मां को चोदने के लिए लोगों ने उकसाया 4

माँ बेटा

असलम 5 फ़ीट 5 इंच ही लंबा था। उसका लंड क़रीब 6 इंच का था और बढ़िया मोटा था। लंड पूरा टाईट था। असलम का बदन बढ़िया गठीला था। असलम अपना लंड सहला रहा था।

असलम: नहीं मैडम नफ़ीसा को अब तक नहीं चोदा है। वो किसी ख़ास आदमी से ही चुदवाना चाहती है। उसको छोड़िए। मैडम, उस दिन जब आपने कहा कि अरविंद साहब आपको नहीं चोद पाये, तो मुझे बहुत आश्चर्य हुआ था। उनकी घरवाली अप्सरा जैसी सुन्दर है, फिर भी वे जितनी लड़कियों को चोदते हैं उतना कोई दूसरा टीचर नहीं चोदता हैं। मेरी कई माल उनसे बार-बार चुदवाती है। पिछली बार ज़रूर कुछ हुआ होगा। इस बार वो आपको बहुत खुश करेंगे। मनोज आपको चोदना चाहता है। कब समय दूं उसे?

मनोज हमारी ही क्लास में पढ़ता था, लेकिन दूसरे सेक्शन में था।

संगीता: मेरी बात ध्यान से सुन लो। मैं 2-3 दूसरे टीचर से भले ही चुदवा लूंगी, लेकिन इस अमित साहब के अलावा किसी भी दूसरे स्टूडेंट से कभी नहीं चुदवाऊंगी। मेरे लिए होटल में ही ग्राहक ढूंढो। हर कस्टमर से 2 घंटे का कम से कम 25 हज़ार चाहिए। 2 हज़ार तुम्हारा।

मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि हेडमास्टर मास्टर की बेटी इतना खुल कर धंधा करने की बात कर रही थी। संगीता की चूत में मैं पीछे से पूरी ताक़त से धक्के लगाता रहा।

संगीता: असलम सामने आओ। तुम्हारा मोटा लंड मुझे बहुत डरा रहा है।

असलम आगे बढ़ कर संगीता के पास आया। उसने एक हाथ से लंड को पकड़ लिया।

संगीता: तुम तो बहुत सालों से कॉलेज में काम कर रहे हो। कितनी लड़कियों को चोदा है?

संगीता ने उसका लंड पकड़ा तो उसने बेझिझक दोनों हाथों से संगीता की चूचियों को पकड़ा और दबाने लगा।

असलम: मैडम, मैं यहां 32 साल से नौकरी कर रहा हूं। मुझे चोदना मेरी अपनी अम्मी ने ही सिखाया। अब्बू ट्रक ड्राइवर थे, और ज़्यादातर घर के बाहर ही रहते थे। अम्मी दूसरे से भी चुदवाती थी। एक दिन जैसे ही उसका आदमी चोद कर बाहर गया, मैंने ये लंड उसकी बूर में पेल दिया। उसने बहुत ही मस्ती से चुदवाया।

असलम: जब मैंने चोदना शुरु किया तो फिर मरते समय तक उसने किसी और से नहीं चुदवाया। अम्मी ने ही मुझे यहां की लड़कियों और औरतों की दलाली करने के लिए कहा। उन्होंने ही कई माल को मुझसे मिलाया। संगीता मैडम, एक आपके सिवा मैंने जितनी भी लड़कियों और औरतों की दलाली की है सभी को चोदा है। अभी मैं 13 लड़कियों और 7 औरतों की दलाली करता हूं, आपके सिवाय सभी को चोदता हूं। आपकी दीदी को भी कई बार चोदा है, और आपकी मां को 20-22 साल से चोद रहा हूं।

असलम: 2 रात पहले आपकी मां इसी होस्टल के कमरा नंबर 17 में 2 लड़कों के साथ ही। उन दोनों से चुदवाने के बाद घर जा कर मालकिन ने मुझसे भी चुदवाया। सच मैडम, आप बहुत ही बढ़िया माल हो।

असलम की बात का असर हो या कुछ और संगीता ने असलम के लंड को चूसना शुरु किया और धीरे-धीरे लंड की पूरी लंबाई को मुंह के अंदर लेकर चूसने लगी।

मैं: असलम, तुमने अरविंद सर की घरवाली रेखा की दलाली भी की है ना? उन्हें भी चोदते हो?

असलम ने भी वहीं बात कही जो बनबारी ने कहा था कि रेखा धंधा नहीं करती है।

असलम: साहब, साली को अपने रंग रुप का बहुत घमंड है, और उपर से अरविंद साहब बढ़िया चुदाई भी करते हैं। हेडमास्टर साहब भी उसे 25-30 हज़ार देने को तैयार हैं। मैंने कई बार रेखा से धंधा करने कहा है, लेकिन मानती ही नहीं है। साहब किसी तरह आप अपना लंड रेखा को दिखा दीजिए वो ज़रूर आपसे चुदवायेगी। बाप रे, इतना लंबा और मोटा लंड मैंने पहले नहीं देखा। और कितना बढ़िया से चोद भी रहे हैं।

मैंने नहीं कहा कि मैंने रात भर रेखा को चोदा है। उसका लंड भी बढ़िया था।

मैं: तुम्हारा लंड भी बहुत बढ़िया है।

संगीता के मुंह में धीरे-धीरे धक्का लगाते हुए असलम आराम से चूचियों का मज़ा भी ले रहा था।

असलम: अमित साहब, अपने कंपाउंड में कुल मिला कर क़रीब 200 औरतें और उतनी ही लड़कियां है जो चुदाई के लायक़ हैं। लड़कियों में सब मिला कर 30-35 लड़कियां ही धंधा करती है। वे स्टूडेंट्स से भी चुदवाती है और टीचर से भी। 7-8 लड़कियां है जो संगीता मैडम जैसा बाहर जाकर धंधा करती है। लेकिन औरतों में सब मिला कर 10-15 औरतें ही ऐसी है जो यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स से नहीं चुदवाती है।

असलम: मुझे लगता है कि रुपया कमाने से ज़्यादा शादी-शुदा औरतों को कम उम्र के लड़कों, कॉलेज के लड़कों से चुदवाने में ज़्यादा मज़ा आता है। मैडम, आह, ऐसा मत चूसो, आह बहुत मज़ा आ रहा है। मैडम मैं गया।

लेकिन संगीता ने लंड को अपने मुंह के अंदर दबाये रखा। असलम के साथ मैं भी समझ गया कि लड़की क्या कर रही थी। वो असलम के लंड का रस पी रही थी।उसकी हरकत देख कर मैं बहुत ही ज़्यादा एक्साइट हो गया। धक्के की स्पीड और पावर अपने आप बढ़ गया, और मैं ज़ोर से बोला, “रानी मैं भी झड़ने वाला हूं।”

मेरी बात सुनते ही संगीता ने अपने को मेरे लंड से अलग किया, असलम के लंड को मुंह से बाहर निकाला,‌ और फुर्ती से पलट कर अपनी ही बूर के रस से लथ-पथ लंड को पकड़ा। उसने लंड को हर तरफ़ से जल्दी-जल्दी चाटा और मुंह के अंदर घुसाने लगी। हम दोनों मर्द अचम्भे से संगीता की हरकत को देखने लगे।

असलम: अमित साहब, जब से चुदाई शुरु की है  600 से ज़्यादा माल को चोदा है। बहुतों ने लंड को चूसा लेकिन किसी ने कभी 10 मिनट से ज़्यादा नहीं चूसा। मैंने कभी सुना नहीं कि कोई माल लंड से निकले रस का एक बूंद भी पीती है, और ये लड़की एक के बाद दूसरे लंड का भी रस पीने वाली है।

मैं ज़्यादा देर कंट्रोल नहीं कर पाया। संगीता के मुंह में ही झड़ने लगा। लेकिन ना मैंने ही लंड को बाहर निकालने की कोशिश की, ना ही संगीता ने लंड को बाहर ढेला। लंड को पकड़ कर चूसती रही। 2-3 मिनट चूसने के बाद लंड आपसे आप उसके मुंह से बाहर आ गया। संगीता ने अपना मुंह पूरा खोला। हमने देखा कि उसके मुंह में गाढ़ा रस भरा हुआ था। हमें दिखाते हुए संगीता ने चुभला-चुभला कर सारा रस निगल लिया।

संगीता: जिस सेठ ने सबसे पहले मुझे चोदा था, उसने बहुत खुशामद की थी कि मैं उसका रस निगल जाऊं। इसके लिए वो मुझे अलग से एक लाख देने को तैयार था। लेकिन उस दिन मैंने उसकी बात नहीं मानी। लेकिन मालूम नहीं आज क्यों मैंने तुम दोनों का रस निगल लिया। सच कहूं तो लंड चूसना और रस पीना दोनों मुझे बढ़िया लगा।

संगीता: असलम, उस सेठ से मिलो और कहो कि मैं एक बार कोशिश करना चाहती हूं। बाप रे, कितना लेट हो गया आज। जल्दी चलो। अमित, दोपहर में तुम्हारे बोलने पर अरविंद से एक बार और चुदवाऊंगी, और रात में मेरे घर में तुम मुझे चोदोगे।

अचानक असलम ने मेरा लंड पकड़ लिया।

असलम: अमित साहब, अगर आपने इस लंड को अपनी मां के बूर में नहीं घुसाया तो इतना बढ़िया लंड बेकार है। जितनी जल्दी हो, अपनी मां को चोदिए, बहुत ही प्यार से चुदवायेंगी आपसे।

मुझे अवाक छोड़ कर असलम अपनी माल को लेकर चला गया

संगीता के जाने के बाद भी मैं सोया नहीं। नंगा ही बैठ कर संगीता के घर में हुई बात-चीत से लेकर असलम ने जो मुझे मां को चोदने की बात की, सब कुछ मैंने पूरे डीटेल से लिखा। अपनी तरफ़ से जितना गंदा हो सकता था, मैंने मां को चोदने, उन्हें लंड चुसवाने, उन्हें लोगों के सामने नंगा नचवाने, उन्हें लोगों से चुदवाने तक की बात लिखी और आख़िर में लिखा, “मां, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है। तेरे बेटे का घोड़े के लंड जैसा मोटा और लंबा लंड अपनी हरामजादी, घटिया रंडी, अपनी मां के बूर में घुसने के लिए तड़प रहा है। जल्दी से आजा मेरी रंडी। तेरा हरामी बेटा- अमित”।

चिट्ठी को लिफ़ाफ़ा में डाल कर बढ़िया से बंद किया, स्टाम्प लगाया और फिर मां के स्कूल का पता लिख कर पोस्ट कर दिया। मेरा दिल बार-बार कह रहा था कि मेरी मां ख़ुद मुझसे चुदवाना चाहती थी। उनमें मुझसे ये बोलने में उन्हें लाज आ रही थी। लेकिन जब मैंने लिखा कि बाबू जी अपनी बेटी को चोदते थे, तब उनकी लाज ख़त्म हो गई थी, और उसने मुझे चुदाई वाली चिट्ठी लिखी।

नाश्ता करने के बाद तीन घंटा से ज़्यादा मैंने पढ़ाई की और साढ़े 11 बजे रेखा के पास पहुंच गया। रास्ते में मैंने पांच लाल गुलाब के फूलों का एक बंडल ले लिया। मैंने रेखा को फूल दिया।

मैं: नमस्ते रेखा मैडम।

बोलते हुए मैंने हाथ जोड़ कर प्रणाम किया। लेकिन अरविंद के सामने रेखा ने मुझे गले लगाया। पहले होंठों को फिर गालों को चूमा।

रेखा: अब मुझे मैडम मत कहो, मैं तुम्हारी मुफ़्त की माल हूं। तुम्हारी रंडी हूं।

रेखा की बातें सुन कर मुझे लगा कि वो मुझसे बहुत नाराज़ थी। देखा कि अरविंद सामने बैठ कर मुस्कुरा रहे थे।

मैं: बहुत नाराज़ हो मुझसे?

रेखा: नाराज़ ना हूं तो क्या नाचूं। सोमवार रात को तुमने मुझे स्वर्ग की सैर कराई, और फिर मुझे भूल गया। आज भी आने की क्या ज़रूरत थी? अरविंद, हमें डिस्टर्ब मत करना। एक हफ़्ते का हिसाब चुकाना है।

बढ़िया चूदाई की भूख औरत को कितना बेशर्म बना देती है, वो रात में संगीता ने दिखाया, और उस समय रेखा दिखा रही थी। अपने पति से यह कह कर कि हमें डिस्टर्ब ना करें रेखा मुझे लेकर अपने बेड रूम में ले गई। मैं दरवाज़ा को अंदर से बंद करने लगा तो रेखा ने रोक दिया।

रेखा: अगर दरवाज़ा बंद कर दोगे तो वो मादरचोद हमारी चुदाई कैसा देख पायेगा? तुम्हें नहीं मालूम, उस रात तुम्हारे अरविंद सर ने अपनी तीसरे राउंड की चुदाई शुरू से आख़िर तक देखी। वो देख रहा था इसलिए मैंने चुदाई को जितना ज़्यादा हो सकता था लंबा चलने दिया। आज साले से तेरा लंड सहलवाउंगी। चोद राजा, पहले मेरी जवानी को चूस-चाट कर ख़ुश कर।

मैं बहुत ही ज़्यादा खुश था कि अरविंद सर के पूरे नॉलेज में उनकी घरवाली रेखा मुझे चोदने, बूर चूसने चाटने बोल रही थी। मैंने रेखा के अंग-अंग को सहलाया। चूचियों को जी भर कर चूसा। मैंने रेखा को बेड के बिल्कुल किनारे बिठाया। उनके दोनों फ़ीट को बेड पर चूत्तड़ो से सटा कर रखा। घुटनों को, जांघों को जितना फैला सकता था फैलाया। पिछली बार की चूदाई के बाद रेखा ने झांट को बाल हटाने वाली क्रीम से चिकना किया था। मैं चिकनी चूत को सहलाने लगा।

मैं: बहुत ही प्यारी चूत है रानी, मुझे चिकनी चूत बहुत पसंद है।

रेखा: तो चाटो ना, तुम्हारे लिए ही चिकना किया था। सच-सच बोल, किस-किस को तुमने यह बताया कि मैंने तुमसे चुदवाया है?

मैंने झुक कर बूर को किस किया, और क्लिट को मसलने लगा।

मैं: यहां सिर्फ़ अरविंद सर को ही मालूम है कि हम दोनों ने चुदाई की। मैंने अपनी चुदाई का पूरा डीटेल मां को लिखी है। तुम्हारा नाम नहीं लिखा, लेकिन यह लिखा कि हमारे एक टीचर की पत्नी है। साथ ही यह भी लिखा कि मेरी माल बिल्कुल तुम्हारे जैसी ही दिखती है और उसे चोदते समय ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड किसी दूसरे की बूर में नहीं, तुम्हारी बूर में, अपनी मां इन्दिरा के बूर में ही घुसा हुआ है।

रेखा: तुम मुझे गर्म करने के लिए ये सब बोल रहे हो, यार मैं वैसे ही बहुत गर्म हूं। तुम ही क्या कोई भी ऐसी गंदी बात अपनी मां को नहीं लिख सकता है।

लेकिन मैंने तो मां को वैसा ही लिखा था।

मैं: तुम्हें चोदने के बाद तीन बार वैसी गंदी चिट्ठी मां को लिख चूका हूं। आज रात को अपने इस दूसरी मिलन के बारे में भी पूरी डीटेल लिखूंगा।

रेखा: होस्टल जा कर नहीं, यहीं चुदाई ख़त्म करने के बाद लिखोगे। मैं भी कुछ अपनी तरफ़ से लिखूंगी और मैं ही पोस्ट करुंगी। अब बूर चूसो।

मैं: जो हुक्म मेरी प्यारी मां, देख तेरा प्यारा कुत्ता अपनी प्यारी कुतिया मां की बूर कैसे चाटता है।

मैंने दोनों हाथों से चूत के फांक को फैलाया और आराम से चाटता रहा, चूसता रहा। कितना समय गुजरा मालूम नहीं। रेखा लगातार मस्ती की सिसकारी मारती रही।

“अमित, तुम्हारी मां की चूत का स्वाद कैसा है?”

मुझे अरविंद सर की आवाज़ सुनाई दी। मैं बूर को चूसना छोड़ खड़ा हुआ। रेखा को बेड के किनारे कुतिया के पोज में किया, और एक हाथ से लंड को पकड़ कर रेखा की चूत में दबाया और खूब ज़ोरदार धक्का मारा।

“आह अमित, मज़ा आ गया। और ज़ोर से और अंदर”। रेखा अपने से आठ साल छोटी उम्र के लड़के से चुदवा रही थी, और उसका पति घरवाली की चूदाई देख रहा था। जब मेरा लंड आराम से बूर के अंदर बाहर होने लगा, तब मैंने पीछे घुम कर देखा। अरविंद एक चेयर पर नंगा बैठा था, और लंड को तेज़ी से मुठिया रहा था। मैं अपनी पूरी ताक़त से रेखा की बूर में लंड से धक्के लगाता रहा।

मैं: सर, आपकी घरवाली सिर्फ़ उपर से ही देखने में सबसे सुंदर नहीं है, इस मेरी प्यारी छोटी मां के अंदर का माल भी सबसे बढ़िया है। आपने भी अपनी मां की बूर को ज़रूर चूसा और चाटा होगा। मेरी इस छोटी मां के बूर का स्वाद आपकी मां के बूर से ज़रूर ही बढ़िया है।

मेरी बात सुन कर अरविंद सर लंड को पकड़े हुए हमारी ओर देखते रहे। मुझे लगा कि मैंने उनकी मां की बूर की बात की वो उन्हें बढ़िया नहीं लगा होगा, और वो मुझ पर ग़ुस्सा करेंगे। लेकिन जवाब दिया चुदवा रही रेखा ने।

रेखा: अमित, तेरे सर ने अपनी मां को चोदा कि नहीं मैं नहीं जानती, लेकिन इतना ज़रूर जानती हूं कि इन्हें अपनी मां की बूर का स्वाद नहीं मालूम है।

अपनी मां की बूर की बारे में सुन कर सर का लंड बहुत ही टाईट दिखने लगा था। सर तेज़ी से मुठ मारने लगे।

अरविंद: अमित, तुम अपनी मां की चूत की बात कर रहे हो तो सुनो। मैंने अपनी मां को बहुत चोदा है। पहली बार तो मैंने उसे तब चोदा जब वो शराब के नशे में धुत्त थी। लेकिन नशे में रहने के बाद भी कुतिया को समझ में आ गया कौन चोद रहा था, और कैसा चोद रहा था। अगले ही दिन से वो ख़ुद ही मेरे पास चुदवाने के लिए आने लगी। मेरी मां जब तक ज़िंदा रही, तब तक मैंने उसे चोदा। लेकिन ना ही उसने कभी मेरा लंड चूसा, ना ही कभी मुझे बूर चाटने या चूसने कहा। मैंने अब तक किसी के बूर में मुंह नहीं लगाया है।

मुझे विश्वास नहीं हुआ कि बिना बूर चूसे, लंड चुसाये कोई कैसे चुदाई करवा सकती है?

रेखा: अरविंद, तुमने अभी तक किसी की बूर में मुंह नहीं लगाया है? अमित से चुदवाने से पहले मुझे भी नहीं मालूम था कि बूर चुसवाने में इतना मज़ा है। अब तो मैं बिना बूर चुसवाये चोदने नहीं दूंगी। मेरी बूर से बूर चाटने की शुरुआत नहीं करना चाहते हो तो अपनी माल रमा की बूर चाट कर शुरुआत करो। और अब गांठ बांध लो, अगर चुदाई के पहले और चुदाई के बाद भी बूर चूसोगे, तभी चोदने दूंगी। अमित, रुक क्यों गया, चोदता रह अपनी कुतिया मां को।

रेखा भी संगीता जैसी ही बेशर्म होकर बात कर रही थी। मैं उसे और बेशर्म बनाना चाहता था। मैं खूब मस्ती से रेखा की चूचियों को मसलते दबाते हुए कुतिया बनी रेखा को चोद रहा था।

मैं: मेरी प्यारी मां, अब हम तीनों नंगे है, और जो एक-दूसरे के सामने नंगे हो जाते है, वे गहरे दोस्त भी हो जाते है। अरविंद ने बता दिया कि उन्होंने अपनी मां को चोद कर चुदाई की शुरुआत की। मेरा लंड तो सबसे पहले अपनी इस कुतिया मां के ही चूत में घुसा। लेकिन सबसे पहले जिसे चोदने का ख़्याल आया वो मेरी दीदी अनीता है।

जैसा मैंने संगीता से कहा था वैसे ही रेखा और अरविंद के सामने अपनी दीदी और बाबू जी के बीच हुई बात के बारे में बताया। रेखा ने भी संगीता की ही तरह कहा कि अनीता ज़रूर अपने किसी यार से चुदवाना चाहती होगी और अपने बाप को बोल रही होगी कि उसके यार को घर बुला ले।

रेखा: तेरी बहन यह चाहती होगी कि उसका यार जब घर आये तो तेरा बाप घर में रहे, जिससे कि किसी को अनीता पर शक ना हो, और उसके बदले वो अपने बाप से भी चुदवाना चाहती हो। और तेरा लंड इतना बढ़िया है तो तेरे बाप का लंड भी बढ़िया होगा। आज-कल के जमाने में सिर्फ़ अरविंद जैसे मादरचोद ही नहीं उससे ज़्यादा बेटीचोद हैं।

मैं दना दन पेल रहा था। रेखा खुल कर सिसकारी मार रही थी। लंड को सहलाते हुए अरविंद हमारे बहुत नज़दीक आ गया और घरवाली के नंगी पीठ को सहलाने लगा। साथ ही कड़क मोटे लंड को रेखा के जांघों से रगड़ने लगा।

अरविंद: अमित बहुत ही बढ़िया लंड है और रेखा की बूर के अंदर-बाहर होता देखना बहुत ही बढ़िया लग रहा है।

मैंने चोदते हुए ज़ोर-ज़ोर से कई ज़ोरदार चांटे चूत्तड़ों पर मारे।

रेखा: आह मज़ा आ गया, और ज़ोर से।

मैं: सर आप चांटा मारते रहिए मुझे अपनी मां की चूचियों का मज़ा लेने दीजिए।

मैंने रेखा की बांहों के नीचे से दोनों हाथों को घुसा कर चूचियों को पकड़ा और आहिस्ता-आहिस्ता सहलाते हुए धक्का मारता रहा।

मैं: अब हम गहरे दोस्त हैं और दोस्तों के बीच की बात कभी किसी और को मालूम नहीं पड़ेगी। मेरी प्यारी मां, सच-सच बोल, अरविंद के लंड के अलावा तुमने किसी और लंड का मज़ा लिया है। ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि तेरे जैसी खूबसूरत माल को लोगों ने सती-सावित्री रहने दिया होगा।

अरविंद: रेखा, मैं बहुत ही किस्मत बाला हूं, कि तुम्हारी प्यारी खूबसूरत चूत में सबसे पहले मेरा ही लंड घुसा, और तू 11-12 सालों से मुझसे चुदवा रही है। तू देख ही रही है कि मैं अपने सामने तुम्हें तेरे यार से चुदवा रहा हूं। मैं तुम्हारे सामने अमित से कहता हूं कि तुम जब चाहो, अमित जब चाहे, तुम दोनों खुल कर चुदाई करो। रात में हम दोनों एक साथ तुम्हें चोदेंगे।

अरविंद: मैं दिल से जानना चाहता हूं कि मेरी खूबसूरत पत्नी को दूसरे किस किस ने चोदा है। रानी, तू नहीं जानती कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं। मैं भले ही दूसरी बहुत सी माल को चोदता हूं, लेकिन तुम्हें जान से ज़्यादा प्यार करता हूं। तुम्हारे लिए कुछ भी करुंगा। अब अगर तुम ये भी बोलोगी कि तुम भी हेडमास्टर या दूसरे टीचर की घरवालियों की तरह धंधा करती हो, तब भी तुम्हें नहीं छोड़ूंगा।

रेखा: ना मैंने कभी धंधा किया है, ना कभी करुंगी। आज सुबह-सुबह असलम आया था। उसने कहा कि कोई लड़का मुझे चोदने के लिए एक लाख देने को तैयार है। उसने ये भी कहा कि हेडमास्टर 2 घंटा मेरे साथ रहने के लिए अब 50 हज़ार देने को तैयार है। लेकिन मैंने मना कर दिया। मैं कभी भी अपना कोई रेट फिक्स नहीं करुंगी, कभी धंधा नहीं करुंगी।

मैं चूचियों का मज़ा लेते हुए चोदता रहा। अरविंद अपनी घरवाली की नंगी जवानी को सहलाता रहा। बीच-बीच में वो चूत्तड़ पर चांटा भी मारता था। कुछ देर रुम में चुप्पी रही।

रेखा: तुम दोनों के अलावा मैंने 11 दूसरे आदमियों से चुदवाया है।

रेखा की बात सुन हम दोनों मर्दों ने एक दूसरे की आंखों में देखा। अरविंद ने बूर के अंदर बाहर हो रहे लंड को पकड़ा, और लंड को पकड़े हुए अपनी घरवाली की बूर के अंदर-बाहर करता रहा। रेखा को चोदते हुए मैंने अरविंद का कड़क लंड पकड़ा और उसे मुठियाने लगा।

झूठ नहीं कहुंगा, ज़िंदगी में पहली बार ही किसी दूसरे का लंड हाथ में लिया था। हाथ में मोटा और कड़क लंड को लेना, मुठियाना बढ़िया लगा। अरविंद को भी मज़ा आ रहा था। एक हाथ से मेरे लंड को अपनी घरवाली की बूर के अंदर-बाहर करते हुए दूसरे हाथ से मेरे चूत्तड़ों को दबाने लगे। मुझे बढ़िया ही लगा।

मैं अरविंद सर की घरवाली को कुतिया के पोज़ में उनकी आंखों के सामने चोद रहा था। साथ ही हम दोनों एक-दूसरे का लंड भी सहला रहे थे। अरविंद मेरे चूत्तड़ों को भी सहला रहा था।

अरविंद: रेखा, जब मैंने तुम्हें पहली बार चोदा था, उससे पहले मैं 15-16 रंडियों को चोद चुका था, और अपनी कुतिया मां को चोद रहा था वो अलग। तुम्हें बिल्कुल शर्माने या डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। तुम अगर यहां की दूसरी औरतों की तरह धंधा भी करती, तब भी मैं तुम्हें ऐसे भी प्यार करता रहता। दूसरों से चुदवाने से कोई औरत रंडी नहीं होती है।

रेखा: तुम मेरी चूत फाड़ कर चले गये। मैं हर समय तुम्हारे और तुम्हारी चुदाई के बारे में ही सोचती रहती थी। तुम्हारे जाने के कुछ ही दिन बाबू जी मुझे साथ लेकर एक घर में ले गये। वो किसी का फार्म हाउस था। बाबू जी को मालूम नहीं कैसे मालूम हो गया था कि मैंने तुमसे चुदवाया था। बाबू जी ने मुझे धमकाया कि अगर मैं उनकी बात नहीं मानूंगी, तो वो दीदी से कह देंगे कि मैं तुमसे चुदवाती थी।

रेखा: उन्होंने कहा कि अगर मैं उनकी बात नहीं मानूंगी तो फिर वो मुझे तुमसे नहीं चुदवाने देगें। मैं तुम्हें नहीं खोना चाहती थी। मैंने उनकी बात मान ली। उस दिन तीन आदमियों ने मुझे दिन भर चोदा। बाबू जी के सामने दिन भर नंगी रही, फिर भी एक बार भी उन्होंने मुझे हाथ नहीं लगाया। ऐसा क़रीब तीन साल चला।

रेखा: तीन साल में बाबू जी मुझे अलग-अलग जगह ले गये और 11 आदमियों ने मुझे चोदा, बार-बार चोदा। अरविंद, अपनी कसम खा कर कहती हूं, तुमसे शादी के बाद यही मादरचोद पहला आदमी है जो मुझे चोद रहा है।

अरविंद: उस रात जब तुम्हें अमित को उपर से चोदते देखा तो एक मिनट के लिए बहुत ही ज़्यादा ग़ुस्सा आया था। लेकिन फिर तुरंत ही तुम्हें दूसरे के साथ चुदवाते देखना बहुत ही बढ़िया लगने लगा। वह पहला मौक़ा था जब मैं किसी की चूदाई देख रहा था। और आज तो बहुत ही बढ़िया लग रहा है। तुम भी असलम की रंडी बन जाओ और नये-नये लंड से चुदवाओ।

अरविंद की बात सुन कर मुझे बहुत ग़ुस्सा आ गया। रेखा को चोदते हुए मैंने बहुत ही ज़ोर से अरविंद के लंड को दबाया। अरविंद दर्द से चीख उठा।

अरविंद: तीन बजे संगीता को चोदना है, लंड को मत तोड़ो।

मैं: मादरचोद तुमने फिर अगर मेरी मां को किसी की रंडी बनने बोला तो हरामी संगीता के सामने ही तेरी गांड मारुंगा। संगीता तुम्हें नामर्द मान चुकी थी। मेरे बहुत बोलने पर ही वो तुम्हें एक और मौक़ा देने को तैयार हुई है। इस बार मेरा नाक मत कटवाना।

रेखा हमारी बातें सुन रही थी।

रेखा: वाह अमित, मैं बहुत खुश हूं कि तुमने संगीता को चोद लिया। लेकिन चार ही दिन में तुमने उसे पटाया कैसे?

मैंने संगीता से बात करने से लेकर असलम के सामने चोदने की सारी बात बताई। अरविंद ने कहा कि उसने भी संगीता की दीदी को 2 बार चोदा था।

मैं: संगीता ने मुझे रात में अपने ही घर में चुदवाने के लिए बुलाया है। कुतिया कहती हैं कि अपने बाप से, हेडमास्टर से मेरे साथ चुदवाने की परमिशन ले लेगी।

अरविंद: सिर्फ़ लंड के लंबे और मोटे होने से कोई सभी औरतों का प्यारा नहीं हो जाता है। हम सभी को मालूम है कि असलम पिछले तीस सालों से हमारे घर की औरतों और लड़कियों को चोद रहा है। वो ज़रूर बढ़िया चोदता होगा। मैं देख रहा हूं कि तुम भी बहुत बढ़िया चोद रहे हो, और उस रात जैसा ही आज भी एक घंटे से चोद रहे हो।

मैं: मैं क्या करुं सर, आपकी घरवाली की चूत मेरे लंड को बहुत ही ज़्यादा पसंद आ गई है। जब तक मैं यहां हूं, तब तक अगर किसी और ने मेरी मां के बूर में लंड पेला, तो मैं उसकी जान ले लूंगा। आप जाओ और संगीता को खुश करो।

और उस दिन फिर मैंने रेखा को डेढ़ घंटा चोदा। उसकी बूर में रस गिरा कर मैंने लौड़ा बाहर निकाला। रेखा की बूर के रस से मेरा लंड चमक रहा था। रेखा, अपनी घरवाली के सामने ही अरविंद ने मेरे लंड को पकड़ लिया।

रेखा: अब जब तुमने ऐसे मस्त लंड को पकड़ ही लिया है, तो इस लंड पर जो मेरी बूर का माल जमा है, उसका स्वाद क्यों नहीं लेते हो?

मैं: सर, आज दूसरी ही बार अपनी इस प्यारी मां के साथ हूं। तीन-चार बार अपनी मां के बूर को चूसा है, लेकिन अंदर के माल का पूरा स्वाद नहीं ले पाया। अभी आप मेरी मां को चोदिये। फिर मैं आपके लंड को चूस चाट कर अपनी रेखा मां की बूर का असल स्वाद लूंगा।

मेरी बात ख़त्म हुई और अरविंद ने मेरे लंड को चाटना शुरु कर दिया,‌ और उसने क़रीब 20-22 मिनट खूब बढ़िया से चूसा और चाटा। अरविंद के चाटने के कारण लंड फिर टाईट हो गया, और मैं रेखा को सीधा चोदने लगा।

अरविंद: सुना है कि अफ़्रीका में रहने वाले लोगों का और पठानों का लंड तुम्हारे लंड जैसा लंबा और मोटा होता है। बाप रे, बहुत ही मस्त और प्यारा लंड है। जो भी औरत ये लंड देखेगी, वो तुम्हारे साथ ज़रूर चुदवाना चाहेगी।

रेखा: और जो एक बार चुदवा लेगी, वो मेरे जैसी बार-बार चुदवाना चाहेगी। संगीता कुंवारी नहीं थी क्या?

अरविंद: पिछले बुधवार को जब मैंने उसे चोदा तब भी कुंवारी नहीं थी। असलम की माल है तो वो भी उसे चोदता ही होगा।

मैं: जिस रात मैंने अपनी रेखा मां को चोदा, उसकी अगली रात ही मैंने अपने रुम में एक कुंवारी लड़की को दो बार चोदा। बनबारी की माल थी।

रेखा मस्ती भरी सिसकारी मारती हुई चुदवा रही थी। साथ ही अरविंद सर का लंड भी सहला रही थी। अरविंद भी पूरी चुदाई के दौरान घरवाली के नंगे बदन का मज़ा लेता रहा। फिर क़रीब एक घंटे की चूदाई हो गई थी।

रेखा: झड़ने के पहले लंड बाहर निकाल लेना। मुझे चूसना है।

इतना बोल कर रेखा अपने पति का लंड चूसने लगी। क़रीब 10-12 मिनट ही चूसा होगा कि अरविंद लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगा। लेकिन संगीता के जैसा ही रेखा ने भी लंड को अपने मुंह में ही दबाये रखा। जब सारा रस झड़ गया तो लंड सिकुड़ कर बाहर निकल गया।

मैं रेखा को चोद ही रहा था। रेखा ने अपना मुंह खोला। मैंने धक्का मारना छोड़ दिया, और लंड को बूर के अंदर दबाये रखा। रेखा के मुंह में लंड से निकला गाढ़ा रस भरा हुआ था। हम दोनों को दिखाते हुए चुभला-चुभला कर रेखा ने सारा रस निगल लिया।

अरविंद: रेखा, ये बहुत गंदा काम किया तुमने। तुम बीमार हो जाओगी।

लेकिन रेखा के उपर अरविंद की बातों का कोई असर नहीं हुआ। रेखा ने ज़ोर से कमर उचकायी।

रेखा: अमित, तुमने धक्का मारना क्यों बंद कर दिया? अरे, ये मैंने पहली बार लंड का रस नहीं पिया है। जिन 11 आदमियों से बाबू जी ने चुदवाया था, सभी के सभी 50 साल से उपर के थे। कोई भी मादरचोद बढ़िया से चोद नहीं पाता था, लेकिन सभी लंड खूब चुसवाते थे, और वहां लंड चूसते-चूसते मैंने कई बार ये लंड का रस भी पी लिया था। पहले तो मुझे बिल्कुल बढ़िया नहीं लगा, लेकिन बाद में बढ़िया लगने लगा।

रेखा: अरविंद, तुमने तो कभी लंड चुसवाया ही नहीं, लेकिन उन हरामियों में एक ऐसा था जिसका कहना था कि अगर कोई औरत लगातार लंड का रस पीती है, तो वो बहुत मदमस्त माल हो जाती है। हमेशा जवान रहती है। और अगर कोई मर्द किसी बढ़िया मज़बूत आदमी के लंड का रस पीता है तो मर्द की ताक़त, चुदाई का स्टैमिना बहुत बढ़ जाता है। वो औरतों को बहुत ही ज़्यादा खुश कर सकता है।

रेखा: अरविंद, तुम बढ़िया चोदते हो लेकिन तुमने देख लिया कि अमित का स्टैमिना तुमसे कितना ज़्यादा है। अगर तुम भी अमित के लंड का रस पिओगे, तो तुम भी संगीता को अमित के जैसा ही घंटा डेढ़ घंटा चोद पाओगे। अमित, सर को लंड चुसाओ, लंड का रस पिलाओ।

उस दिन मुझे मालूम हुआ कि खूबसूरत औरतों में तलवार और बंदूक़ की गोली से ज़्यादा ताक़त होती है। रेखा के ये बोलने के बाद भी कि उसने दूसरे 11 आदमियों से चुदवाया है, उस सभी का लंड चूसा है, लंड का रस पिया है, अरविंद ने रेखा की बात मान ली।

मैं और भी चोदना चाहता था, लेकिन रेखा ने कहा कि मैं उसकी बूर से लंड निकाल कर अरविंद को चुसाऊं। मुझे लगा कि रेखा को यह पसंद नहीं आया कि उसे अपने सामने रेखा को दूसरे से चुदवाते देखना बढ़िया लग रहा है। ‌रेखा के 2-3 बार बोलने पर मैंने लंड को बूर के बाहर निकाला।

रेखा: अरविंद, अमित के लंड को बढ़िया से चाटो। मेरी बूर के अंदर की माल लो, और लंड चूसते-चूसते सारा रस पी जाओ।

मैं चुप-चाप बैठा रहा। ना ही मैंने अरविंद से लंड को पकड़ने के लिए कहा, और ना ही मैंने रेखा को टोका कि वो क्यों एक टीचर से स्टूडेंट का लंड चूसने बोल रही थी। मेरा लंड रेखा की बूर के रस से लथ-पथ था। अरविंद ने मेरा लंड पकड़ा और जीभ से चाट-चाट कर लंड को बढ़िया से चाटा।

उसके बाद वो धीरे-धीरे लंड को अपने मुंह में दबाता गया, और लंड की आधी से ज़्यादा लंबाई को खूब चुभला-चुभला कर चूसा। फिर जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला था, मैंने अरविंद के माथे को दोनों हाथों से पकड़ कर ज़ोर से लंड पर दबाये रखा। मेरा लंड रस फेंकने लगा। अरविंद के चेहरे से साफ़ दिख रहा था कि उसे ये सब, लंड के रस का स्वाद बढ़िया नहीं लग रहा था। रेखा ने अरविंद के लंड को पकड़ लिया।

रेखा: अरविंद, मुझे मालूम है कि तुम्हें बढ़िया नहीं लग रहा है। लेकिन सारा रस पी लो और जाकर संगीता को चोदो। उस दिन संगीता तुमसे खुश नहीं थी, लेकिन अभी अमित के लंड का रस पी कर उसे चोदोगे तो कुतिया ख़ुद तुमसे बार-बार चुदवाने आयेगी। और अगर संगीता तुम्हारी चुदाई से खुश नहीं हुई, तो तुम जिस गार्ड की बोलोगे मैं उसकी रंडी बन जाऊंगी। तुम्हारे लिए धंधा करुंगी।

मैं लंड को अंदर-बाहर करता रहा, और आखिरकार लंड ढीला होकर अरविंद के मुंह से बाहर आ गया। अरविंद ने मुंह खोला तो हमने देखा कि थोड़ी सा रस तब भी उसके मुंह में था। अरविंद ने भी संगीता और रेखा जैसे चुभला-चुभला कर सारा रस निगल लिया। अरविंद ने मेरा लंड पकड़ लिया।

अरविंद: रेखा, रस का स्वाद उतना बुरा नहीं है लेकिन तुमने कैसे इतनी देर तक इस घोड़े के लंड जैसा लंबा और मोटा लंड चूसा? बाप रे, कितना मोटा है। अमित, हमें बदनाम मत करना, मुझे तुम्हारा लंड चूसना बढ़िया लगा। रेखा ढाई बज रहे है, संगीता ने तीन बजे बुलाया था। जो बना है वहीं खिला दो।

15 मिनट के अंदर ही अरविंद खा पीकर तैयार होकर घर के बाहर चले गये। मैं और रेखा घर में रह गये। हम 2 राउंड लम्बी चुदाई कर चुके थे। रात में उसे फिर से चोदना था।

हमने साथ ही नहाया। एक-दूसरे को खूब रगड़ा। हम खाना खाकर उठे ही थे कि दरवाज़े पर नॉक हुआ।

रेखा: उफ़, गलती हो गई। आज रमा को आने से मना कर देना चाहिए था। इसी औरत ने तुम्हारे रुम में चिट रखा था। इसे मालूम है कि मैंने तुम्हें चोदने के लिए ही बुलाया था।

मैं: मेरी प्यारी कुतिया मां, फिर क्यों घबरा रही हो? उसका काम उसे करने दो तब तक मैं अपनी प्यारी रंडी, तेरी दीदी इंदिरा को आज की चुदाई की दास्तान लिखता हूं।

रेखा ने सिर्फ़ एक कुर्ता पहना, नीचे कुछ नहीं। मैंने अपना कपड़ा पहन लिया। रेखा ने दरवाज़ा खोला। रेखा के साथ जो औरत अंदर आई मैं उसे नहीं जनता था। औरत 30-32 साल की होगी। चेहरा खूबसूरत नहीं था लेकिन बदन गदराया हुआ था। औरत ने साड़ी पहनी हुई थी, लेकिन कपड़ों के उपर से ही उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों का उभार दिख रहा था। मैं उसकी जवानी को और निहारता लेकिन उसने हाथ जोड़ कर मुझे प्रणाम किया।

रमा: अमित साहब, चार दिनों से हमारे कॉलोनी की सभी औरतें और लड़कियां सिर्फ़ आपके बारे में ही बात कर रही है।

मुझे उसकी बात सुन कर आश्चर्य हुआ।

मैं: ना तो मैं तुम्हें पहचानता हूं, और ना ही मैं ये जानता हूं कि तुम किस कॉलोनी में रहती हो। फिर लोग मुझे कैसे जानेंगे?

रमा: 6 घंटे में चोद-चोद कर 2 औरत को रुला डाला। चार बार चोदा और हर बार एक घंटे से ज़्यादा चोदा। हम जैसी औरतों की बूर कोई नहीं चूसता और तुमने दोनों की बूर को चूस-चूस कर पागल कर दिया, और आपकी मां ने किस से चुदवा कर आपको पैदा किया, कि आपका लंड घोड़े के लंड जैसा मोटा और लंबा है?

रमा: अपना लंड अपनी मां की बूर में घुसेड़ो, मां को चोदो, तब उसे पता चलेगा कि घोड़े के लंड से चुदवाने में क्या मज़ा आता है। रेखा मैडम, अपने यार को बोलो कि मुझे भी एक बार घोड़े जैसा लंड दिखा दे।

रेखा: तुम्हारी कॉलोनी की किस औरत को अमित ने चोदा है?

हम बातें कर रहे थे और रमा अपने कपड़े खोलने लगी। रेखा ने भी उसे नहीं रोका। रेखा को चोदने के बाद चौथी औरत मेरे सामने नंगी खड़ी थी। वो मस्त चाल से मेरे पास आई।

रमा: सीमा और उसकी मां जमुना को।बेचारी सीमा कुंवारी थी और जमुना के सामने ही आपके यार ने सीमा की चूत फाड़ डाली। मैं भी तो देखूं कि घोड़े का लंड कैसा होता है!

मैंने रेखा की तरफ़ देखा। रेखा ने नॉड किया और हाथ की अंगुलियों से इशारा करते हुए कहा कि “चोदो”।

रेखा: तू सीमा से जलती क्यों है? मेरे घरवाले को अपनी दीवाना बना ही लिया है, मेरे यार को अपनी जवानी खिला दे। अमित चोद इस रंडी को। मैंने आज घर में ही दो बार चुदवा लिया है और तेरा यार (अरविंद) अपनी घरवाली को इस घोड़े के साथ अकेले छोड़ कर गया‌ है।

मैं एक जगह खड़ा रहा और रमा ने मुझे नंगा कर दिया। उसने लंड को पकड़ लिया।

रमा: सीमा झूठ नहीं कह रही थी। मैंने कई बार घोड़े का लंड देखा है। अमित साहब आपका लंड उसके जैसा ही है।

मैंने लिविंग रुम के सोफ़ा पर ही रमा को लिटाया और 10-12 मिनट उसकी बूर को बढ़िया से चूसा और चाटा।

रमा: 14-15 साल में बहुत से स्टूडेंट्स और टीचर से चुदवाया लेकिन अमित आप पहले आदमी हैं जिसने मेरी बूर का स्वाद लिया। मैं फिर कहती हूं, आपकी मां आपसे चुदवाने के लिए तड़प रही होगी। जल्दी से उन्हें चोदिए।

रेखा, संगीता, और असलम के बाद ये रमा भी मां को चोदने के लिए उकसाने लगी।

मैंने उसकी जांघों के बीच पोज़ीशन ली। एक हाथ से पकड़ कर लंड को बूर के अंदर डालते हुए ज़ोरदार धक्का मारा।

रमा: आहहहहह मज़ा आ गया मैडम, हर चूत को ऐसा ही धक्का चाहिए। चोदो अमित साहब। बहुत जल्दी आपका लंड एक बहुत ही मशहूर औरत के बूर के अंदर होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *