माँ और उसका बेटा 10

माँ बेटा
नमिता ने राज के हाथों से पेपर लिया और नम्बर चेक किया और उसकी आखें फट गयी।उसने देखा कि उसको ९६% नम्बर मिले हैं। वह ख़ुशी से उसको अपनी बाहों में लेकर उसका गाल चूम ली। वह भी हँसने लगा।
नमिता: मैं तेरा उतरा हुआ चेहरा देख कर डर गयी थी, बदमाश , नाटक कर रहा था? मुझे एक पल के लिए लगा कि तुझे अच्छे नम्बर नहीं मिले हैं।
राज हँसते हुए: माँ इतनी पढ़ाई की थी नम्बर तो आने थे। आज शीला आंटी भी बहुत ख़ुश हुई मेरे नम्बर देख कर।
नमिता: तूने कोई बदतमीज़ी तो नहीं की उनके साथ?
राज: नहीं माँ कुछ नहीं किया।
अभी भी वह दोनों चिपके हुए थे।
अब नमिता बोली: चल हाथ मुँह धो ले मैं खाना लगती हूँ।
राज ने माँ की एक छाती दबाते हुए कहा: माँ मेरा इनाम ?
नमिता: अरे ले लेना मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ।
राज अपनी माँ के ब्लाउस का हुक खोलने लगा , नमिता ने उसे मना नहीं किया । अब उसने ब्लाउस खोल कर निकाल दिया। नमिता ने हाथ उठाकर उसकी सहायता की ब्लाउस निकालने में।
अब राज के सामने नमिता सिर्फ़ ब्रा और पेटिकोट में थी। उसकी पारदर्शी ब्रा से उसकी चूचियाँ साफ़ साफ़ दिखाई से रही थी। वह बहुत कामुक लग रही थी।
राज उसकी चूचियों को ब्रा में क़ैद देख कर अपना लौड़ा मसलने लगा। फिर बोला: माँ अब आप ऐसे ही रहो और खाना लगाओ।
नमिता मुस्कुरा कर बोली: ठीक है, जैसा तुम चाहो, इतने अच्छे नम्बर लाकर तुमने मुझे इतना ख़ुश कर दिया है कि मुझे तुम्हारी ये बात भी मंज़ूर है।
राज अपने कमरे में फ़्रेश होने गया, और नमिता किचन में जाकर खाने की तय्यारी करने लगी। जब राज बाहर आया तो देखा कि माँ ने टेबल पर खाना लगा दिया था। वह टेबल पर उसका इंतज़ार कर रही थी। राज उसकी कुर्सी के पीछे से उसके पास आकर झुक कर उसको चूमने लगा। अब उसका हाथ उसकी ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों पर घूम रहा था। उसने सिर्फ़ उनको सहलाया पर दबाया नहीं। वह चाहता था कि इन लमहों का पूरा आनंद ले वह जी भर के।
नमिता भी मुस्कुरा कर उसके गाल को चुमी और बोली: चल अब खाना खा ले।
राज हँसकर माँ के मम्मों से हाथ हटाकर उसके गाल और गर्दन को चूमकर खाने के लिए कुर्सी पर आ कर बैठ गया।
नमिता: आज तेरे ताऊ जी आए थे, कोई कोर्ट केस था। तुझे पूछ रहे थे।
राज: माँ वो लोग बहुत दिन से यहाँ नहीं आए ना?
नमिता: हाँ, वह कह रहे थे कि जल्दी ही तेरी ताई और शीना को साथ लेकर आएँगे ।शीना अब कॉलेज जाने लगी है। वह तुझसे एक साल बड़ी है ना।
राज: ओह,और क्या बोल रहे थे?
नमिता सोची वह तो बहुत कुछ बोल रहे थे, यहाँ तक कि राज से शर्मिला और शीना की चुदायी की बात कर रहे थे।
नमिता: बस और कुछ ख़ास नहीं। कल तो तेरी छुट्टी होगी परसों तो फ़िज़िक्स का पेपर है ना? बहुत कठिन होता है ना?
राज: हाँ माँ बहुत लोगों को ये कठिन लगता है, पर मेरा तो यह प्रिय विषय है। और इसमें अच्छे नम्बर आए तो ये ब्रा भी हट जाएगी। और ये मस्त दूध मेरे हाथों और मुँह में होंगे। हैं ना माँ ?
नमिता मुस्कुरा के बोली: बिलकुल मेरे बेटे। वैसा ही होगा। पर आज से ही तुमको पढ़ाई में जुटना होगा।
राज: बस माँ अभी आपको पढ़ूँगा और फिर किताब पढ़ूँगा। ये कहते हुए वह आँख मारकर बेशर्मी से हसने लगा।
फिर खाने के बाद राज नमिता को पकड़कर उसके बेडरूम में ले गया। और ख़ुद नमिता के बिस्तर पर लेट गया।नमिता ने देखा कि उसका लोअर पूरी तरह से उसके खड़े लौड़े को दर्शा रहा था और राज भी उसको छुपाने की कोई कोशिश नहीं कर रहा था।
नमिता जानती थी कि आज वह काफ़ी उत्तेजित है।
वह आकर उसके पास बैठ गयी और राज लेटे हुए उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ जो कि ब्रा के बाहर निकलने को बेताब थीं देखकर अपना लौड़ा मसल रहा था।
नमिता झुककर उसके गाल को चूमी और उसके टी शर्ट को उठाकर उसकी मर्दाना छाती को सहलाने लगी। फिर उसने राज के निपल्ज़ को सहलाया और झुक कर उसके ऊपर अपनी जीभ फिराने लगी। राज के लिए यह अनुभव नया था और वह भी उसकी माँ ये सब कर रही थी, यह सोचकर वह मस्ती से भर गया।
अब नमिता ने अपना हाथ उसके पेट पर फिराया और उसकी नाभि में ऊँगली डाली। फिर हाथ नीचे लेज़ाकर उसने उसके लोअर की इलास्टिक में हाथ डाला और उसकी लोअर और चड्डी के अंदर हाथ लेज़ाकर उसका लंड पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी।
राज की आऽऽहहह निकल गयी। नमिता मुस्कुराती हुई उसके पेट और नाभि को चूमने लगी।
राज भी हाथ बढ़ाकर उसकी ब्रा से बाहर झाँक रही चूचियों पर टूट पड़ा और उनको मसलने लगा। नमिता भी हाऽऽयय्यय कर उठी।
अब राज ने नमिता को अपने ऊपर खिंच लिया और उसकी गर्दन गाल और होंठ चूसने लगा। नमिता ने अपने होंठ हटा लिए। अब वह नशीली निगाहों से राज को देख रही थी।
राज: माँ मेरी लोअर और चड्डी उतार दो ना प्लीज़।
नमिता उठी और उसको नीचे से नंगा कर दिया। नमिता ने देखा कि सच में उसका लंड उसके ताऊ के लंड जैसा ही मोटा और लम्बा था। वह अब उसके लंड पर हाथ फेरने लगी और उसके बॉल्ज़ को भी हाथ से दबाकर मस्ती से भर गयी।
राज उठा और उसको अपनी गोद में खिंच लिया और उसकी चूचियाँ दबाके उसके बदन को सब जगह चूमने लगा। नमिता के चूतर उसकी लौड़े को दबाकर दोनों को मस्ती से भर रहे थे।
अब राज बोला: माँ आपकी बुर गीली हो गयी या नहीं?
नमिता शर्माकर बोली: तू ये सब करेगा तो गीली नहीं होगी क्या?
राज: माँ फिर तो पैंटी भी गीली हो गयी होगी?
नमिता: हाँ मगर तू क्यूँ पूछ रहा है?
राज: माँ प्लीज़ अपनी पैंटी उतार दो ना। आपके चूतर जब बिना पैंटी के मेरे लौड़े को दबाएँगे तो ज़्यादा मज़ा आएगा और मुझे आपकी पैंटी सूंघनी भी है।
नमिता दिखावटी झुँझलाहट दिखाते हुए बिस्तर से नीचे आयी और अपना पेटिकोट जाँघों तक उठाकर अपनी पैंटी उतार दी। पर उसने ध्यान रखा कि उसकी बुर के दर्शन राज को ना होने पाएँ।
राज पैंटी लेकर उसको सूँघने लगा। अपनी माँ के पसीने, पेशाब और सेक्स की मादक गंध से वह मस्त हो गया। उसके अकड़े हुए लौड़े को नमिता फिर से हाथ में ले ली और मूठियाने लगी। राज ने अब नमिता को लिटा दिया पीठ के बल और बोला: माँ मैं आपकी जाँघों के बीच अपना लौड़ा रगड़कर अपना वीर्य निकालना चाहता हूँ।
नमिता ने कहा: सिर्फ़ आधी जाँघ ही नंगी करूँगी, ठीक है?
राज : ठीक है माँ, आप जैसा कहो वैसा ही होगा।
अब नमिता ने अपने पेटिकोट को आधा उठा किया और अपनी जाँघों को आधा नंगा कर दी। उसने पेटिकोट को अपनी बुर के आसपास मोड़ दिया ताकि ग़लती से भी राज को बुर के दर्शन नहीं हो सके।
अब राज नमिता के ऊपर आकर चोदने की मुद्रा में आ गया। और उसने अपना लौड़ा माँ की जाँघों के बीच फँसा दिया।और उसकी चूचियाँ दबाते हुए अपने लौड़े को जाँघों के बीच रगड़ने लगा और कमर उछालकर मानो उसको चोदने लगा।
अब नमिता की भी हालत ख़राब हो रही थी, उसकी बुर भी बुरी तरह से गरम हो चली थी। राज भी ह्म्म्म्म्म्म करके अपनी कमर हिला रहा था।उसके हाथ उसकी चूचियों को बुरी तरह से दबा रहे थे। वह अपनी जीभ से नमिता के गाल होंठ गर्दन चाट रहा था और नमिता को लग रहा था कि उसकी बुर में मानों सेकडों चिटियाँ चल रही हैं।
राज भी माँआऽऽऽऽऽऽऽ मैं झड़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽहहहह कहके अपना रस उसकी जाँघों पर गिराने लगा। और आह्ह्ह्ह्ह करके बिस्तर पर लुढ़क गया।
नमिता भी अपने जाँघों पर चिपचिपा रस को महसूस की और समझ गयी कि वह झड़ गया है। उसने लम्बी साँस ली और अपने पेटिकोट को उठाकर बाथरूम में गयी। उसने वहाँ पेटिकोट को सिर के ऊपर से उतार दिया और अब पूरी नंगी होकर अपने जाँघ साफ़ की और फिर से पेटिकोट पहनकर वह ब्रा और पेटिकोट में ही बाहर आयी। उसकी पैंटी भी कहीं बिस्तर पर ही रखी थी।
राज: माँ, सॉरी मैंने अपना तो रस गिरा दिया पर आपका बदन तो अभी भी गरम होगा। आप अपने बुर को हाथ नहीं लगाने देती नहीं तो मैं आपका भी रस गिरा देता।
नमिता: कुछ नहीं होता। चल तू तो ख़ुश है ना? तेरे अच्छे नम्बर का तुझे ईनाम तो मिलना ही था ना?
राज: माँ मैं तो आपके मम्मों को ब्रा में देखकर और उनको सहला कर ही धन्य हो गया हूँ। बस अभी जाता हूँ और परसों के पेपर के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देता हूँ। मुझे हर हाल में परसों अच्छे नम्बर लाना है और आपके इन मम्मों को नंगा देखना है और मुँह मेंलेकर बहुत देर तक चूसना है।
ये कहते हुए उसने माँ की छातियों को ब्रा के ऊपर से सहला दिया।
नामित: ज़रूर बेटा, तुमको सब मिलेगा जो मैंने कहा है बस तुम्हारा रिज़ल्ट अच्छा आना चाहिए।
यह कहते हुए नमिता ने उसके गाल चूम लिए।
अब राज माँ को आराम करने का बोलकर अपने कमरे में गया और पढ़ने बैठ गया।
इधर नमिता बहुत गरम हो गयी थी,उसने अपना कमरा बंद किया और बिस्तर पर लेट कर अपनी ब्रा के अंदर हाथ डालकर अपनी चूचियाँ मसलने लगी और निप्पल्स भी दबाने लगी। फिर उसने तीन उँगलियाँ अपनी बुर में डाल दीं और आह्ह्ह्ह्ह्ह करके उनको अंदर बाहर करने लगी। वह अपनी clit को भी रगड़ कर अपनी आग शांत करने लगी। जल्दी ही वह घुटी हुई चीख़ निकाल कर झड़ गयी। फिर अपना रस और उँगलियाँ पेटिकोट में ही पोंछ कर सो गयी।
शाम को वह उठकर फ़्रेश हुई और पैंटी और ब्लाउस पहनी और पेटिकोट भी बदल ली। फिर चाय बना कर राज के कमरे में गयी। राज पूरे ध्यान से पढ़ाई कर रहा था। उसने माँ को देखा और मुस्कुरा कर बोला: आओ माँ मेरी गोद में बैठो। साथ ही चाय पिएँगे।
नमिता उसकी गोद में जा बैठी और वह उसको चूमा और एक ही कप से माँ बेटा चाय पीने लगे। फिर दूसरे कप से भी एक दूसरे का जुठा पी कर प्यार में डूब से गए थे।
राज: माँ नींद आयी ?
नमिता: हाँ मस्त नींद आयी।
राज: माँ मूठ्ठ मारी थी ना?
नमिता: हठ, तुझे सब जानना है मेरे बारे में?
राज: बोलो ना माँ , मारी थी ना?
नमिता लाल होकर : हाँ , तूने इतना गरम कर दिया था कि बिना उसके नींद आ ही नहीं सकती थी।
अब नमिता उठते हुए बोली: चल अब मैं जाती हूँ तू पढ़ाई कर, खेलने जाएगा?
राज: नहीं माँ खेलने नहीं जा सकता, बहुत ज़्यादा कोर्स है।
फिर राज ने नमिता के चूतरों पर हाथ फेरा और बोला: माँ , फिर पैंटी पहन ली? बिना पैंटी के आपके चूतरों को दबाना ज़्यादा अच्छा लगता है। अभी देखो ना पैंटी बीच में आ रही है।
नमिता: अच्छा बाबा, पैंटी पहनना भी छुड़वा देगा तू ऐसा लगता है मुझे।
राज: माँ घर में नहीं पहनिए , बाहर जायिये तो पहन लीजिए।
नमिता उसके गाल चुमी और ठीक है बेटा, जो हुक्म, मेरे आका, कहकर हँसते हुए चली गयी।
राज भी ख़ुश होकर फिर से पढ़ने बैठ गया।
नमिता जाकर साड़ी भी पहनी क्योंकि उसको पड़ोसन का फ़ोन आया था की वह उसके घर आ रही है।
शाम को नमिता से मिलने उसकी पड़ोसन आयी और अपना दुखड़ा सुनाने लगी कि उसका बेटा दसवीं में आ गया है और पढ़ायी से उसका मन भटक सा गया है। नमिता सोची कि हर घर की क्या यही कहानी है? वह उसे यह तो बता नहीं सकती थी कि उसने इस समस्या का क्या अजीब सा हल निकाला है।
पड़ोसन के जाने के बाद वह खाना बनाने लगी और फिर TV देखने लगी।
अब उसने सोचा कि राज को खाना खाने के लिए बुला लिया जाए, तो वह अपने कमरे में गयी और उसने अपनी साड़ी और ब्लाउस उतार दिया और अब वह ख़ुद को शीशे में देखी और मुस्करायी कि वह अपने बेटे के लिए इस रूप में आ रही है। तभी उसे याद आया कि वह पैंटी पहनने के लिए भी मना किया है। तब उसने पैंटी भी उतार दी। अब वह अपने बेटे के लिए पूरी तरह से तैयार थी।
उसने टेबल पर खाना लगाया और राज को आवाज़ दी। वह आया तब वह फ्रिज से बोतल निकाल रही थी। उसके चूतरों को पेटिकोट में देख कर राज मस्ती से अपना हाथ उनपर रख कर उनको दबा दिया। नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह करके उठी और बोली: बदमाश, धीरे से नहीं दबा सकता है?
राज: माँ धीरे से दबाऊँगा तो आपको मज़ा ही नहीं आएगा। यह कहकर वह उसको अपने से चिपका लिया और उसके चूतरों पर हाथ फेरते हुए उनकी बीच की दरार में उँगलियाँ डाल दिया।
नमिता ने उसको धक्का देकर अपने से अलग किया और बोली: ख़बरदार , कोई नियम नहीं तोड़ेगा तू , समझा?
राज हँसते हुए: अच्छा हिटलर अम्माँ , जैसा हुक्म आपका। लेकिन देखो माँ ,बिना पैंटी के आपके चूतर कितने अच्छे लगते हैं छूने में!
माँ कुर्सी पर बैठी और वह पीछे से आकर फिर से उसकी ब्रा के ऊपर से आधी से ज़्यादा नंगी चूचियाँ दबाने लगा।फिर उसने उसकी बाँह उठाई और उसके बग़ल को सूंघने लगा। फिर जीभ निकाल कर उसकी बग़लों को एक एक करके चाटने लगा।
नमिता: खाना खाएगा या फिर ये ही सब करते रहेगा?
राज: माँ जो इनको सहलाने में मज़ा है वो किसी और चीज़ में कहाँ?
नमिता: अच्छा अगर दबाना हो गया हो तो चल खा ले।
राज हँसते हुए खाना खाने लगा।
डिनर के बाद दोनों सोफ़े पर बैठ कर बातें करने लगे।
राज: माँ आज बहुत दिन बाद प्रतीक पेपर देने आया था और वह पेपर कम दे रहा था और शीला आंटी को ज़्यादा देख रहा था।
नमिता: तू इन सबकी तरफ़ ध्यान मत देना नहीं तो अपना पेपर ख़राब कर लेगा।
राज: माँ पेपर ख़त्म होने के बाद प्रतीक बोला था कि वह स्टाफ़ रूम में जाकर शिला आंटी से बात करेगा। माँ मेरी बहुत इच्छा हो रही है कि मैं उसको पूछूँ कि वह क्या उनसे मिला और क्या हुआ?
नमिता: देखो बेटा, तुम्हारा ध्यान इन बातों से बटेगा इसलिए तुम इन सब से दूर रहो।
राज अपनी माँ को खींचकर अपनी गोद में लिटा लिया और उसके होंठ चूमकर उसकी छाती दबाने लगा और नमिता भी अपने गाल पर उसका लौड़ा महसूस करने लगी।
राज: माँ मैं तो बस मज़े के लिए ही पूछूँगा। मेरे पास तो अब आप हो ।
नमिता: अच्छा चल पूछ ले।
राज ने फ़ोन को स्पीकर मोड में रखकर प्रतीक को फ़ोन लगाया ताकि नमिता भी सुन सके।
प्रतीक: हाय राज क्या हाल है?
राज: अरे बस सब बढ़िया, तू सुना कैसी रही शीला आंटी से मुलाक़ात?
प्रतीक: अरे बहुत बढ़िया रही। वह बतायी कि उसके पति को आर्मी ने इमर्जेन्सी में वापस बुलवा लिया गया है और वह मुझे बहुत प्यासी लगी।
राज ने नमिता को आँख मारते हुए उसकी चुचि दबा दी और बोला: ओह फिर क्या कुछ हो पाया?
प्रतीक: हाँ बहुत कुछ हा हा ।
राज: मतलब?
प्रतीक: अरे यार उसकी चूचियों को पूरा नंगा करके ख़ूब दबाया और चूसा।
अब राज ने नमिता को उठाया और अपना लोअर नीचे करके अपना लौड़ा बाहर निकाला और नमिता उसको सहलाने लगी। राज अभी भी उसकी चूचियाँ दबा रहा था।
राज: वाह, बढ़िया, दोस्त। और चुदायी हुई की नहीं?
प्रतीक: अरे बिलकुल हुई पर यार जल्दी वाली हुई।
राज नमिता के नीचे वाले हिस्से में हाथ ले गया और नमिता ने अपने चूतर उठा दिए । अब वह नमिता के चूतरों को दबाते हुए उसकी गाँड़ भी दबाने लगा।
राज: मतलब?
प्रतीक: साली को घोड़ी बनाया और उसकी साड़ी और पेटिकोट उठाकर उसकी पैंटी को नीचे किया और पीछे से ही खड़े खड़े ही चोदा । साली मस्त रँडी की तरह चूतर हिला हिला के चुदवा रही थी। हम जल्दी में थे वरना और ज़्यादा मज़ा आता।
राज ने नमिता को खड़े किया और उसकी पीठ अपने ओर करके उसके चूतरों को ज़ोर ज़ोर से दबाया और फिर अपनी माँ को अपने खड़े लंड पर बैठा लिया। अब वह उसकी चुचि दबाते हुए उसके चूतरों, बुर और गाँड़ पर अपना लौड़ा घिसने लगा।
राज: आऽऽऽहहह कितनी देर चोदा?
नमिता उनकी बातों और उनकी अश्लील संवादों से हैरान भी हो रही थी और गरम भी होती जा रही थी।
प्रतीक: वही क़रीब २० मिनट। जल्दबाज़ी का काम था ना मेरे यार।
राज अब नमिता को ऊपर नीचे करके अपना लौड़ा पेटिकोट के ऊपर से ही उसकी बुर और गाँड़ में रगड़े जा रहा था।
राज: आगे का क्या प्रोग्राम बना?
प्रतीक: हा हा वही उसके बेटे के साथ विडीओ गेम खेलने जाऊँगा और उसकी बुर फाड़ के आऊँगा ।
राज: ओह चलो भाई मज़ा करो।
अब नमिता उसके लौड़े पर ख़ुद ही उछल रही थी और मज़े से भरी जा रही थी।
प्रतीक: और यार आंटी की बुर कब दिला रहा है?
नमिता चौक कर उसे देखी, कि ये क्या कह रहा है?
राज थोड़ा सा परेशान होकर: अबे कुछ भी बोलता है? तू मुझे बता कि तू अपनी माँ को मुझे कब दिला रहा है?
प्रतीक: अरे यार तू उनकी बुर आज मार ले , मुझे क्या, अगर तुझे वो दे दे तो। इसी बहाने मुझे भी उनकी बुर मिल जाएगी।
राज: हा हा चल अब रखता हूँ।
नमिता अब बहुत गरम हो चुकी थी और वह अब अपनी बुर उसके लौड़े पर रगड़ कर अपने आप को झड़ने के क़रीब के आयी और चिल्लायी: हाऽऽऽऽऽऽऽहह्यय आऽऽऽहहह मैं तो गयीइइइइइइइइइ उइइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽ। राज भी गरम हो गया अपनी माँ की आवाज़ों से और वह भी ह्म्म्म्म्म्म्म माँआऽऽऽऽऽऽ मैं भी झड़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ कहते हुए उसके पेटिकोट में अपना वीर्य गिराने लगा। राज ने नमिता को अपने गोद में भींच लिया और बहुत देर तक उससे चिपका रहा जब तक दोनों की सांसें सामान्य नहीं हो गयीं।
अब नमिता उठकर अपने बाथरूम में गयी और साफ़ सफ़ाई करके बिस्तर पर लेट गयी। राज भी अपने कमरे में गया और सफ़ाई करके वापस माँ के पास आया और लेटी हुई माँ से लिपट गया और चूमकर बहुत सारा प्यार किया।
नमिता भी उसको चूमते हुए बोली: ये प्रतीक क्या मुझे चो- मतलब करने के लिए बोल रहा था?
राज: माँ , ये बहुत दिन से मेरे पीछे पड़ा है कि मैं उसकी माँ को पटा लूँ और वो आपको पटा ले। पर मैंने कभी हाँ नहीं की है।
नमिता: जब मैं तेरी हो जाऊँगी तब क्या तू मुझे दूसरों से करवाएगा?
राज: माँ ये क्या करना या करवाना बोलती रहती हो ? साफ़ साफ़ बोलो ना चुदवाऊँगा क्या?
नमिता: अच्छा चल वही सही, तू सच मुझे अपने दोस्तों से चुदवाएगा?
राज: माँ अभी ऐसा बिलकुल सोचा नहीं है। पर हाँ एक बार नदीम और आयशा आंटी को यहाँ बुलाकर मैं आयशा आंटी को और आप को नदीम से एक ही बिस्तर पर चुदवाने की मेरी बड़ी तमन्ना है। पर सब कुछ आपके ऊपर है , अगर आप चाहोगी तभी वरना बिलकुल नहीं।
नमिता : ओह ठीक है। चल अब बहुत मस्ती हो गयी। अब पढ़ने बैठ जा। गुड नाइट।
राज भी माँ मो प्यार करके गुड नाइट बोलकर पढ़ने चला गया।
नमिता सोचते हुए कि क्या उसको राज के दोस्तों से भी चूदना पड़ेगा? वह नींद की आग़ोश में समा गयी।

अगली सुबह नमिता उठी और फ़्रेश होकर चाय बनायी और दोनों कप लेकर राज के कमरे में पहुँची। राज अभी भी सो रहा था और उसका लौड़ा लोअर में पूरा तना हुआ साफ़ दिखाई दे रहा था। नमिता उसका मॉर्निंग इरेक्शन देखकर मन ही मन मुस्करायी और बिस्तर पर बैठ कर उसको उठाने लगी। राज उठा और ब्लाउस और पेटिकोट में माँ को देखकर उसको अपनी बाहों में खींचकर अपने से लिपटा लिया और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे।
नमिता: आज देर तक सो रहा है, सब ठीक है ना?
राज: माँ रात बहुत देर हो गयी थी पढ़ते हुए इसी लिए आज नींद नहीं खुली।
नमिता: चल जा फ़्रेश होकर आ जा फिर चाय पिएँगे। देख कैसा तंबू तना हुआ है तेरा? ये कहते हुए नमिता ने हँसते हुए उसके लौड़े को पकड़कर हिला दिया।
राज : आऽहहह माँ । कहते हुए बाथरूम चला गया।
वापस आकर वह कुर्सी में बैठा और नमिता को अपने गोद में खींचकर बोला: माँ ब्लाउस क्यों पहन लिया? पैंटी भी पहनी हैं क्या? ये कहते हुए उसने अपनी गोद में रखे उसके चूतरों को छूकर पैंटी की मौजूदगी की जाँच करने लगा।
नमिता हँसते हुए बोली: पैंटी नहीं पहनी है, ब्लाउस के बिना बाद अजीब लगता है, प्लीज़ पहने रहने दे ना।
राज: माँ ठीक है, मगर जब मुझे इच्छा होगी तो ब्लाउस उतार देंगी ना आप?
नमिता: हाँ बाबा उतार दूँगी, जब भी तू बोलेगा।
अब राज और नमिता एक ही कप से चाय पीने लगे।
राज के हाथ नमिता के पेट पर घूम रहे थे।
नमिता को भी अपने चूतरों के नीचे उसके लौड़े का अहसास हो रहा था पर वह अभी पूरा खड़ा नहीं था।
अब नमिता बोली: अच्छा अब तू पढ़ाई कर , तेरी तो छुट्टी है पर मैं तो आधे दिन के लिए ऑफ़िस जाऊँगी।
राज ने हाँ में सिर हिलाया और सोचा कि क्या पता आज भी सुधाकर अंकल माँ को चोदेंग़े !!
नमिता घर की साफ़ सफ़ाई में लग गयी। फिर नहा धोकर उसने नाश्ता बनाया। अभी भी वह ब्लाउस और पेटिकोट में ही थी।
अब उसने राज को आवाज़ दी नाश्ता करने के लिए।
राज किचन में आकर उससे लिपट गया और उसकी गाँड़ और चूतरों को दबाने लगा। फिर उसने ब्लाउस के हुक खोले और ब्रा के अंदर के कबूतरों को दबा कर मस्ती से भर गया। उसका खड़ा लौड़ा उसकी गाँड़ को ठोकर मार रहा था।
नमिता: आऽऽऽहन ये सुबह सुबह तू क्या करने लगा? चल मैं नाश्ता लगा रही हूँ।
वह उसकी गर्दन चूमता बोला: माँ कल अच्छे नम्बर लाकर इनको खा जाऊँगा। उसकी चूचियाँ मसलते हुए बोला।
नमिता: कल की कल देखेंगे, अभी पढ़ाई कर और जल्दी से नाश्ता कर के भिड़ जा।
राज आहें भरकर बोला: चलो ठीक है। नाश्ता कर लेते हैं। पर आज आपके हाथ से खाऊँगा।
नमिता: चल ठीक है मैं ही खिला देती हूँ।
टेबल पर नाश्ता लगाकर नमिता ने अपनी कुर्सी राज के पास कर ली। अब वह उसको अपने हाथ से खाना खिलाने लगी। राज भी मस्ती में आकर उसकी ऊँगली हल्के से काट देता। नमिता हँसते हुए उसको एक चपत लगा देती।
तभी राज बोला: माँ आप अगला कौर ख़ुद चबाओ और मेरे मुँह में डालो।
नमिता हँसते हुए अगला कौर अपने मुँह में डालकर चबायी , तभी राज ने उसके मुँह के पास अपना मुँह लाकर खोल दिया और नमिता ने अपने मुँह का चबाया हुआ कौर उसके मुँह में डाल दिया।
राज ने अपने मुँह में खाना लेकर उसको निगल लिया। नमिता को उसपर बहुत प्यार आया और वह उसको चूम ली। इस तरह हँसते हुए दोनों ने नाश्ता समाप्त किया और राज वापस पढ़ने चला गया।
नमिता ने भी साड़ी पहनी और तय्यार होकर राज को बाई करने उसके कमरे में गयी। तब राज कुर्सी पर बैठे हुए अपनी माँ का पेट चूमने लगा। फिर हाथ बढ़ाकर उसके चूतरों को दबाने लगा और बोला:
माँ पैंटी पहन ली। क्या होता अगर पैंटी के बिना चली जातीं?
नमिता: चल छोड़ अब जाने दे ।
राज: एक शर्त पर।
नमिता: अब क्या हुआ?
राज: मैं मुँह खोलता हूँ, आप अपना थूक मेरे मुँह में डालो।
नमिता: छी ये कैसी बात हुई, ये भला क्यों?
राज: माँ मैं आपके सब रस का पान करना चाहता हूँ। माँ प्लीज़ । ये कह कर उसने अपना मुँह खोल दिया। नमिता ने हिचकते हुए अपना थूक उसके मुँह में डाल दिया जिसे वह उसकी चूचियाँ दबाते हुए पी गया। फिर उसने नमिता के हाथ ऊपर किए और उसकी बग़लें एक एक करके चाटने लगा। वह उसकी गंध से मस्त हो गया।
वह बोला: देखो, एक और रस आपके बदन का पी लिया।
नमिता ने उसके लौड़े को खड़ा देखकर पकड़कर कहा: इस हालत में तू पढ़ पाएगा?
राज: मैं ठंडे पानी से नहा कर अपनी उत्तेजना शांत कर लूँगा। आप जायिये अब।
नमिता उसके गाल को चूमकर बाहर निकल गयी।
राज बाथरूम में जाकर नहाने लगा।
नमिता ऑटो में थी तभी गुप्ता का फ़ोन आया। वह राज के पेपर का पूछ रहा था। नमिता ने ख़ुश होकर बताया की उसका पेपर बहुत अच्छा हुआ है।
गुप्ता: तो फिर तुमने उसको अपने मम्मों का मज़ा लेने दिया या नहीं?
नमिता: हाँ बिलकुल लेने दिया। वह भी आगे के मज़े का सोच कर बहुत ख़ुश है और बहुत मेहनत कर रहा है।
गुप्ता: करेगा ही उसका सपना जो पूरा होने जा रहा है।
नमिता: और आप कैसे हैं?
गुप्ता: बस लंड हाथ में लिए बैठे है कि कब तुम आओगी और उसे शांत करोगी।
नमिता: छी कुछ भी बोलते रहते हैं। अच्छा रखती हूँ।
उसने फ़ोन काट दिया। सच तो ये था कि वह कुछ देर और बात करती तो क्या पता चुदासि हो जाती और उसके पास ही चली जाती।
ऑफ़िस पहुँच कर वह अपने काम में लग गयी। करीब ११ बजे सुधाकर का फ़ोन आया: कैसी हो? कहाँ हो?
नमिता: जी ठीक हूँ और ऑफ़िस में हूँ।
सुधाकर: मैं तो आज मुंबई आया हूँ, पर आज तुमको एक मेरा काम करना होगा, एक विदेशी कस्टमर jhon आया हुआ है साउथ अफ़्रीका से, वह वहाँ का बड़ा सरकारी अधिकारी है। वह हमें एक बड़ा ऑर्डर देगा, बस उसको ख़ुश करना होगा।
नमिता: छी आप ऐसा सोच भी कैसे सकते हो?
सुधाकर: अरे पूरी बात तो सुनो। मैंने इस काम के लिए अपनी साक्षी को मना लिया है। पर समस्या यह है कि साक्षी अंग्रेज़ी नहीं बोल पाती तो तुम उसकी इतनी मदद कर देना। बाक़ी का काम साक्षी संभाल लेगी। तुम उसके ऑर्डर के काग़ज़ भी चेक कर लेना। साक्षी के बस की तो यह बात है नहीं। उसे तो अपना जवान बदन चुदवाने के अलावा कुछ भी नहीं आता।
नमिता: कब जाना होगा?
सुधाकर: अभी बस एक दो घंटे की बात है। तुम्हें परेशान होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उसने मुझे कहा है कि उसको २०-२२ साल की लौड़ियाँ चाहिए। इसीलिए मैंने साक्षी को चुना है।
नमिता: ओह ठीक है।
सुधाकर: थैंक्स एंड बाई करके फ़ोन काट दिया।

नमिता ने अपना पर्स उठाया तभी साक्षी उसके पास आयी और बोली: चलें? अभी सर का फ़ोन आया था।
नमिता ने उसे देखा , वह २२ साल की एक भरी हुई जवान लड़की थी, उसने अभी स्कर्ट टॉप पहना था। उसे पता था कि सुधाकर ख़ुद भी इसकी चुदायी करता था और अब पता चला की वह इसको इस तरह के काम में भी उपयोग करता है। वह दोनों बाहर आए और ऑटो लेकर Jhon के होटेल पहुँचे। उसके कमरे मेंजाकर घंटी बजाते ही उन्होंने देखा कि दरवाज़े पर एक काला विशाल शरीर का अधेड़ सामने खड़ा था।
नमिता: हाय ( फिर उसने और jhon ने सारी बातें अंग्रेज़ी में की जो बेचारी साक्षी के समझ से बाहर थी) आप कैसे हो?
जौन: बढ़िया। आइए आप अंदर आइए।
दोनों अंदर आकर बैठ गयी।
साक्षी: दीदी ये तो साला राक्षश है।बहुत तंग करेगा।
नमिता: ये तो सर को हाँ करने के पहले सोचना था।
जौन नमिता को पूछा: मैंने तो सुधाकर को एक लड़की के लिया कहा था उसने दो भेज दी , सच में बहुत बढ़िया आदमी है।
नमिता : नहीं नहीं आप ग़लत समझ रहे हैं , असल में इसे अंग्रेज़ी नहीं आती इसलिए मैं इसके साथ आयी हूँ। आप मुझे ऑर्डर की कापी दे दो मैं वह पढ़ती हूँ, जब तक आप इसको अंदर बेडरूम में के जाओ।
जौन: ओह ऐसा क्या? मुझे तो तुम भी बहुत अच्छी लगी ।
नमिता: नहीं नहीं आप इसको हो ले जाओ। सुधाकर ने इसको इसीलिए भेजा है।
नमिता ने साक्षी को कहा: जाओ तुम इसके साथ अंदर बेडरूम में और इसको ख़ुश करो जैसा सर ने कहा है।
साक्षी : पता नहीं ये साँड़ मेरा क्या हाल करेगा? दीदी बचा लेना मुझे अगर मैं आपको बुलायी तो आ जाना मेरी मदद के लिए।
नमिता: कुछ नहीं होगा। जा मज़ा कर।
अब जौन साक्षी के साथ बेडरूम में घुस गया। उसने जाते जाते पेपर’s नमिता को दे दिया और वह पढ़ने लगी।
थोड़ी देर बाद नमिता को साक्षी की घटी हुई चीख़ सुनाई दी। उसके कान खड़े हो गए। वह बेडरूम की ओर देखी तभी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मरीइइइइइइइइइइ की आवाज़ आयी। अब नमिता उठकर बेडरूम के दरवाज़े से सट के खड़ी हो गई। उसने कान लगा कर सुनने की कोशिश की और उसे ठप्प ठप्प की आवाज़ सुनाई दी। वह मुस्कुराई और वापस आने लगी तभी हाय्य्य्य्य्य्य्य्य छोड़ोओओओओओओओ की आवाज़ सुनाई दी। अब वह घबरा कर अंदर देखने की कोशिश की तभी उसको की होल दिखा और उसने उसमें अपनी आँख लगा दी। अंदर का दृश्य बड़ा ही अजीब सा था। जौन पूरा नंगा था और उसके बालों से भरी छाती ऊपर नीचे हो रही थी। वह पूरी नंगी साक्षी के ऊपर सवार था और उसने उसकी टाँगे उठाकर उसके सर के पास रख कर उसकी जाँघों के बीच अपना लंड घुसाकर चोद रहा था। नमिता को वहाँ से उसकी बुर में उसका लौड़ा अंदर बाहर होते दिख रहा था। उसके बड़े बालस उसकी बुर के नीचे लटकते हुए साफ़ दिख रहे थे। जो बात उसको हैरान कर रही थी वह था उसका साइज़ । उसका लौड़ा बहुत मोटा था और वह उसकी बुर को पूरा फैलाकर उसमें घुसा जा रहा था। साक्षी की बुर पूरी तरह से खुली हुई लग रही थी।
साक्षी का मुँह उसे नहीं दिख पा रहा था। पर उसकी दर्द भरी चीख़ें उसकी कान में पड़ रही थी। अचानक jhon ने चुदायी को स्पीड बढ़ा दी और साक्षी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह छोड़ोओओओओओओओओओ कह कर चिल्लायी। तभी उसकी बुर से सफ़ेद रस गिरने लगा जो उसके लंड से निकल कर बुर में छूट रहा था। नमिता का हाथ अपने बुर में चला गया और उसने अपनी बुर खुजा डाली। फिर वह उसके ऊपर से उठा और साक्षी की फटी हुई बुर उसके बिर्य से भरी हुई उसके सामने थी।
साक्षी बिस्तर पर लाश की तरह पड़ी हुई थी। तभी जौन घुमा और नमिता ने अपने जीवन का सबसे बड़ा लंड देखा जो झड़ने के बाद भी अभी भी खड़ा था। वह कम से कम १० इंच लम्बा और बहुत मोटा था। उसने सोचा कि बेचारी साक्षी , क्या हालत हो गयी है उसकी।
जौन बाथरूम गया और बाहर आकर नमिता को बोला: बड़ी कमज़ोर लड़की निकली ये तो। तुम्हारा शरीर तो मस्त भरा हुआ है मैं तुमको fuck करना चाहता हूँ।
नमिता: ओह नहीं, मैं ये नहीं कर सकती।
उसका मन उसके लंड का साइज़ देखकर ही डर गया था।
तभी अंदर से कराहने की आवाज़ आयी और नमिता अंदर गयी तो वह अपने कपड़े पहन रही थी।
फिर वह नमिता से लिपट कर रोने लगी। नमिता ने पूछा: क्या हुआ?
साक्षी: दीदी उसका तो बहुत बड़ा और मोटा है , मेरी तो फट गयी और बहुत दर्द हुआ।
नमिता ने उसको सहारा दिया क्योंकि वह लँगड़ा कर चल रही थी,और बाहर आकर उसको और पेपर’s लेकर वहाँ से निकल पड़ी।

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