रंडी खाना 2

बहन

रात की तैयारी हो चुकी थी ,हाल किसी पब की तरह लग रहा था,जंहा हल्की हल्की ही रोशनी थी ,आज यंहा हवस का नंगा नाच होने वाला था,मैंने सभी मजदूरों और करगिरो को वँहा से भेज दिया था,खाना और शराब लडकिया ही सर्व करने वाली थी ,,,सब कुछ जमा दिया गया था और मैं अपने काम से संतुष्ट था,जैसा शबनम ने मुझे सजाने को कहा था सभी कुछ वैसा ही था,शाम होते ही शबनम भी आ चुकी थी और सभी लडकिया भी ,….
“हम्म गुड वर्क देव इसीलिए रश्मि तुम्हे इतना पसंद करती है ,तुम सच में एक अच्छे मैनेजर हो “
शबनम ने सब अरेंजमेंट को देखते हुए कहा “
“थैक्स यार लेकिन साला सब बहुत ही थकाने वाला था “
मैं सचमे बहुत ही थक गया था..
“तो तुम एक पैक मारो और ऊपर के कमरे में आराम करो जब नींद खुले तो नीचे आ जाना…बची हुई थकान यंहा मेरी लडकिया मिटा देंगी “
शबनम की अदा पर तो मैं मरता था साली सच में कातिल थी……मैं दो पैक पीकर ऊपर के कमरे में आराम करने चला गया ,…….
जब नींद खुली तो 9 बज चुके थे ,मैं हड़बड़ाया..साला सभी मेहमान आ गए होंगे,मैं उठा ही था की मेरी नजर सामने रखे सोफे पर पड़ी ,एक जोड़ी कपड़े ,जिसमे शर्त पेंट ,टाई और एक कोट था ,और साथ ही एक लेटर वहां पर मुझे मिला …
‘ये ड्रेश कोड है मेहमानों का इसे पहन कर नीचे आना’ये शायद शबनम ही होगी’
मैं उन कपड़ो को पहन कर नीचे गया,माध्यम रोशनी में मध्यम आवाज में गाना चल रहा था,सभी लडकिया सिर्फ ब्रा और पेंटी में ही हाथो में जाम लिए घूम रही थी ,वो फार्महाउस का कमरा किसी सेक्स क्लब की तरह लग रहा था,अजीबोगरीब लोग मेरी ही तरह ड्रेश में वँहा बैठे हुए थे,जिनमे से अधिकतर की उम्र 50 के ऊपर की थी ,मुझे उनके सामने जाने में शर्म आ रही थी ,कुछ लडकिया कस्टमर के जांघो में बैठी थी ,और वो लोग उनको हल्के हल्के मसलते हुए अपने जाम का मजा ले रहे थे,एक लड़की बाकायदा कमरे के बीचो बीच पोल डांस कर रही थी जिसे चारो ओर से लोग घेरे हुए मजा ले रहे थे,कोई कुर्सी में बैठा था तो कोई खड़ा हुआ था लेकिन सभी टुन्न थे,मैं बड़ा ही नर्वस सा महसूस कर रहा था,मेरी नजर शबनम पर पड़ी,वो कमरे में एक मात्र लड़की थी जो की पूरे कपड़ो में थी,उसने एक काले रंग का लांग गाउन पहना हुआ था ..वो मुझे देखकर मुस्कुराई और मुझे नीचे आने का इशारा किया,मैं चुपचाप ही उसके बाजू में जाकर खड़ा हो गया ,ऐसे भी किसी का भी ध्यान मेरी ओर नही था,तभी वो पोल डांस खत्म हुआ और सभी तालिया बजाने लगे…एक लड़की आयी और माइक में बोलने लगी …
“आपके सामने पेश हमारे खास मेहमानों के लिए डिज़ाइन किया गया बेले डांस “
सभी फिर के तालिया बजाने लगे,एक लड़की स्टेज में आ गई उसने भी बस अपने ब्रा और पेंटी ही पहने थे ,लेकिन कमर में बड़ी सी करधन लटक रही थी ,वो म्यूज़िक के साथ धीरे धीरे अपनी कमर मटकानी शुरू कर देती है,उसके सेक्सी नितम्भ झूलने लगते है और म्यूज़िक के साथ साथ थिरकने लगते है…….
“ये सब तुम्हारा आईडिया था ,कहा से पकड़ कर लायी हो इनको,सच में अरब की लग रही है “
मैंने शबनम के कानो में कहा जो की मेरे बाजू में ही खड़ी थी ,वो मुझे देखकर मुस्कुराई ..
“अब ये मत कहना की ये तुम्हे चाहिए “
वो हल्के से हँसने लगी ,
“नही मेरे लिए तो तुम ही काफी हो “
मैंने शरारत भरे लहजे में कहा और उसने भी शरारत में मुझे कोहनी मार दिया ..
वो दूध जैसे गोरी ,लंबी सी लड़की ,अपने बड़े बड़े चूतड़ों को बड़ी ही खूबसूरती से हिला रही थी ,उसकी ये अदा देखकर वँहा बैठे लोग बड़ी ही हवस की निगाह से उसे घूर रहे थे,वही जिनके गोद में लडकिया बैठी थी वो कभी उनकी जांघो को मसलते हो कभी उनके सीने को ,तो कभी उनके जांघो के बीच हाथो को ले जाते…
“अब समय आ गया है “
शबनम की बात से मेरा ध्यान उसपर गया..
“किसका “
“ये बुड्ढे ऐसे तो कुछ नही कर पाएंगे ,इनके ड्रिंक्स में अब वायग्रा की गोली मिला देते है..”
मैंने शबनम को आश्चर्य से देखा
“पागल हो गई हो क्या ,इनकी उम्र देखो अगर किसी को हार्टअटैक आ गया तो हम फंस जायेगे “
शबनम मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ..
“10 रुपये वाला मैनफोर्स का टेबलेट नही खिला रही हु इन्हें जो इनके दिल की धड़कने बढ़ जाएगी..फिक्र मत करो अच्छे क़्वालिटी की वायग्रा मंगवाई है इन ठरीकियो के लिए,ये हमे लाखो रुपये देते है तो इनकी सेवा भी अच्छी होनी चाहिए ना,क्या मतलब होगा अगर ये कुछ कर ही नही पाए..और हम इन्हें बता कर देंगे ये “
शबनम ने एक लड़की को इशारा किया और उसे अपने पर्श से निकाल कर कुछ टेबलेट्स दे दिए …
“ये कोई ड्रग्स तो नही है ना “मुझे अब भी चिंता हो रही थी
“नही ये उनके हार्टबीट को कंट्रोल में रखेगा,और स्टेमिना को बड़ा देगा ,कम से कम एक जवान लड़के जितना तो इन्जॉय कर ले ये बुड्ढे “
वो हँसने लगी
“ओह तब तो मुझे भी ले लेना चाहिए “
मैं मुस्कुराया
“अरे यार तुम तो बिना इसके भी इतने देर चल जाते होई तुम्हे क्या जरूरत है इसकी “वो बड़े ही मादक निगाहों से मुझे देख कर मुस्कुराई….
लड़की ने सभी के पास जाकर वो गोलिया उनके ड्रिंक्स में डाल दिए ,थोड़ी देर में ही गोलियो अपना असर दिखाना शुरू कर दिया …
लोग उत्तेजना से लाल हो रहे थे,जो बैठे थे वो भी खड़े हो गए थे और उस लड़की के साथ ही नाचने लगे थे,शराब,शबाब और गोली तीन तीन नशो ने सबको पागल सा बना दिया था,एक सेठ जी ने अपने जेब में हाथ डाला और नोटो की गद्दी निकालकर उस लड़की की ऊपर डालने लगा ,अब लड़की अपने कमर को और भी जोरो से मटकाने लगी,और पिछवाड़े को उस सेठ के मुह में ही ठिका दिया,वो सेठ भी अपनी जीभ से उसके बड़े पिछवाड़े के छेद को चाट रहा था,हवस का नंगा नाच शुरू हो गया था,लोग लड़कियों को जोरो इस मसलने लगे थे,अधिकतर लोग तो बीच में नाच रही लड़की को ही घेरे हुए थे,तभी म्यूजिक चेंज हुआ और डांस सांग्स लगा दिया गया ,सभी मस्त थे कोई दारू उछाल रहा था तो कोई नोट,पूरे कमरे में नोटो की बारिश होने लगी थी,सभी यंहा पर मुफ्त का मजा लेने आये थे लेकिन बिना कोई पैसा लिए भी उनके जेब से पैसे निकाल लिया गया था,मैं मन ही मन में शबनम की तारीफ करने से नही बच पाया,उसने एक लड़की को इशारा किया और वो जाकर नोटो को एक बाल्टी में डालने लगी,क्योकि लोगो के पैरो के नीचे आकर वो खराब हो रहे थे ,साथ ही दारू भी छलकाए जा रहे थे,जिससे नोट खराब होने लगे थे,
एक सज्जन ठरकी ने एक बड़ी ही नवजवान कमसिन सी लड़की को पकड़ रखा था अब वो उसे ही शराब से नहलाने लगे थे,और शराब उसके जिस्म से चाटते …वो लड़की भी उनके साथ दे रही थी ,
शबनम मेरे दाहिने ओर खड़ी थी ,हम दोनो ही बहुत पास पास खड़े थे,किसी को भी हमारे ऊपर ध्यान ही नही था,सब खुद में ही इतने मस्त थे ,कही 4-4 लोग एक ही लड़की के जिस्म से खेल रहे थे तो किसी लड़की के पास कोई प्रेमी ही नही था ,वो नोटों को समेट रही थी तो कोई दारू लाकर उन्हें दे रही थी ,रंग चढ़ने लगा था ,लेकिन पार्टी तो अभी शुरू ही हुई थी ..
इन सब को देखकर मेरा भी लिंग जोर मारने लगा,और मेरा हाथ शबनम की मांसल पिछवाड़े में जा टिका…..वो मुझे देखकर मुस्कुराई और थोड़ी सी मेरी ओर खिसक गई ,अब हम दोनो एक दूसरे से बिल्कुल ही सटे हुए थे ,और मेरा हाथ उसके पिछवाड़े को दबा रहा था..उसने अपना सर भी मेरे कंधे पर रख दिया ..
हमारे कुछ ही दूर पर उस बेले डांसर को उन लोगो ने नंगा ही कर दिया था ,वो जमीन में लेटी हुई थी और 5-6 लोग उसे घेरे हुए थे,कोई उसके
ऊपर शराब डाल रहा था तो कोई पैसे ,कोई उसके शरीर से शराब को अपनी जीभ से चाट रहा था तो कोई अपने ग्लास से उसे शराब पिला रहा था,और उसके होठो से खुद पी रहा था,कोई उसके जांघो के बीच अपना मुह लगाए हुए थे तो किसी का हाथ और जीभ उसके बड़े बड़े वक्षो में फिर रहे थे…वो भी मतवाली हो गई थी ,इतने मर्दो का हाथ और शराब का नशा उसके अंदर भी मजा भर रहा था ,वो मचल रही थी लेकिन बड़े ही आहिस्ता आहिस्ता,
मैं उसे देखकर और भी उत्तेजित हो गया था,मेरा लिंग अपने पूरे तनाव में आ चुका था,
“सोचो अगर इस लड़की की जगह काजल होती तो “
शबनम ने मेरे कानो के पास आकर बड़े ही मादक ढंग से कहा ,काजल का नाम सुनकर ही मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा ,तभी एक लड़की जाम का प्याला एक ट्रे में लिए हमारे पास पहुची थी शायद इसे शबनम ने ही बुलाया था,मैं लगातार ही 4 पैक निगल गया,क्योकि मैं उस लड़की में काजल को देख रहा था..
मेरे दिल की धड़कने बड़ी हुई थी ,सांसे तेज थी और मैं जलन के साथ साथ उत्तेजना की तीव्र अनुभूति कर रहा था,और शबनम के पिछवाड़े को अपनी पूरी ताकत से मसल रहा था जिसके कारण वो भी जल्दी जल्दी सांसे ले रही थी ,गर्म तो वो भी हो चुकी थी ,मैंने उसे अपने हाथो से पकड़ कर अपने से और भी सटा लिया और उसके होठो में अपने होठो को दाल कर चूसने लगा..वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी ,
“देखो देव तुम्हारी बीबी को लोग कैसे मसल रहे है”
शबनम की आवाज बहुत ही धीरे हो गई थी और वो सिसकिया ले रही थी ,उसके आवाज में ही इतनी मादकता था की किसी का झड़ जाए ,मैंने उस लड़की को देखा लोग उसे मसलने में लगे हुए थे,उसका पूरा शरीर गीला होकर चमक रहा था,वो गीलापन या तो शराब की थी या लोगो के थूक की ,,लोग उसपर चढ़ने की कोसीसे कर रहे थे लेकिन एक लड़की के उनपर 5 लोग एक साथ तो नही चढ़ सकते ना ..सभी लोग धीरे धीरे अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिए थे ,एक आदमी अपने पेंट से ही अपना लिंग निकाल कर उसके मुह पर ठिका दिया था जिसे वो जीभ से ही चाट रही थी ,
“देखो देव तुम्हारी बीवी कैसे उसका लंड चाट रही है ,थोड़ी देर में वो उसके मुह के अंदर होगा ..”
शबनम की इस बात से मेरे सामने काजल का चहरा उभर गया..
“ये भी शादी शुदा ही है तुम्हारी काजल की तरह देखो उसके माथे के बीच में हल्का सा लालपन दिख जाएगा जो उसके सिंदूर के कारण है,जिसे उसने अभी अभी धोया था,तुम्हारी काजल भी ऐसे ही सिंदूर को धोकर चुसेगी “
उसकी बात से मेरे अंदर जलन और उत्तेजना की चोट बड़े ही जोरो से पड़ी और मैं उसे और भी पागलो की तरह चूमने लगा ,मेरे दांत उसके होठो में गाड़ने लगे थे और उनसे खून भी आने लगा था,लेकिन उसे इन बातो से कोई फर्क नही पड़ रहा था क्योकि वो भी अत्यधिक उत्तेजना में थी ..

फिर से मेरी नजर उस लड़की की ओर गई ,उस शख्स का लिंग अब उसके मुह में था और वो उसे पूरे जोश में चूस रही थी वही उसके योनि में एक लिंग उसके अंदर घुसकर सवारी करने लगा था बाकी के लोग भी नंगे हो चुके थे और उसके जिस्म से खेल रहे थे……अब पूरे कमरे में सिर्फ हम दोनो के ही जिस्म में कपड़ा बचा हुआ था …मैने हाथो को पीछे ले जाकर शबनम के गाउन का चैन खोल दिया और उसके गाउन को उसके कंधों से नीचे तक सरका दिया उसकी तनी हुई ब्रा मेरे सामने आ गई थी जिसमे से उसके मादक भरे हुए चुचे झांकने लगे थे,मैं आने हाथो से उसे दबाने लगा,शबनम भी मेरे सर को पकड़े हुए अपने होठो में घुसा रही थी ,हम दोनो या तो एक दूसरे के होठो को चूस रहे थे या फिर एक दूसरे के चहरे को गीला कर रहे थे,आग बढ़ने लगी थी ,हमारे अंदर भी और कमरे में मौजूद लोगो के अंदर भी ,लोग जिसे मन करे उसे पकड़ कर अपना लिंग उनके मुह में या योनि में डाल रहे थे,,एक दो लोगो ने तो लड़कियों के पिछवाड़े में भी लिंग घुसा रखा था,,फिर भी कुछ लडकिया ऐसी थी जो अब भी खाली थी और अपने बारी का इंतजार कर रही थी,दो बाल्टियों में पैसे बटोरे जा चुके थे,और सभी ओर बस हवस ही हवस दिखाई दे रही थी ,लड़कियों की चीखने की आवाज से लेकर हल्की हल्की सिसकियों तक ,और मर्दो के गरजने से लेकर फच फच की आवाजो से पूरा कमरा गूंजने लगा था,
मैं भी अपने पूरे शबाब में था एक तरफ काजल का चहरा मेरे दिमाग में घूम रहा था तो दूसरी तरफ शबनम का कोमल जिस्म मेरे हाथो में था,
शबनम भी मेरे कपड़ो को उतारने लगी थी ,और मैंने उसके गाउन को निकाल कर ही फेक दिया ,शबनम ने मुझे रोका और एक लड़की को इशारा किया ,दो लडकिया पास में सटे हुए कमरे में जाकर गड्ढे निकालने लगी,यंहा तो सभी लोग फर्श में ही शुरू हो गए थे,लेकिन इससे किसी को चोट भी आ सकती थी वो गड्ढे लगाने लगी,मैं फिर से शबनम को पकड़ने को हुआ लेकिन उसे मुझे झडक दिया ..
“पहले गड्ढे लगा देते है,”मेरा दिमाग तो खराब हुआ लेकिन मैं जल्दी से उस कमरे की ओर भगा ,लोग अपने काम क्रिया में व्यस्त थे हम उन्हें बिना डिस्टर्ब किये ही गड्ढे लगा देते और वो फिर उसने आ जाते,10 मिनट में ही सभी मोटे मोटे गद्दों के ऊपर थे सभी गड्ढे एक दूसरे से जुड़कर एक बड़ा सा एरिया तैयार कर दिया था,जंहा जो चाहे वो जिसे चाहे उसके ऊपर चढ़ रहा हटा,मैं भी शबनम को उस गड्ढे में पटक दिया ,हम और उसे चूमने लगा,गड्ढे निकालने वाली 2 लड़कियों ने भी हमे जॉइन कर लिया था,शायद उनसे भी सहन नही हो रहा था,एक मेरे लेट गई और मेरे पीठ को चूमने लगी , दूसरी मेरे बाजू में आ गई थी ..
शबनम मेरे नीचे थी और एक लड़की मेरे ऊपर ये मेरे लिए किसी जन्नत से कम नही था,मैंने जल्दी से ही शबनम के बाकी के कपड़े खोल दिए जबकि लडकिया मेरे कपड़े खोलने में लगी हुई थी ,अब हम दोनो भी नंगे थे …….
पूरे कमरे में किसी के भी जिस्म में कोई कपड़ा नही बचा था,आज मुझे समझ आया था की इसका महत्व क्या है,इसका महत्व था की हम सभी बिल्कुल ही आजाद महसूस कर रहे थे,और सेक्स से भरे हुए हमारे अंदर किसी भी सही गलत की भावना का जन्म नही हो रहा था,हम बस डूबने को आतुर थे,सभी के सभी ……
अब यंहा कोई कस्टमर या कोई काल गर्ल नही रह गई थी ,रह गए थे तो जिस्म ,,,महिला और पुरुषो के जिस्म जो की एक दूसरे में डूब जाने को आतुर थे…
सभी इडेन्टिफिकिशन खत्म हो चुके थे,सभी की आंखे भारी थी और बिना कुछ सोचे समझे बस जो मिला उसे फील कर रहे थे ,एक आदमी ने शबनम को अपनी ओर खिंच लिया और मैं धीरे से मेरे बाजू में सोई हुई लड़की के ऊपर चला गया ,मेरा लिंग शबनम के योनि में धसा लेकिन उसके चहरे के पास किसी दूसरे मर्द का चहरा था,वो उसके होठो में अपने होठो को भरे हुए सिसक रही थी जबकि मैं बाजू में सोई हुई लड़की के ऊपर चढ़ा हुआ उसके होठो को चूम रहा था ,मैं शबनम के ऊपर तिरछा हो गया था,मेरे पैर कही और थे और मेरी कमर बस शबनम के ऊपर थी मैं उसे जोरो से धक्के मार रहा था जबकि मेरा पूरा धड़ उस लड़की के ऊपर था……
थोड़ी देर में ही हम खिसकते हुए एक दूसरे से चिपकने लगे थे,सभी मर्द और लडकिया एक दूसरे में गुथे जा रहे थे,ना जाने मेरे ऊपर कौन था ना जाने मेरे नीचे कौन था,ना जाने मेरा लिंग किसके योनि में या मुह में जा रहा था,ना जाने मेरा मुह किसके मुह और योनि में जा रहा था,समझ कुछ भी नही आ रहा था,पूरे 20 कस्टमर ,15 लडकिया ,मैं और शबनम सभी एक साथ हो चुके थे और एक दूसरे के ऊपर थे ,मुह जंहा जाने लगता चाटने लगते और लिंग जंहा घुस जाता हिलाने लगते,वही हाल सबका था वही हाल मेरा था,वही हाल लड़कियों का भी था…………
ये खेल कब तक चला मुझे पता नही लेकिन आखिरी हालत बेहोशी ही थी ……..

जब मेरी आंखे खुली तो कुछ आवाजे मुझे सुनाई दे रही थी ,किसी की सिसकियों की ,मैं उठा कुछ लोग उठ चुके थे और अपना नया कारनामा शुरू कर दिया था,कुछ लोग अभी भी बेसुध ही पड़े थे,,,
आज एक लड़की ने मुझे बहुत आकर्षित किया था वो थी पोलो डांस करने वाली लड़की,मैंने देखा की उसने सिर्फ मुझे ही नही बाकियों को भी आकर्षित किया था,क्योकि अभी भी कुछ लोग उसे कुतिया बनाये हुए उसके पीछे से उसे पेल रहे थे और एक शख्स उसके मुह में पेले जा रहा था,बाकी लोग अपनी बारी के इंतजार में थे……मुझे फिर के काजल की याद आ गई ,अगर वो यंहा होती तो शायद सभी लोग उसके पीछे ही दीवाने हो जाते,उन सभी लोगो में मैंने एक को पहचान लिया ,ये गुलाबचंद था,हमारा पहला कस्टमर..उसकी भी नजर मुझसे मिली वो अभी उसके मुख का चोदन कर रहा था…उसने एक बड़ी सी मुस्कान मुझे दी ,मैं भी बदले में मुस्कुराया..
शबनम कही दिखाई नही दे रही थी ,मैं फ्रेश होने के लिए एक पैक लगा कर ऊपर वाले कमरे में आ गया,,,बिस्तर में शबनम पसरी हुई थी और उसने कपड़े भी पहने हुए थे,घड़ी देखा तो अभी 2 ही बजे थे मतलब की ये रात भर चलने वाला था,मैं उसके ही बाजू में आकर सो गया,लेकिन नीद ना जाने कहा जा चुकी थी मेरे दिमाग में बस उस औरत की तस्वीर ही घूमे जा रही थी,मैं बेचैन होकर फिर से नीचे चला गया,अभी तक लोग थककर उसे छोड़ चुके थे ,वो मुझे देखते ही मेरे पास आ गई ,
“विकास जी ये लोग फिर के उठ गए तो फिर के मेरे पीछे लग जाएंगे,प्लीज् किसी सेफ जगह पर ले जाइये ,मैं बहुत ही थक चुकी हु”
पहले तो मैं उसके मुह से अपना नाम सुनकर ही दंग रह गया,फिर मुझे याद आया की मैं होटल का मैनेजर हु,और ये पार्टी मैंने ही ऑर्गेनाइज की है,उसे मेरा नाम पता हो तो कोई भी आश्चर्य की बात नही थी,मैंने उसे अपने साथ चलने को कहा,मैं अब अपने पुराने ड्रेश में था और वो पूरी तरह के निर्वस्त्र…
उसने एक सिगरेट का पैकेट उठाया और मेरे साथ ही ऐसे ही चल पड़ी,उसका चहरा बता रहा था की वो बहुत ही थकी हुई है,मैन एक विस्की की बोलत भी अपने साथ रख ली…मैं इस फार्महाउस में कई बार आ चुका था और यंहा के बारे में सब पता था,मैं उसे सबकी नजर से बचाकर ऊपर ले गया,लेकिन उस कमरे में नही जंहा शबनम सोई हुई थी..ये कमरा अधिकतर कपूर साहब अपने खास गेस्ट के लिए यूज़ करते थे,कमरा शानदार था,मैंने उसे बैठा कर उसके लिए एक टेबल लाया ,वो मुझे आश्चर्य से देखने लगी जैसे पूछ रही हो की इसका मैं क्या करू…मैंने उसे याद दिलाया की उसने कोई भी कपड़ा नही पहना हुआ है…वो मुस्कुराने लगी ..
“अब किससे क्या छुपाऊ “वो खिलखिलाकर हँसी मैं भी मुस्कुरा दिया लेकिन उसने मेरा मान रखने के लिए ही सही उसे लपेट लिया था,मैं उसके लिए और अपने लिए ड्रिंक्स बनाकर ले आया ,
“तुम्हे पहले होटल में नही देखा है,,,”
“हा ये काम मैं पार्ट टाइम में करती हु,कभी कभी जब पैसे की जरूरत हो ,या मस्ती का मूड बन जाए “उसने थोड़े मादक अंदाज में कहा ..
“ओह तो आज इनमें से क्या था”मैं भी उससे खुलना चाहता था क्योकि पसंद तो वो मुझे भी बहुत ही आयी थी..
“ह्म्म्म दोनो ही ..असल में जब शबनम ने मुझे प्लान के बारे में बताया था तो मुझे लगा की अच्छे पैसे भी मिल जाएंगे और मजा भी आएगा,लेकिन मुझे क्या पता था की सभी लोग मुझपर ही टूट पड़ेंगे “
वो फिर से खिलखिलाने लगी…किसी प्रोफेशनल प्रॉस्टिट्यूट के साथ ये मेरा पहला मौका था,ऐसे शबनम और काजल भी ये किया करते थे लेकिन वो बहुत ही अलग थे ,
“ऐसे आपका नाम मैं नही पूछ पाया “मैंने हल्के से कहा
“मोहनी “वो धीरे से बोली और मुस्कुराई
“ओह सच में अपने सबका दिल ही मोह लिया था,और ऐसे आप काम क्या करती है,फूल टाइम “
उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा,
“लगता है मैं आपको बहुत ही पसंद आ गई ,”वो खिलखिलाई जिससे मैं थोड़ा सा झेप गया जैसे किसी ने मेरी चोरी ही पकड़ ली हो ….
“मेरे फूल टाइम काम के बारे में ना ही जाने तो बेहतर है ..शायद आप यकीन ना करे “
“आप बताइये तो सही “
मैंने थोड़ा फोर्स किया
“अब रहने भी दीजिये ,मैं बहुत थक गई हु ,एक पैक और मिलेगा मुझे सोना है “
“क्यो नही “
मैंने हम दोनो के लिए नया पैक बनाया और पीकर वँहा से निकल गया ,मैं फिर से शबनम वाले कमरे में आकर सो गया ,इस बार शराब ने थोड़ा असर दिखाया और मेरी नींद लग गई …….
“भइया आप बहुत ही गंदे हो कोई काम समय पर नही करते “
मेरे घर आते ही पूर्वी मुझपर भड़क उठी,
“क्या हुआ मेरी जान “
अभी शाम होने को आया था और मेरी नींद दोपहर में खुली जब तक की सभी मेहमान और लडकिया जा चुकी थी ,शबनम भी मेरे लिए एक लेटर छोड़कर जा चुकी थी जिसमे लिखा था की होटल मत आना,यंहा की साफ सफाई करवा कर घर चले जाना ,मैं बाकी के समय साफ सफाई करवाने में ही निकाल दिया था ,पूरे हाथ पैरो में हैंगओवर वाला दर्द भरा हुआ था ,लेकिन जैसे तैसे मैं सभी काम निपटा कर घर आया ,और पूर्वी मेरे ऊपर चिल्ला पड़ी ..
“क्या हुआ आज मेरे कालेज जाना था आपको और आप इस समय आ रहे हो “
वो मुझे घूरने लगी जैसे की मैंने बहुत बड़ा पाप कर दिया हो ..
मैं तो भूल ही गया था …
“ओह तो निशा के साथ चली जाती “
“भइया हमारे प्रोफेसर ने हमारे पेरेंट्स को बुलाया है ,प्रोफेसर सभी के पेरेंट्स से मिल रही है ..”
“ओके ओके कल चले जाएंगे “
“हमम कल तो जाना ही है और अगर आपका कोई काम निकल आया ना तो मैं बताऊंगी आपको “
पूर्वी ने मुझे धमकाते हुए कहा जिससे मुझे थोड़ी सी हँसी आ गई …….

जब मेरी आंखे खुली तो मैंने चारो ओर अंधेरा पाया,ऐसा लग रहा था जैसे मैं घण्टो से बेहोश था,मैंने याद करने की कोशिस की मैं कहा हु ,मुझे याद आया मैं अपनी बहनों के साथ उनके कॉलेज गया हुआ था,मैं पूर्वी और निशि के प्रोफेसर्स से मिला और उनके बारे में उनसे बात की ,कॉलेज में ही मुझे मोहनी मिली,मोहनी वही फार्महाउस वाली बेले डांसर जिसपर मैं फिदा हो गया था,उसने बताया की उसके भाई के प्रोफेसर ने उसे मिलने बुलाया था,कैसा अजीब सा संयोग था की मैं भी अपनी बहनों के लिए यंहा आया था,हालांकि मुझे उसका भाई साथ दिखाई नही दिया,उसने कहा की वो क्लास में चला गया है,जैसे मेरी बहने अपनी क्लास में जा चुकी थी…….
या शायद वो मुझसे अपनी इडेन्टिटी छुपा रही थी ,उसका काम ही कुछ ऐसा था…….
मैंने उसे कही ड्राप करने की बात कही और वो मान भी गई ,मैं कार में बैठा था और मोहनी मेरे बाजू में ,वो कमाल की लग रही थी ,उसका खिला हुआ चहरा और कसाव लिए हुए उसका बदन…बड़ा ही मादक अंदाज था उसका लेकिन आज वो पूरी तरह से ढकी हुई एक संस्कारी महिला की तरह दिख रही थी,साड़ी से झांकता हुआ यौवन मुझे लुभा रहा था ,मांग में मोटा सा सिंदूर और गले में लटकता हुआ मंगलसूत्र उसके शादी शुदा होने की गवाही चीख चीख कर दे रहा था…..
मैं कार स्टार्ट ही करने वाला था की रश्मि का फोन आ गया,मैं नीचे उतारकर बात करने लगा,वो थोड़ी भड़की हुई थी ,मैं अभी तक होटल नही पहुचा था और 1 की बजाय 2 दिन से गायब था…..उसने मुझे जल्दी से होटल पहुचने को कहा…
हम कालेज का केम्पस क्रॉस करके सुनसान इलाके से गुजर रहे थे तभी किसी ने मुझे पीछे से जोरो से पकड़ लिया ,मैं थोड़ा छटपटाया भी था लेकिन उसने मेरे नाक को एक रुमाल से दबा दिया था……..
मैं अभी अभी होश में आया हुआ बिते हुए समय को याद कर रहा था,मैं उठने को हुआ तो मुझे पता चला की ना सिर्फ मेरी आंखों में पट्टी बांधी गई है बल्कि मेरे हाथ भी बंधे है,,मैं जमीन में बैठा हुआ था…कितने समय से ,,ये तो मुझे भी नही पता ………………..
मुझे किसी के फुसफुसाने की आवाज सुनाई दी ,कुछ जूतों की आहट..
अचानक ही मेरी आंखों में बंधा हुआ पर्दा खिंच लिया गया ,और अब कमरे में मद्धम रौशनी सी फैल गई …..
मैं कुछ समझ पता इससे पहले ही ,एक हट्टे कट्टे से इंसान ने मेरे पेट में एक लात मारा जिससे मैं कहर गया ..
“काजल कहा है “
उसकी रौबदार आवाज मेरे कानो में पड़ी ..
काजल??????मैं उसे रविवार की सुबह से नही देखा था,मैं अपने काम में (पार्टी में ) इतना व्यस्त हो गया था की मुझे याद भी नही रहा ,और फिर थकान ने कुछ सोचने का मौका नही दिया था….
“मुझे मुझे नही पता “मेरे पेट में लगे लात का दर्द अब भी बाकी था ..
“हम्म “उसने वँहा उपस्थित और लोगो को देखा,मैं उन्हें डरा हुआ देख रहा था ,वो साले सांडों की औलाद लग रहे थे,5 की संख्या में थे ,उनमे से एक शख्स मेरे पास आया और फिर से मुझे एक लात लगा दिए ..
“क्या प्लान कर रही है काजल “
वो मुझे घूरता हुआ बोला…
मैने अनजान बनने और आश्चर्य से भरे होने का नाटक किया ,
उसने एक जोरो का थप्पड़ मेरे गाल पर मारा
“मादरचोद बताता है की नही ,खान साहब को सब पता चल गया है की तू और काजल पति पत्नी हो ..अब चुपचाप बता दे की काजल क्या प्लान कर रही है खान साहब से उसकी दौलत हड़पने के लिए “
मैं आंखे फाडे उन्हें देखता रहा,शायद ये लोग मुझे चुतिया समझ रहे थे लेकिन ऐसा था नही ,अगर खान को पता चलता तो वो मुझे नही काजल को उठवाता ..
“मुझे कुछ भी नही पता आप लोग ये क्या बात कर रहे हो ,हा मैं मानता हु की हम शादी शुदा है लेकिन ..”फिर से थप्पड़ मेरे गालो पर पड़ा ..
“हमे चुतिया समझता है ..ऐसे नही मानेगा ये इसकी बहनों को ;लाओ,साले के सामने जब हम इसकी बहनों से सुहागरात मनाएंगे तो सब बकेगा अपने आप “
मैं पूरी तरह के कांप गया ,जिस्म में एक झुरझुरी सी दौड़ गई ,लगा मानो कोई हाई पवार का करेंट लग गया हो ..
“नही नही आप क्या जानना चाहते है ,मेरी बहनों को इसके बीच में मत लाइये प्लीज् …”
उनके चहरे में के विजयी मुस्कान फैल गई
“तो बताओ अजीम को अंदर किसने करवाया और काजल के आगे का प्लान क्या है “
मुझे अब भी लग रहा था की ये खान के आदमी नही हो सकते
“मुझे नही पता सच में मुझे नही पता,मुझे तो ये भी नही पता की काजल कुछ प्लान कर रही है,वो बहुत ही सीधी साधी और संस्कारी लड़की है प्लीज् आप लोगो से कुछ गलतफहमी हुई है “
मेरी बात से सभी जोरो से हँसने लगे
“संस्कारी ..हा हा हा “
उसने अपने सड़े हुए दांत दिखाए
“अगर आपको जानना ही था तो खान साहब सीधे काजल से क्यो नही पूछ लेते “मैं जानता था की खान काजल के पीछे पागल है ,और ये उसके लोग नही हो सकते
“तुझे अब भी लगता है की हम खान के आदमी नही है “उसमे से एक शख्स ने मुझे पैनी निगाहों से देखा जैसे मेरा दिमाग पढ़ रहा हो ..
“काजल मिल जाती तो उसे ही उठा लेते,लेकिन वो खुद ही रविवार से गायब है…”
उसकी इस बार ने फिर से मेरे शरीर पर करेंट दौड़ा दिया ,मैं बुरी तरह से चौक गया,ये चौकना असली था,
“उसका फोन भी स्विचऑफ आ रहा है ,वो तो बेटा तुझे फंसा कर निकल गई ,पता नही क्या क्या कारनामे किये है उसने अब तुझे ही सब भुगतना पड़ेगा …जो जानता है बता दे ,वरना तेरी बहनों को नंगा करने में हमे ज्यादा समय नही लगेगा “वो लोग फिर के कमीनो की तरह हँसने लगे ,मैं बुरी तरह से डर गया था …..
“नही नही मैं सच कह रहा हु मुझे कुछ नही पता ..मेरी बहनों को बीच में मत लाओ प्लीज् …”
मैं रोने लगा,यंहा क्या हो रहा था मैं इसका अंदाज भी नही लगा पा रहा था ,मैं फुट फुट कर रो रहा था …..
उनलोगों को भी शायद लगा की मैं सच कह रहा हु ,उनमे से एक ने अपना मोबाइल निकाला और किसी को काल किया .
“मेडम ये तो कह रहा है की इसे कुछ भी नही पता…..हा हा वो भी कहा ना ,ओके ओके ठीक है मेडम “वो काल डिस्कनेक्ट करके फिर इस मेरी ओर हुआ ..
“तुझसे अब मेडम ही बात करेंगी “
वो सभी वँहा से चले गए …..
मेडम ??? आखिर कौन थी ये मेडम ..कही रश्मि को तो काजल के प्लान का शक तो नही हो गया,असल में उसे तो यकीन ही था की काजल कुछ गुल खिला रही है ,तो रश्मि ने मुझे किडनैप करवाया है????????
या खान ने ???
काजल कहा है ,इतने दिनों तक तो वो कभी बाहर नही रहती फिर आखिर क्या बात हो गई ???
मेरा जेहन बुरी तरह से छटपटा रहा था,मेरे होठो से खून की एक हल्की सी धार बह रही थी ..
और सबसे ज्यादा परेशान मैं ये सोच कर हो रहा था की आखिर मेरी बहने है कहा ???
थोड़ी देर में ही कमरे का दरवाजा फिर से खुला ,किसी के पायलों की आवज मेरे कानो में आयी ,मैं सर उठाकर उसे देखने लगा,वो मुझे देखकर मुस्कुराई और मैं आश्चर्य से भर गया था ..
“मोहनी तुम ……..”
वो मुस्कुराते हुए मेरे पास आयी और अपने को झुका लिया ..
“ओहो देखो तो कितना मार दिया इन जालिमो ने ..”
वो मेरे होठो से बहते हुए खून को अपने उंगलियों से फिराकर उसे अपने होठो में डाल लेती है ,
“ह्म्म्म तुम बता क्यो नही देते जो तुम्हे पता है “उसने फिर से प्यार से कहा
“सच में मुझे कुछ नही पता ,मुझे जाने दो ,और मेरी बहने “
वो हल्के से मुस्कुराई
“बहुत प्यार करते हो अपनी बहनों से ……लेकिन अफसोस …तुम्हारी बीवी ने ही तुम लोगो को धोखा दे दिया ,जब उसे अहसास हुआ की वो फसने वाली है तो तुम्हे छोड़कर गायब हो गई ..ओहो मेरे देव तुम सच में कितने शरीफ हो “
उसने अपने होठो को मेरे होठो के पास लाया और उससे निकलते हुए खून को अपने होठो से चूम लिया ,मुझे एक हल्का सा दर्द हुआ ..
“मुझे कुछ पता होता तो मैं अब तक बता चुका होता,…आखिर हो कौन तुम और मुझसे क्या जानना चाहती हो ,सच में मुझे कुछ भी नही पता और तुम भी तो थी ना पार्टी में मैं तो वही था रविवार से ..मैंने तबसे ना ही काजल को देखा है ना ही उससे बात की है “मैं फिर से रोने लगा,..असल में मैं एक्टिंग करने की कोशिस कर रहा था क्योकि मुझे काजल से कही ज्यादा अपनी बहनों की फिक्र थी,……….
“तुम्हारी बहने सलामत है लेकिन तब तक जब तक की हम चाहे..तुम और तुम्हारी दोनो बहने हमारे रेडार में हमेशा रहोगे ..याद रखना जैसा मैं बोलू तुम्हे वैसा ही करना होगा ..”
मैं फिर से आश्चर्य से उसे देखने लगा ,वो मुझसे क्या करवाना चाहती थी ..
“तुम किसके लिए काम करती हो ,कौन हो तुम मुझसे क्या चाहती हो “
मैं थोड़ा बौखलाया
“तुमसे क्या चाहती हु वो तो पता चल ही जाएगा ..और मैं खान साहब के लिए काम करती हु ,उन्हें तुम्हारे और काजल के रिलेशन के बारे में पता चल गया और तबसे ही उन्होंने तुमपर नजर रखने के लिए मुझे भेज दिया ..”वो मुस्कुराने लगी
“इससे पहले की काजल उनके गिरफ्त में आती वो गायब ही हो गई ,,,”
अब उसकी बात मुझे भी सच लगने लगी थी ,,,
“और रही बात की मैं कौन हु ,मैंने कहा था ना तुमसे की जब मेरे जॉब के बारे में पता चलेगा तो तुम यकीन ही नही कर पाओगे ….”
वो फिर से मुस्कुराई ..
“मैं अजीब की दूसरी रखैल हु ,…”
वो एक अजीब तरीके से मुस्कुराई
“पहली तो भाग गई “…उसका इशारा कहा था मुझे पता चल चुका था ,और उसकी बात से मेरे पूरे शरीर में एक करेंट दौड़ गया……….

मन में दहसत और एक उलझन के साथ मैं होश में आया ,और आते ही ज्यादा आश्चर्य में पड़ गया,मैं इस समय एक लक्जरी कमरे में था…इस कमरे को अच्छे से पहचानता था…मेरे ही होटल का एक लक्जरी कमरा था ये ,मैं बड़े ही आश्चर्य से इधर उधर देखने लगा,मुझे लगा जैसे मैं किसी सपने से जगा हु…..
पूरा दिन मेरे आंखों के सामने फिर से बड़ी ही तेजी से घूम गया था,मैंने अपनी घड़ी देखी,अभी 3 बज रहे थे…
मैं बहनों को कॉलेज छोड़कर 11 बजे के करीब कॉलेज से बाहर आया था…मेरे माथे में अब भी पसीना था ,चोटों का दर्द अब भी कायम था,मतलब साफ था की ये सपना तो नही था……….
लेकिन मैं यंहा कैसे पहुचा,ये लोग इतने ताकतवर है की उन्होंने मुझे बिना किसी की नजर में आये यंहा तक छोड़ दिया जबकि मैं बेहोश था……..
कई सवाल मेरे दिमाग में आ रहे थे लेकिन ये समय सवालों में पड़ने का नही था,मैंने तुरंत ही अपना मोबाइल निकाला और काजल को काल किया ,मैं बेपनाह रूप से परेशान हो चुका था क्योकि अभी भी काजल का नंबर स्विचऑफ बतला रहा था ,ये स्तिथि मेरे लिए और भी ज्यादा परेशान करने वाली थी,मैंने खुद को थोड़ा रिलेक्स किया और कमरे से बाहर आया ,मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी था अपनी बहनों की हिफाजत..
क्योकि मेरे दिमाग में मोहनी के वो आखरी शब्द गूंज रहे थे जिसके बाद मुझे बेहोश कर दिया गया,
“हमारी नजर तुम्हारे और तुम्हारी बहनों के ऊपर 24 घण्टे रहेगी..अगर हमे तुम्हारे किसी भी हरकत पर शक हुआ तो समझो ………”
मैं इतना सुनकर ही बेहोश हो गया था….
मुझे उसकी वो बाते अभी भी याद थी और जब तक की मैं काजल से बात नही कर लू आगे का निर्णय लेना मेरे लिए खतरनाक होने वाला था …….
मैं सीधे ही होटल के रिसेप्शन में पहुचा ,मुझे देखते ही रिसेप्शनिस्ट बोल पड़ी ..
“सर रश्मि मेडम ने आपको बुलाया है”
मैं चौका …रश्मि ने मुझे सुबह ही जल्दी आने को कहा था,हे भगवान वो मेरे ऊपर चढ़ जाएगी ..मैं डरा हुआ सा भागता हुआ उसके केबिन में पहुचा ..
मुझे अब भी समझ नही आ रहा था की मैं उसे क्या जवाब दूंगा …
“मे आई कमिंग “
मुझे देखते ही उसके चहरे का भाव बदला ,गुस्सा करने की जगह वो मुस्कुराई ..
“आइये जनाब,लगता है रविवार का बुखार अभी तक नही उतरा है,तुमने तो यार हद ही कर दी “
“सॉरी वो कुछ ऐसे काम आ गए की मैं….”
“कोई बात नही जो तुमने अरेंजमेंट किया था उससे हमारे होटल को बहुत ही ज्यादा फायदा हुआ ,तो मैं तुम्हारी ये गलती माफ करती हु लेकिन पहली और आखरी बार ओके..यार अगर नही आ पाते तो कम से कम बता दिया करो ,यंहा भी कई काम होते है”
मैंने हा में सर हिलाया
“और ये चहरा इतना थका हुआ क्यो लग रहा है,और ये खून “
ओह यार ,मैंने चहरा धोया था लेकिन खून का रिसाव फिर से चालू हो गया था,असल में उन पहलवानों ने जो मेरी धुलाई की थी उसके कारण मेरे चहरे से खून निकलना शुरू हो गया था,वक्त ने इसे बंद तो कर दिया था लेकिन हल्का रिसाव और निशान अभी भी बाकी थे…
“वो कुछ नही ऐसे ही मजाक मजाक में बहन से लग गया “
“ओहो लगता है बहन भाई में बहुत ही प्यार है ..क्यो “
उसके चहरे में मुसकान आ गई लेकिन मैं कुछ भी नही बोला ..
“असल में मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी देव “
मैं फिर से उसे देखने लगा ,अब ये इतनी सीरियस क्यो दिखाई दे रही थी ..
“मैंने तुम्हारे बातो पर बहुत गौर किया ……और मुझे लगा की मुझे भी खान साहब को वो देना चाहिए जो की काजल उसे दे रही है”
उसकी बात सुनकर मेरा दिल एक बारकी धक से हुआ ,
“क्या ??? यानी क्या देना चाहती हो तुम उसे “
मैं पूरी तरह से अनजान बनते हुए उससे कहा
उसके चहरे में बस एक मुस्कान आ गई ………….

ज्वालामुखी का लावा जब फुट कर बाहर निकलता है ,तो वातावरण के ठंड से जम कर बेसाल्ट चट्टान बनाता है,वही अगर वो अंदर ही किसी कारण से जम जाय तो वो ग्रेनाइड चट्टान बनाता है…
ये मैं क्यो बोल रहा हु ,क्योकि मेरी हालत एक ज्वालामुखी की तरह हो गई थी ,जिसमे दर्द का लावा भरा हो ,बेवफाई के दर्द का, लेकिन मैं ना ही अंदर ज पा रहा था ना बाहर ही निकल रहा था…..
कितनी अजीब सी बात है की प्रकृति अपने को कभी नही दोहराती लेकिन फिर भी हर चीज का मूल स्रोत एक ही है …
मसलन 1000 मिलियन वर्ष पहले तक पृथ्वी सिर्फ और सिर्फ गर्म गैस ही थी ,जो जम कर लावा का रूप ले रही थी ,फिर लगभग 500 मिलियन वर्षों पूर्व के मध्य ये जमने लगी और पहली सतह का निर्माण करीब 235 मिलियन वर्ष पूर्व हुआ ,जो की आपस में जुड़ा हुआ था….
अब चाहे सोना हो या कोयला या हीरा या पीतल या संगमरमर या नीलम या तांबा या लोहा सभी एक ही लावा से बने हुए है..लेकिन परिस्थितियों के कारण ,दबाव ,और वातावरण के कारण सभी अलग अलग प्रतीत होते है…अगर फिजिक्स की भाषा में बोले तो और भी सूक्ष्म तहो में जा सकते है जंहा पूरे ब्रम्हांड में सिर्फ और सिर्फ ऊर्जा है और कुछ भी नही है ,बस परमाणु है जो की न्यूट्रॉन प्रोटॉन और इलेक्ट्रान से मिलकर बने हुए है जो की ऊर्जा के कण है….
फिर भी इतने विभेद देखने को मिलते है,सबकुछ ऊर्जा का ही परिवर्तित रूप है उसके अलावा कुछ भी नही ….
मैं भी परिस्थितियों का मारा था,एक तरफ मेरी खुद की बीवी थी जिससे मैं इतना प्यार करता था लेकिन आज की परिस्थिति में मेरे मन में उसके लिए शंका थी,वही मुझे अपनी बहनों के भविष्य की फिक्र थी,मेरी जान और मेरे पूरे परिवार का भविष्य ही खतरे में था …..
मैं बुरी तरह से झल्ला सा गया था और शाम होते ही मैं घर को चला गया ,
मैं सीधे अपने कमरे में गया और वँहा जाते ही मेरी आंखों में एक चमक आ गई ………
वो काजल थी ,मेरी काजल ,थककर ऐसे सोई हुई थी जैसे की कोई बच्चा सोता है…
मेरी निराश जीवन की एक आशा थी काजल,उसे देखकर मुझे बेहद प्यार और शुकुन का अहसास हुआ ,मैं जैसे डूब ही गया ,मैं जाकर उससे लिपट गया,वो बेफिक्री से बस थोड़ी कसमसाई लेकिन उसकी नींद गाढ़ी थी..
मैं उसके शरीर की गर्मी को खुद को डुबोने लगा,मैं उससे ऐसे सट जाना चाहता था जैसे की हम दोनो दो नही एक ही हो …
मेरी ताकत बढ़ते ही उसे मेरे होने का अहसास हो गया,
वो पलटी और मेरे सीने में सर रखकर सोने लगी वो जागने के मूड में तो बिल्कुल भी नही थी …लेकिन मुझे कसकर जकड़े हुए जरूर थी …
मैं अपने ही सोच में पड़ गया था ,जिसके कारण मैं सुबह से परेशान था वो खुद कितने बेफिक्री से सो रहा था,
उसे जैसे इन सबकी खबर ही नही थी ,सभी को लग रहा था की वो भाग गई है और ये रानी साहिबा यंहा आराम फरमा रही है ……….
मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई और मैं फिर इस उसके माथे को चूमा मुझे कम से कम इतनी तो तसल्ली हुई की वो मेरे पास है मेरे साथ है ….
जिक्र नही किया था कभी मैंने,अपनी मोहोब्बत का वो पगला सीने में जो सर रखा मेरा हो गया,बस यही मेरे साथ भी हो रहा था,ऐसा लगा जैसे वो मेरी हो गई हो ,अचानक से ही सही लेकिन बस मेरी हो ,बेमतलब सी ही सही लेकिन बस मेरी हो ,तमन्नाओ सी ही सही लेकिन बस मेरी हो ,मुस्किलो सी ही सही लेकिन बस मेरी हो ,परेशानियों सी ही सही लेकिन बस मेरी हो….,डूबे हुए मन में कश्तियों सी वो आयी थी,और बुझे हुए दिल में चिमनियों सी जल गई ….
मैंने फिर इस उसके माथे को चूमा ,इसबार उसके होठो पर भी एक मुस्कान आ गई वो हल्के से उठी उसके होठ मेरे होठो के पास ही थे और हमारी सांसे एक दूजे के होने का अहसास दिला रही थी ,उसके गुलाबी होठो से आने वाली खुसबू से मैं भी खुद को बचा नही पाया और उसके नरम होठो पर अपने जलते हुए होठो को हल्के से सहला दिया ,उसकी मुस्कान फिर से गाढ़ी हो गई थी ,,,
“क्या हुआ आज बड़े उतावले हो रहे हो “
“आज लगा था की मैंने तुम्हे खो ही दिया है…”
मैं हल्के से ही कह पाया जबकि मेरे होठ उसके होठो को बस छू रहे थे,उसके आंखों से नींद जैसे गायब हो गई थी ,मैंने अपने हाथो से उसके कमर को पकड़ रखा था वही उसने अपने बांहो को मेरे सीने से जकड़ा था,
उसके आंखों में एक आश्चर्य झूलने लगा..
“क्या हुआ आपको ये क्या बोल रहे हो,मैं कहा जाऊंगी आपको छोड़कर “
वो सच में बहुत ही आश्चर्य में थी …..जबकि मेरी भी हालत उससे जुदा नही थी ,मैं भी तो अपने अजीब से कसमकस में डूबा हुआ था ….
“तुम्हारा मोबाइल स्विचऑफ है “
वो हल्के से मुस्कुराई ..
“अच्छा तो इतनी सी बात पर ऐसे फिक्रमंद हो गए आप “
वो थोड़ी सी हँसी ..
“ओह नही जान …लेकिन आज …..”
मैंने उसे पूरी घटना बता दिया ..
“हम्म मोहनी …मैंने नही सोचा था की मोहनी इसमें शामिल हो जाएगी ,हा रश्मि ऐसा कुछ करेगी ये मुझे लगा था ..”
इसका मतलब था की वो मोहनी को जानती है,और रश्मि ऐसा क्यो करेगी ,मैं फिर से आश्चर्य से भर गया..
“असल में ये हमारे ही खेल का परिणाम है “
“लेकिन मोहनी ने तो कहा था की वो खान के लिए काम करती है “
“उसने गलत नही कहा था “
काजल ने बोलना शुरू रखा
“वो भटनागर साहब के साथ काम करती है “
मैं भटनागर को जानता था ,असल में वो एक चार्टर अकाउंटेंट है जो की खान और कपूर दोनो के लिए काम करता है ,मतलब ये हुआ की मोहनी भी दोनो के लिए ही काम करती है ..
“लेकिन इससे हमे कैसे पता लगेगा की ये काम खान ने किया या रश्मि ने और उन्होंने ये क्यो कहा की काजल ने तुम्हे धोखा दिया है …और बार बार तुम्हारे प्लान के बारे में पूछना “
काजल थोड़ी सीरियस हो गई
“असल में इस बात को लेकर तो मैं भी कंफ्यूज होई रही हु,क्योकि शक तो दोनो को ही मुझपर है ,और रश्मि में ना जाने खान के कानो में क्या भरा हुआ है ,वो अब मुझे अपने से दूर ही रख रहा है,मैंने इतनी मेहनत की है यंहा तक पहुचने के लिए अब इसे खराब होने नही दे सकते…..और भगवान का शुक्र है की मैंने आपको सब कुछ पहले ही बता दिया वरना आप के लिए ये और भी शॉकिंग होता और असल में होना भी चाहिए ….”
उसके चहरे में एक चमक आ गई …\
“हा सही है देव ये शॉकिंग ही होना चाहिए तुम्हारे लिए की कोई तुम्हारी बीवी के बारे में पूछे क्योकि तुम्हे तो ये कुछ भी नही पता “
मैं उसकी बात को समझ रहा था लेकिन फिर भी मेरे दिमाग में और भी कई प्रश्न थे ..
“लेकिन तुम्हारा मोबाइल और खान साहब को हमारे रिश्ते के बारे में पता होना ?????”
उसके चहरे में एक मुस्कान आ गई
“उन सब बातो से कुछ नही होता,ऐसे भी रश्मि को तो पहले से ही पता है ,जैसा की मैंने तुम्हे बताया था की अजीम और रश्मि दोनो ही हमारे रिश्तों के बारे में जानते है ,और उन्हें अपने काम से मतलब है ,हो सकता है की रश्मि ने ही खान को बताया हो…और वो ये जांचने के लिए की तुम्हे कुछ पता है की नही तुम्हे किडनैप करवा लिया हो ..मेरे मोबाइल के स्विचऑफ होने का भी उन्होंने बहुत फायदा उठाया है तुम्हे डराने के लिए सोचा होगा की तुम डरकर सब बोल दोगे .हमे बस उनके सामने यही नाटक करना है की हम नही पता की उन्हें सब कुछ पता है …उन्हें समझने दो की हम मोहरे है ,और हम अपना खेल उन्हें मोहरा बना कर खेलेंगे…तुम कल होटल में इतना दुखी दिखना जैसे की कोई मर गया हो …उन्हें भी तो लगना चाहिए की तुम एक सीधे साधे से इंसान हो जिसकी बीवी कमीनी है ,और हम दोनो के बीच में कुछ भी सही नही है …तुम मुझे पूछना चाहते हो लेकिन मैं तुमसे झगड़ा कर लेती हु ,तुम अपनी बहनों की वजह से मुझसे ज्यादा बहस नही करते और मैं तुम्हे दबा कर रखती हु ….”
वो मुस्कुराने लगी ..
“तुम तो मुझे एक्टिंग सीखा के ही रहोगी “
मैं हल्के से हंसा ,उसने अपने बांहो का हार मेरे गले में डाल दिया ..
“मेरी जान अब तुम उनके यूज़ करने के लायक हो गए हो,हमारे दुश्मन मुझे हराने के लिए तुम्हे यूज़ करेंगे…”
वो थोड़ी देर चुप रही और फिर थोड़ी सीरियस सी बोलने लगी
“अब तुम्हे मुझसे नफरत करनी होगी देव ,सबके सामने मुझसे बहुत ही नफरत करनी होगी ताकि उन्हें यकीन हो जाए की तुम उनके जाल में पूरी तरह से फंस चुके हो …शायद तुम्हारे लिए ये मुश्किल हो ,क्योकि तुमने मुझे हमेशा ही इतना प्यार किया है ,मेरी गलतियों के बावजूद मुझे इतना चाहा है “
काजल की आंखों में पानी की बूंदे आ गई थी ,ना जाने मैं इस मुखड़े को और इस रूह को कैसे नफरत कर पाऊंगा ..
मैं कैसे इस मखमली देह को नफरत कर पाऊंगा ,मैं कैसे उसके प्यार से भरे हुए मन को नफरत कर पाऊंगा …
मैं उसके होठो को अपनी ओर खिंच कर उसे चूमने लगा ,मेरे होठ उसके होठो में डूबने लगे ..
जब हम अलग हुए दोनो ही एक दूसरे के अहसास से भरे हुए थे,दोनो ही एक दूजे की आंखों में झांक रहे थे..
“सच में इन सब के कारण मेरा दिमाग ही ठंडा हो गया “
मैं उसके बालो पर अपनी उंगलिया फेरते हुए बोला
“ओह तो तुन्हें गर्मी देना होगा ,”वो मुस्कुराई
“ह्म्म्म लगता है मेरे चार्जर को तुम्हारे प्लग में लगाना ही पड़ेगा “
वो खिलखिलाई और मैं उसके ऊपर खुद गया ………

…….
मैं सर गड़ाए बैठा हुआ था,कमरे में बीप बीप की आवाजे लगातार आ रही थी ,अचानक मेरे कंधे पर एक हाथ आया और मैं सर उठाकर उसे देखने लगा,मेरी आंखे लाल थी ,प्रतिशोध की आग से भरी हुई आंखे,जिसे देखकर एक बार डॉ चुतिया भी डर गए जो की मुझे सांत्वना देने के लिए आये थे..
“उन्हें ऐसा नही करना चाहिए था,खासकर पूर्वी के साथ तो बिल्कुल भी नही ,मेरी मासूम सी बच्ची …..”
मैं इतना ही कहते हुए रुका मेरी नजर फिर से पूवी पर पड़ी जो की बिस्तर में लेटी हुई थी ,चहरे पर अब भी वही मासूमियत झलक रही थी ,वो बेहोश ही और हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में थी ,मैं अभी अभी ही आया था डॉ यहां पहले से ही उपस्थित थे उनके कहने नपर ही मुझे पूर्वी के पास आने दिया गया था…
“शायद वो तुम्हे डरना चाहते थे,या शायद ये बस किसी मनचले की करतूत हो “
डॉ ने गंभीर से स्वर में कहा
“जो भी जिसने भी ये किया उसने अच्छा नही किया,मैं पूर्वी को सबसे अधिक प्यार करता हु,शायद काजल और निशा से भी ज्यादा ..”मैं अब भी धीरे धीरे ही बोल रहा था जैसे खुद से बोल रहा हु ..
“जो डर जाते है देव दुनिया उन्हें ही डराती है …”
मैं फिर से डॉ के चहरे की ओर देखा और उठ खड़ा हुआ,,मैं सीधे ही आईसीयू से बाहर आया ,मेरे पीछे डॉ भी बाहर आने लगे ,बाहर काजल और निशा थे,काजल भी खबर मिलने पर अभी अभी ही आयी थी जबकि निशा पूर्वी को हॉस्पिटल लाने वालो में एक थी..
मुझे देखकर निशा मेरी ओर लपकी लेकिन
‘चटाक’
मेरा हाथ घूमता हुआ सीधे निशा के गालो में पड़ा और उसके गोरे गालो पर मेरे पांचों उंगलियों के निशान छप गए,वँहा उपस्थित सभी लोग हमे ही देखने लगे थे लेकिन फिक्र किसे था…
“ये सब कुछ तेरे ही कारण हुआ है “मैं उत्तेजित होकर बोला और उसका हाथ पकड़कर उसे खिंचता हुआ ले गया ..काजल ने मुझे ऐसे देखा मानो पूछ रही हो की ये क्या बोल दिया लेकिन मैं आज किसी की सुनने के मूड में नही था ,काजल ने एक बारगी मुझे रोकने की कोशिस की लेकिन डॉ ने उसे रोक दिया…
“जाने दो उसे आज नही जागा तो पूरे जिंदगी डर डर कर ही जियेगा “
डॉ की ये हल्की सी आवाज मेरे कानो पर पड़ी ,
मैं गाड़ी चला रहा था जबकि निशा रोती हुई मेरे बाजू में बैठी की वो कुछ भी बोलने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी वही मैं कुछ बोलने के मूड में ही नही था..
मैंने गाड़ी एक चाय की टापरी पर रोकी जो की उनके कालेज जाने के ही रास्ते पर पड़ता ,निशा और मैं नीचे उतरे ,
“कौन था वो “मैंने सपाट सा सवाल किया ,
“वो नीले शर्ट वाला “निशा ने उंगली दिखाई,मेरी नजर उस नीले शर्ट वाले लड़के पर जम गई ,वो एक लंबा चौड़ा स्मार्ट सा लड़का था जोकि अपने 5-6 दोस्तो के साथ किसी बात पर सिगरेट पीते हुए ठहाके लगा रहा था,मैं पीछे से एक लोहे निकाल कर उसकी ओर बढ़ने लगा,उसके किसी दोस्त का ध्यान अचानक ही मुझपर गया,उसने सभी को सतर्क कर दिया उस लड़के की आंखे जैसे निशा पर पड़ी जैसे वो सब कुछ समझ गया,मैं उनके पास पहुचा ही था की ..
“अरे देखो ये है इस रंडी का भाई,या कोई आशिक है “उसने जोरो से कहा सभी हँसने लगी लेकिन मुझे उसकी बात का कोई फर्क नही पड़ा मैं सपाट सा चहरा बनाये हुए उनकी ओर बढ़ रहा था,वो सभी चौक कर सतर्क खड़े हो गए,
“देखो मैं तो बस उसे डरना चाहता था “
वो अपने हाथो को मेरी ओर मुझे रोकने का इशारा कर रहा था की ..
“रआआआ टट “रॉड घुमा और सीधे उसके चहरे से टकराया ,वो लोहे की मोटी रॉड थी जिससे उसका जबड़ा ही उखाड़ गया,मुह से खून की धार निकलने लगी और उसके सभी दोस्त ख़ौफ़ज़दा से कभी मुझे देखते तो कभी उसे सम्हालते …
“ये लड़की धंधा करती है ,इस बेचारे ने तो बस रेट पूछा था दूसरी वाली को और उसने इसे थप्पड़ मार दिया “
उसका एक दोस्त बौखला कर बोल पड़ा ,मैंने फिर से रॉड घुमाया और ‘रआआआ टट’
उसका भी जबड़ा टूट गया और मुह से खून की धार बहने लगी ,माहौल में पूरी तरह से सन्नाटा था और साथ ही मेरे दिल में भी ,मैंने हाथ घूमने से पहले ये भी नही सोचा था की दूसरे लड़के की क्या गलती थी,मेरा चहरा अभी भी सपाट था,…
वँहा खड़े लड़के और बाकी लड़को को जैसे होश आया हो ,वो मुझे देखकर चिलालने लगे और मेरी ओर दौड़े ,जैसे मुझे खा जाएंगे,अपने दोस्तो की ये हालत देखकर वो सभी बौखला गए थे ,
“मारो मादरचोद को हमारे इलाके में आके हमारे भाई को मारा है इसने “
एक लड़का पूरे जोश में चिल्लाय ,लेकिन मेरे मन में एक जु तक नही रेंगी,मैं वैसा ही खड़ा रहा जैसे पहले था,लड़को के हाथो में जो आया वो उसे पकड़ कर मेरी ओर दौड़ाने को हुए ,जो पहला लड़का मेरे पास पहुचा उसके हाथ में लकड़ी का बांस जैसा कुछ था ,इससे पहले की वो उसे घुमा भी पता वो मेरे रॉड के रेंज में था और ‘रआआआ टट’
दूसरे के पेट में रॉड चला गया,तीसरा जो की मेरे पास ही खड़ा था ,वो अपने मुक्के को मेरी ओर उछाला और मैं झुकते हुए रॉड से उसके पैरो में वार कर दिया ,जैसे उसके घुटने टूटे हो ,वो दर्द से छटपटाता हुआ नीचे गिर गया,अपने तीनो दोस्तो का हाल देखकर बाकी के सभी वही जड़वत खड़े हो गए,मैं इंताजर में था की कौन आगे आएगा,उन्होंने मुझे चारो ओर से घेर लिया था ,लेकिन कोई भी आगे आने का साहस नही कर पा रहा था,सबसे ज्यादा हालत उसकी खराब थी जिसके पेट में मैंने रॉड घुसा दिया था,वो चीखता हुआ जमीन में छटपटा रहा था लेकिन किसी की इतनी हिम्मत भी नही हो रही थी की कोई आगे आकर उसे उठा ले ……..मेरे मन में अब भी ख़ौफ़ या भविष्य की कोई चिंता नही थी,मैं ऐसे खड़ा था जैसे मुझे इससे कोई भी फर्क नही पड़ता की कोई मरे या जिए……
कहते है ना की नंगे से खुदा भी डरता है,ये तो मामूली से कालेज के लड़के थे,और मैं अभी पूरी तरह के नंगा था,मेरे ऊपर कोई भी मर्यादा और कानून के डर का कपड़ा नही था,मैं सभी कुछ तभी छोड़ आया था जब मैंने पूर्वी को देखा था,इस लड़के ने उसे डराने के लिए ही सही लेकिन तेजाब उसके ऊपर फेक दिया था,वो उसे जलाना नही चाहता था लेकिन फिर भी उसके तिरछे फेके गए तेजाब से मेरी बहन का हाथ जल गया ,और उसे हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा था ,मेरी मासूम बहन को ये लोग ना जाने कितने दिनों से परेशान कर रहे थे,जब इसके बावजूद वो नही टूटी तो उन्होंने ये ट्रिक इस्तमाल में लाई …
वो सभी भी किसी के बेटे या भाई थे लेकिन वो अपनी मर्यादा से बाहर गए थे जिसका अंजाम उन्होंने भुगता था,इसके लिए मेरे दिल में ना तो ग्लानि थी ना ही कोई दया ,
मैं बाकी खड़े हुए लड़को की तरह मुड़ा उनमे से कुछ तो डरकर बहुत दूर जा खड़े हुए थे ,जो पास में थे वो भी कांप रहे थे की पता नही मेरा अगला शिकार कौन होगा …मुझे उनकी हालत देखकर थोड़ी हँसी भी आ गई जिसने मेरे चहरे में हल्की सी मुस्कान ला दी ,मुझे मुस्कुराता देखना शायद उन लड़को के लिए और भी डरावना था,क्योकि या तो उन्होंने किसी को गुस्से में पागल होते देखा होगा ,या चिल्लाते हुए मारधाड़ करते,लेकिन मैं उन सभी से अलग था,मैंने अभी तक किसी से कोई भी बात नही की थी ,मैंने तो एक शब्द भी नही निकाला था लेकिन मेरे कारण 4 लड़के खून से सने हुए पड़े थे,मैं थोड़ा आगे बड़ा था लड़के तीतर बितर हो गए ,मैं उस लड़के के पास पहुचा जिसने पूर्वी के ऊपर तेजाब फेका था…
“किसी लड़की को छेड़ने से पहले ये याद रखना की वो भी किसी की बहन होगी ,…शायद तुम्हारी भी कोई बहन होगी ,अगर होगी तो तुम समझ पाओगे की एक भाई पर क्या बीतती है ……..”
मैं उठकर सीधे अपने कार की ओर बड़ा ,निशा अजीब सी निगाहों से मुझे देख रही थी ,मेरा दिल एक अजीब से सुकून से भर गया था,शायद आज पहली बात मैंने किसी के ऊपर हाथ उठाया था मैं तो एक सीधा साधा सा लड़का था.ये पूर्वी का प्यार ही था जो मुझे यंहा तक खिंच लाया था…..
तभी वँहा पुलिस सायरन की आवाज सुनाई दी ,लड़के जख्मी लड़को को उठा रहे थे ,पुलिस की गाड़ी वँहा पहुच चुकी थी मैंने देखा की डॉ भी पुलिस के साथ पीछे पीछे पहुचे थे ,पुलिस वालो से देर ना करते हुए जख्मी लड़के की मदद की ..
“आपको मेरे साथ चलना होगा”
इंस्पेक्टर मेरे पास पहुच चुका था,मैंने वो रॉड उसके हवाले कर दिया ,डॉ के भाव को देखकर मैं समझ गया था की ये पुलिस डॉ ने ही बुलाई थी शायद मेरी मदद करने लेकिन यंहा का हाल देखकर वो भी दंग थे …
“तुम चलो मैं आता हु “डॉ ने मुझे कहा और मैं इंस्पेक्टर के साथ चल दिया …….

दोस्तो यंहा से कहानी अलग अलग लोगो द्वारा बताई जाएगी..
अभी तक ये कहानी देव बोल रहा था,तो अब से ये कभी राइटर ,कभी निशा,या काजल की ओर से चलेगी…
राइडर्स कृपया कन्फ्यूज़ ना हो,और इसके लिए मैं पहले ही बता दूंगा ..ऐसे लगभग रोज ही उपडेस आ रहे है तो स्टोरी आप भूलोगे नही की क्या चल रहा है,स्मूथ स्टोरी चलाने की कोसिस रहेगी ताकि ज्यादा कन्फ्यूजन ना हो……..

निशा अभी अपने आंसुओ को रोक नही पा रही थी ,जबकि देव जेल में था,निशा अभी काजल के पास ही हॉस्पिटल में बैठी थी,काजल उसे सांत्वना दे रही थी ,लेकिन निशा का दुख कम नही हो पा रहा था…
“अपने भइया को क्या क्या बताया है भाभी “
निशा की इस बात से काजल थोड़ी सहम गई
“क्या सब कुछ बता दिया अपने “
निशा ने भरे हुए नजरो से काजल को देखा जैसे काजल को फिर से धक्का लगा हो
“मैं अब भइया से कैसे नजर मिला पाऊंगी..और आपको हमे भी तो बतलाना चाहिए था..”
निशा का चहरा परिवर्तित होने लगा था,वो गुस्से में आ रही थी लेकिन ये हॉस्पिटल था ….
“मैने उन्हें कुछ भी नही बताया है निशा “
“उनके बातो से तो ऐसा नई लगा की अपने उन्हें कुछ नही बताया होगा “
वो जोर देने के अंदाज में बोली ..
“मेरे भइया इतने सीधे है की उन्हें तो हमपर शक भी नही हो सकता था,लेकिन आपकी ही गलती से ये सब हुआ है,बाहर से आकर नशे की हालत में ही भइया को सब कुछ बता दिया था अपने …उन्हें आप अपना कस्टमर समझ रही थी “(उपडेट नंबर 4)
काजल उसका चहरा देखने लगी ,उसे यकीन नही हो रहा था की ये बात निशा को कैसे पता ..
शायद निशा को उसकी नजर से कुछ समझ आ गया था..
“मैं उस रात आप लोगे के कमरे के बाहर ही थी ,”
काजल अब घबरा गई ..
“घबराइए नही ना आपको कुछ होगा ना ही आपके इकलौते भाई वरुण को ,…लेकिन आपके पापा ..”
निशा के चहरे में एक अजीब से भाव आये जिसे देखकर काजल डर गई
“नही निशा पापा को कुछ मत करना “उसकी आवाज ही कांप गई थी लेकिन निशा के चहरे में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई …….
“अगर आप चाहती है की वो बुड्डा अपनी बाकी की जिंदगी चैन से काटे तो ….”
काजल के आंखों में आंसू की एक धार बहने लगी थी ,उसका रूह भी निशा की बात से काँपने लगा था..
“तो……”
काजल ने कांपते हुए आवाज में निशा से कहा ,
“तो अब भइया को मेरे खेल से दूर ही रखना ,मैंने जीवन में सबसे अधिक प्यार उन्हें ही किया है…अपने एक बड़ी गलती तो कर ही दी और वो तो ठहरे भोले भाले वो मुझे सुधारने के लिए प्राण ले लिए होंगे..अगर मैं उनकी बहन ना होती तो आज वो मेरे होते..तुम्हारे आने से वो मुझसे दूर हो गए लेकिन अब मैं उन्हें अपना बना के ही छोडूंगी ,अगर तुम बीच में आयी तो जानती हो ना……”
काजल ने उसकी आंखे देखी,वो लाल थे ,जैसे किसी जुनूनी के होते है,वो एक जुनून में ही तो थी ,अपने भाई को पाने के जुनून में ना जाने वो इसके लिए क्या कर जाएगी…काजल के प्राण कांप गए वो एक भीगी बिल्ली जैसे सिमट कर रह गयी ,उसके मुख से कोई भी शब्द नही फूटा बस वो हा में सर हिला कर ही रह गई …….

इधर
“भाभी दिदि ने आपको कुछ कहा ,और भइया को क्या जरूरत थी की वो उन लड़को से भिड़ने जाते “
मासूम सी पूर्वी का चहरा देखकर काजल को उसपर बहुत ही प्यार आया ,वो अभी अपने बिस्तर में लेटी हुई थी और नर्सो के द्वारा की जाने वाली बात को सुनकर उसे पूरा माजरा समझ में आ चुका था..
“उन्होंने जो किया वो तो हर भाई करता ,और वो दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार भी तो तुमसे ही करते है …”काजल के चहरे में एक मुस्कान खिली ,वही मुस्कान पूर्वी के चहरे में भी थी ..
“निशा दिदि ने आपको कुछ कहा क्या ,मुझे बताइये मैं बतलाती हु उन्हें ,समझती क्या है वो अपने को “
पूर्वी का गुस्सा भी तो इतना प्यारा था की काजल हँस पड़ी
“पहले जल्दी के ठीक तो हो जाओ ,और निशा को मैं लुंगी , तुम उसकी फिक्र छोड़ो..पहले तो मुझे लगा था की निशा को सम्हालना आसान होगा ,लेकिन आज उसकी आंखे देखकर तो ऐसा नही लग रहा था जैसे वो कयामत ही ला देगी …….”काजल ने थोड़ी देर हुई बातचीत को याद किया
“क्या बोल रही थी वो ..”पूर्वी के चहरे में भी एक गहरे भाव आये ..
“वही पुरानी बात …लेकिन इस बार उसकी आंखों में जो जनून था वो मैंने पहले कभी नही देखा था..”
पूर्वी ने एक गहरी सांस ली ..
“लगता है अब मुझे ही उतारना होगा “उसने अपने आप से कहा …………….

“रुको “मेरी आवाज से निशा रुक गई जिसने अभी अभी मेरे लिए दरवाजा खोला था,
जेल से आने के समय काजल फिर के होटल चले गई थी ,निशा ने दरवाजा खोला और सर झुकाए जाने लगी ,मुझे ये बात बहुत ही तकलीफदेह लग रही थी की मेरी ही बहन मुझसे ऐसे पेश आ रही थी ,शायद वो उस दिन की मेरी बातो को अब भी अपने दिमाग में बसा कर रखे थी…
“तुम ऐसे मुझसे भाग क्यो रही हो “निशा पलट भी नही रही थी और सर झुकाए खड़ी थी …
“कुछ भी तो नही भइया “
“पूर्वी कैसी है “
“ठिक है अपने कमरे में है “मैंने निशा से अभी बात करना उचित नही समझा ,मैं सीधे ही उनके कमरे की ओर बढ़ा,आज उसने मुझे नही रोका ,मैं कमरे में था और मेरे सामने मेरी प्यारी बहन पूर्वी लेटी हुई थी,मुझे देखते ही वो खुसी से उछाल पड़ी,वो आज ही घर आयी थी और मैं उससे अभी मिल रहा था…
“कैसी है मेरी जान “मैं उसके पास ही बिस्तर में जाकर बैठ गया ,वो उठाने को हुई लेकिन मैंने उसे लिटा दिया ..
“अरे मुझे कोई उठाने क्यो नही देता है “
उसकी मासूमियत में तो दुनिया कुर्बान थी ..
मैं हंसा
“मैं पूरी तरह से ठीक हु भइया अब तो मैं कालेज भी जा सकती हु “
कालेज ?????
मैंने तो ये सोचा ही नही था,अब क्या मेरी बहनों का कालेज जाना ठीक होगा क्योकि जो मैंने किया था उससे पूरे कालेज में इन्ही की चर्चा हो रही होगी,और उनको खतरा भी होगा …
मेरे मनोभाव शायद पूर्वी की समझ में आ गए थे..
“अरे जिसका आपके जैसा भाई हो उन्हें अब कोई कुछ नही बोलेगा आप क्यो फिक्र कर रहे हो “
पूर्वी ने मेरे मन की बात सुन ली थी ,
“कुछ दिन रेस्ट कर ले फिर मैं ही तुझे कालेज छोड़कर आ जाऊंगा “मैंने उसके बालो को सहलाते हुए कहा ,
“क्या भइया आप भी ….कितना रेस्ट करूँगी मैं ,बोर होई जाती हु यंहा लेटे लेटे ..और आप फिक्र मत करो मेरी अब मुझे कुछ भी नही होगा “
“ह्म्म्म “
मैं भी चुप हो गया और उसके जख्मो को देखने लगा ,ज्यादा गहरा घाव नही बना था,लेकिन जलने वाली जगह में निशान बच गया था,घाव पूरी तरह से ठीक था और उसकी चमड़ी से उसके नस दिख रहे थे,ऊपर की त्वचा जल गई थी ,मुझे उसे देखकर फिर से बड़ा दुखी हुआ ,
“देखो ना भइया सब तो ठीक हो गया है और मुझे कोई कमजोरी भी नही है अब “
वो उठकर मेरे गले में झूल गई ,मुझे मेरी पुरानी पूर्वी वापस मिल गई थी ,मैं उसे अपने गले से लगा कर रखा रहा,मेरी नजर उस कमरे में पड़ी…..
यही वो कमरा था जंहा मेरे आने से मेरी बहनों को परेशानी थी ,आज उन्हें कोई परेशानी नही हो रही थी इसका मतलब था की उन्होंने वो चीज हटा दी होगी ,मैं ध्यान से देखने लगा सभी कुछ तो ठीक था बस एक चीज के ,एक दीवाल जो की बिस्तर के बाजू ने ही था,मुझे लगा की उसपर कोई पोस्टर चिपका हुआ रहा होगा जिसे अभी अभी निकाला गया था,क्योकि पोस्टर तो निकल गया था लेकिन उस जगह का कलर बाकी दीवाल के कलर से अलग था,मैं फिर से नजर दौड़ाया और मुझे वो पोस्टर भी दिख गया,जो की निशा के स्टडी टेबल के नीचे में मोड़कर रखा गया था,क्या था उस पोस्टर में जिसे मेरी बहने मुझसे छिपा रही थी ,???
मैं ज्यादा खुफिया गिरी नही करना चाहता था …
मुझे निशा का आभास हुआ जो की मेरे पीछे ही खड़ी थी ,मैं जब पलटा तो उसने फिर से नजर झुका लिया,मैंने पूर्वी को देखा और आंखों ही आंखों में पूछा कि क्या हुआ ..
उसने उसने अपनी नजर बड़ी करके मुझे बताया की आपके ही कारण हुआ है ये अब मनाओ …उसका चहरा और एक्प्रेशन देखकर मुझे हँसी आ गई लेकिन मैं बस मुस्कुराया …
मैंने निशा का हाथ पकड़ा और बिस्तर में बिठा दिया ,वो अब भी नजर गड़ाए हुए बैठी थी ,
“मुझसे नाराज हो ???”
मैंने कहा ही था की वो वँहा से उठ कर चली गई ,मैंने देखा था की उसके आंखों में आंसू थे …हम दोनो ही उसे जाते हुए देखते रहे लेकिन कोई कुछ भी नही बोल पाया ,वो कमरे से बाहर चली गई शायद किचन में …
“इसे क्या हो गया है “मैं पूर्वी की तरफ मुड़ा जो की उदास दिख रही थी ..
“भईया ……..”वो भी चुप हो गई और उसने उस पोस्टर की तरह उंगली की जो की गोल मोड़कर रखा गया था,मुझे पता था की यही वो पोस्टर है जोकि कभी इस दीवार मके लगा रहा होगा ..
“उसे देखो “
पूर्वी ने उदास स्वर में ही कहा ..
मैं उठकर उस तक पहुचा और उसे खोला …
मेरी नजर फ़टी की फ़टी रह गई थी ,ये था जिसे मेरी बहने मुझसे छिपा रही थी ……
मैं चौक कर फिर से पूर्वी को देखने लगा
“हम नही चाहते थे की आपको इसका पता चले लेकिन …..दीद आपसे बहुत प्यार करती है भइया और ये इसका सबूत है ,”
मेरी बहन मुझसे प्यार करती है तो इसमें छिपाने वाली क्या बात थी ???
ये उस पोस्टर से पता लग रहा था,जिसके बीच में एक दिल बना हुआ था जिसपर मेरी फ़ोटो लगी थी ,उसके चारो ओर सिर्फ मेरी ही फ़ोटो थी,ऐसा लग रहा था की किसी नवजवान लड़की को प्यार हो गया हो और वो अपने महबूब की तस्वीरों से दीवाल को सजाने के लिए इसे बनाया हो ,निशा की मेहनत इसमें साफ नजर आ रही थी ,मेरी कुछ चुनिंदा तस्वीरों से उसने एक आदमकद का पोस्टर बनाया था…मेरी आंखे भर गई ..
“मैं भी आपसे प्यार करती हु भइया लेकिन दिदि का प्यार कुछ अलग ही है …वो आपके लिए पागल है ,यहां तक की जब आपकी शादी हुई थी तब सबसे ज्यादा वही रोइ थी …मैं जानती हु की ये गलत है लेकिन ………..”
पूर्वी थोड़ी चुप हो गई ,मुझे काजल ने कुछ तो बता दिया था लेकिन आज मैं इसे फील भी कर सकता था …
“दिदि ने तो भाभी को भी धमका दिया था ,वो तो भाभी को भी ……..”जैसे पूर्वी को होशं आया हो की वो क्या बोल रही है ,वो चुप हो गई जैसे कोई सदमा लगा हो ,मैं उसके पास जा बैठा
“भाभी को भी क्या “
पूर्वी के चहरे में एक डर आ गया था मैं जानता था की वो क्या बोलना चाहती थी ..
“कुछ नही भइया “
“मुझसे कब तक तुम लोग झूट बोलकर निशा को बचाने की कोशिस करोगे ..मैं जानता हु की उसने काजल को मारने की कोशिस की थी और तुझे भी …..”कमरे में एक अजीब सा सन्नाटा पसर गया था …
“मैं ये भी जानता हु की जो एसिड अटैक तेरे ऊपर हुआ वो उसी ने करवाया था…”
अब पूर्वी रोने लगी थी ,
मैंने उसे अपने सीने से जकड़ लिया ,
“मैं जानता हु मेरी जान की तुम निशा को कितना प्यार करती हो ,उसकी हर गलतियों के बावजूद और मैं ये भी जानता हु की निशा के लिए ये सहना बहुत ही मुश्किल होता है की मैं उसके अलावा किसी और को प्यार दिखाऊ,मैं जानता हु की वो बीमार है और उसे अगर कुछ ठीक कर सकता है तो मेरा प्यार ..लेकिन इसका ये तो मतलब नही हुआ की मैं तुझे प्यार करना बंद कर दूंगा ……….अब तो निशा भी जानती है की मुझे उसके बारे में पता चल गया है शायद इसी लिए वो मुझसे इतनी दूर भाग रही है,लेकिन वो दिल की अच्छी है ,वरना अभी तक वो काजल और तुझपर और भी हमले करवा सकती थी ,उसे अपनी गलती का अहसास है लेकिन वो बीमार है ,जब उसे उत्तेजना होती है तब उसमें कुछ भी सोचने समझने की शक्ति नही बच पाती,और जब गलती हो जाए तो फिर पछताने के सिवा और कोई चारा नही बचता “
पूर्वी मेरे सीने से लगी हुई सिसक रही थी ..
“भइया सच में दिदि अच्छी है ,मेरे ऊपर हमला तो करवा दिया लेकिन फिर वो इतना रोइ है ,,,,,,,वो तो ठीक से खाना भी नही खा पा रही है प्लीज् उसे मनाओ शायद जब आप उसे समझाओगे तभी तो ठीक हो पाएगी…सच में हमशे बहुत बड़ी गलती हो गई,हमे आपको सब कुछ पहले ही बता देना था ,अगर हम आपको पहले ही बता देते तो शायद मुझेपर ये अटैक ना होता और ना ही भाभी मुसीबतों में फंसती “वो रोती रही ..
“फिक्र मत कर मेरी जान मैं सब कुछ सम्हाल लूंगा अब उसे सम्हालना मेरे ऊपर है …”
मैं थोड़े देर और पूर्वी के साथ ही बैठा रहा और फिर बाहर जाकर निशा की ओर रुख किया ,वो अभी किचन में ही थी………

“ये क्या कर रही हो “
मैं निशा को देखकर चौक गया था,उसके बाल बिखरे हुए थे और वो किचन में जमीन में बैठी थी ,ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत ही रोई हो ,उसने मुझे देखा उसकी आंखे बता रही थी की उसकी हालत क्या थी ,आंखों का काजल आंसुओ की वजह से फैल गया था,कपड़े अस्त व्यस्त थे जैसे उसने उसे जोरो से खिंचा हो ,वो एक बहुत ही दर्दनाक मानसिक द्वंद से गुजर रही थी …
लेकिन मेरे लिए डर का कारण था वो धारदार चाकू जो उसने अपने हाथो में पकड़ रखा था…मुझे देखते ही वो ऐसे चौकी जैसे कोई चोर चौक जाता है,
उसके इरादे समझ कर मेरे दिल की धड़कने ही रुक गई ..
“नही निशा …”मैं जोरो से बोल गया और दौड़कर उसके पास पहुचा ,वो मुझसे बचने लगी जैसे मैं उसका बलात्कार करने वाला हु …
वो मुझे खुद को छूने भी नही देना चाहती थी
“नही भइया मत छुओ मुझे ..मैंने पाप किया है भइया …मैंने पाप किया है…”
मैंने हाथ बढ़ाया लेकिन वो फिर से पीछे हट गई ..
‘मेरी बहन मेरी बात सुन मैं तुझसे बहुत प्यार करता हु ,निशा मेरी जान सुन मेरी बात “
मेरे आंखों में पानी आने लगा,ऐसा लगा जैसे उसकी इस हालत का जिम्मेदार मैं ही था,दिल तडफ गया और आंखों से वो पानी टूटकर गिर पड़ा ,
“नही भइया ,मैंने पाप किया है भइया मुझे मत छूना आप भी गंदे हो जाओगे भइया,मुझे मर जाना चाहिए मुझे मर जाने दो ..”
मैं जैसे रो ही पड़ा लेकिन निशा को जैसे कुछ फर्क ही नही पड़ रहा था,वो अभी भी सिमटी हुई बैठी थी मेरे रोने से उसे कोई फर्क नही पड़ रहा था,वो अपने ही धुन में थी लेकिन उसकी इस हालत को देखकर मैं बुरी तरह से टूट गया था ,
लेकिन ये समय टूटने का नही था,अगर मैं टूटा तो हो सकता था की मैं अपनी बहन को हमेशा के खो दु,क्या मैं इतना भी मजबूत नही था जितनी मेरी छोटी बहन और मेरी बीवी थी जिन्होंने इतने दिनों तक मुझसे ये बात छुपाए रखी थी …और निशा को पूरी तरह से सम्हाल कर रखा था…
लेकिन आज निशा की हालत सबसे खराब थी ,कारण था मेरे द्वारा उसे बोले गए वो शब्द जो उसे अंदर ही अंदर से खोखला कर रहे थे,अगर मुझे पता होता की इसकी हालत ऐसी हो जाएगी तो मैं उस पर कभी ये जाहिर ही नही होने देता की मुझे सब कुछ पता है ,मैं इसे साधारण ऑब्सेशन समझ रहा था लेकिन आज मुझे पता चला की काजल ने मुझे जल्दी कुछ करने को क्यो कहा था,
निशा बहुत ही बेचैन और डरी हुई लग रही थी ,जैसे किसी लड़की के साथ जबरदस्ती की जा रही हो और वो एक कोने में सिमट कर बैठी हो ,वही हालत इस समय निशा की थी वो एक कोने में सिमट कर बैठी हुई थी …और मुझे दूर रखने को कह रही थी ,
मेरे सामने सबसे बड़ी प्रॉब्लम थी वो चाकू जिसे उसने कस कर पकड़ रखा था ,मैंने उसका ध्यान भटकना ही ठीक समझा ..
“निशा ,,,मेरी बहन मेरी आंखों में देख ,क्या तुझे लगता है की मैं तुझसे नाराज हु ….”
वो थोड़ी देर को शांत हुई

“देख मेरी आंखों में मैं तो दुनिया में सबसे ज्यादा तुझसे ही प्यार करता हु ..फिर ये गलत कैसे हुआ मेरी बहन …क्या तू भूल गई उस दिन को अगर काजल नही आती तो हम एक ही हो जाते ….है ना “
मेरी बात से वो बहुत ही शांत हो गई थी लेकिन अब भी उसके हाथ चाकू पर मजबूती से बंधे हुए थे ..
वो एक सोच में पड़ गई थी जिसने मुझे एक मौका दिया ..
“अगर तुझे मेरी बात पर यकीन नही तो मेरे कमरे में चल ,मैं तुझे पूर्वी और काजल से भी ज्यादा प्यार करता हु ,मैं तुझे सब से ज्यादा प्यार करता हु “
मैं एक उमंग में बोल गया ,मैंने अपने बात में पूरी तरह से फिलिंग भरी क्योकि मैं नही चाहता था की उसे मेरे झूट का पता चले ,
“सच्ची ..”उसकी आवाज में एक अद्भुत भोलापन था
“आप झूट तो नही बोल रहे हो “
वो धीरे से बोली
“पागल मेरी बात तुझे झूट लग रही है ..मेरे गले से लग के देख ..आ मेरे पास आ “
वो अब भी झिझक रही थी ,मैं उसके पास नही जा रहा था क्योकि वो हड़बड़ाहट में कोई गलत कदम भी उठा सकती थी ..
“आना …अपने भाई पर तुझे भरोषा नही है ,मैं तो सोचता था की तुम मुझे बहुत प्यार करती हो लेकिन तुम्हे तो मुझपर भरोषा ही नही है …”मैंने रूठने की एक्टिंग की
“और जब भरोषा ही नही है तो छोड़ो मैं जा रहा हु “
ये बोलते हुए मेरे दिल की धड़कने भी रुक गई थी क्योकि मैं वँहा से नही जाना चाहता था लेकिन निशा को ये बोलना पड़ा ,अगर वो कोई प्रतिक्रिया नही करती तो मेरे लिए सचमे एक मुसीबत खड़ी हो जाती ..मैं थोड़ा मुड़ने को हुआ
“नही …”
निशा की आवाज ने मुझे हिम्मत दी मैं झट से उसकी ओर हुआ
“नही मैं आपके ऊपर भरोषा करती हु भइया “
उसके आंसू सुख चुके थे वो अभी अभी नार्मल कंडीसन में नही आयी थी और मुझे अभी उसे नार्मल नही करना था अभी तो मुझे उसके हाथ से वो चाकू छुड़वाना था
“तो आ मेरे गले लग जा ,वरना मैं चला “
वो मेरे आंखों में देखने लगी जैसे मुझे नाप रही हो …
“सच में तू मुझसे प्यार वयार नही करती ,सब दिखावा है तेरा “
मैं हल्के गुस्से में बोला ताकि उसके दिल में बात लगे और वो तुरंत कुछ ऐसा करे जिससे मुझे मौका मिल जाए ,
“नही भइया मैं आपसे बहुत प्यार करती हु “
वो मेरी ओर बड़ी और मैने उसे खीचकर अपने सीने के लगा लिया ,जैसे एक ज्वालामुखी फटा हो वो जोरो से रोने लगी ,मुझसे लिपटे हुए उसके आंसुओ से मेरे कपड़े भीगने लगे थे मैंने उसे अपने सीने से ऐसे कसा था जैसे मैं उसे अपने अंदर समाना चाहता था ,मैं जानता था की उसके लिए रोना कितना जरूरी था,,,मैंने उसके हाथो से वो चाकू निकाल कर दूर रख दिया और उसे जकड़कर बस वही बैठ गया ,उसका रोना बंद नही हुआ लेकिन उसने मेरे गालो में चुम्बनों की बरसात ही कर दी ,उसके थूक से मेरा पूरा चहरा गीला हो गया था,वो मुझे पागलो की तरह चूम रही थी ..
“I LOVE YOU BHAIYA …I LOVE YOU BHAIYA..I LOVE YOU BHAIYA,….I LOVE YOU BHAIYA…I LOVE YOU BHAIYA…I LOVE YOU BHAIYA …I LOVE YOU BHAIYA..I LOVE YOU BHAIYA,….I LOVE YOU BHAIYA…I LOVE YOU BHAIYA “
वो बोलते हुए थक भी नही रही थी और मुझे चूमे जा रही थी उसके मुह से बस एक ही बात निकल रही थी ,मैंने तो जैसे उसके सामने खुद को सिलेंडर ही कर दिया था ,जब वो रुकी तो मैंने फिर से उसे जोरो से जकड़ा ,मैं उसे उठाकर अपने कमरे में ले गया और बिस्तर में डाल दिया ,उसके आंखों में अब भी आंसू थे ,मैं उसके बाजू में सोया और उसे जकड़ लिया ,वो फिर से मुझे चूमने लगी ..
“भइया क्या आप सच कह रहे हो सबसे ज्यादा मुझे प्यार करते हो …”
मैं मुस्कुराया
“कैसे साबित करू ,इतना भी यकीन नही है अपने भइया पर “
वो मुझसे लिपट गई
“नही भइया मैं बस आपको खोना नही चाहती “
“दुनिया की कोई ऐसी ताकत है क्या जो मुझे मेरी बहन से जुदा कर दे …और तुझे काजल और पूर्वी से क्या डर है ,क्या तुझे लगता है की उनके कारण मैं तुझसे अलग हो जाऊंगा ,अरे पागल तू मेरी है और मैं तेरा हु,तूने ऐसा सोच भी कैसे लिया की काजल और पूर्वी तुझे मुझसे अलग कर देंगे ,,,क्या तुझे मेरे प्यार में विस्वास ही नही है “
ना जाने कब मैं एक्टिंग करते करते सच बोलने लगा था,मेरी हर बात मानो मेरे दिल से आ रही थी और मेरे आंखों का वो आंसू भी झूठा नही था जो अभी अभी मेरे आंखों से गिरा था …
“मुझे माफ कर दो भइया मैं आपको समझ ही नही पाई “
मैंने उसे फिर से जकड़ लिया ,वो सुबकते हुए ही मेरे सीने में समाई हुई सोने लगी थी ,वो मानसिक थकान उसके ऊपर हावी हो गया था और वो धीरे धीरे नींद के आगोश में जा रही थी …मेरे दिल में आया की मैं उसके होठो को चूम लू लेकिन आज वो सही समय नही था ,मुझे अपनी बहन की बेहद ही फिक्र हो रही थी ,जिस तरह की मानसिक स्थिति उसकी थी वो प्यार से ज्यादा पागलपन बन चुका था ,मुझे पहले अपने प्यार के बल में ही उसे सही करना था और मैं इसके लिए कुछ भी करने को तैयार था………

“हद हुई है, अब हुई है, जीने मरने दीजिये,..
.छोड़कर दुनिया मुझे वैरागी बनने दीजिए,
घूम आया हुआ फ़क़त दुनिया की सारी भीड़ में ,भीड़ ही मैं बन न जाऊ , कुछ अपना सा करने दीजिये ………”
दिल से निकली एक शायरी जो ना जाने क्यो दिल के किसी कोने से निकल आयी ,
निधि अब भी मेरी बात को ध्यान से सुन रही थी ,उसने हाथ से अपना चहरा ठिका रखा था और उसकी निगाहे मुझे ही देख रही थी ,हम टेबल में बैठे हुए थे मेरे सामने नाश्ता लगा हुआ था लेकिन मेरे अंदर के कुछ निकलने को बेताब हो रहा था,पूर्वी और निशा दिनों ही मेरी बातो को ध्यान से सुन रहे थे…
“भइया आप क्यो बैरागी बनोगे ?/”
पूर्वी का स्वाभाविक सा प्रश्न था,
“बस कुछ अब सो जाना चाहता हु ,सब कुछ छोड़कर ..”
“ऐसा क्यो बोल रहे हो “निशा चौकी
“क्या बोल रहा हु”
“क्या छोड़ना चाहते हो आप ,अपनी जिम्मेदारियां ??
या हमे ..”
उससे पहले की निशा की आंखों में आंसू आ जाए मैं हँस पड़ा ..
“पागल हो तुम लोग तुम्हे क्यो छोड़ने लगा मैं ,मैं तो सोच रहा था की काम बहुत हो गया,क्यो ना कही छुट्टी मनाने चले ..”
देखते ही देखते मेरी दोनो परियों के चहरे खिल गए ,
“वाओ भइया यकीन नही होता की आप ऐसा बोल रहे हो “पूर्वी बोल पड़ी
“क्यो ?? क्यो यकीन नही होता “मैं चौका
“अरे आप तो वर्कोहोलिक(जिसे काम का नशा हो ) हो,मुझे लगा था की आप कभी छुट्टी नही लेते “पूर्वी फिर से बोल पड़ी लेकिन इस बार उसके होठो में मुस्कान थी ,
“तो डिसाइड करो की कहा जाना है मैं शाम को मिलता हु “
दोनो ही खुस हो गए …

“जगह तो अच्छी है लेकिन तुम जानते हो की मैं नही जा पाऊंगी “
काजल ने फोन में ही अपनी मजबूरी जाता दी ,मैं जानता था की वो नही जा पाएगी …इसीलिए तो ये प्लान किया था ..
“ओके जान लेकिन मैं बहनों को प्रोमिश कर चुका हु “
“ठीक है जानू ,आप सब चले जाओ 3 दिनों की ही तो बात है,ऐसे भी अभी मेरे पास बहुत सा काम है”
काजल ने एक गहरी सांस छोड़ी जैसे सच में काम से बहुत थक गई हो……

“तो तुम तैयार हो क्या सोचा तुमने “
मैं रश्मि के केबिन में बैठा था ,
“मेरा जवाब हा है ,”
मेरे जवाब से वो सुबह के फूलो की तरह से खिल गई
“थैंक्स देव “वो उठी और मेरे गले से लग गई ,पहली बात मैं उसके इतने पास था ,उसके बदन से आते हुए खुसबू ने मुझे बहुत शुकुन पहुचाया और मैं उसे एक अपनत्व का अहसास दिलाने हल्के से जकड़ लिया,ऐसा लग ही नही रहा था की वो मेरी बॉस है बल्कि ये लग रहा था की वो मेरी दोस्त है ,
“तो पेकिंग करना शुरू करो “
वो उछलते हुए बोली जैसे की बच्ची हो
“डोंट वरी वो आज ही हो जाएगा और कल से 3 दिनों के लिए मैं केशरगढ़ में “
वो बहुत ही खुस लग रही थी ,
“जानते हो ना तुम्हे किससे मिलना है …तुम उनसे मिल चुके हो “
उसने मुझे याद दिलाया
“हा जानता हु,डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवादवाले …उर्फ डॉ चुतिया से……. “
रश्मि का चहरा खिल चुका था …………

कार अपने रफ्तार में चल रहा था,पीछे पूर्वी बैठे बैठे ही सो गई थी ,मेरे मन में कई सवाल मचल रहे थे वही उसके साथ ही एक उत्सुकता भी मेरे मन में थी ,
मेरे बाजू में बैठी हुई निशा जैसे पूर्वी के सोने का ही इंतजार कर रही थी वो बार बार मेरे हाथो से अपने हाथो को टच करती और ऐसे दिखाती जैसे की वो बिल्कुल ही अनजाने में हो गया हो ,मैं गाड़ी चला रहा था और वो मेरे बाजू की सीट पर ही बैठी थी ,उसके इस हरकत से मेरे होठो में एक मुस्कान सी खिल जाती थी ,
ऐसे लग रहा था जैसे कोई जोड़ा अभी अभी बंधन में बंधा हो और एक दूसरे को लुभाने का प्रयास कर रहा हो ,मुझे काजल के साथ बिताये कालेज के समय की याद आ गई जब हमारे जिस्म नही मिले थे लेकिन मन मिल चुके थे,छोटी छोटी बातो पर शर्माना फिर हल्के से मुस्कुराना,छोटी छोटी सी वो शरारते,वो जवानी के सबसे अच्छे दिन होते है ,हल्की छेड़छाड़ और बहुत सारा प्यार ….
मैं वो सब सोच कर एक गहरी सांस ली ,और निशा की तरफ देखा ,काजल इसी उम्र की थी जब हम दोनो प्यार में पड़ गए थे,ये उम्र होती ही ऐसी है …..
मैं निशा को देखकर मुस्कुराया और वो बिल्कुल ही स्वाभाविक रूप से शर्मा गई …
मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे हम दोनो हनीमून में जा रहे हो ,वही एक अजीब सा डर और उत्साह दोनो ही एक साथ होता है…
शायद निशा मुझसे एक प्रेमी सा वर्ताव चाहती थी ,शायद वो चाहती थी की मैं ही आगे बढूं लेकिन क्या मैं ये कर पाऊंगा ,वो मेरी प्रेमिका नही थी वो मेरी बहन थी ,मेरी सगी छोटी बहन …..ये सब सोच कर मेरे शरीर में एक झुनझुनी सी भर गई ,बड़ी अजीब सी दशा थी मेरी ,मेरी बहन चाहती थी की मैं उसके साथ प्रेमियों जैसा वर्ताव करू,और मेरे दिल में भी उसके लिए एक आग उठने लगी थी ,बस डर यही थी की कही उस आग में हमारी मर्यादा ही ना जल जाए ,उस आग में रिश्तों की महीन डोर ही ना जल जाए ,हवस की आग बड़ी ही जालिम होती है वो कभी भी नही देखती की सामने कौन है …
मैं इस सोच में जैसे डूब ही गया ,मेरा शरीर हल्के से कांप गया था,लेकिन मेरे नजरो के सामने उस दिन का नजारा भी घूम गया जब मैं और निशा आगे बढ़ चुके थे ,उसके जिस्म का हर कटाव मेरे आंखों के सामने से होकर गुजर गया,मैं बुरी तरह से घबराया और तुरंत ही निशा की ओर देखा ..
वो मुझे ही घूर रही थी लेकिन उसकी आंखे कुछ और ही कह रही थी ,
क्या वो भी वही सोच रही थी जो की मैं सोच रहा था ,जैसे वो एक नशे में थी ,आंखे हल्की सी बोझील थी,क्या वो हवस के नशे में थी ????
इससे पहले मैं कुछ भी समझ पाता वो इठलाकर मेरे पास आ गई और मेरे बांहो को अपने हाथो से जकड़ कर अपना सर मेरे कंधे में ठिका दिया,उसने अपनी आंखे बंद कर ली और मुझे बहुत ही सुकून का आभास हुआ,
मैं आराम से गाड़ी चला रहा था जबकि वो मुझे किसी प्रेमिका की तरह जकड़े हुए थी ,वो एक हल्के गुलाबी से कसे हुए सलवार कमीज में थी,भगवान ने उसे बहुत ही सुंदर बनाया था ना सिर्फ सुंदर चहरा दिया था जबकि कसे हुए शरीर से भी नवाजा था,उसकी छातिया जैसे किसी पहाड़ सी उसके कमीज से बाहर झांक रही थी ,ना जाने उसने ये जानबूझ कर किए था या ये किसी और कारण से हुआ था लेकिन उसका दुपट्टा उसके सीने से गिरकर उसके गोद में आ गया था और उसके वो पहाड़ मुझे अपने तराइयों को दिखा रहे थे,उसने जो काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी उसकी इलास्टिक तक मुझे दिखने लगी थी ,मैं तो कुछ देर के लिए नजर जमा नही बैठा था जैसे पहली बार किसी महिला के यौवन को देख रहा हु ,
मैंने अपना सर झटका ,’ये मेरी बहन है ‘
मरे दिमाग ने मुझसे कहा ,लेकिन अगर ये मेरी बहन ना भी होती तो भी इसे देखने का कोई कारण मेरे पास नही था क्योकि मैंने कभी किसी पराई लड़कियों की तरह नजर नही गड़ाई थी ,मैं बहुत शर्मिला लड़का रहा हु ,हा ये बात अलग थी की कुछ लड़कियों के साथ मेरे संबंध बन गए है लेकिन वो सिर्फ एक इत्तफाक ही था और साथ ही साथ वो अभी किसी अलग तरह की लडकिया थी ,लेकिन मैंने कभी किसी अच्छी लड़की के लिए बुरा नही सोचा था ,मैं तो उन लड़कियों के लिए भी बुरा नही सोचा था ,लेकिन किस्मत ही ऐसी थी की लड़कियों की फ़ौज मेरे सामने आ गई ,और अब उनमे मेरी खुद की बहन भी शामिल हो गई थी ……
करीब 4 घण्टो के सफर के बाद हम केशरगढ़ के उस गेस्टहाउस में पहुच गए जंहा हमे रुकना था,कोई खास बड़ी जगह नही थी वो ,किसी कस्बे जैसा था लेकिन बहुत ही उन्नत लग रहा था ,हरियाली और साफ सफाई मेरी बहनों को ये जगह पसन्द आने वाली थी ,पास ही एक किला भी था और ऊंचे ऊंचे पहाड़ भी गेस्टहाउस से दिख रहे थे ,शहर से ऐसी जगह आने पर कुछ नही बस हरियाली ही दिख जाए तो काम हो जाता है ,मुझे बहनों को थोड़ा घूमना था और डॉ से मिलकर कुछ पता करना था ,वो भी मुझे यही मिलने वाले थे,
मैंने निशा को सीट में ही लिटा दिया था वो बैठे बैठे सो गई थी ,पूर्वी तो पहले से ही सोई हुई थी ,गेस्टहाउस पहुचते ही मैंने उन्हें उठाया …

“आइये साहब हम आपकी बहुत ही देर से प्रतीक्षा कर रहे थे ,”एक अधेड़ सा आदमी भागते हुए हमारे पास आया,ये सरकारी गेस्ट हाउस था,कुछ पुलिस के लोग भी दिख रहे थे ,सभी मुझे इतनी इज्जत दे रहे थे जैसे मैं कोई ऑफिसर हु ,शायद डॉ ने ही ये अरेंजमेंट किया था,पता नही डॉ मुझे क्या दिखाने वाला था और क्या समझने वाला था लेकिन इसके लिए मैं बहुत ही उत्साहित था साथ ही रश्मि भी ,उसने जल्दी से जल्दी मुझे डॉ से मिलने का आदेश दिया था,पता नही केशरगढ़ क्या क्या खेल खेलने वाला था,एक तरफ मेरी बहन थी जो मुझे अपना प्रेमी या शायद पति मान बैठी थी और दूसरी तरफ डॉ के द्वारा बताया जाने वाला रहस्य था …मैं एक गहरी सांस लेकर छोड़ा और गेस्टहाउस के अंदर जाने लगा ………..

कमरे की बत्तियां हल्के प्रकाश फैला रही थी और मैं बेचैन सा लेटा हुआ छत को निहार रहा था,आज पूर्वी और निशा दोनो ही बाजू के कमरे में सो चुकी थी ,मुझे तो लगा था की वो मेरे साथ सोने की जिद करेंगी लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ था…
अचानक दरवाजा खुला ,जैसा मुझे यकीन था निशा अंदर आयी वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ,उस हल्के रोशनी में भी उसके जिस्म का हर कटाव मुझे साफ साफ दिखाई दे रहा था,वो मेरे पास आकर लेट गई थी ,उसने एक बहुत ही पतली सी नाइटी डाल रखी थी ,उसे देखकर मैं थोड़ा घबराया क्योकि मुझे पता था की आज हमे रोकने वाला कोई भी नही है ,लेकिन मैंने खुद को वक्त के हाथो में सौपने की ही ठान ली ,
उसके आंखों में एक अजीब सा नशा था जो आजतक मैंने किसी भी दूसरी लड़की के आंखों में नही देखा था,एक अजीब सी चाहत और जुनून उसकी आंखों में दिख रहा था,
अगर वो मेरी बहन ना होकर मेरी बीवी होती तो शायद मैं उसे देखकर खुस हो जाता लेकिन ये नशा ना जाने क्यो मुझे डरा रहा था…
“नींद नही आ रही है क्या “
मैंने उससे पूछ लिया ,वो मेरे बांहो में आके सो गई थी,
“कैसे आएगी भइया जब आप मेरे पास नही हो “
उसकी आवाज थोड़ी भारी थी जैसे उसने अभी अभी गहरी सांस ली हो शायद उसकी सांसे भी तेज हो रही थी ,वो मेरे पास आने से पहले ही उत्तेजना के शिखर में थी …
“क्या चाहती हो “मैं अनायास ही बोल गया …
“भइया अब मैं कुछ भी नहीं करना चाहती ,मैं बस आपकी होना चाहती हु ,पूरी तरह से आपकी ,मुझे नहीं पता मैं क्या करूँगी पर मुझे इतना पता है ,जो भी होगा वो मेरा प्यार होगा,’
मैंने सजल नैनों से उसके मस्तक पर एक चुम्बन का तिलक किया ,और अपने होठो से उसके होठो को मिला दिया और हमारे बीच की सभी दूरिय उसी क्षण से ख़तम हो गयी ,हम अब एक ही थे और कोई दूजा ना था ,हम बस अपने को एक दूजे में समेटने की पूरी कोसिस कर रहे थे,,, ना जाने कितने समय तक हम एक दुसरे के होठो को चूसते रहे थे हमारी सांसे थी पर मेरे लिंग में कोई भी अकडन नहीं थी और ना ही इसका भान ही रह गया,समय जैसे रुक सा गया हो ,हम एक दूजे को अपनी बांहों में भरे बस खो जाना चाहते थे ,मुझे तब थोडा होश आया तब मेरा हाथ निशा के स्कर्ट के अंदर घुस आया था, और उसकी पीठ को सहला रहा था ,उसकी नंगी पीठ पर अपने हाथो को चलते हुए मैंने उसके स्कर्ट को निकल फेका मेरा सीना पहले से ही नग्न था ,निशा के नर्म स्तनों के आभास ने मुझे फिर से किस के खुमार से बहार निकला मैंने अपने हाथो से उसे दबाना शुरू किया पर होठो को नहीं छोड़ा निशा ने अपने हाथो को मेरे सर पर कस लिए थे और पूरी शिद्दत से मेरे होठो को अपने में समां रही थी ,उसे शायद मेरे हाथो के हलचल तक का आभास नहीं हो रहा था ,पर जब मैंने पूरी ताकत से एक वक्ष को दबाया ,
‘आहह भइया थोडा धीरे ,’निशा साँस लेती हुई बोल पायी उनकी सांसे उखड़ी हुई थी ,वो साँस ले पाती इससे पहले ही मैंने फिर से अपना मुह उसके मुह में घुसा दिया ,मैंने उसे पीठ के सहारे लिटाया और उसके ऊपर छा सा गया,मैंने दोनों हाथो से उसका चहरा पकड़ा और उसके होठो को छोड़ा फिर ,फिर उसके गाल ,उनकी आँखे उनकी नाक ,उसका माथा ,आँखों की पुतलिया,गरदन ,कन्धा ,छाती ,उजोर ,पेट ,नाभि ,…मैं बस चूसता गया मुझे नहीं पता था की मैं क्या कर रहा हु ,ना निशा को ही पता था,हम बस खो से गए थे मैंने फिर उसके उजोरो को पकड़ा और उसके उन्नत निपलो को अपने होठो में समां लिया ,निशा बस छटपटा रही थी ,
‘आः आःह भइया,आः आः आआअह्ह्ह्ह भाआआआआआई ,’मैंने अपने मन भर उसे चूसा जब तक की वो लाल नहीं हो चुके थे, नीचे मुझे उसकी पेंटी के ऊपर से जन्घो के बीच का गीलापन मुझे दिखाई दिया,मुझे अपने जांघो के बीच एक विशाल खम्भे सा दिखाई दिया ,जिसकी अकडन से अब मुझे दर्द होने लगा था,मैंने उसे आजाद कर दिया ,मैंने पेंटी के छोरो को अपने दोनों हाथो से पकड़ा,मैंने निशा की और देखा निशा काप रही थी ,वो एक दिवार थी जो मुझे हमेशा के लिए गिरानी थी ,जिसे गिराकर ही मैं निशा को अपना बना सकता था,
“इजाजत है “
मैंने निशा को छेड़ा
“अब भी इजाजत लोगे क्या “
मुस्काते हुए उसने पूछा और मुझे अपने ऊपर खीच लिया मेरे होठो को फिर अपने होठो में भर लिया ,
“मेरे भइया ,”
निशा ने मेरे हाथो को पेंटी के ओर ले गयी वो मेरे आँखों में ही देख रही थी उसके चहरे पर अब भी वो मुस्कान थी और आँखों में वही प्यार ,मेरे हाथो में दबाव बनाते वो पेंटी को निकल दी और अपने पैरो से निकाल निचे फेक दिया ,वो अब मेरे सामने नंगी थी ,पर मुझे इसकी फिकर ही नहीं थी ना ही मैंने ये देखने की जहमत की ,मैं तो फिर निशा के होठो को चूसने लगा ,हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे मैं उसके ऊपर लेटा था ,और निशा अपनी आँखे बंद किये बस खोयी हुई थी ,मेरा अकड़ा लिंग निशा के गिले योनी में हलके हलके घिस रहा था,थोडा गीलापन से भीग कर लिंग भी फिसलने लगा मैंने एक दबाव दिया पर वो जन्घो से जा टकराया ,ऐसा कई बार होता रहा पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था ,क्योकि ये बिलकुल स्वाभाविक तौर से हो रहा था ,मैं कोई मेहनत नहीं कर रहा था,मैंने तो निशा को किस करने में डूबा हुआ था,पर निशा ने मेरे लिंग को पकड़ा जैसा की उसका पहला मौका नहीं था उसने उसे सही जगह लगाया ,वहा पहुचकर वो चिपिचिपा गिलापण मेरे लिंग को फिर से घेर लिया ,मैंने स्वभावतः फिर झटका मारा लेकिन ये क्या मेरे मुह से एक चीख सी निकली जो निशा के होठो में खो सी गयी ,मेरी लिंग की चमड़ी ने इस घर्षण का आभास किया था लेकिन उस अतिरेक आनद से बढकर मेरे लिए कुछ भी नही रह गया था,मैंने फिर एक जोरदार झटका मारा और ,
‘आआह्ह्ह्ह भा ईई या भा ईईईईईईई या ‘
‘निशा आआआआ आह्ह्ह्ह ‘हमारा मिलन हो चूका था पर अभी तो उफान की शुरुवात भर थी ,
मैंने और निशा ने आँखे खोलकर एक दूजे को देखा ,हम एक रहत की साँस ले रहे थे ,हमारी आँखे मिली दोनों के चहरे पर एक मुस्कान फैली और मैंने फिर एक जोरदार धक्का मार दिया ,
‘अआह्ह्ह ‘दोनों के मुह से निकला और दोनों एक दूजे को देख हस पड़े ,,,मैंने धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा ,मेरा लिंग निशा के योनी रस से पूरी तरह से गिला हो चूका था और हम फिर एक गहन तन्द्रा में प्रवेश कर रहे थे जहा बस प्यार था और दुनिया की कोई शय नहीं..
हमारी आँखे फिर बंद होने लगी… मैं तो किसी भी तरह से आंखे खोल भी पा रहा था पर निशा की आँखे इतनी बोझिल हो चुकी थी वो अपनी आँखे खोल ही नहीं पा रही थी ,मेरे धक्के एक लय पकड़ चुके थे और हमारी सांसे और आंहे ,उसी लय में चल रहे थे ,समय खो चूका था ,और सारा जहा भी खो चूका था ,हम एक दुसरे को काट रहे थे ,चूस रहे थे चूम रहे थे ,पर हमें नहीं पता था की हम क्या कर रहे है ,कोई कण्ट्रोल हमरे ऊपर नहीं था ,ना हमारा ना और किसी का ,पहले धीरे धीरे आःह आह्ह से लेकर तेज तेज सांसे और आह उह ओह तक पहुच जाते फिर धीरे- मध्यम- तेज ये सिलसिला ना जाने कब तक चलता रहा ,हमें आँखे खोल एक दूजे को देखने की फुर्सत नहीं थी ,जैसे किसी ने कहा है ,’
बिना किसी के परवाह के ,बिना किसी मांग के ,बिना किसी तलाश के ,बिना किसी चाह के ,हम थे और बस हम थे,,,…एक दूजे में ऐसे घुल रहे थे की पता लगाना भी मुस्किल था की मैं और तू अलग भी है ,बस मेरा मुझमे ना रहा जो होवत सो तोर ,तेरा तुझको सोपते क्या लागत है मोर…
सांसो में अपनी अंतिम गहराई तक हमें डूबा दिया ,जब लक्ष्य करीब आने को थी तो बस थोड़ी देर के लिए सांसे रुक गयी मेरे अंदर से एक विस्फोट हुए ना जाने कितनी ताकत से मैं धक्के लगाये जा रहा था लेकिन उस विस्फोट ने मुझे शांत कर दिया एक गढ़ा सफ़ेद ,चिपचिपा सा द्रव्य ,मेरे अंदर से निकल निशा की योनी को भिगो दिया वही निशा की योनी से ना जाने कितनी बार फुहारे निकल चुकी थी ,लडकियों की एक खासियत होती है की अगर वो प्यार की गहराई का आभास कर पायी और उससे सेक्स करे जिसे वो प्यार करती है तो वो एक नहीं कई चरम सुख (ओर्गोस्म )का अनुभव आसानी से कर पाती है ,एक सम्भोग में लगभग 7 तालो का ओर्गोस्म संभव है ,ऐसा शोधो ने पता लगाया है …निशा ने भी आज किसी गहरे तालो पर इसका अनुभव किया था ,और मैंने भी ,तूफ़ान तो शांत हो चूका था पर जैसे हम जम ही चुके थे ,हमारे शरीर एक दूजे से अलग ही नहीं हो रहे थे ,हम पसीने से भीगे थे हमारी सांसे उखड़ी थी ,पर हमारे चहरे में एक परम शांति का आभास था,सबकुछ शून्य हो चूका था ,खो चूका था ,इतनी शांति का आभास मैंने कभी नहीं किया था,ऐसा लग रहा था जैसे मैं खाली हो चूका हु ,बिलकुल हल्का ….हम एक दूजे के चुमते रहे हमारे होठ जैसे कभी एक दूजे से ना बिछड़ेंगे वैसे ही चिपके रहे ,हमारे शरीर इक दूजे के पसीने से सने थे ,चहरा और होठ एक दूजे की लार से सने थे और निशा की योनी से मेरा वीर्य अब बहार आने लगा था ,मेरे कमर अब भी हलके हलके चल रह थे…….

लिंग की चमड़ी में वो कोमल सा अहसास,
“आह “
मेरे मुह से अनायास ही निकले हुए शब्द थे…….
मैं अभी अर्धसुषुप्त अवस्था में था,ना जगा ही था ना ही पूरी तरह से सोया था,अपने लिंग की कसावट कुछ महसूस हो रही थी ,
ना जाने समय क्या हुआ था लेकिन मुझे लग रहा था की मैं सपनो में खोया हुआ हु,लेकिन धीरे धीरे ही मुझे अहसास हुआ की मैं जाग रहा हु ,और सचमे कोई गीली सी और कसी हुई चीज मेरे लिंग में घर्षण कर रही है…..
मेरे हाथ अनायास ही नीचे चले गए सोचा की सपने में शायद मजा आ रहा हो तो हाथो से ही शांत कर लू,
लेकिन ये क्या ????
नीचे किसी के कोमल बालो का संपर्क मेरे हाथो में हुआ ,मैं थोड़ा चौका …
“:आह”
मजे के अतिरेक में फिर के मेरे मुह से निकला…
ओह क्या अहसास था,मेरी लिंग की चमड़ी को चूसा जा रहा था,जिससे वो फैल गई थी और मेरे हाथ उस सर पर रख गए जो की उसे चूस रही थी …
मुझे याद आया की मैं कहा हु और वो कौन हो सकती है जो मुझे ये सेवा दे रही थी ,कमरे की खिड़कियों से आती हुई धूप से इतना तो समाज आ चुका था की ये मेरे जागने का समय है ,मैं अपने सर को हल्के से उठा कर देखने की कोशिस की …..
मेरे इस हलचल से निशा कोई भी समझ आ गया था की मैं जाग चुका हु,उसने अपना सर उठाया और हमारी आंखे मिली…………
जैसे नए जोड़े सुहागरात के बाद शर्मा रहे हो ,निशा के चहरे में मुझे देखते ही लाली आ गई ,लेकिन मैं उत्तेजित था,मैंने उसे प्यार से देखा और अपना हाथ उसके सर पर रखकर उसे हल्के से दबा दिया ,वो जैसे ,मेरा इशारा समझ गई थी और उसने फिर से मेरे लिंग में अपना मुह गड़ा दिया ….
कल तक जिस बहन के लिए मैं दुनिया की हर खुसी लाने को तैयार था आज वो मेरे जांघो के बीच मेरे लिंग को चूस रही थी ,…
मैं भी क्या करता असल में यही तो उसके लिये जीवन की सबसे बड़ी खुसी थी …..
जिस बहन को अपने बांहो में झुलाया था,जिसके इज्जत की पिता की तरह रक्षा करने की कसम हर रक्षाबंधन में खाई थी आज उसकी उसी इज्जत का मैं लुटेरा बन गया था,या शायद ये कहु की मैं उसकी इज्जत का मलिक था…….
जिसके कदमो में दुनिया बिछाने के ख्वाब देखे थे वो आज खुद मेरे लिए नंगी बिछी पड़ी थी ,……

गीले गीले होठो की लार मेरे लिंग से मिलकर मुझे सुकून दे रही थी और ना जाने निशा को क्या सुख दे रही थी की वो और भी जोरो से इसे चूसने लगी ,मैं अपने चरम में पहुचने वाला था…
“ओह मेरी रानी बहन चूस भइया का …….ओह नही “
मेरे मुख से ना जाने क्यो ये निकलने लगा था ..
वो इस बात के परेशान होने की बजाय और भी मस्ती में आ जाती थी और जोरो से चूसना शुरू कर देती थी ,उसके होठो से लार नीचे टपकने लगा था वही मेरी हालत और भी खराब हो रही थी ..
सांसे फूल रही थी और उसके मुख का चोदन कर रहा था,मैं अपने कमर को उठा उठा कर उसे स्वीकृति दे रहा था और वो भी अपने भाई के लिंग को पूरी तल्लीनता से चूस रही थी ,उसे देखकर तो ऐसा लग रहा था की उसे फिर खाने को कुछ ना मिलेगा और यही धरती पर एक ही चीज है जिसे चूसकर वो अपनी भूख मिटा पाएगी
वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी …..
मैंने उसे अपने ऊपर आने का संकेत दिया ,
वो मेरे ऊपर चढ़ गई ,
मैं उसके होठो को अपने होठो में भरकर चूसने लगा,मेरे ही वीर्य के कुछ बून्द मेरे ही होठो में आ रहे थे……
हम दोनो ही मुस्कुरा उठे ,ये वो पल था जब हमारे बीच की सभी दीवारे ढह गई ,
सेक्स तो उत्तेजना में भी हो सकता है लेकिन जब बिना किसी अवरोध और उत्तेजना के भी जिस्म मिल जाए और ग्लानि की जगह जब होठो की मुस्कुराहट ले ले तो समझो की दीवार गिर गई

“केशरगढ़ के महल उस खण्डर में जाकर के क्या करोगे साहब “
उस छोटे से और भद्दे से आदमी ने कहा ..
“तुझे क्या करना है तू चल रहा है की नही “
मैंने उसे घूरा ,ये गाइड के रूप में मुझे दिया गया था ये हमे पूरा केसरगढ़ घुमाने वाला था,”
“अरे साहब नाराज क्यो होते है छलिए छलिए लेकिन वँहा घूमने लायक कोई जगह नही है “
मैंने उसे फिर से घूरा क्योकि मेरी बहने उसकी बात को सीरियसली ले सकती थी लेकिन मुझे डॉ ने वही मिलने को कहा था,
“तू चल ना यार क्या नाम है तुम्हारा “
“छेदीलाल छिछोरे “
“क्या हा हा हा “निशा जोरो से हँस पड़ी ,पूर्वी के साथ साथ मैं भी मुस्कुरा उठा ,
“ये कैसा नाम है छिछोरे ??”
लेकिन उस शख्स ने हमारी बात का बिल्कुल भी गुस्सा नही किया जैसे उसे पता ही हो की हम ऐसा ही कुछ रिएक्ट करेंगे ,
“वो क्या है सर मैं छ को छ बोलता हु “
उसने अपने बड़े बड़े सड़े हुए दांत हमे दिखाए
“वो तो सभी छ को छ ही बोलते है “
पूर्वी बोल पड़ी
“नही मेडम आप समझी नही मैं छ को छ बोलता हु “
हम सभी कन्फ्यूज़ थे तभी एक स्टाफ वाले ने हमे देख लिया ,
“सर वो ये कह रहा है की वो च को छ बोलता है ,और इसका नाम छेदीलाल चिचोरे है “
“बड़ा अजीब सरनेम है है यार तुम्हारा “
वो फिर से अपने सड़े हुए दांत मुझे दिखा दिया ,मेरी बहने थोड़ी सी हँसी लेकिन इस बार ज्यादा नही …

****

“साहब यंहा पर किले में पुरातात्विक स्थल है अगर आप घूमना चाहे “
हम केशरगढ़ के किले में पहुचे ही थे ,और एक व्यक्ति ने मुझसे कहा उसने आंखों से इशारा किया किया की मेरे साथ चलिए ,मैंने बस हा में हल्के से सर हिलाया ,
“अरे साहब वो भी खंडहरों को क्या देखना ,वँहा पर गार्डन है जंहा पर सेल्फी पॉइंट है ,वँहा चलते है “
छिछोरे ने कहा ,जिससे मेरी बहने खुस हो गई
“हा भइया,एक तो यंहा बस खण्डर है और आप यंहा ले आये”
पूर्वी ने उसकी हा में हा मिलाया ,
“ऐसा करो तुम लोग गार्डन जाओ मैं जरा देखु की कौन सा पुरातात्विक स्थल है यंहा पर ,तुम्हारी भाभी से मैंने बहुत नाम सुना है इसका “
दोनो छिछोरे के साथ गार्डन की तरह चल दिए जबकि मैं खण्डरहो की तरफ …
अंदर जाने पर मुझे डॉ दिखाई दिए ,उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपने पास बुलाया ,उनके पास ही एक अधेड़ महिला खड़ी थी ,मुझे लगा की मैंने इसे कही देखा है,वो कोई विदेशी लग रही थी ..
“आओ आओ देव ,इनसे मिलो ये है यंहा की खोजकर्ता मेडम मलीना “
ओह याद आया की मैंने इन्हें कहा देखा है ,
“हैल्लो मेडम मैंने आपकी किताब पड़ी है ‘डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़’ उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थी मैंने,मेरी वाइफ आपकी किताबो को बहुत ही चाव से पढ़ती है “
वो मुस्कुराई ,
“आजकल के बच्चे भी इन सबमे इंटरेस्ट रखते है यकीन नही होता “वो मुस्कुराते हुए बोली
“मलीना ये देव है ,देव….श्रुति का पति “
मै चौक गया की डॉ ये क्या बोल रहे है ,लेकिन मलीना मेडम का चहरा मेरे ऊपर ही अटक गया ,उनकी मुस्कुराहट जाने कहा गायब हो गई और आंखों में आंसू आ गए ,उन्होंने मेरे गालो को अपने हाथो से पकड़ लिया था और मेरे माथे को चूमने लगी,मैं परेशान था की ये हो क्या रहा है,लेकिन मूझे उनके उनमे एक बहुत ही गहरे अपनत्व का अहसास हो रहा था…
मैं आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,
“अब समझ आया की वो मेरे किताबो को क्यो पढ़ती है ,मेरी ही तो बेटी है आखिर माँ से दूर कैसे रहेगी “
मलीना फफक कर रो पड़ी ,मेरा मुह खुला का खुला रह गया मैं कभी डॉ को देखता तो कभी मलीना को …
काजल ने मुझे अपनी माँ की तस्वीर दिखाई थी लेकिन ये वो तो नही थी ये तो कोई और ही थी …..डॉ ने मुझे आंखों से बस शांत रहने को कहा ,
“कैसी है वो उसे मेरी याद ही नही आती ,इतना गुस्सा की वो मुझसे मिलने भी नही आ सकती ,2 साल हो गए उसे देखे हुए ,शायद मुझे उसकी सजा मिल रही है जो मैंने अपने पिता के साथ किया था ,उनसे दूर जाकर “
डॉ ने उन्हें सम्हाला ,और मुझसे दूर जाकर उनसे कुछ बात करने लगे ,वो थोड़ी शांत हुई …
“अच्छा तो तुम अपनी बहनों के साथ आये हो कहा है वो सब “
इस बार मलीना के होठो पर एक मुसकान थी …….

मैं अभी अपनी बहनों के साथ मलीना मेडम के घर में बैठा हुआ था,वो मेरी बहनों से ऐसे घुल गई थी जैसे की वो उन्हें बहुत सालो से जानती हो ,डॉ निशा के नजर में आये बिना ही वँहा से जा चुका तथा शायद निशा को डॉ की जानकारी थी,मलीना मेडम हमे लंच के लिए अपने साथ ही ले आयी थी,मैं सोफे में बैठा इधर उधर देख रहा था वही मेरी बहने मेडम से गुफ्तगुह करने में व्यस्त थी ,मेरी नजर एक तस्वीर पर पड़ी और मेरी आंखे चौड़ी हो गई ,अभी तक तो मुझे डॉ और मलीना की हरकते ऐसे भी समझ नही आ रही थी लेकिन इस तस्वीर से तो मैं और भी परेशान हो गया था..
तस्वीर में एक लड़का और दो लडकिया थी ,अजीब बात थी की मैं दोनो ही लड़कियों को पहचानता था,लड़के के एक बाजू में खड़ी थी मलीना मेडम और दूसरे में जो खड़ी थी उसे मैं अभी तक काजल की माँ के रूप से ही जानता था,जी हा मुझे काजल ने उसी औरत को अपनी माँ कहा था,जो की उसके बचपन में ही गुजर गई थी ,बीच का शख्स मेरे लिए अनजान था जिसके हाथो में एक छोटी सी बेबी थी ,उसकी आंखे मुझे काजल की याद दिलाती थी ……..
क्या वो सच में काजल है ???
अगर ऐसा है तो क्या काजल मलीना की बेटी है या फिर उस औरत की जिसे काजल अपनी माँ कहती है,क्या काजल का नाम काजल ही है या फिर श्रुति जैसा की मलीना ने कहा ….
बहुत से सवाल मेरे दिमाग में थे ,सबसे बड़ी ये बात थी की अगर मलीना सच बोल रही है तो ऐसी क्या मजबूरी हो गई की काजल को अपना नाम बदलना पड़ा..और मुझसे ये बात छुपानी पड़ी ……..

“ये किसके साथ फ़ोटो खिंचाया है आपने “
काजल वो फ़ोटो देखकर बहुत ही उत्त्साहित लग रही थी जो की निशा ने अपने वाट्सअप के स्टेटस में डाला था,जिसमे निशा ने मेरे,पूर्वी और मलीना मेडम के साथ सेल्फी ली थी ..
“पहचानो ..तुम इन्हें जानती हो “
“हा जानती तो हो मैं इन्हें ,इन्ही की तो पुस्तके पढ़ती रही हु मैं ,मेडम मलीना “
काजल ने ऐसे कहा जैसे पुस्तको के अलावा मलीना से उसका कोई संबंध ही नही था,क्या वो सच में झूट बोलने में इतनी माहिर थी की अपनी माँ को पहचानने से भी इतने सफाई से इनकार कर दे …
“हम्म ये केशरगढ़ के किले में मिली हमे ,निशा और पूर्वी सके अच्छी ट्यूनिंग हो गई तो उन्होंने अपने घर खाने पर बुला लिया …”
“वाओ बहुत ही अच्छा “
झूट बोलने वाला कितना भी महारथी क्यो ना हो कुछ कमियां तो हर इंसान में होती है,काजल की आवाज थोड़ी धीमी हो चुकी थी शायद वो अपने भरे हुए गले को छुपाने की कोसीस कर रही थी ,मैंने उसे थोड़ा और कुरेदने की सौची शायद मैं जान पाउ की वो सच में भावनाओ में है या नही ..
“मैंने उन्हें तुम्हरे बारे में बतलाया वो बहुत खुस हुई की तुम उनके किताब की दीवानी हो “
काजल थोड़ी देर को चुप थी,
“फ़ोटो भी दिखाई क्या मेरी “
“ओ यार भूल गया ,कल दिखाऊंगा “
“नही ……..वो नही क्या जरूरत है “
लेकिन तब तक उसकी नही ने मेरे दिमाग में पूरा मामला साफ कर दिया था ,वो नही को थोड़ा जोर से बोल गई थी जिसका शायद आभास उसे भी हो गया था ,दोनो में कुछ तो संबंध जरूर है वरना कहा पुरातत्व विज्ञान और कहा वो मैनेजमेंट की लड़की ,मुझे तो पहले भी ये बात अजीब लगती थी की क्यो काजल उनकी और सिर्फ उनकी ही किताब पढ़ती है ..
“हम्म्म्म ओके …….”
“जान आपकी बहुत याद आ रही है “
काजल ने बात को बदलने की कोशिस की ,मुझे उसकी आवाज में वो भारीपन मिल गया जिसकी मुझे तलाश थी ,समझने में कोई भी देरी नही लगी की ये बातो को घूमना चाहती है वरना उसे मेरी याद आएगी और वो इतनी दुखी हो जाएगी की उसकी आवाज ही भर जाए ये तो मुझे मुमकिन नही लगता था ,,,,
“तुम भी आ जाओ फिर यंहा ,अच्छी जगह है ,एक दो दिन और रुकने की सोच रहा हु “
“नही ..मत रुको जल्दी आ जाओ ,,मैं अपने काम कर कारण वँहा नही जा सकती “
वो मुझे आकर्षित करने के लिए अपनी आवाज को नशीली बनाने लगी …
“आ जाओ ना मुझे मसलने “उसने बड़ी ही सेक्सी अदा में कहा ..
“तुम्हे मसलने के लिए तो खान वँहा बैठा है “
मैंने एक व्यंग कर दिया जिससे वो बुरी तरह से बौखला गई
“तुम …तूम ना ….कितनी बार कहा की ये सब को हमारे बीच में मत लाओ …”
उसके आवाज से नाराजगी साफ साफ थी..मैं जोरो से हँसने लगा ..
“अच्छा छोड़ो उसे मैं एक दो दिन में ही आता हु ,और तुम्हे कुछ चाहिए यंहा से …”
“बस तुम आ जाओ और कुछ भी नही चाहिए “
काजल की आवाज में वो गर्मी अब नही रही ,मुझे लगा कि शायद मुझसे कोई गलती हो गई है .
“नाराज हो गई क्या ,लव यु जान “
मैं अपनी आवाज नरम करके बोलने लगा ..वो हल्के से हँसी
“बहुत सारा लव यु ….ऊऊऊम्म्मम्माआआ “
वो खुस थी और उसकी आवाज में चहक वापस आ गया था ..
“अब जल्दी आओ ,बहुत सी बाते करनी है तुमसे ..”
मैं काजल से बात करके पलटा ही था की दरवाजे में मुझे निशा दिखाई दी ,वो अपने बालो में उंगलिया फिराते हुए मुझे घूर रही थी ,उसके होठो में एक कातिल सी मुस्कान थी और वो अपने पारदर्शी कपड़ो से अपने जिस्म की नुमाइश कर रही थी ,जवानी के इस मोड़ पर उसके जिस्म में पूरा भराव आ चुका था और वो कपड़े को फाड़ डालने को बेताब हो रहा था,अब वो मेरी बहन नही रह गई थी की मैं उसके जिस्म के भराव को ना निहारु…
वो इठलाते हुए मेरे पास आयी ,और अपनी बांहे मेरे गले में डालकर झूल गई ….
“हम यंहा पर हनीमून मनाने आये है और आप मेरी सौत से लगे हुए हो “
उसकी मुस्कान में नाराजगी भी मिक्स थी ,मैंने उसे कुछ बोलना सही नही समझा और अपने होठो को उसके होठो से मिला दिया ,
सभी बाते बस तूफान में बह गई वो प्यार का तूफान था ये की हवस का ??????
मुझे लगता है की वो हवस का ही तूफान था क्योकि प्यार का रिश्ता तो हम पीछे छोड़ आये थे ………….

जिस्म की प्यास बुझ चुकी थी और मैं अपनी खिड़की से बाहर झांक रहा था ,बाहर मुझे छिछोरे दिखाई दिया ,मैंने अपनी सिगरेट सुलगाई और उसकी हरकतों को देखने लगा,
वो नाम का ही नही काम का भी छिछोरा था ,
इसी रेस्टरूम में काम करने वाली एक महिला को पकड़े हुए दिखाई दिया ,वो दोनो झाड़ियों के पीछे थे लेकिन मैं दूसरी मंजिल में खड़ा हुआ था ,गार्डन की झाड़ियों के पीछे का दृश्य देखकर मैं अपनी हँसी रोक नही पाया ,क्योकि वो महिला शादीशुदा थी और छिछोरे के बीवी तो नही थी ……
“छेदीलाल “
मैं जोरो से चिल्लाय जिसे सुनकर वो दोनो ही अलग हुए और मुझे ऊपर खड़ा देख जैसे उनके प्राण ही सुख गए …
महिला दौड़ती हुई भागी वही छेदीलाल बस मूर्ति बना हुआ मुझे ताक रहा था ,मैं खिलखिला के हँस पड़ा ,मैं अपनी शर्ट पहन नीचे आया ही था की छेदीलाल मेरे पाव में गिर गया ..
“मुझे माफ कर दीजिये दीजिये साहब,किसी को मत बताइयेगा वरना नॉकरी जाएगी वो अलग लेकिन इसका पति मार मार के मेरा भर्ता ही बना देगा “वो गिड़गिड़ाने लगा और मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई
“अच्छा पहले बोल की चंदू के चाचा ने चंदू के चाची को चांदी के चमचे से चटनी चटाई ..”
मैं मुस्कुराकर उसे देखने लगा ,वो हड़बड़ाया सा मुझे देखने लगा
“छंदू के छाछा ने छंदू के छाछि को छांदी के छमचे से छटनी छटाई”वो बड़ी ही मुश्किल से बोल पाया
मैं जोरो से हँस पड़ा और उसका मुह मुरझा गया ..
“अच्छा चल मेरा एक काम कर तेरा कमरा कहा है “
वो मुझे आश्चर्य से देखने लगा ,मैं उसे लेकर उसके कमरे में चला गया
एक छोटा सा रूम था उसका ..
मैंने मोबाइल निकाल कर उसे काजल की तस्वीर दिखाई
“इसे पहचानता है “उसकी आंखे बड़ी हो गई थी जिसका मतलब मुझे समझ आ रहा था की ये इसे जानता है …
……………..
“साहब आपके पास इनकी तस्वीर कहा से आयी “
“तू वो बता जिसे मैं पूछ रहा हु “
“जी साहब जानता हु ..”
वो हड़बड़ा रहा था …
“कौन है ये “
“श्रुति श्रुति मेमसाहब”
उसकी जबान बुरी तरह से लड़खड़ा रही थी लेकिन मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल चुका था की काजल असल में कौन है ..इससे पहले की मैं और कुछ पूछता मेरा मोबाइल बज उठा ,नंबर डॉ का था ..
“उससे पूछने से तुम्हे तुम्हारे सवालों का सही जवाब नही मिलेगा ,कल तुम मुझसे मिलो अकेले में …”
उन्होंने पता तो बता दिया लेकिन मैं और भी चकित रह गया क्योकि डॉ मुझपर भी नजर रखे हुए था …..

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