राजेंद्र: लाला, पहले किसे चोदोगे, अपनी बेटी को?
रंभा: मुझे किसी और से नहीं सिर्फ़ अमित से ही चुदवाना है। रेणु, मुझे और अमित को कोई दूसरा रूम दो।
राजेंद्र: नहीं, कोई दूसरा रूम नहीं, अगर चुदवाना है तो इसी रुम में सब के सामने चुदवाना होगा।
रंभा: तुम तो दुनिया के सबसे बड़े हरामी हो ही। अपनी बहु और बेटी को चोदते हो। तुम चाहते हो कि मेरा बाप भी तेरे जैसा अपनी बेटी को चोदे, तो वो कभी नहीं होगा। लेकिन हरामी को अपनी बेटी की नंगी जवानी और चुदाई देखने दो। ख़ुद ही पछतायेगा कि बेटी को नंगा क्यों देखा।
लाला: रेणु, अमित और रंभा को दूसरे रूम में सुहागरात मनाने दो। अमित का मूसल देख कर मेरा लंड किसी को नहीं चोद पायेगा। इन दोनों को जल्द बाहर निकालो। मेरी बात नहीं मानोगी तो मैं फिर कभी इस होटल में नहीं आऊंगा।
लेकिन रेणु इस सोने का अंडा देने वाली मुर्ग़ी को नाराज़ नहीं करना चाहती थी। लाला का एक हाथ पकड़ कर समिरा का ब्लाउज़ के अंदर डाला और दूसरा हाथ इंदिरा की चूची पर रखा।
रेणु: लाला, नाराज़ क्यों होते हो? ये दोनों माल आपके लिए ही है। इन दोनों को चूस कर भी लंड को शांति ना मिले तो 107 में आ जाइएगा। मैं और रंभा आपके साथ रहेंगे, और अमित को इन दोनों की गांड मारने भेज दूंगी।
लाला: सच रेणु, तुमने बिल्कुल सच कहा था। ये तो बहुत ही मस्त माल है। अमित, तुम मेरी बेटी को लेकर जाओ, मैं तुम्हारी मां के पेट में एक और बच्चा डालता हूं।
लाला ने समिरा के ब्लाउज़ से हाथ बाहर निकाला, और दोनों हाथों से इंदिरा की चूचियों का मज़ा लेने लगा।
इंदिरा: लाला, पहले हमारी क़ीमत दो।
साली तीन घंटा से ज़्यादा समय से नंगी थी। फिर भी लाला से अपनी क़ीमत मांग रही थी। लाला का एक हाथ इंदिरा की चूचियों पर ही रहा, और दूसरे हाथ से बैग उठा कर इंदिरा को दिया।
लाला: ले रंडी, तू भी क्या याद करेगी। रेणु ने तीन माल का 5 लाख मांगा था, लेकिन ये 5 लाख सिर्फ़ तेरे लिए। रेणु और समिरा तो यहीं रहेंगी, उन्हें देता ही रहूंगा। आज की पूरी रात के लिए तू सिर्फ़ मेरी है। रेणु, सिर्फ़ ये माल मेरे साथ रहेगी। बाक़ी सब को लेकर तू दूसरे रुम में जा।
तभी 2 वेटर खाने-पीने का सामान लेकर आये। लाला नाम से लगता था कि कोई मारवाड़ी सेठ होगा, पेट निकला होगा, वजन बहुत ज़्यादा होगा, ऐसा नहीं था। लाला देहरादून के सबसे अमीर लोगों में से एक था। कई फैक्ट्री का मालिक था, कई पेट्रोल पंप थे। नाटा क़द का आदमी था, लंबाई सिर्फ़ 5 फ़ीट ही थी। उसकी बेटी 5 फ़ीट 3 इंच की थी। लेकिन ऐसा कहा जाता था कि देहरादून और आस-पास के इलाक़ों में लाला से बढ़िया चोदने वाला कोई नहीं था।
घर और ऑफिस में 30 बहुत ही खूबसूरत, जवान, सभी 30 साल से कम की औरतें काम करती थी। लाला इन सभी को चोदता ही था, पिछले 7-8 सालों में रेणु ने जिस किसी भी माल को लाला से चुदवाया, औरतें तो खुश होती ही थी, लाला भी बहुत खुश होता था।
लाला: आज फिर रेणु ने साबित कर दिया कि बढ़िया माल की पहचान अपनी रेणु को हम सब से कहीं बढ़िया है। रेणु, तुमने जैसा कहा था ये औरत (इंदिरा) बहुत ही बढ़िया माल है। अमित, मैं तुम्हारी मां को तीन-चार दिन अपने घर में रखना चाहता हूं। तुम जो क़ीमत बोलोगे मैं दूंगा।
मां को 2 बार चोद कर ही अमित के मन से मां को चोदने का शौक़ ख़त्म हो गया था। वो भी अब रेखा को नहीं अपनी मां के ही उम्र की संपा को रात-दिन चोदना चाहता था। अमित का जी कर रहा था कि उड़ कर जल्दी से संपा की बूर में घुस जाये।
लाला ने समिरा के ब्लाउज़ से हाथ निकाल कर इंदिरा की चूचियों को पकड़ लिया तो समिरा को बेहद ग़ुस्सा आया। सुबह घर जा कर आनंद ने समिरा को बता दिया कि रात उसने समिरा को नींद की दवा खिला कर इंदिरा को रात भर चोदा था। समिरा ने ज़बाब दिया था, “अरे, मेरे सामने भी चोदते तो क्या मैं मना करती! मैं तो ख़ुद चाहती हूं कि तुम लोग जितना हो सके दूसरी रंडियों को चोदो।”
और यहां देखा कि उसका ससुर जो अपनी बहु की तारीफ़ करते थकता नहीं, वो भी इंदिरा के लिए पागल हो गया था, और लाला बोलता है कि इंदिरा को 2-3 दिन घर में रखेगा। लाला नाटा था लेकिन उसका गठीला बदन समिरा को बहुत भा गया था। लेकिन जब उसने देखा कि लाला ने समिरा के ब्लाउज़ से हाथ निकाल कर इंदिरा की चूची पकड़ी, तो उसे बढ़िया नहीं लगा। समिरा बेड पर आई और अमित के लंड को सहलाने लगी।
समिरा: रंभा देख ले, हम दोनों जवान लड़कियों को छोड़ कर ये दोनों बेटीचोद अपनी मां की बूर ही चाटना चाहते हैं, तो इन्हें चाटने दो. हम इन हरामियों के सामने इस घोड़े (अमित) से चुदवाते है। मैं नंगी होती हूं, तू भी नंगी हो जा। हम तीनों यही मस्ती मारते हैं। दिखा अपने बाप को अपनी जवानी। विश्वास रख, तुझे नंगा देख साला लंड हिलायेगा। आज तो मैं तेरे बाप से नहीं चुदवाने वाली। अमित, रंभा का बूर चूस, मुझे लंड चूसने दे।
समिरा ने इतनी धीमी आवाज़ में कहा कि थोड़ी दूर बैठे लाला या इंदिरा को नहीं सुनाई पड़ा। रंभा कसमसाती रही, ना-नहीं करती रही, लेकिन दोनों समिरा और अमित ने रंभा को नंगा कर दिया। अमित ने अपने रुम में मां-बेटी की जोड़ी को चोदा था। बेटी, सीमा की बूर झांटों से भरी थी। उसके बाद उस समय एक दूसरी 21-22 साल की लड़की रंभा की बूर पर झांटो का जंगल देख रही थी। समिरा को लगा कि ये रंभा वर्जिन थी, लेकिन उसने कुछ कहा नहीं।
एक तरफ रंभा ना मुकर कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ़ अमित के लंड को मसल रही थी। रंभा ने धीरे से कहा “और जो करना है बाद में करना, मुझे तुम्हारे लंड से बहुत डर लग रहा है, इसे मेरी बूर के अंदर डाल दो।”
रंभा की बात सुन दोनों को लगा कि रंभा पहले भी चुदवा चुकी थी।
समिरा: अमित देख क्या रहे हो? मेरी बूर सुबह से ही खुजला रही है। रंभा को जल्दी ठंडा करो।
अमित ने रंभा को बेड पर सीधा लिटाया। रंभा बहुत ना-ना करती रही, लेकिन अमित झांटों को अपनी अंगुलियों से अलग कर रंभा की बूर को चूसने लगा।
इंदिरा: मुझे नहीं मालूम था कि मेरा बेटा ऐसा कुत्ता निकलेगा। सीधा चोदो ना, ये बूर चाटने की क्या ज़रूरत है? लाला, मेरी बूर खुजलाने लगी है मुझे चोदो।
इंदिरा उठी और रंभा के बगल में बेड पर लेट गई। अमित रंभा की बूर चूस रहा था और इंदिरा लड़की की चूचियों को चूसने लगी। उस समय रुम में इंदिरा के अलावा रेणु, समिरा और रंभा थी। सबसे कम उम्र की रंभा थी, और सबसे ज़्यादा उम्र की थी इंदिरा। सबसे प्यारा, खूबसूरत चेहरा समिरा का था, लेकिन आकर्षक बदन रंभा का था। लेकिन जैसा सब ने कहा लंड को सबसे पहले टाइट करने वाली इंदिरा ही थी।
लाला: अब मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं।
बोलते हुए लाला भी नंगा हो गया। रेणु ने झट से लंड पकड़ लिया।
रेणु: सच लाला, रंडियां झूठ नहीं बोलती हैं। तुम्हारे लंड से प्यारा लंड और कोई नहीं है। पहले मुझे चोदो।
लाला ने कपड़ों के उपर से ही रेणु की चूचियों को मसला।
लाला: रेणु रानी, दुनिया की सारी रंडियां एक तरफ और मेरी रेणु रानी अकेली दूसरी तरफ़। फिर कहता हूं अपने घरवाले को तलाक़ देदे, और मुझसे शादी कर ले। रानी तुझे तो प्यार करूंगा ही, तेरी सहेली (रंभा) मुझे ललचा रही है, मैं भी कुतिया की पिल्ली को ललचाऊंगा। रंडी को दिखाता हूं कि चुदाई क्या होती है।
लाला ने इतना लाउडली कहा कि सब ने सुना।
रंभा: अमित जल्दी लंड पेलो नहीं तो मेरा बाप ही मुझे चोद लेगा।
रंभा की बात सुन कर अमित ने अपनी पोज़ीशन बदली। फिर रंभा की जांघो के बीच आया, एक कंधे को दबाया, और दूसरे हाथ से लंड को बूर पर दबाया। और इससे पहले कि लाला इंदिरा के उपर आता, अमित ने पूरी ताक़त से धक्का मारा। रंभा चीख उठी,
“बाप रे बहुत मोटा है, बहुत दर्द कर रहा है”।
अमित भी समझ गया कि लंड अनचुदी बूर के अंदर घुस रहा था। उसने लगातार धक्के मारे और लंड चूत की झिल्ली को फाड़ कर और भी अंदर घुस गया। अमित ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि रंभा की आंखों से आंसू निकल कर चिकने गोरे गालों पर निशान बना रहे थे। रंभा का बदन लकड़ी जैसा कड़क हो गया है। अमित फिर भी धक्के पर धक्का लगाता रहा।
समिरा: बहुत ही क़िस्मत वाले हो अमित, बैठे बिठाए एक कुंवारी माल मिल गई।
अमित पेलता रहा।
अमित: हमें समिरा, मुझे भी लग रहा है कि मेरा लंड किसी खौलते तेल में डुबकी लगा रहा है। थैंक्यू समिरा तुमने मुझे इस लड़की को प्यार करने चोदने कहा।
लाला ने इंदिरा के उपर पोज़ीशन लिया और उसकी एक कंधा को दबाये हुए बूर में धक्का पेला।
अमित ने देखा कि लाला का लंड तो 5 इंच ही लंबा था, लेकिन उसके लंड से थोड़ा ज़्यादा मोटा था।
रंभा 21-22 साल की थी। वजन क़रीब 62 किलो था। लेकिन कहीं से भी, थोड़ी भी मोटी नहीं थी। लाला 5 फ़ीट लंबा था जबकि रंभा 5 फ़ीट 3 इंच थी। गोरा रंग, बड़ी-बड़ी काली आंखें, गोरे-गोरे गाल, चांद सा गोल मुखड़ा था लड़की का। गोलाई लिए हुए कंधे थे, और 34 इंच की प्यारी-प्यारी चूचियां थी।
उसकी चूचियों में थोड़ा भी ढीलापन नहीं था। कमर 28 इंच की थी, बूर का एरिया बड़ा था। 36 इंच के चूत्तड़ों को देख कर लगता था कि लड़की काफ़ी चुदवाती थी। लेकिन रंभा की चूत में पहली बार ही लंड घुसा था। इंदिरा को चोदते हुए लाला की नज़र अपनी बेटी के जांघों पर पड़ी। लाला ने हाथ बढ़ा कर जांघों पर के खून के धब्बे को रगड़ा।
लाला: रंभा बेटी, मैं तो समझ रहा था कि अनील तुम्हें महीनों से चोद रहा है। उसने तुम्हें चोदा नहीं तो फिर रोज़ तुम्हारे साथ क्या करता है?
अब रंभा थोड़ी कंफर्टेबल हो गई थी।
रंभा: मादरचोद ने नहीं चोदा इसीलिए तो रेणु की बात सुन कर चुदवाने आ गई। लेकिन कुतिया ने ये नहीं कहा था कि मुझे किसी आदमी से नहीं एक घोड़े से चुदवाना पड़ेगा।
रेणु सब सुन रही थी। वो नज़दीक आई और रंभा की दोनों चूचियों को ज़ोर से दबाया।
रेणु: मैडम जी, मैंने आपसे ऐसे ही नहीं कहा था। अमित से ख़ुद चुदवाने के बाद कहा था। मुझे एक घंटा चोदा, शोभा और इस रंडी इंदिरा से पूछ लो नीचे एक तेरी ही उम्र की लड़की को क़रीब 2 घंटा लगातार चोदा। अब अगर तुझे ये घोड़ा पसंद नहीं है तो हट जा, मैं फिर लूंगी।
रंभा: अब चूत फट ही गई है तो पूरा मज़ा लेने दे। बाबू जी रंडी कैसी है?
रंभा ने अपने बाप से इंदिरा के लिए पूछा।
लाला खूब रगड़-रगड़ कर इंदिरा को चोद रहा था। इंदिरा मस्ती की सिसकारी मारते हुए मज़ा ले रही थी।
इंदिरा: रंभा बेटी, मेरी ढीली बूर में लंड पेल कर तेरे बाबू जी को मज़ा आ रहा है कि नहीं मुझे नहीं मालूम। लेकिन मुझे हद से ज़्यादा, बहुत ज़्यादा मज़ा आ रहा है। लाला आज जो तुमने क़ीमत दी है वो तो मैं वापस नहीं करूंगी। लेकिन आगे से मुझे चोदने के लिए तुम्हें एक रुपया भी नहीं देना होगा। आज से अभी से मैं तुम दोनों, तुम्हारी और राजेंद्र की मुफ़्त की माल हूं। अमित, जब तक यहां हूं, मुझे यहीं रहने दो, तुमने मुझे, अपनी मां को चोद ही लिया। अब तेरे होस्टल जाकर क्या करूंगी।
इंदिरा की बात सुन कर अमित को बहुत ग़ुस्सा आया, और रंभा को चोदते हुए मां की चूचियों को ज़ोर से मसला।
अमित: रंडी, इस बार तो तुझे मेरे साथ चलना ही पड़ेगा। 2-3 दिन वहां रह कर वापस आ जाना, और दोनों बूढ़ों से जितना चुदवाना है चुदवाना।
अमित ने रंभा को चोदते हुए अपनी मां की चूचियों को मसला, तो लाला इंदिरा की बूर में दमदार धक्के मारते हुए अपनी बेटी की चूचियों को मसलने लगा। ना ही बेटी ने रोका ना ही अमित ने चूचियों के उपर से बाप का हाथ हटाया।
लाला: बेटी, पिछले 32-33 सालों में मैंने कम से कम तीन हज़ार लड़कियों और औरतों को चोदा है। हर देश की, अपने देश में हर राज्य की, हर तरह की माल को चोदा है। जो पहली लड़की मुझे सबसे ज़्यादा पसंद आई मैंने उससे शादी कर ली और तुम तीनों भाई-बहन पैदा हुए। उसके बाद जो भी माल मुझे पसंद आती गई उन सब को उनकी क़ीमत देकर अपने पास रखता हूं, और कुछ साल के बाद उन्हें विदा कर देता हूं।
लाला: दो साल पहले तुम्हारी मां हम सब को छोड़ कर चली गई। मैंने औरतों को चोदना नहीं छोड़ा, लेकिन तुम्हारी मां के बाद ये इंदिरा ही पहली औरत है जिसे मेरे लंड ने बहुत पसंद किया ही है, मेरे दिल ने भी बहुत पसंद कर लिया है। मैं इस रंडी इंदिरा से शादी करना चाहता हूं।
लाला ने कई बार अपनी बेटी की चूचियों को मसला, और उसके बाद दोनों हाथों से इंदिरा के गालों को दबाया, और धक्के मारते हुए होंठो को चूमा।
लाला: इंदिरा रानी, मुझ से शादी करोगी?
इंदिरा: पहले जो कर रहे हो उसे पूरा करो।
इंदिरा की बात सुन कर लाला को ख़ुशी हुई लेकिन अमित का ग़ुस्सा और भी बढ़ गया। लाला जैसा चोद रहा था चोदता रहा, लेकिन अमित बहुत ही बेदर्दी से रंभा को चोदने लगा। लेकिन अब रंभा को भी मज़ा आने लगा था। दोनों मस्ती की सिसकारी मार रही थी। कुछ समय गुज़रा।
इंदिरा: आह लाला बहुत मज़ा आया, मैं गई।
लाला: मैं भी भी झड़ने बाला हूं।
दोनों क़रीब साथ ही झड़े। अमित अपने तरीक़े से पेलता रहा। लाला ने बूर से लंड निकाला तो बिना साफ़ किए इंदिरा ने लंड को पकड़ा और चूसने लगी। क़रीब 10 मिनट और गुज़रे। रंभा ने अमित को ज़ोर से धक्का मारा।
रंभा: मादरचोद, कुछ बोल नहीं रही तो क्या ज़िंदगी भर ऐसा ही चोदता रहेगा क्या? मैं पूरी तरह से झड़ गई। अब चोट लग रही है, लंड बाहर निकाल।
बोलते हुए रंभा ने अमित को बहुत ज़ोर का धक्का मारा। अमित ने बूर से लंड निकाला और रंभा को बाहों में बांध कर बहुत देर तक चूमता रहा। फिर रंभा को अलग किया। रंभा को भी और दूसरों को भी दिखा कि लंड अब भी पूरे फ़ॉर्म में था।
इंदिरा तब भी लाला का लंड चूस रही थी। रंभा दोनों पांव को पूरा फैला कर लेटी थी। रंभा की बूर का छेद तब भी खुला ही था। गाढ़ा सफ़ेद रस बाहर टपक रहा था।
अमित ने दूसरी औरतों समिरा, रेणु और अपनी मां को देखा। इंदिरा नहीं-नहीं बोलती रही और अमित ने अपनी पोज़ीशन ली, और उस दिन तीसरी बार मां के बूर में धक्का मारा।
“बेटा नहीं”, लेकिन चौथे धक्के में बेटे का पूरा लंड मां की बूर के अंदर समा गया।
अमित ने रंभा को चोद-चोद कर इतना पस्त कर दिया कि उसने अमित को अपने उपर से हटा दिया, और वहीं बेड पर दोनों टांगें फैला कर लेटी रही। रंभा दो बार झड़ गई, लेकिन अमित का लंड पूरा टाइट था। रंभा के बग़ल में इंदिरा भी नंगी लेटी थी। लाला ने उसे चोदा। दोनों झंडे और लाला इंदिरा के उपर से उतर गया।
इंदिरा उसका लंड चूसने लगी। कमरे में उस समय रंभा के अलावा रेणु और शिप्रा थी। अमित ने थोड़ा ही सोचा और अपनी मां के उपर आ गया। इंदिरा के मुंह में लाला का ढीला लंड था। वे कुछ बोल नहीं पाई। अमित ने थोड़ी-थोड़ी देर मां की दोनों चूचियों को बढ़िया से चूसा। एक हाथ से लंड पकड़ कर मां की बूर में दबाया, और दना दन धक्का मारने लगा। बेटे का लंड आराम से मां की बूर के अंदर घुसने लगा।
अमित: राजेंद्र जी और लाला जी, आप दोनों ने मेरी मां को कितनी बेदर्दी से चोदा है। सुबह में 2 बार चोदा था तो मेरी मां की बूर कितनी टाइट थी और अभी देखिए कुतिया की बूर कितनी ढीली हो गई है। रेणु, तेरा कोई भी कस्टोमर इस रंडी को चोदने के लिए एक हज़ार भी नहीं देगा।
अमित की बात का जवाब ना इंदिरा ने दिया ना ही रेणु ने। जवाब दिया किसी और ने।
राजेंद्र: इंदिरा अब सिर्फ़ मेरी माल है। आज तुम अपनी मां को जितनी बार चोद सकते हो चोद लो। इंदिरा अब मेरे सिवा किसी और से नहीं चुदवायेगी।
राजेंद्र की बात पर इंदिरा ने कोई कमेंट नहीं किया। लेकिन लाला को राजेंद्र की बात पसंद नहीं आई। लाला ने झुक कर इंदिरा को चूमा।
राजेंद्र: इंदिरा सिर्फ़ तुम्हारे होटल की कस्टोमर है। मैं सुबह ही इसे अपने साथ ले जाऊंगा, और जितनी जल्दी होगा इंदिरा से शादी करूंगा।
रंभा: फालतू बात मत कीजिए बाबू जी। आप इस रंडी को जितना चोदना चाहते है चोदिए। लेकिन मैं आपको किसी रंडी से शादी नहीं करने दूंगी।
बेटी की इस बात पर लाला को बहुत ग़ुस्सा आ गया।
लाला: हरामजादी, तू इंदिरा को रंडी कह रही है। इस पूरी दुनिया में तुझसे घटिया रंडी और कोई नहीं होगी। रेणु, तू ही बोल, राजेंद्र तुम्हें बहुत रंडियों से पाला पड़ता है कभी सुना कि कोई लड़की अपने बाप के सामने बूर फड़वाती है। साली, पिछले चार साल से कितने लोग मुझसे खुशामद करते थे कि रंभा को उनसे चुदवा दूं। तीन दिन पहले भी केडिया मुझे ग्यारह लाख दे रहा था तेरी बूर फाड़ने के लिए, और कुतिया तुमने मुफ़्त में चुदवा लिया, झिल्ली को फटने दिया। तेरी बूर में बहुत गर्मी है तो ले मैं तेरी गर्मी उतारता हूं।
किसी को उम्मीद नहीं थी, किसी ने सोचा भी नहीं था। इंदिरा ने लंड चूस कर दुबारा टाइट कर दिया था। लाला ने बेटी के उपर अपनी पोज़ीशन बनायी।
रंभा: बाबू जी नहीं…
लेकिन हर धक्के पर बाप का लंड बेटी की कड़क बूर के अंदर बहुत ही धीरे-धीरे जाने लगा।
रंभा बार-बार “बाबू जी नहीं, बाबू जी नहीं” करती रही, लेकिन 12-13 धक्कों के बाद 7 इंच का लंड बेटी की बूर में पूरा घूस गया। समिरा ने रेणु का हाथ पकड़ कर घीमी आवाज़ में कहा, “बेटीचोद, मेरी जैसी जवान औरत को छोड़ कर हरामी ने बुढ़िया (इंदिरा) को पसंद किया। मैं बहुत खुश हूं कि अमित ने उसे मुफ़्त में चोदा ही, अब बाप भी चोद रहा है। अपने चाचा से बोल कि बाप के बाद वो भी उसे चोदे।”
समिरा ने सिर्फ़ कहा नहीं वो बेड से उतर कर ससुर के पास आई और राजेंद्र को नंगा करने लगी। बाप और बेटी की चुदाई शुरु हुए 10-12 मिनट ही हुए थे, और रंभा की मस्ती भरी सिसकारी कमरे में गूंजने लगी।
इंदिरा बेटे के हर धक्का पर सिसकारी मार ही रही थी। लाला अपनी बेटी को प्यार से नहीं ग़ुस्से से चोद रहा था। उसने देखा कि समिरा बहुत ही प्यार से राजेंद्र के मोटे लंड को सहला रही थी। उस दिन लाला वास्तव में समिरा को ही चोदने आया था। लेकिन पहले इंदिरा की मदमस्त जवानी ने और बाद में बेटी की बेशर्मी के कारण पहले इंदिरा को और बाद में बेटी को चोदने लगा।
इंदिरा को चोदना उसे बहुत ही ज़्यादा बढ़िया लगा था। लेकिन बेटी को चोद रहा था उससे लाला को बहुत बुरा लगने लगा था। लेकिन बाप के लंड को बेटी की बूर बहुत ही ज़्यादा पसंद आ गया था। सिर्फ़ बाप के लंड को ही नहीं, बेटी की बूर को भी बाप का लंड और लंड का धक्का बहुत पसंद आने लगा था।
रंभा: अमित, मुझे तुम्हारा लंड भी बहुत पसंद आया और तुम्हारी चुदाई भी। लेकिन अब मैं तुमसे दुबारा बच्चा पैदा करने के बाद ही चुदवाऊंगी। तुम्हारे इस घोड़े जैसे लंड से लगातार 3-4 बार भी चुदवा लूंगी तो फिर कभी भी मुझे दूसरे लंड के साथ, बाबू जी के लंड के साथ कुछ भी मज़ा नहीं आयेगा।
रेणु: मैं तो हर रोज़ लगातार अमित से चुदवाने को तैयार हूं।
रंभा: अभी तक तुमने अमित से एक बार ही चुदवाया है ना, लगातार चार पांच बार चुदवा ले तब पूछूंगी।
इनकी बातों को सुनते हुए अमित अपनी मां को खूब रगड़-रगड़ कर चोद रहा था।
अमित: रंभा, मैं बहुत ही ज़्यादा खुश हूं कि तुम्हारी प्यारी चूत का उद्घाटन मेरे ही लंड ने किया। अब तुम कितना भी बोलो, मैं भी जानता हूं और तुम भी जानती हो कि तुम्हारी चूत को मेरा लंड बहुत पसंद आया है। लेकिन अब मैं तुम्हें तभी चोदूंगा जब तुम ख़ुद ही मुझे चोदने के लिए बुलाओगी।
कमरे में दोनों जोड़ी बहुत ही मस्ती से चूदाई कर रहे थे। बेटा अपनी सगी मां को चोद रहा था, और बग़ल में बाप अपनी सगी बेटी की चूत को ढीला करने पर लगा था। बेचारा राजेंद्र कितना कंट्रोल करता। वो अपनी बहु समिरा का हाथ पकड़ कर बेड के पास आया।
राजेंद्र: लाला, बेटी को पकड़ कर तुम दोनों इंदिरा की तरफ़ धसक जाओ। तुम तो मेरी बहु को चोदने आये थे लेकिन कोई बात नहीं तुम अपनी बेटी की चूत को ढीला करो मैं अपनी बहु को प्यार करूंगा। समिरा बेटी, रंभा के बग़ल में लेट जाओ।
समिरा ने कोई देरी नहीं की। वो अपनी सुहाग रात से लेकर पिछले चार सालों में सैकड़ों बार ससुर से चुदवा चुकी थी। अक्सर 28 साल का पति और 65 साल का ससुर एक बेड पर ही बारी-बारी से समिरा को चोदते थे। बोलने की ज़रूरत नहीं समिरा को अपने पति के साथ की चूदाई में कोई मज़ा नहीं आता था। लाला ने चोदते हुए ही बेटी को इंदिरा की तरफ़ खसकाया। दोनों चुद रही माल का बदन एक-दूसरे से रगड़ खाने लगा था।
मां को चोदते हुए अमित बेझिझक रंभा की चूचियों को मसलने लगा। लेकिन ना तो रंभा ने ही रोका और ना ही लाला ने ही मना किया।
समिरा भी उसी बेड पर रंभा के बग़ल में लेट गई और जैसे ही समिरा लेटी, लाला ने बेटी की बूर से लंड निकाला। तुरंत समिरा के उपर आया, एक हाथ से लंड को पकड़ कर समिरा की बूर में दबाया, और पूरी ताक़त से धक्का मारा।
समिरा: आह, थोड़ा धीरे यार।
क़रीब सवा घंटा पहले ही समिरा ने कहा था कि उस दिन वो लाला से नहीं चुदवायेगी लेकिन अब लाला के हर धक्के पर “आह, उफ़ करने लगी थी। रंभा को बिल्कुल पसंद नहीं आया कि बिना उसे ठंडा किये ही उसके बाप ने चूत से लंड निकाला और बग़ल में लेटी, उससे 5-6 साल बड़ी औरत की बूर में लंड पेल दिया।
रंभा: बाबू जी, अब तुम नाक रगड़ कर मर जाओगे फिर भी तुम्हें कभी हाथ नहीं लगाने दूंगी। कल से ही तुम्हारी आंखों के सामने तुम्हारे खास-खास दोस्तों, कस्टोमर से चुदवाना शुरु करूंगी और तुम बेटी को दोस्तों से चुदवाते देख ताली बजाना। ये मादरचोद अमित इतनी जल्दी अपनी मां की बूर से लंड निकालेगा नहीं, राजेंद्र चाचा हाथों को क्यों तकलीफ़ दे रहे हो। अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डालो, मेरी चूत तुम्हारे लंड की मालिश कर देगी।
रंभा ने ख़ुद चोदने के लिए कहा तो राजेंद्र क्यों इंतज़ार करता। दो चुद रही औरतों के बीच लेटी रंभा ने अपने दोनों हाथों और पैरों को हवा में उठाया, और एक 65 साल का आदमी 18 साल के जवान लड़के के जैसा उन फैली हुई बाहों में समा गया। रंभा बहुत खुश थी कि बाप के सामने ही अपने से छोटी उम्र के लड़के से चूत का उद्घाटन करवाया, और अब बाप से 15-16 साल बड़ी उम्र के आदमी का लंड उसकी बूर में घुस रहा था।
“वाह राजेंद्र काका, मज़ा आ गया। चुदवाने में मज़ा आता है यह तो सुना था, और सच मुझे चुदवाने में बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा है। खास कर कई लोगों के सामने और अपने बाप के सामने चुदवाने में इतना ज़्यादा मज़ा आयेगा मैंने कभी नहीं सोचा था। वाह काका, आप बहुत ही ज़्यादा मज़ा दे रहे हैं।”
राजेंद्र ने रंभा को चोदना शुरू ही किया था कि शोभा भी आ गई। रेणु ने धीरे से उसे सब बताया कि उसके जाने के बाद क्या हुआ।
रेणु: लेकिन तुझे इतना लेट कैसे हो गया? पता है तुम क़रीब तीन घंटा बाद आई हो! किससे चुदवा रही थी?
शोभा: हम रेस्टोरेन्ट में खा ही रहे थे कि एक आदमी सामने आया और उसने जरीना का हाथ पकड़ लिया। उसने कहा कि वो जरीना को दस हज़ार ही देगा। लेकिन अगर हम दोनों, मैं और शिप्रा भी साथ रहेंगे तो वो हर एक को बीस-बीस हज़ार देगा। उसने बैग से रूपया निकाल कर टेबल पर रख लिया। तुम उसे रूपया दे रही थी, तो उसने तुम्हें गाली दी। लेकिन कुतिया ने आदमी के साथ डील की कि अगर वो 75 हज़ार देगा तो तीनों उसके साथ चुदवायेंगे।
शोभा: उस आदमी ने कहा कि अगर शिप्रा का घरवाला भी रुम में रहेगा तो वह 75 हज़ार देगा। और वो नामर्द मान भी गया।उस नामर्द के सामने उसने शिप्रा को ही पहले चोदा, उसे लंड भी चुसाया। साला अपना लंड हिलाते हुए घरवाली की चुदाई देखता रहा। उसी से चुदवाने में लेट हो गया। मैं तो अमित से चुदवाने के लालच में आई हूं, लेकिन लगता नहीं कि मेरा नंबर आयेगा।
इंदिरा सब सुन रही थी।
इंदिरा: आज का दिन ही ख़राब है मेरे लिए। सुबह से ये मादरचोद तीसरी बार चोद रहा है। तेरे मालिक ने तीन बार चोदा। लाला ने एक बार चोदा। बेटा, मेरी चूत चमड़े का ही है, कोई इलास्टिक नहीं है कि कितना भी रगड़ो तो फर्क़ नहीं पड़ेगा। अब अगर तू चाहता है कि मैं सुबह तेरे होस्टल चलूं, तो मेरे उपर से उतर और मुझे 4-5 घंटा बढ़िया से सोने दे।
लाला समिरा को खूब रगड़-रगड़ कर चोद रहा था।
लाला: अमित, तुम्हें जो कीमत चाहिए मैं दूंगा। अपनी मां मुझे दे दो। चाहे तो रुपया के साथ-साथ ये रंडी रंभा भी तुम्हें दे दूंगा।
अमित: लाला जी, हमारे हेडमास्टर और दूसरे लोग बेसब्री से मेरी मां का वेट कर रहे हैं। कल सुबह तो मेरी मां मेरे साथ ही जायेगी। पहले तो सोचा था कि शनिवार तक अपने साथ रखूंगा, लेकिन मेरी रंडी मां के लिए आप लोगों का प्यार देख कर मैं बुधवार की रात तक ही अपने साथ रखूंगा। बृहस्पति वार सुबह हमारे होस्टल आकर मां को ले जाइये। ये जहां जिसके साथ रहना चाहे, इस रंडी की मर्ज़ी। ले रानी, तुझे चोद कर सच बहुत ही ज़्यादा मज़ा आया।
बोल कर अमित ने मां की बूर से लंड निकाला। अपने लोअर हिस्से के सपोर्ट पर बैठा। राजेंद्र रंभा को चोद रहा था। अमित ने रेणु की ओर देखा। फिर अपने को इस तरह पोज़ीशन किया कि उसका लंड राजेंद्र के मुंह की लाईन में आ गया। रूम में 8 लोग थे, लेकिन एक रेणु के अलावा किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि अमित क्या करने वाला था।
रेणु ने अमित को यह चैलेंज तो दे दिया कि राजेंद्र को अपना लंड चुसाए। लेकिन उसे बहुत डर भी लग रहा था। लेकिन जब तक कोई समझता अमित ने राजेंद्र के माथा को पकड़ कर अपनी ओर खींचा। अपने एक हाथ से पकड़ कर अमित ने लंड को राजेंद्र के मुंह में पेल दिया, और दोनों हाथों से राजेंद्र के माथे को ज़ोर से पकड़े हुए लंड पर नीचे उपर करने लगा। लाला भी समिरा के बूर में लंड को दबाये रख आंखे फाड़ कर देखता रहा। अमित लगातार राजेंद्र के माथे को अपने लंड के उपर-नीचे करता रहा।
शोभा: मादरचोद की इतनी हिम्मत कि हमारे मालिक को लंड चुसाए।
रेणु: चुप ही रह। पुलिस में बात जायेगी तो सभी को पता चल जायेगा कि राजेंद्र सिर्फ़ अपनी बहु और भाई की बेटी को ही नहीं चोदता है, उनसे धंधा भी करवाता है। सारे शहर में बात फैल जायेगी कि लाला ने अपनी बेटी को बेचा ही, दूसरों के सामने ख़ुद भी चोद लिया। अमित जान प्यारी है तो तुरंत अपनी रंडी कुतिया मां को लेकर यहां से भागो।
रेणु ने एक तीर से दो निशाना साधा। उसने राजेंद्र और लाला को भी चेतावनी देदी कि अमित के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से क्या होगा। साथ ही उसने अमित से भी कह दिया कि मां को लेकर होटल से निकल जाये। रेणु को मालूम था कि इंदिरा ने एक ही दिन में 7 लाख से ज़्यादा कमाया था।
राजेंद्र का माथा तेज़ी से लंड पर उपर-नीचे हो रहा था। साथ ही आंखों के सामने तीन नंगी जवानियां थी। रुम में 5 औरतें थी। समिरा और शोभा को छोड़ कर अमित ने बाक़ी तीनों को चोद लिया था। तीन-तीन माल को एक साथ नंगी देख कर अमित भी बहुत एक्साइटेड हो गया। दोनों हाथों से माथा को लंड पर दबाया, और लंड ने पानी फेंकना शुरू किया।
अमित: राजेंद्र जी, मेरे लंड पर कुंवारी रंभा और दुनिया की सबसे घटिया रंडी मेरी मां के अंदरूनी बूर का रस लगा था, वो सारा आपने चाट लिया। अब आप मेरे लंड से निकला रस भी गटक लेंगे तो देखिएगा, रंभा चुदवाते हुए पस्त हो जायेगी लेकिन आप नहीं थकेंगे।
अमित ने राजेंद्र के माथा को अपने लंड पर दबाए ही रखा। राजेंद्र के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। अमित के लंड का गर्म-गर्म रस, सारा रस राजेंद्र के गले से होते हुए उनके पेट में चला गया। जब अमित को लगा कि लंड ने सारा रस राजेंद्र के अंदर डाल दिया था, तब तीन-चार धक्के मार कर लंड को बाहर निकाल लिया। राजेंद्र को संभलने में थोड़ा समय लगा। उसने रंभा की बूर से लंड बाहर नहीं निकाला।
राजेंद्र: रेणु, इन दोनों हरामियों को हमारे नज़र के सामने से तुरंत हटाओ। इन्हें बोल दो कि अगर इन दोनों में से कोई भी होटल के आस-पास भी नज़र आया तो मैं इनका खून कर दूंगा।
राजेंद्र का ग़ुस्सा होना जायज़ था। राजेंद्र की बात सुन दोनों मां-बेटे बेड से नीचे उतरे और उपर बेड पर लाला और राजेंद्र अपनी अपनी माल को फिर से चोदने लगे।
रेणु ने इंदिरा को कपड़ा पहनने में और सामान समेटने में भी मदद की। रेणु ने ख़ुद उस दिन की सारी कमाई इंदिरा के सूटकेस में रखी। दोनों मां-बेटा एक साथ बाथरूम गये और अपना सामान लेकर रुम से बाहर निकल गये।
रेणु: साढ़े बारह बज रहे है। होस्टल जाने में एक घंटा लग जायेगा। तो चलो मैं तुम दोनों को सामने वाले होटल में बुक कर देती हूं। सुबह चले जाना।
लेकिन अमित ने होस्टल वापस जाने की ज़िद्द की।
अमित: नहीं रेणु, हम नहीं चाहते कि हमारे कारण तुम्हें कोई परेशानी हो। हम अभी होस्टल चले जायेंगें। सुबह मुझे क्लास भी करना है।
रेणु: तुम दोनों मुझे बहुत ही पसंद आये हो। मैं जल्दी कांटैक्ट करूंगी। संभल कर जाना। तुम्हारे साथ कोई साधारण औरत नहीं आग बरसाने वाली औरत है।
रेणु ने ही टैक्सी अरेंज किया। बिना किसी परेशानी के टैक्सी रेखा के घर के सामने रात के क़रीब डेढ़ बजे रुकी। टैक्सी वाला अपना भाड़ा लेकर चला गया।
इंदिरा: बेटा मुझे नहीं मालूम था कि मेरी जवानी की इतनी ज़्यादा क़ीमत है। तुमने तो बहुत बढ़िया चोदा ही, लाला की चुदाई मुझे ज़्यादा पसंद आई। सच बोलूं, मैं लाला से शादी करने को तैयार हूं।
कुछ देर तो मैं मां को घूरता ही रहा।
अमित: उन दोनों में से कोई भी अब तुम्हें अपने आस-पास नहीं आने देगा।
मां: कितना बड़ा हरामी है तू, बाप के सामने कुंवारी बेटी को चोद लिया, अपने बाप से 20 साल बड़े आदमी को लंड चुसाया, तुम्हें कोई डर भय नहीं है?
इंदिरा ने बेटे से यह शिकायत नहीं की कि उसने दूसरों के सामने भी मां को चोदा। अमित ने कई बार दरवाज़े पर नॉक किया तब दरवाज़ा खुला। सामने अरविंद सर थे। अमित के साथ एक 40-42 साल की खूबसूरत औरत को देख कर समझ गया।
अरविंद: प्रणाम इंदिरा जी, आपकी ट्रेन तो सुबह आती है फिर अभी इतनी रात को!
“सब सवाल दरवाज़े पर ही पूछ लोगे, दीदी को अंदर आने दो और अमित तू अभी अपने रुम में जा। यहां रहेगा तो ना ख़ुद सोयेगा ना हमें सोने देगा। इंदिरा दीदी, मैं ही आपके बेटे की छोटी मां रेखा हूं। आपका हमारे घर में स्वागत है।”
रेखा भी आ गई। उसने झुक कर इंदिरा के पांव को छू कर प्रणाम किया। अमित ने बहुत खुशामद की, लेकिन रेखा ने उसे घर में रहने नहीं दिया। मां को रेखा के घर छोड़ कर अमित होस्टल की तरफ़ आने लगा। होस्टल के गेट पर ना बनबारी था ना ही असलम। ललन नाम का तीसरा गार्ड था। उसने अमित को पहचान लिया।
ललन: अमित जी, लगता है कि आपकी माल ने आपको पूरा खाना नहीं खिलाया, या फिर आपका डंडा और उसका काम उसे पसंद नहीं आया तभी आधी रात को ही घर से निकाल दिया। ख़ैर कोई बात नहीं, आपके हिंदी टीचर पाठक सर की पत्नी रत्ना आपके रुम में आई थी। आप नहीं थे, तो आपके दोस्त विनोद के पास में ने उन्हें रख दिया है। विनोद साहब ने चोद लिया होगा। अब उन्हें आप के रुम में भेज दूं?
अमित: ललन जी, मैं अभी शहर से आ रहा हूं। मैं बहुत थका हुआ हूं। रत्ना को आप ही चोद लो। मैं कभी बाद में ले लूंगा। मैं सोने जा रहा हूं।
अमित अंदर आया लेकिन अपने रुम में नहीं गया। अंदर ही अंदर वार्डन के घर गया और दरवाज़े पर नॉक किया। कुछ देर बाद डोर खुला और एक हाउस गाउन पहने संपा सामने खड़ी थी।
संपा: तू पागल है क्या? अभी मेरे बदले वार्डन आ जाता तो?
अमित: मैं क्या करूं रानी, तुम मेरे दिलो-दिमाग़ में छा गई हो। एक बार प्यार करने दो।
संपा ने डोर को बंद किया, और अमित को लेकर दूसरे बेडरुम में गई।
संपा: तू तो अपनी मां को चोदने गया था। इतनी रात को उसे किस के पास बेच कर आ गया?
अमित ने संपा के बदन से गाउन हटा दिया, और उसे बेड पर लिटाया। खुद भी नंगा हुआ और संपा के उपर चढ़ गया। लंड को तैयार देख संपा भी गर्म हो गई। ख़ुद लंड को बूर के छेद में दबाया और अमित ने धक्के मारना शुरू किया।
अमित: मेरी रंडी सुबह ही आ गई थी। उसे कई बार चोदा भी। होटल का 65 साल का मालिक उसे अपने साथ रखने की बात कर रहा था। मैंने मां की बूर से लंड निकाल कर साले को चुसाया और उसे रस भी पिलाया। बेटीचोद ने ग़ुस्से में आकर हम दोनों को होटल से निकाल दिया। अभी मां को अपनी दूसरी रंडी रेखा के पास छोड़ कर अपनी प्यारी रानी को प्यार करने आया हूं।
संपा: तू झूठ बोल रहा है, सिर्फ़ मुझे गर्म करने के लिए बोल रहा है ना, कि तुमने मां को चोदा।
अमित: नहीं रानी, जो कसम ले लो। एक बार नहीं, तीन बार चोदा।
अमित को सही में संपा से बहुत प्यार हो गया था। उसने अपने से 25 साल बड़ी उम्र की औरत को चोदते हुए दिन भर की सारी बात बता दी। कुछ भी नहीं छिपाया।
संपा: बाप रे, तू बहुत बड़ा हरामी है। तुझसे बच कर रहना पड़ेगा।
अमित ने धक्का मारते हुए बेतहाशा चूमा।
अमित: रानी मुझे और कोई नहीं चाहिए। बस एक यही संपा मित्रा चाहिए। मुझे कभी अपने से अलग मत करना।
संपा: नहीं करुंगी। तू शाम को अपनी मां को लेकर मेरे घर आ। वो जितने दिन यहां रहना चाहती है, तुम भी उसके साथ मेरे घर में ही रहो।
अमित ने बता दिया कि हेडमास्टर ने पहले ही रात के खाने के लिए बुलाया था।
अमित: मेरी मां वास्तव में रेखा के बुलाने पर ही आई है। रेखा उसे अपने से अलग नहीं करेगी।
संपा: तू चिंता मत कर। तू अपना काम कर। मैं ख़ुद जाकर मिल लूंगी। बहुत बढ़िया से चोद रहे हो यार। मां की बूर का मसाला खाकर तेरे लंड की ताक़त और बढ़ गई है। पेलता रह।
चोदते-चोदते अमित ने संपा को ठंडा किया ही, ख़ुद भी ठंडा हो गया। दोनों वैसे ही नंगे ही, एक-दूसरे से चिपक कर सो गये।
सुबह पहले संपा की नींद खुली। उसने बिना कुछ बोले हिला-डुला कर अमित को उठाया। उसकी आंख खुली और तुरंत खड़ा हो गया। लेकिन संपा ने अमित के लंड को कस कर पकड़ा।
संपा: समीर, अमित को इस घर में, मेरे और सपना के साथ नंगा देखने की आदत डाल लो। अब जब भी बुलाऊंगी अमित घर आकर हम दोनों को चोदेगा। अगर तुमने अमित को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश भी कि, तो यहां रहने वाले सभी को मालूम हो जायेगा कि तुम अपनी बेटी को चोदते हो।
सपना और पति के सामने संपा ने सुपारा को थोड़ी देर चूसा।
संपा: अमित अभी जाओ, नाश्ता का समय हो गया है। मैं तुम्हारी मां से मिल लूंगी। यार, आज तुमने बहुत ही बढ़िया चोदा। जब भी मौक़ा मिले घर आ जाना। हम दोनों की बूर तुम्हारे लिए हमेशा खुली है।
बाक़ी तीनों में से किसी ने कुछ नहीं कहा लेकिन कपड़े पहन कर अमित ने समीर मित्रा (वार्डन) के फ़ीट को छूकर प्रणाम किया।
अमित: सर ज़िंदगी भर आपका आभारी रहूंगा। प्लीज़ मुझे आप अपनी पत्नी को प्यार करने से कभी मत रोकिएगा।
सब के सामने अमित पहले संपा को और बाद में सपना को चूम कर अपने रूम में वापस आ गया। अमित के घर से बाहर निकलने के बाद मित्रा ने सपना को गोदी में बिठाया।
मित्रा: बाप रे कितनी हिम्मत है इस लड़के में! मैं तो इसे बहुत ही शरीफ़ समझता था।
संपा नंगी ही थी।
संपा: अमित शरीफ़ है कि नहीं वो मालूम नहीं। लेकिन तुमने साबित कर दिया कि तुम दुनिया के सबसे बड़े नामर्द हो। तेरी आंखों के सामने तेरी घरवाली को चोद कर चला गया, और तुमने उसे ऐसे ही जाने दिया?
मित्रा भी तो बेटीचोद ही था। बेटी ने अभी तक बूर में बाप का लंड नहीं घुसने दिया था, लेकिन कई महीनों से बाप से बूर चटवा रही थी। सपना के सलवार के अंदर हाथ घुसा कर बूर को मसलने लगा।
मित्रा: अमित को जल्दी घर बुलाओ, और मेरे सामने उससे चुदवाओ। सात साल से 5 आदमियों के साथ धंधा कर ही रही हो, अब घर में भी धंधा कर दो। बनबारी को बोलता हूं कि तुम दोनों की भी दलाली करें।
संपा: हम दोनों स्टूडेंट्स से चुदवाये या ना चूदवाये, बहुत जल्दी तेरी बेटी और दोनों बहनों को तेरी आंखों के सामने एक के बाद एक अमित, तेरे दोस्त अरविंद और असलम से चुदवाऊंगी। असलम कल भी आया था। बोल रहा था कि कोई आसिफ़ है जो मुझे चोदने के लिए 25 हज़ार देगा। होटल ना जा कर अब असलम की रंडी बन कर यहीं तेरे स्टूडेंटस से चूदवाऊंगी। सुना है कि दूसरी औरतें 2 घंटा का सिर्फ़ तीन हज़ार ही लेती हैं। मैं देखना चाहती हूं कि कौन लड़का है जो तीन हज़ार के बदले मुझे 25 हज़ार देना चाहता है। एक बार फिर कहती हूं, अमित का किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए।
संपा अपनी जगह से उठी और मित्रा की गोदी में बैठी सपना को भी उठाया।
संपा: आज रात तो अमित नहीं आयेगा। सपना, असलम को बोल कि पूरा एडवांस मिलने के बाद आज रात ही आसिफ़ से चुदवाऊंगी।
अमित ने 3 बार ही चोदा और संपा की सोई हुई जवानी पूरी तरह से जाग गई। अब ये देखना था कि रेखा कब स्टूडेंट्स के रुम में जाकर चुदवाना शुरू करेगी।
अमित फ़्रेश होकर कैंटीन गया। बहुत से स्टूडेंटस तब भी नाश्ता कर रहे थे। अपने नाश्ते की प्लेट लेकर अमित अपने दोस्त विनोद के बग़ल में बैठ गया।
अमित: अच्छा किया कि तुमने रत्ना मैडम को संभाल लिया। कैसी है कुतिया?
विनोद: बहुत ही मस्त और बिंदास माल है। रंडी ने कहा कि वो देखना चाहती है कि एक के बाद एक लगातार कितना लंड संभाल सकती है। तीन घंटे के बदले 6 घंटे रही। क्या लंड चूसती है यार मज़ा आ गया।
अमित: मेरी मां से बढ़िया नहीं चूसती होगी। रूपया निकाल कर रख ले। वो किसी भी रात मेरे रूम में आ सकती है। तुझे बुला लूंगा।
विनोद: जब भी आयेगी पूरा पैसा दूंगा। लेकिन यार मुझे रेखा की बूर में लंड पेलना है।
अमित: बहुत जल्दी उसे तैयार कर लूंगा। फिर हम दोनों एक साथ उसे चोदेंगे। अपनी मां बहन को कब बुलाओगे?
विनोद: दिल्ली यहां से कितनी दूर है! सुबह जाओगे और दोनों को चोद कर रात कर वापस आ सकते हो। आज कल हेडमास्टर साहब तुम पर बहुत मेहरबान है। लगता है कि संगीता तुम्हारी चुदाई से बहुत ही ज़्यादा खुश है।
अमित: क्या फ़ालतू बात कर रहे हो! मैं पागल हूं जो हेडमास्टर की बेटी को हाथ लगाऊंगा? मुझे संगीता या रचना जैसी जवान लड़की नहीं 2-3 बच्चों वाली औरतों को चोदने में ज़्यादा मज़ा आता है। मैंने संगीता को नहीं चोदा है।
अमित ने इतना ज़ोर देकर कहा कि विनोद को भी लगा कि अमित ने तब तक संगीता को नहीं चोदा था। नाश्ता करने के बाद दोनों क्लास में गये। लंच में संगीता ने अमित से बात की। अमित ने बताया कि उसकी मां आ गई थी और रेखा के साथ रह रही थी। संगीता ने अमित को याद दिलाया कि रात में दोनों मां बेटे का खाना उनके घर में था। संगीता ने कहा, “खाने के बाद तेरी मां किससे चुदवाती है मुझे नहीं मालूम, लेकिन तुम मुझे रात भर चोदोगे। तुमसे कैसा चोदा यार, असलम और अरविंद से 2-2 बार चुदवा कर मैंने दोनों से कह दिया कि मुझे उनके साथ कोई मज़ा नहीं आया, और अब उनसे कभी नहीं चुदवाऊंगी।”
मैंने इधर-उधर देखा और संगीता का एक हाथ पकड़ कर एक किनारे ले गया। बहुतों ने देखा। देखने वालों में विनोद और रचना भी थे।
अमित: मैं चाहता हूं कि हम दोनों के सामने तुम्हारा असलम मेरी मां को चोदे, और मैं आज रात तुम दोनों मां-बेटी को चोदूंगा।
संगीता: इंतज़ाम कर दूंगी लेकिन उससे पहले तुम्हें सब के सामने, बाबू जी के सामने अपनी मां को चोदना होगा।
अमित: तुम्हारा हुक्म सर आंखों पर मैडम। यार इस रचना को चोदना है।
संगीता: क्लास के बाद रोज़ 2-3 घंटा गार्गी को चोदने जाती है। गार्गी को तुमने चोद ही लिया है रचना को चोदना मुश्किल नहीं होगा। वैसे रचना तुम्हें बहुत पसंद करती है। ख़ुशी-ख़ुशी चुदवायेगी।
उस दिन आख़िरी पीरियड केमिस्ट्री का प्रैक्टिकल था। मैं अपना काम कर रहा था कि रचना बग़ल में आ गई।
अमित: आज तो मेरी किस्मत खुल गई। रचना मैडम, स्कूल की हीरोईन मेरे बग़ल में है।
रचना: फालतू बात मत करो। गार्गी, जिसे तुम जानते नहीं, उसके घर जा सकते हो, उसके साथ रात गुज़ार सकते हो, संगीता के साथ रात गुज़ार सकते हो, तो मेरे घर नहीं आ सकते थे?
संगीता ने अपनी चूदाई की कहानी रचना को नहीं सुनाई थी लेकिन पिछले दिन जब वो गार्गी के साथ नंगी मस्ती मार रही थी, तब रचना की नंगी जवानी को मसलते हुए अमित के साथ की चूदाई की कहानी विस्तार से बतलाई ही, यह भी कह दिया कि अमित संगीता और रेखा को भी चोद रहा है।
गार्गी की पूरी बात सुन कर उसने कहा था। “अमित को सभी बहुत शरीफ़ समझते हैं लेकिन कुछ दिन से, 20-22 दिनों से उसमें बहुत बदलाव आ गया है। अब समझ में आया कि असल बात क्या है। लेकिन तुम तो उसे पढ़ाती नहीं फिर तुम्हें चोदने कैसे आ गया?”
गार्गी: रेखा ने बताया कि अमित बहुत ही बढ़िया चोदता है तो मैंने हेडमास्टर से कहा और उसने अगली रात ही उसे मेरे पास भेज दिया। मुझे लगता है कि वो दूसरी माल सब को भी चोद रहा है।
गार्गी की बात सुन कर उसने फ़ैसला किया कि वो अमित से ही सीधा बात करेगी। पहले ही मौक़ा पर उसने कहा कि जब वो संगीता और गार्गी के साथ रात गुज़ार सकता था, तो उसके घर क्यों नहीं आया।
अमित: दोनों संगीता और गार्गी ने बुलाया तब उनके घर गया। तुम बस दूर से मुस्कुराती हो। लेकिन बोलने के लिए कभी घर नहीं बुलाया। सच तो यह है कि मुझे मालूम नहीं कि तुम रहती कहां हो, किसकी बेटी हो।
रचना ने इधर-उधर देखा। उसने ध्यान दिया की सबकी नज़र इन दोनों के तरफ़ ही थी। फिर भी वो अमित के थोड़ा और नज़दीक आई और बहुत ही धीमी आवाज़ में कहा, “अगर शनिवार के पहले तुमने अपना घोड़े के जैसा लंड मेरी बूर में नहीं पेला, तो रविवार को तेरी आंखों के सामने दिन भर अरविंद से चुदवाती रहुंगी। मादरचोद रोज चोदने के लिए खुशामद करता है।”
इतना बोल कर रचना वहां से हट कर अपनी जगह पर चली गई। संगीता ने बताया ही था कि रचना एक लेसबियन थी, गार्गी की सेक्स पार्टनर थी। अमित को समझते देर नहीं लगी कि गार्गी ने अमित के साथ की चुदाई की पूरी बात रचना को बता दी थी।
क्लासेज़ ख़त्म होने के बाद अमित ने कैन्टीन में जा कर नाश्ता किया और रेखा के घर पहुंच गया। रेखा ने मुस्कुरा कर स्वागत किया लेकिन बेटे को देख कर इंदिरा खुश नहीं हुई। पिछले दिन की अमित की हिम्मत देख कर इंदिरा बहुत ही ज़्यादा डर गई थी। वो अब किसी और के सामने बेटे से नहीं चुदवाना चाहती थी।
रेखा: अभी थोड़ी देर पहले तेरी संपा रानी यहां से गई है। बहुत तारीफ़ कर रही थी तेरी। उसे भी चोद लिया!
अमित ने कुछ जवाब नहीं दिया।
इंदिरा: मुझे तुम्हारी छोटी मां बहुत पसंद आई है। मैं यहीं रहना चाहती हूं। अपने हेडमास्टर से कह दो कि मेरी तबियत ठीक नहीं है, हम बाद में उनके घर आयेंगे।
लेकिन अमित को यह बात पसंद नहीं आई। वह अपनी मां को एक गार्ड असलम से चुदवाना चाहता था।
अमित: मां, हेडमास्टर के घर तो जाना ही पड़ेगा। नहीं खाना है तो मत खाना, लेकिन जाना तो पड़ेगा ही।
अमित ने बहुत कहा, रेखा और अरविंद ने भी कहा तब इंदिरा तैयार हुई।
इंदिरा: ठीक है, तू बोलता है तो तेरे हेडमास्टर से भी मिल लूंगी और तेरी रंडी संगीता से भी। लेकिन याद रख, अगर होटल के जैसा वहां भी तुमने कुछ भी उल्टा-सीधा करने की कोशिश की, या हेडमास्टर को खुश करने के लिए मुझे नंगा होने कहा, तो तेरे ही सामने तेरे सारे दोस्तों से चुदवाऊंगी। कुछ भी हो जाये मुझे तेरी रेखा के पास रात दस बजे तक वापस आना है। और तू आज भी यहां नहीं रहेगा। रेखा को तुझसे चुदवाना है तो वहीं तेरे रुम में आ जायेगी।
रेखा: तेरे बेटे को यहां अभी बहुत दिनों तक रहना है। उससे चुदवाती ही रहूंगी लेकिन तुम्हारे साथ रहने का मौक़ा कब मिलेगा। अमित, जब तक दीदी यहां है, तुम मेरे सामने नहीं आओगे। तुम्हें अब एक नई माल मिल ही गई है, रात-दिन संपा को चोदते रहो।
अमित को लगा कि संपा को चोदने से रेखा खुश नहीं थी। लेकिन अमित को रेखा की नाराज़गी की कोई चिंता नहीं थी। उसके लिए संपा रेखा से हर तरह से बहुत बढ़िया माल थी। इंदिरा ने अमित को यह कह कर वापस होस्टल भेज दिया, कि वो आठ बजे तैयार रहेगी।
रेखा से ज़्यादा अमित अपनी मां को चोदना चाहता था। लेकिन इंदिरा एक दिन में ही बेटे से परेशान हो गई थी। होस्टल वापस आते समय रास्ते भर अमित यही सोचता रहा। आख़िरकार उसे महसूस हुआ कि उसकी मां को दोनों बातें पसंद नहीं आई। इंदिरा को यह तो बिल्कुल पसंद नहीं आया कि बेटे ने मां को दूसरे के सामने चोदा। इंदिरा को यह भी पसंद नहीं आया कि दूसरों के साथ की चूदाई भी बेटे ने देखी।
अब इंदिरा को अपने आप से बहुत नफ़रत होने लगी थी। उसने अमित से झूठ नहीं कहा था। जब चार साल पहले उसने अमित को नहाते हुए देखा था, तभी पहली बार उसके घोड़े जैसे लंबे और मोटे लंड को देखा था। उसके बाद से हर पल वो बेटे के लंड को अपनी बूर के अंदर रखना चाहती थी। लेकिन बेटे के सामने आते ही वो शर्म से पानी-पानी हो जाती थी। चार साल गुजर गये, लेकिन दुबारा बेटे के लंड को देखने का मौक़ा ही नहीं मिला।
इंदिरा की हिम्मत तब बढ़ी, जब उसे बेटे की चिट्ठी मिली, जिसमें लिखा था कि बाप-बेटी को चोदना चाहता है। और उस चिट्ठी के मिलने के एक महीने के अंदर ही बेटे ने उसे दुनिया की सबसे बेशर्म औरत बना दिया। इंदिरा ने बहुत सोचा और आख़िर में इसी नतीजे पर पहुंची कि वो ख़ुद बेटे से चुदवाना चाहती थी।
उसने ख़ुद ही राजेंद्र और लाला से बेटे के सामने चुदवाया। इंदिरा को याद था कि उसने एक बार भी ना ही अमित को रोका ना ही अमित को रुम से बाहर जाने बोला। लेकिन इंदिरा ने फ़ैसला किया कि ना अब वो किसी और के सामने बेटे से चुदवायेगी, ना ही बेटे के सामने ही किसी दूसरों से चुदवायेगी।
दोनों मां और बेटे की सोच एक ही जैसी थी। लेकिन अब ऐसी सोच से क्या फ़ायदा था? बहुतों को मालूम हो गया था कि इंदिरा बेटे से चुदवाती थी, और बहुत ऊंची क़ीमत पर धंधा भी करती थी। अमित अब अपनी मां को अपने सामने गार्ड असलम और दोस्त विनोद से चुदवाना चाहता था, और इंदिरा ने फ़ैसला कर लिया था कि ना ही वो बेटे के सामने किसी और से चुदवायेगी। ना ही किसी और के सामने बेटे से चुदवायेगी।
अमित ने अपने रुम का दरवाज़ा खोला तो देखा कि रूम में एक लाल रंग का ख़ुशबूदार स्लिप था। अमित ने उठा कर पढ़ा और उसके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गई। स्लिप पढ़ कर वो अपनी मां को ही नहीं रेखा को भी भूल गया। अमित ने बार-बार स्लिप को पढ़ा, बार-बार किस किया। स्लिप पर लिखा था, “मेरे प्यारे अमित, आज रात कहीं बाहर मत जाना, रुम में ही रहना, मुझे तुम्हारी ज़रूरत पड़ेगी। तुम्हारी प्रेमिका संपा।”
औरत ने ना अपना नाम छिपाया ना ही अपने प्रेमी का। स्लिप पढ़ कर अमित हद से ज़्यादा खुश हो गया। एक बार तो सोचा कि हेडमास्टर के घर भी ना जाये। लेकिन मां को हेडमास्टर से मिलाना था। अमित साढ़े सात के बाद अपने रुम से निकला, और रेखा के घर से हेडमास्टर के घर की ओर पैदल ही चला। रेखा ने बार-बार कहा कि खाना खा कर यहीं, रेखा के घर आ जाये। बहुत समय के बाद मां और बेटा अकेले थे।
अमित: मां, तुम तो मुझसे ही चुदवाने आई हो, लेकिन अब देख रहा हूं कि तुम मुझे अपने पास आने ही नहीं दे रही हो।
इंदिरा ने ज़बाब देने में देरी नहीं की।
इंदिरा: तुमने मुझे दूसरे के सामने क्यों चोदा? मैं बहक गई थी, ट्रेन में आनंद से, फिर राजेंद्र और लाला से चुदवाना मेरी गलती थी। लेकिन तुम्हें मालूम है कि उतने लोगों के सामने मुझे, अपनी मां को चोद कर तुमने मुझे दुनिया की सबसे घटिया रंडी बना दिया है। यहां पर तुम्हारे दोस्त और टीचर को मालूम होगा, उधर तुम्हारे बाबू जी या दीदी को मालूम होगा, रिश्तेदार को मालूम होगा, तो हमारे पास मरने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रहेगा। मैं अब तुमसे, अपने बेटे से कभी नहीं चुदवाऊंगी। मैं तो ये सोच रही हूं कि तुम लोगों से रिश्ता ही तोड़ दूं। छी, तुमने मुझे कितना गंदा कर दिया है।
मां का फ़ैसला सून अमित को दुख नहीं हुआ। अमित को पूरा विश्वास था कि ज़िंदगी में उसे कभी बढ़िया चूत की कमी नहीं महसूस होगी। लेकिन उसने एक बार कोशिश की।
अमित: में देख रहा हूं कि तुम और रेखा, दोनों ने एक-दूसरे को बहुत पसंद कर लिया है। तुमने कहा कि चार साल पहले से ही तुम मुझसे चुदवाना चाहती थी। लेकिन मेरे दिल में तुम्हें चोदने की पहली चाहत जगाने वाली तुम्हारी नई दोस्त रेखा ही थी। अपनी चूदाई की चाहत देने वाली कुतिया रेखा ही है। उसी ने मुझे तुम्हें, अपनी मां को चोदने के लिए उकसाया। और उसके बाद से जब भी रेखा या दूसरी औरतों को चोदा सब ने तुम्हें, अपनी मां को चोदने के लिए उकसाया।
बातें करते-करते हम हेडमास्टर के घर पहुंच गये।
अमित: मां, तुम्हें अब कभी किसी दूसरे के सामने नहीं चोदूंगा। लेकिन एक बार तुम्हें और रेखा को एक-दूसरे के सामने चोदना चाहता हूं। बस एक रात। मुझसे रिश्ता नहीं रखना है तो मत रखना, मैं लाला से शादी करने में भी तुम्हें मदद करूंगा, रंभा को मना लूंगा। लेकिन बस एक बार और मुझसे चुदवा लो। जिस औरत ने तुम्हें चोदने के लिए उकसाया, मैं उसे भी तुम्हारे सामने चोदना चाहता हूं।
इंदिरा: तेरा चेहरा देखने का भी मन नहीं कर रहा है, लेकिन तुमने जो कहा है उसके बारे में सोचूंगी। उस रंडी ने तेरा दिमाग़ ख़राब किया है ना। मैं उसे भी रंडी बना दूंगी।
मां की बात सुन मैं बहुत खुश हुआ। एक हाथ से मां के मस्त चूत्तड़ को दबाया, और दूसरे हाथ से कॉलबेल बजाया। तुरंत ही डोर खुला और संगीता दरवाज़े पर ही मुझ से चिपक गई। मुझे बांहों में लेकर होंठों को चूमा। मैंने उसकी दोनों चूचियों को दबाते हुए धकेला, “संगीता रानी, अपने को संभालो, मेरी मां इंदिरा से मिलो। मां ये हेडमास्टर की बेटी संगीता है। मेरी क्लास में पढ़ रही है, लेकिन मेरी सबसे बड़ी दुश्मन है।”
इंदिरा: देख रही हूं कितनी बड़ी दुश्मन है। बहुत ही प्यारी हो बेटी, सदा सुखी रहो।
संगीता ने झुक कर मां के दोनों पांव छू कर प्रणाम किया। संगीता हमें अंदर लेकर गई। हेडमास्टर और उनकी पत्नी तो थे ही, असलम भी था। असलम भी अकेला नहीं था, उसके साथ एक बहुत ही ग़ज़ब की खूबसूरत लड़की भी थी। असलम की सबसे छोटी बेगम नगमा हर दूसरे-तीसरे दिन चुदवाने आती थी। नगमा भी रेखा से ज़्यादा सुंदर थी, लेकिन अब ये लड़की नगमा से कहीं ज़्यादा सुंदर थी। मेरी नज़र उसके उपर से हट ही नहीं रही थी।
मैंने हेडमास्टर और उनकी पत्नी को प्रणाम किया, लेकिन मेरी नज़र लड़की के चेहरे से नहीं हटी। असलम ने 15 दिन पहले ही कहा था कि वो अपनी बेगम के साथ अपनी एक बेटी नफ़ीसा को भी भेजेगा लेकिन मैंने ही मना कर दिया था। लेकिन लड़की को देख कर मैं बाक़ी सभी माल, इंदिरा, रेखा और संपा को भी भूल गया।
जी तो कर रहा था कि वही सब के सामने उस खूबसूरत लड़की को ही चोद दूं। मैं लड़की की ख़ूबसूरती में खोया हुआ था कि संगीता की आवाज़ ने डिस्टर्ब कर दिया।
संगीता: अमित जिसे तुम इतनी घूर रहे हो वो असलम की बड़ी बेटी नफ़ीसा है। मेरी सहेली है और अक्सर घर आकर मां की मदद करती है।
इंदिरा: संगीता, अमित की कोई गलती नहीं। स्वर्ग की कोई अप्सरा भी इतनी सुंदर नहीं होगी।
मैंने झेंप कर मां को सबसे मिलाया, असलम से भी मिलाया।
अमित: मां, ये असलम जी हैं। वैसे तो यहां के एक गार्ड हैं लेकिन यहां के सबसे पौपुलर आदमी है। यहां की हर छोटी बड़ी औरत और लड़कियां असलम को खूब बढ़िया से जानती है।
इंदिरा ने उड़ती नज़र से असलम को देखा। लेकिन वो बिल्कुल ही आकर्षित नहीं हुई। फिर थोड़ी देर फॉरमल बातें, एक-दूसरे के परिवार की बातें होती रही। नफ़ीसा ने सभी को शरबत पिलाया।
असलम: मैडम, पिछले 15-20 दिनों में अमित साहब सब की ज़ुबान पर आ गये है। 30-32 औरतों ने खुद मुझसे कहा है कि वे जल्दी से जल्दी अमित से मिलना चाहती है।
इंदिरा: हेडमास्टर साहब, मेरा बेटा यहाँ पढ़ने आया है औरतों से मिलने नहीं। सर प्लीज़ ध्यान रखिए कि औरतों के चक्कर में मेरे बेटे की पढ़ाई ना चौपट हो जाये।
संगीता: आंटी, आपने अच्छा याद दिलाया। अमित, मैं एक होमवर्क नहीं कर पा रही हूं, प्लीज़ हेल्प कर दो।
संगीता ने अमित का हाथ पकड़ा और उसे लेकर एक रुम के अंदर गई। अंदर से ही ज़ोर से बोली, “नफ़ीसा एक ग्लास पानी लेकर आ।”
पांच मिनट भी नहीं गुजरे, नफ़ीसा एक ट्रे में दो ग्लास पानी लेकर अंदर गई तो देखती है कि दोनों बिल्कुल नंगे थे, और अमित अपना लंड संगीता की बूर के अंदर-बाहर कर रहा था।
रुम में घुसते ही संगीता फटाफट नंगी हुई। ना उसने ब्रा ही पहना था ना ही पैंटी। अमित क्यों लेट करता। उसने भी कपड़े निकाले और बिना किसी ओरल के लंड को बूर पर दबाया और पेल दिया।
संगीता: मां ने बहुत कहा तो मैंने असलम से चुदवाया। मुझे बिल्कुल मज़ा नहीं आया। मैंने मां से कहा तो उसने खुशामद की कि उसे एक और मौक़ा दूं। मैं इसी बेड पर उसके साथ पूरी रात रही। साले ने तीन बार चोदा लेकिन मुझे खुश नहीं कर पाया। और जानते हो क्यों नहीं खुश कर पाया? क्योंकि इस बूर को अब सिर्फ़ एक ही लंड पसंद है और वो लंड है जो अभी मेरी बूर खा रही है।
अमित को भी इस अचानक की मस्ती में बहुत मज़ा आ रहा था।
अमित: संगीता, मुझे इससे कोई फर्क़ नहीं पड़ता कि मेरी माल को कौन चोदता है या वो किससे चुदवाती है। रचना ने चोदने के लिए मुझे शनिवार तक का समय दिया है। लेकिन वो यहां नहीं रहती है, कहां चोदू उसे। संगीता, मैंने रेखा को बहुत चोदा, नगमा को बहुत चोदा, गार्गी को चोदा, तुम विश्वास नहीं करोगी, वो 28-29 साल की औरत कुंवारी थी। कल होटल में तीन बढ़िया माल को चोदा, लेकिन किसी के साथ वैसा मज़ा नहीं आया, जितना तुम देती हो। मेरे साथ रात गुजारो ना।
तब तक नफ़ीसा ट्रे में पानी का ग्लास लेकर आई।
नफ़ीसा: दीदी, इतनी बेशर्मी ग़लत है। सब बाहर बैठे हैं।
संगीता: दरवाज़ा बंद कर और मेरे यार को जल्दी से अपनी जवानी दिखा। अभी तुम्हें चोदेगा नहीं सिर्फ़ देखेगा। नगमा से पूछ लेना ये कितना बढ़िया चोदता है। जल्दी तुम्हें इसके रुम में भेजूंगी। जल्दी से कपड़े खोल।
नफ़ीसा: अब्बू (असलम) के लंड से दोगुना लंबा है, मोटा भी है। देख कर ही बहुत डर लग रहा है।
उसने अब्बू के लंड की बात की तो दोनों को लगा कि असलम अपनी बेटी को भी चोदता था।
संगीता: असलम तुम्हें भी चोदता है?
नफ़ीसा ने सैकड़ों बार घर में असलम को लड़कियों और औरतों को चोदते देखा था। असलम का लंड पहला लंड था जो उसने देखा था। उसने यह भी सुना था कि चुदाई के बाद सभी असलम की बहुत तारीफ़ करती थी। तो उसे भी अपने अब्बू का लंड पसंद आ गया था, और वो भी अपने अब्बू असलम से चुदवाने को तैयार थी। लेकिन अमित का लंड देख कर वो बहुत ही ज़्यादा मोहित हो गई। नफ़ीसा चुदाई कर रहे जोड़े के पास गई और बेड पर बैठ गई।
संगीता: नंगा हो कर चूदाई देखने में बहुत ही ज़्यादा मज़ा आता है।
संगीता चूत्तड़ उछाल-उछाल कर चुदवा रही थी। नफ़ीसा मानो हिप्नोटाईज़ हो गई थी। लंड को बूर के अंदर-बाहर होते देखते हुए वो अपना सलवार, कुर्ता और शमीज निकाल कर अमित के सामने नंगी खड़ी हो गई। संगीता को चोदते हुए अमित इस नई खूबसूरत परी को ही देखता रहा।
नफ़ीसा 5 फ़ीट 4 इंच की बहुत ही स्लिम-ट्रिम बदन वाली लड़की थी। बहुत ही गोरा रंग तो था ही, चेहरे का कट बहुत ही प्यारा था। पतले-पतले होंठ, अंडाकार चेहरा, बड़ी-बड़ी काली आंखें, सुराहीदार गर्दन, गोलाई लिए हुए कंधे, पतली बाहें, चिपटी, अंदर की ओर धंसा हुआ पेट और 32 इंच गोलाई की बहुत ही प्यारी दिखने वाली चूचियां किसी को भी दीवाना बना सकती थी।
खूब घने और लंबे बाल चूत्तड़ों के बीच तक आते थे और चूत्तड़ों की गोलाई भी 34 इंच से कम ही होगी। चूत का हिस्सा बहुत ही छोटा और प्यारा था। लेकिन लड़की की जांघे संगीता की जांघों जैसी सुडौल और कड़क थी। ओवरऑल, अमित ने तब तक जितनी भी लड़कियां या औरतों को देखा था, नफ़ीसा सबसे ज़्यादा खूबसूरत थी।
