माँ और उसका बेटा 8

माँ बेटा
तभी उसका फ़ोन बजा , गुप्ता था।
नमिता: हाय गुप्ता सर कैसे हैं?
गुप्ता: अरे बढ़िया हूँ। राज के साथ बात आगे बढ़ी?
नमिता: जी सब कुछ आपके प्लान के हिसाब से हो रहा है।
गुप्ता: बढ़िया, तो फिर तो तुमको वह बहुत गरमकर देता होगा, तो ठंडी कैसे होती हो?
नमिता अभी ही तो ठंडी हुई थी। वह बोली: जी बस ऐसे ही अपने आप पर नियंत्रण रखती हूँ।
गुप्ता: अरे हम मर गयें हैं क्या, हमारे पास आ जाना हम ठंडा कर देंगे।
नमिता: जी आ जाऊँगी। एक बात तो बताइए, कि कहीं आपने सुधाकर जी को मेरे और राज के बारे में तो नहीं बता दिया है?
गुप्ता: कैसी बात कर रही हो, बिलकुल नहीं बताया है और ना हीं बताऊँगा।
नमिता : बहुत बहुत धन्यवाद। मैं नहीं चाहती कि ये बात किसी को पता चले।
गुप्ता : कभी नहीं पता चलेगी। पर तुम कब आओगी, मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है।
नमिता हँसते हुए बोली: जल्दी ही आऊँगी। और उसने फ़ोन रख दिया।
अब नमिता शांत मन से अपना काम करने लगी। लंच ब्रेक के बाद राज का फ़ोन आया। वह बोला: माँ क्या कर रही हो?
नमिता: बेटा काम कर रही हूँ। तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है?
राज: एक बार पूरा कोर्स हो गया है। अब उसको दोहराऊँगा।
नमिता: शाबाश मेरा बहादुर बच्चा।
राज: माँ आपकी याद आ रही है। आपके दूध और चूतर दबाने का मन कर रहा है।
नमिता: धत बदमाश कहीं का। चल जब घर आऊँगी तब जो दबाना ही दबा लेना अभी पढ़ने बैठ।
राज: माँ मेरा लौड़ा अभी खड़ा है आप गंदी बातें करो ना तो मैं मूठ्ठ मार लूँगा।
नमिता : पागल हो गया है क्या ? चल फ़ोन रख।
राज: माँ मूठ्ठ मार लूँगा तो शांत होकर पढ़ सकूँगा। नहीं तो फिर ध्यान भटकेगा।
नमिता: अच्छा रुक मैं एक कोने में जाती हूँ नहीं तो कोई सुन लिया तो ग़ज़ब हो जाएगा।
नमिता एक कोने मेंजाकर बोली: हाँ बोल क्या सुनना चाहता है?
राज: माँ इसको फ़ोन सेक्स कहते हैं।

नमिता: ओह तो बोल क्या बोलूँ?
राज: मान लो मैं और आप पति पत्नी हैं और हनीमून पर गए हैं और वहाँ एक जंगल में हम दोनों अकेले हैं और मैं आपको वहीं खुले में चोदना चाहता हूँ, तो ऐसी स्तिथि में हम जो बातें और काम करेंगे , हम उसकी ही बात करेंगे।
नमिता: ओह चल ठीक है। तू शुरू कर।
राज: देखो निम्मु कितना घना जंगल है, कितना रोमांटिक लग रहा है।
नमिता: मुझे तो डर लग रहा है कि कहीं जानवर ना आ जाए।
राज: मैं आपको अपने से चिपका लेता हूँ और बोलता हूँ , निम्मु मैं हूँ ना फिर क्यों डरती हो? फिर मैं आपके होंठ चूसने लगता हूँ। माँ आप कुछ बोलो ना?
नमिता: तूने तो मेरे होंठ दबा लिए है चूमते हुए , मैं कैसे बोलूँ? हा ह हा हा । वह हँसने लगी।
राज: माँ आप हँसोगी तो कैसे मज़ा आएगा? आप आऽऽह बोल दो ना कम से कम।
नमिता: आहाह्ह्ह्ह्ह।
राज: फिर मैं आपकी चूचियाँ दबाने लगता हूँ और आपके निपल्ज़ को भी उमेठ कर आपको मस्त कर देता हूँ।
नमिता:ओह्ह्ह्ह्ह ये क्या कर रहे हो आह।
राज: निम्मु , मेरी जान क्या चूचियाँ हैं तुम्हारी, बहुत मज़ा आ रहा है । चलो अपना ब्लाउस और ब्रा खोलो , मुझे चूसना है तुम्हारे मम्मे ।
नमिता: आह रुको खोलती हूँ। लो खुल गया।
राज: निम्मु आऽऽहहह क्या मज़ा आ रहा है चूसने में तुम्हारे दुद्दु आऽऽहहह मस्त बड़े बड़े है ।
नमिता: आऽऽऽऽहहह और चूसो मेरे राजआऽऽऽऽ।
राज: आऽऽऽह अब मेरी जान निम्मु अपनी साड़ी उठाओ और उस पेड़ के सहारे खड़ी हो जाओ।
नमिता: आह लो अब डालो मेरे राजा।
राज: क्या डालूँ मेरी निम्मु ?
नमिता: आऽऽह अपना लंड और क्या? प्लीज़ डाल दो ना।
राज: लो डाल दिया आऽऽहहह क्या टाइट बुर है तुम्हारी आऽऽहहहह।
नमिता: ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह चोदो राजाआऽऽऽऽऽऽ ज़ोर से चोदोओओओओओओ
अब राज बोला: माँ मेरा झड़ रहा है आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरा झड़ाआऽऽऽऽ ।
नमिता भी अपनी बुर पर हाथ फेरकर खुजायी और बोली: चल झड़ गया ना। अब पढ़ने बैठ जा।
राज: माँ आइ लव यू। आह बहुत मज़ा आया।मॉ, आप जैसे ही मुझे चोदो बोली, मेरा पानी छूटने लगा। माँ इसको RP कहते है।

नमिता: मतलब?
राज: माँ रोल प्ले मतलब कल्पना करके एक दूसरे की फ़ण्टसी को संतुष्ट करते हैं।
नमिता: ओह चल तू संतुष्ट हुआ ना । अब पढ़ाई कर।
राज: ज़रूर माँ अभी साफ़ करके पढ़ने बैठता हूँ।
नमिता ने बाई कहकर फ़ोन काट दिया।
वह अब राज की हरकतों से फिर से गरम हो गयी थी।
उसने कुर्सी पर बैठकर अपनी जाँघों को भींचा और काम में लग गयी।
शाम को जब वह घर पहुँची तो सीधे राज के कमरे की ओर गयी और वहाँ उसको बड़े ही लगन से पढ़ते देखकर बहुत ख़ुश हो गयी और बोली: मेरा प्यारा बेटा पढ़ता हुआ कितना प्यारा दिखता है!
राज ने माँ को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया और उसके होंठ चूम लिया।
नमिता ने कहा: फिर नियम तोड़े तुम?
अब राज ने उसकी गर्दन और गाल चूमे और बोला: होंठ चूमे है चूसे तो नहीं ना।
अब वह उसकी छातियाँ दबाने लगा।फिर पेट पर भी हाथ फेरने लगा। नमिता थोड़ी देर बाद बोली: चल छोड़ मुझे अब चाय बनाती हूँ।

नमिता के खड़े होते ही राज उसके चूतरों को पकड़कर दबाने लगता है। और उसकी नंगी पीठ और कमर को चूमने लगता है। नमिता उसको थोड़ी देर मज़ा लेने देती है, फिर पलटकर उसके गाल चूमकर बोलती है: चल अब छोड़, बहुत दबा लिया।
अब वह उसके नंगे पेट को चूमते जाता है और उसकी नाभि में अपनी जीभ डाल देता है।
नमिता अब गरम होने लगती है, उसका खड़ा लौड़ा पकड़कर दबाके बोली: देख तेरा फिर खड़ा हो गया। चल अब चाय पी ले और फिर इसको ठंडे पानी से धोके पढ़ने बैठ जाना।इसको अभी थोड़ी देर पहले तो फ़ोन से मैंने ठंडा किया था और तू फिर से इसको खड़ा कर बैठा।
दोनों हँसते हुए किचन की ओर चल पड़े।
राज जाकर किचन के प्लेट फ़ॉर्म में चढ़कर बैठ गया और माँ को चाय बनाते देखने लगा। फिर वह बोला: माँ आप घर पर सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में रहा करो ना, ये साड़ी क्यों पहनती हो?
नमिता: तेरा बस चले तो मुझे नंगी ही घुमाए । मुझे अजीब लगेगा तेरे सामने बिना साड़ी के। फिर कभी कोई मेहमान आ गया तो मैं क्या करूँगी?
राज: मैं दरवाज़ा खोलूँगा मेहमान को बैठाऊँगा तब तक आप साड़ी पहन कर आ जाना।
नमिता: तेरे पास मेरी हर बात का जवाब रहता है।


राज ज़िद करते हुए बोला: माँ प्लीज़ उतार दो ना।
नमिता: मैं देख रही हूँ तू ज़िद्दी होते जा रहा है।
राज: प्लीज़ माँ उतार दो ना।
नमिता: अच्छा बाबा उतार देती हूँ पर इसके आगे अब और कोई ज़िद नहीं करना।
राज ख़ुश होकर बोला: ठीक है माँ आगे से ज़िद बंद ।
नमिता चाय लेकर टेबल पर पहुँची और फिर अपनी साड़ी खोलने लगी। साड़ी उतार कर वह ब्लाउस और पेटिकोट में क्या जँच रही थी। उसके आगे और पीछे दोनों के उभार उसको बहुत कामुक बना रहे थे।
अब वह वैसे ही टेबल पर बैठकर चाय पीने लगी। राज भी चाय पिते हुए उसके ब्लाउस के बाहर से झाँकते हुए मोटे मोटे मम्मों को देखकर मस्त हो रहा था। वह बोला: माँ अपके मम्मे कितने बड़े हैं और जब मैं इनको पियूँगा तो वो और बड़े हो जाएँगे ना?
नमिता: धत बदमाश कुछ भी बकता रहता है?
नमिता सोच रही थी कि आज ही सुधाकर भी उसकी छातियों को बड़ा बड़ा बोलकर उत्तेजित हुए जा रहा था। उसने अपना सिर नीचे करके अपनी छातियों को देखा तो सोचने लगी कि सही में मोटी औरतों के दूध बड़े होते हैं। पर वह तो कहीं से भी मोटी नहीं है और फिर भी उसके दूध बहुत भारी हैं। शायद उसको पतली कमर पर ये छातियाँ ज़्यादा कामुक लगती है।
राज: माँ आपको ऑफ़िस में कोई स्टाफ़ तंग नहीं करता?
नमिता: नहीं तो।
अब वह क्या बोलती कि आज ही वह सुधाकर से चुदवा कर आ रही है।
राज: आज मैंने बहुत पढ़ाई की है अब मैं एक ब्रेक चाहता हूँ।अब मैं सीधे डिनर के बाद ही पढ़ूँगा।
नमिता: चलो ठीक है। तब जा बाहर जा कर खेल के आ जा।
राज: नहीं माँ मुझे आपके पास ही बैठना है।

नमिता हँसते हुए उठी और बर्तन किचन में रख कर आयी और सोफ़े पर बैठ गयी। राज आकर उसकी गोद में लेट गया।
अब वह उसके पेट को सहला कर नमिता से बोला: माँ एक बात पूँछुँ आप नाराज़ नहीं होना।
नमिता: नहीं होऊँगी, पूछ।
राज: माँ, आप शादी से पहले चुदायी का मज़ा ले चुकी थी क्या?
नमिता इस प्रश्न से भौंचक्की रह गयी और बोली: ये कैसा बेहूदा प्रश्न है?
राज: माँ आप बोली थी कि आप नाराज़ नहीं होंगी।
नमिता: मैं इस प्रश्न का जवाब नहीं दूँगी।
राज: इसका मतलब हुआ हाँ।माँ इसमें ग़लत क्या है? मैं भी तो चुदाई का मज़ा ले चुका हूँ। ये सब सामान्य बातें हैं आजकल।
बताओ ना माँ कौन था जिसने आपकी सील तोड़ी?
नमिता हैरानी से अपने बेटे को देखे जा रही थी और सोच रही थी कि हालात कहाँ से कहाँ आ पहुँचे हैं। आज से एक हफ़्ते पहले भी ऐसे किसी सवाल की अपेक्षा अपने बेटे से कर ही नहीं सकती थी।
नमिता: मैं अब भी यही सोचती हूँ कि मुझे इसका जवाब नहीं देना चाहिए।
राज अपनी माँ के दूध को ब्लाउस के ऊपर से ही दबाकर बोला: माँ बताओ ना किसने सबसे पहले ऐसे आपके दूध ऐसे दबाए थे और आपको पहली बार चोदा था ? ये कहते हुए उसने उसकी चूचियों को ज़ोर से दबा दिया उत्तेजना में भर के।
नमिता लाचार सी होकर बोली: आह्ह्ह्ह्ह इतनी ज़ोर से क्यों दबा रहा है दुखता है ना?
तभी राज ने अपना हाथ अपने लौड़े पर रखा और बोला: माँ देखो आपको छूने से कैसा पागल हो जाता है।

नमिता भी मस्ती में आकर उसका लौड़ा पकड़ ली और लोअर के ऊपर से ही सहलाने लगी।
राज: आऽऽऽह माँ आपका हाथ बहुत मज़ा देता है वहाँ पर।
वह नमिता के पेट को चूमते हुए बोला: माँ बताओ ना किसने चोदा था पहली बार?
नमिता अब लौड़े को मुट्ठी मैं भरके मस्ती से भरकर बोली: बेटा मेरी पहली चुदायी मेरे सगे चाचा ने की थी। तब मैं सिर्फ़ xx साल की थी और दसवीं में पढ़ती थी।
राज: सगे चाचा ने? ओह कैसे आपको पटाया था या ज़बरदस्ती की थी?
नमिता: उन्होंने मुझे फुसलाया था ।
राज: आह माँ ज़रा ज़ोर से हिलाओ ना प्लीज़ आह्ह्ह्ह्ह्ह।
नमिता ज़ोर से लोअर के ऊपर से उसका लौड़ा हिलाने लगी।
राज: कैसे फुसलाया बताओ ना? और माँ मैं लोअर उतार देता हूँ प्लीज़ नंगा होकर लौड़ा सहलाने में आपको भी मज़ा आयेगा।
यह कह के वह उठकर अपना लोअर और चड्डी उतार कर फिर से माँ की गोद में लेट गया। अब फिर से नमिता ने उसके मस्त लंड को पकड़ा और सहलाने लगी। अब नमिता की बुर भी पनिया रही थी।
वह बोली: मैं और मेरा भाई घर में रहते थे क्योंकि पापा और मम्मी दोनों टीचर थे। स्कूल के बाद हम घर में अकेले रहते थे। पापा और मम्मी का स्कूल का टाइमिंग अलग अलग था। हमारे चाचा पापा से ५ साल छोटे थे और चाचा और चाची की एक मात्र संतान उनकी लड़की थी जो मुझसे २ साल छोटी थी।
चाचा और उसका परिवार हमारे घर हमेशा आता जाता रहता था । दोनों परिवारों मेंबहुत स्नेह था।

नमिता ने महसूस किया कि राज का लंड बहुत गरम और लोहे सा सख़्त हो गया है।
नमिता: फिर एक दिन भैया खेलने गया हुआ था और मैं घर में अकेली थी तभी चाचा आए । मैं उनको देख कर बहुत ख़ुश हुई। चाचा भी मुझे देखकर ख़ुश हुए और बोले: सब लोग कहाँ है?
मैं: चाचा,पापा मम्मी तो स्कूल में हैं और भय्या खेलने गया है।
मैंने देखा कि चाचा की आँखें चमक उठी।
राज: माँ आपने क्या पहना हुआ था?
नमिता: स्कर्ट ब्लाउस । घर पर भी वही पहनती थी।
राज: माँ आप ब्रा पहनने लगीं थी तब या नहीं?
नमिता: हाँ पहनने लगी थी।
राज: कितने बड़े हो गए थे तब आपके दूध? ये कहते हुए उसने नमिता के निपल्ज़ मसल दिए।
नमिता : आऽऽहहह धीरे धीरे बेटा, संतरों के जितने तो हो ही गए थे।
राज: वाह इतने बड़े । फिर क्या हुआ माँ?
नमिता: मैं जाकर चाचा के लिए पानी लायी। चाचा ने पानी लिया और बोले आओ मेरे पास बैठो। मैं उनके पास बैठने लगी। तभी वह बोले कि आज तुमपर बहुत प्यार आ रहा है , चलो मेरी गोद मेंबैठो।
मैं उनके गोद में बैठ गयी। अब वह मुझे पढ़ाई और इधर उधर की बात पूछने लगे। और बात करते हुए मेरी बाहँ सहलाने लगे। ऐसा करते हुए उनके हाथ मेरे संतरों को साइड से छू जाते थे। मुझे इतनी समझ तो थी कि ये कुछ ठीक नहीं हो रहा है। मैंने उनकी गोद से उठने की कोशिश की तो वह मुझे उतारके फिर से गोद में बिठा लिए और इस बार मेरे पिछवाड़े में एक मोटी सी कड़ी सी चीज़ गड़ने लगी।

राज: ओह माँ उसका लौड़ा खड़ा होकर आपको गड़ने लगा होगा।
नमिता: हाँ वही बात थी। फिर मैंने कहा कि मैं आपके लिए चाय बना लाती हूँ तो वह मेरे होंठ चूम लिए और बोले बेटी इसका रस पिला दो चाय रहने दो। मेरे लिए यह अजीब अनुभव था । वह अब मुझे अपने सीने से चिपका कर मेरे होंठ चूसने लगे। मुझे बड़ा अजीब सा अनुभव हुआ । अब वह मेरी छातियाँ दबाने लगे। मेरी तो आह ही निकल गयी। जब वो मेरे नए नए बने निपल्ज़ को दबाए तब मैं उनके बस में आ गयी। मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। अब वो मेरी जाँघों को सहलाते हुए अपना हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर ले गए और। फिर मेरी पैंटी मैं अपना पंजा जमाकर मेरी बुर को भींचने लगा। मैं तो मज़े से मस्त हो गयी। मेरा पहला अनुभव था। अब मेरे होंठ उनके होंठ से सटे हुए थे। मेरी एक चुचि उनकी मुट्ठी में थी और मेरी बुर वह मसल रहे थे और मैं उनके लंड को अपने चूतरों पर गड़ता हुआ महसूस कर रही थी। मैं इतनी अनजान भी नहीं थी क्योंकि मेरी कई सहेलियाँ चुद चुकी थीं और उन्होंने अपना अनुभव हम सबको बताया था। मैं समझ गयी थी कि चाचा भी आज मुझे चोदने वाले हैं।
अब मेरी बुर गीली हो गई थी। अब तो मैं भी चुदवाना चाहती थी।
राज: माँ आऽऽऽहहहह हाथ हटा लो नहीं तो मैं झड़ जाऊँगा।
नमिता ने देखा कि राज के लौड़े पर प्रीकम चमक रह था। उसने उसको ऊँगली में लिया और उसके सुपाडे पर मल दी। अब वह उसके बॉल्ज़ सहला रही थी ताकि उसका झड़ना रुक जाए।

थोड़ी देर बाद राज बोला: हाँ माँ अब सहलाओ अभी रुक गया है।
नमिता ने फिर लौड़े पर हाथ चलाना शुरू किया। फिर राज के कहने पर अपनी कहानी आगे बढ़ाई।
नमिता ने कहना शुरू किया: अब चाचा मेरे संतरों को और निपल्ज़ को दबाने लगे। जैसे ही उनका हाथ पैंटी पर रखा मैं सिहर उठी। अब वह पैंटी के साइड से ऊँगली डालकर मेरी बुर को छूकर मुझे मस्ती से भर दिए। अब वह मेरी बुर के clit को रगड़ने लगे और मैं सिसकियाँ लेने लगी। अब वह बोले कि बेटी चलो तुम्हारे बिस्तर पर ज़्यादा मज़ा आयेगा।
फिर वह मुझे गोद में उठाकर मेरे होंठ चूसते हुए और मेरे चूतरों को दबाते हुए मेरे ही बिस्तर पर लिटा दिया। अब वह मेरे ऊपर आकर मुझे चूमते हुए मेरी टॉप उठा के मेरी चूचियाँ ब्रा में से चूमने लगे। फिर उन्होंने एक ही झटके में मेरा टॉप उतार दिया। अब मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे संतरों को दबा रहे थे।

फिर मेरी ब्रा उतारके मेरे निपल्ज़ को दबाकर मुझे एकदम से गरम कर दिया। अब उसने मेरी स्कर्ट भी उतारी और मेरी जाँघों को चूमने लगे और मेरी पैंटी उतारके मेरी बुर को ख़ूब चुमें और फिर एक ऊँगली डाले। मैं चिल्लाई दर्द से। वह ऊँगली निकाले और बोले कि कभी चुदाई नहीं हो क्या? मैंने शर्माते हुए नहीं में सिर हिला दिया।
अब उन्होंने अपने कपड़े खोल दिए और मैंने अपनी ज़िंदगी में पहला लंड देखा। उस समय मुझे वह बहुत बड़ा लगा था। फिर उसने मेरे चूतरों के नीचे तकिया रखा और एक क्रीम की शीशी मेरे ही कमरे से लिया और मेरी बुर में एक ऊँगली से क्रीम लगाया। फिर उन्होंने अपने लंड पर भी क्रीम मली और मेरे बुर में लगाकर एक धक्का मारा और मैं दर्द से रोने लगी। फिर मुझे इतना ही याद है किवह मेरे दर्द की परवाह नहीं करके मुझको बहुत देर तक चोदे और मेरी चूचियों को बहुत चूसे।
कुछ देर बाद दर्द कम हुआ और मैं भी बहुत मस्त होकर मज़ा लेने लगी और फिर पहली बार चुदायी मेंमैं झड़ी। वह भी झड़े और फिर एक तौलिया लाकर मेरी बुर साफ़ किए वहाँ ख़ून भी लगा हुआ था। उन्होंने मेरी मदद से बिस्तर की चादर बदली उसमें भी ख़ून लगा था।
मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। चाचा ने कहा कि तुम सबको बताना कि चोट लग गयी है। मैंने ऐसे ही किया।

इस तरह मैं पहली बार छोटी उम्र में ही घर के ही सदस्य से चूद गई।
राज: माँ फिर तो कई बार आपको वो चोदे होंगे।
नमिता: हाँ कई बार किया उन्होंने। चल अब अपना लौड़ा अंदर कर ले। मेरा हाथ हिला हिला के दुःख रहा है।
राज: माँ मेरा झड़ने वाला है । ज़रा ज़ोर से हिलाओ ना।
यह कहते हुए उसकी छातियाँ दबाने लगा। जल्दी ही वह झड़ गया और नमिता का हाथ उसके वीर्य से भर गया।
वह उठकर बाथरूम गयी और हमेशा की तरह उसका वीर्य को चाटकर मस्त हो गयी।
उस दिन और कोई ख़ास बात नहीं हुई और खाना खा कर राज पढ़ने चला गया और बोला कि मैं रात को सोने के पहले गुड नाइट करने आऊँगा। अब नमिता TV देखकर सोने चली गयी। राज को शाम की हरकतों की वजह से वह गरम होकर अब फिर से शांत होने की कोशिश कर रही थी। उसे नींद नहीं आ रही थी।

तभी करीब ११ बजे राज के आने को आहट हुई वह सोने का नाटक करती हुई करवट ले कर दीवार की तरफ़ मुँह करके सो गयी। जैसे ही राज अंदर आया तो उसने देखा कि माँ की पीठ और उसके बड़े चूतर उसके सामने थे।
उसने धीरे से कहा: माँ आप जाग रही हो क्या?
नमिता मन ही मन मुस्कुरा के चुप रही और सोने का नाटक करती रही। राज आकर बिस्तर पर बैठा और नमिता के चूतरों को देखकर मस्त होने लगा और उसने धीरे से उनपर पेटिकोट के ऊपर से हाथ फेरा। नमिता की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया ना देखकर वह उनको अब हल्के से दबाने लगा। उसे पता चल गया कि माँ ने पेटिकोट के नीचे की पैंटी उतार दी है। वह समझ गया कि माँ ने पैंटी बाथरूम में उतारी होगी। वह अब उठा और बाथरूम में गया और पैंटी को उठाकर सूँघने लगा।
नमिता भी उसको बाथरूम में जाता देख कर उसके पीछे से बाथरूम में झाँकी । दरवाज़ा खुला था और वह उसकी पैंटी को सूंघ रहा था और फिर उसने अपना लोअर नीचे किया और अपना लौड़ा निकाला और उसपर पैंटी रगड़ने लगा। नमिता को लगा कि कहीं उसकी बुर पानी ना छोड़ दे। वह सोच रही थी कि यह लड़का कैसे पागल हो रहा है उसको चोदने के लिए?
फिर राज वहाँ से हटा और पैंटी हाथ मेंलेकर वापस बिस्तर पर आ गया। नमिता जल्दी से उसी अवस्था में आकर बिस्तर पर आकर लेट गयी।

राज अब आकर नमिता के बग़ल में बैठ गया और उसके चूतरों को दबाते हुए उसकी दरार में पेटिकोट के ऊपर से ही उँगलियाँ डालने लगा। अब नमिता आऽऽहहहह करके उठने का नाटक की और बोली: ये क्या कर रहा है तू?
राज : माँ आपको गुड नाइट कहने आया था पर आपका पिछवाड़ा इतना कामुक है कि बहक गया था।
नमिता: और ये मेरी पैंटी को क्यों हाथ में लिए हुए है?
राज उसको सूँघते हुए: माँ आऽऽऽहहह क्या गंध है आपकी बुर की।
नमिता: तू हद दर्जे का ढीट होता जा रहा है। मैं तेरा क्या करूँ?
राज: बस माँ एक बार चुदवा लो ना ।
नमिता: चल दफ़ा हो जा यहाँ से । नियम नहीं तोड़े जाएँगे।
राज: अच्छा माँ ऐसा करो आप वैसे ही करवट लेकर सो जाओ में अपना लौड़ा आपके पिछवाड़े में रगड़ लेता हूँ।

ये कहते हुए उसने माँ की छातियाँ दबायीं और उसको करवट में लिटा दिया। अब वह उसके बग़ल में लेट गया और अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया और नमिता की गाँड़ की दरार में पेटिकोट के ऊपर से ही सेट कर दिया।फिर बोला: माँ मुझे एक हाथ आपके नीचे से ले जाना है, आप ज़रा गर्दन उठाओ।
नमिता ने करवट में ही लेटे हुए अपना ऊपर का हिस्सा उठाया और राज ने एक बाँह उसके बदन के नीचे से डाल दी । इस तरह उसका हाथ उसकी एक चुचि तक पहुँचा और दूसरे हाथ से उसने अपने लौड़े को उसकी गाँड़ की दरार में लगाया और अब अपने दूसरे हाथ से उसके पेट और छाती सहलाते हुए वह अपनी कमर हिला कर अपना लौड़ा उसके पेटिकोट के ऊपर से उसकी गाँड़ और बुर पर रगड़ने लगा। अब नमिता का भी बहुत बुरा हाल था वह भी उसके लौड़े को कपड़े के ऊपर से अपने बुर के clit दाने में महसूस कर रही थी।
ना चाहते हुए भी उसकी कमर भी राज की कमर के साथ ही हिलने लगी मानों वह दोनों चुदायी ही कर रहे हों।

राज उसकी दोनों चूचियों को दबाते हुए अपने लौड़े को कपड़े समेत उसकी बुर में धकेल रहा था और उत्तेजना से भरकर माँ आऽऽऽहहह बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ है कहता भी जा रहा था।
नमिता बहुत ही मुश्किल से अपनी सिसकारियाँ क़ाबू में रख रही थी।
तभी राज उसके गाल और गर्दन चूमने लगा और बोला: माँ मज़ा आ रहा है?
नमिता को बहुत मज़ा आ रहा था पर नियम याद करके वह बोली: चुप कर जल्दी से अपना झाड़ ले और सोने जा। आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह कहते हुए वह ख़ुद झड़ने लगी। पर उसने अपने जाँघें भींच लीं और राज को पता नहीं चलने दिया कि वह झड़ गयी है।
अब राज भी ज़ोर से कमर हिलाकर झड़ने लगा। और उसका रस नमिता के पेटिकोट में उसके गाँड़ के आसपास गिर गया।
नमिता चुप चाप पड़ी रही और अपने ऑर्गैज़म यानी स्खलन का आनंद ले रही थी अपनी बुर को जाँघों के भींच करके।

राज हाँफते हुए उठा और बिस्तर पर बैठा रहा। नमिता भी उठी तो राज खड़ा हो गया। उसका वीर्य से लिपटा लौड़ा नमिता को बहुत कामुक लगा। और उसका हाथ अपने आप ही उसपर चला गया और उसने उसकी सफ़ाई के बहाने अपने हाथ में उसका वीर्य पोंछ लिया। फिर बाथरूम में जाकर हमेशा को तरह उसका वीर्य चाटा और फिर आनंद के साथ अपना हाथ धोकर बाहर आयी।
राज अभी भी नंगा ही बैठा हुआ था।
नमिता बोली: चलो बेटा अब कपड़े पहनो और सो जाओ।
राज: माँ आज आपके पास सो जाऊँ ? कुछ गड़बड़ नहीं करूँगा। वैसे भी देखो ना ( अपने लौड़े की तरफ़ इशारा करते हुए ) ये अब ठंडा हो गया है। प्लीज़ सोने दो ना।
नमिता: चल ठीक है सो जा । पर अपना तकिया और चादर ले आ।

राज ख़ुश होकर माँ से लिपट गया और अपनी चड्डी और लोअर पहनकर अपना समान लेने अपने कमरे में चला गया। नमिता ने जल्दी से अपना पेटिकोट उतार दिया और फिर दूसरा पेटिकोट पहन ली। अब वह अपनी पैंटी जो राज ले आया था और पेटिकोट बाथरूम में रखी और बाहर आकर बिस्तर पर लेट गयी। तभी राज भी अपना तकिया लाकर माँ के बग़ल में लेट गया। उसने नमिता को खींचकर अपनी तरफ़ को करवट दिलाई और ख़ुद उसकी छातियों में मुँह छुपाकर सो गया।थोड़ी देर तक वह उसकी छातियों के नरम अहसास को महसूस किया फिर नींद की आग़ोश में चला गया। नमिता भी थोड़ी देर उसकी पीठ थपथपायी और फिर सो गयी।
राज बहुत गहरी नींद सो रहा था जब नमिता की नींद खुली। उसने देखा कि अभी भी वह उससे चिपका हुआ था। वह सोया हुआ बहुत ही भोला और प्यारा लग रहा था। उसने उसके गाल चूम लिये और धीरे से उसको उठाकर बोली: बेटा उठो सुबह हो गयी। अब पढ़ाई कर लो , मैं तुमको चाय देती हूँ।


वह करवट से सीधा हुआ और उसका लोअर का तंबू नमिता को मस्त कर गया। वह जानती थी कि ये मोर्निंग इरेक्शन है पर आऽऽहहह क्या मस्त लंड है। वो सोचने लगी कि जब वह उसके अंदर जाएगा तो कितना मज़ा देगा।
राज अपनी माँ को अपने लौड़े को घूरता हुए देखकर मुस्कुरा कर बोला: माँ पकड़कर प्यार कर लो ना इसको, ऐसे क्या घूरे जा रही हो?
नमिता झेंप कर उठी और जाते हुए बोली: मुझे और भी काम है इसको पकड़ने के अलावा।
राज भी अब अपने कमरे में चला गया और फ़्रेश होकर पढ़ने बैठा।
थोड़ी देर बाद नमिता चाय लाकर उसको दी। राज पढ़ते हुएचाय पीने लगा। तभी नमिता ने कहा: बेटा नाश्ता बनेगा तो मैं बुला लूँगी।
राज: ठीक है माँ ।

नमिता चली गयी और नहाकर नाश्ता बनायी और फिर राज और वह दोनों खाकर उठे। राज को नमिता ने याद दिलाया : बेटा, कल तेरा पहला पेपर है, पूरे ध्यान से पढ़ना।
राज: माँ याद है, और यह भी याद है कि अगर ८०% नम्बर आए तो ब्लाउस उतर जाएगा और मुझे ब्रा के ऊपर से आपकी चुचि दबाने को मिलेगी।
नमिता : बहुत ही बदमाश हो गया है तू, हर समय बस यही सब सोचते रहता है।
राज: माँ आप नहीं समझ सकती कि इस सबका मेरे लिए क्या मतलब है?
नमिता : अच्छा अब मैं ऑफ़िस जा रही हूँ। आज फिर फ़ोन सेक्स का चक्कर नहीं चलाना।
राज आकर उससे लिपट गया और उसको बाई कहा।
नमिता ऑफ़िस के लिए ऑटो ली तभी गुप्ता का फ़ोन आया।
नमिता: हाय कैसे है। आप?
गुप्ता: मैं ठीक हूँ । राज की पढ़ाई कैसी चल रही है।
नमिता: अच्छी चल रही है।

गुप्ता: तुम्हारी चुचि मर्दन चल रहा है?
नमिता: गंदे आदमी। तुमको बस यही पूछना है?
गुप्ता: अरे मैं तो बस यही जानना चाहता हूँ कि तुम्हें वह ज़्यादा तंग तो नहीं कर रहा है? और नियम पालन कर रहा है या नहीं? कहीं तुमको चोद तो नहीं लिया?
नमिता: ओह आप और आपके गंदे ख़याल?
गुप्ता: अभी कहाँ हो?
नमिता: ऑफ़िस जा रही हूँ, रास्ते में हूँ।
गुप्ता: चलो आज छुट्टी ले लो और हमारे पास आ जाओ । वैसे भी चूचियाँ दबा दबा कर बेटे ने गरम कर ही दिया होगा। हमारा फ़ायर ब्रिगेड का इंजन तुम्हारीआग को शांत कर देगा।
नमिता: अपना इंजन अपने पास रखिए , मुझे जब जलन होगी तब आ जाऊँगी बुझवाने के लिए।
गुप्ता: वह तो जब दो पेपर हो जाएँगे तब तुम मेरे पास आओगी ही।
हा हा ।

नमिता भी हँसते हुए फ़ोन काट दी।
जैसे ही नमिता ऑफ़िस पहुँची सुधाकर का फ़ोन आया । वह बोला: कहाँ हो?
नमिता: बस ऑफ़िस के सामने पहुँचने वाली हूँ।
सुधाकर: वहीं रुको , मैं भी ऑफ़िस पहुँचने वाला हूँ। वहीं बाहर इंतज़ार करो।
नमिता: जी सर । सुधाकर ने फ़ोन काट दिया।
नमिता ऑटो से उतरकर इंतज़ार करने लगी तभी सुधाकर की कार उसके पास आ कर रुकी और सुधाकर ने उसे अंदर आने का इशारा किया। नमिता अंदर बैठ कर पूछी: सर क्या हो गया , कहीं जाना है क्या?
सुधाकर मुस्कुरा कर बोला: कल तुम्हारे साथ जल्दी जल्दी में मज़ा लिया पर दिल नहीं भरा। इसलिए आज दिन भर मज़े लेने का प्लान बनाया है।
नमिता भी हँसकर बोली: वाह इतने दिन से तो आप ने मुझे छोड़ रखा था अब अचानक मैं आपको फिर से पसंद आने लगी?
सुधाकर: यार कल तुम्हें चोदने के बाद समझ आया कि मैं क्या मिस कर रहा हूँ।
नमिता के निपल्ज़ कड़े हो गए। राज ने उसके बुर की प्यास बहुत बढ़ा दी थी। वह बोली:ओह, तो किसी होटेल में ले जा रहे हैं?
सुधाकर: नहीं , यही तो सर्प्राइज़ है , देखो कहाँ ले जाता हूँ?
नमिता थोड़ी सी परेशान हुई और बोली: देखिए आप मेरे पति के दोस्त हैं और मेरे बॉस भी।मुझे भी कहीं भी ले जाकर ज़लील मत करिएगा।
सुधाकर: अरे जानू तुमने ऐसे कैसे सोच लिया कि मैं तुम्हारी बदनामी करवा सकता हूँ। तुम जानती हो कि मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *