हेलो दोस्तों मेरा नाम अमित है। मैं एक बार फिर से हाजिर हूं आप सभी के लिए एक नई मजेदार कहानी लेकर। यह कहानी मेरे एक पाठक की सच्ची घटना पर आधारित है। अपने पाठक के बताए अनुसार मैं उसकी निजी जानकारी को ना देकर यह कहानी आप सभी को बता रहा हूं। उम्मीद करता हूं इसे पढ़ कर आप सभी को बहुत मजा आयेगा। आप लोगों को ज़्यादा बोर ना करते हुए मैं कहानी को अपने पाठक की जुबानी आप लोगों को बताता हूं।
हेलो दोस्तों, आप सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। मेरा नाम राहुल है। मेरी उम्र 23 वर्ष है, लंबाई 5’4”, देखने में गोरा और स्मार्ट हूं। यह कहानी मेरी विधवा मां की चुदाई की है। कैसे वो एक संस्कारी औरत से एक चुदक्कड़ औरत में बदल जाती हैं। वो सब मैं आपको अपनी इस कहानी में बताने जा रहा हूं। दोस्तों अगर लिखने में कुछ गलती हो जाए तो माफ करना। क्यूंकि मुझे लिखने का इतना तजुर्बा नहीं है।
मेरी यह कहानी कुछ 3 साल पहले की है। मेरे पापा राजवीर वर्मा, एक बड़े ही बिजनेसमैन थे। उनका अपना सुनार का काम था। उनकी मौत उसके 2 महीने पहले अचानक हार्ट अटैक से हो गई थी। पापा के जाने के बाद फैमिली और घर का बटवारा हो गया। हमारे हिस्से में दिल्ली का एक बड़ा आलीशान घर आया, जो पापा ने कभी अपने खुद के दम पर बनाया था। जहां हम घरेलू झगड़ों की वजह से कभी रह नहीं पाए थे। घर को पाने के बाद हमें अब किसी चीज की कमी नहीं थी। बस एक बड़ी कमी थी पापा की, जो मेरी मम्मी अच्छे से महसूस कर रही थी।
मेरी मम्मी का नाम सविता वर्मा है। उम्र 39 वर्ष, लंबाई 5’4” है, उनका रंग दूध सा गोरा है। मम्मी ना ज़्यादा मोटी ना ही पतली है। 34-30-38 इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं। मम्मी की तनी हुई टाइट गोल चूचियां है और बाहर को निकली हुई गोल उभरी हुई बड़ी और चोड़ी गांड। जिसे देखते ही लोग दीवाने हो जाते है। एक मर्द को काबू में करने के लिये मम्मी के पास वो सभी खूबियां हैं। मम्मी शुरू से ही हाउसवाइफ रही थी, जिससे वो अपना धार्मिक और संस्कारी विचार रखती हैं। अब आगे-
2 महीने गुज़र जाने के बाद भी, मेरी मम्मी पापा के सदमे से बाहर नहीं आई थी। उन्हें अकेले रहना बहुत ही चुभ रहा था। ऊपर से हम एक अंजान शहर में अकेले रहते थे। जहां हमारा कोई जान-पहचान वाला नहीं था। मम्मी सुबह-शाम बस अकेले में उदास गुमसुम बैठी रहती। एक दिन मेरे से मम्मी का उदास रहना देखा नहीं गया, और मैंने उनसे इस बारे में बात करनी सोची। मैं उनके पास गया जब मम्मी अपने कमरे में लेटी हुई थी।
मैं बोला: मम्मी आपने अभी तक खाना नहीं खाया?
मम्मी बोली: बेटा अभी मेरा मन नहीं है, तुम खा लो।
मैं: मम्मी आप हर दिन ऐसे ही बोलती हो। मुझे पाता है आप पापा के जाने के बाद उदास रहती हो।
मम्मी उठ कर बैठ गई और रोने लगी। मैंने उनकी आंखों से निकलते आंसुओं को पोंछा और उन्हें शांत किया। फिर मम्मी को अपने गले से लगा लिया।
मैं: मम्मी आप चिंता मत करो। मैं पापा का बिजनेस और घर की जिम्मेदारी संभाल लूंगा।
मम्मी (मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए): बेटा तुम इतनी उम्र में घर की जिम्मेदारी कैसे संभालोगे?
मैं: मम्मी वो सब आप मेरे पर छोड़ दो। मैं आपकी खुशी के लिए कुछ भी करूंगा।
फिर मैंने मम्मी से वादा करवाया कि आप कभी उदास नहीं रहेगी। मम्मी हां बोल कर मेरे गले लग गई, और मेरे माथे पर एक प्यार से किस्स कर देती है। फिर कुछ दिनों के बाद मैंने एक बड़ी शॉप ली और लग गया पापा के बिजनेस की तरफ ध्यान देने। रोज सुबह शॉप पर जाने से पहले मम्मी मेरे माथे पर एक किस्स कर देती थी। अब मेरी मेहनत को देख कर दिन प्रतिदिन मम्मी की उदासी कम हो रही थी। मैं हर दिन शॉप से आने के बाद मम्मी के साथ बैठ जाता, और कुछ देर उनसे बाते करता।
मम्मी: बेटा अब तेरा काम कैसा चल रहा है?
मैं बोला: मम्मी अभी तो बस शुरुआत हैं। बस कुछ दिन बाद अपना कारोबार अच्छा चलने लगेगा। फिर मैं आपकी हर ज़रुरत पूरा कर सकूंगा।
मम्मी (खुशी से मुझे गले लगा ली): बेटा मुझे तो बस तेरे पापा की कमी है। पर मुझे तेरे जैसे बेटा मिल गया अब और किसी की जरूरत नहीं रही।
मैं: थैंक्स मम्मी। (और मैं उनके होठों पर हल्का चूम लेता हूं। यह मेरी लाइफ की पहली किस्स थी जो मैं अपनी मम्मी से कर रहा था।)
मम्मी: बेटा किस्स गाल पर किया जाती है, यहां नहीं करते।
मैं बोला: मम्मी अब मॉर्डन जमाना है। मैं तो आपको ऐसे ही प्यार करूंगा, और अब आपको भी मॉर्डन बनना होगा।
मम्मी: धत बेटा! ऐसे तो विदेशी लोग करते हैं। हमारी संस्कृति में ये सब चीज़ अच्छी नहीं लगती (मैं थोड़ा डर गया कहीं मम्मी मेरी बात का बुरा ना माने)।
अगले दिन, सुबह मेरी नींद जल्दी खुल जाती है। मैं अपनी आंखों को मसलता हुआ फ्रेश होने जा रहा था। बॉथरूम का खुला दरवाज़ा देख कर मेरी बंद आंखें एक दम खुली रह जाती हैं। क्यूंकि मेरी मम्मी पूरी नंगी नहा रही थी। मुझे लगा मैं कोई सपना देख रहा था।
मम्मी का सुनहरा बदन उफ क़यामत ढा रहा था। उनकी पहाड़ जैसी चूची एक-दम कसी हुए थी। उनके ब्राउन-निप्पल जो पानी से भीगने से खड़े हुए थे, जिसे मैं बचपन चूसता होगा। मम्मी का फिगर किसी जवान लड़की से कम नहीं लग रहा था। उनकी पतली कमर और गोल और गहरी नाभि। फिर मेरी नज़र मम्मी की चूत पर गई, जो पाव रोटी की तरह फूली हुई थी। उसके मोटे-मोटे होठ आपस में चिपके हुए थे।
उफ ये काली झांटे ना होती तो चूत की दरार देख कर मजा ही आ जाता। आज पहली बार मैंने अपनी मम्मी को इस तरह पूरी नंगी देख रहा था। मम्मी अपनी चूचियों पर मसल-मसल के साबुन लगा रही थी। तभी उनके हाथ से साबुन फिसल कर ज़मीन पर गिर जाता है।
मम्मी उसे उठाने के लिए आगे झुक जाती है। उफ उनकी उभरी हुई बड़ी और चौड़ी गांड बिल्कुल मेरे सामने थी। दोस्तों माँ की बड़ी गांड देख कर आज मेरे खुद का लंड खड़ा हो जाता हैं। आज पहली बार मेरी नियत मम्मी पर खराब हो रही थी। मम्मी के झुके होने से उनकी गांड की गहरी दरार खुल सी गई थी।
मां की गांड पीछे से देखने में ऐसा लग रहा था, जैसे में किसी पोर्न मूवी की हीरोइन देख रहा हूं। फिर मम्मी साबुन उठा कर अपनी गांड बीच दरार में अपने हाथों से रगड़ कर अच्छे से साफ करती हैं। फिर मम्मी शावर के नीचे खड़ी होकर नहाती हैं। उनका पानी से भीगा बदन संगमरमर की तरह चमक रहा था।
फिर मम्मी ने लास्ट में जब अपनी चूत की दरार के बीच उंगली डाल कर सफाई करी, तब चूत की गुलाबी कलियां देख कर मज़ा ही आ गया। थोड़ी देर में मम्मी का नहाना हो जाता है। फिर मैं जल्दी से अपने कमरे में आकर मम्मी के बारे में सोचता हूं। फिर थोड़ी देर बाद में नाश्ता करके अपनी शॉप पर निकल जाता हूं। आज शॉप पर मेरा मन नहीं लग रहा था। बार-बार मम्मी का नंगा बदन मेरे सामने आ रहा था। फिर जैसे-तैसे शाम होई, और मैं अपने घर के लिए निकल गया।
घर जाते समय रास्ते में मैंने मम्मी के लिए एक फोन ले लिया। घर आकर मैंने पहले मम्मी को अपने पास बुलाया। मम्मी भागती हुई मेरे पास आई-
मम्मी (हांफते हुऐ): क्या हुआ बेटा, आज बहुत खुश नज़र आ रहा है?
मैं बोला: हां मम्मी, पहले आप मेरे पास बैठो (फिर मैं उनके हाथों में गिफ्ट बॉक्स दिया)।
मम्मी बोली: बेटा ये क्या है?
मैं बोला: आप पहले खोल कर तो देखो। आपके लिए गिफ्ट लाया हूं।
मम्मी गिफ्ट बॉक्स खोल कर मोबाइल देखती हैं और बोली: बेटा इसकी क्या ज़रूरत थी?
मैं: मम्मी आप घर में बोर हो जाती हो। इसलिए आपके लिए मोबाइल लिया हैं।
मम्मी खुश होकर बोली: थैंक्स बेटा, तुम मेरा कितना ख्याल रखते हो।
मम्मी ने मुझे कस कर गले लगाया। मुझे उनके बूब्स मेरी छाती पर महसूस होने लगे। मैं भी अपने हाथ उनकी पीठ पर रख कर सहलाने लगा। मम्मी थोड़ा भावुक हो गई, और मेरे माथे पर किस्स किया। मैंने भी उनके गाल पर किस्स कर लिया। आज मम्मी कुछ बोली नहीं और शर्मा गई।
फार मैंने अपने हाथ में मम्मी का हाथ पकड़ा और उनको कहा: मम्मी मुझे पता हैं आप पापा को बहुत मिस कर रही हो। मैं पापा की कमी तो कभी पूरा नहीं कर सकता, पर आपका दोस्त बन कर आपकी ज़िंदगी में खुशियों के रंग भरना चाहता हूं।
मैं मम्मी का फेस अपने दोनों हाथों से पकड़ा, और उनके लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये। जैसे ही मैं उनका निचला लिप्स चूसने लगा, मम्मी ने अपना फेस दूसरी तरफ कर लिया।
मैं बोला: क्या हुआ मम्मी?
मम्मी: हम दोनों का रिश्ता मां बेटे का हैं। हम दोनों ऐसे किस्स नहीं कर सकते।
मैंने कहा: मम्मी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं। मेरे जीवन में सबसे सुंदर और अच्छी कोई हैं, तो वो आप ही हो। मैं पापा के बिना आपको ऐसे मायूस नहीं देख सकता।
मम्मी: बेटा लेकिन हमारा रिश्ता मां बेटे का हैं। अगर किसी को पता चला कि तेरे पापा के जाने के बाद मैं अपने बेटे से ऐसी सब चीज़े कर रही हूं। तो समाज में मेरी क्या इज्जत रहेगी?
मैंने कहा: मम्मी आप इस झूठे समाज की बात मेरे सामने ना करो तो ही अच्छा हैं। जब हमारे परिवार का बटवारा हुआ, तब कहा था ये समाज? तब किसी ने सोचा था कि हमारी आगे की ज़िंदगी कैसे गुजरेगी?
मम्मी: लेकिन बेटा फिर भी मैं ये सब नहीं कर सकती।
मैं (थोड़ा नाराज़ होकर): ठीक ही मम्मी, मुझे लगता हैं आपको हमारी ख़ुशी से ज़्यादा ज़माने की पड़ी हैं।
फिर मैं उठ कर जाने लगा, तब मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
मम्मी: बेटा मेरे लिए अब तू ही एक सहारा हैं। तुम भी मुझे छोड़ कर चले जाओगे तो मैं तो अकेली हो जाऊंगी।
मैं: मम्मी में आपको अकेले नहीं छोड़ रहा। लेकिन आपको अब जमाने की फिकर किए बिना अपनी मर्जी से जीना होगा। मेरे लिए आपकी ख़ुशी से बढ़ कर कुछ नहीं है।
मम्मी: ओहो, अच्छा ठीक है बाबा। अब तेरे लिए मुझे भी अपने आप को बदलना पड़ेगा।
मम्मी ने मुझे मुस्कुराते हुए देखा, और उनके होंठ मेरे होंठों पर रखे दिए। कुछ पल के लिए मुझे समझ नहीं आया कि ये सपना था या हकीकत। मैं भी मम्मी का साथ देने लगा। ये मेरी ज़िंदगी की पहली किस्स थी, जो मैं अपनी मां के साथ कर रहा था। मम्मी ने अपने दोनों हाथ मेरे कंधों पर रख दिए। अब मुझे उनके होंठ चूसने में और मजा आ रहा था। मम्मी के होंठ चूसने में बड़े मीठे लग रहे थे।
अचानक मुझे मम्मी का वो नंगा बदन याद आ गया, जब मैंने उनको बाथरूम में नंगा नहाते हुआ देख लिया था। मैं और जोश में मम्मी के होंठ चूसने लगा। मैं उनकी जीभ को अपने मुंह में डाल कर चूसने लगा। कुछ पल के बाद मम्मी भी मेरा साथ देने लगी। मम्मी भी मेरे लिप्स के साथ मेरी जीभ चूसने लगी। हम मां-बेटे एक-दूसरे को किस्स करते समय किसी दूसरी दुनिया में खो से गए थे। कुछ 5 मिनट तक हमारे लिप्स लॉक रहे। उसके बाद मम्मी मेरे से अलग हुई और शर्माने लगी।
मैं बोला: आई लव यू मम्मी, आप ऐसे ही खुश रहा करो। मैं चाहता हूं आप भी दूसरी औरतों की तरह अपनी लाइफ खुल कर एन्जॉय करो और मॉर्डन बन कर रहो।
मम्मी बोली: तुम एक अच्छे बेटे की तरह मेरी फिकर करते हो। और तुम अपने पापा से भी अच्छा किस्स करते हो। ऐसा किस्स तो उन्होंने भी नहीं किया। माफ करना बेटा, मैं भूल गई थी कि तुम मेरे बेटे हो, और मैं किसी और दुनिया में खो गई (उनकी आंखो में नमी आ गई)। अब तो वो भी नहीं रहे तो मेरी कोई इच्छा का अब कोई मतलब नहीं रहा। और अब मेरी उम्र हो चुकी है।
मैं बोला: मम्मी आप को मेरी कसम, आप अपनी हर इच्छा पूरी करोगी। आप तो आज भी जवान लगती हो, किसी लौंडिया के जैसी।
मैं मम्मी के सामने उनकी बहुत तारीफ करता हूं। जिससे वो और खुश हो जाती हैं।
मम्मी: बेटा पर अब मैं एक विधवा औरत हूं, लोग समाज मुझे क्या बोलेंगे?
मम्मी की बात से मैं समझ गया उनकी इच्छा आज कल की मॉर्डन औरतों की तरह ज़िन्दगी जीने की थी। पर समाज से डर रही थी। फिर मैं मम्मी को समझाया कि-
मैं: आप समाज की चिंता आप मत करो। हम एक अनजान जगह पर रहते हैं। यहां हमें कोई नहीं जानता। आप जैसे चाहे वैसे एन्जॉय कर सकती हैं।
मम्मी मेरी बात से खुश हुई। फिर मैंने मम्मी को शॉपिंग के लिया राजी कर लिया। मैंने अगले रविवार को शॉपिंग जाने के लिए मनाया। जल्द वो दिन भी आ गया जब मैं मम्मी को शॉपिंग के लिए मॉल लेकर गया। मम्मी सिंपल साड़ी में भी तैयार होकर कयामत ढा रही थी। फिर मॉल के अंदर हमे एक अटेंडर मिला जो जवान और हट्टा-कट्टा स्मार्ट था।
वो मम्मी को अपनी ओर से इंप्रेस करने में लगा हुआ था। वो मम्मी को काफी शॉर्ट ड्रेस दिखाता, और उनकी तारीफ करता। फिर मम्मी को वो एक अंडरगारमेंट्स शॉप पर ले गया, जहां मम्मी मेरे सामने ब्रा-पैंटी लेने में शर्मा रही थी। फिर मैं बहाना बना के पार्किंग में आ जाता हूं। कुछ थोड़ी देर बाद मम्मी मुझे उस अटेंडर के साथ आती हुई दिखाई देती है। दोनों बातें करते हुए आ रहे थे। मैं उनकी बात सुनने के लिए छुप जाता हूं।
अटेंडर बोला: मैम सच में आप बहुत ब्यूटीफुल और स्मार्ट लगती हो। इतनी उम्र में आप कयामत ढा रही हो। तो आपकी जवानी कैसी रही होगी। मैं आपकी ख़ूबसूरती देख कर आपसे इम्प्रेस हो गया हूं।
मम्मी बोली: आप यह क्या बोल रहे हो? मैं एक बेटे की मां हूं।
अटेंडर बोला: सॉरी मैम, आप इतने यंग लग रहे हो, तो मेरा दिल मान ही नहीं रहा। वैसे आप पर मेरा दिल आ गया। क्या हम दोस्त बन सकते है?
मम्मी (मुस्कराते हुए): मैं आपकी भावनाओ की कदर करती हूं, पर मैं दोस्ती नहीं कर सकती। सॉरी, और आप अब आपका काम कर सकते हैं।
मम्मी का ये संस्कारी-पन मुझे बहुत अच्छा लगता है। फिर हम अपने घर आ जाते हैं। मम्मी कुछ ड्रेस पहन कर मुझे दिखाती है, जिसमें वो काफी सेक्सी हॉट लग रही थी। फिर मम्मी ने एक टाइट लेगिंग्स और ऊपर एक टॉप पहना। लेगिंग्स में उनकी बड़ी गांड एक-दम टाइट उभरी हुई थी। उनकी गांड का हर कट नज़र आ रहा था। उनकी पाव रोटी जैसी फूली हुई चूत बाहर को निकल रही थी, और चूत के बीच वाली दरार में कपड़ा घुसा हुआ था।
मम्मी का यह सेक्सी रूप देख कर मेरे से रहा नहीं गया, मैंने तुरंत मम्मी को अपनी बाहों में लिया, और उनके होठों पर अपने होंठ रख कर एक किस्स कर लिया।
मैं बोला: ओहो, मम्मी आप इस ड्रेस में काफी सुंदर और जवान लग रही हो। कही लोग आपको मेरी मम्मी की जगह आपको मेरी गर्लफ्रेंड ना समझ ले।
मम्मी (मुस्कुराती हुई): थैंक्स बेटा, मैं तेरी वजह से आज अपने आप को बदल पाई हूं।
फिर मम्मी खुद मुझे लिप्स टू लिप्स किस्स करती है। कुछ 2 मिनट मम्मी मेरे होंठों को बड़े ही कामुक तरीके से चूसती है। फिर अपने होठों को मेरे से अलग करके शर्माने लगती है।
मैं बोला: ओहो, मम्मी अब मेरे से क्या शर्माना? मैं तो चाहता हूं कि हम दोनों गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड बन के रहे।
मम्मी बोली: हां बेटा, तेरे पापा के जाने के बाद तेरे बिना है भी कौन मेरा?
फिर उसके बाद हम रात का खाना खा कर सो जाते हैं। अगले दिन सुबह मैं देर तक सोता रहा। मम्मी मुझे जगाने मेरे कमरे में आती है। उस समय मैं एक लूज़ अंडरवीयर में सो रहा था।
मम्मी बोली: राहुल बेटा उठ जाओ, सुबह हो गई।
में बोला: सोने दो मम्मी।
मम्मी: लगता है मेरा बेटा ऐसे नहीं उठेगा।
मम्मी मेरे माथे पर, गालों पर, फिर होठों पर चूम लेती हैं। मम्मी ने जब अपने कोमल होठों से मेरे होठों को चूमा, मैंने महसूस करा मम्मी के बदन से एक बड़ी ही मादक खुशबू आ रही थी, जो मेरे लंड को खड़ा कर देती हैं। फिर मैं सोने का झूठा नाटक कर लेता हूं।
मम्मी: राहुल बेटा अपनी आंखे तो खोलो, तेरे लिया कुछ सरप्राइज है।
मैं: ओहो, मम्मी सोने दो ना, और आप भी सो जाओ।
मैं मम्मी का हाथ पकड़ के अपने ऊपर खींच लेता हूं। मैं नींद के बहाने से मम्मी की कमर और उनकी टांगों पर हाथ फेरा देता हूं। मैं हैरान रह गया जब उनकी नंगी टांगों पर अपने हाथ फेरे, और अपनी हल्की खुली आंखों से देख कर और भी चौंक गया।
मम्मी ने ऊपर एक स्पोर्ट ब्रा पहनी हुई थी, और नीचे शॉर्ट्स पहना हुआ था, जो उनकी गांड तक ही आ रहा था। मम्मी की ब्रा इतनी टाइट होने से उनकी आधे से भी ज्यादा चूचियां बाहर झलक रही थी। चूचियों की क्लीवेज की गहराई देख कर मेरा लंड एक-दम से खड़ा हो गया। जो मम्मी ने अच्छे से महसूस किया होगा।
मम्मी मेरे ऊपर ही लेटी हुई थी। जो लंड को अपनी चूत पर महसूस करके अब मचल रही थी। मम्मी के बार-बार हिल-डुल से उनकी चूचियां मेरे सीने पर रगड़ रही थी, और नीचे मेरा लंड भी चूत से रगड़ कर मुझे और जोश दिला रहा था। मैं नींद के बहाने ही मम्मी को अपनी बाहों में और टाइट जकड़ लेता हूं। मम्मी अपनी खुली जुल्फें सही करती हुए-
मम्मी बोली: बेटा अभी मस्ती नहीं। मुझे नाश्ता बनाना है।
मैं मम्मी के बात का कोई जवाब नहीं दिया, और अपने हाथ उनकी नंगी टांगों पर फेर ने लगा। फिर नीचे से एक धक्का देकर लंड उनकी चूत से टकरा दिया। लंड चूत पे टकराने से मेरी मां के मुंह से एक आह निकल गई।
मम्मी बोली: लगता है राहुल बेटा तुम ऐसे नहीं मानोगे।
मम्मी मेरे होठों पर किस्स करने लगी। मैं भी उनकी नंगी कमर पे अपने हाथ फेरने लगा। धीरे-धीरे मम्मी मुझे काफी डीप किस्स करते हुए मेरे होंठों को चूसने और चबाने लगी। दोस्तों सच में मम्मी ने जब मेरे होंठों को चूसना शुरू किया, मुझे बहुत मजा आया। नीचे से मेरा लंड मम्मी की चूत पर बार-बार टकरा रहा था, जिससे मम्मी और जोश में मुझे स्मूच करती और मेरे होंठों को काट लेती।
कुछ देर बाद मम्मी एक-दम शांत पड़ जाती हैं। फिर मेरे ऊपर से उतर के मेरे बगल में पेट के बल अपनी गांड ऊपर करके लेट जाती हैं। उनकी उभरी हुई बड़ी गांड देख कर मेरे से रहा नहीं गया, और मैं भी तुरंत उनके ऊपर लेट गाया। मेरा 6 इंच लंड मां की गांड की दरार में जैसे ही हल्का सा घुसा, मम्मी ने अपनी गांड को भींच लिया और एक लंबी सांस लेते हुए-
मां बोली: बेटा उतर जाओ मेरे ऊपर से, मुझे जाने दो।
मैंने मम्मी के बाल उनकी गर्दन से हटा कर उधर किस्स करने लगा। बीच-बीच में उनकी कान की लो को चूस लेता। मेरी मां अब गर्म होने लगी, और हल्की-हल्की सिसकारी लेते हुए अपनी टांगे खोल दी। जिससे मेरा खड़ा हुआ लंड उनकी गांड की गहराई में टकराने लगा।
मेरी मां तुरंत अपनी टांगे बंद करके मेरा लंड अपनी गांड की गहराई में महसूस करने लगी। उफ्फ गांड की गर्मी पा कर मेरा लंड झटके मारने लगा। मम्मी चुप-चाप मेरे नीचे लेटी हुई लंड को अपनी चूत और गांड पर महसूस कर रही थी।
फिर मैंने हल्के-हल्के कुछ झटके मारे। मेरी गर्म मां भी साथ देते हुए अपनी गांड को कभी ढीला कभी टाइट करती हुई लंबी लंबी सांसे ले रही थी। अभी मजे लेते हुए कुछ मिनट ही हुए थे, कि मुझे ऐसा लगा मेरा लंड से पानी निकलने वाला था। मैंने अपने झटके तेज़ किए। तभी मम्मी मुझे धक्का देकर मेरे नीचे से हट गई, और मुझे तिरछी नज़र से देखते हुवे मुस्कुराते हुए बोली-
मम्मी बोली: फ्रेश होकर नाश्ता करने आ जाना।
यह बोल कर मम्मी फिर कमरे से बाहर भाग गई। मम्मी के जाते ही मेरे लंड ने सारा माल अंडरवियर में ही उगल दिया। जो शायद थोड़ी देर पहले मेरी अंडरवियर से बाहर निकल कर मम्मी की गांड पर थोड़ा लग जाता। अच्छा हुआ मम्मी चली गई थी, वरना आज मां-बेटे का रिश्ता खराब हो जाता। फिर मुझे बहुत अफसोस हुआ। सोचने लगा आज मैंने क्या कर दिया जो मुझे मम्मी के साथ नहीं करना चाहिए था।
फिर में नहा धो कर नाश्ते के लिए मम्मी के पास आया। देखा मम्मी ने अपने कपड़े चेंज करके सलवार सूट पहन लिया था। मम्मी मेरे सामने बैठी थी। मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी उनसे नज़रें मिलाने की, और मम्मी भी मेरे से कुछ बोल नहीं रही थी।फिर जैसे-तैसे मैंने बोलने की हिम्मत करी।
मैं बोला: सॉरी मम्मी, वो सब मेरे से गलती से हो गया था (इसका जवाब मम्मी ने काफी देर बाद दिया)।
मम्मी मुस्कुराते हुए बोली: कोई बात नहीं बेटा, अब तुम बड़े हो गए हो। इस उमर में ये सब होने लगता हैं।
मैंने समय देखा सुबह के 10 बज रहे थे। फिर मैं जल्दी से शॉप के लिए निकल गया। अगले दो दिन मेरी हिम्मत नहीं होई मम्मी के पास जाने की। फिर उसके दूसरे दिन शाम को जब मम्मी किचन में थी मैं जाके उन्हें पीछे से हग कर लिया, और उनकी गर्दन पर चूमने लगा। मम्मी मुझे अपने से दूर करते हुए-
मम्मी बोली: बेटा मेरी तबियत ठीक नहीं है। चार पांच दिन तुम्हें दूर रहना होगा।
मम्मी की यह बात मुझे कुछ समझ नहीं आई, और मैं घबराते हुए तुरंत उन्हें डॉक्टर के पास चलने के लिए बोला।
मम्मी मुस्कुराती हुई बोली: बेटा घबराओ मत। मुझे डॉक्टर की ज़रूर नहीं है।
मैं बोला: मम्मी मैं कुछ समझा नहीं?
मम्मी हस्ते हुए बोली: बेटा अब मैं तुम्हें कैसे बताऊं यह हम औरतों की बीमारी है। अब इससे ज़्यादा मैं नहीं बता सकती।
मैं अंजान बनते हुए ज़िद करके उनसे सुनना चाहता था। फिर भी मम्मी मेरे से नहीं बोली। खैर अगले दिन जब वो मौसी से फोन पर बता कर रही थी तब मैंने सुना-
मम्मी बोली: दीदी मुझे आज काफी समय बाद पीरियड हुआ है।
मौसी फोन में क्या बोली वो मैं नहीं सुन सकता, पर मौसी का जवाब सुन कर-
मम्मी बोली: दीदी यह खुशी का संकेत कैसे हो सकता है?
मौसी ने मम्मी को ऐसा क्या बोला था? उसका मुझे पता नहीं पर कुछ तो था। इसका पता मैं बाद में लगाऊंगा। फिर पीरियड के बारे में मैंने गूगल सर्च किया तब मुझे पता लगा। दोस्तों वैसे आप सब भी जानते हो गए पीरियड के बाद औरतों का सेक्स करने का मन कितना करता है। फिर कुछ दिन ऐसे ही निकल गए। एक सुबह मेरी नींद जल्दी खुल गई, और मैं मम्मी को रोज की तरह गुड मॉर्निंग बोलने जा रहा था। पर वो मुझे कमरे में दिखाई नहीं दी। फिर मैं किचन की तरफ जाने लगा। तभी मुझे बाथरूम से मम्मी की सिसकारियों की आवाज़ आई।
मैंने उधर जाकर देखा मेरी संस्कारी मां अपना एक हाथ दीवार पर टिका कर और अपनी टांगे चौड़ी करके पूरी नंगी खड़ी हुई थी। वो अपने दूसरे हाथ की 2 ऊंगली चूत में डाल कर अंदर-बाहर कर रही थी। मां का यह रूप देख कर मैं दंग रह गया। सोचा नहीं था मेरी मां अपनी चूत की गर्मी इस तरह शांत करेगी। मेरी मां अपनी आंखे बंद करके अपनी चूत में 2 उंगलियां बड़े ही आराम से अंदर-बाहर करती हुए अपने मुंह से-
मम्मी: आआआआ ह्ह्ह्ह्ह्ह उफ्फ।
मम्मी अपनी कामुक आवाजों से मेरा भी माहोल गर्म कर रही थी। फिर मैंने भी अपना लंड निकाला, और उधर ही मुठ मारने लगा। थोड़ी देर बाद मम्मी टॉयलेट के कमोड पर बैठ जाती है, और अपनी टांगे चौड़ी करके फिर से चूत में उंगली डालने लगती हैं। अब मुझे उनकी खुली चूत की गुलाबी दीवारें आराम से दिख रही थी। उफ्फ क्या चूत हैं मेरी मां की। मन कर रहा था अभी जाकर अपना मुंह लगा लूं।
इधर मैं मूठ मार रहा था, उधर मेरी मां अपनी चूत में उंगली करते हुए चूचियां भी मसल रही थी। बीच-बीच में जब वो अपनी उंगलियों को चूत से बाहर निकलती, उनकी चूत से उनका गाढ़ा काम रस भी बाहर आ जाता। मेरा मन बार-बार कर रहा था कि अभी जाकर उनकी चूत चाट लूं। उनको वो मजा दूं जिसकी उनको अभी जरूरत थी। मेरी मां अपनी चूत में तेजी से उंगली कर रही थी।
कुछ देर में उनकी चूत फच-फच की आवाजों के साथ झड़ जाती है। मम्मी लंबी-लंबी सांसे ले रही थी। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर-नीचे हो रही थी। वो देख कर मैं भी झड़ गया। मम्मी अपनी उंगलियों पर लगे अपने काम रस को देख कर मुस्कुरा रही थी। उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान दिख रही थी। मम्मी ने अपना रस चूचियों पर मसला, और फिर पानी से साफ करके नहा कर नंगी ही अपने कमरे में आने वाली होती हे।
मैं उनके बाथरूम से बाहर आने से पहले अपने कमरे में आ जाता हूं। थोड़ी देर बाद मैं उन्हें नाश्ते के साथ टेबल पर देखता हूं। मम्मी सलवार सूट पहन कर तैयार हो कर बड़ी क़यामत लग रही थी। नाश्ता करते समय मैंने देखा उनका चेहरा चूत में उंगली करने के बाद खुशी से काफी खिल रहा था। फिर मैं नाश्ता करके मम्मी की गुड बाय किस्स लेकर अपनी शॉप पर निकल गया। शॉप पर काम ना होने से मेरा मन नहीं लग रहा था। मैंने सोचा क्यों ना घर चला जाऊं। फिर मैंने वैसा ही किया और घर जल्दी आ गया। मुझे जल्दी घर पर आया हुआ देखा कर-
मम्मी बोली: क्या हुआ बेटा आज जल्दी कैसे?
मैं बोला: बस शॉप पर काम नहीं था।
मम्मी: बेटा आज मेरा मन कहीं बाहर घूमने का कर रहा है।
मैं बोला: ठीक है आप तैयार होके आओ। हम आज रात का खाना किसी होटल में करेंगे।
थोड़ी देर में मम्मी तैयार हो कर आ गई। सिंपल ब्लैक साड़ी में उनकी बड़ी गांड उभर के आ रही थी। साड़ी में उनकी कमर और पेट नंगी ही दिख रही थी। फिर हम दिल्ली के एक बड़े होटल में आ गए। जहां लोग मेरी मम्मी को खा जाने वाली नज़रों से देख रहे थे। यहां तक होटल का मालिक भी मम्मी को घूर रहा था।
मैं बोला: मम्मी सच में आप बहुत सुंदर लग रही हो। देखो ना लोग आपको कैसे देख रहे हैं।
मम्मी कुछ नहीं बोली बस शर्मा गई। फिर हम खाना खा कर घर आ गए। सोने जाने से पहले मम्मी मुझे एक जोरदार किस्स दी फिर सोने चली गई। अगली सुबह फिर मैंने मम्मी को चूत में उंगली करते देखा। फिर उन्हें देख कर मैंने भी मूठ मार कर अपने लंड को शांत कर लिया।
उसके बाद मैं शॉप पर बैठे हुए सोचने लगा। मेरी मां की चूत में आज कल ज़्यादा ही खुजली हो रही है। जो अपनी चूत को उंगली से शांत कर रही है। फिर सोचा पापा के जाने के बाद मम्मी भी आखिर अपने आप को कब तक रोकती? मम्मी भी एक औरत है, उनकी चूत में भी खुजली हो गई तो क्या गलत है? अगर यह खुजली चुदाई की आग में बदल गई फिर तो उस आग को बस एक लंड ही शांत कर पाएगा।
अब तो मुझे सोचते हुए भी डर लग रहा था कही मम्मी किसी गैर मर्द का शिकार ना बन जाए। उससे मम्मी और घर की बदनामी भी होगी। इसे अच्छा है मुझे ही मम्मी की खुशनुमा लिए अब कुछ करना पड़ेगा।
ऐसे सोचते हुए मेरा दिन निकल गया। शाम को घर के लिए निकल रहा था तभी मेरा पास एक अंजान व्यक्ति काम की तलाश में आया। वो काफी मजबूर लग रहा था। उसकी मजबूरी देख कर मैंने उसे अगले दिन आने को बोल दिया। उसके बाद मैं भी घर आ गया। रात का खाना खाने के बाद में कुछ देर मम्मी के पास उनसे बात करने चला गया। मम्मी अपने कमरे में ना होके छत की बालकनी में खड़ी नीचे देख रही थी।
मैं उनके पास जाकर बोला: मम्मी आप अभी तक सोई नहीं? आप ऐसे यह क्यों खड़ी है?
मम्मी बोली: बेटा बस मुझे नींद नहीं आ रही थी (मुझे मम्मी की बातों में उदासी नज़र आ रही थी।)
मैं बोला: मम्मी कुछ तो बात है, आप उदास लग रही हो। मुझे बताओ ना क्या बात हैं?
मम्मी: बेटा मुझे बहुत अकेला-पन लग रहा है। आज कल मुझे रातों में तेरे पापा की कमी बहुत महसूस होती हैं।
फिर मम्मी फूट-फूट के रोने लगी। मैंने उन्हें शांत किया और उनके कमरे में ले गया। फिर उनके साथ थोड़ी देर बातें करता रहा जब तक वो सो नहीं गई। उसके बाद मैं भी जाकर सो गया।
अगले दिन सुबह मैं अपनी शॉप पर आया और काम में लग गया। थोड़ी देर बाद कल वाला वहीं व्यक्ति मेरे पास काम मांगने आया। उसने मुझे अपनी कुछ दुख भरी कहानी और अपने बारे में बताया। उसका नाम जुनैद था। उम्र 28 वर्ष, हाईट 5’8”, रंग उसका सावला था। फिर भी वो स्मार्ट और हैंडसम लगता था। उसकी बॉडी काफी आकर्षित थी। उसके मोटे-मोटे डोले, चौड़ी छाती, और गठीला बदन देखने में किसी पहलवान जैसा लगता था। कोई भी औरत उसे एक नज़र देख ले तो अपनी टांगे खोलने के लिए तैयार हो जाए।
जुनैद ने बताया काम के साथ उसके पास रहने के लिए घर भी नहीं था। जुनैद मजबूरी में नौकर भी बनने के लिए तैयार था। उसकी दुख भरी कहानी और उसकी मजबूरी सुन कर मैंने उसे अगले दिन आने को बोला। रात को खाने के समय मैंने मम्मी को जुनैद की सारी बात बताई।
मम्मी भी मेरी बात सुन कर बोली: बेटा तुम्हें उसकी मदद करनी चाहिए।
मैं बोला: मम्मी क्यों ना हम उसे ऊपर वाला कमरा दे? वैसे भी ऊपर वाला फ्लोर खाली है, और मुझे अपनी शॉप के लिए एक वर्कर भी मिल जाएगा।
मम्मी: बेटा जैसा तुम्हे ठीक लगे मुझे तो खुशी है तुम किसी की मदद करना चाहते हो। पर एक बार उसके बारे में अच्छे से पता कर लेना कि वह कौन सी जगह से आया है, और उसका व्यवहार कैसा हैं। मैं नहीं चाहती किसी अनजान पर भरोसा करके उसको अपने घर में रखना।
अगले दिन मैंने जुनैद को दुकान पर काम पर रखा, और उसे काम भी समझा दिया। यह सुन के वो काफी खुश हुआ। वो कुछ दिनों तक ऐसे ही बाहर कहीं अपना गुजारा करता रहा। कुछ समय बाद मैंने मम्मी से पूछा तो उन्होंने कहा कि अगर तुम्हें उस पर विश्वास हैं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। एक दिन रात को मैं जुनैद को अपने साथ घर लेकर आ गया।
मम्मी ने जब घर का गेट खोला। मम्मी मेरे साथ खड़े जुनैद को ऊपर से नीचे तक देखती रह गई। फिर मुस्कराते हुएं हमें अंदर आने को बोली। मम्मी उस समय एक टाइट लेगिंग और लूस टी-शर्ट पहनी थी। लेगिंग में मम्मी की उभरी हुई बड़ी गांड और भी बड़ी लग रही थी। ऊपर से मम्मी ने टी-शर्ट के अंदर ब्रा नहीं पहना था। जिससे उनकी चूचियां हिल रही थी।
मम्मी हमारे लिए पानी लेने किचन में जा रहीं थी। तब मैंने देखा जुनैद मेरी मां की मटकती गांड को ही देख रहा था। थोड़ी देर बाद मम्मी ने जुनैद को पानी दिया। वो पानी पीकर मम्मी को थैंक्स बोला। उसके बाद मैंने जुनैद को बताया यह मेरी मम्मी सविता है। फिर मैं उसका कमरा दिखा दिया। जुनैद को हमारा घर काफी अच्छा और उसने मम्मी से घर की बहुत तारीफ़ की।
अब रोज जुनैद मेरे साथ शॉप पर आता। हमरा पूरा दिन काम और बाते करते-करते ही निकल जाता था। घर आने के बाद मम्मी दोनों के लिए चाय बना देती। चाय पीने के दौरान मम्मी भी हमारे साथ बैठ जाती थी। कुछ देर हम बातें करते। तभी मैंने नोटिस किया मम्मी चाय पीते हुए जुनैद की मस्कुलर बॉडी बड़े ध्यान से देखती थी। और उसके साथ बातें करती रहती।
एक दिन मैंने जुनैद को शॉप पर जल्दी भेज दिया। और मैं कुछ देर बाद तैयार होकर नाश्ते के लिए गया। मम्मी मंदिर से पूजा कर के आ रही थी, जो उनकी रोज की आदत थी। फिर मम्मी मेरे लिए नाश्ता लेकर आई और बोली: बेटा आज जुनैद जल्दी क्यूं चला गया?
मैं बोला: मम्मी शॉप पर काम ज़्यादा हैं, इसलिए उसको जल्दी भेज दिया।
मम्मी: पर बेटा तुम्हें भी उसके साथ रहना चाहिए, कहीं वो कुछ….
मैं बोला: ओहो मम्मी जुनैद काफी ईमानदार लड़का है। उसके आने से अपना कारोबार अच्छा चल रहा है। जुनैद पापा की तरह ही अच्छा बिजनेस करना जनता हैं।
मम्मी बोली: बेटा तुम्हे तो फिर भगवान को थैंक्स बोलना चाहिए। जुनैद जैसा ईमानदार अच्छा वर्कर मिल गया।
मैं बोला: हां मम्मी जुनैद पर हम विश्वास कर सकते है।
मैंने देखा मम्मी जुनैद की तारीफ से काफी खुश नज़र आ रही थी। मैंने शॉप पर जाने से पहले मम्मी से किस्स मांगी। फिर मम्मी और मैं कुछ 2-3 मिनट तक एक-दूसरे के होंठ को दबा कर चूमने लगे। उसके बाद मैं अपनी शॉप पर निकल गया। कुछ दिन में ही मम्मी जुनैद से काफी घुल-मिल गई। जुनैद भी घर में इस तरह रहने लगा जैसे वो उसका ही हो।
एक दिन मैंने देखा जुनैद सुबह-सुबह नहा कर बस लुंगी में ही घर के हॉल में आ जाता है। बिना किसी शर्म के वो अपनी घने बालों से भरी छाती और अपनी बॉडी पर तेल मालिश कर रहा था। तभी मेरी मम्मी मंदिर से पूजा पाथ करके हॉल में आती हैं।
मम्मी की नज़र एक-दम से जुनैद के मर्दाने गठीले बदन पर टिक जाती है। जुनैद मम्मी को अपने सामने खड़ा देख कर अपनी छाती और चौड़ी कर लेता है। इससे मम्मी उसका गठीला बदन देखते रह जाती हैं। मम्मी उसको देखते हुए अपनी नज़र इधर-उधर करके शर्माने लगती है। मम्मी उसको देखने के लिए कुछ देर उधर बैठ जाती है, और उसके साथ बाते करने लगती है।
जब मैं हॉल में आया, तब मम्मी मुझे देख कर एक-दम से किचन में चली गई। फिर उसके पीने के लिए अलग से कॉफी बना के लाई, जो जुनैद को बहुत पसंद थी। मम्मी का बदलता रूप देख कर मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था। लेकिन मम्मी जुनैद को अपने बेटे जैसा मान रही थी, तो मैंने सोचा ये मेरी ग़लतफहमी होगी।
एक दिन जुनैद और मैं जब शॉप से घर आए, तो देखा मम्मी घर के हॉल में उदास बैठी थी। फिर मैं उनके पास जाके उनसे उदासी का कारण पूछा?
दबी हुई आवाज में मम्मी बोली: बेटा तेरे मौसा जी की तबियत बहुत ख़राब है। तेरी मौसी का फोन आया था। मुझे उन्हें देखने जाना है।
मैं बोला: ठीक है मम्मी। अभी आप घबराओ मत। हम चले जाएंगे मौसी के घर। पर अभी तो रात में हमें बस भी नहीं मिलेगी।
तब तक जुनैद भी फ्रेश होकर हमारे पास आया। मम्मी की उदासी देख कर पूछने लगा। तब मैने उसे सारी बात बताई।
जुनैद बोला: ठीक है सर, मैं मैडम जी के जाने का इंतजाम करता हूं।
फिर जुनैद फोन पर किसी से बात करने लगा। मैं आपको बता देता हूं कि मेरी मौसी हमारे घर से दो सौ किलोमीटर दूर रहती है। उनका नाम कविता है। वो मम्मी से उम्र में बस 3 साल बड़ी और मम्मी की तरह ही गोरी चिट्टी सुंदर है।
आगे जुनैद ने फोन पर बात करके बताया: सर एक कार का इतंजाम हो गया हैं, पर हम अभी तो नहीं जा सकते हैं। हमें सुबह तक का इंतज़ार करना होगा। आप जाने की सब तैयारी कर लीजिए। मैंने सुबह जल्दी कार बुला ली है।
सुबह चार बजे मेरी नींद खुली, और हॉल में आकर देखा तो मम्मी मेरे से पहले उठ चुकी थी, और वो बॉथरूम से नहा कर आ रही थी। मम्मी को देख कर मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल मच गई। मम्मी के जिस्म पर सिर्फ तौलिया लपेटा हुआ था। मम्मी की आधी चूचियां बाहर दिख रही थी, और नीचे से देखो तो सिर्फ उनकी गांड ढकी हुई थी। मुझे उनकी नंगी जांघों को देख कर कुछ होने लगा था। मम्मी के गीले बालों से निकलती पानी की बूंदे उनके बूब्स की दरार में जा रही थी।
मुझे उनको घूरता हुआ देख कर मम्मी बोली: राहुल तुम जल्दी से तैयार हो जाओ। जुनैद बस कार लेकर आता ही होगा।
फिर मैं नहाने बॉथरूम में चला गया। पर मुझे याद आया मैं अपना तौलिया तो लाना भूल गया। फिर मैं उसे लेने बाहर अपने कमरे में जाने लगा। तभी मुझे जुनैद दिखा जो मम्मी के आधे खुले दरवाजे से अंदर झाक रहा था। मैं यह देख कर हैरान रह गया कि ये साला जुनैद मेरी मम्मी के कमरे में क्यों झाक रहा था? मुझे समझ आया मम्मी अभी नहा कर गई थी। जरूर वो मम्मी को कपड़े पहनते हुए देख रहा होगा।
मेरा माथा ठनक गया, बहनचोद मेरी मां को नंगी देख रहा था, और पजामे के ऊपर से अपना लंड भी मसल रहा था। थोड़ी देर बाद वो अपने कमरे में चला गया। शायद मम्मी ने कपड़े पहन लिया थे। मैं सोचा इस बहन के लोड़े का मैं बाद में कुछ करता हूं।
फिर मैं भी नहा कर तैयार हो गया। नाश्ते पर मैंने मम्मी को देखा। वो क्या लग रही थी। मम्मी ने व्हाइट कलर का सलवार-सूट पहना हुआ था, जिसमें से उनकी लाल ब्रा की झलक नज़र आ रही थी।
उफ्फ इतना टाइट सूट। ऊपर से उसका गला बड़ा होने के कारण उनकी चूचियों में बड़ी दरार नज़र आ रही थी। और स्लीवलेस सूट होने की वजह से जब वो अपने हाथ ऊपर करती, तब उनकी चिकनी बगल नज़र आ रही थी। मेरी मम्मी पूरी जवान घोड़ी लग रही थी। मैं तो उनकी ख़ूबसूरती में खो सा गया था।
मम्मी मेरा ध्यान हटा कर बोली: बेटा कहां खो गए। जल्दी से नाश्ता कर लो और ये जुनैद कहां रह गया?
तभी जुनैद कुर्ता पजामा पहने हुए आ जाता है। मम्मी की आंखें उसे देख कर चमक उठती है, और वो एक अजीब सी मुस्कान उसको देती हैं, और फिर उसको नाश्ता करने को देती है। मुझे मम्मी का बर्ताव बदला-बदला सा लगता है। उसके बाद हम लोग मौसी के घर के लिए निकल जाते हैं। मैं आगे वाली सीट पर बैठा हुआ था और जुनैद कार चला रहा था।
2 घंटे बाद जुनैद हाईवे पर बने एक ढाबे पर कार रोक देता है। उधर कुछ देर रेस्ट करने के बाद मैं मम्मी को आगे वाली सीट पर भेज देता हूं, और खुद पीछे लेट कर सो जाता हूं। कुछ 1 घंटे बाद कार रुकने से मेरी आंखें खुल जा जाती है। लेकिन मैं हल्की नींद से लेटा रहता हूं।
मम्मी बोली: जुनैद तुमने इतने सुनसान रास्ते पर कार क्यों रोकी?
जुनैद हकलाते हुए बोला: मैडम जी 1 मिनट, मुझे बहुत ज़ोर से पेशाब आयी है।
फिर जुनैद कार से उतर कर कार की पीछे की साइड में जाता है, जिस साइड मम्मी बैठी होती है। चारों तरफ काफी झाड़ियां थी। जुनैद खड़ा हो कर अपना कुर्ता उठा कर अपने दांतों में फंसाता है। फिर अपने पजामे का नाड़ा खोलने लगता है। यह सब मैं मिरर में देख रहा था। मम्मी बिना दुपट्टे के बैठी हुई थी अपनी आधी खुली चूचियों को खुल्ला छोड़ कर। वो कार की खुली विंडो से हवा ले रही थी। ओहो, मैंने देखा मम्मी भी साइड मिरर से जुनैद को देख रही थी।
जुनैद पजामे को ढीला करके नीचे करता है, और अपना काला मुसल लंड बिना झांटो वाला चिकना लौड़ा बाहर निकालता है। जो देखने में ढीला था, फिर भी काफ़ी लंबा और मोटा लग रहा था। उसके लंड का टोपा लाल रंग का दिख रहा था। मैंने सोचा इसका मुरझाया हुआ लंड इतना बड़ा लग रहा था, अगर वो खड़ा हुआ तब तो और बड़ा होता होगा।
मम्मी जुनैद के लौड़े को देखते ही सहम सी जाती है, और अपने मुंह पर हाथ रख कर बोल पड़ती है, “हे भगवान, इतना बड़ा!” फिर पीछे मुड़ कर एक बार मेरी तरफ देखती है। मैं अपनी आंखें बंद कर देता हूं। मुझे सोता हुआ देख कर मम्मी फिर से मिरर में देखने लगी। जुनैद के लंड से निकलती मूत की धार शर-शर की आवाज़ से झाड़ियों पर गिर रही थी। धार बंद होते ही जुनैद अपने लंड को एक बार हिला कर आखरी बूंदे भी गिरा देता है। फिर रास्ते में पड़े पत्थर से सफ़ाई करता है, और फिर कार में आ जाता है।
मम्मी बोली: जुनैद अभी और कितना टाइम लगेगा?
जुनैद: मैडम ज़्यादा नहीं, बस एक घंटा। आप कहो तोह में तेज ड्राइविंग करूं?
मम्मी: ओहो, नहीं मुझे बहुत डर लगता है। आराम से चलाओ।
जुनैद: ठीक हैं मैडम, आप जैसा कहो।
मम्मी मुस्कुराती हुई बोली: जुनैद तुम मुझे मैडम मत बोला करो, अच्छा नहीं लगता।
मम्मी की यह बात मुझे कुछ समझ नहीं आई वो ऐसा क्यों बोली।
जुनैद (मम्मी की तरफ देखते हुए): फिर मैं अपको क्या बोल सकता हूं?
मम्मी बोली: मेरा प्यार सा नाम।
जुनैद: वैसे आप अपने नाम की तरह ही सुंदर और सुशील हो।
मम्मी अपनी तारीफ सुन के शर्मा जाती है और उसकी तरफ़ देखती हुई बोली: जुनैद तुम आज कुर्ते पजामे में हैंडसम लग रहे हो।
फिर मेरी तरफ देखती है। मैं अपनी आंखे बंद कर लेता हूं, जिससे उन्हें लगता है मैं सो रहा हूं। मम्मी फिर धीमे से बोली: जुनैद तेरी गर्लफ्रेंड होगी ना?
जुनैद बोला: नहीं, मेरे हालात इतने अच्छे नहीं हैं कि मैं इसके बारे में सोच सकूं। और मैं इतना अच्छा दिख भी नहीं रहा कि कोई मुझे अपना बॉयफ्रेंड बनाये।
मम्मी: ओहो जुनैद जी, आपकी बॉडी इतनी मस्कुलर है कि आप किसी भी औरत या लड़की को पसंद आ जाओ। आप कभी किसी पर ट्राई करके देखो।
मैं सोचा यह मेरी मां जुनैद से इतनी फ्रेंक केसे हो गई? कहीं उसका मुसल धार लंड देख कर उसकी दीवानी तो नहीं बन गई? फिर कुछ देर में हम मौसी के घर पहुंच जाते हैं। काफी समय बाद मैंने मौसी को देखा था, जो अब माल हो गई थी। उनकी मम्मी से भी ज़्यादा सेक्सी उभरी हुई गांड थी।
फिर हमने बीमार मौसा जी को देखा। मम्मी और मौसी इतने दिनों के बाद मिल कर बहुत ख़ुश हुए। मैंने नोटिस किया मौसी जुनैद को चोरी छिपे देख रही थी। रात खाना खाने के बाद मम्मी और जुनैद छत पर बातें करते हुए घूम रहे थे। थोड़ी देर बाद मम्मी मुझे छत से गुस्से में निराश आती हुई दिखी। मुझे उनका बर्ताव अजीब लगा। अगले दिन सुबह हम अपने घर के लिए निकल रहे थे, तभी मैंने देखा मौसी जुनैद से अकेले में कुछ बाते कर रही थी।
मोसी बोली: जुनैद अब तुम ही मेरी बहन सविता का खयाल रखना। मुझे पता है वो ज़रूर मान जाएगी।
मौसी की यह अधूरी बात सुन कर मुझे कुछ समझ नहीं आया क्या गड़बड़ चल रही थी। फिर हम अपने घर के लिए निकल पड़ते हैं। मैं पीछे वाली सीट पर फिर से सोने का नाटक करने लगा। रास्ते में कुछ दूरी तक दोनों शांत रहते हैं। जब जुनैद को लगा में सो गया था, तब जुनैद मम्मी के हाथ पर अपना हाथ रख देता है, जो कार की गियर के पास था।
जुनैद बोला: आज आप साड़ी में काफी खूबसूरत लग रही हैं ( मम्मी उसके हाथ के नीचे से अपना हाथ हटा लेती है, और गुस्से में मुंह फुला लेती है।)।
जुनैद: सविता बस मैं आपकी लाइफ में फिर से खुशियां लाना चाहता था। यह आपको गलत लगा, उसके लिए मैं माफी मांगता हूं।
फिर मम्मी बोली: जुनैद जी मुझे आपसे यह उम्मीद नहीं थी, कि आप मुझ पर ही ट्राई करोगे।
जुनैद बोला: मैं अपको दिल से चाहने लगा हूं, मुझे बस एक मौका दो। मैं आपको वो सब दूंगा जो आपका पति नहीं दे सका। मैं बस तुम्हे पाना चाहता हूं सविता।
मम्मी: जुनैद प्लीज, आप समझते क्यों नहीं? मेरे पति की मौत को अभी 6 महीने हुआ है। मैं एक विधवा औरत और एक जवान लड़के की मां हूं। मैं कैसे आपके लिए सोच सकती हूं। बस मैं और इस बारे में बात नहीं करना चाहती।
जुनैद: मुझे पता है आप भी मुझे पसंद करती हैं। मुझे आपकी हां का इंतजार रहेगा।
अब मुझे समझ आया और इनकी बात सुन कर मुझे गुस्सा आया। मैंने सोचा जुनैद का तो कुछ करना पड़ेगा। अगले दिन मैंने शॉप पर जुनैद को बोल दिया, “जुनैद अगर तुम मेरे लिए अच्छी पार्टी डील नहीं कर सकते, तो तुम जा सकते हो।” फिर जुनैद के जाने के बाद दो दिन मुझे अपनी शॉप पर काफी काम करना पड़ा। जिससे मैं मम्मी पर ध्यान नहीं दे पाया। पर मैंने नोटिस किया जुनैद के जाने के बाद मम्मी अपने कमरे में उदास बैठी रहती थी। कुछ दिन बाद मैं मम्मी के कमरे में उनका हाल जानने के लिए गया तब वो लेटी हुई थी।
मैं बोला: मम्मी क्या हुआ? आप ऐसे उदास क्यों लेटी हुईं हैं?
मम्मी: बेटा मेरी बस थोड़ी सी तबियत खराब है। बेटा यह जुनैद कहा है? वो घर क्यों नहीं आ रहा?
मैं: मम्मी मैंने उसे निकाल दिया है।
मम्मी बोली: पर बेटा तुमने जुनैद के साथ ऐसा क्यों किया? वो कितना अच्छा था। हमें अपना समझने लगा था। हमें उसके जैसे वर्कर की ज़रुरत थी।
मैं: मम्मी पर मुझे वो ठीक नहीं लगा।
मम्मी बोली: बेटा जुनैद तुम्हारी हर काम में मदद करता था। उसके आने से अपना काम भी अच्छा चलता रहता था। मुझे उसकी जरूरत है। वो तेरे पापा की कमी पूरी कर सकता है।
मैं यह सुन कर हैरान हो जाता हूं। फिर मैं बोला: मम्मी आप होश में तो हो? यह क्या बोल रही हो?
मम्मी रोते हुए बोली: बेटा मेरा मतलब वो नहीं है। वो तुम्हे पापा जैसा बिजनेसमैन बन सकता था। तुम मेरी बात को समझो।
मैं: मम्मी पहले आप अपनी दवाई खाओ।
मम्मी: बेटा पहले तुम प्रॉमिस करो जुनैद को काम पर रख लोगे, और उसको हमारे घर में फिर से बुला लोगे।
मैं मम्मी कि भावनाओ को समझ गया। मेरी मां जुनैद के बारे में कुछ ज़्यादा सोचने लगी थी। फिर मैंने जुनैद से बात करी, उसे मम्मी की खराब तबियत के बारे में बताया। वो उसी दिन शाम को मेरे साथ हमारे घर आया। मम्मी हॉल के सोफे पर बैठी हुई थी। जुनैद भी मम्मी के पास जाकर बैठ गया। जुनैद मम्मी का हाल पूछने लगा।
मम्मी उसे उम्मीद भरी नज़रों से देख रही थी। मैंने सोचा इन दोनों को थोड़े टाइम अकेले छोड़ देता हूं। मुझे पता लगाना था आख़िर इन दोनों के बीच ऐसा क्या चल रहा था। मैं बहाना बना कर वहां से निकल गया, और छुप कर उनको देखने लगा।
जुनैद बोला: आपने यह क्या हालात बनाई है? आप दवाई क्यों नहीं ले रही?
मम्मी: जुनैद आपको मेरी इतनी चिंता क्यों है?
जुनैद: मैं आपसे प्यार करता हूं इसलिए।
मम्मी: जुनैद यह नहीं हो सकता। यह मेरे बेटे को पता लागा तो वो मुझे कैसी समझेगा? वो कहीं मुझे अपनी बुरी मां ना समझ ले। मैं आपके साथ यह रिश्ता नहीं रख सकती।
जुनैद: ठीक है अगर मैं अपको पसंद नहीं हूं तो।
फिर वो उठ कर जाने लगता है। मम्मी जुनैद का हाथ पकड़ लेती है और एक-दम से जुनैद के गले लग जाती हैं। उसके सीने पर अपना सिर रख के अपने दोनों हाथों से जुनैद की कमर जकड़ के उससे लिपट जाती हैं और रोने लगती हैं। मेरी मां जुनैद से ऐसे लिपटी हुई थी, जैसे वो मेरा असली बाप हो।
मम्मी रोते हुए बोली: जुनैद जी मैं भी आपसे प्यार करती हूं। अब मैं आपको खोना नहीं चाहती। मैं पहले दिन से ही आपको पसंद करने लगी थी। बस मैं इस समाज के डर से आपसे दूर भाग रही थी।
जुनैद बोला: सविता अब तुम फिकर मत करो। जब तक तुम नहीं चाहोगी, किसी को पता नहीं चलेगा।
