कार में बैठे हुए राज ने नमिता का पर्स लेकर अपनी गोद में रख लिया और ख़ुद नमिता से सट कर बैठ गया। थोड़ा एक तरफ़ को होने के कारण ड्राइवर को अब राज की हरकत शायद ना दिखे। अब उसने नमिता के हाथ को अपने पैंट पर लौड़े के ऊपर रखा और दबाने का इशारा किया। नमिता का हाथ पर्स के नीचे होने के कारण ड्राइवर को मिरर से भी नहीं दिखेगा।
नमिता मुस्कुराकर उसके लौड़े को दाबने लगी। वह भी अपना हाथ नमिता की जाँघ पर रखकर उसको सहलाने लगा। जल्दी ही वह गरम हो गया और इसने अपनी ज़िपर खोल के नमिता को इशारा किया की वह अंदर हाथ डाल के मज़ा करे। नमिता ने अंदर हाथ डाला और उसके बॉल्ज़ और लौड़े को चड्डी के अंदर से छू कर मस्त होती चली गयी। अब राज ने एक हैंड्बैग नमिता की गोद में रखा और उसकी पैंट खोलकर उसकी पैंटी को सहलाने लगा।
जल्दी ही दोनों गरम हो चुके थे। फिर नमिता फुसफुसाई: चल अब बस कर नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी और क्या पता तू भी झड़ जाए। राज हँसते हुए अपना हाथ वापस ले लिया। पर उसने नमिता को दिखाकर अपनी उँगलियाँ चाटीं। नमिता भी मस्ती में आके अपनी ऊँगली चाटी।
थोड़ी देर में राजधानी आ गयी और शानदार सड़कें और इमारतें दिखनी लगी। ड्राइवर ने एक बहुत बड़े माल के आगे कार रोकी और वह दोनों माल के अंदर चले गए ।
वो कई दुकानों में गए और ख़ूब हँसी मज़ाक़ किए।
नमिता बोली: चल तुझे कपड़े ले दूँ?
राज: क्या ले दोगी जींस या टी शर्ट।
नमिता: दोनों ले ले।
दुकान में काफ़ी भीड़ थी। नमिता एक काउंटर पर टी शर्ट देखने लगी तभी उसको अपने चूतरों पर एक हाथ का अहसास हुआ। वह मुस्करायी और सोची कि क्या लड़का है थोड़ी देर भी सबर नहीं कर सकता। नमिता भी हाथ के स्पर्श से मस्त हो रही थी। फिर वह बोली: राज बस कर, कोई देख लेगा।
तभी उसने देखा कि राज तो सामने खड़ा कपड़े देख रहा है। वह हड़बड़ा कर पीछे देखी तो एक अधेड़ सा आदमी खड़ा था और मुस्कुरा रहा था।
वह वहाँ से दूर चली गयी और राज के पास जाकर खड़ी हो गयी। वह आदमी हँसते हुए चला गया।
अब राज ने कुछ कपड़े पसंद किए। तभी नमिता बोली: देख यहाँ सेक्सी चड्डियाँ भी मिल रही हैं। ले ले अपने लिए।
राज: माँ चड्डी क्या करनी है आपको बिना चड्डी के ही सब दिखाता रहता हूँ।
नमिता: हा हा चल ले ले , बड़ा सेक्सी दिखेगा तू इसमें।
राज: ठीक है माँ आपको कौन सी पसंद है?
नमिता: ये वाली जॉकी की बड़ी सेक्सी है। तुम्हारे बड़े बॉल्ज़ को अच्छा सहारा मिलेगा।
राज: ठीक है माँ आपको ये पसंद है तो यही सही।
नमिता ने राज के कपड़े ख़रीदने के बाद कहा: चल अब खाना खाते हैं।
राज: चलो ड्राइवर कोई अच्छे रेस्तराँ में ले जाएगा।
जब दोनों रेस्तराँ में खाना खाने के लिए टेबल पर बैठे तो नमिता बोली: मैं हाथ धो कर आती हूँ। जब वह हाथ धो रही थी तो उसने देखा कि एक उसकी ही उम्र की औरत इंतज़ार कर रही थी अपनी बारी की। अचानक नमिता को लगा कि वह उस औरत पहचानती है। फिर नमिता बोली: इशा ? तुम इशा हो ना?
इशा: हाँ और तुम नमिता हो ना?
दोनों गलें लगीं। इशा: आज हम २० साल के बाद मिल रही है नमिता: हाँ स्कूल के बाद तो हम मिली ही नहीं ।
इशा: चल तुझे अपने परिवार से मिलाती हूँ। तेरे साथ कौन है?
नमिता: बस मैं और मेरा बेटा हैं। पति का देहांत हो गया है।
इशा: ओह , सॉरी, मेरे पति का बिसनेस है ।
बाहर आके वह नमिता को उस टेबल पर ले गयी जहाँ उसका परिवार बैठा था। नमिता ने देखा कि एक थोड़ा मोटा सा आदमी इशा का पति था। उसके पास एक लड़की एक स्कर्ट टॉप में बैठी थी। उसकी चूचियाँ अभी पूरी तरह से बड़ी भी नहीं हुई थी। उसके सामने एक स्मार्ट लड़का बैठा था और वह इशा को देखा और बोला: माँ कहाँ रह गयी थी आप?
इशा: बेटा इनसे मिलो ये मेरी सहेली नमिता है और ये रोहन हैं मेरा बेटा , १२ थ में पढ़ता है । ये मानसी है मेरी बेटी १० थ में है। ये मेरे पति हैं राकेश ।
नमिता ने राकेश को नमस्ते की और बच्चों को प्यार से मुस्कुरा कर देखी। तभी नमिता ने राज को आवाज़ दी और उसके आने पर बोली: ये मेरा बेटा राज है। १२थ में पढ़ता है। राज ने भी सबका अभिवादन किया।
राकेश: अरे आप लोग यहीं हमारे साथ बैठिए ना, साथ में खाना खाएँगे।
सब बातें करते हुए खाना खाने लगे। तभी नमिता का चम्मच नीचे गिर गया। वह झुकी नीचे चम्मच उठाने और उसकी आँख वहाँ टेबल के नीचे चल रहे खेल पर टिक गयी। उसने देखा कि राकेश का हाथ मानसी के स्कर्ट के अंदर था और वह उसकी जाँघ सहला रहा था। नमिता को थोड़ा सा आश्चर्य हुआ कि यहाँ तो बाप बेटी का चक्कर चल रहा है।
वह सोची कि क्या इशा को इसके बारे में पता है? फिर उसने देखा कि रोहैन भी बार बार इशा से चिपक कर बात कर रहा था।
तभी उसने देखा कि रोहन उसके कान में कुछ बोला और नमिता ने देखा कि उसकी एक बाँह उसकी एक चूची को दबा रही थी। और इशा उससे दूर होने का प्रयास भी नहीं कर रही थी।
नमिता को कुछ अजीब सा लगा ये सब और वो जानती थी कि इशा शादी के पहले भी मज़े से सेक्स का सुख लेती थी। शायद अभी भी कुछ ऐसा ही है।
तभी नमिता ने देखा कि राकेश रोहन को देखा और मानसी के कान में कुछ बोला। मानसी भी देखी कि रोहन का हाथ इशा की चूचि को साइड से दबा रहा था। दोनों सीक्रेट रूप से मुस्कुराने लगे।
नमिता को लगा कि ये शायद बहुत ही ख़ास परिवार है कुछ उसके ख़ुद के परिवार जैसा ही -इन्सेस्ट परिवार।
तभी इशा बोली: नमिता याद है हम लोग कितनी मस्ती करती थीं? बहुत अच्छे दिन थे वो भी।
नमिता: हाँ याद है बहुत मस्ती करते थे।
नमिता ने देखा कि राकेश की आँखें अब उसकी टॉप के ऊपर थीं। वह उसकी चूचियों को देखे जा रहा था। नमिता सोचने लगी कि ये आदमी तो बड़ा ही रंगीला है अपनी बेटी से तो मज़ा ले ही रहा है और अब मुझे भी देखे जा रहा है।
थोड़ी देर बाद सबने खाना खा लिया और इशा बोली: आप दोनों को अब हमारे घर चलना है क्योंकि इतने साल बाद मिले हैं, बहुत सी बातें करनी है।
नमिता: हमको वापस भी जाना है यहाँ से तीन घंटे लगेंगे हमको वापस पहुँचने में।
इशा: मैं कोई बात नहीं सुनूँगी अभी के अभी चलो , दो तीन घंटे बाद चले जाना।
नमिता: ठीक है यार तुमसे तो मैं जीत नहीं सकती चलो।
बाहर आके नमिता ने कार बुलायी और इशा और नमिता उसने बैठ गयी। इशा ने देखा कि राकेश नमिता की चूचियों को टॉप के ऊपर से घूर रहा था। इशा राज को रोहन के साथ आने को बोली।
दूसरी कार राकेश कार चला रहा था और राज उसकी बग़ल में आके बैठा था और पीछे भाई बहन बैठे थे।
बातें करते हुए राकेश राज से पढ़ाई के बारे में पूछ रहा था। तभी राज ने देखा शीशे में कि रोहन का हाथ मानसी की जाँघों पर था । उसे थोड़ा अजीब सा लगा कि वह भाई बहन है फिर भी।
तभी अचानक ज़ोर का ब्रेक लगा और राज भी आगे को झुका और जब वह मुड़ा तो उसने देखा कि मानसी की स्कर्ट ऊपर तक चढ़ी हुई थी और उसकी गुलाबी पैंटी दिख रही थी। तभी रोहन ने राज को पीछे देखते हुए देखा तो मानसी की स्कर्ट नीचे कर दिया। राज उसकी चिकनी जाँघ और उसकी पैंटी देख कर मस्त हो गया।
थोड़ी देर में सब उनके घर पहुँचे। अच्छा बड़ा सा घर था।
अंदर जाकर इशा नमिता और राज को ड्राइंग रूम में बैठायी और उनके लिए पानी लायी। इशा ने देखा कि अब उसका बेटा रोहन नमिता की चूचियों को घूर रहा था। वह सोची कि पहले बाप और अब बेटा नमिता को बहुत वासना भरी दृष्टि से देख रहे हैं। तभी उसकी नज़र राज पर पड़ी वह उसे ही घूर रहा था ।
इशा ने आह भरी और सोची कि यहाँ तो सब गरम हो रहे हैं। बाद में इशा नमिता को अपने बेड रूम में ले गयी और दोनों पुराने दिनों की बातें करने लगीं।
उधर राकेश मानसी के बेडरूम में आराम करने चला गया। और राज , मानसी और रोहन ,रोहन के बेडरूम में चले गए।
तीनों अपने स्कूल की बातें करने लगे।
रोहन बोला: मैं ज़रा चेंज करके आता हूँ। वह अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुसा और एक स्लीव्लेस गंजी और हाफ़ पैंट में बाहर आया। राज उसके मसल्ज़ देख कर काफ़ी प्रभावित हुआ। उसकी जाँघे भी राज की जाँघें जैसी बालों से भरी थी।
रोहन राज से बोला: यार तुम भी कपड़े बदल लो और आराम से बैठो। राज भी अपने बैग से कपड़े निकालके बाथरूम में जाकर चेंज किया और बाहर आया। मानसी उसको काफ़ी ध्यान से देख रही थी। राज के मसल्ज़ भी मस्त थे और उसकी जाँघें रोहन की जाँघों से ज़्यादा भारी थीं।
मानसी बोली: मैं भी कपड़े बदल आती हूँ, और अपने कमरे में चली गयी।
रोहन ये सोचके मुस्कुराया कि वहाँ तो पापा लेटे हुए हैं इसके कमरे में। चलो पापा तो मज़ा ले ही लेंगे।
क़रीब १५ मिनट बाद मानसी आयी तो उसकी साँस थोड़ा फूली हुई थी और वह आके उनके पास बिस्तर में बैठ गयी। रोहन मुस्कुराया क्योंकि वह जानता था की पापा ने मस्ती की होगी मानसी के साथ तभी वह गुलाबी हो रही है। अब उसने एक टॉप और स्कर्ट डाल ली थी और उसकी नाभि और पेट नंगा दिख रहा था। जब वह बैठ रही थी तो उसकी गुलाबी पैंटी राज और रोहन को दिख गयी और दोनों अपने लौड़े पैंट में अजस्ट करने लगे। फिर ५ बजे नमिता आयी और बोली: चलो बेटा चलें अब घर।
राज: जी माँ चलते हैं।
नमिता मुस्कुराकर उसके लौड़े को दाबने लगी। वह भी अपना हाथ नमिता की जाँघ पर रखकर उसको सहलाने लगा। जल्दी ही वह गरम हो गया और इसने अपनी ज़िपर खोल के नमिता को इशारा किया की वह अंदर हाथ डाल के मज़ा करे। नमिता ने अंदर हाथ डाला और उसके बॉल्ज़ और लौड़े को चड्डी के अंदर से छू कर मस्त होती चली गयी। अब राज ने एक हैंड्बैग नमिता की गोद में रखा और उसकी पैंट खोलकर उसकी पैंटी को सहलाने लगा।
जल्दी ही दोनों गरम हो चुके थे। फिर नमिता फुसफुसाई: चल अब बस कर नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी और क्या पता तू भी झड़ जाए। राज हँसते हुए अपना हाथ वापस ले लिया। पर उसने नमिता को दिखाकर अपनी उँगलियाँ चाटीं। नमिता भी मस्ती में आके अपनी ऊँगली चाटी।
थोड़ी देर में राजधानी आ गयी और शानदार सड़कें और इमारतें दिखनी लगी। ड्राइवर ने एक बहुत बड़े माल के आगे कार रोकी और वह दोनों माल के अंदर चले गए ।
वो कई दुकानों में गए और ख़ूब हँसी मज़ाक़ किए।
नमिता बोली: चल तुझे कपड़े ले दूँ?
राज: क्या ले दोगी जींस या टी शर्ट।
नमिता: दोनों ले ले।
दुकान में काफ़ी भीड़ थी। नमिता एक काउंटर पर टी शर्ट देखने लगी तभी उसको अपने चूतरों पर एक हाथ का अहसास हुआ। वह मुस्करायी और सोची कि क्या लड़का है थोड़ी देर भी सबर नहीं कर सकता। नमिता भी हाथ के स्पर्श से मस्त हो रही थी। फिर वह बोली: राज बस कर, कोई देख लेगा।
तभी उसने देखा कि राज तो सामने खड़ा कपड़े देख रहा है। वह हड़बड़ा कर पीछे देखी तो एक अधेड़ सा आदमी खड़ा था और मुस्कुरा रहा था।
वह वहाँ से दूर चली गयी और राज के पास जाकर खड़ी हो गयी। वह आदमी हँसते हुए चला गया।
अब राज ने कुछ कपड़े पसंद किए। तभी नमिता बोली: देख यहाँ सेक्सी चड्डियाँ भी मिल रही हैं। ले ले अपने लिए।
राज: माँ चड्डी क्या करनी है आपको बिना चड्डी के ही सब दिखाता रहता हूँ।
नमिता: हा हा चल ले ले , बड़ा सेक्सी दिखेगा तू इसमें।
राज: ठीक है माँ आपको कौन सी पसंद है?
नमिता: ये वाली जॉकी की बड़ी सेक्सी है। तुम्हारे बड़े बॉल्ज़ को अच्छा सहारा मिलेगा।
राज: ठीक है माँ आपको ये पसंद है तो यही सही।
नमिता ने राज के कपड़े ख़रीदने के बाद कहा: चल अब खाना खाते हैं।
राज: चलो ड्राइवर कोई अच्छे रेस्तराँ में ले जाएगा।
जब दोनों रेस्तराँ में खाना खाने के लिए टेबल पर बैठे तो नमिता बोली: मैं हाथ धो कर आती हूँ। जब वह हाथ धो रही थी तो उसने देखा कि एक उसकी ही उम्र की औरत इंतज़ार कर रही थी अपनी बारी की। अचानक नमिता को लगा कि वह उस औरत पहचानती है। फिर नमिता बोली: इशा ? तुम इशा हो ना?
इशा: हाँ और तुम नमिता हो ना?
दोनों गलें लगीं। इशा: आज हम २० साल के बाद मिल रही है नमिता: हाँ स्कूल के बाद तो हम मिली ही नहीं ।
इशा: चल तुझे अपने परिवार से मिलाती हूँ। तेरे साथ कौन है?
नमिता: बस मैं और मेरा बेटा हैं। पति का देहांत हो गया है।
इशा: ओह , सॉरी, मेरे पति का बिसनेस है ।
बाहर आके वह नमिता को उस टेबल पर ले गयी जहाँ उसका परिवार बैठा था। नमिता ने देखा कि एक थोड़ा मोटा सा आदमी इशा का पति था। उसके पास एक लड़की एक स्कर्ट टॉप में बैठी थी। उसकी चूचियाँ अभी पूरी तरह से बड़ी भी नहीं हुई थी। उसके सामने एक स्मार्ट लड़का बैठा था और वह इशा को देखा और बोला: माँ कहाँ रह गयी थी आप?
इशा: बेटा इनसे मिलो ये मेरी सहेली नमिता है और ये रोहन हैं मेरा बेटा , १२ थ में पढ़ता है । ये मानसी है मेरी बेटी १० थ में है। ये मेरे पति हैं राकेश ।
नमिता ने राकेश को नमस्ते की और बच्चों को प्यार से मुस्कुरा कर देखी। तभी नमिता ने राज को आवाज़ दी और उसके आने पर बोली: ये मेरा बेटा राज है। १२थ में पढ़ता है। राज ने भी सबका अभिवादन किया।
राकेश: अरे आप लोग यहीं हमारे साथ बैठिए ना, साथ में खाना खाएँगे।
सब बातें करते हुए खाना खाने लगे। तभी नमिता का चम्मच नीचे गिर गया। वह झुकी नीचे चम्मच उठाने और उसकी आँख वहाँ टेबल के नीचे चल रहे खेल पर टिक गयी। उसने देखा कि राकेश का हाथ मानसी के स्कर्ट के अंदर था और वह उसकी जाँघ सहला रहा था। नमिता को थोड़ा सा आश्चर्य हुआ कि यहाँ तो बाप बेटी का चक्कर चल रहा है।
वह सोची कि क्या इशा को इसके बारे में पता है? फिर उसने देखा कि रोहैन भी बार बार इशा से चिपक कर बात कर रहा था।
तभी उसने देखा कि रोहन उसके कान में कुछ बोला और नमिता ने देखा कि उसकी एक बाँह उसकी एक चूची को दबा रही थी। और इशा उससे दूर होने का प्रयास भी नहीं कर रही थी।
नमिता को कुछ अजीब सा लगा ये सब और वो जानती थी कि इशा शादी के पहले भी मज़े से सेक्स का सुख लेती थी। शायद अभी भी कुछ ऐसा ही है।
तभी नमिता ने देखा कि राकेश रोहन को देखा और मानसी के कान में कुछ बोला। मानसी भी देखी कि रोहन का हाथ इशा की चूचि को साइड से दबा रहा था। दोनों सीक्रेट रूप से मुस्कुराने लगे।
नमिता को लगा कि ये शायद बहुत ही ख़ास परिवार है कुछ उसके ख़ुद के परिवार जैसा ही -इन्सेस्ट परिवार।
तभी इशा बोली: नमिता याद है हम लोग कितनी मस्ती करती थीं? बहुत अच्छे दिन थे वो भी।
नमिता: हाँ याद है बहुत मस्ती करते थे।
नमिता ने देखा कि राकेश की आँखें अब उसकी टॉप के ऊपर थीं। वह उसकी चूचियों को देखे जा रहा था। नमिता सोचने लगी कि ये आदमी तो बड़ा ही रंगीला है अपनी बेटी से तो मज़ा ले ही रहा है और अब मुझे भी देखे जा रहा है।
थोड़ी देर बाद सबने खाना खा लिया और इशा बोली: आप दोनों को अब हमारे घर चलना है क्योंकि इतने साल बाद मिले हैं, बहुत सी बातें करनी है।
नमिता: हमको वापस भी जाना है यहाँ से तीन घंटे लगेंगे हमको वापस पहुँचने में।
इशा: मैं कोई बात नहीं सुनूँगी अभी के अभी चलो , दो तीन घंटे बाद चले जाना।
नमिता: ठीक है यार तुमसे तो मैं जीत नहीं सकती चलो।
बाहर आके नमिता ने कार बुलायी और इशा और नमिता उसने बैठ गयी। इशा ने देखा कि राकेश नमिता की चूचियों को टॉप के ऊपर से घूर रहा था। इशा राज को रोहन के साथ आने को बोली।
दूसरी कार राकेश कार चला रहा था और राज उसकी बग़ल में आके बैठा था और पीछे भाई बहन बैठे थे।
बातें करते हुए राकेश राज से पढ़ाई के बारे में पूछ रहा था। तभी राज ने देखा शीशे में कि रोहन का हाथ मानसी की जाँघों पर था । उसे थोड़ा अजीब सा लगा कि वह भाई बहन है फिर भी।
तभी अचानक ज़ोर का ब्रेक लगा और राज भी आगे को झुका और जब वह मुड़ा तो उसने देखा कि मानसी की स्कर्ट ऊपर तक चढ़ी हुई थी और उसकी गुलाबी पैंटी दिख रही थी। तभी रोहन ने राज को पीछे देखते हुए देखा तो मानसी की स्कर्ट नीचे कर दिया। राज उसकी चिकनी जाँघ और उसकी पैंटी देख कर मस्त हो गया।
थोड़ी देर में सब उनके घर पहुँचे। अच्छा बड़ा सा घर था।
अंदर जाकर इशा नमिता और राज को ड्राइंग रूम में बैठायी और उनके लिए पानी लायी। इशा ने देखा कि अब उसका बेटा रोहन नमिता की चूचियों को घूर रहा था। वह सोची कि पहले बाप और अब बेटा नमिता को बहुत वासना भरी दृष्टि से देख रहे हैं। तभी उसकी नज़र राज पर पड़ी वह उसे ही घूर रहा था ।
इशा ने आह भरी और सोची कि यहाँ तो सब गरम हो रहे हैं। बाद में इशा नमिता को अपने बेड रूम में ले गयी और दोनों पुराने दिनों की बातें करने लगीं।
उधर राकेश मानसी के बेडरूम में आराम करने चला गया। और राज , मानसी और रोहन ,रोहन के बेडरूम में चले गए।
तीनों अपने स्कूल की बातें करने लगे।
रोहन बोला: मैं ज़रा चेंज करके आता हूँ। वह अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुसा और एक स्लीव्लेस गंजी और हाफ़ पैंट में बाहर आया। राज उसके मसल्ज़ देख कर काफ़ी प्रभावित हुआ। उसकी जाँघे भी राज की जाँघें जैसी बालों से भरी थी।
रोहन राज से बोला: यार तुम भी कपड़े बदल लो और आराम से बैठो। राज भी अपने बैग से कपड़े निकालके बाथरूम में जाकर चेंज किया और बाहर आया। मानसी उसको काफ़ी ध्यान से देख रही थी। राज के मसल्ज़ भी मस्त थे और उसकी जाँघें रोहन की जाँघों से ज़्यादा भारी थीं।
मानसी बोली: मैं भी कपड़े बदल आती हूँ, और अपने कमरे में चली गयी।
रोहन ये सोचके मुस्कुराया कि वहाँ तो पापा लेटे हुए हैं इसके कमरे में। चलो पापा तो मज़ा ले ही लेंगे।
क़रीब १५ मिनट बाद मानसी आयी तो उसकी साँस थोड़ा फूली हुई थी और वह आके उनके पास बिस्तर में बैठ गयी। रोहन मुस्कुराया क्योंकि वह जानता था की पापा ने मस्ती की होगी मानसी के साथ तभी वह गुलाबी हो रही है। अब उसने एक टॉप और स्कर्ट डाल ली थी और उसकी नाभि और पेट नंगा दिख रहा था। जब वह बैठ रही थी तो उसकी गुलाबी पैंटी राज और रोहन को दिख गयी और दोनों अपने लौड़े पैंट में अजस्ट करने लगे। फिर ५ बजे नमिता आयी और बोली: चलो बेटा चलें अब घर।
राज: जी माँ चलते हैं।
अचानक राकेश की आवाज़ आयी : अरे सब लोग यहाँ आओ।
सब बाहर ड्रॉइंग रूम में आए जहाँ वह TV देख रहा था।टीवी पर एक समाचार चल रहा था कि उनके राज्यपाल का देहांत हो गया है। और राजकीय शोक घोषित हो गया है और २ दिन स्कूल और दफ़्तर बंद रहेंगे।
राज: ओह माँ ये तो स्कूल की फिर से छुट्टियाँ हो गयीं। क्या बोरिंग है?
रोहन : बोरिंग? यार मज़ा आ गया कि २ दिन छुट्टी मनाएँगे ।
इशा: नमिता तुम कह रही थी राज के स्कूल के कारण ही तुमको जाना है और अब स्कूल तो बंद ही हो गया। चलो अब यहीं रुको २ दिन, और बच्चों को कल पिकनिक पर ले चलेंगे। ठीक है?
सब एक साथ चिल्लाए: ठीक है। राज भी उनके साथ ही चिल्लाया।
नमिता: ओह तो राज ने रुकने का प्रोग्राम बना लिया है। चलो ठीक है।
इशा ख़ुश होके बोली: चलो अब डिनर बनाते हैं। और नमिता और वह किचन में चली गयी।
राकेश टीवी देखने लगा, और बच्चे रोहन के कमरे में आ गए। थोड़ी देर बातें करते रहे तभी राकेश ने आवाज़ लगायी: मानसी बेटा पानी देना।
मानसी उठकर बाहर गयी किचन की ओर।
तभी रोहन बाथरूम गया और पता नहीं राज में मन में क्या आया कि वह धीरे से बाहर आके परदे के पीछे से ड्रॉइंग रूम में झाँकने लगा। उसने देखा कि राकेश का हाथ अपने हाफ़ पैंट पर था और वह अपना लौड़ा दबा रहा था, TV चालू था। तभी मानसी पानी लेकर आइ और राकेश ने पानी लेते हुए दूसरा हाथ उसकी छाती पर रखा और उसको दबाने लगा और फिर उसको खींचकर उसके होंठ चूम लिया। पानी पीते हुए उसका हाथ उसकी जाँघों को सहलाने लगा। शायद उसका हाथ उसकी बुर तक चला गया था क्योंकि वह बोल पड़ी: हाय पापा क्या कर रहे हो।मेहमान आए हुए हैं, कोई देख लेगा।
राकेश हँसते हुए उसकी चूचि दबाया और उसको चूमकर छोड़ दिया। वह वापस मुड़ी तो उसके गोल गोल छोटे से चूतरों को भी दबा दिया। मानसी ने अपने कपड़े ठीक किए और वापस भाई के कमरे में आ गयी।
राज भी जल्दी से अंदर आ गया। उसी समय मानसी और रोहन भी आ गए । राज ये बात माँ को बताना चाहता था।
राज: मैं ज़रा माँ से मिल कर आता हूँ। वह किचन में गया और नमिता से बोला: माँ मेरे बैग में कुछ समान नहीं दिख रहा है। एक मिनट आइए ना।
नमिता उसे इशा के बेडरूम में ले गयी और वहाँ राज धीरे से बोला: माँ, अभी अभी मैंने देखा कि अंकल अपनी बेटी के शरीर का मज़ा ले रहे थे । वह उसकी चूचि और बुर भी दबा रहे थे।
नमिता : ओह, मुझे भी लग रहा है कि इस परिवार में कुछ तो चल रहा है । मैंने भी खाना खाते हुए राकेश को मानसी की जाँघ सहलाते देखा था।
राज: एक और बात मुझे लगता है की भाई बहन में भी कुछ चल रहा है क्योंकि वह भी कार में उसकी जाँघें सहला रहा था।
नमिता: ओह तो ये बात है। इशा भी इस सबमे शामिल है क्योंकि दोपहर को रोहन अपनी कोहनी से उसकी छाती दबा रहा था और वो कुछ नहीं बोली।
राज: माँ कहीं ये लोग भी हमारे जैसे तो नहीं हैं? इन्सेस्ट सेक्स मानने वाले।
नमिता: हो सकता है बेटा। मैं देख रही हूँ तू मानसी और इशा दोनों को घूर रहा है, सब ठीक है ना?
राज: माँ आप भी ना, कुछ भी बोल देती हो।
नमिता: देख राकेश और रोहन भी मुझे घूर रहे हैं।
राज: माँ आप क्या बोलती हो, इनके साथ भी हमें ग्रूप सेक्स करना चाहिए क्या?
नमिता: तू बोल।क्या चाहता है?
राज: माँ, ये हो सकता है क्या?
नमिता: मुझे विश्वास है हो जाएगा। बोल करूँ बात इशा से ? पर ये तो बता तू किसको करेगा मानसी को या इशा को?
राज: हा हा दोनों को।
नमिता: ओह, फिर राकेश और रोहन भी मेरी लेंगे , तुझे ऐतराज़ तो नहीं होगा ना?
राज: माँ अगर आपको कोई ऐतराज़ नहीं है तो मुझे भी नहीं है।
नमिता: चल फिर जा मैं जुगाड़ करती हूँ। तेरा खड़ा हो गया है ना? ये कहते हुए उसने उसका लौड़ा पकड़ा और उसकी अकड़न देख कर अपना बुर गीला कर बैठी। राज ने भी उसकी चूचि दबा दी और वह हँसते हुए किचन में वापस जाने लगी ये सोचते हुए कि कैसे बात शुरू करे इशा के साथ इस टॉपिक पर।
उधर रोहन मानसी को बोला: मैं अभी आता हूँ ।और किचन में गया और अपनी माँ को अकेला पा कर उससे लिपट गया और बोला: माँ क्यों इनको रोक लिया अब हम मज़े कैसे करेंगे।
इशा हँसते हुए बोली: क्यों रात को क्या दिक़्क़त है ? सबके सोने के बाद मिल लेंगे।
रोहन उसको चूमते हुए बोला: माँ सच सुबह से बहुत इच्छा हो रही है। चलो ना आप थोड़ा सा चूस दो।
इशा: अरे बदमाश, नमिता कभी भी अंदर आ जाएगी। पागल जैसी बात ना कर।
उधर नमिता राज से मिलकर किचन में घुसने लगी पर फ्रिज के पास आकर रुक गयी, उसने सुना इशा रोहन को बोल रही थी।
इशा: बेटा थोड़ा सबर करो रात को चूस दूँगी और जी भर के चोद भी लेना।
रोहन : माँ आज तो पापा भी आंटी को बहुत घूर रहे थे। आपने ध्यान दिया ?
इशा: ये तो मैं तेरे बारे में भी कह सकती हूँ। मैंने तो तुझे भी नमिता को घूरते देखा है।
रोहन : माँ तुम भी ना?
इशा: चल अब छोड़ मेरे दूध और भाग यहाँ से नमिता आती होगी।
नमिता ने झाँका और देखा कि वह दोनों चिपके हुए थे और होंठ चूस रहे थे।
फिर रोहन बाहर निकलने लगा और नमिता को फ्रिज के पास देख कर चौंका पर बाहर निकल गया।
नमिता ने सोचा कि सब कुछ आसान हो गया है अब तो ,क्योंकि आग लगी है दोनों तरफ़ बराबर से।
नमिता: तो ये बात है ।
इशा हड़बड़ा कर : क्या बात है?
नमिता हँसते हुए: बेटे से मज़े लिए जा रहे हैं ।
इशा: नहीं तो ऐसा कुछ नहीं है , वह वह —
नमिता हँसते हुए: अरे कोई बात नहीं। क्यों परेशान हो रही हो। अच्छा ये तो बताओ कि राकेश को पता है ना कि तुम रोहन से मज़े करती हो?
इशा: नमिता सुनो तो वैसा कुछ नहीं है, मतलब कि कि —
नमिता: मुझे तो ऐसा लगता है कि राकेश और मानसी भी मज़े लेते हैं। चक्कर क्या है बताओ ना?
इशा: अब क्या बताऊँ? मैं नहीं जानती कि क्या और कैसे बोलूँ?
नमिता: चलो अब मैं तुमको कुछ बताती हूँ और उसके बाद तुम ख़ुद ही मुझसे सब बता दोगी।
इशा: क्या बात दोगी?
नमिता: यही कि मैं भी अपने बेटे राज से मज़े लेती हूँ।
कमरे में जैसे बम गिरा।
इशा: क्या बोली?
नमिता : वही जो तू सुनी। जैसे तुम अपने बेटे से लगी हुई हो वैसे ही मैं भी अपने ही बेटे से लगी हुई हूँ।
इशा: ओह, गॉड । अब मैं क्या बोलूँ, समझ नहीं आ रहा है। हाँ सच में हम भी इन्सेस्ट सेक्स करते हैं। हम पूरे परिवार में एक साथ सोते हैं और एक दूसरे से सेक्स करते हैं।
नमिता: अभी तुम रोहन को कह रही थी ना कि राकेश और वह भी मुझे घूर रहे थे। और राज भी तुम्हें घूर रहा था।
इशा: हाँ ये सच है पर तुम कहना क्या चाहती हो?
नमिता: यही कि सबको मौक़ा दे दो ताकि हर कोई अपनी इच्छा पूरी कर ले।
इशा : मतलब कि हम सब एक दूसरे से मज़ा ले लें?
नमिता: क्यों नहीं , इसमें बुराई क्या है? बोलो तुम क्या चाहती हो?
इशा मुस्कुरा कर बोली: सच मज़ा आ जाएगा। चलो ग्रूप सेक्स करते हैं।
नमिता हँसते हुए: हाँ बिलकुल। चलो प्लान किया जाए।
इशा : चलो।
इशा और नमिता ने खाना लगाया और सब खाने लगे। हँसी मज़ाक़ चलता रहा। कई जोक्स सुनाए गए।
खाने के बाद इशा और नमिता कपड़े बदलने के लिए इशा के बेडरूम में आयीं। नमिता ने बैग से एक सेक्सी नायटी निकाली जो वह फ़ार्म हाउस से लायी थी। यह स्लीव्लेस थी और बड़े गले की थी जिसने से उसकी आधी चूचियाँ ज़रूर दिखायी देंगीं। उसमें कमर के पास एक हिस्सा खुला हुआ भी था जहाँ से उसका आधा पेट और कमर दिखायी देगी।
अब नमिता ने अपनी टॉप उतार दी और इसकी ब्रा में फँसी हुई चूचियाँ इशा के सामने थीं। वह ललचायी निगाहों से उनको देख रही थी। तभी नमिता ने अपनी जींस भी निकाल दी और उसकी सेक्सी पैंटी इशा के सामने थी।
नमिता ने देखा कि इशा अपने होंठों पर जीभ फिर रही है।
वह बोली: क्या हुआ? ऐसे क्या देख रही है? ये सब तो तेरे पास भी है।
इशा आह भरके बोली: है तो पर इतना मस्त नहीं है।
नमिता: ज़रा मैं भी तो देखूँ कि तेरा कैसा है? चल उतार ।
इशा उसके बदन को घूरते हुए अपने कपड़े खोल दी और ब्रा और पैंटी में उसका मस्त बदन देखकर नमिता बोली: आऽऽह क्या माल है यार तू तो?
इशा : सच मैं माल हूँ?
नमिता: बिलकुल मस्त माल।
अब नमिता इशा की ओर बढ़ी और उसकी कमर पर हाथ रखकर उसकी आँखों में देखी और बोली: लेज़्बीयन चलता है?
इशा मुस्कुरा के बोली: दौड़ता है।
अब नमिता ने उसको अपने से चिपका लिया और उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए। अब दोनों ने एक लम्बा चुम्बन लिया। नमिता का हाथ उसकी पीठ और कमर से होता हुआ उसकी गाँड़ पर फिरने लगा। इशा भी उसकी गाँड़ सहलाकर मस्ती से सिसकने लगी। फिर दोनों ने एक दूसरे की छातियाँ दबानी शुरू कीं। जल्दी ही उनके हाथ पैंटी के ऊपर और फिर अंदर रेंगने लगे।
दोनों आह करके चिपकी रहीं।
इशा: चलो इसके लिए अलग से टाइम निकालेंगे। अब देखा जाय कि आगे का प्रोग्राम कैसे बढ़े ।
नमिता हँसते हुए बोली: ठीक है। अब उसने नायटी पहनी और वह उसकी घुटनों से थोड़ा ही नीचे तक थी।
इशा: ग़ज़ब की सेक्सी दिख रही हो। मैं भी कोई ऐसी ही सेक्सी नायटी निकालती हूँ ।
वह भी एक बहुत ही सेक्सी काली सी नायटी पहनी जिसमें से उसका आधा जिस्म झाँक रहा था। उसकी नायटी में से उसके आधी चूचियाँ और आधी जाँघें भी दिख रही थी।
नमिता: चलो अब हेवी मेक अप करते जैसे xxx फ़िल्मों में रंडियां करती हैं। लड़के और राकेश पागल हो जाएँगे।
इशा हँसते हुए: आज रँडियों वाला काम ही तो करना है। मेरी बुर तो तेरे चूमने से ही गीली हो गई है।
नमिता: मेरी भी गीली हो गयी है और ये सोचकर भी मैं बहुत गरम हो रही हूँ कि अभी कुछ देर में क्या होने वाला है।
सब बाहर ड्रॉइंग रूम में आए जहाँ वह TV देख रहा था।टीवी पर एक समाचार चल रहा था कि उनके राज्यपाल का देहांत हो गया है। और राजकीय शोक घोषित हो गया है और २ दिन स्कूल और दफ़्तर बंद रहेंगे।
राज: ओह माँ ये तो स्कूल की फिर से छुट्टियाँ हो गयीं। क्या बोरिंग है?
रोहन : बोरिंग? यार मज़ा आ गया कि २ दिन छुट्टी मनाएँगे ।
इशा: नमिता तुम कह रही थी राज के स्कूल के कारण ही तुमको जाना है और अब स्कूल तो बंद ही हो गया। चलो अब यहीं रुको २ दिन, और बच्चों को कल पिकनिक पर ले चलेंगे। ठीक है?
सब एक साथ चिल्लाए: ठीक है। राज भी उनके साथ ही चिल्लाया।
नमिता: ओह तो राज ने रुकने का प्रोग्राम बना लिया है। चलो ठीक है।
इशा ख़ुश होके बोली: चलो अब डिनर बनाते हैं। और नमिता और वह किचन में चली गयी।
राकेश टीवी देखने लगा, और बच्चे रोहन के कमरे में आ गए। थोड़ी देर बातें करते रहे तभी राकेश ने आवाज़ लगायी: मानसी बेटा पानी देना।
मानसी उठकर बाहर गयी किचन की ओर।
तभी रोहन बाथरूम गया और पता नहीं राज में मन में क्या आया कि वह धीरे से बाहर आके परदे के पीछे से ड्रॉइंग रूम में झाँकने लगा। उसने देखा कि राकेश का हाथ अपने हाफ़ पैंट पर था और वह अपना लौड़ा दबा रहा था, TV चालू था। तभी मानसी पानी लेकर आइ और राकेश ने पानी लेते हुए दूसरा हाथ उसकी छाती पर रखा और उसको दबाने लगा और फिर उसको खींचकर उसके होंठ चूम लिया। पानी पीते हुए उसका हाथ उसकी जाँघों को सहलाने लगा। शायद उसका हाथ उसकी बुर तक चला गया था क्योंकि वह बोल पड़ी: हाय पापा क्या कर रहे हो।मेहमान आए हुए हैं, कोई देख लेगा।
राकेश हँसते हुए उसकी चूचि दबाया और उसको चूमकर छोड़ दिया। वह वापस मुड़ी तो उसके गोल गोल छोटे से चूतरों को भी दबा दिया। मानसी ने अपने कपड़े ठीक किए और वापस भाई के कमरे में आ गयी।
राज भी जल्दी से अंदर आ गया। उसी समय मानसी और रोहन भी आ गए । राज ये बात माँ को बताना चाहता था।
राज: मैं ज़रा माँ से मिल कर आता हूँ। वह किचन में गया और नमिता से बोला: माँ मेरे बैग में कुछ समान नहीं दिख रहा है। एक मिनट आइए ना।
नमिता उसे इशा के बेडरूम में ले गयी और वहाँ राज धीरे से बोला: माँ, अभी अभी मैंने देखा कि अंकल अपनी बेटी के शरीर का मज़ा ले रहे थे । वह उसकी चूचि और बुर भी दबा रहे थे।
नमिता : ओह, मुझे भी लग रहा है कि इस परिवार में कुछ तो चल रहा है । मैंने भी खाना खाते हुए राकेश को मानसी की जाँघ सहलाते देखा था।
राज: एक और बात मुझे लगता है की भाई बहन में भी कुछ चल रहा है क्योंकि वह भी कार में उसकी जाँघें सहला रहा था।
नमिता: ओह तो ये बात है। इशा भी इस सबमे शामिल है क्योंकि दोपहर को रोहन अपनी कोहनी से उसकी छाती दबा रहा था और वो कुछ नहीं बोली।
राज: माँ कहीं ये लोग भी हमारे जैसे तो नहीं हैं? इन्सेस्ट सेक्स मानने वाले।
नमिता: हो सकता है बेटा। मैं देख रही हूँ तू मानसी और इशा दोनों को घूर रहा है, सब ठीक है ना?
राज: माँ आप भी ना, कुछ भी बोल देती हो।
नमिता: देख राकेश और रोहन भी मुझे घूर रहे हैं।
राज: माँ आप क्या बोलती हो, इनके साथ भी हमें ग्रूप सेक्स करना चाहिए क्या?
नमिता: तू बोल।क्या चाहता है?
राज: माँ, ये हो सकता है क्या?
नमिता: मुझे विश्वास है हो जाएगा। बोल करूँ बात इशा से ? पर ये तो बता तू किसको करेगा मानसी को या इशा को?
राज: हा हा दोनों को।
नमिता: ओह, फिर राकेश और रोहन भी मेरी लेंगे , तुझे ऐतराज़ तो नहीं होगा ना?
राज: माँ अगर आपको कोई ऐतराज़ नहीं है तो मुझे भी नहीं है।
नमिता: चल फिर जा मैं जुगाड़ करती हूँ। तेरा खड़ा हो गया है ना? ये कहते हुए उसने उसका लौड़ा पकड़ा और उसकी अकड़न देख कर अपना बुर गीला कर बैठी। राज ने भी उसकी चूचि दबा दी और वह हँसते हुए किचन में वापस जाने लगी ये सोचते हुए कि कैसे बात शुरू करे इशा के साथ इस टॉपिक पर।
उधर रोहन मानसी को बोला: मैं अभी आता हूँ ।और किचन में गया और अपनी माँ को अकेला पा कर उससे लिपट गया और बोला: माँ क्यों इनको रोक लिया अब हम मज़े कैसे करेंगे।
इशा हँसते हुए बोली: क्यों रात को क्या दिक़्क़त है ? सबके सोने के बाद मिल लेंगे।
रोहन उसको चूमते हुए बोला: माँ सच सुबह से बहुत इच्छा हो रही है। चलो ना आप थोड़ा सा चूस दो।
इशा: अरे बदमाश, नमिता कभी भी अंदर आ जाएगी। पागल जैसी बात ना कर।
उधर नमिता राज से मिलकर किचन में घुसने लगी पर फ्रिज के पास आकर रुक गयी, उसने सुना इशा रोहन को बोल रही थी।
इशा: बेटा थोड़ा सबर करो रात को चूस दूँगी और जी भर के चोद भी लेना।
रोहन : माँ आज तो पापा भी आंटी को बहुत घूर रहे थे। आपने ध्यान दिया ?
इशा: ये तो मैं तेरे बारे में भी कह सकती हूँ। मैंने तो तुझे भी नमिता को घूरते देखा है।
रोहन : माँ तुम भी ना?
इशा: चल अब छोड़ मेरे दूध और भाग यहाँ से नमिता आती होगी।
नमिता ने झाँका और देखा कि वह दोनों चिपके हुए थे और होंठ चूस रहे थे।
फिर रोहन बाहर निकलने लगा और नमिता को फ्रिज के पास देख कर चौंका पर बाहर निकल गया।
नमिता ने सोचा कि सब कुछ आसान हो गया है अब तो ,क्योंकि आग लगी है दोनों तरफ़ बराबर से।
नमिता: तो ये बात है ।
इशा हड़बड़ा कर : क्या बात है?
नमिता हँसते हुए: बेटे से मज़े लिए जा रहे हैं ।
इशा: नहीं तो ऐसा कुछ नहीं है , वह वह —
नमिता हँसते हुए: अरे कोई बात नहीं। क्यों परेशान हो रही हो। अच्छा ये तो बताओ कि राकेश को पता है ना कि तुम रोहन से मज़े करती हो?
इशा: नमिता सुनो तो वैसा कुछ नहीं है, मतलब कि कि —
नमिता: मुझे तो ऐसा लगता है कि राकेश और मानसी भी मज़े लेते हैं। चक्कर क्या है बताओ ना?
इशा: अब क्या बताऊँ? मैं नहीं जानती कि क्या और कैसे बोलूँ?
नमिता: चलो अब मैं तुमको कुछ बताती हूँ और उसके बाद तुम ख़ुद ही मुझसे सब बता दोगी।
इशा: क्या बात दोगी?
नमिता: यही कि मैं भी अपने बेटे राज से मज़े लेती हूँ।
कमरे में जैसे बम गिरा।
इशा: क्या बोली?
नमिता : वही जो तू सुनी। जैसे तुम अपने बेटे से लगी हुई हो वैसे ही मैं भी अपने ही बेटे से लगी हुई हूँ।
इशा: ओह, गॉड । अब मैं क्या बोलूँ, समझ नहीं आ रहा है। हाँ सच में हम भी इन्सेस्ट सेक्स करते हैं। हम पूरे परिवार में एक साथ सोते हैं और एक दूसरे से सेक्स करते हैं।
नमिता: अभी तुम रोहन को कह रही थी ना कि राकेश और वह भी मुझे घूर रहे थे। और राज भी तुम्हें घूर रहा था।
इशा: हाँ ये सच है पर तुम कहना क्या चाहती हो?
नमिता: यही कि सबको मौक़ा दे दो ताकि हर कोई अपनी इच्छा पूरी कर ले।
इशा : मतलब कि हम सब एक दूसरे से मज़ा ले लें?
नमिता: क्यों नहीं , इसमें बुराई क्या है? बोलो तुम क्या चाहती हो?
इशा मुस्कुरा कर बोली: सच मज़ा आ जाएगा। चलो ग्रूप सेक्स करते हैं।
नमिता हँसते हुए: हाँ बिलकुल। चलो प्लान किया जाए।
इशा : चलो।
इशा और नमिता ने खाना लगाया और सब खाने लगे। हँसी मज़ाक़ चलता रहा। कई जोक्स सुनाए गए।
खाने के बाद इशा और नमिता कपड़े बदलने के लिए इशा के बेडरूम में आयीं। नमिता ने बैग से एक सेक्सी नायटी निकाली जो वह फ़ार्म हाउस से लायी थी। यह स्लीव्लेस थी और बड़े गले की थी जिसने से उसकी आधी चूचियाँ ज़रूर दिखायी देंगीं। उसमें कमर के पास एक हिस्सा खुला हुआ भी था जहाँ से उसका आधा पेट और कमर दिखायी देगी।
अब नमिता ने अपनी टॉप उतार दी और इसकी ब्रा में फँसी हुई चूचियाँ इशा के सामने थीं। वह ललचायी निगाहों से उनको देख रही थी। तभी नमिता ने अपनी जींस भी निकाल दी और उसकी सेक्सी पैंटी इशा के सामने थी।
नमिता ने देखा कि इशा अपने होंठों पर जीभ फिर रही है।
वह बोली: क्या हुआ? ऐसे क्या देख रही है? ये सब तो तेरे पास भी है।
इशा आह भरके बोली: है तो पर इतना मस्त नहीं है।
नमिता: ज़रा मैं भी तो देखूँ कि तेरा कैसा है? चल उतार ।
इशा उसके बदन को घूरते हुए अपने कपड़े खोल दी और ब्रा और पैंटी में उसका मस्त बदन देखकर नमिता बोली: आऽऽह क्या माल है यार तू तो?
इशा : सच मैं माल हूँ?
नमिता: बिलकुल मस्त माल।
अब नमिता इशा की ओर बढ़ी और उसकी कमर पर हाथ रखकर उसकी आँखों में देखी और बोली: लेज़्बीयन चलता है?
इशा मुस्कुरा के बोली: दौड़ता है।
अब नमिता ने उसको अपने से चिपका लिया और उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए। अब दोनों ने एक लम्बा चुम्बन लिया। नमिता का हाथ उसकी पीठ और कमर से होता हुआ उसकी गाँड़ पर फिरने लगा। इशा भी उसकी गाँड़ सहलाकर मस्ती से सिसकने लगी। फिर दोनों ने एक दूसरे की छातियाँ दबानी शुरू कीं। जल्दी ही उनके हाथ पैंटी के ऊपर और फिर अंदर रेंगने लगे।
दोनों आह करके चिपकी रहीं।
इशा: चलो इसके लिए अलग से टाइम निकालेंगे। अब देखा जाय कि आगे का प्रोग्राम कैसे बढ़े ।
नमिता हँसते हुए बोली: ठीक है। अब उसने नायटी पहनी और वह उसकी घुटनों से थोड़ा ही नीचे तक थी।
इशा: ग़ज़ब की सेक्सी दिख रही हो। मैं भी कोई ऐसी ही सेक्सी नायटी निकालती हूँ ।
वह भी एक बहुत ही सेक्सी काली सी नायटी पहनी जिसमें से उसका आधा जिस्म झाँक रहा था। उसकी नायटी में से उसके आधी चूचियाँ और आधी जाँघें भी दिख रही थी।
नमिता: चलो अब हेवी मेक अप करते जैसे xxx फ़िल्मों में रंडियां करती हैं। लड़के और राकेश पागल हो जाएँगे।
इशा हँसते हुए: आज रँडियों वाला काम ही तो करना है। मेरी बुर तो तेरे चूमने से ही गीली हो गई है।
नमिता: मेरी भी गीली हो गयी है और ये सोचकर भी मैं बहुत गरम हो रही हूँ कि अभी कुछ देर में क्या होने वाला है।
इशा: मेरा भी बुरा हाल है और तेरा बेटा बहुत ही सेक्सी है।
नमिता: और सुन ले उसका लौड़ा भी बहुत बड़ा और मोटा भी है।
इशा: सच आऽऽहहह तब तो मज़ा ही आ जाएगा। वैसे रोहन का भी लौड़ा बड़ा ही है और वह भी मस्त चोदता है । हाँ राकेश का थोड़ा पतला है इसलिए वह गाँड़ स्पेशलिस्ट है, हा हा।
नमिता: तब तो मानसी भी उसका लौड़ा आराम से ले लेती होगी।
इशा: नहीं अभी मानसी की सील नहीं टूटी है। वह अभी कुँवारी है। उसकी सील इस जन्म दिन पर ही टूटेगी पूरे परिवार के सामने।
नमिता: परिवार मतलब
इशा: मतलब मेरे मायके वाले और मेरे ससुराल वाले सब आएँगे।
नमिता: ये क्या बात हुई?
इशा: मेरे मायके और ससुराल वाले इन्सेस्ट सेक्स में विश्वास रखते हैं। इसलिए इसकी बुर और गाँड़ का उद्घाटन समारोह सब मिलके मनाएँगे। मैं तुझे बाद में सब बताऊँगी।
नमिता: हाँ ज़रूर बताना , मुझे बहुत उत्सुकता है जानने की।
इशा: ज़रूर। मगर अब चलें मेकअप तो बढ़िया हो गया। पक्की रंडियां दिख रही हैं हम दोनों।
अब दोनों बाहर आयीं और ड्रॉइंग रूम में पहुँची। वहाँ इन दोनों को ऐसी अवस्था में देखकर जैसे सन्नाटा छा गया।
राज कभी अपनी माँ को और कभी आंटी को देख रहा था और उनकी बाहर निकली हुई चूचियाँ और नंगी जाँघें और नंगा पेट और कमर देखकर अपना लौड़ा सहलाने लगा जो अब तन सा गया था।
क़रीब यही हाल रोहन का भी था और वह भी अपनी माँ और आंटी को देखकर पागल सा होकर अपना लौड़ा सहलाने लगा।
राकेश का भी मुँह खुला रह गया था क्योंकि उसे भी पता नहीं था कि आगे क्या होने वाला है।वह कभी अपनी बीवी और कभी नमिता को देख रहा था और उसने भी अपना लौड़ा दबाना चालू किया।
भोली मानसी जब कुछ नहीं समझ पायी तो बोली: मम्मी ये आप दोनों कैसे कपड़े पहनी हों? और ये कैसा मेक अप किया है ?
इशा: बेटा, वो क्या है कि आज तेरा भाई और तेरे पापा तेरी नमिता आंटी को बहुत घूर रहे थे और ये भोला सा दिखने वाला राज भी मुझे और शायद तुझे भी घूर रहे थे। तो हमने सोचा कि ये लोग जो देखना चाहते हैं इनको दिखा दिया जाए। क्यों नमिता, ऐसा ही है ना?
नमिता: हाँ बिलकुल ऐसा ही है।
अब कमरे में पिन ड्रॉप साइलेन्स छा गया। सबको मानो साँप सूंघ गया हो।
आख़िर में राकेश ने मौन तोड़ा: वाह ये तो बढ़िया सोचा तुम दोनों ने। चलो जब इतनी तय्यार हुई तो मॉडल की तरह चल के भी दिखा दो।
इशा हँसते हुए बोली: मॉडल की तरह या रँडी की तरह?
राकेश: आऽऽऽऽहहह मज़ा तो रँडी की तरह चलोगी तो ज़्यादा आएगा मेरी जान।
इशा ने नमिता को देखा और वह मुस्कुरा दी।
अब इशा कमरे के एक सिरे से दूसरे सिरे तक गाँड़ मटका कर चल के दिखाने लगी। नमिता भी उसके साथ वैसे ही चलने लगी गाँड़ मटका मटका कर।
तभी राकेश उठा और एक भोजपुरी गाना लगा दिया जिसमें बहुत बीट्स थीं हालाँकि शब्द बड़े ही अश्लील थे।
वह आके इशा की कमर पकड़के नाचने लगा।
इशा भी अपनी छातियाँ हिला कर नाचने लगी। अब नमिता को भी जोश आ गया और वह भी अपनी कमर और छातियाँ हिलाके नाचने लगी।
राकेश ने अब नमिता की कमर में हाथ डालके उसके साथ भी नाचना शुरू किया और नमिता भी अपनी गाँड़ मटका कर दोनों लड़कों को मस्त कर दी।
पूरा कमरा सेक्सी गाने और सेक्सी अदाओं से जैसे चार्ज हो चला था।
अब नमिता ने अगली चाल चली । वह जाके मानसी को खड़ा की और उसको अपनी बाहों में लेकर नाचने लगी। जल्द ही वह भी मूड में आ गयी।वह भी अपनी छोटी छोटी चूचियाँ हिलाकर नाचने लगी। वह भी अपनी गोल गोल चूतर मटकाकर नाचने लगी।
राज और रोहन की पैंट तो आगे से पूरी तरह फूल गयी थीं। अब नमिता राज को पकड़के खड़ा की और नाचने लगी। राज भी जल्दी ही मूड में आ गया और अपनी कमर हिलाके नाचने लगा।
इशा भी अपने बेटे को उठाके लाई और वह भी उससे चिपक कर नाचने लगा।
इशा ने नाचते हुए अपनी बेटी मानसी का टॉप उतार दिया और एक छोटी सी ब्रा में उसकी जवान होती चूचियाँ देखकर सब लोग मस्ती से भर गए। अब राकेश उसको पकड़के उसकी चूचियाँ दबाने लगा। और नमिता भी नाचते हुए रोहन के पास जाके उसको अपने सीने से चिपका ली और कमर मटका कर अपने सामने के हिस्से को उसके जवान शरीर से रगड़ने लगी।
इशा भी कहाँ चुप रहने वाली थी उसने भी राज को अपने से चिपका लिया और घूम गयी। अब उसके चूतरों पर राज का खड़ा लौड़ा दस्तक दे रहा था। वह अब पीछे को धक्का मारके उसके लौड़े के ठोकर का मज़ा ले रही थी।
तभी नमिता ने अपने होंठ रोहन के गर्दन पर रख दिए और वहाँ चूमने लगी। रोहन का हाथ भी उसकी नंगी कमर पर पहुँचा और वह उसकी चिकनाई को महसूस करके अपना लौड़ा उसके पेट में दबाने लगा। अब राकेश नमिता को पकड़ा और उसकी चूचियाँ दबाने लगा और वह मस्त हो गयी। तभी राज मानसी के होंठ चूसने लगा। और उसकी गोलायीयों का मज़ा लेने लगा । उसने ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ चूमकर लड़की को गरम कर दिया। उधर इशा और रोहन एक दूसरे को चूमने लगे।
राकेश बोला: चलो हमारे बेडरूम में चलो।
सब एक दूसरे से लिपटे हुए बेडरूम में आए। बड़ा सा बिस्तर था वहाँ जिसमें सब एक दूसरे से चिपके हुए बैठ गए ।
राकेश: चलो अब कुछ नया करते हैं और वह लूडो की एक गोटी लाया और बोला: जिसका सबसे बड़ा नम्बर आएगा वह अपना एक कपड़ा खोलेगा। और सबसे प्यार करेगा।
सब हँसते हुए गोटी खेले। नमिता का नम्बर आया और उसने अपना गाउन खोल दिया।
अब वह राकेश के पास गयी तो वह उसकी चूचि ब्रा के ऊपर से चूमने लगा। राज ने भी पैंटी के ऊपर से बुर दबाई। रोहन भी उसके चूतरों को दबाके मस्ती से भर गया। मानसी और इशा ने भी चूची दबाई।
अगला नम्बर मानसी का आया और उसका स्कर्ट उतारा और उस कली को ब्रा और पैंटी में देखकर सब पागल हो गए। आख़िर में राज और रोहन भी अपनी चड्डी में आ गए थे और राकेश ने सबसे पहली अपनी चड्डी उतारी । नमिता ने देखा कि उसका लौड़ा लम्बा तो ठीक ही था पर ज़्यादा मोटा नहीं था। फिर पूरी नंगी होने वाली इशा थी। उसका भरा हुआ बदन राज के चड्डी में फँसे लौड़े को बहुत परेशान कर दिया।
अगला नंगा राज हुआ और उसके लौड़े को देखकर इशा की वाह निकल गयी। और मानसी की आँखें फैल गयी। अब बारी नमिता की आयी और उसका नंगा बदन देखकर राकेश और रोहन तो जैसे ख़ुशी से भर गए। आख़िर में रोहन की भी चड्डी उतरी और उसका लौड़ा राज के लौड़े से बस थोड़ा सा ही कम मोटा था। नमिता की आँख चमक उठी।
राकेश: देखो आप सबको बता दूँ कि मानसी अभी नहीं चुदेंगीं। हाँ इसके अलावा वह सब कुछ कर सकती है।
इशा: मुझे तो राज से चुदवाना है अगर नमिता को कोई अब्जेक्शन ना हो तो।
नमिता: मुझे क्यों अब्जेक्शन होगा।
राज ने इशा को गिरा दिया बिस्तर पर और उसपर चढ़ कर उसे चूमने लगा।
उधर नमिता को रोहन और राकेश दोनों ने पकड़ लिया और चूमने लगे। रोहन सामने से मज़े ले रहा था चूचियों के और राकेश पीछे से उसकी गर्दन चूमते हुए उसके चूतर दबा रहा था और लौड़ेको गाँड़ पर दबा भी रहा था। मानसी चुपचाप बैथे हुए सबको मस्ती करते देख रही थी और अपने एक निपल को दबाते हुए अपनी बुर में ऊँगली रगड़ रही थी।
उधर राज इशा की चूचियाँ चूसने लगा और नीचे आके उसकी बुर को देखकर मस्त हो गया। माँ जैसे गोरी नहीं थी पर आह क्या मस्त कचौड़ी सी बुर थी। उसने चिकनी बुर को सहलाया और फिर उसने अपना मुँह डाल दिया और उसकी बुर की फाँकों को फैलाकर उसके अंदर के गुलाबी हिस्से को चूमते हुए चाटने लगा।
इशा अब आऽऽऽह करने लगी और बोली: आऽऽहहह बेटा , आऽऽह मुझे भी तेरा लौड़ा चूसना है , चल ६९ में आ जाओ।
अब राज उसके ऊपर उलटा हो कर लेटा और अपने लौड़े को उसके मुँह पर रखा और इशा मज़े से उसके लौड़े के सुपाडे को चाटी और वहाँ लगे प्रीकम को मस्ती से गटक गयी और फिर चूसने लगी। राज भी उसकी बुर चूस और चाट कर गरम हो गया था। इशा ने राज के गाँड़ को भी सहलाया और उधर राज भी उसके पैरों को पूरा उठाया और उसकी गाँड़ को चाटने लगा ।
इशा हाऽऽय्यय करके बोली: आह बेटा अब चोओओओओओओ द दे नाआऽऽऽऽऽ। आह कितना मस्त लौड़ा है मेरा जी करता है कि चूसती ही जाऊँ।
वह अपनी जीभ से पूरे लौड़े और बाल्स को चूसते ही जा रही थी। फिर राज उठकर घुमा और उसके पैरों को अपने कंधे पर रख के उसकी बुर में अपना मोटा लौड़ा डालने लगा।
इशा: आऽऽहहहह बेटा धीरे सेएएएएएए। हाऽऽयय्यय मरीइइइइइओ।
अब राज ने एक धक्का और दिया और लौड़ा उसकी बुर में धँसता चला गया।
मानसी उसके पास आके देखने लगी तो वह एक हाथ से मानसी की और एक हाथ से इशा की चूचि दबाने लगा । उसने महसूस किया कि चूचियों में कितना फ़र्क़ है। माँ की बड़ी और नरम है जबकि बेटी की छोटी लेकिन सख़्त हैं।
क़रीब दस मिनट की चुदाई के बाद इशा चिल्लाने लगी: आऽऽहहहह बेएएएएएटा फ़ाआऽऽऽऽड़ देएएएएएए मेरीइइइइइइइइइ बुर हाय्य्य्य्य क्या लंड है हाऽऽय्य मैं गयी।
अब इशा अपनी कमर उछालके झड़ने लगी।
राज भी उसको ज़ोर ज़ोर से चोदते हुए बोला: आंटी, मानसी लौड़ा चूस लेती है क्या?
इशा हाँफती हुई बोली: आऽऽहहह हाँ बेटा बहुत मस्ती से चूसती है। हाऽऽय्यय अब रुक जा , मैं और नहीं सह सकती , निकाल अपना लंड और मानसी से चूसवा ले।
राज ने अपना लौड़ा निकाला और पूरा रस से भरा गन्ना मानसी के मुँह के पास ले आया और वह उसे पकड़के चूसने लगी। उसके छोटे से मुँह के लिए राज का लौड़ा काफ़ी बड़ा था पर वह बड़े उत्साह से चूसे जा रही थी। राज भी उसकी कठोर सेबों को दबाकर मस्ती से चूसवा रहा था।
राज ने मुँह घुमाके देखा तो वह मुस्कुरा उठा । नमिता रोहन के ऊपर चढ़ी हुई थी और उसकी बुर में उसका लौड़ा घुसा हुआ था और वह उछल उछल के चुदवा रही थी और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ रोहन बड़े मज़े से दबाए जा रहा था। राकेश ने अपने लौड़े पर क्रीम लगायी और नमिता को थोड़ा रुकने को बोला और उसकी गाँड़ में भी क्रीम लगाके अपने लौड़े को नमिता की गाँड़ में पेल दिया। नमिता की आऽऽऽहहह निकल गयी । जल्दी ही उसका लौड़ा उसकी गाँड़ में अजस्ट हो गया और वह उसकी गाँड़ मारने लगा। अब नमिता भी दोनों छेदों में लौड़े डलवाके मस्त हो चुकी थी और चूतर हिला हिला के डबल चुदायी का आनंद ले रही थी।
रोहन भी नीचे से चूतर उछालके उसकी बुर को चोदे जा रहा था। राकेश पीछे से गाँड़ मारे जा रहा था।
नमिता चिल्लाने लगी: आऽऽऽहहहब फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओ मेरीइइइइइइइ गाँड़ हाऽऽऽय्यय मैं तो गइइइइइइइइ ।
वह अब झड़ने लगी। उधर राकेश और रोहन भी झड़ने लगे।
नमिता: और सुन ले उसका लौड़ा भी बहुत बड़ा और मोटा भी है।
इशा: सच आऽऽहहह तब तो मज़ा ही आ जाएगा। वैसे रोहन का भी लौड़ा बड़ा ही है और वह भी मस्त चोदता है । हाँ राकेश का थोड़ा पतला है इसलिए वह गाँड़ स्पेशलिस्ट है, हा हा।
नमिता: तब तो मानसी भी उसका लौड़ा आराम से ले लेती होगी।
इशा: नहीं अभी मानसी की सील नहीं टूटी है। वह अभी कुँवारी है। उसकी सील इस जन्म दिन पर ही टूटेगी पूरे परिवार के सामने।
नमिता: परिवार मतलब
इशा: मतलब मेरे मायके वाले और मेरे ससुराल वाले सब आएँगे।
नमिता: ये क्या बात हुई?
इशा: मेरे मायके और ससुराल वाले इन्सेस्ट सेक्स में विश्वास रखते हैं। इसलिए इसकी बुर और गाँड़ का उद्घाटन समारोह सब मिलके मनाएँगे। मैं तुझे बाद में सब बताऊँगी।
नमिता: हाँ ज़रूर बताना , मुझे बहुत उत्सुकता है जानने की।
इशा: ज़रूर। मगर अब चलें मेकअप तो बढ़िया हो गया। पक्की रंडियां दिख रही हैं हम दोनों।
अब दोनों बाहर आयीं और ड्रॉइंग रूम में पहुँची। वहाँ इन दोनों को ऐसी अवस्था में देखकर जैसे सन्नाटा छा गया।
राज कभी अपनी माँ को और कभी आंटी को देख रहा था और उनकी बाहर निकली हुई चूचियाँ और नंगी जाँघें और नंगा पेट और कमर देखकर अपना लौड़ा सहलाने लगा जो अब तन सा गया था।
क़रीब यही हाल रोहन का भी था और वह भी अपनी माँ और आंटी को देखकर पागल सा होकर अपना लौड़ा सहलाने लगा।
राकेश का भी मुँह खुला रह गया था क्योंकि उसे भी पता नहीं था कि आगे क्या होने वाला है।वह कभी अपनी बीवी और कभी नमिता को देख रहा था और उसने भी अपना लौड़ा दबाना चालू किया।
भोली मानसी जब कुछ नहीं समझ पायी तो बोली: मम्मी ये आप दोनों कैसे कपड़े पहनी हों? और ये कैसा मेक अप किया है ?
इशा: बेटा, वो क्या है कि आज तेरा भाई और तेरे पापा तेरी नमिता आंटी को बहुत घूर रहे थे और ये भोला सा दिखने वाला राज भी मुझे और शायद तुझे भी घूर रहे थे। तो हमने सोचा कि ये लोग जो देखना चाहते हैं इनको दिखा दिया जाए। क्यों नमिता, ऐसा ही है ना?
नमिता: हाँ बिलकुल ऐसा ही है।
अब कमरे में पिन ड्रॉप साइलेन्स छा गया। सबको मानो साँप सूंघ गया हो।
आख़िर में राकेश ने मौन तोड़ा: वाह ये तो बढ़िया सोचा तुम दोनों ने। चलो जब इतनी तय्यार हुई तो मॉडल की तरह चल के भी दिखा दो।
इशा हँसते हुए बोली: मॉडल की तरह या रँडी की तरह?
राकेश: आऽऽऽऽहहह मज़ा तो रँडी की तरह चलोगी तो ज़्यादा आएगा मेरी जान।
इशा ने नमिता को देखा और वह मुस्कुरा दी।
अब इशा कमरे के एक सिरे से दूसरे सिरे तक गाँड़ मटका कर चल के दिखाने लगी। नमिता भी उसके साथ वैसे ही चलने लगी गाँड़ मटका मटका कर।
तभी राकेश उठा और एक भोजपुरी गाना लगा दिया जिसमें बहुत बीट्स थीं हालाँकि शब्द बड़े ही अश्लील थे।
वह आके इशा की कमर पकड़के नाचने लगा।
इशा भी अपनी छातियाँ हिला कर नाचने लगी। अब नमिता को भी जोश आ गया और वह भी अपनी कमर और छातियाँ हिलाके नाचने लगी।
राकेश ने अब नमिता की कमर में हाथ डालके उसके साथ भी नाचना शुरू किया और नमिता भी अपनी गाँड़ मटका कर दोनों लड़कों को मस्त कर दी।
पूरा कमरा सेक्सी गाने और सेक्सी अदाओं से जैसे चार्ज हो चला था।
अब नमिता ने अगली चाल चली । वह जाके मानसी को खड़ा की और उसको अपनी बाहों में लेकर नाचने लगी। जल्द ही वह भी मूड में आ गयी।वह भी अपनी छोटी छोटी चूचियाँ हिलाकर नाचने लगी। वह भी अपनी गोल गोल चूतर मटकाकर नाचने लगी।
राज और रोहन की पैंट तो आगे से पूरी तरह फूल गयी थीं। अब नमिता राज को पकड़के खड़ा की और नाचने लगी। राज भी जल्दी ही मूड में आ गया और अपनी कमर हिलाके नाचने लगा।
इशा भी अपने बेटे को उठाके लाई और वह भी उससे चिपक कर नाचने लगा।
इशा ने नाचते हुए अपनी बेटी मानसी का टॉप उतार दिया और एक छोटी सी ब्रा में उसकी जवान होती चूचियाँ देखकर सब लोग मस्ती से भर गए। अब राकेश उसको पकड़के उसकी चूचियाँ दबाने लगा। और नमिता भी नाचते हुए रोहन के पास जाके उसको अपने सीने से चिपका ली और कमर मटका कर अपने सामने के हिस्से को उसके जवान शरीर से रगड़ने लगी।
इशा भी कहाँ चुप रहने वाली थी उसने भी राज को अपने से चिपका लिया और घूम गयी। अब उसके चूतरों पर राज का खड़ा लौड़ा दस्तक दे रहा था। वह अब पीछे को धक्का मारके उसके लौड़े के ठोकर का मज़ा ले रही थी।
तभी नमिता ने अपने होंठ रोहन के गर्दन पर रख दिए और वहाँ चूमने लगी। रोहन का हाथ भी उसकी नंगी कमर पर पहुँचा और वह उसकी चिकनाई को महसूस करके अपना लौड़ा उसके पेट में दबाने लगा। अब राकेश नमिता को पकड़ा और उसकी चूचियाँ दबाने लगा और वह मस्त हो गयी। तभी राज मानसी के होंठ चूसने लगा। और उसकी गोलायीयों का मज़ा लेने लगा । उसने ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ चूमकर लड़की को गरम कर दिया। उधर इशा और रोहन एक दूसरे को चूमने लगे।
राकेश बोला: चलो हमारे बेडरूम में चलो।
सब एक दूसरे से लिपटे हुए बेडरूम में आए। बड़ा सा बिस्तर था वहाँ जिसमें सब एक दूसरे से चिपके हुए बैठ गए ।
राकेश: चलो अब कुछ नया करते हैं और वह लूडो की एक गोटी लाया और बोला: जिसका सबसे बड़ा नम्बर आएगा वह अपना एक कपड़ा खोलेगा। और सबसे प्यार करेगा।
सब हँसते हुए गोटी खेले। नमिता का नम्बर आया और उसने अपना गाउन खोल दिया।
अब वह राकेश के पास गयी तो वह उसकी चूचि ब्रा के ऊपर से चूमने लगा। राज ने भी पैंटी के ऊपर से बुर दबाई। रोहन भी उसके चूतरों को दबाके मस्ती से भर गया। मानसी और इशा ने भी चूची दबाई।
अगला नम्बर मानसी का आया और उसका स्कर्ट उतारा और उस कली को ब्रा और पैंटी में देखकर सब पागल हो गए। आख़िर में राज और रोहन भी अपनी चड्डी में आ गए थे और राकेश ने सबसे पहली अपनी चड्डी उतारी । नमिता ने देखा कि उसका लौड़ा लम्बा तो ठीक ही था पर ज़्यादा मोटा नहीं था। फिर पूरी नंगी होने वाली इशा थी। उसका भरा हुआ बदन राज के चड्डी में फँसे लौड़े को बहुत परेशान कर दिया।
अगला नंगा राज हुआ और उसके लौड़े को देखकर इशा की वाह निकल गयी। और मानसी की आँखें फैल गयी। अब बारी नमिता की आयी और उसका नंगा बदन देखकर राकेश और रोहन तो जैसे ख़ुशी से भर गए। आख़िर में रोहन की भी चड्डी उतरी और उसका लौड़ा राज के लौड़े से बस थोड़ा सा ही कम मोटा था। नमिता की आँख चमक उठी।
राकेश: देखो आप सबको बता दूँ कि मानसी अभी नहीं चुदेंगीं। हाँ इसके अलावा वह सब कुछ कर सकती है।
इशा: मुझे तो राज से चुदवाना है अगर नमिता को कोई अब्जेक्शन ना हो तो।
नमिता: मुझे क्यों अब्जेक्शन होगा।
राज ने इशा को गिरा दिया बिस्तर पर और उसपर चढ़ कर उसे चूमने लगा।
उधर नमिता को रोहन और राकेश दोनों ने पकड़ लिया और चूमने लगे। रोहन सामने से मज़े ले रहा था चूचियों के और राकेश पीछे से उसकी गर्दन चूमते हुए उसके चूतर दबा रहा था और लौड़ेको गाँड़ पर दबा भी रहा था। मानसी चुपचाप बैथे हुए सबको मस्ती करते देख रही थी और अपने एक निपल को दबाते हुए अपनी बुर में ऊँगली रगड़ रही थी।
उधर राज इशा की चूचियाँ चूसने लगा और नीचे आके उसकी बुर को देखकर मस्त हो गया। माँ जैसे गोरी नहीं थी पर आह क्या मस्त कचौड़ी सी बुर थी। उसने चिकनी बुर को सहलाया और फिर उसने अपना मुँह डाल दिया और उसकी बुर की फाँकों को फैलाकर उसके अंदर के गुलाबी हिस्से को चूमते हुए चाटने लगा।
इशा अब आऽऽऽह करने लगी और बोली: आऽऽहहह बेटा , आऽऽह मुझे भी तेरा लौड़ा चूसना है , चल ६९ में आ जाओ।
अब राज उसके ऊपर उलटा हो कर लेटा और अपने लौड़े को उसके मुँह पर रखा और इशा मज़े से उसके लौड़े के सुपाडे को चाटी और वहाँ लगे प्रीकम को मस्ती से गटक गयी और फिर चूसने लगी। राज भी उसकी बुर चूस और चाट कर गरम हो गया था। इशा ने राज के गाँड़ को भी सहलाया और उधर राज भी उसके पैरों को पूरा उठाया और उसकी गाँड़ को चाटने लगा ।
इशा हाऽऽय्यय करके बोली: आह बेटा अब चोओओओओओओ द दे नाआऽऽऽऽऽ। आह कितना मस्त लौड़ा है मेरा जी करता है कि चूसती ही जाऊँ।
वह अपनी जीभ से पूरे लौड़े और बाल्स को चूसते ही जा रही थी। फिर राज उठकर घुमा और उसके पैरों को अपने कंधे पर रख के उसकी बुर में अपना मोटा लौड़ा डालने लगा।
इशा: आऽऽहहहह बेटा धीरे सेएएएएएए। हाऽऽयय्यय मरीइइइइइओ।
अब राज ने एक धक्का और दिया और लौड़ा उसकी बुर में धँसता चला गया।
मानसी उसके पास आके देखने लगी तो वह एक हाथ से मानसी की और एक हाथ से इशा की चूचि दबाने लगा । उसने महसूस किया कि चूचियों में कितना फ़र्क़ है। माँ की बड़ी और नरम है जबकि बेटी की छोटी लेकिन सख़्त हैं।
क़रीब दस मिनट की चुदाई के बाद इशा चिल्लाने लगी: आऽऽहहहह बेएएएएएटा फ़ाआऽऽऽऽड़ देएएएएएए मेरीइइइइइइइइइ बुर हाय्य्य्य्य क्या लंड है हाऽऽय्य मैं गयी।
अब इशा अपनी कमर उछालके झड़ने लगी।
राज भी उसको ज़ोर ज़ोर से चोदते हुए बोला: आंटी, मानसी लौड़ा चूस लेती है क्या?
इशा हाँफती हुई बोली: आऽऽहहह हाँ बेटा बहुत मस्ती से चूसती है। हाऽऽय्यय अब रुक जा , मैं और नहीं सह सकती , निकाल अपना लंड और मानसी से चूसवा ले।
राज ने अपना लौड़ा निकाला और पूरा रस से भरा गन्ना मानसी के मुँह के पास ले आया और वह उसे पकड़के चूसने लगी। उसके छोटे से मुँह के लिए राज का लौड़ा काफ़ी बड़ा था पर वह बड़े उत्साह से चूसे जा रही थी। राज भी उसकी कठोर सेबों को दबाकर मस्ती से चूसवा रहा था।
राज ने मुँह घुमाके देखा तो वह मुस्कुरा उठा । नमिता रोहन के ऊपर चढ़ी हुई थी और उसकी बुर में उसका लौड़ा घुसा हुआ था और वह उछल उछल के चुदवा रही थी और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ रोहन बड़े मज़े से दबाए जा रहा था। राकेश ने अपने लौड़े पर क्रीम लगायी और नमिता को थोड़ा रुकने को बोला और उसकी गाँड़ में भी क्रीम लगाके अपने लौड़े को नमिता की गाँड़ में पेल दिया। नमिता की आऽऽऽहहह निकल गयी । जल्दी ही उसका लौड़ा उसकी गाँड़ में अजस्ट हो गया और वह उसकी गाँड़ मारने लगा। अब नमिता भी दोनों छेदों में लौड़े डलवाके मस्त हो चुकी थी और चूतर हिला हिला के डबल चुदायी का आनंद ले रही थी।
रोहन भी नीचे से चूतर उछालके उसकी बुर को चोदे जा रहा था। राकेश पीछे से गाँड़ मारे जा रहा था।
नमिता चिल्लाने लगी: आऽऽऽहहहब फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओ मेरीइइइइइइइ गाँड़ हाऽऽऽय्यय मैं तो गइइइइइइइइ ।
वह अब झड़ने लगी। उधर राकेश और रोहन भी झड़ने लगे।
तभी राज ने भी मानसी के मुँह में पिचकारी छोड़ दी। वह बड़े प्यार से उसका वीर्य पीती चली गई। जब राज की आख़री बूँद भी वह चूस ली तभी उसने लौड़े को मुँह से निकाला।
अब मानसी अपना मुँह पोंछते हुए अपने पापा के मुँह में अपना बुर रख के बैठ गयी मानो वह उसके मुँह में मूत रही हो। राकेश भी अपनी प्यारी बिटिया की बुर चाटने लगा और जल्दी ही उइइइइइइइइइइ कहके मानसी ज़ोर ज़ोर से अपने चूतर हिलाते हुए झड़ने लगी और राकेश उसकी बुर का रस पी गया।
अब सभी झड़ के आराम करने लगे।
सब लोग बाथरूम से फ़्रेश होकर आए और बिस्तर पर एक दूसरे से लिपटकर लेटे रहे।
बड़ा सा बिस्तर था जिसने ६ नंगे जिस्म उलटे सीधे लेटे हुए और बैठे हुए थे ।
इशा: नमिता तुम्हारा और राज का ये कब से चल रहा है।
नमिता ने उसको पूरी कहानी सुनाई कि कैसे राज की पढ़ाई के लिए उसको यह सब करना पड़ा, और उससे क्या फ़ायदा हुआ।
इशा : वाह क्या त्याग किया है तुमने अपने बेटे के लिए।
नमिता: मेरी छोड़ , अपनी बता ,ये सारे नंगे कब से ऐसे नंगे हुए? यह कहते हुए वह हँसने लगी और रोहन का लंड सहला दी।
इशा भी हँसते हुए बोली: अरे बड़ी लम्बी कहानी है। सुनना है क्या?
राज ने इशा की चुचि दबाके कहा: आंटी, प्लीज़ सुनाओ न?
इशा हंस कर बोली: बेटा, तेरी तो हर बात मानूँगी क्योंकि तूने मुझे आज बहुत ख़ुश कर दिया है। क्या मस्त चुदायी की है और बहुत ही मोटा लौड़ा है तेरा। ये कहते हुए वह उसका लौड़ा सहला दी।
इशा ने अब कहना शुरू किया:——–:——-:——नमिता याद है जब हम स्कूल में पढ़ती थी तो तुमको कहती थी कि मैं अक्सर चुदायी का मज़ा लेती हूँ। तुम हैरान होती थी और पूछती थीं कि कौन चोदा ? और मैं नाम बताती थी कि पड़ोसी का बेटा या फिर पापा का दोस्त वग़ैरह।
नमिता: हाँ याद है अच्छे से ।
इशा: दरअसल उसमें आधा सच था और आधा झूठ। ये सच है कि मैं अक्सर ही चुदवाती थी पर सिर्फ़ पापा और भैया से।
कमरे में पिन ड्रॉप साइलेन्स हो गया।
नमिता: क्या कहा? पर तुमने तो कभी बताया ही नहीं?
इशा: क्या और कैसे बताती ? तुम तो शॉक में आ जाती।
उन दिनों तुम ये सब सोच भी नहीं सकती थी।
नमिता: ओह, ये शुरू कैसे हुआ
इशा: असल में मेरे पापा ने भाग कर अपनी चचेरी बहन से शादी की थी। समाज इसको सही नहीं मानता इसलिए वो दोनों इस शहर में आ गए। हमारे परिवारों को इसके कुछ भी इतराज नहीं था,पर दिखावे के लिए वो भी विरोध किए। हम चार ही परिवार में थे, मैं और भय्या को मिलाकर।
एक दिन मैंने पापा और मम्मी का सेक्स देखा । हुआ ये कि मुझे बुखार हुआ और मम्मी मुझे अपने साथ सुला ली। रात में शायद पापा को चुदाई की इच्छा हुई और वो मम्मी के रोकने के बावजूद चुदाई में लग गए। मैं जागकर भी ऐसा दिखाई कि मानो सो रही हूँ। तभी पापा की आँखें मेरी आँखों से मिल गयी और मुझे आँख मार दिए। मैं तो शर्म से आँख बंद कर ली। पर मम्मी की आहें सुनकर मैंने फिर आँख खोली और पूरी चुदाई देखी। मेरी कमसिन बुर गीली हो गई थी। चुदाई के बाद मम्मी जब बाथरूम गयीं तो पापा ने नंगे ही मुझे अपने से चिपका लिया और बोले: बेटे मज़ा आया? इसको चुदायी कहते हैं। अब तुम भी जवान हो गयी हो , चाहो तो मज़ा ले लो इसका । ये कहते हुए उन्होंने अपना लंड मेरे हाथ ने से दिया। उसको पकड़ते ही जैसे मेरे बदन में आग लग गयी। तभी मम्मी आयीं बाथरूम से और पापा ने मुझे अलग कर दिया और मैं भी सोने का नाटक करने लगी।
उस रात और कुछ नहीं हुआ पर अगले दिन वह मुझे अकेला पाकर मेरा चुम्बन लिए और मुझे बाहों में भरके प्यार किए और मैं मस्त हो गयी।
एक दिन मम्मी मंदिर गयी थी और मैं अकेली थी तभी पापा आ गए और मुझे अपनी गोद में बिठाके बहुत प्यार किए ।
उन्होंने पहली बार मेरी चूचियाँ दबायी और मेरा टॉप उतार कर मेरी चूचियाँ दबाकर उनको चूसने लगे। मैं सी सी करने लगी। पापा का खड़ा लौड़ा मेरी गाँड़ में दस्तक दे रहा था ।
पापा ने मेरी पैंटी भी उतारी और मेरी नरम झाँटों को देखकर उसे सहलाते हुए बोले: बेटी, इसको हमेशा साफ़ रखा करो।
फिर वह पहली बार मेरी बुर चूमे और चाटके मुझे पागल कर दिए आऊँ मैं उनके मुँह में झड़ गयी। वह पूरा रस पी गए।
अब हम दोनों जब भी मौक़ा मिलता यही खेल खेलते। मैं उनका लौड़ा भी अब मज़े से चूसने लगी थी।
एक दिन हम मज़े कर रहे थे तभी मम्मी अचानक आ गयी और हमको नंगे देख ली। ओह उसके बाद एक तूफ़ान आया घर में।
नमिता: ओह ये तो बड़ी मुश्किल हो गयी । फिर क्या हुआ?
राज: हाँ आंटी फिर क्या हुआ? आपकी कहानी सुनके तो मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है। देखो!
नमिता हँसती हुई उसके लौड़े को चूसने लगी और फिर मुँह उठाने बोली: अब या यो लौड़ा चूसवा लो या कहानी सुन लो ।
नमिता : चल मानसी चूस देगी , इशा तुम कहानी सुनाओ।
मनाई ख़ुशी से आगे आकर राज का लौड़ा चूसने लगी और इशा ने कहानी आगे बढ़ाई।
अब मानसी अपना मुँह पोंछते हुए अपने पापा के मुँह में अपना बुर रख के बैठ गयी मानो वह उसके मुँह में मूत रही हो। राकेश भी अपनी प्यारी बिटिया की बुर चाटने लगा और जल्दी ही उइइइइइइइइइइ कहके मानसी ज़ोर ज़ोर से अपने चूतर हिलाते हुए झड़ने लगी और राकेश उसकी बुर का रस पी गया।
अब सभी झड़ के आराम करने लगे।
सब लोग बाथरूम से फ़्रेश होकर आए और बिस्तर पर एक दूसरे से लिपटकर लेटे रहे।
बड़ा सा बिस्तर था जिसने ६ नंगे जिस्म उलटे सीधे लेटे हुए और बैठे हुए थे ।
इशा: नमिता तुम्हारा और राज का ये कब से चल रहा है।
नमिता ने उसको पूरी कहानी सुनाई कि कैसे राज की पढ़ाई के लिए उसको यह सब करना पड़ा, और उससे क्या फ़ायदा हुआ।
इशा : वाह क्या त्याग किया है तुमने अपने बेटे के लिए।
नमिता: मेरी छोड़ , अपनी बता ,ये सारे नंगे कब से ऐसे नंगे हुए? यह कहते हुए वह हँसने लगी और रोहन का लंड सहला दी।
इशा भी हँसते हुए बोली: अरे बड़ी लम्बी कहानी है। सुनना है क्या?
राज ने इशा की चुचि दबाके कहा: आंटी, प्लीज़ सुनाओ न?
इशा हंस कर बोली: बेटा, तेरी तो हर बात मानूँगी क्योंकि तूने मुझे आज बहुत ख़ुश कर दिया है। क्या मस्त चुदायी की है और बहुत ही मोटा लौड़ा है तेरा। ये कहते हुए वह उसका लौड़ा सहला दी।
इशा ने अब कहना शुरू किया:——–:——-:——नमिता याद है जब हम स्कूल में पढ़ती थी तो तुमको कहती थी कि मैं अक्सर चुदायी का मज़ा लेती हूँ। तुम हैरान होती थी और पूछती थीं कि कौन चोदा ? और मैं नाम बताती थी कि पड़ोसी का बेटा या फिर पापा का दोस्त वग़ैरह।
नमिता: हाँ याद है अच्छे से ।
इशा: दरअसल उसमें आधा सच था और आधा झूठ। ये सच है कि मैं अक्सर ही चुदवाती थी पर सिर्फ़ पापा और भैया से।
कमरे में पिन ड्रॉप साइलेन्स हो गया।
नमिता: क्या कहा? पर तुमने तो कभी बताया ही नहीं?
इशा: क्या और कैसे बताती ? तुम तो शॉक में आ जाती।
उन दिनों तुम ये सब सोच भी नहीं सकती थी।
नमिता: ओह, ये शुरू कैसे हुआ
इशा: असल में मेरे पापा ने भाग कर अपनी चचेरी बहन से शादी की थी। समाज इसको सही नहीं मानता इसलिए वो दोनों इस शहर में आ गए। हमारे परिवारों को इसके कुछ भी इतराज नहीं था,पर दिखावे के लिए वो भी विरोध किए। हम चार ही परिवार में थे, मैं और भय्या को मिलाकर।
एक दिन मैंने पापा और मम्मी का सेक्स देखा । हुआ ये कि मुझे बुखार हुआ और मम्मी मुझे अपने साथ सुला ली। रात में शायद पापा को चुदाई की इच्छा हुई और वो मम्मी के रोकने के बावजूद चुदाई में लग गए। मैं जागकर भी ऐसा दिखाई कि मानो सो रही हूँ। तभी पापा की आँखें मेरी आँखों से मिल गयी और मुझे आँख मार दिए। मैं तो शर्म से आँख बंद कर ली। पर मम्मी की आहें सुनकर मैंने फिर आँख खोली और पूरी चुदाई देखी। मेरी कमसिन बुर गीली हो गई थी। चुदाई के बाद मम्मी जब बाथरूम गयीं तो पापा ने नंगे ही मुझे अपने से चिपका लिया और बोले: बेटे मज़ा आया? इसको चुदायी कहते हैं। अब तुम भी जवान हो गयी हो , चाहो तो मज़ा ले लो इसका । ये कहते हुए उन्होंने अपना लंड मेरे हाथ ने से दिया। उसको पकड़ते ही जैसे मेरे बदन में आग लग गयी। तभी मम्मी आयीं बाथरूम से और पापा ने मुझे अलग कर दिया और मैं भी सोने का नाटक करने लगी।
उस रात और कुछ नहीं हुआ पर अगले दिन वह मुझे अकेला पाकर मेरा चुम्बन लिए और मुझे बाहों में भरके प्यार किए और मैं मस्त हो गयी।
एक दिन मम्मी मंदिर गयी थी और मैं अकेली थी तभी पापा आ गए और मुझे अपनी गोद में बिठाके बहुत प्यार किए ।
उन्होंने पहली बार मेरी चूचियाँ दबायी और मेरा टॉप उतार कर मेरी चूचियाँ दबाकर उनको चूसने लगे। मैं सी सी करने लगी। पापा का खड़ा लौड़ा मेरी गाँड़ में दस्तक दे रहा था ।
पापा ने मेरी पैंटी भी उतारी और मेरी नरम झाँटों को देखकर उसे सहलाते हुए बोले: बेटी, इसको हमेशा साफ़ रखा करो।
फिर वह पहली बार मेरी बुर चूमे और चाटके मुझे पागल कर दिए आऊँ मैं उनके मुँह में झड़ गयी। वह पूरा रस पी गए।
अब हम दोनों जब भी मौक़ा मिलता यही खेल खेलते। मैं उनका लौड़ा भी अब मज़े से चूसने लगी थी।
एक दिन हम मज़े कर रहे थे तभी मम्मी अचानक आ गयी और हमको नंगे देख ली। ओह उसके बाद एक तूफ़ान आया घर में।
नमिता: ओह ये तो बड़ी मुश्किल हो गयी । फिर क्या हुआ?
राज: हाँ आंटी फिर क्या हुआ? आपकी कहानी सुनके तो मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है। देखो!
नमिता हँसती हुई उसके लौड़े को चूसने लगी और फिर मुँह उठाने बोली: अब या यो लौड़ा चूसवा लो या कहानी सुन लो ।
नमिता : चल मानसी चूस देगी , इशा तुम कहानी सुनाओ।
मनाई ख़ुशी से आगे आकर राज का लौड़ा चूसने लगी और इशा ने कहानी आगे बढ़ाई।
