मुझे प्यार करो 4

माँ बेटा
सुगंधा एक अद्भुत स्नान का प्रदर्शन करते हुए अपने बेटे की आंखों के सामने और उसका सहयोग प्रकार नहा चुकी थी लेकिन इस स्थान में इतनी मादकता इतनी उत्तेजना थी कि,, अगर मां बेटे दोनों मेंसे किसी को भी इस बात का एहसास होता कि दोनों एक दूसरे का साथ चाहते हैं दोनों संभोग सुख प्राप्त करना चाहते हैं तो नल से गिरने वाला पानी अंकित के मोटे तगड़े लंड से फुआरा बनके गिरता और बरसों से सुखी बंजर जमीन को हरी भरी कर देता,,,,।

लेकिन अफसोस इस बात का था कि दोनों मां बेटे भले ही एक दूसरे का सहयोग कर रहे थे एक दूसरे के अंगों को देख रहे थे लेकिन दोनों में से कोई भी एक दूसरे के मन की बात को मन की हालत को नहीं जानता था,, हालांकि ईस स्नान क्रिया में जितना दोनों बाहर के पानी से नहीं भेजे थे उतना अंदरूनी पानी से गीले हो चुके थे सुगंध तो बार-बार अपनी बुर से मदन रस बहा रही थी और अंकित भी मुंह के साथ-साथ लंड से भी लार टपका रहा था,,, वह इतना ज्यादा अत्यधिक उत्तेजना से सरोबोर था कि कभी-कभी तो उसे लगने लगता था कि कहीं उसके लंड की नशे ना फट जाए,,, लोहे के रोड से भी ज्यादा कड़कपन का एहसास उसे अपने लंड में हो रहा था,,,।

और सुगंधा अपने बेटे के पेट में बने तंबू को देखकर मन ही मन उत्तेजित हो जा रही थी इतना तो वह जानते ही थी कि उसके बेटे का लंड वाकई में कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा था जिसे वह अपनी आंखों से ही देख चुकी थी और उसे पर अपनी उंगली का स्पर्श भी करा चुकी थी,,, लेकिन अभी तक उसने खुलकर अपने बेटे के लंड के दर्शन नहीं किए थे इसलिए उसके मन में यह अभिलाषा पूरी तरह से जागरूक होती जा रही थी कि ना जाने कब उसे अपने बेटे के लंड के दर्शन करने को मिलेंगे,,, और इसी चाह में बार-बार उसकी बुर गीली हो जा रही थी,,,,। सुगंधा भी जीवन में पहली बार अद्भुत स्नान का आनंद ले चुकी थी आज तक उसने कभी भी अंकित के सामने इस तरह से स्नान नहीं की थी,,, हमेशा अंकित की नजरों से बचकर या यूं कहना कि अपनी खूबसूरत बदन को अपने जवान बेटे की नजरों से बचकर ही स्नान की थी नहीं उसके सामने कभी कपड़े भी बदली थी लेकिन आज हालात इस तरह से हो गए थे कि आज खुद अपने हाथों से अपने कपड़े उतार कर और अपने बेटे के सहयोग से वस्त्र को उतार कर उसके ही सहयोग से स्नान कर रही थी,,,।

एक तरफ जहां आनंद की अनुभूति में वह पूरी तरह से डूबती जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसे अपने बेटे पर गुस्सा भी आ रहा था,,, क्योंकि स्नान करते समय अपने बेटे को सहयोग के बहाने पूरी तरह से इशारा कर चुकी थी कि वह किसी भी तरह से उसके बदन से खेल सकता है उसे सहला सकता है दबा सकता है,,, लेकिन उसका बेटा बुद्धू की तरह कुछ ज्यादा उपभोग नहीं कर पाया था,,, लेकिन हां जिस तरह से साबुन लेने के लिए वह पेटीकोट में हाथ डालते हुए सीधा नीचे दोनों टांगों के बीच अपनी हथेली जमा दिया था उससे अभी भी सुगंधा के तन बदन में आग लग जा रही थी,,,, उसे अभी भी अपने बेटे की हथेली अपनी बुर के ऊपर महसूस हो रही थी,,, उसे पल को याद करके सुगंधा का मन एकदम गदगद हुआ जा रहा था,,, क्योंकि इस बात को सुगंध समझ नहीं पा रही थी उसका बेटा अनजाने भी उसकी बुर को साबुन के साथ तब उसे लिया था या जानबूझकर उसकी बुर को अपनी हथेली से दबोचा था,,,,।उफ्फ,,, अद्भुत एहसास,,,, काश अंकित उसके इशारों को समझ पाता,,,,, अपने मन में ही इस तरह की आशा जगाते हुए सुगंधा बोली,,,।

बाथरूम में अर्धनग्न अवस्था में सुगंधा नहा कर खड़ी थी उसके पतन से पानी की बूंदे मोती के दाने की तरह उसके खूबसूरत मखमली बदन से फिसल कर नीचे बाथरूम के फर्श पर गिर रहे थे,,, इस समय सुगंधा किसी चित्रकार के उन्मादकता भरे चित्र की तरह लग रही थी,,, किसी कलाकार की मूरत की तरह लग रही थी उसका गिला पेटिकोट उसके बदन से इस कदर चिपका हुआ था कि उसके अंग अंग को उजागर कर रहा था,,, इस अवस्था में कोई अगर उसे देख ले तो शायद उसके लंड का पानी अपने आप ही छूट जाए लेकिन न जाने कैसे अंकित अपने आप को संभाले हुए था अपनी मर्दानगी को काबू में किए हुए था वरना अंकित की जगह कोई और होता तो शायद बाथरूम के अंदर ही सुगंधा की चुदाई कर दिया होता और सुगंधा को तृप्त कर देता,,, और यही तो फर्क था दूसरे मर्द में और अंकित में,,,,।

अंकित टावल लेने के लिए अपनी मां के कमरे में आ गया था लेकिन इस बीच वहां जो कुछ भी बाथरुम में हुआ था उसके बारे में ही सोच कर मदहोश हुआ जा रहा था वह मन ही मन बहुत प्रसन्न था क्योंकि आज उसे अपनी मां को नहलाने के बहाने उसके खूबसूरत अंग पर अपने हाथ रखने का मौका जो मिला था उसे स्पर्श करने का एहसास ही कुछ और था,,,, अपनी मां की ब्रा की पट्टी खोलने में जिस तरह का उसे अद्भुत उत्तेजना का एहसास हुआ था उसने आज तक महसूस नहीं किया था और उसके खूबसूरत बदन पर साबुन लगाना सब कुछ अद्भुत था,,,, और जैसे ही अंकित को साबुन वाली बात याद आई तो वह एकदम से उत्तेजना के सागर में डूबने लगा क्योंकि उसे याद आ गया कि वह किस तरह से साबुन उठाते हुए अपनी मां की बुर को अपनी हथेली में दबोच लिया था पानी में डूबी होने के बावजूद भी उसकी मां की बुर कितनी गर्म थी इसका एहसास उसे अभी भी अपनी हथेली में हो रहा था,,,,। पेट में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था लेकिन उसे छुपाने की दरकार अंकित बिल्कुल भी नहीं दे रहा था न जाने क्यों उसके मन में हो रहा था कि उसकी मां भी उसके पेंट में बना तंबू देखें ताकि कुछ बात आगे बढ़े जबकि उसे नहीं मालूम था कि उसकी मां तिरछी नजर से उसके पेंट में बने तंबू को ही देखकर मन ही मन उत्तेजित हुए जा रही थी,,। दोनों मां बेटे का अगर जान जाते की दोनों की मंजिल एक ही है तो शायद इस सफर का मजा और भी ज्यादा बढ़ जाता ,,, अंकित को टावल मिल चुकी थी क्योंकि उसकी मां की बिस्तर पर हुई थी वह जल्दी से टावर लेकर अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया,,,।

टावल लेकर जैसे ही वह अपनी मां के करीब पहुंचा तो उसकी नजर अपनी मां की भारी भरकम गोलाई लिए हुए छाती पर पडी ,,,, और उसकी पेटीकोट से उसकी भारी भरकम खरबूजा जैसी चूजियां एकदम से उजागर हो रही थी उनका जाकर उनके क्षेत्रफल सब कुछ एकदम साफ नजर आ रहा था यहां तक की चूचियों के बीच की शोभा बढ़ा रही उसकी किशमिश के दाने की तरह निप्पल कैडबरी चॉकलेट की तरह एकदम से बाहर आने को अातुर नजर आ रही थी,,, अंकित देखा तो देखा ही रह गया और साथ ही उसकी नजर जैसे ही अपनी मां की दोनों टांगों के बीच गई तो देखा की गली पेटिकोट उसकी मां की दोनों टांगों के बीच ऐसी चिपकी थी कि जानवर और कमर के बीच त्रिकोण आकार एकदम साफ नजर आ रहा था और उसे यह भी दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर कौन सी जगह पर है क्योंकि वह भी कचोरी की तरह फुल कर एकदम से उजागर हो रही थी,,,।

अंकित अपनी मां को टॉवल देना ही भूल गया था वह अपनी मां की खूबसूरती में पूरी तरह से डूब चुका था उसकी मां भी यह देख रही थी और मन ही मन प्रसन्न हो रही थी वह जानती थी कि उसका बेटा क्या देख रहा है इसलिए अपने बेटे की तड़प और ज्यादा बढ़ाते हुए सुगंधा पेटीकोट के ऊपर से ही अपनी बुर को खुजलाने का नाटक करते हुए बोली,,,।

अरे क्या देख रहा है देना टावल,,,,

(अपनी मां की बात सुनकर जैसे कोई नींद से उसे एकदम से झकझोर कर जगा दिया हो वह ऐसे हड़बड़ाहट भरे स्वर में बोला,,,)

ओ,,,,, हां,,,,,,, ये लो टॉवल,,,(अपनी मां की तरफ टॉवल बढ़ाते हुए बोला और उसकी मां मुस्कुराते हुए अपने बेटे के हाथ से टॉवल को ले ली और उसे अपनी खूबसूरत बदन पर लपेटने लगी वह अपने बदन पर टॉवल को लपेटकर टावर को एक हाथ से पकड़ कर अपनी पेटी कोट को नीचे की तरफ खींच रही थी,,, यह नजारा देखकर अंकित की तो सांसे ऊपर नीचे होने लगी एक पल को ऐसा लगा कि अपनी मां की आंखों के सामने अपने लंड को बाहर निकाल कर मुठ मार ले क्योंकि उसे इस उत्तेजना की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी वह पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था इतना अद्भुत नजारा इतना कामुकता भरा दृश्य तो उसने गंदी किताब में भी नहीं देखा था,,, अंकित की हालत बद्तर हुए जा रही थी,,, अंकित अपनी मां की खूबसूरत बदन पर से बिल्कुल भी नजर नहीं जाता रहा था वह अपनी मां को ही देख रहा था और सुगंधा भी उसकी हरकत पर उसे बिल्कुल भी टॉप नहीं रही थी क्योंकि उसे भी बहुत मजा आ रहा था अपने जवान बेटे के सामने कपड़े बदलने में कैसा अनुभव होता है कैसा एहसास होता है आज उसे अच्छी तरह से मालूम हो रहा था,,, देखते ही देखते सुगंधा अपनी पेटीकोट को उतारकर कपड़े के देर में रखती और टावर को अच्छी तरह से अपनी चूचियों के आधे भाग पर लाकर उसे लपेट दी आधा भाग अभी भी उसकी नजर आ रहा था और इस अवस्था में उसकी चूची एकदम पपाया की तरह नजर आ रही थी यह देखकर अंकित मन ही मन सोच रहा था कि काश इतनी बड़ी-बड़ी चूचियां उसे पकड़ने को मिल जाती तो कितना मजा आता,,,,।

अपने बदन पर टावल लगाकर,,, सुगंधा सामने की दीवार की तरह मुंह करके खड़ी हो गई और कपड़े धोने के लिए नीचे बैठ गई और उसके नीचे बैठते ही उसके नितंबों का आकार एकदम से उजागर हो गया टॉवल उसकी गांड को छुपाने में छोटी पड़ गई और अपनी मां की नंगी गांड और उसकी गांड की गहरी दरार को देखकर अंकित से रहा नहीं गया और वह अपने लंड पर हाथ रखकर उसे दबा दिया,,, और अपनी मां के खूबसूरत जवानी को निहारने के चक्कर में वह यह भूल गया कि उसकी मां कपड़े धोने जा रही थी,,, और वह ऐसा नहीं चाहता था क्योंकि वह जानता था किसकी मां की तबीयत खराब है इसलिए वह तुरंत आगे बढा और अपनी मां को रोकते हुए बोला,,,।

अरे अरे क्या कर रही हो मम्मी मैं धो दूंगा,,, तुम्हें कपड़े धोने की जरूरत नहीं है जाकर आराम करो,,,।

अरे नहीं रे मुझे धोने दे अच्छा थोड़ी लगता है कि मेरे कपड़े तु धोए,,,,(ऐसा कहकर वह अपनी साड़ी को अपने पास खींच कर उसे पर साबुन लगाने ही वाली थी कि अंकित अपना हाथ बढ़ाकर अपनी मां की बांह पकड़ लिया और उसे रोकते हुए बोला,,,)

नहीं नहीं बिल्कुल भी नहीं मैं हमेशा के लिए थोड़ी कह रहा हूं अभी तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए कह रहा हूं मैं तुम्हें कपड़े नहीं धोने दूंगा तुम चलो कमरे में आराम करो,,,,।
(अंकित का इस तरह से उसे कपड़े धोते हुए रोकना उसे बहुत अच्छा लग रहा था वह मन ही मन बहुत खुश हो रही थी लेकिन तभी उसकी नजर अपनी उतरी हुई चड्डी पर पड़ी तो वहां हाथ आगे बढ़कर अपनी चड्डी को अपने हाथ में ले ली और उसे धोने के लिए जैसे ही साबुन हाथ में उठाई फिर से उसे अंकित रोकने लगा,,,,)

नहीं नहीं बिल्कुल भी नहीं तुम अपने कमरे में चलो आराम करो मैं कपड़े धो दूंगा,,,,।

अरे हाथ धो देना लेकिन इसे तो धोने दे,,,(पेंटी की तरफ हाथ आगे बढ़ाकर वह बोली वह जानबूझकर अंकित का ध्यान अपनी पैंटी पर ले जा रही थी और अंकित भी अपनी मां के हाथ में उसकी चड्डी देखकर मदहोश होने लगा था और उसे धोने का सुख प्राप्त करना चाहता था इसलिए बोला,,,)

कोई बात नहीं मैं धो दूंगा तुम चलो अपने कमरे में,,,,।

अरे बेटा इसे तो धोने दे,,,,।

नहीं नहीं बिल्कुल भी नहीं तुम अपने कमरे में चलो बस,,,(इतना कहते हुए वह अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे खड़ी कर दिया उसकी जीत देखकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न भी हो रही थी और उत्तेजित भी हो रही थी,,, लेकिन फिर भी आशंका जताते हुए बोली,,,)

अरे बेटा समझने की कोशिश कर अगर किसी को पता चल गया कि तू मेरे कपड़े धोया है तो लोग क्या समझेंगे,,,,।

अरे वाह लोग क्या समझेंगे,,, इसमें क्या लोग समझेंगे,,,, और वैसे भी लोगों को कहां पता चलेगा कि कपड़े कौन धोया है,,,।

लेकिन अगर तृप्ति को पता चल गया तो की मेरे कपड़े तूने धोया है और साथ मेंमेरी चड्डी भी तो वह क्या समझेगी,,,,(सुगंधा जानबूझकर इस बार खुले सकते हैं अपने अंतर्वस्त्र का नाम ली थी और वाकई में इसका असर अंकित के मन पर बहुत ही गहरा पड़ा था अपनी मां के मुंह से चड्डी शब्द सुनकर उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी,,, हालांकि इस दौरान सुगंधा की नजर बराबर अपने बेटे की पेंट के ऊपर थी जिसमें अच्छा खासा तंबू बना हुआ था और उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में उसके बेटे के पेट में लंड नहीं बैल को काबू करने वाला खुंटा छुपा हुआ है,,, अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला,,,)

दीदी को बताना ही नहीं ना,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि इस बात की तसल्ली ठीक है उसके बेटे को इतना तो पता था कि कौन सी बात बतानी चाहिए कौन सी बात छुपानी चाहिए,,,,,,, वह इस बात से खुशी की उसका बेटा यह बात जानता है की औरतों के अंग वस्त्र को धोना उनकी पेंटिं धोना उनकी ब्रा धोना,, कुछ हद तक उचित तो है लेकिन उसे किसी को बताना उचित नहीं है और इस बात से सुगंधा भी खुश थी कि बाथरूम में जो कुछ भी हो रहा है वह किसी को पता नहीं चलेगा,,, अपने बेटे की बात सुनकर मुस्कुराते हुए सुगंधा बोली,,,)

चल कोई बात नहीं किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा बस,,,,, अच्छा मैं अपने कमरे में जाती हूं,,,,(इतना कहकर वह अपने कमरे की तरफ जाने लगी लेकिन उसके मन में युक्ति चल रही थी वह जानती थी कि उसे क्या करना है और जैसे ही तो कदम आगे बढ़ी थी कि उसके बदन से टावल एकदम से खुलकर उसके पैरों में जा गिरी और वह एकदम से नंगी हो गई,,,। पल भर में ही नजारा पूरी तरह से बदल गया,,, अंकित की तो हालत एकदम से खराब हो गई उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसकी आंखों के सामने उसकी मां पूरी तरह से नंगी खड़ी थी उसका टावल उसके बदन से सरक कर नीचे गिर गया था,,, जो कि यह सब सुगंधा की ही चाल थी सुगंधा जानबूझकर अपनी टावेल खोल दी थी जानबूझकर अपने बेटे के सामने संपूर्ण रूप से नंगी हो गई थी,,, अंकित की नजर अपनी मां के नंगे बदन से हटा ही नहीं रही थी वह आश्चर्य से मुंह खोल अपनी मां की नंगी जवानी कोई देख रहा था एकदम गदराया बदन,,, गोरी गोरी काया ,,मांसल देह,,, बदन के हर कोने से जवानी का रस टपक रहा था,,, अपनी मां की नंगी बड़ी-बड़ी गांड को देखकर अंकित की हालत और ज्यादा खराब हो गई बहुत पूरी तरह से पागल होने लगा,,,।

अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बस वह अपनी मां को देखे जा रहा था,,, और सुगंध भी अपने बेटे की तरफ इस तरह से आश्चर्य से देख रही थी कि मानो यह क्या हो गया कह रही हो,,,, कुछ क्षण तक वह जानबूझकर अपने बेटे की आंखों के सामने एकदम नग्नवस्था में खड़ी रही और फिर जैसे उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसके बेटे ने उसकी नंगी जवानी के दर्शन कर ली है वह तुरंत नीचे झुक गई और नीचे झुकता ही उसकी गोल-गोल गाने एकदम से उभर कर चांद की तरह नजर आने लगी जिसे देखकर अंकित कहां अपने आप उसके लंड पर आ गया और उसके हरकत नीचे झुकने पर चोर नजरों से सुगंधा ने देख ली थी और उसके बेटे की हरकत उसके बदन में मदहोशी भर गया वह समझ गई कि उसका बेटा उसको देखकर अपने लंड पर हाथ क्यों रख रहा है,,,, वह तुरंत टावल को उठाई और फिर अपने नंगे बदन पर लपेटकर अपने कमरे की ओर चली गई,,,,।

लेकिन जाते-जाते अपने बेटे की हालात पूरी तरह से खराब कर गई थी कुछ देर तक अंकित अपनी मां के कमरे की तरफ देखता रह गया दरवाजा बंद हो चुका था पहचानता था कि उसकी मां अपने कपड़े बदल रही होगी लेकिन उसे कपड़े धोना था गहरी सांस लेकर वह बाथरूम में बैठकर अपनी मां के कपड़े धोने के लिए या उसका पहला अनुभव था जब वह अपनी मां के कपड़े धो रहा था एक औरत के कपड़े धो रहा था,,,, औरत के कपड़े धोने में कैसा अनुभव होता है आज से पहली बार एहसास हो रहा था उसे उत्तेजना का अनुभव रहा था वह अपनी मां की साड़ी पेटिकोट धोने के बाद अपनी मां की ब्रा हाथ में ले लिया वह अपनी मां की ब्रा को हाथ में लेकर पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंचने लगा,,,,

अंकित के दिल और दिमाग पर वासना पूरी तरह से घर कर गया था वह अपनी मां की ब्रा को अपनी नाक से लगाकर सुंघ रहा था,,, ब्रा के कप को दोनों हाथों में लेकर इस तरह से दबा रहा था कि मानो जैसे उसके हाथ में उसकी मां की ब्रा नहीं बल्कि उसकी मां की चूचियां आ गई हो इस हरकत से वह मदहोश हुआ जा रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था और फिर उसे धोने के बाद वह अपनी मां की पेंटिं को अपने हाथ में ले लिया और पेंटी के हाथ में आते हैं उसके लंड में हरकत बढ़ने लगी,,, उसका लंड ऊपर नीचे होने लगा ऐसा लग रहा था कि मानो उसका लंड उसकी मां की पेटी को सलामी भर रहा हो,,,, अंकित अच्छी तरह से जानता था कि उसके हाथ में उसकी मां के अंग का कौन सा वस्त्र है इसलिए उसकी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,।

वह अपनी मां की चड्डी को दोनों हाथों में लेकर इधर-उधर घूम कर देख रहा था कि तभी उसकी नजर उसकी मां की चड्डी के छोटे से छेद पर गई और उस छेंद को देखते ही उसके लंड की अकड़ एकदम से बढ़ गई मानो कि जैसे उसने अपनी मां की चड्डी में छेद नहीं बल्कि अपनी मां का गुलाबी छेद देख लिया हो,,,,
अपनी मम्मी की चड्डी को हाथ में लिए हुए वह बार-बार बाहर की तरफ देख ले रहा था कि तुम उसकी मां तो नहीं आ रही है,,,, वह अच्छी तरह से जानता था कि इस चड्डी में उसकी मां का सबसे बेश कीमती खजाना छुपा हुआहोता है,,, उसकी बुर और गांड जो मर्दों की उत्तेजना को हमेशा बढ़ा देती है,,,। अंकित अपना होश खो रहा था,,, उसके हाथ में उसकी मां की पेटी थी लेकिन उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे दुनिया का सबसे बेश कीमती खजाना उसके हाथ लग गया हो,,,

अपनी मां की चड्डी को हाथ में लेकर हुआ बार-बार अपने लंड को दबा दे रहा था उसके मन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह कुछ कर गुजरना चाहता था बार-बार वह अपनी मां की पेटी के छेद में अपनी उंगली डालकर उसे अंदर बाहर कर रहा था और ऐसा एहसास कर रहा था कि मानो जैसे वह अपनी उंगली को चड्डी के छेंद में नहीं अपनी मां के गुलाबी छेद में अंतर बाहर कर रहा हो,,, वह बार-बार दरवाजे की तरफ देख ले रहा था उसे डरता कि कहीं उसकी मां आ जाए,,, और उसे अपनी पेंटी के साथ इस तरह की हरकत करता हुआ देखकर पकड़ ना ले नहीं तो क्या समझेगी,,, लेकिन उसकी उत्तेजना कम नहीं हो रही थी जो कुछ भी उसने बाथरूम में देखा था जिस तरह का सहयोग उसने अपनी मां को दिया था उसे देखते हुए और अभी-अभी कुछ देर पहले टावल के गिर जाने से अपनी मां के नंगे बदन के दर्शन करके जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसे शांत करना उसके लिए बहुत जरूरी हो गया था,,,,

इसलिए वह कुछ करना चाहता था और वह धीरे से उठकर खड़ा हूं क्या उसके एक हाथ में में उसकी मां की चड्डी थी पर दूसरे हाथ से वह अपने पेट को खोलकर नीचे कर दिया और उसका लंड एकदम से आजाद हो गया अपने लंड को देखकर अंकित को लग रहा था कि जैसे आज कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा हो गया है,,,, एक नजर दरवाजे पर रखकर वह अपनी मां की चड्डी को अपने लंड पर लपेटने लगा,,,,, यह क्रिया उसके लिए बेहद अद्भुत थी ,,,और वह पहली बार इस तरह की क्रिया अपनी मां की पेंटिं लेकर कर रहा था,,,, वह उसे पूरी तरह से लपेटकर उसे मुट्टी में भरकर मुठिया रहा था,,, उसे बहुत मजा आ रहा है आनंद की पराकाष्ठा उसे महसूस हो रही थी वह परम आनंद में खोने लगा था,,, कुछ देर तक कोई इसी तरह से अपने लंड पर पेंटिं लपेटे मुठीयाता रहा,,,,।

अंकित आज तक ऐसी हरकत नहीं किया था हालांकि मुठ तो मरने लगा था लेकिन अपनी मां के अंतर्वस्त्र को लेकर कभी इस तरह की क्रिया किया नहीं आज पहली बार वह अपनी मां की उपयोग में ली हुई पेटी से हस्तमैथुन कर रहा था और उसे बेहद मेहनत की प्राप्ति हो रही थी लेकिन तभी उसे याद आया कि उसकी मां की पेंटिं में छोटा सा छेद है,,,, और उसका दिमाग बड़ी तेजी से दौड़ने लगा,,,, उसने तुरंत अपने लैंड पर से अपनी मां की चड्डी को हटाया और उसे दोनों हाथों से खोलकर उसके छेद को देखने लगे और उस छेंद को देखकर उसके चेहरे पर कामुक मुस्कान तैरने लगी,,, इस समय अपनी मां की चड्डी का छोटा सा छेंद उसे छेंद नहीं बल्कि अपनी मां का गुलाबी छेद नजर आ रहा था,,, अब उसका धैर्य जवाब देने लगा,,, उसके कल्पनाओं का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ने लगा चड्डी के अंदर का छोटा सा छेद उसे अपनी मां की बुर का छेद नजर आ रहा था जो उसकी आंखों के सामने थी अब वह अपने आप को रोक नहीं सकता था,,,, आज वह अलग तरीके से मुठ मारना चाहता था।

अंकित बार-बार दरवाजे की तरफ देख ले रहा था लेकिन पूरी तरह से जगह पर सन्नाटा छाया हुआ,, था,,, इसलिए उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी लेकिन वह यह भी जानता था की चड्डी का छोटा सा छेद उसके लंड के सुपाड़े से बहुत छोटा था,,, अगर वह उसमें अपना लंड प्रवेश कराएगा तो उसका छेद और ज्यादा बढ़ जाएगा,,,, इस बात को अच्छी तरह से समझना लेकिन वासना का भूत उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से हावी हो चुका था,,, इसलिए अपनी चड्डी में हुए छोटे से छेद को जब एकदम बड़ा हुआ छेंद देखेगी तो उसकी मां क्या सोचेगी,,, अब इसकी फिकर उसे बिल्कुल भी नहीं थी,,, उसे तो बहुत जल्दबाजी थी छोटे से छेद में अपने लंड को डालने में क्योंकि इस समय उसकी मां की चड्डी का छोटा सा छेंद उसके लिए उसकी मां की बुर से कम नहीं था,,,।

अंकित तैयार हो चुका था एक नए अनुभव के लिए,,, इसलिए वह दोनों हाथ से अपनी मां की चड्डी पकड़ कर उसमें अपना लंड प्रवेश कराने लगा,,, सूपाड़ा के प्रवेश करते ही छोटा सा छेद बड़ा होने लगा,,, और अंकित अपने मन में कल्पना करने लगा कि उसकी मां की बुर उसके लंड डालने से फैलती चली जा रही है,,, धीरे-धीरे करके वह अपना समुचा लंड अपनी मां की चड्डी के छोटे से सुराख में डालकर उसे फैलाता चला गया,,,, इस क्रिया को करने में अंकित पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था उसकी कोई आनंद की पराकाष्ठा नहीं थी वह मदहोश चुका था पागल हो चुका था उसके दिलों दिमाग पर वासना पूरी तरह से सवार हो चुकी थी और देखते ही देखते वह अपनी मां की बुर समझ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, और उसकी उत्तेजना इतनी अत्यधिक थी बहुत ही जल्द उसके अंदर से वीर्य पात हो गया,,,।

जैसे ही उसकी दिलो दिमाग से वासना का भी कितना बड़ा कर चुका था अब उसे थोड़ा डर लगने लगा क्योंकि उसकी मां क्या सोचेगी,,, लेकिन इसके लिए भी वह अपने मन में उपाय सोच लिया था और वह कपड़े धोकर छत पर सूखाने के लिए चला गया,,,।

अंकित कपड़े धोते समय अपनी मां की चड्डी को देखकर अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगा था और वह अपनी मां की चड्डी के साथ मनमानी कर चुका था उसके छोटे से छेद को अपने लंड की मोटाई की रगड़ से उसे और भी बड़ा बना दिया था,,,, और इस समय सुगंधा की चड्डी उसे कुंवारी लड़की की बुर तरह हो गई थी जो सुहागरात से पहले एकदम कसी हुई होती है लेकिन सुहागरात की रात के बाद से ही ढीली हो जाती है,,,, अंकित इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसकी चड्डी के छोटे से खेत को बड़ा छेद हुआ देखकर जरूर उससे पूछे कि यह क्या हुआ है और इसके लिए उसने अपने मन में जवाब भी ढूंढ लिया था,,,।

सुगंधा अपने कमरे में ही थी जिस तरह का नजारा उसने अपने बेटे को दिखाई थी वह जानती थी कि उसकी जवानी का जलवा देखकर उसका बेटा चारों खाने चित हो गया है,, वह अपने मन में बहुत खुश थी क्योंकि आज के दिन वह कुछ ज्यादा ही अपने बेटे से खुल गई थी,,, बातचीत में अभी इतना नहीं खुली थी लेकिन अपने बेटे के सामने कपड़े उतारना बदलना नहाना इन सब में वह धीरे-धीरे खुलती चली जा रही थी,,, और उसे पूरा यकीन था कि एक दिन जिस तरह से वह अपने बेटे के सामने खुलती चली जा रही है एक दिन जरूर उसका बेटा अपने हाथों से उसकी दोनों टांगें खोलेगा और उस दिन का उसे बेसब्री से इंतजार भी था,,,,,, सुगंधा अपने बदन में उत्तेजना का संचार होता हुआ महसूस कर रही थी आज बाथरूम के अंदर जो कुछ भी हुआ वह उसकी सोच से बिल्कुल पड़े था वह कभी सोची भी नहीं थी कि हालात इस कदर से उसके पक्ष में आ जाएंगे कि जो वह चाहती है वह खुद अपने बेटे की आंखों के सामने करेगी वह कभी सोची नहीं थी कि बाथरूम के अंदर वह अपने बेटे की आंखों के सामने ही अपने बदन से धीरे-धीरे अपने कपड़े उतरेगी नहाएगी उसके सामने अपनी चड्डी उतारेगी यह सब सो कर ही उसके बदन में गर्मी छा रही थी,,,।

अपने बेटे के सामने संपूर्ण रूप से नंगी हो जाने का ख्याल उसके मन में बिल्कुल भी नहीं था वह सिर्फ इतना चाहती थी कि उसके बेटे के सामने वह नहाएगी,,, उसकी सोने से तो सब कुछ सामान्य लग रहा था लेकिन जैसे-जैसे वहां अपने बदन से कपड़े उतारती गई वैसे-वैसे उसकी टांगों के बीच की गली गीली होती चली गई,,, अपने बेटे की आंखों के सामने अपनी चड्डी उतरना उसे और भी ज्यादा मदहोशी से भरता चला गया था,,, और अपने बदन से अपने बेटे की आंखों के सामने चड्डी उतारते हुए उसके मन में यही ख्याल आ रहा था कि क्यों ना वह अपने बेटे के सामने पूरी तरह से नंगी हो जाए लेकिन इस समय तो वह ऐसा कर नहीं सकती थी क्योंकि वह अपनी पेटीकोट को अपने बदन के नंगेपन को ढकने का सहारा जो बना रखी थी अगर वह उसी समय अपनी बदन पर से पेटीकोट भी उतार कर फेंक देती तो उसका बेटा क्या समझता है वह यही समझता कि फिर उसे अब तक बदन पर चढ़ाई रहने का क्या फायदा है उतार कर ही नहरी होती जब उतारने का ही था तो,,,, वह किसी और बहाने से अपनी बेटी के सामने नंगी हो जाना चाहती थी अपनी खूबसूरत बदन के हर एक हिस्से को दिखा देना चाहती इसलिए टॉवल से अच्छा कारण उसे कोई दिखाई नहीं दे रहा था,,,।

इसलिए कपड़े उतार कर टावल को लपेटकर,, वह अपने मन में दृढ़ निश्चय कर ली थी कि आज वह अपने बेटे की आंखों के सामने पूरी तरह से नंगी हो जाएगी ऐसा नहीं था कि वह अपने बेटे के सामने पहली बार नंगी हो रही थी ऐसा वह बाथरूम के अंदर पहले भी कर चुकी थी लेकिन उसे समय उसकी जवानी का जलवा उसका एक खूबसूरत हमको का नजारा उसका बेटा बाथरूम के दरवाजे के छोटे से छेद से देख रहा था लेकिन वह अपने बेटे के सामने बिना किसी रूकावट के नंगी हो जाना चाहती थी ताकि उसके बेटे की आंखों में पूरी तरह से वासना उतर जाए वह उसे देखा ही रह जाए उसकी जवानी का रस अपनी आंखों से पीने के लिए मजबूर हो जाए,,, इसलिए टावल लपेटकर जैसे ही अपने कमरे की तरफ आगे बढ़ने लगी वह बड़ी सफाई से अपने बदन पर से टावल को एकदम से ढीला कर दी और टॉवल भी उसकी बात मानते हुए एकदम से उसके बदन से भर भरा कर नीचे उसके कदमों में जा गिरा और उसके खूबसूरत बदन को उजागर कर दिया,,, उस समय सुगंधा भी पूरी तरह से उत्तेजना और मदहोशी में डूब चुकी थी वह प्यासी आंखों से अंकित की तरफ देखने लगी अंकित उसे ही देख रहा था,,,। सुगंधा को अपने बेटे की आंखों में अपनी जवानी के लिए वासना एकदम साफ नजर आ रही थी और यह देखकर सुगंधा अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी,,,। सुगंधा को इस बात का एहसास बड़े अच्छे से हो रहा था, वह जानती थी कि जिस तरह की वासना उसे अपने बेटे की आंखों में दिखाई दे रही है अगर वह उसे इशारा करके अपने कमरे में बुला ले तो उसका बेटा खुशी-खुशी उसके कमरे में आ जाएगा और उस पर चढ़े बिना नहीं रह पाएगा,,, लेकिन अभी इतनी जल्दी वह ऐसा करना नहीं चाहती,,,।

ऐसा लग रहा था की सुगंधा के जीवन में यह बुखार बहुत बड़ा बदलाव लेकर आई थी ना तो इससे पहले कभी सुगंध इस तरह से बीमार पड़ी थी और ना ही उसे मौका मिला था अपने बेटे के सामने इस तरह से खुलने का,,, और उसका बेटा भी इस मौके का बहुत अच्छे से फायदा ले रहा था,,,, इस बात को सोचकर उसके तन-बदन में अजीब सी हलचल मच जाती थी की दवा खाने के बाथरूम में उसका बेटा उसकी चड्डी उतारते समय क्या-क्या सोच रहा होगा,,, भले ही उसे समय वह ज्यादा बीमार थी उसे कुछ होश नहीं था लेकिन उसका बेटा तो पूरे हो तो हवास में था वह तो अपने होश में ही उसकी चड्डी अपने हाथों से उतार रहा था चड्डी उतारने में एक मर्द को कितना आनंद आता है इस बात को सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी,,, भले ही इस सुख को उसके पति ने ना भोगा हो लेकिन मर्दों की फितरत से वह धीरे-धीरे अच्छी तरह से वाकिफ हो गई थी,,,।

छत पर कपड़े सूखने के लिए डालने के बाद अंकित अपनी मां के कमरे में नहीं गया था,,,, वह कुछ हद तक शर्मिंदा भी था इसलिए अपनी मां से नजर मिलाने से कतरा रहा था और इस समय वह क्यों शर्मा महसूस कर रहा है इस बात को वह भी नहीं जानता क्योंकि उसके और उसकी मां के बीच बहुत कुछ हो चुका था कपड़ों का उतारना,, उसको नहीं लाना,,, उसके कपड़े धोना उसे नग्न अवस्था में देखना सब कुछ लेकिन फिर भी वासना का बहुत सर से उतर जाने के बाद उसे थोड़ी बहुत शर्मिंदगी का एहसास हो रहा था क्योंकि वह जानता था कि जो कुछ भी वह अपनी मां के बारे में सोच रहा है या उसके बारे में उसके मन में गलत भावना जाग रही है यह सब कहीं ना कहीं गलत है ऐसा मां बेटे के बीच बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए लेकिन फिर भी यह सब करने में उसे बहुत मजा आ रहा था आनंद आ रहा था और इसीलिए वह इस बारे में घर के बाहर इधर-उधर घूमते हुए सोच रहा था,,,।

वह यह सोचकर हैरान हो रहा था कि क्या मां बेटे के बीच जिस्मानी ताल्लुकात सही है या गलत,, क्या बेटे को चाहिए कि वह अपनी मां के साथ संभोग करे उसके साथ शरीर संबंध बनाए ,,, यह सब किस हद तक सही है,,,, क्या कोई मां होगी जो अपने बेटे के साथ चुदवाना चाहेगी,,,,,, बरसों से अपनी प्यासी जवानी की प्यास बुझाना चाहेगी,,,,, राहुल और उसकी मां के बीच उन्हें देखकर तो ऐसा ही लगता है कि उन दोनों के बीच ऐसा ही संबंध है राहुल की बातें सुनकर ऐसा ही लगता है कि वह अपनी मां को जरूर चोदता होगा उसकी मां भी तो उससे बहुत खुश रहती है,,, यह सब सो कर उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना चाहिए,,,,, अपने ही सवाल का जवाब अपने मन में ही देते हुए वह बोला अगर चार दिवारी के अंदर मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता कायम हो जाता है तो भला किसे पता चलने वाला है ऐसा तो है नहीं की औरतों को मर्द की जरूरत नहीं होती,, मां को भी एक मर्द की जरूरत है और वह जरूरत वह पूरी कर सकता है,,,,,, लेकिन क्या इसके लिए मन तैयार होगी,,,,? जरूर होगी क्यों नहीं होगी,,,, यही सब सो कर उसका दिमाग खराब हुआ जा रहा था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,, वह अपने मन में यही सोच रहा था कि भले वह कुछ भी सोच लेकिन हालात तो दोनों के बीच इस तरह से बनते चले जा रहे हैं कि एक नई दिन जरूर दोनों के सब्र का हाथ टूट जाएगा और दोनों एक हो जाएंगे और उसे दिन का उसे भी बड़ी बेसब्री से इंतजार था लेकिन जिस तरह का सफर जारी था उसका आनंद वह पूरी तरह से लेना चाहता था इसीलिए इधर-उधर टहलते हुए जब शाम ढलने लगी तो वह घर पहुंच गया,,,,।

घर पर पहुंच कर देखा तो उसकी मां कुर्सी पर बैठकर आराम कर रही थी,,,, अपनी मां को देखते ही अंकित के चेहरे पर प्रश्ननता के भाव नजर आने लगे और वह एकदम से उसके पास जाकर उसके माथे पर अपना हाथ रखकर बोला,,,।

आप कैसी तबीयत है तुम्हारी मम्मी,,,।

ठीक है इसलिए तो यहां पर बैठी हूं नहीं तो बिस्तर पर पड़ी रहती,,,।

चलो अच्छा है कि आराम हो गया बिस्तर पर बीमार होकर पड़े रहने से अच्छा है कि इधर-उधर घूमते रहो,,,, अच्छा तुम यहीं बैठो तब तक में कपड़े उतार कर लाता हूं,,,।

रुक मैं भी चलती हूं थोड़ा सा हवा भी लग जाएगा छत पर,,,,।

चलो ठीक है,,,, सहारा देना पड़ेगा,,,,

नहीं नहीं अब आराम है मैं चल लूंगी,,,

ठीक है,,, लेकिन तुम आगे आगे चलो मैं पीछे-पीछे चलता हूं,,,, कहीं चक्कर आ गया तो संभाल लूंगा,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,)

तू मेरा कितना ख्याल रख रहा है,,, तू सच में बहुत बड़ा हो गया है मुझे तुझे कर सके एकदम बच्चा ही समझती थी लेकिन जिस तरह से तूने मुझे संभाला है,,,, मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है,,,।

यह तो मेरा फर्ज है मम्मी,,,,

तेरा फर्ज तो बहुत कुछ बनता है अभी तो बहुत फर्ज निभाना बाकी है,,,,(इतना कह कर वह सीढ़ियां चढ़ने लगी,,, और अंकित उसके पीछे-पीछे सीढियां चढ़ता हुआ आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)

कौन सा फर्ज मम्मी,,,,।

अरे बहुत सब फर्ज है बेटा यह तो बीमार होने पर का फर्ज निभाया है तुने ,,, ऐसे छोटे-बड़े बहुत से फर्ज हैं जो समय आने पर तुझे खुद ही पता चल जाएगा,,,।
(सुगंधा बातों ही बातों में अंकित को इशारा दे रही थी लेकिन की समझ नहीं पा रहा था वह सीढ़ियां चढ़ती हुई अपनी मां के गोलाकार नितंबों की खूबसूरती में और फर्ज निभाने के उलझन में उलझ कर रह गया था और अपनी मां के कहने के असली मकसद को समझ नहीं पा रहा था,,,, सीढ़ीया चढ़ती हुई उसकी मां इस समय बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी उत्तेजक बदन की महिला होने के साथ-साथ बड़ी गांड वाली औरत की थी और सीढ़ियां चढ़ते समय उसकी गांड की दोनों फाके आपस में इस कदर ऊपर नीचे होकर रगड़ खा रही थी कि कसी हुई साड़ी में उसके उभार एकदम साफ नजर आ रहे थे,,, अभी कुछ घंटे पहले वह अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देख चुका था लेकिन फिर उसकी प्यास थी कि खत्म नहीं हो रही थी की साड़ी में भी अपनी मां के नितंबों को देखकर वह उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, देखते ही देखते दोनों छत पर पहुंच गए,,,।

छत पर पहुंच कर सुगंधा देखी कि उसके बेटे ने धुले हुए कपड़ों को बड़े अच्छे से रस्सी पर डाल कर रखा था ऐसा लगी नहीं रहा था कि जैसे वह पहली बार रस्सी पर कपड़े सुखाने के लिए डाला हो,,, कैसा लग रहा था कि मानो जैसे यह उसका रोज का काम है लेकिन हकीकत यही था कि वह पहली बार कपड़ों को रस्सी पर सूखने के लिए डाला था,,,, यह देखकर सुगंधा खुश होते हुए बोली।

बहुत अच्छे चलो एक काम से तो मुझे छुटकारा मिल जाएगा,,,।

कौन से काम से मम्मी,, (ऐसा कहते हुए वह दूसरे छोर पर पहुंचकर वहां से धीरे-धीरे कपड़े उतारने लगा और उसकी मां एक किनारे से कपड़े को उतारने लगी)

यही कपड़े सुखाने के काम से,,,।

कोई बात नहीं मुझे तो अच्छा लगता है तुम्हारे काम में हाथ बंटाना,,,।

तो पहले क्यों नहीं बंटाता था,,,।

पहले कभी मौका ही नहीं मिला वैसे भी दीदी सारा काम कर देती थी तो मुझे कुछ करने को रहता ही नहीं था,,,,.।

चल अब तो करेगा ना,,,(धीरे-धीरे रस्सी पर से कपड़े उतारते हुए सुगंधा बोली धीरे-धीरे दोनों करीब आते जा रहे थे दोनों के बीच के दूरी तकरीबन डेढ़ मीटर जितनी ही रह गई थी मौसम सुहावना होता जा रहा था सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था और दूर पंछियों का झुंड अपने घर की तरफ लौट रहा था यह सब देखना बहुत ही अच्छा लग रहा था,,,, और कपड़े उतारते समय अंकित मौसम के इससे खूबसूरत वातावरण का आनंद भी ले रहा था लेकिन इस समय उसके मन में कुछ और चल रहा था वह अपनी मां की तरफ पूरी तरह से आकर्षित हो चुका था.. इसलिए हाथ बंटाने वाली बात पर अंकित बोला,,)

जरूर मम्मी,,,,(इतना कहता कि दोनों बेहद करीब आ गए थे कि दोनों के बीच केवल दो फीट की ही दूरी रह गई थी और तभी सुगंधा के हाथ में उसकी चड्डी लग गई और उसकी नजर चड्डी में बने बड़े से छेद पर चली गई यह देखकर तो अंकित के होश उड़ गए क्योंकि वह भूल चुका था कि उसकी मां की चड्डी उसने ही बड़ा किया है और इस समय वह चड्डी उसकी मां के हाथ में आ चुकी है,,,,।

मादकता भरे वातावरण और एक दूसरे के प्रति आकर्षण के पहले सुगंधा कभी भी अपने बेटे की नजर में अपनी पहनी हुई चड्डी या साफ सुथरी चड्डी आने नहीं देती थी कपड़े सुखाने के लिए डालती भी थी तो साड़ी के नीचे छुपा कर रखती थी,,, लेकिन 2 दिन में जिस तरह की हालात दोनों के बीच बदले थे उसे देखते हुए सुगंधा अपने बेटे की आंख के सामने से अपनी चड्डी को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी क्योंकि इस बात को वह भी अच्छी तरह से जानती थी की चड्डी को धोया भी उसके बेटे नहीं है और सूखने के लिए डाला भी उसी में इसलिए अब उसकी आंख के सामने से अपने अंतर्वस्त्र को छुपाना बिल्कुल भी ठीक नहीं था,,,।

सुगंधा अपनी चड्डी को इधर-उधर घूमा कर उसे बड़े से छेद को देख रही थी उसकी चड्डी में छोटा सा छेद था इस बात को अच्छी तरह से जानती थी लेकिन इतना बड़ा कैसे हो गया उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और अंकित यह देखकर लेकिन फिर भी जिस तरह का आकर उसने अपनी मां की चड्डी में बनाया था उसे देखकर उसके होश उड़ गए थे,, चड्डी में वह छेद एकदम गोलाकार आकार में तब्दील हो चुका था अच्छा खासा गोलाकार जिसमें से अंकित का लंड बड़े आराम से गुजर चुका था,,,, अपनी चड्डी के उसे छोटे से छेद को जो किया बड़ा हो चुका था उसे अंकित की तरफ आगे बढ़ाकर उसे दिखाते हुए बोली,,,,।

अंकित यह कैसे हो गया यह तो बहुत छोटा था,,,,।

हां मम्मी छोटा तो था लेकिन मुझे अच्छा नहीं लग रहा था क्या तुम्हारे पास नई चड्डी नहीं है पहनने को जो इस तरह की फटी हुई चड्डी पहनती हो,,,,(अंकित अपनी मां के सवाल के घेरे में आता है इससे पहले ही वह अपनी मां को ही घेरे में लेते हुए बोला,,,, अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा की शर्म के मारे हालत खराब हो रही थी वह सर में से पानी पानी में जा रही थी और उसकी दोनों टांगों के बीच की दरार में से वह शर्म का पानी बहने लगा था,,,, अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली,,,)

तुझे क्या लगता है,,,?

मुझे तो लगता है कि सच में तुम्हारे पास पहनने को चड्डी नहीं है,,,,(अंकित अब तक के हालात को देखते हुए हिम्मत जुटाकर बोला,,,)

ऐसा क्यों कह रहा है तु,,,(चड्डी के छेद में जानबूझकर उंगली डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए बोली यह देखकर अंकित के पेट में तंबू बनने लगा,,,, क्योंकि जिस तरह से उसकी मां चड्डी के छेद में उंगली बाहर कर रही थी कुछ घंटे पहले वहां उंगली की जगह अपने लंड को अंदर बाहर कर चुका था और सुगंध भी जानबूझकर अपनी हरकत को अंजाम दे रही थी वह अपने बेटे को उकसाना चाहती थी वह इसके मतलब को बताना चाहती थी,,,,, अपनी मां की बात सुनकर उसकी हरकत को देखकर अंकित बोला,,,)

क्योंकि मैं पहले भी देख चुका हूं,,(गहरी सांस लेते हुए अंकित बोला)

पहले भी देख चुका है क्या देखचुका है,,,!(सुगंधा आश्चर्य जताते हुए बोली)

उसे दिन मार्केट में जब मार्केट से वापस लौट रहे थे शाम हो चुकी थी और तुम्हें बड़े जोर की पेशाब लगी थी यादहै तुम्हें,,,,(पेशाब वाली बात एकदम से अंकित भूल गया था और उसके मुंह से पेशाब वाली बात सुनकर सुगंधा को सब कुछ याद आ गया था और उसका भी जोरों से धड़कने लगा था अंकित का जवाब देते हुए वह हां में सिर हिला दी,,,)
तुम पेशाब करने के लिए बैठ रही थी कि अचानक मेरी नजर तुम पर चली गई थी और मैं देखा था तुम चड्डी नहीं पहनी थी बस साड़ी उठाकर बैठ गई थी पेशाब करने के लिए,,,,(अंकित पर सुरूर जा रहा था वह मदहोश हुआ जा रहा था वह अपनी मां से इस तरह की बातें करना नहीं चाहता था लेकिन वक्त और हालात को देखकर अपने आप ही उसके मुंह से इस तरह की गंदी बातें निकल रही थी और सुगंधा तो अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर एकदम से मदहोश हो जा रही थी उत्तेजित हुए जा रही थी उसे अच्छा लग रहा था अंकित के मुंह से इस तरह की बातें सुनने में,,,,, अंकित की बात को सुनकर सुगंधा को सब कुछ याद आ गया था,,, उसे अच्छे से याद था,,वह जानबूझकर चड्डी नहीं पहनी थी,, क्योंकि मार्केट में पेशाब करने के लिए वह पहले से ही सोच कर रखी थी यह उसके प्लान का ही भाग था चक्की ना पहनना क्योंकि वहां जानबूझकर अपने बेटे को यह दिखाना चाहती थी अपने आप को पेशाब करते हुए दिखाना चाहती थी और उसके बेटे ने देखा भी था और यह वह जानबूझकर बोल रहा था कि वह अनजाने में देख लिया था,,, फिर भी अपने बेटे की बात सुनकर आश्चर्यजताते हुएबोली,,,)

बाप रे तू मुझे देख रहा था,,,।

नहीं नहीं देखा नहीं रहा था बस अनजाने में मेरी नजर पहुंच गई थी,,,।

लेकिन तू कितना समझदार है देख कर भी तुझे मेरी तकलीफ के बारे में पता चल गया,,, सच में मेरे पास चड्डी नहीं है,,,,। तु खरीद कर लाएगा,,,,!

(इतना सुनते ही ऐसा लग रहा था जैसे अंकित के कानों में कोई रस घोल रहा हो वह मदहोश हुआ जा रहा था,,,, उसे बहुत अच्छा लग रहा था उसकी मां उसे अपने इसलिए चड्डी खरीदने के लिए बोल रही थी लेकिन फिर भी वह औपचारिकता निभाते हुए बोला,,)

मम्मी में कैसे लाऊंगा मुझे तो इसका अनुभव भी नहीं है दीदी को बोल देना ना,,,,।

नहीं दीदी को नहीं मैं भी तो देखूं तु मेरी कितनी फिक्र करता है,,,(सुगंधा जानबूझकर अपनी बेटी से नहीं मांगना चाहती थी क्योंकि महीना पहले ही वह अपनी बेटी से अपने लिए चार पेटी मंगवाई थी इसलिए अगर वह अपनी बेटी से कहती तो वह क्या कहती कि अभी-अभी तो चार पेंटी खरीद कर दी थी वह कहां गई और अंकित तो इस बारे में कुछ जानता भी नहीं है,,, अंकित अपनी मां की बात सुनकर बोला,,,)

लेकिन मुझे तो कुछ पता ही नहीं है कि कैसे खरीदी जाती है,,,।

अरे इसमें क्या हुआ बड़ा तो तू हो ही गया है इतना तो तुझे समझ में आ जाना चाहिए की औरतों की पेंटिं कैसे खरीदी जाती है,,, बोल खरीदेगा ना,,,,।

अगर रहती हो तो जरूर खरीद दूंगा मुझे अच्छा नहीं लगता है तुम इस तरह की फटी चड्डी पहनती हो,,,।

ठीक है तो खरीद कर देगा तो नहीं पहनूंगी फटी चड्डी,,,,,। लेकिन हां अपनी बहन को कुछ भी मत बताना नहीं तो वह क्या समझेगी,,,।

बिल्कुल नहीं बताऊंगा,,,,।

(पेंटिं खरीदवाने के चक्कर में सुगंधा वह छोटा सा छेद बड़ा कैसे हो गया इस बारे में पूछना भूल ही गई थी,,, और दोनों सूखे हुए कपड़े उतार कर नीचे आ गए थे तब तक तृप्ति भी घर पर आ चुकी थी,,,,)

मां बेटे दोनों सुखी हुए कपड़े लेकर नीचे आ चुके थे और थोड़ी ही देर में तृप्ति भी आ गई थी,,, लेकिन जिस तरह की बातें हो रही थी दोनों मां बेटे के बीच उत्तेजनात्मक मदहोशी भारी उसके चलते इस समय तृप्ति का घर आना मां बेटे दोनों को भी अच्छा नहीं लग रहा था उन दोनों को ऐसा ही लग रहा था जैसे मानो कबाब में हड्डी,,, क्योंकि दोनों जिस तरह से बातें कर रहे थे वह मां बेटे के बीच नहीं बल्कि एक मर्द और औरत के बीच बातें हो रही थी,,,,।
अंकित तो खुशी से फुल नहीं समा नहीं रहा था क्योंकि उसकी मां ने उसे अपने लिए पेंटिं खरीदने के लिए जो बोल दी थी,,, यह उसके लिए पहला अनुभव होगा जब वह अपनी मां के लिए चड्डी खरीदने बाजार जाएगा आज तक अंकित ने औरतों के अंतर्वस्त्र को खरीद नहीं था और ना ही कुछ अनुभव था उनके साइज के बारे में,,,,, अंकित इसलिए हैरान था कि उसकी मां उससे कितना ज्यादा खुलती चली जा रही थी जो अपने अंतर्वस्त्र को हमेशा कपड़े के नीचे ढक कर रखती थी उसे सूखाती थी,, आज खुद ही उसे धोने के लिए दी थी उसे सूखाने के लिए दी थी,,, अंकित को इस बात का एहसास हो रहा था कि जिस तरह की बातें उन दोनों के बीच हो रही थी उसकी मां बिल्कुल भी हिचकिचा नहीं रही थी एकदम सहज होकर बातें कर रही थी,,,, खास करके अपनी ही चड्डी के छोटे से छेद को बड़ा हुआ देखकर उसमें उंगली डालकर अंदर बाहर करना यह इशारा बहुत ही खास था जो ठीक तरह से अंकित समझ नहीं पाया था लेकिन अब उसे थोड़ा-थोड़ा एहसास हो रहा था कि उसकी मां इस तरह की हरकत करके क्या जताना चाह रही थी इसलिए अपनी मां की उस हरकत के बारे में सोच कर इस समय उसका लंड खड़ा हो चुका था,,,,।

तृप्ति आते ही चाय बनाना शुरु करती थी क्योंकि वह जानती थी कि उसकी मां की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए घर का सारा काम सही करना था और वह किसी भी तरह से अपनी मां को परेशान नहीं होने देना चाहती थी इसलिए जल्दी से चाय बनाकर अपनी मां के कमरे में पहुंच गई जहां पर वह लेटी हुई थी,,,, वैसे तो दवा अपना असर कर रही थी और सुगंधा अच्छा खासा अनुभव कर रही थी,,, उसे जल्द ही आराम हो गया था,,,, लेकिन फिर भी न जाने क्यों सुगंधा अपनी बेटी को यह दिखाना चाहती थी कि उसे अभी ठीक से आराम नहीं हुआ है इसका कारण एक ही था कि दूसरे दिन भी अंकित स्कूल न जाए और उसकी देखभाल करें,,।

एक ही कमरे में तीनों बैठकर चाय की चुस्की ले रहे थे,,, और चाय की चुस्की लेते हुए तृप्ति बोली,,,।

हां मैं यह बताना तो भूल ही गई हमारे कॉलेज में तीन-चार दिनों की छुट्टी है,,,,,, चलो अच्छा ही हुआ तीन-चार दिन में ही तुम्हारा ख्याल रखूंगी,,,, अंकित परेशान हो गया होगा,,,,।
(कॉलेज की छुट्टी के बारे में सुनते हैं मां बेटे दोनों एकदम से सन्न रह गए दोनों के चाय के कप उनके होठों तक आकर एकदम से रुक गए थे,, और अनजाने में ही दोनों एक दूसरे के सामने देखने लगे थे क्योंकि वह दोनों जानते थे कि तृप्ति के घर पर न होने की वजह से दोनों आपस में कितना खुल रहे थे और उसकी हाजिरी में ऐसा कुछ भी नहीं हो पाएगा इसलिए दोनों अंदर से दुखी हो गए थे लेकिन फिर भी अंकित सहज होता हुआ बोला,,,)

इसमें परेशानी की कौन सी बात है दीदी,,, यह तो हमारा फर्ज है ना अगर मैं बीमार पड़ता तो मम्मी दिन-रात मेरी सेवा करती रहती अगर आज वह बीमार है तो सेवा तो करना ही पड़ेगा ताकि जल्दी ठीक हो जाए,,,।

वैसे मम्मी तुम नही थी,,,।

हां,,,, बिना नहाए अच्छा नहीं लग रहा था,,,,।

कपड़े तो रखी हो ना मैं धो देती हूं,,,।

अरे नहीं नहीं कपड़े तो मैं धो दी,,,

क्या करती होमम्मी,,,,(एकदम गुस्से से अंकित की तरफ देखते हुए अपनी मां से बोली) तुम्हारी तबीयत खराब थी ना तुम्हें सब नहीं करना चाहिए था पर तुम्हारी देखभाल करने के लिए मैं अंकित को तो घर पर छोड़कर गई थी और अंकित क्या तू एक दिन मम्मी के कपड़े नहीं धो सकता,,,,।

अरेलेकिन,,,(अपनी बड़ी बहन की बात सुनकर अंकित बोल तो उसकी बात को बीच में ही काटते हुए सुगंधा झट से बोली)

अरे तो क्या हो गया तृप्ति मुझे आराम लग रहा था तो मैं धो दी वैसे अंकित मुझे धोने नहीं दे रहा था लेकिन फिर भी मैं धो डाली,,,,।
(सुगंधा अंकित की तरफ देखते हुए बोली अंकित अपने मन में ही बोल रहा था तुम क्या जानो दीदी तुम्हारे जाने के बाद घर में क्या-क्या हुआ है आज जो नजर मैंने देखा हूं वैसा नजारा मैंने कभी नहीं देखा और पहली बार मम्मी के कपड़े धोने में मुझे इतना मजा आया कि पूछो मत खासकर की मम्मी की ब्रा और चड्डी,,,,, अपनी मां की बात सुनकर तृप्ति बोली,,,)

चलो आज जो हुआ सो हुआ अब दो-तीन दिन बिल्कुल भी नहीं काम करना,,,, ठीक है ना,,,।

हां बाबा बिल्कुल ठीक है बस,,,,

अब मैं जल्दी से खाना बना देती हूं,,,,।

ठीक है जाकर बना दे,,,,।

वैसे तुम क्या खाओगी मम्मी,,,,।

मम्मी को तो डॉक्टर ने हल्का खाना खाने को बोला है ऐसा करो,, तुम खिचड़ी ही बना दो,,,(अंकित समझदारी दिखाते हुए बोला और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) जल्दी से बन भी जाएगा,,,,

हां यह तो ठीक कह रहा है एक ही दिन में समझदार हो गया है,,,,।

(तृप्ति की बात सुनकर सुगंधा अपने मन में बोली एक ही दिन में समझदार और मर्द दोनों बन गया है,,,
तृप्ति खाना बनाने के लिए चली गई और अंकित घर से बाहर थोड़ा टहलने के लिए निकल गया और टहलते हुए वह अपनी मां के बारे में ही सोच रहा था दिन भर जो कुछ भी हुआ उसके बारे में सोच रहा था,,,, उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि एक औरत का साथ मर्द को कितना आनंदित कर देता है,, औरत की हर एक अदा मर्दों के लिए कितनी कामुकता भरी होती है आज ईसका एहसास हो रहा है,,, औरतों का नहाना कपड़े बदलना कपड़े उतारना बातें करना सब कुछ तो उत्तेजित कर जाता है,,, आज कितना अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था इसका एहसास उसे अभी तक हो रहा था,,,।

अंकित अपनी मां के बारे में सोच कर मदहोश हो रहा था कि तभी उसके कानों में आवाज आई,,,।

अंकित,,,ओ अंकित,,,,,।
(अपना नाम सुनाई देते हैं अंकित पीछे मुड़कर देखा तो ठीक उसके पीछे सुमन खड़ी थी उसे देखते ही उसकी आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई और वह एकदम से हडबढ़ाते हुए बोला,,)

कककक,,, क्या हुआ दीदी,,,?

अरे हुआ कुछ नहीं है मैं घर का थोड़ा सामान लेने जा रही थी तुझे देखी तो रुक गई वैसे तुझे कोई काम है क्या,,,।

नहीं नहीं दीदी मैं तो ऐसे ही घूम रहा हूं,,,।

तो चल मेरे साथ थोड़ा सामान खरीद कर वापस आ जाते हैं,,,।

हां,,, हां,,,,, चलो,,,,।
(और इतना कहने के साथ ही दोनों पास ही नुक्कड़ के किराना की दुकान पर चल दिए चलते हुए सुमन अंकित की तरफ देखते हुए बोली,,,)

वैसे लगता है कि पढ़ने में ध्यान नहीं दे रहे हो,,,।

नहीं नहीं दीदी ऐसी कोई भी बात नहीं है लेकिन ऐसा क्यों कह रही हो,,,,।

ऐसा इसलिए कह रही हूं कि तुम्हें मैं अपने घर बुलाई थी पढ़ने के लिए,,, कोई भी सब्जेक्ट में परेशानी हो तो मुझसे पूछ लेना ऐसा मैं बोली थी लेकिन तुम तो उस दिन से दिखाई ही नहीं दिए,,,।

नहीं दीदी ऐसी कोई भी बात नहीं है,,,, जब जरूरत पड़ेगी तो बिना कहे तुम्हारे पास आ जाऊंगा पूछने के लिए,,, वैसे भी एग्जाम आने वाले हैं तब तुम्हारी जरूरत मुझे पड़ेगी,,,,।

ठीक है बेझिझक पूछ लेना,,,, तुम्हारे लिए मैं हमेशा तैयार हूं,,,,,, लो बातों ही बातों में दुकान भी आ गई,,, और दोनों दुकान की सीढ़ियां चढ़ने लगे लेकिन आगे आगे सुमन थी और पीछे अंकित था और ऐसे में अंकित की नजर अपने आप ही सुमन की गदराई गोल गोल गांड पर चली गई और इस समय वह पजामा और कुर्ती पहनी हुई थी,,, जिसकी वजह से उसका बदन और भी ज्यादा भरा हुआ लग रहा था ,, खास करके उसकी गांड को ज्यादा ही उभरी हुई नजर आ रही थी जिसे देखते ही अंकित की हालत खराब होने लगी उसके मुंह में पानी आने लगा,,,, दुकान पर अच्छी खासी भीड़ थी जिसकी वजह से सुमन आगे खड़ी थी और ठीक उसके पीछे अंकित खड़ा था,,,।

इस तरह से दुकान पर खड़े होने की वजह से उसे बाजार वाली बात याद आ गई जब वह इसी तरह से अपनी मां के साथ घर का सामान खरीदने के लिए आया था और तभी एक औरत के हाथ से कुछ सामान गिर जाने की वजह से वह एकदम से नीचे चुका गई थी और उसके झुकने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी गांड ठीक उसके लंड पर आ लगी थी,,, जिसकी वजह से अंकित केतन बदन में अजीब सी हलचल महसूस हुई थी,,, और वह औरत भी जाते-जाते उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी,,,, उस पल अंकित पहली बार किसी औरत को टकटकी लगाए देख रहा था,, पहली बार उसे उत्तेजना का एहसास हुआ था क्योंकि उसे समय उसकी उत्तेजना के केंद्र बिंदु में औरत के आकर्षण का मुख्य जरिया जो आ लगा था,,,।

दुकान पर अच्छी खासी फिर सब लोग अपना-अपना सामान ले रहे थे और दुकान पर दुकान के शेठ के साथ-साथ उसके दो मजदूर भी थे , जो जल्दी-जल्दी ग्राहकों को सामान दे रहे थे,,,, उस दिन वाली घटना को याद करके अंकित का लंड खड़ा हो चुका था,,, और उसे अपनी स्थिति पर शर्मिंदगी का भी एहसास हो रहा था क्योंकि वह नहीं चाहता था कि किसी की भी नजर उसके पेंट के आगे वाले भाग पर पड़े,,,, इसलिए वह सुमन से भी तकरीबन चार पांच अंगुल की दूरी बनाए हुए था क्योंकि वह जानता था कि अगर वह थोड़ा सा भी आगे किया तो उसके पेट में बना तंबू सुमन की गांड पर रगड़ खाने लगेगा और वह न जाने क्या समझेगी लेकिन ऐसा एहसास उसे सुमन के घर में ही प्राप्त हो चुका था जब वह उसके घर गया था और उसे समय तो हुआ है उसके नितम्बो की रगड़ अपने लैंड पर महसूस करके उसकी कमर को भी दोनों हाथों से दबोच दिया था क्योंकि सब कुछ अपने आप ही हुआ था,,, और वह इस बात से अनजान था कि उसी दिन से सुमन उसके आकर्षण में बंध गई थी,, उसके मर्दाना अंग पर मोहित हो गई थी।

सुमन के मन में भी कुछ और चल रहा था सुमन चाहती थी कि उसे दिन की तरह आज भी अंकित का मर्दन अंग उसकी गांड से रगड़ खाएं इसलिए वह अभी तक दुकानदार से सामान नहीं मांगी थी बस खड़ी होकर हल्के हल्के अपनी नितंबों को थिरकन दे रही थी और एक बहाने से,, अपनी गांड को पीछे की तरफ ढकेल के अंकित के लंड से अपनी गांड को स्पर्श करा रही थी लेकिन वह अपने इरादे में कामयाब नहीं हो पा रही थी क्योंकि अंकित थोड़ी सी उससे दूरी बनाकर खड़ा था,,,, अंकित देख रहा था कि सब लोग धीरे-धीरे अपना सामान लेकर जा रहे हैं लेकिन भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही थी और सुमन थी कि अभी तक कुछ बोल ही नहीं थी कि उसे क्या चाहिए इसलिए अंकित धीरे से उसके कान के पास अपने होठों को लाया और बोला,,,।

दीदी कुछ बोलो तो सही वरना खड़े रह जाएंगे,,,,।
(अंकित उसके कान के इतने करीब अपने होठों को ले जाकर के बोला था कि उसकी गर्म सांसे उसे अपनी कानों पर महसूस हुई थी और वह इस एहसास से पूरी तरह से मत हो गई थी उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो जैसे अंकित उसके गर्दन पर चुंबन करने जा रहा हो,,,,, फिर भी गहरी सांस लेते हुए वह बोली,,,)

हां,,,, बोल रही हूं,,,,,,(और इतना कहने के साथ है वह दुकानदार से सामान मांगना शुरू कर दी धीरे-धीरे उसके मजदूर सामान पैक करने लगे अंकित अच्छा खासा उत्तेजित हो चुका था बार-बार उसकी नजर पजामे में सुमन की गांड पर चली जा रही थी जिसकी वजह से उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर पेंट में खुंटा बनाया हुआ था अंकित इस बात से डर भी रहा था कि कहीं उसका खुंटा सुमन के छेद में न घुसने लगे इसलिए वह बहुत संभाल कर खड़ा था,,,।

लेकिन तभी उसके पीछे दो-तीन लड़के आ गए जो आपस में मस्ती करते हुए अंकित से टकरा गए और अंकित अपने आप को पूरी तरह से बढ़ाने की कोशिश करते हुए भी नाकामयाब रहा और वास्तव में उसका खुंटा जाकर सुमन की गदराई गांड के बीचों बीच दस्तक देने लगा,,,, एक तरफ आश्चर्य से अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई थी वहीं दूसरी तरफ सुमन पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,, उसे अपनी गांड के बीचों बीच अंकित का खुंटा धंसता हुआ महसूस हो रहा था,, वह पूरी तरह से गदगद हुए जा रही थी दुकान पर लगी थी इस बात से पूरी तरह से अनजान अच्छी दुकान पर ही एक जवान लड़की और एक जवान लड़का आपस में अपने अंगों को रगड़ रहे हैं,,,, अंकित की तो हालत खराब हुए जा रही थी,,, वह जल्द से जल्द अपने आप को पीछे लेना चाहता था लेकिन तभी फिर से वह लडके आपस में मस्ती करते हुए धक्का मुककी करने लगे और इस बार सुमन को ऐसा लग रहा था कि कहीं उसका पजामा फाड़ के अंकित का लंड उसकी गांड के छेद में ना घुस जाए,,,।

अनुभव से भरी हुई सुमन अच्छी तरह से समझ गई थी कि वाकई में अंकित के पास दमदार लंड है उसकी तो बोलती बंद हो गई थी,,,, लेकिन अंकित एक तरफ उत्तेजना का अनुभव करता हूं दूसरी तरफ शर्मिंदा भी था इसलिए फिर से उसके कान के पास अपने होंठ को लाकरबोला,,,।

सॉरी दीदी,,, बच्चे धक्का मुक्की कर रहे हैं,,,(उसका इतना कहना था कि तभी फिर से धक्का लगा और इस बार पजामा पहने होने के बावजूद भी सुमन को साफ-साफ महसूस होने लगा कि अंकित का लंड उसके बुर के मुख्य द्वार पर दस्तक दे रहा था,,, सुमन तो चारों खाने चित हो चुकी थी उसे अपनी बर से मदन रस बहता हुआ महसूस हो रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी और वह कुछ बोल नहीं पा रही थी वह इसी तरह से खड़े रहना चाहती थी लेकिन दुकानदार बार-बार उससे पूछ कर उसका सारा सामान पैक कर दिया था इस बीच अंकित अपने आप को सुमन के बदन से अलग नहीं कर पाया था क्योंकि वह लड़के भी ठीक उसके पीछे खड़े होकर अपना नंबर का इंतजार कर रहे थे,,, इस पल का अंकित पूरी तरह से फायदा उठाना चाहता था वह चाहता था कि वह अपनी कमर को आगे पीछे करके इस तरह से जताए की मानों जैसे वह सुमन की चुदाई कर रहा हो और ऐसा करने में उसे आनंद भी आता लेकिन वह ऐसा करने से डर रहा था बस उसी तरह से,,, खड़े रह गया था सुमन की गांड में लंड धंसाए,,,,।

इस बीच सुमन पूरी तरह से पानी पानी हो गई थी उसकी पेंटि पूरी तरह से गीली हो चुकी थी क्योंकि अंकित के मोटे-मोटे लंड को अपनी बर के द्वार पर महसूस करके वह झड़ चुकी थी ,, इस बात का दुकान पर खड़ी भीड़ को पता भी नहीं चला था कि एक लड़की एक लड़के के लंड को अपनी गांड पर महसूस करके पानी छोड़ दी थी,,, यह एहसास यह अनुभव अंकित के साथ-साथ सुमन के लिए भी बेहद अद्भुत था क्योंकि सुमन इस तरह का अनुभव कभी नहीं प्राप्त की थी हां कभी कबार भीड़ भाड़ में आते जाते बस में सफर करते हुए मनचले लड़के भीड़ का फायदा उठाते हुए उसकी गांड से अपने लंड को स्पर्श करा देते थे या तो फिर उसकी गांड पर अपना हाथ रख कर दबा देते थे बस इतना ही होता था,,, लेकिन आज पहली बार भीड़ में किसी का लंड उसकी बुर के मुख्य द्वार तक पहुंचा था जिसकी वजह से वह झड़ गई थी,,,,।

ना चाहते हुए भी सुमन को अपना सामान थैली में रखकर वहां से हटना पड़ा,,, वापस लौटते समय शर्म के मारे अंकित कुछ बोल नहीं पा रहा था तो सुमन ही उसका हौसला बढ़ाते हुए बोली,,,।

क्या हुआ खामोश क्यों हो,,कुछ बोलते क्यों नहीं,,?

वो , दीदी,,,, मैं जानबूझकर नहीं,,,,

(उसकी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि वह उसे रोकते हुए बोली,,)

कोई बात नहीं अंकित भीड़ में तो यह सब होता ही रहता है मुझे मालूम है तुम्हारी गलती बिल्कुल भी नहीं है,,, तुम शर्मिंदा मत हो,,,।
(सुमन जानबूझकर उसे इस तरह से बोल रही थी ताकि आगे भी इस तरह की गलती करने में उसे बिल्कुल भी डर महसूस ना हो और वह उसके साथ एकदम से खुल जाए क्योंकि सुमन उसके साथ आनंद लेना चाहती थी ,, उसके कठोर लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,, देखते ही देखते दोनों घर आ चुके थे और सुमन उससे बोली,,,)

याद रखना अंकित पढ़ाई में किसी भी प्रकार की तकलीफ आए तो मुझसे मिल लेना मैं तुम्हारी मदद करूंगी,,,।

जी दीदी,,,,
(पर फिर सुमन अपने घर चली गई और एक नए अनुभव के साथ अंकित अपने घर में आ गया,,,, थोड़ी ही देर में खाना तैयार हो चुका था तीनों साथ में मिलकर खाना खाकर कुछ देर के लिए टीवी देख रहे थे और टीवी देखते देखते रात के 12:00 बज गए थे,,,, सुगंधा धीरे से उठी और अंकित से बोली,,,)

अब मैं जा रही हूं सोने और तु भी जाकर सो जा,,, और त्रप्ती तू भी सो जा,,,।

बस थोड़ी देर और मम्मी,,,, फिल्म खत्म होने वाली है,,,।

ठीक है इसके बाद टीवी बंद करके सो जाना,,,,।

(इतना कहकर सुगंध कमरे से बाहर जाने लगी लेकिन अंकित की नजर अपनी मां पर ही टिकी हुई थी तभी उसने देखा कि उसकी मां ड्राइंग रूम से बाहर निकाल कर अपने कमरे की तरफ जाने के बजाय घर के पीछे की तरफ जा रही थी और जाते समय एक नजर उसके ऊपर भी डाल कर गई थी,,,, अंकित का दिल जोरों से धड़कने लगा था वह अपने मन में सोचने लगा कि उसकी मां अपने कमरे में जाने क्यों बजाई पीछे की तरफ क्यों जा रही है जरूरवह पेशाब करने जा रही है,,,, यह ख्याल उसके मन में आते ही वह भी अपने आप को रोक नहीं सका वह भी एक अद्भुत दृश्य को देखने की चाह में धीरे से उठा ओर ड्राइंग रूम से बाहर निकल कर घर के पीछे की तरफ जाने लगा,,,,,।

उसे डर भी लग रहा था कि कहीं उसकी मां उसे कुछ भला बुरा ना कह दे लेकिन फिर भी वह एक मनमोहक दृश्य को देखने की चाह में अपने मन से डर को निकाल दिया घर के पीछे के दरवाजे के पास पहुंच गया और वहां दीवार के पीछे खड़े होकर वह अपनी मां की तरफ देख चलेगा जो कि अभी भी सामने की तरफ मुंह करके खड़ी थी मानो की जैसे उसके ही आने का इंतजार कर रही हो,,,, डर और उत्तेजना के मारे अंकित गहरी गहरी सांस ले रहा था उसकी किस्मत अच्छी थी कि आज भी चांदनी रात थी और उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,,।

और यह हकीकत ही था की सुगंधा उसके आने का ही इंतजार कर रही थी,,, और जैसे ही उसे बात का एहसास हुआ कि अंकित ठीक उसके पीछे दरवाजे के पास खड़ा है तो वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगी वह अपने बेटे को अद्भुत नजारे का दर्शन करना चाहती थी जो कि वह कर भी चुकी थी लेकिन वह जानती थी कि इस तरह का दृश्य मर्दों के लिए हमेशा नया अनुभव ही लेकर आता है हर बार नया ही लगता है वह जानती थी इस दृश्य को बार-बार देखने में भी उसके बेटे को बिल्कुल भी बुरा नहीं लगेगा बल्कि हर बार ही वह पहले की तरह ही उत्तेजना का अनुभव करेगा,,,।

जैसे ही सुगंधा अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगे वैसे ही अंकित की हालत खराब होने लगी,,, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा देखते ही देखते सुगंध अपनी साड़ी को अपनी जांघों तक उठा दी उसकी मोटी मोटी जांघ चांदनी रात में भी चमक रही थी एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, जिसे देख कर अंकित का लंड खड़ा हो रहा था,,, और फिर एकदम से नाटक पर से पर्दा उठाते हुए सुगंधा अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी और अपनी मां की नंगी गांड देखकर अंकित की हालत खराब हो गई और अपने आप ही उसका हाथ उसके लंड पर आ गया और वह पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को दबाना शुरू कर दिया,,, और उसे इस बात का भी एहसास हो रहा था कि उसकी मां चड्डी नहीं पहनी थी इसका मतलब साफ था कि उसकी मां के पास चड्डी नहीं था और उसे अपनी मां के लिए चड्डी खरीदना बेहद जरूरी हो गया था,,,,।

लेकिन उसे अपनी मां के बदन पर चड्डी ना देखकर इस बात का संतोष भी रहता था कि उसका बेस कीमती हुस्न एकदम से उसके सामने आ जाता है चड्डी उतारने का झंझट ही नहीं रहता,,, लेकिन फिर भी उसकी मां के लिए चड्डी बेहद जरूरी था,,, उसकी मां कमर तक साड़ी उठाई कुछ देर तक ऐसे ही खड़ी रही और अपने दोनों हाथों को अपने नितम्बों पर लाकर हल्के हल्के सहला रही थी,,, यह देखकर अंकित अपने मन में ही बोला यह क्या कर रही हो मम्मी यह काम तो मुझ पर छोड़ दो मैं अच्छे से तुम्हारे पूरे बदन को सहला दूंगा बहुत प्यार करूंगा,,,, अभी वह अपने आप से इस तरह की बातें कर ही रहा था कि तुरंत उसकी मां पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई,,,,।

भला हो चांदनी रात का की उसे रात में भी अपनी मां का बेस कीमती खूबसूरत अंग उसका बदन एकदम साफ दिखाई दे रहा था जिसे देखकर वह उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था,,, अगले ही पल उसके कानों में अपनी मां की गुलाबी बुर में से निकलने वाली सिटी की आवाज एकदम साफ सुनाई देने लगी यह सिटी की आवाज नहीं थी बल्कि मटकना से भरी हुई अद्भुत संगीत की अकल्पनीय और था जिसे सुनने के लिए दुनिया का हर मर्द तरसता है और वह सुर इस समय अंकित के कानों में बड़े अच्छे से सुनाई दे रहा था वह मदहोश हुआ जा रहा था वह पेट के ऊपर से अपने लंड को जोर-जोर से मसल रहा था उसकी तो इच्छा हो रही थी किसी समय अपने लंड को बाहर निकाल कर अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखकर अपने लंड को मुठिया कर उसका पानी निकाल दे लेकिन ऐसा करने में उसे डर लग रहा था,,,,।

अंकित की आंखों के सामने बेहद अद्भूत नजारा था,,, उसकी मां अपनी गांड खोलकर पेशाब कर रही थी और वह छूकर अपनी मां को देख रहा था उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसकी मां जानती है कि उसका बेटा पीछे छुपकर उसे पेशाब करता हुआ देख रहा है और यही एहसास सुगंधा के तन बदन में आग लग रहा था वह मदहोश हो जा रहे थे वह अपने मन में सोच रही थी कि इतने करीब होते हुए भी वह अब तक अपने बेटे का सही उपयोग नहीं कर पाई है उसका उपभोग नहीं कर पाई है,,,,, उसकी बुर से लगातार पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी और इतने में वह तुरंत अपनी नजर घुमा कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी अंकित को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसकी मां पीछे देख लेगी और दोनों की नजर आपस में टकरा गई दोनों एक दूसरे की आंखों में देखने लगे दोनों एकदम स्तब्ध थे,,,।

दोनों की नजर आपस में टकरा जाने की वजह से दोनों के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी दोनों कुछ पल के लिए एक दूसरे को ही देखे जा रहे थे यह नजारा अभी क्या खूब था सुगंधा पेशाब करते हुए अपने बेटे को देख रही थी और अपनी मां को पेशाब करता हुआ अंकित देख रहा था दोनों केतन में आग लगी हुई थी दोनों उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुके थे,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है और सुगंधा पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रही थी उसकी आंखों में प्यास झलक रही थी उसके चेहरे पर वासना की खुमारी नजर आ रही थी वह अपने बेटे को अपने करीब आने देना चाहती थी लेकिन उसका बेटा उसके ईसारे को समझ नहीं पा रहा था,,, सुगंधा सोच रही थी कि यह पल है उसकी जिंदगी से कभी खत्म ना हो बस वो इसी तरह से बैठकर पेशाब करती रहे और उसका बेटा उसे जी भर कर देखता रहे ,,, लेकिन ऐसा संभव नहीं था क्योंकि कुछ ही देर में सुगंधा की गुलाबी छेंद से पेशाब के निकलने वाली धार कमजोर पड़ने लगी,,,

वह ऐसा चाहते नहीं थी लेकिन ऐसा उसके बस में भी नहीं था वह पेशाब कर चुकी थी लेकिन फिर भी कुछ देर तक इस अवस्था में बैठे रह गई वह अपने बेटे को जी भर कर अपनी नंगी जवानी के दर्शन करा रही थी और अभी तक अपने बेटे को ही देख रही थी और यह भी देख रही थी कि उसका बेटा उसकी नंगी जवान को देखकर किस कदर उत्तेजित हो रहा था वह लगातार अपने लंड को पेट के ऊपर से ही दबा रहा था मसल रहा था उसकी यह उत्तेजना देखकर उसके तन बदन में आग लगने लगी,,,,,अंकित भी अपनी मां को ही देख रहा था दोनों एक दूसरे के ऊपर से अपनी नजर को हटा नहीं रही थी दोनों की नजर में वासना एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,,, इसके पास धीरे से मुस्कुराते हुए सुगंधा अपनी साड़ी को इस तरह से उठाए हुए ही खड़ी हो गई अभी भी खड़ी होने के बावजूद भी उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और वह एक बार फिर से अपने बेटे की तरफ देखकर अपनी साड़ी को ऐसे गिरा दी जैसे कि एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा पड़ गया हो,,,,,।

अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह वहीं पर खड़ा रहेगा अपने कमरे में चला जाए लेकिन वह इस समय अपनी मां के आकर्षण में इस तरह से बंध गया था कि वह चाह कर भी वहां से हील नहीं पा रहा था और उसकी मां मुस्कुराते हुए उसकी तरफ आगे बढ़ने लगी और उसके पास से गुजरते हुए उसे मुस्कुरा कर देखी और आगे बढ़ गई अंकित तो पूरी तरह से अपनी मां की मदद कर देने वाली जवानी का गुलाम बन चुका था वह उसे जाते हुए देखने लगा और फिर उसके जाते ही वह जैसे होश में आया हो धीरे से वह भी अपने कमरे में गया लेकिन जिस तरह की उत्तेजना का वह अनुभव कर रहा था उसे अपनी गर्मी शांत करनी थी और वह अपने कमरे में जाते ही अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा होकर अपनी मां को याद करके मुठ मारने लगा,,,।

अंकित के होश उड़े हुए थे ,,जिस तरह का नजारा उसने अपनी आंखों से देखा था उसे तरह का नजारा तो वह कई बार देख चुका था लेकिन इस बार के नजारे में एक अद्भुत आकर्षण था मादकता भरी हुई थी,,, एक निमंत्रण भी था जिसे अंकित समझ नहीं पाया था बस ललचाया आंखों से उसे नजारे का रसपान अपनी आंखों से करता रहा जबकि अगर वह इशारे को समझ पाता तो शायद आंखों से ज्यादा होठों से रसपान कर पाता लेकिन शायद उसकी किस्मत में अभी इतना मदहोश कर देने वाला सुख नहीं लिखा था,,,,।
घर के पीछे का नजारा इतना उत्तेजक हो जाएगा इसका अंदाजा अंकित को बिल्कुल भी नहीं था,,, अंकित की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी,,,,, रात को तो वह अपनी मां का खूबसूरत पिछवाड़ा और उसकी मुस्कान देख कर पूरी तरह से अपने जवान को पिघला कर सो गया था,,, लेकिन सुबह-सुबह भी उसकी हालत पूरी तरह से खराब थी सुबह जब वह अपने बिस्तर पर से उठा तब भी उसका लंड पूरी तरह से अपनी अकड़ दिखा रहा था मानो के जैसे अंकित को कह रहा हो कि,,, तेरी वजह से सब कुछ हो रहा है तुझे जब औरतों का इशारा समझ में नहीं आता तो क्यों उनके पीछे पड़ता है,,, रात को इतना अच्छा मौका था पीछे-पीछे अगर चला गया होता तो तेरा क्या बिगड़ जाता मेरी तो हालात सुधर जाती एक खूबसूरत बुर में जाकर मैं भी डुबकी लगा लेता,,, तो मुझे इस समय झेलना नहीं पड़ता चल अब बाथरूम चल बस वही एक ठिकाना तेरा रह गया है अपनी हवस मिटाने का,,,,,।

अंकित हैरान था अपने लंड की अंगड़ाई को देखकर वह जानता था कि इसका इलाज किए बिना अब वह मानने वाला नहीं है इसलिए वह धीरे से अपनी बिस्तर पर से उठा और बाथरूम में चला गया और बाथरूम में जाते ही अपने सारे वस्त्र उतार कर निर्वस्त्र हो गया पूरी तरह से नंगा और दीवार पर दोनों हाथ दिखाकर अपनी दोनों टांगों के बीच खड़े अपने हथियार को देखने लगा जो कि आज कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा लग रहा था,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें रात को जो कुछ भी हुआ वह उसकी समझ के बिल्कुल पड़े था हालांकि ऐसा नजारा हुआ पहले भी देख चुका था लेकिन अब वह सोचने पर मजबूर हो गया था कि उसकी मां जानबूझकर उसे इशारा तो नहीं कर रही है वरना पेशाब करने के लिए जब वह घर के पीछे जा रही थी तो उसकी तरफ देखने की क्या जरूरत थी उसकी तरफ देखकर मुस्कुराने की क्या जरूरत थी,,,,,।

अपनी मां की इस हरकत को देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां क्या चाहती है सब कुछ जानबूझकर हो रहा था या अपने आप ही सब कुछ होते जा रहा था और ना चाहते हुए भी अंकित उठकर घर के पीछे की तरफ जाकर उसी जगह पर खड़ा हो गया जहां पर वहां पहले भी खड़ा होकर अपनी मां के पिछवाड़ा के दर्शन करके धन्यवाद ऐसा लग रहा था कि उसका इंतजार कर रही थी क्योंकि उसकी मां के जाने के बाद तकरीबन तीन-चार मिनट बाद में उठकर वहां गया था अगर सच में उसकी मां वहां पेशाब करने ही गई होती तो शायद वह तब तक पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई होती लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था अंकित जब वहां पहुंचा तब भी उसकी मां खड़ी थी और धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी बिल्कुल भी सहज नहीं था इसने बिल्कुल भी औपचारिकता नहीं थी जिस तरह से सामान्य तौर पर औरतें पेशाब करने के लिए अपनी साड़ी झट से कमर तक उठाकर बैठ जाती है ऐसा कुछ भी नहीं था,,, यही सब सोच कर तो अंकित का दिमाग पूरी तरह से खराब हुआ जा रहा था वह सोचने पर मजबूर हुआ जा रहा था कि आखिरकार उसकी मां चाहती क्या है,,,?

अंकित के दिमाग में बार-बार यही सब सवाल घूम रहा था कि उसके पहुंचने के बाद ही उसकी मां अपनी साड़ी को क्यों ऊपर उठाना शुरू की और वह भी धीरे-धीरे मानव के जैसे अपनी जवानी का दर्शन उसे ही करने के लिए वह वहां पर खड़ी हो धीरे-धीरे साड़ी के उठते ही अंकित की हालत किसी तरह से खराब हो रही थी यह शब्दों में बयां करना बड़ा मुश्किल है ऐसा लग रहा था कि जैसे खूबसूरत नाटक की शुरुआत पर्दे के उठने से हो रही हो और देखते ही देखते पूरी तरह से उठकर कमर तक आ गया था जिसे सुगंधा की नंगी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से चांदनी रात में चमकने लगी थी इस नजारे को देखकर अंकित का हाथ खुद को खुद उसके लंड पर आ गया था और फिर वह पेशाब करने बैठ गई थी,,,,, यह सब बिल्कुल भी सामान्य नहीं था अंकित को हमेशा लग रहा था क्योंकि थोड़ी ही देर में उसकी मां अपनी नजर घुमा कर उसकी तरफ देखने लगी थी अगर सामान्य होता तो उसकी मां को कहां पता था कि उसके पीछे-पीछे अंकित भी आया है उसके नंगे पन का दर्शन करने के लिए,,,।

यह सोचकर तो उसका दिमाग पूरी तरह से झन्नाने लगा,,,, और वह सोचने लगा कि उसकी मां को मालूम था कि वह पीछे-पीछे आएगी तभी तो मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखी थी और इस समय पेशाब करते समय भी उसे ही देख रही थी दोनों की आपस में नजर भी टकरा गई थी अगर सामान्य होता तो उसकी मां शर्मा जाति और अपनी नजर को नीचे कर लेती अपना मुंह घुमा लेती लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था ऐसा लग रहा था कि वह खुद यह सब जानबूझकर दिख रही है और फिर उसके बाद बिना कुछ बोले उसके पास से गुजर जाना और वह भी उसकी आंखों में आंखें डालकर मुस्कुराते हुए यह सब क्या था यह सब कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,, यह सब याद करके अंकित बाथरूम में पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डुबकी लगाने को तैयार हो गया था,,,।

अंकित अभी औरतों को ठीक तरह से समझ नहीं पाया था बस उनके अंगों की झलक उनका मुस्कुराना उनकी मादक अदा बस यही सब पर वह फिदा था लेकिन उनके इशारों को उनके व्यवहार को अभी तक समझ नहीं पाया था अगर समझ पाता तो शायद वह अपनी मां के पीछे-पीछे कमरे में चला जाता है और फिर रात भर अपनी मां के साथ-साथ अपनी जवानी की प्यास बुझा कर ही बाहर लौटता,,, लेकिन नादान अंकित अपनी मां के इशारों को नहीं समझ पाया था यह नहीं समझ पाया था कि जितना वह अपनी मां को पाने के लिए तरस रहा है उससे ज्यादा उसकी मां उसके साथ एकाकार होने के लिए तड़प रही है,,, ।

यही सब सोचता हुआ अंकित अपने लोहे से भी ज्यादा कड़क लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया और मूठ मारना शुरू कर दिया,, और वह भी रात की ही कल्पना करते हुए कि जब उसकी मां उसके पास से मुस्कुराते हुए गुजर रही थी तब वह अपनी मां का हाथ थाम लिया था और वह अपनी मां के पीछे-पीछे उसके कमरे तक पहुंच गया था और कमरे में जाते ही खुद अपने हाथों से दरवाजा बंद कर दिया था एक नई रात की शुरुआत के लिए अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए अपनी मां को संतुष्ट करने के लिए वह उसे अपनी बाहों में भर लिया था,,,,।

जैसे-जैसे उसका हाथ आगे पीछे हो रहा था वैसे-वैसे उसकी कल्पना भी अग्रसर होती जा रही थी वह कल्पना में अपनी मां के कंधों को पड़कर उसे दूसरी तरफ घुमा दिया था और उसे पीछे से पड़कर अपनी बाहों में भर लिया था और उसकी चूचियों को दोनों हाथ से दबाते हुए उसके पिछवाड़े पर अपने लंड पर रगड़ रहा था जो कि अभी भी पजामे के अंदर था और उसकी मां की गांड साड़ी के लिबास में छिपी हुई थी,,, अब उसकी कल्पना बड़ी तेजी से आगे बढ़ने लगी और अपनी आंखों को बंद करके मुठ मारते हुए अपने मन में कल्पना करने लगा कि कमरे के अंदर उसकी मां उससे क्या कह रही है,,,,।

क्या रे मेरा इशारा समझने में ईतनी देर क्यों कर दिया,,,

इशारे में समझता था लेकिन मुझे डर लगता था कहीं कुछ गड़बड़ हो गया तो,,,,(चूचियों को जोर-जोर से दबाते हुए)

कैसी गड़बड़,,,,

यही की कही तुम एन मौके पर पीछे हट जाओ तो,,,

तुझे लगता है मैं पीछे हटने वाली हूं मेरी बुर में आग लगी हुई है जो कि तेरे लंड से ही बुझेगी,,,, तुझे तो पहले ही मेरी जवानी की प्यास बुझा देना चाहिए था महीनो से तु तड़पा रहा है मुझे,,,,।

जितनी ज्यादा तड़प होगी मजा उतना ही आएगा,,,(और ऐसा कहने के साथ ही धीरे-धीरे अपने हाथों से ब्लाउज का बटन खोलने लगा और देखते ही देखते ब्लाउज के सारे बटन खोलकर अपनी मां की नंगी चूची को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, उसकी हरकत से उसकी मां की सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,)

सहहहहह आहहबबह ऊमममममम,,, अंकित मेरे बेटे मेरी गांड में कुछ चुभ रहा है,,,।

यह और कुछ नहीं मेरा लंड है जो की थोड़ी देर में तुम्हारी बुर में जाने वाला है,,,।

तो जल्दी करना देर किस बात की है,,,,।

बहुत जल्दी है मेरा लंड लेने की,,,,।

तो क्या मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,।

मुझे भी तो कहां रहा जा रहा है,,,,(पर इतना कहने के साथ ही पीछे से अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया और उसकी नंगी गांड देखकर एकदम मदहोश हो गया और दो-चार चपत अपनी मां की गांड पर लगाते हुए बोला,,,)

तेरी गांड देखकर करने ना जाने कितनी बार हिला हिला कर काम चलाया हूं लेकिन आज हीलाऊंगा नहीं बल्कि डालूंगा,,,।

तो डालना ,,,,कि सिर्फ बात ही करता रहेगा,,,।

अब मेरी जुबान नहीं बल्कि जवाब मेरा लंड देगा,,,(और इतना कहने के साथ ही कल्पना में अंकित अपनी मां को झुका कर घोड़ी बना दिया और पीछे से अपनी लैंड को उसके गुलाबी छेद में डालकर कमर हिलाना शुरू कर दिया उसका हाथ बड़ी तेजी से अपने लंड पर घूम रहा था उसकी आंखें बंद थी उसकी कल्पना रंगीन होती जा रही थी,,, कमरे में उसकी मां की शिसकारी की आवाज गुंज रही थी,,, अंकित की कमर बड़ी तेजी से कल्पना में आगे पीछे हो रही थी लेकिन हकीकत में उसका हाथ बड़ी तेजी से चल रहा था और देखते ही देखते उसके लंड से वीर्य का फवारा फूट पड़ा और वह गहरी गहरी सांस लेने लगा,,,।

नहा धोकर अंकित तैयार हो चुका था आज उसे घर पर नहीं रुकना था उसे पढ़ने जाना था क्योंकि दो-तीन दिन के लिए उसकी बहन के कॉलेज में छुट्टी थी,,, और वह दो-तीन दिन तक सुगंधा की सेवा करने वाली थी इस बात से सुगंधा के साथ-साथ अंकित को भी बहुत गुस्सा आया था मन ही मन वह दोनों तृप्ति की बात सुनकर गुस्सा भी हुए थे लेकिन कल कह सकते थे उन दोनों को ऐसा ही था कि दो-तीन दिन इसी तरह से दोनों मजा लेंगे लेकिन सब कुछ तृप्ति ने खराब कर दी थी,,,, नाश्ता करके अंकित घर से बाहर निकल गया था,,,, स्कूल में पहुंचने के बाद भी उसका मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा है बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मां का मुस्कुराना है आंख से आंख मिलाना और मुस्कुराते हुए उसके सामने से गुजर जाना यही सब किसी फिल्म की तरह नजर आ रहा था यह उसकी मां की तरफ से कोई इशारा था या युं ही महज औपचारिकता थी यही अंकित समझ नहीं पा रहा था,,,,।
छुट्टी होने के बाद वह अपने घर नहीं गया बल्कि उसके मन में आया कि चलो राहुल के घर चलते हैं क्योंकि उससे भी मिले काफी दिन हो गया था उसके घर जाकर ही तो उसे पता चला था की मां बेटे के बीच भी अलग प्रकार का रिश्ता होता है हालांकि,,, अंकित ने अभी कुछ अपनी आंखों से देखा नहीं था बस उसके घर पर पहुंचकर जिस तरह का वेशभूषा राहुल की मां का था उसे देखकर ही उसे शंका हो रही थी कि उसके और उसके बेटे के बीच जरूर चल रहा है,,,, कुछ देर इधर-उधर घूमने के बाद वह राहुल के घर की तरफ निकल गया,,,,,,।

थोड़ी देर में वह राहुल के घर पहुंच गया था और दरवाजे पर पहुंच कर बेल बजाने लगा,,, थोड़ी देर में दरवाजा खुला तो दरवाजे को खोलने वाली राहुल की मां थी जो की अंकित को दरवाजे पर खड़ा देकर प्रसन्न मुद्रा में नजर आ रही थी लेकिन अंकित की हालत खराब हो गई थी क्योंकि वह एक गाउन पहनी थी जो उसके घुटने के थोड़ा सा नीचे तक आ रहा था और गांव में से उसकी चूचियां भी एकदम बाहर निकली हुई नजर आ रही थी ना चाहते हुए भी अंकित की नजर नूपुर की छाती पर पहुंच गई थी और अनुभव से भरी हुई नूपुर अंकित के नजरिया को समझ गई थी इसलिए वह अंदर ही अंदर और प्रसन्न हो रही थी बात की शुरुआत नूपुर नहीं की क्योंकि नूपुर की जवानी देखकर अंकित की बोलती बंद हो गई थी,,,।

अरे अंकित तुम बैग भी लिए हो इसका मतलब है कि घर नहीं है सीधा यही आ रहे हो,,,।

जी हां आंटी मैं सोचा राहुल से मिलूं यहीं से गुजर रहा था,,,,।

चलो कोई बात नहीं अच्छा हुआ इसी बहाने मिलने तो आ गए आओ अंदर आओ,,,,।
(नूपुर की बात सुनकर अंकित धीरे से कमरे में प्रवेश कर गया वह घर में अकेली है इस बात की जानकारी होते ही एक अजीब सी उलझन उसके बदन में होने लगी,,,, नूपुर अपने हाथों से दरवाजा बंद कर दी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोल कैसे बात की शुरुआत करें लेकिन फिर भी वह हिम्मत जुटाकर बोला,,)

कहां गया है राहुल,,,?

वह तो लाइब्रेरी गया है,,,,

कब लौटेगा,,,,

यह तो पता नहीं बेटा लेकिन जब भी लाइब्रेरी जाता है दो-तीन घंटे बाद ही आता है और अभी उस घर से निकले 15 मिनट ही हुआ है 15 मिनट पहले आते तो शायद उससे मुलाकात हो जाती,,,,।

चलो कोई बात नहीं मैं फिर कभी मिलेगा अच्छा तो आंटी में चलता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह जाने के लिए अपना कदम उठाया इधर की नूपुर जल्दी से अपना हाथ आगे बढ़कर उसकी कलाई थाम ली और उसे रोकते हुए बोली,,,।)

अरे यह क्या बात हुई राहुल नहीं है तो उसकी मां से भी नहीं मिलोगे क्या,,,!(मादक मुस्कान बिखरते हुए नूपुर एक मदहोशी भरे अंदाज में राहुल की तरफ देखते हुए बोली राहुल तो उसका ही अंदाज देखकर पूरी तरह से अंदर ही अंदर हिल गया था ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे उसका हाथ कोई फिल्म की हीरोइन ने पकड़ रखा है उसकी पकड़ से अंकित के बदन में हलचल हो रही थी,,, पहली बार कोई गैर औरत उसका हाथ जो पकड़ी थी इसीलिए वह एकदम हड़बड़ा भर स्वर में बोला,,,)

मममममम,,, मेरा मतलब यह नहीं था आंटी खामखा में आपको परेशान नहीं करना चाहता,,,,।

अरे इसमें परेशानी की कौन सी बात है तुम यहीं बैठो मैं तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूं,,,,,,,(इतना कहकर नूपुर अंकित को कुर्सी पर बिठा दिए और किचन की तरफ जाने लगी लेकिन किचन की तरफ जाते हुए भी वह अपनी चाल को पूरी तरह से बदल दी थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड गाऊन में से बाहर निकलने को आतुर नजर आ रही थी,,, जिस पर नजर पड़ते ही अंकित का इमान डोलने लगा और अनुभव से भरी हुई नूपुर अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित इस समय क्या देख रहा होगा उसकी नजर उसके कौन से अंक पर होगी और यही निश्चित करने के लिए हुआ है रसोई घर के दरवाजे पर पहुंचकर एकदम से नजर घूमर अंकित की तरफ देखने लगी और अंकित वाकई में उसकी बड़ी-बड़ी गांड को ही खोल रहा था यह देखकर वह एकदम से मारे हो गई अंदर ही अंदर प्रसन्न हो गई और मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखकर बोली,,,,)

अभी लाइ गर्मा गरम चाय,,,,।
(अंकित एकदम से शर्मा गया था और अपनी नजर को नीचे कर लिया था लेकिन नूपुर के दिमाग में कुछ और चलने लगा था नूपुर अंकित के व्यक्तित्व को अच्छी तरह से परख गई थी वह जान गई थी कि यह कितना प्यासा है और अपने दोनों हथेली को अपनी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर मुस्कुराते हुए वह कुछ सोचने लगी उसका दिमाग बड़ी तेजी से चल रहा था वह जानती थी कि घर में इस समय कोई भी नहीं है,,,, वह बहुत लंबे की सोच रही थी वह जानती थी कि कुछ दिनों में उसका बेटा चला जाएगा तो उसके बाद उसकी जवानी फिर से सादे पानी की तरह हो जाएगी जबकि वह अपनी जवानी को सोडे का बुलबुला बना कर रखना चाहती थी,,, जिसे देखकर अच्छे-अच्छे का हाजमा बिगड़ जाए,,, और इसका जुगाड़ वह अपने मन में सोच रही थी और राहुल के जुगाड़ के रूप में अंकित उसे पूरी तरह से फिट लग रहा था,,,, जल्द ही उसने चाय पत्ती के डिब्बे को एक छोटा सा स्टॉल खींचकर उसे पर चढ़ी और थोड़ा ऊपर की तरफ रख दी और स्टुल को एक कोने में रखकर उस पर थैला रख दी,,,,

और चाय बनाने के लिए गैस का नोब घूमाकर लाइटर से उसे जला दी,,,, जलती हुई आग को देखकर वह अपने मन में यही सोच रही थी कि उसकी जवानी भी इसी तरह से सुलग रही है अगर अंकित उसका जुगाड़ बन जाएगा तो उसकी जवानी की आग बुझाने वाले दो तो जवान लड़के हो जाएंगे एक राहुल और अंकित दोनों किसी से कम नहीं है,,, गैस पर एक पतीला रखकर चाय बनाना शुरू कर दी लेकिन तभी वह धीरे से किचन से बाहर आई और अंकित से बोली,,,,,।

अंकित बेटा जरा चाय पत्ती का डिब्बा उतार देना तो राहुल ने लगता है ऊपर रख कर चला गया,, ।

जीआंटी अभी उतार देता हूं,,,,(और इतना क्या करवा है अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और वह भी किचन में आ गया लेकिन वह देखा तो चाय पत्ती का डिब्बा कुछ ज्यादा ही ऊपर था और इधर-उधर देखने लगा नूपुर पहले से ही स्टुल को छुपा कर रख दी थी इसलिए उसे पर अंकित की नजर नहीं पड़ी थी और नूपुर ने उसे बन को इतनी ऊंचाई पर रख दी थी ताकि अंकित भी वहां न पहुंच सके,,, ऊंचाई पर रख चाय पत्ती के डिब्बे को उतारने की थोड़ी बहुत कोशिश करके अंकित देख रहा था लेकिन वह जानता था कि वहां तक उछलकर भी उतारने की कोशिश करेगा तो नहीं पहुंच पाएगा,,, अंकित की कोशिश को देखकर जानबूझकर बात बनाते हुए नूपुर बोली,,,,)

यह राहुल बिना बिल्कुल निकम्मा हो गया है यह भी नहीं समझता कि अगर चाय बनाना होगा तो डिब्बा कैसे उतारेंगे,,,,,, एक काम कर ला मैं तुझे उठाती हूं तु उतार दे,,,,।

नहीं नहीं आंटी आप कैसे उठाओगे,,,,

तो यह उतरेगा कैसे,,,,, या तो मैं तुझे उठाऊ या तू मुझे उठा,,,, लेकिन लगता नहीं कि तू मुझे उठा पाएगा,,,,।

नहीं नहीं मैं तुम्हें उठा लूंगा,,,,,।

पक्का,,,,

हां आंटी पक्का,,,,,

मुझे गिराएगा तो नहीं,,,

बिल्कुलभी नहीं,,,,।

(अंकित तो नूपुर की बात सुनकर ही गदगद होने लगा इस बात से उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी कि नूपुर को अपने हाथों से उठाएगा,,, एक औरत को अपने हाथों से उठेगा यह अंकित के लिए बहुत बड़ी बात थी और वह भी एक पराई औरत को जिसकी जवानी का दीवाना वह खुदथा,,,,)

चल तेरे पर भरोसा करती हूं तू भी मेरे बेटे जैसा ही है एकदम जिम्मेदारी से उठाना ऐसा ना हो कि चाय पीने के चक्कर में मुझे चोट लग जाए,,,,।

ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा चाची मुझ पर भरोसा रखो,,,,(बड़ी विश्वास के साथ अंकित बोल रहा था वह अपने मन में सोचने लगा कि आज राहुल के घर पर आना सफल हो रहा है,,,, और अंकित की बात सुनकर नूपुर एकदम से ठीक उसके सामने खड़ी हो गई और बोली,,,,)

चल उठा,,,,,
( अंकित की आंखों के सामने जवानी से लगी हुई औरत खड़ी थी और कमर के नीचे का भाग पूरी तरह से जवानी से भरा हुआ था इसलिए कुछ ज्यादा ही उभरा हुआ नजर आ रहा था उसे पर नजर पड़ते ही अंकित का लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा था,,, अंकित की हालत खराब हो रही थी कुछ देर तक वह इस तरह से खड़ा होकर केवल राहुल की मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को देखता रहा उसकी मां जानती थी कि राहुल उसके पिछवाड़े कोई देख रहा है इसलिए मन ही मन मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

क्या हुआ नहीं उठा पाएगा तो जाने दे कोई जबरदस्ती नहीं है मैं कोई दूसरा जुगाड़ लगाती हूं,,,,।

(नहीं नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं है,,, मैं बडै आराम से उठा लुंगा,,,)

तो उठा देखा नहीं रहा है पानी गर्म हो रहा है,,,,।

ठीक हैआंटी,,,,(अपनी बेवकूफी से अंकित इस सुनहरे मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इस बहाने वह एक खूबसूरत औरत को स्पर्श तो कर सकता था उसे पकड़ सकता था उसके बदन को छू सकता था इसलिए यह मौका उसके लिए एकदम सुनहरा था और इतना कहने के साथ ही अंकित राहुल की मां के बदन से एकदम करीब लगभग उससे सट सा गया,,,, और नूपुर दिशा निर्देश करते हुए अंकित से बोली,,,,)

जांघों से अपने हाथों की पकड़ बनाकर उठाना तब आराम से उठा लेगा वरना नहीं उठा पाएगा,,,,।

ठीक हैआंटी,,,,(और इतना कहने के साथ ही धड़कते दिल के साथ अंकित थोड़ा सा नीचे झुका और अपने हाथों को गोल करके राहुल की मां की जानू के इर्द गिर अपनी भुजाओं को लपेट लिया और थोड़ा सा शक्ति दिखाते हुए ऊपर उठाने लगा,,, एक पर औरत का जिस्म उसकी मोटी मोटी जांघों का स्पर्श पाते ही अंकित का लंड पूरी तरह से तन गया,,,, एक जवान लड़के का स्पर्श पाकर नूपुर भी मदहोश होने लगी और वह धीरे से बोली,,,)

हां बस इसी तरह से अब धीरे-धीरे उठा,,,,।

(नूपुर की आज्ञा पाते ही अंकित अपनी भुजाओं का बाल दिखाते हुए गोल मटोल बदन की कसी हुई राहुल की मां को वह ऊपर उठाने लगा,,, देखते देखते वह अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए राहुल की मां को बढ़िया आराम से उठा लिया उसके नितंब उसकी गोल मटोल गांड एकदम से उसके मुंह के सामने आ गई,,, या यू का को एकदम से उसकी गांड में अंकित का मुंह धंसा हुआ था,,,, यह पल अंकित के लिए बेहद अद्भुत था राहुल की मां की नरम नरम गांड जवानी से भरी हुई गदराई गांड ठीक उसके मुंह पर थी इसकी गर्माहट उसे पूरी तरह से उत्तेजित किए जा रही थी,,, और यही एहसास नूपुर को भी हो रहा था नूपुर की बुर पानी छोड़ रही थी वह भी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी वह जानती थी कि उसकी गांड अंकित के मुंह पर रगड़ खा रही थी यह एहसास ही नूपुर को मदहोशी से भर रहा था,,,, अंकित को लगा कि अब उसका हाथ पहुंच जाएगा इसलिए वह एकदम सहज होते हुए बोला,,,)

क्या हुआ आंटी हाथ पहुंचा कि नहीं,,,।

बस थोड़ासा और,,,,(नूपुर जानबूझकर उसे थोड़ा और ऊपर उठने के लिए बोल रही थी कि वह जानती थी कि वह गाउन पहनी हुई है और गांव उसकी पकड़ से धीरे-धीरे ऊपर की तरफ फिसल रही थी वह जानती थी कि थोड़ा और ऊपर उठेगा तो उसकी अकाउंट उसकी कमर तक उड़ जाएगी और उसकी नंगी गांड एकदम से अंकित के चेहरे पर रगड़ खाने लगेगी अंकित मदहोश हो जाएगा मस्त हो जाएगा उसकी जवानी का कायल हो जाएगा,,, नूपुर की बात सुनकर अंकित बोला ,,)

ठीक है आंटी,,,,(थोड़ा सा और दम दिखाते हुए वह नूपुर को थोड़ा और ऊपर उठाया लेकिन ऊपर उठने के साथ ही उसका गांड एकदम से उसकी कमर तक उठ गया और उसकी नंगी गांड एकदम से अंकित के चेहरे पर रगड़ खाने लगी अंकित पूरी तरह से मदहोश हो गया मस्त हो गया,,,, अंकित चाहता था अपने चेहरे से दो अंगुली दूर ही उसकी गांड को रख सकता था लेकिन ऐसी बेवकूफी भला अंकित कैसे कर सकता था अंकित ही क्यों दुनिया का कोई भी मर्द इस तरह की बेवकूफी बिल्कुल भी नहीं करता जब एक जवानी से भरी हुई औरत की नंगी गांड उसके चेहरे पर रगड़ खा रही हो तो भला ऐसे में हुआ क्यों ऐसी खूबसूरत औरत की गांड को अपने बदन से अपने चेहरे से अलग करना चाहेगा बल्कि वह तो उसकी जवानी में डूब जाना चाहेगा और यही अंकित के साथ भी हो रहा था,,,,,।

नूपुर की गांड की फांक काफी बड़ी-बड़ी थी,,, अंकित को एहसास हुआ कि राहुल की मां गांऊन के नीचे चड्डी नहीं पहनी थी वह बिल्कुल नंगी थी,,, और यह एहसास अंकित के तन बदन में आग लगा रहा था,,,, ऐसा नहीं था कि सिर्फ अंकित की हालत खराब थी नूपुर तो सब कुछ जानती थी वह जानती थी कि गाऊन के नीचे वह कुछ नहीं पहनी है इसीलिए तो थोड़ा और ऊपर उठाने के लिए बोली थी ताकि कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो जाए और उसकी नंगी जवानी देखकर अंकित पागल हो जाए और यही हो रहा था,,,, अंकित भी मदहोश हुआ जा रहा था और नूपुर भी उत्तेजित हुई जा रही थी उसकी बुर से लगातार पानी टपक रहा था जो कि उसकी बुर से निकाल कर उसकी जांघों तक फिसल रहा था,,,,,।

बेहद कामोत्तजना से भरा हुआ नजारा रसोई घर में रचा जा रहा था,,, जवानी से भरी हुई मदहोश कर देने वाली राहुल की मां अपनी चालाकी दिखाते हुए अंकित को अपना जुगाड़ बना रही थी अंकित भी राहुल की मां की जवानी के आगे घुटने देखा हुआ उसकी बात मानकर उसे कंधे तक उठा लिया था उसकी नंगी गांड के दर्शन कर रहा था और उसकी गांड में अपना चेहरा रगड़ रहा था,,,, नूपुर की गांड की गहरी फांकों के बीच अंकित की नाक धंसी हुई थी उसके होंठ उसकी गांड के बीचो बीच सटे हुए थे और वह गहरी गहरी सांस ले रहा था,,,, यही हाल नूपुर का भी हो रहा था मदहोशी और उत्तेजना में उसकी सांसे बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी,,,, अंकित का तो मन कर रहा था कि इसी समय मौके का फायदा उठाते हुए राहुल की मां की गांड में अपनी उंगली डाल दे लेकिन ऐसा करने से वह डर रहा था लेकिन अपनी उंगली की जगह उसने ऐसा लग रहा था अपनी मां को दे दिया था और वह अपनी नाक को नूपुर की मां की गांड के बीचों बीच रगड़ रहा था गहरी गहरी सांस ले रहा था उसके अंदर की मादक खुशबू को अपने अंदर उतर रहा था और इसका एहसास नूपुर को भी हो रहा था उसकी गहरी सांस जब उसकी गांड के बीचों बीच नूपुर को महसूस होती तो नुपुर की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगती थी,,, अंकित का तो मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था कीनूपुर को अपने ऊपर से नीचे उतारे वह इसी तरह से पल गुजार देना चाहता था,,,, लेकिन फिर भी वह अपने मन को मना कर बोलने ही वाला था कि,,, एक अद्भुत एहसास उसे महसूस हुआ और उसकी बोलती एकदम से बंद हो गई,,,।

जिस तरह से अंकित ने नूपुर को ऊपर उठाया था उसकी लंबी टांग सीधे उसके लंड तक पहुंच रही थी और जैसे ही उसके एडी का स्पर्श उसे अपने लड पर महसूस हुआ वह पूरी तरह से मस्त हो गया ,,, और नूपुर भी समझ गई कि उसका पेट किधर स्पर्श कर रहा है अनुभव से भरी हुई नूपुर पल भर में हीं समझ गई थी कि अंकित का लंड कितना जानदार है,,, उसे पैर से अंकित का लंड स्पर्श करने में मजा आने लगा जो कि पेट में तंबू बनाया हुआ था नूपुर बेझिझक होकर अपने पैर को अंकित के तंबू से रगड़ रही थी और अंकित की हालत खराब हो रही थी अंकित को इस बात का डर लग रहा था कि कहीं उसका पानी न निकल जाए क्योंकि वह इतना अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और नूपुर की हरकत तो उसे चारों खाने चित कर रही थी,,,।

पेंट के ऊपर सै ही अपने पैर से अंकित के लंड से खेलते हुए नूपुर अपने मन में सोच रही थी कि इसका लंड कितना मोटा और लंबा है जब पेट के ऊपर इतना गजब ढा रहा है तो अगर उसकी बुर में जाएगा तो क्या हालत करेगा,,, यह सोचकर ही उसकी बुर पानी पानी हो रही थी,,,,। काफी देर हो चुका था उपर उठाए हुए और अंकित कुछ बोल नहीं रहा था इसलिए नूपुर समझ गई थी कि उसका दांव ठीक निशाने पर लगा है राहुल के वापस जाने के बाद उसका जुगाड़ मिल चुका था इसलिए मन ही मन मुस्कुराते हुए नूपुर बोली,,,,।

बस बस हाथ पहुंच गया,,,( और इतना कहने के साथ ही नूपुर हाथ में चाय पत्ती का डिब्बा ले ली और बोली,,,) बस अब नीचे उतार दे,,,,।
(हालांकि अंकित का तो मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था नूपुर को नीचे उतारने का क्योंकि उसका चेहरा अभी भी नूपुर की गोरी गोरी गांड में दबा हुआ था,,, लेकिन फिर भी उसे उतरना पड़ा धीरे-धीरे वह नूपुर को नीचे उतरने लगा लेकिन जैसे-जैसे वह नीचे आ रही थी वैसे-वैसे अंकित के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी क्योंकि वह जानता था कि उसके पेट में तंबू बना हुआ है और जैसे ही वह नीचे आएगी उसका लंड सीधा उसकी गांड से रगड़ खाने लगेगा और उसके मन में डर था कि कहीं नूपुर लंड की चुभन अपनी गांड पर महसूस करके कुछ बोल ना दे,,,, और यह सोचते हुए वहां नूपुर को नीचे उतार दिया लेकिन उसकी ऊपरी हुई गांड वाकई में सीधे उसकी लंड पर रगड़ खाने लगी यह एहसास नूपुर की हालत खराब कर रहा था और वह थोड़ा सा लड़खड़ाने का नाटक करते हुए पीछे अंकित की तरफ हुई और अंकित उसे संभालने के चक्कर में उसे आगे से पकड़ लिया और ऐसे में उसके दोनों हाथ गाउन के ऊपर से ही उसकी दोनों चूचियों पर आ गई और वह उसे थाम लिया,,, लेकिन इस बीच उसके पेट में बना हुआ तंबू सीधे-सीधे उसकी गांड की दरार के बीचों बीच पहुंच गया और उसकी बुर पर दस्तक देने लगा यह एहसास नूपुर को पूरी तरह से मदहोश कर गया,,,,।

इसे ही वह अंकित के मर्दाना ताकत का अंदाजा लगा ली क्योंकि पेट में होने के बावजूद भी सीधे-सीधे उसका लंड उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था मतलब की ज्यादा मोटा और लंबा था इसे लेने के लिए वह तड़प रही थी और अपनी चूचियों पर अंकित की दोनों हथेलियां को महसूस करके तो उसका पानी ही छूट गया वह झड़ गई,,, पहली बार नूपुर किसी लड़के के द्वारा उसके लंड की रगड़ से झड़ी थी,,, अपने आप को समझ करते हुए और अंकित से थोड़ा सा अलग होते हुए वह मुस्कुराते हुए बोली,,,,.

वाकई में तेरे में बहुत दम है,,,,,,।

जी शुक्रिया आंटी,,,,(अंकित शर्माते हुए और अपने पेट में बना तंबू छुपाते हुए बोला नूपुर समझ गई थी कि वह शर्मा रहा है इसलिए वह ज्यादा फिर बोली नहीं बस मुस्कुरा कर उसे बाहर बैठने के लिए बोली और अंकित किचन से बाहर चला गया और कुर्सी पर जाकर बैठ गया अंकित की तो हालत खराब हो रही थी और नूपुर की भी यही हालत थी,, किचन से उसके जाते ही वहां अपने गांव को ऊपर उठकर अपनी बुर की हालत को देख रही थी जो की पूरी तरह से पानी पानी हो गई थी और चिपचिपी हो गई थी वह अपने गांव से ही ऊपर से उसे साफ करते हुए चाय बनाने लगी और अपने मन में आगे की सोचने लगी क्योंकि वह जानती थी कि यही सही मौका है अंकित को पूरी तरह से अपनी जवानी का जलवा दिखाने का,,,।

वह चाय बनाकर,,, उसे कप में छान ली और जैसे ही ट्रे उठाकर किचन से बाहर आई वैसे ही दरवाजे की घंटी बजने लगी और घंटी की आवाज सुनकर उसका दिमाग एकदम से चकराने लगा उसे बहुत गुस्सा आ रहा था,,, क्योंकि वह जानती थी कि इस समय किसी के भी आने का समय नहीं था लेकिन यह कौन आ गया है उसे लगा कि शायद राहुल ही वापस आ गया है और मन ही मन राहुल को भला बुरा कहने लगी और जैसे ही दरवाजा खोली तो सामने उसका पति था ,,,, जो आधे दिन में ही ऑफिस से वापस आ चुका था उसे देखते ही उसका रंग फीका पडने लगा,,,,
अंकित के तन बदन में आग लगी हुई थी,,, किचन के अंदर जो कुछ भी हुआ उसके बारे में सोचकर उसकी हालत खराब हुई जा रही थी आज पूरी तरह से एकदम नजदीक से एक खूबसूरत औरत की नंगी गांड को महसूस किया था और वह भी अपने चेहरे को उस पर रगड़ कर उसकी गांड की फांकों की गहरी दरार के अंदर अपनी नाक को डालकर उसकी मादक खुशबू को महसूस किया था,,, यह अनुभव अंकित के लिए बिल्कुल नया था मादकता से भरा हुआ जिसके अंदर वह पूरी तरह से नूपुर की जवानी में सरोबोर हो चुका था,,,। वह कभी सोचा नहीं था कि राहुल के घर आने पर उसे इस तरह का अनुभव होगा जो कि उसके जीवन का यादगार पल बनकर रह जाएगा,,,।

अंकित इस तरह से पहली बार किसी औरत को अपनी भुजाओं के बल पर उठाया था,,, पहले तो उसे यकीन नहीं था कि वह नूपुर को उठाकर चाय का डब्बा उतरवा लेगा ,,, लेकिन एक औरत के सामने वह किसी भी तरह से असफल नहीं होना चाहता था खास करके नूपुर के सामने इसलिए वह इनकार भी नहीं कर पाया था लेकिन नूपुर की जवानी का जोश उसके तन बदन में मर्दाना ताकत भर दी थी जिसके चलते हैं उसने नूपुर को बड़े आराम से उठाकर एक अद्भुत आनंद प्राप्त किया था,,,,। और इसके साथ ही उसे नीचे उतारते समय एक और अनुभव उसे पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डुबो दिया था उसके पेट में बना हुआ तंबू उसकी गांड की दरार के बीच होता होगा उसकी बुर पर दस्तक देने लगा था जिसका एहसास अंकित के साथ-साथ‌ नुपुर को भी बड़ी अच्छी तरह से हुआ था जिसके चलते वह पानी पानी हो गई थी,,,,।

अपने बेटे की गैर हाजिरी में वह अंकित के साथ ऐसा चक्कर चलना चाहती थी ताकि उसका जुगाड़ बन सके जब राहुल बाहर पढ़ने के लिए चला जाए और इसीलिए वह अंकित के साथ खुलने चाहती थी और धीरे-धीरे वह अपने इरादे में कामयाब भी हो रही थी चाय बना कर दो कप ट्रे में लेकर वह किचन से बाहर निकलने वाली थी की डोर बेल बजने लगी थी और डोर बेल के बजाने की आवाज सुनते ही उसका दिमाग एकदम से खराब हो गया था,,,। क्योंकि वहां नहीं चाहती थी कि इस समय कोई भी घर में आए और जबकि उसे पूरा विश्वास था कि समय घर पर कोई आएगा भी नहीं क्योंकि राहुल कुछ देर पहले ही घर से निकला था और वह तीन-चार घंटे बाद ही आने वाला था और उसके पति तो ऑफिस का काम खत्म करके शाम को ही लौटते थे लेकिन आज ऐसा लग रहा था कि उसकी किस्मत ही खराब है,,,।
हाथ में चाय का ट्रे लेकर वह अंकित के सामने टेबल पर ट्रे रखते हुए बोली,,,‌

इस समय पता नहीं कौन आ गया,,,,, तुम चाय पियो में आती हुं,,,,(इतना कहकर वह दरवाजा खोलने के लिए आगे बढ़ गई ऐसा नहीं था की डोर बेल बजाने की वजह से नूपुर का ही दिमाग खराब हुआ था अंकित भी अंदर ही अंदर बहुत गुस्सा हो रहा था ,, क्योंकि वह नहीं चाहता था कि कोई कबाब में हड्डी बने क्योंकि इस समय उसे बहुत मजा आ रहा था आनंद आ रहा था नूपुर की जवानी के साथ खेलकर उसका मन बहक रहा था,,। और उसके मन में उसकी भावनाएं पूरी तरह से जोर पकड़ रही थी क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था किसी तरह की हरकत नूपुर उसके साथ कर रही है कहीं ऐसा ना हो जाए कि आज नूपुर की चुदाई करने को उसे मिल जाए लेकिन इस बात को सोचकर उसके मन में इस बात का डर भी था कि आज तक उसने चुदाई तो किया नहीं है है इतना जरुर जानता है की बुर में लंड डाला जाता है लेकिन कैसा अनुभव होता है कैसा लगता है यह उसे नहीं मालूम था क्योंकि वह इस अनुभव से नहीं गुजरा था लेकिन फिर भी तैयार था अगर किसी भी तरह से राहुल की मां उससे चुदवाने के लिए तैयार होती है तो वह उसे जरूर चोदेगा,,,,,, चाय का कप टेबल पर रखा हुआ था लेकिन चाय से ज्यादा मजा राहुल की मां दे रही थी इसलिए वह राहुल की मां की तरफ देख रहा था जो की गांड मटकाते हुए दरवाजे की तरफ जा रही थी,,, और वह भी यही देखना चाहता था कि इस समय कौन आया है कहीं राहुल तो नहीं आ गया अगर वह आ गया होगा तो क्या सोचेगा,,,,।

अंकित अपने मन में यही सब सो रहा था कि तभी दरवाजा खुला और सामने अपने पति को देखकर मन ही मां नूपुर उसे गाली देते हुए सहज होने का नाटक करते हुए बोली,,,,।

अरे आप इतनी जल्दी आ गए,,,।

हां वह क्या है ना कि आज थोड़ा सर दर्द हो रहा था इसलिए आधे दिन की छुट्टी लेकर आ गया,,,,(हाथ में लिया हुआ देख नूपुर को थमाते हुए नूपुर का पति बोला,,,० और धीरे से कमरे में प्रवेश किया नूपुर दरवाजा बंद कर दी ,,, नूपुर के पति की नजर जैसे ही अंकित पर पड़ी वह एकदम से थोड़ा सा चौंकते हुए बोला,,,)

तुम,,,,, तुम्हें शायद मैं नहीं जानता कौन हो तुम,,,,?.

(नूपुर के पति की बात सुनकर अंकित कुछ बोलता है इससे पहले ही नूपुर बोली,,,)

मेरे साथ ही पढ़ती हैं उनका लड़का है अंकित और यह अपने राहुल का बहुत अच्छा दोस्त है राहुल से मिलने आया था लेकिन राहुल घर पर नहीं है,,,।

ओहहह,,, तो तुम राहुल के दोस्त हो,,,,।

नमस्ते,,,(अपनी जगह से खड़े होते हुए) जी अंकल,,,

बैठ जाओ बैठ जाओ,,,,,,(नूपुर के पति की बात सुनकर अंकित फिर से अपनी जगह पर बैठ गया लेकिन मन ही मन राहुल के पापा को बहुत गाली दे रहा था क्योंकि इस समय वह ख्वाब में हड्डी बन चुके थे,,, टेबल पर रखी चाय का कप देखकर राहुल के पापा भी पास ही पड़ी कुर्सी को खींचकर टेबल के पास बैठ गए और बिना कुछ बोल ही चाय का कप लेकर चुस्की लेने लगी और साथ ही अंकित को बोले,,,,)

चाय पियो बेटा ठंडी हो जाएगी,,,,।

जी अंकल,,,,,(अंकित तुरंत हाथ बढ़ाकर चाय का कप हाथ में ले लिया और अपने मन में ही बोला आप चाय पीने से क्या फायदा चाय के साथ-साथ अरमान भी ठंडा पड़ गया,,,, और फिर चुस्की लेने लगा,,,, नूपुर पास में ही खड़ी होकर गुस्से से अपने पति की तरफ देख रही थी आज उसके पूरे अरमान पर उसके पति ने ठंडा पानी जो डाल दिया था पूरी तरह से अंकित का साथ पाकर वह गर्म हो चुकी थी और उसे पूरा यकीन था कि कुछ ही देर में वह जरूर अंकित के लंड को अपनी बुर में ले लेगी क्योंकि इसके लिए वह पूरी तरह से तैयार भी हो चुकी थी,,,।

अंकित चाय पी चुका था आपको जानता था कि उसका वहां रहना आप उचित नहीं था और कोई मायने भी नहीं रखता था क्योंकि उसके पति के लिए हाजरी में कुछ भी होने वाला नहीं था इसलिए वह धीरे से अपनी जगह से उठ गया और नूपुर की तरफ देखते हुए बोला,,,।

अच्छा आंटी मैं चलता हूं मुझे देर हो रही है,,,,।

ठीक है बेटा,,,,,

नमस्तेअंकल,,,

खुश रहो,,,,।

(राहुल के पापा के मुंह से यह सुनकर अंकित अपने मन में बोला खुश रहने दोगे तब ना इतना अच्छा मौका मिला था बेवजह चले आए,,, और इतना कहने के साथ ही वह दरवाजे की तरफ जाने लगा तो नौकरी उसके पीछे-पीछे जाने लगी,,, दोनों दरवाजे पर पहुंच गए अंकित दरवाजा खोलकर घर से बाहर निकाल कर एक बार फिर से नूपुर की तरफ देखा तो नुपुर उसकी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,, )

चले आया करो अंकित,,,, इसे अपना ही घर समझना,,,,(ऐसा कहते हुए नूपुर जानबूझकर दरवाजे के दोनों तरफ दोनों हाथ रखकर अपनी छाती को बाहर की तरफ निकली हुई थी या यूं कह लो की एक तरह से वह अंकित को अपनी चूचियों की गोलाइ दिखा रही थी और अंकित उसकी छाती की तरफ देख भी रहा था,,,,)

जी आंटी जरूर आऊंगा,,,,।

वैसे चाय बनाने में जिस तरह से तुमने मेरी मदद किए हो अगर खाना बनाने में मेरी मदद करते तो मजा आ जाता,.

कोई बात नहीं आंटी अगर मौका मिलेगा तो खाना बनाने में भी मदद करूंगा,,,,।

और हां यह पूछना तो भूल ही गई सुगंधा स्कूल क्यों नहीं आ रही,,,।

अरे हां आंटी में भी बताना भूल गया मम्मी की तबीयत खराब है इसलिए दो-तीन दिन तक और नहीं आ पाएंगी,,,।

अरे ऐसा क्या हो गया जो दो-तीन दिन तक नहीं आ पाएंगी,,,(नूपुर एकदम हैरान होते हुए बोली,,,)

वह क्या है ना मम्मी को थोड़ा मलेरिया का असर हो गया था इसलिए डॉक्टर दो-तीन दिन आराम करने के लिए बोला है वैसे तो अभी आराम है लेकिन दो-तीन दिन और आराम कर लेंगी तो अच्छा रहेगा,,,।

वैसे कोई दिक्कत वाली बात तो नहीं है ना,,,।

नहीं नहीं आंटी ऐसी कोई भी बात नहीं है सब एकदम नॉर्मल बस दो-तीन दिन औपचारिकता बस आराम करना है,,,।

चलो कोई बात नहीं,,,, और तुम भूलना नहीं आते रहना,,,,,।

जी आंटी आते रहूंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए अपने पेट में बने तंबू को हाथ से पकड़ कर उसे नीचे दबने की जानबूझकर कोशिश करने लगा वह नूपुर का ध्यान अपनी पेंट के ऊपर लाना चाहता था और ऐसा ही हुआ ,,, अंकित की हरकत को देखकर नूपुर का ध्यान अपने आप ही उसके पेंट में बने तंबू पर गया जो की अभी-अभी बना था पर उसे देखकर मुस्कुरा दी और अंकित भी मुस्कुराकर अपने घर की तरफ चलने लगा,,,,।

उसके पेंट में बना तंबू देखकर नुपुर का मुस्कुराना अंकित को पूरी तरह से मदहोश कर गया था और अंकित जिस तरह से मुस्कुराया था उसे देखकर नूपुर समझ गई थी कि उसकी युक्ति कम कर गई है आपको समझ गई थी कि उसकी जवानी का कायल हो चुका है अंकित,,, अब उसके पास आए बिना वह भी नहीं रह पाएगा,,,

इधर-उधर टहलता हुआ अंकित शाम को अपने घर पर पहुंचा घर पर पहुंचने पर देखा कि उसकी बहन तृप्ति की मां के साथ ही है इसलिए निराश हो गया और अपने कमरे में चला गया,,, ऐसा तीन-चार दिन तक चला वह मौका खोजता रहा लेकिन अपनी मां से अकेले में मिल नहीं पाया और ऐसा सुगंधा भी चाहती थी लेकिन तृप्ति के होते हुए ऐसा हो नहीं पाया,,, मां बेटे दोनों निराश थे ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि दोनों के मन की बात है दोनों जानते थे लेकिन दोनों के बीच इस तरह की हरकत हो चुकी थी जिस तरह से अंकित ने बीमार होने पर उसकी मदद किया था उसे देखते हुए दोनों के बीच आकर्षण बन गया था दोनों एक दूसरे के आकर्षण में पूरी तरह से मजबूर हो चुके थे,,,, और घर के पीछे जिस तरह से उसकी मां बैठकर पेशाब कर रही थी और पीछे मुड़कर अंकित कोई देख रही थी यह सब दोनों मां बेटे के बीच शारीरिक आकर्षण को और भी ज्यादा गहरा बना दिया था,,,,।

सुगंधा बिल्कुल ठीक हो चुकी थी और वह स्कूल जाने के लिए तैयार थी और वह रसोईघर में खाना बना रही थी तृतीय तैयार होकर कॉलेज जा चुकी थी,,,, अंकित भी तैयार था लेकिन उसने अभी नाश्ता नहीं किया था इसलिए रसोई घर में आया और दरवाजे पर खड़े होकर अपनी मां को देखने लगा,,, रोटी बेलती हुई उसकी मां बेहद खूबसूरत और कामुक लग रही थी क्योंकि जिस तरह से वह हाथ चल रही थी उसके नितंबों में थिरकन हो रही थी और उसकी बड़ी-बड़ी गांड थरथरा रही थी जिसे देखकर उसका लंड अंगड़ाई ले रहा था,,,,, अंकित को इस तरह से अपनी तरफ देखता हुआ पाकर सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली,,,,।

क्या हुआ ऐसे क्यों देख रहा है ऐसा लग रहा है कि जैसे बरसों से देखा ही नहीं है,,,,।

सच में मम्मी ऐसा ही लग रहा है तुमसे बात किए तीन दिन हो गए हैं पर ऐसा लग रहा है जैसे 3 साल गुजर गए हो,,,।

मुझे भी ऐसा हीं लग रहा है,,,,,, तुझसे बात किए बिना अच्छा नहीं लगता,,,,।

(दोनों की तड़प एक जैसी ही थी,,,, दोनों एक दूसरे से बात किए बिना परेशान थी और अभी मौका मिलते ही दोनों आपस में बात करना शुरू कर दिए थे और आपस में बात करते हुए दोनों के बदन में अजीब के हलचल हो रही थी दोनों का मन और तन दोनों उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,। अंकित धीरे से रसोई घर में प्रवेश किया वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देख रहा था उसके पिछवाड़े को देख रहा था और उसका मन कर रहा था कि पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में भर ले और उसे जी भर कर प्यार करें और अपने तंबू को उसकी गांड पर जोर-जोर से रगड़े लेकिन इतनी हिम्मत अभी उसमें नहीं थी बस सोचकर ही अपने मन को बहला रहा था,,,,)

जल्दी से नाश्ता कर ले मुझे भी स्कूल जाने के लिए तैयार होना है समय भी हो रहा है,,,।

ठीक है जल्दी से दो,,,,(इतना कहने के साथ ही वह रसोई घर में ही नीचे जमीन पर पलाथी मार कर बैठ गया यह देखकर सुगंधा बोली,,)

अरे रे,,, यह कहां बैठ गया तू बाहर जाकर कुर्सी पर बैठ में लेकर आती हूं,,,,।

नहीं नहीं मैं यहीं बैठकर खाऊंगा तुम्हारे पास तुम्हें देखते हुए,,,,।
(अंकित की यह बात सुनकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न होने लगे और उसके चेहरे पर शर्म के भाव नजर आने लगे,,, और वह धीरे से बोली,,,)

अरे वाह तू तो फिल्मी डायलॉग मारने लगा है,,,, ऐसा लग रहा है कि जैसे कोई हीरो अपनी हीरोइन से बातें ही कर रहा हो,,,,।

इसमें क्या हो गया मम्मी तुम किसी हीरोइन से कम हो क्या कितनी खूबसूरत लगती हो,,,,,।

(अंकित की बात सुनकर सुगंधा के गाल शर्म से लाल होने लगे वह खाना बनाते हुए शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी और मदहोश में जा रही थी अपने बेटे की बात सुनकर अंदर ही अंदर खुश होते हुए बोली)

चल रहने दे बातें बनाने को मस्का लगा रहा है खाली,,,।

नहीं मम्मी में मस्का नहीं लगा रहा हूं मैं सही कह रहा हूं,,,, तुम बहुत खूबसूरतहो,,,।

यह तू कह रहा है ना ऐसा तो मुझे कभी नहीं लगा,,,।

खूबसूरती का पता खुद को थोड़ी चलता है दूसरों को ही पता चलता है कि सामने वाला कितना खूबसूरत है,,,,।
(अंकित की बातें सुगंधा को मदहोश कर रही थी अंकित के मुंह से निकला है एक-एक शब्द ऐसा लग रहा था की सुगंध के कानों में रस घोल रहा हो जिसे सुनने में सुगंध को भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन वह जानती थी कि स्कूल जाने के लिए उसके पास समय बहुत कम है उसे जल्दी तैयार भी होना है इसलिए वह जल्दी से नाश्ता प्लेट में निकाल कर और चाय का कप अपने हाथ में लेकर अंकित के सामने जमीन पर रखती हुई बोली,,,)

अच्छा फिल्मी हीरो डायलॉग मारना बंद करो और जल्दी से नाश्ता कर लो,,, बहुत देर हो रही है,,,।

(अंकित का मन अपनी जगह से हटने का बिल्कुल भी नहीं कर रहा था वह अपने मन में सोच रहा था कि काश दिनभर इसी तरह से बैठकर अपनी मां के पिछवाड़े को देखता तो कितना मजा आता ,,, लेकिन वह भी जानता था कि वाकई में समय काम था इसलिए अभी नाश्ता करने लगा और साथ ही अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को हिलते हुए देखने लगा कसी हुई साड़ी में उसकी गांड और भी ज्यादा खूबसूरत और बड़ी-बड़ी लग रही थी,,,,,।

सुगंधा अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा कुछ बोले उसकी खूबसूरती की तारीफ करें लेकिन वह नष्ट करने लगा था इसलिए सुगंधा भी खामोशी लेकिन तभी उसे कुछ याद आया हो इस तरह से चहकते हुए बोली,,,)

अरे हां मुझे याद आया उसे दिन तो तू बहुत बड़ा बन रहा था और बोल रहा था कि मैं तुम्हारे लिए यह खरीद दूंगा वह खरीद दूंगा,,,,।

(अपनी मां की बात सुनते ही अंकित को एकदम से याद आ गया कि वाकई में वहा अपनी मां के लिए चड्डी खरीदना चाहता था और इसके लिए उसकी मां उसे इजाजत भी दे दी थी लेकिन फिर भी जिस तरह से उसकी मां बोल रही थी वह जानबूझकर अनजान बनते हुए बोला,,,)

क्या खरीदना कुछ खुलकर बताओ ऐसे कहां पता चलेगा कि क्या खरीदने के लिए बोला था,,,,।

चल रहने दे तुझे सब मालूम है सिर्फ बातें बना रहा है,,,।

नहीं मम्मी सच में मुझे नहीं मालूम क्या खरीदने के लिए बोला था,,,।

अरे वही चड्डी खरीदने के लिए बोला था ना,,,

अरे हां मुझे याद आया,,,, तो क्या तुम अभी भी बिना चड्डी के खड़ी हो अंदर कुछ नहीं पहनी हो,,,,।

मेरे पास है कहां जो पहनू एक थी तो तू भी उसे न जाने कैसे फाड़ दिया एकदम गोल गोल उंगली से फाडा की पता नहीं क्या डालकर फाड़ा है,,,।
(इतना सुनते ही अंकित का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया क्योंकि जिस तरह से उसकी मां बोल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसे शक हो गया हो कि उसकी चड्डी का छेद बड़ा कैसे हो गया,,,, फिर भी अपनी मां की बात सुनकर वह बोला,,,)

क्या मम्मी तुम भी मुझे अच्छी नहीं लगी तो उंगली से मैंने उस छेंद को फैला दिया उसमें कुछ डाला थोड़ी ना हूं तुम्हें क्या लगता है कि उसमें मैंने कुछ और डाला हूं,,,,,।

चड्डी की हालत देखकर लगता नहीं की तेरी उंगली से वह छेद बड़ा हुआ है,,,, उसमें कुछ और डाला गया है तभी उसकी चौड़ाई एकदम से बढ़ गई,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित एकदम हैरान हो गया,,, ईस बात का डर था कि कहीं उसकी मां को पता तो नहीं चल गया कि उसकी चड्डी का छेद बड़ा कैसे हो गया है,,।)

क्या मम्मी तुम्हें तो लगता है कि जैसे मैं उंगली नहीं अपना वो,,,,(इतना क्या करवा एकदम से रुक गया लेकिन सुगंध अपने बेटे के कहने का मतलब का अच्छी तरह से समझ गई थी और अंकित अपनी बात का रुख बदलते हुए बोला,,,) अच्छा छोड़ो क्या तुम सच में अभी भी कुछ भी नहीं पहनी हो मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम्हारे पास एक ही चड्डी है,,,।

हारे में सच कह रही हूं अंदर कुछ नहीं पहनी हूं,,, अब क्या तुझे अपनी साड़ी उठाकर दिखाओ,,,।

दिखा दो इसमें क्या हुआ,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसका बेटा सीधे-सीधे उसे अपनी साड़ी उठाने को कह रहा था ताकि वह यह देख सके कि वह चड्डी पहनी है कि नहीं और सुगंधा यह भी जानती थी की साड़ी कमर तक उठा देने पर उसका बेटा सिर्फ यही नहीं देखेगा कि वह चड्डी पहनी है कि नहीं बल्कि उसकी बुर के दर्शन करके धन्य हो जाएगा,,,, और इस बात का डर नहीं बल्कि सुगंधा के मन में उत्सुकता थी क्योंकि उसकी बात सुनकर वह अभी अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी नंगी जवान को उजागर करने के लिए तड़प रही थी लेकिन फिर भी इस समय न जाने क्यों उसे शर्म महसूस हो रही थी,,,। फिर भी वह जानबूझकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

किसी बातें कर रहा है तू अपने तुझे साड़ी उठाकर दिखा दुं,,।

तो इसमें क्या हो गया मम्मी दिखा दो ना,,,,।

इसका मतलब है कि तुझे मेरी बातों पर विश्वास नहीं है तुझे लगता है कि मैं अंदर चड्डी पहनी हूं,,,।

इसलिए तो देखने को बोल रहा हूं देख लूंगा तो मुझे भी यकिन हो जाएगा कि वाकई में तुम्हारे पास चड्डी नहीं है,,,।

(जिस तरह से अंकित जिद कर रहा था उसकी जीद देखकर सुगंधा की बुर पानी छोड़ रही थी वह मदहोश हो रही थी उसे अच्छा लग रहा था अंकित का इस तरह से जिद करना,,,, और मौके की नजाकत और समय का अभाव देखकर ज्यादा न होकर करना सुगंधा को भी ठीक नहीं लग रहा था इसलिए वह बोली,,,)

चल फिर तेरी शंका को दूर कर देते हैं नहीं तो तू हमेशा मुझे झूठी समझना रहेगा कि मेरे पास पेंटिं है और मैं जानबूझकर तुझे ना कह रही हूं,,,।

(और इतना कहने के साथ ही सुगंधा अंकित की तरह पीठ करके खड़ी हो गई और धीरे-धीरे अपनी साड़ी को उठाने लगी है देखकर अंकित का दिल जोरों से धड़कने लगा और उसे इस बात की खुशी होने लगी थी उसकी मां इतनी जल्दी उसकी बात मान गई और देखते-देखते उसकी मां धीरे-धीरे अपनी साड़ी को घुटनों तक उठा दी थी और उसके बाद एक झटके से साड़ी को अपनी कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड को दिखाते हुए वह बोली,,,)

ले देख ले अच्छे से मैं क्या चड्डी पहनी हूं,,,।

(अंकित क्या कहता अपनी मां की जवानी देख कर तो उसकी बोलती बंद हो गई थी वह तो आंख फाड़े अपनी मां की नंगी गांड को देख रहा था,,, उसकी सांसे बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी ,,, और सुगंधा भी जानबूझकर अपनी साड़ी कमर तक उठाया अपने बेटे को अपनी नंगी गांड दिख रही थी वह जानती थी की औरतों का कौन सा अंग देखकर मर्द ज्यादा उत्तेजित और विवस हो जाते हैं उसे पाने के लिए,,,, सुगंधा जानबूझकर अंकित की तरफ अपनी पीठ करके खड़ी थी ताकि वह उसे अपनी गांड दिखा सके वह चाहती तो इसी समय अपने बेटे को अपनी बुरे भी दिखा सकती थी लेकिन वह जानती थी कि अपनी जवानी के बेस कीमती खजाने को मर्द के सामने कब उजागर करना है वह अपने बेटे को थोड़ा और तड़पाना चाहती थी और कुछ सेकेंड तक खड़े रहने के बाद अपने बेटे का जवाब सुने बिना ही सुगंधा अपनी साड़ी को वापस नीचे कर दी और अंकित की तरफ देखकर कर बोली,,,,।
देख लिया ना तुझे तसल्ली हुई कि मैं अंदर कुछ पहनी हूं कि नहीं पहनी हूं,,,,।

(अंकित क्या बोलता उसकी तो वह खुद बोलती बंद कर दी थी अपनी जवानी दिखाकर फिर भी अपने आप को सहज करता हुआ वह धीरे से बोला,,,)

वाकई में मम्मी तुम तो अंदर कुछ नहीं पहनी हो इसका मतलब सच में तुम्हारे पास चड्डी नहीं है,,,।

तो क्या और तुझे लग रहा था कि मैं झूठ बोल रही हूं,,,,। अब बोल खरीदेगाकि नहीं,,,,।

खरीद तो लाऊंगा ,,, लेकिन मेरे पास तुम्हारा नाप नहीं है,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी)

नाप लेना और सुना दोनों बेहद उत्तेजनात्मक था सुगंधा के लिए नाप देना और अंकित के लिए नाप लेना दोनों ही दोनों के मन पर गहरी छाप छोड़ गए थे,,, मां बेटे दोनों ही इस पल को कभी नहीं भूलने वाले थे,,, वैसे भी नाप लेने और देने में मां बेटे दोनों की तरफ से एक अच्छी पहल थी एक दूसरे के प्रति आकर्षण और आमंत्रण का लेकिन फिर भी दोनों आगे बढ़ने से कतरा रहे थे,,,।

जिस तरह से सुगंधा अंकीत के कहने पर बिना देर किए अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड उसे दिखा दी थी,,,, अपने इस हरकत का सुगंधा को जहां एक तरफ गर्व का अनुभव हो रहा था वहीं दूसरी तरफ अपनी हरकत का मलाल भी था और मलाल इसलिए की सुगंधा अपनी सारी कमर तक उठाकर अपने बेटे को अपनी नंगी गांड के दर्शन करा दी थी लेकिन उसका बेटा मुक दर्शक बना सिर्फ देख रहा था और मन ही मन उत्तेजित हो रहा था,, सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अगर उसके बेटे की जगह कोई और होता तो शायद इस समय उसे पीछे से बाहों में भर लेता और अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी प्यासी बुर में डालकर उसकी प्यास बुझा देता,,, लेकिन उसके बेटे ने ऐसा कुछ भी नहीं किया,,, लेकिन इसके पीछे के कारण को भी सुगंधा अच्छी तरह से समझ रही थी क्योंकि वह जानती थी कि जिसके लिए उसने अपनी सारी कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड के दर्शन कराई थी वह कोई गैर मर्द नहीं बल्कि उसका शक बेटा था और शायद मां बेटे के बीच का यही पवित्र रिश्ता दोनों को एक होने से अभी तक रोक रहा था वरना जिस तरह से दोनों के बीच आकर्षण की मुठभेड़ हो रही थी अगर दोनों मां बेटे ना होते तो कब से चुदाई का खेल खेल चुके होते,,,।

वैसे भी सुगंधा को इस बात की खुशी थी कि किसी न किसी बहाने से उसका बेटा उसके बदन का कोई ना कोई अंग देख ही ले रहा है और उसे अंग को देखने के बाद उसके बाद में जिस तरह की प्रतिक्रिया नजर आती है वह काफी काबिले तारीफ कर देने वाली होती है,,, क्योंकि उसके खूबसूरत अंग को देखते ही उसके झलक भर को देखते ही उसके पेट में तंबू सा बन जाता है उसके चेहरे का रंग लाल पड़ने लगता है जो कि इस बात को साबित करता है कि वह भी अपनी मां को चोदना चाहता है बस रिश्ते के नाते झिझक रहा है,,,।

अपनी नितंबों का नाप देते हुए सुगंधा भी काफी औरतेजना का अनुभव कर रही थी जिसके चलते उसकी बुर बार-बार मदन रस बहा रही थी,,,,,, और स्कूल जाने से पहले वह अलमारी में से एक साफ सुथरी पेंटी पहनकर स्कूल के लिए निकल गई थी,,,। रास्ते भर वह अपने बेटे के बारे में सोचती नहीं वह इस बारे में सोच कर परेशान तो हो रही थी लेकिन उत्साहीत भी थी कि उसका बेटा उसके लिए पेंटिं कैसे खरीदना है क्योंकि इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा आज तक उसके लिए कुछ भी नहीं खरीदा था राशन खरीदने की और छोटे-मोटे जरूरत के सामान खरीदने की बात कुछ और थी लेकिन औरत के पहनने का अंग वस्त्र अभी तक उसने नहीं खरीदा था इसीलिए वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा उसके लिए पेंटी खरीद पाता है या सिर्फ ऐसे ही बातें बना रहा है,,,।

यही सब सोचते हुए वह स्कूल पहुंच गई थी,,, स्कूल में भी उसका मन नहीं लग रहा था बार-बार रसोई घर में जिस तरह से उसका बेटा नाप पट्टी से उसकी गांड का नाप लिया था वही दृश्य उसकी आंखों के सामने घूम रहा था,,, जैसे तैसे करके रिशेष की घंटी बज गई,,, वह अपना लंच बॉक्स लेकर नूपुर के पास पहुंच गई नूपुर वहां पहले से ही मौजूद थी और सुगंधा को देखते ही मुस्कुरा कर उसका अभिवादन की,,, नूपुर के चेहरे की लाली साफ बता रही थी कि अपने बेटे के आ जाने से वह कितनी खुश है और इस खुशी के राज को सुगंध भी अच्छी तरह से समझती थी इसीलिए तो अपने बेटे को भी कुछ सीखने के लिए वह राहुल के पास दोस्ती करने के लिए भेजी थी और राहुल के साथ एक ही मुलाकात में उसका बेटा बहुत खुशी किया था उसके अंदर भी बहुत कुछ बदलाव आ गया था जिसका एहसास सुगंध को अच्छी तरह से हो रहा था और उस एहसास का वह पल-पल आनंद ले रही थी,,,।

कुर्सी को ठीक से करके उसके ऊपर बैठते हुए सुगंधा बोली,,,।

क्या बात है नुपुर आजकल बहुत खुश नजर आती हो,,,,।

नहीं तो मैं तो पहले से ही ऐसी थी,,,।

चलो अब रहने दो पहले तो हमेशा तुम्हारा मुंह बना रहता था चेहरा उतरा हुआ रहता था और मैं तुम्हें देखकर यही सोचती थी कि पता नहीं कौन सा दुख तुम्हें खाए जा रहा है और अब तो तुम बहुत खुश नजर आती हो और इस बात की खुशी मुझे भी है,,,।

शुक्रिया,,,, वैसे सच कहूं तो जब से राहुल घर पर आया है तब से मुझे बहुत खुशी है क्योंकि जब वह घर पर रहता है तो ऐसा लगता है कि पूरा परिवार इकट्ठा है और वह जब चला जाता है तो एकदम उदासी सी छा जाती है पूरे घर में,,,।

ऐसा क्या जादू कर देता है राहुल कि उसके जाने से तुम एकदम दुखी हो जाती हो,,,।(अपना टिफिन खोलते हुए वह बोली,, और सुगंधा के सवाल पर नूपुर थोड़ा सा झेंप सी गई लेकिन फिर अपने आप को स्वस्थ करतेहुए बोली,,,)

क्यों नहीं आखिर कर वह मेरा बेटा है खुशी तो रहेगी ही घर पर रहने से और ऐसा सबके साथ होता होगा,,,,।

अरे इसीलिए तो कहती हूं हमेशा खुश रहा करो राहुल तो पढ़ने जाता है कुछ बनने जाता है तुम उदास रहोगी तो उसका भी मन वहां नहीं लगेगा,,,,(सुगंधा जानबूझकर बात को घुमाते हुए बोली और अच्छी तरह से जानती थी कि राहुल के रहने पर उसका मन क्यों लगता है क्यों उसकी खुशी बढ़ जाती है यह मां बेटी का प्यार नहीं बल्कि मां बेटे के अंदर एक औरत और मर्द का प्यार है जो नूपुर को ज्यादा खुशी देता है,,,, और यही प्यार वह भी अंकित से चाहती है,,, बांदा की बात सुनकर नूपुर मुस्कुराते हुए बोली,,,)

तभी तो मैं भी दिल पर पत्थर रखकर उसे दूर पढ़ने के लिए भेज देती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही नूपुर भी अपना टिफिन खोल दी और दोनों एक दूसरे के टिफिन में से सब्जियों का आदान-प्रदान करते हुए लंच का आनंद लेने लगे लेकिन इस बीच लगातार सुगंधा नूपुर के चेहरे की चमक को देख रही थी क्योंकि वह चेहरे की चमक के पीछे के राज को अच्छी तरह से जानती थी और यही चमक वह अपने चेहरे पर देखना चाहती थी लंच के दौरान वह लगातार नूपुर के बारे में सोचती रही कि घर पर जाते ही वह अपने बेटे के साथ कैसा बर्ताव करती होगी उसका बेटा उसके साथ क्या करता होगा,,,,।
वह अपने मन में कल्पना कर रही थी कि राहुल अंकित की तरह बिल्कुल भी नहीं होगा अपनी मां को एकांत में पाए हैं उसे तुरंत अपनी बाहों में भर लेता होगा और अपने होठों को उसके लाल-लाल होठों पर रखकर उसका रसपान करता होगा और इसे अपने दोनों हाथों को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर जोर-जोर से दबाता होगा मसलते होगा और नूपुर भी अपने बेटे की हरकत से मस्त होकर सीधा उसके पेट पर अपना हाथ रख देती होगी और उसके तंबू को जोर से अपनी हथेली में रखकर दबाती होगी दोनों का चुंबन और भी ज्यादा गहरा होता जाताहोगा,,,।

और राहुल मौके की नजाकत के देखते हुए अपनी मां की साड़ी को धीरे-धीरे कमर तक उठा देता होगा और उसकी गांड पर जोर-जोर से चपत लगाता हुआ उसको मसलता होगा,,,,,, नूपुर एकदम मस्त हो चाहती होगी और जोर-जोर से उसके लंड को दबाती होगी,,, जब से रहने ज्यादा होगा तो वहां धीरे से अपने बेटे के पेट का बटन खोलकर उसे घुटनों तक खींच देती होगी और तुरंत घुटनों के बल बैठ जाती होगी,,, और अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर मस्ती के साथ चुस्ती होगी उसका बेटा भी पागलों की तरह अपनी मां का कर पकड़ कर अपनी कमर को आगे पीछे करके ही लता होगा बहुत मजा आता होगा उसे और फिर वह अपनी मर्दाना ताकत दिखा दो अपनी मां को गोद में उठा लेता होगा फिर उसके कमरे में जाकर उसके ही बिस्तर पर उसे पटक देता होगा,,,,।

अपने हाथों से अपनी मां की चड्डी उतारता होगा उसे नंगी करके उसकी दोनों टांगें फैला कर उसकी गुलाबी बुर को अपने होठों पर लगाकर चाटता होगा उसके रस को पीता होगा,,, यह ख्याल मन में आते ही वह अपने मन में सोचने लगी कि क्या उसका बेटा भी अगर उसके साथ इस हद तक पहुंच जाएगा तो क्या उसकी दोनों टांगे फैला कर क्या वह भी उसकी बुर को चाटेगा अपनी होठ लगाकर,,,, अगर वह ऐसा नहीं किया तो,,,, लेकिन क्यों नहीं करेगी सारे मर्द तो एक जैसे होते हैं कहीं उसे बुर चाटना अच्छा ना लगता हो तो तब तो वह एक अद्भुत आनंद से हाथ धो बैठेगी,,, नहीं नहीं ऐसा वह नहीं होने देगी अगर उसका बेटा नहीं चाहेगा तो भी वह जबरदस्ती उसे अपनी बुर चटाएगी ,, यह सोचते हुए, उसकी बुर पानी छोड़ रही थी उसकी पेंटिं गिली हो रही थी,,,।

फिर उसकी कल्पनाओं का घोड़ा और आगे ले जाते हुए सुगंधा को और मदहोश करने लगा वह अपने मन में सोचने लगी कि इसके बाद फिर उसका बेटा घुटनों के बल बैठकर अपनी मां को अपनी जांघों पर चढ़ा लेता होगा,,, और फिर अपने मोटे तगड़े लःड को अपनी मां की बुर में डालकर हुमच हुमच कर चोदता होगा,,,, यह सब सो कर एक तरफ उसकी बुर गीली हुई जा रही थी एक तरफ वह धीरे-धीरे खाना भी खा रही थी लेकिन तभी उसे उसकी कल्पनाओं की दुनिया से बाहर लाते हुए नूपुर उसका हाथ पकड़ कर उसे खिलाते हुए जैसे उसे नींद से जाग रही हो इस तरह से बोली,,,।

अरे क्या हुआ कहां खो गई,,,,, चलो जल्दी हाथ धो लेते हैं,,,,।

हं ,,,,,, तुम चलो मैं आती हूं,,,।

ठीक है,,,(इतना कहकर नूपुर अपना टिफिन लेकर चल दी,,, सुगंधा को भी हाथ धोना था लेकिन जिस तरह की कल्पना उसके दिलों दिमाग पर छाया हुआ था उसके चलते उसकी बर पानी छोड़ रही थी और जिसके चलते उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसे बड़े जोरों की पेशाब भी लग चुकी थी इसलिए वह धीरे से अपनी जगह से उठी और पहले बाथरूम की तरफ जाने लगी,,,, और देखते ही देखते वह बाथरूम के पास पहुंच गई बाथरूम के पास कोई भी नहीं था क्योंकि रिशेष पूरी होने की तैयारी थी और सब धीरे-धीरे अपनी क्लास में जा चुके थे,,, सुगंधा जल्दी से बाथरूम का दरवाजा खोली और बाथरूम में प्रवेश कर गई,,,,,।

बाथरूम काफी बड़ा था,,, सुगंधा धीरे से आगे बढ़ी तो तभी उसे बाथरूम के दरवाजे के बाहर कुछ कदमों की आवाज सुनाई दी वह एकदम से रुक गई वह अपने मन में सोचने लगी कितने समय कौन होगा,,, तो फिर उसके मन में ख्याल आया कि कोई होगी उसे भी पेशाब लगी होगी,,,, और वह धीरे से अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,, लेकिन तभी किसी के बाहर होने का भ्रम एकदम से टूट गया जब उसके कानों में आवाज सुनाई दी,,,।

रुक जा एकदम शांत रहे मैडम साड़ी ऊपर उठाने वाली है,,,,।
(इतना सुनते ही सुगंधा के तो होश उड़ गए और उसका हाथ खुद उसकी साड़ी से अलग हो गए वह समझ गई की बाथरूम के बाहर कोई लेडिस नहीं बल्कि स्कूल का कोई मनचला लड़का है,,,,, कुछ देर तक सुगंधा को तो समझ में नहीं आया कि वह क्या करें उसका दिल जोरो से धड़कता हुआ जानती थी कि लकड़ी के दरवाजे में दरार बनी हुई थी और उसमें से अंदर बड़े अच्छे से देखा जा सकता था,,,, लेकिन किसी लड़के का दरवाजे के बाहर खड़े होकर उसकी तरफ देखने का एहसास उसके बदन में उत्तेजना का रंग भर रहा था वह मदहोश हो रही थी फिर अपने मन में सोची की चलो वह जो देखना चाहता है उसे दिखा ही दो ताकि वह हिला कर अपना काम चला सके,,, सुगंधा अपने मन को तैयार कर चुकी थी अपनी साड़ी ऊपर उठने के लिए और दरवाजे के बाहर खड़े लड़के को अपनी नंगी गांड दिखाने के लिए लेकिन तभी उसके कानों में फिर से आवाज सुनाई दी,,,,।)

यार मैडम पता नहीं क्या सोच रही है देख नहीं रहा कितनी बड़ी-बड़ी गांड है जब साड़ी ऊपर उठाएगी तो नंगी गांड देखकर तो मेरा लंड खड़ा हो जाएगा,, (तभी दूसरा लड़का बोला)

यार मेरा तो अभी से लंड खड़ा हो गया है,,,।

(उन दोनों की बातें सुनकर तो सुगंधा की हालत और ज्यादा खराब होने लगी उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और जिस तरह से दोनों लंड खड़ा होने की बात कर रहे थे उस बारे में सोच कर तो खुद सुगंधा की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पीचकने लगी,,,, अब तो सुगंधा खुद अपने आप को रोक नहीं सकती थी उन दोनों लड़कों को अपनी नंगी गांड के दर्शन कराने से,,, दोनों लड़कों की बातें सुनकर सुगंधा का भी जोश बढ़ने लगा और समय भी बहुत कम था इसलिए जो कुछ करना था जल्दी करना था और वैसे ही सुगंधा का कौन सा कुछ बिगड़ जाने वाला था उसे तो ऐसा ही करके आगे बढ़ना था कि वह बाथरूम के अंदर अकेली है और कोई उसे देख नहीं रहा है,,,।

इसलिए फिर से सुगंधा अपनी साड़ी को पकड़ ली और उसे धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगी,,, यह देखकर बाथरूम के बाहर खड़ा लड़का बोला,,,।

मैडम उठा रही है,,,, बस बस दिखाने वाला है,,,।

(उसे लड़के की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और साड़ी को और ऊपर की तरफ उठाने लगी धीरे-धीरे करके उसकी साड़ी उसकी जांघों तक आ गई ,, सुगंधा की मोटी मोटी केले की तरह चिकनी जांघें बाहर खड़े लड़कों की उत्तेजना को अत्यधिक बढ़ाने के लिए काफी थी वह दोनों लड़के एकदम से मदहोश हो गए और वह पेंट के ऊपर से ही कसके अपने लंड को दबाना शुरू कर दिए,,, और उन दोनों में से एक लड़का बोला,,,)

सहहहहहह ,,,,,, देख रहा है मैडम की जांघ मुझे मिल जाए तो मैं रात भर सिर्फ अपनी जीभ से चाटता ही रहूं,,,,।

सच कह रहा है यार तू मुझे मिल जाए तुम्हें बिना बुर में लंड डालें जांघों पर ही अपने लंड को रगड़ता रहूं,,,(दूसरा लड़का बोला,,,,)

और उन दोनों की बात सुनकर सुगंधा की मदहोशी और ज्यादा बढ़ने लगी,,,, और अपने मन में सोचने लगी कि यह दोनों लड़के उसके लड़के से 10 कदम आगे हैं अगर वह दरवाजा खोलकर दोनों को इशारा कर दे तो बस इसी बाथरूम में दोनों रगड़ रगड़ कर उसकी चुदाई कर दे,,,,,, और यही सोच कर वह अपनी साड़ी को एक ऊपर उठाने लगी और देखते देखते वह अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी,,,,,, कमर तक साड़ी के उठते ही उसकी पैंटी और अद्भुत गोलाई लिए हुए उसकी गांड नजर आने लगी,,,, यह देखकर तो उन दोनों लड़कों की हालत और ज्यादा खराब होने लगी,,,, सुगंधा की पेटी और उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर,,, उन दोनों की हालत और ज्यादा खराब होने लगी उन दोनों की उत्तेजना एकदम परम शिखर पर पहुंच गई और उनमें से एक लड़का बोला,,,।

हाय क्या मस्त गांड है मेरा तो मन कर रहा हूं किसी समय बाथरूम में घुस जाऊ और मैडम को पकड़ कर चोद दूं,,,।

(बाहर खड़े उस लड़के की बात सुनकर तो सुगंधा की बिहट खराब होने लगी वह अपने मन में सोचने लगी थी उसके बेटे से ज्यादा तेज तर्रार तो यह दोनों लड़के हैं जो इसी समय चोदने की बात कर रहे हैं,,,, सुगंध को इस तरह से अपने अंगों का प्रदर्शन करना बहुत अच्छा लग रहा था अपने बेटे के सामने तो वह किसी न किसी बहाने से इस तरह की हरकत करती ही थी लेकिन अनजान लड़कों के सामने पहली बार इस तरह की हरकत कर रही थी लेकिन समय का अभाव होने की वजह से बहुत जल्द से जल्द इस खेल को खत्म करना चाहती थी इसलिए एक झटके से अपनी पेंटि पकड़कर उसे एकदम से नीचे कर दी और उसकी गोरी गोरी गांड एकदम से बेलिबास हो गई,,,, और वह नीचे बैठकर पेशाब करने लगी,,,,।

यह अद्भुत नजारा उन दोनों लड़कों के लिए बेहद खास था क्योंकि आज वह पहली बार अपनी स्कूल की मैडम को पेशाब करते हुए देख रहे थे और वह भी बेहद खूबसूरत मैडम इसके बारे में वह लोग ना जाने कितनी बार गंदी गंदी बातें सोच कर अपना हीलाकर मुठ मारते थे,,, आज वही उनके सपनों की रानी उनकी आंखों के सामने साड़ी उठाकर पेशाब कर रही थी उनकी नंगी नंगी गांड को देखकर दोनों मदहोश में जा रहे थे यह नजारा सुगंधा की मदहोश कर देने वाली कर दोनों के मन में हाहाकार मचा रही थी,,,,, दोनों पागल हुए जा रहे थे दोनों मूठ मारना चाहते थे लेकिन वह जानते थे कि वह दोनों कहां पर है यहां पर कोई भी आ सकता था,,,।

सुगंधा के बदन में भी मदहोशी जा रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि वह दोनों लड़के उसे पेशाब करते हुए देख रहे होंगे जैसे की उसका बेटा चोरी चुपके देखा करता था और एकदम उत्तेजित हो जाया करता था सुगंधा को भी मजा आ रहा था,,,, और इसीलिए सुगंध दोनों की उत्तेजनक और ज्यादा बढ़ाते हुए अपने दोनों हथेलियों को अपनी नंगी गांड पर रखकर उसे हल्के हल्के से सहलाने लगी,,, सुगंधा की यह हरकत दोनों के दिलों दिमाग पर गहरा प्रभाव पड़ रही थी दोनों मदहोश हुए जा रहे थे,,,, सुगंधा अपना कार्यक्रम और ज्यादा आगे बढ़ती और वह दोनों लड़की और ज्यादा मदहोश होते इससे पहले ही रीशेष पूरी होने की घंटी बज गई और घंटी की आवाज सुनकर सुगंध भी धीरे से उठकर खड़ी हो गई और अपने कपड़ों को व्यवस्थित करने लगी क्योंकि वह जानती थी कि अब खेल आगे नहीं बढ़ाया जा सकता लेकिन वह जल्दी से उन लड़कों का चेहरा देखना चाहती थी कि आखिरकार वह दोनों दीवाने हैं कौन इसलिए वह जल्दी से हाथ धोकर बाथरूम के दरवाजे के पास आए तब तक वह दोनों लड़के तुरंत वहां से जा चुके थे दरवाजा खोलकर देखी तो वहा कोई नहीं था,,, सुगंधा भी मुस्कुराते हुए धीरे से अपनी क्लास की ओर चल दी ,,।

सुगंधा अपनी ही हरकत की वजह से काफी उत्तेजना महसूस कर रही थी जिंदगी में पहली बार में किसी जवान लड़कों के सामने अपने अंगों का प्रदर्शन की थी,,,, और वह भी पेशाब करते हुए,,,,,, सुगंधा कभी सोचा नहीं थी कि उसके ही क्लास के लड़के उसके बारे में गंदे ख्यालात रखते हैं,,,, लड़कों की बातों को सुनकर तो खुद उसकी बुर उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फूल गई थी उसे एहसास हो गया कि दुनिया में सारे मर्द चाहे किसी भी उम्र के हो औरतों के बारे में हमेशा गंदे ख्याल ही रखते हैं,,, लेकिन फिर भी बाथरूम के अंदर जो कुछ भी हुआ था बेहद अद्भुत था उसे अनुभव को महसूस करके सुगंधा अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी,,,।

इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि एक औरत को पेशाब करते हुए देखने में मर्द को कितना आनंद आता है क्योंकि वह इस अनुभव से गुजर चुकी थी जिसका ताजा उदाहरण था खुद उसका लड़का जो उसे पेशाब करते हुए बड़े प्यासी नजरों से देखा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर नजर टीकाए हुए ना जाने कैसे-कैसे ख्यालात अपने मन में लाता था,,,,, सुगंधा को पूरा यकीन था कि उसका बेटा भी उसके बारे में गांधी कल्पना करके अपने हाथ से ही अपना लंड हिलाकर अपनी गर्मी शांत करता होगा,,, क्योंकि एक औरत को नग्न अवस्था में अर्धनग्न अवस्था में देखने के बाद एक मर्द के मन में किस तरह की हलचल होती है वह अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि उसे समय मर्द औरत को चोने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाता है और योग्य रूप से जुगाड़ ना मिलने पर बस एक ही सहारा रहता है अपने हाथ से हिला कर अपनी गर्मी को शांत करना,,,।

क्योंकि ऐसे ही ख्यालात बाथरूम के दरवाजे के पीछे छुपकर उसे पेशाब करते हुए देख रहे दोनों लड़कों के मन में भी आ रहा था,,,, लेकिन वह दोनों ऐसा नहीं कर पाए थे,,, क्योंकि मुठ मारने की वह योग्य जगह नहीं थी,,, लेकिन फिर भी उन दोनों की मंशा जानकर ही सुगंधा की बुर से मदन रस टपकने लगा था और वह अपने मन में सोचने लगी थी कि उसके बेटे को छोड़कर बाकी सभी लड़के मौका मिलने पर औरत की चुदाई करने से पीछे नहीं आते लेकिन उसका बेटा इतना मौका मिलने के बावजूद भी अभी तक आगे नहीं बढ़ पाया था लेकिन इस कारण को भी अच्छी तरह से समझ रही थी वह जानती थी कि,,, अगर उसके लड़के के सामने उसकी जगह कोई और होती तो शायद उसका बेटा भी दूसरे लड़कों की तरह ही अपने कदम आगे बढ़ाने में बिल्कुल भी नहीं कतराता ,,,, लेकिन एक मां होने के नाते उसका बेटा इस रिश्ते के लिए आज से आगे बढ़ने से कतरा रहा था झिझक रहा था और यही चीज उसकी दूर करनी थी,,,।

फिर भी बाथरुम के अंदर उसे बहुत ही अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई थी,,, गैर लड़कों के सामने और वह भी अपने ही विद्यार्थियों की आंखों के सामने अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड दिखाते हुए पेशाब करने के लिए बैठ जाना यह भी काफी हिम्मत की बात है और शायद सुगंधा खुले तौर पर अपने विद्यार्थियों के सामने ऐसा नहीं कर पाती लेकिन उसके और उसके विद्यार्थियों के बीच एक लकड़ी का दरवाजा था और इसीलिए वह आराम से अपनी हरकत को अंजाम दे दी,,वरना वह ऐसा नहीं कर पाती भले ही अपने बेटे के सामने वह अपनी गांड दिखाते हुए पेशाब करने बैठ जाती थी लेकिन दूसरे लड़कों के सामने वह ऐसा कभी नहीं करती,,,। खैर इस बात से उसे इतना तो पता चल गया कि वह जिन लड़कों को पढ़ाती है वही लड़के उसे चोदने के लिए व्याकुल है,,,,।

जैसे तैसे करके दो-तीन दिन गुजर गए,,, लेकिन अभी तक अंकित अपनी मां के लिए पैंटी नहीं खरीद कर लाया था,,, और वो भी इसलिए कि उसे समय नहीं मिल रहा था क्योंकि वह अपनी मां के लिए पेटी खरीदने के लिए पास के बाजार नहीं बल्कि दूर के मार्केट जाना चाहता था ताकि उसे कोई वहां पहचान वाला ना हो क्योंकि इस बात का डर उसे था कि कहीं बाजार में कोई उसे पेंटी खरीदना हुआ देख लेगा तो क्या सोचेगा,,, सुगंधा अपने बेटे से पेंटी के लिए पूछना चाहती थी लेकिन उसे योग्य समय नहीं मिल रहा था क्योंकि तृप्ति साथ में ही रहती थी और जब तृप्ति साथ में नहीं रहती थी तो अंकित नहीं रहता था,,, इसलिए वह अभी अपनी पेंटी के बारे में पूछ नहीं पाई थी लेकिन जब भी वह घर पर आती थी तो अपनी पेंटिं को निकाल कर ड्रोवर में रख देती थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा कभी भी उसकी पेंटिं के बारे में पूछ लेगा तो उसे साड़ी उठाकर दिखाना पड़ेगा और वह नहीं चाहती थी कि उसके बेटे को इस बात का पता चले कि उसके पास पहनने के लिए पर्याप्त मात्रा में पहनती है इसलिए तो वह अंकित की हाजिरी में अपनी पैंटी को हमेशा निकाल देती थी और जब बाहर जाती थी तब पैंटी पहन लेती थी,,,,।

रात के तकरीबन 10:00 बज रहे थे और टीवी पर कोई रोमांटिक फिल्म चल रही थी कमरे में दोनों भाई बहन और सुगंधा बैठी हुई थी तीनों फिल्म देख रहे थे,,,,,, एक तरफ सोफे पर मां बेटे दोनों बैठे हुए थे एक ही सोफे पर बैठे होने की वजह से सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, एक तो फिल्म भी बड़ी रोमांटिक थी इसलिए दोहरा सुरूर छा रहा था,,, सुगंधा के मन में हरकत करने को सुझ रही थी लेकिन,, तृप्ति भी वहीं पर मौजूद थी इसलिए वह ऐसा वैसा कुछ करने से डर रही थी लेकिन तभी थोड़ी देर बाद त्रप्ती यह कहकर वहां सेउठकर चली गई कि उसे बहुत नींद आ रही है उसके जाते ही सुगंधा का चेहरा खुशी के मारे खिलने लगा,,, यही हाल अंकित का भी था अंकित भी फिल्म में चल रहे गरमा गरम चुंबन दृश्य की वजह से गर्म हो चुका था,,,,।

फिल्म हॉरर फिल्म लेकिन हॉरर से ज्यादा उसमें उत्तेजक दिल से थे जिन्हें देखने में मां बेटे दोनों को आनंद आ रहा था,,, फिल्म के हीरो हीरोइन का चुंबन दृश्य उनका आलिंगन करना हीरो का पतली कमर पर हाथ रखकर उसे अपनी तरफ खींचना यह सब दोनों मां बेटे को मदहोश किए जा रहा था,,, इस तरह के दृश्य देखकर सुगंधा की तो सांसे ऊपर नीचे हो रही थी अंकित की भी हालत दयनीय होती जा रही थी उसके पेट में भी तंबू बन चुका था,,,, अरे लेकर दोनों मां बेटे एक दूसरे को देख ले रहे थे और वापस टीवी की तरफ देखने लग जाते थे,,,।

इसी बीच सुगंधा सामने पड़े टेबल पर अपनी एक टांग उठा कर रखी और फिर उसके ऊपर दूसरी टांग भी रख दी और इसी के साथ वह अपनी साड़ी को थोड़ा सा घुटनों तक खींच दी वह जान बुझकर इस तरह की हरकत कर रही थी वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी,,, और अपनी मां की हरकत पर अंकित की नजर अपनी मां पर गई थी,,, तो वह गहरी सांस लेते हुए फिर से टीवी की तरफ देखने लगा था,,, गर्मी का महीना पंखा तेजी से चल रहा था लेकिन फिर भी इतनी ठंडक नहीं थी और इसी का फायदा उठाते हुए सुगंधा फिर से अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी पड़कर उसे घुटनों के ऊपर तक खींच दी और उसकी मोटी ताजी जांघ एकदम से दिखने लगी,,, और ऐसा करते हुए सुगंधा बोली,,,।

पंखा इतनी तेज चल रहा है फिर भी कितनी गर्मी लग रही है,,,,।

तुम सही कह रही हो मम्मी मुझे भी बहुत गर्मी लग रही है,,,,( और ऐसा कहते हुए अंकित अपने मन में बोला कि अगर ज्यादा गर्मी लग रही है तो अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ,,,)

क्या करें कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,(तभी फिल्म में फिर से चुंबन दृश्य शुरू होने लगा इस बार चुंबन दृश्य को देखकर सुगंधा के होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,और वह अंकित से बोली,,,)

देख रहा है अंकित दोनों किस तरह से चुंबन चाटी कर रहे हैं,,,,,(सुगंधा जानती थी कि इस तरह की बात अपने बेटे से नहीं किया जाता लेकिन फिर भी वह अपने मां पर काबू नहीं कर पा रही थी इसलिए वह जानबूझकर अपने बेटे से इस तरह की बात की थी उसका बेटा भी अपनी मां की बात सुनकर बोला,,,)
तुम सही कह रही हो मम्मी जब से फिल्म शुरू हुई है तब से न जाने कितनी बार इस तरह का दृश्य आ चुका है कहानी से ज्यादा तो यही सब भरा हुआ है,,,, देखो देखो कैसे दोनों चुंबन कर रहे हैं मैं तो पहली बार इस तरह से देख रहा हूं,,,,(फिल्म में हीरो हीरोइन दोनों एक दूसरे के मुंह में मुंह डालकर एक दूसरे की जीभ को मुंह में डालकर चुंबन चाटी कर रहे थे,,,,)

मैं भी तो पहली बार देख रहीहूं,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा टेबल पर अपने दोनों टांगों को हल्के से खोल दी और उसकी साड़ी एकदम जांघों के ऊपर तक आ गई जहां से उसकी जांघों का कटाव तक दिखने लगा था,,, जिस पर अंकित की नजर बार-बार चली जा रही थी अब वहां फिल्म से ज्यादा अपनी मां की दोनों टांगों के बीच नजर गड़ाए हुए था लेकिन अभी उसे अपनी मां की बुर नजर नहीं आई थी लेकिन फिर भी वह इसी कोशिश में था की मां की दूर नजर आ जाती है क्योंकि फिल्म में बहुत कुछ था लेकिन हीरोइन के अंगों को खुलकर नहीं दिखाया था वह कपड़े में ही थी,,, इसीलिए फिल्मों के गरमा गरम दृश्य को देखकर उसे अपनी मां की बुर देखने की लालसा जाग गई,,,,।

अौर सुगंधा अपने बेटे की तड़प को समझ गई थी,,, लेकिन जानबूझकर साड़ी को अब थोड़ा सा और ऊपर नहीं ले रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा क्या देखना चाह रहा है और इसीलिए वह उसे तड़पाना चाहती थी उसके बदन में उत्तेजना की आग जलाना चाहती है उसे विवस करना चाहती थी,,, और इसीलिए वह अपनी दोनों जांघों पर अपनी हथेली रखकर हल्के से सहलाते हुए बोली ,,।)

मुझे नहीं लगता था की फिल्मों में इस तरह का भी नजर होता होगा आज तक तुम्हें साफ सुथरी फिल्म देखी आई हूं लेकिन पहली बार इस तरह की फिल्म देख रही हूं,,,(सुगंधा जानबूझकर अपनी बातों को आगे बढ़ा रही थी वह जानबूझकर अंकित से इस तरह की बातें कर रही थी वह चाहती तो अपने बेटे से यह बता सकती थी कि वह इस तरह की भी फिल्म देख चुकी है जिसमें मर्द और औरत दोनों नंगे होकर चुदाई का खेल खेलते हैं लेकिन वह इस तरह की बात अपने बेटे को नहीं बताना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उसके बेटे को पता चले कि उसकी मां गंदी फिल्म भी देख चुकी है,,,,और अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला,,)

मम्मी क्या ईन दोनों को खराब नहीं लगता होगा जिस तरह से चुंबन कर रहे हैं एक दूसरे की जीभ एक दूसरे के मुंह में डाल रहे हैं इससे तो एक दूसरे का थुक एक दूसरे के मुंह में चला जाता होगा,,,।

अरे मजा ही आता होगा तभी तो कर रहे हैं वरना ऐसा थोड़ी ना करते,,,,।
(दोनों के बीच बड़े आराम से इस तरह की बातें हो रही थी इसलिए मौका देखकर अंकित थोड़ा हिम्मत दिखा कर बोला)

अच्छा मम्मी बुरा ना मानो तो एक बात कहूं,,,।

बोल क्याबात है,,,।

क्या तुम भी इस तरह से चुंबन कभी की हो,,,।
(अंकित की बात सुनकर सुगंधा के तन बदन में हलचल होने लगी उसके मन में प्रसन्नता के भाव जगाने लगे क्योंकि उसका बेटा बड़ी अंदरूनी बात पूछ रहा था और उसकी हिम्मत के लिए सुगंधा मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और उसके सवाल का जवाब देते हुए बोली,,,)

नहीं ऐसा कभी कि नहीं हूं,,,, तेरे पापा कभी इस तरह से चुंबन किए ही नहीं,,,,
(अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि उसके सवाल का जवाब उसकी मां बढ़िया आराम से दे रही थी दोनों के बीच ऐसा लग रहा था की दूरियां खत्म होती जा रही है दोनों के बीच से पर्दे उतरते जा रहे हैं और ईसी बीच बार-बार सुगंधा अपनी दोनों जांघों पर अपनी हथेली को जोर से दबोच लेती थी तो कभी शपथ लगा देती थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई पहलवान इस तरह की हरकत करके दूसरे पहलवान को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है या उसे चुनौती दे रहा है और यह एक तरह से सुगंधा की तरफ से अपने बेटे के लिए आमंत्रण और चुनौती दोनों ही थी लेकिन फिर भी अंकित अपनी मां के सारे को समझ नहीं पा रहा था अगर उसकी जगह शायद कोई और होता राहुल ही होता तो शायद अब तक उसकी दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल बैठकर उसकी बुर को चाट रहा होता,,,, अभी दोनों के बीच गरमा गरम बरता पी कोई और मोड लेकर इससे पहले ही घर के पीछे कुछ गिरने की आवाज आई और दोनों एकदम से चौक गए,,,,।

पल भर के लिए सुगंधा को लगा कि कहीं कोई चोर तो नहीं है क्योंकि पीछे एकदम खुली जगह है एकदम अंधेरा या अंधेरा इसलिए वह जल्दी से अपनी साड़ी को व्यवस्थित करके सोफे पर से उठकर खड़ी हो गई,,, अंकित भी थोड़ा चौकन्ना हो हो गया था क्योंकि उसे भी ऐसा लगा कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा है इसलिए वह भी जल्दी से उठकर खड़ा हो गया था और अपनी मां से बोला,,,)

कहीं कोई है तो नहीं मम्मी,,,।

मुझे भी ऐसा लग रहा है चलकर देखना पड़ेगा,,,, तू यही रूक में देखती हूं,,,,

नहीं अकेले जाना ठीक नहीं है मैं भी चलता हूं,,,,,।

हाथ में वह कोने में पड़ा मोटा डंडा ले ले,,(उंगली से कोने में पड़े डंडे की तरफ इशारा करते हुए सुगंधा बोली,,, और इतना कहने के साथ ही टीवी को बंद कर दी,,,,
टीवी पर रोमांटिक फिल्म का रोमांटिक फिर से देखकर जिस तरह से सुगंधा गर्म हो चुकी थी,,, उसे देखकर ऐसा ही लग रहा था की सुगंधा जरूर कुछ ना कुछ हरकत करेगी,,, क्योंकि टीवी के रोमांटिक दृश्य को देखकर उसका बेटा भी मदहोश हो चुका था उसके भी पेट में तंबू बन चुका था,,,, और इसी के चलते सुगंधा अपनी दोनों टांगों को उठाकर सामने पड़े टेबल पर रख दिया और साड़ी को धीरे-धीरे अपनी जांघों के ऊपर तक खींच दी,,, ऐसा हुआ जानबूझकर कर रही थी अपने बेटे को अपनी तरफ पूरी तरह से आकर्षित करने के लिए और उसका बेटा ठीक उसके बगल में बैठा था और अपनी मां की हरकत देखकर पूरी तरह से मत हुआ जा रहा था,,,।

अंकित अपनी मां की मदहोश कर देने वाली हरकत देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था और वह अपनी आंखों को टीवी की जगह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच दिखाया हुआ था वह अपनी मां की गुलाबी बुर को देखना चाहता था उसके दर्शन करना चाहता था लेकिन सुगंधा जानबूझकर इतना ही साड़ी कमर तक उठाई थी ताकि सब कुछ तो देखा जा सके लेकिन उसकी बुर दिखाई ना दे और यही तड़प वह अपने बेटे के चेहरे पर देख रही थी,, मोटी मोटी जांघो से सुशोभित सुगंधा की जवानी ट्यूबलाइट की रोशनी में अपनी अलग आभा बिखेर रही थी,,, तृप्ति वहां से उठकर कब का अपने कमरे में सोने के लिए जा चुकी थी और इसी मौके का फायदा सुगंधा उठाना चाहती थी और इसी के चलते वह अपनी जवानी का प्रदर्शन कर रही थी,,,।

जिस तरह की हालत और तड़प सुगंधा अपने अंदर महसूस कर रही थी उसी तरह की तड़प उसका बेटा भी महसूस कर रहा था ऐसा नहीं था कि वह पहली बार अपनी मां की बर देखने के लिए तड़प रहा हो और कभी देखा ना हो वह अपनी मां की बुर को देख चुका था उसके दर्शन कर चुका था,,, लेकिन यह भी सही था कि बहुत बार देखने के बावजूद भी वह नजर भर कर अपनी मां की बुर को देख नहीं पाया था उसके भूगोल को समझ नहीं पाया था इसलिए तो इस समय भी उसकी तरफ बढ़ती जा रही थी और सुगंधा थी कि अपने बेटे को और ज्यादा तड़पाना चाहती थी,,,।

लेकिन सुगंधा की कामुकता भारी क्रियाकलाप आगे बढ़ती इससे पहले ही घर के पीछे किसी चीज के गिरने की बड़ी तेजी से आवाज आई और दोनों एकदम से चौंक गए,,, सुगंधा जल्दी से अपने कपड़े को व्यवस्थित करके अपनी जगह से उठकर खड़ी हो चुकी थी,,,,, और अंकित भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया था दोनों मां बेटे एक दूसरे को सवालिया नजरों से देख रहे थे,,,,,। दोनों के मन में यही शंका थी कि हो सकता है कोई चोर घर में घुस आया हो इसीलिए तो सुगंधा अपने बेटे को बड़ा सा डंडा लेने के लिए बोली थी जो की कोने में पड़ा था और अंकित भी आगे बढ़ाकर उसे डंडे को अपने हाथ में ले लिया था,,,।
सुगंधा जल्दी से टीवी बंद कर दी थी,,,,, और वह भी एक बड़ा सा डंडा अपने हाथ में ले ली और अंकित की तरफ देखने लगी,,,,‌

क्या गिरा होगा,,,!(आश्चर्य से अपनी मां की तरफ देखते हुए अंकित बोला,,,)

मालूम नहीं चल कर देखना पड़ेगा,,,,

मैं भी साथ चलूंगा,,,,।

लेकिन चौकन्ना रहना पड़ेगा हो सकता है कोई चोर हो,,,,

तब तो मैं आगे रहूंगा मम्मी,,,,।

नहीं अंकित तू पीछे रहना तू अभी इतना बड़ा नहीं हो गया है,,,।

क्या बात करती हो मम्मी मैं एकदम जवान हो गया हूं मुझे आगे रहने दो अगर कर हुआ तो दो ही डंडे में उसकी हड्डी तोड़ दूंगा,,,।
(अपने बेटे का जोश और हिम्मत देखकर सुगंधा मन ही मन खुश होने लगी और अपने बेटे की जवानी पर गर्व करने लगी लेकिन फिर भी वह जानती थी कि वह अपने बेटे को इस तरह से आगे नहीं रख सकती थी ,,इसलिए बोली,,,)

तू चाहे कितना भी बड़ा हो जा अंकित मां की नजरों में तू अभी बच्चा ही रहेगा इसलिए मैं आगे रहती हूं और तू पीछे पीछे,,,,(और इतना कहने के साथ ही सुगंधा धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ाने लगी,,, पीछे पीछे अंकित चलने लगा सुगंधा के हाथ में भी मोटा और लंबा डंडा था जिसे वह कस के पकड़ी हुई थी और अपने आप को तैयार कर रही थी कि अगर कोई चोर हुआ तो वह कस के वार करेगी,,,,, और यही सोचकर वह धीरे-धीरे अपना कदम आगे बढ़ा रही थी और पीछे से अंकित धीरे से बोला,,)

मम्मी संभाल कर,,,,,।

तू चिंता मत कर,,,,

(दोनों मां बेटे धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे कुछ देर के लिए दोनों के मन से वासना और मदहोशी का तूफान गुजर चुका था दोनों एकदम सामान्य हो चुके थे मां और बेटा दोनों के अंदर एक बार फिर से चरित्र का बदलाव हो चुका था दोनों अपने मूल रूप में आ चुके थे,,, अपने कमरे से निकल कर दोनों पीछे की तरफ जा रहे थे,, दोनों के मन में इस बात का डर भी था कि कहीं कर हुए तो क्या होगा अगर एक हुआ तो फिर भी ठीक अगर एक से ज्यादा हुए तो क्या होगा,,,,। अगर उनके पास हथियार हुआ मतलब की चाकु हॉकी स्टिक या फिर रिवोल्वर हुई तो,,,, क्यों नहीं हो सकती कर के पास तो सारे हथियार होते हैं और उन्हें चलाने से भी वह बिल्कुल भी नहीं कतराते,,,, इस बारे में सोचते ही सुगंधा के बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी ,, उसके पसीने छूटने लगे,,,,। और वह अपने बेटे को एकदम से सचेत करते हुए बोली,,,)

एकदम चौकन्ना रहना अंकित कुछ भी हो सकता है,,,।

मै एकदम चौकन्ना हुं मम्मी,,,, बस तुम अपने आप को संभालना,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को हिम्मत मिल रही थी,,,, और वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी पीछे से एक बार गिरने के बाद किसी तरह की आवाज नहीं आ रही थी बिल्कुल सन्नाटा छाया हुआ था,,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि पीछे एकदम अंधेरा होगा लेकिन फिर भी चांदनी रात होने की वजह से साफ दिखाई दे रहा होगा अभी तक दोनों पीछे नहीं पहुंचे थे दोनों के हाथ में अपनी रक्षा के लिए हथियार के नाम पर केवल डंडा ही था पर उसे भी दोनों बड़ी सिद्धत से पकड़े हुए थे,,,।

धीरे-धीरे करके दोनों मां बेटे घर के पीछे की तरफ पहुंच गए थे,,,,,,, घर के पीछे भी एक बल्ब लगा हुआ था लेकिन इस समय वह जल नहीं रहा था क्योंकि वह स्विच ऑफ था और उसकी बटन दीवार पर ही थी और वह धीरे से अपने बेटे से बोली,,,,।

अंकित में बटन दबाने जा रही हूं एकदम ध्यान देना कौन है कहां है,,,,, हो सकता है यही छुपा हुआ हो,,,,।

तुम चिंता मत करो मम्मी मैं एकदम तैयार हूं,,,,(अंकित अपने मन में ठान लिया था कि अगर सच में कोई चोर हुआ तो आज वह इस डंडे से मार मार कर उसकी हड्डियां तोड़ देगा उसे जरा भी डर नहीं लग रहा था जवान कौन था जो से भरा हुआ और इस बात से उसके मन में गुस्सा भी था कि वह कोई भी हो उसके घर में घुस आया था,,,,, इस बात का गुस्सा तो उसके मन में था ही वह इस बात से और ज्यादा क्रोधित था कि कमरे के अंदर रोमांटिक फिल्म देखते हुए इतना अच्छा दृश्य उसकी मां दिखा रही थी जिस पर पर्दा पड़ गया था,,,,।

दोनों का दिल बड़ी जोरों से धड़क रहा था क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ था जब दोनों के मन में इस तरह का डर था कि उनके घर में चोर घुस आया है और वह दोनों उसे चोर का मुकाबला करने के लिए हाथ में डंडा लिए घर के पीछे पहुंच चुके थे सिकंदर धीरे से अपना हाथ बटन पर रखी और उसे एकदम से दबा दी और पीछे एकदम से बल्ब जल उठा और उसकी रोशनी चारों तरफ फैल गई,,,, तभी सामने उन दोनों की नजर गई तो वहां पर एक गमला गिरा हुआ था और उसे टूटे हुए गमले की तरफ देखकर जैसे ही सुगंधा बोली ,,,)

कौन है वहां,,,?
(उसका इतना कहना था कि तभी गमले के पीछे बिल्ली निकाली और म्याऊं बोलते हुए जल्दी से दीवार खुद कर भाग गई,,,, और उस बिल्ली को देखकर सुगंधा राहत की सांस लेते हुए बोली,,,)

अच्छा तो यह बिल्ली का काम था,,,,।

हां मम्मी और हम तो कुछ और ही समझ रहे थे,,,।

चलो अच्छा ही हुआ कि बिल्ली थी वरना चोर होता तो गड़बड़ हो जाती,,,।

कुछ गड़बड़ नहीं होती मम्मी देख रही हो ना या डंडा मार मार कर उसका कचुमर बना देता,,,,।

हां देख तो रही हूं वैसे तो है बहुत बड़ा हिम्मतवाला तेरी जगह कोई और होता तो शायद वह डर जाता,,,।

तभी तो कहता हूं मम्मी की मैं बड़ा हो गया हूं तुम रहती हो कि अभी भी बच्चा हो,,,,।

हां बाबा तु बड़ा हो गया है बस,,,,।

खामखा बिल्ली ने सारा खेल बिगाड दी इतनी अच्छी फिल्म चल रही थी,,,,,,।

वह चुम्मा चाटी वाली फिल्म तुझे अच्छी लग रही थी,,,(सुगंधा जानबूझकर इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए बोली क्योंकि वह जिस तरह से गर्म होकर अपने अंगों का प्रदर्शन कर रही थी चोर की आशंका होते ही उसकी उत्तेजना हवा में फूर्ररर हो गई थी और इस समय घर के पीछे एकांत बातें ही वह फिर से मदहोश होना चाहती इसलिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए बोली अपनी मां की बात सुनकर अंकित थोड़ा शरमाते हुए बोला,,,)

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन कहानी अच्छी थी,,,।

लेकिन गर्मी भी तो बहुत थी और यहां देख कितनी अच्छी हवा चल रही है,,,,।

तुम सच कह रही हो मम्मी तुमको कुछ ज्यादा ही गर्मी लग रही थी मैं तुम्हारी हालत देखा था,,,।

क्या देखा था,,,?(जानबूझकर मदहोश होते हुए सुगंधा बोली,,,)

यही देखा था कि तुमसे गर्मी बरसात नहीं हो रही थी और तुम साड़ी अपनी कमर तक उठा दी थी,,,।

ओहहह ,,,,, तो क्या हो गया अंकित सच में मुझे बहुत गर्मी लग रही थी इसलिए मैं सारी कमर तक उठा दी थी ताकि थोड़ी हवा लग सके और वैसे भी तेरी जानकारी के लिए बता दूं कि हमेशा औरतों की टांगों के बीच कुछ ज्यादा ही गर्मी लगती है तुझे मैं यह पहले भी बता चुकी हूं इसलिए तो मुझसे गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,,,।

मुझे भी ऐसा लगने लगा है कि वास्तव में औरतों की टांगों के बीच ज्यादा ही गर्मी रहती है,,,,।

तुझे कैसे मालूम,,,!(आश्चर्य जताते हुए सुगंधा बोली)

अरे मम्मी तुम ही ने तो बताई हो तुम्हारी हालत देखकर मैं समझ गया,,,

और तेरी हालत देखकर,,,(एकदम से अंकित के पेंट में बने तंबू की तरफ देखते हुए) मुझे कैसा लग रहा है कि तेरी भी टांगों के बीच ज्यादा गर्मी लग रही है,,,।
(अपनी मां की बात सुनते ही उसे अपनी स्थिति का भान हुआ लेकिन वह यहां पर थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए हल्का सा मुस्कुराया और अपने हाथ को अपने तंबू पर रखकर उसे हल्के से दबा दिया ऐसा वह जानबूझकर कर रहा था और ऐसा करते हुए धीरे से बोला,,)

हां मुझे भी कुछ ऐसा ही लग रहा है,,,,।

(जिस तरह से अंकित में जवाब दिया था उसका जवाब सुनकर उसकी हिम्मत देखकर सुगंधा की दोनों टांगों के बीच हलचल मचने लगी वह समझ गई कि यही वह मर्द है जो उसकी जवानी की प्यास बुझा सकता है इसलिए मुस्कुराते हुए वह बोली,,)

अंकित कमरे में कितनी गर्मी लग रही थी लेकिन देख घर के पीछे कितनी ठंडी हवा चल रही है कितना अच्छा लग रहा है मन कर रहा है यहीं पर कुछ देर बैठ जाऊं,,,।

मेरा भी यही मन कर रहा है मम्मी,,,,।

तो ठीक है चल कुछ देर यहीं बैठ कर हवा लेते हैं,,,।
(इतना कहने के साथ ही एक कोने में पड़ी दो कुर्सी को खींचकर पास में ले आई और एक कुर्सी पर अंकित को बैठने का इशारा करते हुए बोली,,,)

तू बैठ में बल्ब बुझा देती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही सुगंधा बल्ब बुझाने के लिए आगे बढी और बटन समाधि और अगले ही पल जलता हुआ बल्ब एकदम से बुझ गया और घर के पीछे फैली हुई रोशनी एकदम सीमित हो गई अब कृत्रिम बल्ब की रोशनी नहीं बल्कि आसमान की चांदनी से फैली हुई कुदरत रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था लेकिन जिस तरह से उसकी मां बल्ब बुझाने के लिए बोली थी यह बात सुनकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,,, क्योंकि उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मानो उसकी मां उसके साथ चुदवाने के लिए कमरे के अंदर की लाइट बंद करने के लिए जा रही हो,,, ताकि वह अंधेरे में उसे आराम से और बेझिझक चुदाई का आनंद लूट सके,,,, लाइट बंद करने के बाद वह भी कुर्सी पर आकर बैठ गई औरबोली,,,)

रात काफी हो चुकी है इसलिए बल्ब जलना उचित नहीं है,,,, वैसे भी चांदनी रात में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा है,,,,,,(घर के पीछे पहले चांदनी रात के उजाले को देखकर मन ही मन प्रसन्न होते हुए सुगंधा बोली क्योंकि वह जानती थी की चांदनी रात होने की वजह से बल्ब का जालना उचित नहीं है क्योंकि वैसे भी सब कुछ साफ दिखाई दे रहा है,,,, बातों ही बातों में सुगंधा अपने बेटे से बोली,,,)

अच्छा यह बात तो मुझे बेवकूफ बना रहा है ना,,,।

किस बात के लिए,,,!

अच्छा ऐसे बोल रहा है जैसे तुझे कुछ मालूम ही नहीं,,,,।

अरे सच में मुझे नहीं मालूम तुम क्या कह रही हो किस बारे में कह रही हो,,,,।

धत्,,,, तेरी कि मुझे तो लगा कि मेरा बेटा बड़ा हो गया है जवान हो गया है लेकिन पहला ही वादा तोड़ दिया,,,,।

वादा कैसा वादा,,,,!

अरे बेवकूफ मेरे लिए चड्डी खरीदने का,,,,।

(अपनी मां की बात सुनते हैं एकदम से अंकित के बदन में सिहरन सी दौड़ गई और वह एकदम से मुस्कुराते हुए बोला,,,)

अरे चड्डी के बारे में बात कर रही हो वह तो मैं कल लेकर आऊंगा,,,,।

फिर से बेवकूफ बना रहा है अगर तेरे पास पैसे नहीं है तो बोल दे मैं तुझसे नहीं मांगूंगी और वैसे भी अपने पास से तुझे चड्डी खरीदने के लिए मैं पैसे नहीं दूंगी यह क्या बात हो गई मुझसे ही पैसा लेकर मुझे ही गिफ्ट करेगा,,,।

नहीं नहीं मम्मी ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो सही समय देख रहा था ताकि मैं तुम्हारे लिए अच्छी सी चड्डी खरे सकूं और कल छुट्टी का दिन है इसलिए मैं बड़ी आराम से तुम्हारे लिए खरीद सकता हूं और वैसे भी मुझे पैसे नहीं चाहिए जो तुम मुझे जेब खर्च कर देती हो उसमें से मैं काफी पैसा बचा चुका हूं और उसी पैसे का लाकर दूंगा,,,,।

तब तो ठीक है तब तो सच में मेरा बेटा बड़ा हो गया मैं तो समझी कि भूल ही गया है,,,,।

मैं भला कैसे भूल सकता हूं पहली बार तो तुम्हारे लिए कुछ लाने का वादा किया हूं,,,,।

(चड्डी का जिक्र सुगंधा जानबूझकर की थी,,, क्योंकि वह माहौल को फिर से गर्म करना चाहती थी और ऐसा ही हो रहा था कुछ देर पहले जिस तरह का तंबू अंकित के पेट में बना हुआ था वह शांत हो चुका था लेकिन चड्डी का जिक्र होते ही एक बार फिर से उसके पेंट में तंबू बन चुका था। ,,,,। और एक बार फिर से सुगंधा की बुर पानी छोड़ रही थी,,,, घर के पीछे बैठे-बैठे काफी समय हो चुका था,,,,और सुगंधा के मन में कुछ और चल रहा था,,, इसलिए वह बोली,,,)

बहुत देर हो गई है सुबह उठना भी है,,,।

हां मम्मी देर तो काफी हो चुकी है लेकिन यहां इतनी अच्छी हवा चल रही है कि उठकर जाने का मन ही नहीं कर रहा है,,,,,।

मेरा भी लेकिन क्या करें जाना तो पड़ेगा ही नींद नहीं पूरी होगी तो सुबह नींद नहीं खुलेगी,,,,(इतना कहने के साथ सुगंध अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और अंगड़ाई देने लगी उसकी भारी भरकम गांड अंगड़ाई लेते समय कुछ ज्यादा बाहर निकाल कर नजर आने लगी जिसे देखकर अंकित का लंड अंगड़ाई लेने लगा,,, और वह अपनी मां की गांड देखकर पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को दबा दिया,,, उसकी हरकत तिरछी नजर से उसकी मां ने देख ली और मन ही मन मुस्कुराने लगी वह समझ गई कि उसके बेटे के भी बदन में आग लगी हुई है उसे पाने के लिए,,,, अपनी मां की मदहोश कर देने वाली अंगड़ाई देखकर अंकित बोला,,)

क्या अभी भी अंदर चड्डी नहीं पहनी हो,,,।
(इतना सुनते ही सुगंध अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुरा दी और बोली)

ले देख ले,,, तुझे तो जैसे विश्वास ही नहीं होता,,,,(और इतना कहने के साथ ही कदम आगे बढ़कर वह दीवार के कोने पर पहुंच गई जहां पर बैठ कर वह अक्सर पैसाब किया करती थी,,,, यह देखकर अंकित का दिल जोरों से धड़कने लगा वह समझ गया कि कुछ गजब का होने वाला है और देखते ही देखते उसकी मां अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,, अंकित की हालत खराब होने लगी क्योंकि जो वह सोच रहा था उसकी मां वही करने जा रही थी,,,,, इस दृश्य को देख देख कर ऐसा लग रहा था कि अंकित पूरी तरह से मर्द बन जाएगा,,,,,।

देखते ही देखते सुगंधा अपनी साड़ी को धीरे-धीरे करके कमर तक उठाती और वास्तव में वह साड़ी के नीचे कुछ नहीं पहनी थी वह एकदम नंगी थी और जैसे ही वह कमर तक साड़ी उठाई सुगंधा अपने दोनों हथेलियां को अपनी नंगी गांड पर रखकर उसे सहलाते हुए पीछे की तरफ नजर घूमाकर अंकित से नजरे मिलाते हुए बोली,,,)

देख लिया ना मैं कुछ नहीं पहनी हूं पर तुझे ऐसा लगता है कि मैं तुझसे झूठ बोल रही हूं,,,।

नहीं मम्मी ऐसा नहीं है मुझे इस बात से अच्छी लगता है कि बिना चड्डी पहने तुम कैसे पढ़ाने के लिए चली जाती हो कैसे बाहर निकल जाती हो,,,।

क्या करूं मजबूरी है अगर होती तो पहन कर जाती पर वैसे भी अंदर पहनी हो कि नहीं पहनी हो किसको पता चलने वाला है तेरी तरह मैं किसी के सामने उठा कर दिखाती थोड़ी हूं,,,,।

(सुगंधा अपने बेटे के सामने धीरे-धीरे पुरी तरह से खुलने लगी थी और काफी हद तक खुल चुकी थी यह देखकर अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था क्योंकि उसकी मां के बढ़ता और उसकी हरकत को देखकर अंकित के जीवन में बहार आ गई थी,,, वैसे भी एक जवान लड़के को क्या चाहिए एक खूबसूरत औरत उसकी कामुकता भरी हरकत अच्छी से महसूस करके वह बार-बार उत्तेजित होता रहे,,,)

अच्छा करती हो मम्मी लोगों को क्या पता कि आसमान की परी जैसी दिखने वाली खूबसूरत औरत साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनती,,,।

अच्छा तो मैं तुझे परी की तरह दिखती हूं,,,।

उससे भी ज्यादा खूबसूरत और सच कहूं तो मैं तुम्हारी तरह आज तक इतनी खूबसूरत औरत नहीं देखा,,,,।

अच्छा,,,,।

हां मम्मी में सच कह रहा हूं,,,,।

चल अब रहने दे बातें बनाने को तेरी ईस तरह की बातें सुनकर कहीं मेरी पेशाब न छूट जाए,,,,(सुगंधा एकदम बेशर्मी भरी बातें अपने बेटे से करने लगी थी और उसकी यह बात सुनकर तो अंकित को ऐसा महसूस होने लगा कि कहीं उत्तेजना के मारे उसका लंड फट न जाए,,,, अपनी मां की बेशर्म भरी बातें सुनकर थोड़ा सा बेशर्म होने का हिम्मत करते हुए अंकित भी बोला,,,)

रहने तुम अभी तुम्हारी बात सुनकर तो मुझे पेशाब लगने लगी है,,,।
(अंकित की बात सुनकर सुगंध का मन प्रसन्नता से भर गया उसके चेहरे पर एकदम से नूर झलकने लगा और वह उत्साहित होते हुए बोली,,,)

तो देर किस बात की है आजा तू भी पेशाब कर ले,,,,(इतना कहने के साथ ही सुगंधा धीरे से बैठ गई और पेशाब करने लगी उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से बाहर निकल गई चांदनी रात में उसकी गांड एकदम से मस्त चमक रही थी जिसे देखकर अंकित का मन कर रहा था कि उसकी गांड को जीभ लगाकर चाट जाए,,,, अंकित की हालत खराब होने लगी थी वह इतना तो समझ किया था कि उसके सामने उसकी मां एकदम बेशर्म बन चुकी है तो उसे भी शर्म करने की कोई जरूरत नहीं है और उसका भी मन करने लगा कि अपनी मां के साथ वह भी पेशाब करें आखिरकार ऐसा मौका मर्द की जिंदगी में बहुत ही काम आता है जब वह एक साथ एक औरत के साथ पेशाब करता हूं औरत की बुर से पेशाब की धार निकलती है और दूसरी तरफ मर्द के लंड से पेशाब की धार निकलती है ऐसा नजारा कमी देखने को मिलता है आज अच्छा मौका था जिसके बारे में कभी अंकित सोचा नहीं था आज वही अद्भुत क्रीड़ा करने का अच्छा मौका आ चुका था और इस मौके को अंकित गवाना नहीं चाहता था लेकिन फिर भी वह शर्मा रहा था इसलिए सुगंधा एक बार फिर से अंकित की तरफ देखते हुए बोली,,,)

अाजा शर्मा मत पेशाब कर ले,,,, मुझसे शर्माने की जरूरत नहीं है,,,, याद है ना क्लीनिक में तू ही बाथरूम के अंदर परख नदी में मेरे पेशाब का सैंपल लिया था और कैसे लिया था यह तुझे बताने की जरूरत नहीं है तब मुझसे क्यों शर्मा रहा है,,,,। चल आजा,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित के बदन में जोश बढ़ने लगा उसकी हिम्मत बढ़ने लगी वह भी हिम्मत दिखाना चाहता था और मौका भी सही था इसलिए वह भी धीरे से आगे बड़ा और अपनी मां के बगल में जाकर खड़ा हो गया उसकी मां पेशाब कर रही थी और नजर उठा कर अपने बेटे की तरफ मुस्कुरा कर देखने लगी और बोली,,,)

चल जल्दी से पेशाब कर ले,,,,।
(अंकित अपनी मां को देख रहा था और उसकी दोनों टांगों के बीच निकलती हुई पेशाब की धार को देख रहा था अंकित जानता था कि यह धार उसकी बुर से निकल रही है उसकी गुलाबी छेद से निकल रही है,,, लेकिन यहां से सिर्फ उसे पेशाब की धार दिखाई दे रही थी उसकी मां की गुलाबी बुरे नहीं दिखाई दे रही थी उसे देखने की तड़प उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी लेकिन फिर भी इतना भी उसके लिए बहुत काफी था,,,,।

मदहोशी की पराकाष्ठा कमरे के पीछे दर्शाई जा रही थी,,, मां बेटे दोनों मदहोश हो चुके थे सुगंधा की तरफ से यह खुला आमंत्रण था अंकित के लिए लेकिन अंकित इसे साफ तौर पर स्वीकार करने से घबरा रहा था डर रहा था उसकी जगह कोई और होता तो शायद इसी समय उसकी बुर में अपना लंड डालकर उद्घाटन कर चुका होता है लेकिन फिर भी एक झिझक उसके मन में थी जो उसे रोक रही थी,,,,।

अपनी मां की तरफ देखते हुए अंकित अपने पेट का बटन खोलने लगा यह देखकर सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि सुगंधा अब तक अपने बेटे के लंड को बस एक ही बार देखी पाई है और वो भी जब उसके कमरे में उसे जगाने के लिए गई थी और अगर इस समय सब कुछ सही हुआ तो वह दूसरा मौका होगा जब वह अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड के दर्शन करेगी,,,,, अपनी मां की तरह अंकित भी बेशर्म बनते हुए धीरे-धीरे अपने पेंट की बटन खोलकर उसकी चेन को नीचे सरकार कर अपने पेंट को एकदम से घुटनों तक खींच दिया,,,, घुटनों तक पेट आते ही उसके अंदर बियर में बना अद्भुत खूंटा नजर आने लगा ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी बैल को बांधने के लिए खूंटा गाडा गया हो,,,, सुगंधा का दील जोरों से धड़क रहा था इस तरह का अद्भुत नजारा देखकर सुगंधा का मन कर रहा था कि अपने हाथों से अपने बेटे का अंडरवियर निकाल कर उसके लंड को अपने हाथ में पकड़कर उसे पेशाब करवाए,,, ।

लेकिन ऐसा करने में उसे न जाने क्यों अजीब लग रहा था लेकिन यह काम अंकित बड़े अच्छे से करते हैं अपने अंदर बियर को दोनों तरफ से पकड़ कर उसे आगे की तरफ खींचकर एक अच्छी खासी दूरी बनाकर अपने लंड से बाहर की तरफ करके उसे नीचे कर दिया ऐसा अंकित ने इसलिए किया था ताकि बड़े आराम से उसके अंदर किया नीचे सड़क सके क्योंकि उसका लंड एकदम से लोहे के रोड की तरह तन कर खड़ा था और ऐसे में सीधे-सीधे अंडरवियर नीचे खींचना उचित नहीं था,,, क्योंकि सीधे-सीधे अंडरवियर नीचे आता ही नहीं और यही अदा सुगंधा के तन बदन में आग लगा गई ,,।

बेहद अद्भुत नजारा घर के पीछे दर्शाया जा रहा था मन बैठकर पेशाब कर रही थी और उसके बगल में बेटा पेशाब करने के लिए अपने अंडरवियर को उतर चुका था और अंडरवियर के उतरते ही उसका मतवाला लंड एकदम से हवा में लहराने लगा जिसे देखकर सुगंधा के मुंह के साथ-साथ उसके बुर में भी पानी आ गया,,, सुगंधा इस तरह की अद्भुत नवरी को कभी नहीं देखी थी पड़ोसन के द्वारा दिखाई गई गंदी फिल्म में भी इस तरह का नजारा उसे देखने को नहीं मिला था,,, इसलिए तो उसके दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चलने लगी थी और अंकित की भी हालत खराब थी अंकित जानता था कि उसकी मां उसके लंड को ही देख रही है और यह देखकर अंकित केतन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी उसका मन कर रहा था कि ईसी समय अपनी मां की चुदाई कर दे ,,, लेकिन वह जानता था की चुदाई करने का अनुभव उसे बिल्कुल भी नहीं है अगर वह ऐसा कर भी देता तो निश्चित तौर पर वह सफल हो जाता इस बात को अच्छी तरह से जानता था अगर एक बार भी उसे चुदाई का अनुभव होता तो वह अपने आप को बिल्कुल भी नहीं रोकता,,।

सुगंधा की आंखों में प्यास नजर आ रही थी अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने की प्यास,,, वह अंदर ही अंदर तड़प रही थी उसकी दोनों टांगों के बीच भूचाल आ रहा था वह मदहोश हो रही थी उत्तेजना से उसका बदन कंपकंपा रहा था,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें मन तो उसका कर रहा था किसी समय अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के लंड को थाम ले और उसे अपने मुंह में भरकर जी भर कर चूसे,,, लेकिन न जाने कौन सी झिझक उसे आगे बढ़ने से रोक रही थी,,, लेकिन फिर भी जो नजर उसकी आंखों के सामने था वह अद्भुत था जिसकी तुलना करना नामुमकिन था सुगंधा के लिए क्योंकि उसने आज तक इस तरह का मोटा तगड़ा लंबा लंड देखी ही नहीं थी,,, सुगंधा की बुर से छुलक छुलक कर पेशाब की धार निकल रही थी,,,,।

अंकित अपनी मां की उत्तेजना को और बढ़ाते हुए अपने हाथ से अपने लंड को पकड़ लिया और उसे ऊपर नीचे करके हिलाते हुए,,, पेशाब करने लगा सुगंधा के मुंह से एक भी शब्द नहीं टूट रहे थे वह मुक दर्शक बनकर अपने बेटे की हरकत को देख रही थी,,, अंकित के पेशाब की धार बड़ी तेजी से सामने की दीवार पर गिर रही थी और दूसरी तरफ सुगंधा की बुर से पेशाब कि धार कमजोर पड़ रही थी,,,। मां बेटे दोनों मदहोशी के आलम में पूरी तरह से डूब चुके थे इस तरह का एहसास उन दोनों को कभी नहीं हुआ था यह पल यह क्षण पूरी तरह से आंतरिक हो चुका था इस पल में दोनों डूब चुके थे खो चुके थे,,, अगर इस समय दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन जाता तो इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं थी लेकिन फिर भी संभोग और उसके क्रिया का लाभ के बीच बस एक ही कदम की दूरी रह गई थी,,, लेकिन इस दूरी को खत्म करने के लिए एक कदम बढ़ाने में दोनों की हिम्मत नहीं हो रही थी,,,।

जैसे तैसे करके पैसाब वाला कार्यक्रम खत्म हो चुका था,,,, दोनों अपने कपड़ों को व्यवस्थित कर चुके थे लेकिन जिस तरह के हालात दोनों के बीच बन चुके थे दोनों एक दूसरे से बात नहीं कर पा रहे थे दोनों सीधे अपने कमरे में चले गए और अपने वस्त्र को उतार कर अपने हाथों से अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने की पूरी कोशिश करने लगे।

रात को घर के पीछे जो कुछ भी हुआ था उसे लेकर मां बेटे दोनों एक अलग ही दुनिया में विचरण कर रहे थे दोनों की मदहोशी की सीमा पार हो चुकी थी,, जिसका एहसास दोनों को सुबह उठने के बाद भी हो रहा था और दोनों उसे एहसास से निकल नहीं पा रहे थे आखिरकार वह पल ही ऐसा मधुर और मादकता से भरा हुआ था कि उनकी जगह कोई भी होता तो शायद उस मदहोशी से कभी भी बाहर निकल नहीं पाता,,,, क्योंकि घर के पीछे जो कुछ भी हुआ था सोची समझी साजिश तो नहीं लेकिन कुछ हद तक इस पर मां बेटे दोनों की मर्जी शामिल थी हालांकि अभी तक दोनों ने मर्यादा की आखिरी रेखा को नहीं लांघे थे लेकिन फिर भी दोनों के बीच बहुत कुछ हो चुका था जो की सामान्य तौर पर एक मां और बेटे के बीच कभी नहीं होना चाहिए,,,,।

रात की यादें अभी तक सुगंधा की गुलाबी छेद से रीस रही थी,,, सुबह उसकी नींद खुलते ही उसकी नजर सबसे पहले अपने दोनों टांगों के बीच की स्थिति पर गई थी जो कि अभी तक गीली थी शायद रात की उत्तेजना पर मदहोशी इतनी अत्यधिक की अभी तक उसकी दोनों टांगों के बीच की लकीर से बाहर नहीं निकल पाई थी,,, सुगंधा बिस्तर पर संपूर्ण रूप से नग्न गन अवस्था में थी पूरी तरह से नंगी,,, क्योंकि पेशाब करते समय जिस तरह से उसने अपने बेटे के लंड के दर्शन किए थे और वह भी एकदम नजदीक से वह पल सुगंधा को पूरी तरह से बेकाबू बना दिया था,,, एक तो सुगंधा अपने जीवन में अपने पति के लंड के सिवा किसी और के लैंड के दर्शन नहीं की थी और दूसरे किसी के भी लंड के दर्शन की थी तो वह था उसका बेटा जिसके लंड के दर्शन उसने पहली बार जब उसे कमरे में जगाने के लिए गई थी तब की थी और अपनी मदहोशी पर काबू न कर सकने की स्थिति में वह अपने बेटे के लंड को उंगली से स्पर्श भी की थी,,, लेकिन फिर भी उसे दिन भी वह अपने बेटे के लंड को इतनी नजदीक से नहीं देख पाई थी जितना की कल बीती रात को देखी थी,,,।

वह पल वह नजारा बार-बार उसकी आंखों के सामने घूम रहा था घर के पीछे बैठकर उसका पेशाब करना अपनी बड़ी-बड़ी गांड अपने बेटे को दिखाकर उसे अपनी तरफ आकर्षित करना और उसे खुद भी पेशाब करने के लिए मजबूर करना यह सब सुगंधा के व्यक्तित्व और चरित्र में बिल्कुल भी नहीं आता था लेकिन पिछले कुछ महीनो से उसका बर्ताव और चरित्र दोनों बदल चुका था,,, वह अब अंकित को एक मां के नजरिया से नहीं बल्कि एक प्यासी औरत के नजरिए से देखी थी और अपने बेटे में बेटा नहीं बल्कि एक मर्द को ढूंढती थी जो उसकी प्यास बुझा सके जिसके चलते वह एक मां से एक औरत बन चुकी थी और वैसे भी मां बनने से पहले वह एक औरत ही थी जिसकी कुछ ख्वाहिशें थी जरूरते थी वह भी दूसरी औरतों की तरह जीना चाहती थी अपने बदन की प्यास को बुझाया चाहते थे जिंदगी के हर एक सुख को प्राप्त करना चाहती थी,,,।

लेकिन अपने पति के देहांत के बाद वह अपने अंदर की औरत को पूरी तरह से मार चुकी थी और एक मां के तौर पर अपना किरदार निभा रही थी लेकिन धीरे-धीरे उसमें बदलाव आना शुरू हो गया उसकी ज़रूरतें भी कर उठने लगी उसके भावनाओं को भी पर लगने लगे और जब उसकी मुलाकात नुपुर से हुई और नूपुर के साथ उसके बेटे के बर्ताव को देखी तब वह भी एक मां को भावना और जरूरत तो के दबाव में दबाकर अपने अंदर की छिपी औरत को बाहर निकाल ली और अपने ही बेटे में एक मर्द को तलाश में लगी अपनी जरूरत को पूरी करने के लिए और धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ती चली जा रही थी जिसमें अब उसका बेटा भी साथ दे रहा था,,,।

रात के समय वह कभी सोच नहीं थी कि जब वह पेशाब कर रही होगी तब उसका बेटा भी उसके साथ खड़े होकर पेशाब करेगा और इस तरह की कल्पना तो वह कभी अपने मन में भी नहीं की थी और नहीं कभी इस बारे में सोची थी लेकिन सोच से भी अद्भुत नजारा अपनी आंखों से देख कर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,,, बिस्तर पर बैठे-बैठे वह इस बारे में ही सोच रही थी कि क्या हुआ सच में अपने बेटे के साथ पेशाब कर रही थी कि वह सब एक सपना था,,, नहीं नहीं सपना तो बिल्कुल भी नहीं था इसका एहसास तो अभी तक उसके बदन में उसके रोम रोम में बसा हुआ था उसने ही तो अपने बेटे को मजबूर की थी अपने साथ पेशाब करने के लिए और उसका बेटा भी तैयार हो चुका था सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि जो कुछ भी वह अपने मन में चाहती थी वैसा ही उसका बेटा भी चाहता है,,, फिर एक जैसी चाहत होने के बावजूद भी उसका बेटा आगे क्यों नहीं बढ़ रहा है उसकी जगह दूसरा कोई होता तो शायद अब तक आगे बढ़कर अपनी प्यास को बढ़ा ली होती सुगंधा बिस्तर पर बैठे-बैठे यही सोच रही थी कि तभी वह इस बारे में भी सोच कर अपने मन को तसल्ली देने लगी थी अच्छा हो रहा है कि धीरे-धीरे खिलाकर पड़ रहा है इस धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए खेल में भी तो बहुत मजा आ रहा है,,,,।

बाप रे कितना मोटा और लंबा है मेरे बेटे का लंड,,(: सुगंधा आश्चर्य चकित होते हुए अपने आप से ही बात करते हुए बोली) इतना मोटा और लंबा है कि उसे अपने हाथ से उठाकर खड़ा करना पड़ता है पेशाब करते समय वह किस तरह से ऊपर नीचे करके हिला रहा था वहां पर उसे नजारे को देख कर तुम्हें बेकाबू भेज रही थी मन कर रहा था उसे अपने हाथ में पकड़ लिया और अपने मुंह में डालकर जी भरकर प्यार करूं लेकिन मुझे तो नहीं लगता है कितना मोटा और लंबा लंड मेरे मुंह में ठीक तरह से आ पाएगा,,,(अपने आप से इस तरह की बात करते हुए वह अपनी दोनों टांगों के बीच की अपनी पत्नी दरार को देखते हुए और उसे पर हल्के से अपनी हथेली को रखकर सहलाते हुए मन में बोली) बाप रे इसकी तो खैर नहीं होगी जब मेरा बेटा अपने लंड को इसमें डालेगा देखो तो कितनी मासूम है एकदम मुलायम छोटा सा छेद और मेरे बेटे का लंड एकदम मोटा और लंबा एक बार घुस गया तो बुर का भोसड़ा बना देगा,,, कसम से लेकिन बहुत मजा आएगा जिस दिन मेरा बेटा मेरी बुर में अपना लंड डालेगा मुझे चोदेगा और मुझे चोद कर मादरचोद बन जाएगा,,,।

यही सब सोच कर सुगंधा मदहोश हुए जा रही थी और उत्तेजित हुए जा रही थी,,,, बदन में जब मदहोशी छाने लगी और उत्तेजना का एहसास होने लगा तो वह दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखने लगी नित्य कम शुरू करने में अभी भी 10 मिनट का समय था इसलिए वह अपनी तानों को धीरे से खोल दी और अपनी हथेली को अपनी बर पर रखकर जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दिया और अपनी बुर को अपनी हथेली में दबोचना शुरू कर दी,,,, उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह मदहोश हुई जा रही थी वह एकदम चुदवासी थी इसलिए अपनी दो उंगली को अपनी बुर में एक साथ डालकर उसे अंदर बाहर करके हिलना शुरू कर दे और अपनी आंखों को बंद करके अपने बेटे के बारे में सोचने लगी और कल्पना करने लगी कि जैसे उसकी बुर में खुशी हुई उसकी उंगलियां नहीं बल्कि उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड है और उसका बेटा उसकी दोनों टांगों को खोलकर जोर-जोर से अपनी कमर हिला रहा है,,,।

इस तरह की कल्पना उसे अत्यधिक गर्मी प्रदान कर रही थी वह मदहोशी के परम शिखर पर पहुंच चुकी थी वह एक हाथ से अपनी बड़ी-बड़ी चूची को बारी बारी से दबाते हुए उत्तेजना से अपने लाल-लाल होठों को दांतों से भींचते हुए अपनी दोनों ऊंगलियों को बड़ी तेजी से अपनी बर के अंदर बाहर कर रही थी,,, वह चित्र से जानते थे कि जिस अंग को अपनी बर के अंदर लेना चाहती थी उसकी कमी को उसकी दो उंगलियां क्या तीन चार उंगलियां भी पूरी नहीं कर सकती थी वह जानती थी कि उसकी प्यास उसके बेटे के मोटे तगड़े लंड से ही बुझने वाली है,,, बिस्तर पर वह एकदम से पीठ के बल पसर गई थी अपनी दोनों टांगों को हवा में उठाए हुए बात अपनी उंगलियों को बड़ी तेजी से अंदर बाहर कर रही थी यह नजारा भी बहुत खूब था,,, आखिरकार उसकी उंगलियों ने भी अपनी मेहनत का असर दर्शना शुरू कर दी उंगली की गर्मी और उसकी रगड़ से उसकी बुर की अंदरूनी दीवारें पिघलने लगी उत्तेजना के मारे संकुचाने लगी,,,, और फिर उसका बदन एकदम से अकडने लगा,,, और फिर गरमा गरम लावा का फवारा उसके गुलाबी छेद से बाहर निकलने लगा वह झड़ने लगी मदहोश होने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी उसकी सांसों की गति के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी पानी भरे गुब्बारे की तरह छाती पर लहराने लगी,,,,।

और फिर धीरे-धीरे वह एकदम से शांत होने लगी वासना का तूफान उतरते ही वह अपने कपडो को ढूंढने लगी,,, जिसे वह कमरे में ऐसे ही अपने बदन से एक-एक करके सारे कपड़ों को उतार कर फेंक चुकी थी और बिस्तर पर उसके एक भी कपड़े नहीं थे सब नीचे जमीन पर बिखरे पड़े थे वह धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतरी और एक-एक करके अपने कपड़ों को पहनने लगी,,,, पर अपने मन में सोचने लगी कि काश ऐसा दिन होता कि घर में वाहन पूरी तरह से नंगी होकर ही घूमती काम करती तो कितना मजा आ जाता,,, ऐसा सोचते हुए वह अपने कमरे से बाहर आ गई और दिनचर्या में लग गई,,।

और यही हालत अंकित की भी थी,,,, अपनी मां के साथ पेशाब करने का सुख प्राप्त करके वह कमरे में आते ही अपने सारे कपड़े उतार कर अपनी मां के बारे में गंदे ख्याल मन में सोते हुए अपने लंड को हिलाते हुए मुठ मारने लगा था,,, और सुबह जब उसकी नींद खुली तो देखा कि सुबह मैं भी उसका लंड एकदम टाइट था,,,, रात का नजारा उसकी आंखों के सामने घूमने लगा,,, उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड उसका बैठकर पेशाब करना,, और उसका खुद का यह नजारा देखकर खड़ा हो जाना और फिर अपनी मां के बगल में खड़ा होकर अपने लंड को हिलाते हुए पेशाब करना उसकी मां की दोनों टांगों के बीच से निकलती हुई पेशाब की धार को देखना यह सब बेहद अद्भुत था और इन सब के बारे में सोचकर वह फिर से उत्तेजित होने लगा था और फिर धीरे से अपने कपड़े पहन कर बाथरूम में चला गया और वहां फिर से मुथ मारने लगा,,,,।

चाय नाश्ता करके तृप्ति जा चुकी थी अंकित भी जाने की तैयारी में था वह रसोई घर में नाश्ते के लिए पहुंच चुका था लेकिन अपनी मां से नजरे मिला नहीं से कतरा रहा था और यही हाल सुगंधा का भी था वह भी अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी,, दोनों एक दूसरे से बात तो करना चाहते थे लेकिन रात को जो कुछ भी हुआ था उससे बेहद शर्मिंदा भी थे हालांकि जिस तरह के हालात थे ऐसे में दोनों को शर्मिंदा नहीं होना चाहिए था लेकिन फिर भी दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता था इसलिए इस रिश्ते का लिहाज करते हुए दोनों को शर्मिंदगी महसूस हो रही थी,,,।

अंकित रसोई घर में आकर वापस चला क्या हुआ अपनी मां से कुछ बोल नहीं पाया और सुगंधा भी उसे जाते हुए देखते रह गई वह भी उसे रोक नहीं पाई और फिर अपने मन में सोचने लगी कि वह यह क्या कर रही है,,, अगर ऐसा ही चला रहा तो वह अपनी ख्वाहिश को कभी नहीं पूरी कर पाएंगी,,, ऐसा कैसे हो सकता है आखिरकार वह अपने बेटे से इतना अत्यधिक तो खुल चुकी थी,,, और ऐसा तो था नहीं की वह पहली बार अपने बेटे की आंखों के सामने पेशाब कर रही हो ऐसा तो बहुत बार हो चुका था,,, हां नया हुआ था तो यही कि उसके साथ उसका बेटा भी पेशाब कर रहा था,,,, और शायद इसीलिए शर्मा कर उसका बेटा चला गया लेकिन वह भी तो कुछ कर नहीं पाई वह भी तो उसे रोक नहीं पाई,,,,।

जाने दो जाता है तो,,, किसी काम का नहीं है इसकी जगह कोई और होता है तो अब तक उसकी ख्वाहिश पूरी कर चुका होता इतना कुछ होने के बावजूद भी कुछ समझ नहीं पा रहा है,,,(सुगंधा इस तरह से अपने आप से ही बात कर रही थी कि तभी उसके मन में ख्याल आया और वह फिर से अपने आप से ही बोली)

नहीं नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए अगर ऐसा ही चलता रहा तो कुछ भी नहीं हो पाएगा,,, अंकित को भी दूसरे लड़कों की तरह थोड़ा तेज होना चाहिए जैसा कि राहुल है अपनी मां के साथ खुले बाजार में भी कहीं भी हाथ रख देता है लेकिन अंकित ऐसा नहीं कर पता अंदर से डरता हूं उसे भी थोड़ा हिम्मत वाला होना चाहिए,,,, लेकिन अंकित तो पहले बहुत शर्माता था धीरे-धीरे उसने बदलाव तो आया है लेकिन अभी इतना खुल नहीं पाया है कि उसके साथ कुछ भी कर सके लेकिन वह भी तो पहले ऐसी नहीं थी संस्कारी थी मान मर्यादा वाली थी लेकिन अब जरूर बदल गई है लेकिन ऐसा भी तो नहीं की एकदम रंडी की तरह अपने बेटे के सामने अपने टांगे खोल दो और बोलो अपने लंड को डाल दे बल्कि है तो अंकित को समझना चाहिए एक औरत क्या चाहती है उसके इशारे को समझना चाहिए उसके सामने कपड़े उतारती है पेशाब करती है गंदी गंदी बातें करती है तो इतना तो समझना चाहिए कि औरत को क्या चाहिए लेकिन एकदम बेवकूफ की तरह रहता है,,,।

लेकिन अगर अंकित ऐसा है तो मुझे अपने आप को बदलना होगा अगर मुझे अपनी ख्वाहिश को पूरी करनी है तो मुझे ही आगे कदम उठाना होगा वरना मेरी ख्वाहिश फिर से दबी की तभी रह जाएगी और अगर ऐसा ना हो पाया तो कहीं ऐसा ना हो जाए कि बाहर किसी के साथ संबंध बन जाए और बदनामी हो जाए नहीं नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूंगी मैं अपने लिए अपने बेटे को ही तैयार करूंगी और इसके लिए मुझे मजबूर बना होगा बेशर्म बनना होगा,,,।

(नाश्ता तैयार करते हुए सुगंधा यही सब सो रही थी और वह जानती थी कि अब उसे भी पहल करना पड़ेगा वरना ऐसे ही चलता रहेगा,,,, इसलिए अंकित को आवाज देते हुए बोली,,,,)

अरे अंकित,,, कहां चला गया,,,, जल्दी से आ नाश्ता कर ले नाश्ता तैयार है,,,।
(अंकित शर्मा रहा था अपनी मां से नजर नहीं मिला पा रहा था लेकिन अपनी मां की आवाज सुनकर उसमें थोड़ी हिम्मत आई और वहां भी एकदम से जाकर रसोई घर के दरवाजे पर खड़ा हो गया और बोला,,,)

क्या हुआ मम्मी,,,?

अरे तू चल क्यों गया नाश्ता तैयार है चल जल्दी से नाश्ता कर ले देर हो रही है,,,।

ठीक है मम्मी मैं तो बाथरूम करने के लिए चला गया था,,,,(अंकित जानबूझकर बाथरूम काबहाना करते हुए बोला क्योंकि वह अपनी मां से ऐसा नहीं जाताना चाहता था कि वह कल वाले वाक्या की वजह से शर्मिंदगी महसूस कर रहा है,,,,)

चल कोई बात नहीं जल्दी से नाश्ता कर ले,,,।

(और फिर सहज होते हुए अंकित वही रसोई घर में पड़ी हुई कुर्सी पर बैठकर नाश्ता करने लगा,,,,,,, अंकित भी अपनी मां से बात करना चाहता था लेकिन शर्मा रहा था सुगंध भी बात की शुरुआत करना चाहती थी और ऐसी शुरुआत जो एकदम गरमा गरम हो क्योंकि वह जानती थी कि अब उसे ही पहल करना पड़ेगा उसे ही आगे बढ़ना होगा तभी वह अपनी मंजिल तक पहुंच पाएगी वरना रास्ते में भटकती रहेगी इसलिए वह कुछ देर बाद बोली,,,।)

अंकित एक बात पूछूं सच सच बताना,,,।(रोटी बनाते हुए अंकित की तरफ देखे बिना बोली,,)

हां हां पूछो क्या हुआ,,,?

तेरी तबीयत तो ठीक रहती है ना,,,,।

ऐसा क्यों पूछ रही हो मेरी तबीयत तो हमेशा ठीक रहती है,,,।

देखा सच-सच बताना तुझे मेरी कसम बिल्कुल भी मुझे बहकाने की कोशिश मत करना,,,,।

मम्मी तुम ऐसा क्यों बोल रही हो मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है और मेरी तबियत एकदम ठीक है मुझे कुछ नहीं हुआ है,,,,।

मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता तो सामान्य दिखता है लेकिन है नहीं,,,,।

लेकिन तुम मम्मी ऐसा क्यों कह रही हो,,,,?

कल रात की वजह से,,,,।

कल रात की वजह से मैं कुछ समझा नहीं,,,,(नाश्ता करते-करते रात का जिक्र होते ही अंकित एकदम से रुको क्या उसका दिल जोरो से धड़कने लगा)

अंकित एक मां होने के नाते मुझे इस तरह की बातें तो करना नहीं चाहिए लेकिन फिर भी तेरे स्वास्थ्य का सवाल है इसलिए मुझे बोलना पड़ रहा है,,,।

लेकिन हुआ क्या है मम्मी कुछ तो बताओ,,,।

तेरा वो,,,(अंकित की तरफ घूमकर उंगली से उसकी दोनों टांगों के बीच ईसारा करते हुए) काफी मोटा और लंबा है,,,.

(अपनी मां के कहने का मतलब को अंकित समझ चुका था उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी और बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी थी,,,,)

तुम किस बारे में बात कर रही हो मम्मी,,,(अंकित समझ गया था कि उसकी मां क्या कहना चाह रही है और किसके बारे में बात कर रही है लेकिन फिर भी वह अनजान बनता हुआ बोला,,,)

तेरे उसके बारे में,,,(फिर से उंगली से उसकी दोनों टांगों के बीच ईसारा करते हुए बोली,,,)

ऐसा नहीं है मम्मी सबका ऐसा ही होता होगा,,,।(अंकित सहज बनने का नाटक करते हुए नाश्ता करने लगा और बोला)

नहीं नहीं सबका ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता,,,,।

तुमको कैसे मालूम मम्मी तुम क्या सबको देखती रहती हो क्या,,,?
(अंकित शरारत करते हुए बोला और उसकी बात सुनकर अपनी कमर पर हाथ रखते हुए बोली,,,)

तुझे क्या मैं दूसरी औरतों की तरह लगती हूं क्या जो सबका देखती फिरू,,,, मैं जानती हूं इसलिए कह रही हूं क्योंकि मैं तेरे पापा का देखा है,,,(सुगंधा एकदम से बेशर्म बनते हुए बोली और उसकी बात सुनकर अंकित के लंड का तनाव बढ़ने लगा वह आश्चर्य से अपनी मां की तरफ देखने लगा और बोला,,,)

उनका भी तो बड़ा होगा ना मेरी तरह आखिरकार मैं उनका बेटा जो हूं,,,,(अपनी मां की बात सुनकर अंकित के तन बदन में मदहोशी छाने लगी थी वह जानता था कि इस तरह की बात करने पर उसकी मां बिल्कुल भी नाराज नहीं होगी इसलिए वह भी मौके का फायदा उठाते हुए बोल रहा था,,,)

वह तुम्हें जानती हूं लेकिन मैं यह भी जानती हूं कि तेरे पापा का तेरे जैसा बिल्कुल भी नहीं था,,,।

तो कैसा था पापा का,,,?(अंकित अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला ,,)

तेरे से आधा भी नहीं था और एकदम पतला,,,,।(सुगंधा अपने बेटे से हकीकत बयां करते हुए बोली वह सच बोल रही थी क्योंकि भले ही जब तक उसके पति जीवित थे वह अपने पति से ही शरीर सुख प्राप्त करती रही और इस बारे में उसे बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था कि उसके पति से भी मोटा और लंबा लंड दूसरों का होता है और दूसरों के बारे में न जाने की वजह से ही वह अपने पति से खुश थी लेकिन जब से वह अपने बेटे का लंड देखी थी तब से वह एकदम हैरान थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि लंड इतना मोटा और लंबा भी होता है अपनी मां की बात सुनकर अंकित वास्तव में आश्चर्य से भर गया क्योंकि वैसे यकीन नहीं हो रहा था कि तुम खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरत की बुर में उंगली जितना लंड अंदर बाहर जाता होगा,,,,)

क्या बात कर रही हो मम्मी ऐसा कैसे हो सकता है,,, में तो समझता था की सब का मेरे जैसा ही होता होगा,,,,।

नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है जब तक मैं तेरा नहीं देखी थी मुझे भी ऐसा लगता था कि तेरे पापा जैसा ही सब था होता होगा लेकिन तेरा देख कर तो मेरे होश उड़ गए हैं तेरा तो कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है क्या तुझे दिक्कत नहीं होती अगर होती है तो मुझे बता दे डॉक्टर से मिल लेते हैं दवा ले लेते हैं,,,,।

लेकिन कैसी दिक्कत मुझे तो कोई दिक्कत नहीं आती,,,,,।

नहीं नहीं मैं कल रात तेरी परेशानी देखी थी तेरा मोटा और लंबा लंड कुछ ज्यादा ही वजनदार है तभी तो नीचे झुक जाता है तुझे हाथ से उठाना पड़ता है,,,(एकदम मासूमियत भरा चेहरा बनाकर वह अपने बेटे से बात कर रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे सच में वह अपने बेटे से उसकी परेशानी के बारे में बात कर रही है बल्कि वह उसकी परेशानी नहीं बल्कि इस तरह की बात का जिक्र छेड़कर वह अपने लिए रास्ता बना रही थी,,,,)

नहीं मम्मी ऐसा कुछ भी नहीं है वह तो नेचुरल है,,,(अंकित भी एकदम मदहोश होता हुआ बोला,,, इस तरह की बातें करके सुगंधा की भी बुर पानी छोड़ रही थी,,,)

नेचुरल कैसे हैं तो उसे हाथ का सहारा देकर पकड़े हुए था,,,, पेशाब करते समय क्या तुझे बिल्कुल भी दिक्कत पेश नहीं आती उसकी वजन की वजह से,,,,।(इस बार वह साड़ी के ऊपर से अपनी बुर को खुजलाते हुए बोली,,, पेशावर जानबूझकर की थी अपने बेटे का ध्यान अपनी बुर के ऊपर केंद्रित करने के लिए और ऐसा ही हुआ था अंकित अपनी मां की हरकत को देखकर मत हो गया था और जवाब में वह भी पेट में बने तंबू को अपने हाथ से पकड़ कर दबाने की कोशिश करते हुए बोला,,,)

नहीं नहीं मुझे तो बिल्कुल भी दिक्कत नहीं आती बल्कि मुझे तो अच्छा लगता है उसकी मोटाई और लंबाई की वजह से भारी-भारी सा लगता है और सच कहूं तो हमेशा उसे पकड़ना नहीं पड़ता जब एकदम खड़ा हो जाता है तो बिना किसी सहारे के ही एकदम खड़ा ही रहता है,,,,,।(अंकित भी एकदम बेशर्म बनता हुआ बोल और उसकी यह बात सुनकर सुगंधा इतनी मदहोश हो गई कि उसकी बुर से मदन दन रस की बूंद टपक पड़ी,,,, सुगंधा उसे देखते ही रह गई मन ही मनुष्य अपने बेटे के लंड पर उसकी मर्दानगी पर गर्व हो रहा था,,, नाश्ता करके अंकित कुर्सी पर से उठकर खड़ा हो गया था और झूठे बर्तन को वह किचन के ऊपर रखने के लिए आया तब उसकी मां एकदम मत हो चुकी थी यार एकदम से उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच ली और अपनी बाहों में भर ली ऐसा करने से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां से उसका सीना एकदम से सट गया और एकदम मदहोश होते हुए बिना वक्त गंवाए,,, अपने लाल-लाल होठों को अपने बेटे के होठों पर रखकर चुंबन करने लगी उसका बेटा को समझ पाता है इससे पहले ही वह पागलों की तरह अपने बेटे के होठों को चूसना शुरू कर दी थी,,,, पहले तो अंकित एकदम से कुछ समझ ही नहीं पाया लेकिन जैसे उसे एहसास हुआ कि उसकी मां क्या कर रही है वह अपने दोनों हाथों को तुरंत अपनी मां के निकम दो पर रख दिया और उसे हल्के से दबाने का शुभ प्राप्त करने लगा और अपने पेट मैं बने तंबू को भी आगे की तरफ बढ़कर अपनी मां की बुर पर साड़ी के ऊपर से ही उसे पर दबाव बनाने लगा जिसका एहसास सुगंधा को भी हो रहा था सुगंधा एकदम मद होश चुकी थी,,,,

यह चुंबन आगे बढ़ता है इससे पहले ही अंकित ने जो झूठा बर्तन किचन पर रखा था वह ठीक से न रखने की वजह से एकदम से नीचे गिर गया और उसकी आवाज होते हैं सुगंधा की तंद्रा भंग हो गई,,, और एकदम से वह होश में आ गई और अपनी बाहों से अपने बेटे को धीरे से अलग करते हुए बोली,,,।

मुझे तेरी बहुत चिंता हो रही थी जब से कल में तुझे पेशाब करते हुए देखी हूं तब से उसकी लंबाई और मोटाई को लेकर मुझे चिंता हो रही थी कि कहीं मेरा बेटा परेशानी में तो नहीं है मैं रात भर सो नहीं पाई हूं,,,,,, तेरी बात सुनकर मुझे राहत हुई कि तू कोई परेशानी में नहीं है सच में तुझे कोई परेशानी नहीं है ना,,,,।

बिल्कुल भी नहीं मम्मी मैं एकदम ठीक हूं,,,।

मेरा राजा बेटा,,,(गाल को सहलाते हुए) अब जा बहुत देर हो रही है मुझे भी जाना है,,,.

ठीक है मम्मी,,,,(और इतना कहकर अपने मन में यह सोचते हुए अंकित रसोई घर से बाहर निकल गया कि वह जानता है कि रात भर उसकी मां क्या सोचती रही उसके लंड़के के बारे में वह चिंतित नहीं थी बल्कि मत हो चुकी थी उसका लंड देखकर और अंकित मन ही मन बर्तन को गाली देने लगा की सलाह सही समय पर गलत जगह गिर गया अगर कुछ देर और नहीं गिरा होता तो शायद कुछ और हो जाता क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां भी पूरी मदहोश हो चुकी थी पागल हो चुकी थी,,,,,,,और वह अपने मन में ऐसा सोचते हुए अपना बेग उठाकर स्कूल के लिए निकल गया,,,।

उसके जाते ही सुगंधा अपनी साड़ी उठाकर अपनी एक बर की स्थिति को देखने लगी पूरी तरह से पानी पानी हो चुकी थी एकदम गिरी और उसे साफ एहसास हो रहा था कि उसके बेटे के पेट में बना तंभूत सीधे उसकी बुर पर ठोकर मार रहा था अगर साड़ी और उसके बेटे का पेंट दोनों के बीच ना होता तो उसका लंड उसकी बुर में घुस गया होता,,,, सुगंधा को भी देर हो रहा था लेकिन यह अपने पहले चुंबन से वह काफी प्रभावित और उत्तेजित हो चुकी थी जिंदगी में पहली बार वह इस तरह की हिमाकत की थी उसे बहुत अच्छा लग रहा था उसके बदन में अभी भी उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,, इस तरह का चुंबन कितना आनंद देता है आज उसे एहसास हो रहा था,,,।

वह जल्दी से तैयार होकर स्कूल के निकल गई,,,।

मां बेटे दोनों का एक दूसरे के साथ जीवन का पहला चुंबन था और वह भी बहुत जबरदस्त था क्योंकि इस चुंबन के अधीन होकर मदहोशी के आलम में अंकित अपनी मां के नितंबों पर हाथ रख दिया और उसे दबा दिया और यह एहसास सुगंधा को भी हुआ था और वह एकदम से मदहोश हो गई थी,,, यह चुंबन एक दूसरे के बीच की मर्यादा की दीवार को तोड़ दिया होता अगर किचन पर रखा हुआ बर्तन नीचे ना गिर होता क्योंकि बर्तन के गिरने से दोनों की तंद्रा एकदम से भंग हो गई थी और दोनों एकदम से होश में आ गए थे,,,, और मन ही मन उस गिरे बर्तन को गाली दे रहे थे क्योंकि इस समय कबाब में हड्डी बर्तन बन गया था,,,।

इस चुंबन के बाद दोनों अपने-अपने स्कूल चले गए थे लेकिन स्कूल में भी दोनों का मन नहीं लग रहा था,,, इस चुम्मा का दोनों पर किस तरह का असर पड़ रहा था यह तो वह दोनों ही जान रहे थे,,,, सुगंधा अपनी क्लास में कुर्सी पर बैठकर उसे चुंबन के बारे में सोच रही थी जिसकी प्रेरणा उसे फिल्म में हीरो हीरोइन के चुंबन से मिली थी इस तरह का चुंबन उसके पति ने भी उसके साथ नहीं किया था,,, कितना गजब का एहसास था,, उस पाल को याद करके वह अपने मन में सोच रही थी ,, और उसे अच्छी तरह से याद था कि चुंबन की मदहोशी में उसका बेटा इस कदर से डूब गया था कि अपनी हथेलियां को अपनी मां की गांड पर रखकर दबा दिया था यह उसे चुंबन का ही असर था और यही चुंबन एक दिन दोनों के बीच की मर्यादा की दीवार को गिरा देगा इस बात को सोचकर वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,।

अंकित की भी हालात पूरी तरह से खराब थी वह कभी सोचा नहीं था कि उसकी मा ईस तरह की हरकत कर देगी,,,, और उसे ईस बात का भी एहसास था कि उसकी मां किस लिए अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई क्योंकि पिछली रात को जिस तरह से उसने अपने लंड को बाहर निकाल कर उसकी मां के बगल में खड़ा होकर पेशाब किया था उसकी मां उसके लंड को देखकर मस्त हो चुकी थी और निश्चित तौर पर उस लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प उठी थी,,, और इसी के चलते वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई थी और होंठ पर होंठ रखकर चुंबन कर दी थी,,, अपनी मां की हरकत को देखते हुए अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि वह बहुत ही अपनी मां की दोनों टांगों के बीच काबू पा लेगा वह बहुत ही जल्द संभोग सुख प्राप्त कर लेगा,,, और यही सब के बारे में सोच कर वह क्लास में भी उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,,।

स्कूल से छुट्टी के बाद वह सीधा घर पहुंच गया,,,,,, लेकिन इस समय घर पर कोई नहीं था वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था,, इसलिए अपना बैग रखकर और हाथ मुंह धो कर वहां कुछ देर आराम करके कमरे से बाहर निकला तो उसे,, सुषमा आंटी की लड़की सुमन आवाज लगाकर बुलाने लगी,,, उसे देखते ही अंकित के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,,,,,,,,, वह सुमन को देखते ही खुश हो गया,,, क्योंकि पिछली मुलाकात यादगार बन गई थी जब कुसुम उसे दुकान पर राशन खरीदने के लिए ले गई थी और दुकान की भीड़ की वजह से अंकित ठीक सुमन के पीछे खड़ा था और हल्का सा धक्का लगने की वजह से उसके पेंट में बना तंबू सीधे जाकर उसकी गांड की गहराई में धंस गया था और इस बात का एहसास क्वेश्चन को भी बढ़िया अच्छी तरह से हुआ था लेकिन सुमन कुछ बोली नहीं थी बस मन ही मन मुस्कुरा रही थी,,, ऐसा कुसुम के साथ दो बार हो चुका था जब पहली बार अंकित उसके घर गया था और कुछ लेने के लिए कुछ नीचे झुकी थी और उसके पीछे खड़ा अंकित का जननांग सीधे-सीधे सुमन की गांड से जा टकराया था और एकदम से अंकित भी उसकी कमर दोनों हाथों से थाम लिया था तब से सुमन का झुकाव अंकित की तरफ बढ़ गया था,,,।

सुमन के आवाज देने पर अंकित खुशी-खुशी सीधा उसके पास पहुंच गया,,, और मुस्कुराते हुए सुमन बोली,,,,,।

तुम कहीं जा रहे हो क्या,,,?

नहीं दीदी,,,कहीं नहीं जा रहा हूं,,,।

तो आओ मेरी थोड़ी मदद कर दो,,,।

कैसी मदद,,,?

अरे मेरे कॉलेज का काम है,,।
(इतना कहने के साथ ही बाहर घर के अंदर प्रवेश कर गई अंकित उसे देखता ही रहेगा क्योंकि उसे दिन की तरह ही आज भी वह टी-शर्ट पजामा पहनी हुई थी जिसमें उसकी गांड और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रही थी अंकित भी ज्यादा सवाल जवाब नहीं किया और सुमन के पीछे पीछे वह भी घर में प्रवेश कर गया,,, सुमन आगे आगे चल रही थी और अंकित पीछे-पीछे और ऐसे हालात में अंकित का सारा ध्यान सुमन के नितंबों पर केंद्रित था जो की चलते समय मटक रही थी उसकी गांड की दोनों फांकें पजामे के अंदर आपस में रगड़ खा रही थी और एक अद्भुत ऊर्जा पैदा कर रही थी ,,,। देखते ही देखते सुमन अपने कमरे में पहुंच गई और पीछे-पीछे अंकित भी उसके कमरे में पहुंच गया,,,,, कमरे में पहुंचते ही सबसे पहले अंकित ने सवाल किया,,,।)

आंटी कहां है,,,?

मम्मी तो बाजार गई है घर में कोई नहीं है,,,,(खुश होते हुए सुमन बोरी घर में कोई नहीं है यह कहना अंकित के लिए इशारा था की दोनों इस समय घर में कमरे के अंदर एकदम एकांत है,,, इतना सुनकर अंकित मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,,, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर ज्यादा कुछ कर नहीं पाए तो सुमन की जवानी तो अपनी आंखों से निहार तो सकेगा ही,,,, सुमन की बात सुनकर अंकित बोला,,,)

ठीक है दीदी यह तो बताओ काम क्याहै,,,?

अरे अंकित काम तो बहुत है लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि तू कर पाएगा कि नहीं,,,,(बिस्तर पर बैठते हुए सुमन बोली और उसके बेटे के साथ ही वह जिस तरह का शर्ट पहनी थी वह आगे से एकदम खुला हुआ था जिससे उसकी दोनों चूचियों की गोलाई का आकार टी-शर्ट के ऊपर से भी एकदम साफ पता चलता था,,, और सुमन की गोलाई को देखकर अंकित की हालत खराब होने लगी वह सुमन की बात सुनकर बोला,,,)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो दीदी अगर मेरे करने लायक होगा तो मैं जरूर करूंगा,,,।

वैसे तो वह काम तेरे ही करने लायक है लेकिन फिर भी मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तू कर पाएगा कि नहीं,,,।

जरूर कर पाऊंगा दीदी एक बार बताइए तो सही,,,।

खेली खाई सुमन अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित दूसरे लड़कों की तरह बिल्कुल भी नहीं है वह एकदम भोला भाला है इसलिए उसके कहने का मतलब कुछ समझ नहीं पा रहा है वरना उसकी जगह कोई और लड़का होता तो खूबसूरत जवान लड़की अगर इस तरह से उसे बुलाकर अपने कमरे में ले जाती तो वह और कुछ पूछने के बजाय सीधा उसे अपनी बाहों में भरकर उसके अंगों से खेलने लगता और उसकी चुदाई कर देना लेकिन अंकित बिल्कुल अलग था उसके इशारे को समझ नहीं पा रहा था,,,, इसलिए सुमन भी धीरे-धीरे इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी इसलिए वह सूरज को काबू में करने के लिए दूसरा रास्ता अख्तियार करना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,,)
ज्यादा कुछ करना नहीं है बस कुछ नोट्स है जो तुम्हें लिखना है उसका अनुलेखन करना है,,,,।

बस इतना सा यह तो मैं बडे आराम से कर लुंगा,,,,, लाओ दो मुझे मैं फटाफट पूरा कर दु,,,,।

अरे अरे तुम तो बहुत जल्दबाजी दिखाते हो अरे आराम से कहीं जाना है क्या,,,?

नहीं दीदी जाना तो कहीं नहीं है,,,।

तो फिर उतावला क्यों हो रहे हो,,,, देती हूं लिखने को,,,(और इतना कहने के साथ ही सुमन अपनी बैग में से नोटबुक निकाली और एक पेन अंकित को दे दी और किताब का वह पेज खोलकर आगे बढ़ा दी जिसे लिखना था,,,, अंकित भी जल्दी से लिखना शुरू कर दिया,,, सुमन अंकित को देख रही थी उसके भोले मासूम चेहरे को देख रही थी और अपने मन में सोच रही थी कि वाकई में कितना भोला है जो एक जवान लड़की के जज्बात को नहीं समझ पा रहा है,,,,,,।

लेकिन फिर भी सुमन हार मानने वाले में से नहीं थी वह खेली खाई लड़की थी वह जानती थी मर्दों को कैसे अपनेबस में किया जाता है इसलिए वह अपनी टी शर्ट को पीछे की तरफ खींचकर अपनी टी शर्ट को आगे से कसने लगी ताकि उसकी चुचियों का आकार बढ़िया आराम से टी-शर्ट के ऊपर से भी अंकित को दिखाई दे और उसकी भाले जैसी तनी हुई निप्पल भी उसे दिखाई दे,,,, और उसकी यह उक्ति धीरे-धीरे काम करने लगी क्योंकि अंकित लिखते समय कर नजरों से सुमन की तरफ देख रहा था उसकी चूचियों की तरफ देख रहा था उसकी चूचियों की जाकर वाकई में इस समय जानलेवा दिखाई दे रही थी टी-शर्ट में उसकी चूचियां एकदम से उभर कर अपनी गोलाई लिए हुई थी और अंकित इस आकर्षण से अपने आप को बचा नहीं पा रहा था,,,,,।

वैसे भी कॉलेज के लिए सुमन को कोई अनुलेखन नहीं लिखना वह तो अंकित को अपने पास बुलाने का एक बहाना था वह अंकित को अपने जवानी के दर्शन करना चाहती थी ताकि उसके जवानी के दर्शन करके अंकित उसका दीवाना बन सके,,, और इस समय ऐसा ही हो रहा था अंकित कर नजरों से अपना सारा ध्यान सुमन की चूचियों पर लगाया हुआ था सुमन की चुचीयां उन्नत आकार लिए हुए अपनी आभा बिखेर रही थी,,, और यह देखकर सुमन को मन ही मन प्रसन्नता हो रही थी क्योंकि उसका जादू चल रहा था,,,,,,। बात की शुरुआत करते हुए सुमन बोली,,,।

अंकित मैं तुम्हें पहले भी कह चुकी अगर एग्जाम में कोई प्रॉब्लम हो तो कोई सब्जेक्ट समझ ना आ रहा हो तो मुझे जरुर पूछ लेना मैं तुम्हारी हर तरह से मदद करूंगी,,,।

जी दीदी अगर मुझे कोई भी प्रॉब्लम हुई तो मैं तुमसे जरुर पूछ लूंगा,,,,,(इतना कहते हुए अंकित की नजर उठी और सुमन के चेहरे से होती हुई नीचे फिर से उसकी दोनों चूचियों पर आकर टिक गई क्योंकि सुमन ही उसका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए गहरी गहरी सांस ले रही थी और अपने दोनों हाथों को पीछे करके बिस्तर पर टीकाई हुई थी ऐसा करने की वजह से उसकी चुचियों का आकार और ज्यादा बड़ा दिख रहा था और अंकित बेकाबू हुआ जा रहा था पल भर में ही अंकित सुमन की चूचियों के आकार को देखकर और अपनी मां की चूचियों के आकार से तुलना करने लगा जो की सुमन की चूचियों से काफी पड़ी थी लेकिन फिर भी इस समय सुमन की चूचियां आकर्षक नजर आ रही थी और यह देखकर अंकित का लंड खड़ा हो रहा था,,,।।
अंकित मदहोश बज रहा था सुमन की चूचियां उसका ध्यान भंग कर रही थी और वह लिखते लिखते रुक जाता था और सुमन की चूचियों को तिरछी नजरों से कर नजरों से निहार रहा था और सही मौका देखकर सुमन एकदम से अंकित से पूछ बैठी,,,।

क्या देख रहा है अंकित,,,?
(इतना सुनते ही अंकित की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई वह एकदम से घबरा गया जैसे कि उसकी चोरी पकड़ी गई हो और वास्तव में उसकी चोरी पकड़ी गई थी लेकिन वह जानबूझकर चोरी नहीं कर रहा था बल्कि मालिक खुद उसे उकसा रहा था चोरी करने के लिए फिर भी अंकित घबराया हुआ था और वह घबराते हुए बोला,,,)

ककककक ,, कुछ तो नहीं दीदी,,,।

चलो झूठ मत बोलो मुझे मालूम है तुम कब से चोर नजरों से क्या देख रहे हो,,,(ऐसा कहते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाई और अंकित के हाथों से पेन और नोटबुक लेते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) छोड़ो ये पढ़ाई लिखाई,,,,, अभी तुम्हारे बस की नहीं है तुम बड़े हो चुके हो जवान हो चुके हो,,,।

यह क्या कह रही हो दीदी लव में पूरा कर देता हूं चार-पांच लाइन ही रह गई है,,,।

मैं कह रही हूं ना रहने दो और सीधे-सीधे बताओ क्या देख रहे थे,,,,! देखो मुझसे झूठ बोलने की बिल्कुल भी कोशिश मत करना सच-सच बता दो,,,,

ककककक,,, कुछ तो नहीं दीदी तुम खामखा मुझ पर शक कर रही हो,,, ।

अब मुझसे झूठ बोलने की कोशिश बिल्कुल भी मत कर मैं जानती हूं तु क्या देख रहाथा,,,(सुमन इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित कभी भी इस बात को स्वीकार नहीं करेगा कि वह उसकी सूची ही देख रहा था इसलिए उसे ही बताना पड़ेगा और इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,।) सच-सच बताना मेरी चूची देख रहा था,,,ना,,,,,
(सुमन एकदम से खुले शब्दों में बोली जिसकी बिल्कुल भी अंकित को आशंका नहीं थी इसलिए एकदम से सुमन के मुंह से चुची शब्द सुनते ही फटी आंखों से उसकी तरफ देखनेलगा,,, क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि सुमन इस तरह से खुले शब्दों का प्रयोग करेगी लेकिन उसके मुंह से यह सुनकर उसके कान एकदम सन्न हो गए थे और उसके लंड ने अंगड़ाई लेना शुरू कर दिया था जिस तरह से फटी आंखों से अंकित उसकी तरफ देख रहा था उसे देखकर मुस्कुराते हुए सुमन बोली,,,)

हैरान क्यों हो रहा है सही कह रही हूं ना मैं,,,,।

(सुमन की बात सुनकर अंकित कुछ बोल नहीं पाया क्योंकि सुमन जो कुछ भी कह रही थी उसमें सच्चाई थी इसीलिए वह अपने बचाव में कुछ बोल नहीं पा रहा था और इस बात से डर भी रहा था कि कहीं सुमन उसकी इस बात को उसकी मां से ना बता दे,,,, फिर भी अपनी तरफ से थोड़ी बहुत सफाई पेश करते हुए बोला,,,)

दीदी,,,वो,,,,वो,,,, अनजाने में मेरी नजर चली गई ,,,,, मुझे माफ कर देना आइंदा ऐसा नहीं होगा,,,।

अरे तू डर क्यों रहा है मैं तुझे कुछ बोल थोड़ी ना रही हूं यह तो सामान्य बात है इस उम्र में ऐसा हो ही जाता है अगर इस उम्र में लड़के इधर-उधर नहीं देखेंगे तो कब देखेंगे,,,,।

यह क्या कह रही हो दीदी,,,

सच कह रही हुं,,,,, वैसे सच बताना मेरी चुचीया बड़ी-बड़ी है ना,,,,।
(जिस तरह से सुमन बात कर रही थी उसे देखकर अंकित का भी हौसला बुलंद होने लगा वह भी अंदर ही अंदर खुश होने लगा कि चलो सुमन कुछ बात का बिल्कुल बेतराज नहीं था इसलिए वह ज्यादा कुछ बोलते नहीं पाया लेकिन सुमन के सवाल का सर हां मैं हिला कर जवाब दिया उसका जवाब सुनकर समान खुश हो गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

है ना मेरी सहेलियों भी मुझसे यही कहती है और सच में जिस तरह से तेरी नजर मेरी चूची पर पड़ गई इस तरह से सड़क पर आते जाते सबकी नजर मेरी चूची पर ही पड़ जाती है अच्छा सच बताना कभी किसी लड़की की या औरत की नंगी चूची देखा है,,,,।

(सुमन के मुंह से इस तरह की खुली बातें सुनकर अंकित की तो हालत खराब हो रही थी इतना थोड़ा जानता ही था कि सुमन गंदी लड़की है और न जाने कितने लड़कों के साथ उसके संबंध है इस बारे में मोहल्ले के उसके दोस्त ने बताया था लेकिन आज सुमन की इस तरह की बातें सुनकर उसे यकीन हो गया था लेकिन फिर भी सुमन की बात है उसे मदहोश कर रही थी आनंद दे रही थी इसलिए उसे भी सुमन की बातें अच्छी लग रही थी लेकिन फिर भी वह हैरान होते हुए बोला,,,)

यह कैसी बातें कर रही हो दीदी,,,

अरे पागल हो गया है क्या जवान है तुझसे तो इसी तरह की बातें करनी चाहिए बताना घबरा मत क्या किसी लड़की या औरत की नंगी चूची देखा है नंगा बदन,,,,,।

(सुमन की बातें सुनकर तो अंकित के होश उड़े हुए थे और वह जिस तरह का सवाल पूछ रहे थे लड़की का तो नहीं लेकिन अपनी मां के नंगे बदन को वह बहुत बार देख चुका था उसकी बड़ी-बड़ी गांड उसकी चूची उसका सब कुछ देख चुका था लेकिन फिर भी वह सुमन के सामने यह तो नहीं कह सकता था कि हां देखा हूं अपनी मां के नंगे बदन को देखा इसलिए वह सुमन से झूठ बोलते हुए बोला,,,)

नहीं,,,,(इतना कहते हुए उसकी आंखों में आश्चर्य के भाव साथ में तेरा रहे थे और आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला था यह देखकर सुमन मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और उसकी बात सुनकर बोली)

क्या बात कर रहा है अंकित इतना हैंडसम में हटा करता है फिर भी अभी तक किसी लड़की को अपनी गर्लफ्रेंड नहीं बनाया किसी औरत को नंगी नहीं देखा,,,।

बिल्कुल नहीं,,,,।

मतलब तू औरत के अंगों के भूगोल से बिल्कुल भी वाकिफ नहीं है,,,, रुक तुझे दिखाती हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही एक झटके से सुमन बिना कुछ सोचे समझे अपनी टीशर्ट निकाल कर अपने बदन से अलग कर दी और कमर के ऊपर पूरी तरह से नंगी हो गई उसकी संतरे जैसी चूचियां आकार में कश्मीरी सेव की तरह हो चुकी थी उसके ऊपर उसे सुशोभित कर रहे हैं उसकी निप्पल कैडबरी चॉकलेट की तरह नजर आ रही थी जिसे देखकर अंकित हक्का-बक्का तो हो ही गया था लेकिन उसके मुंह में पानी आ रहा था और साथ ही उसकी दोनों टांगों के बीच का उसका हथियार पूरी तरह से अपनी औकात में आ गया था वह सोच नहीं था कि सुमन उसके सामने इस तरह से अपनी शर्ट उतार कर अपनी नंगी चूची के दर्शन कराएगी,,,।

देख ले अंकित औरत की चूचियां कैसे दिखाई देती है,,,,(ऐसा कहते हुए वह अपनी छाती के दोनों भागों को दाएं बाएं आगे करके दिखा रही थी और उसकी यह अदा अंकित की जान ले रही थी,,,,, उसने अब तक अपनी मां को ही नग्नावस्था में देखा था अपनी मां की चूचियों के दर्शन किया था जो कि एकदम बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी थी आकर में सुमन की चूचियां उसकी मां की चूची से आधी भी नहीं थी लेकिन फिर भी बेहद आकर्षक थी और वाकई में अपनी उम्र के हिसाब से उसकी चूचियां बड़ी ही थी,,,, अंकित हैरान होता हुआ सुमन की नंगी छाती को देख रहा था उसकी चूची को देख रहा था जो की बेहद तनी हुई थी सुमन की चूचियां देखकर अंकित कमाल कर रहा था कि अपने दोनों हाथ आगे बढ़कर चुची को पकड़ ले दबा दे और महसूस करें कि एक औरत की चूची को पकड़ने में दबाने में कैसा महसूस होता है,,,

वैसे तो अपनी मां की चूची को अपनी मां को बहुत बार नंगी देख चुका था उसकी नंगी गांड को देख चुका था उसे पेशाब करता हुआ देख चुका था लेकिन उसके अंग को छूकर वह आनंद प्राप्त नहीं कर पाया था जिसकी चाह हर एक मर्द के अंदर होती है,,,और जो चाहत वह अभी तक अपनी मां के बदन से पूरी नहीं कर पाया था वह चाहत आज सुमन की चूचियों को देखकर जागरूक हो चुकी थी वह सुमन की चूची को छूना चाहता था पकड़ना चाहता था देखना चाहता था,,,, और ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकित के मन की बात सुमन समझ गई हो इसलिए वह बोली,,,।

क्या तुम मेरी चूची को छूना चाहते हो पकड़ना चाहते हो दबाना चाहते हो,,,,।
(अब तो अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी क्योंकि उसके मुंह की बात सुमन छीन ली थी और भला दुनिया में ऐसा कौन सा मर्द होगा जो अपनी आंखों के सामने एक सुंदर खूबसूरत लड़की अपनी चूची दिख रही हो और उसे पकड़ने और दबाने को बोल रही हो और वह ऐसा ना करें इसलिए अंकित भी हां में सिर हिला दिया,,,, और इतना सुनते ही मुस्कुराते हुए सुमन अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाई और अंकित का हाथ पकड़ कर उसकी दोनों हथेलियां को अपनी चूची पर रख दी और उसकी हथेलियां के ऊपर अपनी हथेली रखकर उसे हल्के से दबाने लगी और अपने चेहरे के भाव को एकदम से मदहोशी में बदलने लगी,,,,,)

सहहहहह,,,,आहहहहहहह,,,, अपने हाथ से से जोर-जोर से दबाओ बहुत मजा आएगा अंकित,,,,(इतना कहकर सुमन अपने हाथ को उसकी हथेली के ऊपर से हटा ली और अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर अपनी चूचियों को और ज्यादा उभार दे रही थी अंकित के हाथों में तो रसगुल्ला लग गया था अभी तक अपनी मां की चूची ठीक से स्पर्श भी नहीं कर पाया था लेकिन यहां पर सुमन की चूची से दबाने को मिल रही थी और इससे ज्यादा उसे क्या चाहिए था अंकित जोर-जोर से सुमन की चूचियों को दबाने लगा और जैसा चूचियों के बारे में उसके मन में धारणा थी वैसे बिल्कुल भी चुटिया नहीं थी उसे ऐसा लग रहा था की औरतों की चूचियां एकदम कठोर होती होगी लेकिन यहां तो सिर्फ दिखती कठोर थी लेकिन दबाने पर एकदम नरम-नरम थी,,रुई की तरह इसलिए उसे दबाने में और मजा आ रहा था,,,

एक खूबसूरत जवान लड़की की नंगी चूचियों को दबाने में एक अजीब सी ऊर्जा मिल रही थी अंकित को वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और उसकी मदहोशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी उसका चेहरा एकदम लाल हो चुका था और सुमन भी मस्त हुए जा रही थी एक जवान लड़के के हाथों में अपनी चूची देकर एक बड़ी जिम्मेदारी उसके हाथों में सौंप दी थी जिस पर धीरे-धीरे अंकित खरा उतर रहा था,,,, लेकिन यह खेल आगे बढ़ पाता है इससे पहले ही दरवाजे के खुलने की आवाज आई और सुमन एकदम से समझ गई कि उसकी मां वापस आ गई है इसलिए तुरंत बगल में पड़ी टी-शर्ट को उठाई और एक झटके से उसे पहन कर अपनी नंगी चूचियों को ढंक ली,,,,, अंकित कुछ समझ पाता इससे पहले ही नोटबुक और पेन उसके हाथों में देकर वापस उसे देखने के लिए बोल दी और खुद एक किताब लेकर पढ़ने लगी,,,,।

अंकित कुछ बोल नहीं रहा था बस सुमन को आश्चर्य से देखी जा रहा था क्योंकि उसने दरवाजा खोलने की आवाज उत्तेजना और मदहोशी में सुन ही नहीं पाया था और सुमन की तरफ ही देखे जा रहा था और शुभम उसे फिर से लिखने का इशारा कर रही थी लेकिन तभी सुमन की मन एकदम से दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई और अंकित को देखकर खुश होते हुए बोली,,,।

अरे अंकित तू पढ़ाई करने आया है,,,,(सुषमा आंटी को देखते ही अंकित भी समझ गया था कि आखिरकार सुमन क्यों जल्दी-जल्दी अपनी शर्ट पहन कर अपनी नंगी चूचियों को छुपा ली थी इसलिए सुषमा आंटी के सवाल का जवाब देते हुए वह बोला,,,)

जी आंटी,,,,(ज्यादा कुछ बोला नहीं बस इतना कह कर वापस वह लिखने लगा और फिर सुषमा आंटी दोनों के लिए चाय बनाने चली गई और उसके जाते ही राहत की सांस लेते हुए सुमन बोली,,,)

बाप रे आज तो बाल बाल बच गए,,, और अंकित तु जो कुछ भी यहां हुआ उसके बारे में कुछ बताना नहीं आगे भी तुझे इसी तरह से मजा दूंगी,,,।

(किसी से मत बताना और आगे भी इसी तरह से मजा देने वाली बात सुनकर अंकित मन ही मन एकदम खुश हो गया और हां मैं सिर हिला दिया थोड़ी देर बाद सुमन की मां एक ट्रे में चाय के तीन कप लेकर आई और तीनों बैठकर चाय पीने लगी और थोड़ी देर बात करने के बाद अंकित वह से चला गया लेकिन आज एक अद्भुत आनंद और अनुभव लेकर वह सुमन के घर से जा रहा था,,, औरत की चूची दबाने में कितना मजा आता है आज उसे पहली बार इस बात का एहसास हुआ था और उस आनंद की अनुभूति को वह अपने अंदर समेटे अपने घर की ओर चला गया,,,)

पढ़ाई के बहाने अपने घर में बुलाकर सुमन ने जो कुछ भी अंकित के साथ किया था वह अंकित के लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय पल था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था,,, सुमन के बारे में अपने दोस्तों के मुंह से वह कहीं बार सुन चुका था कि सुमन दूसरी तरह की लड़की है,,, लेकिन कभी ऐसा कुछ देखा नहीं था कि जिसकी वजह से वह भी समान पर दूसरी लड़कियों की तरह होने का शक करता लेकिन इस बीच वह सुमन की जवानी के प्रति बराबर आकर्षित हुआ जा रहा था,,, उसका गदराया बदन हमेशा अंकित की उत्तेजना का कारण बनता जा रहा था और सबसे खास था सुमन की बड़ी-बड़ी गांड जो कि वाकई में बेहद लुभावनी लगती थी,, और जिस पर वह खुद अपने लंड की रगड़ को अच्छी तरह से महसूस कर चुका था और वह भी बनिए की दुकान पर जहां पर सुमन ही उसे राशन लेने के लिए साथ लेकर गई थी,,,।

अंकित अपने घर आ चुका था एक अद्भुत एहसास को अपने अंदर संजोए,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि सुमन खुद उसे अपने कमरे में बुलाकर उसके साथ इस तरह की हरकत करेगी लेकिन जो कुछ भी हुआ था उसमें अंकित की ही बनाई थी अंकित को कुछ सीखने को मिल रहा था अभी तक वह अपनी मां की चूची को देखकर ही मत हुआ जा रहा था उसने उसके भूगोल को तो पूरी तरह देख लिया था लेकिन उसे छूकर नहीं देखा था उसे एहसास को महसूस नहीं किया था जो एहसास एक औरत की मदमस्त कर देने वाली चुची को स्पर्श करके उसे पकड़ कर उसे दबाकर होती है,,, और यह सुख उसे सुमन के द्वारा प्राप्त हुआ था,,,। और इसलिए वह मन ही मन सुमन को धन्यवाद कर रहा था,,,।

अपनी मां के संपूर्ण बदन को वह नग्नवस्था में बहुत बार देख चुका था,,, अपनी मां की चूची के भी दर्शन हुआ कर चुका था और उसे देखकर उसकी गोलाई देखकर खरबूजे जैसा आकार देख कर उसे ऐसा ही लगता था की औरतों की चूचियां एकदम कड़क होती होगी लेकिन उसका यह भ्रम तब टूट गया जब सुमन की चूची को अपने हाथ में लेकर दबाना शुरू किया था एकदम मुलायम रुई की तरह और वह एकदम से मदहोश हो गया था,,, चूचियों को छूने में कितना आनंद और मदहोशी का एहसास होता है यह उसे पहली बार हुआ था सुमन की चूची को पकड़ते ही उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,,, और सुमन ने खुद उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी चूचियों पर रखी थी और अपने आप से ही अपनी चूची को दबाने के लिए उसे प्रेरित की थी,,, खूबसूरत जवान लड़की इतनी खुले विचारों वाली हो सकती है यह उसने कभी सोचा ही नहीं था वह सोचा था कि सब कुछ धीरे-धीरे ही होता है जैसा कि वह अपनी मां के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था लेकिन सुमन तो एक कदम आगे ही निकली वह अपने आप से ही सब कुछ करवाने पर उतारू हो चुकी थी अंकित को पूरा यकीन था कि अगर उसकी मां ना आई होती तो उसे जरूर मर्द की तरह एक खूबसूरत औरत के साथ शुख भोगने का सौभाग्य प्राप्त होता ।

अपने घर में आकर भी अंकित को चैन नहीं मिल रहा था बार-बार उसकी आंखों के सामने सुमन ही नजर आ रही थी जो अपने आप से अपनी टीशर्ट निकाल कर अपनी चूचियों को एकदम नंगी करती थी और मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रहती थी यह सब सोच कर अंकित की हालत एकदम से खराब हुए जा रही थी मैं जानता था कि अब ऐसे आराम मिलने वाला नहीं है इसका इलाज खुद ही करना पड़ेगा और यही सोच करूंगा बाथरूम के अंदर घुस गया था और बाथरूम के अंदर घुसते ही अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगा हो गया था,,, और सुमन के बारे में सोच रहा था उसके व्यक्तित्व के बारे में सोच रहा था वह उसके चरित्र के बारे में मन मंथन कर रहा था की सुमन क्या चाहती है,,,।

अंकित औरतों की मां की भाषा को ज्यादा नहीं लेकिन थोड़ा-थोड़ा समझने लगा था और पूरी तरह से जवान होने के नाते उसे इतना तो समझ में आ ही रहा था कि एक लड़की अपने कमरे में बुलाकर अगर इस तरह की हरकत करे तो वह क्या चाहती है,,, और अपने मन में उठ रहे इस प्रश्न का जवाब वह अच्छी तरह से जानता था और जवाब के बारे में सोचकर ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे,,, और सुमन ने तो उसे यह भी कही थी कि इस बारे में वह किसी को ना बताएं और इस तरह का मजा हुआ आगे भी देती रहेगी इसका मतलब साफ था कि बहुत ही जल्द वह अपने आप को सुमन की दोनों टांगों के बीच पाने वाला था,,, और वह अपने मन में यह भी सोच रहा था कि जो सुख वह अपनी मां से प्राप्त करना चाहता था वह सुख उसे सुमन बहुत ही जल्द देने वाली है और इसीलिए उसकी उत्तेजना का ठिकाना न था,,,।

बाथरूम के अंदर नग्न अवस्था में खड़े होने और सुमन के बारे में सोचने पर ही उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था जिसे वह अपनी मुट्ठी में लेकर धीरे-धीरे दिला रहा था और सुमन के बारे में सोच रहा था अपनी आंखों को बंद करके वह सुमन के बारे में गंदी कल्पना करने लगा था जिससे उसकी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी,,, बस सुमन के बारे में वही कल्पना कर रहा था जो कुछ देर पहले उसकी मां के आने से रुक गई थी वह अपने मन में सोच रहा था कि वह सुमन की चूचियों को दोनों हाथों में लेकर जोर-जोर से दबा रहा है सुमन की हालत खराब हो रही है और सुमन खुद उसके चेहरे को पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचकर खुद ही उसके होठों को अपनी चूची से सटा दी,,,,।

यह पल अंकित के लिए बेहद अद्भुत था ,,वहपागलों की तरह सुमन की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया था जिससे सुमन की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,, और देखते ही देखते सुमन अपना हाथ आगे बढ़ाकर अंकित के लंड को पकड़ ली और उसे जोर-जोर से पेंट के ऊपर से दबाना शुरू कर दी,,, अब अंकित के लिए काबू में रहना कठिन हुआ जा रहा था वह धीरे से अपना हाथ आगे बढ़कर सुमन की दोनों टांगों के बीच रख दिया और पजामे के ऊपर से ही उसकी गुलाबी बुर र को मसलना शुरू कर दिया,,, जीससे सुमन की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह देखते देखते अपना पजामा उतरकर एकदम नंगी हो गई,,,, अंकित सुमन की गर्म जवानी देखकर पागल हुआ जा रहा था और देखते देखते वह भी अपने सारे कपड़े उतार करके नंगा हो गया,,,।

अंकित के लंड को देखकर सुमन के चेहरे पर हवन होने लगी क्योंकि वाकई में अंकित का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा लग रहा था,,, सुमन अपने आप ही अपने दोनों टांगों को खोल कर अंकित को अपनी तरफ आकर्षित करने लगी और देखते-देखते अंकित सुमन की दोनों टांगों के बीच आ गया और अपने लंड को उसकी बुर में डालकर उसे चोदना शुरू कर दिया इस तरह की कल्पना करते हुए वह जोर-जोर से मुठ मार रहा था,,,,। उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसकी सांसों की गति उखड़ रही थी और देखते ही देखते उसके लंड से फवारा छुटकर बाथरूम की दीवार पर गिरने लगी और थोड़ी देर बाद जब बहुत शांत हुआ तो मग में पानी लेकर हुआ है दीवार पर गिरे अपने वीर्य को साफ करने लगा,,, क्योंकि वह जानता था तृप्ति तो शायद दीवार पर गिरे उसके वीर्य को नहीं पहचान पाएगी कि वह क्या है लेकिन उसकी मां जरूर पहचान लेगी,,, इसलिए वह जल्दी-जल्दी से साफ कर दिया था और नहा कर बाहर आ गया था,,,,।

रविवार का दिन था और आज के दिन अंकित ने तय कर लिया था कि आज वह अपनी मां के लिए चड्डी खरीद कर ही रहेगा जिसके लिए उसके पास पैसे भी थे और वह दोपहर में खाना खाने के बाद अपनी मां को बिना बताए घर से अपनी मां के लिए चड्डी खरीदने के लिए निकल चुका था वह जानता था कि उसे कहां जाना है वह पास के बाजार से नहीं बल्कि थोड़ी दूर जाना चाहता था ताकि चड्डी खरीदते समय उसे कोई परिचित का इंसान देख ना ले,, इसलिए वह कुछ दूर तक पैदल चलता हुआ चौराहे पर पहुंच गया और वहां से ऑटो करके अपनी मार्केट से दूर दूसरे मार्केट की ओर निकल गया,,,। और तकरीबन 25 मिनट के बाद वह दूसरे मार्केट में पहुंच चुका था जो की उसके घर से तकरीबन 20 किलोमीटर की दूरी पर यहां पर उसके परिचित का मिलना मुश्किल था,,, इस बात को वह अच्छी तरह से जानता था,,,।

मार्केट में पहुंचने के बाद अंकित कुछ देर तक इधर-उधर घूम कर पूरे मार्केट का मुआयना करता रहा यहां पर उसके मार्केट के मुकाबले दुकान बड़ी-बड़ी थी और काफी अच्छी तरह की साज सजावट वाली दुकान थी,,, कुछ देर तक इधर-उधर घूमने के बाद एक अच्छी सी कपड़े की दुकान में प्रवेश कर गया जहां पर ज्यादा कस्टमर तो नहीं थे लेकिन कुछ औरतें थीं,,,, पहले तो दुकान के दरवाजे पर खड़ा होकर वहां अंदर की तरफ डरा डरा सा देख रहा था क्योंकि एक काउंटर पर कुछ औरतें खड़ी थी और अंदर काम करने वाली भी सेल्स गर्ल थी,,, इसलिए उसका मन झिझक रहा था,,, लेकिन तभी काउंटर पर खड़ी एक लड़की उसे मुस्कुराते हुए अंदर बुलाने लगी और वह उसे लड़की की मुस्कान देखकर अंदर जाने से अपने आप को रोक नहीं पाया और अंदर प्रवेश कर गया और वैसे भी दुकान को देखकर वह समझ गया था कि उसकी मां के लिए यही से अच्छी चड्डी मिलेगी,,,,।

दुकान में प्रवेश करते ही अंकित काउंटर पर खड़ी लड़की के पास गया और वह काउंटर पर कोई और कस्टमर नहीं था इसलिए वह थोड़ा निश्चित था,,।

बोलिए सर आपको क्या चाहिए,,,(काउंटर वाली लड़की मुस्कुराते हुए अंकित से बोली लेकिन अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले वैसे तो घर से चला था कि वह दुकान वाले से औरत की चड्डी के बारे में बात करेगा अच्छी सी चड्डी अपनी मां के लिए खरीद लेगा लेकिन काउंटर पर लड़की को देखकर उसकी सिट्टी पीट्टी गुम हो गई थी,,,, वह कुछ बोल नहीं पाया और उसकी ख़ामोशी को देख कर वह काउंटर वाली लड़की फिर से बोली,,,।)

क्या हुआ सर क्या सोच रहे हैं यहां आपको सब तरह की वैरायटी के कपड़े मिल जाएंगे वैसे किसके लिए खरीदना है आपको आपके लिए या,,,, किसी और के लिए,,,(किसी और के लिए कहते हुए काउंटर वाली लड़की अपनी आंख को नचाते हुए बोली थी,,, अंकित को कुछ देर तक समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें क्या करें कैसे मांगे लेकिन फिर वह अपने मन में सोचने लगा कि यह लड़की कौन सी उसकी परिचित है वह क्यों इस लड़की से शर्मा रहा है घबरा रहा है और वैसे भी वह अपने घर से काफी दूर आया है चड्डी खरीदने के लिए फिर शर्माना कैसा और इसलिए ऐसा सोचकर उसके मन का डर कम होने लगा और वह हिम्मत करके बोला,,,,)

मुझे अच्छी सी पेंटी चाहिए,,,।

(अंकित की बात सुनते ही उसे काउंटर वाली लड़की के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह मुस्कुराते हुए और अपनी आंखों को नचाते हुए बोली,,,)

ओहहह,,,, मुझे पहले से ही मालूम था तभी तो तुम इतना शर्मा रहे थे इसमें शर्माने वाली कौन सी बात है,,,,,।

पहली बार खरीद रहा हूं ना इसलिए,,,,।

वह तो तुम्हारे हवा बहुत देखकर ही पता चल रहा है की पहली बार खरीद रहे हो,,,। वैसे तुम्हें किसके लिए खरीदना है,,, तुम्हें देखकर लग तो नहीं रहेगी तुम्हारी शादी हो गई होगी इसका मतलब साफ है,,,।

क्या मतलब,,,,(उसे लड़की के बात करने के अंदाज से अंकित के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अंदर ही अंदर शर्मा भी रहा था और घबरा भी रहा था,,)

मतलब यही कि जवान हो हट्टे कट्टे हो जरूर तुम अपनी गर्लफ्रेंड के लिए पेंटी खरीदने के लिए आए हो,,, आजकल तुम्हारी उम्र की लड़की इसी तरह का गिफ्ट दे रहे हैं,,,,।

(गर्लफ्रेंड का नाम लेकर उसे लड़की ने अंकित का काम एकदम आसान करती थी क्योंकि अंकित अपने मन में नहीं सोच रहा था कि किसके लिए खरीदने के लिए आया है क्या बताएगा,,,,, और उसे काउंटर वाली लड़की की बात सुनकर मुस्कुराते हुए वह बोला,,,)

हां गर्लफ्रेंड के लिए कोई अच्छी सी दिखाना,,,,।

ऐसे ही चालू किस्म की चाहिए या ब्रांडेड कंपनी की,,,

ब्रांडेड कंपनी की ताकि लूज ना पड़े,,,।

बड़े दिलदार हो गर्लफ्रेंड पर अच्छा खासा पैसा खर्च करना जानते हो,,,,,।

जी,,,,(काउंटर वाली लड़की से बात करने में अंकित को भी मजा आ रहा था वह अंकित की बात सुनकर,,, मुस्कुराते हुए दूसरी तरफ पलट कर पेंटी लेने जा ही रही थी कि तभी उसे अचानक कुछ याद आया और वह फिर से अंकित की तरफ घूम कर जैसे कुछ भूल गई हो इस तरह से याद करते हुए बोली,,,)

अरे कौन सी साइज का चाहिए यह तो तुमने बताया ही नहीं,,,,,,।

(काउंटर वाली लड़की की बातें सुनकर तो अंकित के पसीने छूटने लगे क्योंकि वह अपनी मां का साइज भूल चुका था वैसे वह अपनी मां की गांड का साइज अपने हाथों से नापा था साड़ी के ऊपर से इतनी और साड़ी के अंदर से भी लेकिन कितना नाप था वह उसके दिमाग से निकल चुका था,,,, और तुरंत उसके मन में उसे दिन वाली घटना याद आने लगी जब वह अपनी मां की गांड का नाप ले रहा था वह भी क्या गजब का पल था और वैसे भी वह मौका शायद ही किसी बेटे के जिंदगी में आते हैं जब वह अपने हाथों से अपनी मां की गांड का नाप लेता हो और वह भी अपनी मां के लिए चड्डी खरीदने के लिए,,,, अंकित के जेहन में उसके मन मस्तिष्क में उसकी मां का नंगा बदन पूरी तरह से छप चुका था उसकी मां की गांड का आकार भी पूरी तरह से छप चुका था लेकिन उसका साइज नहीं मालूम था,,,, इसलिए वह इधर-उधर नजर मिलाकर सोचने लगा था लेकिन उसे कुछ भी याद नहीं आ रहा था और वह जानता था कि गलत नाप बता देने से उसकी सारी मेहनत मिट्टी में मिल जाती इसलिए वह गलत नाप बताना नहीं चाहता था,,,।

अंकित के हाव-भाव को देखकर वह काउंटर वाली लड़की समझ गई थी कि अंकित को नाप नहीं मालूम है और वह मन ही मन मुस्कुरा रही थी,,, लेकिन उसका काम यही था इसलिए वह फिर से बोली,,,)

क्या हुआ सर बताइए ना कौन सा नाप चाहिए,,,

नननन,,,नाप ,,,, नाप तो मैं भूल गया,,,,(एकदम से हडबडाते हुए अंकित बोला,,,, उसे इस बात का डर था कि माप न होने की वजह से उसे वापस जाना होगा लेकिन इस समस्या का भी समाधान उसका काउंटर वाली लड़की के पास था वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)

जाने दीजिए सर अच्छा यह बताइए क्या तुम्हारी गर्लफ्रेंड का फिगर मेरी तरह था,,,(और ऐसा कहते हुए वह काउंटर वाली लड़की अपने हाथों पर करके गोल-गोल घूम कर उसे अपना फिगर दिख रही थी जब वह सामने की तरफ मुंह करके घूम तो उसकी ऊभरी हुई गांड पर अंकित की नजर ठीक हो गई क्योंकि उसकी कहानी कुछ अद्भुत तरीके से बाहर निकली हुई थी जिसे देखकर अंकित के तन बदन में हलचल होने लगी लेकिन जिस तरह से वह काउंटर वाली लड़की अंकित को अपना फिगर दिखा रही थी और जब वह अपनी गांड अंकित की तरफ करके घूमी थी तो वह तिरछी नजर से अंकित को देख रही थी और अंकित को अपनी गांड की तरफ देखता हुआ पाकर वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, पूरी तरह से घुम लेने के बाद वह फिर से बोली,,,)

बताइए सर क्या मेरी तरह फीगर है आपकी गर्लफ्रेंड का,,,,।

(काउंटर वाली लड़की की उन्नत नितंबों को देखकर उत्तेजना के मारे अंकित का मुंह खुला का खुला रह गया था लेकिन उसकी बात सुनकर वह जल्दी से अपनी मां को बंद कर लिया और बोला ,,,)

जी नहीं,,,,।

तो फिर बताइए आपकी गर्लफ्रेंड का फिगर कैसा है वह मोटी है पतली है कैसी है,,,,,।

(अब अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले क्योंकि वह अपनी गर्लफ्रेंड के लिए नहीं बल्कि अपनी मां के लिए चड्डी खरीदने के लिए आया था जिसकी कारण काफी बड़ी-बड़ी थी जिसकी चूचियां जैसी थी उसका फिगर गजब का था लेकिन लड़कियों जैसा बिल्कुल भी नहीं था एकदम भरा हुआ भजन था लेकिन यह सब हुआ कैसे बताएं इसलिए वह आश्चर्य से उस काउंटर वाली लड़की को देखता ही रह गया,,,,, लेकिन इसका भी समाधान उस काउंटर वाली लड़की के पास था क्योंकि वह एक सेल्स गर्ल थी उसे मालूम था कि कस्टमर को क्या चाहिए और किस तरह से अपना सामान बेचना इसलिए वह बोली,,,)

चलिए कोई बात नहीं सर ,,,,,, जाने दीजिए मेरी जैसी नहीं है तो फिर सामने देख रहे हैं तीन-चार लेडिस खड़ी है उनमें से बताइए किसकी तरह आपकी गर्लफ्रेंड का फिगर है तब मैं सही नाप का दे दूंगी,,,,।
(काउंटर वाली लड़की की बात सुनते ही अंकित की जान में जाना ही और वह सामने के काउंटर की तरफ देखने लगा जहां पर तीन चार लेडिस खड़ी थी उन चार औरतों को वह बड़ी गौर से देखने लगा और तभी उनमें से एक औरत का फिगर उसकी मां से बिल्कुल मिलता जुलता था उसकी भी बड़ी-बड़ी गांड थी बड़ी-बड़ी चूचियां थी उसकी लंबाई भी उसकी मां की तरह ही थी बस रंग थोड़ा सा दबा हुआ था और वह तुरंत उस औरत की तरफ उंगली दिखाते हुए बोला,,,,)

वो,,वो,,,, खड़ी है ना किनारे ,,,, पीले रंग की साड़ी वाली,,,,।

कौन वो जो हाथ में थैला लेकर खड़ी है,,,,।

हां हां वही,,,,।

(अंकित की बात सुनकर वह काउंटर वाली लड़की बड़ी गौर से उसे औरत को देखने लगी जिसे अंकित उंगली के इशारे से दिखाया था वह एकदम मोटी ताजी गजब के फिगर वाली औरत थी लेकिन लड़की बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन उसे काउंटर वाली लड़की को क्या मालूम की अंकित जिसके लिए चड्डी खरीदने के लिए आया है वह उसकी गर्लफ्रेंड नहीं बल्कि उसकी मां है और एक मां होने के नाते उसके बदन की बनावट कुछ अलग ही थी लेकिन वह काउंटर वाली लड़की समझ रही थी कि शायद मोटी गर्लफ्रेंड होगी,,, और मुस्कुराते हुए तुरंत आंठ दस तरह की पेटी निकाल कर उसकी आंखों के सामने काउंटर पर रख दी जिसे अंकित अपने हाथ में लेकर देख रहा था,,,,। और वह उसे देखकर मन ही मन मुस्कुरा रही थी,,,, पर मुस्कुराते हुए बोली,,,)

तुम्हारी गर्लफ्रेंड के तो काफी बड़ी-बड़ी है,,,,!

क्या,,,?

उसका पिछवाड़ा,,,,(एकदम से बेशर्मी दिखाते हुए वह काउंटर वाली लड़की बोली,,,, उसकी बात सुनकर हाथ में पेंटी लिए हुए अंकित उसकी तरफ आश्चर्य से देखने लगा,,, अंकित को हैरान होता हुआ देखकर वह काउंटर वाली लड़की बोली,,,)

हैरान होने की जरूरत नहीं हैरान तुम्हें हो मुझे लगा कि मेरी फिगर वाली कोई गर्लफ्रेंड होगी लेकिन शायद तुम्हारा टेस्ट कुछ दूसरा है,,,,।
(उसकी बात सुनकर अंकित मन ही मन खुश हो रहा था क्योंकि पहली बार कोई ऐसी लड़की मिली थी जो इस तरह की बातें कर रही थी इसलिए वह मुस्कुराता हुआ बोला)

तुम सही कह रही हो,,,, मुझे बड़ी-बड़ी,,,, वाली ही पसंद है,,,(गांड शब्द को अंकित खुलकर नहीं बोल पाया था लेकिन वह जानता था कि वह काउंटर वाली लड़की उसकी बात को समझ गई थी इसलिए तो मुस्कुरा रही थी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

क्या तुम उसे काबू में कर लेते हो,,,,
(अंकित उस काउंटर वाली लड़की की बात को समझ रहा था,,, इसलिए वह मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

क्यों नहीं,,,,, एक कहावत तो तुम भी सुनी होगी की टीवी चाहे कितनी भी इंच की हो लेकिन उसका रिमोट 8 इंच का ही रहता है जिससे वह चलती है और काबू में भी रहती है,,,,।
(अंकित का हाजिर जवाब सुनकर वह लड़की एकदम मंत्र मुक्त हो गई क्योंकि वह पहली बार इस तरह की कहावत को सुन रही थी जो कि एकदम बराबर फिट बैठ रही थी और वह एकदम से खुश होते हुए बोली)

अरे वह तुम तो एकदम खिलाड़ी निकले मैं तो तुम्हें अनाड़ी समझ रही थी लेकिन तुम्हारी एक कहावत ने मुझे यकीन दिला दिया कि तुम किसी किस्म के बंदे हो गजब वैसे मेरा नाम काजल है,,,,

जी मेरा नाम अंकित है,,,

बहुत सुंदर नाम है,,

तुम्हारा नाम भी काफी सुंदर है,,,,(उस लड़की के खुले विचारों वाली बात को सुनकर अंकित का भी हौसला बुलंद हो रहा था और इस बात से वह ज्यादा निश्चित तथा कि यहां पर उसे कोई जानता नहीं था और यह लड़की उसकी परिचित की बिल्कुल भी नहीं थी और काफी दूर की थी इसलिए अंकित को भी अब उसके साथ झिझक नहीं हो रही थी इसलिए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अच्छा एक बात बताओ अगर यह सब में तुम्हें पसंद करना होता तो कौन सी पसंद करती,,,,।
(न जाने क्यों वह काउंटर वाली लड़की अंकित की तरफ आकर्षित हुए जा रही थी इसलिए मुस्कुराते हुए बिना देर किए हुए वह बोली,,,)

अगर मुझे पसंद करना होता तो,,,,, मैं यह लाल,,, पीली और यह ब्लैक रंग की पेंटी पसंद करती,,,,(तीनों पेंटिंग को अपने हाथ में लेकर वह बोली और उसकी पसंद देखकर अंकित भी मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

वाह ,,, कमाल हो गया मैं अपने मन में यही पसंद किया था,,, लेकिन मुझे दो ही चाहिए थी,,,।

लेकिन तुम तीन लेकर जाना क्योंकि एक और दो से गर्लफ्रेंड ज्यादा खुश नहीं होती,,,।

तुम्हें कैसे मालूम,,,

अरे मैं भी एक लड़की हूं और मैं भी किसी की गर्लफ्रेंड हूं इसलिए अच्छी तरह से जानती हो तुम अगर अपनी गर्लफ्रेंड को तीन दोगे तो बहुत खुश हो जाएगी और तुम्हें डबल खुशी देगी,,,।
डबल खुशी मतलब,,,,,

डबल खुशी का मतलब नहीं जानते गर्लफ्रेंड क्या देती है खुश होने के बाद,,,,(वह मुस्कुराते हुए बोली और अंकित उसके कहने के मतलब को समझ गया था इसलिए वह भी मुस्कुराने लगा और अपने मन में सोचने लगा कि काश ऐसा ही होता,,,,,)

तो चलो जल्दी से इसे पेक कर दो,,,,

और कुछ नहीं चाहिए,,,,,?

नहीं-नहीं बस इतना ही,,,,

अरे ब्रा तो लेते जाओ,,,,,

नहीं ले सकता क्योंकि मुझे उसका भी साइज नहीं मालूम है,,,,।

लेकिन मुझे मालूम है ना पेटी के हिसाब से ब्रा का साइज अपने आप पता चल जाता है,,,,,,, अगर तुम्हारी गर्लफ्रेंड का पिछवाड़ा बड़ा बड़ा है तो उसकी छाती भी बड़ी-बड़ी होगी एकदम खरबूजे की तरह,,,,

जी हां,,,,।

रुको मैं ब्रा भी दे देती हूं,,,,।

लेकिन मेरे पास पैसे नहीं है,,,,

अरे तीन नहीं एक ही ले जाओ,,,,(और इतना कह कर रहा है ब्रा निकालने लगी और अपनी पसंद की एक अच्छी खासी जालीदार ब्रा निकाल कर काउंटर पर रख दी,,,,और अंकित उसे ब्रा को देखने लगा उसके कब को देखने का और अंदाजा लगाने लगा कि उसकी मां की चूची इसमें ठीक से आ पाएगी कि नहीं और अंकित के इस हरकत को देखकर वह समझ गई कि अंकित क्या सोच रहा है इसलिए वह बोली,,,,)

तो बिल्कुल भी चिंता मत करो उसे औरत को देखकर पेंटी निकलवाए हो ना,,, तो उसकी छाती के साइज का ही मैं तुम्हें ब्रा निकाल कर दी हूं तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,,।

ठीक है तुम रहती हो तो सही ही होगी,,,।

अरे बहुत अच्छी लगेगी जालीदार सब कुछ साफ दिखेगी,,,,(उसके कहने के मतलब को समझ कर अंकित मुस्कुराने लगा और थोड़ी ही देर में वहां से पैसे देकर दुकान से बाहर निकल गया,,,, शाम होने लगी इसलिए ज्यादा देर तक यहां रुकना ठीक नहीं था और वैसे भी अपनी मां के लिए ब्रा और पेंटी खरीदने में उसके सारे बचत के पैसे चले गए थे इसलिए ज्यादा फिजूल खर्च करना उसे उचित नहीं लगा और वह ओटो पकड़कर अपने घर पहुंच गया उसकी किस्मत अच्छी थी कि अभी घर पर कोई नहीं आया था ना तो उसकी बहन थी मेरी उसकी मां आई थी रविवार होने की वजह से वह जानता था कि उसकी मां थोड़ा टहलने के लिए निकल जाती थी इसलिए जल्दी से ताला खोलकर घर में प्रवेश किया और अपनी मां के लिए इलाही हुई चड्डी और ब्रा को अपने बैग में रखकर छुपा दिया वह उचित समय पर अपनी मां को देना चाहता था,,,,।)

अंकित एकदम ठीक समय पर अपनी मां के लिए चड्डी और ब्रा लाकर अपने कमरे में छुपा दिया था बस वह सही समय का इंतजार कर रहा था अपनी मां को देने के लिए,,, और वैसे भी उसने अपनी मां से बताएं बिना ही अपनी मां के लिए चड्डी लेने के लिए निकल गया था वहां एक तरह से अपनी मां को सरप्राइज देना चाहता था लेकिन अभी घर पर कोई नहीं था इसलिए वह कुछ देर के लिए घर से बाहर निकल गया था टहलने के लिए,,, और जब वापस लौटा तो घर में उसकी बड़ी बहन और उसकी मां दोनों आ चुकी थी और दोनों रसोई की तैयारी कर रही थी,,,।

अंकित उचित समय के इंतजार में था लेकिन वह समय उसे मिल ही नहीं रहा था क्योंकि मां बेटी दोनों साथ में ही थी दोनों एक पल के लिए भी अलग नहीं हो रहे थे इसलिए अंकित को मौका नहीं मिल रहा था अपनी मां के पास जाने का और वैसे भी जब-जब अपनी मां को देख रहा था तब तक रसोई घर में किया हुआ चुंबन याद आ रहा था जब उसकी मां एकदम मदहोश होकर उसके होठों का रसपान कर रही थी और अपने होठों का रस पिला रही थी उसे पर को याद करके अंकित के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, क्योंकि पहली बार अंकित उसे तरह के चुंबन का आनंद ले रहा था और उसे उम्मीद भी नहीं देखी उसकी मां इस तरह से उसके होठों पर चुंबन करेगी हालांकि कभी कभार खुश होकर लाड प्यार से वह माथे पर चुंबन कर दिया करती थी,,। लेकिन होठों पर करेगी इसकी उम्मीद अंकित को बिल्कुल भी नहीं थी,,,।

इसलिए तो पल भर में ही मदहोशी का रस उसके पूरे बदन में डोल गया था जिसके चलते वह उत्तेजित अवस्था में अपने दोनों हथेलियां को अपनी मां की नितंबों पर रखकर उसे दबाना शुरू कर दिया था और यह एहसास सुगंधा को भी हुआ था सुगंध भी अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से वशीभूत हुए जा रही थी मदहोश हुए जा रही थी,,, और तो और उसे अपनी दोनों टांगों के बीच अपने बेटे के लंड की ठोकर भी एकदम साफ महसूस हो रही थी ,,, यह मदहोशी मर्यादा की सारी दीवारें तोड़ कर आगे बढ़ती इससे पहले ही किचन पर रखी हुई प्लेट एकदम से नीचे गिर गई और दोनों की तंद्रा भंग हो गई और दोनों जो मदहोशी में बद हवास में जा रहे थे एकदम से होश में आ गए और एक दूसरे से अलग हो गए,,,,।

वह पल मां बेटे दोनों के लिए बहुत खास बन चुका था क्योंकि उसे पाल के बारे में सुगंधा भी बार-बार सोच रही थी और अपने द्वारा की गई इस हरकत पर शर्म से पानी पानी भी हो रही थी और अपने आप पर गर्व भी कर रही थी कि चलो इतनी तो हिम्मत दिखाई हालांकि इससे पहले भी वह अपने बेटे के सामने अपने सारे वस्त्र उतार कर बाथरूम में नंगी होकर नहाने की हिम्मत दिखा चुकी थी लेकिन उससे ज्यादा आगे नहीं पड़ रही थी लेकिन पहली बार वह इस तरह की हरकत करके मन ही मन बहुत खुश नजर आ रही थी,,,,।

थोड़ी ही देर में भोजन बनाकर तैयार हो चुका था और तीनों बैठकर भोजन भी कर रहे थे अंकित बार-बार अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुरा दे रहा था और सुगंधा भी अपने बेटे की तरफ देख कर शर्मा जा रही थी,,, क्योंकि पिछले कुछ दोनों में दोनों के बीच बहुत कुछ घट गया था घर के पीछे चोर होने की शंका में मां बेटे दोनों घर के पीछे घंटों बैठकर बातें कर रहे थे और बातें करने के बाद मां बेटे दोनों एक साथ पेशाब किए थे और पेशाब करते समय सुगंधा की जो हालत हुई थी अपने बेटे के मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर अगर उसकी जगह कोई और औरत होती तो शायद उसी समय अपने बेटे के साथ चुदाई का सुख भोग ली होती,,, लेकिन न जाने कौन सी ताकत इकट्ठा करके सुगंधा अपने आप पर काबू कर गई थी,,,।

खाना खाने के बाद भी अंकित को बिल्कुल भी मौका नहीं मिला वह सोचा कि चलो दूसरे दिन स्कूल जाते समय वह अपनी मां को सरप्राइज देगा लेकिन उसे समय भी ऐसा नहीं हो पाया क्योंकि तृप्ति की मौजूद थी और समय हो जाने की वजह से तृप्ति और अंकित दोनों को एक साथ स्कूल के लिए घर से निकलना पड़ा,,,, अंदर ही अंदर अंकित को अपनी बड़ी बहन पर बहुत गुस्सा आ रहा था,,, क्योंकि उसकी वजह से ही उसे मौका नहीं मिल पाया था अपनी मां को चड्डी और ब्रा देने का और कुछ इधर-उधर की बातें करने का क्योंकि वह जानता था कि अपनी मां से बातें करते समय एकांत में कुछ ना कुछ ऐसा जरूर होता था जो उसकी उत्तेजना को चरम शिखर पर पहुंचा देता था लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था और जैसे तैसे करके दो-तीन दिन गुजर गए थे,,,,,,।

एक दिन शाम को अंकित घूमते हुए मार्केट की तरफ निकल गया था और उसकी मुलाकात नूपुर से हो गई थी नूपुर को देखते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर जोड़ने लगी क्योंकि नूपुर के साथ उसका पिछला अनुभव बेहद उत्तेजनात्मक था जब उसके घर गया था उसे सहारा देकर किचन में ऊपर की तरफ उठाना उसकी बड़ी-बड़ी गांड को बेहद करीब से महसूस करना और बड़ी एकदम नंगी गांड क्योंकि नुपुर जानबूझकर पेंटी नहीं पहनी थी,,,,,, नूपुर की नजर अंकित पर नहीं पड़ी थी लेकिन अंकित नूपुर को देख लिया था वह हाथ में थैला लिए झुककर सब्जी ले रही थी और झुकाने की वजह से उसकी भारी भरकम गांड एकदम से बाहर निकली हुई थी और यही अवस्था औरत की मर्दों के लिए कमजोरी बन जाती है और यही अंकित के लिए भी हो रहा था क्योंकि अंकित अपने मन में कई बार इस तरह की अवस्था की कल्पना कर चुका था जब औरत झुक कर घोड़ी बनी हुई हो और पीछे से मर्द उसकी बुर में अपना लंड डालकर उसकी चुदाई कर रहा हो ,,।

हालांकि अंकित की यह केवल कल्पना मात्र ही थी क्योंकि इस अनुभव से अभी तक वह गुजारा नहीं था लेकिन वह इतना तो समझ ही गया था कि इस अवस्था में कुछ ज्यादा ही मजा आता होगा क्योंकि वह इस अवस्था की चित्र को गंदी किताब में बहुत बार देख चुका था,,,,,, अंकित नूपुर के पास गया और बोला,,,।

नमस्ते आंटी,,,।
(आवाज जानी पहचानी थी इसलिए तुरंत नूपुर अपनी नजर ऊपर उठकर देखने लगी और जब अपने आंखों के सामने अंकित को खड़ा देखी तो उसके होंठों पर मुस्कान तेरने लगी और वह तुरंत मुस्कुराते हुए बोली,,,)

ओहहहह ,,,,, अंकित तुम ,,,,(इतना बोलकर औपचारिक रूप से नूपुर की जगह कोई और होता तो अपनी स्थिति से जोकी झुकी हुई थी उठकर खड़ी हो जाती,,, लेकिन नूपुर अच्छी तरह से जानती थी कि वह किस अवस्था में झुकी हुई है वह जानती थी कि उसकी गांड एकदम से उभर कर बाहर दिखाई दे रही होगी और ऐसे हालात में उसे अच्छी तरह से मालूम था कि मर्दों की नजर औरतों के किस अंग पर पड़ती है,,, और उसे पूरा यकीन था कि समय अंकित की भी नजर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर जरूर पड रही होगी और वह तिरछी नजरों से अंकित के प्यासी नजरों का पीछा करने लगी तो तुरंत उसके होठों पर मुस्कान करने लगी क्योंकि इसका अंदाजा एकदम ठीक था तिरछी नजरों से अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड की तरफ भी देख रहा था,,,,।

वह जानती थी कि यह सब उसे दिन का असर है जब अंकित उसके घर पर आया था और वह चाय बनाने के बहाने अपनी जवानी के दर्शन उसे कराई थी,,,,,, सुगंधा मुस्कुराते हुए उसी अवस्था में बोली,,,)

तुम यहां क्या कर रहे हो,,,?

मार्केट में क्या करने के लिए आते हैं,,,।

सब्जी खरीदने आए हो,,,
बस ऐसा ही समझ लो,,,,।
(अंकित के हाजिर जवाबी सुनकर नूपुर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और सब्जी वाले भैया को बोली,,,)

1 किलो तोल दीजिए,,,।

लगता है आपको करेला बहुत पसंद है,,,।

बिल्कुल नहीं अंकित तुम्हारे अंकल को पसंद है इसलिए ले रही हूं,,,।

तो आपको क्या पसंद है,,,,?(अंकित उसी तरह से नूपुर की बड़ी-बड़ी गांड को निहारते हुए बोला,,,)

मुझे,,,(अपने थैला को दोनों हाथों से खोलकर उसमें सब्जी लेते हुए,,) मुझे कुछ खास पसंद नहीं है,,,, और वैसे सच कहूं तो मुझे बैगन बहुत पसंद है,,,(ऐसा कहते हुए वह सब्जी लेकर खड़ी हो गई और मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ देखने लगी तो अंकित भी मुस्कुराते हुए बोला)

मुझे लग ही रहा था,,,,।

क्या लग रहा था,,,?

यही कि तुम्हें भी बैगन पसंद होगा,,,।

तुम्हें भी मतलब और किसे पसंद है,,,,?

मम्मी को भी बैंगन पसंद है,,,, वैसे मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि तुम औरतों को बैगन ही क्यों पसंद है,,,।

(तब तक नूपुर सब्जी लेकर आगे बढ़ गई थी और साथ में अंकित भी चल रहा था अंकित के सवाल पर नूपुर मन ही मन मुस्कुरा रही थी और उसकी मुस्कुराहट को देखकर अंकित बहुत कुछ समझ रहा था और यह सवाल उसने जानबूझकर ही पूछा था इसलिए नूपुर बोली)

क्योंकि हम औरतों को लंबा और मोटा कुछ ज्यादा ही पसंद आता है,,,।

लंबा और मोटा मैं कुछ समझा नहीं,,,,,,(वैसे तो अंकित सबकुछ समझ रहा था ,,, अौर नूपुर की बातें सुनकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर भी उठ रही थी लेकिन वह जानबूझकर इस तरह का सवाल पूछ रहा था जैसे कि वह कुछ जानता ही ना हो,,,)

अरे बुद्धू,,,, औरतों को ककड़ी पसंद है बैगन पसंद है दूधी पसंद है,,,,।

और कैला,,,,,(तपाक से अंकित बोला तो यह सुनकर ,, नूपुर मुस्कुराने लगी और बोली,,,)

बहुत शैतान हो,,,, और बताओ तुम्हें क्या पसंद है,,,।

मुझे,,,,, मुझे तो जैसे तुम्हें लंबा और मोटा पसंद है मुझे तो गोल-गोल चीजे अच्छी लगती हैं,,,(ऐसा कहते हुए अंकित एक पल के लिए नूपुर की चूचियों की तरफ देखने लगा नूपुर भी अंकित के इस हरकत को अपनी आंखों से देख कर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और कुछ पल के लिए अंकित की आंखों में आंखें डाल कर देखने लगी और बोली,,,)

तुम मर्दों को भी यही सब पसंद है मैं जानती थी कि तुझे भी यही सब पसंद होगा मर्दों की पसंद में अच्छी तरह से जानती हूं,,,,,,, अच्छा यह बताओ घर पर क्यों नहीं आते राहुल से मिलने,,,।

आना तो चाहता हूं आंटी लेकिन समय नहीं मिलता,,,।

अरे समय निकालना पड़ता है,,,, राहुल भी तुम्हारे बारे में पूछ रहा था कि अंकित आता है कि नहीं आता,,,,।

अरे आंटी वैसे भी राहुल से मुलाकात नहीं हो पाती,,,।

तो क्या हो गया राहुल से मुलाकात नहीं हो पाती मैं तो हूं ना मुझसे मिलने आ जाया करो,,, जैसा पिछली बार आए थे,,,,(ऐसा कहकर नूपुर जानबूझकर उसे पिछले वाक्ये को याद दिलाना चाहती थी जो की बेहद दिलचस्प और मदहोश कर देने वाली मुलाकात थी अंकित को उसे मुलाकात का एक एक पल याद था इसलिए उसके चेहरे पर उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और वह बोला,,,।)

जरूर आऊंगा आंटी,,,,,,।

अच्छा ठीक है चलो मैं तुम्हें समोसे खिला देती हूं,,,।

नहीं नहीं आंटी इसकी क्या जरूरत है,,,,!

अरे क्यों जरूरत नहीं है चल आ,,,।
(और ऐसा कहते हुए नूपुर से एक नाश्ते की दुकान पर ले गई और गरमा गरम समोसे लेकर खुद भी खाने लगी और अंकित को भी खाने के लिए दे दी थोड़ी ही देर में दोनों इधर-उधर की बातें करते रहे इस बीच दोनों का आकर्षण एक दूसरे के प्रति बढ़ता ही जा रहा था अंकित तो बार-बार नूपुर की बड़ी-बड़ी चूचियों की तरफ चोर नजरों से देख ले रहा था,,, और उसकी यह हरकत नूपुर को बहुत अच्छी लग रही थी,,,,।

थोड़ी देर में दोनों वहां से चलते बने और एक मेडिकल स्टोर पर आकर नूपुर रुक गई और अंकित को थैला थमा कर वह बोली,,,,।)

2 मिनट यही रुको में आती हूं,,,, और देखना ठेले के अंदर कुछ सिक्के होंगे उसे निकाल लेना तो,,,,।
(ऐसा कहकर नूपुर मेडिकल स्टोर पर चली गई,,, और नूपुर के कहे अनुसार,,, अंकित उसे सब्जी के थैले में हाथ डालकर सिक्कों को टटोलने लगा,,,, सिक्के के साथ-साथ उसके हाथ में छोटा सा कोई पैकेट आ गया और कुतूहल बस वह उसे पैकेट को देखने के लिए उसे धीरे से थेले में से बाहर निकाला तो उस पैकेट के ऊपर बना चलचित्र देखकर उसके होश उड़ गए,, कुछ देर तक वह उसे चलचित्र को देखा ही रह गया और फिर जब उसे पैकेट पर लिखा नाम जो की इंग्लिश में लिखा हुआ था उसे पढ़ा तो उसके होश उड़ गए उसके पेट में तुरंत तंबू बन गया,,,,।

गहरी सांस लेते हुए वह उसे पैकेट को ही देख रहा था जिसमें कोहिनूर कंडोम लिखा हुआ था,,, अंकित को समझते देर नहीं लगी कि यह किस काम के लिए उपयोग में आता है भले ही वह पहली बार कोहिनूर कंडोम के पैकेट को देख रहा था लेकिन इसकी उपयोगिता को अच्छी तरह से समझता था वह जानता था कि इसके अंदर जो प्रोडक्ट होता है उसे लंड पर पहना जाता है और फिर औरत की बुर में डाला जाता है ऐसा करने से बच्चा नहीं होता,,, बस इतना ही वह जानता था इस प्रोडक्ट के बारे में लेकिन कभी अपनी आंखों से देखा नहीं था लेकिन आज उसे प्रोडक्ट को अपने हाथ में लिया हुआ था उसने एक चित्र बना हुआ था जो की बेहद कामुक था ,,,।

उस चित्र में एक महिला संपूर्ण रूप से नगन अवस्था में एक मर्द को अपनी बाहों में लेकर अपनी टांग ऊपर उठाए हुए उसकी कमर पर लपेटे हुए थी और वह मर्द अपने दोनों हाथों से उसकी कमर था में अपनी कमर को आगे की तरफ किए हुए खड़ा था और यह संभोग मुद्रा में सांप पता चल रहा था कि उस मर्द का लड उस औरत की बुर में घुसा हुआ है और उस औरत के चेहरे का भाव बेहद संतुष्टि भरा था जिसमें उसका मुंह हल्का सा खुला हुआ था और चेहरे की लालिमा एकदम से बढ़ गई थी यह नजारा देखकर अंकित के पेट में तंबू बनते देर नहीं लगी और यह सब मेडिकल पर खड़ी होकर नूपुर कर नजरों से देख रही थी और यह सब उसका ही किया कराया था वह जानबूझकर अंकित को ठेले में से सिक्के ढूंढने के लिए बोली थी क्योंकि वह जानती थी कि ठेले के अंदर कंडोम रखा हुआ है और वह अनजाने में ही उसे ठेले को लेकर आ गई थी और अपने मन में सोच रही थी कि अच्छा ही हुआ कि वह थैले में से कंडोम को नहीं निकाली,,,।

यह नजारा देखकर मेडिकल पर खड़ी नूपुर मन ही मन मुस्कुरा रही थी और खुश हो रही थी और थोड़ी ही देर में वह मेडिकल पर से वापस आ गई और आते ही थैले को हाथ में लेते हुए बोली,,,।

सिक्के मिले,,,।

जी हां आंठ दस सिक्के मिले हैं ,,,।

(अंकित का इतना कहना था कि नूपुर जानबूझकर ठेले के दोनों चोर को फैलाकर अंदर की तरफ देखने लगी और ऊपर ही कंडोम का पैकेट दिख गया जिसे देखते ही वह अपने चेहरे पर आश्चर्यता के भाव लाते हुए बोली,,,)

ओहहहहह,,,, इसमें कैसे आ गया,,,,।
(इतना सुनते ही अंकित समझ गया कि वह क्या देखकर ऐसा बोल रही है और यह सब जानते हुए भी वह जानबूझकर बोला,,,)

क्या कैसे आ गया आंटी,,,,।

क्या बताऊं तेरे अंकल भी ना,,,,, अब जाने दे तुझे बताने जैसा नहीं है,,,।

अरे बताओ तो आंटी,,,,।

ये देख अंदर,,,,(इतना कहने के साथ ही नूपुर थेले को खोल दी,,,, और अंकित भी थेले के अंदर देखने लगा,,,,, लेकिन फिर भी अनजान बनता हुआ बोला)

क्या आंटी,,,,।

अरे बुद्धू यह देख,,,( और इतना कहने के साथ ही अपना हाथ थैली में डालकर कंडोम के पैकेट को अपनी हथेली में लेकर अंकित की तरफ करके दिखातेहुए बोली,,,) कंडोम का पैकेट,,,, तेरे चाचा बिना बेवकूफ है ऐसे ही रख दिए और मैं वही थैला लेकर चली आई,,,,।( नुपुर की बात सुनकर अंकित की हालत खराब हो रही थी और वह अपने चेहरे पर शर्म के भाव लाता हुआ बोला,,)

ओहहह आंटी तो क्या अभी तक अंकल को यह सब करने का मन करता है,,,।

तो क्या हो गया बंदर कभी गुलाटी मारना नहीं भुलता,,,,,।
(नूपुर जानबूझकर अंकित को कंडोम का पैकेट दिखाते हुए बोल रही थी और वह यह जताना चाहती थी कि वह अभी भी खूब चुदवाती है,,,, और अंकित भी नूपुर की इस तरह की हरकत को देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था और उसकी उत्तेजना का केंद्र बुद्धू इस समय उसके पेट के आगे वाले भाग में बना हुआ था जिसमें तंबू बन चुका था जिसे देख कर नूपुर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही और फिर एक नुक्कड़ पर आकर दोनों रुक गए जहां से नूपुर को अपने घर की तरफ जाना था और अंकित को अपने घर की तरफ शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो चुका था,,,,, दोनों जिस जगह पर खड़े थे वहां पर कुछ ज्यादा ही अंधेरा था क्योंकि बड़े-बड़े पेड़ थे और वहां पर लोगों का आना-जाना भी बहुत कम था,,,, नूपुर इधर-उधर नजर घुमा कर देख रही थी कोई भी वहां पर आ नहीं रहा था इसलिए वह बोली,,,)

अंकित अब मैं चलती हूं,,,, लेकिन मेरे घर जरूर आना,,,।

ठीक है आंटी में जरूर आऊंगा वैसे भी तुम्हारा साथ मुझे अच्छा लगता है,,,,।

तू सच कह रहा है,,,।

कसम से आंटी,,,, न जाने क्यों तुम मुझे अच्छी लगती हो,,,(अंकित जानबूझकर अपने दिल की बात होठों पर हिम्मत करके ले आया था क्योंकि अभी तक कि नूपुर की हरकत को देखकर अंकित भी समझ गया था कि उसके मन में कुछ जरूर चल रहा है और उसका यह कहना था कि नूपुर एकदम से भाव विभोर हो गई और उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच ली और उसे अपनी बाहों में भर ले और उसके होठों पर अपनी होंठ रख दी जैसा कि उसकी मां किचन के अंदर की थी यह अंकित के लिए एकदम से सरप्राइज कर देने वाला था वह नहीं सोचा था कि इस तरह सड़क पर नूपुर इस तरह की हरकत करेगी लेकिन नूपुर चारों तरफ नजर घूमाकर तसल्ली कर लेने के बाद ही इस तरह की हरकत की थी,,, नूपुर की हरकत से अंकित भी एकदम उत्तेजित हो गया और जैसा कि वह अपनी मां के लिए तंबू पर हाथ रखा था उसी तरह से नूपुर के भी नितंबों पर हाथ रखकर उसकी गांड को दबाना शुरू कर दिया,,,।

मार्केट के छोर पर दोनों एकदम मदहोश हुए जा रहे थे अंधेरे का फायदा उठाते हुए दोनों चुंबन का आनंद लूट रहे थे अंकित के पेंट में बना हुआ तंबू सीधे-सीधे ,, नूपुर की साड़ी सहित उसकी बुर पर ठोकर मार रहा था जिसका एहसास नूपुर को भी बड़ी अच्छी तरह से हो रहा था और यही एहसास से वह मदहोश में जा रही थी दोनों का चुंबन अपने चरम सीमा पर था नूपुर की बुर गीली हो रही थी और अंकित अपने दोनों हाथों से नूपुर की बड़ी-बड़ी गांड को दबा रहा था मसल रहा था,,, दोनों का चुंबन और ज्यादा आगे बढ़ता है इससे पहले ही दूर से आ रही गाड़ी के होर्न की आवाज सुनकर दोनों एकदम से एक दूसरे से अलग हो गए दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी और नूपुर मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ अच्छी और बिना कुछ बोले अपने घर की ओर जल्दी अंकित कुछ देर वहीं खड़ा नूपुर को जाते हुए देखता रहा और फिर अपने घर की तरफ चला गया,,,,।
वह नूपुर के बारे में ही सोचता रहा उसकी कामुक अदाएं उसे पागल बना रही थी,,,। और आखिरकार उसके निमंत्रण को स्वीकार करके वह उसके घर पहुंच गया वह घर पर बैठा ही था और इस समय नूपुर घर की सफाई में लगी हुई थी पोछा लगा रही थी,,,लेकीन पोछा लगाते समय वह अंकित को अपनी तरफ रीझा भी रही थी,,,, जल्द ही अंकित को पता चल गया कि नूपुर केवल साड़ी लपेटी हुई है ना तो अंदर पैंटी पहनी है नही ब्लाउज क्योंकि वह जिस तरह से पोछा लगा रही थी उसकी दोनों टांगें खुली हुई थी और दोनों टांगों के बीच की पतली तरह से साफ दिखाई दे रही थी यह सब देखकर अंकित पूरी तरह से मदहोश हो गया और अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,,।

अंकित तुरंत नूपुर के पास आया और उसके अंगों से खेलने लगा नूपुर मदहोश होने लगी नूपुर भी यही चाहती थी और देखते ही देखते दोनों एक दूसरे में मदहोश होने लगे और फिर बिस्तर पर बैठ कर अंकित नूपुर के वस्त्र को उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया उसके अंगों से खेलने लगा साथ ही अंकित भी अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया अंकित के लंड को देखकर नूपुर का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,,, क्योंकि नूपुर अपनी जिंदगी में इतना मोटा और लंबा लंड नहीं देखी थी अंकित के लंड को देखकर उसकी मदहोशी बढ़ने लगी क्योंकि इतना मोटा लंड तो उसके बेटे का भी नहीं था और ना ही इतना लंबा था,,,।

देखते ही देखते नूपुर इस मुंह में लेकर अंकित को खुश करने लगी और अंकित भी उसे अपने तरीके से खुश करने लगा,,, और फिर देखते ही देखते हैं अंकित अपने लंड को नूपुर की बुर में डालकर उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया नूपुर मदहोश हुए जा रही थी क्योंकि इतना अदभुत सुख उसे आज तक नहीं मिला था,,, अंकित की कमर बड़ी तेजी से हिल रही थी वह पागल हुआ जा रहा था उसकी दोनों चूचियों को पड़कर वह पीछे से अपनी कमर हिला रहा था और उसका साथ नूपुर भी अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेल कर बराबर दे रही थी,,,।

तभी नूपुर की सांस बड़ी तेजी से चलने लगी और साथ में अंकित का भी बदल करने लगा क्योंकि दोनों चरम सुख के बेहद करीब थे और देखते ही देखते अंकित के लंड से गरमा गरम फवारा फूट पड़ा और एकदम से अंकित की आंख खुल गई वह कब का रह गया अपने चारों तरफ देखा तो वह अपने ही कमरे में अपने ही बिस्तर पर नग्न अवस्था में था और उसका लंड एकदम छत की ओर मुंह से खड़ा था जिसमें से वीर्य निकल रहा था कुछ देर तक उसे समझ में नहीं आया जब उसे पता चला कि वह सपना देख रहा था तो उसे अपने आप पर ही गुस्सा आया लेकिन तुरंत उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,,, घड़ी की तरफ देखा तो 15 मिनट लेट हो चुका था और जल्दी-जल्दी उठकर कपड़े पहन कर बाथरूम में चला गया और तैयार होकर स्कूल की तरफ निकल गया,,,।

अभी भी वह अपनी मां को चड्डी और ब्रा नहीं दे पाया था उसे योग्य मौके की तलाश थी जो बिल्कुल भी मिल नहीं रहा था लेकिन एक दिन तृप्ति को उसकी सहेलियों के साथ कहीं जाना था और यही मौका अंकित के लिए भी उचित था और किस्मत अच्छी थी कि दिन भी रविवार था ना तो अंकित को स्कूल जाना था और ना ही उसकी मां को और बड़े सवेरे ही नाश्ता करके तृप्ति घर से निकल गई थी अंकित मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,,,,।

रविवार का दिन था गर्मी का महीना होने के बावजूद भी मौसम बड़ा ही सुहावना लग रहा था,,, और वह भी इसलिए कि आज उसकी बड़ी बहन किसी काम से घर से बाहर जा रही थी और दिन भर वह अपनी मां के साथ अकेला रहने वाला था और यही मौका था जब वह अपनी मां को ब्रा और पैंटी गिफ्ट कर सकता था,,, इसलिए आज वह बहुत खुश था,, लेकिन उसकी मां को बिल्कुल भी नहीं पता था कि उसका बेटा उसके लिए ब्रा और पैंटी खरीद कर ला चुका है,,,, वह इस बात से पूरी तरह से इंसान अपने काम में मगन थी और अंकित था कि योग्य मौके की तलाश में था,,,।

सुबह-सुबह नहा धोकर वह तैयार हो चुका था,, सुगंधा जल्दी ही खाना और नाश्ता दोनों बना चुकी थी,,, क्योंकि आज उसे थोड़ा घर की सफाई भी करनी थी,,, अंकित बार-बार अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुरा दे रहा था और उसका इस तरह से मुस्कुराना सुगंधा को भी अच्छा लग रहा था,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच जाने के बाद इतना तो वह समझ ही सकती थी कि उसके बेटे के मन में क्या चल रहा है वह जान गई थी कि उसका बेटा उसकी तरफ पूरी तरह से आकर्षित है,,, इसलिए तो अपने बेटे की मुस्कुराहट देखकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,, लेकिन अभी तक दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी बस एक दूसरे से आंखों ही आंखों में वह दोनों बातें कर रहे थे लेकिन बात की शुरुआत करते हुए सुगंधा बोली,,,,।

क्या बात है आज कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रहा है,,,(किचन पर पड़े बर्तन को इकट्ठा करते हुए वह बोली,,)

ककककक,, कुछ नहीं ऐसी कोई बात नहीं है,,,।

नहीं जरूर पूछे तभी तो मुस्कुरा रहा है मुझे देख कर,,,,।

वह क्या है ना कि आज तुम कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही हो,,,।

अच्छा आज मैं तुझे ज्यादा खूबसूरत लग रही हूं रहने दे मस्का लगाने को मैं आज नहाई नहीं हूं,,,,।

सच में तुम नहीं नहाई हो,,,!(आश्चर्य जताते हुए अंकित बोला )

तो क्या आज मैं नहाई नहीं हूं,,,,,।

ओहहहह फिर भी मम्मी तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो कोई तो मैं देख कर कह नहीं सकता कि तुम नहाई नहीं हो इतनी तरो ताजा लग रही हो,,,,।

रोज नहीं लगती क्या,,,?

लगती तो रोज ही हो सच कहूं तो मुझे तो तुम फिल्म की हीरोइन लगती हो जो कभी भी कहीं भी देखो स्वर्ग की अप्सरा ही लगती है,,,।(अंकित धीरे-धीरे अपनी मां को लाइन पर ला रहा था वह इस तरह की बातें करके अपनी मां का मन बहला रहा था और बातों ही बातों में हुआ अपनी मां के सामने अपना लाया हुआ गिफ्ट दे देना चाहता था,,,,, लेकिन गिफ्ट देने के बावजूद भी वह अपने मन में एक मलाल महसूस जरूर करता कि वह अपनी मां को अपने ही द्वारा खरीद कर लाई गई ब्रा और पैंटी पहने हुए देख ली सकता क्योंकि वह जानता है कि भला ऐसी कौन सी मैन होगी जो ब्रा पैंटी पहन कर अपने बेटे को दिखाएगी,, कि कैसी लग रही है,,,, अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,)

आज कुछ ज्यादा ही रोमांटिक हो रहा है क्या बात है,,,,!(बर्तन कोई इकट्ठा करके अपने हाथ में लेकर उसे घर के पीछे की तरफ ले जाते हुए वह बोली और पीछे-पीछे अंकित जाने लगा,,,, सुगंधा ढेर सारे बर्तन को एक प्लास्टिक के तब में रखकर कमर पर टिका कर उसे ले जा रही थी और ऐसा करके ले जाने में उसकी कमर की लक और उसके नितंबों का उभार कुछ गजब का आकार ले रहा था,,, जिसे देखने में अंकित को आनंद आ रहा था। कुछ दिनों से जिस तरह के हालात मां बेटे के बीच पनप चुके थे उसे देखते हुए कुछ भी खाने में अंकित को डर नहीं लग रहा था लेकिन वह फिर भी सोच समझ कर बोल रहा था और अपनी मां की बात का जवाब देते हुए वह बोला,,,,)

जहां तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत हो वहां पर हीरो बनकर रोमांटिक होना पड़ता है,,,,।

ओहहहहह ,,,, क्या बात है तू तो सच में फिल्मों के हीरो की तरह डायलॉग मार रहा है कहीं फिल्मों के हीरो की तरह हरकत मत करने लगा,,,,।(इस तरह की बातें करके सुगंधा के भी तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी और उसे भी मजा आ रहा था अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला,,,)

किस तरह की हरकत मम्मी,,,,,?

अरे वही जो उसे दिन फिल्म में नहीं देखा कैसे एक दूसरे को किस कर रहे थे,,,,।
(अपनी मां की बात सुनते ही अंकित के बदन मदहोशी जाने लगी उसे याद आ गया कि कैसे उसकी मां उसे पकड़ कर उसके होठों पर चुंबन कर रही थी,,, और वह तुरंत मौके का फायदा उठाते हुए बोला,,,)

अच्छा उसी तरह से जैसे तुम किचन में चुंबन कर रही थी सच में मुझे बहुत मजा आया था मम्मी मैं तो कभी सोचा भी नहीं था कि चुंबन में भी इतना मजा आता है,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा की टांगों के बीच सिहरन सी दौड़ने लगी और वह मुस्कुराने लगी,,,,, वह भी अपने बेटे से मजा लेना चाहती थी जिस तरह की बातें वह दोनों आपस में करने लगे थे उसे देखते हुए सुगंधा को उम्मीद की किरण नजर आ रही थी की बहुत ही जल्दी दोनों के बीच सारीरीक संबंध स्थापित हो जाएगा,,, लेकिन कैसे होगा यह वह नहीं जानती थी वैसे तो सुगंध भी अपने बेटे के मन की बात को समझ चुकी थी कि वह भी उसके साथ संबंध बनाना चाहता है लेकिन कहने से डर रहा है शायद दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता दीवार बन रहा था ,,, क्योंकि जिस तरह से वह नहीं चाहती थी अपने बेटे से सीधे-सीधे कह दे कि मैं तुझसे चुदवाना चाहती हूं वैसे ही उसका बेटा भी सीधे-सीधे उसको यह नहीं कहना चाहता था कि मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं,,,, और यही दोनों को आगे बढ़ने में बाधा रूप बन रहा था,,,, लेकिन जो कुछ भी दोनों के बीच हो रहा था वह भी बेहद आनंद दायक था,,,,। अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा शर्मा गई थी,,,, आज घर में तृप्ति भी नहीं थी इसलिए वह जानती थी कि घर में अंकित और वह दोनों अकेले इसलिए कुछ रोमांचक होने का अंदेशा उसे हो रहा था,,,,,।

वह झूठे बर्तन और ढेर सारे कपड़े लेकर बैठ गई थी,,,, जब ज्यादा बर्तन और कपड़े धोने होते थे तो सुगंधा घर के पीछे ही धोती थी वह अपनी साड़ी को घुटनों तक उठकर बैठ गई थी अपने दोनों टांगें फैला कर और अंकित ठीक उसके सामने बैठकर बातें कर रहा था अपनी मां को इस हालत में देखना उसे अच्छा लगता था उसकी टांगें खुली हुई थी और अपने मन में वह यही सोच रहा था कि कहां से वह बिना कपड़ों की होती तो जिस तरह से वह टांगे खोल कर बैठी है उसकी गुलाबी बुर भी खुल गई होती,,,,, वह अपनी मां की बुर को नहाते हुए देख चुका था और सुगंधा खुद अपने बेटे को अपनी बुर के दर्शन कराई थी दरवाजे के छोटे से छेद में से,, लेकिन फिर भी वह अपनी मां की बुर को एकदम करीब से अच्छी तरह से देख नहीं पाया था इसलिए अपनी मां की बुर देखने की इच्छा उसके मन में हमेशा प्रबलित रहती है,,,।

दोनों मां बेटे इधर-उधर की बातें करते रहे दोनों को मजा आ रहा था एक दूसरे से बातें करने में ,,,, ज्यादातर दोनों रोमांटिक बातें करते थे और इस तरह की बातें करके दोनों आनंद के साथ-साथ आगे बढ़ना भी चाहते थे कि दोनों के बीच कोई बात बन सके लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था देखते ही देखते सुगंधा सारे झूठे बर्तन और कपड़ों को धो डाली थी और नहाने की तैयारी कर रही थी लेकिन तभी उसे पता चला कि नहाने वाला साबुन तो है ही नहीं इसलिए वह अंकित से बोली,,,।

अंकित जरा जाकर नहाने वाला साबुन तो गया नहाने वाला साबुन खत्म हो गया है,,,।

तुम नहाओगी मम्मी,,,,!

और क्या देख नहीं रहा है हालत और वैसे भी आज नहाई नहीं हूं तुझे पहले भी बता चुकी हूं,,,।

ठीक है मैं जाकर साबुन ले आता हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और जाने लगा लेकिन इस दौरान सुगंधा की नजर उसके पेट में बने तंबू पर पड़ चुकी थी जो कि अच्छा खासा तंबू बनाया हुआ था और उसके तंबू पर नजर पड़ते ही उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल होने लगी वह समझ गई कि उसके बेटे के पेंट में तंबू क्यों बना है उसका लंड क्यों खड़ा है। , जब आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत बेठी हो तो भला ऐसा कौन सा मर्द होगा जिसका लंड खड़ा नहीं हो जाएगा,,,, अंकित जा चुका था लेकिन जाते-जाते सुगंधा के तन बदन में आग लगा दिया था उसके मन में वासना का तूफान जगा गया था वैसे तो सुगंध कई बार अपनी हरकतों से अपने बेटे को अपने नंगे बदन के दर्शन कर चुकी थी लेकिन आज फिर से उसके मन में यही हो रहा था आज वह देखना चाहती थी कि दोपहर के समय उसका बेटा क्या उसे नहाते हुए देखने की कोशिश करेगा,,,, और इसलिए वह जल्दी-जल्दी अपना ब्लाउज और ब्राउज़र कर एक तरफ रख ले और पेटीकोट को भी निकाल कर रखती उसके बाद केवल साड़ी को अपने बदन से लपेट ली ताकि आराम से उसके बेटे को उसके नंगे पन का एहसास हो सके,,,।

अंकित अभी साबुन लेकर आया नहीं था और इससे पहले ही सुगंधा अपने ऊपर पानी डालना शुरू कर दी थी अपनी साड़ी को भिगोना शुरू कर दी थी ताकि वह भी कर उसकी चूचियों से उसके नंगे बदन से इस कदर चिपक जाए कि उसका बदन एकदम से साड़ी पहने होने के बावजूद भी उभरकर उसकी आंखों के सामने नजर आए,,,, और वह अपने बदन पर पानी डालकर खुद इस बात का जायजा ले रही थी कि सब कुछ उसके सोने के मुताबिक हो रहा है कि नहीं और जैसे ही अपनी नंगी चूचियों की तरफ देखी तो अपनी निप्पल को तना हुआ देखकर मंद मंद मुस्कुराने लगी क्योंकि वाकई में गीली साड़ी में उसकी चूची एकदम साफ नजर आ रही थी,,,, उसकी उत्सुकता बढ़ने लगी थी वह अपने बेटे का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी और धीरे-धीरे अपने ऊपर पानी डाल रही थी वह एक तरह से अपने ऊपर पानी नहीं बल्कि अपनी जवानी का रस डाल रही थी जिसमें वह पूरी तरह से अपने आप को डुबो डाली थी सोचने समझने की शक्ति को छीण कर डाली थी,,,वह वासना की आग में इस कदर सुलग रही थी कि यह भी भूल गई थी कि वह अपने बेटे के साथ ही इस तरह की गंदी हरकत कर रही है,,,, लेकिन इस खेल में इस तरह की हरकत करने में उसे जो आनंद प्राप्त हो रहा था उसे जीने का एक नया उमंग प्राप्त हो गया था वरना जब से उसके पति का देहांत हुआ था वह सिर्फ अपने बच्चों के लिए जी रही थी लेकिन आप उसे ऐसा लग रहा था कि उसे भी अपने लिए जीना चाहिए,,,।

थोड़ी देर में अंकित आ गया था और अपनी मां की हालत को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी वह अपनी मां को एक टक देखता ही रह गया था,,,, सुगंधा जान गई थी कि उसका बेटा क्या लेकिन फिर भी वह अपने आप को इस तरह से उलझ रखी थी कि वह अंकित की तरफ नहीं देख रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा इस समय क्या देख रहा होगा और वाकई में इस समय अंकित अपनी मां की चूचियों को देख रहा था जो की गीली साड़ी में और भी ज्यादा मादक हो गई थी,,, उसकी निप्पल एकदम खजूर की तरह तनी हुई साड़ी के ऊपर झलक रही थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह अपने मन में सोच रहा था की काश दोनों सूचियां को हाथ में पकड़ने का मौका मिल जाता तो कितना मजा आ जाता,,, इस तरह का ख्याल उसके मन में आते ही तुरंत उसे सुमन का ध्यान आ गया जो कि खुद ही अपनी चूचियों को दबवा रही थी,,,और हकीकत में उसे सुमन से ही पता चला की औरतों की चूचियों के लिए देखने में कड़क लगती है लेकिन दबाने में एकदम हुई की तरह नरम-नरम होती है और इसीलिए अपने मन में सोच रहा था कि अगर उसे अपनी मां की चूची दबाने का मौका मिला तो कितना मजा आ जाएगा,,,,।

सुगंधा नीचे सर झुका कर अपने पैर को मल रही थी और अंकित को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां ने उसे नहीं देखी है इसलिए वहीं खड़े होकर अपनी मां को ही देख रहा था उसका गिला बदन और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था खास करके उसकी चुचियों का आकार ऐसा लग रहा था की कुछ ज्यादा बढ़ गया है,,,। सुगंधा जानती थी कि उसका बेटा ठीक उसके सामने खड़ा है और वह कुछ बोल नहीं रहा है इसका मतलब साफ था कि वह उसके बदन को देखने का सुख भोग रहा है लेकिन ज्यादा देर तक सुगंध भी अपने सर को नीचे झुकाए बैठ नहीं सकती थी इसलिए चौंकने का नाटक करते हुए बोली,,,,।

अरे आ गया तू मुझे तो पता ही नहीं चला,,,,ला मुझे साबुन दे दे,,,,,।
(इतना सुनते ही अंकित अपनी जेब में हाथ डाला और अपनी जेब में से लाइफ ब्वाय साबुन बाहर निकाल लिया उसे अपनी मां के हाथ में थमाने लगा,,,, और फिर सुगंध मुस्कुराते हुए साबुन लेकर उसे खोलने लगी अंकित वहीं खड़ा अपनी मां को ही देख रहा था सुगंध भी यही चाहती थी कि उसका बेटा उसे नहाते हुए देखे लेकिन फिर भी उसे टोकना जरूरी था इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

अरे यही खड़ा रहेगा कि जाएगा भी मुझे नहाने तो दे,,,।

ओहहहह,,,,(जैसे अचानक ही कुछ याद आया हो ओर वह तुरंत वहां से हट गया,,, वह कुछ देर के लिए अपनी मां की नजरों से दूर हुआ था और सुगंधा तिरछी नजर से उसे देख भी रही थी वह जा चुका था वह जैसे ही अपने कमरे में गया था सुगंधा को अपने आप पर ही गुस्सा आ रहा था कि वह उसे नहीं भगाती तो अच्छा होता अब अपने अंगों का प्रदर्शन किसके लिए करें,,,, इसलिए उदास मन से अपने बदन पर साबुन लगाने लगी और अपने अंगों का प्रदर्शन का ख्याल उसके मन से एकदम से उतर गया था लेकिन फिर भी वह अपने बेटे के इंतजार में ही थी की कब वह चोरी-छिपी से नहाते हुए देखें और वह अपनी मादक अदाओं से अपनी नशीली जवानी से उसे अपना दीवाना बनाए,,,,।

और जैसा कि वह अपने मन में सोच रही थी अंकित भी ज्यादा देर तक अपनी मां के नंगे बदन को देखने से अपने आप को रोक नहीं सका और दबे पांव अपने कमरे से बाहर आया और दीवार की ओट में खड़ा हो गया यह देखकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी उसका मन प्रसन्न होने लगा,,, और उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल होने लगी वह मदहोश होने लगी,,, और वह अपने मन में ही अपने आप से ही बोली देखा ना मेरा बेटा मेरी जवानी का दीवाना हो गया है वह मेरे से दूर हो ही नहीं सकता,,,,। और फिर वह अपने बदन पर साबुन लगाना शुरू कर दी,,,,, अंकित की मदहोशी बढ़ती जा रही थी उसके पेट में तंबू बन चुका था और सुगंध साबुन लगाने के बहाने अपनी साड़ी को नीचे सरका कर अपनी नंगी चूचियों पर साबुन लगा रही थी और अपनी मां की नंगी चूची देखकर अंकित की हालत खराब होती जा रही थी,,,, वैसे तो अपनी मां को नहाते हुए पहले भी देख चुका था लेकिन इस समय पहली बार वह दोपहर में घर के पीछे खुले में नहाते हुए देख रहा था इसलिए उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,

सुगंधा जिस तरह से अपनी चूचियों पर साबुन लगा रही थी वह साबुन कम उसे दबा ज्यादा रही थी और यह देखकर अंकित अपने मन में नहीं सोच रहा था कि जब कुसुम की छोटी-छोटी चूची को दबाने में इतना मजा आ रहा था तो अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूची दबाने में कितना मजा आएगा यहीं सोचता हुआ वह पेंट के ऊपर से अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा का अंग प्रदर्शन बढ़ता जा रहा था,,, वह उठकर खड़ी हो गई थी क्योंकि उसकी साड़ी एकदम बदन से चिपकी हुई थी और जब-जब पानी ऊपर डाल रही थी उसकी साड़ी और ज्यादा उसकी जांघों से चिपक जा रही थी इसलिए अंकित को अपनी मां की मोटी मोटी जांघों का एहसास भी बहुत अच्छी तरह से हो रहा था,,,,, लेकिन तभी उसका दिमाग काम करना बंद हो गया जब उसकी साड़ी एकदम से उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार से चिपक गई थी और उसकी मां की गुलाबी बुर एकदम उभर कर साड़ी के ऊपर से नजर आ रही थी,,,।

उत्तेजना के मारे सुगंधा की बुर कचोरी की तरह फुल चुकी थी और इसीलिए साड़ी के ऊपर एकदम अच्छे से नजर आ रही थी उसकी बीच की दरार भी एकदम उपसी हुई नजर आ रही थी यह सब देखकर अंकित की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसके माथे से पसीना टपकने लगा था अपनी मां की मदद कर देने वाली जवानी उसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,, सुगंधा अब तक अपनी नंगी चूचियों पर साबुन लगा रही थी लेकिन धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाकर अपनी जांघों पर भी साबुन लगा रही थी और देखते ही देखते वह अपनी बुर पर साबुन लगाकर,, उसके झाग को अपनी बुर पर रगड़ने लगी वह जानबूझकर अपने बेटे के सामने इस तरह की हरकत कर रही थी वह जानती थी कि उसका बेटा चोरी छिपे उसे ही देख रहे हैं उसके नंगे बदन को देख रहा है,,,।

अंकित को अपनी मां की हरकत बेहद लुभावनी लग रही थी उसका मन कर रहा था कि खुद जाकर अपने हाथों से अपनी मां के नंगे बदन पर साबुन लगाई उसकी बुर पर साबुन लगाकर जोर-जोर से रगड़े और अपने लंड को उसकी बुर में डालकर उसकी सारी गंदगी को बाहर निकाल दे,,,, और ऐसा सोचकर उसका मन कर रहा था किसी समय अपने पेंट में से अपने लंड को बाहर निकलना लेकिन ऐसा करने से वहां डर रहा था क्योंकि दोपहर का समय था उसकी मां की नजर उसके ऊपर कभी भी पड़ सकती थी,,, लेकिन फिर भी वह पेंट के ऊपर से अपने लंड को जोर-जोर से मसल रहा था दबा रहा था।,, अपनी बर पर साबुन रगड़ते रगड़ते सुगंधा की भी हालत खराब हो रही थी वह जानती थी कि उसका बेटा उसकी हरकत को देख रहा है मस्त हो रहा है इसलिए उसकी भी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और वह देखते ही देखते हैं अपने ऊपर पानी डालकर अपनी बर के ऊपर से साबुन के झाग को एकदम से दूर कर दी उसकी करी गुलाबी पर एकदम साफ नजर आने लगी,,,।

अपनी मां की गुलाबी बुर देखकर अंकित का गला उत्तेजना के मारे सूखने लगा,,, उसकी सांसों की गति तेज होने लगी और फिर सुगंधा जानबूझकर अपनी दो उंगली को एक साथ अपनी बुर में डालकर अंदर बाहर करने लगी और अपने पैर को उठाकर दीवार से टिका दी,,, अपने बेटे के सामने ऐसा हुआ जानबूझकर की थी वह अपने बेटे को दिखाना चाहती थी कि वह कितनी चुदवासी है उसे एक मर्द की जरूरत है और वह मर्द की कमी उसका बेटा ही पूरा कर सकता है,,,,,, सुगंधा की सांसें उपर नीचे हो रही थी वह मदहोश में जा रही थी उसकी दोनों उंगलियों बड़ी तेजी से बुर में अंदर बाहर हो रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई उसकी चुदाई कर रहा है वह अपनी गांड को भी गोल-गोल घूम रही थी अपनी उंगलियों के सहारे ही नचा रही थी यह सब देखकर अंकित कितने बदन में आग लग रहा था उसकी जवानी सुलग रही थी अगर इस समय वह अपनी मां के सामने चला जाता है और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसकी बुर में डाल भी देता तो उसकी मां उसे कुछ नहीं कहती और उसे अपनी बाहों में भरकर खुद अपनी कमर आगे पीछे करके हिलाना शुरू कर देती लेकिन इतना अंकित नहीं समझ पा रहा था,,,,।

इशारे ही इशारे में उसकी मां उसे आमंत्रण दे रही थी उसे अपनी तरफ बुला रही थी अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी उसे खुला निमंत्रण दे रही थी कि आ और मेरी प्यास बुझा दे लेकिन औरतों के इशारों को समझने में अंकित अभी नादान था बच्चा था वह इशारों को नहीं समझ पा रहा था इसीलिए वह भी अपने आप में झुलस रहा था,,,, क्योंकि वह भी चाहता था कि वह अपनी मां की चुदाई करें लेकिन आगे बढ़ने से डर रहा है और सुगंधा से की अपनी उंगली को पतवार बनाकर वासना के तूफान के पार निकल जाना चाहती थी,,,, लेकिन ऐसा हो पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था क्योंकि जितना वह इसमें से निकलने की कोशिश करती थी और भी ज्यादा इसमें डुबती चली जा रही थी और उसमें डूबने में भी उसे मजा आ रहा था,,,।

उंगलियों के सहारे सुगंधा अपने चरमसु पर पहुंच चुकी थी उसका बदन एकदम से अकड़ गया और उसकी बुर से बदन रस का फवारा फूट पड़ा और गहरी गहरी सांस लेने लगी वह अपने बेटे के सामने ही अपनी उंगली से झड़ रही थी आज इस तरह की हरकत करने में उसे और भी ज्यादा मजा आया था वह जानती थी उसका बेटा ठीक उसकी आंखों के सामने दीवाल की ओट में छिपकर उसे ही देख रहा है,,, और इसीलिए तो उसके आनंद मैं और भी ज्यादा बढ़ोतरी हो गई थी,,,। वह झड़ चुकी थी उसके वासना का तूफान शांत हो चुका था और वह फिर से नहाना शुरू कर दी थी,,, अब अंकित का वहां ठहरना ठीक नहीं था क्योंकि जो कुछ भी उसे देखना था वह देख लिया था और सीधा अपने कमरे में चला गया था और अपनी मां का इंतजार कर रहा था कि कब अपने कमरे में जाए क्योंकि अब यही सही मौका था अपनी मां को ब्रा पेंटी का गिफ्ट देने का,,,,।

थोड़ी देर में सुगंधा नहा चुकी थी और केवल टावल लपेटकर अपने कमरे में जाने लगी थी और अंकित को एहसास हो गया था कि उसकी मां अपने कमरे में जा रही इसलिए तुरंत अपने बैग में से पैकेट निकाल कर अपने कमरे से बाहर आ गया था और दरवाजे पर ही उसकी मुलाकात अपनी मां से हो गई थी और मुस्कुराते हुए अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,,।

तुम्हारे लिए गिफ्ट है,,,।
(पैकेट को आगे बढ़ाते हुए बोला,,, और उसकी मां उसके पैकेट को देखने लगी वह अपने टॉवल को अपनी आधी चूचियों पर दबाकर लपेटी हुई थी उसकी आधी च एकदम साफ दिख रही थी और अंकित की नजर भी समय अपनी मां की चूचियों पर ही थी ना जाने ऐसा कौन सा आकर्षण होता है औरत के बदन में की मर्द चाहे जितनी बार देखे उसका मन भरता ही नहीं है क्योंकि अभी-अभी वह अपनी मां को पूरी तरह से नंगी ही देख चुका था और अपनी मां को अपनी बुर में उंगली करते हुए भी देख चुका था लेकिन फिर भी उसकी प्यास थी कि बुझने का नाम ही नहीं ले रही थी,,,, सुगंधा भी एक हाथ से टॉवल को थामे हुए दूसरे हाथ को आगे बढ़कर अपने बेटे के हाथ में से उस पैकेट को लेते हुए बोली,,,)

मेरे लिए गिफ्ट,,,!(सुगंधा पैकेट को हाथ में लेकर आश्चर्य जताते हुए बोली,,,,)

हां मम्मी तुम्हारे लिए,,,

लेकिन क्या है इसमें,,,?

खोल कर खुद ही देख लो,,,,,

अच्छा,,,,(इतना कहने के साथ ही सुगंध अपने कमरे में उसे पैकेट को लेकर प्रवेश कर गई और टॉवल पहने हुए ही वह बिस्तर पर बैठकर उसे पैकेट को खोलने लगी अंकित मर्यादा दिखाते हुए दरवाजे पर ही खड़ा हो गया था और वहीं से अपनी मां को देख रहा था जो कि इस समय टावल में बला की खूबसूरत लग रही थी,,, सुगंधा धीरे-धीरे उस पैकेट को खोलने लगी जो कि अंकित अपने ही हाथों से पैक किया था और देखते देखते वह पूरा पैकेट खोल दे और पैकेट के अंदर जो दिखाई दिया उसे देखकर खुशी से उसकी आंखें चौंधिया गई,,,)

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