मां को चोदने के लिए लोगों ने उकसाया 11

माँ बेटा

गार्गी: रेखा ने बताया कि तुम्हारी मां ने तुमसे मिलने से मना कर दिया है। रात में अरविंद ने तुम्हारी मां को चोदा।

अमित: मेरी कुतिया मां मेरा लंड देख कर इतना डर गई है, कि मुझे सामने आने से मना कर दिया है। साली अरविंद से चुदवाए या असलम से, उसकी बूर है जिसका लंड चाहे अपने अंदर ले। मुझे उस घिसी-पिटी बूर में लंड पेलने में कोई इंटेरेस्ट नहीं है। मुझे तुम्हारी इस मर्द रचना की प्यारी बूर में लंड पेलना है।

रचना आंख झुकाये पैर की अंगुलियों से फर्श को कुरेद रही थी।

रचना: जैसा मैंने सुना है तुम सिर्फ़ देखने में आदमी लगते हो लेकिन असल में हो गधे। मुझे गधे के साथ प्यार नहीं करना।

अमित: कुतिया, भाव क्यों मार रही है? कल तो हल्ला कर रही थी कि जब मैं गार्गी को चोद सकता हूं, संगीता को चोद सकता हूं, तो फिर तुम्हें क्यों नहीं। रचना नखरा मत करो, प्यार करने दो।

गार्गी मुस्कुराती रही लेकिन रचना छटपटाती रही। अमित ने उसे छोड़ा नहीं। बांहों पर उठा कर बेडरूम में लाया और बेड पर लिटा दिया। रचना लगातार ना-नहीं करती रही, लेकिन अमित ने उसे नंगा कर दिया। रचना कुछ समझती अमित ने वो काम करना शुरू किया जिसके बाद ठंडी से ठंडी औरत भी चुदाई के लिए मचलने लगती है।

रचना की दोनों चूचियों को दबोचे हुए अमित ने बूर की क्लिट को चूसना शुरू किया। गार्गी अपने पूरे कपड़े उतार कर नंगी ही रचना के चेहरे के सामने जांघों को फैला कर बैठ गई। रचना को अपनी प्यारी औरत गार्गी की बूर दिखी, और अपनी मस्ती भूल कर वो गार्गी की बूर का मज़ा लेने लगी। बूर को कुछ देर चूसने और चाटने के बाद रचना ने अमित की ओर देखा। अमित ने चूचियों को छोड़ दिया था। अपने हाथों से रचना की बूर की पत्तियों को फैला कर अंदर का स्वाद ले रहा था।

रचना: गार्गी जब यहां आई उसके तीसरे ही दिन मैंने उसे नंगा कर दिया था। इसके नंगे बदन और बूर का स्वाद मुझे बहुत ही पसंद था, लेकिन तीन दिन पहले तुमने लंड मेरी प्यारी बूर, गार्गी की बूर में घुसाया उसके बाद से बूर का स्वाद और भी बढ़िया हो गया है। अमित, मैंने मज़ाक में कहा था। अगर मुझे चुदवाना ही होता तो एक साल पहले ही शहर के होटल में होटल के मालिक राजेंद्र और उसके दोस्त लाला से चुदवा लिया होता। दोनों मिल कर मुझे 11 लाख दे रहे थे। लेकिन मैंने राजेंद्र की बहु समिरा और उसके भाई की बेटी को चोद-चोद कर उन्हें पागल कर दिया था। राजेंद्र तो नहीं लेकिन लाला हर दो-तीन दिन पर मुझे फ़ोन करता रहता है।

अमित ने बूर को चूसना बंद किया और उसके उपर आ गया। अमित ने लंड को रचना की बूर पर दबाया।

अमित: मैं नहीं चाहता कि मेरी प्यारी दोस्त रचना किसी होटल की रंडी बने। एक बार होटल में रंडी-पना करोगी और उसके बाद तुम होटल वालों के लिए बॉल हो जाओगी। वे जैसा चाहेंगे तुम्हें वैसा ही करना पड़ेगा। तुम्हारे जैसी बढ़िया लड़की को ज़रूर बहुत ही बढ़िया क़ीमत मिलेगी। लेकिन तुम भी अपने को एक घटिया रंडी ही समझोगी।

अमित ने अपना चूत्तड़ उचकाया और पूरी ताक़त से पेला। “बाप रे, मर गई, अमित, नहीं निकाल लो, बहुत मोटा है।” गार्गी ने रचना के गालों को सहलाया।

गार्गी: अब सुपारी अंदर घुस ही गया है तो तेरी चूत को पूरा खोद कर ही निकलेगा। तीन दिन पहले ही मेरी भी बूर में ऐसे ही घुसा था। लगा था कि जान ही निकल जायेगी। लेकिन रचना, जैसे ही पूरा लंड अंदर घुसा तो पूछ मत। उसके बाद इतना मज़ा आया कि बता नहीं सकती।

गार्गी अपनी चुदाई का अनुभव सुनाती रही और अमित लगातार पेलता रहा। क़रीब-क़रीब पूरे लंड की लंबाई पर बूर का खून फैल गया था। रचना के जांघों पर, प्यूबिक एरिया पर भी खून की बूंदें थी। लंड की पूरी लंबाई बूर के अंदर जा चुकी थी। मैंने धक्का मारना बंद किया। लंड को बूर में दबाये रख मैं रचना के होंठ और गालों को चूमते हुए दोनों हाथों से रचना के चिकने बदन को सहलाता रहा।

अमित का लंड रचना की बूर में अंदर तक घुस गया था। अमित ने धक्का मारना बंद कर दिया था। सिर्फ़ अमित के दोनों हाथ नहीं गार्गी के दोनों हाथ भी रचना के चिकने बदन को सहला रहे थे। रचना के चेहरे पर दर्द था, फिर भी वो गार्गी की बूर के साथ खेल रही थी।

रचना एक बड़े दुकानदार की बेटी थी। कॉलोनी के शौपिंग सेंटर में उसकी दुकान थी। टीचर्स कॉलोनी से थोड़ी दूरी पर असलम के घर के नज़दीक उनका घर था। बहुत बड़ा मकान था तो घर में रहने वाले भी बहुत थे। कई चचेरे भाई थे। अपना भी एक बड़ा भाई था। और क़रीब दो साल पहले तीन भाभियों ने अपनी जवान ननद को लूट लिया। चारों पूरी रात लेस्बियन सेक्स करते रहे। रचना को लेस्बियन सेक्स इतना बढ़िया लगा कि उसने घर की सभी जवान औरतों और लड़कियों को अपना पार्टनर बना लिया।

जैसे नशा करने वाले दूसरे नशा करने वाले को तुरंत पहचान लेते हैं, वैसे ही एक लेस्बियन दूसरी लेस्बियन को तुरंत पहचान लेती है। एक साल गुजरते-गुजरते 17 लड़कियां और 7 लेडी टीचर्स रचना की घरवाली ले गई। वैसी ही एक लेस्बियन टीचर उसे राजेंद्र के होटल ले गई। दोनों राजेंद्र और लाला के सामने दोनों ने लेस्बियन का परफ़ॉर्मेंस दिया। दोनों ने रचना को बहुत लालच दिया, लेकिन उसने चुदवाने से मना कर दिया।

लेकिन पिछले एक साल से अलग-अलग माल को लेकर होटल जाती है, और वहां बूढ़े अमीर लोगों के सामने लेस्बियन का तमाशा दिखा कर बहुत कमाई करती है। लेकिन अमित की चुदाई के चर्चे को सुन कर अमित को चोदने का चैलेंज दिया और दूसरे ही दिन अमित ने चोद भी लिया। लंड घुसाये हुए क़रीब 15 मिनट से ज़्यादा हो गये थे। रचना का सारा दर्द ख़त्म हो गया था। रचना ने अमित को किस किया।

रचना: धक्का मारना है तो मारो, नहीं तो मेरे उपर से उतर जाओ। बहुत भारी लग रहे हो।

इतने प्यार से कोई बोले तो मर्द क्या करे? अमित जमा-जमा कर रचना को चोदने लगा। थोड़ी देर करारा धक्का मारने के बाद आराम से रगड़ते हुए चोदने लगा।

रचना: अब बहुत बढ़िया लग रहा है। लेकिन तुमने मेरा 11 लाख का नुक़सान कर दिया और इस नुक़सान की भरपाई भी तुम्हें ही करनी पड़ेगी।

अमित: जिन रंडियों को गार्ड मेरे रुम में लायेगा, उसे 2-3 हज़ार दे दूंगा, उससे ज़्यादा नहीं।

रचना ने ज़ोर से चूत्तड़ उचकाया।

रचना: मादरचोद मुझे तुमसे पैसा नहीं सिर्फ़ तेरा लंड ही चाहिए। जिन बूढ़े लोगों के सामने लेस्बियन शो करती हूं, वे हमेशा चूदाई दिखाने की बात भी करते हैं। अगले संडे मुझे फिर होटल जाना है। मेरे साथ एक दूसरी टीचर जा ही रही है, तुम भी चलो। लेस्बियन शो के साथ-साथ हम चूदाई का शो भी देंगे। तुम हम दोनों को चोदना। जो भी कमाई होगी हम तीनों आपस में बांट लेंगे। विश्वास रखो, बहुत कमाई होती है।

अमित को याद आया कि राजेंद्र ने भी ऐसा ही ऑफ़र दिया था।

अमित: किस होटल में जाना है?

रचना: वही राजेंद्र और रेणु वाले होटल में।

रचना की बात सुन कर अमित ने चूदाई की स्पीड बढ़ा दी।

अमित: साला मुझे तो गोली मारेगा ही, तुम दोनों को भी गोली मार देगा।

रचना: तुम उसे कैसे जानते हो?

और रचना को प्यार से, आराम से चोदते हुए होटल की सारी बात, अपनी मां की चूदाई की बात, इंदिरा के नंगे परेड की बात भी बताई।

रचना: बहुत बड़े मादरचोद हो। अपनी कुतिया मां को चोदा ही तुमने, अपने दादा के उम्र के राजेंद्र को लंड चुसाया। ना बाबा तुम्हें लेकर नहीं जा सकती। मेरा पूरा धंधा चौपट हो जायेगा।

ज़्यादा विस्तार में जाने की ज़रूरत नहीं। आप समझ ही सकते हैं कि अमित ने दोनों को चोदा होगा।

रचना: अगर कल मैंने तुम्हें एक गुलाब का फूल दिया तो समझ लेना की मेरी चूत को तुम्हारे लंड की ज़रूरत है।

गार्गी: रचना फूल दे या ना दे, अब से मेरी चूत हर रोज़ चार बजे तेरे लंड का इंतज़ार करेगी। जिस दिन रचना नहीं रहेगी उस दिन तुम्हारे लिए एक नई माल होगी।

रचना: तुम अपने होस्टल जाओ। मैं गार्गी के साथ तुम्हारी कुतिया (मां) से मिलने जाती हूं। अरविंद के सामने तेरी कुतिया से अपनी चूत चटवाऊंगी। चल रानी।

तीनों बाहर निकले। अमित अपने रुम में आया और दोनों रेखा के घर चली गई। रुम में आकर अमित ने अपने दोस्त विनोद को फिर याद दिलाया।

विनोद: मैंने रुपया निकाल लिया है। अगर तुम्हारी मां का बदन भी पसंद आया तो उसे भी चोदूंगा। कितना लेती है वो?

अमित: मुझे भी नहीं मालूम था। संडे हम होटल में रुके थे। मैंने उसे बहुत पटाने की कोशिश की लेकिन तेरी मां की तरह मेरी मां ने भी मुझसे नहीं चुदवाया। लेकिन मेरे ही सामने रंडी ने एक के बाद एक तीन मर्द से चुदवाया। सबसे उसने एक-एक लाख लिया। तीनों ने कहा कि मेरी मां के बदले एक लाख कुछ नहीं है। तीनों ने मां को संडे के लिए फिर बुक कर लिया है। पूरा पैसा एडवांस में दे दिया है। पहले उसे नंगी देख लेना फिर ख़ुद उसका रेट पूछ लेना। कोई ताक़त की दवा है तो खा लेना। रेखा का मालूम नहीं लेकिन मेरी मां तुम्हें पूरा चूस लेगी।

विनोद: कल भी रत्ना ने कहा कि मैं बहुत बढ़िया चोदता हूं। चलो खाना खाने।

दोनों खाना खाकर आये और अपने-अपने रुम में चले गये। अमित पढ़ाई करने लगा। सारा होमवर्क पूरा किया, और रिवाइज करने लगा। अमित को विस्वास नहीं था कि रेखा उसके रुम में आयेगी। अमित पढ़ने में व्यस्त था कि दरवाज़ा पर हल्का-हल्का नॉक हुआ। समय देखा तो सवा ग्यारह बज रहे थे। अमित ने मुस्कुराते हुए दरवाज़ा खोला। ललन गार्ड के साथ काले रंग का बुर्का पहने दो औरतें थी।

ललन: अमित साहब, आपने आज रात किसी को भेजने से मना किया था। मैंने कितना रोका लेकिन ये ज़बरदस्ती आ गई। अमित ने दोनों का हाथ पकड़ कर अंदर खींचा।

अमित: इन दोनों के लिए ही मैंने दूसरे को लाने से मना किया था। मैंने रत्ना को कल ही कह दिया था। कल रात तुम उसे साथ लेकर आना। अभी तुम जाओ, सुबह तुम्हें इन दोनों माल का भी कमीशन मिल जायेगा। अभी और किसी को मेरे पास मत आने देना।

असलम जैसे ललन को किसी माल को नंगा देखने का लोभ नहीं था। ललन के जाने के बाद अमित ने दरवाज़ा बंद किया। जिस औरत का बुर्का अमित ने पहले खोला वो रेखा थी। रत्ना के जैसा ही रेखा ने भी बुर्का के नीचे कुछ नहीं पहना था। रेखा को नंगा देख मां भी नंगी हो गई। उसने भी कोई दूसरा कपड़ा नहीं पहना था।

रेखा: हरामी, कितनी औरतों को रंडी बना चुका है। ये पाठक की घरवाली भी तेरे चक्कर में आ गई!

अमित ने बारी-बारी से दोनों को बाहों में लेकर खूब चूमा।

अमित: तुम दोनों, तुम और संगीता मुझे बर्बाद करने पर क्यों तुली हो? खुद मेरे लंड का मज़ा लो ना, दूसरों से मेरी चूदाई की तारीफ़ क्यों करती हो? तुमने गार्गी से कहा तो साली ने मुझसे चुदवा लिया। संगीता ने रत्ना से कहा तो कुतिया अपने से मेरे पास आ गई।

अमित बोल रहा था और उसकी मां ने बेटे को नंगा कर दिया।

इंदिरा: रत्ना भी लेस्बियन है क्या? पिछले दिन तेरी एक रंडी में चूस चाट कर मुझे बर्बाद किया, और आज ये रचना तो सबसे बड़ी हरामजादी है। मेरी बूर चूस कर ही कुतिया ने मुझे ठंडा कर दिया। साली ने खुद नहीं चुदवाया लेकिन मुझे अरविंद से चुदवा दिया।

रेखा: उन लोगों को छोड़। पहले मेरे सामने अपनी मां को चोद। उसके बाद विनोद को बुलाना। तुमसे चुदवाने के बाद किसी और के साथ कोई मज़ा नहीं आयेगा। चोद अपनी मां को। अरविंद ने तेरी मां से हार मान ली है। उसने कह दिया है कि अब वो इंदिरा को कभी नहीं चोदेगा। अब तू अपनी मां को चोद।

मान गया रचना बहुत ही तेज थी। खैर, जैसा रेखा चाहती थी, और मैं भी चाहता था, मैं नंगा हुआ, थोड़ी देर दोनों की बूर को चूसा और चाटा। उसके बाद अपनी मां को चोदने लगा। चोदते समय बारी-बारी से दोनों की चूचियों का भी मज़ा लेता रहा।

रेखा: मैं बस ये देखना चाहती थी कि मादरचोद कैसा होता है वो देख लिया। जा अब अपने दोस्त को बुला, आज तेरी मां की तरह मैं भी रंडी बन कर देखूं कि क़ीमत लेकर चुदवाना कैसे लगता है।

अमित ने अपनी मां के बूर से लंड निकाला और रेखा को चुसाने लगा।

अमित: मेरी प्यारी छोटी मां, तू तो 12 साल से एक मादरचोद के साथ ही रह रही है। और तेरी इस दीदी ने तेरे ही कारण पहली बार होटल में रुपया लेकर चूदाई की।

इंदिरा को भी रेखा पसंद आ गई थी।

इंदिरा: मादरचोद, तू मेरी छोटी बहन को क्यों बदनाम कर रहा है? रेखा ने क्या किया? मैंने किसी से एक रुपया भी नहीं मांगा। हरामी ख़ुद लुटाने पर तुले थे तो मैं क्यों मना करती? साला तू तो अब अपनी दोनों मां को पेलता ही रहेगा। जा अपने दोस्त को बुला कर ला।

रेखा को लंड चुसाते हुए अमित ने कहा-

अमित: विनोद ने जब रेखा चोदने की बात की तब मुझे पहली बार किसी को चोदने की चाह जगी। तब मैंने तुम्हें दीदी वाली चिट्ठी लिखी। हिम्मत कर रेखा से बात किया और हम दोनों में प्यार हो गया। लेकिन साली बहुत ही बड़ी हरामजादी है। उसने तुम्हें अपने बारे में बताया ही होगा कि रंडी ने कैसे अपनी दीदी के घरवाले पर डाका डाला।

अमित: मां, हम दोनों ने बढ़िया चुदाई की। लेकिन जब मैंने कहा कि मेरी एक बार में मन नहीं भरा तब इस प्यारी रेखा रानी ने उकसाया कि मैं वादा करूं कि अपनी मां को चोदूंगा, तब मुझे चोदने देगी। इसी औरत ने सबसे पहले अपनी मां को चोदने के लिए उकसाया और मेरी प्यारी दोनों मां ने, जिसने भी मुझसे चूदवाया सभी ने मां को चोदने के लिए उकसाया। और रेखा मेरी क़िस्मत बोलो या मां की बदक़िस्मती, अब तक कई लोगों ने हम दोनों मां बेटे की चुदाई देखी है। आज विनोद मेरी मां को चोदेगा और अगले संडे दिल्ली जा कर उसकी मां बहन को चोद कर आऊंगा। दोनों बुर्का पहन लो, मैं विनोद को बुला कर लाता हूं।

मैंने होस्टल का नॉर्मल ड्रेस पाजामा और कुर्ता पहना और बग़ल के रुम में चला गया। उसे ललन ने बता दिया था कि मेरे रुम में दो औरत आई हुई है। मेरे नॉक करने पर विनोद ने तुरंत दरवाज़ा खोला।

विनोद: वो यार मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूं।

अमित: मेरी मां शायद तुम्हें पसंद नहीं आयेगी, इसलिए उसे चोदने का प्रोग्राम छोड़ो और रेखा को जो देना चाहते हो वो लेलो। मेरे बोलने पर रेखा तैयार नहीं हो रही थी, लेकिन मेरी मां ने बहुत ज़िद की तब वो रेखा एक बार तुमसे मिलने को तैयार हुई है। उसने कहा है कि दुबारा होस्टल नहीं आयेगी। चलो जल्दी।

मैंने देखा कि उसने एक बैग लिया और रुम बंद कर दिया। उसे लेकर मैं अपने रुम में आ गया। दोनों नंगी थी सिर्फ़ चेहरे को कवर कर लिया था। मैंने दोनों औरतों के बदन को पहली बार गौर से देखा।

दोनों का रंग बहुत साफ़ गोरा था, और चेहरा पूरा राऊंड नहीं देखा था। अलग-अलग देखें तो दोनों बहुत ही खूबसूरत थी। लेकिन जब दोनों साथ हों तो रेखा मेरी मां से कहीं ज़्यादा सुंदर और आकर्षक थी। दोनों के शरीर की बनावट भी एक जैसी ही थी।लेकिन उम्र का फर्क तो पड़ता ही है।

रेखा को एक भी बच्चा नहीं हुआ था, और मेरी मां दो-दो जवान बच्चों की मां थी। रेखा का वजन 60 किलो के आस-पास होगा, जब कि मेरी मां 65-66 केजी की होगी। दोनों हेल्दी थी लेकिन गदराई हुई नहीं थी। दोनों की जवानी ऐसी थी कि जो भी उन्हें एक बार देखता बार-बार देखने की इच्छा करता। सब के दिल में उन्हें चोदने की इच्छा तो जगती ही थी। 36 इंच की मस्त मांसल चूचियां, चिकनी बूर और बहुत ही सुडौल जांघें किसी को भी पागल कर सकती थी।

अमित: लो विनोद, हमें कुछ मेहनत नहीं करनी पड़ी। दोनों ख़ुद ही हमसे चुदवाने के लिए तैयार है। इन दोनों में एक रेखा है और दूसरी मेरी मस्त चुदासी मां है। अगर तुम्हें दोनों को चोदना है तो तीन लाख देना पड़ेगा। सिर्फ़ एक को ही चोदना है तो दो लाख पच्चीस हज़ार दो। दो लाख चोदने के लिए और 25 हज़ार एक दूसरी नंगी औरत की जवानी को देखने और मज़ा मारने के लिए।

अमित: एक को जितनी बार चोद सकते हो चोदो और दूसरी औरत के साथ और सब कुछ कर सकते हो सिर्फ़ बूर में लंड नहीं पेल सकते। तुम जब अपना काम कर लोगे तो मैं तुम्हारे सामने दोनों को चोदूंगा।

विनोद: बाप रे, दोनों बहुत ही सुंदर और मस्त है यार। मुझे दोनों को चोदना है तो कितना देना होगा?

दोनों औरत में से किसी ने भी अपना चेहरा नहीं दिखाया।

रेखा: चार लाख दो और सुबह 5 बजे तक हम दोनों तुम्हारी रंडी। सिर्फ़ तुम ही पूरी मस्ती लोगे। तुम्हारा दोस्त हमें हाथ नहीं लगायेगा। अगर तुम्हें रेखा पसंद आ गई तो हर रात तो नहीं हर हफ़्ते एक रात तुम्हारे साथ रहेंगी लेकिन आगे से हर रात का एक-एक लाख देना होगा। सिर्फ़ तुम और दूसरा कोई नहीं। जल्दी फ़ैसला करो कि सिर्फ़ एक को ही चोदोगे या दोनों की बूर में लंड पेलना है?

अमित: मुझे भी चोदना है।

रेखा: तुम भी दो लाख दो और चोदो। लेकिन आज नहीं, आज हम दोनों तेरे दोस्त की माल है।

अमित समझ गया कि ये दोनों घर से अमित को शर्मिंदा करने आई थी। अमित के सामने दोनों विनोद से चुदवाने आई थी। लेकिन अमित ने भी ठान लिया कि दोस्त के सामने भी अपनी मां को चोदेगा।

विनोद: सॉरी अमित। मैंने कहा था ना कि मैं तुम्हारी दोनों मां को चोदूंगा। अभी आता हूं।

विनोद रुम से बाहर निकल गया। अमित ने दोनों के चेहरे से कपड़ा हटाया।

अमित: ये क्या मज़ाक है! मैं भी दोनों को चोदूंगा।

रेखा: मैं तो तुम्हारे साथ ही बहुत खुश थी। लेकिन तुम ख़ुद हमें अपने दोस्त से चुदवाना चाहते थे। तुमने अपनी सगी मां को अपने सामने दूसरों से चुदवाया। तो अब हमें रंडी-पना करने दो। पैसा कमाने के लिए हम हर बार तुम्हारे ही सामने तुम्हारे दोस्तों से चुदवायेंगे। तुम ही हमारी दलाली करोगे। तुम्हारे रुम में, होस्टल में, तुम सिर्फ़ हमारा दलाल हो। तुम्हें हमारी चुदाई देखनी होगी और तुम कभी यहां अपने कपड़े नहीं खेलोगे। मुझे जब भी चोदना है तो तुम मेरे घर आ जाओ। यहां तुम हमारे दलाल हो और कुछ नहीं।

उन्होंने कदमों की आहट सुनी और दोनों ने फ़िर चेहरे को कवर कर लिया। रेखा की बात सुन कर अमित को बहुत ज़ोर का धक्का लगा। उसे अपनी गलती समझ आ गई। वो भूल गया था कि दो लाख की क्या क़ीमत है। उसे रेखा से कभी धंधा करने के लिए नहीं बोलना चाहिए था। लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। रेखा ही नहीं उसकी अपनी मां भी उसके दोस्त के सामने नंगी थी। विनोद अंदर आया और दरवाज़े को अंदर से बंद कर दिया।

विनोद: रेखा रानी ये है 6 लाख। मैंने तुम्हें अपनी खास रंडी बनाने के लिए ये सारा रुपया निकाला था। दूसरी औरतों को हम ज़्यादा से ज़्यादा 5 हज़ार ही देते हैं। लेकिन अगर तुम वादा करो की तुम यहां किसी और से नहीं चुदवाओगी, तो आज की क़ीमत के अलावा हर महीना तुम्हें पांच लाख दूंगा। बदले में हर हफ़्ता एक रात मेरे साथ गुज़ारनी‌ होगा। एक रात तो आओगी ही, उसका पांच लाख हर महीना दूंगा ही, उसके अलावा जब भी आओगी हर रात कम से कम 25 हज़ार दूंगा। लेलो सारा रुपया। आज का 4 लाख और कल रात का दो लाख। तुम दोनों कल की पूरी रात भी मेरे साथ ही रहोगी।

विनोद ने किसी को हाथ भी नहीं लगाया था, लेकिन उसने रेखा को अपनी रखैल बनाने का ऑफ़र भी दे दिया।

विनोद: रानी, अब तो दोनों की क़ीमत दे दी है, अब चेहरा क्यों छिपा रही हो?

विनोद ने झटके से चेहरे के उपर से कवर हटा दिया।

इंदिरा: अब तो सब कुछ देख लिया। तुमने हमारी क़ीमत भी दे दी। अब ये सभी 6 लाख हमारे। अगर हमें तुम्हारी चूदाई भी पसंद आई तो ही हम कल रात फिर आयेंगे। अगर तुम हमें खुश नहीं कर पाये तो फिर हम ना ये रूपये वापस करेंगे, ना ही दुबारा यहां आयेंगे।

विनोद ने अमित के मां के गालों को सहलाते हुए तीन बार होंठों को चूमा। वैसा ही उसने रेखा को भा चूमा। दोनों की चूचियों को सहलाया।

विनोद: आंटी, अमित ने जब ये कहा कि रेखा उसकी मां जैसी ही लगती है तब मुझे विस्वास नहीं हुआ था। मुझे लगा था मानो वो मज़ाक कर रहा था। लेकिन सच ही आप दोनों बहनें ही लगती है। मैं बहुत ही ज़्यादा खुश हूं कि मुझे एक साथ दोनों खूबसूरत बहनों को प्यार करने का, उन्हें चोदने का मौक़ा मिल रहा है। सॉरी दोस्त (अमित), तुम्हारी मां मेरे सामने नंगी है। बहुत ही मस्त माल है यार। अभी तो मैं तुम्हारी मां को चोदूंगा ही।

विनोद: अगर तुम्हें पसंद नहीं है तो मेरे रुम में चले जाओ, इंदिरा आंटी, आप भी यहीं रह जाओ तो मैं आपको भी हर महीना 5 लाख और हर रात की चुदाई का अलग से 25 हज़ार दूंगा। ये रेखा तो मुझे जान से प्यारी है ही, आप भी मुझे बहुत पसंद आ गई है। रेखा, बेटे के सामने मां को चोदने में बहुत ही ज़्यादा, डबल मज़ा आयेगा, पहले आंटी को चोद लूं?

रेखा: कुत्ते का जब लंड टाईट होना शुरु होता है, तो सभी के सामने वो पहले अपनी मां की बूर में ही लंड पेलता है। तुम सब भी कुत्ते ही हो। क्या पता तुमने भी चूदाई की शुरुआत अपनी मां की बूर में ही लंड पेल कर की हो। लंड में दम भी है कि सिर्फ़ रुपये देकर ही औरत को नंगा करते हो? चिट्ठी में तो बहुत भाव मारते हो कि ऐसे चोदूंगा वैसे लंड चुसाऊंगा। अभी तक तो तुमने लंड दिखाया भी नहीं, तुम्हारे लंड में दम नहीं है तो कोई बात नहीं। जब तक तुम्हारा लंड टाईट नहीं होता है तब तक अपने दोस्त (अमित) से बोलो हमें चोदेगा। देखो उसका लंड कैसे पाजामा के नीचे से भी हमें डरा रहा है।

रेखा की बात पर अमित ने अपना पाजामा और कुर्ता निकाल दिया।

विनोद: अ अ अमित ये क्या है? अब समझ आया कि संगीता और रत्ना क्यों तुमसे इतना खुश रहती है। बाप रे कोई कैसे इस लंड को अपना बूर में लेती है?

अमित: तुम्हें, अभी दिखाता हूं।

रेखा ना ना, नहीं करती रही लेकिन अमित उसके उपर चढ़ा और एक मिनट के अंदर ही लंड को बूर में पेल दिया। थोड़ी देर रेखा अमित के पीठ पर मुक्के से मारती रही। लेकिन रेखा की बूर को अमित का लंड बहुत ही पसंद आ गया था। 5-7 मिनट ही गुजरे होंगे, और रेखा लाउड सिसकारी मारते हुए चुदाई का मज़ा लेती रही। अमित अपने तरीक़े से खूब जमा कर चोद रहा था। रेखा को चोदते हुए उसने मां की चूचियों को भी मसलना शुरु किया।

अमित: अब क्या देख रहे हो? मेरी रंडी तेरे सामने नंगी है, अगर तुमने नहीं चोदा तो पिछली रात जैसा तुम्हारे रुपया पर मैं ही ऐश करुंगा। तुम्हारे कारण अपनी मां को भी चोद लूंगा।

लेकिन अमित का घोड़े जैसा लंड देख कर विनोद शॉक्ड हो गया था। दोनों नंगी औरतों को देख कर लंड टाईट हुआ था, वो ढीला हो गया।

अमित: कुतिया (मां) देख क्या रही है? बेचारे ने इतना रुपया दिया है, तो तू भी अपना कमाल दिखा। पिछले दिन होटल में तुमने मेरे सामने तीन कुत्तों से चुदवाया था। यहा़ भी मेरे दोस्त से चुदवा ले।

बेटे की बात सुन कर इंदिरा उठी और उसने विनोद को नंगा किया। उसे अपने साथ बेड पर लिटाया और दोनों एक-दूसरे को रगड़ते हुए चुम्मा चाटी करने लगे। कुछ देर मस्ती लेने के बाद इंदिरा ने बहुत प्यार से लंड को चूसा। अमित और रेखा की चुदाई 30-35 मिनट हो गई,‌ तब विनोद ने इंदिरा की बूर में पहला धक्का मारा।

इंदिरा: वाह बेटा विनोद ! बहुत दम है तेरे लंड में यार। एक बात याद रखो किसी भी औरत को, कुतिया को इससे फर्क नहीं पड़ता कि चोदने वाले का लंड पतला है या मोटा, लंबा है, या छोटा। बस चोदने वाले में दम हो जाना चाहिए। एक और बात, सभी की सभी औरतें 20-25 मिनट की दमदार चुदाई से ही पूरी तरह से संतुष्ट हो जाती है। अमित बेटा है, बहुत खुशामद करता है तो कभी-कभी चुदवा लेती हूं।

इंदिरा: इसके बाप का लंड भी इसके जैसा ही लंबा और मोटा है। लेकिन मुझे कभी भी दोनों बाप बेटे से चुदवाने में कोई मज़ा नहीं आता है। दो रात से तुम्हारे अरविंद सर चोद रहे हैं। आज दिन में हम दोनों ने असलम से 2-2 बार चुदवाया। और मुझे दोनों अरविंद और असलम के साथ ही ज़्यादा मज़ा आया। अब तुम बहुत ही ज़्यादा मस्त कर रहे हो। तुम उन दोनों अरविंद और असलम से बढ़िया चोद रहे हो। रेखा, झूठ नहीं बोल रही हूं, बहुत मज़ा आ रहा है विनोद के साथ।

इंदिरा सिर्फ़ बेटे को ग़ुस्सा दिलवाने के लिए बोल रही थी कि उसने असलम से चुदवाया। लेकिन यह उसने बिल्कुल सच कहा कि विनोद बहुत ही बढ़िया चोद रहा था।

रेखा: विनोद तुम्हें मस्त कर रहा है और तेरा बेटा मेरी जान लेने पर तुला है। अमित, आज साफ़-साफ़ कह देती हूं, तुझे संगीता, रचना, गार्गी या रत्ना को जितना चोदना है चोद। अब से बिना बुलाए तुम मेरे घर नहीं आओगे। मादरचोद, तुमसे कोई भी लगातार 4-5 दिन चुदवायेगी तो कैसी भी रंडी क्यों ना हो मर जायेगी। अब उतर, मैं तेरा एक भी धक्का और नहीं संभाल सकती। तेरे लंड के लिए सबसे बढ़िया बूर वहीं है जहां से तू निकला है। विनोद, इस जंगली जानवर से मेरी जान बचाओ।

दोनों औरत घर से ही प्लान बना कर आई थी कि अमित के दोस्त के सामने भी इंदिरा को उसके बेटे से चुदवायेगी जिससे कि अमित किसी के सामने रेखा का नाम लेने से भी घबरायेगा।

विनोद ने इंदिरा को 10-12 मिनट ही चोदा होगा। रेखा बार-बार विनोद से बोलती रही। जब इंदिरा ने भी कहा तब विनोद ने इंदिरा की बूर से लंड निकाला।

विनोद: अमित, रुपया मैंने दिया लेकिन तुम ने भी मेरी रेखा को चोद लिया। अब से तुम्हारी मां भी मेरी रंडी है, रखैल है। लेकिन तुम भी क्या याद करोगे कि विनोद भी क्या दिलदार था। चोद लो एक बार अपनी मां को भी। इंदिरा आंटी, आप जब तक यहां है, हर रात आप मेरी मेहमान है।हर रात आपको एक एक लाख दूंगा। सच रेखा रानी, आपकी ख़ूबसूरती का कोई मुक़ाबला नहीं। लेकिन ये अमित की रंडी मां, ये कुतिया बहुत ही मस्त माल है।

अमित भी रेखा के बूर से लंड निकाल कर सीधे अपनी मां के उपर आ गया। विनोद अपनी सबसे खास पसंद की माल रेखा से बात ही कर रहा था और अमित ने अपने दोस्त के सामने भी अपनी मां‌ की बूर में लंड पेल दिया।

समाप्त

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