माँ और उसका बेटा 6

माँ बेटा
तभी अचानक नदीम रुक गया और राज को बोला: जा अम्मी के मुँह के पास और अपना लौड़ा चूसवा। अम्मी मस्त चूसती हैं।
राज रहमान के हाथ से लौड़े को छुड़वा कर आयशा के मुँह के पास लाया और उसने जल्दी से सुपाडे को चाटा और चूसने लगी।
अब नदीम ने फिर से चुदाई शुरू कर दी। थोड़ी देर बाद उसने अपना लौड़ा निकाला और राज को बोला: अब तू चोद,चल आजा यहाँ।
राज ने अपना लौड़ा आंटी के मुँह से हटाया और उनकी बुर के पास आ गया। उसकी खुली हुई बुर में अपना सुपाड़ा सेट करके एक ही धक्के में लौड़ा अंदर कर दिया। आयशा चिल्लाकर बोली: आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या करता है? हाऽऽऽऽऽयह्यय इतना बड़ा है तेरा ज़रा धीरे से भी डाल सकता था। आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मोटा लौड़ा है तेरा। ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म
राज: आंटी जब यहाँ से नदीम निकल सकता है तो मेरे लौड़े की क्या औक़ात?
नदीम ने अपना लौड़ा अम्मी के मुँह में डाल दिया और बोला: हाँ हाँ सही है ना अम्मी ।
आयशा कुछ नहीं बोली और बेटे का लंड चूसते हुए चुदाई का मज़ा लेने लगी और अपनी गाँड़ उछालकर चुदवाने लगी।
राज भी मस्ती से भर कर धमाकेदार चुदाई कर रहा था तभी उसको लगा कि उसके चूतरों के बीच कोई ऊँगली कर रहा है। वो पलट कर देखा तो रहमान अंकल उसकी गाँड़ के छेद को सहला रहे थे। उसे अजीब लगा पर कुछ नहीं बोला। तभी रहमान ने उसकी गाँड़ में अपना मुँह डाल दिया और उसकी गाँड़ चाटने लगे। राज की सिसकारि निकल गई। उसे अब डबल मज़ा मिल रहा था और वह हैरान भी था कि अंकल ये क्या कर रहे हैं। अब चुदाई चरम सीमा पर पहुँच रही थी। नदीम आह्ह्ह्ह्ह्ह करके अम्मी के मुँह में झड़ रहा था और आयशा उसके रस को पिए जा रही थी। तभी राज भी ज़ोर ज़ोर से ह्म्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा और आयशा भी ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म आऽऽह्ह्ह्ह्ह करके झड़ गई। रहमान ने भी अपना मुँह उसकी गाँड़ से हटा लिया। राज जैसे ही हटा रहमान आयशा की बुर से दोनों की मलाई चाटने लगा। वह अब भी अपना नरम लंड हिला रहा था।
अब तीनों बिस्तर पर लिपटकर लेटे थे। और एक दूसरे को चूम रहे थे।
अब नदीम पूछा: राज मज़ा आया? कैसी है हमारी अम्मी की बुर?
राज: मस्त है यार, आंटी, बहुत मज़ा आया।
नदीम: अब जल्दी से अपनी माँ को चोद और मुझे भी दिलवा अपनी माँ की बुर। और यार मज़ा तो तब आएगा जब दोनों अम्मियाँ बिस्तर पर नंगी होंगी और हम दोनों उन दोनों को बदल बदल कर चोदेंग़े। बोल क्या कहता है?
राज: हाँ यार सच में बड़ा मज़ा आएगा , सोच कर ही सनसनी हो रही है। आंटी आपको तो कोई इतराज नहीं है ना? मेरी माँ के साथ नंगी सोने में और हम दोनों से एक साथ चुदवाने में?
आयशा: तुम दोनों बहुत कमीने हो। अभी मुझे एक साथ चोद रहे हो और पूछ रहे हो कि कोई इतराज तो नहीं होगा? अरे मेरी छोड़ो नमिता को पटाओ पहले। वह आसानी से नहीं मानने वाली!
राज: आंटी मुझे लगता है कि पट जाएँगी। आज मेरी चड्डी में फुले लौड़े को बहुत ध्यान से देख रही थी।
आयशा: तेरा लौड़ा है ही इतना मस्त कि कोई भी औरत इसको देख कर चुदाई के लिए मरने लगेगी फिर चाहे वह तुम्हारी माँ ही क्यों ना हो?
नदीम: साला दिखता तो इतना सीधा है पर इतना बड़ा हथियार लेकर घूम रहा होगा ये किसने सोचा होगा!
और तीनों हँसने लगे। तभी रहमान बाथरूम से बाहर आया और राज के पास आकर बैठ गया और उसका नरम लौड़ा सहलाने लगा।
अब राज का खड़ा होने लगा। आयशा ने भी नदीम का लंड सहलाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते लौड़े तन गए। अब रहमान राज का लौड़ा चूसने लगा और आयशा भी नदीम का लंड चूसने लगी।
नदीम ने रहमान को कहा: अब्बा, ज़रा क्रीम लाकर अम्मी की गाँड़ में लगा दो मुझे उनकी गाँड़ मारनी है।
रहमान उठकर क्रीम ले आया और अब आयशा ने अपनी गाँड़ उठा कर ऊपर कर दी ताकि रहमान क्रीम लगा सके। रहमान ने पहले गाँड़ चाटी फिर उसमें ऊँगली डालकर अच्छी तरह से क्रीम लगा दिया।
अब नदीम राज को बोला: चल लेट जा बिस्तर पर।
राज लेट गया और आयशा अपनी बुर खोलकर उसके लौड़े पर बैठ गई। अब उसने धीरे धीरे पूरा लौड़ा अंदर कर लिया।
अब वह ऊपर नीचे होकर राज को चोदने लगी। राज भी उसके मस्त मम्मों को दबा और चूस रहा था। अब नदीम अम्मी के पीछे से आकर उसकी गाँड़ में अपना सुपाड़ा सेट किया और हल्के से धक्का मारा और अपना आधा लंड अंदर कर दिया।
आयशा आह्ह्ह्ह्ह्ह बेटाआऽऽऽऽऽ कहकर डबल मस्ती से झूम उठी। हाय्य्य्य्य्य बड़ा अच्छा लग रहा है। पूरा डाल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल देएएएएएएए। आऽऽहहह कहते हुए वह ऊपर नीचे होने लगी।
दोनों लौड़े उसको मस्ती को दुगुना कर रहे थे। वह पहली बार दो लंडों से चूद रही थी।
तभी रहमान पीछे से आकर दोनों लंडों पर जीभ फेर रहा था जैसे ही वो छेदों से बाहर आते । तीनों मस्ती से चुदायी कर रहे थे। फ़च फ़चठप्प थप की आवाज़ से कमरा गूँज रहा था। रहमान की जीभ में तीनों का कामरस भर रहा था जिसको वो चाटे जा रहा था।
तभी नदीम आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कहते हुए अम्मी की गाँड़ में झड़ने लगा। उसका वीर्य गाँड़ के अंदर से बाहर आकर रहमान के मुँह में जाने लगा। नदीम के हटते ही राज भी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगा। और आयशा भी हाय्य्य्य्य्य्य मैं भी गईइइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। अब आयशा राज के ऊपर गिर गई। रहमान ने उसके चूतरों को ऊपर किया और पहले उसकी बुर चाटा और फ़िर राज का लौड़ा चाटकर साफ़ किया। उसका एक हाथ अभी भी अपने नरम लंड पर ही था। जिसे वह आगे पीछे कर रहा था।
अब तीनों आराम से पड़े थे।
उधर नमिता ऑफ़िस के लिए तय्यार होते हुए बार बार राज की चड्डी में फुले हुए हथियार का सोच रही थी।
आज उसका बदन बहुत गरम था और उसका मन चुदाई के लिए तरस रहा था। तभी मनीष का फ़ोन आया वह बोला: आंटी पापा और मैं अभी दिल्ली जा रहे हैं, शाम तक आएँगे। लो पापा से बात करो।
मनीष के पापा जिनका नाम सुधाकर था बोले: नमिता तुमको आज एक ज़रूरी काम करना होगा। तुम होटेल ताज चली जाओ और वहाँ शर्मा जी से मिलकर एक फ़ाइल ले आना और उसपर लिखी बातों को समझकर मुझे फ़ोन पर अप्डेट दे देना।
नमिता: ये वही पटना के शर्मा जी हैं ना?
सुधाकर: हाँ वहीं हैं , उनका बेटा भी साथ ही है।
नमिता: ठीक है मैं अभी जाती हूँ।
वह काफ़ी अप्सेट थी कि मनीष से आज अपनी प्यास नहीं बुझा पाएगी। उसने अपना सिर झटका और आख़िरी बार अपने आप को देखा और मुग्ध होकर सोची कि हाय अपनी जवानी तो बर्बाद ही हो रही है। आज उसने एक मस्त सेक्सी टॉप और लेग्गिंग पहनी थी जिसने वह बहुत मस्त माल दिख रही थी। पर मनीष तो दिल्ली जा रहा है। उसने अपनी बुर पर हाथ फेरा और ख़ुद से बोली : सबर कर मेरी रानी। अभी कुछ नहीं हो सकता।
नमिता ऑटो से होटेल ताज पहुँची और शर्मा जी को फ़ोन किया । वो बोले: तुम ऊपर मेरे कमरे में आ जाओ।
वह उनके कमरे की घंटी बजाई तो शर्मा जी ने दरवाज़ा खोला और बोले: आओ नमिता , कैसी हो बेटी? शर्मा जी की उम्र कोई ५५/५६ की थी और अब भी बड़े तंदूरस्त थे। उन्होंने टी शर्ट और केप्री पहनी थी जिसमें से उनकी बालों वाली जाँघें बड़ी पुष्ट और मर्दाना नज़र आ रही थी।
नमिता: जो ठीक हूँ, आपका बेटा कहाँ है?
शर्मा: वह होटेल के जिम में कसरत कर रहा है।
नमिता: अच्छा , मुझे फ़ाइल दिखा दीजिए और समझा दीजिए।
शर्मा : अरे बेटी, इतनी जल्दी क्या है? आज तो तुम्हारे ऑफ़िस में भी कोई है नहीं । मज़े से यहाँ रहो और खाओ पियो , बोलो क्या लोगी?
नमिता: जी मैं तो अभी नाश्ता करके आयी हूँ बस कॉफ़ी ले लूँगी।
शर्मा ने फ़ोन पर कॉफ़ी ऑर्डर की और अपने लिए बीयर मँगाया।
शर्मा नमिता से इधर उधर की बातें करता हुआ उसकी सुंदरता की तारीफ़ करने लगा। अब नमिता थोड़ी सी परेशान और थोड़ी सी ख़ुश भी हो रही थी।
शर्मा: अरे बेटी , तुम ४० की होगी क्योंकि तुम्हारा बेटा भी तो १८ का हो गया है। पर कोई तुमको ३० साल का ही समझेगा। उसकी छातियों की तरफ़ देख कर बोला: सच में तुमने अपना फ़िगर बहुत संभाल कर रखा है। तुम्हारी उम्र में तो बहुत सी औरतें मोटी हो जाती हैं। तुम तो अभी भी बहुत सेक्सी हो।
नमिता शर्म से लाल हो कर बोली: क्या सर आप भी? मुझे बहुत शर्म आ रही है।
शर्मा: बेटी, तुम तो परी की तरह सुंदर हो , काश मैं आज से २० साल पहले तुम्हें मिला होता तो तुम मेरी बीवी होती। और सच में तुम्हें बहुत प्यार करता।
नमिता समझ रही थी कि वह कमीना उसको पटा रहा है पर वह अपनी बुर की खुजली से मजबूर थी। उसकी बुर ये सब सुनकर गीली हो रही थी। वह जिन नज़रों से उसकी छातियाँ देख रहा था उससे उसके निपल्ज़ भी तन गए थे।
अब वह कमीना बीच बीच में बेशर्मी से अपना लौड़ा भी दबा देता था। वहाँ पर अब एक बड़ा सा टेंट भी उभर आया था।
अब शर्मा बोला: बेटी अगर तुम एक मिनट के लिए खड़ी हो जाओ तो मैं तुमहे कुछ दिखाना चाहता हूँ।
नमिता थोड़ी अचंभे से खड़ी हुई और फिर शर्मा ने उसको कहा : देखो उस दीवाल में पूरा शीशा लगा है। ज़रा चल कर बताओ। और अपने आप को शीशे में देखती रहो।
नमिता: उससे क्या होगा सर?
शर्मा: अरे चलो तो सही, इस छोर से उस छोर तक।
नमिता उठकर अपनी कुर्ते को नीचे अपनी लेग्गिंग तक खींची और चल कर दिखाई। उसने शीशे में देखा ख़ुद को- सच वह बहुत सेक्सी लग रही थी। उसकी छातियों का उभार और उसकी पतली कमर और उसके लेग्गिंग से उभरे हुए चूतर किसी को भी पागल कर सकते थे और शर्मा जी तो पागल हो चुके थे।
अचानक जब वह उनके पास से गुज़री तो उन्होंने उसको पकड़कर अपनी गोद मेंखिंच लिया और वो नमिता के चूतर उसके खड़े लौड़े से जा टकराए। नमिता की छातियों को एकदम से दबोचते हुए उसने अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और चूसने लगा।
नमिता हैरानी से थोड़ा झिझकी पर जल्द ही मस्ती की आँधीं मेंबहक गयी। अब वह उसकी छातियाँ दबाते हुए उसकी बुर को लेग्गिंग के ऊपर से ही सहलाने लगा, और नमिता की प्यासी बुर पानी छोड़ने लगी। विरोध तो कब का समाप्त हो गया था और अब तो वह मज़े से सीइइइइइइ हाऽऽऽऽऽऽऽय्यय कर रही थी।
नमिता: आपका बेटा आ सकता है, छोड़िए ना, प्लीज़।
शर्मा: अरे वह आया तो उसके साथ भी मज़ा ले लेना। जब। से उसकी माँ का देहांत हुआ है हमने कई बार उसकी गर्ल फ़्रेंड्स को साथ साथ चोदा है।
नमिता उसकी बात सुन कर हैरान हो गयी।

अब वह नमिता की कुर्ती खोलने लगा और फिर उसने उसे उतार दिया। नमिता ने भी अपने हाथ उठाकर उसको सहयोग दिया।
अब नमिता ब्रा में थी और उसकी गोरी दूधिया चूचियों को उसने दबाया और चूमा। फिर उसने नमिता की लेग्गिंग और पैंटी एक साथ निकाल दी। अब उसने नमिता को पलंग पर लिटाकर उसके ऊपर आ गया और उसके होंठ और चुचि चूसने लगा। फिर वह उसके पेट को चूमते हुए नीचे आया और उसके चूतरों के नीचे एक तकिया रख दिया जिससे उसकी बुर उभरकर दिखने लगी। अब उसने उसकी जाँघों को चूमा और चाटते हुए उसकी बुर के पास आ गया और बुर को पहले सहलाया और फिर चूमने लगा। फिर उसकी पंखुड़ियों को अलगकर उसकी छेद को ऊँगली से खोदा। नमिता आऽऽऽहहहह कर उठी अब उसने उसकी बुर को जीभ से चोदना चालू किया। नमिता हाऽऽऽऽऽऽय्य्य्य्य स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र जीइइइइइइइइ क्या कर रहे हैं आऽऽऽहहहह।
शर्मा अब उसकी जीभ से चटाई करने लगा और वह भी अपनी कमर उठकर उसका साथ देने लगी। अचानक वह झड़ने लगी और चिल्लाई: हाय्य्य्य्य्य्य मैं झड़ीइइइइइइइइइइ। उईइइइइइ ।
उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया और शर्मा ने उसे पूरा पी लिया।
तभी दरवाज़ा खुला और रतन शर्मा जी का बेटा अंदर आया वह स्विमिंग पूल से नहा कर आया था जिम करने के बाद । उसके पास डूप्लिकेट चाबी थी।
रतन को अचानक कमरे में देखकर नमिता का शर्म से बुरा हाल हो गया और वह अपने बदन पर चादर ढँकने की कोशिश की। फिर भी उसकी जाँघें पूरी नंगी थीं।
शर्मा मुस्कराया और बोला: आओ बेटा, देखो क्या माल तय्यार है हमारे लिए।
रतन ने हँसते हुए कहा: अरे नमिता आंटी आप पापा को मज़ा दे रही हो और हमारा ख़याल नहीं रख रही हो।
नमिता को बहुत शर्म आ रही थी। अब उसने उठने की कोशिश की तो रतन बिस्तर पर बैठ गया और उसको लिटाता हुआ उसके होंठ चूसने लगा। और चादर खींचकर उसकी छातियों को नंगा करके उनपर टूट पड़ा और उन्हें दबाते हुए बोला: पापा आंटी की चूचियाँ कितनी मस्त हैं। और वह उनको बारी बारी से चूसने लगा। अब नमिता की आहें निकलने लगीं। तबतक शर्मा ने अपने कपड़े खोल दिए और उसका काला मोटा लौड़ा ऊपर नीचे हो रहा था। नमिता ने बहुत दिन बाद ऐसा हथियार देखा था। अब वह उसकी जाँघों के बीच आ गया और उसकी टाँगें फैलाकर उसकी बुर में अपना लौड़ा लगा दिया और एक धक्के से आधे से भी ज़्यादा अंदर कर दिया। नमिता हाय्य्य्य्य्य मर गईइइइइइइइइइ। धीइइइइइइइइरे सेएएएएएए कहती हुई उफ़फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी।
उधर रतन भी अब खड़ा होकर अपने कपड़े खोल दिया। उसका लंड भी अपने बाप के लंड की तरह ही बड़ा और काला था। उसने नमिता के मुँह के पास अपना लौड़ा हिलाया और नमिता ने मुँह खोलकर उसका लौड़े का सुपाड़ा मुँह में ले लिया और उसको जीभ से सहलाते हुए चूसने लगी।
रतन मस्ती से अपनी कमर हिलाके उसके मुँह को चोद रहा था। अब वह भी मस्ती से कमर उछालकर शर्मा के धक्कों का जवाब दे रही थी। दोनों मर्द उसकी एक एक चुचि दबा रहे थे। तभी शर्मा मस्ती से ह्म्म्म्म्म्म्म्म करके झड़ गया। शर्मा हाँफते हुए हट गया।
नमिता अभी भी प्यासी थी। रतन मुस्करा कर बोला: आंटी, अब मैं चोदूँगा आपको, घबराओ नहीं। अब वह नीचे आकर एक तौलिए से उसकी बुर को साफ़ किया और फिर अपना लौड़ा एक ही झटके में उसके अंदर कर दिया। अब रतन ने ज़बरदस्त जवानों वाली चुदायी चालू की और नमिता भी बड़ी मस्ती से उसके धक्कों का जवाब देने लगी। कमरा अब फ़च फ़च और जाँघों की रगड़ती हुई आवाज़ों से गूँज उथा। पलंग भी धक्कों के कारण चूँ चूँ कर रहा था।
रतन ने उसकी होंठों को चूसते हुए उसके निपल्ज़ मसले और कमर को हिला हिला कर ज़बरदस्त चुदायी की। अब वह दोनों चिल्लाकर झड़ने लगे। वाह क्या स्खलन था दोनों के चरम आनंद का। दोनों जैसे सातवें आसमान में थे। फिर थक कर दोनों लेट गए।
शर्मा सोफ़े पर बैठकर उनकी चुदायी का आनंद ले रहा था और अपने नरम लंड को सहला रहा था।
नमिता बाथरूम से वापस आकर अपने कपड़े पहनी और तय्यार हो गयी। शर्मा और रतन ने उसे एक और राउंड के लिए कहा पर वह मना कर दी।
फिर वह अपनीं फ़ाइल लेकर चल दी घर की तरफ़ क्योंकि ऑफ़िस तो अब जाना नहीं था।

उधर राज अब भी आयशा से लिपट कर पलंग पर पड़ा था , अभी सिर्फ़ १० ही बजे थे। नदीम नहाने चला गया और बोला: अम्मी मेरा नाश्ता बना दो मैं दुकान जाऊँगा। राज तू चाहे तो अम्मी के साथ बाद में नहा लेना। मैं तो कई बार नहाया हूँ और बाथरूम में ही इनको चोदा भी हूँ। आयशा उठकर अपनी मैक्सी पहनने लगी तो नदीम ने कहा: अम्मी आज दोपहर तक नंगी ही रहो। साला राज भी क्या याद करेगा कि आपने उसे क्या मज़ा दिया था वह भी उसकी पहली चुदायी में ही।
आयशा: अरे ऐसा भी कहीं होता है, वह जब चाहेगा मैं फिर से उतार दूँगी ना।
नदीम: अम्मी, बस कह दिया तो कह दिया। आज आप नंगी रहोगी।
आयशा कुछ परेशान होकर: अच्छा बाबा जैसा तू कहता है।
अब वह नंगी ही किचन में चली गयी । जब वो जा रही थी तब उसके मटकते गोल गोल बाहर की ओर उभरे हुए चूतरों को देखकर राज का लौड़ा फिर से खड़ा होने लगा।
नदीम मुसकाया और बोला: मस्त माल है ना अम्मी। देख कैसे मटका कर गयी है, अपने बड़े बड़े चूतरों को। आज गाँड़ भी मार लेना अच्छी तरह से उनको बहुत मज़ा आता है गाँड़ मरवाने में।
राज ने हाँ में सर हिलाया और नदीम बाथरूम में घुस गया। अब राज ने अपनी चड्डी पहनी और उसमेंसे उसका आधा खड़ा लौड़ा उभार के साथ साफ़ दिखाई दे रहा था।
वह अब सोफ़े पर आ कर बैठ गया जहाँ रहमान बैठकर TV देख रहा था।
रहमान: मज़ा आया बेटा चुदायी में ?
राज: जी अंकल बहुत मज़ा आया।
रहमान: जाओ ना किचन में जाकर आयशा की मदद कर दो। फिर आँख मार के बोला: वह नंगी है जाओ मज़ा लो।
राज: नहीं अंकल वह नाश्ता बना रही हैं। मैं जाऊँगा तो वह काम नहीं कर पाएँगी। मैं तो उनको पकड़ लूँगा और फिर काम कैसे करेंगी।
रहमान उसकी चड्डी में खड़े लौड़े को देखकर अपनी जीभ होंठ पर फेरते हुए बोला: मैं इसकी कुछ मदद कर दूँ?
राज चड्डी में से अपने लौड़े को अजस्ट किया और बोला: नहीं अंकल अभी नहीं, अभी नाश्ता करते हैं।
रहमान निराश होकर: ठीक है कोई बात नहीं।
तभी नदीम नहा कर आया और चिल्लाया: अम्मी नाश्ता लाओ। और राज से बोला: आओ यार नाश्ता करते हैं। और यार तुमने चड्डी क्यों पहनी? ये तो अन्याय है, मैंने तुम्हारे लिए अम्मी को नंगी रखा है और तुम चड्डी पहन लिए? बड़ी नाइंसाफ़ी है भाई! चलो चड्डी उतारो ताकि अम्मी को अटपटा नहीं लगे।
राज हँसते हुए अपनी चड्डी उतार दिया और अपने आधे खड़े लौड़े को छूकर बोला: यार आज तो तूने इसकी चाँदी ही करा दी। ये साला तो बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है।
अब राज आकर टेबल पर बैठा और दोनों बातें करने लगा।
आयशा नाश्ता लाई और नदीम और राज के सामने रख दी। उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ हिलकर धमाल मचा रही थी। नदीम ने उसकी एक चुचि दबा दी और वह नदीम का गाल चूम ली। जब वह राज के पास आइ तो राज ने भी उसके चूतर दबा दिए तो वह उसका भी गाल चूमी।
आयशा रहमान को बोली: आप भी आ जाओ और नाश्ता कर लो।
रहमान आकर राज के पास बैठ गया। आयशा उसका भी नाश्ता लगा दी। नदीम जल्दी से खाकर उठा और बोला: अच्छा मैं चलता हूँ दुकान पर। और फिर राज को बोला: चल मज़ा ले अम्मी का, मैं क़रीब १ बजे आ जाऊँगा और तुझे घर छोड़ दूँगा। और अम्मी को प्यार करके उनकी बुर को अपनी हथेली में भरकर दबाया और फिर नीचे बैठ कर उसकी बुर की एक ज़ोरदार आवाज़ वाली चुम्मी लिया और बाहर निकल गया।
रहमान बोला: ये रोंज बाहर जाते हुए अपनी अम्मी की बुर की चुम्मी लेता है,वह जाने के समय अपनी अम्मी के आगे घुटनों पर बैठ जाता है और आयशा अपने कपड़े उठाकर अपनी बुर को नंगी करती है और वह उसे चूमता है।
नदीम चला गया। आयशा बोली: चाय पीयोगे?
राज ने हाँ में सर हिलाया, वह चाय बनाने गयी। तभी राज को अपने खड़े लौड़े पर अंकल का हाथ महसूस हुआ । वह उसके लौड़े को सहला रहे थे। राज ने उनका हाथ हटाया और सोफ़े पर आकर बैठ गया । रहमान भी दूसरे सोफ़े पर बैठकर TV देखने लगा।
तभी आयशा चाय लाई और राज और रहमान को दी। जब वह चाय दे रही थी झुक कर तब उसके बड़े दूध राज के मुँह पर आ गए जिसे उसने चूम लिया और दबाकर मस्त भी हो गया। फिर वह राज के पास बैठकर ख़ुद भी पीने लगी । राज उसकी नंगी जाँघें सहला कर मस्त होने लगा। उसका हाथ उसकी बुर तक भी पहुँचा पर वह जाँघें चिपका कर बैठी थी सो उसकी बुर के अंदर तक नहीं जा पाया। अब आयशा ने उसके लौड़े को पकड़ा और उसको ऊपर नीचे करने लगी और बोली: तुम्हारा हथियार बहुत मस्त है। सालों बाद ऐसा हथियार पकड़ी हूँ।
राज: आंटी आपकी चीज़ है जो चाहे करो।
आयशा चाय पीते हुए झुकी और उसकी टोपी की चमड़ी पीछे करके उसकी टोपी को चूसने लगी। वह एक चाय का सिप लेती और फिर एक सिप लौड़े का लेती। राज भी उसके गरम चाय के कारण उसकी गरम मुँह का स्पर्श अपने लौड़े पर महसूस करके मस्त हुए जा रहा था। रहमान बड़ी ही उत्सुकता से सब देख रहा था और लूँगी में हाथ डालकर अपना लंड मसल रहा था।
आयशा रहमान को बोली: आप भी नहा लो।
रहमान: पहले तुम दोनों नहा लो। मैं बाद में नहा लूँगा।
राज भी आयशा के कंधों पर हाथ रखकर उसको अपने चिपटा लिया और उसके एक मम्मे को दबा रहा था और दूसरे को चूस रहा था।
आयशा बोली: चलो अब नहा लो।
राज: आज तो मैं आपके साथ ही नहाऊँगा।
आयशा हँसते हुए बोली: चलो नहा लो , मैं कौन सा मना कर रही हूँ।
फिर दोनों खड़े हुए और राज का लौड़ा अब पूरा तना हुआ था और उसके पेट की ओर करके उसकी नाभि को छू रहा था।
आयशा अपनी गाँड़ मटका कर बाथरूम में पहुँची और राज भी उसके पिछले हिस्से को देखता हुआ उसके पीछे बाथरूम में पहुँचा।
आयशा राज से लिपट गयी और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। राज के हाथ उसकी पीठ से होते हुए उसके मस्त पिछवाड़े की गोलाइयों का मज़ा ले रहे थे।
तभी राज ने शॉवर चालू किया और वह पानी में भीगते हुए एक दूसरे को चूमे जा रहे थे।
थोड़ी सी बाद आयशा ने उसको अलग किया और साबुन हाथ मेंलेकर उसकी छाती पर लगाने लगी। फिर उसने उसकी बाहों और गर्दन पर भी लगाया। उसको घुमाकर उसकी पीठ पर भी लगाया। अब वह नीचे स्टूल पर बैठकर उसकी जाँघों पर साबुन लगायी । उसके चूतरों पर भी वह साबुन लगायी और उसकी दरार मैं हाथ डालकर उसके बालोंवाली गाँड़ में भी साबुन लगाया। राज का लौड़ा मस्ती से प्रीकम छोड़ रहा था। अब वह उसको घुमायी और साबुन का झाग उसके बॉल्ज़ पर भी लगाई और गाँड़ और बॉल्ज़ के बीच के हिस्से को भी साफ़ करने लगी। आयशा की आँखों ने सुपाडे के छेद पर लगा प्रीकम देख लिया और वह जीभ निकालकर उसको चाट गयी। अब उसने पूरे लौड़े पर साबुन लगाया। और फिर खड़ी होकर बोली: चलो अब तुम्हारे मुँह मेंभी लगा देती हूँ।
राज: नहीं आंटी अभी तो मैं आपको साबुन लगाउँगा . फिर मुँह मेंलगा दीजिएगा।
आयशा हँसते हुए बोली: चलो लगाओ।
अब राज भी साबुन का झाग बनाकर उसकी गर्दन से चालू किया। फिर उसके हाँथों और उसके पेट के हिस्से पर लगाया। फिर वह उसके पीछे जाकर उसकी पीठ और पैरों पर साबुन मला। अंत में उसने खड़े होकर उसके मम्मों मो दबाते हुए उनपर साबुन मला। फिर वह भी नीचे स्टूल पर बैठा और उसको घुमाकर उसके चूतरों को मसलते हुए उनपर साबुन मला। अब उसने उसकी गाँड़ मेंसाबुन लगाया। आह्ह्ह्ह्ह क्या मक्खन सी गाँड़ थी कहीं एक बाल भी नहीं था। उसने और नीचे जाकर बुर और गाँड़ के बीच को जगह को भी मला। पूरा बदन मानो रेशम सा कोमल था कहीं एक बाल नहीं। फिर उसको घुमाकर सामने से भी बुर में साबुन लगाया और फुली हुई बुर को इतनी सुंदरता देख कर मुग्ध हो गया।
राज: आंटी आपके बदन में वक भी बाल नहीं है, ऐसे कैसे हुआ?
आयशा: अरे नदीम को बाल बिलकुल पसंद नहीं है। वह ख़ुद ही बाल साफ़ कर देता है जैसे ही बढ़ते हैं। बहुत प्यार करता है मुझे ।
अब राज खड़ा हुआ और दोनों ने एक दूसरे के मुँह मेंसाबुन लगाया और शॉवर के नीचे लिपटकर खड़े हुए और नहाने लगे।
जब साबुन निकल गया तो दोनों ने एक दूसरे के अंगों को पोंछा ।
तभी राज बोला: आंटी एक बार यहीं चोदने दो ना प्लीज़।
आयशा: ठीक है लो कर लो। अब ये कहते हुए वह दीवाल को पकड़कर झुक गई और अपने चूतरों को ऊपर की ओर कर दिया। राज को शीला और प्रतीक की ऑफ़िस वाली चुदायी याद आ गयी।
तभी राज ने देखा कि रहमान दरवाज़े पर खड़ा होकर अंदर झाँक रहा था। उसने आयशा को इशारे से बताया तो वह बोली: अब इनका खड़ा नहीं होता इसलिए इस तरह से देख कर ये अपनी वासना शांत करते हैं। बेचारे के साथ बहुत बुरा हुआ। पहले बहुत मस्त चोदते थे। देखने दो उनको कुछ नहीं होता।
अब राज आयशा के पीछे आकर अपने लौड़े को उसकी बुर के छेद में लगाने लगा। आयशा ने हाथ बढ़ाकर उसके लौड़े को अपनी बुर में लगा लिया और ख़ुद पीछे होकर उसका आधा लौड़ा अंदर के ली। अब राज ने धक्का मारा और पूरा लौड़ा अंदर पेल दिया। आयशा और पीछे होकर पूरा लौड़ा जड़ तक अंदर ले ली। अब राज ने चुदायी शुरू की और वह उसकी लटकती हुई चूचियों को दबाकर आयशा मी मस्ती को दुगुना कर दिया था। क़रीब १० मिनट की घमासान चुदायी के बाद आयशा भी अपनी कमर को पीछे धकेल धकेल कर चुदवा रही थी। उसकी सिसकियाँ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽ है । और ज़ोर से चोदोओओओओओओओओओ । मेरे राजाआऽऽऽऽऽऽ फाड़ दोoopooopoooo नाआऽऽऽऽऽ हाय्य्य्य्य्य्य्य्य्य मैं गईइइइइइइइइ। कहते हुए वह झड़ गयी। अब वह बुरी तरह से हाँफ रही थी। राज का स्खलन अभी बहुत दूर था । उसने आयशा की गाँड़ के छेद को देखा और उसने एक ऊँगली डाली और बोला/’: आंटी गाँड़ मारने दो ना।
आयशा: आह क्या चोदू लड़का है, मस्त चोदा तूने आज। चल वह भी मार ले।पर यहाँ नहीं पलंग पर।
अब अच्छी तरह से सफ़ाई करके दोनों बाहर कमरे में आए और आयशा ने रहमान को कहा :यह भी पीछे डालना चाहता है, आप ज़रा वहाँ क्रीम लगा दो।
अब वह उलटा लेट गई और अपनी गाँड़ को ऊँचा कर दी। रहमान ने बड़े प्यार से उसकी गाँड़ में पहले एक फिर दो और अंत में तीन ऊँगली क्रीम के साथ डालकर उसको अच्छी तरह से राज के मोटे लौड़े के लिए तय्यार करने लगा।अब राज ने आयशा के पीछे आकर उसकी गाँड़ को देखा और मस्त होकर अपना लौड़ा हिलाने लगा। रहमान ने उसका हाथ हटाया और अपने हाथ की क्रीम को राज के लौड़े पर लगाने लगा। राज ने गाँड़ पर ऊँगली फेरी और फिर एक ऊँगली अंदर डाली। उसकी गरम टाइट गाँड़ ने उसको बहुत गरम कर दिया और अब उसने सलमान के हाथ से अपना लौड़ा छुड़ाकर आयशा की गाँड़ में फ़िट किया और हल्के से धक्का मारा , लंड उसकी टाइट गाँड़ में सर्र्र्र्र से घुसता चला गया।
आयशा की आऽऽहहह निकल गयी , वह बोली: हाय्य्य्य्य्य्य जराऽऽऽऽ धीरे सेएएएएएएएए । बहुत मोटा है तुम्हारा।
अब राज ने एक आख़री झटका दिया और उसका लौड़ा गाँड़ के अंदर पूरा चला गया। अब उसने धक्के मारने शुरू किए और कमरा ठप्प ठप्प की आवाज़ से भरने लगा। आयशा की चूचियाँ हर धक्के से बुरी तरह से हिल रही थी। अब राज उसकी चूचियाँ दबाने लगा और उसके निपल्ज़ को ऐठने लगा। तभी रहमान ने उसकी बुर में दो ऊँगली डाली और उनको अंदर बाहर करने लगा।
आयशा मस्ती से भरकर ज़ोर से पीछे कमर करके चुदवाने लगी। आयशा भी मस्ती से अपनी गाँड़ फटवाने लगी। राज को पहली बार गाँड़ मारने का मज़ा मिल रहा था। थोड़ी देर में आयशा अपनी बुर और गाँड़ की रगड़ायी से मस्त होकर झड़ने लगी। उसने रहमान की उँगलियों में पानी छोड़ना शुरू कर दिया। तभी राज भी उसकी गाँड़ में झड़ना शुरू किया। अब वो बाथरूम में साफ़ सफ़ाई करके वापस आए और राज ने कपड़े पहन लिए। पर आयशा पूरी नंगी ही सोफ़े पर आ कर बैठ गयी। रहमान ने कहा: अरे यह अब और नहीं चोदेगा तुम्हें चलो अब कपड़े पहन लो।
आयशा: नहीं जब तक नदीम वापस नहीं आता तब तक मुझे ऐसे ही रहना पड़ेगा। वह मुझे नंगी रहने को बोला है।अगर मैंने कपड़े पहन लिया तो वह नाराज़ होगा। तुम कुछ खाओगे राज?
राज: जी आंटी जी भूक तो लगी है। नदीम भी आता होगा और वह मुझे घर छोड़ देगा, वहीं खा लूँगा।
तभी नदीम वापस आ गया और आयशा को पकड़ कर प्यार किया और बोला: अम्मी मज़ा दिया ना राज ने आपको?
आयशा: हाँ बहुत मज़ा आया इसके साथ।
नदीम: अम्मी आपकी गाँड़ भी मारी कि नहीं इस लल्लू ने?
रहमान: अरे बहुत ज़ोर से मारी पूरी फाड़ के रख दी है।
नदीम: दिखाईये अम्मी गाँड़ क्या सच में फट गयी?
आयशा आगे की ओर झुकी और अपने चूतरों को अलग करके अपनी गाँड़ का छेद नदीम को दिखाया। नदीम ने देखा कि गाँड़ अभी भी पूरी खुली हुई थी और पूरी लाल हो रही थी।
नदीम: यार सच तूने अम्मी की गाँड़ फाड़ दी है। अब बता अपनी माँ मुझे कब दिलाएगा।
राज: यार आज से ही मैं इस जुगाड़ मेंलग जाऊँगा कि माँ को कैसे चोदूँ।
नदीम: बस अब तूने ठान ली है तो तू चोद ही लेगा। पर यार हमें नहीं भूल जाना। हमको भी दिलवाना उनकी बुर।
राज: ज़रूर यार ये भी कोई पूछने की बात है।
नदीम: अम्मी चलो अब कपड़े पहन लो मैं इसे घर छोड़ कर आता हूँ।
फिर नदीम जब उसको घर के सामने बाइक से उतारा तब बोला।: तो आज से माँ की चुदाई की तय्यारी चालू होगी ना?
राज: बिलकुल अब बस ये करना ही है।
फिर वह अपने घर का ताला खोला और अंदर जाकर हैरान रह गया कि माँआज भी घर पर ही है। वह माँ के कमरे मेंपहुँचा और खिड़की से झाँक कर देखा और उसकी आँखें फटी की फटी रह गयीं——-
नमिता होटेल से निकली और ऑटो से घर के लिए चल पड़ी। उसका शरीर ज़बरदस्त चुदायी से बहुत हल्का हो चला था और वह लस्त हो रही थी, तभी उसे ध्यान आया कि कुछ राशन का सामान लेना होगा, तब वह घर के पास के दुकान पर उतरी और राशन दुकान में उसे शीला मिल गयी।
नमिता: अरे आप आज स्कूल नहीं गयी।?
शीला: गयी थी थोड़ा जल्दी आ गयी। ये आए हुए हैं ना।
नमिता: अरे वाह तब तो मज़े ही मज़े हैं।
शीला थोड़ा झेंप कर बोली: अरे आप भी ना कुछ भी कह देती हैं।
दोनों हँसने लगीं।
तभी शीला थोड़ी गम्भीर होकर बोली: आपको पता है ना ३/४ दिन में हम सब पेपर’s का टेस्ट ले रहे हैं। फिर वह विस्तार से सब बतायी टेस्ट के बारे में।
वह आगे बोली: देखिए, मेरा फ़र्ज़ है कि आपको समय रहते बता दूँ कि राज का पढ़ने में बिलकुल ही ध्यान नहीं है । अगर ये टेस्ट भी उसने ठीक से नहीं किए तो फ़ाइनल में कुछ भी उम्मीद नहीं रखिएगा।
नमिता: मैं क्या करूँ पता नहीं क्या हो गया है उसका बिलकुल पढ़ने में मन ही नहीं लगता।
शीला अपराध बोध से ग्रस्त थी, कि उसने इस लड़के का सत्यानाश कर दिया था। कल रात को उसका पति आ गया था ३ हफ़्ते की छुट्टियों में। उसने कल रात से शीला को अब तक तीन बार चोद लिया था। अब शीला को किसी की ज़रूरत नहीं थी। सो अब उसे लगा कि एक छोटी उम्र के लड़के के साथ ये सब करके उसने अच्छा नहीं किया। इसीलिए वह नमिता को समझा रही थी कि किसी तरह राज को पढ़ने के लिए प्रेरित करे। फिर नमिता उसका धन्यवाद करके राशन लेने लगी।
सारे रास्ते नमिता राज के भविष्य को लेकर चिंतित रही। फिर उसने अपना सिर झटका और सोचा कि आज राज से साफ़ साफ़ बात करनी ही पढ़ेगी। तभी उसको अपनी बुर में खुजाल मची तो वह सोची कि साली दो लोगों से चूद कर आ रही है, फिर भी खुजा रही है। वह मन ही मन मुस्कुरा उठी।
नमिता जब घर पहुँची तो सीधे अपने कमरे में गयी और अपने कपड़े उतारने लगी। अब वह ब्रा और पैंटी में थी। उसने घड़ी देखी , अभी राज को आने में एक घंटा बाक़ी था। उसने अपनी ब्रा खोली और फिर अपनी छातियों का निरीक्षण करने लगी।
तभी राज भी घर में आकर खिड़की से माँ को सिर्फ़ पैंटी में देखा और उसकी आँखें फटी रह गयीं। नमिता अब छातियों में लाल लाल निशान देखी और मुस्कुरायी कि बाप बेटा दोनों क्या चूसे हैं इनको। चूस चूस कर लाल ही कर दिया है। वह शीशे में अपना हुस्न देखकर ख़ुद पर ही मुग्ध हो रही थी। उसने अपनी गोलाइयों को सहलाया और उसे याद आया कि शायद शर्मा ने वहाँ काटा भी था। तब उसे दाँत के निशान भी मिले, वह बुदबुदायी : साला कमीना कितनी ज़ोर से काटा है। फिर उसने एक क्रीम लेकर वहाँ पर मला और फिर अपनी पैंटी भी उतार दी।
राज अपनी माँ का हुस्न देखकर जैसे दीवाना हो गया। शीला या आएशा तो इनके सामने कुछ भी नहीं है। क्या गठा हुआ जिस्म है। कमर में हल्की सी चरबी है पर बाक़ी जगह तो माशा अल्लाह एक एक अंग जैसे तराशा हुआ हो। शीशे में उनका सामने का हिस्सा और वैसे ही उनका पिछवाड़ा राज की आँखों के सामने था।
चूतरों का उभार गदरायी जाँघें और गोरी चिकनी पीठ , राज का लौड़ा पूरा खड़ा हो गया। अब उसने अपने लौड़े को पैंट से आज़ाद किया और उसको मूठियाने लगा।
तभी नमिता घूमी और उसकी मादक गोरी बड़ी चूचियाँ राज के सामने थी। नमिता ने अपने बुर के ऊपर के बालों को पेड़ू के ऊपर बहुत सफ़ाई से दिल का शेप दिया हुआ था और नीचे उसकी बुर बिलकुल बिना बाल के मस्त चिकनी दिखाई दे रही थी।
अब वह मुड़कर शीशे में अपने चूतरों का मुआयना करने लगी।वहाँ भी लाल निशान थे, शर्मा और उसके बेटे ने बहुत दबाया था और शायद जोश में आकर चूमते हुए वहाँ भी काटा था। उसने वहाँ भी क्रीम लगाई। फिर वह नंगी ही बाथरूम में अपने बड़े बड़े चूतर मटकाते हुए घुस गयी।
राज कमरे में घुसा और माँ की पैंटी और ब्रा सूँघने लगा। अब उसका लौड़ा जो पैंट के बाहर हो था और ज़ोर से मस्त होकर हिलने लगा।
उसने बाथरूम के दरवाज़े में कोई छेद खोजने की कोशिश की पर उसे सफलता नहीं मिली। वह फिर अपने कमरे में जाकर बाथरूम में अपने माँ के नाम की मुट्ठ मारा और झड़ गया।
जब वह थोड़ी देर बाद अपने कमरे से बाहर आया तो देखा कि माँ किचन में खाना गरम कर रही है। उसे देखकर बोली: अरे तू कब आया?
राज : बस माँ अभी अभी हो आया हूँ। आप आज फिर ऑफ़िस से जल्दी आ गयीं?
नमिता: हाँ आज दोनों बाप बेटे टूर पर है तो मैं ऑफ़िस में क्या करती?
राज: माँ ये सुधाकर अंकल बार बार टूर पर जाते हैं।तो आज आप ऑफ़िस गई ही नहीं?
नमिता हकलाते हुए: नहीं नहीं गयी थी पर जल्दी आ गयी।
अब वह राज को कैसे बताती कि वह ऑफ़िस के काम से होटेल गयी और वहाँ शर्मा और उसके बेटे से चुदवा कर आ रही है।
राज : ओह अच्छा चलो मैं खाना लगाता हूँ आपके साथ । उसने माँ के उभारों को मैक्सी के ऊपर से घूरते हुए कहा।’
अब दोनों खाना खाने लगे तब नमिता ने पूछा: बेटा आज शीला आंटी मिली थी और तुम्हारे टेस्ट का बता रही थी। तुमने तो मुझे बताया ही नहीं?
राज: माँ वह तो हर साल होते हैं उसमें नया क्या है?
नमिता: नहीं इस बार इसमें बहुत कुछ नया है। शीला बोली कि अगर तुमने ये टेस्ट अच्छे से पास कर लिए तो तुम्हारा फ़ाइनल का रिज़ल्ट भी अच्छा आएगा। उसने मुझे यह भी बताया है कि एक दिन छोड़कर ये टेस्ट होंगे और उसका परिणाम भी उसी दिन बता दिया जाएगा ताकि तुमको ये पता चल जाए कि तुम कितने पानी मेंहो?
तुम्हें पता भी है किये टेस्ट कबसे शुरू हो रहे हैं।
राज: हाँ माँ ४ दिन बाद चालू हो रहे हैं।
नमिता : तुम्हारी तैयारी है?
राज: नहीं माँ नहीं है।
नमिता: तुमको समझ क्यूँ नहीं आ रहा है कि अगर तुम पढ़ायी नहीं कर पाए तो तुमको कोई भी नहीं पूछेगा। तुम्हारे पापा भी नहीं है और ना ही हमारा कोई बिज़्नेस है। नाहीं मेरे पास पैसा है तुम्हारे बिज़्नेस के लिए। तुम्हारा भविष्य इसी पर टिका है कि तुम्हारा परिणाम कैसा आता है?
राज हताश स्वर में बोला: माँ मैं क्या करूँ, मैं जब पढ़ने बैठता हूँ को मेरा ध्यान भटकता रहता है।
नमिता: अच्छा चलो मैं तुम्हारी मदद करूँगी। तुम एक पेज पढ़ो और मुझे सुनाओ। मैं पूरे समय तुम्हारे पास बैठूँगी।
राज सोचने लगा कि तब तो हो चुकी पढ़ाई, मैं तो सिर्फ़ आपके बदन को ही निहारता रहूँगा, पढ़ाई क्या ख़ाक होगी?
राज: माँ उससे कोई फ़ायदा नहीं होगा, चलो मैं कोशिश करता हूँ।
ये कहकर वह अपने कमरे में चला गया।
नमिता भी खाना उठाकर साफ़ सफ़ाई करके राज के कमरे में आयी तो वह किताब खोल कर सामने खिसके से आसमान को देख रहा था और उसका हाथ लोअर के ऊपर से उसके खड़े लौड़े को सहला रहा था।
नमिता बहुत परेशान हुई और अपना हाथ उसके लोअर में बने तंबू की ओर करके बोली: ये कैसी पढ़ाई कर रहा है तू, कमीने? मर क्यों नहीं जाता? बहुत ही जवानी की आग लगी हुई है? देखना एक दिन भीक माँगेगा।
ये कहते हुए वह रोने लगी और अपने कमरे में चली गयी।
राज को बड़ा धक्का लगा, वह तो माँ के जवान बदन को कल्पना में देखकर गरम होकर लौड़ा सहला रहा था, उसे क्या पता था कि माँ आ जाएगी।
उसे बड़ा दुःख हुआ और वह माँ के कमरे की ओर गया। उसने देखा कि माँ बिस्तर पर पेट के बल लेती हुईं थीं और सिसकियाँ ले ले कर रो रहीं थीं।
राज की आँखें माँ के उठे हुए मस्त नितम्बों पर पड़ीं जोकि उनके रोने से हिल रही थीं। उसे अपने आप पर ग़ुस्सा आया कि छी एक तरफ़ माँ उसके कारण रो रही है और वह उनको अभी वासना की निगाह से ही देख रहा है।
उसने माँ की पीठ पर हाथ रखा और उसका हाथ उनकी ब्रा की पट्टी पर ही आ गया। उसे फिर से झटका लगा और उसने हाथ को वहाँ से हटा कर पीठ के नीचे रखा और बोला: माँ रोने से क्या होगा? मैं कोशिश तो कर रहा हूँ ना पढ़ने की? अब थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा। आप प्लीज़ मत रोईए।
नमिता अपना मुँह उठाकर जो पूरी तरह से आँसुओं से भीगा हुआ था बोली: बेटा, तू क्यों नहीं समझता कि तेरा भविष्य बर्बाद हो रहा है।
राज: मैं कोशिश करूँगा माँ और ध्यान से पढ़ने की। यह कहते हुए वह मॉ के आँसू पोछने लगा।
नमिता: आख़िर तू ऐसा क्या सोचता रहता है हमेशा सेक्स के बारे में कि तू इतना उत्तेजित हो जाता है?
राज: पता नहीं माँ , मुझे और कुछ नहीं सूझता , मुझे किसी डॉक्टर को दिखा दो । ये कहते हुए वह भी रोने लगा।
नमिता ने उसे अपने से लिपटा लिया और प्यार करते हुए बोली: सब ठीक हो जाएगा बेटा, तू परेशान ना हो। राज भी उससे लिपट कर रो रहा था। जब दोनों के आँसूँ थमे तो राज ने देखा कि उसकी माँ ने उसे अपनी छाती में भींच लिया था और उसका मुँह उनकी चूचियों की घाटियों पर था। वह फिर से उत्तेजित होने लगा और अपने आप को माँ से छुड़ाया ताकि वह फिर उसके लंड का उभार ना देख ले।
नमिता बोली: चल मैं तेरे लिए चाय लाती हूँ , तू पढ़ने बैठ।
राज अपने कमरे में गया और किताब खोला, तभी उसको नदीम का फ़ोन आया , वो बोला: यार मेरी नानी का देहांत हो गया है। मैं और अम्मी १० दिन के लिए जा रहे हैं। तू पीछे से अपनी माँ को पटा लेना।

राज का तो जैसे दिल बैठ गया, वह तो २/३ दिन बाद फिर से आंटी को चोदने का प्लान बना रहा था। उसने कहा: ठीक है यार।
तभी माँ चाय लायी और बोली: बेटा शीला बता रही थी कि उसके पति तीन हफ़्ते की छुट्टी पर आएँ हैं। वह बड़ी ख़ुश दिखायी दे रही थीं। बड़ी भली महिला है।
राज के सिर पर जैसे किसी ने ठंडा पानी डाल दिया। तो अब शीला भी नहीं मिलने वाली चुदने के लिए। उसने एक आह भरी कि अब बेचारे लंड का क्या होगा? वह उदास हो गया।
अब ले दे कर माँ ही बची है, पर उसपर तो सिर्फ़ मेरी पढ़ाई का ही भूत सवार है।
राज अपनी ही सोच में डूबा था और उधर नमिता सोच रही थी कि इस लड़के का क्या करे?
उसने सुधाकर याने कि अपने बॉस को फ़ोन किया और बोली: आपसे कुछ व्यक्तिगत बात करनी है, आपके पास समय है क्या?
सुधाकर: हाँ हाँ बोलो क्या बात है।

नमिता ने राज के मन के भटकाव और उसके सेक्स के प्रति पागलपन के बारे में उसे बताया और उसको ये भी बताया कि कैसे उसकी पढ़ाई का सत्यानाश हो रहा है?
सुधाकर: ओह तो ये बात है? तुम क्या चाहती हो किसी मनोवेज्ञानिक को दिखाना चाहती हो?
नमिता: और क्या करूँ आप ही बोलो?
सुधाकर: तुम ऐसा करो मैं डॉक्टर गुप्ता का नम्बर भेजता हूँ वह तुम्हारी मदद करेगा । पहले तुम उससे मिल लेना कल दस बजे फिर जैसा वो बोलेगा तुम करना। ठीक है? मैं उसे तुम्हारे बारे में बता दूँगा।
नमिता: थैंक यू सर कहकर फ़ोन रख दी।
अगले दिन वह डॉक्टर गुप्ता से मिलने गयी फिर क्या हुआ——-

अगले दिन वह ऑफ़िस गयी और वहाँ का काम निपटाकर डॉक्टर गुप्ता के क्लीनिक पहुँची। डॉक्टर एक ६० साल का भारी बदन का आदमी था। उसने नमिता को देखकर कहा:बैठो बेटी, हाँ सुधाकर ने मुझे फ़ोन किया है कि तुम मुझसे मिलना चाहती हो, बोलो क्या समस्या है?
नमिता : जी मैं आपसे कैसे कहूँ बड़ी हिचक हो रही है।
गुप्ता: अरे बेटी इसमें हिचकने की क्या बात है जो कहना है खुल कर कहो?
नमिता: असल में समस्या मेरी नहीं मेरे बेटे की है।


गुप्ता: ओह क्या हुआ है उसको?
नमिता: असल में आजकल उसका ध्यान पढ़ाई में नहीं लग रहा है। ज़रा ज़्यादा ही जवानी चढ़ रही है उसको?
गुप्ता मुस्कुराते हुए बोला: कितनी उम्र है?
नमिता: जी अभी १८ का है।
गुप्ता: ओह फिर तो जवान हो गया है। अच्छा बताओ तुम्हें ऐसा क्यों लगा कि उसका ध्यान पढ़ाई से इसीलिए हटा है कि उस पर जवानी छाईं है। कोई और कारण भी तो हो सकता है।
नमिता: उसने ख़ुद से ही बताया है कि वह औरतों के बारे में सोचता रहता है।
गुप्ता: औरतें या लड़कियाँ?
नमिता: वही तो, वह कहता है कि उसको लड़कियों में कोई दिलचस्पी नहीं है और उसे अंटियाँ ही अच्छी लगती हैं। ये तो थोड़ा अजीब बात है ना?
गुप्ता: नहीं उसने अजीब कुछ नहीं है। कई लड़के अपने माँ से इतने ज़्यादा जुड़े रहते है कि वो अपनी गर्ल फ़्रेंड में भी अपनी माँ ही ढूँढते हैं और आँटियों को पसंद करने लगते हैं।
नमिता: ओह पर इसका उपाय क्या है? कैसे उसे इस पागलपन से छुटकारा दिलाया जाए और पढ़ाई में उसका ध्यान वापस लाया जाए?
गुप्ता: यह आसान भी है और कठिन भी। पर बिना उसे मिले मैं कोई भी फ़ैसला नहीं कर सकता।

नमिता: ठीक है मैं उसको शाम को लेकर आऊँगी।
गुप्ता: उसने कभी किसी आंटी का नाम लिया?
नमिता: जहाँ तक मैं समझती हूँ किउसको अपनी क्लास की कुछ टीचर पसंद हो सकती है । उनमें से एक शीला जी हैं और वह एक दो बार अपने दोस्त नदीम की माँ के बारे में भी कुछ ऐसी वैसी बातें करता रहा है?
गुप्ता चौंकते हुए: कैसी बातें, खुलकर बताओ . छिपाओगी तो मैं शायद ही मदद कर पाऊँ?
नमिता: असल में बात ही कुछ ऐसी है, वो वो —
गुप्ता: हाँ हाँ बोलो ना।

नमिता: वह कहता था कि शायद नदीम अपनी मतलब माँ के साथ मतलब याने कि – अब मैं कैसे बोलूँ?
गुप्ता: तुम यह कहना चाहती हो कि नदीम अपनी माँ के साथ सेक्स करता है। यही ना?
नमिता सिर झुका कर बोली: जी हाँ।
गुप्ता: बेटी,दुनिया में बहुत कुछ होता है जो कि हमारे सोच के ख़िलाफ़ है। जैसे माँ बेटा या बाप बेटी या भाई बहन का सेक्स । हालाँकि इसकी संख्या कम है पर ये सब इस दुनिया में होता है।कुछ दिन पहले एक भाई बहन आए थे, उनके माँ बाप नहीं हैं। लड़के का छोटा मोटा काम है , पर उनकी जात में दहेज प्रथा है तो वह उसकी शादी करवा नहीं पा रहा था।
नमिता: ओह तो फिर?
गुप्ता: वह लड़का ख़ुद भी शादी नहीं करना चाहता क्योंकि वह चाहता है किपहले बहन की शादी हो जाए।
लेकिन एक दिन अपनी बहन को कपड़े बदलते देख कर वह उसकी तरफ़ वासना से भर गया और क्योंकि दोनों जवान थे और प्यासे थे इसलिए वासना की आँधी में बह गए।
नमिता: ओह, भाई बहन?
गुप्ता: हाँ , पर बाद में उनको शायद कुछ अपराध भाव आया होगा सो मेरे पास आए कि हम अब क्या करें?
नमिता: फिर आपने क्या बोला?
गुप्ता: मैंने पहले ये समझा कि वो दोनों सिर्फ़ सेक्स के लिए जुड़े हैं या आपस में प्यार भी करते हैं? जब मुझे लगा कि वो दोनों सच मैं एक दूसरे को प्यार करते हैं तो मैंने उनको साथ मेंपति पत्नी की तरह रहने को कह दिया और अब वो दुनिया के लिए भाई बहन हैं पर वास्तव में हैं पति और पत्नी।
नमिता का सिर चकरा गया कि ये सब क्या है?
वह बोली: ओह तो आपने उनके रिश्ते को सही ठहरा दिया।
गुप्ता: मैं कौन हूँ सही ग़लत का फ़ैसला करने वाला? मैंने तो सिर्फ़ सुझाव दिया कि फ़ालतू का टेन्शन मत लो और मज़े से रहो।
नमिता: तो क्या आप नदीम और उसकी माँ के रिश्ते को भी सही कहोगे?
गुप्ता: जब तक पूरी बात पता नहीं होगी मैं कैसे कह सकता हूँ?
नमिता: ठीक है डॉक्टर मैं राज को शाम को लेकर आती हूँ, आप उसको ही समझाइए कि पढ़ाई की तरफ़ ध्यान दे।

अब वह उठी और नमस्ते करके बाहर जाने लगी, गुप्ता ने उसको कहा: ठीक है शाम को आ जाओ उसको लेकर। नमिता के जाने के बाद गुप्ता ने सुधाकर को फ़ोन किया: यार ये नमिता तो मस्त माल है, तू इसको चोदना क्यों बंद कर दिया?
सुधाकर: यार आजकल मुझे कमसिन लौंडियों को चोदने में मज़ा आता है। तू मज़ा ले लेना इससे।
गुप्ता: वो तो मैं के ही लूँगा पर पहले इसकी समस्या का हल कर दूँ फिर उससे फ़ीस वसूलूँगा। हाऽऽऽ हाऽऽऽऽ । दोनों हँसे और फ़ोन काट दिए।
राज जब स्कूल से घर पहुँचा तभी उसकी माँ भी आ गयी।
नमिता: बेटा, आज मैं डॉक्टर गुप्ता के पास गई थी वह बड़े मनोवेज्ञानिक ( Psychologist) माने जाते हैं। वह शाम को तुम्हें बुलाए हैं। हम शाम को उनसे मिलेंगे।
राज ने बुझी आवाज़ में कहा: ठीक है माँ जैसा आप कहो।
राज बहुत उदास था क्योंकि शीला और आयशा दोनों ही चुदायी के लिए उपलब्ध नहीं थी। दोनों ने उसको चुदायी की लत लगा दी थी।
वह खाना खाकर माँ के नाम की मूठ मारा और सो गया।
शाम को माँ बेटा तय्यार होकर गुप्ता के पास पहुँचे।
गुप्ता ने कहा: राज तुम इस कमरे में बैठो और नमिता को लेकर दूसरे कमरे में चला गया।
वहाँ उसने नमिता को एक कुर्सी पर बैठाया और उसके सामने टेबल पर रखे दो TV को चालू किया। जल्द ही दोनों TV में तस्वीर आने लगी। नमिता ने देखा कि एक TV में राज बहुत ही साफ़ साफ़ दिख रहा है। और दूसरे TV में डॉक्टर की कुर्सी साफ़ साफ़ दिख रही है।
नमिता हैरान होकर बोली: ये सब क्या है डॉक्टर?
गुप्ता: बेटी, अब जब मैं राज से सवाल जवाब करूँगा तो तुम बहुत ही साफ़ साफ़ सब कुछ अच्छी तरह से देख और सुन सकोगी। इससे तुमने फ़ैसले लेने में आसानी होगी। और हाँ चाहे कुछ भी हो जाए किसी भी हालत में तुम यहाँ से कहीं नहीं हिलोगी।

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