पति ने दोस्त को बुलाके पत्नी को प्रेग्नेट करवया 2

दोस्त की बीवी

कार में सेक्स करने के बाद मैं पकड़ी गयी थी। हालांकि वो बात इज्जत के डर से बाहर नहीं आ पायी, पर अब मेरा ससुराल वाले पुश्तैनी घर में जाना मुश्किल हो गया कि कही मौसी या प्रशांत से फिर सामना ना हो जाए।

खैर इस बात को अब कुछ समय बीत गया था। इस बीच अब ससुराल में बार बार जाने के बजाय मैंने पति को बोल कर सासुमां को ही हमारे साथ रहने के लिए बुला लिया था।

इससे दो फायदे हुए, एक तो सास को मौसी से दूर कर दिया ताकि भांडा ना फूटे और मेरे वहां ना जाने से उनको उस काण्ड की याद भी नहीं आएगी।
एक दिन मेरी माँ का फ़ोन आया कि घर में कुछ फंक्शन रखा हैं तो हो सके तो कुछ दिन पहले ही आ जाना, घर में इतने काम रहेंगे तो मदद हो जाएगी।

मैंने पति और सास से बात की और ये फैसला किया की बाकी लोग फंक्शन वाले दिन आ जायेंगे, पर मैं कुछ दिन पहले जाकर उनकी मदद कर दू।
मैं अपने मायके पहुंच गयी। मेरे पापा, मम्मी भैया और भाभी ने काफी काम पहले ही बाँट रखे थे। सबसे पहला काम था लोगो को निमंत्रण देना।

हमने इलाको के हिसाब से मेहमानो की तीन लिस्ट बना ली, एक लिस्ट पापा को, दूसरी भैया भाभी को तो तीसरी मेरे और मम्मी के हिस्से आयी जहाँ हमें निमंत्रण देने जाना था।

हमारी लिस्ट में वो एरिया था जो नया नया बसा था, जहां हमारे कुछ रिश्तेदार कुछ समय पहले ही शिफ्ट हुए थे। मुझे और मम्मी को उस एरिया के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।

परंतु उस एरिया के पास मुख्य सड़क पर मेरी मम्मी की सहेली सुधा आंटी रहती थी, जिनके घर मम्मी पहले जा चुकी थी। चूँकि वो उसी एरिया के पास रहती हैं तो उनको वहां की पूरी जानकारी हैं, कौन कहाँ रहता हैं।

निमंत्रण तो उनको भी देना ही था, तो ये तय किया की पहले उनके घर जाएंगे और फिर उनकी मदद से बाकी लोगो को भी निमंत्रण दे देंगे।

पहले सुधा आंटी हमारे घर के पास में ही रहते थे, इसी वजह से मेरी मम्मी और उनकी दोस्ती हुई थी। दोनों पक्की सहेलिया थी तो एक दूसरे के घर काफी आना जाना था तो हम बच्चे लोग भी अच्छे से जानते थे। कुछ सालो पहले ही वो अपने इस नए घर में रहने को आये थे।

अगले दिन दोपहर से पहले मैं और मम्मी भाभी की स्कूटी लेकर सुधा आंटी के वहां पहुंच गए। मैं उस एरिया में काफी सालों बाद आयी थी, तो सब कुछ बदला बदला सा लगा।

मम्मी भी काफी समय से नहीं आयी थी, तो वो भी थोड़ा कंफ्यूज थी नयी नयी गलियों की वजह से। पर सुधा आंटी का घर मुख्य सड़क पर था तो ज्यादा मुश्किल नहीं हुई।

उन्होंने हमारा स्वागत किया और बहुत अच्छे से आवभगत की। मुझसे वो काफी समय बाद मिल रही थी तो मेरी खैर खबर ली। उन्होंने मम्मी को अपनी अपडेट भी दी कि वो जल्द ही दादी बनाने वाली हैं, उनकी बहु बच्चे की डिलीवरी के लिए 2 महीनो से पीहर गयी हुई हैं।

हमने उनको फंक्शन में आने का निमंत्रण दिया और फिर अपनी समस्या बताई की उनकी मदद चाहिए। उनको लिस्ट दिखाई तो उन्होंने कहाँ ये सब लोग यहाँ आस पास ही रहते हैं मैं आपको ले चलती हूँ वहां।

तभी उन्होंने कहाँ कि मैं पहले संजू को फ़ोन कर देती हूँ, वो दूकान से लंच के लिए इसी समय आता हैं। उसको थोड़ा थोड़ा लेट आने को बोल देती हूँ। वो फ़ोन कर ही रहे थे कि डोरबेल बजी। उन्होंने दरवाज़ा खोला तो संजू ही था।

संजू सुधा आंटी का लड़का था जिसकी बीवी डिलीवरी के लिए उसके मायके गयी हुई थी। संजू मेरे भैया का दोस्त भी था। क्यों कि पहले पडोसी थे और दोनों की मम्मिया पक्की सहेली थी तो उनके बच्चे भी आपस में दोस्त बन गए।

जब मैं छोटी थी और स्कूल में पढ़ती थी तो संजू के साथ खेला करती थी। पर जैसे जैसे उम्र बढ़ी लड़का लड़की में फ़र्क़ पता चला तो खेलना छूट गया और शर्म आने लगी। हालांकि संजू मेरे भैया का दोस्त था तो हमारे घर कभी कभार आता रहता था।

संजू ने अंदर आकर मेरी माँ के पाँव छुए और मुझसे हाय हेलो हुआ। आंटी ने संजू को पूरी बताई कि वो उसी को फ़ोन कर रहे थे। अब तुम आ ही गए हो तो पहले तुम्हारे लिए खाना बना देती हूँ, सब्जी तैयार हैं सिर्फ गरम करनी हैं और आटा गुंथा हुआ हैं सिर्फ रोटी डालनी हैं।

अब मेरी मम्मी ने बीच में अड़ंगा लगा दिया, वो बोली अरे संजू के लिए खाना तो मेरी बेटी बना लेगी, तब तक हम दोनों जाकर वो निमंत्रण का काम कर आते हैं।

मैंने अपनी अपनी मम्मी को घूरते हुए गुस्से से देखा कि वो कहाँ फंसा रही हैं। मम्मी ने तुरंत मेरा चेहरा पढ़ लिया और बोली बना ले वरना तो हम लेट हो जायेंगे, घर पर ओर भी काम पड़े हैं।

आंटी खुश हुए कि चलो आज खाना बनाने से छुट्टी और मम्मी खुश की समय बच जाएगा। मम्मी बोली हम आधे घंटे के अंदर आ जाएंगे निमंत्रण देके, जैसे उनको उस एरिया की पूरी जानकारी हो।

आंटी बोले चलो मैं तुमको किचन में सब सामान कहाँ पड़ा हैं बता देती हूँ। अब बीच में कूदने की बारी संजू की थी। वो बोला आप चिंता मत करो मम्मी मैं बता दूंगा सामान कहाँ पड़ा हैं मुझे पता हैं।

मम्मी और आंटी अब बाहर निकल पड़े। मैं उनको देखती ही रह गयी जब तक कि दरवाज़ा बंद नहीं हो गया।

संजू बोला आओ मैं तुम्हे बता देता हूँ सामान कहाँ हैं। किचन में ले जाकर बोला ये किचन हैं। मैंने सोचा बोल दूं कि मुझे भी दिख रहा हैं ये किचन हैं। उसने अब चकला, बेलन, लाइटर वगैरह सब सामान बताये।

उसने अब एप्रन लाकर दिया ताकि मेरी साड़ी खराब ना हो जाये। वो वही पीछे खड़ा रहा और मैंने रोटी बनाना शुरू किया।

मैंने पूछा कितनी रोटी बनाऊ? तो उसने लापरवाही से कहाँ जितनी प्यार से खिला सको उतनी बना दो।

बचपन में उसके साथ खेलते वक्त वो हमेशा मुझसे जीतता था और फिर बहुत चिढ़ाता था, तो उसपर गुस्सा भी आता था। और अब उसकी इस बात पर गुस्सा आया।

उसने आगे कहाँ कि तुम्हारी साइज के हिसाब से बताता हूँ। मैंने सोचा क्या मतलब था उसका, मैं तो ठहरी एक दुबली पतली लड़की तो फिर किस साइज की बात कर रहा था। मेरे सिर्फ स्तन और कूल्हे ही थोड़े बड़े थे।

पर उसने बात संभालते हुए बताया कि वो रोटी की साइज की बात कर रहा हैं। पहली बेली रोटी के आधार पर उसने चार रोटियों की फरमाइश की।

अगर अपने मेरी पिछली देसी हिन्दी सेक्सी स्टोरी “बेगानी शादी में सुहागरात मेरी” नहीं पढ़ी तो उसे जरुर पढ़िए।

उसने आगे बात करना जारी रखते हुए पूछा, तुम्हे पता हैं मेरी मम्मी मेरे लिए तुम्हारा हाथ मांगने आयी थी और तुम्हारी मम्मी ने ये कहते हुए मना कर दिया था, कि इतने पास में शादी नहीं करनी वरना झगडे ज्यादा होते हैं।

मुझे याद हैं जब मैं हाई स्कूल में थी तब एक बार मेरी मम्मी मेरे पापा से ये बात कर रही थी। मैं तो इतनी बड़ी थी नहीं कि उन बातों में कोई दिलचस्पी दिखाती। वैसे भी मेरे घर वालो ने मना कर दिया था।

मैंने संजू को जवाब दिया, हां याद हैं, मेरी मम्मी पापा से बात कर रही थी और यही कारण दिया था। मैंने पूछा तुम्हे पता था?

वो बोला मैंने ही तो भेजा था उनको। मैं चुप हो गयी।

संजू ने पूछा अगर तुम्हारी मम्मी तुमसे राय मांगती तो तुम क्या कहती?

मैंने कहा पता नहीं, मैं तो छोटी थी, पढाई करनी थी तो शायद ना ही बोलती।

संजू ने पूछा अच्छा अगर ये सवाल तुम्हारे कॉलेज ख़त्म होने के बाद पूछा होता तो तुम क्या बोलती?

अब मैं असमंजस में पड़ गयी। अगर ना बोलती, तो कारण क्या बताती, अगर हां बोलू तो पता नहीं मेरे बारे में क्या सोचेगा।

सच्चाई तो ये थी की जब मैंने मेरे मम्मी पापा को उस ऑफर के बारे में बात करते सुना था तो मैं शर्मा गयी थी। उसके बाद जब भी वो हमारे घर आता था तो उसको देख कर मैं सामने जाने से कतराती थी पर छुप कर जरूर देखती थी।

शायद मन ही मन उसको अपना मंगेतर मान लिया था, जब तक कि कुछ सालों बाद मेरी सच मैं मेरे पति के साथ सगाई नहीं हो गयी थी।

फिलहाल मैंने सोचा उसका दिल क्या दुखाना सच तो खैर यही हैं, इसलिए मैंने जवाब दिया कि हां कह देती, ऐसा कुछ ना कहने के लिए था ही नहीं।

संजू बोला मैं तुम्हारे भैया से मिलने तुम्हारे घर आता था, असल में मैं इसलिए आता था कि इस बहाने से तुम्हे देखने का मौका मिल जाता था। कभी कभार तुमसे बात हो जाती तो आवाज सुनने को भी मिल जाती थी।

वो एक के बाद एक ऐसे राज बता रहा था और मुझे भी कुरेद कर मेरे दिल को टटोल रहा था।

उसने कहा कि स्कूल कॉलेज के समय से लेकर अब तक तुम काफी बदल गयी हो।

उसने पूछा एक बात बताउ, बुरा तो नहीं मानोगी?

मैंने कहा मैं अब पांच सात साल उम्र में ज्यादा हो गयी होंगी ओर क्या।

वो बोला नहीं, तुम पहले से भी ज्यादा खूबसूरत हो गयी हो। पहले सलवार कुर्ता पहनती थी और अब साड़ी, जिससे तुम्हारी पतली सेक्सी कमर अब अच्छे से दिखती हैं।

अपनी तारीफ़ सुन मैंने अपनी हंसी अंदर ही दबा ली और शर्मा गयी। उसने तारीफ़ जारी रखी, पहले तुम्हारे सीने का हल्का उभार था अब इतना ज्यादा कि अच्छी अच्छी हीरोइने भी देख कर शर्मा जाए।

तुम्हारे ब्लाउज के पीछे के जालीदार हिस्से से झांकती तुम्हारी पीठ की स्किन पहले नहीं दिखती थी अब दिखती है। और तुम्हारे…

मैंने उसको बीच में ही टोंकते हुए कहा बस बहुत हुई तारीफ़।

खाना तैयार था तो मैंने उसको थाली में लगा दिया उसको खाने के लिए बोल दिया। एप्रन निकाल कर रख दिया और बाहर जाने लगी।

उसने मुझे रोकना चाहा और कहा कि वो मेरे प्यार में पागल था। मैंने वहां से जाना ही ठीक समझा और बिना रुके उसके सामने से होते हुए निकलने लगी।

पर उसने पीछे से मेरे साड़ी का पल्लू पकड़ लिया था। जैसे ही मैं तेजी से आगे बढ़ी तो पल्लू खिंच गया और कंधे पर साड़ी और ब्लाउज पर लगी पिन की वजह से मेरा ब्लाउज कंधे से नीचे खिसक गया। फिर झटके से पिन भी निकल गयी और शरीर के ऊपरी भाग से साड़ी नीचे गिर गयी।

मेरी ब्रा का एक स्ट्रेप दिखने लगा और एक कंधा भी नंगा हो गया था। मेरे पेट से लेकर ऊपर के हिस्से में सिर्फ एक ब्लाउज ही बचा था। मैंने तुरंत पल्लू पकड़ा और अपनी तरफ खिंचा।

संजू अब पल्लू को अपनी कलाई पर लपेटता हुआ मेरे नजदीक आ गया। पास आते ही उसने मेरा नीचे खिसका हुआ ब्लाउज फिर से कंधे पर चढ़ा दिया। फिर उसने मेरा पल्लू भी छोड़ दिया।

मैंने फिर से पल्लू अपने ऊपर डाला और किचन के बाहर आ गयी।

वो भी मेरे पीछे पीछे बाहर आया और कहने लगा मैं अब भी तुमसे उतना ही प्यार करता हूँ।

उसने मुझसे पूछा क्या तुम्हे भी मुझसे कभी प्यार रहा हैं।

मैंने कोई जवाब नहीं दिया।

वह ऊपर सीढ़ियों पर चढ़ने लगा और कहा, मैं ऊपर अपने कमरे में जा रहा हूँ, अगर तुम्हे मुझसे कभी भी थोड़ा सा भी प्यार रहा हो तो ऊपर आ जाना। मैं अब नीचे आके तुम्हे ओर परेशान नहीं करूँगा।

संजू सीढ़ियां चढ़ते हुए ऊपर जा चूका था। मैं वही दो मिनट खड़ी रही और सोचने लगी।

दिमाग कह रहा था अब कोई मतलब नहीं, इससे किसी का भी भला नहीं होने वाला। पर दिल कह रहा था कि थोड़े समय के लिए ही सही मुझे उससे प्यार और आकर्षण तो रहा था।

मैं इसी दुविधा में थी कि क्या करना चाहिए और मेरे कदम खुद-ब-खुद सीढ़ियां चढ़ रहे थे।

थोड़ी ही देर में मैं ऊपर पहुंच उसके कमरे के दरवाज़े के बाहर खड़ी थी। अंदर झाँका तो वो मेरी तरफ पीठ कर खिड़की से बाहर देख रहा था।

मैंने कमरे में प्रवेश किया और हाथ हिलने से मेरी चूड़ियाँ बज उठी। आवाज़ सुनते ही वो ख़ुशी से पलटा। मेरी करीब आया और कहने लगा मुझे पता था तुम जरूर आओगी।

उसने आगे बढ़ कर मुझे अपने सीने से लगा लिया।

मैं उसकी बाहों में जैसे पिघल रही थी। उसका हाथों की उंगलिया मेरे ब्लाउज की जालीनुमा डिज़ाइन से मेरे पीठ को छू रही था। मेरे वक्ष उसके सीने से थोड़ा दब से गए थे। अब मैंने भी अपने हाथ उसकी भुजाओ के अंदर डालते हुए पीछे से उसके कंधे पकड़ लिए।

कुछ मिनटों तक हम यही अहसास करते रहे कि पहले पहले पुराने प्यार की बाहों में कैसा सकून मिलता हैं। जब ये अहसास हुआ की ये सपना नहीं सच हैं तो हमने एक दूंसरे से गले लगना छोड़ा और अनायास ही हमारे होंठ एक दूंसरे के होठों की तरफ बढे और छू गए।

एक दूंजे के मुलायम होठों को छूते ही दोनों को एक झटका सा लगा और हम थोड़ा पीछे हट गए। फिर एक अल्पविराम के बाद दोनों के होंठ एक बार फिर मिले और इस बार एक दूंसरे का रस चूसने का मजा लिए बिना नहीं हटे।

कुछ सेकंड तक तो हमें होशो हवास ही नहीं रहा। जैसे तीन दिन के भूखे खाने पे टूट पड़ते हैं, वैसे ही हम एक दूंसरे के होंठों को दबा दबा के चूस रहे थे। जब हम दोनों का पेट भर गया तो एक दूंसरे को छोड़ा।

संजू के होठों पर मेरी लिपस्टिक लग गयी थी। मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए उसके होंठ पोछने लगी। उसने तुरंत मेरी कमर में हाथ डाला और पकड़ कर अपनी तरफ खिंच कर नीचे से मुझको अपने से चिपका दिया। हम दोनों के नाजुक अंग कपड़ो के अंदर से ही एक दूंसरे को छू रहे थे।

उसने अब पीछे हाथ ले जाकर मेरे नितम्बो को पकड़ लिया और कहने लगा, शुरू से इच्छा थी इनको पकडू और बिना कपड़ो के देखु, मेरी एक इच्छा पूरी कर दो।

मैंने अपने आप को छुड़ाया और उसकी और पीठ करके खड़ी हो गयी और कहा, कर लो अपनी इच्छा पूरी। वो मुझे धकियाते हुए बिस्तर के पास ले गया और पेट के बल उल्टा लेटा दिया।

उसने अब मेरा पेटीकोट साड़ी सहित ऊपर उठाया, जब तक की मेरी पैंटी पूरी ना दिख गयी। फिर उसने मेरी पैंटी पकड़ कर नीचे खींच दी और मेरे बड़े नितम्बो पर दोनों हाथों को फेरते हुए दबाने लगा।

अब उसने मेरी पैंटी पैरो से पूरी बाहर निकाल दी। मैं तुरंत उठ खड़ी हुई और अपने पेटीकोट साडी को नीचे कर दिए।

मैंने कहा बात सिर्फ देखने और छूने की हुई थी तो हो गया।

वो बोला किस अंग से छूना हैं वो थोड़े ही ना डीसाईड हुआ था। ऐसा कह कर उसने अपनी पैंट और अंडरवियर निकाल दी।

मैं उसका लंड देखने लगी जो कड़क होकर तैयार था। इतना आगे बढ़ने के बाद मुझे भी पीछे मुड़ना ठीक नहीं लगा।

उसने कहा, अब ओर मत तड़पाओ, मिलन होने जाने दो, बहुत सालो से तड़पा हूँ।

मैंने पूछा प्रोटेक्शन कहाँ हैं?

उसने कहा वो तो नहीं हैं, मैंने और बीवी ने बच्चा प्लान किया था तो प्रोटेक्शन की जरुरत ही नहीं थी कुछ महीनो से।

मैंने कहा सिर्फ तुम्हारे लिए मैं थोड़ा रिस्क लेने को तैयार हूँ बिना प्रोटेक्शन के पर तुम बहुत ध्यान रखना, कुछ गड़बड़ नहीं होनी चाहिए।

समय भी कितना तेजी से बदलता हैं, कुछ समय पहले मैं और पति एक बच्चे के लिए कितने लोगो से मदद ली और दुआ करते थे अब कुछ हो जाए और आज मैं कोशिश करती हूँ कि कुछ ना हो।

खैर मैंने अब उसको बिस्तर पर लेटा दिया। सारी जिम्मेदारी मुझे ही लेनी थी। मैंने अपने कपडे नीचे से ऊपर किये और अपने दोनों पाँव उसके दोनों तरफ फैला कर उसके लंड पर इस तरह बैठी की मेरी पीठ उसके मुँह की तरफ रहे।

मैंने उसको कहा तुम्हारी पसंद के अनुसार मिलन के समय तुम मेरे नितंब देखते रह पाओगे और छू भी पाओगे। मैं थोड़ा ऊपर उठी और उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत में घुसा दिया।

इतनी देर की छुअन से वैसे भी मेरे अंदर गीला हो चूका था, तो उसका फट से अंदर फिसलता हुआ घुस गया। उसकी एक जोर की आह निकली। जिसको दिल से प्यार करते हो तो शारीरिक सम्बन्ध के वक़्त वैसे भी मजा कुछ ओर होता हैं।

मैं ऊपर नीचे होने लगी, उसका लंड मेरी चूत की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर बाहर होने लगा। उसकी जोर जोर से सिसकिया चालु हो गयी। उसकी आवाज़ सुन मुझे भी मजा आने लगा।

वो मेरे नीचे के कपड़ो को अपने हाथ से बार बार उठा कर ऊपर रखने की कोशिश कर रहा था। उसने शिकायत की के मेरे कपडे नीचे गिर रहे हैं जिससे वो मेरा पसंदीदा अंग देख नहीं पा रहा हैं।

मैंने अब अपनी साडी के प्लीट्स पेटीकोट से बाहर निकालने लगी। वो भी मदद करते हुए साड़ी को पेटीकोट से अलग करने लगा।

साडी निकाल कर अलग रखने के बाद मैंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोला और टीशर्ट के भांति सर के ऊपर से निकाल दिया।

जिससे अब वो मेरी पतली कमर और नितम्बो को अब आसानी से देख सकता था। वो मेरी कमर और कूल्हों पर हाथ फेराने लगा।

अब मैं उसके पैरो की तरफ आगे झुक गयी और ऊपर नीचे हरकत करते हुए उसके लंड को अंदर बाहर करते हुए उसको मजा दिलाती रही।

रवि की माँ और बहन ने कैसे एक चुदक्कड रूप धारण किया और उसके साथ चुदाई के मजे लिए, यह उसकी हिन्दी चुदाई स्टोरी में जानिए।

उसने भी मेरे नितम्बो को पकड़ के चौड़ा कर दिया, जिससे वो अपने लंड को मेरे छेद में अंदर बाहर होते हुए देख पाए। वो सिसकिया मारते हुए बोले जा रहा था, आज तो मजा आ गया, तुम्हारे सेक्सी कूल्हों को नंगा देखा और मेरे लंड को अंदर बाहर होते हुए देख कर जन्नत मिल गयी।

थोड़ी देर हम दोनों ऐसे मजे लेते रहे। अब मैं फिर सीधी बैठ गयी। मैंने अपने हाथ पीछे किये और पीछे झुकते हुए दोनों हाथ उसके सीने पर रख दिए।

अब मैं एक बार फिर ऊपर नीचे होने लगी। उसने अपने दोनों हाथ मेरे ब्लाउज पर रख चुचियाँ दबाने लगा। फिर पीछे से मेरे ब्लाउज और ब्रा के हुक खोल दिए।

मैंने एक एक करके हाथ सीधा किया और उसने ब्लाउज और ब्रा को मेरे हाथों से पूरा निकाल दिया। मैं अब पूरी नंगी हो चुकी थी।

मेरा सीना छत की तरफ था और वो अपने दोनों से मेरे आगे पीछे उछलते हुए चूँचियो को दबा कर मसलने लगा।

मेरी चुत में अंदर बाहर होते लंड के साथ चूंचियो के दबने से मुझे भी मजा आने लगा। पर फिर मैंने सोचा ज्यादा देर करना भी थोड़ा रिस्की हैं। मैं सीधा बैठ गयी और उसके ऊपर से उठ गयी।

हालांकि दोनों का झड़ना बाकी था पर रिस्क भी नहीं लेना था। मेरा बाहर निकालना उसको भी पसंद नहीं आया। जैसे ही मैं बिस्तर से उतरी वो भी उतर गया और मुझे पीछे से पकड़ लिया।

उसने मुझे बिस्तर पर धक्का देते हुए उल्टा लेटा दिया और दोनों टाँगे ऊपर उठा कर चौड़ी करते हुए, अपनी कमर के दोनों तरफ ले गया, जिससे उसका लंड फिर मेरी चुत को छू गया।

मैं सिर्फ कोहनियो के बल बिस्तर पर थी और बाकी का शरीर हवा में था। वो मेरी दोनों जांघो को हवा में पकडे अपने कड़क लंड से मेरी चुत में निशाना लगाने लगा। थोड़ी ही देर में उसका निशाना लगा और उसने फिर मेरे अंदर अपना लंड डाल दिया।

वो मेरी दोनों जांघो को पकडे आगे पीछे करते हुए मजे लेने लगा। हवा में इतनी करतबबाजी से मैंने पहले कभी नहीं चुदवाया था और मुझे मजे आने लगे। मैं जोर जोर से आई ऊई करने लगी।

थोड़ी ही देर में फचाक फचाक की आवाज़े आने लगी और मैं झड़ने को आई तो सिसकिया चीखों में बदलने लगी।

अह्ह्ह्हह्ह संजू आज कर लो अपनी इच्छा पुरी अह्ह्ह्हह ठोको मेरी चूत को ऐसे ही अह्ह्ह्हह्ह ऐसे ही करो मेरी चूत की ठुकाई!

ये सब बड बडाते हुए, थोड़ी ही देर में चीखते चिल्लाते हुए मैं झड़ गयी।

वो अब भी मुझे बुरी तरह से चोदे जा रहा था। मैंने उसको कहा अब छोड़ दो वरना कुछ हो जायेगा। वो भी इतनी देर से मुझे आधा उठाये उठाये अब थकने लगा था तो मुझे छोड़ दिया। मैंने चैन की सांस ली।

उसका अभी हुआ नहीं था, तो मेरी तरफ तरसती निगाहो से देख रहा था।

मैंने कहा अभी मुझे रिस्क नहीं लेना हैं, तुम्हारा काम मैं हाथ से ही कर देती हूँ। उसको तो पूरा अंदर घुस कर ही करना था पर उसने हां बोल दिया, भागते भूत की लंगोटी ही सही।

उसने कहा, वाश रूम में कर लेते हैं यहाँ कमरे में गन्दा हो जायेगा। वाशरूम नीचे की तरफ था।

मैंने अपने सारे कपडे वापस पहन लिए। वो अपनी पैंट हाथ में पकडे मेरे साथ सीढ़ियों से होते हुए नीचे आने लगा।

मैंने उसको पूछा कोई अंदर आ तो नहीं जायेगा।

उसने कहा नहीं आएगा, मम्मी चाबी लेकर नहीं गए हैं। हम दोनों अब वाशरूम में घुस गए।

मैंने देखा इतनी देर में उसका लंड मुरझा कर लटक रहा था। मैंने थोड़ा नीचे झुकी और उसका लंड अपनी मुट्ठी में भरकर आगे पीछे खींचने लगी।

कुछ मिनटों की इस खींचातानी से वो फिर से खड़ा होने लगा। एक बार खड़ा हुआ तो मैंने उसको हाथ से रगड़ने लगी। थोड़ी ही देर में उसकी सिसकिया निकलनी शुरू हो गयी।

उसकी फरमाइश थी कि वो मेरे मम्मो के बीच में लंड रख कर रगड़ना चाहता है। मैंने कहा ठीक हैं पर कैसे करोगे, यहाँ तो बैठने की भी जगह नहीं।

उसने कहा बाहर हॉल में सोफे पर करते हैं।

मैंने पूछा वहा गन्दा नहीं होगा क्या, तुम्हारा पानी कहाँ निकालोगे।

उसने कहा वो मेरी चूचियों पर ही पानी निकालेगा।

पर मैंने मना कर दिया कि ऐसी गन्दगी मुझे नहीं चाहिए। आखिर में ये डीसाईड हुआ कि वो मेरे मम्मो के बीच लंड रगड़ेगा पर पानी वाशरूम में आकर ही निकालेगा।

अब हम लोग सोफे पर आ गए। मैंने अपना पल्लू हटा कर ब्लाउज और ब्रा निकाल दिया। उसने मुझे सोफे पर लेटाया और मुझ पर झुक कर अपना लंड मेरे दोनों मम्मो के बीच रख दिया।

मैंने अब अपने दोनों मम्मो को साइड से दबाते हुए उसका लंड को बीच में झकड़ लिया। वो अब आगे पीछे होता हुआ मेरे मम्मो के बीच चोदने लगा।

थोड़ी देर तक ऐसे ही करते करते वो आहें भरने लगा। मेरे सीने पर रगड़ से पसीना होने लगा या वो उसका रिसता हुआ पानी था ये पता नहीं चला।

मैंने उसको फिर चेताया पानी निकलने से पहले उठ जाना, मेरे ऊपर मत डालना। उसने बोला अभी टाइम हैं और जोर से झटके मारने लगा।

कुछ मिनट तक ऐसे करते रहने के बाद उसने अपना लंड पीछे खिंच लिया। मैंने अपने मम्मे छोड़ दिए और कहा अब वाशरूम में जाकर कर आओ।

मैंने अपना वाक्य पूरा ही किया था कि उसके लंड से एक पानी का फव्वारा छूटा और मेरी आँख पर टकराया। फिर दूंसरा फव्वारा मेरे होंठ पर आया। फिर बड़ी बड़ी बुँदे मेरी चूचियों पर आ गिरी।

मैं उसको गुस्सा में कुछ बोलती उससे पहले ही वो कान पकड़ कर सॉरी बोलने लगा और कहा कि क्या करू कण्ट्रोल नहीं हुआ। तुम्हारे मम्मे हैं ही इतने जबरदस्त।

फिर मैं भी क्या कर सकती थी। उसको कुछ साफ़ करने के लिए लाने को कहा। वो भागता हुआ गया और नैपकिन ले आया। मैंने नैपकिन से गन्दा पानी साफ़ किया। मेरा मुँह और चूचियाँ चिपचिपी हो गयी थी।

मैंने अपना ब्लाउज और ब्रा उठाया और वाशरूम में जाकर पानी से पोछ कर चिकनाई मिटाई। उसने भी अपने आप को साफ़ किया और हम कपडे पहन कर हॉल में आ गये।

उसने 5 मिनट में जल्दी जल्दी खाना खा लिया। फिर बाहर की घंटी बजी। दरवाजा खोला तो हम दोनों की मम्मिया आ गयी थी।

उन्होंने कहा सब जगह थोड़ी थोड़ी देर रुकना पड़ा और चाय नाश्ता करना पड़ा इस कारण बहुत देर हो गयी। आंटी ने पूछा तुम दोनों भी खाना खाकर ही जाओ। मेरी भूख प्यास तो वैसे ही उनके बेटे ने मिटा दी थी।

हम लोग इजाजत लेकर वहां से निकल पड़े। मम्मी ने पूछा हम गए थे तब तुम्हारी शक्ल पे बारह बजे थे, अभी आये तो एकदम खुश लग रही थी।

कुछ शक हो उसके पहले ही मैंने बोल दिया आपका इंतज़ार करते करते इतना टाइम हो गया, तो आपको देख कर ही खुश हो गयी।

फंक्शन के दिन देर सुबह मेरे पति हमारे बच्चे सहित मेरे पीहर पहुंच गए थे। सारा कार्यक्रम घर के पास पांच मिनट की दुरी पर एक कम्युनिटी हॉल में रखा गया था।

संजू भी शाम को फंक्शन में आने वाला था। मुझे डर था कि हमारे बीच उसके घर जो भी हुआ उसके बाद कही वो पति के सामने कोई ऐसी वैसी हरकत ना कर दे कि पति को शक हो जाए।

पापा और भैया नाश्ता करने के बाद ही कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्था सँभालने के लिए चले गए।

बाकी हम सब लोग भी नाश्ते के बाद घर का काम निपटा कर नहा धो कर तैयार हो गए थे। पति चूँकि सफर से आये ही थे तो वो नहा कर नाश्ते के लिए आ गए।

मम्मी ने कहाँ कि हॉल में शाम की तैयारी में सहायता के लिए जाना हैं, तो एक जन दामादजी को नाश्ता कराने रुक जाओ बाकि सब चलते हैं।

मैंने कहा मैं रुक जाती हूँ। भाभी ने सुझाव दिया कि उन्हें वैसे भी बर्तन धोने बाकी हैं तो उनको रुकना ही पड़ेगा, तो वो मेरे पति को नाश्ता करवा देंगे और बाद में हॉल में ले आएंगे।

तो फिर मैं अपनी मम्मी और अपने और भैय्या के बच्चो के साथ हॉल की तरफ निकल पड़े।

पांच मिनट में हम वह पहुंच गए।

हॉल में पहुंचने पर याद आया मेरा मोबाइल तो घर पर ही छूट गया। मैं माँ को बोलकर फिर घर के लिए निकली। जाते वक़्त शायद हमने बाहर का दरवाज़ा लॉक नहीं किया था तो थोड़ा खुला ही था। मैं सीधा अंदर चली गयी।

डाइनिंग टेबल पर देखा तो पति नहीं थे। मैंने टेबल पर रखा मोबाइल उठाया। फिर उत्सुकतावश किचन की तरफ देखा, वहां भी भाभी नजर नहीं आये।

एक स्त्री होने के नाते दिमाग में कुछ खटका। मैंने देखा भैय्या के कमरे का दरवाज़ा बंद था, पर भैय्या तो कम्युनिटी हॉल में थे।

मैं अब धीरे धीरे भैया के कमरे की तरफ बढ़ी और दरवाज़े के बाहर खड़े होकर कान लगा सुनने की कोशिश करने लगी।

अंदर से रह रह के भाभी के खिलखिलाने की आवाज़ आ रही थी।

देसी कहानी पर आपके लिए बहुत सी हिन्दी पोर्न स्टोरी उपलभध है जिनका आप मजा ले सकते है!

मुझे शक हुआ कही मेरे पति भाभी के साथ अंदर तो नहीं। मैं थोड़ी देर के लिए अतीत में चली गयी।

मेरे पति मेरी भाभी को हमारी शादी के पहले से जानते थे, क्यों कि मेरे पति के बड़े चचेरे भाई की साली बाद में मेरी भाभी बनी थी।

हमारी शादी के पहले ही इन दोनों की अच्छी खासी बातें होती थी। पर पहले कभी मुझे शक नहीं हुआ था, क्योकि शादी के बाद से ही हम दूसरे शहर में रहते थे।

कमरे के अंदर से आती आवाज़ों से मैं बेचैन होने लगी। एक इच्छा हुई कि दरवाज़ा तोड़ के अंदर चली जाऊ और उनको रंगे हाथों पकड़ लु। फिर सोचा अगर अंदर गयी और कुछ नहीं निकला तो मेरी ही फजीहत हो जाएगी।

फिर मैंने फैसला किया कि मकान के साइड में इस कमरे की खिड़की हैं, वहां से झांक कर देखती हु, शायद कुछ दिख जाए।

मैं बाहर निकली और खिड़की के करीब पहुची।

अंदर झाँका तो कांच की खिड़की बंद थी, अंदर पर्दा लगा हुआ था और कुछ दिख नहीं रहा था। मैं थोड़ी निराश हुई कि अब क्या किया जाए।

मैं फिर घर के अंदर पहुंची। फिर मैंने देखा कि कमरे के दरवाज़े के ऊपर का रोशनदान खुला हैं।

मैंने अपने बैग से सेल्फी स्टिक निकाली और अपना मोबाइल उस पर लगा के वीडियो मोड चालू कर दिया। मैंने अपनी सेल्फी स्टिक पूरी लम्बी की और रोशनदान के वहां लगा दिया और अंदर का दृश्य देखने लगी।

मोबाइल से अंदर का नजारा देख कर मेरे होश उड़ गए।

मेरे पति मेरी भाभी के साथ बिस्तर पर थे और दोनों अर्धनग्न हालत में थे। भाभी नीचे लेटी थी और पति उनकी चूचियों को चुस रहे थे। मेरी हालत काटो तो खून नहीं वाली हो गयी।

थोड़ी देर तो कुछ सुझा ही नहीं। मेरा माथा ठनक गया, और लड़ाई के मोड में आ गयी। मगर फिर अपने किये हुए काण्ड याद आ गए। पति की पीठ पीछे मैंने भी तो ऐसा ही कुछ किया हैं। यहाँ तक कि एक काण्ड का तो गवाह भी हैं।

अगर किसी दिन पति को पता चल गया तो। फिर सोचा कभी पकड़ी गयी तो ये वीडियो मेरे काम आएगा पति को चुप कराने के लिए।

मैंने मन ही मन फैसला ले लिया था कि मुझे अभी कोई एक्शन नहीं लेना हैं। बस ये सबूत साथ रखना हैं समय आने पर काम आएगा।

इस बीच मेरी भाभी अब एक्शन मोड में थी और मेरे पति का लंड अपने मुँह में ले अपना हाथ उस पर घुमाते हुए मजे लेते हुए चूस रही थी। मुझसे देखा नहीं गया और बहुत जलन हुई।

मैंने अब वो सेल्फी स्टिक नीचे की और वीडियो बंद किया। फिर बाहर का दरवाज़ा धीरे से बंद कर वापिस हॉल की तरफ बढ़ी।

पुरे रास्ते कमरे के अंदर का दृश्य ही मेरी आँखों के सामने घूम रहा था। मेरे साथ मेरे भैया का घर भी बर्बाद हो रहा था। इसी चिंता के साथ मैं हॉल में दूसरे कामों को करने लगी।

आधे घंटे के बाद मेरे पति, भाभी के साथ हॉल में पहुंचे। दोनों के चेहरे की लाली देखते ही बनती थी। मुझे तो खैर पता था इस लाली का राज क्या हैं।

मैंने कई बार नोटिस किया कि काम के बीच बार बार नजरे बचा के वो दोनों एक दूसरे को शरारत भरी नजरो से देख रहे थे और हंस रहे थे।

कई बार मैं इधर उधर काम में व्यस्त होती और वो थोड़ी थोड़ी देर के लिए कही गायब भी हो जाते।

मैंने एक बार उनको फॉलो करने की सोची। पहले भाभी वहां से निकले और उसके कुछ सेकंड बाद पति उनके पीछे पीछे निकले। मैं चुपके से फॉलो करती हुई बाहर गयी।

हम निचली मंजिल पर थे, पर वो लोग दूसरी मंजिल के वाशरूम की तरफ गए थे। मैं भी छुपते हुए वहां पहुंची। वो दोनों एक ही वाशरूम में घुसे थे।

मैं बिना आवाज़ किये दरवाज़े के पास पहुंची। अंदर से फुसफुसाने की आवाज़ आ रही थी। भाभी की चूडियो के खनकने की आवाज़ तो कभी कपडे सरकने की आवाज़।

थोड़ी देर में चप चप की आवाज आने लगी, शायद ये चूचिया चूस रहे थे या भाभी उनका लंड। मैं मन मसौस कर रह गयी। गुस्सा कण्ट्रोल करना पड़ रहा था।

शायद अब तक जो मैंने पति को धोखे दिए हैं उनकी सजा इस तरह मिल रही थी। मैं यही सोचती रह गयी और अंदर से उनकी सिसकियों की आवाज़ शुरू हो गयी।

थोड़ी देर में मेरे गुस्से की जगह उनकी आवाज सुन कर मेरे को भी कुछ कुछ होने लगा। मैं अपने हाथों से अपने ही अंग दबाने लगी। काश अंदर भाभी की जगह मैं होती।

अंदर से अब जोर जोर की आवाजे आने लगी। भाभी कह रही थी अशोक धीरे धीरे करो मेरी जान निकल रही हैं, मेरी चीखें निकल रही हैं कोई सुन कर आ जायेगा।

पति हाँफते हुए बोले बाकी लोगो का काम नीचे हो रहा हैं, ऊपर सिर्फ हमारा काम हो रहा हैं, कोई नहीं आएगा।

भाभी की बीच बीच में हलकी चीखें निकल रही थी और पति तो सिसकिया भर रहे थे।

भाभी बोली तुम्हारे से करवाने का सबसे बड़ा फायदा हैं कि प्रोटेक्शन बीच में नहीं आता। तुमको कुदरत का वरदान हैं कितना भी करो लड़की माँ नहीं बन सकती।

ये बात सुनकर मैं सन्न रह गयी। मैंने और पति ने वादा किया था कि हम दोनों के अलावा ये राज किसी ओर को पता नहीं चलनी चाहिए। इसका मतलब भाभी को पता हैं कि मेरे बच्चे का बाप मेरा पति नहीं हैं।

ऐसी चीटिंग तो मैंने भी कभी नहीं की थी कि घर के राज बाहर बता दू।

थोड़ी ही देर में दोनों जोर की आवाजे निकालते हुए झड़ गए।

मैं तुरंत वहां से निकल फिर नीचे वाली मंजिल पर आ गयी और अपने कामो में लग गयी। थोड़ी देर में वो दोनों भी थोड़े थोड़े अंतराल पर वहां आ गए और इस तरह काम करने लगे जैसे कुछ हुआ ही न हो।

दिन भर मैं उनकी हरकतें इसी तरह झेलती रही। शाम को हम तैयार होने के लिए घर पर आ गये।

पति तो भाभी की ही खूबसूरती के पुल बांधे जा रहे थे, जैसे मैं तो वहां थी ही नहीं। देर शाम हम लोग तैयार हो कर हॉल में पहुंच गए इसके पहले की मेहमान आना शुरू ही जाये।

अब धीरे धीरे मेहमान आना शुरू हो गए थे और चहल पहल काफी बढ़ गयी थी। संजू भी आया था और बार बार मुझसे बात करने की कोशिश कर रहा था, पर दिन भर हुए काण्ड के बाद चिंता में डूबी मैंने उसको ज्यादा तवज्जो नहीं दी।

बीच बीच में समय मिलते ही ये जरूर देख लेती कि पति और भाभी कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं। अधिकतर समय वो एक दूसरे के आस पास ही थे।

पार्टी परवान पर थी और माँ ने मुझसे कहा कि घर पर एक काम का बेग रह गया हैं तो उसको ले आ।

मैं चाबी लेकर हॉल से बाहर निकली। संजू भी मेरे पीछे पीछे आ गया। मुझसे बोलने लगा कि वो आज प्रोटेक्शन लेकर आया हैं।

मैंने उसको डांट दिया कि तो मैं क्या करू। उस दिन तुम्हारे घर पर जो भी हुआ जज्बात में हो गया, अब मुझसे फिर वही उम्मीद मत रखना। वो थोड़ा रुआंसा सा हो गया। पर सुबह से मेरी चिंता कुछ ओर थी।

संजू मेरे पीछे पीछे एक आस लिए घर तक आ गया। मैंने बाहर के दरवाजे का इनर लॉक खोला और घर में प्रवेश किया। भाभी के कमरे के आधे बंद दरवाजे से रोशनी आ रही थी।

मुझे झटका लगा कही मेरे पति और भाभी फिर से यहाँ आकर तो नहीं लग गए। मैंने संजू को इशारे से आवाज नहीं करने के लिए कहा।

हम दोनों दबे पाँव कमरे के दरवाजे के करीब पहुंचे और मैं आधे खुले दरवाजे से झाँकने लगी, संजू मेरे पीछे खड़ा हो देखने लगा।

जल्दबाजी में उन्होंने दरवाजा भी पूरा बंद नहीं किए था। दोनों शायद थोड़ी देर पहले ही पहुंचे थे, क्यों की मेरे पति मेरी भाभी की साड़ी पकड़ खींचते हुए उतार रहे थे।

संजू मेरा हाथ पकड़ कर बाहर आने का इशारा करने लगा। मैं उसके साथ बाहर आ गयी। उसको भी झटका लगा था। मेरे भैय्या का दोस्त था और मेरी भाभी को भी भाभी ही बुलाता था।

वो भाभी अभी मेरे पति के साथ इस हालत में थी। उसने कहाँ तुम्हारा रिएक्शन देख कर लगा तुम्हे पहले से अपने पति और भाभी के बारे में पता था।

मैंने कहा आज सुबह ही पता चला। उसने मेरा कंधा दबाते हुए मुझे सांत्वना दी। हम एक बार फिर दबे पाँव अंदर गए देखने लगे।

अब पति और भाभी के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। भाभी मेरे पति के ऊपर सवार होने की तैयारी में थी। उस पर बैठ कर उन्होंने पति का लंड अपनी चुत में घुसा दिया। वो ऊपर नीचे हरकत करते हुए मेरे पति को चोद रही थी।

संजू मेरे पीछे खड़ा था और थोड़ी ही देर में मुझसे चिपक गया। मैं अंदर का नजारा देखने में मग्न थी तो संजू पर ध्यान ही नहीं गया।

थोड़ी देर में वो मेरे पिछवाड़े पर रगड़ खाने लगा तो मेरा ध्यान गया। मुझे भी अंदर का नजारा देखने के बाद वो रगड़ अच्छी लग रही थी।

मेरे कुछ ना बोलने से उसके हौसले भी बढे और मेरी साडी नीचे से ऊपर उठा दी और मेरी पैंटी नीचे उतार कर मेरे नितंबो पर हाथ फेरने लगा।

मैंने उसको रोका और अपने कपडे सही किये और उसका हाथ पकड़ कर घर से बाहर ले आयी। आते वक़्त वो बैग भी साथ ले लिया जो माँ ने लाने को बोला था।

बाहर आकर मैंने उससे कहा, संजू मेरा एक काम करोगे।

उसने कहा बोलो क्या करना हैं।

मैंने उसको समझाया कि तुम्हे अंदर जाकर उन दोनों को रोकना हैं और उनको समझाना हैं कि वो जो कुछ भी कर रहे हैं वो गलत हैं। उनके दिमाग में ये बात अच्छे से बैठानी हैं कि आइन्दा वो लोग इस तरह का काम से तौबा कर ले।

मैंने उसको बताया कि ये काम मैं नहीं कर सकती, क्योंकि ये हम तीनो के लिए बहुत शर्मनाक होगा और एक दूसरे से शायद फिर कभी नजरे ना मिला पाए, इसलिए ये काम तो तुम्हे ही करना पड़ेगा।

संजू बोला ठीक हैं समझा दूंगा पर फिर तुम मुझे अपने साथ करने दोगी, मैं प्रोटेक्शन भी लाया हु।

मैंने उसको डांट दिया, मैं इतनी तनाव में हु और तुमको ये सब सूझ रहा हैं। हम अपना बाद में देखेंगे पहले तुम मेरा ये काम कर दो। मैं अभी वापस हॉल में जा रही हू, ये बैग देना हैं। तुम इन दोनों को हॉल में ले आना। और मेरे बारे में मत बताना कि मैं यहाँ आयी थी और इनको देख लिया था।

संजू ने आश्वस्त किया कि वो सब समझ गया हैं। संजू अब वापस घर के अंदर गया और मैं बैग लिए वापस हॉल की तरफ चली आयी।

पुरे रास्ते और हॉल में पहुंच कर भी मेरी चिंता घर पे क्या हो रहा होगा इस पर थी। मैं दो तीन मिनट से ज्यादा वहां ठहर नहीं पायी और एक बार फिर अपने घर की तरफ बढ़ गयी।

रास्ते में ध्यान रख रही थी कि कही वो लोग सामने से आते हुए ना मिल जाए, कोई बहाना भी सोचने लगी।

अब मैं घर पर पहुंच गयी। चाबी मेरे पास ही रह गयी थी तो डरते डरते धीरे से बाहर का दरवाजा खोला, अंदर कोई दिखाई नहीं दे रहा था। पर अभी भी भाभी के कमरे के आधे खुले दरवाजे से रोशनी आ रही थी।

शायद वो लोग अभी भी अंदर ही थे। अंदर से कुछ आवाजे आ रही थी। मैं अंदर जाऊ या न जाऊ सोच में पड़ गयी कि कही पति और भाभी मुझे देख ना ले।

देसी कहानी पर आपके लिए बहुत सी हिन्दी पोर्न स्टोरी उपलभध है जिनका आप मजा ले सकते है!

फिर मैं हिम्मत करके कमरे के दरवाजे के पास पहुंची और अंदर झांकने लगी। अंदर का नजारा देख के मेरा सर चकरा गया। मेरी भाभी डॉगी बनी हुई थी और पीछे से संजू उनको चोद रहा था जब की उनके मुँह में मेरे पति अपना लंड घुसाए उनका मुँह चोद रहे थे।

मैंने संजू को किस काम के लिए भेजा और वो क्या कर रहा था। जिस संजू को रखवाली के लिए भेजा था वो ही तिजोरी में सेंध मार रहा था।

भाभी और पति ने मिलकर इस संजू को भी पटा लिया था या फिर संजू ने ही इन दोनों की मज़बूरी का फायदा उठाते हुए उनको ब्लैकमेल किया होगा।

संजू मेरे साथ करने के लिए जो कंडोम लाया था उसका अब वो इस्तेमाल कर रहा था। शायद मेरी ही गलती थी, मैंने ही उसको अपने साथ करने को ना बोला था, इसलिए उसको जैसे ही मौका मिला दूसरे के साथ हो लिया।

मेरी भाभी आगे पीछे दोनों छेदो में चुदवा रही थी और कही ना कही मैं भी इसकी जिम्मेदार थी, ना मैं संजू को भेजती ना भाभी फंसती।

संजू पीछे से भाभी को इतने जोर के झटके मार रहा था कि पति को कुछ करने की जरुरत ही नहीं थी, भाभी का मुँह उन झटको की वजह से अपने आप आगे पीछे होते हुए चुद रहा था।

अभी तो मैं अंदर जाकर उनको डांट कर रोक भी नहीं सकती थी, क्योंकि संजू बोल सकता था कि मैं उनको थोड़ी देर पहले ही देख कर जा चुकी हु, और मैंने ही संजू को अंदर भेजा था। मैं खुद फंस सकती थी। उससे भी बड़ी बात संजू मेरा वो भेद खोल सकता था जो हम दोनों के बीच उसके घर पर हुआ था।

मैंने चुप चाप रह कर देखते रहने का फैसला किया ताकि पता तो चले मेरे जाने के बाद इनके बीच क्या सौदा हुआ हैं।

थोड़ी देर के बाद उन्होंने पोजीशन चेंज की। पति नीचे लेट लेट गए और भाभी उनके ऊपर पेट के बल। पति ने अपना लंड भाभी की चुत में घुसा दिया। ऊपर से संजू भाभी के ऊपर लेट गया।

दो भूरी चमड़ियो वाले मर्दो के बीच भाभी का गौरा जिस्म ऐसा लग रहा था, जैसे ब्राउन ब्रेड के बीच चीस रख दिया हो। भाभी अब सैंडविच बंद चुकी थी।

संजू अब अपना लंड भी भाभी की चुत में घुसाने की कोशिश करने लगा जहां पहले से पति का लंड घुसा हुआ था।

थोड़ी देर वो संघर्ष करता रहा और अंत में उसने थोड़ा बहुत अंदर घुसा ही दिया। भाभी तो दर्द के मारे चीखने लगी। मुझे उन पर बहुत दया आयी। इस सब की जिम्मेदार शायद मैं ही थी।

एक मेरा पति और दूसरा मेरा पहला प्यार, दोनों ही आज मेरी भाभी के साथ लगे हुए थे। कही ना कही दोनों ही मुझे धोखा दे रहे थे। देखा जाए तो मेरा पहला प्यार, मेरे पति के पहले प्यार को चोद रहा था।

फिलहाल संजू का ज्यादा देर भाभी के अंदर टिका नहीं और उसने बाहर निकाल दिया। अब उसने भाभी के पीछे वाले छेद में अपना लंड घुसा दिया। भाभी एक बार फिर चीख पड़ी। अब उनके दोनों छेद लंड से भर गए थे।

भाभी अब जोर जोर की आवाजे निकलते हुए मस्त चुदवा रही थी। मुझे जो दर्द की चीखें लग रही थी वो दरअसल मजे की थी, क्यों कि भाभी उन दोनों को जोर से झटके मारने को बोल रही थी।

भाभी का ऐसा रूप होगा ऐसा तो कभी सोचा न था। काश उनकी जगह मैं होती, एक छेद में मेरा पति तो दूसरे में मेरा पहला प्यार, कितना मजा आता। उन लोगो को मजा लेते हुए देख मेरी भी इच्छा होने लगी, पर कुछ कर नहीं सकती थी।

कमरे में उन तीनो की आवाजे गूंजने लगी। भाभी ने दोनों को बोला एक साथ झटका मारो। दोनों ने ऐसा ही किया। हर झटके साथ तीनो की एक सुर में आह निकलने लगी।

इस तरह का ट्रिपल मजा मैंने कभी जिंदगी में नहीं देखा था। ये सब देख मेरी तो पैंटी गीली हो गयी। उस वक़्त वहां कोई ओर होता तो शायद मैं खड़े खड़े ही चुदवा लेती।

इतनी देर तक चोदते और चुदवाते तीनो ही हांफने लगे, पर उनको मजा ही इतना आ रहा था, कि वो छोड़ने को ही तैयार नहीं थे।

संजू ने पति को बोला अब में आगे से मारता हु और तुम पीछे से आओ, तुमने वैसे भी प्रोटेक्शन नहीं पहना हैं तो इसको कुछ हो जायेगा। पति अपना राज तो खोल नहीं सकते थे तो वो मान गए।

संजू पीछे हटा और भाभी को पति के ऊपर पीठ के बल लेटा दिया। पहले पति ने अपना लंड भाभी की गांड में घुसा दिया और फिर संजू भाभी की टाँगे चौड़ा कर बीच में बैठ गया।

उसने अब अपना लंड पकड़ कर भाभी की चुत में घुसा दिया। एक बार फिर झटको पे झटके लगने शुरू हो गए। भाभी चिल्लाये जा रही थी और दोनों मर्द बिना रहम किये ओर जोर से झटके मारने लगे।

मुझे डर लगा कही आज भाभी के दोनों छेद फट ही ना जाए।

संजू चोदते हुए बोल रहा था, बहुत दिंनो से तेरी चुत मारने का मन था आज जाके पकड़ में आयी हैं। आज तो फाड़ के रख दूंगा।

भाभी भी नशे में आ गयी थी और बेशर्मी से बोली फाड़ डालो मैं भी देखु कितना जोर हैं तुम में।

पति ने अब चोदना बंद कर दिया था, शायद इतनी आवाजों में पता ही नहीं चला कब वो झड़ गए।

थोड़ी देर में संजू और भाभी के बीच बात गन्दी बातें शुरू हो गयी।

भाभी बोली चोद दे मुझको संजू जोर से चोद।

संजू और तेजी से करते हुए बोलता ले ले अपनी चुत में मेरा सब माल।

थोड़ी देर में भाभी चिल्लाते हुए झड़ गयी और उसके बाद संजू भी कपकपाते हुए झड़ गया।

काम ख़त्म कर तीनो नंगे ही बिस्तर पे आस पास लेटे थे। भाभी के पाँव दरवाजे की तरफ थे और टाँगे खुली थी।

मैं उनके दोनों छेद देख पा रही थी जहां केले की मोटाई जितनी आकार की गुफा सी बन गयी थी। दोनों छेदो से पानी रिस रहा था।

मैं अब उनकी बातें सुनने लगी।

भाभी ने कहाँ कि कल रात को अशोक अपने शहर के लिए निकल जाएगा, उसके पहले दिन का कही प्रोग्राम बनाते हैं, वैसे भी मेरे पति तो कल काम पर जाने वाले हैं।

मेरे पति ने बोला मुश्किल हैं मेरी वाइफ का क्या करेंगे। तीनो अगले दिन का प्लान बना रहे थे, और मैं बाहर खड़ी हो सुनती रही।

मेरे पति, मेरी भाभी और मेरा पहला प्यार तीनो ने मिलकर जमकर चुदने के मजे लिए और अब वो अगले दिन का दिन का भी प्लान बना रहे थे, जब कि मैं बाहर खड़े खड़े ये सब देख रही थी। और उनके देसी ग्रुप सेक्स का मजा भी ले रही थी।

मैंने अब कान लगा कर उनका प्लान जानने की कोशिश की। जितना मुझे याद हैं उसको अक्षरत मैं आपको यहाँ बताने जा रही हूँ।

भाभी: कल रात को अशोक अपने शहर के लिए निकल जाएगा, उसके पहले दिन का कही प्रोग्राम बनाते हैं, वैसे भी मेरे पति तो कल काम पर जाने वाले हैं।

अशोक (मेरे पति): कल का मुश्किल हैं, मेरी वाइफ के सामने यहाँ से कैसे निकलेंगे।

भाभी: मैं ये मौका छोड़ना नहीं चाहती, तुम पता नहीं फिर कब आओगे।

संजू: तुम दोनों का चक्कर कब से चल रहा हैं वैसे?

अशोक: मेरे चचेरे भाई की शादी के दौरान मुलाक़ात हुई और पहली नजर में प्यार हो गया।

भाभी: ये हम दोनों का पहला प्यार था।

अशोक: पहला प्यार तो पहला प्यार होता हैं। संजू तुम्हारा पहला प्यार कौन हैं?

[बाहर मेरी हालत खस्ता हो गई, कही संजू मेरा और उसका सारा राज ना खोल दे]

संजू: वो छोडो, कल का क्या प्रोग्राम हैं, आज के जैसा ही करना हैं। मेरे एक दोस्त का घर खाली हैं। वहां मिल सकते हैं।

भाभी: ठीक हैं तो कल दोपहर में कोई बहाना बना कर मैं और अशोक आ जायेंगे, एड्रेस भेज दो हमे।

अशोक: क्या बहाना मार के जायेंगे, मेरी बीवी को शक हुआ तो?

संजू: तो उनको भी ले आओ। वैसे भी एक जन कम हैं।

अशोक: यार ये मरवाएगा। मेरी बीवी को क्या बोलूंगा? मैं तुम्हारी भाभी को चोदता चाहता हूँ तो देखने के लिए तुम भी आओ।

संजू: आपने क्या कभी अपनी बीवी से पूछा हैं? हो सकता हैं उसकी भी इच्छा हो, या फिर तुम ही अपनी बीवी को शेयर नहीं करना चाहते।

अशोक: नहीं, ऐसा नहीं हैं।

संजू: क्यू आपने कभी देखा हैं क्या अपनी पत्नी को किसी के साथ करते हुए?

[मैंने सोचा, देखा तो हैं जब बच्चे पैदा करने के लिए साजिश कर रहे थे, क्लोसेट के अंदर से दो लोगो से चुदते हुए मुझे देख रहे थे और फिर बस के अंदर भी देखा था]

भाभी: संजू, तुम बडा इंटरेस्ट ले रहे हो इनकी बीवी में! क्या बात हैं?

संजू: नहीं ऐसे ही बस।

अशोक: सच सच बता, अगर कोई बात हैं तो। मैं नाराज नहीं हो होऊंगा। हम दोनों तो वैसे भी अभी अभी मिलकर इसको चोद रहे थे।

संजू: सच पूछो तो, जैसे ये भाभी आपके लिए प्यार हैं तो मेरा बचपन का प्यार आपकी बीवी हैं।

भाभी: क्या बात कर रहा हैं संजू? पहले कभी अहसास तक नहीं होने दिया। अशोक तुमको जलन हो रही नहीं ना?

अशोक: थोड़ी थोड़ी शायद हो रही हैं।

संजू: तो फिर अशोक कल तुम अपनी बीवी को भी ला रहे हो न?

अशोक: नहीं भाई, एक ही रात में उसको इन सब कामो के लिए समझाना नामुमकिन हैं। अगर ना मानी और शक हो गया तो हम लोग भी नहीं जा पाएंगे।

भाभी: चलो अभी कपडे पहनते हैं और कम्युनिटी हॉल चलते हैं, बहुत देर से गायब हैं, संजू की तरह कोई यहाँ ढूंढते हुए यहाँ ना जाए।

तीनो अब कपडे पहनने लगे और मैं वहां से निकल कर हॉल की तरफ बढ़ी। थोड़ी देर में वो तीनो भी वहां पहुंचे। मैंने संजू को एक कोने में अलग से बुलाया।

मैं: संजू तूने मुझको धोखा दिया, तुमको उन दोनों को रोकने के लिए भेजा था और तुम उनके साथ ही हो लिए।

संजू: मतलब तुम वापिस घर पर आयी थी और सब देख लिया! मैं क्या करता? मैं उनको उस हालत में देख कर अपने आप को मजे लेने से रोक नहीं पाया। तुमने तो वैसे भी मुझको मना कर दिया था। मैं तो भरा भराया बैठा था।

मैं: भरे भराये तो आज थे तो फिर कल का फिर प्रोग्राम बनाने की क्या जरुरत थी।

संजू: क्या बताऊ, थ्रीसम में कितना मजा आता हैं। मैंने तो तुमको भी शामिल करने के लिए बोला था पर वो लोग नहीं माने।

मैं: तुमको ये प्रोग्राम कैंसिल करना पड़ेगा। मैं घर पर कुढ़ती रहूंगी और तुम लोग वहां मजे लोगे।

संजू: ठीक हैं एक काम करते हैं, मेरे दोस्त का घर बड़ा हैं, उन दोनों को करने दो आपस में, हम दोनों दूसरे कमरे में अलग से कर लेंगे।

मैं: तुम्हारे साथ तो मैं अब कभी नहीं सोने वाली, मुझे छोड़ कर तुम किसी ओर के साथ कर रहे थे।

संजू: तुम अपने पति को धोखा देकर मेरे साथ सोइ थी वो धोखा नहीं पर मैं किसी के साथ सोया तो धोखेबाज! ये तो पाखंड हैं।

मैं: ठीक हैं, अभी क्या करना हैं, मैं पकडे नहीं जाना चाहती बस। पर एक बार थ्रीसम ट्राय करना है मुझे भी।

संजू: मेरे पास एक प्लान हैं, इन दोनों के घर से निकलने के पहले ही तुम अपनी सहेली से मिलने जाने का बोल कर मैं एड्रेस दूंगा वहा आ जाना। ये दोनों भी वही आने वाले हैं। तुम्हारा चेहरा छुपा के मैं तुम्हे अपनी एक दोस्त की तरह मिलवाऊंगा। तुम भी हमारे साथ मजे ले सकती हो बिना अपनी पहचान बताये।

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मैं: मेरे कपडे और आवाज सुन के पहचान नहीं जायेंगे वो दोनों?

संजू: मैं अपनी बीवी के कपडे लेते आऊंगा, वो पहन लेना। थोड़ी गले से आवाज निकाल कर बात करना तो आवाज बदल जाएगी और पहचान में नहीं आएगी। तुम्हारी बॉडी पर वैसे भी कोई निशान नहीं जिसको देख कर पति पहचान जाए।

मै: ठीक हैं तम एड्रेस भेजो मुझे, पर कुछ भी गड़बड़ हो तो संभाल लेना।

फंक्शन समाप्त होने के बाद हम सब लोग घर पहुंचे। मैं चिंतित थी कल के प्रोग्राम के बारे में। पूरी रात मैं ठीक से सो नहीं पायी, सोचा कही रात को ये निकल कर फिर मेरी भाभी से मिलने ना पहुंच जाए।

सुबह सुबह ही मैंने सबको बता दिया कि मैं दोपहर से पहले अपनी सहेली से मिलने जाने वाली हूँ और थोड़ा देर से ही आउंगी। सुबह के सारे काम ख़त्म करने के बाद माँ से पता चला कि भाभी बाजार जाने वाली हैं अपनी कुछ साड़िया बनवाने के लिए।

नाश्ता करते हुए पति ने भी बताया कि इसी शहर में उनका एक दोस्त रहता हैं, अब यहाँ आया हूँ तो सोचा उससे मिलता चलू, फिर कब मौका मिलेगा।

मैं घर से निकल गयी और संजू के बताये एड्रेस पर पहुंच गयी। वो वहां पहले से मौजूद था। पहले उसने मुझे अपनी हेयर स्टाइल बदलने को कहा। फिर उसने अपने साथ लाये हुए सलवार कमीज मुझे दिए और कपडे बदलने को कहाँ।

यहाँ तक कि मेरी ब्रा और पैंटी भी वो नयी खरीद कर लाया था। नाप तो मेरा वो कुछ दिन पहले ही ले चूका था शायद।

उसके दोस्त की बीवी का मेक अप का सामान पड़ा था, तो नए सिरे से अलग तरह का मेकअप करवाया। उसने अब मुझ पर अलग तरह का परफ्यूम छिड़का जो मैं कभी इस्तेमाल नहीं करती।

मैंने जो थोड़े बहुत गहने पहने थे वो भी खुलवा दिए, और वहां पड़े नकली गहने पहना दिए। अब मेरे ऊपर मेरी कोई पहचान नहीं बची थी।

उसने अब अपने बैग से चार मास्क निकाले। उसने कहाँ कि हम चारो ये मास्क पहन कर ही करेंगे।

इन सब के बीच मैं उसको अलग अलग तरह की आवाज बना के दिखा रही थी। हमने एक आवाज को फाइनल कर लिया था। वैसे भी मास्क पहना होगा तो आवाज वैसे भी दब के थोड़ी अलग ही आएगी।

हमने थोड़ा इंतज़ार किया और फिर दरवाजे की घंटी बजी। शायद वो दोनों आ गए थे। मैंने तुरंत एक मास्क पहन लिया। बाकि के तीनो मास्क लेकर संजू दरवाजा खोलने गया।

मैं अंदर बैडरूम में ही इंतजार करने लगी। मुझे बाहर उनकी आवाजे आ रही थी, संजू उनको बाहर समझा रहा था कि मेरी एक दोस्त भी हमारा साथ देगी। तुम लोग उसके लिए अनजान हो तो एक दूसरे की पहचान छुपाना जरुरी हैं तो सब मास्क पहनेंगे।

मुझे अंदर बहुत डर लग रहा था। अगर पकड़ी गयी तो बहुत फजीहत होगी। मेरे पति के सामने मेरी इमेज ख़राब हो जाएगी।

वो तीनो मास्क पहन कर अंदर दाखिल हुए। संजू ने सबको मिलवाया, मेरा नाम पूर्वी बताया। अपने ही परिवार वालो से मुझे मिलवाया जा रहा था।

भाभी बटन वाला शर्ट और जीन्स पहने थी। उस टाइट शर्ट से उनके उभरे हुए वक्ष बहुत सेक्सी लग रहे थे, और स्किनी जीन्स से उनके कूल्हे गजब ढा रहे थे। संजू ने भाभी के फिगर की तारीफ़ की।

हम सब लोग डबल बेड पर घेरा बना के बैठ गए। भाभी ने बोला जल्दी शुरू करते हैं वापिस घर भी जाना हैं। संजू बोला कपडे उतारने से शुरू करते हैं और लेडीज फर्स्ट।

ये कहते हुए उसने भाभी के शर्ट के उपर के दो बटन खोल दिए। बटन खुलते ही भाभी के मम्मे शर्ट के अंदर से झाँकने लगे। संजू ने अपनी उंगलिया उन मम्मो पर रख दी और दबाने लगा।

पति ने बोला मजे लेना हैं तो पुरे खोल के ले, और उन्होंने भाभी के शर्ट को खिंच जीन्स के अंदर से निकाल लिया और शर्ट के बाकी बटन भी खोल दिए।

भाभी का गुलाबी ब्रा दिखने लगा और उसमे से बाहर निकलते हुए मम्मे। संजू ने भाभी के पीछे जाकर शर्ट को कंधो से होते हुए हाथों से पूरा निकाल दिया।

पति अब अपना हाथ भाभी के ब्रा में घुसा मम्मे मसलने लगे। तब तक पीछे से संजू ने भाभी के ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को शरीर से अलग कर दिया। भाभी बोली मुझ अकेली को ही नगी करोगे या पूर्वी को भी करोगे।

मेरे पति अब भाभी के मम्मे छोड़ कर मेरे सीने पर हाथ रख मेरे मम्मे दबा कर महसूस करने लगे। अरे बाप रे बहुत जबरदस्त हैं ये तो।

पति मुझसे पूछने लगे ये तुम्हारा कुरता निकाल दू? मैंने हां बोला तो उन्होंने बिना देरी किये मेरा कुर्ता ऊपर कर सर से निकाल दिया।

मैंने मास्क पकड़ कर रखा ताकि कुरता निकलते वक़्त मास्क ना निकल जाये। उन्होंने अब मेरा ब्रा भी निकाल दिया।

मेरे एकदम टाइट तने हुए मम्मे देख कर संजू भाभी को छोड़ कर मेरे पास आ गया। मेरा एक मम्मा पति तो दूसरा संजू दबा रहा था। भाभी अकेले पड़ गयी।

भाभी अब आगे बढ़ी और उन दोनों का हाथ मेरे मम्मो से हटाते हुए मेरे सीने से चिपक गयी। हम दोनों के मम्मे आपस में एक दूसरे के दबाने लगे। उनके मम्मे एक दम नरम थे और मेरे टाइट मम्मो से पुरे दब गए।

दोनों मर्द हम दोनों की पीठ पर हाथ फेरने लगे। संजू ने मेरा हाथ ऊपर किया और मेरी कांख के नीचे और मम्मो के बगल में अपना मुँह और जबान फेरने लगा। मेरे मीठी सी गुदगुदी होने लगी और करंट दौड़ गया।

मेरा रिएक्शन देख पति ने भी भाभी के ऐसा ही किया और बगल में चूमने लगे। जिससे भाभी की सिसकिया निकलने लगी।

उन दोनों मर्दो ने ऐसा मास्क पहना था जिसमे नाक के नीचे के हिस्सा कवर नहीं था जब कि लड़कियों के मास्क में पूरा चेहरा कवर था।

जिससे वो लोग हमें चुम पा रहे थे पर हम कुछ चूसने का मजा नहीं ले सकते थे। एक तरह से अच्छा भी था मेरी पहचान पूरी छुपी रहती।

उन दोनों की चुम्मा चाटी चालू ही थी कि संजू का फ़ोन बजा। उसने किसी से कहाँ कि “आ जाओ, मैं यही हु”।

मेरे पति ने चाटना बंद किया और हम तीनो संजू की तरफ देखने लगे।

पति ने पूछा “कोई आ रहा हैं क्या यहाँ?”

संजू ने भाभी की तरफ देखा और पूछा “ये जीन्स की पैंट किसने खरीदी?”

भाभी ने जवाब दिया कि उनके पति ने खरीदी हैं।

संजू ने बोला कि “तो इसको निकाल देते हैं”।

संजू ने अब भाभी की पैंट और पैंटी निकाल दी और बोला कि आपके पति अमित यही आ रहे हैं तो आपकी पैंट पहचान जायेंगे, इसको छुपा दो कही।

हम तीनो घर वाले बिस्तर से उछल कर नीचे आ खड़े हुए।

भाभी ने पूछा “क्या मजाक हैं ये?”

संजू ने कहाँ “डरो मत तुम लोगो ने मास्क पहन रखा हैं। सुबह अमित फ़ोन पर बोल रहा था कि फंक्शन में काम करके बहुत थकान हो गयी तो मैंने उसको यहाँ आने को बोल दिया। भाभी तुम चिंता मत करो अपने पति की आँखों के सामने किसी से चुदवाने का मजा ही कुछ ओर होता हैं, उसके बारे में सोचो। आज इस चीज के भी मजे लेके देखो।”

भाभी एक दम तनाव में आ गयी साथ में मेरे पति भी। उनका तो आधा मास्क भी नीचे से खुला था।

मगर सबसे ज्यादा अगर कोई तनाव में था तो वो थी मैं। ये सोच कर ही मैं सिहर उठी कि मैं अपने ही भाई के सामने नंगी होउंगी। और अगर उसने मुझे यहाँ वहा हाथ लगा दिया तो गजब ही हो जायेगा। और अगर उन्होंने अनजाने में ही सही मेरे साथ कुछ करने की कोशिश कि तो पाप हो जायेगा।

मैंने तुरंत कुर्ता उठाया और कमरे से बाहर जाने लगी। संजू ने मेरा हाथ पकड़ कर रोक लिया। पति और भाभी आश्चर्य से देखने लगे कि इस अनजानी लड़की को क्या हो गया। भागना तो उन दोनों को चाहिए था।

संजू ने मुझको रोकते हुए कहा, “घबराओ मत तुमने भी मास्क पहन रखा हैं। अगर तुमको उस नए बन्दे से नहीं करवाना तो मैं संभाल लूंगा। जब तक तुम इस कमरे में हो तब तक ही तुम्हारी पहचान सुरक्षित हैं, बाहर गयी तो मेरी गारंटी नहीं।”

मैं उसके शब्दों में छुपी चेतावनी समझ गयी। मेरे पास रुकने के अलावा कोई चारा नहीं था।

संजू ने मुझको बोला कि भाभी की पहचान छुपाने में मदद करू। संजू ने बोला कि अमित पांच मिनट में आने वाला हैं। सब बिंदास मजे लेते रहो कोई पकड़ा नहीं जायेगा।

मेरी तरह मैंने भाभी का भी मेकअप और बाल थोड़े अलग किये। अपने आप को आईने में देखने के बाद भाभी बहुत कॉंफिडेंट नजर आयी। भाभी बहुत उत्साहित थी, शायद काफी समय से वो ऐसा कुछ करना चाह रही थी।

थोड़ी देर में डोर बेल बजी, संजू ने एक और मास्क बैग से निकाला और बाहर अमित को लेने गया। मैं थरथर कांप रही थी। अपने लालच की वजह से मैं इस शर्मनाक स्थिति में फंस चुकी थी। मैंने शर्म के मारे अपने कुर्ते से सीना ढक लिया।

संजू और अमित मास्क पहने हुए कमरे में आये। संजू ने फर्जी नामों से सबका परिचय कराया।

संजू बोला एक के ही दर्शन करने को मिलेंगे दूसरे का नहीं?

अमित आगे बढ़ कर मेरे कपडे निकालता, उसके पहले ही संजू आगे बढ़ा और मेरा कुरता मुझसे छीन लिया। घबराहट से मेरा चेहरा पूरा पसीना पसीना हो गया।

संजू ने अब मेरे सलवार का नाड़ा खोलते हुए उसको पैंटी सहित पैरो से बाहर निकाल दिया।

मैंने दोनों पांवो को तुरंत बंद करते अपना अंग छुपा लिया। संजू ने भाभी को मेरे पास बैठा दिया। तीनो मर्द अब हमारे सामने आ खड़े हुए। संजू ने दोनों लड़कियों को पाँव चौड़े कर अपनी चुत दिखाने को कहा।

भाभी ने दोनों पाँव चौड़े कर अपनी चुत खोल दी। बारी बारी से संजू और अमित ने अपनी उंगलिया उनकी चुत पर फिरा निरिक्षण किया।

संजू ने मुझे भी पाँव खोलने को कहा पर मैंने ऐसा नहीं किया। उसने अब आगे बढ़ कर जबरदस्ती मेरा एक पाँव पकड़ हटाने की कोशिश की, दुसरा पाँव अमित ने पकड़ा और दोनों ने विपरीत दिशा में पाँव को हटाते हुए मेरी चुत खोल दी।

अमित ने अपनी ऊँगली मेरी चुत पर घुमाई। मेरा दिल धक् से रह गया। ये क्या अनर्थ हो गया। इस चीज की मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

मैंने जोर लगा के फिर पाँव जोड़ने की कोशिश की पर अमित वहाँ उंगलिया फेरता रहा। संजू ने फिर मेरा पैर छोड़ा और अमित को भी जाने देने को कहा। अमित ने मुझे छोड़ा और मेरी जान में जान आयी।

उन्होंने हम दोनों लड़कियों को बिस्तर के कोने पे, पाँव घुटनो के बल मोड़ कर उल्टा बैठा दिया। हमारे गांड बाहर की तरफ थी इस पर वो लोग बारी से चमाट मार रहे थे। बीच बीच में जोर से पड़ रही थी जिससे दर्द के मारे मेरी और भाभी की चीख निकल रही थी।

उन तीनो मर्दो ने अब अपने सारे कपडे निकाल दिए। संजू ने बैग से ढेर सारे कंडोम निकाले और साइड टेबल पर रख दिए, उन तीनो ने एक एक कंडोम पहन लिया।

संजू ने अमित को बोला कि वो भाभी का मजा ले और वो मेरी लेगा। मेरे पति दोनों में से किसी का भी साथ दे सकते हैं।

अमित बोला ये गलत हैं, सबको सबके साथ मौका मिलना चाहिए।

संजू ने कहा बाद में देखते हैं, पहले शुरू तो करो। पति ने मुझे चुना क्यों कि भाभी को तो उन्होने कल रात को ही चोदा था।

मैं और भाभी अभी भी उसी पोजीशन में थे। उन्होंने हम दोनों को डॉगी स्टाइल में बैठाया।

संजू मेरे पीछे आया और अमित भाभी के पीछे और एक साथ दोनों ने हमारी चुत में प्रवेश किया। इतने तनाव के बाद लंड अंदर घुसते ही जैसे मुझे बहुत चैन मिला।

पति आगे से मेरे दोनों हाथों के गेट के अंदर अपना मुँह घुसा कर मेरे लटकते स्तनों को अंगूर की भांति चूसने लगे। मेरी तो सिसकिया निकलने लगी। मैं आँखें बंद कर इसका आंनद लेने लगी।

संजू और अमित इतना जोर से चोद रहे थे कि उनके शरीर के हमारे नितम्बो से टकराने की मुझे जोर जोर की थाप थाप की आवाज रही थी।

मैं तो उन जोर के झटको को महसूस भी कर पा रही थी। संजू का लंड मेरी चुत को रगड़ते हुए जोर जोर से अंदर बाहर हो रहा था।

पति मेरे स्तनों को छोड़ कर थोड़ा ओर अंदर खिसके और अपने मुँह से मेरे पेट को चूमने और चाटने लगे, साथ ही अपने हाथों से मेरे दोनों मम्मो को दबाने लगे।

कुछ मिनटों तक मेरे ऐसे ही मजे लेने के बाद पति ने अब भाभी की तरफ रुख किया।

पति ने अपना एक हाथ भाभी की कमर और पीठ पर तो दूसरा भाभी के पेट और मम्मो पर एक साथ फेरने लगे। मम्मो पर हाथ आते ही वो उनको दबा भी लेते और फिर फेरते हुए पेट की तरफ जाते।

मेरे पति ने बोला “अब कोई छोडो मुझे भी मौका दो अंदर डालने का।”

संजय ने बोला इधर आओ और मुझे चोदना छोड़ा। संजू अब नीचे लेट गया और मुझे उसके ऊपर उलटा लेटने को कहा।

मैं उसके ऊपर पीठ के बल लेट गयी, संजू ने अपना गीला लंड मेरी गांड के छेद में डाल दिया। मेरी भी अब प्रैक्टिस हो चुकी थी गांड में लेने की तो ज्यादा दर्द नहीं हुआ।

पति ने अब मेरी टाँगे चौड़ी की अपने हाथ को मेरी चुत पर और दरार में फेरने लगे। थोड़ा आगे बढ़कर अब होने अपना कंडोम लगा लंड मेरी चुत में उतार दिया।

मेरे दोनों छेद भरते ही उन दोनों ने आगे पीछे झटके मारने शुरू कर दिए। मैं अपने दोनों छेदो में मोटे लंड की रगड़ को महसूस करते ही पागल हुए जा रही थी।

संजू शिकायत कर रहा था कि पति की गोटिया उसके लंड से भी टकरा रही हैं। बहुत देर तक हम लोग इसी स्तिथि में चुदने के मजे लेते रहे।

उधर भाभी की जोर जोर की आ आ आ ऊ ऊ ऊ की आवाजे लगातार आने लगी। लगता था जैसे वो झड़ने वाली थी। संजू ने अमित को रुकने के लिए बोला कि भाभी को वो झड़ायेगा।

पति ने और संजू ने अपना लंड मेरे छेदो निकाला और हटे। उधर अमित ने भाभी को चोदना बंद किया, वैसे ही भाभी के आवाजे निकलनी बंद हो गयी।

संजू ने अपना कंडोम बदला और अमित की जगह ली। अब उसने अपना लंड भाभी की चुत में घुसा चोदना शुरू किया। भाभी की बंद हुई टेप एक बार फिर शुरू हो गयी।

अमित ने भाभी के लटकते मम्मो को दबाना शुरू कर दिया। जैसे जैसे भाभी की सिसकारियां बढ़ती गयी, संजू ने और जोर के झटके मारना शुरू कर दिया।

फचाल फचाक की आवाजे गूंजने लगी सबका ध्यान भाभी की तरफ गया। वो बुरी तरह से चिल्ला रही थी। उनका तो जैसे एक सपना पूरा हो रहा था।

उनका पति उनको सहला रहा था, जबकि दुसरा मर्द उनके पति के सामने उनको जम कर चोद रहा था। भाभी अब संजू को ललकार रही थी, चोद जितना दम लगा के चोद सकता हैं मेरा पति कुछ नहीं कर सकता तेरा।

अमित भी बोल रहा था लगता हैं बहुत भरी भराई बैठी हैं ये अपने पति से, चोद संजू इसकी चुत इतनी जोर से की इसका पति इसकी चुत देखे तो आगे से चुदने के लिए इसको तेरे पास ही भेजे।

अगले कुछ मिनटों में संजू ने चोद चोद कर भाभी का सब रस निकाल दिया। भाभी चीखते चिल्लाते हुए झड़ गयी। वो थक हार के वही झुक गयी पर संजू इतना जोश में था कि भाभी को चोदता ही रहा।

उसने अब भाभी को बोला कि देखता हु तेरा पति कैसे तुझे मेरे से चुदने से बचता हैं। हर बार ये ले.. ये ले बोलते हुए अंदर जोर के झटके मारने लगा और बोला बुला अपने पति को।

इतने जोर के अंदर पड़ते झटको से भाभी दर्द के मारे कराहने लगी। संजू ऐसे ही चिल्लाते हुए झड़ गया।

झड़ते हुए वो भाभी को धक्का देते हुए उन पर लेट गया और लेटे लेटे ही कुछ ओर आखिरी के झटके मारते हुए अपना रहा सहा पानी भी कंडोम में निकाल दिया।

संजू और भाभी के धराशाई होते ही अमित अब मेरे और पति की तरफ मुड़ा। हम दोनो का धीरे धीरे चोदते हुए सारा ध्यान भाभी और संजू के बीच हुए घमासान पर ही था।

अमित पति को बोला अब मुझे भी मौका दो इसे चोदने का। मैं डर गयी कि ये पाप नहीं होना चाहिए। संजू को मुझे बचाना चहिए पर वो तो गिरा पड़ा था।

मेरे मन में बस यही चल रहा था, की अब क्या होगा?

अमित ने मेरे पति की तरफ देख कर प्रस्ताव रखा कि अब वो करना चाहता हैं। मैं दुआ करने लगी कि मेरे पति मेरी इज्जत मेरे ही भाई के हाथों लूटने को ना दे दे।

पर आज शायद मेरी किस्मत अच्छी नहीं थी। मेरे पति ने मेरे ऊपर से उठना शुरू कर दिया, और मैंने डर के मारे अपने दोनों हाथों से उनको पीठ को दबोच कर फिर अपने सीने से चिपका लिया।

अमित बोला – लगता हैं ये तुमसे ही चुदवाएगी, पर सबका नंबर तो लगना चाहिए, बोलते हुए मेरे हाथों की पकड़ को ढीला करने लगा।

पति भी जोर लगा के मेरे ऊपर से हट गए। पति के हटते ही मैंने करवट बदल अमित से दूर जाने की कोशिश की, पर उसने मेरा एक हाथ पकड़ ही लिया।

अमित मुझे अपनी ओर खींचने लगा, तब तक पति मेरी दूसरी तरफ आये और मेरा दूसरा हाथ पकड़ लिया।

उन दोनों ने मेरा एक एक हाथ बिस्तर से सटा के दबा के रखा था। अब उन्होंने अपने दूसरे हाथ से झपट्टा मारते हुए मेरा एक एक मम्मा दबोच लिया और मसलने लगे।

मैं अपने पाँव पटक पटक छटपटाने लगी। एक बेलगाम घोड़ी को इस तरह बिदकते देख उनको ओर ज्यादा मजा आ रहा था।

अमित ने पति को बोला “इसके पाँव पकड़” और दोनों ने मेरे मम्मे छोड़ दिए।

पति ने मेरा एक पाँव पकड़ कर बिस्तर पर ही दबा लिया। मैं अपना दूसरा पाँव पटकती रही।

अमित ने अब अपनी एक टांग लंबी कर के मेरे तड़फते हुए पाँव में लपेट कर झकड़ लिया ताकि में उसे हिला ना पाऊ।

अब उसने मेरी टांग को दूसरे से दूर करना शुरू कर दिया। मेरी दोनों टांगो के बीच का गैप बढ़ने लगा और चुत भी खुलने लगी।

अब अमित ने अपना हाथ मेरी खुली चुत पर रख दिया। अब वो मेरी चुत की दरारों में ऊँगली फिराने लगा और मैं अपने आप को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करती रही।

जिन दो लोगो को मेरी रक्षा करनी चाहिए थी वो दोनों ही अभी अनजाने में मेरे भक्षक बने हुए थे। मेरे बचने की सारी आशाएं अब संजू पर थी, पर वो मेरी भाभी के ऊपर निढाल सा पड़ा था।

अमित अपनी ऊँगली ओर भी नीचे ले गया और मेरी चुत के छेद के आस पास गोलाई में फिराने लगा।

दो तीन बार गोल गोल फिराने के बाद उसने अपनी ऊँगली का ऊपर का एक हिस्सा मेरी चुत में घुसा दिया। जिससे मेरी एक जोर की आह निकली। अगले दो सेकंड में उसकी पूरी की पूरी ऊँगली मेरे अंदर उतर चुकी थी।

अब वो मेरे अंदर अपनी ऊँगली चारो तरफ फिराते हुए मजे लेते कहने लगा, “अंदर तो मौसम बहुत गर्म हैं और गीला हैं।”

फिर उसने अपनी ऊँगली अंदर बाहर करनी शुरू कर दी। मेरी ना चाहते हुए भी सिसकिया निकलने लगी।

वो दोनों हँसने लगे और बोले “अब आया न मजा इसको भी।”

तभी मेरी सिसकिया सुनकर संजू उठ गया, अपना सर ऊपर उठाते हुए अमित पर चिल्लाया “अबे छोड़ ना अमित, उसको तेरे से नहीं कराना तो क्यों पीछे पड़ा हैं”

अमित ने अपनी ऊँगली मेरी चुत से बाहर निकाल दी। संजू अब उठ खड़ा हुआ। अमित ने मेरे हाथ और पाँव पर पकड़ भी छोड़ दी। पति ने भी मुझे छोड़ दिया। और अमित बिस्तर के कोने पर जाकर बैठ गया।

मैं भी अपने घुटने मोड़ कर बैठ गयी और अपने सीने से चिपका कर अपना मुँह घुटनो के बीच छुपा लिया।

संजू ने भाभी का हाथ पकड़ कर उनको भी उठाया और उनको बोला “चलो हम वाशरूम में खुद की थोड़ी सफाई करके आते हैं।”

अमित ने अपना कंडोम निकाल कर फेंक दिया जो भाभी पर यूज़ किया था। मैंने सर उठा के देखा, संजू और भाभी कमरे के बाहर निकल गए।

तभी अमित ने अब दूसरा कंडोम पहन लिया। मैं डर गयी उसके इरादे नेक नहीं लगते।

मैं सही थी, पर कुछ समझ पाती उससे पहले ही अमित पीछे मुड़ा और पति से बोला “संजू गया, अब लेते हे इसकी फिर से”।

उन दोनों ने मुझे फिर से पकड़ लिया, मैंने विरोध किया। उन्होंने मुझे घुटनो के बल बैठाया और मेरी पीठ को दबाते हुए मुझे मुँह के बल नीचे झुका दिया।

मेरा मुँह मास्क सहित बिस्तर से चिपका था और पति ने पीठ से दबा कर मुझे वहां चिपका ही रहने दिया।

अमित अब मेरे पिछवाड़े आ गया था और मेरे दोनों कूल्हो को अपने हाथों में भर लिया। उसका कड़क लंड रह रह के मेरे नितंबो को छू रहा था।

अब शायद वो घड़ी आ चुकी थी जब भाई बहन का रिश्ता तार तार होने वाला था। एक पाप होने वाला था। मेरी आँखों के सामने एक पिक्चर रील चल रही थी जिसमे मेरे पिछले सारे कांड चल रहे थे।

मैं आज जिस स्तिथि में थी उसकी जिम्मेदार शायद मैं ही थी। आँखों के सामने चलती हुई वो पिक्चर अचानक थम सी गयी, जब मैंने एक कड़क मांस का लोथड़ा मेरी चुत में धीरे धीरे घुसते हुए महसूस किया। मेरी दिल की धड़कने कुछ सेकंड्स के लिए रुक सी गयी थी। भाई बहन के रिश्ते पर दाग लगा गया था।

अमित का लंड पूरा अंदर तक आ गया था और मेरी बच्चे दानी को थपकी मारते हुए फिर धीरे धीरे बाहर आने लगा। पूरा बाहर आने से पहले ही वो रुक गया और एक बार फिर रगड़ करते हुए अंदर जाने लगा। मेरी रुकी धड़कने एक बार फिर चलने लगी।

मुझे उन दोनों की हंसी कही दूर से आती हुई सुनाई पड़ रह थी, जब की वो दोनों मेरे पास ही बैठे थे।

अमित मुझे पीछे से जोर जोर से चोद रहा था और लाचारी में मेरे मुँह से अनायास ही निकल गया “बहनचोद”। जो कि एक कड़वा सत्य भी था।

गाली सुन उसको ओर जोश आ गया और वो ओर भी जोर के झटके मारने लगा।

इस सच को स्वीकारने के अलावा मेरे पास कोई ओर चारा न था। अमित के लंड के अंदर बाहर जाते झटको के साथ मेरा सारा विरोध और छटपटाहट धीरे धीरे शांत हो चुकी थी।

अब विरोध करने के लायक कुछ बचा ही न था। पति ने भी मेरी पीठ पर से हाथ हटा लिया था।

अमित बोला “देखा अंदर लंड जाते ही अच्छी अच्छी घोड़िया शांत हो जाती हैं” और दोनों कहकहे लगाने लगे। मैं अपना चेहरा बिस्तर में घुसाए मास्क के अंदर जैसे रो रही थी।

अमित का इसका कोई असर नहीं हुआ, उसने झटके मारना जारी रखा और सिसकिया भी निकालते जा रहा था। मेरे पहले विरोध करने पर वो जितने जोर के झटके मार रहा था अब मेरा विरोध ख़त्म होने पर उसके झटको में उग्रता नहीं रही थी।

संजू और भाभी ने हँसते हुए एक बार फिर कमरे में प्रवेश करते हैं। वहाँ की हालत देखकर संजू दंग रह गया।

वो एक बार फिर अमित पर चिल्लाया “अरे अमित तुझे मना किया था इसको छोड़ दे पर तू फिर शुरू हो गया।”

अमित ने भी जवाब दिया “तेरी क्या बहन लगती हैं जो बार बार बचा रहा हैं?”

अब संजू भला क्या बोलता। मुझे तो इसमें ही सांत्वना मिल गयी कि पति ना सही मेरा पहला प्यार ही मुझको बचाने की कोशिश तो कर रहा हैं। हालाँकि इस स्तिथि में फंसाने का जिम्मेदार भी वो ही था।

संजू ने अमित के सामने प्रस्ताव रखा कि भाभी एक बार फिर से तैयार हैं करवाने के लिए तो वो उन के साथ कर ले और मुझे छोड़ दे।

पर अमित ने मना कर दिया और भाभी को बोला “माफ़ करना पर आपको थोड़ी देर पहले ही चोदा था पर कुछ नया नहीं लगा, पर इस पूर्वी को चोदने का एक अलग ही नशा आ रहा हैं।”

बाकि लोग तो वैसे भी समझ चुके थे कि भाभी को तो वैसे भी अमित रोज चोदता हैं तो मजा कैसे आएगा।

संजू अब मेरी पीठ पर हाथ फेर सहलाने लगा और बोला “चिंता मत कर शरीर ही तो हैं, कौन चोदता हैं क्या फरक पड़ता हैं, तुम मजे लो।”

अब पति ने भी अमित से डिमांड की के मिलकर करते हैं। अमित मान गया एक से भले दो। अमित और पति मिलकर मुझे बिस्तर से उतार नीचे लाये।

पति एक कुर्सी पे जाकर बैठ गए और मुझे अपनी गोद में बैठा लिया। अमित ने मेरे दोनों पैर ऊपर उठाये और घुटनो के बल मोड़ते हुए पति की दोनों जांघो पर मेरे दोनों पैर के पंजे टिका दिए।

मैं एक ग़ुलाम की तरह उनके आदेश मानने के अलावा कुछ कर भी नहीं सकती थी।

पति ने अब अपना कंडोम निकाल दिया और अपना लंड पकड़ा और मेरी गांड में घुसाना शुरू कर दिया। दर्द से मेरी भी एक चीत्कार निकली। उन्होंने अब अपना पूरा लंड मेरी गांड में उतार दिया और अब मेरी कमर पकड़ कर मुझे ऊपर नीचे करने लगा।

मेरे पति ने अब अपनी दोनों टाँगे फैलानी शुरू की जिससे उस पर रखी मेरी टाँगे भी खुलने लगी। संजू और भाभी बिस्तर पर बैठे इस नज़ारे का आनंद ले रहे थे।

अमित अब आगे बढ़ा और हम दोनों की टांगो के बीच आकर मेरी चुत को रगड़ने लगा और अपना अंगूठा चुत की खुली दरार में डाल कर फिराने लगे। मैं भी अब तड़पने लगी थी और सिसकिया मारने लगी।

अब अमित घुटनो के बल बैठा और अपना लंड पकड़ मेरी चुत की खुली दरारों में पर ऊपर नीचे रगड़ने लगा। रगड़ते हुए अचानक मेरे खुले छेद में उसने अपना लंड घुसेड़ दिया। अमित ने अपने दोनों हाथ मेरे मुड़े घुटनो के नीचे डालें और पाँव को थोड़ा उठा दिया।

एक तरफ अमित सामने से आगे पीछे झटके मार कर मजे दिला रहा था, तो नीचे से मेरा पति अपना लंड मेरी गांड में अंदर घुसाए ऊपर नीचे करने की कोशिश कर रहा था।

पति ने अब मेरी कमर छोड़ी और मेरे दोनों मम्मे पकड़ लिए और मसलने लगे। फिर उन्होंने मेरी तनी चूंचिया दो ऊँगली में दबा नॉब की तरह घुमाने लगा.

मेरा भाई और पति मेरे दोनों छेदो में अपना लंड घुसाए मुझे मजा दिला रहे थे। मैं भी अब अह्ह्ह्ह उह्ह्ह करते हुए लगातार सिसकिया निकाल रही थी।

क्योकि अंत में मै भी थी तो एक औरत, उस मजे को नजर अंदाज भी नहीं कर सकती थी।

पति भी अब जोर जोर से सिसकिया निकालने लगे और मेरी चूंचिया छोड़ मेरी कमर पर हाथ रख एक बार फिर मुझे ऊपर नीचे करने लगा। थोड़ी ही देर में उन्होंने जोर की चीख निकाली और उनका सारा गरम पानी मेरी गांड में छूट गया।

अमित अब भी मुझे आगे से चोदे जा रहा था। हम तीनो की हालत देख संजू और भाभी का फिर से मूड बनने लगा।

संजू हमारी तरफ टाँगे कर बिस्तर पर लेट गया और भाभी हमारी तरफ पीठ कर संजू पर झुकी। उनका मुँह दूसरी तरफ था तो भाभी ने हिम्मत कर अपना मास्क निकाल दिया और संजू का लंड चूसने लगी।

जबकि उनको इतना भी डर नहीं था कि उनका चेहरा उनके पति को दिख जाएगा।

अपने पति और भाई से एक साथ चुदवाते हुए, ना चाहते हुए भी मैं आनंद सागर में हिचकोले खा रही थी। पति मेरी गांड में ही झड़ चुके थे। उधर भाभी उत्साह में अपना मास्क निकाले संजू का लंड चूस रही थी।

पति का हो चूका तो उन्होंने कहाँ “मेरा हो गया, मुझे नीचे से निकलने दो, फिर तुम दोनों करते रहना”।

अमित ने अपना लंड मेरी चुत से बाहर निकाला और पीछे हटा। मैं पति के ऊपर से नीचे उतरी। पति के लंड से निकला हुआ पानी मेरी गांड में जमा था जो लंड के बाहर आते ही रिसने लगा।

पति को पूरा लंड पानी से तरबतर हो गंदा हो चुका था। पति बोले मैं वाशरूम जाकर साफ़ करके आता हूँ।

अमित ने मुझको बोला “अब बिस्तर पर करते हैं।” मुझे ले जाकर संजू के पास लेटा दिया।

मैंने देखा भाभी ने मास्क नहीं लगा रखा हैं और उनका चेहरा थोड़ा दिख रहा हैं, अमित के मेरे पास आते ही उसको भाभी का चेहरा दिख सकता हैं, पर भाभी तो चूसने में इतनी मगन थी कि उनको कोई अहसास ही नहीं था इस बात का।

संजू ने समय रहते एक हाथ से भाभी का चेहरा ढक लिया और दूसरे हाथ से मास्क उठा कर भाभी के चेहरे के साइड में लगा दिया। अमित ने मेरी टाँगे चौड़ी कर फोल्ड कर दी और झुक कर अपने मुँह से मेरी चुत चाटने लगा।

थोड़ी देर चाटने के बाद अमित मुझसे बोला “ये पास वाली अपना मास्क हटा के लंड मुँह में ले रही हैं, तू भी ऐसा ही कर।”

अमित ने अपना कंडोम निकाल कर फेंक दिया। मेरी तरफ टाँगे कर सीधा लेट गया और मुझे उस पर लेट कर 69 पोजीशन बनाने को कहा। मैं उसके कहे अनुसार उस पर लेट गयी। उसके होंठ एक बार फिर मेरी चुत पर चलने लगे। उसका लंड मेरे मास्क के नीचे था।

अमित ने मुझे उसका लंड भी मुंह में लेने को कहा। मैंने डरते हुए उसका लंड अपने हाथ में पकड़ा और एक अजीब सी घबराहट हुई और उसे छोड़ दिया।

उसने थोड़ा जोर से फिर मुझे मुँह में लेने को कहा। मुझे लगा कही वो आकर मेरा मास्क ही ना हटा दे। उसका लंड रह रह कर फडफडा रहा था और ऊपर नीचे हो रहा था।

मैंने एक बार फिर उसका लंड अपने हाथ में लिया। पति बाहर गए थे और भाभी दूसरी तरफ मुँह कर संजू का लंड चूसने में लगी थी।

मैंने अपना मास्क थोड़ा ऊपर उठा कर ललाट पर कर दिया और आँखें बंद कर ये सोचते हुए मुंह में लेने लगी, कि ये लंड पति का हैं।

मुंह में लंड जाते ही मुझे गिन्न आने लगी। मैं फिर निकालना चाहती थी पर अमित नीचे से ही झटके मारते हुए मेरे मुंह को चोदने लगा।

थोड़ी देर मुंह में रखने के बाद मुझे वो भी दूसरे लंडो की तरह ही लगा और मैं ऐसे ही उसे चूसने लगी।

नीचे से अमित ने अब अपनी जबान से मेरी चुत को चाटना और चोदना शुरू कर दिया। अमित की खुरदरी गीली जबान मेरी चुत में चल रही थी और मैं पागल हुई जा रही थी।

तभी पति कमरे में आये। मैंने तुरंत अपने खुले बालो को बिखेर कर अपने चेहरे को ढक लिया और एक हाथ से साइड फेस को छुपाने लगी।

दोनों लड़कियों को लंड चूसते देख पति का भी मूड खुश हो गया। मैंने उंगलियों के झरोखे से देखा वो अपना नरम पड़ा लंड अपने हाथों से रगड़ते हुए कड़क करने लगे।

मैं अपनी जबान को अमित के लंड की टोपी के चारो तरफ फेरते हुए रगड़ रही थी। थोड़ी थोड़ी देर में उसका एक बून्द पानी लंड से निकलता और मैं उसको अपनी जबान से चाट कर साफ़ कर देती।

पति का लंड अब कड़क हो चूका था और वो कंडोम पहन कर उलटी लेती भाभी के ऊपर चढ़ गए।

उनका चेहरा भी अब दूसरी तरफ था तो मैंने अपना हाथ जो चेहरे को ढका था हटा लिया और इत्मीनान से अमित की टोपी को आइसक्रीम की तरह चाटती रही।

मैं अब तक अमित का बून्द बून्द पानी चाट रही थी, अब मैंने उसका पूरा लंड मुँह में घुसा कर अंदर ही रखे घुमाने लगी। उसका नमकीन मीठा गुनगुना पानी मेरे मुँह से होते हुए गले में जाने लगा।

थोड़ी देर के लिए मैं भूल गयी कि मैं किसके साथ कर रही हूँ और इस ग्रुप सेक्स में मुझे भी मजा रहा था और मदहोशी में मेरा भी पानी छूटने लगा था।

अमित को जैसे ही मेरे पानी का स्वाद लगा, थोड़ी देर तो उसने चाटा फिर उसने चाटना छोड़ दिया और मुझको बोला “मुंह से बहुत चोद लिया अब लंड से चोदने की बारी है।”

उसने मुझे अपने ऊपर से हटा लिया और मैंने तुरंत अपना मास्क नीचे खिसका कर चेहरे को फिर ढक लिया। अमित ने बिस्तर से उतर कर नया कंडोम पहन लिया।

उधर संजू जोर जोर से सिसकारियां मारने लगा और उसने अपना सारा पानी भाभी के मुंह में छोड़ दिया। उसने अभी भी हाथ और मास्क से भाभी का चेहरा छुपा रखा था।

भाभी अब संजू के लंड पर लगे पानी को चाट कर साफ़ करने लगी। फिर संजू ने सावधानी से फिर उनको मास्क पहना दिया।

संजू अब भाभी के सामने से हटा, भाभी वही लेटे लेटे मेरे पति से पीछे से चुदवा रही थी। संजू अब बिस्तर से नीचे उतर आया, उसका लंड तो भाभी ने चाट कर वैसे ही साफ़ कर दिया था।

अमित अब बिस्तर पर लेट गया और मुझको उस पर बैठने के बोला। मैं उसका सामना नहीं करना चाहती थी तो उसकी तरफ पीठ करके उसके लंड पर बैठ गयी।

मैंने उसका लंड पकड़ा और अपनी चुत में घुसा कर उसके पैरो की तरफ झुक गयी। मैं अब अपने कूल्हों को ऊपर नीचे करते हुए उसके लंड को अपनी चुत के अंदर बाहर कर रगड़ने लगी।

अमित अपने लंड को मेरी चुत से अंदर बाहर होते हुए देख पा रहा था। वो वहां का दृश्य देख पागल हो गया और बोला “क्या मस्त गांड हैं, और गुलाबी खुली चुत में मेरा लंड मस्त अंदर बाहर हो रहा हैं”।

उसकी तारीफ़ सुन मैं भी जोर जोर से उसको चोदने लगी। अमित की सिसकारियां निकलने लगी।

उधर पति भाभी को पीछे से जम के जोर जोर से चोद रहे थे, जिससे थाप थाप की आवाजे आ रही थी। संजू मेरे सामने आया और मेरे मास्क को ऊपर कर दिया।

संजू को पता था बाकी तीनो लोग मेरी पीठ की तरफ थे, तो मेरा चेहरा देख नहीं पाएंगे। संजू ने अपना लटकता हुआ लंड मेरे मुंह में डाल दिया।

संजू का लंड अभी भी पानी की वजह से थोड़ा चिकना था। मुझे उसका स्वाद अमित के जैसा स्वादिष्ट नहीं लगा। मैं उसका लंड मुँह से निकालना चाहती थी पर संजू ने मेरा मुँह पकड़ कर उसको निकलने नहीं दिया।

अमित ने मेरी गांड के दोनों पाटो को चौड़ा कर अपनी ऊँगली मेरे पीछे के छेद में डाल दी और ऊँगली अंदर बाहर करने लगा। मेरे तीनो छेद भर चुके थे।

वो अब एक हाथ से ऊँगली कर रहा था तो दूसरे हाथ से पिछवाड़े पर चमाट मारने लगा।

मैं अब झड़ने वाली थी, तो मैंने अपने झटके जोर से मारने शुरू कर दिए। अमित ओर जोर से सिसकारियां मारने लगा।

मेरे मुँह में संजू का लंड था जो धीरे धीरे फिर कड़क हो बड़ा होने लगा था। मैं ढंग से अपनी ख़ुशी भी नहीं बता पा रही थी और मुँह से दबी हुई आहें निकल रही थी।

मैं झड़ने को हुई और मैंने अपना पूरा मुंह खोल कर आवाज निकलते हुए आहें भरने लगी, उसी बीच अमित भी बच्चो की तरह आ आ आ उई उई आ आ ओह माय गॉड.. ओह माय गॉड करता हुआ मेरे साथ ही झड़ गया।

संजू ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाल मेरा मास्क फिर चेहरे पर ढक दिया। मैं अमित के ऊपर से हट गयी।

मुझे वाशरूम जाना था पर अमित वाशरूम की तरफ चला गया। संजू मुझे बोला वाशरूम खाली हो तब तक ला मैं भी तुम्हारा चख लेता हूँ।

संजू बिस्तर पर लेट गया और अपना सर बिस्तर के किनारे पर ले आया। मैंने अपने पाँव चौड़े कर अपनी गीली चुत उसके होठों पर रख दी। वो अब आराम से मेरी चुत पर जबान फेर चाटने लगा।

थोड़ी देर में अमित वापस आ गया। संजू ने चाटना छोड़ कर मुझे वाशरूम जाने को कहाँ। मैं जब वापिस आयी तो देखा, उन्होंने भाभी को नंगी खडी कर रखा था और मेरे पति उसकी टांगो के बीच घुसकर नीचे से चाट रहे थे, जब कि संजू भाभी के मम्मे मुँह में भर काट रहा था। भाभी रह रह कर कभी दर्द तो कभी मजे से कराह रही थी।

अमित कुर्सी भी बैठा अपनी पत्नी को मजे लेता देख रहा था, और उसको अहसास भी ना था वो लोग उसकी बीवी के साथ ही कर रहे थे।

मुझे अंदर आया देख अमित बोला इसको भी ऐसे ही खड़ा करते हैं और मैं इसके मोटे मम्मे काटूंगा। संजू ने मुझको बोला “तुम अब घर जाओ।”

मैंने अपने बिखरे कपडे उठाये और वो मुझे दूसरे कमरे में ले आया जहा, मैंने सुबह कपडे चेंज किये थे। आते वक़्त उसने उन लोगो को बैडरूम में बाहर से बंद कर दिया था।

अपने भाई के साथ करने का बहुत दुःख था मगर ग्रुप सेक्स का मजा लेने की ख़ुशी भी थी। मैंने जल्दी जल्दी अपने कपडे पहने और पहले जिस तरह आयी थी वैसे तैयार हो गयी।

तैयार होते होते मैं संजू को बहुत भला बुरा सुनाये जा रही थी, कि उसकी वजह से मुझे अपने भाई के साथ सोना पड़ा।

मेरे तैयार होते ही संजू हँसते हुए बोला “चिंता मत कर वो तेरा भाई अमित नहीं, ये बस डील डोल में तुम्हारे भाई जैसा दीखता हैं। इसका नाम कुछ ओर हैं, और इस घर का मालिक हैं। इसकी बीवी कुछ दिन के लिए बाहर गयी हुई हैं इसलिए हम यहाँ हैं, वरना हम किसी होटल में जाते।”

मैं संजू की तरफ आश्चर्य से देख रही थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था। अमित के कपडे वो नहीं थे जो सुबह भाई पहन कर गया था और आवाज में भी थोड़ा अंतर था।

जब मुझे अहसास हुआ उसने क्या बोला हैं, तो मैं ख़ुशी के मारे कूद कर उसकी गोद में उछल बैठ गयी और उसने भी मुझे लपक लिया।

मैंने उसको टाइट हग किया और फिर उसके होठों को अपने होठों में दबा एक थैंक यू किस भी किया।

उसने कहाँ “कभी कभी मजा दुगुना करने के लिए और उत्तेजना बढ़ाने के लिए झूठ भी बोलना पड़ता हैं। अब देखो तुम्हारी भाभी क्या इतने ज्यादा मजे ले पाती। कल रात को ही वो बोल रही थी कि उसको अपने पति के सामने कभी चुदवाने का बहुत मन हैं, तो मैंने नकली में ही सही उसकी इच्छा पूरी कर दी”।

उसने कहना जारी रखा “इस सब चक्कर में तुम पीस गयी पर उन दोनों आदमियों को तुम्हारे नखरो की वजह से मजा आ गया” ।

मैं उसकी गोद से उतरी, मेरे ऊपर से गुनाह का बोझ उतर गया था। मैंने उसको शिकायत की कि तुमने किसी भी ऐरे गेरे आदमी के साथ मुझे सुला दिया।

उसने कहा “मैंने तो तुम्हे बहुत बचाने की कोशिश की पर तुम हो ही इतनी सेक्सी कोई कण्ट्रोल कैसे करे। तुम्हारे लिए अपने भाई के साथ सोना बेटर था ये इस ऐरे गेरे के साथ? वैसे भी ये अच्छे घर का हैं, पहली बार अपनी बीवी के अलावा किसी ओर के साथ कर रहा था”।

उसने मुझको बोला “ग्रुप सेक्स में ऐसा होता हैं कि अनजान लोगो के साथ भी करना पड़ता हैं। तुम अब यहाँ से बिंदास निकलो तुमको अभी तक किसी ने पहचाना नहीं हैं।”

हम दोनों कमरे से बाहर निकले, बैडरूम के सामने से निकलते हुए अंदर से भाभी के चीखने चिल्लाने की आवाजे आ रही थी। हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर हँसे।

संजू बोला “आज तुम्हारी भाभी की हम लोग मिलकर अच्छे से लेंगे।”

मैं घर से बाहर आ कर रिक्शा पकड़ अपने घर की तरफ निकल पड़ी। पुरे रास्ते मैं ये ही सोचती रही कि संजू ने जो पहले बोला था वो सच था या वो जो उसने आखिर में बोला।

घर पहुंचने के एक घंटे बाद भाभी भी थकी हारी लुकी पीटी घर पहुंची। उसके आधे घंटे बाद पति भी घर पहुंचे, उनमे थकान कम और संतुष्टि ज्यादा नजर आ रही थी।

शाम को भैया घर आये, हम तीनो ही चोरो की तरह उनसे अपना मुंह छुपाये फिर रहे थे। भैया हमेशा की तरह एक दम नार्मल बीहेव कर रहे थे। मुझे बिलकुल नहीं लगा कि दोपहर वाला अमित ये ही था।

हालांकि संजू चाहता तो मुझे और भाभी को एक्सपोज़ कर सकता था, पर जिस तरह मैं एक बुरी स्तिथि फंसी थी मैंने सोच लिया था कि मुझे संजू और इस तरह की परिस्थितियों से हमेशा दूर ही रहना हैं।

मैं ये आपके विवेक पर छोड़ती हूँ कि आपको क्या लगता हैं, संजू ने जो पहले कहा वो सच था या वो जो उसने बाद में कहा। मैंने उसके बाद वाले कथन को ही सच माना हैं।

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