मां को चोदने के लिए लोगों ने उकसाया 10

माँ बेटा

संगीता: बहुत ही ज़्यादा खूबसूरत हो नफ़ीसा। अभी चुदवाओगी?

नफ़ीसा किसी आदमी के सामने पहली बार ही नंगी हुई थी। लेकिन उसके चेहरे को देख कर लग रहा था, कि उसे किसी तरह की शर्म नहीं थी।

नफ़ीसा: हमारे घर में लड़कियां और औरतें आती रहती हैं, और अब्बू अंदर वाले कमरे में उन्हें ऐसे ही चोदते है जैसे आप लोग कर रहे हैं। चूदाई देखते-देखते मैं भी बहुत गर्म हो जाती हूं, और मन करता है कि अंदर जा कर अब्बू से चुदवा लूं। लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई। दीदी, आप बाद में लीजिएगा, मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है। अमित मुझे चोदो।

संगीता: बस दो मिनट नफ़ीसा।

अमित समझ गया और अगले 5-7 मिनट उसने बहुत ही ज़ोरदार चूदाई की। संगीता बाप-बाप करने लगी।

संगीता: बस अमित और नहीं ले सकती। लंड निकाल लें और इस परी को प्यार से चोदना।

नफ़ीसा मेरे बग़ल में लेट जा। नफ़ीसा किसी कठपुतली जेसी बेड पर लेट गई। अब्बू की सैकड़ों चुदाई देख कर जो असर नफ़ीसा पर हुआ था, उससे ज़्यादा असर अमित के लंबे और मोटे लंड को एक बार ही देख कर हो गया था। नफ़ीसा ने टांगों को फैलाया और अमित की ओर दोनो बाहों को फैलाया। अमित का लंड पूरा टाइट था। फिर भी अमित खूबसूरत जवानी का स्वाद लेने से अपने को नहीं रोक सका।

होंठ से शुरु कर गाल, चूचियों, पेट को चूसते चाटते हुए चूत पर आया। दोनों हाथों से झांट को अलग किया, तो अमित को लड़की की चूत की स्लिट, क्लिट और लंड घुसाने का छेद दिखा। सबसे पहले उसने क्लिट को चूसना शुरु किया, तो लड़की का पूरा बदन सिहर उठा।

नफ़ीसा: आह, बहुत बढ़िया… मैंने अब्बू को कभी किसी की भी बूर पर मुंह लगाते नहीं देखा था। अमित बहुत बढ़िया लग रहा है।

अमित ने क़रीब 15 मिनट बूर के अंदर-बाहर खूब बढ़िया से चाटा और चूसा। नफ़ीसा की लाउड सिसकारी बाहर बैठे चारों असलम, हेडमास्टर, उसकी घरवाली सुशीला, और इंदिरा को साफ़ साफ़ सुनाई देने लगी।

इंदिरा: कितने बेशर्मी कर रहे हैं तीनों!

नफ़ीसा: दीदी, आपके यार ने मेरी चूत फाड़ दी, अमित निकाल लो बहुत मोटा है।

सभी ने नफ़ीसा की लाउड और दर्द भरी आवाज़ सुनी। अमित ने असलम की बेटी की कुंवारी चूत में अपना घोड़े के लंड जैसा लंड पेल दिया था। संगीता ने कुछ देर देखा कि कैसे अमित एक कमसिन कुंवारी लड़की को चोद रहा‌ था,‌और नफ़ीसा भी ख़ुशी-ख़ुशी मस्ती से चुदवा रही थी।

नफ़ीसा: मैं तो छोटी अम्मी (नगमा) के साथ ही तुमसे चुदवाने को आने वाली थी, लेकिन तुम्हें किसी कुंवारी चूत में लंड पेलने में डर लगा था, इसलिए मुझे अपने रुम में आने से मना कर दिया। लेकिन देखो मेरी चूत कितने प्यार से तुम्हारे मूसल जैसे लंड से चुदवा रही है। मज़ा आ गया यार।

संगीता: कितनी गर्मी है तेरी बूर में लड़की!

बोल कर संगीता नंगी ही रुम से बाहर आई।

संगीता: मां, आंटी, देखिए कैसे एक शेर (अमित) बकरी को चोद रहा है।

हेडमास्टर: बेटी, इतनी बेशर्मी ठीक नहीं। अमित की मां क्या बोलेगी कि संगीता कितनी गंदी लड़की है।

बाहर जितने भी लोग थे सभी एक साथ अंदर घुस गये।

असलम: बेटी, ये क्या कर रही हो?

नफ़ीसा: आप सब देख ही रहे हैं कि हम और अमित क्या कर रहे हैं। और अब्बू, आप तो मुझे खुद ही अमित से चुदवाना चाहते थे मुझे। सच अब्बू, छोटी अम्मी बिल्कुल सही कहती है। अमित जैसा चोदने वाला कभी-कभी ही पैदा होता है।

19 साल की लड़की की बात सुन कर सभी स्तब्ध थे। बेड पर अमित आराम से रगड़-रगड़ कर नफ़ीसा को चोद रहा था। नफ़ीसा के अब्बू असलम ने नंगी खड़ी संगीता की कमर में हाथ डाला, और दूसरी तरफ़ से हेडमास्टर ने भी अपनी बेटी के कमर में हाथ डाला।

इंदिरा: सुजाता बहन, अब ये दोनों जल्दी बाहर नहीं निकलने वाले, और संगीता अगर तुम्हें भी बहुत गर्मी है, तो तुम भी ठंडी हो जाओ। मुझे जो खिलाना है खिला दीजिए, मैं जल्दी चली जाऊंगी। मुझे इस तरह की गंदी हरकतें बिल्कुल पसंद नहीं है। हेडमास्टर साहब, आपकी बेटी हम सब के सामने नंगी खड़ी है, उसे डांटने-मारने के बदले आप खुद बेटी को चोदने के चक्कर में है। कितना गंदा ज़माना आ गया है। और अमित, तुम मुझे अपना चेहरा मत दिखाना। छी! मुझे नहीं मालूम था कि मेरा बेटा इतना गंदा आदमी है।

इंदिरा ने इतनी रुखाई से कहा कि कोई भी उसका जवाब नहीं दे पाया। इंदिरा रुम से बाहर आ गई, तो उसके पीछे सुजाता और हेडमास्टर भी आ गये। असलम ने संगीता की बूर को मसला।

संगीता: क्या अमित, तेरी मां बहुत ही ठंडी औरत है। मैंने ये सब उसे गरम करने के लिए किया। लेकिन कुतिया ने सारा मूड ख़राब कर दिया। छोड़ असलम अब चुदाई का मूड नहीं है। अमित के बाद तू भी नफ़ीसा को, अपनी बेटी को चोद लेना।

संगीता ने पूरे कपड़े पहने और बाहर आ गई। असलम ने थोड़ी देर बेटी की चुदाई देखी।

अमित: असलम भाई, अब तो जब तक मैं यहां हूं, इन दोनों मां-बेटी, नगमा और नफ़ीसा को प्यार करता ही रहूंगा। लेकिन मेरी मां एक-दो दिन में चली जायेगी। तुम रंडी को पटाने की कोशिश करो, खुद चोदो, दूसरे से भी चुदवाओ। मुझे अपनी इस गुड़िया को प्यार करने दे।

असलम: बेटी, मुझे माफ़ करना, मैं तुम्हें अपनी बेटी को नहीं चोदना चाहता था। लेकिन अब जब तुम्हें नंगी देख लिया, चुदवाते देख रहा हूं, तो अपने को रोकना मुश्किल हो रहा है।

बोलते हुए असलम ने बेटी की चूचियों को मसला, जांघों को दबाया और सहलाया। अमित के हर धक्के का जवाब चूत्तड़ों को उचका कर, हाथ से अमित के बदन को सहलाते हुए दे रही थी।

नफ़ीसा: अब्बू, नंगी होने बोलोगे तो दिन भर नंगी रहूंगी, चूची दबाने दूंगी, लंड भी सहला दूंगी, लेकिन अगर कभी मेरी चूत में हाथ भी लगाया, मुझे चोदने की कोशिश की, तो मैं खुद तेरा लंड काट दूंगी। मेरा दलाल तू नहीं ललन चाचा है।

बेटी की बात सुन कर असलम भी दुखी होकर बाहर आ गया। बाहर सभी खाने के लिए बैठ गये थे। इन लोगों ने खाना खा लिया तब नफ़ीसा और अमित कपड़े पहन कर बाहर आये। सुजाता ने दोनों को खाना दिया, और इंदिरा ने हेडमास्टर से कहा कि वो उसे रेखा के घर पहुंचा दे। संगीता और उसकी मां ने भी बहुत रोका, लेकिन इंदिरा नहीं रुकी। हेडमास्टर के साथ बाहर आ गई। हेडमास्टर उसे कॉलेज के बारे में बताने लगे।

हेडमास्टर: यहां पढ़ाई बहुत ही बढ़िया होती है, लेकिन यहां का माहौल बहुत ही गंदा है। समझ लीजिए कि इक्का-दुक्का औरत को छोड़ कर सभी औरतें और चुदाई की उम्र की जितनी भी लड़कियां हैं, सभी धंधा करती है। मेरी दोनों बेटी और घरवाली भी। संगीता ने अब तक एक अमित से सिवा किसी और स्टूडेंट्स से नही चुदवाया है। लेकिन मेरी घरवाली 5-10 हज़ार के लिए बेटे के उम्र के लड़कों से चुदवाती है। यहां के कई टीचर अपने स्टूडेंट को चोदते हैं।

हेडमास्टर: एक लेडी टीचर ने खुद मुझसे कहा और मेरे बोलने पर अमित ने उसे ऐसा चोदा कि वो अमित से रोज़ चुदवाना चाहती है। वहीं नहीं, अब यहां की सभी औरतें और लड़कियां आपके बेटे से चुदवाना चाहती है। आपने खुद देखा कि सिर्फ़ अमित का लंड ही सबसे लंबा और मोटा नहीं है, वो चूदाई भी सबसे बढ़िया करता है। मैं तो कहता हूं कि आप भी शर्म छोड़ो और बेटे से चुदवाओ।

इंदिरा नाराज़ नहीं हुई। चलते हुए उसने हेडमास्टर का हाथ पकड़ लिया। उसने थोड़ा झूठ कहा-

इंदिरा: अमित के बाबू जी का लंड भी अमित जैसा है, और वो भी कभी एक घंटा से कम नहीं चोदते। इसलिए मुझे कभी किसी दूसरे की ओर देखने की ज़रूरत नहीं है। और अगर कभी ज़रूरत हुई तो अमित को जब बोलूंगी अपनी मां को खुश कर देगा। हेडमास्टर साहब आप से मिल कर बहुत ख़ुशी हुई। मेरे बेटे का ध्यान रखिएगा।

रेखा का घर आ गया। रेखा और अरविंद दोनों ने हेडमास्टर से बहुत कहा लेकिन हेडमास्टर ने कहा कि काफ़ी रात हो गई है बाद में कभी आयेंगे। इंदिरा अंदर आई और रेखा ने दरवाज़ा बंद कर दिया।

इंदिरा: रेखा, तेरे साथ की चूदाई ने अमित को कितना बेशर्म बना दिया है! अरविंद, सुजाता तुम्हारी बहुत तारीफ़ कर रही थी। मुझे भी दिखाओ की तुम कितने बड़े मर्द हो।

इंदिरा ने खुद ही अरविंद से कहा कि वो उसे चोदे। अमित और नफ़ीसा की चूदाई देख कर इंदिरा बहुत ही ज़्यादा गर्म हो गई थी। रेखा देखती रही और इंदिरा ने पहले अरविंद को नंगा किया। उसकी जांघों और चूत्तडों को सहलाते हुए लंड को चूसने लगी। रेखा ने देखा कि जितनी देर इंदिरा ने अरविंद का लंड चूसा, पूरे समय वो अरविंद के आंड (दोनों बॉल्स) से भी खेलती रही। रेखा भी लंड चूसती थी लेकिन वो 10-12 मिनट से ज़्यादा नहीं चूस सकती थी।

लेकिन इंदिरा ने पूरा एक घंटा चूसा। अरविंद को खुद आश्चर्य हुआ कि वो इतनी देर अपने को कैसे कंट्रोल कर सका। इंदिरा को जब लगता था कि अरविंद का लंड रस फेंकने वाला था, तो वो आंड को इस तरह दबाती थी कि अरविंद का सारा जोश ख़त्म हो जाता था और लंड बिना पानी गिराये ढीला होने लगता था। लेकिन फिर वो इस तरह चूसने लगती थी कि लंड फिर टाइट हो जाता था। और जब तीसरी बार लंड से पानी निकलने का टाइम हुआ, तब इंदिरा ने अपना मुंह हटा लिया, और रस का सारा स्प्रे इंदिरा के चेहरे पर ही गिरा।

रेखा: तुमने इतनी देर कैसे चूसा? मैं तो मुश्किल से दस मिनट ही चूस पाती हूं।

इंदिरा: बहुत प्रैक्टिस करनी पड़ी है। मैं चाहूं तो अमित जैसे चुदक्कड़ को भी 5 मिनट में ही ठंडा कर दूं, या फिर किसी ढीले लंड वाले का भी लंड एक घंटा तक टाइट रख सकूं। अरविंद, तुममें बहुत स्टैमिना है।

रेखा: ऐसे स्टैमिना का क्या फ़ायदा? 50 साल का असलम सभी को मुफ़्त में चोदता है और ये साहब संगीता जैसी रंडी को 20-25 हजार देकर चोदते हैं।

इंदिरा खुद नंगी हो गई, और अरविंद को इशारा किया कि उसकी बूर को चाटे।

इंदिरा: सिर्फ़ कुत्ता जैसा चाटना, कुछ भी मत चूसना।

रेखा: तुम्हारा बेटा तो बूर के अंदर-बाहर चूस-चूस कर ही ठंडा कर देता है।

इंदिरा: साला गधा है। 10-15 मिनट बूर को चाटने से ही ठंडी से ठंडी औरत चुदाई की गर्मी से पागल होने लगती है। बहुत हुआ तो क्लिट को चूसो, बाक़ी बूर में चूसने लायक़ और कुछ नहीं है। बूर को चूस कर ही औरत को ठंडा करना है तो कोई ना-मर्द भी किसी भी रंडी को ठंडा कर देगा। फिर लंड का लंबा, मोटा, या कड़ा होने का क्या मतलब?

इंदिरा: रेखा, हेडमास्टर ने कहा कि यहां की सभी औरतें, सभी टीचर की घरवाली धंधा करती है, फिर तुम क्यों शरीफज़ादी बन कर बैठी हो। हेडमास्टर ने खुद कहा कि उसकी घरवाली, बुढ़िया सुजाता को भी स्टूडेंट्स चोदते है। फिर तुझसे बढ़िया माल कौन है? अरविंद, बढ़िया चाट रहे हो, चाटते रहो।

एक तरफ़ इंदिरा अरविंद से अपना बूर चटवा रही थी, वहीं दूसरी तरफ़ रेखा को धंधा करने के लिए उकसा रही थी।

इंदिरा: अमित बता रहा था कि उसका कोई दोस्त तुम्हें चोदने के लिए 2 लाख देने को तैयार है। बन्नो, आज के जमाने में रुपया सबसे बड़ी ताक़त है। अरविंद से तुम्हें बच्चा नहीं हुआ तो अमित ज़रूर तुम्हारे पेट में बच्चा डाल चुका है। तुमने 11-12 साल इस मादरचोद (अरविंद) को बहुत मज़ा दे दिया। अब तुम भी खुल कर मज़ा मारो। साला खुद तो रंडी-पना करता है, और तुम्हें कमरे में बंद करके रखता है। 2 लाख बहुत होता है रेखा, मौक़ा हाथ से मत जाने दे। मुझे अगर कोई 25-50 हज़ार भी दें तो हर रोज़ धंधा करुंगी।

रेखा: दीदी, हर रोज़ मेरे पास गंदी-गंदी चिट्ठियां आती है। सभी में मुझे चोदने की ही बात होती है। लेकिन किसी में भी भेजने वाले का नाम नहीं रहता है। आठ साल में अमित ही एक मात्र लड़का है जिसने सामने से आकर बात की। मैंने उसे घर बुलाया और साले ने आते ही चोद लिया।

यहां होस्टल में चार गार्ड हैं वही सब यहां की औरतों और लड़कियों की दलाली करते हैं।

रेखा: बाक़ी तीन क्या करता है नहीं जानती। लेकिन असलम अपनी सभी माल को खुद तो मुफ़्त में चोदता है, और दूसरों से क़ीमत लेकर चुदवाता है। उसने भी कहा था कि कोई लड़का है जो मुझे चोदने के लिए दो लाख देगा। मैं उस लड़के से चुदवा भी लूं लेकिन असलम या दूसरा गार्ड कितना भी बढ़िया चोदता हो मैं उससे नहीं चुदवाऊंगी।

इंदिरा: बहुत चाट लिया और अब आराम से चोदो।

सुनते ही अरविंद ने अपना पोज़ीशन लिया और जो लड़का उसकी घरवाली को चोद रहा था उसकी मां को चोदने लगा।

इंदिरा: असलम या दूसरे गार्ड को मारो गोली। अमित के दोस्त से चुदवा लो, और दो लाख लेलो। और मैं विश्वास से कह सकती हूं कि जो भी तेरी बूर में एक बार लंड पेलेगा, वो भी अमित जैसा तेरा कुत्ता हो जायेगा। मैं नहीं बोलती हूं कि जो भी रुपया दिखाए उससे चुदवा ले। 2-3 ऐसे लड़कों को चुनो जो तुम्हें बढ़िया क़ीमत दे। तेरी चूत को ठंडा करने के लिए अमित है ही।

रेखा बढ़िया से जानती थी कि क़रीब-क़रीब सभी टीचर की घरवाली धंधा करती थी, और शान से रहती थी। ना कोई बदनाम करता था, ना कोई बदनाम होती थी। रेखा ने भी रंडी बनने का फ़ैसला कर लिया। रंडी पर संगत का असर तो होना ही था।

रेखा: अगर तुम भी मेरे साथ रहो तो मैं दो लाख के लिए एक बार चुदवा लूंगी।

इंदिरा: अगली रात हम दोनों अमित के रुम में रहेंगे।

इंदिरा अब रेखा के सामने बेटे से चुदवाना चाहती थी।

हेडमास्टर के घर के एक कमरे में अमित एक नई लड़की, कुंवारी लड़की नफ़ीसा को उसके बाप और संगीता के सामने चोद रहा था। इंदिरा को ये बात पसंद नहीं आई। उसने खाना खाया और उसके ही ज़िद करने पर हेडमास्टर ने उसे रेखा के घर पहुंचा दिया। हेडमास्टर वापस अपने घर लौट आया। अरविंद से चुदवाते हुए इंदिरा ने रेखा को धंधा करने के लिए तैयार कर दिया। दोनों ने फ़ैसला किया कि अगली रात दोनों अमित के रुम में जायेंगे।

हेडमास्टर जब वापस घर लौटा तो उसने देखा कि घर में सभी नंगे थे, और अमित सब के सामने उनकी घरवाली सुजाता को चोद रहा था।

सुजाता: हेडमास्टर साहब, संगीता ग़लत नहीं है। अमित का सिर्फ़ लंड ही सबसे बढ़िया नहीं है, ये असलम से कही बढ़िया से चोद रहा है। तभी तो असलम की छोटी बेगम नगमा हर दूसरी रात पूरी रात अमित के लंड को अपनी बूर में रखती है। अमित बेटा बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा है।

अपनी घरवाली की बात सुनते-सुनते हेडमास्टर नंगी खड़ी लड़कियों के बीच खड़े हो गये। उन्होंने एक-एक हाथ दोनों की कमर में लपेटा।

नफ़ीसा: हेडमास्टर साहब, मज़ा ही लेना है तो हम सब की तरह आप भी नंगे हो जाइए, ज़्यादा मज़ा आयेगा। अमित, जल्दी ख़त्म करो यार, मुझे एक बार और लेना है।

नफ़ीसा की कच्ची चूत ज़्यादा फड़क रही थी। असलम भी नंगा था। वो संगीता के दूसरी तरफ़ खड़ा हो गया और संगीता का एक हाथ पकड़ कर अपने टाइट लंड पर रखा। संगीता ने हाथ नहीं हटाया, मां-बाप के सामने लंड मसलने लगी।

संगीता: यार, मैंने कई बार तुमसे चुदवा लिया। लेकिन क्या करूं, ना तो मुझे तुम्हारे साथ ही कोई मज़ा आया, ना ही अरविंद के साथ। अब कभी उससे मेरे लिए पैसा मत लेना। अब मैं अरविंद सर से कभी नहीं चुदवाऊंगी। असलम मुझे मालूम हुआ है कि शहर में दो आदमी है, एक कोई फ़ॉर्च्यून होटल का मालिक है राजेंद्र और दूसरा कोई लाला है। दोनों के बारे में सुना है कि वे रंडियों को बढ़िया क़ीमत देते हैं, तो चुदाई भी बढ़िया करते हैं। हर दो घंटे का मुझे कम से कम 25 हज़ार चाहिए। मुझे सिर्फ़ रूपये नहीं बढ़िया चोदने वाला भी होना चाहिए। जब कभी मुझे ज़रूरत होगी तुम्हें बुला लूंगी।

संगीता ने अपने बाप हेडमास्टर का एक हाथ अपनी चूची पर दबाया।

संगीता: बाबू जी, हम सब खाना खा लेते हैं। उसके बाद आप रात भर नफ़ीसा को अपने साथ रखिए। अमित की मां आई है तो वो हमारे साथ रुकेगा नहीं। इसलिए, आप ही रात भर नफ़ीसा का मज़ा लीजिए।

अमित ने संगीता की मां को भी पूरा संतुष्ट किया। उसके बाद खाना खा कर अपने रुम में वापस आया तो ललन गार्ड ने फिर रोक लिया।

ललन: अमित साहब, लगता है कि आपके दोस्त ने पिछली रात रत्ना मैडम को बढ़िया चोदा था। इसलिए आज फिर विनोद के ही रूम है। उसे बोल दूं कि बाद में आपके पास भी आ जाए? साहब, बहुत बढ़िया माल है।

अमित: तुमने असलम की बेटी नफ़ीसा को कैसे पटाया, उसे चोद लिया क्या?

ललन 35-40 साल का ही था। आर्मी में शॉर्ट सर्विस कमीशन में सिपाही था। फ़ौज की नौकरी छोड़ने के बाद यहां गार्ड की नौकरी कर रहा था।

ललन: साहब, मेरी घरवाली चंद्रा मुझे बहुत प्यार करती है। जब से चोदना शुरू किया है सिर्फ़ अपनी घरवाली को ही चोदा है। साहब, आप सभी के पास लुटाने के लिए बहुत रुपया है। लेकिन मैं औरत के बारे में एक ही बात पर विश्वास करता हूं कि खूबसूरत हसीना रेखा हो या जवान लड़की नफ़ीसा हो, या कोई बहुत ही बदसूरत औरत हो, जब औरत कुंवारी नहीं रहती है तो फिर सब की बूर एक जैसा ही मज़ा देती है।

ललन: मेरी पत्नी मेरे लंड से, मेरी चूदाई से बहुत खुश रहती है। फिर मैं किसी भी दूसरी बूर में लंड पेलने के लिए रुपया क्यों बर्बाद करुं। असलम के पास सबसे ज़्यादा रंडीयां है लेकिन उसे कमीशन से एक पैसा भी नहीं मिलता है। मैंने तीन साल पहले ही रंडियों की दलाली शुरु की है, और मैं हर महीने अपनी तनख़्वाह से तीन-चार गुना कमीशन से कमाता हूं।

ललन: मेरी पत्नी मुझसे चुदवाने के लिए हमेशा तैयार रहती है। चंद्रा ने ही नफ़ीसा को दलाली के लिए कहा था लेकिन अभी तक वो किसी के रूम में नहीं आई है। बहुत ही ज़्यादा सुंदर है साहब, उसे देख कर ही आप का दिल ख़ुश हो जायेगा। अभी उसने अपना कोई रेट नहीं बताया है। आपके लिए ले आऊं?

अमित: जब मुझे लड़की की ज़रूरत होगी, मैं बताऊंगा।

अमित ने उसे 200 रुपया दिया और अपने रुम में आ गया। सुबह में संपा को चोदा और रात में तीन माल को संतुष्ट किया। अमित को किसी माल की ज़रूरत नहीं थी। फिर भी उसे याद था कि चिट में संपा ने क्या लिखा था। अमित संपा के आने का इंतज़ार करने लगा। इंतज़ार करते-करते अमित से भी गया।

दरवाज़ा पर लगातार नॉक की आती आवाज़ सुन कर अमित ने दरवाज़ा खोला। दरवाज़ा पर उसका क्लासमेट आसिफ़ था।

आसिफ़: सौरी अमित, लेकिन अभी मेरे कमरे में चलो, बहुत ज़रूरी काम है।

आसिफ़ ने पाजामा कुर्ता पहना था।‌‌ जबकि अमित सिर्फ़ एक अंडरवियर में ही था। अमित के दिमाग़ में यह बात कैसे आती कि उसकी खाश माल संपा ने अमित से चुदवाने के लिए ही उसे बुलाया था।

अमित: लेकिन बोलो तो क्या ज़रूरी काम है?

आसिफ़: बस पूछो मत। कपड़े पहनो और मेरे साथ चलो।

अमित ने टेबल क्लॉक में समय देखा। साढ़े बारह बजे थे। उसने मन ही मन सोचा कि अब संपा नहीं आयेगी। अमित ने पाजामा कुर्ता पहना और रुम को लॉक कर आसिफ़ के साथ चल दिया। चार कमरे के बाद ही आसिफ़ का रुम था। आसिफ़ ने दरवाज़ा को धकेला। रुम में अंधेरा था। आसिफ़ ने स्विच ऑन किया और अमित बेड पर लेटी औरत के क़रीब जा कर खड़ा हो गया था। बेड पर संपा ही लेटी थी, लेकिन उसने चादर से अपने को कवर कर रखा था। अमित ने खुश होते हुए आसिफ़ को गले लगाया, उसके गालों को चूमा।

अमित: उफ़ आसिफ़, मैंने जब पहली बार अपनी वार्डन की पत्नी संपा मैडम को देखा तभी से इस खूबसूरत औरत को प्यार करने के लिए तड़प रहा हूं। आज अपनी प्यास बुझाऊंगा, संपा मैडम को प्यार करूंगा।

संपा: ज़्यादा खुश होने की ज़रूरत नहीं। आसिफ़ को 3-4 हज़ार में दूसरी कुतिया मिल सकती थी, लेकिन इसने 25 हज़ार देकर मुझे बुक किया है। असलम ने कहा था कि आसिफ़ की पर्सनालिटी बढ़िया है, बढ़िया चोदेगा, लेकिन आसिफ़ ने बहुत निराश किया। लंड अंदर भी नहीं घुसा पाया। तुम स्विमिंग चैम्पियन हो ना? पूल में तैरने में और औरत की बूर के अंदर तैरने में बहुत फर्क़ है। अमित, मुझे चोद पाओगे? ठंडा कर पाओगे, तभी कपड़े खोलना।

संपा ने रुपया आसिफ़ से लिया। आसिफ़ को उसने बहुत उकसाया। अपने नंगे बदन को खूब सहलाने और दबाने दिया। बहुत देर तक बूर भी चुसवाया। बेचारा, एक बार तो बूर चूसने के समय ही झड़ गया था। संपा ने सहला कर लंड को दुबारा टाइट किया। आसिफ़ ने बूर के अंदर लंड घुसाया ही था कि जैसा उसने अमित के साथ पहली बार की चूदाई में किया था, संपा ने अपनी मस्त मोटे जांघों और बाहों से आसिफ़ को इतना टाइटली बांधा कि बेचारा एक धक्का भी नहीं मार पाया लेकिन झड़ गया। संपा ने उसे अपने उपर से उतारा।

संपा: तुम बहुत ही ज़्यादा एक्साइट हो गये थे। किसी दूसरे को चोदते देखोगे तो तुम भी मुझे बढ़िया से चोद पाओगे। ख़ुद चोदना तो बढ़िया लगता ही है, दूसरों को चोदते देखने भी बढ़िया लगने लगता है। असलम बता रहा था कि अमित बहुत बढ़िया चोदता है, उसे बुला कर ले आओ, देखें वो भी मुझे चोद पाता है कि नहीं। नहीं बुलाना चाहते हो तो मत बुलाओ। सुबह चार बजे तक रहूंगी, तुम जो करना चाहते हो करो। आज रात मैं तुम्हारी हूं लेकिन अब कितना भी दोगे तुम्हारे पास फिर नहीं आऊंगी।

अमित की तरह ये आसिफ़ भी संपा को बहुत पसंद करता था। वो ख़ुद चोदना चाहता था, लेकिन घुसाने के बाद भी नहीं चोद पाया तो उसने सोचा कि क्यों ना किसी दूसरे से ही चुदवाते देखूं। भले ही वो उसे चोद नहीं पाया लेकिन आसिफ़ औरत की नंगी जवानी से आगे भी खेलता रहना चाहता था।

आसिफ़: मैडम, अगर अमित को बुला दूं, तो फिर जब बुलाऊंगा तब आओगी ना? आपको नंगा देख लिया, आपने मेरा लंड पकड़ा तो मेरा पैसा वसूल हो गया।

संपा समझ गई कि ये आसिफ़ भी उसे अमित की तरह ही पसंद करता था।

संपा: तुम बहुत प्यारे हो। अमित को बुला कर लाओ, अगर वो भी नहीं चोद पायेगा तब भी तुम दोनों का लंड चूस दूंगी और जब भी बुलाओगे आऊंगी लेकिन हर बार मुझे मेरी…

आसिफ़ समझ गया कि संपा क्या बोलना चाहती थी।

आसिफ़: आप जब भी चाहो मेरे रुम में आ जाओ। आज मैं आपसे एक वादा करता हूं। आप मेरे सामने भी अमित या किसी और से चुदवाओ मैं कभी मना नहीं करुंगा। लेकिन जब तक यहां हूं मेरे रुम में आपके सिवा और कोई दूसरी औरत या लड़की नहीं आयेगी। आप जब भी आओगी, आपको आपकी पूरी क़ीमत मिलेगी। मुझे नहीं बोलना चाहिए लेकिन अगर कभी भी रुपयों की ज़रूरत हो बेझिझक मुझसे बोलिए। आपको दूंगा।

संपा: ओह आसिफ़ तुम बहुत प्यारे हो।

संपा लेटी रही। उसने हाथ बढ़ा कर लंड को पकड़ कर अपनी ओर खींचा। आसिफ़ की आंखों में देखती हुई लंड को चूसने लगी। और डेढ़ घंटा के अंदर आसिफ़ तीसरी बार झड़ गया। संपा ने लंड चूसा, इस बात से आसिफ़ बहुत खुश था। संपा बेड पर लेटी रही। पाजामा कुर्ता पहन कर आसिफ़ रुम से बाहर निकल गया। 15 मिनट भी नहीं हुए, और अमित ने संपा के उपर से चादर खींच नीचे फेंक दी।

अमित: उफ़ संपा मैडम, जितना सोचा था आप उससे कहीं ज़्यादा खूबसूरत हो। अब मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता।

अमीत ने अपना कपड़ा खोला। संपा तो कई बार अमित के लंड का मज़ा ले चुकी थी। फिर भी लंड देख कर ऐसा एक्टिंग किया मानो पहली बार ही देख रही हो।

संपा: बाप रे, इतना बड़ा आदमी का लंड होता है क्या? ये तो किसी घोड़े या गधे के लंड जैसा है, बहुत ही डरावना है।

आसिफ़: अमित, सुना है कि तुम यहां बहुत औरतों को चोद रहे हो। वे सब कैसे इतने लंबे और मोटे लंड को अपने अंदर लेती है?

संपा ने हाथ बढ़ा कर अमित के फनफनाते लंड को पकड़ लिया।

संपा: आसिफ़ तुम भी कपड़े खेल दो, और एक बाद जान लो। अमित का लंड बहुत लंबा और मोटा है। लेकिन कोई भी लड़की और औरत आराम से सिर्फ़ इस लंड को ही नहीं इससे भी लंबा और मोटा लंड बूर में ले सकती है। अमित तुम्हारे दोस्त ने बहुत गर्म कर दिया है। देखूं तुम भी चोद सकते हो कि नहीं।

अपनी मां को चोद कर अमित जितना खुश नहीं हुआ था, उससे ज़्यादा खुश तब हुआ जब उसके दोस्त के सामने संपा ने उसे चोदने के लिए कहा।

अमित: चोदूंगा रानी, लेकिन पहले थोड़ा प्यार तो करने दो।

अमित ने जी भर कर होंठों को चूसा, बारी-बारी से दोनों निपल्स को चूसा। आख़िर में बूर की पत्तियों को फैला कर बूर के अंदर-बाहर खूब चाटा, बहुत चूसा। पूरे समय संपा मस्ती की सिसकारी मारती रही। आख़िर में अमित ने संपा की जांघों के बीच पोज़ीशन ली। संपा ने हाथ बढ़ा कर लंड को पकड़ा, और बूर के अंदर दबाया। संपा का एक कंधा पकड़ कर अमित ने पूरी ताक़त से एक के बाद एक 4-5 धक्के पूरी ताक़त से लगाये, और बूर की दीवारों को चीरते हुए लंड की पूरी लंबाई अंदर चली गई।

संपा: थैंक्यू आसिफ़, तुम्हारे ही कारण मुझे इतने बढ़िया लंड से चुदवाने का मौक़ा मिला है। बूर फट रही है, अमित जल्दी मत झड़ना। आराम से चोदो, पूरी रात चोदो।

और आप सब पढ़ चूके हैं कि अमित और संपा की जोड़ी कितनी बढ़िया बन गई थी। कभी फुल स्पीड में तो कभी आराम से अमित धक्का लगाता रहा। आसिफ़ को खुश करने के लिए संपा उसका लंड पकड़ कर चूदाई का मज़ा लेना चाहती थी। लेकिन अमित के धक्कों ने औरत को इतना एक्साइट कर दिया था, कि वो अपने को संभालने के लिए पूरे समय अमित को अपनी बाहों और जांघों से बांधे रही।

आसिफ़ ने देखा कि संपा ने उसके साथ भी ऐसा किया था। लेकिन वो एक धक्का भी नहीं मार पाया था। जब कि ये अमित संपा के बदन को दोनों हाथों से सहलाते हुए बढ़िया से चोद रहा था। आसिफ़ भी बेड पर बैठ गया, और संपा की जांघों का मज़ा लेने लगा।

आसिफ़: मैडम, इतना लंबा लंड आपकी बूर में घुसा है। अमित इतने ज़ोर-ज़ोर से धक्का मार रहा है‌। लेकिन देख रहा हूं कि आपको बहुत ही मज़ा आ रहा है।

संपा ने मुस्कुराते हुए आसिफ़ को देखा और उसका लंड पकड़ कर मुठियाने लगी।

संपा: थैंक्यू आसिफ़, तुम्हारे कारण ही मुझे इतना मज़ा मिल रहा है। तुम ये सोच रहे हो कि अमित का लंड लंबा है, मोटा है, इसलिए मुझे मज़ा आ रहा है। नहीं, बिलकुल ग़लत। लंड के छोटे या लंबे होने से कोई ख़ास फर्क़ नहीं पड़ता है। हां, लंड ज़्यादा मोटा हो तो ज़रूर ज़्यादा मज़ा आता है। सबसे ज़रूरी यह है कि लंड बूर के अंदर टाइट रहे। जब तक औरत पूरी तरह से ठंडी ना हो जाये, तब तक टाइट रहे, और मर्द की बाहों में ताक़त हो।

संपा: चार इंच लंबे लंड वाले भी अपनी औरत को बहुत खुश रखते हैं। औरत चाहती है कि मर्द उसे इस बेदर्दी से रगड़े, दबाये, कि उसकी एक-एक हड्डी पसली चरमरा जाए। अगर अमित का सिर्फ़ लंड लंबा या मोटा होता, लेकिन बूर के अंदर जल्दी ढीला हो जाता, या फिर इसके धक्के में ताक़त नहीं होती, तो कोई औरत इससे नहीं चुदवाती। लेकिन अमित जैसा चोद रहा है तो देखना इसकी मां और बहन भी इससे चुदवायेंगी और इसकी बेटी भी।

संपा: आसिफ़, तुम अगर अपने घर की औरतों को, मां, बहन को अमित से चुदवाओगे, तो सभी तुम्हारा एहसान मानेंगी। मैं तो अपनी बेटी को भी अमित से चुदवाऊंगी। उफ़ अमित, बहुत मज़ा आ रहा है। ला आसिफ़ तेरा लंड चूसती हूं।

अमित: आपको कितना मज़ा आ रहा है नहीं मालूम, लेकिन मुझे आपके साथ जन्नत का मज़ा मिल रहा है।

आसिफ़: और मुझे तुम दोनों की चुदाई देख कर ही बहुत मज़ा आ रहा है।

अमित ने क़रीब सवा घंटा चोदा तब वो झड़ा। संपा उससे चिपक गई। दूसरे राउंड में संपा ने दोनों का लंड चूसा। अमित ने आसिफ़ को बूर चूस कर औरत को खुश करने का तरीक़ा बतलाया। अमित ने संपा को कुतिया बनाया। आसिफ़ बग़ल में बैठ कर देखता रहा कि अमित का लंड कैसे संपा के बूर के अंदर-बाहर हो रहा था।

देखते-देखते आसिफ़ का लंड भी पूरा टाइट हो गया, तो अमित ने लंड निकाला और आसिफ़ को चोदने के लिए कहा। अमित सामने आया और आसिफ़ से चुदवाते हुए संपा ने अमित का लंड चूसा।

इस राउंड में आसिफ़ ठीक सात मिनट लंड को टाइट रख पाया, और बूर में झड़ गया। अमित ने आसिफ़ से ही बूर को चटवाया, और फिर कुतिया बनी संपा को चोदने लगा। इस बार भी लंबी चुदाई हुई। संपा तैयार हुई तो आसिफ़ ने उसे दस हज़ार की टिप दी।

आसिफ़: मैडम, मैं अब किसी दूसरी औरत को रुम में नहीं बुलाऊंगा। मैं चाहता हूं कि आप हर हफ्ते कम से कम दो रात आप मेरे साथ गुज़ारे। आपको आपकी पूरी क़ीमत मिलेगी ही, आप जब बोलेंगी अमित को भी बुला लूंगा।

संपा ने आसिफ़ को गले लगा कर उसे चूमा।

संपा: तुम बहुत प्यारे हो। आने की कोशिश करुंगी। हफ्ते में एक रात 25 हज़ार लूंगी और बाक़ी की रात सिर्फ़ 10 हज़ार। तुम दोनों एक बात ध्यान में रख लो। मेरे जैसी बदन वाली औरत को अपने साथ नंगा रखने में जो सुख है, वो बूर में लंड पेलने से कहीं बढ़िया है। फिर जल्दी आऊंगी।

अमित और संपा, आसिफ़ के रुम से साथ निकले। संपा अंदर ही अंदर अपने घर चली गई। ललन गार्ड को मालूम ही नहीं पड़ा कि वार्डन की घरवाली दो-दो लड़कों से चुदवा कर घर वापस चली गई। अमित अपने रुम का लॉक खोल ही रहा था कि बग़ल का रूम खुला।

“क्या अमित, तुम तो दूज का चांद हो गये हो। ललन ने तुमसे ज़रूर कहा होगा कि मैं तुम्हारे बग़ल के रुम में हूं। आज भी तुम्हारे बुलाने का वेट कर रही थी। चलो रुम के अंदर, थैंक्यू विनोद, मैं तुमसे बहुत खुश हूं। फिर मेरी याद आये तो ललन को 11 हज़ार दे देना।”

अमित ने अपने रुम का दरवाज़ा खोला और बुर्का पहनी औरत ने अमित को रुम के अंदर ढकेला। वो ख़ुद भी अंदर आई और दरवाज़े को अंदर से बंद कर दिया। अमित देखता रहा और औरत ने बुर्का उतार दिया। उसने बुर्का के नीचे कुछ नहीं पहना था। औरत अपनी चिकनी बूर को सहलाने लगी।

औरत: जब तुम लोगों के पास आकर नंगा ही होना है तो फिर कपड़े पहनने की क्या ज़रूरत है? ललन ने ज़रूर बताया होगा। फिर भी बता देती हूं। मैं तुम लोगों के हिन्दी सर पाठक सर की पत्नी हूं।

अमित एक जगह खड़ा रहा, और औरत ने बोलते हुए उसे नंगा करना शुरु किया।

औरत: मेरा नाम रत्ना है। मेरी दो जवान बेटियों है, एक जवान बेटा है। 25 साल पहले शादी हुई। अपने पति से बहुत खुश हूं। पाठक बढ़िया चोदता है। 25 साल से चुदवाते हुए बूर ज़रूर ही ढीली हो गई। फिर भी पाठक हर रात चोदता है। क़रीब एक महीना पहले चोदते हुए उसने कहा कि यहां की टीचरों की पत्नियां स्टूडेंट्स से चुदवाती है। हर रात 3-4 हज़ार कमाती है।

औरत ने कुर्ता और पाजामा खोल दिया था। अंडरवियर के उपर से लंड सहला रही थी।

औरत: मैंने सीधा पूछा कि क्या वो चाहता है कि मैं भी धंधा करूं। पाठक ने कहा कि उसे पता है कि पिछले 25 सालों में मैंने किसी और से नहीं चुदवाया है। लेकिन अगर अब मैं किसी से भी चुदवाऊंगी तो वो मना नहीं करेगा।

रत्ना ने अमित को नंगा कर दिया था।

रत्ना: बहुत ही बढ़िया लंड है अमित, 4 से ज़्यादा हो गया है लेकिन इस लंड को बूर में लिए बिना जाऊंगी तो दिन भर बेचैन रहूंगी। मुझे चोदो।

रत्ना बेड पर लेट गई और बूर को उचकाया। सामने फड़कती बुर हो तो कौन बेवकूफ शांत रहेगा?

अमित ने मस्त मस्त जांघों के बीच जगह बनायी, और लंड को बुर के अंदर दबाया। जमा-जमा कर धक्के मारने लगा।

रत्ना: वाह अमित, मज़ा आ गया। एक बात जानते हो?

अमित: पहले ये बताओ कि हरामी बेटी चोद ने ख़ुद तुम्हें शरीर बेचने के लिए कहा?

रत्ना ने भी संपा जैसा ही अमित को बाहों में बांधा और कमर उचका कर चूदाई का मज़ा लेने लगी।

रत्ना: जब पाठक ने कहा कि मैं अगर किसी से भी चुदवाऊंगी तो वो मना नहीं करेगा। तो मैंने पूछा कि मैं अपने पसंद के किसी मर्द से चुदवाऊंगी या मैं भी टीचर्स की पत्नियों जैसा धंधा करूं?

अमित: फिर गांडू ने क्या कहा?

रत्ना: तुम्हारे सर ने कहा कि अगर मेरा कोई यार है तो मैं उससे भी चुदवाऊं, लेकिन अगर चुदाई के साथ कमाई भी होगी तो बढ़िया रहेगा। मेरा कोई यार तो था नहीं, तो उस समय मैंने उसे कोई जवाब नहीं दिया। उफ़ अमित, संगीता ने ग़लत नहीं कहा था तुम सबसे बढ़िया हो। अगले दिन मैंने अपनी दोनों बेटियों को बता दिया कि उसका बाप क्या चाहता था।

अमित को चूदाई के साथ-साथ रत्ना के बोलने का तरीक़ा बहुत पसंद आ रहा था।

अमित: तुम्हारी बेटियों ने ज़रूर तुम्हें धंधा करने के लिए ही कहा होगा। क्या वे भी धंधा करने लगी है?

रत्ना के चेहरे को देख कर ही लग रहा था कि वो बहुत खुश थी।

रत्ना: अपनी कसम, मुझे नहीं मालूम, लेकिन उनके चलने के तरीक़े और बॉडी लैंग्वेज से लगता है कि दोनों अभी कुंवारी है। उन्होंने कहा कि जब बाबू जी ने दूसरों के साथ चुदवाने की परमीशन दे ही दी है, तो फिर दूसरी औरतों जैसा चुदाई के साथ साथ कमाई भी करो। मैंने बदनामी की बात की तो उन्होंने कहा कि यहां कि 100 में से 90 औरतें स्टूडेंट्स के साथ चुदवा कर रुपया कमाती है, और शान से रहती है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि दूसरों की तरह 3-4 हज़ार के लिए ना चुदवाऊं।

रत्ना: उन्होंने ये भी कहा कि दूसरी औरतों की तरह 2 घंटा नहीं पूरी रात स्टूडेंट्स के साथ रहुंगी तो वे ज़्यादा खुश होंगे, और मुझे ज़्यादा क़ीमत देंगे। मेरा पहला स्टूडेंट् राजीव था। वो इतना खुश हुआ कि दस हज़ार के बदले उसने पंद्रह हज़ार दिया और लगातार 11 रात मुझे अपने साथ सुलाया।

रत्ना: मैंने ही उसे समझाया कि लगातार एक ही औरत को चोदेगा, तो दोनों का एक दूसरे से इंटरेस्ट ख़त्म हो जायेगा। 11 रात में ही मैंने सवा लाख कमाया। 5 रात मैंने घर में ही आराम किया। फिर ललन ने कहा कि आसिफ़ मुझे 15 हज़ार देगा। लेकिन अमित, आसिफ़ मौगा है। पूरी रात उसके साथ रही, लेकिन बेचारा एक धक्का भी नहीं मार पाया। फिर तीन दिन पहले संगीता ने तुम्हारे बारे में बताया। लेकिन तुम यहां थे ही नहीं। विनोद ने बढ़िया चोदा लेकिन तुम्हारे जैसा और कोई नहीं हो सकता।

अमित: लेकिन मैं एक पैसा भी नहीं दूंगा।

रत्ना ने ज़ोर से चूत्तड़ को उचकाया।

रत्ना: तुम बोलो, मैं तुमसे रोज़ चुदवाना चाहती हूं मुझे कितना देना पड़ेगा?

अमित ने धक्का मारना बंद कर उसे बेतहाशा चूमा। अपनी बाहों में बांध कर इतना दबाया कि रत्ना “बाप रे मर गई” बार-बार बोलती रही।

अमित: रत्ना रानी, तुम्हारी जैसी प्यारी औरतें कभी-कभी ही पैदा होती है। आज रात कोई दूसरी आयेगी लेकिन कल रात 11 बजे मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा। बहुत ही मस्त माल हो रानी। लेकिन आज जी भर कर तुम्हें प्यार नहीं कर पाऊंगा। कोई देखेगा तो बहुत बदनामी होगी।

रत्ना: मेरा होने वाला है, जल्दी-जल्दी धक्के मारो।

जितनी तेज़ी और पावर से अमित धक्का मार सकता था, अमित ने मारा, और रत्ना झड़ गई, पस्त हो गई।

रत्ना: 25 साल में सात-आठ हज़ार बार तो चुदवाया ही होगा। लेकिन आज पहली बार मालूम हुआ कि असल चूदाई क्या होती है। थैंक्यू अमित, थैंक्यू वैरी मच।

दोनों बेड से उतरे। रत्ना बुर्का पहनने लगी।

रत्ना: लड़की और लड़का दोनों सबसे पहले रोड पर कुत्ता-कुतिया की चूदाई ही देखते हैं। और क़रीब-क़रीब सभी चाहती है कि उनका मर्द भी कुत्ते जैसा बुर को चाटे और कुत्ते जैसी ही लम्बी चूदाई करे। 100 में 4-5 मर्द ही ऐसे होंगे जो 15 मिनट से ज़्यादा बुर में टाइट रह सकते है। फिर अगर किसी लड़की ने गधे या घोड़े का लंड देख लिया, तब वो भगवान से प्रार्थना करने लगती है कि उसे भी कोई ऐसा मर्द मिले जिसका लंड घोड़ा के लंड जैसा लंबा हो।

रत्ना: मैं बहुत ही क़िस्मत वाली हूं कि मुझे एक ऐसे आदमी ने चोदा जिसका लंड तो घोड़ा के लंड जैसा लंबा और मोटा है ही, और वो कुत्ते जैसा चोदता भी है। अमित, अगर अब तक अपनी मां को नहीं चोदा है, तो उसे ये लंड दिखाओ, वो ख़ुद तुमसे चुदवायेगी।

एक और औरत ने मां को चोदने के लिए उकसाया। 1:45 हो गये थे। दरवाज़ा पर नॉक हुआ। मैंने टॉवेल लपेट कर दरवाज़ा खोला। दोनों विनोद और ललन साथ खड़े थे।

रत्ना: अमित, कल की पूरी रात मेरे लिए ही रिज़र्व रखना। चलो ललन, लेट हो रहा है।

दोनों आंखों से ओझल हो गये।

अमित: विनोद, रेखा और मेरी मां को चोदना है तो रुपया निकाल कर रखना। आज रात दोनों को रुम में लाने की कोशिश करूंगा। लेकिन यह बात अगर किसी तीसरे को खबर हुई तो तुम मारे जाओगे।

अमित अपने रुम में आ गया और दरवाज़ा बंद कर दोनों संपा और रत्ना के बारे में सोचने लगा।

संपा हेल्दी औरत थी, उसकी जवानी बहुत ही गदराई हुई थी। किसी भी आदमी को, नामर्द के लंड को भी एक बार तो टाइट कर ही देती। बहुत ही चमकदार, प्यारा रंग था। बहुत ही बढ़िया माल थी।

रत्ना ने कहा कि उसकी जवान बेटी था, जवान बेटा था, 25 साल पहले शादी हुई। लेकिन किसी भी एंगल से 30-32 साल से ज़्यादा की नहीं लगती थी। रेखा की ही तरह स्लिम-ट्रिम फीचर था। रेखा की चेहरे की ख़ूबसूरती सबसे बढ़िया थी, लेकिन अमित ने तब तक जितनी भी माल को नंगा किया था, रत्ना की फिगर सबसे आकर्षक थी। 36 इंच की चूचियां, 26 इंच की कमर, और 36 इंच के चूत्तड़ रत्ना को लाखों रुपया का माल बनाते थे।

अमित को होटल की औरतों और लड़कियों की याद आ गई। अमित ने बहुत कोशिश की लेकिन उसने यही फ़ैसला किया की रत्ना जैसी आकर्षक बदन वाली माल और कोई नहीं थी। अचानक उसके दिमाग़ में आया कि अगर रत्ना को लाला से मिलवा दें तो लाला इसे क्या क़ीमत देगा!

अमित तैयार हुआ और कैंटीन ना जा कर सात बजे के पहले रेखा के घर पहुंच गया। अरविंद ने दरवाज़ा खोला और अमित घर के अंदर घुसा तो देखा कि दोनों रेखा और इंदिरा बेड पर नंगी सोई हुई थी। अमित को समझते देर नहीं लगी कि रात में अरविंद ने उसकी मां को चोद लिया था। अमित ने अरविंद से कुछ नहीं कहा। एक-एक हाथ से दोनों की बुर को ज़ोर से मसला। इतने ज़ोर से मसल रहा था कि दोनों उठ कर बैठ गई।

अमित: रंडियों, आज रात ग्यारह-साढ़े ग्यारह बजे तुम दोनों को मेरे रुम में आना है। अगर नहीं आई तो समझ लेना कि तुम दोनों के लिए अमित मर गया है। अरविंद सर, दोनो रंडियों को मेरे रुम में भेजना आपका काम है।

दोनों की बूर को बेदर्दी से मसल कर अमित बाहर निकल गया। कैंटीन में जाकर जो भी मिला वो खा लिया और दिन भर क्लास किया। क्लासेज़ ख़त्म हुए और अमित अपने रुम में ना जाकर बॉयलौजी की टीचर गार्गी के घर पहुंच गया। कुछ देर बाद दोनों गार्गी और रचना साथ आये। अमित को अचानक सामने देख कर दोनों घबरा गये।

गार्गी: तुम अभी यहां! रात में 11 बजे के बाद आना।

अमित: मुझे तुम दोनों से बहुत ज़रूरी काम है। यहां बाहर में सीन मत क्रिएट करो, चलो अंदर।

मन ही मन खुश होते हुए गार्गी ने दरवाज़ा खोला। तीनों अंदर घुसे।

अमित: मुझे आज ही मालूम हुआ कि तुम दोनों आपस में सेक्स करती हो। मैं देखना चाहता हूं कि तुम दोनों एक-दूसरे को कैसे चोदती हो।

रचना सिर्फ़ गार्गी के साथ ही नहीं कई और औरतों के साथ सेक्स करती थी। पचासों बार औरत के सामने नंगी हो चुकी थी। उसने पिछले ही दिन अमित को चैलेंज दिया था कि वो शनिवार तक उसे चोद लें लेकिन अमित को सामने देख कर उसकी धड़कन बहुत ही तेज हो गई थी। लेकिन गार्गी बहुत खुश थी कि बिन बुलाए ही अमित फिर से उसे चोदने आ गया।

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