संस्कारी विधवा मां का रंडीपना 2

माँ बेटा

आने के बाद, मम्मी हॉल में लगे सोफे पर बैठ कर एक राहत भरी सांस लेते हुए बोली: राहुल बेटा, आज इतना घूम कर तो मैं काफी थक गई हूं। बस मन कर रहा है कि एक कॉफी मिल जाए?

मैं: मम्मी, रात हो गई है। सोने के समय है। आपको अब कॉफी नहीं पीनी चाहिए।

इतनी बात सुन कर पास खड़ा जुनैद बोला: अब मैडम जी घूम कर इतना थक गई हैं तो‌ इनके लिए मैं ही कॉफी बना कर ले आता हूं।

मम्मी जुनैद की तरफ देख कर कातिलाना मुस्कान के साथ बोली: थैंक्स जुनैद जी, आप मेरे लिए इतनी तकलीफ़ उठा रहे हो! ठीक है, जब तक आप कॉफी लाते हो, मैं तब तक अपने कपड़े बदल कर आती हूं।

मम्मी अपनी गांड मटकाते हुए अपने कमरे में चली जाती हैं, और जुनैद मम्मी के लिए कॉफी बनाने किचन में चला जाता है। मैं फ्रेश होने बाथरूम चला जाता हूं। थोड़ी देर में हॉल में आकर बैठ जाता हूं। कुछ देर बाद मम्मी कमरे से बाहर आती है, तो मैं उन्हें देखता ही रह जाता हूं, मम्मी ने एक बॉडी से चिपकी हुई सिल्की डार्क रेड नाइटी पहनी थी। पतली स्ट्रैप्स, डीप नेक और नीचे से इतनी छोटी कि उनकी जांघें साफ दिख रही थी।

मम्मी इस ड्रेस में बहुत हॉट लग रही थी। उनके होंठों पर रेड लिपस्टिक, हाथों में रेड चूड़ियां, नेल पॉलिश और उनके फेस पर आती बालों की लटें, कुल मिला कर मम्मी एक हॉट क़यामत लग रही थी। धीरे-धीरे मम्मी चल कर मेरे पास आती हैं, और मुझे एक मुस्कान देते हुए मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ जाती है।

जुनैद मम्मी के लिए कॉफी लेकर आता है। जब वह मम्मी को देखता है तो उसकी आंखें चमक जाती है। जुनैद अपना हाथ आगे बढ़ा कर मम्मी को कॉफी देता है। मम्मी उसकी आंखों में देखते हुए एक मुस्कान के साथ, उसके हाथों को अपने हाथों से छूते हुए कॉफी लेकर बोली: थैंक्स जुनैद जी, आपने मेरे लिए इतना कष्ट किया।

जुनैद: मैडम जी, यह तो मेरा फ़र्ज़ था।

जुनैद अपनी कॉफी लेकर मम्मी के बगल में ही बैठ जाता है। फिर उनसे इधर-उधर बातें करने लगता है। थोड़ी देर बाद जब सबकी कॉफी खत्म हो जाती है, तो मैं बोला: मम्मी, अब काफी रात हो गई है, हमें अब सोना चाहिए?

मम्मी: बेटा, बस थोड़ी देर में मैं भी सोने जा रही हूं, तुम जाकर सो जाओ। गुड नाइट।

मैं मम्मी को बाय बोल कर अपने कमरे में तो आ गया, पर मेरा मन यहीं सोच रहा था कि मम्मी थकी हुई थी, और उन्हें जल्दी सोना भी नहीं था। कहीं वो कुछ करने वाली तो नहीं थी? यही सोच कर मैं अपने कमरे से बाहर आया और हॉल में छिप कर देखा।

मम्मी जुनैद की गोद में बैठी हुई थी, और जुनैद मम्मी की नंगी चिकनी टांगों पर अपने हाथ फेर रहा था। मम्मी उसकी आंखों में अपनी नशीली आंखें डाल कर उसे रोकने के लिए –

मम्मी बोली: जुनैद, यह सब अभी ठीक नहीं है। राहुल अभी-अभी सोने गया है, कहीं वो आ गए तो सब गड़बड़ हो जाएगा।

जुनैद मम्मी के फेस पर आ रही बालों की लट को साइड करते हुए बोला: जान, आज जब से तुम्हें ब्लैक साड़ी पहने देखा है, मेरा मन कर रहा था। उधर दोस्त के होटल में ही तुम्हारी एक जोरदार चुदाई कर देता। और अभी भी तुम इतनी हॉट लग रही हो कि मुझसे रहा नहीं जा रहा।

मम्मी: ओहो जुनैद जी, आपने उधर कौन सी कसर छोड़ी? आपने तो अपने दोस्त के सामने ही मुझे इतनी बोल्ड किस्स करी कि मैं खुद भी गर्म हो गई थी। पर जुनैद जी, अभी वो नहीं हो सकता, मेरी मुनिया कल से ही काफी दर्द कर रही है।

जुनैद अपने होंठ मम्मी के होंठों के नजदीक लाकर: अभी कुछ तो ऐसा करो कि मैं शांत हो जाऊं।

मम्मी जुनैद की आंखों में देखते हुए, बिना कुछ बोले अपने रसीले होंठ जुनैद के होंठों पर रख देती हैं, और अपने दोनों हाथ उसके गले में डाल कर उसे अपने से चिपका लेती हैं। फिर मम्मी बड़े ही कामुक तरीके से उसके होंठ चूसने लगती हैं। जुनैद अपने हाथों से मम्मी की गांड मसलने लगता है। धीरे-धीरे वो उनकी नाइटी को खिसका कर कमर के ऊपर कर देता है।

मैंने देखा मम्मी ने नाइटी के नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी। मम्मी की उभरी हुई नंगी गांड पर जुनैदै अपने हाथ फेर रहा था। मम्मी उसके होंठों को चूसते हुए जुनैद की गोद में इस तरह बैठ जाती हैं, कि वो अपनी चूत भी उसके लंड पर रगड़ सके।

मम्मी का यह जोश देख कर मेरा भी लंड खड़ा हो रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मुझे लंड को बाहर निकालना पड़ा। अब लंड को अपने हाथों में लेकर रगड़ते हुए मैं यही सोच रहा था: साली, यह मेरी मां नहीं हो सकती, यह तो कोई रंडी है।

कुछ देर में जुनैद अपने होंठों को मम्मी से अलग करता है, और मम्मी की चूचियों को नाइटी से बाहर निकाल कर उन्हें चूसने लगता है। मम्मी की चूचियां जुनैद के होंठ लगते ही और फूलने लगी थी, उनके निप्पल टाइट हो चुके थे। मम्मी जुनैद के बालों में अपने हाथ फेरते हुए अपनी कामुक आवाजें निकाल रही थी।

मम्मी: आह आह उफ्फफ्फ जुनैद आराम से चूसो,‌ उफ्फफ्फ आईईईई आह आह उफ्फफ्फ जुनैद जी इनमें अब दूध नहीं आने वाला, उफ्फफ्फ आराम से।

जुनैद साला मां की चूचियों को ऐसे चूस रहा था, जैसे कोई देशी आम निचोड़ रहा हो। मेरी मां भी जोश में अपनी दोनों चुचियों को जुनैद से बराबर चुसवा रही थी। थोड़ी देर बाद मम्मी जुनैद की गोद से उतर कर जमीन पर बैठ जाती है। जुनैद मम्मी को जमीन पर बैठा हुआ देख कर अपनी पैंट की बेल्ट खोल कर पैंट और अंडरवियर अपने घुटनों तक कर देता है। मम्मी जुनैद की तरफ एक स्माइल करके, उसकी पैंट और अंडरवियर उसके घुटने से निकाल कर उसे नीचे से पूरा नंगा कर देती हैं। जुनैद थोड़ा आगे आकर सोफे के किनारे पर बैठ जाता है।

मम्मी जुनैद की आंखों में देखते हुए एक कातिलाना मुस्कान देकर अपने हाथ लंड की तरफ बढ़ा देती हैं। फिर उसके लंड को अपने हाथ की मुट्ठी में लेकर उसे आगे-पीछे करते हुए-

मम्मी बोलीं: जुनैद जी आपका मुसल लंड बड़ा ही प्यारा है। ऐसे लंड को पाने की कल्पना मैं अक्सर किया करती थी।

जुनैद: सविता, मैंने कभी नहीं सोचा था, मुझे तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत कभी मिलेगी। अब तुम्हें ऐसे लंड की कल्पना नहीं करनी होगी। जब चाहे तुम इसके साथ खेल सकती हो।

मम्मी जुनैद की तरफ देखते हुए उसके मुसल को अपने होंठों के करीब लाकर उसके ऊपरी सिरे पर एक किस्स करती हैं। फिर उसके लंड को अपने होंठों पर ऐसे रगड़ती हैं जैसे लिपस्टिक मोटे अंडों को चूमती है। फिर जुनैद की तरफ एक कातिलाना मुस्कान करके उसके लंड के अगले सिरे को अपने मुंह में लेती हैं।

मम्मी के मुंह में लंड जाते ही जुनैद हल्की आवाज़ में: आह सविता, तुम्हारे यह उफ्फफ कोमल होंठों के बीच मेरा लंड कहीं पिघल ना जाए!

मम्मी जुनैद की आंखों में देखते हुए उसका मुसल थोड़ा और अपने मुंह में लेती हैं। फिर अपने सिर को आगे-पीछे करके उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगती हैं। जुनैद का लंड मम्मी के मुंह में देख कर मुझे गुस्सा और मजा भी आ रहा था! साला इधर मैं अपना लंड हिला कर शांत कर रहा हूं। उधर मेरा नौकर मेरी मां से अपना लंड चुसवा कर मजे ले रहा है! मैं अपने आप को ही कोस रहा था, यह मैंने क्या कर दिया। अपनी प्यासी मां के लिए मुसल लंड को घर लेकर आ गया।

जुनैद अपना लंड मम्मी के मुंह में डाल कर मजे से सिसकारियां ले रहा था। मेरी मां भी उसकी सिसकारियां सुन कर अपनी रंडाई पर आ गई थी। मम्मी अपनी दोनों चूचियों के बीच जुनैद का लंड फंसा कर उसे ऊपर-नीचे कर रही थी। मम्मी अपना थूक गिरा कर उसे और चिकना कर लेती थी, जिससे उसका मुसल आराम से चूचियों में फिसल सके। मेरी मां अपने थूक से सने जुनैद के लंड को अपनी चूचियों से निकाल कर अपने गले तक ले लेती, जब वो मुंह से निकालती तो उनकी हालत खराब हो जाती।

कुछ देर की लंड चुसाई के बाद, जुनैद एक लंबी सांस लेकर अपना लंड मम्मी के मुंह में पूरा डाल कर सारा वीर्य उनके मुंह में उगल देता है। जब तक जुनैद पूरा झड़ नहीं जाता, वो अपने लंड को मम्मी के मुंह से बाहर नहीं निकालता। मम्मी जुनैद की आंखों में देखते हुए उसके लंड का सारा वीर्य गटक जाती हैं, तब मम्मी उसके मुसल को अपने मुंह से निकाल कर लंबी-लंबी सांसें लेती है। फिर जुनैद मम्मी को खींच कर अपने सीने से लगा लेता है। इधर मैं भी अपने लंड से अपना वीर्य निकाल कर एक चैन की सांस लेता हूं।

मम्मी जुनैद के सीने से लिपट कर बोली: जुनैद जी आपका शेर तो मैंने शांत कर दिया।

जुनैद: जान आज तो तुमने मेरा शेर शांत करके मेरा दिल ही खुश कर दिया। आई लव यू सविता।

मम्मी उसके होंठों को चूम कर: आई लव यू टू जुनैद जी। अब आप मुझे अपनी इन मजबूत बाहों में उठा कर मेरे बेड तक छोड़ दो।

जुनैद तुरंत मम्मी को अपनी गोद में लेकर उनके कमरे में चला गया। कुछ देर मम्मी के साथ लेटा रहा, जब तक वो सो नहीं गई।फिर उनके सोने के बाद वो भी अपने कमरे में चला गया था, और मैं भी सो गया था।

सुबह मेरी नींद जल्दी खुल जाती है। मैं बाथरूम से फ्रेश होकर हॉल में आया तो देखा मम्मी ऊपर जुनैद के कमरे से नीचे आ रही थी। मैं देख कर चौंक गया कि मेरी मां सुबह-सुबह ऊपर क्या करने गई होगी? वो भी एक शॉर्ट्स निक्कर और ऊपर टी-शर्ट पहने हुई। मम्मी के सिल्की खुले हुए लहराते बाल‌ थे, और फेस पर मुस्कान लेकर नीचे आ रही थी।

सुबह-सुबह मम्मी को देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगता है। मैं सोच रहा था साली आखिर मेरी मां ऊपर क्या करने गई थी।

मम्मी मेरे करीब आती हैं मैं उनसे पहले यहीं पूछता हूं: मम्मी मैं आपको कमरे में देखने गया था, और आप ऊपर से आ रही हैं, उधर क्या कर रही थीं?

मम्मी अपना मुंह फुलाते हुएं: बेटा बस मैं अपने गीले कपड़े सुखाने गई थी। यह क्या गुड मॉर्निंग की जगह सुबह ही तुम मेरे से सवाल करने लगे (इतना बोल कर मम्मी मेरे से मुंह फेर लेती हैं)?

मम्मी का फूला हुआ मुंह देख कर मैं बोला: सॉरी मम्मा।

मम्मी तब भी मेरी तरफ अपना फेस नहीं करती, तो मैं उनका फेस पकड़ कर अपनी तरफ करके: गुड मॉर्निंग।

मम्मी अपनी आंखें उठा कर मुझे एक स्माइल करती हैं। तभी मैं अपने होंठ उनके होंठ पर रख देता हूं। अपना एक हाथ उनकी कमर में डाल कर उन्हें अपने से चिपका लिया। मम्मी की चूचियां मेरे सीने से चिपक गई थी। मम्मी मेरे होंठों को चूसते हुए लंबी-लंबी सांसें ले रही थी। उनकी फूलती नरम गुदगुदी चूचियां मुझे एक अलग मजा दे रही थी। मैं मम्मी के होंठों को चूसते हुए भूल गया कि यह मेरी मां थी।‌ मैं इतना बहक गया कि मैं अपने हाथ उनकी गांड पर फेरने जा रहा था। कुछ देर के बाद मम्मी मेरे से अलग होती हैं तब।

मैंने मम्मी से कहा: आज आपके होंठ पहले से काफी मीठे लग रहे है।

मम्मी कुछ बोलने वाली थी, तभी सामने से लुंगी पहने जुनैद आ जाता है। वो हमको गुड मॉर्निंग करता है। मम्मी उसकी तरफ देख कर अपने फेस पर एक शर्मीली मुस्कान लिए कहती हैं: गुड मॉर्निंग जुनैद जी।

जुनैद मम्मी के सामने लुंगी के ऊपर से ही अपना लंड सेट करते हुए हॉल के सोफे पर बैठ जाता है। जुनैद को देख कर मेरा मूड खराब हो जाता है। मैं मन में बोला आज कई दिन बाद तो मम्मी के होंठ चूसने को मिले थे, वो भी यह आके टपक गया।

नाश्ता करने के बाद मैं तैयार होकर अपनी शॉप के लिए निकल रहा था। तभी मैंने देखा मम्मी अपने कमरे में किसी से हंस-हंस कर बात कर रही थी। थोड़ा कमरे के अंदर झांक कर देखा तो मम्मी मौसी से वीडियो कॉल पर बात कर रही थी। मैं बाहर खड़ा उनकी बातें सुनने लगा। मम्मी काफी हंस और मुस्कुरा रही थी।

मौसी मम्मी की मुस्कान देख कर बोलीं: क्या बात सविता, बड़ी खुशी झलक रही है तेरे चेहरे पर? मुझे भी तो बता क्या राज छुपा रही है अपनी दीदी से?

मम्मी: ऐसी कोई बात नहीं है दीदी। मैं तो बस आपको इतने दिनों बाद देख कर खुश हो रही हूं।

मौसी: अच्छा जी, अब सविता अपनी बातें दीदी से छुपाने लगी है। मेरी छोटी बहन तू शुरू से ही काफी शर्मीली रही है। खैर, तेरी जिंदगी में अब कुछ चल रहा है जो तू मुझे बता नहीं पा रही?

मम्मी: दीदी, सही बताऊं तो मुझे पहले से अब काफी अच्छा लग रहा है। मेरी उदास जिंदगी में एक नयापन सा मिला। जिसे पाकर मुझे काफी खुशी मिल रही है।

इनकी बातें सुन कर मेरे कान खड़े हो गए। मैं सोच रहा था मम्मी मौसी को जुनैद की बात बताएंगी या नहीं? यही सब आगे सुनने के लिए मैंने अपने पैर उधर ही जमा लिए।

मौसी: सविता, सीधा-सीधा बोल, तेरी जिंदगी में कोई मर्द आया है? जिस दुख भरी जिंदगी से तू गुजरी है, अब तेरी खुशी को मैं भी समझ सकती हूं। वैसे यह बता वो कौन है?

मम्मी: दीदी, मुझे समझ नहीं आ रहा मैं आप से कैसे कहूं। आप उसे जानती हैं।

मौसी ने कुछ देर सोचकर कहा: वो कहीं जुनैद तो नहीं है? अगर जुनैद जैसा मर्द तेरी लाइफ में खुशी दे रहा है, तो यह खुशी की बात है।

मम्मी शर्माते हुए: दीदी, आप मेरे दिल की बात जान जाती हैं। वैसे आपको कैसे लगा जुनैद ही मेरी लाइफ में है?

मौसी: जुनैद जैसा जवान, सॉलिड और इतना हैंडसम मर्द ही तेरी उदासी दूर कर सकता है। अब उसके साथ तुझे कैसा लग रहा है? वैसे तुम दोनों अभी तक कितने करीब आए?

मम्मी शर्मीले अंदाज़ में: क्या दीदी आप भी ना। दीदी, जुनैद जी के साथ मुझे हर पल अच्छा लगता है। पर मुझे डर है कहीं राहुल को पता लगा तो?

मौसी: सविता, राहुल की फिक्र मत कर। उसको पता लगा तो मैं संभाल लूंगी। अब मैं फोन रखती हूं, बाय।

मम्मी का फोन कटने के बाद मैं हॉल आ गया। फिर मैंने जुनैद को आवाज़ देकर बुलाया शॉप जाने के लिए। जुनैद मेरे पास आ जाता है। मम्मी अपने कमरे से मुस्कुराती हुई आती हैं, फिर किचन में जाकर हमारे लिए खाना पैक करती हैं। कुछ देर में-

मम्मी किचन से बोली: जुनैद जी, एक मिनट के लिए आना यहां। मेरे से लंचबॉक्स बंद नहीं हो रहा है।

जुनैद फौरन किचन में चला जाता है। मुझे कुछ शक सा हो रहा था, तो मैं भी किचन के पास गया और अंदर देखा। मम्मी जुनैद से लिपट कर उसे ज़बरदस्त किस्स कर रही थी। दोनों के लिप्स लॉक हुए पड़े थे। मम्मी अपनी आंखें बंद किए उसके होंठों को जोश से चूस और काट रही थी।

जब मैंने किचन की स्लैब पर देखा तो मेरा खून खौल गया, लंचबॉक्स बंद पड़ा था। मेरी मां बस अपनी होंठों की प्यास बुझाने के लिए जुनैद को बुलाई थी। कुछ 4 मिनट बाद, जुनैद मम्मी के होंठों को चूसते हुए अपने हाथ उनकी चूचियों को दबाने लगता है। तभी मम्मी अपने होंठों को जुनैद से अलग करके बड़ी धीमी आवाज़ में बोली-

मम्मी: जुनैद जी, अब जाओ, राहुल बाहर खड़ा है। यह बस आपके लिए गुड बाय किस्स थी।

जुनैद ज़िद करते हुए बोला: बस एक मिनट के लिए।

मम्मी अपनी आंखें दिखाते हुए: नहीं, अभी आप जाओ।

मम्मी उसके हाथ में लंचबॉक्स दे देती हैं। मैं फौरन उधर से बाहर चला जाता हूं। जुनैद मुस्कुराते हुए मेरे पास आता है, और फिर हम लोग अपनी शॉप के लिए निकल जाते हैं। दो से तीन दिन ऐसे ही मम्मी उसे रोज किचन में बुला कर किस्स करती रही।

फिर अगले दिन सुबह मैंने देखा मम्मी ने एक पिंक और रेड प्रिंटेड साड़ी पहनी हुई थीं, उनका ब्लाउज़ स्लीवलेस काफी कसा हुआ था। ब्लाउज़ का गला इतना डीप था कि उनकी चूचियों के निप्पल ही कवर कर पा रहा था।

मम्मी ने साड़ी अपनी नाभि से भी नीचे बांधी हुई थी। उनके चूतड़ साड़ी में इतने कसे हुए थे कि उनकी पैंटी का शेप भी नज़र आ रहा था। मम्मी ने अपने सुनहरे बालों को खोल कर अपने आगे दाएं साइड के कंधों पर रखा हुआ था। मम्मी अपनी नाक की नथ को सेट करते हुए कमरे से बाहर आ रही थी। मम्मी का यह लुक मैं देखता ही रह गया।

मम्मी मुस्कुराते हुए मेरे पास आई और बोली: गुड मॉर्निंग बेटा, कहां खो गए?

मैं होश में आते हुए: कहीं भी नहीं मम्मी। मैं बस आपका यह लुक देखकर हैरान हो गया।

मम्मी: मैं अच्छी नहीं लग रही हूं?

मैं: ओहो मम्मी, आप तो एक-दम हॉट एंड सेक्सी लग रही हैं मेरी प्यारी मां।

मम्मी इस्माइल करते हुए: अब तुमने मेरी इतनी तारीफ़ करी, तो तुम्हें इनाम भी मिलना चाहिए।

मम्मी मेरे करीब आईं और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैंने भी उनका फेस पकड़ा और होंठों को चूसने लगा। कुछ देर की कामुक किस्स के बाद-

मम्मी मुस्कुराती हुई: यह मेरे बेटे के लिए गुड मॉर्निंग किस्स। अब तुम बैठो मैं नाश्ता लेकर आती हूं।

मम्मी किचन में चली जाती हैं। तभी जुनैद भी आता है लुंगी पहने हुए अपनी नंगी छाती लेकर। फिर हॉल में ही अपनी बॉडी पर ऑयल लगाने लगता है। जुनैद अपना एक पैर जमीन पर तो दूसरा सोफे पर रख कर अपनी जांघ पर ऑयल लगा रहा था। तभी मम्मी किचन से नाश्ता लेकर हॉल में आ जाती हैं। उनकी आंखें जुनैद की चमकती बॉडी पर टिक जाती हैं।

जुनैद मम्मी को अपने सामने देख कर अपना ऑयल से लगा हाथ, अपनी जांघ के आखिरी हिस्से तक लेकर जाता है, जहां तक उसका लंड था। मम्मी जुनैद को अपनी हवस भरी निगाहों से देख रही थी, और उसको देख कर अपने होंठों को दांतों से चबा लेती हैं। जुनैद मम्मी को और गर्म करने के लिए अपना एक हाथ लुंगी के अंदर डालता है, और दूसरे हाथ से लुंगी को कवर करता है ताकि वो जो करे मुझे दिखे ना।

फिर मम्मी की आंखों में आंखें डाल कर अपने अंदर वाले हाथ से मुसल लंड पर ऑयल मसल लेता है। मम्मी जुनैद की इस हरकत से और गर्म हो जाती हैं। उनकी आंखें नशीली हो जाती हैं, गालों पर चमक और उनके होंठ प्यासे हो जाते हैं।

मम्मी अपने होंठों को होंठों से रगड़ते हुए कामुक आवाज़ में बोलीं: जुनैद जी, बॉडी को चमकाते रहोगे या नाश्ता भी करोगे?

जुनैद मम्मी की तरफ हवस भरी निगाहों से देखते हुए: बस हो गया। बॉडी को फिट रखना भी जरूरी है, ताकि हम अपनी मजबूती को सही जगह इस्तेमाल कर सकें। वैसे सविता मेम, आज आपके ऊपर यह प्रिंटेड साड़ी बहुत जच रही है।

मम्मी जुनैद को इस्माइल करती हुई: थैंक्यू जुनैद जी। आपका नाश्ता तैयार है।

जुनैद अपने हाथों को एक तौलिये से साफ करके सोफे पर बैठ जाता है। मैंने एक चीज़ नोटिस की कि आज जुनैद ने लुंगी के नीचे अंडरवियर नहीं पहना हुआ था। लुंगी के अंदर उसका मोटा मुसल लंड झूलता हुआ अलग ही नजर आ रहा था। फिर मम्मी जब नाश्ता देने के लिए जुनैद के सामने झुकती हैं, तो उनका पल्लू कंधे से सरक कर जमीन पर गिर जाता है। जुनैद की आंखें मम्मी की आधी नंगी चूचियों को देख कर चमक जाती हैं।

मम्मी कुछ देर उसके सामने ऐसे ही झुकी रहती हैं। फिर जुनैद से शर्माते हुए अपना पल्लू ठीक करती हैं। मम्मी के पल्लू से बस एक साइड का बूब्स ही कवर हो रहा था। दूसरी साइड के बूब्स के निप्पल का ब्राउन रंग भी दिखाई दे रहा था।

मम्मी जुनैद को कॉफी देने के बाद उसके बगल में बैठ जाती हैं, उसकी तरफ ही फेस करके। दोनों एक-दूसरे को देख कर अपनी-अपनी कॉफी पी रहे थे। आज पता नहीं क्यों मुझे यह सब देख कर बुरा नहीं लग रहा था। शायद मम्मी के चेहरे की खुशी को देख कर या उनका यह कातिल बदन देख कर मैं पिघल रहा था। मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। बस जो मेरे सामने हो रहा था, मैं उसे चुप-चाप देख रहा था।

मम्मी बार-बार जुनैद की ऑयल से चमकती बॉडी ही देख रही थी। उसे देख कर उनकी आंखें नशीली होती जा रही थी। मेरी मां अपनी कामवासना में डूबती जा रही थी। दोनों हंसी-मज़ाक की बातें कर रहे थे। मम्मी बातें करते-करते अपना एक हाथ जुनैद की जांघ पर रख देती हैं। फिर मम्मी मेरी तरफ देखती हैं। जब उनको लगा मैं अपने फोन में लगा हुआ हूं तो वो बिना डरे अपना हाथ उसकी जांघ के लास्ट तक ले जाती है। फिर उसके मुसल लंड पर अपना हाथ रख कर जुनैद की आंखों में देखती हुई-

मम्मी बोलीं: जुनैद जी, आपकी बॉडी बहुत ही सॉलिड है। इसे बनाने में आपने बहुत मेहनत करी होगी।
जुनैद: हां, मेहनत तो मैंने की है, पर इसका फल जब किसी और को मिलता है, तो मुझे अपनी मेहनत पर खुशी मिलती है।

मम्मी का चेहरा एक-दम कामुक हो गया था। वो जुनैद को अब खा जाने वाली नजरों से देख रही थी। मम्मी अपना लंड पर रखा हुआ हाथ को थोड़ा रब करती हुई बोली: जुनैद जी, फिर तो आप मेरा मजबूत दरवाजा आराम से तोड़ देंगे।

मम्मी का इशारा मैं समझ गया था, वो जुनैद से क्या कहना चाहती हैं। साली मां के ऊपर हवस इतनी चढ़ चुकी थी, उन्हें मेरे सामने बैठे होने का भी होश नहीं था।

मैं तुरंत खड़ा हुआ और बोला: मम्मी, मुझे शॉप के लिए निकलना है, आप लंच कब तैयार करेंगी?

मम्मी अपने आप को होश में लाती हुई: बेटा, तुम तैयार होकर आओ मैं किचन में जा रही हूं।

फिर मैं तैयार होने अपने कमरे में चला जाता हूं। कुछ 5 मिनट बाद, मैं तैयार होकर हॉल में आया। देखा मम्मी और जुनैद अभी तक वैसे ही बैठे हुए थे। मैंने गौर किया कि अब मम्मी का पल्लू जुनैद की जांघों पर पड़ा हुआ था, और मम्मी का एक हाथ अब भी जुनैद की जांघों पर था। शायद मां का हाथ अब लुंगी के अंदर था, जो वो अपनी साड़ी के पल्लू से ढकी हुई थीं। वो दोनों मुझे देख कर चौंक गए थे।

मैंने उसे इग्नोर करते हुए कहा: जुनैद तुम तैयार नहीं हुए? और मम्मी आप?

मम्मी थोड़ा अपने को होश में लाती हुई बिना मेरी तरफ देखे बोली: बेटा, तुम शॉप पर चले जाओ, मुझे जुनैद से थोड़ा घर का काम करवाना है।

मैं चौंकते हुए: जुनैद क्या काम करेगा? आज शॉप पर भी मुझे बहुत काम है।

मम्मी: बेटा, मेरा काम थोड़ा भारी है, जुनैद के बगैर वो मैं नहीं कर पाऊंगी।

मम्मी की बात मैं समझ गया यह किस काम के लिए जुनैद को रोक रही थी। मां को अपनी हवस जो शांत करवानी है।

फिर मैं काफी सोच कर मम्मी से नरमी से बोला: ठीक है, मम्मी पर जुनैद का काम निपट जाए तो उसे शॉप पर भेज देना।

मम्मी मुस्कुराती हुई: ठीक है बेटा।

मैं: जुनैद, तुम मम्मी का काम अच्छे से निपटा कर जल्दी शॉप पर आना।

मम्मी तुरंत खड़ी हुई और मेरे करीब आकर: जुनैद जी आप मेरे कमरे में चलो, मैं अभी आती हूं राहुल बेटे को गुड बाय बोल कर।

जुनैद के जाते ही मम्मी मेरे और करीब आई। फिर अपने दोनों हाथों को मेरे गालों पर रख कर मुझे एक जोरदार लंबा किस्स करती हैं।

फिर एक मिनट के जोरदार किस्स के बाद। मम्मी अपने होंठों को अलग करके बोली: गुड बाय राहुल बेटा, और सुनो जुनैद को थोड़ा टाइम लग जाएगा मेरा काम निपटाने में।

मैं इस्माइल के साथ बोला: ठीक है, पर जल्दी निपटा देना।

फिर उसके बाद मैं फौरन घर से निकल गया। मुझे पता था मेरी मां आज अपनी ज़बरदस्त चुदाई करवाने वाली थी। मुझे शॉप पर भी जाना था, मेरा मन चुदाई देखने का भी कर रहा था। फिर मैं सोचा क्यों ना कुछ देर चुदाई देखने के बाद ही जाऊं। फिर मैंने गेट की दरार से अंदर देखा तो मम्मी का कमरा बंद था, वो लोग हॉल में भी नहीं थे। मेरा रास्ता साफ था। मैंने दूसरी चाबी निकाली और घर का गेट खोलकर आराम से अंदर आ गया।

मम्मी के कमरे में देखा। दोनों एक-दूसरे से लिपट कर लिप्स लॉक किए हुए थे। मम्मी के बदन से उनकी साड़ी उतार कर जमीन पर पड़ी थी। जुनैद मेरी मां को किस्स करते हुए अपने मजबूत हाथों से उनकी गांड मसल रहा था। मम्मी अपने दोनों हाथ उसकी गर्दन में डाल कर उसके होंठों को पागलों की तरह चूस रही थी।

फिर जुनैद मम्मी का पेटीकोट खोल देता है, जिसे मम्मी खुद अपने पैरों से निकाल कर अलग कर देती हैं। मां ने आज गजब की पिंक रंग की शॉर्ट्स पैंटी पहनी हुई थी। पैंटी के आगे बस छोटा सा कपड़ा लगा हुआ था, जो बस चूत को कवर कर रहा था। कमर में बंधी उसकी डोरियां, पीछे कोई कपड़ा नहीं, बस एक डोरी वो भी उनकी गांड की फांकों में घुसी हुई थी।

मेरा तो मां का रंडीपना देख कर ही लंड खड़ा हो गया। साली आए दिन कुछ नया पहन रही थी। मैंने अपना लंड बाहर निकाला, और उस मां को देख कर हिलाना शुरू कर दिया।

मम्मी अपने लिप्स जुनैद से अलग करके उसकी तरफ पीठ करते हुए बोली: जुनैद, मेरे से अब रहा नहीं जा रहा, नोच डाल मुझे आज तू।

जुनैद अपने हाथों को आगे बढ़ा कर उनके ब्लाउज़ की डोरियों को पकड़ कर एक झटके में तोड़ देता है।

डोरियां टूटते ही मम्मी के मुंह से: आअआअ जुनैद जी, यह क्या कर रहे हो?

जुनैद: साली, सुबह से तू मुझे गर्म कर रही थी। मेरी ताकत को ललकार रही थी ना, अब देख तू।

जुनैद मम्मी का बचा हुआ ब्लाउज़ और ब्रा भी फाड़ कर उतार देता है। फिर मम्मी की कमर से अपने दोनों हाथों को आगे ले जाकर, मम्मी की दोनों चूचियां कस के पकड़ लेता है और उन्हें कस-कस के दबाने लगता है।

मम्मी: उफ्फफफ आईईईई जालिम जुनैद आराम से आह आह अह उफ्फ।

मम्मी अपनी कामुक आवाजें निकालते हुए अपनी गांड उसके मुसल पर रगड़ रही थी। उस रगड़ में जुनैद की लूंगी खुल कर जमीन पर गिर जाती है, जुनैद का मुसल अब सीधा मम्मी की गांड की फांकों में रगड़ खा रहा था। मम्मी भी जोश में अपनी कमर कभी गोल घुमाती तो कभी ऊपर-नीचे करती। जुनैद मम्मी की दोनों चूचियां ऐसा दबा रहा था, जैसे उनका रस निचोड़ रहा हो।

फिर मम्मी जुनैद की तरफ घूमती हैं और उसे एक जोरदार किस्स करके नीचे बैठ जाती हैं, फिर उसकी आंखों में देखते हुए उसके मुसल लंड पर अपनी पूरी जीभ फेरने लगती हैं। जुनैद मम्मी के खुले बालों में अपना हाथ डाल उनका सिर पकड़ कर मम्मी के मुंह की चुदाई शुरू कर देता है। मम्मी उनकी आंखों में देखते हुए उसका पूरा मुसल अपने मुंह में ले रही थी। आज मां का अंदाज़ कुछ रंडियों जैसा लग रहा था, साली पूरा लंड मुंह में लेने के बाद भी उसे प्यारी सी स्माइल कर रही थी।

कभी-कभी मम्मी जुनैद की अंडों की एक गोली अपने मुंह भर कर ऐसा चूसती, जैसे गुलाब जामुन मुंह में ले रही हों। कुछ देर की लंड चुसाई के बाद मम्मी खड़ी होती हैं, और जुनैद का लंड पकड़ कर उसे अपने बेड तक लाती है। फिर जुनैद को अपने बेड पर धक्का देकर खुद भी उसके ऊपर गिर जाती है।

मम्मी जुनैद के सीने पर लेट कर उसे किस्स करने लगती हैं, उसके होंठों को ऐसा चूसती हैं कि मम्मी की सारी लिपस्टिक के होंठों और गालों पर निशान बन जाते हैं। फिर मम्मी खड़ी होकर अपनी पैंटी की डोरियां खोल देती हैं, जो जुनैद के सीने पर गिर जाती हैं। जुनैद उसे उठा कर अपने नाक के पास लगा कर उसकी खुशबू लेने लगता है।

मम्मी थोड़ा आगे जा कर जुनैद के मुंह पर अपनी चूत रख कर बैठ जाती हैं, जुनैद भी मम्मी के चूतड़ों को अपने हाथों से संभाल कर उनकी चूत में जीभ फेरने लगता है।

मम्मी कामुक आवाज़ों से: आह आह अह अह उफ्फ उफ्फ, जुनैद बहुत गर्मी है मेरी इस चूत में। आअआअ उफ्फफफ हरामी काटता क्यों है? उद्युफ्फाफ आअआअ जुनैद जी उफ्फफफ, कमाल की जीभ है आपकी।

मम्मी अपनी कमर को गोल-गोल घुमा रही थी, कभी उसके मुंह पर अपने चूतड़ों को घिसने लगती। जुनैद मम्मी की पूरी चूत चूसते हुए गांड भी चाट रहा था। मम्मी जुनैद के मुंह पर ही अपनी चूत रगड़ते हुए झड़ जाती हैं। फिर राहत भरी सांस लेकर जुनैद के ऊपर से उतर कर बेड पर लेट जाती हैं, जुनैद उठ कर मम्मी की दोनों टांगों के बीच आ जाता है।

मम्मी जुनैद की आंखों में देख कर बोली: जुनैद जी, अब मेरी चूत में अपना मुसल लंड उतार दो, सुबह से आपको देख कर तड़प रही हूं।

जुनैद लंड को चूत पर रख कर कहा: आज तो तूने अपने बेटे से गजब का बहाना कर दिया, मन तो कर रहा था तेरे राहुल के सामने ही तुझे घोड़ी बना लूं।

मम्मी: आह जुनैद जी, वो दिन भी आएगा जब मैं राहुल बेटे के सामने किसी मुसल पर उछल रही होऊंगी। अब तुम ज्यादा समय खराब मत करो, मेरी चूत शांत करने के बाद तुम्हें शॉप भी जाना है।

जुनैद मम्मी की चूत में अपना आधा लंड उतारकर कहा: जी मालकिन, पहले तेरी सर्विस करूंगा।

मम्मी: उफ्फफफ आईईईई जालिम जुनैद आह आह आराम से चोदो।

जुनैद फिर एक ज़ोरदार दूसरे धक्के में अपना पूरा लंड मम्मी की चूत में उतार देता है।

मम्मी पूरा लंड जाते ही छटपटा जाती हैं, अपने हाथों की मुट्ठी से चादर समेटने लगती, दांतों को भींचते हुए दर्द भरी आवाज़ में बोली: कमीने, रहम कर, उफ्फफफ आईईईई सीईईईई, आह आअआअ सीईईई। इतनी चुदाई के बाद भी तेरा मुसल पहली चुदाई का एहसास दे रहा है, उफ्फफफ मर डाला। जालिम जुनैद।

जुनैद मम्मी की बिना परवाह किए अपने धक्के लगाता है, मम्मी दर्द को बर्दाश्त करते हुए भी उसे रोक नहीं रही थी। मम्मी अपनी टांगें और फैला लेती है, ताकि जुनैद मम्मी के ऊपर आराम से लेट कर चुदाई कर सके। जुनैद के धक्के तेज हो जाते हैं, मम्मी जुनैद के मुंह में अपनी एक बूब्स लगा देती है। मम्मी जुनैद को अपना एक बूब्स पिलाते हुए चुदाई का मजा अपनी मीठी सिसकारियों से ले रही थी।

मम्मी: आह आहा ह ह ह ह अह ह उफ्फफफ आईईईई जुनैद जी और तेज चोदो मुझे, उफ्फफफ आईईईई, बड़ा मीठा दर्द होता है जब आपका लंड मेरी बच्चेदानी, उफ्फ में महसूस होता है।

मैं सोचा यह साला चुदाई जुनैद मां की कर रहा था, जलन और दर्द मुझे हो रहा था। यह साला मेरी सेक्सी मां का मजा ले रहा है, उफ्फ मैं यह लंड हिला रहा हूं।

मैं मन में कहा: उफ्फ मां, आपकी चूत में यह जुनैद का लंड मुझे अच्छा नहीं लग रहा है, निकाल दो मां।

उनकी चुदाई देख कर मैं अपना लंड तेजी से हिला रहा था। कुछ देर में जुनैद मम्मी को घोड़ी बना देता है, फिर पीछे से अपना मजबूत लंड मम्मी की चूत में पेल देता है।

जुनैद: जब मैं तुझे घोड़ी बनाता हूं तो तेरा यह गांड का छेद मुझे बहुत कातिल लगता है, साली, पर तुझे इसे अपनी सुहागरात पर देनी है इसलिए रुक जाता हूं।

इतना बोल कर जुनैद मां की गांड पर 2-3 चांटे मार देता है। फिर अपने धक्कों को और तेज कर देता है। पूरे कमरे में मां की सिसकारियां, चूत से आती फच्च-फच्च की आवाज़ गूंजने लगी थी।

थोड़ी देर बाद जुनैद मम्मी को अपने ऊपर लेता है, मम्मी अपने खुले बालों को पीछे एक जूड़ा सा बांध कर लंड को चूत में सेट करती हैं। फिर लंड को चूत में लेकर अपनी कमर को कभी गोल, कभी दाएं-बाएं करते हुए उस पर उछलने लगती हैं। मम्मी के फेस पर अब दर्द की जगह मुस्कान आ गई थी, वो जुनैद के सीने पर अपने दोनों हाथों को टिका कर अपनी मस्त कमर चला रही थी। मम्मी का गोरा फेस अब और भी कामुक और हॉट लग रहा था। मम्मी को जुनैद के लंड पर उछलता हुआ देख कर मेरा लंड अपना पानी फेंक देता है।

मुझे होश आता है कि मुझे शॉप पर जाना है, काफी देर से मेरा फोन भी जेब में वाइब्रेट कर रहा था। मैंने उसे निकाल कर देखा तो काफी लोगों की मिस कॉल आई हुई थी। मैं सोचा इनकी चुदाई तो अभी चलती रहेगी, मुझे तो अपना काम देखना पड़ेगा। फिर मैं घर को पहले जैसा लॉक कर बाहर निकल गया, और अपनी शॉप पर पहुंच गया।

शॉप पर काफी काम निपटाने के बाद मुझे राहत मिली। मैं सोचने लगा यह मां भी ना अपनी चूत की गर्मी शांत करने के लिए मुझे भी लेट कर दिया। जुनैद शॉप पर लंच के समय आता है, मुझे उसे देख कर गुस्सा आने लगता है। फिर उस पर मैं अपना गुस्सा भी निकाल देता हुं। फिर शाम को शॉप से घर आने पर मैं जल्दी खाना खाकर सो जाता हूं।

फिर कुछ एक महीने तक मम्मी का ऐसा ही ड्रामा चला, हर दो दिन में मम्मी किसी ना किसी बहाने जुनैद को घर रोक लेती। कभी शॉप से जुनैद को जल्दी घर बुला लेती, तो कभी उसको शॉप पर ही जाने नहीं देती। जुनैद की लगातार चुदाई से मम्मी और भी निखर गई थी, उनके गालों पर ग्लो, फेस पर खुशी, और चूचियां और भी टाइट हो गई थी।

एक दिन, ऐसे ही शॉप पर मम्मी ने मुझे फोन किया तो मैंने गुस्से में बोला: क्या हुआ मम्मी आज क्या काम है आपको?

मम्मी: राहुल बेटा, गुस्सा क्यों होते हो, मैंने तो कुछ बोला भी नहीं।

मैं: मम्मी, मुझे पता है आपको फिर कोई काम होगा, रोज़-रोज़ मैं तंग आ गया हूं। बताएं?

मम्मी: सॉरी बेटा, पर आज मेरा काम अलग है और खास है, मुझे जुनैद के साथ पार्लर जाना है। प्लीज मेरा बेटा। आखिर जुनैद हमारे काम के लिए ही तो नौकर है, अब हर काम के लिए मैं तुम्हें शॉप से नहीं बुला सकती मेरे प्यारे बेटा।

मम्मी मुझे अपनी काफी प्यारी-प्यारी बातों से मनाने लगती हैं।

मैं: ओहो मम्मी, अब रहने दो आप मुझे अपनी इन बातों से मत मनाओ?

मम्मी: बेटा, आज यह तुम्हारी मम्मी नहीं, यह एक सेक्सी सविता बनके आने वाली हैं। प्लीज बेटा, बोलो अब जुनैद आ रहा है ना?

मम्मी की यह सेक्सी सविता वाली बात सुन कर मेरा लंड खड़ा हो जाता है, मैं सोचा मम्मी कितनी भी सेक्सी बन जाए पर जाएगी जुनैद के नीचे ही चुदने। फिर भी मैं मम्मी की मीठी बातों से पिघल कर उन्हें हां बोल देता हूं।

जुनैद भी फौरन तैयार होकर शॉप से घर निकल जाता है। अब शॉप पर बैठा मैं यही सोच रहा था, मम्मी पहले जुनैद से चुदेगी या पार्लर जाएगी? या पार्लर से आकर चुदेगी? काफी देर तक ऐसे ही पता नहीं मेरे दिमाग में कैसी-कैसी बातें आ रही थी।

काफी काम होने से आज मैं घर के लिए लेट हो रहा था, जब मेरा काम खत्म हुआ तो मैं अपने घर निकल लिया। घर आकर देखा मम्मी अभी तक आई नहीं थी, फिर थोड़ी देर मैं फ्रेश होकर घर के हॉल में बैठ जाता हुं।

कुछ देर में घर का गेट खुलता है तो मैंने देखा, मम्मी जुनैद का हाथ पकड़े हुए हंसती हुई अंदर आ रही थी। मैं तो देख कर हैरान हो गया मम्मी आज जीन्स पहनी हुई थी, और ऊपर एक शॉर्ट टॉप जो बस उनके पेट तक ही आ रहा था। मां का फेस और बालों का स्टाइल पूरा बदला हुआ था। जब मम्मी की नज़र मुझ पर पड़ी तो, मम्मी ने तुरंत जुनैद से अपने हाथ अलग कर लिए। फिर शर्माते हुए मेरे पास आई तो मैं उनकी तारीफ़ करने लगा, मैंने मम्मी को गले लगाने के लिए अपने दोनों हाथ फैलाए तो,

मम्मी बोलीं: राहुल बेटा, अभी मैं बाहर से आई हूं! थोड़ा फ्रेश होकर आती हूं फिर हम आराम से बातें करते है।

मैं अपना मन मार कर रह गया, मम्मी आज इतनी खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी। फिर जब मम्मी अपने कमरे में जाने लगी तो, मैं उनकी जीन्स में उभरी हुई मटकती गांड को देखने लगा। क्या मस्त गांड लग रही थी मेरी मां की, उफ्फ मेरा लंड खड़ा हो रहा था। मैं अपने कमरे में गया और मां के नाम की मुठ मारने लगा।

मैं: उफ्फ सविता, तू अब पहले वाली मां नहीं रही, तू अब एक रंडी हो रही है, साली तुझे मुसल ने पागल कर दिया है। उफ्फ सविता आह आह।

मैं भी पता नहीं क्या-क्या सोच कर मूठ मारने लगा, जब मेरा झड़ गया तो मुझे कुछ राहत मिली। फिर अपने बेड पर लेटा रहा, कुछ देर बाद मम्मी ने खाने के लिए बुलाया। मैं हॉल में गया तो देखा मम्मी ने बाहर से खाना ऑर्डर करके मंगाया हुआ था। थोड़ी देर खाने के बाद फिर मैं अपने कमरे में चला गया, और बस अंडरवियर में लेट कर राहत की सांस लेने लगा।

आज पता नहीं मुझे नींद नहीं आ रही थी, मैं बेचैन सा होकर कभी इधर-उधर करवट बदल रहा था। कुछ रात के साढ़े 11 बज रहे थे, मैं कमरे से बाहर बाथरूम करके आया। सोचा नींद नहीं आ रही है, तो कुछ देर मम्मी के कमरे में जाकर उनसे ही कुछ देर बातें कर लूं। फिर मैं उनके कमरे की तरफ गया, कमरे का गेट पूरा खुला हुआ था और अंदर लाइट भी जल रही थी। मैं सोचा मम्मी अभी तक जग रही है?

मैं: यह तो अच्छा है, चलो कुछ देर बातें हो जाएगी।

फिर मैं जैसे ही कमरे के अंदर दो कदम गया, मेरी आंखें खुली रह गई, मेरा लंड अंडरवियर में तन के एक-दम टाइट हो गया था।

मां इतनी रात में एक बड़े शीशे के सामने खड़ी होकर, हेयर ड्रायर मशीन से अपने बालों को सुखा रही थी। मम्मी आईने के सामने खड़ी अपने बालों को धीरे-धीरे सुलझाते हुए गुनगुना रही थी। उन्होंने एक बेहद नाज़ुक, बेबी पिंक रंग का फूलों की कढ़ाई से सजा हुआ ब्रा-पैंटी सेट पहना था, जिसमें हल्के गुलाबी और सुनहरे धागों से बने छोटे-छोटे फूल उनके तन पर जैसे खिल रहे थे।

मम्मी की पैंटी बहुत ही ज़्यादा शॉर्ट थी, उनकी आधी गोरी और उभरी हुई गांड नंगी ही नज़र आ रही थी। मम्मी की नंगी, चिकनी थाई और गोरी टांगें, उफ़ मेरा ईमान ख़राब कर रही थी। मैंने शीशे में देखा, मम्मी की गोल चूचियां उनके छोटे साइज़ की ब्रा में कैद नहीं हो पा रही थी। आधे से भी ज़्यादा बाहर झाँक रही चूचियां ब्रा का हुक तोड़ने को तैयार हो रही थी।

मां के खुले बाल कंधों से नीचे तक लहराते हुए गिर रहे थे। बालों में हल्की वेव्स थी, और उनमें सुनहरी ब्राउन हाइलाइट्स। चेहरा शांत, आंखों में आत्मविश्वास और होंठों पर हल्की मुस्कान। जैसे वो खुद ही अपने इस लुक को महसूस कर रही हो। उनकी कमर पर चाँदी की पतली करधनी और पैरों में चाँदी की पायलें धीरे-धीरे हिलतीं तो उनमें एक बहुत हल्की, धीमी सी छन-छन होती। कमरे की उस ख़ामोशी में जैसे कोई मधुर राग छेड़ रहा हो। ये सब कुछ इतना अश्लील था कि देखने वाले को मां की चुदाई करने पर मजबूर कर दे। मम्मी को देखने के बाद मैं उल्टे पैर बाहर जाने लगा था, तभी मम्मी मुझे शीशे में से देख लेती हैं और बिना पीछे मुड़े-

मम्मी बोली: क्या हुआ राहुल बेटा, तुम अभी तक सोए नहीं?

मैं थोड़ा हड़बड़ा कर बोला: वो… वो मम्मी, मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो सोचा आपके साथ थोड़ी बातें कर लूं! पर आप इस हाल में हैं तो मैं बाद में आ जाता हूं?

मम्मी: ओहो, कोई बात नहीं बेटा, आ जाओ।

फिर मम्मी ने बगल में से एक कपड़ा उठा कर ब्रा-पैंटी के ऊपर पहना, जो एक सिल्की, हल्का पारदर्शी रोब था। वो उसी रंग और डिज़ाइन का था, बिलकुल मैचिंग। वो रोब उनके कंधों से ढलता हुआ, कमर पर हल्के से बँधा था। वो मम्मी के घुटनों तक ही था। उसकी पारदर्शिता से अंदर का सुंदर डिज़ाइन झलकता, मगर सलीके से ढका हुआ था। रोब के किनारों पर नाज़ुक लेस थी, और उसकी हल्की-सी झिलमिलाहट मां की त्वचा पर चाँदनी जैसी चमक छोड़ रही थी। मैं मम्मी को देखते हुए इतना खो गया था, मुझे होश जब आया जब-

मम्मी मेरे करीब आकर बोली: राहुल, कहाँ खो गए? अब ऐसे ही देखते रहोगे तो मुझे शर्म आने लगेगी!

मैं बड़ी धीमी आवाज़ में बोला: मम्मी, आप इतनी हॉट लग रही हो कि मेरी नज़र आपसे हट ही नहीं रही, आपका यह बालों का स्टाइलिंग आपको और भी सेक्सी बना रहा है। आप वो पहले वाली मां नहीं, एक मॉडल सविता लग रही हो!

फिर मैंने अपना एक हाथ उनके बालों में फेरा। एकदम सिल्की और मुलायम, उनमें से आती ख़ुशबू मुझे पागल कर रही थी। मैंने एक नज़र मम्मी के चेहरे पर डाली, क्या निखार था! उनकी चमचमाती नथ और भी प्यारी लग रही थी। मैं उनके माथे से अपना हाथ फेरते हुए, गालों से होते हुए उनकी झुमके जैसी नथ तक लाया और उसे प्यार से सहलाने लगा।

मम्मी मेरी आंखों में देख कर बड़े ही प्यार से बोली: राहुल, यह सविता तुम्हारे वजह से ही अपने आप को बदल पाई है, वरना तुम्हारे पापा होते तो मैं आज भी वहीं ओल्ड मॉडल मां होती।

मैं थोड़ा डरे हुए लहज़े में बोला: मम्मी, आपका यह बदलता रूप देख कर मुझे डर लग रहा है, कहीं आप मेरे से दूर… (मैं इतना बोल कर चुप हो जाता हूं)

मम्मी: राहुल, क्या किस बात का डर? बोलो, तुम मेरे से बोल सकते हो।

मैं: देख रहा हूं आप कुछ दिन से मेरे पास नहीं आतीं, ना ही वो पहले जैसा प्यार करती हैं? कहीं आप पापा की जगह किसी और को देकर मेरे से दूर ना हो जाएँ?

मम्मी तुरंत मुझे अपने गले से लगा कर बोली: राहुल, ऐसा नहीं होगा, मैं तुमसे कभी दूर नहीं जाऊँगी!

मम्मी की यह बात सुन कर मुझे ख़ुशी हुई कि, मेरी मां जुनैद से बस चुदाई का ही मज़ा ले रही थी। फिर मैंने मम्मी को थोड़ा और टाइट हग किया, जिससे उनकी मस्त चूचियां मेरे सीने से चिपक गई। उनके टाइट निप्पल मुझे अपने सीने में अच्छे से महसूस होने लगे, मेरा लंड भी तन कर खड़ा हो गया था।

मैं मम्मी की पीठ पर अपने हाथ फेरते हुए बोला: मम्मी, सच में आप पहले से बहुत हॉट हो गई हो।

मम्मी: थैंक्स बेटा, जैसा तुमने चाहा था, मैं वैसे ही मॉडल बन रही हूं। सच बताऊँ तो मुझे अब खुल कर जीने में मज़ा आ रहा है।‌ अब तुम्हारी वजह से मेरी सभी ख़्वाहिशें पूरी हो रही हैं।

अपनी तारीफ़ सुन कर मैं मम्मी के दोनों गाल चूम कर बोला: सविता को अपनी हर ख़्वाहिश पूरी करने का हक़ है। (मैं मम्मी के गले में अपना हाथ फेरता हूं, थोड़ा उनकी चूचियों के ऊपरी हिस्से पर भी अपनी उँगलियां फेरते हुए) आपका यह सुंदर रूप पर यह खाली गला अच्छा नहीं लग रहा, मैं आपको एक बेहतरीन और महंगा गिफ़्ट देना चाहता हूं। जिसे पहनने के बाद आप और भी हॉट लगेंगी।

मम्मी एक क़ातिलाना मुस्कान से बोली: वाह राहुल, तुम अपने पापा से भी अच्छा सोचते हो मेरे लिए, वैसे वो कीमती गिफ़्ट कब मिलेगा इस सविता को?

मैं अपने दोनों हाथों को मम्मी की कमर में डाल कर उन्हें अपने से और सटा कर उनके होठों के नज़दीक अपने होंठ ला कर बड़े ही प्यार भरे लहज़े में बोला: आपके बर्थडे पर, जो जल्दी ही आ रहा है।

मम्मी तुरंत लपक कर मेरे होठों को चूमते हुए ख़ुशी से बोली: ओ गॉड, मैं तो भूल ही गई थी। थैंक्स राहुल, तुम्हारी वजह से मुझे एक और ख़ुशी का दिन मिल गया। इस बर्थडे को मैं कुछ ख़ास और स्पेशल करूँगी, और मैं भी तुम्हें एक सरप्राइज़ दूँगी!

मैं बोला: वैसे सविता जी, मुझे क्या सरप्राइज़ देने वाली हैं?

मम्मी ने अपना एक हाथ मेरे सिर के पीछे रखा और एक मेरे नंगे सीने पर। अपने होठों को मेरे नज़दीक लाकर बोली: वो बाद में बताऊँगी।

इतना बोल कर मम्मी अपने होठों से मेरे होंठ लॉक कर देती हैं, (मम्मी के इस हमले से मैं अनजान था)। मैं भी उनके होंठ चूसते हुए सोचने लगा कि मम्मी मुझे क्या सरप्राइज़ दे सकती थी? वो क्या करने वाली थी, जो मेरे लिए सरप्राइज़ होगा? मैंने मन में सोचा, ख़ैर यह मैं बाद में सोच लूँगा, अभी इस पल का मज़ा लेता हूं। मैं मम्मी के लिप्स चूसते हुए सातवें आसमान पर पहुँच रहा था, आज उनका लिप्स चूसने का अंदाज़ कुछ ज़्यादा कामुक, जोशीला लग रहा था।

नीचे से मेरा लंड भी निक्कर में तन कर खड़ा हो रहा था। मैंने मां के उभरते चूतड़ों पर एक हाथ से थोड़ा दबाव बना कर उन्हें नीचे से भी अपने से सटा लिया। जिससे उनकी उभरती, फूली हुई चूत मेरे खड़े लंड से चिपक जाती है, मेरा लंड अब आराम से मां की चूत की मोटी फांकों में रगड़ खा रहा था।

उफ़, लंड चूत पर टच होते ही मां को भी परम आनंद प्राप्त हो रहा था, जो वो मेरे होठों को चूस कर मुझे बता रही थी। सच में दोस्तों, मुझे ऐसा मज़ा आ रहा था, मैं उसे अभी शब्दों में आप लोगों को नहीं बता पा रहा हूं। जो भी अपनी बीवी या अपने पार्टनर के साथ इस पल को कर चुका है, बस वो ही मेरी फ़ीलिंग्स को समझ सकता है। आगे-

मैंने मम्मी की बंद पड़ी हुई आंखों को देखा, वो बड़े सुकून से मेरे अंदर अपनी जीभ डालकर उसे मेरी जीभ से लड़ा रही थी। उनका यह रूप देख कर मेरी हिम्मत कुछ बढ़ जाती है। मैं अपने हाथों को उनकी उभरी हुई मुलायम गांड पर लाता हूं। फिर अपने दोनों हाथों को हल्के-हल्के गांड के ऊपर फेरता हूं, उसकी गांड की बीच की फाँकों में अपनी एक उँगली फेरता हूं तो कभी दूसरे हाथ से पैंटी से बाहर निकली हुई नंगी गांड को हल्का दबा देता हूं।

मेरी मां मेरी इस हरकत का कोई विरोध नहीं कर रही थी, तो मेरी हिम्मत और बढ़ रही थी। मैं मम्मी की जीभ को चूसते हुए कामुक हुआ जा रहा था, साथ में मेरा लंड भी मम्मी की चूत में रगड़ खाते हुए मुझे और जोश दिला रहा था। मम्मी अपना एक हाथ मेरी नंगी पीठ पर फेर रही थी, और अपना एक हाथ मेरे गले में डाले हुए मेरे होठों और जीभ को मस्त चूस रही थी।

आज काफ़ी दिनों बाद मुझे मम्मी का इस तरह प्यार मिल रहा था। मैंने भी इसका पूरा फ़ायदा उठाने की सोची, अपने हाथों को मम्मी के बदन पर फेरने लगा था। मैं मम्मी की मस्त चर्बीदार गांड को अपने हाथों से दबाने लगता हूं, तो मम्मी मेरे होठों से अपने होंठ अलग करके मेरी आंखों में देखने लगती हैं। मां की कामुक आंखें देख कर पता नहीं मुझे क्या हो जाता है, मैं अचानक मम्मी की नथ पर टूट पड़ता हूं। मां की नथ को चूमते हुए उनके गाल काटने लगता हूं।

मां आह उफ़ करते हुए: राहुल आह बस करो उफ़।

मैं उनकी बिना सुने उनके होंठ फिर अपने होठों से बंद कर देता हूं, और अपने एक हाथ से मां के एक चूतड़ को अपनी पूरी मुट्ठी में भींच लेता हूं। मां मेरे इस हमले से अनजान थी, वो एक-दम से चौंक जाती हैं, और वो मेरे निचले लिप्स को अपने दाँतों से काट लेती हैं। हम दोनों के होंठ अलग हो जाते हैं। मम्मी घूमकर मेरी तरफ़ अपनी पीठ कर लेती हैं। मैं फिर भी मम्मी के पीछे से लिपट जाता हूं, अपने दोनों हाथों को मां के पेट पर लपेट लेता हूं ताकि मां मेरे से दूर ना जाए। अब मेरा टाइट लंड मां की गांड में चुंबन कर रहा था, जिससे मम्मी कसमसाने लगी थी। मैं मां की गर्दन और कान के आस-पास चूम रहा था।

मम्मी ने धीमी, कामुक भरी आवाज़ में कहा: आह राहुल, हटो भी, क्या हो गया तुम्हें?

मैंने हकलाते हुए कहा: मुझे… मुझे इस सविता से प्यार हो गया है, यह सविता बहुत ही सेक्सी और हॉट है।

मम्मी मेरी तरफ़ गर्दन घुमा कर कुछ बोलने वाली थी, तभी मैंने अपने होठों से उनके लिप्स बंद कर दिए। मम्मी मेरे से अब छटपटा रही थी। मैं अपना हाथ उनके पेट पर फेरते हुए पैंटी तक ले गया। मैं पैंटी की इलास्टिक के साथ कुछ देर खेलते हुए अपनी उँगलियां पैंटी के अंदर डालने लगा।

मेरी उँगलियां मां की चुभती झाँटों तक पहुँच गई थी। मैं कुछ देर उधर ही उँगलियों को चलाने लगा। फिर मैंने थोड़ा और अंदर अपना हाथ किया तो, मम्मी ने तुरंत अपने हाथ को मेरे हाथ के साथ पैंटी में डाल दिया। मेरी उँगलियों ने जैसा ही चूत के दाने को हल्का सा छुआ तभी मां ने मेरा हाथ बाहर खींच लिया।

मम्मी अपने होठों को मेरे से अलग करते हुए मेरी तरफ़ घूम कर बोली: राहुल, यह ज़्यादा नहीं हो गया! मैं सविता के साथ मां भी हूं तुम्हारी। बेटा, हमारे प्यार करने की कुछ मर्यादा है।

मेरा जोश और होश मम्मी की इस बात से पूरा जैसे उतर सा गया था। मैं मम्मी के सामने अपना मुँह लटकाए खड़ा था। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूँ, मुझे अपनी गलती नज़र आ रही थी। मैं चुप-चाप खड़ा उनसे नज़रें नहीं मिला पा रहा था।

मम्मी मेरे क़रीब आई और मेरे चेहरे को ऊपर उठा कर मेरी आंखों में देखते हुए बोली: राहुल बेटा, तुम अब जवान हो रहे हो, मैं तुम्हारी भावनाओं को समझ सकती हूं। इस उम्र में लड़के अक्सर बहक जाते है। अब यूँ मुँह लटका कर खड़े मत रहो, मैं तुम्हें कोई डाँट नहीं रही हूं।

मम्मी की इस बात से मेरे अंदर थोड़ी हिम्मत आई और मैंने तुरंत मम्मी को अपने गले लगाते हुए कहा: सॉरी मम्मी, पता नहीं मुझे क्या हो गया था, मैं आपका ऐसा हॉट रूप देख कर आपके प्रति बहक सा गया था।

मम्मी थोड़े ख़ुशी के मिज़ाज में बोली: राहुल, मैं समझ सकती हूं, तुमने कुछ ग़लत नहीं किया। वैसे अब तुम बड़े हो रहे हो, तुम्हें अब अपने लिए कोई गर्लफ्रेंड ढूँढ लेनी चाहिए।

मैं: क्या मम्मी, आप भी ना, मैं अभी इतना भी बड़ा नहीं हुआ हूं, जो अपने लिए गर्लफ्रेंड ढूँढ लूँ।

मम्मी थोड़े मज़ाकिया तरीक़े से बोली: हाँ, वो तो मैंने देख ही लिया तुम कहाँ से कहाँ तक बड़े हो गए हो। ख़ैर, अब काफ़ी रात हो गई है हमें अब सोना चाहिए।

मैं मम्मी को फिर से अपनी बाँहों में भर कर उनके गालों को चूमते हुए मैंने कहा: मम्मी, मुझे सविता जैसी मिली तो ही किसी को गर्लफ्रेंड बनाऊँगा, वरना मैं अपनी प्यारी मम्मा को ही प्यार करूँगा?

मम्मी अपने कोमल हाथों से मेरे गालों को नोचते हुए बोली: सविता भी तुम्हें बस मम्मा वाला ही प्यार देगी बुद्धू, अब जाकर सो जाओ।

मैं: बिना गुड नाइट किस्स के मैं नहीं सोने वाला।

मम्मी: तुम मानोगे नहीं? (मम्मी मेरे लिप्स पर लिप्स रख कर एक किस्स करती हैं)।

तभी कमरे में अचानक जुनैद लुँगी में दाख़िल हो जाता है। वो हमें ऐसा देख उल्टे पैर जाने लगा था। मैं उसे इतनी रात में मां के कमरे में आया देख ग़ुस्से में बोल पड़ता हूं-

मैं: जुनैद, तुम्हें तमीज़ नहीं है? तुम इतनी रात में मम्मी के कमरे में आ रहे हो, वो भी बिना गेट नॉक किए?

मम्मी मेरा चेहरा अपनी तरफ़ करके बड़े प्यार से बोली: बेटा, जुनैद किसी काम से ही आया होगा, उसे इतना ग़ुस्सा क्यों कर रहे हो। मैं बात कर लेती हूं। जुनैद, क्या हुआ तुम्हें कुछ काम था?

जुनैद मम्मी की तरफ़ देख कर बोला: मैडम, मैं तो बस आपको कॉफ़ी के लिए पूछने आया था?

मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा: जुनैद जी, अभी मेरा मूड नहीं है, ज़रूरत होगी तो मैं तुम्हें बुला लूँगी, अभी तुम जाओ।

उसके जाने के बाद मैं मम्मी से कहा: आप रात में कॉफ़ी पीती हो?

मम्मी: हाँ, कभी-कभी मुझे नींद नहीं आती तो पी लेती हूं। राहुल, पर तुम्हें जुनैद पर इस तरह ग़ुस्सा नहीं करना चाहिए था।

मैं: मम्मी पर उसका इस तरह कमरे में आना मुझे ठीक नहीं लगा, आप इस तरह कम कपड़ों में थी उसका आपके सामने आना ग़लत था।

मम्मी: राहुल बेटा, जुनैद मेरे ऑर्डर पर ही आता है, उसे अब पता है। मुझे कब किस चीज़ की ज़रूरत है, वो उसको पूरी करता है। आज जुनैद ने जैसा मेरा ख़याल रखा, वैसे तो कभी, ख़ैर राहुल, अब तुम्हें सोना चाहिए।

मैं: मम्मी, आप कुछ बोलने वाली थी? रुक गई।

मम्मी: बेटा, मेरा मतलब यही था कि जुनैद मेरा ख़याल रखता है, वैसे तो मैं भी अपना नहीं रख पाती आज जिस सदमे से गुज़री हूं। राहुल, बस अब तुम्हें जाकर सो जाना चाहिए। गुड बाय।

फिर मैं मम्मी के कमरे से अपने कमरे में आ जाता हूं। मम्मी के साथ बिताए पल को वो याद कर मैं मुठ मार कर एक चैन की नींद लेकर सो जाता हूं।

अगले दिन, जब मैं सो कर उठा और बॉथरूम जाने लगा, तभी मैंने देखा जुनैद मम्मी के कमरे से बाहर निकल रहा था। उसकी हालत देख कर लग रहा था जैसे वो अभी सोकर उठा हो, उसने अपनी लुंगी भी ठीक से नहीं पहनी हुई थी। जुनैद को देख मेरा माथा ठनक गया। यह साला ज़रूर पूरी रात मेरी मां को चोद रहा था। मेरे गर्म किए हुए लोहे पर जुनैद ने अपना हथौड़ा चला दिया था।

कल जिस तरह मैंने मम्मी को चूसा, मुझे उम्मीद थी कि वह गर्म हो गई थी। मम्मी ने मुझे बेटा बोल कर दूर कर दिया और जुनैद से अपनी आग शांत करवा ली थी। अब मेरा माथा और ठनक रहा था जुनैद को लेकर। मैं मन में सोचने लगा, इस नौकर का कुछ करना पड़ेगा। बॉथरूम से आने के बाद मैंने नाश्ता किया, फिर तैयार होकर अपनी शॉप पर निकल गया।

शॉप पर मैं पूरा दिन यही सोचने लगा कि मम्मी को क्या गिफ्ट दूं? फिर मैंने एक सबसे अच्छा और बेहतरीन हार पसंद किया मम्मी के लिए। यह काफी महंगा था और इसमें डायमंड लगे हुए थे, पर अब मेरी यह ज़िद थी कि मुझे मां के दिल से जुनैद को निकाल कर अपने लिए जगह बनानी है। मैंने फ़ौरन उस हार के लिए ऑर्डर दिया, जिसे तैयार होने में कुछ दिन लगने वाले थे।

आगे दो दिन बाद, रात को मैं अपने कमरे में लेटा हुआ लंड मसल रहा था, तभी अचानक मम्मी कमरे में आ जाती है। जब तक मैं अपने लंड को चादर से ढकता, मम्मी की नज़र पड़ चुकी थी।

मैं थोड़ा घबराया हुआ मम्मी से कहा: आप… क्या हुआ मम्मी? कुछ काम था मेरे से?

मम्मी गेट से ही मुस्कुराते हुए बोली: राहुल, मुझे कुछ बात करनी थी। अगर तुम कहो तो मैं बाद में आ जाती हूँ?

मम्मी उस समय एक रेड नाइटी पहने हुई थी, जो उनके बदन से काफी चिपकी हुई थी। नाइटी काफी शॉर्ट और नेट वाली थी। उनके बूब्स के पास काफी नेट वाला कपड़ा लगा हुआ था, जिससे उनके बिना ब्रा के बूब्स आराम से चमक रहे थे। आगे-

मैं अब अपने आप को ढक चुका था तो मैंने कहा: मम्मी आप आ सकती हो, बोलो क्या बात है?

मम्मी मेरे करीब आकर बेड पर बैठ कर बोली: राहुल, मैं इस बार अपना बर्थडे कहीं बाहर मनाना चाहती हूँ। जैसे किसी अच्छी जगह, मनाली या शिमला? मेरा काफी दिनों से मन था ऐसी जगहों पर घूमने का, अब मेरे पास अच्छा मौका है। मैं अपनी खास जिंदगी को वहाँ खुल कर एन्जॉय करना चाहती हूँ। क्या तुम तैयार हो?

मैं: मम्मी, यह तो अच्छा आईडिया है, पर कुछ ही दिन बचे हैं बर्थडे को। हमें पहले सोचना चाहिए था। अब इतना जल्दी सब कैसे मैनेज होगा? मतलब रहने के लिए होटल, जाने के लिए ट्रेन?

मम्मी मुस्कुराते हुए बोली: बेटा, वो सब मैनेज हो जाएगा, बस तुम हाँ बोलो?

मैं: ठीक है, मैं तैयार हूँ। पर कैसे मैनेज होगा?

मम्मी खुशी से मेरे गले लगी, और मेरे गालों पर किस्स करते हुए कहा: कल सुबह बता दूँगी।(मेरे होंठों पर एक लंबा किस्स देकर) गुड नाइट बेटा।

मैंने भी गुड नाइट कहा। फिर मम्मी जाने लगीं, गेट पर एक-दम से रुक कर बोली: बेटा, वो सब जो तुम कुछ कर रहे थे, हेल्थ के लिए ठीक नहीं है!

इतना बोल कर मम्मी कमरे से बाहर चली जाती है। उनके जाने के बाद मैं सोचा कि मां ने ज़रूर मेरा लंड देखा होगा। शायद वो मेरे मुठ मारने पर बोल रही थी। उस रात मैं फिर मुठ मार कर सो गया। सुबह मैं लेट उठा और फ्रेश होकर हॉल में आया तो देखा, मम्मी जुनैद के साथ सोफे पर बैठ कर नाश्ता कर रही थी। दोनों मुझे गुड मॉर्निंग करते हैं।

मम्मी ने आज अलग ही ड्रेस पहनी हुई थी, जो हल्के गुलाबी-बैंगनी (लैवेंडर) रंग की बेहद सेंसुअस और स्टाइलिश स्पेगेटी स्ट्रैप मिनी ड्रेस थी। ड्रेस की डीप वी-नेकलाइन थी, जिससे मम्मी के बूब्स के बीच की लाइन पूरी नंगी नज़र आ रही थी। यह ड्रेस का लुक मम्मी को और बोल्ड और आकर्षक बना रहा था। मम्मी की ड्रेस की लंबाई जांघों से ऊपर तक थी, कुछ स्कर्ट टिप नीचे से फैला हुआ था। मां की नर्म और चिकनी थाई, नंगी टाँगें पूरी नज़र आ रही थी।

मम्मी के चेहरे पर काफी खुशी झलक रही थी। मम्मी जुनैद के साथ इस तरह हाथों पर हाथ रख कर बैठी हुई थी, जैसे वो घर का नौकर नहीं, बल्कि मालिक या कहूँ सविता का पति हो। दोनों को देख कर ऐसा ही लग रहा था।

मैं उनके सामने वाले सोफे पर बैठ जाता हूँ। मम्मी मेरे लिए नाश्ता लाकर फिर जुनैद के साथ बैठ कर मेरी तरफ देखती हैं।

मम्मी मुस्कुराती हुई बोलीं: बेटा, वो कल मैंने तुम्हें ट्रिप पर जाने वाली बात बोली थी ना, उसका इंतजाम हो गया।

मैं: मम्मी, यह तो अच्छी बात है, कैसे हुआ?

मम्मी जुनैद की तरफ देख कर बोलीं: सब जुनैद जी ने किया है। तुम्हें याद है जुनैद जी ने हमें अपने एक दोस्त से मिलवाया था होटल में? उनका मनाली में अपना एक रिसॉर्ट है।

मैं: हाँ, शायद वो आरिफ। उनके रिसॉर्ट पर हम लोग जाने वाले हैं? उसके रिसॉर्ट का खर्चा ज़्यादा तो नहीं है? मतलब बर्थडे मैनेजमेंट का खर्चा पता किया? (यह बात मैंने जान-बूझ कर बोली)

मम्मी: बेटा, आरिफ जी जुनैद जी के इतने अच्छे दोस्त हैं, उन्होंने मुझे खास इनविटेशन दिया है रिसॉर्ट पर आने के लिए। वहाँ हम आराम से 10 दिन गुज़ार सकते हैं। वो जुनैद जी के इतने खास हैं कि वो खर्चे जैसी कोई बात नहीं करेंगे। राहुल, तुम तैयार हो ना?

मम्मी की बात अब मुझे समझ आ रही थी, वो बर्थडे के नाम पर अपनी सुहागरात मनाना चाहती थी। इस आरिफ का रिसॉर्ट पर मम्मी को इनवाइट करना कुछ ठीक नहीं लग रहा। खैर, इसका पता मुझे लगाना पड़ेगा।

मैं काफी सोचने के बाद बोला: हाँ, बिलकुल मैं तैयार हूँ।

मम्मी मेरी हाँ से खुश होते हुए जुनैद का एक हाथ अपने दोनों हाथों के बीच लेकर मुस्कुराते हुए बोली: थैंक्स जुनैद जी, तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया। आज हम जल्दी से जाने के लिए शॉपिंग कर लेते हैं। राहुल बेटा, तुम और जुनैद जी आज शॉप पर नहीं जाओगे।

मैं: मम्मी, आज जुनैद को मेरा एक ऑर्डर लेने जाना है, जो आपके लिए ही खास तोहफा है। क्यों ना आप कल जुनैद के साथ शॉपिंग चली जाएं?

मम्मी खुश होते हुए: फिर तो कल मैं पूरा दिन जुनैद जी से काफी मेहनत करवाने वाली हूँ।

फिर काफी बात करने के बाद मैं जुनैद को मम्मी का हार लाने के लिए भेज देता हूँ। शाम को हार लाने के बाद जब जुनैद ने देखा तो उसकी आँखें चौंक गई थी।

मैं बोला: जुनैद, यह हार डायमंड से बना है, काफी महंगा है। यह मैं मम्मी को देने वाला हूँ। तुम बताओ यह कैसा लगेगा उन पर?

जुनैद: यह तो काफी महंगा है। सविता मैडम पर बहुत ही सुंदर लगेगा जब वो बर्थडे पर पहनेंगी!

फिर मैंने जुनैद को मम्मी से अभी हार के बारे में बताने को मना किया, उसके बाद हम लोग रात को घर आए। मैं रात का खाना खाकर जल्दी सो जाता हूँ। अगले दिन सुबह मम्मी मुझे अपनी गुड मॉर्निंग किस से जगाती हैं। वह आज रोज़ के मुकाबले काफी खुश लग रही थी, और उनका बदन भी सोने की तरह निखर रहा था। फ्रेश होने के बाद मैं नाश्ता करके तैयार होकर हॉल में आया।

मम्मी जुनैद के साथ सोफे पर बैठी हुई थी। मुझे तैयार हुए देखकर बोली: राहुल, तुम भी चलो ना हमारे साथ शॉपिंग करने!

मैं: मम्मी, आप मेरे लिए भी शॉपिंग कर लेना। मुझे शॉप पर बहुत काम है, जुनैद आपके साथ हेल्प करेगा।

फिर शाम को शॉप से मैं आया तो देखा मम्मी काफी चमक रही थी। उनकी चिकनी टाँगें और थाई देख कर लग रहा था जैसे मम्मी ने अपनी पूरी बॉडी वैक्स कराई हो। वो काफी कुछ शॉपिंग करके आई थी, मैंने दिखाने को बोला तो मम्मी ने मुझे ट्रिप पर देखने को मिलेगा बोला।

अगली सुबह, मैं नाश्ते के लिए हॉल में आया तो देखा मम्मी जुनैद के कंधे पर अपना सिर रखे सोफे पर बैठी हुई थी। मुझे देख कर मम्मी अपने आप को ठीक करती हैं।

फिर मम्मी मेरी तरफ थोड़ी दुखी अंदाज़ में बोली: बेटा, वो आज मेरी कविता दीदी से बात हुई थी, वो भी इस ट्रिप पर जाने के लिए बोल रही थी। तुम क्या कहते हो?

मैं बोला: मम्मी, यह तो अच्छी बात है, मौसी हमारे साथ ट्रिप पर चलेंगी तो और अच्छा लगेगा।

जुनैद: मैं भी यही सविता जी को समझा रहा था, उनके होने से अच्छा ही लगने वाला है।

मम्मी जुनैद की तरफ देख कर बोली: जुनैद जी, आपको पता है ना, वो मेरे से बड़ी हैं। मैं उनके सामने कैसे वो सब एन्जॉय करूँगी?

मुझे पता था मम्मी जुनैद से क्या एन्जॉय करने की बोल रही थी। मौसी के सामने उन्हें अपनी सुहागरात मनाने में शर्म जो आ रही होगी।

मैं उनकी बात को ना समझते हुए कहा: क्या मम्मी, बर्थडे ही तो है, उनके होने से क्या दिक्कत है?

मम्मी थोड़ा मुँह फुलाते हुए कहीं: ठीक है राहुल, आप लोगों को अच्छा लगता है, तो मैं उन्हें इनवाइट कर देती हूँ।

मैं: मम्मी, मौसी से बोलना मौसा के साथ जल्दी ही आ जाए, बस चार दिन ही बचे हैं ट्रिप पर जाने के लिए।

मम्मी मुस्कुराते हुए: बेटा, वो अकेले ही आने की बोली थी।

जुनैद: फिर तो मुझे ही उनका ख़याल रखना पड़ेगा?

मम्मी जुनैद को चिढ़ाते हुए: हाँ जुनैद जी, मेरे से आपको मौका मिलेगा तब! (मम्मी थोड़ा हँस देती हैं)

मैं: ठीक है, अब बातें हो गई हों तो जुनैद, हम शॉप पर चलें? काम भी करना है।

जुनैद मम्मी की तरफ देखते हुए बोला: हाँ क्यों नहीं, आज घर पर मेरे लिए कोई काम भी नहीं है, क्यों मैडम!

मम्मी जुनैद की आँखों में देखते हुए उसे सताने के अंदाज़ में बोलीं: जुनैद जी, अब तो सब तैयार हो चुका है, ट्रिप से पहले अब मैं आपको कोई काम नहीं दूँगी! मेरे बर्थडे वाले दिन आपको मैं काम दूँगी, वो मन लगा कर करना होगा।

जुनैद के साथ मैं भी समझ जाता हूँ कि मम्मी अब उसे चुदाई का मौका बस सुहागरात पर ही देंगी। इस बात पर मुझे मां पर गुस्सा आ रहा था। खैर, मैं अभी कुछ नहीं कर सकता था। फिर जुनैद अपना मुँह लटकाकर मेरे साथ शॉप पर आ जाता है। फिर चार दिन हमारे ऐसे ही निकल जाते हैं।

जिस दिन हम ट्रिप पर जाने वाले थे, उसी सुबह मौसी घर आ जाती हैं। मैं तो उन्हें देखता ही रह जाता हूँ। मौसी ने टॉप और लॉन्ग स्कर्ट पहनी हुई थी। मौसी ने एक सफ़ेद रंग का वी-नेक टॉप पहना हुआ था, उसका वी-नेक गला इतना खुला हुआ था कि उनकी चूचियों की क्लीवेज पूरी नज़र आ रही थी। और मौसी ने नीचे एक लंबी, प्रिंटेड स्कर्ट पहनी हुई थी, जिसमें लाल और बैंगनी रंग के पैटर्न थे। यह स्कर्ट टखनों तक लंबी थी और इसमें नीचे की तरफ़ रफल्स भी लगी हुई थी। मौसी इस स्टाइलिश ड्रेस में काफी हॉट लग रही थी।

मौसी मां से भी ज़्यादा हॉट और सेक्सी लग रही थी। मौसी को देख कर मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया था। साली के उभरे हुए चूतड़ कमाल के लग रहे थे। मौसी पहले मम्मी को अपने गले लगाती हैं, फिर मुझे। जब मेरे गले लगती हैं, उनके भरे-भरे बूब्स मेरे सीने में जैसे आग सी लगा देते हैं।

मौसी मेरे गालों को चूमते हुए बोली: राहुल बेटा, तुमने अपने पापा से भी बढ़ कर सविता को ख़ुशी दी है। आज तुम्हारी वजह से ही हमारा ऐसा ख़ुशी से मिलना हो पा रहा है।

मैं बोला: मौसी, मम्मी की ख़ुशी के लिए यह सब करना तो मेरा फ़र्ज़ है।

फिर हम सभी साथ में बैठ कर खाना खाते हैं। खाने के समय मम्मी ने मौसी से फिटनेस का राज़ पूछा तो मौसी ने कहा: मैं कुछ महीने से जिम कर रही थी।

फिर खाने के बाद हम लोग मनाली के लिए निकल जाते हैं। रास्ते में जुनैद ने बताया कि उसका दोस्त आरिफ हमें रिसॉर्ट पर ही मिलने वाला था।

मैं अपने सभी पाठकों से माफ़ी चाहता हूँ, कि यह कहानी आप तक देर से पहुँची। कुछ निजी कामों की वजह से मैं समय नहीं निकाल पाया। जिन पाठकों ने मुझे ई-मेल किए, उनसे कहना है कि अब अपना लंड कस कर थाम लो, क्योंकि मेरी यह कहानी तुम्हारा पानी ज़रूर निकाल देगी। अब आगे–

कई घंटों के लंबे सफ़र के बाद आख़िरकार रात के 8 बजे हम लोग रिसॉर्ट पहुँच गए। रिसॉर्ट पर आरिफ का एक आदमी हमारा गर्मजोशी से स्वागत करता है। उसने सभी को उनके-अपने कमरे दिखाए और हमारे लिए खाने का इंतज़ाम करवाया।

पहाड़ों की ठंडी हवाओं से सब का बदन काँप रहा था। चारों तरफ़ हरियाली और ऊँचे-ऊँचे पहाड़ थे। रात में इनकी ऊँचाई ठीक से देख पाना मुश्किल था। थकान भरे सफ़र के बाद हम सब ने गर्म पानी से नहाया, फिर गर्म कपड़े पहन कर डिनर किया।

डिनर के बाद थोड़ी देर होटल के बग़ीचे में बैठ कर बातें की, और फिर सब अपने-अपने कमरों में सोने चले गए। मेरा कमरा मम्मी के कमरे के बिल्कुल बगल में था।

सुबह जब मैं सोकर उठा और तैयार होकर मम्मी के कमरे में गया, तो देखा कि मुझसे पहले ही मौसी और जुनैद वहाँ बैठे थे।

मेरी नज़र जैसे ही मम्मी पर पड़ी, दिल थम-सा गया। उन्होंने पीले रंग की मिडी-लेंथ स्लिप ड्रेस पहन रखी थी, जो घुटनों से ज़रा नीचे तक आ रही थी। पतली स्ट्रैप्स वाली उस ड्रेस में मम्मी का फिगर और भी ज़्यादा सेक्सी लग रहा था। ड्रेस कमर से टाइट होकर उनकी बॉडी को उभार रही थी और नीचे से फ्रॉक-स्टाइल फैल रही थी।

मैं मम्मी को देखते ही बोला: हैप्पी बर्थडे, मेरी प्यारी सविता मम्मा।

मम्मी मुस्करा कर अपनी दोनों बाहें फैलाते हुए मुझे गले से लगाई और बोली: थैंक्यू, मेरे बेटे।

फिर मेरे होंठों पर एक छोटा सा किस्स रख कर बोली: इतना लेट क्यों कर दिया विश करने में?

मैंने मुस्करा कर कहा: अच्छा! तो सबसे पहले किसने बोला?

मम्मी ने हँसते हुए जुनैद की तरफ़ देखा और बोली: जुनैद जी ने सबसे पहले विश किया… वो हमेशा फास्ट रहते हैं।

मौसी खिलखिला कर बोली: हाँ, जुनैद को फास्ट तो होना ही पड़ेगा, आखिर वो मेरी छोटी बहन का इतना ख़ास जो हो गया है।

जुनैद तुरंत बात काटते हुए बोला: अब हमें नाश्ते के लिए चलना चाहिए। आरिफ भी आने ही वाला होगा।

हम सब बाहर बग़ीचे में गए, जहाँ से पूरा खुला आसमान नज़र आ रहा था। पहाड़ों के बीच बना वह होटल वाक़ई शानदार था। चारों तरफ़ घना जंगल और ऊँचे-ऊँचे पहाड़। यह नज़ारा देखने लायक था। काफ़ी देर बाद आरिफ आया, सफ़ेद पठानी कुर्ता-पजामा पहने, सर पर सफ़ेद टोपी लगाए, और गले में चमचमाती चाँदी की तसब्बुह लटकाए। वह शान से हमारी ओर बढ़ा।

मैंने नोटिस किया कि आरिफ को देखते ही मौसी और मम्मी के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई थी। दोनों उसे इस तरह घूर रही थी जैसे कोई स्टार सामने आ गया हो। आरिफ सीधे मम्मी के करीब आया और हल्की मुस्कान के साथ उन्हें बर्थडे विश किया।

मम्मी उसकी आँखों में देखते हुए बोली: थैंक्यू आरिफ जी। आपने मुझे इस रिसॉर्ट पर बुला कर मेरा बर्थडे और भी स्पेशल बना दिया।

आरिफ ने नज़रों में वही शरारत भर कर जवाब दिया: ओह सविता जी, थैंक्स तो मुझे कहना चाहिए कि आप मेरे कहने पर यहाँ आईं।

मम्मी हल्की कातिल मुस्कान देते हुए बोली: आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं, आपको थैंक्स नहीं बोलना चाहिए।

तभी आरिफ ने अपनी बाहें फैलाते हुए कहा: तो क्यों ना दोनों का शुक्रिया एक प्यारे से हग में बदल जाए?

मम्मी उसकी आँखों में झिझक के साथ देखती हैं। थोड़ी नर्वस होकर, हम सब की तरफ़ नज़र दौड़ाने के बाद, आखिरकार वो धीरे-धीरे उसके गले लग जाती हैं। बस एक छोटा-सा हग फिर तुरंत दूर हो जाती हैं।

आरिफ मुस्कराते हुए बोला: आज की रात आपके लिए बहुत हसीन होने वाली है।

मम्मी हल्की-सी शर्माते हुए अलग हो गईं। फिर आरिफ ने मौसी से भी गले मिलना चाहा। लेकिन मौसी तो जैसे इसी पल का इंतज़ार कर रही थी। उनकी बाहें ऐसे फैल गईं, जैसे किसी पुराने प्रेमी को अपनी बाहों में भर रही हों।

उसके बाद हम सबने नाश्ता किया और बर्फ़ीली वादियों में घूमने निकल पड़े। उधर मौसी, आरिफ के साथ हाथों में हाथ डाले बाक़ियों से दूर घूम रही थी। मैंने गौर किया कि दोनों में एक अलग ही नज़दीक़ी नज़र आ रही थी।

वहीं, दूसरी तरफ जुनैद मम्मी के साथ अकेले घूम रहा था। मैंने साफ़ देखा कि जुनैद मम्मी को कोई गिफ़्ट दे रहा था। दूर से मुझे गिफ़्ट समझ नहीं आया, लेकिन मम्मी के चेहरे की खुशी देख कर साफ़ लग रहा था कि वो चीज़ उनके दिल को छू गई थी।

आधा दिन यूँ ही बीत गया। होटल लौट कर सबने थोड़ा आराम किया। शाम ढली तो देखा कि आरिफ बगीचे में बर्थडे की सजावट करवा रहा था। मैं मम्मी को ढूँढने उनके कमरे की ओर गया, तो वहाँ भी कुछ लोग फूल और गुब्बारे लगा रहे थे। मैं बेचैन-सा उन्हें ढूँढ रहा था कि तभी मौसी मिली।

मौसी मुस्कराकर बोली: क्या हुआ राहुल? ऐसे इधर-उधर क्यों भटक रहे हो?

मैंने कहा: कुछ नहीं मौसी, बस मम्मी कहीं नज़र नहीं आ रहीं आप जानती हैं वो कहाँ हैं?

मौसी हल्की मज़ाकिया हँसी हँसते हुए बोली: राहुल, वो अब तुम्हें रात में ही दिखेंगी। अभी तो सविता अपने बर्थडे के लिए ख़ास तैयार हो रही हैं। घबराओ मत, वो यहीं होटल में हैं। आज रात पार्लर वाली उन्हें एक-दम ख़ास अंदाज़ में तैयार कर रही है।

मैं थोड़ा चौंक कर बोला: बर्थडे के लिए इतना ख़ास तैयार होना?

मौसी ने आँख दबा कर कहा: राहुल, अभी तुम नहीं समझोगे। आज रात सविता अपनी जवानी को फिर से ताज़ा करना चाहती हैं। तुम खुद देख लेना। अब तुम भी जाकर तैयारी करो… रात में मिलते हैं।

ये कह कर मौसी अपने कमरे की ओर बढ़ गईं। मैं अपने कमरे में बैठा ही था कि अचानक मेरे फोन पर मैसेज आया।
स्क्रीन खोली तो मैसेज मम्मी का था-

मम्मी: राहुल, आज वो खूबसूरत गिफ़्ट देने का समय आ गया है, जो तुम अपनी सविता को खास देना चाहते थे। बीस मिनट बाद मेरे ऊपर वाले कमरे में आ जाना… मैं तुम्हारा इंतज़ार बेसब्री से कर रही हूँ।

मेरे दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। मैसेज पढ़ते ही मैं तड़प उठा। किसी तरह बीस मिनट गुज़ारे फिर हाथों में वो डायमंड वाला गिफ़्ट लेकर मम्मी के कमरे की ओर निकल पड़ा। ऊपर मुझे कोई भी नहीं दिख रहा था। शायद यह रूम ख़ास सजाने के लिए ही बनाया गया था।

मैंने दरवाज़े पर हल्की-सी नॉक की तो अंदर से मम्मी की आवाज़ आई: गेट खुला है, आ जाओ।

मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला और हल्के क़दमों से अंदर चला गया। सामने देखा तो मम्मी बड़े से मिरर के सामने खड़ी होकर खुद को निहार रही थी। मेरे आने की आहट पाकर वो पीछे मुड़ी, और हमारी नज़रें टकराईं। मैं वहीं ठहर गया बस उन्हें देखता रह गया।

मम्मी ने लाल रंग का भारी घेरदार लहंगा पहन रखा था, जो ज़मीन तक लिपटा हुआ था। उस पर की गई बारीक कढ़ाई और मोतियों का काम उन्हें और भी रॉयल बना रहा था।

ऊपर लाल रंग की कॉर्सेट-स्टाइल चोली, जो बस बूब्स के नीचे तक थी। चोली एक-दम टाइट, डीप वी-नेकलाइन वाली, जिससे उनकी कसी हुई, भरे-भरे बूब्स की क्लीवेज साफ़ झलक रही थी। नंगा कमर-पेट और नाभि पर चमकती चांदी की करधनी उनके जलवे को और भी खतरनाक बना रही थी। हाथों में मैचिंग चूड़ियों की खनक पूरे कमरे में गूंज रही थी।

उनके खुले रेशमी सुनहरे बाल कंधों पर बिखरे थे, चेहरे पर ब्राइडल मेकअप और नाक की नथ उनकी खूबसूरती को दुल्हन-सा बना रही थी।

वो हल्की मुस्कान के साथ बोली: राहुल, ऐसे ही देखते रहोगे या कुछ कहोगे भी?

मैं उनके क़रीब जाकर धीरे से बोला: मैं मम्मी को नहीं, सविता को देख रहा हूँ… जो आज बिल्कुल दुल्हन लग रही है। पर ये लुक बर्थडे पर क्यों?

मम्मी ने गहरी साँस लेकर कहा: उन पुराने बंधनों से आज़ाद होने के लिए… जो मुझे औरत का असली सुख नहीं दे पाए। आज मैंने खुद को फिर से दुल्हन की तरह सजाया है… ताकि एक नई औरत की ज़िंदगी जी सकूँ। वैसे, सबसे पहले तो तुमने ही मुझे देखा है… बताओ कैसी लग रही हूँ? बाहर सबको अच्छी लगूँगी ना?

मैंने उनका हाथ थाम लिया और धीरे से कहा: कसम से मम्मी, आप तो बिल्कुल 20 साल की हॉट दुल्हन लग रही हैं। काश अपना रिश्ता माँ-बेटे का ना होता तो मैं…

मम्मी: क्या, चुप क्यों हो गए बेटा? बोलो, (मम्मी ने ज़िद की)।

मैंने मुस्करा कर कहा: कुछ नहीं मम्मी बस ऐसे ही खयाल आ गया। आप सच में बहुत हॉट लग रही हैं। अब चलो, मैं आपको अपना सबसे कीमती तोहफ़ा देता हूँ।

मैंने जेब से छोटा-सा डिब्बा निकाला और हार उनके हाथों पर रख दिया। मम्मी की आँखें चमक उठी।

मम्मी धीमे स्वर में बोली: वाव… ये तो बहुत ही खूबसूरत है। (फिर अचानक मुझे अपनी बाहों में जकड़ कर बोली) थैंक्यू राहुल, तुम्हारा गिफ्ट बहुत सुंदर है।

मैंने शरारत से कहा: तो अब जल्दी पहन कर दिखाइए!

मम्मी हँस कर बोली: ये तुमने दिया है तो तुम ही पहनाओगे।

वो मिरर की तरफ़ मुड़ कर खड़ी हो गईं। मैं उनके पीछे जाकर हार उनके गले में पहनाने लगा। उन्होंने हल्के हाथों से हार को सही जगह सेट किया-

मम्मी मिरर में मेरी तरफ़ देख मुस्कराईं बोली: राहुल, तुम्हारा ये तोहफ़ा मेरे बदन को और भी खूबसूरत बना रहा है। इतना कीमती तोहफ़ा मुझे कभी नहीं मिला। अपना रिश्ता माँ-बेटे का ना होता तो प्लीज़ सच-सच बताओ, राहुल… तुम मेरे लिए क्या करते? तुम्हें मेरी क़सम।

मैंने हार की डोरी कसते हुए उनकी आँखों में सीधे देखते हुए धीमे स्वर में कहा: मैं वो कमी भी पूरी कर सकता था जो पापा कभी नहीं कर पाए।

इतना सुन कर मम्मी का चेहरा जैसे सकपका गया, उनकी आँखों में हल्की-सी चमक और डर दोनों झलक रहे थे। हम कुछ देर तक एक-दूसरे को मिरर में ही घूरते रहे।

मम्मी ने गहरी साँस लेकर खुद को सँभालते हुए कहा: राहुल मैं समझ सकती हूँ, तू मेरी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता है। लेकिन हम माँ-बेटे हैं, तुझे ऐसे खयाल नहीं लाने चाहिए।

मैंने हँस कर उनकी बात काट दी: ओहो मम्मी, मैंने तो बस मजाक किया था। वैसे भी सामने इतनी हॉट अप्सरा खड़ी हो तो किसका दिल ना पिघलेगा?

ये सुन कर मम्मी झेंप गईं। उन्होंने झट से मेरे गालों पर एक चुम्मी दी और फिर मुझे अपनी बाँहों में भींच लिया।

मम्मी:‌ नॉटी, अपनी मम्मी से मजाक करता है! तू मेरे लिए अपने पापा से भी ज़्यादा खास है।

मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा: मम्मी, आप मुझे आज कोई सरप्राइज़ देने वाली थी ना?

मम्मी थोड़ी घबराई-सी, धीमी आवाज़ में बोली: राहुल, मुझे डर है कहीं तू नाराज़ ना हो जाए प्रॉमिस कर, तू मुझे गलत नहीं समझेगा।

मैंने मुस्करा कर उनका हाथ थामा: ऐसी क्या बात है मम्मी, जिससे मैं नाराज़ हो जाऊँगा? आपकी हर खुशी में ही मेरी खुशी है। प्रॉमिस, अब बताओ।

मम्मी ने अपना सिर मेरे सीने पर रख दिया, उनकी साँसें तेज़ हो रही थी। धीरे से बोली: मैं… जुनैद जी को अपने रिश्ते में एक खास जगह दे रही हूँ।

मैं चौंक गया: मतलब? वो जुनैद किस रिश्ते में?

मम्मी डरते-डरते बोली: जुनैद को अपना…

इतना ही कहा था कि तभी अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला।

मौसी अन्दर आ गईं और हँसते हुए बोली: अरे छोटी बहन! हम लोग कब से इंतज़ार कर रहे हैं। बाहर केक काटने का समय हो गया है।

उनके पीछे आरिफ भी अन्दर आ गया और बोला: भाभी जी, अब चलिए भी।

मम्मी उनके पास जाने से पहले झटपट मेरे कान में फुसफुसाईं: राहुल, इस बारे में हम बाद में बात करेंगे।

मैंने नज़र उठा कर मौसी और आरिफ को देखा। दोनों ही सफ़ेद कपड़ों में खड़े थे। आरिफ ने पठानी कुर्ता-पायजामा पहन रखा था। मगर मेरी नज़र अटक गई मौसी पर।‌ वो नेट की साड़ी में थी, जो उनके बदन से ऐसे चिपकी थी जैसे पानी में भीगा कपड़ा। उनका ब्लाउज़ पूरी तरह बैकलेस था, बस पतली डोरी से बँधा हुआ। सामने से गला इतना गहरा था कि उनकी चूचियों के बीच की मोटी दरार साफ़ नज़र आ रही थी। मैं एक पल को ठिठक गया सीन मेरे सामने और भी गर्म होता जा रहा था।

मौसी हमारे पास आकर बोली: राहुल, अब सविता से तुम्हारी मुलाक़ात हो गई है तो बाहर चलो। वहाँ कोई और भी है, जो सविता का ख़ास इंतज़ार कर रहा है।

मम्मी शर्माते हुए बोली: दीदी, मुझे ऐसे सबके सामने बाहर जाने में अजीब-सा लग रहा है।

मौसी मुस्करा कर बोली: ओहो सविता, अभी दुल्हन की तरह मत शरमाओ। शर्माने के लिए तुम्हारे पास पूरी रात पड़ी है। चलो।

फिर मौसी ने मम्मी का हाथ पकड़ा और हमें बग़ीचे में लेकर आईं। वहाँ आरिफ ने बहुत ही शानदार सजावट कर रखी थी। होटल के बग़ीचे के बीचों-बीच एक बड़ा सा केक रखा हुआ था। जुनैद उधर खड़ा, बस मम्मी को आते हुए देख रहा था।

जुनैद ने हल्के महरून रंग का पठानी कुर्ता-पायजामा पहना हुआ था, और उस वक्त काफ़ी हैंडसम लग रहा था। होटल में खड़े और लोग भी मम्मी को ही देख रहे थे।

पास आने पर जुनैद और मम्मी की नज़रें टकराईं और दोनों के चेहरे पर मुस्कान फैल गई। सब के सामने भी मम्मी उसकी आंखों में देख हौले से मुस्करा रही थी।
फिर सबने मिल कर मम्मी को केक काटने के लिए कहा। मम्मी आगे बढ़ी और मुझे व जुनैद को पास बुलाया। मैं मम्मी के एक तरफ खड़ा होकर उनका हाथ पकड़े था, जबकि जुनैद मम्मी के पीछे आकर उनके हाथ पर अपनी पकड़ बनाए था। मौसी दूसरी ओर खड़ी हुईं।

फिर हम सब ने मिल कर केक काटा। तालियों की गूंज के बीच सबने मम्मी को हैप्पी बर्थडे कहा और जश्न शुरू हुआ। मम्मी ने पहले मुझे केक खिलाया, फिर जुनैद और मौसी को।

इतने में मौसी मुझे अचानक साइड में ले जाकर बोली: राहुल, मेरा फ़ोन कमरे में रह गया है। ज़रा प्लीज़ मेरे लिए ले आओ।

मैंने हामी भर दी और उनके कमरे की ओर निकल गया। कुछ देर ढूंढने के बाद मुझे उनका फ़ोन मिल गया और मैं तुरंत बग़ीचे की तरफ लौट आया।

लेकिन जैसे ही मैंने वहाँ का माहौल देखा, मेरी आंखें चौंधिया गईं। सब लोग गोल घेरे में खड़े थे और बीच में मम्मी और जुनैद वे दोनों ऐसा क्या कर रहे थे

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