गर्मियों की छुट्टियों के बाद होस्टल आये हुए मुझे 20 दिन ही हुए थे, और मेरी मां इंदिरा मेरी बांहों में थी। स्टेशन पर ही सैकड़ों लोगों के सामने मां ने मुझे गले लगाया और धीमी आवाज़ में कहा
“बेटा, बूर में बहुत खुजली हो रही है जल्दी से होटल ले चल और चोद।” तभी किसी और की आवाज़ आई, “मैडम, होटल की कार आ गई है चलिए।”
एक आदमी की आवाज़ सुन मां ने मुझे अलग किया। लेकिन मेरा हाथ अपने हाथ में रखा।
मां: आनंद जी, ये मेरा बेटा अमित है यहीं के कॉलेज में पढ़ता है। और बेटा, ये आनंद जी हैं, तुम्हारे बाबू जी के असिस्टेंट है। यहां आने-जाने और रहने का सारा इंतज़ाम इन्होंने ही करवाया है।
मैंने आनंद को ध्यान से देखा। 26-27 साल का था, देखने में भी बढ़िया था। मालूम नहीं मुझे लगा कि मेरी मां मुझसे चुदवाने नहीं इस मज़बूत से दिखने वाले जवान आदमी के साथ रंगरलियां और खुल कर चुदवाने आई थी। ख़ैर आनंद ने मां का सामान कार में रखा। वो कार में ड्राइवर के बग़ल में आगे बैठा और मैं पीछे की सीट पर मां के बग़ल में बैठा। कार एक बढ़िया फाईव स्टार होटल के सामने रुकी। रिसेप्शन में आनंद ने ही सारी एंटरी की। वेटर ने हमें रूम में पहुंचाया।
मां: थैंक्यू आनंद। मुझे जब तुम्हारी ज़रूरत होगी बुला लूंगी।
आनंद: भूलिएगा मत, शुक्रवार को हमें मसूरी में रहना है और शनिवार की रात वापसी है।
मां ने मेरे सामने उसका हाथ पकड़ लिया।
मां: तुम हो तो मुझे याद रखने की क्या ज़रूरत है। शुक्रवार की सुबह मुझे अमित के होस्टल से ही पिक कर लेना। होटल में बोल दो कि हम कल सुबह चेक आउट करेंगे, और हां, कल सुबह होस्टल जाने के लिए एक टैक्सी भी चाहिए।
बोलते हुए मां आनंद के साथ रुम के बाहर गई। अमित ने नहीं देखा कि आनंद ने इंदिरा को बाहों में बांध कर होंठों को चूमा और चूचियों को सहलाया।
आनंद: समिरा आप से 20-22 साल छोटी है। लेकिन इंदिरा तुम्हारी जवानी में जो नशा है वो उसमें कहां? मुझे अब उसके साथ कोई मज़ा नहीं आयेगा।
मां: चार दिन अपनी घरवाली समिरा का मज़ा लो फिर दो दिन और रात सिर्फ़ हम दोनों। मैं तुमसे बहुत खुश हूं। जल्दी से 2 कॉफी भिजवा दो।
आनंद को विदा कर इंदिरा रुम में वापस आई। उसने आनंद के बारे में अपने बेटे से जो भी कहा सब ग़लत कहा। आनंद उसके बाप का असिस्टेंट नहीं, जिस होटल में वो ठहरे थे उसके मालिक का बेटा था। इंदिरा रेलवे के जी.एम. की घरवाली थी। रेलवे में यह एक बहुत ही बड़ा पद होता है। ट्रेन के फर्स्ट क्लास के 2 बर्थ वाले कूपे में अकेली थी। कुछ देर तो अकेली बैठी फिर बाहर निकल गई और डब्बे में इधर-उधर घूमने लगी। तभी आनंद भी अपने कूपे से निकला। इंदिरा ने उसे पहले नहीं देखा था।
आनंद: नमस्कार मैडम, आप बहुत परेशान दिख रही है?
इंदिरा: हां यार बहुत ही ज़्यादा परेशान हूं। बेटे के बुलाने पर अकेली तो निकल गई लेकिन अब पछता रही हूं कि अकेली क्यूं आई।
आनंद: आपको तकलीफ़ ना हो तो क्या मैं आपके साथ थोड़ी देर बैठ सकता हूं?
इंदिरा: नेकी और पूछ-पूछ! आओ, तुम भी अकेले हो क्या?
दोनों इंदिरा वाले कूपे में आये। आनंद ने देखा कि उपर वाले बर्थ पर कोई नहीं था।
आनंद: आप जैसी खूबसूरत और आकर्षक बदन वाली औरत को अकेले यात्रा नहीं करनी चाहिए। और वैसे रेलवे को भी आपके साथ किसी लेडी पैसेंजर को देना चाहिए था।
इंदिरा: तुम अगर अकेले हो तो अपना सामान लेकर यहां आ जाओ।
इंदिरा ने इतना कहा और आनंद ने कूपे को अंदर से बंद किया और झटके से इंदिरा को अपने आगोश में लेकर ख़ूब चूमने लगा। शुरु में इंदिरा बहुत कसमसाई लेकिन जब उसे समझ आया कि वो जिसकी बाहों में थी, उसकी पकड़ बहुत मज़बूत थी, तो वह ढीली हो गई। आनंद ने उसे नंगा किया, फिर खुद नंगा हुआ। उसके बाद नीचे के बर्थ पर जम कर चुदाई हुई।
इंदिरा: अपना सामान लेकर आ जाओ।
आनंद: नहीं आ सकता रानी, साथ में घरवाली है, लेकिन मैं फिर आऊंगा। दरवाज़ा लॉक मत करना।
कपड़ा पहन कर आनंद बाहर चला गया। इंदिरा कूपे में नंगी लेटी रही। एक घंटा भी नहीं गुजरा होगा। आनंद फिर उसके ऊपर था।
आनंद: मैंने समिरा को नींद की दवा खिला दी है अब वो सवेरे में ही उठेगी। मुझे अपनी प्यारी जवानी को खाने दो। आनंद ने क़रीब 15 मिनट बूर को चूसा और उसके बाद सुबह सात बजे तक दोनों ने तीन बार चूदाई की।
इंदिरा: आनंद तुम बहुत ही बढ़िया मर्द हो। मेरा मन नहीं भरा।
आनंद: तो मेरा मेहमान रहो। समिरा को मालूम है कि मैं दूसरी औरतों को चोदता हूं। वो भी अपने पसंद के मर्दों से चुदवाती है लेकिन मैडम, आप इस उम्र में भी मेरी 22 साल की पत्नी से कहीं ज़्यादा मालदार माल है। आप जो भी मांगोगी मैं दूंगा।
इंदिरा लगातार लंड को मसलती रही।
इंदिरा: पूरा समय तुम्हारे साथ ही गुज़ारती लेकिन मेरा बेटा मेरा इंतज़ार कर रहा होगा। वो स्टेशन पर मुझे लेने आयेगा। शनिवार रात इसी ट्रेन से वापसी है।
आनंद: 3-4 दिन मैं भी बहुत व्यस्त हूं। आपको पूरा समय नहीं दे पाऊंगा। चार दिन बेटे से जितना चाहो चुदवाओ, शुक्रवार को मैं आपको मसूरी ले चलूंगा। हम वहां हनीमून बनायेंगे और शनिवार की रात आपको इसी ट्रेन में बिठा दूंगा।
जितनी देर आनंद बोलता रहा उतनी देर इंदिरा ने लंड चूसा।
इंदिरा: लगता है कि मेरे ही जैसा तुम्हारी मां को ये लंड बहुत पसंद है। मुझसे झूठ मत बोलना, अपनी मां को चोदते हो?
आनंद: वहीं मेरी पहली औरत है। आप मेरे घर चलो, आप के सामने भी मां को चोदूंगा।
इंदिरा: यार गर्म मत करो, नहीं तो मैं भी अपने बेटे से चुदवा लूंगी। एक बात बोलूं?
आनंद ने इंदिरा को अपने लंड पर बिठाया।
आनंद: हां रानी खुल कर बोलो।
इंदिरा ने लंड को पकड़ लिया।
इंदिरा: आनंद, मुझे तुम्हारा ये लंड और लंड का काम बहुत ही ज़्यादा पसंद आया। लेकिन तुम विश्वास नहीं करोगे, मेरे बेटे का लंड 9 इंच से भी ज़्यादा लंबा है और तुम्हारे लंड से भी मोटा है। तुमने घोड़े का लंड देखा है ना, समझ लो बिल्कुल वैसा ही है। अगर बेटे का लंड भी तुम्हारे लंड जैसा होता तो उससे कभी चुदवा भी लेती। लेकिन उसके घोड़ा जैसे लंड से चुदवाने की हिम्मत नहीं होती है। चलो अपनी घरवाली से मिलाओ।
दोनों तैयार होकर निकले। इंदिरा के बोलने पर आनंद टीटी को ढूंढ कर लाया। टीटी से सामान का ध्यान रखने बोल आनंद के कूप में गई। समिरा गहरी नींद में थी।
आनंद के बहुत हिलाने-डुलाने पर समिरा उठी। आनंद ने इंदिरा को अपने एक दोस्त की मां कह कर परिचय करवाया।
दो घंटा इंदिरा उन लोगों के साथ रही और आनंद की तरह समिरा भी इंदिरा को बहुत पसंद करने लगी। जब इंदिरा ने कहा कि वो किसी होटल में रहेगी तो समिरा ने आनंद से कहा कि दीदी (इंदिरा) को अपने फ़ॉर्च्यून प्लाज़ा होटल में बुक करे।
समिरा: मैं घर पहुंच जाऊंगी तुम दीदी को होटल में सेट कर के आना।
आनंद ने इंदिरा को बढ़िया से सेट किया और दो पूरा दिन साथ गुज़ारने का वादा लेकर आनंद नीचे आया। उसने मैनेजर से कहा कि 301 नंबर रुम में रहने वाले का बढ़िया से ध्यान रखे।
आनंद: उनका सारा खर्चा मेरे अकाउंट में लिख लेना। उनसे एक पैसा भी मत लेना।
आनंद ने इंदिरा को सिर्फ़ चोदा ही नहीं वो तीन चुदाई के बाद अपने से 14-15 साल बड़ी उम्र की औरत का दीवाना हो गया। आनंद ही नहीं खुश था। आनंद उसका तीसरा ही मर्द था और इंदिरा अपने तीसरे मर्द से चुदवा कर हद से ज़्यादा खुश थी। आनंद को विदा कर इंदिरा रुम में आई और कुर्ता को बाहर निकाल दिया।
इंदिरा: तुझे अपनी मां को इतनी गंदी चिट्ठी लिखने में शर्म नहीं आई? कैसे तू अपनी मां की चूत और चूची के बारे में, मां को चोदने, दूसरे से चुदवाने के बारे में लिख सकता है?
सलवार और ब्रा पहन कर इंदिरा बेटे के सामने खड़ी हो गई। अमित बेड पर पांव लटका कर बैठा था। अमित ने सलवार के उपर से बूर को सहलाया और दोनों हाथों से सलवार के नाड़े को खींचने लगा।
अमित: मेरी प्यारी मां, मैंने तुम्हें चिट्ठी इसलिए लिखी थी कि तुम बाबू जी को रोको कि वो दीदी को ना चोदे लेकिन ज़वाब में तुमने इतनी गंदी बातें लिखी, कि तेरी चिट्ठी पढ़ते हुए मुझे लंड को मसल-मसल कर पानी निकालना पड़ा। मेरा लंड तुमने देखा कब जो बोल रही हो कि मेरा लंड घोड़े के लंड जैसा है?
अमित ने नाड़े के दोनों छोरों को खींचा और सलवार नीचे गिर गयी। अमित ने पैंटी के उपर से बूर को सहलाया। बूर को ज़ोर से मसला।
अमित: मां सच बहुत ही मस्त माल हो। जब तुझे मेरा लंड इतना ही पसंद है तो फिर घर में ही मुझसे क्यों नहीं चुदवाया?
तभी दरवाज़े पर नॉक हुआ और आवाज़ सुनाई दी “रूम सर्विस”। अमित ने पैंटी को थोड़ा नीचे खींचा। पैंटी का टॉप बैंड नीचे आ गया।
अमित: मां देख तो कौन है?
एक क्षण तो इंदिरा अपने ही जगह पर खड़ी रही। फिर कमर मटकाते हुए दरवाज़े तक गई। उसने दरवाज़ा खोला। वेटर के साथ एक सूट-बूट पहना आदमी था। तीनों अंदर आये। सेंटर टेबल पर ट्रे रख कर वेटर रुम से बाहर चला गया। दूसरा आदमी वहीं खड़ा रहा।
आदमी: मैडम, मेरा नाम मनमोहन है। मुझे माफ़ कीजिएगा, आप बहुत ही सुंदर और मालदार है। आपकी सही क़ीमत देने वाले सिर्फ़ इसी होटल में मिलेंगे।
मां: क्या फ़ालतू बात कर रहे हो? किस चीज़ की क़ीमत मुझे मिलेगी? फ़ालतू बात कर मेरा दिमाग़ मत ख़राब कीजिए। प्लीज़ कॉफी बना दीजिए।
बोल कर इंदिरा सोफ़ा पर इस तरह बैठी कि दोनों मैनेजर और अमित को पूरी जांघ और पैंटी साफ़-साफ़ दिखे। कुछ देर माल का नजारा दिखाने के बाद इंदिरा ने लेग्स को क्रॉस कर दिया।
मैनेजर: मैडम, दूसरे होटल में आपके साथ 2-3 घंटा समय समय गुज़ारने के लिए लोग ज़्यादा से ज़्यादा 25-30 हज़ार देंगे। यहां 50 हज़ार मिल जायेगा। 2 घंटा में 50 हजार कमाना है तो बोलिए?
अमित समझ गया कि मैनेजर उसकी मां से धंधा करवाने की बात कर रहा था। लेकिन वह चुप रहा।
मां: आप मुझे नहीं पहचानते है। मैं आपके जैसे को नौकर रखती हूं। मैं आनंद साहब को फ़ोन करती हूं, वही आप से बात करेंगे।
मैनेजर सही में इंदिरा से धंधा करवाना चाहता था। उसे दोनों पार्टी से 10-10% कमीशन मिलता था। आनंद का नाम सुन कर मैनेजर रुम से बाहर चला गया। इंदिरा ने उसके पीछे डोर को बढ़िया से बंद किया, और दरवाज़े पर ही खड़ी रह कर पहले पैंटी और फिर ब्रा को निकाला, और नंगी होकर सोफ़ा पर बैठ गई।
इंदिरा: आजा कॉफी पी लें, फिर अपना रस पिलाऊंगी। रात में किसको चोदा, पूरी डीटेल में बता?
अपनी मां को अपने सामने नंगा देख कर भी अमित को विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी मां उसके सामने नंगी थी।
इंदिरा: बेटा, तू तो ऐसे देख रहा है मानो पहली बार ही किसी नंगी औरत को देख रहे हो। ऐसे डरोगे तो फिर मुझे चोदोगे कैसे? आजा कॉफी बहुत टेस्टी है।
मां की हरकत देख कर अमित को लगने लगा कि उसकी मां बहुत ही घटिया रंडी थी, जो किसी के एक बार बोलने पर ही उससे चुदवा लेगी। अमित तो यह सोच रहा था कि बेटे की चुदाई की चाहत देख कर उसे डांटेगी, गाली देगी, नखरा करेगी। लेकिन नहीं, उसकी मां तो खुद ही नंगी हो गई। अमित ने भी कॉफी का कप लिया, और थोड़ी दूर पर बैठ गया।
इंदिरा ने कॉफी के तीन-चार घूंट लिए। 43-44 साल की औरत थी। हर तरह के मर्दों से पाला पड़ता था। मर्दों की नज़र और उनके सोचने के नज़रिये को बख़ूबी पहचानती थी।
इंदिरा: बेटा, मैं समझ गई कि तू क्या सोच रहा है। तू सोच रहा कि तेरी मां इतनी चुदासी है कि बेटे से चुदवाने इतनी दूर आ गई। बेटे के साथ थोड़ा भी नखरा नहीं किया। खुद ही नंगी हो गई। तो बेटा नखरा उसके सामने किया जाता है जिससे कुछ फ़ायदा हो। तेरे सामने नखरा करने से मुझे क्या मिलेगा? दूसरी माल को चोदने के लिए मैं ही तेरे अकाउंट में पैसा भेजती हूं, तू मुझे क्या देगा।
इंदिरा: जहां नखरा करना था वहां मैंने किया है। होटल का मैनेजर मेरी जवानी की क़ीमत पचास हज़ार लगा रहा था। मैंने उसे मना कर दिया। वहीं मना करना मेरा नखरा था। अगर कोई सही में मुझे चोदना चाहता है, तो देखना मैनेजर दुबारा आयेगा और मेरा क़ीमत बढ़ाएगा।
अपनी मां की बातें सुनते हुए मां की नंगी जवानी को निहारते हुए कॉफी पी रहा था।
इंदिरा: आज मैं तेरे सामने, अपने बेटे के सामने ये मानती हूं कि तुम्हारी चिट्ठी पढ़ने के बाद से नहीं, मैं कई सालों से तुम्हारे घोड़े के जैसे लंड को अपनी इस बूर के अंदर लेना चाहती थी।
बोलते हुए इंदिरा ने अपनी अंगुलियों से बूर की फांको को फैलाया, और अपने बेटे को बूर के अंदर का माल दिखाया।
इंदिरा: बेटा, पत्नी अपने पति के सामने, प्रेमिका अपने प्रेमी के सामने नखरा करती है। क्योंकि एक तो उनके पास बहुत समय होता है, दूसरा औरत जितना नखरा करेगी, उसे उतना ही फायदा होता है। लेकिन वैसे मर्द या औरत जिनके पास ज़्यादा समय नहीं होता, वह अगर नखरा ही करते रहेंगे तो फिर कभी चूदाई कर ही नहीं पायेंगे।
इंदिरा: मैं कितना नखरा करती हूं अपने बाप से पूछना। शादी के 25 साल भी मैं उसे बहुत तड़पाती हूं। बेटा चार साल हो गये, अपना लंड दिखा दे यार। मैं भी तो देखूं कि सिर्फ़ देखने में ही औरतों को डराता है, या फिर औरत की बूर भी तेरे लंड को देख कर डरती है।
इंदिरा ने इतने प्यार से औरतों के नखरे के बारे में बताया, कि अमित भी समझ गया कि जब दोनों चुदवाने के लिए ही आये हैं, तो फिर बेकार का नखरा करके समय क्यों बर्बाद करें।
अमित ने कॉफी ख़त्म की, और इंदिरा के सामने खड़ा हो गया।
अमित: साली, इस उम्र में भी तुमने अपने बदन को इतना खूबसूरत बना कर कैसे रखा है? रेखा और नगमा का सिर्फ़ चेहरा ही खूबसूरत है, लेकिन कुतिया तेरा अंग-अंग उन दोनों से कहीं बढ़िया है। बहुत ही मस्त माल हो तुम। मां, मैंने तुम्हें अपनी सारी चुदाई की कहानी लिख-लिख कर भेजी है। तू बता कि किस भाग्यशाली आदमी का लंड सबसे पहले तेरी प्यारी बूर के अंदर घुसा था?
बोलते-बोलते अमित ने अपने कपड़ों को निकाल फेंका, और बेटे का फनपनाता लंड देख कर इंदिरा उछल कर सोफ़ा से उठ कर खड़ी हो गई।
इंदिरा: बाप रे बेटा, कौन सी दवा खाता है? किस तेल से मालिश करता है? तेरे असली बाप का लंड इतना डरावना नहीं था। एक तो पहले से ही तुझसे चुदवाने के लिए बूर खुजला रही थी, अब तो बर्दाश्त नहीं कर सकती। पहले मुझे देखने दें कि ये मुसल जिस बूर से निकला है उसमें घुस सकता है कि नहीं। पेल बेटा, पेल लंड अपनी मां की बूर में।
इंदिरा सच में अपने बेटे से ही चुदवाने आई थी। रास्ते में, ट्रेन में एक जवान मर्द ने बहुत सारे रुपये का लालच देकर उसे चोद लिया, लेकिन वो आई थी बेटे से ही चुदवाने। आनंद ने ट्रेन में सिर्फ़ 10 हज़ार ही नगद दिया था। लेकिन उसने वादा किया था कि देहरादून पहुंच कर बाक़ी 75 हज़ार देगा। यानी 43 साल की औरत ने 27 साल के नौजवान से चुदवाने की डील एक लाख में की थी। ऊपर से होटल में रहने, 2 दिन मसूरी में हनीमून ट्रीप का सारा खर्चा आनंद को ही उठाना था। इंदिरा बेड पर फ़्लैट लेट गई और बेटे की तरफ़ दोनों बाहों को बढ़ाया।
इंदिरा: बेटा, पहले राउंड में और कुछ नहीं। 22 साल गुजर गये, लेकिन तेरे बाप की चुदाई आज भी वैसे ही याद है मानो उसने अभी-अभी चोदा हो। उसके लंड की फील, लंड का धक्का, आज भी उसी तरह महसूस करती हूं जैसे उससे चुदवाने समय करती थी। बस और सब कुछ बाद में, पहले लंड को बूर में पेलो। जिस बूर से तू निकला है उसी बूर में दुबारा घुस जा। तेरा लंड मुझे बहुत डरा रहा है, हटा उसे मेरी आंखों के सामने से।
अपनी मां की मधमस्त करने वाली जवानी को देख कर अमित बहुत ही मस्ता गया था। उसने कई लंबी-लंबी सांसें ली और अपनी मां की थंडर जांघों के बीच जगह ली। दोनों हाथों से चूचियों को मसला और दबाया। होंठों को कई बार चूसा। एक हाथ से लंड को पकड़ कर मां की बूर में दबाया। चूत्तड़ को थोड़ा उपर उठाया और पूरी ताकत से धक्का मारा। करीब डेढ़ इंच लंबाई अंदर चला गया।
इंदिरा: आउच.. थोड़ा धीरे बेटा!
अमित: रंडी, चुदवाती नहीं क्या या फिर बूर में गोंद लगा कर आई है? कल रात ही एक कुंवारी माल को चोदा, हरामजादी, तेरी बूर भी वैसी ही टाइट है।
और इंदिरा ने खुद बता दिया। उसे बेटे के लंड का पहला धक्का ही अपनी बुर में बहुत बढ़िया लगा। आनंद का धक्का ऐसा तेज नहीं था। अमित लगातार धक्के मारता रहा। आख़िरकार, लंड की पूरी लंबाई अपनी ही मां की बूर के अंदर गायब हो गई। अमित ने लंड को मां की बूर में टाईटली दबा कर रखा और कुछ देर गाल, होंठ और चूचियों को बढ़िया से चूसा। फिर धीरे-धीरे धक्के मारना शुरु किया।
अमित: पिछले दो सप्ताह में 7-8 माल को, 19 साल की कुंवारी लड़की से लेकर तेरी उम्र की औरत को चोदा। लेकिन रानी तेरे मुंह पर नहीं कह रहा हूं तुझे ज़रूर किसी का बढ़िया आशीर्वाद मिला हुआ है। किसी की भी चूत इतनी रसीली और टाइट नहीं थी जितनी तेरी है।
अपने बेटे की बातें सुन कर इंदिरा बहुत ही ज़्यादा खुश हुई। लेकिन खुशी बेटे को नहीं दिखाई।
इंदिरा: बेटा, स्पीड तेज कर, और ताक़त से मार। इस दुनिया में हर दस बेटों में कम से कम सात बच्चे ऐसे होते हैं जो मां को चोदना चाहते हैं। लेकिन हज़ारों बेटों में से एक या दो ही बेटों की ऐसी क़िस्मत होती है जो अपनी सगी मां की बूर पेल सकता है। आज कल लड़कों के बीच ही नहीं औरतों के बीच एक फ़ैशन चला हुआ है।
जैसा इंदिरा ने कहा था बेटे ने अपनी चोदने की स्पीड भी बढ़ाई और चोदने की पावर भी। इंदिरा ने कहा नहीं लेकिन उसे बेटे से चुदवाने में कुछ ज़्यादा ही मज़ा आ रहा था। पिछली रात आनंद ने इंदिरा को रुपया दिया या देने की बात कह कर रात भर चुदाई की, लेकिन आनंद के साथ की चुदाई में वैसा मज़ा नहीं आ रहा था, जैसा बेटे अमित के साथ आ रहा था।
अमित: कैसा फ़ैशन मां?
इंदिरा: वहीं अपनी मां को चोदने और दूसरे से चुदवाने की बात। वैसे 1000 में इक्का-दुक्का ही मेरे जैसी छिनाल होगी जो अपने बेटे से ख़ुशी-ख़ुशी चुदवाती होंगी। लेकिन बहुत सी ऐसी हरामज़ादियां जो अपने बेटे के साथ नहीं उनके दोस्तों से चुदवाती है। मैं 43-44 साल की हो गई हूं, और मैं बढ़िया से जानती हूं कि मेरी उम्र की औरते किस तरह के आदमियों से चुदवाना चाहती हैं।
मां की जवानी तो अमित को मस्त कर ही रही थी। उसकी बातें औरतों के बारे में उसका ज्ञान भी बढ़ा रही थी।
अमित: तुम्हारे जैसी औरतों को किस तरह का मर्द चाहिए?
इंदिरा ने मुस्कुराते हुए ज़ोर से चूत्तड़ों को उपर की ओर उचकाया।
इंदिरा: झूठ नहीं बोल रही हूं। तेरे चेहरे पर तुझे खुश करने के लिए नहीं बोल रही हूं। बेटा तेरी रेखा मां ग़लत नहीं है, कि तू बहुत ही बढ़िया चोद रहा है।
अमित: और मां, मैं भी तुम्हारे चेहरे पर तुम्हें खुश करने के लिए नहीं बोल रहा हूं। अभी तक जितनी कुतिया को चोदा किसी के साथ ऐसा मज़ा नहीं आया जितना मज़ा अपनी इस कुतिया, अपनी मां को चोदने में आ रहा है।
इंदिरा: बेटा, तुमने हमें बिल्कुल सही नाम दिया है। हमारी जैसी औरतें दो टांगों वाली कुतिया ही तो हैं। और हमारी उम्र की कुतिया तुम्हारी उम्र के जवान लड़कों से चुदवाना पसंद करती है। और यही कारण है कि आजकल पत्नी की अदला-बदली के साथ-साथ मां की अदला-बदली बहुत साधारण बात हो गई है। लड़के आज-कल अपने दोस्तों के साथ अपनी मां की अदला-बदली करने लगे हैं। लेकिन ऐसी अदला-बदली में बता सकते हो किसका नुक़सान होता है?
अमित तो अपने भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि मां के बूर के अंदर उसका लंड वैसा ही टाइट रहे जैसा था।
अमित: नुक़सान तो औरतों का ही होता होगा। क्योंकि उन्हें मन लायक़ चुदाई नहीं मिलती होगी।
इंदिरा: नहीं बेटा, नुक़सान औरतों का नहीं जवान लड़कों का होता है। औरत कोई भी हो। अगर वो चाहे तो किसी भी आदमी के साथ, चाहे वो बढ़िया चोद पाता हो या नहीं पूरा मज़ा ले लेती है। लंड में दम नहीं है तो बूर चुसवायेगी, बदन की मालिश करवायेगी या अगर लड़का अमीर होगा तो उसे पूरा लूट लेगी। दूसरी तरफ़ अगर किसी औरत को कोई लड़का पसंद नहीं आया तो लड़का कुछ भी करे वो वैसे लड़के को चोदने नहीं देगी। उपर से उससे अपनी क़ीमत भी लेगी।
जब इंदिरा ने क़ीमत लेकर चुदाई की बात की तो बेटा भी अपनी मां के रंडी-पने के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो गया।
अमित: मेरा एक दोस्त है विनोद, वो तुम्हें चोदने के लिए 20-25 हज़ार देने को तैयार है। सिर्फ़ तुम्हें नंगा देखने के लिए दस हज़ार देगा। चुदवायेंगी उससे? मैंने उससे कहा है कि अगर वो अपनी मां और बहन को मुझसे चुदवायेगा, तभी में अपनी मां को उसके साथ चुदवाऊंगा। मां चुदवाओगी मेरे दोस्त से?
अमित की बात सुन कर इंदिरा बेटे को घूरने लगी। इंदिरा को अपने बेटे में साफ़-साफ़ दिखा कि अमित उसे अपनी मां समझ कर ही चोद रहा था।
इंदिरा: तुम अपनी मां को दूसरे के साथ चुदवाते हुआ देखना चाहते हो?
अमित: मालूम नहीं मां, पिछले रविवार को अरविंद ने अपने सामने अपनी घरवाली को मुझसे चुदवाते देखा। 10-12 दिन पहले एक और आदमी चाहता था कि मैं उसके सामने उसकी घरवाली को चोदूं। रेखा के पति ने खुद कहा कि वो अपने सामने अपनी मां को दूसरे से चुदवाता था।
अमित: हेडमास्टर को मालूम है कि यहां का एक गार्ड सिर्फ़ उसकी बेटी और घरवाली को ख़ुद ही नहीं चोदता है, उससे धंधा भी करवाता है। सच कहता हूं मां कि मुझे नहीं मालूम कि दूसरे से तुम्हें चुदवाते देखना कैसा लगेगा। लेकिन मैं दिल से चाहता हूं कि तुम मेरे सिवा किसी और के सामने नंगा भी ना हो। मैं नहीं चाहता कि कोई भी दूसरा, बाबू जी भी तुम्हें चोदे।
इंदिरा बहुत ज़ोर से हसी और बेटे की छाती पर ज़ोर से मुक्का मारा।
इंदिरा: मादरचोद, अपनी मां को चोद ही रहा है। मौक़ा मिलते ही अपनी बहन को भी चोद लेगा। घरवाले के सामने उसकी घरवाली को चोदता है, बाप के सामने बेटी को चोदता है, और मां से कहता है कि वो किसी और से ना चुदवाये। बेटा तू मान या ना मान, अपने घर की औरतों को दूसरों से चुदवाते देखने में जैसा मज़ा आता है वैसा मज़ा तो अपनी मां, बहन, या बेटी को खुद चोद कर भी नहीं आता है। मैं तेरे सामने किसी से भी चुदवाने को तैयार हूं। सच कहती हूं, मुझे, अपनी बहन, या अपनी घरवाली को अपने सामने दूसरों से चुदवायेगा तो तुझे बहुत मज़ा आयेगा।
मां अब बेटे के सामने दूसरे से चुदवा कर बेटे को शर्मिंदा करना चाहती थी। कोई भी असली मर्द अपने सामने कभी भी घर की किसी औरत को दूसरे के सामने नंगा भी नहीं करेगा, चुदवाना तो दूर की बात है। इंदिरा का घरवाला, अमित का बाप बढ़िया चोदता था। अमित के बापू को मालूम था कि उसकी घरवाली बाहर चुदवाने जाती थी। इंदिरा को मालूम है कि अमित का बाप कई दूसरी माल को चोदता था, लेकिन उसने अपनी पत्नी को कभी किसी के सामने नंगा करने की कोशिश नहीं की थी।
अमित के बाबू जी का लंड बेटे के लंड जैसा लंबा और मोटा नहीं था। लेकिन जो उससे एक बार चुदवाती थी, वो बार-बार चुदवाने आती थी। जिस समय इंदिरा अपने बेटे से चुदवा रही थी, उसी समय अमित का बाप सुरेन्द्र अपनी बेटी अनीता को घर में चोद रहा था। लेकिन वो कहानी बाद में।
अमित को अचानक कुछ याद आया। वो अपनी मां के बुर में लगातार धक्के मार ही रहा था।
अमित: मेरी प्यारी कुतिया मां, तू कहती हैं कि तू मुझसे चार-पांच साल पहले से ही चुदवाना चाहती थी। लेकिन मेरे मन में तेरी बूर में लंड पेलने का ख्याल तेरी गंदी चिट्ठी पढ़ने के बाद आया। साथ ही साथ रेखा और उसके अलावा जिस किसी भी रंडी को चोदा, सब ने मां को चोदने के लिए उकसाया ही, रेखा के घरवाले अरविंद और संगीता के दलाल असलम ने यहां तक कहा, कि इतना बढ़िया लंड है और अगर इस लंड को मां का बूर में नहीं घुसाया तो ऐसे लंड रखने का कोई मतलब नहीं।
तभी रुम के दरवाज़ा पर नॉक होने लगा।
इंदिरा: तू जैसा पेल रहा है पेलता रह। साला वहीं मैनेजर होगा। मेरी क़ीमत बढ़ाने आया है, अभी और बढ़ायेगा। रेखा ग़लत नहीं है। इससे पहले ना किसी ने इतनी देर चोदा था, जितनी देर से तू बूर में लंड घुसा कर बैठा है। ना ही किसी के साथ इतना मज़ा आया जितना तुझसे चुदवाने में आ रहा है। पिछले 7-8 दिनों में किस-किस को चोदा सब डीटेल में बता।
अमित की मां को अपने उपर, अपनी जवानी के उपर बहुत भरोसा था। कभी आराम से तो कभी पूरी स्पीड से चोदते हुए बेटे ने मां को पिछले दिनों की गई सभी चुदाई, विनोद के साथ हुई बातों को भी बताया। और बेटे की चुदाई की कहानी सुनते-सुनते मां ने बेटे को अपनी बाहों और जांघों में टाईटली बांधा और एक ज़ोर की मस्ती भरी आवाज़ के साथ झड़ गई, “वाह बेटा मज़ा आ गया, मैं गई।”
अमित ने सात-आठ धक्के मारे और मां की बूर को अपने रस से भर दिया। दोनों ने एक दूसरे को बेतहाशा चूमा और फिर अगल-बगल लेट कर हांफने लगे।
अमित: कुतिया तुमने पूरा थका दिया। बाप रे इतनी देर तो कोई चार टांग वाली कुतिया भी नहीं चुदवाती होगी।
इंदिरा: रात भर ट्रेन में थी, आनंद ने एक मिनट भी सोने नहीं दिया। साले ने 20-25 मिनट कर तीन बार चोदा और बहनचोद तुमने कुछ खिलाने-पिलाने के बदले अपना मोटा लंड बूर में पेल दिया। आनंद ने तीन चुदाई में जितना समय लिया उससे ज़्यादा समय तुमने एक चुदाई में लिया। चल मुंह हाथ धोकर खाना खायेंगे, और उसके बाद एक और लंबी चुदाई करेंगे। रात में तुझे अपनी एक बचपन की सहेली से मिलवाने ले जाऊंगी।
अमित को अपनी मां की यह बात सुन कर ग़ुस्सा आया कि उसने रात में ट्रेन में किसी से चुदवाया। लेकिन रेखा ने कहा था कि अगर उसकी औरत किसी से चुदवाती है, तो उसके बारे में तब तक कुछ ना पूछे जब तक वो ख़ुद ना बताये। रेखा ने कहा था,
“मैं किसी और से कितना और कैसे चुदवाती हूं, उसकी चिंता तू क्यों करता है? बस तू यही देख की तू मेरे साथ कितना ज़्यादा मज़ा ले सकता है।”
और इंदिरा ने ख़ुद कहा कि अमित ने आनंद से ज़्यादा देर तक ही नहीं चोदा उससे कहीं ज़्यादा मज़ा भी दिया। अमित ने फ़ैसला किया कि अगर मां ख़ुद बतायेगी तो बताये, वो अपनी मां की दूसरों के साथ की चूदाई के बारे में कुछ नहीं पूछेगा।
दोनों बाथरूम में साथ घुसे। एक-दूसरे को खूब रगड़-रगड़ कर नहलाया। दोनों तैयार होकर, दूसरा सेट कपड़ा पहन कर रुम से बाहर निकले। रिसेप्शन से रेस्टोरेंट के बारे में पूछा तो काउंटर लेडी ने कहा कि वे सिर्फ़ बिल पर साईन कर दें, उन्हें पेमेंट करने की ज़रूरत नहीं है। लेडी ने उनके सामने रेस्टोरेंट में फ़ोन कर के कहा कि रुम 301 के दो गेस्ट हैं। लेडी ने कहा, “दोनों हमारे आनंद साहब के ख़ास गेस्ट हैं, इनका बढ़िया से ध्यान रखें और इनसे पेमेंट ना लें।” समिरा ने ही आनंद से कहा था कि अपने ही होटल में इन्हें रखें।
मां और बेटा रेस्टोरेंट आये। वहीं के मैनेजर और वेटर ने इनका बढ़िया ध्यान रखा। भर पेट खाना खा कर दोनों क़रीब एक घंटे के बाद वापस रुम में आये। रुम में आते ही इंदिरा ने एक-एक कर अपने सारे कपड़े उतार दिए, और नंगी ही बेड पर लेट गई।
इंदिरा: अपने दोस्त विनोद से बोलना कि अगर 25 हज़ार देगा तो मैं उसके सामने एक घंटा नंगी रहूंगी, और अगर एक लाख देगा तो चुदवा भी लूंगी। तुमने अब तक रेखा या दूसरी रंडियों को कितना दिया है?
अमित अपनी मां की नंगी जवानी को निहारता रहा। इंदिरा 5 फ़ीट 5 इंच लंबी थी। रेखा या नगमा की तरह उसका चेहरा खूबसूरत नहीं था, लेकिन अपने आप में काफ़ी सुंदर थी। भरा-पूरा बदन था।
गोलाई लिए हुए चौड़े कंधे, आकर्षक और हेल्दी उपरी बाहें, 36 इंच से भी थोड़ी बड़ी गुदाज़ और मांसल चूचियां, निपल्स का साइज़ बढ़िया बड़ा था। निपल्स के चारों तरफ़ का गहरे रंग का घेरा संगीता के घेरे से बड़ा और रेखा के घेरे से छोटा था। पेट में उभार नहीं था, ना ही कहीं कोई सिलवट थी। कमर क़रीब 28 इंच की थी, और प्यूबिक एरिया बड़ा था। सालों से लंड का धक्का खाते-खाते बूर पर हल्का कालापन आ गया था। लेकिन बूर फिर भी बहुत ही आकर्षक था। लंबी, मोटी और चिकनी जांघें बहुत ही प्यारी लग रही थी।
इंदिरा समझ गई कि उसका बेटा अपनी मां की जवानी का रस पी रहा था। अमित को सामने से अपनी जवानी दिखाने के बाद वो पलट गई, और कुतिया के पोज़ में आ गई। धीरे-धीरे खिसकते हुए घुटनों को बेड के किनारे तक ले आई और चूत्तड़ों को मटकाने लगी। अमित नज़दीक पहुंचा और दोनों हाथों से चूत्तड़ों को सहलाने लगा। चूत्तड़ कसे हुए और बहुत कड़क थे।
36 इंच से बड़े-बड़े चूत्तड़ थे, लेकिन ना ढीलापन था, ना ही एक-दूसरे से अलग ही हुए थे। कुछ देर सहलाने के बाद अमित ने चूत्तड़ों पर पूरी ताक़त से चांटे मारना शुरु किया। इंदिरा हर चांटे पर आह, उफ़ करती रही, लेकिन उसने बेटे को रोका नहीं। अमित तब तक चांटे मारता रहा, जब तक दोनों चूत्तड़ लाल नहीं हो गये।
फिर उसके बाद चूत्तड़ों को सहलाते हए क्लिट से गांड के छेद तक जीभ से कई बार रगड़ा। फिर पीछे से ही बूर को पूरा फैला कर अमित ने अंदर-बाहर से बूर को खूब चाटा, क्लिट को चूसा, बूर की पत्तियों को चबाया। जितना हो सकता था जीभ को बूर के अंदर घुसा कर अंदर इधर-उधर घुमाता रहा। कई बार नाक को भी बूर के अंदर घुसा कर लंबी-लंबी सांसे लेता रहा।
आख़िरकार इंदिरा को बर्दाश्त करना मुश्किल होने लगा। बार-बार ज़ोर से बोलने लगी, “पेलो बेटा, बूर में लंड पेलो, बूर में आग लगी है, जल्दी ठंडा करो”।
बहुत देर की और मस्ती के बाद अमित फिर अपनी मां को चोदने लगा। कई धक्के लगाने के बाद अमित ने बताया कि उसने सिर्फ़ उन्हीं औरतों को रुपया देकर चोदा हैं जिन्हें गार्ड लेकर आया था।
अमित: तू रुपया लेकर चुदवाती है लेकिन मैंने अब तक जितनी शरीफ़जादीयों को चोदा है, चाहे रेखा हो, संगीता हो, संपा हो, या गार्गी, मैंने अब तक उन्हें एक रुपया भी नहीं दिया है, ना आगे दूंगा।
इंदिरा: बेटा, एक बार की चुदाई से मालूम हो गया कि तू बहुत बढ़िया चोदता है। लेकिन पत्नी भी जब पति से चुदवाती है तो वो पति से हर हमेशा कुछ ना कुछ चाहती है। पति देता भी है। जिन्हें रुपया देकर चोदता है उन्हें कुछ भी देने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन जो औरतें, संगीता और रेखा जैसी औरतें जो तुमसे प्यार करती है, मुफ़्त में चुदवाती हैं, वे कुछ बोलती नहीं लेकिन बीच-बीच में तुमसे गिफ़्ट की उम्मीद करती हैं।
इंदिरा: औरतों को बस कुछ ही चीज़ है जो पसंद है, वो है कपड़े, गहने, या फिर श्रिंगार की चीजें। बीच-बीच में उन्हें गिफ़्ट देते रहो। फिर देखो वो तुमसे कितना प्यार करने लगेंगी। इस चुदाई के बाद मैं तुम्हारी रंडियों के लिए गिफ्ट ख़रीदूंगी।
इंदिरा खुद तो बेटे से चुदवा ही रही थी। वो बेटे को यह भी समझा रही थी कि अपनी औरतों को कैसे खुश रख सकते हैं।
मां बेटे मस्ती से बातें कर रहे थे। क़रीब आधे घंटे की चुदाई हो गई थी। टेलीफोन की घंटी बजी। बेड के नज़दीक ही रिसीवर रखा था। इंदिरा ने हाथ बढ़ा कर रिसीवर उठाया और बातें करने लगी।
इंदिरा: उन्हें अकेले भेजो, साथ में कोई भी दूसरा होगा तो मैं बात नहीं करूंगी।
इतना बोल कर इंदिरा ने फ़ोन रख दिया।
इंदिरा: रात में बेटे ने चोदा और अभी उसका बाप चोदना चाहता है। आनंद का बाप आ रहा है।
मां की बात सुन कर बेटा बहुत ही एक्साइट हो गया, और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। कुछ ही देर बाद दरवाज़ा पर नॉक हुआ।
इंदिरा: जा बेटा, अगर बुढ़ा अकेले होगा तो उसे अंदर ले आना, और उसके सामने भी मुझे चोदते रहना। और अगर साथ में कोई दूसरा भी हो दरवाज़ा बंद कर देना। ऐसे ही नंगा जा, मैं भी ऐसे ही रहती हूं।
इंदिरा बहुत ही खेली खाई औरत थी। अमित पहले भी दूसरे आदमी के सामने चुदाई कर चुका था। अरविंद के सामने रेखा को चोदा था, असलम का सामने संगीता को चोदा था। ना संगीता को ही मालूम था और ना अमित को ही, हेडमास्टर ने संगीता और अमित की पूरी चुदाई देखी थी।
मां की बूर से लंड निकाल कर अमित दरवाज़े के पास गया। दरवाज़ा खोला तो देखा कि सामने एक बढ़िया मज़बूत बदन बाला आदमी खड़ा था। आदमी मज़बूत कद काठी का था। लेकिन माथे के सारे बाल सफ़ेद हो गये थे।
अमित ने प्रणाम किया और उसे अंदर आने कहा। आदमी अंदर आया।
इंदिरा: बेटा, अपना काम पूरा करो। साहब दरवाज़ा बंद कर दो।
अंदर आने वाला आदमी जब तक अंदर आता, अमित फिर पीछे से ही मां को चोदने लगा था। वो आदमी इंदिरा के बिल्कुल नज़दीक आ गया। उसने रिसेप्शन के रजिस्टर से नाम देख लिया होगा। आदमी इंदिरा की नंगी पीठ को सहलाने लगा।
आदमी: इंदिरा, जानती हो, किसी खूबसूरत औरत को अपनी आंखें के सामने चुदवाते देखने से बढ़िया और कुछ नहीं है। ये तुम्हारा बेटा है या सिर्फ़ मुझे गर्म करने के लिए इसे बेटा कह रही हो?
इंदिरा ने आदमी की ओर देखा।
इंदिरा: होटल के मालिक हो, रेणु (रिसेप्सनिस्ट) ने कहा कि तुम 65 साल के हो इसलिए अंदर आने दिया। पहले मेरी क़ीमत दो, फिर कुछ पूछना या हाथ लगाना।
उस आदमी ने रिसीवर उठाया और किसी को फ़ोन किया।
आदमी: रेणु बेटी, जल्दी से 2 लाख नगद लेकर तुम खुद इस रुम में आ जाओ। तुम्हारे लिए एक बहुत ही बढ़िया गिफ्ट है। रिसेप्शन पर किसी और को बैठा दो। तुम्हें अब मेरे साथ रहना है।
उसने रिसीवर नीचे रख दिया।
आदमी: मेरा नाम राजेन्द्र है, और आनंद मेरा सगा बड़ा बेटा है। मैं इस होटल का मालिक हूं और इंदिरा, तुम आनंद के साथ होटल में घुसी तभी मैंने तुम्हें बहुत पसंद कर लिया था। लगता है ट्रेन में तुम आनंद से मिली, तभी वो तुम्हें यहां लेकर आया है। तो जैसे तैसे वो तुम्हें चोदने की कोशिश ज़रूर करेगा। ट्रेन में आनंद के साथ उसकी घरवाली समिरा भी थी, इसलिए आनंद ने तुम्हें नहीं चोदा होगा, लेकिन अभी मैं चोदूंगा।
बोल कर वो 65 साल का आदमी नंगा हो गया। मानना पड़ेगा, साला 65 साल का था। बदन गठीला था ही, लंड भी बढ़िया दिख रहा था। मैं मां को चोद ही रहा था। मां की बाहों के नीचे से हाथ बढ़ा कर मैंने मां की दोनों चूचियों को पकड़ा, और चूची की मस्ती लेते हुए चोदता रहा। मां ने उससे झूठ कहा।
इंदिरा: मैं अपने बेटे से आज ही नहीं पिछले चार साल से चुदवा रही हूं। कुछ दूसरे लोगों से भी चुदवाया है, लेकिन जो मज़ा बेटे के साथ आता है, वैसा मज़ा कोई और नहीं देता है। तुम ही सोचो, बेटे के घोड़ा जैसे लंड से चुदवाने के बाद तुम्हारे इस लंड से चुदवाने में मुझे क्या मज़ा आयेगा?
लेकिन बुढ़ा मेरी मां की बूर में लंड पेलने के लिए बेकरार था।
राजेंद्र: हमेशा सिर्फ़ अपनी ही मस्ती का नहीं सोचना चाहिए। तुम्हें खुश करने के लिए तुम्हारा बेटा है ही। तुम कभी-कभी दूसरों को खुश करने के लिए भी चुदवा लिया करो। वैसे मैं तुम्हें बता दूं, तुम्हारे आनंद की घरवाली आनंद के घर में रहते हुए भी मुझसे चुदवाती है। अभी रेणु आयेगी। मेरे चचेरे भाई की बेटी है। 26 साल की है। 2 साल पहले हमने उसकी शादी भी कर दी, लेकिन कुतिया को मेरा लंड इतना पसंद है कि मुझसे चुदवाने के लिए यहां नौकरी करती है।
राजेंद्र: घरवाला दिल्ली में सरकारी नौकरी करता है। हर शनिवार की रात घरवाली को चोदने आता है, और सोमवार सुबह वापस चला जाता है। उसके बाद सोमवार से शनिवार तक साली मुझसे चुदवाती है।
तभी दरवाज़े पर नॉक हुआ। इस बार मैं नहीं राजेंद्र ने दरवाज़ा खोला, और तुरंत एक जवान लड़की को लेकर अंदर आया और दरवाज़ा बंद कर दिया। रेणु हमारी चुदाई देखती रही, और राजेंद्र ने लड़की को नंगा कर दिया। लड़की के हाथ से बैग लेकर मां को दिया।
राजेंद्र: इंदिरा इस बैग में पूरे 2 लाख है। अब नखरा मत करो। अमित तुम मां की बूर से लंड निकालो और मेरा रेणु की बूर में पेलो। मुझे अपनी मां को चोदने दो।
इंदिरा: बेटा, ये बेटी चोद नहीं मानेगा। अपनी मां के बूर से लंड निकालो और राजेंद्र को चोदने दो। हरामी ने क़ीमत दी है तो पूरा क़ीमत वसूल भी करेगा। तू भी देख कि तेरी कुतिया मां दूसरे से कैसे चुदवाती है।
बोलते हुए इंदिरा ने बूर को लंड से अलग खींच लिया। अमित का लंड मां की बूर से एक ज़ोर की “फचाक” की आवाज़ कर बाहर निकल गया। रेणु ने दोनों हाथों से अमित के लंड को पकड़ लिया।
रेणु: थैंक्यू चाचा जी, जब से चुदाई के बारे में जानकारी लेना शुरू किया तभी से ऐसे लंड के लिए तरस रही थी। जो भी तुम्हारा नाम है, पहले मुझे लंड को प्यार करने दो, उसके बाद तुम्हें जो मन करे करना।
इधर रेणु मेरे लंड को सहला रही थी, और उधर राजेंद्र ने अमित की मां के मस्त-मस्त जांघों के बीच जगह बनाया। उसने थोड़ी देर इंदिरा की चूचियों को सहलाया, निप्पलस को चूसा, और लंड को बूर में पेलने लगा।
इंदिरा: राजेंद्र, देखने से नहीं लग रहा था लेकिन बहुत मोटा है यार।
65 साल का राजेंद्र 43 साल की इंदिरा के बूर में लंड पेलने लगा, लगातार धक्का मारने लगा। बग़ल में 25 साल की रेणु ने 20 साल के अमित के लंड को चूसना शुरु किया, और अमित पहली बार घर की औरत, अपनी ही मां के बूर में किसी दूसरे के लंड को अंदर जाते हुए देखता रहा। राजेंद्र का लंड सही में बढ़िया मोटा था। अमित ने क़रीब एक घंटा इंदिरा की बूर में लंड पेला था, फिर भी अमित को लगा कि राजेंद्र का लंड बूर की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर घुस रहा था।
राजेंद्र: इंदिरा, मानना पड़ेगा, तुम्हारी बूर में ज़रूर कुछ ख़ास बात है। मेरे सामने अमित ने तुम्हें क़रीब आधा घंटा चोदा, फिर भी रंडी तेरी बूर कितनी टाइट है। रानी बहुत ही गरम, टाईट और रसीली बूर है, बहुत मज़ा आ रहा है।
इंदिरा: राजेंद्र, मुझे भी नहीं लग रहा कि कोई दूसरा लंड 5 मिनट पहले ही मेरी बूर से निकला है। बहुत बढ़िया से चोद रहे हो, बहुत मज़ा आ रहा है।
रेणु: इंदिरा मैडम, तभी तो मैं अपना जवान घरवाला को छोड़ कर चाचा के साथ रहती हूं। आनंद ने बहुत ज़िद किया, तो तीन बार आनंद से भी चुदवाया लेकिन आनंद बिल्कुल नहीं जमा। मुझे और मेरी बूर को सिर्फ़ राजेंद्र चाचा का ही लंड पसंद है। मालूम नहीं चाचा क्यों मुझे अमित से चुदवाने बोल रहे हैं।
राजेंद्र लगातार धक्का मारता हुआ बोला, “कुतिया, तुने खुद अभी कहा कि तू हमेशा से ऐसे ही लंड से चुदवाने के लिए तरस रही थी। अमित बेटा चोदो मेरी इस कुतिया भतीजी रेणु को। इसके पेट में अपना बच्चा डाल दो।”
अमित ने रेणु को मां के बग़ल में लिटाया। ना बूर को चूसा, ना ही चूचियों को, रेणु की जांघों के बीच पोजिशन लिया, लंड को बूर के छेद में दबाया, और ख़ूब दबाते हुए धक्का मारा।
“बाप रे चाचा, बहुत मोटा है”,
लड़की ज़ोर से चिल्लाई, लेकिन उसका चेहरा मुस्कुरा रहा था। अमित को यह देख कर जलन हुई कि बग़ल में ही उसकी मां मुस्कुराते हुए अपने से 22 साल बड़े आदमी से, होटल के मालिक से चुदवा रही थी। बूढ़े के चेहरे पर भी मुस्कुराहट थी। सुबह में अमित जब पहली बार अपनी मां को चोदने लगा था, तो उसने सोचा था कि अब वो अपनी मां को किसी से, रेखा से भी नहीं मिलायेगा।
लेकिन जब इंदिरा ने कहा कि उसने ट्रेन में आनंद से चुदवाया, और एक बार बोलने पर ही आनंद के बाबू जी से भी चुदवाने लगी, तो अमित को बिल्कुल बढ़िया नहीं लगा। उसने मन ही मन सोचा कि ऐसा माहौल बनाऊंगा, कि मां खुद विनोद से भी और असलम गार्ड से भी चुदवाये।
राजेंद्र: इंदिरा, ईश्वर की कृपा से मुझे बहुत सी जवान लड़कियां और औरतें चोदने के लिए मिल जाती है। तुम विश्वास नहीं करोगी, समिरा से मैंने बस एक बार ही कहा होगा, और वह अपनी सुहागरात को ही मुझसे चुदवाने आ गई।
रेणु: चाचा, मुझे भी आपने एक बार ही कहा और मैं आपके सामने नंगी हो गई थी। अमित, मैंने अपनी वर्जिनिटी चाचा को ही दी।
इंदिरा: राजेंद्र, मैंने चार-पांच लोगों से ही चुदवाया है, मानना पड़ेगा कि आप बहुत ही बढ़िया चोदते हो। लेकिन मैं आपके सामने शान से कह सकती हूं कि चूदाई का जो मज़ा मुझे मेरे बेटे अमित ने दिया, वैसा मज़ा किसी और ने नहीं दिया। लेकिन यह भी सच है कि अमित के घोड़े जैसे लंड से रेणु जैसी जवान लड़की क्या मेरी जैसी सालों-साल से चुदी हुई औरत भी लगातार चार बार नहीं चुदवा सकती। राजेंद्र बहुत मज़ा आ रहा है।
20-22 मिनट की चुदाई के बाद राजेंद्र ठंडा हो गया और इंदिरा के उपर से उतर गया।
इंदिरा: पहले अमित ने और बाद में आपने थका डाला। हॉट चॉकलेट ड्रिंक आर्डर कीजिए।
इंदिरा ने कहा और राजेंद्र ने तुरंत चार ग्लास का आर्डर किया। इंदिरा कपड़े पहनना चाहती थी लेकिन राजेंद्र ने रोक दिया।
राजेंद्र: कभी-कभी दूसरों के सामने नंगा रहने का अपना ही मज़ा है।
इंदिरा: एक नंबर के मादरचोद हो। आनंद के सामने कभी अपनी बहु को चोदा है?
राजेंद्र: कई बार।
रेणु: चाचा, आनंद भैया शाम को दिल्ली जा रहे हैं परसों सुबह लौटेंगे। आज रात भाभी को यही बुला लो। आप और अमित है ही, लाला को बुला लो। साला बहुत समय से समिरा को चुदवाने के लिए खुशामद कर रहा है। हम तीन रंडियां और आप तीन हरामजादे।
राजेंद्र: साले के पास बहुत दौलत है। बोल 5 लाख में तीन बहुत ही स्पेशल माल है, समिरा भी रहेगी। विआग्रा खाकर आ जाए।
लाला को रात में आना था। दरवाज़े पर नॉक हुआ। हम सभी नंगे ही थे। मैं पूरी ताक़त और स्पीड से रेणु को चोद रहा था। राजेंद्र ने दरवाज़ा खोला। एक ट्रे में चार ग्लास चॉकलेट मिल्क शेक लेकर वेटर आया। इंदिरा सोफ़ा पर पांव फैला कर बैठी थी। अमित रेणु को चोद रहा था।
राजेंद्र: फिरोज़, इस माल की क्या क़ीमत लगाते हो?
फिरोज़ ने ट्रे नीचे रखा। दोनों हाथों से इंदिरा की चूचियों को मसला, जांघों को सहलाते हुए कुछ देर बूर को मसला। इंदिरा ने कोई शिकायत नहीं की।
फिरोज़: साहब, आपकी रेणु और समिरा मैडम से कहीं ज़्यादा बढ़िया माल है। रात भर के लिए रुस्तम सेठ 5 लाख देंगे।
इंदिरा: मैं इस होटल से बाहर नहीं जाऊंगी। मैं समिरा और रेणु के साथ ठीक हूं। तुम बाहर जाओ।
वेटर बाहर चला गया। इंदिरा ने फिर कहा कि वो किसी भी क़ीमत पर होटल से बाहर नहीं जायेगी।
इंदिरा: मैं थोड़ी बहुत मस्ती मारती हूं, लेकिन रंडी नहीं हूं। कल सुबह मुझे अमित के कॉलेज जाना है। जो चुदाई होनी है इसी होटल में होगी।
राजेंद्र ने विश्वास दिलाया कि इंदिरा को होटल के बाहर नहीं भेजेंगे।
रेणु: कितना पेलोगे यार। दो बार झड़ गई। अब धक्का नहीं सह सकती। लाओ लंड चूस देती हैं।
अमित ने कुछ और धक्का मार कर लंड को बाहर निकाला। उसे बिल्कुल पसंद नहीं आया कि राजेंद्र के एक बार कहने पर उसकी मां एक वेटर के सामने नंगी बैठी रही। एक बार बोलने पर किसी अनजान आदमी से चुदवाने के लिए तैयार हो गई।
लेकिन अमित कुछ बोल नहीं पा रहा था। साफ़-साफ़ दिख रहा था कि इंदिरा को 65 साल का राजेंद्र बहुत ही ज़्यादा पसंद आ गया था। बेड पर रेणु अमित का लंड चूसने लगी और नीचे सोफ़ा पर राजेंद्र ने इंदिरा को सोफ़ा पर सीधे लिटाया, और बूर को चूसने-चाटने लगा। वो इंदिरा को उस दिन चौथी चुदाई के लिए तैयार करने लगा।
होटल का 65 साल का मालिक और 43 साल की अमित की मां इंदिरा ने एक चुदाई के बाद ही एक-दूसरे को बहुत पसंद कर लिया था। बेड पर अमित एक नई माल रेणु को लंड चुसवा रहा था, और थोड़ी ही दूर पर राजेंद्र ने इंदिरा को सोफ़ा पर लिटाया और उसकी बूर को चूसने और चाटने लगा। वो इंदिरा को उस दिन की चौथी चुदाई के लिए गर्म कर रहा था।
दोनों मां-बेटे दस बजे के क़रीब होटल में आये। तीन बजे के पहले ही मां और बेटे ने 2 राउंड चुदाई कर ली थी। पहली राउंड की चूदाई किसी और ने नहीं देखी। लेकिन दूसरी बार जब मां को कुतिया बना कर चोद रहा था, तो क़रीब आधे घंटे की चूदाई के बाद होटल का मालिक राजेंद्र रुम में आया, और मां-बेटे की चूदाई देखने लगा। इंदिरा उसे इतनी बढ़िया लगी, कि ख़ुद तो नंगा हुआ ही, अपनी एक रिसेप्शनिस्ट रेणु जो उसके भाई की बेटी थी, उसे 2 लाख लेकर रुम में आने कहा।
रेणु 2 लाख लेकर आ गई। अमित कुतिया बनी मां को एक घंटा चोद चुका था। राजेंद्र ने रेणु को नंगा किया, और अमित से कहा कि मां की बूर से लंड निकाल कर रेणु को चोदे। नई माल सामने थी अमित देरी क्यों करता। इंदिरा की बूर से लंड निकाला। राजेंद्र ने इंदिरा को सीधा किया, और बिना किसी ओरल मस्ती के बेटे के सामने मां को चोदने लगा। अमित ने रेणु को मां के बग़ल में लिटाया। क़रीब 15 मिनट बूर को चूस चाट कर लड़की को गर्म किया, और उसे चोदने लगा।
राजेंद्र ने 25-30 मिनट की चूदाई के बाद इंदिरा की बूर में रस गिराया। इंदिरा ने उसकी चुदाई की तारीफ़ की और यह कहा कि उसने चोद कर उसे बहुत थका दिया था। राजेंद्र ने चॉकलेट ड्रिंक मंगाया, और इंदिरा को नंगी रहने कहा। एक फिरोज़ नाम का वेटर ड्रिंक लेकर आया। राजेंद्र ने पूछा कि इंदिरा कैसी माल है तो उसने इंदिरा की बूर, चूची, और जांघों को दबा कर कहा कि ये औरत रुम में चुद रही रेणु और राजेंद्र की बहु समिरा से कहीं ज़्यादा बढ़िया माल है। उसने यह भी कहा कि रुस्तम सेठ इंदिरा को चोदने के लिए पांच लाख देगा। इंदिरा ने होटल से बाहर जा कर चुदवाने से मना कर दिया।
अमित को पसंद नहीं आया कि उसकी मां ने राजेंद्र से चुदवाया। और जब उसने वेटर को एक बार भी मना नहीं किया, ना उसे रोका, और वेटर ने सब के सामने बूर और चूचियों को मसला, तो अमित को बहुत बुरा लगा ही, उसे अपनी मां पर बहुत ग़ुस्सा भी आया। उसने सोचा कि मां को रेखा, नगमा और संगीता के सामने असलम से चुदवायेगा। अमित अपनी मां की गंदी हरकतों के बारे में सोचते हुए रेणु को लंड चुसा रहा था।
राजेंद्र: बेटा अमित, तेरी मां तो बहुत ही मस्त माल है ही, तू भी ग़ज़ब का मर्द है। मैंने सैकड़ों मर्दों का लंड देखा है। किसी का भी लंड तेरे जैसा नहीं है। तुमने अपनी मां को क़रीब एक घंटा चोदा, रेणु को एक घंटा चोदा, और अब क़रीब 15 मिनट से उसे लंड चुसा रहे हो। इतना स्टैमिना कहां से आया?
अमित ने रेणु के माथे को लंड पर दबाया और तेज़ी से आगे-पीछे करने लगा।
अमित: राजेंद्र साहब, जिस बूर से आप खेल रहे हैं मैं वहीं से निकला हूं। अपनी कुतिया से पुछिए की किस घोड़े से चुदवा कर मुझे पैदा किया था।
अमित बहुत ग़ुस्सा में था और तेज़ी से रेणु के माथे को अपने लंड पर आगे-पीछे कर रहा था। अमित की बात सुन कर इंदिरा समझ गई कि उसके बेटे को पसंद नहीं आया कि उसने राजेंद्र से चुदवाया, और वेटर को भी नंगी जवानी की मस्ती लेने दी।
इंदिरा: बेटा, तू बेकार में ग़ुस्सा कर रहा है। कोई भी शरीफ़ औरत कितनी भी चुदासी हो, मर जायेगी लेकिन किसी भी हालत में अपने बेटे से नहीं चुदवायेगी। जो मेरी जैसी रंडी, छिनार होगी वहीं बेटे से चुदवायेगी। जिस बूर से तू बाहर निकला है उसके अंदर घुसने का मैंने तुझे मौक़ा दिया तो तुझे मेरे पांव धो धो कर पूजा करनी चाहिए।
इंदिरा एक हाथ से राजेंद्र के लंड को सहला रही थी, और अपनी कहानी भी सुना रही थी।
इंदिरा: मैं जवान हुई और एक साथ तीन-तीन अपने बाप से भी बड़े उम्र के मर्दों की गोदी में नंगी बैठने लगी। तीनों मेरी नंगी जवानी से खेलते थे। लेकिन किसी के लंड में इतना दम नहीं था कि मेरी चूत में लंड पेल सके। मेरा घरवाला ही पहला आदमी था जिसने मेरी चूत में लंड पेला। राजेंद्र, मेरा घरवाला बहुत बढ़िया चुदाई करता है। उसने अपने घर की सभी औरतों को चोदा है, अपनी मां को भी।
इंदिरा: मैं छिप-छिपा कर देखती थी और वो दूसरे कमरे में अपनी मां, बहन, भतीजी, चाचियों को चोदता था। शादी के 2 साल बाद एक शाम ससुर जी मेरे सामने आये, और मेरे देखते-देखते नंगे हो गये। मैं उन्हें नहीं रोक पाई, और वे रोज़ मुझे चोदने लगे। कुछ दिन के बाद मैंने अपने पति से कह दिया तो पति ने कहा कि उसे मालूम था कि उसका बाप मुझे चोदता था। मैं आगे और क्या बोलती? एक दोपहर ससुर जी यह कह कर मुझे बाहर ले गया कि “चलो तुम्हें एक बहुत ही बढ़िया लंड दिखाता हूं”। मैं उनके साथ बाहर निकल गई। ससुर जी मुझे एक स्टेबल में ले गये। वहां कुल मिला कर 17 जानवर थे। उसमें 14 घोड़ियां थी और तीन घोड़े।
इंदिरा: ससुर जी ने मुझे वहीं बैठने कहा और यह कह कर चले गये कि “रानी यहां बैठ कर तमाशा देखो मैं कुछ देर में आता हूं।” और बेटा मेरे देखते-देखते एक घोड़े का लंड फैलता गया। देखते-देखते वो पूरा लंबा हो गया। उधर घोड़े का लंड एक घोड़ी के बूर में घुसा और एक बिल्कुल अनजान आदमी ने उन जानवरों के बीच मुझे नंगा किया और सीधा चोदने लगा।
इंदिरा: वे चुदाई तब तक की मेरी सबसे बढ़िया चुदाई थी। इधर वो आदमी मुझे चोद रहा था, और मेरी आंखों के सामने तीनों घोड़े अपनी-अपनी घोड़ियों को चोद रहे थे। पूरी चुदाई के दौरान मैं घोड़ियों की बूर के अंदर-बाहर होते लंड को देखते हुए यही सोचती रही, भगवान से प्रार्थना करती रही, कि उस दिन की चुदाई से मेरे पेट में बेटा रह जाये, और बेटे का लंड घोड़ों के लंड जैसा ही लंबा और मोटा हो। उस आदमी ने मेरी बूर में अपना रस गिराया और बोला, “मैं रोज़ तुम्हारे ससुर को ऐसा काम दे दूंगा कि वो तुमसे डेढ़-दो घंटे अलग रहे और हम दोनों खूब मस्ती मार सके। इंदिरा मैं कल इसी समय पर तुम्हारा इंतज़ार करूंगा। ज़रूर आना।”
इंदिरा: वो आदमी रविंद्र सेन था कोलकाता रेसकोर्स का मैनेजर। मेरे ससुर उसके नीचे काम करते थे। रात को चोदते समय ससुर ने पूछा तो मैंने कह दिया कि घोड़ा-घोड़ी की चुदाई देखना मुझे बहुत ही बढ़िया लगा। मैं रोज़ देखना चाहती हूं। और बेटा, अगले 30 दिनों तक तेरे दादा जी रोज़ मुझे वहां ले जाते रहे। वो मुझे छोड़ कर जाते थे, और रविंद्र मुझे जम कर चोदता था। हर चुदाई के समय मैं वहीं प्रार्थना करती थी कि मेरे बेटे का लंड घोड़ा के जैसा ही हो।
इंदिरा: रविंद्र ने पहली बार चोदा और उसके ठीक 270 वें दिन तुम मेरी बूर से निकले। नर्स ने तेरा लंड दिखाते हुए कहा था “मैडम तैयार रहिए आपके बेटे का लंड सबसे पहले आपकी ही बूर में घुसेगा। 1000 से ज़्यादा बेटों को देखा है, लेकिन इतना लंबा और मोटा लंड पहले किसी का नहीं देखा”।
