हैलो दोस्तों मैं रॉनित हूं। यह कहानी थोड़े समय पहले की है जब में 21 साल का था। मेरे परिवार में मेरी मां संगीता 43, बहन काव्या 19 (बहन हॉस्टल मे रहती है), और मुकेश पापा 46, है, और हम बंगाल से है। मेरी मां एक बंगालन औरत है। वो संस्कारी पूजा-पाठ वाली औरत है। उनका बदन भरा हुआ है, और दिखने में बहुत मस्त है।
तो कहानी शुरू करते है। शनिवार का दिन था। उस दिन मेरे कॉलेज की छुट्टी जल्दी हो जाती है। मैं सुबह से चला जाता हूं, और पापा भी ऑफिस निकल जाते है। दिन में जल्दी घर आता हूं, डोर बेल बजाता हूं, पर संगीता गेट नहीं खोलती है। पर मेरे पास दूसरी चाबी होती है, तो मैं उससे गेट खोलता हूं, और अंदर जाता हूं।
जैसे ही घर में घुसता हूं। संगीता के कमरे से सिसकियों की आवाज आती है। मैं थोड़ा डर जाता हूं, और उनके कमरे की तरफ देखता हूं। गेट थोड़ा खुला होता है। जैसे ही में अंदर देखता हूं, मेरी आंखें फटी की फटी रह जाती है। मेरी संसकारी मां किसी और मर्द की बाहों में थी, हमारे घर के पास के सलीम अंकल। उनकी किराने की दुकान है। उनकी उम्र भी 45-46 होगी। वो दोनों कमरे के अंदर मजे कर रहे थे।
मम्मी बिना साड़ी के अंकल को किस कर रही थी। वो दोनों इतने मदहोश थे, कि उनको पता नहीं चला कि कोई उनको देख रहा था। अंकल बूब्स को ब्लाउस के ऊपर से मसल रहे थे। मां के भरे बदन को दबा रहे थे। यह देख मुझे गुस्सा आया बहुत, और साथ में मेरा लंड भी खड़ा हो गया था।
उन्होंने मम्मी को बेड पर फेंका, और गले और होंठों पर किस करने लगे। संगीता भी पूरा साथ दे रही थी। वो ब्लाउज के ऊपर बूब्स दबाने लगे, और क्लीवेज पर जुबान फेरने लगे। मैं दोनों को बाहर से देख रहा था।
सलीम: साली रांड, क्या मस्त जिस्म है तेरा।
मम्मी: आपकी ही मेहनत का फल है सलीम जी।
अंकल के मुंह से गाली सुन कर समझ गया था, इन दोनों का बहुत दिनों से चल रहा था। फिर थोड़ी देर में दोनों नंगे हो जाते है। उनका नंगा जिस्म देख कर मेरे लंड पर काबू नहीं हुआ। पसीने से उनका बदन और ज्यादा चमक रहा था। बड़े-बड़े बूब्स, बड़ी गांड देख कर मेरा खड़ा हो गया। अंकल का लंड भी बहुत बड़ा था। करीब 7-8 इंच का। इतना तो मेरा भी नहीं था, और पापा का भी नहीं था।
मैंने मम्मी-पापा की चुदाई भी देखी बहुत बार, पर संगीता सलीम के साथ ज्यादा मजे कर रही थी। सलीम ने संगीता के मुंह में लंड डाला, और वो चूसने लगती। संगीता एक रांड की तरह लंड को चूस कर मजे रही थी।
सलीम: अहह साली कुतिया, रोज तुझे इतने सालो से रोज चोदता हूं, पर रोज ज्यादा मजा आता है।
यह सुन कर मेरे और होश उड़ गए कि यह कब से चोद रहा था। और रोज इनकी चुदाई चल रही थी। संगीता को उसने बहुत देर तक लंड चुसाया, और अब कुतिया बना दिया और गांड पर थप्पड़ मारे।
संगीता: अहह मालिक, धीरे, यहीं पर हूं।
सलीम: चुप कुतिया, रंडी साली।
सलीम पीछे से संगीता की चूत में लंड डालने लगा। उनकी कमर पकड़ के पीछे से जोरदार धक्के देने लगा। वो भी पूरे मजे ले रही थी। वो पीछे से बाल पकड़ के, घोड़ी बना कर चोदने लगा। संगीता भी एक रंडी की तरह चुद रही थी। उनकी आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। इस पोजिशन में मस्त चुदाई कर रहा था। मैंने दोनों की विडिओ बना ली। ऐसे ही संगीता को कुतिया बना कर चोदता रहा। सलीम में बहुत स्टेमिना था। इतनी देर में पापा का दो बार निकल जाता, पर वो धक्के के चोद रहा था।
थोड़ी देर में वो पीछे से हटा, और बिस्तर पर लेट गया। संगीता सलीम के लंड पर बैठ गई थी। दोनों बूब्स के बीच मंगलसूत्र लटक रहा था। संगीता लंड पर कूदने लगी। बूब्स भी हवा में उछालने लगे। यह नज़ारा देख कर मैं पेंट में दूसरी बार झड़ चुका था।
आज संस्कारी संगीता का असली रूप देख रहा था। उसके अंदर चुदाई की बहुत भूख थी। वो जोर-जोर से लंड पर कूदने लगी। उसका पानी निकल चुका था। चिकने पन से चुदाई में और ज्यादा मजा आ रहा था।
सलीम: साली मादरचोद, और जोर से कूद ना।
संगीता की कमर पकड़ के नीचे से झटके देने लगा। दोनों थक चुके थे, पसीने में गीले हो गए थे। सलीम तेजी से चोदने लगा, और फिर जल्दी से संगीता के मुंह के सामने खड़ा हुआ। उसने उसके मुंह में लंड डाल दिया, और मुंह के अंदर ही माल निकाल दिया।
संगीता सारा माल गटक गई। सलीम ने थोड़ा माल मंगलसूत्र और बूब्स गिरा दिया। मां उसको भी चाट गई। फिर दोनों थक कर बिस्तर पर लेट गए। संगीता का हाथ सलीम के लंड पर था, और प्यार से मसल रही थी।
सलीम: अहह मेरी जान, मजा आ जाता है तुझे चोद कर।
संगीता: और मुझे भी आपका लंड लेकर बहुत मजा आता है।
सलीम: इतने सालों से चोदता हूं। फिर भी ऐसा लगता है पहली बार चोद रहा हूं तुझे।
संगीता: अब आपका लंड है ही इतना बड़ा, कि रोज चूत फाड़ देता है।
वो दोनों ऐसे लेटे रहते है। और एक बार और चुदाई करके अंकल चले जाते है। मैं अपने रूम में जा कर संगीता के बारे में सोचने लगता हूं, और उसके बदन का दीवाना हो जाता हूं। मैं उसकी चुदाई के बारे में सोचता हूं, और सो जाता हूं।
शाम को संगीता फ्रेश हो जाती है। फिर चाय बना कर मेरे रूम में लाती है। वो अब बिलकुल एक ससंकारी औरत की तरह आती है और मुझे उठाती है
संगीता: बेटा रॉनित उठ, शाम हो गई, कितना सोएगा?
रॉनित: हां मम्मी, बस थोड़ी देर।
संगीता: ले चाय रखी है, पी लेना।
रॉनित: हां ठीक है।
वो चली जाती है। मैं पीछे से देखता हूं। अपनी बड़ी गांड हिलाती हुई वो रूम से निकल जाती है। रात को सब खाना खाते है। हमारे सामने संगीता इतनी सीधी बनती है, और दिन में अलग ही रूप था उसका।
रात को मैं दोनों पति-पत्नी की चुदाई देखता हूं, पर संगीता को मजा नहीं आता है। सिर्फ दिखाने के लिए सिसकियां लेती है। असली मजे तो वो सलीम के साथ लेती है, एक पूरी रंडी बन कर।
सुबह इतवार था। पापा सुबह से ही खेत पर चले जाते है। घर पर सिर्फ मैं और संगीता ही होते है अकेले। मैंने जब से उसकी चुदाई और नंगा जिस्म देखा था, मेरे दिमाग में वो ही घूम रही थी। मेरे मन में भी उसको चोदने के ख्याल आने लगते है। साड़ी पहन कर उसकी बड़ी गांड, बड़े-बड़े बूब्स, क्लीवेज मुझे और उसकी तरफ आकर्षित कर रहे थे।
दोपहर हो जाती है। खाना खा कर संगीता अपने रूम में चले जाती है, और मैं अपने रूम में फोन में उनकी चुदाई की विडिओ देखता हूं। फिर मुझसे कंट्रोल नहीं होता है, तो मैं उनके रूम में जाता हूं।
संगीता: अरे बेटा कुछ चाहिए?
रॉनित: हां चाहिए।
संगीता: क्या चाहिए बोलो?
रॉनित: वहीं जो इतने सालों से सलीम अंकल को दे रही हो।
संगीता डर जाती है। उसका चेहरा लाल होने लगता है, और वो हड़बड़ा कर बोलने लगती है।
संगीता: मैं क्या देती हूं सलीम अंकल को? किसकी बात कर रहा है तू?
रॉनित: मुझे सब पता चल गया है, ज्यादा नाटक मत करो।
संगीता: अरे क्या पता चल गया तुझे? कैसी बहकी-बहकी बात कर रहा है तू?
रॉनित: अच्छा रुको बताता हूं।
मैं अपना फोन निकाल कर उनको विडिओ बताता हूं जिसमें उनका और सलीम का चेहरा साफ-साफ दिख रहा होता है। संगीता की गांड फट जाती है। उसका मुंह उतर जाता है और वो रोने लगती है।
रॉनित: अब आ गया समझ में किसकी बात कर रहा हूं?
संगीता: बेटा यह बात किसी को मत बताना (और रोने लगती है)।
रॉनित: सलीम के साथ तो बहुत मज़े करती है, और अब आंसू आ रहे है।
संगीता: बेटा जो तू बोलेगा वैसा करूंगी। पर यह बात अपने बीच रहनी चाहिए।
रॉनित: अब आई ना लाइन पर।
मैं उसके करीब जाता हूं, और अपना हाथ उसके बूब्स पर रखता हूं, और प्यार से हाथ फेरने लगता हूं। वो कुछ नहीं करती है।
संगीता: यह गलत है बेटा, ठीक नहीं है।
रॉनित: अच्छा और सलीम के साथ सब ठीक था?
मैं सारी का पल्लू हटाता हूं। क्लीवेज पर उंगली घूमता हूं। अपना हाथ उसके पेट पर लाता हूं, और मसलने लगता हूं। बिस्तर पर धक्का दे कर उसके ऊपर चढ़ जाता हूं। मेरे ऊपर भी अब हवस चढ़ चुकी थी।
संगीता मुझे हटाने की नाकाम कोशिश कर रही थी, पर उससे कुछ हुआ नहीं। मैंनै अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए, और किस करने लगा। उसके होंठ मैं चूसने लगा। धीरे-धीरे वो भी गरम हो रही थी। उसको भी मजे आने लग रहे थे, पर अभी भी वो मेरा साथ नहीं दे रही थी।
संगीता: बेटा यह ठीक नहीं कर रहा है तू, छोड़ दे मुझे।
रॉनित: साली दूसरे के साथ तो बड़े मजे ले रही थी।
मैं फिर से किस करने लगा। मैं होंठों और गले पर चूमने लगा। वो भी गरम होने लगी थी। अब वो मेरा साथ देने लगी थी। मैं धीरे-धीरे नीचे क्लीवेज को चाटने लगा, ब्लाउस खोल कर ब्रा के ऊपर से बूब्स दबाने लगा। फिर मैंने उसकी साड़ी निकाल फेंकी। मैंने भी टी-शर्ट निकाल दी, और उसके पेट को चाटने लगा। नाभी के अंदर जुबान डाल कर चाटने लगा।
वो भी सिसकियां लेने लगी थी। उसको भी अब मजे आ रहे थे। मैं जल्दी से खड़ा हुआ, और पेंट और चड्डी निकाल कर उसके सामने नंगा खड़ा हो गया। मेरा लंड पूरा खड़ा था। मेरे लंड को देख कर वो अंदर ही हंसी। मुझे भी पता था सलीम के सामने यह कुछ नहीं था। पर वो कुछ नहीं बोली, और लंड को हाथ से सहलाने लगी। मेरा लंड उसके मुंह के सामने खड़ा था।
मैं बोला: चल अब इसको मुंह में ले।
उसने भी मुंह के अंदर लिया और चूसने लगी। पहली बार जीवन में इतना अच्छा महसूस हो रहा था। उसने पूरा लंड अंदर डाल लिया, और तेजी से चूसने लगी। 3-5 मिनट में ही मेरा माल निकल गया, और मैं उसके मुंह के अंदर झड़ गया। मेरी आखें बंद थी। संगीता ने मुझे जोर से धक्का दिया, और मैं बिस्तर पर गिर गया। वो मेरी तरफ ग़ुस्से और असंतुश्ती की निगाहों से देख रही थी।
संगीता: साले जैसा बाप वैसा ही बेटा है। दोनों गांडू।
रॉनित: साली क्या बोल रही है कुतिया?
संगीता: चुप मादरचोद, तेरा बाप आज तक कभी मेरी गर्मी नहीं मिटा पाया, और ना तुझसे कुछ हुआ।
मेरा मुंह उतार गया था। मुझे शर्म आ रही थी, कि मैं इतना जल्दी में झड़ गया था, और ज्यादा कुछ नहीं कर पाया। तो मैंने अपने कपड़े पहने और जाने लगा।
संगीता: कहा जा रहा है? रुक अभी यहीं तू, और बैठ यहीं।
रॉनित: ठीक है।
मैंने चड्डी पहनी और वहीं बगल में कुर्सी रखी थी। मैं उस पर बैठ गया। संगीता ने फोन उठाया, और किसी को काल किया, और घर पर बुलाया। मुझे लगा सलीम को बुलाया होगा। संगीता ने फिर से साड़ी और ब्लाउस पहन लिया।
संगीता: चल कपड़े पहन ले, अब क्या नंगा ही रहेगा क्या?
रॉनित: हां ठीक है।
जैसा वो बोल रही थी, वैसा मैं कर रहा था। उसके सामने अब कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हो थी। मैंने अपने कपड़े पहन लिये।
रॉनित: जाऊ मैं अपने रूम में?
संगीता: रुक गांडू, यहीं चुप-चाप बैठा रह। अच्छा अब क्या बताएगा सब को, कि तेरा लंड छोटा है, और 2 मिनट में तेरा माल निकल जाता है?
रॉनित: सॉरी, अब कुछ नहीं बोलूंगा किसी को।
संगीता: साले बोलने लायक बचा भी नहीं है तू कुछ। दोनों बाप-बेटे एक जैसे हो। औरत की गर्मी शांत नहीं कर सकते।
मैं कुछ नहीं बोला, और इतने में घर की डोर बेल बजती है। मुझे लगा सलीम अंकल होंगे। में दरवाजा खोलने जाता हूं पर दरवाजे पर तो कोई और था, जिसकी मुझे उम्मीद भी थी, और अब उसके साथ संगीता चुदाई करेगी।
मैंने जैसे ही दरवाजा खोला, सामने हामिद अंकल थे। हामिद की उम्र 40 थी, और मेरे पापा के साथ ही ऑफिस में काम करते थे। पर कुछ महीनों पहले उन दोनों की लड़ाई हो गई थी, और संगीता अब उसके पति के दुश्मन के साथ ही चुदाई करेगी।
हामिद: अरे रॉनित बेटा, कैसे हो?
रॉनित: मैं ठीक हूं, आप कैसे हो?
हामिद: मैं भी ठीक हूं। मुझे लगा तुम घर पर नहीं होंगे, और संगीता जी कहा है?
मैं कुछ बोलता उससे पहले संगीता कमरे से बहार आती है। वो थोड़ी तैयार हो गई थी, साड़ी-ब्लाउस बदल कर बाहर आती है।
संगीता: अरे हामिद जी, अंदर आओ ना।
हामिद: हां संगीता जी।
हामिद अंदर आता है, और हाल में सोफ़े पर बैठ जाता है। संगीता मुझे पानी लाने को बोलती है। मैं पानी ले कर आता हूं, और इतने में संगीता हामिद की गोद में बैठी थी। हामिद मुझे देख के घबरा जाता है।
संगीता: अरे हामिद जी, इस चूतिये से डरने की कोई जरूरत नहीं है। अब यह भी इसके बाप की तरह गांडू ही है।
हामिद: मैं कुछ समझा नहीं संगीता, क्या बोल रही हो?
संगीता: कुछ समझने की जरूरत नहीं है।
संगीता बड़े आराम से हामिद की गोद में बैठी थी, और हामिद का हाथ संगीता की कमर पर था। मैं बस खड़ा-खड़ा देख रहा था। हामिद भी खुल गया था। वो संगीता का पेट मसलने लगा था। संगीता को भी मजा आ रहा था। वो पीछे से पीठ और गले पर किस करने लगा था।मैं बस देख रहा था दोनों को।
संगीता: साले गांडू, आज देखना कैसे चोदते है एक औरत को, और तेरे बाप को भी सिखा देना।
मैं कुछ नहीं बोलता हूं। हामिद संगीता का पल्लू हटा देता है, और मुंह घुमा कर दोनों किस्स करने लगते है। हामिद का हाथ संगीता की गांड पर जाता है, और वो गांड पर हाथ फेरने लगता है। वो एक दूसरे में खो गए थे। मैं बस शर्म से दोनों को देख रहा था।
हामिद बूब्स दबाने लगता है, और संगीता हामिद को गोद में बैठी अपनी गांड उसके मूसल पर मसलने लगती है। उसका खड़ा लंड संगीता की गांड में चुभता है। वो फिर संगीता को सोफ़े पर फेंक देता है, और उसके ऊपर चढ़ जाता है। वो उसको जानवर की तरफ चूमने लगता है। हामिद बहुत जोश में था। संगीता भी उसका साथ देती है।
अपने पति के दुश्मन के साथ संगीता पूरे मजे लूट रही थी। संगीता की साड़ी-ब्लाउस शरीर से अलग हो गया था। संगीता ने ब्रा नहीं पहनी थी। हामिद भी ऊपर से नंगा हो गया। उसके सीने पर बाल थे। संगीता हामिद के ऊपर आ जाती है, और उसके बालों वाले सीने से उसके नंगे बूब्स उससे टकरा रहे थे। हामिद पूरे मज़े ले रहा था।
हामिद: भड़वी मस्त माल है तू, मजा आ जाता है।
संगीता: अहह हामिद जी, आपका यह मर्दाना बदन!
हामिद (मेरी तरफ देखते हुए) देख ऐसे मजे करते है औरत के साथ, गांडू की औलाद।
संगीता मेरी तरफ देख कर हस्ती है। मेरा लंड भी खड़ा होने लगता है। ऐसे ही एक-दूसरे के शरीर से साथ खेलते-खेलते दोनों नंगे हो जाते है। हामिद का लंड बड़ा मोटा काला था, तभी अपने पति के दुश्मन के लंड पर मरती थी संगीता। हामिद ने संगीता को सोफ़े के नीचे बिठा दिया, और अपना लंड संगीता के मुंह में देने लगा। लंड इतना बड़ा था कि उसके मुंह में जा भी नहीं रहा था, पर हामिद फार भी उसके मुंह में फौलादी लंड डाल रहा था।
हामिद ने उसका पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था। वो उसके मुंह में लंड घुसा कर उसका मुंह चोदने लगा। संगीता की आवाज़ भी बाहर नहीं निकलने दे रहा था वो। वो उसके मुंह से लंड बाहर निकलता है, तो संगीता थोड़ी हांफ़ती है, और जोर-जोर से सांसे लेने लगती है। हामिद उसका उठा कर बेडरूम में ले जाता है। संगीता मुझे आने का इशारा करती है। मैं उनके पीछे चला जाता हूं।
वो संगीता को बिस्तर के किनारे पर फेंक देता है। उसका मूसल लंड पूरे जोश में संगीता की चूत फाड़ने के लिए तैयार था। संगीता की चूत पहले ही गीली हो चुकी थी। संगीता की टांगे वो फैला देता है, और अपना लंड उसकी चूत पर सेट करता है। फिर धीरे-धीरे चूत के अंदर लंड डालने लगता है। संगीता की चूत बहुत बार फट चुकी थी। फिर भी हामिद के सामने ऐसा लग रहा था कि पहली बार उसकी चूत में इतना बड़ा लंड जा रहा था।
संगीता की चीखें निकलने लगती है। उसकी चुदाई देख कर मेरा माल पेंट में निकल जाता है। हामिद संगीता की कमर पकड़ता है, और उसको चोदने लगता है। उसकी चीखें पूरे रूम घर में गूंज रही थी।
संगीता: हामिद जी, धीरे करो। इतने दिन बाद मिले हो, मेरी चूत फिर फाड़ डालोगे क्या?
हामिद उसकी चीखें सुन कर और जोश में आता है। वो अपनी स्पीड तेज करने लगता है। उसके बूब्स और मंगलसूत्र सब उछलने लगते है। वो संगीता की कमर और जोर से पकड़ के धक्के की स्पीड बढ़ा देता है। मैं देखता हूं कोई इंसान इतनी देर कैसे चोद सकता है, पर वो रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
संगीता: अहह मादरचोद, इसे बोलते है चुदाई। तेरी तरह नहीं, 2 मिनट में काम खत्म।
संगीता मुझे गाली देती है। मुझे देख उसमे और जोश आता है। उसकी चूत पानी छोड़ चुकी थी। हामिद लंड बाहर निकालता है। उसका लंड पूरा गीला था चूत के पानी से, और अभी भी सख्त खड़ा हुआ था। वो संगीता को घुमा कर उसको घोड़ी बना देता है। फिर उसकी गांड पर जोर डर थप्पड़ मारता है। संगीता की चीखे निकलती है, पर उसको इसमें मजा आता है।
फिर वो अपने लंड पर थूक लगा कर संगीता की गांड में लंड डालने लगता है। संगीता गांड भी मरवा चुकी थी पहले। लंड पहले से ही गीला और चिकना था जो गांड के अंदर जाने लगता है। हामिद धीरे-धीरे धक्कों में एक जोरदार धक्का देता है, और पूरा लंड गांड के अंदर घुस जाता है।
संगीता इस बार बहुत जोर से चिल्लाती है। इतना कि पूरा मोहल्ला सुन ले और पता चल जाए कोई असली मर्द ठुकाई कर रहा था संगीता की। वो पीछे से बाल पकड़ के उसको चोदने लगता है। संगीता के कूल्हों से हामिद की जांघे टकराती है। वो हर झकटे में संगीता की गांड फाड़ता है। संगीता भी भी पक्की रंडी है, हर झटका झेलती है। उसकी गांड खुल चुकी थी। हामिद पूरे जोश से संगीता की गांड चोद रहा था।
मन मेरा भी था उसको घोड़ी बनाने का, पर संगीता ने पहली बार में ही मेरी औकात मुझे बता दी थी। हामिद और सलीम के आगे में कुछ नहीं था। हामिद ने संगीता को अपनी रंडी बना लिया था, और उसको रंडी जैसा ही चोद रहा था। हामिद का शरीर थकने लगा था। वो और तेजी से चोदने लगा-
हामिद: कुतिया मेरा होने वाला है।
संगीता जल्दी घुटनों पर बैठ गई, और हामिद का लंड को चूसने लगी। हामिद ने उसके बाल पकड़े, और पूरा लंड उसके मुंह में उतार दिया। हामिद की आँखें बंद हो गई थी। वो अपने चरम पर था। उसने तेजी से झटके मारे, और संगीता के मुंह में झड़ गया। संगीता भी पूरा माल पी गई। फिर हामिद ने संगीता को धक्का दिया, और बिस्तर पर सो गया। दोनों बहुत थक गए थे।
संगीता: गांडू अपने बाप के लिए पानी लेकर आ।
रॉनित: जी ठीक है।
मैं दोनों के लिए पानी लेकर आया। हामिद का लंड अभी भी दिखने में कड़क था, और चुदाई के बाद भी उसका मेरे से बड़ा दिख रहा था। वो दुश्मनी का गुस्सा संगीता को चोद कर निकाल रहा था, और संगीता भी उसको पूरे मजे देती थी। जिसको मैं संसकारी और घरेलू औरत समझता था, वो एक रंडी थी।
संगीता: सलीम और हामिद जी भी तेरे पापा ही है। काव्य (मेरी बहन) इन दोनों में से किसी एक औलाद है।
हामिद: पर यह तो उस गांडू की औलाद है, और उसके जेसी ही है।
मैं सुन कर शॉक हो जाता हूं कि यह दोनों कब से संगीता को चोद रहे थे, और उनसे एक बेटी भी थी। उसके बाद शाम तक दोनों ने बहुत चुदाई की, और फिर हामिद चला गया।
संगीता अभी मेरे सामने नंगी सोई थी। उसको देख कर मेरा खड़ा था। उसको यह दिख रहा था, पर उन दोनों के सामने मेरा बहुत छोटा था, यह मैं समझ गया था।
संगीता: भड़वे मुझे देख कर खड़ी हो गयी क्या तेरी छोटा सी लुल्ली? चल अपने कपड़े उतार, और मेरे सामने हिला कर दिखा।
मैं वेसा ही करता हूं, अपनी पेंट निकाल कर उसके सामने हिलाने लगता हूं। संगीता मुझे देख रही थी, और मेरा फिर से 3-4 मिनट में निकल गया। वो मुझ पर हंसी।
मैं शर्म से मुंडी नीचे करके खड़ा था, और उसकी गाली सुन रहा था। अब वो जब मन करे तब मेरे सामने चुद लेती थी। कभी भी घर पर हामिद और सलीम आते रहते थे। मेरी बेईज्जती करती सलीम और हामिद के सामने।
रोज हामिद या सलीम संगीता की चुदाई करने आते रहते थे। इन सब की अब आदत हो गई थी, और हम दोनों के लिए नॉर्मल हो गया था। दिन भर संगीता घर पर अकेली रहती थी, और मजे करती थी।
मुझे भी चस्का लग गया था अब उसकी चुदाई देखने का, और मजे भी आते थे देख कर, कि वो लोग कैसे उसे रंडी बना कर चोदते थे हर दिन।
