रंडी खाना 3

बहन

मैं बड़ी मुश्किल से डॉक्टर से बोल पाता हु,
“वो चाहती क्या हैं, “
मैं झुंझलाया था …..
“वह चाहती क्या है यह तो शायद वही बता पाएगी ,लेकिन एक चीज मैं तुम्हें बता देना चाहता हूं की बदले की आग व्यक्ति से कुछ भी करा सकती है.. चाहे वह कितना ही कमजोर क्यों ना”
हो डॉक्टर की बात मेरी समझ में आ रही थी लेकिन फिर भी मैं असमंजस की स्थिति में था आखिर काजल इतना परेशान क्यो थी ?
क्या मेरा कोई वजूद नहीं था शायद उसके लिए….शायद नही वो मुझसे प्यार करती है , वह मेरे लिए बहुत मायने रखती थी रखती है और रखती रहेगी, मेरे सामने काजल का अतीत घूम रहा था उसके बचपन की यादें रह रहकर मुझे सता रही थी न जाने कितने दुख उसने झेले थे जिसके बारे में वह बात नहीं करती ..शायद उसने कभी मुझसे यह नहीं चाहा कि मैं उसका साथ दु या शायद वो जानती थी कि मैं उसका साथ नहीं दे सकता, बात इतनी आसान तो नहीं थी जितना मैं समझ रहा था उसने कई दुख देखे हैं जो मेरी समझ से परे हैं, काजल मेरी अपनी काजल मैं उसे कैसे किसी सीमाओं में बांध पाऊंगा वो हर सीमाओं से परे है ,उस पानी की तरह जो बस बहती जाती है,वह उस सावन की तरह है जो कब आएगी इसका अंदेशा किसी को नहीं , मैं दर्पण में खड़ा अपने अक्स को निहार रहा था ,परछाई… वह तस्वीरें… वह हल्की हवा की खुशबू ,महक का जादू अतीत की कही अनकही कहानियां थी जो मुझे जानने थी, मैं परेशान था व्याकुल था मेरा दिल गवाही नहीं दे रहा था कि वह गलत है और वही हुआ मुझे जितना भी अब तक पता चला मुझे यही समझ आया कि काजल गलत नहीं थी ना वह है और शायद वह नहीं होगी उसके साथ जो बीती थी वह एक दर्दनाक घटना थी शायद उसका रोग उसके जीवन में आज भी कायम था, मैं अपनी पलकें गड़ाए डॉक्टर को निहार रहा था डॉक्टर भी मुझे घूर कर देख रहा था,, जैसे जानना चाहता हो कि मेरे दिल में क्या चल रहा है…
आखिर उसने कहा
“ मैंने जो भी तुम्हें बताया है कभी इसका जिक्र काजल से मत करना न जाने उसके लिए कितनी बड़ी बात होगी वह हर चीज तुमसे छुपाना चाहती है, क्योंकि उसे पता है तुम्हें बताने से सिर्फ उसका दुख बढ़ेगा, उसे खुशी देना हो सके तो उस का साथ देना मैं जानता हूं कि तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल होगा लेकिन मैं जानता हूं कि तुम यह कर सकते हो…”
डॉक्टर वहां से उठ कर चला गया और मैं बस एक तक दिवाल को घूरता रहा…
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घूमते-घूमते ना जाने मैं कहा जा रहा था, मैं उन जगहों में घूम रहा था जहां काजल की पूरी जिंदगी थी ,लेकिन उसने कितने राज अपने सीने में छुपाए हुए थे वह 2 साल पहले ही तो यहां आई थी लेकिन मुझे कभी पता नही चल पाया …
मैं उस होटल में पहुंचा जहां से इन सब की शुरुआत हुई थी नाम था आदित्य इंटरनेशनल
मैं बस निहारे जा रहा था वह एक शानदार होटल था…
वह वापस अपनी बहनों के साथ आया और लजीज खाने का लुफ्त उठा रहा था आसपास नजर दौड़ाई कुछ खास नहीं कुछ ऐसा नहीं जिससे मुझे संदेह हो..
“भइया खाना तो बहुत अच्छा है” निशा ने कहा
“ हां” मैंने जवाब दिया…
अचानक ही मैं बहुत गुस्से में आ गया
“यह सब क्या है” मैंने जोरों से कहा वहां पर बेटर तुरंत उपस्थित हुआ.
“ क्या हुआ सर”
“ यह क्या है”
मैंने प्लेट में पड़े हुए एक काक्रोच की तरफ इशारा किया ,वह बुरी तरह चौका
“ सर सर यह कहां से आया”
मैंने उसे घूरकर देखा,
“ यह खाना तुमने ही लाया था ना “
वह चकित हुआ
“ जी जी सर,पता नहीं सर यह कैसे हुआ”
लेकिन मैं क्रोधित था मैंने उसकी एक न सुनी
“अपने मैनेजर को बुलाओ “ मैं फिर जोर से बोला, वह डरता हुआ भागा थोड़ी देर में होटल का मैनेजर मेरे सामने था, वह मुझसे माफी मांग रहा था लेकिन मैंने एक तमाशा खड़ा कर दिया..
आखिरकार थक कर उन्होंने कुछ फोन किए,और मेरे होठो में मुस्कान खिल गई …
कुछ ही देर में वहां एक लंबा चौड़ा सा व्यक्ति आकर खड़ा हुआ और बड़ी नम्रता से मुझसे कहा
“सर जो भी हुआ उसके लिए हमें माफ कर दीजिए मैं इस होटल का मालिक हूं आपका खाना फ्री है और आशा करता हूं कि यह बात यहां से बाहर नहीं जाएगी “
मैंने उस व्यक्ति को घूरा और उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया जैसे वह समझ गया हो कि मैं मान गया हूं..
“ हेलो सर मेरा नाम अयूब खान है मैं इस होटल का मालिक हूं” मैंने अपना हाथ बढ़ाया वह कुछ 25 साल का शख्स था, दिखने में बहुत ही स्मार्ट और हैंडसम लग रहा था आयूब मैंने मन ही मन दोहराया अच्छा तो यह अजीम का भाई है, मेरे चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई…
आयूब को देख पूर्वी के चेहरे पर एक अलग स्वभाव आया .मैं उस को पहचानता था मैं जानता था की पूर्वी उसकी तरफ आकर्षित है ,यह इस उम्र की नजाकत थी कि किसी भी स्मार्ट और हैंडसम लड़के को देखकर एक लड़की तथा किसी भी खूबसूरत लड़की को देखकर एक लड़का आकर्षित हो जाए एक सामान्य सी बात है मैं उससे हंसकर बात करने लगा और थोड़ी देर में वह हमसे बहुत ही घुल मिल गया देखते ही देखते निशा और पूर्वी की उससे दोस्ती हो गई ,हमने उससे विदा लिया और उसे शहर आने का निमंत्रण दिया जब उसे पता चला कि मैं एक होटल का मैनेजर हूं तो वह मुझसे और भी खुल गया और जब उसे पता चला कि मैं रश्मि के साथ काम करता हूं तो उसका चेहरा अचानक सूख गया मैं उसकी भावनाओं को समझ सकता था ,मैंने हंसा
“ कोई बात नहीं जो हुआ सो हो गया लेकिन मुझे एक चीज समझ नहीं आती आखिर खान साहब के दो बेटे हैं तो क्यों अजीम को ही अपना बेटा मानते हैं या ये कहे कि दुनिया के सामने सिर्फ अजीम ही आता है मुझे तो आज तक पता नहीं था कि खान साहब के दो बेटे हैं”
उसका चेहरा और मुरझा गया उसने बात को बदलना चाहा और मैंने भी कोई जोर नहीं डाला क्योंकि मैं जानता था की असलियत क्या है और यही असलियत शायद मुझे काजल का बदला लेने में मदद करने वाली थी

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“तो मुझे लगता है तुम्हें आयूब बहुत पसंद आया”
मैंने हंसकर निशा और पूर्वी से कहा ,पूर्वी तो जैसा शर्मा ही गई मैंने पहली बार उसे शरमाते हुए देखा था मैं भी थोड़ा हंसा और निशा भी क्योंकि मुझे पता था कि निशा का आकर्षण सिर्फ मेरे लिए है ..
लेकिन क्या मैं पूर्वी का इस्तेमाल करूंगा ???
शायद???
मेरे लिए यह सोचना भी पाप है लेकिन क्या सच में ??
मैं सोच में गुम हो गया मैं यही सोच रहा था कि क्या मैं सच में पूर्वी का इस्तेमाल करना चाहता हूं आयुष को फसाने के लिए.. शायद नहीं, शायद हां ,शायद पता नहीं,
मैं असल में दोनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता था मैं चाहता था जो हो बस हो जाए, अगर इस दौरान मुझे कुछ ऐसी चीज पता चले या कुछ ऐसा हो जाए जिससे मैं काजल की मदद कर सकूं तो शायद वह कार्य मुझे करना चाहिए और अगर ऐसा ना हो तो ???
जिस तरह मैंने आयूब व पूर्वी को नजर मिलाते देखा था मुझे लग रहा था इन दोनों के बीच कुछ तो खिचड़ी पक सकती हैं अभी मैं कुछ कह नहीं सकता था लेकिन पूर्वी मेरी सबसे प्यारी बहन है मेरे लिए यह करना बहुत मुश्किल था कि मैं उसे मछली के दाने की तरह इस्तेमाल करू, मैं उसे उसकी स्वतंत्रता में रहने देना चाहता था ,मैं चाहता था कि अगर वह प्यार करें तो सफल हो, मैं चाहता था कि वह खुश रहे और शायद इसी प्यार में और इसी खुशी में मुझे मेरी मंजिल मिल सकती थी, मैं सोच में गुम सा हो गया मुझे डॉक्टर की बताई बातें याद आ रही थी तो साथ ही पूर्वी का उस लड़के को देखना ,उन दोनों की निगाहों में एक अजीब सा आकर्षण एक दूसरे के लिए ,वह आकर्षण किसी भी नौजवान की आंखों में जब देखा जाता है तब बड़े ही आराम से बताया जा सकता है कि आखिर उनके दिल में चल क्या रहा है लेकिन क्या आयूब एक अच्छा लड़का है ??
मुझे नहीं पता था जितना मैं उसे जान सका या जितना मैंने दूसरों के द्वारा सुना था.. जी हां मैं आज दिनभर यही तो कर रहा था होटल आदित्य इंटरनेशनल की पूरी जानकारियां मेरे पास थे आयूब की जानकारी मेरे पास थी, जितना मैंने उसे जाना मुझे बस इतना ही समझ आया कि वह एक बड़ा सुलझा हुआ लड़का है शायद पूर्वी के लिए अच्छा है, शायद ना भी हो?
लेकिन मैं इन दोनों को स्वतंत्रता देना चाहता था देखना चाहता था कि आखिर कितनी आगे बढ़ते हैं खैर जो भी हो मैं थक चुका था जमाने भर के विचार मेरे दिमाग में घूम रहे थे और अब मुझे जरूरत थी आराम की और शायद उससे पहले निशा की…
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पता नहीं क्यों लेकिन मुझे निशा की आदत सी पड़ रही थी उसका मुझे इतना प्यार करना मैंने कभी सोचा नहीं था कि कोई मुझे इतना भी प्यार कर सकता है, रही बात काजल की मैं जानता था कि वह मुझे बहुत प्यार करती हैं लेकिन वह मेरी बीवी थी और निशा मेरी बहन दोनों के व्यक्तित्व में जमीन आसमान का फर्क है, न जाने क्यों लेकिन मैं दिन-ब-दिन निशा की और आकर्षित होते जा रहा हूं ,जिसे मैंने निशा को बचाने के लिए शुरू किया था ,जिसे मैंने अपनी बहन की भलाई के लिए शुरू किया था अब वह मेरे लिए पाप नहीं रह गया था अब शायद वह मजा बन गया एक ऐसा मजा जिसमें मैं डूबते जा रहा हूं ,उसके शरीर कण कण उसके अंग प्रत्यंग उसके कटाव उसके एक एक घुमाव, उसके जिस्म का भराव , उसकी मासूमियत ,उसकी हंसी ,उसके बाल ,उसके गाल, उसके होठों की लाली ,उसकी मतवाली चाल, उसके पसीने की सुगंध, उसका हंसना ,उसका बोलना, उसका चलना, उसका रुकना, उसका देखना, उसका मुझे छूना ,उसका मुझे प्यार करना उसका हर एक बर्ताव ,उसकी अदाएं ,उसके नखरे, उसके झूठ, उसकी सच, उसकी हया, उसकी बेहयाई , उसकी नजाकत उसकी फितरत उसकी मोहब्बत उसकी सिहरन, उसकी उलझन ,उसका द्वेष उसका राग ,उसकी सीमाओं को तोड़ना और नई सीमा बना देना ,उसका मेरे बालों पर हाथ फेरना.. उसके आंसू …जब वह कहती है कि आप मेरे हो सिर्फ मेरे.. उसकी बड़ी-बड़ी आंखें और आंखों का वह काला घेरा जो काजल से बनता है, उसकी आंखों से झड़ते हुए प्यार के झरने उसका दिल जो इतना सख्त होकर भी कितना नरम है, मुझे कभी-कभी लगने लगा कि मैं कहीं पूरी तरह से तो उसका नहीं हो जा रहा हूं, हां शायद लेकिन नहीं शायद,
वह मेरी बीवी नहीं थी वह मेरी प्रेमिका नहीं थी लेकिन अब वह मेरे लिए इन दोनों से बढ़कर है मैं क्या हूं ? मैं क्यों हूं ? मैं किसका हूं ???यह सवाल बड़े पेचीदे हैं लेकिन उसका एक जवाब निशा के पास है कि ‘आप मेरी जान हो आप मेरे लिए हो और आप मेरे हो’ उसकी प्यार भरी बातें जिसका शायद कोई मूल्य ना हो, जो तर्क की सीमाओं में नहीं बंधती जो तर्क से बाहर है वो अलग ही दुनिया की बात है जो एक प्रेमिका एक प्रेमी से करती हैं,या एक बच्ची करती है अनगढ़ सी ,बेमतलब सी , वैसी बातें यह सब निशा की खूबी थी तर्क से दूर प्यार की किसी दुनिया में खोई हुई थी ,एक सागर में खोई हुई थी जिसका कोई किनारा उसके पास में ना था …
वह मुझे अपनी गहराई में पाना चाहती थी, वह हमेशा मुझ में समाना चाहती थी, उसके पास इसके सिवा और कोई काम नहीं था उसकी जिंदगी में इसके सिवा और कोई मकसद नहीं था और शायद यही बात मुझे उसकी ओर इतना आकर्षित करती है ,क्योंकि काजल की जिंदगी में एक मकसद है और वह मकसद मैं नहीं हूं…
लेकिन निशा की जिंदगी में जो मकसद है वह सिर्फ मैं हूं………………………………………

सदार होठों का चुंबन ले कर, जीभ में जीभ घुसकर जीभ से जीभ मिलाकर और दिल की धड़कनों को एक साथ करें फकत उसके होठों को अपने दांतो में गड़ा कर मैं मदहोश हो रहा था….
निशा की जवानी में डूब कर उसके गद्देदार पिछवाड़े अपने हाथों से सहलाते हुए उसके गीले गीले होठों पर मैं और थूक ,मिला रहा था,
जीवन का यह सुख शायद सभी को नसीब होता है लेकिन मेरे जैसा नहीं, क्योंकि नीचे पड़ी वह लड़की कोई और नहीं थी वह मेरी बहन थी मेरी अपनी बहन जिस की जवानी के उठान को हम अपने जिस्म की आग बुझाने के लिए उपयोग में ला रहा थे.. “भैया भैया भैया भैया भैया थोड़ा धीरे धीरे कीजिए ना इतना क्यो उतावले हो रहे हो, इतने क्यों मतवाले हो रहे हो आपकी ही हु , आपकी ही रहूंगी इतने उतावले मत हो “
निशा कहे जा रही थी लेकिन उसकी बातो का मुझ पर कोई असर नहीं हो रहा था, मैं तो बस उस में डूबना चाहता था उस गहराई तक जहां तक आज तक मैंने डूबा नही था, हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे और मेरे हाथ उसके गद्देदार पिछवाड़े को सहलाते हुए उसे अपनी ओर खींच रहे थे..
दो नंगे जिस्म एक दूसरे से सटे हुए एक दूसरे में गुथे जा रहे थे सांसे तेज थी धड़कन मध्यम थी, जितना हो सके एक दूसरे से मिलने की ख्वाहिश थी ,दीवानगी सर पर चढ़ी हुई थी मेरा लिंग अकड़ कर अपनी प्यास बुझाने को बेताब था , वही निशा की योनि रस से भरी हुई छलक रही थी ,मेरे लिंग की चमड़ी थोड़ी पीछे हुई और वह धीरे-धीरे निशा की योनि में समाते गई.. एहसास ..वह एहसास इतना सुखदाई था कि हम दोनों के ही मुंह से सिसकी निकल गई निशा ने मेरे बालों को जोरों से पकड़ा और अपनी और खींचा मैंने भी उसके टांगों को हल्का सा फैलाया और अपने लिंग को और भी अंदर दबाने लगा जब तक कि वह अपनी पूरी गहराई में नहीं चला गया..
निशा ने मेरे होठों को अपने दांतो से काटा शायद मुझे दर्द होना चाहिए था लेकिन वह दर्द इतना मीठा था कि मैं बार-बार लेना चाहता था, रात के अंधेरे में हल्की रोशनी से कमरे में फैली दूधिया रोशनी में दो जिस्म एक हो रहे थे ,कमर हल्की-हल्की चल रही थी निशा के यौवन से भरपूर उसके स्तन मेरे हाथों में थे ,कभी उसके फूलों को अपने होठों से चूमता और उसमें रस के भंडार को और निचोड़कर पीने की कोशिश करता..
दोनों डूबे थे मस्ती अपने चरम में थी मैं निशा के ऊपर उछले जा रहा था और वह अपने कमर को मेरे कमर से मिलाने की पूरी कोशिश कर रही थी, निशा ने मुझे नीचे पटक दिया और मेरे ऊपर आकर अपने कमर को हिलाने लगी..
“ भैया मैं मर जाऊंगी …आह आह ..मुझे अपना बना लो …आह आह ..सिर्फ अपना बना लो …आह आह ..बस मेरे हो जाओ ओह भईया …आह आह ..आह आह .. और मुझे कुछ नहीं चाहिए,जोरो से भइया आह मुझे अपने प्यार में डूबा लो भइया जोरो से आह भइया .. मैं और कुछ नहीं चाहती आई लव यू भैया ,आई लव यू ,आई लव यू भैया, आई लव यू,…आह आह …..आह आह आह आह आह आह .”
अब वह मेरे ऊपर थी और पूरा कंट्रोल उसके ही हाथों में था मैं शांत पड़ा हुआ उसके चेहरे को देख रहा था वह मेरे ऊपर आ गिरी थी और उसके बाल मेरे चहरे के चारों तरफ फैल गए, निशा की सांसे बहुत जोरों से चल रही थी जो मेरे गालों से टकरा रही थी उसकी आंखें अधमुंदी थी जैसे कोई नशे में हूं थोड़ी देर बाद जैसे तूफान हल्का सा शांत हुआ और कमर धीरे धीरे चलने लगे हवस की गहराई प्यार की गहराई में बदलने लगी थी, हम दोनों एक दूसरे के जिस्म का पूरा एहसास कर पा रहे थे और वो प्यार जिस्म से लेकर मन तक पहुंच रहे थे हम एक दूसरे की रूह को छूने में कामयाब हो पा रहे थे, मैं उसके बालो को सहला रहा था और वह मेरे ऊपर गिरी हुई अपने जिस्म को सिर्फ मेरे लिए छोड़ दी थी उसके नाज़ुक शरीर का एहसास मेरे त्वचा से होता हुआ मेरे मन की गहराइयों में उतर रहा था..
मैं उसे बहुत प्यार करने लगा था, पहले भी करता था लेकिन अब प्यार का स्वरूप भी बदल चुका था, मैंने उसके बालों को अपने चेहरे से हटाया और उसको अपनी बाहों में जोरों से खींचा वह कसमसाई हुई मेरे बाहों में समा गई वह अपनी कमर को हल्के हल्के हिला रही थी और मेरे जिस्म को सहला रही थी वह किसी समर्पण की प्रतिमा सी थी अपने आप को मेरे लिए समर्पित कर चुकी थी, मैंने आंखें खोली एक हल्का सा प्रकाश दरवाजे के माध्यम से कमरे में आता हुआ दिखाई दिया ..
देखा तो दो आंखें देखते ही समझने में देर नहीं लगी कि वह और कोई नहीं बल्कि पूर्वी है ,पूर्वी का मासूम चेहरा मेरे सामने खिलकर आ गया था..
हम दोनों की नजरें मिली वह जाने को हुई लेकिन अचानक से फिर रुक गई उसकी आंखों में आंसू थे एक अजीब सा दर्द शायद छलकने को था, शायद मैं उस दर्द को समझ पाता वह अपने आंखों से कैसे देख पा रही थी कि उसका खुद का भाई अपनी सगी बहन के साथ नंगा सोया है.. किसी के लिए भी यह सोच पाना मुश्किल है लेकिन मेरी प्यारी सी छोटी सी बहन इतने बड़े दर्द को किस प्रकार झेल पा रही होगी. उसके आंखों का आंसू मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आया मैंने अपने हाथ उठाया है और उसे अपने पास बुलाया, उसने अपना सिर ना में हिलाया लेकिन मैंने उसे फिर से आंखों ही आंखों में इशारा किया आजा शायद मुझे तेरी जरूरत है उसने एक बार निशा की और देखा मैंने आंखों से कहा कि इसकी फिक्र मत कर, वह हल्के कदमों से कमरे में आई मैंने उसका हाथ थामा और अपनी ओर खींच लिया वह सकुचाई सी धीरे से बिस्तर में बैठी निशा ने अचानक अपना सिर उठाया कभी वह पूर्वी को देखती तो कभी मुझे मैंने प्यार से निशा के चेहरे को सहलाया
“क्या यह मेरी बहन नहीं है, मैं जानता हूं कि तुम दोनों को ही पता है कि क्या हो रहा है लेकिन मैं किसी से छुपाना भी नहीं चाहता, निशा मैं उससे बहुत प्यार करता हूं और इस प्यार में कोई बंटवारा नहीं है कभी यह मत सोचना कि मेरे लिए पूर्वी और तू दो अलग हैं तुम दोनों ही मेरे लिए एक ही हो.. हां यह जिस्म का रिश्ता जो तेरे साथ मेरा बन गया है वह शायद एक भाई बहन के रिश्ते में नहीं होना चाहिए था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं पूर्वी को भूल जाऊं या तेरे ऊपर मेरा कोई विशेष अधिकार हो गया तुम दोनों आज भी मेरे लिए मेरी जान हो ,मेरी बहने हो ,आज भी मेरी कलाई में राखी तुम्हारे नाम की बंधती है…..”
“ निशा मेरी बात को समझना जितना अधिकार तुम्हारा मेरे ऊपर है उतना ही पूर्वी का भी है ..यह जिस्मानी रिश्ता केवल मेरे और तुम्हारे बीच ही रहेगा ,लेकिन मुझे पूर्वी को भी प्यार करने दे “
निशा बहुत भावुक हो चुकी थी उसकी आंखों में आंसू था साथ में पूर्वी के भी शायद इन दिनों जब उसके मन से सभी के लिए नफरत निकल चुका था और वह मेरे ही दुनिया में खोई हुई थी इस समय में और इस खुशी में उसे सोचने पर मजबूर किया था की सच में हम दोनों भाई बहन हैं हमारा जो रिश्ता बन चुका है उसे भुलाया नहीं जा सकता उसे बदला नहीं जा सकता लेकिन निशा का मेरे ऊपर एकाधिकार चाहना शायद निशा को यह बात समझ आ गई थी कि प्यार में अधिकार नहीं होता ,या समझ नहीं आई थी..??
मैंने फिर से निशा की आंखों में देखा
“बहन… मेरी जान… प्यार में कोई एकाधिकार नहीं होता असला प्यार में तो अधिकार ही नहीं होता प्यार में होता है तो सिर्फ और सिर्फ समर्पण जो तूने किया है मेरे लिए, लेकिन अगर तू यह चाहती है कि कि तेरा मेरे ऊपर अधिकार हो तेरे प्यार नहीं बस जिस्म की हवस होगी यह वासना होगी, अधिकार की चाह करना ही वासना है”
निशा ने मेरी आंखों की गहराइयों में झांका और मेरे होठों पर हल्का सा चुंबन दिया,
“ भैया मैं जानती हु कि आप क्या कहना चाहते हो लेकिन क्या करूं ..जब आपको किसी दूसरे को प्यार करते देखती हु तो दिल जल जाता है सांसे रुक जाती हैं लगता है कि कोई आपको मुझसे छीन लेगा मैं इस बात से परेशान हो जाती हु कि कैसे आपके प्यार का बटवारा करूँगी ,भैया मैं मानती हूं कि मुझसे गलती हुई लेकिन क्या आप मुझे माफ नहीं करोगे..”
मेरे होठों पर मुस्कान आ गई मैंने पूर्वी का हाथ पकड़ा और उसे अपने ऊपर खींचा मेरी एक बाह में निशा थी वहीं दूसरी बाह में पूर्वी..
निशा के जिस्म में एक भी कपड़ा नहीं था उसकी योनि में अभी भी मेरा लिंग पूरी तरह से समाया हुआ था लेकिन पूर्वी?? पूर्वी मासूम निश्चल सी मेरे बाहों में खुद को सामने की कोशिश कर रही थी वह अचानक से रो पड़ी
“भैया यह क्या हो रहा है मैंने कभी ऐसा तो नहीं सोचा था मैंने आपका प्यार चाहा है , मैं दीदी का प्यार चाहा है , मैं चाहती थी कि आप दोनों मिलो ,मैं आपके और दीदी के बीच नहीं आना चाहती थी ..लेकिन ??
यह क्या हो रहा है क्या प्यार करना इसी को कहते हैं क्या प्यार करने के लिए दो जिस्म का मिलना जरूरी है???
क्या जिस्मों के बाहर प्यार नहीं होता??
अगर दीदी आप से प्यार करती थी क्या जरूरी था कि उनका जिस्म आपके जिस्म से मिले क्या जरूरी था वह करना जो दुनिया की नजर में गलत है????”
मेरी मासूम बहन ने मुझसे ऐसा सवाल पूछ लिया था जिसका जवाब मेरे पास नहीं था शायद उसने मुझे आइना दिखा दिया था लेकिन अब देर हो चुकी थी बहुत देर मैं प्यार से उसके बालों को सहला रहा था इधर निशा मेरे गालों को चूमते हुए अपनी कमर को हल्के हल्के हिला रही थी बड़ी अजीब सी कंडीशन थी …एक तरफ मेरी वह बहन थी जिसके साथ मेरी जिस्मानी संबंध है और एक तरफ मेरी वह बहन थी जिसे बेहद प्यार करता था जिसके बारे में मैं गलत सोच भी नहीं सकता था ..
मासूमियत हवस और प्यार तीनों एक साथ हैं थे जज्बात मोहब्बत और भावनाओं का उफान सब कुछ एक साथ थे.. जिस्म की आग ,प्यार की ठंडकता सब कुछ एक साथ थे, निशा रो रही थी पूर्वी भी रो रही थी और मेरे आंखों में पानी था.. दो जिस्म नंगे पड़े थे लेकिन आंखों में पानी लिए, मेरा लिंग मेरी बहन की योनि की गहराइयों में था उसमें अकड़ भी थी और वह योनि के रस से भीगा हुआ भी था लेकिन मन में हवस का एक कतरा भी नहीं बचा था, निशा भी रोते हुए अपने कमर को हल्के हल्के हिलाए जा रही थी और मेरा अभी भी उसके मांसल चूतड़ों को सहलाया जा रहा था.. मेरी दोनों बहनें मेरे साथ थी, उस रूप में जो दोनों चाहती थी एक को बस प्यार चाहिए था और दूसरे को मुझ पर अधिकार मेरे जिस्म पर अधिकार.. दोनों को वो मिला था जो वह चाहते थे और मुझे???
मुझे मिली थी जन्नत, मेरे साथ दोनों थे दोनों का प्यार मेरे साथ था , मेरा मन शांत था मैं खुश था मानो पूरे दुनिया की जन्नत मेरे कदमों में हो, पूरी दुनिया की खुशियां मेरे कदमों में है अपने दोनों बहनों को प्यार करना चाहता था उस तरह से जिस तरह से वह चाहती थी.. एक से जिस्मानी होकर तथा दूसरे से रूहानी होकर …..

मासूमियत हवस और प्यार तीनों एक साथ हैं थे जज्बात मोहब्बत और भावनाओं का उफान सब कुछ एक साथ थे.. जिस्म की आग ,प्यार की ठंडकता सब कुछ एक साथ थे, निशा रो रही थी पूर्वी भी रो रही थी और मेरे आंखों में पानी था.. दो जिस्म नंगे पड़े थे लेकिन आंखों में पानी लिए, मेरा लिंग मेरी बहन की योनि की गहराइयों में था उसमें अकड़ भी थी और वह योनि के रस से भीगा हुआ भी था लेकिन मन में हवस का एक कतरा भी नहीं बचा था, निशा भी रोते हुए अपने कमर को हल्के हल्के हिलाए जा रही थी और मेरा अभी भी उसके मांसल चूतड़ों को सहलाया जा रहा था.. मेरी दोनों बहनें मेरे साथ थी, उस रूप में जो दोनों चाहती थी एक को बस प्यार चाहिए था और दूसरे को मुझ पर अधिकार मेरे जिस्म पर अधिकार.. दोनों को वो मिला था जो वह चाहते थे और मुझे???
मुझे मिली थी जन्नत, मेरे साथ दोनों थे दोनों का प्यार मेरे साथ था , मेरा मन शांत था मैं खुश था मानो पूरे दुनिया की जन्नत मेरे कदमों में हो, पूरी दुनिया की खुशियां मेरे कदमों में है अपने दोनों बहनों को प्यार करना चाहता था उस तरह से जिस तरह से वह चाहती थी.. एक से जिस्मानी होकर तथा दूसरे से रूहानी होकर …..
जीवन की सभी करामातों ने मुझे और भी अधिक मजबूत बना दिया था,अभी अभी मैं छुट्टी से वापस आया था और आके अपने कमरे में बैठा हुआ सोच रहा था की आगे क्या करना चाहिए कि मेरे मोबाइल की बत्ती जल उठी ,,
“हैल्लो “
“आ गए जान “
दूसरी ओर से काजल ने कहा
“कहा हो तुम देखने को दिल कर रहा है “
वो हँसी ..
“होटल आयी थी यार ,और कहा शाम को मिलते है ,तुम भी जाओ मेडम रश्मि तुम्हारा इंतजार कर रही होगी “
मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई क्योकि काजल ने मेडम रश्मि बोला ही कुछ इस तरह जैसे वो इस बात को लेकर जलती हो …
मुझे काजल से मिलने का बहुत ही मन कर रहा था मैं उसके सामने मलीना की बात करना चाहता था और उसके चहरे का एक्सप्रेशन देखना चाहता था की आखिर वो फिर मुझसे कैसे छिपाती है ,
मैं जल्दी से तैयर हुआ और उसके होटल की तरफ भागा ..
पहली बात तो मैं उसे सरप्राइज देना चाहता था ,
मैं सोच में पड़ गया की आखिर कैसे पता करू की वो कहा होगी ,सीधे उसके पास जाने से पहले मैं सोच रहा था मेरे दिमाग में एक आईडिया आया मैंने शबनम को फोन लगाया ,
“अरे कहा हो मेरी जान “शबनम की नशीली आवाज मेरे कानो में आयी
“बस छुट्टियां खत्म हो गई है अभी अभी पहुचा हु “
“ओह तो इस कनीज को कैसे याद कर लिया “
वो फिर से अपनी मादक आवाज में बोली
“तुम मेरी कनीज नही तुम तो मेरी मलिका हो “मैं मुस्कुरा उठा
“ओहो ऐसी बात है ..”वो जोरो से हँसी
“लगता है साहब को कोई जरूरी काम आ गया है “
उसने मेरी चपलिसी की वजह समझने में ज्यादा देर नही की
“बस मैं चाहता हु की तुम पता करो को काजल कहा है ,असल में मैं उसे सरप्राइज देना चाहता हु “
शबनम थोड़ी देर सोचने लगी
“अरे क्या हुआ “
“सोच लो कही तुम्हारा सरप्राइज देना तुम्हारे लिए मुश्किल ना पैदा कर दे “
वो जोरो से हँसने लगी ,हा मैं कैसे भूल गया था की काजल क्या क्या करती है ,शबनम की बातो में तो दम था लेकिन फिर भी मुझे तो काजल से मिलना ही था
“तुम पता तो करो वो होटल में है तो आखिर है कहा और ये भी बताने की जरूरत नही है की उसे पता नही चलना चाहिए की मैं आ रहा हु “
वो शायद मुस्कुराई होगी
“ओके जैसा आप कहे मेरे आका “वो फिर से खिलखिलाई

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होटल के बाहर ही मुझे हर्ष मिल गया शायद उसने मुझे पहचान लिया था …
“हैल्लो सर “
मैं हड़बड़ाया ,मैं कैसे भूल गया था की यंहा पर मुझे बहुत से लोग जानते है ,
“ओह हैल्लो “
“आप तो काजल मेडम के फ्रेंड है ना “
“हम्म “
“कहा है तुम्हारी मेडम “
“वो तो ……..”
वो चुप हो गया जैसे सोच रहा हो ,
“क्या हुआ “
“कुछ नही सर वो तो असल में खान साहब के फॉर्म हाउस में है “
मेरे दिल में एक जोर का धक्का लगा
“ओह और फार्महाउस कहा पर है “
“मुझे नही पता सर बस इतना ही बताया था मेडम ने ,वो दोनो किसी डील के कारण वँहा गए है ,आप एक बार फोन करके कन्फर्म कर लीजिए “
वो थोड़ा झेप गया क्योकि उसके मुह से शायद कुछ गलत निकल गया था ,

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मुझे शबनम काल कर रही थी
“हैल्लो “
“मजनू जी के लिए बुरी खबर है “
उसकी बात सुनकर मैं थोड़ी देर तक कुछ भी नही बोला
“काजल मेडम तो होटल में नही है “
“तो कहा है ???”
“वो तो उसने नही बताया है बस इतना ही कहा की वो अभी 2 घण्टे बाद ही होटल पहचेगी “
“ओक्के “
“मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी “
मैंने थोड़ा जोर दिया
“हा पूछो ना “
“खान का फार्महाउस कहा पर है “
मेरी बात से शबनम थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गई
“ओ तो काजल वँहा गई है ,यार देव क्यो आग से खेलना चाहते हो ,छोड़ो काजल को मैं हु ,यंहा आ जाओ तुम्हे जन्नत दिखाउंगी “
वो बहुत ही कमीनी सी आवाज में बोली
“जो पूछा है वो तो बताओ “
उसने मुझे पूरा पता बताया लेकिन साथ ही हिदायतें भी दे डाली ,लेकिन मैं उसकी हिदायतें कहा मानने वाला था …
मैंने गाड़ी घुमा दी ..
मैं कर में ही था की काजल का फोन आ गया
“तुम होटल आये थे,हर्ष ने बलताय “
लग रहा था की मेरा होटल आना उसे पसंद नही आया ,या हर्ष का मुझे बतलाना
“हा सोचा था की सरप्राइज दूंगा ,लेकिन अब वापस जा रहा हु ,तुम तो अपने खान को खुस करने में बिजी हो “
थोड़ी देर तक उधर से कोई भी जवाब नही आया
“देव प्लीज् …….”
उसकी आवाज में एक निराशा थी
“अगर मुझे कुछ पता नही होता तो बात और थी ,जबकि मुझे सब पता है तो भी तुम मुझसे ये सब छिपाने की कोशिस कर रही हो “
मैं उसे समझते हुए कहा
“हा क्योकि असलियत तुम्हे जला देगी और मैं नही चाहती की तुम जलो ,तुम्हे दुख हो ..माना की तुम्हे सब कुछ पता है लेकिन फिर भी मेरी बात सुनकर तुम्हे जलन होगी मैं वो बिल्कुल नही करना चाहती ,मैं तो इसे बस जल्द से जल्द खत्म करके तुम्हारे साथ ही अपना पूरा जीवन बिताना चाहती हु ……..अब प्लीज् देव ऐसे मजाक भी मत किया करो क्योकि इससे मुझे लगने लगता है की मैं तुम्हारे साथ धोखा कर रही हु ..
हाँ अगर तुम भी वैसे होते तो अलग बात थी “
मैं उसकी बात सुनकर चौका
“कैसा ???”
वो थोड़ी देर तक चुप थी
“अरे बताओ भी क्या हूं “
“cuckoldry का नाम सुना है “
वो धीरे से बोली …मैं उसकी बात सुनकर सन्न रह गया और फोन काट दिया ,मुझे इसके बारे में ज्यादा तो नही पता था लेकिन मैं कुछ तो जानता ही था …………..

“तुम्हें मलिनी कैसी लगी”
काजल ने मुझसे लिपटकर कहा.
“ बहुत अच्छी,लगा ही नहीं जैसे किसी अनजान से बोल रहा हूं”
काजल का चेहरा चमक उठा, वह किसी बच्चे की तरह उछल पड़ी ,
” काश मैं उन्हें देख पाती”
“ तो चलो कभी चलते हैं”
उसका चेहरा थोड़ा सा उदास हो गया
“और क्या-क्या किए” उसने बात को पलटा
“और कुछ नहीं बस घूमे फिरे और हां डॉक्टर से भी मिला”
काजल चौकी, वह मेरी बाहों से अलग हो गई
“क्या तुम डॉक्टर साहब से मिले”
“ हां क्यों यहां हमारी पहचान तो हो ही चुकी थी वह मुझे वहां दिख गए थे”
काजल का चेहरा गंभीर होता गया..
“ क्या हुआ डॉक्टर का नाम सुनते ही तुम्हारे चेहरे में क्या हो गया”
मैंने उसे परखने के अंदाज में कहा उसने अपने आप को तुरंत संभाला
“कुछ भी तो नहीं “
थोड़ी देर सोचती रही
“ अच्छा मैंने जो तुम्हें कहा था उसके बारे में क्या सोचा”
उसने थोड़ी नजाकत के साथ और थोड़ी शरारत के साथ मुझसे पूछा
“ किस बारे में???”
“ अरे वही जो मैंने तुम्हें कहा था cuckoldry के बारे में”उसके होठो में मुस्कान थी
“ तुम पागल हो गई हो क्या”
मैं अपनी भावनाओं को छुपाते हुए कहा
“ ऐसी कोई बात नहीं लेकिन फिर भी मुझे लगता है की तुम्हे कितना दुख होता होगा , उससे अच्छा है कि दर्द का मजा लिया जाए”
मैंने अपना सिर झटका
“दर्द का मजा “वह मेरे ऊपर आ चुकी थी उसने मेरे होठों पर अपने तपते हुए होठ रखें वह चुंबन कुछ देर तक चलता रहा..
मैं उसके जिस्म को सहलाता रहा और वह मादक सिसकियां लेते रही
“क्यों दर्द में मजा नहीं है क्या???
“दर्द में शायद मजा हो सकता हैं लेकिन तड़प में नहीं ,जलन में नहीं, उस पीड़ा में नहीं जब भी मैं सोचता हूं कि तुम किसी और के साथ हो तुम्हें नहीं पता कि मेरे अंदर क्या बीतती है ऐसा लगता है कि मार डालो तुम्हें भी और उसे भी जो तुम्हारे साथ हैं….”
काजल को देर तक गंभीरता से मुझे देख तेरे फिर अचानक से हलके से मुस्कुराई
“ यही तो तड़प है जो तुम्हें मजा देगा “
उसकी बातें मुझे समझ नहीं आ रही थी मैं उसे गौर से देखता रहा उसका प्यारा सा चेहरा खिला हुआ था,वो मन में कुछ सोच कर मुस्कुरा रही थी..
“ ऐसे क्यों मुस्कुरा रही हो क्या तुम्हें सच में लगता है कि मैं वह करूंगा “
उसने अपना सिर ना में हिलाया
“मुझे नहीं लगता कि तुम ऐसा कर पाओगे लेकिन हां अगर तुम ऐसा करोगे तो शायद मुझे बहुत खुशी हो “
मैंने उसे बड़े आश्चर्य से देखा
“ ऐसा क्यों कह रही हो “
“क्योंकि मुझे हमेशा दुख रहता है कि तुम जल रहे हो सिर्फ और सिर्फ मेरे कारण तुम्हें इतनी तकलीफ है झेलनी पड़ रही है सिर्फ मेरे कारण तुम चाहे मानो या ना मानो लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं बेबी”
काजल की आंखों में अनायास ही आंसू आ गए,
“ हो सकता है कि यह करने से तुम्हें थोड़ा सुकून मिलेगा”
“ सुकून कैसा सुकून तुम्हें लगता है कि तुम्हें दूसरे के साथ देख कर मुझे सुकून मिलेगा”
मैंने उसके आंसुओं को अपनी उंगलियों से हटाया, वह हलके से मुस्कुराई उसकी प्यार भरी नजरें भी मुझे देख रही थी..
“ मैंने तो सुना है कि कुछ लोगों को इससे सुकून मिलता है मजा मिलता है मुझे लगा शायद तुम भी ऐसा कर पाओगे चलो ठीक है कोशिश कर लेना मैं यह नहीं कहूंगी कि तुम ऐसा करो या ना करो यह तुम्हारे ऊपर है लेकिन अगर तुम इस बात का मजा लेता है तो शायद यह मेरे लिए सबसे अच्छी बात होगी कम से कम मैं उस दर्द से मुक्त हो जाऊंगी कि मैं तुम्हें तकलीफ दे रही हूं,”
“तो तुम ऐसा कर ही क्यो रही हो काजल कि तुम्हें मुझे तकलीफ देनी पड़ रही है”
मैं उसे घूरता रहा वह मेरे आंखों में झांकती रही ….
“देव मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूं “
,मैंने उसे फिर से एक बार आश्चर्य से देखा
“क्या “मेरा स्वर ठंडा था
“ अपना अतीत जो सुनना तुम्हारे लिए शायद बहुत जरूरी है”
मैं सोच में पड़ा था कि काजल ने कहना शुरू किया
“जानते हो देव जब मैं एक छोटी बच्ची थी मेरे पापा एक चॉकलेट लेने के लिए भी 10 बार सोचते थे ,”
मैं उसे देखता रहा और वह कहती रही
“ इतनी तकलीफ देखी है, इतने दर्द सहे हैं… मैंने देखा है गरीबी किसे कहते हैं हर तरफ बस लोगों की बुरी नजर रहती है जब मैं 16 साल की थी तब लोगों ने मुझे ऐसे देखा था जैसे मुझे खा जाएंगे, उनकी आंखों में हवस साफ दिखाई देते थे , लेकिन मैंने अपने आप को बचा लिया…”
काजल की बातें मुझे समझ नहीं आ रही थी लेकिन बस मैं सुन रहा था ..
“देव जब मैं बच्ची थी मेरे पापा मुझे एक दुकान ले गए , उन्होंने मुझसे कहा कि कौन सी मिठाई खाएगी,मैं मिठाइयों को घूरते रह गई सामने कई प्रकार की मिठाइयां थी रंग बिरंगी ऐसी ऐसी जो मेरे साथ कभी देखी नहीं थी मैं बस उसे देखते रह गई थोड़ी देर बाद मैंने एक मिठाई के ऊपर हाथ रखा मैंने कहा मुझे इसे खाना है पापा ने दुकानदार से रेट पूछा दुकानदार ने जो कीमत बताई पापा सोच में पड़ गए.. थोड़ी देर इधर उधर की बातें करते रहे मुझे बहला रहे थे , उनके पास इतने पैसे ही नहीं थे कि वह उस मिठाई को खरीद पाय मैंने उनका चेहरा देखा था ,वह उदास थे दुखी थे सिर्फ मेरी वजह से ,सोची वह उस मिठाई को खरीद नहीं पाया जो मेरी जरूरत थी और वो जरूरत नहीं थी और बस मेरी तमन्ना थी मैं उनके आंखों में झांकती रही थोड़ी देर बाद पापा एक दूसरी मिठाई लेकर वहां से निकल गए,मैं उनके साथ चल रही थी मैं एक बच्ची थी देखो बस एक बच्ची लेकिन मुझे सब समझ आ रहा था..पैसे की कमी ,इतनी कमी की उन्होंने मेरी जरूरत को ठीक नहीं समझा था हम थोड़ी देर तक चलते रहे फिर पापा ने मुझे कहा क्यों बेटा तुम्हें यह मिठाई पसंद है ना मैंने कहा नहीं पापा मुझे तो वही मिठाई पसंद थी जो आपने दिखाई थी..
पापा मेरे चेहरे को देखते रहे बस देखते रहे बिना कुछ बोले मेरा हाथ पकड़ कर वह मुझे फिर से उसी दुकान में ले गए, उन्होंने वही मिठाई ली जिसे मैंने कहा था हां यह अलग बात है उसके बाद मेरे पापा की जेब में थोड़ा भी पैसा नहीं था हम दोनों पैदल ही घर गए क्योंकि हमारे पास ना तो ऑटो ना ही रिक्से का पैसा था,पाप ने अपने लिए वो जूते भी नही लिए जिसे लेने के लिये उन्होंने महीने भर से पैसे जोड़े थे,…
वह दिन था और आज के दिन है मुझे पैसे की अहमियत समझ आ गई “
वह बस इतना ही बोल पाई थी लेकिन मेरे दिल से एक बात निकल गई
“अच्छा तो अगर ऐसा है तो हम दोनो ही कमाते है काजल ,हमारे पास पैसे की क्या कोई इतनी कमी है की तुम्हे अपना जिस्म बेचना पड़े “
काजल के आंखों से आंसू छलक गए थे,साथ ही मेरे भी ..
“बात अभी पूरी नही हुई है देव …”
उसने मेरी बात को फिर से कांटा ..
“मैंने तुम्हे बतलाया था ना की मेरी मा का देहांत बहुत पहले ही हो चुका है …”
काजल की मा ,हा उसने बतलाया तो था लेकिन मैं तो आज भी कन्फ्यूज़ हु की उसकी असली माँ कौन है और उसका असली पिता कौन है …मैंने हा में सर हिलाया
“असल में उनका देहांत प्राकृतिक रूप से या किसी बीमारी से नही हुआ था ..”
मैं उसकी बात सुनता ही रहा
“उन्हें मारा गया था “
“क्या “इस बार मैं बुरी तरह से चौका
“हा देव उनका बलात्कार किया गया था और उसके कुछ दिनों के बाद हत्या “
मैं उसे बस देखता ही रहा
“मेरे पिता जी जिस होटल में काम करते थे,मेरी मा भी उसी होटल में काम करती थी ,होटल का मालिक एक बहुत ही कामुक इंसान था ,वो तो खुद भी शादीशुदा था लेकिन फिर भी वँहा काम करने वाली सभी औरतों पर उसकी नजर रहती थी ,मेरी मा पर भी उसकी नजर थी …उसने पहले तो मेरे पिता की गरीबी का फायदा उठाना चाहा लेकिन जब वो नही मानी तो उसने उनका बालात्कार किया,जब मेरे पिता जी और मा पुलिस के पास पहुचे तो उस होटल के मालिक ने अपनी पहुच लगाकर उन्हें ही अंदर करवा दिया ,उस दिन मुझे दूसरी बार पैसे की वेल्यू का पता चला,मेरे पिता जी को छोड़ने के लिए उसने फिर से मेरी मा के साथ बालात्कार किया,इस बार उसका साथ वो इंस्पेक्टर भी दे रहा था ,उन्होंने मेरे ही घर में मेरे ही सामने मेरी मा की इज्जत लूटी थी ,मैं रोती रही अपने भाई को गोद में लिए हुए …पूरे मोहल्ले को पता था की मेरे घर में क्या हो रहा है लेकिन किसी की इतनी हिम्मत ही नही हुई की वो कुछ कर पाए……”
कमरे में शांति फैल गई थी ,काजल की आंखों में मानो खून उतर आया था उसकी आंखे लाल हो चुकी थी और उसके आंसू सुख चुके थे …
“आज भी मेरे कानो में मेरी मा के हर चीख़ घुंजा करते है देव…मैं उसे नही भुला सकती ,मैं उन लोगो को नही भुला सकती जिन्होंने ये किया है …वो दरिंदे वँहा भी नही रुके ,मेरे पिता ने जेल से छूटने के बाद उनसे बदला लेने के लिए एक आदमी की मदद ली थी …जिसे तुम आज डॉ के नाम से जानते हो ,उन्होंने थोड़ा प्रयास किया जिससे इंस्पेक्टर तो सस्पेंड हो गया और होटल का मालिक वँहा से भाग निकला लेकिन जाते जाते उन्होंने मेरी मा को भी मार दिया,बिना उसके बयान के दोनो ही रिहा हो गए ,डॉ भी कुछ नही कर पाए ……मेरे पिता जी के लिए भी वँहा रहना मुश्किल था वो भी वँहा से निकल आये,और छोटी मोटी नॉकरी करके मुझे पढ़ाया ……..डॉ को मैं तब से जानती हु ,वो मेरे लिए मेरे पिता के समान है ,”
काजल की आंखे सुखी हुई थी आंसू की एक बून्द भी उनमे नही थी लेकिन था तो एक दर्द एक गहरा दर्द ,,,
आंखे लाल…सुर्ख लाल हो चुकी थी जैसे की अंगारे हो ,मैं उसे देखकर ही कांप गया ,ऐसे भी मैं कई तरह के कन्फ्यूजन से घिरा हुआ था,
“जानते हो देव वो होटल का मालिक कौन था “
काजल ने फिर से कहा ,मैंने ना में सर हिलाया
“होटल आदित्य इंटरनेशनल का मलिक ,मिस्टर खान ….”
इस बार चौकाने के लिए मेरे पास बहुत से कारण थे
“क्या??????”
मैं बुरी तरह से चिल्लाया
“तुम्हे आज तक यही लगता रहा की अजीम ने मुझे इस धंधे में उतारा और मैं उसके जयजात के लालच में हु इसलिए मैं ये सब कर रही हु ,या ये लगा होगा की तुम्हारी बहन के कहने पर ये सब कर रही हु ,जैसा की मैंने तुम्हे बतलाया था…
लेकिन देव असल बात तो यही है की ना तो निशा ना ही अजीम मुझे इस बिजनेस में लाये है ,मैं यंहा आयी हु बस और बस उन्हें बर्बाद करने …मैं चाहती तो खान और उस इंस्पेक्टर को एक ही बार में मार सकती थी लेकिन नही देव उन्हें तो पल पल करके मरूँगी ,उन्हें इतना तड़फाउंगी की वो मारने की दुवा मांगे लेकिन मर ना पाए …”
काजल की सांसे तेज हो चुकी थी वो गुस्से से दहक रही थी ,चहरा लाल हो चुका था ,उसके एक एक बात में मुझे सच्चाई दिखाई दे रही थी
“और जानते हो देव मैंने तुम्हे ऐसा प्रस्ताव क्यो दिया था …??क्योकि मैं चाहती हु की अब तुम मेरी मदद करो …बहुत हो गया देव मैं अकेले ये सब नही कर सकती मैं बस खान की रंडी बनकर रह जाऊंगी ,मुझे उन्हें नंगा करके रास्ते में भीख मांगने पर मजबूर कर देना है ,देव”
काजल ने मेरी बांहो को मजबूती से जकड़ लिया
“तुम्हे मेरा साथ देना होगा देव,सोचो की मैं उन दरिंदो के नीचे खुद को रौंदाती हु फिर भी उफ नही करती ,तो क्या तुम मुझे देख भी नही सकते ????
मेरे लिए देव मेरे लिए “
इस बार वो रो पड़ी ,मैं अपने को इतना मजबूर कभी महसूस नही किया था ,ये क्या हो रहा था मेरे जीवन में
“मैं सब कुछ करूँगा मेरी जान “
मेरे मुह से ये शब्द सीधे मेरे दिल से निकल कर आ रहे थे ,मैं जानता था की काजल मुझसे क्या मांग रही थी लेकिन उसकी कहानी जो की मुझे सच ही लग रही थी उसे सुनने के बाद मैं उसका। साथ ना दु ऐसा तो हो ही नही सकता था …
“देव तुम्हे मेरा साथ देना ही होगा ..मैं जानती हु की तुम्हारे लिये ये कितना मुश्किल होने वाला है लेकिन तुम्हे उस दर्द में मजा भी ढूंढना ही होगा …मैंने ढूंढा है इसीलिए आज मैं उन लोगो के नीचे आने से थोड़ा भी नही झिझकती जिन्होंने मेरी मा को मारा था और जिन्होंने उनका बलात्कार किया था ,तुम्हे भी वो रास्ता ढूंढना होगा देव…तुहे बहलाने वाले तो यंहा पर बहुत मिलेंगे ,निशा मुझे कभी भी पसंद नही करती थी ,और अब तो अजीम और खान के जयजात पर रश्मि की भी नजरे है ,दोनो ही तुम्हे मेरा साथ देने से रोकेंगे लेकिन तुम्हे फैसला करना होगा देव,ये बहुत ही निर्णायक वक्त है जबकि हम अपना मास्टर स्ट्रोक खेल सकते है ..”
वो जैसे बोल कर चुप हुई और मेरे आंखों में देखते हुए मेरे जवाब का इंतजार करने लगी ..
“मैं तुम्हारे साथ हु काजल “
मैं बस इतना ही बोल पाया था और वो मेरे गले से लग गई …..

जवां रंग ,जवां कालिया ,जवां जवां सी उमंग…ये नजारा दिखाई देता है सुबह सुबह गार्डन में घूमने से ..
उसी जवानी में मैं भी डूबा हुआ गहरी गहरी सांसे ले रहा था ,मेरे साथ साथ मेरी दोनो बहने भी थी ,मैं उनके साथ कुछ ज्यादा समय बिताने के इरादे में था,
एक हँसता मुस्कुराता हुआ हसीन सा चहरा मेरे पास आया ,मैं उसे देखकर पहचान तो गया लेकिन फिर भी मैंने कोई भी प्रतिक्रिया नही की ..
“कैसे हो देव सुना है तुम अपनी बीवी के अतीत को ढूंढने में लगे हुए हो “
उस मदमस्त बाला ने कहा जिसे देखकर गार्डन में उपस्थित सभी लड़के आहे भर रहे थे,उसके शरीर की बनावट की कुछ ऐसी थी लेकिन मेरे लिए वो बिल्कुल भी उत्तेजक नही थी …
“तुम्हे किसने कहा “
मोहनी जोरो से हँस पड़ी ..
“मुझे तुम्हारे एक एक पल की खबर रहती है,और मैंने जो तुमसे काम कहा था तुम उसपर भी ध्यान नही दे रहे हो ,लगता है तुम अपनी बीवी के वर्तमान से ज्यादा उसके अतीत पर धयन दे रहे हो ,खान साहब को ये बिल्कुल भी पसंद नही आएगा “
उसने थोड़ा गुस्से से कहा ,मैंने एक बार अपनी बहनों की ओर देखा जो की मुझसे बहुत दूर थी और अपने आप में ही मस्त थी …
मेरे चहरे में एक कुटिल सी मुस्कान आ गई
“पहले तो मुझे ये समझ आ गया है की तुम खान साहब के लिए काम नही करती ….”
जैसे उसके होश उड़ गए उसके चहरे से ये बात साफ थी की मैंने उसे पकड़ लिया था ,
“और दूसरा तुम्हे मेरे पल पल की कोई खबर नही है वरना तुम यंहा मेरी जासूसी करने या मुझे धमकी देने नही आती “
वो बौखलाई ,लेकिन मैं मंद मंद मुस्कुराता रहा
“अच्छा तो तुम रश्मि के लिए काम करती हो ,तभी मैं भी सोचु की किसी को पता भी नही लगा और तुमने मुझे उस जगह से जंहा से मुझे बंदी बनाकर रखा था वँहा से होटल के कमरे तक कैसे लायी ,फिर तुम्हे जब काजल और मेरे बारे में सब कुछ पता है तो खान साहब कोई एक्शन लेने की बजाय मुझे को किडनैप करवाएंगे…रश्मि ने ये सब क्यो किया और खान साहब का नाम ही क्यो फसाया ये तो मुझे भी समझ में आ गया है ,लेकिन तुम्हारी क्या मजबूरी थी की तुम अजीम और खान को धोखा देकर रश्मि के साथ काम करने लगी …”
मेरे चहरे की मुस्कुराहट और भी गहरी हो गई वंही मोहनी के चहरे में भी एक मुस्कान आ गई
“तुम तो सच में बहुत ही दिमाग वाले निकले ,क्या तुम्हे जरा भी डर नही लगा था जब मैंने तुम्हे किडनैप करवाया था “
“डर तो मैं गया था लेकिन जब मैंने चीजो को ध्यान से सोचा तो मुझे सब कुछ ही समझ आ गया ,खान के पास अभी तो इतना दिमाग नही है की वो काजल के खिलाफ कोई काम करे लेकिन हा रश्मि जरूर काजल के पीछे पड़ी हुई है मुझे बस ये जानना है की तुम क्यो रश्मि की गुलामी कर रही हो”
मैंने गुलामी शब्द में ज्यादा जोर दिया क्योकि मैं उसे थोड़ा सा बहकाना चाहता था और मेरे कहे अनुसार वो थोड़ी बेचैन भी हो गई
“मैं उसकी कोई गुलामी नही करती ,मुझे वो पैसे देती है ये काम करने के लिए पहले वो मुझसे अजीम की जासूसी करवाती थी वही अब वो मुझसे खान की जासूसी करवाती है ,मुझे अपने पैसे से मतलब है ना की मैं कोई जासूसी करती हु ,और अब जब काजल खान को अपने वस में कर रही है तो रश्मि के लिए सबसे बड़ा खतरा तो काजल ही है ,इसलिए वो अब काजल की जासूसी करवाती है लेकिन काजल शायद उसके उम्मीद से ज्यादा ही चालक है इसलिए उसने तुम्हे टारगेट करने की सौची लेकिन उसने गलतियां कर दी और तुम्हे सब कुछ पता चल गया …”उसने एक ही सांस में कह दिया
“तो तुम बस अगर पैसे के लिए काम करती हो तो क्यो ना मेरे साथी काम करो “
उसकी आंखे चौड़ी हो गई
“तुम्हारे पास है ही क्या देने के लिए “
मैं जोरो से हंसा
“शायद तुम्हे पता नही लेकिन अब अजीम से ज्यादा जायदाद मेरे पास है मैं तुम्हे पैसे से नहला सकता हु “
वो हक्की बक्की हो कर मुझे देखने लगी
“अजीम और खान के पास क्या है ???एक होटल केशरगड में ? एक होटल यंहा ?कुछ और बिजनेस जो की अभी पूरी तरह से घाटे में चल रहे है “
उसने हा में सर हिलाया ,वो एक C.A. के साथ काम करती थी तो मुझे यकीन था की उसे पैसे की भाषा अच्छे से समझ आएगी
“अब मेरी बात पहले ध्यान से सुनो फिर कोई फैसला करना ,मैं अभी केशरगड में था तुम्हे तो पता ही है की मैं काजल के बारे में पता करने की कोशिस कर रहा था वँहा मुझे जानती हो क्या पता लगा “
उसने ना में सर हिलाया लेकिन उसके चहरे से उसकी उत्तेजना और बेचैनी साफ साफ झलक रही थी
“मुझे ये पता लगा की काजल असल में होटल आदित्य के मालिक की बेटी है ,”उसके चहरे में कुछ खास प्रतिक्रिया नही आयी
“ये तो मुझे पहले से पता है ,की वो होटल पहले आकाश जी का था जिसकी बेटी काजल है लेकिन उन्होंने IAS ऑफसर बनने के बाद ही उसे बेच दिया और खुद वँहा से दूर चले गए “
इस बार मैं थोड़ा कन्फ्यूज़ हो गया लेकिन मैंने उसे चहरे में लाने नही दिया
“उन्होंने वो होटल बेचा नही था बल्कि खान ने इसपर अपना अधिकार जमाया था ,साथ ही उसने यंहा की सभी प्रॉपर्टी पर भी अपना अधिकार जमाया जो की असल में काजल के पिता के ही नाम की थी ,तो उसकी असली मालिक कौन हुई काजल ही ना ,इसलिये ही काजल अपनी पूरी ताकत से खान को फसने पर तुली हुई है ,और जबकि आज भी उसके पास वो कागज है जिसपर खान ने आकाश जी से धोखे से साइन करवाये थे ,तो पहली चीज की काजल के लिए अब ज्यादा मुश्किल नही है की लीगली वो सब कुछ फिर से अपने नाम में कर सकती है ,और जबकि खान भी उसके झांसे में है अजीम तो उसका कुत्ता ही बना हुआ है वो जंहा बोलती है वो साइन कर देता है ,कुछ ही दिनों में सब कुछ ही काजल के नाम पर होगा वो भी बिल्कुल ही लीगल रूप से …….”
असल में मैंने ये कहानी बनाई थी मुझे भी नही पता था की असल में काजल को कितना सक्सेज मिला है या ये की वो असल में आकाश और मलीना की बेटी है भी की नही लेकिन मैंने जो पासा फेका मोहनी उसमे सच में ही फंस गई .उसका चहरा ही बतला रहा था की वो मेरी बातो पर यकीन कर रही थी …
“तो ..जब कुछ भी खान और अजीम का है ही नही तो कैसे वो रश्मि को मिलेगा ,साथ ही साथ हमारे पास ऐसा भी प्लान है की हम जब चाहे रश्मि और कपूर के पूरे बिजनेस को एक ही बार में तबाह करके यंहा के राजा बन सकते है ,अब तुम्हे सोचना है की तुम किसका साथ देना पसंद करोगी उगते हुई सूरज का या डूबते हुए सूरज का ……..
तुम्हे ये भी पता होगा की काजल के पिता एक IAS अधिकारी थे इसलिए सरकारी अमले भी उसकी बहुत ही पहचान है ,अगर उसके पास पैसा आ गया तो वो अपने हिसाब से सब कुछ चलाने लगेगी ,तब तुम कहा जाकर छुपागी ??”
मेरी बात में ऐसा कांफीडेंस था की मोहनी सच में डर गई..जबकि असलियत ये थी मुझे भी असलियत का कोई पता नही था ,लेकिन मेरा काम हो गया था
“हमारे साथ आ जाओ आज नही तो कल पैसे और पॉवर की कोई कमी मैं तुम्हे होने नही दूंगा ऐसे भी तुमपर तो मेरा दिल आ गया था ,जब मैंने तुम्हे पहली बार देखा था …..”
पहली बात की मैंने हमारे साथ कहा था मतलब मैं उसे बतलाना चाहता था की मैं और काजल अब एक ही हो गए है ,और काजल के हर एक्शन के बारे में मुझे पता है ,दूसरा मैंने जो दुसरी बात उसे कही उसकी तारीफ में उससे उसे ये जरूर लगता की मैं कुछ तो उस पर फिदा हु ,मैंने ये जानबूझ कर कहा था क्योकि मैं उसे दिखाना चाहता था की मैं भी अमीरों की तरह अय्यास हो सकता हु ,क्योकि अभी तक उसने लोगे के अमीरी और उनके अय्यास होने का ही फायदा उठाया था मैं भी चाहता था की वो मेरा फायदा उठाये…बड़ी अजीब बात थी लेकिन असलियत ये ही थी की अगर वो मेरा फायदा उठाएगी तभी वो मेरे नीचे आ पाएगी ,जिस्म से भी और दिमाग से भी ,मैं उसे अपनी गुलाम की तरह यूज़ करना चाहता था …और इसके लिए सबसे जरूरी था की मैं एक मालिक की तरह पेश आउ…
वो बहुत ही सोच में पड़ गयी थी उसे मेरी मालकियत का तो अहसास होने ही लगा होगा वो मेरे बातो से ही समझ आ रहा हटा की मैं उससे क्या चाहता हु …
“मुझे सोचना पड़ेगा “
“सोच लो लेकिन देर मत करना क्योकि तुम सोचती थी की तुम मेरे ऊपर नजर रखे हो ,जबकि तुम मेरे रेडर में हो ,मैं तुम्हरे हर एक मूवमेंट पर नजर रखे हुए हु ,”
वो चौकी
“तुम्हे क्या लगा थी की तुम्हारा यंहा आना महज इत्तेफाक था,तूम आओगी ये मुझे पहले से पता था इसलिए ही मैं यंहा आया वरना कब तुमने मुझे यंहा आते हुए देखा था,और इसलिए मैंने अपनी बहनों को भी अपने से दूर ही रखा था क्योकि मैं तुमसे अकेले में बात करना चाहता था “
उसका चहरा आश्चर्य से लाल हो गया उसकी आंखे बड़ी हो गई उसे यकीन ही नही आ रहा था की एक साधारण सा दिखाने वाला शखस उसकी जासूसी कर रहा है ,
असली बात ये थी की मुझे इस बारे में बिल्कुल भी पता नही था की वो आ रही है या वो मुझे यंहा मिल जाएगी लेकिन जब वो आ ही गई थी और मेरे हर झूट को मान ही रही थी तो मैंने ये पासा भी फेक दिया उसे सचमे लगा की मैं उसकी जासूसी कर रहा हु और उसके ऊपर नजर रखे हुए हु ,मेरी बहने पता नही क्यो अभी भी हमसे दुर थी और मोहनी को लग रहा था की ये भी प्लान किया हुआ है ताकि हम दोनो आपस में ज्यादा बात कर सके …
मैं अपनी बातो को मोहनी को समझने में सफल हो गया था
“तो तुम्हे जल्दी से ही फैसला लेना पड़ेगा अगर इसके बारे में रश्मि को पता लगा तो पहले तुम्हारा पति जायेगा फिर तुम …ऐसे भी मुझे कई नेताओ और अधिकारियों को दावत देनी थी ,तुमसे अच्छी रंडी मुझे कहा मिलेगी उसने सामने परोसने के लिए “
मैंने अपने आंखों में बड़ी ही कमिनियत लायी जिससे वो कांप ही गई ,ऐसी बाते कोई साधरण आदमी तो नही कर सकता उसे ये अहसास हो गया की सच में मेरे पास कोई पवार आ गई है वरना उसे मेरे बारे में पता ही था की मैं कितना सीधा साधा आदमी हु ,से लगने लगा की सच में मेरे पास कुछ ऐसा है की ये सब कर भी सकता हु ,मेरा सीधा साधा होना फिर मेरा ये रूप बदलना उसे समझ आ रहा था जो की मेरे लिए अच्छी बात थी …वो गिड़गिड़ाई
“नही देब ऐसा कुछ भी मत करना मैं रश्मि को कुछ भी नही बतलाऊंगी “
“ह्म्म्म तो सोचकर बताना अगर तुम हमारे साथ हो तो तुम्हे डरने की कोई भी जरूरत नही हम पहले की ही तरह दोस्त रहेंगे और मैं अपने दोस्तो का बहुत ही ख्याल रखता हु ,,,और अगर तुम्हे कोई गलती करने की कोशिस की तो याद रखना की दोनो ही होटलों में कई लोग मेरे ही दया से जॉब कर रहे है और वो अब मेरे साथ है ,और पूरे होटल के कैमरे का एक्सेस भी मेरे ही पास है इसके साथ ही सभी कमरों में रश्मि के कमरों में भी मैंने उसकी बातो को रिकार्ड करने की डिवाइस लगा के रखे है ,तुम मुझसे कभी नही बच पाओगी …….”
मैं हल्के से मुस्कुराया ,माना की ये सभी बाते गलत थी लेकिन मोहनी के चहरे से पता चल गया था की वो मेरी बात को मान चुकी थी ………..
उसके जाने के बाद मैंने एक गहरी सांस ली ,आज मेरी एक्टिंग मेरे काम आ गई अगर ये मेरे साथ आ जाए तो मैं इसे डबल एजेंट की तरह यूज़ करूँगा ,रश्मि को लगेगा की वो मेरे ऊपर नजर रख रही है वही मैं रश्मि के ऊपर नजर रख पाऊंगा ……..

मन कई आशंकाओं से भरा हुआ था, और गाड़ी बहुत ही स्पीड से चल रही थी, वैसे ही मेरे दिल की स्पीड भी बढ़ी हुई थी,वो बहुत ही तेजी से धड़क रहा था, मैंने गाड़ी रोकी और जोरो से गहरी सांस ली,मैं इस समय खान के फार्महाउसमें था,मुझे अजीब सा डर लग रहा था,काजल ने तो मुझे कह दिया था की तू इसके मजे लो लेकिन क्या मैं सच में ऐसा कर सकता हु ये मैं नही जानता था,
मैं गहरी सांसे लेकर उस बंगले नुमा फार्महाउस को देखने लगा ,मैं किसी ने नजर में नही आना चाहता था ,मैं आशंकित था की अंदर क्या हो रहा होगा असल में यू ही इधर आ गया था मुझे सच में नही पता था की अंदर काजल होगी भी या नही …
मैंने थोड़ी दूर में झाड़ियों के अंदर अपनी गाड़ी लगाई और दीवाल फांदने का प्लान बनाया ,मैं आहिस्ता से एक दीवार में चढ़ गया और अंदर खुद गया ,पता नही अंदर क्या हो लेकिन जानने का एक पागल पन मेरे अंदर आ चुका था,मैं काजल को भी नही बतलाना चाहता था की मैं क्या कर रहा हु ,मैं किसी जासूस के तरह कमद रख रहा था और वैसे ही सोचने लगा था,
मैं अंदर आ चुका था और मैंने खुद को सम्हाला,मैं धीरे धीरे अंदर गया,अंदर जाकर मैंने मैं उस बड़े से घर जिसे बंगाल भी बोला जा सकता है के पास पहुचा,मैं विशेष धयन इस बात का रख रहा था की कही मुझे कोई देख ना ले साथ ही की कही कोई कैमरा तो नही लगा हुआ है ,ऐसे तो मुझे कोई भी कैमरा नही दिखाई दिया ,मैं बड़े ही ध्यान से अंदर गया,मैं पहले तो उस बंगले को ध्यान से निहारने लगा ,मुझे कुछ खिड़कियां और बाहर लगी हुई a.c, के डब्बे ही दिख रहे थे,मैं पहले तो मेन गेट के अंदर जाने की सोच रहा था लेकिन फिर मैंने अपना इरादा बदला और मैं उसके चारो ओर घूमने लगा,मुझे वो जगह दिख ही गई जंहा से मैं अंदर जा सकता था ,वो फर्स्ट फ्लोर की ख़िदखि थी ,मैं उसे हल्के से खोला तो समझ आया की ये किचन है ,वँहा से अंदर जाना भी तो खतरे से खाली नही होगा,मैं गंभीर सोच में पड़ा हुआ था की मेरा ध्यान वँहा फले हुए कुछ आमो पर गया,मैं अपनी ही सोच में उन पके हुए आमो को निहारता रहा ,और फिर थोड़ी देर बाद मुझे मेरा प्लान सूझ गया मैं फिर से दीवार फांद कर बाहर चला गया ……..
……..
“कौन है भोसड़ी का जो पत्थर फेके जा रहा है “
एक बुजुर्ग सा व्यक्ति फार्महाउस की मेन गेट को खोलकर बाहर आया ,मैं उसे देखकर रुका लेकिन वँहा सके भागा नही ,वो यंहा का गार्ड लग रहा था ,मैं पिछले 15 मिनट से पत्थर फेक रहा था ,कुछ आम के पेड़ जो की दीवारों से बाहर झांक रहे थे उनमे पके हुए आम दिखाई दे रहे थे मैं उन्हें ही निशाना बनाता लेकिन जानबूझ कर ऐसे पत्थर फेंकता था की उन्हें पड़े ही नही बल्कि सीधे अंदर चले जाए,लेकिन फिर भी बहुत देर तक किसी ने कोई केयर ही नही किया,ऐसे भी ये एक वीरान सी जगह थी यंहा का गार्ड भी घोड़े बेचकर सो रहा होगा,लेकिन मेरी मेहनत सफल हुई और वो उस गार्ड को समझ आ गया की कोई अंदर पत्थर फेक रहा है ,वो मुझे घूरा क्योकि मैं कोई आवारा लड़का तो नही था जो की आम के लालचमे पत्थर फेक रहा हो,
“का हुआ बाबू कहे पत्थर मार रहे हो “
वो गुस्से में था लेकिन फिर भी मेरे कपड़ो के कारण उसने मुझसे थोड़ी तमीज से बात करना ही सही समझा,साथ ही उसने देखा की मेरे बाजू में ही मेरी कार भी खड़ी है ..
“ओ सॉरी बाबा असल में इन्हें देखकर लालच आ गया था साला शहर में ऐसे आम कहा मिलते है ,ताजा ताजा ,और वो भी इतने नेचरल पेड़ में ही पके हुए ,खाने का मन कर गया ,सोचा की एक दो तोड़ लू लेकिन साला निशाना ही सही नही जा रहा ……”
वो थोड़ी देर तक मुझे घूरता रहा फिर जोरो से हँस पड़ा,
“क्या बाबुजी आप तो पढ़े लिखे हुई अमीर आदमी लगते हो बच्चों जैसी हरकत क्यो कर रहे हो “
मैं तुरंत अपने जेब से एक 500 का नोट निकाल कर उसके सामने किया,
“बाबा कुछ आम मिल सकता है क्या,मेरी पत्नी को बहुत पसद है “वो ललचाई निगाहों से उस नोट को देखा और मुझे समझ आ गया कि ये बुड्डा मेरे बहुत काम में आने वाला है…..
“ठिक है मैं कुछ आम आपके लिए तोड़कर लाता हु”उसने पैसे बड़े ही प्यार से स्वीकार कर लिए,वो अंदर जाने लगा साथ ही मैं भी ,लेकिन उसने मुझे रोक दिया
“अरे ये क्या बाबु यही रुको हम आते है “
“अरे बाबा देखने तो दो की गार्डन में और क्या बोया है कुछ पसंद गया तो वो भी ले जाऊंगा,..”
वो मुझे घूरने लगा
“अरे उसके अलग से पैसे ले लेना”
उसके चहरे में मुस्कान आ गई
“अरे बाबू ताजा भी है और ओरजेनिक भी है “
“ऑर्गेनिक ??”
“हा हा वही “
“अरे वाह तब तो सोने में सुहागा होगा,बाबा देखने तो दो गार्डन “
“अरे नही मरवाओगे क्या,गेट में ही कैमरा लगा है ,तुम रुको मैं पहले कैमरा बंद कर दु फिर अंदर आ जाना “
वो अंदर चला गया और मेरे होठो की मुस्कान और भी बढ़ गई साला जिस काम को मैं इतना मुश्किल समझ रहा था वो कितना आसान था,बस मुझे इस बुड्ढे को अपने बस में करना होगा आधी इन्फॉर्मेशन तो यही दे देगा..

*******
मैं इत्मीनान से पूरे गार्डन में घूम रहा था सच पुछु तो बहुत ही अच्छे और ताजे फल थे वँहा सच में एक बार तो मैं भी उन सब्ब्जियो और फ्लो को देखकर भूल गया था की मैं यंहा पर क्यो आया हु ,उस बुड्ढे ने कैमरा मेरे अंदर आने के बाद चालू कर दिया,मैं समझ गया था इंट्री पर ही कैमरा लगा हुआ है,वँहा एक बड़ा सा कुत्ता भी था ,जब मैंने उसे देखा तो मेरे प्राण ही सुख गए थे ,क्योकि अगर पहले मैं इस कुत्ते के संपर्क में आ जाता तो ये मेरा आधा मांस ही खा गया होता,अभी मैं उसे अपने हाथो से सहला रहा था और वो भी मुझे पहचानने लगा था,साथ ही उसने अपने बेटे बहु से भी मुझे मिलाया,वो इतने इत्मीनान में था की मुझे पता चल गया की यंहा खान नही है ,लेकिन मेरे लिए ये अच्छा ही था की मैं इस फार्म हाउस के सभी लोगो से अच्छे से मिल गया ,मैंने उनसे उनकी ही भाषा में बात की औऱ ये भी बलताय की मैं पास ही काम करता हु और इस रॉड से गुजरता रहता हु ,मैं बहुत ही गरीब घर का हु मेहनत करके इतना बड़ा हुआ हु ,मैंने उसके बेटे हो कुछ मूलभूत सपने भी दिखा दिए जैसे की वो अपने बेटे को कैसे पढ़ाये ताकि वो आगे चलकर कुछ बड़ा आदमी बन पाए ,मैंने वँहा पर 1 से 1.5 घंटे बिताये और हालत ये हो गई की उन्होंने मुझसे रिक्वेस्ट किया की आप जब भी इधर से गुजरे तो यंहा जरूर आया करे,उसका बेटा बड़ा ही सुलझा हुआ इंसान लग रहा था जो की अपनी गरीबी से त्रस्त था,मैं उसे शहर लाने और उसे नॉकरी दिलाने की भी बात कर दी ,बुड्डा गार्ड तो मुझे मेरे पैसे भी लौटने लगा लेकिन मैंने जिद करके उसे वो पैसे दे ही दिए ,मेरी सहजता और अच्छाई आज काम आ गई थी मैं उन गरीब लोगो से असांनी से मिल पा रहा था ,आदमी अगर सचमे अच्छा हो तो उसकी अच्छाई उसके व्यव्हार से झलकने लगती है ,
मैं उसके बेटे को कोई गलत सपने नही दिखा रहा था मुझे सच में लगा की मैं इसे कोई काम दिला दु ,मैंने उसे कुछ समय मांगा और वँहा से चला गया ,उसका बेटा सारे फ्लो और सब्जियों के साथ मुझे छोड़ने मेरे कार तक आया…
“साहब आते रहिएगा,”
“बिल्कुल हरिया भाई,लेकिन यार तुम्हारे मालिक को अगर पता लगा तो गजब हो जाएगा “
“अरे आप फिक्र मत कीजिये यंहा का सब कुछ हमारे ही कंट्रोल में रहता है उसे कभी पता नही चलेगा ,आप बस मुझे फोन कर दिया कीजियेगा …वो साला तो बस अपनी ऐयासी के लिए यंहा आता है सच बोलू तो मुझे ये सब बिल्कुल भी नही पसंद लेकिन क्या करे कोई और काम भी तो नही है,साला रंडियों के साथ यंहा आता है कभी वो तो कभी उसके दोस्त,यंहा मेरी बीवी भी है मेरे बच्चे भी है ,मुझे तो बहुत ही बुरा लगता है भइया …”
उसके आंखों में आंसू आ गए थे ,वो मुझे भइया बुला रहा था मैंने उसे दिलासा दिलाया की मैं उसके लिए जल्द ही कोई नॉकरी ढूंढूंगा ,मैं वँहा से निकल गया..
लेकिन मेरे दिमाग में एक बात बार बार आ रही थी की गरीबी लोगों को क्या क्या नही करने पर मजबूर कर देती ..
कहा ये सुलझा हुआ और समझदार आदमी ,इसकी इतनी अच्छी बीवी और बच्चा है एक परिवार वाला आदमी और कहा वो ऐसी जगह में काम कर रहा है जो खान ने सिर्फ और सिर्फ अपने ऐयासी के लिए ही बनाया था,
ऐसा नही था की उन्हें यंहा किसी भी चीज की कमी थी लेकिन कमी थी तो बस सम्मान की ……….

मैं कुछ ज्यादा ही चालाकी दिखाने लगा था ,मैंने रश्मि से भी यही कहा की मुझे कुछ खास पता नही चला,ऐसे मुझे इतना मोहनी के कारण पता ही लग गया था की रश्मि को कितना पता है…
वक्त आगे बढ़ने का नाम ही नही ले रहा था,जाने क्यो इतनी खामोशी सी फैल गई थी ,मेरा होटल में समय कटाना मुश्किल हो रहा था,मैं रश्मि के ऑफिस से निकल कर सीधा शबनम के पास चला गया,उसे एक केबिन दिया गया था,ऐसे तो होटल में इसकी जरूरत नही थी लेकिन वो और भी तो बहुत से काम कर रही थी ,वो मुझे देखते ही बहुत ही चहक कर उठी
“ओह यार देव कितने दिनों के बाद आज आये तुम ,”मेरे चहरे में भी एक मुस्कान फैल गई वो बला सी खूबसूरत लग रही थी
पास बैठी हुई एक लड़की खड़ी हो चुकी थी ,बहुत ही कम उम्र की लड़की लग रही थी शायद कालेज में हो ,
“मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आ रही थी “
वो हँसी
“चलो झूठे कही के “
उसने लड़की की ओर देखा जो की मुझे अजीब निगाहों से घूर रही थी ,जब हमारी नजर मिली तो झेंपी और सर झुका लिया,मैंने उसे ध्यान से देखा अचानक ही मुझे कुछ याद आया और मैं बिल्कुल ही सहम गया मुझे याद आ गया था की ये कौन थी,
“अच्छा तुम बाहर जाओ “शबनम ने उस लड़की को कहा वो सर झुकाए हुए वँहा से वैसे भागी जैसे वो चाहती ही हो की जल्द से जल्द वँहा से निकल जाए ,उसके जाते ही मैं शबनम के सामने बैठ गया ..
“ये लड़की यंहा क्या कर रही थी “
मेरी निगाहों को जैसे उसने पहचान लिया था ..
“वही जो की बाकी की लडकिया मेरे पास करती है “
“तुम पागल हो गई हो ,इतनी कम उम्र की लड़की से ये सब काम करवा रही हो “
“अरे यार ये लीगल एज से कही ज्यादा है ,तुम फिक्र क्यो कर रहे हो “
“लेकिन ये मेरी बहन के साथ पड़ती है अभी तो ये कालेज में ही है “
शबनम के चहरे में मुस्कान फैल गई
“अरे मेरे बलमा इस उम्र की लडकिया तैयार हो जाती है सेक्स के लिए और इस उम्र में इन्हें भी तो बहुत खुजली होती है ,जिस्म की खुजली और साथ ही साथ पैसे और शोहरत की खुजली ,असल में लड़कियों का यही सही उम्र है …और मर्द भी तो इस उम्र की कमसिन कलियों को तोडना पसंद करते है इनके हमे ज्यादा पैसे मिलते है “
उसके चहरे का मुस्कान और भी गहरा गया ,लेकिन आज मुझे अपने पर घृणा होने लगी थी ,ये लड़की पूर्वी की क्लासमेट थी ,मेरी प्यारी सी पूर्वी जिसे तो मैं सोच भी नही सकता था की वो बड़ी भी हो गई है …
मेरा चहरा मुरझा गया था ..
शबनम मेरे पास आयी और मेरे सर को अपने स्तनों में गाड़ा दिया,मेरे सर उसके सीने से टिके हुए थे जो की उसके बड़े बड़े स्तनों के कारण उसके स्तनों में जा धसे थे ,
मेरे लिए ये कोमल तकिया आज किसी वासना का नही बल्कि एक गहरी दोस्ती का अहसास करा रहा था,हा शबनम मेरी दोस्त तो थी ,,,
वो बड़े ही प्यार से मेरा सर सहला रही थी
“देव यार तुम बड़े ही इमोशनल टाइप के आदमी हो बात बात पर इमोशनल हो जाते हो ,तुम्हे कई काम करना है और तूम मुह लटकाए बैठे हो ,हा ये सब गलत है लेकिन हम किसी भी लड़की के साथ जबरदस्ती तो नही करते ना…मुझे और काजल को जबरदस्ती इस धंधे में लाया गया था,बाद में आदत हो गई और पैसे मिलने पर मजा भी लेने लगे ,लेकिन मैं इस बात का पूरा ध्यान रखती हु की कोई भी लड़की को जबरदस्ती इस धंधे में ना लाया जाए …वो अपनी मर्जी से आती है और चाहे तो अपनी मर्जी से वापस भी जा सकती है ,तो फिर इसके लिए तुम कैसे दोषी हुए “
उसकी बातो में सच में गजब का प्यार झलक रहा था ,मैं उसे और भी जोरो से कस लिया पता नही क्यो लेकिन मुझे यंहा सुकून मिल रहा था..
“अरे क्या हुआ ,मेरी चाहिए क्या “
वो खिलखिलाई ,मैंने जब सर उठाया तो वो होले होले से मुस्कुरा रही थी
“चोदने के लिए इतने बहाने क्यो कर रहे हो सीधे ही बोल दो की चोदना है “
वो फिर से खिलखिलाई ,लेकिन मैंने उसे फिर से जकड़ लिया और किसी बच्चे की तरह उसके सीने से अपने सर को गड़ा लिया ,सच ही है की सबसे सुकून बच्चा बन जाने में ही मिलता है …
मर्दों के साथ एक चीज होती है की उन्हें सबसे सुकून माँ के सीने से लगने में ही मिलता है ,लेकिन वक्त के साथ और सेक्स के प्रभाव के कारण औरतों के सीने को सेक्स का प्रतीक मान लिया जाता है ,एक मर्द औरत के सीने को देखकर उत्तेजित होता है और यही से वो अपना सुकून भी खो देता है ,लेकिन फिर कभी वो अपनी प्रमिका के ,या पत्नि के या और किसी औरत के सीने में जब अपना सर लगाकर सोता है तो उसे उतना ही सुकून मिलता है ,लेकिन एक शर्त जरूरी है की वासना अंदर ना हो …
वही हाल मेरा भी था,मुझे भी बहुत सुकून मिल रहा था मैं एक बच्चे की तरह ही वासना से रहित था और मेरी ये दशा शबनम से छुपी नही थी ,वो भी मेरे सर को प्यार से सहलाने लगी ,…
सच ही तो है की सभी प्यार मां के प्यार से ही सुरु होते है और एक इंसान जीवन भर उसी को ही ढूंढता रहता है…
लेकिन उसके लिए बच्चा बनना ही पड़ता है ये ही उसकी अनिवार्य बात होती है ..
मैं अपने मानसिक थकान से बहुत ही थक चुका था और अब उसके सीने में गड़ा हुआ आराम कर रहा है …
ये बहुत देर तक रहा ,जब मैं अपना सर उठाया तो देखा की शबनम की आंखों में आंसू है और साथ ही मेरे भी ये आंसू आखिर क्यो आये थे ये तो मैं भी नही जानता था ना ही शबनम ही जानती थी ..
“क्या हुआ “मैंने उसे पूछा
“कुछ नही “उसने ना में सर हिलाया
“तू पहले ऐसे मर्द हो जिसने मुझे आजतक की जीवन में पहली बार इतने प्यार से छुवा है ,मेरे पति ने भी मुझे कभी इतने प्यार से नही छुवा “
वो आंसुओ को पोछते हुए भी हँसने की कोशिस करती है ,और मुझे बड़ी ही प्यार भारी निगाह के देखती है ,
“मन करता है की तुम्हारे लिए अपना सब कुछ लुटा दु “
उसने बहुत ही धीरे से कहा ,उसका कहना भी साबित कर रहा था की वो ये नही कर सकती और इसी लिए वो इतना धीरे बोली क्योकि वो चाहती तो है लेकिन कर नही सकती ,मेरे चहरे मे भी मुस्कान खिल गई मैं उठा और उसके माथे को चूम लिया …
लग रहा था की हम कालेज के नए नए जोड़े हो जो अभी अभी प्यार में पड़ा हो ..
“मुझे तुमसे कुछ भी नही चाहिए लेकिन यही प्यार मेरे लिए रखना “
मैंने मुस्कुराते हुए कहा
“लेकिन मुझे तो तुम्हे देना है सब कुछ देना है और रात भर देना है “
वो फिर से मस्ती के मूड में आ गई थी ,वो इतना बोल के ही खिलखिलाई ,
मैं भी उसके साथ हँस पड़ा था …..

मैंने काजल को ताबड़ तोड़ पलंग तोड़ प्यार किया ,कारण????
कारण था वो बाते जो आज काजल ने मुझे कही थी ,वो आज मुझे थोड़ा और cuckoldry की तरफ धकेलने के लिए कुछ बाते कही जैसे वो सेक्स करते हुए कभी कभी अजीम का नाम ले लेती ,और मैं गुस्से से भर जाता उसके होठो में आयी हुई मुस्कान से मेरा गुस्सा और भी बढ़ जाता और मैं उसे जमकर धक्के मारने लगता,रात भर यही चलता रहा लेकिन एक बात तो मुझे भी समझ में आ गई की आखिर cucklodry की psychology क्या होती है …
असल में जब दिल जलता है तो एक अजीब ही तरह का मजा भी आता है ,आपके खून का प्रवाह बढ़ जाता है और आप अलग ही दुनिया में पहुच जाते है ,आप किसी को मारना चाहते है और उत्तेजित हो जाते है ये आपके सेक्स को और टेस्टोस्टेरोन को भी प्रवाहित करता है आप ज्यादा ताकतवर और मजबूत महसूस करने लगते है,ये उन लोगो के लिए नही है जो पहले से कमजोर हो और बात बात पर रोने वाले हो लेकिन ये मुझ जैसे मजबूत और गुस्सेल लोगो के लिए हो सकता है क्योकि इसकी आग से सच में मेरी सेक्स लाइफ तो बहुत ही खरतरनाक तरीके से अच्छी हो गई ,लेकिन वो सेक्स बस हवस के साथ किया गया था,वँहा पर वो प्यार की नजाकत नही थी …
काजल को मैंने कभी पूरे जिंदगी में इस तरह से नही रौंदा था जैसा मैने आज किया था …काजल भी बहुत खुस थी की मैं इसे इन्जॉय कर रहा हु,वो थककर सोई हुई थी लेकिन मेरे आंखों से नींद ही गायब हो चुकी थी ,मैंने उसके मोबाइल को अपने हाथो में लिया ,अजीब सी बात थी और बड़ी ही आश्चर्य की बात थी की उसने अभी तक अपने मोबाइल का पासवर्ड चेंज नही किया था ये वही था जो उसके कालेज के समय में होता था,कई मोबाइल चेंज कर लिए गए लेकिन पासवर्ड वही यही होता है प्यार ,क्योकि वो पासवर्ड मेरा डेट ऑफ बर्थ था,और मेरे मोबाइल में उसका ..
मैंने उसका वाट्सअप चेक किया और मुझे किसी ठाकुर साहब का मेसेज दिखा,
‘कल मिलोगी ना तुम्हारे लिए गिफ्ट खरीदा हु ‘
पहला लाइन यही था
‘अरे ठाकुर साहब इसकी क्या जरूरत थी ,’
‘बस समझलो की ये मेरी ख्वाहिस है की मैं तुम्हे ये दु ‘
‘अच्छा ठीक है लेकिन खान साहब …’
‘अरे तुम फिक्र मत करो खान के फार्महाउस में ही मिलो मैं उससे बात कर लूंगा ‘
‘ओके तो कल 12 बजे ‘
‘ओके मेरी जान ‘
‘ठाकुर साहब आप फिर से चालू हो गए ‘
‘तो क्या बुरा कहा ,इतना भी हक नही है क्या,खान ही तुम्हे जान कहे ये तो अच्छी बात नही हमे भी तो कुछ हक होना चाहिए ‘
काजल ने बहुत सी स्माइल भेजी
‘ओके जान अब ठीक’
‘हाय तुम तो मार ही दोगी ‘
काजल ने फिर से स्माइल भेजी
‘ओके जानू अब मेरे पति को मेरी जरूरत है मैं आपसे कल मिलती हु ‘
‘कितना खुशनसीब है साला देव जो तुम उसके साथ रोज रहती हो ‘
मेरी गांड ही सुलग गई साला मेरा नाम भी जानता है..
‘बस मख्खन लगाओ आप चलो कल मिलते है ..’
‘बस इतना ही कुछ और नही’
‘ओके बाय जानू ,,लेकिन खान साहब को नही पता लगना चाहिये की ..’
वो बस इतना ही लिखी थी
‘खान की मा का भोसड़ा ‘
‘देखिए मेरे साथ ऐसी गंदी बात नही करना ‘
काजल ने बहुत सी गुस्से वाली स्माइल भेजी
‘ओह सॉरी मेरी जान असल में पोलिस वाला हु ना तो गली मुह में रहती है तुम बुरा मत मानना ,खान को मैं कुछ भी नही बताऊंगा बस इतना कहूंगा की काम के सिलसिले में तुमसे मिलना था ..”
“ओके ‘
‘बस ओके ‘
काजल ने बहुत से हँसते हुए स्माइल भेजे
“ओके मेरी जान ‘
सच में वो लिखते हुए काजल मुस्कुराई जरूर होगी क्योकि शिकार उसके जाल में फंस गया था ,मैं उस ठाकुर को नही जानता था लेकिन मुझे इतना तो पता चल गया था की वो कोई पुलिस वाला है…
क्या वो वही पुलिस वाला था जिसने काजल की मा के साथ बलात्कार किया था और खान का दोस्त था (जैसा की काजल ने बतलाया था )
मैं सोच में पड़ गया था उसकी प्रोफ़ाइल पिक्चर में भी उसकी शक्ल का पता नही लगा क्योकि उसने किसी धर्मात्मा की तरह एक धार्मिक की पंक्ति लगा के रही थी ,कैसे मादरचोद लोग होते है दुनिया में..
करना उन्हें है गलत काम लेकिन दिखाएंगे के वो भगवान के कितने बड़े भक्त है कितने अच्छे इंसान है ,इन्ही मादरचोदों के कारण दुनिया इस हाल में आ गई थी ,
मुझे उसके उस प्रोफ़ाइल पिक्चर को देखकर उससे और भी चिढ़ सी हो गई क्योकि वो एक पुलिस वाला था जिसका कर्तव्य था की वो समाज के लिए कुछ करता लेकिन नही वो पैसे और चुद के पीछे पड़ा हुआ था,इस मादरचोद को तो मैं पर्सनली मारूंगा ..मेरे दिमाग में ये ख्याल आया मैं आगे की बातचीत पड़ने लगा
‘umaaaaaaaa ‘
इसके साथ कुछ होठो के चिन्ह और किस के साथ दिल के निशान वाले स्माइल से उसने कई लाइन भर दी थी
‘आप फिर से शुरू हो गए मैंने कहा ना की मैं खान साहब की वफादार हु और सिर्फ और सिर्फ खान साहब के साथ ही मेरे संबंध है …मैं शादी शुदा हु और किसी और मर्द के साथ सोती हु तो इसका मतलब ये नही की मैं रंडी हु “
अचानक ही काजल का तेवर अलग हो गया था मुझे समझ में आ रहा था की ये जो भी है वो खान का दोस्त है लेकिन उसकी नजर काजल पर है और काजल इसके सामने ये दिखाना चाहती है की वो खान की वफादार है लेकिन ये उसे पटाने के चक्कर में है ,मैं जानता था की काजल उससे पट ही जाएगी लेकिन पहले तो भरपूर नखरा चोदेगी क्योकि उसे अपनी इमेज अच्छी बनानी थी …
अखिकतर लडकिय यही ट्रिक अपनाती है ,वो पट तो जाएगी लेकिन फिर ही अपने को सती सावित्री जताने में कमी नही करेंगी ,चुड़वाएँगी तो कई लोगो से लेकिन फिर भी कोई नया लड़का मिल जाए तो पहले उससे मेहनत करवाएंगी ताकि उस लड़के को लगे की लड़की अच्छी है और किसी के साथ भी नही सो जाती..
मुझे काजल की इस बात पर थोड़ी हँसी आयी क्योकि कालेज के समय में मैं ऐसी लड़कियों से बहुत ही चिढ़ता था लेकिन आज मुझे पता चला की मेरा प्यार मेरी बीवी ही ऐसी है ..
खैर जो भी ये एक लड़की के लिए जरूरी है की जो लड़का उसके पीछे दुम हिलाता हुआ फिर रहा है वो उसके कंट्रोल में ही रहे और इसके लिए पहले अपनी इमेज अच्छी करनी भी बहुत ही जरूरी होती है ,तो काजल जो कर रही थी वो सही था आखिर ठाकुर से उसे भी कुछ काम करवाने होंगे..
काजल की इस बात से ठाकुर हड़बड़ाया जरूर होगा
“सॉरी अगर तुम्हे बुरा लगा होगा तो ,लेकिन क्या करू मैं तुमसे प्यार करने लगा हु ‘
ठाकुर साहब ने भी वही कहा जो की हर कमीना लड़का कहता है ,जब उसे किसी लड़की को चोदना हो तो वो प्यार के नाम का सहारा ही तो लेता है
‘लेकिन खान साहब से ये गद्दारी होगी ‘
काजल ने लेकिन लिखा था मतलब की तैयार थी ,ये भी हर वो लड़की करती है जिसे चुदवाना भी है लेकिंन नखरे करके
‘अरे मा चुदाये खान ‘

‘आप फिर से गली दे रहे है’
‘सॉरी जान सो सॉरी ‘

‘पहले आप ये आदत सुधारो मुझे गली बिल्कुल भी पसंद नही ‘
मुझे ये पढ़के हँसी आ गई क्योकि मैं आज ही काजल को मा बहन की गालियां देकर ही चोदा था ,हा चोदा ही तो था आज प्यार ही कहा किया था बस चोदा था ,अपना लंड उसकी चुद में घुसा कर पेला ही तो था ,पूरी ताकत से लेकिन बस इतना ही तो किया था ..
चोदना एक अजीब सा शब्द है जिसमे बस एक गुस्सा है ,एक फ्रस्ट्रेसन जो की निकल गया ,
लेकिन चुद कितना प्यारा लगता है बोलने में ,एक बार बोलिये चुद …
बड़ा ही cute सा शब्द है ,है ना
वही लंड बोलकर देखिए ..साला लगता है की अजीब सा है ,एक बार बोल कर देखो लंड ..
लौड़ा ,कितना अजीब है साला ,बोलने से ही अजीब लगता है बोलकर ही देख लो लंड या लौड़ा एक मर्दाना फिलिंग है उसमे लेकिन चुद ,बड़ा ही प्यारा लगता है ……….
है ना..,इस पर कमेंट करना की चुद बोलना प्यारा लगता है की नही ..
और एक कमेंट मुझे चाहिए ‘चोदना’ पर भी ,ये मादरचोद आखिर है क्या चोदना ऐसा लगता है जैसे की कोई मजदूरी करवा रहा है ,चोदना सोच कर देखो जरा…एक काम है ये ,चोदना ..??

जैसे कोई मजदूर मेहनत करता है वैसे ही लड़कियों के लिए लड़के मजदूरी करते है ,,उन्हें चोद कर ..
मैं फिर से पढ़ने लगा
‘सॉरी जान अब नही दूंगा .लेकिन तुम मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु सच में मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हु ‘
ठाकुर उत्तेजित हो गया था

‘कुछ भी करने की जरूरत नही है प्यार में कोई लेन देन नही होता ,बस प्यार होता है आप मुझे प्यार करो यंही मेरे लिए काफी है ‘
सच में मेरी बीवी हरामी थी .वो साली वही सब उस ठाकुर को बोल रही थी जो वो मुझे बोला करती है ,शायद ये सब उसने मुझसे ही सीखा था
‘लेकिन मुझे तुम्हे गिफ्ट तो देना है ‘
‘वो तो आपका हक है ‘
काजल ने उसे ग्रीन सिग्नल दे ही दिया
‘सच में ‘
‘कोई शक .12 बजे आप मिलिए .लेकिन खान साहब को बताए बेगैर ओके ‘
‘ओके मेरी जान .एक किस तो दो ‘
‘पागल हो गए हो आप ‘

‘तेरे प्यार में पागल हो गया हु जान ,मैंने और खान ने एक साथ कई लडकियो को किया है ,लेकिन तुम पहली हो जिसके लिए मुझे खान से झूट बोलना पड़ रहा है ,सच में वो तुम्हारे प्यार में ही है ‘
‘मुझे तो लगता है की वो तुमसे शादी भी कर लेगा ‘
‘नही मैं अपने पति को नही छोड़ सकती मैंने खान साहब को भी ये बता दिया है ..लेकिन मैं उन्हें धोखा भी तो नही दे सकती पता नही आपको जानू बोल रही हु आपसे उनसे पूछे बिना मिल भी रही हु ,उन्हें कैसा लगेगा ‘

‘अरे जो लगेगा देखा जाएगा ,लेकिन मेरे लिए तो तुम बहुत ही इम्पोर्टेन्ट बन चुकी हो मैं तो अपने बीवी से भी उतना प्यार नही करता जितना की तुमसे करता हु ,तुम मेरी जिंदगी हो काजल अगर तुम कहो तो मैं अपनी बीवी को तलाक देकर तुमसे शादी करने को भी राजी हु ‘
काजल ने कुछ देर तक कुछ जवाब ही नही दिया
‘इतना प्यार करते हो मुझसे ‘काजल का जवाब आया
‘हा ‘

काजल फिर थोड़े देर कुछ मेसेज नही की
‘कल आप मिलिए ,मुझे लगता है की आप मुझे खान साहब से ज्यादा प्यार करते है,मैं भी तो देखु की आप मुझसे कितना प्यार करते है ‘
काजल ने अपना दावा खेल दिया था
‘ओके जान …..सॉरी तुम्हे बुरा लगा हुआ हो तो ‘
ठाकुर इस बार सम्हाल कर बोल रहा था
‘उम्ममम्मम्माआआ लो किस भी दे दिया ,लेकिन लव यू तभी बोलूंगी जब लगेगा की आप सच में मुझसे प्यार करते हो ..मेरी जानू ‘
काजल ने उसे छेड़ा

‘हाय मेरी जान तुमसे लव यु सुनने के लिए तो अपनी जान भी दे दूंगा ‘
‘ऐसा फिर से मत बोलना ,आपकी जान जाने से पहले मेरी जान चले जाए ,आइंदा ऐसा नही बोलोगे ,,कल मिलती हु पति देव आ रहे है …’
इसके बाद काजल ने तो कोई मेसेज नही किया लेकिन ठाकुर जरूर कई आई लव यु ,और मैं तुम्हारे लिए सब कुछ करूँगा के मेसेज कर चुका था …

मैं सब पढ़ने के बाद हल्के से मुकुराय क्योकि मुझे पता था की कल मुझे क्या करना है ,,,

इंस्पेक्टर ठाकुर के बंदूख कि नोक मेरे ही ओर थी ,
“बहुत खेल खेल लिया तुमने अब मेरी बारी है ,”
मैं बेखोफ खड़ा हुआ था,पास ही काजल स्तब्ध सी मुझे देख रही थी,
‘रुको ठाकुर ‘
वो चिल्लाई लेकिन तब तक ठाकुर की गोली चल गई ,काजल ने उसका हाथ उठा दिया था और मैं बचने के लिए थोड़ा दूर जा गिरा था,ठाकुर फिर से बौखला गया और मेरे ऊपर फिर से बंदूक तान दी इस बार उसका निशाना सही था लेकिन उसकी गोली चलती इससे पहले ही काजल बीच में आ गई ..
धाय धाय धाय
ऑटोमेटिक लोडिंग वाली बंदूक ने अपना काम कर दिया था ,लगातार तीन गोली सीधे जाकर काजल के सीने को चीरते हुए निकल गए मैं बौखला गया था ,जैसे कोई सुध ही ना बची हो ,वही ठाकुर भी स्तब्ध सा उसे देख रहा था वो तो मुझे मरना चाहता था ताकि काजल को पा सके लेकिन काजल ने ये गोलियां खाकर ये साबित कर दिया था की वो जिस्म से चाहे जिसकी भी हो लेकिन उसकी रूह सिर्फ मेरी है …..
मैं गुस्से से तिलमिलाया और पास ही पड़े एक पत्थर से ठाकुर पर वॉर कर दिया ,उसका सर जख्मी हो गया था ,मैं उसकी पत्थर से उसका सर फोड़ना शुरू कर दिया ,वो बेसुध हो गया था और मैं तो पहले से ही बेसुध था ,मैं चीख रहा था चिल्ला रहा था ,और पत्थर उसके सर पर मारे जा रहा था..
“नही देव मेरे पास आओ “काजल इस हालत में भी थोड़े होश में थी
मैं जल्दी से काजल के पास पहुचा ,मैंने उसे सीने से लपेट लिया था,मेरा पूरा कपड़ा खून के रंग से रंग चुका था ..
“आई लव यु देव ,हमेशा से तुम मेरे हीरो रहे हो हमेशा से मैंने सिर्फ और सिर्फ तुम्हे प्यार किया है “
काजल इतना ही बोलकर बेसुध हो गई ,मैं चीखा
“काजल ………..नही काजल तुम मुझे छोड़कर नही जा सकती काजल “
तभी
धाय ….
एक गोली मेरे पीठ में आकर धंस गई ,ठाकुर लेटे हुए था और उसके हाथो में बंदूक थी
मैं गुस्से से लाल हो चुका था और उसे जान से मार देना चाहता था .
मैंने पास ही पड़ा हुआ एक रॉड उठाया और उसके पैरो में घुसा दिया ,वो चीखा ही था की मैंने अपने पैरो से उसके मुह पर वॉर किया ,वो बेसुध हो गया मैं फिर से काजल के पास आया ,मैं रो रहा था मेरी काजल मुझे छोड़कर नही जा सकती थी ………
मैं होशं में आया तो मैंने अपने पास डॉ चुतिया को पाया ,
“काजल कहा है “
मेरा पहला सवाल यही था ..
“वो कोमा में है,गोलियां निकाल दी गई है लेकिन होश नही आया है ,खैरियत है की दिल को गोली नही लगी वरना”
मैं रोने लगा था
“ये सब मेरी ही गलती के कारण हुआ है डॉ ना मैं वो कदम उठता और ना ही ये हादसा होता “
डॉ मेरे पास आकर मेरे सर पर हाथ फेरा ..
“तुम्हारी गलती नही है देव अपने को दोष मत दो जो भी हुआ वो किस्मत का ही तो खेल था ,सब ठीक हो जाएगा “
“निशा कहा है ???”
मुझे अचानक ही निशा की याद आयी
“वो भी ठीक है और अभी जेल में है ,फिक्र मत करो वँहा हमारे लोग है उसे कोई तकलीफ नही होगी ,”
मैं थोड़ा शांत हुआ
“उसके खिलाफ कोई सबूत मिला ??”
मैंने फिर से कहा
“नही अभी तक तो नही ,सिर्फ पूर्वी की ही गवाही है उसके खिलाफ लेकिन उतना काफी नही है ,काजल के गवाही के बिना उसे जेल में ज्यादा दिनों तक नही रख पाएंगे उसके वकील भी बहुत ई स्ट्रांग है ,लेकिन अभी उसका छूटना ठीक नही होगा “
डॉ के चहरे में चिंता साफ झलक रही थी
“उसे बेल दिलवाओ डॉ वो मेरी बात सुनेगी ,मैं बहक गया था जो मैं उसकी बात नही सुना ,लेकिन इस हादसे से मुझे समझ आ चुका है की मुझे उसकी बातो को सिरियसली लेना चाहिए था “
“लेकिन उसके बाहर आने से काजल और पूर्वी दोनो के ही जान को खतरा है ??”
डॉ मेरी बातो से चकित दिख रहे थे ,
“मैं सम्हाल लूंगा ,मैं उसे अच्छे से समझता हूं आप उसे बाहर निकलवाये “
डॉ थोड़ी देर तक तो सोच में ही डूबा रहा लेकिन फिर वो बाहर चला गया ,मैं उठाकर उसके पीछे ही बाहर आया
“आप पागल हो गए हो क्या ये क्या कर रहे हो “
सामने पूर्वी और शबनम खड़ी थी
“मुझे काजल से मिलना है “
“अभी तुम आराम करो शाम को मिल लेना ,ऐसे भी उसे ज्यादा मिलने नही दिया जाता हम तम्हे स्ट्रेचर में ले जाएंगे “
शबनम की आंखों में भी पानी था और पूर्वी के भी ,मुझे शक था की कही काजल को कुछ हुआ तो नही है और ये लोग मुझसे झूट बोल रहे है ,मैंने शंका की नजर से दोनो को देखा ,
पूर्वी रोते हुए मेरे पास आयी और मुझसे लिपट गई ..
“भइया ये क्या हो गया “
“काजल ठीक तो है ना तुमलोग मुझसे कुछ छिपा तो नही रहे “
पास खड़े हुए डॉ के चहरे में मुस्कान गहरा गई
“छुपाने को बचा ही क्या है देव ,अभी आराम करो शाम को मिल लेना,फिक्र मत करो काजल हमे छोड़कर इतनी जल्दी नही जाने वाली “
डॉ के चहरे में दृढ़ता के भाव उभर गए जैसे उन्हें काजल पर बहुत ही ज्यादा यकीन हो ..

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