मां को चोदने के लिए लोगों ने उकसाया 2

माँ बेटा

जिस दिन अमित ने रेखा से मिलने और उसके घर आने की बात की, उसी रात रेखा अपने ही घर में अपने लड़के से तीसरी बार चुदवा रही थी। वास्तव में वहीं अमित को ऊपर से चोद रही थी। रेखा ने मज़ाक में कहा था लेकिन मैंने निश्चय किया कि अब से चाहे अकेले हों या दूसरे के सामने, मैं रेखा को मां ही कह कर पुकारूंगा।

मैं: अमित की प्यारी कुतिया, अब तुम्हें अच्छा लगे या बुरा, अब से मैं हर हमेशा तुम्हें मां ही बोलूंगा।

रेखा ने उपर से एक जोरदार धक्का मारा।

रेखा: अपने अरविंद सर और दोस्तों के सामने भी!

मैं: हां मेरी प्यारी मां, सबके सामने। मेरे मां-बाबू जी हर टर्म में एक बार ज़रूर आते हैं। इस बार वो जब आयेंगे तो उनके सामने भी अपनी इस खूबसूरत रंडी को मां ही बोलूंगा। मां, तुम कहती हो कि अपने इस कॉलेज कंपाउंड में बहुत सी रंडियां है, तो तुम पता लगवाओ, अरविंद सर भी ज़रूर किसी कुतिया के बूर में घुसे रहते होंगे। फिर भी अरविंद सर को अगर मालूम पड़ा कि मैं तुम्हें चोदता हूं, तो एक महीना के अंदर मैं इन्दिरा को यहां बुलाऊंगा।

मैं: मैं अपनी मां को बढ़िया से जानता हूं। अपने बेटे की ख़ुशी के लिए वो अरविंद सर से ज़रूर चुदवा लेगी। एक रुम में अरविंद मेरी पुरानी मां को चोदेगा, और मैं उसके ही बग़ल में अपनी नई मां इस इन्दिरा को चोदूंगा। मैं भी तो देखूं कि आख़िर अरविंद कैसा चोदता है जो मेरी प्यारी रेखा मां एक उसी कुत्ते से चुदवा रही है। इन्दिरा, अब सर मुझे कॉलेज से निकाल दें या जेल में डाल दें, मां मैं तुम्हें चोदता रहूंगा।

मेरी बातों से रेखा ज़रूर खुश हुई होगी। दोनों हाथों से मेरी चेस्ट को रगड़ते हुए जोर जोर से धक्का मारती रही। मैं उसकी ख़ूबसूरती को निहारता रहा और पहले दो राउंड जैसा पहले रेखा झड़ी और डेढ़ दो मिनट बाद मैं भी झड़ गया। हम दोनों हांफ रहे थे। थोड़ी देर बाद-

रेखा: बेटा, आज तो तू गया। मादरचोद कितना चोदा तुमने। हमने चार बजे ये तीसरी राउंड शुरु की थी, और अब साढ़े पांच बज रहे है।

मैं: मां, मैंने दोनों बार तुम्हें 40-45 मिनट ही चोदा, कुतिया तुमने ही डेढ़ घंटा चोदा। रानी तैयार रहना, आज रात फिर तेरा ये बेटा अपनी मां को चोदने आयेगा।

रेखा ने मुझे ढकेला, मैं फ़्लोर पर खड़ा था और उसने फुर्ती से मेरे दोनों पैर पकड़ लिए।

रेखा: मालूम नहीं, आज अचानक इतनी गरमी कैसे आ गई कि तुम्हें घर बुला कर चुदवा ली। मुझमें तेरे जैसी हिम्मत नहीं है। पिछली रात जैसा संदेश दिया था जल्दी वैसा संदेश जब दूंगी तभी आना। लेकिन तैयार रहो सिर्फ़ तेरे ही क्लास की लड़कियां ही नहीं, दूसरी लड़कियां और उनकी मां भी तुमसे तेरे लंड की भीख मांगेंगीं। अमित, तुम्हारे मुंह पर नहीं बोल रही हूं। 11-12 साल से चुद रही हूं, लेकिन आज पहली बार मालूम पड़ा कि चुदाई का असल सुख क्या होता है। जल्दी से वापस रुम में जाओ।

रेखा वैसे ही नंगी खड़ी रही। मैंने अपना कपड़ा पहना और रेखा को चूम कर, चूचियों को दबा कर, उनके घर से निकल गया। रेखा नंगी ही मुझे घर के मेन गेट पर छोड़ने आई। मैंने एक बार और चूमा और होस्टल की ओर चल दिया। चारों तरफ़ सुबह की रोशनी फैलने लगी थी।

कई स्टाफ़, टीचर रास्ते में मिले। मैंने उन्हें प्रणाम किया, और पूछने पर बताया कि सुबह की सैर कर रहा था। क़रीब-क़रीब सभी ने एक बात ही कही, “बेटा अमित, हम सब समझते हैं, तुम अच्छे स्टूडेंट हो, पढ़ाई पर ध्यान दो। इन औरतों का क्या, तुम्हारे जैसे अमीर लड़कों से रुपया ऐंठती है। कभी रंडी-बाजी करते पकड़े गये तो कॉलेज से निकाल दिए जाओगे।”

मैंने झूठी सफ़ाई दी।

मैं: सर, मैं किसी को चोदने नहीं गया था। आप बनबारी गॉर्ड से पूछ लीजिए। मैं एक घंटा पहले ही होस्टल से निकला था।

बोलने को मैंने अपनी सफ़ाई दी, लेकिन डर भी था कि किसी ने अगर गार्ड से पूछ-ताछ की तो मैं मारा गया। मैं गार्ड के पास पहुंचा लेकिन इधर-उधर, आस-पास कुछ दूसरे स्टूडेंट्स थे। मैं गार्ड के पास से गुजरा तो उसने मुझे ग़ुस्से से देखा।

“ड्यूटी ख़त्म होने के बाद मेरे रुम में आना, बहुत ज़रूरी काम है।” धीरे से बोल कर मैं अपने रुम में आ गया। रेखा और उसके साथ की चूदाई के बारे में सोच-सोच कर मैं फिर बहुत गर्म हो गया, और मैंने सारे कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया। मैं फ़्रेश हुआ। बाथरूम में नहाने के लिए घुसने ही वाला था कि डोर पर नॉक हुआ।

हम सीनियर अक्सर रुम में नंगे रहते थे। मैं भी नंगा ही था और वैसा ही डोर खोला। मैंने सोचा था कि मेरा कोई दोस्त होगा, लेकिन नहीं, बनबारी गार्ड था। वो जल्दी से रुम में घुसा। उसने दरवाज़ा अंदर से बंद किया। मैं कुछ बोलता लेकिन उससे पहले उसने दोनों हाथों से मेरा फनफनाया हुआ लंड पकड़ लिया।

बनबारी: अमित बाबा, आपका लंड तो ऐसा है कि औरत आपसे चुदवाने के लिए रुपया मांगेगी नहीं, रुपया देंगी। इतना लेट कैसे हो गया? वार्डन देख लेते तो बहुत मुश्किल हो जाती।

मैंने थोड़ा अपना भाव बढ़ाने का सोचा।

मैं: बहुत ग़लत जगह फंस गया यार। एक 30-32 साल की औरत ने चोदने बुलाया था। नाम नहीं बताऊंगा, एक दुकानदार की घरवाली है। साली को मेरी चुदाई इतनी पसंद आई कि उसने अपनी कुंवारी बेटी और 23-24 साल की बहु को भी बुला लिया, और तीनों ने मेरी हालत ख़राब कर दी।

मैं: आज मैंने पहली बार चुदाई की लेकिन बनबारी काका, मां, बेटी और बहु को एक-दूसरे के सामने चोद कर मज़ा आ गया। हरामजादी ने फिर बुलाया है, लेकिन उसके घर इतनी जल्दी नहीं दुबारा नहीं जाऊंगा। बनबारी क्या कर रहे हो? यह ठीक नहीं।

बनबारी मेरे सामने अपने घुटनों के बल पर बैठ गया। फिर दोनों हाथों से लंड को पकड़ कर चूसने लगा। मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। एक 43-44 साल का अधेड़ आदमी मेरे जैसे लड़के का लंड चूसने लगा था। रात में रेखा ने भी थोड़ी देर चूसा था, लेकिन ये आदमी जैसा चूस रहा था मुझे ज़्यादा मज़ा आ रहा था। बनबारी को अपना काम बहुत बढ़िया से आता था। रेखा ने उपर से मुझे चोदा तो क़रीब डेढ़ घंटा के बाद झंडा था।

लेकिन इस आदमी ने इतना चुभला-चुभला कर चूसा, कि 25 मिनट की चुसाई के बाद ही मैं झड़ने लगा और जोश में आकर मैंने उसके माथे को अपने लंड पर पूरा दबा दिया। लंड का सारा रस सीधा उसके गले के अंदर चला गया। फिर भी वह लंड को चूसता ही रहा। आखिर जब उसने रस का आख़िरी बूंद तक चूस ली, तब उसने लंड को मुंह के बाहर किया। बनबारी ने लंड को चारों तरफ़ से चाटा और खड़ा हो गया।

बनबारी: साहब, आज रात अपने रूम में ही रहना। मौक़ा निकाल कर दिन में ही सो लीजिएगा। क्योंकि रात में जो माल आपके पास आएगी वो आपको एक मिनट भी आराम नहीं करने देगी।

मैं: बनबारी, रात वाली तीनों माल ने लंड चूसा था। लेकिन तुमने जो चूस कर मज़ा दिया है, वो मज़ा किसी को भी चोद कर नहीं आया था। तुम ही बीच-बीच में आकर मुझे ठंडा कर दिया करो। मैं तुम्हें बढ़िया इनाम दूंगा। और अगर अरविंद सर की घरवाली रेखा मैडम को मुझसे चुदवा दो तो मैं तुम्हें 200 नहीं 2000 दूंगा।

मैं बनबारी से रेखा के बारे में जानना चाहता था। उसने भी वही जवाब दिया जो रेखा ने कहा था। बनबारी को मेरा लंड बहुत पसंद आ गया था। वह ढीले लंड को भी सहला रहा था।

बनबारी: किस कुतिया का नाम ले लिया साहब। साली को अपने रुप रंग पर बहुत घमंड है। मैंने और दूसरे सभी गार्ड ने उसकी कितनी ख़ुशामद की, लेकिन साली धंधा करने के लिए मानती ही नहीं है। आज शाम ही आपके दोस्त विनोद साहब ने कहा है कि रेखा को एक बार चोदने के लिए बीस-पच्चीस हज़ार तक देने को तैयार है। मुझे सिर्फ़ रेखा से बात करने के लिए 500 दिया है। उसको भूल जाइये साहब, मैं आपके लिए यहां की सबसे बढ़िया-बढ़िया माल को लाऊंगा।

बनबारी: कल ही एक ख़ास औरत से बात करूंगा। उसे एक लम्बी चुदाई करने वाले की तलाश है। वो स्टूडेंट्स के रुम में नहीं जाती है, लड़के को कहीं और बुलाती है। वो पहले ख़ुद नहीं चुदवायेगी। उसके सामने ही आपको किसी और को चोदना होगा। अगर आपकी चुदाई उसे पसंद आई, तभी आपसे चुदवायेगी। चार साल पहले एक लड़का था। उसका भी नाम विनोद था। तीन साल तक लगातार औरत ने उससे चुदवाया था। तीन दिन पहले मिली थी। उस लड़के के जाने के बाद से उसने किसी से भी नहीं चुदवाया है। कॉलेज की जवान लड़कियों को बर्बाद करती है।

मुझे उसकी किसी और बात से कोई मतलब नहीं था। मैं यही जान कर खुश था कि मेरी रेखा, मेरी नई मां बिकाऊ नहीं है। मैंने बनबारी से कहा कि रात में रुम में ही रहूंगा। मैंने उसे 500 रुपया दिया। उसने लंड को 2-3 मिनट और चूसा और उसके बाद बाहर चला गया। रात भर मैं एक मिनट भी नहीं सोया था लेकिन रेखा की ख़ूबसूरती और चुदाई की उसकी ख़ुशी ने दिन भर मुझे तरो-ताज़ा बनाये रखा।

फ़र्स्ट पीरियड में क्लास में घुसा ही था कि एक मिठी आवाज़ आई, “क्या बात है अमित, आज कुछ ज़्यादा ही चमक रहे हो? क्या हुआ?”

मैंने नज़र घुमाकर देखा, मेरी क्लासमेट रचना थी। एक क्लास में थे तो बात-चीत हो जाती थी। लेकिन हम दोस्त नहीं थे। मैंने उसकी बात का जवाब देता, उससे पहले संगीता बोली, “अमित का चेहरा चमकेगा ही, पिछली शाम ही साहब ने यहां की ब्यूटी क्वीन रेखा सिंह से बात की थी।”

इन सभी को जलन थी कि मैंने रेखा से बात की। अगर इन्हें यह मालूम हो जाता कि रेखा ने रात भर मुझ से चुदवाया, तो सभी को दिल का दौरा पड़ जाता। मैं विनोद के बग़ल में अपने सीट पर बैठा। मैं ने लाऊडली जवाब दिया।

मैं: रचना मैडम, चेहरा इसलिए चमक रहा है कि रात सपने में एक स्वर्ग की अप्सरा ने कहा कि सुबह-सुबह खूबसूरत रचना मुझसे बात करेगी और शाम को रेखा मैडम ने कहा कि विषैला सांप के काटने से कोई बच भी जाये, लेकिन संगीता के काटने से कोई नहीं बच सकता। इसलिए मेरी मां मुझे माफ़ करो, मुझे इतनी जल्दी नहीं मरना।

संगीता स्कूल के हेडमास्टर की छोटी बेटी थी। संगीता को ग़ुस्सा आना लाज़िमी था।

संगीता: बेटा, अब तो तू गया। तेरी रेखा मां भी तुम्हें नहीं बचा पायेगी।

“ कीप क्वाईट”, एक रौबदार आवाज़ गूंजी। अरविंद सर क्लास के अंदर आये।

जिस औरत रेखा को मैंने रात भर चोदा सुबह का पहला पीरियड उसी के पति अरविंद सर का था। उन्होंने एक बार मेरी ओर घूर कर देखा।

अरविंद: अमित, मेरे केबिन में आकर मिलो।

अमित: यस सर।

बोलने को मैंने यस सर कह दिया, लेकिन डर से मेरा हाल ख़राब हो गया।

विनोद: सर को मालूम हो गया है कि तुम उनकी घरवाली से मिलना चाहते थे। बेटा, अब तू काम से गया। ये आदमी तेरा रिज़ल्ट ख़राब कर देगा।

अरविंद को सिर्फ़ यही नहीं मालूम हुआ कि अमित ने रेखा से बात की थी। उसने दोनों की तीसरी राउंड की पूरी चुदाई भी देखी। क़रीब 2 घंटा एक कोने में खड़ा होकर उसने देखा कि उसकी घरवाली 12 साल बाद भी पहले जैसी ही चुदासी और मस्तानी थी। रेखा ने उपर से अमित को चोदा। दोनों सिर्फ़ एक बार ही झंडे लेकिन घरवाली की चुदाई देखते-देखते अरविंद तीन बार झड़ गया।

अमित को मेन गेट तक सी-आफ करके जब रेखा अंदर घुसी तो देखा कि अरविंद सामने खड़ा था। पहले तो रेखा बहुत डर गई। लेकिन तुरंत ही उसने अपने को संभाला। उसने चार्ज किया-

रेखा: तुम्हारे सामने तुम्हारा एक स्टूडेंट तुम्हारी घरवाली को चोद रहा था। उसे मारने या डांटने के बदले कोने में खड़ा होकर लौड़ा हिला रहे थे। घरवाली को दूसरे से चुदवाते देख बहुत मज़ा आ रहा था ना? मुझे तो तुम्हारे सामने दूसरे से चुदवाते में बहुत ही ज़्यादा मज़ा आया। और क्या स्टामिना है छोकरे में।

रेखा: पहले तुम्हारे बग़ल में बूर चाटने के बाद 50 मिनट चोदा। मेरा जी नहीं भरा तो सोफ़ा पर कुतिया बना कर आधे घंटे से ज़्यादा कुत्ते जैसा बूर चाटा और फिर 50 मिनट चोदा। हम दोनों को और चाहिए था तो आख़िर में मैंने उसे चोदा। तुमने तो देखा ही उसने डेढ़ घंटा संभाला।

अरविंद ये सोच रहा था कि रेखा को नहीं मालूम था कि वो चुदाई देख रहा था। लेकिन रेखा ने उसे बेडरूम से निकलते देख लिया था।

अरविंद: कब से ये रंडीपना चल रहा है? कितना रेट रखा है अपना? कल ही उस मादरचोद को कॉलेज से निकलवा दूंगा।

अरविंद की बात सुन कर रेखा को बहुत ग़ुस्सा आया।

रेखा: मैं आज पहली बार ही तुम्हारे सिवा किसी और के सामने नंगी हुई। लेकिन तुम तो  8 साल से रमा को चोद रहे हो। अगर अमित का तुमने कुछ भी नुक़सान किया तो कल ही सारे कॉलेज को मालूम हो जायेगा कि तुम हेडमास्टर की बेटी संगीता को 2 साल से चोद रहे हो, रमा को  8 साल से चोद रहे हो, और मुझे अमित से चुदवाने के लिए मजबूर किया। मैं तो बदनाम होऊंगी ही, तुम भी कहीं के नहीं रहोगे। मैंने तुम्हारे लिए कितनी बदनामी सही, घरवालों से रिश्ता तोड़ लिया, और तुम शुरु से ही नौकरानी को चोदते रहे। अब मैं भी अमित से बार-बार चुदवाऊंगी।

रेखा का तेवर देखकर 40-42 साल का अरविंद घबरा गया। उसे लग रहा था कि संगीता को चोदने वाली बात किसी और को मालूम नहीं थी, लेकिन रेखा जानती थी। रेखा ने संगीता की चुदाई की बात ऐसे ही कही थी, अंधेरे में तीर चलाया था। लेकिन तीर सही निशाने पर बैठा था।

अरविंद: रेखा रानी, यह ज़रूर है कि मैं दूसरों को चोदता हूं। संगीता को तीन दिन पहले ही चोदा था। लेकिन तुम्हें कैसे मालूम हो गया? मैं यहां की कुछ और औरतों को चोदता हूं, लेकिन प्यार तो सिर्फ़ तुमसे ही करता हूं। मुझे ये देख कर बहुत ही ज़्यादा ग़ुस्सा आया कि किसी और ने मेरी रानी को चोदा। लेकिन अगर तुम कसम खाओ कि अमित के सिवा किसी और से नहीं चुदवाओगी, तो मैं अमित का कुछ नुक़सान नहीं करूंगा। लेकिन आगे से वो तुम्हें सिर्फ़ तभी चोदेगा जब मैं घर में रहूंगा।

रेखा को अपने कानों से सुन कर भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उसने अमित से चुदवाने की परमिशन दे दी थी। लेकिन रेखा अब अपने लिए चुदाई का रास्ता खुला रखना चाहती थी। उसने अरविंद को गले लगा कर चूमा।

रेखा: तुम्हें भी मैं खुली छूट देती हूं कि जिसे चाहे चोदो। अमित सिर्फ़ अगली मई तक है, उसके बाद भी तो मुझे बढ़िया चोदने वाला चाहिए।

अरविंद ने पत्नी को सोफ़ा पर लिटाया और सुबह-सुबह रेखा की बूर में लंड रेल कर चोदने लगा।

अरविंद: ऐसा ही होता है। जब एक बार चुदाई की चसक लग जाती है, तो छूटती नहीं। चलो तुम्हें भी छूट देता हूं। कॉलेज के स्टाफ़ के अलावा तुम जिससे चाहो चुदवाओ। अगले रविवार को तुम्हें शहर ले जाकर कुछ लोगों से मिलाऊंगा। रानी, 12 साल से तुम्हें चोद रहा हूं, तुम्हारे अलावा कम से कम 25 माल को, कॉलेज की लड़कियों को भी चोदा है। लेकिन तुम्हारी जैसी बढ़िया रंडी और कोई नहीं।

उस रात रेखा ने पहली बार चार बार चुदवाया। अरविंद सही में रेखा की अमित के साथ की चुदाई से दुखी नहीं था। वास्तव में अरविंद को लगने लगा था कि 12 साल में उसने रेखा का सब कुछ चूस लिया था। रेखा की बूर ढीली हो चुकी थी। इसके अलावा अरविंद के हाथ में कई और माल आ गई थी, और उन सब में सबसे ख़ास थी हेडमास्टर की 19 साल की बेटी संगीता।

तब तक एक बार ही चोदा था, लेकिन अरविंद को विश्वास था कि रेखा की तरह संगीता भी उसे बहुत पसंद करेगी। अरविंद यह भूल गया था कि जब उसने रेखा को पहली बार चोदा था, उस समय वह 26 साल का ही था, लेकिन संगीता को चोदने के समय 38 साल का हो गया था। संगीता 2 और लोगों से चुदवा चुकी थी। जब क्लास में अमित ने उसे विषैला सांप से भी ख़तरनाक कहा तभी संगीता ने फ़ैसला कर लिया था अपना विषैला ज़हर अमित के लंड को जल्द से जल्द पिलाएगी।

रीसेस में मेस से खाना खाकर रुम में वापस आया तो देखा कि उसके नाम का एक लिफ़ाफ़ा था। अमित ने लिफ़ाफ़ा उठा कर देखा और होंठों से उसे चूमा। लिफ़ाफ़ा चूमते हुए अमित अपना लंड भी सहलाता रहा। यह उसकी मां इन्दिरा की चिट्ठी थी। अमित ने बेड पर बैठ कर लिफ़ाफ़ा खोला और चिट्ठी पढ़ने लगा।

मां ने बच्चे के लिए प्यार भरी बातों के अलावा जो लिखा था, वो था, “बेटा, यह पढ़ कर बहुत बढ़िया लगा कि तुम्हें अपनी बहन की चिंता है कि वो अपने बाप से चुदवा लेगी। क्या पता बाप के अलावा दूसरों से भी चुदवाती हो। मैंने भी अनीता के कई बार नरेंद्र के साथ देखा है। वो लड़का वैसे मुझे अनीता के लिए पसंद है। लेकिन तुम्हारी बहन अभी 3-4 साल और शादी नहीं करेगी। बेटा, आज-कल की लड़कियों के उपर कंट्रोल करने से कोई फ़ायदा नहीं।

वे अगर चुदवाना चाहेगी तो कहीं भी किसी से भी चुदवा लेगी। तू अपना बोल, अभी तक किसी को चोदा है कि नहीं? अगर नहीं चोदा है तो पटा कर चोद, और नहीं पटी सकता है तो माल को ख़रीद कर चोद। या सिर्फ़ अपनी मां को ही चोदने के लिए लौड़े को संभाल कर रखा है? तू अगर मेरा सगा बेटा नहीं होता तो अब तक तेरे घोड़े जैसा लंबा और मोटा लंड बार-बार अपनी बूर के अंदर रखती। बेटा, तेरे सभी राज को राज ही रखूंगी। लेकिन बेटा जिसे भी चोदेगा मुझे उसके बारे में पूरा डिटेल से लिखना। तेरी चूदाई के क़िस्से पढ़ने के लिए बेताब हूं।”

अपनी मां की गंदी चिट्ठी पढ़ते हुए अमित को पता ही नहीं चला कि वो कब नंगा हो गया। चिट्ठी पढ़ते हुए लंड भी हिला रहा था। मां ने यह भी लिखा था कि उसने उसके बैंक अकाउंट में बहुत रुपया भी ट्रांसफ़र कर दिया था।

उसने एक लाईन लिखी थी,

“कुंवारी लड़की, जवान लड़की को सभी चोदना चाहते है, लेकिन असल मज़ा एक-दो बच्चे वाली यानी मेरी जैसी औरत को चोदने में ही आता है। मां को चोदना बहुत बड़ा पाप हैं लेकिन देखें तू अपनी मां को, बहन को पटा कर चोद सकता है कि नहीं। मैं अपनी तरफ़ से तुझसे चुदवाने की कोशिश नहीं करुंगी, और तुझे बता दूं तेरी मां जैसी चुदाई की मस्ती बहुत ही कम औरत दे सकती है।

जल्दी से अपनी चुदाई के बारे में लिख। तेरी मां की चूत चुदवाने के लिए हमेशा गीली रहती है। हां, एक बात और, औरत हो या जवान लड़की, कोई भी खूबसूरत लड़के को नहीं, हिम्मती लड़कों को पसंद करती है। उससे ही चुदवाना चाहती है। तेरी हेडमास्टर की छोटी बेटी संगीता बहुत ही गरम माल है। पिछली बार वो मुझसे चुदाई की बात कर रही थी। उसे भी तेरा बाप पसंद आ गया था। तू उससे मिल, मुझे विश्वास है कि वो तुमसे जल्दी चुदवा लेगी। अपने लंड को अपनी मां की प्यारी बूर का प्यार देना। तेरे लंड की प्यासी मां।”

मैंने चिट्ठी 3-4 बार पढ़ी। मुझे विश्वास नहीं हुआ कि कोई औरत इतना गंदा लिख सकती है। अपने बेटे से इस तरह खुल्लम-खुल्ला चुदवाने की बात कर सकती है। अब मैं जल्दी से जल्दी अपनी मां की बूर में लंड पेलना चाहता था। जी तो कर रहा था कि रेखा के घर जाकर उसे खूब चोदू, लेकिन प्रैकटिकल क्लास थी। फिर मैं रुम बंद कर क्लास में चला गया।

क्लास ख़त्म होने के बाद डरते-डरते मैं अरविंद सर के केबिन में गया। उन्होंने मुझे सामने बैठने के लिए कहा। मैं डर रहा था कि सर क्या पता क्या पूछेंगे, और मैं क्या बोलूंगा। लेकिन उन्होंने ने जो पूछा उसके लिए मैं तैयार नहीं था।

अरविंद: 2 साल पहले एक लड़के ने रेखा को एक लाख देकर चोदना चाहा था। लेकिन रेखा ने मना कर दिया था। तुमने कितना देकर रंडी को चोदा?

मुझे लगा कि रेखा ने चुदाई की बात अपने पति को बता दी थी। लेकिन सर की बात सुन कर मुझे बहुत ग़ुस्सा आ गया।

मैं: सर, मेरी रेखा रंडी नहीं है। आपके साथ उसने ईमानदारी से 12 साल साथ निभाया और आप घर की नौकरानी और कॉलेज की लड़कियों को चोदते हैं। मुझे रेखा बहुत पसंद है। मैंने उसे एक पैसा भी नहीं दिया। मैं रेखा को बहुत प्यार करता हूं। सर, मुझे रेखा को प्यार करने से मत रोकिए।

मुझे भी समझ में नहीं आया कि मुझमें इतनी हिम्मत कहां से आ गई। शायद रेखा की चुदाई और मां की चिट्ठी पढ़ कर मुझमें इतनी हिम्मत आ गई। सर थोड़ी देर मुझे घूरते रहे।

अरविंद: जी तो करता है कि तुम्हें कॉलेज से निकलवा दूं। रेखा को रेप करने के जुर्म में जेल भिजवा दूं। लेकिन उस कुतिया को तू बहुत पसंद आ गया है। लेकिन ये बात कि रेखा तुमसे चुदवाती है, किसी को भी मालूम हुई तो फिर तुम्हारे लिए मुझसे बुरा कोई और नहीं होगा। रेखा की बदनामी नहीं होनी चाहिए। अगले रविवार को लंच हमारे साथ लेना।

रेखा को रात भर चोद कर जितना मज़ा आया था, उससे ज़्यादा मज़ा ये देख कर आया कि रेखा का पति हमारे अरविंद सर मुझसे नाराज़ नहीं थे। मैंने उठ कर सर के दोनों फ़ीट को छूकर प्रणाम किया। अरविंद ने मेरे माथे पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिया, “सदा सुखी रहो”।

मैं: सर, मैंने रेखा को चोदा हैं। लेकिन अब से आपके सामने भी और दूसरों के सामने भी रेखा को “मां” बोलूंगा।

अरविंद ज़ोर से हंसा।

अरविंद: जिसे चोद लिया है उसे मां बोलोगे! मुझे भी मां-बेटे की चुदाई देख कर बहुत मज़ा आयेगा। अब जब हम चुदाई की बात कर रहे हैं तो तुझे एक बात बताता हूं। अपनी मां को नंगा देख कर, उसे चोद कर, उसे दूसरों से चुदवाते देख कर जैसा मज़ा आता है,‌ वैसा मज़ा कोई और कुतिया नहीं दे सकती है। अपनी मां को चोद लिया? उसे चोदना चाहते हो?

अरविंद सर हमें फिजिक्स पढ़ाते थे। बढ़िया टीचर थे। देखने में भी बढ़िया मर्दों वाली पर्सनेलिटी थी। तभी तो कम उम्र की लड़कियां बहुत ही जल्दी उनसे पट जाती थी। सर से चुदवाती थी। मैंने उनकी बहुत ही खूबसूरत पत्नी की चोदा, यह जान कर भी वो मेरे साथ चुदाई की बात कर रहे थे।

मैं: झूठ नहीं बोलूंगा। पहले तो नहीं, लेकिन पिछली रात रेखा मां को चोदने समय पहली बार अपनी मां को भी चोदने का ख़्याल आया। आपने उन्हें देखा होगा। मेरी मां इन्दिरा और मेरी छोटी मां रेखा एक जैसी ही दिखती है। रेखा को देख कर ही मुझे अपनी मां की ज़्यादा याद नहीं आती थी। सर अगर मौक़ा मिला तो अपनी मां को ज़रूर चोदूंगा। आपने अपनी मां को चोदा है?

मेरी बात सुन कर सर दुखी हो गये।

अरविंद: नहीं यार, जब तक ज़िंदा रही उसकी खुशामद करता रहा लेकिन साली ने चोदने नहीं दिया। मेरे सामने नंगी रहती थी, चूची चूसने देती थी, बूर सहलाने देती थी, मेरा लंड सहलाती थी, लेकिन जब चोदने की बात करता था, तो मेरे सामने घर के जवान माली से चुदवाती थी।

मैं: सर, आपकी घरवाली रेखा मां मेरी पहली औरत है। आपने सबसे पहले किसको चोदा?

अरविंद: अपनी बायोलॉजी की टीचर को। क़रीब 4 साल उसे चोदता रहा। फिर घर में जितनी नौकरानी या नौकर रहते थे, उनके घरों की औरतों को चोदता था। मेरी शादी हुई थी रुबी से, लेकिन सुहागरात मनाया उसकी छोटी बहन रेखा से। रेखा से पहले मैं सात माल को चोद चुका था। इस कॉलेज में 14 साल से हूं। घर में जितनी नौकरानी काम करने आई, सभी को चोदा। उसके अलावा मैंने ध्यान दिया है कि कम उम्र की लड़कियां बहुत जल्दी पट जाती है।

मैं: हम लड़कों को भी आपकी पर्सनेलिटी बहुत पसंद है।

अरविंद: नाम मत पूछना, अभी जितनी लड़कियां कॉलेज में पढ़ रही हैं उनमें से मैं पांच को चोद रहा हूं। तीन दिन पहले संगीता को पहली बार चोदा। अमित, रेखा बहुत सुंदर हैं। लेकिन संगीता जैसी बढ़िया चूची और जांघ बहुत ही कम माल की होती है। तुम भी कोशिश करो शायद संगीता तुमसे चुदवा ले। वैसे रचना तुम्हें बहुत पसंद करती है। अमित, रेखा को चोदते रहना है तो उसे कभी बदनाम मत करना। रविवार को दिन का खाना हमारे साथ खाना।

मैं खड़ा हो गया।

मैं: सर, रेखा के साथ प्यार करने का मौक़ा देकर आपने मेरे उपर सबसे बड़ा उपकार किया है। रेखा की चुदाई की कीमत नहीं लेकिन सर आपको कभी मेरी ज़रूरत हो तो बोलिएगा। रेखा को मैं एक गहना देना चाहता हूं। उन्हें क्या पसंद है?

अरविंद: अपनी छोटी मां से ख़ुद ही पूछ लेना। संगीता को पटा कर चोदो और मुझे बताओ कि रेखा बढ़िया रंडी है या संगीता। परसों संगीता को चोदा था लेकिन साली कुंवारी नहीं थी। किसी और से भी चुदवा रही है। अभी जाओ नाश्ता करो।

मैं केबिन से बाहर आ गया। मैं हद से ज़्यादा खुश था। अरविंद सर ने रेखा को चोदते रहने की प्रमीशन देदी थी। कैंटीन में जा कर नाश्ता किया, चाय पिया, और दोस्तों के साथ समय गुज़ारा।

रात के खाना के बाद 11 बजे रात तक पढ़ाई की। मां की चिट्ठी को बार-बार पढ़ा, और मैंने मां को जवाब लिखा। मैंने चिट्ठी की शुरुआत की।

“ दुनिया की सबसे प्यारी बूर की मालकिन को बेटे के घोड़े जैसे लंबे और मोटे लंड का बहुत-बहुत प्यार “

मैंने मां की चिट्ठी का जवाब लिखा। “दुनिया की सबसे प्यारी बूर की मालकिन को बेटे के घोड़े जैसे लंबे और मोटे लंड का बहुत बहुत प्यार। मां, तुम्हारी प्यार से भरी हुई चिट्ठी पढ़ कर मैं तो खुश हुआ ही, तुम्हारा प्यारा लंड अपनी मां की प्यारी बूर में डुबकी लगाने के लिए तड़प रहा है। सच कहता हूं, जब तक तुम्हारे साथ था, तब तक तुम्हें चोदने की चाहत नहीं जगी थी।

लेकिन उस रात दीदी और बाबू जी का बातें सुन कर पहली बार किसी को, दीदी को चोदने का ख़्याल आया। लेकिन होस्टल वापस आया तो विनोद ने कहा कि उसने मां से बहुत खुशामद की लेकिन कुतिया ने बेटे को चोदने नहीं दिया। साली ने बेटे के सामने अपने कुत्ते ड्राईवर से चुदवाया।

अपनी बूर के बदले मां ने अपनी दो सहेलियों को बेटे से चुदवाया, लेकिन मां मैं तुम्हारी किसी सहेली को नहीं, तुम्हें, अपनी मां को ही चोदूंगा, और तुम्हारे आशीर्वाद से पिछली रात ही तेरे बेटे के घोड़े जैसे लंबे और मोटे लंड ने तेरे ही जैसी दिखने वाली खूबसूरत रेखा, एक टीचर की घरवाली की बूर में रात गुजारी। और मां, सर ने अपनी घरवाली को चोदते रहने की परमिशन दे दी है।”

चिट्ठी में मैंने रेखा के साथ की चुदाई के बारे में सब कुछ लिखा।

“मां, रेखा बहुत ही सुंदर हैं, लेकिन अब ज़ब तक अपनी मां की प्यारी बूर में लंड नहीं पेलूंगा, चैन नहीं मिलेगा। रंडी जल्दी से देहरादून आजा, हम दिन रात चुदाई करेंगे। तेरा मादरचोद बेटा।”

मैंने चिट्ठी लिख कर लिफ़ाफ़े में डाली, और डोर पर हल्का नॉक हुआ। मैंने डोर खोला और एक साथ तीन लोग अंदर घुसे। चिट्ठी लिखते-लिखते मैं नंगा हो गया था।

बनबारी: अमित, इन दोनो मां बेटी की जोड़ी बहुत ही खास है।

मैंने देखा कि एक 20-21 साल की जवान औरत के साथ एक 40-42 साल की औरत थी।

औरत: अगर मर्द जैसा चोदोगे तो एक पैसा भी नहीं लूंगी। लेकिन अगर हमें खुश नहीं किया, तो 5-5 हज़ार देना पड़ेगा।

मैं: दूंगा, लेकिन पहले अपना-अपना माल तो दिखाओ। बनवारी, तुम अभी जाओ। मुझे माल को खाने दो।

रेखा के साथ की चुदाई और मां की चिट्ठी ने मुझे बिल्कुल बदल दिया था। बनबारी के सामने ही दोनों नंगी हुई। मानना पड़ेगा, दोनों बहुत मस्त माल थी। मैंने एक के हाथ से दोनों की चूचियों को दबाया। बढ़िया मांसल कड़क माल था। बनबारी बाहर चला गया।

मैं: पहले किसको पेलूं?

लड़की: तुम बेड पर लेट जाओ।

मैं बेड पर लेट गया। लडकी मेरे फ़ेस के पास आई। वो मेरे कंधों को पकड़ कर चिकनी बूर को मेरे होंठ से रगड़ने लगी, और नीचे उसकी मां लंड को चूसने लगी। यह मां को चोदने की कहानी है इसलिए रंडियों की चुदाई के बारे में विस्तार से नहीं लिखूंगा। सुबह 4 बजे बनबारी वापस आया।

औरत: बनबारी, पहले ही क्यों नहीं बताया यार। मादरचोद जितना बढ़िया से और जितनी देर चूसता है, वैसा और किसी ने नहीं किया।

लडकी: अमित ने हमें 2-2 बार चोदा, और हर बार मस्त कर दिया। अमित तैयार रहो, अब तुम्हारे लंड की खैर नहीं है। तैयार रहो, रचना बहुत जल्दी तुमसे चुदवायेगी। मेरा नाम सीमा है‌। वो मेरी खास सहेली है।

मैं: कम से कम रचना को मत बोलना कि मैं रंडी-बाज़ हूं। मैं उसे ख़ुद पटा कर चोदना चाहता हूं।

औरत: असल मर्द हो।

दोनों ना-ना करती रही, फिर भी मैंने दोनों को 5-5 हज़ार दिया और बनबारी को 500 देकर विदा किया। दो रातों में 3 औरतें और तीनों ने सार्टिफिकेट दिया कि मैं बढ़िया चुदाई करता हूं। उन सब के जाने के बाद मैं तीन घंटा सोया, और समय पर क्लास अटेंड किया। क्लास जाते समय मां के स्कूल के पते पर ही चिट्ठी को पोस्ट किया। कॉलेज से वापस आने के बाद मैंने पिछली रात की 2 औरतों, मां और बेटी का चुदाई का पूरा विवरण मां को लिख कर भेजा।

रेखा की चुदाई वाली चिट्ठी 4 पेज की थी और पिछली रात वाली का विवरण 6 पेज में था। मैं जितना गंदा लिख सकता था, लिखा। चिट्ठी में बार-बार लिखा कि बेटे का घोड़ा जैसा मोटा और लंबा लंड अपनी मां इन्दिरा की प्यारी बूर में घुसने के लिए बेताब था।

बनबारी मुझसे रोज़ पूछता था लेकिन मैं मना करता रहा। शनिवार को आधे दिन ही कॉलेज होता था। शाम 4 बजे मैं संगीता के घर पहुंच गया। संगीता अपनी मां के साथ बरामदे में बैठी थी। बिना बुलाए टीचर के घर जाने को ग़लत समझा जाता है। फिर भी अरविंद सर की बात को याद कर मैं वहां पहुंच गया। मुझे देखते ही संगीता खड़ी हो गई।

संगीता: मैं नागिन हूं ना, ज़हरीली नागिन, फिर मेरे पास क्या करने आये हो? जाओ अपनी खूबसूरत रचना और रेखा मां के पास।

मैं मुस्कुराते हुए आगे बढ़ा, और संगीता की मां के पांव को छू कर प्रणाम किया।

मैं: मैडम, बिना बुलाए आया हूं। माफ़ कीजिएगा। आपकी इस बेटी को नागिन नहीं बोलूं तो क्या बोलूं? 5 साल से लड़की से दोस्ती करने की कोशिश कर रहा हूं। लेकिन पता नहीं मुझसे क्या दुश्मनी है?, साली जब भी बोलती है तो हर हमेशा मेरे लिए ज़हर उगलती है।

संगीता: तुमने मुझे विषैला सांप से भी विषैला क्यों कहा?

मैं: रानी, पूरे क्लास के सामने रेखा मैडम का नाम मेरे साथ जोड़ने की क्या ज़रूरत थी? बेकार ही अरविंद सर मुझसे नाराज़ हो जायेंगे। मैडम, आप ही बोलिए, कोई ऐसा है जो मौक़ा मिलने पर रेखा से बात नहीं करेगा? मैंने पहली बार ही उनसे बात की। मेरी मां मुझे माफ़ कर दें। मुझे अपना दोस्त बना ले।

संगीता की मां ने क्या समझा मालूम नहीं। वो अपनी जगह से खड़ी हो गई।

मैडम: मैं चाय बनाने जा रही हूं। तुम भी पिओगे ना?

मैंने हां‌ की। मैडम अंदर की ओर चली गई। मैं झट से संगीता के सामने ज़मीन पर बैठ उसके घुटनों को दबाया।

मैं: संगीता, मुझे समय दो, मैं तुम्हारे साथ अकेले में समय गुज़ारना चाहता हूं।

संगीता: क्यों, मुझे चोदोगे? रचना तुम्हें बहुत पसंद करती है। वो तुमसे चुदवा लेगी।

रेखा के साथ की चुदाई और मां की चिट्ठी ने मुझे बहुत ही हिम्मती बना दिया था। मैं खड़ा हुआ और इससे पहले की संगीता कुछ करती या मुझे मना करती, मैंने फुर्ती से उसे अपनी बाहों में बांधा, और होंठों को चूसते हुए चूचियों को मसला। उसने झटके से मुझे अलग किया।

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