काजल मेरी काजल ,आंखे बंद किये ना जाने कीस दुनिया में खो गई थी ,उसे देखकर एक बार तो मूझे चक्कर ही आ गया,मैं वही था जो कुछ दिनों पहले उसे मारने का प्लान कर रहा था ,आज उसकी इस कुर्बानी ने मुझे फिर से याद दिलाया जो वो मुझे बोला करती थी ,
‘मैं तुम्हारी ही रहूंगी देव चाहे शरीर किसी और के पास ही क्यो ना रहे लेकिन रूह तलक बस तुम्हारी ही रहूंगी ‘
मेरी आंखे भीग गई थी और मैं सिसक रहा था ,मेरा हाथ अभी भी काजल के हाथो में था,वो ऑपरेशन थिएटर मुझे काटने को दौड़ रहा था ,
‘कितना पागल था तू देव जो अपनी जान की वफादारी पर उसके प्यार पर शक किया ‘
मेरे दिल से बार बार यही बात निकल रही थी मैं बैठा बैठा अतीत की यादों में खो गया था ,3 महीने पहले जब मैंने काजल की जासूसी का फैसला किया था शायद वो मेरे जीवन का सबसे बेकार फैसला था,काजल मुझे सब कुछ तो बताना ही चाहती थी ,वो तो ये भी चाहती थी की मैं उसे दूसरे के साथ देखकर भी एन्जॉय करू ..
हा एक पति के लिए ये कितना कठिन था ये मैं और वो दोनो ही जानते थे लेकिन वो भी अपने जिद में थी और मैं भी …
वो दिन जब मैं हरिया से फोन कर उसके फार्महाउस में आने की बात कही मैंने उसे एक जॉब का आफर दिया था ,मुझे पता था की काजल और ठाकुर वही मिलने वाले है ,ठाकुर उसे कोई गिफ्ट देने वाला था पता नही वो क्या था,
हरिया को भी ये बात पता थी की 12 बजे के करीब खान का दोस्त इंस्पेक्टर ठाकुर वँहा आने वाला था,उसने इसी बात के कारण मुझे मना कर दिया लेकिन मैं उससे इतममिन से बात करना चाहता था…
मैं फॉर्महाउस में था ..
“सर जी आप मेरी बात नही समझ रहे है वो बड़े ही खतरनाक लोग है ‘
उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठा
“अच्छा ये बताओ क्या यही लड़की उनके साथ आती है “मैंने उसे काजल का फ़ोटो दिखाया वो चौक गया
“इस रांड का फ़ोटो आपके पास कैसे “
रांड मेरे दिल में एक जलन सी उठी मेरे ही सामने साला मेरी ही बीवी को रांड बोल रहा था
“बस जानता हु ,तुम्हे जॉब चाहिए ना “
वो घबरा गया था
“मेरी लाश पर मैं जॉब का क्या करूँगा आप कौन हो ,और आप मुझसे क्या करवाना चाहते हो ,सर जी मुझे तो लगा था की आप एक शरीफ इंसान हो इसलिए आपकी मदद करने की सोची लेकिन आप की नियत तो मुझे साफ नही लग रही है ..वो लोग मुझे और मेरे पूरे परिवार को मार देंगे ..”
वो बहुत ही डरा हुआ लग रहा था ,हो भी क्यो ना उसे खान और ठाकुर के बारे में कुछ तो पता ही रहा होगा
“एक चीज का ईमानदारी से जवाब देना,क्या खान और ठाकर तुम्हारी बीवी पर गंदी नजर नही डालते “
वो सन्न रह गया .उन्होने तो कई बार उसे पैसे भी ऑफर किये थे लेकिन वो शरीफ महिला थी ..
उसका सर झुक गया
“क्या तुम्हारा खून नही खोलता ,क्या पैसे की इतनी अहमयत है की तुम अपना ईमान भी बेच दोगो “
मेरी बाते उसके सीने में तीर सी चुभने लगी थी
“मैं कर भी क्या सकता हु,और वो लोग ज्यादा झेड़ते नही ,मैं अंजू (हरिया की बीवी ) को उनके पास भेजता भी नही “
“अगर किसी दिन भगवान ना करे की वो लोग दारू के नशे में हो और अपनी तलब का शिकार अंजू को बना ले तो क्या करोगे “
वो दंग सा मुह फाड़े मुझे देख रहा था उसे भी पता था की ये भी हो सकता है और वो कुछ भी नही कर पायेगा
“ऐसा कैसे हो सकता है अभी तक तो ऐसा नही हुआ “
“नही हुआ या तुम्हे पता नही है ,हो सकता है की उन्होंने अंजू के साथ जबरदस्ती की कोशिस की हो लेकिन अंजू ने अपनी मजबूरी के कारण तुम्हे कुछ भी नही बतलाया हो ….”
कुछ देर के लिए शांति छा गई थी ,उसकी नजर जमीन को देख रही थी और वो कई सोचो में गुम था,मैं उसकी मजबूरी समझता था वो ये नॉकरी छोड़कर नही जा सकता था ,क्योकि बाहर के दुनिया इससे भी खतरनाक थी …
“तुमने ही तो मुझे बतलाया था ना की उन्होंने अंजू को ऑफर किया था ,लेकिन अंजू ने मना कर दिया था …ये बात क्या अंजू ने तुम्हे तुरंत ही बता दी थी …”
वो चुप था
“ये बात भी तो उसने तब ही बताई जब तुमने उसे उनके पास गिलास ले जाने को कहा था ,है ना “
हरिया ने मुझे पहले ही सब कुछ बता दिया था और मैं जानता था की वो अपने परिवार से बहुत ही प्यार करता है ..
उसने हा में सर हिलाया
“देखो हरिया तुम्हारी और मेरी कंडीसन एक ही है ,जैसे तुम उन लोगो से डरे हुए हो वैसे ही मैं भी डरा हूं ,जैसे तुम मजबूर हो वैसे ही मैं भी मजबूर हु ,क्यो ना इन लोगो को ही खत्म कर दिया जाए “
वो चौक कर मुझे देखने लगा
“खत्म करने का मतलब मारने से नही है ,आर्थिक रूप से खत्म करने की बात है,उनका पावर खत्म किया जा सकता है ,”
वो समझ नही पा रहा था की वो क्या करे
“और इसमें तुम्हारा भी फायदा होगा “
उसने मुझे ध्यान से देखा
“कैसा रहेगा अगर ये फॉर्महाउस ही तुम्हारा हो जाए ,”
वो फिर से चौका
“मैं ये कर सकता हु तुम्हे बस मेरी थोड़ी सी मदद करनी होगी ,तुम्हे और तुम्हारे परिवार को कुछ भी नही होगा इसकी मैं गारेंटी ले सकता हु क्योकि उन्हें कभी पता ही नही चलेगा ,और मैं अगर पकड़ा भी गया तो डरो नही मैं तुम्हारा नाम नही लूंगा ,वो मेरा कुछ भी नही बिगड़ सकते डोंट वरी ,तुम अपने और अपने परिवार के लिए ये करो मेरा साथ दो ,मुझे यंहा आने जाने दो ,तुम्हारी पत्नी ,तुम्हरे पिता और तुम्हारे बेटे को भी इसके बारे में नही पता चलेगा ,तुम फिक्र मत करो ,”
फॉर्महाउस बहुत ही बड़ा था और सच में यंहा अगर कोई लाश भी लाके गाड़ दे तो किसी को पता नही चलेगा …
उसने हा में सर हिलाया उसकी सहमति का मतलब था की अब ये फॉर्महाउस मेरा ही था …मैं यंहा जब चाहे आकर जो चाहे कर सकता था …मैं खुसी से उसे देखा और पहली पगार के रूप में 2 हजार का एक नोट उसकी ओर बढ़ाया ..
“नही साहब ये सब नही चाहिए ,बस जो आपने कहा वो हो जाए तो मेरी जिंदगी सफल हो जाए “
पहली बार मैंने हरिया के आंखों में लालच देखा था ,मैं उस साधारण से भोले इंसान को लालची नही बनाना चाहता था लेकिन क्या करू मेरी भी तो मजबूरी थी ….
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12 बज चुके थे और ठाकुर पहले से ही आ चुका था वो बेचैनी से इधर उधर घूम रहा था वो पहले से ही 3-4 पैक दारू के पी चुका था,उसने आते ही सोफे में एक बड़ा सा गिफ्ट के रैपर में पैक कोई समान रखा था ,पता नही वो काजल को क्या देने वाला था,वो घड़ी देखता तो कभी मोबाइल …
ठाकुर को देखते ही मुझे समझ आ गया था की आखिर काजल इसमें इतना इंटरेस्ट क्यो ले रही है ये वही इंस्पेक्टर था जिसने मुझे और काजल को अजीम से मिलवाया था ,तो वो खान का दोस्त भी है और साथ ही काजल के चाहने वालो में से एक भी ,वो अभी जेल का जेलर था और अजीम से संपर्क बनाने में काजल का सबसे बड़ा हथियार …
मैंने हरिया से बंगले की पूरी डिटेल ले ली थी ,मुझे पता था की वो कौन सा कमरा यूज़ करते है ,और कहा से उन्हें देखा जा सकता है ,कैसे उनकी बाते सुनी जा सकती है,मैंने कुछ माइक्रोफोन वँहा लगा दिए थे ताकि मुझे कम से कम आवाज तो सुनाई दी ,देखने का भी जुगाड़ हो गया था..
वक्त ऐसे लग रहा था की बहुत ही धीमी गति से बढ़ रहा है वही मेरी और ठाकुर की दिल की धड़कने जरूर बढ़ी हुई थी …
आखिर वो समय आ ही गया जब काजल आयी ,आज उसने काले रंग की साड़ी पहने हुई थी ,उसे देखकर एक बार मेरा दिल जोरो से धड़का कहा मेरी नाजुक सी कोमल सी काजल और कहा ये काला भैसा ..
उसके मादकता से कोई भी मर्द दीवाना हो जाए तो ये भी कम ही था,
मैं नजर गड़ाए हुए उन दोनो को देखता रहा ..
उसे देखकर ठाकुर का मुह खुला का खुला ही रह गया ,काजल मुस्कुराते हुए आयी और सीधे ठाकुर के गले से लग गई ,
“ओह ठाकुर साहब आपको ज्यादा इंतजार तो नही करना पड़ा “
ठाकुर ने पहले तो अपना थूक गटका …उसे मानो यकीन ही नही हो रहा था की इतनी सुंदर लड़की भी दुनिया में होती है ,
काजल का हर एक अंग उसकी साड़ी से झांक रहा था ,वो दूध सी गोरी और मसलता से भरपूर थी ,मुझे तो कभी कभी अपनी ही किस्मत पर यकीन नही होता था की ऐसी लड़की जिसे पाने को दुनिया दीवानी हुई घूमती है मेरे बिस्तर में रोज ही रहती है ..
उस काली साड़ी में से उसका यौवन और भी निखर कर आ रहा था ,
वो आकर सीधे ठाकुर के गले से लग गई ,उसके तने हुए स्तन ठाकुर के चौड़े सीने में गड़े,वो एक भैस जैसा ही दिख रहा था और काजल के उज्ज्वल जिस्म के आगे तो उसका कालापन और भी ज्यादा खिल रहा था ,
ठाकुर तो मानो स्वर्ग में ही था,और इसे देखकर मेरी झांटे सुलग रही थी ,
मादरचोद साला …मेरे मुह से अनायास ही निकल गया
लेकिन ठाकुर भी उसके सौन्दर्य को देखकर डर रहा था,क्योकि जितना लालच हो उतना खोने का डर भी तो होता है,
वो कोई भी कदम जल्दबाजी में नही बढ़ाना चाहता था ,
“तुम्हारे लिए तो जिंदगी भर इंतजार कर सकता हु “
उसने बड़े ही रोमांटिक अंदाज से कहा ,काजल मुस्कुरा उठी
“सो स्वीट “ठाकुर का चहरा खिल गया हो भी क्यो ना ,साला मादरचोद …
काजल अंदर आयी और सोफे में बैठ गई
“वाओ ठाकुर जी अपने मेरे लिए गिफ्ट लिया है ,वाओ “
वो ऐसी चहकी जैसे कोई बच्ची हो
“हा जान सिर्फ तुम्हारे लिए लेकिन मैं चाहता हु की तुम मेरे लिए इसे पहनो “
काजल ने शरारत भरे नजरो से उसे देखा ,अच्छा तो ये साला ठरकी मेरे जान के लिए कोई कपड़ा लाया है ..
“ठाकुर साहब आप जानते हो ना खान साहब को पता लगेगा तो …”
काजल ने ऐसे कहा जैसे की वो तो राजी है लेकिन खान का डर है
“तुम फिक्र क्यो रही हो वैसे भी तुम उसकी बीवी तो हो नही और मैं भी उसका हर काम इसीलिए करता हु क्योकि तुम कहती हो वरना मैं खान के उल्टे सीधे काम करता क्या “
अच्छा तो वो काम के बदले मेरी पत्नी की लेना चाहता था …साला मादरचोद ..
मैं मन ही मन उसे गालियां तो दे रहा था लेकिन मैं भी उत्तेजित हो रहा था की आखिर उसने ऐसे कौन से कपड़े लाये है जिसे वो काजल को पर्सनली पहना कर देखना चाहता था ..
काजल उसकी बात सुनकर मुकुराई
“वो तो ठिक है लेकिन फिर भी मैं हु तो खान साहब की ही गुलाम ..”
काजल का चहरा मुरझा गया ,अब वो सच में मुसझाया था या वो एक्टिंग कर रही थी वो कहना कठिन था ..
“अरे तुम ऐसा क्यो सोचती हो मैं हु ना ,तुम्हे गुलाम से मालिकिन बना दूंगा “
ठाकुर उसके पास जाकर बैठ चुका था और काजल भी उसके कंधे में अपना सर ठिका चुकी थी ,मैं जले हुए दिल से ये सब देख रहा था की कैसे मेरी बीवी उस अधेड़ से काले और बदसूरत आदमी को अपने हुस्न के जाल में फंसा रही थी ,वो कितना आगे जा सकती है ये सोचकर ही मैं रोमांचित हो जा रहा था ,मैं सांसे रोके हुए देख रहा था …
“हम्म्म्म लेकिन आप तो ठहरे खान साहब के दोस्त आप मेरी मदद क्यो करेंगे आपको तो बस मेरी जवानी ही चाहिये …”
काजल ने अब भी उदास सा मुह ही बनाया था
ठाकुर ने मौका देख कर उसके कंधे पर अपना हाथ फिरना शुरू कर दिया था,साला मादरचोद ..
काजल उसके और भी करीब आ गई और उससे लिपट ही गई
“अरे मेरी जान तुम्हे किसने कह दिया की मैं उसका दोस्त हु ,वो साला मुझसे अभी तक कई गैरकानूनी काम करवाता रहा बदले में मुझे क्या मिला ????ये नॉकरी???
कितनी सेलरी मिलती होगी मुझे और ऊपरी कमाई भी कुछ नही ,जब भी उसके मतलब का काम होता है साला मुझे वही ट्रांसफर करवा देता है ,लेकिन अब मेरे पास तुम हो और तुम ही उसके किस्मत की चाबी हो क्यो ना हम दोनो ही मिलकर उसके गांड में लात मारे और मेरे पावर और तुम्हारी काबिलियत के बदौलत हम दोनो ही उसके सर पर पैर रखकर निकल जाए “
काजल के चहरे में फिर से मुस्कान खिल गई,लेकिन उसने खुद को सम्हाल लिया
“ये आप क्या कह रहे है आप तो उनके दोस्त है ना “
ठाकुर के चहरे मे मुसकान और भी गाढ़ी हो गई
“तुम्हे क्या लगता है तुम जो अजीम के साथ कर रही हो खान को बिना बताए वो मुझे नही मालूम …मैं जानता हु की तुम्हारी नजर खान के जयजात पर है लेकिन तुम उसे अकेले तो नही हड़प सकती तुम्हे मेरी जरूरत तो होगी ही ,”
अब काजल के चहरे में मुस्कान साफ साफ दिखाई देने लगी
“मैं जानती थी की तुम बहुत ही होशियार हो इसीलिये तो मैंने तुम्हे चुना “
दोनो ने ही एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखा ,वो आप से तुम में उतर चुकी थी
“और मैं भी जानता था की तुम बहुत चालाक हो इसलिए तो तुम्हे यंहा बुलाने की हिमाकत कर गया “
दोनो यह खिलखिला कर हंसे
“तो एक जाम हो जाए “
ठाकुर उठकर दो ग्लास में शराब भर लाया था,अब खान का पुराना राजदार काजल का दोस्त बन चुका था और अब काजल को अपनी अदाओं से उसे अपना दीवाना बनाना था ..
वो जाम अपने हाथो में लेकर उसके जाम से टकराई
“ये जाम हमारी दोस्ती के नाम “काजल कुटिलता से मुस्कुराई
“और साथ ही खान की बर्बादी के नाम “
ठाकुर भी मुस्कुरा रहा था ,दोनो ही एक ही सांस में पूरा पैक पी गए और एक दूसरे को देखने लगे ,मेरे दिल में बस एक ही बात आ रही थी …..साला मादरचोद ..
मैं इसके सिवाय और सोच भी क्या सकता था ,
उसने अपना हाथ काजल के कमर पर रख दिया
“अब तो आप हमारी दोस्त बन चुकी है तो ये गिफ्ट स्वीकार करे और साथ ही हमारी शर्त भी “
“क्या शर्त “
“यही की इसे हम अपने हाथो से आपको पहनना चाहते है “
काजल खिलखिलाई और मेरा गांड सुलग गया..
“अच्छा देखे तो जनाब हमारे लिए क्या लाये है “
काजल ने गिफ्ट को खोला
“यू नॉटी …इसे पहनना चाहते है आप ,हम तो आपको बड़ा ही शरीफ समझ रहे थे और आप तो “
काजल गुस्सा तो नही थी लेकिन बड़े ही मादक अंदाज में और मादकता भरे हुए शिकायत के अंदाज में ठाकुर को देख रही थी …
“तुम्हारे जैसी हसीना को देखकर कोई मर्द कब तक शरीफ रहेगा ,और ये तो मेरा सपना था की मैं तुम्हे ये अपने हाथो से पहनाऊँ …”ठाकुर ने बड़े ही शायराना अंदाज में कहा और साथ ही ऐसे कहा जैसे काजल से रिक्वेस्ट कर रहा हो ..
मैंने नजरे गड़ाई की आखिर वो गिफ्ट था क्या ,मुझे काले रंग का ही कुछ दिखाई दिया ,
काजल ने उसे उठाया ,
“इसे पहनने का सपना देख रहे थे जनाब “वो मुस्कुराई लेकिन मेरा सब कुछ जल गया
‘साला मादरचोद ‘मैं फिर से बुदबुदाया
काजल के हाथो में काले रंग की एक झीनी सी पतली पेंटी थी ,शायद एक ब्रा अभी भी गिफ्ट के पैकेट में रखा था ..
दोनो ही एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे लेकिन मेरी हालत बहुत ही गंभीर थी ………..
काजल ………
वो ऐसे विहेब कर रही थी जैसे ठाकुर उसका प्रेमी हो ,
और ठाकुर …
साला उसे देखकर तो उसे मार ही देने का मन कर रहा था ,
काजल और वो दोनो ही सोफे में बैठे हुए हँस रहे थे,
“आपको नही लगता की ये थोड़ी छोटी है “
काजल ने उस पेंटी के बारे में पूछा ,जिसके जवाब में ठाकुर ने उसके साड़ी से झांकते और मानो फाड़ के बाहर आने को बेकरार वक्षो को हल्के से मसल दिया
“आउच कितने बदमाश हो आप “
काजल मचली जरूर लेकिन उसके होठो में मुस्कुराहट बढ़ गई थी ,
“अभी तो बदमाशी और भी ज्यादा करने का मन कर रहा है जानेमन लेकिन तुम …कुछ करने ही नही दे रही “
काजल खिलखिला कर हँस पड़ी ,
“मुझे इसे तुम्हे पहनाना है “
ठाकुर मचल रहा था
“इतनी भी क्या जल्दी है “
काजल अदा से खड़ी हुई और हल्का म्यूजिक लगा कर उसके सामने आ खड़ी हुई,वो म्यूजिक के रिदम में अपने कमर को हल्के हल्के हिला रही थी और उसकी आंखे सीधे ठाकुर की आंखों से मिली हुई थी ,वो अदा से हिल रही थी ,साड़ी से झांकती हुई उसकी नंगी कमर चमक रही थी और उसकी नाभि के गहराई साफ साफ दिखने लगी थी ,
ठाकुर की आंखे उसकी कमर में ही अटक चुकी थी ,वो सांप सी उसे लहरा रही थी ,
ठाकुर की सांसे मानो अटक गई जब काजल उसके और भी पास आ खड़ी हुई ,उसकी कमर अब ठाकुर के सर के पास ही थी ,शायद उसकी सांसे अब काजल के पेट को छू रही होगी,
ठाकुर ने अपना सर थोड़ा आगे कर उसे चूमने की कोशिस की पर काजल खिलखिलाकर उससे दूर हो गई ,
ठाकुर ने बुरा सा मुह बनाया तो काजल फिर से उसके पास पहुच गई और इस बार वो उसके सर पर हाथ रखकर उसे अपनी ओर खिंचा,
ठाकुर का मुह सीधे काजल के नंगे पेट से जा टकराया ,वो पहले तो अपनी नाक उसके नाभी में रगड़ने लगा फिर अपनी जीभ निकाल कर उसे चाटने की कोशिस करने लगा ,
“आह “काजल ने एक मादक सिसकारी ली उसे जोरो से अपने ओर खिंच लिया
अब ठाकुर का मुह पूरा का पूरा ही उसके पेट में धंस गया था काजल की पकड़ इतनी थी की ठाकुर सांसे भी नही ले पा रहा था ना ही वो अपने चहरे को ही हिला पा रहा था …
वो बौखला गया था और काजल की गिरफ्त से छूटने की कोशिस करने लगा ,काजल जोरो से हँसी और उसे दूर कर थोड़ी दूर हो गई…
हल्का हल्का सेक्सोफोन का म्यूजिक सच में बहुत ही मधुर था और साथ ही बहुत ही रोमांटिक भी ,काजल फिर से उसकी आंखों में अपनी आंखे गड़ाकर हिलाने लगी और इस उसने अपने बाल भी खोल लिए जिससे उसके घने और लंबे बाल उसके कंधे और छातियों पर भी बिखर गए थे ,वो अपने बालो से मादक अंदाज में सहलाने लगी साथ ही उसे ऊपर किया ,वो उससे खेलने लगी उसकी कमर अब भी म्यूजिक के साथ साथ ही चल रही थी ,
ठाकुर उसे देखकर ऐसे बावरा गया था मानो किसी गरीब को खजाना ही मिल गया हो ..
वो आंखे फाडे हुए काजल की अदाएं देख रहा था ,जैसे पलक झपकना और सांस लेना भी भूल गया हो ..
काजल फिर से उसके पास आयी और अपने पल्लू हो गिरा दिया ,
उसके ब्लाउज से भी उसके स्तनों की सुडौलता और भराव साफ साफ झलक रहे थे ,ठाकुर के आंखों में हवस जाग गई थी वो उसे ललचाई निगाहों से देख रहा था ,काजल ने उसके करीब आकर फिर से उसके चहरे को पकड़ लिया ,वो भी किसी खिलौने की तरह उसकी आज्ञा का पालन करने लगा था ,काजल उसे अपने सीने के पास लायी लेकिन गड़ाया नही वो उसे ऊपर से ही महसूस कर रही थी ,ठाकुर के आनन्द की सीमा क्या थी ये उसकी आंखे बता रही थी उसकी आंखे बंद हो चुकी थी ,वो खुद से कुछ भी नही कर रहा था सब कुछ काजल ही कर रही थी ,
वो अपनी नाक उसके स्तनों में रगड़ने लगा,काजल की भी आंखे बंद हो गई मानो किसी परम् सुख का अनुभव कर रही हो ,ये कोई एक्टिंग थी या हकीकत इसका अनुमान लगाना भी मेरे लिए कठिन हो गया था,वो मेरे साथ भी ऐसा ही करती थी ,,
वो आंखे बंद कर उसके नाक की रगड़ को महसूस कर रही थी ,और आनन्द में सिसकियां ले रही थी …
वो थोड़ा और जोर लगाती है इस बार वो झुककर अपने वक्षो की घाटी में उसके सर को घुसा देती है ,इसे देखकर तो मेरा भी लिंग अकड़ गया था ,क्योकि काजल की गोरी गोरी और बड़ी सी उस खाई में ठाकुर का काजला सा मुह बड़े ही अजीब तरीके से मुझे भी उत्तेजित कर रहा था ,
वो अपनी जीभ निकाल कर उसे चाटना चाहता था लेकिन मैं गलत था वो तो उसे खाने पर उतारू हो चुका था ,ठाकुर के दांत काजल के नंगे स्थल पर जा रहे थे वो ब्लाउज को भीगा रहा था और साथ ही साथ दांतो से हल्के हल्के से काट भी रहा था,उसकी जीभ भी आकर अपना थूक काजल के वक्षो में छोड़ रही थी…
काजल मचल रही थी और उसे और भी जोरो से अपने ऊपर दबा रही थी वही ठाकुर अपनी आंखे बंद किये हुए उस जन्नत का मजा ले रहा था जिसका हक सिर्फ मुझे मिलना था ,
मैं जलन और गुस्से से तो भर रहा था लेकिन साथ ही साथ एक उत्तेजना भी मुझमें घुलती जा रही थी ,
ठाकुर खड़े होने की कोशिस करता है लेकिन काजल उसे खड़ा होने ही नही देती और हंसकर फिर से दूर चली जाती है,
उसकी आंखे ठाकुर की आंखों से मिली दोनो के ही होठो में मुस्कुराहट थी ,एक अजीब सी मुस्कुराहट,ठाकुर ने आंखों ही आंखों में काजल से पास आने का इशारा किया लेकिन काजल ने आंखों ही आंखों में ठाकुर को ना का इशारा किया ,ठाकुर हल्के से मुस्कुराया और खड़ा हो गया ,मैंने देखा की उसके पेंट से ही उसका तनाव साफ साफ दिख रहा था ,उसने अपनी शर्ट उतार फेंकी और अपनी बनियान भी ,वो थोड़ा पेटू जरूर था लेकिन लगता था की उसने अपनी जवानी में बहुत कसरत भी कि हो क्योकि उसके मसल्स बहुत ही बड़े दिख रहे थे ,वो किसी कुश्ती के पहलवान की तरह लग था ,उसका काल बदन भी कमरे के रोशनी में चमकने लगा ,
काजल ने उसके शरीर को ललचाई निगाहों से निहारा और उसके आंखों को मादकता से देखने लगी,ठाकुर भी अपने जिस्म की नुमाइश करने लगा और अपने पेंट की ओर इशारा किया जिसमे उसका लिंग अकड़ रहा था ,काजल ने मुह थोड़ा खुला ,पता नही वो सच में खुला था या उसने खुद ही इसे खोला था ,लेकिन वो ऐसा करने से ठाकुर को और भी मोहित कर गई वो स्त्रियों वाली सब अदाओं को जानती थी जिसे एक मर्द हमेशा ही पसंद करता है ,,,
काजल की इस हरकत से ठाकुर थोड़ा हंसा और उसके पास जाने लगा काजल उससे दूर जाने लगी वो उसे पकड़ने को झपटा ,काजल हट गई वो थोड़ा लड़खड़ाया और कमीनी सी मुस्कान के साथ उसकी ओर बढ़ने लगा ,थोड़ा रुक कर उसने अपनी पेंट भी निकाल कर हवा में उछाल दी ,उसके अंडरवियर से उसका लिंग सच में बहुत ही बड़ा और खतरनाक लग रहा था ,उसका काला बदन चमक उठा था,वो बहुत ही उत्तेजित था और काजल को कहा जाने वाली निगाहों से देख रहा था ,काजल कभी उसके बदन को देखती तो कभी उसके अकड़े हुए लिंग को ,काजल के होठो में अब भी मादक मुस्कान थी वो उसे घूर रही थी और ठाकुर भी तड़फता हुआ उसकी ओर बढ़ रहा था ,
जैसे जैसे ठाकुर उसकी ओर बढ़ता वो पीछे होती जाती ..
वो फिर से झपटा इस बार उसका हाथ ठाकुर के पकड़ में आ गया था
“आउच छोड़िए ना “
काजल ने मचलते हुए कहा जिससे ठाकुर हँस पड़ा और उसे अपनी ओर खिंच कर अपने से मिला लिया
ठाकुर ने उसे बहुत ही जोरो से जकड़ रखा था ऐसे की कोई हवा भी दोनो के बीच से पास ना हो पाए ,
काजल के वक्ष उसकी बालो से भरी चौड़ी छातियों में धंस गई थी वही ठाकुर का लिंग अब काजल के जांघो के बीच रगड़ रहा था ,काजल इससे और भी मचल रही थी लेकिन ठाकुर उसे कोई भी मौका नही देने वाला था ,उसने अपने होठो को काजल के गले और कंधों पर चलाना शुरू कर दिया
“आह नही ना आह “
वो छूटने का प्रयास करने लगी थी लेकिन मैं भी जानता था की वो छूटना नही चाहती थी वो और भी उसमें गड़ी जा रही थी ,और भी मचल रही थी
“आह नही ना… आह रुको ना ..थोड़ा सब्र तो करो आह ओह “
काजल की इन आवाजो से ठाकुर के साथ साथ मैं भी पागल हो रहा था ,वो और भी जोरो से उसे चूमता और अपने कमर को उसके कमर से टकराता ,भला हो उस साड़ी का जिसे मेरी बीवी ने पहन रखा था वरना उसका लिंग अभी काजल के अंदर ही होता वो 90 डिग्री में उठा हुआ था और सीधे ही काजल के जांघो में रगड़ रहा था,
काजल को भी इसका आभास जरूर हो रहा होगा ,वो भी गर्म होने लगी थी उसका विरोध कम हो रहा था और वो बस आहे ले रही थी वो अब भी छोड़िए ना कह रही थी लेकिन बहुत ही कमजोर स्वर में,वो उत्तेजित थी और शायद गीली भी ……..
ठाकुर ने उसकी कमर को पकड़ कर और भी जोरो से अपनी ओर खिंच लिया साथ ही अपनी कमर को भी उसके कमर से टकराया
“आह “एक जोर की आवाज काजल के मुह से निकली
दोनो की ही आंखे मिली और काजल ने उसे हल्के से मुक्के से मारा ,ठाकुर ने काजल को किसी गुड़िये की तरह ही उठा लिया और उसे सीधे सोफे में जा फेका और उसके ऊपर छा गया ,उसके भारी शरीर ने मेरी कोमल सी जान के नाजुक शरीर को ऊपर पूरी तरह से ढंक लिया था,वो उसे मसल रहा था और अब उसका हाथ काजल के ब्लाउज तक पहुच चुका था वो से मसल रहा था और उसे उतारने की कोशिस भी कर रहा था ,उसने उसे काजल के कंधे से नीचे गिरा ही दिया लेकिन वो अब भी काजल के बांहो में फंसे थे , वो उसके नंगे कंधे को चूमने लगा और उसे अपनी लार से भिगाने लगा,काजल मादक सिसकियां ले रही थी ,
वो काजल की घाटी तक अपनी जीभ ले जा रहा था लेकिन अब भी ब्रा की वजह से वो पूरी तरह से दिखाई नही दे रही थी ,लेकिन उसकी ब्रा जरूर दिखने लगी थी ,वो जितना हो सके उसे चूम रहा था और उसने अपने दांत भी काजल के कंधे पर गड़ा दिए ,
इधर मैं उत्तेजना के शिखर पर पहुच गया था मैंने कब अपना लिंग अपने हाथो में ले लिया था मुझे भी नही पता लगा मैं जोरो से हिलाने लगा और जैसे ही ठाकुर ने अपने दांत गड़ाए मैं भी झाड़ा और दीवार में ही अपने को खाली कर दिया ,मेरी सांसे भी उखड़ी हुई थी ,क्या हुआ और क्या हो रहा है इसकी समझ मुझे अभी आई थी ,मैं पागल हो चुका था मैं क्या कर रहा था ,
ठाकुर ने काजल की साड़ी खोलने के लिए हाथ बढ़ाया लेकिन काजल ने हाथ पकड़ लिया
“यंहा नही बेडरूम में चलिए “
ठाकुर ने उसे किसी बच्चे की तरह उठाया साथ ही वो ब्रा पेंटी भी उठा ली जिसे वो काजल के लिए लाया था ,वो बेडरूम की ओर जाने लगा ,मैं वही बैठ चुका था मैं दहाड़ कर रोना चाह रहा था ,मुझे लग रहा था की जो मैंने किया था वो गलत है ,मैं वँहा एक पल भी नही रुकना चाहता था मैं वँहा से भागा,………
ये क्या हो रहा है ,इतना तिरिस्कार ,इतनी जिल्लत ,इतनी नाकामी….
इतना बेसहारा तो मैंने अपने को कभी महसूस ही नही किया था,ये मेरे अंदर की निर्लज्जता थी या नपुंसकता ..
मैं क्यो कुछ नही कर पा रहा था ,मैं अपने को असहाय महसूस कर रहा था ,मैं अंदर से टूटा हुआ महसूस कर रहा था ,
मैं डरा हुआ था,कुछ घबराया हुआ,..
मुझे किसी ने कुछ भी तो नही किया था,किसी ने कुछ भी नही किया था लेकिन ये क्यो हो रहा था,
क्यो मेरे दिमाग में काजल और ठाकुर की छबि बार बार आ रही थी,क्यो मैं इतना बेचैन था की वो दोनो आखिर कर क्या रहे होंगे ,मैं अपने को रोक ही नही पा रहा था,मैं फिर से उसी दर्द को बार बार महसूस कर रहा था,मैं सोच कर ही सिहर उठता था की मेरी ही मौजूदगी में कोई मेरी पत्नी के साथ …….
मुझे रोना आ रहा था ,………
आखिर क्यो मैं इसे चुपचाप देखता रहा मैं वँहा से भाग क्यो नही गया ,
आखिर मुझे हुआ क्या था की मेरा लिंग ये सब देखकर अकड़ रहा था,आखिर मैं ऐसा कैसे हो गया था ,
जिसकी रक्षा की शपथ ली थी उसे दूसरे के साथ देखकर ??????
लेकिन उसे क्या सच में रक्षा की जरूरत थी ,मेरे खयाल से नही ,वो खुद ही इसे अपनायी थी ,काजल अगर यंहा थी तो वो अपने लिए डिसीजन के कारण थी ,ये उसका खुद का ही तो फैसला था…….
मैं गार्डन में बैठा हुआ रो रहा था की मेरे मोबाइल की घंटी बजी…
मैं चौक कर देखा तो वो काजल थी ,और भी ज्यादा चौक गया …….
एक पूरा रिंग होने पर भी मैं उसे नही उठा पाया ,थोड़ी ही देर में अगला रिंग भी बजने लगा
“हैल्लो “मैं थका हुआ सा बोल पाया
“तुम यंहा क्या कर रहे हो “वो बौखलाई हुई आवाज में बोली
मैं हड़बड़ा गया था मैं चारो ओर देखने लगा ,मैं उस खिड़की के तरफ देखा जिस कमरे में वो दोनो गए थे ,कांच की खिड़की में लगे हुए पर्दे से झांकती हुई काजल मुझे दिखी ,मेरे पास कहने को कोई शब्द नही था ,लेकिन शायद वो मेरी कंडीसन देख कर समझ चुकी थी आखिर मैंने क्या देख लिया है …वो अभी भी साड़ी और ब्लाउज पहने हुई थी लेकिन अब भी उसका दुप्पटा उसके कंधे में नही था…
“तुम तुम पागल हो क्या,यहां कैसे आ गए और ये क्या कर रहे हो कोई देख लेगा तो ..”
वो घबराई हुई थी
“और ऐसा हाल क्यो बना लिया है “
कहते कहते ही उसका गला भर गया ,उसकी आंखों से पानी तो नही झर रहा था लेकिन उसकी आवाज से जरूर पता चल रहा था की मेरी हालत देखकर उसे दुख ज़रूर हुआ होगा..
“अब कुछ बोलो भी “
“ठाकुर कहा है “
मेरे सवाल पर वो थोड़ी देर तक चुप ही थी,
“वो अभी बाथरूम में है उसके निकलने से पहले तुम यंहा से चले जाओ प्लीज् “
मैं उसे यू ही देखता रहा जैसे कोई खोया हुआ खजाना मेरे सामने हो..
“तुमने ही तो कहा था ना की देखो और इन्जॉय करो तो इन्जॉय करने आ गया था “
मेरे बातो में वो व्यंग था जिसे काजल अच्छे से समझती थी
“प्लीज् देव मैं जानती हु की तुम ये सब सह नही पाओगे ,देखो तुम्हारी हालत क्या हो गई है,”
उसके आवाज के दर्द को मैं महसूस कर पा रहा था ,मैं एक गहरी सांस लिया
“मुझे कुछ नही होगा तुम वो करो जो तुम यंहा करने आई हो “
पीछे से ठाकुर की आवाज आयी और काजल ने फोन काट दिया ,लेकिन पलटने से पहले ही उसने आंखों ही आंखों से मुझे समझया की मैं वँहा से चला जाऊ…
वो पलटी साथ ही उसने पर्दा भी खिंच लिया ,मेरे हेडफोन अब भी मेरे कानो में थे मैं उनकी बाते भी सुन सकता था..
“डार्लिंग अब और मत तड़फओ आओ इधर “
इस बार काजल ने कुछ नही कहा था लेकिन धम्म की आवाज से इतना तो मुझे समझ आ गया की वो बिस्तर में बैठ या लेट चुकी थी ,
“ओह मेरी जान क्या हुस्न पाया है तुमने मन करता है की कच्चा चबा जाऊ “
ठाकुर की ललचाई सी आवाज आयी ,लेकिन फिर भी काजल ने कुछ भी नही कहा
“क्या हुआ तुम्हे अभी तो अच्छी थी ???”
“कुछ अजीब सा लग रहा है ,”
“तबियत तो ठीक है “
“ह्म्म्म ,नही रुको…आज नही कभी और करते है “
“मैं सह नही पाऊंगा “
“जब जिंदगी भर के लिए कोई चीज मिल रही हो तो थोड़ा इंतजार कर ही लेना चाहिए “
पहली बार काजल की हँसी मुझे सुनाई दी लेकिन वो हँसी भी बड़ी फीकी सी लग रही थी
“आखिर हुआ क्या है ,??”
“कुछ नही जान बस आज नही ,मैं तुमसे वादा करती हु की ये पेंटी और ब्रा तुम्हारे ही हाथो से पहनूँगी लेकिन आज नही ,”
पता नही लेकिन ठाकुर जरूर झल्लाया होगा
“ठीक है जाओ “
‘थैक्स मेरी जान “काजल ने शायद उसके गालो को चुम्मन दिया था या उसके होठो को ??
लेकिन थोड़े ही देर में मेरे पास उसका काल आ गया
“मुझे घर में मिलो अभी “
मैं चुपचाप ही वँहा से निकलकर घर की ओर चल पड़ा …..
सोफे में बैठा हुआ मैं अपनी ही सोच में पड़ा हुआ था ,की दरवाजा खुला और काजल अंदर आयी वो बहुत ही गुस्से में लग रही थी ,
मेरे हाथो में स्कोच का एक पेग था,
“तुम्हे जरूरत क्या थी देव वँहा जाने की “
मैं खामोश रहा और एक सिप लगाई
“बोलो अब चुप क्यों हो ,जब सह नही सकते तो दूर ही क्यो नही रहते,वँहा बैठे रो रहे थे और यंहा बैठे हुए दारू पी रहे हो ..अब बोलो भी “
ऐसा लगा जैसे वो अब तब रोने ही वाली हो, मैं खड़ा हुआ और उसे अपने सीने से लगा लिया ..
“मैं वँहा तुम्हे देखकर उत्तेजित हो गया था काजल मुझे माफ कर दो तम्हारे और ठाकुर के फोरप्ले का मैं आनन्द उठाने लगा था,मैं इसी ग्लानि से भर गया…”
उसने मुझे खुद से दूर किया और मेरी आंखे में झांका वो अब मुस्कुरा रही थी
“तुम सच में उत्तेजित हो गए थे”
“हा”मैंने मासूमियत में सर हिलाया
वो जोरो से मेरे गले से लग गई
“वाओ यानी तुम जब तक नही झड़े तब तक तुम्हे सब कुछ अच्छा लगा “
मैं फिर से सर हिलाया
वो बहुत ही खुस हो गई
“यानी तुम तैयार हो बस इतना करना की अब की बार झड़ना नही “
मैं आश्चर्य से उसकी ओर देखने लगा
“मैं आज ही ठाकुर को फिर से बुलाती हु ,तुम तो जानते हो होंगे की उसने मुझे एक गिफ्ट दिया था “
मैं बिल्कुल ही शॉक हो गया
“तुम पागल हो गई हो नही नही मैं ये नही कर सकता “
उसने प्यार से मेरे गालो को किस किया
“मेरी जान तुम तो ये पहले भी कर चुके हो “
हम दोनो ही थोड़ी देर तक चुप थे और एक दूसरे की आंखों में देखते रहे
“मैं जानती हु ये कितना डरावना हो सकता है लेकिन मुझे उम्मीद है की तुम इसे इन्जॉय करोगे ,सोचो आज तो तुम्हे पता नही था की मैं क्या करने वाली हु .लेकिन अगर ये तुम्हारी इजाजत से हो तो बात ही कुछ और होगी..”
काजल की बातो से मेरे दिल से खून निकल गया था
मैं कैसे अपनी बीवी को किसी दूसरे का बिस्तर गर्म करने की इजाजत दे सकता था
“ये मैं कैसे कर सकता हु “मैं भड़क गया
“तुम ही ये कर सकते हो देव “
“आखिर कैसे “
मैं चिंतित था
“बस तुम कह दो की हमारे बीच का प्यार इससे कम नही होगा मैं दुनिया के साथ सो सकती हु अगर तुम कहो “
मैं बौखला गया था
“तुम तो वैसे भी सो रही हो और उसके मजे भी ले रही हो ,क्या मैंने ये नही देखा था की तुम कैसे सिहर रही थी क्या तुम्हारे मजे से लिए गए हुए सारे सिसकियां मैने नही सुनी है ,मैं जानता हु की तुम मजे ले रही थी और मैं ये भी समझने लगा हु की तुम अपने मजे के लिए मुझे cuckold की ओर धकेल रही हो …”
मैं गुस्से में तमतमा गया था
“मतलब है की तुम्हे ये नही लगता की मैं तुमसे प्यार करती हु “
वो भी भड़क गई थी
“नही नही लगता की तुम मुझसे प्यार करती हो ,तुम तो अपने बदले और जिस्म की आग में जल रही हो और इसमें तुमने ना सिर्फ मुझे घसीटा है बल्कि मेरी बहनों को भी घसीट लिया ,क्या मुझे ये नही पता की निशा की इस हालत की जिम्मेदार भी तुम ही हो “
मेरे मुख से निकले कड़वे शब्द उसके सीने को छलनी करने लगे थे
“तूम अपनी बहनों के बारे में सोच रहे हो देव ,तुम जो की खुद ही अपनी बहन के साथ सोता है …”
मैंने एक जोर का तमाचा उसके गाल में लगा दिया और एक गहरा सन्नाटा कमरे में छा गया था
मेरी आंखों से आंसू की बूंदे निकल गई ये पहली बार था जब मैंने काजल को मारा था ,उसका गोरा चहरा लाल हो चुका था
वो मुझे भरे हुए नयनो से देख रही थी …
“क्या ये सच नही देव की तुम मोहनी और शाबनम के साथ भी सो चुके हो”
मैं सन्न रह गया ,
“और ये भी क्या सच नही की अगर तुम्हे मौका मिले तो तुम दूसरी लड़कियों के साथ भी सो सकते हो …”
हा जो काजल ने कहा था वो सच में बिल्कुल ही सच था
“देव जब तुम इसमें मजा ले सकते हो तो मैं क्यो नही बस इतनी सी बात तुम मुझे बता दो “
मैं फिर से चुप हो गया
“तुम पैसे और पावर के लिए ये सब कर रही हो “
मैं धीरे ही सही लेकिन बोल पाया
“हा हा हा “वो जोरो से हँसी
“अगर मजे के साथ साथ ये भी मिलता है तो क्या गलत है “
तार्किक रूप से उसकी बात भी सही थी
“लेकिन तुम मेरी पत्नी हो और मैंने जो भी किया वो तुम्हारे बाद किया जब मुझे पता चला की तुम ऐसा करती हो ,शुरुवात तुमने की थी,और तुमने मुझसे झूठ बोला “
“कौन सा झूट देव “
“यही की …….यही की …”
मैं बुरी तरह से कांप गया मुझे कोई झूट याद ही नही आया था
“लेकिन ये धोखा तो था ,तुमने झूट नही कहा लेकिन तुमने मुझे कुछ बतलाया भी तो नही था …….”
वो मुझे देख कर हँस रही थी मानो मुझे चिढ़ा रही हो
“देव मेरी जान तुम सच में भोले हो “
मैं सच में पगला गया था
“मैंने तुम्हे धोखे में रखा था लेकिन अब तो मैं तुम्हे सब बता रही हु …अगर वफ़ा है तो इतना करना की मेरा साथ दो “
“किस बात का साथ चुदवाने का “
वो फिर से खिलखिला उठी
“हा चुदवाने का ,दूसरे से चुदवाने का तुम्हारी परमिशन के साथ “
उसकी आवाज में एक गुस्सा साफ झलक रहा था
उसने अपना बेग उठा लिया और वो बाहर जाने लगी
“मैं वही जा रही हु अपना गिफ्ट ठाकुर से पहनने …तुम्हे अगर देखना है तो आ जाना ,और हा एक चीज और मुझे बहुत मजा आने वाला है ठाकुर का लंड बहुत ही बड़ा है तुमसे भी बड़ा…”
वो गुस्से में जाते जाते दरवाजे को जोर से बंद कर गई और मैं बस यही सोचता रहा की अब क्या करू ………..
कभी जिंदगी इतनी शिद्दत से लेती है की हमे समझ ही नही आता की हमारी ली जा रही है …
यही मेरे साथ भी हों रहा था जिंदगी मेरी शिद्दत से ले रही थी और मैं बस इसी सोच में पड़ा हुआ था की मैं क्या करू ..
मैं मोबाइल उठाकर हरिया को काल किया ..
“जी सर बोलिये “
“हरिया वो जो रांड तेरे फॉर्महाउस में बार बार आती है वो मेरी बीवी है ,”
मैं नशे में था और मैं बोल गया
वो चुप था बहुत देर तक बस चुप था
“हैल्लो “
“हा सर “
“तूने सुना ना मैंने क्या कहा “
“सुन लिया सर और वो अभी यंहा आयी हुई आई किसी का इंतजार कर रही है “
मैं जोरो से हँस पड़ा मुझमें इतनी ताकत भी नही बची थी की मैं गाड़ी चला सकू मैं बुरी बोतल ही पी गया था ,
“वो साला ठाकुर आने वाला होगा ,”
:इंस्पेक्टर ठाकुर ??”
“हा वही “
“जी सर अपने सही कहा उन्होंने ही फिर से मुझे फोन कर कहा था की वो आने वाले है और शराब की व्यवस्था उनके कमरे में कर दी जाए “
“तो तुमने कर दी क्या “
मैं टुन्न था
“हा सर कर दी एक बोलत शेम्पियन की और और बोतल स्कोच की रखवा दी है मेडम अभी हाल में ही उनका वेट कर रही है “
“मेडम यानी रंडी ..है ना “
मैं फिर से जोरो से हँस पड़ा लेकिन आगे से कोई भी रिप्लाय नही आया
“क्या हुआ तू चुप क्यो है “
“सर क्यो दर्द झेल रहे हो तलाक दो और काम खत्म करो अगर आप ये सब जानते हो तो आप उनके साथ है ही क्यो ??”
उसका प्रश्न मेरे दिल में घुस गया था
“क्योकि मैं उससे प्यार करता हु “
“ये कैसा प्यार है ??”
वो भी बड़ा बेचैन हो गया था
“छोड़ यार …तू बहुत अच्छा आदमी है तुझे मैं उस फार्महाउस को गिफ्ट में दूंगा ये मेरा वादा है तुझसे …”
मैं इतना ही बोल कर फोन रख दिया,मैं सामने देखा तो दंग ही रह गया
सामने मेरी बहन पूर्वी खड़ी हुई मेरी बात को सुन रही थी ,मैं इतने नशे में था की मुझे सब कुछ धंधला दिख रहा था
वो स्तब्ध खड़ी हुई थी ,उसे देखकर मुझे बहुत ही प्यार आया
“मेरी जान आ जा आ मेरे पास बैठ “
वो मेरे पास आकर बैठ गई
“कब आयी तू “
मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया
“अभी जब आप बात कर रहे थे “
वो रो रही थी मुझे अभी पता चला था
“क्या हुआ तुझे रो क्यो रही है “
“आप इतना क्यो पी लिए हो भइया और भाभी को क्या हुआ ,वो कहा गई है और क्या ऐसा हो गया की आप उनके बारे में ऐसा बोल रहे हो “
शायद वो सब कुछ सुन चुकी थी
मैं पूरे नशे में ही था और मैं उससे झूठ भी नही बोल पाया
“वो अपने यार से चुदवाने गई है “
पूर्वी का क्या रिएक्शन था मुझे नही पता क्योकि मुझे सच में कुछ भी सही नही दिख रहा था
लेकिन उसने अपना हाथ मेरे गालो पर रख दिया
“आई लव यु भइया “
मैंने उसे देखा वो थोड़ी धुंधली सी मुझे दिखाई दी ,असल में 2-3 सूरत मेरे सामने घूम रही थी मैंने उसे पकड़ा और उसके होठो में अपने होठो को मिला दिया थोड़ी देर किस करने के बाद
“आई लव यु मेरी जान “
उसके रोने की आवाज मुझे सुनाई दे रही थी
“भइया अपने बहुत ही पी ली है प्लीज चलिए सो जाइये “
“नही मैं बिल्कुल भी नही पिया हु ,अभी तो मुझे अपनी बीबी को चुदवाते हुए देखना है ,मैं फार्महाउस जाऊंगा और वँहा जब मेरी बीवी की चुद ठाकुर मार रहा होगा तो मैं उसे देखकर अपना हिलाऊंगा …हा हा हा मैं एक वो क्या कहती है काजल cuckold हा मैं तो एक cuckold हु मेरा जन्म भी तो इसी के लिए ही हुआ है मेरी बहन की मैं अपनी पत्नी को जिसे मैं शादी कर लाया था 7 वचन कर के लाया था ,उसे मैं दूसरे के बिस्तर में देखने के लिए ही तो जन्मा हु…”
मैं फुट फुट कर रोने लगा पूर्वी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया था …
वो भी रो रही थी और मैं भी …
एक लड़की और उसकी एक जिद ने हम दोनो को रोने में मजबूर कर दिया था ..
मैं जानता था की ये मेरी बहन है वो बहन जिसे मैं दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करता हु ,वो मेरी बच्ची थी मेरी छोटी बहन थी लेकिन मैं उससे इस तरह की बाते कर रहा था
अब मुझे पता चला था की मैं दुनिया का सबसे किश्मत वाला आदमी हु लोगो के पास गर्लफ्रेंड्स होती है बीबी होती है ,मेरे पास मेरी बहने है जिनसे मैं दुनिया की सब बाते कर सकता हु ..
मुझे आज पूर्वी के सीने से लगकर लगा की मेरी दुनिया कितनी हसीन है मेरे पास प्यार करने वालो के कमी नही है ,
काजल ने अगर वो फैसला किया जिसके कारण मैं दारू के नशे में डूब गया तो वो भी मेरे ही कारण किया था वो तो बेचारी सब छोड़कर मेरे पास आ रही थी मैंने ही उसे उकसाया उससे तमीज से पेश नही आया था ,
गलत सही का फैसला करने वाला है कौन ???
मैं भी तो गलत था या सही था ,वो भी तो गलत थी या सही थी …
और ये मेरी बहने है मेरी जान है ,जो मेरी हर गलतियों को सहकर भी मुझसे प्यार करती है ..
मैंने पूर्वी के माथे को चूमा ..
और उठ कर खड़ा हुआ ..
“मुझे फॉर्महाउस जाना है “
पूर्वी जरूर चौकी होगी
“भइया आप पागल हो गए हो क्या देखो अपनी हालत ऐसे में गाड़ी कैसे चलाओगे..”
“तू चलाएगी मुझे वँहा ले जा मैं काजल दो देखना चाहता हु ..”
पूर्वी जोरो से चीखी
“भइया आप पागल हो गए हो क्या ,नही आप मेरे पास रहोगे “
वो रोने लगी थी जिसकी आवाज मुझ तक पहुच रही थी
“भइया प्लीज् “
“प्लीज् मेरी जान समझ मेरी बात को मैं दुखी नही हु ,मुझे समझ में आ गया है की प्यार क्या होता है ,प्यार जिस्म को नही देखता वो देखता तो बस मन को और सच मान तेरी भाभी दूसरे के साथ भी बिस्तर में उतनी ही गर्म है जितनी मेरे साथ होती है …”
मैं उठ कर कर की चाबी निकाल कर बाहर जाने लगा ,
“भइया आप क्या बोल रहे हो वो आपको पता नही है आप सच में पिये हुए हो “
“मैं क्या बोल रहा हु मुझे पता है और मैं किससे बोल रहा हु ये भी मुझे पता है …,तू मेरी जान है दुनिया में अगर मैं सबसे ज्यादा प्यार किसी से करता हु तो वो तू ही है …”
मैंने पूर्वी के गालो में एक किस किया
“और मैं चाहता हु की तू कर ड्राइव करते हुए वँहा ले जा जंहा काजल ठाकुर के साथ है ,तुझे अजीब जरूर लगेगा की तेरा भइया पागल हो गया है लेकिन सच में जान मैं पागल नही हूं मैं तो बस दीवाना हो गया हु तेरा ,निशा का, काजल का,शाबनम का और थोड़ा थोड़ा रश्मि और मोहनी का भी …वो जो भी करे लेकिन मुझे तो वो सब ही अच्छा लगता है …”
दारू मेरे दिल की बात को जुबान पर ला रही थी लेकिन पहली बार मैंने अपनी बहन के होठो में एक मुस्कुराहट देखी थी वो थोड़ी सी हँसी
“आप आज सच में पागल हो गए हो ,बस चुपचाप बैठना चलो मैं आपके साथ हु देखते है आज आप क्या तूफानी करते हो “
वो मेरे गले से लगकर मुझसे चाबी लेकर मेरे सामने चलने लगी और मैं उसके पीछे लग गया …..
पूर्वी के साथ बैठा हुआ मैं अपने में मगन होकर फॉर्महाउस की तरफ चल दिए थे ,गाड़ी अपनी रफ्तार से चल रही थी..
“पूर्वी वो तेरे भाभी की पेंटी खोलकर नई पेंटी पहनाने वाला है …मुझे क्या करना चाहिए …”
मेरे सवाल से नही पूर्वी मेरे बात करने के तरीके से चौकी होगी,इतना खुलकर मैंने उससे कभी बात नही की थी
“मार दो उसे जो भाभी पर हाथ डाले”
पूर्वी ने दृढ़ता से कहा
“अच्छा मैं भी तो यही चाहता हु लेकिन….लेकिन तेरी भाभी अपने मर्जी से वँहा गई है उसका क्या करू “
वो भी सोच में पड़ गई थी
“दोनो को ही मार डालो ..”
उसने एक सपाट सा उत्तर दिया..मेरी बहन ..
मैं उसे किस करने के लिए उसके पास गया और उसके गालो में किस कर लिया
“भइया सीधे बैठो ना क्या कर रहे हो “
वो भी हड़बड़ाई
“लेकिन मुझे भी मजा आ रहा था जब वो तेरी भाभी के साथ ये कर रहा था तब क्या करू “
वो सोच में पड़ गई बहुत देर तक वो कुछ भी नही बोल सकी
“बोल ना क्या करू “
मैं अभी भी नशे में था और हिल रहा था
“जो आपकी मर्जी वो करो मुझे मत पूछो “
वो गुस्से में बोली और मैं हँस पड़ा
क्या जिंदगी हो गई है जिन्हें मुझे सम्हालना था वो मुझे सम्हाल रहे थे
फॉर्महाउस आते ही मैं एक लोहे का रॉड अपने कार से निकाल कर रख लिया और बाहर मुझे हरिया मिल गया ..
“ठाकुर आया क्या “
“सर आप बहुत नशे में है प्लीज् अंदर मत जाओ कुछ गलत हो गया तो “
“बे तू चिंता क्यो कर रहा है मैं सब सम्हाल लूंगा कुछ नही होगा ,ठाकुर आया की नही “
“अभी आया है “
“तो हट सामने से “मैं लड़खड़ाता हुआ गार्डन में पहुचा मेरे साथ ही साथ पूर्वी भी चल रही थी मैं रॉड को जमीन में घसीट रहा था जैसे मैं कोई साउथ का हीरो हु…लेकिन मैं क्या करने वाला था ये तो मुझे भी नही पता था ..
मेरी बहन ने कह रखा था की दोनो को मार दो लेकिन मैं अभी भी सीरियस नही था क्योकि मुझे खुद भी होशं नही था की मैंने क्या सुना था और मैं क्या करने जा रहा था …
मैं वँहा पहुचा जंहा मैंने जगह बना रखी थी अंदर देखने के लिए
,पूर्वी मेरे बाजू में खड़ी थी ..असल में मैं खड़ा भी नही हो पा रहा था मैं अब भी लड़खड़ा रहा था
मैं अंदर झांका और खिलखिला उठा
“देख तेरी भाभी क्या कर रही है “
पूर्वी अंदर झांकने लगी
अंदर काजल बिस्तर में लेटी हुई थी और ठाकुर उसके साड़ी से खेल रहा था
“भइया मार दो इन दोनो को “
पूर्वी कांप रही थी ,मैं उसे देखकर उसे फिर से उसके गालो में किस किया
“रुक ना अभी तो शो शुरू हुआ है देखने तो दे की आगे क्या क्या होता है “
पूर्वी शांत हो गई मैं फिर से देखने लगा
वो काजल के कपड़े खोल रहा था मुझे याद आया की मेरे पास हेडफोन है मैंने उसे अंदर लगे है डिवाइस से कनेक्ट किया और एक पूर्वी के कानो में भी डाल दिया ..
डर क्या होता है जैसे मुझे पता ही नही हो मैं बिल्कुल ही निडर हो गया था ये शायद मेरे द्वारा पी गई स्कोच की बोतल का कमाल था …
“आह जल्दी करो ना “
काजल मचल रही थी
“ये साला तेरी साड़ी खुल क्यो नही रही है “
ठाकुर बहुत ही जल्द बाजी में था आज ही उसने थोड़ी देरी की थी और काजल का पूरा मूड ही बदल गया था अब वो देरी नही करना चाहता था
जैसे तैसे वो साड़ी को खोल ही गया
काजल अभी मेरे सामने आधी नंगी लेटी हुई थी उसके बदन में साड़ी नही थी वो ब्लाउज और पेटीकोट में अंदर लेटी हुई थी और ठाकुर पूरा नंगा खड़ा हुआ था उसका बड़ा सा लिंग जो सच में बहुत बड़ा लग रहा था वो पूरे लंबाई में खड़ा हुआ था ..
अचानक ही वो उसके पेटीकोट से खेलने लगा और उसके नाड़े को निकालने की जद्दोजहत करने लगा..
काजल ने अपना सर घुमाया और हमारी ओर देखा जैसे हमे देख रही हो ,मैंने यही सोच कर ये खिड़की चूस की थी क्योकि इसमें जो कांच लगा था उससे दिन में अंदर आराम से देखा जा सकता था लेकिन अंदर से बाहर नही देखा जा सकता था क्योकि अंदर प्रकाश ज्यादा और बाहर प्रकाश कम होता था ,लेकिन काजल हमारी ओर ऐसे देख रही थी जैसे उसे पता था की मैं उसे इस खिड़की से देख रहा हु,वो मुस्कुराई …
ठाकुर अभी भी काजल के पेटीकोट के नाड़े में बिजी था लेकिन काजल ने अपना मोबाइल अपने हाथो में ले लिया और कुछ टाइप करने लगी जो मेरे पास मेसेज बनकर आया
“देखने का मजा ही कुछ और है अब देखो और इन्जॉय करो “
ये मेसेज पूर्वी ने मुझे पड़कर सुनाया था क्योकि मुझे साफ दिख ही नही रहा था
काजल हमारी ओर देखकर फिर से मुस्कुराई
“भइया ये हो क्या रहा है ??भाभी को पता है की आप उन्हें देख रहे है …”
वो बेचारी मेरी छोटी सी गुड़िया बुरी तरह से कन्फ्यूज़ थी
“हा वो मुझसे गुस्सा है और यंहा चली आयी “
“आप पागल हो या वो पागल है ये हो क्या रहा है ….”
“तू देख ना और फिर बताना क्या करू तू जो बोलेगी वही मैं करूँगा दोनो को मार दूंगा या खुद मर जाऊंगा”
मैं उसे सामने कर दिया और खुद उसके पूछे सट ले नजारा देखने लगा
अंदर कामाग्नि में जलाते हुए दो बदन आपस में गुथे जा रहे थे,ठाकुर उसका नाडा खोलने में कामयाब हो गया था और अब देर ना करते हुए काजल के ऊपर खुद गया था ,जैसे मैं भी उस सीन का ही एक हिस्सा बन गया था मैं आंखे गड़ाए हुए उसे देख रहा है जैसे की मैं कोई मूवी देख रहा हु ,मेरे सामने मेरी बहन थी मेरी छोटी बहन जो अब तक शायद कन्फ्यूज़ ही थी की ये हो क्या रहा है ,वो शायद अपने को ही कोश रही होगी की वो क्यो उस समय वँहा गई …
मैं पीछे से उससे चिपका हुआ था और मेरा हाथ खिड़की से लगा हुआ था ,मेरे दोनो हाथो के बीच पूर्वी समाई हुई थी ,उसने एक बार मुझे बुरा सा मुह बनाकर देखा ,मैं मुस्कुराते हुए उसके गालो में किस कर गया ,वो फिर मुह बनाते हुए आगे देखने लगी ,उसे मुझपर बहुत गुस्सा आ रहा होगा लेकिन वो मेरे प्यार के कारण ही मुझसे कुछ कह नही पा रही थी …
अंदर का नजारा गर्म हो रहा था …
ठाकुर काजल के ऊपर चढ़े हुए पूरे ताकत से उसके गालो को खा रहा था ,उसके मोटे होठो ने काजल के नरम गालो को पूरी तरह से भिगो ही दिया था,उसके गाल लाल पड़ गए थे वो थोड़ा रुककर फिर से काजल के होठो तक आया,
“हम्म्म्म “
काजल ने एक पल की देरी किये बिना ही उसके होठो को अपने होठो में भर लिया और उसे चूसने लगी ,काजल के लाल नरम रसीले होठो का स्वाद ठाकुर पूरे तन्मयता से ले रहा था ,दोनो के थूक से मिली आवाज हमारे कानो में पड़ रही थी ,
काजल का उज्ज्वल शरीर ठाकुर के काले शरीर में धंसा जा रहा था ,
जैसे ही दोनो का चुम्मन टूटा दोनो ने एक दूसरे की आंखों में देखा दोनो ही मुस्कुरा रहे थे ..
“तो अब गिफ्ट खोलने की इजाजत है “
ठाकुर का लहजा बड़ा ही शांत था
“आपकी ही हु …”
काजल ने मादकता से कहा ,जैसे मेरे दिल में जलन भर गया वही मेरे लिंग में खून ..
काजल की बात सुनकर ही ऐसा लगा जैसे की मेरा लिंग किसी लोहे की रॉड सा हो गया हो और वो तनाव बर्दास्त नही हो रहा था ,मैं नशे में था फिर भी वो शब्द मेरे कानो में गूंज रहा था ..
मैंने अपने कमर को थोड़ा आगे धक्का दिया मुझे नरम नरम गद्देदार चीज मिली जिससे मेरे लिंग को शांति मिली ,
“आउच भइया ये क्या कर रहे हो “
पूर्वी ने पीछे मुड़ते हुए मुझसे कहा ,लेकिन उसकी आंखे वैसी नही रह गई थी ,उसकी सांसे थोड़ी फूली हुई थी ,वो मुझे गुस्से से नही नाराजगी से देख रही थी ..
“सॉरी बहन “मैं इतना ही बोल पाया क्योकिं मेरी सांसे भी फूली हुई थी
मैं नशे में जरूर था लेकिन इतना नही की अपनी प्यारी बहन को ना पहचान सकू
मैंने अपना लिंग थोड़ा पीछे खिंचा ,मुझसे सहन तो नही हो रहा था क्योकि सामने नरम गद्दा था जिसमे मैं आसानी से अपना लिंग रगड़ सकता था लेकिन वो गद्दा मेरी खुद की बहन का था ,और उस बहन का जिससे मैं बेहद प्यार करता था ..
मैं खुद को सम्हालकर अंदर देखने लगा ,ठाकुर उस गिफ्ट से ब्रा बाहर निकाल कर हिला रहा था वो उसे चूम रहा था जैसे फुटबॉल का वर्डकप हो…
उसके आंखों में खुसी नाच रही थी हो भी क्यो ना मन मांगी मुराद जो साले को मिल रही थी ,
वो काजल के पास आया और हाथ पीछे लेजाकर उसकी ब्रा को खोलने लगा ,देखते ही देखते काजल के बड़े और भारी स्तन नंगे होकर झूम गए ,वो कुछ देर तक एक टक उसे ही देखता रहा जैसे कोई आकर्षण उसे आकर्षित कर रहा हो वो उनकी ओर खिंचा जा रहा था ..
उसने अपने होठो से निप्पल को भर लिया और जोरो से चूसने लगा ,
“आह ठाकुर जी “
काजल की मादक आवाज निकली और वो सिसकियां लेने लगी लेकिन थोड़ी ही देर में उसने हमारी खिड़की की ओर देखा उसके होठो में एक कमीनी सी मुस्कान थी ,हम दोनो की ही आंखे मिली जैसे उसे पता था की मेरी आंखे कहा पर है ,
उसकी आंखे मुझे घूर रही थी और हाथ ठाकुर के सर पर था ,उसका मुह मजे में खुला हुआ था जिससे हल्की हल्की सिसकियां निकल रही थी ,
ये दृश्य मेरे लिए सहन से बाहर हो रहा था मैं उत्तेजना के ऐसे शिखर में था की मुझे लगा जैसे मैं अब झर जाऊंगा लेकिन मैंने अभी तक अपने लिंग को हाथ भी नही लगाया था और ना ही किसी और चीज से रगड़ा था शायद इसी लिए मैं अभी तक बना हुआ था ..
लेकिन आगे मेरी बहन थी मैं दारू के नशे में उसके साथ कुछ गलत तो नही कर सकता था लेकिन अब मुझे एक और भी नशा चढ़ चुका था ,हवस का नशा …
मैं डरते हुए अपने कमर को आगे किया मेरे लिंग ने उसके गड्ढे पर एक रगड़ खाई और
“आह “मुझे इतना सुकून मिला ,इस बार पूर्वी ने कोई विरोध नही किया लेकिन मैं बस एक ही रगड़ के बाद ही रुक गया था ,
इधर ठाकुर काजल के निप्पल्स को किसी बच्चे जैसे चूसे जा रहा था लग रहा था जैसे कोई बच्चा बहुत भूखा हो और उसे मा के वक्षो से दूध मिल गया हो ,काजल भी उसके बालो को सहला कर उसे अपने वक्षो का रस पिला रही थी ,लेकिन उसकी नजर अब भी मेरी तरफ ही थी ,
ठाकुर कभी कभी उसके निप्पल्स को काट भी लेता था तब काजल की आंखे बंद हो जाती थी और वो एक सिसकी लेकर ज्यादा मुस्कुरा का मुझे देखती थी ,
उसकी हर मुस्कान से मैं पागल हो जाता था और कमर को यदा कदा हिला ही देता था ,पूर्वी कोई शोर तो नही कर रही थी लेकिन एक बार उसने भी अपने गड्ढे को मेरे लिंग में रगड़ दिया था ,
वो भी जवान थी और नई नई जवानी तो और भी खतरनाक होती है उसे सम्हालना और भी मुश्किल होता है ,पूर्वी की भी हालत कुछ ऐसी थी ,वो खिड़की से नजर ही नही हटा पा रही थी…
इधर
“आउच बदमाश हो आप “
ठाकुर ने काजल के निप्पल को जोरो से काट लिया था जिससे काजल का पूरा ध्यान उधर ही चला गया
“हा हा हा “ठाकुर अपनी बत्तीसी दिखा कर हँसने लगा
और धीरे धीरे चूमता हूं नीचे को बढ़ता गया ,शायद वो भूल ही गया था की उसे क्या पहनाना है ..
नीचे आकर वो काजल के पेट में रुका और अपनी जीभ से उसकी नाभि को भिगोने लगा ..
काजल फिर से मचलने लगी थी लेकिन गुदगुदी में
“नही नही ना गुदगुदी हो रही है “दोनो ही हंसे जा रहे थे .
ठाकुर फिर नीचे आया और काजल की पेंटी के आस पास के जांघो को चूमने लगा ,वो फिर से मदहोश हो गया था और थूक से उसकी जनघो को भिगो रहा था ,
“आह आह आह “
काजल की आंखे बंद होने लगी थी वो बस सिसकियां ले रही थी और उसका सर पकड़े हुए अपनी पेंटी के बीचों बीच फसी हुई योनि में उसका सर सरकने की कोशिस कर रही थी लेकिन ठाकुर अभी भी उसके जांघो में बिजी था ..
वो सरकता हूं उसके योनि के करीब आया जो की रस की धार से पूरी तरह से भीग चुका था,
उसने हल्के से पेंटी के सिरे को सरकाया ,और गोर से देखने लगा ,
वो साला काला सा,शैतान सा इंसान मेरी नाजुक कली के कोमल गुलाबी योनि को निहार रहा था ,काजल उसके रिएक्शन पर हल्के हल्के मुस्कुराने लगी और फिर से मेरी ओर देखी ..
उसके चहरे में किसी विजेता सी मुस्कान खिल गई थी ,वो मुझे ऐसे देख रही थी जैसे कहना चाह रही थी की देखो मुझे चाहने वाले कितने है ,
मैं मचल सा गया और इस बार मेरे लिंग ने कोई भी झटका नही मारा ,
अंदर ठाकुर ने अपनी जीभ काजल की योनि में लगा दी और उसका रस पूरी तनमयता से पीने लगा,काजल की योनि रस से इतनी भर चुकी थी की वो उसे चुहक रहा था और इसकी आवाज हमारे कानो तक भी पड़ रही थी,
इस बार मैं थोडा पीछे हुआ था लकिन पूर्वी ने अपने कमर को थोड़ा पीछे कर मेरे लिंग पर ठिका ही दिया ,वो भी लय से अपनी कमर हिला रही थी ,मेरा अकड़ा हुआ लिंग उसके गड्ढे में समा कर और भी विकराल रूप ले रहा था मैं भी मजे के गर्त में जा रहा था …
वँहा काजल अपनी कमर उचका कर अपनी योनि को ठाकुर से चुस्वा रही थी और यंहा मेरी प्यारी बहन अपनी कमर हिलाकर मेरे लिंग को अपने चूतड़ों में रगड़ने की कोशिस कर रही थी ….
सभी जगह बस हवस का साया फैला हुआ था और रिस्तो की मर्यादा तार तार हो रही थी …..
ऐसे मर्यादा की फिक्र भी किसे थी ,मैं नशे में था और बाकी तीनो भी हवस के नशे में डूबे हुए थे ,मेरा हाथ आगे जाकर पूर्वी के कमर को पकड़ लिया,और वो मुझे सट गई,
अब मेरे हाथ पूर्वी के बदन पर बेफिक्र से चलने लगे,हमारी निगाहे खिड़की के अंदर थी जैसे वँहा काजल नही मैं और पूर्वी ही थे ,हम उस दृश्य में पूरे मगन हो चुके थे ,
उधर काजल के शरीर के आखरी कपड़े को भी निकाला जा चुका था और वो गहरी गहरी सांसे ले रही थी ,मैं देख रहा था की ठाकुर का अकड़ा हुआ लिंग फुंकार मार रहा था ,वो काजल की गीली योनि को बड़े ही लालची नजर से देख रहा था ,वो भूल ही चुका था की उसे पेंटी पहननी थी लेकिन अब वो बात ही नही कर रहे थे ,वो काजल के ऊपर आ गया था दोनो ही नंगे जिस्म एक दूसरे में मिल गए थे दोनो पसीने से नहाए हुए थे और एक दूसरे में गुथे जा रहे थे,एक दुख सी गोरी और दूसरा कोयले सा काला असल में ये दृश्य बेहद ही कामुक लग रहा था,,
ठाकुर अपने हाथो के सहारे थोड़ा ऊपर हुआ अभी अभी उसने काजल के होठो से रह को निचोड़ा था वो अपना हाथ नीचे ले गया ,
मेरी दिल की धड़कने ही रुक सी गई थी मुझे पता था की वो क्या करने वाला है,वही शायद पूर्वी की भी सांसे रुक चुकी थी ,4 जन हम वँहा थे लेकिन इस एक पल के लिए कोई भी सांसे नही ले रहा था ,सभी की सांसे अटकी हुई थी ,वो आखिरी दूरी जो उनके बीच में थी वो भी खत्म होने को थी,ठाकुर अपने लिंग को काजल की योनि में चला रहा था और एक भारी हुंकार के साथ उसने धीरे से उसे काजल के योनि में समा दिया ,
“आआहहहहहह “एक गहरी सिसकी काजल के मुह से निकली पूरा लिंग उसके अंदर था और मैंने अपने हाथो से जोरो से पूर्वी के योनि को दबा दिया
“ आआहहहहहह भइया “दोनो लडकिया पागल सी हो चुकी थी और दोनो ही पुरुष दीवाने ..
ठाकुर ने पहला झटका दिया और काजल के ऊपर आकर उसके होठो को चूसने लगा दोनो पागलो की तरह एक दूसरे को किस कर रहे थे ,वही मैने भी पूर्वी का चहरा पकड़ लिया और उसकी योनि को अपने हाथो के मसलता हुआ उसके होठो को अपने होठो में मिला कर चूसने लगा …
“ओह आह आह आह “दूसरी बार काजल को ठाकुर ने जोर जोर से कुछ धक्के दिए
मैं पूर्वी के पूछे जोरो से अपने लिंग को रगड़ रहा था और उसके होठो को खा रहा था ,मेरा हाथ उसके सलवार के नाड़े पर पहुच चुका था मैं उसे खोल दिया सलवार अब उसके पैरो के नीचे आ गिरा था मेरा हाथ फिर के उसके योनि पर गया ,इस बार उसकी पेंटी के उपर से ही मैं उसके योनि को मसल रहा था वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी ,
उधर काजल की सिसकियां और ठाकुर के हुंकार बढ़ते ही जा रहे थे ,दोनो ही अपने पूरे वेग में थे और मगन थे ,ठाकुर का सर काजल के कंधे पर ठिका हुआ था वो अपने कमर को जोरो से हिला रहा था ,काजल थोड़ी शांत हुई ,लेकिन उसके मुह से आह ऊह की आवाज लगातार आ रही थी वो अपने सर को मेरी ओर करके मुस्कुराने लगी ..
मैं उसकी मुस्कुराहट देखकर और भी जल गया और पूर्वी के पेंटी को मानो फाड़ता हूं उतारने लगा ,
“रुको भइया ‘
मैंने एक नही सुनी और अपने लिंग को निकाल कर उसकी योनि में दे मारा “
वो जोरो से चीखी लेकिन मैंने अपने हाथो से उसका मुह बंद कर दिया था..
खुन की एक धार उसके जांघो से निकल कर नीचे जमीन में गिरने लगी मैं बेदर्दी के साथ 3-4 धक्के ही मारे थे ,की वो जोरो से रोने लगी थी लेकिन उसका रोना भी मेरे हाथो में दब जा रहा था उसके आंखों से निकलते हुए आंसू को देखकर जैसे मैं तुरंत ही होश में आया ,
मैं अंदर निगाह डाली ,अंदर ठाकुर काजल पर कूदे जा रहा था और काजल उसके बालो को सहला रही थी ,फच फच की आवाजो से पूरा कमरा गूंज रहा था ,
लेकिन मैं पूर्वी की हालत देखकर बुरी तरह से चौक गया ,मेरे ढीले पड़ते ही वो जमीन में रोते हुए बैठ गई मैं उसकी हालत देख कर समझ चुका था की मैंने ये क्या कर दिया था ,मैंने जल्दी से खुद को सम्हाला …
अब मेरी आंखों में भी आंसू छलक गए
अंदर एक एक जोर की चीख सुनाई दी ये आनद के अतिरेक की चीख थी ,ठाकुर दहाड़ रहा था और उसका लिंग हवा में लहरा रहा था उसके लिंग से नीकला हुआ गढ़ा वीर्य अभी काजल के योनि के हिस्से से लेकर पेट तथा उसके स्तनों तक फैल चुका था ,थोड़ा सा वीर्य काजल के चहरे में भी चमक रहा था ,…
मैं जल्दी से पूर्वी के कपड़े को ठीक किया और वँहा से नीकल गया,सब कुछ तो ठीक था लेकिन मेरी एक गलती ने मुझे मेरी बहन के नजरो में ही गिरा दिया ,और उसके ही नही मुझे अपनी ही नजरो में गिरा दिया था ……..
सन्नाटा किसे कहते है ………???????
अतीत की गलतियों को सुधारा नही जा सकता ,ग्लानि में किसी माफी की जगह भी नही होती ,
और दर्द चुभन की कोई सीमा नही होती ,
कार में सन्नाटा फैला हुआ था और मैं ग्लानि से भरा हुआ था ,गाड़ी चलाते हुए बाजू में बैठी पूर्वी को सुबकते हुए देखता हुआ भी मैं कुछ नही कह पा रहा था क्योकि अतीत को बदला नही जा सकता जो हो गया वो हो गया ….
मैं चुप था लेकिन शांत नही था ,
मन में अजीब सवाल उठ रहे थे जिसका उत्तर मेरे पास नही था ,मेरी आंखों में आंसू तो नही थे लेकिन सीने में इतनी हिम्मत भी नही थी की मैं पूर्वी से सर उठा कर बात कर सकू ..
“मैं आपके साथ आयी ही क्यो …”
पूर्वी ने रोते हुए कहा ,वो फूल सी बच्ची सिकुड़े हुए बैठी थी ..
मैं उसे देखने की हिम्मत ही नही जुटा पा रहा था…
गाड़ी घर तक आ चुकी थी लेकिन अब भी मैं चुप ही था पूर्वी भी चुप ही थी …
वो सीधे बिना कुछ बोले ही अपने कमरे में चली गई ,
“अरे भइया पूर्वी को क्या हो गया और आप लोग कहा गए थे “
निशा की बातो का मैं क्या जबाव देता ,मैं नजर गड़ाए ही रखा मेरा नशा ना जाने कहा काफूर हो चुका था ,
मैं बिना कोई जवाब दिए ही सीधे अपने कमरे में चला गया ,मैं आंखे बंद किये हुए बीते बातो को याद कर रहा था ,मेरे सामने बार बार पूर्वी का चहरा झूम जाता था ,मैं अपना सर झटकता लेकिन फिर से वो चहरा दिमाग में भर जाता था…
उसकी साफ मासूम आंखे मुझे दिखाई दे रही थी,जो आंसुओ से भरी हुई थी ,वो उसका सिसकना और उसका वो दर्द मैं महसूस कर पा रहा था …
ना जाने कितना समय बीत चुका था की निशा कमरे में आयी उसकी आंखे लाल थी ,उसे देखते ही मेरा सर झुक गया …
चटाक ….
एक झन्नाटेदार थप्पड़ मेरे गालो में पड़ा वो रूह तक ही सिहर गया था ,
मेरा चहरा लाल था और माथे में पसीने की बूंदे तैरने लगी ,मैंने निशा को इतने गुस्से में कभी नही देखा था…
“मुझे शर्म आ रही है आपको भाई कहते हुए “निशा की आवाज लड़खड़ा रही थी
मैं कुछ भी कहने की हालत में नही था ,और कहता भी तो क्या कहता ??
मैं अब भी वही बैठा रहा जब निशा ने जोर से दरवाजा बंद किया और कमरे से निकल गई ..
मेरे आंखों में पानी आने शुरू हो चुके थे ,
ना जाने कब तक मैं ऐसे ही बैठा रहा मुझे दरवाजा खुलने का आवाज आया ,वो काजल थी जो हाल में निशा से कुछ बात कर रही थी ,थोड़ी देर में ही काजल अंदर आयी ,
मैं अब भी अपने बिस्तर में सिमटा हुआ बैठा था,मैंने काजल को देखा वो मुझे गुस्से से घूर रही थी ..
मैं ज्यादा देर तक उससे आंखे ही नही मिला पाया ,
वो बिना कुछ बोले ही बाथरूम में चली गई और आते ही दूसरी तरफ मुह कर सो गई …
मैं किसी गुनहगार की तरह बस बैठा हुआ अपने की विचारों में खोया हुआ था ना जाने कितना समय बीत चुका था और ना जाने कब मुझे नींद आ गई थी ……
मैं बुझे हुए मन से और बिना कुछ खाये पिये ही अपने ऑफिस में बैठा हुआ था ,गहरे सोच में डूबा हुआ था,ऐसे भी मैं कई दिनों के बाद यंहा आया था और मेरा काम भी आजकल कुछ खास होता नही था,शाबनम ने पूरी जिम्मेदारी ही ले ली थी ,वैसे भी उसे मुझसे दुगुना पेमेंट मिलता था साथ ही साथ अगल से और भी पैसे कमा रही थी ,मैं तो बस नाम का ही मैनेजर रह गया था,
घर परिवार ,प्यार और प्रोफेसन सब में मैं पिछड़ रहा था ,गहरे सोच में डूबे हुए मुझे सब कुछ छोड़कर भागने का मन करने लगा ….
“तुम ऐसा करोगे मैंने सोचा भी नही था “मैं चौका सामने शाबनम थी उसका चहरा उतरा हुआ दिख रहा था ..
मुझे काजल के ऊपर बहुत ही गुस्सा आया जो भी हुआ वो हमारे बीच की बात थी बाहर उसे फैलाने का क्या मतलब था ..मैं बस शाबनम को देखता ही रहा ..
“अरे इतने दिनों के बाद आये हो और फिर बस यू ही कमरे में घुस गए …”
मैंने राहत की सांस ली ,वो मेरे पास आकर बैठ गई क्या हुआ लगता है कुछ परेशान हो ..
“हाँ बस काजल के बारे में “
“अरे यार तुम उसकी फिक्र मत करो वो जो भी कर रही होगी वो कुछ सोच समझ कर ही कर रही होगी ,तुम बस चील मारो और चलो मेरे साथ एक कुछ दिखाना है …रश्मि से मिले क्या तूम “
“नही तो “
“परफेक्ट चलो फिर जल्दी उससे पहले की वो तुम्हे देख ले “
मैं मन में सोच रहा था की अब इसे क्या हो गया है ..
वो मुझे उसी पुराने कमरे में ले गई जंहा हम अक्सर मिलते थे..
“ये सब क्या है “
उसने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा कर मेरे सामने अपने स्तनों को तान दिया था …
“क्यो आज पीने का मन नही कर रहा है क्या “
“यार तुम भी मैं इतने टेंसन में हु और तुम ये सब “
मैं उठकर जाने को हुआ उसने मुझे खिंचकर अपने सीने से लगा लिया ..
“देव यार प्लीज् कई दिन हो गए है..मेरी भी तो थोड़ी फिक्र करो “
उसकी तड़फ देखकर मैं आज पहली बार मुस्कुराया
“तुम भी ना “
मैंने उसे जोरो से जकड़ लिया ,वो थोड़ी कसमसाई …
“क्या हुआ अब क्यो कसमसा रही हो “
उसके चहरे में मुस्कान फैल गई
“यार तूम काजल की टेंशन मत लो मैं हु ना तुम्हारा टेंसन निकालने के लिए “
वो खिलखिलाई ,मैं भी मुस्कुरा दिया लेकिन ये मुस्कान फीकी थी
“क्या हुआ मेरी जान ,आज सच में तुम प्रॉब्लम में हो ,,कोई तो बात होगी वरना तुम्हे ऐसे तो मैंने कभी नही देखा था “
उसका चहरा भी थोड़ा संजीदा हो गया था ,क्या मुझे उसे बतलाना चाहिए ??
मेरे दिमाग में ये बात घूम रही थी ,मैं क्या करू ये मुझे समझ नही आ रहा था लेकिन मुझे किसी की जरूरत जरूर थी जिससे मैं कुछ एडवाइस ले सकू ..
“मुझसे एक गलती हो गई है शाबनम जो नही होनी चाहिए थी “
मैंने उसके कमर से अपना कसाव कम किया और उससे अलग होकर बिस्तर में बैठ गया ..
वो मेरे पास आकर बैठ गई थी
“आखिर हुआ क्या है कुछ तो बोलो “
मैं उसे बतलाते गया उसका चहरा गंभीर होने लगा था ,अंत में वो बौखलाई नजर आयी
“ये तुमने क्या कर दिया देव जंहा तक मैं पूर्वी को जानती हु वो तुमसे बेहद प्यार करती है और तुमने …”
मैं सर झुका कर बैठा रहा
“जानते हो तुमने इससे भी ज्यादा गलती क्या की है ?”
मैं उसे देखता रहा
‘तुम्हे उससे बात करनी चाहिए थी ,तुम्हे माफी मांगना चाहिए था लेकिन तुम तो कायरों की तरह हालत से दूर भाग रहे हो ,ऐसा मत करो देव गलती हो जाया करती है ,मैं भी मानती हु की इस गलती को माफ नही किया जा सकता लेकिन फिर भी तुम्हे कोशिस तो करनी ही चाहिए “
उसके चहरे में एक सांत्वना के भाव आये ,कल से मैं मेरे लिए किसी के मन में ये भाव की तलाश में था मैं टूट गया ,मैंने शाबनम को अपने गले से लगा लिया और जोरो से रोने लगा
“मुझसे बड़ी गलती हो गई है शबनम ये क्या हो गया “
वो मेरे बालो पर अपने हाथ फेरने लगी और मुझे सांत्वना देने लगी,मैंने अपने जीवन में शबनम से अच्छी दोस्त नही देखी थी वो मेरे हर बात को समझती थी और मुझे सही सलाह देती थी मैं उसका कृतज्ञ हुए जा रहा था,जबकि सभी ने मेरा साथ छोड़ दिया था वो अब भी मेरे साथ थी …
बहुत देर तक मैं ऐसे ही रहा ,जब मैं उठा तो जैसे मैं कोई संकल्प कर चुका था..
********
मैं वँहा से सीधे घर को निकल गया ,घर में आज निशा और पूर्वी दोनो ही थे ,किसी ने मुझसे के भी शब्द नही कहा ,
“पूर्वी तुमसे कुछ बात करनी है “
निशा जैसे आग बबूला हो गई लेकिन वो कुछ भी नही बोली और वँहा से चली गई वो अपने कमरे में चली गई थी ..
पूर्वी जो की अभी तक चुप ही बैठी थी कुछ और सिकुड़ गई और उसकी आंखों ने फिर से पानी छोड़ना शुरू कर दिया था ..
मैं उसके पास गया,वो सोफे में बैठी थी मैं उसके पाव के पास जमीन में जा बैठा…
“मेरी बहन जो हुआ वो नही होना चाहिए था ,मैं इसे बदल तो नही सकता ,और जानता हु की ये माफ करने लायक नही है लेकिन फिर भी मुझे माफ कर दे ,मैं तुझे ऐसे नही देख सकता मुझे मेरी पुरानी पूर्वी चाहिए “
मैं इतना बोला ही था की पूर्वी ने झुककर मुझे पकड़ लिया और जोरो से रोने लगी ,जिसे सुनकर निशा भी बाहर आ गई ,हम दोनो ही एक दूसरे को पकड़ कर रो रहे थे …
“भइया मैंने रात भर सोचा लेकिन मुझे आपकी गलती से ज्यादा अपनी गलती ही दिखाई दी ,मैं भी ऐसे रियेक्ट कर रही थी की आप नही रुक पाए ,मुझे तो आपको पहले ही रोक लेना था लेकिन मैं भी मजे लेने लगी थी,मुझे नही पता था की आप इतने आगे बढ़ जाएंगे लेकिन मैंने भी तो आपको उकसाया था ,मुझे वँहा से हट जाना था आपको उसे देखने से रोकना था…
लेकिन मैं ही मजे लेने लगी ,आप तो नशे में थे लेकिन मैं तो होशं में थी ,जब मैं ही बहक सकती हु तो आपको क्यो दोष दु …मुझे माफ कर दो भइया की मेरे कारण आपको इतनी तकलीफ सहनी पड़ी ,आपको इतने ग्लानि से गुजरना पड़ा सॉरी भइया सॉरी “
मैंने उसे और भी जोरो से जकड़ लिया मैं रो सोच भी नही सकता था की वो ऐसा सोच रही होगी ,मैं तो अपनी गलती को माफी मांगने आया था और वो मुझे ही माफी मांग रही थी …सच में वो कितनी भोली थी और मैं कितना बड़ा पापी …….
निशा आश्चर्य से हमे देख रही थी ,और हमारी बात सुन रही थी ..
उसके चहरे का गुस्सा अभी भी कम नही हो रहा था ,लेकिन कुछ देर बाद ही हमारे पास आ गई
“एक बार हो गया इसका मतलब ये नही की आपलोग ये रोज करोगे ,भइया पर मेरा अधिकार है समझी “
निशा ने जो कहा उससे पूर्वी तो हँस पड़ी लेकिन मैं शॉक में ही रह गया ,आखिर निशा के दिमाग में ये क्या चल रहा था ,उसे अभी भी अधिकार की पड़ी थी …वो इतना ही बोलकर हल्के से मुस्कुराते हुए किचन में चली गई ,लेकिन मुझसे उसने कोई भी बात नही की ……………..
मैं थका हुआ अपने कमरे में ही लेटा हुआ था ,बहुत ही शुकुन इस बात का था की मेरी बहने मेरे साथ ही थी..
मैं अभी अभी होटल से आया था ,तभी कमरे का दरवाजा खुला और निशा ने पूर्वी को अपने साथ अंदर लाया ,मैं उन्हें ध्यान से देख रहा था,निशा पूर्वी का हाथ पकड़े हुए अंदर ला रही थी,वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी,आखिर इन लड़कियो का इरादा क्या था ..??
वो दोनो पहले की तरह ही मेरे आजू बाजू आकर लेट गई और मुझे अपने बांहो में घेर लिया …इतना सुखद अहसास होता है जब आपको प्यार करने वाले आपके पास हो…
मैं भी अपने दोनो हाथो से उनके बालो को सहला रहा था,निशा ने पहला कदम उठाया और मेरे शर्ट को निकाल फेका,मुझे इससे गुदगुदी का अहसास हुआ और मैं खिलखिला उठा,
वो दोनो ही अपने झीनी नाइटी में थे,मैं ऊपर से कपड़ो से विहीन था और मेरे शरीर पर उसके गुद्देदार वक्षो की चुभन को महसूस कर रहा था,
मैं उनके प्यार से भरा जा रहा था,निशा एक्टिव थी लेकिन पूर्वी थोड़ी शर्मा रही थी ,वही पूर्वी जो कभी मुझसे नही शर्माती थी वो आज शर्मा रही थी उसे देखकर मुझे उसके ऊपर बहुत प्यार आ रहा था लेकिन मैं कोई भी जल्दबाजी नही करना चाहता था क्योकि मुझे निशा का भी तो डर था ना जाने वो क्या मीनिंग निकाल लेगी ,
इधर निशा की सांसे तेज होने लगी थी मुझे पता था की उसे क्या चाहिए लेकिन मैं भी पूर्वी के होने के अहसास से भरा हुआ थोड़ा सकुचा रहा था जिसे निशा ने भांप लिया था…
वो प्यार से मेरे गालो को अपने होठो में भरे हुए उन्हें चूसने लगी ,
“अब भी क्यो दीवार हमारे बीच आ रही है क्या भइया,अब तो पूर्वी भी हमारे खेल में शामिल हो सकती है “
निशा ने हम दोनो को ही ऐसे झेड़ा था की हम दोनो ही शर्मा गए और पूर्वी वँहा से भागने को हुई लेकिन निशा ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया
“तू ही तो कह रही थी ना की भाभी को देखकर कुछ कुछ हो रहा था तो रुक जा ना आज अच्छे से उसे कर लेते है “
पूर्वी और भी बुरी तरह से शर्मा गई ,उसका गोरा चहरा लाल हो चुका था,उसके फुले हुए गालो से जैसे खून गिर रहा हो,उसके होठ फड़कने लगे थे ,नजर नीची थी लेकिन होठो पर एक मुस्कान थी …
आज मैंने पहली बार अपनी बहन को ऐसे देखा था जैसे वो अपने प्रेमी के पास खड़ी हो .
मैं भी तो उसका प्रेमी ही था लेकिन रिश्ते अलग थे,मैं उसके प्रेम था लेकिन प्रेम का एक्सप्रेशन ही अलग था…
जो आज बदलने वाला था ,या यू कहे की कुछ दिनों से बदल रहा था…
पूर्वी ना गई ना ही फिर से लेटी ,लेकिन निशा ने उसका हाथ पकड़े हुए ही मेरे कानो में कुछ कहा
“आज इसे भी जन्नत दिखा दो भइया,आप आगे नही बढ़ोगे तो ये कभी आगे नही बढ़ेगी “वो बोल कर मुस्कुराई ,जो लड़की कभी मुझे बांटना नही चाहती थी आज वो मुझे बांट रही थी ‘
मेरी प्रश्न से भरी हुई निगाहों को उसने पहचान लिया था ,
“मैं आपको नही बांट रही हूं ,असल में मुझे ये समझ आ गया है की प्यार को बंटा ही नही जा सकता “
उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा
अब मुझे ही शुरुवात करना था दीवार तो पहले ही गिर चुकी थी और मर्यादाओं से हम कब के बाहर आ चुके थे ..
मैंने पूर्वी का हाथ थमा और उसे अपने ओर जोरो से खिंच लिया ,वो मेरे सीने से आ लगी …
उसका कोमल लेकिन भारी सीना मेरे चौड़ी बालो से भरी हुई छाती में आ धसे थे ,उसके होठ मेरे होठो के पास ही थे ,दोनो ही होठ फड़फड़ा रहे थे,मेरा हाथ उसके कमर को कस रहा था ,वो शर्मा रही थी जैसे नई नई दुल्हन सुहागरात को शर्माती हो ,सच में आज मैंने अहसास किया था की पूर्वी का जिस्म और रूप ऐसा था जिसे कोई भी मर्द पाना चाहे,मासूम से चहरे और मासूम से मन में प्यार और समर्पण की कलियां खिलने लगी थी ,और वो बेसुध सी हो रही थी ,मैं इस अहसास को समझ सकता था लेकिन जैसा समर्पण पूर्वी का मेरे लिए था वो तो भाग्यवानों को ही नसीब होता है और मैं उन्ही भाग्य के धनी लोगो में था ..
वो शरमाई हुई कमसिन सी कली थी उसकी सुर्ख होठो में आखिर मैंने अपने होठो को रख ही दिया ,वो जैसे तड़फ ही गई ,वो कसमसाई और अपने होठो को खोलकर मुझे पूरा आमंत्रित करने लगी ,जैसे जैसे मैं उसके होठो को चूसे जा रहा था उसकी और मेरी जीभ दोनो ही गुथमगुत्थि किये जा रहे थे ,वो दोनो ही मिलकर एक नया अहसास हमारे मन में भरे जा रहे थे जो की हवस तो बिल्कुल भी नही था,
पूर्वी के आंखों से आंसू की कुछ बूंदे निकल गई ये उस समर्पण की बूंदे थी जो एक लड़की अपने प्यार के लिए करती है ,
निशा हमे देखकर बस आंसू ही बहा रही थी,और मुस्कुरा रही थी,
ये सुखद था और साथ ही मन को सुकून देने वाला भी था,निशा ने अपने हाथो को आगे बड़ा कर अपने नाइटी को पूरा खोल दिया ,कोई आश्चर्य नही था की वो अंदर से पूर्ण नग्न ही थी ,उसका शरीर कमरे के माध्यम प्रकाश में जगमगाने लगा था,लेकिन हम दोनो का ही ध्यान उसकी ओर नही था ,वो मेरे और पूर्वी के शरीर से बाकी वस्त्रों को निकालने में व्यस्त हो गई थी,जबकि पूर्वी और मैं बस एक दूजे के होठो के जरिये एक दूजे के दिल में उतर रहे थे..
कुछ ही देर में एक बिस्तर में तीन नग्न शरीर लेटे हुए थे ,मैं सीधे लेटा हुआ था जबकि पूर्वी और निशा मेरे ऊपर थी ,दो जवान कलियों के बीच होने का अहसास क्या होता है जो आपसे इतना प्यार करती है ….??जैसे जन्नत में आ गए हो..
मेरा लिंग अब भी मुरझाया हुआ ही था ,मैं अब भी पूर्वी के होठो से मद का पान कर रहा था वही कभी कभी उसके आंखों से बहते हुए आंसुओ को भी अपने होठो से पी रहा था ,वो भी मेरे आंखों में गालो पर अपने होठो को यदाकदा रख दिया करती थी ,
लेकिन निशा ने मुझे ऐसे रहने नही दिया वो मेरे लिंग को अपने होठो से सहलाने लगी ..
“आह……..”
मेरे मुह से अनायास ही निकल गया ..
उसका मुह मेरे लिंग को भर रहा था और उसके लार से मेरा लिंग और भी चिकना हो रहा था ,उसने ऊपर की त्वचा को नीचे किया और अपने थूक से उसे गीला करके अपने मुह से मुझे सुख की दरिया में डुबो दिया ..
मैं मगन था और मेरी बहने भी अपने अपने जगह में मगन थी ..
पूर्वी अपने जिस्म को मुझसे और भी जोरो से सटा रही थी और सिसकिया ले रही थी ,मैं उसकी उत्तेजना को समझ नही पा रहा था लेकिन मुझे आभास हुआ की निशा पूर्वी के योनि को भी अपने हाथो से मसल रही है ,पूर्वी भी उत्तेजित होकर मेरे होठो को काटने और खाने पर उतारू हो गई थी ,
अब मैंने भी निशा जो की इतनी मेहनत कर रही थी उसे भी थोड़ा सुख पहुचने की सोची ,मैंने अपना हाथ आगे बढ़कर उसके कूल्हों को सहलाया ,उसके कसे हुए भारी और मखमली चूतड़ों को सहलाते हुए मैं उसकी पीछे से ही अपने हाथ को उसके योनि पर लाया ,वो तप रही थी लेकिन फिर भी गीली थी ,उसमे हल्के बाल उग आये थे ,मैं उन बालो पर अपने हाथ फेर रहा था और उसकी गीली योनि को भी ऊपर से ही सहला रहा था ,वो भी उत्तेजित थी ..
अब हम तीनो ही उत्तेजना की अवस्था में आ चुके थे ,तीनो की आंखे बंद थी और एक दूजे के शरीर से सुख ले रहे थे,निशा का मुह मेरे लिंग की मालिस कर रहा था वही निशा का हाथ पूर्वी के योनि की जबकि मेरा हाथ निशा की योनि की मालिस कर रहा था,तीनो ही एक दूसरे पर गुथे जा रहे थे…
मैंने थोड़ी आंखे खोली तो मुझे कमरे के गेट पर कोई खड़ा हुआ दिखा ,मैंने ध्यान दिया वो काजल थी ,
मेरी और काजल की आंखे मिली वो अविश्वास से हमे देख रही थी,हमारी नजर मिलते ही मेरे होठो पर एक मुस्कान आ गई ,
कल मैं उसे देख रहा था और वो ममुस्कुरा रही थी और आज वो मुझे देख रही थी और मैं मुस्कुरा रहा था,मैं कुटिल मुस्कान से उसे देख रहा था,उसका चहरा ये सब देखकर लाल हो चुका था ,उसकी आंखे बड़ी हो गई थी ..
माना वो कैसे भी हो लेकिन फिर भी थी तो मेरी पत्नी,और मैं भले ही बाहर कुछ भी करता हु लेकिन आज ये सब उसके आंखों के सामने ही हो रहा था ,जिसे देखकर वो जल रही थी ,मैं इस अनुभव को कल महसूस कर चुका था ,उसकी मुठ्ठी कसे जा रही थी और मुझे ये देखकर बहुत ही मजा आ रहा था,मेरी निगाहे मानो उसे ये कह रही हो की देख, देख मुझे भी प्यार करने वालो की कमी नही है ,और जो लोग तेरे जिस्म से खेलते है वो बस हवस के लिए खेलते है लेकिन मेरे पास सच में प्यार करने वाले है…
काजल के आंखों में आंसू छलकने वाले थे ,वो इसे देखकर उत्तेजित भी थी लेकिन आंखों में आंसू भी आ रहे थे,जलन से उसका सीना भी जल रहा होगा ,ये मेरे साथ भी हो चुका था और मैं इस स्तिथि को समझ सकता था,वो मेरी आंखों में देखकर जाने को पलटी ,लेकिन मैंने तभी पूर्वी के कूल्हे में एक जोरदार चपात लगा दी ..
“आउच “पूर्वी दर्द और मजे से बोल पड़ी और पूर्वी की आवाज सुनते ही काजल तुरंत ही पलट गई और हमे देखने लगी मेरी मुस्कान और भी गहरा गई थी ,वो गुस्से भरे नयनो से मुझे देखकर चली गई लेकिन मैं जानता था की वो गुस्सा नकली था,उसकी आंखे बता रही थी की वो और भी देखना चाहती थी ,वो उत्तेजित थी और इसलिए वो वँहा से निकलना चाहती थी ..
मैं ये भी जानता था की वो बाहर नही जा पाएगी वो घर में ही रहेगी जब तक हमारा काम खत्म नही हो जाता लेकिन वो बहनों के नजर में भी नही आना चाहेगी…
आखिर मेरा लिंग भी पूरी तरह से गीला हो चुका था और साथ ही मेरी बहनों की योनि भी ,
मैं उनको अपने से अलग किया और निशा को हटा कर पूर्वी को अपने नीचे लिटा लिया ,निशा मेरे ऊपर आ गई और मेरे पीठ को चाटने और काटने लगी ,
मैंने पूर्वी के निगाहों में देखा ,वो शर्मा कर ही सही लेकिन उत्तेजक निगाहों से मुझे देख रही थी और जैसे कह रही थी की अब आगे बढ़ो…
मैं आगे बढ़ा और अपने लिंग को उसकी योनि में सहलाने लगा,वो मुझे पूरी तरह से जकड़ कर मुझसे खुद को सटाने लगी ,
उसकी गीली योनि में मेरा लिंग फिसलने लगा था ,लेकिन अब भी वो बहुत टाइट था,धीरे धीरे ही सही लेकिन मेरे लिंग का ऊपरी भाग उसके योनि में धंस गया ,वो मछली जैसे छटपटाई लेकिन मेरे होठो को अपने होठो से मिलाते हुए थोड़ी शांत हो गई ,मैं हल्के हल्के धक्के से अपना लिंग उसके अंदर पूरी तरह से प्रवेश करवा दिया…
नई नई जवानी में खिली हुई योनि ने लिंग को मजबूती से जकड़ रखा था, ऐसा अहसास मुझे पहली बार हुआ था, हल्के बाल भी लिंग से रगड़ खा जाते थे, मेरा लिंग पूर्वी के योनि रस से पूर्णतः भीग चुका था,और थोड़ी आसानी से उसके अंदर जा रहा था, उसके आंहो से पूरा कमरा गूंजने लगा था ,उसकी योनि हर रगड़ के पहले ढीली हो जाती और जब लिंग पूरी तरह से अंदर जाता तो तो कस जाती थी ,इतना सुखद अहसास मुझे सच में कभी नही हुआ था,वो मुझे मेरी बहन से मिल रहा था,मेरी प्यारी सी छोटी बहन से ,लेकिन सुख तो सुख होता है जंहा से भी मिले…
वही निशा मेरे ऊपर झा गई थी वो अपने जिस्म को मेरे बदन पर रगड़ रही थी और अपने होठो और हाथो से मेरे हर अंगों को नहला रही थी,
उत्तेजना तेज हुई और मैं मैंने जोर जोर से धक्के देना शुरू दिया,
“आह आह आह “
पूर्वी की सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगी थी ,उसकी आंखे बंद थी और ओ उस मजे की गहराई में खोई हुई थी ,उसका कमर ऊपर उचक रहा था और मेरा कमर उसके कमर में धंसे जा रहा था,उसका सारा शरीर अकड़ गया और वो जोरो के झड़ी,उसने मेरे कंधे पर अपने दांत गड़ा दिए थे…
अब वो शांत किसी लाश सी गिर गई थी ,शरीर में कोई हलचल नही हो रही थी ,मेरा लिंग इतना पानी पाकर तृप्त महसूस हो रहा था और वो ज्यादा अकड़े जा रहा था,मैं भी अपने चरम के निकट था,लेकिन मैंने अपने लिंग को निकाला नही और अपनी बहन के गर्भ में झड़ने लगा,वो मेरा गर्म लावा अपने अंदर महसूस करके और भी ज्यादा तृप्त होने लगी और मेरे होठो को अपने होठो से चूसने लगी थी ……
मैं थककर जब पूर्वी से हटा तो निशा मेरे ऊपर चढ़ गई अभी तो मुझमें वो हिम्मत नही थी की मैं फिर से कुछ कर पाऊ लेकिन निशा कहा मानने वाली थी ,उसनें मेरे लिंग को अपने होठो में भर लिया,पूर्वी मुझसे सटी हुई मुझे बांहो में भरकर सो रही थी वही निशा मेरे लिंग को अपने होठो में भरे हुए चूस रही थी ,मैं जब दरवाजे की ओर देखा तो मेरे होठो की मुस्कान फैल गई ,सामने काजल खड़े हुए अपने साड़ी के ऊपर से ही अपने योनि को मसल रही थी ,मुझे मुस्कुराता हुआ देख वो गुस्से से भर गई वो झूठा गुस्सा था और मुझे मारने का इशारा किया ,मैं हल्के से हँस पड़ा,वो अधीर थी जैसे अब तब रो ही डाले लेकिन ये रोना दुख का नही बल्कि उत्तेजना का था,जब उत्तेजना ज्यादा बढ़ जाए तो भी व्यक्ति का रोना निकल जाता है………..
अब मेरा लिंग तैयार था निशा को भरने के लिए ,मैंने सोए हुए ही उसे अपने} ऊपर कर लिया ,निशा ने भी अपने योनि में मेरे लिंग को सटाया और मेरे ऊपर कूदने लगी,मैं फिर से आनद के गहराई में जा रहा था,ये तब तक चलता रहा जब तक की मैंने उसे भर ही नही दिया ,तब तक काजल को भी समझ आ गया था की अब उसका यंहा रुकना ठीक नही है ….
बहनों के साथ मचे हंगामे के बाद मेरी आंखे कब लगी मुझे पता ही नही चला…
जब आंखे खुली तो कमरे में कुछ हलचल हो रही थी सामने देखा तो काजल थी ,
हमारी आंखे मिली उसने मुझे थोड़े गुस्से में देखा लेकिन वो गुस्सा नकली था,,,
असल में उसके होठो में एक मुस्कान थी ,
जो मुझसे छिप नही सकी,
“तो तुमने पूर्वी को भी बिगड़ ही दिया “उसने शरारती मुसकान से कहा,वो मेरे पास ही खड़ी थी और अभी अपनी नाइटी पहनने वाली थी ,मैंने उसके हाथ को पकड़ उसे बिस्तर में गिरा दिया और उसके ऊपर आ गया…
“सब तुम्हारे कारण हुआ है “
मैं सच में थोड़ा गंभीर था,
“मुझे माफ कर दो देव मैं नही जानती थी की ऐसा कुछ हो जाएगा ,लेकिन फिर भी मुझे पूर्वी के लिए खुसी भी है और दुख भी …….”
काजल भी थोड़ी गंभीर हो गई थी
मैंने प्रश्नवाचक निगाहों से उसे देखा…
“खुसी इसलिए की अब उसकी उम्र हो गई है और तुमने उसे बहकने से तो बचा लिया ,जैसा हमारे घर का माहौल था पता नही वो खुद को कितने दिनों तक सम्हाल पाती,मुझे पता लगा की उसके क्लास की ही लडकिया तुम्हारे होटल में उस धंधे में घुस गई है ….”
मुझे उस दिन की याद आयी जब मैंने अपने ही होटल में पूर्वी के क्लास की लड़की को देखा था..
“लेकिन दुख इसलिए भी है की तुमने जो आग उसे लगा दी ,जैसे शेर को खून का स्वाद दिला दिया है ,मैं नही चाहूंगी की पूर्वी अब ऐसा कुछ कर बैठे की ….तुम्हे अब उसका सहारा बनना होगा ,तुम्हारा ध्यान अगर उससे हटा तो समझो वो बाहर ट्राय करना शुरू कर देगी और दुनिया में उस जैसी खूबसूरत कम उम्र की लड़कियों के कद्रदान बहुत है…”
काजल की बात मुझे समझ में आ रही थी,मैं भी पूर्वी की हालत काजल और निशा की तरह होते नही देखना चाहता था…
हम दोनो ही थोड़ी देर तक चुप रहे ..
“लेकिन एक बात मुझे साफ बताओ की ठाकुर के साथ मुझे देखकर तुमने मजा आया की नही “
उसके होठो में एक कमीनी सी मुस्कान फैल रही थी ,
मैंने उसे जोरो से अपनी बांहो में भर लिया और जोरो से दबाया ..
“तू साली बहुत ही कमीनी है “
“तुमसे ज्यादा नही ,वो तो गैर मर्द था लेकिन तुम तो अपनी ही बहनों के साथ शुरू हो गए हो ,मेरी ही दोस्त के साथ भी सोते हो,साले रिस्तो को तो तुमने खत्म ही कर दिया है ,और तुम्हे नही पता क्या की मुझे भी जलन होती है ,और तुमसे ज्यादा जलन होती है ,तुम किसी और लड़की के साथ रिलेशन में रहते तो शायद मैं ठीक भी रहती लेकिन मेरी ही सहेली ,और अपनी ही बहनों के साथ “
वो मुझे घूर रही थी
“मैं तो सीधा साधा सा इंसान था तेरे ही कारण मैं ऐसा हो गया हु “
हम दोनो ही मुस्कुरा उठे…
“चलो हमारे बीच कम से कम अब इस बात की ग्लानि नही होगी की हम में से एक ही बेवफा है ,असल में तो हम दोनो ही बेवफा हो चुके है “
काजल खिलखिलाई और उसके सफेट मोती से दांत मेरे सामने आ गए ..
“सच कहु काजल ठाकुर के साथ तुम्हे देखकर मुझे लगा जैसे मैं उसे मार ही डालू….”
मेरा शरीर उस दृश्य को यादकर गर्म हो गया था
“फिक्र मत करो ये मौका भी मैं तुम्हे दूंगी,चाहे हो ठाकुर हो या खान …”
काजल किसी ख्वाब में खो रही थी और उसकी आंखों से एक आंसू निकल गए शायद पुराना दर्द था जो बह रहा था..
“लेकिन तुझे भी उसके साथ बहुत मजा आया क्यो??और तुझे वो गिफ्ट भी तो मिल गया “
मैंने बात को बदल दिया ,वो मुस्कुराई लेकिन इस बार उसकी मुस्कुराहट में वो ख़िलापन नही था ,कुछ ठंडा था..
“ह्म्म्म गिफ्ट तो मिल गया है …और मजा भी आया ,लेकिन ठाकुर के कारण नही बल्कि तुम्हारे कारण “
वो मेरे आंखों में घूर रही थी
“तुम देख रहे हो ये ही सोचकर मैं एक बार झड़ गई थी “
“कमीनी कही की “
उसकी बातो को सुनकर मेरा लिंग ही खड़ा हो गया था और मैंने देर नही करते हुए उसे काजल की योनि में डाल दिया,मैं नंगा ही था और काजल भी सिर्फ नाइटी में थी जो की पूरी तरह से पहनी नही गई थी,
उसकी योनि पहले से ही पनियाई हुई थी और मेरे लिंग को आराम से वो अपने अंदर कर गई…
ऐसे तो ये अहसास बहुत ही सुहाना था लेकिन फिर भी आज मैं कुछ सोच में गहराई से डूबा हुआ विचार कर रहा था…
सबसे बड़ा सवाल तो ये था की क्या सच में काजल चाहती है की मैं उसे उस हाल में देखु,या वो बस वक्त की मजबूरी है???
और एक सवाल मेरे मन को खाये जा रहा था ,क्या काजल मुझसे प्यार करती है ,या वो बस ये रिश्ता निभाये जा रही है???
सवाल तो कई थे और जवाब कोई भी नही था,बस कुछ धारणाएं थी,बस कुछ पुरानी याद और बात जिसके सहारे में कुछ समझ या सोच सकू…………….
सेक्स तो खत्म हो गया और हम दोनो ही एक दूसरे की तरफ पीठ करके सोए थे,लेकिन मेरी और काजल की दोनो की ही आंखे खुली हुई थी,दोनो ही कई सवलो से घिरे हुए थे….
“आखिर वो रंडी तुमको देती क्या है ,जो तुम इतने पैसे को ठुकरा रहे हो ,तम्हे लड़की चाहिए मैं वो भी तुम्हें दिला सकती हु “
रश्मि बौखलाई हुई ठाकुर से बोली ..
“जबान सम्हाल कर बात कीजिये मेडम ,आप मेरे कैरेक्टर पर ऐसे कीचड़ नही उछाल सकती “
ठाकुर की बात सुनकर रश्मि का गुस्सा और भी बढ़ गया था ,उसे समझ नही आ रहा था की आखिर ऐसा क्या हो रहा है जो ठाकुर और खान जैसे अय्यास लोग यू काजल की तरफ हो गए है वो भी पूरे दीवानों की तरह …
“तुम कितने दूध के धुले हो ये मैं जानती हु ठाकुर साहब,और काजल के साथ खान के फॉर्म हाउस में क्या क्या रंगरलियां मनाई जा रही है वो भी जानती हु ,आखिर तुम मुझे मेरे ही पति से क्यो नही मिलने देना चाहते जबकि काजल तो कभी भी उससे मिलने पहुच जाती है “
सच में रश्मि का चहरा बौखला गया था साथ ही ऐसा लग रहा था जैसे वो रो डाले लेकिन वो इतनी कमजोर नही दिखना चाहती थी …
“असल में बात ऐसी है की अजीम आपसे खुद ही नही मिलना चाहता ,वो खान से भी नही मिलता ..उसने सख्त हिदायत दे रखी है की उसे बस काजल से ही मिलाया जाए “
रश्मि खुद को रोक नही पाई और उसके आंखों से आंसू के बून्द गिर ही गए …
मैं वही उसके साथ खड़ा हुआ उसे देखता ही रहा ,पहले जब हम यंहा आये तो ठाकुर ने मुझे घूर कर देखा क्योकि वो मुझे पहले काजल के साथ देख चुका था ,पता नही उसे मेरे बारे में पता था या नही लेकिन उसने मुझे या रश्मि को कुछ भी नही कहा था ,उसने रश्मि को अजीम से मिलवाने के लिए साफ साफ माना कर दिया,जबकि रश्मि उसे मुह मांगी कीमत देने को तैयार थी ,काजल उन्हें ऐसा क्या दे रही थी की वो ऐसे ऑफर को भी ठुकरा दे रहे थे ,सिर्फ सेक्स का असर तो नही था ,सेक्स तो उन्हें रश्मि भी दिलवा सकती थी और काजल से ज्यादा खूबसूरत लड़कियों का अंबार उनके सामने लगा सकती थी ,उसने ये आफर भी दे दिया था लेकिन काजल कोई ऐसा प्रलोभन उन्हें दे रही थी जिसके आगे सभी प्रलोभन कम पड़ रहे थे …
रश्मि की हालत देख कर मुझे भी उसपर दया आनी शुरू हो गई थी ,मुझे नही पता था की मेरी बीवी इतनी बड़ी खिलाड़ी निकलेगी की जिनसे सारा शहर डरता है वो उन्हें भी हरा रही थी और रोने पर मजबूर कर दिया था…
मैंने ठाकुर से थोड़े विनम्र स्वर में कहा ..
“सर प्लीज् मेडम को मिलने ना सही लेकिन देखने तो दिया जा सकता है ,”
रश्मि के भीगी हुई आंखों से मेरी ओर देखा ,
“आपलोग समझ क्यो नही रहे हो ,मैं भी मजबूर हु ,अजीम ने साफ साफ मना किया हुआ है “
मैंने रश्मि को बाहर बैठने को कहा,आखिर मैं मैनेजर था सौदे करना मुझे भी आता था..
मैं अकेले में ठाकुर से कुछ बात करना चाहता था ..
“देखिए सर ,मेडम को बस उन्हें देखने दीजिये ,अजीम को तो पता भी नही चलेगा की वो उसे देखकर चली गई है ,और इसके बदले आप को अच्छी खासी कीमत मिल सकती है ,और कुछ चाहिए तो आप मुझसे बेझिझक कहे “
मैंने बहुत ही विनम्र होकर उस आदमी से ये कहा जिसे मैंने अपनी बीवी के साथ गंध मचाते देखा था ,लेकिन क्या करे काम भी ऐसा था मेरा ,और रश्मि के लिए एक सहनुभूति मेरे दिल में आ गई थी …
ठाकुर थोड़ी देर तक कुछ सोचता रहा …
“तुम तो डॉक्टर और काजल के साथ यंहा आये थे ना .डबल गेम तो नही खेल रहे हो ..”
मैंने अपने होठो पर उंगली रखते हुए उसे चुप रहने का इशारा किया ,और हल्की मुसकान के साथ उसकी ओर मुखतलिब हुआ ..
“बा खुदाय सर जी ,मैं तो सीधा साधा इंसान हु ,मुझे नही पता की ये सब क्या चल रहा है,लेकिन मुझे मेडम का दर्द नही देखा जाता ,बस इतना कर दीजिये ,…और मैं तो दोनो ही तरफ का हु लेकिन खेल मैं किसी भी तरफ से नही रहा “
वो थोड़ी देर तक मुझे घूरता रहा फिर उसके होठो में एक शरारती सी मुस्कान आ गई ..
“ठिक है लेकिन तेरी मेडम मुझे देगी क्या ??”
उसने अपने मुठ्ठी बांध कर सेक्स करने के इशारे से कहा ,मैं मजबूरन हंसा ,असल में मुझे तो उस समय ऐसा लगा जैसे साले का गाला ही घोट दु लेकिन क्या करू ,इसकी ट्रेनिग ली थी मैंने की कैसे गुस्सा आने पर भी मुस्कुराया जाता है ..
“वो बड़े घर की लड़की है सर उससे ऐसा पूछा तो आप भी जानते हो की क्या होगा ,लेकिन मैं आपको एक से एक लडकिय दिला सकता हु ,कालेज की ,या शादीशुदा आप जैसा बोले “
वो कमीनी मुस्कान अपने चहरे में लाया …
“ठीक है ,फिलहाल तो **** पैसे पहुचा देना ,लड़कियों का बाद में बताऊंगा ,अपना नंबर दे दो और अजीम को बस देखने ही दूंगा मिलवा नही सकता ,पता नही ये तुम्हारी मेडम क्या कर जाए ,और साथ ही तुम तो समझते ही होंगे की काजल को इसका पता नही चलना चाहिए …”
उसकी बात से मैंने एक गहरी सांस ली ,मुझे भी थोड़ा सुकून हुआ …
*****
अजीम की हालत देखकर रश्मि रो ही पड़ी थी ,वो 6 फुट 2 इंच का जवान और गबरू सा दिखने वाला मर्द अभी किसी कंकाल के ढांचे की तरह सुख गया था ,गाल चिपक गए थे और बहुत ही कमजोर दिख रहा था,उसकी दाढ़ी बढ़ गई थी और आंखे जैसे बाहर को निकल गई थी,चहरे पर कोई तेज नही था ,लग रहा था की वो बहुत ही ज्यादा नशा कर रहा है लेकिन खा कुछ भी नही रहा ,मुझे काजल की बात याद आयी की वो उसे तड़फ़ा तड़फा कर मारेगी,वो उसके पास ड्रग्स भिजवाती थी और उसे अपने काबू में ऐसे कर रखा था जिससे अजीम उसपर पूरी तरह से निर्भर हो गया था …
रश्मि उसके पास जाकर उससे बात करना चाहती थी लेकिन मैंने उसे रोक लिया ..
“नही रश्मि अगर उसे पता चला तो गड़बड़ हो जाएगी ,,,उसे सोने दो..हम बाहर जाकर कुछ सोचते है “
रश्मि और मैं बाहर आये ,मैं अभी गाड़ी चला रहा था जबकि रश्मि मेरे बाजू में बैठी हुई थी और अपना सर मेरे कंधे पर रखी कुछ गहरी सोच में डूबी हुई थी …
“कितना अंतर है तुम दोनो में …”
वो गहरी सांस लेकर बोलने लगी
“किसमे ??”
मैं उसकी बात को समझ नही पाया था ..
“तुझमे और तुम्हारी पत्नी में …”
मैं हड़बड़ाया ,मुझे पता था की रश्मि जानती है की काजल मेरी पत्नी है लेकिन अभी तक मेरे ही सामने उसने कुछ नही कहा था लेकिन पता नही आज क्या हुआ की वो मेरे सामने ही मेरी पत्नी का जिक्र कर रही थी …
उसने मुझे देखा मेरा चहरा हैरत से भरा हुआ था …
वो हल्के से मुस्कुराई और फिर से मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया
“मुझे पता है देव की काजल तुम्हारी पत्नी है ,हमेशा से पता था अजीम को भी पता है ,लेकिन तुम दोनो ही अपने काम में इतने माहिर और हुनरमंद हो की हमने कभी तुम दोनो के रिलेशन को लेकर कोई बात नही की ,जबकि हम दोनो बिजनेस में एक दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे है ,और आज मुझे लगता है की हम सही थे…..”
वो थोड़ी देर तक रुक कर फिर से बोलने लगी..
“पता नही तुम्हे पता भी है या नही की काजल क्या कर रही है लेकिन सच पुछू देव तो मैं उससे परेशान हो गई हु ,अब मुझे लगता है की मैं हार गई हु …क्या तुम्हे नही लगता की तुम भी हार गए हो …तुम्हारी बीवी ना जाने क्या क्या कर रही है और तुम्हे पता भी नही …इतना सीधापन भी किस काम का देव “
मैं अब भी चुप ही था …
“देव वो तुम्हे धोखा दे रही है ,धोखा खाना क्या होता है ये मुझसे पूछो ,तुम्हारे दिल में कभी ये बात नही आती ,या तुम उसे जानबूझकर ही जानना नही चाहते …”
उसने मुझे ऐसा प्रश्न किया था जिसका जवाब मुझे समझ नही आ रहा था ..
“मेरे लिए बस मेरी बीवी नही है रश्मि मुझे मेरी बहनों को भी देखना है …पता नही की काजल क्या कर रही है लेकिन इतना जरूर है की अगर मैं इन सबमे पड़ा तो शायद मेरी बहनों पर इसका प्रभाव गलत पड़ सकता है..”
मैंने अपनी परेशानी उसे बता दी …
वो चुप ही थी ……..
“मैं कर भी क्या सकता हु …??”
मेरी बात पर रश्मि थोड़ी सतर्क हुई …
“बहुत कुछ …अगर तुम मेरा साथ दो तो …”
उसने मेरे हाथो पर अपना हाथ रख दिया था ……….
गहरी खामोशी और गहरे सोच में हम दोनो ही गुम थे और रश्मि के कमरे में बैठे हुए थे,
“मैं जानता हु रश्मि की काजल क्या कर रही है “
मैंने बहुत सोच कर कहा था ,रश्मि ने सर उठाकर मुझे देखा ,उसका उदास चहरा अचानक से कोई नूर छोड़ गया था,
“लेकिन मुझे ये नही पता की वो चाहती क्या है ,मैं भी इंसान हु ,मेरी भी कुछ भावनाएं है,जैसे मैं उसके लिए मर ही गया हु ,कई दिनों से हमारे बीच कोई बातचीत ही नही रही है ,लेकिन मैं इतना तो जरूर जानता हु वो मुझे धोखा दे रही है …”
रश्मि का चहरा खिल गया,मैं झूट बोल रहा की काजल और मेरे बीच में कोई भी बातचीत नही हो रही है लेकिन मैं रश्मि पर पूरी तरह से विस्वास भी तो नही कर सकता था …..
“तुम मुझे बताओ की मुझे क्या करना चाहिए,मैं तंग आ चुका हु मैं एक आराम की जिंदगी बसर करना चाहता हु ,मुझे इन झमेलो से निकलना है …”
रश्मि ने मेरे आंखों में देखा उसमें एक चमक दिखाई दी..
“तुम क्या चाहती हो और अगर तुम्हे काजल को रोकना है तो क्यो “
मैंने रश्मि के ऊपर एक प्रश्न दागा …
“पहले तो मुझे खान साहब के प्रोपर्टी में अपने हिस्से की चिंता थी लेकिन अब …अब तो मुझे बस अजीम की चिंता हो रही है ,अगर उसे बाहर नही निकाला तो वो मर जाएगा “
वो जोरो से रोने लगी थी
मैं उसके पास जाकर उसके कंधे पर अपना हाथ रखा
“जिस आदमी ने तुम्हे इतना सताया तुम उसके लिए क्यो परेशान हो रही हो “
वो सर उठाकर मुझे देखने लगी …
“क्योकि मैं उसे प्यार करती हु ,वो मेरा पति था …देव एक लड़की के दिल की बात तुम नही समझ पाओगे,कई मजबूरियां होती है लेकिन कुछ भी हो मैंने उससे ही तो प्यार किया था …”
मैं इसी सोच में पड़ गया की हो सकता है की काजल की भी कुछ मजबूरियां हो लेकिन वो मुझसे भी प्यार करती हो …
“मेरे दिमाग में एक प्लान है क्या तुम मुझपर भरोसा कर सकती हो “
मैंने झट से कहा
वो मानो खुस हो गई
“मुझे तुम्हारे ऊपर पूरा भरोसा है देव तुम कहो तो सही..”
मुझे अब अपना मैनेजर वाला दिमाग लगाना था ..
“तुम्हे क्या लगता है की अजीम इतना कमजोर क्यो हो रहा है “
वो आश्चर्य से मुझे देखने लगी
“क्या वो ड्रग्स लेता है ???”
“बहुत ज्यादा लेता था लेकिन अभी उसे ड्रग्स …”
वो कहते कहते रुक गई
“वाओ देव कमाल है ,हा समझ गई ठाकुर और काजल मिलकर उसे ड्रग्स दे रहे है …ओह माय गॉड इसलिए वो काजल का ऐसा दीवाना बना घूम रहा है “
रश्मि की आंखों की चमक और भी बढ़ गई ,मेरे दिमाग में कई खुरापात एक साथ चलने लगी थी ..
“अब हमे क्या करना चाहिए “
रश्मि ने बड़े ही जल्दबाजी में मुझसे पूछा..
“पहले तो पता करो क्या तूम अपने कांटेक्टस के बारे में मुझे बता सकती हो ..”
वो थोड़ी देर सोचती रही ,इतने अचानक मुझपर वो इतना विस्वास कैसे कर सकती थी ..
लेकिन फिर उसने थोड़े हिम्मत भरे स्वर में कहा
“हा बिल्कुल “
“तो जेल में अपना आदमी कौन है “
“फिलहाल तो कोई भी नही “
“तो बिठाओ या खरीदो किसी को “
वो मुझे देखने लगी
“हो सके तो ऐसा सिपाही जो बिल्कुल ही आम हो ,थोड़े पैसे में ही जिसे खरीदा जा सके “
उसने अपना सर हा में हिलाया
“और खान के पास हमारा कोई आदमी “
“हा है तुम जानते हो उसे मोहनी “
मोहनी का नाम सुनकर मैं जोरो से हँस पड़ा
“वो किसी काम की नही है ,वो बस एक ही काम के लिए ठीक है “
मैं फिर से हँस पड़ा और रश्मि ने मुझे थोड़ी नाराजगी से देखा
“एक आदमी बैठना पड़ेगा ,मेरी नजर में है एक लड़का “
वो शांत ही रही
“तुम्हे जो भी करना है करो तुम्हे जितना पैसा चाहिए मैं तुम्हे दूंगी लेकिन …लेकिन अजीम को उस काजल से बचाओ मेरे पास बहुत है और मुझे अब उनकी दौलत नही चाहिए,अजीम और खान साहब को तो अपने कर्मो की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी लेकिन मैं अपने पत्नी धर्म का तो पालन कर ही सकती हु ,एक बार उन्हें इस दलदल से निकाल दु बस ,फिर कभी उसने नही मिलूंगी “
रश्मि के चहरे में सच में दर्द टपक रहा था ..
पता नही क्यो मेरी सहानुभूति उसकी ओर बढ़ रही थी ,जैसा मैंने अभी तक उसके बारे में सोचा था वो उससे बिल्कुल ही अलग निकली थी ,वो एक बड़े बाप की बिगड़ी हुई औलाद तो थी लेकिन वक्त ने उसे बहुत कुछ सिखाया था,उसके दिल में आज भी अजीम के लिए गुस्सा था लेकिन फिर भी वो उसे अपना पति ही मानती थी ,मैं तो उसे चालबाज समझता था लेकिन वो बस उतना ही उड़ सकती थी जितना पैसे के दम में एक इंसान उड़ता है,काजल ने उसे असहाय बना दिया था क्योकि काजल के सामने उसके पैसो की बिल्कुल भी नही चल पा रही थी …
“एक अंतिम बात ..काजल के पास ऐसा कोई है जो उसकी खबर तुम तक पहुचाये “
“हा है ना …शबनम ..”
उसकी बात सुनकर मेरे होठो की मुस्कान गहरी हो गई ,तो शबनम भी मेरी ही तरह दोनो तरफ से खेल रही थी ,
कमरे के बड़े से बिस्तर में मैं शबनम के पहलू में लेटा हुआ था ,रश्मि ने आज मुझे शबनम से नए तरीके से मिलवाया था,
हम दोनो को ही ये पता था की हम किसका साथ दे रहे है,मैं उसे उसी कमरे में ले आया जंहा हम अधिकतर ही मिला करते थे,मैं अभी उसके गोद में सोया था और वो मेरे बालो पर अपनी उंगलियां फेर रही थी ,
उसकी गोद में मुझे एक अलग सा सुकून और शांति का अहसास होता है ,ऐसा लगता है जैसे वो ही मेरी सबसे अच्छी दोस्त है मेरा सहारा है…
“आखिर तुमने भी रश्मि के साथ हाथ मिला लिया “
वो मुस्कुराती हुई बोली
“क्या करू कुछ तो करना ही होगा ,काजल क्या करती है मुझे तो आजतक समझ ही नही आया “
“क्या करती है या क्यो करती है क्या जानने के लिए रश्मि के साथ आये हो”
“दोनो ही चीजे आखिर वो ऐसी क्यो हो गई है…”
शबनम थोड़ी देर तक खामोश ही रही
“उसने तुम्हे नही बतलाया ??”
“बतलाया था अपनी कहानी उसने भी बतलाई थी लेकिन …”
“लेकिन क्या ??”
“यकीन नही होता ..”
“क्यो ??”
“क्योकि मैंने किसी से एक दूसरी ही कहानी सुन रखी है “
शबनम का हाथ अचानक ही रुक गया
“कौन सी कहानी “
“श्रुति की कहानी “
उसके चहरे में हल्की सी मुस्कान उभर कर आ गई
“तो तुम केशरगढ़ में बहुत खोज बिन करके आ गए …किसने सुनाई कहानी डॉ. चुतिया ने या मलीना मेडम ने “
मैं चौका ..
“तुम इन्हें कैसे जानती हो “
“क्योकि वो कहानी सच है और काजल मुझसे कुछ भी नही छुपाती “
मैं अब उठ बैठा था…
“तो काजल ने मुझे झूट कहा था “
मैं उसे घूरने लगा
“नही काजल ने भी सच ही कहा “
मैं बड़े ही असमंजस में पड़ गया था
“मतलब एक ही कहानी सच हो सकती है दोनो कैसे “
वो मुस्कुराई
“इसके लिए तुम्हे अतीत में झकना होगा देव …काजल ने मुझे मना किया था की उसके अतीत के बारे में कुछ भी तुम्हे नही बताऊँ लेकिन मुझे लगता है की अब वो समय आ चुका है जब तुम्हे ये जानने का हक है,वरना तुम उससे सिर्फ नफरत ही करते रहोगे …”
शबनम के आंखों से एक आंसू गिर गया ..
मैंने उसका हाथ थाम लिया था ..
उसने कहना शुरू कीया
“बात तब की है जब केशरागड के करीब शहर में होटल आदित्य की मालकिन काजल हुआ करती थी ,काजल की एक और सहेली थी जिसका नाम था नेहा ,काजल के पति का नाम विकास था जो की एक आईएएस ऑफिसर थे ,विकास की एक और बीवी थी जिनसे तुम मिले थे ,मलीना ,उनसे उन्हें एक लड़की थी जिसका नाम रखा गया श्रुति …
“
मैं ध्यान से उसकी बातो को सुन रहा था…
“काजल की दोस्त नेहा का पति रॉकी था जो की आदित्य इंटरनेशनल का मैनेजर हुआ करता था ,उन दोनो की एक बेटी थी जो की श्रुति की हम उम्र ही थी ,नेहा और काजल का प्यार बहनों की तरह था शायद उससे भी ज्यादा इसलिए नेहा ने अपनी बेटी का नाम भी उसके नाम पर काजल ही रखा …वही हमारी काजल है देव ….”
उसकी आंखों से आंसू झलक आये थे ,
मैंने उसके गालो पर हाथ फेरा ..
“तो नेहा काजल की मां थी ,तो डॉ ने मुझे मलीना के सामने श्रुति का पति क्यो कहा ???”
मैंने सवाल किया ..
“क्योकि भगवान को कुछ और ही मंजूर था ,काजल और श्रुति ना सिर्फ हम उम्र थे बल्कि उनमे बहुत ज्यादा प्यार भी था,जैसे नेहा और काजल में हुआ करता था ,तभी विकास का ट्रांसफर दिल्ली हो गया ,उसे केंद्र सरकार में काम करने के लिए बुला लिया गया ,काजल भी होटल के काम से तंग आकर उसे बेचने की सोच ली आधा शेयर अपनी बहन की तरह प्यारी दोस्त नेहा के नाम कर दिया और आधा खरीदा खान ने …
फिर काजल विकास के साथ दिल्ली चली गई ,
वक्त ने करवट बदली खान का दिल नेहा पर आया हुआ था ,लेकिन वो कुछ कर नही पा रहा था जबतक की उसे इन सबकी असलियत पता नही चल गई …
नेहा का पति रॉकी पहले काजल का बॉयफ्रेंड हुआ करता था और तब भी उसे काजल से मोहोब्बत थी लेकिन जब काजल और विकास के बीच सब सही हो गया उसने नेहा से शादी कर ली ,वही नेहा हमेशा ही विकास से प्यार किए करती थी पहले उनका शारीरिक संबंध भी रह चुका था ,उसने रॉकी को बतलाया नही था की असल में काजल(नई वाली ) भी विकास के बीज से ही जन्मी थी ,ये बात नेहा ने ना सिर्फ रॉकी से बल्कि काजल और विकास से भी छुपाई थी ,लेकिन खान को जब उन सब के पुराने रिलेशन के बारे में पता चला तो उसने रॉकी के कान भरने शुरू किये ,और रॉकी को ब्लड टेस्ट से ये पता चल गया की जिसे वो अपनी बेटी मानता था असल में वो विकास की बेटी थी ,खान ने उसे चुप रहने के लिया कहा और पहले उसे नेहा से होटल के आधे शेयर हासिल करने की स्किम बनाई ..
रॉकी बदले की आग में जल रहा था ,उसे हमेशा लगता था की काजल नेहा और विकास ने मिलकर उसे चुतिया ही बनाया है,वो पहलवानों की तरह ताकतवर था लेकिन खुद का दिमाग चलाने में उतना महिर नही था जितना की खान ,खान को भी दौलत और नेहा का जिस्म चाहिए था,उसने इंस्पेक्टर ठाकुर को अपने साथ मिला लिया,उसे ये भी पता था की इन सबके बीच विकास जो की एक आईएएस है उससे जितना मुश्किल होगा ,इसलिए उसने उसे भी अपने रास्ते से हटाने की सोच ली ,इन सबमे सिर्फ मलीना ही उनके लिए कोई खतरा पैदा नही कर सकती थी इसलिए उसपर हाथ लगाना उन्होंने ठीक नही समझा …
वो काली रात थी जब काजल(नई) के गले में चाकू रखकर रॉकी और खान ने नेहा से शेयर रॉकी के नाम पर करवा लिए ,उसके बाद बेटी के सामने ही ठाकुर रॉकी और खान ने नेहा का बलात्कार किया ,इन सबके बाद उसको जिंदा छोड़ना मुश्किल था ,उन्होंने दोनो मा बेटी को बांधकर घर समेत जला दिया ……..”
मैं सुन्न रह गया था ,…और शबनम की आंखों से आंसू अनवरत गिरे जा रहा था …
“रॉकी ने विकास से बदला लेने के लिए विकास की दूसरी बेटी श्रुति को भी किडनैप कर लिया ,और वँहा से भाग गया ,ये सभी बाते जब बाहर आयी तो इंस्पेक्टर ठाकुर ने खान को साफ साफ इन सबसे अलग कर दिया और पूरा दोषी रॉकी को बना दिया जो की आज तक फरार है,इन घटना सुनकर विकास और काजल दिल्ली से वापस आये लेकिन रास्ते में उनके गाड़ी का एक्सीडेंट करवा दिया गया ,आगजनी में काजल(नई) निकल गईं थी ,जिसका पता सिर्फ डॉ चुतिया को था,लेकिन उन्होंने उसे पुलिस के सामने ना ले जाने का फैसला किया ,एक्सीडेंट में विकास और काजल गंभीर हो चुके थे ,काजल जब अति गंभीर अवस्था में थी तो उसने अपने जान से प्यारी सहेली के बेटी काजल से मुलाकात की ,जिसे डॉ सबकी नजर से बचा कर उसके पास ले आया था ,उसने काजल के कानो में बस एक बात कही थी ..’अपने मा के कातिलों को तड़फ़ा तदफ़ा कर मारना,उन्हें आसान मौत नही आनी चाहिए ,तोड़ देना उनका दम, गुरुर,जिस्म सब कुछ छीन लेना उनसे जो उन्हें प्यारे हो ,ऐसी स्तिथि में ला देना की वो मौत चाहे लेकिन मर नही पाए , ‘….काजल ने वो बात सीने में बसा लीया…और आज वो अपने बदले के बहुत करीब है …”
मैं सन्न रह गया था लेकिन काजल ने मुझे थोड़ी अलग कहानी सुनाई थी ,शायद वो मुझे कुछ चीजे नही बतलाना चाहती थी ..
“डॉ चुतिया ने काजल की परवरिश की जिम्मेदारी अपने ही एक आदमी को दे दी जिनकी पत्नी का इंतकाल हो चुका था और एक बेटा भी था,जिसे आज तुम काजल के पिता और भाई के रूप में जानते हो,उसे मलीना से मा का प्यार मिला मलीना उसमे ही अपनी खोई हुई बेटी श्रुति को देखती है और उसे ही श्रुति कहा करती है ,जब काजल थोड़ी बड़ी हो गई तो सब उसे श्रुति ही कहा करते थे ,सबको यही लगता था की मलीना ने उसे गोद लिया हुआ है ,क्योकि काजल कभी पहले केशरागड में नही रही थी बल्कि उसकी परवरिश शहर में होटल आदित्य में हुई थी इसलिए केशरगढ़ के लोग उसे कम ही पहचानते थे,इसका फायदा उसे हुआ ,वो हमेशा ही डॉ और मलीना के संरक्षण में रही ,लेकिन वो अपनी उस आग को बुझा नही पाई ना ही उसने कभी काजल मेडम की बात को ही भुलाया ,उसकी बदकिस्मती की उसे कालेज के दौरान तुमसे प्यार हो गया और तुम्हारी बदकिस्मती की तुम्हे वो सब पता चल गया जो तुम्हे नही पता चलना था,काजल तुम्हे नही छोड़ सकती,
लेकिन वो इस मकसद को भी नही छोड़ सकती जिसके कारण ही वो जी रही है …इसलिए वो ये कोशिस करती है की तुम उसके साथ आ जाओ चाहे,”
वो इतना बोल कर थोड़ी मुस्करा पड़ी मैं समझ रहा था की वो क्यो मुस्कुरा रही थी ,वो भी जानती थी की आजकल काजल मुझे क्या बनाने की कोशिस कर रही है ,लेकिन मैं अब उसकी मजबूरी को समझ सकता था …
“उसका ये सब करना जायज है शबनम लेकिन …रॉकी का क्या हुआ क्या वो मिला ??”
शबनम ने एक गहरी सांस ली
“वो वँहा से भागने के बाद एक अमीर विधवा को फंसा कर उससे शादी कर ली,जिसकी एक बेटी भी थी ,आजकल रॉकी को लोग कपूर साहब के नाम से जानते है “
मैं बुरी तरह से बौखला गया था ,
“कपूर साहब “मेरी मुठ्ठी बंद होने लगी मैं गुस्से में जल रहा था .,उसने मुझे शांत कराया..
“वक्त आने पर सही वार करना है हमे देव अभी से गुस्सा होने से कुछ नही होगा “
मैं शांत हुआ
“लेकिन शबनम आखिर श्रुति का क्या हुआ ,क्या वो मिली “
शबनम हँस पड़ी
“हा डॉ ने उसे खोज निकाला इसके लिए उनको रॉकी से फिर से दोस्ती भी करनी पड़ी ,लेकिन आजतक उन्होंने उसे सबसे छुपा कर रखा है…रॉकी ने विकास से बदला लेने के लिए उसे एक कोठे में बेच दिया ,लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी वो बहुत ही खूबसूरत थी तो एक पुराने नवाब ने उसे खरीद कर अपने घर में रख लिया ,वो उनकी सेविका बनकर रहने लगी ,वंही उसे नया नाम दिया गया और साथ ही नया काम भी और साथ ही उसकी शादी एक लड़के से भी करा दी गई “
मैं उसे आश्चर्य से देखा
“तुम इतना कैसे जानती हो”
वो मुस्कुराई ,इस बार उसके होठो की मुस्कान और भी गहरी थी
“क्योकि मैं ही श्रुति हु देव ……”
मैं बस उसके चहरे को देखता रहा उसकी आंखों में मेरे लिए बस प्यार था उसकी हर बात में सच्चाई थी ,अब मुझे समझ आ रहा था की आखिर शबनम और काजल की दोस्ती इतनी गहरी क्यो है ,वो दोनो ही बहने है और उससे भी ज्यादा है …………
शबनम की आँखो में आंसू था और होठो में मुस्कुराहट,ये वो पल होता है जब कोई खुसी में नही आनन्द में हो ,दिल खुशी होठो में चमक रही थी और आंखो से मोती बनकर टपक रही थी,नयनो के अंदर बस प्यार ही प्यार दिखाई दे रहा था,उसका हाथ मेरे सर को सहला रहा था और मैं उसकी गोद में अपना सर टिकाए हुए किसी स्वर्ग की सैर में था,
“शबनम क्या तुम भी मुझसे प्यार करती हो ..”
मैं उसके गोद में कुछ और ही धंस गया था
शायद उसके होठो की मुसकान और भी चौड़ी हो गई हो,
“कोई शक है क्या ???”
“लेकिन मैं तो तुम्हारी बहन का पति हु “
“तो …”
“तो क्या तुम्हे पता नही क्या की मैं क्या कहना चाहता हु ..”
“शायद ये हमारे खून में ही है देव…मेरी और काजल की माए भी तो एक ही लड़के के प्यार में थी जो की उनका पति नही था…”
वो खुलकर हँस पड़ी ,मैंने अपना चहरा ऊपर कर उसकी ओर देखा आज वो कुछ और ही छटा बिखेर रही थी ,चहरा दमक रहा था,उज्जवल काया में कोई दाग ही नही था,आज मैंने उसके त्वचा के उस रंग को गौर किया वो सच में मलीना के गुणों से भरी हुई थी लेकिन थोड़ी यूरोपियन थोड़ी भारतीय,वक्त ने उसके भारतीय गुणों को ज्यादा उजागर किया था,वो शर्माती हंसती हो लाल हो जाया करती थी ,मानो खून उतर आया हो,गोल गोल गालो और भरे हुए जिस्म के कारण वो बहुत मस्तानी लगा करती थी लेकिन आज उसकी मासूमियत भी उसके चहरे से टपक रही थी,उसके कमीज से छलकते हुए उसके दो उजोर अपने पूरे सबाब में मुझे उसका चहरा देखने से रोकते थे,और उसके जांघो में भरा हुआ मुलायम मांस आज मेरा तकिया था ..
उसके हँसने पर एक पंक्ति में जमे हुए उसके चमकदार दांत और किसी ताजा सेब से लाल चमकदार मसूड़े मेरे दिल की गहराइयों में बस गए थे…
मेरी नजर बस उसपर जम ही गई ,वो इससे शर्मा सी गई थी ,
उसके गुलाबी लेकिन भरे हुए होठ ऐसे फड़कने लगे थे जैसे जैसे किसी जाम से मदिरा छलक रही हो ..
मुझसे और सब्र नही हो पाया मैं उठा और उसके होठो के सबाब को अपने होठो में भर ही लिया ,वो दोहरी हुई लेटती गई और आखिर में उसका जिस्म मेरे बांहो में था ,वो चंचल सी शोख हसीना आज किसी समर्पण की देवी सी मेरे बांहो में कैद थी …
मेरा शरीर उसके शरीर के ऊपर था और हमारे होठो एक दूजे के होठो पर शिद्दत से छाए हुए थे,कोई बेताबी कोई बेचैनी कोई भी जल्दबाजी दिल में नही थी ,एक सुकून था उसके इन मय के प्यालों में जिसे मैं शिद्दत से पीना चाहता था ,पूरी तरह से पूरी तृप्ति होने तक ,,…
वो अपना हाथ मेरे बालो में फंसा कर मेरा साथ दे रही थी ,ऐसा लगा जैसे आज मैं किसी और ही शबनम के साथ था ,वो शबनम जो मुझे प्यार करती है ,
और ये प्यार जिस्मनी नही था ,ऐसा लगा जैसे उसके रूह से आती हुई कोई प्यार की लहरे मेरे मन के किसी कोने को भिगो रही थी ,
वो एक अजीब सा सुख दे रही थी ,हर अहसास में वो जिंदा सी लगी ,किसी भी तरह का दिखावा और मुर्दापन नही था,मैं तो बस डूब ही जाना चाहता था और मैं डूब ही गया,ना जाने कितने देर तक हम बस एक दूजे के ही होठो को पीते रहे ,
ना जाने कब हमारी आंखों ने पानी छोड़ दिया,ये भावनाओ का शैलाब सा आ गया था जिसे हम दोनो ही रोकना नही चाहते थे और रोके भी क्यो…
उसके जिस्म की गर्मी और नरमी ने मुझमें हवस की कोई आग नही जलाई थी ,मेरा हाथ उसके पुष्ट जांघो को सहला रहा था लेकिन अभी भी हम बस उसी अज्ञात दरिया में डूबे हुए थे जिसमे से बाहर निकल पाना मुश्किल हो रहा था,उसने मुझे कस रखा था और मैं उसके मखमली जिस्म में हाथ फेर रहा था,
पता नही क्यो ऐसा लगा की अब हमारे जिस्म के बीच कपड़ो की दूरियां भी नही होनी चाहिए,मैंने ही पहल की और उसने साथ दिया ,हम कब नंगे हुए हमे पता ही नही था,
दोनो का बदन तप रहा था,सांसे तेज थी और मेरे लिंग में भी कसावट थी लेकिन दुविधा ,और उतावलापन अब भी नही था ,ना ही मैंने उसके अंदर जाने के लिए कोई मेहनत की ना ही उसने मुझे अपने अंदर लेने के लिए कुछ किया ,
हमारा जिस्म बस एक दूसरे में रगड़ खा रहा था और थोड़ी भी दूरी बेहद ज्यादा लग रही थी ,यू ही उसके होठो गालो को चूमता जा रहा था,वो भी कभी मेरे ऊपर आ कर मेरे शरीर को चूमती थी ,उसके बाल फैल गए थे और वो साक्षात काम की देवी का रूप लग रही थी,मोहक इतनी की आंखे जो जम गई तो फिर नजर किनारे ही नही हो पा रही थी,फैले हुए काले लंबे बाल और गोरे जिस्म में हल्की हल्की पसीने की बूंदे,नंगा जिस्म चमक रहा था और पसीने से थोड़ा भीग कर नरमी का अहसास दे रहा था ,वो मेरे कमर में बैठी थी और उसके गद्देदार कूल्हे का नरम अहसास मैं अपने लिंग पर कर पा रहा था ,
फिर भी कोई उतावला पन नही था..
बस उसके रूप को मोहित होकर देखे जा रहा था,वो झुकी और फिर से हमारे होठ एक दूजे में मिल गए ,कहने को कोई बात नही रह गई थी था तो बस अहसास …
गीले योनि में कब मेरा लिंग फिसल गया इसकी भनक भी नही लगी ,थोड़ी रगड़ होने लगी और रगड़ से उठाने वाले सुखद अहसास ने हमे घेर लिया लेकिन फिर भी दिल में सुकून की एक गहरी छाया थी जो हट नही पाई,लिंग और योनि के संगम ने भी हमारे मन को विचलित नही किया था ,बस एक दूसरे का हो जाने के अहसास में हम डूबे हुए थे ,ना जाने कितनी देर ना जाने कितने घंटे…
बस यू ही रहे ….
