अब राज आकर उसकी बग़ल में लेट गया और फिर उसने नमिता की ओर मुँह करके अपना मुँह उसकी एक चूचि पर रखा और उसको पीने लगा। दूसरी चुचि के निप्पल को मसलते हुए वह अपना हाथ उसकी पैंटी से ढकी बुर पर ले गया और उसको मुट्ठी में लेकर भींचने लगा।
नमिता आऽऽहहहह कर उठी और अपनी कमर उछाल कर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की। अब उसने अपनी तीन उँगलियाँ उसकी बुर के अंदर पैंटी के ऊपर से ही डाल दिया और उसको अंदर बाहर करने लगा। नमिता और ज़ोर से उछल कर उसका साथ देने लगी। नमिता उइइइइइइइइइइ और हाऽऽय्य्य्य्य्य कहकर ज़ोर से कमर हिलाने लगी। उससे उसकी clit राज के उँगलियों से रगड़ने लगी। अब वह मस्ती से भर कर चिल्लायी: आऽऽऽऽऽऽहहह बेटाआऽऽऽऽऽऽ मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ हैएएएएएएएए आऽऽहहहह मरीइइइइइइइ मैं तो गईइइइइइइइइइइ । और वो झड़ने लगी ।
उसके बाद वह राज को बहुत चूमी जैसे उसे धन्यवाद कह रही हो इतने मस्त ऑर्गैज़म के लिए।
राज को भी अच्छा लगा कि चलो उँगलियों से ही सही उसने माँ को शांत कर ही दिया। थोड़ी देर तक एक दूसरे को प्यार करने के बाद राज उठा और बोला: माँ आज तो आप सुला रही हो ना अपने साथ? नमिता: हाँ बेटा क्यों नहीं । पर मुझे बाथरूम जाना है।
राज: ठीक है आप हो आओ फिर मैं भी जाऊँगा।
नमिता बाथरूम से आयी तो वह अंदर चला गया । तब नमिता ने अपनी पैंटी बदल ली ।नमिता ने अपना मोबाइल चेक किया पर उसमें सुषमा का कोई SMS नहीं था। बाद में फ़्रेश होकर दोनों एक दूसरे की बाहों में सो गए।
उस रात और कुछ नहीं हुआ।
सुबह जब वह उठी तो राज ग़ायब था। मतलब वह पढ़ने को चला गया था। नमिता ने पूरी उत्सुकता से मोबाइल चेक किया और सुषमा का SMS देखकर मुस्करायी- लिखा था– दोनों ने दो दो राउंड किया। मेसिज रात को २ बजे का था। वह मुस्कुराती हुई सोची कि बाप बेटे ने मिलकर इसकी ख़ूब बजायी रात भर। उसकी बुर खुजा उठी ये सोचकर कि सुषमा कितनी क़िस्मत वाली है। उसने अपनी बुर को खुजा ही लिया ।
गिर वह बाथरूम में घुस गयी। उसे सुषमा की रात की कहानी सुननी ही थी। फिर से उसने अपनी बुर खुजा ली।
नमिता ने ब्लाउस और पेटिकोट में चाय बनाई और राज को चाय दी और साथ ही ख़ुद भी चाय पीने लगी। राज सुबह से ही उठ कर पढ़ाई कर रहा था। वह नमिता से चाय पीते हुए बोला: माँ रात को बहुत मज़ा आया , पता नहीं आपको मज़ा आया या नहीं? आपके नरम नरम दूध में अपना लौड़ा रगड़ कर मुझे बहुत सुख मिला।
नमिता हँसते हुए: तुम्हें मज़ा मिला तो समझो मुझे भी मिल ही गया।
नमिता उठकर बोली: चलो थोड़ी देर बाद नाश्ता करने आ जाना।
राज ने उसको अपने पास खिंचा , वह कुर्सी पर बैठा था नमिता को पास खींचकर उसके पेट को चूमा और उसके पेटिकोट के ऊपर से उसके चूतरों को दबाया। फिर उसने पेटिकोट को ऊपर उठाया और उसकी पैंटी में क़ैद नरम गोल चूतरों को दबाकर मज़े से भर गया। नमिता चुपचाप खड़ी उसके बालों पर हाथ फेर रही थी। जब उसका दबा दबा कर दिल भर गया तो वह उसके पेटोकोट को नीचे कर दिया और नमिता बोली: अब जाऊँ?
राज हँसते हुए बोला : हाँ जाओ ।
बाद में राज को नाश्ता करा के वह ऑफ़िस के लिए तैयार हुई और राज को प्यार करके बाई कहकर चली गयी ।
ऑफ़िस में कुछ ख़ास नहीं हुआ। सुधाकर किसी मीटिंग के लिए गया हुआ था। वह १२ बजे वापस घर आयी पर घर जाने के बजाय वह सुषमा के घर पहुँची। सुषमा उसे देखकर बहुत ख़ुश हुई और नमिता ने पूछा: घर पर और कौन है?
सुषमा शरारती मुस्कान के साथ बोली: और कोई नहीं है। राजन ऑफ़िस और राजू स्कूल गया है।
अब नमिता ने अपनी बाहें फैलायीं और सुषमा दौड़ कर उसमें समा गयी। अब दोनों लिपटकर एक दूसरे के होंठ चूसने लगीं।
फिर दोनों बेडरूम पहुँची और पाँच मिनट में पूरी नंगी होकर एक दूसरे से लिपटकर चूचियाँ दबा रही थीं और चूस भी रही थीं। आज सुषमा ने पहल की और नमिता की बुर में अपना मुँह घुसा दिया और उँगलियाँ और जीभ से उसको मस्त कर दी। जल्द ही नमिता अपनी कमर उचका कर उसके मुँह पर अपना बुर रगड़ रही थी और उसके सिर को अपनी बुर में दबा रही थी। और फिर नमिता आऽऽऽहहहह करके उईइइइइइइइइइ की और झड़ने लगी। सुषमा उसका रस पी गई।
अब नमिता बोली: चल मैं भी तेरा झाड़ देती हूँ ।
सुषमा बोली: दीदी मेरा रहने दो । मुझे तो दो दो साँड़ों से भी निपटना है । आज सुबह भी दोनों एक एक राउंड करके गए हैं। और अभी राजू २ घंटे में आएगा और फिर से चढ़ जाएगा मेरे ऊपर।
नमिता हँसते हुए बोली: चल तेरे तो मज़े हो गए।
सुषमा भी हँसने लगी।
नमिता उसकी चूचि दबाकर बोली : अच्छा ये तो बता कि कल क्या हुआ?
नमिता ने बताना शुरू किया: ————
दीदी आपके जाने के बाद मैं बहुत देर सोची कि क्या ये सही है? अपने बेटे से चुदवाना ? फिर सोची कि एक ही बेटा है वह भी पागल ही हुआ जा रहा है, उसको क़ाबू में करने का एक यही उपाय है तो चलो ये ही सही।
मुझे आपकी बात याद थीं, इसलिए मैंने अपनी शादी का जोड़ा निकाला और सेक्सी पैंटी और ब्रा निकाली जो मेरे लिए राजन विदेश से लाए थे। अब नहाने गयी और फिर कपड़े पहनी और मैंने देखा कि ब्लाउस तो आ ही नहीं रहा है। शादी के समय मेरी छातियाँ छोटी थीं अब बड़ी हैं। फिर मैंने अपना नया ब्लाउस ही पहना। अब ज़ेवर वग़ैरह पहनकर बिलकुल दुल्हन के लिबास में पूरी तरह सजकर मेकअप करके अपने आप को शीशे में देखा और ख़ुद भी मुग्ध हो गयी। अब मैंने सिंदूर , मंगल सूत्र वग़ैरह एक थाल में रखा और उसको घर के मंदिर में रख दिया। फिर मैंने राजू और राजन के पसंद का भोजन ऑर्डर किया। और उन दोनों का और भोजन का इंतज़ार करने लगी।
थोड़ी देर बाद भोजन आ गया और मैंने उसे टेबल पर केसरोल में सज़ा दिया। पहले राजू आया और मुझे दुल्हन की तरह सज़ा देखकर पूछा : मम्मी , कहाँ जा रही हैं आप?
मैंने उसकी बात का जवाब नहीं दिया मानो कि अभी भी उससे नाराज़ हूँ।
फिर राजन भी आ गया और मुझे देखकर हैरान हो कर बोला: ये क्या है? कहीं जा रही हो?
मैंने कहा: जाओ फ़्रेश हो कर आओ और अपने प्यारे पुत्र को भी बुला लो । खाना लगा हुआ है।
राजन थोड़ा हैरान सा फ़्रेश होने चला गया।
थोड़ी देर बाद दोनों आए और खाने बैठ गए।
मैंने कहा: आज तुम्हारे पसंद के होटेल से तुम्हारी पसंद का खाना मँगायी हूँ। चलो पार्टी शुरू करो।
राजन और राजू ने खाना देखा और ख़ुश हो गए ।
राजन: खाना तो बढ़िया है, पर पार्टी किस ख़ुशी में ?
अब मैंने bomb फोड़ा: मेरी शादी की ख़ुशी में ।
राजन: क्या? तुम्हारी शादी? क्या बकवास कर रही हो?
मैं बोली: बकवास नहीं कर रही हूँ। तुम ही तो चाहते थे ना कि मैं राजू के साथ सोऊँ ? तो मैं उससे शादी कर लेती हूँ फिर वह अपनी दुल्हन के साथ जो चाहे करे। आख़िर वह मेरा दूसरा पति जो होगा।
राजन और राजू को मेरी बात समझने में कुछ वक़्त लगा , पर जैसे ही उनको मेरी बात समझ में आयी उनके चेहरे ख़ुशी से खिल गए।
राजन: ओह ग्रेट, तो तुम मान गयीं। वाह ये बढ़िया हो गया। क्यों राजू अब तो ख़ुश है ?
राजू अपनी ख़ुशी को ना छुपा सका और बोला: पापा मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है कि मम्मी मान गयीं हैं।
मैं: चलो अब चुपचाप खाना ख़त्म करो।
मैंने देखा कि दोनों ने अपना एक हाथ टेबल के नीचे जाकर कुछ किया। मैं समझ गयी थी कि अपने अपने लंड अजस्ट कर रहे होंगे, क्योंकि वो खड़े होने लगे होंगे।
खाना ख़त्म करके मैंने टेबल साफ़ किया और फिर सोफ़े पर बैठ कर TV देखने लगी। तभी राजन भी आकर मेरे पास बैठ गया और मेरी जाँघ पर हाथ रखकर बोला: जानू, ये तुमने बहुत अच्छा फ़ैसला किया। देखना अब हमारे घर में ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ होंगी। राजू तो सामान्य हो ही जाएगा। हमारी बोरिंग सेक्शूअल लाइफ़ भी अब मज़ेदार हो जाएगी। आऽऽऽऽऽऽहहहह तुमको राजू से चुदते देखकर क्या मज़ा आयेगा मुझे? वह अपने लौड़े को सहलाते हुए बोला।
मैं: चलो देखते हैं।
तभी राजू भी अंदर आया और उसका लोअर भी आगे से फुला हुआ था ।
राजन उसके लौड़े की तरफ़ इशारा करके बोला: देखो इसका तो अभी से तनकर सलामी से रहा है। बेचारा बहुत परेशान है।
अब मैं बोली: चलो मंदिर में ।
राजन और राजू मेरे पीछे मंदिर में आए। अब मैंने पूजा की थाली उठायी और राजू की पूजा की और उसको मैंने अपनी माँग भरने को कहा। वह सिंदूर लेकर मेरी माँग भरा और उसने मुझे मंगल सूत्र भी पहना दिया। राजन ये सब देख कर बहुत उत्तेजित हो रहा था।
अब मैंने और उसने मिलकर भगवान की पूजा की । फिर मैंने राजू के पैर छुए ।राजू हड़बड़ा गया और बोला: मम्मी आप मेरे पैर क्यों छू रही हो। हमेशा तो मैं ही आपके पैर छूता हूँ।
मैं हँसकर बोली: अब से तू मेरा दूसरा पति है।
राजन भी हँसने लगा । फिर मैंने सबको मिठाई खिलाई और कहा: चलो शादी सम्पन्न हुई।
राजन: ग्रेट, चलो अब सुहाग रात मानते हैं।
मैं बोली: सुहाग रात तो नए पति के साथ होगी ना, आप क्यों उत्तेजित हो रहे हो?
राजन एकदम गिड़गिड़ा कर बोला: अरे ऐसा मत बोलो, तुम्हारे दोनों पति रहेंगे, भले तुम नए पति के साथ ही मना लेना। पर मुझे देखने के सुख से तो वंचित मत करो।
मैं हंस दी और बोली: चलो ठीक है , आप भी आ जाओ।
मैंने कहा कि आप लोग ५ मिनट के बाद आना , मैं अभी बेडरूम में जा रही हूँ।
मैंने बेडरूम में आकर बिस्तर पर फूल बिछाई और कमरे में सेण्ट छिड़की और फिर बाथरूम से फ़्रेश होकर आकर बिस्तर पर बैठ गयी और साड़ी के पल्लू का घूँघट निकाल ली।
दो मिनट बाद दोनों अंदर आए और कमरे का हाल देखकर हैरान हो गए। दोनों के लोअर के तंबू तने साफ़ दिख रहे थे।
मेरे पास आकर दोनों आज़ू बाजु बैठ गए।
राजन: बेटा अब अपनी बीवी का घूँघट उठाओ। राजू थोड़ा हिचकते हुए मेरा घूँघट उठा दिया।
मैं: मेरा नेग मतलब गिफ़्ट दो।
राजू ने अपनी जेब से एक छोटा सा गिफ़्ट निकाला और मुझे दिया। मैंने उसे खोला तो उसमें से एक सुंदर सी सोने की अँगूठी निकली।
मैं: ये तेरे पास कहाँ से आयी?
राजन: ये मैंने इसे दी है। असल में यह मैं तुम्हारे अगले महीने आने वाले जन्मदिन के लिए विदेश से लाया था। पर अब मैं तुम्हें कोई दूसर गिफ़्ट ला दूँगा।
मैं बहुत ख़ुश हो गयी। मैंने राजू को कहा कि वह ही मुझे ख़ुद पहना दे। उसने मुझे अँगूठी पहना दी। अब मैंने राजू को प्यार से चूम लिया। राजन ने मुझे लिटा दिया।
अब राजन बोला: चल अब शुरू हो जा , अपनी बीवी को प्यार कर। पहले उसके गाल, नाक , माथा और फिर होंठ चूम ले।
मैंने साइड से देखा कि राजन अब खुले आम अपना लंड सहला रहे थे।
जब हम हाँफते हुए अलग हुए तो राजू अपने पापा को देखा मानो पूछ रहा हो अब क्या?
राजन : अब साड़ी का पल्ला गिरा और ब्लाउस के ऊपर से दूध दबा।
राजू ने वैसे ही किया और मेरे दोनों दूध दबाने लगा। उसके हाथों में एक मर्दाना पकड़ थी क्योंकि वह खिलाड़ी था। मैं तो मज़े से। भर गयी ।
राजन: चल अब ब्लाउस के हुक खोल दे।
राजू ने हुक खोले और राजन ने मुझे उठने का इशारा किया और मैं उठी और राजू ने ब्लाउस उतार दी। अब ब्रा में क़ैद मेरे दूध देखकर वह उनको और ज़ोर से दबाने लगा। उधर राजन ने मेरी ब्रा के हुक खोले और राजू ने मेरी ब्रा निकाल दी। अब मेरी चूचियाँ उनके सामने नंगी थीं। राजू उनको ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा। राजन ने उसे कहा: बेटा, अब निपल को ऐसे अंगूठे और ऊँगली से दबाओ । तुम्हारी मम्मी को बहुत मज़ा आयेगा।
राजू बहुत ज़ोर से मेरे निप्पल दबाने लगा। मेरी तो बुर पानी छोड़ने लगी। अब राजन बोला: यार अपनी मम्मी के दूध नहीं पीना? बचपन मेंतो मुँह ही नहीं हटाता था वहाँ से ।
राजू ने अपना मुँह नीचे किया और उसकी एक चूचि मुँह में लेकर चूसने लगा। तभी राजन भी दूसरी चुचि चूसने लगा।
आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मस्त लग रहा था कि दोनों मर्द जिनको मैं बहुत प्यार करती हूँ मेरे दोनों दूध पी रहे हैं। मैंने उनके सिर अपनी चूचियों पर दबा लिया और मस्ती से उनसे चुचि चूसवाने लगी। फिर राजन बोला: चल अब आगे बढ़ और इस साड़ी को पेट के पास से उतार दे।
राजू ने साड़ी खोल दी और मैंने अपनी कमर उठा कर अपनी साड़ी निकालने में उसकी मदद की। अब मैं सिर्फ़ पेटिकोटऔर पैंटी में थी। राजू अब मेरे पेट और नाभि को चूमने लगा। उसके हाथ अभी भी मेरी चूचि पर थे। उधर राजन मेरे दूसरी चूचि को दबा रहा था । फिर राजन के कहने पर राजू ने मेरी पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसको नीचे को खिसकाने लगा। अब मेरी पैंटी उन दोनों के सामने थीं। राजू मेरी जाँघों पर हाथ फेरे जा रहा था। राजन ने कहा : अपने भी तो कपड़े उतार , इसे तो नंगी किए जा रहा है।
राजू ने मुस्कुरा कर अपने कपड़े खोले और उसका चौड़ा सीना और मस्कूलर बदन मुझे गरम कर गया। जल्दी ही उसने चड्डी भी उतार दी। अब उसका बड़ा सा लंड मैंने दूसरी बार देखा। इस बार काफ़ी क़रीब से देख रही थी । मेरी बुर बिलकुल गीली हो रही थी। अब मेरा हाथ अपने आप ही उसके लौड़े पर चला गया और उसे सहला कर मैं मस्ती से भर उठी। राजू की आँखें अपने लौड़े पर ही थी और वह उसे मेरे हाथ मेंदेखकर मस्त हो गया था ।
तभी राजन ने उसको कहा कि पैंटी उतार दो। अब राजू ने कम्पते हाथों से मेरी पैंटी उतार दी। मैंने कमर उठाकर उसको उतारने में मदद की। राजू की आँखें जैसे मेरी बुर पर चिपक सी गयी थी।
अब राजन ने मेरी जाँघें फैला कर राजू से कहा: देखो बेटा, ये हैं तुम्हारी जन्म स्थली। तुमने यहाँ से ही जन्म लिया था और आज तुमको अपना लौड़ा इसके अंदर डालना है जहाँ से तुम स्वयं निकले हो।
अब राजू का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था। उसके लौड़े से कामरस निकल कर मेरी उँगलियों को गीला किए जा रहा था।
फिर राजन ने मेरी बुर की फाँकों को अलग किया और बोला: देखो ये अंदर की गुलाबी जगह देखो , कितनी प्यारी लग रही है।
इसे चूसने और चाटने में भी मज़ा आता है।
अब राजन ने उसको मेरी टांगों के बीच आने को बोला। राजू मेरी टांगों के बीच आ गया और मेरी बुर को चूमने लगा।
मेरी आऽऽऽऽऽऽहहहह निकल गयी। और राजन ने मेरी चूचियाँ दबाना चालू रखा । फिर राजन के निर्देश पर राजू अपनी जीभ से मेरी गुलाबी बुर को चाटने लगा। मैं हाय्य्य्य्य्यू कहकर मस्ती से भर उठी।
अब राजन बोला: चलो अब अपनी मम्मी को चोदो।
तभी मुझे आपकी बात याद आयी और मैं राजन को बोली: तुम अपने हाथ से उसके लंड को मेरी बुर में डालो। मेरा पहला पति ही मुझे दूसरे पति से ख़ुद चुदवाएगा ।यही ठीक होगा।
राजन का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था। वह अब अपने कपड़े उतार दिया और अपना खड़ा लौड़ा सहलाने लगा। फिर वह राजू का लौड़ा पकड़कर उसने मेरी बुर में लगाया। अब राजू ने धक्का मारा और उसका पूरा लौड़ा एक ही धक्के में मेरे जड़ तक समा गया। मेरी हाऽऽय निकल गयी और थोड़ा सा दर्द भी हुआ । राजू का लंड अपने पापा के लंड से थोड़ा ज़्यादा ही मोटा ही था।
अब राजू ने चार पाँच ही धक्के मारे और ह्म्म्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा। मैं समझ गयी कि पहली बार चोद रहा है इसलिए अपनी उत्तेजना पर क़ाबू नहीं रख सका।
वह अब मेरे ऊपर से हट गया और बग़ल में लेट गया। अब राजन ने एक तौलिए से मेरी बुर साफ़ की और मुझ पर चढ़ गया और पागलों की तरह मेरी ज़बर्दस्त चुदायी करने लगा।
राजू मेरी चुदायी को बहुत ध्यान से देख रहा था उसका लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था। मैंने राजन से चुदवाते हुए ही राजू का लंड सहलाना शुरू किया राजू भी मेरी चूचि फिर से चूसने लगा।
राजन की चुदायी ने मुझे मस्त कर दिया और मैं हाय्य्य्य्य्य्य मरीइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। तभी राजन भी ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा।
मैं लस्त होकर पड़ गयी राजन भी शांत होकर लेट गया।
क़रीब पाँच मिनट के बाद मैंने देखा कि राजू फिर से मेरे ऊपर आ गया था और अपना लंड मेरी बुर में लगा रहा था। अब उसने फिर से मुझे चोदना शुरू किया। मेरी आऽऽहहह और हाय्य्य्य्य्य निकलने लगी। कमरा फ़च फ़च की आवाज़ से भर गया था। अब राजन भी उठकर हमारी चुदायी देखने लगा और मस्ती से भर कर मेरी चूचि दबाने लगा। राजू भी अब मेरे होंठ चूसने लगा । अब मैं फिर से गरम हो चुकी थी और चुदायी का मज़ा लेते हुए अपनी क़मर उछाल कर उसका साथ देने लगी। राजन बहुत ख़ुश दिख रहा था, अपनी पत्नी को अपने बेटे से चुदवा कर।
अब जल्दी ही हम दोनों आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगे।
अब राजू पूरी तरह तृप्त लग रहा था। मैं भी दो बार झड़ चुकी थी। तभी राजन मेरी चूचियाँ फिर से दबाने लगा और मैंने देखा कि उसका लौड़ा फिर से खड़ा हो चुका था। मैं हैरान रह गयी कि कहाँ हफ़्ते में मुश्किल से दो तीन बार मेरी चुदायी करने वाला यह मेरा पति आज दो बार करने का सोच रहा है। तभी वह मुझ पर चढ़ गया और फिर से चोदने लगा। मैं एक लाश की तरह पड़ी रही और वह करीब २० मिनट मेरी चुदायी करके झड़ गया। बीच में मैं भी गरम हुई और उसके साथ ही झड़ गयी।
अब हम पूरी तरह से थक गए थे और नंगे ही सो गए।
सुबह मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि वह दोनों सोए हुए हैं और उनके लंड आधे खड़े हैं। मैं बाथरूम से फ़्रेश हो कर आइ और चाय बनाकर लाई। मैंने एक मैक्सी डाल ली थी।
दोनों को उठायी तो वो अपने आप को नंगे देखकर बिलकुल ही सामान्य सा बर्ताव किए और चाय पीने लगे। फिर राजन बाथरूम गए और राजू भी अपने कमरे में जाकर फ़्रेश हो गया।
मैं किचन में नाश्ता बनाने लगी तभी वो दोनों आए और राजू मुझसे पीछे से चिपक गया और अपना लंड मेरी गाँड़ पर रगड़ने लगा ।राजन भी मेरी चूचि दबाने लगा। मैंने कहा कि ये सुबह सुबह क्या करने लगे दोनों?
राजन और राजू मुझे लेकर फिर से बेडरूम में ले गए और मेरी मैक्सी उतार दी। फिर वो दोनों भी नंगे हो गए। मैं बिस्तर पर पैर नीचे करके बैठी थी और वो दोनों अपने लौड़े मेरे सामने झुलाने लगे। मैं समझ गयी कि वो क्या चाहते हैं। मैंने अपना मुँह खोला और राजू का लंड चूसने लगी और राजन का लंड सहलाने लगी। फिर मैंने राजन का लंड चूसा और राजू का लंड सहलाने लगी। अब हम तीनो गरम हो गए थे ।
अब राजन ने मुझे चौपाया बनाया और राजू को पीछे से चोदने को बोला। राजन ख़ुद मेरे सामने आकर खड़ा हुआ और मैंने उसका लंड चूसना शुरू किया उधर राजू ने पीछे से मेरी ठुकाई शुरू कर दी। अब मैं ह्म्म्म्म्म्म ही कर पा रही थी क्योंकि मुँह में भी एक लंड घुसा हुआ था। मेरी चूचियाँ भी दोनों मसल रहे थे। अब मेरी गूँउउउउउउउउ निकलने लगी। अब मैं झड़ने लगी राजू की ज़बरदस्त चुदायी से । वह भी झड़ने लगा और जोर ज़ोर से कमर हिलाने लगा ।थोड़ी देर बाद राजन भी मेरे मुँह से अपना लंड निकाला और मेरे पीछे से आके उसने मेरी गीली बुर में अपना लंड पेल दिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। मैं हाय्य्य्य्य्य कहकर चिल्लाने लगी । वह ज़बरदस्त चुदायी कर रहा था और मेरी उइइइइइइइइ और हाय्य्य्य्य्य निकली जा रही थी ।
फिर वह भी झड़ गया और मेरी बुर में अपना रस छोड़ दिया।
अब हम सब शांत हो चुके थे । फिर राजन ऑफ़िस गया और आज से राजू भी स्कूल जाने लगा।
तो ये है मेरी कहानी अपनी दूसरी शादी की वह भी अपने बेटे से।
नमिता उसकी चूचि चूसकर बोली: ले तूने तो अपने बेटे से चुदवा भी लिया और मैं अभी भी उससे ऊँगली ही करवा रही हूँ अपनी बुर में।
दोनों हँसने लगीं ।
नमिता: चल मैं अब अपने घर जाती हूँ। तू मजे ले।
सुषमा: तू भी तो बस तीन चार दिन बाद चुदवा ही लेगी अपने बेटे से ।
नमिता हँसती हुई तय्यार होकर चली गयी अपने घर को।
