझदार हो चुका है,,,,, वैसे पढ़ क्या रहा था तू,,, मैं तो ठीक हूं की पूरी किताब ही गजब की कहानी से भरी हुई है,,,,(किताब के पन्ने को पालते हुए सुगंधा अपने होठों पर मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली अपनी मां को इस तरह से मुस्कुराता हुआ देखकर अंकित के भी हिम्मत बढ़ने लगी और वह बोला,,,)
तुम सच कह रही हो मम्मी पूरी किताब ही गजब की है एक बार पढ़ने बैठो तो पूरी किताब पड़े बिना उठ नहीं सकते मैं तो उसे दिन वाली कहानी के बारे में सोच रहा था और वही देखना चाहता था कि आगे क्या होता है जैसा कि तुम बताएं की हालत को देखकर दोनों में जरूर कुछ हुआ होगा और दोनों के बीच कुछ होने की आशंका दोनों के हालात पर निर्भर रखती है,,,।
अच्छा तो तूने क्या पढ़ा उन दोनों के बीच आगे कुछ हुआ कि नहीं,,,,,।
बहुत कुछ हुआ मम्मी मेरा तो पढ़ कर ही हालत खराब हो गई है,,,,,।
क्यों ऐसा क्या लिखा हुआ है कि तेरी हालत खराब हो गई और वह भी सिर्फ पढ़करअगर देखा होता है या कुछ उसे कहानी का हिस्सा होता तो मैं समझ सकती थी पढ़कर ही तेरी हालत कैसे खराब होने लगी,,,। मुझे भी तो बता,,,(ऐसा कहते हुए उसे किताब को अंकित की तरफ आगे बढ़ाते हुए) ले उस दिन की कहानी से आगे पढ़ कर बता,,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे भी एहसास होने लगा था कि उसकी मां भी उत्सुक थी की मां बेटे के बीच आगे क्या हुआ,,,, और यह कहानी वाली घटना उन दोनों के लिए ही कारगर साबित होने वाली थी ऐसा अंकित को एहसास होने लगा था,,,,इसलिए वह भी तुरंत अपनी मां के हाथ से उस किताब को ले लिया उसकी मां ठीक उसके सामने खड़ी थीऔर अंकित नीचे बिस्तर पर बैठा हुआ था और धीरे-धीरे पन्नों को पलट रहा था कुछ पन्नों के बाद रंगीन चित्र थे जिसमेंमर्द और औरत के संभोग के बहुत सारे चित्र थे जिसमें औरत की बुर और मर्द का लंड एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,अंकित उसे चित्र को बड़े गौर से देख रहा था देख क्या रहा था वह अपनी मां को चित्र को दिखा रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां भी उस किताब की तरफ ही देख रही थी,,, उस गरमा गरम चित्र को देखकर अंकित का लंड पेंट के अंदर अकड़ रहा था,,,खड़ा तो वह पहले से ही था लेकिन इस समय अब उसकी हालत और ज्यादा खराब हो रही थीतो दो तीन-तीन सेकंड तक उसे दृश्य पर अपनी नजर डालकर और अपनी मां को दिखाकर वह पन्ने को पलट दे रहा था हर एक पन्ने पर एक अद्भुत दृश्य था जिसे देखकर कोई भी मर्द और औरत चुदवासे हो जाए।
सुगंधा अपने बेटे की हरकत को देखकर मस्त हो रही थी वह भी उसी द्रशय को देख रही थी जिस दृश्य को उसका बेटा देख रहा था,,,, सुगंधा की बुर की पानी छोड़ रही थी क्योंकि चित्र था ही कुछ ऐसा मर्द बिस्तर पर पीठ के बल लेटा हुआ था और एक औरत जो कि एकदम गदराए बदन की थीवह उसे मर्द के ऊपर पूरी तरह से छाई हुई थी उसे मर्द का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था और औरत अपनी चूची को अपने हाथ से पड़कर उसे मर्द के मुंह में डालें हुई थी और वह मर्द उसकी दोनों चूचियों को पकड़े हुए था उसे मर्दों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि औरत की हरकत से उसकी काम कला से वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था। तभी अंकित पन्ने को पलट दिया और दूसरे दृश्य को देखने लगा यह दृश्य भी गजब का था,,, इसमें एक औरत खेत में काम करते हुए अपनी फ्रॉक को कमर तक उठाई हुई थी और झुक कर घास को काट रही थी और पीछे से एक आदमी उसकी चुदाई कर रहा था,,,इस नजारे को भी उसकी मां प्यासी नजर से देख रही थी और अपने मन में सोच रही थी की खास उसे औरत की जगह वह खुद होती है और पीछे खड़ा मर्द उसका बेटा होता तो कितना मजा आता।।
अगले पन्ने को पलटते ही जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर सुगंधा की बुर मदन रस की बुंद नीचे टपका दी,,,, उस पन्ने पर चित्र छपा हुआ था जो बेहद मन मौत था और यह सुगंधा की भी ख्वाहिश थी,,,चित्र में एक मर्द बाथरूम के अंदर खड़ा था हो एक औरत अपने घुटनों के बल बैठकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके लंबे मोटे लंड को अपने मुंह में जड़ तक लेकर उसे कस रही थीऔर उसकी मोटाई और लंबाई से साफ पता चल रहा था कि उस औरत के गले तक पहुंच चुका था उस मर्द के लंड को मुंह में लेने पर उसे थोड़ी बहुत तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी इस तकलीफ के आगे जो आनंद उसे प्राप्त हो रहा था वह उसकी तकलीफ को पूरी तरह से कम कर दे रहा था। यही चाहतसुगंधा के मन में भी थी वह भी इसी तरह से अपने बेटे के मोटे-तगडे लंड को अपने मुंह में उसे चूसना चाहती थी,,, दो-तीन सेकंड के बाद अंकित पढ़ने को पलट दिया और अब कहानी शुरू हो गई थी अंकित कहानी को वहीं से शुरू करना चाहता था जहां से उस दिन खत्म किया था।वही पन्ना आंख के सामने आते ही अंकित अपनी मां की तरफ देखने लगा और अंकित को अपनी मां की आंखों में वासना का तूफान दिखाई दे रहा था जिसमे वह खुद डूबना चाहता थाकहानी को आगे पढ़ने से पहले वह अपनी मां की इजाजत लेना चाहता था इसलिए वह धीरे से बोला,,,।
आगे पढ़ु,,,,,?
इसीलिए तो तुझे दी हूं,,,,,।
ठीक है,,,,,,, उस दिन अपने यहां तक पढे थे,,,,, अब आगे पढ़ कर बताता हूं,,,,(अंकित का इतना कहना था की सुगंधा पास में पड़ी कुर्सी को अपनी तरफ खींचकर उसे पर बैठ गई और ठीक अंकित के सामने बैठ गई थी वह अंकित के चेहरे के बदलते भाव को देखना चाहती थी,,)
मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा थावैसे तो मैं यह नजारा देखना नहीं चाहता था अपने आप ही मेरी आंखों के सामने यह नजारा दिखाई दे गया था लेकिन आज पहली बार या नजारा देखकर मुझे लग रहा था कि मैं अब तक एक खूबसूरत दृश्य को नहीं देख पाया था लेकिन आज शायद मेरी किस्मत में यही लिखा था और आज मुझे वह देखने को मिल रहा है जिसके बारे में मैं कभी सपने में नहीं सोचा था,,,मां की गांड वाकई में कुछ ज्यादा ही पड़ी थी कई हुई साड़ी में अक्सर मैंने अपनी मां की गांड को देखा थालेकिन कभी मेरे मन में गलत भावना नहीं जगी थी लेकिन आज पहली बार मन को पेशाब करता हुआ देखकर मेरे मन में न जाने कैसे-कैसे भाव पैदा हो रहे थे और यह भावएक बेटे के मन में तो बिल्कुल भी नहीं पैदा हो सकते थे एक मर्द के मन में ही पैदा हो सकते थे और इस समय मुझे ऐसा ही लग रहा था कि मेरी आंखों के सामने जो औरत पेशाब कर रही है वह मेरी मां नहीं बस एक औरत है और मैं एक मर्द हूं हम दोनों को एक दूसरे की जरूरत है।
मां की बुर लगातार सिटी की आवाज निकल रही थी और यह सिटी की आवाज किसी मधुर ध्वनि से बिल्कुल भी काम नहीं थी इस सिटी की आवाज सुनकर तो मेरा लंड एकदम से अपनी औकात में आ गया था,, अभी तक मां की नजर मेरे पर नहीं पड़ी थीवही तो ऐसा तक नहीं था कि बाहर दरवाजे पर खड़ा होकर में उन्हें पेशाब करता हुआ देख रहा हूं वरना अगर उन्हें एहसास हो गया होता तो वह कब सेमुझे जाने को कह देती और दरवाजा बंद कर देती और शायद गुस्सा भी करती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा था लेकिन मा को पेशाब करतेहुए देख कर मेरी हिम्मत पड़ रही थी बार-बार मेरा हाथ अपने आप ही पेंट के ऊपर से लंड को सहला दे रहा था। इस समय मुझे कुछ और नहीं सुझ रहा था। वैसे भी मैं निश्चिंत था क्योंकि घर में मेरे और मां के सिवा और कोई नहीं रहता थाइसलिए किसी के देखे जाने का या किसी के आ जाने का डर मुझे बिल्कुल भी नहीं था डर इस बात का था की मां मुझे देख लेगी तो क्या सोचेगी।(कहानी के एक-एक शब्दों को पढ़कर अंकित की हालत खराब हो रही थी वह अपनी मां की तरफ भी देख ले रहा था,, उसे साफ दिखाई दे रहा था कि,,कहानी को सुनकर उसकी मां की भी हालत खराब हो रही थी पाल-पाल उसके चेहरे का रंग बदल रहा था और उसकी सांसों की गति भी ऊपर नीचे हो रही थी यह देखकर अंकित को मजा आ रहा था और वह वापस कहानी आगे पढ़ते हुए बोला।)
सच कहूं तो इस समय मन कर रहा था कि बाथरूम में घुस जाऊं और मां की चुदाई कर दुं,,,,, क्योंकि जहां तक मेरा मानना था बरसो हो गए थे मां की बुर में लंड नहीं गया था,,, क्योंकि हम दोनों अकेले ही रहते थे बरसों पहले ही पिताजी किसी और औरत के साथ शादी करके दूसरे शहर चले गए थेजहां तक मेरा मानना था की मां का किसी के साथ गलत संबंध बिल्कुल भी नहीं थाक्योंकि अगर होता तो इतने दिनों में भनक लग जाती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था और इतना पक्का था की मां की बुर में लंड ना जाने की वजह से उसे भी दूसरी औरतों की तरह पुरुषकी जरूरत पड़ती होगी लेकिन न जाने क्यों हुआ अपनी भावना को दबाए रह गई थी शायद उसके परवरिश के लिए,,, मुझे एहसास हो रहा था कि शायद मा को भी ईसी चीज की जरूरत है,,,,और अब मेरा करते तो बनता है कि मैं अपनी मां की जवानी की प्यास अपने लंड से बुझाऊं क्योंकि उसे भी अपनी शौक पूरा करने का पूरा हक है। और शायद मेरी वजह से ही मन अपनी ख्वाहिश को पूरा नहीं कर पा रही थी और अंदर ही अंदर घुट रही होगी,,,क्योंकि अगर मैं नहीं होता तो शायद वह दूसरी शादी कर ली होती और एक औरत की जिंदगी की रही होती यह सब मेरी वजह से ही हो रहा है,,,, आज तो मैं अपनी मां की जरूरत को पूरा करके रहूंगा,,,,,।
अरे यह क्या मां तो पेशाब कर चुकी है अब जल्दी ही उठकर खड़ी हो जाएगी,,, नहीं नहीं मैं क्या देख रहा हूं मां तो अपनी बुर में उंगली डाल रही है,,ओहहहह इसका मतलब है कि मेरा सोचना बिल्कुल सही था मा को भी जरूरत है,,,, अब तो मेरा रास्ता एकदम साफ हो गया है आज तो मैं अपनी भी और अपनी मां की भी इच्छा पूरी कर दूंगा,,,,,,(ऐसा पढ़करअंकित अपनी मां की तरफ देखने लगा उसकी मां मुस्कुरा रही थी क्योंकिकहानी कुछ उसके जीवन जैसी ही थी जिसका एहसास अंकित को भी हो रहा था अंकित गहरी सांस लेते हुए कहानी को आगे पढ़ते हुए बोला )
मुझे रहा नहीं गया और मैं दरवाजे पर खड़ा होकर बोला,,,।
बस करो मम्मी बहुत तुमने उंगली से अपनी प्यास बुझाने की कोशिश कर ली अब मैं जानता हूं कि तुम्हें क्या चाहिए,,,,(मेरी बात सुनकर मा एकदम से चौंक गई और,,,घबरा कर तुरंत अपनी बुर में से उंगली को बाहर खींच ली और एकदम से खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को नीचे गिरा दि और अपनी गांड को ढंक ली और घबराहट भरे स्वर में बोली,,,)
तततततत,,, तू यहां क्या कर रहा है,,,?
देख रहा हूं कि मेरी मां कितना तड़प रही है लंड के लिए,,,(ऐसा कहते हुए मैं बाथरूम में प्रवेश करके और अपने पेंट की बटन को खोलने लगा यह देखकर मा से घबरा गई और बोली,,,)
यह तु क्या कर रहा है,,?
वही जिसकी तुम्हें जरूरत है,,,,(ऐसा कहते हुए मैंने तुरंत अपने कपड़े उतार कर बाथरूम के अंदर एकदम नंगा खड़ा हो गया मां की हालत खराब हो रही थी वह थोड़ा गुस्से में भी थी लेकिन मेरे मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर वह एकटक उसे देखते ही रह गई,,,,, और धीरे से बोली)
यह गलत है,,,।
गलत क्या है सही क्या है यह हम दोनों जानते हैं और इस समय क्या सही है यह तुम भी अच्छी तरह से जानती हो इसलिए बिल्कुल भी दिखावा मत करो मैं अपनी आंखों से देख चुका हूं तुम अपनी उंगली से अपनी प्यास बुझाती हो,,,,,(ऐसा कहते हुए मैं मां के एकदम करीब पहुंच गया और उनका हाथ पकड़ कर तुरंत अपने लंड पर रख दिया जो कि एकदम गरम और एकदम कड़क था,,,पहले तो मन घबरा कर उसे पर से अपना हाथ हटाने की कोशिश करने लगी लेकिन मैं तुरंत अपने हाथ में मां की हथेली पकड़ कर उसे पैर दबा दिया तो थोड़ी ही देर मेंमां के बदन में लंड की गर्मी पूरी तरह से छाने लगी और वह मदहोश होने लगी और उनकी मदहोशी उनकी आंखों में दिख रही थी और वह धीरे से बोली,,,)
किसी को पता चल गया तो,,,,।
चार दिवारी के अंदर हम दोनों के बीच क्या हो रहा है यह बाहर किसी को कैसे पता चलेगा,,,,,,(मेरी बातें सुनकर मन मदहोश हो रही थी और धीरे-धीरे मेरे लंड को मुठीयाना शुरू कर दी थी जो कि उनकी तरफ से इशारा था आगे बढ़ने का,,,,मुझे बिल्कुल भी रहा नहीं यार मैं तुरंत ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते-देखते में अपनी मां की चूचियों को ब्लाउज की कैद से आजाद कर चुका था,,,, उनकी बड़ी-बड़ी चूचियांऔर भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी मैं दोनों हाथों से उसे पकड़ कर जोर-जोर से दबा रहा था और मां मेरे लंड को आगे पीछे करके मजा ले रहे थे देखते-देखते वह खुद मेरा सर पकड़ कर अपनी चूची पर कर दी और मुझेदूध पीने का इशारा करने लगी मैं भी मन का इशारा पाकर टूट पड़ा और बारी-बारी से दोनों चुचियों का रेस पीने लगा,,,, हम दोनों के बीच हालात पूरी तरह से बिगड़ रहे थे ऐसा लग रहा था कि बरसों के बाद मां के हाथों में उसका पसंदीदा खिलौना आ गया था जिससे वह जी भर कर खेल रही थी,,,देखते ही देखते मैं अपने घुटनों के बल बैठ गई और तुरंत मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी कि हम मेरे लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था क्योंकि मैंने ऐसा कभी सोचा नहीं था,,,,, कुछ देर तक मां इसी तरह से मजा लेती रही और मुझे मजा देती रही इसके बादमां तुरंत उठकर खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर मुझे अपनी बुर चाटने के लिए बोली,,,, मैं कर भी जा सकता थामेरा तो यह सपना था मैं तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपनी मां का रस पीना शुरू कर दिया हम दोनों पागल हुए जा रहे थे बाथरुम के अंदर हम दोनों पूरी तरह से मां बेटे की जगह औरत और मर्द बन चुके थे,,,,।
बाथरूम के अंदर ही मा पेट के बल लेट गई और अपने दोनों टांगें खोलकर मुझे बताने लगी कि आगे क्या करना हैयह मेरा पहला मौका था मां की बात मानते हुए मैं धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी गुलाबी छेद में डालना शुरू कर दिया और उसके बाद अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत मां भी मस्त हो रही थी और उसके बाद है तो यह सिलसिला रोज का हो गया हम दोनों एक ही कमरे में कहीं बिस्तर पर पति-पत्नी की तरह सोने लगे,,,,,,
(इतना पढ़कर अंकित की हालत खराब हो गई थी अंकित गहरी सांस लेता हूं अपनी मां की तरफ देखने लगासुगंधा भी मदहोश हो चुकी थी उसके चेहरे पर भी उत्तेजना साफ झलक रही थी वह भी वासना भरी आंखों से अपने बेटे की तरफ देख रही थी)
अंकित कहानी पढ़ चुका था और कहानी पढ़ने के बाद जो भाव अंकित के चेहरे पर नजर आ रहे थे वही भाव उसकी मां के चेहरे पर नजर आ रहे थे दोनों कहानी को पढ़कर मंत्र मुग्ध हो चुके थेदोनों की आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था दोनों एक दूसरे को एक तक देख रहे थे ऐसा लग रहा था कि जैसे दोनों के बीच अभी कुछ हो जाएगा कहानी की गर्माहट दोनों बदन को उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुकी थी,,, दोनों की सांसों की गति एक दूसरे की सांसों की गति से मानो जैसे आगे बढ़ने की शर्त लगाई हो दोनों की सांस बड़ी तेजी से चल नहीं रही थी बल्कि दौड़ रही थी। अंकित के हाथों में वह गंदी किताब थी जिसने मां बेटे दोनों को आपस में खुलने में काफी मदद किया था,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि इस समय का क्या करें जिस तरह के दोनों के हालात थे अंकित के मन में हो रहा था किसी समय अपनी मां को अपनी बाहों में भर ले और उसके होठों पर उसके गालों पर चुंबनों की बौछार कर दें,,, लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी।
दोनों के बीच एकदम से खामोशी छा गई थी,,, सुगंधा के तन-बदन में आग लगी हुई थी सुगंधा अपने मन में यही सोच रही थी कि, जिस तरह से बाथरूम में घुस किया था काश उसका बेटा भी उसी तरह की हिम्मत दिखा कर उसे पलंग पर पटक कर चोद डाले तो मजा आ जाए,,,, यही सोच कर उसकी बुर पानी छोड़ रही थी उसका खुद का मन कर रहा था कि इस समय अपने बेटे को लेकर पलंग पर पसर जाए लेकिन यह भी उसके मन की केवल सोच थी जिसे अंजाम देने में उसे डर लग रहा था,,, दोनों के खामोशी के बीच अंकित की आवाज आई।
क्या सच में इन दोनों ने ऐसा ही किया होगा जैसा की किताब में लिखा हुआ है।
बिल्कुल किताब में सही लिखा हुआ है मैं कह रही थी ना दोनों के बीच जो भी होगा हालात को देखते हुए होगा,,
मेने कुछ समझा नहीं हालात को देखते हुए से मतलब,,,,(अंकित हैरान होते हुए अपनी मां से पूछा)
मैं तुझे कही थी नादोनों के बीच अगर आगे कुछ भी होता है तो हालात को देखते हुए होगा हालात का मतलब की दोनों के बीच घर के अंदर किस परिस्थिति से दोनों गुजर रहे हैं,,,।
अभी भी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है सीधी शादी भाषा में समझाओ।
देख मैं तुझे बताती हूं बरसों सेवह औरत अकेली थी और अपने बेटे के साथ ही घर में रहती थी,,,, इसका मतलब साफ करके वह बरसों से अपने पति के प्यार से दूर थी,,,, जिसके चलते उसके बेटे ने उसके हालात का फायदा उठाते हुए,,बाथरूम में घुस गया था क्योंकि वह अपनी मां को गंदी हरकत करते हुए देख लिया था और वह समझ गया था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है,,,,।
अच्छा तो वह पेशाब करते हुए हरकत कर रही थी अपनी उंगली से वही ना,,,,(अंकित भी याद करते हुए बोला)
हां वहीउसकी हरकत देखकर उसका बेटा समझ गया था कि उसकी मां को क्या चाहिए,,,,।
क्या चाहिए,,,?(जानबूझकर हैरान होने का नाटक करते हुए बोला)
इतना समझ में नहीं आता मर्द का साथ जो उसे सुख दे सके उसे खुशी दे सके जो एक पति देता है उसे सुख के लिए वह भी तड़प रही थी तभी तो बाथरूम के अंदर हरकत कर रही थी,,,।
ओहहह,,,, मतलब कि उसके बेटे को समझ में आ गया था इसलिए उसने इतना बड़ा कदम उठाया,,,।
हां इसीलिए उसने इतना बड़ा कदम उठाया और नतीजा सामने है,,,, शुरू शुरू में उसकी मां इंकार करती रही उसे यह सब गलत होने की दुहाई देती रहीं लेकिन अंदर से वह भी यही चाहती थी,,,, और फिर वह भी मान गई,,,,।
बाप रे मेरा तो माथा ठनक रहा है,,,, मां बेटे के बीच में भी यह रिश्ता संभव है पहली बार देख रहा हूं,,,,।
मैं भी तो पहली बार ही तेरे मुंह से सुन रही हूं कहानी की किताब को नहीं तो मुझे नहीं मालूम था की मां बेटे के बीच में भी ऐसे रिश्ते भी होते होंगे तब तो ऐसे ना जाने कितने घर होंगे और उनकी घर की चार दिवारी के अंदर इसी तरह के रिश्ते पनप रहे होंगे मां बेटे दोनों मजा ले रहे होंगे,,,।
तो क्या सच में यह हो सकता है,,,।
बिल्कुल हो सकता है मैं तुझसे कही थी ना की कहानी ऐसे ही नहीं लिखी जाती,,, सच्चाई छुपी होती है तभी उसे सच्चाई को कलम के जरिए किताब में लिखी जाती है,,,,,,,
बाप रे गजब की कहानी थी,,,,और वैसे देखा जाए तो कहानी के हालात और हम दोनों के हालात एक जैसे ही हैं,,,,।
(अपने बेटे की यह बात सुनकर सुगंधा के तन-बदन में भेजने की लहर उठने लगी और वह मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,,)
ओहहहह कहीं तेरा इरादा भी उन दोनों की तरह तो नहीं है,,,।
नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो सिर्फ बता रहा था कि वह भी वर्षों से अपने पति के बगैर रही थी और हम दोनों भी पापा के बिना बरसों से रह रहे हैं,,,।
हम दोनों नहीं, तृप्ति भी है,,,
हां वह तो है लेकिन इस समय तो केवल हम दोनों ही हैं,,(अंकित हिम्मत करके अपने मन की बात अपनी मां से बता रहा था वह चाहता था कि उन दोनों के बीच भी कहानी वाली घटना हो जाए)
तुझे क्या लगता है अंकित कि मैं भी उस औरत की तरह हूं क्या,,,, एकदम निर्लज्ज,,,,
नहीं नहीं मैं ऐसा तो नहीं कह रहा हूं,,,।
नहीं तेरे कहने का मतलब क्या है क्या मैं भी उसे औरत की तरह गंदी हरकत करती हूं कहीं ऐसा तो नहीं कहानी पढ़कर तो भी मुझ पर उस लड़के की तरह आजमाना चाहता हो।
यह कैसी बातें कर रही हो मम्मी मैंने ऐसा तो नहीं कहा,,,,।
( अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसकी मां केवल दिखावा कर रही थी, नाटक कर रही थी अंदर से वह क्या चाहती है यह अंकित अच्छी तरह से भली-भांति जानता था,,,,)
चाहे जो भी हो लेकिन कहानी पढ़ने के बाद मुझे तेरा इरादा कुछ अच्छा नहीं लग रहा है,,,,।
चलो कोई बात नहीं,,(कुछ देर तक वहीं बैठे रहते हुए अपनी मां की बात सुनकर कुछ सोचने के बाद इतना के करवा तुरंत उस कीताब को लेकर खड़ा हो गया,,,लेकिन उसके खड़े होने के साथ-साथ उसका लंड भी पूरी तरह से खड़ा हो गया था इसका एहसास उसके पेट में बने तंबू को देखकर अच्छी तरह से समझ में आ रहा था और उसके पेट में बने तंबू पर सुगंधा की नजर पड़ चुकी थी,,,, सुगंधा तो देखते ही रह गई सुगंधा कुछ बात का एहसास हो रहा था की कहानी पढ़ने के बाद उसके बेटे की क्या हालत हो रही है जब उसकी खुद की हालत खराब हो चुकी थी तो उसके बेटे के बारे में क्या कहना,,,, बुर लगातार पानी पर पानी छोड़ रही थी,,,, जिससे उसकी चड्डी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। जिसके गीलेपन की वजह से वह अपने आप को असहज महसूस कर रही थी। और उसे अपनी चड्डी बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था) मैं इस किताब को रख देता हूं और अब ईसे हाथ नहीं लगाऊंगा,,, क्योंकि मुझे लगता है कि,,,,,(अलमारी खोलकर उसमें किताब रखते हुए,,,, लेकिन वह अपनी बात खत्म कर पता है इससे पहले ही सुगंधा बोल पड़ी)
क्या लगता है तुझे,,,?
मुझे लगता है कि,,,(धीरे से अलमारी बंद करके अलमारी का सहारा लेकर खड़े होकर बड़े आराम से)अगर इस किताब को पढ़ते रहे तो फिर हम दोनों के बीच भी कुछ हो जाएगा,,,,,
(इस बार अंकित की बात सुनकर सुगंधा कुछ बोल नहीं पाई क्योंकि सुगंधा को भी यही लग रहा था और वह खुद ऐसा चाहती थी लेकिन अपने बेटे से खुलकर बोलने में शर्म महसूस हो रही थी इस समय सुगंधा की नजर अपने बेटे के पेंट में बने तंबु पर थी और इस बात का एहसास अंकित को भी हो रहा थाअंकित भी यही चाहता था इसलिए अंकित अपने पेंट में बने तंबू को छुपाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रहा था वह एक तरह से अपनी मां को यह जताना चाहता था कि देखो तुम्हारी वजह से मेरे लंड की हालत क्या हो गई है,,,, और सुगंधा अपने मन मेंअपने बेटे के पेट बने तंबू को लेकर कल्पना कर रही थी कि पेट के अंदर उसके बेटे का लंड कितना भयानक लग रहा होगा उसकी लंबाई मोटाई जब पेंट के अंदर इतना गजब का दिखाईवदे रहा है तो पूरी तरह से नंगा हो जाने के बाद तो बिना चोदे ही यह उसकी बुर से पानी निकाल देगा। अपने बेटे के तंबू को देखते हुए वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)
वैसे तो तू सच कह रहा है,,,, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता,,, भले ही हम लोगों की परिस्थिति कहानी की तरह है लेकिन इन सबके बावजूद भी मेरी मर्यादा की डोरी तेरी कच्ची नहीं है कि जैसे हालात में टूट जाए मेरे माता-पिता ने मुझे जो संस्कार दिए हैं उस पर मैं हमेशा खरी उतरूंगी,,,,।
(अपनी मां के मुंह से अपनी मां का पिता के द्वारा दिए गए संस्कार की बात सुनते ही अंकित अपने मन में बोला तुम्हारे संस्कार और संस्कारी घर,,, और वाह रे तुम्हारी मांतुम्हारी मां के बारे में शायद तुम्हें पता नहीं है अगर मैं उसके बारे में बता दूं तो शायद तुम भी साड़ी उठाकर मेरे लंड पर अपनी बर रगड़ने लगोगी,,,, तुम्हें नहीं मालूम है कि तुम्हारी मां रात भर रंडी की तरह मुझसे चुदवा कर घर गई है,,,,लेकिन यह बात वह अपने मन में ही कह रहा था अपनी मां के सामने कहने में उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,, अपनी मां की बात सुनने के बावजूद भी उसे उसकी बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि वह जानता था कि जब उसकी मां की मांमर्यादा में इतनी कच्ची है कि अपने ही नाती के साथ है मजा कर सकती है तो फिर उसकी बेटी तो अभी भी पूरी तरह से जवानी से भरी हुई है वह भला कैसे अपने आप को संभाल कर रख पाएगी,,,,,)
मैं तो यही चाहता हूं कि हम दोनों के बीच ऐसा कुछ भी ना हो,,,, वरना अगर ऐसा कुछ हो गया तो हम दोनों के बीच मां बेटे का पवित्र रिश्ता ही नहीं रह जाएगा,,,।
हां तु सच कह रहा है,,,,।(ऐसा कहते हुए वह गहरी सांस लेने लगी और अपने मन में सोचने लगी कि यह क्या हो गया गंदी किताब की गंदी कहानी के माध्यम से वह अपना निशाना साधना चाहती थी,,, लेकिन बातो का रुख एकदम से दूसरी तरफ घूम गया था,,,, जिसका उसे पता नहीं चला था औरयह सब उसके ही कारण हुआ था इसलिए उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा थाऔर वह अपने आप से ही बोल रही थी की बड़ी सती सावित्री बनाने चली है संस्कार का चोला पहनने चली है,,, ले अब बन जा संस्कारी,,,, खुद से ही खुद की दुश्मन बनी हुई है इतना अच्छा खासा चल रहा थाऐसा नहीं की थोड़ी हिम्मत दिखा कर खेल को आगे बढ़ाने में मदद करें लेकिन खेल को एकदम से दूसरी तरफ घुमा दे जहां पर सिर्फ वही रोज की घीसी पिटी जिंदगी है संस्कारों की चादर है मर्यादा की दीवार है जहां से बाहर निकलना नामुमकिन है,,,,, सुगंधा को अपने आप पर गुस्सा आ रहा था,,, लेकिन अंकितजानता था कि उसकी मां बिल्कुल भी मर्यादा में नहीं रह पाएगी सिर्फ वह बातें कर रही है।
शाम हो चली थी सुगंधा आईने में अपने आप को देखकर बालों को संवार रही थी उसे बाजार जाना था,,, लेकिन इस समय उसके बदन में उत्साह नहीं था,,, क्योंकि अपने चरित्र को ऊंचा बात कर उसने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार दी थी लेकिन अब अपनी करनी को उसे ठीक करना था एक बार फिर से गाड़ी को पटरी पर चढ़ाना था,,,, इसलिए वह अपने बेटे को आवाज लगाने लगी।
हालात पूरी तरह से बिगड़ जाते, यह जो सुनहरा मौका यह जो लाभदाई अवसर हाथ में लगा था वह पूरी तरह से हाथ से निकल जाता है इससे पहले सुगंधा हालात को संभाल लेना चाहती थीइसलिए वह बालों को संभालते हुए अपने बेटे को आवाज लग रही थी।
अंकित ओ अंकित कहां गया,,,,,(ऐसा कहते हुए वहां अपनी साड़ी के पल्लू को थोड़ा सा नीचे की तरफ कर ले रही थी ताकि उसके ब्लाउस से उसकी भारी भरकम चूचियों के बीच की पतली गहरी दरार आईने में उसके बेटे को साथ दिखाई दे सके और इस दौरान हो अपनी गांड का भी जायजा ले रही थी,,,,वह नजर पीछे घूम कर अपने पिछवाड़े को देख रही थी और अपनी साड़ी को कमर से थोड़ा सा और ज्यादा कर दे रही थी ताकि नितंबों के बीच की गहरी लकीरका जो भाग होता है वह साड़ी में अच्छी तरह से उपस कर उसके बेटे को नजर आ सके,,,, सुगंधा आज डोरी वाला ब्लाउज पहनी हुई थीऔर इस डोरी वाले ब्लाउज के चलते ही उसके मन में युक्ति सुझ रही थी और अपनी इस युक्ति को अंजाम देना चाहती थी,,,, अपने बेटे की तरफ से किसी भी प्रकार का जवाब न मिलने पर वह फिर से आवाज लगाते हुए बोली,,,।
अंकित,,, जरा इधर तो आना बेटा मेरी मदद कर दे,,,,,,
(अंकित अपने कमरे में ही थाऔर अपनी मां की बात सुनकर उसके चेहरे पर मुस्कान करने लगी क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से उसकी मां चरित्रवान होने का ढोंग कर रही थी ऐसा बिल्कुल भी नहीं था उसके बदन की गर्मी को उसके चेहरे के उत्तेजना को वह अच्छी तरह से भांप चुका था और उसे इस बात का एहसास हो चुका था कि उसकी मां भी दूसरी औरतों की तरह ही है,,, जिस तरह से दूसरी औरतों चुदास से भर जाने के बाद किसी भी तरह का कदम उठाने से नहीं हिचकीचाती वही हरकत एक हाथ से गुजर जाने के बाद उसकी मां भी कर सकती है,,,और यह अंकित को अपनी मां की बहुत सी हरकतों से अंदाजा लग गया था बार-बार उसकी आंखों के सामने किसी भी तरह से किसी भी बहाने से अपने अंगों का प्रदर्शन करना बेझिझक उसके सामने पेशाब करने के लिए बैठ जाना गंदी किताब का उसके द्वारा पढवाना,,, अपने बदन पर साबुन लगवाना यह सब उसकी मां को दूसरी औरतों के चरित्र में ही ढाल रही थी बस वह ऊपर से सिर्फ दिखावा कर रही थी,,,
अपनी मां की पुकार सुनकर अंकित बिस्तर से नीचे उतर गया था और अपने मन में बोल रहा था चलकर देखें तो सही अब कौन सा नाटक शुरू होने वाला है,,,, अपने मन में ऐसा सोच कर वह अपने कमरे सेबाहर निकल गया और अपनी मां के कमरे पर पहुंच गया दरवाजे पर पहुंचते ही अंदर का नजारा देखा तो वह देखता ही रह गया पहले इस समय उसकी मां नग्न अवस्था में नहीं थी और ना ही अर्धनग्न अवस्था में थी वह संपूर्ण कपड़ों में थी लेकिन कपड़ों में भी उसके बदन से जवानी टपक रही थीकपड़ों में भी उसकी मां कयामत लग रही थी इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था इसलिए तो दरवाजे पर पहुंचते ही हुआ अपनी मां को देखा ही रह गया था और आईने में खुद सुगंधा अपने बेटे को देख रही थी और जिस तरह से वह दरवाजे पर खड़े होकर उसे घुर रहा था यह देखकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी और वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी। अपने बेटे को दरवाजे पर खड़ा देखकर वह आईने में ही अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,,।
क्या हुआ रुक क्यों गया अंदर तो आ,,,।
क्या काम है मम्मी,,,(कमरे में प्रवेश करते हुए अंकित बोला,,,)
अरे देख नहीं रहा है मुझे ब्लाउज की डोरी बंध नहीं रही है,,,, जरा इसे बांध देना तो,,,।
(अपनी मां की बात सुनते ही अंकित अपने मन में बोल दो जमाने का जलवा दिखाना शुरू हो गया और कहती है कि मैं चरित्रवान हूं अगर इसी समय साड़ी उठाकर चोद दुं तो मुझे बिल्कुल भी नहीं रुकेगी खुद ही टांग उठा उठा कर लेगी लेकिन अभी संस्कारी होने का सिर्फ दिखावा कर रही है,,इतना कुछ हो गया है फिर भी अपने मुंह से बोल नहीं पा रही हैइसे अच्छी तो राहुल की मां है जो एक दो मुलाकात में ही मेरे लिए अपनी टांगें खोल दी और अपनी मलाई चटवा दी और अपनी पड़ोस वाली आंटी है जो मौका देखकर मेरे लिए टांग उठा दी और अपना गुलाबी छेद मेरे आगे कर दी,,,,, अपने मन में ऐसी बातें सोचकर वह गहरी सांस लेते हुए अपनी मां के करीब पहुंच गया और आईने में अपनी मां का खूबसूरत खिला हुआ चेहरा देखकर वह बोला,,,)
वाकई में मम्मी तुम बहुत खूबसूरत हो आईने में अपनी सूरत देखो ऐसा लग रहा है कि चांद का टुकड़ा आईने में दिखाई दे रहा है,,,,इस दौरान वह अपनी मां की नंगी चिकनी पीठ को अच्छी तरह से देख रहा था और मजे वाली बात यह थी कि अभी वह सारी नहीं पहनी थी,सिर्फ पेटीकोटा ब्लाउज में खड़ी थी और ब्लाउज भी डोरी वाला होने की वजह से पीछे से पूरी तरह से खुला हुआ था,,, जिससे उसकी नंगी चिकनी पीठ एकदम साफ दिखाई दे रही थी जिसे देखकर अंकित उत्तेजित हो रहा था सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि वह अपने बेटे के सामने किस अवस्था में खड़ी है लेकिन उसे अपने बेटे के सामने इस तरह से खड़े होने में अब किसी भी प्रकार का शर्म महसूस नहीं होता था क्योंकिकई बार तो अपने बेटे के सामने साड़ी उठाकर अपनी नंगी गांड दिखाते हुए पेशाब भी कर चुकी थी और खड़ी भी हो चुकी थी,,,, अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बोला,,,)
अब चल रहने दे,,,, खामखां मक्खन लगाने को,,,, पैसे की जरूरत है तो बोल दे मैं ऐसे ही दे दूंगी लेकिन इस तरह से झूठ मत बोल,,,।
यह क्या कह रही हो मम्मी मैं तुम्हारी खूबसूरती के बारे में भला झूठ क्यों बोलूंगा और अगर मैं झूठ बोल भी रहा हूं तो तुम्हें तो आईने में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा है ना देखो तो सही कितना खूबसूरत चेहरा है तुम्हारा ऐसा लगता है कि जैसे कोई फिल्म की हीरोइन खड़ी है,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा गदगद हुए जा रही थीऔरतों की सबसे बड़ी कमजोरी यही होती है कि अगर कोई मर्द उसके खूबसूरती की तारीफ करती है तो वह उस मर्द की तरफ आकर्षित होने लगती हैऔर इस समय तो उसका बेटा उसके खूबसूरती की तारीफ कर रही थी जिसकी तरफ वह पहले से ही आकर्षित थी इसलिए वह खुशी के मारे अपने गुलाबी छेद से आंसू बहा रही थी,,, फिर भी वह जानबूझ कर अपने बेटे की बात सुनकर बोली,,,)
चल रहने देदो जवान बच्चों की मां होने के बाद खूबसूरती कहां टिकती है बदन में,,,।
यही बात तो मैं भी सोच कर हैरान हूं कि तुम इस करने की इतनी खूबसूरत और आकर्षक हो की पूछो मत,,,(ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा हुआ अपनी मां की नंगी चिकनी पीठ और उभरी हुई नितंबों की तरफ देखकरइस तरह की बातें कर रहा था और आईने में सुगंधा को भी साथ दिखाई दे रहा था कि उसके बेटे की नजर कहां है इसलिए तो उसके बदन में उत्तेजना के साथ-साथ कंपन का भी एहसास हो रहा था,,, गहरी सांस लेते हुए वह अपने बेटे की बात सुनकर बोली,,)
अच्छा चल रहने दे जल्दी से यह डोरी बांध हमें बाजार चलना है थोड़ी खरीदी करना है,,,,।
ओहह मैं तो भूल ही गया,,,(एकदम से वह अपनी मां के खुले हुए ब्लाउज की तरफ हाथ बढ़ाते हुए और उसकी डोरी को दोनों हाथ में पकडते हुए बोला,,, यह सुनकर उसकी मां मुस्कुराते हुए बोली)
अब तो तू भूल ही जाएगा आखिरकार बढ़ा जो हो गया है छोटी-छोटी बातें कहां ध्यान में आने वाली है तेरे,,,,,,,।
नहीं ऐसी बात बिल्कुल भी नहीं है,,,(ब्लाउज की रेशमी डोरी अपने दोनों हाथों में पकड़े हुए वह अपनी मां की नंगी चिकनी पीठ को देख रहा था जो कि एकदम मांसल और भरी हुई थी,,,इस समय उसका मन तो कर रहा था कि अपने प्यार से बातें को अपनी मां की चिकनी पीठ पर रखकर चुंबनों की बौछार कर दे लेकिन ऐसा वह कर नहीं सकता था कमर के नीचे का उभरा हुआ भाग उसकी उत्तेजना को परम शिखर पर ले जा रही थीआईने में बार-बार वह अपनी मां का खूबसूरत चेहरा देख ले रहा था जो कि इस समय पूरी तरह से उत्तेजना से भरा हुआ था,,, तभी उसके ध्यान में आया कि उसकी मां तो ब्रा पहनी नहीं थी,,, उसे थोड़ा आश्चर्य हुआ और वह अपनी मां से बोला,,,)
मम्मी तुम तो ब्लाउज के अंदर कपड़ा नहीं पहनी हो,,,,
ब्रा ना,,,,
हां वही,,,
तेरा अभी ध्यान गया,,,,,।
(अपनी मां की यह बात सुनकर अंकित थोड़ा गनगना गया उसे समझ में आने लगा था कि उसकी मां किसी और उसका ध्यान दिलाना चाहती थी फिर भी अपनी मां की बात का जवाब देते हुए बोला,,,)
हां सच में मेरा ध्यान अभी गया लेकिन तुम ऐसा क्योंकि ब्लाउज के अंदर ब्रा क्यों नहीं पहनी तुम तो हमेशा पहनती हो,,,,
अच्छा तु सब जानता है मैं क्या पहनती हूं क्या नहीं पहनती हूं,,,।
इसमें जाने वाली कौन सी बात है इतना तो पता चलता ही है कि तुम क्या पहनी हो क्या नहीं पहनी हो,,,।
साड़ी के अंदर भी पता चल जाता है क्या पहनी हुं, क्या नहीं पहनी हुं ,,,,की पहनी भी हुं कि नहीं पहनी हुं,,,,।(आईने में अपने बेटे के चेहरे को देखकर मुस्कुराते हुए सुगंधा बोल रही थी,,, और अपनी मां की है बात सुनकर अंकित के तन बदन में आग लग रही थी,,,उसे इस बात की खुशी थी कि उसकी मां को फिर पहले सती सावित्री संस्कारी होनेका सिर्फ दिखावा कर रही थी इस समय उसके बातों का रुख फिर से मदहोशी में डूबने वाला ही था,,,)
नहीं नहींनीचे साड़ी के अंदर क्या पहनी हुई है तो नहीं पता चलता लेकिन ब्लाउज के अंदर पहनी हो कि नहीं पहनी हो यह जरूर पता चल जाता है।
कैसे,,,?
वह कहना कि पीछे से तुम्हारे ब्रा की पट्टी दिखाई देती है,,,।
ओहहहह,,,,, यह बात है,,,,। तब तो बहुत बुरा दिखता होगा,,,।
क्या बात कर रही हो मम्मी ब्लाउज में से जब ब्रा की पट्टी दिखाई देती है तो क्या खराब लगता है कितना अच्छा लगता है देखने वालों को,,,,(अंकित अपने मन की बात बता रहा था और यह हकीकत भी थाअपनी मां का ही नहीं हुआ किसी भी औरत के ब्लाउज में से झांकती हुई ब्रा की पट्टी देखता था तो उत्तेजित हो जाता था,,, अपने बेटे की यह बात सुनकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,, जानबूझकर अपने बेटे की बात पर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)
तो तुझे यह सब देखने में मजा आता हैतुझे जरा भी फर्क नहीं पड़ता कि तेरी मां के ब्लाउज से उसकी ब्रा दिखाई दे रही है देखने वाले उसके बारे में क्या-क्या सोचते होंगे तुझे बता तो देना चाहिए,,,,।
लेकिन मुझे तो कभी खराब नहीं लगा मुझे तो अच्छा लगता था,,,,।
ऊंं,,,,, तू है ही ऐसा,,,, कुछ ना कुछ जरूर झांकता रहता है चल जल्दी से ब्लाउज की डोरी बांध दे,,, बाजार जाने के लिए देर हो रही है,,,,,।
ठीक है मम्मी,,,,(और इतना कहकर वह अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को बांधने लगालेकिन जिस तरह की दोनों मां बेटे में वार्तालाप हो रही थी उसकी वजह से अंकित के पेंट में तंबू सा बन गया था और बार-बार उसकी नजर अपने तंबू के साथ-साथ अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर जा रही थी जो कि इस समय उसके पेंट में बने हुए तंबू से केवल चार अंगुल की ही दूरी पर थी,,,, अपने तंबू को अंकित किसी भी तरह से अपनी मां की गांड से सटा देना चाहता था,,,, लेकिन वह ऐसा सोच ही रहा था कि तभी सुगंधा खुद अपना एक कदम पीछे लेकर एकदम से अपने बेटे के पेंट में बने हुए तंबू को अपनी गांड से सटा दी,,,, अंकित की तो एकदम से हालत खराब हो गई अंकित के पेट में बना तंबू सुगंधा की गांड के बीचों बीच हल्का सा धंसा हुआ थाअंकित को पूरा यकीन था कि उसकी मां को उसकी चुभन का एहसास अच्छी तरह से हो रहा होगा लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह थी कि उसकी मां अपने बेटे की हरकत से जरा सा भी हैरान परेशान नहीं हो रही थी,,, जिससे साफ पता चल रहा था कि उसकी मां भी यही चाहती है,,,,इसीलिए तो वह इस हरकत पर बिल्कुल भी ध्यान न देते हुए वह एकदम सहज बनने का नाटक करते हुए बोली।)
ब्लाउज की डोरी को कस के बांधना ऐसा ना हो कि बाजार में खुल जाए और फिर सब देखते ही रह जाए,,,,।
पहली बात तो ऐसा होगा नहीं और अगर होगा तो सच में देखने वाले की हालत खराब हो जाएगी और दूसरों को पता तो चलेगा कि तुम कितनी खूबसूरत हो,,,(अंकित भीअपनी मां की गांड के बीचों बीच अपने लंड को सटाए हुए बोला,,, पेंट में बना तंबु सहित उसका लंड उसकी मां की गांड में घुसने को तैयार था,,,, और अंकित था किअपने लंड को पीछे लेने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रहा था क्योंकि इतने मात्र से ही उसे परम सुख का आनंद प्राप्त हो रहा था,,,, इसका एहसास सुगंधा को भी अच्छी तरह से हो रहा था,,,,उसे इस बात की खुशी थी कि उसके कहने की वजह से जो गाड़ी पटरी से नीचे उतर चुकी थी वह धीरे-धीरे फिर से पटरी पर चढ़ चुकी थी और अपने बेटे की बात सुनकर वह हंसते हुए बोली,,,)
अच्छा तो तेरे कहने का मतलब यह है कि मैं अपनी खूबसूरती सबको दिखाने के लिए अपने कपड़े उतार कर घूमुं,,।
उतारने के लिए कौन कह रहा है यह तो सिर्फ अचानक अगर कपड़ा खुल गया तो उसकी बात कर रहा हूं,,,।
नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए ठीक तरह से बांधना,,,,,।
ठीक है,,,( इतना कहने के साथ ही वह थोड़ा जोर से गिठान मार कर रेशमी डोरी को खींचा और उसके इस तरह से डोरी को खींचने की वजह से उसकी मां उससे और एकदम से सट गई और अंकित का लंड चौकी भले ही समय पेंट में था फिर भी वह थोड़ा सा और गांड के बीचो-बीच धंस गयाऔर बोला अपने बेटे की इस हरकत पर तो सुगंधा की सांस ही अटक गई,,,, क्योंकि उसे भी मजा आ रहा था,,,,, गिठान मारकर अंकित बोला,,,) इतना ठीक है ना,,,, अगर ज्यादा जोर से बांधुगा तो तुम्हारा दुखने लगेगा,,,,।
(अपने बेटे की यह बात सुनकर सुगंधा मन ही मन में मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा किस बारे में बात कर रहा है,,,, इसलिए वह अपने बेटे की बात सुनकर बोली,,,)
बस इतना ठीक है वरना सच में दुखने लगेगा,,,,।
इसलिए तो कह रहा हूं,,,,,(इस समय भी अंकित के पेंट में बना तंबू सुगंधा की गांड के बीचों बीच घुसा हुआ थामां बेटे दोनों पानी पानी हो रहे थे सुगंधा की बुर पानी छोड़ रही थी और अंकित का लंड लार टपका रहा था,,, थोड़ी देर उसी तरह से खड़े रहने के बादसुगंधा धीरे से अपने बेटे से अलग हुई क्योंकि अपनी बेटी को देखकर सुगंधा को ऐसे लग रहा था कि वह उससे अलग होना नहीं चाहता,,,, और फिर,,, अपने बेटे से बोली,,,)
जा जाकर जल्दी से तैयार हो जा हमें बाजार जाना है,,,
ठीक है मम्मी इतना कहकर वह अपनी मां के कमरे से बाहर जाने लगा लेकिन ईस बीच उसके पेंट में बना हुआ तंबू एकदम साफ दिखाई दे रहा था जिस पर सुगंधा की नजर थी,,,,अंकित कमरे से बाहर जा चुका था और फिर सुगंधा आईने में अपने आप को देखते हुए मुस्कुरा रही थी और थोड़ी देर में तैयार हो गई थी,,,, अंकित भी तैयार होकर फिर से अपनी मां के कमरे में आ गया था इस बार अपने बेटे को करीब देखकर सुगंधा से अपने आप पर काबू नहीं हो सका और वह तुरंत अपने बेटे कोअपनी बाहों में भरकर उसके होठों पर चुंबन जल्दी अपनी मां की हरकत पर अंकित पूरी तरह से सन्न रह गया था उसे कुछ समझ में नहीं आया,,, सुगंधा अपने बेटे के होंठों पर अपने होंठ रखकर उसे चुंबन कर रही थी,,,,, यह बेहद मादकता भरा था,,, उत्तेजना से भरा हुआ,,,, अपनी मां की हरकत सेअंकित पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी मां इस तरह से उसे चुंबन करेगी,,, अंकित भी अपने आप को संभाल नहीं पाया और वह भी जवाबी कार्यवाही में अपनी मां के लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर उसका रस चूसना शुरू कर दिया,,,,इस समय अंकित अपनी मां से भी तेज हो गया था वह तुरंत अपने दोनों हाथों को अपनी मां की पीठ पर ले आया और हल्के हल्के से सहलाते हुए देखते ही देखे कब उसके नितंबों पर उसकी हथेली पहुंच गई यह अंकित को भी पता नहीं चलाऔर वह अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर दबाने लगा जिसकी वजह से उसके पेट में फिर से तंबू बन गया था और इस बार उसका तंबू उसकी मां की बुर पर सीधा ठोकर मार रहा था पेंट और साड़ी में होने के बावजूद भी एक दूसरे के अंग की गर्मी दोनों को अच्छी तरह से महसूस हो रही थी और सुगंधा तो अपने बेटे के तंबु की ठोकर को अपनी कोमल बुर पर महसूस करके पानी पानी हुई जा रही थी।
सुगंधा की भावनाएं भड़क रही थी साथ में उसका बेटा भी पागल होने को तैयार हो चुका था वह अपने मन में सोच रहा था कि काश उसकी मां अपनी साड़ी कमर तक उठा देती तो इसी समय उसकी चुदाई कर दिया होता और यही बात सुगंधा भी अपने मन में सोच रही थी कि बस थोड़ी सी हिम्मत दिखाने की जरूरत है फिर उसका बेटा हमेशा के लिए उसका हो जाएगा लेकिन अपनी मंजिल के इतने करीब पहुंचने के बाद भी मां बेटे में कोई भी इससे आगे अपना कदम नहीं बढ़ा रहा था,,,,लेकिन जो आनंद की अनुभूति इस समय मां बेटे को हो रही थी वह बेहद अद्भुत और अकल्पनीय थी रात को छत पर सोते समय जिस तरह की हरकत अंकित ने किया था उससे भी ज्यादा मादक मदहोशी और नशा का असर इस समय हो रहा था,,,, सुगंधा को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसके बेटे का लंड कितना कठोर है,,,,सुगंधा अपने बेटे के लंड की कठोरता को अपने कोमल बुर की अंदरूनी दीवारों पर उसे रगड़ता हुआ महसूस करना चाहती थीवह चाहती थी कि उसका बेटा बेरहम होकर अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में एक झटके से डाल दे,,,, ताकि बुर की हालत खराब हो जाए बहुत परेशान कर रही है उसे उसकी बुर इसका एहसास उसे अच्छी तरह से था,,,,,
कुछ देर तक इस प्रगाढ़ चुंबन के चलतेअंकित की हिम्मत थोड़ी बढ़ने लगी थी और वह दोनों हाथों में अपनी मां की साड़ी को पकड़ लिया था और थोड़ी हिम्मत दिखा कर उसे ऊपर उठने की कोशिश कर ही रहा था कि,,,, घड़ी में शाम के 5:00 बजने का अलार्म बजने लगा और उस अलार्म की आवाज के साथ ही सुगंधा एकदम से होश में आ गई क्योंकि वहां एकदम मदहोश हो चुकी थी उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा छाने लगा था जवानी का नशा तो अलग से उसे बेकाबू किए हुए था,,, वह एकदम से अपने बेटे से अलग हुई और गहरी गहरी सांस लेने लगी,अंकित की हालत एकदम खराब हो गई थी ऐसा लग रहा था कि उसके हाथ से कोई उसका खूबसूरत खिलौना छीन लिया हो क्योंकि वह मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझ रहा था,,,, अच्छी तरह से जानता था कि इस समय हालात किस तरह के थेउसे पूरा विश्वास था कि अगर वह अपनी मां की साड़ी उठाकर उसकी बुर में अपना लंड डाल देता तो भी उसकी मां बिल्कुल भी इनकार नहीं कर पाती क्योंकि वह अपनी मां की बदन की गर्मी को पहचान किया था उसके अंदर उठ रहे वासना के तूफान को समझ गया था जिसे शांत करना बेहद जरूरी था लेकिन पल भर के लिए सारा मामला एकदम से शांत हो गया था, वह भी गहरी गहरी सांस ले रहा था,,,, और गहरी सांस लेते हुए वह अपनी मां से बोला,,,)
तुम इस तरह से चुंबन क्यों करने लगी,।
उसने तुझे बताई थी ना जब कोई बहुत अच्छा लगता है तो उसे इस तरह से चुंबन किया जाता है जैसा कि तूने मेरा किया आज तो भी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था इसलिए चुंबन करने लगी तुझे अच्छा नहीं लगा क्या,,?
मुझे तो बहुत अच्छा लगा लेकिनतुम मुझे बार-बार अच्छी लगती हो हमेशा अच्छी लगती हो तो क्या मैं बार-बार तुम्हें चुंबन कर सकता हूं,,।
बिल्कुल जब जब तुझे मैं अच्छी लगु तब तब तु इसी तरह से चुंबन कर लिया कर मैं तुझे बिल्कुल भी नहीं बोलूंगी,,,।
सच में मम्मी,,,।
हां रे बिलकुल इसमें कोई बड़ी बात थोड़ी है,,,।
ओहहहह मम्मी तुम कितनी अच्छी हो,,,,
अच्छा चल 5:00 बच गए हैं बाजार जाना है फिर आकर खाना भी बनाना है,,,,,।
चलो ठीक है मैं थैला ले लेता हूं,,,,
(थोड़ी ही देर में मां बेटे दोनों बाजार के लिए निकल गए थेदोनों बहुत खुश नजर आ रहे थे क्योंकि दोनों के बीच काफी कुछ हो चुका था तृप्ति के घर में न होने से दोनों को कितना समय और खुलापन मिल रहा था यह दोनों को और भी ज्यादा संतुष्टि का एहसास दिला रहा था,,,, अगर त्रप्ति घर पर मौजूद होती तो शायद इतनी जल्दी दोनों में खुलापन नहीं आ पाता इसलिए तो दोनों एकदम इत्मिनान से रह रहे थे अभी तृप्ति के गए तीन दिन ही भेज रहे थे इन तीन दिनों में मां बेटे दोनों काफी मंजिल को तय कर चुके थेलेकिन अभी तक मंजिल को प्राप्त नहीं कर पाए थे लेकिन उन दोनों को विश्वास था कि जल्द ही दोनों मंजिल प्राप्त कर लेंगे। दोनों एक दूसरे से बातें करते हुए फुटपाथ पर चलते चले जा रहे थे सूरज अभी डूबा नहीं था कुछ बच्चे फुटपाथ के बगल में क्रिकेट खेल रहे थे,,, सुगंधा बातों में मजबूर थी कि तभी एक रबर की गेंद बड़ी तेजी से आई और उसकी जांघ से टकरा गई,,,, इस वजह से सुगंधा एकदम से भौंचक्की रह गई पल भर के लिए तो उसे समझ में नहीं आया कि क्या हुआ,,,, लेकिन अंकित को समझ में आ गया था कि उसकी मां की जांघ से रबड़ की गेंद टकरा गई थी सुगंधासाफ तौर पर बज चुकी थी भले ही रबड़ की गेंद उसकी जान से टकरा गई थी लेकिन वह एकदम सामान्य था अगर रबड़ की गेम थोड़ी और ऊपर होती तो सीधे उसकी बुर पर वार करती तब उसे चोट लग सकती थी। लेकिन वह एकदम साफ बच चुकी थी।)
तुम्हें चोट तो नहीं लगी मम्मी,,,,(अंकित अभी हैरान होकर यह सवाल पूछी रहा था कि तभी एक छोटा बच्चा आया और रबड़ के गेंद को अपने हाथ में उठा लिया लेकिन सुगंधा से बोला,,)
सॉरी आंटी जानबूझकर नहीं बल्कि गलती से लग गई है,,,।
कोई बात नहीं बेटा,,,,,।
(और इतना कहकर वह लड़का चला गया वैसे तो सुगंधा के साथ-साथ उसके बेटे को भी बहुत गुस्सा आया था लेकिनवह लड़का उम्र में काफी छोटा था इसलिए कुछ बोला नहीं जा सका लेकिन फिर भी अंकित अपनी मां से बोला,,)
लगी तो नहीं है ना,,,।
नहीं लगी तो नहीं है,,,,।
(फिर इसके बाद दोनों बाजार में खरीदी करते रहें लेकिन इस बीच रबड़ के गेंद के लगने की वजह से सुगंधा का दिमाग बड़ी तेजी से दौड़ रहा था,,,, बेटे दोनों सब्जी और जरूरी सामान खरीद कर एक मेडिकल के सामने आकर खड़े हो गए सुगंधा का इस तरह से मेडिकल के पास खड़े होने से अंकित बोला,,)
जहां क्यों खड़ी हो गई मम्मी,,,,
जा जाकर एक मूव ले ले तो,,,,(अपने पर्स में से पैसे निकालते हुए)
मूव ,,,,,,,लेकिन किस लिए,,,,!(आश्चर्य जताते हुए अंकित बोला)
जहां गेंद लगी थी वहां थोड़ा-थोड़ा दर्द कर रहा है मुझे लग रहा है की दवा लगाना पड़ेगा,,,,।
ओहहहह ,,, लेकिन तब तो तुम कुछ नहीं बोली,,,।
उस समय लग ही नहीं रहा था कि दर्द करेगा अब जा जाकर जल्दी से ले ले,,,,(इतना कहते हुए सुगंधा अपने बेटे के हाथ में पैसा थमा दी और पैसे लेकर अंकित मेडिकल पर जाकर मुंह लेने लगा सुगंधा के मन में कुछ और ही चल रहा था वह मन ही मन में खुश हो रही थीथोड़ी देर में अंकित मुव लेकर आ गया और फिर दोनों घर के लिए निकल गए,,,, घर पर पहुंच कर सुगंधा अपने बेटे के सामने जानबूझकर हल्के हल्केलंगड़ा कर चल रही थी यह जताना चाहती थी कि उसे दर्द हो रहा है और अंकित अपनी मां की चाल देखकर थोड़ा परेशान हो रहा था,,,,वह बार-बार अपनी मां से पूछ भी रहा था लेकिन उसकी मां हर बार यही जवाब दे रही थी कि ठीक है कोई ज्यादा दिक्कत नहीं है,,,,,
खाना बनाकर तैयार हो चुका था और मां बेटे दोनों खाना खा चुके थे खाना खाने के बाद सुगंधा उसी तरह से सफाई में लग गई थी,,, अपनी मां की स्थिति को देखते हुए अंकित भी अपनी मां के काम में हाथ बता रहा था काम खत्म होने के बाद सुगंधा अपने कमरे में पहुंच चुकी थी,, और कमरे में अपने बेटे के आने का इंतजार कर रही थी क्योंकि वह अपनी युक्ति को अंजाम में बदलना चाहती थी और उस पल का उसे बेसब्री से इंतजार था,,,, थोड़ी ही देर मेंअंकित भी अपनी मां के कमरे में आ गया और इस तरह से बैठा हुआ देखकर वह बोला,,,)
क्या हुआ मम्मी यहां क्यों बैठी हो चलो छत पर,,,।
थोड़ी देर बाद चलूंगी जा जाकर थैले में से मुव लेकर आजा,,,,,
क्यों क्या हुआ ज्यादा तकलीफ है क्या,,,?
थोड़ा दर्द कर रहा है मालिश कर लूंगी तो आराम हो जाएगा,,,, जा जा कर लेकर आजा,,,।
रखी कहां हो,,,?
रसोई घर में है थैले के अंदर जिसमें सब्जी लेकर आई थी,,,,
ठीक है मैं अभी लेकर आता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां के कमरे में से बाहर निकल गया और मौका देखकर सुगंधा नहीं मन में खुश होते हुए जल्दी से बिस्तर से नीचे उतरी और अपनी पैंटी उतार कर उसे बिस्तर के नीचे रख दी क्योंकि उसे लगने लगा था कि आज की रात निर्णायक रात है,,,, उन दोनों के बीच जो कुछ होना है आज की रात हे जाना चाहिए अगर आज की रात भी दोनों आगे नहीं बढ़ पाए तो समझ लो दोनों सबसे बड़े बेवकूफ है अपने मन में यही सोचते हुए वह अपने बेटे के आने का इंतजार करने लगी,,)
सुगंधा के कहने पर अंकित मुव लेने चला गया था और उसके जाते ही सुगंधा मौके का फायदा उठाते हुए जल्दी-जल्दी बिस्तर से नीचे उतरकर अपनी पेंटि उतार दी और उसे बिस्तर के नीचे दबा दी और फिर से उसी तरह से बैठ गई,,, आगे की सोच कर उसके बदन में कसमसाहट बढ़ रही थीक्योंकि आज वह अपने मन में यही सोच रही थी कि आज की रात उसे जरूर कुछ करना होगाताकि दोनों के बीच की शर्म पूरी तरह से खत्म हो जाए और दोनों एक एकाकार हो जाए। बार-बार सुगंधा की नजर दरवाजे पर जा रही थी उसके बदन में गुदगुदाहट हो रही थी,,, और अंकित की भी हालत कुछ ऐसी ही थी मुंह लेने के लिए वह रसोई घर में पहुंच चुका था और थैले में हाथ डालकर वह मूव निकल भी गया था,,, और अपने मन में सोच रहा था कि कशमालिश करने का मौका उसे मिल जाता तो कितना मजा आता है यही सोचता हुआ वह मूव को अपने हाथ में ले लिया और अपनी मां के कमरे की तरफ आगे बढ़ गया,,,, दरवाजे पर पहुंचते ही देखा तो उसकी मां उसी तरह से बैठी हुई थी,,,, अपनी मां को देखते ही वह कमरे के अंदर दाखिल होता हुआ बोला,,,।
ज्यादा दर्द कर रहा है क्या मम्मी,,,,
हा रे शुरू शुरू में तो कुछ भी महसूस नहीं हुआ था लेकिन इस समय बहुत दर्द कर रहा है,,,,।
गेंद ज्यादा जोर से लगी थी ना,,,।
उस समय तो ऐसा नहीं लग रहा था लेकिन अभी दर्द कर रहा है,,,,।
ठीक है ये लो क्रीम,,, लेकिन क्या यह असर करेगी,,,।
करती होगी तभी तो टीवी पर इसकी एडवर्टाइज आती है,,,।
(अपनी मां की बातें सुनकर उसे थोड़ा तोफिक्र हो रहा था कि अगर सच में दर्द कर रहा होगा तो मुसीबत वाली बात हो जाएगी लेकिन फिर भी वह अपनी मां का मन लेने के लिए बोला)
अच्छा ठीक है मम्मी तुम मालिश करो मैं छत पर जाकर बिस्तर लगा देता हूं,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को गुस्सा आ रहा था अपने बेटे के भोलेपन पर अंदर ही अंदर गुस्सा कर रही थी और अभी इस बात के लिए कीजिसके लिए वह खुद इतना कुछ कर रही है सब कुछ दिखाने के लिए तैयार है वह खुद कुछ भी देखने की सोच भी नहीं रहा है जबकि खुले शब्दों में बोल भी चुकी हूं कि चोट जांघ के ऊपर लगी है,,, फिर भी कितना नादान है,,,अपने बेटे की बात सुनकर वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,)
कैसा बेटा है रे तू देख रहा है कि मां को चोट लगी है और तु बिस्तर लगाने के बारे में सोच रहा है,,।
नहीं मम्मी ऐसी कोई बात नहीं है,,,मैं तो इसलिए कह रहा था कि तुम जल्दी से मालिश कर लो तब तक मैं बिस्तर लगा देता हूं ताकि तुम्हें बिस्तर लगाना ना पड़े,,,,,।
तुझे बिस्तर लगाने की पड़ी है लेकिन मेरे चोट के बारे में कुछ सोच नहीं रहा है।
तो में अब कर भी क्या सकता हूं मम्मी,,,, इस समय तो दवा खाना भी बंद हो गया होगा। नहीं तो मैं इस समय तुम्हें दवा दिलवा दिया होता,,,,।
दवा दिलवाने की जरूरत नहीं है,,,,।
,, तो फिर,,,
ले तू ही अच्छे से मालिश कर दे,,,,( बिस्तर पर रखी हुई ट्यूब को उठाकर अपने बेटे की तरफ आगे बढ़ाते हुए वह बोली,,,, सुगंधा मूव क्रीम के द्वाराअपना निशाना साधना चाहती थी अपनी मंजिल तक पहुंचाना चाहती थी क्योंकि चोट भी ऐसी जगह लगी थी जिस पर मालिश करते हुए उसके बेटे के द्वाराउसकी गुलाबी गली देखने का उसे भरपूर मौका मिलने वाला था और यह मौका खुद सुगंधा अपने बेटे को देना चाहती थी क्योंकि अभी तक वह अपनी गुलाबी गली को सिर्फ उसे दिखाते आ रही थी लेकिन आज वह सोच रही थी कि उसे गुलाबी गली में वह पूरी तरह से घूमे,,,,अपनी मां की बात सुनकर अंकित की भी आंखों में वासना का तूफान उठने लगा जो कुछ भी वह अपने मन में सोच रहा था वह सच होने वाला था इसलिए बिल्कुल भी देर ना करते हुए वह अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और अपनी मां के हाथ से वह क्रीम लेता हुआ बोला,,,)
ठीक है इतना तो मैं कर ही सकता हूं तुम्हारी सेवा में,,,, चलो देखु तो सही चोट किस जगह लगी हुई है,,,,।
चोट तो ऐसी जगह लगी है बेटा कि मेरी तो दिखाने की हिम्मत नहीं हो रही है शर्म से मेरी हालत खराब हो रही है,,,,।
तब तो दवा खाने में कैसे दिखाती,,
इसलिए तो मुझे दवा खाने नहीं जाना है मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मालिश से मेरा दर्द ठीक हो जाएगा,,,,।
अगर तुम्हें इतना विश्वास है तो जरूर मैं तुम्हारे विश्वास पर खरा उतरूंगा,जो तुमने मुझे मौका दी हो मे भी इस मौके का पूरा फायदा उठाऊंगा,,,,(अंकित जानबूझकरदो अर्थ में बात कर रहा था और उसकी मां उसके कहने के मतलब को समझ रही थी इसके लिए उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी थी,,,और वह भी अपने मन में कह रही थी कि मैं भी तुझे मौका देना चाहती हूं देखना चाहती हूं कि तू सच में पूरा मर्द बन चुका है कि नहीं,,,, सुगंधा दरवाजे की तरफ देख रही थी यह देखकर अंकित बोला,,,)
वहां क्या देख रही हो,,,?
दरवाजा तो बंद कर दे,,,
लेकिन किस लिए यहां कौन सा हम लोग गलत काम करने जा रहे हैं जो दरवाजा बंद करना पड़े और वैसे भी तुम्हारे और मेरे सिवा घर पर तो कोई है नहीं,,,,।
तुझे बहुत गलत काम करने का मन कर रहा है ना,,,, मैं इसलिए कह रही हूं कि जहां पर मालिश करना है,,, वह थोड़ी ऊपरी जगह पर है इसलिए दरवाजा बंद कर दे,,,
(अंकित अपनी मां की हालत को अच्छी तरह से समझ रहा था,,,औरतों की यही बात सबसे अच्छी होती है कि अगर घर में कोई तीसरा शख्स ना हो तो भी फिर कुछ भी करते समय उन्हें दरवाजा बंद करने की आदत रहती है क्योंकि बंद कमरे में चार दिवारी के अंदर वह कुछ ज्यादा ही खुल जाती हैं,,,, इसलिए अपनी मां की बात मानते हुए वह दरवाजे तक गया और दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दिया दरवाजा बंद करते समय और उस पर कड़ी लगाते समय अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि वह जानता था कि किस हालत में इस तरह से दरवाजा बंद किया जाता है अगर कमरे के अंदर एक खूबसूरत औरत हो तो,,, धीरे-धीरे अभी से ही अंकित के पेंट में तंबू बनना शुरू हो गया था,,, अंकित दरवाजा बंद करके वापस आ गया था,,,, और अपनी मां से बोला,,,)
अब लेट जाओ ताकि मैं अच्छे से मालिश कर सकूं,,,,,।
नहीं ऐसे ही मालिश करदे रुक,,,(सुगंधा इस तरह से बैठे हुए ही दोनों हाथों से अपनी साड़ी पकड़ कर ऊपर की तरफ उठने लगी वह बिस्तर पर गांड टीका कर बैठी हुई थी और उसकी गांड के वजन से नरम-दनरम गद्दा भी एकदम अंदर तक धंस गया था,,, सुगंधा का दिल जो रास्ता लग रहा था क्योंकि वह जानती थी कि वह अपने बेटे के सामने क्या करने जा रही हैदेखते-देखते वह बैठी अवस्था में ही अपनी साड़ी को घुटनों तक उठा दी थीऔर यह देखकर अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था वह बड़ी बेसब्री से अपनी मां की हरकत को देख रहा था उसकी गोरी गोरी टांग को देख रहा था,,,, और जानबूझकर सहज बनने के लिए बीच-बीच में बात भी कर रहा था)
कुछ ज्यादा ही ऊपर लग गई थी गेंद ऐसा लग रहा है,,
हां रे,,, बहुत ऊपर लगी है पहले से दर्द नहीं कर रहा था लेकिन अभी बहुत दर्द कर रहा है,,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी साड़ी को दोनों टांग आगे की तरफ किए हुए अपनी ज़ांघो तक साड़ी को उठा दी थी,,, अंकित की आंखें अपनी मां की गहराई जवान देखकर फटी के फटी रहे जा रही थीइस समय वह जिस तरह से बैठी थी उसकी मोटी मोटी जांघें केले के पेड़ के तने की तरह चिकनी चिकनी दिखाई दे रही थी जिसे देखकर पेट के अंदर अंकित का लंड अकड़ने लगा था,,,, अंकित चाहता था कि उसकी मां जल्दी से अपनी जवानी पर से पर्दा हटा दे क्योंकि वह जल्द से जल्द अपनी मां की गुलाबी गुफा को देखना चाहता था अभी उसके मन में यह शंका थी कि उसकी मां साड़ी के अंदर चड्डी पहनी है कि नहीं पहनी है अगर चड्डी पहनी हुई तो सारा मजा कीरकीरा हो जाएगा,,,, इसलिए वह मन ही मन में मना रहा था कि उसकी मां साड़ी के अंदर चड्डी ना पहनी हो,,, देखते देखते सुगंध अपनी साड़ी को जांघों उठा दी थी,,,
साड़ी उठते समय जिस तरह की उत्सुकता उसे देखने में उसके बेटे की हो रही थी उससे कहीं ज्यादा उत्सुक वह खुद थी अपने बेटे को अपनी गुलाबी बुर दिखाने के लिए,,, उसका दील भी बड़े जोरों से धड़क रहा था और मदहोशी उसकी बुर से मदन रस टपक रहा था,,, आधी जांघों तक साड़ी उठ जाने के बाद अंकित बोला,,,,।
यही लगी है क्या,,?(उंगली के इशारे से अंकित बोला)
नहीं रे थोड़ा और ऊपर लगी है,,,,,(गहरी सांस लेते हुए सुगंधा बोली,,,, दोनों किस से ऊपर नीचे हो रही थी दोनों मदहोशी की पराकाष्ठा तक पहुंच रहे थे अपने आप को एकदम उत्तेजित अवस्था में देखकर अंकित वही बिस्तर पर बैठ गया..अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देखने की कोशिश करने लगा जो कि इस समय आपस में सटी हुई थी,, जिसे देखकर अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया और अपनी मां से बोला,,,)
थोड़ा टांगों को खोलो तब ना पता चलेगा की कहां लगी है,,,,।
(अंकित एकदम उत्साहित होता हुआ बोल रहा था और अपने बेटे की यह बात सुनकर सुगंधा भी मन ही मन में मुस्कुराने लगी थीक्योंकि सुगंधा को इस बात का एहसास अच्छी तरह से था कि उसका बेटा उसके जांघों पर लगी चोट को नहीं बल्कि उसके गुलाबी छेद को देखना चाहता हैं,,,, और यही तो खुद वह अपने बेटे को दिखाने के लिए सारा खेल रच रही थी इसलिए अपने बेटे की बात सुनते ही वह तुरंत अपने पर को घुटनों से एकदम से मोड़ ली और एकदम से तकरीबन डेढ़ फीट की दूरी तक उसे खोल दी उसकी दोनों टांगों के बीच डेढ़ फीट की दूरी बनी हुई थी,,, और उसके ऐसा करते हीअंकित की आंखों के सामने उसकी मां की गुलाबी पर जो एकदम उत्तेजना में कचोरी की तरह फूल गई थी वह एकदम से नजर आने लगी अंकित तो सामने बिस्तर पर बैठा बैठा अपनी मां की गदराई जवानी के प्रमुख ढांचे को देखकर पागल हो गया आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया,,, वह पहली बार अपनी मां की बुर नहीं देख रहा था लेकिन फिर भी इस समय वह काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था क्योंकि हालात ही कुछ ऐसे थे,,,वह अपनी मां के कमरे में बैठा हुआ था और एक ही बिस्तर पर दोनों बैठे हुए थे उसकी मां अपनी जांघों की चोट दिखाते दिखाते कब अपनी गुलाबी बुर उजागर कर दी कुछ पता ही नहीं चला।अंकित की हालत यह सोचकर और ज्यादा खराब हो रही थी कि उसकी मां साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनी थी जिसके बारे में वह सोचकर हैरान हो रहा थाअंकित अपने मन में यही चाहता था कि उसकी मां अंदर चड्डी ना पहनी हो ताकि वह सब कुछ अपनी आंखों से देख सके और यही हो भी रहा था इसलिए उसके चेहरे पर उत्तेजना के साथ-साथ प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे
चोट का ख्यालअंकित और उसकी मां के दिमाग से एकदम से निकल गया था क्योंकि इस समय जिस तरह के हालात में वह बैठी हुई थी अपनी दोनों टांगें खोलकर उसे भी अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी गुलाबी बुर एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, और यही तो अपने बेटे को दिखाने के लिए वह मौका देखकर अपनी चड्डी उतार दी थी,,,ताकि उसका बेटा उसकी नंगी बुर को देख सके उसके दर्शन कर सके ना की चड्डी में होने की वजह से वह भी निराश हो जाए क्योंकि उस समय वह अपने बेटे को चोट दिखाते दिखाते अपनी चड्डी तो नहीं उतार सकती थी ना,,,, माहौल पूरी तरह से एक पल में गर्म हो चुका था अंकित की आंखें अपनी मां की दोनों टांगों से बिल्कुल भी नहीं हट रही थी। और सुगंधा खुद अपने बेटे को अपनी बुर दिखाने से पीछे नहीं हट रही थी।अंकित अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देख रहा था और सुगंध अपने बेटे की तरफ देख रही थी दोनों की आंखों में वासना का तूफान उठ रहा था दोनों की आंखों में एक दूसरे को पाने की चाहत दिखाई दे रही थी। अंकित को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर मदन रस से भीगी हुई थी। अपने बेटे की हालत देखकर सुगंधा को बहुत अच्छा लग रहा था वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, लेकिन एक बार फिर से सहज बनते हुए वह अपने बेटे से बोली,,,)
दिखाई दिया तुझे चोट,,,,,,
नहीं तो,,,,(अंकित एकदम मदहोश सा अपनी मां की बुर देखते हुए बोल रहा था उसे इस समय और कुछ नहीं दिखाई दे रहा था,,,,, और यह सुगंधा के लिए काफी उत्साहित कर देने वाली बातें थी वह अपने बेटे की हालत को देखकर बहुत खुश हो रही थी लेकिन फिर भी उसका ध्यान चोट पर ले जाना बहुत जरूरी था वरनासुगंधा के मन में हो रहा था कि उसका बेटा यही समझेगा कि उसकी मां अपनी बुर दिखाने के लिए सारा खेल रच रही थी इसलिए वहां अपनी टांग के नीचे से अपनी हथेली को अपनी जांघों तक ले गई और जहां पर दर्द कर रहा था वहां पर अपनी उंगली रखते हुए बोली,,,)
तुझे दिखाई दे रहा है देख यहां पर मुझे दर्द हो रहा है,,,,।
(अपनी मां की इस दिशा निर्देश परवह थोड़ा होश में आया और अपनी मां की बात पर ध्यान देने लगा और वह अपनी मां की बुर के निचले हिस्से की जांघ की तरफ देखने लगा जहां पर वह उंगली से दिखआ रही थीअंकित घुटनों के बल चलते हुए अपनी मां की दोनों टांगों की बेहद करीब तक आया और उसे जगह को देखने लगा जहां पर उसकी मां उंगली से दिखा रही थी और फिर उस जगह को देखते हुए बोला,,,)
हां मम्मी यह तो हल्की-हल्की लाल हो गई है,,,,।
बेटा यह तो उस गेंद की चोट की वजह से हल्की-हल्की लाल हो गई है,,, लेकिन जो तूने जो दर्द दिया है उसकी वजह से तो मेरी पूरी बुर गुलाबी हो गई है,,,(अपने बेटे की बात सुनकर वह अपने मन में ही बोली,,,,)
तभी तो दर्द कर रहा है,,,।
तुम अच्छा हुआ मूव खरीद ली इससे तुम्हें आराम मिल जाएगा लाओ लगा दुं,,,,,।
लगा दे अच्छे से,,,,।
थोड़ा लेट जाओ तब अच्छे से लग जाएगा,,,,,(अंकित जानबूझकर अपनी मां को लेट जाने के लिए कह रहा था क्योंकि वह जानता था कि लेटने से उसकी मां की बुर उसे और अच्छे से दिखाई देने लगेगी,,,, और सुगंधा भी अपने बेटे की बात मानते हुए धीरे से लेट गई,,,, और बोली,,,)
अब तो कर लेगा ना अच्छे से मालिश,,,,।
बिल्कुल एकदम साफ दिखाई दे रहा है,,,(अपनी मां की बुर देखते हुए) की कितनी हालत खराब है,,,,(वह अपनी मां की बुर की हालत को देख कर कह रहा था ना की चोट को देखकर और उसकी बात को सुगंधा भी अच्छी तरह से समझ रही थी। और मन ही मन में खुश भी हो रही थी,,, और वह धीरे से क्रीम का ढक्कन खोलने लगा और अपनी मां से बोला,,,)अब तुम इत्मानाम से लेटी रहो थोड़ी देर में तुम्हें आराम मिल जाएगा,,,,(ऐसा कहते हुएअंकित अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देख रहा था जो कि इस समय लेटने की वजह से खुद ही उसकी साड़ी थोड़ा गुलाबी बुर को ढंक ली थी,,, और ऐसा वह जानबूझकर नहीं की थी। जब वह बिस्तर पर पीठ के बल लेट रही थी तभी उसकी साड़ी सरक कर उसके गुलाबी छेंद को ढंक दी थी,,, और अपनी ही साड़ी की यह हरकत सुगंधा को अच्छी नहीं लगी थी,,और वह इस समय अपने हाथों से साड़ी को ऊपर उठा नहीं सकती थी। और यह बात अंकित को भी अच्छी नहीं लगी थी,, लेकिन इस बात से सुगंधा खुश भी थी,,, क्योंकि वह देखना चाहती थी कि अब उसका बेटा क्या करता है,,,अपने हाथों से उसकी साड़ी उठाकर उसकी बुर देखने की कोशिश करता है कि फिर बुद्धू बनकर सिर्फ मालिश ही करता रहेगा,,, फिर भी मौके की नजाकत को समझते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली,,,।
मेरी हालत को ठीक करना अब तेरी जिम्मेदारी है देखती हूं कि तो क्या कर सकता है।
बिल्कुल भी फिक्र मत करो,,,, मैं अभी हालत में सुधार ला देता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह क्रीम दबाकर उसमें से दवा निकालने लगा,,, ऐसा करते हुए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था।क्योंकि कुछ ही देर में वह चाहता था कि उसकी हथेली उसकी मां की बुर के बेहद करीब हरकत करने वाली थी,,,, देखते ही देखते अंकित एकदम उत्तेजना से भरे हुएअपने दोनों हाथों से अपनी मां के टांग को थोड़ा सा और खोल दिया और ऐसा करने में जो अद्भुत सुख का उसे एहसास हुआ वह वर्णन करने जैसा नहीं था पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था।क्योंकि इस समय उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की चुदाई करने के लिए उसकी टांगों को खोल रहा हूं क्योंकि अक्सर मर्द औरत की टांग इसीलिए खोलने भी हैं वह तो कभी कबार इस तरह से मदद करने के लिए खोल दिया जाता है वरना अक्सर मर्दों का काम यही होता है और जैसा एहसास अंकीत को हो रहा था वैसा एहसास सुगंधा को भी हो रहा था,,, क्योंकि बरसों गुजर गए थे इस एहसास से गुजरे,, पल भर में ही उसे बीते हुए वह दिन याद आने लगे जब ईसी तरह से अंकित के पापा उसे छोड़ने के लिए इसी तरह से उसकी टांगों को खोलते थे,,,,। इस समय के हालात कुछ और थे,,,, सुगंधा का दिल जोरो से डल रहा था और जिस तरह से वहगहरी गहरी सांस ले रही थी उसके चलते हैं उसकी खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज में कैद होने के बावजूद भी ऊपर नीचे होकर अपने होने का एहसास कर रही थी जिस पर बार-बार अंकित की नजर चली जा रही थी।
सुगंधा का गुलाबी छेद जो इस समय उसके ही साड़ी के किनारी से हल्का सा ढंक गया था। उसके बारे में सोच कर अंकित पागल हुआ जा रहा थाक्योंकि कुछ पल पहले ही वह अपनी मां के उसे खूबसूरत अंग को देख चुका था और उसकी खूबसूरती उभर कर उसकी आंखों में वासना का तूफान भर रहा था,,,,, उंगली में हल्के से दवा लगाकर वह अपनी हथेली को अपनी मां की जांघ की तरफ आगे बढ़ाने लगा,,,बिस्तर पर लेटे हुए सुगंधा अपने बेटे को ही देख रही थी उसकी हरकत को देख रही थी,,,हल्का सा लाल रंग सुगंधा की जांघों पर दिखाई दे रहा था जहां पर रबड़ का गेंद लगा था और इस लाल रंग पर मूव क्रीम में से निकली हुई दवा अंकित लगाने लगा ,,, अंकित उंगली के सहारे हल्के हल्के दवा को लग रहा था तब तक सुगंधा को कुछ एहसास नहीं हो रहा था लेकिन जब सुगंधा ने कहीं।
अरे थोड़ा जोर लगा ऐसे कैसे आराम मिलेगा,,,,।
(बस इतना सुनते ही अंकित अपनी पूरी हथेली से उसे लाल रंग के हिस्से को दबोच दिया एकदम मदहोश होकर मानो के जैसे वह अपनी मां के साथ संभोग कर रहा हो और अंकित की इस हरकत पर सुगंध एकदम से उत्तेजित होकर सिहर उठी और एकदम से उसकी आंखें मदहोशी में बंद होने लगीजिस तरह का अनुभव उसे अपने शरीर में महसूस हुआ था उसके चलते हुए अपने लाल रंग के निचले हिस्से को दांत से दबा दी थी,,, और अपनी मां की इस एहसास कोअंकित अपनी आंखों से देख लिया था और समझ गया था कि उसकी मां को मजा आ रहा हैअंकित इस तरह से अपनी मां की जांघों को दबाना शुरू कर दिया और दवा को लगाना शुरू कर दिया अपनी मां की मोटी मोटी जांघ को दबाने में उसे इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत,,,,अंकित पागल हुआ जा रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मां अधनंगी हालत में लेटी हुई थी,,,, उसकी गुलाबी पर हल्का सा साड़ी से ढंका हुआ था जिसे अंकित अपने हाथों सेउसकी साड़ी हटा देना चाहता था और उसके गुलाबी बुर को जी भर कर देख लेना चाहता था,,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, और इसके बारे में सोचता होगा वह अपनी मां की जांघ की मालिश कर रहा था।सुगंधा पीठ के बोल लेते हुए अपनी आंखों को बंद करके इस एहसास में धीरे-धीरे डूब रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था जहां पर वह मालिश कर रहा था बस उससे दो-तीन अंगुल की दूरी पर है सुगंधा का गुलाबी छेद था।और इसका एहसास मां बेटे दोनों को पागल कर रहा था अंकित का लंड उसकी पेंट में गदर मचाने को तैयार था और सुगंधा की बुर बार-बार पानी फेंक रही थी।
अपनी नानी के साथ संबंध लेने के बाद उसे इतना तो पता ही था कि औरत को कैसे मदहोश किया जाता है उसे मजबूर किया जाता है संबंध बनाने के लिए इसलिए वह बार-बार अपनी मां की जांघ को जोर-जोर से दबा रहा था मसल रहा थारह रहे कर सुगंधा के मुंह से सिसकारी भी फूट पड़ रही थी और दर्द से थोड़ा कराह भी ले रही थी लेकिन अपने बेटे से इसकी बिल्कुल भी शिकायत नहीं कर रही थी जिसका मतलब साफ था कि वह भी आगे बढ़ना चाहती थी।अंकित अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी मालिश भी कर रहा था वह देखना चाहता था कि उसकी मां कुछ कहती है कि नहीं क्योंकि वह इस समय अपनी मां की साड़ी को उसकी बुर से थोड़ा सा ऊपर उठाना चाहता था,,,,ताकि वह यह देख सके कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है और वह अपनी मां को इसका एहसास दिला सके कि वह खुद क्या चाहता है लेकिन फिर भी ऐसा करते समय उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था। अपनी मां की जंग को मसल मसल कर वह पूरी तरह से लाल कर दिया,, था,,,,अपनी मां की जान को मालिश करने के बहाने मसलते हुए उसे इतना तो एहसास हो रहा था कि वाकई में औरत के हर एक अंग से अद्भुत आनंद के फुहार फुट दिए जिसमें दुनिया का हर मर्द नहाने के लिए उतावला रहता है और इस समय उस आनंद की फुहार में अंकित अपने आप को भीगता हुआ महसूस कर रहा था।,,,, अंकित अपने मन की करने के लिए अपना मन बना चुका थावह अपनी मां की तरफ देख रहा था जो कि इस समय मदहोश होकर अपनी आंखें बंद करके गहरी गहरी सांस ले रही थी अंकित को इस बात का पता चल रहा था कि उसकी मां के बदन मैं अब बिल्कुल भी दर्द नहीं था बल्कि वह मजा ले रही थी क्योंकि ऐसा एहसास वह अपनी नानी के चेहरे पर देख चुका था।
ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था रात के 11:00 बज रहे थेवैसे तो यह समय मां बेटे दोनों का बिस्तर पर सोने का था,,, लेकिन इस समयबिस्तर पर तो दोनों था लेकिन सोने के लिए नहीं बल्कि एक दूसरे के साथ सोने के लिए मचल रहे थे नींद दोनों की आंखों में बिल्कुल भी नहीं थीऔर ऐसा ही होता है जब मरद और औरत एक साथ बिस्तर पर होते हैं तो दोनों की आंखों से सबसे पहले नींद भाग जाती है ताकि वह दोनों अकेले रह सके,, और इस समय दोनों की हालत उसी तरह की
थी,, मां बेटे दोनों की आंखों में वासना के साथ-साथ उम्मीद की किरण की नजर आ रही थी,,, अंकित गांधी जोरों से धड़क रहा था दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी मानो कि अंकित से पहले उसे ही मंजिल पर पहुंचने की जल्दबाजी होअपनी मां की सांसों की गति के साथ उठती बैठती ,,चूचियों को देखकर अंकित का मन कर रहा था कि इसी समय हाथ बढ़ाकर अपनी मां की दोनों चूचियों को थाम ले और उनसे जी भरकर खेलें,,, क्योंकि मर्दों के लिए इससे बेहतर खिलौना बना ही नहीं है,, अंकित अपने मन में ठान लिया थावह पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की साड़ी को थोड़ा सा ऊपर उठने के लिए ताकिउसके बदन का सबसे खूबसूरत अंग उसे दिखाई दे सके,,,, लेकिन यह कार्य अंकितसहज रूप से बातों के जरिए करना चाहता था इसलिए वह अपनी मां से बात करना चाहता था और अपनी मां की जांघ को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोला।)
अब कैसा लग रहा है मम्मी,,,?
अब तो बहुत अच्छा लग रहा है ऐसा लग ही नहीं रहा है कि यहां दर्द है,,,, बस थोड़ी देर और मालिश करता रे एकदम से दर्द निकल जाएगा,,,,।
तुम चिंता मत करो तुम कहोगी तो मैं रात भर मालिश करता रहूंगा,,,।
अच्छा यह बात है थकेगा नहीं,,,।
औरतों की सेवा मेरा मतलब है कि तुम्हारी सेवा करने में अगर थक जाऊं तो मैं मर्द किस बात का,,,।
ओहहहह,,,, क्या बात है,,,(अंकित की बात सुनकर सुगंधा एकदम गदगद हो गई थी,,, अच्छी तरह से जानते थे कि उसके बेटे के कहने का मतलब क्या है इसलिए तो उसके कहने का मतलब को समझ कर वह पानी पानी हो रही थी,,,)
तो क्या ऐसे ही थोड़ी ना कह रहा हूं मैं पहले जैसा अंकित नहीं हूं अब पूरी तरह से बदल गया हूं पूरा मर्द बन चुका हूं,,,,(अंकित जानबूझकर मर्द शब्द कहकर अपनी मां को यह जैसा ना चाहता था कि अब वह पूरी तरह से तुम्हारे लिए तैयार हो गया है चाहे जैसे उसका उपयोग कर सकती हो,,,सुगंधा भी अपने बेटे की बात सुनकर अपने मन में ही बोली यह तो वक्त बताएगा बेटा कि तू पास होता है या फेल होता है,,, क्योंकि अच्छे-अच्छे औरतों की बीच नाली में ही डूब गए,,, अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली,,)
वह तो दिखाई देता है,,, तू बहुत जोर-जोर से मालिश कर रहा है,,,।
तुमको पूरी तरह से आराम मिल जाए इसलिए कर रहा हूं क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा है,,,?(इतना कहने के साथ ही अपनी बीच वाली उंगली को एकदम से अपनी मां की बुर के करीब ले जाते हुए जो कि इस समय साड़ी से ढकी हुई थी)
सहहहहह ,,,,,आहहहहहहह बहुत अच्छा लग रहा है,,,,(अपने बेटे की हरकत से ना चाहते हुए भी उसके मुंह से सिसकारी निकल पड़ी थी,,, और अपनी मां की गरमा गरम सिशिकारी की आवाज सुनकर अंकित का लंड पागल हुआ जा रहा था,,,,, अपनी मां की हालत और अपनी चाहत देखकर उसे रहा नहीं गया और वह तुरंत अपनी मां की साड़ी जो हल्का सा उसकी बुर को ढंक ली थी,,, उसे पकड़कर ऊपर की तरफ नहीं बल्कि उसे नीचे की तरफ कमर पर जहां पेटिकोट की डोरी से कई होती है उसे धीरे-धीरे उसके अंदर डाल दिया ताकि दोबारा उसकी साड़ी की कीनारी बुर के ऊपर ना आएऐसा करते हुए उसकी उंगलियां कांप रही थी उसकी अजीब सी हालत हो रही थी उसे ऐसा था कि उसकी हरकत पर उसकी मां जरूर कुछ बोलेगी,,, लेकिन उसके हेरान के बीच उसकी मां उसे कुछ नहीं बोली बस उसी तरह सेआंख बंद करके लेटी रही लेकिन उसे पल का एहसास अंकित को हुआ था जब उसने अपनी मां की साड़ी को उठाकर उसकी पेटिकोट की डोरी के नीचे डाला था तब उसकी मां के बदन में अजीब सी कसमसाहट हुई थी जिसको महसूस करके अंकित को लगने लगा था कि आज की रात जरूर कुछ काम बनने वाला है,,,,, साड़ी केएक बार फिर से बुर की जगह से हटने से एक बार फिर सेवा खूबसूरत अद्भुत नजारा दिखाई देने लगा था,,, बुर की चिकनाहट बता रही थी कि जल्दी में ही उसकी मां ने क्रीम लगाकर उसकी सफाई कीऔर सफाई करने के बाद वाकई में उसकी मां की बुर चमकते चांद की तरह हो गई थी जिसे पाने के लिए दुनिया का हर प्रेमी हर मर्द उत्सुक रहता है,,,,,। एक बार फिर से अंकित अपनी फटी आंखों से अपनी मां की गुलाबी बर को देख रहा था जो पूरी तरह से मदन रस के पानी से लबालब भरी हुई थी और उसे मदन रस की गगरी छलक रही थी जिससेवह कांग्रेस पूरी तरह से उसकी बुर के निचले स्तर को भी होता चला जा रहा था और आलम यह था कि नीचे लगाया गया बिस्तर भी गीला हो रहा था इतना अदभुत और इतना ज्यादा सुगंधा बुर से पानी बहा रही थी यह सुगंधा की स्थिति की गवाही थी कि उसकी हालत क्या हो रही थी किस कदर वह मर्द के साथ के लिए तड़प रही थी।
सुगंध को भी इस बात का एहसास था कि उसके बेटे ने उसकी साड़ी को एक बार फिर से उसकी बुर पर से हटा दियाहै और इस समय फिर से उसकी गुलाबी बुर उसके बेटे की आंखों के सामने उजागर हो गई होगी जिसे देखकर उसके बेटे के मन में न जाने कैसी कैसी कल्पना हो रही होगी,,,, यही सोच करसुगंधा की सांस फिर से ऊपर नीचे होने लगी थी उसकी हालत फिर से खराब होने लगी थी वह जानती थी कि उसकी बुर से लगातार पानी निकल रहा था जिसकी वजह से नीचे बिछाया गया चादर भी गीला हो रहा था,,,, अपनी मां की नमकीन और पनियाई बुर को देखकर अंकित जानबूझकर अपना भोलापन का नाटक दिखाते हुए बोला,,,,।
बाप रे तुम्हारी यह तो गिली हो गई है,,,,,
क्या गीली हो गई है,,,(सुगंधा जानते हुए भी उसका बेटा किस बारे में बात कर रहा है वह जानबूझकर अनजान करने का नाटक करते हुए बोल रही थी)
अरे यही तुम्हारी देखो तो कितना पानी छोड़ रही है,,,,
तो यही वही क्या कर रहा है नाम लेकर बोल,,,।
धत्,,,,, इसका नाम लेने में शर्म आ रही है,,,।
चल अब रहने दे शर्म का नाटक करने को गंदी किताब मेंन जाने कितनी बार गंदे शब्द आए थे लेकिन तू बेझेक उसे पढ़ना चला जा रहा था मेरे सामने और इस समय नाटक कर रहा है शर्माने का,,,।
अरे वह तो सिर्फ किताब की बात थी,,,।
किताब की बात थी तो क्या हो गया शब्द तो वही थे ना जो आमतौर पर लड़के प्रयोग में लेते हैंऔर इस समय तेरी हालत खराब हो रही है उसका नाम लेने में और अपने आप को कहता है कि पूरा मर्द बन गया हूं,,,,।
(सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे को उपसह रही थी उसकी जवानी की दुहाई दे रही थी उसकी मर्दानगी को ललकार रही थी जिसे सुनकर वाकई में अंकित अपने आप को अपनी मां के सामने लाचार साबित होता हुआ नहीं देखना चाहता था इसलिए वह एकदम से हिम्मत जुटाकर बोला,,,)
बबबबब,,,बुर,,,,,,(अंकित हकलाते हुए बोलावह पहले भी अपनी मां के सामने इस तरह के शब्दों का प्रयोग कर चुका था लेकिन आज की बात को छोड़ता हालत कुछ ओर थे,, आज अंकित को सच में लग रहा था कि आज उसकी मां के साथ उसका जरूर कुछ होने वाला है,,,, अपने बेटेके मुंह से अपने खूबसूरत और संवेदनशील अंग का नाम सुनते ही सुगंध के चेहरे का रंग एकदम से बदलने लगा उसके होठों पर मादक मुस्कान छाने लगी,,,, और फिर वह अपने बेटे का हौसला बढ़ाते हुए बोली,,,)
यह हुई ना बात इसे कहते हैं असली मर्द,,,,,,कुछ दिनों में हम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ है जिस तरह से वार्तालाप हो रही है उसे देखते हुए हम दोनों को अभी एक दूसरे से इस तरह की बात करते हुए इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए शर्म नहीं करना चाहिए,,, सच कहूं तो बरसों से मेरी ख्वाहिश थी कि अपने पास भी कोई ऐसा साथी हो जिससे मैं इस तरह के शब्दों का प्रयोग करके बात कर सकूं तेरे पापा के जाने के बाद मेरी एक ख्वाहिश मेरे सीने में ही दब कर रह गई,,,
क्या सच में मम्मी तुम इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना चाहती थी इस तरह से आमतौर पर जिस तरह से हम लड़के लोग बात करते हैं इस तरह से तुम भी बात करना चाहती थी,,,(अपनी मां की जांघों को अपनी हथेली में दबोचते हुए,,)
आहहहह,,,, बहुत जोर से मसलता है तू,,,, तु बिल्कुल सच कह रहा है,,,,ऐसा बिल्कुल भी नहीं है किस तरह के शब्दों का प्रयोग करके जो आपस में बात करते हैं वह गंदे होते हैं गंदे आदमी या गंदी औरत ऐसा कुछ भी नहीं है आमतौर पर मर्द और औरत आपस में इस तरह की बातें करते ही रहते हैं हमारे स्कूल में भी कुछ औरतें हैं जो इस तरह से ही बातें करती है,,,।
तब तुम अभी तुम भी उन लोगों के साथ इस तरह की बात कर सकती थी ,,,,।
कर तो सकती थी लेकिन मैं जानबूझकर ऐसी बातें नहीं करती थीअगर मैं उन लोगों से इस तरह की बातें करती तो सारे दिन लोगों को मेरे बारे में गलत भावना ही जाती वह लोग मेरे बारे में गलत धारणा बांध लेते क्योंकि फिर उन्हें लगने लगता है कि मैं पति के जाने के बाद भी किसी के साथ रिलेशनशिप में हूं तभी इस तरह की बातें करते हैं और इसीलिए मैंने इस तरह की बातें उन औरतों से कभी नहीं की जो कि मेरी सहकर्मी ही है,,,।
नूपुर आंटी से भी नहीं,,,,(अपनी मां की बुर को देखकरअंकित को राहुल की मां याद आने लगी थी इसी तरह से उसकी खुली टांगों के बीच अपना मुंह डालकर वह उसकी बुर को अपनी जीभ से चाटा था,,,, और इस समय भी उसका मन कुछ ऐसा ही करने को कर रहा था इसलिए वह अपनी मां के सामने नूपुर का जिक्र छेड़ दिया था,,,, लेकिन नूपुर की बात आने पर भी उसकी मां सहज बनी रही और बोली।)
नहीं उसके साथ भी ईस तरह की बातें में नहीं करती थी,,, क्योंकि वह अभी सीधी शादी सी थी किसी से ज्यादा बोलती चालती नहीं थी,,,,,,,
(अपनी मां से बात करने के दौरान भी अंकित की नजर अपनी मां के गुलाबी बुर पर थी जिसे देखकर उसके मुंह से लार टपक रही थी अंकित अपनी मम्मी बहुत सी बातें सोच रहा थाउसे इतना तो एहसास हो रहा था कि उसकी मां क्या चाहती है अगर उसके मन में भी गंदी भावना ना होती तो वह उसके सामने इस तरह से टांग खोल कर लेटी ना होती,,,,इसलिए वह जानता था कि उसे थोड़ी हिम्मत दिखाने की जरूरत है और अगर आज की रात वह भी कुछ नहीं कर पाया तो उसके जैसा बुद्धू इंसान दुनिया में कोई नहीं,,, है।इसलिए वह अपनी मां से बात करने के दौरान तुरंत अपनी हथेली को एकदम से अपनी मां की बुर पर रख दिया और उसके गुलाबी लकीर को अपनी हथेली के नीचे ढक लिया एकदम से अपनी बर पर अपने बेटे की हथेली महसूस करते ही सुगंधा गनगना गई,,, और वह एकदम से उठ कर बैठ गई और अपने बेटे की आंख में आंख मिलाकर बोली,,,)
यह क्या कर रहा है अंकित,,,,(सुगंधा की सांसें उपर नीचे हो रही थी ऐसा कहते हुए वह अपनी टांगों के बीच तो कभी अंकित के चेहरे को देख ले रही थी,,, सुगंधा का चेहरा साफ बता रहा था कि वह क्या चाहती है वह सिर्फ ऊपर से अपने बेटे को जाने की कोशिश कर रही थी जबकि वह अपने बेटे से यही उम्मीद लगा कर बैठी थी,,)
ककककक,,,, कुछ नहीं मम्मी यह पूरी गीली हो गई है अगर तुम्हें पेशाब लगा है तो जाकर करके आ जाओ धीरे-धीरे इसमें से पेशाब निकल रही है,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर ही सुगंधा मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)
अरे तू सच में बुद्धू है इतना बड़ा हो गया और मर्द बनने का ढोंग कर रहा है यह पैसाब नहीं है यह कुछ और है,,,।
कुछ और मैं कुछ समझा नहीं,,,,(अंकित सब कुछ समझ रहा था जानता था कि उसकी मां की बुर से निकलने वाला तरल पदार्थ क्या है वह अच्छी तरह से जानता था कि यह उसके पेशाब की बूंद बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन फिर भी अनजान बनने का नाटक कर रहा था अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,)
तू सच में अभी छोटा ही है इसलिए तुझे समझ में नहीं आएगा कि यह क्या हैजब तू औरतों को समझने लगेगा तो तुझे खुद में खुद पता चल जाएगा कि यह क्या चीज निकल रहा है,,,,
तुमको तो मैं समझता हूं तो फिर क्यों नहीं समझ में आ रहा है मुझे ,,,,।
अच्छी तरह से नहीं समझता अभी तो मुझे सिर्फ अपनी मां की तरह समझता है जब एक औरत की तरह समझने लगेगा तो तुझे पता चल जाएगा फिर तुझे कुछ भी पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी,,,,
(अंकित अपनी मां के कहने का मतलब कुछ समझ कर पूरी तरह से अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रहा था उत्साहित हो रहा था यह शब्द उसकी मां की तरफ से आगे बढ़ने का इशाराजिसे अंकित समझ गया था और आज की रात अनजान बनने का ढोंग उसे बिल्कुल भी नहीं करना था नहीं तो यह सिलसिला न जाने कब तक चलता ही रहेगा आज खत्म कर देना चाहता था इसलिए वह बोला)
कोई बात नहीं ये भी करके देख लेते हैं तब तो समझ में आ जाएगा ना,,,।
बिल्कुल समझ में आ जाएगा,,,(सुगंधा अपने चेहरे पर मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली,,,,,)
लेकिन अभी तो लग रहा है कि तुम्हारी इसको साफ करने की जरूरत है,,,
फिर से इसको,,,,
मेरा मतलब है कि तुम्हारी,,,बबबब,बुर को,,,(अंकित का हकलाना देखकर उसे खूबसूरत शब्द को कहते हुए सुगंधा मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,)
अभी डर के यह शब्द निकल रहा है जब तु मुझे समझने लगेगा तो मजे से यह सब निकलेगा,,,,।
(अंकित अपनी मां की बात सुनकर मदहोश हो रहा था वह उसकी आंखों में वासना का तूफान देख रहा था जिसमें वह डुब जाना चाहता था और फिर धीरे से अपनी हथेली का दबाव अपनी मां की बुर पर बढ़ाने लगा,, जो कि इस समय कचौड़ी की तरह फुल चुकी हैअंकित को मजा आ रहा था उसकी मां को भी मजा आ रहा था,,,, सुगंधा कुछ भी नहीं बोल रही थीक्योंकि वह भी यही चाहते थे और आज पूरी तरह से बहक जाने वाली रात थी आज के दिन वह अपने बेटे को रोकना नहीं चाहती थी वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा अब क्या करता है,,, अंकित की पूरी हथेली उसके कामरस से भीग गई थी। यह देख कर सुगंधा बोली,,)
तेरी हथेली पूरी तरह से गीली हो रही है,,,।
तुम अपनी ही इतना छोड़ रही हो मैं तो दबा कर उसका पानी निकलने से रोक रहा हूं,,,,।
पानी रोक कर क्या करेगा,,,,।
तब तुम्हारी बुर और मेरी हथेली गीली नहीं होगी,,,,।
लेकिन इसे तो रोक नहीं जा सकता इसे तो निकल जाने दिया जाता है जैसे पैसाब को निकल जाने दिया जाता है,,,,।
तभी तुम इसको रोकने की कोशिश नहीं कर रही हो,,,।
नहीं,,,,(गहरी सांस लेते हुए सुगंधा बोली)
लेकिन इससे तो कपड़े गीले हो रहे हैं देखो चादर कितने गीली हो गई है अगर तुम्हें समय पैंटी पहनी होती तो वह भी पूरी तरह से भीग गई होती तुम्हारी साड़ी भी गीली हो जाती होगी ऐसे दिन में न जाने कितनी बार तुम अपने कपड़े गीला कर लेती होगी,,,(अंकित इस तरह से अपनी मां की बुर पर अपनी हथेली का दबाव बनाते हुए बोला और हल्के हल्के उसे हथेली से ही सहला रहा था एक तरह से वह अपनी मां को गर्म कर रहा था,,,,)
यह हमेशा थोड़ी ना निकलता है,,,,
फिर कब निकलता है,,,(अंकित अच्छी तरह से जानता था कि औरत की बुर से काम रस कब निकलता है लेकिन वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था वह देखना चाहता था उसकी मां क्या कहती है,,,)
जब औरत को कुछ कुछ होता है जब वह किसी मर्द के करीब होती है और मर्द उसके अंगों को सहलाता है उसका हाथ रखता है तब औरत की ऐसी हालत हो जाती है तब ईसमें से ऐसा रस निकलता है,,,(अपनी बुर की तरफ उंगली से इशारा करते हुए बोली)
तो क्या इस समय तुम्हें ऐसा ही लग रहा है कि तुम किसी मर्द के साथ हो,,,,।
ऐसा तो नहीं लग रहा है लेकिनतेरे में कुछ बात तो है जो मेरी हालत ऐसी हो रही है पूरा मर्द है कि नहीं यह तो बाद में ही पता चलेगा,,,,।
(अपनी मां की तरफ से खुला निमंत्रण पाकर अंकित की भावनाएं भड़क रही थी उसका मन बहक रहा था और वह अपनी हथेली का दबाव एकदम से अपनी मां की बुर पर बढ़ाता हुआ बोला,,)
मम्मी अगर तुम्हें बुरा ना लगे तो एक बात कहूं,,,।
क्या बोल,,,,
हम दोनों की स्थिति भी उस गंदी कहानी के उस परिवार की तरह ही है,,,,।
कैसे,,,?
अब देखो ना मम्मी,,,(अपनी हथेली का दबाव अपनी मां की बुर पर एकदम से बढ़ाते हुए जिसकी वजह से सुगंधा की हालत खराब होने लगी,,) कहानी में उसके बेटे को बाथरूम के अंदर क्या दिखाई दे रहा था,,,।
उसकी मां पेशाब करते हुए दिखाई दे रही थी,,,।
पेशाब करते हुए दिखाई तो दे रही थी लेकिन वह अपनी मां की गांड देख रहा था और अपनी मां की नंगी गांड देखकर उसकी हालत खराब होने लगी थी,,,,।
और इस समय मेरी आंखों के सामने क्या है,,,?(अपनी मां की तरफ सवालिया नजरों से देखते हुए अंकित बोल तो उसकी मां अपने बेटे की बात समझ कर मुस्कुरा दी और बोली,,,)
तू बहुत शैतान है,,,।
वह तो जब तुम्हारे साथ होता हूं तो न जाने क्यों ऐसा सुझने लगता है,,,, मेरी आंखों के सामने तुम्हारी बुर है उसके सामने उसकी मां की गांड थी नंगी और मेरे सामने मेरी मां की बुर है एकदम नंगी,,,, और वह अपनी मां की नंगी गांड देखकर कैसे-कैसे विचार अपने मन में ला रहा था यह तो तुम सुन ही चुकी हो,,,।
हां वह तो मैं जानती हूं लेकिन क्या तेरे मन में भी उसी तरह के विचार आ रहे हैं क्या,,?(अपनी आंखों को नचाते हुए सुगंधा बोली,,,)
नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो उसकी स्थिति में और अपनी स्थिति में कितनी समानता है उस बारे में बता रहा था,,,,,,।
लेकिन इस बात पर भी गौर करना कि उसने अपनी मां को उंगली करते हुए देखा था तब जाकर उसकी उत्तेजना और ज्यादा भड़क गई थी लेकिन मैं यहां पर ऐसा कुछ नहीं कर रही हूं,,,, इसलिए अपनी भावनाओं पर काबू रखना,,,,,(अपनी आंखों को गोल-गोल नचाते हुए वह बोली,,,)
मैं अच्छी तरह से समझ रहा हूं लेकिन न जाने मुझे कुछ अजीब सा हो रहा है,,,,,(हल्के से अपनी बीच वाली उंगली से अपनी मां की बुर की पतली लकीर के गुलाबी पत्तियों को कुरेदते हुए) ऐसा लग रहा है कि कुछ भी मेरे बस में नहीं है.
(अपने बेटे की बात और उसकी हरकत को देखकर सुगंधा पागल हुए जा रही थीक्योंकि इस समय उसका बेटा उसकी बुर के गुलाबी पत्तियों से खेल रहा था जो औरत के उत्तेजना को परम सीमा तक ले जाती हैं उसकी आंखें नशा में बंद होने लगी थी,,,, और वह सिर्फ इतना ही बोल पाई,,)
तु कहना क्या चाहता है,,,,।
हम दोनों उसे कहानी के मां बेटे की तरह तो नहीं लेकिन,,(धीरे से अपने बीच वाली उंगली को अपनी मां की बुर में प्रवेश कराते हुए) इतना तो कर ही सकते हैं ना,,,,,।
सहहहहह,,,,आहहहहहहह,,,,,,,(अपने बेटे की हरकत से एकदम मदहोश होते हुए) यह क्या कर रहा है अंकित यह गलत है,,,,, मैं उसकी मां की तरह नहीं हूं,,,वह मजबूर थी अपने बदन की प्यास की वजह से लेकिन मैं मजबूर रही हूं मुझे इसकी कोई जरूरत नहीं है,,,,(सुगंधा ऐसा बोल भी जा रही थी और अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लेकर अपनी आंखों को मदहोशी में बंद करके गहरी सांस भी ले रही थी जो कि इस बातको जाहिर कर रहा था कि उसे इस समय किस चीज की जरूरत है और अंकित अच्छी तरह से अपनी मां की प्यास को समझ रहा था इसलिए वह लगातार अपनी उंगली को अंदर बाहर करते हुए अपनी मां को और ज्यादा मदहोश कर रहा था और बोला)
तुम उसे औरत की तरह नहीं हो मम्मी मैं अच्छी तरह से जानता हूं लेकिन मैं ज्यादा कुछ करने को नहीं कह रहा हूं सिर्फ उंगली को अंदर बाहर करने दो तुम सच में बहुत खूबसूरत हो,,,, वह कहानी वाली उसकी मां भी तुम्हारी जैसी खूबसूरत नहीं होगी,,, उसने तो सिर्फ अपनी मां की गांड देखकर उसे चोदने का विचार बना लिया था,,,, तुम जरा सोचो तुम तो सर से पांव तक एकदम क़यामत ही कयामत उसने तो अपनी मां की नंगी गांड देखकर भावनाओं में बह गया था लेकिन तुम पूरी तरह से साड़ी में रहती हो तो भी तुम्हारी कसी हुई गांड साड़ी के ऊपर से देख कर किसी की भी हालत खराब हो जाए,,,(अपनी मां की बुर में अपनी बीच वाली उंगली को अंदर बाहर करते हुए अंकित बोल रहा था उसकी बातें सुनकर मदहोशी के आलम में सुगंधा बोली)
तो यह बात सच कह रहा है या मुझे बहकाने के लिए कह रहा है,,,।
तुम छोटी बच्ची थोड़ी ना हो कि मेरी बातों से बैठ जाओगी अच्छा बुरा सब जानती हो स्कूल की टीचर हो तुम्हें कोई कैसे बहका सकता है मैं तो सिर्फ अपने मन की बात बता रहा हूं,,,,।
तो क्या तुझे उंगली करने में मजा आ रहा है,,,(इस तरह से अपनी आंखों को बंद किए हुए मदहोशी भरे स्वर में बोली)
सच पूछो तो उस कहानी वाले लड़के को भी मजा नहीं आया होगा जितना मजा मुझे आ रहा हैतुम इससे ज्यादा आगे बढ़ने की इजाजत न भी दो तो भी है मेरे लिए बहुत है,,,सससहहहह कितनी गर्म बर है तुम्हारी अंदर कितनी चल रही है ऐसा लग रहा है कि मैं अपनी उंगली को किसी भट्टी में डाल दिया है,,,,।
सहहहहहह क्या सच में इतनी गरम है,,,,।
तो क्या,,, बहुत ज्यादा गर्म है,,,,, लेकिन मैं एक बात कहना भूल गया,,,,,(धीरे से अपनी मां की उठती बैठी चूचियों पर वह अपनी हथेली रख दिया जो कि इसमें ब्लाउज के अंदर कैद थी अपनी चूचियों पर ब्लाउज के ऊपर से अपने बेटे की हथेली महसूस करते ही सुगंधा पूरी तरह से गनगना गई,,,, और अपने मुंह से एकदम मादक स्वर निकालते हुए बोली,,)
सहहहहहह,,,ं अब यह क्या है अंकित,,,, अब ईससे ज्यादा मत बढ़ हटा ले अपना हाथ,,,
मैंने कोई जानबूझकर नहीं कियातुम्हारी छाती ऊपर नीचे हो रही है मुझे लगा कि तुम्हें तकलीफ हो रही है इसलिए ब्लाउज के ऊपर से मैंने थाम लिया।
नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,,
तो फिर कैसा है मम्मी,,,(बातोंके बहाने अंकित अपनी हथेली को अपनी मां की चूची पर से बिल्कुल भी नहीं हटाया जो इसमें ब्लाउज में कैद थी उसकी गर्माहट उसकी नरमाहट पूरी तरह से अंकित की भावनाओं को भड़का रही थी उससे रहा नही गया और वह धीरे-धीरे ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची को दबाना शुरू कर दिया,,,,, उत्तेजना के मारे सुगंधा का गला सूखने लगा वह अंदर ही अंदर बहुत खुश थी क्योंकि उसका बेटाअपनी हरकत को अंजाम दे रहा था आगे बढ़ रहा था हिम्मत दिखा रहा था और सच में एक मर्द वाला काम कर रहा था,,, उत्तेजना से अपने सूखते हुए गले को अपने थूक से गिला करते हुए वह बोली,,,)
ऊममममम,,,,,, ऐसा मत कर तेरी हरकत से मुझे भी न जाने क्या हो रहा है,,,।
क्या हो रहा है मम्मी मुझे भी तो बताओ तुम्हें अच्छा लग रहा है कि खराब लग रहा है,,,,।
(अंकित का इतना कहना था कि सुगंधा धीरे से अपनी आंखें खोल कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी,,, मदहोशी उसकी आंखों में पूरी तरह से छाई हुई थी वह पूरी तरह से अपने बस में नहीं थी वह बेकाबू हुए जा रहे थे वह कुछ बोलने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी। क्योंकि उसे पर अंकित दोहरा दबाव बनाए हुए थाएक तरफ से वहां उसकी दोनों टांगों के बीच की पत्ली दरार में अपनी उंगली डालकर अंदर बाहर कर रहा था और ऊपर से वह ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची को धीरे-धीरे दबा रहा था,,,,यह दोनों औरतों के लिए उत्तेजना के केंद्र बिंदु होते हैं जिससे उसकी उत्तेजना बढ़ती जाती है,,, अगर औरत का मरना भी कर रहा हो और मर्द का हाथ उसकी चूची या किसी तरह से उसकी बुर तक पहुंच जाए और वह हल्के हल्के सहला कर उसे मजा देने लगे तो वह तुरंत चुदवासी हो जाती है,,,,और यही हाल ही समय सुगंधा का भी हो रहा था सिर्फ अपने मुंह से बोल नहीं पा रही थी,,,, हालात पूरी तरह से बेकाबू हुए चले जा रहे थे। बुर की गर्मी अंकित अपनी उंगली पर महसूस तो कर रहा था लेकिन उसका सीधा असर उसके लंड पर पड़ रहा था,,,, जो कि इस समय गदर मचाने को तैयार थालेकिन अभी उसे बंदिश में रहना जरूरी था क्योंकि अंकित को मालूम था कि अभी उसकी बारी नहीं आई है,,,,।
अंकित और उसकी मां दोनों खामोश हो चुके थे दोनों एक दूसरों को देख रहे थे,उत्तेजना से लाल हुआ सुगंधा का चेहरा और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था जो की ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,, सुगंधा के काम रस से भरे हुए उसके लाल-लाल होठ एकदम धधक रहे थे,,, और अपनी मां के होठों को देखकर अंकित के मन में प्यास जाग रही थी दो हाथ तो उसके व्यस्त ही थे पहले से ही लेकिन अब वह अपने होठों को भी व्यस्त करना चाहता था। पहले भी दो बार चुंबन हो चुका था इसलिए उसे मालूम था कि इस हरकत पर भी उसकी मां बिल्कुल भी ऐतराज नहीं करेगी जब बुर में उंगली डलवा ली चुची दबवाली तो चुंबन करने से कैसा एतराज,,,, दोनों एक दूसरे को देख ही रहे थेअंकित पूरी तरह से कामवासना से लिप्त हो चुका था और यही हाल उसकी मां का भी था वह भी मदहोशी के हर में डूबने लगी थी वह इस समय अपने बेटे के हाथों की कठपुतली बन जाना चाहती थीक्योंकि उसे ऐसा ही लगता था कि उसका बेटा औरतों के मामले में अभी भी नादान है जबकि वह नहीं जानती थी कि वही नादान बेटा उसकी मां की चुदाई कर चुका था पड़ोस कि उसकी सहेली की भी चुदाई कर चुका था,,,, गहरी गहरी सांस लेते हुए सुगंधा और भी ज्यादा मतवाली घोड़ी लग रही थी,,,, अंकित लगातार अपने बीच वाली उंगली को अपनी मां की बुर के अंदर बाहर कर रहा थासुगंधा पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी अपने बेटे की हरकत से उसकी हिम्मत को देखकर वह गदगद हुई जा रही थीउसे लगने लगा था कि आज उसकी अभिलाषा पूरी होने वाली है वर्षों से जिस चाहत को अपने सीने में दबा कर रखी थी आज उसकी चाहत पूरी होने वाली है,,, अभी तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है आगे भी इसी तरह से चलता रहे तो मजा आ आए सुगंधा अपने मन में ऐसा सोच रही थी और गरम आंहे भर रही थी।
तभी अंकित एकदम मदहोश होता हुआअपने होठों को तुरंत अपनी मां के लाल लाल होठों पर रख दिया,,,उसे लग रहा था कि उसकी मां अपने होठों को हटा लेंगे लेकिन उसके सोच के विपरीत उसकी मां भी तुरंत अपने लाल-लाल होठों को खोल दी और खुद ही अंकित के होठों को चूसना शुरू कर दी,,,,अंकित एकदम पागल हो गया अपनी मां के लिए शहर का से उसे रहने की और अपने हथेली कादबाव अपनी मां की चूची पर एकदम से बढ़ाना शुरू कर दिया सुगंधा भी मदहोश होने लगी उसकी बुर से लगातार मदन रस का भा हो रहा था जो कि अंकित की उंगलियों को पूरी तरह से अपने रस में डुबो दे रहा था अंकित अपनी मां की चूची को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया था जिसका आनंद सुगंधा बड़ी मस्ती के साथ लेते हुए उसके असर को अपने बेटे के होठों को चुस कर दिखा रही थी,,, चुंबन बेहद गहरा होता चला जा रहा था अंकित की उंगलियां लगातार उसकी मां की गुलाबी गली में अंदर बाहर हो रही थी उसकी गर्माहट खुद उसके लंड को पिघलने के करीब ला चुकी थी अपने बेटे की उंगलियों की हरकत से सुगंधा एकदम से चुदवासी हो गई थी,,,, मन तो उसका कर रहा था कि इसी समयअपने बेटे का पेंट खोलकर उसके खड़े लंड को अपनी बुर में ले ले और अपनी प्यास बुझा ले,,, लेकिन सुगंधा बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाओं पर काबू किए हुए थीक्योंकि वह बेहद आशावादी थी अपनी किसी भी हरकत से हुआ या नहीं जताना चाहती थी कि वह इसके लिए तड़प रही है क्योंकि अभी तक जो कुछ भी हो रहा था उसके मन का ही हो रहा था और वह यही सोच रही थी कि आगे भी जो कुछ भी होगा इसमें दोनों का ही फायदा होगा । इसलिए वह सब कुछ हालात पर ही छोड़ दी थी और उसे अब अपने बेटे पर पूरा विश्वास हो चुका था कि वही उसकी नैया पार लगाएगा।
धीरे-धीरे घड़ी में 12 बज चुका थामोहल्ले में पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था सब लोग अपने-अपने घरों में चैन के नीचे सो रहे थे लेकिन सुगंधा के घर में मां बेटे दोनों की नींद हराम की दोनों का चैन लूटा हुआ था और मां बेटे दोनों एक दूसरे में अपना चैन सुकून खोज रहे थे सुगंधा अधनंगी हालत में अपने बेटे के साथ मस्ती के सागर में डुबकी लगा रही थीइतने से ही उसे एहसास हो रहा था कि इतने वर्षों में उसने कितना कुछ खो दिया था इतनी अनमोल पल सिर्फ जिम्मेदारी निभाने में वह गुजार दी थी कभी अपने बारे में नहीं सोची थी लेकिन अब वह अपने लिए जीएगी अपने शरीर के लिए उसकी जरूरतों को पूरी करेगी,,, ऐसा अपने मन में सोचकर सुगंधा मदहोश में जा रही थी अपने बेटे की हरकत की पूरी तरह से मजा ले रही थी अब वह उसे रोकने की हालत में बिल्कुल भी नहीं थी,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि इन सब हरकतों के बाद क्या होता है,,। और वह आने वाले पल के लिए बेहद उत्सुक भी थी,,,,
दोनों के बीच अब किसी भी प्रकार की वार्तालाप की सत्यता बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि दोनों के होंठ एक दूसरे के होठों में चपे हुए थे,,,, दोनों मदहोश हो रही थीसुगंधा का मन भर-भर कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़कर पेंट के ऊपर से अपने बेटे के लंड को थाम ले लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,वह केवल चुंबन करते समय अपने बेटे के चेहरे को दोनों हाथों से थामे हुए थे उसके बालों को सहला रही थी और उत्तेजना से खींच रही थी।जिसकी वजह से अंकित की उत्तेजना की ओर ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी वह बारी बारी से एक ही हाथ से अपनी मां की दोनों चूचियों से खेल रहा था ब्लाउज पहने होने केबावजूद भी अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और उसकी मां को भी,,,,यह पहला मौका था जब ब्लाउज के ऊपर से अंकित अपनी मां की चूचियों को खुले तौर पर दबा रहा था। इसलिए तो वह ज्यादा उत्तेजित और आनंदित नजर आ रही थीउसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन अंकित की उंगलियों का कमल बढ़ता जा रहा था वह अपनी उंगली को अपनी मां की बुर में डालकर गोल गोल घूमा रहा था,जिसकी वजह से वह अपनी चरम सुख के करीब पहुंचने की कगार पर आ चुकी थी,,,,सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही है उसकी हालत खराब हो रही थी क्योंकि वह झढ़ने वाली थी और अंकित भी अपनी मां के बदन में बढ़ रही हलचल को पहचान चुका था,,,वह और तेजी से अपने बीच वाली मेरे को अपनी मां की बुर की गहराई में अंदर बाहर कर रहा था एक तरह से वह अपनी मां की बुर में अपने लंड के लिए जगह बना रहा था।
सुगंधा की सांसें फुल रही थी, उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारियां निकालने को तैयार थी लेकिन अपने बेटे के होंठों के बीच अपने होंठ देकर वह सिसकारी भी नहीं ले सकती थी,,लेकिन उसकी चूचियां बहुत तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी जो एहसास दिला रही थी कि अब वह झड़ने वाली है,,,, और फिर एकदम से उसकी बुर से मदन रस का फव्वारा फुट पड़ा अंकितबड़ी तेजी से अपनी उंगली के अंदर बाहर कर रहा था वह अपनी मां को जो मजा दे रहा था उसमें उसका भी सुख छुपा हुआ था वह जानता था कि औरत की बुर में उंगली से ज्यादा लंड डालने में मजा आता है,,,,और वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि जब उसकी मां इस समय उसे अपनी बुर में उंगली डालने दिए तो उसके समझाने पर जरूर लंड भी डालने देगीभले ही वह अपने मुंह से कुछ ना बोल रही हो लेकिन अंदर ही अंदर वह भी यही चाहती है क्योंकि औरतों के मन के बारे में उनकी जरूरत के बारे में वह अच्छी तरह से जानता था । अंकित पागल हुआ जा रहा था सुनैना की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी और लगातार उसका शरीर झटका मार रहा था और हर झटका के साथ उसकी बुर से मदन रस बाहर झटक दे रहा था,,,,
उनकी धीरे से अपने होठों से अपनी मां के होठों को अलग किया औरनशीली आंखों से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देखने लगा इसके अंदर अभी भी उसकी उंगली खुशी हुई थी और उसकी पूरी हथेली उसके मदन रस से भीगी हुई थी अंकित जानता था कि उसकी बुर से निकलने वाला द्रव्य क्या है लेकिन फिर भी वह जानबूझकर अनजान बनता हुआ अपनी मां से बोला,,,।
सससससहहहह,,, ओहहहहह मम्मी तुम तो मुतने लगी,,,(अंकित यह शब्द अपनी मां से एकदम से अश्लील भाषा में बोला थाजिसे सुनकर सुगंधा के भी तन बदन में आग लग गई थी उसे अपने बेटे के मुंह से मुतना शब्द सुनकर बेहद उत्तेजित कर देने वाला लग रहा था,,,, सुगंधा अंकित की तरफ नशीली आंखों से देख रही थी और उसकी बात पर मुस्कुराते हुए बोली,,)
अरे बुद्धु यह मुत नहीं है,,,,।
मुत नहीं है तो फिर क्या है,,,?(जानबूझकर अनजान बनता हुआ अंकित बोला)
और जब ऐसे हालात में मर्द के साथ होती है और जब उसे अच्छा लगने लगता है तो इसी तरह से निकलता है,,,,।
ओहहहह,,,,आज तो मैं बिल्कुल नई बात सुन रहा हूं मुझे तो इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था मुझे तो लगता था कि सिर्फ इसमें से पेशाब निकलती है,,,,,।
धीरे-धीरे औरतों के बारे में तु सब कुछ सीख जाएगा,,,,(सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)
लेकिन मम्मी जो कुछ भी है बहुत ढेर सारा निकला है देखो तो सही मेरी पूरी हथेली गीली हो गई,,,(धीरे से अपनी मां की बुर में से उंगली को बाहर निकाल कर वह अपनी मां के मदन रस में डूबी हुई पूरी हथेली को थोड़ा सा ऊपर करके अपनी मां को दिखाने लगा जिसमें से उसका मदन रस उसकी उंगलियों से उसकी हथेलियां से नीचे टपक रहा था यह देखकर सुगंधा शर्म से लाल हो गई, शर्म से लाल हुआ अपनी मां का चेहरा देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,,) देखो तो सही तुम्हारी जांघें भी पूरी तरह से गीली हो गई है,,,,
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा अपनी जांघों की तरफ देखने लगी वाकई में वह पूरी गीली हो चुकी थी और नीचे बिस्तर पर बिछी चादर भी गीली हो चुकी थी,,,, चादर पर अपनी मदन रस का धब्बा देखकर सुगंधा शर्म से गड़ी जा रही थी,,,, उसे बड़े जोरों की पेशाब भी लगी थी इसलिए वह धीरे से बोली,,,)
मैं अभी आती हूं,,,(इतना कहते हुए वह घुटनों के बाल वेट करें लेकिन साड़ी को अपने हाथ से पकड़ कर कमर तक उठाए हुए थे और घुटनों से चलते हुए वह बिस्तर से नीचे उतर रही थी यह देखकर अंकित की हालत खराब हो रही थी एक तो पहले से ही उसका लंड पूरी तरह से बेहाल हो चुका था,,,,अपनी उंगली और अपनी हरकतों से उसने अपनी मां को तो ठंडा कर दिया था लेकिन खुदगर्म होकर तड़प रहा था इसका इलाज उसकी मां के पास ही था लेकिन कब हुआ इसका इलाज करेगी या अंकित जानता नहीं था लेकिन उसे उम्मीद थी कि आज की रात को ही जो होना ही हो जाएगा,,,सुगंधा कमर तक साड़ी अपने हाथ में पड़े वह बिस्तर से नीचे उतर चुकी थी ऐसे हालात में कमर से नीचे वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड ट्यूबलाइट की दुधिया रोशनी में चमक रही थी,,,, वह दरवाजे की तरफ जा रही थी अपनी गांड मटका कर यह देखकर अंकित देखना चाहता था कि उसकी मां के मन में अब क्या चल रहा है इसलिए वह बोला,,,)
ऐसे में कहां जा रही हो,,,।
मुझे बड़े जोरों की पेशाब आई है,,,,
(अंकित बहुत खुश था क्योंकि उसकी मां खुले शब्दों में पेशाब करने की बात कर रही थी और उसकी बात सुनकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला)
मैं यही रुकूं की छत पर बिस्तर लेकर चलु,,,(ऐसा कहकर वह अपनी मां का मन टटोलना चाहता था,,, वह देखना चाहता था कि उसकी मां अब क्या चाहती हैं,,,, अपने बेटे का सवाल सुनकर सुगंधा भी कुछ देर के लिए असमंजस में पड़ गई थी कि अब वह अपने बेटे से क्या बोले,,,,,लेकिन फिर थोड़ा हिम्मत दिखा कर वह अपने मन में सोची कि जो कुछ भी होगा देखा जाएगा इतना कुछ तो मां बेटे के बीच हो चुका हैजो कि नहीं होना चाहिए और जब इतना होकर आए तो थोड़ा और होने में क्या दिक्कत है इसलिए वहां दरवाजा खोलकर कमरे से बाहर जाते हुए बोली,,,)
अभी यही रूक में आती हूं,,,,।
(इतना कहकर हुआ कमरे से बाहर निकल गई थी लेकिन अपने बेटे के लिए खुशखबरी छोड़ गई थी क्योंकि उसकी मां की तरफ से यह है खुला आमंत्रण था कि आज की रात बहुत खास थी मर्यादा की दीवार गिरा देने की रात थी अपने संस्कारों का पर्दा हटा देने की रात थी अपनी मां का जवाब सुनकर अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था।)
अंकित को अभी कमरे में रुकने का बोलकर सुगंधा कमर तक साड़ी उठाए हुए अपनी गांड मटकाते हुए और अपने बेटे को अपनी गांड दिखाते हुए पेशाब करने के लिए चली गई थीजो कुछ भी कमरे में हुआ था यह मंजिल तक पहुंचने का सीधा रास्ता था मां बेटे दोनों को समझ में आ गया था कि अब मंजिल दूर नहीं थी,,, सुगंधा यह भी जानती थी कि मंजिल इतने करीब दिखाई दे रही है तो उसे भी संभाल कर अपनी जबान पर लगाम लगाना होगा क्योंकि ऐसे ही हालत में वह अपनी संस्कार अपनी मर्यादा की दुहाई देकर खेल को पूरी तरह से बर्बाद कर देती थी,,, इस बारे में भीवह सोच रही थी कि भले ही वह आगे से पहले नहीं करेगी लेकिन अपने बेटे की हरकत को रोकने की कोशिश भी नहीं करेगी,,, वैसे भी जिस तरह से वह बिस्तर से उठकर खड़ी हुई थी अपनी साड़ी को कमर तक उठाएं यह पूर्ण रूप सेअपने बेटे के लिए आमंत्रण था आगे बढ़ाने के लिए वह अपने इशारे से ही कह चुकी थी कि अब रुकना नहीं अब सीधा मंजिल पर ही जाकर रुकना है रास्ते का सफर बेहद रोमांचक रोमांचक हो चुका था मंजिल पर पहुंचने की कितनी खुशी होती है यह देखना बाकी था।
सुगंधा कमरे से बाहर जा चुकी थी अंकित जानता था कि उसकी मां घर के पीछे वाले हिस्से में पेशाब करने के लिए गई होगी वैसे तो उसे भी बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी और यही सही मौका भी था अपनी मां को अपना नंगा और खड़ा लंड दिखाने का,,, इस तरह की हरकत हो पहले भी एक बार कर चुका था लेकिन कसम कस में बात आगे नहीं बढ़ी थी,,,लेकिन आज का दिन कुछ और था आज के यह हालात कुछ और थे आज अंकित पूरी तरह से अपनी मां की जवानी पर छा जाना चाहता थाउसे समझ में आ गया था कि उसकी मां उसकी हर खुशियों को बिल्कुल भी रोक की नहीं बस हल्का सा जानबूझकर विरोध करेगी बाकी वह भी यही चाहती होगी कि वह आगे बढ़ने और आगे बढ़ने का मतलब अंकित समझ गया था कि अब उसका लंड और उसकी मां की बुर दोनों एकाकर होने वाली है,,,, अंकित बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था अपनी मां के पास पहुंचने में इसलिए वह भी धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतराऔर अपने पेट की तरफ देखा तो उसके पेट की हालात पूरी तरह से खराब थी आगे वाला हिस्सा उसके लंड से निकलने वाले रस से गिला हो चुका था,,, वह अपने पेंट की हालत को देखकर मुस्कुरा रहा थाऔर अपने आप से कह रहा था कि जैसे स्वादिष्ट भोजन को देखकर मुंह में पानी आ जाता है इस तरह से औरत और मर्द की भी हालत यही होती है औरत लंड को देखकर बुरे से लार टपकाती है और मर्द बुर देखकर अपने लंड से लार टपकाता है,,,अभी तक की मिली सफलता से अंकित बहुत खुश था क्योंकि वह उंगली से ही अपनी मां का पानी निकाल चुका थाऔर यह दूसरी बार था जब अपनी उंगली के सहारे से अपनी मां का पानी निकला था पहले तो वह साबुन लगाने के बहाने अपनी मां की बुर में उंगली डाल चुका था उसका पानी को झाड़ चुका था लेकिन आज का दिन संभोग से पहले की क्रिया थी जिसमें वह पूरी तरह से सफल हो चुका था,,,, अंकित अपनी उंगलियों की तरफ देख रहा था जो अभी भी उसकी मां के मदन रस में भीगी हुई थी,,, बुर के नमकीन स्वाद को अच्छी तरह से अंकित चखा हुआ था,,,, सुमन,,, सुमन की मां,,, राहुल की मां,,, और खुद की नानी के बुरे का नमकीन साथ वाले चुका था और अपनी मां की भी बुर पर वह अपनी जीभ घूमा चुका था,,,और औरत की बुर चाटने में मर्द को कितना मजा आता है इस बात का एहसास अंकित को अच्छी तरह से था इसलिए तो अपनी मां की बुर चाटने के लिए वह ललाईत था,,,,।
अंकित दरवाजे की तरह आगे बढ़ रहा था यह सोचकर कि कहीं उसकी मां पेशाब करके वापस ना आ जाए और उसे अपने लंड दिखाने का मौका हाथ से गंवाना ना पड़े,,,हालात को देखते हुए अंकित अच्छी तरह से जानता था कि ऐसे माहौल में अगर उसकी मां उसके टनटनाए हुए लंड को देखेगी तो पागल हो जाएगी और बिना उसे अपनी बुर में लिए नहीं मानेगी,,,,यही सोचकर वह धीरे से अपनी मां के कपड़े से बाहर निकल गया और घर के पीछे की तरफ जाने लगा पीछे पहुंचे उसने देखा कि उसकी मां उसी अवस्था में बैठी हुई है और मुत रहीं हैं,, वाकई में इस समय उसकी मां जिस अवस्था में बैठी हुई थी एकदम काम देवी लग रही थी जिसे देखकर किसी की भी भावनाएं एकदम से भड़क जाए,,,किताब वाली कहानी का नायक कुछ गलत नहीं सोच रहा था अपनी मां को पेशाब करते हुए देखकर कोई भी इस अवस्था में अपनी मां को देख रही तो उसका लंड खड़ा हो जाए और उसे चोदे बिना नहीं रह पाए,,,,अंकित को अपनी मां की बुर में से निकलने वाली सीधी की आवाज एकदम साफ सुनाई दे रही थी क्योंकि मोहल्ले में पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था और उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज वातावरण में गुंज रही थी और अंकित को मदहोश बना रही थी,,,, सुगंधा को नहीं मालूम था कि उसका बेटा उसके पीछे-पीछे आ जाएगा वह एकदम मगन होकर पेशाब कर रही थी क्योंकि काफी देर से वह अपने पेशाब को रोकी हुई थी,,,,अपने बेटे के पैरों की आहट सुनकर वह पीछे नजर घुमा कर देती तो अंकित ठीक उसके पीछे ही खड़ा था अंकित को देखा करवा थोड़ा सा असहज महसूस की लेकिन फिर वह एकदम से सहज हो गई क्योंकि अब उसे भी लगने लगा था कि आप उसके बेटे से शर्माने कैसे कोई जरूरत नहीं है। वह पेशाब करते हुए ही अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,,।
क्या हुआ तु क्यों आ गया तुझे तो रुकने के लिए बोली थी,,,,।
मुझे भी बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,।
तो कर लेना,,,,, यहीं बगल में,,,,।
तुम्हारे पास में,,,
तो क्या हो गया,,,,,,।
(अंकित अपनी मां के कहने का मतलब कोई अच्छी तरह से समझ रहा था वह यह भी जानता था कि उसके मन में क्या चल रहा है,,,इसलिए वह इस समय कोई भी बेवकूफी नहीं करना चाहता था कि उसकी बयान बाजी से फिर से खेल का रुख बदल जाए इसलिए वह तुरंत अपनी मां की बात मान गया था,,,, और ठीक अपनी मां के बगल में खड़ा हो गया थायह देखकर सुगंधा का भी दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि कुछ ही देर में उसे अपने बेटे का लंड देखने को मिलने वाला था,,,, जो कि अक्सर काम बार ही देखने को मिला था । सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था,, एक तो वातावरण की गर्मी और ऊपर से दोनों की मदहोशी की गर्मी और भी ज्यादा मां बेटे दोनों को व्याकुल बना रहे थे,,,, माहौल पूरी तरह से सन्नाटा में बिखरा पड़ा था जहां पर वह दोनों थे पीछे खुला मैदान था और चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा अगल-बगल में किसी कामकान नहीं था जहां से देखा जा सके इतनी रात को कि वह दोनों क्या कर रहे हैं इसलिए दोनों निश्चिंत थे।
उत्तेजना से सूखते हुए गले को गीला करते हुए अंकित अपने पेंट की बटन खोलने लगा,,उसके पेंट में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था और वह अच्छी तरह से जानता था की ईस स्थिति में चैन खोलकर उसका लंड उसमें से बाहर नहीं निकल पाएगा,,, इसलिए वह सीधे पेट की बटन खोलकर अपने पेंट को ही उतारने जा रहा था जांघों तकजैसे ही उसने पेंट के साथ-साथ अपने अंडरवियर को भी दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे करने लगा यह देखकर सुगंधा का दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा और वह अपने मन में सोचने लगी की क्या वह पूरा पेंट उतार कर नंगा हो जाएगा,,,, और वह अपनी मन में अभी सो रही थी कि देखो उसकेकहने पर वह तुरंत वहीं पर खड़े होकर के साथ करने के लिए तैयार हो गया अगर उसके मन में भी कुछ ना चल रहा होता तो वह इस समय इस तरह से पेशाब करने को तैयार ना होता इस बात को सोचकर उसकेमन में उत्तेजना के भाव जाग रहे थे वह मदहोश हो रही थी कि उसका बेटा भी कहानी वाले बेटे की तरह उसे चोदना चाहता है,,,,देखते ही देखते अंकित अपने पेट और अंडरवियर को एक साथ पकड़ कर नीचे की तरफ करने लगालेकिन लंड पूरी तरह से आसमान की तरफ मुंह उठाए खड़ा था इसलिएआगे वाले हिस्से को हुआ थोड़ा सा आगे की तरफ खींचकर उसमें से अपने लंड को बाहर निकलने दिया और जैसे ही उसका लंड पेंट की कैद में से बाहर निकाला सुगंधा का तो कलेजा मुंह को आ गया,,, आजाद होते ही वह पूरी तरह से हवा में लहरा उठा था अंकित अपनी पेंट को और अंडरवियर को जांघों तक खींच दिया था,,, अपने बेटे के मुसल जैसे लंड को देखकर उत्तेजना के मारे सुगंधा की बुर फूलने पिचकने लगी,,, वह अपने बेटे के लंड को देखते ही रह गई।
अंकित अपनी मां की मनोदशा को अच्छी तरह से समझ रहा था।वह जानता था कि इस समय उसकी मां की हालत क्या हो रही होगी उसके मोटे तगड़े लंड को देखकर,,,, उसके लंड को ही देख कर तो उसकी नानी भी उसके आगे घुटने टेक दी थी और अपना सब कुछ उस पर निछावर कर दी थी अौर यही हाल सुमन की मां का भी था,,, चीनी मांगने आई थी लेकिन उसके लहराते लंड को देखकर अपनी बुर उसके सामने परोस कर चली गई,,, और अब उसकी मां की बारी थीअपने बेटे के लंड को देखकर कुछ देर के लिए सुगंधा की पेशाब एकदम से रुक गई थी,,जिस तरह से सुगंध देख रही थी उसकी आंखों में उसे पाने की चाहत दिखाई दे रही थी उसे अपने अंदर लेने की तड़प दिखाई दे रही थी,,,इस समय अंकित को कुछ भी कहने की जरूरत नहीं थी क्योंकि अब उसके होठ नहीं उसका लंड सब कुछ बोल रहा था।अंकित धीरे से अपने लंड को पकड़ा और उसे एक बार हवा में ऊपर नीचे करके लहराते हुए पेशाब करना शुरू कर दिया उसे इतनी जोर की पेशाब लगी हुई थी कि उसके पेशाब की धार बुर दीवार तक जा रही थी जिसे देखकर सुगंधा की बर पानी छोड़ने लगी थी,,, उत्तेजना की असमंजस्यता में सुगंधा की बुर से निकलने वाली पेशाब रूक चुकी थीऔर उसमें से निकलने वाली सिटी की आवाज भी खामोश हो चुकी थी इसलिए अंकित अपनी मां से बोला,,,।
क्या हुआ मम्मी तुम कर चुकी हो क्या,,,?
नननन,,नही रे,,,(मदहोशी भरे स्वर में बोली और फिर अपने आप ही फिर से बुर से सिटी की आवाज आने लगी,,, और एक बार फिर से अंकित की हालत खराब होने लगी,,,अंकित काफी किस्मत वाला था इसीलिए तो अपनी मां के बगल में खड़ा होकर उसके साथ ही पेशाब कर रहा था वरना ऐसा मौका कहां किसी बेटे को मिलने वाला था और अभी खास करके जब बेटा पूरी तरह से जवान हो जाए और मां जवानी से भरी हुई हो,, मां, बेटे दोनों पेशाब कर रहे थे,,,अंकित जहां खड़ा था वहां से तो उसकी मां का कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था ना तो बोलना तो गांडक्योंकि वह ठीक अपनी मां के बगल में खड़ा था और उसकी मां बैठकर पेशाब कर रही थी लेकिन उसकी मां को अंकित का सब कुछ दिखाई दे रहा था खास करके उसका वह अंग जो औरतों के लिए उसका सबसे पसंदीदा खिलौना होता है। जिसे देखकर वह पानी पानी हो रही थी और अपनी मां को तड़पाने के लिए अंकित भी अपने लंड को पकड़ कर उसे बार-बार झटका दे रहा था हिलता हुआ लंड और भी ज्यादा भयानक लग रहा था। इस समय सुगंधा अपने बेटे के लंड को देखकरअपनी बुर की हालत के बारे में सोच रही थी वह सोच रही थी कि अगर सच में उसके बेटे का लंड उसकी बुर में जाएगा तो पहली बार में ही उसकी बुर फट जाएगी,,, यह सोचकर सुगंधा एकदम से गनगना गई,,,,,।
थोड़ी देर में दोनों पेशाब कर चुके थे सुगंधा इस स्थिति में अपनी साड़ी को कमर तक पकड़े हुए ही उठकर खड़ी हो गई,,,अंकित अपनी मां को देखकर फिर से मदहोश होने लगा क्योंकि उसे लगा रहा था कि इस बार उसकी मां साड़ी नीचे गिरा देगी लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह खोलकर अपनी बुर के दर्शन से कर रही थी जिसमें कुछ देर पहले ही उसने अपनी उंगली डालकर उसका पानी निकाल चुका था,,, अंकित अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां बोले कि नहीं लेकिन इशारे से सब कुछ बता रही है कि उसे लंड चाहिए उंगली से तुम्हें कुछ भी अपनी प्यास बुझा सकती है,,,, अंकित भी पेशाब कर चुका था और वह आगे अपनी मां की तरफ देख रहा था दोनों की नजर आपस में टकरा रही थी दोनों की आंखों में हवा साफ दिखाई दे रहा था रात का अकेलापन दोनों को मां बेटा नहीं बल्कि मर्द और औरत होने का एहसास दिला रहा था,,,, सुगंधा पूरी तरह से काम विह्वल हो रही थी उसे अपनी जवानी की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी जिसे बरसों से संयोज कर रखी थी,आज वही बदन की गर्मियों से पूरी तरह से परेशान किए हुए थी,,,,सुगंधा अपने बेटे के बेहद करीब थी वह उसकी आंखों में देख रही थी अंकित भी अपनी मां की आंखों में देख रहा थाआंखों ही आंखों में इशारा हो रहा था और सुगंध अपने आप को रोक नहीं पाई और एक बार फिर से अपने होठों को अपने बेटे के होठों के करीब ले जाने लगी और अगले ही पल दोनों के होंठ आपस में मिलन करने लगे यही वापस था जब एक दूसरे के होठों का स्पर्श बातें ही दोनों एकदम से बहकने लगे,,,,,।
अपनी मां की हरकत का जवाब अंकित भी उसी की भाषा में देने लगा था दोनों के होठ आपस में भिड़ चुके थे दोनों के होंठ खुले हुए थे दोनों एक दूसरे की जीभ चाट रहे थे,,, इस दौरान भीसुगंधा अपने दोनों हाथों से साड़ी पड़े हुए खड़ी थी कमर के नीचे को पूरी तरह से नंगी थी और अंकित की कमर के नीचे नंगा था उसका लंड हरकत में आ चुका था क्योंकि बार-बार अंकित के लंड का सुपाड़ा उसके गुलाबी छेद से टकरा जा रहा था और यह स्पर्श यह रगड़,, आग में घी का काम कर रहा था दोनों की वासना भड़कने लगी थी,,,,अंदर तुरंत अपनी मां को अपनी बाहों में कस लिया था और उसके लाल लाल होठों का रसपान कर रहा था और इस दौरान नीचे से ,, अपनी नन्हे सैनीक को भी कार्य में लगा दिया थाजो कि अपने कर्तव्य को अच्छी तरह से जानता था कि उसे क्या करना है बार-बार सुपाड़ा उसकी बुर की दरार से टकरा जा रहा था रगड़ खा जा रहा थाजिसकी वजह से सुगंधा पानी पानी हो रही थी उसकी बुर से नमकीन पानी टपक रहा था जिससे अंकित के लंड का सुपाड़ा पूरा गीला होते चला जा रहा था,,,, और इस गीलेपन का लाभ उठाते हुए अंकितअपने लंड की सुपारी को बराबर अपनी मां की बुर की दरार में रगड़ रहा था और हल्का सा अंदर की तरफ ले जाने की कोशिश कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी इस क्रिया से उसकी मां पूरी तरह से मस्त हो जाएगी और टांगें खोलकर उसके लंड को अंदर ले लेगी,,,अपनी हरकत से और अपनी चुंबन से वह अपनी मां को कुछ भी बोलने का मौका नहीं दे रहा था क्योंकि वह जानता था कि अगर ऐसी हालत में उसकी मां फिर से अपनी संस्कार की दुहाई देने लगी तो मामला बिगड़ जाएगा,,,,
सुगंधा पागल हो जा रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था वह खुद अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प रही थी,,,,, वह इतनी मदहोश हो चुकी थी कि उसके हाथों से उसकी साड़ी छूट चुकी थी,,,, लेकिन फिर भीउसकी साड़ी कमर पर ही टिकी हुई थी क्योंकि अंकित दोनों हाथों से अपनी मां की गांड पकड़कर उसे दबा रहा था। और उसे अपनी तरफ खींचकर अपने लंड को बुर के अंदर डालने की कोशिश कर रहा था,,,सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि इतनी आराम से उसकी बुर में इतना मोटा लंड जाने वाला नहीं है क्योंकि बरसों से उसका दरवाजा बंद पड़ा था,,, अब दरवाजे पर तेल पानी लगने पर ही वह किसी को अपने अंदर लेने के काबिल हो पाएगी,,, लेकिन यहां पर सुगंधा का मन थोड़ा इस बात से बहक रहा था कि अगर सीधे-सीधे अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में ले लेगी तो उसके बारे में उसका बेटा क्या सोचेगा,,,, यही सोचकर वह तुरंत अपने हाथ को नीचे की तरफ ले गई और अपने बेटे के लंड को पकड़ ली और अपने होठों को अपने बेटे के होठों से अलग करते हुए बोली।)
क्या यह सही है,,,,,,,,(ऐसा कहते हुए भी अपने बेटे के लंड को उत्तेजना से जोर-जोर से अपनी मुट्ठी में दबोच रही थी क्योंकि उसके लिए पहला मौका था जब वह अपने जवान बेटे के लंड को अपने हाथ में ली हुई थी अपने आप पर काबू उससे भी नहीं हो रहा था लेकिन वह बीच में इस तरह से खेल रोक करया जताना चाहती थी कि वह एक मन है और उसके संस्कार उसे आगे न बढ़ने की दुहाई दे रहे हैं। अपनी मां का इस तरह का व्यवहार अंकित को अच्छा नहीं लग रहा था वह उत्तेजना से भरा हुआ थाऔर चाहता तो इसी समय अपनी मां को यही पटक कर उसकी चुदाई कर देता लेकिन सब कुछ हुआ शांति से प्यार से होने देना चाहता था ताकि उसमें मजा आए,,, अपनी मां के ईस सवाल पर वह उसे समझाते हुए बोला,,,,)
मुझे तो इसमें कुछ भी गलत नहीं लग रहा है,,,, कहानी में भी वह मां बेटे चार दीवारी के अंदर अपने बदन की प्यास बुझाने से पीछे नहीं हटे थे,,,,।
लेकिन हम दोनों मां बेटे हैं हम दोनों के बीच पवित्र रिश्ता है,,,।
कहानी में भी दोनों मां बेटे ही थे,,,, मां बेटे होने से पहले वह दोनों सबसे पहले मर्द और औरत थे और इस समयमैं एक मर्द हूं और एक तुम्हारा था अगर हम दोनों के बीच समय मां बेटे का पवित्र रिश्ता होता तो तुम्हारी हालत देखकर मेरा लंड कभी खड़ा नहीं होता और मेरी हरकत से मेरे लंड को देखकर तुम्हारी बुर कभी पानी न छोड़ती,,,,।
लेकिन किसी को पता चल गया तो,,,,(सुगंधा ज्यादा ना नुकुर नहीं करना चाहती थी इसलिए सीधे मुद्दे की बात पर आ चुकी थी,,अंकित अपनी मां के मुंह से ईस तरह का सवाल सुनकर समझ गया था कि अब आगे क्या होने वाला है इसमें उसकी मां की हामी थी,,,, इसलिए वह अपनी मां को समझाते हुए बोला,,,)
किसी को कैसे पता चलेगा मम्मी क्या तुम अपने मुंह से बताओगी क्या मैंअपने मुंह से किसी को बताऊंगा कि चार दिवारी के अंदर हम मां बेटे किस तरह से रह रहे हैं ऐसा कभी नहीं होने वाला किसी को कानो कान तक खबर नहीं पडने वाली है,,,,,।
लेकिन तु समझ नहीं रहा है,,, अभी मैं इसके लिए तैयार नहीं हूं मैं थोड़ा बहक गई थी लेकिन,,,, अच्छा एक काम कर किसी और दीन यह करते हैं,,,, मेरा मन नहीं मान रहा है मैं कैसे अपने बेटे के साथ यह सब कर सकती हूं भले ही दूसरों घरों में मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता होता होगा लेकिन मुझे बड़ा अजीब लग रहा है,,,,।(ऐसा कहने के बावजूद भी वह अपने हथेली में अपनी मुट्ठी में अपने बेटे के लंड को दबोची हुई थी उसका मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था कि अपने बेटे के मुसल जैसे लंड को अपने हथेली से आजाद कर दे,,,, अपनी मां की बात सुनकर वह बोला,,,)
मुझे तो इसमें कुछ भी अजीब नहीं लग रहा है कुछ देर पहले ही मैं तुम्हारी बुर में उंगली डालकर तुम्हारा पानी निकाल चुका हूं,,,,, तुम्हें बहुत मजा आया,,, आया कि नहीं मम्मी,,,,।
में जानती हुं की मुझे अच्छा लगा,,,,। लेकिन आगे बढ़ना ठीक नहीं है,,,,।(सुगंधा खुद हैरान थी की वह यह क्या बोल रही है,,,, उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था क्योंकि वह एक बार फिर से इस खेल का रुख बदल रही थी,,,,, क्योंकि किसी की तरह से यह जो कुछ भी हो रहा था उसमें अपनी पहल नहीं चाहती थी।वह चाहती थी कि अंकित ही पहल करे जो कुछ भी करना होगा खुद करेंऔर जो कुछ भी वह करेगा उसमें उसका बराबर साथ देगी लेकिन पहल नहीं करेगी,,,,उसके मन में यही चल रही असमंजसता उसे परेशान कर रही थीअंकित को गुस्सा आ रहा था अपनी मां की बातों को सुनकर वह पूरी तरह से अपनी मां को लाइन पर लाना चाहता था इसलिए वह हाथ आगे बढ़कर अपनी मां के ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची दबाते हुए बोला,,,)
क्यों अपने मन को बहका रही हो तुम भी जरा सोचो एक मां के पहले तुम एक औरत हो तुम्हारी भी जरूरत नहीं तुम्हारी भी ख्वाहिश है अगर तुम्हारी जरूरत ना होती तो इस समय तुम मेरे लंड को कस कर ना पकड़ी होती देखो,,, कैसे पकड़ी हो,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां का ध्यान अपने लंड पर ला रहा था क्योंकि इस समय उसकी हथेली में पूरी तरह से दबोचा हुआ था और इस समय उसकी नशे एकदम फुली हुई थी जो एकदम साफ ऊभर कर दिखाई दे रही थी,,,, अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा,,,, अपनी नजरों को नीचे करके देखी तो वह पानी पानी होने लगी,,,,, इस समय उसकी साड़ी उसकी जांघों तक जाकर अटकी हुई थी,,,, और जिस तरह से सुगंधा अपनी बेटे के लंड को प्यासी नजरों से देख रही थी अंकित इस मौके का फायदा उठाना चाहता था और उसे फिर से चुदवासी बनाना चाहता था,,,,इसलिए तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ लेकर और साड़ी को ऊपर की तरफ उठाते हुए अपनी हथेली को अपनी मां की बुर पर रखकर उसे हल्के हल्के सहलाने लगा और सहलाते हुए बोला,,) तुम्हें मेरी कसम है मम्मी सच-सच बताना,,,,(ऐसा सुनते ही सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखने लगी,,,,उसे समझ में नहीं आ रहा था किसका बेटा क्या पूछना चाह रहा है तभी अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)
मेरा लंड पापा के लंड से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है ना सच सच बताना तुम्हें मेरी कसम है,,,,।
(अपने बेटे का इस सवाल को सुनकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगेयह बात सही थी कि वाकई में उसके बेटे का लंड उसके पति से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था,,,,लेकिन वह अपने बेटे से कुछ बोल नहीं पा रही थी बस उसे देखे जा रही थी और अपनी हथेली में अपने बेटे के लंड पर उसका दबाव बढ़ाती जा रही थी,,,,यह देख कर अंकित फिर से अपनी हरकत को दोहराते हुए अपनी मां की बुर को सहलाते हुए बोला,,,)
बोलो ना मम्मी खामोश क्यो हो सच-सच बताना,,,,।
बहुत मोटा और लंबा है,,,(कुछ पल के खामोशी के बाद सुगंधा बोल पड़ी,,, अपनी मां का जवाब सुनकर अंकित गर्व से गदगद होने लगा और फिर धीरे से बोला)
तब तो तुम्हें ज्यादा मजा आएगा,,,,।
नहीं मुझे डर लग रहा है तेरा लंड सच में कुछ ज्यादा ही मोटा है मेरी तो फट जाएगी,,,,मैं तुझे इसमें डालने नहीं दूंगी बाकी अगर तुझे जो कुछ भी करना है कर ले लेकिन डालना नहीं,,,,,
यह क्या कर रही हो मम्मी,,,,,,,
मैं सच कह रही हूं मैं दूसरी औरतों की तरह नहीं बनना चाहती मैं नहीं चाहती कि हम दोनों के बीच का पवित्र रिश्ता खराब हो,,,।
तो क्या जो कुछ भी है हम दोनों ने कीया-क्या उससे रिश्ता खराब नहीं होगा,,,।
नहीं,,,, तू सब कुछ कर सकता है लेकिन डालना नहीं एक बार तेरा लंड मेरी बुर में घुस गया तो फिर हम दोनों के बीच का सारा पवित्र रिश्ता खत्म हो जाएगा और मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती,,,,
(सुगंधा ऐसा जानबूझकर बोल रही थी वह भी अपने बेटे से चुदवाना चाहती थीलेकिन इस बहाने से वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा अपनी तरफ से पहल करता है कि नहींइतना कुछ मां बेटे के बीच हो जाने की वजह से एक बेटे को इतना तो समझ में आ जाना चाहिए कि उसकी मां उससे क्या चाहती है अगर ऐसा हुआ नहीं समझ पाया तो समझ लो वह दुनिया में सबसे बड़ा बुद्धू बेटा है,,,,और अपनी मां की बात सुनकर अंकित भी समझदारी से काम लेना चाहता था वह इस समय जरा भी गुस्सा दिखाना नहीं चाहता था ताकि बना काम बिगड़ जाए क्योंकि इसमें उसे बहुत मजा आ रहा था और इस समय उसका लंड उसकी मां के हाथ में भी था उसे बड़े समझदारी से काम लेना था वह औरतो के बारे में अच्छा खासा समझने लगा था,,,,ऊपर से चरित्र की धनवान दिखने वाली औरतें बिस्तर पर कैसी हो जाती है इसका अंदाजा उसे लग चुका था जिसका ताजा उदाहरण उसकी खुद की रानी थी सुमन की मां थी सुमन खुद थी और नूपुर की मां थी अगर सही समय पर उसे दिनराहुल के पापा ना आ गए होते तो शायद उसी दिन पहली बार में ही वह नुपुर की चुदाई कर दिया होता। इसलिए अंकित समझदारी से काम लेते हुए अपनी मां से बोला,,,लेकिन इस बीच में लगातार अपनी मां की बुर को सजा रहा था और उसमें से लगातार पानी बह रहा था जिसका मतलब साथ था कि वह ऊपर मां से यह सब कुछ कह रही थी अंदर से वह भी उसके लंड लेना चाहती थीलेकिन अंकित भी कोई जोर जबरदस्ती नहीं करना चाहता था वह चाहता था कि उसकी हरकतों से उसकी मां खुद उसके लिए अपनी दोनों टांगें खोल दे और यह निश्चित भी था की ऐसा ही होगा बस उसे थोड़ी समझदारी दिखानी होगी,,, इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,)
तुम्हें क्या लगता है कि मैं यह सब करने के लिए तड़प रहा हूं मैं तो तुमसे प्यार करने लगा हूं तो मुझे सबसे ज्यादा खूबसूरत लगती हो किसी फिल्म की हीरोइन की तरह सच में तुम्हारी खूबसूरती मुझे तुम्हारा दीवाना बना दि है मम्मीमैं बहुत पहले तुमसे यह बात कर देना चाहता था लेकिन डरता था कि कहीं तुम नाराज ना हो जाओ,,,,।
क्या सच में तू,,,,
हां मैं सच में तुमसे प्यार करने लगा हूं एक बेटे की तरह नहीं बल्कि एक मर्द की तरह,,, तुम शायद नहीं जानती कि मैं किसी लड़की की तरफ आकर्षित नहीं होता मैं सिर्फ तुम पर ही आकर्षित होता हूं तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत हो,,,,।
(अपने बेटे के मुंह से यह सुनकरसुगंधा खुशी से गड़बड़ हो रही थी क्योंकि उसका बेटा उसके सामने अपने प्यार का इजहार कर रहा था, लेकिन इस बीच लगातार वह धीरे-धीरे उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों को कुरेद रहा था,,,, अंकित अपनी बात को बढ़ाते हुए बोला,,,) तुम अगर कहानी वाली मां की तरह नहीं हो तो मैं भी कहानी वाले बेटे की तरह नहीं हूं मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित तुरंत अपनी मां को अपनी तरफ खींच कर उसे अपनी बाहों में भर लिया और फिर से अपने देखते हुए होठों को अपनी मां के लाल लाल होंठों पर रखकर उसका रस चूसने लगा,,,सुगंधा अपने बेटे की बात सुनकर एकदम मस्त में जा रही थी और उसकी हरकत से तो वह पानी पानी होने लगी वह अपने हाथ में से अपने बेटे के लंड को छोड़ दी थी और वह भी अपने बेटे को अपनी बाहों में भर ली थी,,,, सुगंधा अपने मन में यह सोचकर अपने आप ही गुस्सा कर रही थी कि यह क्या कर दिया तुने बनते हुए खेल को बिगाड़ दीलेकिन उसे पूरा विश्वास है कि उसका बेटा सबको संभाल लेगा और उसकी बात भी रह जाएगी,,,
मां बेटे दोनों एक दूसरे की बाहों में एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे हालांकि सुगंधा ने अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली से आजाद कर दी थी लेकिन उसके पेट पर हाथ रखकर उसका हौसला बढ़ाते हुए उसे होले होले सहला रही थी लेकिन अंकितपागलों की तरह अपने दोनों हथेलियां से अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पकड़कर उसे जोर-जोर से दबा रहा था और उसकी गांड की फांको को आपस में रगड़ रहा था,,,, जिससे सुगंध गर्म हो रही थी मदहोश हो रही थी मां बेटे दोनों घर के पीछे वाले हिस्से में एक दूसरे की जवानी से खेल रहे थेऔर एक बार फिर से अंकित का टनटनाया हुआ लंड उसकी बुर से रगड़ खाने लगा जिससे सुगंधा एकदम मदहोश होने लगी,,,, अंकित का जोश भरत जा रहा था वह एक हाथ अपनी मां की गांड से हटकरदूसरे हाथ से उसे सहला रहा था लेकिन एक हाथ से वह धीरे-धीरे अपनी मां का ब्लाउज खोलना शुरू कर दिया था ऐसा लग रहा था कि यहीं पर खड़े-खड़े आज वह अपनी मां की चुदाई कर देगा,,,सुगंधा भी अपने बेटे की हरकत से मदहोश हो जा रही थी अपने बेटे की हिम्मत देखकर आज उसे अपने बेटे पर गर्व हो रहा था,,, उसके मन में यही हो रहा था कि चलो देर आए दुरुस्त आए।
ओहहहह मम्मी तो मुझे पागल कर दोगी तुम्हारा यह खूबसूरत बदन मुझे दीवाना बना रहा है,,,(अपनी मां के होठों से अपने होठों को थोड़ी देर के लिए अलग करते हुए वह ऐसा बोला और फिर वापस अपनी हरकतों में जुड़ गयाचुंबन में उसकी मां भी उसका बराबर का साथ दे रहे थे वही हाथ से धीरे-धीरे करके अपनी मां के ब्लाउज का चार बटन खोल चुका था बस आखरी बटन रह गया था,,,,,देखते ही देखते वह आखरी बटन भी खुलने लगा लेकिन एक हाथ से उसकी मां के ब्लाउज का बटन खोल नहीं रहा था तो मौके की नजाकत को समझते हुए सुगंधा खुद ही अपने बेटे का हाथ हटाकर अपने ब्लाउज का आखिरी बटन खोलने लगीअपनी मां की इस हरकत को देखकर उसे उम्मीद की किरण नजर आ रही थी वह जानता था कि उसकी मां आप उसकी हरकत हो उसका बिल्कुल भी विरोध नहीं करेगी बस थोड़ा बहुत दिखावा करेगी।थोड़ी देर में वह अपने हाथों से अपना ब्लाउज का बटन खोलकर अपने ब्लाउज को खोल चुकी थी। अपनी मां की अंकित पागल हो गया था ब्लाउज की खोलने के बाद भी अंदर उसकी लाल रंग की ब्रा थी जिसे देखकरअंकित और ज्यादा उत्तेजित हो गया और ब्रा के ऊपर से अपनी मां की चूची को दबाना शुरू कर दिया सुगंधा मदहोश होने लगी,,,,, और धीरे से बोली,,,।
क्या यही खड़े-खड़े सब कुछ करेगा,,,,,(सुगंधा धीरे से अपने बेटे के होठों पर से अपने होंठ को हटाते हुए बोली यह सुनकर अंकित अपनी मां को प्यासी नजरों से देखने लगा,,,, और उससे यह पल एकदम से बर्दाश्त नहीं हुआ वह तुरंत बिना कुछ बोले अपनी मां को गोद में उठा लिया सुगंधा अपने बेटे की हरकत से एकदम घबरा गई उसे कुछ समझ में नहीं आया अगले ही पल वह अपने बेटे की गोद में थी यह देखकर वह एकदम से बोली,,,)
यह क्या कर रहा है उतार मुझे नीचे गिर जाऊंगी,,,।
तुम्हें क्या लगता है कि मैं तुम्हें गिरने दूंगा तुम्हें मेरी ताकत पर विश्वास नहीं है,,,, ऐसे ही थोड़ी ना कसरत करता हूं दंड पेलता हूं,,,,।
तुझे मैं भारी नहीं लग रही हूं,,,
भला पसंदीदा औरत कभी भारी लगती है,,,।
तुझे बहुत फिल्मी डायलॉग सुझ रहे हैं।
जब आंखों के सामने हीरोइन हो तो डायलॉग तो निकलेंगे ही हीरो के मुंह से।
तो तू हीरो है,,,।
तुम हीरोइन हो तो मैं हीरो ही हूं,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बहुत खुश हो रही थी।अपने बेटे की ताकत पर वह गर्व महसूस कर रही थी और जिस तरह से बड़ी आराम से अपनी गोद में उठाया हुआ था वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि कोई मर्दों से इस तरह से गोद में उठा सकता है क्योंकि वाकई में उसका शरीर थोड़ा भारी था,,,,अंकित अपनी मां की खूबसूरत चेहरे को देख रहा था और सुगंधा भी अपने बेटे की तरफ देख रही थी दोनों एक दूसरे को देख रहे थे,, इस तरह से गोद में उठाए हुए अंकित अपनी मां को उसके कमरे की तरफ ले जाने लगा सुगंधा की साड़ी कमर तक थी उसकी नंगी गांड पर अंकित का लंड बराबर ठोकर लग रहा था जिसका एहसास उसे पानी पानी कर रहा था,,,,अपनी मां को गोद में उठाए हुए और दरवाजे पर पहुंच चुका था दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था उसे पूरा खोल दिया और अपनी मां को गोद में लेकर वह कमरे में दाखिल हो गयाअपने बेटे की हरकत से वह पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हो रही थी और उत्तेजित भी कुछ ज्यादा ही हो रही थी वह अपनी मां के बिस्तर के करीब आया और उसे नरम नरम गद्दे पर पटक दिया,,,, सुगंधा एकदम से डर गई लेकिन वह एकदम सुरक्षित थी,,,बिस्तर के नीचे अंकित खड़ा था उसका पेंट उसकी घुटनों में फंसा हुआ था उसका लंड छत की तरफ मोटा ही खड़ा था जिसे सुगंधा प्यासी नजर से देख रही थी,, अपनी हालत पर गौर करते हुए सुगंधा दरवाजे की तरफ देखी और अपने बेटे से बोली ,,,,)
दरवाजा तो बंद कर दे,,,
दरवाजा बंद करने की जरूरत है मम्मी कोई तो नहीं है घर में हम दोनों के सिवा,,,, भले कोई नहीं हो लेकिन मुझे खुले दरवाजे के अंदर शर्म आती है तु दरवाजा बंद कर दे,,,,
ठीक है मैं अभी बंद कर देता हूं ,,,,(इतना कहने के साथ ही वहां घुटनों में फंसी अपनी पैंट और अंडरवियर को एकदम से उतार कर कमर के नीचे नंगा हो गया और इस स्थिति में वह दरवाजे की तरफ जाने लगा चलते समय उसका हिलता हुआ लंड देखकर सुगंधा की सांस अटक रही थी,,,, थोड़ी देर में दरवाजा बंद करके बिस्तर की तरफ आने लगा सुगंधा अपने बेटे को देख रही थी ,,,ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब को साफ दिखाई दे रहा था उसके बेटे का हिलता हुआ लंड मानो उसे चुदवाने के लिए मना रहा हो,,,, वह अपनी मां के करीब आ गया वह बिस्तर पर उसकी तरफ टांग फैलाए लेटी हुई थी लेकिन वह शर्म के मारे अपनी टांगों को आपस में सिकोड़ ली थी। अपनी मा की इस स्थिति को देखकर अंकित मुस्कुराने लगा,,,, धीरे से झुक कर वह अपनी मां की दोनों टांगों को धीरे से पकड़ कर खोलने लगा अपने बेटे के द्वारा अपनी टांगे खोलने पर सुगंधा शर्म से पानी पानी हो रही थीवह कुछ बोल नहीं पा रही थी और अंकित बिस्तर पर घुटनों के बाल आगे बढ़ रहा था वह अपनी मां के ऊपर पूरी तरह से छा जाने के लिए तैयार था और देखते ही देखे अपनी मां की दोनों टांगों को खोलकर टांगों के बीच दोनों पैर के घुटने रखकर आगे की तरफ बढ़ने लगा और रख दे पर अपनी मां के ऊपर एकदम से पसर गया उसे अपनी बाहों में भरकर उसके लाल लाल होठों को चूसना शुरू कर दिया,,,,जिस तरह से अंकित अपनी मां के ऊपर लेटा हुआ था उसका लंड सीधा उसकी मां की बुर पर ठोकर मार रहा था यह सुगंधा के लिए आसानी नहीं था वह पागल हो जा रही थी क्योंकि समय को पूरी तरह से अपने बेटे की बाहों में थीकमर के नीचे से नंगी ब्लाउज पूरी तरह से खुला हुआ था लाल रंग की ब्रा में कैद उसकी दोनों चूचियां फड़फड़ा रहे थे बाहर आने के लिए,,, जिसे अपनी मां के होंठों का रसपान करते हुए अंकित जोर-जोर से दबा रहा थाउसे अपनी मां की चूची की जवानी बहुत मजा आ रहा था क्योंकि वह खरबूजे के आकार की थी बड़ी-बड़ी जो पूरी तरह से उसकी हथेली में समा भी नहीं रही थी,,,,,।
ब्रा के ऊपर से चूची दबाने मेंइतना मजा अंकित को नहीं आ रहा था लेकिन फिर भी यह मजा उसके लिए काफी थालेकिन शायद सुगंधा के लिए यह काम था इसलिए वह अपने हाथ से ही अपनी ब्रा को दोनों हाथों से नीचे की तरफ पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाती है और उसकी दोनों घर पहुंचे जैसी चुचिया एकदम से हवा में लहर उठी,,,,,और अंकित अपनी मां की नंगी चूचियों को चोरी से दबाने लगा गोरी गोरी नंगी चूची में हाथ में आते हैं उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी और उसके लंड का आकार ऐसा लग रहा था कुछ ज्यादा ही मोटा होने लगा जो बार-बार उसकी बुर के गुलाबी मुहाने पर ठोकर मार रहा था रगड़ खा रहा था जिससे सुगंधा पानी पानी हो रही थी।कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था मां बेटे दोनों की आंखों में चार बोतलों का नशा छाया हुआ था दोनों वासना में डूब चुके थे,,,,, अंकित लगातार अपनी मां की होठों का रसपान कर रहा था लेकिन काफी देर तक पर होठों का रस पी रहा था इसलिए सुगंधा बिना कुछ बोले उसके चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर उसे अपने होठों से अलग की और गहरी सांस लेते हुए उसकी तरफ देखने लगी अंकित भी अपनी मां को देख रहा था दोनों की आंखें आपस में कुछ बातें कर रही थी,,, और फिर सुगंध अपने बेटे का बाल अपने हाथों में पकड़ कर उसे नीचे की तरफ ले जाने लगी और अपनी चूचियों पर लाकर अटका दीअंकित एक बार अपनी मां की तरफ देखा और अपनी मां की दोनों चूचियों की तरफ देखा ऐसा लग रहा था कि अंकित अपनी मां के इशारे को समझ रहा था लेकिन वह अपनी तरफ से कुछ कर पाता इससे पहले ही सुगंधा अपने हाथ में अपनी चूची पकड़ कर उसे अपने बेटे के मुंह से लगा दी और सिर्फ इतना ही बोली।
ले पी,,,,।
फिर क्या था अंकित तोपागल हो गया वह अपनी मां की चूची को जितना हो सकता था उतना अपने मुंह में लेकर दबा दबा कर पीना शुरू कर दिया हालांकि उसमें से बात तो नहीं निकल रहा था लेकिन जो मजा नहीं कर रहा था जो आनंद की फुहार निकल रही थी वह बयान करना बहुत मुश्किल था वह बारी बारी से अपनी मां की दोनों चूचियों को दबाकर अपने मुंह में लेकर पी रहा था,,,, बरसों बाद सुगंधा की चूचियों पर किसी मर्द ने मुंह लगाया थाऔर वह कोई गैर मर्द नहीं बल्कि उसका हिस्सा का बेटा था जो पूरी तरह से जवान हो चुका था मर्द बन चुका था और अपनी मर्दानगी अपनी मां पर दिख रहा था पागलों की तरह अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर उसे टमाटर की तरह लाल कर दिया था।जितनी जोर-जोर से अंकित अपनी मां की चूची को दबा रहा था उतना ही आनंद सुगंध को मिल रहा था सुगंधा बाल पकड़ पकड़ कर उसे अपनी चूची पर दबा रही थी और नीचे अंकित का लंड उसका गरम सुपाड़ा सुगंधा की बुर की दरार में फंसा हुआ था जिसे अंकित हल्के हल्के से अपनी कमर आगे पीछे करते हुए उसे चोदने की कोशिश कर रहा था उसे एहसास दिला रहा था कि वह क्या चाहता है। बिस्तर परपूरी तरह से घमासान मचा हुआ था हालांकि यह संभोग के पहले का घमासान थासुगंधा भी अच्छी तरह से जानते थे कि जिस तरह के हालात पैदा हो चुके हैं जिस तरह की उत्तेजना उसके बेटे के बदन में छाई हुई है आज उसकी चुदाई तय थी,,,,,।
थोड़ी देर तक अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर पीने के बाद वह धीरे से अपनी मां की चूची को दोनों हाथों में पकड़ कर अपने मुंह से अलग किया और अपनी मां की तरफ गहरी सांस लेते हुए बोला।
सच में तुम कयामत हो पागल कर दे रही हो मुझे अपने हुस्न की जादू से आज की रात लगता है कि मैं पागल हो जाऊंगातुमसे ज्यादा खूबसूरत औरत मैंने जिंदगी में कभी नहीं देखा,,,।
क्या तुझे मे इतनी खूबसूरत लगती हूं।
मुझे क्या तुम सबको खूबसूरत लगती होगी,,, तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां,,(दोनों हाथों में पकड़ कर उसे दबाते हुए और हिलाते हुए)ऐसा लगता है कि मेरे लिए यह अनमोल खजाना है और इस खजाने को मैं खोना नहीं चाहता इस पर सिर्फ मेरा ही अधिकार है,,,,।
तेरा ही अधिकार है मेरे बेटे,,,,,
ओहहहह मम्मी,,,,, यह सुनकर तो मैं पागल हो रहा हूं,,,,।
नहीं नहीं पागल मत होना अगर तू पागल हो गया तो मेरा क्या होगा,,,,
वही होगा जो मै चाहूंगा,,,।
और तू क्या चाहता है,,,,?(सुगंधा मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफ देख कर बोली,,,, अपनी मां का यह सवाल सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और धीरे-धीरे अपनी मां की चूची पकड़ कर वालाउसके पेट पर चुंबन करने लगा धीरे-धीरे वह नाभि तक पहुंच चुका था नाभि में अपनी जीभ डालकर उसे गोल-गोल घुमा कर चाट रहा था,,,, वह बिना कुछ बोले बता रहा था कि वह क्या करना चाहता है,,, देखते देखतेवह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया था और अपनी मां की तरफ देखते हुए इसकी मोटी मोटी जांघों पर अपने होठ रखकर चुंबन कर रहा था,,,, जब जब वह उसकी जांघों पर अपने होंठ रखता था तब तब सुगंधा उत्तेजना से सिहर उठती थी।देखते ही देखते अंकित उसकी बुर की तरफ आगे बढ़ रहा था और सुगंधा यह अपनी खुली आंखों से देखा है कि वह कहां बढ़ रहा है इसका एहसास होते ही उसका बदन कसमसा रहा था,,,,उसके सांस ऊपर नीचे हो रही है उसकी हालत खराब हो रही थी और देखते ही देखते अंकित अपनी मां की गुलाबी लकीर की तरफ आ चुका था उसकी बुर की तरह आ चुका था और वह अपने होंठ को अपनी मां के बुर के एकदम करीब ला दिया था जहां से उसकी गर्मी का एहसास उसके होठों पर एकदम बराबर हो रही थी,,,,अपनी मां की बुर चाटने का उसका बहुत मन कर रहा है और अब समय आ गया था अपनी इच्छा को पूरी करने की,,,,सुगंधा पागल हो जा रही थी अपने बेटे के होठ को अपनी बुर के इतने करीब पाकर उसकी भावनाएं भड़क रही थी,,,,मन तो उसका कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के होठों को अपनी बुर से सटा देलेकिन वह ऐसा कुछ कर नहीं पा रही थी बस अपने बेटे को देख रही थी और अंकित भीअपनी मां की तरफ देखने लगा दोनों की नजर आपस में टकराई दोनों पागल होने लगे,,,,,लेकिन फिर भी आगे बढ़ने से पहले अंकित अपनी मां की इजाजत ले लेना चाहता था इसलिए वह अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,,।
मैं तुम्हारी बुर को चूमना चाहता हूं क्या मैं ऐसा कर सकता हूं,,,,,(जवाब में सुगंधा कुछ देर तक अपने बेटे की आंखों में देखती रही और फिर शर्मा कर अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली यह सुगंधा की तरफ से हामी थी जिसे स्वीकार करके मुस्कुराते हुए अंकित अपने होठों को अपनी मां की दहकते हुए बुर पर रख दिया जो कि समय भट्टी की तरह तप रही थी और उसे चुंबन करने लगा धीरे-धीरे वह दो-तीन बार बुर पर अपने होंठ सटाकर चुंबन कर रहा था अपनी मां की तरफ देख रहा था उसके चेहरे के बदलते भाव को देख रहा था अंकित जानबूझकर इस तरह से चुंबन कर रहा थाऔर सुगंधा यह चाहती ज थी कि वह अपनी जीभ को उसकी बुर में डाल दे और उसकी मलाई को कहते लेकिन बार-बार अंकित सिर्फ तड़पा रहा थावह जानता था किसकी मां की हालत खराब हो रही है इसलिए बार-बार उस पर चुंबन करके अपने होठ को हटा दे रहा था,,,,लेकिन इस बार जैसे ही अंकित अपने होंठ को अपनी मां की बुर पर रखा उसे चुंबन किया सुगंधा का सब्र का बांध एकदम से टूट पड़ा। वह तुरंत अपना हाथ अपने बेटे के सर पर रख दिया एकदम से उसे अपनी बुर पर दबा दीऔर अपनी टांगों को घुटनों से मोड़ कर उसे तुरंत अपने बेटे के कंधों पर रखकर उस पर अपना दबाव बनाने लगी,,,,,इस हरकत से अंकित एकदम बावला हो गया वह अपनी मां की तरफ देख रहा था लेकिन सोचा नहीं था कि उसकी मां इस तरह की हरकत करेगी,,,, अब तो अंकित की हालत एकदम से खराब हो गई,,,,
और वह पागलों की तरह अपनी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया जिसमें से मदन रस लगातार बह रहा था उसे रस को अपनी जीभ से चाटने लगा उसका कड़वा और कसैला स्वाद उसे अमृत की तरह लग रहा था,,,, नमकीन खारा पानी उसे मध की धार लग रही थी,,,,अंकित पागलों की तरह अपनी मां की बुर को चाट रहा था और सुगंधा ने दोनों हाथ से अपने बेटे के बाल को पकड़कर उसके मुंह का दबाव अपनी बुर पर बना रही थी,,,,अंकित जितना हो सकता था उतनी अपनी जीभ को अपनी मां की बुर में डालकर उसकी चटाई कर रहा था यह क्रिया उसके लिए पहली बार कि नहीं थी ईससे पहले भी सुमन और सुमन की मां के साथ-साथ,,,,अपनी नानी और राहुल की मां की बुर की चटाई कर चुका था इसलिए बुर चाटने का उसे अच्छा खासा अनुभव था,,, लेकिन यह सुगंधा के लिए नया था बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय पल था वह पागल हो जा रही थी क्योंकिआज तक उसके पति ने भी उसके साथ ऐसा नहीं किया था उसकी बुर को कभी होठों से नहीं लगाया था लेकिन अंकित अपने आप से एक कदम आगे था वह संपूर्ण रूप से एक मर्द था तभी औरत को खुश करना जानता था,,,,सुगंधा कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसका बेटा उसके साथ ऐसा करेगा ऐसा अद्भुत सुख उसे प्रदान करेगा,,, इसका अंदाजा तो उसे उसी दिन लग गया था जब वह सुबह अपने कमरे में निर्वस्त्र होकर सो रही थी और उस समय उसे जगाने के लिए,अंकित कमरे में आया था और उसे नंगी देखकर उसकी हालत खराब हो गई थी और उसी पल का फायदा उठाते हुए वह उसकी बुर पर अपने होंठ लगाया था सुगंधा अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से सिहर उठी थी,,,और इस समय हमसे एहसास हो गया था कि अगर उन दोनों के बीच कुछ हुआ तो अंकित इसी तरह से उसे अद्भुत सुख प्रदान करेगा।
और आज उसका सोचना एकदम सही साबित हो रहा था,,,, अंकित मदहोश होकर अपनी मां की बुर मेंडूबा चला जा रहा था उसकी गहराई भले ही डेढ़ 2 इंच की थी लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई झरना हो और वह उसमें पूरी तरह से उतरता चला जा रहा था। अंकित की अभिलाषा आज पूरी हो रही थी वह अपनी मां की दोनों जांघों को अपनी हथेली में दबोचा हुए उसके गुलाबी बुर को अपने होठों से अपनी जीभ से चाट रहा था। उसका मादक गंध अंकित की उत्तेजना को और बढ़ा रहा था। सुगंधा मचल रही थी मछली की तरह पानी के बिना तड़प रही थी वह बिस्तर पर कसम खा रही थी और अपने बेटे की तरफ देख रहे थेलेकिन साड़ी कमर तक उठी होने की वजह से उसे कुछ ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था तो वह अपने बेटे की सद्भूत हरकत को देखने के लिए अपने हाथ की कहानी का सहारा लेकर अपने आपको ऊपर की तरफ उठा ली थी और अपनी दोनों टांगों के बीच देख रही थी जहां पर उसका बेटा पूरी तरह से उस पर छाया हुआ था,,,,।
सहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,ऊममममममम,,,,,ओहहहह अंकित मेरे बेटे तू तो मुझे पागल कर दे रहा है,,,,सहहहहह आहहहहहहहहहह,,,,चाट ,,,(अपने बेटे के सर पर हाथ रखते हुए उसे पर थोड़ा दबाव बनाते हुए) पुरी जीभ अंदर डालकर चाट बहुत मजा आ रहा है रे,,,,,ऊममममममम,,,,,,उफ्फ,,,,,,,,,,।
(अपनी मां की गरमा गरम सिसकारी ओर उसकी उत्तेजना भरी बातें अंकित के हौसले को बढ़ा रही थी अपनी मां की बात सुनकर अंकित पूरी तरह से जोश में आ गया था और जितना हो सकता था उतनी अपनी जीभ को अंदर डालकर उसे गोल-गोल घूमा रहा था,,,,, अंकित की हरकत से उसकी मां पूरी तरह से बेचैन हो रही थी मदहोश हो रही थी और अंकितऔर भी ज्यादा उत्तेजित हो क्या जब उसकी मां अपनी कमर को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर खुद गोल गोल घूमाकर उसके चेहरे को अपनी बुर से रगड़ रही थी,,,, अंकित समझ गया था कि अब यह लंड लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। लेकिन अभी समय था अभी तो अंकित को अपनी मां के खूबसूरत बदन से जी भर के खेलना था जिसे देख देखकर वह पागल हुआ जाता था,,,, जिसके बारे में सोच सोच कर वह ना जाने कितनी बार मुठ मार चुका था,,,,, ऐसे खूबसूरत बदन को किया इतनी जल्दी कैसे वह अपनी गिरफ्त से छोड़ सकता था। आज तो मौका मिला था उसे अपनी मां की जवानी से जी भर कर खेलने का,,,,। अंकित इस मौके को गंवाना नहीं चाहता बल्कि इसका जी भर कर मजा लुटना चाहता था। इसलिए तो अंकित पागलों की तरह अपनी मां की बुर की चटाई कर रहा था,,,, अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर उसका गुदाजपन का एहसास उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था। इस तरह का मजा तो वह पहले भी ले चुका थाअपनी नानी के साथ एकदम खुलकर रात भर मजा लिया था लेकिन उसेअच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि जो मजा उसकी मां की बुर में मिल रहा था वह मजा उसकी ना तो नानी की बुर में और ना ही सुमन और सुमन की मां की बुर में मिला था और ना ही राहुल की मां की बुर में,,,,वह इस बात पर गर्व कर रहा था कि वाकई में उसकी मां की बात ही कुछ और है,,,।
आधी रात से ज्यादा का समय हो चुका था घर में अभी भी ट्यूबलाइटअपनी रोशनी भी खेल रही थी और उसकी दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा थाअभी नंगी अवस्था में लेटी हुई उसकी मां अपनी टांगे फैलाकर अपने बेटे को अपनी बुर चटाई का आनंद दे रही थीभले ही औरत अपनी संस्कार की अपनी मर्यादा की चाहे जितनी भी दवाई दे आखिरकार बिस्तर पर आने के बादवह पूरी तरह से एक रंडी हो जाती है और जी भर कर मजा लेती भी और मजा देता भी है इस समय सुगंधा का यही हाल था सुगंधा कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह से वह अपने बेटे को मजा देगी लेकिन जब से अपने बेटे की हरकत को देखकर और अपने मन में दबी हुई भावनाएं उजागर होता हुआ महसूस की थी तब से वह इस पल के लिए तड़प रही थी। और आज उसकी यह तड़प उसकी पाया एस बुझाने वाली थी उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था,,,, लेकिन सुगंधा अपनी ही बात पर थोड़ा परेशान थे कि वह अपने बेटे को चाहे कुछ भी हो जाए अपनी बुर में लंड डालने के लिए ना बोली थी क्योंकि उसका कहना था कि वह गंदी किताब वाली मां नहीं है,,,, लेकिन अपने मन में यही सोच रही थी कि उसका बेटा जरूर उसकी बुर में लंड डालने की कोशिश करेगा जिसके लिए वह तड़प रही है और अपने मन में साफ उद्देश्य बना ली थी कि उस समय वह अपने बेटे को बिल्कुल भी नहीं रोकेगी,,,,,सुगंधा अपनी दोनों टांगों के बीच अपने बेटे की हरकत को देखकर पागल हुए जा रही थी वहजैसे बिल्ली दूध की मलाई चाहती है इस तरह से वह उसकी बुर चाट रहा था यह देखने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और पागलों की तरह मदहोश हो रही थी उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा छाया हुआ था।
और अंकित यहां पर अपना अनुभव कम लग रहा था अपनी मां की बुर चाटते हुए वह अपनी एक उंगली को धीरे से अपनी मां की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए उसके मजा को दुगुना करने लगा,,, सुगंधा वाक्य में अपने बेटे की इस हरकत से इस कलाबाजी से पूरी तरह से मदमस्त मदहोश होने लगी वह अपना दोनों हाथ अपने बेटे के सर पर रख दि और उसके सर को दबाते हुए अपनी टांगों को एकदम से घुटनों से मोड़कर पुरा खोल दी,,,पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी इस समय जिस तरह से वह बिस्तर पर हरकत कर रही थी वह पूरी तरह से छिनार बन चुकी थीअंकित भी पागलों की तरह अपनी मां की बुर में उंगली करते उसे चाट रहा था वह जिस तरह से मचल रही थी अंकित धीरे से अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाया और उसकी दोनों खरबूजा को पकड़कर जोर-जोर से दबाने लगा जिससे सुगंधा की हालत और ज्यादा पतली होने लगी वह अपने चरम सुख के करीब पहुंच रही थी उसकी सांसों की गति बड़ी तेजी से चलने लगी थी,,, पूरा कमरा उसकी गरमा गरम सिसकारीयो से गूंज रहा था,,,और इस समय वह इतनी मदहोश हो चुकी थी कि अपनी गरमा गरम सीसकारीयो पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रही थी,,,,
सरहहहह आहहहहहहह,,,,,,,सईईईईईईईई,,,,,ऊईईईईईईईई, मां मर गई रे तू तो मुझे पागल कर दिया है,,,आहहहहहहह,,,,, यह सब कहां से सीखा तु,,,,,,ऊममममम मैं तो तुझे पूरा नादान समझ रही थी हाय दइया तू तो मुझे पागल किए जा रहा है,,,,,(ऐसा कहते हुए वह जोर लगाकर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल रही थी अंकित समझ गया था कि उसकी मां झड़ने वाली हैइसलिए अपने दोनों हाथों को अपनी मां की चूची पर से हटकर वह धीरे से अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड के नीचे अपनी दोनों हथेलियां रख दिया और उसे ऊपर की तरफ उठाते हुए अपने होठों से एकदम से सटा दिया और पागलों की तरह नाक डालकर उसे चाटना जरूर कर दियावह अपनी मां की गुलाबी छोड़ के गुलाबी पत्तियों को अपनी नाक से जीव से जैसा हो सकता था वैसे कुरेद कुरेद कर अपनी मां को मस्त कर रहा थाऔर उसकी मां थी की पूरी तरह से मदहोश ले जा रही थी आज पहली बार अपनी गदराई जवानी का आनंद ले रही थी,,,, उसकी सिसकारियां थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। वह अपना सर उत्तेजना से दाएं बाएं पटक रही थी,,,।
सहहहहह आहहहहह। मेरे लाल मैं पागल हो रही हूं मुझे कुछ हो रहा है तेरी हरकत से मुझे लग रहा है जैसे मैं हवा में उड़ रही हूं मुझे पकड़ ले दोनों हाथों से दबोच ले में कहीं उड़ ना जाऊं,,,,,आहहहहहहह आहहहहहहह ऊईईईईई मां,,,, ऐसा कहने के साथ ही सुगंध जोर से अपने बेटे के कर के बाल को पकड़ कर अपनी बुर से सटा दी और भलभला कर झड़ने लगी,,, उसके गुलाबी छेद से मदन रस का फव्वारा एकदम से फूट पड़ाऔर सीधे अंकित के मुंह के अंदर उसकी धार लगने लगी लेकिन अंकित बेझिझक अपनी मां के मदन रस को अमृत की धार समझ कर चाटना शुरू कर दिया अपने गले के अंदर उतारना शुरू कर दिया,,,,अौर सुगंधा दोनों हाथों से अपने बेटे के बालों को पकड़ कर उसे अपनी बुर पर दबाए जा रही थी,,, उसे मजा आ रहा था मदहोश हो रही थी बरसों के बाद वह इस तरह से झड़ रही थी यह सुख उसके लिए उसके जीवन का सबसे अनमोल सुख थाइस तरह के सुख की कल्पना उसने कभी कि नहीं थी पति के देहांत के बाद तो उसने कभी इस बारे में सोचा भी नहीं थी कि अब उसे इस तरह का सुख कभी प्राप्त होगा लेकिन वर्षों के बाद उसके बेटे ने भी उसे जो सुख दिया था उससे वह पूरी तरह से निहाल हो चुकी थी।
सुगंधा के मदन रस से अंकित का गला तर तो हो रहा था लेकिन उसका चेहरा पूरी तरह से भेज चुका थाधीरे-धीरे जब सुगंध शांत होने लगी उसकी सांसों की गति थमने लगी तो वह धीरे से अपने होठों को अपनी मां की बुर पर से अलग किया और गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की तरफ देखने लगा,,,,सुगंधा भी अपने बेटे की तरफ ही देख रही थी दोनों की आंखें एक दूसरे से टकराई और सुगंधा शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली,,,, इस समय अपने बेटे से नजर नहीं मिल सकती थी क्योंकि जो सुख एक पति या प्रेमीके द्वारा मिलता है वह सुख उसे उसके बेटे ने दिया था और यही बात से वह शर्म से गड़ी जा रही थी लेकिन जो आनंद मदहोशी उसने अपने अंदर महसूस की थी उसे वहां अपने बेटे पर गर्व महसूस कर रही थी,,,,अपनी मां की हालत को देखकर अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था उसके जीवन में बाहर आ चुकी थी जिसके बारे में सोचकर वहां न जाने कितनी बार मुठ मार कर अपनी गर्मी को शांत किया था आज उसकी बाहों में थी आज वह उसके साथ कुछ भी कर सकता था।अंकित को साथ दिखाई दे रहा था कि अभी भी उसकी मां की सांस थोड़ी गहरी चल रही थी जिसकी वजह से उसकी नंगी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर उसके मुंह में फिर से पानी आने लगा था क्योंकि अभी तक वह सिर्फ अपनी मां को संतुष्ट कर रहा था अभी वह प्यासा का प्यासा ही था उसके पास हुआ था लेकिन अभी भी उसकी प्यास बुझी नहीं थी उसकी प्यास बढ़ती ही जा रही थी,,,लंड किया कर देख कर अंकित को ऐसा ही लग रहा था कि आज वह अपनी मां की बुर का भोसड़ा बना देगा।
धीरे-धीरे वह अपनी मां के ऊपर की तरफ जाने लगा नीचे का काम तो वह तमाम कर चुका था,,,, देखते देखते वह अपनी मां के ऊपर छा गया और अपने हाथ को अपनी मां के छाती के ईर्द-गिर्द रखकर उसे एक टक देखने लगाअभी भी उसकी मां की आंखें बंद थी वह मदहोशी में डूबी हुई थी उसका खूबसूरत चेहरा उत्तेजना से तमतमाया हुआ था,,,,, उसके लाल लाल होठ खुले हुए थे जिसमें से सांसों का आवागमन हो रहा था,,,,लाल-लाल होठों को देख कर अंकित से रहा नहीं गया और वह धीरे से अपनी मां के होठों पर अपनी होठ रख दिया और उसे फिर से चुसना शुरू कर दिया,,,,सुगंधा की आंखें खुल गई क्योंकि होठों पर उसके बुर का रस लगा हुआ था जो थोड़ा कसैला और नमकीन था,,,, सुगंधा को झट से एहसास हो गया कि ऐसा स्वाद किसका है,,,और वह अपने होंठों को अपने बेटे के होठ से अलग करने की कोशिश करते हुए बोली,,,।
ऊमममममम,,,, हटना,,,,,,
(अपनी मां की इस हरकत को देखकर अंकित मुस्कुराने लगा गहरी सांस लेता हुआ वह अपनी मां को देख रहा था उसकी मां अपनी आंखों को खोल दी थी और अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी। अपनी मां को मुस्कुराते हुए देखकर अंकित बोला,,,)
मेरे होठों पर लगा रस तुम्हारी बुर का ही है,,,(और इतना कहने के साथ ही फिर से उसके होठों को अपने होठों में भर लिया और चूसना शुरू कर दिया,,,
ईस बार वह अपने होंठों को अपने बेटे के होठ से बिल्कुल भी नहीं हटाई बल्कि इस बार तो वह खुद अपनी बुर का स्वाद लेने के लिए अपने होठों को खोल के अपने बेटे के होंठों को चूसना शुरू कर दी उसे भी अपनी बुर का स्वाद अच्छा लग रहा था उसका कसैला और नमकीन स्वाद उसे भी मदहोश कर रहा था दोनों एक बार फिर से गुत्थम गुत्था हो गए थे,,, सुगंधाअपने बेटे का स्वागत करते अपने दोनों टांगें फिर से खोल दी थी और इस बार भी उसका टनटनाया हुआ लंड उसकी बुर पर ठोकर मार रहा था सुगंधा फिर से गर्म होने लगी थी,,,दो बार वह खुद छोड़ चुकी थी लेकिन उसका बेटा अभी तक सिर्फ उसे ही संतुष्ट कर रहा था अभी तक उसके लंड से पानी नहीं निकला था इस बात की खुशी और गर्व दोनों सुगंधा के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था,,, क्योंकि एक औरत होने की नाते वह अच्छी तरह से जानती थी किशुरू-शुरू में मर्द अगर पहली बार किसी नंगी औरत को देख मिले तो भी उनके लंड से पानी निकल जाता है यहां तो उसका बेटा उसके अंगों से खेल रहा था दबा रहा था पी रहा था इसलिए बुर को चाट रहा था लेकिन फिर भी ज्यों का त्यों बना हुआ था,,,, और सुगंधा अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर उसके बेटे का लंड उसकी बुर में जाएगा तो उसे पूरी तरह से मस्त कर देगालेकिन कभी उसे याद आया कि उसने तो अपने बेटे को बोली थी कि चाहे जो भी करना है कर लेना लेकिन अंदर मत डालना,,,,इस बात से उसके चेहरे पर थोड़ी सी उदासी आ गई थी लेकिन अगले ही पर वह अपने मन में सोचने लगी कि भला इस अवस्था में बिस्तर पर मर्द औरत की बात मानते हैं क्याबिल्कुल भी नहीं मानते वह बिस्तर पर औरत के साथ मनमानी करने से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटते खास करके ऐसे मदहोशी भरे लम्हे में,,,,।
अंकितअपनी मां को बाहों में कसके बिस्तर पर उसके होठों का रसपान कर रहा था उसकी नंगी चूचियां उसकी छाती से चपी हुई थी और चुचियों का छुहारे जैसा निप्पल किसी भाले की तरह उसकी छाती से चुभ रही थी,,, लेकिन फिर भी उसकी चुभन अंकित को मदहोश कर रही थी अंकित बार-बार अपनी कमर हिला कर अपने लंड का एहसास अपनी मां की बुर पर बराबर करा रहा था,,,मदन रस से चिपचिपी हुई सुगंधा की बुर बार-बार उसे अपने अंदर लेने के लिए ललाईत नजर आ रही थीलेकिन अंकित चला कर दिखा रहा था वह अपने लंड को अपनी मां की बुर में जाने नहीं दे रहा था वह पसंद कैसे उसे पर रगड़ खिलाकर ऊपर की तरफ ले ले रहा था,,,अंकित अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके लंड को लेने के लिए मचल रही है भले ही वह अपने मुंह से कुछ भी बोल चुकी हो लेकिन इस समय वह पूरी तरह से पागल हुई जा रही थी चुदवाने के लिए लेकिन अंकित अपनी मां को तड़पाना चाहता था। उसे इस कदर मजबूर कर देना चाहता था किवह खुद है उसके लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़पे और गिड़गिड़ाए,,, अंकित अपनी मां के शब्दों को की अंदर नहीं डालने नहीं दूंगी वह इस बात को चुनौती की तरह स्वीकार कर लिया था,,,, और इसलिए वह इस समय भीबार-बार अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां की बुर पर रगड़ कर हटा दे रहा था,,,, और उसकी ईस हरकत से सुगंधा एकदम मचल जा रही थी,,,,।
दोनों का चुंबन जारी था लेकिन सुगंधा को फिर से पेशाब लग चुकी,,, थी,,, इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी क्योंकि अंकित उसकी बुर को इतना गर्म कर दिया था कि उसका लावा बार-बार पिघल रहा था। वह धीरे से अपने होठों को अपने बेटे के होठ से अलग की और अपने बेटे की आंखों में देखते हुए बोली,,,।
तू इतना बड़ा शैतान है मुझे मालूम नहीं था मैं तो तुझे बुद्धु समझती थी,,,, कहां से सीखा यह सब,,,,।
(अंकित अपनी मां को सच नहीं बताना चाहता था कि यह सब कहां से सीखा इसलिए अपनी मां की खूबसूरत चेहरे की तरफ प्यासी नजरों से देखते हुए वह बोला)
यह सब पढ़कर मैं सिखा हूं,,,।
कहां पढ़कर,,,?
वही गंदी किताब उसमें और भी कहानीया है,,,,, उसमें ही यह सब लिखा हुआ था तभी तो मुझे पता चला नहीं तो मुझे कभी मालूम ही नहीं पड़ता की औरत की बुर भी चाटी जाती है,,,(अंकित उसी तरह से अपनी मां के ऊपर पसरे हुए ही बोलाअभी भी उसका खड़ा लंड उसकी मां की बुर पर ठोकर मार रहा था जिससे सुगंधा मचल जा रही थी,,, और तभी अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) लेकिन तुम तो जानती होगी ना की बुर को मर्द चाटते भी हैं,,,,
नहीं मुझे भी नहीं मालूम था,,,
अब रहने दो झूठ बोलने को,,,
सच में मैं झूठ नहीं बोल रही हूं,,,
पापा तो चाटे होंगे ना,,,,
अगर चाटे होते तो मुझे पता तो होता कि इस तरह का सुख मिलता है उन्होंने कभी ऐसा किया ही नहीं,,,,
ओहहहह ,,,, इसका मतलब है कि पापा एक अद्भुत अविष्मरणीय सुख से वंचित रह गए,,,,।
क्या सच में यह इतना अच्छा सुख देता है।
तो क्या मम्मी मैं तो किताब में पढ़ा था तभी सोच रहा था कि कैसा लगता होगा और काफी उत्सुक भी था इस सुख को प्राप्त करने के लिए।
किसके साथ,,,(मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफ देखकर बोली)
तुम्हारे साथ,,,,
तुझे ऐसा क्यों लग रहा था कि यह सुख तुझे मुझसे ही मिलेगा,,,,।
पता नहीं क्यों लेकिन मुझे ऐसा ही लग रहा था कि जो कुछ भी सुख मुझे पहले मिलेगा अगर तुमसे ही मिलेगा क्योंकि तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत हो और ऐसी खूबसूरत औरत को में छोड़ना नहीं चाहता,,, बिना सुख लिए,,,
तुझे मजा आया,,,,
बहुत मजा आया मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था की पेशाब करने वाली जगह इतना ज्यादा मजा देती होगी,,, तुम भी तो पागल हो रही थी तुम्हें भी तो बहुत मजा आया।
(इस बात पर सुगंधा कुछ बोली नहीं बस शर्मा कर दूसरी तरफ नजर घुमा ली,,,,अपनी मां को शरमाता हुआ देखकर अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)
सच में तुमको भी बहुत मजा आ रहा था तभी तो अपनी गांड उठा उठा कर बुर चटवा रही थी,,,,।
सससहहहहह,,,, कैसी बातें कर रहा है,,, पहली बार में ही तु इतना खुल गया,,,,
खोलने वाली भी तो तुम ही हो,,,,।
चल अच्छा हट अब,,,,
क्यों अब क्या हुआ,,,?(अंकित धीरे से अपनी मां के ऊपर से हटते हुए)
मुझे फिर से जोरों की पेशाब लगी है,,,।
बाप रे तुम्हारे पेशाब की टंकी तो बार-बार भर जाती है,,,
अब इसमें मेरा कोई दोष थोड़ी ना है अब लग जाती है तो क्या करूं,,,,(इतना कहकर वह उठकर बैठ गई और वह बिस्तर से उतरने की तैयारी में थी कि तभी अंकित उसका ब्लाउज पकड़ लिया और उसे उतारने लगा)
अब यह क्या कर रहा है,,,?
उतार रहा हूं,,,(इतना कहते हुए वह ब्लाउज को दोनों हाथों से पकड़ कर पीछे की तरफ खींचने लगा जिसमें उसकी मां भी उसका सहकार देते हुए अपने हाथ को पीछे कर दी और अंकित आराम से उसके ब्लाउज को उतार कर एक तरफ रख दिया और फिर ब्रा के हुक को दोनों हाथों से पकड़ कर खोलने लगा यह देखकर वह फिर से बोली,,)
अब ईसे भी उतारेगा क्या,,,?
क्यों नहीं अब समय आ गया है कि मैं तुम्हें पूरी तरह से नंगी देखूं,,,,।
(अपने बेटे कि ईस तरह की बात सुनकर वह शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी। एकदम से हैरान थी की उसका बेटा एक हीं दिन में इतना ज्यादा खुल गया,, लेकिन उसे अच्छा भी लग रहा था अपने बेटे का बदला हुआ रूप देखकरसुगंधा अपने मन में अभी यही सोच रही थी कि तब तक अंकित उसकी ब्रा का हुक खोलकर उसे भी उसके बदन से अलग कर दिया,,,, और फिर उसकी साड़ी को भी खोलना शुरू कर दिया यह देखकर फिर से वह बोली,,,)
क्या अब मुझे पूरी तरह से इसी समय नंगी कर देगा क्या,,,,
तो क्या नंगी होने के बाद तुम और ज्यादा खूबसूरत लगती हो,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां की कमर से उसकी साड़ी को खोलकर अलग कर दिया था और उसकी पेटिकोट की डोरी कोई कोई झटके से खींचकर उसे कमर से ढीली कर दिया था लेकिन इस बारसुगंधा खुद ही अपनी पेटीकोट को पड़कर अपनी भारी भरकर गांड को थोड़ा सा ऊपर उठे और उसे आगे की तरफ खींच कर अपने पैरों से बाहर निकाल दी और बिस्तर पर एकदम नंगी हो गई,,,, और शर्मा का अपने बेटे की तरह देखे बिना ही अपनी नजर को नीचे झुका कर बोली)
अब खुश है तू,,,,,।
वाह रे मेरी जवानी से भरी हुई मम्मी,,, यही देख देख कर तो मेरे लंड की हालत खराब हो रही है,,,,(अपने लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करके हिलाते हुए वह बोला अपने बेटे की बात सुनकर वहउसकी तरह देखने लगी और उसके हाथ में पकड़ा हुआ लंड देखकर करवा एकदम से शर्मा गई और जैसे वह अपने बेटे को याद दिलाती हो ऐसे बोली,,)
कुछ भी हो इसे डालने नहीं दूंगी,,,,।
तुम तो ऐसे ही मुझे इतना मजा दे रही हो डालने की जरूरत ही क्या है,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर मुस्कुरा करसुगंधा बिस्तर पर से नीचे उतर गई ट्यूबलाइट में उसकी ड्यूटी और रोशनी में उसका नंगा बदन चमक रहा था उसका गदराया जिस्म अंकित को पागल कर रहा थाअपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड उसकी खरबूजा जैसी चूचियां और केले के तने की तरह चिकनी मोटी मोटी जांघें उसके होश उड़ा रही थी और सुगंध बिस्तर पर से चादर अपने हाथ में पकड़ कर उसे खींचने लगी यह देखकर अंकित तुरंत चादर पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचने लगा तो उसकी मां बोली,,)
इसे तो लपेटने दे,,, इस अवस्था में जाने में मुझे शर्म आती है,,,।
अफसर में कैसे शर्म का पर्दा तो पूरी तरह से हट चुका है तुम्हें बेपर्दा होकर ही पेशाब करने जाना होगा,,,।
तू सच में बहुत शैतान हो गया है कोई इस तरह से अपनी मां को परेशान करता है।
किसी की मां इतनी खूबसूरत होती भी तो नहीं है ना परेशान करने लायक मेरी मां परेशान करने लायक है इसलिए परेशान कर रहा हूं,,(इतना कहने के साथ ही चादर को फिर से खींच लिया उसे बिस्तर पर रख दिया एक बार फिर से उसकी मां पूरी तरह से नंगी उसकी आंखों के सामने खड़ी थी सुगंधा जान गई थी कि अब उसकी एक नहीं चलने वाली है,,,,इसलिए वह मुस्कुरा कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी और फिर अपनी कमर पर दोनों हाथ रखकर अपनी गांड मटकाते हुए दरवाजे की तरफ जाने लगी मानो कि जैसे वह भी अब पूरी तरह से अपने आप को तैयार कर चुकी थी बेशर्मी पर उतर आने के लिए,,,अपनी मां को इस तरह से जाता हुआ देखकर अंकित पूरी तरह से मस्त हो गया और देखते ही देखते सुगंधा दरवाजे की सीटकनी खोलकर कमरे से बाहर निकल गई,,,,अपनी मां को इस मादक अदा से गांड मटकाते हुए जाता हुआ देखकर अंकित अपने आप को रोक नहीं पायाऔर अभी जल्दी से बिस्तर से नीचे उतर गया और अपने पेंट और अंडरवियर जो कि उसके घुटनों में अटका हुआ था,,, उसे झटके से अपने पैर से बाहर निकाल कर कमर से नीचे नंगा हो गया और अपने शर्ट को भीउतारकर फेंक दिया और वह भी कमरे के अंदर पूरी तरह से नंगा हो गया उसका लंड छत की तरफ मुंह उठाए खड़ा था वह तड़प रहा था अपनी मां की बुर में जाने के लिए और अंकित उसे अपने हाथ में पकड़कर उसे दिलासा देते हुए बोला।
बिल्कुल भी चिंता मत कर आज की रात तेरी ख्वाहिश जरूर पूरी होगी,,,,(और इतना कहकर वह भी कमरे से बाहर निकल गया और घर के पीछे के तरफ पहुंच गया जहां पर उसकी मां एकदम नंगी बैठकर पेशाब कर रही थी इस रूप में तो वह और भी ज्यादा कामुक और भरे हुए जिस्म की लग रही थी,,,, अंकित अपनी मां का यह रोड देखकर पागल हुआ जा रहा था अपनी मां की भरी हुई जवान देखकर करवाना अपनी किस्मत पर गर्व कर रहा था,,,, और अपने आप से ही बोल कितना किस्मत वाला हूं मैं कि मेरी मां इतनी खूबसूरत और जवानी से भरी हुई है,,, सच में यह बहुत मजा देगी,,, अपने आप से ईस तरह की बात करते हुए वह एकदम से अपनी मां के पास उसके बगल में पहुंच गया वह भी पूरी तरह से नंगा थासुगंधा उसे अच्छी तो शर्म से पानी पानी हो गई पहली बार अपने बेटे को पूरी तरह से नंगा देख रही थी उसका नंगा लंड उसके करीब ही झूल रहा था उसका मन तो कर रहा था उसे पकड़ कर वह भी उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दे लेकिन उसका ऐसा करनाइस समय उचित नहीं था ऐसा उसका मानना था क्योंकि जिस तरह से उसने कही थी कि कुछ भी हो जाए लंड को डालने नहीं दूंगी इसलिए उसका पहला करना जरूरी नहीं था ऐसा वह सोच रही थी,,,, लेकिन फिर भी वह अपने बेटे से बोली,,,)
तुझे भी पेशाब लग गई,,,।
तुम इतनी गरम हो की बार-बार पेशाब लग जा रही है,,,
लेकिन कपड़े उतार कर आना जरूरी था,,,।
जब मम्मी कपड़े उतार कर नंगी पेशाब करने आ सकती है तो भला बेटा क्यों नहीं आ सकता।
देख रही हूं तुझे बहुत बातें बनाने आ गया है,,,,।
तुम्हारी खूबसूरती देख-देख कर मेरे मुंह से बस निकल जाता है,,,,और यह तुम्हारी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज तो मुझे पागल कर देती है,,,,( ईतना कहने के साथ ही अंकित अपने लंड पर से अपना हाथ हटाकर कमर पर रख दिया और पेशाब करना शुरू कर दिया,,,, सुगंधाबेशर्म की तरह अपने बेटे के लंड को देख रही थी उसमें से निकलने वाली पेशाब की धार को देख रही थी,,,और उसकी खुद की बुर में से पेशाब की धार निकल रही थी जिसमें से सिटी की आवाज पूरे वातावरण को मदहोशी से भर दे रही थी,,, अंकित अपने पेशाब को रोक-रोककर बाहर निकाल रहा था जिसकी वजह सेउसका लंड बिना पकड़े ही ऊपर नीचे हो रहा था और अंकित की हरकत देखकर सुगंधा की बुर पानी छोड़ रही थी,,,,,सुगंधा पेशाब कर चुकी थी लेकिन अपने बेटे को देख रही थी उसके लंड की लंबाई और मोटाई उसे पूरी तरह से मदहोश कर रही थी,,,, वह कभी सोची भी नहीं थी कि किसी का लंड इतना मोटा और लंबा हो सकता है,,,, सुगंधा अपने बेटे के लंड की आकार की आकर्षण में पूरी तरह से खो चुकी थी,,,, थोड़ी ही देर में अंकित भी पेशाब कर चुका था,,, लेकिन अचानक ही उसके मन में एक युक्ति सुझने लगीवह तुरंत अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां के एकदम करीब पहुंच गया और अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां के गाल पर रगड़ने लगा,,, अचानक से अपने बेटे की तरफ से हुई हरकत से सुगंधा एकदम से बावली हो गई यहां पर वह अपने संस्कार नहीं दिखाना चाहती थी वह अपना मजा किरकिरा नहीं करना चाहती थी,,,,इसलिए अपनी बेटी की हरकत पर गहरी सांस लेने लगी और अपनी आंखों को मदहोशी में बंद करने लगी अपनी मां की हालत को देखकर उनकी समझ गया था कि उसकी मां भी पूरी तरह से तैयार है,,, और वह तुरंत अपने लंड को पकड़े हुए ही अपनी मां के ठीक सामने खड़ा हो गया सुगंधा की आंखें बंद थी और अंकित अपने लंड के गरम सुपाड़े को अपनी मां के होठों पर रगड़ना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा उत्तेजना से मरी जा रही थी कुछ देर पहले जो होगा खुद सोच रही थी उसका बेटा अपने से ही पहल करके गई हरकत कर रहा था।
अब यह मत कहना कि पापा ने यह भी नहीं किया था तुम्हारे साथ,,,(अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां के लाल होठों पर रगड़ हुआ वह बोलासुगंधा अपने बेटे के कहने का मतलब को समझ चुकी थी और वह भी यही चाहती भी थीइसलिए वह तुरंत अपने होठों को खोलकर अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में आने के लिए आमंत्रण दे दी,,, और अपनी मां के ईस हरकत पर,,, अंकितगदगद हो गया और वह धीरे से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दिया उसकी मां तुरंत अपने बेटे के लंड को पकड़ कर अपने होंठों के बीच भर ली,,,, और कुछ देर तक उसे अपने होठों के बीच रखी रह गई वह इस अद्भुत पल को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी। इस एहसास में पूरी तरह से डूब जाना चाहती थी वह काफी उत्साहित और उत्सुक नजर आ रही थी उत्तेजना से वह भर चुकी थीवर्षों के बाद एक मोटा तगड़ा लंड जो कि उसके ही बेटे का था वह उसके मुंह में था और वह धीरे-धीरे उस पर अपनी जीभ घूमाना शुरू कर दी,,, अंकित मदहोश हुआ जा रहा थाअंकित पागल हुआ जा रहा था अपनी कमर पर हाथ रखकर इस तरह से खड़ा था और अपनी मां को देख रहा था अंधेरी रात होने के बावजूद भी उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था। देखते ही देखते उत्तेजना में लिप्त होकर सुगंधा अपने बेटे के लंड को चूसना शुरू कर दी धीरे-धीरे वह उसे अपने अंदर ले रही थी,,,, उसकी सांस फूल रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था वह पेशाब करने की मुद्रा में बैठी हुई थी,,,, देखते देखते धीरे-धीरे अंकित अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था और उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी मां के मुंह के अंदर बाहर हो रहा था। सुगंधा को जितना मजा आ रहा थाउससे ज्यादा मजा अंकित कह रहा था क्योंकि वह इस बात से और ज्यादा उत्तेजित था की उसका लंड उसकी मां चूस रही थी,,,
देखते ही देखते सुगंधा बड़े अच्छे से अपनी बेटी के लैंड को चूस रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई आइसक्रीम का कोन उसके मुंह में घुसा हुआ हो और उसे जीभ से चाट रही थी,,, मां बेटे पूरी तरह से बेशर्म बन चुके थेअंकित तो अपनी मां की जवानी में पूरी तरह से खो गया थालेकिन उसकी मां भी पूरी तरह से बेशर्मी पर उतर आई थी उसे भी समय लगने लगा था कि मजा लेना है तो पूरी तरह से बेशर्म बना ही पड़ेगा,,,, शर्म का घूंघट ओढ़े रहने से कुछ फायदा नहीं है,,,इसलिए वह अभी पूरी तरह से पैसा नहीं बन चुकी थी और उत्तेजना के मारे अपनी चूची को दोनों हाथों से पकड़ कर वह खुद दबा रही थी यह देखकर उनकीअपना हाथ खुद नीचे की तरफ ले जाकर के उसकी चूची को थाम लिया था उसे जोर-जोर से दबा रहा था,,,,सुगंधा की मदहोशी और उसकी लंड चुसाई से अंकित पूरी तरह से मत हो चुका था और अब शिसकारी लेने की बड़ी अंकित की थी।
सससहहह,,,,,आहहहहहहहह,,,ऊमममममम मम्मी तुम कितना मस्त चुस रही हो आहहहहहह तुम्हारा हर एक रूप मुझे पागल कर दे रहा है मैं कभी सोचा नहीं था कि तुम इस तरह से मेरा लंड चूसोगी,,,(, ऐसा कहते हैं अंकित उत्तेजना से भरकर अपना पूरा लंड उसके गले तक ठुंस दिया था,,,,जिसकी वजह से सुगंधा के साथ रखने लगी थी और वह फिर से उसे बाहर खींच लिया था ऐसा हुआ दो-तीन बार किया था हालांकि ऐसे सुगंधा को तकलीफ होती थी लेकिन उसे बहुत मजा आता था हैरानी की बात सुगंधा के लिए यह थी कि उसके बेटे का लंड बड़े आराम से उसके गले के अंदर तक पहुंच जा रहा था,,, और वह यही सोच कर हैरान हो रही थी कि जब उसका बेटा अपना लंड उसकी बुर में डालेगा का तो उसकी क्या हालत होगी,,,,सुगंधा पूरी तरह से अपने बेटे के रंग में रंग गई थी वह पागलों की तरह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में अंदर बाहर ले रही थी,,,,कुछ देर तक यह सिलसिला ऐसा ही चला रहा लेकिन अभी तक अंकित का लंड पानी नहीं फेंका था यह हैरान कर देने वाली बात थी सुगंधा के लिए,,,, इसलिए वह कुछ ज्यादा ही उत्साहित हैक्योंकि वह जानती थी कि जब उसका पति उसकी चुदाई करता था तोबहुत जल्दी पानी फेंक देता था भले ही उतने से ही उसे आनंद आ जाता था लेकिन चुदाई की जो सीमा थी वह बहुत कम थी,,,,
थोड़ी देर तक और चुदाई करने के बाद अंकित सही बर्दाश्त नहीं हुआ और वह अपनी मां की बांह पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठने लगा उसकी मां भी अपने मुंह में से अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल कर गहरी सांस लेते हुए उठकर खड़ी हो गई,,,,अंकित मदहोशी तब अपनी मां को देख रहा था दोनों एक दूसरे को देख रहे थे और अंकित तुरंत उसके लाल लाल हो तो को फिर से चूसना शुरू कर दिया इस दौरान वह अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को पकड़कर जोर-जोर से पहुंचने लगा और अपने लंड को आगे से अपनी मां की बुर पर रखना शुरू कर दिया वह एक तरह से अपनी मां को पूरी तरह से पागल बना रहा था चुदवाने के लिए,,,सुगंधा खुद अपने बेटे के लंड को ले लेना चाहती थी उसका बस चलता तो इस समय अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे अपनी बुर पर रखकर उसे अपनी पतली गली का रास्ता दिखा देती लेकिन वह अपनी बात से ही मजबूर थी,,,, कुछ देर तक इसी तरह से वह मजा लेकरआना वह जानता था कि आप लोहा गरम हो चुका है ,,,हथौड़ा मारने की आवश्यकता अब पड़ चुकी हैं,,,, अंकितफिर से अपनी मां को अपनी गोद में उठा दिया इस बार सुगंधा बिल्कुल भी नहीं घबराई क्योंकि उसे अपने बेटे की ताकत पर पूरा भरोसा था,,, अंकित अपनी मां को गोद में उठाए हुए ही वह उसे कमरे की तरफ ले जाने लगा,,,सुगंधा के कमरे का दरवाजा खुला हुआ था और वह तुरंत अपनी मां को कमरे में लेकर प्रवेश कर गया लेकिन इस बार कमरे का दरवाजा उसे बंद नहीं किया और अपनी मां को ले जाकर के नर्म बिस्तर पर फिर से पटक दिया,,, सुगंधा की हालत खराब थी उसकी बुर की भी हालत खराब थी उसकी बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी अंकित बिस्तर के नीचे खड़ा थाअपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था और अपनी मां की दोनों टांगों के बीच किसके गुलाबी छेद को देखकर और भी ज्यादा उत्तेजित हो रहा थाअपने बेटे की हरकत को देखकर वह समझ गई थी कि अब उसका बेटा उसकी बुर में लंड डालने के लिए तैयार है लेकिन फिर से वह अपने बेटे को अपनी बात याद दिलाते हुए बोली।
अंदर मत डालना बाकी जो करना है कर ले,,,,।
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं अंदर नहीं डालूंगा लेकिन मेरा पानी निकालना जरूरी है नहीं तो मैं पागल हो जाऊंगा,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगे उसे यकीन हो गया था कि उसका बेटा पूरी तरह से मर्द बन चुका है पानी निकलने वाली बात सुनकर उसकी छाती एकदम चोडी हो गई थी,,,,,देखते ही देखते घुटनों के बाल अंकित अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आगे बढ़ने लगा और जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रहा था उसकी मां अपनी टांगों को खोल रही थी। यह उसकी तरफ से आमंत्रण था,देखते ही देखते वह पूरी तरह से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच पहुंच चुका था लेकिन उसकी मां खुद ही अपनी टांगों को घुटनों से मोड़कर उसे खोल चुकी थीअपनी मां का यह रूप देखकर अंकित एकदम गदगद हुआ जा रहा था उसे मालूम था कि उसकी मां चुदवाने के लिए तैयार है बस नाटक कर रही है,,,,,अंकित पूरी तरह से मदहोशी में डूबा हुआ था उसकी आंखों के सामने सिर्फ उसकी मां की गुलाबी फोटो दिखाई दे रही थी और वह एकदम उत्तेजना से लाल हो चुकी थीअंकित अपने मोटे तगड़े लंड को पकड़ा और उसके सुपाड़े को अपनी मां की बुर पर पटकना शुरू कर दिया,,,,,,, जैसे ही उसका सुपाड़ा उसकी बुर पर पड़ा सुगंधा एकदम से सिहर उठी,,,,।
सहहहहह आहहहहहह,,,, यह क्या कर रहा है रे तु,,,,।
अब तुम कुछ मत बोलो तुम बोली थी ना की अंदर मत डालना बाकी सब कुछ कर लेना बस वही कर रहा हूं,,,,।
लेकिन तेरा तो एकदम हथौड़े जैसा है,,,,
अब इसमें मेरी क्या गलती है,,,( और ऐसा कहते हुए वह फिर से सुपाड़े को बुर पर पटक दिया,,,,, वह फिर से सिहर उठी ऐसा अंकीत दो-चार बार और किया तो सुगंधा की बुर से नमकीन पानी की फुहार फूटने लगे जिसे देखकर अंकित और ज्यादा उत्तेजित होने लगासुगंधा की तो हालत एकदम खराब हुई थी वह चाहती थी कि उसका बेटा उसके लंड को उसकी बुर में डाल दे लेकिन अंकित उसे तड़पाना चाहता था इसलिए अपने सुपारी को अपनी मां की गुलाबी क्षेत्र में हल्के से प्रवेश करा कर उसे ऊपर नीचे करके रगड़ रहा था,,,, उसकी गुलाबी लकीर पर पूरी तरह से अपने लंड के सुपाड़े की छाप छोड़ रहा था,,,, वह अपनी मम्मी की तरफ देख कर बोला।
कैसा लग रहा है मम्मी,,,।
(सुगंधा कुछ बोली नहीं उत्तेजना से उसका चेहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था और वह अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा दीऔर अंकित फिर से अपनी हरकत के दौरान आने लगा वह बार-बार अपने लंड को उसकी बुर के ऊपर हिस्से में हल्के से डालता और उसे खींचकर ऊपर कि तरफ निकाल लेता,,, ऐसा हुआ बार-बार कर रहा था सुगंधा समझ गई थी कि उसका बेटा उसे तड़पा रहा है,,,,वह पागल हो जा रही थी जिस तरह से उसके लंड का सुपाड़ा उसकी बुर के ऊपरी भाग पर प्रवेश करता था वह पागल हो जाती थीऔर वह तुरंत खींचकर उसे बाहर निकाल लेता था यह उसकी तड़प को एर ज्यादा बढ़ा रहा था सुगंधा अपने मुंह से नहीं बोल सकती थी और अपनी ही बात पर उसे पछतावा हो रहा था। उसका बस चलता तो अपने हाथ से अपने बेटे का लंड पकड़ कर उसे अपनी बुर में डाल दी थी लेकिन अपने कहने पर ही वह पछता रही थी,,,, और अंकित था की हर बार अपनी हरकत को दोहराता और अपनी मां को मदहोश कर देता अब सुगंधा से बर्दाश्त नहीं हो रहा थावह जानती थी कि उसका बेटा सिर्फ नाटक कर रहा है वह भी अपने लंड को उसकी बुर में डालना चाहता है बस उसे तड़पा रहा हैवह जानती थी कि जब इतना कुछ हो गया है तो अब आगे बढ़ने में कोई हर्ज नहीं है इतनी तो बेशर्म बन चुकी है एक बार फिर अपने बेटे के सामने बेशर्म बन जाएगी तो क्या हो जाएगा,,,।
इसलिए आप वहां अपने आप को पूरी तरह से तैयार करके जब उसका बेटा,,,, अपने लंड को उसकी बुर के मुंहाने पर लाता तब वह अपनी कमर एकदम से ऊपर उठा लेती,,, ऐसा हुआ बार-बार अपनी गांड उपर उठाकर अपने बेटे को इशारा दे रही थी,,, अपनी मां की हालत को देखकर अंकित मन ही मन खुश हो रहा थाअब वह अपनी मां को और ज्यादा नहीं तो उठाना चाहता था लेकिन एक बार उसके मुंह से जरूर सुनना चाहता था कि बस कर अब डाल दे इसलिए वह अपने लंड को इस बार थोड़ा सा अंदर तक उसकी बुर की गहराई में उतरा ,,,उसका पूरा सुपाड़ा उसकी गहराई में समा गया था,,,सुगंधा एकदम से मचल उठी पर फिर से अपनी गांड ऊपर की तरफ उठा दे जैसे ही वह अपनी गां ऊपर की तरफ उठाई अंकित तुरंतइस स्थिति में उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला।
बोलो अब क्या करूं मम्मी,,,।
तू सच में बहुत शैतान है और जिद्दी भी है मेरे मुंह से ही सुनना चाहता है ना,,,,।
तो क्या जब तक तुम बोलोगी नहीं तब तक मैं तुम्हारी चुदाई कैसे कर सकता हूं,,,,।
तो डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में कर मेरी चुदाई,,,,,,,(इतना कहते हुए वह शर्म से पानी पानी हो गई क्योंकि वह अपनी ही बात से मुखर गई थीअपने बेटे के आगे घुटने टेक दी थी अपने बेटे के लंड की ताकत को देखकर उसकी बुर खुद पानी फेंक रही थी वह अपनी बुर की हालत को देखकरअपने बेटे के आगे झुक गई थी अपनी मां के मुंह से इतना सुनकर अंकित मदहोश हो गया गड़बड़ हो गया पूरी तरह से जोश से भर गया और वह अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से थाम लिया… और फिर अपने लंड को अपनी मां की बुर में अंदर डालने लगा उसे साफ एहसास हो रहा था की उम्र के इस दौड़ में पहुंचने के बावजूद भी उसकी मां की बुर कसी हुई थी,,,, अपनी नानी और सुमन की मां के मुकाबले उसकी मां की बुर वाकई में एकदम कसी हुई थी जिसमें डालने में उसे बहुत मजा आ रहा था। धीरे-धीरे होले होले वह अपने लंड को अपनी मां की बुर की गहराई में डाल रहा था और जैसे-जैसे अंकित का लंड सुगंधा की बुर में प्रवेश कर रहा था वैसे-वैसे सुगंधा के चेहरे का हाव-भाव पूरी तरह से बदलता चला जा रहा था,,,,सुगंधा इस पल को अपने बेटे की सरकार को अपनी आंखों से देखना चाहती थी इसलिए वह फिर से अपने दोनों हाथ की कोनी का सहारा लेकर अपना मुंह ऊपर उठा ली थी और अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी नजर को स्थिर कर ली थी।और उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी बुर की गहराई में धीरे-धीरे घुस रहा था,,,, ऐसा लग रहा था कि उसके गुलाबी बिल में कोई अजगर धीरे-धीरे प्रवेश कर रहा हैवह जिस तरह से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में ले रही थी आश्चर्य से उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी,,,, अपने बेटे की मेहनत देखकर उसे उसके ऊपर गर्व महसूस हो रहा था कि उसका बेटा जरा भी जल्दबाजी नहीं कर रहा था बड़ी आराम से उसकी बुर लेने के लिए तैयारी कर रहा था,,,,।
अंकित की मेहनत रंग ला रही थी लेकिन इस बीच मां बेटे दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे,,,, मौसम की गर्मी तो ठीक है उसे पर से सुगंधा की जवानी की गर्मी अलग कहर ढाह रही थी,,,,लेकिन फिर भी मां बेटे दोनों को इस गर्मी की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी भले ही वह दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे लेकिन अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए पूरी तैयारी बना लिए थे।अंकित का आधा लंड सुगंधा की बुर में कुछ चुका था लेकिन सुगंधा को ऐसा लग रहा था कि उसकी बुर पूरी तरह से उसके बेटे के लंड से बढ़ चुकी है इसलिए आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था,,,,, वह कभी अपने बेटे को तो कभी उसके लंड को देख रहे थे उसके ऊपर का गुलाबी छेद एकदम से गोल हो चुका था किसी छल्ले नुमा,,, बरसों के बाद उसकी बुर में लंड प्रवेश कर रहा था वह पूरी तरह से मदहोशी में डूबी हुई थी,,,, अंकित को एहसास हो रहा था कि उसकी मां की बुर वाकई में ज्यादा कसी हुई थी इसलिए उसे थोड़ा धैर्य से काम लेना था,,,, इसलिए वह अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ेआधा लंड है धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया आधे लंड से भी सुगंधा को पूरे लंड का मजा मिल रहा था,,,,उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी चुचीया उसके हर एक धक्के के साथ लहरा रही थी,,,, सुगंधा पागल हुए जा रही थीवह कभी सोची भी नहीं थी कि उसके जीवन में ऐसा भी पल आएगा कि जब वह अपने हीं बिस्तर पर अपने ही बेटे के साथ चुदवा रही होगी,,,,अंकित मदहोश हुआ जा रहा था अपने आधे लंड से अपनी मां की चुदाई करते हुए वह बोला,,,)
अब कैसा लग रहा है मम्मी,,,,,!
सहहहहहह,,,,ऊममममममम,,,,आहहहहह,,,,(जवाब में उसके मुंह से बस इतना ही निकल रहा था क्योंकि बरसों के बाद उसकी बुर में लंड गया था तो उसे दर्द के साथ-साथ मजा भी आ रहा था दर्द और आनंद का मिला-जुला असर उसके चेहरे पर दिखाई दे रहा था,,, अंकित को अपनी मां के चेहरे का बदलता भाव बहुत अच्छा लग रहा था,,, अंकित से ज्यादा कुछ बोला नहीं क्योंकि पूछने की जरूरत नहीं थी उसकी मां का चेहरा सब कुछ बयां कर रहा था अंकित को मालूम था कि उसकी मां को मजा आ रहा है बरसों बाद औरत का पसंदीदा खिलौना अगर उसे मिल जाए तो उससे ज्यादा खुशी उसे किस बात की होगी,,,, अंकित के पसीने छूट रहे थे वह बराबर मेहनत कर रहा था मां बेटे दोनों पसीने से तरबतर होते हुए भी एक दूसरे को मजा देने से पीछे नहीं हट रहे थे,,,,,, अंकित अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से कस के पकड़ा हुआ था।और उसकी चुदाई कर रहा था।वह अपनी मां के उत्तेजना और दर्द से तमतमाए हुए चेहरे की तरफ देखते हुए बोला,,,)
सच मैं मम्मी यकीन नहीं हो रहा है कि इस उम्र में भी तुम्हारी बुर इतनी कसी हुई है।
ऐसा क्यों लग रहा है तुझे,,,,(मदहोश होते हुए सुगंधा बोली,,,)
पूरा घुस नहीं रहा है,,,।
घुसेगा कैसे तेरा लंड ज्यादा लंबा और मोटा है,,,,,(मदहोशी के आलम में सुगंधा एकदम से खुले शब्दों में अपने बेटे के अंग का नाम लेते हुए बोली)
तो क्या घुस नहीं पाएगा,,,,
मुझे क्या मालूम तू जाने अब तो तो पूरा मर्द बन गया है मुझसे क्यों पूछ रहा है,,,सहहहहहह,,आहहहहह,,,(सुगंधा मस्त होकर अपने बेटे को उकसा रही थी।और अपनी मां की बात सुनकर अंकित जोश में आ रहा था वह आधे लंड से भी अपनी मां की जबरदस्त चुदाई कर रहा था अंकित को अपनी मां के चेहरे पर मस्तीभारी झलक दिखाई दे रही थी वह समझ गया था कि अभी से दर्द नहीं हो रहा है और समय आ गया था पूरी मर्दानगी दिखाने का इसलिए वह अपनी मांकी कमर नहीं बल्कि इस बार उसके दोनों लहराते हुए खरबुजो को पकड़ लिया और फिर कचकचा के धक्का मारा और इस प्रयास में अंकित का पुरा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में समा गया,,,लंड की ठोकर सीधे सुगंधा के बच्चेदानी पर लगी थी,,, एकदम से सुगंधा दर्द से बिल बिला उठी,,,,)
ऊईईईईई,, मां,,मर गई रे,,,आहहहहह यह क्या किया रे हरामजादे,,,, तू तो मेरी बुर फाड डालेगा,,,आहहहबह निकाल जल्दी इसे,,, मुझसे रहा नहीं जा रहा है मेरी जान चली जाएगी,,,आहहहहहहह,,,, निकाल मादरचोद,,,,(गुस्से में और दर्द में अचानक से सुगंधा के मुंह से मादरचोद गाली निकल गई लेकिन अंकित को बुरा नहीं लगा बल्कि अपनी मां के मुंह से गाली सुनकर तो वह एकदम से मदहोश हो गया और अपनी मां को मनाने के चक्कर में उसके मुंह से भी निकल गया।)
नखरा मत दिखा मेरी रानी कुछ नहीं हुआ है इतना तो घुसता रहता है,,,,,, अभी तेरे दर्द को मजे में बदल देता हूं,,,,(अंकित भी मस्त होता हुआ अपनी मां से इस तरह से बातें कर रहा था मानों जैसे किसी रंडी से बात कर रहा हो और उसकी बातें सुनकर सुगंध भी हैरान थी,,, अंकित तुरंत अपनी मां के दर्द को कम करने के लिए उसकी चूची को दबाते उसे मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया और उसी तरह से अपना लंड उसकी बुर में घुसाए पड़ा रहा थोड़ी देर में सच मेंउसकी युक्ति काम करने लगी और उसकी मां का दर्द दूर होने लगा उसे मजा आने लगा,,,,,और थोड़ी ही देर में उसके मुंह से सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,, अंकित समझ गया कि अब काम बनने लगा है,,,और वह फिर से अपने लंड को अपनी मां की बुर में से बाहर खींचा और फिर उसे अंदर जड़ दिया लेकिन इस दौरान वह अपनी मां की चूची को मुंह में भरकर पी रहा था,,,, जिससे सुगंधा को दर्द ना हो धीरे-धीरे अंकित अपना कमर हिलाना शुरू कर दिया था सुगंधा भी मस्त होने लगी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वाकई में उसके बेटे का लंबा लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई में घुस गया है। कुछ देर तक अंकित उसी तरह से कमर हिलाता रहा,,,, सुगंधा को मजा आने लगा वह मस्त होने लगी,,, अंकित मजा लेते हुए अपनी मां की चुदाई कर रहा था।
धीरे-धीरे उसके धक्के की रफ्तार बढ़ने लगी सुगंधा को और ज्यादा मजा आने लगा,,, वह उसका जोश बढ़ाते हुए बोली।
और जोर से,,, और जोर से चोद मेरे राजा,,,आहहहहह मत कर दिया है रे तूने मुझे,,,आहहहहह जोर-जोर से डाल मेरी बुर में,,,,,
अभी डालता हूं मेरी रानी पर देखना तेरी बुर फट न जाए,,,,।
फट जाए तो फट जाए फाड़ डाल मेरी बर लेकिन जोर-जोर से चोद मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,।
तुझे मजा मिले तभी तो तेरी चुदाई कर रहा हूं,,,,।
तु आज पूरा मादरचोद बन गया है,,,
और आज तो पूरी रंडी बन गई है मेरी रंडी अपने बेटे की छिनार,,,आहहहहह,,, तेरी कसी हुई बुर में डालने में मजा आ रहा है।आहहहहहह (ऐसा कहते हुए अंकित जोर-जोर से अपनी मां की चुदाई कर रहा था उसकी मां एकदम मस्त हो रही थीअपने बेटे के मुंह से उसके लिए रंडी और छिनार शब्द सुनकर उसे पर भर के लिए तो अजीब लग रहा था लेकिन जिस तरह से उसकी चुदाई कर रहा था वह इन शब्दों से और ज्यादा मदहोशी का अनुभव कर रही थी. उसे मजा आ रहा था,,,,अंकित आप अपने मुंह में से अपनी मां की चूची को निकाल दिया था और उसकी कमर पकड़ कर जोर-जोर से चुदाई कर रहा था काफी देर से उसका लंड खड़ा था इसलिए उसे लग रहा था कि उसका पानी निकलने वाला है लेकिन सुगंधा का भी यही हाल था वह तीसरी बार झड़ने के कगार पर थी,,,,।
सहहहहह आहहहहहहहह,,,,, मुझे कुछ हो रहा है,,, जोर-जोर से चोद मेरे राजा,,,आहहहहहह तु पूरा मादरचोद बन गया है आज और मुझे अपनी छिनार बना दिया,,,,।
औरत को छिनार बनाकर चएदने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,।
लेकिन तू तो अपनी मां को छिनार बना दिया है,,,,।
बिस्तर पर तुम्हारा यही असली रूप है,,,, देख कितनी मस्त लग रही है तू चुदवाते समय एकदम नंगी होकर,,,।
आहहहहब आगहहहहह मेरा हो रहा है मेरा निकलने वाला है मेरे राजा,,,,।
अपनी मां की जल्दबाजी देखकर अंकित उसे करके अपनी बाहों में झगड़ा लिया उसका भी निकलने वाला था इसी आसन में वह पहली बार अपनी मां की चुदाई करते हुए चढ़ने वाला था वरना वह आसन बदल बदल कर अपनी मां की चुदाई करता लेकिन अभी पूरी रात बाकी थीइसलिए अंकित जोर-जोर से धक्के लगाकर वह भी अपनी मां के साथ झड़ जाना चाहता था और ऐसा ही हुआ दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,, अंकित और उसकी मां दोनों मंजिल पर पहुंच चुके थे जिसकी महीनो से दोनों को तलाश थी।
बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय पल को मां बेटे दोनों एक साथ महसूस कर रहे थे जी रहे थे,, सुगंधा की बुर से मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा था,, अंकित भी अपने वीर्य से अपनी मां की गुलाबी बुर को भर दिया था,,, दोनों का बदन हिचकोले खा रहा था अंकित पूरी तरह से अपनी मां को अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था और रह रहकर जोर से धक्के लगा दे रहा था,,, सुगंधा की आंखें मदहोशी में बंद थी वह गहरी गहरी सांस ले रही थी,,, अंकित के मोटे तगड़े लंड से अपनी बुर को चुदवा कर सुगंधा तृप्ति के एहसास में डूब रही थी उसकी टांगें पूरी तरह से खुली हुई थी टांगों के बीच में अंकित उसे अपनी बाहों में भरकर चरम सुख के एहसास मैं डूब रहा था और उसे अच्छी तरह से इस बात का भी एहसास हो रहा था कि अपनी नानी और सुमन की मां की चुदाई से भी कहीं ज्यादा आनंद उसे अपनी मां की चुदाई करने में आया था,,,, जब जब सुगंधा को लग रहा था कि उसका बेटा शांत हो चुका है तब तक अंकित जोर से धक्के लगा दे रहा था और सुगंधा पूरी तरह से आश्चर्यचकित थी कि झड़ने के बावजूद भी उसके बेटे का लंड पूरी तरह से खड़ा था और उसकी बुर में घुसा हुआ था।
थोड़ी ही देर में दोनों सामान्य हो गए लेकिन बिस्तर पर दोनों उसी स्थिति में थे,,,,, ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में मां बेटे पूरी तरह से जवानी का मजा लूट रहे थे। दोनों की तेज चलती सांसों की गति सामान्य होने लगी लेकिन अभी भी सुगंधा की बड़ी-बड़ी चूचियां अंकित की चौड़ी छाती के नीचे दबी हुई थी और इसका एहसास अंकित को मदहोश कर रहा थाअंकित अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हाथों में ले लिया था उसे अपनी मां पर बहुत प्यार आ रहा था क्योंकि उसने उसे अद्भुत सुख दिया था,,, उसे मर्द बनाने में पूरा सहकार दी थी। शर्म के मारे सुगंधा की आंखें अभी भी बंद थी वासना का तूफान गुजर चुका थाऔर एक बार वासना का तूफान गुजर जाने के बाद सुगंधा को हकीकत का एहसास हो रहा था,,, वासना और मदहोशी में जिनकी बाहों में मचल कर वह चुदाई का मजा ले रही थीवासना का तूफान गुजर जाने के बाद वह उसी की बाहों में शर्म से पानी पानी हो रही थी वह अपने बेटे से आंख मिलाने से कतरा रही थी,,,,और अंकित थकी अपनी मां के लाल लाल होठों को बार-बार चुम ले रहा था उसके गाल को चुम ले रहा था उसके माथे को चुम ले रहा था उसे अपनी मां पर बहुत प्यार आ रहा था,,,,लेकिन ईस अभी भी उसका लंड उसकी मां की बुर में समाया हुआ था,,,, जवानी और चुदाई के जोश में वह अपने बेटे के वचन को अपने ऊपर झेल गई थी लेकिन झड़ जाने के बाद उसेअपनी बेटे के वजन का एहसास हो रहा था और वह अपने बेटे के वजन के नीचे कसमसा रही थी लेकिन अंकित था कि अपनी मां के ऊपर से उतरने का नाम ही नहीं ले रहा था।
रात के 2:30 बज रहे थे लेकिन अभी भी दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी महीनो की मेहनत का यह फल था, जिस पल के लिए वह दोनों महीनो से तड़प रहे थे वह पल उनके जीवन में आ चुका था,,,, अंकित बहुत खुश था उसने अपनी मां की जवानी पर फतह हासिल किया था अंकित की मुस्कान में विजय की आभा दिखाई दे रही थी क्योंकि आज उसने अपनी मां की बुर में भी अपनी जीत का झंडा लहरा दिया थाअपनी मां को संपूर्ण रूप से संतुष्ट करने के बाद उसे अपनी मर्दाना ताकत पर गर्व महसूस हो रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां की जवानी बेलगाम घोड़ी की तरह है जिस पर काबू पाना सबके बस की बात नहीं थी भले ही उसने अपनी नानी की चुदाई कर चुका था उसे संतुष्ट कर चुका था और साथ ही सुमन की मां की भी चुदाई कर चुका था लेकिन एक मर्द होने के नाते उसे अच्छी तरह से ज्ञात था कि उन दोनों औरतों की तुलना में उसकी मां की गदराई जवानी कुछ ज्यादा ही उछाल मारती है। लेकिन अंकित उस पर भी काबू पा चुका था,,,, दोनों के बीच खामोशी छाई हुई थीसुगंधा अपने बेटे के वजन के नीचे कसमसा रही थी,, और उसका मोटा लैंड अभी उसकी बुर के अंदर घुसा हुआ था,,,, लेकिन शर्म के मारे वह कुछ बोल नहीं पा रही थी,,, और अपनी मां का शरमाता हुआ चेहरा देखकर अंकित उसके लाल-लाल होठों पर चुंबन करते हुए बोला।
तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,
(ऐसा कहकर फिर से उसके होंठ पर चुंबन किया और बोला)
तुम्हें कुछ ऐहसास हो रहा है,,,(ऐसा कहते हुए और फिर से उसकी कान के करीब चुंबन करने लगा उसके इस चुंबन से सुगंधा फिर से मदहोश होने लगी और बोली)
क्या,,,?
मेरा लंड अभी भी तुम्हारी बुर में घुसा हुआ है,,,
(अपने बेटे के मुंह से यह बात सुनकर वह शर्म से पानी पानी होने लगी उसे एहसास होने लगा कि एक ही रात में वह कितनी बदल चुकी हैकल तक उसका बेटा उसके सामने इस तरह के शब्दों का प्रयोग भी नहीं कर पता था उसकी इतनी इज्जत करता था लेकिन एक ही रात में एक ही चुदाई के बाद वह पूरी तरह से बदल गया है और उसके सामने कुछ भी बेशर्मों की तरह बोल दे रहा हैलेकिन इसमें भी सुगंधा को बुरा नहीं लग रहा था बल्कि अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जा रही थी। अपनी बेटी की बातें सुनकरहल्की सी मुस्कान अपने होठों पर लाते हुए लेकिन अपनी आंखों को बंद किए हुए ही वह बोली,,,)
तो बाहर निकाल ले उसे अब उसका काम खत्म हो गया है,,,
इतनी जल्दी खत्म हो गया है अभी तो पूरी रात बाकी है देखो घड़ी में कितना बज रहा है,(दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखते हुए अंकित बोला तो सुगंधा की भी नजर उसे पर चली गई और जब वह देख की घड़ी में घड़ी बज रहा है तो उसके होश उड़ गए वह एकदम से चोंकते हुए बोली)
हाय दइया यह तो अढी बज रहे हैं,,,।
तो क्यातुम्हारी बुर इतनी मलाई वाली है कि पता ही नहीं चलता कि कब समय गुजर जाता है,,,,(हल्के से अपनी मां की चूची को दबाते हुए बोला अपने बेटे की हरकत से और उसकी बात से सुगंधा फिर से शर्मा के अपनी आंखें बंद कर ली अपनी मां को इस तरह से शर्माता हुआ देखकर वह फिर से बोला,,)
अब क्यों शर्मा रही हो,,,, अब तो खुलकर जवानी का मजा लो बरसों से तुम्हारी बुर सूखी जमीन की तरह पड़ी हुई थी उस पर हल नहीं चला थातुम्हें तो खुश होना चाहिए था कि आज रात तुम्हारी सूखी जमीन को मैं हल चला कर जोत दिया हुं,,,।
अच्छा तो तु किसान बन गया है ना,,,।
किसान भी और तुम्हारा मादरचोद बेटा,,,,।
(अपने बेटे किस बात पर सुगंधा अपनी आंखें खोल दी और अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी और बोली,,,)
सच में तू मादरचोद हो गया है,,,।
और तु मेरी छिनार,,,,।
(अपने लिए अपने बेटे के मुंह से छिनार शब्द का प्रयोग सुनकर सुगंधा की बुर कुल बुलाने लगा रही थी,,, उत्तेजना के मारे फिर से उसकी बुर फुलने पिचकने लग रही थी,,,,उसे अपने बेटे के मुंह से यह सब सुनना अच्छा लग रहा था लेकिन हैरान वह ईस बात से थी कि यह सब वह सीखा कहां,,, इसलिए वह हैरान होते हुए बोली,,)
तु यह सब कहां से सीख गया,,,,
मोहल्ले में बहुत से लोग हैं जो इस तरह की गाली देते रहते हैं। तुम्हें अच्छी नहीं लगी क्या मेरे मुंह से गाली,,,।
मैं इसीलिए तो हैरान हूं कोई और समय होता तो शायद इस तरह की खाली तेरे मुंह से सुनकर तेरे गाल पर थप्पड़ लगा दी होती लेकिन इस समय न जाने क्यों तेरे मुंह से इस तरह की गाली मुझे अच्छी लग रही है।
इस समय मतलब किस समय चुदवाते समय ना,,,,(अपनी मां की आंख में आंख डालते हुए अंकित शरारती अंदाज में बोला और इस बात को सुनकर सुगंधा थोड़ा गुस्सा दिखाने लगी तो अंकित फिर से बोला,,,)
शर्मा क्यों रही हो बोलो ना चुदवाते समय इस तरह की गाली अच्छी लगती है।
तू बहुत शैतान हो गया है मैं तो तुझे बहुत सीधा-साधा समझ रही थी लेकिन तू तो एक नंबर का हरामि है।
मैं भी तुमको सीधी शादी औरत समझ रहा था लेकिन बिस्तर में तुम पूरा रंडी की तरह मजा देती हो।
अच्छा तो मैं रंडी हूं,,,
हां तुम हो,,,(ऐसा कहकर अंकितफिर से अपनी मां के लाल-लाल होठों पर अपनी होठ रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा उसे इस बात का डर था कि कहीं इस शब्द से उसकी मां नाराज ना हो जाए लेकिन उसकी होठों पर चुंबन करने वाली युक्तिकाम कर गई थी हो और वह फिर से मदहोश होने लगी थी अपने लिए रंडी शब्द का प्रयोग सुनकर उसके बदन में एक अजीब सी हलचल होने लगती थी जिसके चलते वह अपनी बाहों में अपने बेटे को कस ली और चुंबन में उसका साथ देने लगी अपनी मां की उत्तेजना को देखकरअंकित अपनी मां के होठों से अपने होंठ हटा दिया और उसकी आंखों में देखते हुए फिर से बोला,,)
बिस्तर में सच में तुम एकदम छिनार लगती हो,,,,(और ऐसा कहकर अंकित एक हाथ से अपनी मां की चूची को दबाने लगा अपनी बेटे की हरकत और उसकी बातें उसकी गाली सुनकर सुगंधा उत्तेजना से सिहरने लगीउसकी बुर फिर से पानी छोड़ रही थी और हैरानी की बात यह थी कि अभी भी उसके बेटे का लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था और टनटनाया हुआ था। अपने बेटे का जोश बढ़ाते हुए वह बोली,,,)
तो तुझे मैं मां के सिवा सब कुछ लगूंगी रंडी लगूंगी छिनार लगूंगी क्योंकि तेरे सामने टांगें खोल दि हुं ना इसके लिए,,,,।
ओहहह मेरी रानी इसी अदा पर तो मैं पागल हो जाता हूं,,,,,(ऐसा कहने के साथ ही वह इस बार अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीने लगा सुगंधा अपने बेटे के नीचे कसमसा रही थी लेकिन जिस तरह की वार्तालाप दोनों के बीच हो रही थी उसके चलते सुगंधा के बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी एक बार फिर से उसका मन बहकने लगा था,,,,और अंकित भी फिर से तैयार हो चुका था एक बार फिर से अपनी मां की चुदाई करने के लिएऔर वह अपनी मां की चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे पीता हुआ धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था,,,, सुगंधा की सांसे फिर से गहरी होने लगी। उसे अच्छा लगने लगा था,,,, लेकिन उसका बदन दर्द करने लगा था इसलिए वह बोली ,,)
थोड़ा रुक जा मेरा बदन दर्द करने लगा है,,,।
यह तो बदन दर्द का इलाज है मेरी जान और तुम मुझे रुकने के लिए कह रही हो,,,,अब तो यह घोड़ा अपनी मंजिल पर पहुंचने के बाद ही रुकेगा तुम्हारे मैदान में घोड़ा दौड़ाने में मुझे अच्छा लगता है,,,
तेरा घोड़ा बहुत तेज तर्रार है,,,, मेरे मैदान को खदान कर देगा,,,।
तभी तो मजा आता है मेरी रानी बुर का भोसड़ा बनाने में,,,,।
भोसड़ा मत बना देना नहीं तो दोबारा तुझे मजा नहीं आएगी,,,,
तुम्हारी बुर तो मुझे हर हाल में मजा देगी,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी कमर हीलाना शुरू कर दिया था,,,, अंकित का जोश पूरी तरह से परम शिखर पर था उसकी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी उसे पागल कर रही थी,,,अंकित अपनी मां के दोनों चूचियों को पड़कर अपनी कमर हिलाता हुआ उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया था,,,, और सुगंधा के मुंह से फिर से गरमा गरम शिसकारी की आवाज निकलना शुरू हो गई थी,,,,)
सहहहहब आहहहहहहहह,,,,आहहहहहहह,,,, मेरे राजा तुने फिर से मुझे गर्म कर दिया है,,,,आहहहहह,,,
मैं तेरा राजा हूं ना मेरी रानी,,,
हा रे तु मेरा राजा बेटा है,,,,सरहहहह
और तु मेरी रानी मा है रंडी मां छिनार मा है,,,(अंकित पूरी तरह से जोश में हर एक शब्द के साथ रह रहकर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और हर धक्के के साथ सुगंधा के मुंह से आहहहह आहहहह निकल रहा था।सुगंधा अपने बेटे के मुंह से रंडी छिनार शब्द सुनकर और ज्यादा जोश में आ जाती थी और नीचे से अपनी गांड ऊपर की तरफ उछाल देती थी अपने बेटे का साथ देती थी। अंकित को इसमें बहुत मजा आता है वह इतना जोश में आ गया था कि वह अपनी बाकी दोनों चूचियों कोघोड़ियों की लगाम की तरह पकड़ कर जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था सुगंधा को अपने बेटे की इस हरकत से थोड़ा दर्द तो होता था लेकिन उसका जोश देखकर पूरी तरह से मस्त हो जाती थी,,,, एक बार फिर से दोनों बिस्तर पर पागल हुए जा रहे थे,,,, सुगंधा हैरान थी अपने बेटे की ताकत देखकर,, उसका मुसल जैसा लंड उसके परखच्चे उड़ा रहा था,,,, वह इस बात से भी हैरान थी की अभी कुछ देर पहले ही उसके बेटे का लंड पानी फेंक दिया था लेकिन बुर में से लंड निकाले बिना ही एक बार फिर से उसका लंड उसे चोदने के लिए तैयार हो गया था और उसे चोद रहा था,,,,।
आहहहह आहहहहह आईईईई ,,,,,,ऊईईई मा बड़ा जाल मेरे तो बिल्कुल भी रहम नहीं करता है अपनी मां को चोदने में,,,।
अगर तुम्हें चोदने में रहम करने लगूंगा तो बुरचोदी कैसे बनोगी,,,।
क्या कहा तूने,,,
बुरचोदी,,,,,
हाय दईया,,,,, ऐसी ऐसी गंदी गाली कहां से सीख रहा है तु ,,,, भोसड़ी वाले,,,(सुगंधा की जोश में अपने बेटे को गाली देने लगी तो जवाब में उसका बेटा जोर से अपने लंड को उसकी बुर में पेलता हुआ बोला,,)
भोसड़ा छोड़ी बोल रहा हूं कि मोहल्ले में गाली देने वाले कम नहीं है उन्ही से सीख रहा हूं,,,।
तो क्या मादरचोद सारी गलियां मुझे ही देगा क्या,,,?
बहुत दिन से सोच रहा था कि इस तरह की गाली में किसी दो दूसरों को तो दे नहीं सकता था,,, क्योंकि मैं एक टीचर का लड़का हूंऔर एक शिक्षिका का लड़का होने की वजह से थोड़ा बहुत तो संस्कार होना चाहिए जो किसी को गाली ना दे इज्जत से बात करें,,,।
तो मादरचोद अपनी मां को इस तरह की गाली दे रहा है,,,।
और कोई है भी नहीं जिसे मैं गाली दे सकूंऔर सच कहूं तो तुम्हें चोदते समय इस तरह की गाली अपने आप मेरे मुंह से निकल रही है,,, और सच मानोइस तरह की गली तुम्हें देते हुए इतना जोश बढ़ जा रहा है कि मन कर रहा है कि तुम्हारी बुर में मैं खुद घुस जाऊं,
तो घुस जा ना मादरचोद,,,, तुझे रोका किसने है,,,,।
अगर घुस गया तो तेरी बर फट जाएगी छिनार,,,
फट जाने दे भोसड़ी वाले मेरे राजा,,,।
अगर फट गई तो मेरी भोसड़ा चोदी रानी कोई देखेगा तो यही कहेगा कि ना जाने कितने लोगों का लेती है,,,
तो क्या हुआ उसके सामने भी अपनी टांगें खोल दूंगी वह भी मेरी ले लेगा,,,।
तब तो तू पक्का छिनार बन जाएगी,,,।
छीनार तो मैं बन ही गई हूं,,,मेरे से बड़ी छिनार कौन होगी जो अपने ही बेटे के सामने टांगें खोलकर उसके लंड को अपनी बुर में ले रही है,,,,।
सच कह रही है साली रंडी तु, तेरे से बड़ी छिनार कौन होगी,,,(इतना कहने के साथ हीअंकित अपने लंड को अपनी मां की करने से बाहर निकाल लिया यह देखकर सुगंधा उसे सवालिया नजरों से देखने लगी तो अपनी मां की आंखों में उठ रहे सवाल को देखकर अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)
देख क्या रही है भोसड़ा चोदी चल पलट जा घोड़ी बन जा,,,, तुझे चोदने के लिए घोड़ा तैयार है,,, आज तुझे घोड़ी बनाकर चोदुंगा पीछे से तेरी लूंगा,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा की हालत खराब हो रही थी,,,उसे मालूम था कि उसका बेटा उसे बहुत मचा देने वाला है पीछे से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने वाली बात से वह काफी उत्साहित थी क्योंकि शादीशुदा जिंदगी में उसके पति ने कभी भी उसे घोड़ी बनाकर नहीं छोड़ा था और उसकी ख्वाहिश थी कि उसका पति उसे पीछे से चोदे वहपीछे से भी मजा लेना चाहती थी लेकिन उसके पति ने उसके साथ ऐसा नहीं किया था लेकिन आज अपने बेटे के मुंह से घोड़ी बनाकर चोदूंगा इस शब्द को सुनकर ही उसका रोम रोमप्रफुल्लित होने लगा था वह मचलने लगी थी और अपने बेटे की बात मानते हुए वह तुरंत अपने आप से ही पलट गई थी और घोड़ी बन गई थी अपने हाथ की कोहनी को नरम गद्दे पर टिकाकर और अपनी भारी भरकम गांड को हवा में लहराते हुए वह पीछे की तरफ देख रही थी,,अपने बेटे की हरकत को देख रही थी वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा क्या करता है और अंकित तुरंत अपनी मां के पिछवाड़े अपने आप को जमा लिया था और उसकी भारी भरकम गांड पर दो-तीन चपत लगाते हुए बोला,,,)
आज मजा आएगा तुझे चोदने में यही गांड मटका मटका कर पूरे दिन घर में इधर-उधर घूम कर मेरी हालत खराब करती थी मैं दिन रात सोचता था कि कब मुझे मौका मिलेगा तेरी पीछे से लेने का,,,,आहहहह और आज देखो दिन आ गया बहुत तड़पाती थी तू अपनी इसी गांड से रंडी,,,,तेरे बारे में सोच सोच करना जाने कितनी बार मुझे हाथ से हिला कर काम चलाना पड़ा था,,,,,(अपने बेटे की यह बात सुनकर सुगंधा को और भी ज्यादा मजा आने लगा थाउसे पूरा यकीन हो गया था कि उसका बेटा सिर्फ भोला भाला बनने का नाटक करता था दूसरे लड़कों की तरह वह भी उसे चोदना चाहता था और दूसरे लड़कों की तरह वहवभी उसके नाम की मुठ मारता था,,,,,अपने बेटे की बात सुनकर वह अभी जोश में आ गई थी और अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में दाएं बाएं लहराते हुए बोली,,)
तो कर ले अपनी ख्वाहिश पूरी मेरे राजा तेरे सामने तेरे हुस्न की रानी की नंगी गांड है डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में फाड़ दे मेरी बुर को पीछे से मैं भी तो देखु कितना दम है तेरे लंड में,,,,।
दम की बात करती है मादरचोद,,, रंडी छिनार अभी दिखाता हूं तुझे कि मेरे लंड में कितना दम है,,,(और इतना कहने के साथ ही ढेर सारा थुक अपने सुपाड़े पर लगाकर वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को थाम लियाऔर फिर धीरे-धीरे उसे अपनी मां की गुलाबी खेत में डालना शुरू कर दिया देखते ही देखते अंकित का लंड सुगंधा की बुर में पूरी तरह से समा गया था और फिर वह अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से कस के पकड़ कर बोला,,,)
ले रंडी अब संभाल,,,(और इतना कहने के साथ ही बहुत जोरदार धक्का मारा सुगंधा पूरी तरह से तैयार नहीं थी इसलिए एकदम से अपने बेटे के इस प्रहार से एकदम से आगे की तरफ लुढ़क गई और अंकित का लंड उसकी बुर से बाहर निकल गया,,, यह देखकर अंकित फिर से उसकी कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए बोला,,)
क्या करती है छिनार इतना भी नहीं संभाल पाती और मेरे लंड का दम देखेगी,,, अभी तेरी बुर का भोसड़ा बनाता हूं भोसड़ा चोदी,,,,(और इतना कहने के साथ ही फिर से अंकित अपनी मां की बुर में पूरा लंड डाल दिया और उसे दे दना दन चोदना शुरू कर दिया अंकित का लंड को ज्यादा ही मोटा थाजिसकी वजह से सुगंधा को अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर अपने बेटे का लंड रगड़ता हुआ अंदर बाहर होता हुआ महसूस हो रहा था जिससे उसका मजा दुगना होता जा रहा था,,,,सुगंधा एकदम मदहोश हो चुकी थी वह पागल हो जा रही थी पीछे से चुदवाने में वाकई में उसे बहुत मजा आ रहा था उसके हर एक धक्के के साथ उसकी पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां हवा में लहरा रही थी,,,जिसे अंकित अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसे थाम लिया और उसे दबाता हुआ अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया।
पूरे कमरे में सुगंधा की सिसकारी की आवाज गूंज रही थीवह पागल हुए जा रही थी वह कभी सोची नहीं थी की चुदाई में इतना ज्यादा मजा आता है अपने पति के साथ जो सुख ली थी वह उसके लिए अब बहुत ही कम लग रहा था वाकई में इस तरह से वह चुदाई का मजा ली ही नहीं थी,,,, हर धक्के के साथ सुगंधा को स्वर्ग का आनंद मिल रहा था आज के हाथों सेसारे संस्कार मर्यादा को एक तरफ रख दी थी आज वह पूरी तरह से औरत बन चुकी थी और औरत भी ऐसी की पूरी रंडी बन चुकी थी अपने बेटे से वह खुलकर चुदाई का मजा लूट रही थीअंकित भी कुछ काम नहीं था अंकित भी पूरा मादरचोद बन गया था एक ही रात में अपनी मां को रंडी बनाकर चोद रहा था ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि वह अपनी मां की चुदाई कर रहा है बिल्कुल भी शर्म और हया उसकी आंखों में नहीं थी,,,उसकी आंखों के सामने केवल एक नंगी औरत थी और उसके गुलाबी बुर थी जिसमें वह पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था,,,,
मां बेटे दोनों की सांसों की गति तेज होने लगी थी अंकित की हथेलियां का कसाव उसकी मां की चूचियों पर बढ़ता जा रहा था औरसुगंधा के सांस उखड़ती हुई महसूस हो रही थी क्योंकि वह फिर से अपने चरम सुख के करीब पहुंच रही थी वह इतनी जोश में और उत्तेजना में थी कि बार-बार पीछे की तरफ अपनी बड़ी-बड़ी गांड ठेल दे रही थी इस तरह से वह अपने बेटे के धक्के का जवाब दे रही थी और अंकित अपनी मां की इस हर हरकत से पूरी तरह से जोश से भर चुका था और धक्के पर धक्के लगा रहा था और अगले ही पल वह एकदम से अपने लंड में से वीर्य का फव्वाराअपनी मां की बुर के अंदर मारना शुरू कर दिया और सुगंधा को अपने बच्चेदानी पर अपने बेटे के लंड की धार गिरती हुई महसूस होने लगी और वह भी एकदम से भलभलाकर झड़ने लगी,,,,, दोनों मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रहे थे। कुछ देर तक अंकित इस तरह से अपनी मां की पीठ पर पसरा रह गया और फिर धीरे से अपने लंड को अपनी मां की बुर में से बाहर निकाल लियासुगंधा भी अपने बेटे का लंड अपनी बुर में से निकल जाने के बाद वह भी धीरे से बिस्तर पर बैठ गई और गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,, अंकित अपनी मां को देखकर मुस्कुरा रहा था और अपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था यह देखकर सुगंधा बोली,,,)
बस कर हरामजादे तू तो पूरा सांड है,,,,।
तेरी जैसी गदराई गांड वाली औरत को चोदने के लिए सांड की ही जरूरत है।मेरी छिनार मम्मी,,,।
चल अच्छा हट घड़ी में देख कितना बज रहा है 3:10 हो चुका है,,, (इतना कहकर वह बिस्तर से नीचे उतर गई यह देखकर अंकित बोला)
तो क्या हो गया सुबह कौन सा जल्दी उठना है स्कूल तो जाना नहीं है,,,,।
फिर भी एक डेढ़ घंटे में सुबह हो जाएगी और अभी तक हम दोनों सोए नहीं है,,,।
जो सोवत है वह खोवत है,,,, इतना तो सुनी होना अगर सो गई होती तो इतना मजा कैसे ले पाती,,,,,।
चल अब रहने दे मैं तो एकदम थक गई हूं तूने मुझे थका दिया है,,,(इतना कहते हुए वह नंगी ही दरवाजे की तरफ जाने लगी तो अंकित फिर से बोला,,,)
अब कहां जा रही हो,,,।
मुतने,,,,,,।(इतना कहकर वह कमरे से बाहर निकल गई क्योंकि दरवाजा बंद था ही नहीं,,, अपनी मां के मुंह से मुतने शब्द सुनकर अंकित का लंड फिर से सर उठाने लगा और वह भी अपनी मां के पीछे-पीछे जाता हुआ बोला,,,)
बाप रे तुम कितना मुतती हो,,,,,।
(इतना कहते हुए वह भी करके पीछे पहुंच गया जहां पर उसकी मां खड़ी होकर ठंडी हवा ले रही थी,,,, घर के पीछे वाली जगह थोड़ा खुली हुई थी जहां परठंडी हवा बहती थी और जिस तरह से जवानी के जोश में दोनों गर्मी से पसीने से तरबतर हुए थे यहां पर आकर सुगंधा को थोड़ा आराम मिल रहा था,,, अंकित भी अपनी मां के पीछे आगे से अपनी बाहों में भर लिया दोनों अभी भी पूरी तरह से नंगे थे इसलिए अंकित का जो हल्का सा लंड ढीला पड़ गया था वह जैसे ही उसकी मां की गांड से सटा उसमें फिर से जान आने लगी और वह फिर से लहराने लगा अपने बेटे की हरकत को देखकर सुगंधा बोली,,,)
अभी भी तेरा मन नहीं भरा है क्या,,,,
(अपनी मां की बातें सुनकर अपनी हथेली को उसके गुलाबी बुर पर रखते हुए बोला,,)
दुनिया में कोई ऐसा है जिसका मन इससे भर जाए,,,,।
चल अब रहने दे मुझे पेशाब करने दे अब मैं एकदम थक गई हूं,,,(इतना कहकर वह नीचे बैठने लगी तो उसकी भारी भरकम गांड पीछे की तरफ निकल गई जो सीधा अंकित के लंड से टकरा गईऔर अंकित के लंड का सुपाड़ा उसकी बुर की दरार से रगड़ते हुए आगे की तरफ निकल गया,,,, सुगंधा इस स्थिति में पेशाब करने के लिए बैठ गई और अंकित जोर से भरता हुआ सीधा अपनी मां के आगे आ गया और अपने लंड को लहराता हुआ उसके चेहरे पर रगड़ने लगा सुगंधा जानती थी कि उसे क्या करना है क्योंकि वह भी फिर से गर्म होने लगे थे लेकिन उसकी बुर से पेशाब के धार निकल रही थी जिससे बचने के लिएअंकित अपनी टांग को थोड़ा सा फैला दिया था उसकी टांगों के बीच से उसकी मां की पेशाब की धार उसकी टांगों के बीच से गिर रही थी सुगंधा अपने होंठों को खोल दीऔर अंकित अपने लंड को जो उसके वीर्य और उसकी मां के मदन रस से सना हुआ था उसे सीधा अपनी मां के होंठों के बीच डाल दिया और सुगंधा उसे चूसना शुरू कर दी,,, एक तरफ सुगंधा मुत रही थीदूसरी तरफ अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी यह मां बेटे दोनों के लिए बेहद उत्तेजना से भर देने वाला पल था,,,,जब तक सुगंधा पेशाब करती रही तब तक अंकित अपने लंड को उसके मुंह में डालकर चुस्वाता रहा,,, और जैसे ही उसकी बुर से सिटी की आवाज आना बंद हो गई अंकित समझ करके उसकी मां पेशाब कर चुकी है इसलिए वह धीरे से अपने लंड को उसके मुंह में से बाहर निकाला और उसकी बांह पकड़ कर उसे खड़ी करने लगा,,, सुगंधा समझ गई थी कि अब उसका बेटा उसके साथ क्या करने वाला है।
हैरानी वाली बात यह थी की सुगंधा पूरी तरह से थक चुकी थी लेकिन उसके बेटे की हरकत ने उसे फिर से गर्म कर दिया थालेकिन अब क्या करना है कैसे करना है यह सब कुछ उसने अपने बेटे पर छोड़ दी थी और अंकित उसे खड़ी करके उसे अपनी बाहों में लेकर उसे लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए धीरे से उसकी एकदम उठाया औरउसे अपनी कमर पर लपेट लिया और अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड कै सुपाड़े को उसकी बुर की गली का रास्ता दिखा दियाऔर फिर अपने दोनों हाथों को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे थाम कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और ईस उसके लाल नोटों का रस चूसता रहा,,, सुगंधा हैरान थी अपने बेटे की कामलीला को देखकर उसकी कलाबाजीया उसे पूरी तरह से पागल बना रही थी,,, वह कभी सोची भी नहीं थी कि उसका बेटा कामक्रीड़ा में इतना निपुण होगा जिसे वह बुद्धू समझती थी वह पूरा खिलाड़ी निकल गया था,,सुगंधा को मजा आ रहा था वह पूरी तरह से अपने बेटे की बाहों में थी उसकी हरकतों का मजा ले रही थी अपने बेटे की मजबूत हथेलियों को अपनी भारी भरकम नितंबों पर महसूस करके वह गदगद हुए जा रही थीअंकित जोर-जोर से धक्के लगा रहा था लेकिन उसकी गांड को थामे हुए था वरना वह गिर जाती,,,, और फिर 20 मिनट बाद मां बेटे फिर से एक साथ झड़ने लगे,,,,।
दोनों एक दूसरे से अलग हुए और अंकित भी पेशाब करने लगा सुगंधा पानी से अपनी बुर धोने लगीपूरी तरह से थक चुकी थी और सीधा बिस्तर पर आकर लेट गई बिना कपड़े पहने एकदम नंगी और अंकित भी अपनी मां को बाहों में भरे हुए वह भी उसके साथ लेट गयासुबह जब सुगंधा की नींद खुली तो घड़ी में 9:00 बज रहे थे वह एकदम से उठकर खड़ी हो गई थी अंकित अभी भी सोया हुआ था लेकिन नींद में भी उसका लंड खड़ा था अपने बेटे के लंड को देखकर सुगंधा को न जाने क्या सोच और वह सहज रूप से अपने बेटे के लंड को पकड़ लीइतने में अंकित की नींद खुल गई और वह अपनी मां की हरकत को देखकर फिर से उत्तेजित हो गया और उसका हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींच लियाइस समय उसकी मां उसके ऊपर थी और वह अपनी मां के रसपान फिर से करना शुरू कर दिया और उसकी नंगी गांड को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया उसकी मां उसकी खेत से आजाद होना चाहती थी लेकिन वह ऐसा होने नहीं दे रहा था।
अंकित बहुत देर हो गई है 9:00 बज गया है घर के सारे काम बाकी हैं,,,।
कहीं जाना भी तो नहीं है इसलिए बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,।
नहीं मैं थक गई हूं मुझे जाने दे,,,,।
नहीं जाने दूंगा तुमने फिर से मुझे गर्म कर दि हो,,,
रात भर तो पेला है तूने मुझे,,,,
एक बार और पेलवा लो,,,,(इतना कहते हैं कोई अंकित अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने लंड को पकड़ लिया और उसे नीचे से अपनी मां की बुर से रगड़ना शुरू कर दिया जो कि उसके ऊपर बैठी हुई थी अपने बेटे की हरकत से वह भी गर्म होने लगी और खुद-ब-खुद उसकी टांगें खुल गई और धीरे से वह अपने बेटे के खड़े लंड को अपनी बुर में ले ली,,,,भले ही वह अपने पति के साथ ऐसी हरकत कभी नहीं की थी लेकिन एक औरत होने के नाते उसे मालूम था कि आप उसे क्या करना है वह भी अपने बेटे की जीत के आगे विवश होकर उसके कंधे को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके लंड के ऊपर उठक बैठक करने लगी जिसमें सुगंधा को मजा आने लगा,,, और वह भी मजा लेते हुए सब कुछ भूल गई और अपने बेटे के लंड पर अपनी गांड को जोर-जोर से पटकने लगी। और तब तक पटकती रही जब तक दोनों का पानी न निकल गया।
वासना का तूफान गुजर चुका था मां बेटे दोनों हवास में डूबे हुए एक दूसरे की जरूरत को पूरा करने का एक दूसरे को दिलासा देते हुए मां बेटे के पवित्र रिश्ते को तार तार कर दिए थे,,, मां बेटे दोनों एक दूसरे की जरूरत को जानते थे और समझते थे,,, बरसों से बिना पति के दिन गुजारते हुए जिस तरह के मदहोशी भरे अभाव और एकाकीपन में जीवन गुजर रही थीउसे भी एक मर्द की जरूरत थी इस बात को उसका बेटा अच्छी तरह से समझता था और अपनी मां की जरूरत की आवश्यकता कितनी ज्यादा जरूरी है इस बात का एहसास उसे राहुल की मा नुपुर और सुमन की मां से मिलने के बाद है एहसास हुआ जो कि दोनों के पति मौजूद थे जिनमें से एक उसकी मां के साथ एक ही स्कूल में सहअध्यापिका भी थी,,, लेकिन अपनी मां चलती हुई जवानी सेमजबूर होकर अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए अपने ही बेटे के साथ हम बिस्तर होकर अपनी जरूरत को पूरी कर रही थी और दूसरी पति के होने के बावजूद भी ,, अकेलेपन का फायदा उठाते हुए खुद उसके साथ ही संभोग सुख प्राप्त कर रही थी ,,, दोनों औरतों की जरूरत और मजबूरी को देखते हुएअंकित को अच्छी तरह से एहसास होने लगा था कि उसकी मां को भी एक मर्द की जरूरत हैजिसके चलते हैं उसने अपनी मां के साथ संबंध बनाकर उसे बहुत सुख दिया था जिसके अभाव में वह जी रही थी, और जी सुख के अभाव में उसका जीवन नीरस बन चुका था लेकिन एक बार फिर से उसने अपनी मां के बेरंग जीवन में रंगों की बौछार ला दिया था।
वहीं दूसरी तरफ सुगंधा एक मर्द और औरत के बीच के संबंध को फिल्म के जरिए देखकर धीरे-धीरे अपनी भावनाओं को भड़काने लगी थी अपनी जरूरतों को समझने लगी थी,,उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि वाकई में एक औरत का जीवन मर्द के बिना कितना अधूरा है खास करके तब जब औरत पूरी तरह से जवानी से खीली हुई हो,,, अपने जीवनके बारे में सोचकर सुगंधा को एहसास होने लगा था कि उसे भी दूसरी औरतों की तरह जिंदगी के हर एक सुख प्राप्त करने का पूरा अधिकार हैलेकिन अपनी मर्यादा और अपनी सीमा को अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि अगर घर के बाहर कदम रखकर वह किसी गैर मर्द के साथ संबंध बनाती है तो वह उसके जीवन और उसके परिवार के लिए अपमानजनक स्थापित हो सकता है और जिसके चलते समाज में वह बेइज्जत हो सकती हैइसलिए वह बहुत समझदारी से कमली और काफी सोच विचार करने के बाद वह अपने ही बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए सोचने लगी थी और उसे हिसाब भी होने लगा था कि चार दिवारी के अंदर रिश्तो की मर्यादा कोई मायने नहीं रखती और उसकी यह सोच उसके आत्मविश्वास में तब और ज्यादा बढ़ोतरी करने लगी जब वह सब्जी मार्केट मेंनूपुर को अपनी बेटी के साथ देखी थी और जिस तरह से उसका बेटा उसके नितंबों पर हाथ घुमा रहा था वह देखकरसुगंधा के तन बदन में हलचल सी मच गई थी एक मां बेटे के बीच इस तरह की छेड़खानी को अच्छी तरह से समझने लगी थी और अपने बेटे को पूरी तरह से जवानी की दहलीज पर कदम रखते हुए देखकर उसकी भी भावनाएं भड़कने लगी थी जिसके चलते किसी भी कीमत पर वह अपने बेटे के साथ संबंध बनाना चाहती थी औरइस बात को वह अच्छी तरह से जानती थी कि घर के चार दीवारी के अंदर उसके और उसके बेटे के बीच किस तरह का संबंध है यह भला घर के बाहर के लोग कैसे जान सकते हैं,,, और चोर तभी चोर साबित होता है जब वह पकड़ा जाए और सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि अगर उसके और उसके बेटे के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो जाता है तो इस बारे में ना तो वह किसी से कुछ कहे की और नहीं उसका बेटा इसलिए वह पूरी तरह से निश्चित थी और काफी मशक्कत करने के बाद अपनी मंजिल को प्राप्त कर ली थी।
रात भर चुदाई के मजे लेने के बाद सुबह जब नींद से उठी तोउसे नहीं मालूम था कि रात भर उसकी सवारी करने के बाद सुबह खुद उसे अपने बेटे के लंड की सवारी करना पड़ेगा लेकिन यह अनुभव भी बेहद सुखद था जवानी के दिनों मेंअपने पति के साथ जिस तरह का मजा हुआ नहीं ले पा रही थी एक ही रात में वह अपने बेटे के साथ खुलकर जीवन का आनंद ले रही थी,,, एक ही रात में अंकित ने अपनी मां को पूरी तरह से रंडी बना दिया था और यह एहसास दिला दिया था कि जीवन का सुखाकर अच्छी तरह से लेना है तो औरत के शर्म के परदे से पूरी तरह से बाहर आना होगा और एक रंडी की तरह खुलकर मजा लेना होगा,,,,सुगंधा अपने बेटे की लंड की सवारी जिस तरह से कर रही थी वह बेहद आश्चर्य का अनुभव कर रही थी,,, अपने थोड़े भारी भरकमशरीर की वजह से वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि वह बिस्तर पर इतनी फुर्ती दिखा पाएगी लेकिन जिस तरह से वह अपने बेटे के लंड पर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को जोश के साथ पटक रही थी वह बेहद उत्साहित कर देने वाला था एक तरह से उसकी यह हरकत उसे पूरी तरह से आत्मविश्वास से भर दी थी। बिस्तर से उतरते उतरते एक बार फिर से उसने अपनी जवानी का रस निचोड़ कर निहाल हो चुकी थी और अपने बेटे को भी तृप्त कर दी थी।गहरी सांस लेते हुए सुगंधा बिस्तर से नीचे उतर चुकी थी वह अभी भी पूरी तरह से नग्नअवस्था में ही थी ,,,कमरे मेंअभी भी ट्यूबलाइट जल रही थी जिसकी दूधिया रोशनी में सबको साथ दिखाई दे रहा था वैसे तो सुबह के 9:00 बज रहे थे दिन का उजाला हो चुका था लोग अपने-अपने काम में लग चुके थे लेकिन सुगंधा बरसों के बाद एक बार फिर से मदहोशी का एहसास कर रही थी,,,, जिस तरह की रात उसकी गुजारी थी ऐसा कहना बिल्कुल रुचि थी ताकि सुगंधा अपने जीवन में दूसरी बार सुहागरात मना रही थी,,,।
क्योंकि औरत के जीवन में सुहागरात उसके लिए पहला अवसर होता है जब वह किसी पुरुष संसर्ग से जिस्मानी तौर पर आनंद लेती है और अपने पति के देहांत के पास बरसों गुजर गए थे इस सुख से वह पूरी तरह से वंचित थी लेकिन उसके जीवन में एक बार फिर से वही रात आई थीजिसमें वह अपने बेटे के साथ चुदाई का मजा लूट रही थी और एक अद्भुत आनंद और उत्साह के साथ जिसमें शर्म की कोई जगह नहीं थी जिसमें वह पूरी तरह से बेशर्म थी,, और बेशर्म बन जाने में कितना आनंद होता है उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था। पानी निकल जाने के बाद भीअंकित का लंड अभी भी छत की तरफ को उठाकर खड़ा था और हवा में लहरा रहा है इसे अंकित अपने हाथ में पकड़ कर उसे हिलाते हुए अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए बोला।
कैसी लगी सवारी,,,,।
चल हट बदमाश,,,,,(सुगंधा शर्माते हुए बिस्तर पर पड़ी अपनी पेटीकोट को लेने लगी तो अंकित तुरंत अपना पर उसे पर रखकर उसे दबा दिया और बोला,,,)
तुम ऐसे ही खूबसूरत लग रही हो इसे पहनने की जरूरत ही क्या है।
चल अब रहने देबहुत हो चुकी तेरी बदमाशी रात भर तो अपनी मनमानी करता आ रहा है लेकिन दिन के उजाले में मैं तुझे अपनी मनमानी चलाने नहीं दूंगी,,,
मनमानी कहां थी मम्मी,,, सब कुछ तुम्हारी जरूरत के मुताबिक ही तो हुआ है तुम भी तो यही चाहती थी।
चल रहने दे मैं ऐसा कुछ भी नहीं चाहती तू ही न जाने मुझे क्या से क्या बना दिया,,,!(पेटिकोट को अपने हाथ में पकड़ कर अपने बेटे के पैर के वजन के नीचे से छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली,,)
क्या बना दिया रात में भी तुम मम्मी थी और इस समय भी मम्मी हो,,,,।
कोई अपनी मम्मी को चोदता है क्या,,,?(अपने चेहरे पर शर्म का लहजा लाते हुए सुगंधा बोली,,)
किसी की मम्मी इतनी खूबसूरत होती है क्या,,?
तो खूबसूरत होने का यह मतलब थोड़ी है कि बेटा ही उस पर चढ़ जाए।
मां की गदराई जवानी देखकर कोई और चढ़ जाए इससे अच्छा तो बेटे को ही चढ़ जाना चाहिए घर की बात घर की इज्जत घर में ही रहेगी,,,
अच्छा यह बात है तुझे लगता है कि मेरे ऊपर कोई और चढ़ जाएगा और मैं उसे चढ़ने दूंगी,,,।
तुम हो ही ऐसी बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूची सड़क पर चलते समय न जाने कितनों का लंड खड़ा हो जाता है तुम्हें देखकर,,,, और वैसे भी जिस तरह से जवानी से भरी हुई हो कोई भी तुम्हें चोदने के लिए तड़पता होगा।
तड़पता है तो तड़पने दो देख कर मन बहलाने वाले को भला क्या बोल सकते हैं,,,, लेकिन मैं किसी को चढ़ने दुं ऐसा हो नहीं सकता,,,।
वैसे कुछ इस तरह से तुम्हारी बुर गीली होती रहती है मुझे तो लगता है कि विवस होकर किसी के लिए भी टांग खोल दो,,,,।
उसका तो काम ही है गीली होना,,,, और मैं इतनी नाड़े की ढीली नहीं हूं कि किसी के लिए भी टांग खोल दुं,,,(सुगंधा इस तरह से अपनी पेटीकोट को अपने बेटे के पैर के नीचे से निकालने की कोशिश कर रही थी लेकिनअंकित था कि उसे छोड़ने को तैयार नहीं था मां बेटे के बीच अब पूरी तरह से खुलकर बातें हो रही थी किसी भी तरह का शर्म नहीं था क्योंकि एक ही रात मेंमां बेटे दोनों ने मिलकर शर्म की दीवार को पूरी तरह से गिरा दिए थेअब दोनों के बीच किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं रह गया था और इस तरह की बातें करने में मां बेटे दोनों को बड़ा मजा आ रहा था,,,,जब सुगंध को लगने लगा कि वह अपनी बेटी के पैर के नीचे से अपना पेटिकोट नहीं ले पाएगी तो तंग आकर बोली,,)
चल रहने दे तू ही इसे पहन लेना मैं तो जा रही हूं नहाने,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा एकदम मादक अदा भी खेलते हुए अपनी बड़ी-बड़ी गांड मटकाते हुए दरवाजे तक पहुंच गई,,,, लेकिन फिर दरवाजे पर खड़ी होकर एकदम सेमुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफ नजर घुमा कर देखने लगी तो वह तंग रह गई अंकित बिस्तर के नीचे खड़ा था और अपनी मां की पेटीकोट को अपने शहर से डालकर उसे पहनने की कोशिश कर रहा था यह देखकर सुगंधा अपनी हंसी को रोक नहीं पाई और हंसने लगी लेकिन तब तक अंकित पेटीकोट को पहुंच चुका था और उसकी डोरी को अपनी कमर पर बांध रहा था,,,सुगंधा उसे देखकर जोर-जोर से हंसी जा रही थी और पेटिकोट की डोरी बात लेने के बाद वह अपनी मां की तरफ देखा और बोला,,,)
देख लो अब ठीक लग रहा है ना,,,।
बिल्कुल,,,(एकदम हंसते हुए) बहुत अच्छा लग रहा है लेकिन,,, उसका क्या करेगा (उंगली के ईसारे से अपने बेटे के लंड को दिखाते हुए जो की पेटीकोट में तंबू बनाया हुआ था),,,,, यह जो खड़ा है,,,, इसे तो नीचे कर तभी तो एकदम सही लगेगा,,,,।
जब तक तुम मेरे पास खड़ी रहोगी,,, तब तक यह,,,(पेटिकोट के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ते हुए और जोर से दबाते हुए) बैठने का नाम नहीं लेगा ,,,।
यह बात है तब तो मैं चली जाती हूं,,,,(इतना कहकर वह कमरे से बाहर निकल गई लेकिन पूरी तरह से नंगी हालत में अपनी मां की नंगी जवानी देखकर अंकित की हालत फिर से खराब हो रही थीइस बात से सुगंधा भी काफी हैरान थी की रात भर उसकी जमकर चुदाई करने के बाद भी और सुबह-सुबह उसके जवानी का रस चखने के बाद भी उसके बेटे का लंड बिल्कुल भी ढीला नहीं पड़ा था,,, अभी भी वह उसी तरह से टनटनाया हुआ था। अपने मन में सुगंधा यह सोचकर मुस्कुरा रही थी कि एक औरत को क्या चाहिए एक मोटा तगड़ा लंबा लंड जो दीन रात उसकी चुदाई करके उसकी प्यास बुझाता रहे,,,, ऐसा सोचते हुए सुगंधा बाथरूम में घुस गई थी और पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई थी अभी भी घर में साफ सफाई करना बाकी था,, सुगंधा को अपने बदन में एक अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी एक अलग उत्साह उसके चेहरे पर दिखाई दे रहा था,,,, वह पेशाब करते हुए अपने बेटे के बारे में ही सोच रही थी एक ही रात में वह पूरी तरह से बदल गई थी यह भी एक हैरान कर देने वाली बात थी,,,, पेशाब करने के बाद वह तुरंत बात करने से बाहर निकल गई लेकिन देखी तोउसके कमरे से उसका बेटा वही पेटिकोट पहनकर बाहर निकल रहा था,,,, सुगंधा उसे देखकर फिर से हंसने लगी लेकिन अंकित कुछ बोल नहीं रहा था तभी वह बाथरूम के बाहर जहां पर बर्तन धोया जाता है वहीं पर आकर खड़ा हो गया अपनी पेटीकोट को दोनों हाथ से पकड़ कर और अपनी मां की तरफ देखने लगा सुगंधा उसकी हरकत को देखकर पागल हो जा रही थी लगातार वह हंसी जा रही थी। और वह हंसते हुए अपने बेटे से बोली।)
अब क्या करना चाहता है तू,,,,,?
मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,,।
तो,,,, यह पेटिकोट है तेरा अंडरवियर नहीं है जिसके छेद में से लंड बाहर निकाल कर पेशाब करना शुरू कर देगा,,,,(सुगंधा एक ही रात में पूरी तरह से बदल गई थी अब वह अपने बेटे के सामने लंड शब्द का प्रयोग करते हुए नहीं कतरा रही थी,,,, अपनी मां की यह बात सुनकर अंकितबेहद उत्साहित और उत्तेजित होने लगा और वह अपनी मां से बिना कुछ बोले अपनी पेटीकोट को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा जिस तरह से सुगंधा उसे रिझाने के लिए बड़ी मादक अदा से पेटिकोट ऊपर की तरफ उठाती थी ठीक उसी तरह से अपनी मां की तरफएक अजीब ही नजर से देखते हुए वह अपनी पेटीकोट को ऊपर की तरफ उठा रही थी और उसकी यह हरकत देखकर सुगंधा की हंसी नहीं रख रही थी और देखते ही देखते वह अपनी कमर तक अपनी पेटीकोट को उठा दिया था,,,, सुगंधा अपने बेटे की नंगी गांड को पहली बार बड़े गौर से देख रही थी जो की पूरी तरह से मर्दाना थी पूरी तरह से गोलाई लिए हुए नितंबों के किनारे की नसें उसकी मर्दाना ताकत की गवाही दे रही थी सुगंधा अपने बेटे के इस रूप को देखते रह गई और अंकित एकदम से नीचे बैठकर पेशाब करने लगा और सुगंधा फिर से जोर-जोर से हंसने लगी,,,, अंकित कुछ नहीं बोल रहा थावह सिर्फ अपनी मां को प्यासी नजरों से देखे जा रहा था अंकित की हरकत को देखकर सुगंधा बोली,,)
अब यह क्या नया नाटक है बहुत तुझे औरत बनने का शौक है,,,,।(ऐसा कहते हुए सुगंधा धीरे-धीरे उसके आगे की तरफ आ रही थी वह देखना चाहती थी कि इस अवस्था में बैठकर वह किस तरह से पेशाब करता है और देखते देखते वह अपने बेटे के ठीक सामने आ गई और अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर फिर से अंकित एकदम औरतों की तरह अपनी पेटीकोट उसको संभाले हुए था। वह अपने लंड को इस अवस्था में छोड़े हुए था जो कि एकदम ऊपर की तरफ मुंह उठाए पेशाब की धार फेंक रहा था,,,, इस नजारे को देखकर पल भर में ही सुगंधा की बुर फिर से गीली होने लगी और वह एकदम से हैरान होते हुए बोली,,)
हाय दइया तू तो सच में एकदम बेशर्म हो गया रे लेकिन सच में एक तरफ औरत बैठी हो पेशाब करने और एक तरफ तू बैठा हो तो औरतें शायद तुझे ही देखेंगी,,,,, वैसे एक बात बता तू हम औरतों की तरह इस तरह से बैठकर क्यों पेशाब कर रहा है,,,।
सच में बहुत मजा आ रहा है मुझे आज एहसास हो रहा है कि तुम औरतों को इस तरह से बैठकर पेशाब करने में कितना मजा आता है,,,।
और तुम मर्दों को हम औरतों को पेशाब करते हुए देखने में बहुत ज्यादा मजा आता है ना,,,।
बात तो तुम एकदम ठीक कह रही हो,,,,(इतना कहकर वापस कर चुका था और बैठे-बैठे ही अपने लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करके अपने लंड को झटका देने लगा ताकि पेशाब की बूंदे नीचे गिर जाए और ऐसा ही हुआ और वह लंड पकड़े हुए ही फिर से उठकर खड़ा हो गया,,,,,और अपनी मां की तरफ देख कर उसे हिलाते हुए बोला जो कि इस समय पूरी तरह से नंगी थी,,,) तुम्हें देख कर बार-बार खड़ा हो जा रहा है मुझे लगता है कि यह दिन भर तुम्हारी बुर में रहना चाहता है,,,,।
हां तू भी रहना चाहता है ना इसमें घुसकर अरे हरामि देख रहा है कितना बच गया है अभी घर की सफाई नहीं हुई हैचाय नाश्ता नहीं बना है ना हम दोनों में से किसी ने नहाया है और तू है कि,,,, तेरे दिमाग में यही सब चलता रहता है क्या,,,,(अपनी कमर पर हाथ रखते हुए सुगंधा बोली लेकिन उसकी नजर बार-बार अपने बेटे के लंड पर चली जा रही थी)
तुम जैसी हसीना पास में हो तो भला ऐसा कौन सा मर्दों का जिसके दिमाग में यह सब नहीं चलता होगा अगर जिसके दिमाग में यह सब नहीं चलता होगा तो समझ लो वह मर्द नहीं होगा,,,,।
अच्छा एक ही रात में तु मर्द हो गया,,,,!(
क्यों कोई कसर बाकी है तो बोलो अभी पूरा कर दुं,,,,(अपने लंड को मुठीयाते हुए वह बोला,,,, अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,)
नहीं नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं है और जल्दी से कपड़े पहन कर जाकर दूध लेकर आ चाय बनानी है तुझे तो कोई फिक्र नहीं है अगर दिन रात तेरे सामने टांग फैला है लेती रहूं तो दिन भर बस करता ही रहेगा खाने पीने की तो तुझे सुध है ही नहीं,,,,।
तुम्हारी जवानी से पेट भर जाता है तो फिर खाने-पीने की जरूरत ही क्या है,,।
चल अब रहने दे फिल्मी डायलॉग मारने को जा जल्दी से कपड़े पहन कर दूध लेकर तब तक मैं घर साफ कर देती हूं नहा कर तैयार हो जाती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही सुगंधा अपनी गांड मटकाते हुए अपने कमरे में चली गई अंकित भी कपड़े पहन कर दूध लेने के लिए घर से बाहर चला गया,,,, सुगंधा अपने बदन पर गाउन डालकर घर का काम करने में लग गई और रात भर जो कुछ भी हुआ उसके बारे में सोचने लगी,,,,घर की सफाई करते हुए अपने बेटे के बारे में सोच रही थी कि वह अपने बेटे को कितना बुद्धू समझ रही थीलेकिन उसे क्या मालूम था कि उसका बुद्धू बेटा पूरा मर्द बन चुका है और रात भर जो ठुकाई किया है उसे उसके बदन में अभी भी दर्द हो रहा था खास करके उसकी बुर की अंदरूनी भाग में,,,उसे अच्छी तरह से ऐसा सो रहा था कि वाकई में उसके बेटे का लैंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है,,,, अभी तक उसे महसूस हो रहा था कि जैसे उसकी बुर में उसके बेटे का लंड घुसा हुआ है,,,,झाड़ू लगाते लगाते हुए अपनी कमर पर हाथ रख ले रही थी क्योंकि अपने बेटे की जबरदस्त धक्को को उसकी कमर झेल नहीं पा रही थीजिसके चलते उसे अपनी कमर में थोड़ा-थोड़ा दर्द महसूस हो रहा था लेकिन इस दर्द के आगे वह सुख जो आनंद उसे मिला था वह बेहद अनमोल था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।वाकई में चुदाई में इतना सुख मिलता है उसे पहली बार एहसास हो रहा था वरना अपने पति के साथ भले ही वह संभव को सुख प्राप्त की थी लेकिन इस तरह का अद्भुत तृप्ति का एहसास उसे कभी नहीं हुआ था।
उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसका बेटा कैसा उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर जमकर धक्के लगा रहा था वह यह सोचकर हैरान थी और उसके चेहरे पर शर्म भरी मुस्कान तैरने लगती थीवह अपने बेटे की मर्दाना ताकत से पूरी तरह से हैरान्त रात भर चुदाई करने के बाद भी और सुबह तक चुदाई करने के बावजूद भी उसका लंड बिल्कुल भी ढीला नहीं पड़ा था यह उसके लिए गर्व करने वाली बात थी और अब उसे इस बात से और ज्यादा संतुष्टि मिल रही थी कि अब दिन रात उसका बेटा उसकी जमकर चुदाई करेगा जिस सुख को पाने का सपना वह देखते आ रही थी वह सपना एक ही रात में सच हो गया था,,,उसे इस बात से भी हैरानी हो रही है कि सुबह-सुबह अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर उसका खुद का मन एकदम से बहक गया था और वह कमरे से बाहर जाते-जाते एकदम से रुक गई थी और वह अपनी बेशर्मी से खुद हैरान थी की कैसे वह पूरी रंडी की तरह अपने बेटे के लंड पर अपनी गांड पटक रही थी,,,यह सब सोते हुए और घर में झाड़ू मारते हुए उसकी बुर फिर से पानी छोड़ने लगी थी और वह सारे काम निपटाकर नहाने के लिए बाथरुम में चली गई थी जहां पर वह अपना गाऊन निकालकर एकदम नंगी होकर नहा रही थी,,,और सबसे ज्यादा अपनी बुर पर साबुन लगाकर उसकी सफाई कर रही थी क्योंकि वह जानती थी की बुर की सफाई करना ज्यादा जरूरी है।
नहा कर वह तैयार हो चुकी थी। और रसोई घर में चली गई थी तब तकअंकित भी दूध लेकर आ गया था रसोई घर में अपनी मां को देकर वह भी नहाने के लिए चला गया था,,,,उसे भी इस बात की खुशी थी कि अब वह जब चाहे तब अपनी मां की चुदाई कर सकता था कोई रोकने वाला नहीं था कोई रोकने वाला नहीं था दोनों के मिलन मेंजो थोड़ी बहुत बाधा रूप थी उसकी बड़ी बहन वह अपनी नानी के घर जा चुकी थी,,,,इसलिए अंकित कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रहा था थोड़ी देर में वह भी नहा कर तैयार हो चुका था। रात भर अपनी पूरी ताकत का जोर अपनी मां पर दिखाने के बाद सुबह उसे भूख लग रही थीइसलिए वह नहा कर सीधा कपड़े पहन कर अपनी मां के पास रसोई घर में पहुंच गया लेकिन रसोई घर में पहुंचने से पहले वह दरवाजे पर ही खड़ा हो गया और अपनी मां को देखने लगा और उसकी मां अपने बेटे की तरफ देखकर हल्के से मुस्कुरा दी और खाना बनाने में लग गई,,, अपने बेटे की उपस्थिति में बार-बार उसकी बुर पानी छोड़ दे रही थी। पूरी तरह से बेशर्म बनने के बावजूद भीइस समय न जाने क्यों अपने बेटे से नजर नहीं मिल पा रही थी बस उसकी तरफ हल्के से देख कर मुस्कुराते रही थी और अपने काम में लग जा रही थी दरवाजे पर खड़ा अंकित अपनी मां की जरूरत रेखा को देख रहा था उसकी भरी जवानी को दिख रहा था जिस रात भर उसने अपने मर्दाना अंग से रौंदा था,,,,खाना बनाते समय सुगंध अपनी साड़ी को थोड़ा सा उठाकर उसे कमर में खोज दी थी और साड़ी को कस के बंधी हुई थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम गांड बंधी हुई साड़ी में और भी ज्यादा बड़ी लग रही थी और अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर एक बार फिर से अंकित के पेंट में हलचल होने लगी थी,,,, काफी देर तक अंकित दरवाजे पर खड़ा होकर अपने हाथ कोआपस में बांधकर अपनी मां की जवानी कोई देख रहा था यह देखकर सुगंधा के तन-बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी वह हिम्मत जुटाकर अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली।
दरवाजे पर खड़े-खड़े क्या देख रहा है नाश्ता तैयार है,,,,।
देख रहा हूं कि नाश्ता तो तैयार है लेकिन तुम भी तैयार दिखाई दे रही हो,,,।
क्या मतलब,,,!(अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही वह आश्चर्य से तवे पर रोटी को पलटते हुए बोली)
मेरा मतलब है कि,,,(इसे कहते हुए रसोई घर में प्रवेश करते हुए) पेट पूजा के लिए नाश्ता तो तैयार हो गया है लेकिन,,,(एकदम से अपनी मां के पीछे पहुंच गया और उसे पीछे से अपनी बाहों में भरते हुए) जो जवानी फुट रही है,,,(इतना कहने के साथ ही अपने पेट में बना तंबू को हुआ अपनी मां की गांड पर दबाते हुए,,,,, सुगंधा अपने बेटे के मतलब को अच्छी तरह से समझ गई थी एकदम से अंकित को रोकने की कोशिश करते हुए बोली)
नहीं नहीं अभी बिल्कुल भी नहीं अभी-अभी नहा कर आई हूं रात भर तो मजा लिया है अभी भी तेरा मन नहीं भर रहा है,,,।
मैं भी यही सोचा था कि अभी कुछ भी नहीं करूंगा लेकिन तुम्हारी यह बड़ी-बड़ी,,,(साड़ी के ऊपर शायरीअपने दोनों हाथों को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर जोर से दबाते हुए) गांड ने फिर से मेरे मन को बहकने पर मजबूर कर दिया है,,,(और ऐसा करते हुए अपनी मां की गर्दन पर चुंबनों की बारिश कर दिया सुगंधा एकदम से मचल उठी लेकिन फिर भी अपने बेटे को रोकने की कोशिश करते हुए बोली)
देखा भी बिल्कुल भी नहीं बाद में तेरा मन करे उतना कर लेना लेकिन अभी नहीं,,,,।
कैसे नहीं मेरी रानी,,,(एकदम से अपनी दोनों हथेलियां को ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चुचीयों पर रखकर दबाते हुए और एकदम मादकता भरी आवाज में उसके कान के पास धीरे से बोला) तुम्हारी भरी हुई जवानी देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया है।
तो तेरा मैंने ठेका लेकर नहीं रखी हूं,,, जो तेरा बार-बार खड़ा हो जाए तो मैं साड़ी कमर तक उठा लुं,,(प्यार से गुस्सा दिखाते हुए सुगंधा बोली)
अब तो तुम ही मेरी ठेकेदार हो जब-जब खड़ा होगा यह तुम्हारी बुर में ही जाएगा,,,,,,,(ऐसा कहते हुए धीरे-धीरे अपनी मां की ब्लाउज का बटन खोलने लगा तो सुगंधा उसे रोकते हुए बोली)
अरे हरामि इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रहा हैपूरा दिन तो पड़ा है सुबह-सुबह सब करना जरूरी है क्या और अभी सुबह-सुबह ही तो मजा लिया है फिर भी,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपने ब्लाउस पर से अपने बेटे का हाथ पकड़ कर उसे झटक दी लेकिन फिर से अंकित अपनी मां की चूची को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाते हुए बोला)
अगर एक ही बार में या एक ही दिन में औरत और मर्द को एक दूसरे से संतुष्टि मिल जाए तो सारा झमेला ही खत्म हो जाए,,,,(इतना कहने के साथ ही अपनी मां के कान पर हल्के से अपनी जीभ को घुमाते हुए वह एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोला ,,,) तुम ही बताओ मेरी रानी क्या दोबारा तुम अपनी बुर में मेरा लंड नहीं चाहती हो,,,,,(अपने बेटे की हरकत से सुगंधा मदहोश होने लगी एक बार फिर से उसकी बुर पानी छोड़ने लगी लेकिन फिर भी अपने बेटे की बात सुनकर वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,)
बिल्कुल भी नहीं,,,,,,
(सुगंधा का इतना कहना था कि अंकितअपनी मां की चूचियों पर से अपनी हथेलियां हटाकर सीधा उसकी साड़ी को दोनों हाथों से थाम लिया और उसे धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठने लगा लेकिन इस बीच में लगातार अपनी मां के कान के नीचे उसकी गर्दन परचुंबनों की बारिश जारी रखा जिसे उसकी मां पूरी तरह से मदहोश होने लगी थी मस्त होने लगी थी और अपने बेटे की मर्दाना ताकत के आगे विवस होने लगी थी,,,, अपनी मां की बात सुन कर वह फिर से उसी अंदाज में बोला,,,)
झूठ बोल रही है मेरी जान मैं चाहता हूं तेरी बुर ईस समय पानी छोड़ रही होगी,,,, तेरी जवानी का रस तेरी बुर से टपक रहा होगा,,,(इतना कहने के साथ हीअंकित अपनी मां की साड़ी को एकदम से कमर तक उठा दिया था और अपनी मां की नंगी गांड पर अपनी हथेली रखते हुए उसे उत्तेजना से दबोचते हुए बोला) देखी मेरी जान तू भी तैयार है मैं भी तैयार हूं मैं जानता हूं तु बिना चुदवाए नहीं रह सकती,,,,(इतना कहने के साथ नहीं अंकित अपने पेंट की बटन खोलकर एक झटके से अपना अंडरवियर और पेंट घुटनों तक नीचे खींच दिया,,,, और उसका टनटनाया हुआ लंड एकदम से हवा में झूलने लगा,,,, जिसकी चुभन सुगंधा को अपनी गांड पर महसूस हो रही थी वह मस्त होने लगी मदहोश होने लगी और अपनी आंखों को एकदम से बंद कर ली,,,,अंकित पूरी तरह से उत्तेजना से भर चुका था क्योंकि साड़ी के अंदर उसकी मां चड्डी नहीं पहनी थी,,,, जो कि उसकी मां की तरफ से साफ ईसारा था कि उसका बेटा जब चाहे तब उसकी चुदाई कर सकता है,,, और फिर अंकित धीरे से अपनी मां की टांग उठा कर उसे किचन के लंबी पत्थर पर रख दिया,,, जिससे सुगंधा की बड़ी-बड़ी गांड की दरार एकदम से खुल गई और उसका गुलाबी छेद नजर आने लगा सुगंधा अपने बेटे के हाथों के कठपुतली बन चुकी थी जैसा वह कर रहा था वैसा वह होती जा रही थी,,,, किचन के बड़े से पत्थर पर सुगंधा एकदम से झुक गई थी उसकीएक टांग ऊपर उठी हुई थी जो किचन के पत्थर पर रखी हुई थी और घुटनों से मुड़ी हुई थी जिसे अंकित के लिए उसका रास्ता एकदम साफ हो गया थाअंकित धीरे से अपने लंड की सुपाडै को अपनी मां के गुलाबी छेद से लगायासुगंधा की बुर पहले से ही इतना पानी छोड़कर चिकनाहट से भर गई थी कि अंकित को थूक लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ी,,,,, अंकित धीरे से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला और पहले ही प्रयास में अंकित का मोटा तगड़ा लंड आधा उसकी बुर में समा गया,,,, इसके बावजूदसुगंधा के मुंह से हल्की दर्द भरी करने की आवाज निकल गई रात भर बनेगी वह अपने बेटे के लंड से मस्त हुई थी लेकिन फिर भी अंकित का लंड इतना मोटा था की पहली बार में दर्द दे ही देता था भले ही अंकित के लंड का सांचा उसकी मां की बुर में बन चुका था।
आहिस्ता आहिस्ता,,,, दर्द करता है।
मजा भी तो देता है मेरी रानी,,,(और इतना कहकर अपनी मां की कमर से दोनों हाथों से थाम लिया और जोरदार धक्का मारा इस बार बाकी बचा लंड भी एक झटके से बुर की अंदरूनी अड़चनों को दूर करता हुआ सीधे जाकर सुगंधा के बच्चेदानी से टकरा गया एकदम से सुगंधा के मुंह से चीख निकल गई,,,,।
हाय दइया मर गई रे,,,,,।
चुप भोसड़ा चोदी रात भर चुदवाई है और अब कह रही है हाय दऐया मर गई रे,,,,,।
अरे हरामजादे सच में दुखता है तेरा कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है,,,,, फाड़ डालेगा क्या मेरी बुर,,,,सहहहहह आहहहहहहहह,,,(दर्द से सुगंधा थोड़ा कहरा रही थी कि तभी,,,,अंकित अपनी मोटे लंड को बाहर की तरफ खींचने लगा था कि जोर से धक्का लगा सके लेकिन सुगंध समझ गई इसलिए वह एकदम से अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर उसके लंड को पकड़ने की कोशिश करते हुए बोली,,,)
रुक जा,,,, थोड़ा रुक जा जल्दबाजी मत दिखा मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूं,,,,।
(शायद अपनी मां की बात को अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था उसकी हालत को समझ रहा था इसलिए इस स्थिति में अपने आप को रोक रहा लेकिनअपनी मां की ब्लाउज का बटन खोलने लगा और इस बार सुगंध उसे रोकने की कोशिश नहीं की और अगले ही पलअंकित अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलकर ब्रा को दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर की तरफ खींच दिया जिससे उसके दोनों खर्च हवा में लहराने लगे और वह दोनों खरबुजो को हाथ में पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया ताकि उसकी मां को मस्ती चढ़ सके,,,, और थोड़ी ही देर में अंकित की हरकत रंग लाने लगी उसकी मेहनत का फल दिखाई देने लगा सुगंधा को मजा आने लगा और उसके मुंह से दर्द की जगह मस्ती भरी आवाज निकलने लगी जिसे सुनकर अंकित उसकी चूची को इस तरह से दबाते हुए बोला,,,)
अब चोदु ना तुम्हें,,,,।
हां अब लगा धक्के मेरे राजा,,,
ले मेरी रानी संभाल,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से अपने लंड को बाहर की तरफ खींचा और फिर लंड के सुपाड़े को गुलाबी छेद में ठहरा कर एक बार फिर से कचकचा कर धक्का माराइस बार भी उसका लंड पूरी तरह से उसके बच्चेदानी से टकरा गया लेकिन इस बार उत्तेजना से वह सिहर उठी और एकदम मस्त हो गई अंकित अपनी कमर हीलाना शुरू कर दिया अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा अपनी एक टांग ऊपर उठाए हुए अपने बेटे से चुदवा रही थी,,,,अंकित पागलों की तरह अपनी मां की नंगी चूचियों को दबा दबा कर अपनी मां को चोद रहा था। मां बेटे फिर से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी दोनों मदहोशी के सागर में डूबने लगेतवे पर रखी हुई रोटी जलने लगी थी लेकिन उसकी शुध मां बेटे दोनों को बिल्कुल भी नहीं थी,,, अंकित तो पागल हुआ जा रहा थारसोई घर में अपनी मां की चुदाई कर रहा था यह वही रसोई घर था जिसमें वह अपनी मां की मदहोश कर देने वाले रूप को देखकर मन में कल्पनाएं किया करता था। कसी हुई साड़ी में अपनी मां की कई हुई बड़ी-बड़ी गांड देखकर उसके नंगेपन की कल्पना करके मुट्ठ मारा करता था वह कभी सोचा नहीं था कि उसके जीवन में ऐसा भी पल आएगा कि वह रसोई घर में ही अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी चुदाई करेगा।वो काफी उत्साहित और उत्तेजित नजर आ रहा था सुगंधा की तो हालत खराब हो रही थी शर्म और उत्तेजना के मारे उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया थाजिस तरह से उसका बेटा उसकी चुदाई कर रहा था वह पागल हुए जा रही थी हर एक धक्का उसे मदहोश कर रहा था।
सहहहह आहहहह मेरे राजा,,, और जोर-जोर से धक्के मार फाड़ दे मेरी बुर को घुस जा मेरी बुर में बहुत मस्त चुदाई करता है रे तू,,,,आहहहहहह,,,आहहहहहह एकदम पक्का मादरचोद हो गया है।
तू भी मादरचोद बेटे की रंडी मन हो गई है,,,, देख कैसे गांड उठा उठा कर लेती है।आहहहह देख कैसे गांड उठा रही है,,,, साली छिनार,,,,।
(अपने बेटे के मुंह से अपने लिए गली और इसकी बात सुनकर सुगंधा का जोश बढ़ने लगा था और वह सच में अपनी गांड उठा उठा कर अपने बेटे के लंड को ले रही थी,,,,सुगंधा की बुर में अंकित का लंड एकगम रगड़ रगड़कर अंदर बाहर हो रहा था जिससे सुगंधा को और ज्यादा मजा आ रहा था,,,, रसोई घर में सुगंधा की गरमा गरम सिसकारी की आवाज गूंज रही थी जिससे रसोई घर का वातावरण पूरी तरह से गर्म हो चुका था,,,,, अंकित की कमर किसी मशीन की तरह आगे पीछे हो रही थी और बार-बार सुगंधा की बुर पानी फेंक दे रही थी जिसकी चिकनाहट पाकर बड़े आराम से अंकित का लंड उसकी मां की बुर में अंदर बाहर हो रहा था। सुगंधा और अंकित दोनों चरम सुख के करीब पहुंच चुके थे सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और अंकित अपनी मां की चूचियों को छोड़कर उसकी कमर को थाम लिया था और जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और अगले ही पल मां बेटे दोनों फिर से एक साथ झढ़ने लगे।)
तवे पर रखी हुई रोटी जल चुकी थी लेकिन मां बेटे दोनों की जवानी की तपन संभोग की शीतलता से बुझ चुकी थी,,,यह मायने नहीं रखता कि संभोग किस जगह पर हो रहा है किस तरीके से हो रहा है यह मायने रखता है जगह कोई भी हो आनंद की जो सीमा होती है वह कम नहीं होनी चाहिए और यही मां बेटे दोनों के साथ हो रही थी,,, लेकिन सुगंधा के लिएजगह बहुत मायने रखती थी क्योंकि अब तक वह अपने ही स्वयं कक्षा में अपने पति के साथ संभोग का सुख प्राप्त कर चुकी थी और कोई दूसरी जगह नहीं थी जहां पर वह चुदाई का मजा ले चुकी हो लेकिन अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होने के बाद अंकित जगह बदल रहा था अपनी मां की चुदाई करने के लिए,,,,, रात भर वह जमकर अपनी मां के कमरे में उसके ही बिस्तर पर उसकी चुदाई कर चुका था लेकिन सुबह-सुबह रसोई घर में वह अपनी मां के उभरे हुए नितम्बों को देखकर उत्तेजित हो गया था नतीजन यह हुआ किरसोई घर में ही वह अपनी मां की साड़ी उठाकर उसकी जमकर चुदाई कर चुका था और इस चुदाई के दौरान तवे पर रखी हुई रोटी पूरी तरह से चल चुकी थी जिसका एहसास सुगंधा को तब हुआ जब उसके सर से वासना का तूफान गुजर चुका था।वह एकदम से अपनी साड़ी नीचे किए हुए ही तवे पर रखी हुई रोटी को चिमटी से उठाने की कोशिश करते हुए बोली।
हाय दइया यह क्या हो गया तेरी वजह से देख रोटी जल गई,,,,,,।
अब इसमें मैं क्या कर सकता हूं,,,(अपनी मां की साड़ी से अपने लंड को साफ करते हुए) तुम्हारी गरम भट्टीमैं वैसे ही मेरा लंड पिघल चुका है तो तवे पर रोटी जल गई इसमें कौन सी बड़ी बात है।
तू सच में बहुत हारामी है,,,(तवे पर से जली हुई रोटी को चिमटी से पकड़कर उतारते हुए) मैं कभी सोचा नहीं थी की रसोई घर में तु इस तरह की हरकत कर देगा,,,,।
तुम चीज ही ऐसी हो कि कहीं भी तुम्हारे साथ यह सब करने का मन करेगा,,,,।
एक ही रात में तुझे मैं ऐसी चीज लगने लगी,,,(दूसरी रोटी को तवे पर रखते हुए हालांकि अभी भी उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और वह रोटी पकाने में लग गई थीउसे इस बात का आवाज तक नहीं हुआ था कि उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई और उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से उजागर है उसके बेटे की आंखों के सामने जिसे देखकर ही वह रसोई घर में उसे चोदने के लिए आया था और चुदाई कर चुका था,,, अपनी मां की बात सुनकर मुस्कुराते हुएअंकित अपनी पैंट और अंडरवियर दोनों को एक साथ ऊपर की तरफ खींचते हुए,,,)
तुम हमेशा से ऐसे ही चीज थी लेकिन हिम्मत नहीं होती थी आगे बढ़ने की,,,,
और अब,,,,(मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ देखते हुए)
अब तो जब चाहे तब तुम्हारे साथ कुछ भी कर सकता हूं,,,(पेंट की बटन बंद करके चैन को ऊपर की तरफ खींचते हुए अंकित बोला,,,,)
लेकिन अब यह नहीं चलेगा तूने मेरी कमर तोड़ दिया है चलने में भी दिक्कत होने लगी है,,,,।
अब इसमें मैं क्या कर सकता हूं तुम हो ही इतनी खूबसूरत कि तुम्हें देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,,।
चल अब रहने देना यह,, कुछ ज्यादा ही ,(अपने बेटे की पेंट की तरफ जो कि अभी भी उसमें तंबू बना हुआ था देखते हुए) खड़ा हो रहा है इसे बैठे रहने को बोल जब यह खड़ा हो जाता है तो मुझे दिक्कत आ जाती है।
मजा भी तो तुम्हें ज्यादा देता है,,,।
नहीं चाहिए मुझे मजा तुझे पता है सुबह से मेरी दर्द कर रही है,,,,.
क्या दर्द कर रही है,,(अपनी मम्मी के कहने के मतलब को अंकित समझ गया था इसलिए मुस्कुराते हुए शरारत भरी नजर से अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला तो उसकी मां के भी चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और वह शर्मा कर तवे की तरफ देखने लगी) बताओ क्या दर्द कर रही है,,,,
तू अच्छी तरह से जानता है कि क्या दर्द कर रही है,, इसलिए मैं नहीं बोलने वाली ,,, लेकिन मैं साफ-साफ बता दूं कि अभी दोबारा कुछ भी नहीं होने दूंगी,,,(तवे पर फूली हुई रोटी को फिर से चिमटी से पकड़ कर उसे थाली में रखते हुए,,,)
चलो अच्छा मैं तुम्हारी बात मान रहा हूं लेकिन बता दो जो की क्या दर्द कर रही है,,,।
अब तू जाता है कि,,,(हाथ में लिया हुआ बैलन अपने बेटे की तरफ दिखाते हुए,,)
उससे भी अच्छा मेरे पास है और यह बात तुम अच्छी तरह से जानती हो,,,(बेलन की तरफ देखते हुए अंकित अपनी मां से बोल तो उसकी मां शर्म से अपनी नजर को नीचे झुका ली और उसकी बात सुनकर बोली,,,)
मैं जानती हूं तु कितना बड़ा मर्द है,,,।
रात भर अच्छी तरह एहसास जो कराया हूं पता तो चल ही गया होगा।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा फिर से शर्मा गई,,, इन सब बातों नहीं पर फिर से उसकी बुर को गीली करना शुरू कर दिया था,,, और इसीलिए वह चाहती थी कि उसका बेटा वहां से चला जाएक्योंकि वह जानती थी कि अगर ऐसी हालत में फिर से उसके बेटे ने हरकत करना शुरू किया तो वह फिर से इनकार नहीं कर पाएगी इसलिए थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)
अच्छा यहां से जाता है कि नहीं की मार खा कर ही जाएगा मुझे खाना बनाने दे, वैसे भी देर हो गई है।
जाता हूं जाता हूंलेकिन एक बार बात तो दो अपने मुंह से की क्या दर्द कर रही है और जब तक नहीं बताओगी तब तक मैं नहीं जाऊंगा इसी तरह से परेशान करता रहूंगा।
सच में तु बहुत शैतान हो गया है,,,,(गुस्से से बेलन को पटकते हुए वह अंकित की तरफ देखते हुए बोली लेकिन इसका अंकित पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ा हुआ मुस्कुराता हुआ अपनी मां से फिर से बोला)
जब तक नहीं बताओगी तब तक मैं यहीं खड़ा रहूंगा,,,,।
(सुगंधा समझ गई थी कि वह मानने वाला नहीं हैऔर वैसे भी उसके और उसके बेटे के बीच में कोई भी पर्दा बाकी नहीं रह गया था इसलिए वह थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए बोली,,,)
तू सुने बिना नहीं जाएगा ना,,,,।
बिल्कुल भी नहीं।
तो सुन,,,, रात भर जो तूने किया है उसकी वजह से मेरी,,,बबबबबुर दर्द कर रही है,,,(इतना कहते ही वह गर्म तवे की तरफ देखते हुए गहरी गहरी सांसें लेने लगी वह शर्म से पानी पानी हो गई थी।क्योंकि औरत होने के नाते उसे इस तरह के शब्दों का प्रयोग खुले तौर पर करना शोभा नहीं देता था और ना ही उसने इस तरह के शब्दों का प्रयोग कभी की थी लेकिन एक हीं रात में, सब कुछ बदल गया था मां बेटे के बीच की दूरियां पूरी तरह से कम हो चुकी थी एक ही रात में मां बेटे के बोलने का ढंग पूरी तरह से बदल चुका था लेकिन एक औरत होने के नाते वाकई में सुगंधा के मुंह से इस तरह के शब्दों का प्रयोग खुद सुगंधा के लिए शर्म जनक महसूस करा रहा था,,,, इसीलिए तो सुगंधा शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी।उसे इस बात का एहसास था कि रात को अपने बेटे के साथ चुदवाते समय वह इस तरह के शब्दों का प्रयोग खुलकर की थी,,,अपने बेटे के मर्दाना अंग का भी नाम उसने खुलकर ली थी और अपने भी खूबसूरत अंग का नाम उसने बेखुदी बेशर्मी की हद पार करते हुए ली थी लेकिन इस समय की बात कुछ और थी इसलिए उसके चेहरे पर अपने ही अंग का नाम लेने पर उत्तेजना और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे। वह फिर से अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी,,, वह किचन के प्लेटफार्म को पकड़कर गहरी गहरी सांस ले रही थी इस बात से अनजान की उसकीसाड़ी अभी भी कमर तक कुछ हुई है उसकी नंगी गांड अभी भी पूरी तरह से उजागर है अंकित धीरे से अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा इस एहसास से सुगंधा का दिल फिर से जोरों से धड़कने लगा। उसे लगने लगा कि फिर से उसका बेटा उसके साथ शरारत करेगा। और ऐसा ही हुआ अगले ही पर सुगंधा को अपने बेटे की हथेली अपनी गांड पर महसूस हुई और उसका दिल धक्क से करके रह गया,,, उसे एहसास हुआ कि उसकी गांड नंगी है,,,, वह कुछ समझ पाती या कुछ कह पाती इससे पहले ही,,अंकित उत्तेजना से भरते हुए अपनी मां की नंगी गांड को अपनी हथेली में जोर से दबाते हुए बोला,,,)
इस तरह से नंगी गांड दिखाओगी तो भला मुझसे सब्र कैसे होगा,,,,(और इतना कह कर अंकित मुस्कुराता हुआ रसोई घर से बाहर निकल गया लेकिन उसने अपनी मां की साड़ी को कमर से नीचे गिराने की बिल्कुल भी तस्दी नहीं लिया,,,,,गहरी सांस लेते हुए सुगंधा अंकित को रसोई घर से बाहर जाते हुए देखती रही और अपनी हरकत पर अपने ही आप वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए अपने आप से ही बोलीयह कैसी बेशर्मी है की गांड पीछे से खुली हुई है और खुद को पता नहीं चल रहा है।इतना अपने आप से कहते हुए वह खुद से अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ी और उसे व्यवस्थित करते हुए अपने कदमों में नीचे गिरा दी और एक खूबसूरत दृश्य पर पर्दा पड़ गया,,,, सुगंधा पूरी तरह से बदल चुकी थी उसके चेहरे का रंग बेशर्मी से लाल हो चुका था। उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि जिंदगी का असली सुख किसमे है,,, अपने बदलाव पर उसे जरा भी पछतावा नहीं हो रहा था बल्कि इस बदलाव से वह बेहद खुश नजर आ रही थी।
अंकित अपने कमरे में लेटा हुआ था वह अपनी मां के बारे में सोच रहा थाएक ही रात में उसकी मां ने उसे कितना मजा दी थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड बड़ी बड़ी चुचीया वाकई में सबसे अलग थी इस उम्र में भी उसे अपनी मां की बुर का कसाव अच्छी तरह से महसूस हुआ था इतना कसाव तो उसे अपनी नानी और सुमन की मां की बुर में बिल्कुल भी महसूस नहीं हुआ था,,,, अंकित समझ गया था कि अब वह अपनी मां को चोदे बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकता। वह भी अपनी मां की तड़प देखना चाहता थावह देखना चाहता था कि उसके बिना उसकी मां रह सकती है कि नहीं एक औरत के मन को अच्छी तरह से समझ चुका था वह जानता था कि एक रात में इतनी जबरदस्त चुदाई करवाने के बाद उसकी मां की बुर बिना लंड लिए शांत रहने वाली नहीं है इसलिए वह अपने मन में निश्चय किया कि वह अभी कुछ नहीं करेगा और वह देखेगा कि उसकी मां उसका लंड लेने के लिए कितना तड़पती है । ऐसा निश्चय करके वह मन ही मन खुश होने लगा,,,, खुशी इस बात की थी कि वह अच्छी तरह से जानता था किअभी बहुत दिन तक उन दोनों को घर में अकेला ही रहना था किसी तीसरे की मौजूदगी की आशंका भी नहीं थी और एक ही रात में अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करने के बाद वह जानता था कि उसकी मां बिना चुदवाए नहीं रह सकती है इसलिए निश्चित हो चुका था इस बात से की उसकी मां की बुर उसे मिलना ही है।
थोड़ी ही देर में खाना बन चुका था,,, लेकिन अभी खाने का समय नहीं हुआ था इसलिए सुगंधा कुछ देर तक बाहर टहल लेना चाहती थी इसलिए वह खाना बना कर,, अंकित के कमरे पर आई और दरवाजे पर खड़ी होकर बोलि।
अभी मैं थोड़ी देर में आती हूं तब हम दोनों साथ में मिलकर खाना खाएंगे।
कहां जा रही हो?
यही पड़ोस में होकर आती हुं,,,।
ठीक है लेकिन जल्दी आ जाना,,,,
एहहह है,,,, लगता है कि रहा नहीं जा रहा है,,,।(सुगंधा इतराते हुए बोली)
बात तो बिल्कुल सही है तुम जिसको भी मिल जाओ उसे तुम्हें चोदे बिना कैसे चैन मिलेगा।
जब देखो तब एक ही बात दिमाग में घूमती रहती है,,(इतना कहकर मुस्कुराते हुए वह घर से बाहर निकल गई,,,,,, एक घंटा बीता होगा सुगंधा घर पर वापस आ चुकी थी अच्छी तो दरवाजा इस तरह से खुला हुआ था और वह अंदर आईऔर अंकित के कमरे के पास पहुंची तो देखी वह गहरी नींद में सो रहा था,,,, अंकित की तरफ देखते ही सुगंधा के चेहरे पर संतुष्टि भरा एहसास जगमगाने लगाअपने बेटे की मासूम चेहरे को देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह रात वाला अंकित है इसके भोले चेहरे को देखकर कोई बोल ही नहीं सकता कि इसके अंदर इतना बड़ा शैतान छुपा हुआ है ईसके पास इतना मोटा और लंबा लंड है कि किसी भी औरत की चीख निकाल दे,,,,अपने बेटे के कमरे के पास खड़ी होकर एक बार फिर से उसका मन बहकने लगा,, फिर से उसकी बुर में पानी की बाढ़ आने लगीऔर वह चाहती थी कि इस समय उसका बेटा नींद से उठकर उसे पूरी तरह से अपनी बाहों में लेकर बिस्तर पर पटक पटक कर उसकी चुदाई करें और इसलिए वह अपने बेटे के कमरे में प्रवेश की और उसे जगाने की कोशिश करने लगी एक मर्द कोअपनी तरफ आकर्षित करने की कला एक औरत होने के नाते उसे अच्छी तरह से मालूम थी इसलिए वह तुरंत अपने ब्लाउज के ऊपर के दोनों बटन को खोल दे ताकि उसकी चूची का अच्छा खासा हिस्सा उसके बेटे को नजर आए, और गहरी सांस लेते हुए अपने बेटे के बिस्तर के करीब पहुंच गई,,,।
बाहर का दरवाजा बंद कर चुकी थी लेकिन कैमरे का दरवाजा खुला था क्योंकि किसी तीसरे के आने की आशंका तब तक बिल्कुल भी नहीं थी जब तक की घर का मुख्य द्वार खुला ना हो जो कि उसे वह अपने हाथों से बंद कर चुकी थी,,,, वह धीरे से अपने बेटे की तरह तो बिस्तर पर झुकी और धीरे से बोली,,।
अंकित,,,, क्या हुआ इतनी जल्दी सो गया क्या,,,? अंकित,,,(इतना कहते हुए वह उसका हाथ पकड़ कर उसे झक्कोर कर जगाने लगी,,, और तुरंत ही अंकित की आंख खुल गई और वह अंगड़ाई लेता हुआ अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)
तुम आ गई मम्मी बहुत देर लगा दी,,,(अपनी आंखों को मिंजते हुए वह अपनी मां की तरफ देखते हुए खुला और उसके ब्लाउज का दो-दो खुला बटन देखकर अगले ही पल अंकित की टांगों के बीच सुरसुराहट होने लगी,,,)
देर कहां लगा दी एक ही घंटा तो हुआ है जल्दी आ गई,,, क्योंकि मुझे मालूम था कि तुझे भूख लगी है,,,।
वह तो लगी है,,,(इतना कहकर वह अपनी मां की चूचियों की तरह देखने लगाउसका मन कर रहा था कितनी मां की चूची हो को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर-जोर से दबाए और उसे अपने मुंह में लेकर उसका सारा दूध पी जाए लेकिन वह देखना चाहता था कि उसकी मां कीस हद तक तड़पती है,,, और उसके सोचने के मुताबिक ही सुगंधा अपनी साड़ी का पल्लू भीजानबूझकर अपने कंधे से नीचे गिरा दी ताकि उसकी चुचियों का नजारा उसके बेटे को भरपूर दिखाई दे अंकित समझ रहा था कि उसकी मां ही जानबूझकर शाडी के पल्लू को भी नीचे गिराई है लेकिन वह इस बात से अनजान बनना चाहता थाक्योंकि वह अपनी मां को तड़पाना चाहता था उसकी तरफ देखना चाहता था पर एक औरत को तड़पने के बाद जब उसकी चुदाई की जाती है तब उसे चोदने का मजा ही कुछ और होता है,,, इस बात को अंकीत-अच्छी तरह से जानता था इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,)
तुम जल्दी से खाना लगाओ मैं हाथ मुंह धोकर आता हूं,,,(इतना कह कर वह धीरे से उठा और अपने बिस्तर से नीचे उतर गया और अपने कमरे से बाहर निकल गया उसकी मां अभी भी कमरे के अंदर थी सुगंधा उसे देखते ही रह गई,,, फिर उसे लगा के शायद नींद से उठने की वजह सेवह ठीक से ध्यान नहीं दे पाया इसलिए वह भी अपन बेटे के कमरे से बाहर निकल गई और खाना लगाने लगी,,,,थोड़ी देर में मां बेटे दोनों खाना खा रहे थे और सुगंध अपने बेटे का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए अपनी साड़ी को घुटनों तक उठाकर उसे मोड कर बैठी थी और खाना खा रही थी उसकी गोरी गोरी मांसल पिंडलियां एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,। सुगंधा अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने की भरपूर कोशिश कर रही थी। और ऐसा नहीं था कि उसका काम रूपउसके बेटे पर असर नहीं कर रहा था अंकित तो पागल हुआ जा रहा था अपनी मां को चोदने के लिए लेकिन वह थोड़ा सा अपने आप पर काबू किया हुआ था। सुगंधा हर एक कोशिश करके हार गई थीफिर उसे लगने लगा कि शायद रात भर की चुदाई और सुबह-सुबह जिस तरह से उसने दो बार उसकी चुदाई किया था हो सकता है कि वह थक गया हो वह थोड़ी निराश हुई।
दिन पूरी तरह से गुजर चुका था सुगंधा को बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था उसकी बुर में आग लगी हुई थी,,,वैसे तो वह अपने बेटे से पूरी तरह से खुल चुकी थी वह चाहती तो खुद ही उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर सकती थी लेकिन सुबह रसोई घर में वह अपने बेटे से पहले ही कह चुकी थी कि थोड़ा दूर रहना क्योंकि उसकी वजह से उसकी बुर में दर्द हो रहा हैऔर अभी इस समय अगर वह अपने बेटे से इस तरह की हरकत करेगी तो उसका बेटा यही समझेगा कि उसकी मां ही एकदम चुडक्कड़ हैभले ही वह रात भर अपने बेटे के साथ बेशर्मी की सारी हदें पार करती थी लेकिन फिर भी उसे एक सीमा में रहना था इसलिए वह मजबूर हो चुकी थी और यही उधेड़बुन में दिन का भी समय निकल चुका था शाम होने वाली थी और उससे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था इसलिए वह अपने मन में एक तरकीब सोचने लगी,,,, वह अपने कमरे से बाहर निकली और अपने बेटे के कमरे के पास दरवाजे पर खड़ी हो गई वह देखी तो अंकित जाग रहा था सिर्फ बिस्तर पर लेटा हुआ था वह अंकित से बोली,,,।
जल्दी से तैयार हो जा बाजार चलना है,,,।
ठीक है मैं अभी तैयार हो जाता हूं,,,,,(इतना कहकर वह अपने बिस्तर पर उठकर बैठ गया, और गहरी सांस लेता हुआ वह अपनी मां के बारे में सोचने लगा कि किस तरह से खाना खाते समय उसे उठते समय उसकी मां पूरी तरह से उस पर अपना काम बाण चला रही थी और वह अपनी मां के कामबाण से घायल भी हुआ था लेकिन अपने आप पर काबू किए हुए था। उसे एहसास हो रहा था कि उसकी मां एक ही रात में कितनी बड़ी चुडक्कड़ हो चुकी थी,बरसों से मर्यादा में रहकर पूरी तरह से संस्कारी जीवन गुजर रही थी और कहां एक ही रात में वह पूरी तरह से बेशर्म बन चुकी थी,,,, यह सब सोचते हुए उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगीएक तो अभी कुछ देर पहले ही भर नींद से ज्यादा था और नींद में होने की वजह से उसका लंड खड़ा था लेकिन अब उसे अपने लंड पर तरस नहीं आता था क्योंकि उसका जुगाड़ हो चुका था और घर में ही हो चुका था उसे शांत करने का रास्ता उसे मिल चुका था,,, पेंट के ऊपर से अपने लंड को सहलाते हुए वह धीरे से बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया और अपने कमरे से बाहर आया,,, कमरे से बाहर आते हीवह पेशाब करने के लिए बाथरूम की तरफ जाने लगा लेकिन जैसे ही बाथरूम के पास पहुंचा और बाथरूम के अंदर का नजारा देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
बाथरूम के अंदर उसकी मां पूरी तरह से निर्वस्त्र थी और नहा रही थी उसने बाथरूम का दरवाजा भी बंद नहीं की थी और वह शायद इसलिए कि अब दोनों के बीच किसी भी तरह का पर्दा नहीं था दोनों बेपर्दा हो चुके थे दोनों बेशर्म हो चुके थे इसलिए जहां पर बेशर्मी की सारी है तो पर कर चुकी हो वहां पर शर्म का पर्दा लगाने से कोई फायदा नहीं था अपनी मां का यह रूप देखकर वह पूरी तरह से पागल हो गया औरवह अपने आप पर काबू नहीं कर पाया उसकी मां अपने ऊपर पानी डालते हुए अंकित की तरफ ही देख रही थी और बेहद नशीली आंखों से उसे देख रही थी उसके होंठों में वासना का रस भरा हुआ था और वह उत्तेजना से अपने होंठ को अपने दांत से काट रही थी यह देखकर अंकित से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह बेकाबू होने लगा।अंकित अच्छी तरह से जानता था की अपनी मां को इतना ज्यादा तड़पना उचित नहीं था उसे उसकी प्यास बुझाना ही था और यह उसका फर्ज भी था।इसलिए वह अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने सारे वस्त्र उतार कर एकदम से नंगा हो गया उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था अंदर नहा रही सुगंधा अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर मन ही मन प्रसन्न होने लगी। और अपने मन में सोचने लगी कि उसकी यह युक्ति काम कर गई है।
दिन भर जो भी उसने अपने बेटे को अपनी तरफ लुभाने की पूरी कोशिश की थी वह पूरी तरह से नाकामयाब हो चुकी थी जिसके चलते उसके मन में लगने लगा था कि शायद रात भर की चुदाई से बात थक चुका हैऔर इसीलिए इस समय दिन भर की थकान उतारने के बाद उसका यह रूप देखकर एक बार फिर से उसका बेटा उसे चोदने के लिए तैयार हो चुका है। अपने बेटे की तरफ देखते हुए सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली।
तू भी नहाएगा क्या,,,,
तुम्हें इस तरह से नहाते हुए देख कर मेरा मन भी तुम्हारे साथ नहाने को करने लगा है,,,,।
तो देर किस बात की है आज रोका किसने है,,,।
(अपनी मां का आमंत्रण पाते ही,,, अंकित बाथरूम में घुस गया और बाथरूम में घुसते ही अपनी मां को अपनी बाहों में जकड़ लिया,,,,,)
आहहहह यह क्या कर रहा है तू तो नहाने के लिए आया था ना,,,।
जब बाथरूम में तुम्हारी जैसी खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरत नहा रही हो और वह भी नंगी होकर तो भला एक मर्द सिर्फ बाथरूम में नहाने के लिए तो आएगा नहीं,,,,।
मतलब,,,,(सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)
मेरा मतलब है मेरी रानी,,,(इतना कहने के साथ हीअंकित अपनी मां को अपनी बाहों में एकदम कस के झगड़ा लिया जिसकी वजह से उसका खड़ा लंड उसकी दोनों टांगों के बीच सीधा उसकी बुर पर ठोकर मारने लगा,,,, सुगंधा एकदम से मदहोश हो गईऔर अंकित अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने होठों में भरकर चूसना शुरू कर दिया और साथ ही उसकी तुने चूचियों को दबाना शुरू कर दिया नीचे से तो उसका लंड अपना काम कर ही रहा था,,,वैसे वह चाहता तो खड़े-खड़े ही अपनी मां की बुर में लंड डाल देता लेकिन वह थोड़ा मजा लेना चाहता था। उसकी मां भी दिन भर चुदवाने के लिए तड़प रही थी।इसलिए मौका मिलते ही वह तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ लिया और उसके गरम सुपाड़ा को अपनी गुलाबी बुर की दरार में रगड़ना शुरू कर दी यह एहसास अंकित को पागल कर रही थी और साथ ही उसकी मां को भी मदहोश बना रही थी।मां बेटे दोनों पागल हुए जा रहे थे अंकित लगातार अपनी मां के लाल-लाल होठों का रस चूस रहा था और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबा रहा था उसकी मां भी पीछे हटने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी।
अंकित सहने जा रहा था अंकित अपनी मां के कंधों पर दोनों हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ दबाने लगाउसके कंधों पर दबाव बनाते हुए वह उसे इशारा कर रहा था और शायद उसकी मां उसके इशारे को समझ गई थी इसलिए वह धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी थी और घुटनों के बाल बैठते ही अपने बेटे के खड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ कर सीधा उसे अपने लाल-लाल होठों के बीच भरकर उसे चूसना शुरू कर दी थी,,, एकदम से अंकित मदहोश हो गया पागल हो गया वह बाथरूम की दीवार को दोनों तरफ से अपना हाथ फैला करअपने आप को स्थिर कर लिया था और अपनी आंखों को बंद करके धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया था उसकी मां भी एक ही रात में मानो जैसे पूरी पक्की खिलाड़ी बन चुकी थी वह अपने बेटे के लंड को पूरा का पूरा अपने गले तक उतार कर उसकी चुसाई कर रही थी। अपनी मां के इस कला से अंकित पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा थाइसलिए अपनी कमर हिलता हुआ कभी दीवार का सहारा ले ले रहा था तो कभी अपनी मां के साथ पर हाथ रख दे रहा था ऐसा करते हुए वह पूरी तरह से इस पल का आनंद ले रहा था,,,,,अंकित मदहोशी में अपनी आंखों को खोलकर अपनी मां के इस कामकला को देख रहा था वह देख रहा था कि उसकी मां कीतनी चुडक्कड़ और मस्तानी औरत बन चुकी है एक ही रात में उसने अपनी मां को क्या से क्या बना दिया और यही शायद उसकी जरूरत भी थी। घर को संभालने के साथ-साथ यह भी उसकी कला में शामिल थी बस वह अपनी ईस कला का प्रदर्शन नहीं कर पा रही थी,,शायद उसका कोई साथी ना होने की वजह से उसकी यह कल उसके अंदर ही विलुप्त होती चली जा रही थी लेकिन अब उसे एक साथी मिल चुका है अपने ही बेटे के रूप में जिसके साथ वह अपने काम कला को अच्छी तरीके से प्रदर्शित कर सकती थी और कर भी रही थी।
अंकित मदहोश हो चुका था बाथरूम के अंदर मां बेटे दोनों पूरी तरह से नंगे दोनों के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं थाबाथरूम के दरवाजे को सुगंधा पहले से ही खुला छोड़ रखी थी ताकि उसकी नंगी जवानी उसका बेटा देख सके,,,वैसे भी अब घर के अंदर कमरे का दरवाजा हो या फिर बाथरूम का दरवाजा दोनों को बंद करने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी। सुगंधा का गला अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से भर चुका था,,, जिससे उसे सांस लेने में थोड़ी तकलीफ भी हो रही थी लेकिन फिर भी वह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह से निकालना नहीं चाहती थी। सुगंधा को भी बहुत मजा आ रहा थावह पागलों की तरह अपने बेटे के लंड को चूस रही थी, ऐसा लग रहा था कि जैसे आज के बाद उसे अपने बेटे का लंड मिलने वाला नहीं है। कुछ देर तक मां बेटे इसी तरह से मज़ा लेते रहे,, सुगंधा तो अपने बेटे के लंड को छोड़ना नहीं चाहती थी, लेकिन अंकित को इस बात का डर था कि कहीं उसका पानी न छूट जाए वह अपनी मां को छोड़ना चाहता था इसलिए वह धीरे से अपनी कमर को पीछे की तरफ खींचा और उसकी मां के मुंह में से उसका लंड बाहर निकल गया अंकित की ईस हरकत पर सुगंधा सवालिया नजर से उसकी तरफ देखने लगी,,,, वह कुछ समझ पाती इससे पहले ही अंकित उसका हाथ पकड़ कर उठने लगा सुगंधा का भी दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे समझ में आ गया था कि अब कौन सा फपल आने वाला है,,,,।
अंकित उत्तेजित अवस्था में एक बार फिर से उसे अपनी बाहों में लेकर जकड़ दिया और उसकी नंगी गांड पर अपने दोनों हाथ रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया किस तरह से अंकित की उत्तेजना पूरी तरह से बढ़ती चली जा रही थी उसका लंड इतना कड़क हो चुका था मानों जैसे लोहे का रोड हो और वह सीधा उसकी मां की बुर पर दस्तक दे रहा था सुगंधा पागल हुए जा रही थी वह जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर की गहराई में ले लेना चाहती थी,,,, इसलिए वह अपनी बुर को अपने बेटे के लंड पर गोल-गोल नचाकर उसे अंदर लेने की कोशिश कर रही थी,,, लेकिन जब उसका यह प्रयास सफल नहीं हुआतो वह अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे अपनी बुर का रास्ता दिखाने लगी,,,, अपनी मां की हरकत को देखकर अंकित उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था ।अंकीत समझ गया था कि उसकी मां कितनी बड़ी चुदक्कड़ हो चुकी है और यही तो वह चाहता था,,,, अपनी मां की उत्तेजना और उसकी विवशता को देखकर अंकित और ज्यादा मदहोश होने लगा,,, वह तुरंत अपनी मां को घूमाकर दीवार के सहारे खड़ी कर दिया ऐसे में उसकी मां की गांड ठीक उसके सामने थी,,,मां बेटे दोनों उत्तेजना से लाल हुए जा रहे थे । सुगंधा को मालूम था कि अब उसे क्या करना है इसलिए वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को अपने बेटे के आगे परोस दी थी ताकि उसका बेटा आराम से उसकी बुर में पीछे से लंड डाल सके।
अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर अंकित उत्तेजना से लाल हो गया और अपने लंड को पकड़कर उसके गुलाबी छेद में भिडा दिया तीन चार बार की चुदाई के बादअपने आप ही सुगंधा की बुर में अंकित के लंड का सांचा बन चुका था जिसकी बदौलत बड़े आराम सेअंकित का लंड उसकी मां की बुर में घुस गया और वह अपनी मां की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया सुगंधा एकदम गहरी सांस ली और फिर एकदम मस्त हो गईअंकित अपनी मां की चुदाई कर रहा था बाथरूम में एकदम नंगा होकरउसकी मां भी पूरी तरह से निर्वस्त्र थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड उसकी उत्तेजना का कारण बनती जा रही थी,,,, अंकित अधिकतर अपनी मां की बड़ी गांड देखकर कहीं उत्तेजित हो जाता था। थोड़ी ही देर में सुगंध की गरमा गरम शिसकारी बाथरूम के साथ-साथ पूरे घर में गुंजने लगी,,,अंकित को बड़ा मजा आ रहा था अंकित बार-बार अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूची को दोनों हाथों से थाम ले रहा था और उसे दबाते हुए धक्के पे धक्का लगा रहा था।सुगंधा बेकाबू हो जा रही थी वह अपने बेटे के धक्के का जवाब धक्के से दे रही थीदोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी क्योंकि अब होठों का काम लंड और बुर ने अपने सर पर ले लिया था वही दोनों आपस में बातें कर रहे थे वही दोनों आपस में भिड़ रहे थे वही दोनों एक दूसरे को जवाब दे रहे थे। अंकित बड़े जोरों से धक्का लगा रहा था हर बार हर धक्के के साथ सुगंधा की चीख निकल जा रही थी,,, अंकित का लंड इतना गम और मोटा था किसुगंध को लगता कि कोई उसकी बुर में गर्म गर्म लोहे का रोड डाल रहा हो।
सहहहहह आहहहहह आहहहह ओहहहह मां,,,,,बडा दमदार लंड है तेरा।आहहहहह
तेरी बुर भी तो बहुत गर्म है,,,,आहहहह बहुत मजा आ रहा है मुझे,,,,आहहहहह मैरी रानी,,,,ऊमममममम,,,,,,सहहहहहहह ,,,,,।
दोनों का नशा और मजा दोनों चरम सीमा पर थादेखते ही देखते दोनों के सांसे तेज होने लगी और फिर अगले ही पल दोनों एक साथ झड़ने लगे लेकिन फिर भी अंकित का धक्का जारी था वह झडते हुए भी अपनी मां को पेल रहा था। दोनों एकदम मस्त हो चुके थे देखते ही देखते दोनों का वासना का तूफान शांत हो चुका था।
मर्यादा और संस्कार की दीवार गिरे 24 घंटे भी नहीं हुए थे और मां बेटे जब भी मौका मिल रहा था तब एकाकार हो जा रहे थे।सुबह-सुबह ही रसोई घर के अंदर अपने बेटे की मनमानी और खुद की चाहत को पूरा करने के बाद सुगंधा खुद अपने बेटे को हिदायत दी थी किया अब से ऐसा बिल्कुल भी नहीं चलेगा लेकिन दो-चार घंटे में ही उसका मन नहीं माना और वह तड़प उठी अपने बेटे के लंड को लेने के लिए जिसके चलते खुद ही वह पूरी तरह से नंगी होकर बाथरूम का दरवाजा खोलकर नहाने लगी। ताकि उसका बेटा इस हाल में देखे तो उसे चोदे बिना ना रह सके और ऐसा ही हुआ अंकित अपनी मां कीनंगी जवान देखकर फिर से मदहोश हो गया और फिर बाथरूम में उसकी जमकर चुदाई किया,,,वासना का तूफान गुजर जाने के बाद मां बेटे दोनों नहा कर बाहर निकल गए मां बेटे के बीच अब शर्म कीबिल्कुल भी गुंजाइश नहीं रह गई थी दोनों बेशर्म बन चुके थे इसलिए तो सुगंधा बाथरूम से निकलने के बाद अपने बदन पर टावर लपेट बिना ही नंगी ही अपने कमरे में चली गई,,, अंकितअपनी मां के रूप को देख कर उसकी कातिल अदा को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था उसे इस बात पर करवा था कि वह उसने से भरी हुई अपनी मां पर काबू पा चुका था अब उसकी मां की जवानी पूरी तरह से उसके नाम हो चुकी थी जिसके साथ वह जब चाहे तब खेल सकता था अपनी प्यास बुझा सकता था।
अंकित तैयार हो चुका था और तैयार होने के बाद अपनी मां के कमरे में गया तो उसकी मां अभी भी तैयार हो रही थी वैसे तो वह बाजार जाने से पहले तैयार होती थी लेकिन अब उसके तैयार होने का रंग बदल चुका थापहले तो औपचारिक रूप से तैयार होती थी लेकिन मैं उसके जीवन में उसके बेटे के रूप मेंउसका प्रेमी आ चुका था जिसे वह हर पल रिझाने की पूरी कोशिश करती थी,,,वैसे तो वह अपने बेटे को अपनी जवानी का रस चखा चुकी थी लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से अपने बेटे को अपनी जवानी का गुलाम बना देना चाहती थी ताकि उसका बेटा किसी और औरत की तरफ नजर उठा कर देखे भी नहीं,,, इसलिए वह कुछ अच्छी तरीके से सज रही थी,,, बरसों के बाद वह इसलिए स्लीव लेस ब्लाउज पहनने के लिए निकाली थी जिसमें बांह नहीं होती। जिसमें औरत की चूचियां और उसकी बांहे और भी ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लगती है।अपनी मां को इस रूप में देखकर अंकित कमरे में दाखिल होते ही अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला।
अरे वह मम्मी आज तो तुमने नया ब्लाउज पहनी है इसमें तो तुम और भी ज्यादा सेक्सी लग रही हो,,,।
(पहली बार अंकित अपनी मां के लिए इस शब्द का प्रयोग कर रहा था इसलिए सुगंध अपने बेटे के मुंह से अपने लिए सेक्सी शब्द सुनकर एकदम से गनगना गई वह मुस्कुराने लगी लेकिन कुछ बोल नहीं पाई और अंकित से रहने की वह पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में भर लियाऔर सीधा अपने दोनों हथेलियां को ब्लाउज के ऊपर से ही चूची पर रखते हुए हल्के से दबाते हुए बोला,,,)
इस ब्लाउज में तो तुम्हारी चूचियां और भी ज्यादा बड़ी लग रही है,,,,।
आहहहह,,, आराम से छोड़ दे इसे अब,,,, ब्लाउज पुराना है इसलिए कसा हुआ है कहीं तेरे दबाने से फट न जाए,,,,।
खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां छोटे से ब्लाउज में घुसेडोगी तो फट तो जाएगा ही,,,,।
तू भी बहुत शैतान हो गया है रात को कुछ और फाड़ता है और दिन में कुछ और,,,(शर्म और उत्तेजित स्वर में सुगंधा बोली तो अपनी मां की बात सुनकर अंकित एकदम सेमदहोश होता हुआ सीधा अपनी हथेली को साड़ी के ऊपर से अपनी मां की बुर पर रखकर बुर को और हथैली में लेकर दबाते हुए बोला,,,)
तुम्हारी फट गई क्या,,,,,!
आहहहह छोड़ दुख रही है,,,,।
क्या मम्मी इसमें डाल दो तब भी बोलोगी दुख रहा है, दबा दो तब भी बोलोगी दुख रहा है अब करूं तो क्या करूं,,,।
अभी समय कुछ नहीं करना है बाजार चलना है और दो-तीन ब्लाउज सिलवाना है,,,।
ब्लाउज क्यों,,,?
तेरी शरारतें जो बढ़ने लगी है तेरी हरकतों की वजह से कहीं मेरे ब्लाउज फटने लगे तो इसलिए पहले से ही सिलवा ले रही हूं,,, ताकि ब्लाउज फटने के बाद दिक्कत ना आए,,,।
और कहीं बुर फट गई तो,,,(गर्दन पर चुम्बन लेते हुए अंकित बोल तो इस बात पर सुगंधा एकदम से शर्म से अपनी नज़रें नीचे झुका ली और बोली,,)
अगर बुर फट गई तो तुझे ही तकलीफ होगी तुझे चोदने को नहीं मिलेगा इसलिए आराम से,,,।
बात तो बिल्कुल सही है तुम्हारी बुर को अगर कुछ हो गया तो मेरे लंड की तो हालत खराब हो जाएगी अब तो तुम्हारी बुर में डाले बिना मेरे लंड को चैन हीं नहीं मिलता,,,(अभी भी अपनी हथेली अपनी मां की बुर को साड़ी के ऊपर से दबाए हुए वह बोला तो उसकी बात सुनकर सुगंधा बोली,,)
इसलिए तो कह रही हूं छोड़ दे उसको,,, तभी तु उसके साथ मजा ले पाएगा,,,।
को छोड़ दिया अब जल्दी से तैयार हो जाओ,,,,।
मैं तो तैयार हो गई हूं,,,, चल अब,,,, अच्छा रुक जा मैं ब्लाउज का कपड़ा तो ले लुं,,(इतना कहने के साथ ही सुगंधा अलमारी खोली और ब्लाउज सिलवाने का तीन कपड़ा ले ली और उसे एक थैली में रख ली. फिर इसके बाद मां बेटे दोनों घर से बाहर निकल गए बाजार जाने के लिए,,, मुख्य सड़क पर आते हीसुगंधा एक ऑटो को रोकने का इशारा की ओर ऑटो रुक भी गया यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला,,,)
आज ऑटो क्यों पैदल ही चलते हैं ना,,,।
अरे उस दर्जी की दुकान बाजार से थोड़ा दूर है और आज पहली बार वहां पर ब्लाउज सिलवाने के लिए जा रही हूं,, सुनी हूं कि वह अच्छा ब्लाउज सिलता है,,,(इतना कहते हुए मां बेटे दोनों ओटो में बैठ गए,,,, जहां जाना था वहां का पता ऑटो ड्राइवर को सुगंधा ने बता दी थी और थोड़ी ही देर बाद ऑटो एक सड़क पर आकर रुक गई यह भी एक छोटा सा बाजार ही था,,, मां बेटे दोनों ओटो में से बाहर निकले और सुगंधा ऑटो वाले को उसका किराया देकर,,,, इधर-उधर उस दुकान को खोजने लगी,,,, दूर से ही उसे वह दुकान दिखाई दे गई थी जिसके बारे में उसकी ही सहेली ने उसे बताई थी और यह सहेली नूपुर नहीं थीस्कूल की ही थी लेकिन कोई और थी जिसके साथ उसकी ज्यादा बातचीत नहीं होती थी,,,, क्योंकि उसका ब्लाउज का डिजाइन सुगंधा को बहुत अच्छा लगा था और सुगंधा उसे ब्लाउज कहां सिलवाई इस बारे में पूछ रही थी उसी ने इस दुकान के बारे में उसे बताई थी,,,,, दुकान को देखते ही वह अंकित से बोली।)
वह रही दुकान अंकित,,,,(उंगली से अंकित को सड़क की दूसरी तरफ दुकान दिखाते हुए बोली तो अंकित भी उस तरफ देखने लगालेकिन अंकित को बड़ी जोरों से पेशाब लगी हुई थी इसलिए अपने हाथ में लिया हुआ थैला अपनी मां को थमाते हुए बोला,,)
ठीक है तुम जाओ मैं आता हूं,,,।
तू कहां जा रहा है,,,?
पेशाब करने जा रहा हूं तुमको चलना है क्या,,,?(मस्ती लेते हुए अंकित बोला तो उसकी मां शर्मा गई और बिना कुछ बोले थैला हाथ में लिए हुए सड़क पार करने लगी,,,, सड़क पार करने के बाद सुगंधा धीरे-धीरे चलते हुए उस दुकान के पास पहुंच गई। दुकान कुछ ज्यादा बड़ी नहीं थी छोटी सी दुकान थी,,, कांच के अंदर सजावट के लिए अच्छे-अच्छे डिजाइन के ब्लाउज रखे हुए थे। जिसे देखकर ही सुगंधा समझ गई थी कि वाकई में अच्छा दरजी है,,, इसलिए खुशी-खुशी सुगंधा दुकान के अंदर प्रवेश कर गई,,, दुकान तो छोटी थी लेकिन अच्छी खासी थी इस समय दुकान पर कोई दूसरा ग्राहक नहीं था सामने ही काउंटर पर तकरीबन साइन 65 वर्ष के एक चाचा जी बैठे थे तो सुगंधा को देखते ही बोले,,)
आईए बेटा,,,, बोलिए क्या सेवा कर सकता हूं।
चाचा जी मुझे एक अच्छा डिजाइन वाला ब्लाउज सिलवाना है,,,।
ठीक है इसीलिए तो बैठे हैं,,,। किस डिजाइन का ब्लाउज सिलवाना है,,,,।
(उस दर्जी की बात सुनते ही, सुगंधाकांच में सजा के ब्लाउज की तरफ देखने लगी जिसमें से वह इस ब्लाउज को पसंद की जी डिजाइन को वह अपनी सहेली को पहने हुए देखी थी तुरंत उसकी तरफ हाथ से इशारा की जिसे देखते ही दर्जी बोला।)
यह हमारे दुकान की सबसे अच्छी डिजाइन है ज्यादातर औरतें यही डिजाइन पसंद करती हैं।
तभी तो मैं यहां आई हूं,,
इसीलिए मैं पहली बार देख रहा हूं,,,,(इतना कहते ही वह दर्जी काउंटर पर से उठकर खड़ा हो गया उसके हाथ में पट्टा बंधा हुआ था जिसे देखकर सुगंधा निराश हो गई बहुत जल्द ही वह दर्जी सुगंधा के चेहरे पर उपसी हुई परेशानी को समझ गया और बोला)
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,, मैं समझ सकता हूं कि समय तुम्हारे मन में क्या चल रहा है लेकिन ब्लाउज मेरा बेटा चलता हैऔर तुम्हें कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है लेकिन एक बात की दिक्कत है कि इस समय तुम्हारे ब्लाउज का नाप नहीं ले सकूंगा और मेरा बेटा भी समय दुकान पर नहीं है अगर आप कल आ सके तो,,,,।
नहीं चाचा जी हम बहुत दूर से आए हैं अगर हो सके तो आज ही नाप ले लो,,,,।
लेकिन मैं कैसे ले सकता हूं मेरे हाथ में चोट लगी हुई है अगर कोई होता तो उसे कह देता,,,(उसका इतना कहना था कि तभी अंकितदुकान के दरवाजे पर पहुंच गया जिसे देखते ही वह दर्जी एकदम से खुश होते हुए बोला) बहुत सही समय पर कोई दुकान पर आया है इधर आओ बेटा तुम्हारी बहुत जरूरत है इस समय,,,,।
मेरी जरूरत,,,(इतना कहकर अपनी मां की तरफ देखो और फिर दर्जी की तरफ देखने लगा सुगंधा अपने बेटे को देखकर सामान्य ही थी वहउसे दरजी को बोलना चाहती थी कि यह मेरा बेटा है लेकिन तभी उसे दर्जी ने जो कहाउसे सुनकर सुगंधा खुद खामोश हो गई और कुछ बोल नहीं पाई,,)
हां बेटा तुम्हारे जैसे ही किसी नौजवान कि मुझे जरूरत थी जो इन मैडम का ब्लाउज का नाप ले सके क्योंकि मेरे हाथ में चोट लगी हुई है और मैं नाप ले नहीं सकता और यह मैडम कल दोबारा आ नहीं सकती क्योंकि बड़ी दूर से आ रही है,,,,।
ओहहह मैं सब समझ गया,,,(इतना क्या करो सुगंधा की तरफ देखकर हल्के से आंख मार दियाअंकित सब कुछ समझ चुका था जैसे ही उसने यह मैडम का नाप लेना बोला वह समझ चुका था कि वह नहीं जानता किवह दोनों मां बेटे हैं इसलिए वह इस फल का फायदा उठाना चाहता था और इशारों ही इशारों में उसने अपनी मां को भी कुछ ना कहने के लिए बोल दिया था,,,,सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी इस बात से की उसका ही बेटा उसके ब्लाउज का नाप लेने वाला है अब कैसे लेगा यह तो वह खुद नहीं जानती थी,,,,, अंकित दुकान के अंदर प्रवेश कर चुका था और उस दर्जी से बोला,,)
चाचा जी ईससे पहले मैंने कभी इस तरह से नाप नहीं लिया कहीं गड़बड़ हो गई तो,,,(सुगंधा की तरफ देखते हुए अंकित बोला और ऐसा व्यवहार कर रहा था मानो कि जैसे सच में वह दोनों अनजान हो )
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बेटा मैं हूं ना मैं जैसा कहता हूं वैसे ही करना,,,,,,।
ठीक है चाचा जी आप कहते हैं तो मैं नाप ले लेता हूं और वैसे भी सब आपकी जिम्मेदारी है कहीं मैडम का ब्लाउज खराब हो गया तो मुझे कुछ ना कहना,,(अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए देखकर बोला,,, अपने बेटे के मुंह से अपने लिए मैडम शब्द सुनकर उसके बदन में भी सुरसुराहट होने लगी वह भी एकदम से अनजान बन गई थी,,,,)
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बेटा 40 साल का अनुभव है एक डोरा इधर से उधर नहीं हो सकता,,,, लो यह फीता और जैसा कहता हूं वैसा नाप ले लो,,,(इतना कहकर वह दर्जी अंकित की तरफ फीता बढ़ा दिया और अंकित ने भी चाचा जी के हाथ से फीता ले लिया और ठीक अपनी मां की आंखों के सामने खड़ा हो गया सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, हाथ में फीता लेकर वह दर्जी चाचा से बोला)
बताइए कैसे लेना है अब नाप,,,,।
ठीक है बेटा अब फीता के किनारी को कंधे पर रखो,,,
और अंकित ने वैसा ही किया फीता के किनारी को अपनी मां के कंधे पर रख दिया,,,,(इस समय एक अनजान की आंखों के सामने सुगंधा की हालत तो खराब ही हो रही थी अंकित के तन-बदन में भी उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,,, गहरी सांस लेता हुआ अंकित फिर से बोला) अब क्या करना है चाचा जी,,,,,।
अब उसे फीता को नीचे की तरफ लेकर आओ जहां पर मैडम जी के ब्लाउज की निचली किनारी है वहां तक,,,,,,।
ठीक है चाचा जी ,,,,वैसे तो यह काम में पहली बार कर रहा हूं लेकिन न जाने क्यों ईस काम में मुझे अच्छा लग रहा है,,,,,।
बड़ी बारीकी वाला काम है बेटा,,,, नाप लेने में तो अच्छे अच्छों का पसीना छूट जाता है,,,,,(दर्जी सुगंधा की तरफ देखते हुए बोला और खासकर के उसकी चूचियों की गोलाई की तरफ देखकर वह बोला थाउसके कहने के मतलब को अंकित बड़ी अच्छी तरीके से समझ रहा था और सुगंधा भी उसके कहने का मतलब कुछ समझ चुकी थी लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी। लेकिन इस बात से अंकित कोबड़ी खुशी में रही थी कि उसकी मां इस उम्र के मर्दों को भी रिझाने में पूरी तरह से समर्थ है इसलिए वह मुस्कुरा कर बोला,,)
बात तो सही कह रहे हो चाचा सच में पसीने छूट जाते हैं,,,,(इतना कहने के साथ हीं अंकित जानबूझ के उसे फीते को नीचे की तरफ लाते हुए अपनी मां की चूचियों पर दबाव बनाते हुए उसे नीचे की तरफ लेकर आयाऔर इस हरकत को उसे दर्जी ने अपनी आंखों से देख कर गर्म सांस छोड़ने लगा उसकी हालत खराब होने लगी और वह अंकित की हरकत पर एकदम से मत हो गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि आजकल के छोकरे कितने तेज होते हैं,,,, फीते को ब्लाउज के निचली किनारी पर लाकर अंकित फीते को वही रोक दिया और दर्जी की तरफ देखते हुए बोला,,,) देखो अब ठीक है ना,,,,।
(इतना सुनकर वह दर्जी थोड़ा नजदीक आया और सुगंधा की भरपूर चूचियों पर नजर डालते हुए फीते की तरफ देखा और बोला,,)
एकदम ठीक है,,(इतना कहकर वह एक हाथ से नाप को लिखने लगा यह देखकर अंकित बोला,,)
ठीक से देख लो एक बार और चाचा गोलाई तो सही है ना कहीं ऐसा ना हो की गोलाई का नाप कम हो जाए और फिर बाद में मैडम जी ब्लाउज के अंदर डालते ही रह जाए और गोलाई घूसे ना,,,(अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए देख कर अंकित एकदम से मजे लेते हुए बोला तो उसकी बात सुनकर दरजी के भी होश उड़ गए थे,,,, सुगंधा खुद शर्म से पानी पानी हो गई थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका दी थी और दर्जी इसलिए हैरान हो गया था की कहीं अंकित की बातों को सुनकर उसकी ग्राहक नाराज ना हो जाए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था न जाने क्यों अंकित की बातों को सुनकर जो कि उसे दरजी के लिए अनजान लड़का था उस दरजी के अरमान भी मचलने लगे कुछ देर खामोशी के बाद वह बोला।)
बात तो तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो बेटे बाद में तकलीफ नहीं होनी चाहिए अगर गोलाई से कम साइज का ब्लाउज बन गया तो वाकई में मैडम को तो परेशानी हो जाएगी अंदर डालने में,,,(वह दर्जी भी मौके का फायदा उठाते हुए सुगंधा की खामोशी को देखकर अंकित के सुर में और मिलने लगा वह अंदर डालने वाली बात पर कुछ ज्यादा ही जोर देकर बोला था सुगंधा उसके कहने के मतलब को समझ रही थी और न जाने क्यों एक अनजान आदमी के सामने अपने बेटे की छेड़ छाड़ ऊसे भी अच्छी लगने लगी थी। वह दर्जी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) क्यों मैडम जी सही कह रहा हूं ना अभी से बता दो ब्लाउज कसा हुआ रखना है कि थोड़ा ढीला इस तरह से नाप ले सकेंगे,,,,
(सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और अंकित इस तरह से उसे अनजान व्यक्ति के सामने फीते को अपनी मां की चूची पर दबाए खड़ा था,,, सुगंधा गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)
थोड़ा कसा हुआ चलेगा,,,।
(सुगंधा की बात सुनते ही अंकित एकदम उत्साहित होता हुआ बोला)
देखा चाचा जी मैं कारहा था ना,,,, इसलिए कह रहा हूं मैडम जी बोलते जाइए वरना कहीं तुम्हारा सामान ब्लाउज के अंदर समा नहीं पाया तो खामखा इस दुकान को बदनाम कर दोगी,,,,(अंकित अपनी मां की चूची को समान शब्द कहकर संबोधन किया था जिससे एक बार फिर से दर्जी की हालत खराब हो गई थी और वहां सुगंधा की तरफ हैरानी से देख रहा था लेकिन सुगंधा की तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं थी बस वहां में सर हिला दी थी तब जाकर उसे राहत महसूस हुई और वह अंकित के जुमलेबाजी से पूरी तरह से हैरान हो गया था,,, इस बार फिर से अंकित कंधे पर से फीत को नीचे की तरफ लाते हुए अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूची पर थोड़ा दबाव बढ़ा रहा था और यह सब वह जानबूझकर कर रहा था ताकि वह दर्जी अपनी आंखों से सब कुछ देख सके वह उसे अनजान व्यक्ति के सामने अपनी मां के बदन से मस्ती कर रहा था और देखना चाहता था कि उसे बुजुर्ग की क्या हालत होती है और उसकी यह हरकत वाकई में दर्जी की हालत को खराब कर रहा था दरजी आंखें फाड़े अंकित की हरकत को देख रहा था उसे तरह से सुगंधा शांत खड़ी थी यह देखकर उसे हैरानी भी हो रही थी दर्जी की सांस ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि उसने साफ-साफ देखा था कि उसके लिए अनजान अंकित की उंगलियां उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर दब रही थी लेकिन इसका बिल्कुल भी वह विरोध नहीं कर रही थी,,,, आज अपने हाथ में पट्टा बंधा होने की बेबसी साफ उसकी आंखों में दिखाई दे रही थी। अंकित इस तरह से अपनी मां की चूचियों से खेलता हुआ ब्लाउज के निचले कीनारी तक फीते को लाया और वही रोक दिया और सीधे सुगंधा से ही बात करते हुए बोला,,)
अब देख लो मैडम जी अब ठीक है ना इसमें क्या है कि तुम्हारा ब्लाउज कसा भी रहेगा और तुम्हारा सामान तुम आराम से अंदर रख सकती हो तकलीफ नहीं होगी,,,,।
(सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी एक अनजान व्यक्ति के सामने वाकई में उसका बेटा पूरी तरह से खुलकर अनजान बनकर उसकी चूचियों से खेल रहा था जिसकी वजह से वह खुद उत्तेजित हुए जा रही थी और अपने बेटे की बात सुनकर वह धीरे से बोली)
हां यह ठीक है,,,,।
(इतना सुनते ही हैरानी के साथ वह दर्जी किताब में नाप लिखने लगा और मन ही मन सोचने लगा कि लड़का साला सच में एक नंबर का हरामि है अगर ज्यादा समय मिले तो इसी समय वह बातों में बहला फुसलाकर इसकी चुदाई भी कर दे,,, कितना हो जाने के बाद अंकित दर्जी की तरफ देखते हुए बोला)
अब क्या करूं चाचा जी,,,,।
अब जिस तरह से इधर का नाप लिए हो वही नाप दूसरी तरफ से भी ले लो।
मतलब की दूसरी गोलाई का,,!(जानबूझकर हैरान होने का नाटक करते हुए वह बोला और उसकी बात सुनकर उत्तेजना से वह चाचा अपने सूखे गले को अपने ही थूक से गिला करते हुए बोला)
हां बेटा दूसरी तरफ की गोलाई का,,,(इस तरह का शब्दों का प्रयोग दरजी कभी नहीं करता था लेकिन उसे लड़के की हिम्मत देखकर उसकी भी हिम्मत खोलने लगी थी इसलिए वह भी सुगंध के सामने उसकी चूची को गोलाई का संबोधन करते हुए बोल रहा था,,जिससे सुगंधा की बुर पानी छोड़ने लगी थी उसे दर्जी की बात सुनकर अंकित फिर से उत्साहित होता हुआ इस तरह से नाप लेने लगा,,,, इस बार में दरजी के सामने थोड़ा खुलने का कोशिश करते हुए फीते को कंधे के ऊपर लगाया और उसे फीते को नीचे की तरफ लाते हुए जानबूझकर उसे दर्जी की आंखों के सामने ही अपनी मां की चूची को हथेली में हल्के से दबा दिया और यह सब इतनी जल्दबाजी में किया कि बस वह दर्जी देख सके और वह फिर से फीते को नीचे की तरफ ले आया,,,, इस हल्की सी झलक को देखकर दर्जी की हालत एकदम से खराब हो गई उसके मुंह में पानी आ गया और उसकी धोती में उसका लंड खड़ा होने लगा भले ही वह 50-55 की उम्र का हो गया था लेकिन फिर भी सुगंधा की मदहोशीकर देने वाली जवानी उसे उत्तेजना का एहसास करा रही थी। वह पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था और अपने मन में ही कह रहा था कि साला लड़का सच में बहुत चालाक है खेल खाया लगता है तभी औरतों के अंगों से खेलना जानता है। अंकित बड़ी चालाकी से फीते को नीचे किनारी पर रखते हुए बोला,,,)
लो देख लो चाचा और लिख लो बराबर है ना,,,,
हां बिल्कुल ठीक है बेटा,,,(माथे पर ऊपर से पसीने की बूंद को अपने रुमाल से साफ करते हुए दर्जी बोला और नाप को लिखने लगा)
अब बोलो,,,, अब क्या करना है,,?(फिते को हाथ में लिए हुए अंकित बोला और उसकी बात सुनकर दरजी अपने मन में बोला आपके हाथ तो इसकी साड़ी उठाकर पीछे से पेल दे बस,,,, लेकिन यह बात उसने अपने मन में ही बोला था क्योंकि सुगंधा के सामने बोलने की इतनी हिम्मत उसकी बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए वह बोला,,,)
अब बेटा ब्लाउज के बीच में जो बटन है वहां पर फीते को पकड़ो और उसे उसी तरफ से ले जाकर के बांह के नीचे तक का माप लेना है,,,,।
ठीक है चाचा,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से फीते को ब्लाउज के पीछे-पीछे जहां पर बटन लगाया जाता है वहां पर रख दिया और दूसरे हाथ से फीते ब्लाउज के उसी भाग पर ले जाने लगा, और इस बार भी उसने वही हरकत को दोहराया इस बार भी उसने अपनी मां की चूची को हल्के से दबा दिया,,,, लेकिन इस बार जो उसने बोला उससे उसे दर्जी का कान के परदे लक हील गए,,,, वह हल्की सी अपनी मां की चूची को दबातेहुए बोला) ज्यादा बड़े हैं ना मैडम इसलिए थोड़ा दिक्कत हो रहा है…..(और दर्जी के सामने सुगंधा कुछ बोली नहीं बस शर्मा के हां में सर हिला कर नीचे नजर झुका ली यह सब दरजी के लिए असहनीय होता जा रहा था,,, उसे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था और उसका हाथ अपने आप ही उसकी धोती के ऊपर चला गया और इसकी यह हरकत को अंकित और सुगंध दोनों ने अपनी आंखों से देख लीए थे,,,, अंकित तब तक फिर देखो उसके सही जगह पर ले आया था और बोला,,)
देख लो चाचा जी ठीक है ना,,,।
बिल्कुल ठीक है बेटा,,,(उत्तेजना के कारण चाचा जी के मुंह से आवाज भी ठीक से नहीं निकल पा रहा था और वह धीरे से नाप को लिख लिए यही क्रिया उनकी दूसरी तरफ से भी किया और फिर बोला,,,)
अब कहां का नाप लेना है चाचा जी,,,,।
बस बेटा अब पीछे से नाप ले ले,,,।
ठीक है चाचा जी,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित खुद अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे घुमा दिया,, जिससे उसकी मां की पीठ अंकित की तरफ हो गई लेकिन यह देखकर करती हैरान हो गया था कि वह लड़का बिना कुछ बोले उसे अपने हाथ से ही घुमा दिया था और इस बात पर उसे मैडम ने बिल्कुल भी प्रतिक्रिया नहीं की थी वह पूरी तरह से उसके अधीन हो चुकी थी यह देखकर वह दर्जी यही सोच रहा था कि अगर यह चाहे तो इसकी चुदाई भी कर दे तो भी यह कुछ नहीं बोलेगी,,, जैसे ही सुगंधा की पीठ उसकी आंखों के सामने हुई,,,, अंकित एकदम से उसकी साड़ी कंधे से पकड़ कर अपने हाथ में लिया और उसे कंधे से नीचे करते हुए बोला,,,)
मैडम जी थोड़ी देर के लिए साड़ी को अपने हाथ में पड़े रहिए ताकि अच्छे से नाप लिया जा सके,,,,,।
ठीक है,,,(इतना कह कर वह साड़ी को अपने हाथ में पकड़ ली,,,, और अंकित उस दर्जी को और भी ज्यादा उत्तेजित करने के लिए बोला,,,)
बहुत चौड़ी और चिकनी पीठ हैं मैडम जी कोई क्रीम लगाती है क्या,,,?
नहीं यह तो ऐसे ही है,,,।(सुगंधा भी धीरे से बोली वह भी इस खेल में पूरी तरह से शामिल हो चुकी थी उसे भी मजा आ रहा था उसकी भी बुर पानी छोड़ रही थी,,,,)
सच में आप बहुत खूबसूरत है,,,,,(अंकित दर्जी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला दर्जी की हालत खराब थी वह समझ गया था कि सच में कितना हरामी लड़का है,,, और उसने आज तक ऐसा बिंदास लड़का नहीं देखा था जो औरतों के मामले में इतना तेज हो,,,, दर्जी की तरफ देखते हुए अंकित बोला,,,,)
अब कैसे लेना है नाप चाचाजी,,,?
बस बेटा आप पीठ की तरफ जहां से सिलाई शुरू होती है वहां पर फिता र ख और इस तरफ जहां पर सिलाई खत्म होती वहां पर रखकर नाप ले ले,,,,।
ठीक है चाचा जी,,,,(और इतना कहकर बाहर दरजी जैसा बोला वैसा ही किया लेकिन ऐसा करने के दौरान भी वह धीरे से जो बोला वह भी काफी हैरान कर देने वाला था दरजी को नाप लेते हुए अंकित दर्जी की तरफ देखते हुए बोला।)
चाचा जी अगर ब्लाउज उतार कर नाप लेना हो तो सही नाप लिया जाए पैसे में क्या मैडम जी भी खुश और ग्राहक खुश तो आप खुश,,,,।
(इतना सुनते ही फिर से दर्जी की हालत खराब हो गई वह फिर से मैडम की तरफ तो कभी अंकित की तरफ देखने लगा लेकिन वह हैरान था कि मैडम एक शब्द तक नहीं बोल रही थी और तब तक अंकित अपने हाथ में से फिते को कबाट पर रख दिया,,,,, कोई कुछ बोलता है इससे पहले ही मैडम मतलब की सुगंधा बोल पड़ी,,,)
कितने दिन में हो जाएगा चाचा जी,,,,।
तीन-चार दिन में हो जाएगा क्योंकि और भी ब्लाउज सिलना बाकी है ऐसा करो कि रविवार को आ जाना तुम्हारा ब्लाउज तैयार मिलेगा,,,,।
ठीक है चाचा जी,,,,
(थोड़ी देर में दर्जी ने पर्ची बनाकर सुगंधा को थमा दिया और सुगंधा भी मुस्कुराते हुए दुकान से बाहर निकल गई लेकिन अंकित वहीं खड़ा रहा क्योंकि वह जानना चाहता था कि दरजी के मन में क्या चल रहा है और सुगंधा के जाते ही वह दर्जी एकदम से उत्साहित होता हुआ अंकित से बोला,,,)
वाह बेटा बड़े तेज हो अगर दुकान में मै ना होता तो शायद तुम साड़ी उठाकर उसकी ले भी लिएहोते।
सच कहूं तो चाचा जी इरादा कुछ ऐसा ही था देख नहीं रही हो कितनी खूबसूरत औरत थी पूरा बदन जवानी से भरा हुआ था,,,।
एक बात बताओ जो इतना उसके साथ खुल रहे थे तुम्हें डर नहीं लग रहा था अगर कुछ बोल देती या थप्पड़ लगा देती तब क्या करते ।
तुम्हें लगता है चाचा जी की वह थप्पड़ लगा देती। अगर मैं खुलकर उससे उसकी बुर मांग लेता तो भी वह दे देती,,,,।
सच में बेटा तुम्हारा तो जलवा है,,,।
अच्छा चाचा जी सच-सच बताना कैसी लगी तुम्हेंवह औरत,,,।
क्या कहूं बेटा गजब की औरत थी मेरा तो देखते ही खड़ा हो गया था मैंने आज तक कितनी खूबसूरत औरत अपनी दुकान में नहीं देखा उसका ब्लाउज बनाने में भी मुझे बहुत मजा आएगा । अच्छा एक बात बताओ दो बार मैंने तुम्हारी हरकत देखा था दो बार तुमने उसकी चूची दबाए थे सच-सच बताना कैसी चुची थी नरम नरम थी या कड़क।
मिला जुला था चाचा जी कड़क भी और नरम भी ऊपर से कड़क लेकिन दबाने पर एकदम नरम तुम्हारा भी तो खड़ा हो गया था चाचा जी मेरी हरकत देखकर।
अब क्या कर सकता हूं बेटा बस देखकर ही मजा ले सकता हूं हमारी किस्मत में कहां इतनी खूबसूरत औरत है जो बिस्तर पर मजा दे।
वैसे भी चाचा जी इतनी गर्म औरत दिखाई दे रही थी कि बिस्तर पर तुम उसे ठंडा भी नहीं कर सकते बल्कि मुझे तो डर है कि कहीं अगर ऐसी औरत तुम्हें बिस्तर पर मिल जाए तो कहीं दिल के दौरे से ना मर जाओ।
(अंकित की बात सुनते ही वह दर्जी जोर-जोर से हंसने लगा,,,, और जब थोड़ा सामान्य हुआ तो वह बोला)
अच्छा यह बताओ बेटा तुम किस सिलसिले से यहां पर आए हो।
मम्मी ने भेजा था कि देखो दुकान खुली है या बंद,,, यही देखने के लिए आया था और तुम तो मेरे हाथों में खूबसूरत तोहफा दे दिए। (इतना कहकर मुस्कुराते बहन की दुकान से बाहर निकल गया दुकान से बाहर निकाल कर वाहन सड़क की तरफ देखा तो दूर पेड़ के नीचे उसकी मां खड़ी होकर उसका इंतजार कर रही थी अंकित मुस्कुराता हुआ अपनी मां के पास पहुंच गया तो उसकी मां थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)
सच में तु बहुत हारामी है,,,,,
आप क्या कर सकता हूं वह दुकान वाला ही मुझे अजनबी समझ रहा था और यही सोचकर मैं थोड़ा मजा लेना चाहता था अनजान बनकर और सच में मुझे बहुत मजा आया तुम्हारे ब्लाउज का नाप लेकर।
अगर ब्लाउज उतार कर नाप देना हो तो मजा आ जाए ना,,,,(सुगंधा हल्के से अपने बेटे की पीठ पर मरते हुए बोली तो वह भी मुस्कुराते हुए बोला)
सच में अगर ऐसा हो जाए तो मैं भी दरजी बन जाऊं तब सब की खोल खोल कर नाप लु,,,।
बहुत शैतान हो गया है तू,,,,,
और वैसे भी मम्मी देख रही थी दर्जी की हालत उसका मुंह देखने लायक था अच्छी नहीं धोती में उसका ल़ड खड़ा हो रहा था।
हां रे देखी थी,,,, उसकी उम्र देखकर लगता ही नहीं है कि वह भी इन सब के बारे में सोचता होगा।
अरे तुम्हें क्या मालूम मम्मी उम्र का कोई लेना-देना नहीं होता वह भी अपने मन में तुमको लेकर न जाने कैसे कैसे ख्याल पका रहा होगा।
अच्छा यह बात है,,,, तुझे बहुत मालूम पड़ता है ना यह सब फिर से क्या बात हो रही थी मेरे आने के बाद।
वह दर्जी यही कह रहा था कि मैं तुम्हारे जैसा लड़का नहीं देखा इतनी जल्दी तुम औरतों के मामले में आगे बढ़ जाते हो मैं तो देख कर हैरान रह गया था ओर मालूम है तुम्हें वह क्या कह रहा था।
क्या कह रहा था,,,,?
कह रहा था कि बेटा अगर मैं दुकान में नहीं होता तो शायद तुम साड़ी उठाकर उसकी ले भी लिए होते।
हाय दइया ऐसा कह रहा था वो।
तो क्या और जब मैं उससे यह कहा कि अगर तुम्हें ऐसी औरत मिल जाए बिस्तर पर तो तुम क्या करोगे।
तब उसने क्या कहा,,,?(सुगंधा भी जानना चाहती थी कि उसे देखकर उसे दरजी के मन में कैसे विचार जाग रहे थे अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला)
वह हंसने लगा और बोला कि इस उम्र में मुझे नहीं लगता कि मैं कुछ कर पाऊं लेकिन फिर भी अगर ऐसी औरत बिस्तर पर हो तो मैं पूरी कोशिश करूंगा,,,,।
(इतना सुनकर सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखने लगी जो कि यह बात अंकित अपने मन से बोल रहा था जबकि उसे दर्जी ने सुगंधा के मामले में पहले ही अपने हाथ खड़े कर दिए थे और फिर अंकित अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बोला)
उसकी बात सुनकर मैं बोला अगर यह औरत मतलब कि तुम तुम्हारे बिस्तर पर आ जाए तो मुझे लगता है कि तुम्हारा तो दिल के दौरे से ही मृत्यु हो जाएगी और इतना सुनकर वह जोर-जोर से हंसने लगा।
(अपने बेटे की बात कर सुगंधा भी हंसने लगी आज का यह अनुभव बेहद अद्भुत था मां बेटे के लिए सुगंधा इस बात से हैरान थी कि वह दर्जी जान नहीं पाया कि यह दोनों मां बेटे हैं दोनों को अजनबी ही समझ रहा था। उसी छोटे से बाजार में से सुगंधा कुछ सब्जिय खरीदी और मां बेटे दोनों थोड़ा नाश्ता करके ओटो पकड़कर घर वापस आ गए।)
एक अद्भुत और रोमांचक अनुभव के साथ मां बेटे दोनों घर पर पहुंच चुके थे,,,, ना तो इस बात को कभी अंकित सोचा था और नहीं कभी उसकी मां सोची थी कि ब्लाउज की दुकान पर दरजी के सामने मां बेटे पूरी तरह से अनजान बनकर इस तरह से मजा लेंगे,,,, सुगंधा अपने बेटे को बेवकूफ समझती थी लेकिन आप उसे समझ में आने लगा था कि उसका बेटा बेवकूफ नहीं बहुत चालाक है जो एक ही रात में उसे एक बार फिर से औरत बना दिया था और एक ही रात में उसे खुद को पता चल गया था कि वाकई में उसका बेटा पूरा मर्द है जिसे वह ढीला ढाला समझती थी,,, हर पल अंकित उसे एक नए एहसास में डुबो दे रहा था जिसमें सुगंधा खुद डूबना चाहती थी वैवाहिक जीवन में भी उसने इतना आनंद नहीं ली थी जितना एक ही रात में उसके बेटे ने उसे आनंद प्रदान किया था एक अद्भुत अनुभव प्रदान किया था उसे एहसास दिलाया था कि औरत अपनी सोच से ज्यादा मजा ले सकती है अगर वह खुद रंडी पन पर आ जाए तो उसकी झोली में आनंद ही आनंद है इसका एहसास सुगंधा को भी अच्छी तरह से हो रहा था। सुगंधा को अच्छी तरह से मालूम था कि उसके पति ने भी उसे इतना ज्यादा खुलने की अनुमति कभी नहीं दिया था या खुद ही औरत के अंदर कितना प्यार छुपा है इस बात की गहराई को वह कभी समझ ही नहीं पाए थे संभोग की परिभाषा उनके लिए केवल इतनी सी थी कि बिस्तर पर और उसकी टांगों के बीच जाकर जोर-जोर से धक्के लगाना और ढह जाना बस इतना ही जानकारी थी औरत को खुश करने की।
लेकिन सुगंधा इस बात से खुश ठीक ही उसका बेटा अपने आप से एक कदम नहीं 10 कदम आगे था वह औरत को खुश करना जानता था कैसे उन्हें प्रसन्न किया जाता है इस बात को अच्छी तरह से जानता था। लेकिन सुगंधा को यह नहीं मालूम था कि उसका बेटा यह सब सीखा कहां से,,,, लेकिन फिर भी सुगंधा के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं थी क्योंकि इतना तो ज्ञान उसे भी था कि मर्द औरत को चोदने का हुनर अच्छी तरह से जानते हैं भले ही वह पहली बार हो या आखिरी बार हो,,, शुरू शुरू में थोड़ी दिक्कत होती है लेकिन कुछ ही समय में सब कुछ सही हो जाता है। सुगंधा ईस बात से भी भली भांति परिचित थी कि वह गंदी किताब जिसे वह खुद फुटपाथ पर से खरीदी थी,, जिसे वह अंकित चाहिए कहकर संभाल कर रखी हुई थी कि यह उसके पिता की निशानी है जिसे वह पढ़ा करते थे उसे किताब से भी अंकित को बहुत ज्ञान मिला था इस बात से उसे इनकार नहीं था क्योंकि उसके काम में औरत को खुश करने का पूरा तरीका था एक मर्द औरत के साथ संबंध बनाते समय किस तरह की हरकत करता है कैसे खुश करता है सब कुछ बड़ी बारीकी से लिखा गया था शायद उसके बेटे का हमें उसके बाप से ही आया हो इसलिए वह इस बात से कुछ ज्यादा विचार विमर्श नहीं करती थी।
सुगंधा ताला खोलकर घर में प्रवेश करते हुए मुस्कुराते हुए अपने बेटे से बोली,,,,।
मैडम का नाप लेने में मजा आया कि नहीं,,,
पूछो मत मम्मी,,, (घर में प्रवेश करते हुए और फिर दरवाजा बंद करते हुए) कसम से मेरा बस चलता है तो उसे दरजी के सामने तुम्हारी साड़ी उठाकर तुम्हारी चुदाई कर देता,,,,।
तो कर दिया उसने रोका किसने था,,, (सुगंधा थैले को टेबल पर रखते हुए बोली और अपनी मां की बात सुनकर अंकित एकदम हैरान होकर उसकी तरफ देखने लगा और बोला,,,)
क्या बात कर रही हो मम्मी सच में,,,।
तो क्या मजाक थोड़ी ना कर रही हुं,,, (अंकित की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए) तेरी हरकतों से मुझे भी न जाने क्या होने लगा था..
तुम्हारी भी बुर पानी छोड़ रही थी ना,,,।
क्यों नहीं जब तेरा खड़ा हो सकता है तो मेरा पानी नहीं छोड़ सकता और वैसे भी तेरी हरकत थी ऐसी की मेरी जगह कोई भी हो थी तो उसका भी मेरे जैसा यार होता लेकिन तू कितना बेशर्म है उस दरजी के सामने ही मेरी चूची दबा रहा था।
तो क्या मम्मी मैं तो उसे दर्जी की हालत खराब कर रहा था और दिख रहा था कि आजकल के लड़के कितने तेज हैं,,,, सच कहूं तो उसके मन में भी यही चल रहा था क्योंकि जब तुम चली गई थी तो उसने यही कहा था कि मुझे तो डर था कि कहीं तुम उसकी साड़ी उठाकर उसकी लेना लो,,,,।
तभी तो मैं भी कह रही हूं ले लिए होते तो भी मैं नहीं रोकती वैसे भी वह हम दोनों को थोड़ी ना जानता है,,,, (अपनी मम्मी की बातें सुनकर अंकित ठगा सा रह गया था उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसने इतना सुनहरा मौका खो दिया था उसे नहीं मालूम था कि उसकी मम्मी इतनी बड़ी छिनार हो चुकी है कि किसी के भी सामने चुदवाने के लिए तैयार है। इसलिए उदास होते हुए बोला,,,)
क्या मम्मी तुम भी इतना अच्छा मौका हाथ से गंवा दी मुझे तो लगा के तुम शर्मा रही हो,,,, तुम्हें यह सब अच्छा नहीं लगेगा अगर जरा भी मुझे एहसास होता कि तुम तैयार हो तो सच में उसे दरजी के सामने तुम्हारी बुर में लंड डालने मैं जरा भी देरी न करता और सोचो कितना मजा आता है जब बहुत दरजी अपनी आंखों से यह सब कुछ देखा कि एक अनजान लड़का है कंजन औरत को किस तरह से पल भर में मदहोश करके उसकी चुदाई करने लगा है उसे अपने आप पर शर्माने लगता कि वह इतना अच्छा मौका कम दिया क्योंकि यह सब वह भी कर सकता था।
कर तो सकता था लेकिन मुझे नहीं लगता कि वह मंजिल तक पहुंच पता उसकी हालत देखे थे सिर्फ नाप लेने में लेने में क्या सिर्फ देखने में ही उसका लंड खड़ा हो गया था वह पसीना पसीना हो गया था अगर उसे छूने का मौका मिल जाता तो शायद सच में वह दिल के दौरे से ही मर जाता।
बात तो तुम ठीक कह रही हो तुम्हारी जवानी है ही इतनी गदराई हुई कि तुम पर काबू पाने के लिए सांड बनना पड़ता है,,,,।
अच्छा तो तु सांड बन जाता है।
वह तो बनना ही पड़ता है मम्मी तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड जब तुम घोड़ी बनती हो तो पीछे से देखकर कोई कह ही नहीं सकता की,, तुम कोई सामान्य औरत हो क्योंकि तुम्हारा पिछवाड़ा इतना बड़ा दिखता है कि वाकई में तुम गाय लगने लगती हो और मुझे सांड बनना पड़ता है तुम्हें खुश करने के लिए,,,,।
(अपने बेटे की बात पर सुगंधा हंसने लगी और वैसे भी जिस तरह की बातचीत हो रही थी उसकी बुर फिर से गीली होने लगी थी,,, अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) वैसे मम्मी जिस तरह से तुम बोल रही हो सच में तुम एकदम छिनार हो गई हो,,,।
यह मत भुल तूने हीं बनाया है। चल अच्छा अब रहने दे खाना भी बनाना है रुक मैं हाथ मुंह धो लुं,,
ठीक है,,,,
(सुगंधा बाथरूम में चली गई और थोड़ी ही देर में पेशाब करने की आवाज आने लगी उसकी बुर से मधुर सिटी की आवाज आने लगी जिसे सुनकर अंकित बोल पड़ा)
तुम तो हाथ मत होने के लिए बोल रही थी तुम तो मुतने लगी।
अब लगी है तो क्या करूं करना तो पड़ेगा ही,,, (बाथरूम के अंदर से ही पेशाब करते हुए सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली अपने बेटे की बात सुनकर उसके चेहरे पर शर्म की लालिमा छा गई थी भले ही अपने बेटे से अब चाहे जितना भी खुल गई हो लेकिन फिर भी किसी किसी बात पर वह शर्म से पानी पानी हो जाती थी,,,,,, अपनी मां की बात सुनकर बोला)
बोली होती तो बाहर ही पेशाब करवा दिया होता।
क्यों पेशाब करने में तेरी जरूरत पड़ेगी क्या,,,,
अब तो पड़ेगी क्योंकि तुम्हारी बुर पर मुंह रखकर तुमसे पेशाब करवाऊंगा,,,,।
धत्,,,,,, हरामी,,,,, ऐसा सोचना भी नहीं कितना गंदा लगता है। (अंदर बैठे-बैठे ही वह बोली,,,)
तुम्हें गंदा लगता है लेकिन मुझे तो अच्छा लगेगा,,,।
बिल्कुल भी नहीं हमेशा बिल्कुल भी नहीं करने दूंगी जो कुछ भी हो रहा है उतना ही काफी है इससे ज्यादा कुछ नहीं,,,,,,।
ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी तुम्हारी मर्जी के बिना थोड़ी ना कुछ करना है,,,।
(बातों ही बातों में बुर पर मुंह रखकर पेशाब करने वाली बात करके अंकित ने सुगंधा के अरमानों को जगा दिया था भले हुए अंदर से इस तरह की हरकत करने से इनकार कर रही थी लेकिन अंदर ही अंदर ना जाने क्यों इस तरह के अनुभव से गुजरने का उसका मन कर रहा था,,,, जिनके एहसास से उत्तेजना के मारे उसकी बुर फूलने पिचकने लगी थी।
थोड़ी देर बाद वह तरो ताजा होकर खाना बनाने के लिए तैयार हो गई थी,,,,वह रसोई घर में जाकर खाना बना रही थी बाजार से वह दोनों नाश्ता करके आए थे लेकिन अंकित को भूख लग गई थी तो वह रसोई घर में गया देखा तो अभी भी खाना बनने में थोड़ा समय था अंकित को देखकर उसकी मां मुस्कुराते हुए बोली।
क्या हुआ,,,?
बड़े जोरों की भूख लगी है लेकिन अभी खाना बनने में भी समय है।
बस आधा घंटा और लगेगा तब तक एक काम कर केला खा ले,,,।
मेरे पास तो खुद ही केला है तुम्हारे लिए तुम्हें भूख लगे तो बोलना तुम्हें मैं अपना केला खिला दूंगा,,,,
नहीं तु अपना केला अपने पास ही रख,,,, तेरा वाला केला बहुत ज्यादा परेशान करता है,,,,।
लेकिन मजा भी तो बहुत देता है पूरी भूख मिटा देता है।
भूख मिटा नहीं देता है बल्कि और ज्यादा भड़का देता है,,,,।
ओहहह मतलब कि तुमको पलंग तोड़ चुदाई चाहिए।
ऐसा ही कुछसमझ,,, (सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली तो अपनी मां की मदहोश कर देने वाली अदा और उसके अंदर की प्यास को देखकर अंकित बोला)
अब तो लगता है कि तुम्हें रंडी की तरह चोदना पड़ेगा,,,।
तो अभी किस तरह से चोद रहा था,, (कढ़ाई में चमची से सब्जी को चलाते हुए बोली,,,)
अभी तो थोड़ा रहम कर रहा था,,,, क्योंकि मुझे लग रहा था कि तुम बहुत नाजुक हो लेकिन तुम्हारी बातों से लग रहा है कि तुम कितनी बड़ी खिलाड़ी हो तुम्हें तो पटक कर चोदना पड़ेगा,,,,।
उसके लिए तुझे ताकत की जरूरत पड़ेगी इसलिए कह रही हुं जाकर केला खा ले,,, वह देख थैले में रखा हुआ है,,, (रसोई घर के कोने में उंगली से इशारा करते हुए बोली इस बार अंकित अपनी मां की बात से इनकार नहीं कर पाया और वह भी जाकर के केला ले लिया लेकिन कला को हाथ में लेकर देखने लगा कला वाकई में उसके लंड जितना ही मोटा और लंबा था यह देखकर वह अकेला को हाथ में लिए हुए अपनी मां के पास आया और अपनी मां की आंखों के सामने कला को लेकर उसे हिलाते हुए बोला,,,)
मेरी साइज का ही केला तुम्हें पसंद आता है।
(इस बात को सुनकर सुगंधा मुस्कुरा दे क्योंकि ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई थी इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली)
तू एकदम सही कह रहा है जब मैं केला खरीद रही थी तो मेरी आंखों के सामने तेरा लंड ही झूल रहा था इसलिए मैं भी तेरी साइज का ही केला खरीद ली।
अब जब इतना हिम्मत दिखा ही दी हो तो,,, आज केला भी मैं अलग तरीके से खाऊंगा इसका स्वाद बढ़कर खाऊंगा।
कैसे खाएगा,,,,? (सुगंधा भी आंखों को नचाते हुए बोली,,,)
बस तुम देखती जाओ,,, (इतना कहकर अंकित अकेले को छीलने लगा और देखते-देखते वह पूरा केला छील दिया और उसके छिलके को एक तरफ कूड़ेदान में फेंक दिया केले को हाथ में लेकर इधर-उधर देखकर वह बोला,,,,) चाहे कुछ भी हो इसकी मोटाई मेरे लंड से कम ही है,,,,
दिखा तो,,, (इतना कहकर वह भी केले को ध्यान से देखने लगी तो बोली,,)
सच में तेरा एकदम सांड जैसा है मुझे तो लगा था कि यह अकेला तेरे साइज से थोड़ा बड़ा ही होगा लेकिन यह भी तेरी साइज से कम ही निकला,,,,।
चलो कोई बात नहीं जब तक खाना नहीं बन जाता है इसी से कम चलाते हैं मुझे उम्मीद है कि इससे मेरी भूख थोड़ी बहुत शांत हो ही जाएगी।
तो जल्दी से खा ले इतनी बातें क्योंकर रहा है।
खाता हूं मेरी रानी थोड़ा सबर तो करो आज थोड़ा मसाला लगा कर खाऊंगा।
कैसा मसाला,,,,?
(सुगंधा का इतना कहना था कि अंकित एकदम से मदहोश हो गया और अपनी मां के करीब आकर साड़ी के ऊपर से ही बड़ा अपनी हथेली को अपनी मां की बुर पर रखकर जोर से दबा दिया और बोला)
इसका मसाला,,,,।
हाय दईया कितना हारामी है रे तू,,,, सहहह छोड़ इस दर्द कर रही है,,,,।
जब लंड डालता हूं तब दर्द नहीं करती,,, (अंकित इस तरह से अपनी हथेली में अपनी मां की बुर को दबोचे हुए बोला,,)
लंड डालता है तो मजा आता है लेकिन ऐसे पकड़ता है तो दर्द करताहै।
ठीक है अभी दर्द को मजे में बदल देता हूं,,,,, (इतना कहने के साथ ही वह एकदम से घुटनों के बल बैठ गया,,,, यह देखकर हैरान होते हुए सुगंधा बोली,,,)
अरे यह क्या कर रहा है तू,,,,,
रुको तो सही सब समझ में आ जाएगा,,,, (इतना कहने के साथ ही एक हाथ में केला पड़े हुए दूसरे हाथ से अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा उसकी हरकत को देखकर सुगंधा को थोड़ा बहुत ज्ञात तो हो ही गया था कि उसका बेटा क्या करना चाहता है उसकी हरकत से उसकी बुर भी पानी छोड़ रही थी इसलिए वह उसे इनकार नहीं की और उसे साड़ी को ऊपर की तरफ उठने दी लेकिन फिर भी वह पूछ रही थी)
अब बात भी दे क्या करने जा रहा है,,,?
रुको तो सही तूम्हे पता चल जाएगा बस इतना बता दो चड्डी तो नहीं पहनी हो ना,,,,।
साड़ी उठा कर रहा है खुद ही देख ले,,,, (सुगंधा भी मदहोश होते हुए बोली,,,,, और अगले ही पर अंकित अपनी मां की साड़ी को उसकी मोटी मोटी जांघो के ऊपर की तरफ ले जाने लगा,,,, और अगले ही फलों से एहसास हो गया कि उसकी मां वाकई में साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनी थी यह देखकर वह एकदम से हैरान होता हुआ अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)
तुम तो सच में चड्डी नहीं पहनी हो इसका मतलब तुम एकदम तैयार थी अगर दर्जी की दुकान में तुम्हारी साड़ी उठाकर तुम्हें चोद दिया होता तो मजा आ जाता,,,,।
अब पछताए क्या होत जब चिड़िया चुग गई खेत,,,,।
बात तो तुम एकदम सही कह रही हो अब पछताने से कोई फायदा नहीं है और दोबारा उसकी दुकान पर एक साथ मुलाकात करना भी उचित नहीं है उसे पता चल जाएगा कि हम दोनों एक दूसरे को जानते हैं ।
बात तो तो ठीक कह रहा है चल कोई बात नहीं दर्जी ना सही और कोई सही कहीं ना कहीं तो ऐसा मौका जरूर मिलेगा,,,,।
(अपनी मां की उम्मीद और उसका विश्वास देखकर अंकित उत्तेजित होने लगा था उसे भी उम्मीद थी कि एक लड़की ने ऐसा मौका जरूर मिलेगा जब वह किसी गैर के सामने खुलकर अपनी मां की चुदाई करेगा और यही है उम्मीद से उत्साहित होता हुआ अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया था जिसे खुद सुगंधा अपने हाथ से पकड़ ली थी सुगंधा को एहसास हो गया था कि उसका बेटा क्या करने वाला है और इसी एहसास में वह डूबने लगी थी उत्तेजित होने लगी थी और उत्सुकता के साथ अपने बेटे को देख रही थी अपनी मां की गुलाबी बुर को देखकर जो कि इस समय कचौड़ी की तरह फुल चुकी थी उसकी पतली सटीक लकीर देख कर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि इस तालाब में डुबकी लगाने वाला अंकित दूसरा ही था पहला उसका पति इसीलिए तो उम्र के इस दौर में भी उसकी बुर किसी जवान लड़की से काम नहीं थी,,,, अपनी मां की बुर को देखकर अंकित का लंड अंगड़ाई लेने लगा था,,,, अपनी मां की गुलाबी बर को देखने के बाद अंकित नजर उठाकर अपनी मां की तरफ देखने लगा दोनों की नजर आपस में टकराई और सुगंधा शर्म के मारे अपनी आंखों को दूसरी तरफ घूमा ली,,,, पहले ही पल अंकित केले को धीरे-धीरे अपनी मां की गुलाबी बुर की गहरी लकीर पर रगड़ना शुरू कर दिया ऊपर से नीचे तक यह एहसास सुगंधा के तन बदन में जवानी का जोश भर रहा था उसकी आग को भड़का रहा था।
इस तरह की हरकत करते हुए अंकित अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी मां का चेहरा उत्तेजना से लाल हुआ जा रहा था,,,, अंकित की खुशी का ठिकाना न था क्योंकि उसकी हरकत से उसकी मां को मजा आ रहा था अंकित तीन चार बार अपनी मां के बुर की लकीर के ऊपर नीचे करके वह केला को रगड़ने लगा सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी सुगंधा अपनी साड़ी को खुद अपने हाथों से पड़ी हुई थी और अंकित अपनी मां की मोटी जांघ पर अपना एक हाथ रखकर उसे हल्के हल्के से दबा रहा था अंकित तो उत्तेजित हो ही रहा था उसकी मां के बदन में भी सुरूर छा रहा था। देखते ही देखते अंकित उसके लिए को अपनी मां की बुर की गहराई में प्रवेश कराने लगा। जैसे जैसे केला अंदर जा रहा था वैसे-वैसे सुगंधा के चेहरे का हाव भाव बदलता जा रहा था उसे ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे कोई लंड उसकी बुर में फिर से प्रवेश कर रहा है और इसी एहसास में वह डूबती चली जा रही थी। देखते ही देखते अंकित आधा केला अपनी मां की बुर में डाल चुका था और आधे केले को ही अंदर बाहर कर रहा था और इतने में ही सुगंधा के तन बदन में आग लगी हुई थी वह मदहोश हुई जा रही थी उसे मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था कि केला नहीं जैसे कोई लंड उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा हो उसके चेहरे का हाव भाव पूरी तरह से बदल रहा था उसके चेहरे को देखकर प्रतीत हो रहा था कि वह कितनी चुदवासी हो गई है।
अंकित की भी हालत खराब हो रही थी अपनी मां की बुर में केले को अंदर बाहर होता हुआ देखकर उसे भी मजा आ रहा था और देखते-देखते वह बाकी केले को भी अंदर की तरफ सरका रहा था ,उसे पूरा यकीन था कि पूरा का पूरा केला उसकी मां के बुर में खो जाएगा,,,, और ऐसा ही हुआ अंकित पूरा का पूरा केला अपनी मां की बुर में डालकर उसे बाहर तक खींचता और उसे फिर अंदर डाल देता ऐसा करने में उसे बहुत मजा आ रहा था वह अपने हाथ को अपनी मां की जांघ से हटाकर पीछे की तरफ उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रख दिया और उसकी गांड को मसलते हुए वह इस क्रिया को बार-बार कर रहा था। सुगंधा की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां नीचे से भी ऊपर नीचे होती हुई एकदम साफ दिखाई दे रही थी अंकित पागल हो जा रहा था कुछ देर तक अंकित इसी तरह से क्रिया को दोहराता रहा और अपनी मां को मजा देता रहा,,,,,, केले की चुदाई से ही सुगंधा के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगी थी।
सहहहहह आहहहह,,,, ऊमममममम, आहहहहहहहह,,,,, (वह उत्तेजना के मारे अपने लाल-लाल होठों को अपने दांत से ही काट रही थी उसे बिल्कुल भी रह नहीं जा रहा था वाकई में उसे तेज धक्कों की जरूरत थी इस बात का एहसास अंकित को भी हो रहा था। लेकिन अंकित अपनी मां की उत्तेजना को उसके चुदासपन को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था इसलिए कुछ देर तक केले से ही अपनी मां की बुर को चोदता रहा उसका लंड भी पूरी तरह से तैयार हो चुका था उसकी मां की बुर में घुसने के लिए,,,,,, अपनी मां की उत्तेजना उसकी मदहोशी देखकर अंकित का भी मन डोलने लगा था क्योंकि वह इस समय अपनी मां को चोदना नहीं चाहता था और इस समय उसका उद्देश्य भी नहीं था क्योंकि उसके पास समय बहुत था मौका भी था और दस्तूर भी था इसलिए वह किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करना चाहता था घर में केवल मां बेटे ही थे इसलिए वह जानता था कि दोनों को मौका ही मौका है इसलिए वह किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करना चाहता था वह केवल केले पर अपनी मां की बुर की मलाई लगाकर उसे करना चाहता था उसका स्वाद लेना चाहता था लेकिन उसकी हरकत की वजह से जिस तरह की आग उसकी मां के बदन में लगी हुई थी वह देखकर अंकित के भी पसीने छूट रहे थे सुगंधा खुद अपनी बुर गोल-गोल घूमाकर केले को ही अंदर बाहर ले रहे थे और खुद ही हल्के हल्के कमर को आगे पीछे कर रही थी और यही देखकर अंकित का मन एकदम से बदल गया वह धीरे से अपनी मां की बुर में से किले को बाहर निकाल दिया केला बाहर निकलते ही उसके मदन रस से पूरा लबालब दिखाई दे रहा था केले पर से मदन रस की बूंदे टपककर नीचे फर्श पर गिर रही थी।
मदहोशी में सुगंधा की बंद आंखें केले के बाहर निकलने से खुल चुकी थी और वह गहरी सांस लेते हुए अपने बेटे की तरफ देख रही थी अंकित भी अपनी मां की तरफ देख रहा था दोनों की नजर आपस में टकरा रही थी लेकिन इस बार सुगंधा शर्म से अपनी नजरों को ना तो बंद कर रही थी ना ही दूसरी तरफ फेर रही थी वह अपने बेटे की आंखों नहीं देख रही थी। अंकित भी अपनी मां की आंखों में डूबता हुआ धीरे से ऊठकर खड़ा हो गया,,,, और अपनी मां की आंखों के सामने ही उसकी बुर के मदन रस में डुबे हुए केले को, अपने मुंह में डाल दिया,,,, सुगंधा मस्त होकर अपने बेटे की हरकत देख रही थी उसे साथ दिखाई दे रहा था कि केले से उसकी बुर का रस टपक रहा था फिर भी उसका बेटा बेझिझक उसे अपने मुंह में डाल दिया था,,, गहरी सांस लेते हुए सुगंधा अपने बेटे की एक-एक हरकत को देख रही थी उसे नहीं मालूम था कि अगली हरकत क्या होने वाली है अपने मुंह में डाला हुआ अकेला जो कि आधा बचा हुआ था अपने मुंह में डाले हुए ही वह अपने मुंह में लिए हुए केले को अपनी मां की तरफ बढ़ने लगा सुगंधा कुछ समझ पाती ईससे पहले ही अंकित बाकी बचे केले को अपनी मां के होठों से सटा दिया उसमें से मादक खुशबू आ रही थी जो सुगंधा के नथुनों से उसके सीने के अंदर तक जा रही थी वह भी मदहोश होने लगी उसे मालूम था कि उसका बेटा उसे क्या करवाना चाहता है वह भी धीरे से अपने लाल लाल होठों को खोलकर बाकी केले को अपने मुंह में ले ली वह दोनों धीरे-धीरे अकेले का रस चूसने लगे केले का रस क्या चुस रहे थे ।अंकित अपनी मां की बुर का रस चूस रहा था और सुगंधा खुद अपनी बुर के रस स्वाद ले रही थी,,,, इस दौरान अंकित अपनी पेंट का बटन खोल रहा था इसका एहसास सुगंधा को भी हो रहा था सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था।
अगले ही पल अंकित का लंड पेट से बाहर आ चुका था जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था अंकित धीरे से अपने लंड को पकड़ा और अपनी मां की गुलाबी गली से सटा दिया,,,, सुगंधा एकदम उत्तेजना से भर गई और अपने आप ही अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दी,,,, अंकित अपनी मां की उत्तेजना और उसका उतावलापन देखकर बिल्कुल भी सब्र करने जैसा नहीं था वह तुरंत अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाया और अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथ से थाम लिया और फिर एक करारा धक्का लगाया और पहली बार में ही अंकित का लंड उसकी मां की गीली बुर में अंदर तक समा गया। अपने बेटे की असीम ताकत और उसके जबर्दस्त प्रहार की वजह से उसके मुंह से हल्की सी चीज निकलने वाली थी लेकिन केला मुंह में होने की वजह से उसके मुंह से चीख निकल नहीं पाई थी,,,, और फिर नहीं पर अंकित अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था खड़े-खड़े ही बड़े आराम से सुगंधा की बुर में अंकित का लंड अंदर बाहर हो रहा था दोनों मां बेटे पूरी तरह से मत हो चुके थे और दोनों धीरे-धीरे केले का स्वाद लेते हुए आगे बढ़ रहे थे हल्का-हल्का टुकड़ा काटते हुए मां बेटे दोनों मदहोशी के आलम में डूबते चले जा रहे थे। अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पकड़ कर धक्को की गति तेज कर रहा था। सुगंधा भी अपनी बाहों का हर अपने बेटे के गले में डालकर इसका सहारा लेकर खड़ी थी।
देखते ही देखते केले का आकार कम होता जा रहा था दोनों धीरे-धीरे केला ख भी रहे थे और चुदाई का मजा भी लूट रहे थे अंकित आसान बदलने के बारे में सोच भी नहीं रहा था क्योंकि इसी आसन में दोनों को मजा आ रहा था। दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों मदहोश हो रहे थे दोनों का मजा आ रहा था,,,,, सुगंधा को इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि केले से ज्यादा मजा उसके बेटे का केला दे रहा था। दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी दोनों का बदन अकड़ने लगा और अंकित एकदम से अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हथेलियों में जितना हो सकता था उतना दबोचते हुए जोर-जोर से धक्के लगाने लगा था मुंह में केला होने की वजह से हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज सुगंधा के मुंह में से आ रही थी जो की घुटी घुटी सी थी। अगले ही पल केला भी खत्म हो चुका था और देखते ही देखते मांबेटे दोनों एक दूसरे की बाहों में एक दूसरे को कसते हुए एक दूसरे के होठों का रस चूसना शुरू कर दिए थे,,,, और अंकित का लावा भल भला कर उसकी मां की बुर के तालाब को भर रहा था।
वासना का तूफान शांत होने के बाद खाना भी तैयार हो चुका था लेकिन जिस तरह की दोनों ने मेहनत किया था थोड़ी थकान महसूस हो रही थी इसलिए 10-15 मिनट दोनों बैठकर आराम कर रहे थे और फिर दोनों एक साथ खाना खाने लगे खाना खाने के बाद थोड़ी देर के लिए अंकित बाहर घूमने के लिए चला गया था और सुगंधा घर की साफ सफाई करने लगी थी।
रसोई घर में मां बेटे दोनों मदहोश होते हुए ना चाहते हुए भी चुदाई का सुख भोग चुके थे। मां बेटे दोनों अद्भुत सुख की प्राप्ति कर रहे थे जैसे भी मौका मिल रहा था वैसे ही वह दोनों एक दूसरे में पूरी तरह से खो जा रहे थे घर में किसी तीसरे का न होने का फायदा उन दोनों को बराबर मिल रहा था और इसीलिए तो सुगंधा ने अपनी बेटी को अपनी नानी के घर भेज दी थी अगर उसे अपनी नानी के घर ना भेजी थी तो शायद इस तरह की सुख की वह कभी प्राप्ति नहीं कर पाती सिर्फ कल्पना ही कर सकती थी। घर की सफाई करते हुए सुगंधा को इस बात का एहसास हो रहा था कि वह अपने बेटे से पूरी तरह से खुल चुकी थी। अब दोनों के बीच किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं था,और ना हीं एक दूसरे के प्रति मां बेटे वाला सम्मान और पवित्र रिश्ता रह गया था मर्यादा के दीवार मां बेटे मिलकर गिरा चुके थे,,,, रहे रहकर सुगंधा के मन में कभी ग्लानी के भाव पैदा होते थे लेकिन जिस तरह का अद्भुत सुख दोनों को रिश्तो की दीवार गिरा देने के बाद मिल रहा था वह सुख मन में उठ रहे ग्लानी पर भारी पड़ जाती थी। सुगंधा कभी सोचा नहीं थी कि वह अपने बेटे से इतना खुल जाएगी कि उसके सामने अपनी दोनों टांगें खोल देगी।
घर में झाड़ू लगाते हुए सुगंधा के मन में बहुत सारे विचार और सवाल पैदा हो रहे थे कुछ सवाल ऐसे थे जो उसे विचलित कर दे रहे थे तो उन सवालों में से जो जवाब उसके मन में उठता था वह उसे शांति प्रदान करता था इस बात से वह बहुत खुशी की वह अपनी बेटी के सामने पूरी तरह से औरत बन चुकी थी लेकिन वह पल याद करके उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगती थी और वह खुद शर्म से पानी पानी हो जाती थी। वह अपने मन में यही सोच रही थी कि अभी कुछ दिन पहले ही वह अपने बेटे से एक मां की तरह बर्ताव करती थी और उसका बेटा भी उसे मां के नजरिया से देखा था लेकिन कुछ ही दिनों में सब कुछ बदल गया था जिसके सामने वह कपड़े बदलने में शर्म आती थी जिसके सामने में वह अपने मुंह से अप शब्द नहीं निकालती थी,, एक मां होने के साथ-साथ समाज में जिस तरह का शिक्षिका की मर्यादा में वह बंधी हुई थी वह अपने घर में मां और शिक्षिका दोनों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही थी लेकिन वर्षों से मन में दबी जवानी की प्यास एकदम से उसे तड़पा दी थी,,, पेट की भूख तो शांत हो जाती थी लेकिन तन की भूख उसे पूरी तरह से व्याकुल बना देती थी जिसके चलते मां बेटे के पवित्र रिश्ते को तार तार करने में वह भी पूरी तरह से अपने बेटे का सहकार की थी। और इस बात की उसे खुशी थी उसके मन में किसी भी प्रकार का मन दुख नहीं था। इस पल कर पूरी तरह से आनंद ले लेना चाहते थे क्योंकि जिंदगी ने बहुत जल्दी उससे सब कुछ छीन लिया था लेकिन बरसों बाद इस जिंदगी में उसके ही बेटे के रूप में फिर से उसे जीने का मौका दिया था और इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी।
थोड़ी ही देर बाद अंकित बाहर घूम कर आ गया था रात के 10:00 बज रहे थे अपनी मां से फिर से मिलन करने की उत्सुकता उसके भी बदन में एकदम साफ दिखाई दे रही थी उसका मन मचल रहा था इसलिए वह घर में प्रवेश करते ही मुख्य द्वार को बंद करके कड़ी लगा दिया था,,,, सफाई करने के बाद सुगंधा टीवी देख रही थी और दरवाजा बंद करते हुए अंकित समझ गया था कि उसकी मां टीवी देख रही है इसलिए भाभी दरवाजा बंद करने के बाद सीधा अपनी मां के पास पहुंच गया टीवी देखने के लिए,,,, वह ठीक अपनी मां के बगल में जाकर बैठ गया एकदम सट कर क्योंकि अब दोनों के बीच किसी भी प्रकार की शर्म बाकी नहीं रह गई थी दोनों टीवी देख रहे थे और टीवी में राजा हिंदुस्तानी फिल्म चल रही थी तभी एक दृश्य आता है जिसमें तेज बारिश हो रही थी और हीरो हीरोइन दोनों पानी में भीग रहे थे ऐसे में हीरो हीरोइन दोनों एक दूसरे के होठों को अपने होंठों में भरकर चुंबन करना शुरू कर देते हैं या फिर से देख कर मां बेटे एक दूसरे को देखने लगते हैं दोनों की सांसें ऊपर नीचे होने लगी थी वैसे भी दोनों के बीच कुछ बाकी नहीं रह गया था बस वासना की पूर्ति नहीं हुई थी और दोनों जानते भी थे कि दोनों संभोग क्रिया को बार-बार दोहराएंगे। एकदम नए विवाहित जोड़े की तरह।
सुगंधा और अंकित दोनों मां बेटे इस समय नए विवाहित जोड़े की तरह ही थे जैसे शुरू-शुरू में शादी होती है तो पति-पत्नी पूरी तरह से अपनी वासना की पूर्ति करते हैं उसके बाद में एक दूसरे से प्रेम होता है कुछ ऐसा ही मां बेटे के बीच चल रहा था,, दोनों भले ही पति पत्नी नहीं थे मां बेटे से लेकिन दोनों में पति पत्नी वाला ही संबंध था बस यहां पर थोड़ा बदलाव ऐसा था कि पति पत्नी का एक कमरा होता था सुहागरात मनाने का अपनी वासना की कोशिश करने का लेकिन यहां पर मां बेटे के लिए पूरा घर ही सुहागरात का कुछ बना हुआ था दोनों जहां चाहते थे वहां अपनी वासना के पुर्ती करते थे। और इस बात को दोनों अच्छी तरह से जानते थे कि सोने से पहले दोनों एक बार फिर से चुदाई का खेल खेलेंगे इसलिए तो टीवी में चल रहे हैं चुंबन दृश्य को देखकर अंकित बेझिझक अपनी मां से बोला,,,,।
मम्मी पहले मैं इस तरह किसी दृश्य को देखा था तो मुझे बड़ा अजीब लगता था मैं सोचता था कैसे एक दूसरे के मुंह में जब डालकर चुंबन करते हैं कितना गंदा लगता है।
और अब,,, (सुगंधा भी अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली)
और अब तो जब से तुम्हारे साथ इस तरह का चुंबन करने लगा हूं ऐसा लगता है कि ईससे बड़ा सुख दुनिया में कोई है ही नहीं। देखो तो सही दोनों कितने पागल हुए जा रहे हैं।
वही तो मैं भी देख रही हूं सच कहूं तुझे तेरे साथ मेरा इस तरह का संबंध नहीं था तो इस तरह का दृश्य जब भी टेलीविजन पर आता था मेरा मन व्याकुल हो जाता था।
ओह सचमें,,, (अपनी मां की तरफ देखते हुए अंकित बोला,,)
तो क्या आखिर में भी तो एक औरत हूं जिस तरह से तुम मर्दों को इस तरह का दृश्य देखने पर उत्तेजना छा जाती है इस तरह से हम औरतों के साथ भी ऐसा होता है।
अच्छा बताओ कैसा महसूस होता था इस तरह का दृश्य देखकर हम लड़कों का लंड खड़ा हो जाता है सबसे बड़ी उत्तेजना का उदाहरण यही है और हमारी उत्तेजना सभी लोग को दिखाई भी दे जाती है अगर हमारी टांगों के बीच नजर दौड़ा दिया जाए तो।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी क्योंकि जानती थी उसका बेटा एकदम सही कह रहा था.. अपनी मां को हंसता हुआ देखकर अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाता हुआ बोला,,,) लेकिन तुम औरतों का अच्छा है तो मरते जब उत्तेजित होती हो तो भी किसी को पता नहीं चलता भले ही 10 लोगों के बीच बैठी रहो तुम्हारी बुर लंड मांग रही हो लेकिन फिर भी इस बात का अहसास तक नहीं हो पाता कि तुम्हें क्या चाहिए,,, क्यों सही कह रहा हूं ना….
कह तो तु सही रहा है,,,, लेकिन यह पूरा सच नहीं है अगर औरतों के बारे में मर्द को ज्यादा ज्ञान हो तो वह औरत की उत्तेजना को समझ जाता है उसके एहसास को परख लेता है वैसे तूने ठीक ही कहा कि अगर तुम लोग उत्तेजित होते हो तुम लोगों का मन करता है तो सबसे पहले तुम लोग का लैंड खड़ा होता है यही सबसे बड़ा असर तो मर्दों में होता है लेकिन हम औरतों का मन जब बहकता है हमारी बुर में सोच रहा होता होती है तो सबसे पहले हमारी बुर में से भी पानी निकलना शुरू हो जाता है बुरे की चिकनाहट बढ़ने लगती है लेकिन इसके साथ ही साथ हम लोगों के चेहरे का भाव बदलने लगता है सांसों की गति हल्की तेज हो जाती है और चेहरे का रंग सुर्ख लाल हो जाता है अगर अनुभवी मर्द हो तो औरत की इन बदलती हाव भाव को समझ जाता है और फिर,,, वही करता है जो एक औरत के साथ मर्द को करना चाहिए।
चलो कोई बात नहीं इतना तो मैं समझ गया लेकिन तुम जब मेरे साथ इतना समझ रही हो ना,,, तब तुम क्या करती थी जब तुम्हारा मन बहकता था।
तब क्या करती थी कुछ नहीं करती थी अपने मन को समझती थी अपनी चाहत को अपने सीने में दबा देती थी।
अच्छा ऐसा कुछ भी नहीं करती थी मतलब कि अपने हाथ से अपनी चूची को दबाना अपनी बुर को मसलना या फिर अपनी बुर में उंगली से या ककड़ी बैगन से उसकी चुदाई करना।
पागल हो गया है क्या तू अगर यह सब मैं पहले से करती रहती तो शायद इस पर,,(उंगली से अपनी दोनों टांगों के बीच इशारा करते हुए) आज किसी और का हक होता तेरा नहीं होता…
(अंकित अपनी मां के कहने का मतलब को अच्छी तरह से समझ गया था और अपनी मां के कहने के मतलब को समझते हुए उसके खुद के चेहरे पर थोड़ी परेशानी की लकीर उपस कर आई थी जो कुछ भी उसकी मां सारे से कहना चाहती थी अंकित खुले शब्दों में बोला,,,)
मतलब कि तुम दूसरों से चुदवाती?
क्या करें करना पड़ता अगर मैं सही ना होती तो शायद कोई और मुझे चोदता तेरा तो नंबर भी नहीं आता और वैसे भी मेरी खूबसूरती देखकर अच्छे-अच्छे की हालत खराब हो जाती है इस बात का एहसास तो तुझे भी होगा।
बात तो तुम ठीक कह रही हो अच्छा हुआ कि तुम दूसरी औरतों की तरह गलत नहीं हो वरना सच में इतना खूबसूरत माल मुझे नहीं मिल पाता चोदने को,,,(अंकित अपनी मां के गाल पर उंगली से सहलाते हुए बोला तो उसकी मां माल शब्द का प्रयोग सुनकर अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली)
माल,,,,!
तो क्या पूरे मोहल्ले में तुम्हारे जैसा माल कोई नहीं है।
यह कहां से सीख गया तु।
मोहल्ले में यही सब बोला जाता है खूबसूरत औरत को देखकर तो इतना तो दावे के साथ कह सकता हूं कि तुम्हारे से अच्छी माल पूरे मोहल्ले में कोई नहीं है।
तू भी एक नंबर का हरामि ही है। बस पता नहीं चलरहा था।
तुम भी तो एक नंबर की छिनार हो जो कि अब जाकर पता चला है।
दुनिया के लिए छिनार थोड़ी हूं तेरे लिए हुं,,,, तेरी छिनार हूं और शुक्र माना कि तेरी छिनार हूं अगर दुनिया की छिनार होती तो न जाने कितनों के सामने टांगे खोल चुकी होती।
बहुत मन कर रहा है तुम्हारा दूसरों के सामने टांगे खोलने के लिए,,,,(एकदम से अपना हाथ आगे बढ़कर साड़ी के ऊपर से अपनी मां की बुर को जोर से दबाते हुए बोला यह देखकर सुगंध मुस्कुराते हुए बोली)
क्यों बहुत गुस्सा आ रहा है तुझे।
क्यों नहीं तुम्हारे ऊपर सिर्फ मेरा हक है तुम्हें सिर्फ मैं ही चोद सकता हूं और कोई नहीं,,,,
और कोई मुझे चोदने के लिए ललाईत हो तो,,,।
तो मैं साले की गांड मार लूंगा,,,,।
(अंकित एकदम गुस्से में बोल रहा था और अपने बेटे के मुंह से गांड मार लेने वाली बात सुनकर सुगंधा का मन उत्तेजना से भरने लगा और वह हाजिर जवाब देते हुए बोली)
मतलब की तो उसकी गांड मारेगा और वह तेरी मां को चोदेगा,,,,।
हाथ लगा कर तो देखे तुम्हें,,,,, साले का हाथ तोड़ दूंगा।
ओहहह हो मेरे हीरो तू मेरे लिए इतना कुछ कर जाएगा।
अब तुम सिर्फ मेरी हो और जिंदगी भर मेरी होकर ही रहोगी अगर किसी के सामने टांगे खोलने की बात की तो तुम्हारी बुर में लंड डाल दूंगा।
(अपने बेटे की बात सुनते ही सुगंधा जोर-जोर से हंसने लगी अपने बेटे की बात उसे अच्छी लग रही थी और यह बात कुछ और भी ज्यादा अच्छी लग रही थी कि उसका बेटा उसके लिए चिंता करता था उसके फ़िक्र करता था और उस पर अपना हक जताता था,,,, अपनी मां को हंसता हुआ देखकर अंकित भी हंसने लगा था थोड़ी देर में जब वह शांत हुई तो बोली।)
अब टीवी बंद कर दे सोने का समय हो रहा है।
सोने का समय हो रहा है लेकिन उसके पहले कुछ करने का भी समय हो रहा है।
(अपने बेटे के कहने का मतलब को समझ कर सुगंध मुस्कुरा दी और मुस्कुराते हुए बोली)
साला शैतान,,,। वैसे आज सोना कहां है कमरे में तो बहुत गर्मी लगती है।
तो चलो ना छत पर ही सोते हैं।
छत पर,,,,(सवालिया नजरों से अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोले तो उसके कहने के मतलब को अंकित अच्छी तरह से समझ गया था इसलिए वह बोला)
चिंता मत करो हम लोगों की छत सबसे ऊपर है इसलिए दूसरे छत से किसी को अपने छत पर कुछ भी दिखाई नहीं देगा और वैसे भी चारों तरफअंधेरा ही है।
बहुत जल्दी समझ जाता है तू,,,,,।
आखिर बेटा भी तो तुम्हारा हूं तुम्हारी बात नहीं समझुंगा तो और किसकी बात समझूंगा,,,,।
बेटा तो है लेकिन बेटे वाली एक भी तेरे में लक्षण नहीं है कोई बेटा अपनी मां की बुर में लंड डालता है क्या,,,?(सुगंधा मस्ती करते हुए बोले तो उसके ही शब्दों में अंकित भी जवाब देते हुए बोला)
किसी की मां इतनी खूबसूरत भी तो नहीं होती और वैसे भी किसी की मां की बुर में तुम्हारी जितनी गर्मी भी तो नहीं है जो अपने बेटे के लंड को पिघला सके,,,,।
अच्छा यह बात है तुझे क्या लगता है त ही एक लाडला बेटा है,,, दुनिया में जो अपनी मां की चुदाई करता है ऐसे बहुत से लड़के होंगे जो रोज रात को अपनी मां को चोद कर ही सोते हैं,,,,।
सच कहूं तो मुझे भी ऐसा लगता है,,,,,
लगता है ना तुझे,,,।
हां बिल्कुल,,,,,
चल अच्छा टीवी बंद कर दे,,,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और उसके खड़े होते ही उसके पेट में बना तंबू एकदम से दिखाई देने लगा तो उसकी मां उसके पेंट में बने तंबू को देख कर हंसने लगी. अपनी मां को हंसता हुआ देखकर अंकित समझ गया था कि उसकी मां किस लिए हंस रही है इसलिए वह भी मुस्कुराते हुए बोला)
तुम्हारी वजह से ही इसकी यह हालत है,,,,।
अच्छा तो अब जब से तेरा लंड खड़ा होगा उसकी वजह मैं ही होंगी।
लंड खड़ा होने की कोई खूबसूरत वजह होती है और पूरे घर में सबसे ज्यादा खूबसूरत वजह सिर्फ तुम ही हो।
(अपने बेटे की हाजिर जवाबी से सुगंधा मंत्र मुग्ध हो गई थी और अंकित भी टीवी बंद कर दिया था,,, सुगंधा धीरे से अपनी जगह से उठी और कमरे से बाहर निकल गई और सीधा पीछे की तरफ चली गई क्योंकि सोने से पहले वह पेशाब करती थी अंकित जब तक टीवी बंद करके कमरे से बाहर निकाल कर कमरा बंद करता है तब तक उसकी मां साड़ी उठाकर पेशाब करने बैठ गई थी,,,, यह देखकर अंकित भी जल्दी-जल्दी अपनी मां के पास पहुंच गया और उसके बगल में ही अपने पेट की बटन खोलकर लंड को बाहर निकाल लिया और पेशाब करना शुरू कर दिया और पेशाब करते हुए बोला,,)
अकेले-अकेले पेशाब कर रही हो मुझे भी तो बुला ली होती,,,।
अच्छा अब यह सब करने के लिए भी तुझे बुलाऊं।
चुदवाने के लिए तो बुलाती हो,,,,।
वह तो मेरी जरूरत है इसलिए बुलाती हूं,,,।
तो पेशाब करने के लिए भी बुला लिया करो क्योंकि वह मेरी जरूरत है,,,,?
क्यों मुझे तेरे मुंह में पेशाब करना है क्या,,,,,(बोलने को तो सुगंधा बोल गई थी लेकिन अपने मुंह से निकले इन शब्दों के बारे में सोच कर वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोल गई थी अपने बेटे की संगत और उतेजनात्मक असर का मिला-जुला असर दिख रहा था,,,, अपने बेटे के साथ इस तरह की बात करने में उसे भी बहुत मजा आ रहा था और अपनी मां की बात सुनकर तो अंकित मनो हवा में उड़ रहा था इसलिए वह अपने लंड को पकड़ कर उसे हिला कर पेशाब करते हुए बोला।)
मैं तो यही चाहता हूं कि तुम मेरे मुंह में पेशाब करो बहुत मजा आएगा।
धत्,,,,,, बेवकूफी भरी बातें मत कर,,,(और इतना कह कर वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ लि और उसकी दिशा दूसरी तरफ करते हुए बोली,,,) दूसरी तरफ कर मेरे ऊपर छिटे आ रहे हैं।
तुम छिटे से घबरा गई अगर तुम अपनी पेशाब में मुझे नहला भी दो तोभी मुझे कोई दिक्कत नहीं है बल्कि मुझे तो बहुत मजा आएगा।
तुझे तो मजा आएगा ही तु है ही हरामि,,,(इतना कहने के साथ ही वह उठकर खड़ी हो गई अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर ली,,,,, तब तक अंकित भी पेशाब कर चुका था,,,, दोनों सीढ़ी के पास पहुंच चुके थे अंकित अपनी मां से बोला,,,)
तुम छत पर चलो मैं चटाई और तकिया लेकर आता हूं।
ठीक है एक लोटा पानी भी ले लेना,,,।
हां लेकर आता हूं,,,,।
(सुगंधा सीढीओ से छत पर चली गई,,,, और अंकित थोड़ी ही देर में चटाई तकिया और पानी लेकर छत पर पहुंच गया वह चटाई बिछाने लगा और उसकी मां छत पर खड़ी होकर दूर-दूर तक देखने की कोशिश करेंगे चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था सिर्फ किसी-किसी घर में लाइट चल रही थी जो की दर से यह नजारा बेहद खूबसूरत लग रहा था चटाई बिछाने के बाद वह भी अपनी मां के पास पहुंच गया और अपनी मां की गांड पर जोर से चपत लगाते हुए बोला,,,,)
क्यों क्या देख रही हो,,?
मैं देख रही हूं कि कितना अंधेरा फैला हुआ है।
यह तो हम दोनों के लिए और भी अच्छा है अंधेरे में ही तो मजा आता है,,,(साड़ी के ऊपर से अपनी मां की गांड को एक हाथ से पकड़ कर दबाते हुए बोला सुगंधा को भी अपने बेटे की यह हरकत बहुत अच्छी लग रही थी वह मदहोश हो रही थी और वैसे भी वह जानते थे कि अब क्या होने वाला है इसलिए उसके बदन में सुरूर छा रहा था,,,,, अपने बेटे की बात सुनकर वह चुटकी लेते हुए बोली)
पहले तो अंधेरे में तुझे डर लगता था अब अंधेरे में तुझे मजा आने लगा है।
पहले मैं छोटा था लेकिन अब बड़ा हो गया हूं और वैसे भी जब अंधेरे में खूबसूरत साथी हो तो डर किस बात का बल्कि इस तरह के अंधेरे में तो और भी मजा लेना चाहिए।
बहुत मजा लेने की सोचता है ना तू पहले देख कितना खूबसूरत नजारा है दूर-दूर तक हल्की-हल्की लाइटे टीमटीमा रही है।
मेरा लंड भी टिप टिप करके पानी बरसा रहा है,, तुम्हारी बड़ी गांड,,(जोर से फिर से अपनी मां की गांड पर चपत लगाते हुए) देख कर मेरे मुंह में तो पानी आ रहा है लेकिन मेरे लंड में भी पानी आ रहा है इसका कुछ करो,,,,
मैं क्या करूं जो भी करना है तुझे ही करना है,,,।
अच्छा यह बात है,,,(इतना कहकर होगा पीछे से अपनी मां को बाहों में भर लिया जिसकी वजह से उसके पेट में बना तंबू एकदम से उसकी मां की गांड की दरार में धंसने लगा,,,, इससे सुगंधा का मन भी बहकने लगा वह भी मदहोश होने लगी,,,, अंकित पीछे से अपनी मां को बाहों में भरे हुए ही ब्लाउज के ऊपर से उसके दोनों चूचियों को दबाना शुरू कर दिया लेकिन इस बार उसकी मां इस अपने से अलग करने की कोशिश करते हुए बोली,,,)
अरे बेवकूफ कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,।
कोई नहीं देख पाएगा मम्मी अपनी छत सबसे बड़ी है सबसे ऊपर है,,,।
अच्छा तो सबसे ऊपर है लेकिन हम लोग किनारे पर खड़े हैं नीचे से भी दिखाई देते होंगे।
लेकिन अंधेरा कितना है कुछ नहीं दिखाई देगा,,,,।
नहीं रहने दे,,,,,,(इतना कहकर वहा एकदम से अपने बेटे का हाथ पकड़ के झटक दी,,, अंकित एकदम से दूर हो गया लेकिन इस बार अपनी मां की हरकत से थोड़ा नाराज हो गया इसलिए वह बिना कुछ बोले चटाई पर जाकर लेट गया सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखी तो उसे अपनी हरकत पर पछतावा होने लगा वह अपने मन में सोचने लगी कि ऐसा उसे नहीं करना चाहिए था अगर सच में उसका बेटा नाराज हो गया तो आज की रात एकदम से बेकार हो जाएगी लेकिन एक औरत होने के नाते उसे अच्छी तरह से मालूम था कि मर्द को कैसे लुभाया जाता है,,,,,, वह छत के किनारे पर ही खरीदी और उसका बेटा चटाई पर लेट गया था वह अपने बेटे से बोली)
क्या हुआ नाराज हो गया,,,,
(अंकित कुछ नहीं बोला)
इसमें नाराज होने वाली कौन सी बात है अगर सच में हम दोनों को कोई देख लेगा तो कितना गजब हो जाएगा यह तू भी जानता है।
(इस बार भी वह कुछ नहीं बोला)
अरे भले अंधेरा है लेकिन हम दोनों को थोड़ा संभल कर रहना चाहिए हम दोनों का रिश्ता ही कुछ ऐसा है हम दोनों का रिश्ता प्रेमी प्रेमिका वाला नहीं है भाभी देवर वाला नहीं है या जीजा या साली वाला नहीं हम दोनों मां बेटे हैं और हम दोनों को कोई अनैतिक संबंध बनाते हुए देख लिया तो समझ में बदनामी हो जाएगी इस बात का ख्याल तुझे भी रखना चाहिए।
(लेकिन इस बार भी अंकित अपनी मां की बातों का बिल्कुल भी जवाब नहीं दिया,,,, तो सुगंधा एकदम से परेशान हो गई वह धीरे-धीरे अपने बेटे की तरफ आगे बढ़ने लगी उसकी चूड़ियों की खनक और पायल की झलक से अंकित को एहसास हो रहा था कि उसकी मां उसके करीब आ रही थी,,, वह भी अपनी मां से इतना नाराज होना नहीं चाहता था लेकिन बात ही बात में वह थोड़ा ज्यादा ही नाराज हो गया था और वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर सच में वह इसी तरह से नाराजगी दिखाता रहा तो उसके लिए ही अच्छा नहीं है सुबह से ही वह रात होने का इंतजार कर रहा था और जब रात उसकी झोली में आ गई थी फिर वह नाराजगी की चादर ओढ़े पड़ा था से कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे क्या किया जाए,,,, वह अपने मन में यही सब सो रहा था कि उसकी मां ठीक उसके सिरहाने आकर खड़ी हो गई थी उसे साफ एहसास हो रहा था,,,, वह अपनी आंखों को बंद किए हुए था,,,,, उसकी मन बहलाते हुए सुगंधा बोली,,,)
मेरा लाडला बेटा नाराज हो गया मैंने ऐसा भी क्या कह दिया था जो इस तरह से नाराजगी दिखा रहा है,,,,(ऐसा कहते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी को पकड़ लि और उसे धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगी,,, अपने बेटे की नाराजगी दूर करने की तरकीब उसके दिमाग में आ चुकी थी,,,,,)
सुगंधा समझ गई थी कि उसका बेटा नाराज हो चुका है लेकिन उसे मनाने का तरीका उसे अच्छी तरह से मालूम था एक मर्द को रिझाने का तरीका एक औरत से भला अच्छा कौन जान सकता है औरतों मर्दों को हर तरीके से दी जा सकती है उन्हें नाराज भी कर सकती है उन्हें मना भी सकती है। इस समय सुगंधा खुद अपने बेटे को नाराज कर चुकी थी। और उसे मनाने का कर्तव्य भी उसका ही था। मां बेटे दोनों अच्छी तरह से जानते थे कि एक दूसरे से नाराजगीज इस समय अच्छी बात नहीं थी दोनों को एक दूसरे की जरूरत थी दोनों अभी-अभी तो कामक्रीड़ा की शुरुआत किए थे उसमें ठीक तरह से डुबे भी नहीं थे,, और ऐसे में एक दूसरे से नाराजगी अच्छी बात नहीं थी अंकित भी यह बात जानता था और सुगंधा भी।
अपनी मां से नाराज होकर अंकित अपनी आंखों को बंद करके लेटे रहने का नाटक कर रहा था और अपनी मां की बात का बिल्कुल भी जवाब नहीं दे रहा था लेकिन सुगंध भी कोई काम नहीं थी 2 दिनों में ही वह पूरी तरह से छिनार बन चुकी थी,,, उसके अंदर रंडी पन आ चुका था,, और यह रंडीपन किसी और के लिए नहीं था खुद के अपने बेटे के लिए था। इसलिए तो अपने बेटे के सीरहाने खड़ी होकर वह अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पड़कर ऊपर की तरफ उठा रही थी,,, और साथ में अपने बेटे से बात करने की कोशिश भी कर रही थी।
एसी भी क्या नाराजगी मेरे बेटे,,, मेरे लाल मेरे राजा,,,, मैंने तो तुझे अपना सब कुछ दे दी और तू है कि थोड़ी सी बात पर नाराज हो गया,,,, (ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी साड़ी को घुटनों तक उठा दी थी जिसका अंदाजा अंकित को बिल्कुल भी नहा था,,,,,) मुझे अच्छी तरह से मालूम है कि तू ज्यादा देर तक मेरे से नाराज नहीं रह सकता तो मेरे बिना रह ही नहीं सकता और नाराज होने की तो बात ही छोड़ दो,,,, मैं भी देखती हूं की कितनी देर तक तू नाराज रहता है। (ऐसा कहते हुए वह अपनी साड़ी को जांघों तक उठादी थी,,, ऐसा करते हुए उसके अंदर बेशर्मी का एहसास हो रहा था लेकिन उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति भी हो रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, वैसे तो इस बात का अच्छी तरह से जानती थी कि अपने बेटे के साथ चुदवाने के बाद शर्म की जरा सभी गुंजाइश करना पागलपन था जो मां अपने बेटे के लिए अपनी दोनों टांगें बार-बार खोल दे वह पूरी तरह से बेशर्म बन जाती है लेकिन फिर भी न जाने क्यों अपनी किसी हरकत पर सुगंधा को शर्म महसूस करा देती थी लेकिन फिर भी वह खुद अपनी बेशर्मी का खुलकर मजा ले रही थी,,,,, सुगंधा अपनी साड़ी को इस तरह से ऊपर उठाते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)
देख रहा है कितनी खूबसूरत रात है पहले तो यह रात यूं ही गुजर जाया करती थी लेकिन जब से तूने मेरी चुदाई किया अब तो हर एक रात मुझे लगता है कि मेरी सुहागरात है,,,,, (और इतना कहने के साथ ही वह अपनी साड़ी को एकदम कमर तक उठा दी थी। मौसम भी एकदम आशिकाना होता जा रहा था गर्मी का महीना जोरों पर था लेकिन छत पर शीतल हवा बह रही थी जिसका एहसास उसके बदन में मदहोशी भर दे रहा था अपनी साड़ी को कमर तक उठाने के बाद वह अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगी जो कि इस अंधेरे में भी हल्की-हल्की नजर आ रही थी। सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी खुद की हरकत की वजह से उसकी बुर कचोरी की तरह फुल गई थी,,,, अपनी फूली हुई बुर को देखकर उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी। और फिर वह गहरी सांस ली और अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,,)
मान जा मेरे राजा देख मेरी बुर कितना तड़प रही है तेरे लिए,,,, मेरे ऊपर ना सही मेरी बुर के ऊपर तो तरस खा,,, जिसे पाने के लिए तूने खुद कितने पापड़ बेले हैं,,,,, (सुगंधा अच्छी तरह से देख रही थी कि उसकी किसी बातों का असर उसके बेटे के ऊपर नहीं हो रहा था,,,, ऐसा लग रहा था कि वह कुछ ज्यादा ही नाराज हो गया था वह अपने बेटे की नाराजगी को अच्छी तरह से समझ सकती थी ,,, वह जानती थी कि जब मर्द-औरत एक दूसरे से अच्छी तरह से खुल जाते हैं तो हर जगह पर संभोग करने की इच्छा रखते हैं और इस समय उसका बेटा यही कर रहा था लेकिन सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उन दोनों के संबंधों को देखते हुए जरा सी लापरवाही दोनों का जीवन बर्बाद कर सकती थी,,,, इसलिए वह अपने बेटे को थोड़ा सा सब्र करने को बोली थी और वह नाराज हो गया था लेकिन सुगंधा अपने बेटे को मनाने का हुनर जानती थी और वैसे भी वह अपनी बेटी से ही समय नाराज होना बिल्कुल भी नहीं चाहती थी क्योंकि उसकी बुर में उत्तेजना की चीटियां रेंग रही थी,,,, जिसे शांत करना बेहद जरूरी था जब उसने देखी कि उसके बेटे के बदन में जरा भी हलचल नहीं हो रहा है तो वह समझ गई कि अब उसे क्या करना है जिसके लिए वह पहले से ही तैयारी कर चुकी थी। साड़ी को कमर तक उठाए हुए वाहन धीरे से अपने कदम को आगे बढ़ाई और अपने बेटे के कर के अगल-बगल अपने दोनों पैर जमा दे और फिर धीरे से नीचे की तरफ बैठने लगी ऐसा करते हुए सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना क्या तूफान उठ रहा था मदहोशी पूरे उफान पर थी आंखों में सुरूर छा रहा था,,,, और देखते ही देखते वह अपनी भारी भरकम गांड को अपने बेटे के चेहरे पर रख दी,,,,, जैसे ही वह अपने बेटे के चेहरे पर अपनी भारी भरकम गांड रखी,,,, जांघों के इर्द-गिर्द हो रहा रक्तस्राव एकदम से बढ़ गया और वह सब जाकर उसके बुरे के इर्द गिर्द जमा होने लगा जिसकी वजह से उसे अपनी बुर में बेतहाशा ऊर्जा का संचार होता हुआ महसूस हो रहा था उत्तेजना के मारे उसकी बुर फुल रही थी पिचक रही थी।
कुछ सेकेंड तक वह एकदम से अपनी सांसों की गति को रोक दी थी इस एहसास में पूरी तरह से डूबने लगी थी क्योंकि पहली बार उसने इस तरह की हरकत की थी और वह भी पूरी तरह से बेशर्मी भरी लेकिन इतना उसे ज्ञात था की औरत को बेशर्म बनने में ही ज्यादा मजा आता है। और इस समय वह ईस अनुभव से पूरी तरह से गुजर रही थी,,,,, अंकित अपनी आंखों को बंद किए हुए ही सांस में पूरी तरह से डूब गया था पहले तो उसे कुछ समझ में नहीं आया कि उसके चेहरे पर यह क्या है लेकिन धीरे-धीरे उसे एहसास होने लगा जब उसकी नाक में उसकी मां की बुर से निकलने वाली मादक खुशबू भरने लगी वह पूरी तरह से उत्तेजना से डूबने लगा उसे अपनी मां की हरकत पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह कोई सपना देख रहा हो,,,, इसलिए वह इस सपने में पूरी तरह से डूब जाना चाहता था ,खो जाना चाहता था,,,, अगर यह सच में सपना है तो अपनी आंखों को खोल कर सपने को टूटने नहीं देना चाहता था इसलिए वह अपनी आंखों को खोल नहीं रहा था। उसका दिल जोरो से धड़क रहा था,,,, और वहीं दूसरी तरफ उत्तेजना से सुगंधा की सांसें उखड़ रही थी,,, उसकी हालत खराब हो रही थी अपनी हरकत की वजह से बहुत पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूब रही थी वह अपने बेटे के होठों पर अपनी गुलाबी फूलों की गुलाबी पत्तियों को रगड़ना चाहती थी,,,,,, इसलिए वह अपनी भारी भरकम गोल गोल बड़ी-बड़ी गांड को अपने बेटे के चेहरे पर ही घूमा रही थी और जल्द ही उसे एहसास होने लगा था कि,, उसकी बुर की गुलाबी पट्टी उसके बेटे के होठों से रगड़ खा रही है और वह कुछ देर तक अपनी गांड को अपने बेटे के होठों पर गोल-गोल घूमाती रही लेकिन अभी तक अंकित की तरफ से किसी पर प्रकार की हरकत का एहसास उसे नहीं हुआ था वह अपने तरफ से ही अपनी हरकत को दोहरा रही थी और ऐसा करने में उसे मजा भी आ रहा था,,,,,।
वह एकदम पेशाब करने वाली मुद्रा में बैठी हुई थी,,, और इस मुद्रा में अपने बेटे के चेहरे पर बैठने में उसे अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था कि वह किसी और दुनिया में उड़ती हुई जा रही है,,,, अभी तक उसने केवल अपने बेटे के लंड की सवारी की थी लेकिन आज उसके चेहरे की सवारी कर रही थी वह अपने दोनों घुटनों पर दोनों हाथ टिकाकर अपनी गांड को गोल गोल घूमआ रही थी अगर ही हरकत को कोई दूसरा अपनी आंखों से देख ले तो उसे यकीन ही नहीं होगा कि यह स्कूल में पढ़ाने वाली कोई शिक्षिका है उसे ऐसा ही लगेगा कि शायद कोई रंडी है क्योंकि इस तरह की उम्मीद सुगंधा से तो कोई कर नहीं सकता था। और देखा जाए तो खुद अंकित ही हैरान था अपनी मां की हरकत को लेकर उसे एहसास हो गया था कि उसकी मां क्या कर रही है वह समझ गया था कि वह कोई सपना नहीं देख रहा था यह बिल्कुल हकीकत था। इसलिए बहुत ही इस पल में पूरी तरह से खो गया था उसे इस बात की खुशी थी कि वह अपनी मां को पूरी तरह से छिनार बन चुका था वरना उसकी मां इस तरह की हरकत सपने में भी करने की सोच नहीं सकती थी,,,,, उसे इस बात की खुशी और ज्यादा थी कि उसकी मां उसे मनाने का एक अद्भुत तरीका खोज निकाली थी,,,, जिसकी उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। अपनी मां की हरकत अंकित से बर्दाश्त नहीं हो रही थी अपनी आंखों को वह खिल चुका था लेकिन उसकी आंखों के सामने अंधेरा या दे रहा था क्योंकि उसकी मां अपनी भारी भरकम उसके चेहरे पर रख चुकी थी उसे चारों तरफ अंधेरा ही दिख रहा था वह गहरी सांस ले रहा था उसकी सांसों की गति बड़ी तेज हो रही थी और उसके पेंट में पूरी तरह से तूफान आ चुका था,,,,।
सहहहहहह ऊमममममम,,,,,, आहहहहह,,,,, आहहहहहह,,,,, सहहहहहहहह,,,, (अपनी बुर को अपने बेटे के चेहरे पर रगड़ते हुए सुगंधा एकदम मदहोश हो रही थी और अपनी मदहोशी में इस समय वह भूल चुकी थी कि उसका बेटा उससे नाराज था वह अपनी ही दुनिया में पूरी तरह से खो चुकी थी अपनी हरकत का वह पूरी तरह से आनंद ले रही थी,,,,,, लेकिन अगले ही पल उसे एहसास हुआ कि उसकी पर की गुलाबी पत्तियों को उसका बेटा अपनी जीभ से कुरेद रहा था चाट रहा था। सुगंधा भी साहस में उत्तेजना से मेरी जा रही थी उसे मजा आ रहा था उसकी बुर से मदन रस टपक रहा था जो सीधा उसके बेटे के मुंह में गिर रहा था,,,,, अपने दोनों घुटनों पर दोनों हाथ का हुए अपनी गांड को गोल-गोल लहरा रही थी घूमा रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, लेकिन उसकी कमर थोड़ा दर्द करने लगी थी क्योंकि इस तरह की उसे आदत नहीं थी। लेकिन तभी ऐसा लग रहा था जैसे उसकी कमर को दर्द को उसका बेटा अच्छी तरह से समझ गया हो क्योंकि अगले ही पर उसकी दोनों हथेलियां सुगंधा को अपनी गांड पर महसूस हुई,,,, और उसे राहत महसूस होने लगा,,,, वह और भी ज्यादा आनंदित हो गई क्योंकि इस खेल में उसका बेटा शामिल हो चुका था वह जानती थी कि उसका बेटा उससे ज्यादा देर तक नाराज नहीं रह सकता इसलिए वह अपने बेटे के चेहरे पर अपनी गांड का दबाव बनाते हुए बोली,,,,)
मुझे मालूम था कि तु मुझसे ज्यादा देर तक नाराज नहीं रह सकता,,, (ऐसा कहते हुए वह अपनी गांड को अपने बेटे के चेहरे पर घुमा दे रही थी बल्कि हल्के से रख दी थी और उसे एहसास दिला रही थी कि उसकी गांड कितनी वजनदार है वह कुछ सेकेंड तक अपनी बेटे के चेहरे पर अपनी गांड को रखे रह गई,, अपनी गांड का दबाव उस पर बनाए रह गई,,,, अपनी मां की हरकत अंकित को भी आनंद दे रही थी मजा दे रही थी लेकिन जिस तरह से वह कहानी रखकर चेहरे पर बैठी थी उसकी नाक उसके गुलाबी छेद में प्रवेश कर गई थी जिससे उसे सांस लेने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी और इस बात को सुगंधा के अच्छी तरह से जानती थी वह सिर्फ अपने बेटे के साथ दिल्लगी कर रही थी,,,, इसलिए वह मौके की नजाकत को समझते हुए अपनी बहन को फिर से हल्के से उठा दी और उसका बेटा तुरंत गहरी सांस लेता हुआ फिर से उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया। सुगंधा ऐसा बार-बार कर रही थी उसे ऐसा करने में मजा आ रहा था एक तेरे को अपने बेटे को मजा भी दे रही थी और तड़प भी रही थी और अंकित उत्तेजना से अपनी मां की भारी भरकम गांड को दोनों हथेलियां से पकड़ कर जोर-जोर से दबा भी रहा था। मां बेटे दोनों आनंद के सागर में डुबकी लगा रहे थे सबसे ऊंची छत होने की वजह से किसी दूसरे की छत पर से यह दृश्य देखा जाना नामुमकिन था इसलिए मां बेटे दोनों पूरी तरह से निश्चिंत थे।
काफी देर से सुगंधा अपने बेटे के चेहरे पर अपनी गांड को रगड़ रही थी मसल रही थी और अपना पानी निकाल रही थी,,, भले ही वह अपना दोनों हाथ अपनी मां की गांड पर लगाकर अपनी मां को सहारा दे रहा था लेकिन फिर भी उसकी कमर दुखने लगी थी और इसका उसने अलग ही रास्ता खोज निकाली थी वह धीरे से आगे की तरफ झुकने लगी और देखते ही देखते हैं वह घोड़ी बन गई इससे उसे आराम भी मिल रहा था और मजा भी आ रहा था। क्योंकि आप सुगंध बड़ी आराम से अपनी कमर अपने बेटे के ऊपर आगे पीछे कर रही थी एक तरह से अपने बेटे के चेहरे पर उसके होठों पर अपनी बुर को पटक रही थी। ऐसा करने में उसे भी बहुत मजा आ रहा था और इस तरह से अपनी मां की बुर चाटने में अंकित को भी बहुत मजा आ रहा था उसके लंड की हालत खराब होती जा रही थी ऐसा लग रहा था कि उसका लंड पजामा फाड़ कर बाहर आ जाएगा। छत पर मां बेटे पूरी तरह से निश्चिंत थे किसी के देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था इसलिए खुलकर दोनों मजा ले रहे थे। सुगंधा की गरमा गरम सिसकारियां छत पर गूंज रही थी। साड़ी कमर तक उठाए हुए सुगंधा घोड़ी बन चुकी थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां जिस तरह से झुकी हुई थी ऐसा लग रहा था कि जैसे ब्लाउज का बटन फाड़ कर बाहर आ जाएगी,,,,, मां बेटे दोनों आनंद से सरोबोर होते चले जा रहे थे। लेकिन अब अंकित के मन में कुछ और चल रहा था अपनी मां की बुर चाटते हुए उसके दिमाग में एक चलचित्र घूम रहा था जिसे वह अपने दोस्त राहुल के साथ गंदी किताब में देखा था। उसकी मां बड़े जोरों से अपनी कमर को ऊपर नीचे करके हिला रही थी और अपने दिमाग में उपस रहे उस चलचित्र को साकार करने के लिए अंकित अपनी मां की गांड पकड़ कर एकदम से उसे रोक दिया अपने बेटे के द्वारा किए गए इस हरकत से सुगंधा हैरानी से अपनी नजर पीछे की तरफ घूमा कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी। अंकित गहरी गहरी सांस ले रहा था लेकिन वह अपनी मां की तरफ नहीं देख रहा था इसलिए सुगंधा बोली।
क्या हुआ,,,?(गहरी सांस लेते हुए सुगंधा बोली,,,, उसकी आवाज में तड़प थी मदहोशी थी नशे में पूरे तरह से डूब जाने की चाहत थी,,,, इस तरह से उसकी गांड पकड़कर उसकी हरकत को रोक देना उसे अच्छा नहीं लग रहा था,,,, लेकिन अंकित इससे भी ज्यादा मजा अपनी मां को देना चाहता था पर खुद प्राप्त करना चाहता था इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,,)
इधर आओ इससे भी ज्यादा मजा देता हूं,,,,,
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंध गहरी सांस लेते हुए एक हाथ छत के फर्श पर रखकर धीरे से खड़ी होने लगी,,,, क्योंकि काफी देर तक वह इसी अवस्था में अपने बेटे को मजा दे रही थी इसलिए उसके घुटने में थोड़ा दर्द हो रहा था और देखते-देखते वह धीरे से खड़ी हो गई लेकिन अपनी साड़ी को अपने हाथों से पकड़ कर वह कमर तक उठाए हुए ही थी वह अपनी साड़ी को उसके कदमों में नहीं गिरने देना चाहती थी वह अपने बेटे की आंखों से इतनी खूबसूरत नजारे को ओझल नहीं होने देना चाहती थी,,, और किसी रंडी की तरह इस तरह से कमर तक साड़ी उठाए हुए वह पैर में पायल बजाते हुए अपने बेटे के सिरहाने पर पहुंच गई और बोली,,,,)
अब क्या करना है,,,?
अभी तो बहुत कुछ करना है मेरी रानी अभी तो पूरी रात बाकी है,,,,।
अच्छा अभी मैं तुझे रानी दिखने लगी अभी तो नाराज हो गया था और ऐसा लग रहा था कि जैसे कभी बात ही नहीं करेगा,,,,,।
वह तो थोड़ा बहुत चलता ही रहता है मैं खुद जानता था कि मैं तुम्हारे से ज्यादा देर तक नाराज नहीं रह सकता क्योंकि नाराज रहने में मेरा ही घाटा है,,,।
तेरा कैसा घाटा है,,,,(सुगंधा अच्छी तरह से जानते थे कि उसका बेटा कि घाटे की बात कर रहा था लेकिन फिर भी वह उसके मुंह से सुनना चाहती थी)
नाराज रहने में मेरा भी तो घाटा है और सबसे बड़ा घाटा है अगर ज्यादा देर तक नाराज रहा तो आज की रात ऐसे ही गुजर जाएगी रूम में ऐसा होने नहीं देना चाहता था जब तक तुम्हारी बुर में लंड नहीं डाल देता तब तक अब मुझे चैन नहीं मिलता।
(सुगंधा अपने बेटे की बात सुनकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,, और अंकित अपनी मां की स्थिति को देखकर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,) देखो तो सही कैसी रंडी की तरह साड़ी कमर तक उठाए घूम रही हो इधर से उधर,,,, ऐसा लग रहा है कि जैसे मेरा लंड लेने के लिए तड़प रही हो,,,।
यह तेरे लंड की ही तड़प है जो मैं तेरे लिए रंडी बन गई हुं और यह सही बात है इसमें छुपाने वाली कोई बात नहीं है कि अब मुझे भी तेरा लंड अपनी बुर में लिए बिना चैन नहीं मिलता,,,।
तो आओ देर किस बात की है चढ़ जाओ मेरे लंड पर।
वह तो चढ़ना ही है लेकिन अभी इस खेल में ज्यादा मजा आ रहा था,,,,।(सुगंधा उसी तरह से अपनी साड़ी कमर तक उठाएं हुए बोली,,,)
तुम्हारा मजा और भी ज्यादा बढ़ाने के लिए तो मैं तुम्हें रोक दिया,,,,,, अब तुम्हें ऐसा मजा दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,।
चुदाई से भी ज्यादा मजा आएगा क्या,,,?
बिल्कुल और मैं तो कहता हूं कि इसके करने के बाद चुदाई करने में कुछ ज्यादा ही मजा आएगा।
मुझे करना क्या होगा,,, (अपने बेटे की बात को सुनकर सुगंधा बोली, अच्छी तरह से जानती थी अगर उसका बेटा कह रहा है तो जरूर उसे ज्यादा मजा आएगा,,,,)
ज्यादा कुछ करना नहीं है,,,, पहले इधर आओ,,,,
कहां,,,,? (गहरी सांस लेते हुए सुगंधा बोली)
मेरी तरफ आओ मेरे सर के अगल-बगल पैर रख दो और मेरे लंड की तरफ देखो,,,,
तु करने क्या जा रहा है,,,?
पूछो मत जैसा मैं कह रहा हूं वैसा ही करो,,,,।
(सुगंधा जैसा अंकित ने बोला था वैसे ही अपनी बेटी के कर के अगल-बगल पर रखकर खड़ी हो गई थी हालांकि अभी भी वह साड़ी अपने हाथों से उठाए हुए खड़ी थी और जिस तरह से वह खड़ी थी यह नजारा देखकर अंकित को लग रहा था कि जैसे उसका लंड फट जाएगा,,,,, खड़ी होने के बाद सुगंधा बोली,,,,)
अब क्या करना है,,,?
अब तुम जैसे खड़ी हो वैसे ही घुटनों के पल बैठ जाओ जहां पर कम रखी हो वहीं पर अपने घुटनों को रख दो,,,,,।
अभी उम्र में तू न जाने क्या-क्या करवाएगा,,,, (ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी साड़ी को इस तरह से दोनों हाथों से पकड़े हुए घुटनों के बल बैठने लगी अपनी मां की बात सुनकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,)
यही उम्र तो है जवान दिखाने का तुम्हें देखकर कोई कह सकता है कि दो जवान बच्चों की मन हो ऐसा लगता है कि अभी-अभी जवान हो रही है तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर तो जिसका नहीं खड़ा होना चाहिए उसका भी खड़ा हो जाए,,,,,।
चल अब बकवास मत कर,,,(मन ही मन सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली अपने बेटे की बात सुनकर उसे भी अच्छा लग रहा था,,,,, और देखते ही देखते वह घुटनों के बल बैठ गई,,,,, जिस तरह से वह बैठी थी उसकी दोनों टांगों के बीच अंकित का कर आ गया था अंकित नजर ऊपर उठाए हुए अपनी मां की रसीली बुर को देख रहा था जो की अंधेरे में भी साफ दिखाई दे रही थी क्योंकि जैसे-जैसे समय गुजर रहा था वैसे-वैसे अंधेरा काम होते जा रहा था चांदनी बिखरती जा रही थी और छत पर तो कुछ ज्यादा ही चांदनी बिखरी हुई थी और यह अंकित के लिए अच्छी बात थी क्योंकि वह अपनी मां की नंगी जवान को अपनी आंखों से देख पा रहा था,,,, उससे रहा नहीं गया और वह अपने हाथ ऊपर की तरफ उठाकर अपनी मां की बुर छुने की कोशिश करने लगा जिसमें वह कामयाब भी हो गया,,, लेकिन जैसे ही उसकी उंगलियों के पास पर सुगंध को अपने ऊपर महसूस हुआ सुगंधा अपनी गांड पर की तरफ उठा दी और बोली,,,)
आहहहह, यही करने के लिए मुझे इतनी कसरत करवा रहा है,,,।
अरे यही नहीं करना है इससे ज्यादा करना है,,,,, लेकिन तुम्हारी बुरी इतनी अच्छी लग रही है कि मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,।
तो चाट ले,,,, हटा क्यों दिया,,,,(सुगंधा की बातों में उसकी नाराजगी साथ झलक रही थी वह अपने बेटेसे जी भर कर अपनी बुर चटवाना चाहती थी,,, अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला)
चिंता मत करो वही करने जा रहा हूं लेकिन थोड़ा अलग तरीके से,,,, अब तुम मेरे लंड की तरफ उसी तरह से आगे बढ़ो घुटने वही रखकर,,,,,।
हाय दइया पता नहीं क्या-क्या करवाएगा,,,,।
इश्क में तो सब कुछ जायज है,,,।
यह इश्क है,,,!(सुगंधा चुटकी लेते हुए बोली)
इश्क ही तो है इश्क की आखिरी मंजिल यही है यहां पहुंचे बिना इश्क मुकम्मल नहीं होता।
चल शायर बनने को रहने दे तू तो मेरी कमर में दर्द दे रहा है। (अपने बेटे की टांगों के बीच झुकते हुए सुगंधा बोली)
जब धक्के लगाऊंगा तो मजा भी बहुत दूंगा,,,।
तब की तब देखेंगे अभी मजा दे मुझे,,,,।
बस हो गया मेरी जान,,,(सुगंधा घुटनों के बल अपने बेटे की टांगों के बीच झुकते हुए घोड़ी बन गई थी, अंकित अपनी मां की क्रियाकलाप को देख रहा था,,,, और यह भी देख रहा था कि उसकी मां कितनी बेताब है मजा लेने के लिए,,, ऐसी ही औरतें बिस्तर पर मर्दों को ज्यादा मजा देती है,,,,,, अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) अभी नीचे नजर करके देखो तुम्हें क्या दिखाई दे रहा है,,,,।
पेंट में तेरा लंड पागल हुआ जा रहा है यही दिखाई दे रहा है,,,,।
बस मेरी जान समझो कि हो गया,,,(अंकित एकदम मदहोश होता हुआ बोला,,, और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) अब अपने हाथों से मेरी पैंट खोलकर घुटनों तक खींच दो,,,,,,।
(पेट में बने तंबू को देखकर सुगंधा से खुद नहीं रहा जा रहा था इसलिए वह अपने बेटे की बात सुनते ही जल्दबाजी दिखाते हुए पेट की बटन खोलने लगी उसकी उंगलियों का स्पर्श पेंट के ऊपर से ही उसके लंड की अकड़ को ओर ज्यादा बढ़ा रहा था,,,, और देखते ही देखते सुगंधा अपने बेटे के पेट की बटन को खोल दी और चैन को नीचे की तरफ खींच दी पेट को नीचे सरकाते समय अंकित खुद अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा लिया जिससे उसकी मां उसकी पेंट को आराम से उतर सके और देखते-देखते सुगंधा ने अपने बेटे के पेट को घुटनों तक खींच दी थी और वह भी अंडरवियर सहित और उसके बाद जो नजर उसकी आंखों के सामने दिखाई दे रहा था उसे देखकर तो उसकी बुर उत्तेजना के मारे फूलने पीचकने लगी,,,,, सुगंधा ने बिल्कुल भी देर नहीं की हो अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड़ ली और गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)
बाप रे ऐसा लग रहा है कि तेरा लंड आज कुछ ज्यादा ही मोटा हो गया है।
यह तो होना ही था मेरी जान क्योंकि तुम्हारी बुर का छेद भी बड़ा होते जा रहा है,,,,।
सहहहहहह,,,,हममममममम,,,,(गरम आहे भरते हुए सुगंधा अपने आप से ही अपने बेटे के लंड की सुपाडे को आइसक्रीम के कौन की तरह चाटना शुरू कर दी यह देखकर अंकित एकदम से मदहोश हो गया और अपनी मां का जोश बढ़ाते हुए बोला,,,)
वह मेरी रानी तुम्हें सीखाना नहीं पड़ा यही तो मैं चाहता था तुम तो खुद ही मेरे लंड को चाट रही हो,,,,सहहहहह मेरी जान खूब चाटो,,,, अच्छे से चाटो ताकि यह तुम्हारी बुर की अच्छी से चुदाई कर सके,,,आहहहहह मेरी जान मेरी रंडी,,,,सहहहहह आहहहहहहहह,,ं(ऐसा कहते हुए अंकित कमर से नीचे गिरी अपनी मां की साड़ी को दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर की तरफ उठने लगा और अगले ही पल वह अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया था एक बार फिर से उसकी मां की गांड नंगी हो गई थी बड़ी-बड़ी गांड उसकी आंखों के सामने थी उसकी लसलसी बुर उसके होठों के बेहद करी थी उसकी खुशबू बड़े आराम से उसके नथुनों से उसकी छाती के अंदर तक पहुंच रही थी अंकित सिरहाने के और वह दोनों हाथों से अपनी मां की भारी भरकम गांड को थाम कर हल्का से अपने सर को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाया और अपनी होठों के बाहर अपनी जीभ को निकाल कर उसे अपनी मां की गुलाबी छेद से सटा दिया,,,, जैसे ही सुगंधा को अपनी बर पर अपने बेटे के जीभ का स्पर्श हुआ वह उत्तेजना से एकदम से गनगना गई,,, उसे समझते देर नहीं लगी कि उसका बेटा क्या करना चाहता था वह एकदम से मदहोश हो गई और लंड के सुपाड़े को एकदम से अपने मुंह के अंदर घुसेड ली,, और उसे चाटना शुरू कर दी चूसना शुरू कर दी,,,, सुगंधा को एहसास होने लगा कि उसका बेटा ठीक ही कह रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा इस तरह की तरकीब कहां से सीखा,,,, लेकिन इस समय यह सब जानने की जरूरत नहीं थी वह तो आनंद के सागर में गोते लगा रही थी।
चांदनी रात में मां बेटे दोनों मदहोश हुए जा रहे थे दोनों एक ही साथ एक दूसरे को मजा दे रहे थे सुगंधा अपने बेटे के लंड को गले तक लेकर चाट रही थी चुसाई कर रही थी,,, और उसका बेटा अंकित जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ को अपनी मां की रसीले बुर में डालकर उसकी मलाई चाट रहा था यहां तक की सुगंधा उत्तेजना से इतना पानी बहा रही थी कि उस पानी में अंकित का चेहरा भीग रहा था लेकिन अंकित को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह तो जैसे अमृत के सागर में डुबकी लगा रहा हूं उसे अपनी मां की बुर से निकलने वाला नमकीन पानी अमृत की धार कि तरह लग रहा था,,,, अंकित पागलों की तरह अपनी मां की बुर की चटाई कर रहा था उसके एक अंगुल की निचले हिस्से पर उसे अपनी मां की गांड का भूरा रंग का छेद दिखाई दे रहा था अभी तक अंकित अपनी मां की गांड के छेद से बिल्कुल भी छेड़छाड़ नहीं किया था,,,,, उसे अपनी मां की गांड का छेद देखने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे उसकी बनावट बहुत अच्छी लग रही थी एकदम गोल और हल्की-हल्की लकीर खींची हुई थी,,,, और उत्तेजना से वह छेद सिकुड़ रहा था और उभर रहा था। जिसे देखकर अंकित की उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी । अभी तक वह केवल अपनी मां के गुलाबी छेद की चटाई कर रहा था लेकिन अपनी मां की गांड का भूरा रंग का छेद देखकर अब उसका मन बहकने लगा था,,, वह अच्छी तरह से जानता था कि उसे छेड़ से उसकी मा हगती है,,,, यह उसका मलद्वार है लेकिन इस बात को जानने के बावजूद भी उसे जरा भी अजीब नहीं लग रहा था। और अगले ही पल वह अपनी जीभ की नोक को अपनी मां की गांड के छेद से सटा दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया।
अपने बेटे की इस हरकत पर सुगंध एकदम से उत्तेजना से भर गई उसका बदन एकदम से सनसना गया,,, उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोचती थी कि उसका बेटा उसकी गांड के छेद को चाटेगा क्योंकि इस क्रिया को सोच के पति ने भी नहीं किया था और ना ही वह कभी सोची थी कि कोई इस तरह से उसकी गांड के छेंद से प्यार करेगा इसलिए वह एकदम से मस्त हो गई थी एकदम बेकाबू हो गई थी,,, अपनी उत्तेजना हुआ दबा नहीं पा रही थी इसलिए वह अपने बेटे के लंड को उत्तेजना से भरकर हल्के से काट ले रही थी अंकित अपनी मां की उत्तेजना के असर को अच्छी तरह से समझ गया था इसलिए वह बार-बार अपनी जेब अपनी मां की गांड के छेद पर ले जा रहा था उसे चाट रहा था और तब तब सुगंधा उसके लंड को काट ले रही थी,,,, अंकित को इस खेल में मजा आ रहा था,,,वह दोनों हाथों से अपनी मां की भारी भरकम गांड को थाम कर वह अपनी मां की गांड के छेद को चाट रहा था उसमें से निकलने वाली मादक खुशबू उसके बदन में उत्तेजना का तूफान भर दे रही थी और अंकित अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रहा था जिससे उसका पूरा का पूरा लंड उसकी मां के गले में चला जा रहा था लेकिन फिर भी सुगंधा उसे बाहर निकालने की कोशिश नहीं कर रही थी वह तो पागल हुए जा रही थी। सुगंधा भी दिखने लगी थी कि उसे कितना मजा आ रहा है जिसके जवाबी तौर पर वह अपने बेटे के लंड को डांट से काट ले रही थी और जब उसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया तो वह अपनी गांड को गोल-गोल घूमने लगी अपनी बेटी के चेहरे पर उसके दबाव को बनाकर उसे एकदम से रगड़ने लगी वह अपनी गांड को अपने बेटे के चेहरे से उठा नहीं रही थी। और उसकी बुर से निकलने वाला नमकीन पानी पूरी तरह से अंकित के चेहरे को रगड़ रहा था एक तरह से वह अपनी बुर से अपनी गांड से अपने बेटे के चेहरे की मालिश कर रही थी और वह भी किसी तेल से नहीं बल्कि अपनी बर से निकले हुए मदन रस से,,,
और सही मायने में देखा जाए तो औरत की तरफ से मर्दों के लिए इससे अच्छा तेल मालिश के लिए पूरे बाजार में क्या पूरी दुनिया में कोई नहीं होगा मर्दों को जितना मजा औरत की बुर की मदन रस मालिश करवाने में आता है उतना और किसी तेल से नहीं आता इसलिए तो अंकित भी कुछ नहीं कर रहा था बस अपनी मां की हरकत का मजा ले रहा था दोनों हाथों से इसकी गांड को थाम कर वह खुद उसे गोल-गोल घूमने में उसकी मदद कर रहा था,,,, भारी भरकम गांड की रगड़ को अपने चेहरे पर महसूस करना भी एक किस्मत की बात होती है शायद इसमें अंकित सबसे ज्यादा अव्वल नंबर का था उसे यह खुशी बार-बार उसकी मां के द्वारा मिल रही थी,,, वह मदहोशी के साथ अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल रहा था,,,,, सुगंधा भी अपने बेटे की हरकत का मजा ले रही थी दोनों मां बेटे एक दूसरे की हरकत का जी भर कर मजा ले रहे थे। लेकिन अगले ही पर अंकित अपनी दो उंगली एक साथ अपनी मां की बुर में डाल दिया और उंगली को अंदर बाहर करने लगा ऐसा करने से सुगंधा की उत्तेजना और ज्यादा भड़क गई उसके बदन की अकड़न बढ़ने लगे और देखते ही देखते भल भला कर उसकी बुर से मदन रस का फव्वारा फुट पड़ा,,,, लेकिन अंकित को एहसास हो गया था वह तुरंत अपने होठों को खोलकर अपनी जीभ को और होठ को एक साथ अपनी मां की गुलाबी छेद से सटा दिया,,, और उसकी बुर से निकलने वाली नमकीन पानी को अमृत की बहुत समझ कर वह चाटना शुरू कर दिया अपने गले के अंदर उतारना शुरू कर दिया और तब तक चाटता रहा जब तक उसकी बुर से अमृत की आखिरी बूंद उसके गले के अंदर उतर नहीं गई,,,, झड़ने की वजह से सुगंधा अपने कार्य को रोक दी थी और गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,,,,।
जिस तरह का सुरूर उसकी बुर की अंदरूनी दीवारों में छा रहा था जिसमें से बार-बार मदन रस बह रहा था उसे रहने जा रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उस बड़े जोरों की पेशाब लगी है और वह उठकर बैठ गई थी,,,, यह देख कर अंकित अपनी मां से बोला,,,।
क्या हो गया बैठ क्यों गई,,,,
बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,(इतना कहने के साथ है वह उठकर खड़ी हो गई और इस पर अपनी साड़ी को पकड़ने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं और उसकी साड़ी उसके कदमों में जाकर अंकित अपनी मां को देख रहा था और रेखा से अपने लंड को पकड़ लिया था जो कि एकदम लोहे के रोड की तरह हो गया था,,, उसकी मां उसी कोने मैं जा रही थी जहां पर वह बैठकर पेशाब करती थी और अंकित उसे देखा था,,,, और देखते ही देखते सुगंधा जल्दी से अपनी साड़ी कमर तक उठाकर पेशाब करने के लिए बैठ गई थी,,, चांदी रात में अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर अंकित से रहने की और अंकित भी अपने पेट को एकदम से अपने पैर में से निकाल कर अलग कर दिया और उठकर खड़ा हो गया।,,,, और सीधे अपनी मां के पास पहुंच गया वह पेशाब करने में व्यस्त थी उसकी बुर से बड़ी तेजी से पेशाब की धार फूट रही थी ऐसा लग रहा था कि बड़े देर से वह पैसाब को रोक कर रखी थी जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था छत पर आने से पहले ही वह मुत कर आई थी। बड़े जोरों से उसकी बुर से सिटी की आवाज निकल रही थी और यह सिटी की आवाज अंकित की उत्तेजना को बढ़ाने के लिए काफी थी वैसे तो पहले से ही उसकी मां ने उसके लंड को चुस चुस कर एकदम मजबूत कर दि थी। अंकित अच्छी तरह से जानता था कि जिस तरह से उसका लंड खड़ा था लोहे के रोड की तरह अगर वह अपनी मां की बुर में लंड डाल देगा तो बुर का भोसड़ा बना देगा। यही सोचता हुआ वहां जैसे उसकी मां बैठी थी वैसे ही वह पीछे जाकर बैठ गया,,,, जैसे ही उसकी मां को एहसास हुआ कि उसका बेटा ठीक उसके पीछे ही उसी की तरह बैठा है एकदम सट कर तो वह नजर पीछे घूमाकर देखने लगी और बोली।
अरे यह क्या कर रहा है पेशाब तो कर लेने दे,,,,।
तो मैं कहां तुम्हारी बुर पर हाथ रखकर रोक दे रहा हूं तुम अपना काम जारी रखो,,,, मैं अपना काम करता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां के कंधों पर अपने दोनों हाथ रख दिया और उसे कस के दबोच लिया सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा क्या करने जा रहा है, वह अपनी मां से सटा हुआ बेटा था ठीक अपनी मां की तरह ही जैसे कि वह भी पेशाब करने बैठा हो,,, अपनी मां के कंधों को अपने हाथ से कस के पकड़ कर वह अपनी मां को स्थिर कर दिया था सुगंधा भी उत्तेजना से भरी जा रही थी मर्द और औरत के बीच बहुत कुछ होता होगा लेकिन इस तरह से तो कभी कुछ नहीं होता होगा कि एक औरत की तरह खुद उसका साथी भी उसी की तरह बैठ जाए,,,,, अंकित खुद उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था वह अपने लंबे लंड को अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आगे की तरफ जाने दिया वह अपने पैर को थोड़ा आगे बढ़ा दिया था और अंकित का लंड इतना लंबा था कि पीछे से भी बड़े आराम से उसकी मां की बुर के सामने तक पहुंच गया था,,,, जैसे ही लंड का सुपाड़ा सुगंधा की बुर के छेद के ठीक सामने पहुंचा उसकी बुर से निकलने वाली पेशाब की कर लंड के सुपाड़े से टकराई अंकित एकदम से मदहोश हो गया गहरी सांस लेने लगा और अपने दोनों हाथों की हथेलियां को अपनी मां के कंधे पर जोर से दबाने लगा उसकी मां भी मदहोश होने लगी उसे समझ में आ गया किसका बेटा क्या कर रहा है उसकी भी पैसाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी और उसके बेटे के लंड कै सुपाड़े को भिगो रही थी,,,,, अंकित से रहा नहीं जा रहा था वह धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके अपनी मां की गांड के निचले स्तर पर ही अपने लंड को रगड़ रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था और जिस तरह की वह हरकत कर रहा था उसकी मां की हालत भी एकदम पतली होती जा रही थी उससे भी नहाने जा रहा था वह तो चाहती थी कि जल्द से जल्द उसके बेटे का लंड उसकी बुर में घुस जाए,,,,,
सहहहह ओहहहहह मम्मी,,,,,,ऊमममममम बहुत मजा आ रहा है मम्मी,,,,,सहहहहहवआहहहहह तुम्हारी बुर से निकलने वाली पेशाब कितनी गर्म है।आहहहह मेरा तो लंड एकदम से टनटना गया,,,सहहहह
अब क्या करेगा तू,,,
तुम्हें चोदूंगा और क्या करूंगा,,,,।
कैसे चोदेगा,,,,, (उत्तेजना से एकदम गहरी सांस लेते हैं सुगंधा बोली,,,, अंकित की हथेलियां का दबाव उसके कंधों पर कुछ ज्यादा ही बढ़ता जा रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजित हो रहा था इसका एहसास सुगंधा को हो गया था एक बार चढ़ने के बाद अपने बेटे की हरकत की वजह से फिर से उसकी बुर चुदने के लिए तैयार हो चुकी थी,,,, हालाकी पहली बार वह अपने बेटे की उंगली और उसकी जीभ की करामात से झड़ गई थी लेकिन इस बार वह अपने बेटे का लंड अपनी बुर में डलवा कर झड़ना चाहती थी,,, इसलिए वह पूरी तरह से अपने आप को तैयार कर चुकी थी,,,, अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला,,,)
तुम जैसा चाहो ,,,।
(अंकित का इतना कहना था कि सुगंधा धीरे से अपने बेटे के लंड को अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के पकड़ ली और फिर उसे अपनी बुर में डालने के लिए हल्के से अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाएं हालांकि अभी भी उसकी बुर से पेशाब की बुंद निकल रही थी इसके बावजूद भी वह अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को जो उसकी पेशाब की धार से गिला हो चुका था सीधा उसे अपनी गुलाबी गली का रास्ता दिखा दी उसे अपनी बुर के मुहाने पर रखकर धीरे-धीरे अपनी गांड का दबाव उसे पर बढ़ने लगी और धीरे-धीरे अंकित का लंबा लंड उसकी बुर में घुसने लगा,,,,, अंकित अपनी मां की करतब को देखकर मदहोश हुआ जा रहा था वह कसके अपनी मां के कंधों को पकड़े हुए था और देखते ही देखते सुगंधा अपनी कला बड़ी दिखाते हुए पीछे से ही अपने बेटे के लंड को पूरा का पूरा अपनी बुर की गहराई में घुसेड ली,,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थे कि यह अनुभव उसके लिए भी और उसके बेटे के लिए भी बिल्कुल नया था इसलिए वह गहरी सांस लेते हुए अपने बेटे से बोली।)
कैसा लग रहा है मेरे राजा,,,,
पूछ मत मेरी रानी बहुत मजा आ रहा है,,,।
अभी तो और मजा आएगा,,,, (और ऐसा कहने के साथ ही वह उसी तरह से बैठे हुए ही अपनी बड़ी-बड़ी गांड को अपने बेटे के लंड पर पटकना शुरू कर दे उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, अंकित उसके कंधों को पकड़कर उसे संभाले हुए था बढ़ती जा रही थी वैसे-वैसे उसकी दोनों हथेलियां आगे की तरफ सरकती चली जा रही थी और अगले ही पर वह ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाता हुआ अपनी मां के धक्को का मजा ले रहा था,,,, सुगंधा की जवानी और चांदनी रात पूरी तरह से शबाब पर थी अभी तो रात की शुरुआत हुई थी।
चांदनी रात पूरे शबाब पर खिल चुकी थी,,, अद्भुत आसन में मां बेटे जवानी का मजा लूट रहे थे यह आसन अपने आप ही प्रस्थापित हो चुका था,,, सुगंधा अपनी सूझबूझ से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर की गहराई में उतार ली थी,,,, आधी रात से ज्यादा का समय हो गया था लेकिन मां बेटे दोनों की आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं था और वैसे भी जिस तरह का खेल हुआ दोनों खेल रहे थे इस खेल को खेलते समय नींद कोसों दूर चली जाती है और नशा पूरी तरह से आंखों में छाने लगता है,,, अपनी मां की चूचियों को दबाता हुआ अंकित पेशाब करने की मुद्रा में बैठा हुआ था और उसकी मां की भारी भरकम गांज उसके लंड के ऊपर पूरी तरह से सवार हो चुकी थी,,, सुगंधा को देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे मोटर गाड़ी का स्टेरिंग उसके हाथों में आ गया हूं सारा कंट्रोल उसके हाथों में था। जिस अवस्था में अंकित संभोग का आनंद ले रहा था उसे अवस्था में वह चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहा था जो कुछ भी कर रही थी उसकी मन कर रही थी लेकिन फिर भी अंकित को अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी। कुल्हाड़ी पर पैर पड़े या पैर कुल्हाड़ी पर दोनों ही अवस्था में कुल्हाड़ी और पैर अपना-अपना काम और कर्त्तव्य बखूबी निभाते हैं। अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए सुगंधा मदहोशी भरे स्वर में बोली।
कैसा लग रहा है मेरे राजा बेटा,,,,,।
बहुत मजा आ रहा है मम्मी पूछो मत मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि तुम इतना मजा देती होगी ।
मैं तो हमेशा से इतना ही मजा देता हूं बस तू मजा लेता नहीं था,,,,,।
मुझे नहीं मालूम था मम्मी की तुम्हारी बुर में भी आग लगी हुई है,,,,, (अपनी मां की चूचियों को मसलते हुए धीरे-धीरे उसके ब्लाउज का बटन खोलते हुए अंकित बोला,,,)
तुझे तो बहुत पहले ही समझ जाना चाहिए था कि एक औरत का जीवन बिना मर्द के अधूरा ही रहता हैं।(छत की 3 फीट की दीवार को अपने हाथों से पकड़ कर वह अपने बेटे के लंड पर उछलती हुई बोली,,,)
तुम सच कह रही हो मुझे बहुत देर में समझ आया और जब समझ आया तो देखो हम दोनों क्या कर रहे हैं कोई बात नहीं देर आए दुरुस्त आए।सहहहहह आहहहहह बहुत गर्म है तुम्हारी बुर,,,,
तेरा लौड़ा भी बहुत गर्म है मेरी बुर का लव पिघला रहा है,,,,,।
कितना मजा आता है ना मेरी जान जब तुम्हारी बुर में से तुम्हारा पानी निकलने लगता है।
तुझे भी तो मजा आता है ना जब तेरे लंड से अपनी फेंकता है।
पूछो मत मेरी रानी कितना मजा आता है मन करता है कि बस इसमें से निकलता ही रहे निकलता ही रहे। आहहहह ,,,,,, थोड़ा जोर-जोर से उछलो,,,,।
क्यों ऐसे में मजा नहीं आ रहा है क्या,,,? (अपने बेटे की बात पर अपनी नजर घूमाकर अंकित की तरफ देखते हुए बोली तू अंकित अपनी मां का उत्तेजना से भरा हुआ चेहरा देखकर उसके होठों पर अपने होंठ रखकर चुंबन कर लिया और बोला,,,)
मजा तो बहुत आ रहा है लेकिन तुम्हारी कसी हुई बुर में जब लंड पूरा बाहर निकलता है और जब तुम गच्च से नीचे बैठती हो तो और ज्यादा मजा आता है।
यह बात है मजा तो मुझे भी इस तरह से ज्यादा आता है लेकिन कहीं लंड बाहर निकल गया और मैं जोर से गांड पटक दि तो कहीं तेरा लंड टूट न जाए,,,,।
तुम्हारी चुदाई करते समय लंड टूट भी जाए तो कोई गम नहीं,,,,।
नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,,, अब तो मुझे तेरे लंड की आदत सी पड़ गई है अगर तेरा लंड टूट गया तो मजबूरी में मुझे दूसरे के सामने टांगे खोलना पड़ेगा,,।
कौन चोदेगा गा तुझे मेरी जान,,,,,।
चोदने वाली की कमी है क्या मेरे राजा,,,, मुझे देख कर तो न जाने कितने लोग लार टपकाए घूमते रहते हैं बस एक ईशारे की देरी है फिर देखो मेरे कमरे के बाहर लाइन लगी होगी मुझे चोदने के लिए,,,,।
हाए मेरी रंडी तू इतनी बड़ी छिनारबन जाएगी,,,, (अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोलकर उसकी नंगी चूची को दबाते हुए बोला हैरान कर देने वाला बात यह था कि उसकी मां ने ब्लाउज के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी,,,,,, ऐसा लग रहा था कि शायद ब्रा पेंटी को उतारने के झंझट में पड़ना नहीं चाहती थी। अपने बेटे की बातें सुनकर मदहोश होते हुए वह अपनी गांड को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर लंड के सुपाड़े को सिर्फ अपने गुलाबी छेद में रहने दी और फिर गच्च से एकदम से अपने बेटे के लंड पर बैठ गई मां बेटे दोनों एकदम से मस्त हो गए और सुगंध अपने बेटे की बात सुनकर बोली,,,)
तब तो बनना ही पड़ेगा क्योंकि अब मुझे नहीं लगता कि बिना लंड डलवाए मुझे नींद आने वाली है।
तब तो मेरी रानी तू बिल्कुल भी चिंता मत कर तेरे लिए मैं ही काफी हूं तेरा यह सांड बेटा किस दिन काम आएगा,,,आहहहह आहहहहह ले मादरचोद पूरा का पूरा ले ले,,,, दूसरे का लंड लेने की बहुत चाहत है ना तेरी बुर में,,, ले तेरे भोसड़े में अपनी बेटी का लंड ले भोसड़ा चोदी छिनार,,,,।
अरे मादरचोद बस इतना ही दम है क्या तेरे में और जोर-जोर से धक्के लगा वरना सच में तेरे सामने किसी और से चुदवाऊंगी एकदम छिनार की तरह नंगी होकर तू देखता रह जाएगा और मैं उसका लंड पर जोर-जोर से अपनी गांड पटकुंगी,,, हारामी साले तुझे क्या लगता है कि तू ही एक मर्द है दुनिया में मेरी बुर देखकर ना जाने कितनों का खड़ा हो जाएगा एक से बुर की गर्मी शांत नहीं होगी तो दूसरा डलवा लूंगी,,, दूसरे से नहीं तो तीसरे का,,, सारी रात कभी एक का तो कभी दूसरे का लेटी रहूंगी।
हरामजादी भोसड़ा चोदी तू तो एकदम रंडी बन जाएगी,,,(अपनी मां की नंगी चूचियों को जोर-जोर से मसलते हुआ अंकित बोला,,,,) और मेरे घर को रंडी खाना बना देगी,,,।
तो कर भी क्या सकती हो जब तेरे में दम ही नहीं रहेगा तो मुझे तो दूसरों के साथ करना ही होगा,,,,।
(मां बेटे दोनों की बातचीत एकदम गंदी होती चली जा रही थी दोनों को इस तरह से बात करने में मजा भी आ रहा था सुगंधा बात ही बात में अपने बेटे को उकसा रही थी,,, और उत्तेजना और जोश में अंकित पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबने लगा था अपनी मां की बातें सुनकर एकदम से वह चुची को जोर से दबाते हुए बोला,,,)
ले भोसड़ा चोदी मादरचोद रंडी,,,, खड़ी हो साली रंडी अभी दिखाता हूं तुझे अपनी ताकत,,,,, बहुत दूसरे से चुदवाने का मन कर रहा है ना तेरा,,, आज तेरी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,, मादरचोद खड़ी हो,,,,(इतना कहने के साथ अंकित अपने लंड को अपनी मां की बुर में से निकाल कर एकदम से खड़ा हो गया और अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे भी खड़ी करने लगा सुगंधा को एहसास हो रहा था कि उसका बेटा कुछ ज्यादा ही उत्तेजना मैं डूब गया था वह तेरे से खड़ी हो गई लेकिन वह खड़ी होती है इससे पहले ही अंकित उसे अपनी तरफ घूम लिया और एकदम से उसके होंठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, सुगंधा भी मदहोश हो गई थी उसकी भी सांस ऊपर नीचे हो गई थी लेकिन जिस तरह से वह खड़ी हुई थी उसकी साड़ी फिर से उसके कदमों में जहां गिरी थी जिसे उसका बेटा खुद अपने हाथों से ऊपर की तरफ कर रहा था और बहुत तेजी से ऊपर की तरफ कर रहा था और जैसे ही कमर तक उसकी साड़ी आई वह सीधा एक साथ अपनी दो उंगली को अपनी मां की बुर में डाल दिया और उसके अंदर बाहर करते हुए उसके होठों का रस चूसने लगा हालांकि अपने बेटे की हरकत की वजह से उसे थोड़ा बहुत दर्द का एहसास हो रहा था लेकिन उससे ज्यादा मजा मिल रहा था,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से अपनी मां की जवानी के साथ खेलता रहा,,,,, बुर में से बाहर निकल जाने के बाद उसका लंड और भी ज्यादा बौखला गया था वापस बुर में घुसने के लिए लेकिन इससे पहले अंकित एक बार फिर से अपनी मां को अपना लंड चटवाना चाहता था,,,, अपनी मां के दोनों कंधों को पकड़कर,,, उसे नीचे की तरफ ले जाने लगा सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी किसका बेटा क्या करवाना चाहता है लेकिन सुगंधा हिचकीचा रही थी, और उसकी हीचकीचाहट का कारण था , उसके बेटे का लंड,,, जो कि अभी-अभी उसकी पर की गहराई नाप कर बाहर निकाला था और उस पर उसकी बुर की मलाई लगी हुई थी,,,,।
सुगंधा देखते ही देखते अपने घुटनों के बल बैठ चुकी थी और अंकित अपने लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाता हुआ उसके सुपाड़े को अपनी मां के गाल पर रगड़ रहा था,,,, लेकिन सुगंधा अपने होठों को खोल नहीं रही थी वह जानती थी कि उसका बेटा उसके होठों के बीच जरूर अपना लंड डालेगा,,,, इसीलिए वह अपना मुंह नहीं खोल रही थी और इस बात का एहसास अंकित का हो गया था अगले ही पल अंकित अपने सुपाड़े को अपनी मां के लाल-लाल होठों पररगड़ रहा था,,,, और उसकी मां अपने होठों को कस के बंद की हुई थी,,, यह देखकर अंकित बोला।
खोलना छिनार में क्यों बंद कर ली,,,, खोलकर अंदर ले तुझे तो रंडी बनने का शौख चढ़ा है ना फिर क्यों मुंह बंद कर रही है,,,,,(सुगंधा कुछ भी नहीं बोल रही थी बस अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी और अंकित अपनी मां से गंदी बात करता हुआ लगातार उसके होठों से अपने लंड को रगड़ रहा था) खोल मादरचोद अगर रंडी बन जाएगी तो न जाने कितने लोग तेरे मुंह में इसी तरह से डालेंगे कितनों को इनकार कर पाएगी,,, तब तो शायद खुद दोनों हाथ में पकड़ कर तीसरा मुंह में लेकर चूस रही होगी,,,, अब खोल दे भोसड़ा छोड़ी मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,, अपनी ही मलाई चाटने में इतना नाटक कर रही है और मुझे तो टांगें खोलकर अपनी मलाई चटवाती है,,,,,
(अपने बेटे के मुंह से इस तरह की अपने लिए गाली सुनकर सुगंधा की बुर उत्तेजना से कचोरी बन गई थी,,, सुगंधा को बिल्कुल भी बुरा नहीं लग रहा था अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर बल्कि उसकी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा छा रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई गैर मर्द उसे रंडी की तरह चोदने को तैयार है, और उसे रंडी समझकर इस तरह की बातें कर रहा है,,,, एक अलग ही आनंद और से प्राप्त हो रहा था वह भी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी इसलिए आज अपने बेटे के लोड़े पर अपनी बुर की मलाई लगी हुई वह अपनी जीभ से चाट कर उसका स्वाद का मजा लेना चाहती थी। इसलिए वह अपने बेटे की हरकत का ज्यादा विरोध ना करते हुए धीरे से अपनी लाल-लाल होठों को खोल दी और यह देखकर अंकित के खुशी का कोई ठिकाना न था वह पूरी तरह से मदहोश हो गया और अगले ही पल अपने मोटे सुपाड़े को जो की पूरी तरह से आलू बुखारे की तरह फुल चुका था उसे धीरे से अपनी मां के लाल लाल होठों के बीच सरका दिया,,,,
सुगंधा की आंखों में भी हवस उतर आई थी वह पूरी तरह से वासना से लिप्त हो चुकी थी, उसे अपने बेटे में गैर मर्द दिखाई दे रहा था,,, उसे रहा नहीं जा रहा था और वह अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को चाटना शुरू कर दी उसे चूसना शुरू कर दी,,, मदहोशी की सीमा को पूरी तरह से मां बेटे पर कर चुके थे मर्यादा की दीवार तो दोनों ने कब से गिरा चुके थे,,, दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता खत्म हो चुका था,,और एक मर्द और औरत का रिश्ता शुरू हो चुका था। जिसमें वह दोनों काफी उत्तेजित और खुश नजर आ रहे थे देखते ही देखते सुगंध अपने बेटे के लंड को अपने गले की गहराई में उतार कर चूस रही थी। उसे बहुत मजा आ रहा था इस समय उसके बेटे का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा महसूस हो रहा था,,, और सुगंधा की उत्तेजना को बढ़ा रहा था। अंकित अपनी कमर पर दोनों हाथ रख कर अपनी खबर को आगे पीछे करके हिला रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था वह अपनी मां की बुर में दोबारा डालने से पहले अपने लंड की धार को मजबूत कर रहा था,,, अंकित को अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी मां के लार में डूब कर उसका लंड और भी ज्यादा मजबूत और टिकाऊ हो जाएगा कुछ देर तक किसी तरह से वह अपनी मां को मजा देता रहा और फिर हाथ पकड़ कर धीरे से कड़ी किया और फिर से उसे अपनी बाहों में भर लिया लेकिन इस बार वह अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाने की जगह कमर से उसकी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया था,,,, इस बीच वह लगातार अपनी मां के लाल लाल होठों को चूस रहा था जिसमें उसकी मां भी उसका सहयोग कर रही थी और अपनी बड़ी-बड़ी चूचियों को उसकी छाती से सटा दे रहीं थी।
देखते ही देखते अंकित अपनी मां के बदन से सारे कपड़ों को उतार कर से पूरी तरह से नंगी कर दिया था। रात के अंधेरे में सुगंधा का गोरा बदन चांद की तरह चमक रहा था जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था अंकित की हालत खराब हो रही थी छत के ऊपर खुली हवा में आसमान के नीचे वह अपनी मां को पूरी तरह से नंगी कर चुका था और वाकई में खुले आसमान के नीचे उसकी मां का नंगा बदन और भी ज्यादा उत्तेजक और मादक लगने लगा था,,,,,,,, चारों तरफ एकदम सन्नाटा छाया हुआ था बस रह रहकर कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी बाकी पूरे मोहल्ले में सन्नाटा छाया था सब लोग अपनी-अपने घरों में चैन के लिए सो रहे थे या कुछ ऐसे लोग भी होंगे जो इसी खेल में जुटे होंगे,,,, मोहल्ले में सबसे ऊंचाई पर छत होने का फायदा मां बेटे दोनों को मिल रहा था की पूरी तरह से नंगे हो जाने के बावजूद भी किसी को देखे जाने का डर दोनों में बिल्कुल भी नहीं था,,,,, अपनी मां की खूबसूरत नंगे बदन का एहसास उसे और भी ज्यादा उत्तेजित कर दे रहा था और वह एकदम से अपनी मां को अपनी बाहों में जाकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर दोनों हाथ रखकर उसे जोर-जोर से दबाता हुआ अपनी कमर हिला रहा था यह जानते हुए भी किस तरह से इसका लंड उसकी बुर में घुस नहीं रहा था फिर भी वह सिर्फ अपने लंड की ठोकर को अपनी मां की बुर के मुहाने पर दे मार रहा था जैसे की प्रवेश करने के लिए दरवाजे पर दस्तक दे रहा हो,,,, अपनी मां की गांड मसलते हुए और अपनी कमर हिलाते हुए वह एकदम जोश में आकर बोला।
बोल छिनार रंडी बनने का बहुत शौक है ना तुझे,,,
क्यों मादरचोद तू इस रंडी की प्यास को बुझा पाएगा कि नहीं,,,,, देख रहा है ना मेरी बुर में आग लगी हुई है मुझे नहीं लगता कि तेरा लंड मेरी बुर की गर्मी को शांत कर पाएगा,,,,।
तुझे ऐसा क्यों लगता है रे भोसड़ा चोदी जबकि एक बार तो झ चुकी है ,अपनी उंगली से ही में तेरा पानी निकाल दिया और देख अब तेरी बुर का भोसड़ा बनाने जा रहा हूं।।
मुझे तो नहीं लगता कि तेरे से हो पाएगा,,,, मेरी जैसी गदराई जवानी पर काबू पाना तेरे बस का नहीं है,,,रे मादरचोद,,,,।
छिनार तुझे क्या लगता है,,, तेरी बुर का पानी में निकाल नहीं सकता,,,, रुक मादरचोद अभी तुझे बताता हूं,,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित पूरी तरह से जोश से भर गया वह जानता था कि उसकी मां उसे उकसा रही है और वह यह भी जानता था कि उसकी मां को पता है कि उसकी मचलती जवानी पर केवल उसका बेटा ही काबू पा सकता है इसलिए अंकित पूरी तरह से मदहोश हो चुका था उसे अच्छा लग लग रहा था अपनी मां का यह रूप देखकर जिस तरह से वह उसे उकसा रही थी एकदम रंडी की भाषा में उसे यह सब सुनकर अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था और इसी उत्तेजना के सारे असर को अपनी मां पर दिखाना चाहता था आज सच में वह अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर उसका भोसड़ा बना देना चाहता था,,,, देखते ही देखते अंकित छत की 3 फीट की दीवार पकड़ कर उसे घोड़ी बना दिया था और पीछे से उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर दो चार चपत लगाते हुए उसकी गोरी गोरी गांड को टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,,,,,, सुगंधा भी जानती थी कि आज उसकी खैर नहीं है और वह भी तो यही चाहती थी ऐसी ही चुदाई उसे अच्छी लगने लगी थी उसे नहीं मालूम था की चुदाई इस तरह से भी होती है जिस तरह से उसका बेटा उसकी चुदाई करता आ रहा था लेकिन इस चुदाई को कहा थोड़ा सा और उत्तेजक बनाना चाहती थी इसलिए वह अपने बेटे से अश्लील बातें कर रही थी एकदम रंडी की तरह,,,,, सुगंधा छत की दीवार पड़कर घोड़ी बन चुकी थी और अपने पैर को फैलाता थी ताकि बड़े अच्छे से उसका बेटा उसके गुलाबी छेद को देख सके,,,,, फिर भी चुटकी लेते हुए वह अपने बेटे से बोली,,,,)
गुलाबी गली दिखाई तो दे रही है ना कहीं जोश में होश ना खो देना,,,,,।
बिल्कुल भी नहीं साली तेरी गांड की गुलाबी गली एकदम साफ दिखाई दे रही है,,,, अब देखना में अपना काला घोड़ा कैसे इसके अंदर दौड़ाता हूं तू भी क्या याद रखेगी की किसी मर्द से पाला पड़ा था।
केवल बातें करने से काम नहीं बनेगा कुछ करके दिखाना होगा तभी ना पता चलेगा कि किस नस्ल का मर्द है,,,,।
अभी थोड़ी देर में पता चल जाएगा रंडी की किस नेशनल का मर्द हूं तेरी इसी बुर से निकला हुं इसलिए तुझ पर कैसे काबू पाना है अच्छी तरह से जानता हूं,,,,,।( सुगंधा को अपने बेटे की यह बात एकदम से मदहोश कर गई थीं। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बेटा जोश में यह बात बोल जाएगा इसलिए वह पूरी तरह से मदहोश होकर अपने दोनों हाथ पीछे की तरफ लाकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड की दोनों आंखों को दोनों हाथों से पकड़ कर फैलाने लगी अभी मन को ऐसा करता हुआ देखकर अंकित को यकीन हो गया था कि उसकी मां पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी है एकदम रंडी बन चुकी है छिनार की तरह वह खुद मचल रही है लंड को अपनी बुर में डलवाने के लिए, लेकिन अपनी मां का यह रूप देखकर अंकित को बहुत खुशी हो रही थी आखिरकार वह भी यही चाहता था कि दूसरों की तरह उसकी मां भी एकदम मस्त होकर उससे चुदवाए,,, अंकित अपने लंड को हिलाते हुए अपनी मां की यह अदाकारी देखकर बोला।)
साली एकदम छिनार हो गई है रुक अभी बताता हूं तुझे,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित ठीक अपनी मां के पीछे आकर खड़ा हो गया और अपनी कमर को थोड़ा नीचे की तरफ ले जाकर के अपने लंड को अपनी मां की बुर से सटाने लगा और इतना करने में उसे ज्यादा समय नहीं मिला अगले ही पल वह अपनी मां की गुलाबी गली में अपने लंड को रास्ता दिखाकर दोनों हाथ अपनी मां की गांड पर रख दिया था और पहले ही प्रहार इतना तेज है कि पूरा का पुरा लंड एक ही बार में सीधा सुगंधा के बच्चेदानी से जा टकराया,,, सुगंधा अपने बेटे के द्वारा इस प्रहार के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इसलिए वह एकदम से चीख पड़ी वह तो अच्छा हुआ कि उसकी चीज की आवाज किसी को सुनाई देने वाली नहीं थी लेकिन फिर भी रात के सन्नाटे में वह चीख पल भर के लिए पूरे वातावरण में गुंज गई थी। अपनी मां की चीख सुनकर पल भर के लिए अंकित एकदम से घबरा गया था और एकदम से रुक गया और धीरे से अपनी मां को बोला,,,)
क्या कर रही हो पूरे मोहल्ले को जगाओगी क्या,,,? यह दिखाने के लिए कैसे अपने बेटे से चुदवा रही हूं।
अरे मादरचोद हरामजादे इतनी जोर से कोई पेलता है क्या,,,? ऐसा लग रहा है कि जैसे तू मेरी बुर फाड़ डालेगा,,,।
क्यों मेरी प्यारी रंडी सारी अकड़ निकल गई मैं बोला था कि आज तेरी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,।
आराम से करना मादरचोद में कहीं भागी नहीं जा रही हूं,,,,।
तु चिंता मत कर मेरी छिनार तेरी बुर को बड़े प्यार से चोदुंगा,,,,,, (और इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था अंकित अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया था सुगंधा घर के पीछे की तरफ की छत की दीवार पकड़कर चुदवा रही थी इसलिए किसी के देखे जाने का डर ही नहीं था क्योंकि घर के पीछे पूरा मैदान ही मैदान था जो की घनी झाड़ियों से भरा हुआ था,,,, अंकित को अपनी मां की चुदाई करने में बहुत मजा आया था और सुगंधा को भी अपने बेटे का लंड अपनी बुर में लेने में अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रहीथी। सुगंध को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसके बेटी का लैंड कुछ ज्यादा ही मोटा था और उसकी बुर की अंदरूनी दीवारों में एकदम रगड रगड़ के अंदर बाहर हो रहा था इससे उसका मजा दोगुना होता जा रहा था। सुगंधा मतवाली होती जा रही है तो उसके चेहरे का हाव-भाव हर एक धक्के साथ बदल रहा था और अंकित भी हर एक धक्का बड़ी तेजी से मार रहा था,,,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर वह जबरदस्त चुदाई कर रहा था। सुगंधा आनंद के सागर में डूबते चले जा रही थी वह मदहोश हुई जा रही थी आंखों को बंद करके वह इस पल का भरपूर मजा लूट रही थी,,,,)
सहहहहह आहहहहहह ऊमममममम बहुत मजा आ रहा है मेरे लाल,,,, आहहहहह तेरे जैसा बेटा पकड़ में तो धन्य हो गई मैं कभी सोची नहीं थी कि जीस बुर से तु निकला है उसी बुर की प्यास तु एक दिन बुझाएगा,,,।
आखिरकार एक बेटे होने का फर्ज तो मुझे निभाना ही था मेरी रानी मैं भी कभी सोचा नहीं था कि,,, मैं कभी अपने सपनों की रानी को चोद पाऊंगा,,, (अंकित जोर-जोर से अपनी कमर हिलाता हुआ बोला,,)
तो क्या मैं तेरे सपनों की रानी हूं,,,,।
हां तुम ही मेरे सपनों की रानी हो ,,,, जिसके घर में इतनी खूबसूरत औरत हो बना उसके सपनों की रानी कोई और कैसे हो सकती है,,,।
कैसा लग रहा है सपनों की रानी को चोदकर,,, (अपने बेटे के धक्के का जवाब अपनी कमर को पीछे की तरफ ठेल कर देते हुए वह बोली,,)
सच कहूं तो मेरी रानी अभी भी मुझे यह सब सपना ही लग रहा है मैं सपने में पूरी तरह से खो जाना चाहता हूं,,,,।
यह हकीकत है मेरे राजा,,,, आहहहह आहहहहह और जोर से और जोर से चोद मुझे,,, आहहहह मेरे राजा पूरा दम लगा देख तेरे सपनों की रानी तेरी मां टांग खिलाए तेरे सामने खड़ी है,,,, आहहहहह मेरे राजा मेरे मादरचोद बेटे देख तेरी मां तेरा लंड लेने के लिए कैसे तड़प रही है,,, ऊममम जोर-जोर से धक्के लगा,,,, आहहहहहह,,,।
मेरी छिनार मम्मी,,,, ले और जोर-जोर से ले,,,, आज सच में तेरी बुर फाड़ दूंगा,,,,, आहहहहह आहहहहह ओहहहहह मेरी रानी,,,,, आहहहहह तुझे चोदने में मुझे बहुत मजा आता,,,,, है,,,,, आहहहहहह,,,।
(मां बेटे दोनों पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे अंकित के हर एक धक्के का जवाब सुगंधा अपनी गांड को पीछे की तरफ ठेल कर दे रही थी दोनों एक दूसरे को परास्त करने में लगे हुए थे दोनों किसी से काम नहीं थे दोनों पक्के खिलाड़ी हो चुके हैं अंकित पूरी तरह से अपनी मां की जवानी पर छा चुका था वह हर तरीके से अपनी मां को सुख देना चाहता था वह धक्के लगाते हुए कभी अपनी मां की बड़ी गांड को दबोच लेता तो कभी दोनों हाथ आगे की तरफ लाकर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर देता जिससे सुगंधा का मजा दुगना होता जा रहा था,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से खड़े-खड़े अपनी मां की चुदाई करता रहा लेकिन अब उसे आसान बदलने की जरूरत जान पड़ रही थी इसलिए वह धीरे से अपनी मां की बुर में से लंड बाहर निकाल लिया यह देखकर सुगंधा एकदम उत्तेजित अवस्था में प्यासी नजरों से अपनी बेटी की तरफ देखने लगी तो अंकित भी समझ गया था कि उसकी मां उसे ऐसे क्यों देख रही है। उसकी मां कुछ पूछता इससे पहले ही वह बोला,,,)
अब चटाई पर लेट जा मेरी जान अब तेरी लिटा कर लूंगा,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा कुछ बोली नहीं बस गहरी सांस लेते हुए एकदम चटाई पर आकर पीठ के बल लेट गई और खुद ही अपनी दोनों टांगों को खोल दी अपनी मां की मस्त आदत देखकर अंकित की उत्तेजना बढने लगी और वह अपने लंड को अपने हाथ से मुठीयाते हुए अपनी मां की दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल हो गया। और अपने हिस्से की तकिया को उठाकर हुआ अपनी मां की गांड के नीचे लगाने लगा वह कुछ बोलता है इससे पहले ही खुद ही सुगंध अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा ली और जैसे ही तकिया गांड के नीचे अंकित ने लगाया हुआ एकदम सहज होते हुए अपनी गांड को तकिए पर रख दी,,,, यह देखकर अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,)
सब कुछ सीख गई है,,,,।
तो क्या तेरे साथ रहना है तो सब कुछ सीखना पड़ेगा,,,,,,।
बात तो सही है तभी तो ज्यादा मजाआएगा,,, (और इतना कहने के साथ है यह अंकित अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसे अपनी जान पर चढ़ा दिया और एक बार फिर से अपनी मां की बुर में लंड डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था एक बार फिर से समां बंधने लगा पूरी छत पर फच्च फच्च की आवाज गूंजरही थी अंकित की जांघें उसकी मां की मोटी मोटी जांघों से टकरा रही थी,,,, जिससे किसी तबले की तरह ठाप पर ठाप पड़ रहा था,,,, मां बेटे दोनों उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुके थे दोनों की सांस ऊपर नीचे हो रहे थे दोनों का चरम सुख बेहद करीब आ गया था जिसकी वजह से अंकित अपनी मां के ऊपर झुक कर उसकी चूची को अपने मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया था और अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ के नीचे की तरफ ले जाकर के उसे कस के अपनी छाती से चाप लिया था जिससे धक्के लगाने में उसे और भी आसानी हो रही थी। सुगंधा ने भी ऐसा ही कि वह भी अपने बेटे को अपनी बाहों में कस ली थी क्योंकि उसका भी पानी निकलने वाला था और देखते ही देखते अंकित की रफ्तार बड़ी तेजी से बढ़ने लगी और अगले ही पल मां बेटे दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,, दोनों का मदन रस एक दूसरे से मिल रहा था अंकित तब तक धक्का लगातार जब तक की उसके लंड से आखरी बूंद तक उसकी मां की बुर में निकल नहीं गया,,,।
वासना का तूफान शांत हो चुका था अपने लंड को अपनी मां की बुर में से बाहर निकाल कर अंकित अपनी मां के बगल में ही लेट गया दोनों गहरी गहरी सांस ले रहे थे दोनों को अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई थी दोनों एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे और एक दूसरे से बातें कर रही थी बातें करते-करते कब दोनों की आंख लग गई दोनों को पता ही नहीं चला जब हल्का-हल्का उजाला छत पर होने लगा तो सुगंध की आंख खुल गई लेकिन अभी भी अंकित गहरी नींद में सो रहा था,,, दोनों एक दूसरे की बाहों में समाए हुए थे जिसकी वजह से उसके बेटे का लंड ठीक उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था और वह भी पूरी तरह से खड़ा होकर एक बार फिर से सुगंधा का मन डोलने लगा वह धीरे से अपने बेटे से अलग हुई और अंकित गहरी नींद में ही पीठ के बल हो गया वह पूरी तरह से नंगा था और सुगंधा भी पूरी तरह से नंगी थी अपनी और अपने बेटे की स्थिति को देखकर उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,, और अपने बेटे के लैंड को देखकर जो की पूरी तरह से खड़ा होकर आसमान की तरफ मुंह उठाएं देख रहा था यह देखकर उसकी बुर में फिर से मदन रस का तालाब भरने लगा,,,, अभी पूरी तरह से उजाला नहीं हुआ था हल्की-हल्की बस रोशनी दिखाई दे रही थी और इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि वाकई में उसे और उसके बेटे दूसरे की छतों से देखा नहीं जा सकता था वह लोग एकदम सुरक्षित थे,,, और इसी का लाभ लेते हुए अपने बेटे को बिना जगाए सुगंधा अपनी बुर की तरफ देखी जो की पानी छोड़ रही थी और वह धीरे से अपने बेटे के लंड पर सवार हो गई जैसे ही,,, अंकित का मोटा लंबा लंड उसकी बुर में घुसना शुरू हुआ वैसे ही एक बार फिर से वह हवा में उड़ने लगी और जैसे ही पूरा लंड उसकी बुर के अंदर खो गया,,,, वैसे ही अंकित की नींद खुल गई,,,,, जब वह देखा कि उसकी मां उसके ऊपर सवार हो गई है तो वह नींद में होने के बावजूद भी अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर अपनी मां के दोनों दशहरी आम को थाम लिया और उन्हें जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया यह देखकर सुगंधा के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह जोर-जोर से अपने बेटे के लंड पर कुदना शुरू कर दी,,, एक बार फिर से मां बेटे दोनों जवानी के नशे में खो गए,,,,।
थोड़ी देर में दोनों की हवस शांत हो चुकी थी सुगंधा धीरे से अपने बेटे के लंड पर से नीचे उतरी और देखी तो उसके सारे कपड़े छत पर बिखरे पड़े थे,,,, वह धीरे से उठकर खड़ी होगी पूरी तरह से नंगी क्योंकि किसी के देखे जाने का डर उसे बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि वह छत के किनारे नहीं खड़ी थी वह बीचोंबीच थी अगर किनारे खड़ी होती तो किसी की भी नजर उस पर पड़ सकती थी वह धीरे-धीरे अपने कपड़ों को इकट्ठा करने लगी बहन बिल्कुल भी नहीं रही थी वह अपने सारे कपड़ों को इकट्ठा करके खड़ी होकर अपने बेटे की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह अभी भी पीठ केवल लेटा हुआ था और उसका लंड उसकी बुर की मलाई से डूबा हुआ था,,,,,और यह देखकर सुगंधा बोली,,,)
अब उसको तो नीचे बैठा ले की खड़ा ही रखेगा,,,।
जब तक तुम इसके सामने इस तरह से खड़ी रहोगी तब यह कैसे बैठ पाएगा,,,।
यह बात है तब तो मैं जा रही हूं,,,,(और इतना कहकर अपने कपड़ों को हाथ में लिए हुए सुगंधा अपनी गांड मटकाते हुए छत की सीढ़ियां उतरने लगी अंकित यह देखकर एकदम मस्त हो गया और अंगड़ाई लेता हुआ वह भी उठकर बैठ गया तब तक उसकी मां अपनी जवानी का जलवा भिखेर कर नीचे जा चुके थे वह भी कुछ देर तक बैठा रहा और फिर वह भी अपने कपड़े समेट कर उसे बिना पहने ही नीचे आ गया।)
