माँ और उसका बेटा 4

कुँवारी चूत
नमिता: आज पढ़ायी कैसी हुई?
राज: ठीक हुई माँ ।
नमिता: अब तेरा अगला टेस्ट कब है?
राज: अगले सोमवार को, फ़िज़िक्स का है।
नमिता: बेटा, इस बार अगर टेस्ट में ८०% से कम नम्बर आए तो मैं तुझसे बात नहीं करूँगी।
राज: माँ मैं पूरी मेहनत करूँगा।
फिर खाना खाकर वो उठ गए और सोफ़े पर बैठ गए।
आज नमिता ने सोच रखा था कि राज की उलझनों को समझने की कोशिश करेगी।
नमिता: बेटा, एक बात पूँछूँ?
राज ने लाड़ दिखाते हुए उसकी गोद में सर रखा और लेट कर बोला: हाँ माँ पूछो।राज माँ की गदरायी जाँघों पर लेटा हुआ था और उसने मुँह माँ के पेट की तरफ़ किया और सोचा कि वो माँ की बुर के कितने पास है?
नमिता भी उसके बालों में उँगलियाँ फेरते हुए बोली: बेटा, एक बात बताओ, पिछले कुछ दिनों में ऐसा क्या हो गया है कि तुम्हारा ध्यान पढ़ाई से हट गया है, और तुम्हारे टेस्ट के नम्बर भी ख़राब आने लगे हैं?
राज सकपका गया क्योंकि उसे माँ से ऐसे सीधे प्रश्न की उम्मीद नहीं थी। वो बोला: माँ, ऐसा तो कुछ भी नहीं हुआ है, आपको ऐसा क्यों लग रहा है?
नमिता: बेटा, तेरी माँ को तो हमेशा तेरी फ़िक्र होगी ना, सच बता क्या बात है? क्यों तेरा मन पढ़ाई मेंनहीं लग रहा है। एक महीने पहले तक तो तू बहुत अच्छे नम्बर लाता था।
ऐसा कहते हुए वो झुकी और उसका माथा चूम ली।
राज अंदर तक ममता से भीग गया।माँ कितना निश्छल प्यार करती है ,उससे और वह कमीना उसको चोदने की फ़िराक़ में है। उसे अपने पर शर्म आयी और वो बोला: माँ ऐसा सच में कुछ नहीं है, जो मैं आपको बताऊँ ।अब मैं और मेहनत करूँगा। इतना कहकर उसकी आँखें फिर से माँ की विशाल छातियों पर आ गई।
नमिता उसके गाल पर हाथ फेरी और उसकी आँखों में झाँकते हुए बोली: अच्छा ये बता तू सेक्स के बारे में क्या सोचता है?
राज हैरान सा होकर बोला: मतलब ? मैं समझा नहीं आप क्या पूछ रही हो?
नमिता: मैं यह पूछ रही हूँ कि तू जवान हो गया है और तू सेक्स के बारे में क्या सोचता है?
राज: माँ मैं बड़ा हो गया हूँ और सेक्स के बारे में सब जानता हूँ।
नमिता: क्या तुम किसी लड़की को प्यार करते हो?
राज: ओह माँ नहीं तो, ये सब नहीं है मेरी ज़िंदगी में।
नमिता उसके बालों में हाथ फेरता हुए बोली: बेटा तो फिर जब सेक्स का सोचते होगे तो किसी लड़की की कल्पना तो करते होगे? कौन है वो जिसके बारे में सोचते हो? कोई क्लास की लड़की है या क्या?
राज: माँ ऐसा कुछ नहीं है मैं किसी भी लड़की में इंट्रेस्टेड नहीं हूँ।
नमिता हँसते हुए : तो किसी लड़के में इंट्रेस्टेड हो क्या? गे हो क्या?
राज हँसते हुए: माँआऽऽऽ आप भी ना, कुछ भी बोलती हो। मैं सच अभी किसी भी लड़की वड़क़ी के चक्कर में नहीं पड़ा हूँ।
नमिता: अच्छा ये बता जब तू उत्तेजित होता है तो इसका कारण क्या होता है? मेरा मतलब क्या सोच कर उत्तेजित होता है?
राज समझ गया की माँ उसके खड़े लंड की बात कर रही है, जो उन्होंने कई बार लोअर में से देखा है।
वह बोला: माँ , मुझे नहीं पता, कभी कभी सोकर उठता हूँ तो उत्तेजित रहता हूँ, पर फिर बाथरूम जाकर सूसू करके सामान्य हो जाता हूँ।
नमिता: ह्म्म्म्म्म तो तू नहीं बताना चाहता?
राज: माँ सच कोई लड़की नहीं है मेरे जीवन में ।
नमिता: अच्छा बताओ उत्तेजित होने पर क्या करते हो?
राज: माँ अब ये कैसा सवाल है? मैं इस बारे में बात नहीं करूँगा।
नमिता: क्यों शर्म आती है । और ऐसा बोलते हुए उसके गाल खींच लिए।
राज: हाँ आती है । ऐसा कहते हुए उसने माँ की कमर मेंहाथ डालकर अपना चेहरा माँ के पेट में घुसा दिया।
नमिता ने उसकी पीठ सहलायी और बोली: अच्छा ये तो बता दे कि क्या रोज़ ही अपनी उत्तेजना को हाथ से शांत करता है? या दो तीन दिन में एक बार?
राज माँके मुँह से “ हाथ से “ शब्द सुनकर हैरान हुआ और थोड़ी देर बाद बोला: पता नहीं आज आपको क्या हो गया है, कैसी कैसी बातें कर रही हैं , मैं जा रहा हूँ पढ़ाई करने। ऐसा बोलकर वो उठने लगा और उसका सर माँ की छातियों से टकरा गया और उन नरम अंगों की छूअन उसको गरम कर गयी।
वह “ सारी माँ” बोलते हुए भाग गया।
नमिता अब सोफ़े से उठकर अपने कमरे में गई और आज हुई बातों के बारे में सोचते रही । उसे राज की मन की बात निकलवाने में कोई सफलता हाथ नहीं लगी थी।तभी फ़ोन पर मेसिज आया । मनीष का था , लिखा था: आपकी याद आ रही है।
नमिता ने भी लिखा: मुझे भी याद आ रही है।
मनीष: फ़ोन करूँ?
नमिता: हाँ करो।
फ़ोन पर मनीष बोला: हाय आंटी, कैसी हैं आप?
नमिता: ठीक हूँ,तुम ठीक हो?
मनीष: आंटी मैं ठीक हूँ, पर मेरा ठीक नहीं है।
नमिता: बदमाश बस हमेशा एक ही बात।क्यों तेरे उसको क्या हुआ?
मनीष: वो आपकी याद में खड़ा है और मैं उसे ऊपर नीचे हिला रहा हूँ?
नमिता को अचानक याद आया कि यही सवाल उसने राज को पूछा था तो उसने जवाब गोल कर दिया था। उसने वही सवाल पूछा: अच्छा ये बताओ कि तुम क्या रोज़ मूठ्ठ मारते हो?
मनीष: आंटी ये कैसा सवाल है?
नमिता: बताओ ना?
मनीष: नहीं रोज़ नहीं तीन चार दिन में एक बार। और जब आप मिल जाती हो तो वह भी नहीं मारता।
नमिता: अच्छा याद करो कि आज से तीन चार साल पहले जब तुम १८ के आसपास थे तब कितने दिनों में मारते थे?
मनीष हँसते हुए बोला: कभी कभी रोज़ और कभी दिन में दो बार भी।
नमिता के मुँह से “ओह” निकला।
वह सोचने लगी तो क्या राज भी ऐसा ही कर रहा है?
मनीष: क्या हुआ आंटी कहाँ गईं?
नमिता: कुछ नहीं सोच रही हूँ इतना मूठ्ठ मारता था तो किसके बारे में सोचता था? कोई लड़की थी क्या?
मनीष: आंटी मुझे तो लड़कियाँ कभी अच्छी नहीं लगीं। मुझे तो आप जैसी आंटी ही अच्छी लगती हैं शुरू से ही। असल में माँ तो बहुत जल्दी गुज़र गयीं थीं पर एक मेरी मौसी थी करीब ३५/३६ साल की, बहुत मिलती थी आपसे। बस उनकी ही छाती और गाँड़ याद करके मूठ्ठ मारता था। मैंने उनको एक बार कपड़े बदलते हुए नंगी देखा था, बस तभी से उनका दीवाना हो गया था।
नमिता को राज से सम्बंधित अपने कुछ सवालों का जवाब मिलता दिख रहा था।
वो फिर पूछी: तो तेरी पढ़ाई पर इसका क्या असर हुआ?
मनीष: आंटी किताब खोलता था तो मौसी की छातियाँ दिखती थीं , पढ़ाई क्या ख़ाक करता। थर्ड डिविज़न में पास हुआ था। पापा का बिज़नेस था तो कोई चिंता नहीं थी।
नमिता काँप उठी कि कहीं राज के साथ भी तो ऐसा नहीं हो रहा है। वो अगर पढ़ नहीं पाया तो वो कहीं का नहीं रहेगा। उसका तो ना बाप है ना ही कोई बिसनेस वो क्या करेगा? वो बेहद चिंतित हो उठी।
मनीष: क्या हुआ आंटी, चलो ना फ़ोन सेक्स करते हैं?
नमिता: नहीं मनीष आज मूड नहीं है। फिर कभी।
मनीष: आंटी कल पापा का टूर बन सकता है , राज के जाने के बाद आऊँ क्या?
नमिता: कल की कल देखेंगे। चलो बाई ।
मनीष: आंटी एक पप्पी तो दे दो प्लीज़।
नमिता ने हँसते हुए उसको किस किया और फ़ोन रख दिया।
नमिता सोचने लगी कि क्या सच में राज को भी बड़े उम्र की औरतों में ही दिलचस्पी है?उसके आसपास कौन सी औरतें हैं? यहाँ तो पड़ोसन कभी उसके सामने आयी ही नहीं । स्कूल में ज़रूर मैडम हैं। और उसके दोस्तों में सिर्फ़ श्रेय , नदीम और ये नया लड़का प्रतीक हैं। पता नहीं इनमे से ही किसी की माँ पर तो वह कहीं फ़िदा ना हो गया हो? इस उम्र का क्या भरोसा?
अब नमिता ने सोच लिया कि उसे ये सब भी पता करना ही है?
फिर उसकी आँख लग गयी। सपने में वह मनीष से चुदवा रही थी। मनीष उसके दूध पिता हुआ उसको बुरी तरह से चोद रहा था। अचानक उसने देखा कि मनीष का चेहरा धुँधला पड़ने लगा और उसकी जगह उसे राज का चेहरा दिखने लगा। वो झड़ रही थी और राज को हटा रही थी अपने ऊपर से। तभी उसकी नींद खुली और उसने पाया कि उसकी पैंटी पूरी गीली है और वो पसीने से भीग गयी है। उसे ये समझ नहीं आ रहा था कि मनीष की जगह उसे राज क्यों दिखा उसकी चुदायी करते हुए???
वह थोड़ी परेशान हो गई पर बाद में उसने सोचा कि शायद वह राज के बारे में चिंतित है इसलिए राज ही उसको सपने में अपने ऊपर दिखाई दिया। वह बाथरूम जाकर फ़्रेश हुई।
उधर राज नमिता की गोद से उठकर अपने कमरे में गया और सोचने लगा कि आज माँ को क्या हो गया है? ज़रूर उन्होंने अपनी पैंटी में उसका वीर्य देख लिया होगा तभी ये सब पूछ रहीं हैं। फिर उसको माँ की लेग्गिंग से उभरी हुई बुर याद आयी जिसे उसने सूँघा था और ये भी याद आया कि कैसे उनकी छातियों से टकराकर उसे मज़ा आ गया था। अब उसने अपना लोअर और चड्डी खोल दिया और अपने लौड़े को मूठियाने लगा और माँ माँ कहते हुए जल्दी जल्दी हाथ चलाने लगा। फिर उसने अपने लौड़े पर थूका और ज़ोर से मूठ्ठ मारने लगा और हाय्य्य्य्य्य्य्य माँआऽऽऽऽ कहकर झड़ने लगा । फिर बाथरूम जाकर वो वापस आया और सो गया। किताबें तो उसका रास्ता ही देखती रह गयीं।

शाम को नमिता किचन में खाना बना रही थी कि राज पीछे से आकर माँ कहते हुए उससे चिपक गया और बोला: चाय पिला दो ना फिर मैं पार्क से आता हूँ। नमिता ने उसकी पैंट को अपने नितम्बों पर महसूस किया पर अच्छा कहकर चाय बनाकर उसको से दी। नमिता सपने में अपने साथ राज को देखकर थोड़ी सी शॉक में थी।
राज चाय पीकर पार्क में गया। वहाँ नदीम से मिलकर वो बातें करने लगा।
नदीम: यार ,आज तो हद ही हो गयी।
राज: क्या हुआ?
नदीम: आज अब्बा और अम्मी दोनों से मज़ा लिया।
राज: मतलब?
नदीम: आज जब मैं काम से वापस लंच पर आया तो अम्मी और अब्बा सोफ़े ओर बैठे बातें कर रहे थे। मैं अंदर आया तो अब्बा अम्मी से थोड़ा दूर हो गए और मैं अम्मी और अब्बा के बीच बैठ गया।
अम्मी बोली: चल मैं तेरे लिए पानी लाती हूँ।
मैं बोला: नहीं अम्मी नहीं चाहिए। आप बैठो ना यहाँ। फिर मैंने अम्मी को अपनी गोद में खिंच लिया और उनके होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने कहा: अम्मी कुर्ती उतार दो ना, मुझे दूध पीना है।
अम्मी ने कुर्ती उतार दी फिर ब्रा भी खोल कर अपने दूध नंगे कर दिए । मैंने अम्मी को गोद से उतारा और कहा: मैं आपकी गोद में लेट जाता हूँ, चलो आप मुझे दूध पिलाओ।
अम्मी के गोद में आकर मैं लेट गया और अम्मी ने अपने एक दूध का पसीना साफ़ किया और मेरे मुँह में अपना दूध लगा दिया।मैं दूध चूसने लगा और दूसरे हाथ से उनका दूसरा दूध दबाने लगा।अम्मी की आऽऽऽहहह निकल रही थी, और मेरा लौड़ा पैंट के ऊपर से खड़ा हो गया था। अब्बा मज़े से अपना लंड सहला रहे थे और मुझे अम्मी से मज़ा लेते हुए देख रहे थे। तभी पता नहीं मुझे क्या सूझा कि मैंने अब्बा से कहा: आप मेरी पैंट और चड्डी खोल दो। अब्बा थोड़ा सा हैरान हुए फिर बड़े प्यार से मेरी बेल्ट खोलने लगे। फिर मेरी ज़िपर खोलकर उन्होंने मेरी पैंट उतार दी। अब चड्डी में तना हुआ लौड़ा उनको साफ़ दिख रहा था। अब उन्होंने मेरी चड्डी भी निकाल दी और अब मेरा लौड़ा उत्तेजना से अपना सर हिला रहा था।
अम्मी के दूध से मुँह निकालकर मैं बोला: अब्बा इसे सहलाओ। वह चुपचाप उसको पकड़ लिए और सहलाने लगे। अब मैंने कहा: अब्बा इसे चूसोगे? अगर आपकी इच्छा है तो चूस लो।
अम्मी ने हैरानी से मुझे देखा और बोली: क्या बक रहा है?
मैं बोला: अम्मी अब अब्बा का खड़ा नहीं होता है ना तो उनको सेक्स के लिए कुछ नया ट्राई करना होगा। शायद मेरा लौड़ा चूसना उनको अच्छा लगे।देखो ना कितने प्यार से उसको सहला रहे हैं।
मैं फिर बोला: अब्बा चूसो अगर आपकी मर्ज़ी हो तो।
और अम्मी की तो आँखें जैसे फट सी गयीं क्योंकि अब्बा किसी भूक़े बच्चे की तरह मेरे लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगे।
मेरे मुँह से आऽऽऽहहह निकल गयी। अब मैं फिर से अम्मी का दूध चूसने लगा। उधर अब्बा बहुत मज़े से चूस रहे थे और मेरी सिसकियाँ निकल रही थीं। मैंने अम्मी को कहा कि आप अपनी सलवार उतार दें और वो नंगी हो गयीं। अब मैंने उनको सोफ़े पर घोड़ी बना दिया और उनकी बुर और गाँड़ मेरे सामने थी। मैंने उनके बुर को चाटा और गाँड़ में एक ऊँगली डाल दी। अब मैंने ज़ोर से अम्मी की बुर चाटनी और चूसनी शुरू की। अम्मी पीछे धक्के मारके मज़े से अपने चूतरों को मेरे मुँह पर रगड़ रही थी। उधर अब्बा मेरे लौड़े को मेरे जाँघों के बीच में आकर चूसे जा रहे थे। आह क्या फ़ीलिंग थी हम तीनों ही वासना की आँधी में जैसे बह गए थे। अब माँ मेरे मुँह में झड़ने लगी और चिल्ला रही थी: हाऽऽऽऽय्यय बेटाआऽऽ चाआऽऽऽऽऽट अपनी माँआऽऽऽऽऽऽऽ की बुर हाऽऽऽऽय्य्य्य्य।
मेरा मुँह अम्मी की पानी की धार को ग्रहण किए जा रहा था और मैंने पूरा रस पी लिया।उधर मैं भी चिल्ला कर झड़ने लगा। मेरा रस अब्बा के मुँह में गिरने लगा। अब्बा मज़े से मेरा रस पीने लगे।
फिर हम सब ने बाथरूम मेंअपनी सफ़ाई की और फिर खाना खाने बैठे।
अब्बा बोले: बेटा मुझे बहुत अच्छा लगा तुम्हारा चूसना और तुम्हारा रस भी बहुत स्वाद है।
अम्मी: ये आपको क्या हो गया है, आप ऐसे कैसे कर सकते हो?
अब्बा: तुम नहीं समझोगी। अब मेरा खड़ा नहीं होता है तो मुझे इसका खड़ा लौडा चूसना बहुत अच्छा लगा।
मैं: अब्बा आप मेरे लौड़े को जब भी चूसना चाहो चूस लेना।
आख़िर मेरा ये लौड़ा आपके और अम्मी की सेवा के लिए ही है।
सच आज बहुत मज़ा आया यार।
राज का मुँह खुला का खुला रह गया। क्या ऐसा ही भी हो सकता है? हे भगवान सेक्स क्या क्या करवाता है। वो सोचा कि मेरी भी तो ऐसी ही हालत है कि मैं भी अपनी माँ को चोदना चाहता हूँ।
उसका उत्तेजना के मारे बड़ा बुरा हाल था।
तभी नदीम बोला: यार तू चाहे तो मेरी माँ को चोद ले पर आंटी को मुझसे एक बार चुदवा दे यार।
राज हम्म कहकर घर को चला गया।
घर पहुँचकर उसने देखा कि माँ TV देख रही थी। नमिता ने TV बंद कर दिया। फिर बोली: अभी तुम एक घंटा पढ़ो फिर खाना खाएँगे।
और हाँ तुम अपनी किताबें मेरे कमरे में ले आओ और वहीं पढ़ाई करो।
राज: वो क्यों माँ , मैं अपने कमरे में ही पढ़ लेता हूँ।
नमिता: इसलिए कि मैं देखूँगी कि तुम पढ़ पा रहे हो ना? या लड़कियों के सपने देख रहे हो।
राज : माँ आप भी ना, चलो ठीक है आपके कमरे में ही आ जाता हूँ किताबें लेकर।
राज किताबें लाकर माँ के कमरे में चला आया और नमिता भी अपने कमरे में बिस्तर पर आ कर बैठ गयी। राज बिस्तर के पास रखे कुर्सी टेबल पर बैठकर पढ़ाई करने लगा। उसने देखा कि माँ एक मैगज़ीन पढ़ रही है। इस समय वह साड़ी ब्लाउस में थीं।
अब वह पढ़ाई करने की कोशिश करने लगा। पर उसकी आँख के सामने बार बार नदीम की बातें याद आ रही थी। कैसी होगी उसकी माँ की बुर, क्या बड़ी स्वाद होती है, तभी तो नदीम उसको चाटता होगा। उसका लौड़ा खड़ा होने लगा।
उधर नमिता ध्यान से उसको देख रही थी कि वह सपने की दुनिया में खोया हुआ है, उसने अभी तक पढ़ाई शुरू भी नहीं की है।
वो समझ गयी कि ये बड़ी भारी समस्या है और इसका हल सरल नहीं होगा।
नमिता: तेरा ध्यान कहाँ है, तू पढ़ ही नहीं रहा है।
राज: पढ़ तो रहा हूँ माँ।
नमिता: चल मेरी ओर देखकर बता कि क्या पढ़ा है अभी?
राज झुंझला कर बोला: आप तो बस पीछे ही पड़ गयी हो।
नमिता ने आह भरी और कहा: बेटा क्या बात है, क्यों नहीं पढ़ पा रहे हो?
राज ने कोई जवाब नहीं दिया और पुस्तक पढ़ने लगा।
नमिता के दिमाग़ मेंएक बात आयी और वह खड़ी होकर बोली: चलो तब तक मैं अपने कपड़े ही बदल लूँ।
राज थोड़ा सा चौका पर उसने कोशिश की जैसे उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
नमिता इसके पहले भी कई बार उसके सामने कपड़े बदलती थी, पर राज ने कभी भी इस पर ध्यान नहीं दिया था।वो अपने विडीओ गेम या नमिता के मोबाइल पर लगा रहता था। आज नमिता देखना चाहती थी कि उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है?
नमिता अपनी साड़ी उतारने लगी और शीशे से राज को कनख़ियों से देखने लगी। उसका शक सही था वह उसे घूरे जा रहा था।
अब वो पेटी कोट में थी और उसने देखा कि जैसे उसकी आँखें उसके नितम्बों पर ही चिपक गयी थीं। अब उसने ब्लाउस खोला और ब्रा में आ गयी और सामने से ब्लाउस को छाती से चिपका लिया जिससे उसकी ब्रा सामने से ना दिखे।अब वह उसकी नंगी पीठ को देखे जा रहा था। वो नायटी लेकर अपने ऊपर पहन ली। और फिर नीचे से पेटिकोट खोल कर निकाल दी।
नमिता ने जो देखना था देख लिया था । तो ये सच है कि राज का ध्यान अब सेक्स में ही फँस कर रह गया है। और इसी कारण उसकी पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
उसने एक आख़री टेस्ट लेने का सोचा और अपने उतारे हुए कपड़े वहीं छोड़कर और ये कहकर कि खाना लगाती हूँ ,बाहर चली गयी।
पर सच में वह पीछे से आकर खिड़की के पीछे से देखने लगी कि राज क्या करता है?
उसका दिल धक से रह गया जब उसका शक सही निकला। उसने देखा कि राज ने दरवाज़े की तरफ़ देखा और फिर वहाँ माँ को ना पाकर वह अपनी माँ के ब्लाउस को उठाकर उसे सूँघने लगा और अपने मुँह पर मलने लगा। फिर उसने बग़लों की जगह को जो पसीने से भीगे हुए थे को सूँघा और जीभ से चाटा। पेटिकोट को भी वो बुर और गाँड़ के पास वाली जगह पर सूँघा और मुँह में मला।
नमिता के तो होश ही उड़ गए, उसका अपना बेटा उस पर गंदी नज़र रखता है। अब उसे पक्का यक़ीन हो गया कि राज सेक्स का ही सोचता रहता है , इसलिए उसकी पढ़ाई का सत्यानाश हो रहा है।वह बहुत चिंता में पड़ गयी कि ये कैसा मोड़ आ गया है उसकी ज़िंदगी में? वह शॉक में थी और सोचने लगी कि इस मुसीबत से कैसे छुटकारा पाया जाए।
राज थोड़ी देर बाद आकर खाने के टेबल पर बैठ गया और खाना खाने लगा। नमिता ने देखा कि वह चुप सा था।
फिर वो यह कहकर कि मैं अपने कमरे में पढ़ूँगा वहाँ से चला गया।
नमिता रात को सोच रही थी कि क्या किया जाए? तभी उसने सोचा किदेखा जाए ये लड़का पढ़ भी रहा है या सो गया है?
वह इसके कमरे में आकर रुक गई और खिड़की का पर्दा हटा कर अंदर झाँका। उसने देखा कि किताब खुली थी और वो सोच में डूबा हुआ था और उसक एक हाथ अपनी लोअर के अंदर था, और ये साफ़ पता चल रहा था कि वो अपना हथियार सहला रहा है।
नमिता ने अपना माथा ठोक लिया। हे भगवान मैं इस लड़के की जवानी का क्या करूँ? ये तो जैसे सेक्स के पीछे पागल ही हो गया है।
नमिता ने दरवाज़े के पास आके आवाज़ दी: राज बेटा, सो गया क्या?
राज ने जल्दी से अपना हाथ लोअर से निकाला और बोला: आओ माँ , क्या हुआ?
नमिता अंदर आकर उसके पीछे खड़ी हो गई और उसके बालों को सहलाते हुए बोली: बेटा, पढ़ाई पर ध्यान है या अभी भी सेक्स के बारे में ही सोच रहे हो?
राज जैसे अपनी चोरी पकड़ी जाने से हड़बड़ा गया और बोला: माँ बस आप भी एक ही बात बोलती रहती हो। आप देखना ये सोमवार का टेस्ट मैं बहुत अच्छे से करूँगा।
नमिता: भगवान करे ऐसा ही हो, तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो तो कह सकते हो। मन की बातें मन में ना रखो। नहीं तो समस्या का हल कैसे निकलेगा।
राज: जी माँ ठीक है, जब भी कुछ होगा मैं आपसे बात ज़रूर करूँगा।
नमिता को मनीष से हुई बातें याद आयीं ।
वो बोली: बेटा,तुम कह रहे थे कि तुम्हें लड़कियों मेंदिलचस्पी नहीं है और मैं देख रही हूँ कि तुम सेक्स के बारे में सोचते रहते हो, तो कहीं ऐसा तो नहीं है कि तुम्हें बड़ी उम्र की औरतें पसंद हैं?
राज सकपका गया और बोला: माँ क्या मतलब?
नमिता: मैं सोच रही थी की कुछ लड़के ऐसे होते हैं जो अपनी से बड़े उम्र की औरतों में ज़्यादा दिलचस्पी लेते हैं।मुझे लगता है कि तुम भी वैसे ही लड़के हो। अच्छा बोलो क्या तुमको शीला मैडम या कोई और स्कूल की मैडम सेक्सी लगती है?
राज सकपका गया और बोला: माँ आप भी ना, कुछ भी बोलती हो?
नमिता: झूठ मत बोलो, बताओ सच में कोई मैडम अच्छी लगती है?
राज धीरे से सर हिलाया और बोला: हाँ वो अच्छी लगती हैं।
नमिता ने चैन की साँस ली चलो बात कुछ तो आगे बढ़ी।
वो फिर पूछी: अच्छा ये बताओ कि नदीम और प्रतीक की माँ भी अच्छी लगती हैं?
राज: माँ नदीम की अम्मी को तो मैंने देखा ही नहीं , हाँ प्रतीक की माँ बहुत सुंदर है।नदीम ने अपनी माँ की एक फ़ोटो दिखाई थी , वो भी बहुत गोरी और सुंदर है।

राज ने माँ को ये नहीं बताया कि नदीम ने उसको एक बार मोबाइल में अपनी माँ की नंगी फ़ोटो दिखायी थी।
नमिता: अच्छा ये बता कि इनमे से तू सबसे ज्यादा किनके बारे में सोचता है?
राज सर झुकाकर बोला: शीला मैडम के बारे में।
नमिता: वो क्यों? वही क्यों?
राज कैसे बोलता कि मैंने उनको प्रतीक से चुदवाते देखा है और क्या मस्त गदराया हुआ है बदन उनका।
राज: माँ पता नहीं, बस अच्छी लगती हैं।
नमिता: अच्छा ये बता कि उनका कौन सा अंग तुमको बहुत सेक्सी लगता है?
राज जैसे पिंजरे में फँसता जा रहा था, बोला: माँ , अब बस करो ना, मुझे नींद आ रही है।
नमिता: चल ये आख़री सवाल का जवाब दे दे जो मैंने अभी पूछा है, फिर मैं चली जाऊँगी।
राज: माँ वो वो वो —
नमिता: अरे बोला ना साफ़ साफ़।
राज: माँ उनके वो मतलब बड़े बड़े दूध।
नमिता: पर दूध तो सभी औरतें के होते हैं। मेरे भी तो हैं। ऐसा क्या ख़ास है उनके दूध में ?
राज: माँ पता नहीं पर मुझे बड़े अच्छे लगते हैं।
तब नमिता ने वो किया जो राज सपने में भी नहीं सोच सकता था।
नमिता ने अपने दोनों दूध को हाँथों से पकड़ कर कहा: बता शीला के दूध ज़्यादा अच्छे हैं या मेरे?
राज सकपका गया, और बोला: माँ वो वो- आप तो मेरी माँ हो ना। आपके दूध ,मतलब ,मैं उनके बारे में कैसे बोलूँ?
नमिता: तो फिर वो भी तो श्रेय की माँ है ना।उनके दूध के पीछे क्यों पड़ा है?
राज: ओह माँ आप भी ना।
नमिता: अच्छा ये बता ,कल को तेरा कोई दोस्त जैसे श्रेय या नदीम या प्रतीक मुझे गंदी नज़र से देखेंगे तो तुझे ख़राब लगेगा ना? वैसे ही श्रेय भी बहुत दुखी होगा जब उसे पता चलेगा कि तू उसकी माँ को गंदी नज़र से देखता है।
राज कैसे बोलता कि माँ ,मेरे दो दोस्त तो आपको चोदने के लिए मरे ही जा रहे हैं ।
राज: ठीक है माँ मैं अब कोशिश करूँगा कि सिर्फ़ पढ़ाई पर ध्यान दूँ और सोमवार के टेस्ट में अच्छा करूँ।
नमिता ख़ुश होकर बोली: शाबाश बेटा, मैं यही चाहती हूँ कि तू अपना पूरा ध्यान पढ़ाई में ही लगाए।
यह कहकर उसने झुक कर उसके दोनों गाल चूमे और राज को माँ की नायटी से दोनों गोलाइयां और उनके बीच की गहरी घाटी दिख गयी और उसका लौडा फिर सर उठाने लगा।लगता है राज के लौड़े को माँ का भाषण पसंद नहीं आया या उस पर कोई असर ही नहीं हुआ।
नमिता गुड नाइट बोलकर अपने कमरे में चली गयी।

अगले कुछ दिन कुछ ख़ास नहीं हुआ।
रविवार को नमिता हाथ धोकर राज के पीछे पड़ी रही पढ़ने के लिए और राज ने भी काफ़ी कोशिश की ध्यान लगाने की। पर सच तो ये था कि उसका ध्यान बार बार हट जाता था पढ़ायी से।
नमिता उस दिन नहाकर बग़ल के घर में एक पूजा में गयी और राज फिर बाथरूम में जाकर माँ की ब्रा और पैंटी खोजकर सूँघने और चाटने लगा। उसने माँ के बाथरूम में ही मूठ्ठ मारी और सावधानी से माँ के कपड़े वापस अपनी जगह पर रख दिए ताकि माँ को शक ना हो जाए और अपना वीर्य पानी से अच्छी तरह से साफ़ कर दिया।
नमिता पूजा के बाद आइ और राजको नहाने को बोली। राज ने नहाके अपने गंदे कपड़े माँ के बाथरूम में लाकर रख दिए क्योंकि वॉशिंग मशीन वहीं थी।बाद में नमिता राज के गंदे कपड़े भी लेकर और अपने कपड़े भी लेकर मशीन में डालने लगी। तभी वह फिर से चौकी क्योंकि उसने अपनी नायटी और ब्रा पैंटी एक साथ अलग रखी थी और बाक़ी कपड़े अलग रखे थे। अब वो देखी कि सब कपड़े एक साथ हैं, इसका मतलब साफ़ है कि आह फिर राज ने उसकी ब्रा पैंटी को लेकर कुछ उलटा सीधा काम किया है।वो सोचने लगी कि आख़िर इस सबका हल कैसे निकलेगा।
फिर उसने सोचा कि कल उसका टेस्ट है , आज उसको छोड़ दिया जाए ताकि वो अच्छी तरह से तय्यारी कर सके।वह उसका ध्यान और भटकाना नहीं चाहती थी।
उस दिन और कुछ नहीं हुआ। अगले दिन राज स्कूल चला गया और नमिता ऑफ़िस।
स्कूल में राज टेस्ट दिया और उसको समझ आ गया कि उसकी नय्या आज भी डूब गयी।
टेस्ट देने के बाद लंच ब्रेक में प्रतीक मिला और बोला: यार आज बड़ा मन कर रहा है चुदाई का। शीला मैडम तो आज स्टाफ़ मीटिंग में हैं।
राज: अरे वह तेरी मेड को क्या हुआ? उसने करवाना बन्द कर दिया है क्या?
प्रतीक: अरे वह तो घर का माल है वो तो दे देती है। पर आज सुबह जब वह चाय देने आइ तो मैं उसके दूध दबाने की कोशिश किया तभी साली ने घोषणा कर दी कि उसका पिरीयड आ गया है। उसका पहला दिन बहुत दर्द के साथ बीतता है। वह हाथ भी नहीं लगाने देती। साली क्य क़िस्मत है।
राज: ओह फिर तो तुमने आज मूठ्ठ से ही काम चलाना पड़ेगा।
तभी प्रतीक का मोबाइल बजने लगा और फ़ोन पर एक सुंदर महिला की फ़ोटो भी आ गई। उसने राज को आँख मारी और फ़ोन को स्पीकर मोड में रख दिया। अब राज भी उसकी बात सुन सकता था।
प्रतीक का चेहरा चमक उठा था, वह बोला: हाय चाची कैसी हैं आप?
चाची: ठीक हूँ आज तेरी बड़ी याद आ रही है।
प्रतीक: अच्छा, चाचा कहीं बाहर गयें हैं क्या, वरना आपको हमारी याद क्यों आएगी?
चाची: बेटा, ताने तो ना मार, तू जानता है कि तेरी चाची कितना प्यार करती है, तुझे, फिर ऐसा क्यों बोल रहा है?
प्रतीक: अरे चाची मैं तो मज़ाक़ कर रहा था, बताओ क्या बात है?
चाची: अरे वही बात है , तेरे चाचा ३ दिन के लिए टूर पर गए हैं। और लाली स्कूल गयी है, वो स्कूल के बाद tuition जाएगी, काफ़ी समय है, आ सकता है?
प्रतीक: अरे चाची , ये भी कोई पूछने की बात है, मैं बस अभी आधे घंटे में पहुँचता हूँ। एक बात बताइए कि नीचे शेव करा रखी है या नहीं?
चाची: बदमाश आकर ख़ुद देख ले। वैसे तेरे चाचा ने कोई पंद्रह दिन पहले शेव की थी , थोड़े बाल तो आ गए हैं। तू चाहे तो तू भी शेव कर लेना आज।
प्रतीक: चाची तो शेविंग का सामान तय्यार रखो अभी आ कर करता हूँ फिर साथ ही नहाएँगे और फिर दो बार चुदाई। ठीक है?
चाची हँसते हुए बोली: तू आ तो जा, सच बहुत खुजा रही है।
प्रतीक: चाची क्या खुजा रही है?
चाची: हट बदमाश तेरे हथियार की सहेली और कौन ।
प्रतीक: चाची नाम लो ना प्लीज़।
चाची: हा हा बुर और क्या, चल जल्दी आ और मज़े से चोद मुझे।
प्रतीक अपना लौडा मसलते हुए बोला: बस अभी आया चाची।फिर फ़ोन बंद कर दिया।
राज: क्या अभी जाएगा? और क्लास का क्या होगा?
प्रतीक: अरे मुझे कौन सा डॉक्टर या एंजिनीयर बनना है, पापा का बिसनेस चलाने के लिए थर्ड डिविज़न में भी पास होने से चलेगा।
और वो हँसते हुए चला गया।
राज सोचने लगा कि क्या किस्मतवाला लड़का है।
अब वह क्लास में वापस आया और आख़री पिरीयड में उसकी टेस्ट की कापी जँचकर उसको मिली। उसने देखा कि उसको १५% नम्बर ही आए हैं। वो सोचने लगा कि आज घर में क्या बवाल मचेगा! माँ तो पागल ही हो जाएगी ऐसे नम्बर देख कर।
फिर दोपहर को घर पहुँचा तो माँ ने पूछा कि टेस्ट में कितने नम्बर आए?
राज ये बोलते हुए कि आज जँचकर नहीं मिला, बैग सोफ़े पर पटक कर अपने कमरे में चला गया और अपने कपड़े बदलने लगा।
अचानक उसको लगा कि किसी के रोने की आवाज़ आ रही है। वो घबरा कर बाहर आया और देखा कि माँ सोफ़े पर अपने पाँव ऊपर रखके घुटने मोड़ कर बैठी थी और अपना सर घुटनों पर रख कर रो रही थीं। उनके पास सोफ़े पर उसके टेस्ट के पेपर रखे थे जो शायद उन्होंने उसके बैग से निकाल कर देख लिया था।
राज माँ के पास आया और बोला: माँ रोने से क्या होगा? प्लीज़ चुप हो जाओ। मैं वादा करता हूँ कि मैं और मेहनत करूँगा।
नमिता: बस कर अब तू झूठ भी बोलने लगा है । कहता था कि अच्छा रिज़ल्ट आएगा , ये अच्छा है? तू फ़ेल हो गया है। तुझे समझ नहीं आ रहा है की तू अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर रहा है।
वह रोते हुए बहुत ही दुखी दिखाई से रही थी।
राज को समझ नहीं आ रहा था कि कैसे माँ को शांत कराए।
वह बोला: माँ मुझे जो सज़ा देनी है दे दो पर ऐसे मत रोओ ।
नमिता ने कोई जवाब नहीं दिया और उसने अपना सर फिर से अपने घुटनों पर रखा।
राज परेशान होकर अपने कमरे में चला गया और अपना सर पकड़कर बैठ गया। उसने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया।
नमिता थोड़ी देर बाद उठी और अपना मुँह धो कर खाना लगाने लगी। फिर जाकर राज को आवाज़ दी: चलो अब खाना खा लो।
राज ने कहा: मुझे भूक नहीं है। आप खा लो।
नमिता: चलो नाटक छोड़ो, दरवाज़ा खोलो और खाना खा लो।
राज: कहा ना मैं नहीं खाऊँगा।
नमिता: भाड़ में जाओ। मैं खा रही हूँ।

नमिता खाने बैठी और उससे भी खाया नहीं गया।उसने खाना टेबल पर ही छोड़ दिया और अपने कमरे में चली गई। वह सोच रही थी कि ऐसा क्या करे कि उसका बेटा सामान्य हो जाए और पढ़ाई पर ध्यान दे।
थोड़ी देर के लिए उसको नींद लग गयी। जब वो उठी तो उसे याद आया कि राज ने पता नहीं खाना खाया होगा कि नहीं।
वह उठकर खाना चेक की और देखा कि राज ने खाना नहीं खाया था।
वह राज के कमरे में गई और खिड़की से झाँका और उसने देखा कि वह टेबल पर सर रखकर रो रहा था। वो सन्न रह गई और उसने कहा: राज बेटा,दरवाज़ा खोलो प्लीज़ अभी के अभी।
राज: माँ मुझे मर जाना चाहिए , मैंने आपको बहुत दुःख दिए हैं।
नमिता: क्या बक रहा है, चल दरवाज़ा खोल, तुझे मेरी क़सम है।
राज ने दरवाज़ा खोला और नमिता ने उसे अपनी बाहों में खींचकर प्यार से उसके गाल चूमने लगी, और बोली: ख़बरदार जो फिर कभी मरने की बात की। तेरे सिवाय मेरा इस दुनिया में कौन है?
राज भी उनसे चिपककर रोता रहा और बोला: माँ मैं बहुत परेशान हूँ समझ नहीं आ रहा है क्या करूँ?
नमिता: पगले मैं तो कब से कह रही हूँ मन की बात मुझे बता दे,तू तो कुछ बताता ही नहीं?
राज कुछ नहीं बोला , फिर वह बाथरूम से मुँह धोकर आया और बोला: माँ चार बज गए हैं , भूक लगी है।
वह बोली: चलो आओ खाना गरम कर देती हूँ, चलो तुम बैठो।
खाना खाने के बाद जब वो सोफ़े पर बैठे थे तब नमिता बोली: बेटा,बताओ ना क्या हो गया है, तुम पढ़ाई में ध्यान क्यों नहीं लगा पा रहे हो?
राज: माँ , सच बोलूँ आप ग़ुस्सा तो नहीं होगे?
नमिता उसको अपने पास बुलायी और उसको अपनी गोद में सर रख कर लिटा ली और बोली: चल बता क्या बात है?
राज अब भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था पर बोला: माँ ये सच है किमुझे हर समय सेक्स का ही ध्यान आता रहता है?
नमिता: तो शीला मैडम का ही सोचते रहते हो क्या?
राज: माँ सच में बड़ी उम्र की औरतें ही अच्छी लगती हैं मुझे।
नमिता: क्या सोचते हो मैडम के बारे में?
नमिता अब उसके बालों पर हाथ फेर रही थी। उसने उसके गालों पर हाथ फेरा और बोली: कितने दिन से शेव नहीं की? कितना खुरदरा लग रहा है।
राज: माँ मेरा क्या होगा? मैं तो बिलकुल पढ़ नहीं पा रहा हूँ।
नमिता: क्या तू शीला मैडम के साथ सेक्स करना चाहता है? ये तो हो नहीं सकता बेटा, वह शादीशुदा है ।तुम्हें इस पागलपन से बाहर आना ही होगा।
राज: माँ मैं क्या करूँ , मैं हमेशा सेक्स का ही सोचता रहता हूँ। मैं फ़ेल हो जाऊँगा माँ । और वह रोने लगा।
नमिता ने उसके गाल चूमते हुए कहा: बेटा, रोने से क्या होगा? हम कोई रास्ता निकालेंगे नहीं तो डॉक्टर के पास जाएँगे।
राज: माँ मुझे तो बहुत डर लग रहा है कि मैं इन हालात में कैसे पास होऊँगा।
नमिता: बेटा, कोई ना कोई रास्ता निकलेगा।
अच्छा एक बात पूछूँ ? सच बोलोगे?
राज: हाँ माँ अब मैं आपसे कुछ नहीं छिपाऊँगा । ये कहते उसने अपना मुँह अपनी माँ में पेट में छुपा लिया।
नमिता: ये बता कि तूने मेरी पैंटी में अपना रस क्यों निकाला? क्या तू मुझे भी ऐसी नज़र से देखता है जैसे मैडम को देखता है?
राज की सिट्टि पिट्टी गुम हो गई , उसे लगा कि धरती फट जाए और वह उसमें समा जाए। तो माँ को पता चल ही गया है।
वह बोला: माँ मुझे माफ़ कर दो ।और फिर वह एकदम से उठकर अपने कमरे में चला गया।
नमिता सोचने लगी कि अब क्या करे?
वह उठी और उसके पीछे उसके कमरे में गयी । वह पेट के बल लेता हुआ था और सिसक कर रो रहा था। नमिता उसके बिस्तर पर बैठकर उसके पीठ में हाथ फेरती हुई बोली: बेटा, आख़िर बात क्या है? तू क्या मुझे भी ऐसी ही नज़र देख़ता है? बता ना?
राज रोते हुए बोला: हाँ माँ मैं बहुत पापी हूँ, मैं आपको भी ऐसी ही नज़र से देखता हूँ।
नमिता चुप रह गई और सोचने लगी कि अब क्या करे।
वह थोड़ी देर उसके पीठ पर हाथ फेरती रही फिर धीरे से बोली: बेटा ये ग़लत है ना, ये तुम जानते हो ना? इसे समाज पाप मानता है। तुम समझ क्यों नहीं रहे हो बेटा।
राज: माँ मैं सब समझता हूँ पर क्या करूँ हर समय बस आपके बारे में ही सोचता रहता हूँ।
नमिता: क्या सोचते हो मेरे बारे में?
राज : माँ गंदी गंदी बातें।
नमिता: जैसे बताओ ?
राज: मुझे बताने में शर्म आ रही है।
नमिता: जब सोचने में शर्म नहीं आ रही है तो बताने में कैसी शर्म, बोलो?
राज : वो वो – मैंने आपको –
नमिता: बोलो बोलो।
राज: मैंने आपको एक बार कपड़े बदलते हुए देख लिया था, आप ब्रा पैंटी में थीं, तब से मैं आपके साथ सेक्स करने का सोचने लगा हूँ।
नमिता थोड़ी परेशान हो कर बोली: बेटा तुम किसी भी औरत को देखोगे बिना कपड़ों के तो क्या उनके साथ सेक्स कर लोगे?
राज: मैं किसी औरत की नहीं बल्कि आपकी बात कर रहा हूँ।
नमिता: पर बेटा ऐसा नहीं होता, माँ बेटा सेक्स नहीं कर सकते।
राज: पर माँ, नदीम तो अपनी माँ के साथ सेक्स करता है, और प्रतीक भी अपनी माँ से सेक्स करना चाहता है।
नमिता हैरानी से बोली: क्या कह रहे हो? क्या सच में ऐसा है?
राज: हाँ माँ सच है बिलकुल।
नमिता: ओह, तभी तेरे दिमाग़ में ऐसे विचार आ रहे हैं।
नदीम का क्या कह रहा था तू?
राज: माँ , नदीम के अब्बा का ऐक्सिडेंट में कमर में नीचे चोट लगी थी और वह सेक्स के लायक नहीं रहे तो वह नदीम को बोले कि उसकी माँ कहीं दूसरों से ना चुद– मेरा मतलब है सेक्स ना करने लगे, इससे अच्छा है कि नदीम ही उसे चो- मतलब सेक्स कर ले।
नमिता हैरानी से उसे देख रही थी और सोच रही थी कि ये इतना भोला नहीं है जैसा कि वह सोच रही थी। वह तो चोदने जैसे शब्द से भी वाक़िफ़ है। तो ये बात है , इन बातों से ही वह अपनी माँ की तरफ़ आकर्षित हुआ है।
नमिता: प्रतीक के बारे में क्या बोल रहा था तू?
राज: माँ वह भी अपनी माँ के साथ सेक्स करना चाहता है। वह तो शीला मैडम को चो- मतलब पा चुका है।
नमिता झटके में आ गई, और बोली: क्या? वह शीला के साथ सेक्स कर चुका है? ओह ये बड़ी विचित्र बात है।
राज: माँ, मुझे माफ़ कर दो, मैं पूरी कोशिश करूँगा सुधरने की।
नमिता हम्म कहकर उठ गई। और अपने कमरे में आ गयी।

नमिता सोच रही थी कि इस समस्या का हल शायद वह अकेली नहीं निकाल पाएगी , उसे किसी ना किसी की सहायता लेनी पड़ेगी। उसे दो ही नाम याद आए मनीष या शीला। पर यहाँ तो शीला तो ख़ुद ही एक अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ फँसी हुई है। शायद मनीष ही कुछ मदद कर सके। उसने मनीष को मेसिज किया कि क्या अभी बात हो सकती है?
मनीष का फ़ोन आ गया: वो बोला: हाय आंटी क्या हुआ?
नमिता: मैं थोड़ी परेशान हूँ, सोचा कि तुम शायद मदद कर सको।
मनीष: आंटी बोलो ना, आपके लिए सब कुछ करूँगा।
नमिता: असल में मैं राज को लेकर परेशान हूँ । वो पढ़ाई में लगातार नीचे की ओर जा रहा है। वो हरसमय सेक्स का सोचता रहता है।
मनीष: वह किससे सेक्स करना चाहता है?
नमिता: बड़ी उम्र की औरतों से और आज तो बोला कि मुझसे भी , अपनी माँ से । बताओ ऐसा भी कहीं होता है?
मनीष: आंटी होता है ऐसा भी। मैं भी तो आपको चोदते समय कई बार मम्मी बोलकर चोदता हूँ।कई लड़के अपनी माँ को ही चोदना चाहते हैं।
नमिता: ओह , राज भी कह रहा था किउसका एक दोस्त तो अपनी माँ के साथ लगा हुआ है और दूसरा लगाने को तय्यार है।
मनीष: अब ऐसे दोस्तों के साथ रहेगा तो फिर वह भी ऐसा ही सोचेगा।
वैसे आंटी एक बात बोलूँ आप उसको अपने मन की कर लेने दो ना। घर की ही तो बात है। कौन सी आपकी बुर घिस जाएगी और बेटे को भी मज़ा आ जाएगा।
नमिता: बकवास मत करो। एक मदद करोगे , मुझे नदीम की माँ से मिलना है। उसका सेल नम्बर चाहिए मुझे। मैं राज से नहीं लेना चाहती।
मनीष: वो कहाँ रहता है? कुछ तो बताओ उसके बारे में।
नमिता: मैं इतना ही जानती हूँ की सरोजिनी नगर में उसका एक कपड़े का शोरूम है नदीम गर्मेंट्स के नाम से ।
मनीष: ठीक है आंटी, मैं आपको कल उसका नम्बर दे दूँगा।
नमिता: थैंक्स, तुमसे बात करके अच्छा लगा।
मनीष: आंटी कल आ जाऊँ क्या चोदने का बहुत मन हो रहा है आपको।
नमिता: कल की कल देखेंगे पर मुझे नदीम की माँ का नम्बर दे देना।
मनीष उसको चूमता हुआ फ़ोन बंद कर दिया।
नमिता किचन मैं गयी और खाना बनाने लगी। आज शाम राज पार्क नहीं गया। नमिता ने उसे चाय के लिए आवाज़ दी पर वह नहीं आया।
नमिता ने चाय बनाई और उसके कमरे में लेकर गयी। वह कुर्सी पर बैठा था और उसका सिर टेबल पर था और वह सो रहा था।
नमिता को राज पर बहुत तरस आया और उसके बालों पर हाथ रखा और सहलाते हुए उठाने लगी। वह उठकर माँ को देखा तो बोला: अरे,मैं क्या यहीं सो गया था?
फिर वह उठकर बाथरूम गया और आकर चाय पीने लगा। वह अपनी माँ से नज़रें नहीं मिला सका। नमिता भी बाहर आकर किचन में चली गयी।

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