राहुल ने मेरी गांड मार दी थी और मैंने आखिरी बाधा पार कर ली थी। मैं जल्दी से अपने कपड़े उठाये बिना उसकी तरफ मुड़े बाथरूम को भागी। मैंने अपनी दूसरी परीक्षा पास कर ली थी। मैं इसी में खुश थी कि मैंने राहुल को अपने मम्मे और आगे से पूरी चूत नहीं दिखाई थी। हालांकि उसने कुछ पलो के लिए मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया था पर उसे मैंने अपनी चूत पूरी नहीं चोदने दी।
मैंने अपनी साफ़ सफाई कर कपड़े पहन लिए और बाहर निकल बैडरूम में आयी। वो वहां नहीं था। मैं हॉल में आयी तो वो वहां के बाथरूम से बाहर आया। वो अंदर बेडरूम में गया और आते वक़्त मेरे पहले वाले कपड़े ले आया जो दो दिन पहले मैंने यहाँ छोड़ दिए थे।
राहुल: “तुम्हे ऑफिस के लिए ये कपड़े पहनने थे ना, ये लो . इसमें तुम्हारी ब्रा और पैंटी भी हैं”
मैंने वो कपड़े उससे लिए। उसकी इतनी बेबाक बात पर मुझे शर्म आ गयी, उसने भले ही मुझे चोदा था पर इतना अधिकार तो नहीं था कि इस तरह बात मुँह पर करें। मैं उससे कपड़े लगभग छीनते हुए बैडरूम में भागी।
मैंने अपनी ड्रेस उतारी और ब्रा और पैंटी में आ गयी। वो अंदर के कपडे काले रंग के थे, मेरी कुर्ते वाली सफ़ेद ड्रेस से मैच नहीं होते। इसलिए मुझे उन्हें भी उतारना पड़ा, ताकि दूसरा वाला पूरा सेट पहन सकू। मगर तभी राहुल धड़धड़ाते हुए अंदर आ गया। मैंने दीवार की तरफ मुँह कर लिया।
राहुल: “सॉरी, मैं अपनी बेल्ट भूल गया था। मुझे आदत नहीं कि मेरे कमरे में लड़किया कपड़े भी बदलती हैं। ”
मैं: “अब तो पता चल गया अब क्यों घूर रहे हो, बाहर जाओ।”
राहुल: “तुम्हे नहीं, तुम्हारी पीठ पर तिल देख रहा था, बहुत खूबसूरत लग रहा हैं। ”
मैंने अपने बाल पीठ पर कर दिए
राहुल: “तुम्हारे बाल इतने भी लंबे नहीं कि कमर के नीचे के दूसरे तिल को छुपा सके। ”
मेरे पति ने बताया था कि मेरी गांड की दरार जहा शुरू होती हैं वहा थोड़ा ऊपर एक तिल हैं। मैंने एक हाथ से अपने उस तिल को छुपा लिया।
मेरे पहनने के कपड़े मेरे पीछे की तरफ थे, जहा वो खडा था तो कपड़े पहन भी नहीं सकती थी।
उसने मेरी गांड की दरार में ऊँगली रख दी।
राहुल: “तिल यहाँ हैं ”
मैंने उसका हाथ हटाने की कोशिश की, और वो अपनी ऊँगली नीचे खिसकाते हुए मेरी गांड की दरार के साथ चलाता रहा और मैं अपना हाथ उसके हाथ के पीछे पीछे ले जा रोकने की। उसकी ऊँगली अब मेरी चूत के दरार पर थी और हलकी सी अंदर थोड़ी घुसा दी। मैं आगे बढ़ी पर दीवार से चिपक गयी। उसने अपनी ऊँगली मेरी चूत में थोड़ी और उतारी और मेरी सिसकियाँ निकलने लगी।
मैं: “मुझे वहां दर्द हो रहा हैं, प्लीज बाहर निकालो ऊँगली ”
राहुल : “तो फिर कब करने दोगी, कल?”
मैं: “पता नहीं ”
उसने अपनी ऊँगली अंदर ही हिलाते हुए घुमा दी और मेरी एक और आह निकली।
राहुल: “फिर कब?”
मैं: “कल”
उसने एक बार फिर अपनी ऊँगली हिला दी और मेरी एक और आह निकली।
राहुल: “पक्का कल !”
मैं: “हां पक्का”
राहुल: “कपड़े सारे खोलने दोगी ?”
मैं: “खोल लेना”
राहुल: “मुँह लगाने दोगी अपनी चूत में”
मैं: “नहीं”
उसने ऊँगली और अंदर घुसा दी।
मैं: “ऊह ऊह, लगा देना मुंह भी ”
राहुल ने अपनी ऊँगली मेरी चूत से निकाल दी और मैंने राहत ली। वो थोड़ी देर और रखता तो शायद मैं झड़ जाती। मेरी पीठ अभी भी उसकी तरफ थी और वो मेरे एकदम पीछे खड़ा था।
राहुल: “ऑफिस में करने दोगी?”
मैं: “तुम्हारी मांगे कुछ ज्यादा नहीं बढ़ गयी।”
उसने मेरी नंगी पीठ पर पड़े मेरे लंबे खुले बाल हटाए हुए और अपने होंठ से चूमने लगा। अपना हाथ मेरी गांड पर मलने लगा। फिर अपनी ऊँगली मेरी गांड पर फिराते हुए एक बार फिर मेरी चूत में घुसा दी। इस बार मैंने नहीं रोका, मैं चाहती थी वो मेरा अधूरा काम ऊँगली से ही पूरा कर ले।
राहुल: “क्या कहा? ऑफिस में करने दोगी ”
मैं: “नहीं”
उसने अपनी ऊँगली मेरी चूत में हिलानी शुरू कर दी और मेरी मजे में आहें निकलने शुरू हो गयी। मैं चाहती थी कि वो अब मेरा पूरा करे।
राहुल: “ऑफिस में करने दोगी ?”
मैं: “नहीं…आह्ह आह”
राहुल: “अब बोलो ”
मैं: “नहीं…आह्ह आह”
मैं उसे ना बोलती रही और वो और भी अंदर ऊँगली घुसा अंदर घूमाता रहा। मेरा अब पानी बनने लगा था और मैं लगातार नशीली आहें भर रही थी।
राहुल : “मेरे केबिन में करेंगे ?”
मैं: “आह्ह हां करेंगे आह्ह ”
राहुल : “ऑफिस के वाशरूम में करेंगे ?”
मैं: “आईई हां करेंगे आअह ”
राहुल : “मेरी कार में करेंगे ?”
मैं: ” हां हां उहुहु हां करेंगे ”
राहुल: “अपने पति के सामने करवाओगी ?”
मैं: ” हां , आह , नहीं करवाउंगी , अकेले में सिर्फ उह उह ”
वो ऊँगली और भी जोर जोर से अंदर बाहर कर चोदने लगा और मैंने अपने पाँव चौड़े कर लिए थे।
राहुल: “पति के सामने करवाओगी ?”
में: “आह्ह…नहीं, आह्ह…नहीं आह आह आह उम्म आहआह ”
राहुल: “बोलो करवाओगी ?”
मैं: “नहीं करवाउंगी…आह आह आह, नहीं..ऊहूहु…हां…आईई हां करवाऊंगी, करवाउंगी पति के सामने करवाऊंगी …आह्ह आह्ह आह्ह उउउउऊ हा”
और मैं खड़े खड़े ही उसकी ऊँगली से झड़ गयी। मेरे पैर थर थर कांप रहे थे। मैं दीवार की तरफ मुँह कर दीवार से चिपके हुए खड़ी रही जब तक कि राहुल वहां से बाहर नहीं चला गया। उसके जाते ही मैंने जल्दी से कपड़े पहन लिए ।
अब मैं सोच रही थी कि पिछले कुछ मिनटों में मैंने क्या किया। मैंने अपनी कमजोरी को राहुल के सामने पूरा खोल दिया और उसके इशारो पर नाचती रही। फिर सोचा वो चाहता तो उस वक़्त मेरी चूत को अपने लंड से भी चोद सकता था या मुझे आगे से पूरा नंगा देख सकता था जो मैं अब तक छुपाती आ रही थी। पर इतना होने के बाद मैं उसका सामना कैसे करुँगी।
मैं अब नजरे झुकाये बाहर आयी। राहुल अपना सूट पहन तैयार था। हम दोनों बाहर आकर कार में बैठे। हम दोनों चुपचाप बैठे थे।
राहुल: “तुम्हे अपने आप को रोकना नहीं चाहिए, तुम्हारी बहुत सी दबी हुई इच्छाएं हैं, उनको बाहर आने दो, रोको मत। खुल कर जियो।”
मैं चुप चाप नजरे झुकाये सब सुनती रही।
राहुल: “कुछ तो बोलो ”
मैं कुछ नहीं बोल पायी। चुप ही रही।
राहुल: “तो फिर कल मेरे केबिन से शुरू करे”
मेरे मुँह पर तो जैसे शर्म का ताला लग चूका था, मैंने सिर्फ ना में गरदन हिला दी।
राहुल: “हां बोल कर अब पीछे मत हटो। इतनी जगहों के लिए हां बोला था…अच्छा बताओ उन सब में से कौन सी जगह के लिए तैयार हो।
मैं सर झुकाये शर्म से सिर्फ गरदन हिलाते हुए ना कर रही थी।
राहुल: “अरे शर्माओ मत, बोल भी दो, अब कैसी शर्म”
मैं: “इसी कारण से मैंने उस दिन तुम्हारी जगह जोसफ को चुना था। एक बार कुछ हो गया तो हमेशा मुझे ऐसी बातें सुनने को मिलेगी।”
राहुल: “अच्छा सॉरी, मैं बार बार नहीं बोलूंगा, बस एक बार बता दो, कहा करेंगे?”
मैं: “जो होना था हो चूका, अब कुछ नहीं होगा”
राहुल: ” अच्छा ठीक हैं, अब मैं नहीं बोलूंगा। वैसे डील मिलने वाली हैं तो हम सेलिब्रेट करते हैं।”
मैं: “तुम फिर से वैसी ही बातें कर रहे हो। ”
राहुल: “मैं असली पार्टी की बात का रहा था। फार्म हाउस पर पार्टी रखते हैं ।”
मैं: “ऊप्स सॉरी, इस बार मैं पति को भी लाऊंगी. पार्टी में।”
राहुल: “ओह, तो पति के सामने करवाने का ऑप्शन चुना हैं तो तुमने। ठीक हैं। ”
मैं: “हे? मैं पार्टी की बात कर रही हूँ। वैसे भी पति के सामने करवाने से बेहतर बंद कमरे में करवा लू।”
राहुल: “मैं तो पहले ही बोल रहा था, मेरे केबिन में कर लेते हैं। तो कल का पक्का रखे प्रोग्राम फिर। ”
मैं: “अब इस बारे में कोई भी बात की तो मैं कार से उतर जाऊंगी”
राहुल “इस पार्टी में वैसे भी सिर्फ स्टाफ होगा उसकी फॅमिली नहीं। फॅमिली के लिए तो सालाना पार्टी होती ही है।”
उसके बाद राहुल पुरे रास्ते चुप ही रहा। पर कार ऑफिस पहुंचते ही उसने मुझे फिर छेड़ ही दिया।
राहुल: “अभी मैं बार बार याद नहीं दिलवाऊंगा, कल मेरे केबिन में हमारा प्रोग्राम हैं।”
मैं सर हिलाते हुए ऑफिस में आ गयी। ये तो मुझे अब ऐसे ही परेशान करता रहेगा। वैसे ये वाला राहुल पहले के खड़ूस राहुल बॉस से बेहतर था।
दोपहर बाद सैंड्रा और जोसफ हमारे ऑफिस में आये। मैंने और राहुल ने उनको रिसीव किया और सीधा राहुल के केबिन में आये। सभी लोगो को अपेक्षा थी कि आज हमें डील मिल ही जाएगी। हम चारो राहुल के केबिन में पहुंचे और बैठ गए।
सैंड्रा: “राहुल मैंने बोला वो काम हुआ कि नहीं।”
राहुल: “हो गया हैं, प्रतिमा जरा वीडियो दिखाओ।”
मैं अपने मोबाइल पर पहले ही वीडियो ओपन कर तैयार बैठी थी। मैंने अपना मोबाइल सैंड्रा की तरफ बढ़ाया।
सैंड्रा: “सबूत की जरुरत नहीं, राहुल का चेहरा ही बता रहा हैं कि काम हो गया।”
राहुल: “ठीक हैं प्रतिमा तुम जाओ। कुछ काम होगा तो बुला लूंगा। ”
मैं अब बाहर अपने क्यूबिकल में आ गयी। फ़ालतू में इतनी मेहनत कर अपनी इज्जत गवाई, राहुल अपना ये वाला सतुष्ट चेहरा दिखा देता तो मुझे कुछ करना ही नहीं पड़ता। मैंने फिर भी वो वीडियो डिलीट नहीं किया, पता नहीं कब मांग ले । डील साइन होंने तक तो रखना ही था।
करीब पंद्रह मिनट के बाद वो तीनो बाहर आये। राहुल ने तीन बार ताली बजा कर सबका ध्यान आकर्षित किया और अपने पास बुलाया कुछ घोषणा करनी थी। सबको आभास हो गया क्या घोषणा हैं। मैं भी खड़ी हुई। मेरी जगह तो केबिन के एकदम बाहर ही थी। मैंने देखा जोसफ का
विशाल शरीर मेरे सामने था और मैं उसके आगे खड़े राहुल को बड़ी मुश्किल से देख पा रही थी।
जोसफ के दोनों हाथ उसकी पीठ की तरफ थे और मोबाइल खुला था। मैंने ध्यान दिया उसमे लिखा था “मेरे पास तुम्हारे लिए एक वीडियो हैं। अपना मोबाइल नंबर मुझे नीचे लिखे नंबर भेजो , मैं तुम्हे वो वीडियो भेजूंगा।”
जोसफ दूसरे लोगो से छुपा कर मुझे कोई मेसेज दे रहा था। वो कौनसे वीडियो की बात कर रहा था। तब तक सारा स्टाफ राहुल के सामने जमा हो गया था और राहुल सब स्टाफ का शुक्रिया कर रहा था।
मुझे जोसफ का मेसेज देख लगा उसके पास जरूर मेरे और उसके बीच गेस्ट हाउस में हुई चुदाई का वीडियो हैं और वो मुझे ब्लैकमेल करना चाहता हैं। कल तो बड़ा दिलदार बन कर दया दिखा रहा था और आज ब्लैकमेल पर उतर आया। मैंने जल्दी से अपने मोबाइल से उसके मोबाइल स्क्रीन का फोटो ले लिया ताकि उसका नंबर तो नोट कर लू, बाकि क्या करना हैं, बाद में देखा जायेगा।
राहुल ने घोषणा कर दी कि हमे डील मिल चुकी हैं और सारा ऑफिस तालियों की गड़गड़ाहट से भर गया। किसी को भी नहीं पता कि उसके लिए मैं दो बार अपनी इज्जत दे चुकी हु और एक राक्षस उसी दौरान मेरा फिर से भंजन करने को उतारू था।
बाकी सब उपस्थित लोग बहुत खुश थे सिर्फ मैं चिंता में थी। राहुल ने इस इस डील मिलने की ख़ुशी में अगले दिन शुक्रवार को शाम को अपने फार्म हाउस में पार्टी की घोषणा की । सैंड्रा व जोसफ विदा ले जाने लगे, जाते जाते जोसफ मुझे आँखों से इशारे कर गया।
सब लोग अपनी अपनी जगह लौटने लगे और मैं तनाव में अपनी सीट पर बैठ गयी। मेरी मुसीबते तो ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैंने सोचा मुझे राहुल को सब बता देना चाहिए। पर वो तो खुद मेरे मजे ले रहा था। राहुल इतना बुरा तो नहीं होगा, हो सकता हैं उसने वो सब मजाक किया हो, इस मामले में मेरी मदद कर देगा।
बहु देर तक मैं निर्णय नहीं ले पायी। फिर बहुत सोच विचार कर घंटे भर बाद मैंने जोसफ के नंबर पर मैसेज किया “मुझे पता हैं तुम मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो। अगले हफ्ते तुम जहा बुलाओगे आ जाउंगी, पर तुम्हे मेरे वीडियो डिलीट करने होंगे।”
मुझे डर लगा कही वो आज या कल ना बुला ले, मुझे थोड़ा समय चाहिए था सोचने का।मैंने पहले अपना और राहुल के बीच का सुबह वाला वीडियो डिलीट किया। फिर मैंने तुरंत अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया। अंत में मैंने सोचा मुझे राहुल की मदद लेनी चाहिए। मैं राहुल के केबिन में गयी।
राहुल:: “अरे तुम आज ही आ गयी, केबिन में करने का तो कल प्रोग्राम हैं। तुम इतना सीरियस क्यों हो?”
मैंने उसे जोसफ की ब्लैकमेलिंग के बारे में सब बताया।
राहुल: “तुम अपना फ़ोन कल पार्टी तक बंद ही रखो, मैं सैंड्रा को बोल कर जोसफ को समझा दूंगा। चिंता मत करो तुम्हे अब जोसफ परेशान नहीं करेगा, मेरी गारंटी हैं”
मुझे उसकी बात सुन सांत्वना मिली और वापिस अपनी सीट पर आ गयी।
रात भर मैं सोचती रही, एक तरफ राहुल हैं जो मेरी दुसरो से बराबर रक्षा कर रहा हैं, दूसरी तरफ हैं मेरा पति अशोक, जिसने कई बार मुझे मुसीबत में डाल दिया। मेरी इज्जत से लोगो को खिलवाड़ करने दी। मेरे दिल में अब राहुल के लिए आकर्षण बढ़ने लगा था।
अगली सुबह तैयार होते वक्त मुझे अपने वो छोटे कपड़े याद आये जो मैंने राहुल का ध्यान आकर्षित कर तारीफ़ पाने को खरीद तो लिए थे पर आज तक पहने नहीं थे। मैंने वो मिनी स्कर्ट निकाली और पहन ली। उसको पहनने का समय आखिर आ ही गया था। अब मैं ऐसे छोटे कपड़े पहन राहुल के सामने बेधड़क जा सकती हूँ। उसके ऊपर मैंने स्लीवलेस टॉप पहन लिया।
मुझे पहली बार इतने छोटे कपड़े पहने देख ऑफिस मे सबकी आँखें खुल गयी। मैं अपने हाई हील सैंडल के साथ मिनी स्कर्ट में ऑफिस में आकर्षण का केंद्र बन गयी। ऑफिस में वैसे भी शाम को होने वाली पार्टी का माहौल था।
राहुल ऑफिस में आया और आज पहली बार उसने केबिन में जाने से पहले मेरी तरफ मुड़ कर देखा। उसका मेरे ऊपर अधिकार जो बढ़ गया था। अपने जरुरी काम निपटाने के बाद उसने मुझे केबिन में बुलाया। मैं उसके केबिन में पहुंची, वो मुझे ऊपर से नीचे घूरते हुए देखने लगा ।
राहुल: “बहुत हॉट लग रही हो। ”
मैं: “थैंक यू , कुछ काम था मुझसे”
राहुल: “मैंने प्रमोशन की लिस्ट बना दी हैं , इसमें तुम्हारा भी नाम हैं । बधाई हो ”
मैं: “थैंक यू सो मच।”
राहुल: “ट्रीट तो बनती हैं।”
मैं: “ठीक हैं, कौनसी मिठाई खाओगे ले आउंगी। ”
राहुल: “मुझे मिठाई इतनी पसंद नहीं, जूस पी लूंगा।”
मैं: “ठीक हैं, मिल जायेगा।”
राहुल: “तो पिलाओ अभी।”
मैं: “चलो बाहर शॉप पर। ”
राहुल : “फ्रूट का नहीं, मुझे तुम्हारे दोनों होंठों का रस पीना हैं। ”
जिसका मुझे डर था वही हो रहा था। वो मुझे शर्मिंदा कर रहा था।
मैं: “मुझे नहीं चाहिए ऐसा प्रमोशन।”
राहुल: “प्रमोशन तो तुम्हारा हक़ हैं, ट्रीट नहीं देनी तो मत दो, एक दोस्त की हैसियत से मांग रहा था, कोई जबरदस्ती नहीं। ”
मैं अब वापिस मुड़ कर जाने लगी।
राहुल: “मैंने सैंड्रा से बात की थी जोसफ के बारे में। जोसफ कल बाहर जा रहा हैं किसी ख़ास काम से, अगले हफ्ते उसके आने के बाद सैंड्रा उसे समझा देगी। ”
मैं: “थैंक यू, मैं कल सुबह तक फ़ोन बंद ही रखूंगी। तुमने मेरी बहुत बड़ी हेल्प की हैं। ”
राहुल: “मैं तो तुम्हे दोस्त मानता हूँ, तुम मानो या ना मानो।”
मैं: “तुम नाराज हो? पर मैं ये नहीं कर सकती। ”
राहुल: “जैक को तो चूमा था।”
मैं: “सिर्फ दो सेकंड के लिए इजाजत दूंगी, और ये आखिरी बार होगा। ”
राहुल: “पांच सेकण्ड्स और दोनों होंठो पर।”
मैं: “हम्म, ठीक हैं पांच सेकंड से एक सेकंड भी ज्यादा नहीं, मैं गिनूँगी।”
मैं राहुल के करीब पहुंची, हम दोनों की ही साँसे बहुत तेज चल रही थी। दो बार चूमते चूमते मैंने उसे रोक दिया था और आज आख़िरकार पांच सेकंड के लिए ही सही मैंने उसे इजाजत दे दी थी। उसने अपने दोनों हाथ मेरे एक एक कान के नीचे गले के पास रखे और मुझे अपने करीब खिंचा। हम इतने करीब थे की एक दूसरे की गरम साँसे महसूस कर रहे थे।
उसने अपना सर थोड़ा तिरछा किया और मैंने अपने होंठ जरा सा खोल कर आँखें बंद कर ली। वो घड़ी आ चुकी थी जब पहली बार राहुल मुझे चूमेगा। जल्द ही मेरा ऊपर वाला होंठ उसके दोनों होंठो के बीच था, और उसने उसे चूसना शुरू कर दिया। मेरी गिनती चालू थी और उसने मेरे होंठ तीन बार ही चूसे थे कि मैं अलग हो गयी पांच सेकंड हो चुके थे।
मैंने आँखें खोली । मेरे होंठ उसके रस से गीले हो चुके थे और उसके होंठ मेरे रस से। मेरी साँसे और भी गहरी हो चुकी थी। वो फिर से आगे बढ़ा, अपने वादे के मुताबिक उसको मेरा निचला होंठ भी चूसना था। इस बार उसने अपने होंठो के बीच मेरा निचला होंठ भरा और जल्दी जल्दी मेरा रस लेने लगा। उसका मजा शुरू ही हुआ कि मेरे पांच सेकंड हो चुके थे और हम अलग हुए।
मैंअपने होंठो पर जबान फेर रही थी क्यों कि वहा मीठी गुदगुदी हो रही थी। वो मुझे तरसती निगाहो से देख रहा था मुँह को लगा हाथ को ना आया। उसकी प्यास तो पूरी मिटी भी नहीं थी। मैं मुड़ कर जाने लगी और उसने मुझे रोक लिया।
राहुल: “कहाँ जा रही हो? नीचे के होंठ बाकी हैं अभी।”
मैं: “अभी निचला होंठ ही तो चूसा था तुमने। ”
उसने मेरी चूत की तरफ इशारा किया और बोला : “मैं यहाँ के, नीचे के होंठो की बात कर रहा था।”
मैं: “नहीं वहां नहीं, मैं कपड़े खोल नहीं दिखा सकती”
राहुल: “कल तो खोले थे ”
मैं: “पर सामने से तो नहीं दिखाया था ”
राहुल: “फिर भी पीछे से तुम्हारे नीचे वाले होंठ दिख रहे थे, वैसे ही दिखा दो, मैं रस ले लूंगा ऐसे ही।”
मैं: “सिर्फ पांच सेकंड के लिए। ”
राहुल: “पांच सेकंड अगर आगे से होंठ चूमने दोगी तो। पीछे से कोई समय सीमा नहीं होगी। सोच लो।”
मैं अभी भी शर्म से राहुल को अपनी चूत सामने से दिखाने में असहज थी। इसलिए पीछे से मेरी चूत का रस पिलाने के लिए मान गयी।
मैं: “पीछे से चुम लो, पर सिर्फ एक मिनट। मंजूर हो तो बोलो वरना मैं जाती हूँ। ”
राहुल: “ठीक हैं, मेरे टेबल पर आ जाओ।”
वो अपनी कुर्सी पर जाकर बैठ गया और मैं उसकी तरफ पीठ कर खड़ी हो गयी। उसने मेरी मिनी स्कर्ट का हुक खोल कर ढीला कर दिया और नीचे से हाथ डाल कर मेरी पैंटी पूरी निकाल दी। फिर मुझे अपनी टेबल पर चढ़ा कर मुझे कल की तरह कोहनियो और घुटनो के बल बैठा दिया। उसने मेरी मिनी स्कर्ट को ऊपर की तरफ खींच कर मेरी गांड को नंगा कर दिया।
उसकी पहले की चुंबन और बने माहौल से मेरी चूत वैसे ही थोड़ी गीली हो अपना रस छोड़ चुकी थी।
राहुल: “अपने पाँव और खोलो, अपने होंठ पुरे दिखाओ….हां ऐसे….पहले थोड़ा रस बनाता हु फिर चूसूंगा”
ये कहते हुए उसने अपनी ऊँगली मेरी खुली चूत की दरार में रगड़नी शुरू कर दी। उसकी ऊँगली की रगड़ से मेरी गांड और टाँगे थरथराने लगी। इसके साथ ही मेरी चूत में और पानी बनने लगा और बाहर आने को उतारू हो गया। मगर वो अपनी ऊँगली प्यार से फेरता रहा। मैं मेरी चूत के होंठ गीले महसूस कर रही थी।
मैंने अपने सर को दोनों हाथों के बीच डालते अपनी दोनों टांगो के बीच देखा। राहुल की ऊँगली मेरी चूत पर घुम कर गीली हो चुकी थी। मेरी चूत के होंठ खुले थे और बीच में घाटी बन चुकी थी जहा उसकी ऊँगली रगड़ रही थी । थोड़ी देर बाद तो मेरी चूत से दो तीन बून्द पानी नीचे टेबल पर टपक पड़ा।
मैं: “बन गया रस, अब जल्दी से पी कर ख़त्म करो ये नाटक”
राहुल: “तुम बोलो तो ऊँगली की जगह थोड़ी मोटी चीज डाल दू? ज्यादा मजा आएगा दोनों को ”
मैं: “नहीं, मैं अपनी चीख रोक नहीं पाऊँगी, ये ऑफिस हैं।”
राहुल: “तो आज शाम पार्टी में कर सकते हैं ?”
मैं: “तुम्हे ये काम करना हैं या मैं जाऊ ?”
उसने अब ऊँगली रगड़ना बंद किया और मैं उसके होंठ और दाढ़ी को अपनी दोनों टांगो के बीच देख सकती थी। उसके मुँह के होंठ मेरी चूत के होंठो पर लग रस चाट कर मजे ले रहे थे और मैं हलकी सिसकियाँ निकाल रही थी। मैंने भी घडी का ध्यान नहीं रखा और वो एक मिनट की बजाय काफी ज्यादा मेरे चूत के होंठो को मुँह में दबा मजा लेता रहा।
मैं अनियंत्रित होने लगी, कही मैं झड़ ही ना जाऊ इसलिए मैंने उसको रोका और थोड़ा आगे हटी। अपनी स्कर्ट नीचे कर दी और पीछे खिसक कर टेबल से उतर गयी । मैं अपनी स्कर्ट का हुक फिर बांधती उससे पहले ही उसने मुझे मेरी कमर से पकड़ कर मुझ सहित अपनी कुर्सी पर बैठ गया। मैं उसकी जांघो पर बैठी थी।
उसने एक हाथ से मुझे झकड़े हुए दूसरे हाथ से अपने पैंट की चैन खोल दी और अपना कड़क हो चुका लंड बाहर निकाल दिया। वो एकदम तैयार था चोदने के लिए। क्या वो मुझे यही ऑफिस में चोदने वाला था। मैं उसको मना करने लगी कि यहाँ नहीं कर सकते पर उसने मेरी स्कर्ट को पीछे से ऊपर कर अपनी गोद में बैठा लिया।
मैं अपनी गांड पर उसके कठोर लंड की छुअन का अनुभव कर रही थी। मेरी चूत तो पहले ही गीली थी तो आसानी से उसका लंड एक झटके में मेरी चूत के अंदर फिसल गया। बाकी का उसने जोर लगाते हुए मेरी चूत में चार पांच इंच लंड अंदर कर दिया। मैं उठने की कोशिश कर रही थी पर वो मुझे नीचे बैठाये रख रहा था।
मैं उठने की कोशिश करती और वो मुझे नीचे बैठा देता, इस चक्कर में उसका लंड मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था। मैं तो पहले ही झड़ने वाली थी पर अब उसके लंड की चूत में होती रगड़ से मैं झड़ने की करीब आ गयी।
मैंने अब ऊपर उठना ही बंद कर दिया। पर उसका लंड उत्तेजना के मारे मेरी चूत में बिना हरकत के ही सिकुड़ और फुल रहा था। जिससे मेरी चूत में भी कम्पन हो रहा था। मैं किसी भी क्षण झड़ने वाली थी।
मैं: “राहुल, मेरा पानी निकलने वाला हैं, तुम्हारी पैंट खराब हो जाएगी।”
राहुल ने मुझे छोड़ दिया और बोला: “चलो छोड़ दिया, तुम्हारी इच्छा तुम उठना चाहती हो या चुदना चाहती हो”
मेरी ऐसी हालत थी कि मैं चाहते हुए भी उठ नहीं पा रही थी। मैंने सोचा मैं पूरा कर ही लेती हूँ। पर तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और मैं घबरा कर राहुल के ऊपर से उठी। एक सांस में मैंने जल्दी से अपनी स्कर्ट नीचे की और उसका हुक लगा लिया। मैं वापिस टेबल के दूसरी तरफ आ गयी, तब तक राहुल ने भी अपनी चैन बंद कर कुर्सी सही लगा ली।
ये सब मुश्किल से पांच सात सेकण्ड्स में हो गया और राहुल ने दस्तक देने वाले को अंदर बुलाया। वो सुधा आंटी थी, वो शायद किसी काम से आयी थी।
मैं एकदम घबराई हुई खड़ी थी और राहुल से इजाजत लेकर बाहर आयी और सीधा वाशरूम गयी। मेरी चूत में अभी तक हलकी सी हलचल थी, मेरी पैंटी भी राहुल की कुर्सी के आस पास कही गिरी पड़ी थी जो जल्दबाजी में मैंने नहीं उठायी थी क्यों कि पहनने का समय ही नहीं था ।
मैं बाल बाल बची, अगर कोई बिना दस्तक अंदर आ जाता तो पुरे ऑफिस में मेरी ही बातें होती। वाशरूम से मैं वापस आयी देखा सुधा आंटी केबिन से बाहर आ चुकी थी।
मुझे अंदर जाकर अपनी पैंटी लेनी थी पर हिम्मत नहीं हो रही थी। मैं सीधा अपनी जगह आकर बैठ गयी। अंदर पैंटी नहीं पहने होने से कुछ खाली खाली सा लग रहा था। करीब आधे घंटे बाद मैं फिर राहुल के केबिन में गयी।
राहुल ने ऑफिस के केबिन में ही मेरे मजे लूट लिए थे और हम पकडे जाने से बाल बाल बच गए थे। इस चक्कर में मेरी पैंटी उसके केबिन में रह गयी जो मुझे चाहिए थी, मैं फिर राहुल के केबिन में गयी।
मैं: “मेरे कपड़े यहाँ रह गए थे”
राहुल: “कौन से कपड़े?”
मुझे पता था वो जानबूझ कर अनजान बन मेरे मुँह से सुनना चाहता था। मैं वापिस जाने लगी तो उसने आवाज लगा कर रोका। मैंने मुड़ कर देखा वो अपने हाथ में मेरी पैंटी पकड़ हिला रहा था।
राहुल: “ये चाहिए तुम्हे?”
मैंने आगे आकर अपना हाथ बढ़ाया, पर उसने अपना हाथ पीछे खिंच लिया।
राहुल: “इसे मैं तुम्हे पहनाउंगा ”
मै: “नहीं चाहिए, तुम्ही पहन लो”
राहुल: “अच्छा ये लो। पर इसे हाथ में लेकर बाहर कैसे जाओगी? किसी ने देख लिया तो ! पहनना तो यहाँ मेरे सामने ही पड़ेगा।”
बात तो उसकी भी सही थी। ऑफिस के अंदर तो पर्स लेकर नहीं घूम सकती। मुझे उसके सामने ही वो पैंटी पहननी थी। मैंने उससे वो पैंटी ली और उसकी तरफ पीठ कर मैंने पैंटी पांवो में डाल ऊपर खिंच ली और बड़ी सावधानी से बिना अपने ज्यादा अंग दिखाए वो पहन ली।
राहुल: “थोड़ा थोड़ा करने से मजा नहीं आया, पूरा करना हैं ढंग से”
मैं: “आगे से मैं ऑफिस में तुम्हारे पास भी नहीं आउंगी, पकड़े जाते तो आज?”
राहुल: “यहाँ नहीं करेंगे तो कहा करेंगे?”
मैं: “क्या करना हैं तुम्हे?”
राहुल: “चार काम करने हैं। पहला, तुम्हारे ऊपर और नीचे के होंठो का जी भर कर रस चूसना हैं। दूसरा, तुम्हारे मम्मे देखने हैं और चूसने हैं। तीसरा, तुम्हारे मम्मो को अपने हाथो से दूध दुहना हैं। चौथा, सामने से तुम्हारी चूत के दर्शन कर पूरा चोदना हैं”
मैं: “सैंड्रा का शुक्र मनाओ कि तुम मेरे कपड़े खोल पाए और कल पीछे से कुछ कर पाए। बाकि के ये चारो काम तुम सपने में ही करना”
राहुल: “ये चारो काम आज रात को ही होंगे पार्टी के बाद । तुम आज रात मेरे साथ मेरे फार्म हाउस पर ही रुकने वाली हो। अपने घर पर बोल कर आना कि सुबह आओगी”
मैं: “ऐसा कुछ नहीं होने वाला हैं”
राहुल: “और पांचवा काम तुम करने वाली हो, मैं तुम्हारा नीचे का रस लूंगा तो तुम भी तो मेरा रस चुसोगी”
मैं: “मैं भी देखती हु, कैसे होता हैं ”
मैं अब बाहर अपनी सीट पर आ गयी। मगर मन में यही चल रहा था कि क्या वो मेरे साथ सच में ये सब करने वाला हैं। पर मैं क्यों उसके साथ रात को रहूंगी। इतने लोगो के बीच तो वो हाथ लगा नहीं पायेगा। शाम को पार्टी के चक्कर में सब लोग ऑफिस से जल्दी निकल गए घर जाकर तैयार होने के लिए।
घर आकर मैं भी तैयार होने लगी। आज राहुल मेरे कपड़े देख भड़क ना जाये इसलिए मैंने जो ब्लाउज पहना वो पीठ से पूरा बंद था। कोहनियो तक आस्तीन थी और चाइनीज कॉलर था। मैंने अपनी नारंगी रंग की साड़ी लपेट दी। पुरे कपड़े पहनने के बावजूद मैं अपने कर्व तो नहीं छुपा सकती थी। बिना अंगप्रदर्शन किये हुए भी मेरे सीने और गांड के उभार मेरी तरफ किसी को भी आकर्षित करने को काफी थे।
राहुल ने पार्टी स्थल तक पहुंचने की व्यवस्था कर दी थी।
आज सब लोग बिना फेमिली के आये थे तो वहा पर माहौल बिलकुल ही अलग था। ऑफिस की सारी कुंवारी लड़कियों सहित शादीशुदा लड़किया भी छोटे कपड़े और स्किन दिखाऊ साड़ी पहन आयी थी। शायद पिछली बार पार्टी में मैंने जो कपड़े पहने थे उससे प्रेरणा ली थी।
पुरुष स्टाफ की तो चांदी हो गयी थी। आज उनको रोकने वाले उनके पति और पत्निया भी नही थी, सब अपने अरमान पुरे कर सकते थे। अपने पसंद के साथियो के साथ सब चिपक कर डांस कर रहे थे। मुझे पुरे कपड़ो में देख सबको थोड़ा आश्चर्य भी हुआ।
राहुल ने पास आकर मेरे साथ डांस करने को बोला पर मैं पहले ही सोच कर आयी थी उसको ज्यादा पास आने का मौका नहीं देना वरना वो अपनी चारो गन्दी ख्वाहिशे पूरी ना कर सके। मेरे मना करने पर भी वो मुस्कुराता रहा।
अब वो दूसरी लड़कियों के साथ बारी बारी से डांस करने लगा। वो उनसे कुछ ज्यादा ही चिपक रहा था, उसका हाथ लगातार लड़कियों की कमर और पीठ पर था। वो लड़किया भी जैसे इसी का इंतजार कर रही थी। उनको तो जैसे प्रमोशन का शॉर्टकट मिल गया था।
राहुल के हाथ कभी कभार कमर से खिसक कर लड़कियों की गांड पर भी आ गए थे। जब भी वो एक दूसरे के कान में कुछ बोलने के लिये पास आते तो उनके मम्मे राहुल के सीने से दब भी रहे थे ।
एक शादी शुदा औरत तो राहुल के साथ कुछ ज्यादा ही चिपक गयी थी, उसकी कमर के नीचे का हिस्सा आगे से राहुल से पूरा चिपक गया था। मैं ना जाने क्यों वो सब नहीं देख पा रही थी। मुझे वो सब देख जलन हो रही थी।
वो सब मिलकर मुझसे राहुल को दूर कर रही थी या मैंने खुद ही राहुल से दुरी बना उन्हें मौका दे दिया था। मुझे अहसास हुआ शायद मैं राहुल से शायद प्यार करने लगी थी। पर राहुल के मन में मेरे लिए क्या हैं, अगर कुछ होता तो वो इस तरह दूसरी लड़कियों के साथ इस तरह चिपक कर डांस नहीं करता।
एक चालीस साल के सहकर्मी ने मेरे साथ डांस करने का प्रस्ताव रखा और मैंने मान भी लिया, पहला मौका था जब मैंने राहुल के अलावा ऑफिस में किसी के साथ डांस का करना स्वीकार्य किया था। उसको तो जैसे खजाना हाथ लग गया।
बाकि के युवक आश्चर्य करने लगे, उन जैसे अच्छे दिखने वाले लड़को को छोड़ मैंने अपने से ज्यादा उम्र वाले को डांस पार्टनर चुना। मैंने कपड़े पुरे पहन रखे थे फिर भी साड़ी के ऊपर से ही वो मेरी कमर को पकड़े था। मैं उससे थोड़ी दुरी बनाये हुए थी ताकि मेरे सीने का उभार उससे ना छुए।
इन सब के बीच मेरी नजरे बराबर राहुल पर थी कि वो क्या कर रहा हैं। बीच में एक दो बार वो अपनी अलग अलग डांस पार्टनर के साथ हॉल से बाहर भी गया था, शायद उनके अंगो को अच्छे से छूने के लिए अकेले में ले गया हो। वो लड़किया तो उसे चूमने भी देगी।
सब लोग अब हॉल से निकल कर बाहर बरामदे में लगे डिनर के लिए आ गए। राहुल अभी भी अपनी गोपियों के बीच में ही था और हंस हंस कर जैसे मुझे जलाते हुए मजे ले रहा था।
खाना हो जाने के बाद सभी लोग बाहर गार्डन में ही आपस में बातें कर रहे थे। शायद राहुल सही था, मैं ही जलन में पागल हो गयी थी। कैटरर अपने सामन समेट कर जा रहा था। कुछ लोग जा चुके थे और कुछ जाने की तैयारी में थे।
राहुल एक साड़ी वाली लड़की को लेकर वापिस अंदर गया। मुझे दाल में काला लगा, मैं थोड़ी देर बाद अंदर गयी। वो दोनों सामने से बाहर ही रहे थे। राहुल ने उस युवती को बाहर जाने दिया और मेरे लिए वही रुक गया।
राहुल: “तुम मेरा पीछा कर रही हो?”
मैं: “मुझे सब पता हैं तुम आज पार्टी में क्या कर रहे थे, सबसे बड़ा चिपक चिपक कर डांस कर रहे थे। मुझे तो लगा तुम्हे सिर्फ मुझ में रूही दिखाई देती हैं। पहले मुझे रात को यहाँ रुकने को बोल रहे थे, मैंने मना किया तो अभी जो गयी हैं उसको रात को रोकने वाले हो। ”
राहुल: “तुम्हारे अलावा इन सब की कैब मैं बुला चूका हूँ । तुम कहो तो तुम्हारी कैब भी मंगवा लेता हु। एक तरफ मेरा बैडरूम हैं, दूसरी तरफ बाहर जाने का रास्ता। तुम्हारी इच्छा हैं, तुम कहाँ जाना चाहती हो। मैं बाहर सब लोगो को विदा करने जा रहा हूँ”
शायद राहुल सही था, मैं ही जलन में पागल हो गयी थी। राहुल हाल से बाहर जाने लगा और मैं बैडरूम की तरफ मुड़ी तभी उसकी आवाज आयी।
राहुल: “मुझे मेरे चारो काम करने दोगी तो ही अंदर जाना ”
मैं उसके चारो काम याद कर बहुत शरमाई और भाग कर बैडरूम में चली गयी। अंदर जाकर मैंने अपना मेकअप ठीक किया और अच्छे से देख लिया सब ठीक हैं । परफ्यूम लगा लिया और माउथ स्प्रे कर दिया। फिर याद आया पति को तो बोला ही नहीं कि रात को यही रुकने वाली हूँ।
मैंने अपना मोबाइल निकाला जो कल दोपहर से जोसफ के डर से स्विच ऑफ था । मैंने फ़ोन स्विच ऑन किया और अशोक को फ़ोन लगा कर झूठ बता दिया कि आज हम सब ऑफिस वाले यही रुकने वाले हैं, मैं अगली सुबह आ जाउंगी।
इस बीच मेरे फ़ोन पर पांच छह पेंडिंग मैसेज डिलीवर हुए। फ़ोन काट कर मैंने नोटिफिकेशन देखे एक मैसेज जोसफ का था, कोई मीडिया भेजा था। कही ये मेरे और उसके बीच उस दिन हुई चुदाई का वीडियो तो नहीं। मेरी तो मैसेज खोलने की हिम्मत ही नहीं। वैसे भी राहुल ने बोला था कि सैंड्रा सब संभाल लेगी।
मैं सोच ही रही थी कि राहुल बैडरूम में आया और दरवाजा बंद कर लिया। उसके हाथ में एक थर्मस था जो उसने टेबल पर रख दिया। मैं फ़ोन पर्स में रख बेड से उठकर खड़ी हो नजरे नीची कर ली। मेरे यहाँ रुकने का मतलब मेरी उसके साथ आज सुहागरात होने वाली थी।
उसने मेरे पास आकर मुझे पीठ से पकड़ कर अपने सीने से चिपका लिया। फिर उसने पीछे हटते हुए मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और अपनी तरफ खिंच लिया। कंधे पर लगी पिन से साड़ी अटक गयी, मैंने वो पिन निकाल दी और उसने साड़ी मेरे सीने से अलग कर दी और मेरा ब्लाउज और उसके अंदर के उभार दिखने लगे।
मैने पटली पर लगी पिन भी खोल दी। उसने मेरे पेटीकोट में ऊपर से हाथ डाल मेरी साड़ी की पटली को पेटीकोट से बाहर कर दिया। फिर उसने साड़ी खींचना जारी रखा और मैं गोल गोल घूमने लगी। धीर धीरे मेरी साड़ी मेरे पेटीकोट से उतरने लगी।
जब साड़ी पूरी उसके हाथ में आ गयी तब मैं रुकी। मैं अब पेटीकोट और ब्लॉउज में शर्माए खड़ी थी। उसने मुझे खुद अपना ब्रा निकालने को बोला। मैंने उसकी तरफ पीठ कर ली और ब्लाउज के आगे के सारे हुक खोल दिए।
फिर पीठ पर ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर ब्रा का हुक खोल दिया। मैंने ब्लाउज पहने हुए ही अंदर हाथ डाल ब्रा को निकाल दिया. उसने मुझे उसकी तरफ मुड़ने को बोला और मैंने आगे से खुले ब्लाउज को हाथ से पकड़ कर बंद रखा और उसकी तरफ मुड़ गयी।
उसने मुझे बिस्तर पर लेटने को बोला मैं अपने ब्लाउज को पकड़े बंद रख लेट गयी। वो थर्मस लेकर आया और खोल कर उसमे से एक आइस क्यूब निकाल लिया। उसमे से पानी टपक रहा था। उसने मेरे होंठो के ऊपर आइस क्यूब पकडे रखकर दो तीन ठंडी बूंदें गिराई। मेरा मुँह अपने आप ही खुल गया।
उसने अब वो आइस क्यूब मेरी ठुड्डी से लेकर गले तक प्यार से फिराई । मेरी साँसे बहुत तेज हो गयी और मेरे पुरे शरीर में हलचल सी हुई और मैंने अपने हाथ ब्लाउज से हटा लिए और नीचे बिस्तर को कस कर पकड़ लिया।
मेरा ब्लाउज अभी भी मेरे मम्मे ढके हुए थे पर खुले ब्लाउज में दोनों मम्मो के बीच की थोड़ी वादियां दिखने लगी। वो अब आइस क्यूब मेरे पेट पर नाभी के आसपास लगाने लगा। मेरा बदन अब लगातार फड़क रहा था।
मेरी चूत अब थोड़ी गीली हो चुकी थी। उसने अब नया आइस क्यूब निकाला जिस पर लगा पानी टपक रहा था और उसने मेरे ब्लाउज का एक हिस्सा मेरे मम्मे से हटा दिया और आइस क्यूब रगड़ने लगा। उसने पहली बार मेरे मम्मे देखे थे और मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो चुके थे।
मैं अपने सीने को ऊपर उठाये अपने आप को नियंत्रित रखने का प्रयास कर रही थी। मेरे मम्मे पुरे फूल कर निप्पल तन गए थे। उसने दूसरी तरफ से भी ब्लाउज को हटा दूसरा मम्मा बाहर कर दिया। मैं अब भी तेज तेज साँसे ले तड़प रही थी।
उसने आइस क्यूब अपने मुँह में लिया और मेरे मम्मो पर मलने लगा। मैं मुँह खोल बुरी तरह से आहें भर रही थी। थोड़ी देर बाद उसने मुझे छोड़ा। मैं बिस्तर पर हाथ फैलाये पड़ी थी और मेरे मम्मे खुले पड़े थे। मैंने उन्हें ढकने का प्रयास नहीं किया, वैसे भी वो अब सब देख चूका था।
उसने मेरे ऊपर सर लाते हुए मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसना शुरू कर दिया। मैं भी उसके होंठो को चूसते हुए आनंद लेने लगी। उसकी एक के बाद एक ख्वाहिशे पूरी होती जा रही थी और मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं थी।
मेरे मम्मे देखने की उसकी ख्वाहिश पूरी हो चुकी थी और साथ ही मुझे चूमने की भी। अगले पांच मिनट तक हम एक दूसरे को चूमते ही रहे और उसने अपनी महीनो की अधूरी चाहत पूरी की।
उसके चूमने में एक अपनापन था जो जैक के चूमने में भी था। मेरे होंठो को छोड़ने के बाद उसके होंठ मेरे मम्मो की तरफ बढे और मेरा एक तना हुआ निप्पल अपने होंठ में भर चूसने लगा।
बारी बारी से उसने कभी मेरे निप्पल को चूसा तो कभी अपने मुँह में मेरे मम्मे को भर लिया। मैं उसके चूसने का आनद ले ही रही थी कि उसने अचानक मेरे मम्मे को काट लिया और लव बाइट दे दी। मैं एकदम से चीखी और उस हिस्से को रगड़ कर अपना दर्द मिटाने लगी। तब तक उसने मेरे दूसरे मम्मे पर भी एक निशान दे दिया।
दर्द से ज्यादा मैं इस बात से परेशान थी कि मेरे पति जब इन लव बाइट को देखेंगे और पूछेंगे तो मैं क्या जवाब दूंगी। वो लगातार मेरे मम्मो को को चूसे जा रहा था। चूमते चूमते हुए वो मेरे पेट पर आ गया और मेरा पेट फिर फड़फड़ाने लगा।
उसके इस चूमने से मुझे मजा बहुत आ रहा था और नशे से मेरी आहें भी निकल रही थी। फिर उसने पेट चूमते हुए मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। मैं उसके बालों में हाथ डाल सहलाने लगी। उसने एक हाथ से मेरा पेटीकोट नीचे खिसकाने की कोशिश की।
मैंने खुद ही अपना वजन उठा कर उसको जगह दी और उसने पेटीकोट घुटनो तक नीचे कर दिया। फिर मैंने खुद ही पाँव को झटके मार पूरा पेटीकोट बाहर कर दिया।
उसने अब पेट चूमना बंद किया और मेरी दोनों टांगो के बीच आकर बैठ गया। उसने मेरी नजरो से नजरे मिलाई।
उसके दोनों हाथ मेरी पैंटी पर थे। उसको आखिरकार सामने से मेरी चूत के दर्शन होने वाले थे। धीरे धीरे कर उसने मेरी पैंटी को नीचे किया और जैसे जैसे मेरी चूत दिखने लगी उसकी आँख की चमक बढ़ने लगी।
उसने पूरी पैंटी निकाल दी और अब मैं नीचे से पूरी नंगी थी। उसने मेरे पाँव फोल्ड किये और ऊपर की तरफ उठा कर चौड़े कर दिए और अपना होंठ मेरी चूत पर रख चाटने लगा। सुबह भी उसने ये कोशिश की थी पर सिर्फ पीछे से थोड़ा चूस पाया था पर अब तो सब उसके सामने था।
वो अपनी तीखी जुबान को मेरी चूत की दरार में ऊपर नीचे तेजी से रगड़ रहा था और मैं दोनों हाथों से सर के नीचे लगे तकिये को कस के पकड़े हुए थी।
मेरा पानी निकलना शुरू हो गया और मैंने आहें भरते हुए उसको रोकने की कोशिश की कि उसे कही गंदा न लगे पर उसे जो जैसे स्वाद लग गया था। वो इस तरह मेरा पानी चाट रहा था जैसे सचमुच का फ्रूट जूस पी रहा हो।
उसने मेरी चूत के होंठो को पकड़ कर चौड़ा किया और मेरी चूत का छेद खोल दिया। मेरी चूत के छेद में अब उसकी जबान थी और वो अपनी जबान से ही मुझे चोद रहा था। कभी उसकी जबान आगे पीछ हो रही थी तो कभी लपलपा कर ऊपर नीचे।
मेरे सब्र का बाँध भी अब टूट रहा था। मैं कोशिश कर रही थी अपनी चुदाई से पहले ही कही झड़ ना जाऊ। अपने शरीर को मैंने कस लिया था ताकि मेरी भावनाये ना बह जाए। पर मेरी सारी कोशिशे बेकार जा रही थी।
उसकी जबान लगातार मेरी चूत को भेद रही थी और मैं अपने शरीर के नियंत्रण को छोड़ रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने हार मान ली और अपना शरीर ढीला छोड़ दिया और चूत को पुरे मजे लेने की छूट दे दी। मेरा पानी और तेज रिसने लगा और मेरी आहें भी।
मेरी मुँह से लगातार आह्ह अहहह उम्म्म्म ऊह्ह्ह आह आह आह आह करते हुए मैं झड़ गयी। मैं बिस्तर पर धराशाई हो पड़ी थी। व वो अब भी मेरे ताजा निकले पानी को चाट रहा था।
उसने अब अपना मुँह ऊपर उठाया। जैसे लस्सी पीने के बाद सफ़ेद मुछे बन जाती हैं वैसे उसके होंठ मेरे पानी से भीगे हुए थे। उसके भीगे होंठ देख मैं और भी शर्माने लगी।
राहुल: “अब बारी हैं तुम्हारा दूध दुहने की”
मैं: “ये क्या बचपना हैं? वैसे भी मेरे अभी दूध नहीं निकलता”
राहुल: “मजा तो मम्मे दुहने का हैं, दूध आये ना आये”
ये कह कर उसने मुझे हाथ पकड़ कर बैठाया वो मेरे पीछे आया और मेरा ब्लाउज पूरा बाहर निकाल दिया। अब मेरे शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। उसने मुझे गाय तरह बैठने को कहा ताकि वो मेरे मम्मे दुह पाए। मैं अपनी हथेलियों और घुटनो के बल बैठ गयी और मेरे सीने से मेरे मम्मे नीचे लटक रहे थे।
उसने अपने दोनों हाथों की मुठ्ठी में मेरे निप्पल पकड़े और बारी बारी से दबा कर नीचे खींचता और फिर ऊपर करता। मेरा एक मम्मा नीचे जाता और दूसरा ऊपर, फिर पहला मम्मा ऊपर और दूसरा नीचे। इस तरह वो मेरे मम्मे से दूध दुहता रहा। अगर सच में दूध होता तो वो दूध की गिलास भर लेता।
मैं: “इसमें तुम्हे क्या मजा आ रहा हैं, इसमें तो सर्फ मुझे मजा आएगा”
राहुल: “मैं सिर्फ प्रैक्टिस कर रहा हूँ, एक दिन जब तुम मेरे बच्चे की माँ बनोगी तब मैं ऐसे ही सच में तुम्हारा दूध निकालूंगा”
उसकी बचकानी बातें सुन मैं शरमा गयी और तुरंत वहा से हट गयी। उसने अब अपने सारे कपड़े निकाल पूरा नंगा हो गया। उसका लंड पूरा तन गया था। आखिर उसे मेरी चूत के दर्शन जो हो गए थे। वो नीचे लेट गया और मैंने अपनी साड़ी से उसके दोनों हाथ ऊपर पलंग से बाँध दिए। मैंने उसका लंड अपने हाथ में लिया वो एक गरम लोहे की छड़ समान खड़ा था।
उसको थोड़ा ठंडा करने के लिए मैंने अपने मुँह में रख गीला कर दिया और फिर थोड़ी देर उसे चूसती रही, उसकी आहें शुरू हो गयी थी। मैं उसकी गोटियों को अपनी जबान से ऊपर नीचे रगड़ने लगी।
मैं अब उसके ऊपर सवार हो गयी। आगे झुक कर उसके निप्पल पर अपनी जबान रगड़ी, उसके रोंगटे खड़े हो गए। नीचे उसका लंड बार बार खड़ा हो कर मेरी चूत को छूने की कोशिश कर रहा था।
मैंने अब अपना हाथ नीचे ले जाकर उसके लंड को अपनी चूत में डाल दिया और उसकी एक गहरी आह निकली। मैं अब आगे पीछे गति करने लगी और उसका लंड अपनी चूत में रगड़ती रही। उसकी आह उह आह उह आह चलती रही।
थोड़ी देर में वो भी अपनी लोहे की छड़ को अंदर बाहर धक्का मार रहा था। उसने अब मेरे से गन्दी बातें शुरू कर दी और मैं भी मजे में उसका साथ देती रही, इससे हमारा मजा दुगुना हो रहा था ।
राहुल: “तुम्हारी चूत में क्या हैं?”
मैं: “कोक”
राहुल: “हिंदी में बोलो”
मैं: “लंड”
राहुल: “किसका?”
मैं: “तुम्हारा”
राहुल: “नाम लेकर बोलो, मैं क्या कर रहा हूँ”
मैं: “मेरी चूत में राहुल का लंड हैं ”
राहुल: “क्या कर रहा हैं ये भी बताओ ”
मैं: “चोद रहा हैं”
हम दोनों के झटको की गति एकाएक बढ़ गयी और हमारी सिसकियाँ भी बढ़ने लगी।
मैं: “आह्ह आह्ह राहुल, तुम्हे मुझे चोदना था ना। अम्म हा बोलो, मुझे चोदोगे ना अहअहअहअह”
राहुल: “आआआआआह ओह प्रतिमा तुम्हारी चूत उह्ह्ह मैं चोदूंगा, चोदने दोगी ”
मैं : “हां आह आह तुम्हारी ही हैं ये चूत उउउह जितनी मर्जी उतनी चोद दो। करलो पूरा करलो हां ये वाला कर लो हम्म्म आह्ह उह्ह ”
राहुल: “ओह प्रतिमा, ओह प्रतिमा, आअह्ह ऊहहुहुहु ऊहहुहुहु या या या फक यु फक यु आह आह आह हाथ खोलो मेरे… आह आह …मेरा पानी बाहर आ रहा हैं.. ऊहहु ऊहहु उउउउउउउउउ आअहाहा आअहाहा”
मैं: “उई माँ …निकाल दो पानी मेरी चूत में, हां उह माँ आईईई आअह्ह आअह्ह आअह्ह”
राहुल ने अपना सारा पानी मेरी चूत में खाली कर दिया और हम दोनों झड़ गए।
मैं उसके ऊपर से हटी और उसके हाथ खोल दिए। हम दोनों बाथरूम से साफ़ होकर वापिस आये। हम दोनों नंगे ही बिस्तर में घुस गए और एक दूसरे की तरफ मुँह कर आमने सामने लेट गए। एक बार वो मुझे मेरे होंठो पर चूमता तो एक बार मैं उसे चूमती। हम दोनों एक दूसरे की कमर में हाथ डाले एक दूसरे की तरफ देखते देखते सो गए।
अगली सुबह मेरी नींद खुली। मैं सीधी लेटी थी और और राहुल मेरी तरफ करवट लेकर लेटा था। उसका एक हाथ मेरे एक मम्मे के ऊपर था और उसकी दोनों टांगो के बीच मेरी एक जांघ फांसी हुई थी। मुझे उसकी बाहों में बहुत ही सुकून मिल रहा था। वो भी शायद उठ चूका था या शायद कोई सपना देख रहा था। उसका लंड एकदम कड़क था और मेरी जांघो को चुभ सा रहा था।
उसके हाथ की मेरे मम्मे पर पकड़ थोड़ी मजबूत हुई और वो मलने लगा। उसने भी अब आँख खोली और मुझे देख मुस्कुराने लगा। उसने अपनी ऊपर वाली टांग थोड़ी और उठा कर मेरी चूत पर ले आया और अपनी टांग से मेरी चूत रगड़ने लगा।
मैं: “क्या हो रहा हैं ये?”
राहुल: “मेरे लंड की गाड़ी को पार्किंग करनी हैं इसलिए तुम्हारी चूत को गराज की तरह तैयार कर रहा हूँ ”
मैं: “कल रात को ही तो पार्किंग की थी, पेट नहीं भरा”
राहुल: “पेट भर गया, अब तुम्हारी चूत को भरूंगा अपने पानी से”
ये कहत हुए वो मेरे ऊपर चढ़ गया और अपना लंड मेरी चूत में घुसाने लगा। मैंने उसको अपने से दूर किया।
मैं: “पहले मुझे बाथरूम जाकर तैयार होने दो, ज्यादा मजा आएगा। और तुम भी बाथरूम हो आओ”
मैं उठ करअटैच वाशरूम में गयी और पंद्रह मिनट बाद बाथरूम और माउथवाश कर आयी। बाहर आकर देखा वो अभी भी लेटा हुआ था।
मैंने उसको जबरदस्ती वाशरूम में भेजा। मैं अब बिस्तर पर आकर बैठ गयी। मेरा ध्यान मेरे मोबाइल पर गया। जोसफ का भेजा वीडियो अभी तक नहीं देखा था।
मैंने मोबाइल लिया और वो वीडियो देखना शुरू किया।
ये वीडियो राहुल के केबिन का था और उसमें सैंड्रा की भी आवाज थी। ये परसो का वीडियो था जब सैंड्रा और जोसफ डील साइन करें ऑफिस आये थे। वो सारी बातें सुन कर मैं सदमे में आ गयी। वो कुछ इस तरह था:
सैंड्रा: “तो आखिर प्रतिमा को चोद ही दिया तुमने”
राहुल: “थैंक यू, सब तुम्हारी वजह से मुमकिन हुआ। तुम वो गांड मारने की शर्त ना रखती तो प्रतिमा शायद ही मानती मेरे साथ चुदवाने के लिए”
सैंड्रा: “मैं तो उसी दिन करवा देती तुम्हारा मिलन पर उसने तुम्हारी जगह जोसफ को चुन लिया। इस जोसफ को मुफ्त में चुदाई मिल गयी”
राहुल: “तुमने मुझे उसके पुरे कपड़े क्यों नहीं खोलने दिए उस दिन। ”
सैंड्रा: “तुमको कितनी बार बोला मुझे भी कभी चोद दो, कभी हां नहीं बोलते तुम। उस दिन पहली बार तुम्हारा लंड देख के मेरी नीयत ख़राब हो गयी और प्रतिमा की जगह मैं खुद बीच में आ गयी अपनी चुदवाने के लिए । ”
राहुल: “तुमको फिर सजा मिली, गाँड़ फाड़ दी थी तुम्हारी मैंने। पर अभी तक प्रतिमा के बूब्स नहीं देख पाया हूँ”
सैंड्रा: “तो आज सुबह गांड मारते वक्त भी कुछ नहीं दिखाया उसने”
राहुल “नहीं, बहुत शर्मीली हैं। पर एक दिन उसको पूरा पाकर रहूँगा”
सैंड्रा: “तुम इसके पीछे इतना क्यों पड़े हो ”
राहुल: “बचपन से जिद्दी रहा हु, जो माँगा मिला हैं। प्रतिमा ने एक पार्टी में उसको चूमने से मुझे रोक दिया था। मेरे दिल पर लगी थी ये बात। उसी दिन सोच लिया था इसकी चुदाई करूँगा”
सैंड्रा: “बेचारी को बहुत पागल बनाया डील के नाम पर। डील को तो बॉब ने मंजूरी दे ही दी थी । तुम्हारी बॉब के साथ सेटिंग माननी पड़ेगी।”
राहुल “बेवकूफ तो बना दिया, पर.. ”
और वीडियो कट हो गया। मेरे होश फाख्ता हो गए। मुझे बिस्तर तक लाने की ये सब राहुल की चाल थी।
जिस पर इतना भरोसा किया उसने मुझे ही धोखा दिया था।
जोसफ द्वारा भेजा वीडियो देखने के बाद मैं ठगा सा महसूस कर रही थी। ये साफ़ हो गया कि राहुल ने मुझे बिस्तर तक लाने के लिये मुझे धोखा दिया था।
मैंने अपने कपडे पहनना शरू कर दिया। मुझे जल्दी से यहाँ से निकलना था। कपडे पहनते वक्त मैं सोच रही थी काश मैंने ये वीडियो कल रात को ही देख लिया होता तो राहुल मेरे जिस्म के साथ खिलवाड़ नहीं कर पाता।
उससे भी पहले मुझे अपना फ़ोन स्विच ऑफ नहीं करना था। वरना मैं इस पार्टी में आती ही नहीं। जोसफ ने तो मुझे बचाने की कोशिश की थी।
शायद उस दिन फार्म हाउस पर वो जो इशारे कर रहा था वो इसी साजिश की तरफ थे, मैं ही मुर्ख समझ नहीं पायी और उसको गलत समझती रही।
सच में दिखावे पर नहीं जाना चाहिए था। जोसफ भले ही खतरनाक दीखता हो पर उसका दिल साफ़ हैं, जबकि राहुल सुन्दर होते हुए भी दिल का काला हैं। मेरे जैक के साथ रिश्ते के बारे में जोसफ ने सैंड्रा को नहीं बताया होगा, ये भी सैंड्रा को राहुल ने ही बताया होगा अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए।
मैंने कपड़े पहन लिए थे और मोबाइल वापिस पर्स में रख सैंडल पहन लिए। मैं जाने को तैयार थी और राहुल बाथरूम से बिना कपड़ो के बाहर निकला।
राहुल: “अरे कपड़े पहन लिए, अभी तो काम बाकी हैं डिअर”
मैंने अपना मोबाइल निकाल वीडियो चलाया और उसकी तरफ स्क्रीन कर दी।
मैं: “ये देखो, तुम्हारी काली करतूत रिकॉर्ड हैं।”
राहुल: “सॉरी प्रतिमा। मेरी बात सुनो, मैं समझाता हूँ तुम्हे”
मैं: “जितना सुनना था सुन लिया ”
राहुल: “पर ये पूरा सच नहीं हैं। मुझे पूरी बात बताने का मौका तो दो”
मैं अब बैडरूम से बाहर आ गयी और अपना मोबाइल वापिस पर्स में डाल दिया, वो मेरे पीछे पीछे आया और मुझे रोकने की कोशिश करने लगा। वो दौड़ कर मेरे आगे आया और बाहर जाने वाले दरवाजे को रोक कर खड़ा हो गया।
राहुल: “सिर्फ दो मिनट दो, मैं तुम्हे पूरी बात बताता हूँ, फिर तुम फैसला करना मैं गलत हु या नहीं”
मैं वापिस पीछे मुड़ी और हॉल के उस दरवाजे से बाहर निकली जो बालकनी में खुलता हैं। वो फिर मेरे पीछे पीछे आया रोकने को। मैं बालकनी में आकर उसके आगे बनी सीढ़ियों से नीचे गार्डन की तरफ उतरी। सीढ़िया उतरने के बाद उसने पीछे से आकर मेरा हाथ पकड़ लिया। मैंने उससे अपना हाथ छुड़ाया। उसने फिर मेरे कंधे से मेरा पर्स उतार लिया और अपने पीछे कर लिया।
राहुल: ‘पहले तुम मेरी बात पूरी सुनो फिर मैं तुमको पर्स दूंगा। फिर चाहे तो तुम चली जाना। आई रियली लव यु ”
वो बिना कपड़ो के वहां खड़ा था और मुझे शर्म आ रही थी कि इसके फार्म हाउस का केयरटेकर ये तमाशा देखेगा तो क्या सोचेगा। मैंने अपना पर्स लिए बिना ही वहां से जाने का सोच लिया और चल पड़ी। थोड़ा आगे आकर उसने एक बार फिर मेरा हाथ पकड़ लिया, मैं छुड़ाने का प्रयास करने लगी और वो मुझसे रुकने की गुजारिश करता रहा।
इस खींचातानी में मेरा हाथ दर्द करने लगा और मैं चीखी कि मुझे दर्द हो रहा हैं और उसने मुझे छोड़ दिया। मैं इसके लिए तैयार नहीं थी और पीछे की तरफ दम लगाने के कारण मैं तेजी से पीछे की तरफ गयी और लड़खड़ा कर पास में बने स्वीमिंग पूल में गिर गयी।
मेरा सर पानी के अंदर चला गया। मैं पूल के ज्यादा गहराई वाली जगह थी और मुझे इतना अच्छा तैरना नहीं आता खास तौर से जब मेरे पुरे कपड़े भीग गए हो और साड़ी पेटीकोट पहना था जो भीग कर मेरे शरीर से चिपक गए थे । मगर जल्द ही राहुल भी पूल में कूद पड़ा और मुझे पीछे से पकड़ कर खड़ा हो गया। उसने मुझे जमीन से थोड़ा ऊपर उठा रखा था।
वो मुझे ऐसे ही उठाये थोड़ा आगे लेकर आया जहा पूल का पानी थोड़ा कम गहरा था। उसने मुझे नीचे उतार पैर जमीन पर टिकाये और मेरी सलामती पूछने लगा।
उसने मुझे अभी भी पकड़े रखा था। मैंने उसको धक्का दिया और पूल की सीढ़ियों की तरफ भागी बाहर आने को। पर मेरी साड़ी खींची और मैं रुक गयी।
मैंने पलट कर देखा उसके हाथ में मेरी साड़ी का पल्लू था, शायद धक्का देते वक्त उसके हाथ में आ गया था। मैंने उसको साड़ी छोड़ने को बोला पर वो मुझे रुकने के लिए बोलने लगा और मेरी तरफ बढ़ा।
मैंने अपनी साड़ी जल्दी से पेटीकोट से अलग की और आगे बढ़ी। मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो गयी और मैं पूल की सीढ़ी से ऊपर चढ़ गयी और पूल से बाहर आयी। मगर उसने पूल में खड़े खड़े ही मेरा एक पाँव पकड़ लिया और जाने नहीं दिया।
मैं वही बैठ गयी और अपना पाँव झटक कर छुड़ाने लगी पर उसने नहीं छोड़ा। मैंने मदद के लिए देखा, उसका केयरटेकर जहां रहता था वहा ताला लगा था, शायद उसने उसको कल रात को ही छुट्टी दे दी थी ताकि मेरे साथ रात गुजार पाए। अब सीढ़ी से चढ़ वो भी बाहर आ गया।
बाहर आते ही उसने मेरा पाँव छोड़ा और मुझे अपनी बात सुनाना चाहा पर मैं उठ कर फिर भागी अपने पर्स की तरफ। वो मेरे पीछे ही था।
अपने भीगे कपड़ो में मैं बहुत असहज महसूस कर रही थी। मैं जैसे ही अपने पर्स को उठाने के लिए झुकी उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया। मैं वही औंधे मुँह गिर पड़ी और वो मेरे ऊपर। उसने मुझे सीधा किया और अपनी बात सुनानी चाही पर मैं उसपर चीखते हुए हटाती रही।
अपनी बात सुनाने के लिए उसे मुझे कमजोर करना बहुत जरुरी था और उसे मेरी कमजोरी अब तक पता चल गयी थी। उसने मेरा गीला पेटीकोट नीचे से थोड़ा ऊपर उठाया और अपना हाथ अंदर डाल मेरी पैंटी खींच कर बाहर निकालने लगा।
मैंने उसको रोकना चाहा पर कामयाब नहीं हुई और उसने मेरी पैंटी थोड़ी नीचे खिसका दी और अपनी एक ऊँगली मेरी चूत में घुसा दी।
अंदर ऊँगली जाते ही उसने ऊँगली को अंदर गोल गोल घुमा अंदर बाहर करने लगा। जैसे एक रोते हुए बच्चे के मुँह में निप्पल डाल उसको शांत करा देते हैं वैसे ही उसकी ऊँगली के मेरी चूत में हरकत होते ही मेरा चिल्लाना बंद हो गया और हलकी सिसकियाँ निकलने लगी।
उससे अच्छे से पता था मुझे नियंत्रण करने की चाबी कहा हैं और वो मेरी चाबी घुमा कर मुझे नशा दे रहा था । एक हाथ से मेरा कंधा दबाये उसका चेहरा मेरे चेहरे के पास था।
राहुल: “आई एम सॉरी इसके लिए पर मैं ऐसा नहीं करता तो तुम मेरी बात नहीं सुनती। अब सुनो ”
मेरे सर पर नशा चढ़ रहा था और मैं उसकी बात नहीं सुनना चाहती थी। मुझे कुछ नहीं सुझा और अपने होंठो से उसको होंठो को काटना चाहा पर उसके होंठ पर छूते ही उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैं कुछ ना कर पायी और नीचे चूत में होती हलचल के साथ ही मैं खुद भी उसको चूमने लगी। थोड़ी देर तक हम एक दूसरे को यु ही चूमते रहे फिर उसने मुझे कहना शुरू किया ।
राहुल: “मैं मानता हु की मैंने तुम्हे पाने के लिए गलत तरीका इस्तेमाल किया था पर मैं तुम्हे प्यार करता हु। पता नहीं जोसफ ने तुम्हे पूरा वीडियो भेजा या नहीं पर तुमने जो सुना वो आधा सच हैं ”
मैं: “अहह मुझे नहीं सुनना उम्म अहह अहह ”
उसने अपनी ऊँगली निकाल दी। किसी बैटरी से चलने वाले खिलौने की बैटरी निकाल दी हो वैसे मेरी सिसकियाँ शांत हो गयी पर उस हलके नशे में अभी भी पड़ी थी।
उसने मेरी पैंटी पूरी निकाल दी और आगे से पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया। वो मेरे ऊपर चढ़ गया और अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। पतली ऊँगली के बाद उसके मोटे लंड के मेरी चूत के अंदर जाते ही मेरा नशा और बढ़ गया।
इसके बाद उसने एक के बाद एक जोर के धक्के मारना शुरू कर दिया और मैं अपने हाथ दोनों तरफ फैलाये आहें भरने के अलावा कुछ नहीं कर पायी।
थोड़ी देर मुझे वही खुले में चोदते हुए वो अपनी सफाई दिए जा रहा था कि वो मुझे बहुत प्यार करता हैं और मैं उसकी गलती को पहली गलती मान उसे माफ़ कर दू।
मेरे पति ने तो सिर्फ मजे के लिए मुझे अपने दोस्तों को सौंप दिया था इसने तो मुझे दुसरो के हाथों में जाने से बचाया ही था । मुझे उसके प्यार पर कभी शक नहीं था और उसकी आँखों में सच्चाई दिख रही थी पर मैं उसके धोखे को कैसे भुला देती। तभी मेरे मोबाइल की घंटी सुनाई दी जो पर्स के अंदर से आ रही थी।
मैंने अपना हाथ पीछे बढ़ा कर पर्स को अपनी तरफ खिंचा और अंदर से मोबाइल निकाला।
अशोक का कॉल था, मुझे सुबह घर पहुंचना था और अभी मैं इस मुसीबत में फंसी थी। राहुल मेरे सीने से उठा और बिना अपना लंड बाहर निकाले मेरी टाँगे अपनी मुड़ी जांघो पर रख दी और बैठे बैठे ही बहुत धीमे धक्के मारता रहा ताकि मैं बात कर पाऊ।
अशोक किसी से मिलने जाने वाला था और मेरा इंतजार कर रहा था ताकि मैं बच्चे को संभाल सकू। मेरे कपड़े पुरे गीले हो चुके थे और इस तरह जा नहीं सकती थी तो मैंने उसको एक दो घंटे में आने का बोल कर बच्चे को माँजी के पास छोड़ने को बोल दिया। फिर मैंने फ़ोन रख दिया और उस पर चिल्लाने लगी ।
मैं: “तुम्हे सिर्फ मेरा जिस्म चाहिए था ना, तो ले लो, जो चाहिए ले लो”
ये कहते हुए मैंने अपने ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्लाउज को सामने से हटा कर ब्रा को उसके सामने कर दिया। अपने ब्रा को भी हटाने की कोशिश की पर पीठ पर हुक लगे होने से नहीं खिसका पायी। उसने अब तक मुझे धीमे धक्के मारने भी बंद कर दिये थे। मैंने अपने हाथ फिर जमीन पर फैला दिए।
मैं: “बोलो क्या चाहिए तुम्हे? लेलो कुछ नहीं कहूंगी। तुम इसी के भूखे हो, कर दो नंगा मुझे”
उसने मेरे कंधे पकड़ मुझे ऊपर उठाया और मेरा गीला ब्लाउज मेरे कंधे से निकाल पूरा बाहर कर दिया और हाथ पीछे ले जाकर मेरे ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी तो रोने जैसी हालत थी। वो सच में मुझे नंगा कर रहा था। उसने मेरा ब्रा पूरा निकाल मुझे टॉपलेस कर दिया। मैं लगभग सुबकते हुए फिर लेट गयी।
उसने अब मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोला और अपना लंड मेरी चूत से निकाल दिया। फिर उसने मेरा गीला पेटीकोट मेरी टांगो से निकाल मुझे पूरा नंगा कर दिया। वो उठ गया और मैं वही लेटी रही।वो वापिस पीछे की तरफ गया और पूल में हाथ डाल वहा तैर रही मेरी साड़ी अपने हाथों में समेट कर ले आया। वापिस आकर उसने मेरे बाकि के कपड़े उठाये।
राहुल: “मैं ड्रायर में डाल कर कपड़े सूखा देता हूँ, फिर तुम्हे घर छोड़ दूंगा”
ये कह कर वो वहा से घर के अंदर चला गया। मैं पूरी नंगी वहा लेटी की लेटी रह गयी। मैं उसको समझ ही नहीं पा रही थी। मेरा शरीर पाने के लिए उसने मुझे धोखा दिया और अभी उसके पास मौका था तो उसने कुछ नहीं किया। पता नहीं उसका असली रूप क्या हैं।
राहुल मेरे कपड़े निकाल मुझे वही बिना चोदे नंगा छोड़ अंदर चला गया। मैं वही पड़ी रही और दस मिनट बाद वो वापिस आया और मेरा हाथ पकड़ उठाने लगा पर मैंने उसका हाथ झटक दिया।
उसने जबरदस्ती मुझे उठाया और अपने कंधे पर लाद दिया। उसमे मुझे मेरी नंगी गांड से पकड़ रखा था और मेरा सर उसकी पीठ की तरफ लटका था, उसने अभी भी कपड़े नहीं पहने थे और मुझे उसकी गठीली गांड और मांसल जाँघे दिख रही थी।
राहुल: “सोना हैं तो अंदर सो जाना, मेरा केयरटेकर आधे एक घंटे में आने वाला होगा। ”
वो मुझे बैडरूम में ले आया और बिस्तर पर लेटा दिया। उसने मुझे थोड़ी देर इंतजार करने को कहा कि मेरे कपड़े ड्रायर में सुख रहे हैं। फिर वो मेरे पास वही बैठ कर मुझे मनाने लगा।
राहुल: “मेरी बात नहीं सुनोगी तो मुझे समझोगी कैसे”
मैं: “मुझे कुछ नहीं सुनना हैं”
राहुल: “मतलब तुम्हे सिर्फ वो वीडियो सच्चा लगा पर मेरी भावनाये सब झूठी लगी । अच्छा मेरी दो बातें सुनो और फिर उसका जवाब दो ”
मैं: “मुझे कोई जवाब नहीं देना और ना ही कुछ सुनना हैं”
राहुल: “मेरी बात सुनवाने के लिए मुझे फिर से वही करना पड़ेगा”
मैं: “हाथ भी मत लगाना मुझे अब, दूर रहो”
राहुल: “तो फिर मेरी बात सुनो, जैसे भी हो मैं तुम्हे अपनी बात सुनवा के रहूँगा। मुझ पर इल्जाम लगा हैं मैं अपना पक्ष रखूँगा। ”
मैंने उसको धक्का देकर बाहर जाने को बोला पर उसने मुझे पकड़ लिया और बिस्तर पर उल्टा लेटा दिया और वो एक बार फिर मेरे ऊपर चढ़ा हुआ था। मैं लगातार आवाज निकालते हुए उसकी आवाज को दबा रही थी। उसने मेरे दोनों हाथ बिस्तर पर दबा कर मेरे पुरे पुरे शरीर को अपने नीचे दबा रखा था।
उसका लंड मेरी गांड से छू रहा था और धीरे धीरे वो कड़क हो मुझे चुभ सा रहा था।
उसने मेरी टांगो के बीच जगह बनाई और मैं चिल्लाई और तब तक उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल जोर जोर से धक्के मारना शुरू कर दिया।
उसके झटको से मेरा पूरा शरीर बिस्तर पर ऊपर नीचे हिल रहा था और मैं उस पर चिल्ला रही थी। थोड़ी ही देर में मेरा चिल्लाना धीरे धीरे कम होता गया और एक दम रुक गया।
फिर मेरे मुँह से सिर्फ सिसकियाँ निकल रही थी। उसने मुझे चोदते चोदते ही अपनी बात सुनाई।
राहुल: “भले ही मैंने तुम्हारी गांड धोखे से मारी थी पर हमारे बीच जो ऑफिस में हुआ वो तो तुम्हारी मर्जी से हुआ था या नहीं ? बोलो….अब कुछ क्यों नहीं बोलती ….. जवाब दो तुम भी मुझे चाहती हो”
मैं: “आअह्ह आह्ह हां वो मेरी मर्जी थी ”
राहुल: “कल रात को यहाँ रुकना तुम्हारी इच्छा से था, मैंने तो मजबूर नहीं किया था ना, बोलो?”
मैं: “हम्म्म अहहह हां मेरी मर्जी थी ”
राहुल: “मैंने तो तुम्हे जोसफ और जैक से बचाने की हमेशा कोशिश की हैं। मुझे अपनी रूही हर कीमत पर वापिस चाहिए थी, सारो कोशिशे कर ली, धोखा नहीं करता तो क्या करता, तुम्हारा दिल कैसे जीतता”
मैं: “जो प्यार करते हैं ..अहह.. झूठ नहीं बोलते, तुम कल रात .आह्ह.. मेरा फायदा उठाने से पहले मुझे सब सच बता सकते थे..आह्ह ..मुझे जोसफ से पता चला ”
राहुल: “मैं वैसे भी तुम्हे आज सुबह बताने वाला था। मुझे नहीं पता था जोसफ के पास ये वीडियो हैं। वरना मैं खुद पहले बता देता। आहहह आहहह आहहह ओह प्रतिमा, केन आई फक यू , अम्म्म हाहह आह्ह ”
मैं: “या या या उह्ह्ह उम्म्म हम्म्म हम्म्म ऊऊओह्ह्ह आआआ”
राहुल और मैं जोर से चीख निकालते और आहें भरते रहे, अंदर से फच्चाक फच्चाक की आवाजे आने लगी। मेरा तेजी से पानी छूटने लगा था और उसने अपनी पिचकारी मेरी चूत में छोड़ दी और फिर थोड़े हलके झटको के साथ बाकी की बची बुँदे भी मेरे अंदर डाल दी। हम दोनों बुरी तरह से हांफते हुए झड़ गए। और तेज तेज सांस लेते हुए हम वैसे ही बिस्तर पर पड़े रहे।
राहुल: “शायद ये हमारे बीच का आखिरी संबंध हो। पर फैसला तुम्हारे पास हैं। क्या तुमने कभी किसी को धोखा नहीं दिया”
मैं: “मैंने ऐसे कामो के लिए धोखा नहीं देती”
राहुल: “तो फिर नौकरी ज्वाइन करने के बाद जो तुम मेरा ध्यान अपने कपड़ो और उसमे से झाकते अंगो पर देखने पर मजबूर क्यों करती थी, वो क्या था ?”
अब झेंपने की बारी मेरी थी, उसको मेरी उस चाल के बारे में अब तक सब पता था। आग तो शायद मैंने ही लगाई थी। पर मेरी कोई बुरी नीयत नहीं थी कि किसी के इज्जत से खेलु।
मैं: “मैंने ऐसा कुछ नहीं किया हैं ”
राहुल: “मेरी नजरो में नजरे डाल कर बोलो”
मैं: “तुम मेरे ऊपर से हटो, तुमने अभी मेरे साथ जबरदस्ती की हैं ”
राहुल: “जबरदस्ती थी तो रोकने की बजाय आहें क्यों भर रही थी”
मैंने उसको अपने ऊपर से हटा दिया और भाग कर वाशरूम में चली गयी। मेरी एक चोरी भी पकड़ा गयी थी। पर उसके गुनाह के सामने मेरी गलती कुछ ही नहीं थी। मैं नहा धो कर साफ़ हो गयी। मेरे पास पहनने को कपड़े नहीं थे तो टॉवेल लपेट कर वाशरूम के दरवाजे से झाँका। राहुल वहां नहीं था पर बिस्तर पर मेरे सूखे हुए कपड़े पड़े थे।
मैं वाशरूम से बाहर आ गयी और बेडरूम का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। मैंने जल्दी से अपने सारे कपड़े पहन लिए और तैयार हो गयी।
मैं अब बैडरूम से बाहर आयी, हाल में राहुल तैयार बैठा था। मेरे आते ही वो खड़ा हो गया। उसके हाथ में मेरा पर्स था जो उसने दिया।
राहुल: “चलो मैं तुम्हे घर छोड़ देता हूँ”
हम दोनों कार में थे और मेरे घर की तरफ जा रहे थे।
राहुल: “अगर तुम्हे मेरी शिकायत करके सजा दिलवानी हैं तो दे दो। माफ़ करना हैं तो कर दो। सब तुम्हारी मर्जी हैं। पर मैं तुमसे प्यार करना नहीं छोडूंगा, तुम करो या न करो ”
मैंने उसको कुछ नहीं बोला और घर पर आ गयी। मुझे इस विषय पर गंभीरता से सोचने की जरुरत थी।
घर पर आने के बाद पूरा दिन में इसी विचार में खोयी रही कि मुझे अब आगे क्या करना हैं। क्या मैं राहुल को माफ़ कर उसे एक और मौका दू या उसे हमेशा के लिए छोड़ कोई दूसरी नौकरी ढूंढ लू या फिर घर पर बैठ जाऊ।
मैंने कड़ी मेहनत से ये मुकाम पाया था, क्या मैं इसे अपने हाथ से जाने दू। मैं उन लोगो को छोड़ दू जिन्होंने मुझे धोखा दिया था। मैंने आखिर फैसला कर लिया था। मैं अपनी नौकरी और पोजीशन नहीं छोडूंगी, ये मेरे खून और पसीने से अर्जित की हुई हैं। मगर मैं राहुल को दूसरा मौका नहीं दूंगी। मेरे उसके साथ संबंध सिर्फ एक बॉस और कर्मचारी के होंगे और कोई दिल का रिश्ता नहीं होगा।
उसने मुझे धोखा दिया मगर मैं उसे एक बार माफ़ भी कर करती हूँ क्यों कि वो आग मैंने ही उसमे लगाई थी। पर सैंड्रा, उसका तो मुझसे कोई लेना देना ही नहीं था, उसको मेरा फायदा क्यों उठवाने दिया दुसरो से।
मैंने जैक के साथ थोड़ा समय ही तो बिताया था इसके बदले मेरा दिल तोड़ने की क्या जरुरत थी। यहाँ तक कि उसने मुझसे जैक को भी छीन लिया था।
अगले दिन रविवार की छुट्टी थी, और कल की परेशानी अब भी मेरे सर पर थी। तभी मुझे जोसफ की याद आयी, जिसने मेरी मदद की और मुझे उस कड़वे सच से रूबरू करवाया। उसको एक धन्यवाद देना तो बनता था। जैसे ही पति थोड़ा इधर उधर हुए मैंने जोसफ को फ़ोन मिलाया और उसको वो वीडियो भेजने के लिए धन्यवाद कहा।
उसने मेरी सलामती पूछी कि मैं ठीक हु या नहीं, उसको ये तो नहीं कह सकती थी कि उसका मैसेज देर से पढ़ने के कारण मैं लूट चुकी थी उसको अफ़सोस होता पर उससे माफ़ी जरूर मांगी कि मैंने उसको गलत समझा।
मैं उसके इशारे पढ़ नहीं पायी कि वो मेरा शुभचिंतक हैं। उसने मुझे मेरा ध्यान रखने की सलाह दी। फ़ोन रखने से पहले उसने एक और बात कही।
जोसफ: “मुझे तुमसे एक फेवर चाहिए”
एक बार तो मैं डर गयी, ये क्या मांगने वाला हैं और चुप हो गयी।
जोसफ: “घबराओ मत, कुछ ऐसा वैसा नहीं मांग रहा। वैसे मैं अपने लिए नहीं मांग रहा। ये जैक के लिए हैं। जब से उसने तुम्हे और मुझे एक साथ वो सब करते हुए देखा हैं, उसका दिल टूट गया हैं। उसकी हालत देख कर मुझे पता चला वो तुमको बहुत प्यार करता हैं। सैंड्रा ने मुझे उसे सच्चाई बताने से मना किया हैं। मैं चाहता हु कि तुम उससे मिलो”
मैं: “किस मुँह से जाऊ उसके सामने, मैं भी उसको बहुत पसंद करती हूँ पर अब वो मुझे देख कैसे रियेक्ट करेगा पता नहीं। शायद वो मुझसे मिलना भी ना चाहे”
जोसफ: “नहीं, उसे अब भी यकीन नहीं हैं कि तुम ऐसा कर सकती हो। उसने मुझसे भी कई बार पूछा पर मैं बता नहीं सकता था। सैंड्रा को पता चल गया तो वो मेरा जीना हराम कर देगी। तुम जैक से मिलने जाओ और उसको सब सच बताओ, और सैंड्रा के सामने ही बताओ ताकि वो मुझ पर शक ना करे कि मैंने जैक को सच बताया”
मैं: “जैक मेरी बात का यकीन क्यों करेगा भला ! तुम्हे क्या लगता हैं”
जोसफ: “करेगा, जरूर करेगा। सच्चा प्यार इतना कच्चा नहीं होता हैं। तुम सुबह के समय जाना जब सैंड्रा होगी या फिर शाम को”
मैं:”ठीक हैं मैं कोशिश करुँगी”
वीकेंड ख़त्म हुआ और सोमवार के दिन अशोक के घर से ऑफिस जाते ही मैं तैयार हुई। मैंने अपनी स्लीवलेस बॉडीकॉन ड्रेस पहनी जो घुटनो के ऊपर तक ही थी। मैं ऑफिस नहीं गयी और सीधा जैक के गेस्ट हाउस पहुंची। ड्राइवर गाड़ी के साथ बाहर ही खड़ा था मतलब सैंड्रा वही थी।
दरवाजा जैक ने ही खोला था। उसने मुस्कुराते हुए मेरा स्वागत किया और फिर कुछ याद कर मुझसे कहा कि जोसफ तो बाहर गया हुआ हैं कुछ दिन के लिए काम से।
मैंने कहा कि मुझे पता हैं और मैं उसी से मिलने आयी हु। उसने मुझे अंदर लिया, सैंड्रा उस वक्त वाशरूम में थी। मैंने उसको सच बताना शुरू किया।
उस दिन जोसफ के साथ मैंने जो कुछ भी किया था वो सब मज़बूरी में सैंड्रा के कहने पर किया था ताकि वो मुझसे दूर हो जाये। मैं तो उसे अब भी चाहती हूँ। उसको मुझ पर यकीन हो भी गया, क्यों कि वो अपनी माँ की आदतों को अच्छे से पहचानता था। वो जैक की कुछ गर्लफ्रेंड को पहले भी भगा चुकी थी।
जैक: “तुम सिर्फ ये कहने के लिए ही आयी थी यहाँ”
मैं: “नहीं, मैं ये कहने भी आयी कि मैं तुम्हे और भी पसंद करने लगी हूँ। तुम्हारे जैसा सच्चा इंसान मिलना बहुत मुश्किल हैं। तुमने इतनी आसानी से मेरी बात पर विश्वास कर लिया”
जैक: “मुझे उसी दिन लग गया था जिस तरह तुम मुझसे नजरे चुरा रही थी। मुझे पता था तुम ऐसा कुछ नहीं कर सकती”
मैं: “मुझ पर भरोसा बनाये रखने के लिए थैंक्स”
जैक: “पता नहीं तुम मुँह पर यकीन करोगी या नहीं पर आई रियली लव यू। तुम्हे नहीं पता तुमने यहाँ आकर…”
वो आगे कुछ बोल ही नहीं पाया. उसकी वो नीली नीली खूबसूरत आँखें एकदम नम हो चुकी थी और प्यार से मेरी तरफ ही देख रहा था। उसकी हालत देख मेरी भी आँख से एक दो आंसू टपक पड़े।
मैंने उसको “आई लव यू टू ” बोला और उसको अपने गले से लगा लिया। इतने बड़े धोखे के बाद उसकी बाहों में बहुत सुकून मिल रहा था।
राहुल से धोखा खाने के बाद मुझे अब जैक के साथ बहुत सुकून मिल रहा था रहा था। हमने एक दूसरे के होंठो पर चूमना शुरू कर दिया। इतने दिनों बाद उसके हलके गुलाबी पतले कोमल होंठो को चुम कर बहुत अच्छा लगा।
थोड़ी देर चूमने के बाद हम अलग हुए और वो कुछ बोलना चाह रहा था पर बोल नहीं पा रहा था।
मैं: “तुम कुछ कहना चाह रहे हो”
उसने अपने हाथो में मेरे हाथ ले लिए और बोला ।
जैक: “दो दिन बाद हम वापस जा रहे हैं। मैं तुम्हे बहुत मिस करूँगा”
मैं: “मैं भी मिस करुँगी”
हम दोनों एक बार फिर एक दूजे के होंठो को चूमने लगे। फिर उसने मुझे घुमा दिया और पीछे से चिपक गया। उसने मेरी ड्रेस को जांघो से ऊपर उठाया और मेरी जांघो पर हाथ मलने लगा।
उसका मुँह मेरे कंधो पर चुम रहा था। मेरी जांघो को छोड़ उसने अपना हाथ मेरी ड्रेस के ऊपर से ही मेरे मम्मो पर रख दबाना शुरू किया। उसने मेरे कानो से बाल हटाए और मेरी गर्दन और कान के पीछे चूमने लगा।
इसी तरह चूमते हुए वो बारी बारी से कभी हाथ नीचे ले जाकर मेरी जांघो पर मलता तो कभी कपड़ो के ऊपर से ही मेरे मम्मे दबाता । इस तरह वो मुझे उत्तेजित कर रहा था। इस उत्तेजना से मेरी धीरे धीरे आह अहह सिसकीया निकलने लगी। उसने अपनी दो उंगलिया ली और मेरी चूत के ऊपर रगड़ने लगा और मैंने अपना मुँह पीछे मोड़ा और हम एक दूसरे को चूमने लगे।
उसने मेरी ड्रेस उठा कर मेरे सर के ऊपर से निकाल दी और मुझे सोफे पर बैठा दिया । अंदर से मेरा काला ब्रा और पैंटी दिखने लगी। वो सोफे पर मेरे पीठ पीछे बैठ गया और मेरे ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मे दबाने लगा और मेरे कंधे पर चूमता रहा।
उसने पीछे से मेरी ब्रा का हुक खोल ब्रा पूरा निकाल कर मुझे टॉपलेस कर दिया । मेरा ब्रा हटते ही उसने पीछे से हाथ आगे लाते हुए मेरे मम्मो को मलना शुरू कर दिया और साथ ही साथ मेरी गर्दन की साइड और कंधे पर चूमता रहा।
वो अब मेरे सामने की तरफ आया और मेरे दोनों पाँव चौड़े कर दिए। उसने मेरी पैंटी को मेरी चूत के छेद के आगे से थोड़ा साइड में किया और मेरी चूत की दरार में अपनी जबान चलाते हुए चाटता और चूसता रहा।
मेरी लगातार आह आह की आवाज जारी थी और वो मेरी चूत चाटते चाटते थोड़ा आगे बढ़ जांघो पर तो कभी चूत और जांघो के बीच के एरिया में भी चूमता रहा। मैं अब और जोर से ओ आ हां ओ आ हां कर जैसे सैंड्रा को वाशरूम से बाहर बुलाने लगी। मैं चाहती थी कि वो देखे मैं उसके बेटे के साथ क्या कर रही हूँ।
जोसफ वैसे भी कुछ दिन के लिए बाहर गया हैं, उसके बिस्तर का साथी अभी जैक ही हैं और उसको भी मैं अपने वश में कर लुंगी तो वो बहुत तड़पेगी।
इधर जैक ने मेरी पैंटी मेरी टांगो से बाहर कर मुझे पूरा नंगा किया और उधर सैंड्रा बाहर आयी और उसने वहां का नजारा देखा। उसको अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ। मगर वो अपने जवान बेटे को कैसे रोके, जो मेरे नशे में पागल हो चूका था।
सैंड्रा को देख जैक सोफे पर बैठ गया, पर मैंने बिना समय गवाए उसके पायजामे से उसका लंड बाहर निकाला। पहली बार मैंने उसका लंड देखा था, उसके लंड पर उसकी नसे ऐसा लग रहा था जैसे दूध की कटोरी में केसर के लच्छे पड़े हो। इतना गौरा लंड मैंने कभी देखा नहीं था और सोफे पर ही घोड़ी बन कर उसके लंड पर मुँह झुका दिया और उसका लंड चूसने लगी।
मैंने जोश जोश में कुछ ज्यादा ही अपने गले में उतार कर चूस रही थी और मेरे मुँह से उउहु उउहु की आवाज आ रही थी। मैं एक हाथ से उसका लंड पकड़े अपना मुँह ऊपर नीचे घिस रही थी । वो भी मजे में मेरी गांड को सहला रहा था। थोड़ी देर मैं उसके गोरे लंड को चूसती रही।
मैं सोफे पर घोड़ी बनी हुई थी और वो उठा और मेरे पीछे आया। उसने एक पाव नीचे ज़मीन पर रखा और दूसरा पाँव का पंजा सॉफे पर घुटनो के बल मोड़ कर रखा और पीछे से मेरी चूत में लंड डाल चोदना शुरू कर दिया। मैं सैंड्रा को जलाते हुए आह्ह आह्ह हम्म की झड़ी लगा दी।
जैक की उम्र भले ही ज्यादा नहीं थी पर उसने सैंड्रा और जोसफ से काफी कुछ सीख लिया था जो वो मेरे साथ प्रदशित कर रहा था। वो एक अनुभवी मर्द की तरह मुझे बहुत अच्छे से चौद रहा था।
उसने अपना एक हाथ मेरे कूल्हों पर रखा और दूसरा गाँड के छेद के ऊपर रख अपनी एक ऊँगली मेरी गांड के छेद में डाल दी। मैं दोनों छेद में चूदने से आह्ह आह्ह अम्म आह्ह आह्ह अम्म की लगातार आहें भरने लगी।
हम दोनों अब सोफे पर लेटे थे , मैं आगे और वो मेरे पीछे था। मेरी टाँगे सैंड्रा की तरफ थी, मैंने अपनी टांग ऊपर कर मोड़ पकड़ ली ताकि सैंड्रा को अच्छे से दिखा जला पाऊ।
जैक ने मेरी गांड पकड़ दरार को चौड़ा किया और मुझे तेज तेज चोदना शुरू किया। मैं अब बेतहाशा आह्ह आह्ह आह्ह आह्ह उम्म करने लगी। मुझे खुद इतना मजा आ रहा था कि मुझसे अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था।
जैक अब सोफे पर सीधा बैठ गया और मुझे उसकी गोद में आने को कहा। मैं उसकी गोद में चढ़ कर उसके लंड पर बैठ गयी। मेरी पीठ उसकी तरफ थी और मैंने अपने पाँव मोड़ पीछे कर लिए थे। मेरे हाथ पीछे उसके सीने पर थे। नीचे से जैक ने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। मेरी चूत पूरी खुल चुकी थी उसका लंबा सा लंड मेरे काफी अंदर तक जा रहा था।
जैक ने अब मुझे मेरी मम्मो के साइड से कमर के बीच पकड़ लिया था और मुझे ऊपर नीचे कर रहा था। मैं भी ऊपर नीचे जोर लगा कर चूद रही थी।
थोड़ी देर में मैंने ऊपर नीचे होना बंद कर दिया तो जैक ने नीचे से धक्के मारना शुरू। उसके झटके नीचे से भी काफी जोर से पड़ रहे थे और मेरी चूत को छलनी कर रहे थे। मेरी हालत अब ख़राब होने लगी।
मैं अब चीखते हुए आहें भर रही थी आआआआआह आआआआआह। जैक ने मेरे बालो को चोटी की तरह पकड़ खिंच मेरा मुँह ऊपर छत की तरफ कर दिया और जोर जोर से झटके मारता रहा। मैं अपना मुँह खोले ऊपर छत की तरफ देखते हुए आहें भर रही थी। सीईई ओह्हो ओह्हो ओह्हो करते हुए अपना पानी छोड़ने लगी।
उधर जैक भी सिसकिया भर रहा था और जिस तरह से तेज धक्के मारता हुआ अचानक गहरे धीमे धक्के मार रहा था वो भी अपना पानी मेरी चूत में निकाल रहा था। थोड़ी देर बाद हम दो प्रेमी एक दूसरे के प्यार से सरोबार हो झड़ चुके थे ।
मैं उसके ऊपर से हटी और देखा उसका गोरा लंड सफ़ेद गाढ़े पानी से भरा हुआ था। सैंड्रा अभी भी ताके जा रही थी। मैं नीचे बैठी और उसकी तरफ नजरे कर मैंने जैक का लंड चूस कर साफ कर दिया।
मुझे वो गन्दगी चूसना अच्छा तो नहीं लगा पर उसको ये दिखाना मुझे जरुरी लगा कि अब जैक पूरा मेरा हो चूका हैं। मैंने अपने होंठ हाथों से पोंछते हुए सैंड्रा को घुरा। फिर जैक का हाथ पकड़ उसको वाशरूम में ले गयी। उसके साथ नहा ली और जब पंद्रह मिनट के बाद वापिस आयी तो सैंड्रा तैयार हो कर जा जाने वाली थी।
मुझे आज वैसे भी ऑफिस नहीं जाना था तो मैं शाम तक जैक के साथ घूमती रही। शाम होने से पहले मैं फिर उसके गेस्ट हाउस आ गयी और सैंड्रा का इंतजार करने लगी। शाम को मैं जैक का मूड फिर बनाने लगी और हम दोनों पुरे नंगे हो गए। जैसे ही सैंड्रा की कार बाहर आने की आवाज आयी मैं जैक को लेकर उसके बेडरूम में आयी और दुसरी बार चूदाई की तैयारी कर ली।
सैंड्रा के कमरे में आने तक मैं जैक पर चढ़ कर उसकी मस्त चुदाई कर रही थी। मैं जैक को तृप्त कर देना चाहती थी ताकि उसे रात को सैंड्रा की जरुरत ना पड़े। मैंने उससे दोपहर में ही वादा ले लिया कि वो अब से सैंड्रा को नहीं चोदेगा।
जैक एक भारतीय खूबसूरत औरत को चोद कर बहुत खुश था । मैं पहली बार एक गौरे लंड का स्वाद चख कर और सैंड्रा को जला कर खुश थी।
हालांकि होम करते मेरे हाथ भी जले थे। सैंड्रा को जलाने चक्कर में मैंने अपनी इज्जत जैक के हवाले कर दी। पर मैं वैसे भी उसको सब दे देती, उसको देखते ही मुझे प्यार हो गया था।
असल में वो जैक ही था जिसने मेरा साल भर का व्रत तोड़ने को मजबूर कर दिया था। और एक गलती के बाद मैं एक से बढ़ एक गलती करती गयी।
मैं: “मेरे पास जोसफ और सैंड्रा का सेक्स वीडियो हैं। मुझे नहीं पता तुम्हारे पापा को पता हैं या नहीं इस बारे में, पर सैंड्रा की पोल खोलना जरुरी हैं। ”
जैक: “जोसफ अच्छा इंसान हैं, वो इसमें फंस जाएगा”
मैं: “उसको भी सैंड्रा से आजादी मिलेगी। वो अभी सिर्फ सैंड्रा का गुलाम बना हुआ हैं। वैसे भी मुझे नहीं लगता बॉब कभी जोसफ को छोड़ेगा ”
मैंने उसको वो वीडियो भेज दिया।
अगले दिन मैं ऑफिस पहुंची। जब राहुल अपने केबिन में गया तो एक नजर मेरी सीट पर डाली और अंदर चला गया।
शायद उसे राहत मिली होगी मुझे ऑफिस में देख कर। सिर्फ एक बार मैं काम से अंदर गयी थी और उसको मैंने साफ़ बोल दिया था कि मेरे ऑफिस आने का मतलब ये नहीं कि मैंने उसे माफ़ कर दिया।
अब हमारे बीच सिर्फ व्यावसायिक संबंध ही रहेंगे। प्रमोशन के बाद मेरा काम का बोझ बढ़ गया हैं और अब उसे अपने लिए दूसरी सेक्रटरी ढूंढनी होगी।
उसकी पुरे दिन हिम्मत नहीं हुई मुझे अपने केबिन में बुलाने की; सिर्फ मेल और मैसेज ही मिल रहे थे।
कल जैक वापिस जाने वाला था और मैं उससे आखिरी बार मिलने गेस्ट हाउस पहुंची। और सैंड्रा की आँखों के सामने एक दूसरे को चूमा । सैंड्रा के चेहरे पर खीझ देख कर मुझे बहुत सुकून मिला । उससे विदा लेने से पहले हम दोनों एक दूजे से गले मिल बहुत रोये।
अगले दिन शाम को जोसफ का एक वीडियो मैसेज मिला, जिसको पढ़कर मैं भावुक हो गयी। उसका हिंदी अनुवाद भी नहीं करुँगी। कुछ चीजे ओरिजिनल ही अच्छी होती हैं।
Joseph: “Hi Pratima, I don’t know how to tell this. First I want to apologise, in our first meeting I made an awkward comment. That’s how I have been brought up and think towards girls. But when I observed you I realised what a woman should be.
You changed me. I never said this to any woman but I am telling you that I love you. I don’t know what you think about me but I can never forget you.
Whatever happened between us in guest house that day was forced one, but I will never forget that experience. That was the best love I ever made. Till the time you’ll receive this message I’ll be gone from your life forever.
I have your number and will keep looking at your profile picture and status messages you will change. I can’t call you or I don’t have courage to face you, because I will cry like a baby like am doing right now. If I cry like baby, then it won’t look good with this heavy body. Some love stories are tend to be short lived, mine is same.
Take care, Love You. Joseph”
*** (इस मेसेज का हिन्दी अनुवाद!) ***
जोसफ: हेल्लो प्रतिमा, मुझे नहीं पता मैं ये कैसे कहूँ। पहले तो मैं हमारी पहली मुलाकात के दोरान मेरे द्वारा तुम्हारे बारे में कही बातो के लिए माफ़ी चाहता हूँ। शायद औरतों के बारे में मेरी सोच ऐसी ही रही है। पर जब मैंने तुम्हे समझा तो जाना की सभी औरतें तुम्हारी तरह की ही होनी चाहिए!
सच में तुमने मुझे बदल दिया, मैंने आज तक ये किसी भी औरत से नहीं कहा पर तुमसे कह रहा हूँ की आई लव यू। मुझे नहीं पता तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो, पर मैं तुम्हे कभी भी नहीं भूल पाउँगा।
उस दिन गेस्ट हाउस में हमारे बिच जो कुछ भी हुआ वो जबरदस्ती था, पर मैं उड़ दिन के अनुभव को कभी नही भूलूंगा। क्योकि वो मेरी जिदगी का सबसे बेहतर अनुभव था। जिस समय तम्हे ये मेसेज मिलेगा तब तक मैं तुम्हारी जिंदगी से बहुत दूर जा चूका होऊंगा।
मेरे पास तुम्हारा नंबर है, मैं हमेश तुम्हारी प्रोफाइल पिक और स्टेट्स देखता रहूँगा। मैं तुम्हे फ़ोन नहीं करूँगा, क्योकि मुझमे तुमसे बात करने और तुम्हारा सामना करने की हिम्मत नहीं है। क्योकि मुझे पता है मैं एक छोटे बच्चे की तरह रो पडूंगा जैसे की मैं अब रो रहा हूँ। अगर मैं रोऊंगा तो मेरे इस बड़े शरीर पर वो बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा। कुछ प्यार की कहानियां यु ही छोटी होती है, जैसे की मेरी है!
अपना ख्याल रखना, लव यू! जोसफ!
***
मैंने उसको तुरंत जोसफ को फ़ोन करना चाहा पर नंबर स्विच ऑफ था और वो हमेशा के लिए मेरी ज़िन्दगी से चला गया था। उसको कुछ भी कहना होता हैं तो अपना स्टेटस मैसेज बदल लेती हूँ। मुझे पता हैं वो पढ़ रहा होगा पर मैं उसकी सुन नहीं सकती।
ऑफिस में राहुल को मैंने कई बार मुझे ताड़ते हुए पकड़ा हैं। हर बाहरी मीटिंग में वो मुझे जानबूझ कर शामिल करता हैं ताकि मेरे साथ कार में कुछ समय साथ बैठ पाए। शायद इस आस में कि किसी दिन मैं मान जाऊ। उसकी आँखों में वो तड़प हैं मुझे पाने की।
मैंने सोचा शायद एक दिन मैं उसे मौका दे दू, जब मेरे पति अशोक की तरफ से मेरे लिए सब दरवाजे बंद हो जायेगे।
