मुझे प्यार करो 6

माँ बेटा

अंकित की परीक्षा समाप्त हो चुकी थी और स्कूल में छुट्टी भी हो चुकी थी इसलिए बहुत पूरी तरह से निश्चित था इसलिए निश्चित नहीं था की परीक्षा पूरी हो चुकी थी,, इसलिए निश्चित तथा की परीक्षा के दौरान की दी गई समय अवधि पूरी तरह से समाप्त हो चुकी थी अब वह फिर से अपनी मां के जवानी के जलवे को देख सकता है। चाय की दुकान पर राहुल से हुई मुलाकात से एक बार फिर से अंकित को कुछ सीखने को मिला था। वैसे भी राहुल के साथ की हर एक मुलाकात अंकित के लिए फायदेमंद ही साबित हो रही थी यह मुलाकात भी उसके लिए आगे बढ़ाने के नए दरवाजे को खोल चुका था।

राहुल के कहे अनुसार औरत जब अंदर से प्यासी होती है जब चुदवासी होती है तो अपनी हरकतों से अपनी क्रियाकलाप से घर में जवान मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करती है,,,,, अंकित के पूछे जाने पर राहुल ने बताया था कि उसके घर में भी ऐसा ही होता है राहुल के मुंह से यह सुनकर तो हुआ और भी ज्यादा दंग रह गया था कि उसकी मां उसकी आंखों के सामने पेशाब करते हुए अपनी गांड उसे दिखाती है,,, अंकित को उसकी बात पर विश्वास ना होता अगर वह अपनी आंखों से ही उन दोनों मां बेटे को संभोग रत ना देखा होता,,, लेकिन अंकित के सवाल पर की दोनों के बीच कुछ हुआ है तो वह साफ इनकार कर गया था अंकित अच्छी तरह से जानता था कि कोई भी मर्द इस तरह से बिल्कुल भी कबूल नहीं कर पाएगा कि उसका संबंध उसकी ही मां के साथ है।

लेकिन राहुल की मुलाकात से उसे इतना तो पता चल गया था कि उसकी मां भी प्यासी है उसकी भी क्रियाकलाप एक प्यासी औरत की तरह ही है और इसका कारण भी था कि वह बरसों से पति के बिना रात गुजार रही थी,, और ऐसे हालात में उसका पुरुष संसर्ग के लिए तड़पना लाजमी था इसीलिए तो वह अपनी जवानी का जलवा अपने ही बेटे को दिखा रही थी,,, अंकित समझ गया था कि अब उसे क्या करना है उसकी मां उससे क्या चाहती है वैसे तो अंकित का मन बहुत करता था अपनी मां के साथ संबंध बनाने के लिए लेकिन आगे बढ़ने से डरता था और अभी उसे कोई अनुभव नहीं था औरत के साथ संभोग करने का बस कल्पना में ही क्रियाकलाप करके और अपने हाथ से खिलाकर अपना काम चला रहा था।

घर पर पहुंचने के बाद आराम करने के लिए अंकित अपने कमरे में चला गया और आगे की स्थिति का चयन करने लगा कि अब उसे कैसे आगे बढ़ाना है लेकिन भले ही वह कितनी भी मन में आगे की रचनाएं बना ले चलना तो उसे हालात के मुताबिक ही होता था,,,,, अपने कमरे में परीक्षा की थकान को लेकर वह लेट गया और थोड़ी ही देर में वह नींद की आगोश में चला गया,,।

शाम को जब उसकी मां आई तब दरवाजे पर दस्तक देने लगी अगर दरवाजे पर ताला लगा होता तो उसके पास खुद एक चाबी होती थी और वह खुद ताला खोल देती है लेकिन बाहर ताला नहीं लगा था इसलिए उसे मालूम था कि घर में कोई ना कोई तो होगा ही या तो अंकित या फिर तृप्ति,,, इसलिए दरवाजे पर दस्तक कह रही थी गहरी नींद में सो रहा अंकित के कानों में जब दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज पड़ी तो वह उठकर बैठ गया और दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ समय देखा तो वह समझ गया कि उसकी मां आ गई है । और वह आलस मरोड़ते हुए बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और फिर बाहर जाकर दरवाजा खोलने लगा। जैसे ही दरवाजा खुला तो सामने उसकी मां खड़ी थी और मुस्कुरा रही थी उसे मुस्कुराता हुआ देखकर अंकित भी मुस्कुराने लगा और उसकी मां मुस्कुराते हुए बोली।

कैसी रही आज की परीक्षा?

बहुतअच्छी,,,(ऐसा कहते हुए एक तरफ खड़ा हो गया था कि उसकी मां अंदर आ सके और जैसे ही उसकी मां अंदर आई वह फिर से दरवाजे को बंद कर दिया और अंदर आते ही उसकी मां बोली)

तृप्ति नहीं आई अभी तक,,,।

नहीं अभी तक तो नहीं आई बस तैयारी है आने की।

वैसे अब तेरी परीक्षा समाप्त हो चुकी है,,, अब तो आराम ही आराम है 2 महीने तक।

हां मम्मी ऐसा ही है अब तो तुम्हारी भी छुट्टी होने वाली होगी ना.

बस तीन-चार दिनों में छुट्टी हो जाएगी। (अपना पर्स टेबल पर रखते हुए सुगंधा बोली,,,, सुगंधा के मन में भी ढेर सारी बातें चल रही थी बहुत ही अच्छी तरह से जानती थी कि आज उसके बेटे की परीक्षा खत्म हो चुकी है कुछ दिनों से वह भी मजा नहीं ले पाई थी भले ही वह खुलकर शारीरिक तौर पर मजा नहीं दे रही थी लेकिन ऊपर ही ऊपर से अपनी बेटी को अपने अंगों का प्रदर्शन करके जो आनंद की अनुमति से प्राप्त हो रही थी वह कुछ दिनों से बंद हो चुकी थी लेकिन आज उसकी भी समय मर्यादा समाप्त हो चुकी थी,, इसलिए वह भी मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि आज से उसकी कामुक हरकतें फिर से शुरू होने वाली थी। वैसे तो वह क्या चाहती है यह कभी भी खुलकर अपने बेटे से नहीं बोली थी लेकिन अपनी क्रियाकलाप से अपने अंगों को किसी न किसी बहाने से उजागर करके अपने बेटे को इशारे में ही बहुत कुछ बोल गई थी लेकिन उसका बेटा था कि उसके सारे को समझ कर भी आगे बढ़ने की बिल्कुल भी हिम्मत नहीं कर पाता था।

सुगंधा को आज भी याद है जब उसने मार्केट में नूपुर के साथ एक नौजवान लड़के को देखी थी और वह नौजवान लड़का बेझिझक बिना डरे बिना शर्माए उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर अपना हाथ रखकर सहला रहा था और वह भी खुले मार्केट में,,, उस समय तो, उस लड़के को देखकर सुगंधा को यही लगता था कि नूपुर का किसी जवान लड़के के साथ चक्कर है इसीलिए वह इतना खुलकर उसके साथ हरकत कर रहा है,,, लेकिन जब नूपुर में अपने बेटे से उसे मिलवाया था तो उस लड़के को देखकर सुगंधा एकदम से चौंक गई थी क्योंकि उसका बेटा वही लड़का था जो मार्केट में अपनी ही मन की गांड पर हाथ रखकर सहला रहा था दबा रहा था,,, और उस दृश्य को देखकर सुगंधा के मन में भी अपने बेटे के द्वारा इस तरह की हरकत का आनंद लेने का मन करने लगा जिसमें वह धीरे-धीरे कामयाब भी होती नजर आ रही थी।पर्स को टेबल पर रखने के बाद वह पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गई थी और गहरी गहरी सांस लेकर अपने आपको आराम दे रही थी,,, और इस तरह से टेबल पर पीछे की तरफ झुकी हुई थी जिसे उसकी भारी भरकम छाती एकदम से आगे की तरफ उजागर नजर आ रही थी और उसकी दोनों चूचियां ब्लाउज में और साड़ी के परदे में होने के बावजूद भी अपने होने की आभा बिखेर रही थी,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि काफी दिनों से इस तरह का खेल ना खेलने की वजह से अंकित के तन बदन में एक बार फिर से उत्तेजना की लहर उठने लगेगी और ऐसा ही हो रहा था वह तिरछी नजर से अंकित की तरफ देख रही थी अंकित प्यासी नजरों से उसकी दोनों गोलाईयों की तरफ देख रहा था यह देखकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न होने लगी,,, क्योंकि यही तो वह चाहती थी वह देखना चाहती थी कि इतने दिनों के बाद भी उसके बेटे के मन में उसके बदन के प्रति आकर्षण है या नहीं। भला ऐसा कभी हो सकता है कि मर्द खूबसूरत औरत की तरफ देखना बंद कर दे उसके आकर्षण में अपने आप को बांध ना ले,, आखिरकार मर्दों की फितरत होती ही यही है और अंकित भी तो एक मर्द ही था।

अपनी मां की गोल गोल चूचियों को देखकर उसके मन में लहर उठ रही थी,,, और वह बार-बार छोड़ने जरूर से अपनी मां की छाती की तरफ देख ले रहा था,, मन ही मन में प्रसन्न होते हुए सुगंधा कुर्सी पर से उठते हुए बोली,,,।

बाथरूम जाकर आती हूं फिर चाय बना देती हुं,, बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,,(अपने बेटे की तरफ मुस्कुराते हुए देखकर वह बाथरूम की तरफ घूम गई और अपनी मां के मुंह से पेशाब करते सुनकर एक बार फिर से उत्तेजना के सागर में अंकित अपने आप को डूबता हुआ महसूस करने लगा परीक्षा के दौरान इस तरह के शब्दों को वह सुना ही नहीं था लेकिन परीक्षा के खत्म होते ही एक बार फिर से उसके कान किस तरह के मधुर और कामुक शब्दों से गुजने लगे थे वैसे तो, परीक्षा के दौरान भी उसे जिस तरह का अनुभव सुमन के घर पर मिला था वह काफी हद तक उसे मदहोश कर देने वाला था लेकिन फिर भी परीक्षा की वजह से वह जानबूझकर अपने मन में से उस तरह के कामुक दृश्य को बाहर निकाल दिया था।

(सुगंधा मुस्कुराते हुए बाथरूम में प्रवेश कर गई थी और बाथरूम का दरवाजा बंद कर दी थी लेकिन अंदर पहुंचकर भी वह कुछ देर तक इस अवस्था में खड़ी थी वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा अब क्या करता है,,, उसे अच्छी तरह से मालूम था कि बाथरूम के दरवाजे का वह छोटी सी दरार अभी भी ज्यों कि त्यों थी,,, उसकी मरम्मत अभी तक नहीं हुई थी या यू कह लो की सुगंधा ने जानबूझकर दरवाजे की मरम्मत नहीं कराई थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि यही वह दरार थी जिसमें से उसका बेटा जन्नत का नजारा देखा और एक बार फिर से उसके मन में यही उम्मीद जाग रही थी इसलिए तो वह बाथरूम के अंदर खड़ी थी।

और किस्मत से जैसा सुगंधा सोच रही थी वैसा ही ख्याल अंकित के भी मन में चल रहा था,, क्योंकि परीक्षा के दौरान जिस तरह का सुख सुमन ने अपनी रसीली बुर का स्वाद उसे चखा कर दी थी ,, वह स्वाद अभी तक उसके होठों पर बरकरार था और इसीलिए अपनी मां की बुर देखने के लिए वह तड़प उठा था, वैसे तो अंकित बहुत बार अपनी मां को पेशाब करते हुए नहाते हुए उसकी नंगी गांड के साथ-साथ उसकी बुर के भी दर्शन कर लिया है लेकिन यह चाहत यह प्यास थी कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेती थी,, इसलिए तो जैसा सुगंध अपने मन में सोच रही थी वैसा ही ख्याल अंकित के मन में भी आ रहा था वह भी बाथरुम के दरवाजे की तरह से अंदर की तरफ देखना चाहता था वह देखना चाहता था कि उसकी मां की गुलाबी बुर से किस तरह से पेशाब की धार फुटती है,।

कुछ देर खड़ी रहने के बाद सुगंधा अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगी और अपने बेटे के कदमों की आहट को सुनने के लिए अपने कान को एकदम चौकन्ना कर ली थी ,, इस समय सुगंधा के तन बदनल में उत्तेजना की लहर उठ रही थी अपने बेटे को अपनी बुर दिखाने की चाहत में उत्तेजना के मारे उसकी बुर से मदन रस टपकने लगा था,,, और देखते ही देखते सुगंधा अपनी साड़ी को एकदम कमर से उठा ली थी,,, सुगंधा अपने बेटे की कदमों की आहट का इंतजार कर रही थी जो कि दरवाजे की तरफ बढ़े और अंकित अपनी मां की बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज का इंतजार कर रहा था ताकि सही समय पर वहां दरवाजे की दरार से अंदर की तरफ देख सके,,।

साड़ी को कमर तक उठा लेने के बाद,, कुछ देर तक सुगंधा फिर से उसी तरह से खड़ी रही,, लेकिन जब अंकित के कदमों की आहट उसे सुनाई नहीं थी तो थक हार कर वह अपनी पेंटिं को जांघों तक खींच कर पेशाब करने के लिए बैठ गई और जैसे ही उसकी बुर से सिटी की आवाज निकालना शुरू हुई उस आवाज को सुनकर अंकित का दिल जोरों से धड़कने लगा वह मदहोश होने लगा और समझ गया कि उसकी मां पेशाब करना शुरू कर दी है अब उससे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था,,, वह तुरंत धीरे से कदम आगे बढ़ाया और बाथरूम के दरवाजे की तरफ बढ़ने लगा उसका दिल जोरो से धड़क रहा था काफी दिनों बाद वह एक बार फिर से उसे मनोहर दृश्य को देखने जा रहा था जिसे देखकर वह पूरी तरह से मर्द बन चुकाथा।दरवाजे की तरफ बढ़ती हुई कदमों की आहट को पहचान कर सुगंधा के तन बदन में झनझनाहट सी फैलने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी क्योंकि बिल्कुल वैसा ही हो रहा था जैसा वह अपने मन में सोच रही थी वह समझ गई थी कि उसका बेटा अभी भी उसकी तरफ पूरी तरह से आकर्षित है और उसे पाना चाहता है उसे भोगना चाहता है इस बात की खुशी उसके चेहरे के साथ-साथ उसके गुलाबी छेद में भी नजर आ रही थी और वह हल्के से खुलकर उसमें से तेज पेशाब की धार मार रही थी,,, सुगंधा जानती थी कि कुछ देर तक उसके पेशाब की धार उसकी बुर में से निकलती रही थी क्योंकि उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी और यह नजारा उसका बेटा जरूर अपनी आंखों से देख लेगा,,,। के

अंकित भी देखते ही देखते दरवाजे के पास पहुंच गया और तुरंत घुटनों के बल बैठकर उसे पतली सी दरार में अपनी आंख को सटा दिया और अंदर के नजारे को देखने की कोशिश करने लगा,,, थोड़ी ही देर में अंदर का चित्र पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका था अंकित जो कुछ भी देखना चाहता था वह ठीक उसकी आंखों के सामने थी घुटनों के बल बैठ कर वह अपनी मां को पेशाब करता हुआ देख रहा था,,,, सुगंधा को भी इस बात का पता चल गया था कि दरवाजे पर उसका बेटा पतली धार से सब कुछ देख रहा है इसलिए उसकी भेजना एकदम से बढ़ने लगी थी वह कामुक हरकतों को बढ़ावा देने लगी थी जिसके चलते उसकी मदहोशी और बढ़ती जा रही थी।

सुगंधा इस बात को जानकर कि उसका बेटा सब कुछ देख रहा है इसलिए अपनी हथेली अपनी बर पर रखती और उसकी दोनों उंगलियों को विक्ट्री की शेप में बनाकर अपनी बुर के ईर्द गिर्द कर दी और उस सेप के अंदर से बुर से पेशाब की धार मारने लगी यह देखकर अंकित की हालत खराब होने लगी वह पागल होने लगा बहुत दिनों बाद इस तरह का नजारा देखा था वैसे तो बहुत दिन नहीं हुए थे कुछ दिन पहले ही बात सुमन की बुर को अपने होठों से लगाकर उसका रसपान किया था लेकिन फिर भी उसके लिए अपनी मां की बुर देखे बहुत दिन हो गए थे,,,, इसलिए अंकित के लिए इस दृश्य की रोमांचकता कुछ और थी वह मदहोश हो चुका था,,, ।

इस मदहोश कर देने वाले नजारे को देखकर उसे राहुल की बात याद आ गई थी राहुल की कही गई एक-एक बात सच होती नजर आ रही थी। अभी अंकित इस बारे में सोच ही रहा था कि तभी उसकी मां अपनी बीच वाली उंगली को धीरे से अपनी बुर के अंदर प्रवेश कराने लगी हालांकि अभी भी उसमें से पैसाब की धार निकल रही थी,,,,,, अपनी मां की हरकत को देखकर अंकित अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगा और पेंट के ऊपर से अपने लंड को दबाने लगा जो कि अपनी औकात में आ चुका था,,, और अपने आप से हीबोला,,, मम्मी कितनी चुदवासी है। इसको भी लंड चाहिए जैसा की नूपुर आंटी ले रही थी अपने बेटे का,,,, साली एक बार अपने मुंह से बोल दे कि मुझे तेरा लेना है तो अभी इसी वक्त इसकी बुर में लंड डाल दुं,,,, अंकित इस तरह से अपने आप से ही बात कर रहा था और इस तरह की बात अपने आप से ही करके और वह भी अपनी मां के बारे में वह पूरी तरह से उत्तेजित होने लगा था मदहोश होने लगा था।

इस बात का एहसास की उसका बेटा उसे पेशाब करता हूं अपनी आंखों से देख रहा हुआ अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करते हुए अपनी गुलाबी छेद में जोर-जोर से अपनी उंगली को अंदर बाहर करके मजा लेना शुरू कर दी थी और अंकित उस दरवाजे की दरार में से सब कुछ देख रहा था। अपनी मां की बेशर्मी उसका छीनार पन देखकर उसका मन ईसी समय अपनी मां की चुदाई करने को कर रहा था लेकिन इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि अपने आप से आगे बढ़ने में कहीं गड़बड़ हो गई तो यह सब भी बंद हो जाएगा,,, इसलिए वह ऐसी कोई गलती नहीं करना चाहता था जिससे इस तरह के नजारे दिखने बंद हो जाए,,,। अंकित भी पेंट के ऊपर से अपने लंड को दबा रहा था उसका मन तो बहुत कर रहा था कि ईसी समय अपने लंड को बाहर निकाल कर मुठिया मारना शुरू कर दे लेकिन न जाने क्यों वह ऐसा नहीं कर रहा था,,, शायद इसलिए कि इस समय उसकी मां केवल पेशाब करने के लिए बाथरुम में गई थी और किसी भी वक्त पेशाब करके बाहर निकल सकती थी और ऐसे हालात में अगर वह चरम सुख नहीं प्राप्त कर पाया तो सारा मजा किरकिरा हो जाएगा इसलिए वह ऐसा नहीं करना चाहता था।

अंकित अपनी मां को अपनी बुर के अंदर उंगली अंदर बाहर करता हुआ उसके चेहरे के हाव भाव को देख रहा था। उसे अच्छी तरह से दिखाई दे रहा था कि उसकी मां का चेहरा उत्तेजना से टमाटर की तरह लाल हो चुका था उसके चेहरे पर कामुकता और मदहोशी एकदम साफ झलक रही थी और ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सच में चुदाई का मजा लूट रही हो,,, अंकित को साथ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर से आने वाली सिटी की आवाज एकदम से बंद हो चुकी थी वह पेशाब कर चुकी थी लेकिन फिर भी अपनी बुर के अंदर उंगली को अंदर बाहर करके चुदाई का आनंद लूट रही थी। सुगंधा सब कुछ जानती थी,,, यह सब कुछ अपने बेटे के लिए एक ईशारा था वह अपने बेटे को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए इशारे से समझ रही थी,, लेकिन इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा अपने आप से आगे बढ़ने वाला नहीं है उसे उकसाना पड़ेगा उसे उत्तेजित करना पड़ेगा तब जाकर काम बनने वाला है इसलिए वह इस तरह की हरकत को शुरू कर दी थी।

देखते ही देखते अंकित की आंखों के सामने भले ही वह दरवाजे की दूसरी तरफ था लेकिन सब कुछ देख रहा था यह जानकर वहां एक हाथ से ब्लाउज के ऊपर से अपनी चूची को दबाना शुरू कर दी थी और उत्तेजना के मारे अपने लाल-लाल होठों को अपने दांतों से काट रही थी यह सब अंकित से देखा नहीं जा रहा था अंकित की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी ऐसा लग रहा था कि उसका लंड पेट फाड़ कर बाहर आ जाएगा वह काफी देर से अपनी उत्तेजना को काबू में किए हुए था उसे दबाए हुए था लेकिन ऐसा लग रहा था कि उसे अब उसकी उत्तेजना दबने वाली नहीं थी,, इसलिए वह अपने पेट में से अपने लंड को बाहर निकालने की सोच ही रहा था कि तभी उसकी मां एकदम से चरम सुख को प्राप्त कर ली और एकदम से गहरी गहरी सांस लेने लगी उसके बुरे से मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी यह देखकर अंकित का भी लंड एकदम से लावा फूटने के कगार पर आ गया था,, लेकिन जैसे तैसे वह अपने आप को संभाल ले गया था और वह समझ गया था कि उसकी मां का काम हो चुका है इसलिए वह धीरे से उठकर कुर्सी पर जाकर बैठ गया था क्योंकि खड़ा रहना भी उचित नहीं था क्योंकि उसका लंड खड़ा था और पेंट में तंबू बना हुआ था।

थोड़ी ही देर में बाथरूम में पानी गिरने की आवाज आई और थोड़ी देर बाद उसकी मां बाथरूम में से मुस्कुराते हुए बाहर आने लगी तो उसे मुस्कुराता हुआ देखकर अंकित बोला।

काफी देर लगा दी,,,।

हां पेट में थोड़ा दर्द हो रहा था इसलिए,,,, रुक मैं अभी चाय बना कर लाती हूं थोड़ी देर में तृप्ति भी आने वाली है,,,।(इतना कहकर वह किचन में चली गई और स्थिति सामान्य होने के बाद अंकित भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हुआ और रसोई घर के दरवाजे के पास खड़ा होकर मुस्कुराते हुए बोला।)

तुम्हें कुछ यादहै मम्मी,,,!

क्या,,, ?

ब्रा और पेटी का एक सेट अभी भी नाप लेने के लिए बाकी रह गया है,,,,।

(इतना सुनते ही सुगंध मुस्कुराने लगी)

अंकित की ब्रा और पेटी का सेट नापने वाली बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी थी और उसकी मुस्कुराहट में उसका सहकार एकदम साफ नजर आ रहा था उसे मुस्कुराता हुआ देखकर अंकित के भी मन में गुब्बारे फूटने लगे थे क्योंकि उसकी उम्मीद पर कार थी कि अभी भी बहुत कुछ देखना बाकी है,,, क्योंकि अपनी मां के लिए खरीद कर लाई गई ब्रा पेंटी की तीन जोड़ी में से दो जोड़ी उसकी मां पहन कर देख चुकी थी और वह भी अपने बेटे की आंखों के सामने जिसमें अंकित खुद अपनी मां को ब्रा पेंटी पहनने में मदद किया था और इस बीच ईस अवसर का लाभ उठाते हुए अंकित अपनी मां की बुर को अपनी हथेली से स्पर्श करके उसे दबा भी दिया था यह इस वर्षों से बहुत ज्यादा गर्मी और शुभ प्रदान किया था इसीलिए तो वह एक बार फिर से उस अवसर को प्राप्त करना चाहता था।

अंकित भी उस अवसर का बेसब्री से इंतजार करने लगा,, क्योंकि उस पल में जो आनंद की प्राप्ति उसे होती है वह शायद किसी पल में उसे नहीं होती,,,, लेकिन इस बात को भी 5 दिन गुजर गए थे इस बीच ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था जिससे अंकित को मदहोशी का नशा अपने बदन में महसूस हो सिर्फ उसी दिन ही अपनी मां की जवानी का जलवा देख पाया था जिस दिन उसकी परीक्षा खत्म हुई थी और वह भी बाथरुम में ऐसा लग रहा था कि जैसे अब यह है सिलसिला चलता ही रहेगा,,, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ कुछ दिन तक सब कुछ खामोश चलता रहा,,,। अभी भी तृप्ति की छुट्टियां नहीं पड़ी थी वह रोज कॉलेज जाया करती थी और वहां से कोचिंग चली जाया करती थी अंकित दिन पर घर पर ही रहता था और इधर-उधर घूमता रहता था क्योंकि सुगंधा की भी छुट्टी अभी नहीं पड़ी थी,,,।

इस दौरान अंकित की मुलाकात सुमन से बाजार में हो गई ,,,, सुमन को देखते ही अंकित एकदम खुश हो गया वह सब्जी खरीद रही थी और वह तुरंत उसके पास पहुंच गया सुमन की नजर अभी तक अंकित पर नहीं पड़ी थी और वह बैगन खरीद रही थी बैगन को जिस तरह से वह अपने हाथ में लेकर देख रही थी यह देखकर अंकित के तन-बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी क्योंकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि मानो जैसे सुमन के हाथ में बैगन नहीं बल्कि उसका मोटा लंबा खड़ा लंड है,,,, और जिस तरह की सोच अंकित के दिमाग में चल रही थी उसी तरह की सोच सुमन के भी दिमाग में चल रही थी वह अपने हाथ में बैगन लेकर मन ही मन अंकित के लंड के बारे में कल्पना कर रही थी,,, और उसे पाल को याद कर रही थी जब पहली मुलाकात अंकित से हुई थी और वह भी किचन में और वह जिस तरह से झुकी हुई थी उसके नितंबों का स्पर्श एकदम से अंकित के लंड से हो गई थी उसी समय सुमन समझ गई थी कि अंकित के पास जानदार हथियार है।

बात की शुरुआत करते हुए अंकित बोला,,,.

सुमन दीदी क्या खरीद रही हो ,,,?(अंकित एकदम से मुस्कुराते हुए बोला तो एकाएक उसके कानों में इस तरह की आवाज पढ़ते ही वह एकदम से चौक कर अपने पीछे की तरफ देखी तो ठीक उसके बगल में अंकित खड़ा था और अंकित को देखते ही उसके चेहरे पर भी प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह अपने मन में सोचने लगी कि कैसी किस्मत है वह अभी-अभी बैगन को हाथ में लेकर उसके लंड के बारे में सोच ही रही थी कि वह खुद मेरे बगल में खड़ा है वह एकदम से प्रसन्न होते हुए बोली।)

तुम यहां क्या कर रहे हो अंकित,,,?

मैं भी यहां सब्जी खरीदने आया था तुम्हें देखा तो तुम्हारे पास आ गया,,,।

ओहहह अब तो बार-बार मेरे पास आना होगा,,,(अपनी आंखों को नचाते हुए वह बोली,,, अंकित उसके कहने के मतलब को समझ रहा था इसलिए कुछ बोल नहीं पाया उसके हाथ में अभी भी बैगन था और वह भी काफी मोटा और लंबा था उसे देखकर अंकित बोला,,)

तुम्हें बैंगन पसंद है,,,!

इस उम्र में मेरी जैसी लड़कियों को बैंदन ही पसंद होता है,,,,।(अपने होठों पर मुस्कान लाते हुए बड़ी मादक स्वर में सुमन बोली उसके कहने के मतलब को कुछ देर पहले जो अंकित अपने मन में सोच रहा था उससे थोड़ा-थोड़ा तो वह समझना था लेकिन फिर भी उसकी जिज्ञासा समाप्त नहीं हो रही थी इसलिए वह बोला)

मैं कुछ समझा नहीं,,,!(आश्चर्य के साथ अंकित बोल तो मुस्कुराते हुए जवाब देते हुए सुमन बोली,,)

धीरे-धीरे सब समझ जाओगे रुको पहले मैं सब्जी खरीद लेती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह थोड़ा नीचे झुक कर बैगन के देर में से अच्छे-अच्छे बड़े बैगन को लेने लगी और उसे झुकी हुई देखकर अंकित की नजर उसके पिछवाड़े पर चली गई क्योंकि इस अवस्था में कुछ ज्यादा ही चौड़ी नजर आ रही थी इसकी चौड़ी गांड को देखकर अंकित के दोनों जांघों के बीच सनसनाहट बढ़ने लगी,,,,, बाजार में कोई देखने नहीं इसलिए वहां सुमन की गांड पर से अपनी नजर को हटा दिया और सुमन को बैगन लेते हुए देखने लगा,,,, बड़ी मासूमियत के साथ वह बैगन के ढेर में से अच्छे-अच्छे बैंगन को पसंद कर रही थी और उसकी पसंद थी मोटा तगड़ा और लंबा बैगन और यह देखकर अंकित अपने मन में सोचने लगा कि जिस तरह की गांड है सच में सुमन को इसी तरह का बैंगन की जरूरत है,,,।

लेकिन इस बीच अंकित की नजर उसे सब्जी वाले पर गई तो वह एकदम से तंग रह गया क्योंकि उसकी निगाहें सुमन की कुर्ती के ऊपर हिस्से पर टिकी हुई थी और वह चोर नजरों से और प्यासी नजरों से उसकी चूचियों की तरफ देख रहा था,,, उसकी नजरों को देखकर अंकित को समझते थे नहीं लगी कि वह सब्जी वाला सुमन के कौन से अंग को देख रहा है।उसकी गंदी नजर को देखकर अंकित के मन में आया कि इसी समय वह सब्जी वाले को टोक दें लेकिन ऐसा करने से,,, भरी बाजार में उसकी फजीहत हो सकती थी,, क्योंकि ऐसा कोई सबुत नहीं था कि वह वाकई में सुमन की चूचियों को ही बोल रहा था,,, इसलिए अपने मन में आयुष ख्याल को अपने दिमाग से निकाल दिया और थोड़ी ही देर में सुमन भी सब्जी वाले को पैसे देकर बैगन को ठेले में ले ली और मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ देखते हुए बोली,,,,।

तुम कौन सी सब्जी खरीदने आए हो,,,।

मैं तो कद्दू खरीदना है उसकी सब्जी बहुत अच्छी लगती है मम्मी को,,,

ओहहहह कद्दू,,,, मुझे लगा तुम भी बैगन खरीदने आए हो,,,,।

नहीं नहीं बैगन तो मुझे भी नहीं अच्छा लगता और ना ही मम्मी को अच्छा लगता है,,,,।

और तुम्हारी दीदी को उसे तो अच्छा लगता होगा क्योंकि वह भी तो मेरी उम्र की है,,,।(एकदम खुश होते हुए सुमन बोली)

नहीं ऐसा कुछ खास नहीं है जो मिल जाए वही खा लेती है उसकी कोई पसंद ना पसंद नहीं है बस भूख लगनी चाहिए,,,।

ओहहह ,,, तब तो वह सबसे अलग है ,,। तुम्हारी मम्मी को तो जरूर देना पसंद होगा और तुम कह रहे हो कि उसे बैंगन नहीं पसंद,,,,।हां सच कह रहा हूं दीदी मम्मी को बैगन बिल्कुल भी नहीं पसंद है,,,।
(दोनों बाजार में चलते हुए बात कर रहे थे और सुमन अपने मन में सोच रही थी कि अंकित की मां बरसों से अकेले ही जीवन काट रही थी ऐसे में उसे तो सबसे ज्यादा ऐसे मोटे तगड़े बेगन की जरूरत पड़ती होगी,,, अपने मन में उठ रहे सवाल का जवाब वह खुद ही देते हुए बोली हो सकता है कि वह किसी और से कम चलती होगी आजकल किसी का भरोसा नहीं है। सुमन को इस तरह से खामोश देखकर अंकित बोला,,,)

क्या हुआ क्या सोच रही हो,,,?

तुम्हारी मम्मी के बारे में,,,,

मम्मी के बारे में,,,!

मेरा मतलब है कि मैं तुम्हारी मम्मी के बारे में सोच रही थी कि कितनी मेहनत करती हैं घर का कामकाज फिर स्कूल जाना पढाना,,, बहुत दिक्कत हो जाती होगी।

हां वह तो है लेकिन फिर भी मम्मी सब संभाल लेती है,,,।(अंकित एकदम सहज होते हुए बोला.. उसकी बात सुनकर सुमन बोली,,,)

सिर्फ कद्दू ही लेना है कि और कुछ भी लेना है,,,।

नहीं नहीं सिर्फ कद्दू लेना है,,,।

तो चलो वह देखो ठेले पर कद्दू है और अच्छे-अच्छे हैं चलो चलकर ले लेते हैं,,,।

ठीक है दीदी अच्छा हुआ कि तुम मुझे बाजार में मिल गई वरना मैं अच्छे से कद्दू खरीद ही नहीं पाता हूं जब भी खरीद कर ले जाता हूं तो मम्मी कोई ना कोई नुस्ख निकालती रहती है,,,।

तब तुमको सब्जी खरीदना नहीं आता होगा चलो कोई बात नहीं आज मैं हूं तुम्हारे साथ हुं आज तुम्हें डांट नहीं पड़ेगी,,,।

चलो दीदी तुम तो अच्छा है नहीं तो मैं घबरा ही रहा था कि आज कैसी खरीद कर ले जाऊंगा,,,।

(थोड़ी देर में दोनों ठेले वाले के पास पहुंच गए और एक अच्छा सा कद्दू देखकर सुमन खुद अपने हाथों से निकाल कर उसे ठेले वाले को तोलने के लिए दे दी और कद्दू लेकर दोनों एक अच्छे से दुकान पर पहुंच गए जहां पर समोसे और जलेबी तली जा रही थी,,, सुमन खुद उसे वहां पर लेकर गई थी और आज भीड़भाड़ बहुत कम थी इसलिए एक अच्छी सी जगह देखकर दोनों बैठ गए,,, अंकित के मन में थोड़ी घबराहट थी क्योंकि वह जानता था कि उसके पास पैसे नहीं है और इस बात को शायद सुमन समझ गई थी इसलिए ठीक उसके बगल में कुर्सी पर बैठते हुए वह बोली,,,)

तुम चिंता मत करो पैसे मैं दूंगी,,,।
(इतना सुनकर अंकित राहत की सांस लेने लगा और वाकई में खर्च के लिए उसके पास पैसे नहीं होते थे और नहीं कभी अपनी मां से बेवजह पैसे मांगता था जब जरूरत पड़ती थी तभी पैसे मांगता था क्योंकि वह अपने हालात से अच्छी तरह से वाकिफ था,,,, थोड़ी देर में दुकान पर काम करने वाला एक लड़का दोनों के लिए समोसे और जलेबी या लेकर आ गया और सुमन उसमें से समोसा उठाकर अंकित को देते हुए और खुद एक समोसा हाथ में लेकर बोली,,)

अब खाओ,,,।

(अंकित भी समोसा लेकर खाने लगा और दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई.. सुमन के मन में उस दिन वाली बात चल रही थी जब वह,,, अंकित को कमरे में अकेला पाकर उसके होठों से अपनी बुर सटा दी थी,,, वह पल सुमन के लिए बेहद अद्भुत था वैसे तो इस तरह के पल उसके जीवन में बहुत बार आए थे क्योंकि बहुत से लड़कों के साथ उसके संबंध रहे थे लेकिन अंकित उनमें खास था अंकित के साथ वह जानती थी कि उसे बहुत आनंद आने वाला है और उसे दिन भी अंकित ने अपनी जीभ और अपने होठों से उसे बेहद आनंद की प्राप्ति करवाया था इसलिए उसका शुक्रिया अदा करते हुए वह उसे दिन की बात को याद कराते हुए अंकित से बोली,,)

सच-सच बताना अंकित उस दिन मजा आया था कि नहीं,,,,?

(अंकित समझ गया था कि सुमन किस दिन वाली बात कर रही है लेकिन फिर भी अपनी बात को घुमाते हुए वह बोला,,,)

किस दिन की बात कर रही हो दीदी,,,?

अब ज्यादा बनने की जरूरत नहीं है मैं उसी दिन की बात कर रही हूं उसी दिन तु,,, सवाल का हल ढूंढने के लिए आया था,,,,।
(सुमन के मुंह से एकदम साफ तौर पर उसे दिन वाली बात सुनकर अंकित के चेहरे पर उत्तेजना की लहर सांप दिखाई देने लगी और वह शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका दिया तो उसे इस तरह से शर्माता हुआ देखकर सुमन बोली)

अरे इसमें शर्माने की कोई बात नहीं है मैं तुझे कुछ बोल नहीं रही हूं सिर्फ पूछ रही हूं कि तुझे मजा आया तो था ना कहीं मेरी हरकत तुझे खराब तो नहीं लगीथी,,,।

बिल्कुल भी नहीं दीदी उसे दिन तो तुमने मुझे एक नया अनुभव दी थी मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है।(जलेबी का टुकड़ा मुंह में डालकर शरमाते हुए अंकित बोला तो उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए सुमन बोली)क्या सच में तुझे नहीं मालूम था की लड़कियों की बुर के साथ क्या किया जाता है,,,!

मुझे कैसे मालूम होगा दीदी मैंने यह सब पहले कभी किया ही नहीं था सच कहूं तो पहली बार तो मैं तुम्हारी वह देख रहा था और वह भी ठीक तरह से नहीं देख पाया था,,,।

क्या वो,,, जरा खुल के तो बोल,,,(समोसा खाते हुए सुमन मुस्कुराते हुए बोली ,,, सुमन देखना चाहती थी कि अंकित को उस अंग का नाम भी पता है या नहीं,,,)

क्या दीदी जाने दो ना,,,(शरमाते हुए अंकित बोल तो वह एकदम से जीद पर अड गई और बोली,,,)

बता दे इतना तो मालूम है कि तू इतना भी नादान नहीं है कि उसे अंग को क्या कहते होंगे यह नहीं मालूम होगा अगर बता दिया तो इससे आगे भी बहुत मजा दूंगी,,,,।

मुझे शर्म आती है,,,।

अरे हरामि शर्म तो मुझे आनी चाहिए लेकिन देख तेरे सामने कितनी बेशरम हूं क्योंकि तुझे नहीं मालूम बेशर्म बनने के बाद ही असली मजा आता है,,,,। चल अब जल्दी से बता भी दे शर्माने की जरूरत नहीं है,,,,।

बबबबब,,,,बुर,,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित एकदम से गनगना गया ,,, वैसे तो वह इस शब्द को किसी भी लड़की के सामने कहना नहीं चाहता था लेकिन सुमन उसे मजबूर कर दी थी और सुमन की भी बेशर्मी को देखकर अंकित काफी हिम्मत बढ़ने लगी इसलिए वह सुमन के सामने उसके खूबसूरत अंग का नाम ले लिया था इस अंग का नाम लेते हुए उसके लंड की अकड़ एकदम से बढ़ गई थी,,,, अंकित के मुंह से औरत के सबसे खूबसूरत और उत्तेजित अंग का नाम सुनते ही सुमन के चेहरे पर शर्म की लालिमा जाने लगी वह उत्तेजित होने लगी और इसका असर उसकी दोनों टांगों के बीच के इस अंग पर होने लगा था जिसका अंकित ने नाम लिया था और उसकी बहादुरी देखकर सुमनमुस्कुराते हुए बोली,,,)

यह हुई ना मर्दों वाली बात अब देखना तुझे मैं बहुत मजा दूंगी,,,,।

लेकिन दीदी मैं उसे दिन तुम्हारी उसको ठीक तरह से देख भी नहीं पाया था,,,।

किसको,,!(फिर से मुस्कुराते हुए सुमन बोली तो इस बार बेझिझक जवाब देते हुए अंकित बोला,,,)

तुम्हारी बुर,,,,,।
(इतना सुनते ही सुमन बहुत खुश हो गई लेकिन अपने अगल-बगल नजर थोड़ा कर देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन कोई भी उन दोनों की तरफ ध्यान नहीं दे रहा था और अंकित के मुंह से इस तरह के शब्द सुनकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी और उसकी बात सुनकर बोली)

बाप रे मैंने अपनी बर पूरा का पूरा तेरे मुंह से लगा दी थी और जीभ से तू चाट भी रहा था फिर भी कहता है कि मैं ठीक तरह से देखा नहीं,,,,।

सच कह रहा हूं दीदी तुमने देखने का मौका ही नहीं दी और उसे मेरे मुंह से लगा दी सच कहूं तो मैं अभी ठीक तरह से यह सब देखा भी नहीं हूं।

ओहहहह,,,, यह बात है तो तू ठीक तरह से देखना चाहता है ना,,,,!

यह भी कोई कहने वाली बात है दीदी,,,, कौन होगा जो नहीं देखना चाहेगा।

कोई बात नहीं मैं तुझे ठीक तरह से दिखा दूंगी,,, चले आना मेरे घर पर पढ़ाई के बहाने,,,।

(सुमन की बात सुनकर अंकित खुशी से गदगद हो क्या मन में आया किसी समय बता दे कि उसे समय वह तुम्हारे घर पर तुम्हारी मां को भी नंगी देख चुका है नहाते हुए लेकिन ऐसा कहने की उसकी हिम्मत नहीं हुई,,,, इस तरह की बातें करके सुमन को अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि उसकी बुर पानी छोड़ रही थी और उसे पूरा यकीन था कि इस तरह की बातें करके अंकित का भी लंड खड़ा हो गया होगा इसलिए वह धीरे से बोली,,,)

अंकित,,,, इस तरह की बातें करके मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारा लंड खड़ा हो गया होगा बताओ सही कह रही हूं ना,,,।

(सुमन की यह बातें सुनकर अंकित एकदम से शर्मा गया और शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका लिया और उसकी नीचे झुकी नजरे सच्चाई को बयां कर रही थी इसलिए सुमन मुस्कुराने लगी सुमन धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हुई और दुकान वाले को पैसे देकर वापस कुर्सी के पास आई और अपना थैला हाथ में लेते हुए बोली,,,)

अंकित अपना थैला अपने आगे कर लेना वरना तुम्हारे पेंट में बना तंबू सबको दिखाई देगा,,,।
(सुमन किस तरह की बेशर्मी भरी बातें सुनकर अंकित एकदम से मस्त हो गया था क्योंकि जो कुछ भी वह कह रही थी वह बिल्कुल सही था,, जिसे बिल्कुल भी नकारा नहीं जा सकता था और उसने वैसा ही किया कुर्सी पर से उठते समय पहले को अपने आगे रख लिया लेकिन इस बीच सुमन उसके पेट में बना तंबू देख ली थी और मन ही मन लग जा भी रही थी और जैसे ही वह चलने के हुआ सबसे नजरे बचा कर वह ठेले के पीछे अपना हाथ बढ़ाकर अंकित के तंबू को अपनी हथेली में जोर से दबा दी थी और अंकित एकदम से मत हो गया था लेकिन कुछ बोल नहीं पाया था सुमन जल्दी से अपना हाथ हटा ली थी।

लेकिन जो कुछभी उसने अपनी हथेली में महसूस की थी वह पूरी तरह से उसे मदहोश कर गया था क्योंकि उसकी हथेली पूरी तरह से उसके पेट में बने तंबू से भर चुकी थी और वह समझ चुकी थी वाकई में अंकित के पास मोटा तगड़ा और लंबा लैंड है जो उसकी बुर में जाएगा तो उसकी बुर के तार तार खोल देगा,,,, इस बात को अपने मन में ही महसूस करके वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,,, और मुस्कुराकर अंकित की तरफ देखने लगी लेकिन अंकित शर्म के मारे अपनी नज़रें नीचे कर लिया,,,, दोनों रास्ते भर बातें करते हुए आए,,, अंकित जो कुछ भी बाजार में हुआ था उसे लेकर काफी उत्तेजित और अपनी उत्तेजना शांत करने के लिए घर पर पहुंचते ही बाथरूम में चला गया और मुठ मार कर अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश करने लगा।

आज आखिरी दिन था स्कूल में उसकी मां की भी छुट्टी होने वाली थी,, एक दिन पहले ही उसकी बड़ी बहन की बीच छुट्टी हो चुकी थी,,, इसलिए अंकित निराश था और अपनी मां से नाराज भी था क्योंकि इस बीच उसकी मां ने ब्रा पेंटी को नापने के बारे में जिक्र तक नहीं की थी जबकि अंकित ने उसे याद भी दिलाया था। वह इस बारे में अपनी मां से बात करना चाहता था लेकिन अब उसे मौका नहीं मिलने वाला था क्योंकि वह जानता था कि उसकी बड़ी बहन की छुट्टी हो जाने की वजह से वह दिन भर घर पर ही रहेगी अब दोनों को मौका मिलने वाला नहीं था जिसके बारे में सोचकर उसकी मां भी उदास थी,,,।

सुबह-सुबह नहा धोकर तैयार होकर उसकी मां खाना बना रही थी और छुट्टी होने की वजह से उसकी बहन अपने कमरे में नाश्ता करके बैठकर कुछ पढ़ रही थी इस बात को सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी और शायद इसीलिए रसोई घर में आने के लिए अंकित का इंतजार कर रही थी,,, अंकित को भी नाश्ता करना था इसलिए वहां रसोई घर में जैसे किया उसकी मां उसे देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,,।

तीसरी जोड़ी एकदम फिट बैठ रही है मुझे गर्व होता है कि तू मेरे नाप की ही ब्रा पेंटी खरीद कर लाया है,,,।

(अपनी मां की बात सुनते ही अंकित थोड़ा हैरान हो गया क्योंकि उसके बगैर उसकी मां कैसे ब्रा और पैंटी पहने उसे उम्मीद थी कि उसकी आपके सामने ही उसकी मां ब्रा पेंटी का नाप लगी पहनकर लेकिन ऐसा नहीं हुआ था लेकिन किसी उसे विश्वास नहीं हो रहा था तो वह आश्चर्य से अपनी मां की तरफ देख रहा था और उसके आंखों में उठ रहे सवाल को सुगंधा अच्छी तरह से पढ़ ली थी इसलिए वह बोली,,,)

क्या हुआ तुझे विश्वास नहीं हो रहा है ना,,,

नहीं बिल्कुल भी नहीं,,,,

यह देख,,,( ईतना कहने के साथ ही मौका देखकर सुगंध तुरंत अपनी साड़ी दोनों हाथों से पड़कर उसे कमर तक उठा दी और वाकई में उसकी मां उसके द्वारा खरीद कर लाई गई नई पैंटी पहनी हुई थी,,,, और उसे पेटी में उसकी गोरी गोरी मोटी मोटी जांघें बेहद आकर्षक लग रही थी अंकित तो अपनी मां की नहीं पहनती नहीं बल्कि उसकी मोटी मोटी जामुन को ही देख रहा था काफी दिनों बाद उसे यह नजारा देखने को मिला था इसलिए उसकी आंखों में पल भर में ही पूरी तरह से मदहोशी छाने लगी थी,,,,।

अंकित पूरी तरह से अपनी मां की हरकत पर मदहोश हो चुका था उसका दीवाना हो चुका था क्योंकि उसे उम्मीद नहीं था की किचन में आकर उसे इस तरह का नजारा देखने को मिलेगा सुबह-सुबह उसकी मां उसे खुश कर दी थी और सुगंध भी अपने बेटे की आंखों में मदहोशी और वासना दोनों साफ तौर पर देख पा रही थी इसलिए मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,, अंकित के लिए अब कोई शब्द नहीं बचे थे वह अपनी मां को कुछ बोल भी नहीं सकता था क्योंकि बहुत दिनों बाद इस तरह का नजारा देखकर फिर से उसकी उम्मीद बंध चुकी थी इसलिए वह अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ करते हुए बोला,,,।

वाह सच में तुम बहुत खूबसूरत हो ,,, यह पेंटि सिर्फ तुम्हारे लिए ही बनी है तभी तो तुम्हारे बदन पर इतनी खूबसूरत लग रही है,,,(ऐसा कहते हुए अंकित धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था वह किसी ने किसी बहाने अपनी मां को स्पर्श करना चाहता था खास करके उसके पेटी वाले हिस्से को लेकिन वह अभी कदम आगे बढ़ाया ही था की तृप्ति के कमरे का दरवाजा खोलने की आवाज आई और एकदम से सुगंध अपनी साड़ी को कमर से नीचे गिरा दी और व्यवस्थित होकर खाना बनाने लगी अंकित भी अपने कदमों को पीछे ले लिया और पानी का गिलास लेकर उसे पीने लगा तब तक तृप्ति भी रसोई घर में आ चुकी थी।)

एक दिन सुबह-सुबह सुगंधा तैयार हो रही थी। स्कूल की छुट्टियां पड़ चुकी थी इसलिए वह निश्चिंत थी,,, सुगंधा को अपने भाई के घर जाना था जो की तकरीबन 25 किलोमीटर की दूरी पर ही रहता था और वह सुगंधा से छोटा भी था,, काफी दिन हो गए थे उसे अपने भाई से मिले वैसे तो सुगंधा का बड़ा भाई विशाल लेकिन वह गांव में रहता था,, और ज्यादातर वहां आना-जाना तभी होता था जब शादी ब्याह पड़ता था,,। और गांव गए भी सुगंधा को काफी समय हो गया था लेकिन ऐसा कोई प्रोग्राम ही नहीं बन रहा था कि उसे कहां जाना पड़ता बहुत दिनों बाद वहां अपने छोटे भाई के घर जाने की मन में ठान ली थी।

क्योंकि उसके छोटे भाई ने उसकी बहुत मदद भी की थी जब उसके पति का देहांत हुआ था तब उसका छोटा भाई ही बहुत दिनों तक उनके साथ भी रहा था अपनी बीवी के साथ जब तक सब कुछ सामान्य नहीं हो गया तब तक वह उन लोगों की देखभाल करने के लिए उनके साथ ही रहता था। लेकिन काफी दिनों से दोनों की मुलाकात नहीं हुई थी इसलिए गर्मियों की छुट्टी में वह एक दिन के लिए अपने भाई के घर जाना चाहती थी वैसे तो अंकित भी साथ में जा रहा था और सुगंधा ने तृप्ती को भी जाने के लिए बोली थी लेकिन तृप्ति नई-नई कोचिंग लगी थी और नए विषय की पढ़ाई थी इसलिए वह नहीं जा रही थी,,,, तृप्ति के न जाने पर सुगंधा को तो इस बात की फिक्र थे ही की तृप्ति घर में अकेली कैसे रहेगी क्या करेगी,,,।

लेकिन इस बारे में उसने सुषमा से बात की थी और सुषमा उसे निश्चित रहने के लिए कही थी एक ही दिन की तो बात थी वह बोली थी कि एक दिन वह उसके घर पर रुक जाएगी इसमें क्या हुआ जैसे सुमन उसकी बेटी है वैसे तृप्ति भी तो उसकी बेटी ही है,, सुषमा की बात सुनकर सुगंधा को राहत मिली थी और निश्चित हो गई थी तृप्ति के लिए क्योंकि सुषमा उसकी देखभाल उसका खाना पीना एक दिन के लिए अपने घर निश्चित कर ली थी,,, और इसीलिए निश्चिंत होकर सुषमा तैयार हो रही थी और तैयार होते होते वह तृप्ति से बोली।

अरे तृप्ति देख जरा अंकित तैयार हुआ कि नहीं,,,।

ठीक है मम्मी मैं अभी देख कर आती हूं,,,, लेकिन मम्मी,,,(अपनी मम्मी की तरफ देखते हुए,,) आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो..।

चल रहने दे,,,, इस उम्र में भला खूबसूरत लगकर क्या करुंगी,,,,(बालों में कंघी करते हुए सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली वह आईने में अपने आप को देख रही थी और उसे भी इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में आज कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही थी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोली,,) जा जल्दी जाकर देख कहीं उसकी वजह से बस न छूट जाए,,,

जा रही हूं लेकिन मुझे लगता नहीं है कि तुम पर उम्र भारी पड़ रही है,,,।(तृप्ति मुस्कुराते हुए बोली)

अब मेरे सामने कविता मत पढ़,,, जो बोल रही हूं उसे पर ध्यान दें,,।

क्या मम्मी तुमसे मेरी बात को कभी भी दिल पर लेती नहीं हो मैं एकदम सच कह रही हूं,,,।
(ऐसा कहते हुए तृप्ति अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गई और सुगंधा आईने में अपने आप को देखकर मुस्कुरा रही थी,,, सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी बेटी उसकी खूबसूरती के बारे में गलत नहीं कह रही थी वह सच कह रही थी और अपनी ही बेटी के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह मन ही मन गर्व महसूस कर रही थी क्योंकि भले ही तृप्ति उसकी बेटी थी लेकिन थी एक लड़की ही,,, और जब एक लड़की किसी औरत की तारीफ करें तो समझ लो कि वह झूठ नहीं बोल रही है।

तृप्ति देखते हई देखते अपने भाई के कमरे तक पहुंच गई,,,, वह अपने भाई को आवाज देकर दरवाजे पर जा सकते नहीं वाली थी कि ना जाने उसके दिमाग में क्या सोचा कि वह एकदम से वही खड़ी हो गई और हल्के से दरवाजे पर हाथ रख तो दरवाजा धीरे से थोड़ा सा खुल गया पल भर में उसकी आंखों के सामने जो एक बार अपने भाई को जगाने के लिए उसके कमरे में गई थी वही फिर से उजागर हो गया और वह दृश्य के बारे में सोचने लगी ना जाने क्यों वही नजर उसके मन में घूमने लगा और वह एक बार फिर से उसने चेहरे को देखने की चाहत अपने मन में करने लगी।

ऐसा लग रहा था कि जैसे जो कुछ भी उसके मन में चल रहा है वह बहू कमरे के अंदर दिखाई भी दे रहा है क्योंकि वह जैसे ही दरवाजा हल्के से खोली तो कमरे के अंदर उसे सामने का नजारा देखने लगा और जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से देखी उसे देखकर वह एकदम से दंग रह गई क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसका भाई संपूर्ण रूप से नग्नावस्था में खड़ा था एकदम नंगा,,, और अलमारी में से अपने कपड़े निकाल रहा था वैसे तो उसकी पीठ दरवाजे की तरफ थी इसलिए वह निश्चित था उसे नहीं मालूम था कि दरवाजे पर उसकी बहन खड़ी है वह अपने आप में ही मस्त अपने लिए कपड़े ढूंढ रहा था।

अपने भाई को नंगा देखकर तृप्ति के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,,, वह उसके नंगे घटीले बटन को देख रही थी और उसकी नजर सीधे उसके कमर के नीचे उसके नितंबों पर जा टिकीं जो कि एकदम कसी हुई थी,,,, और उसके ऊपर एकदम गजब का दिखाई दे रहा था बीच की गहरी पतली दरार देखकर तृप्ति के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी वैसे भी एक बार वह अपने भाई को देख चुकी थी उसके मोटे तगड़े लंबे लंड को देख चुकी थी उसे देखकर उसे समय उसके तन बदन में आग लग गई थी।

और जब वह संदीप के साथ अपने कॉलेज की मैडम के बर्थडे पर गई थी तब उसे समय संदीप उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश किया था उसे समय संदीप के लंड को देखकर उसे अपने भाई का लंड याद आ गया था क्योंकि संदीप के लंड की तुलना कुछ ज्यादा ही मोटा और तगड़ा था और लंबाई भी उसकी गजब की थी और तृप्ति इस समय इस दृश्य के बारे में सोच रही थी। और अपने मन में यही दुआ भी कर रही थी कि काशी समय भी उसके भाई का लंड उसे देखने को मिल जाता तो कितना अच्छा होता,,, और इसी ख्वाहिश में दरवाजे को हल्के से खोलकर ताकि उसके भाई को बिल्कुल भी शक ना हो कि दरवाजे पर कोई खड़ा है और उसे देख रहा है वह इस तरह से अपने आप को दरवाजे के पीछे छुपा कर अपने भाई को देख रही थी,,, तृप्ति का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां भी कमरे से बाहर ना आ जाए। इसलिए वह बार-बार दरवाजे की तरफ देख ले रही थी।

अंकित निश्चिंत होकर अलमारी में से अपने कपड़े धो रहा था उसको थोड़ी देर में उसे अपने कपड़े मिल भी गए थे और वह गुनगुनाता हुआ उसे कपड़े को अपने हाथों में लेकर दरवाजे की तरफ मुंह करके खड़ा हो गया था और दरवाजे की तरफ मुंह करके घूमते ही तृप्ति की ख्वाहिश पूरी हो चुकी थी क्योंकि उसने अपने भाई के लंड देख लेती और इस समय भी वह अपनी औकात में आकर खड़ा था,,, अपने भाई के खड़े लंड को देखकर अपने आप ही तृप्ति को अपनी बुर में खुजली होती है महसूस होने लगी थी,,, अपने भाई के लंड की मोटाई लंबाई देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी आज दूसरी बार अपने भाई के लंड को देख रही थी,, और उसकी हालत खराब होती जा रही थी,,, अगर उसकी जगह कोई और होता तो उसकी भी हालत खराब हो जाती क्योंकि अंकित का हथियार था ही इतना दमदार तभी तो उसकी मां खुद उसकी दीवानी हो गई थी।अंकित कपड़े बिस्तर पर रखकर टी-शर्ट निकाल कर उसे पहन लिया और अपने आप को आईने में देखने लगा,, जब भी इधर-उधर उसके कम पढ़ रहे थे तो उसके साथ ही उसका खड़ा लंड एकदम से लहरा उठता था और यह नजारा तृप्ति के तन बदन में जवानी की उमंगों को बढ़ावा दे रहा था। तृप्ति को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपनी आंखों के सामने इस तरह का मदहोशी भरा नजारा देखकर उसके पैर वही जम गए थे,,, देखते देखते अंकित बिस्तर पर से अपना अंडरवियर ले लिया उसे इधर-उधर घूमा कर पहले देखने लगा फिर से पहनने की तैयारी करने लगा,,,, तृप्ति अपने भाई के बदन के केवल उसके लंड कोई देख रही थी बाकी के अंग पर उसकी नजर जा ही नहीं रही थी वह पूरी तरह से जड़वंत हो गई थी,,,।

तृप्ति अपने मन में यही सोच रही थी कि उसके भाई का लंड हमेशा खड़ा क्यों रहता है आखिरकार ऐसा हुआ करता क्या है कि उसका लंड हमेशा खड़ा रहता है उसे दिन देखी थी तब भी खड़ा था आज देख रही है फिर भी खड़ा है और वह भी ऐसा वैसा नहीं पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा है,,, यह सवाल का जवाब मिलना शायद इस समय तृप्ति के लिए मुश्किल था क्योंकि वह नहीं जानती थी कि कुछ देर पहले ही वह अपनी मां के बारे में सोच रहा था और जब भी वह अपनी मां के बारे में सोचता था या उसके करीब रहता था अपने आप ही उसका लंड अपने आप अपनी औकात में आ जाता था इसीलिए इस समय भी वह पूरी तरह से उत्थान पर था।

अंडरवियर को अपने हाथ में लेकर वह पहनने ही वाला था कि उसकी नजर अपने खड़े लंड पर चली गई,, और वह मदहोश होकर अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे मुट्ठी में लेकर मदहोश होता हुआ उसे मुठियाने लगा यह देखकर तो तृप्ति की हालत और भी ज्यादा खराब हो गई क्योंकि उसके भाई की हरकत पूरी तरह से उपासना से भरी हुई थी और ऐसा एक जवान लड़का तभी करता है जब उसके मन में किसी औरत के प्रति या लड़की के प्रति वासना जागरूक होती है और इस समय अपने भाई के रूप को देखकर खुद तृप्ति की बुर से मदन रस टपकने लगा था।

दरवाजे के पीछे छुपकर तृप्ति सब कुछ देख रही थी वह अपने भाई के लंड को मुठीयाता हुआ देख रही थी,,, और लंड की मोटाई इतनी गजब की थी कि उसकी मुट्ठी में पूरी तरह से समा नहीं रही थी यह देखकर अनजाने में ही तृप्ति के मन में ख्याल आ गया कि अगर यह उसके खुद की मुट्ठी में नहीं समा रही है तो किसी औरत की बुर में जाएगा तो उसकी क्या हालत करेगा,,,, यह ख्याल उसके मन में आते ही उसकी बुर से पानी और माथे से पसीना टपकने लगा उसकी आंखों के सामने का नजारा है इतना मनमोहक और मदहोश कर देने वाला था कि उसकी जगह कोई और लड़की होती तो शायद कमरे का दरवाजा खोलकर उसके पास पहुंचगई होती और अपने बुर की प्यास बुझा ली होती,,,‌।

तकरीबन 1 मिनट तक अंकित अपने लंड को मुठियाता रहा,,, उसे मालूम था कि 1 मिनट में उसका पानी निकलने वाला नहीं है और इस समय वह अपने लंड से पानी निकलना भी नहीं चाहता था इसलिए अपने लंड पर से अपना हाथ हटाकर वह धीरे से अपना अंडरवियर पहनने लगा,,, और तृप्ति उसे अंडरवियर पहनता देखकर धीरे से अपने कदम को पीछे नहीं और बाथरूम में चली गई बाथरूम में जाकर वह अपनी सलवार खोलकर अपनी बुर की तरफ देखने लगी जो की पूरी तरह से मदन रस से चिपचिपी हो चुकी थी,,, धीरे से तृप्ति बैठ गई और पेशाब करने लगी,,, पेशाब करने के बाद सुबह अपनी बुर को पानी से धोकर साफ कर ली और जब वह बाथरूम में थी तभी उसकी मां अपने कमरे से बाहर निकल कर आवाज लगाते हुए बोली,,,।)तृप्ति कहां गई,,, कब से बोल रही हूं कि अंकित को बुला,,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित जल्दी से अपने कपड़े पहन कर तैयार हो गया था और तृप्ति भी बाथरुम में से बाहर निकल गई,,,, अपने बेटे के कमरे के दरवाजे पर पहुंचकर उसे आवाज लगाते हुए बोली ,,,)

तैयार हो गया कि नहीं ,,,,?

हां मम्मी तैयार हो गया हूं बस निकलने की देरी है,,,।

तो जल्दी कर देर हो जाएगी अगर बस छूट गई तो आज कोई बस नहीं है।

चिंता मत करो मम्मी समय पर पहुंच जाएंगे,,,,,,।
(अपने कमरे में से बाहर निकलते हुए अंकित बोला और तब तक तृप्ति भी उन दोनों के पास पहुंच गई थी वह अपने भाई की तरफ देखने से शर्मा रही थी क्योंकि कुछ देर पहले उसकी बेशर्मी भरी हरकत को देखकर वह खुद मदहोश हो गई थी।,,, थोड़ी देर में दोनों घर से बाहर सड़क पर आ गए उन दोनों को छोड़ने के लिए प्रति भी कुछ दूर तक आई थी लेकिन बस स्टैंड थोड़ी दूरी पर थी जहां पर पैदल ही जाना था इसलिए सुगंधा बोली,,,)

अब तुम घर जाओ और सुषमा आंटी के वहां चली जाना वहीं पर रात रुक भी जाना उनसे सब बात हो चुकी है लेकिन वहां जाने से पहले घर में ताला मार देना खुला मत छोड़ देना।

ठीक है मम्मी तुम चिंता मत करो,,,। तुम आराम से जो मेरी फिक्र मत करो,,,।

ठीक है,,,,(इतना कहकर सुगंधा और अंकित धीरे-धीरे बस स्टैंड की तरफ जाने लगे अंकित इस बात पर भी गौर कर रहा था कि उसकी मां सज धज कर आज हुस्न की परी लग रही थी,,,, तृप्ति कुछ देर तक उन्हें जाते हुए देखती रही और फिर वापस अपने कमरे में आ गई और कुर्सी पर बैठकर अपने भाई के बारे में ही सोच रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका भाई ऐसा क्या सोचता है कि उसका लंड खड़ा हो जाता है,,,।

उसे एहसास होने लगता है बाकी उसका भाई अब पूरी तरह से जवान हो गया है,,, लेकिन उसका लंड इतना जबरदस्त कैसे हैं,,, संदीप का तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं था बल्कि उसका तो इससे आधा ही था,,, अंकित भी अब औरतों के बारे में सोचने लगा है लड़कियों के बारे में सोचने लगा है अब वह बड़ा हो रहा है दूसरे लड़कों की तरह उसका भी आकर्षक औरतों की तरफ ज्यादा ही बढ़ने लगा है,,,, अपने भाई के बारे में सोच कर तृप्ति को जहां चिंता हो रही थी वही अपने भाई के बारे में सोच कर उसके बदन की मदहोशी भी बढ़ते जा रही है बहुत दिनों बाद उसे फिर से उत्तेजना का एहसास हुआ था संदीप के जाने के बाद वह इन सब से अपना ध्यान पूरी तरह से हटा दी थी वैसे भी इस तरह की उत्तेजना वह अपने बदले में कभी महसूस नहीं करती थी कभी-कभार संदीप की हरकत से वह भी गर्म हो जाती थी,,।

लेकिन अपने भाई के बारे में सोच कर उसके एक मोटे तगड़े खड़े लैंड के बारे में सोचकर उसकी बुर बार-बार गीली हो रही थी,,, उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था क्योंकि वह भी पूरी तरह से जवान थी,,,, इसलिए वह धीरे से कुर्सी पर से उठी और दरवाजे को बंद कर दी और फिर अपने कमरे में आ गई अपने कमरे में आते हैं वह आईने के सामने खड़ी हो गई अपने ऊपर से दुपट्टा हटाकर वह अपनी छाती को देखने लगी आईने में उसकी छाती ऊपरी हुई नजर आ रही थी लेकिन उसमें कोई खास उभर नहीं था बस केवल संतरे की तरह ही उसकी चुचिया नजर आ रही थी। कुछ देर तक वह आईने में अपने आप को देखते रही और फिर धीरे से अपने दोनों हथेलियां को अपनी दोनों चूचियों पर रख दी।

अपने भाई के बारे में सोच कर पहले ही उसका बदन पूरी तरह से गर्म हो चुका था इसलिए जैसे ही वह अपनी हथेलियां कोअपनी चूचीयो पर रखी तो उसे हल्के से दबा दी और उसे दबाते ही उसके बदन में उत्तेजना की फुहार उठने लगी और वह मदहोश होने लगी,,, उसके भाई ने अपने मर्दाना अंग से जो उसके जिस्म में जवानी की आग को भड़काया था उसे बुझाना उसके लिए जरूरी होता जा रहा था क्योंकि वह बार-बार उस पर से अपने ध्यान को हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन बार-बार उसकी आंखों के सामने अपने आप ही उसके भाई का झूलता हुआ लंड नजर आने लगता था,,, जिसके चलते ह उसका मन बहक रहा था,,,.

वह धीरे से अपनी कुर्ती को अपने भजन से अलग करने लगी और उतार कर बिस्तर पर फेंक दी आईने के सामने वह केवल सलवार और ब्रा में खड़ी थी,,, उसे इस बात का एहसास था कि उसकी चुचियों का आकार अभी देखना उन्नत नहीं था जितना की होना चाहिए था क्योंकि इस बात का एहसास उसे भी था कि अभी तक उस पर किसी मर्द का हाथ नहीं लगा था,,, इसलिए उसका उभार विकसित नहीं हुआ था। वह बड़ी गौर से पीले रंग की ब्रा में कैद अपनी चूचियों को देख रही थी और कुछ देर पहले अपनी मां को तैयार होते हुए देखी थी वह नजर उसकी आंखों के सामने नजर आने लगा उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी मां की चूचियां खरपट्टी जैसी बड़ी-बड़ी थी जो की ब्रा और ब्लाउज के अंदर वाक्य में बेहद खूबसूरत नजर आती थी।

अपनी मां की चूचियों के बारे में सोचते ही वह अपने आप ही अपने हथेली को ब्रा के ऊपर से अपनी चूची पर रख दी और उसे हल्के हल्के दबाने लगी उसके बदन में उत्तेजना की फुहार उठने लगी थी वह मदहोश होने लगी थी,,,, उसे रहा नहीं जा रहा था,,उससे जवानी की आग बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए वह अपने दोनों हाथों को पीछेकी तरफ ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खोलने लगी इस तरह की हरकत वह पहली बार कर रही थी,,, क्योंकि समय उसके पास करने के लिए कोई काम नहीं था कॉलेज की छुट्टियां पड़ चुकी थी इसलिए पढ़ाई भी बंद थी इसलिए उसका दिमाग इधर-उधर ज्यादा घूम रहा था और देखते ही देखते वह अपने बदन पर से अपनी पीले रंग की ब्रा को भी उतार कर बिस्तर पर फेंक दे और आईने के सामने कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी हो गई गोरे रंग पर उसकी दोनों नारंगी जैसी चुचीया इस समय बेहद सुहावनी लग रही थी,,,।

आईने में अपनी नंगी चूचियों को देखकर खुद उसके मुंह में पानी आ रहा था इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी मां की चूचियां के मुकाबले उसकी चूची कुछ भी नहीं थी लेकिन फिर भी उसके बाद में जिस तरह की मदहोशी चाहिए थी इस समय वह अपनी चूची से ही आकर्षित हो जा रही थी इसलिए आईने में देखते हुए अपनी दोनों हथेलियां को अपनी चूची पर रखकर दबाना शुरू कर दी देखते ही देखते देखते उसके बदन में वासना की लहर उठने लगी और मदहोशी में उसकी आंखें अपने आप ही बंद होने लगी,,, पढ़ने लिखने वाली सुंदर सुशील लड़की आज अपने भाई के नग्न अवस्था के नजारे को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो गई थी जिसके चलते उसे इस तरह की हरकत करना पड़ रहा था।

वह पागलों की तरह दोनों हथेली में भरकर अपनी चूचियों को दबा रही थी और अपनी आंखों को बंद करके कल्पना के सागर में गोते लगाने लगी थी कि अनजाने में ही उसके जेहन में उसके भाई का ख्याल आने लगा उसे महसूस हो रहा था एहसास हो रहा था और वह कल्पना कर रही थी कि जैसे उसकी चूचियों पर उसकी हथेली नहीं बल्कि उसका भाई उसे अपनी बाहों में लेकर अपने हाथों से उसकी चूची को मसल रहा है इस तरह का एहसास इस तरह की कल्पना उसके बदन में उत्तेजना का सागर पैदा कर रही थी वह मदहोश में जा रही थी पागल हो जा रही थी उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार बार-बार पानी छोड़ रही थी जिससे उसकी मदहोशी और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,।

ओहहह दीदी तुम्हारी चूचियां कितनी मस्त है एकदम नारंगी तरह की तरह,,,,सहहहहह मन करता है जिंदगी भर ईसे मुंह में लेकर पिता रहूं,,,,।

तो मना किसने किया है भर ले अपने मुंह में और पिज़ा पूरे रस को,,,आहहहहहह,,,,।

(तृप्ति की कल्पना हकीकत का आभास कर रही थी वह अपनी आंखों को बंद करके ऐसे ही सोच रही थी कि जैसा उसका भाई उसके साथ वार्तालाप करते हुए उसके हमको से खेल रहा है और ऐसा करने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी आईने के सामने खड़ी होकर वह पूरी तरह से चुदवासी हुए जा रही थी,,)

आज तो तुम्हारी चूची के रस को मुंह लगाकर पी जाऊंगा,,,,ओहहहह दीदी,,,,,,उफफफ,,,(तभी तृप्ति अपनी एक हथेली को सलवार के ऊपर से ही अपनी दूर पर रख दी और कल्पना करने लगी कि ऐसी हरकत उसका भाई कर रहा है) ओहहहह दीदी तुम्हारी बुर कितना पानी छोड़ रही है,,,उफ्फ,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,।

इस तरह की कल्पना तृप्ति की हालत को खराब कर रही थी उसके बदन रस को पूरी तरह से निचोड़ रही थी,,,, उससे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वह तुरंत अपने सलवार की डोरी खोलकर सलवार को भी उतार कर फेंक दी जब आईने में अपने आप को अच्छी तो खुद शर्म और उत्तेजना से मदहोश होने लगी आईने के सामने वह केवल अपनी पैंटी में खड़ी थी और पेटी का आगे वाला था पूरी तरह से भीग चुका था उसके मदन रस से,,,, अब तृप्ति को अपने बदन पर वह छोटी सी पेंटि भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,, और देखते ही देखते उसने अपनी पैंटी को भी उतार कर फेंक दी और एकदम से नंगी हो गई।

तृप्ति को आज पहली बार एहसास हो रहा था कि थोड़ी सी बेशर्मी दिखने में बदन को कितना आनंद प्राप्त होता है,,, आईने में अपने आप को देखकर वह मदहोश हुए जा रही थी,,, कभी अपनी चूत को कभी अपनी बर पर हथेली रखकर वह जोर से मसल दे रही थी अपने दोनों हथेलियां से अपनी नितंबों पर शपथ लग रही थी और आईने की तरफ पीठ करके खड़ी होकर तिरछी नजर से हम अपनी नितंबों के उभार को देख रही थी जो की बेहद आकर्षक नजर आ रही थी और दो चार चपत लगाने की वजह से उसकी गोरी गोरी गांड टमाटर की तरह लाल हो गई थी जिसे देखकर खुद उसके शर्म के मारे उसके गोरे-गोरे गाल लाल हो गए थे,,,।

बुर से टपक रहा मदन रस उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रही थी,,, और वह धीरे से चलते हुए अपनी बिस्तर तक आई और पीठ के बल लेटकर अपनी दोनों टांगों को खोल दी और अपनी निगाहों को अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर स्थिर कर दी जो की उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फूल गई थी,,,, देखते ही देखते तृप्ति अपनी हथेली को अपनी गुलाबी बर पर रखकर जोर-जोर से मसलना शुरू कर दी और उसकी यह हरकत आग में घी का काम कर रही थी,,,, उसे अपनी बुर को मसलने में बहुत मजा आ रहा था।

वह एकदम चुदासी हुई जा रही थी,,, और फिर वह धीरे से अपनी उंगली को अपनी गुलाबी छेद में प्रवेश कराना शुरू कर दी,,,, उसके आनंद की कोई सीमा नहीं थी उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। देखते हीदेखते उसकी आंखें बंद होने लगी,,, और उसकी उंगली बड़ी तीव्र गति के साथ बुर के अंदर, अंदर बाहर होने लगी,,, अच्छे से उसकी उत्तेजना और आनंद दोनों बढ़ते जा रही थी,,,, उसके चेहरे का हाव भाव पूरी तरह से बदलता जा रहा था,, वह एक हाथ से अपनी चूची को मसल रही थी दबा रही थी जिससे उसकी उत्तेजना अग्रसर हुए जा रही थी इस समय घर पर कोई नहीं था जिसका वह पूरा फायदा उठा रही थी,,,। और इस तरह की हरकत भी वह पहली बार कर रही थी,,,।

आखिरकार धीरे-धीरे उंगली के सहारे वह अपने चरम सुख को प्राप्त कर ली थी और गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी उंगली को अपनी गुलाबी छेद में से बाहर निकाल कर उसे देख रही थी जो की पूरी तरह से उसके मदन रस में डूबी हुई थी।

दूसरी तरफ पैदल चलते हुए मां बेटे दोनों बस स्टैंड पर पहुंच चुके थे लेकिन वहां पहुंचने पर पता चला कि बस तो पूरी तरह से भरी हुई थी बैठने की जगह बिल्कुल भी नहीं थी और आज घर से निकल चुके थे वहां जाने के लिए तो वहां जाना भी जरूरी था इसलिए सुगंध जैसे तैसे टिकट ले ली और बस के अंदर चढ़ गई इधर-उधर आगे आगे चलते हुए सुगंधा बस के बीचो-बीच पहुंच गई और आगे बढ़ाना नामुमकिन था क्योंकि आगे भी कुछ और से खड़ी थी और वह भी वही जा रही थी जहां पर सुगंधा को जाना था,,, ठीक अपनी मां के पीछे अंकित खड़ा था,, अभी बस चालू नहीं हुई थी ड्राइवर पास के ही पान के गल्ले पर खड़ा होकर पान खा रहा था वह पूरी तरह से बस के बहार जाने का इंतजार कर रहा था और बस पूरी तरह से भर भी चुकी थी बस कंडक्टर के इशारे की देरी थी।

यात्रियों से बस पूरी तरह से खचाखच भरी हुई थी,,,देर में पहुंचने के कारण सुगंधा और उसके बेटे को बस में बैठने की जगह बिल्कुल भी नहीं मिली थी,,, सुगंधा के भाई के घर सिर्फ यही एक बस जाती थी अगर आज यह बस छोड़ जाती तो आज का प्रोग्राम रद्द करना पड़ता और उन्हें कल फिर से यही बस पकड़नी पड़ती,,, लेकिन गनीमत था कि सुगंधा और उसके बेटे कोबस की टिकट मिल गई थी और बैठने के लिए नहीं बल्कि खड़े रहने की सुविधा तो उन्हें मिल ही गई थी वैसे बस के बीचों बीच खड़े रहने वाले वह दोनों अकेले नहीं थे बहुत से लोग थे जिन्हें बस में सिर्फ खड़े रहने भर की जगह मिली थी।,,,

पान की दुकान पर खड़े होकर पान खा रहा ड्राइवर कंडक्टर के इशारे का इंतजार कर रहा था।गर्मी का महीना होने के नाते बस के अंदर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए और ज्यादा गर्मी का एहसास हो रहा था सुगंध बस के पीछे-पिक खड़ी थी और उसके आगे कुछ औरतें खड़ी थी और सुगंधा के ठीक पीछे अंकित खड़ा था। दूसरों की तरह सुगंधा और उसका बेटा भी बस के चलने का इंतजार कर रहे थे। क्योंकि गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और अगर बस चलना शुरू हो जाती तो , हवा लगने लगती और थोड़ी राहत मिल जाती लेकिन किसी को भी नहीं मालूम था कि बस कब चलेगी इसीलिए सब लोग अपने आप से ही हवा लेने की कोशिश कर रहे थे कुछ और से साड़ी के पल्लू से हवा ले रही थी तो कुछ लोग अपने हाथ में किसी भी सामान से हवा लेने की कोशिश कर रहे थे।

अरे यार चलाओ बस को कितनी गर्मी लग रही है,,,।(पीछे बैठे एक बुजुर्ग यात्री ने बस को चलने के लिए कंडक्टर से बोल तो उसकी बात को सुनकर कंडक्टर बोला,,)

अरे हां चाचा जी बस थोड़ी ही देर में बस चलने वाली है,,,।

लेकिन कब चलेगी देख रहे हो गर्मी से हालत खराब है एक तो बस पूरी तरह से भरी हुई है और ऊपर से यह गर्मी और ज्यादा परेशान कर रही है।

अरे चाचा जी हम भी जानते हैं बस थोड़ी देर और रुक जाओ,,,।(उसे बुजुर्ग यात्री के साथ-साथ सभी को समझाते हुए कंडक्टर ने बोला,, तो दोबारा किसी ने बस चलने के लिए उससे बोला ही नहीं क्योंकि सबको मालूम था कि थोड़ी देर में बस चलने वाली है,,,,)

मुझे पता होता मम्मी ईतनी भीड़ होती है बस में तो मैं कभी नहीं आता,,,।

इसलिए तो कह रही थी कि जल्दी से तैयार हो जा लेकिन तुझे तो हीरो बनकर जाना है थोड़ा जल्दी आ गया होता तो बैठने की जगह तो मिल जाती धीरे-धीरे आने की वजह से ही हम लोगों को खड़े होकर जाना पड़ रहा है,,,(सुगंधा ऊपर की रेलिंग को पकड़करअपने बेटे से बोली और उसकी बात सुनकर अंकित कुछ बोल नहीं पाया क्योंकि वह जानता था कि उसकी वजह से ही देर हुई है उसे नहीं मालूम था कि बस में इस तरह कीभीड़ हो जाती है क्योंकि उसके लिए बस का सफर यह पहली बार का था,,,)

अरे मुझे क्या मालूम था कि बस में इतनी भीड़ हो जाती है,,,।

तेरे मामा के वहां बस यही एक बस जाती है अगर और भी बस जाती तो शायद इतनी भीड़ न होती,,, आप कर भी क्या सकते हैं बस इंतजार कर,,, ड्राइवर पता नहीं कहां चला गया है,,,।(ड्राइवर की खाली सीट की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली,,,अगर ड्राइवर की सीट पर कोई बैठा होता तो शायद उसे इतनी जान होता कि आप गाड़ी चलने वाली है लेकिन ऐसा नहीं था कुछ देर तक इसी तरह से ड्राइवर की सीट खाली रही,,, अंकित भी बार-बार ड्राइवर की सीट की तरफ ही देख रहा था उससे ही गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। बस में कहीं पर भी थोड़ी सी जगह नहीं रह गई थी बैठने के लिए जहां पर तीन बैठने चाहिए वहां चार बैठे हुए थे। बस की हालत को देखते हुए अंकित समझ गया था कि बैठने की जगह अब मिलने वाली नहीं है,,,।

लेकिन तभी कंडक्टर ड्राइवर को आवाज लगाया और ड्राइवर की पान की दुकान से पान चबाते हुआबस के अंदर प्रवेश किया और ड्राइवर की सीट पर जाकर बैठ गया ड्राइवर की सीट पर ड्राइवर को बैठा हुआ देखकर सुगंध और अंकित के साथ-साथ बस में सभी यात्री के चेहरे पर राहत के भाव नजर आने लगे क्योंकि उन्हें एहसास हो गया कि अब बस चलने वाली है वैसे भी बस में बैठे-बैठे तकरीबन आधा घंटा गुजर गया था।
ड्राइवर को देखते ही बस में एक दूसरे से सभी लोग बोलने लगे कि अब बस चलने वाली है चिंता मत करो। और इस बात को सुगंधा भी दोहराते हुए बोली।

चिंता मत कर अब बस चलने वाली है।
(सुगंधा का इतना कहना था कि ड्राइवर ने बस को स्टार्ट कर दिया और उसकी आवाज से पूरा माहौल खुशी से जो हम उठा क्योंकि इस समय बस के स्टार्ट होने की आवाज ही लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव ला रही थी क्योंकि काफी देर से सबको इसी का इंतजार था और बस स्टार्ट होते ही ड्राइवर ने गैर बदला और बस का पहिया आगेबढ़ गया लेकिन आगे बढ़ते ही जो लोग सतर्क थे वह तो बच गए लेकिन जो सतर्क नहीं थे वह आगे की तरफ लुढ़क गई और आगे की तरफ अंकित भी लुढ़क गया और सीधा जाकर अपनी मां के बदन से एकदम से सट गया।,,,,

पल भर में हीअंकित को एहसास हो गया कि आगे का सफर कैसा जाने वाला है क्योंकि वह जिस तरह से अपनी मां के बदन से सटा था,,,पूरी तरह से उसके भारी भरकम गोलाकार ने तंबो से उसके आगे वाला अंग एकदम से जाकर चिपक गया था और अपनी मां की गांड से सटते ही पल भर में ही अंकित का लंड जो की पूरी तरह से सुसुप्त अवस्था में था तुरंत ही उसमें रक्त का प्रभाव बड़ी तेजी से होने लगा और वह खड़ा होने लगा,,,, सुगंधा भी आगे की तरफलेकिन आगे भीड़ थी इसलिए अपने आप को वह संभाल ली थी और वैसे भी वह बस के ऊपर की रेलिंग को पकड़े हुए थे इसलिए वहअपने आप को पूरी तरह से नियंत्रित कर दी थी लेकिन अंकित पूरी तरह से नियंत्रण हो गया था तन से भी और अब मन से भी,,,।

पहली बार इस तरह से अंकित का अपने ऊपर सट जाना सुगंधा समझ सकती थी कि बस के चलने की वजह से ऐसा हुआ था लेकिन जब दूसरी बार ड्राइवर ने ब्रेक मारा था तब फिर से अंकित इस तरह से अपनी मां के बदन से चिपक सा गया था और इस बार उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और पेट में तंबू बनाया हुआ था और वह सीधा जाकर उसकी मां की भारी भरकम गांड की दरार के बीचों बीच घुस गया था और तब जाकर सुगंधा को इस बात का एहसास हुआ कि उसके बेटे का लंड उसकी गांड में चुभ रहा था,,, और यह एहसास उसके बदन में उत्तेजना की लहर पैदा करने लगा था लेकिन अगले ही पर अंकित अपने आपको फिर से संभाल लिया था,,,,।

बस मुख्य सड़क पर दौड़ रही थी,,, लेकिन बस के साथ-साथ सुगंधा और उसके बेटे का मन भी बड़ी तेजी से दौड़ रहा था,,,अंकित बार-बार अपने पेट की तरफ देख रहा था जिसमें तंबू बना हुआ था और अपनी मां की भारी भरकम उभरी हुई गांड की तरफ देख रहा था जो उसके तंबू से मात्र दो अंगुल की दूरी पर ही था वह जानता था कि बस में हल्का सा भी धक्का लगने पर वह सीधा उसकी मां की गांड से टकरा जाएगाइसीलिए वह अपने आप को संभाले हुए था और बार-बार अपने इधर-उधर देख ले रहा था कि कहीं कोई उसकी तरफ देखा तो नहीं रहा है लेकिन सब अपने में ही मगन थे,,,।

सुगंधा की हीम्मत नहीं हो रही थी कि पीछे मुड़कर अंकित की तरफ देख ले क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह मुड़कर अंकित की तरफ देखेगी तो शायद उसके बेटे कोअपनी गलती का एहसास हो जाएगा और वह अपने बेटे को उसकी गलती का एहसास नहीं करना चाहती थी जो कि उस गलती हो नहीं रही थी बल्कि अनजाने में सब कुछ हो जा रहा था और इस अनजाने में हुई गलती का आनंद सुगंध को भी प्राप्त हो रहा था,,,, बस में सभी इधर उधर की बात करके अपना समय व्यतीत कर रहे थेकिसी का भी ध्यान ना तो अंकित की तरफ था और ना ही सुगंधा की तरफ,,, अंकित बार-बार अपनी मां की भारी भरकम गांड की तरफ देख ले रहा था उसे इस समय अपनी मां की गांड पर को भगाने लग रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी मां खुद अपनी गांड उसकी तरफ करके उसे ललचा रही हो,,,।

अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि ऐसा मौका इस दोबारा मिलने वाला नहीं है भले ही वह कुछ ज्यादा ना कर पाए लेकिन बस के अंदर भीड़ भड़का फायदा लेते हुए वह इतना तो कर ही सकता है कि अपने लंड को अपनी मां की गांड से सटाकर उसकी गर्मी को महसूस कर सकता है। अंकित को इस बात का भी एहसास था कि दो बार वह अपनी मां से सट चुका था,,,पहली बार ना सही लेकिन दूसरी बार सताने पर उसे पूरा विश्वास था कि उसके लिए पेट में बना तंबू सीधे उसकी मां की गांड में धंस गया था जिसका एहसास उसकी मां को भी हुआ होगा,,, लेकिन वह कुछ बोली नहीं इसका मतलब साफ था कि वह भी यही चाहती है,,,,।

सुगंधा के मन में यही सब चल रहा था सुगंध भी अपनी गांड के बीचो-बीच अपनी बेटी के लड्डू को महसूस करके पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसे पूरा विश्वास था कि उसकी गांड के बीचों-बीच चुभने वाला अंग कोई और चीज नहीं बल्कि उसके बेटे का लंड ही था और वह अपने मन में सोच कर इस बात से गदगद हुए जा रही थी कि जब साड़ी और पेंट में होने के बावजूद भी उसके बेटे का लंड इतने आराम से उसकी गांड के बीचों-बीच चुभ सकता है तो खुला दौर मिल जाने पर वह तो पूरी तरह से हाहाकार मचा देगा।सुगंधा भी बड़ी बेशबरी से इंतजार कर रही थी कि दोबारा उसके बेटे का लंड उसकी गांड से सट जाए,,,लेकिन बस अपनी रफ्तार में आगे बढ़ रही थी ड्राइवर के द्वारा ब्रेक लगाने का कोई अवसर नहीं मिल रहा था इसलिए ना चाहते हुए भी अपनी मनसा को अपनी युक्ति की शक्ल देकरसुगंधा इस बार जान बुझ कर अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को पीछे की तरफ ठेल दी और अपने बेटे के लंड से सट गई,,,।

अंकित को तो कुछ समझ में नहीं आया अंकित पूरी तरह से आश्चर्य सेमदहोश हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी मां ने हरकत ही कुछ ऐसे की थी अंकित अपने दिमाग पर पूरा जोर दे रहा था कि वाकई में ड्राइवर ने ब्रेक लगाया कि नहीं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था बिना ब्रेक लगा है उसकी मां पीछे की तरफ अपनी गांड को दे मारी थी जिसका मतलब साफ था कि उसकी मां भी यही चाह रही थी जैसा कि वह चाह रहा था अपनी मां की इस तरह की मदहोशी और उसकी उत्तेजना और उसका उतावलापन देखकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना की ज्वाला फूटने लगी वह मदहोश होने लगा,,, सुगंधा की हरकत पर एक बार फिर सेअंकित के पेंट में बना तंबू सीधे उसकी मां की गांड से टकरा गया था,,,, और यह टक्कर दोनों के तन बदन में आग लगा रही थी,,, हालांकि सुगंधा की कोशिश पूरी तरह से सफलतापूर्वक पूरी नहीं हुई थी क्योंकि ऐसे में उसके बेटे का लंड सिर्फ उसकी गांड से टकराया भर था उसके अंदर घुस नहीं था।

लेकिन फिर भी सुगंधा के लिए भी इतना काफी था क्योंकि इतने से भी उसकी गुलाबी बुर पानी छोड़ रही थी,,,अंकित तो गहरी गहरी सांस ले रहा था बस की भीलवाड़ा में कोई उन दोनों की तरफ देखा नहीं रहा था और यही मौका भी था दोनों के लिए अपनी मंजिल तक पहुंचने का,,,,। सुगंधा मन ही मन में उत्तेजित भी हो रही थी और मुस्कुरा भी रही थी। और अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही अंकित से बोली,,,।तुझे कोई दिक्कत तो नहीं हो रहा है ना,,,!

नहीं बिल्कुल भी नहीं,,, बस कितना देर लगेगा पहुंचने में,,,।

बस की रफ्तार पर है जितनी जल्दी पहुंचा दे लेकिन फिर भी काफी समय लग जाएगा।
(अपनी मां के मुंह से इतना सुनकर अंकित अपने मन में ही बोला काश यह सफर खत्म ना हो तो कितना मजा आ जाए और अपने मन में सुगंधा भी यही बात को दोहरा रही थी वह भी इस सफ़र से अत्यधिक उत्तेजित और उत्साहित हो रही थी,, वैसे तो घर पर दोनों के बीच काफी कुछ हो चुका था लेकिन इस कदर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था कि दोनों अपनी सीमा को पूरी तरह से लांघ कर एकाकार हो जाए,, लेकिन आज का यह सफर दोनों की उम्मीद की किरण का सफर था ,,,क्योंकि दोनों के बीच इस तरह का मिलन हो रहा था दोनों के अंगों का स्पर्श हो रहा था यह स्पर्श या मिलन दोनों को एक बिस्तर पर ले जाने के लिए काफी था,,,।

सुगंधा अपनी गांड को आगे लेने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की थी वह तो मन में यही सोच रही थी कि अंकित भी कुछ हरकत करें और आगे बढ़े ताकि उसके पेट में बना तंबू साड़ी को चीरता हुआ उसकी गांड के बीचों बीच धंस जाए,,, लेकिन तभी अचानक ड्राइवर ने ब्रेक मारा और दोनों के मन की बात पूरी होने लगी उसके ब्रेक मारते ही अंकित भी एकदम आगे की तरफलुढ़क गया और इस बार उसके पेंट में बना तंबू सीधे-सीधे उसकी मां की गांड के बीचोबीच धंसता हुआ,,, सीधे जाकर उसके गुलाबी द्वार पर ठोकर मारने लगा,,, जैसे ही सुगंधा कोअपने बेटे का लंड अपने गुलाबी द्वार पर ठोकर मारता हुआ महसूस हुआ वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गई,,,क्योंकि उसे उम्मीद से दुगना मिला था,, वह कभी सोची नहीं थी कि इस अवस्था में साड़ी पहनी होने के बावजूद भी और उसके बेटे का लंड पेंट में होने के बावजूद भी सीधे उसकी बुर पर ठोकर मारेगा,,,।

इससे ही सुगंधा को एहसास हो गया था कि उसके बेटे का लंड कितना दमदार है,,, बस में ऐकाएक ब्रेक लगी थी बस एक जगह पर रुक गई थी,,,,,, शायद किसी यात्री को लेने के लिए रुकी थी क्योंकि बाहर दो औरतें खड़ी थी,,, सुगंधाबिना अपने आपको अपने बेटे से अलग किए हुए हैं खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगी और वाकई में बस उन दोनों के लिए ही रुकी थी जब वह दोनों बस में चढ़ने लगी तो पीछे बैठे बुजुर्ग ने फिर से आवाज लगाई,,,।

अरे यार कंडक्टर बस तो पहले से ही भरी हुई है और तुम फिर से यात्री चढ़ा रहे हो,,,।

तो क्या हो गया चाचा देख नहीं रहे हो इतनी दोपहर में दौड़ते आखिर जाएंगी कहां,,,,।
(इतना कहकर कंडक्टर इन दोनों की भी टिकट काटने लगा और उसके चढ़ते हीअंकित जो कि अपनी मां से थोड़ा अलग होने की सोच ही रहा था लेकिन अब ऐसा करना मुश्किल था क्योंकि बस में दो यात्री और चढ़ जाने की वजह से थोड़ी सी जगह वह भी खत्म हो चुकी थी,,, अब तो अंकित चाहता तो भी पीछे अपने पैर नहीं ले सकता था और इस तरह से वह अपने लंड को भी अपनी मां की गांड से अलग नहीं कर पा रहा था,,,.

सुगंधा भी मदहोश हुए जा रही थी सुगंधा भी बस में दो यात्री के चढ़ जाने की वजह से हालात को समझ रही थी,,, और अपने मन में सोच रही थी कि अच्छा हुआ कि दो औरतों और चढ़ गई बस में अब उसका बेटा चाहेगा भी तो उससे अलग नहीं हो पाएगा,,,इस बात की खुशी सुगंधा के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उत्तेजना से उसका चेहरा एकदम लाल भी हो चुका था सुगंधा भी तो उधर देख ले रही थी कि कहीं कोई हम दोनों को देखा तो नहीं रहा लेकिन किसी का भी ध्यान में दोनों की तरफ बिल्कुल भी नहीं थी इस समय भी सुगंधा की गांड में उसके बेटे का लंड घुसा हुआ था,,। सुगंधा अपने मन में यही सोच रही थी की काश यह सफर खत्म ना हो तो कितना मजा आ जाए। और अंकित भी यही चाह रहा था।

उन दोनों औरतों को बस में चढ़ते ही बस फिर से आगे की तरफ बढ़ गई लेकिन अब ना तो सुगंधा अपने आप को अपने बेटे से अलग कर सकती थी ना अंकित,,, दोनों बस की भीड़ में एकदम सटे हुए थे,,,, हालांकि गर्मी सेहालत खराब थी लेकिन फिर भी बस के चलने की वजह से हवा लग रही थी जिसे उन दोनों के साथ-साथ सभी को राहत महसूस हो रही थी,, इस सफर का असली मजा तो मां बेटे ही ले रहे थे,,, सुगंधा को अपनी बुर के द्वार पर अपनी बेटे का लंड एकदम सटा हुआ महसूस हो रहा था,,, और इस अवस्था में वह सोच रही थी कि कहां से उसके लंड और उसकी बुर के बीच साड़ी और पेंट ना होता तो,,, दमदार लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा होता,,,।

सुगंधा और उसका बेटा दोनों हालात को अच्छी तरह से समझ रहे थे,,,घर में दोनों के बीच जो कुछ भी होता था आज उससे कहीं ज्यादा दोनों के बीच हो रहा थाक्योंकि दोनों का अंग एक दूसरे के उसे अंग से स्पर्श हो रहा था जिससे संभोग क्रिया की शुरुआत होती है और यही तो दोनों चाहते ही थे दोनों के मन की मुराद पूरी हो रही थी,,,, रह रहकर सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो जा रही थी,वह जानती थी कि जब उसकी हालत खराब हो रही थी उसके बेटे की क्या दशा होती होगी इसलिए वह फिर से अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही बोली,,,।

कोई दिक्कत तो नहीं आराम से खड़ा है ना,,,।

हां मम्मी कोई दिक्कत नहीं आराम से खड़ा हूं,,,(इस बात को बोलकर अंकित अपने मन में सोचने लगा की खास इससे ज्यादा बोलने की उसकी हिम्मत होती तो इस समय अपनी मां से बोल देता की और तो खड़ा ही लेकिन उसका लंड भी खड़ा है तुम अपनी साड़ी ऊपर उठा लो तो ज्यादा मजा आए,,, लेकिन ऐसा कहने की उसकी हिम्मत नहीं हुई,,,लेकिन जिस तरह का आनंद उसे मिल रहा था वह बात नहीं सकता था और ना यह बता सकता था कि इस समय क्या हो रहा है क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां को भी सब कुछ मालूम है,,,, अगर वह अनजान होती तो शायद मोटे तगड़े लंड की चुभन से अनजान बिल्कुल भी ना होती,,।

अंकित अत्यंत उत्साहित और उत्तेजित हो चुका था मन तो उसका कर रहा था कि दोनों हाथों से अपनी मां की कमर को थाम ले और हल्के हल्के से अपनी कमर को हिलाना शुरू कर ली हालांकि उसे संभोग क्रिया का ज्ञान बिल्कुल भी नहीं था लेकिन इतना तो जानता ही था की चुदाई कैसे होती है क्योंकि वह अपनी आंखों से राहुल और उसकी मां की चुदाई देख चुका था।,, भीड़भाड़ की वजह से अंकित एकदम से अपनी मां से सात गया था वह इस कदर अपनी मां सेचिपका हुआ था कि उसकी मां का पिछवाड़ा पूरी तरह से उसके बेटे के आगे वाले भाग से चपक सा गया था मानो कि जैसे दोनों के बीच संभोग क्रिया हो रही हो,,, और ऐसे हालात में सुगंधा कोअपने बेटे की नाक में से निकलती गहरी सांस अपनी कनपटी पर महसूस हो रही थी जिसकी वजह से हुआ और उत्तेजित हुए जा रही थी और उसकी बर पानी पानी हो रही थी।

हालात पूरी तरह से बेकाबू हुआ जा रहा था अपनी मां की गांड की खुशबू पाकर अंकित का लंड पूरी तरह से लोहे के रोड की तरह कड़क हो चुका था,,, ऐसा लग रहा था कि अगर सुगंध पेंटि ना पहनी होती तो इस समय साड़ी सहित अंकित का लंड उसकी मां की बुर में घुस गया होता,,,वह तो गनीमत था कि सड़क एकदम समतल थी और बड़े आराम से बस चली जा रही थी अगर ऊपर खबर होता तो शायद इस समय जो एहसास दोनों को होता वह पूरी तरह से दोनों का पानी झाड़ने में सहायक हो जाता,,,।

इसी तरह से मां बेटेआधा सफर से ज्यादा तय कर चुके थे काफी समय हो गया था दोनों को खड़ेरहते लेकिन जिस तरह का हालात दोनों के बीच उत्पन्न हुआ था उसे देखते हुए दोनों को बिल्कुल भी थकावट नहीं लग रही थी बल्कि दोनों बेहद उत्साहित थे,,, रह रहकर सुगंधा अपने पिछवाड़े को पीछे की तरफ दे मार रही थी,,,और अपनी मां की हरकत को देखते हुए अंकित भी थोड़ी छूट चाट लेते हुए और हिम्मत दिखाते हुए अपनी कमर को आगे से मार रहा थाऔर सुगंध को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि उसके बेटे ने कौन सी हरकत किया है और मन ही मां अपने बेटे की हरकत से उत्साहित हुए जा रही थी।

दोनों के बीच किसी भी प्रकार का वार्तालाप नहीं हो रहा था लेकिन दोनों के अंग बहुत कुछ कह रहे थे,,, एक तरह से दोनों के अंग दोनों की बोलती को बंद किए हुए थे,,, और ऐसे हालात में खामोश रहना हीं सबसे ज्यादा उचित रहता है,,,अंकित अपने मन में सोच रहा था कि काश इस तरह से अपनी मां की चूची पकड़ने का फिर मौका मिल जाता तो और कितना ज्यादा मजा आता ,,,क्योंकि वह ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा हुआ था और उसे अपनी मां की चूची दिखाई दे रही थी क्योंकि उसकी लंबाई उसकी मां से थोड़ी सी ज्यादा थी और उसकी मां की चूचियों के बीच की पतली गहरी खाई भी दिखाई दे रही थी जिसमें डूब जाने का उसका मन कर रहा थाबस के ही स्कूलों के साथ-साथ उसकी भारी भरकम खरबूजे जैसी चूचियां भी रबड़ के गेंद की तरह उछल रही थी जिसे देखने में उसे और भी ज्यादा मजा आ रहा था।तभी अचानक एक बार फिर से ड्राइवर ने ब्रेक मारा और इस बार,, अंकित का हाथ एकदम से उसकी मां की कमर पर आ गया और जिसे अपने आप को संभालने के लिए अंकित ने अपनी मां की कमर को थाम लियाऔर उसका लंड इस पर कुछ ज्यादा ही अंदर घुसता हुआ पेंटी सहित उसकी मां की गुलाबी बुर की दोनों पत्तियों को हल्का सा खोलकर अंदर की तरफ प्रवेश करने लगा और उसी पर अचानक रुक भी गया,,, इस बार सुगंधा अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाई,,,क्योंकि बहुत देर से वह अपनी उत्तेजना को दबाए हुए थे लेकिन इस बार तो उसके बेटे के लंड ने सारी मर्यादा को सारी दीवारों को तोड़ कर आगे बढ़ चुका था,,,वह कभी सोचा भी नहीं थी कि इस तरह से खड़े-खड़े उसके बेटे का लंड उसकी बुर की इतने करीब पहुंच पाएगा हालांकि कुछ देर पहले ठोकर तो मार ही रहा था लेकिन पेंटी सहित अंदर तक घुस आएगा इस बारे में कभी सोच नहीं थी,,,,।

इसलिए तो उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी फूट पड़ी थी जिसे उसके बेटे ने एकदम साफ तौर पर सुना था और उसकी शिसकारी की आवाज सुनकर उसे राहुल की मां याद आ गई थी जब चुदवाते समय इसी तरह की आवाज उसके मुंह से निकल रही थी,,,, ड्राइवर ने इसलिए तेज ब्रेक लगाया था क्योंकिजब कच्ची सड़क शुरू हो गई थी वह बरखबर ऊपर नीचे होते हुए बस को जाना था और यह हालत इस तरह का अवसर दोनों मां बेटे को कभी मिलने वाला नहीं था क्योंकि जैसे ही आगे बस बढ़ने लगी उसमेंहलचल बढ़ने लगी बस हिलने लगी और उसके हिलने की वजह से दोनों का शरीर भी हीलने लगा और बार-बारअंकित का लंड सुगंधा की बुर पर ठोकर मारने लगा मानो के जैसे उसे चोदने की तैयारी कर रहा हो,,,।

जैसे-जैसे बस आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे दोनों की हालत और ज्यादा खराब होती जा रही थी और अब तो बस जिस तरह से कच्ची सड़क पर चल रही थी अब अंकित को अपनी मनमानी करने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी वह इस गति का फायदा उठा रहा था बस की चाल की गति के साथ-साथ अपनी कमर की भी गति से वह खेल रहा था। सुगंधा को साफ एहसास हो रहा था कि उसका बेटा अपनी कमर हिला रहा था मानों जैसे कि उसकी चुदाई कर रहा हो और अपने बेटे की ईस हरकत से वह उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी,,,ऐसा नहीं था कि अंकित मनमानी अपनी कमर हिला रहा था वह मौका देखकर जैसे ही गाड़ी हिचकोले खाती वैसे ही अपनी कमर को दे मरता था अपनी मां की गांड पर और यह उसकी यह हरकत इतनी अद्भुत और मदहोश कर देने वाली थी किसुगंधा की ओर से पानी निकलने लगा था वह एकदम से झड़ने लगी थी और झड़ने समय उसके चेहरे का रंग एकदम से बदलने लगा था वह किसी तरह से अपने चेहरे के हाव-भाव को छुपा कर इस तरह से खड़ी रही लेकिन उसका पानी निकल गया था।

लेकिन इस दौरान भी अंकित ज्यो का त्यों बना हुआ था,,, वह अभी भी बरकरार था लेकिनमंजिल आ चुकी थी बस एक जगह खड़ी हो गई और धीरे-धीरे सभी यात्री नीचे उतरने लगे जैसे तैसे करके अंकित बस से नीचे उतरा क्योंकि उसके पेंट में अभी भी तंबू बना हुआ था और जहां पर बस रुकी हुई थी वहां पर जंगली झाड़ियां थी इसलिए वहसभी से नजर बचाकर तुरंत झाड़ियां के बीच चला गया और वहां पेशाब करने लगा था कि उसके पेट में बना तंबू एकदम शांत हो सके,,,, और जब वाकई में सब शांत हो गया तो वह धीरे से अपनी मां के पास आयाजो कि वही खड़ी थी लेकिन उसकी मां शर्म के मारे अपनी नजर अंकित से नहीं मिल पा रही थी और धीरे से एक मिठाई की दुकान पर जल्दी और मिठाई खरीद कर अपने भाई के घर की तरफ जाने लगी जहां से उसके भाई का घर 10 मिनट की ही दूरी पर था।

बस के सफ़र के दौरान जो कुछ भी हुआ वह बेहद रोमांचित कर देने वाला था,,,सुगंधा के लिए भी और उसके बेटे के लिए आज मां बेटे दोनों एक अलग ही अनुभव से गुजरे वैसे तो घर के अंदर दोनों में काफी कुछ हो चुका था केवल शारीरिक संपर्क अभी तक नहीं हुआ था लेकिन बस के अंदर दोनों के बीच केवल दोनों के बदन के वस्त्रही बाधा रूप थे,,, वरना तो आज दोनों का मिलान होना बिल्कुल तय था दोनों ने एक दूसरे के अंगों को बेहद करीब से अनुभव किया था दोनों के अंगों की गर्मी दोनों ने बेहद करीब से महसूस किए थे यह एहसास दोनों के तन बदन में एक अजीब सी ऊर्जा का संचार कर रहा था।

अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचकर दोनों के साथ-साथ बाकी के यात्री भी बस से नीचे उतर गए थे और अपने-अपने मंजिल की ओर आगे बढ़ गए थे,,, कई लोग अभी भी वही खड़े थे कुछ लोग खरीदी कर रहे थे कुछ लोग मिठाइयां खरीद रहे थे,,। तो कुछ लोग सब्जियां खरीद रहे थेअंकित की हालात पूरी तरह से खराब थी जिस तरह के हालात से वह गुजरा था वह उसे एक पल के लिए स्वर्ग का अनुभव कर रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था आज पहली बार उसनेअपने लंड को अपनी मां की गांड की दरार के पीछे बीच उसकी गुलाबी चाहिए के करीब दस्तक देता हुआ महसूस किया था यह उसके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थीलेकिन इस उपलब्धि के चलती उसके लंड का तनाव पूरी तरह से बरकरार था बस से नीचे उतरने के बाद भी उसका यह तनाव बना हुआ था।

अंकित बिल्कुल भी नहीं चाहता था कि किसी की भी नजर उसके पेट में बने तंबू पर पड़े या उसकी मां ही उसके पेंट में बने तंबू को देख ले भले ही बस के अंदर उसने इसका अच्छी तरह से अनुभव किया हो लेकिन इस समय वह ऐसा नहीं चाहता था इसलिएबस से नीचे उतरने के साथ ही वह घनी झाड़ियां के पास चला गया था और वहां पर जाकर पेशाब करने लगा था क्योंकि जानता था की पेशाब करने के बादउसके लंड का तनाव काफी हद तक सामान्य हो जाएगा और ऐसा ही हुआ जब उसके लंड का तनाव पूरी तरह से सामान्य हो गया तो वह पेंट की चेन बंद करके वापस उसी जगह पर आ गया जहां पर उसकी मां खड़ी थी और तिरछी नजर से अपने बेटे की तरफ देख ले रही थी उसके मन में भी बहुत कुछ चल रहा था एक तरह से उसके मन में दंद युद्ध चल रहा था।

आज उसने जो कुछ भी मैसेज की थी वह उसे उत्तेजना के साथ भी आसमान पर पहुंचा दिया था वाकई में इतनी उत्तेजना का अनुभव उसने कभी नहीं की थी आज पहली बार उसने अपने बेटे के मर्दाना अंग को अपनी गुलाबी छेद के बेहद करीबउसे पर दस्तक देता हुआ महसूस की थी और अपने बेटे के मर्दाना अंग पर मन ही मन गर्भ अनुभव कर रही थी क्योंकि चीजहालत में दोनों खड़े थे और ऐसी अवस्था में उसके बेटे का लंड बड़े आराम से उसकी गुलाबी चिन्ह तक पहुंच रहा था तो उसे पूरा यकीन था कि उसका बेटा अपने लंड से अगर मौका मिल जाए तो उसकी बुर के धागे खोल देगा जो बरसों से एकदम बंद हो चुके हैं,,,। सुगंधा के लिए अपने बेटे के साथ इस तरह का कल्पना करना अब पूरी तरह से आम बात हो चुकी थी,,,शुरू शुरू में जब सुगंधा का आकर्षण अपने बेटे की तरफ बढ़ने लगा था तब वह अपने मन में इस तरह की कल्पना करके आनंदित हो जाती थी लेकिन उसे पछतावा भी होता था एक गिलानी महसूस होती थी लेकिन अब यह ग्लानी धीरे-धीरे मदहोशी में बदलने लगी थी,,,इस तरह की कल्पना करके वह पूरी तरह से मत हो जाती थी और उसे एक अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती थी,,,।

कुछ देर तक बड़े से पेड़ के नीचे खड़े होकर दोनोंइधर-उधर देख रहे थे जो यात्री बस में उनके साथ थे वह धीरे-धीरे बाजार से अपनी-अपनी दिशा की ओर बढ़ने लगे थे लेकिन अभी तक ऐसा लग रहा था की सुगंधा अपनी मदहोशी से उसे बेहतरीन पल की आगोश से निकल नहीं पा रही थी,,,, वह खड़ी होकर अपने चारों तरफ देख रही थी और कसमसा रही थी क्योंकि उसकी पैंटी पूरी तरह से मदन रस से भीग चुकी थी और उसे इस समय उसके गीलेपन से असहजता महसूस हो रही थी,,, या यूं कह लो की उसकी गुलाबी छेद की गली में पेशाब की तीव्रता महसूस हो रही थी लेकिन किसी तरह से अपने आप को संभाल कर वह बिना कुछ बोले एक मिठाई की दुकान की तरफ जाने लगी,,,।

अंकित भी कुछ बोल नहीं रहा था बस अपनी मां के पीछे-पीछे चलता बना और देखते ही देखते दोनों मिठाई की दुकान पर पहुंच गए,,, सुगंधा अपनी हालत पर इस समयथोड़ा सा महसूस कर रही थी और वह ऐसा नहीं चाहती थी कि उसके बेटे को जरा भी है सांसों की उसकी मां को उसकी हरकत खराब लगी है वरना उसका बेटा जो इतनी हिम्मत दिखा कर यहां तक पहुंचा है वह फिर से अपना दो कदम पीछे ले लेगा और वह ऐसा कभी नहीं चाहती थी इसलिए वह पूरी तरह से सहज बनना चाहती थी,,, वह अपने बेटे को इस बात का जरा भी एहसास नहीं दिलाना चाहती थी,, उसकी हरकत से उसे कैसा महसूस हो रहा है अच्छा लग रहा है या बुरा लग रहा है,,,, इसलिए वह बिल्कुल सहज और सामान्य बने रहने का नाटक करते हुए अपने बेटे से बोली,,,।

चल कुछ थोड़ा खा लेते हैं उसके बाद तेरे मामा के लिए भी मिठाई खरीद लेंगे,,,।

तुम सही कह रही हो मम्मी मुझे भी भूख लग रही है ऐसा करो कि जलेबी और समोसा ले लो,,,।(लकड़ी के रखे हुए पट्टी पर धीरे से बैठते हुए अंकित बोला,,,, उसकी बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराते हुए दुकानदार से थोड़ी जलेबी और समोसे देने के लिए बोलकर वह भी अपने बेटे के बगल में बैठ गई,,,,, उसके मन में अजीब सी कसमकस चल रही थी,,,उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि बस में जो कुछ भी हुआ उसे बारे में वह अपने बेटे से बात करें या ना करें उसकी मां इनकार भी कर रहा था और अपने बेटे से इस बारे में बात करने के लिए हामी भी भर रहा था,,, उसका मन एक तरफइनकार कर रहा था और दूसरी तरफ उसे समझा भी रहा था कि आगे बढ़ने का यही सही मौका है इस बारे में अगर वह अपने बेटे से बात करेगी तो दोनों के बीच की झिझक धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी और दोनों अपनी मंजिल तक आराम से पहुंच पाएंगे।

सुगंधा को अपने मन की यह बात बड़ी अच्छी लग रही थी,,क्योंकि इस बात से वह भी सहमत थी वह जानते थे कि अपने बेटे से इस तरह की बातें करने से दोनों के बीच ज्यादा खुलापनमहसूस होने लगेगा और दोनों एक दूसरे की बातें आपस में आराम से कर सकते हैं और धीरे-धीरे आगे भी पढ़ सकते हैंक्योंकि बस के अंदर जो कुछ भी हुआ था वह सामान्य बिल्कुल भी नहीं था एक मर्द और एक औरत के लिए जिस्मानी ताल्लुकात के पहले का वह एक तरह का खेल ही था,,, जिससे आगे बढ़ा जा सकता थाअगर दोनों के बीच मां बेटे का संबंध ना होता तो शायद जिस तरह के हालात और मदहोशी दोनों के बदन में छाई हुई थी सुगंधाएक औरत होने के नाते मर्द का साथ पाने के लिए धीरे से अपनी साड़ी को कमर तक उठा देती और अपनी दोनों टांगों के बीच की गली को एकदम से खोल देती ताकि एक अनजान मर्द उसमें आराम से चहल कदमी कर सके,,,।

अंकित भी खामोश था वह भी कुछ नहीं बोल रहा थावैसे भी बोलने लायक उसके पास कोई शब्द नहीं था जैसा अनुभव उसे प्राप्त हुआ था वह बेहद अद्भुत और अतुल्य था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था बस का सफर उसके लिए पहला ही था और यह सफर उसके जीवन का यादगार सफर बन चुका था,,,।वह अपनी मां की तरफ नजर मिलाकर देखा भी नहीं पा रहा था वह बाजार में चारों तरफ नजर घूमाकर अपना समय व्यतीत कर रहा था,,, और वह दुकानदार गरमा गरम जलेबी और समोसे छान रहा था,,, थोड़ी ही देर में वह एक कागज मेंदो-दो समय से और थोड़ी-थोड़ी जलेबियां लेकर दोनों के पास आया और अपना हाथ आगे बढ़ाकर दोनों को थमाने लगा,,, सुगंधा और उसका बेटा दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसे दुकानदार के हाथ से समोसे और जलेबी ले लिए और खाने लगे,,,,,, समोसा और जलेबी दोनों काफी स्वादिष्ट थी,,, वैसे मां बेटे दोनों को जलेबी और समोसे कुछ ज्यादा ही पसंद थे।

जलेबी को हाथ में लेकर तोड़ते हुए उसमें से मीठे रस की चासनी नीचे टपक रही थी जिसे देखकर सुगंधा के चेहरे का रंग सुर्ख लाल हो गया क्योंकि उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि जिस तरह से जलेबी से चांदनी टपक रही है इस तरह से उसकी बुर से उसका मदन रस भी टपक रहा था,,, उसकी बुर और जलेबी में कुछ ज्यादा फर्क नहीं था बस फर्क इतना था की जलेबी का रस वह खुद चाटने वाली थी लेकिन उसकी बुर से निकला मदन रस चाटने वाला अभी कोई नहीं था,,,। बस बार-बार उसका रस निकालने वाला उसके पास में ही बैठा था।जलेबी खाते हुए तिरछी नजर से सुगंध अपने बेटे की तरफ देख रही थी और मन ही मां अपने बेटे पर गुस्सा भी कर रही थी,, क्योंकि जिस तरह के हालात से उसे देखते हुए उसे राहुल याद आ रहा था,,,,, क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसके और उसकी मां के बीच शारीरिक संबंध है,,, क्योंकि वहखुद अपनी आंखों से दोनों की अठखेलियों को बाजार में देख चुकी थी।

सुगंधा खुद चाहती थी कि उसका बेटा भी राहुल की तरह हो जाए लेकिन अभी भी उसके मन में झिझक थी जो की धीरे-धीरेदूर हो रही थी लेकिन पूरी तरह से दूर होने में कितना समय लगेगा इस बारे में वह कुछ बात नहीं सकती थी लेकिन धीरे-धीरे उसकी तड़प पूरी तरह से बढ़ती जा रही थी,,, थोड़ी ही देर में दोनों समोसे और जलेबी खाकर पानी पी रहे थे और सुगंधा ने दुकानदार को जलेबी और समोसे पेक करने के लिए भी बोल दी थी,,, दुकानदार को पैसे देकर और उस समस्या और जलेबी या लेकर दोनों फिर से मुख्य सड़क पर आ चुके थे यह देखकर अंकित बोला,,,।

फिर से गाड़ी करना पड़ेगा क्या,,,?

नहीं नहीं यहां से तेरे मामा का घर ज्यादा दूर नहीं है 10 मिनट का ही रास्ता है,,,। पैदल चलेंगे तो अभी पहुंच जाएंगे,,,, वैसे भी अब ज्यादा धूप नहीं है थोड़ी ही देर में शाम हो जाएगी,,,।

ठीक है लेकिन चलना कौन सी दिशा में है,,,?(जी मुख्य सड़क पर दोनों खड़े थे वहां से तीन तरफ रास्ता जाता था इसलिए अंकित पूछ रहा था उसके सवाल पर सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली,,,)

यह सामने वाली कच्ची सड़क है ना यहां से जाना है,,,।

यह सामने वाली यह तो बहुत छोटी सड़क है यहां से तो वाहन भी नहीं जाता होगा,,,। और देखो तो दोनों तरफ कितने पेड़ लगे हैं कितना मस्त नजारा है,,।

तभी तो यहां से पैदल ही जाना है,,, यह थोड़ा गांव जैसा ही है,,,।

ओहहह गांव जैसा ही है तब गांव कितना खूबसूरत होगा,,, मम्मी हम लोग गांव क्यों नहीं जाते,,,!(अंकित अपनी मां से आश्चर्य जताते हुए बोला उसकी मां मुस्कुराते हुए जवाब देते हुए बोली)

जरूर चलेंगे,,,, लेकिन अभी समय है,,,। अब चल जल्दी,,,काफी देर से हम लोग यही खड़े हैं बाकी के सभी लोग जो साथ में बस से उतरे थे अपने-अपने घर पहुंच गए होंगे,,,।

सही कह रही हो सिर्फ बस खड़ी है बाकी के सभी लोग गायब है लेकिन क्या यही बस चल जाएगी,,।

हां यही बस चल जाएगी और हम लोगों को सही समय पर पहुंच जाना है वरना यह बस छुटी तो फिर से तेरे मामा के घर रुकना पड़ेगा।

(बस की तरफ देखते हुए दोनों मां बेटे के मन में बहुत कुछ चल रहा था इस वर्ष में एक अद्भुत एहसास दोनों के बदन में और दोनों के दिलों दिमाग पर एक अमिट छाप छोड़ दी थी जिसका एहसास दोनों को गिला करने के लिए काफी था,,, वैसे तोबस में भीड़भाड़ सुगंध को पसंद नहीं रहती थी लेकिन आज की बात ही कुछ और थी आज की भीड़ भाड़ उसे एक अद्भुत सुख प्रदान किया था,,, जिसका वर्णन वह अपने शब्दों में नहीं कर सकती थी,,,।

देखते ही देखते दोनों कच्ची सड़क पर साथ में चलने लगे थेकस्बा पूरा गांव जैसा होने की वजह से इस समय कोई भी नजर नहीं आ रहा था कच्ची सड़क पर केवल मां बेटे ही आगे आगे चल रहे थे,,, सुगंधा आगे चल रही थी औरउसे एक कदम पीछे अंकित चल रहा था वैसे भी अपनी मां के पीछे चलने में अंकित का अपना एक लालच छुपा हुआ होता था क्योंकि वह अपनी मां के पीछे चलते हुए वह अपनी मां की बनावट को अपनी आंखों से देखकर मस्त हो जाता था और इस समय वह कच्ची सड़क पर चल रही थी जिसकी वजह से कसी हुई साड़ी में है उसकी बड़ी-बड़ी गांड बेहद आकर्षक और उत्तेजक लग रही थी,, जिसे देखकर बड़ी मुश्किल से सहज हुआ उसका लंड एक बार फिर से टनटनाने लगा था,,,अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर अपनी मन में यही सोच रहा था कि वाकई में गजब की माल है,,,। और सुगंधा भी बार-बार तिरछी नजर से अपने बेटे की तरफ देख ले रही थी और उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि इस समय उसके बेटे की नजर उसके कौन से अंग पर है,,, इसलिए वह अपनी गांड को कुछ ज्यादा ही मटका कर चल रही थी।

सुगंधा भी अच्छी तरह से जानती थी कि जब एक पक्ष कमजोर हो जाए तो दूसरे पक्ष को हमेशा हावी हो जाना चाहिए,,, हालात भी कुछ यही दर्शा रहे थे,,, वह जानती थी किसका बेटा आगे बढ़ने से थोड़ा कतरा रहा है,,, और ऐसे में उसे ही जिम्मेदारी उठानी होगी वह तो भीड़भाड़ की वजह से उसका बेटाथोड़ी हिम्मत दिखा कर अपनी हरकत को आगे बढ़ा दिया था वरना अगर बस में भीड़ भाड़ ना होती तो वह अपने मन से कभी भी आगे ना बढ़ता,,, सुगंधा को अच्छी तरह से याद आता कि भीड़भाड़ और कच्ची सड़क की ऊपर खबर सड़कों पर ऊंची नीची होती हुई बस के रफ्तार का फायदा उठाते हुएबार-बार उसका बेटा अपनी कमर को हिचकोले खिला रहा था आगे पीछे हिला रहा था मानो के जैसे वह किसी की चुदाई कर रहा हो अगर सबको सामान्य होता तो इतनी हिम्मत उसका बेटा कभी नहीं करता,,, और उसकी इसी हिम्मत को सुगंधा को आगे बढ़ाना था ताकि उसके मर्दाना अंग के उसका मन भी पूरी तरह से मर्दाना हो जाए।

यही सब सोचते हुए सुगंधा धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी,,, अपने मन में आगे की युक्तिके बारे में विचार कर रही थी कि आगे कैसे बढ़ता है ताकि उसका बेटा खुद ही उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मचल उठे तड़प उठे,,,,यह सब सोते हुए वह आगे पीछे काफी दूर तक देख भी ले रही थी कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा है लेकिन जेठ की दुपहरी में किसी का नामोनिशान सड़क पर दिखाई नहीं दे रहा था,,, ऐसे भी मदन रस के बहाव के चलते उसे बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी थी,,,और यही सही मौका भी लग रहा था उसे अपने बेटे को पूरी तरह से आकर्षित करने के लिए वैसे तो वह यह हथकंडा काफी बार आजमा चुकी थी लेकिन इसका यही फायदा होता था कि उसका बेटा उसके आकर्षण में पूरी तरह से बंधता चला जा रहा था लेकिन आगे नहीं बढ़ पा रहा था,,, बस देखता भर था,,,ना तो इससे आगे करने की कुछ सोचता था और ना ही उसके ईसारे को समझ पाता था।

लेकिन आज उसके धक्को याद करके सुगंधा समझ गई थी कि उसका बेटा भी चुदाई करने के लिए तड़प रहा हैवरना वह अपनी कमर आगे पीछे करके हिलता नहीं वह भी सुख भोगना चाहता है बस कोई झिझक उसे आगे बढ़ने से रोक रही है,,,, और उसकी यही झिझक को सुगंधा खत्म करना चाहती थी दूर करना चाहती थी,,,, इसलिए कुछ देर और आगे चलते हुएएक बड़े से पेड़ के नीचे एकदम से रुक गई और इधर-उधर देखने लगी उसके साथ में अंकित भी रुक गया था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां यहां क्यो रुक गई है,,,, फिर उसे लगा कि शायदधूप की वजह से वह पेड़ की छांव के नीचे खड़ी हो गई है लेकिन फिर उसे एहसास हुआ कि पूरे सड़क भर पेड़ ही पेड़ हैं धूप तो है ही नहीं इसलिए वह अपने मन में उठ रहे शंका को दूर करने के लिए बोला।क्या हुआ मम्मी खड़ी क्यों हो गई,,,?

अब कैसे बताऊं तुझे,,,,(अपनी कमर पर दोनों हाथ रखकर इधर-उधर देखते हुए सुगंधा बोली और चेहरे का थोड़ा सा तंग करते हुए वह अपनी युक्ति को कामयाब करना चाहती थी उसकी बात को सुनकर अंकित बोला)

क्यों क्या हो गया,,,?

अरे मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी हैऔर देखना है चारों तरफ झाड़ियां ही झाड़ियां हैं यहां पर तो सांप और बिच्छू का भी डर बना रहता है,,,।

क्या बात कर रही है मम्मी यहां पर सांप बिच्छू भी हैं,,,(सांप बिच्छू का नाम सुनकर एकदम से हैरान होते हुए बोल सांप बिच्छू का नाम सुनकर वह अपनी मां के मुंह से निकले हुए से पेशाब शब्द पर भी ध्यान नहीं दिया था वरना औरत के मुंह से यह सब दे सुनते ही मरते की दोनों टांगों के बीच की बत्ती जलने लगती है,,, इस बात पर उसकी मां भी गौर की थी इसलिए थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

अरे बुद्धु मुझे बड़े जोरों के पेशाब लगी और सोच रही हूं कहां करूं इन झाड़ियां में तो कहीं भी कुछ भी निकल सकता है,,,(सुगंधा इस तरह से अपनी कमर पर दोनों हाथ रखकर इधर-उधर देखते हुए बोली,,,, अपनी मां के चेहरे के हाव-भाव को देखकरअंकित को समझ में आने लगा था कि वाकई में उसकी मां को बड़ी जोरों की पेशाब लगी हुई है वह भी इधर-उधर जगह देखने लगा वैसे भी कच्ची सड़क पूरी तरह से खाली थी कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था,,, आदमी तो छोड़ो जानवर का भी नामोनिशान दिखाई नहीं दे रहा था,,, और पेशाब वाली बात पर अब जाकर अंकित का ध्यान गया था और उसके बाद में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी और वह भी जगह देखते हुए अपनी मां से बोला,,,,)

, एक काम करो मम्मी बड़े से पेड़ के पीछे चली जाओ वहां आराम से कर लोगी,,,(अंकित उंगली के इशारे से सामने के बड़े पेड़ की तरफ दिखाते हुए बोलाउसे मालूम था कि उसकी मां उसकी आंखों के सामने तो पेशाब करने बैठे कि नहीं इसलिए वह बोल रहा था कि पेड़ के पीछे चली जाओ और इस समय सुगंधा के मन में कुछ और चल रहा था वह पूरी तरह से अपने बेटे के सामने पेशाब करने के लिए बैठना चाहती थी ताकि उसकी बड़ी-बड़ी गोलाकार जवानी उसका बेटा अपनी आंखों से देख सके,,,,इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी इसलिए चारों तरफ नजर घूमाकर पूरी तसल्ली कर लेने के बाद वह उसे पेड़ की तरफ जाने लगी और बोली,,,)मुझे डर लग रहा है पेड़ के पीछे तो मैं जाऊंगी नहीं जंगली झाड़ियां से वैसे भी मुझे यहां डर लगता है,,, मैं पेड़ के पास ही बैठ जाती हूं और हां तो देखते रहना कहीं कोई सांप बिच्छू ना निकल जाए,,,, नहीं तो बहुत परेशानी हो जाएगी,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी गांड मटकाते हुए बड़े से पेड़ के पास पहुंच गई,,,,अपनी मां की इस तरह की बातों को सुनकर अंकित का दिमाग काम करना बंद कर दिया था उसे तुरंत राहुल की कही गई बात याद आने लगी थी,,, राहुल ने उसे बताया था कि घर की औरतें इसी तरह से अपनी गांड दिखाकर घर के मर्दों को अपना दीवाना बनाती है और उनके साथ चुदवाती है,,, यह बात मन में आते ही अंकित के टांगों के बीच का हथियार खड़ा होने लगाऔर वह धीरे-धीरे कदम आगे बढ़कर बीच सड़क पर खड़ा हो गया जहां से उसकी मां एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,,।

जिस तरह से उसकी मां ने उसे देखने के लिए हिदायत दे रखी थी उसके चलतेअब उसे चोरी छुपे नहीं बल्कि खुली आंखों से अपनी मां की तरफ देखना था और वह भी पेशाब करते हुए यह एहसास उसके मन में मदहोशी का रस बोल रहा था वह पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था वह उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,, बस उसकी मां के पेशाब करने के लिए बैठने की जरूरत हैअभी भी उसकी मां बड़े से पेड़ के पास खड़ी थी वह पूरी तरह से तसल्ली कर लेना चाहती थी कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा है,,,,, लेकिन पूरी तसल्ली कर लेने के बाद सुगंधा अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ ली थी,,,,,और उसे धीरे-धीरे ऊपर उठा रही थी यह एक तरह की मादकता थी जो वह अपने बेटे की जवान नसों में घोलना चाहती थी,,,। और उसकी यह अदा धीरे-धीरे काम भी कर रही थी,,,।अंकित का दील जोरों से धड़क रहा था,,,, उसके पेट में तंबू बनना शुरू हो चुका थाऔर उसकी मां बार-बार उसे हिदायत भी दे रही थी कि देखते रहना कहीं कोई जानवर आना जाए,,,, और ऐसा कहते हुए धीरे-धीरे अपनी साड़ी को अपनी मोटी मोटी जांघों तक उठा दी थी,,,,अपनी मां की गोरी चिकनी मोटी मोटी केले के तने के समान चिकनी जांघो को देखकर अंकित का मन फिसल रहा था,,,, इस तरह के कुदरत वातावरण के मनोरम दृश्य के साथ-साथ एक खूबसूरत जवान औरत की मादकता भी उसे देखने को मिल रही थी और उसे क्या चाहिए था,,, जिस तरह का एहसास अंकित को हो रहा था वही एहसास सुगंधा को भी हो रहा था सुगंधा की भी बुर पानी छोड़ रही थी,,, सुगंधा को इस बात का डर भी था कि कहीं कोई आ ना जाए,,, भले ही अब तक जेठ की दुपहरी में कोईनजर नहीं आया था लेकिन कोई भरोसा भी नहीं था क्योंकि पास में ही बस्ती शुरू होती थी इसलिए बिल्कुल भी देर ना करते हुए सुगंधा एकदम से अपनी साड़ी को कमर तक उठा दे औरउसके साड़ी उठते ही उसकी बड़ी-बड़ी मदहोश कर देने वाली गांड उसकी पेंटि में नजर आने लगी,,,।

अंकित की तो हालत खराब हो गई उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह अपनी नजर को दूसरी तरफ तो घूमा ही नहीं सकता था वैसे अगर उसकी मां नेउससे साफ शब्दों में ना बोली होती देखते रहने को तो वह शायद चोरी छिपे ईस नजारे को देखकर अपनी आंखों को सेंकता,,, लेकिन वह अपनी मां की बात को टाल नहीं सकता था इसलिए अपनी नजर को इधर-उधर ना करके वह सिर्फ अपनी मां को ही देख रहा था और एक बार फिर से उसकी मां अपने शब्दों को दोहराते हुए पीछे मुड़कर अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,,)

देखते रहना अंकित मुझे बहुत डर लगता है,,,।(ऐसा कहते हुए वह अपने बेटे की हरकत को देख रही थी और उसकी कामुक हरकत उसकी आंखों में कैद हो चुकी थी वह जब पीछे मुड़कर देखी थी तब अंकित अपनी उतेजना पर काबू नहीं कर पा रहा था और पेंट में बने तंबू को अपने हाथों से दबा रहा था,,, उसके बेटे की यह हरकत देख कर सुगंधा को अपनी युक्ति कामयाब होती हुई नजर आने लगी थी क्योंकि उसकीबेलगाम जवानी का कर उसके बेटे पर बहुत ही बुरा प्रभाव डाल रहा था वह पूरी तरह से उसकी आकर्षण में डूबता चला जा रहा था,,, सुगंधा तुरंत अपनी नजर को फिर से आगे की तरफ कर दी थी क्योंकि वह जताना नहीं चाहती थी कि उसने अपने बेटे की हरकत को देख ली है,,,।

और फिर अपनी पेंटिं को नीचे सरकाने लगी,,,, जिसका बड़ी बेसब्री से अंकित को इंतजार था,,, सुगंधा को भीइस तरह की हरकत तो अपने बेटे के साथ बहुत बार कर चुकी थी उसकी आंखों के सामने कपड़े उतारना कपड़े पहनना अपनी नंगी गांड दिखाना यह सब तो घर में चलता रहता था लेकिन आजखुले में इस तरह से वह अपने बेटे को अपनी जवानी के दर्शन कर रही थी ताकि उसका काम बन सके,,,, पेंटी के नीचे उतरते ही सुगंधा की गोरी गोरी गांड एकदम जवानी से लाल हुई मदहोश कर देने वाली उभारधार गांड उसके बेटे की आंखों के सामने एकदम से उजागर हो गई जिसे देखते ही अंकित की आंखों में वासना के डोरे नजर आने लगे वह पूरी तरह से पागल होने लगा,,,और यह देखकर अपने मन में सोचने लगा कि काश बस के अंदर उसकी मां अपनी साड़ी ऊपर उठा दी होती तो उसका लंड उसकी बुर में घुस गया होता,,,।

पेंटी को जांघों तक नीचे सरकाते हीसुगंधा पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई उसे आज बिल्कुल भी सर में महसूस नहीं हो रही थी अपने बेटे की आंखों के सामने खोलेंगे पेशाब करने में वह तो चाहती थी कि उसका बेटा खुली आंखों से यह सब कुछ देखें और ऐसा हो भी रहा था अंकित सांप बिच्छूपर नजर रखने के बहाने अपनी मां की भरी हुई जवान दे रहा था उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की मधुर आवाज उसके कानों में पडते ही वह पूरी तरह से बावला हुआ जा रहा था,,, उसकी सांसे गहरी चल रही थी पेंट में बना तंबू एकदम से अकड़ने लगा था,,,अपनी मां की हरकत को देखकर वह समझ गया था कि राहुल घर की औरतों के बारे में सच ही बोल रहा था,,,,। आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी सुगंधा चुदवाना चाहती थी और उसका बेटा चोदना चाहता था,,,।

सुगंधा पेशाब करने के बादअपने दोनों हथेलियां को अपनी नंगी गांड पर रखकर उसे हल्के हल्के से सहला रही थी,,, एक तरह से अपने बेटे को पागल बना रही थी और फिर एक झटके से अपनी नजर पीछे की तरफ घूमकर अपने बेटे की तरफ देखने लगी और एकदम से मुस्कुरा दी यह मुस्कुराहट अंकित के लिए एक खुला आमंत्रण था एक ही सहारा था आगे बढ़ने का लेकिन अपनी मां की नंगी गांड और उसकी नजर से एकदम से अंकित झेंप सा गया था,,, और अपने तंबू पर से वह एकदम से अपना हाथ हटा दिया था,,, सुगंधा मन ही मन में मुस्कुरा रही थी और फिर धीरे से खड़ी होकर अपनी पेंटि को उपर चढकर अपनी साड़ी को एकदम से नीचे गिरा दी और एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा पड़ गया,,,।

बाप रे अब जाकर आराम मिला है,,,(अपने कपड़ों को व्यवस्थित करते हुए अंकित की तरफ आते हुए वह बोली,,,,अंकित तो अपनी मां का खूबसूरत चेहरा देखा ही रह गया था इस समय उसके चेहरे पर भी उत्तेजना के भाव थे और अंकित बावला हुआ जा रहा था अंकित के पेट में तंबू बना हुआ थाएक नजर अपने बेटे के पेंट में बने तंबू पर डालकर,,, सुगंधा चलने लगीऔर अंकित पीछे-पीछे चलने लगा अपनी मां की मटकती गांड को देखकर अंकित अपने मन में ही बोला,,, साली चुदवाने के लिए कितना तड़प रही है और तड़पा रही है,,,, अंकित के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे लेकिन फिर भी वह बोला,,)

मम्मी तुम्हें सांप और बिच्छू से डर क्यों लगता है,,,?

यह बहुत लंबी कहानी है जब मैं गांव में थी तब मेरे साथ एक हादसा हो गया था तभी से मुझे डर लगता है,,,।

कैसा हादसा,,,!(अंकित आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)

फिर कभी बताऊंगी,,,,, आराम से,,,,,।

(थोड़ी ही देर में बस्ती शुरू हो गई थी बस्ती के नाम पर थोड़ी-थोड़ी दूर पर इक्का दुक्का घर दिखाई दे रहे थे तभी सुगंधा उंगली के ईसारे से एक घर की तरफ इशारा करते हुए बोली,,,)

वह देख वह रहा तेरे मामा का घर,,,,।

वह मम्मी मामा ने तो बहुत अच्छा घर बना रखा है,,,।

तब क्या,,,,?
(घर ज्यादा बड़ा नहीं था तीन कमरों का घर था और छत वाला था,,, घर के पीछे बाथरूम बना हुआ था जहां पर स्नान और सोच किया जाता था,,,, सुगंधा और अंकित दोनों,,, घर पर पहुंच चुके थे,,, घर का दरवाजा खुला हुआ था सुगंधा,, बाहर खड़े होकर आवाज लगाती हुई बोली,,,)

अरे कोई है घर में,,,,।

(आवाज सुनते ही सुगंधा का भाई जल्दी-जल्दी आया वह घर में कोई काम कर रहा था और आते ही एकदम खुश होते हुए बोला,,,)

अरे दीदी तुम,,,, तुम कब आई,,,,।

अरे अभी-अभी आ रही हूं,,,,।

ना कोई खबर ना चिट्ठी,,,!

अरे तेरे घर आने के लिए मुझे खबर देना पड़ेगा,,,।

अरे ऐसी कोई बात नहीं दीदी बस अचानक आ गई इसलिए कह रहा हूं,,,। अंकित तू तो एकदम बड़ा हो गया रे एकदम जवान हो गया है,,,(सुगंधा का भाई अपने भांजे की तरफ देखते हुए बोला तोसुगंधा अपने मन में ही बोली यह तो बड़ा हो गया है लेकिन इसका हथियार भी ज्यादा बड़ा हो गया है,,, और वह अंकित की तरह देखते हुए बोली,,,)

अंकित पैर छुओ मामा के,,,,।
(अंकित एकदम से आगे बढ़ा और अपने मामा के पैर छूने लगा,,,, अभी यह सब चल ही रहा था कि पीछे से एकदम से खुश होते हुए एक खूबसूरत औरत आई वह भी घर में कोई काम कर रही थी और आते ही सुगंधा के पैर छुते हुए बोली,,,)

प्रणाम दीदी,,,, आओ अंदर आओ,,,,

अंकित यह तुम्हारी मामी है पैर छुओ इनके,,,,
(इतना सुनकर अंकित मुस्कुराते हुए आगे बड़ा और अपनी मामी के भी पैर छूने लगा,,,,,, यह देखकर वह तुरंत उसकी बांह पकड़ कर उसे अपने सीने से लगा ली,,,, अंकित अपनी मामी की हरकत पर खुश हो गया था क्योंकि उसके ऐसा करने से उसकी छाती एकदम से उसके सीने से रगड़ खाने लगी थी,,,,,।

थोड़ी देर बाद चाय नाश्ता कर लेने के बाद चारों बैठकर बातें कर रहे थे इधर-उधर की बातें करते हुए सुगंधा बोली,,,।

तुम दोनों के शादी के ईतने वर्ष बीत गई लेकिन अभी तक कोई अच्छी खबर नहीं मिली,,,।

(इस बात को सुनकर अंकित की मामी उदास होते हुए बोली)

क्या करूं दीदी इतनी दवा दवाई तो कर रहे हैं लेकिन कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है कहां नहीं दिखाएं हर जगह दिखाकर थक हार गए हैं,,,, लेकिन कोई परिणाम नहीं मिल रहा है इसलिए अभी इच्छा भी नहीं करती।

धैर्य रखो सब कुछ ठीक हो जाएगा सब कुछ समय से ही होता है एक न एक दिन जरूर तुम्हारी गोद हरि हो जाएगी,,,।

(दोनों की बात को सुनकर अंकित समझ गया था कि उसके मामा मामी के कोई संतान नहीं है,,, अंकित एक नजर अपनी मामी पर डालकर देख ले रहा था ,,, उसकी मम्मी पूरी तरह से जवानी से भरी हुई थी पतला छरहरा बदन,,, बेहद आकर्षक किया थी उसकी मम्मी की और उसकी चुचियों का स्पर्श तो वह अपनी छाती पर महसूस भी कर चुका था,,,, सुगंधा के इस बात पर माहौल थोड़ा गमगीन हो गया था इसलिए माहौल को बदलते हुए सुगंधा बोली,,,)

अपनी जानकारी में अंकित पहली बार तुम दोनों से मिल रहा है क्यों अंकित सच कह रही हूं ना,,,।

बिल्कुल सही मैं तो पहली बार अपने मामा मामी को देख रहा हूं और पहली बार इधर आया भी हूं,,,।

हां सही कह रहे हो अंकित दीदी तुम्हें पहली बार यहां ला रही है,,,।

अब क्या करूं तू तो जानता ही है तेरे जीजा जी के देहांत के बाद से कैसे दिन गुजारी हूं मैं ही जानती हूं,,, अगर टीचर की नौकरी ना होती तो शायद बहुत बुरा हो चुका होता,,,, परीक्षा खत्म हो चुकी थी मेरी भी छुट्टी पड़ चुकी थी इसलिए सोची चलो मामा मामी से ही मिला दुं,,,।

यह तो ठीक किया दीदी लेकिन तृप्ति को क्यों नहीं लाई,,,,(अंकित की मामी एकदम से बोल पड़ी)

क्या करूं उसकी पढ़ाई ही कुछ ऐसी है,,, लेकर तो आना चाहती थी लेकिन उसका लेक्चर उसे आने नहीं दिया,,,,।

तो दीदी शहर में उसे किसके सहारे छोड़ कर आई हो,,,।

पड़ोस में,,, उनके सहारे छोड़कर आई हूं उनकी तृप्ति की उम्र की बेटी है,,, और उन्होंने ही कहा था कि तुम निश्चिंत होकर जो वह संभाल लेगी एक ही दिन की तो बात हैइसलिए तुम्हें कपड़े भी लेकर नहीं आई हूं कल सुबह चली जाऊंगी,,,।

यह क्या दीदी इतने साल बाद आई भी तो सिर्फ एक दिन के लिए,,,।(अंकित की मामी बोली,,)

अरे अब तो आना जाना लगा रहेगा बच्चे भी बड़े हो गए हैं,,,,।

(रात को अंकित की मामी खीर पुरी और सब्जी बनाई,,, जिसे खाने के बाद सोने की तैयारी होने लगी गर्मी का दिन था इसलिए सुगंधा बोली,,,)

हम दोनों का बिस्तर छत पर लगा देना तुम दोनों भी छत पर सोते हो कि नहीं,,,।

नहीं दीदी हम लोग तो कमरे में ही सोते हैं,,,।

गर्मी बहुत है इसलिए हम दोनों का बिस्तर छत पर ही लगा देना हम दोनों को छत पर ही सही रहेगा क्यों अंकित सही है ना,,,।

हां मम्मी यहां पर गर्मी कुछ ज्यादा ही है कमरे में सो नहीं पाएंगे,,,।

चलो ठीक है दीदी तो मैं आप दोनों का बिस्तर छत पर लगा देती हुं,,,,,,,।

(इतना कहकर अंकित की मामी छत पर बिस्तर लगाने लगी और कुछ देर वह लोग बैठकर बातें करते रहे काफी समय बीत जाने के बाद नींद आने लगी तो सुगंधा खुद अंकित की मामी से बोली,,,)

अब मुझे नींद आ रही है तुम दोनों भी जाकर सो जाओ,,,,(इस दौरान बस के सफर के कारण थककर अंकित सो चुका था,,, उसकी तरफ देखते हुए सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) पहली बार बस का सफर किया है इसलिए थक कर सो गया,,,।

ठीक है दीदी अब हम दोनों भी चलते हैं किसी चीज की जरूरत हो तो बता देना,,,।

नहीं अब किसी चीज की जरूरत नहीं है तुम दोनों जाओ आराम करो,,,,।
(थोड़ी ही देर में सुगंधा को भी नींद आ गई,,, लेकिन तकरीबन एक घंटा बीता होगातो उसकी नींद एकदम से खुल गई उसे बड़े जोरों की प्यास लगी थी और बातों ही बातों में उसने पानी रखने के लिए बोलना भूल गई थीइसलिए वह धीरे से हटकर बैठ गई उसकी चूड़ियों की खनक की आवाज सुनकर अंकित की भी नींद खुल गई थी लेकिन वह अपनी आंखों को बंद किए हुए था,,,, वह सोच रहा था कि उसकी मां शायद नींद नहीं आ रही है इसलिए उठकर बैठ गई है कुछ देर बैठने के बादवह धीरे से उठकर खड़ी हुई और छत से चारों तरफ देखने लगी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा छाया हुआ था केवल इसका दुख का घर में नाइट बल्ब जल रहा था बाकी कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी सुगंधा चलते हुए छठ के कोने की तरफ गई वह शायद पानी केनिकलने का रास्ता देख रही थी और उसे वहीं पर छोटी सी पाइप लगी हुई नजर आई और वह छत से खड़ी होकर दूसरी तरफ देखने लगी तो वह पाइप घर के पीछे खेतों की तरफगई हुई थी जिसमें से पानी नीचे गिरकर खेतों की तरफ चला जाता था।

यह सब अंकित अपनी आंखों से देख रहा था उसकी भी नींद उड़ चुकी थी वह देख रहा था कि उसकी मां कर क्या रही है,,, लेकिन तभीउसकी मां धीरे से अपनी साड़ी पर उठने लगी और देखते ही देखते वह वहीं पर बैठकर पेशाब करने लगी,,, अंकित की आंखों के सामने एक बार फिर से उसकी मां की गदराई गांड दिखाई दे रही थीऔर उसकी गुलाबी बुर से सिटी की आवाज निकल रही थी जो पूरे वातावरण को अपनी मादकता में लपेटे हुए था,,,, यह नजारा देखकर एकदम से अंकित के पेंट में तंबू सा बन गया,,, और वह पीठ के बल लेटा हुआ था,,,इस स्थिति में उसकी मां की नजर उसके तंबू पर पड़ सकती थी लेकिन इस समय न जाने की वह अपने तंबू को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था और उसी तरह से लेते हुए ही अपनी मां की रसभरी जवानी का रसपान अपनी आंखों से कर रहा था,,,,थोड़ी देर में सिटी की आवाज आना बंद हो गई तो अंकित समझ गया कि उसकी मां पेशाब कर चुकी है और फिर उसकी मां उठकर खड़ी होगी और पानी डालकर वापस उसी जगह पर आ गई जहां पर अंकित सो रहा था अंकित पर नजर पडते ही,, सुगंधा की आंखों की चमक बढने लगी,,, क्योंकि उसकी नजर उसके बेटे के तंबू पर चली गई थी,,,।

सुगंधा ईस नजारे को देखकर उत्तेजित होने लगी,,, और अपने मन में सोचने लगी की यही तंबू बस के अंदर उसकी गांड में घुसने के लिए बेताब हुआ जा रहा था,,,, यह सोचते हुए वह धीरे से झुकी और अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के पेंट में बने तंबू का स्पर्श करने लगी,,,उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसका बेटा गहरी नींद में सो रहा है वह नहीं जानते थे कि उसके बेटे की नींद खुल चुकी है और वह सब कुछ अपनी आंखों से देख रहा था लेकिन इस समय वह अपनी आंखों को बंद करके गहरी नींद में होने का नाटक कर रहा था वह देखना चाहता था कि उसकी मां क्या करती है,,,,हालांकि उसकी सांसों की गति ऊपर नीचे हो रही थी और वह बड़ी मुश्किल से अपनी उत्तेजना पर काबू किए हुए था,,,,।

सुगंधा अपने बेटे की नींद में होने का फायदा उठाते हुएउसके पेट में बना तंबू को छू रही थी स्पर्श कर रही थी जब ईस तरह की हरकत करने पर भी अंकित के बदन में कोई हरकत नहीं हुई तो उसकी हिम्मत बढ़ने लगी और वह एकदम उत्तेजित अवस्था में एक झटके से अपने बेटे के पेंट में बनी तंबू को अपनी मुट्ठी में दबोच ली उसकी ईस हरकत सेअंकित एकदम से मदहोश हो गया उसकी आंख खुलने वाली थी उसकी बदन में हलचल होने वाली थी लेकिन न जाने कैसे वह अपनी उत्तेजना पर एकदम से लगाम लगा दिया था लेकिन अपनी मां की ईस हरकत पर उसका बदन हल्के से कसमसाया जरूर था,,, और अंकित के इस तरह से कसमसाने से सुगंधा एकदम से अपना हाथ पीछे खींच ली,,,, पेंट के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड की मोटाई को महसूस करके वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी,,,। लेकिन ज्यादा छेड़छाड़करना उसे उचित नहीं लगा क्योंकि वह उसका घर नहीं बल्कि उसके भाई का घर था,,,।

उसे बड़े जोरों की प्यास लगी हुई थी इसलिए हुआ धीरे से सीढ़ियां उतरने लगी और धीरे-धीरे सीढ़ियां उतर कर रसोई घर की तरफ जाने लगी,,,दूसरी तरफ अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी जब उसे एहसास हुआ कि उसकी मां सीढ़ियां उतरकर नीचे जा चुकी है तो वह उठकर बैठ गया था गहरी गहरी सांस लेने लगा था,,,पल भर में ही उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई थी क्योंकि उसकी मां उसके लंड को पहले ही पेट के ऊपर से लेकिन अपनी हथेली में दबोच ली थी यह एहसास उसे पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद कर दिया था,,,, कुछ देर तक वह बैठकर अपनी मां के बारे में ही सोचता रहा इतना तो वह समझ गया था कि उसकी मां चुदवाना चाहती है और वह खुद उसे छोड़ना चाहता है लेकिन कैसे आगे बढ़ा जाए बस यही समझ में नहीं आ रहा था,,,तभी अंकित को एहसास हुआ कि उसकी मां काफी देर से नीचे गई है और अभी तक आई नहीं उसे कुछ समझ में नहीं आया कि उसकी मां आखिरकार कर क्या रही है इसलिए वह धीरे से वह भी सीढ़ियों से नीचे उतरने लगा,,,,।

चारों तरफ अंधेरा थावह कुछ देर खड़ा होकर इधर-उधर देखता रहा लेकिन उसकी मां कहीं नजर नहीं आ रही थी,,, फिर उसे ऐसा लगा कि शायद उसकी मां घर के पीछे टॉयलेट उसे करने के लिए गई हो इसलिए बहुत दिशा में चलने लगा लेकिन तभी उसे एहसास हुआ की खिड़की पर कोई खड़ा है,,,,वह कुछ देर के लिए तो एकदम से घबरा गया क्योंकि अंधेरा था इसलिए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, और वह डर के मारे आवाज भी नहीं लगा पा रहा था,,,,खिड़की से हल्की-हल्की रोशनी बाहर की तरफ आ रही थी कुछ देर ध्यान से देखने के बाद उसे एहसास समझने लगा की खिड़की पर तो उसकी मां ही खड़ी है लेकिन वह खिड़की में से अंदर क्या देख रही है यह उसके लिए कुतुहल विषय था,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,इसलिए वह बिना आवाज के धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ते हुए अपनी मां की करीब ठीक उसके पीछे पहुंच गया जहां पर उसकी मां खड़ी थी,,, वह कुछ खिड़की से अंदर की तरफ देख रही थी।

अंकित भी बिना आवाज की खिड़की के अंदर देखने की कोशिश करने लगाउसकी मां खिड़की के अंदर देखने में इतनी तल्लीन हो चुकी थी कि उसे अहसास तक नहीं हुआ कि उसके ठीक पीछे उसका बेटा खड़ा है,,,, और जब उसने खिड़की के अंदर नजर टिकाकर कमरे के दृश्य को देखने की कोशिश किया तो अंदर का नजारा देखकर उसके होश एकदम से उड़ गए,,, कमरे के अंदर उसके मामा मामी की चुदाई कर रहे थे,,,, अंकित के तो एकदम से होश उड़ गए थेइस यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां अपने ही भाई और भाभी की चुदाई को तल्लीन होकर देख रही थी,,,,लेकिन तभी अंकित को एहसास हुआ कि उसकी मां भी तो यही चाहती है इसी के लिए तो तड़प रही है वर्षों से,,,।

अंकित भी दूरी बनाकर अंदर की तेरे से को देखने लगा उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मम्मी उसकी मां के लंड पर चढ़ी हुई थी,,, अंदरनाइट लैंप चल रहा था जिसकी रोशनी में ध्यान से देखने पर सब कुछ साथ दिखाई दे रहा थाउसकी मामी की गांड इस अवस्था में कुछ ज्यादा ही बड़ी लग रही थी और वह अपने पति के लंड के ऊपर जोर-जोर से कुद रही थी,,,,इस दृश्य का असर मां बेटे दोनों पर बेहद कहना पड़ रहा था सुगंधा को तुम बिल्कुल भी आप आज तक नहीं था कि ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसका बेटा भी वही देख रहा है जो वह खुद देख रही थी,,, अंकित और उसकी मां एकदम साफ तौर पर देख रहे थे कि उसके भाई का लंड बड़े आराम से बुर के अंदर बाहर हो रहा था और पूरा कमान अंकित की मामी ने संभाली हुई थी,,,। कमरे के अंदर की सिसकारी की आवाज खिड़की से दोनों के कानों में पड़ रही थी,,, और उस सिसकारी की आवाज को सुनकर सुगंधा की हालत खराब हो रही थी और वह साड़ी को कमर तक उठाकर पेंटी में अपना हाथ डालकर अपनी बुर को मसल रही थी,,,।

उसे पर उत्तेजना का दोहरा असर पड़ा था कुछ देर पहले ही वह पेंट के ऊपर से अपने बेटे के लंड को पकड़ कर आई थी और पानी पीने के लिए रसोई घर की तरफ जा ही रही थी की खिड़की खुली होने से अंदर की रोशनी में अचानक उसकी नजर चली गई थी और अंदर की तेरे को देखकर वह अपने आप को वही रोक दी थी और अंदर के गरमा गरम दृश्य को देखकर वह खुद गर्म होती चली जा रही थी। अंकित के पेट में तंबू बन चुकावह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था इतना तो उसे पता चल गया था कि उसकी मां एकदम चुदवाने के लिए तड़प रही है ऐसे में अगर वह खुद कुछ भी करना चाहे तो शायद उसकी मां इनकार नहीं कर पाएगी,,,,और उसे इस बात का भी एहसास हो रहा था कि उसकी मां अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी थी और अपने हथेली को अपनी पेंटि में डालकर अपनी बुर को मसल रही थी,,,, यह एहसास होते ही अंकित से सब्र करना मुश्किल हुआ जा रहा था,,,।

और वह हिम्मत दिखाते हुएएकदम से अपनी मां के बदन से उसके पिछवाड़े से चपक सा गया,,,, उसके पेट में बना था हमको एकदम से उसकी गांड में घुसने के लिए तैयार हो गया,,,, जैसे ही सुगंधा को एहसास हुआ कि उसके पीछे कोई एकदम से उससे सट गया है,,,, तो वह एकदम से कुछ बोलना चाहि वह घबरा गई थी,,,, लेकिन मौके की नजाकत को समझते हुए सुगंधा कुछ बोल पाती से पहले ही अंकित चला कि दिखाता हुआ एकदम से अपने होठों को उसके कान के करीब ले गया और धीरे से बोला,,,,।

अंदर क्या हो रहा है मम्मी तुम यह क्या देख रही हो,,, यह मामी क्या कर रही है,,,,(अंकित जानबूझकर एकदम से अनजान बनता हुआ एकदम भोलेपन से बोल रहा थाजैसे कि उसे कुछ पता ही ना हो लेकिन वह जिस तरह से एकदम से अपनी मां के पिछवाड़े से सटा हुआ था उसका लंड उसकी बुर में जाने के लिए मचल रहा था इस बात का भी एहसास सुगंधा को अच्छी तरह से हो रहा था लेकिन जब उसे पता चला कि उसके पीछे दूसरा कोई नहीं उसका लड़का है तो उसकी जान में जान आई,,,,लेकिन अपने बेटे का सवाल का जवाब हुआ है कैसे देता उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,अंकित एकदम मदहोश हो चुका था और वह अपने होठों को एकदम अपनी मां के गर्दन पर रख दिया था और गहरी गहरी सांस ले रहा थावह अपनी मां के लाल-लाल होठों का चुंबन करना चाहता था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी इसलिए केवल अपने होंठों को वह अपनी मां के गर्दन पर रख दिया था लेकिन इतने से ही सुगंधा की बुर भल भला कर झडने लगी,,,,क्योंकि वह दोनों तरफ से मदहोश हो रही थी पीछे से उसका बेटा अपने लंड की रगड़ उसकी गांड पर बढ़ा रहा था और खुद उसकी उंगली की बुर के अंदर बाहर हो रही थी,,।

झड़ते हुए वह गहरी गहरी सांस ले रही थी लेकिन उसे इस बात का डर भी था की कहानी उन दोनों को उसका भाई और उसकी भाभी देख ना ले अगर ऐसा हो गया तो गजब हो जाएगा इसलिए वह ज्यादा कुछ बोली नहीं बस धीरे से बोली,,,।

कुछ नहीं हो रहा है चल इधर,,,,(और इतना कहकर धीरे-धीरे फिर से सीढीओ की तरफ जाने लगी अब अंकित का भी वहां खड़ा रहना उचित नहीं था,,,इसलिए वह भी दबे पांव अपनी मां के पीछे-पीछे चल दिया और थोड़ी देर में दोनों छत पर आकर बैठ गए,,,, अंकित उसी मासूमियत भरे स्वर में बोला,,,।)

मामा मामी क्या कर रहे थे मम्मी,,,, दोनों में झगड़ा तो नहीं हो रहा था,,,।

( अंकित की बात को सुगंधा समझ नहीं पा रही थीवह फैसला नहीं कर पा रही थी कि वाकई में उसका बेटा मासूम और नादान है या सिर्फ मासूम बनने का ढोंग कर रहा है,,,,वह फैसला नहीं कर पा रही थी और अपने बेटे को क्या जवाब दे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,, फिर उसे लगने लगा कि वाकई में उसका बेटा अभीमासूम ही है तभी यह सब नहीं समझ पा रहे हैं वरना उसका इशारा पाकर उसकी जगह कोई और होता है तो अब तक तो उसकी चुदाई कर दिया होता,,,, इसलिए वह कुछ सोच समझ कर बोली)

दोनों काफी परेशान है बच्चे को लेकर शादी कितने साल हो गए हैं लेकिन फिर भी अभी दोनों को संतान नहीं है इसलिए दोनों परेशान थे और संतान के लिए कोशिश कर रहे थे,,,, और अब तु ज्यादा सोच मत सो जा ज्यादा देर हो गई है,,,,(इतना कहकर वह खुद बिस्तर पर लैटने लगी,,,,, अंकित की धीरे से पास में सो गयावैसे तो यही मौका था दोनों को आगे बढ़ने का लेकिन न जाने क्यों दोनों आगे बढ़ने से इस समय कतरा रहे थे और कब दोनों की आंख लग गई पता ही नहीं चला सुबह जल्दी से उठकर नहा धोकर नाश्ता करके दोनों तैयार हो चुके थे,,,,वैसे तो दोनों दूसरे कपड़े नहीं लगे थे लेकिन वही कपड़े उतार कर टावल लपेटकर बारी-बारी से दोनों नहा लिए थे,,,।

बाजार तक छोड़ने के लिए सुगंधा का भाई आया था,,, बस में दोनों को बैठने के लिए जगह मिल गई थी क्योंकि अभी भीड़ नहीं थी और जगह मिल जाने की वजह से मां बेटे दोनों के चेहरे पर उदासी सी नजर आ रहे थे उन दोनों को बस में बैठ कर उनका भाई चला गया था और थोड़ी देर में बस भर गई थी ,,,, बस के बहार जाने पर थोड़ी ही देर में बस का ड्राइवर बस चालू करके बस को आगे बढ़ाने लगा,,,,,,,,। दोनों के चेहरे परप्रसन्नता और उदासी दोनों के भाव नजर आ रहे थे क्योंकि एक ही रात में एक ही दिन के सफर में वह दोनों ने बहुत कुछ पाया था और बहुत कुछ पाने का अवसर गंवा दिया था।

एक तरफ मां बेटे के लिए है सफर बेहद यादगार था तो दूसरी तरफ तृप्ति के भी जीवन में एक ही रात में पूरी तरह से बदलाव आ गया था,,,।

अपने मामा के घर से अंकित अपनी मां के साथ बस में वापस लौट रहा था वापस लौटते समय अपने मन यही सोच रहा था कि काश बस में पहले की तरह ही भीड़ भाड़ होती और दोनों को खड़े-खड़े ही जाने को मिलता तो कितना मजा आता,,, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था दोनों समय सेपहुंच जाने की वजह से बस में दोनों को अच्छी तरह से बैठने की जगह मिल गई थी,,, दोनों एक दूसरे की तरफ चिंतित मुद्रा में देख रहे थे,, दोनों के चेहरे पर बस में जगह मिल जाने का मलाल साफ दिखाई दे रहा था,,, लेकिन कर क्या सकते थेजगह मिल गई थी तो बैठना ही पड़ता थोड़ी ही देर में बस पूरी तरह से भर चुकी थी ठीक वैसे ही भीड़ थी जैसे आने के समय की यह देखकरअंकित और उसकी मां यही सोच रहे थे कि कुछ देर बाद आती तो कितना मजा आता।

दोनों मां बेटे को यह सफर जिंदगी भर याद कर रहने वाला था क्योंकि जो कुछ भी सफर के दौरान हुआ था इसकी दोनों ने हीं कल्पना नहीं की थी,,, बस के सफर के दौरान दोनों के बीच जिस तरह काआकर्षक और घर्षण हुआ था वह बेहद उन्माद जाकर उत्तेजित कर देने वाला था जिसे याद करके इस समय भी सुगंधा गीली हो जा रही थी,,, और बची कुची कसरघर पर पूरी हो गई थी रात में जब सुगंध पानी पीने के लिए रसोई घर की तरफ जा रही थी और वह रास्ते में ही अपने भाई के कमरे के सामने रुक गई थी क्योंकि खिड़की से वह अपने भाई और बाकी दोनों की चुदाई को देख रही थी उसे नहीं मालूम था कि इस समय उसका बेटा भी वहां आ जाएगा और वह भी ठीक उसके पीछे खड़ा होकर वही दृश्य को देख कर मदहोश हो जाएगा जिसे वह देख रही थी।

खैर जो कुछ भी हुआ वह मां बेटे दोनों के लिए बेहद उनमादक और अतुलनीय था,, जिसे वह दोनों जिंदगी भर नहीं बोलने वाले थे लेकिन इस दौरान तृप्ति के साथ भी उन दोनों से कुछ अलग नहीं हुआ था वह भी इस रात को कभी भूलने वाली नहीं थी,,,वैसे तो सुबह-सुबह अपने भाई के मोटे तगड़े लंड के दर्शन करके वह पूरी तरह से एक स्त्रीत्व का एहसास कर रही थी पहली बार उसे एहसास हो रहा था किएक औरत होकर उसे कितना आनंद प्राप्त होने वाला है,,, अपने भाईके मुसल को देखकर ही वह पूरी तरह से आनंदित हो चुकी थी यह उसके जीवन में दूसरी बार हुआ था जब अपने भाई के लंड को देख रही थी,,, पहली बार तब हुआ था जब वह गहरी नींद में सो रहा था और दूसरी बार तब जब वह पूरी तरह से नंगा होकर अपने कमरे में कपड़ा ढूंढ रहा था,,, अंकित को नहीं मालूम था कि दरवाजे पर उसकी बहन खड़ी है ,, वह तो अपनी ही धुन में नंगा होकर कपड़े ढूंढ रहा था,,,।

लेकिन इस दृश्य को देखकर तृप्ति का शांत मन एकदम से डामाडोल होने लगा था ऐसा लग रहा था कि मानव जैसे शांत तालाब में कोई कंकर फेंक दिया हो,,, बड़ी मुश्किल से तृप्तिइन सब से बाहर निकल पाई थी संदीप के जाने के बाद वह पूरी तरह से टूट गई थी लेकिन जैसे-जैसे हिम्मत करके वहां फिर से अपने आप को मजबूत करके खड़ी हो गई थी जब तक संदीप के साथ थी तो उसे भी ऐसा लगता था कि वह कभी ना कभी अपनी मर्यादा को लांघ जाएगी,,क्योंकि संदीप हमेशा उसके अंगों से छेड़खानी कर देता था और उसकी यह छेड़खानी उसे भी मदहोश कर देती थी एक बार तो अपनी मैडम के बर्थडे में जाने पर उसके घर पर जो कुछ भी हुआ था उसी समय वह संदीप के साथ अपनी मर्यादा को लांघ गई होती,,, लेकिन एन मौके पर किसी के आ जाने की वजह से दोनों अलग हो चुके थे,,,,,उसे समय संदीप के द्वारा उसके तन-बाद में उत्तेजना की मदहोशी का संचार बड़ी तेजी से हो रहा था और वह भी इन तरह की कल्पना में अपने आप को पिरोने लगी थी,लेकिन संदीप के एकाएक चले जाने के बाद वह धीरे-धीरे इन सब बातों से अपने आप को बाहर निकाल देती लेकिन एक बार फिर से अपने ही भाई के मर्दाना अंग को देखकर उसकी पुरानी भावनाएं फिर से जागरूक होने लगी थी,, जिसके चलते हैं उसे अपनी जवानी की आगबुझाने के लिए अपनी उंगली का सहारा लेना पड़ा था और इस खेल में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति भी हुई थी।

रात कोखाना खाने के लिए उसे सुषमा आंटी के घर जाना था और रात को वहीं रुकना भी था वैसे तो दिन भर जिस तरह की कल्पना उसके दिलों दिमाग पर छाई हुई थी उसे देखते हुए वह सुषमा आंटी के घर सोने के लिए नहीं जाना चाहती थी क्योंकि वह रात को एक बार फिर से अपनी जवानी की आग को अपनी उंगली से ही बुझाना चाहती थी,,, लेकिन जब सुषमा आंटी के घर गई तो खाना खाने के बाद,,, उन्होंनेबहुत जोर दिया रात को रोकने के लिए और यह भी कहा कि रात को इस तरह से घर पर अकेला रहना ठीक नहीं है तो ना चाहते हुए भी तृप्ति को सुषमा के घर रुकना पड़ा और सोने के लिए उसे सुमन के कमरे में जाना पड़ा वैसे भी सुमन बहुत खुश नजर आ रही थी,,, क्योंकि वह तृप्ति से दोस्ती बढ़ाना चाहती थी,,, और इस दोस्ती से वह अंकित के और करीब पहुंचना चाहती थी वैसे तो सुमन जानते थे कि वैसे भी अंकित पूरी तरह से उसके आकर्षण में कैद हो चुका है जैसा वह कहेंगीवैसा ही अंकित करेगा लेकिन फिर भी ज्यादा मेल जोल के लिए तृप्ति के साथ दोस्ती बढ़ाना उचित था,,।

रात को दोनों इधर-उधर की खूब बातें की हैतृप्ति और सुमन दोनों एक दूसरे में घुल मिल गए थे दोनों को एक दूसरे का साथ बहुत अच्छा लग रहा था बातों ही बातों में सुमन तृप्ति से बोली।

कोई बॉयफ्रेंड बनाई कि नहींवैसे तो इतनी खूबसूरत है मुझे नहीं लगता कि तुझे बनाने की कोई जरूरत होगी खुद ही तेरे पीछे लट्टु बनकर घूमते होंगे मजनू,,,।
(सुमन की यह बात सुनकर उसे पर भर में ही संदीप का ख्याल आने लगा उसके जीवन में केवल संदीप ही था और वह संदीप से बहुत प्यार करती थी लेकिन शायद उसके जीवन में संदीप के साथ आगे बढ़ना नहीं लिखा था लेकिन सुमन की बात सुनकर वह थोड़ा उदास होते हुए बोली,,,)

नहीं यार इन सब के चक्कर में मैं नहीं पड़ी हूं अभी तो पूरा ध्यान पढ़ाई में है,,,।

लेकिन तेरे बदन की बनावट देखकर तो ऐसा ही लगता है कि तू चाहे की ना चाहे 10 15 दीवाने तो होंगे ही,, सही बताना,,,।

अब मैं क्या बताऊं मुझे थोड़ी मालूम है कि मेरे पीछे कौन घूमता है मैं तो अपनी ही धुन में रहती हूं अच्छा छोड़ तू तो जरूर बनाई होगी,,।

क्या करूं नहीं चाहती हूं फिर भी लड़के पीछे पड़ ही जाते हैं,,।

अच्छा कितने बॉयफ्रेंड है तेरे,,,(तृप्ति उत्सुकता दिखाते हुए बोली)

अब तक पांच,,,(मुस्कुराते हुए सुमन बोली)

एकदम सीरियस या टाइम पास,,,।

अब क्या कहूं कुछ समझ में नहीं आता की किसके साथ सीरियस रहूं सच कहूं तो सब मुझे टाइम पास ही लगते हैं क्योंकि जितने भी बॉयफ्रेंड मिलेंगे आखिरकार सबको एक ही चीज चाहिए लड़कियों की,,, तू तो समझ ही गई होगी,,,।

(सुमन की बात सुनकर वह शर्मा गई और शर्मा कर मुस्कुरा दे यह देखकर सुमन अपनी आंखों को नचाते हुए बोली,,,)

चल शुक्र है इतना तो तुझे समझ में आता है मुझे तो लगा कि कुछ भी समझ में नहीं आता होगा,,,।

आप इतना तो समझ में आता ही है इतना भी नादान नहीं है इसलिए तो मैं इन सब चीजों में नहीं पड़ती,, अच्छा यह बात किसी के साथ आगे बड़ी है या,,,(तृप्ति इससे ज्यादा बोल नहीं पाई क्योंकि वह इस तरह की बातें कभी कि नहीं थी वह एकदम से रुक गई थी और उसकी बात का मतलब सुमन अच्छी तरह से समझ रही थी उसकी बात को सुनकर वह मुस्कुराते हुए बोली)

सही कहूं तो अब तक ऐसा कुछ हुआ नहीं है मैं जैसा तुझे पता है कि सभी लड़कों को हम लड़कियों की एक ही चीज चाहिए इसके बाद बोलोरिलेशनशिप तोड़ देते हैं इसीलिए मैं इन सब चीजों में आगे नहीं बढ़ रही हूं एक तो बदनाम होने का डर बना रहता है,,।

सच कह रही है सुमन तू,,एक बार समझ में बदनामी हो गई तो फिर घर से बाहर निकल पाना मुश्किल हो जाएगा और फिर तुम चाहे जैसे भी हो घर के बाहर तो सब तुम्हें दूसरी लड़कियों की तरह ही समझेंगे,,,।

बात एकदम सही है अभी अगले मोहल्ले में मेरी एक सहेली होती है उसके पड़ोस में ही एक लड़की है जो दो-तीन लडको के साथ रिलेशनशिप में थीअब पता नहीं कि उसे लड़की का उन लड़कों के साथ संबंध बना या नहीं लेकिन समाज में तो बात करने लगी और फिर आज तक होगा घर से बाहर निकलना उसके लिए मुश्किल हो गया है,,,।

इसलिए तो कहती हूं की लड़कियों का,, एक-एक कदम आगे बढ़ाना बहुत मुश्किल हो जाता है,,,।
(दोनों की बातें हो ही रही थी कि तभी दरवाजे पर सुषमा आंटी आ गई और वह बोली)

अरे लड़कियों घड़ी में तो देखो कितना बज रहा है 12:00 बजने वाले हैं और तुम दोनों अभी तक बातें कर रही हो चलो अब जल्दी से सो जाओ,,।

ठीक है आंटी मुझे भी नींद आ रही है,,।

वह तो ठीक है लेकिन कपड़े तो बदल लो सलवार कमीज में कैसे नींद आएगी कुछ ढीला ढाला सा पहन लो,,,।

वह तो आंटी में घर पर ही भुल आई हूं,,,।

चलो कोई बात नहीं सुमन का गाउन पहन लो,,,।

(इतना सुनते ही सुमन अपने बिस्तर पर से चहकते हुए नीचे उतर गई और अलमारी की तरफ बढ़ते हुए बोली,)

मैं अभी देती हूं मुझे भी कपड़े बदलना है,,,।
(इतना कहकर वह अलमारी की तरफ आगे बढ़ गई थी और सुषमा यह कहकर वहां से चली गई थी कि कपड़े बदलने के बाद सो जाना,,, सुषमा आंटी से चली गई थी और सुमन अलमारी में से तृप्ति के लिए एक गाउन निकाल रही थी,,, और गाऊन निकालने के बाद उसे तृप्ति की तरफ बढ़ाते हुए बोली,,,)

लो तुम यह पहन लो,,, मैं अपने लिए फ्रॉक ले लेती हूं,,,,(ऐसा कहते हुए अलमारी में से वह अपने लिए एक फ्रॉक निकाल ली और अलमारी को बंद कर दी अभी तक तृप्ति इस तरह से गाउन को हाथ में लेकर बैठी हुई थी और सुमन उसकी आंखों के सामने अपने कपड़े उतार कर केवल ब्रा और पेटी में खड़ी थी यह देखकर तृप्ति के बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह यह देख रही थी कि सुमन उसकी आंखों के सामने बिल्कुल भी शर्म नहीं कर रही है,,, देखते ही देखते वह फ्रॉक को पहन ली थी,,, और सुमन को इस तरह से बिस्तर पर बैठे हुए देखकर वह बोली,,,)

क्या हुआ पहन लो,,,,।

पहनती हूं,,,(ऐसा कहकर वह भी बिस्तर से नीचे उतरने लगी वैसे तो उसने आज तक किसी के भी सामने कपड़े बदली नहीं थी वह या तो बाथरूम में कपड़े बदलती थी या तो अपने कमरे में दरवाजा बंद करके लेकिन सुमन बेझिझक अपने कपड़े बदल ली थीइन सब के बीच तृप्ति की नजर उसकी दोनों चूचियों पर ही थी वह देखकर हैरान थी की सुमन की चुचीया कितनी बड़ी थी,,, उसकी चूचियां अभी भी छोटे से अमरूद की तरह थी,,,तृप्ति इस बात को अच्छी तरह से जानती थी की लड़कियों की खूबसूरती में उसकी चूचियों की गोलाई और उसके उभार ही ज्यादा आकर्षण बढ़ाते हैं,,,इस बात से उसे भी इनकार नहीं था कि वह सुमन से ज्यादा खूबसूरत थी लेकिन बदन की बनावट में इस समय सुमन उससे दो कदम आगे थी,,, यही सब सोचते हुएवह अपनी कमीज पर दोनों हाथ रखकर उसे ऊपर उठने वाली थी कि उसकी आंखों के सामने ही सुमन अपनी पेंटि को भी निकाल कर एक तरफ रख दी थी,,, यह देखकर तृप्ति बोली,,)

अरे तुम तो पेंटी भी उतार दी,,।

सच कहूं तो रात को मुझे बिना कपड़े पहन कर सोने में ही ज्यादा मजा आता है,,, वह तो तुम हो इसलिए ईतना पहन रही हुं नहीं तो नंगी ही सोती हूं,,,
(सुमन कि ईस तरह की बातों को सुनकर तृप्ति थोड़ा हैरान भी थी क्योंकि उसे यकीन नहीं हो रहा था कि सुमन उससे इस तरह से खुलकर बातें कर रही है जबकि वह इस तरह की बातें कभी कि नहीं थी इसलिए सुमन के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसे हैरानी भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था,,, सुमन की बातों को सुनकर वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)

बाप रे तुम्हारी आदत तो बहुत जानलेवा है,,।

क्यों क्यों,,,?

अरे वह तो अच्छा है किआंटी हैं तुम्हारे कमर में आ जाती होगी तो तुम्हें इस तरह की हालत में देख कर हिरानी नहीं होती होगी अगर सोचो तुम्हारा घर में कोई मर्द होता तो तुम्हारे पापा को छोड़कर समझ लोतुम्हारा कोई भाई होता है और तुम्हें इस तरह की हालत में देख लेता तो क्या होता,,,।
(तृप्ति सुमन से अपने मन की बात बता रही थी जो उसके साथ सुबह में हुआ था,, क्योंकि वह जानती थी कि अचानक से कोई भी कमरे में आ सकता है और उसे इस तरह की हालत में दैखेगा तो क्या सोचेगा,,, लेकिन उसके हैरानी के बीच सुमन मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

यार तब तो मजा नहीं आ जाता सोच घर में अगर अंकित जैसा जवान भाई होता और मुझे इस तरह की हालत में देखता तो उसके मन पर क्या गुजरती,, वह तो मेरी जवानी देखकर पागल ही हो जाता,,,(एकदम से खुश होते हुए सुमन बोली और उसकी बात सुनकर तृप्ति हैरान रह गई और हैरानी जताते हुए बोली)

बाप रे यह क्या बोल रही है अपने ही भाई के बारे में,,, क्या सच में तुझे शर्म नहीं आती,,,!

बिल्कुल भी नहीं आती,,,, वैसे तृप्तितेरे घर में तो जवान लड़का है तेरा भाई क्या तुझे कभी अस्त-व्यस्त हालत में उसने कभी नहीं देखा,,,।

यार यह कैसी बातें कर रही है तू,,,

अरे मैं सच कह रही हूं बताना,,,,।

धत्,,,, मुझे इस तरह की बातें नहीं करनी,,,(ऐसा कहते हुए तृप्ति अपनी कमीज को दोनों हाथों से ऊपर की तरफ ले जाने लगी और अपने मन में सुमन की कही गई बात के बारे में सोच रही थी वैसे तो इस समय सुमन कि ईस तरह की बातें उसे बेहद अच्छी लग रही थी,,, लेकिन वह इस तरह की बातें करना नहीं चाहती थी लेकिन सुमन अपनी जीद पर अड गई थी,,,वह फिर से अपने सवाल को दोहराते हुए बोली,,,)

बताना मुझे कैसी शर्म मैं तो तुझे बता दी हूं,,,।

तू इसलिए बताई है कि तेरे घर में जवान लड़का नहीं है इसलिए अपनी कल्पना को अपने शब्दों में ढाल रही है,,,,(अपनी कमीज को उतार कर बिस्तर पर रखते हुए वह बोली,,,,)

तू तो सच में एकदम बेवकूफ है इस उम्र में भी तुझे यह सब बातें अच्छी नहीं लगती,,, सच कहूं तो सभी घरों में ऐसा होता ही होगा लड़के अपनी बहन को या अपनी मम्मी को ऐसी हालात में देखा ही लेते होंगे जैसे हालात में उन्हें नहीं देखना चाहिए,,,।

तेरी बात मुझे कुछ समझ में नहीं आ रही है कैसे हालात में,,,,।

अरे मेरा मतलब है कपड़े बदलते हुए अब जिस घर में जवान लड़का जवान लड़कीमम्मी पापा रहते होंगे तो उसे घर में कोई ना कोई तो एक दूसरे को देखा ही होगा लड़का अपनी मां को ही अपनी बहन को कपड़े बदलते हुए या बाथरूम में नहाते हुए या फिर पेशाब करते हुए भी देख तो लिया ही होगा और लड़कियां भी अपने भाई को किसी ने किसी हालत में देख लेती होगी या नहाते हुए या नंगा नहाते हुए उनके लंड को,,,,।

(सुमन के मुंह से इस बात को सुनकर तो तृप्ति के तो होश ही उड़ गए खास करके उसके मुंह से लंड शब्द सुनकर उसकी दोनों टांगों के बीच अजीब सी हलचल होने लगी,,,, और पल भर में उसकी आंखों के सामने सुबह वाला दृश्य नजर आने लगा इस समय सुमन की यह बात एकदम सच साबित हो रही थी उसने अपने भाई को नंगा देखी थी उसके लंड को देखी थी,,,, सुमन की बात को सुनकर तृप्ति कुछ बोल नहीं पाई बस जानबूझकरऐसा जताने की कोशिश करने लगी कि उसकी बातें उसे अच्छी नहीं लग रही है इसलिए मुंह बनाने लगी और मुंह बनाते हैं वह अपनी सलवार की डोरी पर हाथ रख दी उसे खोलने के लिए,,, तृप्ति का स्तर का मिजाज देख कर सुमन बोली,,,)

तुझे तो यह सब बकवास लग रहा है पता नहीं जानबूझकर ऐसा कर रही है कि सच में जैसा मैं कह रही हूं वैसा देख चुकी है ऐसा सच में होता है तृप्ति मैंने एक इंग्लिश मूवी में देखी थी,,,।

तो तू इस तरह की फिल्में भी देखती है,,,(हैरान होते हुए तृप्ति बोली)

तो क्या हो गया मेरी सहेलियां भी देखती हैं उन्हीं लोगों ने तो मुझे दिखाई थी,,, एकदम खुला नजारा,,, तुझे पता है उसमे मैंने देखी थी किलड़की अपने भाई को नंगा देख लेती है और उसके मोटे तगड़े लैंड को देखकर उसकी हालत खराब हो जाती है और वह खुद ही अपनी बुर में उंगली डालकर अपनी जवानी की आग बुझाने की कोशिश करती है ऐसा वह दो-तीन बार करती है,,,,(सुमन के मुंह सेऔरत के खूबसूरत अंग का नाम सुनकर तो तृप्ति के होश उड़ गए थे वह अपने मन में सोच रही थी कि वह कभी सपने में भी इस तरह से अपने ही अंगों का नाम उसने खुलकर नहीं ली थी,,,,, लेकिन सुमन थी कि इस तरह की असली शब्दों का प्रयोग हुआ पड़े खुलकर कर रही थी उसके चेहरे पर बिल्कुल भी शर्म का भाव नहीं था वह अपनी बात आगे बढ़ाती हुई बोली,,,)ऐसा वह तीन-चार बार की लेकिन वह समझ गई थी कैसे उसकी जवानी के पाट्सास बुझने वाली नहीं है क्योंकि उसकी आंखों के सामने बार-बार उसके भाई का मोटा तगड़ा लंड दिखाई देता था जिसे देखकर जिसकी कल्पना करके वह पागल हुए जा रही थी,,,।

फिर उसने क्या की,,,!(एकदम से उत्सुकता दिखाते हुए तृप्ति बोली)

वह समझ गई थी कि अब उसे कुछ ऐसा करना है जिसे देखकर उसका भाई खुद ही उसका दीवाना हो जाए और उसे चोदने के लिए तड़प उठे,,,,।
(सुमन कि ईस तरह की बातेंतृप्ति के होश उड़ा रही थी उसकी दोनों टांगों के बीच की हलचल बढ़ती जा रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सुमन की बातें उसे बेहद लुभावनी लग रही थी जिसे बड़े गौर से वह सुन रही थी,,, गहरी सांस लेते हुए तृप्ति उत्सुकता दिखाते हुए बोली,,,)

फिर उसने क्या की,,,?(इस बार तृप्ति के शब्दों में मदहोशी और मादकता छलक रही थी जिसे अनुभव से भरी हुई सुमन पहचान ली थी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

फिर क्या था वह लड़की अपने भाई के सामने जानबूझकर कपड़े बदलने लगे उतरने लगी पहनने लगी उसके सामने अश्लील हरकतें करने लगी और ऐसा जताती थी कि जैसे उसे नहीं मालूम है कि वह देख रहा है लेकिन एक दिन वह पूरी तरह से मदहोशी में पागल होने लगी थी और फिर ऐसा कुछ कर दी की उसके मन की इच्छा पूरी हो गई,,,.

ऐसा क्या कर दिया उसने,,,?(उत्सुकता दिखाते हुए तृप्ति बोली,,)

उसकी बहन अच्छी तरह से जानती थी कि उसका भाई किस समय बाथरूम में जाता है और वह उसके जाने से पहले ही बाथरूम में घुस गई और पेशाब करने के लिए बैठ गएऔर इस समय उसका भाई भी बाथरुम में घुस गया उसे नहीं मालूम था कि बाथरूम में पहले से ही उसकी बहन है लेकिन जब उसेइस बात का एहसास हुआ कि बाथरूम में उसकी बहन है तब तक क्लियर हो चुकी थी क्योंकि उसकी नजर उसकी बहन की बड़ी-बड़ी नंगी गांड पर पड़ चुकी थी और वह एकदम से उत्तेजित होने लगा था उसकी बहन पीछे नजर घूमर उसकी तरफ देखने लगी और दोनों की नजरे आपस में टकरा गई,,,, उसका भाईअब पीछे मुड़ना उचित नहीं समझ रहा था और वह धीरे से आगे बड़ा और अपनी बहन का हाथ पकड़ कर उसे खड़ी कर दिया और फिर उसे अपनी बाहों में लेकर उसके होठों का रसपान करने लगा और फिर थोड़ी ही देर में उसका लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था,,,।

(सुमन के मुंह से गंदी फिल्म की कहानी और अश्लील शब्दों को सुनकर तृप्ति की हालत पूरी तरह से खराब हो गई थी उसके चेहरे का रंग पूरी तरह से बदलने लगा था वह आश्चर्य से मुंह खोले उसकी बातों को सुन रही थी,, और धीरे से बोली,,,)

बाप रे इंग्लिश फिल्म में ऐसा भी होता है,,।

तो क्या यही सब होता है मेरे पास तो एककिताब भी है जिसमें इस तरह की कहानी लीखी हुई है रुक मैं तुझे बताती हूं,,,(ऐसा कहने के साथ ही वह अलमारी खोलकर झुक गई औरउसे किताब को ढूंढने लगी लेकिन झुकने के साथ ही उसकी नंगी गांड एकदम से हवा में लहराने लगी जिसे देखकर तृप्ति की हालत खराब होने लगी वाकई में गांड का घेराव भी उसकी गांड से कुछ ज्यादा ही था और बेहद आकर्षक लग रहा था,,,सुमन की नंगी गांड को देखकर कृति अपने मन में सोचने लगी कि भले ही खूबसूरती में वह सुमन से एक कदम आगे है लेकिन बदन के आकर्षण में वह उससे भी दो कदम आगे हैं,,,, थोड़ी ही देर मेंसुमन उसे किताब को अलमारी से बाहर निकाल कर उसके पन्नों को पलटते हुए तृप्ति के पास आगे बढ़ने लगी,,,, उस किताब में रंगीन पन्ने भी थे जिसमें संभोग के अलग-अलग आसन में दृश्य छपे हुए थे और उन दृश्य को दिखाते हुए सुमन बोली,,,)

देख कितनी सारी तस्वीरें हैं चुदाई की,,,।

(सुमन की बातें सुनकरतृप्ति अपनी नजरों को अन रंगीन पन्नों से हटा नहीं पाई और उनमें छपे रंगीली संभोग दृश्य को देखने लगी जिंदगी में पहली बार तृप्ति इस तरह की किताब को देख रही थी,,, अलग-अलग संभोग की दृश्य बेहद आकर्षक लग रहे थे और तृप्ति के भी होश उड़ा रहे थे तृप्ति बड़े गौर से उन पन्नों को देख रहे थे वाकई में संभोग का दृश्य कितना लुभावना होता है आज पहली बार तृप्ति को इस बात का एहसास हो रहा था,,, ज्यादातर तृप्ति की नजर रंगीन पन्ने में छपे हीरो केमोटे तगड़े लंड पर टिकी रहती थी और उस मोटे तगड़े लंड को देखकर उसे उसके भाई का लंड याद आ रहा था,,, और वह अपने मन में सोच रही थी कि ऐसा तो बिल्कुल उसके भाई के पास भी है देखो तो सही कैसा लड़की की बुर में घुसा हुआ हैऐसा अपने मन में सोचते ही अनायास उसके मन में ख्याल आ गया कि,,,।

अगर उसके भाई का लंड उसकी बुर में घुसेगा तो बिल्कुल ऐसा ही नजर आएगा,,, ऐसा खयाल उसके मन में आते ही उसकी बुर से मदन रस की बूंदे टपकने लगी,,,,वह पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी वह जिस तरह से किताब देखने में रस ले रही थी उसे देखकर सुमन मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि उसकी युक्ति पूरी तरह से काम कर रही थी,,,, वह धीरे से तृप्ति से बोली,,,।

कैसी लगी,,,,!

(उसकी बात सुनकर तृप्ति कुछ बोल नहीं पाई उसका मुंह आश्चर्य से खुला हुआ था और वह नजर उठाकर सुमन की तरफ देखी लेकिन कुछ बोली नहीं और वापस पन्ने पलट कर दूसरे दृश्य को देखने लगी, जिसमें हीरोहीरोइन को घोड़ी बनाया हुआ था और पीछे से उसकी बुर में लंड डाल रहा थायह सब नजर तृप्ति के लिए पहली बार था लेकिन वह पूरी तरह से इसमें डूबती चली जा रही थी,,,, यह देखकर सुमन बोली,,,)

तू देखती रह मैं बाथरुम जाकर आती हूं,,,,(और इतना कहकर वह दरवाजा खोलकर कमरे से बाहर निकल गई बाथरूम करने के लिए और सुमन की गैर हाजिरी मेंअपनी सलवार को खोले बिना ही वह बिस्तर पर बैठ गई और उस कीताब के पन्नों को खोलकर बड़े चाव से देखने लगी,,।

उस गंदी किताब को तृप्ति को देकर सुमन बाथरूम चली गई थी इस दौरान वह प्यासी नजरों से उसे गंदी किताब के रंगीन पन्नों को देख रही थी, उसे पाने में जितने भी चित्र थेवह बेहद कामुकता से भरे हुए थे और तृप्ति इस तरह के दृश्य को इस तरह की किताब को पहली बार देख रही थी इसलिए उसके दिल की धड़कन एकदम से बढ़ने लगी थी उसमें छपे हुए हीरो की तस्वीर को देखकरउसके मोटे तगड़े लंड को देखकर तृप्ति को अपने भाई का मोटा तगड़ा लंड बना रहा था,,, इस बीच उसे संदीप भी याद आ रहा था और इस समय संदीप के याद आने का कारण भी वही मोटा तगड़ा लंड था,,, तृप्ति अच्छी तरह से जानती थी कि संदीप का लंडचित्र के मुताबिक और उसके भाई के लंड के मुताबिक काफी छोटा और पतला था,,,।

और इस समय जिस तरह के हाव-भाव वहचित्र में छपी हीरोइन के चेहरे पर देख रही थी उससे साफ पता चल रहा था कि औरत की बुर में मोटा लंड की क्या अहम भूमिका है,,, तृप्ति के तो दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी वह बार-बार दरवाजे की तरफ देख ले रही थी और गंदी किताब की तरफ,,, देख ले रही थी जल्दी-जल्दी वह पन्ने पलट रही थी,,, लेकिन तभी वह किताब के बीच वाले पन्ने को खोलकरकर उसमें लिखे शब्दों को पढ़ने लगी जिसे पढ़कर तो उसके होश उड़ गए वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह की भी किताब होती होगी जिसमें रिश्तो के बीच चुदाई का इस तरह से वर्णन लिखा होता होगा लेकिन जो कुछ भी हो उसकी आंखों के सामने था उससे वह इनकार नहीं कर पा रही थी कि वाकई में इस तरह की भी किताबें होती हैं,,, उसमें लिखा एक-एक शब्द उसके मन मस्तिष्क पर हथौड़े बरसा रहा थाउसके दिल की धड़कन को बढ़ा रहा था एक तरफ उसे थोड़ा अजीब लग रहा था लेकिन दूसरी तरफइन सबको पढ़ने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,।

दीदी अपनी टांगे खोलो मुझे तुम्हारी बुर देखनी है,,।

क्या करेगा मेरी बुर देखकर,,,,

मुझे उसमें अपना लंड डालकर तुझे चोदना है,,,।

क्या तू ऐसा कर पाएगा,,,।

क्यों नहीं आखिरकार तुम्हारी बुर मेरे लंड के लिए तो बनी है दीदी,,,।

तुझे कैसे मालूम कि मेरी बुर तेरे लंड के लिए बनी है,,,।

मैंने देखा हुं मम्मी की बुर में पापा अपना लंड डालते हैं,,, और तुम्हारे पास बुर है और मेरे पास लंड,,,।

बाप रे इतना शैतान हो गया है तु मम्मी पापा की चुदाई देखता है,,।

तो क्या हो गया तुम भी तो देख रही थी तभी तो मैंने देखा,,,।

मे कब देख रही थी,,।

परसों रात कोजब मैं पानी पीने के लिए उठा था तो मैंने देखा कि तुम खिड़की से मम्मी पापा के कमरे में देख रही थी,,,।

मैं तो बड़ी हूं तू छोटा है मैं देख सकती हूं,,,।

लेकिन मेरा लंड तो पापा से भी ज्यादा बड़ा है।

दिखा तो मैं भी देखूं,,,।

बाप रे तू तो सच कह रहा है रे,,, तू तो मुझे पागल कर देगा ला ठीक से देखने दे,,,,ओहहहहह यह तो बहुत गर्म है अगर इस पर घी रख दो तो वह भी पिघल जाए,,,।

तभी तो कह रहा हूं अब मुझे भी अपनी बुर दिखा दो,,,।

अब तो दिखाना ही होगा लेकिन यह सब तु किसी से कहना नहीं,,,।

किसी से नहीं कहूंगा,,,,।

ले देख,,,,,।

आहहहह दीदी यह तो कितनी गुलाबी है,,,

छूकर देख यह भी तेरे लंड की तरह गर्म है,,, इस पर तो घी रखने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि अंदर से ही पिघल कर निकलती है,,, चाट कर देखेगा,,,।

इसे,,,।

तो क्या देखा नहीं पापा कैसे मम्मी की बुर चाटते हैं,,,।

ओहहहहह दीदी इसका स्वाद तो बहुत नमकीन है मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,ऊममममममम,,,,आहहहहह,,,

जोर-जोर से चाट मुझे बहुत मजा आ रहा है,,, अगर खुश कर देगा तो मैं भी तेरे लंड को इसमें डालने नहीं दूंगी,,,,आहहहहह तू तो पक्का खिलाड़ी निकला,,, अब मेरी बारी है,,,,।

क्या करोगी,,,?

तेरा लंड चूसूंगी,,,।

सच में,,,

तो क्या देखा नहीं था मम्मी को,,,

देखा था,,,।

आहहहहह आहहहहहहह दीदी मुझे कुछ कुछ हो रहा है,,,,,आहहहहहहह,,,,।

हां बिल्कुल भी देर मत कर इसे मेरी बुर में डाल दे,,,,,

लो दीदी गया,,,।

बस अब जोर-जोर से अपनी कमर हिला,,,,।

आहहहह आहहहहहहह आहहहहहहह बहुत मजा आ रहा है जोर-जोर से धक्का लगा,,,।

(अभी तृप्तिदूसरे पेज पर आगे बड़ी ही थी कि कमरे का दरवाजा खुल गया और सुमन कमरे में दाखिल हो गई यह देखकर वह तुरंत किताब को बंद कर दी उसके चेहरे काहाल एकदम पर हाल हो चुका था उसका गोरा चेहरा सुर्ख लाल हो चुका था वह शर्म और उत्तेजना से तमतमा रही थी,,, कमरे में दाखिल होते ही सुमन मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

क्या हुआ मजा आया कि नहीं,,,?

बाप रे में तो सोच भी नहीं सकती कि ईस तरह की भी कहानी होती है,,,।

तुझे अभी कुछ नहीं मालूम हैयह सिर्फ कहानी नहीं ऐसा होता भी होगा,,,। लेकिन तूने अभी तक कपड़े नहीं बदली कपड़े तो बदल ले जल्दी से,,,।
(सुमन समझ गई थी की तृप्ति की हालत खराब हो रही है वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी है तभी तो उसके चेहरे का रंग लाल हो चुका था,,,, सुमन की बातें सुनकर प्रीति अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और अपनी सलवार की डोरी खोलकर उसे उतारने लगी इस समय उत्तेजना के मारे उसके चेहरे पर शर्म के भाव तो दिख रहे थे लेकिन शर्म का नामोनिशान नहीं था वह बड़े आराम से अपनी सलवार उतार कर एक तरफ रख दी और गाऊन को पहनने लगी उसका कसा हुआ छरहरा बदन देखकर सुमन के मुंह में पानी आने लगा और वह उसे छेड़ते हुए बोली,,,)

वाह तृप्ति तेरी चुचीयां तो अभी एकदम अमरुद जैसी है,,, लगता है अभी तक किसी का हाथ नहीं पड़ा है,,,।

मेरा ध्यान अभी पूरी तरह से पढ़ाई में है,,,।

तेरा ध्यान पढ़ाई में है ना लेकिन दूसरों का तो नहीं दूसरों का ध्यान तो तेरी चूचियों पर और तेरी गांड पर ही होगा,,।

तू भी ना,,,,(इसे कहते हुए वह गाऊन उठाकर पहनने लगी,,,)

नहीं मैं सच कह रही हूं,,,, तू सच में बहुत खूबसूरत है,,,।
(एक लड़की के मुंह सेअपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर तृप्ति मन ही मन प्रसन्न हो रही थी उसे अच्छा लग रहा था कि उसके ही हम उम्र की लड़की उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रही थी फिर भी वह बेमन से बोली,,,)

चल रहने दे,,, सोने का समय हो रहा है,,, काफी समय हो गया,,,।(ऐसा कहते हुए वह बिस्तर पर लेट गई,,, और उसके बगल में सुमन भी लेटते हुए बोली,,)

तू सो जा मुझे अभी नींद नहीं आ रही है मैं थोड़ी देर तक इस कहानी को पढ़ूंगी,,,।

तू ही पढ़ मैं तो सोने जा रही हूं मुझे नींद आ रही है,,,,(ऐसा कहते हुए वह दूसरी तरफ मुंह घूमाकर करवट लेकर सोने की कोशिश करने लगी वैसे उसे गांधी किताब का असर उसके कोमल मन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ रहा था,,,उसकी आंखों में भी नींद नहीं थी लेकिन वह अब इस तरह से खुलकर उसके सामने उसे किताब को पढ़ नहीं सकती थी,,।

तृप्ति सोने की लाख कोशिश कर रही थी लेकिन उसकी आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी दूसरी तरफ सुमन उस गंदी किताब को पढ़कर गर्म हो रही थी,,, किताबको पढ़ते समय बार-बार उसकी नजर तृप्ति पर चली जा रही थी उसके उभारदार नितंबों पर चली जा रही थी,,,, तकरीबन 1 घंटे का समय गुजर गया था लेकिन ना तो सुमन को नींद आ रही थी और ना ही तृप्ति को बस तृप्ति सोने का नाटक कर रही थी और अपने मन में सोच रही थी कि गंदी किताब की गंदी कहानियों को पढ़कर सुमन को मजा आ रहा होगा,,, उस किताब में लिखा है एक शब्द तृप्ति के मन पर हथौड़े बरसा रहा था,,, और दूसरी तरफ सुमन की हालत खराब हो रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था,,,। तृप्ति के साथ उसे कुछ करने का मन कर रहा है क्योंकि जो आग उसके गुलाबी छेद में लगी हुई थी उसकी आग बुझाना बेहद जरूरी हो गया था और वैसे भी सुमन के लिए यह कोई नया नहीं था अपनी सहेली के साथ वह इस तरह का खेल खेल चुकी थी और उसे मालूम था कि इसमें भी बहुत मजा आता है,,।

काफी देर तक बात तृप्ति की तरफ देखती रही तृप्ति के बदन में किसी भी प्रकार का हलचल नहीं हो रहा था तो उसे ऐसा ही लगा कि वह गहरी नींद में सो रही है,,, इसलिए हिम्मत दिखाते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाई और उसके गोलाकार नितंबो पर रख दी,,,जैसे ही तृप्ति को सुमन का हाथ अपनी गांड पर महसूस हुआ उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह अपनी नज़रें घूमाकर सुमन की तरफ देखना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि वह ऐसा क्यों कर रही है उसकी गांड पर हाथ क्यों रख रही है,,,अभी वह ऐसा सोच ही रही थी कि सुमन हिम्मत दिखाते हुए उत्तेजना के चलते गाउन के ऊपर से ही उसकी गोल-गोल गांड को सहलाना शुरू कर दी,,अब तृप्ति कुछ बोलना भी चाह रही थी तो भी नहीं बोल पा रही थी न जाने क्यों सुमन की हथेली का असर उसे पर छाने लगा था,,,, सुमन का इस तरह से सहलाना उसे अच्छा लगने लगा था,,,उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी और वह देखना चाहती थी कि अब इससे ज्यादा बढ़कर सुमन क्या करती है,,,।

गंदी कहानी और अपने बगल में खूबसूरत लड़की की मौजूदगी उसे पूरी तरह से मदहोश कर रही थी,,, गंदी किताब के रंगीन पन्ने उसके जीवन में भी रंग भर रहे थे उसकी कल्पनाओं काघोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ रहा था और वह अपनी कल्पना को हकीकत में बदलना चाहती थी जिसकी शुरुआत उसने कर दी थी सुमन एक लड़की के मन को अच्छी तरह से समझती थी और गंदी किताब को देखते समय जिस तरह के हाव-भाव तृप्ति के चेहरे पर बदल रहे थे उसे देखकर सुमन समझ गई थी कि बस उसके पहल करने की देरी है और यह लड़की एकदम से पिघल जाएगी,,, सुमन कुछ देर तक उसके नितंबों को गाउन के ऊपर से ही सहलाती रही इतना तो समझ ही गई थी की तृप्ति पूरी तरह से चिकनी थी,,, और इस क्रिया को करने में सुमन को भी मजा आ रहा था।

जब सुमन ने देखी कि उसकी हरकत के बावजूद भी तृप्ति के बदन में किसी भी प्रकार की हरकत नहीं हो रही है तो उसकी हिम्मत बढ़ने लगी,,, उसे यकीन हो गया था कि वह पूरी तरह से गहरी नींद में सो रही है और वह इसका पूरा फायदा उठाना चाहती थी इसलिए धीरे-धीरे उसके गाऊन को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,ऊपर वाला भाग तो बढ़िया आराम से उसकी कमर तक पहुंच चुका था लेकिन उसके नितंबों के नीचे दबा हुआ उसका गाउन ऊपर की तरफ सरक नहीं पा रहा था,,,लेकिन ऊपर से भी उसकी चिकनी जाने और उसके नितंबों का आकार पूरी तरह से दिखाई दे रहा था जिसे देखकर सुमन के मुंह में पानी आने लगा था और उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में भी मदन रस इकट्ठा हो रहा था,, सुमन गहरी सांस लेते हुए उसकी गोल-गोल गोरी गोरी गांड को सहलाना शुरू कर दी।

इसका प्रभाव तृप्ति के मन पर और उसके बदन पर बहुत ही गहरा पड़ रहा था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थीउसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सुमन की हथेली का जादू उस पर पूरी तरह से छाने लगा था,,, यहां तक की उसकी गुलाबी छेद से मदन रस टपकना शुरू हो गया था,,, तृप्ति का भी मन भटक रहा था वह भी खुलकर मजा लेना चाहती थी,,, लेकिन आगे बढ़ने से डर रही थीक्योंकि वह एक सीधी साधी और संस्कारी लड़की थी इस तरह की हरकत करने के बारे में वह सोच भी नहीं सकती थी लेकिन सुमन ने अपनी हरकतों से उसके बदन में जवानी की उमंग को उछालना शुरू कर दी थी,,, उसकी सांसों की गति के साथ उसके छोटे-छोटे अमरुद भी ऊपर नीचे हो रहे थे उसके छोटे अमरुद भी खुली हवा में सांस लेना चाहते थे ऐसा लग रहा था कि ब्रा की कैद में उन अमरूदों का विकास नहीं हो पाया है,,,। एक तरफ तृप्ति की हालत खराब हो रही थी वहीं दूसरी तरफ सुमनका दिमाग बड़ी तेजी से चल रहा था अब तक उसने किसी भी प्रकार की हलचल को तृप्ति के बदन में महसूस नहीं की थी इसलिए उसकी हरकत और उसकी हिम्मत दोनों बढ़ती चली जा रही थी।

इन सभी हरकतों से उसकी खुद की बरु पानी छोड़ रही थी,,,और इसीलिए वह देखना चाहती थी कि उसके इस हरकत का असर तृप्ति पर कितना पड़ रहा है इसलिए वह उसकी बुर को टटोलना चाहती थी,,,, इसलिए वह अपनी हथेली कोऔर भी ज्यादा हरकत मिलना चाहती थी उसकी गोल-गोल कांड को सहलाते हुए वह धीरे-धीरे अपनी हथेलियां को ऊपर की तरफ ले जाने लगी और जैसे-जैसे उसकी हथेली ऊपर की तरफ बढ़ रही थी वैसे-वैसे तृप्ति की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी उसे लग रहा था कि उसकी बुर से मदन रस का लावा फूट पड़ेगा,,, क्योंकि वह जानती थी किस तरह की स्थिति में ऐसा ही होता है,,, उसकी हालत इतनी खराब थी कि वह खुद अपनी बुर को अपनी हथेली में लेकर मसलना चाहती थी,,,,एक तरफ सुमन की हथेली और उंगलियों से उसके बदन में गुदगुदी का एहसास हो रहा था औरदूसरी तरफ मदहोशी से वह पूरी तरह से डूबती चली जा रही थी देखते ही देखते वह गाउन में अपना हाथ डालकर अपनी हथेली को उसके कमर के ऊपरी हिस्से उसके पेट पर लेकर आ चुकी थी,,,।

तृप्ति की सांसों की गति के साथ-साथ उसका पेट भी ऊपर नीचे हो रहा था जिसका एहसास सुमन को अपनी हथेली पर बराबर हो रहा था सुमन अपने मन में सोच रही थी कि यह लड़की कितना सोती है ऐसा लग रहा है कि जैसे घोड़े बेचकर सो रही हो,,, अगर नींद में कोई इसकी चुदाई करके चला जाए तो ईसे पता भी ना चले,,,। यही सब सोचते सोचतेसुमन की हरकत बढ़ने लगी और वह धीरे-धीरे उसकी पेंटि के अंदर अपनी उंगली को सरकाना शुरू कर दी,,, उसकी इस हरकत पर तृप्ति की सांसे थमने लगी,,, उसकी हालत और भी ज्यादा खराब होने लगी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बस इस पल को अपनी आंखों को बंद करके महसूस कर रही थी। और वैसे भी दिन भर जो कुछ भी हुआ था वह सब बिल्कुल ताजा ही था जिसकी मदहोशी में वह अभी तक थी और उसकी मदहोशी को सुमन और भी ज्यादा बढ़ाने लगी थी,,,

सुमनउस गंदी किताब को एक तरफ रख दी थी और अपना पूरा ध्यान तृप्ति के ऊपर टीकाए हुए थी,,, दिल की धड़कन लगातार बढ़ती जा रही थी बदन में कम से हाथउत्पन्न हो रही थी लेकिन किसी तरह से वह अपने आप को संभाले हुए थी,, लेकिन वह अच्छी तरह से जानती थी कि अब ज्यादा देर तक वह अपने आप को संभाल नहीं पाएगी वह पूरी तरह से बेकाबू होती जा रही थी,, और धीरे-धीरे सुमन की उंगलियां आगे बढ़ती जा रही थी,, जैसे-जैसे सुमन की उंगली उसके बुरे के करीब पहुंच रही थी वैसे-वैसे उसकी दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी और उसका बदन संकुचा जा रहा था। और फिर सुमन की उंगलियां उसके मंजिल तक पहुंच गई,,, पल भर में ही सुमन का एहसास हो गया कि तृप्ति की बुर पूरी तरह से गर्म आ चुकी थी और उसमें से मदन रस भी टपक रहा था जो उसकी हथेली में लग गया था इस बात से वह बेहद खुश थी कि नींद में होने के बावजूद भी उसका अंतर्मन पूरी तरह से काम कर रहा था। और दूसरी तरफ जैसे ही तृप्ति को अपनी बुर पर सुमन के कोमल हथेली का स्पर्श हुआ,, वह पूरी तरह से रोमांचित हो गई,, अब उसे सब्र करना मुश्किल हुआ जा रहा था,,, वह समझ गई थी कि अब शांत रहने में भलाई नहीं है इसलिए वह तुरंत एकदम से नजर घूमाकर सुमन की तरफ देखने लगी और बोली,,,।

यह क्या कर रही है तू,,,?

तू बहुत खूबसूरत है तृप्ति,,, तेरी जवानी देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,(सुमन इस तरह की स्थिति से निपटना अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी किउसे क्या करना है एक लड़की होने के नाते उसे अच्छी तरह से मालूम था कि एक लड़की अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर एकदम से पिघल जाती है और वही उसने की भी थी जिसका असर तृप्ति के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,, सुमन की बात सुनकर तृप्ति एकदम सेसुमन की आंखों में देखने लगी और यही मौका था जब दोनों को एक होना था और इस मौके को सुमन अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी,,,सुमन एकदम अपने प्यास होठों को उसके लाल-लाल होठों की तरफ आगे बढ़ाने लगी और अगले ही पल दोनों के होठ आपस में सट गए थे,,,,,।

तृप्ति को तुरंत संदीप याद आ गयाजब वह ट्यूशन से अपने घर की तरफ लौट रही थी और अपने घर के पीछे वाली सड़क पकड़कर,, जहां पर हमेशा अंधेरा ही रहता था शाम के वक्त कोई आता जाता नहीं था और उसी समय वहां पर संदीप खडा होकर उसका इंतजार कर रहा था,,,और उसे देखते ही तुरंत उसके सामने आ गया था तृप्ति कुछ समझ पाती ईससे पहले ही,,वह उसे अपनी बाहों में भरकर उसके लाल-लाल होठों पर अपने होठ रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा था,,, जिंदगी में यह तृप्ति का पहला चुंबन थाऔर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी वह तो सही समय पर वह पूरी तरह से होश में आ गई थी वरना उसी दिन संदीप उसके कौमार्य को भंग कर दिया होता,,,,और वही हरकत आज सुमन उसके साथ कर रही थी लेकिन आज वह पूरी तरह से होशो हवास में थी,,,।

सुमन का यह सुमन पूरी तरह से गहरा होता जा रहा था जिसमें तृप्ति भी उसका सहकार करने लगी थी तृप्ति को भी बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी जब सुमन ने देखी की तृप्ति पूरी तरह से मदहोश हो रही है तो वह अपनी हथेली को उसकी गुलाबी बर पर जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दी जिसका असर तृप्ति के बदन में बेतहाशा उत्तेजना प्रकट कर रहा था और तृप्ति कसमसा रही थी,,,सुमन की हरकत से तृप्ति पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करना है लेकिन सुमन की हरकत का वह पूरा आनंद ले रही थी सुमन एक ही समय में दोनों तरफ से उस पर प्रहार कर रही थी। और इस प्रहार से बचने का तृप्ति के पास कोई रास्ता नहीं था,,,तृप्ति धीरे-धीरे सुमन की हरकत से उत्तेजित हुए जा रही थी वह मदहोश में जा रही थी और धीरे से अपने हाथ कोसुमन की पीठ पर रख दीजिए जिसे सुमन का मनोबल और ज्यादा बढ़ने लगा और देखते ही देखते हो अपनी बीच वाली उंगली को धीरे-धीरे उसकी बुर के अंदर सरकाना शुरू कर दी,,, जब तृप्ति को यह एहसास हुआ तो वह मदहोशी के सागर में डूबने लगी,,,।

लेकिन तृप्तिकी मदहोशी को देखकर सुमन अपनी उंगली को एकदम से रोक दी क्योंकि वह समझ गई थी कि अब खेल में मजा आने वाला है,,,, और पल भर के लिए उसके होठों से अपने होठों को अलग करकेबिस्तर पर बैठे-बैठे ही वह अपनी फ्रॉक को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींचने लगी और अगले ही पल अपने बदन से अपनी फ्रॉक को उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दी,,,बिस्तर पर वह केवल ब्रा में ही थी जिसमें से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम मस्त लग रही थी,, सुमन की हरकत को तृप्ति प्यासी आंखों से देख रही थीतृप्ति भी समझ गई थी कि अब आगे बहुत कुछ होने वाला है जिसे रोक पाना उसके बस में अब बिल्कुल भी नहीं था,,,,मुस्कुराकर तृप्ति की तरफ देखते हुए सुमन अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लेकर और अपनी ब्रा का हुक खोलते हुए बोली,,,।

अब आएगा असली मजा,,,(और इतना कहने के साथ हीसुमन अपनी ब्रा उतार कर उसे भी बिस्तर के नीचे फेंक दी और पूरी तरह से नंगी हो गई उसके नंगे बदन को देखकर तृप्ति की आंखें फटी की फटी रह गई नंगी होने के बाद सुमन बेहद खूबसूरत और गदराए जिस्म की मालकिन लग रही थी,,,,अपने कपड़े उतार लेने के बाद सामान अपने दोनों हाथ आगे बढ़कर उसके गाउन को पकड़ ली और बोली,,,)

मजा लेने के लिए तुम्हें भी नंगी होना पड़ेगा,,,।
(तृप्ति खुद भी यही चाहती थी इसलिए सुमन को रोक नहीं पाई और सुमन देखते ही देखते उसके गांव को निकाल कर बिस्तर के नीचे फेंक दी लेकिन अभी भी उसके नंगेपन को ढकने के लिए बदन पर ब्रा और पैंटी थी जिसे सुमन अपने हाथों से निकाल कर उसके बदन से अलग कर दी,,, और उसके छोटे संतरों को एक हाथ में पकड़कर मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अब देखना मैं तुम्हारी चूचियों को भी अपनी तरह खरबूजा बना दूंगी,,,,।

क्या सच में ऐसा हो जाएगा,,,!

बिल्कुल मेरी रानी,,,(और इतना कहने के साथ ही वहां उसकी चूचियों को हल्के हल्के दबाते हुए अपने लाल-लाल होठों को हल्के से खोली और उसके निप्पल को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,,,तृप्ति मदहोशी के सागर में पूरी तरह से डूबने लगी थी यह उसके जीवन का पहला अवसर था जब कोई उसकी चूचियों को मुंह में लेकर पी रहा थाऔर वह भी कोई मर्द नहीं बल्कि उसकी हम उम्र एक खूबसूरत लड़की थी जो इस तरह की कलाबाजी में माहिर थी,,,सुमन की हरकत से उसके बदन में मदहोशी छाने लगी थी उसकी आंखें बंद होने लगी थी उसकी आंखों में सुरूर छा रहा था,,, वाकई में इस समय तृप्ति को बहुत मजा आ रहा था,,,, सुमन की हरकतेंनिरंतर आगे बढ़ती जा रही थी वह दोनों चूचियों को हाथ में लेकर हाल-चाल के दबाते हुए बारी-बारी से उसे मुंह में लेकर पी रही थी,,, ।

सहहहह आहहहहहहह ऊममममममम,,, ओहहहहह फफफ,,,,,,ऊमममममममम सुमन,,,,,,आहहबबबबबब मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,।

तुझे मजा मिले तभी तो मैं यह कर रही हूं,,,,(धीरे से अपने मुंह में से उसकी चूची को निकाल कर इतना बोलकर फिर से उसे मुंह में लेकर पीना शुरू कर दी,,,,तृप्ति बार-बार अपनी आंखों को खोलकर इस नजारे को देख नहीं रही थी क्योंकि उसे देखने में भी बहुत मजा आ रहा था उसकी आंखों के सामने उसके मुकाबलेज्यादा बड़ी-बड़ी चूचियां सुमन के पास थी जिसे देखकर उसका भी मन लालच रहा था और वह अपने इस लालच को रोक नहीं पाई और अपने दोनों हाथ आगे पकडकर उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथों में पकड़ ली और उसे सुमन की तरह ही धीरे-धीरे से दबाना शुरू कर दी,,,तृप्ति के जीवन का यह पहला अवसर था जब वह इस तरह से एक लड़की के साथ आने लग रही थी उसे मजा आ रहा था वाकई में आज उसे एहसास हो रहा था की चूचियां दबाने में कितना मजा आता है,,,, वह भी सुमन की तरह चुचियों का मुंह में लेकर पीना चाहती थी लेकिन अभी इस क्रिया में सुमन लगी हुई थीलेकिन थोड़ी देर बाद जैसे ही वह दोनों चूचियों को छोड़कर गहरी सांस लेने लगी,,, तृप्तिभी उसी की तरह ही अपने प्यास होठों को खोलकर उसकी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दी और इस खेल में उसे आनंद आने लगा वह भी बारी-बारी से दोनों चुचियों का मजा ले रही थी,,,।

रात के 1:30 रहे थे लेकिन दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थीदोनों की बुर से मदन रस टपक रहा था दोनों की चूचियां टमाटर की तरह लाल हो चुकी थी,,,तृप्ति के लिए तो यह पहली बार था इसलिए वह पागलों की तरह उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों से प्यार कर रही थी उससे खेल रही थी,,,तृप्ति की तरह ही सुमन की भी हालत खराब होने लगी और उसके मुंह से भी गरमा गरम शिसकारी की आवाज निकलने लगी उसकी गरमा गरम शिसकारी की आवाज सुनकर तृप्ति मदहोश होने लगी उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी। लेकिन इस बीचसुमन अपनी हथेली को एक बार फिर से उसकी पेंटि में डालकर उसकी गुलाबी बुर को अपनी हथेली में जोर से दबोच ली थी,,,। उसकी सरकार पर एकदम सेतृप्ति की सांस रुक गई थी और पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी लेकिन अब वह किसी भी तरह से सुमन को रोकना नहीं चाहती थी,,, सुमन भीउसे धक्का देकर बिस्तर पर पीठ के बल लेट दे और तुरंत अपने दोनों हाथों से उसकी चड्डी पकड़ कर अपनेहाथों से खींचते हुए उसे उसकी लंबी चिकनी टांगों से बाहर निकाल दी अब वह भी उसकी तरह पूरी तरह से बिस्तर पर नंगी हो चुकी थी

सुमन अपने बिस्तर पर एक नंगी खूबसूरत लड़की को देखकर मदहोश हुए जा रही थी,,, उसकी आंखों में वासना उतर आया था,,,वह अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों टांगों को पकड़ कर उसे खोलते हुए घुटनों के बल उसकी दोनों टांगों के बीच आगे बढ़ने लगी,,,, तृप्ति की बुर एकदम चिकनी थी उस पर बाल का नामोनिशान नहीं था,,,जिसे देख कर सुमन के मुंह में पानी आ रहा था और वह अपनी हथेली आगे बढ़ाकर उसकी बुर को अपनी हथेली में रखकर उसे दबाते हुए बोली,,,।

हाय रे तेरी बुर कितनी चिकनी है लगता है अभी-अभी साफ की है,,,।

मुझे सफाई पसंद है 10 15 दिन में मैं एक बार सफाई कर देता हूं क्रीम लगाकर,,,(सुमन की दोनों टांगों के बीच देखते हुए) तेरी बुर भी तो बहुत चिकनी है,,,।

मैंने भी कल ही साफ की हुं क्रीम लगाकर,,, ज्यादा बाल रहते हैं तो खुजली होने लगती है,,,,(ऐसा कहते हुए सुमन बार-बार उसकी बुर को अपनी मुट्ठी में दबा रही थी खोल रही थी ऐसा करने में उसे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि उसमें से निकलने वाला मदन रस पूरी तरह से उसकी हथेलियां को भिगो रहा था,,, और उसकी हरकत पर तृप्ति के चेहरे के हाव-भाव पूरी तरह से बदलते जा रहे थे,,,अब बिल्कुल भी देर ना करते हुए सुमन धीरे से अपने प्यासे होठों को उसकी दोनों टांगों के बीच ले जाने लगी और अगले ही पल उसके गुलाबी छेद पर अपने होठ रखकर उसे जीभ से चाटना शुरू कर दी,,,,यह पल तृप्ति के लिए बेहद अद्भुत था जिसे वह कभी जिंदगी में महसूस नहीं की थी इसलिए वह जैसे ही सुमन के होठों को अपनी प्यासी बुरर पर महसूस की वह पूरी तरह से गन गना गई,, उसके बदन में कंपन होने लगा और उसके हाथ खुद-ब-खुद सुमन के सर पर आ गया और वह दोनों हाथों को उसके रेशमी बालों में डाल दी और उसके सर को पकड़ ली,,,।

सुमन भी पूरी तरह से एक अंश हुई तरोताजा बुर की महक को अपने अंदर महसूस करके पागल हो गई और पागलों की तरह जीभ से उसकी बुर को चाटना शुरू कर दी,,,, दोनों पागल हुए जा रहे थे,, तृप्ति कभी सोची नहीं थी कि एक लड़की लड़की की बुर को इस तरह से चाटती होगी,,, इसीलिए तो तृप्ति कोअपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन वह जानती थी कि जो कुछ भी हो रहा है वहां हकीकत में हो रहा है यह कोई सपना नहीं कोई कल्पना नहीं है,,, इसलिए वह इस पल को जी लेना चाहती थी,,,बिस्तर पर वह पूरी तरह से उत्तेजना से कसमस आ रही थी और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर सुमन लपा लप उसकी बुर को चाट रही थी,,,इस खेल में वैसे भी वह माहिर थी इस खेल को अच्छी तरह से खेलना जानती थी इसीलिए तो उसका यह खेल रंग ला रहा था,,,।

तृप्ति अपने मन में यही सोच रही थी कि जब उसे इतना मजा आ रहा है तो क्या ऐसा करने में सुमन को मजा आता होगा,,,अपने ही सवाल का जवाब वह खुद देते हुए अपने आप से ही बोली जरूर आता होगा तभी तो वह इतनी मदहोश होकर यह कार्य को कर रही हैऔर सुमन थी की लगातार उसकी बुर को चाट कर उसे पूरी तरह से पागल बना देना चाहती थी क्योंकि वह चाहती थी कि इस क्रिया को वह भी उसके साथ दोहराएं,,,, लेकिन जो कुछ भी करना था उसे ही करना था और सुमन अच्छी तरह से जानती थी कि उसे क्या करना है,,,।

सुमन और तृप्ति दोनों पूरी तरह से नंगी होकर एक ही बिस्तर पर मजे लूट रही थी कमरे में जल रही डिम लाइट की रोशनी में सबको साफ नजर आ रहा था दोनों की जवानी बेलगाम हो चुकी थी,,, सुमन तो इस खेल की पक्की खिलाड़ी थी लेकिन तृप्ति अभी अनाड़ी थी उसका सीखना अभी बाकी था लेकिन सुमन की संगत में वह सब कुछ सीख जाएगी अब ऐसा लगने लगा था।इसलिए तृप्ति अपने मन में सोच रही थी कि अच्छा हुआ कि वह यहां पर सोने के लिए तैयार हो गई वरना इतनी अद्भुत सुख की वह कभी कल्पना भी नहीं कर पाती,,, वह अभी अपने मन में यह सोच ही रही थी कि सुमन अपनी बीच वाली ऊंगली को धीरे से उसके गुलाबी छेद में डालना शुरू कर दी,,,जैसे-जैसे उसकी उंगली अंदर बाहर हो रही थी वैसे-वैसे उसकी मदहोशी बढ़ती जा रही थी उसे मजा आ रहा था और इस दौरान वह लगातार अपनी जीभ से उसकी बुर को चाट भी रही थी,,,और सुमन की यह क्रिया लगातार जारी थी वह पूरी तरह से तृप्ति को पागल बना देना चाहती थी और जब उसे लगने लगा कि उसका किया कार्य काम करने लगा है तो वह धीरे से गहरी सांस लेते हुए उसकी दोनों टांगों के पीछे से अपने चेहरे को ऊपर की तरफ उठाई औरतृप्ति की तरफ देखने लगी दोनों की नजर आपस में टकराई दोनों की आंखों में वासना साफ झलक रही थी,,।

सुमन समझ गई थी कि अब वह जैसा कहेगी तृप्ति वैसा ही करेगी इसलिए धीरे से उठी और,,, 69 की अवस्था में उसके ऊपर लेट गई।पहले तो तृप्ति को कुछ समझ में ही नहीं आया और सुमन अपना कार्य जारी करती थी वह उसकी बुर को चाटना शुरू कर दी थी लेकिन तृप्ति कुछ कर नहीं रही थी बस बेहद करीब से सुमन की बुर को देख रही थी और उसकी मादक खुशबू को अपने अंदर उतार रही थी,और सुमन इशारे से उसे समझा रही थी कि क्या करना है लेकिन बोल कुछ नहीं रही थी वह अपनी कमर को आगे पीछे हिलाते हुए अपनी बुर को उसके होठों से सटा दे रही थी,,, लेकिन तृप्ति कुछ कर नहीं रही थी तो,,, आखिरकार सुमन को बोलना पड़ा,,,।

तू भी जीभ से चाट बहुत मजा आएगा,,,,।

(उसकी बात सुनकरतृप्ति के दिल की धड़कन बढ़ने लगी क्योंकि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इस क्रिया को वह कैसे कर पाएगी लेकिन वह अच्छी तरह से देख रही थी कि इसी क्रिया को सुमन बड़े आराम से कर रही थी और आनंदित हो रही थी इतना तो वह मालूम था किस क्रिया को करने में मजा बहुत आता है इसलिए वह भी हिम्मत करके धीरे से अपनी जीभ को हल्के से निकाली और उसकी नौक को सुमन की बुर से हल्का सा स्पर्श कराई और एकदम से गनगना गई,, फिर दोबारा उसने कोशिश की और इस बार हुआ पूरी तरह से अपनी जीभ को उसकी गरम बुर से सटा दी,,, ऐसा करने से वह पूरी तरह से आनंदित हो गई और इस दौरानसुमन अपनी बीच वाली उंगली को फिर से उसकी बुर में प्रवेश कर दी और ऐसा होते ही वह उत्तेजना में तुरंत अपने होठों को पूरी तरह से सुमन की बुर से सटा दी और उसे चाटना शुरू कर दी पहले तो उसे थोड़ा अजीब लगा लेकिन थोड़ी ही देर में उसे आनंद आने लगा मजा आने लगा वह अभी सुमन की तरह ही उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दि।

सच पूछो इस क्रिया को करने में उसे बहुत मजा आ रहा था वह पागल हो जा रही थी उसे पहली बार एहसास हो रहा था कि वाकई में इस तरह के खेल खेलने में कितना मजा आता हैवह भी अपनी बीच वाली उंगली को सुमन की तरह ही उसकी खुद की बुर में डालकर अंदर बाहर करने लगे और उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी बुर अंदर से कितनी गर्म है जैसा कि उसकी खुद की गरम रहती है,,, दोनों कीक्रिया निरंतर बढ़ती जा रही थी दोनों का नितंबों का आकार एकदम गोल था लेकिन सुमन की गांड को ज्यादा बड़ी थी और दोनों गोल-गोल अपनी गांड को एक दूसरे के चेहरे पर घूम रही थी जिससे दोनों की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी।

देखते ही देखते दोनों चरम सुख की तरफ आगे बढ़ रही थी दोनों की उंगली एक दूसरे की बुर में बड़ी तेजी से अंदर बाहर हो रही थी ऐसा लग रहा था कि मैं जैसे दोनों की उंगली ना होकर एक मजबूत लंड हो,,,वासना की आग में दोनों सुलग रही थी दोनों पसीने से तरबतर हो चुकी थी,,,,और देखते ही देखते दोनों एकदम चरम सुख को प्राप्त कर ली दोनों की बुर से मदन रस का फवारा फूट पड़ा जिसे दोनों अपने होठों से जीभ से चाट कर मदहोश होने लगी,,,और यह खेल तकरीबन सुबह 5:00 बजे तक चलता रहा और उसके बाद कब दोनों की आंख लग गई दोनों को पता ही नहीं चला,,,।

सुबह जबसुमन की मां दरवाजे पर दस्तक देने लगी तो दोनों की आंख खुली दोनों बिस्तर पर एकदम नंगी थी और जल्दी-जल्दी दोनों अपने कपड़े समेट कर पहनने लगी,,, इसके बाद एक अद्भुत अनुभव के साथ तृप्ति अपने घर आ गई।

तृप्ति के लिए बीती रात बेहद यादगार बन चुकी थी वह कभी सोचा भी नहीं थी कि उसके जीवन में ऐसा भी पल आएगा जब एक लड़की के साथ उसे हम बिस्तर होना पड़ेगा,,, लेकिन यह अनुभव उसे काफी कुछ सीखा गया था, वह पूरी तरह से अपनी जवानी का लुत्फ ले चुकी थी,, लेकिन यह तो अभी शुरुआत थीऔर शुरुआत की इतनी धमाकेदार थी कि वह कभी सोच भी नहीं सकती थी,,,दूसरों के मुंह से तो उसने सुषमा आंटी की लड़की सुमन के बारे में बहुत कुछ सुनी थी,, लेकिन अब उसे उसका अनुभव भी हो चुका था लेकिन सुमन से उसे कोई गिला शिकवा नहीं था क्योंकि एक ही रात में सुमन ने उसे जवानी का मजा चखाई थी,,, भले ही दोनों मर्दाना अंग से आनंद ना लिए हो लेकिन जनाना अंग से भरपूर मजा लूट थे,,,।

एक अद्भुत अनुभव के साथ अपने घर वापस लौट आई थी एक ही रात में वह पूरी तरह से बदल गई थी एक ही रात में उसे लगने लगा था कि वाकई में असली सुख तो इन्हीं सब में है,,, घर वापस लौटने के बावजूद भी उसका बताने में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, वह कुछ देर तक कुर्सी पर बैठकरबीते एक दिन के बारे में सोचती रही एक ही दिन में काफी कुछ बदल गया था एक ही दिन में वह पूरी तरह से लड़की से औरत बनने की दिशा में कदम रख चुकी थी,,, वह सुमन के बारे में भी सोच रही थी कि सुमन इतने खुले विचारों वाली है वह कभी सोची नहीं थी,,, और वह अपने मन में इस बात से सबक भी कर रही थी कि भले वह एक औरत के साथ इस तरह का सुख भोग रही थी लेकिन यकीन तौर पर वह संभोग सुख भी पूरी तरह से प्राप्त कर चुकी थी क्योंकि इस तरह से खुले विचारों वाली लड़की ज्यादा देर तक चुदवाए बिना नहीं रह सकती,,,।

सुमन के बारे में सोचते हुए सुमन की बातें उसे याद आने लगी,,, उसके पास तोअश्लील किताब की थी उसमें किस तरह से गंदी कहानी लिखी हुई थी एक भाई और बहन के बीच किस तरह से संबंध स्थापित होता है इसका उल्लेख बड़े अच्छे तरीके से किया हुआ था,,,और इस बात की झिझक सुमन में बिल्कुल भी नहीं थी कि अगर उसका कोई भाई होता तो उसे नग्न अवस्था में देखकर उसके मन पर क्या गुजरती बल्कि उसे तो अच्छा लगता,,, उसके इस तरह के विचार के बारे में सुनकर तो तृप्ति के होश उड़ गए थे,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि अगर वाकई में सुमन का कोई भाई होता तो अब तक वह जरूर उसके साथ शारीरिक संबंध बना ली होती उसके साथ जवानी का मजा लूटती ,,, यह सब सोचती हूं उसके मन में इस बात सेएक और शंका थी कि अगर वह ऐसा चाहती तो वह कर सकती थी लेकिन क्या उसका भाई उन सबके लिए तैयार होता क्या एक भाई अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार होगा,,,, फिर अपने ही सवाल का जवाब उसके मन मेंउमड़ने लगा और वह अपने आप से ही बोली क्यों नहीं तैयार होगा जब एक तो है ना अपने भाई की मर्दाना अंग को देखकर पिघल सकती है तो क्या एक भाई अपनी बहन की नंगी जवान को देखकर निकल नहीं सकता क्या उसका मन नहींकर करेगा अपनी बहन के साथ शारीर सुख प्राप्त करने के लिए,,,इस बारे में सोचकर वह अपने मन में सोचने लगी कि क्या अगर वह चाहे तो क्या उसका भाई इन सबके लिए तैयार होगा,,।

अपने मन में उठे इस सवाल को लेकर उसे अपने आप पर ही गुस्सा आने लगा वह अपने मन में सोचने लगी कि उसका भाई कितना सीधा ज्यादा है वह अपने भाई के बारे में क्यों इस तरह की बातें सोच रही है,,,वह तो अनजाने में उसके लंड को देखी थी जब वह कमरे में पूरी तरह से नंगा होकर अपने लिए कपड़े ढूंढ रहा था ऐसा तो हर घर में हर एक मर्द करता होगा जब घर में अकेला होता होगा नहाने के बाद वह सारे कपड़े उतार भी देता होगा लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि उसके मन में कुछ चल रहा होगा,,,लेकिन तभी उसके मन में ख्याल आया कि अगर एक मर्द के मन में कोई गलत भावना नहीं होती तो उसका सीधा असर उसके लंड पर पड़ता है और उसमें बिल्कुल भी उत्थान नहीं होतालेकिन जब एक मर्द के बंद में कुछ गंदे विचार चलते हैं तो इसका भी असर सीधे उसकी दोनों टांगों के बीच के अंगों पर होता है और वह तुरंत खड़ा हो जाता है और जब वह अपने भाई को देखी थी तो उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था तो क्या उसके मन में भी गंदे विचार चल रहे थेयह बातें सोचकर उसका दिमाग घूमने लगा था फिर अपने मन में सोचने लगी कि उसका भाई भी तो पूरी तरह से जवान हो चुका है गठीला बदन का बांका नौजवान बन चुका है,दूसरे लड़कों की तरह उसका भी आकर्षक औरतों की तरफ और लड़कियों की तरफ बढ़ता ही होगा वह भी दूसरे लड़कों की तरह आती जाती लड़कियों के अंगों के उभार को देखकर मचलता होगा,,, क्या सच में उसके भाई के मन में भी यही सब विचार चलाते होंगे,,,।

इन सब बातों को सोचते हुए उसकी हालत फिर से खराब हो रही थी और उसके बदन में उत्तेजना का संचार होने लगा था,,, जिसका असर सीधे उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर पड़ रहा था,,, और उसे रात वाली बात याद करने लगी कि कैसे सुमन बेझिझक बिना शरमाए उसकी बुर को अपने जीभ से चाट रही थी,,,पल भर के लिए तो वह एकदम सच में पड़ गई थी कि एक लड़की एक लड़की के साथ भला ऐसे कैसे कर सकती है,,,लेकिन थोड़ी ही देर में उसके बदन में उत्तेजना की जब हुआ रुकने लगी आने दे कि जो अनुभूति होने लगी उसे महसूस करके वह समझ गई कि वाकई में एक औरत भी औरत को अद्भुत सुख दे सकती हैवह पूरी तरह से मचल गई थी जैसे-जैसे सुमन की जुबान उसके गुलाबी छेद के इर्द गिर्द और अंदर गहराई तक अंदर बाहर हो रहे थे एक अद्भुत सन सनाहट उसके बदन में महसूस हो रही थी जिसका उसे पहले कभी अनुभव नहीं हुआ था,,।

जिस तरह से उसकी हरकतें जारी थी उसे देखते हुए तृप्ति समझ गई थी कि सुमन पूरी तरह से खिलाड़ी बन चुकी थी जिस तरह से वह उसके ऊपर जाकर उसकी दोनों टांगों के बीच मुंह डाल दी थी और बिना कुछ कहेअपनी भारी भरकम गांड को उसके चेहरे पर रखकर अपनी बुर का स्पर्श उसके चेहरे पर कर रही थी उसके होठों पर कर रही थी यह हरकत एक तरह का इशारा था उसके लिए जिसे वह थोड़ी देर बाद समझ गई थी इस समय भी तृप्ति के जेहन में बुर से उठ रही मादक खुशबू बसी हुई थी,,,, यह खुशबू का अनुभव से अपनी बुर से कभी नहीं हुआ था और अगर सुमन एक अद्भुत सुख से प्रधान ना करती तो शायद इस खुशबू से वह अनजान ही रहती,,,सुमन अपनी मन में सोच रही थी कि बुर से निकलने वाले मदन रस का स्वाद कितना कसैला और नमकीन होता है,,, पहले तो उसे खुद को बड़ा अजीब लग रहा था लेकिन धीरे-धीरे उस स्वाद में वह पूरी तरह से खो चुकी थी,,और वह भी सुमन की तरह अपनी जीत के साथ-साथ उंगली को भी उसके गुलाबी छेद में डालकर अंदर बाहर कर रही थी और उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में सब की बुर कितनी अंदर से गर्म होती है,,,।

इन सब बातों के बारे में सोच कर त्रप्ति फिर से गर्म होने लगी उसके बदन में उत्तेजना का संचार होने लगा था वह मदहोश होने लगी थी,,, वह अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और झाड़ू लेकर पूरे घर में झाड़ू लगाना शुरू कर दी,,,,,, और सफाई कर लेने के बाद सीढ़ियां चढ़ते हुए वह छत पर पहुंच गईसुबह का समय था इसलिए छत पर ठंडी हवा बह रही थी और वह गहरी सांस लेते हुए ठंडी हवा को अपने अंदर लेने लगी लेकिन यह ठंडी हवा भी उसकी बदन की गर्मी को शांत करने में नाकामयाब हो रही थी,,,तृप्ति दूर-दूर तक नजर घुमा कर देख रही थी चारों तरफ सुबह की कितनी शांति छाई हुई थी उसके घर के पीछे दूर तक मैदानी मैदान था जिसमें जंगली झाड़ियां उगी हुई थी और एक कच्ची सड़क भी गुजरती थी,,, और यही कच्ची सड़क थी जिस पर चलकर वहां ट्यूशन से घर वापस आ रही थी जब संदीप उसे रास्ते मेंपकड़ लिया था और उसके बदन से छेड़छाड़ कर रहा था उसे समय संदीप की हरकत उसे कुछ अजीब तो लगी थी लेकिन बेहद आनंद दायक भी प्रतीत करा रही थी,,,,।

तृप्ति संदीप के बारे में सोच ही रही थी कि उसकी नजर दूर-दूर झाड़ियों तक पहुंचने लगी जहां पर सुबह के समय औरतें सोच कर रही थी और वही उसे दो लड़के दिखाई दे रही है जो उन औरतों की नंगी गांड को देखकर मत हो रहे थे,,,बड़े लड़कों को देखकर तृप्ति को एहसास हो रहा था कि दुनिया के सारे मर्द एक जैसे ही हैं उन्हें औरतों के खूबसूरत बदन से ही ज्यादा लगाव होता हैवरना एक सो करती औरत को कौन देखना चाहेगा एक औरत तो बिल्कुल भी नहीं देखना चाहेगी लेकिन एक मर्द हमेशा देखना चाहेगा भले ही वह पेशाब कर रही हो यार सोच कर रही हो ऐसी हालात में भी मर्दों को अपनी आंख सेंकने का जुगाड़ मिल जाता है,,,। लड़कों को देखकर तृप्ति अपने भाई के बारे में सोचने लगी,,, उसके मन में ख्याल आने लगा कि उसका भाई भी अगर उसकी आंखों के सामने यह सब चल रहा हो तो जरूर देखेगा क्योंकि आखिरकार वह भी तो एक मर्द है उसका भी आकर्षक औरतों की तरफ जरूर होगा,,,

इन सब के बारे में सोच ही रही थी कि तभी उसे दूर झाड़ी में एक औरत चोरी छिपे आई हुई नजर आने लगी जिसे छत पर खड़ी होकरइतनी बड़ी गौर से देखने लगी वह ऐसे झाड़ियां में जा रही थी जैसे सबसे नजर बचाकर जा रही हो उसके रवैए में तृप्ति को कुछ अजीब लगा अगर वह सहज रूप से सोच करने के लिए जा रही होती तो इस तरह से घबराई हुई ना होती,,, इसलिएबड़े ध्यान से तृप्ति उस औरत को देखने लगी और वह धीरे-धीरे झाड़ियों की तरफ आगे बढ़ रही थी,,,उसके हाथ में डब्बा जरूर था लेकिन तृप्ति को न जाने क्यों ऐसा लग रहा था कि वह सोच करने नहीं जा रही थी,,, तभी तृप्ति को दूसरी तरफ से एक लड़का उसी तरफ आता हुआ नजर आने लगा उसके हाथ में डब्बा भी नहीं था,,, दूर से भी तृप्ति को एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,, उसे औरत की उम्र 40 से 45 साल के बीच रही होगी और जो दूसरी तरफ से जवान लड़का आ रहा था वह उसके भाई के ही उम्र का था,,, त्रप्ति उसे लड़के को उसे औरत की तरफ आता हुआ देखकर सोचने लगी कि उस लड़के को देखकर वह औरत अपना रास्ता बदल देगी लेकिन जैसे ही वह लड़का उस औरत के करीब पहुंचा,,, दोनों एकदम से रुक गए,,,।

तभी तृप्ति के आश्चर्य के बीच वह दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे और देखते ही देखते वह लड़का जो उसे औरत के लड़के के उम्र का था वह एकदम से उसे औरत को अपनी तरफ अपनी बाहों में भर लिया यह सब तृप्ति के आश्चर्य को ओर ज्यादा बढ़ा रहा था,,, तृप्ति को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार वह औरत कुछ बोल क्यों नहीं रही है जबकि उन दोनों की उम्र में मां बेटे की उम्र का ही फर्क था,,, इस तरह की हरकत पर एक औरत जरूर सामने वाले पर एक तमाचा जड़ देती लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो रहा था,,, यह सब देखकरतृप्ति की उत्सुकता बढ़ने लगी और वह बड़े गौर से उन दोनों की तरफ देखने लगी,,, तृप्ति के होश तब और उड़ने लगे जब वह लड़काब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों को दबाना शुरू कर दिया यह देखकर तो तृप्ति की खुद की हालत खराब होने लगी पहली बार वह इस तरह का नजारा देख रही थी,,,।

वह औरत मुस्कुरा रही थीउससे बातें कर रही थी जिसे साफ पता चल रहा था कि वह औरत उसे लड़के को जानती थी दोनों में काफी जान पहचान थी वरना एक अनजान लड़के और औरत के बीच इस तरह से बातचीत और हरकत संभव बिल्कुल भी नहीं था,,, तभी तृप्ति कोऔर तेज झटका लगा जब वह औरत खुद पेड़ की तरफ घूम कर झुक गई और अपनी साड़ी को दोनों हाथों से कमर तक उठा दे और उसकी नंगी गांड एकदम से दिखाई देने लगी दूर से भी तृप्ति को सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,अब तृप्ति को समझते देर नहीं लगी कि दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता है लेकिन उन दोनों के बीच तो उम्र का काफी फर्क था लेकिन फिर भी दोनों एक दूसरे से इतना घुल मिल गए थे शायद जिस की जरूरत ही कुछ ऐसी होती है की उम्र नहीं देखती,,,।

दूर झाड़ियांके बीच का नजारा देखकर तृप्ति की हालत खराब होने लगी थी उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी और उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल भी बढ़ने लगी थी उसकी नंगी गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी-बड़ी थी जिसे वह लड़काजो उसके बेटे के ही उम्र का लग रहा था वह अपने दोनों हाथों से उसे औरत की बड़ी-बड़ी गांड को पकड़ कर उसे दबा रहा था दबोच रहा था और घुटनों के बल बैठकर उस पर चुंबन भी ले रहा था यह सब कुछ तृप्ति के लिए बेहद अजीब और अद्भुत था लेकिन बेहद को भावना था औरत से एक मर्द किस तरह से प्यार करते हैं वह तृप्ति पहली बार अपनी आंखों से देख रही थी,,,, यह सब तृप्ति के होश उड़ा रहा था और उसके जोश में वृद्धि भी कर रहा था,,,वह लड़का घुटनों के पास बैठकर बार-बार उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर गांड की दोनों आंखों पर बारी-बारी से चुंबन कर रहा था और वह औरत पीछे नजर घूमाकर उसे जवान लड़के को देखकर मुस्कुरा रही थी,,,।

लेकिन पल भर में ही उसकी मुस्कुराहट मदहोशी में बदलने लगी थी और वह औरत अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर उसके सर पर रखकर उसे और नीचे जाने के लिए इशारा कर रही थीशायद वह लड़का यह क्रिया को पहले भी कर चुका था इसलिए उसके सारे को एकदम से समझ गया था और वह औरत की अपना टांग उठाकर उसके कंधों पर रख दी थी एक टांग नीचे जमीन पर थी और एकदम उसके कंधों पर थी जिससे उसकी दोनों टांगों के बीच का रास्ता थोड़ा सा ज्यादा खुल गया था इतनी दूर से तृप्ति को उसकी बुर तो नजर नहीं आ रही थी,,, लेकिन अगले ही पल उसे समझ में आ गया कि वह लड़कावही कार्य कर रहा है जो रात को सुमन उसकी बुर के साथ कर रही थी वह लड़का घुटनों के बल बैठ कर उस औरत की बुर को चाट रहा था,,,जैसे ही तृप्ति को इस बात का एहसास हुआ उसकी हथेली खुद ब खुद सलवार के ऊपर से ही उसकी बुर तक पहुंच गई और वह सलवार के ऊपर से ही अपनी बुर को मसलना शुरू कर दी,,,उस लड़के की हरकत से वह औरत पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी और वह उसके बालों को कस के पकड़े हुए थी,,,,।

तृप्ति इस नजारे को देखते हुएअपने चारों तरफ नजर घुमा कर देख भी ले रही थी कि कहीं कोई उसे इस नजारे को देखते हुए तो नहीं देख रहा है वरना लेने का देने पड़ जाएंगे,,, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था वैसे भी,,, उसके घर के थोड़ी दूर पर सुषमा का घर था और बाकी घर दूर-दूर थे और उसकी खुद की छतदूसरों की छत से ज्यादा बड़ी थी इसलिए किसी के भी देखे जाने कीआशंका बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए वह निश्चित हो गई और फिर से अपनी नजरों को और अपने ध्यान को उसी झाड़ियां पर केंद्रित कर दी,,, वह लड़का अभी भी उस औरत की बुर को चाट रहा था,,दोनों के बीच की उम्र के अंदर को देखकर सुमन के होश उड़े जा रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह लड़का तो पूरी तरह से जवान था ऐसे में उसका आकर्षण लड़कियों की तरफ बढ़ना चाहिए लेकिन वह पूरी तरह से औरत के आकर्षण में डूबता चला गया थाक्या ऐसा हो सकता है कि एक जवान लड़का अपनी ही मन की उम्र की औरत क्या आकर्षण में बंध जाए और अगर ऐसा होता होगा तो क्यों होता होगा,,,यह सब सोचते कि उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,।

तृप्ति को दूसरी औरतों भी सो करती हुई दिखाई दे रही थी लेकिन उन औरतों सेउसे औरत के बीच की दूरी काफी ज्यादा थी और ऐसा लग रहा था कि यह जगह उन दोनों के लिए बेहद सुरक्षित थी और उसे जगह पर दोनों पहले भी इस तरह का आनंद ले चुके थे क्योंकि उनके इर्द-गिर्द कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था,,और जिस तरह से दोनों आपस में जाकर मिले थे निश्चित था कि दोनों का वहां मिलना चाहिए था पहले से ही तभी तो वह दोनों एक ही जगह पर चलते चले जा रहे थे,,, जो कुछ भी हो लेकिन इस समय तो दोनों जवानी का मजा लूट रहे थे,,,, उसे औरत के चेहरे के बदलते हाव भाव को देखकरतृप्ति इतना तो समझ गई थी कि उसे लड़के की हरकत से वह मदहोश हुए जा रही है उसे मजा आ रहा है,,,,,वह लड़का भी औरत की बुर चाटने में बुरी तरह से माहिर था इसलिए तो अपनी जीभ से उसे पूरी तरह से आनंदित किया जा रहा था जैसा कि सुमन उसे रात में मजा दी थी वैसा ही इस समय वह लड़का उस औरत को मजा दे रहा था। थोड़ी देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रहे लेकिन तभी वह औरत उसे उठने का इशारा करने लगी और थोड़ी देर में वह उठकर खड़ा हो गया और अपने पेंट का बटन खोलने लगा।

यह देखकर तृप्ति की हालत बहुत ज्यादा खराब होने लगी क्योंकि अब दोनों के बीच चुदाई का खेल शुरू होने वाला था,,, लेकिन तभी वह औरतउसे लड़की की तरह खुद घुटनों के पास बैठ गई और अपने हाथों से उसके पेंट का चैन खोलने लगी और अपने हाथ से उसके लंड को बाहर निकाल कर सीधा उसे मुंह में भर ली,,, यह देख कर तो तृप्ति की सांस अटकने लगी,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था जो काम घर की चार दिवारी के अंदर रहकर करते हैं वही काम को या दोनों घर के बाहर खुले मैदान में झाड़ियों के बीच कर रहे थे,,, इतनी दूर से तृप्ति को उस लड़के का लंड नजर नहीं आ रहा थालेकिन इतना दिखाई दे रहा था कि उसे मुंह में लेकर वह औरत एकदम मस्त हुए जा रही थी पर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह उस लंड को खा जाएगी,,, उस औरत की मस्ती को देखकर तृप्ति के मन में फिर से शंका पैदा होने लगी कि क्या इस उम्र की औरत अपने बेटे की उम्र के लड़के के अंग के साथ संतुष्ट हो सकती है,,, और शायद हो सकती होगी तभी तो दुनिया की नजरों से बचकर यह औरत मजा लेने के लिए झाड़ियों में आई थी,,।

तृप्तिमदहोश कर देने वाली नजारे को देखकर सलवार के ऊपर से अपनी बुर को अपनी हथेली में जोर-जोर से दबोच रही थी मसल रही थी,,, ऐसा करने में उसे भी मजा आ रहा था,,,कुछ देर तक कुछ औरत इसी तरह से मजा लेती रही और फिर अपने आप ही उठकर खड़ी हो गई और फिर से झाड़ी पकड़ कर घोड़ी बन गई और अपनी बड़ी-बड़ी गांड को ऊपर की तरफ उठा दी हालांकि ऐसा करने में उसकी साड़ी ठीक तरह से हो गई थी और उसकी नंगी गांड साड़ी के अंदर छुपा रही थी लेकिन इस बार उसेलड़के ने अपने हाथों से साड़ी उठाकर उसे उपर उठा दिया था और फिर से उसकी नंगी गांड एक बार फिर से उजागर हो गई थी,,,उसकी नंगी गांड देखकर एक बार फिर उसे लड़के ने उसकी गांड पर बारी-बारी से चपत लगाया,,, और गांड पर चपत लगते ही वह औरत फिर से पीछे मुड़कर देखने लगी,,, और थोड़ा नाराजगी दर्शाते हुए उसे मुख्य कार्य को करने के लिए बोली और तुरंत वह लड़काठीक उसके पीछे खड़ा हो गया और नीचे की तरफ झुक कर उसके गुलाबी छेद में अपना लंड डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,,।

वैसे तो इतनी दूर से ना तो औरत की बुर दिखाई दे रही थी ना ही उस लड़के का लंड दिखाई दे रहा था लेकिन भी उसकी आगे पीछे होती हुई कमर को देखकर तृप्ति समझ गई थी कि वह लड़का उसकी चुदाई कर रहा है,,, इस समय दोनों की उम्र का फर्क तृप्ति को इस बात से पता चल रहा थाऔर अच्छी तरह से समझ रही थी कि इस उम्र का क्या महत्व होता है इस उम्र में वह औरत अपनी मर्जी से उस लड़के से चुदवा रही थी,,, वह लड़का अपनी तरफ सेऐसा कोई कार्य नहीं कर रहा था जिससे वह नाराज हो जाए और वह लड़का उस औरत के दिशा निर्देश पर ही काम कर रहा था,,,जैसा जैसा वह बोल रही थी वैसा वैसा हुआ लड़का कर रहा था जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि इस उम्र में एक जवान लड़के पर औरत का कितना दब दबा बना रहता है,,,,।

यह नजारा तृप्ति को पूरी तरह से मदहोश कर दिया था इस समय उसे भी चुदवाने का बहुत मन कर रहा था हालांकि इस खेल में वह पूरी तरह से अनाड़ी थी कच्ची खिलाड़ी थी उसे नहीं मालूम था कि चुदवाने में कैसा महसूस होता है लेकिन इतना तो समझ गई थी कि परम आनंद की अनुभूति होती है,,,,वह लड़का जोर-जोर से अपनी कमरिया रहा था तकरीबन 10 मिनट बाद वह लड़का उसे औरत से एकदम से अलग हो गया और अपने लंड को पेट में वापस डाल दिया वह औरत की अपनी साड़ी को ठीक करके मुस्कुराते हुए उसकी तरफ अच्छी और शायद फिर से मिलने का वादा करके वहां से चलती बनी और उसके जाते ही तृप्ति का भी वहां खड़े रहना अब ठीक नहीं था क्योंकि उसके बदन में भी उत्तेजना की लहर उठ रही थी और वह सीधा सीढ़ियां उतरकर नीचे आई और सीधा बाथरूम में घुस गई,,,।

बाथरूम में प्रवेश करते ही वह अपने बदन से सारे कपड़े को उतार कर एकदम नंगी हो गई और अपनी बुर की हालत को देखने लगी क्योंकि पूरी तरह से उसके ही मदन रस से चिपचिपी हो गई थी वह अपनी हथेली को अपनी बुर पर रखकर उसे जोर-जोर से मसलने लगी जैसा कि सुमन उसकी बुर को मसल रही थी,,,और देखते ही देखते हैं उसकी आंखें धीरे-धीरे बंद होने लगी और वह धीरे-धीरे अपनी उंगली को अपनी बुर के अंदर प्रवेश कराने लगी,,, और धीरे-धीरे उसे अंदर बाहर करने लगी ऐसा करने में उसे मजा आने लगा ।थोड़ी देर बाद वापस संतुष्ट हो गई और नहा कर वापस बाहर निकल गई लेकिन आज वह अपने कमरे तक जाने में ना तो किसी कपड़े का सहारा ली और ना ही टॉवल अपने बदन पर लपेटी,,,एकदम नंगी ही वह अपने कमरे तक गई क्योंकि घर पर कोई नहीं था इसलिए इस मौके को पूरा फायदा उठा लेना चाहती थी,,,वैसे भी घर में नंगी होकर घूमने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी बहुत हल्का महसूस कर रही थी,,,।

थोड़ी देर बाद वह तैयार हो गई और खाना बनाने लगी क्योंकि वह जानती थी दोपहर तक उसकी मां और उसके भाई दोनों आ जाएंगे,,खाना बनाते हुए अपने मन में सोच रही थी कि अगर एक दिन का समय और मिल जाता तो कितना मजा आता आज भी वह सुमन के घर पर जाकर जवानी का मजा लूटती,,,,।दोपहर तक उसकी मां और उसके भाई भी घर पर आ गए थे वह दोनों भी एक नए अनुभव के साथ वापस लौटे थे।

एक ही दिन में मां बेटे के साथ-साथ बेटी को भी एक अलग ही अनुभव प्राप्त हुआ था जिससे तीनों की जिंदगी एक नई राह पकड़ ली थी अब उनकी मंजिल एक ही थी लेकिन मंजिल पर पहले कौन पहुंचता है यह देखना बाकी था,,, लेकिन इतना तो तय था कि मंजिल से ज्यादा सफर मजा देने वाला है,, बस में हुई मां बेटे के बीच घमासान घर्षण का एहसास दोनों के बदन में रह रहकर उत्तेजना की फुहार उठा रहा थाऔर सुमन के साथ जिस तरह का अनुभव तृप्ति ने प्राप्त की थी वह बेहद अद्भुत और अतुलनीय था लेकिन तृप्ति इस बात का अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी संतुष्टि में अभी भी कमी थीक्योंकि उसे अभ्यास होने लगा था कि उसे एक मर्द की जरूरत है जो अपने मर्दाना अंग से उसके अंदरूनी अंग से मदन रस को बाहर निकाल दें,,,,, एक तरह से पूरा परिवार वासना की आग में झुलसने लगा था,,,।

शाम को तृप्ति ने हीं खाना बनाई,, क्योंकि बस का सफर करके सुगंधा थक चुकी थी,, लेकिन बदन भले ही थक चुका था पर मन पूरी तरह से प्रफुल्लित था जिस तरह का अनुभव सुगंधा ने अपने भाई के घर और बस के अंदर प्राप्त की थी वह उसके जीवन का बेहद यादगार पल बन चुका था,,,वह कभी सोची भी नहीं थी कि अपने भाई के घर में खिड़की से वह अपने भैया और भाभी की चुदाई देखी थी,,,इस बात का एहसास सुगंधा को अच्छी तरह से हो रहा था कि बरसों के बाद अपनी आंखों के सामने चुदाई का दृश्य देखकर वह खुद बेहद गर्म हो चुकी थी उसे बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि वह अपनी आंखों से अपने ही छोटे भाई को अपनी बीवी को चोदते हुए देख रही थी,,, जबकि यह बेहद शर्मनाक बात थी,,, और शायद यहसुगंधा के लिए शर्मनाक बात होती भी अगर वह पहले वाली सुगंधा होती,,।

लेकिन पहले वाली सुगंधाबहुत पहले से पीछे छूट चुकी थी अब सुगंधा के अंदर एक औरत ने जन्म ले लिया था जो अपनी इच्छाओं की पूर्ति करना चाहती थी अपनी मर्जी से जीना चाहती थी अपने सपनों को पूरा करना चाहती थी अपने अधूरे ख्वाब के लिए जीना चाहती थी,, इसलिए अपने भैया भाभी को संभोग मुद्रा में देखकर उसके मन में बिल्कुल भी ग्लानी नहीं थी,,,लेकिन उसके साथ-साथ उसे नजारे को उसके बेटे ने भी अपनी आंखों से देखा था ठीक उसके पीछे खड़े होकर,,, और इसी के बारे में सुगंधा कुर्सी पर बैठे-बैठे सो रही थीउसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था क्योंकि वह अपने बेटे के बारे में निर्णय नहीं ले पा रही थी,,, उसे यहप्रश्न अंदर ही अंदर खाए जा रहा था कि वाकई में उसका बेटा बुद्धू है या बुद्धू बनने का सिर्फ नाटक कर रहा है,,,। क्योंकिरात को जो दृश्य उसने अपनी आंखों से देखी थी , उस दृश्य को उसका बेटा भी अपनी आंखों से ठीक उसके पीछे खड़े होकर देख रहा था लेकिन उस दृश्य के बारे में वह अजीब से सवाल कर रहा था,,,।

सुगंधा उस समय तो परेशानी का कारण बताकर वहां से हट गई थी लेकिन उसे तो आगे बढ़ना थाउसे समझ में नहीं आ रहा था कि अगर इस उम्र में भी उसका बेटा सच में एकदम नादान है तो फिर वह कैसे आगे बढ़ पाएगीऔर अगर सिर्फ वह नाटक कर रहा है तो इस खेल में और भी ज्यादा मजा आने वाला है उसे ही पूरी बागड़ौर संभाल कर आगे बढ़ना होगा,,लेकिन फिर अपने ही सवाल का जवाब उसके मन में अपने आप ही उम्र रहा था कि अगर वह नादान बुद्धू होता तो बस के अंदर उसके बदन से सट जाने की वजह से उसका लंड खड़ा ना हो जाता,, औरत औरउसकी गांड में पूरी तरह से घुसने की कोशिश ना करता अगर वह सच में नादान होता तोइतना तो समझ सकता था कि क्या हो रहा है वह अपने आप को पूरी तरह से हटाने की कोशिश करता लेकिन ऐसा हुआ बिल्कुल भी नहीं कर रहा था ऐसा लग रहा था कि इस खेल में उसे भी बहुत मजा आ रहा है,,,,, यही सब सुगंधा अपने मन में सोच रही थी कि तभी तृप्ति ने आवाज लगाई,,।

मम्मी खाना तैयार हो गया है जल्दी से हाथ मुंह धोकर आओ,,, मैं खाना लगा देती हुं,,,।

ठीक है लेकिन अंकित को जगा दे वह लगता है सो गया है अपने कमरे में,,,।

ठीक है मम्मी,,,।
(इतना कह कर कहा अपने भाई के कमरे में उसे बुलाने के लिए चली गई,,, कमरे में अपने बिस्तर पर बैठकर अंकित किताब के पन्नों को पलट रहा था उसे देख कर तृप्ति बोली,,,)

चल खाना तैयार हो गया है हाथ मुंह धोकर खा ले,,,।

ठीक है दीदी तुम चलो मैं आता हूं,,,

(इतना सुनकर न जाने क्या शरारत सोची तेरी थी एकदम से उसकी आंखों के सामने दरवाजे की तरफ मुंह करके झुक गई और बेवजह अपने पायल को ठीक करने लगी लेकिन ऐसा करने पर उसकी मदमस्त कर देने वाली गोलाई दार गांड उभर कर एकदम अंकित की आंखों के सामने आ गई अंकित की नजर अपने आप अपनी बहन की गांड पर चली गई,,,,, और पल भर में ही अपनी बहन को देखने का नजरिया उसका एकदम से बदल गया अपनी बहन की सुगठित नितंबों को देखकर उसके मन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी और वह नजर भर कर उसे देखने लगा।

और तृप्तिबेवजह नाटक करते हुए अपनी पतली सी पायल को ठीक करने का नाटक कर रही थीवह देखना चाहती थी कि उसके भाई क्या करता है कहां देखता हैऔर यही देखने के लिए वह अपनी पायल को ठीक करते हुए पीछे नजर घुमा कर देखी तो उसका दिल धक से करके रह गया,,, उसकी सोच के अनुसार उसका भाई उसकी गांड की तरफ ही देख रहा था,,, यह देख कर उसकी मां उत्तेजना और प्रसन्नता से झूम उठा उसकी युक्ति काम कर गई थी और वह धीरे से उठते हुए बोली,,,।

पायल ढीली हो गई है डर लगता है कि कहीं गिर ना जाए,,,।
(उसकी बातें सुनकरअंकित कुछ बोल नहीं पाया क्योंकि बोलने के लिए उसके पास कोई शब्द नहीं थे क्योंकि वह तो अपनी बहन के नितंबों को देखकर उत्तेजना से मंत्र मुग्ध हो गया था,,, और वह कोई जवाब सुनना भी नहीं चाहती थी इसलिए बिना जवाब का इंतजार किए वह वहां से चलती बनी,,,, उसके जाने के बाद थोड़ी देर तक अंकित अपने कमरे में बैठा रहा और अपनी बहन के बारे में सोचता रहा फिर धीरे से अपनी बिस्तर पर से नीचे उतरा और हाथ मुंह धोकर खाने बैठ गया,,।

बातों ही बातों में सुगंधा तृप्ति से बोली,,,।

कोई दिक्कत तो नहीं हुई ना,,,।

नहीं मम्मी कोई दिक्कत नहीं हुई,,।

रात को सोई कहां थी,,,?

सुमन के घर पर वैसे तो मैं वहां सोना नहीं चाहती थी लेकिन आंटी बहुत जिद करने लगी तो मुझे जाना पड़ा,,,।

चलो अच्छा है कि तुम वहां जाकर सो गई,,,।खाना खाई थी,,,।

हां खाई थी सुबह तो बना हुआ ही था,रात को सुषमा आंटी खुद बुला कर ले गई थी खाना खिलाने के लिए वैसे सुषमा आंटी बहुत अच्छी है,,,।

(तृप्ति के मुंह से सुषमा आंटी बहुत अच्छी है सुनकर अंकित की आंखों के सामने सुषमा आंटी का नंगा बदन दिखाई देने लगा,,, बिल्कुल वही मुद्रा में जी मुद्रा में अंकित ने सुषमा आंटी को देखा था यह खांसी अपनी चूचियों को छुपाते हुए और दूसरी हाथ की हथेली से अपनी बुर को छुपाते हुए,,, इस दृश्य के बारे में सोचकर अंकित मन ही मन में मुस्कुराने लगा और तृप्ति की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,)

अच्छी तो है इतने अच्छे से एक दिन के लिए तुम्हारी जिम्मेदारी जो उठा ली,,,, लेकिन तृप्ति अगर तुम भी चलती तो मजा आ जाता,,,। लेकिन तुम्हारी पढ़ाई,,,(इतना कहकर सुगंधा निवाला मुंह में डालकर खाने लगी और अपने मन में ही सोचने लगी कि अच्छा हुआ कि नहीं चली अगर चली होती तो शायद बस के सफर का आनंद वह पूरी तरह से नहीं उठा पाती,,,पर अपनी मां की बात सुनकर अंकित भी अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर सच में उसकी दीदी भी साथ में गई होती तो शायद इतना अच्छा अनुभव और एहसास उसे कभी प्राप्त नहीं होता,,,,,फिर भी अपनी मां की बात रखने के लिए अपनी मां के सुर में सुर मिलाते हुए अंकित बोला,,,)

सच में दीदी तुम होती तो और मजा आता मामा मामी के घर बहुत मजा आया क्यों मम्मी सच कह रहा हूं ना,,,,।

हां बहुत मजा आया दो-तीन दिन और रुकना चाहिए था लेकिन ना तो कपड़े लेकर गए थे और नहीं पहले से बोल कर गए थे,,,।

(अंकित अपने मन में सोचने लगा कि अगर सच में दो-तीन दिन और रुकने का मौका मिलता तो शायद मामा के घर पर ही अपनी मां की चुदाई करने का मौका मिल जाता,,,,क्योंकि वह समझ गया था कि उसकी मां बहुत प्यासी है तभी तो अपने भाई को संभोग मुद्रा में देख रही थी,,, अगर इस समय वह कोई हरकत करता तो शायद उसकी मां बिल्कुल भी विरोध नहीं करती क्योंकि वह खुद खिड़की से झांक कर अंदर का दृश्य देखकर एकदम गरम हो गई थी,,,। अपनी मां की बात सुनकर वह बोला,,,)

अगली बार चलेंगे तो चार-पांच दिनों के लिए चलेंगे और दीदी को साथ में लेकर चलेंगे वहां कितना अच्छा लगता है कितनी अच्छी हवा चलती है एकदम ठंडक रहती है चारों तरफ खेत ही खेत,,,।

सच कह रहा है अंकित तूऔर छत पर सोने में कितना अच्छा लग रहा था एकदम ठंडी हवा बह रही थी,,,।

हां मम्मी एक झटके में नींद आ गई थी,,,,।
(इतना कहकर अंकित अपने मन में सोचने लगा कि एक झटके में उसकी मां ने पूरी नींद उड़ा दी थी उसकी आंखों के सामने ही छत पर कोने में बैठकर अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही थी उसकी मां को नहीं मालूम था कि अंकित अपनी आंखों से सब कुछ देख चुका है,,, उस नजारे के बारे में याद करके तो इस समय भी उसका लंड खड़ा होने लगा था,, दोनों की बातों को सुनकर तृप्ति भी खाना खाते हुए बोली,,,)

तुम दोनों अगर इतनी तारीफ कर रहे हो तो सच में अगली बार में भी चलूंगी क्योंकि मुझे भी गांव पसंद है,,,।

अरे तृप्ति वह तो तेरे मामा का घर है,,,,जो दादा से अलग रहते हैं लेकिन अगर तू अपने दादा के घर जाएगी तो तेरा इधर आने का मन ही नहीं करेगा,,,।

ऐसा क्यों मम्मी,,,?

अरे पूछो गांव की अाबो हवा है ही ऐसी,,, चारों तरफ लहराते हुए खेत हरियाली छोटे-छोटे तालाब बड़ी-बड़ी नदियां हर तरह के फल का बगीचा बड़े-बड़े पेड़ ऊंची नीची कच्ची सड़क और गांव मेंघास फूस की बनी झोपड़ी सच में बहुत मजा आ जाता है नहाने के लिए हेड पंप या कु्ए पर जाना पड़ता है उन सबका अपना अलग ही मजा है,,,।

क्या बात करती हो मम्मी क्या गांव में सच में यह सब होता है,,,(अंकित एकदम आश्चर्य जताते हुए बोला)

तो क्या गांव में बहुत मजा आता है,,,।

तब तो मम्मी हम लोगों को गांव चलना चाहिए,,,।(तृप्ति उत्सुकता दिखाते हुई बोली)

चलना तो चाहिए लेकिन बिना काम के चलने में पैसे बहुत खर्च हो जाते हैं,।

तो क्या हुआ मम्मी एक बार हम लोगों को गांव घूमाना तो चाहिए तुम्हें,,,।

अच्छा कोई बात नहीं समय आएगा तो हम सब चलेंगे गांव,,,,।

(इतना कह कर फिर से तीनों खाना खाने लग गए थोड़ी देर में खाना खा लेने के बाद,,, तृप्ति और सुगंधा दोनों बर्तन साफ करने लगे तृप्ति तो अपनी मां को रोक रही थी बर्तन साफ करने से लेकिन वह मानी नहीं और साथ में बैठ गई,,,बर्तन साफ करने के बाद तीनों कुछ देर तक टीवी देखते रहे और फिर अपने अपने कमरे में चले गए लेकिन तीनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी जिसका कारण था कि तीनों की आंखों में वासना की चमक पूरी तरह से अपना असर दिखा रही थी,,, बस में हुए घमासान घर्षण को याद करके अंकित अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया था अपने हाथ से अपने लंड को हिला कर अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रहा था,,,।

सुगंधा अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी पैंटी को अपने हाथों से निकाल कर अपनी गरमा गरम बुर को अपनी हथेली से जोर-जोर से रगड़ रही थी मसला रही थीऔर यह क्रिया करते हुए अपने आप को खुश रही थी क्योंकि उसे अब लग रहा था कि उसके पास वही अच्छा मौका था जब खिड़की से देखते हुए उसके बेटे ने भी वही दृश्य को देखा था जिसे देखकर वह गर्म हो रही थीइस समय वह अपने बेटे को सब कुछ सही-सही बता देती तो शायद छत के ऊपर दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो जाता,,।

और तृप्ति सुमन को याद करके अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर अपनी चूची को एक हाथ से पकड़ कर दबाते हुए दूसरे हाथ की हथेली से अपनी गरमा गरम बुर को रगड़ रही थी और अपने भाई के लंड के बारे में सोच रही थी,,वह अपनी मन में सोच रही थी कि अगर उंगली से उसे इतना आनंद मिला है तो अगर उसके भाई का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में जाकर अंदर बाहर करेगा तो कितना मजा आएगा यही सब सोचते हुए वह भी अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने में लगी हुई थी,,,।

तकरीबन10 12 दिन का समय गुजर चुका था लेकिन इन दिनों में सुगंधा अपने बेटे से उस दृश्य के बारे में चर्चा नहीं कर पाई थी और ना ही बस के सफर के दौरान जो कुछ भी हुआ था उसे बारे में कोई बात कर पाई थी,,,और मन तो दुखी उसका इस बात से ताकि इस बारे में उसके बेटे ने भी उससे कुछ भी नहीं पूछा था क्योंकि सुगंधा को लग रहा था कि बातचीत आगे बढ़ाने का यही अच्छा मुद्दा है,,, लेकिन फिर भी थी तो वह एक मा ही अगर मन की जगह एक औरत होती तो शायद वह कब से आगे बढ़ गई होती और वह औरत उसके अंदर बार-बार जन्म भी ले रहा था लेकिन वह अपने आप को आगे नहीं बढ़ा पा रही थी,,, इस बात का मलाल उसे अच्छी तरह से हो रहा था,,,।

एक दिन सुगंधाअपने बेटे अंकित और अपनी बेटी प्रीति के साथ बाजार सामान खरीदने गई थी,,, लेकिनएक दिन जब वह बाजार सब्जी लेने गई थी अपने बेटे के साथ तब फुटपाथ पर कुछ लड़के उसके खूबसूरत बदन उसकी जवानी पर फब्तियां कस रहे थे,,और उन लड़कों के कहने का मतलब बिल्कुल साफ था कि वह लड़के उसे चोदना चाहते थे उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर उत्तेजित में जा रहे थे उसकी बड़ी-बड़ी चूची उनके बीच आकर्षण का केंद्र था और वह लोग खुलकर उसके साथ-साथ अपनी मां बहन के बारे में भी गंदी बातें कर रहे थे,,, उसे दिन से लेकर आज तक सुगंधा जब भी बाजार सब्जी लेने जाती थी तब फुटपाथ पर खड़े आवारा लड़कों से दूरी बनाकर ही चलती थी,,, बहुत दिनों बाद सुगंधा अपने बेटे के साथ-साथ अपनी बेटी को भी लेकर आई थी क्योंकि अक्सर कोचिंग के सिलसिले से त्रप्ति घर पर मौजूद नहीं होती थी,, और ऐसे में सुगंधा को अंकित के साथ ही बाजार जाना पड़ता था,,,।

सुगंधा घर का सामान और सब्जियां खरीद चुकी थी और अंकित और तृप्ति को समोसा चाट के साथ-साथ पानी पुरी भी खिला रही थी और खुद भी खा रही थी,,,और उन दोनों के साथ नाश्ता करने के बाद वह बाजार के मुख्य सड़क पर आ गई थी जहां से उन लोगों को वापस घर की तरफ आना था,,, लेकिन सुगंधा ने देखी की तृप्ति बार-बार बाजार की तरफ ही देख रही थी इसलिए वह तृप्ति से बोली,,,।।

क्या हुआ बार-बार वहां क्या देख रही है,,।

मुझे और पानी पुरी खाना है,,,।

अभी तो तुम खाई ना,,,।

तो क्या हो गया मन थोड़ी ना भरा है मेरा मन और कर रहा है खाने को,,,।

हे भगवान कैसी लड़की है इसका पेट ही नहीं करता अभी घर पर जाएगी तो कहेगी कि भूख नहीं लगा है,,, और इसके हिस्से का खाना बेकार हो जाएगा,,,,(ऐसा कहते हुए बटुआ में से 10 का नोट निकालते हुए वह तृप्ति की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

ले जाकर खा ले और जल्दी से खाना,,,(उसे रुपया थमाने के बाद वह अंकित की तरफ देखने लगी और बोली,,) तुझे भी और खाना है,,,.

नहीं नहीं मेरा तो हो गया मैं नहीं खाऊंगा,,,।

ठीक है तू ही जा जल्दी से आना,,,,

ठीक है अभी जल्दी से आती हुं उसने बराबर तीखा नहीं डाला था इसलिए मजा नहीं आया,,,(इतना कहकर तृप्तिजल्दी-जल्दी उसे ठेले वाले के पास जाने लगी और मां बेटे दोनों वही बड़े से पेड़ के पास फुटपाथ के किनारे खड़े होकर जहां पर एक 5 फीट की दीवार भी जाती थी और आगे से थोड़ी टूटी हुई थी,,,यह वह जगह नहीं थी जहां पर पहले सुगंध जानबूझकर पेशाब करते हुए अपनी गांड अपनी बेटी को दिखा रही थी यह जगह उससे पहले ही थी बाजार की शुरुआत में,,, यहां पर भी लोगों का आना-जाना अच्छा खासा बना रहता था क्योंकि यहीं से बाजार भी शुरुआत भी होती थी,,,।

कुछ देर खड़े रहने के बाद सुगंधा को वाकई में पेशाब लगने लगी,,, वह इधर-उधर देखने लगी वह जानती थी कि यह उचित जगह नहीं थी पेशाब करने कीक्योंकि यहां पर लोगों का आना-जाना काफी था इसलिए वह अपने आप को रोक रह गई थी अपने आप पर काबू किए हुए थी,,,लेकिन फिर भी रह कर उसके पेशाब की तीव्रता बढ़ती जा रही थी उससे अब काबू नहीं हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि अगर वह कुछ देर तक ऐसे ही खड़ी रही तो अपने आप ही उसकी पेशाब छूट जाएगी,,, इन सबसे अनजान अंकित अपनी ही धुन में खड़ा होकर इधर-उधर देख रहा था,,, सुगंधा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,पहले तो ऐसे हालात में वहां किसी भी तरह से किसी न किसी बहाने से अपनी नंगी गांड को अपने बेटे को दिखाने की कोशिश करती थी लेकिन इस समय का हालात कुछ और था यहां पर ऐसा कुछ भी नहीं था कि जानबूझकर अपने बेटे को अपना खूबसूरत अंग दिखाएं क्योंकि ऐसे में दूसरे के भी देखे जाने की अाशंका बढ़ जाती थी। इसलिए वह इस समय दीवार की दूसरी तरफ जाकर पेशाब करने से कतरा रही थी वह तृप्ति का इंतजार कर रही थी कि जल्दी से वह आए तो घर की तरफ जाए,,,,इसलिए वह बार-बार इस दिशा में देख रही थी लेकिन दूर-दूर तक तृप्ति का कोई ठिकाना नहीं था,,,।

लेकिन पेशाब की तीव्रता अब असहनीय होने लगी उसे लगने लगा कि अब छोड़ जाएगा इसलिए वह जल्दी से थैले को अंकित के हाथों में पकडाते हुए बोली,,,,।

अंकित तु थैला पकड़,, मैं अभी आती हूं,,,,।

(अंकित थैला पकड़ने से पहले ही बोला,)

लेकिन तुम कहां जा रही हो मम्मी,,,,?

ज्यादा सवाल मत पूछ मैं अभी आती हूं ले जल्दी से पकड़ ले,,,।
(इतना कहने के साथ ही वह थैले को अंकित के हाथ में पकड़ा दिया और अंकित भी बिना कुछ आगे पुछे थैले को हाथ में ले लिया,,, और देखने लगा कि उसकी मां क्या करती है,,,, सुगंधा को तो बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई इसलिए वह अपने आप को बिल्कुल भी रोक सकने की स्थिति में नहीं थी इसलिए वह तुरंत फुटपाथ से लगी दीवार जो थोड़ी सी टुटी हुई थी उसमें से प्रवेश करके दूसरी तरफ जाने लगी, यह देखकर अंकित भी समझ गया कि उसकी मां कहां जा रही है इसलिए कुछ बोला नहीं वैसे तो ऐसी स्थिति में उसका बहुत मन करता था अपनी मां को पेशाब करते हुए देखने के लिए लेकिन यहां पर ऐसा करना मुनासिब नहीं था क्योंकि यह जगह लोगों के आने जाने के लिए थी और बिल्कुल भी सुनसान नहीं था इसलिए अगर ऐसी स्थिति में वह देखने की कोशिश करता है तो किसी के भी नजर में आ जाएगा,, और ऐसे में शर्मनाक स्थिति पैदा हो सकती है इसलिए वह अपने आप को अपनी मां को पेशाब करते हुए देखने से रोकने लगा,,,

सुगंधा जल्दबाजी दिखाते हुए पीछे की तरफ पहुंच चुकी थी और इधर-उधर देख भी नहीं वह अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर एकदम से कमर तक उठाकर वहीं पर पेशाब करने के लिए बैठ गई थी,,, जैसे ही उसके गुलाबी छेद में से पेशाब का फवारा फुटा उसे राहत महसूस होने लगी और उसे इस बात का एहसास भी होने लगा था कि अगर वह जरा सी देरी लगती तो शायद साड़ी में ही उसका पेशाब छूट जाता तब शर्मनाक स्थिति पैदा हो जाती,,,,, पेशाब की तीव्रता इतनी थी कि बैठने के बावजूद भी तकरीबन डेढ़ मीटर तक उसकी बुर से पेशाब की धार निकल कर जा रही थी,, बाहर दीवार के पीछे खड़े अंकित का मन बहुत मचल रहा था लेकिन वह किसी तरह से अपने आप को रोके हुए था और बाजार की तरफ देख रहा था जहां पर तृप्ति पानीपुरी खाने के लिए गई थी,,,, जहां पर वह खड़ा था वहां लगातार लोगों का आना-जाना बना हुआ था इसलिए वह छुपकर भी उस नजारे को देख नहीं सकता था,,,।

धीरे-धीरे सुगंधा के पेशाब की तीव्रता कम होने लगी लेकिन फिर भी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके पास में ही कुछ पानी जैसा गिर रहा है वह एकदम हैरान हो गई थी इधर-उधर देखने लगी उसे कहीं कुछ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन तभी उसे ऐसा लगा कि पेड़ के पास से ही वह आवाज आ रही है और वह बड़े गौर से देखी तो एकदम से हैरान हो गई उसकी सांस एकदम से अटक गई,,, अपनी स्थिति पर उसे शर्म महसूस होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अभी भी उसकी बुर से पेशाब की धार निकल रही थी भले ही कमजोर पड़ गई थी लेकिन धार बराबर निकल रही थी लेकिन जो उसकी आंखों के सामने पेड़ के पास था वह उसे एकदम शर्मिंदगी का एहसास करने के लिए काफी था,,, अगर उसकी जगह कोई और औरत होती तो शायद उसकी भी यही स्थिति होती,,,।

बड़ी गौर से देखने के बाद चित्र स्पष्ट हो गया था पेड़ के पीछे कोई आदमी खड़ा था जो अपना लंड बाहर निकाल कर पेशाब कर रहा था,,, इस नजारे को देखकर सुगंधा एकदम से ठीठक गई,,, उसकी तो पेशाब एकदम से रुक गई थी वह कुछ पल के लिए उस नजारे को देखते ही रह गई,,, सामान्य अवस्था में वह पेशाब नहीं कर रहा था इतना तो तय था क्योंकि उसका लंड पूरी तरह से उत्तेजित था एकदम खड़ा था वह उत्तेजित अवस्था में पेशाब कर रहा था,,,, सुगंधा को क्या करना है उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह तो बस एक टक उसकी तरफ देखती ही जा रही थी,, पहली बार किसी गैर मर्द को अपनी इतनी करीब खड़ा होकर पेशाब करते हुए देख रही थी,, इससे पहले केवल उसके पास खड़े होकर उसका बेटा ही पेशाब किया था क्योंकि ऐसा वह चाहती थी वरना उसके बेटे की भी हिम्मत नहीं थी कि उसके पास में खड़ा होकर पेशाब कर सकें,,,।

सुगंधा का मन विचलित हुआ जा रहा था क्योंकि वह आदमी अपनी लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर उसे आगे पीछे करके हिलाते हुए पेशाब कर रहा था, यह नजारा देखकर वह इतना तो समझ ही गई थी कि सामान्य रूप से वह पेशाब नहीं कर रहा था बल्कि इसकी कोई खास वजह थी उसके अंदर गंदी भावना पैदा हो रही थी और जल्द ही उसे इस बात का पता भी चल गया क्योंकि जिस तरह से सुगंधा उसकी तरफ देख रही थी उसे आदमी को लगने लगा कि वह भी रुचि रख रही है इसलिए वहां अपने लंड को हिलाते हुए ही बोला,,,।

मैडम तुम्हारी गांड बहुत मस्त है तुम्हारी नंगी गांड देखकर करी मेरा लंड खड़ा हो गया है,,,, अगर तुम्हें एतराज ना हो तो यही झुका कर तुम्हारी ले लुं,,,,।
(उसे अनजान आदमी की इस तरह की गंदी बातें सुनकर तो ऐसा लग रहा था की सुगंधा के कानों में हथौड़े बरस रहे हो सुगंध को उम्मीद नहीं थी कि कोई आदमी इस तरह से उसे बदतमीजी करेगा इस तरह से उससे गंदी फरमाइश करेगा,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वैसे इस समय आप गलती उसकी भी थी उसे आदमी को देखकर भी वहां तुरंत उठकर खड़ी होकर सामान्य स्थिति में नहीं हो पा रही थी अब अभी वह उसे ही देखते हुए इस तरह से बैठी हुई थी साड़ी कमर तक उठे उसकी नंगी गांड एकदम साफ दिखाई दे रही थी और यही वजह थी कि वह अनजान आदमी पूरी तरह से मदहोश और उत्तेजित हो गया था और मदहोशी में इस तरह की फरमाइश कर रहा था,,,,,, सुगंधा को वह सहज होते हुए ना देखकर उसकी हिम्मत बढ़ने लगी और उसकी दोनों टांगों के बीच देखते हुए वह अपने लंड को हिलाते हुए बोला,,,)

क्यों मैडम कैसा लगा मेरा लंड बोलो तो अभी तुम्हारी बुर में डाल दुं,,,,,(ऐसा कहते हुए वह एकदम से पेड़ के पीछे से बाहर आ गया और यह देखकर सुगंधा एकदम से घबरा गई,,, और वह अपने कदम को आगे बढ़ा रहा था यह देखकर तो उसकी हालत और खराब होने लगी वह तुरंत उठकर खड़ी हो गई तो अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर दी वह उसे कुछ बोल नहीं पाई बस गुस्से में इतना ही बोली,,,)

बदतमीज कहीं का अपनी मां बहन के पास चले जा,,।
(और इतना कहकर वह तुरंत टूटी हुई दीवार से फिर से फुटपाथ पर आ गई,,,,,, अपनी मम्मी को देख कर अंकित बोला)

कितनी देर लगादी मम्मी,,,,।

चल कोई बात नहीं,,,, तृप्ति आई कि नहीं,,,,!(तिरछी नजर से दीवार के पीछे की तरफ देखते हुए गोरी वह आदमी अभी भी वहीं खड़ा होकर मुस्कुराता हुआ अपने लंड को हिला रहा था वह अपने मन में बोली कितना बेशर्म है,,,, हरामजादा अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला)

वह देखो आ रही है दीदी,,,, वह भी बहुत समय लगा दी,,,,।

(इसके बाद रास्ते पर सुगंधा उसे आदमी के बारे में सोचती रही कि कैसा बदतमीज और बेशर्म इंसान है,,, सीधे-सीधे उसे चोदने की बात करने लगा,,, फिर अपने मन में सोचने लगी की इसमें उसकी ही गलती है वह ज्यादा देर तक उसे आदमी के सामने भी बैठकर पेशाब करती रही ऐसे में उसकी नंगी गांड और टांगों के बीच की गाली देकर उसकी हिम्मत बढ़ गई थी अगर सच में उसकी जगह कोई और होता तो वह उठकर खड़ी हो जाती है और अपने कपड़े को ठीक कर लेती उसका देर तक बैठे रहना ही उसे आदमी की हिम्मत को बढ़ा रहा था और उसकी हिम्मत इतनी बढ़ गई कि सीधे-सीधे उसे अपने मन की फरमाइश करने लगा,,,।

इस बात को सोचते हुए वह अपने बेटे के बारे में सोचने लगी कि उस आदमी और उसके बेटे में कितना फर्क है तू जरा सी देर हो जाने पर सीधा मुद्दे की बात पर आ गया था और उसका बेटा उसकी आंखों के सामने जानबूझकर अंग प्रदर्शन करने के साथ-साथ ऐसी तमाम हरकत करने के बावजूद भी उसका बेटा अभी तक उसके इशारे को पूरी तरह से समझ नहीं पाया था और अपने मन की बात को कह नहीं पाया था,,, यही सब सोचते हुए सुगंधा घर पहुंच गई थी।

सुगंधा घर पर पहुंचने के बाद भी उस आदमी के बारे में सोच रही थी,,, इस बारे में उसने किसी को यह बात नहीं बताई थी उसे समय अंकित भी वहीं मौजूद था लेकिन अंकित को अहसास तक नहीं हुआ की दीवार की पीछे उसकी मां को पेशाब करते हुए देखकर कोई के इंसान उसके सामने चोदने की फरमाइश रख रहा है,,, और इस बात को सुगंधा ने अपनी बड़ी बेटी तृप्ति को भी नहीं बताई थी,,, सुगंधा रात को अपने बिस्तर में लेटे-लेटे इसी के बारे में सोच रही थी। सुगंसुगंधा घर पर पहुंचने के बाद भी उस आदमी के बारे में सोच रही थी,,, इस बारे में उसने किसी को यह बात नहीं बताई थी उसे समय अंकित भी वहीं मौजूद था लेकिन अंकित को अहसास तक नहीं हुआ की दीवार की पीछे उसकी मां को पेशाब करते हुए देखकर कोई के इंसान उसके सामने चोदने की फरमाइश रख रहा है,,, और इस बात को सुगंधा ने अपनी बड़ी बेटी तृप्ति को भी नहीं बताई थी,,, सुगंधा रात को अपने बिस्तर में लेटी हुई इन्हीं सब के बारे में सोच रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार उसका बेटा है कितना बुद्धू क्यों है जो कि उसकी आंखों के सामने हुआ इतना अंग प्रदर्शन कर चुकी थी उसका एक-एक अंग उसे खोलकर दिखा चुकी थी लेकिन फिर भी वह उसके इशारे को समझ नहीं पा रहा था,,, अपने बेटे की मूर्खता पर उसे बहुत गुस्सा आ रहा था। क्योंकि उसकी प्यासा बदन अब उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं था।

बाजार में दीवार के पीछे जो कुछ भी हुआ था वह भले ही कुछ पल के लिए सुगंध को हैरान और डरा देने वाला था लेकिन मन ही मन हुआ उसे आदमी को उसकी हिम्मत को दाद दे रही थी की पहली मुलाकात में ही उसने अपने मन की बात उसके सामने रख दिया था,,, और बदले में उसने की क्या थी बस उसके सामने कुछ देर तक पेशाब करने लग गई थी बस इसी से उसकी हिम्मत बढ़ गई थी और उसने अपने मन की बात उसके सामने कह दी थी और उसकी वासना इतनी बढ़ गई थी कि उसकी आंखों के सामने ही अपने लंड को निकाल कर उसे हिला रहा था मानो संकेत दे रहा हो कि बस अब हो गया तुम्हारी इजाजत हो तो तुम्हारी चुदाई कर दुं,,, इतने से ही मन आदमी सब कुछ समझ गया था लेकिन उसका बेटा अभी तक नहीं समझ पाया था जो कि अपने हाथों से उसे चड्डी तक पहना चुका था बाथरूम के दरवाजे के छोटे से छेद से देख भी चुका था कि उसकी मां कितनी प्यासी है फिर भी वह आगे बढ़ने से डर रहा था या वाकई में वह पूरी तरह से बुद्धु था,,, और उसे आगे कुछ आता ना हो शायद इसीलिए वह आगे बढ़ने से कतरा रहा था,,,,

सुगंधा अपने मन में सोच रही थी कि अगर वाकई में उसे कुछ नहीं आता तो इसमें क्या हो गया वह खुद उसे सीखाने के लिए तैयार है बस वह आगे तो बढे,,, लेकिन एक सीमा के आगे वह अपने कदम आगे बढ़ा नहीं पा रहा है,,, औरत के जिस को देखकर उसके बदन में उत्तेजना का एहसास होता है वह भी मदहोश हो जाता है इस बात का पता सुगंधा को अच्छी तरह से था,, जिसका एहसास हुआ कहीं बार महसूस कर चुकी थी बस के अंदर तो हद हो गई थी अगर वह साड़ी ना पहनी होती तो शायद उसके बेटे का लंड उसकी बुर में घुस गया होता इस कदर वह बावला हो गया था,,,, यही सब सो कर सुगंधा हैरान हो रही थी और अपने मन में आगे बढ़ने का कोई रास्ता ढूंढ रही थी उसे लगने लगा था कि अब मंजिल तक पहुंचना जरूरी है सफर का मजा तो वह पूरा ले रही है लेकिन मंजिल पर पहुंचने की उत्सुकता अब बढ़ती जा रही है,,, लेकिन कैसे बढ़ा जाए कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,।

यही सब सोचते हुए सुगंधा रोज की तरह ही,, अपने पसंद से एक-एक करके सारे कपड़ों को उतार कर एकदम नंगी हो गई और अपने दोनों टांगों को फैला कर अपनी उंगली से अपनी जवानी की आग को शांत करने की नाकाम कोशिश करने लगी वह जानती थी कि जब तक उसकी बुर में मोटा तगड़ा लंड नहीं घुसेगा तब तक यह आग भडकती रहेगी,,,, एक अजीब सी स्थिति हो जाती है जब इंसान को पता हो कि उसका इलाज क्या है और सब कुछ उसके पास में करीब में होने के बावजूद भी वह अपना इलाज उचित ढंग से ना कर पाए यही उसकी सबसे बड़ी बदकिस्मती होती है और इस समय सुगंध अपने आप को सबसे बड़ी बस किस्मत समझ रही थी,,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि अब उसे ही कुछ करना होगा,,, जैसा कि वह पहले भी सोच चुकी थी और उस दिशा में अपने कदम बढ़ाती भी थी लेकिन कुछ दूरी पर जाकर उसके कदम खुद ब खुद रुक जाते थे।

सुबह सबसे पहले अंकित की आंख खुली,,,, लेकिन उसने महसूस किया कि घर में किसी भी प्रकार का चल-पा नहीं हो रहा था किसी प्रकार की हलचल नहीं थी कोई शोर शराबा नहीं था जिसका मतलब साफ था कि अभी घर में सब सो रहे हैं और वैसे भी किसी को कहीं जाना तो था नहीं इसलिए चैन की नींद सो रहे थे स्कूल में छुट्टी पड़ चुकी थी इसलिए उसकी मां भी निश्चित थी लेकिन उसका मन हुआ कि चलो थोड़ा- बाहर टहल लिया जाए,,,,, इसलिए वह अपनी बिस्तर से उठ कर बैठ गया और फिर अपनी आलस को मारते हुए धीरे से बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया,,, दीवार पर टंगी घड़ी पर देखा तो अभी 5:00 बज रहे थे,,, शायद आज वह जल्दी ही उठ गया था,,, बाहर अभी भी अंधेरा था इसलिए वह सोचा कि थोड़ी देर बैठ जाऊं फिर उठ कर चला जाऊंगा और यही सोचकर वह फिर से बैठ गया।

सुबह-सुबह अचानक उसके मन में उसकी मां के बारे में ख्याल आने लगा राहुल की बातें याद आने लगी उसे औरत की स्थिति का ज्ञान होने लगा, वह समझ रहा था कि उसकी मां चुदवाने के लिए तड़प रही है,,, उसे अपनी मां की स्थिति का अच्छी तरह से एहसास था वह जानते थे कि उसकी मां बिना पति के बरसों से इसी तरह से अपना जीवन गुजार रही थी,,, उसके मन में भी जिस्म की चाहत जगती होगी,,, वह भी अपनी बुर में लंड लेना चाहती होगी तभी तो बस में उसकी गांड के बीचों बीच लंड घुसने के बावजूद भी उसने बिल्कुल भी रोकने की कोशिश नहीं की थी अगर उसे यह सब खराब लगता तो इस समय वह मुझे अपने आप से दूर रहने के लिए बोलती मुझे डांट लगाती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था,, बल्कि बस में अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि वह खुद अपनी गांड को उसकी तरफ ठेल रही थी,,, इन सब बातों को याद करके अंकित अपने मन में सोच रहा था कि अगर वह घटना घर में घटी होती तो शायद उसकी मां अपने हाथों से अपनी साड़ी कमर तक उठा देती और अपने हाथ से लंड को पकड़ कर अपनी बुर पर सटा दी होती,,,

और अगर सच में उसके मन में ऐसा कुछ ना होता तो वह अपने भाई के घर खिड़की पर आधी रात को खड़ी होकर चुदाई का नजारा ना देख रही होती,,,, इन सब बातों को सोचकर अंकित अपने आप में ही दुखी हो रहा था और उत्सुक भी हो रहा था क्योंकि उसे इतना तो पता चल गया था कि उसकी मां चुदवाना चाहती है लेकिन आगे बढ़ने से डर रही है शायद शर्म और संस्कार की वजह से वह अपने आप को ऐसा करने से रोक रही है अगर ऐसा है तो उसे ही कुछ करना होगा उसे ही इस खेल को पूरा करना होगा क्योंकि वह भी तो यही चाहता है,,,, एक बेटा होने के शायद वह ऐसा ना कर सके लेकिन एक मर्द होने के नाते वह ऐसा जरूर कर पाएगा ऐसा उसके मन में पूरा विश्वास था और वह भी यही चाहता ही था,, इन सब बातों को सोचकर सुबह-सुबह अंकित उत्तेजित हो गया था,,, और तकरीबन 10 15 मिनट गुजर भी चुके थे इसलिए वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और अपने कमरे से बाहर आ गया,,, अपनी मां के कमरे से गुजरते हुए वह अपने मन में सोचा कि एक बार देख लो कि उसकी मां सो रही है या जाग रही है अगर जाग रही होगी तो जाते समय बोल दूंगा कि दरवाजा बंद कर ले,,, ऐसा सोचकर वह अपनी मां के कमरे के सामने खड़ा हो गया।

वह दरवाजे पर दस्तक दिए बिना अपनी मां को आवाज लगाकर जागना चाहता था और यह देखना चाहता था कि वह सो रही है कि जाग रही है लेकिन तभी ऐसा सोचते हुए उसका एक हाथ दरवाजे पर
अपने आप ही स्पर्श हो गया और उसके स्पर्शों से ही दरवाजे का एक पल्ला धीरे से खुलने लगा,, दरवाजे का पल्ला खुलने की वजह से अंकित को लगने लगा कि उसकी मां जग रही होगी तो उसे खाने में आसानी होगी इसलिए वह एक पल्ला पूरी तरह से खुलने दिया और कमरे के अंदर देखने लगा अंदर लाल कलर का हल्के वोल्टेज का गोला जल रहा था जिसकी रोशनी में सब को साफ दिखाई दे रहा था लेकिन फिर भी अंदर का दृश्य सबको साफ दिखने में कुछ पल का समय लगा।
और जैसे ही अंदर का दृश्य एकदम साफ होने लगा अंकित के दिल की धड़कन एकदम से बढ़ने लगी उसकी नजर कमरे के एक तरफ के दीवार से सटे हुए बिस्तर पर पड़ी जिस पर उसकी मां सो रही थी लेकिन बिना कपड़ों के एकदम नंगी उसके पसंद से साड़ी उसका ब्लाउज उसका पेटिकोट सब कुछ बिस्तर के नीचे बिखरा पड़ा हुआ था और उसकी मां पीठ के बाल एकदम आराम से गहरी नींद में सो रही थी इस नजारे को देखकर तो अंकित का दिल और जोरो से धड़कने लगा उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां इस तरह से सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर क्यों सो रही है,,,, उसके दिल की धड़कन कैसा लग रहा था कि उसका साथ नहीं दे पा रही थी और बेकाबू होकर चल रही थी। पर धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ रहा था।और जैसे-जैसे अपनी मां के बिस्तर की तरफ बढ़ रहा था वैसे उसे दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह आगे बढ़ेगा इसी समय दबे पांव वापस लौट जाए क्योंकि उसकी मां के उठने का समय हो गया था अगर ऐसी हालत में उसकी भीख खुल गई और उसे इस तरह से अपने कमरे में देख ली तो पता नहीं क्या समझेंगी यही सब सोच कर उसका दिल जोरो से धड़क रहा था,,,, कुछ पल के लिए अपनी मां को इस तरह से अस्त्र-व्यस्त हालत में सोता हुआ देखकर अंकित के मन में कुछ और सबका होने लगी वह अपने मन में सोचने लगा कि कहीं उसकी मां के कदम सच में जगमगा तो नहीं गए हैं कहीं सच में उसकी मां अपनी जवानी की आग को अपने हाथों से बुझा पानी में असमर्थ तो नहीं हो गई है कहीं ऐसा तो नहीं की एकदम चुदवासी होकर वह कोई गलत कदम तो नहीं उठा ली,,, गलत कदम उठा लेने से अंकित का मतलब था कि कहीं कोई गैर मर्द तो नहीं है जो उसकी मां की प्यास बुझा रहा हो।

जिस तरह के हालात थे अंकित का दिल शंका से भरा जा रहा था उसे लगने लगा था की कही वाकई में ऐसा तो नहीं हो गया,,, अंकित को इस बात का एहसास था कि उसकी मां महीनो से प्यासी थी प्यासी तो वह बरसों से थी लेकिन कुछ महीनो से अंकित को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी मां के बदन में चुदास की लहर कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी है,,, और अपने दोस्त राहुल से उसने सुना था कि औरत जब प्यासी होती है तो वह घर में ही अंग प्रदर्शन करती है किसी ने किसी बहाने से घर के जवान लड़की को अपने अंगों को दिखाने की कोशिश करती है ताकि उसके अंगों को देखकर रीझकर वह घर की औरत के बदन की प्यास बुझा सके उसे खुश कर सके,,, उसे संतुष्ट कर सके,,, उसकी जवानी की आग को अपने मर्दाना अंग से
बुझा सके,,,।

और यही सब सोच कर वह हैरान हुआ जा रहा था। उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी उसके चेहरे के भाव एकदम से बदलने लगे थे जहां उत्तेजना का एहसास उसके चेहरे पर दिखाई दे रहा था वही चिंता की लकीरें भी उसके चेहरे पर स्पष्ट दिखाई देने लगी थी।

वह अपने मन में सोच कर हैरान हो रहा था कि उसके दोस्त की बताई सभी हरकत है तो उसकी मां उसके सामने कर रही थी,,, उसके सामने अंक प्रदर्शन करना उसके सामने बैठकर पेशाब करना,,, नंगी गांड दिखाना यह सब तो उसकी हरकत में शामिल था यह सब को जानबूझकर उसे दिखा रही थी उसे अपनी तरफ रीझा रही थी ताकि अपनी जवानी की आग को अपने बेटे से बुझा सके,,, लेकिन वही मूर्ख था जो अपनी मां के इशारों को नहीं समझ पाया और आज उसकी मां दूसरी औरतों की तरह दूसरे मर्द का सहारा लेने लगी,,, अब तो यह सब सोच कर अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी उसे अपने आप पर गुस्सा आने लगा उसे यही लगने लगा था कि उसकी मां रात को किसी दूसरे मर्द को अपने कमरे में बुलाती है और रात भर चुदवाती है तभी तो इस समय वह नंगी होकर सो रही है उसके कपड़े बिस्तर के नीचे बिखरे पड़े हैं,,,, उसे इस समय अपनी मां पर नहीं बल्कि अपने आप पर ही गुस्सा आ रहा था वह अपने आप को ही कोस रहा था और अपने मन में सोच रहा था कि अगर वह अपनी मां के ईशारे को समझ जाता या थोड़ी हिम्मत दिखता तो आज उसके कमरे में वह होता कोई दूसरा मर्द नहीं,,,,।

यही सब सोचते हुए अपनी मां के बेहद करीब पहुंच चुका था एकदम बिस्तर के पास उसकी मां एकदम नंगी बेसुध होकर सो रही थी उसकी दोनों टांगे खुली हुई थी वह एकदम चित होकर सो रही थी जिसे उसकी बुर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और साथियों की शोभा बढ़ा रही है उसकी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छातियों पर लहरा रही थी,, यह सब देख कर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,, फिर उसके मन में ख्याल आया कि ऐसा भी तो हो सकता है कि वह खुद अपने हाथों से अपनी जवानी की प्यास बुझा रही हो। क्योंकि ऐसा तो होगा खुद भी कर चुका है और ऐसा करते समय वह भी अपने बदन से सारे कपड़े उतार कर फेंक देता है और अपने लंड को अपने हाथ से हिलाता है मुट्ठीयाता है,,, अब उसके मन में दो-दो ख्याल चल रहे थे….

वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या सच है लेकिन उसे अपनी मां पर पूरा विश्वास था वह जानता था कि उसकी मां इस तरह के कदम नहीं उठा सकती समझ में उसकी बदनामी हो ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकती और ऐसे हालात में तो वाकई में कमरे में किसी गैर मर्द को बुलाना अपनी इज्जत को खुद अपने हाथों से नीलाम करने जैसा हो जाता जब उसके मन में इस तरह का ख्याल आया तब जाकर उसके चेहरे पर शांति का आभास होने लगा उसके चेहरे पर मुस्कुराहट तैरने लगी क्योंकि उसे लगने लगा था कि अगर ऐसा कुछ होता तो उसे जरूर है कुछ ना कुछ ऐसा कुछ जरूर होता है कि नहीं ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था,,,,।

अपने मन में इस तरह का ख्याल आते ही उसका मन शांत होने लगा और वह बड़े गौर से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच की पतली लकीर को देखने लगा जो की सोते हुए भी उत्तेजित अवस्था में कचोरी की तरफ फुल गई थी,,,, अंकित के दिल की धड़कन फिर से बढ़ने लगी थी,,, इस समय उसकी मां की गुलाबी बुर दुनिया के सबसे हसीन और बेशकीमती खजाना लग रही थी,,, वह बड़ी गौर से अपनी मां के उस खूबसूरत अंग को देख रहा था जिसे पाने के लिए वह खुद तड़प रहा था। इस समय उसका मन तो कर रहा था कि इसी समय अपनी मां की गुलाबी बुर पर अपने होठ रखकर एक चुंबन कर ले,,, लेकिन ऐसा करने से उसका मन घबरा रहा था क्योंकि अगर उसकी मां की आंख खुल जाती तो गजब हो जाता,,,, ऐसा वह सोच रहा था लेकिन सच में उसकी मां जा चुकी थी उसे एहसास हो गया था कि उसका बेटा उसके बेहद करीब है और वह जिस अवस्था में सोई हुई है वाकई में यह फल उसके लिए बेहद उत्तेजनात्मक है।

सुगंधा अपनी आंखों को खोल नहीं रही थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर इस समय अपनी आंखों को खोल देगी तो उसका बेटा तुरंत कमरे से बाहर निकल जाएगा और वह देखना चाहती थी कि इस समय उसका बेटा क्या करना चाहता है क्योंकि ऐसा नजारा उसका बेटा पहले भी देख चुका था और आज वह देखना चाहती थी कि उससे बढ़कर आज उसकी कोई हरकत देखने को मिलती है या अभी भी वह पूरी तरह से बुद्धू है,,,, उसकी मां अपने बेटे में सुधार देखना चाहती थी उसकी हिम्मत को बढ़ते हुए देखना चाहती थी जैसा की बस में उसने थोड़ा बहुत हिम्मत दिखाया था,,,,,वह अपने मन में सोच रही थी कि अगर आज ऐसा कुछ हो जाता है तो आज ही वह अपने बेटे के लिए अपनी दोनों टांगों को खोल देगी भले ही इसके लिए उसे एकदम बेशर्म बनना पड़ेगा लेकिन अब वह पीछे नहीं है सकते इसलिए अपनी आंखों को बंद किए हुए थे और इस पल का आनंद ले रहे थी ‌।

दूसरी तरफ अंकित इस बात से अआस्वस्त था कि बहुत देर हो चुका था उसे अपनी मां के कमरे में आए लेकिन उसकी मां के बदन में जरा भी हलचल नहीं हो रही थी जिसका मतलब साफ था कि उसकी मां एकदम घोड़े बेच कर सो रही थी एकदम गहरी नींद में सो रही थी,,, यह एहसास होते ही अंकित के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी उसकी हिम्मत भी बढ़ने लगी थी वह धीरे से अपनी मां की खूबसूरत चेहरे की तरफ देखा उसके खूबसूरत रेशमी बालों की लटे उसके चेहरे पर आ चुकी थी,, और पंखे की हवा में इधर-उधर लहरा रही थी जिसकी वजह से उसकी मां की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जा रही थी,,,, लेकिन इस समय बेहद नाजुक क्षण था बहुत कम समय था और वह अपनी मां की खूबसूरत बालों की लटो में उलझना नहीं चाहता था उसे तो झांट के बाल में उलझना अच्छा लग रहा था,,,।

अंकित ने यहां पर एक बात पर ध्यान दिया था कि उसकी मां की बुर एकदम चिकनी थी उस पर बाल का रेशा तक नहीं था इसका मतलब साफ था कि उसकी मां निरंतर अपनी बुर की सफाई करती थी ताकि वह देखने में एकदम जंवा ताजा लगती रहे,,, लेकिन अब अंकित अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता था अब आगे बढ़ना चाहता था वह धीरे-धीरे अपनी मां की दोनों टांगों के बीच झुकने लगा और तिरछी नजर से अपनी मां के चेहरे की तरफ देख रहा था कि कहीं उसकी आंख ना खुल जाए,,,, उसे नहीं मालूम था कि अगर इस समय उसकी मां की आंख खुल जाएगी तो वह क्या जवाब देगा की क्या करने उसके कमरे में आया था ऐसा हुआ कुछ सोचा नहीं था बस इस समय अपनी मां को नंगी सोता हुआ देखकर उसकी हिम्मत बढ़ रही थी। रहरहकर वह अपनी सांसों को दुरुस्त करने के लिए गहरी गहरी सांस लेने लग जा रहा था क्योंकि उसकी सांसों की गति इस समय कुछ ज्यादा ही तेज चल रही थी उसे खुद की दिल की धड़कन की आवाज सुनाई दे रही थी।

अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी और वह धीरे से अपनी हथेली को अपनी मां की गुलाबी बुर की तरफ आगे बढ़ने लगा लेकिनउसके हाथों में उत्तेजना की कंपन थी एक डर था अपनी मां के जग जाने का और उत्सुकता थी कि कैसा महसूस होता है अपनी मां की बुर पर हथेली रखने पर जिसका मिला जुला एहसास अंकित के चेहरे पर दिखाई दे रहा था। अंकित की हथेली उसकी मां की दोनों टांगोंके बीच पहुंच चुकी थी उसकी बुर और हथेली में केवल चार अंगूल का ही फासला था लेकिन तभी अंकित के मन में डर की भावना बढ़ने लगी उसे एहसास होने लगा कि अगर उसकी मां जग गई तो गजब हो जाएगा और वह अपने कदम पीछे लेने के बारे में सोच ही रहा था कि तभी उसे ख्याल आने लगा।

कि अगर वास्तव में उसकी मां को एक मर्द की जरूरत है और अगर ऐसे में वह अपने कदम पीछे ले लेता है तो कुछ देर पहले अपनी मां के कमरे में दाखिल होने के बाद जो शंका है उसके मन में जाग रही थी वह शंका भी सच साबित हो जाएगी और उसकी मां अपनी जवानी की आग बुझाने के लिए किसी गैर मर्द की बाहों में पिघलने लगेगी अगर ऐसा हो गया तो उसे अपनी जवानी पर अधिकार होगा अपनी मर्दानगी पर धिक्कार होगा कि उसके होते हुए भी किसी गैर मर्द का सहारा उसकी मां को देना पड़ रहा है यही सब सोचकर वह एकदम से रुक गया और अगले ही पल वह अपनी हथेली को अपनी मां की बुर पर रख दिया जो कि एकदम दहक रही थी तप रही थी,,, अंकित को यह पल एकदम मदहोश कर देने वाला लग रहा था वह एकदम से गहरी सांस लेने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें।

और दूसरी तरफ सुगंधा की हालत खराब होती चली जा रही थी उसका मन कर रहा था कि अपनी आंखों को खोल दे और अपने बेटे के हाथ को अपनी बर पर ही पकड़ ले और उसे अपनी बाहों में खींच ले और सारी हसरतों को पूरा कर ले लेकिन वह इससे ज्यादा अपने बेटे की हरकत को देखना चाहती थी लेकिन जिस तरह की हरकत उसने किया था पूरी तरह से उसकी नसों में मदहोशी का रस खोल दिया था बड़ी मुश्किल से वह अपनी उत्तेजना पर काबू कर पाई थी,,,, अपने बेटे की गरम हथेली को अपनी गरम बुर पर महसूस करके वह पागल हुए जा रही थी। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बस बेसुध होकर चित लेटी हुई थी,,, उसकी भी सांस ऊपर नीचे हो रही थी लेकिन वह बड़ी मुश्किल से अपनी सांसों को तेज चलने से रोकी हुई थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर ऐसा हो गया तो उसके बेटे को शक हो जाएगा कि उसकी मां जाग रही है। सुगंधा भी अपने आप पर पूरी तरह से काबू किए हुए थी।

दूसरी तरफ अंकित ने जब देखा कि हथेली को बुर पर रखने के बावजूद भी उसकी मां के बदन में जरा भी हल-चल नहीं हुआ है तो उसकी हिम्मत बढ़ने लगी,,,, और वह अपने बदन में पहले से ही अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसकी मां की बुर की गर्मी उसके बाद में और भी ज्यादा उत्तेजना का एहसास दिला रही थी और वह उत्तेजना के चलते अपनी हथेली में अपनी मां की बुर को एकदम से जोर से दबोच लिया,,, ऐसा करने में अंकित को बहुत मजा आया लेकिन वह एकदम से घबरा गया था क्योंकि वह ऐसा करना नहीं चाहता था बस अपने मां पर काबू नहीं कर पाया था लेकिन फिर भी जब देखा कि उसकी मां इतने से भी नहीं जागी है तो उसके मन में प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे वह खुश होने लगा,,,, अब उसकी हिम्मत और बढ़ने लगी मन तो उसका कर रहा था किसी से मैं अपनी मां की दोनों टांगें खोलकर उसकी बुर में अपना लंड डाल दे और जो होगा देखा जाएगा लेकिन ऐसा करना उचित नहीं था,,।

क्योंकि वह अपनी मां के सामने अपनी बुद्धि का प्रदर्शन पहले ही कर चुका था अपने मामा और मामी की चुदाई को देखकर,,, उस समय उसे नजारे को देखकर हुआ अपनी मां से पूछ बैठा था कि वह दोनों क्या कर रहे हैं और अगर इस समय वहां वही दृश्य को दोहराएगा तो उसकी मां क्या समझेगी लेकिन फिर अपने सवाल का जवाब उसके मन में आ चुका था वह अपनी मां से वही बोलेगा जरूर समय उसकी मां उसे जवाब दी थी कि उसकी मामी बहुत परेशान है और उसके मामा उसकी परेशानी दूर कर रहे हैं,,,, लेकिन एक सवाल और खड़ा हो जाता है कि उसकी मां कहां परेशान नजर आ रही है जो वह इस तरह से उसकी परेशानी दूर कर रहा है इस तरह का ख्याल से ही वह अपने मन में से ईस युक्ति को निकाल दिया,,। और उठकर खड़ा हो गया क्योंकि उसकी मां के उठने का समय हो चुका था। वह अपने मन में सोच रहा था कि इतना तो बहुत है उसके लिए इस समय उसके पेंट में पूरी तरह से तंबू बन चुका था।

और दूसरी तरफ सुगंधा सोच रही थी कि उसका बेटा अपनी हरकत को थोड़ा और बढ़ाया उसकी बुर में उंगली डालें लेकिन वह तो ऐसा करने से पहले उठकर खड़ा हो गया था और यह सब सुगंधा अपनी आंख को हल्के से खोलकर देख रही थी उसके मन में निराशा जगने लगी थी,,,, लेकिन तभी अंकित को न जाने क्या हुआ वह तुरंत फिर से नीचे झुक गया और अपनी मां की दोनों टांगों के बीच अपना चेहरा ले जाने लगा उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी और यह सब हल्के से आंखों को खोलकर सुगंधा देख रही थी सुगंधा के दिल की धड़कन भी बढ़ने लगी थी जब उसका बेटा अपनी चेहरे को उसके दोनों टांगों के बीच ले जा रहा था उसके मन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं वह एकदम से कसमसा नी जाए उसके बदन में हलचल न होने लगे,,,, लेकिन जैसे तैसे करके वह अपने आप को काबू में किए हुए अपने बेटे की हरकत को देख रही थी,,,,।

और उसका बेटा मन में जैसे दृढ़ निश्चय कर लिया हो कि अब जो होगा देखा जाएगा,,, और अगले ही पल उसने को हरकत कर दिया इसके बारे में सुगंध कभी सोच भी नहीं करती थी अंकित अपने प्यासे होठों को अपनी मां की बुर पर रख दिया था और गहरी गहरी सांस ले रहा था अपने बेटे के होंठ को अपनी गुलाबी पर पर महसूस करते ही सुगंध एकदम से गनगना गई थी उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसकी बुर के अंदर अत्यधिक खुजली हो रही हो और वह अपनी बुर को अपने हाथों से अपनी उंगली को उसमें डालकर खुजलाना चाहती थी लेकिन अपने आप को किसी तरह से वह रोक रह गई थी और अंकित इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहता था अपनी मां की बुर पर अपने होठ को रखकर वह गहरी गहरी सांस ले रहा था और बुरे की गहराई से उठ मादक खुशबू को अपने नसों से अपनी छाती मैं उतार ले रहा था,,,, बर से उठ रही मादक खुशबू सिर्फ खुशबू नहीं थी एक नशा था जिसका कोई तोड़ नहीं था,,, और अंकित उसे नशे को जी भर के अपने अंदर ले रहा था।

ऐसी खुशबू का एहसास हुआ पहले भी महसूस कर चुका था सुमन की बुर से सुमन की बुर को अपने होंठ से अपनी जीभ जी भर के चाट चुका था इसलिए वह जानता था कि औरत की बुर चाटने में कितना आनंद देती है। लेकिन इस समय अंकित को घबराहट हो रही थी वह समझ नहीं पा रहा था कि इस समय वह अपनी मां के बुरे पर अपनी जीभ फिराए कि ना फिराए क्योंकि ऐसा करने में उसकी मां जा सकती थी लेकिन इस समय वह अपनी उत्तेजना को काबू भी नहीं कर पा रहा था वह जिस तरह से अपनी हिम्मत दिखाया था वह अपनी हिम्मत का आनंद भी ले लेना चाहता था वह अपनी मां की बुर को चाट लेना चाहता था पहले ही एक बार ही सही अपनी मां की बुर पर अपनी जीभ को घूमा लेना चाहता था,,,, इसलिए अपनी हिम्मत को आगे बढ़ाने के लिए वह अपनी नजर को उठाकर अपनी मां की तरफ देखने लगा कि कहीं वह जाग तो नहीं रही है लेकिन जैसे ही वह अपनी नजरों को ऊपर की तरफ करना चाहो वैसे ही सुगंधा अपनी आंखों को तुरंत बंद कर ली और फिर से गहरी नींद में होने का नाटक करने लगे और अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को देखकर अंकित समझ गया कि उसकी मां वाकई में एकदम घोड़े बेचकर सो रही है इसलिए उसकी हिम्मत बढ़ने लगी ,,,, और वैसे भी बाराती बनकर जो और वहां पर भोजन न करो तो बाराती बनने का कोई मतलब ही नहीं होता।

इसलिए इस मौके का पूरा फायदा अंकित उठा लेना चाहता था और इसीलिए अपनी मां की तरफ देखते हुए वह अपनी जीप को बाहर निकाला और अपनी मां की बुर की पतली दरार के ऊपर, ऊपर से नीचे तक नीचे लगाकर चाटना शुरू कर दिया और उतेजना के मारे वैसे भी उसकी बुर से मदन रस की बूंद बाहर निकल रही थी लेकिन यहां पर सुगंधा के लिए बेहद उत्तेजनात्मक और बदहवास कर देने वाला था वह पूरी तरह से पागल हुए जा रही थी बरसों के बाद एक तो पहली बार उसकी बुर पर किसी मर्दाना होठों का स्पर्श हुआ था‌। इसलिए उसका बावली होना लाजमी था वह अपनी उत्तेजना जना पर काबु पाने में असमर्थ साबित हो रही थी,,,, उससे रहा नहीं जा रहा था वह अंदर ही अंदर तड़प रही थी,,, उसका मन कर रहा था कि अपने दोनों हाथों से अपने बेटे का कर पकड़ कर अपनी कमर को गोल-गोल हिलाते हुए अपनी बुर को उसके चेहरे पर रगड़ डालें,,,,।

अंकित पूरी तरह से दीवाना हो चुका था मदहोश चुका था उत्तेजना के सागर में डुब चुका था,,, वह कभी सपने में नहीं सोचा था कि इस तरह से वह अपनी मां के कमरे में आएगा और इस तरह की हरकत कर बैठेगी वह ऐसी हरकत ना भी करता है अगर उसकी मां के बदन पर पूरे कपड़े होते तो अपनी मां को लग्न अवस्था में देखकर ही वह इस तरह के कदम उठाया था लेकिन ऐसा करने में से अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह तीन चार बार अपनी मां की बुर को चाटा और एकदम से उठकर खड़ा हो गया,,, सुगंधा के लिए यही मौका था वह अपने बेटे को अपनी बाहों में भर लेना चाहती थी उसके साथ मिलकर अपने अरमान को पूरा कर लेना चाहते थे लेकिन वह अभी इस बारे में सोच ही रही थी की फुर्ती दिखाता हुआ उठकर खड़ा हो गया था वैसे तो उसकी मां इस समय अपनी मां के कमरे से बाहर जाने का बिल्कुल भी नहीं कर रहा था लेकिन उसके इस तरह से उठकर खड़े हो जाने में बहुत बड़ा कारण था क्योंकि उसकी बहन के कमरे का दरवाजा खोलने की आवाज और तुरंत ही बाथरूम के बंद होने की आवाज उसके कानों में सुनाई दी थी वैसे तो वह इतनी मदहोशी में था कि इस तरह कि आवाज उसे ठीक तरह से सुनाई नहीं देती लेकिन फिर भी उसे एहसास हो गया था कि उसकी बहन बाथरूम में गई है,,,,।

इसलिए मन होने के बावजूद भी उसका यहां रुकना ठीक नहीं था और वैसे भी जिस तरह से उसकी मां घोड़े बेचकर सो रही थी उसकी हिम्मत और बढ़ती जा रही थी उसके मन में इससे भी ज्यादा करने की इच्छा जागरुक हो चुकी थी लेकिन अब उसका यहां रुकना ठीक नहीं था और वैसे भी अब सुबह पूरी तरह से हो चुकी थी इसलिए वह तुरंत अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया था,,,, सुगंधा भी मदहोशी में इतना डूब चुकी थी कि उसे भी तृप्ति के कमरे के खुलने की आवाज ठीक तरह से सुनाई नहीं देती लेकिन अपने बेटे के घर से बाहर जाते ही उसे बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज सुनाई दी थी और वह समझ गई थी कि उसका बेटा इस तरह से क्यों चला गया और इस समय उसे अपनी बेटी पर थोड़ा गुस्सा आ रहा था,,,, लेकिन वह कर भी क्या सकती थी शायद उसकी किस्मत में इतना ही लिखा था लेकिन फिर भी बदल में जिस तरह की उत्तेजना के तूफान को उसके बेटे ने जगा कर गया था उसे शांत करना बेहद जरूरी था लेकिन इस समय वह दरवाजा भी खुला था जिसे वहां रात को अनजाने में ही खुला छोड़ दी थी और अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा हुआ कि अनजाने में ही वह दरवाजा खुला छोड़ दी थी अगर खुल न छोड़ दी होती तो शायद इस तरह का सुख इस समय वह भोग नहीं पाती।

लेकिन अपने बेटे का अधूरा काम उसे पूरा करना था इसलिए नग्न अवस्था नहीं हुआ फिर बिस्तर से उत्तर खड़ी हो गई और तुरंत जाकर दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी और अपनी बिस्तर पर आकर अपनी दोनों टांगों को खोल दिया और अपनी उंगली चाहिए अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने की कोशिश करने लगी और थोड़ी देर में जैसे ही वह झड़ गई वह गहरी सांस लेते हुए अपने आप को दुरुस्त की और अपने कपड़े पहन कर घर के काम करने में लग गई,।

नाश्ता तैयार होने के बाद उसका बेटा भी घर पर आ गया था और नहाने के लिए बाथरूम में चला गया था जब वह नहा कर तैयार होकर आया तो सुगंधा उस नजर मिलाने में थोड़ा शर्मा रही थी लेकिन तभी उसके मन में ख्याल आया कि अगर वह इस तरह की हरकत करेगी तो उसके बेटे को शक हो जाएगा आगे नहीं बढ़ पाएगा इसलिए वह अपने बेटे से एकदम सहज हो गई मानो के जैसे कुछ हुआ ही ना हो और वैसे भी अंकित की नजर में तो वह गहरी नींद में सो रही थी इसलिए उसे कुछ मालूम ही नहीं था।

अंकित आज अद्भुत और अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त कर लिया था और इस तरह के अनुभव के बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था,,,, एक अतुलनीय अनुभव जो उसके कल्पना से भी परे था कल्पना में भी अंकित ने इस तरह का अनुभव के बारे में कभी सोचा भी नहीं था जिस तरह का अनुभव उसे आज प्राप्त हुआ था वह अपने मन में यही सोच रहा था कि अच्छा हुआ कि आज उसकी नींद समय से पहले खुल गई थी वरना इस तरह के अनुभव से वह पूरी तरह से अनजान रह जाता,,, वैसे तो वहां सुमन की बुर चटाई का अनुभव ले चुका थाऔर उसे सुमन की बुर चाटने में भी बेहद आनंद की प्राप्ति हुई थी।

लेकिन अंकित को अपनी मां का अनुभव कुछ ज्यादा ही अद्भुत और मजेदार लग रहा था वह कभी सोचा भी नहीं था कि कमरे में जाने पर उसकी मां उसे बिस्तर पर नंगी मिलेगी,,, लेकिन अपने बिस्तर पर उसकी मां नंगी क्यों लेटी हुई थी इस बारे में इसका निष्कर्ष उसे ही कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन जो अनुभव उसे मिला था वह बेहद यादगार था। जिसके आगे वह सब कुछ भूल चुका था,,, अंकित क्या उसकी जगह कोई और होता तो उसकी भी यही हालत होती क्योंकि नजर ही कुछ ऐसा था,,, किसी भी जवान लड़की की आंखों के सामने अगर उसकी मां संपूर्ण रूप से नग्नावस्था में बिस्तर पर गहरी नींद में सो रही हो तो वह नजारा ही उसके लिए बेहद खास हो जाता है,,,, अंकित तो कमरे में प्रवेश करते ही बस देखता ही रह गया था लेकिन फिर भी उसकी बहादुरी और हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी कि इस तरह के हालात में भी वह पूरी हिम्मत जताकर अपनी हरकत को अंजाम देने से नहीं चुका।

क्योंकि एक तरफ उसके मन में इस बात का डर था कि उसकी मां अगर जाग गई तो उसे अपने कमरे में और खुद को ईस अवस्था में देखकर ना जाने क्या समझेगी यह सब ख्याल मन में आने के बावजूद भी,,, अंकित अपनी मां की उत्तेजना और वासना को दबा नहीं पाया था जिसके चलते वह अपनी मां की मदहोश कर देने वाली कचोरी जैसी पूरी हुई पर्व पर अपनी होठ रखकर चुंबन करने से अपने आप को रोक नहीं पाया,,, इन सबके बावजूद भी यह क्रिया करने के बाद उसकी हिम्मत और ज्यादा बढ़ने लगी जिसके चलते वह अपनी जीत से अपनी मां की बुर में से निकल रहे मदन रस को चाट कर एकदम मस्त हो गया,,,, अंकित अपने आप को एकदम धन्य समझ रहा था और वाकई में इस समय वह अपने आप को सबसे भाग्यशाली समझ रहा था।

अपने बेटे की हिम्मत और उसकी हरकत को देखकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसके बेटे ने हरकत ही कुछ ऐसी करी थी,। उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी उसका बेटा इतनी हिम्मत दिखा पाएगा बरसों से प्यासी अपनी सूखी जमीन पर उसे अब लगने लगा था कि उसका बेटा हल चलाएगा जिससे उसकी भी जमीन एक बार फिर से उपजाऊ हो जाएगी,, सुगंधा बहुत खुश थी क्योंकि धीरे-धीरे ही सही उसके बेटे में हिम्मत बढ़ने लगी थी,,, और वह अपने मन में सोच रही थी कि अगर तृप्ति उठकर बाथरूम में ना गई होती तो शायद इससे भी ज्यादा उसका बेटा हरकत करता ,,, लेकिन आप उसके मन में यह निश्चित हो गया था कि उसका बेटा बुद्धू नहीं है अगर समय और हालात के मुताबिक चले तो वह भी एक अच्छा खासा मर्द बन सकता है जो उसकी प्यास बुझा सकता है बस उसे उकसाने की देरी है ऐसा मन में ख्याल आते ही सुगंधा के होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,।

ऐसे ही तीन-चार दिन गुजर गए मां बेटे दोनों एक दूसरे अनजान बनने का नाटक कर रहे हैं लेकिन दोनों अपनी अपनी कहानी को अच्छी तरह से जानते थे ऐसे ही एक दिन सुबह-सुबह मां बेटे और तृप्ति बैठकर चाय पी रहे थे तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,, सुगंधा को लगा कि उसकी पड़ोसन सुषमा होगी इसलिए अंकित से बोली,,,।

अंकित जाकर दरवाजा खोल दे तो बगल वाली सुषमा होंगी,,,।
(सुषमा का नाम सुनते ही अंकित की आंखों के सामने बाथरूम में नहा रही सुषमा आंटी का नंगा बदन दिखाई देने लगा हुआ एकदम से प्रसन्न हो क्या और उठकर दरवाजे की तरफ चला गया और जैसे ही दरवाजा खोला तो दरवाजे पर सुषमा आंटी नहीं बल्कि कोई और औरत थी जिसे पहचान में अंकित में बिल्कुल भी देर नहीं किया और एकदम से खुश होता हुआ बोला।)

अरे नानी जी आप यहां,,,(इतना कहते ही अंकित एकदम से झुक गया और अपनी नानी का आशीर्वाद लेने लगा,,, उसकी नानी भी उसे आशीर्वाद देते हुए बोली।)

खुश रहो बेटा आपको तुम बड़े हो गए हो शादी लायक हो गए हो,,,।

(चाय पी रही सुगंधा और तृप्ति दोनों लगभग भागते हुए दरवाजे पर आए और एकदम से खुश होते हुए वह दोनों भी एकदम चरण स्पर्श करने लगे,,,, सुगंधा को नहीं मालूम था कि उसकी मां आने वाली है इसलिए वह हैरान होते हुए बोली,,,)

तुम यहां कैसे ना कोई चिट्ठी ना खबर,,,,।

अब बेटी के घर आने के लिए चिट्ठी और खबर देनी पड़ेगी,,,,।

नहीं मां ऐसी बात नहीं है,,,(अपनी मां के हाथ से थैला लेते हुए,, सुगंधा बोली और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) फिर भी कोई खबर भिजवा देता तो मैं अंकित को लेने भेज देती स्टेशन पर,,,,

कोई बात नहीं छोटा आया था लेने उसी के घर तो दो दिन रहकर आ रही हूं,,।

नई तुम मामा के वहां गई थी,,,।

हां मैं पहले वही गई थी फिर बस पकड़ कर इधर आ रही हुं,,,,(अपनी नानी के मुंह से मां और बस का जिक्र होते ही अंकित की आंखों के सामने बस वाला नजारा घूमने लगा और यही ख्याल सुगंधा के मन में भी आने लगा था लेकिन फिर भी अपने आप को अास्वस्त करके सुगंधा बोली,,,)

चलो कोई बात नहीं आ तो गई,,,, मैं नहाने का पानी रख देता हूं नहा कर थोड़ा तरोताजा हो जाओ,,,।

ठीक है,,,,(इतना कहकर वह खुद ही कुर्सी लेकर बैठ गई और सुगंधा बाथरूम में पानी रखने लगी क्योंकि वह जानती थी कि 5 घंटे का सफर था तो नहाना जरूरी है,,,, थोड़ी देर इधर-उधर की बात करने के बाद वह बाथरूम में नहाने के लिए घुस गई अंकित अपनी नानी को बड़े गौर से देख रहा था और अपने मन में सोच रहा था कि उसकी मां बिल्कुल उसकी नानी की तरह दिखती है इतनी उम्र होने के बावजूद भी अभी भी गठीला बदन की मालकिन है,,, कोई कह नहीं सकता की इनकी उम्र निश्चित तौर पर कितनी है अपनी उम्र से 10 साल कमी लगती है और अगर एक साथ खड़ी कर दिया जाए तो मां बेटी दोनों बहन ही लगेगी।

थोड़ी देर में अंकित की नई नहा कर बाथरूम से बाहर आ गई थी,,, तब तक तृप्ति ने फिर से चाय बना कर तैयार करती थी थोड़ा सा चाय नाश्ता करने के बाद अंकित की नानी आराम करने लगी,,,, दोपहर का समय था इसलिए इतनी कड़ी धूप में कहीं जाना उचित नहीं था जिसके चलते तृप्ति अंकित और सुगंधा भी अपने-अपने कमरे में आराम कर रहे थे,,, लेकिन अंकित की नई अंकित के कमरे में आराम कर रही थी अंकित भी कमरे में प्रवेश किया उसकी नानी गहरी नींद में सो रही थी वह भी नीचे बिस्तर लगाकर सोने की तैयारी करने लगा,,,, लेकिन उसके मन में न जाने क्या हुआ वह एक बार उठकर खड़ा हो गया और अपनी नानी की तरफ देखने लगा अंकित बड़े गौर से अपनी नानी को देख रहा था वह गहरी नींद में सो रही थी गोल चेहरा गोरा बदन पता ही नहीं चलता था कि उम्र कितनी है सोने की वजह से ब्लाउज में से झांकता बड़ी-बड़ी चूचियां अभी भी कठोरता लिए हुए थी,,,,, अपनी नानी को देखकर अंकित के मन में अजीब सी उलझन होने लगी।

अंकित इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि वह उसकी नानी है और उम्र दराज है लेकिन अपनी नानी के बदन की बनावट और बदन की गठीलापन को देखकर अंकित को अपनी नानी में एक खूबसूरत औरत नजर आ रही थी जिसे देखकर वह उत्तेजना का अनुभव कर रहा था फिर भी जैसे तैसे करके वह नीचे चटाई पर लेट गया,,,, शाम को जब उसकी नानी की आंख खुली तो वह बिस्तर से उठकर बैठ गई और नीचे देखी तो अंकित सो रहा था वह एकदम से बोली,,,।

अरे अंकित बेटा यह क्या तू नीचे क्यों सो रहा है,,,?
(इतने में अंकित की आंख खुल गई थी वह देखा तो उसकी नानी बिस्तर पर बैठी हुई थी पैर नीचे जमीन पर थी लेकिन साड़ी उनके घुटनों में फंसी हुई थी और घुटनों के नीचे उनकी मांसल पिंडलियां दिख रही थी,,, जिसे देखकर एक बार फिर से अंकित के बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी,,, जब अंकित की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला तो एक बार फिर से उसकी नानी बोली,,,)

तुझे नीचे सोने की जरूरत नहीं थी मेरे पास में ही सो गया होता।

कोई बात नहीं नानी तुम गहरी नींद में सो रही थी इसलिए मैं उचित नहीं समझा,,।

अरे इसमें क्या हो गया मैं बिस्तर पर सोउं और तुम नीचे जमीन पर लेटो यह अच्छी बात नहीं है,,,।

कोई बात नहीं नानी आप खामखा परेशान हो रही है,,,।

खामखा परेशान नहीं हो रही है अच्छा बात नहीं है आइंदा से ऐसा मत करना और वैसे भी मैं यहां पर दो-तीन दिनों के लिए यहां ही हूं फिर गांव लौट जाऊंगी,,,।

क्या नानी से को दो-तीन दिनों के लिए मुझे तो लगा था कि आप 20-25 दिन रुकेंगी,,,

नहीं नहीं इतना दिन रुक कर क्या करूंगी गांव में बहुत काम रहता है खेतों में काम रहता है।

तो क्या आप खेतों में कामकरती हैं,,,।

खेतों में काम नहीं करती हूं लेकिन काम करवाती हूं सब देखना पड़ता है मजदूर लोगों को जो खेतों में काम करते हैं,,,।

यह सब तो नानाजी करते होंगे ना,,,, और बड़े वाले मामा भी करते होंगे,,,,।

बड़े वाले मामा कुछ नहीं करते मुझे और तेरे नाना कोई करना पड़ता है। इस बार सोच रही हूं की तृप्ति को अपने साथ ले जाऊं वैसे भी कॉलेज की छुट्टियां पड़ गई है। एकाद महीना रहकर कुछ रीति रिवाज सीख जाएगी और वैसे भी शादी के बाद यही सब काम आने वाला है,,,,,।
(तृप्ति को साथ में ले जाने की बात से और वह भी एक महीने के लिए,,, इस बात को सुनकर ही अंकित के दिल की धड़कन बढ़ने लगी क्योंकि ऐसे में घर में केवल वह और उसकी मां ही रह जाती तब कितना मजा आता है यही सोच कर वह अंदर ही अंदर खुश हो रहा था और अपनी नानी की बात सुनकर बोला)

आप सच कह रही हो नानी मैं तो कहता हूं ले जाना साथ में वह भी घूम लेगी,,,,।

चल कोई बात नहीं आज ही तेरी मां से बात करती हूं,,,।

(दोनों की बातचीत हो ही रही थी कि तभी दरवाजे पर तृप्ति आ गई और बोली)

नानी चाय नाश्ता तैयार हो गया है हाथ मुंह धो कर आ जाओ,,,,(इतना कहकर तृप्ति वहां से चली गई जिसे देखकर अंकित की नानी बोली,,)

शादी करने की उम्र तो हो गई है गांव में होती तो अब तक ईसके हाथ पीले हो गए होते,,,,। और शादी करने लायक तु भी हो गया है,,, हट्टा कट्टा नौजवान हो गया तू भी अगर गांव में होता तो अब तक तेरी भी शादी हो गई होती।

अपनी नानी के मुझे अपनी शादी की बात सुनकर वह शर्मा गया उसे शर्माते हुए देखकर उसकी नानी चुटकी लेते हुए बोली,,।

देखो तो सही कितना शर्मा रहा है,,,,,
(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और फिर अंकित की नई कमरे से बाहर निकल गई और हाथ मुंह धोकर फिर से तीनों साथ में बैठकर इधर-उधर की बातें करते हुए चाय पीने लगे शाम को जब भोजन कर रहे थे तब अंकित की नानी बोली,,,)

सुगंधा मैं चाहती हूं कि मेरे साथ तो तृप्ति को भी गांव भेज दे और वैसे भी एक-दो साल में इसकी शादी करनी पड़ेगी गांव के रीति-रिवाज सीख जाएगी तो इसे भी आसानी होगी अपनी गृहस्ती बसाने में,,,,।

(तृप्ति अपनी नानी की बातें सुनकर बोली,,)

क्या नानी आप भी अभी तो मेरी पढ़ने की उम्र है,,,।

मैं जानती हूं लेकिन तेरी शादी की भी उम्र है,,,,,‌

कोई बात नहीं मां मैं तृप्ति को तुम्हारे साथ भेज दूंगी कुछ नहीं तो गांव घूम लेगी तो इसे भी अच्छा लगेगा,,,,,(सुगंधा यह बात बहुत सोच समझ कर बोली थी जो ख्याल कुछ देर पहले इस बात को सुनकर अंकित के मन में आई थी वही ख्याल सुगंधा के मन में भी चल रहा था वह भी घर में एकांत चाहती थी अपने बेटे के साथ ताकि उनका कार्यक्रम थोड़ा आगे बढ़ सके तृप्ति कुछ देर तक ना नुकुर करती रही और आखिरकार मान गई,,,,।

कुछ देर टीवी देखने के बाद सुगंधा अपने कमरे में सोने के लिए चली गई वैसे तो वह अपनी मां को अपने कमरे में सोने के लिए बोल रही थी लेकिन वह इनकार कर दी और बोली कि मैं अंकित के कमरे में सो जाऊंगी,,, त्रप्ति अपने कमरे में चली गई और अंकित और उसकी नानी अंकित के कमरे में आ गए कुछ देर दोनों इधर-उधर की बातें करने के बाद एक ही बिस्तर पर सो गए,,,, तकरीबन 1:30 बजे अंकित की नानी को पेशाब लगी तो उसकी आंख खुल गई लेकिन जब आंख खुली और उसे अपनी स्थिति का भान हुआ तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा वह करवट लेकर दरवाजे की तरफ मुंह करके सो रही थी और उसके ठीक पीछे अंकित सो रहा था लेकिन वह भी दरवाजे की तरफ लिया हुआ था ऐसे में उसका पूरा बदन उसके बदन से सटा हुआ था और अंकित की नानी को बहुत अच्छे से एहसास हो रहा था कि उसकी बड़ी-बड़ी गांड के बीच में बीच कुछ चुभ रहा है,,,, अंकित की नई उम्र के इस दौर में पहुंच चुकी थी कि उन्हें समझते देर नहीं लगी कि उनकी गांड के बीचों बीच चुभने वाली चीज क्या है,,,,।

उसे चीज के बारे में ख्याल आते हैं अंकित के नानी के भजन में अजीब सी हलचल होने लगी सरसराहट से बढ़ने लगी वह समझ गई थी कि उनकी गांड के पीछे-पीछे उसके नाती का लंड घुसा हुआ है अब यह समझ में नहीं आ रहा था कि यह हरकत उसने जानबूझकर किया था कि अनजाने में गहरी नींद की वजह से हो गया था वह देखना चाहती थी इसलिए उसे स्थिति में कुछ देर तक लेटी रही,,, वह जानती थी कि अगर वह जानबूझकर ऐसा कर रहा है तो उसकी हरकत और भी ज्यादा बढ़ेगी लेकिन कुछ देर तक किसी तरह से लेते रहने के बावजूद अंकित के बदन में बिल्कुल भी हलचल नहीं हुई तो वह समझ गई कि यहां अनजाने में हुआ है,,,, इसलिए वह धीरे से उठकर अंकित की तरफ देखिए वह वास्तव में गहरी नींद में सो रहा था उसे तो अपनी स्थिति का बहन भी नहीं था लेकिन कमरे में जल रहे लाल बल्ब की रोशनी में अंकित की नई एकदम साफ तौर पर देख पा रही थी कि अंकित के पजामे में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे देखकर इस उम्र में भी अंकित की नानी की टांगों के बीच सुरसुराहट बढ़ने लगी थी,,,,।

कुछ देर तक वह अंकित के पजामे में बने तंबू को देखते रही,,, और फिर धीरे से बिस्तर से उठकर खड़ी हो गई और दरवाजा खोलकर बाथरूम में चली गई पेशाब करने के बाद और फिर से अपने बिस्तर पर आई और इस स्थिति में लेट गई फिर से एक अनुभव की चाह में लेकिन अंकित तो गहरी नींद में सो रहा था उसके साथ जो कुछ भी हुआ था वहां जाने में हुआ था इसलिए ऐसा दोबारा नहीं हुआ और इस बात का मलाल अंकित की नानी को हो रहा था क्योंकि पल भर में ही सही अंकित ने उसके बदन में उत्तेजना की लहर को प्रज्वलित कर दिया था। और वैसे भी अंकित की नानी कोई सीधी साधी औरत नहीं थी गांव में अच्छा दबदबा था खेती-बाड़ी ज्यादा होने की वजह से दूर-दूर तक उसकी नानी और उसके नाना का नाम था,,, उम्र के ईस पड़ाव में पहुंच जाने के बाद भी खेतों में काम करके और हमेशा बदन में स्फूर्ति रहने की वजह से अपनी उम्र से 10 साल कम ही लगती थी,,,, और उसके पति की तबीयत और शेयर उम्र के पड़ाव में जवाब दे गई थी इसलिए अपनी बीवी को खुश करने की ताकत उनके बगल में नहीं बची थी जिसके चलते कभी कभार अंकित की नई अपनी बदन की प्यास बुझाने के लिए विश्वासु मजदूर के साथ शारीरिक संबंध बना लेती थी,,,, आज न जाने क्यों अपने बेटी के जवान लड़के की हरकत की वजह से उनके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,।

अनुभव से भरी हुई अंकित की नई अपनी गांड में चुदाई अपने ही नाती के लंड कि चुभन से उसकी मजबूती का अंदाजा लगा रही थी वह समझ गई थी कि उसकी टांगों के बीच मर्दाना ताकत से भरा हुआ मजबूत हथियार है जो किसी भी औरत की प्यास बुझाने में पूरी तरह से सक्षम है। अंकित की नई अपने आप को इस बात के लिए तैयार कर ली थी कि अगर अंकित अपनी हरकत को आगे बढ़ता है तो वह उसके साथ सारे संबंध बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी लेकिन जो कुछ भी हुआ था वह नींद की वजह से हुआ था और अनजाने में हुआ था इस बात का दुख अंकित की नानी के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।

दूसरे दिन अंकित नाश्ता करके घर से यूं ही इधर-उधर घूमने के लिए निकल गया था और घूमते घूमते बाजार पहुंच गया था,,, बाजार में उसने देखा तो राहुल अपने कुछ दोस्तों के साथ हाथ में बैंट लिए हुए क्रिकेट खेलने के लिए जा रहा था अंकित का मन किया कि उसे आवाज देकर बुलाए और उसके साथ ही चल दे लेकिन फिर उसके मन में ख्याल आया कि अगर राहुल क्रिकेट खेलने जा रहा है तो घर में उसकी मां अकेली होगी और वैसे भी उसकी मां के साथ जाने अनजाने में मस्ती भरे पल उसने गुजारे थे और काफी दिन हो गया था उससे मुलाकात की इसलिए वह इस आवाज नहीं दिया और चुपचाप उसके घर की तरफ निकल गया,,,, थोड़ी देर में वह पैदल चलते हुए राहुल के घर पहुंच गया था और दरवाजे पर पहुंच कर डोर बेल बजाने लगा,,,,।

लेकिन पहली बार डोर बेल बजाने पर दरवाजा नहीं खुला दूसरी बार भी बजाने पर नहीं खुला तो अंकित निराश हो गया उसे लगा कि शायद,, राहुल की मां सो गई होगी लेकिन फिर भी एक बार आखिरी कोशिश करते हुए डोर बेल बजाय तो दरवाजा खुल गया और दरवाजे को खोलने वाली को देखकर अंकित उसे देखा ही रह गया पल भर में ही उसे एहसास हो गया कि राहुल की मां नहा रही थी और शायद इसीलिए दरवाजा नहीं खोल पाई थी और जल्दबाजी में वह अपने बदन पर केवल टावरक्षल लपेटकर ही दरवाजा खोलने के लिए आ गई थी। अंकित तो नूपुर को देखता ही रह गया,, नूपुर भी अंकित को देखकर मन ही मन खुश होने लगी और उसे इस बात की तसल्ली होने लगी कि चलो सही समय पर सही वस्त्र में वह अंकित के सामने आई है अंकित प्यासी नजरों से उसकी ऊभरी हुई छातियों को ही देख रहा था जो टावल में लिपटी हुई थी,,,।

बाथरूम में नूपुर नहा रही थी इसलिए उसका भजन पूरी तरह से गिला था और टावल लपेटने की वजह से टावल भी गीला हो चुका था और गीले टावल में नूपुर की चूची की कड़ी निप्पल एकदम साफ झलक रही थी। जिसे अंकित प्यासी नजरों से देख रहा था अनुभव से भरी हुई नूपुर समझ गई कि अंकित क्या देख रहा है इसलिए मुस्कुराते हुए बोली।

राहुल तुम यहां,,,?

जी आंटी जी यहीं से गुजर रहा था तो सोचा राहुल से मिलता चलु राहुल है क्या,,,?

राहुल तो नहीं है राहुल क्रिकेट खेलने गया है।

ओहहह (सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनने का कोशिश करते हुए अंकित बोला) चलो कोई बात नहीं मैं फिर कभी मिल लुंगा,,,(इतना कहकर वह जाने ही वाला था कि नूपुर बोली,,)

क्यों तुम्हें राहुल से ही काम है मुझसे काम नहीं है,,,

ऐसी बात नहीं है आंटी जी,,, राहुल से मिलता हूं तो तुमसे भी तो मिल लेता हूं,,, और वैसे भी मैं माफी चाहता हूं आपको तकलीफ देने के लिए,,,।

तकलीफ किस बात के लिए,,,।

मतलब आंटी जी आप नहा रही थी और खामखा में आ गया और दरवाजा खोलना पड़ा,,,।

तो इसमें क्या हो गया,,, वैसे सच-सच बताना तुम्हें मैं कैसी लगती हूं,,,।

जी,,,,,!(एकदम आश्चर्य से फटी आंखों से नूपुर की तरफ देखते हुए)

हां कैसी लगती हूं बताओ ना वैसे मैं तुम्हें देखती हूं तुम मुझे घूरते रहते हो,,,।

जी,,,,जी,,,,, ऐसी कोई बात नहीं है,,,!(अंकित एकदम से घबराते हुए बोला)

नहीं ऐसी ही बात है अभी भी तुम मेरी चूचियों की तरफ देख रहे थे,,,,(नूपुर एकदम से बिंदास होते हुए बोल रही थी क्योंकि वह जानती थी लड़कों की आदत को उसका इस तरह से बिंदास बोलना ही लड़कों को पूरी तरह से गुलाम बनने पर मजबूर कर देता है और यही अंकित के साथ भी हो रहा था नूपुर किस तरह की बातें सुनकर तो उसके होश उड़ गए थे जिस तरह से उसने खोलकर चुची शब्द का प्रयोग की थी उसे सुनकर उसके तन बदन में आग लगने लगी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके खाने में कोई मधुर रस घोल दिया हो,,,, नूपुर की बातें सुनकर अंकित एकदम से घबराते हुए बोला,,,)

क्या बात कर रही हो आंटी जी ऐसी कोई भी बात नहीं है यह तो अनजाने में मेरी नजर,,,(इससे आगे अंकित कुछ बोल नहीं पाया तो नूपुर मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

मैं सब समझता हूं अंकित तुम्हारे जैसे नौजवान लड़कों की नजर इधर-उधर भटकती ही रहती है,,, आओ अंदर आ जाओ,,,, दरवाजे पर कब तक खड़े रहोगे,,,,।

नहीं मैं फिर कभी आ जाऊंगा,,,,।

ऐसे कैसे,,,, आए हो तो चाय पानी पीकर जाओ,,,,(इतना कहते हुए नूपुर खुद उसका हाथ पकड़ कर उसे घर के अंदर ले आई और दरवाजा बंद कर दी दरवाजा बंद करते ही नूपुर के बदन में जैसे उत्तेजना और हवास दोनों उबाल मार रहे हो इस तरह से वह तुरंत अंकित को दीवार से सटाकर उसे अपनी बाहों में भरकर उसके होठों पर अपने होंठ रखकर चुंबन करने लगी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उत्तेजित हो चुकी थी,,,

अंकित को नूपुर की तरफ से इस तरह की किसी भी हरकत का अंदाजा नहीं था इसलिए वह एकदम से आश्चर्यचकित हो गया उसे तो कुछ समझ में नहीं आया लेकिन जब तक समझ में आता तब तक नूपुर पूरी तरह से उसे पर हावी हो चुकी थी वह अपनी जवानी का जलवा उसके ऊपर पूरी तरह से भी कर चुकी थी उसके लाल लाल होठों का चुंबन करते हुए उसका रसपान करते हुए उसे पूरी तरह से अपनी आंखों में ले ली थी आखिर अंकित भी कब तक अपने आप को संभाल पाता इन्हीं सब पल के लिए तो वह तड़प रहा था,,,, उसके भी हाथ खुद ब खुद नूपुर की पीठ पर घूमने लगे और वह भी चुंबन में उसका साथ देने लगा वैसे तो अंकित के जीवन का यह पहला चुंबन था जो उसे पागल बना रहा था उसे चुंबन का एहसास और कैसे किया जाता है नहीं मालूम था लेकिन नूपुर जिस तरह से उसके होठों का रसपान कर रही थी वह भी नूपुर के लाल लाल होठों को अपने मुंह में लेकर उसका रस पी रहा था और उत्तेजना के मारे अपनी हथेलियां को उसकी पीठ पर घूम रहा था जो कि टावल में लिपटी हुई थी,,,।

पल भर में ही नूपुर को अपनी दोनों टांगों के बीच अंकित के लंड की चुभन महसूस होने लगी और उसे चुपन को अपने अंदर महसूस करके वह पूरी तरह से उत्तेजना से बिलबिलाने लगी,,,, इसी पल का फायदा उठाते हुए एक हाथ से वह अपनी टॉवल को खोलकर उसे नीचे गिरने पर मजबूर कर दी और पूरी तरह से अंकित की बाहों में एकदम नंगी हो गई हालांकि अंकित अभी तक उसके नंगे भजन को देख नहीं पाया था लेकिन अपनी हथेली पर उसकी नंगी चिकनी पीठ और कमर को महसूस करके इतना तो समझ गया था कि उसके भजन से टावर नीचे गिर गई है और यह एहसास उसे होते ही उसकी उत्तेजना भी चरम शिखर पर पहुंचने लगी वह पागल होने लगा।

अंकित अपने बदन में अत्यधिक उत्तेजना का संचार होता हुआ महसूस कर रहा था,,, उसके लंड का कड़कपन एकदम बढ़ता जा रहा था जो कि सीधे-सीधे उसे नूपुर की दोनों टांगों के बीच ठोकर मार रहा था अपनी उत्तेजना पर काबू न कर पाने की वजह से अंकित की हथेलियां उसकी चिकनी कमर से फिसलती हुई उसके गोलाकार ने संभोग पर आते की और जैसे ही उसे एहसास हुआ कि उसकी दोनों हथेलियां में नूपुर की मदमस्त गांड आ चुकी है तो वहां उसे ज़ोर से अपनी हथेली में दबोच दिया और उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया है,,,, अंकित के साथ यह सब पहली बार हो रहा था,,, वैसे तो सुमन के साथ इससे भी ज्यादा हो चुका था लेकिन ,,, आज की बात कुछ और थी क्योंकि आज उसकी बाहों में जवानी से गदराई हुई एक औरत थी,,,। आज एक नया अनुभव से मिल रहा था अंकित को लगने लगा था कि आज उसकी मनोकामना पूरी हो जाएगी भले उसकी मां से ना सही लेकिन नूपुर के साथ वह आज अपने मन की मुराद को पूरी कर सकता है,,,,।

अभी वह यह सब सो ही रहा था कि तभी दरवाजे की घंटी बजने लगी और घंटे की आवाज सुनकर दोनों के होश उड़ गए,,,, दोनों के होठ एक दूसरे से अलग हो चुके थे,,,, दोनों एक दूसरे की तरफ तो कभी दरवाजे की तरफ देख रहे थे,,, हैरान होते हुए नूपुर बोली।

आप कौन आ गया राहुल के पापा से ऑफिस के लिए निकल गए थे और राहुल क्रिकेट खेलने के लिए गया था इतनी जल्दी तो आ नहीं सकता,,,,।

फिर भी दरवाजा तो खोलना पड़ेगा आंटी जी,,,।

रुक में कपड़े पहन लुं,,,(इतना कहकर नूपुर नीचे गीरी टावल को लेने के लिए झुकी,,, तब जाकर अंकित की नजर नूपुर पर गई और उसे एहसास हुआ कि बिना कपड़ों के राहुल की मां कितनी खूबसूरत लगती है उसके नंगे बदन को देखकर अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी उसका झुकना उसके बदन की लचक उसकी गांड का घेराव सबकुछ बेहद अद्भुत था और देखते ही देखते टावल को बाथरूम में रखकर नूपुर जल्दी से एक गाउन अपने बदन पर डाल दी जो कि उसके घुटनों तक ही आ रही थी,,, और अंकित से बोली,,,)

तुम कुर्सी पर बैठ जाओ,,,,।
(इतना क्या करवा दरवाजा खोलने लगी लेकिन अंकित ना जाने क्यों एकदम घबरा गया था और घबराहट में वह डाइनिंग टेबल के नीचे छूप गया था,,,, उसके मन में एक बात और चल रही थी कि उसे लगा था कि शायद दरवाजे पर राहुल होगा अगर राहुल इस समय कमरे में आएगा तो जरूर उसकी मां के साथ कुछ ना कुछ करेगा और यही अंकित देखना भी चाहता था,,,, लेकिन जैसे ही दरवाजा खुला सामने राहुल के पिताजी थे और वह एकदम उदास होते हुए कमरे में दाखिल हुए और बोले,,,)

आज बस छूट गई आज काम किसी जिले में कहीं और जाना था लेकिन कैंसिल हो गया तो मैं ऑफिस से सीधा यही आ गया हूं,,,,।

मतलब आज तुम्हारी छुट्टी है,,,।

फिर क्या आज तो दिमाग खराब हो गया इतनी जल्दी बिना चाय नाश्ता किए निकला था फिर भी यही हाल हो गया,,,, तुम चाय नाश्ता लगाओ में हाथ धोकर आता हूं,,,,,।

ठीक है,,,,।
(इतना कहकर नूपुर रसोई घर की तरफ जाने लगे लेकिन उसकी नजर डाइनिंग टेबल के नीचे पड़ी तो देखी थी अंकित डाइनिंग टेबल के नीचे छुपा हुआ है,,, यह देखकर करवा हैरान हो गई लेकिन उसे कुछ बोल पाती इससे पहले ही उसके पति बाथरूम से बाहर आ गए थे और वह चाय गरम करने के लिए चली गई थी जब चाय लेकर वह किचन से बाहर आई को अच्छी डाइनिंग टेबल के नीचे अभी भी अंकित चुप कर बैठा हुआ था और कुर्सी पर उसके पति बैठकर अखबार पढ़ रहे थे,,, नूपुर कुछ बोल नहीं पाई उसे बात का डर था कि कहीं उसके पति डाइनिंग टेबल के नीचे बैठे अंकित को देखना है अगर ऐसा हो गया तो गजब हो जाएगा उन्हें शक हो जाएगा कि जरूर दाल में कुछ काला है,,,।

नूपुर अपने पति की तरफ चाय का कब आगे बढ़कर बिस्किट रखती और खुद भी ठीक उसके सामने कुर्सी पर बैठ गई नूपुर का दिल जोरों से धड़क रहा था उसके मन में यह चल रहा था कि उसके पति को कहीं शक ना हो जाए कहीं वह देखना ले,,,, और डाइनिंग टेबल के नीचे छिपे अंकित की नजर नूपुर की दोनों चिकनी टांगों पर गई जो की घुटनों के नीचे पूरी तरह से नंगी थी और जिस तरह का गाउन पहनी हुई थी वह घुटनों के ऊपर तक आ रहा था और वह कुर्सी पर बैठी हुई थी ठीक उसकी आंखों के सामने,,, वैसे तो अपनी तरफ से कुछ भी करने की हिम्मत अंकित मैं बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन जिस तरह की हरकत करके सुगंधा ने उसका हौसला बढ़ाई थी उसे देखते हुए उसकी हिम्मत बढने लगी थी,,,।

अपनी आंखों के सामने नूपुर की नंगी जवान टांगे देखकर अंकित की उत्तेजना बढ़ने लगी और वहां अपनी हथेली को उसकी नंगी चिकनी टांग पर रखकर हल्के-हल्के सहलाने लगा पहले तो डर के मारे नुपुर अपना हाथ उसके हाथ पैर रखकर उसे हटाने की कोशिश कर रही थी,,, लेकिन बार-बार अंकित अपनी हरकत को दोहरा रहा था और अखबार पढ़ते हुए उसके पति चाय की चुस्की ले रहे थे दोनों के बीच किसी भी तरह की बातचीत नहीं हो रही थी और बार-बार अंकित की हरकत से नूपुर के बदन में भी फिर से उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, अंकित नंगी टांगों को सहलाने के बाद दोनों टांगों को अपने हाथों से पकड़ कर उसे खोलने की कोशिश करने लगा यह देखकर नूपुर की सांस ऊपर नीचे होने लगी उसकी उत्तेजना परम शिखर पर पहुंचने लगी,,,,।

नूपुर भी समझ गई थी कि अंकित ऐसी हरकत किसने कर रहा है और उसकी हरकत के बारे में एहसास होते ही नूपुर की बुर पानी छोड़ने लगी थी,,,, अंकित के दोनों हाथ उसके घुटनों पर थी और वह उसे खोलने की कोशिश कर रहा था और मौके का फायदा उठाते हुए नूपुर धीरे से कुर्सी की ओर किनारे पर आ गई और अपनी टांगों को खोल दी लेकिन फिर भी गाउन की वजह से उसकी दोनों टांगों के बीच अंधेरा छाया हुआ था,,,,, फिर भी अंकित अपनी हथेली को उसकी जांघों पर रखते हुए उसे अंदर की तरफ ले जा रहा था अंकित के लिए यह बेहद अद्भुत और नया अनुभव था और नूपुर के लिए भी ,,भले ही वह अपने बेटे के साथ पूरी मर्यादा को लांघ चुकी थी लेकिन फिर भी इसके बावजूद भी है उसके लिए पहला अनुभव था जब कोई डाइनिंग टेबल के नीचे बैठकर उसके बदन से छेड़खानी कर रहा था।

अंकित की हालत पाल-पाल खराब होती जा रही थी उसकी हथेली नूपुर की गर्म जवानी की वजह से तप रही थी और देखते ही देखते अंकित अपनी हथेली को सीधा ले जाकर के नुपुर की नंगी बुर पर रख दिया जो की गरम तवे की तरह दहक रही थी,,,, अंकित की हरकत से उसकी सांस उपर नीचे होने लगी,,,।

राहुल कहां गया घर पर ही है क्या,,,?(अखबार को पढ़ाते हुए राहुल के पिताजी बोले)

नहीं वह तो कब से क्रिकेट खेलने के लिए चला गया मैं नहा रही थी तभी दरवाजे की घंटी बजने लगी मुझे क्या मालूम आप आए हैं,,,, नहाते नहाते बाहर आना पड़ा।

अब कर भी क्या सकता था सारा प्लान चौपट हो गया,,,,।

(दोनों की बातचीत जा रही थी और अंकित की हरकत बढ़ती जा रही थी वह अपनी हथेली में नूपुर की बुर को दबोच रहा था उसे मजा आ रहा था,,,, इतनी हिम्मत तो अपनी मां के साथ नहीं दिखा पाया था शायद इस वजह से क्योंकि वह उसकी मां थी उसके साथ मां बेटे का पवित्र रिश्ता था लेकिन नूपुर के साथ ऐसा कोई रिश्ता नहीं था अंकित के लिए वह अनजान औरत थी इसलिए उसके साथ भाग खुली छूट ले रहा था और वैसे भी इस छूट को लेने के लिए बढ़ावा उसने ही दी थी लेकिन फिर भी नूपुर को अंकित की हरकत से मजा आ रहा था,,,, एक तरफ पति पत्नी आपस में बातचीत कर रहे थे और दूसरी तरफ़ अंकित अपनी मनमानी कर रहा था अंकित की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी।

तभी अचानक अपने पति से नजर बचाकर नूपुर अपनी कुर्सी पर से हल्के से अपनी गांड को ऊपर उठा दिया अपनी गाउन को पूरी तरह से कमर के ऊपर कर दी कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो गई,,,, राहुल की मां कि ईस तरह की हरकत को देखकर अंकित की हालत खराब होने लगी वह पागल होने लगा कमर के नीचे उसके नंगे बदन को देखकर उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी वासना उसकी आंखों में नाचने लगी,,,, वैसे भी राहुल की मां ने जिस तरह से हरकत की थी उसे देखकर उसकी उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच चुकी थी अगर राहुल के पिताजी ना आ गए होते तो शायद दोनों के बीच इस समय शारीरिक संबंध स्थापित हो रहा होता और एक नए अनुभव से अंकित परिपूर्ण हो जाता लेकिन उसका नया अनुभव राहुल के पिताजी रोक दिए थे। लेकिन उसकी आंखों के सामने जो नजारा दिखाई दे रहा था अब वह अपने आप को रोक नहीं सकता था।

कमर के नीचे नंगी हो जाने के बाद अंकित खुद उसकी दोनों टांगों को खोलकर उसकी गुलाबी बर को देख रहा था जो कि इस समय कचौड़ी की तरह खुली हुई थी और उसे पर मदन रस की बूंदे ओश की बूंद की तरह चमक रही थी। जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था वैसे भी वह दो बार बुर चाट चुका था एक बार कुसुम की और एक बार खुद की अपनी मां की इसलिए उसे थोड़ा बहुत तो अनुभव था इसलिए वह अपने हाथों से नूपुर की दोनों टांगों को खोल दिया नूपुर खुद कुर्सी के किनारे बैठ चुकी थी ताकि इस नजारे को अंकित एकदम साफ तौर पर देख सके। अंकित खातिर जोरों से धड़क रहा था और यही हालत नूपुर का भी था वह इस अद्भुत अनुभव को लेते हुए अपने पति से बातचीत भी कर रही थी जो की बहुत ही सब्र और अपने आप को नियंत्रण में रखने वाली बात थी और इस पर नूपुर एकदम खरी उतर रही थी।

अगले ही पर अंकित अपनी उत्तेजना के चलते अपनी हरकत को बढ़ाते हुए अपने प्यासे होठों को राहुल की मां की दोनों टांगों के बीच ले गया और उसे उसकी बुर पर रख दिया पल भर के लिए तो नूपुर को कुछ समझ में नहीं आया कि क्या हो रहा है बस उसे दोनों टांगों के बीच अंकित का सर नजर आ रहा था लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि अंकित उसे पागल बना रहा है तो एकदम से मदहोश होने लगे अपनी मदहोशी पर वह काबू नहीं कर पा रही थी लेकिन फिर भी जैसे तैसे करके वह अपने पति से बात जीत जारी रखते हुए अपने चेहरे के हाव-भाव को छुपाने में कामयाब होरही थी।

एक बार फिर से वही मादक जानी पहचानी सी खुशबू अंकित के नथुनों से उसके छाती में पहुंचने लगा जिससे उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी अंकित पागलों की तरह अपनी जीभ से राहुल की मां की बुर चाट रहा था उसे उसकी मां की बुर चाटने में बहुत मजा आ रहा था नूपुर की कसम आ रही थी कुर्सी पर बैठे-बैठे अपनी टांगों को कभी खोल दे रही थी तो कभी आपस में कस ले रही थी,,, आज कुछ देर ज्यादा तक अंकित को औरत की बुर चाटने को मिल रही थी वह पागलों की तरह राहुल की मां की बुर को चाट रहा था अपनी जीभ को उसके अंदर तक प्रवेश कर दे रहा था,,,, अपनी उत्तेजना पर काबू न कर सकने की स्थिति में राहुल की मां अपने एक हाथ को अंकित के सर पर कब से जोर-जोर से अपनी बुर पर दबा रही थी,,,, वैसे तो जिस तरह के हालात थे राहुल की मां के मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज किसी भी समय निकाल सकती थी,,, लेकिन बड़ी मुसीबत से राहुल की मां अपनी उत्तेजना को काबू में किए हुए थी,,,, राहुल के पिताजी अभी भी अखबार पढ़ने में व्यस्त थे उन्हें इस बात का एहसास तक नहीं था कि उनकी आंखों के सामने डाइनिंग टेबल के नीचे एक जवान लड़का उनकी ही बीवी की बुर को चाट रहा है।

देखते ही देखते राहुल की मां अपने चरम सुख की ओर अग्रसर होने लगी और तभी अंकित भी अपनी एक उंगली को बड़ी चालाकी से राहुल की मां की बुर में डालकर सुंदर बाहर करते हुए उसकी बुर की चटाई करने लगा,,, इस बार राहुल की मां से बिल्कुल भी अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं हो पाया और वह एकदम से भलभला कर झड़ने लगी,,, लेकिन झड़ने समय उसके मुंह से आखिरकार निकल ही गया।
ओहहहहहबह,,,,,।

(यह आवाज सुनकर अखबार पढ़ते-पढ़ते राहुल के पिताजी का ध्यान इस आवाज पर गया और वह बोले।)

क्या हुआ,,,?

अरे कुछ नहीं मुझे याद आया कि मुझे तो कपड़े धोने हैं और वाशिंग मशीन में रखकर आई हूं,,,,।

तो जाओ धो डालो,,,,।

आप सो जाइए कमरे में जाकर तब में जाती हुं,,,।

अरे भाग्यवान यह कोई सोने का समय है,,,।

अरे सोने का समय नहीं है लेकिन जाकर आराम तो करिए अपने कमरे में अभी मुझे यहां पर झाड़ू पोछा लगाना पड़ेगा सफाई करनी पड़ेगी और अगर एक बार आपकी आंख लग गई तो फिर आपको उठाना मुश्किल हो जाएगा,,,।

हां यह बात तो तुम ठीक कह रही हो मुझे कमरे में ही जाना चाहिए,,,,
(अपने पति की बात सुनकर नूपुर को थोड़ा राहत महसूस हुआ और उसके पति अपनी जगह से उठकर अपने कमरे की तरफ जाने लगे और जैसे ही वह कमरे में जाकर दरवाजा बंद किया हमने पूरी एकदम से उठकर खड़ी हो गई अपने कपड़ों को व्यवस्थित करने लगी और इशारे से अंकित को बाहर निकलने के बोली और वह तुरंत बाहर निकल गया उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी लेकिन उसका चेहरा उसके मदन रस से पूरी तरह से भीगा हुआ था यह देखकर नूपुर शर्म के मारे मुस्कुराने लगी,,,, और उसका हाथ पकड़ कर दरवाजे तक ले आई लेकिन जाते-जाते वह एक बार फिर से उसे अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का चुंबन करने लगी जिस पर उसके बुर से निकला हुआ उसका मदन रस लगा हुआ था और इस एहसास से वह पूरी तरह से मदहोश हो गई और प्रसन्नता के साथ अंकित नूपुर के घर से चला गया)

अंकित नूपुर के घर से उसकी रसेदार मलाई चाट कर आया था,,, एक अद्भुत आनंद की प्राप्ति के साथ वह नूपुर के घर से बाहर निकला था,, आज अपने आप पर बहुत खुश था क्योंकि आज उसने बहुत हिम्मत दिखाई थी और उसे आगे बढ़ाने में और बढ़ावा देने में राहुल की मां का ही हाथ था,, नूपुर जिस तरह की हरकत उसके साथ कर रही थी उसे देखकर अंकित समझ गया था कि वह क्या चाहती है इसीलिए तो वह डाइनिंग टेबल के नीचे छिपकर उसके पति की मौजूदगी में उसकी दोनों टांगों के बीच से टपकती हुई रस से अपनी प्यास बुझाया था,,,,,,,,,, एक प्यासी औरत के हवा कैसे होते हैं कैसी क्रियाएं होती हैं धीरे-धीरे अंकित समझने लगा था अगर वाकई में आज उसके पति घर वापस ना आ गए होते तो शायद आज वह एक औरत के अद्भुत सुख को प्राप्त कर लेता जिसे पाने के लिए वह दिन-रात लगा हुआ था।

रास्ते में अंकित अपने मन में सोच रहा था मनो मंथन कर रहा था कि राहुल की मां की हरकतों को वह पहचान गया था वह क्या चाहती है लेकिन इस तरह की हरकत उसकी मां उसके साथ कर रही थी तो उसके साथ वह क्यों इतनी हिम्मत नहीं दिखा पा रहा है,,,, अंकित अपने मन में बहुत गहराई में उतर कर सो रहा था कि उसकी मां तो इससे भी ज्यादा उसकी आंखों के सामने पेशाब करने लग जाती है अपनी गांड दिखती है अपने खूबसूरत अंगों की नुमाइश करती है फिर क्यों सब कुछ जानकार भी हुआ आगे क्यों नहीं बढ़ रहा है क्यों हिम्मत नहीं दिखा पा रहा है,,,, अंकित अपने मन में यह सोचकर हैरान था कि जिस तरह की हिम्मत दिखाकर एक अद्भुत सुख को अभी-अभी प्राप्त करके वह वापस लौट रहा है अगर वह अपने घर में इतनी हिम्मत दिखा दे तो शायद इससे भी ज्यादा आनंद के सागर में से डुबकी लगाने को मिल जाए,,, यही सब अपने मन में सोचता हुआ वह अपने घर पर पहुंच चुका था,,,,।

अपने घर पर पहुंच कर बस सीधी अपनी मां के कमरे में प्रवेश कर गया जहां पर उसकी नानी और उसकी मां मौजूद थे नई बिस्तर पर बैठी हुई थी और उसकी मां कपड़े बदल रही थी वह अपनी साड़ी को कमर से लपेट रही थी उसके बदन पर ब्लाउज था और उसकी चूचियों के बीच की गहरी लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,, वाकई में यह नजारा बेहद खूबसूरत था लेकिन कमरे में उसकी नानी भी मौजूद थी इसलिए वह एकदम सहज होता हुआ बोला,,,,।

मम्मी आज नानी के आने की खुशी में शाम को पूरी सब्जी खीर बना देना,,,
(अंकित की बात सुनकर उसकी नानी बोली)

नहीं नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं सादा भोजन बना देना चलेगा,,,।

नहीं नहीं नानी ऐसा कैसे हो सकता है आपके आने की खुशी में मुंह मीठा तो करना ही होगा,,,,

चल कोई बात नहीं शाम को बना दूंगी,,,,( अपनी साड़ी को ठीक से अपनी कमर पर लपेटते हुए सुगंधा बोली,,,, अगर कोई और समय होता अगर उसकी मां घर में मौजूद न होती तो शायद वह इस मौके का अच्छी तरह से फायदा उठाकर अपने अंको का प्रदर्शन अपने बेटे के सामने जरूर करती लेकिन अपनी मां की मौजूदगी में वह एकदम सहज बनने का नाटक कर रही थी,,,, अपनी मां की बातें सुनकर अंकित संतुष्ट नजर आ रहा था उसका तो कमरे में रुकने का बहुत मन था लेकिन अपनी नानी की मौजूदगी में वह इस समय कमरे में ज्यादा देर तक रुक नहीं सकता था क्योंकि वह जानता था की उसकी मां कपड़े बदल रही है,,,, इसलिए वहां धीरे से वहां से चलतआ बना और अपने कमरे में जाने वाला था कि वह अपनी मां के कमरे से निकाल कर दीवार की ओट के पीछे खड़ा हो गया वह सुनना चाहता था कि उसकी नानी कुछ बोलती है कि नहीं,,, जब उसकी नानी को भी लगा कि अंकित अपने कमरे में चला गया है तो वह धीरे से अपनी बेटी सुगंधा को बोली।)

सुगंधा आप तुझे थोड़ा सहूलियत से रहना चाहिए,,,।

सहूलियत से मैं कुछ समझी नहीं,,,,(साड़ी को ठीक तरह से अपनी कमर में खोंसते हुए बोली,,)

सहुलियत से मतलब की अब तेरा बेटा बड़ा हो गया है जवान हो गया है ऐसे में उसकी आंखों के सामने कपड़े बदलने कपड़े उतारना अच्छी बात नहीं है तू नहीं जानती लेकिन इस उम्र के लड़के औरतों के प्रति आकर्षण होने लगते हैं,,,,।

अरे मां वो मेरा बेटा है,,,, भला वह ऐसा कैसे कर सकता है,,,(अपने बेटे के बारे में सब कुछ जानने के बावजूद भी सुगंधा जानबूझकर अपनी मां से इस तरह की बातें कर रही थी ताकि उसकी मां को बिल्कुल भी शक ना हो कि उसका बेटा भी दूसरे लड़कों की तरह है,,, सुगंधा की बात सुनकर उसकी मां बोली,,)

तू नहीं जानते तेरा बेटा तो है लेकिन इससे पहले वह एक मर्द है और मर्द को हर एक रिश्ते में सिर्फ एक औरत ही नजर आती है,,,,,,,।
(दीवार के पीछे छुपकर अंकित अपनी नानी की बातें सुनकर एकदम सन्न रह गया,,,, क्योंकि जो कुछ भी उसकी नानी कह रही थी उसमें सत प्रतिशत सच्चाई थी,,,,, वह कान लगाकर और भी बातें सुनने लगा अपनी मां की बात सुनकर सुगंध बोली,,,)

अंकित ऐसा नहीं है मां,,,।

तू पागल है सुगंधा तू दुनिया नहीं देखी है इसलिए ऐसा कह रही है,,, अब तुझे क्या बताऊं अपने गांव की ही बात है तेरे जैसे ही एक औरत अपने बेटे के सामने इस तरह से कपड़े पहनती थी उतारती थी नहाती थी और यह सब अपने बेटे के सामने करती थी बेटा धीरे-धीरे जवान होने लगा और उसे इतनी मां की इस तरह की हरकत उसकी तरफ उसे आकर्षित करने लगी उसे यह सब देखने में मजा आने लगा अपनी मां के अंगों को देखने में मजा आने लगा,,,,।

तो इससे क्या हो गया अपनी मर्यादा में तो था ना वो अब किसके मन में क्या चल रहा है कैसे पता चलेगा,,(अपनी मां की बात सुनकर सफाई देते हुए सुगंधा बोली)

अरे बुद्धू असली खेल तो उसके बाद ही शुरू हुआ एक दिन उसकी मां नहा कर कमरे में आई और एकदम नंगी अपने कपड़े ढूंढ रही थी कमरे में उसका बेटा मौजूद था इस बात से वह अनजान थी,,,, ।

 

तो क्या हुआ अपनी बेटे के सामने नंगी हो जाती थी,,,,।(सुगंधा हैरान होते हुए अपनी मां से बोली)

नहीं पूरी तरह से नंगी तो नहीं हो जाती थी बस कपड़े बदलने ना आना इतना ही चलता था लेकिन वह अनजान थी कि उसका बेटा कमरे में मौजूद है।

फिर क्या हुआ,,,?

(अपनी मां और अपनी नानी की बातें सुनकर दीवार के पीछे खड़ा अंकित पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,,)

फिर क्या था उसका लड़का पूरी तरह से जवान हो चुका था अपनी मां के खूबसूरत अंगों को देखकर उसके अंगो में भी बढ़ोतरी हो जाती थी,,,,,,,।

अंगो में बढ़ोतरी,,, मतलब मैं कुछ समझी नहीं,,,।

अरे बुद्धू अब मैं तुझे कैसे समझाऊं,,,, मतलब कि उसका खड़ा हो जाता है,,,।

ओहहहहह,,,,,

तू भी ना कुछ भी नहीं समझती,,,,।

अच्छा ठीक है फिर क्या हुआ,,,,?

फिर क्या था वह लड़का एकदम से अपनी मां को बाहों में भर लिया उसकी मां कुछ समझ पाती से पहले ही उसे पीछे से अपनी बाहों में भरे हुए उसके गर्दन पर चुंबनों की बौछार करने लगा,,,, और जब तक उसे एहसास होता कि उसे बाहों में भरने वाला कोई और नहीं उसका जवाब देता है और वह कुछ कर पाती है उससे अलग हो पाती इससे पहले ही उसका लड़का अपने पजामे को नीचे कर दिया था और अपने लंड को अपनी मां की गांड से रगडना शुरू कर दिया था,,, अब तो उसके बेटे की हरकत उसे भी पागल बनाने लगी,,,, वह मदहोश होने लगी और फिर दोनों के बीच वही हुआ जो नहीं होना चाहिए था,,,।

लेकिन यह सब तुम्हें कैसे मालूम,,,!(आश्चर्यजताते हुए सुगंधा बोली)

यह सब मुझे मालिश करने वाली औरत बताइए जो मेरी मालिश करती है और दोपहर में हुआ उसके घर गई थी उसकी मालिश करने के लिए और उसने खिड़की से यह सब कुछ देख ली और मुझे बताइ,,,।

ओहहह यह बात है,,,, लेकिन मन इसमें उस लड़के की तो गलती है ही लेकिन उसकी मां की भी गलती है,, अपने बेटे की हरकत पर दो तमाचा लगा दी होती तो उसका दीवानापन उतर जाता,,,।

 

अरे बुद्धु वह भी ऐसा कर सकती थी लेकिन महीनो से वह अपने पति से दूर थी और ऐसे में उसके बेटे के बदन की गर्मी उसे एकदम से पिघला दी,,,, वह अपने बेटे की बाहों में और उसकी हरकत की वजह से मजबूर हो गई,,,,, और उसके बाद जब एक बार इस तरह के हालात पैदा हो जाते हैं तो फिर कदम पीछे नहीं हटते,,,,।

क्या मैं तुम्हें लगता है कि मैं ऐसा कुछ करूंगी,,,।

नहीं बेटी मैं जानती हूं तु ऐसा नहीं करेगी,,, लेकिन भूख मजबूर कर देती है चाहे पेट की हो या बदन की,,,,।

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला आप खामखा कुछ ज्यादा ही सोच रहीं है,,,।

चल कोई बात नहीं जैसा तु कह रही है वैसा ही हो,,,, मैं तो अंकित की उम्र देख कर कह रही थी अब वह पूरी तरह से जवान हो चुका है,,, ऐसे में कुछ भी हो सकता है,,।

कुछ भी नहीं होने वाला आप भी कर रहे हैं मुझे अपने बेटे पर पूरा भरोसा है,,,।

(अंकित अपनी मां और अपनी नानी की बातें सुनकर पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था वह समझ रहा था कि उसकी नानी को ऐसा ही लग रहा था कि दोनों के बीच ऐसा ही चला रहा तो कुछ ना कुछ हो जाएगा वह तो पहली बार में ही समझ गई थी एक जवान लड़के के मन को इसका मतलब साफ था कि वह पूरी तरह से अनुभव से भरी हुई थी,,, अंकित की नानी सुगंधा से इस तरह की बातें इसलिए कह रही थी क्योंकि वह रात को ही अंकित के मर्दाना अंग को अनुभव करचुकी थी,,, भले ही वह पूरी तरह से नींद में था,,, लेकिन नींद में भी वह पूरी तरह से उत्तेजित था,,, उसके लंड को अपनी गांड के बीचों बीच महसूस करके उसकी नानी पूरी तरह से दंग हो गई थी इसलिए वह अपनी बेटी सुगंधा से अपना अनुभव बता रही थी,,,।

 

सुगंधा भी अपनी मां के कहने का मतलब कौन अच्छी तरह से समझती थी वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी खुद की हालत उसकी मां ने जिस औरत के बारे में बताया खुद वैसे ही है सुगंध को अच्छी तरह से मालूम था कि उसके और उसके बेटे के बीच की मर्यादा की दीवार किसी भी दिन गिर कर टूट सकती है वह तो अपनी मां को केवल दिलासा देने के लिए कह रही थी बाकी उसके भी मन में वही सब चल रहा था वह भी अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होना चाहती थी,,,, लेकिन अपनी मां को बिल्कुल भी शक होने देना नहीं चाहती थी अपनी मां के सामने वह अपने चरित्रवान होने का बखान कर रही थी,,,। अंकित की नानी को अपनी बेटी पर भरोसा था लेकिन वह ईस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि आप और की एक साथ नहीं रह सकती उनका मिलना तय रहता है। थोड़ी देर और खड़ा रहने के बाद अंकित अपने कमरे में चला गया।

रात को अंकित के खाने के मुताबिक ही भोजन बनाया गया और घर के सभी सदस्य भोजन करके अपने-अपना काम निपटाकर अपनी-अपने कमरे में सोने के लिए चाहिए अंकित की नानी अंकित के साथ उसके कमरे में सोने के लिए आ गई,,, अंकित की नई पलंग पर बैठी हुई थी और अंकित अपने लिए नीचे चटाई बिछाने लगा तो उसे देखकर उसकी नानी बोली।

 

यह क्या कर रहा है बेटा,,, जब तक मैं हूं इस घर में तो मेरे साथ ही सोना जैसा कि कल सोया था।

नहीं नानी मुझे लग रहा है कि आपको दिक्कत होती होगी,,,।

मुझे बिल्कुल भी दिक्कत नहीं होती चल छोड़ चटाई,,,(इतना कहकर खुद उसके हाथ से चटाई लेकर एक तरफ राखी और उसका हाथ पकड़ कर पलंग पर अपने पास बिठा दी,,,, रात की यादें उसके जेहन में पूरी तरह से ताजा थी,,,, अंकित के लंड की चुभन उसे अपनी गांड के बीचों बीच अभी भी महसूस हो रही थी,,,,,, वह बड़े प्यार से अंकित थी मासूम चेहरे की तरफ देखते हुए बोली,,,)

तेरे लिए तो मैं ही दुल्हन तोड़ कर लाऊंगी और वह अभी गांव की एकदम मजबूत जो तेरी अच्छे से सेवा कर सके,,,।

क्या नानी आप भी अभी मेरी कोई उम्र थोड़ी है,,,।

अरे बुद्धु अब तेरी उम्र हो गई है,,,, पूरा जवान हो गया है गांव में होता तो अब तक तेरी शादी हो गई होती,,,,।

नहीं नानी अभी मुझे शादी नहीं करनी है अभी तो मुझे पढ़ना है,,,( अंकित एकदम शरमाता हुआ बोला उसकी बात सुनकर उसकी नानी मुस्कुराते हुए बोली …)

 

क्यों तुझे लगता है कि तू औरत को संभाल नहीं पाएगा इसलिए ऐसा बोल रहा है ना,,,।

नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है संभालने में क्या है,,,!

तुम्हारी बात समझ नहीं रहा है,,, यहां संभालने का मतलब बहुत बड़ा है शायद तो समझ नहीं पा रहा है।

आपकी बात मुझे समझ में नहीं आ रही नई जरा खुल कर बताओ,,,,।

चल रहने दे जब समय आएगा तो समझ जाएगा,,,,,,,( अच्छी तरह से जानते थे कि वह अपने नाती से इस समय खुलकर नहीं बता सकती इसलिए वह जानबूझकर बहाना बनाते हुए बोली,,,) अच्छा थोड़ा सा सरसों का तेल मिलेगा,,,,।

हां क्यों नहीं,,, लेकिन करोगी क्या,,,?

मुझे पैरों में थोड़ा दर्द होता है मालिश करनी पड़ती है तब जाकरनींद आती है,,,।

तो कोई बात नहीं नई आज मैं तुम्हारी मालिश कर दूंगा,,,,।

तब तो बहुत अच्छा रहेगा,,,, जा जल्दी लेकर आ,,,,।

 

(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित तुरंत अपने कमरे से निकाला और रसोई घर में चला गया और उसे जाता हुआ देख कर उसकी नानी के चेहरे पर वासना भरी मुस्कान तैरने लगी,,,,, यह सब उसकी नानी जान बुझकर कर रही थी,,,, थोड़ी देर में कटोरी में थोड़ा सा सरसों का तेल लेकर अंकित अपने कमरे में दाखिल हुआ और दरवाजा बंद कर दिया,,,, वह बिना कुछ बोले दिल की कटोरी लेकर घुटनों के बल बैठ गया और बोला,,,)

लाओ में मालिश कर देता हूं,,,,।

अरे ऐसे नहीं मैं लेट जाती हूं तब तु मालिश कर,,,

ठीक है नानी,,,,

,(अंकित की नई तुरंत पीठ के बल लेट गई लेकिन वह जानबूझकर अपनी साड़ी को बिल्कुल भी ऊपर नहीं उठाई क्योंकि वह यह कार्य अंकित को करने देना चाहती थी अंकित भी ठीक तरह से बिस्तर पर बैठ गया था और बिस्तर पर सरसों के तेल की कटोरी रख दिया था यह देखकर उसकी नानी बोली,,,,)

तुझे मालिश करना तो आता है ना,,,।

बिल्कुल नई इसमें क्या हुआ मालिश करने में कौन सी बड़ी बात है,,,।

 

चल ठीक है मैं भी देखती हूं तो अच्छी तरह से मालिश कर पता है कि नहीं,,,,,, चल अब शुरू हो जा,,,,,।

(इतना कहकर वह अंकित की तरफ देखने लगी,,, अंकित भी कभी उसकी तरफ तो कभी उसके पैरों की तरफ देख रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था की मालिश कहां करना है फिर वह अपने आप ही हाथ में सरसों का तेल लगाकर उसके तलवों में बारिश करने लगा तो यह देखकर उसकी नानी एकदम से बोली,,,)

अरे अरे वहां नहीं साड़ी घुटनों तक ऊपर उठा फिर मालिश कर,,,,,।
(अपनी नानी की बातें सुनकर अंकित नहीं लगा और वह अपने मन में सोचने लगा कि वह तो खुद की बेटी को उससे दूर रहने को कह रही थी और खुद उसके सामने अपनी साड़ी उठाने के लिए बोल रही है,,,,, फिर भी अंकित अपनी नानी की बात मानते हुए उसकी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर धीरे-धीरे उसे घुटनों की तरफ उठाने लगा,,, और ऐसा करने में उसे अद्भुत उत्तेजना का एहसास हो रहा था वाकई में यह काम उसके लिए मदहोशी से भर देने वाला था क्योंकि पहली बार वह अपने हाथों से किसी औरत की साड़ी ऊपर की तरफ उठा रहा था वैसे तो अपनी मां के कपड़ों को अपने हाथों से बदल चुका था लेकिन साड़ी को ऊपर की तरफ उठाना उसके लिए यह एक अद्भुत अनुभव था जिससे गुजरते हुए वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था और अनुभव से भरी हुई उसकी नानी उसके चेहरे के हाव-भाव को देख रही थी।

 

साड़ी को उठाते समय अंकित के चेहरे के बदलते हवाओं को देखकर अंकित की नानी मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि उसे लगने लगा था कि उसकी युक्ति कम कर रही है,,,,, और देखते ही देखते अंकित उसकी सारी घुटनों तक ऊपर उठा दिया था घुटनों के नीचे उसकी नंगी चिकनी टांग को देखकर अंकित के बदन में उत्तेजना के लहर रखने लगी थी वह जैसे तैसे करके अपनी उत्तेजना को दबा रहा था उसे काबू में कर रहा था,,,, अंकित सरसों के तेल को उसके पैरों पर गिराता इससे पहले उसकी नानी बोली,,,)

पूरे पैरों में मालिश करना बहुत दर्द करता है मालिश करने के बाद ही मुझे नींद आती है खासकर के पिंडलियों में,,,,,।(अंकित अपनी नानी की पिंडलियों की आकर्षक को पहले भी देख चुका था और खेली खाई अनुभव से भरी हुई उसकी कहानी अच्छी तरह से जानती थी कि एक मर्द के लिए औरत की मांसल पिंडलियां भी उत्तेजना का काम करती है,, अपनी नानी की बातें सुनकर अंकित बोल,,,)

 

ठीक है नानी तुम बेफिक्र कर रहो,,,,(इतना क्या करवा सरसों के तेल की कटोरी अपने हाथ में ले लिया और उसकी धार को उसके पैरों पर गिरने लगा दोनों पैरों पर तेल की धार को गिरकर वहां कटोरी को एक तरफ रखकर अपने दोनों हाथों से उसकी मालिश करना शुरू कर दिया,,,, एक औरत की टांग को मालिश करते हैं उसके बदन में मदहोशी छाने लगी थी,,,, और मालिश करते हुए अंकित अपने मन में सोच रहा था कि उसकी नानी तो पूरी तरह से अनुभव से भरी हुई है तो उसे इतना भी तो पता होगा कि एक मर्द की हालत इस समय क्या हो रही होगी उसके मन में क्या चल रहा होगा यह सोचकर वह उत्तेजना से गनगनाने लगा,,,, अंकित बड़े अच्छे से अपनी नानी के पैरों की मालिश कर रहा था लेकिन वह पेर को एकदम बिस्तर से सटाए हुए थी इसलिए वह ठीक तरह से मालिश नहीं कर पा रहा था,,,,, इसलिए वह अपनी नानी से बोला,,,)

नई थोड़ा पैरों को मोड लो तो अच्छी तरह से मालिश हो जाएगी,,,।
(अंकित की बातें सुनकर वह मुस्कुरा दी और बोली,,,)

 

ठीक है,,,(और इतना कह कर अपने पैरों को घुटनों से थोड़े से मुरली जिसकी वजह से उसकी साड़ी अपनी आंख थोड़ा सा और नीचे सरक गई और उसकी मोटी मोटी जांघें एकदम से उजागर हो गई पल भर के लिए अंकित की नजरे उसकी नानी की मोटी मोटी जांघों पर टिक गई,,,,, कमरे में अभी भी ट्यूब लाइट जल रही थी जिसके दुधिया रोशनी में उसका गोरा बदन और भी ज्यादा दूधिया लग रहा था,, अंकित जिस तरह से उसकी मोती मोती जैंगो की तरफ देख रहा था यह देखकर उसकी रानी एकदम प्रसन्न हो गई थी क्योंकि वह समझ गई थी कि उसकी जवानी का आकर्षण अभी भी बरकरार था भले ही वह उम्र के इस दौर में पहुंच चुकी थी लेकिन उसके बदन का भरावपन किसी भी मर्द का पानी निकालने में अभी भी पूरी तरह से सच में था और इसका ताजा उदाहरण था उसका नाती अंकित जो की पूरी तरह से जवान हो चुका था और उसे प्यासी नजरों से देख रहा था,,।

 

उसकी नानी बोली कुछ नहीं और अंकित फिर से उसके पैरों पर मालिश करने लगा,,,, अपनी नानी के बदन की गर्मी उसे अपनी हथेली में महसूस हो रही थी वह पागल हुआ जा रहा था उत्तेजित हुआ जा रहा था और लंड उसके पेट में पूरी तरह से तंबू बनाया हुआ था जिसे वह बार-बार अपने हाथों से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा था और उसकी यह हरकत उसकी नानी की नजर में आ चुकी थी यह देखकर तो उसकी नानी मदहोश होने लगी थी क्योंकि उसके लंड की चुभन अपनी गांड पर उसे अभी भी अच्छी तरह से महसूस हो रही थी,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से सिर्फ पैरों पर मालिश करता रहा और उसकी नानी चाहती थी कि आप उसकी हथेली ऊपर की तरफ आगे बढ़े लेकिन वह जानती थी कि उसका नाती शायद अभी कच्चा खिलाड़ी है वरना अगर वह औरतों के बारे में अच्छी तरह से जानता था शायद उसकी दोनों हथेलियां इस समय उसकी साड़ी के अंदर होती,,,,, इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली।

बस अब थोड़ा ऊपर की तरफ कर दे जांघों पर भी बहुत दर्द होता है तेरे हाथों में तो जादू है मुझे आराम लगने लगा है लेकिन जांघों में दर्द हो रहा है,,,,,।

 

ठीक है नानी मैं अभी मालिश करदेता हूं,,,,(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था, उत्तेजना के मारे उसका दिल जोरो से धड़कता है अपनी नानी की मोटी मोटी जांघो को देखकर वह पहले ही उत्तेजित हो चुका था अब उस पर हथेली रखकर कर मालिश करना था एक तरह से एक बहाने से उसे स्पर्श करना था इसलिए उसकी हालत खराब हो रही थी,,,, वह धीरे से फिर से सरसों की कटोरी उठाया और उसकी धार अपनी नानी की मोटी जांघों पर ना गिराते हुए उसे अपनी हथेली पर गिराने लगा,, और फिर कटोरी को एक तरफ रखकर वापस अपनी नानी की मोटी मोटी जांघो पर अपनी हथेली से मालिश करने लगा,,, वास्तव में यह उसके जीवन का पहला मालिश था जब वह किसी औरत की मालिश कर रहा था और वह भी अपनी ही नानी की उसकी मोटी मोटी चिकनी जांघों पर मालिश करते हुए वह अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,,, अंकित की नानी मुस्कुराते हुए बोली,,,,।)

 

अपनी नानी की जांघों को मालिश करते हुए कैसा लग रहा है तुझे,,,।

बहुत अच्छा लग रहा है,,,इसी बहाने आपकी सेवा करने का मौका तो मिल रहा है,,,,,,।

तू मेरे साथ नहीं रहता वरना सेवा करने का मौका तुझे बहुत मिले,,,,(अंकित की नानी अंकित से इशारे में बहुत बड़ी बात बोल रही थी लेकिन अंकित समझ नहीं पा रहा था,,,, बस वह मुस्कुराए जा रहा था लेकिन उसे अपनी नानी की मालिश करने में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसकी नानी भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी मोटी मोटी जांघों को स्पर्श करके उसके नाती का लंड खड़ा हो चुका है,,, इस बात के एहसास से ही वह पानी पानी हुए जा रही थी उसकी बुर हल्का-हल्का पानी छोड़ रही थी,,,, फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उसकी नानी बोली,,,,)

 

अच्छा यह बात कभी इस तरह से अपनी मां की मालिश कीया है कि नहीं,,,,,,(इस तरह का सवाल करके अंकित की रानी अपनी ही बेटी के चरित्र के बारे में जांच पड़ताल कर रही थी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका नाती भोला भाला है,,, अगर वह अपनी मां की मालिश करता होगा तो जरूर बताएगा और इस बात को भी अच्छी तरह से जानते थे कि अगर अंकित अपनी मां की माली से इस तरह से करता होगा तो जरूर दोनों के बीच शारीरिक आकर्षण बढ़ गया होगा और इसके चलते होना हो दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गया होगा क्योंकि वह एक औरत के मन को अच्छी तरह से समझती थी वह अपनी बेटी के हालात के बारे में अच्छी तरह से जानती थी,,,, लेकिन तभी अपने नाती का जवाब सुनकर उसे संतुष्टि प्राप्त हुआ जब उसने कहा,,,)

नहीं,,,, बिल्कुल भी नहीं सच कहूं तो आज यह पहली बार में मालिश कर रहा हूं,,,,।

 

ओहहहहह,,, पहली बार कर रहा है फिर भी इतने अच्छे से मालिश कर लेता है,,,,।

तो इसमें कौन सी बड़ी बात है यह तो कोई भी कर लेगा,,,।

फिर भी तेरे हाथों में जादू है,,,।

चलो अच्छा ही है इसी बहाने आपको आराम तो मिला,,,,(अपनी नानी की जांघों पर मालिश करते हुए वह बोला,,,, लेकिन इस दौरान उसकी नानी शरारत करते हुए अपने घुटनों को हल्का सा और मारते हुए थोड़ा ऊपर की तरफ उठा दी और अंकित के हाथों से उसकी साड़ी भी हल्के से और नीचे की तरफ खिसक गई,,,और जैसे ही साड़ी हल्के से थोड़ा और नीचे सरकी अंकित को ऐसा नजारा दिखाई दिया कि उसके होश उड़ गए।)

अंकित की नानी के द्वारा हल्के से घुटना मोड़ने और हल्के से साड़ी नीचे सरकने की वजह से जो नजर अंकित को दिखाई दिया उसे देखकर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई थी उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था,,, वह पलक झपकाए बिना ही अपनी नानी की साड़ी के अंदर देखे जा रहा था और यह देखकर उसकी नानी मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि उसकी नानी जानबूझकर अपनी साड़ी को थोड़ा और नीचे की तरफ सरकाई थी जिससे वह जो दिखाना चाहती है उसका नाती वही देखें,,, अंकित की नई का काम बन चुका था अंकित की रानी एक मर्द को काबू में करना अच्छी तरह से जानती थी,,, वह अच्छी तरह से जानती थी कि एक मर्द किस तरह से औरत के आगे घुटने टेक देता है और अंकित की हालत को देखकर वह समझ गई थी कि यह बहुत जल्दी उसके काबू में आ जाएगा,,,,।,

 

अंकित अपने आप पर अपनी उत्तेजना पर काबू करके फिर से सरसों का तेल अपनी हथेली पर गिरने लगा लेकिन इस दौरान उसकी नजर उसकी नानी की साड़ी के अंदर ही थी उसकी दोनों टांगों के बीच अद्भुत नजारा दिखाई दे रहा था जिसे देखकर वह पागल हुआ जा रहा था वह अपनी मम्मी सो रहा था कि उसकी मां की बुर में और उसकी नानी की बुर में बिल्कुल भी फर्क नहीं था और वैसे भी मां बेटी में कुछ ज्यादा फर्क नहीं था बस थोड़ा सा उम्र का ही फर्क था,,, लेकिन यहां पर अंकित को एक बात हैरान कर रही थी कि उसकी नानी की बुर पर बिल्कुल भी बाल नहीं था उसकी नानी भी उसकी मां की तरह ही अपनी बर को एकदम चिकनी सपाट रखती थी और ऐसा क्यों करती थी यह अंकित को समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि वह तो उसकी मां की भी मां थी,,,, अपने मन में इस तरह के ख्याल को वह एक तरफ रखकर जो कुछ भी आंखों के सामने था उसका रसपान वह अपनी आंखों से कर लेना चाहता था इसलिए सरसों के तेल को हाथ में लेकर मालिश करना शुरू कर दिया,,,,, लेकिन अपनी नजरों से अपनी नानी की बुर पर से हटा नहीं रहा था।,,,, अंकित सभी सपने में नहीं सोचा था कि जो एक उसकी मुलाकात अपनी नानी से हो जाएगी और उसकी इस तरह से सेवा करने का मौका मिलेगा,,,,।

 

अंकित की नानी मन ही मन मुस्कुरा रही थी वह प्रसन्नता से और भी ज्यादा व्याकुल और उत्सुक हुए जा रही थी क्योंकि वह एक खेली खाई औरत थी अनुभव से भरी हुई मर्दों को काबू करने का उसके पास ढेर सारा तरीका था यह तो सिर्फ पहले ही तरीका था जिसमें उसका नाती पूरी तरह से ढेर होता हुआ दिखाई दे रहा था। कुछ देर के लिए उसकी नानी कुछ नहीं बोली वह देखना चाहती कि उसका नाती क्या करता है अपनी हरकत को बढ़ाता है या सिर्फ नजरों से ही सारा खेल खेलेगा,,, कुछ देर तक अंकित सहज रूप से उसकी जांघों की मालिश करता रहा उसकी मोटी मोटी चिकनी गोरी जांघों को अपने दोनों हथेलियां में देखकर मालिश करने में उसे पर अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी जिसे वह बयान नहीं कर सकता था इस उम्र में भी औरत का बदन इस तरह से आकर्षक और मदहोश कर देने वाला होता है आज उसे पहली बार पता चल रहा था,,, वरना उसे अपनी मां की उम्र की औरतों में ही ज्यादा आकर्षण था और वैसे भी उसका अनुभव धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था और उसके मामले में अपनी मां से जितना नहीं सिखाता था उतना बाहर की औरतों से सीख रही थी सुमन और राहुल की मां शामिल थी।

 

राहुल की मां तुमसे एक अद्भुत अनुभव देखकर अपने घर से भेजी थी जिसे पाकर वह पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था और उसे इतना आत्मविश्वास होने लगा था कि वह किसी औरत को भी अपनी जीभ से संतुष्ट कर सकता है,,,, अंकित लगातार अपनी नानी की कचोरी जैसी फुली हुई बुर को अपनी नजरों से ही भेद रहा था,,, और इसमें भी उसे अद्भुत आनंद प्राप्त हो रहा था,,,, अंकित की नानी के मन में बहुत कुछ चल रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या किया जाए वैसे तो उसे मस्जिद तक पहुंचाने के सारे रास्ते मालूम थे लेकिन सफर का साथी कोई और नहीं उसका अपना ही नाती था इसलिए थोड़ा हिचकीचा रही थी,,, अंकित के नानी के मन में बहुत सारे सवाल उठ रहे थे जिसका जवाब हो खुद ही अपने मन में दे रही थी,,,, और यह सच ही है कि अगर रात को सोते समय उसे अपनी गांड के बीचों बीच अपने नाती के लंड की चुभन महसुस ना होती तो शायद वह यह सब करने पर मजबूर ना होती,,,।

 

अंकित के लंड को तो वह अपनी नजरों से तो नहीं देखी थी,,, लेकिन उसका एहसास वह अपने बदन में अभी तक महसूस कर रही थी उसकी चुभन बार-बार उसे याद आ रही थी जिसके चलते उसे इस बात का अंदाजा लग गया था कि उसके नाती के टांगों के बीच मर्दाना अंग नहीं बल्कि हथियार है जो किसी भी औरत को संतुष्ट करने में सक्षम है,,,, ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में उसकी मोटी मोटी जांघें एकदम नग्न थी,,, जिसे देखकर अंकित के बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,, अंकित की नजर उसकी नानी की बुर पर से है नहीं रही थी जिसमें से उत्तेजना के मारे मदन रस की बूंद और उसकी बूंद की तरह ऊपरी सतह पर आकर चमक रही थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था वह उसे बूंद को अपने होठों से लगा लेना चाहता था क्योंकि सुमन और नूपुर ने उस बूंद को चाटने का उसे एक अलग ही अनुभूति कराई थी,,, इसलिए अंकित को पूरा विश्वास था कि अगर उसकी नानी उसे मौका देगी तो वह भी पूरी तरह से उसे मस्त कर देगा,,,,।

 

अपनी नानी के इस व्यवहार को देखकर उसे राहुल की बातें याद आने लगी थी उसे याद आने लगा था कि राहुल ने बताया था कि घर की औरतें इसी तरह से अपने अंगों का प्रदर्शन करके घर के मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं और फिर उनसे अपनी प्यास बुझाती हैं, यह ख्याल मन में आते ही वह सच में पड़ गया कि क्या उसकी नानी भी यही चाहती है,,, अगर उसके मन में ऐसा कुछ नहीं होता तो वह अपनी साड़ी को भी इस कदर उपर ना उठाती कि उसका नाती सब कुछ देख ले,,,, अंकित को धीरे-धीरे समझ में आ रहा था कि उसकी नानी यह सब जानबूझकर कर रही है उसके मन में भी बहुत कुछ चल रहा है क्योंकि आज कमरे के बाहर खड़े होकर अंकित ने अपनी नानी की बात को सुना था,,, और उसकी नानी किसी गांव की औरत का उदाहरण देकर यही सब बता रही थी कि कैसे एक मर्द और औरत करीब आते हैं।

 

इन सब बातों को सोते हुए भी अंकित की नजर में अपनी नानी की बुर से हट नहीं रही थी वह अपनी नानी की बुर के बारे में ही सोच रहा था,,,, अंकित को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी नानी की बुर पर उसकी उम्र का बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ा था। यही तो अंकित के लिए आश्चर्य की बात थी क्योंकि उसे साफ तौर पर दिखाई दे रहा था कि उसकी नानी की बुर में उसकी मां की बुर में रत्ती भर भी फर्क नहीं थी बिल्कुल सपाट और चिकनी बस इतना ही फर्क था कि उसकी मां की गुलाबी पर एकदम पतली दरार नुमा थी और उसकी नानी की बुर के बीचों बीच हल्की सी गुलाबी पट्टी बाहर को झांक रही थी,,,, जिससे उसकी खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जा रही थी,,,, यह सब देखकर अंकित का लंड गदर मचाने को पूरी तरह से तैयार हो चुका था,,, वह इस कदर पेट के अंदर बलखा रहा था कि मानो पेट फाड़ कर बाहर आ जाएगा जिसे बार-बार वह अपना हाथ लगाकर व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा था और यह सब उसकी नानी अपनी आंखों से देख कर मन ही मन उत्तेजित भी हो रही थी और प्रसन्न भी हो रही थी क्योंकि उसकी जवानी का जादू चल चुका था इस उम्र में भी उसकी जवानी बरकरार थी यही बहुत बड़ी बात थी जिसका श्रेय वह हमेशा खेतों में काम करने और इधर-उधर घूम कर अपने बदन की चर्बी को कम करने में लगा दी थी,,,।

 

सरसों के तेल की कटोरी में सरसों का तेल बहुत ही काम बचा था सारा तेल आज उसने अपनी नानी की जांघों और टांगों पर लगाकर उसकी मालिश करने में खत्म कर दिया था और अंकित बड़े अच्छे से उसकी मालिश भी कर रहा था,,, तकरीबन 1 घंटा जैसा हो गया था अंकित लगातार अपनी नानी की मालिश कर रहा था वह थक जाता अगर उसकी आंखों के सामने उसकी गुलाबी बुर दिखाई ना देती तो उसे देखकर ही वह मालिश करने में बिल्कुल भी थकान महसूस नहीं कर रहा था,,,, लेकिन अब लगने लगा था अंकित की नानी को की आगे बढ़ना चाहिए नहीं तो सारी रात ऐसे ही मालिश करने और करवाने में ही गुजर जाएगी इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली,,,। और सीधा तीर निशाने पर लगाते हुए पहला ही प्रश्न एकदम से दाग दी,,,।

 

मैं कब से देख रही हूं एक टक तु साड़ी के अंदर क्या देख रहा है,,,?(ऐसा कहते हुए वह हल्के से उठ कर बैठने लगी लेकिन अपनी नानी के इस सवाल पर अंकित एकदम से घबरा गया था और वह अपनी नानी की तरफ देखने लगा था उसकी नानी अंकित की हालत को समझ गई थी अंकित कुछ बोल नहीं पा रहा था इसलिए वह खुद ही अपनी दोनों टांगों के बीच झांकने लगी और अपनी बुर को देखकर एकदम से मुस्कुराते हुए बोली,,,)

ओहहह यह बात है तो तू यह देख रहा है कब से तभी मैं सोचूं कि इतनी ध्यान से तो क्या देख रहा है,,, मुझे क्या मालूम कि मेरी बुर दिखाई दे रही है,,,(अंकित ने कभी कल्पना नहीं किया था कि उसकी नानी अपने अंग का नाम इस तरह से खुल कर लेंगी और वह भी उसके सामने अपनी नानी के मुंह से बुर शब्द सुनकर उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगी,,, वह आश्चार्य से अपनी नानी की तरफ देखने लगा,,,, और उसकी नानी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,) वह क्या है ना कि मेरी आदत है रात को सोते समय में चड्डी नहीं पहनती,,,,।

 

(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित थोड़ा घबरा गया था इसलिए वह बोला)

अनजाने में मैंने देख लिया मुझे मालूम नहीं था मुझे यह दिखाई देगा,,,।

क्या दिखाई देगा तुझे इसका नाम नहीं मालूम,,,(एकदम साफ शब्दों में वह बोली,,, अंकित अपनी नानी का सवाल सुनकर झेंप गया,,,, लेकिन धीरे से बोला,,,)

मालूम तो है लेकिन इसका नाम लेने में शर्म आती है,,,।

अरे एकदम बुद्धू है क्या शादी की उम्र हो गई और औरत की इस अंग का नाम लेने में तुझे शर्म आती है पता नहीं शादी के बाद क्या करेगा कहीं ऐसा ना हो कि तेरी बीवी किसी और के पास चली जाए,,,।

मेरी बीवी किसी और के पास में कुछ समझा नहीं,,,(अंकित को अपनी नानी की कहानी बात समझ में आ रही थी लेकिन फिर भी वह अनजान बनने का नाटक करते हुए बोला,,, उसकी बात सुनकर उसकी नानी मुस्कुराते हुए बोली)

अरे बुद्धु इतना भी नहीं समझता,,,, पता नहीं तेरा क्या होगा अच्छा यह बात इससे पहले तूने किसी औरत की नहीं देखी है क्या,,,,?

नहीं नई बिल्कुल भी नहीं मैं तो पहली बार देख रहा हूं और देख कर ही हैरान होगया था,,,, कि तुम औरतों के पास ऐसाहोता है,,,,(एकदम नादान बनने की कोशिश करते हुए अंकित बोला उसकी बात सुनकर उसकी नानी हंसने लगी और हंसते हुए बोली)

अरे हम औरतों के पास ऐसा ही होता है मेरे पास भी ऐसा है तेरी मां के पास भी ऐसा है,,, क्या सच में तूने कभी ऐसा किसी औरत की नहीं देखा,,,।

नहीं नानी में सच कह रहा हूं मैं किसी की नहीं देखा हूं,,,,।

अपनी मां को तो कपड़े बदलते हुए देखा है ना नहाते हुए देखा है तो क्या उसके ईस अंग को नहीं देख पाया,,,,(अंकित की नानी अपने इस सवाल से एक बार फिर से मां बेटे की हकीकत जानने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंकित भी चालाक था वह पूरी तरह से अपने नानी के सामने नादान बनने की कोशिश कर रहा था उसे बार-बार राहुल की कही गई बातें याद आ रही थी और सब कुछ उसके साथ वैसा ही हो रहा था जैसा राहुल बताता है कि हर घर में औरतें किस तरह से मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं अंकित समझ गया था कि उसकी नानी के मन में क्या चल रहा है अगर आज सबको ठीक होगा तो आज हुआ एक नया सुख अनुभव करेगा इसलिए अपनी नानी की बात सुनकर वह बोला,,,,)

कैसी बातें करती हो नानी,,,छी,,,, मैं कभी इस बारे में सोच भी नहीं सकता देखने की तो बात ही दूर है वह तो आज अनजाने में तुम्हारी देख लिया,,,,।

(जिस तरह से हम कितने बोला था उसकी बात सुनकर उसकी नानी को पूरा विश्वास हो गया की मां बेटे के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है वह एकदम प्रसन्न होते हुए बोली)

चल कोई बात नहीं नहीं देखा तो ना सही आज देख लिया एक न एक दिन तो तुझे देखा नहीं था आखिरकार मर्द जो है औरत का तो हर एक अंग तुझे देखना ही होगा उसे खुश जो करना है,,,।

देख कर खुश करना है मे कुछ समझा नहीं नानी,,,।

लगता है तुझे सब कुछ बताना ही होगा तेरे हाथों में जादू है कि मेरा दर्द काम हो गया है लेकिन अब सोचती हूं की कमर पर भी मालिश करवा लुं,,,, लेकिन इसके लिए मुझे अपने कपड़े उतारने पड़ेंगे,,,,।

नहीं नहीं नानी ऐसा मत करना मुझे शर्म आती है,,,।

अरे बुद्धू शर्मा ना तो मुझे चाहिए और शर्म तुझे आती है और वैसे भी अब शर्म जैसी कोई बात नहीं हम दोनों में जो नहीं देखना था वह तो तुने देख ही लिया है अब छुपाने लायक कुछ बचा ही नहीं है,,, अच्छा एक काम कर मैं घूम जाती हूं तो मेरी कमर की मालिश कर,,,,।

लेकिन ऐसा करने में तो साड़ी,,,,(इतना कहकर अंकित चुप हो गया उसकी नानी समझ गई की वह क्या बोलना चाहता है,,, इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

मैं जानती हूं लेकिन तू साड़ी ऊपर कर देना तब तू आराम से मालिश कर पाएगा,,,।

लेकिन ऐसे में तो,,,(फिर से चुप हो गया इससे आगे नहीं बोल पाया उसकी नानी जानती थी कि वह क्या कहना चाहता है इसलिए फिर से मुस्कुराते हुए बोली,,,)

हां मैं जानती हूं साड़ी ऊपर करने से मेरी गांड नंगी हो जाएगी ना तो इसमें क्या हो गया अब तेरे सामने मुझे शर्म नहीं आती क्योंकि तूने मेरा अनमोल खजाना तो देख ही लिया है अब छुपाने लायक कुछ बचा ही नहीं है और वैसे भी तेरे हाथों का जादू मैं अपने पूरे बदन पर महसूस करना चाहती हूं ताकि यहां से जाते-जाते मेरे बदन का दर्द पूरी तरह से दूर हो जाए,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित का जवाब जाने बिना ही वह घूम गई और पेट के बल लेट गई उसके इस तरह से लेटने पर उसकी साड़ी उसकी जांघों के ऊपरी सतह तक चढ़ी हुई थी जिससे उसके नितंबों के निचले स्तर का कटाव दिखाई दे रहा था जहां से उसका उभार शुरू होता है,,,, यह देखकर कर अंकित की उत्तेजना बढ़ने लगी उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगी,,,, वह समझ गया था किसकी नानी क्या चाहती है बस खुले शब्दों में बोल नहीं पा रही है और इस बात को समझ कर अंकित मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,,, घड़ी की तरफ देखा तो 12:00 रहे थे अभी तो पूरी रात बाकी थी काफी समय था दोनों के पास अंकित को एहसास होने लगा था कि दोनों के बीच आज कुछ ना कुछ जरूर हो जाएगा यह सोचकर वह मुस्कुराते हुए,,,, अपनी नानी की साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी कमर की तरफ उठाने लगा,,,,।

ऐसा करने में अंकित का दिल बड़े जोरों से ढक रहा था आज उसकी आंखों के सामने उसकी मां की भी मन थी जो जवानी में भी उसे एक कदम बढ़ाकर आगे थी उसका चरित्र भी उसकी मां से बेहद अद्भुत था जहां एक तरफ उसकी मां शर्म और मर्यादा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी वही उसकी नानी पूरी तरह से खुलकर मजा लूटना चाहती थी जो की एक ही रात में ईतना आगे बढ़ चुकी थी,,,, साड़ी को ऊपर करने में उसकी नानी का खुद का जांघों का दबाव साड़ी को ऊपर करने में बाधा रूप बन रहा था जिसे खुद उसकी नानी अपने बदन को हल्का सा ऊपर उठकर दूर कर दी थी अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठने के साथ ही अंकित अपने दोनों हाथों से फुर्ति दिखाता हुआ तुरंत अपनी नानी की साड़ी को एकदम कमर तक उठा दिया और कमर तक साड़ी उठाते ही,,, उसकी नानी की भरपूर जवानी से भरी हुई बड़ी-बड़ी कांड एकदम से उजागर हो गई जो ट्यूबलाइट की दुधिया रोशनी में और ज्यादा चमक रही थी,,,, अपनी नानी की गांड को नजदीक से देखने के बाद उसे बात का एहसास हो रहा था किसकी नानी की गांड उसकी मां की गांड से थोड़ी सी ज्यादा बड़ी थी इसके लिए और भी ज्यादा आकर्षक और मदहोश कर देने वाली दिखाई दे रही थी।

अंकित अपनी नानी की गांड को देखकर एकदम उत्तेजित हुआ जा रहा था उसका लंड पेट फाड़ कर बाहर आने के लिए व्याकुल हो रहा था वहां कुछ देर तक अपनी नानी की गांड को देखता ही रहा,,, उसकी नानी तिरछी नजर से उसकी हरकत को देख रही थी वह जानती थी कि उसका नाती उसकी गांड को प्यासी नजरों से देख रहा है इसलिए वह कुछ देर तक खामोश रही और फिर बोली ,,,,

अब मालिश भी करेगा कि सिर्फ देखता ही रहेगा लगता है कि यह सब पहली बार देख रहा है,,,।
(अंकित के नई जानबूझकर उसे से ऐसा कह रही थी और अपनी नानी की बात सुनकर अंकित कुछ बोल नहीं पाया वाकई में वह अपनी नानी की मदमस्त भरी हुई गांड देखकर स्तब्ध रह गया था। अपनी नानी की बात सुनकर वह धीरे से बोला,,)

सच कह रही हो नानी यह सब में पहली बार देख रहा हूं,,,,,।

चल अच्छा यह सब तो बहुत बार देखने को मिलेगा आप जल्दी से मालिश कर दे,,,।
(इतना सुनकर अंकित फिर से सरसों के तेल को हथेली में लेकर अपनी नानी की गांड को दोनों हाथों में भर भर कर मालिश करना शुरू कर दिया वाकई में उसे बहुत मजा आ रहा था अपनी नानी की गांड की मालिश करने में,,,, वह कभी सोचा नहीं था कि उसे अपनी नानी की मालिश करना पड़ेगा और वह भी ऐसे हालत में,,, अंकित हैरान था,,,, और उसके हैरानी की वजह थी उसकी नानी की गांड वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था की उम्र दराज औरत की कहानी इतनी मदमस्त और मांसल होगी बिल्कुल उसकी मां की गांड की तरह बस उसकी मां की गांड की तुलना में उसकी नानी की गांड थोड़ी सी बड़ी थी,,,, अंकित दोनों हाथों का उपयोग करके अपनी नानी की गांड की मालिश करके उत्तेजितहुआ जा रहा था।

सच में वह अपने आप को किस्मत का धनी समझ रहा था वरना ऐसा मौका किसे मिलता है,,,, लंड की अकड़ पूरी तरह से उफान पर थी जिसे वह बार-बार अपने हाथ से व्यवस्थित कर रहा,,,, कुछ देर तक मालिश करने के बाद उसकी नानी बोली,,,.

अब थोड़ा सा तेल की धार गांड के बीचों बीच गिरा,,, और दरार के अंदर उंगली डालकर मालिश कर तब ज्यादा आराम मिलेगा,,,।

(अपनी नानी की बात सुनकर उत्तेजना से अंकित गनगना वह समझ गया था किसकी नानी क्या चाहती है और इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी कि उसकी नानी उसकी मां से एक कदम आगे थी उसकी मां तो केवल अपने अंगों का प्रदर्शन करती थी लेकिन कुछ करने को का नहीं पाती थी लेकिन उसकी नानी तो लगता है कि आज ही रात में सारा सुख उसे दे देगी अपनी नानी की बात सुनते ही वह सरसों के तेल की कटोरी फिर से अपने हाथ में ले लिया,,, और अपनी नानी के कहे अनुसार ही तेल की धार को उसकी गांड की दरार के अंदर गिराने लगा,,, और जैसे-जैसे सरसों के तेल की धार गांड की गहराई में उतर रही थी वैसे-वैसे अंकित की नानी का बदन कसमसा रहा था,,,, उसे एक अद्भुत आनंद की अनुभूति हो रही थी जिसकी वजह से उसकी बुर से मदन रस टपक रहा था।

उम्र के ईस पड़ाव पर बुर से मदन रस झरना यह भी बड़ी बात थी,,, क्योंकि इस उम्र में कभी कभार ही औरत की बुर गीली होती है,,, लेकिन अंकित की नानी की बुर ऐसे मौके पर बार-बार पानी छोड़ती थी जिसकी एक खास वजह थी की उम्र के इस दौर पर भी पहुंचकर अंकित की नानी मजा लेना नहीं छोड़ी थी उसके बदन से वासना बिल्कुल भी काम नहीं हुई थी और यही कारण था कि ऐसे हालात में बार-बार उसकी बुर पानी छोड़ती थी। देखते देखते अंकित कटोरी का सारा तेल अपनी नानी की गांड में उडेल दिया था,,, यहां पर अब वह अपने मन में यही सोच रहा था कि अब उसे भी यहां पर हिम्मत दिखाने की जरूरत है जैसा कि वह राहुल की मां के साथ हिम्मत दिखाया था। क्योंकि यह सब जो भी हो रहा है या उसकी नानी की तरफ से एक इशारा एक आमंत्रण है अगर आज वह इस इशारे को आमंत्रण को ठुकरा देता है तो उससे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं होगा,,, इस बात का अहसास होते ही अंकित अपने मन को एकदम मजबूत कर लिया था।

अंकित फिर से अपनी नानी की गांड की मालिश करना शुरू कर दिया था। लेकिन एक बार फिर से अपनी नानी की इजाजत चाहता था अपनी उंगलियों को गांड की दरार के अंदर ले जाने के लिए और जल्द ही उसे अपनी नानी की तरफ से इजाजत भी मिल गई,,, उसकी नानी उसे इजाजत देते हुए बोली,,,।

अरे अंदर उंगली डालकरमालिश कर,,,।

जी नानी,,,,,।

(अंकित को इस बात पर एहसास होने लगा था कि उसकी नानी गांड की दरार में उंगली डालकर मालिश करने के लिए क्यों बोलरही है,,, इसलिए वह भी उत्साहित हुआ जा रहा था,,,, वह अपनी नानी की बात मानते हुए अपनी उंगली को अपनी नानी की गांड की दरार की अंदर तक डालकर उसकी मालिश करने लगा लेकिन जल्दी उसे एहसास हो गया कि उसकी उंगली उसकी नानी की बुर तक पहुंच रही थी,, उसकी गर्माहट उसका स्पर्श उसका गीलापन उसे अच्छी तरह से एहसास करा रहा था उसकी हालत खराब होती जा रही है,,,, उसकी नानी भी अपने नाती की उंगली को अपनी बुर पर महसूस करके मदहोश हुए जा रही थी,,, अंकित बिल्कुल भी घबरा नहीं रहा था ट्यूबलाइट की रोशनी में उसकी नानी की गोरी गोरी गांड एकदम साफ दिखाई दे रही थी जो कि उसके उत्तेजना को पल-पल बढ़ा रही थी,,,, अपनी नानी की बुर पर अच्छे से उंगली को रगड़ते हुए वह बोला।)

कैसा लग रहा है नानी,,,,।

सहहहहह,,,आहहहहहह,,,, बहुत अच्छा लग रहा है रे,,,, तेरी उंगली जब जब मेरी बुर पर छुआ रही है अजीब सा हो रहा है बहुत अच्छा लग रहा है,,,।

(अपनी नानी की बातें सुनकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर का तूफान उठने लगा क्योंकि उसे नहीं मालूम था कि उसकी नानी इतनी खुले शब्दों में एकदम से उसके सामने बोल देगी,,,, फिर भी अपनी नानी की बात सुनकर अंकित नादान बनता हुआ बोला,,,)

बुर पर लेकिन मेरी उंगली तो वहां तक नहीं जा रही है,,,।

अरे बुद्धू तेरी उंगली बड़ी आराम से मेरी बुर पर जा रही है देखना चाहता है,,,, रुक मैं तुझे दिखाती हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही उसकी नानी पेट के बल लेट-लेटे ही अपनी जांघों को खोल दी,,,, और उसके ऐसा करते ही एक बार फिर से अंकित को उसकी नानी की गुलाबी बर नजर आने लगी जो की सरसों के तेल में पूरी तरह से डूबी हुई थी और उसका खुद का मदन रस छल छलआ रहा था,,, जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था,,,, अंकित की नई अच्छी तरह से जानती थी कि इतनी मात्रा से ही उसके नाती को उसका गुलाबी छेद बडे आराम से दिखाई दे रहा होगा,,, इसलिए वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, फिर भी वह अंकित से बोली,,,।)

देख तुझे मेरी बुर दिखाई दे रही है ना,,,(अंकित की नई एकदम बेशर्मी भरे शब्दों का प्रयोग करते हुए बोली जिसका असर अंकित पर बेहद गहरा पड़ रहा था अपनी नानी के मुंह से इस तरह से बुर शब्द सुनकर उसके लंड की अकड़ बढने लगी थी,,,, अंकित पागलों की तरह अपनी नानी की बुर को देख रहा था अपनी नानी की बात सुनकर वह धीरे से बोला,,,)

हां नानी एकदम साफ दिखाई दे रही है,,,,,,,।

अब जैसे पहले मालिश कर रहा था उसी तरह से कर और देख तेरी उंगली वहां पहुंचती है कि नहीं,,,।
(अंकित अच्छी तरह से समझ गया था उसकी नानी क्या चाहती है,,,, इसलिए मन ही मन प्रसन्नता के साथ उत्तेजित भी हुआ जा रहा था,,,,)

अंकित की नानी अपनी दोनों टांगे खोलकर उसे अपनी गुलाबी बुर दिखा दी थी,,, जिसे देखकर अंकित पागल हो गया था और यह सब उसकी नानी जानबूझकर कर रही थी इतना उसे अच्छी तरह से मालूम हो गया था,,,, पहले के ही तरह अंकित को उसने मालिश करने को बोली और यह देखने के लिए बोली कि तेरी उंगली वहां तक पहुंचती है कि नहीं,,,, यह सुनकर अंकित की हालत और भी ज्यादा खराब होने लगी लेकिन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी यह सब अंकित के लिए पहली बार था लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें अंकित को अपना ही भला होता दिखाई दे रहा था,,। इस समय भला अंकित अपनी नानी की बात कैसे टाल सकता था उसके ना खाने के बावजूद भी वह खुद अपनी उंगली को उसकी पुस्तक पहुंचने के लिए आतुर नजर आ रहा था।

 

कटोरी में सरसों का तेल खत्म हो चुका था लेकिन फिर भी अंकित कटोरी में अपनी उंगली डालकर उसे अच्छे से तेल अपनी उंगली पर लगने लगा और फिर एक बार फिर अपनी नानी की मालिश करना शुरू कर दिया,,, अपनी नानी की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों में लेकर मालिश करने का जो आनंद अंकित को प्राप्त हो रहा था उसे अंकित बयान नहीं कर सकता था वाकई में आज उसके हाथों में आसमान का चांद लग गया था और उसकी खूबसूरत नंगी गांड आसमान के खूबसूरत चांद की तरह ही होती है जिस पाकर मर्द अपने आप को दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान समझता है,,, अंकित अपने मन में सोच भी रहा था कि अगर इस समय उसकी नानी अपने मुंह से पूछ लेती उसके दोनों हाथों में क्या है तो वह यह कहते बिल्कुल भी नहीं इसकी चाहेगा कि उसके हाथ में चांद आ गया है,,,। अपनी नानी की गांड की मालिश करते हुए अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था उत्तेजना परम शिखर पर थी ऐसा लग रहा था कि लंड पैंट फाड़कर बाहर आ जाएगा,,, जिसे बार-बार अंकित अपने हाथों से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा था।

 

इस पल का आनंद अंकित की नानी भी बराबर ले रही थी,,, यहां आने से पहले उसे बिल्कुल भी अंदेशा नहीं था कि अपने नाती के साथ ही उसे ऐसा कुछ करना पड़ जाएगा ऐसा हुआ करती भी नहीं लेकिन सोते समय उसके लंड की चुभन अपनी गांड पर महसूस करके वह मदहोश हो चुकी थी और अपनी जवानी पर काबू नहीं कर पाई थी जिसके चलते पूरी तरह से बेशर्मी का प्रदर्शन दिखाते हुए वह अपने नाती से अपनी गांड की मालिश करवा रही थी। अंकित की नई की सांसे भी ऊपर नीचे हो रही थी,,, बादल में उत्तेजना की लहर उठ रही थी और गुलाबी दरार से मदन रस का बहाव लगातार हो रहा था,,, अंकित को गांड के ऊपर ही सदा पर मालिश करते हुए देखकर अंकित की नानी बोली,,,।

पहले की तरह मालिश कर अंदर तक उंगली लेजा,,,,

 

(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित समझ गया कि यह पूरी तरह से रंडी है काश उसकी मां भी इतने खुले विचारों वाली होती तो इतने पापड़ ना बेलने पड़ते,,, फिर भी अपने मन में यह सोचकर अपने मन को तसल्ली देने लगा कि चलो मा नहीं मा की मां ही सही,,,,, अपने मन में ऐसा सोचते हुए वह भी थोड़ा शरारत करने की सोच औरबोला,,,)

अंदर ज्यादा दर्द कर रहा है क्या नानी,,,,।

अरे बहुत दर्द कर रहा है पूछ मत कितने अंदर तक दर्द कर रहा है तू अंदर के दर्द को दूर नहीं कर पाएगा,,,,।

बोलो तो सही में सर दर्द ठीक करने के लिए तैयार हूं मुझ पर भरोसा रखो लेकिन सही-सही बताओ दर्द कहां हो रहा है,,,।
(अंकित अपनी नानी से उसकी ही भाषा में बोल रहा था लेकिन अपनी नानी को बिल्कुल भी एहसास नहीं होने दे रहा था कि वह यह सब जानबूझकर बोल रहा है उसकी नानी को ऐसा ही लग रहा था कि वह नादानी पन में ऐसा बोल रहा है और उसकी बातें सुनकर उसकी नानी मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रही थी उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि आज की रात उसके लिए भी बहुत आनंददायक बीतने वाली है,,, फिर भी वह देखना चाहती थी कि उसका नाती बिना कुछ बोले कितना कुछ कर दिखाता है इसलिए वह बोली,,,)

 

अभी तो तू सिर्फ मालिश कर दे फिर देखती हूं कि कितना तू कर सकता है,,,,।

ठीक है नानी,,,(और इतना कहने के साथ वह फिर से अपनी उंगलियों को गांड की दरार के बीच ले जाने लगा जैसे-जैसे उसकी उंगली गांड की तरह के नीचे की तरफ जा रही थी वैसे-वैसे उसकी नानी के बदन में कसमसाहट बढ़ती जा रही थी,,,, उसकी हालत पल-पल खराब होती जा रही थी,,, गांव में उसने एक औरत थी जिसे वह मालिश करवाती थी लेकिन वह अभी इतना आनंददायक और उसके जनात्मक मालिश एक औरत होने के बावजूद भी नहीं कर पाती थी शायद इसलिए कि वह एक औरत थी और इस समय वह एक मर्द से मालिश करवा रही थी,,,, औरत के बदन पर मर्द की हथेली और उसके स्पर्श का मजा ही कुछ और होता है जो एक औरत ही समझ सकती है,,,, देखते ही देखते अंकित की उंगलियां उसकी नानी की बुर तक पहुंचने लगी थी जिसकी गर्मी उसे अपनी उंगली के पोर पोर में महसूस हो रही थी,,, मुझे गर्मी सीधा उसकी दोनों टांगों के बीच के हथियार पर दस्तक दे रही थी। मालिश करते हुए अपनी नानी की बुर का स्पर्श अंकित को आनंदित कर दे रही थी,,, बेहद अद्भुत और अतुलिनिय एहसास अंकित को महसूस हो रहा था वाकई में इस उम्र में भी उसकी नानी की बुर तरो ताजा दिखाई दे रही थी कि पूछो मत,,,।

 

तीन चार बार मालिश करते हुए अंकित अपनी नानी के बुर को स्पर्श किया तो उसकी नानी एकदम से मदहोश होते हुए बोली।।

सससहहह,,,,, कितना मजा आ रहा है तेरी मालिश का कसम से तेरी उंगलियों में जादू है,,,,,आहहहहहहह,,,, बहुत अच्छा लग रहा है ऐसे ही मालिश कर,।

चिंता मत करो नई आज तुम्हारे बदन से दर्द एकदम दूर हो जाएगा,,,(अपनी नानी की बातें सुनकर उत्साहित होता हुआ अंकित बोला)

मैं भी यही चाहती हूं,,,(ऐसा कहते हुए उसकी नानी थोड़ा सा और अपनी जांघों को खोल दी जिससे उसकी नानी की गुलाबी बुर हल्के से खुल गई उसमें से लबालब मदन रस बाहर टपक रहा था जिससे बिस्तर पर बिछी चादर गीली हो रही थी ,,यह देखकर अंकित बोला,,,)

यह क्या नानी तुम्हारी तो सुसु निकल रही है,,,,।

(यह सुनकर उसकी नानी समझ गई कि अंकित किस बारे में बात कर रहा है इसलिए बहुत जोर-जोर से हंसने लगी,,,, और अंकित से बोली)

तू सच में एकदम बुद्धू है अरे वह सु सु नहीं है तुझे नहीं मालूम ,,, जब औरत को एकदम आराम मिलने लगता है तो ईसी तरह से उसकी बुर से निकलता हैं पानी की तरह,,,।

क्या कह रही हो नानी कितनाअजीब है,,,(अंकित सच में सोच में पड़ गया था क्योंकि उसे सच में नहीं मालूम था कि ऐसा कुछ भी होता है,,, इसलिए अपनी नानी की बात सुनकर वह सोच में पड़ गया था वह तो यही सोच रहा था कि शायद उसकी नानी की बुर से पेशाब टपक रहा था,,,, कुछ देर खामोश रहने के बाद अपनी नानी की टांगों के बीच में देखते हुए वह बोला,,,,)

तो क्या अब आपको आराम मिल रहा है,,,,।

हां सच में बहुत आराम मिल रहा है इतना आराम मिल रहा है कि तू पूछ मत मैं बता नहीं सकती,,,।

तो क्या अभी कुछ देर पहले जो बोल रही थी की गहराई में दर्द होता है क्या उसमें भी आराम मिलने लगा है,,,,।

 

नहीं रे उसमें तो अभी भी दर्द हो रहा है बस वही एक दर्द है जो नहीं जा पाता,,,,,,,,,, अच्छा एक बात सुन ,,,क्या तू मेरे पूरे बदन की मालिश कर देगा,,,,।

हां नानी इसमें क्या हुआ मैं तुम्हारे पूरे बदन की मालिश कर दूंगा,,,(अंकित अपने मन में सोच रहा था कि आज उसकी नई उस पर पूरी तरह से कृपा बरसाने वाली है,,, अंकित की बात सुनकर उसकी नानी उत्साहित होते हुए बोली)

तब तु बिल्कुल भी देर मत कर,,,( सरसों के तेल की कटोरी की तरफ देखते हुए) जा जाकर रसोई घर से थोड़ा सरसों का तेल और लेकर आना ,, सरसों का ,,, तेल खत्म हो गया है,,,,

जी नानी,,, अभी लेकर आया,,,(ईतना कहते हुए अंकीत बिस्तर पर से नीचे उतर गया,,, और सीधा दरवाजे तक पहुंच गया और जैसे ही दरवाजा खोल वैसे उसकी नानी पीछे से आवाज लगाते हुए बोली,,,,)

 

बिल्कुल भी आवाज मत करना कहीं कोई जग ना जाए एकदम संभाल कर जाना,,,,

जी नानी चिंता मत करो मैं एकदम संभाल कर जाऊंगा,,,,( अंकित अपनी नानी के कहने का मतलब खुल जाएगी तो हो सकता है कार्यक्रम को रद्द करना पड़ जाए और उसकी नानी नहीं चाहती थी कि इस कार्यक्रम को आधे पर रोकना पड़ जाए वह अपनी नानी की बातें सुनकर एकदम प्रसन्न था और जल्दी से रसोई घर की तरफ चल दिया,,, थोड़ी देर में वह कटोरी में सरसों का तेल लेकर अपने कमरे में प्रवेश करने लगा और जैसे ही कमरे में प्रवेश करने लगा उसकी नजर सामने बिस्तर पर पड़ी और सामने बिस्तर पर नजर पडते ही उसके होश उड़ गए,,,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,, उसने कभी सोचा नहीं था कि उसे अपने कमरे में अपने बिस्तर पर इस तरह का नजारा देखने को मिलेगा,,,,, उसकी जगह कोई और होता तो शायद उसकी भी यही हालत होती,,,,,।

 

सामने बिस्तर पर उसके गाने बिना कपड़ों से एकदम नंगी पेट केवल लेटी हुई थी उसके सरसों के तेल लेने जाने में वह इस बीच में अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई थी,,,, और अपनी नंगी नानी को अंकित फटी आंखों से देख रहा था अनुभव से भरी हुई उसकी नई मर्द को अपनी मुट्ठी में करने का हुनर अच्छी तरह से जानती थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि इस समय अंकित की हालत क्या हो रही होगी उसे नंगी देखकर वह मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देख रही थी,,,, अंकित को तो अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था ट्यूबलाइट की रोशनी में उसकी बड़ी-बड़ी उभारदार गांड और ज्यादा चमक रही थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और उसके पेंट में उसका तंबू पूरे उफान पर था,,, जिस पर उसकी नानी की नजर बराबर जा रही थी और उसके पेंट में बना तंबू देख कर वह भी मदहोश हुए जा रही थी,,, उसकी नानी उसके पेंट में बने तंबु पर जानबूझकर उसका ध्यान नहीं ले जाना चाहती थी उसे किसी भी तरह से लज्जित नहीं करना चाहती थी लेकिन समय आने पर उसके पेंट में बने तंबू का पूरा उपभोग करने के लिए वह भी काफी उत्सुक थी वह मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ देखते हुए बोली,,,)

 

क्या हुआ ऐसे क्यों देख रहा है,,,,?

नई तुम तो अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई हो,,,,(अपनी नानी के विषय में देख कर अंकित को थोड़ा हिम्मत दिखाते हुए नंगी शब्द का प्रयोग करते हुए बोला)

तो क्या हुआ पूरे बदन में मालिश करवाने के लिए कपड़े उतारना भी तो जरूरी था क्या बिना कपड़े उतारे थे तो मालिश कर देता,,।

नहीं ऐसा तो नहीं हो पाता लेकिन मेरे सामने तुम सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई,,,,(फटी आंखों से अपनी नानी की नंगी गांड की तरफ देखते हुए बोला)

तो इसमें क्या हो गया और वैसे भी तो तू मेरी बुर देख चुका है,,,, मैं तुझे मालूम नहीं की औरत गैर मर्दों से अपनी बुर छुपा कर ही रखती है कपड़ों के अंदर रखती है उसे दिखाती नहीं है,,,, लेकिन तूने तो मेरी बुर देख लिया है इसलिए अब तुझसे शर्म कैसी,,,,।

क्या मैं गैर मर्द नहीं हूं मैं भी तो गैर मर्द हूं,,,,।

अरे बुद्धु तु गैर मर्द कहां से हुआ तू तो मेरा नाती है,,,। अच्छा सब छोड़ दरवाजा खुला है उससे पहले बंद कर दे और जल्दी से आकर मालिश कर,,,।

 

अपनी नानी की बातें सुनकर अंकित को भी इस बात का एहसास हुआ कि दरवाजा खुला है इसलिए वह तुरंत एक हाथ से दरवाजा बंद किया और उसकी कड़ी लगाकर अपने बिस्तर के करीब आ गया,,, अंकित की हालत पाल-पाल खराब होती जा रही थी उसके भजन में उत्तेजना का रस किसी नशे की तरह खेल रहा था वह अपने नानी की जवानी की मदहोशी में पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था,,,, अंकित को मालूम था कि अह क्या करना है वह जल्दी से बिस्तर के ऊपर चढ़ गया और सरसों के तेल की धार अपनी नानी की मखमली चिकनी पीठ और उसके नितंबों के उभार पर गिराने लगा और कटोरी को एक तरफ रखकर मालिश करना शुरू कर दिया,,, अंकित अपने आप को बेहद खुश नसीब समझ रहा था और वाकई में वह खुशनसीब था अभी क्योंकि उम्र के जिस दौर पर वह गुजर रहा था एेसे में उसकी उम्र के लड़के केवल खूबसूरत लड़की हो और औरतों की कल्पना करके अपनी जवानी के गर्मी को शांत करते थे लेकिन उसके बिस्तर पर तो उसकी उम्र में भी जवानी से भरी हुई थी वह पूरी तरह से नंगी होकर उससे मालिश करवा रही थी ।

 

अपनी नानी के बेशर्मी देख कर अंकित की भी हिम्मत खुलने लगी थी और वह अपनी नानी की बड़ी-बड़ी गांड को अपने दोनों हथेलियां में लेकर उसकी मालिश नहीं बल्कि उसे दबोच रहा था मसल रहा था रगड़ रहा था ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी वाकई में एक जवान लड़के के लिए इससे बड़ी बात क्या हो सकती है कि उसके हाथों में एक मदमस्त जवानी से भारी औरत की नंगी गांड हो,,,, अंकित की सांस ऊपर नीचे हो रही थी वह बार-बार अपने पेंट में बने तंबू को अपने हाथ से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा था,, वैसे तो उसका मन कर रहा था किसी समय अपने लंड को बाहर निकाल कर अपने लंड को अपनी नानी की गांड पर जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दे लेकिन ऐसा करना अंकित के लिए उचित नहीं था ऐसा हुआ समझना था अगर वह कहीं नहीं वह अपनी हिम्मत को आगे बढ़कर इसकी क्रिया को कर देता तो शायद उसकी नानी बिल्कुल भी इनकार नहीं करती बल्कि उसे अपने हाथ से पकड़ कर अपनी गुलाबी छेद में डलवा लेती,,,,,,।

 

अंकित की नानी को भी इस तरह से मालिश करवाने में मजा आ रहा था अंकित की नानी को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि उसका नाती उसकी मालिश नहीं कर रहा है बल्कि उसके बदन से खेल रहा है,,,,,, कुछ देर तक आपकी इसी तरह से अपनी नानी की गांड क्यों परेशान था पर मालिश करता रहा शायद इतने में उसे आनंद की अनुपाती हो रही थी उसे मजा आ रहा था लेकिन अंकित की नानी कुछ और चाहती थी इसलिए उसे याद दिलाते हुए बोली,,,,)

 

जैसे पहले कर रहा था वैसे कर अंदर तक उंगलियां ले जा,,,,(और ऐसा कहने के साथ ही लड़की की रानी पहले की तरह अपनी दोनों जनों को खोल दी जिससे उसका गुलाबी छेद एक बार फिर से नजर आने लगा जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आने लगा और वह पहले की तरह अपनी उंगलियों को अंदर की तरफ ले जाते हुए उसकी मालिश करने लगा और देखते ही देखते अपनी उंगलियों का स्पर्श अपनी नानी के गुलाबी बुर की पत्तियों पर करने लगा जिससे अंकित की नानी की हालत खराब होने लगी वह मदहोशी के आलम में डूबने लगी,,,, अंकित की हिम्मत बढ़ रही थी क्योंकि उसकी नानी इस समय बिल्कुल भी दिशा निर्देश नहीं दे रही थी वह इस पल का मजा ले रही थी और अंकित अपनी उंगलियों को हल्के हल्के अपनी नानी की बुर की गुलाबी पत्तियों पर रगड़ना शुरू कर दिया था ऐसा करने से जो आनंद की प्राप्ति उसे हो रही थी वह शायद वह बयान नहीं कर पाता वह पागल हुआ जा रहा था उसके लंड की अकड़ बढ़ रही थी उसकी उतेजना बढ रही थी,,,,। और अपनी नानी की बुर में से निकल रहा है मदन रस की बूंद को देखकर उसके मुंह में पानी आ रहा था,,, वह उस पर होठ लगाकर उसके मदन रस को चाटना चाहता था जैसा कि वह अपनी मां की गहरी नींद का फायदा उठाते हुए उसके गुलाबी बुर पर अपने होठ रखकर उसके मदन रस का पान किया था,,,,, बाहर के हल्के गुलाबी पत्तियों पर उंगली रगड़ते हुए अपनी नानी से बोला,,,)

 

अब कैसा लग रहा है नानी अब तो आराम है ना,,,,

आराम तो होने लगा है लेकिन अंदर का दर्द अभी भी कायम है वह नहीं जाता,,,,।

लेकिन वह कैसे जाता है नानी,,,,,(अंदर के दर्द के मतलब को अंकित अच्छी तरह समझ रहा था,, इतने महीनों से अपनी मां के पीछे यूं ही पापड़ नहीं बेला था,,, वह औरतों के इशारे को अच्छी तरह से समझने लगा था उसे अब यह भी समझ में आने लगा था कि उसकी मां का उसके सामने नग्न अवस्था में अर्धनग्न अवस्था में उसे अपनी तरफ आकर्षित करना आगे बढ़ने का इशारा था लेकिन वह सारे को अच्छी तरह से समझ नहीं पाता था लेकिन वह अब सबकुछ समझने लगा था,,,, इसका ताजा उदाहरण थी राहुल की मां उसके इशारे को अंकित अच्छी तरह से समझ गया था और हिम्मत दिखा कर उसकी दोनों टांगों के बीच अपने होठों को रखकर उसके बुर का रसपान किया था,,,। इस समय उसे लगने लगा था की हिम्मत दिखाने की जरूरत है और फिर उसे भी जीत हासिल हो जाएगी इसलिए वह अपनी नानी से इस तरह का सवाल पूछ रहा था अंकित का सवाल सुनकर उसकी नानी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

 

क्या सच में तू मेरा दर्द दूर करना चाहता है,,,।

हां नानी बिल्कुल,,, मैं आज पूरी तरह से तुम्हारा दर्द दूर कर देना चाहता हूं इसी बहाने मुझे तुम्हारा सेवा करने का मौका तो मिला,,,।

तू तो बहुत अच्छा है रे,,, मेरे बारे में इतना तो सोचता है लेकिन,,,,(इतना कहकर वह खामोश हो गई तो उसकी ख़ामोशी देखकर अंकित उसकी गांड की मालिश करते हुए और अपनी उंगलियों को उसकी बुर तक पहुंचाते हुए बोला)

लेकिन क्या नानी,,,,?

क्या तू सच में मेरा दर्द दूर कर पाएगा,,,,।

हां बिल्कुल तुम बताओ तो सही दर्द कहां हो रहा है,,,,

अच्छा रुक मैं तुझे बताती हूं कि दर्द कहां हो रहा है,,,,,(इतना कहते हैं उसके गाने एकदम से फुर्ती दिखाते हुए करवट लेकर पीठ के बल लेट गई,,,, और इस अवस्था में देख कर तो अंकित की आंखें फटी के फटी रह गई उसकी हालत और ज्यादा खराब होने लगी क्योंकि इस समय उसकी नानी के खूबसूरत बदन के खूबसूरत अंग उसे खुले तौर पर दिखाई दे रहे थे,,,, अपनी नानी की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर उसके मुंह में पानी आ रहा था अभी तक अंकित का ध्यान अपनी नानी की चूची पर बिल्कुल भी नहीं गया था लेकिन इस समय अपनी नानी की नंगी चूची देखकर उसकी बोलती है तुमसे बंद हो गई थी और वह अपनी नानी से च कोई देख रहा था जो कि इस समय पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लहरा रही थी।

अंकित कि नानी समय-समय पर अपनी जवानी का गोला अंकित के ऊपर दाग रही थी जिससे वह एकदम से ध्वस्त होता चला जा रहा था,,,, अंकित की रानी मां ही मन मुस्कुरा रही थी और अपनी दोनों टांगों को हल्के से खोलकर अपनी गुलाबी बुर को अच्छी तरह से अपने नाती की आंखों के सामने करते हुए बोली,,,,।

इसके अंदर दर्द हो रहा है क्या तू इसके अंदर का दर्द है मीटा पाएगा,,,,।

(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित अपनी नानी की तरफ देखा और फिर अपनी नजरों को अपनी नानी की गुलाबी बुर की तरफ करते हुए बोला,,,)

इसके अंदर,,,(उंगली से अपनी नानी की बुर की तरफ इशारा करते हुए बोला)

हां इसके अंदर दर्द हो रहा है खुजली हो रही है क्या तू दूर कर पाएगा,,,,,,।

बिल्कुल नानी,,,(गहरी सांस लेते हुए) लेकिन इसके अंदर हाथ कैसे जाएगा यह तो बहुत छोटा सा छेद है,,,,(अंकित अपनी नानी की बातों को उसकी इशारों को अच्छी तरह से समझ रहा था और समझ गया था कि उसकी नानी इसके अंदर लंड डालने की बात कर रही है लेकिन अपने मुंह से कह नहीं पा रही है और अंकित जानबूझकर नादान बनने की कोशिश कर रहा था उसकी बातें सुनकर उसकी नानी मुस्कुराते हुए बोली)

भले ही है छोटा सा छेद है लेकिन इसमें बहुत मोटा मोटा और लंबा-लंबा चीज चला जाता है,,,।

 

क्या बात कर रही हो नानी ऐसा कैसे हो सकता है,,,,(अंकित जानबूझकर हैरान होने का नाटक करते हुए बोला,,,)

बिल्कुल ऐसा ही होता है लेकिन तू अभी नहीं समझ पाएगा क्योंकि तू इन सब चीजों से अभी गुजरा नहीं है,,,,,, इसलिए तू सिर्फ इसके अंदर अपनी उंगली डालकर उसे गोल-गोल घूमाकर मालिश कर दे,,,, अपनी उंगली को सरसों के तेल में डूबा कर मालिश करना,,,।

ठीक है नानी,,,,,(इतना कहकर अंकित अपनी नानी के दिशा निर्देश पर आगे बढ़ना चाहता था लेकिन तभी उसकी नानी कुछ और चाहती थी वह अपनी जवानी का जलवा पूरी तरह से अंकित के मन पर अंकित कर देना चाहती थी इसलिए अपने दोनों हाथों से अपनी चूची पकड़ कर वह उसे हल्के से दबाते हुए बोली)

अच्छा पहले मेरी चूचियों की मालिश कर दे,,,,।
(इतना सुनकर अंकित एक तक अपनी नानी की चूचियों की तरफ देखने लगा,,,

अंकित की नानी बिस्तर पर सीधी घूम गई थी और उसके इस तरह से घूमने पर इसका बेहतरीन खूबसूरत तराशा हुआ जिसमें के साथ-साथ उसका खूबसूरत और आकर्षक अंग एकदम से अंकित की आंखों के सामने नजर आने लगा था। यह देखकर अंकित की तो सिट्टी पट्टी गुम हो गई,,, अभी तक वेक बस अपनी नानी के भारी भरकम ने संभोग को देखा था और उसकी गुलाबी छेद की हल्की झलक भर लिया था लेकिन इस तरह से पीठ के बल लेटने की वजह से उसकी नानी का सब कुछ अंकित को दिखाई दे रहा था अंकित के मुंह में पानी आ रहा था वाकई में इस उम्र में भी उसकी नानी का बदन बेहद आकर्षक और भरा हुआ था यही अंकित के लिए बेहद आश्चर्य की बात थी,,,।

 

अंकित की नई एक बार फिर से अंकित के ऊपर अपनी जवानी का गोला दाग दी थी वैसे तो,,, उसकी नानी चाहती तो इसी समय अपनी बुर में उसकी उंगली डलवा देता लेकिन वह जानती थी कि उसकी कई बार अंकित बिल्कुल भी टाल नहीं पाएगा,,, इसलिए अपनी युक्ति को कुछ क्षण के लिए वह रोक दी थी क्योंकि अभी बहुत कुछ बाकी था वह अंकित को पूरी तरह से अपनी जवानी का गुलाम बना देना चाहती थी इसीलिए वह अपने बदन के बाकी हिस्सों में तेल की मालिश करवाना चाहती थी,,,,, अंकित फिर से फटी आंखों से अपनी नानी के संपूर्ण मदहोश कर देने वाले बदन को प्यासी नजरों से देख रहा था,,,, अपनी मां की नंगी चूचियों को वह देख चुका था इसलिए अपनी मां की और अपनी नानी की चुचियों में उसे तुलनात्मक स्थिति में बिल्कुल भी अलग नजर नहीं आ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी नानी के नहीं बल्कि अपनी मां की चूचियों को देख रहा था दोनों के बदन में कोई खास फर्क नहीं था,,, सिर्फ नितंबों के घेराव में ही हल्का सा फर्क नजर आ रहा था अंकित को इस तरह से अपनी चूची और अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को देखता हुआ पाकर उसकी नानी मुस्कुराते हुए बोली,,।

 

क्या हुआ आप क्या देख रहा है अभी भी कोई कमी रह गई है क्या इतना तो देखा है फिर भी तेरा मन नहीं भर रहा है,,,,।

क्या करूं नानी कुछ समझ में नहीं आ रहा है पहली बार किसी नंगी औरत को देख रहा हूं क्या सच में सभी औरतें ऐसे ही दिखाई देती है तुम्हारी तरह,,।(अंकित मदहोश होता हुआ अपना नादानी पन जानबूझकर दिखाते हुए बोला,,,)

हां सब औरतें नंगी होने के बाद मेरी तरह ही दिखती है बस पर कितना होता है कि अंगों का उभार चढ़ाव कटाव अलग-अलग होता है,,।

मैं कुछ समझ नहीं,,,।

धीरे-धीरे सब समझ जाएगा बस अब तू जल्दी से मालिश करना शुरू कर दे और हां इस बारे में किसी को कुछ भी मत बताना वह तो तू मेरा नाती है इसलिए तेरे सामने बिना कपड़ों के लेती हूं कोई और होता तो ऐसी हरकत में बिल्कुल भी नहीं करती लेकिन फिर भी यह बात बताने वाली नहीं है,,,, समझ गया ना,,,।

 

समझ गया नानी,,,,(और इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से वह तेल की कटोरी को अपने हाथ में ले लिया और उसकी धार को सीधा अपनी नानी की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियो पर गिराने लगा,,,, यह देखकर और तेल की धार को अपनी चूची पर महसूस करके उसकी नानी मदहोश होते हुए बोली,,,)

मुझे यकीन नहीं हो रहा है कितना हट्टा कट्टा जवान लड़का पहली बार किसी नंगी औरत को देख रहा है मैं तो समझी थी कि तू इस तरह का नजारा बहुत बार देख चुका होगा,,,।

नहीं नानी सच में मैं पहली बार देख रहा हूं तभी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,(तेल की कटोरी को एक तरफ रखते हुए अंकित बोला,,,)

इसलिए तो कह रही हूं शादी कर ले,,,, एक बार शादी हो गई तो रोज इसी तरह का नजारा देखने को मिलेगा,,,,।

सच नानी,,,,।

तो क्या,,,? तुझे भी अच्छा लग रहा है ना इस हालत में मुझे देखने में,,.

सच कहूं तो बहुत अच्छा लग रहा है नजर हटाने का मन नहीं कर रहा है,,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित एक साथ अपने दोनों हथेलियां को अपनी नानी की दोनों चूचियों पर रख दिया वाकई चूचियों को पकड़ने में उसे पर हाथ रखने में इतना अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है यह बता पाना अंकित के लिए मुश्किल हुआ जा रहा था पहली बार वह अपनी मां की चूचियों पर हाथ रखकर उसे हल्के से दबाने की कोशिश किया था तब उसके बाद में अद्भुत उत्तेजना का संचार हुआ था वह तो पल भर के लिए ही था लेकिन यहां तो उसे पर मालिश करना था और एकदम नंगी चूचियों पर वाकई में यहां पर अंकित के लिए अद्भुत और अतुलनीय था जिसे भूल पाना बहुत मुश्किल था अंकित अपनी नानी की दोनों चीजों को अपनी दोनों हथेलियां में ले लिया था मानों जैसे जंगली कबूतर उसके हाथ लग गए हो,,,, और उसकी हथेली में फड़फड़ा रहे हो आजाद होने के लिए,,, लेकिन अंकित इस जंगली कबूतर को अपनी हथेली से आजाद होने नहीं देना चाहता था,,,।

 

अंकित मालिश के बहाने अपनी नानी की चूचियों को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया वाकई में चुचीया इतना नरम नरम होती है इसका एहसास बहुत कम बार ही उसे हुआ था यह एहसास सुषमा आंटी की लड़की सुमन ने भी उसे अच्छी तरह से कर चुकी थी लेकिन आज की बात कुछ और थी सुमन की तो चुचीया नारंगी जैसी थी लेकिन उसकी नानी की चीटियां खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी थी जो की ठीक तरह से उसकी हथेली में भी नहीं आ रही थी,,,, देखते ही देखते अंकित अपनी नानी की चूची को दबा दबाकर टमाटर की तरह लाल कर दिया था जिसका एहसास उसकी नानी को भी हो रहा था और उसकी नानी अपनी नजर को नीचे करके अपनी चूचियों की तरफ देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी उसे इस तरह से अपने नाती के द्वारा अपनी चुचीयों का दबाना मसलना बहुत अच्छा लग रहा था और उसकी उत्तेजना को भी बढ़ा रहा था,,,,, रह रहकर अंकित की नानी के मुंह से सिसकारी की आवाज निकल जा रही थी जिस पर अब उसका बिल्कुल भी काबू नहीं था,,,,,। अंकित अच्छी तरह से जानता था कि औरत के मुंह से इस तरह की आवाज कब निकलती है इसलिए वह भी अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था।

 

कुछ देर तक दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी अंकित पूरा ध्यान अपनी नानी की चूचियों पर लगाया हुआ था उसे चूची दबाने में उसे मसलने में और उसकी मालिश करने में इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे आज अंकित दबा दबा कर अपनी नानी की चूची से सारा दूध बाहर निकाल देगा,,,,, अंकित की हरकतों का असर उसकी नानी की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में बहुत अच्छी तरह से हो रही थी बार-बार उसमें से मदन रस टपक रहा था जिससे पलंग पर बिछी चादर गीली लिए होती चली जा रही थी,,,, अंकित की हरकतें उसकी नानी के लिए असहनीय होती जा रही थी वैसे तो उसकी नानी अनुभव से भरी हुई थी और खेली खाई थी अपनी उत्तेजना पर काबू करना हुआ अच्छी तरह से जानते थे लेकिन काफी देर से हो अंकित के हाथ की कठपुतली बन चुकी थी उसके मर्दाना हथेलियां में जो जोश और दम था उसे अपने बदन पर महसूस करके उसका पानी छूट जा रहा था। अंकित की नानी से अब बिल्कुल भी सहन नहीं हो रहा था उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,, इसलिए वह बोली।

 

लगता है तुझे मेरी चूची दबाने में मजा आ रहा है,,,,,।
(अपनी नानी की यह बात सुनकर अंकित एकदम से झेप गया और घबराहट भरे स्वर में बोला,,,,)

नननन,,, नहीं नानी ऐसी कोई बात नहीं बस में मालिश कर रहा था,,,।

मालिश नहीं कर रहा था तो जोर-जोर से लग रहा था मैं मर्दों की हरकत से अच्छी तरह से बाकी अच्छी तरह से जानती हूं कि तुझे दबाने में मजा आ रहा था सच सच बताना अब मुझसे झूठ बोलने की कोशिश बिल्कुल मत करना,,,, तुझे मेरी चूची दबाने मजा आ रहा था ना,,,।

(अंकित भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी नानी क्या चाहती है इसलिए घबराने की उसे बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी लेकिन फिर भी वह घबराने का सिर्फ नाटक कर रहा था और अपनी नानी के बाद सुनकर वह अपने मुंह से झूठ नहीं बोलना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि जिस तरह का माहौल चल रहा है जिस तरह की हरकत से वह दोनों गुजर रहे हैं आगे क्या होने वाला है इसलिए वह बोला)

 

पता नहीं क्यों नहीं लेकिन मालिश करते-करते ना जाने कि मुझे अच्छा लगने लगा,,,,,।

(अंकित की बात सुनकर उसकी नानी मादक मुस्कान बिखेरने लगी,,, और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

इसमें तेरी कोई गलती नहीं है इस तरह की हरकत करने पर मर्द को मजा मिलता ही है,,,,, चल अब चूचियों को छोड़ नीचे की तरफ जा,,,,।

ठीक है नानी,,,,(इतना कहकर वह चूचियों के नीचे की तरफ ध्यान केंद्रित करने लगा और अपनी चूचियो की तरफ देखकर उसकी नानी बोली,,,)

दबा दबा कर एकदम टमाटर की तरह लाल कर दिया हरामी,,,,, इस तरह से अपनी औरत की दबाना उसे बहुत मजा आएगा,,,,।

तो क्या नानी तुम्हें भी मजा आया,,,,।

अरे बुद्धु इस तरह से दबाएगा तो मैं क्या किसी भी औरत को मजा आ जाएगा (बुर की तरफ उंगली से ईसारा करते हुए) देख रहा है कितना पानी निकल रहा है जब औरत को मजा आता है तब इसी तरह से इस जगह से पानी निकलता है देख कितना सारा निकला है पूरी चादर गीली हो गई है..,

 

इसका मतलब नानी तुम्हें बहुत मजा आया,,,,।

बहुत,,,,,,,, तेरे हाथों में जादू है अब देखती हूं कि तेरी उंगलियों में कितना जादू है,,,,।

उंगलियों में में कुछ समझा नहीं,,,,।(सब कुछ जानते हुए भी नादान बनने की कोशिश करते हुए अंकित बोला,,,)

अरे अभी तो कुछ देर पहले समझाई थी कि मेरी बुर के अंदर दर्द होता है तुझे उंगली डालकर उसकी मालिश करनी होगी,,,।

ओहहहहह ,,,हां,,,, याद आया नानी मैं तो भूल ही गया था,,,,,।

चल अब जल्दी कर दर्द मुझसे सहन नहीं हो रहा है,,,,।

ठीक है नानी अभी डाल देता हूं ऊंगली,,,,।
(अंकित की बात सुनकर उसकी नानी अपने मन में ही कहने लगी,,, बस थोड़ी देर और तो उसमें उंगली की जगह अपना लंड डालेगा,,,,.

अंकित अपनी उंगली को अपनी नानी की बुर की तरफ ले जाने लगा तो उसकी नानी उसे रोकते हुए बोली,,,,।

 

अरे पहले सरसों का तेल तो लगा ले उस पर,,,।

ओहहह मैं तो भूल ही गया,,(अंकित अपने मन में बहुत खुश हो रहा था उसे लगने लगा था कि आज उसकी मन की मूराद पूरी होने वाली है ,,,, अंकित अपने मन में सोच रहा था कि उसकी मां तो उसके मन की मुराद को पूरी करने से रही लेकिन उसकी मुराद उसकी नानी जरूर पूरी कर देगी पहली रात में ही इतना बड़ा तोहफा जो उसे सौंप दी थी अंकित प्यासी नजरों से अपनी नानी की बुर को देख रहा था जो की उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फुल गई थी,,, जिसमें से उसका मदन रस टपक रहा था,,,, अब अंकित बिल्कुल भी तेरी नहीं करना चाहता था वह तुरंत सरसों की कटोरी में अपनी उंगली को डूबोने लगा उसे गीला करने लगा,,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि वह जानता था कि जो क्रिया अब वह करने जा रहा है वह वाकई में अद्भुत और उत्तेजना से भरी हुई थी,,,, इस तरह कि वह केवल सिर्फ कल्पना ही करता था लेकिन आज उसे हकीकत करने को मिलने वाला था बुर के इतने करीब और रूबरू वह पहली बार हो रहा था आज जी भर कर उसे स्पर्श करने का छूने का मौका जो उसे मिल रहा था,,,

 

पेंट में लंड कि अकड पूरी तरह से अंकित को मदहोश बना रही थी मन तो उसका कर रहा था कि अपनी नानी की आंखों के सामने अपने लंड को बाहर निकाल ले लेकिन वह अभी पूरी तरह से अपनी नानी से खुला नहीं था क्योंकि वह अपनी नानी के सामने एक नादान लड़का था,,,, अपनी नानी की बात मानकर वह अपनी उंगली को सरसों का तेल में डुबोकर अपनी नानी की बुर पर हल्के से रख दिया,,,,,, ऐसा करने पर उसके बदन में उत्तेजना की झनझनाहट होने लगी उसके बदन में कंपन होने लगा वह अपनी नानी की जवानी के तरंगों पर जो अपना हाथ रख दिया था उसकी नानी भी एकदम मदहोश हो चुकी थी,,,,, वह भी कभी सोची नहीं थी कि अपनी बेटी के घर आने पर उसे इस तरह का कार्य करना होगा इस तरह का सुख प्राप्त करना होगा और वह भी अपने ही नाती के द्वारा।

ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था कमरे में पूरी तरह से रोशनी फैली हुई थी और यह रोशनी कमरे में लाजमी भी थी बिना रोशनी के इतना खूबसूरत दृश्य अनदेखा सा हो जाता और इस बात के लिए अंकित अपनी नानी को धन्यवाद दे रहा था कि उसकी नानी ने अच्छा हुआ ट्यूबलाइट बंद करने के लिए नहीं बोली थी वरना वह इतना खूबसूरत नजारा अपनी आंखों से देखा नहीं पता इतनी खूबसूरत हमको कोई इतने करीब से महसूस नहीं कर पता ना उन्हें देख पाता अंकित को इस बात का एहसास होने लगा था कि इस तरह का मजा रात के अंधेरे में तो जरूर आता है लेकिन ट्यूबलाइट की रोशनी में इसका मजा दुगना हो जाता है।

 

अंकित की सांस ऊपर नीचे हो रही थी वह अपनी उंगली को अपनी नानी की बुर के ऊपरी सतह पर रखकर गोल-गोल घूम रहा था जिससे उसकी नानी की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी उसकी नानी के चेहरे का रंग उड़ता चला जा रहा था,,, अंकित की हरकतों से उसकी नानी के चेहरे का हाव-भाव पल-पल बदल रहा था उसकी सांसे गहरी चल रही थी जिसकी वजह से उसकी खरबूजे जैसी चूचियां उसकी छाती पर पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी जिस पर रह-रेकर अंकित की नजर चली जा रही थी वैसे तो अपनी नानी की बलखाती चूचियों को देखकर उसका मन उसे फिर से लपकने को कर रहा था लेकिन जी भर कर उससे से वह अभी-अभी खेल चुका था और अब उसका पूरा ध्यान और उसकी उंगली उसकी नानी की जवानी की केंद्रीय बिंदु पर था और इस समय उसकी जवानी के केंद्रीय बिंदु पर से अपने नजर हटाने का मतलब था की पूरी तरह से बेवकूफी दिखाना और इस तरह की बेवकूफी अंकित दिखाना नहीं चाहता था।वह जानता था कि उसकी हरकत की वजह से उसकी नानी पागल हुई जा रही थी लेकिन वह अपनी हरकत को जारी रखा था वह भी एक औरत की तड़प को अच्छी तरह से समझने लगा था वह अपनी मां को देखकर और राहुल की मां को देखकर अच्छी तरह से समझता था कि एक औरत की तड़प क्या होती है,,,,, और फिर धीरे से वहां अपनी उंगली को अपनी नानी के गुलाबी छेद पर रखकर उसे हल्के हल्के सेहलाना शुरू कर दिया उसकी गुलाबी पत्तियां बार-बार पानी से भीग जा रही थी,,, और अंकित की इस हरकत की वजह से उसकी जाने की हालत खराब होती चली जा रही थी उसे अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,,,, इसलिए वह अंकित से बोली।

सहहहह आहहहहहहह,,,,,ऐसै क्यों कर रहा है रे मुझे तड़पा रहा है ना,,,।

दही बनाने ऐसा कुछ भी नहीं है मैं तो मालिश कर रहा हूं,,,,।

मैं ऊपर मालिश करने के लिए नहीं बोली थी,,अंदर उंगली डालकर मालिश करने के लिए बोली थी,,,,।

जानता हूं नानी लेकिन मैं सोच रहा था क्या सच में ईसमे मेरी उंगली चली जाएगी,,,।

अरे बेवकूफ इसमें तेरी उंगली क्या तेरा लंड चला जाएगा,,,।

(उत्सुकता और उत्तेजना में अंकित की नानी के मन की बात उसके होठों पर आ गई थी और इस बात को सुनकर अंकित पूरी तरह से सन्न रह गया था वह एक टक अपनी नानी की तरफ देखता रह गया था,,,,, और उसकी बातें उसे भी बेहद उत्तेजित कर गई थी जिसके चलते हुए अपनी नानी की तरफ देखते हैं अपनी उंगली को अपनी नानी की बुर में धीरे-धीरे प्रवेश करना शुरू कर दिया था ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी इस कार्य को वह राहुल की मां के साथ कर चुका था वह जानता था कि यह कार्य कैसे करना है लेकिन उसकी नानी की बातों ने जो उसके बाद में उत्तेजना का तूफान जगाया था वह बेहद अद्भुत था मन तो उसका कर रहा था कि वाकई में उसकी नानी की बात को इसी समय सच कर दे लेकिन ऐसा करने से उसकी नानी समझ जाएगी की वह उसके सामने जानबूझकर नादान बनने की कोशिश कर रहा है वह सब कुछ जानता है इसलिए वह धीरे-धीरे अपनी पूरी उंगली को अपनी नानी की बुर में उतार दिया था और उसे हल्के हल्के गोल-गोल घूमना शुरू कर दिया था उसकी हरकत से उसकी नानी के बदन में मदहोशी का रस घुलने लगा,,, वह मदहोश होने लगी उसका बदन कसमसाने लगा,,,,

 

हालात पूरी तरह से बेकाबू पता चला जा रहा था अंकित को अच्छी तरह से अपनी नानी की बुर के अंदर की गर्मी महसूस हो रही थी अंदर का तापमान पूरी तरह से पिघला देने वाला था उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि इतनी गरम तो राहुल की मां की बुर भी नहीं थी जितनी गर्म उसकी नानी की बुर है,,,, अंकित के लिए पीछे हटना नामुमकिन था वह अपनी नानी की मोटी जांघ पर हाथ रखकर अपनी उंगली को गोल-गोल घूमा रहा था,,,, मदहोशी के चलते उसकी बुर से मदन रस बार-बार बाहर निकल रहा था जिसे अंकित का चाटने का मन कर रहा था,,,, अंकित की हरकत की वजह से अंकित की नानी के मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज पूरी तरह से बेकाबू होकर निकलने लगी,,,,,।

सहहहहह आहहहहहह,,,,,,ऊमममममममम,,,,,ओहहहहहबबब ,,, अंकित,,,,,आहहहहहहहबह,,, बहुत अच्छा लग रहा है रे,,,,आहहहहहहहबह,,,,,ऊममममममम तेरी उंगलियों में तो जादू है,,,,उफफफ,,,,,ऊममममममम,,,,(मदहोशी में इस तरह किसी शिसकारी की आवाज निकालते हुए अंकित की नई की आंखें मुंदने लगी वह पूरी तरह से उत्तेजित होने लगी,,, अपनी नानी के मुंह से इस तरह की आवाज सुनकर अंकित की भी हालत खराब होती जा रही थी उसकी उंगलियां जोर-जोर से बुर की गहराई नाप रही थी,,, कचोरी जैसी फूली हुई बुर देखकर उस पर अपने होंठ रखकर उसका रस चाटने का अंकित का मन कर रहा था,,,, लेकिन किसी तरह से वह अपने आप को संभाला हुआ था पेंट में बना तंबू सब कुछ फाड़ कर बाहर आने पर उतारू था,,,,। अंकित जोर-जोर से अपनी उंगली को अंदर बाहर और गोल-गोल घूमाते हुए बोला,,,,,)

 

तुम्हारी बुर तो अंदर से बहुत गर्म है नानी,,,,,,।

ओहहहहह मेरे बेटे बुर अंदर से गर्म ही होती है,,,,।

सच में नानी,,,।

हां,,,रे,,,,,,।

लेकिन पानी भी बहुत छोड़ रही है,,,,।

बोली थी ना जितना मजा ज्यादा आएगा उतना ज्यादा पानी निकलेगा,,,,।

क्या सच में तुम्हें ज्यादा मजा आ रहा है,,,,।

पूछ मत तुझे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा होगा,,,,।

आ तो रहा है लेकिन,, ज्यादा आ रहा है कि कम यह कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,।

मैं जानती हूं तुझे भी बहुत मजा आ रहा है,,,(धीरे से अपनी आंखों को खोलते हुए वह बोली. और अपनी नानी की बात सुनकर उसकी तरह देखते हुए बोला)

 

तुम्हें कैसे मालूम नहीं कि मुझे ज्यादा मजा आ रहा है या काम मजा आ रहा है,,,,( उसी तरह से अपनी नानी की आंखों के सामने अपनी उंगली को उसकी बुर में अंदर बाहर करती है बोला,,,,)

मुझे कैसे मालूम,,,,(इतना कहकर वहां धीरे से अपनी गर्दन को सीधी करके ऊपर उठने की कोशिश करने लगी और सीधा अपना हाथ आगे बढ़ाकर अंकित के पेंट में बने तंबू पर रखते हुए) ऐसे मालूम तेरा पूरा खड़ा हो चुका है,,, और मैं यह भी जानती हूं कि जब मर्द को ज्यादा मजा आता है तो इसी तरह से खड़ा हो जाता है,,,,।

(अपनी नानी की हरकत की वजह से अंकित पूरी तरह से झेंप गया था,,, आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था क्योंकि उसे उसकी नानी की तरफ से इस तरह की हरकत की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही थी लेकिन जैसे ही अपने गाने का हाथ अपने पेट में बने तंबू पर महसूस की आवाज पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबने लगा,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी और गहरी सांस लेते हुए अपनी नानी से बोला,,,)

 

यह क्या कर रही हो नानी मुझे शर्म आ रही है,,,।

अरे बुद्धू एक औरत होकर मैं तेरे सामने नहीं शर्मा रही हूं और तू शर्मा रहा है मर्द को तो कभी भी औरत से नहीं शर्माना चाहिए अब दिखा मुझे कि तेरा कैसा है मेरा तो सब कुछ देख लिया तूने,,,,।

(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित को अपने बदन में गुदगुदी होने लगी लेकिन शर्म के मारे वह अपनी नानी की बात मान नहीं पा रहा था,,,, इसलिए वह बोला,,,)

नहीं नानी रहने दो देखने जैसा कुछ भी नहीं है,,,।

अरे पागल हो गया क्या इसके अंदर मेरे देखने लायक ही चीज है,,,(तंबू को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर दबाते हुए वह बोली उसकी हरकत पर अंकित भी पानी पानी होने लगा उसकी हालत खराब होती चली जा रही थी वह भी अपने लंड को अपनी नानी की आंखों के सामने कर देना चाहता था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी और यह बात उसकी रानी अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए खुदाई अपने हाथ से उसकी पेंट का बटन खोलने लगे यह देखकर अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी उसकी उंगली पागलों की तरह उसकी नानी की बुर के अंदर बाहर हो रही थी यह उसके उत्तेजना का असर था और उसकी ईस हरकत से उसकी नानी को भी मजा आ रहा था,,,,। अंकित की नानी जानती थी कि उसके नाती के पेंट के अंदर उसके आनंद की चीज थी,,,, देखते ही देखते अंकित की नानी अंकित के पेंट की बटन को खोल दि और चैन को नीचे करके पेंट को दोनों हाथों से पकडकर एक झटके उसे घुटनों से खींच दी अंकित खुद बिस्तर पर घुटनों के बाल बैठा हुआ था और पेंट के नीचे आते ही,, उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड एकदम से हवा में झूलने लगा जिसे देखकर उसकी नानी की आंखें आश्चर्य से फटी की फटी रह गई,,,

 

अपने पूरे जीवन काल में उसने इस तरह का मोटा तगड़ा लंबा लंड नहीं देखी थी इसलिए अपने नाती का लंड देखकर वह आश्चर्यचकित हुए जा रही थी इसकी चुभन को अपनी गांड के बचों की अच्छी तरह से महसूस कर चुकी थी इसीलिए तो वह चुभन उसे यहां तक आने के लिए मजबूर कर दिया था,,, और नतीजन अंकित का लंड आज उसकी आंखों के सामने हवा में लहरा रहा था,,,, जिसे देखकर अंकित की नानी एकदम खुश होते हुए बोली,,,,,।

बाप रे इतना मोटा और लंबा मैं तो अपनी जिंदगी में पहली बार देख रही हूं सच में यह तो बहुत ही घातक हथियार है,,,,,(अंकित अपनी नानी की बातें सुनकर मन ही मन खुश हो रहा था क्योंकि एक औरत के मुंह से अपनी मर्दाना आगे की तारीफ सुनकर कोई भी मर्द और भी ज्यादा मतवाला हो जाता है और यही हालत अंकित की भी हो रही थी उसकी नानी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,) मैं बहुत देर से देख रही हूं मेरे नंगे बदन को देख तेरा लंड बहुत देर से खड़ा है मुझे अच्छी तरह से एहसास हो रहा है कि इसमें बहुत दर्द हो रहा होगा।

 

सच कह रही हो नानी ईसमें बहुत दर्द हो रहा है,,,,(अंकित इस तरह से अपनी उंगली को बुर के अंदर बाहर करता हुआ बोला,,,, उसकी बात सुनकर उसकी नानी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

तू बिल्कुल भी चिंता मत करो मेरी बारी है तूने मेरी बहुत सेवा कर ली अब मेरी बारी है तेरे दर्द को दूर करने के लिए,,,,,।

यह कैसे दूर होगा नानी मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं,,,,,।

अभी बताती हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही हाथ का सहारा लेकर बाहर उठ कर बैठ गई इस हालत में भी अंकित की ऊंगली उसकी बुर में घुसी हुई थी और वह तुरंत आगे कुछ बताती इससे पहले ही अपने प्यासे होठों को खोलकर अंकित के लंड को अपने मुंह में भर ली,,,,,, इसी के साथ अंकित की हालत एकदम से जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी,,, अंकित कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी नानी उसे इस तरह का सुख देखें अंकित कुछ बोल नहीं पाया बस उत्तेजना और मदहोशी में उसकी आंखें अपने आप ही बंद हो गई इस दौरान भी उसकी उंगली उसकी नानी की बुर में घुसी हुई थी और वह धीरे-धीरे उसके दरबार कर रहा था,,,,, अंकित की नई पहली बार इतने मोटे और लंबे लंड को अपने मुंह में ले रही थी वह पागल हुई जा रही थी चूसने पर अंकित का लंड सीधा उसके गले की गहराई तक पहुंचा रहा था जिससे उसे सांस देने में थोड़ी तकलीफ हो जा रही थी लेकिन आनंद की कोई सीमा नहीं थी वह पागल हुए जा रही थी,,,, इतने अद्भुत मर्दन अंग को जिंदगी में पहली बार वह देख रही थी और उस आनंद ले रही थी उसकी बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी,,,,

 

अपनी नानी की हरकत की वजह से अंकित मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रहा था उसकी मां अपनी कमर हिलाने को कर रहा था लेकिन वह ऐसा कर नहीं सकता था क्योंकि वह ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहता था जिससे उसकी नानी को जरा भी शंका हो कि इस तरह का सुख हुआ पहले भी प्राप्त कर चुका है या उसे यह सब मालूम है इसलिए वह बहुत संभल कर आनंद ले रहा था,,,, अंकित की नानी अंकित के लंड को पूरा गले तक लेकर उसकी चुसाई कर रही थी,,,,,, इस कार्य को करने में वह पूरी तरह से माहिर थी,,, लेकिन अंकित के लंड की मोटाई और लंबाई उसकी कार्य क्षमता को और भी ज्यादा बढ़ा दे रहा था उसे कुछ ज्यादा ही मेहनत करनी पड़ रही थी अंकित के लंड को चूसने में,, वह अपने मन में यही सोच रही थी कि जब अंकित का लंड बड़े आराम से उसके गले की गहराई तक चला जा रहा है तो उसकी बुर में जाकर तो उसके परखच्चे उड़ा देगा,, यह सोचकर ही उसकी बर पानी पानी हुई जा रही थी।

कुछ देर तक अंकित के लंड की चुदाई करने के बाद उसकी बुर फुदक रही थी उतेजना के मारे फुल रही थी और पीचक रही थी,,, यह देखकर उसके मन में भी यही चल रहा था कि उसकी अंकित अपनी जीभ लगाकर चाटे,,,, और इसलिए वह धीरे से अपने मुंह में से अंकित के लंड को बाहर निकल दी और उससे बोली,,,।

 

अब मेरी तरह तू भी अपने सारे कपड़े उतार करने का मजा अब बहुत मजा आने वाला है,,,।

(अंकित तो पहले से ही अपनी नानी की तरह नंगा होने के लिए तड़प रहा था आज उसकी मनोकामना पूरी होने वाली थी आज उसकी नानी उसे संभोग की कला से परिचित कराने वाली थी इसलिए वह अपनी नानी की बात मानते हुए बिस्तर पर ही खड़ा होकर अपने कपड़े उतार कर एकदम से नंगा हो गया नंगा होने के बाद उसका गठीला बदन ओर भी ज्यादा आकर्षक लग रहा था जिसे देखकर उसकी नानी मंडप में मुस्कुरा रही थी,,,,, और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अब तो मेरी तरह पीठ के बल लेट जा,,,,।

(अंकित को नहीं मालूम था कि उसकी नानी अब क्या करने वाली है लेकिन वह जानता था कि उसकी नानी जो भी करेगी इसमें उसका ही भला है इसलिए वह भी तुरंत अपनी नानी की बात मानते हुए बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया,,,, देखते ही देखते अंकित की नई उसकी तरफ पीठ करके घुटने के बाल हो गई और एक घटना उसके दाएं कंधे की और और दूसरा घटना पे कंधे की ओर रखकर उसके ऊपर एकदम से झुकने लगी और देखते ही देखते हैं वह उसके लंड के करीब पहुंच गए और एक बार फिर से उसके लंड को अपने हाथ में लेकर मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, और अपनी भारी भरकम गांड को अपने नाती के चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दी,,,, यह अंकित के लिए बिल्कुल नया था अपनी नानी की भारी भरकम नंगी गांड को अपने चेहरे पर रगड़ हुआ देखकर उसकी उत्तेजना परम शिखर पर पहुंचने लगी वह पागल होने लगा वह नहीं जानता था कि एक औरत मर्द से इस तरह से भी खेल सकती है वह अपने दोनों हाथों से उसकी गांड को पकड़ लिया था लेकिन,,,, क्या करना है उसे मालूम नहीं था उसके होठों से उसकी नानी की बुर केवल दो अंगुल की दूरी पर थी जिसमें से मदन रस टपक रहा था और उसके होंठों पर गिर रहा था,,, जिसे अपनी जीभ से चाट रहा था,,,,

 

अंकित की नानी पूरी तरह से उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने का मजा लूट रही थी और उसका बिल्कुल भी मन नहीं कर रहा था अपने मुंह से लंड को बाहर निकालने के लिए इसलिए अंकित को क्या करना है वह इशारे से समझाते हुए अपनी गुलाबी बुर को उसके होठों पर रगड़ना शुरू कर दी थी जिससे उसके होठ उसके मदन रस में भीगना शुरू हो गए थे,,, अंकित से अब रहा नहीं जा रहा था वह जानता था किसकी नानी की तरफ से क्या है उसके लिए इशारा ही है बुर चाटने के लिए इसलिए वह अपने आप को रोक नहीं पाया और तुरंत अपने होठों को अपनी नानी की बुर से सटा दिया,,,, अंकित की ईस हरकत से उसकी नानी के बदन में झनझनाहट होने लगी वह मदहोश होने लगी,,, वह और जोर-जोर से उसके लंड को चूसना शुरू कर दी और अंकित अपनी नानी की भारी भरकम गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया था,,,, बुर चटाई का उसका यह तीसरा अनुभव था,,, वैसे तो अपनी मां की बुर पर भी उसकी नींद में होने का फायदा उठाकर वह हल्के से अपने होठों को उस पर रखकर उसके मदन रस को चाट लिया था लेकिन खुलकर वह राहुल की मां, सुमन और आज अपनी नानी की बुर को चाट रहा था,,,, उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, घर में किसी को कानों कान खबर नहीं थी कि अंकित के कमरे में क्या चल रहा है अंकित आज पूरी तरह से अपनी नानी की जवानी का मजा लूट रहा है आज पहली बार उसे अपने मर्द होने का सुख प्राप्त हो रहा था,,,, देखते ही देखे अपनी नानी के मदन रस से उसका पूरा चेहरा देख चुका था,,,,।

तकरीबन 20 मिनट तक अंकित की नानी उसे एक औरत का सुख देती रही लेकिन अब समय आ गया था असली सुख प्राप्त करने का,,,, इसलिए वह धीरे से अंकित के लंड को अपने मुंह से बाहर निकाली और अपनी भारी भरकम गांड को अंकित के चेहरे पर से हटाकर एक तरफ बैठ गई और मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ देखते हुए बोली,,।

कैसा लगा अंकित,,,,।

(जवाब में अंकित कुछ बोल नहीं रहा था बस उत्तेजना से गहरी गहरी सांस लेना था उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे उत्तेजना की भाव नजर आ रहे थे लेकिन अभी खेल बाकी था इसका एहसास उसके चेहरे को देखकर हो रहा था इसलिए अंकित की नानी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) अब समय आ गया है मेरे दर्द को पूरी तरह से खत्म करने का तु जानता है ना यह दर्द कैसे खत्म होगा,,,,

कैसे,,,,,?(गहरी सांस लेते हुए अंकित बोला)

मेरी बुर में अपना लंड डाल कर मैं समझ गई हु ऊंगली से काम चलने वाला नहीं है,,,,।

लेकिन क्या इसमें जाएगा,,,(अपनी नानी की दोनों टांगों के बीच देखते हुए अंकित बोला)

क्यों नहीं ईसी के लिए तो मेरी बुर बनी है,,,, तुझे मालूम है औरत को चोदते कैसे हैं,,,,।

(अपनी नानी के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर वह उत्तेजना से मचलने लगा,,,, उसके मुंह से शब्द नहीं फुट पाए बस ना में सिर हिला दिया,,,, उसका जवाब सुनकर उसकी नानी मुस्कुराते हुए बोली,,)

चिंता मत कर आज तुझे सबकुछ सिखा दुंगी,,, बस जैसा-जैसे में बोलु वैसा वैसा करते जाना,,,,,।(इतना कहने के साथ ही वह बिस्तर पर पेट के बल लेट गई और अंकित से बोली,,,)

वह (उंगली के इशारे से) तकिया तू मेरी गांड के नीचे रख दे ताकि मेरी गांड थोड़ी ऊपर हो जाए,,

(अपनी नानी के इस तरह से खुली बातें सुनकर अंकित का जोश बढ़ता जा रहा था और वह तुरंत ही बिस्तर पर एक किनारे पर तकिया पड़ा था उसे लेकर अपनी नानी की गांड के नीचे लगाने लगा और उसका सहकार देते हुए उसकी नानी खुद अपनी भारी भरकम गांड को थोड़ा ऊपर की तरफ उठा दी और अंकित उसके नीचे तकिया रख दिया और वाकई में उसकी गांड थोड़ी ऊपर हो गई,,,,, यह देख कर अंकित के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी वह समझ गया कि उसकी नानी खेली खाई औरत है आज उसे जी भरकर मजा देगी गांड तकिया पर रखकर ऊपर होने के बाद अंकित अपनी नानी की तरफ सवालिया नजर से देखते हुए बोला,,,)

अब क्या करूं नानी,,,,?अब तु मेरी टांगों के बीच आजा घुटनों के बल,,,(ऐसा कहते हुए वह अपनी दोनों टांगों को खोलती और अच्छा खासा जगह अंकित के लिए बना दी अंकित भी अपनी नानी की बात मानते हो घुटनों के बाल अपनी नानी की दोनों टांगों के बीच आ गया इसके बाद उसकी नानी बोली)

बस अब अपनी जांघों को थोड़ा सा खोल,,,,(ऐसा कहते हुए उसकी नजर अंकित के लंड पर गई जो पूरी तरह से छत की तरफ मुंह उठाए खड़ा था यह देखकर वह मुस्कुराते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,) देख अंकित तेरा लंड कितना उतावला है मेरी बुर में घुसने के लिए,,,,,।

(अपनी नानी की बातें अंकित को बेहद उत्तेजनात्मक लग रही थी वह मदहोश हो जा रहा था उसकी एक-एक बातें उसके लंड की हालत को खराब करती चली जा रही थी,,,, अंकित वैसा ही किया जैसा उसकी नानी बोल रही थी अपनी जांघों को थोड़ा सा फैला लिया,,,, और फिर बोला,,,)

अब क्या करु नानी,,,?

अब तुम दोनों हाथों को मेरी गांड के नीचे की तरफ ले आ,,,,(ऐसा सुनते ही अंकित अपने दोनों हाथों को अपनी नानी की गांड के नीचे की तरफ ले जाने लगा,,,,)

 

हां बस ऐसे ही अब मेरी कमर को दोनों हाथों से कस के पकड़ ले,,
(अपनी नानी की बात मानते हुए अंकित दोनों हाथों से अपनी नानी की कमर को अपनी हथेली में कस के पकड़ लिया अंकित कुछ पूछता इससे पहले ही उसकी नानी बोली,,,)

अब जोर से अपनी तरफ खींच अपनी जांघों पर चढ़ा ले मेरी जांघों को,,,,।

(अंकित ठीक वैसा ही किया जैसा उसकी नानी बता रही थी उसके दिशा निर्देश का पालन करते हुए अगले ही पल उसकी नानी की मोटी जांघें उसकी जांघों पर चढ़ी हुई थी,,,, यह देखकर उसकी नानी खुश होते हुए बोली)

एक औरत के वजन को एक मर्द चाहे जितना भी हो वह उठा ही लेता है,,,,

 

अब क्या करना होगा नानी,,,(उत्तेजना भरी सांस लेते हुए अंकित बोला)

बस अब क्या मेरी बुर दिखाई दे रही है ना,,,, अब इसके छेद पर अपने लंड का सुपाड़ा रखकर धक्का मार,,,,,
(अपनी नानी का दिशा निर्देश और उसके शब्दों में खुलापन देखकर अंकित पूरी तरह से मचल उठा उसका दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि अब वह जो काम करने जा रहा है था वह पूरी तरह से उसे कामुक बना दी थी,,, किसी का सपना तो वह दिन रात देखता था फर्क सिर्फ इतना था कि उसकी कल्पना और सपना में उसकी मां रहती थी लेकिन आज हकीकत में बिस्तर पर उसकी नानी थी। अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी नानी की कचोरी जैसी फूली हुई गुलाबी पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी जिसमें से मदन रस टपक रहा था,,, और उसकी टपकती हुई मदन रस को देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बुर उसे अपने अंदर आने के लिए आमंत्रित कर रही हो अब अंकित से अपने आप को रोक पाना बहुत मुश्किल हो गया था क्योंकि वह पूरी तरह से संभोग आसन में आ चुका था उसकी नानी की मोटी मोटी चिकनी जांघें उसकी जांघों पर चढ़ी हुई थी,,,, यह एहसास ही उसे मस्त करने के लिए काफी था। जोर-जोर से धड़कते हुए अपनी धड़कनों पर काबू करते हुए अंकित अपने मोटे तगड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया था,,, और उत्तेजना से अपने सूखने हुए गले को अपने ही थूक से गिला करने की कोशिश करते हुए अपने लंड के मोटे सुपाड़े को अपनी नानी के गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों पर हल्के से रख दिया,,,, यह स्पर्श दोनों को एकदम से रोमांचित कर दिया दोनों एकदम से मदहोश हो गए अंकित की नई अपने दोनों हाथ की कोहनी का सहारा लेकर हल्के से अपनी गर्दन उठाकर अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगी।

 

वाकई में टांगों के बीच का नजारा बेहद खूबसूरत था,,, अंकित की नानी साफ तौर पर देख पा रही थी कि उसकी गुलाबी बुर पर उसके नाती का मोटा तगड़ा लंड रखा हुआ था,, जिसे देखकर वह खुद मदहोश हुए जा रही थी और धीरे से उत्तेजना भरे स्वर में बोली,,।

अभी इंतजार किस बात का कर रहा है रे धीरे-धीरे से अंदर डाल,,,,,

(अपनी नानी किस तरह की बातें सुनकर वह उत्तेजना से भरता चला जा रहा था उसे इतना तो मालूम था कि लंड को बुर में डाला जाता है,,, लेकिन उसका सही तरीका उसे नहीं मालूम था इसलिए इस बात को शायद अंकित की नानी अच्छी तरह से समझ गई थी,, इसलिए वह खुद ही अपना हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ ली और उसे योग्य दिशा दिखाते हुए अपने गुलाबी छेद पर रख दी और बोली,,)

बस बेटा अब धक्का मार,,,।

 

(उसका इतना कहना था कि अंकित अपनी कमर को आगे की तरफ खेलने लगा उसका लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था इस बात का एहसास अंकित की रानी को हो गया था वह जानती थी कि उसके लंड को अंदर घुसने में थोड़ी बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ेगा और ऐसा ही हो रहा था बुर के मदन रस की चिकनाहट पाने के बावजूद भी अंकित को ज्यादा जोर लगाना पड़ रहा था,,,, तीन चार बार कोशिश करने के बाद बुर की चिकनाहट का सहारा लेकर उसके लंड का सिपारा हल्का-हल्का बुर के छेद द्वार को खोलता हुआ अंदर की तरफ बढ़ने लगा,,,, यह एहसास अंकित के लिए भी बहुत खास था और अनुभव से भरी हुई उसकी नानी के लिए भी यह पल बेहद कामुकता और उत्तेजना से भरा हुआ था क्योंकि उसने चुदाई का यह खेल जवानी के दिनों से खेलती आ रही थी लेकिन आज की तरह उसे पहले कभी भी ऐसा मर्द नहीं मिला था जो उसके चेहरे के हाव भाव को पूरी तरह से बदल दे,,, सुपाड़े को अंदर प्रवेश करते हुए देखकर अंकित की नई प्रसन्नता के साथ बोली,,,,)

बस इसी तरहसे दम लगा,,,, देख कैसे धीरे-धीरे अंदर जा रहा है अभी देखना थोड़ी ही देर में तेरा पूरा लंड मेरी बुर की गहराई में खो जाएगा,,,,

सच नानी,,,,(अपनी नानी की तरफ देखते हुए बोला,,,,)

हा रे सब कुछ तेरे सामने है अभी सब कुछ साफ हो जाएगा बस तु इसी तरह से मेहनत कर,,,।

(अपनी नानी की तरफ से हरी झंडी का इशारा पाकर अंकित फिर से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलना शुरू कर दिया,,, उसे भी अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी नानी की बुर के अंदर उसका लंड रगड़ता हुआ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था,,,, चोदने का अनुभव उसमें बिल्कुल भी नहीं था,,,, धीरे-धीरे अंकित अपनी मनसा को पूरी करने में लगा हुआ था देखते ही देखे उसका पूरा सुपड़ा उसकी नानी की बुर की गहराई में डूब चुका था यह देखकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे उसकी नानी भी है देखकर खुश हो रही थी लेकिन वह बोली,,,,)बस ऐसे ही अभी पूरा जाना बाकी है,,,, एक बार घुस गया तब देखना कितना मजा आएगा,,,,

(इतनी सही अंकित की नानी के माथे पर पसीने की बूंदे उपसने लगी थी,,,, उसे भी अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि वाकई में अंकित का लंड ज्यादा ही दमदार है,,, और वास्तव में यह उसके लिए खुशी की बात थी क्योंकि औरत को और क्या चाहिए मर्द का मोटा तगड़ा और लंबा लंड जो उसकी बुर में जाकर पूरी तरह से उसके रस को नीचोड़ सके,,, और ऐसा ही लंड अंकित की नानी की बुर में घुसता चला जा रहा था,,,, अंकित गहरी गहरी सांस ले रहा था उसके हाथ में तो बेस कीमती खजाना लग गया था जिसका इस समय वह खुद मालिक था जैसे चाहे वैसे इसका उपयोग कर सकता था इसलिए उसकी खुशी छुपाए नहीं छुप रही थी,,,, अपनी नानी के बताएं अनुसार वह अपने कमर को जोर-जोर से आगे की तरफ करने लगा और देखते ही देखे उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी नानी की बुर की अंदरूनी सारी अडचनो को दूर करता हुआ आगे की तरफ बढ़ रहा था और यह क्रिया करने में अंकित को अद्भुत एहसास हो रहा था बुर की अंदरूनी दीवारें उसके लंड की रगड़ उसे पानी पानी हो रही थी और यह रगड़ उसे मदहोश कर रही थी,,,, देखते ही देखते अंकित का एक तिहाई लंड पूरी तरह से उसकी नानी की बुर में समा गया,,, यह देखकर उसकी नानी एकदम हैरान परेशान हो रही थी,,,।

क्योंकि अंकित का लंड एक तिहाई घुसने के बाद उसके बच्चेदानी पर स्पर्श कर रहा था लेकिन इतना खुश जाने के बावजूद भी उसका एक चौथाई हिस्सा बचा हुआ था यह देखकर अंकित की नानी पानी पानी हो रही थी और थोड़ी बहुत घबराहट भी हो रही थी क्योंकि उसे मालूम था कि अभी तो अंकित नादान और अनजान है इसलिए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है,,, लेकिन जब उसे मजा आने लगेगा इस खेल को वह पूरी तरह से समझने लगेगा तब उसके धक्के तेज हो जाएंगे एकदम दमदार हो जाएंगे तब पता नहीं वह उसके धक्को को सह पाएगी कि नहीं,,,, यही सोचकर वह हैरान हो रही थी लेकिन आने वाले पाल को जीने के लिए वह काफी उत्सुक नजर आ रही थी।

लेकिन अब अंकित से भी रहा नहीं जा रहा था बुर की अंदरूनी रगड़ उसे मदहोश कर रही थी उसे पागल बना रही थी उसे ज़ोर दिखाने के लिए मजबूर कर रही थी और वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर लिया था क्योंकि इतना तो जानता ही था कि अब उसे क्या करना है,,,,, अंकित गंदी किताब के रंगीन पन्नों को अच्छी तरह से देख चुका था,,, उसमें छपे आसान उसे अच्छी तरह से आदत है इसलिए वह काश कि अपनी नानी की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया था और फिर कच कचा के जोर से धक्का मारा,,,, इस बार उसके प्रहार से उसका बचा हुआ एक चौथाई लंड पुरे जोर के साथ उसके बच्चेदानी से जा टकराया,,, और उसके इस प्रहार से उसकी नानी एकदम से दर्द से बिलबिला उठी। उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई,,,,।

ऊईईईईई मां,,,,,,,,,,,।

क्या हुआ नानी,,,,,?(एकदम से अपने आपको रोकते हुए अंकित बोला अपनी नानी की चीख सुनकर वह भी एकदम से रुक गया,,,,)

तू तो मार ही डालेगा रे,,,,

क्यों क्या हुआ नानी,,,

अरे इतनी जोर से कोई पेलता है क्या,,,? इतनी जोर से मत धक्का मार धीरे-धीरे अंदर बाहर कर तब तुझे भी मजा आएगा और मुझे भी,,

ठीक है नानी,,,, मुझे नहीं मालूम था,,,,।

चल कोई बात नहीं अब धीरे से उसे बाहर का तरफ ले जाओ और अंदर की तरफ लिया लेकिन ध्यान रखना पूरा लंड बाहर मत निकालना,,,

ठीक है नानी,,,,(अंकित कुछ ज्यादा ही जोर से धक्का लगा दिया था क्योंकि उसे चोदने का कला नहीं मालूम था लेकिन अब अपनी नानी के बसाया अनुसार वह अपने लंड को धीरे से बाहर की तरफ खींचा और उसके सुपाड़े को अंदर ही रहने दिया,,, और फिर धीरे से अंदर की तरफ लेकर इस क्रिया को वह पहली बार कर रहा था और पहली बार मे हीं इतने आनंद की उसे अनुभुति हुई कि पूछो मत,, मस्ती में आकर उसने इस क्रिया को दोहराया उसे और भी ज्यादा मजा आने लगा और फिर धीरे-धीरे वह अपने आप ही,,, इस क्रिया को दोहराने लगा और अपनी नानी को चोदने लगा,,, उसकी नानी भी समझ गई कि अब ज्यादा मजा आने वाला है इसलिए उत्तेजित और प्रसन्न होते हुए बोली,,,।)

हां मेरे लाल बिल्कुल ऐसे ही,, चोद मुझे,,,,।

 

अंकित को अपनी कमर हिलाने में मजा आ रहा था वह जानता था कि इस क्रिया को चुदाई कहते हैं और वह अपनी नानी को चोद रहा है,,, आज उसकी मनोकामना पूरी हो रही थी और उसे पूरी करने वाली उसकी मां नहीं बल्कि उसकी मां की भी मां थी,,,, अंकित मन ही मन अपनी नानी को धन्यवाद कर रहा था इस अनुभव की अनुभूति कराने के लिए वरना इस पल के लिए वह ना जाने कितने समय से तड़प रहा था,,,, अद्भुत अविस्मरणीय अतुलनीय पल था यह अंकित के लिए और उसकी नानी के लिए,,,,, उसकी नानी पहली बार अपनी बुर में इतना लंबा और मोटा लंड ले रही थी और अंकित पहली बार किसी औरत को चोदने का सुख प्राप्त कर रहा था,,,,वाकई चुदाई में इतना मजा आता है तभी तो दुनिया का हर मर्द औरत के पीछे पागल रहता है आज अंकित को इसका एहसास हो रहा था।,,,,

बेहद मदहोशी और काम उत्तेजना से भरा हुआ नजर अंकित के कमरे में दृश्य मान हो रहा था, अंकित के लिए यह खुशी की बातें थी कि उसकी नानी ने ट्यूबलाइट बंद करने के लिए नहीं पड़ी थी जो कुछ भी हो रहा था सब कुछ उजाले में हो रहा था और रात के 3:00 चुके थे लेकिन दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी,,,, क्योंकि दोनों पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डुबकी जो लगा रहे थे अंकित की नई इस उम्र में भी पूरी तरह से जवानी से भरी हुई थी मां और तुम दोनों की हवस भरी नहीं थी इसीलिए तो अपने नाती से ही दैहिक संबंध बना रही थी,,,, धीरे-धीरे अपने आप ही अंकित की कमर थोड़ी रफ्तार पकड़ रही थी क्योंकि यह सब अपने आप ही हो रहा था और वैसे भी चुदाई की मदहोशी में मर्द और भी ज्यादा ताकतवर हो जाता है,,,,, लेकिन अंकित की नानी उसे रोकने की कोशिश नहीं कर रही थी क्योंकि उसे भी तेज धक्के पसंद थे वह तो शुरुआती दौर पर ही अंकित के तेज धक्के को सह नहीं पाई थी क्योंकि वह सीधा जाकर उसके बच्चेदानी से टकरा गया था,, लेकिन अब सब कुछ उसके काबू में था मदहोशी की चरम सीमा पर पहुंचकर अंकित की नई गहरी गहरी सांस लेते हुए गरमा गरम सिसकारी की आवाज छोड़ रही थी,,,, लेकिन वॉइस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि वह कहां पर है इसलिए अपनी शिसकारी की आवाज पर भी उसका काबू था वह जानते थे कि कमरे से बाहर शिसकारी की आवाज जाना नहीं चाहिए वरना सब काम बिगड़ जाएगा,,,, इसलिए वह इस तरह से शिसकारी की आवाज में रही थी कि उसकी आवाज कमरे से बाहर न जाए अगर वह अपने गांव में होती है अपने घर में होती है खेत खलियान में होती तो खुलकर गरमा गरम शिकारी की आवाज लेते हुए चुदाई का आनंद लूटती,,,,।

अंकित दोनों हाथ से अपनी नानी की कमर को मजबूती से पकड़ कर धक्के पर धक्के लगा रहा था,,,, उसका हर एक धक्का उसके बच्चेदानी तक पहुंच रहा था लेकिन उसे अब दर्द नहीं हो रहा था क्योंकि जितना तेज हो शुरू में धक्का मारा था उतना तेज वह अपनी कमर नहीं ला रहा था क्योंकि उसकी नानी ने उसे ऐसा न करने की हिदायत दी थी लेकिन अब उसकी नानी को भी लगने लगा था कि इस आनंद को और भी ज्यादा बढ़ना चाहिए उसके धक्के की गति को तेज करना चाहिए इसलिए उसकी नानी अपना हाथ आगे बढ़कर कमर पर रखे हुए हाथ को दोनों हाथों से पड़कर उसकी हथेलियां को अपनी चूची पर रख दे ताकि वह उसे पड़कर धक्का तेज कर सके इसलिए वह बोली,,,,,)

बस मेरे राजा अब जोर-जोर से धक्का लगा,,,।

लेकिन नानी,,,

 

तो बिल्कुल भी चिंता मत कर मैं तेरा धक्का सहन कर लूंगी वह तो उस समय में तैयार नहीं थी,,,, अब शुरू हो जा जोर-जोर से चूची दबाते हुए,,,,,चोद मुझे,,,,ओहहहह मेरे राजा,,,,,।

(अब उसकी नानी उसे खुली छूट देती थी इस खुली छूट को पाकर वह भी मदहोश हो गया और अपनी नानी की चूचियों को दोनों हाथों से जोर से दबाते हुए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया वाकई में अंकित के हर एक धक्के साथ अंकित की नई का वजूद हल जा रहा था वह पूरी तरह से बिस्तर पर ही लहरा जा रही थी अंकित पूरी ताकत से धक्का लगाना शुरू कर दिया था जो कि उसके बच्चे दानी से टकरा जा रहा था। लेकिन अब उसकी नानी उसे धक्के को सह ले रही थी उसे इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत वह तो पागल हुई जा रही थी,,,,।

सहहहहह आहहहहहह ऊमममममममम ओहहहहह मेरे राजा,,,,आहहहहहहह और जोर से और जोर से धक्का लगा,,,,,ऊममममम फाड़ दे मेरी बुर को,,,,ओहहहहहबह बहुत मजा आ रहा है,,,,,आहहहहहहह ,,,घुस जा मेरी बुर में,,,,ओहहहहहबबब,,,,,,

 

अपनी नानी के गरमा गरम सिसकारी की आवाज ओर उसकी मदहोशी देखकर,,,, अंकित का जोश बढ़ता जा रहा था,,,,,, वह बड़ी तेजी से अपनी कमर हिला रहा था,,, पूरे कमरे में फच्च फच्च की आवाज गूंज रही थी,,,, यह आवाज अंकित के जोश को और ज्यादा बढ़ा रहे थे अंकित पागलों की तरह अपनी नानी की दोनों चूचियों को दशहरी आम की तरह पकड़ कर दबा रहा था और धक्का लगा रहा था ऐसा करने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,,,। तकरीबन 25 से 30 मिनट की घमासान चुदाई के बाद अंकित की नई चरम सुख के करीब पहुंच गई थी और तुरंत अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर अंकित को अपनी बाहों में भर ली थी अंकित की पूरी तरह से अपनी रानी को अपनी बाहों में दबोचते हुए अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,, और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ना शुरू कर दिए थे अंकित के जीवन का यह पहला स्खलन था।

पहली बार अंकित किसी की बुर में जाना था वरना अपने हाथ से अपना पानी निकाल कर अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने की कोशिश करता रहा था अगर आज उसके घर नानी ना आई होती तो वह शायद संभोग के सुख से न जाने कितने महीने अनजान रहता,,,, वह अपनी नानी की बाहों में पसर गया था गहरी गहरी सांस ले रहा था अंकित की नानी भी संपूर्ण संतुष्टि का एहसास लिए चेहरे पर मादक मुस्कान बिखेर रही थी और गहरी गहरी सांस ले रही थी उसकी गहरी चलती सांसों के साथ उसकी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जो कि अंकित की छाती पर अपनी चुभन का एहसास दिला रही थी,,,, दोनों एक दूसरे की बाहों में अपने-अपने अंगों से बदन रस की बूंदें टपका रहे थे,,, रह रह कर अंकित की कमर अभी भी ठोकर मार रही थी क्योंकि उसके लंड से रह रहकर अभी भी लावा बरस रहा था अंकित की नई संतुष्टि का एहसास लिए अंकित की पीठ को सहला रही थी मानो कि जैसे उसे शाबाशी दे रही हो इस अद्भुत कार्य को पूर्ण करने के लिए।

 

कैसा लग रहा है अंकित,,,?(बालों में उंगली फिराते हुए,,,)

बहुत अच्छा लग रहा है नानी मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था की चुदाई में इतना मजा आता है सच में तुम्हारी बुर में मेरा पूरा लंड घुस गया था वरना मैं तो समझ रहा था की उंगली भी नहीं घुस पाएगी,,,,(अभी भी जानबूझकर अंकित अपना नादानी दिखाते हुए बोल रहा था)

इसीलिए कहती हूं मेरी हर एक बात माना कर,,,, और हां सच में तेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है जिस किसी औरत को चोदेगा वह पूरी तरह से तेरी गुलाम बन जाएगी,,,,।

गुलाम बन जाएगी मैं कुछ समझा नहीं,,

अरे बेवकूफ एक बार तेरा लंड किसी भी औरत की बुर में घुस गया तो वह बार-बार तुझसे चुदवाएगी,,,,।

 

क्या तुम भी नानी,,,,!(अपनी नानी की तरफ सवालिया नजरों से देखते हुए अंकित बोला उसकी बात सुनकर उसकी नानी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

मैं भी तेरी गुलाम हो गई हूं सच में हम औरतों को क्या चाहिए तेरे जैसा मोटा और लंबा लंड जो बुर में घुस कर पानी पानी कर दे,,, और आज तुने वैसा ही किया है,,,,।

सच नानी,,,,

हां रे,,,,, तो पूरा मर्द बन चुका है,,,,, चल अब उठ मेरे ऊपर से मुझे बड़ी जोरों की पेशाब लगी है,,,,।
(इतना कहने के साथ है उसकी नानी उसके कंधे को पकड़ कर उसे अपने ऊपर से हटने लगी तो अंकित खुद ही अपनी नानी के ऊपर से हटने लगा लेकिन उसका लंड अभी भी उसकी नानी की बुर में घुसा हुआ था और पूरी तरह से खड़ा का खड़ा था बस हल्का सा ढीलापन उसमें आया था इसलिए वह धीरे से अपने लंड को अपनी नानी की बुर में से बाहर खींचा तो पक्क की आवाज के साथ बुर में से लंड बाहर निकल गया उसके खड़े लैंड को इस समय देखकर उसकी नानी बोली,,,)

 

बाप रे देख तो सही एक बार झड़ चुका है लेकिन फिर भी खड़ा का खड़ा है,,,,,,।
(अंकित मुस्कुराता हुआ एक तरफ होकर बैठ गया था और उसकी कहानी उठकर पलंग के नीचे अपने पैर लटका कर बैठ गई थी और अंकित की तरफ देखते हुए बोली,,,)

कितना समय हो रहा है,,?

(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखते हुए बोला,,,,)

3:00 बज गए नानी,,,,

बाप रे पहली बार इतना समय चुदाई में गुजरा है वरना 10-15 मिनट तो बहुत हो जाता है,,, सच में तुझ में बहुत दम है,,,(इतना कहने के साथ ही वह बिस्तर पर से उठकर खड़ी हो गई और नग्नवस्था में ही दरवाजे की तरफ जाने लगी उसे देखकर अंकित बोला ,,,,)

अरे नानी कपड़े तो पहन लो की नंगी ही बाहर जाओगी,,,,

 

घड़ी में देख 3:00 बज रहा है ना अब इतनी रात को भला कौन उठने वाला है सब गहरी नींद में सो रहे होंगे और तुझे मैं बता दूं कमरे में नंगी होकर घूमने में मुझे बहुत अच्छा लगता है,,,।
(अपनी नानी की बात सुनकर उसका भी जोरों से धड़कने लगा अंकित को अपनी नानी की यह अदा बेहद लुभावनी लग रही थी लेकिन उसे डर भी लग रहा था कि कहीं कोई देख लिया तो गजब हो जाएगा इसलिए वह भी धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतर गया और अपनी नानी से बोला,,)

लेकिन नानी यहां पर इस तरह से घूमना ठीक नहीं है अगर कहीं दीदी ने या मम्मी ने देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,।

तुझे लगता है कि कोई देख लेगा मैं जानती हूं इस समय सब गहरी नींद नहीं सोते हैं इसलिए तो बिल्कुल भी चिंता मत कर बस ट्यूब लाइट बंद कर दे,,,।
(अपनी नानी की बात सुनकर आंखें तो तुरंत ट्यूबलाइट का स्विच दबा दिया और कमरे में अंधेरा छा गया और उसकी नानी धीरे से कमरे का दरवाजा खोली और कमरे से बाहर निकल गई,,,, उसे अपने अनुभव पर विश्वास था वह जानती थी कि इस पहर सब गहरी नींद मे हीं सोते हैं,,,, अंकित के बदन में भी गुडदगुदाहट हो रही थी,,,, कमरे में वह भी पूरी तरह से नंगा इधर से उधर घूम रहा था और दरवाजे पर खराब इसलिए उसके बदन में भी अपनी नानी की नंगी गांड देखकर एक बार फिर से उत्तेजना की लहर उठने लगी थी वैसे तो कमरे के बाहर भी पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था लेकिन कमरे के बाहर सड़क पर स्ट्रीट लैंप चल रहा था जिसकी रोशनी दरवाजे की दरार से अंदर की तरफ आ रही थी और इतना तो दिखाई दे ही रहा था कि वह अपनी नानी को देख सके उसके नंगे बदन को देख सके,,,,।

अंकित इस बात से ही ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था कि वह खुद और उसकी नानी दोनों एकदम नग्न अवस्था में अपने कमरे के बाहर आ चुके थे अंकित का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था वह बार-बार अपनी मां के कमरे की तरह पर अपनी बड़ी दीदी की कमरे की तरफ देख रहा था लेकिन दोनों कमरे में एकदम सन्नाटा छाया हुआ था इसलिए उसे थोड़ी राहत महसूस हो रही थी और उसकी नानी अपनी कमर पर दोनों हाथ रखकर इधर-उधर अपनी कमर हिला कर अपने बदन को खींच तान रही थी,,, क्योंकि अंकित ने बिस्तर पर कुछ ज्यादा ही कसरत करवा दिया था,,,,, अपनी नानी को इस तरह से कमरे के बाहर नंगी खड़े देख कर अंकित बोला,,,,।

क्या हुआ नानी जल्दी करो ना,,,,(अंकित दबे श्वर में बोला था कि उसकी आवाज कमरे के अंदर ना पहुंच सके,,,,)

तू घबरा क्यों रहा है चिंता मत कर कुछ नहीं होने वाला,,,,,,(इतना कहकर वह बाथरूम का दरवाजा खोलने ही वाली थी कि अंकित को लगा कि दरवाजा खोलने की आवाज से शायद किसी की नींद खुल जाए इसलिए वह धीरे से बोला,,,)

बाथरूम में मत करो नानी,,, यहीं बैठ जाओ,,,।

यहीं पर,,,,(उसकी नानी सवालिया नजरों से अंकित की तरफ देखते हुए बोली,,,)

हां नानी यहीं पर नाली बनी है निकल जाएगा बस थोड़ा पानी गिरा देना,,,,।

ठीक है,,,,(और इतना कहने के साथ है अंकित के गाने एकदम बेशर्मों की तरह बेशर्मी दिखाते हुए अंकित की आंखों के सामने ही बैठकर पेशाब करने के लिए और वैसे भी दोनों के बीच जिस तरह का रिश्ता बन चुका था उसे देखते हुए अंकित की नानी को अब अंकित से शर्म करने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी थोड़ी ही देर में अंकित के कानों में सिटी की आवाज गूंजी रही वह समझ गया की नई की बुर से पेशाब की धार निकल रही है और यह एहसास अंकित को फिर से उत्तेजित करने लगी और वह एक बार फिर से उत्तेजित होने लगा उसका लंड फिर से अपनी औकात में आने लगा,,,, अंकित की नानी अभी अपनी बुर से पेशाब कि धार मार ही रही थी कि अंकित की तरफ देखते हुए बोली,,,)

तू भी कर ले यही खड़े होकर तुझे भी लगी होगी,,,,,(अंकित की तरफ नजर उठा कर देखते हो वह बोली और उसके नीचे अंकित के लंड पर चली गई जो की दरवाजे की दरार में से आ रही रोशनी में साफ दिखाई दे रहा था,,,, अपने नाती के झड़ने के बावजूद भी एक बार फिर से टनटनाए हुए लंड को देखकर वह मुस्कुराते हुए बोली,)

हाय दैया यह तो अभी भी खड़ा है रे,,,(इतना कहने के साथ है वह अपना हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ ली और उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोली,,)

चल अब मैं तुझे पेशाब करवाती हूं जल्दी से करना शुरू कर दे,,,,(अंकित के लंड को अपनी हथेली में भरे हुए वह बोली,,,, एक अद्भुत एहसास अंकित के बदन में खुल रहा था अपनी नानी के द्वारा पकड़े गए लंड की गर्मी से वह खुद पिघलने लगा था और अपनी नानी की बात मानते हुए वह भी पेशाब करना शुरू कर दिया जिंदगी में पहली बार वह इस तरह से पेशाब कर रहा था जब कोई औरत उसके लंड को पकड़ी हो,, अंकित अपने मन में ही बोल रहा था की कितनी बड़ी छिनार है,,,, लेकिन छिनार ना होती तो उसे इतना मजा ना देती यह सोचते हुए वह पेशाब कर रहा था थोड़ी ही देर में दोनों पेशाब कर चुके थे लेकिन पेशाब करने की क्रिया के दौरान दोनों अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहे थे अंकित एक बार फिर से चुदाई के लिए तैयार हो चुका था और उसकी नानी चुदवाने के लिए,,,,

अंकित की नई अंकित के लंड को छोड़ना नहीं चाहती थी वह उसके लंड को पकड़े हुए भी उसे वापस कमरे के अंदर ले गई,,, और अपने हाथ से ही दरवाजा बंद कर दी और अंकित से बोली,,,,।

चल अब लाइट चालू कर दे तु फिर से तैयार हो चुका है और मुझे भी पानी पानी कर रहा है एक बार फिर तुझसे चुदवाना पड़ेगा,,,।
(अपनी नानी की बात सुनकर वह मन ही मन प्रसन्न होने लगा क्योंकि एक बार फिर से उसे चुदाई का सुख मिलने वाला था,,, अपनी नानी की बात मानते हुए वह फिर से ट्यूबलाइट चालू कर दिया और पूरे कमरे में रोशनी फैल गई,,,, अंकित की ढाणी मुस्कुराते हुए बिस्तर की तरफ गई और बिस्तर पर चढ़े बिना ही बिस्तर पर अपने हाथ की कोहनी रखकर घोड़ी बन गई,,,, इस तरह के आसान को भी अंकित गंदी किताब के रंगीन पन्नों पर देख चुका था,,, इसलिए वह समझ गया कि उसकी नानी पीछे से लेना चाहती है,,,, लेकिन फिर भी नादान बनते हुए वह बोला,,,)

यह कैसे नानी,,,!

अरे बुद्धू, (अपनी दोनों टांगों को खोलते हुए) तुझे मेरी बुर दिखाई दे रही है ना,,,

हां नानी एकदम चमक रही है,,,,।

बस अब इसी के अंदर पीछे से लंड डालना है मेरी कमर पकड़ कर,,,, जैसा अभी लेटे-लेटे कर रहा था वैसे अब तुझे खड़े-खड़े करना है,,,, समझगया ना,,,।

हां नानी समझ गया,,,(इतना कहने के साथ ही उत्तेजित अवस्था में प्रसन्नता के साथ वह आगे बड़ा और अपनी नानी की गुलाबी बुर को देखकर अपने लंड को पड़कर उसे पर टिका दिया और फिर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,,, एक बार की घमासान चुदाई के बाद अंकित की नई की बुर में उसके लंड का सांचा बन चुका था इसलिए इस बार कोई भी दिक्कत पेश नहीं आई और बड़े आराम से देखते ही देखते अंकित का मोटा लंबा लंड पूरी तरह से उसकी नानी की बुर में घुस गया और वह अपनी नानी की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया। इस आसन में भी अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और उसकी नानी को भी और इस बार भी तकरीबन आधे घंटे की जबरदस्त चुदाई के बाद दोनों एक बार फिर से झड़ गए और नंगे ही एक दूसरे की बाहों में गहरी नींद में सो गए सुबह जब प्रीति दरवाजे पर दस्तक देने लगी तो उसकी नानी की नियत एकदम से खुल गई और जब अपने और अपने नाती की तरफ देखी तो दोनों बिना कपड़े के सो रहे थे,,,,, इसलिए वह थोड़ी समझदारी दिखाते हुए बिस्तर पर से ही बोली,,,)

हां तृप्ति तू जा में आ रही हुं,,,(और उसके जाने के साथ ही अंकित की नानी अंकित को भी जगा दी दोनों जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहन कर व्यवस्थित हो गए और कमरे से बाहर आकर अपनी दिनचर्या में लग गए किसी को कानों कान खबर नहीं पड़ी की रात भर कमरे में अंकित और उसकी नानी के बीच काम लीला चल रही थी।)

रात भर अंकित के कमरे में जो काम लीला चली थी उसे बारे में घर के किसी सदस्य को कानो कान खबर तक नहीं पड़ी थी और ना हीं किसी को जरा सा भी अंदेशा था कि उनके पीठ पीछे अंकित के कमरे में क्या हो रहा है,,,, अंकित के लिए यह याद कर रहा था थी और सही मायने में देखा जाए तो अंकित के लिए यह इसकी सुहागरात ही थी भले ही यह सुहागरात उसकी नानी के साथ थी लेकिन उसके जीवन का पहला संभोग रात जो की सुहागरात जैसा ही था,, अगर मर्द चरित्रवान हो तो उसके जीवन में उसकी पत्नी के साथ ही प्रथम रात के साथ ही उसके संभोग की शुरुआत होती है और अंकित के जीवन में अंकित के साथ ऐसा ही हुआ था,,, अंकित कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे संभोग सुख सर्वप्रथम उसकी नानी से प्राप्त होगा,,, इसके लिए वह अपनी नानी को दिल से धन्यवाद दे रहा था क्योंकि वाकई में उसकी नानी ना होती तो शायद संभोग की शुरुआत ना जाने कब होती और उस पल की तड़प में वह पल-पल सुलग रहा था,,,।

अंकित अपने नानी के दैह लालित्य पर पूरी तरह से मोह गया था उसका आकर्षण अपने नानी की तरफ एकदम से बढ़ गया था वह कभी सपने में नहीं सोचा था कि नानी की उम्र की औरत इतनी मदहोश कर देने वाली और जवानी से भरी होती होगी,,, और सही मायने में देखा जाए तो वह अपनी नानी की उम्र की औरतों के प्रति बिल्कुल भी आकर्षित नहीं था और ना ही उन्हें इस उम्र में इतना लाजवाब हुस्न में पाया था,,, लेकिन उसकी नानी की बात ही कुछ और शुरू-शुरू में वह अपनी नानी के प्रति आकर्षित बिल्कुल भी नहीं हुआ था लेकिन उसकी नानी की बातें और उसका अंग प्रदर्शन देखकर अंकित का मोह भंग होने लगा था कि इस उम्र में औरतें लाजवाब नहीं होती,,, बल्कि अंकित ने अपनी नानी के बताने में एक बात का और ध्यान दिया था कि उसकी नानी की चूचियां और गांड दोनों उसकी मां से बड़ी-बड़ी थी। अंकित सुबह जब उठा तो रात भर जो कुछ भी हुआ था वह सारे दृश्य उसकी आंखों के सामने किसी फिल्म के दृश्य की तरह घूम रहे थे,,, बाथरूम में बैठा बैठा हुआ अपनी नानी के बारे में सोच रहा था और अपनी नानी के बारे में सोचते सोचते उसका लंड एक बार फिर से अंगड़ाई लेने लगा था,,, लेकिन इस बार उसने अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए अपने हाथों का उपयोग नहीं किया बल्कि अपनी भावनाओं पर काबू करके अपने आप को समझने की कोशिश किया कि आप हाथ से हिलाने का कोई फायदा नहीं है जब उसके पास इतनी खूबसूरत औरत है दिन में ना सही रात को एक बार फिर से वह वही खेल खेलेगा जिस खेल को खेलने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।

मन ही मन अंकित अपनी नानी को धन्यवाद देते हुए नतमस्तक प्रणाम भी कर रहा था क्योंकि उसके लिए तो उसके जीवन में आने वाली संभोग की साथी उसकी नानी ही थी जोर से शरीर सुख प्रदान की और सही मायने में देखा जाए तो एक तरह से वह उसकी शिक्षिका भी थी जो उसे संभोग की किताब के पन्नों को पलट पलट कर उसका अध्ययन कर रही थी,,, सामाजिक जीवन में भले ही उसकी मां शिक्षिका थीं लेकिन अंकित के लिए उसके जीवन किसी का उसकी नानी थी जो उसे एक औरत को खुश करने की कला सीखा रही थी उसमें पारंगत कर रही थी,, अपनी नानी को याद करके उसके बारे में सोच-सोच कर बार-बार अंकित का लंड खड़ा हो जा रहा था,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें बार-बार उसका मन मुठिया करने को करता था लेकिन,,, उसकी आंखों के सामने उसकी नानी का नंगा बदन नाचने लगता था इसलिए वह अपने आप पर काबू करके एकांत का इंतजार कर रहा था।

घर के सभी सदस्य नहा धोकर तैयार हो चुके थे और नाश्ता भी तैयार हो चुका था नाश्ता करते समय उसकी नानी बार-बार अंकित की तरफ देखकर मुस्कुरा दे रही थी और अंकित भी अपनी नानी की तरह मुस्कुराते रहा था लेकिन अंकित घबरा रहा था वह अपनी नानी से नजर मिलाने से कटरा रहा था उसे इस बात का डर था कि कहीं किसी को शक ना हो जाए,, लेकिन यह उसके मन का केवल भ्रम था ऐसा किसी को भी शंका होने वाला ही नहीं था कि अंकित अपनी नानी के साथ ही संभोग सुख प्राप्त किया है,,,, बात ही बात में अंकित की नानी अपनी बेटी सुगंधा से बोली,,,।

मैं तृप्ति को अपने साथ गांव ले जाना चाहती हूं ताकि गांव जाकर वह कुछ सीख सके,,,।
(अपनी मां की है बात सुनते ही सुगंधा मन ही मन बहुत खुश हुई,,, क्योंकि वह जानती थी की तृप्ति का गांव जाने का मतलब था कि उसके और उसके बेटे के लिए एकदम एकांत और यह खुशी वह अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने दी शुरू-शुरू में तृप्ति अपनी नानी के साथ गांव जाने से इनकार करने लगी लेकिन उसकी नानी के बहुत जोर देने पर आखिरकार उसे मानना ही पड़ा,,,, और वह गांव जाने के लिए तैयार हो गई उसके गांव जाने की तैयारी के रूप में उसकी नानी सबको बाजार लेकर गई ताकि तृप्ति के लिए कुछ खरीद सके और खाने पीने का सामान ले सके,,,,।

बाजार जाने के लिए सब तैयार हो चुके थे अंकित भी तैयार था लेकिन उसके मन में इस बात का मलाल था कि अगर बाजार न जाते तो इस समय वह अपने कमरे में नानी के साथ मजे लूट लेता,, क्योंकि जब से उसने अपनी नानी की बुर में अपना लंड डाला था तब से बार-बार उसे अपने लंड को बुर में डालने की इच्छा हो रही थी और उसकी यह इच्छा केवल उसकी नानी ही पूरी कर सकती थी लेकिन इस समय उसे भी अपनी नानी के साथ बाजार जाना पड़ा,,,, गांव जाने के लिए त्रप्ति भी नए कपड़े के लिए ही तैयार हुई थी वरना वह गांव जाने से इनकार कर रही थी,,, थोड़ी देर में तीनों बाजार पहुंच चुके थे वहां पर उसकी नानी ने तृप्ति के लिए उसके मनपसंद कपड़े खरीदे ,,, अपनी बेटी के लिए नई-नई साड़ी खरीदी और अंकित को भी नए कपड़े दिलाए यह उसकी मेहनत का नजराना था जो उसने रात भर अपनी रानी के साथ किया था,,, यह बात धीरे से उसकी नानी ने अंकित के कान में भी कही थी और अंकित मुस्कुरा दिया था,,, लेकिन अंकित की नानी ने उसके कान में क्या कहा यह बात तृप्ति और सुगंधा के लिए किसी पहेली से कम नहीं थी लेकिन इस बारे में उन दोनों ने अंकित से बिल्कुल भी बात नहीं की थी क्योंकि उन्हें इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि दोनों किस बारे में बात कर रहे हैं दोनों को ऐसा ही लगा की नानी और नाती का प्यार है,,, और वास्तव में यही था ,,,भी लेकिन वासना का प्यार,,,,।

रास्ते में खाने के लिए कुछ नाश्ता और फिर थोड़े बहुत फल फ्रूट लेकर शाम होते-होते चारों घर पहुंच चुके थे,,,, तृप्ति खुश थी उसकी नानी भी खुश थी,,, और सुगंधा और अंकित दोनों से ज्यादा खुश है क्योंकि तृप्ति के जाने के बाद दोनों को एकांत मिलने वाला था,,,, सुगंधा सब्जी काट रही थी और तृप्ति अपनी मां का हाथ बता रही थी अंकित और अंकित की नई भी वहीं पास में बैठकर आपस में बातें कर रहे थे और बात ही बात में उसकी नानी बोली,,,,।

देखना तृप्ति के लिए तो एक से एक रिश्ते आएंगे तृप्ति है ही इतनी खूबसूरत गांव पहुंचते ही देखना रिश्तो की लाइन लग जाएगी,,,(अपनी नानी की बात सुनकर तृप्ति एकदम से शर्मा गई और शरमाते हुए बोली,,,,)

क्या नानी आप भी अभी कोई उम्र है शादी करने की अभी तो मुझे पढ़ना है,,,।

चल रहने दे बहुत हो गई पढ़ाई सही समय पर शादी हो जाए तो अच्छा ही होता है और वैसे भी तु इतनी खूबसूरत है कि तेरे लिए रिश्ते तैयार ही होंगे,,,,(तृप्ति अपनी नानी की बात सुनकर मन ही मनपसंद भी हो रही थी क्योंकि एक तरह से उसकी नानी उसकी खूबसूरती की तारीफ भी कर रही थी जिसमें कोई दो राय नहीं थी वाकई में तृप्ति बहुत खूबसूरत थी,, सुगंध को भी अपनी मां की बात सही लग रही थी क्योंकि वह जानती थी कि वह कहां-कहां रिश्ते ढूंढने जाएगी अगर उसकी मां चाहेगी तो उसकी जल्दी शादी हो जाएगी और उसकी मां अच्छा ही रिश्ता ढूंढ कर लाएगी इसलिए हम मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, अंकित कुछ बोल नहीं रहा था वह सिर्फ सबको बात करते हुए देख रहा था उसके मन में कुछ और चल रहा था उसके मन में यही चल रहा था कि जल्दी से जल्दी खाना खाकर सब अपने-अपने कमरे में जाएं फिर वह एक बार फिर से अपनी नानी की चुदाई कर सके,,, इस सोच के साथ बार-बार उसका लंड लार टपका रहा था,,, और खड़ा भी हो जा रहा था,,, जिसे वह सबसे नजर बचाकर बार-बार व्यवस्थित करने की कोशिश भी कर रहा था लेकिन उसकी यह हरकत उसकी नानी देख ले रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी। वह अपने नाती की हालत को अच्छी तरह से समझ रही थी।

अनुभव से भरी हुई अंकित की रानी अच्छी तरह से अंकित के जज्बात को समझ रही थी उसकी नानी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि कल रात को जो कुछ भी हुआ था वह अंकित के लिए पहली बार था इसलिए वह उस पल को जीने के लिए तड़प रहा है,,,, वैसे तो अंकित की हालत की तरह उसकी भी हालत थी वह भी रात को अंकित के साथ मजा लूटने के लिए उत्साहित थी उसके लंड की मोटाई और लंबाई अभी तक उसे अपनी बुर के अंदरूनी भागों पर रगड़ता हुआ महसूस हो रहा था,,, वह ऐहसास ही अजीब था,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचकर अंकित की नानी को अच्छी तरह से मालूम था कि इस उम्र में पहले जैसी ऊर्जा और आनंद नहीं प्राप्त होता लेकिन बीती रात अंकित ने अपने मर्दाना अंग से जिस तरह से उसे रौंदा था वह बेहद काबिले तारीफ था,,,, इसलिए उसके गाने एक बार फिर से अपने नाती के लंड अपनी बुर में लेने के लिए तड़प रही थी।

खाना खाने के बाद सब लोग बैठकर टीवी देख रहे थे,,,, टीवी में जो फिल्म चल रही थी अंकित की नानी को वह फिल्म अच्छी लग रही थी इसलिए वह बैठकर देख रही थी लेकिन तृप्ति अपने कमरे में चली गई थी अंकित अपनी नानी के इंतजार में बैठा हुआ था सुगंधा जानती थी कि उसकी मां टीवी पर फिल्म देखने की शौकीन है इसलिए थोड़ा टाइम लग जाएगा और उसे भी नींद आने लगी थी इसलिए वह धीरे से उठकर बोली,,,,।

अब मैं जा रही हूं सोने,,,,(कितना कहकर सुगंध अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और धीरे से कमरे से बाहर निकाल कर घर के पीछे की तरफ पेशाब करने के लिए जाने लगी,,,, अंकित को भी नींद लग रही थी लेकिन वह अपनी नानी के इंतजार में जबरदस्ती बैठा हुआ था और जैसे ही उसकी मां कमरे से निकाल कर बाहर गई और पीछे की तरफ जाने लगी तो अंकित के दिल में कुछ-कुछ होने लगा वह जानता था कि उसकी मां पेशाब करने के लिए जा रही है लेकिन उसके नानी के होते हुए वह उठकर जा नहीं सकता,,,, लेकिन धीरे-धीरे सबके जाने के बाद अंकित की नानी को भी पेशाब लग रही थी इसलिए वह अभी धीरे से उठकर खड़ी हो गई और एक नजर अंकित की तरफ डाली ,,,अंकित उसे ही आशा भरी नजरों से देख रहा था उसकी नानी मुस्कुराई और कमरे से बाहर निकल गई और वह भी घर के पीछे की तरफ पेशाब करने के लिए जाने लगी उसे नहीं मालूम था कि घर के पीछे उसकी बेटी सुगंध भी पेशाब करने के लिए गई है ,,,,।

अंकित सब कुछ देख रहा था उसकी नानी और उसकी मां दोनों घर के पीछे की तरफ जा रही थी और वह जानता था कि इस समय दोनों पेशाब करने के लिए ही जा रही हैं और यह देखकर वह मन ही मन उत्तेजित होने लगा वह अपने मन में सोचने लगा कि एक साथ अपनी मां और अपनी नानी को पेशाब करते हुए देख कर कितना मजा आएगा दोनों की बड़ी-बड़ी गांड अद्भुत नजारा होगा और यही सोचकर वह भी धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,,, और घर के बाहर जाने की सोचने लगा,,,, एक तरफ उसके मन में उत्सुकता भी थी और दूसरी तरफ से इस बात का डर भी था कि कहीं दोनों में से किसी ने देख लिया तो गजब हो जाएगा,,, लेकिन फिर भी यहां पर उसे अपने डर को दूर करना था क्योंकि डर के दूर होने पर ही उसे एक अद्भुत नजारे के दर्शन हो सकते थे इसलिए वह अपने मन में से इस बात का डर निकाल कर धीरे से कमरे से बाहर निकला और धीरे-धीरे दबे पांव घर के पीछे की तरफ जाने लगा अंकित अच्छी तरह से जानता था की उसे क्या करना है,,,,,।

उसकी नानी घर के पीछे पहुंच चुकी थी और घर के पीछे पहुंचते ही उसने देखी कि उसकी बेटी सुगंध अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही थी इस नजारे को देख कर वह मुस्कुराई और धीरे से वह भी अपनी बेटी सुगंधा के बगल में खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाते हुए बोली,,,,

इस तरह से यहां पेशाब करना ठीक नहीं है सुगंधा,,,,

क्यों मां,, घर में किस बात का डर यहां कौन देखने वाला है,,,,(पेशाब करते हुए अपनी बुर से सिटी की आवाज निकालते हुए सुगंधा बोली और यह नजारा पीछे दीवार से छिपकर अंकित देख रहा था और इस नजारे को देखकर उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगी थी,,,,)

अरे पगली घर के अंदर घर का बाहर तो नहीं दिखेगा लेकिन घर के अंदर रहने वाला सदस्य तो देख ही लगा जैसे में तुझे पता भी नहीं चल यहां तक आ गई सो ऐसे में अंकित भी आ सकता है वह पूरी तरह से जवान हो चुका है और तुझे इस हालत में देखेगा तो उसके मन पर क्या बीतेगी,,,,!(ऐसा कहते हुए वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी थी उसकी नंगी गांड एकदम से झलकने लगी थी,,,, यह नजारा अंकित के लिए बेहद उत्तेजित कर देने वाला था इस नजरों को देखकर उसके मन में ढेर सारी धारणाएं बन रही थी वह अपनी नानी और अपनी मां के बारे में बहुत कुछ सोच रहा था,,,,, अपनी मां की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,,)

क्या मां तुम भी मैं दिन दहाड़े थोड़ी यहां पेशाब करने आई हूं सिर्फ रात को ही आता हूं क्योंकि जानती हूं कि रात को वह यहां नहीं आता,,,,।

लेकिन किसी दिन आ ही गया तो क्या करोगी किसी दिन तुम्हारी नंगी गांड देख लेगा तो गजब हो जाएगा तुम नहीं जानती इस उम्र में लड़कों का क्या हाल होता है वह आकर्षण में इतने अंधे हो जाते हैं कि उन्हें कोई रिश्ता नहीं दिखता सिर्फ हर रिश्ते में एक औरत ही दिखतीहै,,,(ऐसा कहते हुए वह पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई और कुछ ही छोड़ बात उसकी बुर में से भी सीट की आवाज एकदम तेज आने लगी जो कि अंकित के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रही थी उसके कानों में एक साथ दो-दो खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरतों की पेशाब करने की आवाज गुंज रही थी,,, इस समय इस अद्भुत नजारे को देखकर वह कैसे अपनी उत्तेजना पर काबू किया हुआ था यह कहना बहुत मुश्किल था,।,,, अंकित की तो हालात पूरी तरह से खराब थी वाकई में इस नजारे के बारे में वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था एक साथ दो दो औरत को इस तरह से पेशाब करते हुए देख पाना वाकई में बहुत बड़ी किस्मत का काम था और इस समय ऐसा लग रहा था कि अंकित के सारे सितारे गर्दिश में थे वह किस्मत का धनी था तभी तो इस तरह का नजारा उसे अपनी आंखों के सामने दिखाई दे रहा था।

वैसे तो अंकित के उम्र का हर एक लड़का अपने ही घर में अपनी मां बहन भाभी चाची मासी को पेशाब करते हुए कभी ना कभी तो देखा ही होगा उसकी नंगी गांड देखकर उत्तेजित भी हुआ होगा लेकिन यह सहयोग उसके जीवन में या अंकित के जैसे उम्र के लड़के में शायद ही संयोग बना हो कि वह एक साथ अपनी मां को और अपनी नानी को एक साथ पेशाब करते हुए देखा हो और यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि अगर वह देखा भी होगा तो शायद अंकित की नानी के जैसे उसकी नानी तो बिल्कुल भी नहीं होगी जिसके बदन में अभी भी जवान कूट-कूट कर भरी हो जिसके नितंबों का आकर्षण इस उम्र में भी अद्भुत हो,,, बदन एकदम कसा हुआ हो खेत में काम कर करके जिसमें एकदम गठीला बन गया हो जिसके खूबसूरत चेहरे को उसके बदन को देखकर पता लगाना मुश्किल हो की उम्र कितनी है ऐसा संयोग वाकई में केवल अंकित के साथ ही बन रहा था,,, बड़ी उत्तेजित अवस्था में अंकित इस नजारे को देख रहा था और अपनी मां की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,)

क्या मां तुम खामखा घबराती हो ऐसा कुछ भी नहीं होगा अपना अंकित ऐसा बिल्कुल भी नहीं है देखते नहीं हो कितना सीधा-साधा है औरतों से तो एकदम दूर ही भागता है,,,,,(सुगंधा जानबूझकर अपनी मां के सामने अपने बेटे के चरित्र को साफ सुथरा बताने की कोशिश कर रही थी जबकि हकीकत वह भी जानती थी अंकित के बारे में और अपनी बेटी के मुंह से अंकित की तारीफ सुनकर वह अपने मन में ही बोली,,,, बड़ा आया चरित्रवान कल रात को ऐसी चुदाई किया कि अभी तक मेरी बुर में दर्द हो रहा है बस इशारे की देरी है अगर यह भी इशारा कर देगी तो अंकित यह नहीं देखेगा कि यह मेरी मां है इस पर भी चढ़ जाएगा और चुदाई कर देगा,,,, इस पगली को कैसे समझाऊं दुनिया के रीतभात को यह नहीं जानती,,, दो जवान बच्चों की मन हो गई लेकिन फिर भी अभी भोली की भोली है,,,,,,, दोनों धीरे-धीरे अपनी बुर में से पेशाब की धार मार रहे थे और यह नजारा दीवार के पीछे छुप कर अंकित देखकर पेंट के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को दबा रहा था,,,,। सुगंधा की बातें सुनकर वह बोली,,,,)

तू समझ नहीं पा रही है मैं क्या कहना चाह रही हूं,,,, इस तरह से खुले में मत पेशाब किया कर खास करके तब जब अंकित घर पर हो अंकित जवान हो चुका है इस बात को तु मानती है कि नहीं,,,।

हां इसमें कोई शक नहीं है जवान तो हो ही गया है,,,,(सुगंधा इस बात को कहते हुए पिछली बातों को याद करने लगी जब वह इसी तरह से पेशाब करने बैठी थी और वह ईस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा चोरी छिपे उसे देख रहा है,,,, सुगंधा की हालत इस समय क्या हो रही थी वही जानती थी और उसे वह वाली बात भी याद थी जब घर में चोर होने की आशंका से वह दोनों घर के पीछे की तरफ आए थे और किसी बिल्ली के होने की आशंका से थोड़ी देर बात करने के बाद सुगंध इसी जगह पर पेशाब करने के लिए बैठ गई थी और उसके पास में खड़ा होकर उसका बेटा पेशाब कर रहा था और उस समय उसके खड़े लंड को देखकर उसका बेटा कितना जवान हो गया है इस बात का एहसास सुगंधा को अच्छी तरह से हो गया था,,, और इस समय अपनी मां की बात सुनकर वह उसी क्षण को याद कर रही थी और सुगंध की बात सुनकर उसकी मां बोली,,,)

और तुझे यह भी मालूम होना चाहिए कि जब जवान हो गया है तो उसका लंड भी खड़ा होता होगा,,,,,,(वह एकदम से खुले शब्दों में सुगंधा से बोली तो सुगंधा भी हैरान होकर अपनी मां की तरफ देखने लगी और बोली,,,)

यह कैसी बातें कर रही हो मां,,,,।

मैं ठीक कर रही हूं तुझे समझने की कोशिश कर रही हूं दो बच्चों की मां है तुझे भी मर्दों के बारे में पता होना चाहिए तुझे भी पता होना चाहिए कि एक मर्द का लंड खड़ा होता है,,,, अरे पगली किसी दिन तेरा बेटा तुझे पेशाब करता हुआ तेरी नंगी गांड को देखा गया तो उसका भी लंड खड़ा हो जाएगा,,, वह यह नहीं सोचेगा कि सामने उसकी मां बैठकर पेशाब कर रही है सिर्फ उसे यही दिखेगा की कितनी खूबसूरत बड़ी-बड़ी गांड है बस एक मर्द को उत्तेजित होने के लिए इतना काफी है और उसे समय अगर उसका लंड खड़ा हो गया था तो क्या करेगी,,,, क्योंकि यह तो प्राकृतिक है इस तरह का नजारा देखकर मर्द का खड़ा होता ही है अभी भले ही अंकित इन सब के बारे में नहीं सोचता है लेकिन तुझे इस हालत में देखेगा तो उसके मन में भी अपने आप इस तरह के ख्याल आने लगेंगे और वह भी तेरी तरफ आकर्षित होने लगेगा,,,,,(वह थोड़ा तेज आवाज में उसे समझाने की कोशिश कर रही थी और दीवार के पीछे खड़े होकर छुप कर यह सब देख रहा अंकित अपनी नानी की तरह की बातें सुनकर और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगा,,, और वह अपने मन में सोचने लगा कि उसकी नानी अपनी बेटी को कैसे संभाल कर रहने के बारे में समझ रही है और खुद रात भर मजा लूटी है,,,,।

अंकित की नानी अपनी बेटी को इसलिए समझ रही थी कि क्योंकि वह दुनिया देखी थी,,, वह जानती थी कि इस तरह के मामले ज्यादातर घर में ही होते हैं एक दूसरे से आकर्षण और फिर मर्यादा लांघ जाना,,, अपनी बेटी को समझाते हुए अपने बारे में सोच रही थी क्योंकि यहां आने से पहले और अंकित को देखने के बाद वह कभी सोची नहीं थी कि उसे अंकित के साथ शारीरिक संबंध बनाना पड़ जाएगा,,, लेकिन सोते समय जिस तरह का अनुभव उसे हुआ था उससे वह पूरी तरह से मजबूर हो गई थी अपने ही नाती के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए और वह अब अपने नाती अंकित को अच्छी तरह से समझ गई थी उसके मर्दाना अंग को उसकी ताकत को समझ गई थी उसे इस बात का डर था कि कहीं जिस तरह का अनुभव उसे हुआ है अगर ऐसा ही कुछ अनुभव सुगंध को हो गया तो दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता एकदम से खत्म हो जाएगा और एक मर्द और औरत का रिश्ता कायम हो जाएगा,,,, इसीलिए वह सुगंधा को समझा रही थी,,,, अपनी मां की बात के कहने का मतलब वह भी अच्छी तरह से समझ रही थी पेशाब करते हुए देखने पर लंड खड़े होने की स्थिति को वह बहुत बार देख भी चुकी थी और अनुभव भी कर चुकी थी उसकी मां को जिस बात का डर था वही तो सुगंधा चाहती थी लेकिन अपनी मां के सामने सीधी साधी और भोली बनने की कोशिश कर रही थी,,,,।

जब मां बेटी दोनों केबीच इस तरह की बात हो रही थी तब अंकित की नानी को ऐसा लगा कि पीछे कोई खड़ा है इसलिए वह बिना सर पीछे घुमाई बस नजर को तिरछा घूम कर पीछे की तरफ देखने की कोशिश की तो उसे जल्दी ही दीवार के पीछे खड़ा उसका नाती दिखाई दे गया और वह एकदम हैरान तो हुई लेकिन पल भर में ही इस बात से उत्तेजित होने लगी की अंकित इस समय अपनी मां और अपनी नई दोनों को पेशाब करते हुए देख रहा है दोनों की गांड उसे एकदम साफ दिखाई देती होगी इस बात का अहसास होते ही अंकित की नानी के टन वजन में उत्तेजना की लहर उठने लगी भले ही वह अपनी बेटी को इस तरह की हरकत ना करने की सलाह दे रही थी लेकिन वह खुद ऐसी सलाह मानने को तैयार नहीं थे क्योंकि वह जानती थी की असली मजा तो इन्हीं सब में है इसलिए वह अंकित की लालच और ज्यादा बढ़ाने के लिए अपने दोनों हाथों को अपनी नंगी गांड पर रखकर उसे होले होले सहलाने लगी और तीरछी नजर से अपनी बेटी की गांड की तरह देखने लगी उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी गांड की अपेक्षा उसकी बेटी की गांड उससे थोड़ी छोटी ही है और वह अच्छी तरह से जानती थी कि समय अंकित का आकर्षण उसकी बड़ी-बड़ी गांड के ऊपर ज्यादा होगा,,,,।

अंकित को इस तरह से चुप कर देखते हुए वह इतना भी समझ गई थी कि जितना सुगंधा उसे सीधा-साधा समझती है इतना सीधा-साधा वह बिल्कुल भी नहीं है उम्र के मुताबिक उसके अंदर भी औरतों के प्रति आकर्षण जागने लगा है,,, बीती रात को तो सबकुछ खुद ही उसे उकसाने के लिए और उत्तेजित करने के लिए की थी लेकिन आप उसे पता चल गया था की चोरी छिपे वह भी शायद यह सब देखता होगा वरना घर के पीछे वह क्यों आता,,, क्योंकि सुगंधा के कहे अनुसार वह इतनी रात को घर के पीछे आता ही नहीं है और इस समय वह दीवार के पीछे खड़ा है इसका मतलब साफ था कि उसे मालूम है कि उसकी मां और उसकी नानी दोनों पेशाब करने के लिए घर के पीछे आई है,,,, अंकित की नानी समझ गई थी कि अब उसे क्या करना है जिस तरह का रिश्ता उसने अंकित के साथ कायम कर ली थी अब अंकित के बारे में अपनी बेटी को कुछ भी बता पाना मुश्किल था उसके चरित्र के बारे में बता पाना और भी ज्यादा मुश्किल था क्योंकि वह जानती थी कि अगर उसके कहे अनुसार उसकी मां उसके जाने के बाद उसकी पूछताछ करेगी तो वह हो सकता है सब कुछ बता दे और ऐसे में उसकी खुद की बदनामी होने की संभावना बढ़ जा रही थी,,,, इसलिए वह बोली,,,,,)

चल कोई बात नहीं जैसी तेरी मर्जी मैं तो तुझे जीवन की सच्चाई के बारे में लोगों की हकीकत के बारे में आगे कर रही थी लेकिन मुझे लगता है कि अंकित पर तेरा कुछ ज्यादा ही भरोसा है और मैं भी भगवान से प्रार्थना करूंगी कि तेरा विश्वास बना रहे और अंकित ऐसी वैसी कोई हरकत ना करें अब चल पेशाब कर चुकी है रात भी हो चुकी है अब सोना चाहिए,,,,(इतना कहने के साथ ही वह धीरे से उठकर खड़ी होने लगी अभी भी वह अपनी साड़ी को कमर तक उठाएं हुए थी जिससे उसकी नंगी गांड एकदम चमक रही थी,,,, अपनी मां के साथ पेशाब करने के बाद सुगंध भी खड़ी हो गई और उसके हाथ में भी अभी भी साड़ी थी धीरे से वह साड़ी को नीचे गिरे और एक खूबसूरत नजरे पर पर्दा पड़ गया और उसकी नानी की धीरे से साड़ी को नीचे गिरा दी,,,, खड़ी होने के बाद भी वहां से वापस कमरे में जाने की जगह वहीं खड़ी होकर अंकित की नानी बात करने लगी वह एक तरह से अंकित को समय दे रही थी कि वह अपनी जगह से हट जाए चला जाए,,, क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि अंकित को उसकी मां देखें क्योंकि अपने बेटे पर से वह अपनी बेटी का विश्वास टूटने नहीं देना चाहती थी,,,, और ऐसा ही हुआ मौके की नजाकत को देखते हुए अंकित तुरंत अपने कमरे में आ गया और थोड़ी देर बात करने के बाद सुगंध अपने कमरे में चली गई और अंकित की नानी अंकित के कमरे में आ गई क्योंकि दरवाजा अंकित ने खुला छोड़ दिया था,,,।

अपनी मां से नसीहत की बातें सुनकर सुगंध अपने कमरे में जा चुकी थी और अपनी मां और नानी को एक साथ पेशाब करते हुए इस अद्भुत नजारे को देखकर अंकित भी अपने कमरे में प्रवेश कर चुका था और फिर अंकित की नानी के कमरे में प्रवेश करके अपने हाथ से दरवाजा बंद करके उसकी कड़ी लगा दी थी,,, कमरे में आने की उत्सुकता अंकित से कहीं ज्यादा उसकी नानी की थी क्योंकि वह जानती थी कि आज की रात अंकित के साथ आखिरी रात थी और वह कल गांव चली जाने वाली थी और वह एक मर्द की ताकत को अच्छी तरह से पहचानती थी और जिस तरह से उसने अपनी नाती के साथ संभोग करके संतुष्टि प्राप्त की थी वह उसके लिए बेहद अद्भुत कार्य था,,, और इस संतुष्टि को एक बार फिर से वह प्राप्त करना चाहती थी। वैसे तो अंकित की नानी फिर से वैसे ही शुरुआत करना चाहती थी लेकिन कुछ देर पहले अंकित को घर के पीछे देख कर उसके दिल में कुछ-कुछ होने लगा था और वह अंकित के साथ मजा लेना चाहती थी अपने तरीके से,,,,।

एक बार अपनी नानी के साथ खुल चुका अंकित अपनी नानी को कमरे में देख कर बेहद उत्साहित होता हुआ बोला,,,।

क्या नानी कितनी देर लगा दी,,,

क्या करूं फिल्म इतनी अच्छी चल रही थी कि उठने का मन नहीं कर रहा था,,,,।(बिस्तर पर बैठते हुए वह बोली,,,)

लेकिन तुम्हें तो पता होना चाहिए कि आज की रात हम दोनों के लिए आखिरी रात है कल तो तुम चली जाओगी,,,(अंकित थोड़ा नाराज होते हुए बोला,,, उसकी तरह की बातों को सुनकर,, अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रही थी उसे अंकित की आंखों में साफ दिखाई दे रहा था कि वह फिर से वही खेल खेलना चाहता है जिसे खेलकर वह इतना मस्त हो चुका है,,, उसकी बात सुनकर वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अरे तो इसमें क्या हो गया अभी तो पूरी रात बाकी है,,,

लेकिन नानी अगर मुझे नींद आ जाती तो सारा मजा खिड़की राह हो जाता आज की रात तो ऐसे ही चली जाती और फिर कल तुम चली जाती फिर क्या होता,,,।(अंकित की आंखों में ढेर सारे सवाल थे,,, जिसका जवाब इस समय शायद उसकी नानी के पास नहीं था फिर भी वह मुस्कुराते हुए बोली,,)

सोच में क्या होगा कल तो वैसे भी मैं चली जाऊं कि उसके बाद क्या होगा इस बारे में सोचा हे जरा,,,,।

यह सोच कर तो बहुत दुख हो रहा है कुछ भी और रुक जाती तो कितना अच्छा होता ,,,।

तेरी भावनाओं को में समझ सकती हुं,,, लेकिन कर भी क्या सकती हुं,,,,,,

अच्छा कोई बात नहीं नानी मैं तुम्हारी मालिश कर दुं,,,,,
(अंकित की यह बात सुनकर उसकी नानी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

मैं जानती हूं तो क्यों इतना मस्का मार रहा है तु फिर से मुझे चोदना चाहता है ना,,,,(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित शर्मा के और शर्मा कर अपनी नजर को नीचे झुका लिया और उसकी नानी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) मैं समझ सकती हूं तेरा बहुत मन कर रहा होगा क्योंकि तूने पहली बार किया है ना और वैसे भी चाहे जितनी बार चुदाई करें लेकिन थोड़ी देर बाद फिर मन चोदने को करता ही है,,,,

ऐसी बात नहीं है नानी ,,,,(अंकित एकदम से शरमाते हुए बोला)

अरे मुझे मत सीखा मैं सब जानती हूं तुम लड़कों का हाल,,,, इसमें कोई बुरी बात नहीं है यह तो एक नहीं दिन होना ही था मैं नहीं कोई और सही लेकिन तुझे यहां से सीखा कर जा रही हूं ताकि आगे तुझे काम आए,,,, अच्छा सच-सच बताना कुछ सीखने को मिला कि नहीं,,,,।

(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित कुछ बोला नहीं बस शर्मा गया यह देखकर उसकी नानी बोली)

शर्माने से काम नहीं चलेगा बात तो सही कुछ सीखा कि नहीं चल तुझे अच्छी थी तुझे कुछ नहीं आता था तुझे पल पल हर एक चीज सीखना पड़ा था औरत को कैसे सुख दिया जाता है कैसे मजा लिया जाता है सब तुझे सीखाना पड़ा था,,,, अच्छा सही बताइए इससे पहले कभी किसी नंगी औरत को देखा था,,,।

बिल्कुल भी नहीं नानी,,,,

किसी औरत की चुदाई किया था,,,,

क्या नई जब किसी औरत को नंगी दिखाई नहीं तो चोदने का तो सवाल ही नहीं उठता,,,,,।
(अंकित भी अपनी नानी के सामने हीम्मत दिखाते हुए चोदने जैसे शब्दों का प्रयोग करने लगा था,,, और इस शब्द को सुनकर उसकी नानी मां ही मन प्रसन्न हो रही थी उसे दिखाई दे रहा था कि उसका नाती अब असली मर्द बन रहा है,,,, उसका जवाब सुनकर उसकी नानी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अच्छा यह बता मेरी बुर तुझे कैसी लगी,,,,(जानबूझकर साड़ी के ऊपर से अपनी बर को खुजलाते हुए बोली और यह हरकत अंकित अपनी नजरों से देखकर मदहोश हो जा रहा था उसकी नजर अपनी नानी की बड़ी-बड़ी चूचियों पर भी थी जो कि उसके सांस लेने के साथ-साथ ऊपर नीचे हो रही थी,,,)

एकदम रसीली नानी ऐसा लग रहा था कि जैसे,,, रसमलाई एकदम रस में डूबी हुई,,,।

रसमलाई,,, बड़ा ही रसीला नाम दिया है तूने मेरी बुर को,,,, अच्छा यह बता,,, मेरी बुर में लंड डालने के बाद तुझे कैसा लग रहा था,,,,।
(अपनी नानी किस तरह की बातें सुनकर एक बार फिर से अंकित के तन-बाद में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी उसके बदन में मदहोशी का रस घुलने लगा था वह उत्तेजित होने लगा था,,,, वह जानता था कि अपनी नानी के सवाल का जवाब देना भेज जरूरी है क्योंकि अब उसे भी खुलना पड़ेगा,,, वह जानता था कि आप उसे अपनी नानी के सामने शर्माने की कोई जरूरत नहीं है जब नानी है इतनी छिनार हो तो फिर नाती क्या करेगा यही सोच कर वह मुस्कुराते हुए बोला,,,)

बहुत गर्म पानी इतना गम की मैंने कभी तवे को भी इतना गरम नहीं देखा,,, तुम्हारी बुर अंदर से एकदम भट्टी की तरह तप रही थी मैं तो डर रहा था कि कहीं कुछ हो ना जाए,,,।

क्या हो जाएगा ज्यादा से ज्यादा तेरा पानी निकल जाएगा और वैसे भी उसे तो निकलना ही है,,,, तुझे आज एक अच्छी हिदायत देती हूं औरत की चुदाई करते समय कभी भी जल्दबाजी मत दीखना एकदम आराम से धीरे-धीरे आगे बढ़ाना हड़बड़ाहट में ना तो तुझे मजा आएगा नहीं औरत मजा ले पाएगी,,, और घबराना तो बिल्कुल भी नहीं जितना आराम से साथ दिमाग से आगे बढ़ेगा उतनी देर तक तू औरत की चुदाई कर पाएगा,,,।

ठीक है नानी,,,,(अंकित का मन अपनी नानी की बड़ी-बड़ी चूचियों को पकड़ कर दबाने का कर रहा था लेकिन वह अपने आप को संभाले हुए था वह जानता था कि आज की रात फिर से हसीन होने वाली है,,,, इसलिए वह चाह कर भी अपनी तरफ से कोई हरकत नहीं कर रहा था,,,,, कुछ देर कमरे में खामोशी छाई रही,,, और फिर खामोशी को तोड़ते हुए उसकी नानी बोली,,,)

फिर से चोदना चाहेगा मुझे,,,।
(अपनी नानी की यह बात सुनते ही अंकित का मन उत्तेजना और प्रसन्नता से भरने लगा उसके होठों से शब्द नहीं फूट रहे थे लेकिन उसकी आंखें सब कुछ बता रही थी कि वह क्या चाहता है उसकी आंखों में वासना और औरत की प्यास एकदम साफ दिखाई दे रही थी और यही प्यास तो उसकी नानी देखना चाहती थी,,,, अंकित की रानी उसकी आंखों में देखकर उसके मन की बात को पढ़ ली थी इसलिए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

लेकिन आज मैं कुछ नहीं करूंगी और ना ही तुझे कुछ बताऊंगी तुझे सब अपने आप ही करना होगा,,,।
(अपनी नानी किस बात को सुनकर अंकित थोड़ा परेशान हो गया और हैरानी भरी नजरों से अपनी नानी की तरह देखने लगा तो उसकी नानी उसे समझाते हुए बोली)

अरे बुद्धू अब तु पूरा मर्द हो गया है,,, औरत के कहने पर चलना तेरी फितरत नहीं है बल्कि अपने इशारे पर औरत को नाचना तेरी मर्दाना ताकत का सही इस्तेमाल है तो नहीं जानता कि तेरे पास क्या है जिस औरत की बुर में तो अपना लंड डालने के बाद पूरी तरह से तेरी गुलाम हो जाएगी लेकिन इसका सही उपयोग करने के बाद ही,,,।

मैं कुछ समझा नहीं नानी,,,,,!(आश्चर्य जताते हुए अंकित बोला,,,)

अरे बुद्धू अगर तेरी शादी हो गई तो सुहागरात की रात को करेगा क्या अगर सब कुछ औरत से पूछेगा और सुहागरात की रात को औरत तेरी सरकत पर समझ जाएगी कि तू एकदम बुद्धू है बेवकूफ है तुझे कुछ नहीं आता और तुझे छोड़कर चली जाएगी कुछ समझ में आ रहा है कि नहीं,,,,।

लेकिन नई मैं करूंगा क्या,,,?

अच्छा सुन अब मान ले की तेरी शादी हो गई,,, मैं तेरी दुल्हन और यह कमरा हमारी सुहागरात का कमरा है,,, और यह बिस्तर सुहागरात की सेज है,,,,, समझ रहा है कि नहीं,,।

जी नानी,,,,,

जी नानी के बच्चे सिर्फ लंड खड़ा हो जाने से आदमी मर्द नहीं बन जाता बल्कि उसका सही तरीका आना चाहिए उसका उपयोग करना आना चाहिए,,,,,,, अब सुन मेरी बात,,, मैं तेरी बीवी और तू इतना तो जानता है ना की सुहागरात को पति अपनी पत्नी के साथ क्या करता है,,,।

(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित कुछ बोला नहीं बस हां मैं सिर हिला दिया तो यह देखकर उसकी नानी बोली,,,)

बोल कर बता क्या करता है,,,,।

पत्नी की चुदाई,,,(एकदम से अंकित बोल पड़ा उसकी बात सुनकर उसकी नानी मुस्कुराने लगी और बोली,,)

हां,, चलो इतना तो समझ में आता है तुझे लेकिन चुदाई करने के लिए सबसे पहले पहल कौन करता है पता है,,,,।

पति,,,,।

अरे वाह एक ही रात में सब कुछ सीख गया,,,, लेकिन कल रात को तो सब कुछ मुझे सीखाना पड़ रहा था,,,।

कुछ आता नहीं था इसके लिए,,,।

लेकिन अब लगता है सब कुछआ गया है,,,।

थोड़ा-थोड़ा,,,( अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,,)

चल कोई बात नहीं आप पूरा आ जाएगा,,,, इतना तो समझ में आ गया ना की औरत के साथ पहल ज्यादातर मर्द ही करता है तभी तो वह मर्द कहलाता है और आज तुझे मेरे साथ अपने मन से सब कुछ करना होगा मैं तुझे कुछ भी नहीं बताऊंगी,,,, अब कैसे करना है तू जाने और तेरा काम जाने लेकिन मजा बराबर आना चाहिए,,,।

(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित का दील जोरों से धड़कने लगा,,, अंकित समझ गया था कि उसकी नानी पूरी खिलाड़ी है,,, लेकिन इतना भी जानता था कि उसकी नानी सर दामोदार उसके ऊपर छोड़कर एक तरह से उसे सीखा रही है,,, और कभी इसी तरह की हालत उसके और उसकी मां के बीच बने तो यह अनुभव उस दिन बहुत काम आएगा यह सोचकर वह अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था,,,, अपनी नानी की बात सुनकर वह शंका जताते हुए बोला,,,)

लेकिन कुछ गड़बड़ हो गई तो,,,।

अरे बुद्धू गड़बड़ होगी तो कैसी गड़बड़ होगी आखिरकार लंड तो बुर में ही जाएगा ना और तुझे धक्का लगाना तो आता है,,,, अब कोई सवाल नहीं बस शुरू हो जा मैं भी तो देखूं कितना बड़ा मर्द है तु,,,,(इतना कहकर वह मुस्कुराते हुए अंकित की तरह देखने लगी वह बिस्तर पर पैर नीचे जमीन पर टीकाए हुए बैठीथी,,,उसी तरह से अंकित भी बैठा हुआ था,,,, उसकी नानी बेहद उत्सुक नजर आ रही थी क्योंकि उसे भी यही पसंद था कि मर्द अपने तरीके से उसका इस्तेमाल करें उसे पटक कर चोदे इसलिए वह सब कुछ अंकित पर छोड़ दी थी और वह देखना चाहती थी कि वह इस परीक्षा में उत्तीर्ण होता है कि नहीं,,,,, अंकित की हालत खराब होती जा रही थी,,,,, तभी उसे राहुल की मां याद आ गई जिसके साथ वह अपने मन से हिम्मत दिखाते हुए मनमानी किया था,,, और इतना समझ गया था कि डर के आगे ही जीत है,,,,

इसलिए वह अपनी नानी के खूबसूरत चेहरे को देखने लगा इस उम्र में भी उसका चेहरा एकदम मिला-मिला था उसकी आंखें एकदम गहरी काली थी जिसमें डूब जाने का उसका मन कर रहा था उसके लाल-लाल होंठ उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे,,, और इसी आकर्षण के चलते अंकित अपनी नानी की हथेली में अपनी हथेली देखकर उसे कसके पकड़ लिया और अपनी उत्तेजना को संग्रहित करते हुए वह धीरे-धीरे अपने होठों को अपनी नानी के होठों के पास ले जाने लगा उसकी नानी का भी दिल जोरो से धड़कने लगा था उसे लग रहा था कि उसका नाती इस परीक्षा में एकदम उत्तरीण हो जाएगा,,, और अंकित देखते ही देखते अपने प्यार से होठों को अपनी नानी के लाल-लाल होठों पर रख दिया और उसका चुंबन करने लगा,,,, अपनी तरफ से यह अंकित का पहला चुंबन था जो कि अपनी नानी के साथ ही था लेकिन उसे बेहद उत्तेजना का अनुभव हो रहा था जैसे ही उसके होंठ उसकी नानी के लाल लाल होठों पर इस पर सुबह वह एकदम से मदहोश हो गया और अपनी नानी के होठों को अपने होठों के बीच रखकर उसका रस पीने लगा उसकी नानी भी अपने नाती के ईस हरकत से पूरी तरह से मदहोश हो गई,,,,।

देखते ही देखते यह चुंबन एकदम गहरा होने लगा
अंकित पागल होने लगा मदहोश होने लगा और देखते ही देखते उसकी हथेलियां कब उसकी नानी की चूची पर चली गई उसे भी पता नहीं चला,,, वह ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी नानी की बड़ी-बड़ी चूचियों को दबा रहा था उसके उत्तेजना और हिम्मत दोनों बढ़ती जा रही है और यह सब उसकी नानी के लिए बड़ी खुशी की बात थी वह अपने नाती की हरकत से मदहोश हुए जा रही थी और वह भी चुंबन में उसका पूरा सहकार दे रही थी,,,। देखते ही देखते अंकित बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और ठीक अपनी नानी के सामने झुकी हुई स्थिति में ही उसके होठों से अपने होठों को अलग किया भी नहीं उसके होठों का रसपान करते हुए अब अपने दूसरे हाथ का भी उपयोग करते हुए एक साथ उसके दोनों चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था उसके ब्लाउज के ऊपर से ही वह पूरी तरह से अपनी नानी की चूची को मसल कर देना चाहता था,,,,,।

उसके नानी के मदहोशी और अंकित की उत्तेजना पूरी तरह से बढ़ने लगी थी ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी नानी की चूची को दबाते दबाते अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसके पेंट में तंबू बना हुआ था,,,,,, उसकी नानी अपने मन में यही सोच रही थी कि उसके दिए गए छुट का उसका नाती कितना सही उपयोग कर पाता है,,,, क्योंकि अब उसके मन में बहुत सी बातें चल रही थी अपनी बेटी सुगंधा को लेकर अपने नाती अंकित को लेकर,,,, क्योंकि जिस तरह से उसे और उसकी बेटी को पेशाब करते हुए अंकित प्यासी आंखों से देख रहा था उसकी आंखों में उसे बहुत कुछ नजर आ रहा था,,,, उसे एहसास होने लगा था कि घर की चार दिवारी के अंदर मां बेटे के बीच बहुत कुछ पकने वाला है,,, क्योंकि अनुभव से भरी हुई अंकित की नई इस बात से भली भांति परिचित थी कि उसकी बेटी सुगंधा बहुत ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक बदन की मालकिन है उसकी जवानी पुरे बहार में खीली हुई है,,,, ऐसे में घर में एक जवान लड़का उसे औरत को भले ही वह उसकी मां क्यों ना हो किस नजरिए से देखता है अंकित की नानी से अनजान नहीं था,,,

अंकित की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह अपनी नानी की चूची को जोर-जोर से दबाता हुआ ब्लाउज को बिना खोले नीचे ब्लाउज के अंदर अपनी उंगलियों को डालकर उसे ऊपर करने की कोशिश कर रहा था यह देखकर उसकी नानी एकदम से बोल पड़ी,,,।

अरे बुद्धू ऐसे करेगा तो ब्लाउज फट जाएगा बटन खोल,,,

अंकित की नानी अंकित को ब्लाउज का बटन खोलने के लिए बोल रही थी क्योंकि जिस तरह से अंकित अपनी नानी का ब्लाउज खोल रहा था उससे ब्लाउज फटने की संभावना पूरी तरह से बढ़ जा रही थी और अंकित की उत्तेजना और उसकी उत्सुकता देखकर अंकित कि नानी भी पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,,, अंकित की नानी को एहसास होने लगा था कि उसकी दी हुई शिक्षा काम आ रही थी अंकित एक ही रात में बहुत कुछ सीख गया था इसीलिए तो उसके होठों को बिल्कुल भी अपने होठों से अलग नहीं कर रहा था उसके होठों का रस पीता हुआ वह अपनी नानी की बात मानकर उसके ब्लाउज का बटन खोलना शुरू कर दिया था,,, अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था उसकी उत्तेजना संपूर्ण रूप से परम शिखर पर थी, वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था। ब्लाउज का बटन खोलने में भी उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वैसे तो वह अपनी मां के कपड़े अपने हाथों से उतार चुका था लेकिन आज पहली बार उसे अपनी नानी का ब्लाउज का बटन खोलने का अवसर मिल रहा है इसलिए उसकी उत्सुकता और उत्तेजना अद्भुत होती चली जा रही थी।

अंकित की नानी की चुचिया बड़ी-बड़ी थी और चूचियों के आकार की अपेक्षा ब्लाउज का आकर थोड़ा छोटा था इसलिए वह बड़े कस के बटन को बंद की थी जिसे उतारने में अंकित के पसीने छूट रहे थे,,,, अंकित ऊपर के दो बटन खोल चुका था तीसरा बटन खोलने में उसे बड़ी जहमत उठानी पड़ रही थी,,,, यह देखकर उसकी नानी बोली,,,।

क्या करता है अंकित तू औरत का ब्लाउज का बटन नहीं खोल पा रहा है तो उसे खुश कैसे कर पाएगा,,,,

कुछ नहीं नानी लगता है कि ब्लाउज बहुत कस हुआ है,,,(अपने होठों को अपनी नानी के होठों से अलग करता हुआ वह बोला और उसकी बात सुनकर उसकी नानी बोली,,,,)

ब्लाउज कसा हुआ नहीं है मेरी चूचियां बड़ी-बड़ी है,,,, क्या तुझे नहीं लगता कि मेरी चूची बड़ी है,,,।

लगता तो है नानी एकदम खरबूजे की तरह है,,,,(ब्लाउज के चौथे बटन को खोलता हुआ वह बोला और जैसे ही चौथा बटन खुला उसके चेहरे के मुस्कान बढ़ने लगी,,,)

तुझे छोटी-छोटी चूची अच्छी लगती है कि बड़ी बड़ी,,,,।

पहले तो ऐसा कुछ भी नहीं था नई लेकिन कल रात से सब कुछ बदलता हुआ नजर आ रहा है मुझे तो तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूची अच्छी लगती है,,,(आखरी बटन को खोलने का प्रयास करता हुआ अंकित बोला उसकी बात सुनकर उसकी नानी मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,, और अगले पल अंकित अपने प्रयास को सफल करता हुआ अपनी नानी के ब्लाउज के सारे बटन को खोल चुका था और उसके दोनों पल्लू को पकड़ कर एक दूसरे से अलग कर दिया था ब्लाउज के खुलते ही अंकित की नई की बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम से हवा में लहराने लगी ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे कबूतर कैद से आजाद हो गए हो,,, अपनी नानी की बड़ी-बड़ी चूचियों की तरफ देखकर मुस्कुराता हुआ अंकित बोला,,,)

सच में नानी तुम्हारी चुची बहुत खूबसूरत है,,,।

तेरे लिए ही है जैसा मन करे वैसा इसके साथ खेल,,,,।
(इतना सुनते ही अंकित अपने दोनों हाथों को आगे बढ़कर अपनी नानी की चूचियों पर रख दिया और गहरी सांस लेता हुआ उसे दबाना शुरू कर दिया अंकित की हथेलियों में पूरी तरह से मर्दाना ताकत भरी हुई थी, जिसका एहसास अंकित के नानी को भी अच्छी तरह से हो रहा था अंकित उत्तेजना के चलते बड़ी जोर-जोर से उसकी चूचियों को मसल रहा था दबा रहा था उसके पेंट में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे देखकर उसकी नानी का बुर का पानी पिघल रहा था,,,, अंकित की नानी से रहा नहीं गया और वह पेट में बने तंबू को अपने हाथ में पकड़ ली और उसे जोर-जोर से पेट के ऊपर से ही मसलना शुरू कर दी जिससे अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी,,,

अंकित तो अपनी नानी की बड़ी-बड़ी चूचीयो को अपने हाथ में लेकर पागल हो गया था कुछ अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि वाकई में औरत की चूचियों से खेलने में कितना मजा आता है,,, और से जोर-जोर से मसलता हुआ वह धीरे से अपने होठों को चूचियों की तरफ ले गया उसे मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया अंकित की हरकत से उसकी नानी उत्तेजना और प्रसन्नता से गदगद हुए जा रही थी क्योंकि उसकी नानी को लगने लगा था कि आज उसे कुछ सीखाने की जरूरत नहीं है,,,, अंकित अपनी हरकतों से अपनी नानी का पानी छुडा रहा था,,,, वह बारी-बारी से अपनी नानी की दोनों चीजों को मुंह में लेकर पी रहा था उसकी कड़ी निप्पल को कैडबरी चॉकलेट की तरह अपने दांतों के बीच लेकर दबा दे रहा था और जब-जब अंकित यह हरकत करता था तब तक अंकित की नानी के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगती थी,,,,।

आज भी कमरे में ट्यूबलाइट चल रही थी उसके दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था।
अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि अच्छा हुआ आज भी ट्यूब लाइट जल रही है क्योंकि अंधेरे में अपनी नानी का खूबसूरत नंगा बदन वह देख नहीं पाता ,,, बस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसके घर में बाकी के सभी लोग गहरी नींद में सो रहे होंगे क्योंकि उसकी आंखों के सामने ही उसकी मां पेशाब करने के बाद अपने कमरे में सोने के लिए गई थी उसकी बहन तृप्ति तो पहले ही अपने कमरे में जाकर सो रही थी इस समय सिर्फ उसकी नानी और वह खुद जाग रहे थे उन दोनों की आंखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी क्योंकि समय दोनों जवानी का मजा लूट रहे थे,,, अंकित पागलों की तरह अपनी नानी की चूची को दबा भी रहा था उसे मुंह में लेकर पी रहा था ऐसा लग रहा था कि बरसों की हसरत को हुआ आज ही पूरी कर लेना चाहता हो,,, और अक्सर अंकित की नानी को ऐसे ही मर्द पसंद रहते हैं जो औरत के हर एक अंग से जी भर कर खेलें जी भर कर प्यार करें और अंकित वैसा ही कर रहा था,,,।

कुछ देर तक किसी तरह से अपनी नानी की चूची से खेलने के बाद अंकित अपनी नानी को पूरी तरह से लग्नावस्था में देखना चाहता था उसके बदन से बाकी के वस्त्र को उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर देना चाहता था और वैसे भी अंकित की नई की तरफ सबसे पूरी छूट मिली हुई थी आज की रात में उसकी नानी के लिए उसका पति था और वह अपनी नानी के साथ एक बीवी की तरह,,, अपनी नानी की चूचियों से मुंह हटाने के बाद वह गहरी गहरी सांस लेता हुआ अपनी नानी की तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था उसकी नानी भी उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी अंकित की नानी को है लगने लगा था कि उसका नाती आज सफल हो जाएगा,,, वह भी मदहोश हुए जा रही थी उसे भी अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी बुर से पानी निकल रहा है,,,,,,, अपनी नानी के द्वारा दिए गए छुट का फायदा उठाते हुए वह अपनी नानी की बाहों को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे बिस्तर पर से खड़ी करने लगा उसकी नानी भी उसका इशारा समझ कर बिस्तर पर से उठकर खड़ी हो गई वह मुस्कुरा रही थी वह देखना चाहती थी कि उसका नाती अब क्या करता है,,,,।

उसकी नानी एकदम हैरान हो गई जब अंकित उसका हाथ पकड़ कर एकदम से उसके पीछे चला गया और पीछे से उसे अपनी बाहों में जाकर लिया पीछे से वह अपने दोनों हाथों को अपनी नानी की चूची पर रखकर से दबाते हुए उसके गर्दन पर चुंबन करने लगा यह अंकित की नानी के लिए हैरान कर देने वाली बात थी क्योंकि यह समर्थ तभी करता है जब वह पूरी तरह से औरत को समझने लगता है उसे औरत को खुश करने का हर एक कला आती हो लेकिन यह सब तो अंकित के लिए पहली बार था कल रात वह जितना सिखाई थी यह उससे ज्यादा ही था,,,, लेकिन अंकित की हरकत उसे आनंदित कर रही थी अंकीत उसे पीछे से अपनी बाहों में भरकर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को मसलते है उसके गर्दन पर चुंबन करते हुए पीछे से ही अपने लंड को उसकी गांड के बीचों बीच चुका रहा था जिसका हिस्सा अंकित को भी था और अंकित की नानी को भी अंकित की नानी पूरी तरह से मचल रही थी मदहोश हो रही थी,,, अंकित की रानी को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसका लंड किसी भाले से कम नहीं था जो बड़े आराम से गांड के बीचों बीच साड़ी के ऊपर से भी पहुंच जा रहा था,,,। अंकित की हरकत से अंकित की नानी की सिसकारी छूट रही थी,,,।

सहहहह आहहहहहहह,,,,अंकीत मेरे राजा तू तो एक ही रात में पूरा मर्द बन गया है,,,,,आहहहहह,,,,,।

(अपनी नानी के मुंह से कहे गए इस शब्द को सुनकर उसका हौसला बढ़ने लगा था उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी वह मन ही मन बहुत खुश हो रहा था और इस बात की खुशी उसके मन में और ज्यादा थी कि अच्छा हुआ उसकी नानी उसे यह सब सीख रही है अगर उसे सच में मौका मिल गया अपनी मां की चुदाई करने का तो अपनी नानी के साथ जो कुछ भी सीखा है वह उसका पूरा उपयोग अपनी मां के साथ करेगा और उसे पूरी तरह से खुश कर देगा,,,, अपनी नानी की गर्दन पर चुंबनों की बौछार करते हुए अपनी नानी की साड़ी को खोलने लगा,,, यह उसकी नानी के द्वारा उसके हिम्मत की तारीफ करने का ही नतीजा था जो अंकित इस कदर अपनी नानी के साथ खुलने लगा था,,, अंकित की नई अच्छी तरह से समझ रही थी कि अंकित उसे पूरी तरह से नंगी देखना चाहता है उसके नंगे बदन का दर्शन करना चाहता है,,,, अपनी नानी की साड़ी को खोलने लगा और अगले ही पल अपनी नानी की साड़ी को खोलकर वह साड़ी को जमीन पर गिरा दिया,,,,।

इन सब के बावजूद अभी भी उसके बदन पर ब्लाउज टिका हुआ था और उसकी नग्नता को छुपाने के लिए पेटिकोट उसके बदन पर अभी भी बरकरार था,,,, अंकित अपने दोनों हाथों से अपनी नानी का ब्लाउज पकड़ कर उसकी बाहों से उसे अलग करने लगा उसकी नानी भी इसमें उसका सहयोग करने लगी अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ कर दी ताकि बड़े आराम से अंकित उसके ब्लाउस को उधर सके और अगले पर वह अपनी नानी के बदन पर से ब्लाउज को भी उतार कर नीचे जमीन पर गिरा दिया था अब केवल पेटिकोट उतरना बाकी रह गया था लेकिन पेटिकोट उतारते से पहले वह एक बार फिर से अपनी नानी के बदन से सट गया और अपनी हथेली को सीधे-सीधे उसके पेटिकोट के ऊपर से ही उसकी बुर पर रख दिया और उसे पेटिकोट के ऊपर से ही मसलनी शुरू कर दिया अंकित की नानी को बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि अंकित इस तरह की हरकत कर देगा,,, इसलिए वह एकदम से मदहोश हो गई थी और मदहोशी भरे स्वर में बोली।

सहहहहह आहहहहहह,,,,, अंकित तू तो पूरा चालू है मैं कभी सोचती नहीं थी कि तू एक ही रात में इतना कुछ सीख जाएगा,,,।

जब सिखाने वाली तुम जैसी गुरु हो नानी तब चेला कैसे आगे नहीं बढ़ पाएगा,,,(अंकित इस तरह से पेटीकोट के ऊपर से ही अपनी नानी की बुर को मसलता हुआ बोला और अपनी बात को आगे बढ़ाता हुआ बोला,,,) नानी तुम्हारी बुर तो बहुत गीली गीली लग रही है कहीं पेशाब तो नहीं कर दी हो,,,,।

कल तुझे बताई थी,, यह पेशाब नहीं है जब औरत मत हो जाती है तो इसी तरह से लार टपकती है जैसे स्वादिष्ट भोजन देखकर मुंह में पानी आ जाता है ना उसी तरह से जब लगने लगता है कि औरत को मजा आने वाला है तभी इसी तरह से बोलने से लार टपकने लगता है समझा कि नहीं,,,,।
ओहहह नानी बिल्कुल समझ गया,,,,, अब तो मैं तुम्हारी बुर का पानी निकालते हुए देखना चाहता हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी नानी के पेटीकोट की डोरी को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे ज़ोर से एक झटके से खींच दिया अगले ही पल अंकित की नई की पेटिकोट एकदम से ढीली हो गई लेकिन फिर भी उसकी कमर पर टिकी हुई थी जिसे अंकित अपने दोनों हाथों की उंगलियों का सहारा देकर उसे कमर पर से ढीला किया और उसे उसी अंदाज में ऊपर से ही नीचे छोड़ दिया और अगले ही पल पेटिकोट उसके कदमों में जा गिरा,,,, लेकिन अंकित एकदम से हैरान हो गया जब देखा कि उसकी नानी पैंटी पहनी हुई थी यह देखकर उसके चेहरे पर उत्तेजना और मदहोशी के भाव और भी ज्यादा बढ़ गए और वह अपनी नानी से बोला,,,,)

क्या बात है नानी आज तो तुम पैंटी पहनी हो,,,,।

तेरे लिए ही पहनी हूं शायद तु नहीं जानता मर्द जब औरत के कपड़े उतारता है तो उसकी चड्डी उसकी पेंटि उतारने में उसे और भी ज्यादा मजा आता है और मुझे पूरा यकीन है कि तू मेरे बदन पर मेरी पैंटी देखकर और भी ज्यादा मस्त हो गया होगा।

क्या बात है नई बिल्कुल सही नहीं तो हैरान हो गया तुम्हारे बदन पर पेटी देखकर इसे सच में अपने हाथों से उतारने में बहुत मजा आएगा,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित को उसकी मां याद आ गई जब वह दवा खाने में अपने हाथों से अपनी मां की पेंटिं उतारा था,,, लेकिन वह दवा खाना था और आज वह अपने घर में है और आज वह अपनी मां की नहीं बल्कि अपनी नानी की पेंटिं उतारने जा रहा है जिसके साथ कुछ भी करने कि उसे इजाजत प्राप्त है,,,, अपनी नानी को पेंटि में देखकर एक बार फिर से उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और बार फिर से उसे एकदम से अपनी बाहों में भर लिया और इस बार वह आगे से उसे अपनी बाहों में भर लिया था,,,, उसके लाल लाल होठों का रसपान करते हुए वह पेंटी के उपर से ही अपने लंड को उसकी बुर पर धंसा रहा था,,,,अंकीत की हरकत उसकी नानी को बावली बना रही थी,,,। अंकित की नानी सोची भी नहीं थी कि अंकित इतना कुछ उसके साथ करेगा और वाकई में वह एक मर्द की तरह ही उसके साथ पैस आ रहा था औरतों को जिस जिस हरकत से आनंद प्राप्त होता है वही हरकत अंकित कर रहा था,,,।

थोड़ी देर बाद वह धीरे से घुटनों के बल बैठ गया,,, और जी भर कंपनी नानी की पेंटी की तरफ देखने के बाद,, वह दोनों हाथों से अपनी नानी की पेंटि को पकड़ लिया उतारना शुरू कर दिया और देखते-देखते वह अपनी नानी की पेंटि को उसके घुटनों तक खींच दिया,,,, अंकित की आंखों के सामने उसकी नानी की कचोरी की तरह फुली हुई उसकी बुर थी जिसमें से मदन रस टपक रहा था और उसे अपने होठों से लगाकर उसे पीने का मन कर रहा था,,, अंकित की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसकी सांसों की गति ऊपर नीचे हो रही थी,,, अंकित अच्छी तरह से जानता था कि अब उसे क्या करना है,,, वह अपनी नजर को ऊपर की तरफ उठाया उसकी नानी भी उसकी तरफ ही देख रही थी दोनों की नजरे आपस में मिली और दोनों के होठों पर मुस्कान तैरने लगे अंकित धीरे से अपने होठों को अपनी नानी की फुली हुई बुर पर रख दिया,,, अंकित की नानी अंकित की हरकत पर पूरी तरह से मदहोश हो गई और एकदम से गहरी सांस लेते हुए अपने दोनों हाथ को अंकित के सर पर रख दी,,, अंकित को बुर चाटने का अनुभव प्राप्त हो चुका था और यह अनुभव उसे सर्वप्रथम सुमन के द्वारा प्राप्त हुआ था और दोबारा राहुल की मां और तीसरी बार उसकी खुद की नई जो पूरी तरह से उसे संभोग का अध्याय कंठस्थ करा रही थी,,,।

अंकित पागलों की तरह पूरी तरह से अपनी नानी के बुरे को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया था मानो के जैसे कोई रसमलाई हो वह पागल की तरह अपनी नानी की बुर को चाट रहा था और उसकी यही अदाकारी उसकी नानी को पूरी तरह से पानी पानी कर रही थी ,,,वह मदहोश हुए जा रही थी,,, अंकित पूरी तरह से अपनी नानी की जवानी पर छाने लगा था वह अपनी नानी की तालाब नुमा बुर का पानी पीकर अपनी प्यास बुझा लेना चाहता था,,,, अभी भी उसके घुटनों में उसकी पैंटी फांसी हुई थी और अंकित अपने दोनों हाथों को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे जोर से दबाते हुए बुर का स्वाद ले रहा था,,,, अंकित की नई की हालत खराब हो रही थी वह पागल हुए जा जा रही थी उसका पूरा बदन कसमसा रहा था और उसके मुख से गरमा गरम शिसकारी की आवाज निकल रही थी,,,। अपनी नानी के मुंह से निकलने वाली शिसकारी की आवाज को सुनकर अंकित का हौसला और भी ज्यादा बुलंद होता चला जा रहा था,,, अंकित जितना हो सकता था उतनी अपनी जीभ को अपनी नानी की बुर के अंदर डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,।

अंकित अपनी नानी की बुर को अपने दूसरे हाथ के अंगूठे और उंगली से फैला कर आनंद ले रहा था अपनी एक उंगली को उसमें डालकर अंदर बाहर करते हुए उसकी बुर चाट रहा था अंकित की तरफ से यह हरकत अंकित की नानी को पूरी तरह से ध्वस्त कर रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कल का छोकरा उसके छक्के छुड़ा रहा था,,, अंकित का एहसास हो रहा था कि पेंटी घुटनों में फांसी होने की वजह से उसकी नानी ठीक तरह से खड़ी नहीं हो पा रही थी इसलिए वह उसकी पैंटी को उतारने लगा लेकिन इस बीच वह उसकी बुर को लगातार चाट रहा था और देखते-देखते वह उसकी पेंटिं को एकदम नीचे तक ले आया तो उसकी नानी खुद अपने पैरों को एक-एक करके ऊपर करके अपने पैरों में से पेंटी को बाहर निकलवा दी,,, पेटी के निकलते ही जैसे भाभी किसी कैदी से आजाद हो गई हो इस तरह से अपनी एक टांग को घुटनों से मोड़कर एकदम से अंकित के कंधों पर रख दी और दोनों हाथों से उसका सिर पकड़ कर अपनी बुर को उसके चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दि,, अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दी और एक तरह से वह अपनी कमर को धक्का मार रही थी अंकित के चेहरे पर,,, देखते ही देखते अंकित का पूरा चेहरा उसकी बुर में से निकलने वाले मदन रस से पूरी तरह से गिला हो गया लेकिन फिर भी अंकित को मजा आ रहा था वह अपनी चीज से जितना हो सकता था उतनी अपनी नानी की मलाई को चाट रहा था,,,,।

और देखते ही देखते अंकित की उंगलियों की करामात और उसकी जीभ की जादूगरी से अपने चरम सुख के करीब पहुंचने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी और वह अंकित के बालों को कस के पकड़ के उसके होठों को अपनी बर से एकदम से दबा दी और भलभला कर झड़ने लगी,,, अंकित अपनी नानी की बुर में से निकलने वाले बदन रस की एक भी बुंद को जमीन पर गिरने नहीं दिया उसे लगातार चट्टा हुआ उसे अपने गले के अंदर गटक गया,,, मानो की जैसे वह बुर से निकला पानी नहीं कोई अमृत की बूंद हो,,,, अंकित की नानी झड़ चुकी थी गहरी गहरी सांस ले रही थी अंकित भी अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसने क्या किया है एक अद्भुत कार्य को अंजाम दिया था इसलिए चेहरे पर मुस्कान लिए वह धीरे से उठकर खड़ा हो गया और एक बार फिर से अपनी नानी के होठों से अपनी होंठ को सत दिया अंकित की रानी अच्छी तरह से जानते थे कि अंकित के होठों पर उसकी ओर से निकलने वाली मलाई लगी है लेकिन फिर भी बेझिझक वह भी उसके होंठों को अपने मुंह में भरकर चाटना शुरू कर दी,,,,।

अंकित की नई पूरी तरह से नंगी थी लेकिन अंकित के बदन पर अभी भी पूरे वस्त्र थे उसने अपने वस्त्र है उतरे नहीं थे और इस बार वह अपनी नानी को बिस्तर पर ले गया और उसे बिस्तर पर बैठ कर अपना शर्ट निकाल कर उसे भी अपनी नानी के वस्त्र पर फेंक दिया लेकिन अभी तक वह अपना पेटं नहीं उतारा था उसके पेंट में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे देख कर उसकी नानी के मुंह में पानी आ रहा था,,,, अंकित देखते ही देखते अपनी नानी के कंधों को पकड़ कर उसे बिस्तर पर लेट आने लगा और देखते ही देखते उसकी नानी बिस्तर पर पीठ के बाल एकदम से लेट गई ,,, नग्नावस्था में उसका बदन ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था,,,, अंकित ने अपनी सूझबूझ और जो कुछ भी सीखा था उसके अनुभव से वह अपनी नानी को पूरी तरह से मस्त कर दिया था जिसका एहसास उसकी नानी के चेहरे को देख कर एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,,।

अंकित अभी भी बिस्तर के नीचे था वह धीरे से अपने पेट की बटन खोलने लगा और अपना पेंट उतार कर उसे भी एक तरफ रख दिया और इस समय वह अपनी नानी के सामने केवल अंडरवियर में था और उसके अंडरवियर में उसका तंबू पूरी तरह से गोले दागने के लिए किसी तोप की तरह खड़ा था,,,, पेंट उतारने के बाद उसने अपनी अंडरवियर नहीं उतारा और अपने हाथ का सहारा लेकर वह अपनी नानी को घूमने का इशारा करते हो उसे घूमने लगा वह उसे पेट के बल लेटाना चाहता था,,, और उसकी नानी भी उसके इशारे को समझ गई थी और भाभी पेट के बल लेट गई थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से ट्यूबलाइट की रोशनी में चमक रही थी जिसे देख कर अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,,।

वह नानी कितनी खूबसूरत गांड है तुम्हारी और कितनी बड़ी-बड़ी है,,,,।

(इतना सुनते ही उसकी नानी तपाक से बोली,,,)

तेरी मां से भी ज्यादा खूबसूरत है क्या,,,!

(इस सवाल को सुनकर अंकित थोड़ा झेंप गया और अपने आप को संभालते हुए बोला,,,)

मुझे क्या मालूम नहीं मैं तो अब तक सिर्फ तुम्हारी ही गांड देखा हूं और वाकई में तुम्हारी गांड बहुत ज्यादा खूबसूरत है,,।

लेकिन तेरी मां से ज्यादा खूबसूरत नहीं है और यह बात तू भी अच्छी तरह से जानता है,,,।

मैं भला कैसे जानुंगा मैं कभी देखा थोड़ी हूं,,,।(अंकित पूरी तरह से अपनी भावनाओं पर काबू करता हुआ बोला,,, और बिस्तर पर बैठकर अपनी नानी की नंगी गांड पर हथेली रखकर उसे चलने लगा,,,,)

चल झूठ मत बोल मैं सब जानती हूं अभी कुछ देर पहले ही तो घर के पीछे दीवार के पीछे छुप कर देख रहा था,,,,।

(अपनी नानी की बात सुनकर अंकित एकदम से हक्का-बक्का रह गया उसे ऐसा था कि यह बात किसी को मालूम नहीं होगी लेकिन उसकी नानी सब जान गई थी इसलिए कुछ छुपाने से फायदा नहीं था इसलिए वह अपनी तरफ से सफाई देता हुआ बोला,,)

लेकिन वह तो अनजाने में देख लिया था मैं तो तुम्हें देखने के लिए गया था मुझे क्या मालूम था कि मम्मी भी वही होगी,,,,।

मुझे देखने के लिए अभी कल रात को ही तो हम दोनों के बीच सब कुछ हुआ फिरभी,,,।

हां जब मुझे लगा कि तुम पेशाब करने जा रही हो तो मैं तुम्हें पेशाब करते हुए देखना चाहता था सच में तुम पेशाब करते हुए बहुत खूबसूरत लगती हो लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि मम्मी भी वही है,,,।

चल कोई बात नहीं मालूम था कि नहीं मालूम था यह मैं नहीं जानती लेकिन इस समय तूने अपनी मां की भी गांड देखा ना पेशाब करते हुए उसे भी देखा तो सच सच बताना हम दोनों में से सबसे ज्यादा खूबसूरत नजारा किसका दिखाई दे रहा था,,,,।

(अंकित की नानी इस सवाल से अंकित के मन में क्या चल रहा है यह जानना चाहती थी और यह भी देखना चाहती थी कि यह जो चोरी छुपे देखा था कि हो रही है उसके जाने के बाद कितना आगे बढ़ सकती है,,, अंकित अपनी नानी का सवाल सुनकर बोला,,,)

ऐसा कुछ भी नहीं है नानी मैं तो सिर्फ तुम्हारी ही गांड को देख रहा था,,,।

चल झूठ मत बोल मैं भी तिरछी नजर से देख रही थी तू अपनी मां की गांड की तरफ देख रहा था सच सच बताना क्या पहले भी तू इसी तरह से चोरी छिपे अपनी मां को पेशाब करते हुए देखा है,,,।

(अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी नानी के सवाल का जवाब हुआ कैसे दिन ऐसा तो बहुत बार हो चुका था लेकिन ऐसा कहना बहुत गलत होगा क्योंकि उसकी मां सफाई दे चुकी है कि अंकित ऐसा लड़का नहीं है इसलिए वह बोला)

पहले तो मैंने कभी नहीं देखा आज पहली बार देख रहा था लेकिन सच कहूं तो मन से ज्यादा बड़ी गांड तुम्हारी है,,,।

वह तो है ही आखिरकार मैं उसकी मां हूं लेकिन गांड कैसी हुई किसकी ज्यादा है,,,, सच-सच बताना झूठ बिल्कुल भी मत बोलना और हम दोनों के बीच किसी भी तरह का पर्दा नहीं रहना चाहिए हम दोनों के बीच इस तरह का रिश्ता कायम हो चुका है इससे हम दोनों को एक दूसरे से बिल्कुल भी शर्म करने की जरूरत नहीं है,,, और हां हम दोनों के बीच इस तरह की बात हो रही है मैं यह किसी को नहीं बताऊंगी,,,।

(अपनी नानी की बातें सुनकर अंकित थोड़ा सोच में पड़ गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें लेकिन इतना तो वह जान ही गया था कि उसकी नानी है सब किसी को नहीं बताएगी अगर यह सब किसी को बताएगी तो उसका भी राज राज नहीं रह पाएगा,,, और यह सब बातें तो होता है अपनी बेटी को नहीं बता सकती क्योंकि वह खुद एक नंबर की छिनार है तो भला हुआ अपनी बेटी से कैसे बता पायेगी की रात भर वह अपनी ही नाती के साथ चुदवाती रही है,,,, इस तरह की बातें अपने मन में सोच कर अंकित को थोड़ी तसल्ली महसूस हो रही थी और उसे भी अपनी मां की इस तरह की बातें करने में अपनी नानी के साथ मजा आ रहा था उसके उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ रही थी इसलिए वह अपनी नानी से बोला,,,)

सच कहुं तो अगर उमर को लेकर अंतर देखा जाए तो फिर भी तुम इस उम्र में भी एकदम कड़क हो और वैसे तो सही मांगने में इस समय मन की गांड ज्यादा कसी हुई है लेकिन इससे मुझे क्या मुझे तो तुमसे मजा लेना है और इसीलिए मेरे लिए तुम ही मेरे सपनों की रानी हो,,,,।
(अंकित अपनी नानी से एकदम फिल्मी स्टाइल के हीरो जैसी बातें कर रहा था और अंकित की नई भी उसकी बातों से एकदम मस्त हो रही थी प्रसन्न हो रही थी लेकिन अंकित की यह बात कि मुझे तो तुमसे मजा लेना है इस बात पर वह बोली,,,)

अच्छा अंकित सच-सच बताना अगर मेरी तरह तेरी मां भी तुझे मौका दे तब तू क्या करेगा,,,।
(अंकित की नानी एकदम से मुद्दे वाला सवाल पूछ ली थी,,, इसलिए अंकित एकदम से हैरान हो गया था और अपनी नानी के सवाल को सुनकर वह हैरानी जताते हुए बोला,,,)

यह क्या कह रही हो नानी ऐसा भला हो सकता है क्या,,,,(ऐसा कहते हुए भी वह अपनी मां का जिक्र सुनकर उत्तेजित हो चुका था और उसकी उत्तेजना उसकी हथेली के दबाव पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी वह अपनी नानी की गांड को कस के दबोच रहा था और उसका यह व्यवहार उसकी नानी को शंका के दायरे में ला रहा था वह समझ गई थी कि अगर मौका मिलेगा तो वह इसी तरह से अपनी मां के साथ भी मजा ले लेगा बिल्कुल भी इनकार नहीं कर पाएगा)

अरे मैं सच कह रही हूं मैं भी तो तेरी नानी हूं लेकिन तुझे मौका देना अगर तेरी मां भी इसी तरह से तुझे मौका देगी तो क्या तो इंकार कर पाएगा बिल्कुल भी नहीं तू भी अपनी मां पर ही चढ़ जाएगा,,,,।

(अपनी नानी किस तरह की खुली बातें उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रही थी उसे मदहोशी जा रही थी और उसे अपनी नानी के मुंह से अपनी बेटी के बारे में इस तरह की बातें सुनने में और भी ज्यादा मजा आ रहा था लेकिन फिर भी वह जानबूझकर इनकार करते हुए बोला)

नहीं नानी ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता मम्मी इस तरह की बिल्कुल भी नहीं है,,,।

लेकिन तू तो है ना,,,, मैं भी तो तेरी नानी हूं तो मेरे साथ क्यों यह सब कर रहा है क्योंकि मैं जानती हूं मर्द की फीतरत ही ऐसी होती है उन्हें बुर मिलना चाहिए फिर भले ही वह किसी की भी हो मां की और नानी की हो या बहन की हो,,,(एकदम से खुद से घूम कर पीठ के बल लेटते हुए,, और अपने हाथ के कोहनी का सहारा लेकर,,, उठकर बैठते हुए,,,) वैसे भी तेरी मां बहुत सेक्सी है,,, पहले ही मेरी बेटी है लेकिन में औरत के बारे में अच्छी तरह से जानती हूं मेरी बेटी बरसों से अकेली रह रही है उसकी भी इच्छा करती होगी जिस्मानी भूख शांत करने के लिए तू जरा सोच इस उम्र में जब मेरा यह हाल है अभी तो वह पूरी तरह से जवान है उसकी क्या हालत होती होगी उसका भी मन भटकता होगा बस कोई राह दिखाई नहीं दे रही है वरना वह भी अपने मंजिल को प्राप्त कर लेती,,,

यह सब कैसी बातें कर रही हो मम्मी के बारे में,,,।

अरे बुद्धू तेरी मम्मी के बारे में नहीं मैं बल्कि हर एक औरत के बारे में बता रही हूं हर रिश्ते के पहले वह एक औरत होती है उसे भी प्यास लगती है भूख लगती है जिस्म की भूख लगती है,,,, मैं सच कह रही हूं भले ही तो अनजाने में अपनी मां को पेशाब करते हुए देखा है लेकिन देखना जब मैं चली जाऊंगी ना फिर भी तेरा मन बार-बार अपनी ही मा को नग्न अवस्था में नहाते हुए कपड़े बदलते हुए पेशाब करते हुए देखने की इच्छा करेगी और अगर यह सब तेरी मां को मालूम पड़ गया अगर वह अपने आप को संभाल ली तो ठीक वरना वह भी भावनाओं में बह जाएगी तो उसका भी मेरी तरह हल हो जाएगा लेकिन मजा बहुत आएगा,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित की नानी उत्तेजित होते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाकर अंडरवियर में बने तंबू को पकड़ ली और उसे ज़ोर से दबोच ली अंकित एकदम से उत्तेजित हो गया,,, अपनी मां के बारे में खुली बातें सुनकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था इसलिए अपनी नानी की सरकार पर वह एकदम से बिस्तर पर घुटनों के बल अपनी नानी के करीब पहुंच गया और खुद ही अपने अंडरवियर को अपने हाथों से नीचे की तरफ खींच कर अपने खड़े लंड को एकदम से बाहर निकाल लिया,,, उसकी नानी अभी इस नजारे को देख ही रही थी कि वह खुद अपना हाथ आगे बढ़कर अपनी नानी के सर को पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ दबाव बनाता हुआ अपने लंड की तरफ लाने लगा,,,,,।

वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसे क्या करना है और वह अगले ही पल अंकित के लंड को मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दी,,, अपनी मां के बारे में अपनी नानी के मुंह से गंदी बातें सुनकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था उत्तेजना एकदम परम शिखर पर पहुंच चुकी थी और जैसे ही अपने लंड को अपनी नानी के मुंह में महसूस किया हुआ पूरी तरह से बेकाबू हो गया और अपनी नानी के सर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिया वह अपनी नानी के मुंह को ही चोदना शुरू कर दिया था,,,, अंकित की मदहोशी है और उसका बेकाबूपन देखकर अंकित की नानी भी,,, मदहोश हो चुकी थी,,, वह भी अपने गले तक लेकर अंकित के लंड की चुसाई कर रही थी पूरी तरह से चुसाई कर लेने के बाद,,,,,, वह धीरे से अंकित के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाली क्योंकि उसकी बुर में भी चीटियां रेंग रही थी,,, उसे भी अंकित के लंड को अपनी बुर में लेना था,,,। अंकित समझ गया था कि अब उसे क्या करना है,,, वह धीरे से अपनी नानी के कंधों को पकड़ कर उसे पीठ के बल लेटा दिया,,,,

एक बार फिर से अंकित की नई कल रात वाली मुद्रा में हो चुकी थी,,,, अंकित कल की तरह ही घुटनों के पर अपनी नानी के टांगों के बीच पहुंच गया और उसकी कमर में हाथडालकर उसे अपनी जांघों पर खींच लिया,,, अंकित के चेहरे पर उत्साह साफ झलक रहा था,,,, अगले ही पर अपने लंड को अपनी नानी की बुर में डालकर अपनी कमर हीलाना शुरू कर दिया वह अपनी नानी को एकदम से हुमच हुमच कर चोद रहा था,,,, कुछ देर पहले ही अंकित की जीभ से ही वह झढ़ गई थी लेकिन अब अंकित उसकी बुर में अपने मर्दाना अंग का उपयोग कर रहा था क्योंकि पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था वह इतना गरम था कि अंकित की नानी को ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बुर में कोई गरम लोहे का रोड डाल रहा हो,,, वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी।
शुरू से ही अंकीत अपने धक्कों को तेज किए हुए था और अंकित कि ईस मर्दानगी को देखकर उसकी नानी पानी पानी हुई जा रही थी।

इस बार अत्यधिक उत्तेजना के चलते अंकित ज्यादा देर टिक नहीं पाया और 20 मिनट के बाद ही वह भी देर हो गया लेकिन अपनी नानी को पूरी तरह से मस्त करने के बाद,,,,,।

झड़ने के बाद अंकित अपनी नानी के बगल में पसर गया था,,, और गहरी गहरी सांस ले रहा था अंकित की नानी बहुत खुश थी,,, पहली बार उसे ऐसे मर्द से पाला पड़ रहा था जो उसके धागों को पूरी तरह से खोल दिया था,,,,,,,, दोनों गहरी गहरी सांस ले रहे थे अंकित की नई की गहरी चलती सांस के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां के ऊपर नीचे हो रही थी जिस पर अंकित की नजर बनी हुई थी वह एक बार झड़ चुका था लेकिन लंड की अकड़ बरकरार थी,,, वह धीरे से अपना हाथ अपनी नानी की चूची पर रख दिया और उसे फिर से दबाना शुरू कर दिया अंकित की नानी अंकित के खड़े लंड को देखकर बोली,,,।

झड़ जाने के बाद भी तेरा खड़ा रहता है सच में तु असली मर्द है,,,।

तो क्या नानी झड़ जाने के बाद लंड ढीला पड़ जाता है क्या,,,(अपनी नानी की चूची को जोर-जोर से दबाते हुए बोला)

तो क्या एक बार पानी निकलने के बाद वह एकदम से ढीला पड़ जाता है,,,,, और उसके खड़े होने में थोड़ा समय लगता है लेकिन तेरा तो पानी निकालने के बाद भी खड़ा ही रहता है,,,(अपना हाथ अंकित के लंड पर रखते हुए बोली,,,, अपनी नानी की बातें और उसकी हरकत को देखकर अंकित उसकी चूची को जोर से दबाते हुए बोला,,,)

सच में नानी तुम बहुत मजा देती हो,,, अगर तुम नहीं सिखाती तो मैं तो कुछ जान ही नहीं पता मुझे कुछ आता ही नहीं था।

लेकिन तू तो सब कुछ बहुत जल्दी सीख गया,,,।

यह सब तुम्हारी मेहरबानी है नानी लेकिन मजा आया बहुत मजा आया,,,,।

मुझे भी बहुत मजा आया,,,,,(घड़ी की तरफ देखते हुए जिसमें दो बज रहा था और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) देख 2:00 बज गया है सच में जिससे भी तेरी शादी होगी वह बहुत खुश नसीब होगी,,,।

ऐसा क्यों,,,?

क्योंकि तू उसकी जमकर चुदाई करेगा और औरत को यही सुख सबसे ज्यादा चाहिए पैसे गहने घर द्वार यह सब तो चलता ही रहता है लेकिन औरत की असली खुशी सिर्फ चुदाई में मिलती है और तेरे जैसा मर्द मिल जाए तो औरत के तो बारे न्यारे हो जाए,,।

तो मैं भी चलूं क्या तुम्हारे साथ गांव रोज मजा करेंगे,,,।

मैं भी यही सोच रही थी लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि तृप्ति को तैयार कर चुके हैं मैं तो अपनी फैसले पर ही अपने आप पर गुस्सा कर रही हूं तृप्ति की जगह मुझे तुझे ले जाना चाहिए था,,,, अगर तू मेरे साथ चलता तो बहुत मजा आता,,, गांव में चारों तरफ हरियाली है हरियाली हर जगह मजा करते हैं खेत में कल्याण में तालाब में जहां गाय भैंस बांधते हैं वहां,,, नल पर सच में बहुत मजा आता ट्यूबवेल में नहाते हुए मजा करते,,,।

नई जिस तरह से तुम बता रही हो सच में मेरा चलने का मन कर रहा है लेकिन अब कुछ हो नहीं सकता क्योंकि अगर मैं भी चलूंगा तो मम्मी अकेली हो जाएगी ऐसा नहीं हो सकता कि सब लोग साथ चले,,,,।

नहीं अब इस तरह से एका एक चलने की तैयारी कैसे कर सकते हैं,,, चल कभी शादी ब्याह पड़ेगा या अगली गर्मी की छुट्टी में सब साथ में चलेंगे,,,।

सच में नानी बहुत मजा आएगा,,

मजा तो बहुत आएगा,,,, अब मुझे बड़े जोरो की पेशाब लगी है,,,, मुझे उठने दे,,,,(ऐसा कहकर वहां बिस्तर से उठने लगी तो अंकित खुद जल्दी से उठकर बिस्तरसे नीचे आ गया और उसकी नानी कुछ कहती कुछ समझ पाती ईससे पहले ही वह अपनी नानी को बिस्तर पर से ही अपनी गोद में उठा लिया,,,, अंकित की नानी के लिए यह बेहद अद्भुत था वह अपने नाती की ताकत पर गर्व महसूस कर रही थी और मुस्कुरा रही थी लेकिन फिर भी उसे डर लग रहा था इसलिए वह बोली,,,)

अरे रहने दे उतार नीचे कहीं गिर गई तो चोट लग जाएगा,, गजब हो जाएगा,,,,,,,,(थोड़ा सा घबराते हुए वह बोली)

ऐसे कैसे गिर जाओगी यूं ही नहीं कसरती शरीर बना कर रखा हूं,,, ऐसा लगता है कि उसी दिन के लिए कसरत करके मेहनत किया था आज सभी समय आ गया है,,,,(अंकित उसी जगह पर खड़े-खड़े ही अपनी नानी से बोला,,, उसकी नानी का दिल जोरो से धड़क रहा था, क्योंकि चाहे जो हो भले ही वह न जाने कितनी मर्दों के साथ सारे संबंध बन चुकी थी लेकिन किसी ने भी उसे गोद में नहीं उठाया था और वह भी इस तरह से तो बिल्कुल भी नहीं,,, उसके जीवन में अंकित पहले मर्द था जो उसे संपूर्ण रूप से संतुष्टि का एहसास भी कर रहा था और कार्य क्षमता का परिचय देते हुए अपनी मर्दाना ताकत का सही उपयोग करते हुए उसे गोद में उठा लिया था,,,, अंकित की नई अपनी भारी भरकम शरीर को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि इस तरह से गोद में उठा पाना अंकित जैसे लड़कों के लिए तो वाकई में मुमकिन कार्य नहीं है लेकिन इसे नामुमकिन कार्य को अंकित ने मुमकिन बना दिया था इसलिए तो अंकित के मर्दाना ताकत से उसकी नानी की छाती गर्व से गदगद हुए जा रही थी,,,

अंकित अपनी नानी के खूबसूरत चेहरे को देखकर मुस्कुरा रहा था और उसकी नानी अंकित को देखकर मुस्कुरा रही थी अंकित भी पूरी तरह से नंगा था और उसकी नानी भी बिना कपड़ों की थी,,,, अभी-अभी अंकित अपनी नानी की चुदाई करके अपना पानी निकल चुका था लेकिन अपनी नानी को गोद में लेने से ऐसा लग रहा था जैसे एक बार फिर से उसकी उत्तेजना वापस लौट रही थी और लंड पूरी तरह से ढीला पड़ता इससे पहले ही वह फिर अपनी औकात में आने लगा था,,, और ऊपर की तरफ मुंह उठने लगा था जिससे उसका छुपाना उसकी नानी की गांड पर स्पर्श कर रही थी उसके पीठ पर रगड़ खा रही थी,, अंकित की नानी अंकित के लंड के स्पर्श से फिर से गर्म होने लगी थी,,,,,

अंकित के लिए यह सब कुछ नया नया था,, और अभी-अभी सुबह जवान हुआ था इसलिए उसका खून ज्यादा गर्म था वह बार-बार उससे ही सो जा रहा था उसकी नानी उसके आगे ढीली पड़ जा रही थी लेकिन अंकित अपनी हरकतों से अपनी नानी को फिर गर्म कर दे रहा था,,,, अंकित उसी तरह से अपनी नानी को गोद से में उठाए हुए दरवाजे की तरफ जाने लगा,,,, अंकित की नानी को इस बात का डर लग रहा था कि कहीं उसका वजन न संभाल पाने के कारण वह कहीं नीचे ना गिरा दे इसलिए बार-बार उसे नीचे उतरने के लिए बोल रही थी लेकिन वह बिल्कुल भी अपनी नानी की बात नहीं मान रहा था क्योंकि उसे अपनी भुजाओं पर पूरा विश्वास था देखते ही देखते हो वह दरवाजे तक पहुंच चुका था लेकिन इस बीच उसका लंड बार-बार उसकी नानी की पीठ से रगड़ खाकर अपनी औकात में आ चुका था यह एहसास अंकित की नानी को भी हो रहा था तभी तो वह भी गरम होती जा रही थी,,,, अंकित दरवाजे पर पहुंचकर अपनी नानी से मुस्कुराते हुए बोला,,,।

तुम दरवाजा खोलो नानी,,,।
(अंकित की हरकत से उसकी नानी की मदहोश हो चुकी थी वह पूरी तरह से अपनी नाती का गुलाम बन चुकी थी इसलिए गोद में बैठे-बैठे ही वह अपने दोनों हाथ का सहारा लेकर दरवाजे की कड़ी खोल दी,,,, दरवाजा खोलने लगी और साथ में यह भी हिदायत देने लगी की,,,)

देखना बिल्कुल भी शोर मत मचाना किसी की नींद ना खुल जाए,,,,।

बिल्कुल भी नहीं खुलेगी नानी,,,,,।
(कल इसी तरह से पेशाब करने जाते समय अंकित घबरा रहा था लेकिन आज उसकी नानी को थोड़ा डर महसूस हो रहा था एक ही रात में सब कुछ बदल गया था अंकित उसके साथ पूरी तरह से खुल चुका था एक असली मर्द की तरह उसके साथ पेश आ रहा था,,, और इतना कहने के साथ ही अंकित कमरे से बाहर निकाल कर अभी भी उसकी नानी उसकी गोद में थी अपनी नानी को गोद में उठाने पर और वह भी लग्न अवस्था में उसे काफी उत्तेजना का एहसास हो रहा था उसे मजा आ रहा था,, और इस समय उसे अपनी नानी का वजन बिल्कुल भी महसूस नहीं हो रहा था क्योंकि अंकित खुद उत्तेजित अवस्था में था पूरी तरह से जोश से भरा हुआ था,,, और देखते ही देखते हैं अंकित घर के कोने में पहुंच गया जहां पर कल दोनों पेशाब किए थे,,, वहां पहुंचते ही अंकित अपनी गोद में से अपनी नानी को नीचे उतारने लगा,,, उसकी नानी उसकी गोद से नीचे उतर चुकी थी,,,, उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,,,।

और वह तुरंत अंकित की आंखों के सामने ही बैठकर पेशाब करने लगी पेशाब करते समय अंकित की नानी की खूबसूरती और उसकी कामुकता पूरी तरह से बढ़ जाती थी इस अवस्था में अगर कोई अंकित की नानी को देख ले तो वाकई में उसका लंड ईस नजारे को देखकर ही पानी फेंक दे,,, बुर से निकल रही सिटी की आवाज,,, सुनकर अंकित की हालत खराब होने लगी उसके कानों में इस मधुर ध्वनि के पडते ही वह पूरी तरह से बेकाबु होने लगा उसकी मदहोशी एकदम से बढ़ने लगी,,, और वह अपनी नानी की आंखों के सामने ही अपने लंड को पकड़ कर हिलता हुआ पेशाब करने लगा इस नजारे को अपनी बेहद करीब देखकर उसकी नानी की बुर पकोड़े की तरह फूलने लगी मदहोश होने लगी,,,, और वह अगले ही पल एक हाथ अपनी बर पर रखकर दूसरे हाथ को अंकित के लंड पर रख दी,,, और उसे कसके दबा दी जिससे कुछ देर के लिए अंकित की पेशाब एकदम से रुक गई और फिर वह वापस अपनी हथेली के कसाव को लंड पर से ढीला करने लगी और वापस पेशाब छुटने लगी,,, ऐसा वह बार-बार कर रही थी जिससे अंकित का पेशाब रुक-रुक के बाहर निकल रहा था लेकिन अपनी नानी की हरकत पर अंकित की मदहोशी और उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी,,,,।

थोड़ी देर में हम किसकी नानी के बुर से सिटी की आवाज कमजोर पडने लगी और कुछ देर बाद एकदम से बंद हो गई इसका मतलब साफ था कि वह पेशाब कर चुकी थी लेकिन अंकित के लंड से अभी भी रह रहकर पेशाब निकल रही थी,,, अंकित तो पागल हुआ जा रहा था उसकी हालत खराब हो रही थी उसका लंड फिर से तैयार था उसकी नानी की बुर में घुसने के लिए लेकिन इससे पहले अंकित की नई अपने लाल लाल होठों को खोलकर अंकित के लंड को अपने मुंह में भर ली और उसे चूसना शुरू कर दी,,,, ओहहहहह नानी,, अपनी नानी की हरकत पर एकदम से अंकित के मुंह से मदहोशी भरी आवाज निकल गई,,, वह पूरी तरह से मस्त होने लगा था,,,, घर के बाहर सड़क की स्ट्रीट लाइट की रोशनी दरवाजे की दरार से अंदर तक हल्की रोशनी बिखेर रही थी,,, जिसमें सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था अंकित अपनी नानी की हरकत को देखकर एकदम चुदवासा हुआ जा रहा था,,,,।

कुछ देर तक अंकित की नई अंकित को इसी तरह से खुश करती रही और जब अंकित से बर्दाश्त नहीं होगा वह खुद ही अपनी नानी का हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और दीवार से सटा दिया उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड को अपने सिधान पर लेने लगा,,, और अगले ही पल अंकित अपने लंड को अपनी नानी के गुलाबी छेद में डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया अंकित के लिए यह बेहद हिम्मतवाला कार्य था,,, क्योंकि अंकित पहली बार अपने मन से किसी औरत की चुदाई कर रहा था वैसे तो वह बीती रात को ही यह सब अपनी नानी से ही सीखा था और आज अपनी नानी को उसके सिखाए गए हुनर का करतब दिखा रहा था,,, जो की बेहद लाजवाब था।

अंकित का हर एक धक्का उसकी नानी के बच्चेदानी तक पहुंच रहा था अंकित का लंड रगड़ रगड़ के अंदर बाहर हो रहा था,,,, अंकित तो दोनों हाथों से अपनी नानी की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिला रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था वह आनंदित हो जा रहा था वह जानता था कि इस तरह का मौका अब ना जाने कब मिलेगा इसलिए वह इस मौके का भरपूर फायदा उठा लेना चाहता था,,,, अंकित की नई तो मानो जैसे हवा में उड़ रही हो इस तरह का शो कुछ नहीं इससे पहले कभी नहीं भौजी थी भले ही कई मर्दों के साथ उसके जिस्मानी तालुका थे लेकिन इस तरह का सुख आज तक किस्मत में नहीं दिया था वह पूरी तरह से दोस्त होती चली जा रही थी,,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कल का लौंडा रगड़ रगड़ कर उसका पानी निकाल रहा था,,,, तकरीबन 30 मिनट की घमासान चुदाई के बाद अंकित अपनी नानी के साथ ही झड़ गया,,,, यह बेहद अद्भुत फल था उसकी नानी पूरी तरह से मत हो चुकी थी अंकित धीरे से अपने लंड को अपनी नानी की बुर से बाहर खींच लिया,,,,।

दोनों दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे दोनों अपनी-अपनी हसरत को एक दूसरे से पूरी कर रहे थे अंकित तो पूरी तरह से सपनों की दुनिया में खो चुका था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह जो कुछ भी हो रहा है यह हकीकत है या कोई सपना या उसकी कोई कल्पना लेकिन यह ना तो कोई कल्पना थी और नहीं कोई सपना,, जो कुछ भी था वह पूरी तरह से हकीकत था लेकिन यह सब कुछ अंकित की सोच के परे था दो-तीन दिन पहले ही वह सिर्फ अपनी मां के बारे में सोचता था और उसके जीवन में केवल सुमन और राहुल की मां ही आई थी जो की ऊपर ऊपर से थोड़ा बहुतउसे आनंद प्रदान की थी,,,, लेकिन उसकी नानी उसके जीवन में जाकर उसके जीवन को पूरी तरह से बदल दी थी एक ही रात में उसे पूरा मर्द बना दी थी एक औरत को कैसे खुश किया जाता है यह हुनर उसे सिखा दी थीं और इस हुनर का सही उपयोग करके आ जाओ अपनी नानी की बुर का भोसड़ा बना रहा था,,,,।

एक बार फिर से चुदाई का आनंद लेकर दोनों अपने कमरे में आ चुके थे और दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दिए थे लेकिन अभी भी नींद दोनों की आंखों से कोसों दूर थी कमरे में ट्यूबलाइट जल रही थी जिसकी दूरी और रोशनी में अंकित की नई का नंगा बदन अपनी मदहोशी भरी आभा बिखैर रहा था,,,, अंकित किरानी बिस्तर पर बैठकर अंकित को देख रही थी अंकित अभी भी दरवाजे के पास खड़ा था और उसका लंड दो बार की चुदाई के बाद हल्का सा झूल गया था,,, लेकिन अंकित की नानी अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित का लंड इस अवस्था में भी बुर में घुसेगा तो पूरी तरह से संतुष्ट करने के बाद ही बाहर आएगा,,,, अंकित की नई घड़ी की तरफ देखी तो 3:30 का समय हो रहा था,,, 2 दिन से दोनों सोए नहीं थे और वह दोनों इस बात का अच्छी तरह से समझ गए थे कि जो सोवत है वह खोवत है,,, और वाकई में अगर अंकित और उसकी नानी नींद को प्रधान्य देते तो शायद इस तरह का सुख कभी नहीं भूल पाए लेकिन उन दोनों ने नींद को त्याग कर भोग पर ध्यान केंद्रित किया तभी तो जवानी का मजा लूट रहे थे,,,,।

अंकित जानता था कि अभी भी दोनों के पास काफी समय है और आज की ही रात है कल की रात तो उसकी नानी ना जाने कहां होगी इसलिए वह आज की रात पूरी तरह से अपनी नानी के नाम कर देना चाहता था,,,, इसलिए अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए अपनी नानी के पास आता हुआ बोला,,,।

क्या नई तुम्हें नींद तो नहीं आ रही है ना,,,।

अरे हरामि जिसका तेरे जैसा नाती हो भला उसको नींद कैसे आएगी,,,।

तुम सच कह रही हो नानी और जिसकी नानी तुम्हारी जैसी हो भला ऐसे नाती को नींद कैसे आएगी,,,।

हरामी,,, पक्का मादरचोद बनेगा,,,,।
(अपनी नानी की बात को अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए मन ही मन में प्रसन्न हो रहा था,,,, अंकित अपनी नानी को उसके बताए अनुसार दो-तीन आसन से चोद कर सुख प्राप्त कर लिया था लेकिन अभी अपनी नानी पर एक आसन आजमाना बाकी था,,, जिस आसन को वह राहुल के घर देखा था वही आसन वह अपनी नानी पर आजमाना चाहता था,,,, अंकित अपनी आंखों से देखा था कि राहुल के लंड के ऊपर उसकी मां चढ़ी हुई थी और अपनी गांड जोर-जोर से पटक रही थी,,, और इसी तरह से अंकित भी अपनी नानी के साथ करना चाहता था,,,, जिस तरह से अंकित अपना लंड हिला रहा था एक बार फिर से उसमें खून का दौरा बढ़ने लगा था और उसका कड़कपन पहले की तरह होने लगा था,, यह देख कर अंकित की नानी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

हाय दैया क्या खाता है रे,,,, तेरा तो अभी भी खड़ा है,,,,,।

तुम्हारे जैसी बुर के लिए लंड को हमेशा खड़ा रहना पड़ेगा,,,

अच्छा तो तुम मेरे लिए लंड को खड़ा किया है,,,।

यहां और कोई है क्या,, सिर्फ तुम्हारे लिए,,,,(लंड को हिलाते हुए अंकित बोला,,,)

लेकिन मैं तो एकदम थक गई हूं,,,,।

बस एक बार और फिर सो जाना,,,,(इतना कहने के साथ एक बार फिर से वह अपनी नानी के करीब आकर उसे अपनी बाहों में भर लिया वह बिस्तर पर बैठी थी और वह पलंग के पास खड़ा था और इस तरह से अपने बाहों में अपनी नानी को भरकर उसके लाल-लाल होठों पर चुंबन करने लगा और उसे लेकर बिस्तर पर पसर गया लेकिन अगले ही पल वह फुर्ती दिखाता हुआ अपनी नानी को एकदम से अपने ऊपर ले लिया,,, उसकी इस हरकत से उसकी नानी एकदम से हक्की बक्की रह गई,,,, अंकित कुछ देर तक इस तरह से अपनी नानी को अपनी बाहों में लेकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखकर उसे सहलाता रहा तो बता रहा और उसका लंड बार-बार नीचे से उसकी बुर में घुसने की कोशिश करता रहा,,, अंकित की नानी थकी होने के बावजूद भी अंकित की हरकत से एक बार फिर से गर्म होने लगी और वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अंकित के लंड को पकड़ कर अपनी बुर में डालने की कोशिश करने लगी,,, यही तो अंकित चाहता था,,,,।

देखते देखते अंकित की नानी घुटनों के ऊपर बैठ गई और अपनी गांड को अंकित के लंड पर रखकर एक हाथ से लंड पकड़ कर उसे अपने गुलाबी छेद पर सटाने लगी,,, और जैसे ही गुलाबी छेद पर उसके लंड का सुपाड़ा स्पर्श हुआ अंकित की नई अपनी भारी भरकम गांड का दबाव अंकित के लंड पर बढ़ाने लगी और देखते ही देखते अंकित का लंड बुर की चिकनाहट पाकर अंदर की तरफ घुसने लगा,,, अंकित के लिए यह पल बेहद मदहोश कर देने वाला था,, अंकित पागल हो जा रहा था उसकी सांसे गहरी चलने लगी थी देखते-देखते अंकित की नई उसके लंड पर बैठकर उसके पूरे लंड को अपनी बुर की गहराई में छुपा ली थी,,,,, अंकित यह देखकर पूरी तरह से दंग रह गया था,,, अंकित अपनी नानी को देख रहा था और उसकी नानी अंकित को देख रही थी इस अवस्था में अंकित की नई कई बार मजा ले चुकी थी इसलिए उसे मालूम था कि क्या करना है,,, और देखते ही देखते हो अपनी बारी भर काम गांड को अंकित के लंड पर पटकना शुरू कर दी।

अपनी नानी की हरकत से अंकित बावला हुआ जा रहा था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और उसकी नानी जिस तरह से अपनी बड़ी-बड़ी गांड को पटक रही थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसकी हरकत से उसकी कामुक क्रियाओ,,, पेड़ पर लटके दशहरी आम की तरह झूल रही थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह तुरंत अपने दोनों हाथों को आगे बढ़कर अपनी नानी के दोनों चूचियों को थाम लिया था,,, और उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया था,, अंकित की नई अपनी गांड पटकने की रफ्तार को धीरे-धीरे बढ़ा रही थी और ऐसे हालात में,,, लंड और बुर के मिलन से एक अद्भुत ध्वनी उत्पन्न हो रही थी,,,। फच्च फच्च की आवाज से पूरा कमरा गुंज रहा था,,, इस क्रिया को करने में अंकित की नानी को भी बहुत मजा आ रहा था वह भी बड़ी जो उसके साथ जोर-जोर से अपनी गांड को पटक रही थी और हर बार अंकित का लंड पूरी तरह से उसके बच्चेदानी से टकरा जा रहा था।

फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगी और अंकित की रानी इस अवस्था में उसके ऊपर एकदम से पसर गई,,,,, झड़ने के बाद अंकित इस अवस्था में अपनी नानी की चिकनी पीठ पर अपनी हथेली रखकर उसे सहलाता रहा उसकी नानी एकदम से थक चुकी थी और इसीलिए कब उसकी आंख लग गई उसे पता ही नहीं चला अंकित भी अपनी नानी को नहीं जागना चाहता था और इसीलिए उसकी पीठ को सहलाते सहलाते वह भी सो गया,,, सुबह जब अंकित की नई की आंख खुली तो देखी कि वह तो अभी भी अंकित के ऊपर थी और अंकित सो रहा था और उसे महसूस हुआ कि अंकित का लंड अभी भी उसकी बुर में घुसा हुआ था,,, अंकित को देखकर उसकी नानी मुस्कुराने लगी और उसके माथे पर चुंबन कर दी जिससे अंकित की भी नींद खुल गई। दोनों उठकर अपने कपड़े पहन कर अपने आप को एकदम व्यवस्थित कर लिए,,।

आज तृप्ति को भी अपनी नानी के साथ गांव जाना था उसका मन तो नहीं कर रहा था लेकिन वह भी गांव को देखना चाहती थी एक बार घूमना चाहती थी क्योंकि अपनी जानकारी में अभी तक वहां अपने गांव नहीं गई थी,,, सुगंधा रास्ते के लिए दोनों के लिए खाना तैयार कर ली थी 10 12 घंटे का सफर था और बस से जाना था,,,, और बस रात को 9:00 की थी सब कुछ तैयार हो चुका था वैसे तो सुगंधा तृप्ति को इस तरह से अकेले उसकी नानी के साथ जाने नहीं देना चाहते थे लेकिन वह भी बहुत कुछ सोच रही थी उसके मन में बहुत से ख्याल चल रही थी और उन ख्यालों के चलते सुगंधा को तृप्ति को गांव भेजना ही था,,,। दोनों को छोड़ने के लिए अंकित को बस स्टॉप तक जाना था और यहां से बस स्टॉप तकरीबन 20-25 मिनट की दूरी पर थी जहां पर जाने के लिए ऑटो करना पड़ता था।

मुख्य सड़क पर आकर वहां से औटो पर तीनों बैठ गए रास्ते भर तृप्ति से नजर बचाकर अंकित की रानी बार-बार उसके पेंट के आगे वाले भाग पर अपना हाथ रख दे रही थी जिसे अंकित का लंड खड़ा हो चुका था,,,, अंकित की नानी अपनी हरकतों से अंकित को पूरी तरह से उत्तेजित कर दी थी और अंकित को इस बात का डर था कि कहीं उसकी बड़ी बहन तृप्ति यह सब ना देख ले ,,,, रह रहे कर अंकित की नानी जोर से पेट के ऊपर से ही उसका लंड दबा दे रही थी जिसे अंकित की हालत खराब हो जा रही थी,, अंकित की नानी पूरी तरह से चुदवासी हुए जा रही थी इस बात का ऐहसास अंकित को हो गया था,,,और निश्चित दूरी तय करने के बाद ऑटो बस स्टॉप पर पहुंच गया था,,, बस स्टॉप शहर के छोर पर था जहां से बस ढेर सारी शहर और गांव की तरफ जाती थी यह बस स्टॉप शहर से थोड़ा बाहर होने की वजह से अगल-बगल जंगली झाड़ियां उगी हुई थी,,,, बड़े-बड़े पेड़ चारों ओर छाए हुए थे वैसे तो यहां का नजारा भी थोड़ा बहुत गांव की तरह ही लगता था लेकिन यह एकदम शहर से सटा हुआ था इसलिए गांव कहना मूर्खता ही थी,,, बहुत से लोग बस स्टॉप पर इकट्ठा हुए थे,,, क्योंकि गर्मियों का महीना था और स्कूल कॉलेज में छुट्टी हो चुकी थी इसलिए लोग अपने-अपने गांव की तरफ जा रहे थे,,, अंकित बस काउंटर पर से अपनी नानी के गांव की दो टिकट ले लिया था,,, बस लगी हुई थी लोग धीरे-धीरे अंदर बैठ रहे थे अपनी जगह पर अंकित भी टिकट लेकर और सामान लेकर आगे आगे चलने लगा और पीछे-पीछे उसकी नानी और तृप्ति चलने लगी,,,।

थोड़ी ही देर में अंकित उचित स्थान पर तृप्ति और अपनी नानी को बैठा दिया था उसका जाने का मन नहीं कर रहा था क्योंकि रास्ते में जिस तरह की हरकत उसकी नानी ने की थी वह पूरी तरह से चुदवासा हो चुका था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अभी भी बस को चलने में 20-25 मिनट का समय था और वह बस से नीचे उतर कर अपने लंड की अकड़ को कम करने के लिए पेशाब करने के लिए चला गया,,, वहीं पर यात्रियों के लिए छोटा सा बाथरूम बना हुआ था जिसमें लोग पेशाब कर रहे थे लेकिन ठीक उसके पीछे अंधेरा और जंगली झाड़ियां थी अंकित बाथरूम में ना जाकर के उसके पीछे जाकर वहां का मुआयना करने लगा और पेशाब करने लगा थोड़ी देर में उसे एहसास होने लगा कि पीछे यहां पर कोई नहीं आ रहा था और चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था यह देखकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह तुरंत पेशाब करने के बाद वापस पास में चढ़ गया और अपनी नानी से बोला,,,,।

नानी 10 12 घंटे का सफर है अगर बाथरूम का उपयोग करना चाहो तो कर सकती हो,,,,(ऐसा कहते हुए वह अपनी नानी को इशारा करके नीचे उतरने के लिए कह रहा था,,, और उसकी अंकीत के ईसारे को अच्छी तरह से समझ रही थी,,,, लेकिन तृप्ति से भी पूछना जरूरी था इसलिए उसने तृप्ति से धीरे से पूछी तो तृप्ति इनकार कर दी और उसकी इनकार को सुनकर अंकित की नानी के चेहरे पर प्रसन्नता के भावना चलने लगे वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और औपचारिकता निभाते हुए अंकित से बोली,,,,)

अभी कितना समय है बस को चलने में,,।

बस 20 मिनट जैसा है,,,,।

चल तब तो ठीक है कुछ खाने को भी ले लूंगी,,,

लेकिन नानी मम्मी ने तो खाने के लिए दी है ना,,,(तृप्ति बीच में बोल पड़ी)

तो क्या हो गया कुछ और खरीद लूंगी खाते हुए चलेंगे,,,।

ठीक है नानी अगर हो तो समोसे ले लेना,,,(खुश होते हुए तृप्ति बोली)

ठीक है मैं खरीद लूंगी तु यहीं पर बैठ कर सामान का ध्यान रखना ऐसे में सामान चोरी हो जाता है,,,(अंकित की नानी जानबूझकर तृप्ति को सामान चोरी होने का डर बता रही थी ताकि वह बस से नीचे ना उतरे,,,, और इतना कह कर वह अंकित के साथ बस से नीचे उतर गई,,,, बस से थोड़ी दूरी पर जाने के बाद अंकित की नानी मुस्कुराते हुए अंकित से बोली,,,)

तेरे मन में चल क्या रहा है,,,।

क्या करूं नानी ऑटो में तुमने मेरी हालत खराब कर दी मेरा लंड है कि बैठने का नाम नहीं ले रहा है,,,,।

वह सब तो ठीक है लेकिन यहां करेंगे कैसे कोई जगह तो दिखाई नहीं दे रही है जहां पर आराम से कर सके,,,।

तुम चिंता मत करो नई में जगह देखने के बाद ही तुम्हें लेकर आया हूं,,,।

बहुत चालाक हो गया है तू,,,, पक्का मादरचोद बनेगा,,,,।
(अंकित की नई बार-बार उसे मादरचोद बनाने पर जोर दे रही थी उसे इस बात की आशंका थी कि उसके जाने के बाद उसके और उसकी बेटी के बीच जरूर कुछ होने वाला है,,, थोड़ी देर में अंकित अपनी नानी को लेकर बाथरूम के पीछे वाले जगह पर पहुंच गया जहां पर चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था,,,, इस जगह को देखकर अंकित की नानी मन ही मन प्रसन्न तो हो रही थी और इस बात से और खुश हो रही थी कि उसका नाती एक ही रात में एकदम हरामी बन चुका था अब जगह का भी प्रबंध करना सीख गया था,,,, समय ना बर्बाद करते हुए अंकित तुरंत अपनी नानी का हाथ पकड़ा और उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने लगा और अपने दोनों हाथों से साड़ी के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दबाना शुरू कर दिया,,,, अपने नाती किस तरह की हरकत से उत्तेजित होते हुए वह बोली,,,।

अरे बेवकूफ इन सब में समय बर्बाद मत कर कहीं ऐसा ना हो कि हम दोनों चुदाई करते रहें और तृप्ति को लेकर बस निकल जाए,,,(ऐसा कहते हुए अंकित की नानी अंकित की बाहों में से अलग होने लगी,,,, और तुरंत अपनी साड़ी को पकड़ कर एकदम से कमर तक उठा दे और अपनी नंगी गांड अंकित के सामने परोस दी वैसे तो चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था लेकिन इतना तो दिखाई दे रहा था कि अंकित की आंखों के सामने क्या है वह तुरंत अपनी पेंट का बटन खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल दिया जो की काफी देर से तड़प रहा था,,, और तुरंत अपने लंड को अपनी नानी की बुर में डाल दिया और जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया वह जानता था कि उन दोनों के पास समय वाकई में बहुत कम है।

खेतों में नदी के किनारे तालाब में कहीं जगहो पर अंकित की नानी चुदाई का मजा लूट चुकी थी लेकिन आज पहली बार वह बस स्टॉप पर इस तरह से अंधेरे का फायदा उठाते हुए अपने ही नाती से चुदवा रही थी,,,, अंकित अपने धक्को में किसी भी प्रकार की कमी महसूस होने नहीं देना चाहता था,,, इसलिए अंकित की नानी मस्त हुए जा रही थी,,,, अंकित के ताबड़तोड़ तेज प्रहार की वजह से अंकित की नई अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी और आगे की तरफ लुढ़क जा रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं वह गिर ना जाए लेकिन अंकित उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर संभाले हुए था और अपनी कमर हिला रहा था और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झढ गए,,,,।

अंकित की नानी चुदवाने के बाद वहीं बैठकर पेशाब करने लगी,,,, पेशाब करने के बाद वह अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके वापस बस स्टॉप पर आ गई और मिठाई की दुकान पर कुछ मिठाई और समोसे खरीदने लगी,,,, अंकित की नई थोड़ी मिठाइयां और समोसे खरीद कर अंकित को दे दी थी और फिर वापस बस में बैठ गई थी बस में बैठने के बाद थोड़ी देर में बस चालू हो गई और उसकी नानी मुस्कुराते हुए अपने गांव की तरफ चल दी,,,।

अंकित अपनी नानी और अपनी बड़ी बहन को बस में बैठ कर अपने घर वापस लौट आया था एक अद्भुत अनुभव के साथ,,, जो कुछ भी हुआ था उसे अंकित को बहुत कुछ सीखने को मिला था,, वह कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी नानी एकदम छिनार होगी उसका व्यवहार एकदम रंडियों की तरह होगा, लेकिन अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था कि अगर उसकी नानी रंडी और छिनार की तरह न होती तो शायद उसे इतना अद्भुत सुख कभी नहीं मिल पाता,,, उसकी नानी के छीनरपन में ही उसे एक अद्भुत अनुभव मिला था जिस अनुभव के चलते हैं किसी भी औरत पर अपना वर्चस्व कायम कर सकता था। वैसे तो उसका पूरा ध्यान उसकी खुद की मां पर पूरा वर्चस्व कायम करने पर लगा था,,, नानी को संतुष्ट कर लेने के बाद उसका आत्मविश्वास बढ़ चुका था। लेकिन फिर भी वह अपनी मां के साथ किस तरह से आगे बढ़ेगा यही सोच रहा था।

घर पर पहुंचा तो देखा उसकी मां दरवाजे पर खड़ी होकर बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार कर रही थी अपनी मां को दरवाजे पर इस तरह से खड़ी देख कर उसके मन में उसके कल्पना का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ने लगा और वह अपने मन में सोचने लगा की काश ऐसा दिन है कि उसकी मां इसी तरह से अधनंगी या पूरी तरह से नंगी होकर बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार करें,,, और वह दरवाजे से ही उसे गोद में उठाकर उसके कमरे में ले जाए और बिस्तर पर उठाकर पटक दे और फिर उसे जी भर कर प्यार करें ऐसा ख्याल मन में आते ही बदन में उत्तेजना कि सीरहन सी फैलने लगी,,, वह जानता था कि यह सब ख्याली पुलाव है लेकिन अगर उसकी नानी कुछ दिन और रूकती तो उसकी यह कल्पना हकीकत में बदल जाति।

घर पर पहुंचते ही उसकी मां तो दरवाजा खोलकर ही दरवाजे पर खड़ी होकर उसके आने का इंतजार कर रही थी वह बोली,,,।

ठीक से तो बैठ गई ना,,,

हां मम्मी दोनों आराम से बैठ गए,,,।

तू इतनी जल्दी आ गया,,,।

जल्दी कहां 2 घंटे लग गए,,,।

बस चली गई थी या सिर्फ बैठा कर आ गया,,,।

बस के जाने के बाद ही आया हूं,,, कल सुबह तक तो दोनों गांव भी पहुंच जाएंगे,,,।

चलो अच्छा हुआ,,,, आराम से पहुंच जाएंगे मेरा तो मन नहीं लग रहा है पहली बार तृप्ति को अपने से दूर गांव भेज रही हूं,,,।

मुझे भी अच्छा नहीं लग रहा है,,,(घर में प्रवेश करते हुए अंकित बोल और खास करके उसे अपनी नानी के लिए अच्छा नहीं लग रहा था वह जानता था कि अगर उसकी नानी होती तो आज की रात फिर से रंगीन हो जाती,,, लेकिन एक बात की तसल्ली अंकित के मन में थी कि अब वह और उसके मन दोनों घर पर अकेले ही होंगे,,, और यही तसल्ली सुगंधा को भी थी,,,, अगर उसका आकर्षण अपने बेटे की तरफ ना होता तो शायद वह तृप्ति को अकेली गांव जाने ही ना देती,,, मन के लालच ने उसे मजबूर कर दिया था तृप्ति को अपने से दूर गांव भेजने के लिए क्योंकि उसे भी घर में अपने बेटे के साथ अकेलापन चाहिए था। सुगंधा भी घर में प्रवेश करके दरवाजा बंद कर दि और कड़ी लगा दी,,, घर में काफी खालीपन लग रहा था,, जिसका एहसास दोनों का अच्छी तरह से हो रहा था,,,।

तू हाथ मुंह धो ले मैं खाना लगा लेती हूं,,,।

ठीक है मम्मी,,,(इतना कहकर अंकित हाथ मुंह धोने के लिए बाथरूम चला गया और उसकी मां किचन में खाना लगाने के लिए चली गई थोड़ी ही देर में वह अपने हाथ में दो थाली लेकर आई और अंकित के साथ खाना खाने लग गई,,, लेकिन इस समय उसके मन में अंकित को लेकर किसी भी प्रकार का आकर्षण या वासना का एहसास नहीं हो रहा था क्योंकि समय उसका पूरा ध्यान तृप्ति पर था,,,, अंकित के मन में ऐसा था कि खाना खाने के बाद टीवी देखते हुए अपनी मां से कुछ इधर-उधर की बातें करेगा और नसीब अच्छी रही तो कुछ देखने को मिल जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ खाना खाने के तुरंत बाद उसकी मां बोली।

बर्तन सुबह में माजूंगी,,, आज बहुत थक गई हूं जा रही हूं सोने तु भी समय पर सो जाना,,,,।
(सुगंधा की यह बातें अंकित के अरमानों पर पानी फ़िर दिए थे वह कुछ देर अपनी मां के जाने के बाद वहीं बैठना और फिर वह भी धीरे से अपने कमरे में चला गया और सोने की तैयारी करने लगा आज उसे अपने कमरे में अच्छा नहीं लग रहा था उसका खुद का कमरा उसे काटने को दोड़ रहा था,,, क्योंकि अपने कमरे में प्रवेश करते हैं अपने बिस्तर को देखते ही उसे अपनी नानी याद आने लगी थी दो दिन में उसकी नानी उसके बेहद करीब आ गई थी,,, यह यू कह लो कि उसकी नानी अंकित के लिए बहुत कुछ बन गई थी दोस्त प्रेमीका पत्नी सब कुछ,,, बिस्तर पर पड़ी सिलवटें रात की मधुर कहानी कह रही थी क्योंकि सुबह कमरे से निकलने के बाद अंकित रात को ही अपने कमरे में प्रवेश किया था और रात को जिस तरह से बात नहीं नहाने की घमासान चुदाई किया था उसकी निशानियां अभी तक उसके बिस्तर पर दिखाई दे रही थी जगह-जगह उसे धब्बे दिखाई दे रहे थे और वह अच्छी तरह से जानता था कि वह धब्बे किसके हैं,,,,।

आखिरकार मन महसूस कर वह बिस्तर पर लेट किया और अपनी नानी के बारे में ही सोचता रहा,, उसे कब नींद आ गई उसे खुद को पता नहीं चला,,, बड़ी सवेरे सुगंधा की नींद टूट चुकी थी वह जाग गई थी पहले तो उसे सब कुछ सामान्य लगा लेकिन जैसे उसे एहसास हुआ की तृप्ति घर पर नहीं है वह अपनी नानी के साथ गांव गई है तो वह एकदम से उठकर बिस्तर पर बैठ गई घर में तृप्ति के न रहने से सुगंध को भी अजीब सा एहसास हो रहा था लेकिन बहुत ही जल्दी वह स्वस्थ हो गई वह अपने मन को दिलासा देने लगी कि जो कुछ भी उसकी मां कह रही थी वह सच ही है ,,,गांव जाकर वहां का रहन सहन सीख जाएगी तो उसके लिए अच्छा होगा अब किस्मत का क्या भरोसा हो सकता है कि उसकी शादी गांव में ही हो जाए अगर वह गांव को अच्छी तरह से समझ नहीं पाई की तो शादी के बाद का जीवन बड़ा मुश्किल हो जाएगा इसलिए उसकी मां ने जो कुछ भी किया वह सही कीया। ऐसा सोचकर वह अपने मन को तसल्ली देने लगी। उसके चेहरे पर ताजगी दिखाई दे रही थी,,, वह कुछ देर तक बिस्तर पर इस तरह से बैठी रह गई और जब दीवार की तरफ देखी तो घड़ी में 4:30 का समय हो रहा था सुबह होने में अभी भी समय वैसे तो यह समय सुबह का ही था लेकिन चारों तरफ अंधेरा ही था,,,।

सुगंधा के मन में अनेक विचार चल रहे थे अभी स्कूल की छुट्टी भी थी और उसके पास कुछ ज्यादा करने के लिए काम नहीं था तो वह सोची थोड़ा योग कर ले और अपने बदन को थोड़ा और कस ले, क्योंकि उसे लगने लगा था कि उसका पेट थोड़ा बाहर आ रहा है और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी वह अपनी खूबसूरती और अपने बदन की बनावट को अच्छी तरह से समझती थी इसलिए उसे लगने लगा था कि उसे थोड़ा योग कसरत करना चाहिए ताकि उसका शरीर ज्यादा बढ़ ना पाए और शरीर योग की वजह से और भी ज्यादा कसा हुआ और चमकीला आकर्षण बन जाए,,, आखिरकार औरतों के पास उसके खूबसूरत बदन के सिवा होता ही क्या है मर्दों को आकर्षित करने के लिए,,,, ऐसा सोच कर वह मन ही मन मुस्कुराने लगी और वह धीरे से अपनी बिस्तर पर से नीचे उतर गई,,,,, ट्यूबलाइट की स्विच दबाकर वह कमरे में पूरी तरह से रोशनी फैला दी और आईने में अपने खूबसूरत शक्ल को देखने लगी लेकिन इस समय सो कर उठने की वजह से बाल बिखरे हुए थे चेहरा तो खूबसूरत लगी रहा था लेकिन योग्य रूप में नहीं था इसलिए धीरे से कंगी लेकर वह अपने बाल को संभालने लगी और उसे धीरे से जुड़े के रूप में गोल-गोल बांध ली और फिर अपने चेहरे को देखने लगी बाल की एक लट उसके गालों पर लहरा रही थी जो कि उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे,,,।

वह मुस्कुराते हुए अपने कमरे से बाहर निकली,,, और सीढ़ियां चढ़ने लगी अगले ही पल वह अपनी छत पर थी सुबह का समय होने की वजह से बड़ी शीतल हवा दे रही थी जो उसके बदन में ठंडक प्रदान कर रही थी खुली हवा में सांस लेने में उसे भी बहुत राहत महसूस हो रही थी और वैसे भी गर्मी का समय था इसलिए छत पर उसे अच्छा महसूस हो रहा था वह अपने मन में सोच रही थी कि गर्मी के महीने में छत पर ही सोना चाहिए इतनी अच्छी हवा बह रही है वरना पंखे की हवा भी गर्मी के महीने में कुछ असर नहीं करती,,, सुगंधा पूरे छत पर इधर-उधर चक्कर लगाने लगी थी एक तरह से वह अपने छत पर ही मॉर्निंग वॉक कर रही थी और से अच्छा भी लग रहा था नंगे पैर छत की फर्श और भी ज्यादा ठंडक प्रदान कर रही थी कुछ देर तक सुगंध इसी तरह से छत पर चक्कर लगाती रही,,,, दूर-दूर तक अंधेरा ही छाया हुआ था हालांकि जगह-जगह पर नाइट बल्ब जल रहे थे जिससे पता चल रहा था कि उस स्थान पर कोई घर है,,, वैसे भी सुगंधा की छत दूसरी चोटो की अपेक्षा थोड़ी बड़ी थी और लंबी भी बाकी की छत सुगंधा की छत से नीचे ही थी और ऐसे में सुगंधा सबकी छत पर नजर रख सकती थी लेकिन अंधेरा होने की वजह से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

कुछ देर तक मॉर्निंग वॉक करते-करते वह थोड़ा थक गई थी इसलिए रुक गई और गहरी गहरी सांस लेकर अपनी स्थिति को व्यवस्थित करने लगी,,, वह अपनी मां के बारे में सोच रही थी उसकी मां जिस तरह की हिदायत उसे दे रही थी उसमें झूठ की गुंजाइश बिल्कुल भी नहीं थी वह सच ही बोल रही थी शायद वह घर के अंदर एक मर्द और पुरुष की स्थिति को अच्छी तरह से समझ सकती थी उनका कहना ठीक ही था कि उसका इस तरह से कपड़े बदलना या बेफिक्र होकर पेशाब करने बैठ जाना यह आदत घर में जवान लड़के के होते हुए बाद गंभीर स्वरूप ले लेती है भले ही वह जवान लड़का उसका खुद का सगा बेटा क्यों ना हो। सुगंधा अपनी मां की कहानी-कहानी बातों के बारे में सोच रही थी और फिर अपने आप से ही मुस्कुराते हुए बोली।

मैं भी तो यही चाहती हूं जैसा मेरी मां मुझे समझ रही थी वैसा सब कुछ थोड़ा-थोड़ा मेरे साथ भी तो होता है और ऐसा नहीं है कि मेरा बेटा मुझे चोरी छुपे देखने की कोशिश करता है बल्कि मैं खुद उसे सब कुछ दिखाने के लिए तैयार रहती हूं और किसी ने किसी बहाने अपने अंगों का प्रदर्शन उसके सामने करती ही रहती हूं,,, अपने आप से ही इस तरह की बात करते हुए उसे उत्तेजना महसूस हो रही थी। सुगंधा अपनी मां की कही गई बात के बारे में सोच रही थी कि अगर ऐसा ही चला रहा तो उसका खुद का जवान लड़का उसके ऊपर चढ़ जाएगा और शायद दूसरे घरों में यही सब होता है तभी तो उसकी मां इस तरह की उसे हिदायत दे रही थी और हिदायत देते हुए एक उदाहरण भी दे रही थी जो उसके गांव में हो चुका था,। और सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि अगर उसकी मां उसे उदाहरण दे रही थी तो हो सकता है कि यह ऐसा ही चलता रहा था उसके भी घर में वही सब होगा जिसके लिए उसकी मां उसे समझा रही थी। और वैसे भी अंकित पूरी तरह से जवान हो चुका है उसे भी तो इस उम्र में औरतों के प्रति आकर्षण होता ही है यह तो वह अच्छी तरह से जानती है उसे बुर की भी जरूरत पड़ती होगी अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए इसका एहसास भी सुगंधा को अपने कमरे में हो चुका था जब वह गहरी नींद में सो रही थी और उसकी नींद का फायदा उठाते हुए अंकित उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर को अपने हाथों से स्पर्श करके मजा ले रहा था और अपने होठों को उसके गुलाबी छेद पर लगाकर उसके मदन रस का स्वाद भी लिया था अपने मन में इस तरह का ख्याल आते ही सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजना से गनगना गई,,,।

काफी देर तक वह अपनी मां और अपने बेटे के बारे में सोचती रही धीरे-धीरे अंधेरे की गहराई काम हो रही थी सूरज अपने समय पर निकलने वाला था और सुगंधा योग कर रही थी,,, योग करने के बाद वह थोड़ा हल्का-फुल्का कसरत करने लगी लेकिन तभी अंकित की भी नींद खुल गई और वह अपनी मां के कमरे में देखा तो उसका दरवाजा खुला हुआ था और दरवाजा अंदर से बंद था उसे लगा कि उसकी मां बाथरूम गई होगी लेकिन बाथरूम का भी दरवाजा खुला हुआ था तब वह खुद ही धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ता हुआ छत की तरफ जाने लगा और जैसे ही छत पर पहुंचा तो देखा उसकी मां कसरत कर रही थी,,, वह खड़ी थी और हाथ ऊपर करके आगे की तरफ झुकने वाली थी उसकी पीठ अंकित की तरफ थी अंकित खड़ा होकर अपनी मां को देखने लगा,,,, सुगंधा के बदन पर गाउन था वह रात को साड़ी निकाल कर गाउन पहन कर सोई थी,,,, अंकित उत्सुकता के साथ अपनी मां को देख रहा था वह बिल्कुल भी आवाज नहीं कर रहा था नहीं तो उसकी मां कसरत नहीं करती,,,।

अंकित को साफ दिखाई दे रहा था उसकी मां अपने हाथों पर करके धीरे-धीरे झुक रही थी और जैसे-जैसे वह झुक रही थी उसके नितंबों का घेराव गाउन में भी बढ़ता जा रहा था और यह देखकर अंकित उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, और देखते ही देखते सुगंध पूरी तरह से झुक गई और अपने पैर के अंगूठे को अपने हाथ की उंगलियों से पड़कर गहरी गहरी सांस लेते हुए सांस को रोक दी अंकित यह सब पीछे खड़ा देख रहा था इस समय जिस मुद्रा में उसकी मां थी बेहद गजब की मुद्रा थी उसकी मां की गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी नजर आ रही थी,,,, अंकित का मन कर रहा था कि इसी समय अपनी मां के पीछे चला जाए और उसका गाउन कमर तक उठा कर ईसी अवस्था में पीछे से उसकी चुदाई करना शुरू कर दे,,, और वैसे भी एक औरत की जबरदस्ती चुदाई कैसे की जाती है यह सब कुछ उसकी नई सीखा कर गई थी और एक औरत को खुश करने की कला अंकित समझ गया था उसे पूरा विश्वास था कि अगर उसकी मां इस समय मौका दे तो वह उसे भी पूरी तरह से संतुष्ट कर सकता है,,,,।

लेकिन इस समय वह कुछ भी कर सकते की स्थिति में नहीं था वह सिर्फ अपनी मां को देख सकता था इस पल का फायदा नहीं उठा सकता था क्योंकि इतनी भी उसमें हिम्मत नहीं थी भले ही वह मिलने की चुदाई कर चुका था संभोग सुख को महसूस कर चुका था एक औरत के पूरे अंदर से कितनी गर्म होती है और लंड के अंदर जाने पर लंड की क्या स्थिति होती है यह सब कुछ बात समझ चुका था,, लेकिन कुछ कर नहीं सकता था भले ही वह अपनी नानी के साथ संभोग सुख प्राप्त कर चुका था लेकिन अभी भी उसका ज्ञान अधूरा था,,, अभी संपूर्ण रूप से उसे संभोग कला में महारत हासिल करना बाकी था,,, क्योंकि अभी तो उसका पल सिर्फ एक छिनार से पड़ा था जो किसी भी तरह से सिर्फ संभोग सुख प्राप्त करना चाहती लेकिन अभी बेलगाम घोड़ी को काबू करना बाकी था और एक बेलगाम घोड़ी को काबू करना मतलब लोहे के चने जबाने जैसा था,,, और वह बेलगाम घोड़ी थी सुगंधा जवानी से भरी हुई,, भले ही वह दो जवान बच्चों की मां थी लेकिन बरसों पहले ही उसके पति का देहांत हो जाने की वजह से,,, बरसों से उसकी जवानी कोरी पड़ी थी जिस पर उसके पति के सिवा अभी किसी के भी दस्तखत नहीं हुए थे।

और अंकित की नई तो कागज का वह पूर्जा बन चुकी थी,,, जिस पर आए दिन किसी के भी दस्तखत हो ही जाते थे,,,, सुगंधा की बुरनुमा जमीन वर्षों से बंजर पड़ी थी,,, उस पर बिल्कुल भी खेती नहीं हुई थी,,, सुगंधा का खेत जुतना बाकी था,, अब उसके खेत की जुताई कैसे होती है यह देखने वाली बात थी,,, सुगंधा की बेलगाम जवान को काबू कार्पण अंकित के बस में था या नहीं यह आने वाला समय ही बताने वाला था लेकिन न जाने क्यों सुगंधा को अपने बेटे पर पूरा भरोसा था,,, उसे पूरा यकीन था कि,, जिस दिन भी इस घोड़ी की सवारी उसका बेटा करेगा सीधा मंजिल पर ही जाकर रुकेगा,,,।

सुगंधा अपनी मस्ती में कसरत कर रही थी,,, वह इस तरह से झुकी हुई थी उसकी बड़ी-बड़ी गाना गाऊन में भी अपना आकार अपना प्रभाव बिखेर रही थी,,, यह मदहोश कर देने वाला नजारा देखकर अंकित से रहा नहीं क्या और वह धीरे से अपनी मां के करीब पहुंच गया और बोला,,,।

क्या बात है मम्मी आज का कसरत की जा रही है,,,।
(सुगंधा को इस बात का अहसास तक नहीं हुआ था कि अंकित उसके बेहद करीब पहुंच गया है इसलिए वह उसकी आवाज सुनकर एकदम से डर गई थी और एकदम से उठकर खड़ी हो गई थी और अंकित को अपने पास खड़ा देखकर उसकी जान में जान आई थी और वह अपनी सांसों को व्यवस्थित करते हुए बोली,,)

बाप रे मैं तो डर ही गई थी,,,।

क्यों क्या हुआ,,,?

तेरे आने की जरा भी आहट नहीं हुई,,,, बोल नहीं सकता कि मैं आ रहा हूं,,,,।

अरे मम्मी तो इसमेंक्या हो गया,,,!

इसमें क्या हो गया मेरी पूरी हालत खराब हो गई देख मेरे दिल की धड़कन,,,(इतना कहने के साथ ही अपने बेटे का हाथ पकड़ कर उसकी हथेली को अपनी छाती से लगा ली,,,) कितनी जोर-जोर से धड़क रहा है,,,,,(अंकित तो अपनी मां की हरकत पर पूरी तरह से हैरान हो गया था उसकी हथेली पूरी तरह से उसकी दुनिया चूचियों के बीच थी हल्के से ऊपरी सतह पर जहां से चुचियों का उभार शुरू होता था,,, और वैसे भी गाउन पहनने के बावजूद भी गांव में से भी उसकी दोनों चूचियों के बीच की गहरी लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उसे पर ही अंकित की हथेली थी अंकित की तो हालात पूरी तरह से खराब हो गई,,,,, अंकित भी एकदम मन लगाकर अपनी मां की दिल की धड़कन को सुनने लगा और साथ ही उसकी चूचियों की नरमाई को महसूस करने लगा,,,, सुगंधा भी थोड़ी बहुत घबराहट की वजह से गहरी गहरी सांस ले रही थी जिससे उसकी चुचियों का उठाव और बैठाव दोनों अंकित को अपनी हथेली पर साफ महसूस हो रहा था पल भर में अंकित के पेंट में तंबू बनने लगा ,,,,

सुगंधा को भी एहसास हुआ कि वह डर के मारे जल्दबाजी में शर्म जनक हरकत कर दी है,,,, अब इस स्थिति से कैसे निपटा जाए उसके बारे में सोचने लगी क्योंकि वह खुद अपने बेटे की हथेली को अपने हाथ में लेकर अपने सीने से लगाए हुए थी,,,, सुगंधा अपने बेटे के चेहरे की तरफ देख रही थी उसके चेहरे पर हवाई उड़ रही थी उसके चेहरे पर उत्तेजना एकदम साफ झलक रहा था सुगंधा इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह की वह हरकत की है उसका बेटा क्या उसकी जगह कोई भी होता तो उसका लंड खड़ा हो जाता है और जब उसके मन में ख्याल आया तो अपने आप ही उसकी नजर अंकित के पेंट की तरफ चली गई और वाकई में उसे जगह पर हल्का-हल्का तंबू बनना शुरू हो गया था यह देखकर तो सुगंधा की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में कंपन होने लगा,,, उसकी बुर से उत्तेजना के मारे मदन रस टपकने लगा,,,, फिर भी अपने आप को संभालते हुए अपनी भावनाओं को काबू में करते हुए सुगंधा धीरे से अपने बेटे की हथेली को अपनी छाती पर से हटाती हुई बोली,,,)

चोरी छुपे मत आया कर बता दिया कर,,,।

अरे मम्मी मुझे क्या मालूम कि तुम एकदम से डर जाओगी और वैसे भी यह कसरत,,,,, क्यों,,,?(अंकित हैरान होते हुए बोला और उसकी बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)

क्यों तुझे नहीं लगता कि मुझे कसरत करना चाहिए,,,।

नहीं ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं लगता,,,।

मेरे बगल में तुझे बदलाव दिखाई दे रहा है,,,(ऐसा कहते हुए वह अपने दोनों हाथों को फैला दी और अपने बेटे को ठीक से अपना बदन दिखाने लगी जो कि गाऊन में छुपा हुआ था,,,,,, अपनी मां को इस तरह से देखकर वह बोला,,,)

थोड़ा पीछे घूमो,,,,

(अंकित की बात मानते हुए सुगंधा पीछे की तरफ घूम गई,,, जिससे उसका पिछवाड़ा अंकित की तरफ हो गया अपनी मां का भरा हुआ पिछवाड़ा देखकर अंकित का मन कर रहा था कि एकदम से उसके पीछे सात जाए और अपने पेट में बना तंबू उसकी गांड पर रगड़ रगड़ कर अपना पानी निकाल दे,,,, वह कुछ देर तक अपनी मां के मातबस कर देने वाले पिछवाड़े को देखता रहा जो की गाउन में होने के बावजूद भी अपने आकार को उपसा रहा था,,,, नजर भर कर देखने के बाद वह बोला,,,,)

मुझे तो कोई बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है,,,।

अरे बुद्धू तुझे नहीं लग रहा है लेकिन मुझे मालूम है मेरा पेट हल्का-हल्का बाहर निकल रहा है मुझे अच्छा नहीं लग रहा है इसलिए मैं योग और कसरत कर रही हूं,,,।

मुझे तो तुम अभी भी एकदम फिट लग रही हो एकदम कसा हुआ बदन तो है,,,,(अंकित जानबूझकर अपनी मां के सामने कसे हुए बदन जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहा था,,,, और सुगंधा ने भी अपने बेटे के द्वारा कहे गए इन शब्दों पर कुछ ज्यादा ही ध्यान दी थी और इस शब्द को सुनकर वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि यह भी एक तरह से उसके हुस्न की तारीफ ही थी,,, फिर भी एकदम मासूम बनते हुए वह बोली)

क्या कसा हुआ सब कुछ ढीला ढीला हो गया है,,, इसलिए तो मुझे चिंता हो रही है कहीं ऐसा ना हो जाए कि मैं जल्दी बूढी हो जाऊं,,,।

क्या बात कर रही हो मम्मी कभी आईने में अपने आप को अच्छी हो 20 साल की लड़कियां भी तुम्हें देख कर शर्मा जाए,,,,।
(अपनी नानी के साथ किए गए संभोग का ही नतीजा था कि वह धीरे-धीरे अपनी मां के सामने भी खुल रहा था और सुगंध भी अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर हैरान थी और वह अपने बेटे की बात सुनकर बोली)

20 साल की लड़की मुझे देखकर क्यों शर्मा जाएगी,,,,।

तुम्हारी खूबसूरती,,, तुम्हारे बदन की बनावट उसकी कसावट तुम्हारी लंबाई,,, सच में तुम किसी फिल्म की हीरोइन लगती हो,।

(अपने बेटे किस तरह की रोमांटिक बातों को सुनकर वह मस्त हुए जा रही थी उसका दिल एकदम गदगद हुआ जा रहा था फिर भी बनावटी गुस्सा दिखाते हुए वह बोली,,,)

चल रहने दे बातें बनाने को फिल्म की हीरोइन लगती हुं,,,,, जब सड़क पर चलती हूं तो कोई देखता भी नहीं है,,,(सुगंधा थोड़ा इतराते हुए बोली उसकी यह अदा अंकित को उत्तेजित कर रही थी और वह अपने मन में बोला तुम्हें क्या मालूम मम्मी तुम जब सड़क पर चलती हो तो सब की नजर तुम्हारी च और तुम्हारी गांड पर रहती है कितनी कसी हुई लगती है सच में तुम्हारे बारे में सोच कर कितनों का लंड खड़ा हो जाता होगा और कितने तो अपने हाथ से हिला कर पानी निकाल देते होंगे,,,, अंकित एक टक अपनी मां को देख रहा था,,, यह देखकर सुगंध थोड़ा शर्मा गई और अपने आप को व्यवस्थित करते हुए बोली,,,)

अगर मैं फिल्म की हीरोइन जैसी दिखती तो कोई तो मुझे देखता,,,, ऐसा तो कुछ भी नहीं होता,,,।

(अंकित अपनी मां की बात सुनकर अपने मन में सोचा अगर कोई देखे तो उसकी आंख ना नोच लुं अंकित बिल्कुल भी नहीं चाहता कि उसकी मां को कोई गंदी नजर से देखें लेकिन फिर भी बात बनाते हुए वह अपनी मां से बोला,,,)

यह तो तुम्हें लगता है लेकिन आते जाते सच कहूं तो लोग तुम्हें ही देखते हैं,,,।

तुझे कैसे मालूम,,,!

अरे मुझे मालूम है,,,,(अंकित के मन में भी कुछ और चल रहा था इसलिए अपनी बात को थोड़ा नमक मिर्च लगाकर बोल रहा था)

कैसे मालूम है बता,,,,,,

जब तुम सड़क पर जाती हो तो अपनी नुक्कड़ पर चाय की दुकान नहीं है,,,।

हां,, है,,,,।

वहीं पर सभी प्रकार के आदमी बैठे रहते हैं एक दिन में भी वहीं बैठा था और इस समय तुम सब्जी लेने के लिए जा रही थी तभी उनमें से एक आदमी बोला,,,।

बाप रे इतनी खूबसूरत औरत ऐसा लगता है कि जैसे मेरे सामने कोई फिल्म की हीरोइन जा रही है,,,।

क्या सच में,,,,,(सुगंधा एकदम उत्साहित होते हुए बोली,,,)

तो क्या मैं ठीक उसके पीछे बैठा था उसे नहीं मालूम था कि सामने जो औरत जा रही है उसका बेटा भी है और मालूम है उसने क्या कहा,,,,?

क्या कहा,,,,?

उसने कहा कि,,,, अगर मैं इसके बारे में जानता होता तो अपने घर वालों को उसके घर भेज कर शादी की बात कर लेता,,,,।

क्या,,,,(एकदम उत्साहित और हंसते हुए) सच में उसने ऐसा कहा क्या उसे नहीं मालूम कि मेरे दो बच्चे हैं मैं शादीशुदा हूं,,,,.

उसे क्या मालूम और वैसे भी तुम ऐसी लगती ही हो एकदम कसा हुआ बदन लगता है नहीं कि तुम दो बच्चों की मां हो तभी तो कहता हूं कि 20 साल की लड़की भी तुम्हारे सामने अपनी भरेगी,,,,।

और क्या कहा उसने,,,,।

और क्या कहेगा मैं तो वहां से उठ कर चला गया वैसे तो मेरा मन कर रहा था कि दो थप्पड़ लगा दु,,, लेकिन बड़ी मुश्किल से अपने आप को रोक कर वहां से चला बना क्योंकि मैं अब ईससे ज्यादा नहीं सुनना चाहता था,,,,‌

इससे ज्यादा मतलब,,,!

अरे जब वह इतना कुछ बोल रहा था तो और कुछ भी बोल सकता था कुछ गंदी बातें भी बोल सकता था जो मुझे सुनी नहीं जाती इसलिए मैं वहां से चलता बना और तुम कह रही हो कि मैं देखने लायक नहीं हूं,,,,।

अरे कसम से मुझे लगता है कि मेरा पेट बाहर निकल रहा है,,,,।

अच्छा कोई बात नहीं अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हारा पेट बाहर निकल रहा है तो कल से हम दोनों दौड़ने चलेंगे सुबह-सुबह बस और यह सब कसरत करने से पेट अंदर नहीं जाएगा अगर निकल रहा होगा तो थोड़ा चलोगी थोड़ा दौड़ोगी तभी सही होगा,,,।

तु ठीक कह रहा है जब तक स्कूल की छुट्टी है तब तक कसरत कर लेती हूं और जैसा तू कह रहा हूं अगर 1 महीने और कैसे कर लूंगी तो मेरा शरीर और आकर्षक हो जाएगा ना।

बिल्कुल,,,(अंकित बातों ही बातों में आज बहुत कुछ बोल देना चाहता था लेकिन किसी तरह से अपने आप को रोक ले गया था,,,, उसका दिल बड़ी जोर से धड़क रहा था अपनी मां से इस तरह की बातें करके और उसके पेंट में अच्छा खासा तंबू भी बन गया था,,, और वह नहीं चाहता था कि इस समय उसकी मां की नजर उसके पेंट में बने तंबू पर पड़े इसलिए ज्यादा बहस नहीं करना चाहता था लेकिन वह समझ गया था कि अब धीरे-धीरे बात बन जाएगी,,,, इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) अब जल्दी से नहा धोकर नाश्ता तैयार कर दो चल ठीक से खा नहीं पाया था बहुत जोरों की भूख लगी,, है,,,,।

मैं भी तृप्ति की वजह से कुछ खा नहीं पाई थी कुछ खाने का मन ही नहीं कर रहा था लेकिन आज मुझे भी भूख लगी है,,,, चल जल्दी से कुछ बना देती हूं,,,,।

(ऐसा कहकर दोनों छत से नीचे उतरने लगी आज दोनों के बीच बहस कुछ रोमांटिक मुद्दे पर हो रही थी जिसके चलते दोनों के बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी दोनों उत्तेजित भी हो रहे थे लेकिन अंकित ही इस मुद्दे को यहीं खत्म कर दिया था न जाने क्यों वहां आगे बढ़ने से डर रहा था भले ही इतनी हिम्मत दिखा लिया था लेकिन फिर भी उसे इस बात का डर था की कही उसकी कही गई बातें उसकी मां को झूठी ना लगे,,, क्योंकि इन सब के बारे में वह कुछ ज्यादा सोच विचार कर नहीं रखा था इसलिए वह इस मुद्दे को यहीं खत्म करके बहुत अच्छे से अपने मन में तैयारी करने के बाद फिर से अपनी मां से इसी तरह से बातचीत का दौरा आगे बढ़ाना चाहता था,,,,,)….

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