मेरा नाम अमित है। पिता जी रेलवे की नौकरी में उंचे पद पर थे। मुझसे दो साल बड़ी एक बहन है। उसका नाम अनीता है। पिता जी की रेलवे की नौकरी थी। बढ़िया आमदनी थी। फिर भी मेरी मां को नौकरी करने का बहुत शौक़ था। हर तीन-चार साल पर पिता जी का तबादला हो जाता था, लेकिन नई जगह पर जाने के एक महीना के अंदर ही मां को भी बढ़िया नौकरी मिल जाती थी। हम चारों की ज़िंदगी बहत आराम से कट रही थी।
मुझे पहला झटका तब लगा जब 18 साल की उम्र में मुझे देहरादून के एक बहुत ही मशहूर कॉलेज में पढ़ने के लिए भेज दिया गया। शुरू-शुरू में मैं बहुत रोया लेकिन धीरे-धीरे वहां बढ़िया लगने लगा। मैं घर सिर्फ़ दो बार ही आता था, एक गर्मियों की छुट्टी में, और दूसरा जाड़े की छुट्टी में। उम्र बढ़ती गई तो लड़कियों की तरफ़ मेरा आकर्षित होना बढ़ता गया।
समय बहुत तेज़ी से भाग रहा था। मेरे लंड में तनाव आने लगा। मुझे अपने तने हुए लंड को सहलाना बहुत ही बढ़िया लगने लगा। फाइनल ईयर में अब हम सीनियर्स हो चुके थे। होस्टल में पहली रात थी और मैं पढ़ाई कर रहा था। अचानक 5 सहपाठी लड़के मेरे कमरे में घुसे और उन्होंने रुम का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया।
मैं: क्या यार, कल के क्लासेज़ के लिए पढ़ाई कर रहा था।
हम सभी लड़के बहुत ही गहरे दोस्त हो गये थे। मेरे बोलने का उनके उपर कोई असर नहीं हुआ। एक लड़के विनोद ने मेरे सामने कई किताबें फेंकी। आंखों के सामने कई तस्वीरें थी। कुछ तस्वीर में सिर्फ़ नंगी औरतें थी और कुछ में चुदाई के फ़ोटो थे।
विनोद: इन छुट्टियों में मैंने तीन माल को खूब चोदा। उन में से 2 मेरी मां की ख़ास सहेलियां थी। तीसरी मेरी एक पड़ोसन लड़की थी, जो ख़ुद ही मुझ से चुदवाने आती थी।
उसकी बातों से मेरा पढ़ाई का मूड ख़त्म हो गया, और हम सब अपनी लड़कियां दोस्त, मां और बहन की बातें करने लगे। विनोद ने विस्तार से अपनी सभी चुदाई की कहानी सुनाई और आख़िर में उसने कहा, “इस बार जैसे भी हो अरविंद सर की पत्नी रेखा को ज़रूर चोदूंगा। उसे जब भी देखता हूं, लंड पैंट फाड़ कर बाहर आने के लिए बेताब हो जाता है।”
विनोद की पसंद सही में बहुत ही बढ़िया थी। स्कूल कंपाउंड में जितनी भी औरतें थी रेखा सबसे ज़्यादा सुंदर और आकर्षक थी। मैंने किसी से कभी नहीं कहा कि रेखा को देख कर मुझे हमेशा अपनी मां की याद आती थी। सच तो यह है कि सिर्फ़ रेखा के कारण ही मैंने अपनी मां को मिस नहीं किया। क़रीब एक घंटा बाद सभी बाहर चले गये।
पढ़ाई का मूड खत्म हो गया था। विनोद ने रेखा का नाम लिया तो रेखा की ख़ूबसूरती के साथ-साथ मुझे अपनी मां और दीदी अनीता की जवानी की याद आने लगी। और अचानक मुझे कुछ दिन पहले हुई पिता जी और दीदी की बात याद आ गई।
पिता जी को सरकारी मकान मिला हुआ था। चार बेडरूम का मकान था। खुला हुआ छत था। जैसा अक्सर होता है छुट्टियां ख़त्म होने को आती है, तो मन बेचैन रहने लगता है। मैं आप सब को बता दूं, घर में हम चार ही थे। लेकिन मेरी अपने पिता जी से ही ज़्यादा बनती थी। मैं मां या दीदी के साथ बहुत ही कम समय गुज़ारता था। जब घर से अगले ही दिन मुझे देहरादून के लिए निकलना था, तो रात में मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मैं छत पर चला गया। छत पर पहुंचा ही था कि आवाज़ सुनी।
पिता जी: अनीता, कितना और कब तक तड़पाओगी? तुम्हें बढ़िया से मालूम है कि मुझे क्या चाहिए। तुम मुझे देती क्यों नहीं?
अनीता की खिलखिलाती आवाज़ सुनाई दी।
अनीता: मेरे प्यारे पिता जी, आप को मैंने एक महीना पहले ही बता दिया था कि आपका सामान आपको कैसे मिलेगा। पहले आप मेरा काम कर दो, फिर अपना सामान लेलो।
उसके बाद भी दोनों बातें करते रहे, लेकिन मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। 5-7 मिनट के बाद-
अनीता: अब चलो बहुत हो गया। वो तुम्हें तभी मिलेगा जब तुम मुझे मेरी चीज़ दोगे। तब तक इतने से ही काम चलाओ।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि दोनों बाप-बेटी क्या लेने-देने की बात कर रहे थे। मैं अगर दस कदम आगे जाता, तो देखता कि पापा बिल्कुल नंगे बैठे थे। अनीता ने पैंटी के उपर एक मिनी फ़्रॉक पहनी थी। अनीता बाप का लंड सहला रही थी, और बाप-बेटी की जवानी को सहला रहा था।
डेढ़ महीना पहले मेरे बाबू जी नवीन ने अपनी बेटी को एक पार्क में किसी जवान आदमी की गोदी में बैठे देखा था। उसी रात बाप ने बेटी को चार्ज किया और पूछा कि ये रंडीपना कब से कर रही थी। अनीता को ना कोई शर्म आई ना ही कोई हिचक हुई।
अनीता: बाबू जी, अभी तक मैं ने रंडीपना शुरु नहीं किया है। थोड़ी बहुत मस्ती लेती हूं, लेकिन अब तक कुंवारी हूं। अगर आप मेरी मदद करो तो फिर आप को बेटी के कमरे में ताक-झांक करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। जब मैं नहाती हूं उस समय जो आप मेरी नंगी जवानी देखने के लिए मेहनत करते हो, वो सब नहीं करना पड़ेगा। मैं ख़ुद आपको सब कुछ दे दूंगी। लेकिन मेरा जवानी को सबसे पहले नरेन्द्र चाहिए। वो आपके ऑफिस में ही इंजीनियर है।
नवीन यह जानकर क्लीन बोल्ड हो गया कि बेटी को उसकी हरकतों की जानकारी थी।
नवीन: तुम मुझसे क्या चाहती हो?
बोलते हुए नवीन बेटी की दोनों चूचियों को पकड़ कर दबाने लगा। बेटी ने बाप के हाथ को गाउन के उपर से नहीं हटाया।
अनीता: मुझे नरेंद्र के साथ दिन में ही सुहागरात मनानी है। आप एक दिन घर में रहो। मैं नरेंद्र को बुला लूंगी। आप बाहर रखवाली करना और अंदर नरेंद्र आपकी बेटी की चूत फाड़ेगा, और जिस दिन नरेंद्र मुझे चोद लेगा, उसी रात इसी बेड पर आपके साथ चुदवाऊंगी।
उस रात के बाद से हर रात बाप बेटी से चुदवाने के लिए खुशामद करता रहा, और बेटी ज़िद पर अड़ी रही कि पहले नरेंद्र से चुदवायेगी। दो दिन बाद से ही बेटी बाप के लंड को सहलाने लगी। बहुत खुशामद करने पर बेटी ने लंड चूसना भी शुरु कर दिया। लेकिन नरेंद्र से चुदवाने की ज़िद पर अड़ी रही।
मैंने उस घटना को याद किया और रात में ही मां को चिट्ठी लिखी। छत पर मैंने बाप बेटी के बीच क्या बात हुई थी सब लिखा और अंत में अपना फ़ैसला सुनाया-
मैं: मां, मुझे लगता है कि बाबू जी अपनी बेटी को चोदते हैं। यह बहुत ग़लत है ना!?
मैंने चिट्ठी को लिफ़ाफ़े में डाला और मां जिस स्कूल में काम करती थी वहां का पता लिखा। अगली सुबह मैंने चिट्ठी पोस्ट कर दी। अगले शाम से मैं हर रोज़ मार्केटिंग कम्प्लेक्स में जाने लगा। कुछ ख़रीदारी करने नहीं सिर्फ़ रेखा की झलक देखने के लिए। मुझे ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा। तीन दिन बाद ही मैंने रेखा को एक दुकान से निकलते देखा। मेरे कई दोस्त साथ थे। लेकिन सबको छोड़ कर मैं रेखा के पास गया और झुक कर दोनों फ़ीट को छू कर प्रणाम किया।
अमित: प्रणाम मैडम। मैं अमित हूं, फाइनल ईयर में हूं। आप से बात करने का बहुत मन कर रहा है। क्या मैं आपके घर आ सकता हूं?
रेखा ने घूर कर अमित को देखा।
रेखा: नहीं। किस होस्टल में रहते हो?
मैंने होस्टल का नाम ही नहीं, रुम नंबर भी बताया। रेखा वहां से चली गई। रेखा को बढ़िया से मालूम था कि सीनियर क्लास के लड़के उसकी एक झलक के लिए तरसते थे। उसके पास लड़कों की लिखी हुई चिट्ठियां भी आती थी। किसी भी चिट्ठी पर भेजने वाले का नाम नहीं होता था।
अधिकतर चिट्ठियों में यही लिखा रहता था कि वो बहुत ही सुंदर है, बहुत सेक्सी है। लेकिन कुछ चिट्ठियों में सिर्फ़ सेक्स की बातें रहती थी। उसे चोदने की बात रहती थी। वैसी चिट्ठियों को रेखा अपने पति से शेयर करती थी। लेकिन आठ साल में यह पहला मौक़ा था जब किसी लड़के ने पब्लिक प्लेस में इस तरह उससे बात की हो। लड़के ने अपना नाम ही नहीं होस्टल और रुम नंबर भी बताया। उसने घूम कर पीछे देखा। मैं उसे घूर ही रहा था। रेखा ने मन ही मन कहा “बहुत हिम्मत है लड़के में।”
वापस होस्टल आकर पढ़ाई क्या करता, रेखा और अपनी मां इन्दिरा के बारे में ही सोचता रहा। रेखा से बात करने के 4 घंटा बाद जब अपने रुम में घुसा तो देखा कि दरवाज़े के पास फ़्लोर पर एक गुलाबी रंग का पेपर का चिट गिरा हुआ था। मैंने चिट उठाया। इससे पहले कि वो पढ़ता मेरा खास दोस्त विनोद रुम में घुसा और बेड पर लेट गया।
विनोद: तुम मेरी माल रेखा से क्या बात कर रहे थे?
अमित: जिसने तुम से ये बात कही उसने ये नहीं कहा कि मैंने रेखा मैडम का फ़ीट छू कर प्रणाम किया। यार रेखा बिल्कुल मेरी मां जैसी है।
विनोद: यानी तुम्हारी मां भी रेखा जैसी सुंदर है? रेखा को चोदूंगा यानी तेरी मां को चोद लूंगा।
अमित: सोचने की क्या ज़रूरत है। मेरे घर चलो और पटा कर मेरी मां को चोद लो। यार सच बोल, तुमने अपनी मां को भी चोद लिया है ना!
मेरी बात सुन कर विनोद बहुत दुखी हो गया।
विनोद: सच बोलता हूं दोस्त, सब से पहले जिस बूर में लंड पालना चाहता था वो मेरी अपनी मां का ही बूर है। कुतिया घर में ड्राइवर से चुदवाती है। तीन-चार साल से चुदवा रही है। एक साल पहले मैंने उसे ड्राइवर से चुदवाने रंगे हाथ पकड़ा। मैंने उसे बहुत धमकाया, डराया लेकिन उस बेशर्म पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। उल्टा रंडी ने मुझे ही धमकाया कि वही सबसे कह देगी कि मैं अपनी मां को चोदना चाहता हूं।
विनोद: यार सभी औरत की ही बात सुनते है। फिर मैं उसकी बहुत खुशामद करने लगा। तब मैंने साफ़-साफ़ कह दिया कि वो दुनिया भर के कुत्तों से भी चुदवा लेगी लेकिन बेटे से कभी नहीं चुदवायेगी। लेकिन मां ने अपनी ही उम्र की अपनी दो सहेलियों को मुझसे चुदवाया।
विनोद की बात सुन कर मेरा लंड फिर टाइट हो गया और इस बार जो औरत मेरी आंखों के सामने आई, वो मेरी दीदी नहीं मेरी खूबसूरत मां इन्दिरा थी। उस समय पहली बार मां को चोदने का ख़्याल आया।
विनोद के जाने के बाद मैंने दरवाज़ा ठीक से बंद किया। पॉकेट से चिट निकाल कर पढ़ा। मेरे माथे पर पसीना आ गया। चिट में लिखा था। “अगर मुझसे मिलना चाहते हो तो आज रात मेरे घर आओ। मैं 12 बजे रात तक इंतज़ार करुंगी। अगर आज नहीं आये तो फिर कभी मेरे सामने मत आना, रेखा।
मैंने इस संदेश को बार-बार पढ़ा। पहले तो लगा कि किसी दोस्त ने मेरे साथ मज़ाक़ किया था। फिर मैंने फ़ैसला किया कि चांस लेने में क्या नुक़सान था। मैंने सोचा कि रेखा के घर तक जाऊंगा। अगर वो इंतज़ार करती हुई मिली तो ठीक, नहीं तो वापस आ जाऊंगा। रेखा का घर हमारे होस्टल से क़रीब 1 किलोमीटर की दूरी पर था।
मैं रात गुजरने का इंतज़ार करने लगा। संदेश में लिखा था कि वो 12 बजे रात तक ही इंतज़ार करेगी। मैंने सिर्फ़ एक पाजामा कुर्ता पहना। सर पर एक हुड डाला कि जल्दी से कोई मुझे पहचान ना सके। लेकिन एक समस्या थी, और वो समस्या था होस्टल के गेट का नाइट गार्ड। मैंने पॉकेट में सौ का 5 नोट लिया और सवा ग्यारह बजे अपने रुम से निकला। मैंने लॉक लगाया और सामने के एक फ्लावर पॉट में चाबी रख दी।
गेट पर पहुंचा ही कि गार्ड ने टोका, “अमित साहब, इतनी रात को कहां जा रहे हो?”
ये उसने लाउडली कहा फिर धीरे से बोला,
“किसी ने चोदने के लिए बुलाया है क्या?”
उसकी बात सुन मैं अकबका गया।
गार्ड: ये कोई नई बात नहीं है। पिछले बैच में एक आनंद साहब थे 23 नंबर के रुम में। वे अक्सर रात को किसी को चोदने जाते थे। लेकिन रात में ऐसे बाहर जाने से पकड़े जाने का डर है। आप को कोई माल चाहिए तो मैं आपके रुम में ही रात भर के लिए इंतज़ाम कर दूंगा। लड़की का 2 हज़ार और मेरा 2 सौ। मेरे हाथ में बहुत बढ़िया-बढ़िया माल है। सभी 25 साल से कम उम्र की। सब की सब स्कूल स्टाफ़ की बेटी है, बहन है, या घरवाली है।
गार्ड: और अगर आपको अपनी मां यानी मां की उम्र की ही औरत को चोदना है, तो मैं वैसी 4 माल की दलाली करता हूं। चारों की चारों आपके किसी टीचर की ही घरवाली है। लेकिन उनकी क़ीमत ज़्यादा है। वे सिर्फ़ 2 घंटा का 3 हज़ार लेती है। लेकिन साहब 2 घंटा में जो भी बोलोगे सब करेगी।
उसकी बातों से मेरी हिम्मत बढ़ी।
अमित: काका, आज एक बहुत बढ़िया माल ने बुलाया है। आज मुझे अपनी क़िस्मत आज़माने दो। अगर कल उसने नहीं बुलाया तो तुम अपनी किसी बढ़िया माल को रुम में भेज देना। मैं वापस आकर बताता हूं।
मैंने गार्ड को 2 सौ रुपया दिया। उसने मुझे बाहर जाने दिया लेकिन बोला कि 5 बजे के पहले वापस आ जाऊं।
जब मैं रेखा के घर पहुंचा, तो 11:45 हो गये थे। मैं यह देख कर बहुत खुश हुआ कि बरामदे में रेखा बैठी थी।
रेखा के घर तक आते समय मैं यही सोच रहा कि ये सच नहीं था। लेकिन जब रेखा को इंतज़ार करते देखा, तो दिल ख़ुश हो गया। वो मुझे देखती रही और मैं उनके सामने खड़ा हो गया।
रेखा: मुझसे क्यों मिलना चाहते थे? क्या चाहिए मुझसे?
मैं तो औरत की खुबसूरती को ही देख रहा था। मेरे पास होंठों पर दिल की बात आ गई।
अमित: दूसरों की तरह मैं सिर्फ़ आपकी ख़ूबसूरती का भूखा नहीं हूं। आपको देखते ही मुझे अपनी मां इन्दिरा दिखाई देने लगती है। रेखा, तुम बहुत ही सुंदर हो। सबसे ज़्यादा सुंदर हो। क्या मैं आपको टच कर सकता हूं?
मालूम नहीं मुझमें इतनी हिम्मत कहां से आ गई थी। बिना रेखा की परमिशन का इंतज़ार किये हुए, मैंने उनकी एक गाल को छुआ।
अमित: कितनी चिकनी है आप!
रेखा ने हौले से मुझे धकेला और एक रुम के अंदर घुस गई। मैं भी उसके पीछे रुम के अंदर चला गया, और बाहर वाले दरवाज़े को ठीक से बंद कर दिया। लेकिन रेखा उस रुम में नहीं रुकी। ये रुम लिविंग कम ड्राइंग रुम था। वहां से निकल कर वो दूसरे रुम में गई। मैं भी उस रुम में गया, लेकिन दरवाज़े पर ही रुक गया। यह बेडरूम था और बेड पर अरविंद सर सो रहे थे।
उनकी उठती गिरती छाती को देख कर लगा कि वे गहरी नींद में थे। रेखा उनके बग़ल में लेट गई। मैं थोड़ी देर खड़ा रहा और मुझे लगा कि उस औरत ने अपने पति को कोई नशे की दवा या नींद की दवा दे कर सुला दिया था, और ख़ुद मस्ती के मूड में थी। मैं रेखा की ओर देख रहा था और उसने मुझे विंक किया।
रेखा धीरे से बोली, “मैं समझ गई तुम सिर्फ़ मुझे नज़दीक से देखना चाहते थे, छूना चाहते थे। देख भी लिया और छू भी लिया। अब होस्टल वापस जाओ।”
लेकिन मेरी हालत ख़राब हो रही थी। रेखा के इतने नज़दीक आकर अगर उसे बिना चोदे यहां से गया तो फिर मैं अपने को कभी माफ़ नहीं कर पाऊंगा।
अमित: रेखा, चैन से नहीं रह पाऊंगा। प्लीज़ मुझे अपनी असली ख़ूबसूरती देखने दो।
रेखा: ये असली और नक़ली ख़ूबसूरती क्या होती है? जो हूं सो तुम्हारे सामने हूं। सब कुछ तो देख ही रहे हो।
अमित: ख़ाक सब दिख रहा है! सिर्फ़ चेहरा और हाथ ही तो दिख रहा है। बाक़ी तुम्हारी सारी ख़ूबसूरती तो इस गाउन ने छुपा रखी है।
बोलते हुए मैं रेखा के बिल्कुल पास गया और उनके पेट पर ( गाउन के उपर ) हाथ रखा।
अमित: रेखा रानी, प्लीज़ थोड़ी देर के लिए इसे अपने बदन से अलग कर दो।
वो एक टक मेरी ओर देखती रही। कुछ देर हम दोनों चुप रहे। लेकिन मेरी आंखें यह ढूंढ रही थी कि गाउन में बटन कहां था। बटन सामने नहीं था और ना ही मैं ही होश में रह गया था। रेखा के चेहरे की ख़ूबसूरती, उसके आकर्षक बदन के कारण मैं अपना होशों-हवास खो बैठा था।
मैंने रेखा को उसके पति की ओर घुमाया तो मुझे पीठ पर गाउन के बटन की जगह दिखी। मैंने उस जगह पर अंगुलियों को उपर नीचे किया तो मालूम पड़ा कि वहां बटन नहीं एक चेन (ज़िप) थी। पीठ के ऊपरी हिस्से से कमर तक का लंबा ज़िप था। मैंने ज़िप का हैंडल पकड़ा और पकड़े हुऐ नीचे तक ले आया। ज़िप खुल गया।मैंने दोनों हाथों से गाउन के पल्लुओं को पकड़ कर फैलाया तो रेखा की पीठ कमर तक नंगी हो गई।
ना ही रेखा मुझे रोक रही थी, ना ही मुझे होश था कि मैं क्या कर रहा था। मैंने दोनों हाथों से नंगी पीठ को सहलाया। जहां-तहां कंधों को पीठ को, कमर को चूमता रहा। मैंने रेखा को सीधा किया तो देखा कि उसकी आंखें डबडबा गई थी। मैंने दोनों आंखों को बार-बार चूमा।
अमित: अगर तुम्हें ये पसंद नहीं है फिर भी अब मैं अपने को रोक नहीं सकता हूं। मुझे प्यार करने दो, मुझे चोदने दो।
मैंने गाउन के दोनों साइड के स्ट्रैप को जो कंधे पर थे, उसे बांहों पर खिसकाया और दोनों बांहो को स्ट्रैप से बाहर कर दिया और धीरे-धीरे गाउन को नीचे खींचने लगा। थोड़ा ही खींचा तो मुझे चूचियों का उभार दिखाई देने लगा। गाउन थोड़ा और नीचे आया तो मुझे निप्पल दिखाई पड़ने लगा। और थोड़ा खींचा तो चूचियों की पूरी गोलाई दिखाई पड़ने लगी। मैं गाउन को खींचता ही गया और रेखा के बदन से बाहर निकाल दिया। उपर से नीचे तक हमारे साईंस टीचर की पत्नी बिल्कुल नंगी थी।
अमित: रेखा, इसे कहते हैं असली ख़ूबसूरती।
मैं थोड़ी झुका और दोनों चूचियों को दबाते हुए पहले होंठों को, फिर दोनों गालों को चूमा, बार-बार कई बार चूमा लेकिन रेखा ने एक बार भी थोड़ा भी रिस्पॉस नहीं दिया। किसी गुड़िया जैसी चुप-चाप लेटी रही। लेकिन मुझे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था। रेखा की नंगी जवानी को निहारते हुए मैंने पाजामा और कुर्ता खोला और मैं भी नंगा हो गया। बहुत देर के बाद रेखा बोली-
रेखा: मेरे पास आओ।
मैं उसके बग़ल में खड़ा हुआ। उसने लेटे हुए ही मेरे लंड को पकड़ा और उपर की स्किन को उपर नीचे करने लगी। उसने तीन-चार बार ऐसा किया फिर छोड़ दिया।
रेखा: मुझे तो लग रहा था कि तुम अपनी मां को सैकड़ों बार चोद चूके हो। लेकिन अब तक तुम्हारा लंड किसी भी बूर में नहीं घुसा है।
रेखा ने कैसे समझा कि मैंने तब तक किसी को नहीं चोदा था मालूम नहीं। मैं बेड पर उनकी जांघों के बीच बैठ गया। रेखा की चूत को बार-बार मसला। चूत चिकनी नहीं थी, लेकिन झांटे छोटी ही थी। चूत की पत्तियों, चूत की घुंडी सब साफ़-साफ़ दिख रहा था। मैं एक हाथ से रेखा की चूत को सहला रहा था।
अमित: मैंने अब तक किसी को नहीं चोदा क्योंकि मैं अपने इस लंड को दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत की खूबसूरत बूर के अंदर पेलना चाहता था।
तीन-चार दिन पहले विनोद ने चुदाई वाली तस्वीर दिखाई थी। उसके अलावा मैंने ना चुदाई की कहानी ही पढ़ी थी, ना ही चुदाई की कोई सिनेमा ही देखी थी। मुझे ओरल सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं मालूम था। फिर भी रेखा की जवानी इतनी लुभाने वाली थी, कि मैं अपने को रोक नहीं सका। एक हाथ से चूची और दूसरे हाथ से जांघों को सहलाते हुए मैं चूत को चाटने लगा।
मैंने रेखा की सेक्सी आवाज़ सुनी। “आह अमित, मत करो ना, बहुत बढ़िया लग रह है, फिर से करो।”
मुझे नहीं मालूम कि उसे क्या बढ़िया लगा लेकिन मैं प्युबिक एरिया को चूसता रहा चाटता रहा। फिर हाथों से चूत की फांक को फैला कर अंदर का नजारा देखा तो दिल बाग-बाग हो गया। चूत के अंदर का गुलाबी और रसीला माल को देख कर लंड बाहर नहीं चूत के अंदर घुसने को बेताब था।
अमित: रेखा, जी तो करता है कि रात दिन तेरी इस बूर को चूसता ही रहूं, लेकिन अगर लंड को इसका खाना जल्दी नहीं खिलाया, तो ये फट जायेगा।
मैंने अपने को उसके उपर पोजिशन किया। एक हाथ से लंड को पकड़ कर बूर के छेद में घुसाया। दूसरे हाथ से एक कंधे को पकड़ा। चूत्तड़ों को हल्का सा उपर उठाया और ज़ोर से धक्का मारा। सुपाड़ा बूर के अंदर घुस गया। “आह”, पहले ही धक्के में रेखा ने मस्ती की सिसकारी मारी।सिसकारी सुन कर मेरा जोश और बढ़ा। मैं धक्के पर धक्का मारता गया और पांचवें धक्के पर रेखा ज़ोर से बोली,
“वाह अमित, मज़ा आ गया। और ज़ोर से, और अंदर।” रेखा की यह बात सुन कर दिल ख़ुश हो गया। मैं पूरी ताक़त से धक्का लगाता रहा। साथ ही कभी मैं रेखा की मस्त जांघों को सहलाता था, तो कभी चूचियों को मसलता था। बीच-बीच में धक्का मारना बंद कर चूचियों को भी चूस लेता था।
मुझे तो बहुत मज़ा आ ही रहा था, रेखा भी शांत रह कर नहीं चुदवा रही थी। वो कभी अपनी बाहों में मुझे बांधने की कोशिश करती थी, तो कभी अपने फ़ीट को मेरे बदन पर रगड़ने लगती थी। उपर से वो लगातार मस्ती की सिसकारी मार ही रही थी। हम दोनों के बीच और कोई बात चीत नहीं हुई। बस हम दोनों एक-दूसरे को रगड़-रगड़ कर चोदते रहे।
मेरी पहली ही चुदाई थी। बिना किसी मेहनत के एक बहुत ही खूबसूरत औरत को चोद रहा था, वो भी उस औरत के पति के बग़ल में। मैंने धक्का मारना छोड़ कर रेखा के होंठों को चूमा। दोनों निप्पलों को चूसा और मैंने अरविंद सर का गाल सहलाया। फिर से धक्का लगाने लगा।
अमित: रेखा रानी, अरविंद सर को क्या खिलाया कि बेड इतना हिल रहा है, हम बातें कर रहे हैं, फिर भी सर को कोई फ़र्क़ नहीं पर रहा है? मुझे भी वो दवा देदो, कभी ज़रूरत पड़ सकती है।
रेखा ने ज़ोर से चूत्तड़ो और कमर को उचकाया।
रेखा: अगर क़सम खाओ कि वो दवा सिर्फ़ अपने बाबू जी को खिला कर उनके बग़ल में ही अपनी मां को चोदोगे, तभी वो दवा दूंगी।
रेखा कि बात सुन कर मैं बहुत गर्म हो गया, और भी जमा-जमा कर चोदने लगा।
अमित: कुतिया, तू पागल हो गई है क्या? कोई अपना मां को भी चोदता है क्या?
रेखा: अपनी गुरु की पत्नी को चोद ही रहे हो, मां को भी चोद लोगे तो क्या हो जायेगा ? वैसे आज कल मां को चोदना, बेटी के पेट में बच्चा डालना, बहन को घरवाली जैसा रखना आम बात है। तुम्हारे दोस्तों में कई होंगे जो अपनी मां को, बहन को चोदते होंगे। उफ़ अमित, बहुत ही ज़्यादा मज़ा रहा है, सालों बाद इतना बढ़िया चुदाई मिली है, उफ़, हे भगवान, मैं गई
रेखा ने दोनों हाथों और जांघों से मुझे कस कर बांधा, इतना टाइटली बांधा कि मैं धक्का नहीं मार पाया। रेखा ने मुझे कुछ देर ऐसे ही बांधे रखा और फिर दोनों हाथ को अग़ल-बग़ल फैला दिया। अपने पैंरों को भी ढीला छोड़ दिया। मैं फिर धक्का मारने लगा लेकिन 5-6 धक्कों के बाद मुझे लगने लगा कि पूरे बदन का सारा खून लंड में ही आ रहा था। अचानक मैं झड़ने लगा। लंड से रस बूर के अंदर झड़ने लगा और मैं कुछ धक्के मार कर रेखा की चूचियों पर ढीला पर गया।
रेखा: अमित, ना तुमने कंडोम पहना, ना ही मैंने कुछ लगाया है। अगर मेरे पेट में तुम्हारा बच्चा रह गया तो?
मैंने उसे प्यार से बार-बार चूमा।
अमित: तुम्हारी शादी हो चुकी है। बच्चा होगा भी तो सर यही समझेंगे कि उनका ही बच्चा है। और नहीं तो तुम जब बोलो मैं तुमसे शादी कर लूंगा।
वो मुस्कुराते हुए मेरी तरफ़ देखती रही।
रेखा: सिर्फ़ चोदना बढ़िया आता है लेकिन हो पूरे बुद्धु। जो तुम्हें चाहिए था वो तुम्हें मिल गया। अब होस्टल जाओ। पकड़े जाओगे तो तुम स्कूल से निकाले ही जाओगे, मेरी भी बदनामी होगी।
अमित: रानी, विश्वास रखो, मेरी तरफ़ से कभी किसी को नहीं मालूम पड़ेगा कि मैंने तुम्हें चोदा है। रेखा रानी, दिल नहीं भरा, एक बार और लूंगा।
रेखा: क़सम खाओ की अगली छुट्टी में घर जाओगे तो मां को चोद कर आओगे, तभी दुबारा चोदने दूंगी।
ये औरत मेरे दिमाग़ में मां को चोदने की बात डाल रही थी। दीदी और बाबू जी की बात याद कर अनीता दीदी को चोदने की चाहत जाग ही गई थी। मैं रेखा के उपर से उतर कर बेड के नीचे आया। एक हाथ रेखा के पीठ के नीचे और दूसरा हाथ उसके जांघों के नीचे डाल कर मैंने उसे उठाया।
“बहुत ताक़त है”, बोलते हुए उसने अपने दोनों हाथों को मेरी गर्दन में लपेट लिया और मेरे होंठों को चूमा। मैं वैसे ही उसे उठाये हुए लिविंग रुम में लाया। उसे फ़्लोर पर उतारा।
अमित: रेखा रानी, मुझे ठीक से देखने दो कि रेखा सिंह कितनी ख़ूबसूरत है।
मैं उसके सामने खड़ा हुआ। दोनों हाथों से मैंने पहले उसके आगे के हिस्से को, पूरे बदन को सहलाया। फिर रेखा को घुमा कर माथा से लेकर पीठ और चूत्तड़ों को सहलाते हुए फ़ीट को पकड़ कर चूमा।
“रे़खा लम्बी औरत की श्रेणी में आती थी। उसका वजन 55 किलोग्राम था। रंग साफ़ गोरा रंग। देखने से ही लगता था कि औरत का बदन बहुत लचकदार था। उपर से नीचे तक औरत ही औरत लगती थी। लम्बे घने बाल, चेहरा बहुत ही प्यारा। एक बार चेहरे पर नज़र चली जाए तो वहां से हटाना बहुत ही बहुत ही मुश्किल था।
चेहरा गोलाकार नहीं अंडाकार था। तीखे नयन नक्श, पतले रसीले होंठ और आंखों को लुभाने वाली गोरी-गोरी बांहे थी। 36 इंच की उभरी हुई चूचियां, सपाट पेट और पतली कमर थी रेखा की। बूर का तिकोना बहुत ही प्यारा था और 34 इंच की कसी हुई चूत्तड़ किसी को भी पागल बना सकती थी। उसकी टांगे और जांघें भी बहुत ही आकर्षक थी। उपर से नीचे तक एक खूबसूरत औरत थी ये 32 साल की रेखा।
बाद में पता चला कि ये रेखा अरविंद सर की दूसरी घरवाली थी। पहली घरवाली के मरने के बाद सर ने अपनी छोटी साली से शादी कर ली थी। शादी को 8 साल हो गये थे, लेकिन उनका कोई बच्चा नहीं हुआ था।
रेखा मुझे बार बार अपनी मां को चोदने के लिए बोल रही थी। मैंने अपनी मां को चोदने की बात मान ली।
अमित: रेखा, जिस तरह तुम्हें अपनी गुरू की पत्नी समझ कर नहीं, दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत समझ कर चोदा है। अपनी क़सम खाता हूं, कि अपनी मां इन्दिरा को मां नहीं एक बढ़िया माल, एक घटिया रंडी समझ कर चोदूंगा। मैंने सुना है, पढ़ा है कि औरत को सीधा लिटा कर चोदने में जितना मज़ा आता है, उससे ज़्यादा मज़ा औरत को कुतिया बना कर चोदने में आता है।
रेखा रानी, मेरे लिए कुतिया बनोगी? जैसे कुत्ता अपनी कुतिया की चूत चाटता है वैसे ही मैं भी चूत चाटने के बाद तुम्हें चोदूंगा।
मेरा बोलना ख़त्म हुआ और रेखा सोफ़ा पकड़ पर कुतिया के पोज़ में आ गई। यह देख कर मुझे विश्वास हो गया कि इस खूबसूरत औरत को मेरी चूदाई पसंद आई थी। तभी दोबारा चुदवाने के लिए तैयार हो गई थी। मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था।
तीन चार दिन पहले ही मेरे एक दोस्त ने रेखा को चोदने की बात की थी। विनोद ने रेखा को चोदा कि नहीं मुझे नहीं मालूम, लेकिन मैंने उसके ही घर में उसके ही बेड पर रेखा को चोदा। मुझसे चुदवाने के लिए रेखा ने अपने पति को गहरी नींद आने वाली कोई दवा दे दी थी। हमने पहली चूदाई अरविंद सर के बग़ल में ही की।
पहली चुदाई में हम दोनों झड़े। मेरे कहने पर वो कुतिया के पोज़ में भी चुदवाने को रेडी हो गई। वो लिविंग रूम के सोफ़ा पर दोनों हाथ के सहारे कुतिया के पोज में हो गई। सामने से रेखा बहुत सुंदर तो थी, लेकिन कुतिया के पोज में उसकी चिकनी पीठ, मस्त सुडौल कसे हुए चूत्तड़, और बहुत ही आकर्षक जांघें थी।
मैं: उफ़ रेखा कितनी सुंदर हो! ज़रूर ही बहुत से लोगों ने तुझे चोदा होगा। मेरे दोस्तों में से भी किसी ने चोदा है क्या?
मैं उसके पीछे बैठ कर चूत्तड़ों को सहलाया और चूत्तड़ों पर लगातार कई चांटा मारा। रेखा ने पीछे घूम कर नहीं देखा।
रेखा: मादरचोद पहली बार औरत को चोदा है इसलिए छोड़ देती हूं। लेकिन अपने दिमाग़ में इस बात को बिठा ले। मुझसे पूछ लिया सो पूछ लिया, फिर कभी किसी से भी, अपनी घरवाली और बेटी से भी मत पूछना, कि उसे किसने चोदा है, या कुतिया किससे चुदवाती है। औरत के लिए इससे ज़्यादा गंदी गाली और कुछ नहीं है। तुम्हें कितना भी प्यार करती होगी, लेकिन अगर तुमने उससे उसकी चुदाई या उसके यारों के बारे में पूछ लिया, तो वो फिर तेरा चेहरा भी नहीं देखेगी। जैसा चांटा मारा था फिर से मार, बढ़िया लगा था।
बोल कर रेखा चूत्तड़ों को हिलाने लगी। मैंने दुबारा उसे कई चांटा मारा और फिर दोनों चूत्तड़ों को सहलाते हुए, गांड की फांक को फैलाते हुए, बहुत देर क्लिट से लेकर गांड के छेद तक बहुत देर तक चाटा और चाटते हुए बीच-बीच में चूत्तड़ पर चांटा मारता रहा। लंड पूरा टाईट हो गया। मैंने एक हाथ से रेखा के एक कंधे को पकड़ा और दूसरे हाथ से लंड को पकड़ कर बूर के छेद पर दबाया। तीन चार धक्के में ही लंड की पूरी लंबाई बूर के अंदर हो गई।
रेखा: अमित, सही में जिसने भी तुमसे कहा है ठीक ही कहा है। इस पोज में लंड की ज़्यादा लंबाई बूर के अंदर तक जाती है। आह, सच बहुत मज़ा आ रहा है।
मैं चिकने बदन को सहलाते हुए अपनी पूरी ताक़त से पेलता रहा। मैं रेखा के बारे में जानना चाहता था लेकिन उसने जिस तरह मुझे डांटा, मैं चुप रह कर ही चोदता रहा।
रेखा: बग़ल से दोनों हाथ घुसा कर चूचियों का भी मज़ा लो। मुझे मालूम है कि मेरी चूचियां तुम्हारे साथ पढ़ने वाली संगीता और रचना से ज़्यादा टाईट है। मैं गारंटी के साथ कह सकती हूं, कि वो दोनों चुदवाती है। तुमसे पूछना ही बेकार है कि तुमने उन दोनों में से किसी को चोदा है कि नहीं। अरे यार, सुंदर दिखते हो, कॉलेज के स्वीमिंग चैम्पियन हो, कोशिश करोगे तो आराम से वही दोनों नहीं, कई दूसरी भी तुमसे पट जायेगी।
रेखा: अगर मुझे कमीशन दो, इनाम दो, तो बहुत जल्दी कॉलेज कंपाउंड में रहने वाली औरतों को मालूम पड़ जायेगा कि अमित कुमार झा बहुत बढ़िया चूदाई करता है। उसका लंड 7 इंच से भी ज़्यादा लंबा है, और संगीता की कलाई से ज़्यादा मोटा है।
रेखा की बातों से मेरा एक्साइटमेंट बहुत बढ़ गया। मैंने कस कर 4-5 चांटे चूत्तड़ों पर मारे।
मैं: कुतिया बन कर चुदवा रही हो तो क्या सच में कुतिया ही बन गई हो। अपने को और अरविंद सर को बदनाम करोगी?
मैंने बाडी के नीचे से दोनों हाथों को नीचे घुसाया और मस्त मांसल चूचियों को दबाते हुए चुदाई करने लगा।
रेखा: नहीं यार इतनी बेवकूफ नहीं हूं, कि तुम्हें इतनी आसानी से छोड़ दूंगी। अभी तुम यहां 10 महीने और हो। पूरी तरह से चूस कर ही तुम्हें जाने दूंगी। तैयार रह, जल्दी सिर्फ़ लड़कियां ही नहीं औरतें भी तुम्हारे आगे पीछे घूमेंगी। अमित बहुत मज़ा दे रहे हो यार।
हमारे जैसे लड़के के लिए इससे ज़्यादा तारीफ़ और क्या हो सकती है, कि 8 साल से चुदवा रही औरत मेरी चुदाई की तारीफ़ कर रही थी। मैंने उसे खुश करने के लिए कहा-
मैं: मेरी प्यारी रेखा रानी, तुम मेरी पहली प्रेमिका, पहली घरवाली हो, और जब तक देहरादून में रहूंगा, मेरा लंड सिर्फ़ इसी प्यारी बूर में घुसेगा।
उसके बाद हमने 5-7 मिनट चुप-चाप चुदाई की। पहली राउंड की चुदाई में रेखा ने कुछ ही शब्द बोले होंगे। लेकिन कुतिया बन कर चुदवाने में साली बहुत बोल रही थी।
रेखा: मेरा अपना घर मेरठ में है। मेरे बाबू जी एक स्कूल मास्टर थे। उनका दो ही काम था पढ़ाना और मां को चोदना। मेरी मां ने 7 बच्चों को जन्म दिया। 3 बहन और 4 भाई। मेरा नंबर 5 वां है। बहनों में सबसे छोटी हूं। हम बच्चे मां से मज़ाक-मज़ाक में पूछ लेते थे कि क्या उन्हें मालूम था कि उनके किस बच्चे का बाप कौन था। तो मां बाबू जी के तरफ़ इशारा करके बोलती कि हम सभी नमूनों को एक ही आदमी, हमारे बाबू जी ने ही बनाया था। तुम ही बोलो, जो औरत शादी के एक साल के बाद से हर डेढ़ साल पर बच्चा पैदा करती रही, उसे दूसरा कौन चोदता?
मैं जो जानना चाहता था रेखा ख़ुद बताने लगी थी।
मैं: लगता है कि तुम्हारी मां भी तुम्हारे जैसे ही सुंदर थी।
रेखा: मेरी जैसी नहीं मुझसे कहीं ज़्यादा सुंदर थी। लेकिन बाबू जी उसके पेट में बच्चा डालते रहे और 30 साल में ही वो 50 से ज़्यादा दिखने लगी। मां को छोड़ो, में अपनी बता रही हूं। सबसे बढ़ी दीदी सपना की शादी सही समय पर हुई और उनकी किस्मत ख़राब। सुहाग रात की सुबह ही उनका पीरियड शुरू हो गया। दीदी ने सुहाग रात नहीं मनाया, लेकिन जीजा जी ने मेरे साथ जम कर सुहाग रात मनाया।
रेखा: मैं कुंवारी थी और पहली ही रात में हमने तीन बार चुदवाया। फिर मैं रेगुलरली जीजा जी से चुदवाने लगी। तीन साल गुजर गए। मुझसे बड़ी बहन की शादी हो गई और शादी होने के बाद उसने मुझे धमकाया कि मैं अगर गलती से भी मैं उसके घरवाले से मिली, तो वो ज़हर खा कर मर जायेगी।
मैं: इसका मतलब कि सबको मालूम था कि रेखा नाम की कुतिया अपनी दीदी का ही काट रही थी, और जीजा जी से चुदवा रही है।
इस बात-चीत में हमारी चुदाई चल रही थी।
रेखा: हमें, घर में सबको मालूम हो गया था कि मैं जीजा जी की रखैल थी। फिर भी किसी ने कभी मुझे रोका टोका नहीं। ना ही मैंने ही जीजा जी से चुदवाना बंद किया। छोटी दीदी के शादी के साल भर के अंदर ही बड़ी दीदी मर गई। अब भी घर वाले, गांव वाले कहते है कि दीदी मेरे कारण ही मर गई। लेकिन मैं बहुत मजबूर थी। जीजा जी से अलग होना मेरे लिए संभव नहीं था। और जानते हो मेरा जीजा जी कौन थे?
मैं: कौन, अरविंद सर!
रेखा: बहुत बुद्धिमान हो, तुरंत समझ गये। मैं अरविंद को बहुत प्यार करती हूं। मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि तुमसे एक बार ही मिली और मैंने पहली ही मुलाक़ात में तुमसे चुदवा भी लिया। अब अरविंद को क्या ज़बाब दूंगी?
मैं: सर से साफ़-साफ़ कह देना कि 11 साल पहले उन्होंने किसी के साथ शादी करने के बाद भी किसी दूसरी कुंवारी लड़की के साथ सुहागरात मनाई थी, उसी तरह आज किसी कुंवारे लड़के ने तुम्हारे साथ सुहाग रात मना ली। रेखा रानी, विश्वास रखो, अरविंद सर हम दोनों के प्यार के बीच नहीं आयेंगे।
रेखा: पहली बार एक औरत को चोद रहे हो इसलिए पागल हो रहे हो। तैयार रहना किसी भी दिन कॉलेज से तुम्हें निकाल दिया जायेगा। और मैं यहां से कहीं और चली जाउंगी। उफ़ अमित बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा है। और जमा-जमा कर चोदो।
और उसके बाद मैं रेखा की चूचियों को दोनों हाथों से मसलते हुए अपनी पूरी ताक़त से पेलता रहा। कुछ देर के बाद रेखा ज़ोर से चिल्ला कर बोली,
“उफ़ अमित, तुमने मुझे स्वर्ग की सैर करवा दी। बहुत मज़ा आया यार। आहह, मज़ा आ गया। इस रंडी को तुमने पूरा ठंडा कर दिया।”
मैं भी झड़ रहा था। फिर भी धक्का लगाता रहा।
मैं: थैंक्यू वेरी मच रेखा। तुमने जो ख़ुशी मुझे दी है। उस के बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था। तुमने कहा कि मैंने तुम्हें स्वर्ग की सैर करवायी, लेकिन रेखा, मेरी जन्नत तो तुम ही हो। यह अमित हर समय तुम्हारी सेवा में हाज़िर है। कभी भी आज़मा लेना।
रेखा के चेहरे पर भी ख़ुशी थी मुस्कुराहट थी लेकिन मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। “बिन मांगे मोती मिले”, ये कहावत सैकड़ों बार सुनी होगी। लेकिन उस दिन सच में मुझे बिन मांगे ही मोतियों का ख़ज़ाना मिल गया था। मैंने रेखा को खड़ा किया और हम दोनों ने एक-दूसरे को बेतहाशा जहां-तहां चूमा।
मैं: रेखा, मैं नहीं पुछूंगा कि तुम मुझे फिर कब बुलाओगी। लेकिन मैं हर समय तुम्हारे संदेश का इंतज़ार करता रहूंगा। तुमने मुझे एक नई ज़िंदगी दी है। अब मैं जाता हूं, गार्ड इंतज़ार कर रहा होगा।
गार्ड का नाम सुनते ही रेखा को शायद ग़ुस्सा आ गया। उसने लंड को ज़ोर से पकड़ कर मरोड़ा।
रेखा: कुत्ते, मादरचोद तू गार्ड को यह बोल कर आया कि रेखा मैडम को चोदने जा रहा हूं?
मैंने दोनों हाथों से उसके कमर को पकड़ कर अपनी ओर खींचा। वो बहुत कसमसाती रही। फिर भी मैंने उसे बहुत चूमा।
मैं: मेरी प्यारी रेखा रानी, मैं उतना बुद्धू नहीं कि खुद ही अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारूंगा। मैंने उससे इतना ही कहा कि किसी ने मुझे चोदने के लिए बुलाया है। लेकिन मैंने किसी का नाम नहीं लिया। रानी विश्वास रखो, जीभ काट लूंगा, लेकिन कभी किसी को यह मालूम नहीं पड़ेगा कि मैंने रेखा सिंह को चोदा है।
रेखा फिर प्यार से लंड को सहलाने लगी थी। रेखा ने गार्ड के बारे में पूछा तो मैंने बता दिया कि रात की ड्यूटी में बनबारी था। रेखा सभी गार्ड के बारे में जानती थी।
रेखा: कॉलेज के सभी गार्ड बहुत हरामी है। यहां कॉलेज में 56 टीचर है। दूसरे काम करने वालों को भी मिला लें तो कुल मिला कर 120 लोग यहां काम करते हैं। सभी 56 टीचर कॉलेज कंपाउंड में ही रहते हैं। साथ में 22 स्टाफ़ भी रहते हैं। और अमित, तुम विश्वास नहीं करोगे, 15 टीचर के घरों की औरतों को छोड़ कर सभी की सभी कॉलेज के स्टूडेंट्स से चुदवाती हैं।
रेखा: तुम्हारे जैसे बढ़िया चोदने वाले कुछ ही लड़के होंगे, लेकिन औरतें बढ़िया चुदाई के लिए नहीं चुदवाती है, वे स्टूडेंट्स से बढ़िया क़ीमत लेने के लिए चुदवाती है। जिस औरत को बाहर होटल या दूसरे अड्डे पर 500 भी नहीं मिलेगा, वैसी औरतों को चोदने के लिए तुम लोग 2-3 हज़ार देते हो।
रेखा: 4 साल पहले बनबारी ही नहीं दूसरे गार्ड भी मेरे पास खुशामद करने आए थे कि मैं भी उनकी रंडी हो जाऊं। लेकिन मैंने सभी को गाली देकर भगा दिया। सभी गार्ड के पास कम से कम 10 माल तो है ही। तुम जिस उम्र की माल चाहोगे बनबारी या दूसरे गार्ड ला देंगें। तुम्हारे रुम में ही माल आ जायेगी।
मैंने रेखा को बहुत चूमा, चूची दबायी। मैं जानता तो था फिर भी मैंने पूछा।
मैं: रंडियों को रुपया मिलता है, लेकिन गार्ड को क्या फायदा होता है?
रेखा: हरामियों को कमिशन मिलता है। जितना रंडियों को दोगे, उसका 10% तुम्हें गार्ड को भी देना पड़ेगा। ये मादरचोद, रंडियों से भी कमीशन लेते हैं।
मैंने बूर को जोर से मसला।
मैं: मुझे हर हमेशा यही प्यारी रंडी चाहिए। रेखा, मैं विनोद या शेखर जैसा बहुत अमीर नहीं हूं। लेकिन अगर मैं कभी आपके किसी काम आ सका तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी।
रेखा: मुझे बहुत ख़ुशी है कि मैं तुम्हारी पहली रंडी हूं। लेकिन तुम अपनी मां को चोदने से पहले और भी दूसरी रंडियों को चोद कर चुदाई का पूरा एक्सपीरियंस ले लो। याद रखो, हर औरत को तुम एक तरह से ही खुश नहीं कर सकते। सभी की पसंद अलग-अलग होती है। मुझे तुम्हारे लंड का धक्का ही पसंद है। अभी चार भी नहीं बजे। मुझे एक बार और चाहिए लेकिन इस बार मैं तुम्हें चोदूंगी।
रेखा की बातें सुन कर मुझे लगा कि मुझसे ज़्यादा भाग्यशाली और कोई नहीं। रेखा ने मुझे सोफ़ा पर लेटने के लिए कहा। मैं लेट गया।
रेखा: पिछले 4 घंटे से ज़्यादा तुम मुझे परेशान कर रहे हो। अब किसी शरीफ़ बच्चे जैसे चुप-चाप लेटे रहो और अपनी मां को तंग मत करो। तुम्हारी मां का नाम क्या है?
मैं: इंदिरा।
रेखा: अब से तुम्हारे लिए मैं रेखा नहीं तुम्हारी मां इंदिरा हूं। या तो मुझे मां कह कर पुकारो, या फिर इंदिरा कहो, रेखा नहीं। अब चुप-चाप लेटे रहो और मां जो कर रही है उसे करने दो।
मैं लेटा रहा और रेखा ने पांव से लेकर माथे तक मेरे अंग-अंग को चूमा। जांघों पर, लंड पर, छाती पर, और आख़िर में मेरे मुंह पर चूचियों को खूब रगड़ा। दोनों निपल्स को चुसवाया भी और चूची चुसवाते समय बार-बार मुझे बेटा, प्यारा बेटा बोलती रही। उसने ऐसा क़रीब 20 मिनट किया, और उसके बाद मेरी कमर के दोनों तरफ़ एक-एक पांव को रख कर खड़ी हो गई।
रेखा: बेटा, लंड जैसा टाईट है वैसा ही रहना चाहिए। तेरी मां की बूर को बेटे का यह मस्त लंड बहुत पसंद आयेगा।
अपनी ख़ूबसूरती को बिखेरती हुई रेखा मेरी आंखों के सामने थी। औरत के बदन में कहीं भी ढीलापन नहीं था। अरविंद सर इस औरत को 11-12 साल से चोद रहे थे, और पहली ही मुलाक़ात में इसने मुझसे चुदवा लिया। रेखा ने दोनों घुटनों पर हाथ रखा और धीरे-धीरे नीचे होने लगी। मैं यह सोचता रहा कि इस खूबसूरत औरत ने पहली ही मुलाक़ात में मुझसे क्यों चुदवाया?
(उस दिन ही शाम को अमित ने रेखा का पांव छू कर उससे बात करने, उसके घर आने की इच्छा प्रकट की। ऐसा नहीं कि कॉलेज के दूसरे लड़कों ने रेखा से पहले बात नहीं की हो। अक्सर पार्टियों में, कॉलेज के कार्यक्रम में लड़कों से बात होती थी। लेकिन अक्सर पति, अरविंद साथ रहता था। 8 साल में यह पहला मौक़ा था जब किसी लड़के ने उससे बात करने की, उसके घर आने की इच्छा जताई।
रेखा ने भी पहली ही बार किसी लड़के से उसके होस्टल के बारे में पूछा था। रेखा को अमित की हिम्मत बहुत पसंद आई जब उसने सिर्फ़ अपने होस्टल का ही नाम नहीं, रुम नंबर भी बता दिया। फिर वो बिना कुछ बोले वहां से चल दी। थोड़ी ही दूर जाकर उसने घूम कर देखा तो पाया कि अमित उसे ही घूर रहा था।
रेखा ने सही अंदाज़ा लगाया कि अमित 5 फ़ीट 10 इंच लम्बा है और उसका वजन 70-72 किलो होगा। अमित के चौड़े कंधे और उभरी हुई छाती से अंदाज़ा लगाया कि ये लड़का स्पोर्ट्स में भाग लेता है। अचानक उसे याद आया,
“अरे, ये तो कॉलेज का स्वीमिंग चैम्पियन है।”
और यह याद आते ही रेखा के चेहरे पर मुस्कुराहट दौड़ गई। रेखा ने फ़ैसला कर लिया कि वो भी चोरी का गुड़ खा कर देखेगी। घर आई तो उसने दवाई का बक्सा खोला। स्लीपिंग पिल्स को देख कर खुश हो गई। रात का काम ख़त्म कर जब नौकरानी जाने लगी तो 200 रुपये के साथ एक गुलाबी पन्ने पर लिखा हुआ चिट दिया और धीरे से बोली,
“रमा, मेरी इज़्ज़त तेरे हाथ में है। लड़के जब खाना खा रहे हो तब ये चिट रुम में डाल देना।” रमा ने जवाब दिया, “दीदी, आप जब यहां नहीं रहती है तो आप की जगह मुझे ही संभालना पड़ता है। हर रात अरविंद साहब चोदते हैं। आप आराम से चुदवाओ, किसी को कभी खबर नहीं होगी।”
रेखा को पहली बार मालूम हुआ कि उसका पति इस शादी शुदा औरत को सालों से चोद रहा था।
एक तरफ़ रमा ने किसी और से रुम में चिट रखवाया और दूसरी तरफ़ रेखा ने रात का खाना खिलाने के बाद पति को कॉफी के साथ नींद की गोली खिला दी।)
मैंने बहुत सोचा लेकिन उसे समझ नहीं आया कि कैसे एक बार बात करने पर ही रेखा ने सिर्फ़ घर ही नहीं बुलाया, 5 घंटे के अंदर तीसरी बार चुदाई कर रही थी। तभी रेखा की आवाज़ ने उसकी सोच को डिस्टर्ब कर दिया।
रेखा: बेटा अमित, किस की सोच में खोये हो? बहन को बाद में पटा कर चोदना, देख अभी तेरी मां इंदिरा की मस्त चूत तेरे लंड को चूमने वाली है, लंड को मां की चूत के अंदर जाने दे, चोद अपनी मां को।
अमित ने ध्यान से देखा। घुटनों पर हाथ रखे हुए रेखा बैठती जा रही थी। उसने जांघों को ऐसा फैलाया था कि बूर की फांक खुल गई थी। अंदर का रसीला गुलाबी माल देख कर लंड पहले से भी ज़्यादा टाईट हो गया। अमित ने लंड को जड़ से पकड़ कर सीधा रखा।
अमित: आजा मेरी प्यारी मां, ये तेरा बेटा किसी कुत्ते की तरह अपनी कुतिया मां की बूर में लंड पेलने को बेक़रार है। तेरी हरामजादी बेटी को मैं क्या चोदूंगा। उस कुतिया की पिल्ली अनीता को भाई का जवान लंड नहीं, बाप का ढीला लंड ही पसंद है। तेरी प्यारी बेटी अपने बाप से ही चुदवा रही है, लेकिन मां तू चिंता मत कर, तेरी बूर की गर्मी निकालने के लिए तेरा ये बेटा अमित ही काफ़ी है।
रेखा की ख़ूबसूरती और मस्त बदन के नशे में मदहोश होकर अमित ने वो बात कह दी जो उसे नहीं कहनी चाहिए थी। जैसे ही बूर की ओंठ ने लंड को छुआ, रेखा ने ज़ोर से नीचे की ओर धक्का मारा। बूर लंड को निगलती चली गई।
अमित: हरामजादी, तूने मेरा लंड तोड़ डाला। उफ़ रेखा, तुम शायद स्वर्ग की अप्सरा से भी ज़्यादा खूबसूरत हो।
रेखा ने दोनों हाथों से अमित की छाती को पकड़ लिया था और बूर को अब लंड के उपर नीचे कर रही थी।
रेखा: अमित, सच-सच बताओ, क्या तुम कोई वशीकरण मंत्र जानते हो? पहली बार मुझसे बात की और 8 घंटा भी नहीं गुजरा तुम मेरे अंदर घुस गये। अब मैं तुम्हारे अरविंद सर को क्या मुंह दिखाऊंगी। 12 साल से एक ही आदमी से चुदवा रही थी तुम्हारे साथ की पहली मुलाक़ात ने मेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया।
रेखा की आंखों में एक दुख था लेकिन गालों की लाली बता रही थी कि उसे बहुत मज़ा आ रहा था।
