आप लोग कुछ डिमांड मत कीजिये,क्यूँ की यह किसीका लाइफ की सच्ची घटनाएँ है। जो में सुना , वह आप भी जानीए। बस एक चीज़ कहानी को कैसे फील करते रहेंगे, वह बताइयेगा। आप लोग अगर इंटेरेस्टेड नहीं रहेंगे, तोह मेहनत करके बताने का जरूरत नहीं होगा।
एम पी । में मेरा दोस्त किसी के घर में पेइंग गेस्ट बन के रहता है। ।मि.पटेल एक छोटा बंगलो टाइप घर किराया में लेके वहां रेह्ते है। उनका घर में मिसेस पटेल और उन लोगों का नर्सरी में पड़नेवाली एक बेटी है,ज़ीस का नाम दिया है। वह मेरा दोस्त को चाचू बुलाता है। मि.पटेल (अब्ब से हितेश नाम से बुलाएँगे) को मेरा दोस्त नाम से ही बुलाता है पर उनकी पत्नी यानि की मिसेस पटेल (अब्ब से मंजु बुलाएँगे) को भाभी ही कहता है। गुजरात में अब्ब हितेश का कोई नहीं है। पिछला ५ साल से मंजु का परेंट्स भी गुजरात छोड़के मुंबई में आगये। वहाँ एक फ्लैट खरीद के वह दोनों रेह्ते है। कहानी उस समय से डिटेल मालूम है जब हीतेश इंजीनियरिंग का लास्ट इयर में था उस से पहला घटना भी बताऊँगा जितना में जानता हू। हितेश अहमेदाबाद में ही पड़ रहा था। अहमेदाबाद के पास एक जगह है(नाम पूछिए मत) जहाँ हितेश अपनी माँ, नाना और नानी के साथ रहता था। उस का फ़ादर एक अनाथ था पर अच्छा इंसान था। इस्स लिए उसका नाना उनको घर जमाई बना के अच्चा प्यार दिया था। उसका नानी थोड़ी हिचक रही थी क्यूँकि उस समय उनकी बेटी देखने में बड़ी होगयी थी पर उम्र में कम थी। गुजरात में शायद कम उम्र में शादी होती है लगता है। सब ख़ुशी से जी रहे थे साल घूम ने से पहले ही हितेश आगया। ख़ुशी से सब झूम उठे। पर ज़ादा टाइम यह हाल नहीं रहा। हितेश के जनम के दो साल बाद मलेरिआ से अचानक हितेश के फादर की डेथ हो गई। तब हितेश की माँ केवल १८ साल की थी। एक बड़ा झटका लगा था उस फॅमिली को पर धिरे धीरे वह लोग उस सदमें से बाहर आने लगे और नार्मल होने लगे। कुछ साल बाद हीतेश के नाना नानी मंजू की दोबारा शादी के बारे में सोचे। पर मंजु खुद ही मना कर दिया वह। हीतेश के नाना के पास पैसा और प्रॉपर्टी था। तोह वह लोग एक फॅमिली बन के , एक आराम की ज़िन्दगी बिता रहा थे पर हितेश जब कॉलेज ख़तम किया उसको काम्पुसिंग में ही जॉब लग गया केवल २० साल का उम्र में। कंपनी में जाके जॉब ज्वाइन किया। और वीकेंड में घर आया करता था। पर उसका नाना नानी यह सोच के परेशांन होते थे की इतने दूर , अकेला उसका रहना खाना सब अकेले में करने में तकलीफ होती होगी। सो उसके नाना नानी उसकी शादी करवा ने के लिए सोच लिया।
आगे के भाग को आसान करने के लिए हीतेश की जबान से बोलुंगा। की कैसे उसके लाइफ का एक छुपा हुआ सपना अचानक खुद के बिना कोशिश में सच हो गया। जो सपना केवल वह देखता था मन ही मन में, वही शामे चीज़ उसका नाना नानी सब ठीक विचार करके अपने सब के भलाई के लिए कैसे सच करवा दिया। सब की मर्ज़ी से यह कहानी आगें गई। जो कुछ परेशानिया आगे आई , वह कैसे कैसे दूर हुआ, कैसे वह एक सचचा प्यार से बढा हुआ फॅमिली ,एक ही रह गया ज़िन्दगी भर के लिये। हीतेश का नाना नानी अपना पोता हीतेश को खोये। उन लोगों ने एक नया पोता पाने का आशा किया था , आब वह लोग कभी पोता पाएंगे नाहि,पर नन्हि मुन्नी पोती दिआ को पाके ही खुश है। क्यूँ की डॉक्टर साफ़ मना कर दिया हीतेश को ,की अगर वह दूसरा बच्चे के लिए प्रयास करेगा तो उस्का पत्नी यानि की मंजु का जान जा सकता है। पहले पहले हीतेश का प्रॉब्लम होता था नाना नानी को मम्मी पापा बुलाने में। कभी कभी नानाजी, नानीजी मुह से निकल जाता था। पर आज सात साल में सब कुछ परफेक्ट हो गया। जिस तरीके से हीतेश रिस्पांसिबिलिटी लेके ज़िन्दगी बिता रहा है, अपना बीवी , बच्चा का ख्याल रखता है, बूढ़ा साँस ससुर का ध्यान रखता है, और कोई आता इस फॅमिली में तो शायद ऐसा नहीं ही पाता। यह लोग अपने दामाद से बेहद खुश है। और मंजू।।उसको पहले तो सब सपना जैसा लगा था। आब वह एक अच्छी हाउसवाइफ है। बूत यह सब आसानी ने नहीं हुआ कैसे हुआ वह में आप को बतौँगा।
एक एक्स दोस्त के कहने पर में इस सच्ची घटना को कहानी जैसा लिखने का कोशिश किया। आप लोगों का इस कहानी पड़ कर क्या फीलिंग्स होता है, वह जरूर बताइयेगा। मुझे होसला बढ़ेगा
मै हितेश। बचपन से में अपना नाना नानी और माँ के साथ रह के बड़ा हुआ। फादर न रहने के कारन मेरा नाना नानी कभी कमी नहीं छोड़ि प्यार और सपोर्ट देणे में। माँ हमेशा आपनि ममता और प्यार से मुझे पालन किया। नाना के पास पैसा होने के कारन मुझे कभी कुछ भी चीज़ का कमी मेहसुस करने नहीं दीए। मैं ऐसे ही तेज स्टूडेंट था। इस्स लिए सब लोग मुझे प्यार ही प्यार देते थे। मैं बदमासी भी करता था। पर इतना नहीं जो की बिगडे बच्चे करते है। छोटा मोटा शरारत करता वह अपनी तरीके से माफ़ किया कर देता थे। पर हाँ।।।मुझे हमेशा अच्चा वैल्यूज और मोरालिटी के साथ की पाला वह लोग। बाहर ज़ादा लोगों के साथ मेरा दोस्ती भी नहीं था। नाना नानी और माँ सब मेरा दोस्त भी थे और टीचर भी। डांटते भी थे । फिर सीखाते भी थे। हम चारों एक बॉन्डिंग से बढ रहै थे बचपन से।यही देखते गया। मैंने यह सुना की मेरा पिताजी गुजर जाने के कुछ साल बाद , मेरा नाना नानी मेरा माँ का दोबारा शादी करवा नेके लिए कोसिश किया थे। तब मेरा माँ २३-२४ साल की थी। बहुत सुन्दर देखने में थी। स्लिम और गोरी। लम्बे बाल था । पान का पत्ते जैसा मुह का शेप। उनका आँख , ऑय ब्रोव्स , नाक, होठ सब कोई अर्टिस्ट का बना हुआ लगता है। बारवी क्लास तक पढ़ी है। उसके बाद जिन्दगी में हदसा और बाद में मुझे देख भाल करके बड़ा करने में जुट गई। मेरा और कोई मौसी नहि। सो नाना नानी की वही देख भाल करति थी। घर का काम भी करति थी , फिर मुझे पढाती भी थी और टाइम मिलता तोह वह बड़े बड़े लेखक के नावेल स्टोरी पड़ने में उस्ताद थी। एक बेटी होने के कारन नाना नानी भी उनको घर में रहने का सब बंदोबस्त कर दिया था। उनको भी बुक पड़ने का नशा लग गया बचपन से। बाद में वह एक ही की थी जो वह अपनी खुद के लिए ,अपनी मन की ख़ुशी के लिए करती थी। मेरा नानी भी इतने ओल्ड नहीं थे। पर मेरी माँ मेरे पिताजी का फॅमिली नहीं होने के कारन अपना बेटा लेके नाना नानी के फॅमिली को ही अपना फॅमिली सोच के सब देख भाल करती थी। शायद उस में उनको ख़ुशी मिलति थी और वक़्त भी गुजर ने का तरीका मिला था। वह शांत स्वाभाव की थी पर हसि की बातों से हस्ति भी थी और टीवी में दुःख दर्द भरी फिल्म देखके मायूस भी हो जाति थी। कुछ लोग नाना जी के पास उनको शादी करने के लिए प्रपोजल भी लाया था। पर कुछ मेरा नाना जी।।और बाकि मेरा माँ कैंसिल कर दिया। स्टार्टिंग में नाना नानी माँ से गुस्सा करता था । माँ का भविष्य के लिए वह बोलते थे की सारी ज़िन्दगी पड़ी है तेरी, कैसे गुजारेगि। और यह भी कहते थे की हितेश को भी तो एक बाप पाने का इचछा होता होगा। बाप का प्यार। पर माँ का कहना था की अगर वह किसी को फिर से शादी किया तोह वह आदमी अपना अधिकार दिखाके मुझे त्याग करने को कहेगा और नाना नानी को छोड़ के भी जाने लिए कहेंगा। आब इस सिचुएशन पे वह उनके लिए सम्भब नहीं था वह मुझ से दूर नहीं रह सकति , और नाना नानी को अकेले छोड़के और किसी फॅमिली में जाके अपना गृहस्थी कर सकता थीं। माँ ने मेरा मुह देख के उनका सब सुख ख़ुशी विसर्जन देणे का फैसला किया था। नाना नानी धीरे धीरे उनका बात मान ने लगा , पर अंदर ही अंदर फ्यूचर को लेके परेशान थे।
div class=”content”>इसी बीच में बड़ा होते रहा. नाना नानी को में बहुत बहुत प्यार करता था. उन लोगों से दूर नहीं रह पाता में. वह लोग मेरी दुनिया बन चुके थे. सबसे ज़ादा प्यार करता था माँ को. उनका सब कुछ मुझे बहुत अच्चा लगता था. वह जो कहे, जो करे, जो खाना बनाये, जो कपडा ख़रीदे मेरे लिये..सब…सब कुछ मुझे अच्चा लगता था. इतनी अच्छी होने के बाद भी उनको ज़िन्दगी बहुत कुछ दिया नही. फिर कुछ चीज़ देके फिर ले भी लिया. हमारे सब के ख्याल रखा, सब की जिम्मेदारी उठाना मुझे उनके लिए एक अद्भुत प्यार था मन में. मैं कभी उनको दुःख न देणे की कसम खाई थी मन में.
नाना नानी मुझे हमेशा ‘तुम’ केह्के बुलाते थे माँ भी. लेकिन में नाना नानी को ‘आप’ केह्के बात करता था. पर माँ को हमेशा ‘तुम’ ही कहता था. हम सब के बीच एक बॉन्डिंग था. नाना का घर काफी बड़ा था. नाना नानी एक बड़ा सा रूम में रहते थे मैं माँ के साथ रहता था दूसरे एक बड़े कमरे में. घर में और भी तीन रूम है. जो खाली पड़े है. सामान है. पर में जैसे जैसे बड़ा होता गया मेरे लिए एक स्टडी रूम बना. फिर में अकेला सोने लगा. मेरे नाना एक दिन एक रूम साफ़ सफाई करके और एक बेड लगा के वह रूम मेरे नाम कर दिया. मैं बहुत खुश था. आखिर मेरा भी एक आइडेंटिटी बन रहा है. मैं एक इंडिविजुअल भी बन रहा था. यह सोच के अच्चा लगता था.
मैने स्कूल में कुछ दोस्त बनाये थे. धीरे धीरे सेक्स के बारे में जानना, अपोजिट सेक्स के प्रति आकर्षित होना…सब बाकि लड़कों के जैसा फील करने लगता था. उन दोस्तोँ से में मुठ मारने के बारे में जानने लगा. अकेले एक रूम मिलने के कारण में रात को एकदिन मुठ मारना ट्राई किया. पर डर लगा. अगर किसी को पता चला तो. सब कुछ सोचा, फिर भी उस दिन ट्राई किया और अनाडी जैसा करके ख़तम किया. मुझे इतना अच्चा फील नहीं हुआ. पर हा..एक अजीब ख़ुशी के एक फीलिंग्स से मन भर गया था. कुछ दिन बाद फिर किया. पर शेम हालत थी. जब यह बात एक दोस्त ने सुना उसने मुझे एक बुक दिया. करीब एक महिना हो चुका पहला मुठ मारे उस दिन बड़ी डर डर के वह किताब छुपके घर लाया और इंतज़ार करते रहा रात का सब सो जाने के बाद में कुछ नया मेहसुस करने के उत्तेजना में कांप रहा था. हर दिन के तरह माँ सोते टाइम आके दूध का गिलास दिया और बिस्तर ठीक करके मेरे पास आई. मैं टेबल में पड़ रहा था. उन्होंने मेरे सर के बालों में हाथ फिराया प्यार से में उनको देखा और वह मुस्कुराके गुड नाईट बोलके चलि गयी. हर रोज मुझे इस पल बहुत ख़ुशी और माँ के प्रति प्यार अता है. पर आज एक अजीब उत्तेजना मेरे शरीर में था. मैं इंतज़ार कर रहा था कब वह जाये और में रूम लॉक करू. वह जाने के थोड़ा देर बाद में रूम लॉक किया और वह किताब निकाला. किताब खोलतेही मेरा मुह खुला के खुला रह गया. वह एक फोटोज से भरी बुक है. सेक्स करते हुए आदमी और औरत के फोटो. सब फॉरेनर्स है. पेहली बार यह सब देख के इतना उत्तेजित था की जल्दी ही मेरा निकल गया.
ऐसे कुछ दिन चलतारहाऔर अलग अलग किताब मिलता रहा. लेकिन वह इतना रॉ था और एक अद्धभुत दुनिया था की वह चीज़ से मन हट्ने लगा. फिर धीरे धीरे एक अजीब तरीके से मन उत्तेजित होना चालू किया. रस्ते में कोई लड़की देखके या बस में बैठि कोई लड़की के फेस देख के रात में वह सोचता था और मस्टरबैट करता था. ऐसा करने में मन में एक अलग ख़ुशी मेहसुस होता था. जैसे की कोई अपना सहर की लडकि, अपना जैसा अट्मॉस्फेरे में बड़ा हुआ एक लड़की के सरीर सोच के और उसके साथ मिलन के दृस्य कल्पना करके मेरा काम चलता था. सोचता था की एकदिन ऐसेही एक लड़की मेरी बीवी बनेगी और उसके साथ में मन भर के सेक्स करूँगा
यह सब के बाद भी मेरा पढाई में कोई कमी नहीं था. मैं अच्छे रिजल्ट करके आगे बढ़ते रहा. एक रविवार. मैं घर में था. नाना नानी के साथ वक़्त बितारहा था. माँ घर के काम में लगी हुए थी नानी भी माँ को हेल्प कररहे थी. मैं एहि सब देखरहा था सोफ़े में बैठके एक स्पोर्ट्स मैगज़ीन हाथ में लेके. उस दिन क्या पता क्यूं, में अजीब नज़रों से माँ को देखा. शायद यह मेरा इतना महीनों के हरकतों का फल था. पर में जब उनकी गर्दन हिला हिला के नानी से बात करते हुए देखा तब में उनकी कन्धा देखके मन अजीब नशा में बंद होने लगा. फिर उनकी ब्लाउज और साड़ी के बीच के पेट् नज़र आया. मेरा नशा लग गया था. अचानक वह बाथरूम से पैर धोके के निकली. साड़ी थोड़ा ऊपर करके पकडे थे मुझे उनकी हील्स के ऊपर से ऊँगली तक पूरा पैर नज़र आया. सुन्दर गोलगोल हील्स है और सुन्दर उंगलियां. एकदम लाइट कलर के नेल पोलिश लगा हुआ है. मैं उनकी फेस नहीं देखा. बस यह सब देख के नशा हो गया..
उस रात में जब मस्टरबैट किया मुझे खाली वह सब चीज़ नज़र के सामने आया. मैं बहुत टाइम लेके एक अजीब अद्भुत नए फीलिंग्स के साथ किया. ऐसा आज तक नहीं हुआ. मुझे ओर्गास्म के साथ जो सटिस्फैक्शन मिला
वह लाइफ में पहली बार फील हुआ. उस रात एक गहरी नीद आया.
मैने हमेशा एक डिफरेंस देखा. मेरे बाकि दोस्तोँ की माँ और मेरी माँ में बहुत अंतर है. वह सब एक भारी भरकम माँ जैसा होता था, पर मेरी माँ उन लोगों के छोटी बहन या बेटी जैसे लगती थी. एक तो उम्र बहुत कम है. साथ में वह देखने में बहुत सुन्दर थी. उनको रस्ते में जाते हुए देंखे तो कॉलेज की लड़कियों की तरह लगती थी. पर किसको मालूम की उनको मेरे जैसा एक बेटा है और उनकी ज़िन्दगी में एक भयानक हदसा हो चुका है..
उस रात के बाद तीन साल बित चुका है. मैं इंजीनियरिंग में फर्स्ट इयर में एडमिशन ले लिया. मेरे रूम में ब कंप्यूटर आगया है. और मेरा बारवी क्लास का अच्छी रिजल्ट के लिए नानाजी ने मुझे एक छोटा डिजिटल कैमरा गिफ्ट किया है.
येह सब चेंजेस से ज़ादा जो चेंज हुआ वह है में खुद. मेरा नाना नानी और माँ के प्रति मेरा शद्ध भक्ति और प्यार , पहले जैसा है. जो सब लोक देखते है. पर अंदर ही अंदर मेरा माँ के प्रति एक दूसरी तरह का प्यार मन में जनम ले लिया. कब कैसे यह सब हुआ , मुझे भी पता नहीं चला. नाहीं कभी किसी को इस बारे में पता चलेगा. मैं उसको प्यार से मेरे मन के अंदर के कमरे में छुपा के रखा. बीच बीच में वहां से निकाल के अकेले उसके साथ मेरा सबसे अच्छा वक़्त बिताता हू. और फिर से वहां रख देता हू. इस्स प्यार को में बयां नहीं कर पाऊंगा.
उस रात मेरा माँ का कंधा, पेट् का हिस्सा और पैरों को सोच के मुझे जो एक सटिस्फीएड ओर्गास्म मिला था उस के बाद धीरे धीरे मेरे मन में माँ के लिए एक अद्भुत प्यार जागने लगा. नाकि वह केवल सेक्स से सम्बंद्धित है,…वह मेरे मन की ख़ुशी का सबसे बड़ा आधार है.
हां…उस दिन के बाद आज तक में जब भी मस्टरबैट किया, मेरे ख़यालों में सिर्फ वह ही आति है. और कोई कभी एंट्री नहीं ले पाया आज तक्. मैं धीरे धीरे उनको अलग नज़रियाँ से देखना सुरु किया..पर सब का नज़र छुपाके, एवं माँ को भी आज तक पता नहीं चला. वह आज भी हमेशा के तरह सोते टाइम एक गिलास दूध लेके आति है, बिस्तर ठीक करवाके मेरे पास आति है और सर के बाल पे प्यार से उँगलियाँ फ़िराती है. और थोड़ा देर बाद एक प्यारी सी स्माइल के साथ गुड नाईट केह्के चली जाती है. मैं जब उनको सोच के हिलाता हू, तोह मेरे तन्न मन एक नशे में भर जाता है और मुझे सब से ज़ादा संतुस्टि मिलति है.
मा हमेशा लाइट कलर नेल पोलिश पसंद करति है. जब भी वह किसीके घर शादी या और कोई प्रोग्राम में जाती थी तोह उन्होंने हल्का सा मेकअप लगा लेती थी. हलका लिपस्टिक उनके होठो को और भी खूबसूरत बना देती थी. मेरे साथ मेरी बड़ी दीदी जैसा लगता थी. और नाना नानी के साथ लगता ही नहीं था की वह उनका बेटी और में पोता हु.
कुछ दिन पहले तक में मेरी माँ का हर पिक्चर अपनी ऑखों से कैद करता था. उनकी तस्वीरें केवल मेरी आँख से ही खीचता था, उनकी जाने अन्जाने में तोंर तरीके की तस्वीर मेरे दिमाग में सेट कर लेता था. पर मुझे कैमरा मिलने के बाद में उस से फोटो खीचता हू. सब का पिक्स लेता हूण. नाना नानी का बहुत पिक्स लेता हूं..अन्य टाइम ..फिर अन्य तरीके से…. साथ में माँ का भी….डीजीटल कैमेरा होने के कारन कभी कभी माँ के अन्जाने में उनका बहुत फोटो खिचा. मैं सब फोटो पी. सी में रखा है. पर स्पेशल मेरे माँ का सब फोटो में एक सीक्रेट फोल्डर बनाके छुपाके रखा है. जो केवल मेरे लिए ही है. उस फोल्डर में माँ का हर तरीके का फोटोज है. हस्ते हुये, घुस्सेके टाइम, उदासी के फोटोस, प्यार भरी झुकि हुई नज़र का पिक्स, बाते करते वक़्त का पिक्स, काम करते वक़्त का फोटो, मेरे साथ पिक्स है जो नानाजी क्लिक किया. और बाकि कुछ जॉइंट फोटो से केवल माँ का पिक्चर काट के अलग कर लिया. ऐसा भरा हुआ है मेरा पिसी माँ का फोटोज से. अब में हर रात जब माँ दूध का गिलास देके चले जाते है और सब सो जाते है, में वह फोल्डर खोल के माँ को देखता हूण. उनका हर अदा गौर से देखता हूण. और एक सपने में डुब जाता हूण. माँ के लिए प्यार उभर के आने लगता है. तब में आहिस्ता से पैंट का ज़िप निकाल के अपना पेनिस निकाल ता हूण. वह अब और भी बड़ा होने लगता है. मेरा मुठ्ठी भी कम पडता है. अपनी पाँच उँगलियाँ से उसको टाइट पकडता हूँ और माँ के साथ मिलन का प्यारी दृस्य कल्पना करके धीरे धीरे हिलाने लगता हूण. अब पहले जैसा अनाडी के तरह नहीं करता हूण. अपना सुख पाने के लिए खुद ही सिख गया कैसे संतुस्टि मिलती है. मेरा पेनिस बहुत मोटा है. और उसका अगली पोरशन सबसे ज़ादा मोटा और राउंड शेप का है. सामने का पोरशन फ्लैट है. मेरे देखे हुये बाकि पेनिस की पिक्टुरेस जैसा अगला भाग पतला होक पॉइंटेड टाइप नहि. थोड़ा सा डम्बल के किनारे जैसा है. लम्बाई नार्मल है. जब ओर्गास्म होता है तब वह अगले भाग का कैप और फूल जाता है और मुठ्ठी के अंदर आने में अटक जाता है. पर में ओर्गास्म के टाइम अंख बंध करके माँके सरीर के अंदर मेरा सीमेन छोड़ने का सुख प्राप्त करता हूण
मेरा दोस्त जब हीतेश को पुछा था की वह इंटरनेट सेक्स में एडिक्ट हुआ था क्या कभी? उस ने बताया की उस को कभी वहां जाने की जरुरत नहीं पडी. वह अपना खुद का क्रिएट किया हुआ एक दुनिया बना के उस में ही संतुस्टि प्राप्त करता था. और क्या चाहिए इस के अलावा… पर हाँ हीतेश ने यह बताया था की जब वह अपना जॉब ज्वाइन किया और उसका शादी तय हो गया, तब शादी का डेट से पहले जितना दिन मिला था , वह सब दिन वह नेट से कुछ सेक्स एजुकेशन लिया था…क्यों लिया था… इस बारे में में टाइम होने पर बताऊंगा.
अब कहानी में आता हूँ हीतेश की जुबानी में। इसी तरह लाइफ चलति रही। और में इंजीनियरिंग की लास्ट सेमेस्टर में पहुच गया। मेरा रिजल्ट अच्चा हो रहा था। पढाई में में कोई ढील नहीं दि। जब नाना नानी और माँ मेरा इतना ख्याल रखते है, इतना प्यार देते है, तोह में क्यों न उन लोगों को खुश होने का मौका न दू !! मेरी पढाई से सब खुश थे। मैं भी नार्मल लड़का ही था। देखने में भी ठीक ठाक था और शरीर का स्ट्रक्चर भी अच्चा था। पढाई का प्रेशर और रात का फैंटसी सेक्स वर्ल्ड के कारन में बाकि स्टूडेंट से थोड़ा मेचुरड लगता था। एकबार में माँ के साथ घर का कुछ शॉपिंग में माँ को हेल्प करने के लिए उनके साथ एक सुपर मार्किट गया था । वहाँ मेरा एक क्लास मैट मेरी माँ को मेरा बेहन समझ के बात कर रहा था। जब उस्को बताया की यह मेरी माँ है, तोह उसके मुह की हालत क्या हुआ था , आज भी मुझे याद है। मेरा अच्चा ख़ासा एक मेनली अपीयरेंस के कारण कॉलेज में कुछ लड़की क्लास मैट मेरे साथ क्लोज होने की कोशिश करती थी। मैं कभी भी।।आज तक किसीके उप्पर वीक नहीं हुआ , फ्लिर्टिंग भी करता नहीं था। वह लोग दो चार दिन में समझ जाति थी और मेरे से दूर होने लगती थी। मुझे अपनि माँ छोड़के कोई भी अच्छी नहीं लगती थी। इस्स लिए शायद में अपनि माँ के ही प्यार में पडा। वह ख़ुशी की खबर मेरे दूसरे कान तक भी नहीं पहुँची कभी भी। मन्न की बात मन में ही रहती थी।
मुझे यह भी मालूम था की मुझे एक दिन ऐसे ही एक दूसरी कोई लड़की से शादी करनी पडेगी। नाना नानी का एक मात्र पोता और माँ का एक बेटा होने के कारन मुझे मालूम था, में मन में जो भी सोच के रोज खुश क्यों न हु, मुझे एकदिन एक लड़की को चुनना पड़ेगा मेरी बीवी बनाने के लिये। तब मुझे एक डर भी आता था। क्यूँ की में जानता था मेरा पेनिस और बाकि सब के जैसा नहि। यह बहुत मोटा और आगे का कैप बहुत बड़ा राउंड शेप का है। फिर स्कलन के टाइम तो वह कैप फूल के और भी बड़ा हो जाता है। मैं कैसे अपने बीवी के साथ सेक्स करूँगा। यह सोच के में कभी कभी मायुस हो जाता था। अगर वह लड़की मेरा पेनिस अपनी पुसी में न ले पाया तो!!! अगर मेरा पेनिस ठीक से अंदर कम्फर्टेबली एडजस्ट ना हुआ तो!! अगर वह दर्द से मुझेसे दूर रहा तो!! कैसे होगा पति पत्नी का मिलन!! कैसे मेरे फॅमिली की अगली पीडी पैदा होगी!! तब किसको बताएँगे यह सब प्रॉब्लम का बात!! कौन समझेंगे !!! यह सब सोच के डर लगता था। लेकिन आज २७ साल के उम्र में एक एक बात महसुस हुआ। पति -पत्नी के मिलान से जो सुख मुझे और मेरी बीवी को मिलता है , बहुत कम सौभ्ग्य्वान है , जिस को वैसा सुख प्राप्त होता होगा।
मेरे फाइनल एग्जाम से पहले मुझे काम्पुसिंग में ही जॉब मिल गया। एम पी में। एक बहुत बड़ा इंजिनेअरिंग कंस्ट्रक्शन कम्पनी। भारत की पुरानी कंपनी में से एक है।
उस दिन घर में जब यह न्यूज़ दिया , तोह सब ख़ुशी से झूम उठे। इस्स लिए नहीं की मुझे सैलरी मिलेगी, वह लोग खुश था इस लिए की एक लडका, जिसका बाप बचपन में चल बसा, उसको उसके नाना नानी और माँ पालके एक इंडिपेंडेंट आदमी बना दिया। अब लगता है की वह लोगों का ड्यूटी ख़तम हो गया। नाना का पैर छुआ तो वह मुझे गले लगा लिया। नानी का पैर छुए तो वह मेरा सर पकड़ के सर पे हाथ रख के अशीर्वाद देणे लगी। नाना नानी बहुत भावूक बन चुके थे। ख़ुशी से आँख नम्म होक छल छल करने लगी। और दोनों बहुत सारी बाते करे जा रहे थे। माँ एक साइड में खड़ी होके यह सब देख रही थी। जब में माँ के पास गया, माँ कुछ बोली नहि। लेकिन उनके आँखों में में जो प्यार और ख़ुशी देखि, वह उनके पास बरक़रार रखने के लिए में ख़ुशी से जान भी दे सकता हू। मैं उनका पैर छुए तो वह मुझे पकड के गले मिलने गई पर में ५’११” का था , वह ५’ ५” कि, तोह उनका सर मेरे गले के पास कंधे में टिक गया। वह मुझे पकड़ के रखि कुछ मोमेन्ट्स। फिर छोड़ के मेरे दोनों गाल को दोनों हाथ से पकड के, आँखों में बहुत सारा प्यार लेके और होठो में ख़ुशी का स्माइल लेके मुझे देखा । फिर मुझे नाना बुलाये तो में उनके पास गया। माँ और नानी किचन में चलि गयी मेरे लिए खीर बनाने के लिये। यह एक चीज़ हमारे घर में होता था। जब भी कुछ ख़ुशी की बात होती थी तो घर में खीर बनती थी। मैं खीर बहुत पसंद करता हू। आज भी मेरे घर में खीर की परंपरा जारी है। मेरी बेटी भी खीर की भक्त है।
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उस रात सब सोने के बाद जब में माँ का तस्वीर खोलके माँ को देख रहा थ, मुझे शाम का याद आया। माँ मेरे गाल पकड़ के मेरी तरफ एक प्यार भरी आँखों से जो नज़र दिया था, वह इनोसेंस से मेरा प्यार और बढ गया। मैं उन में खो गया और मुझमे मधहोसी छ गई। मैं झुक के कॉम्प स्क्रीन में खुला हुआ माँ का एक बिग क्लोज अप पिक्चर के पास गया। और आँख बंध करके धीरे धीरे उनकी लिप्स के साथ मेरा लिप्स मिलवाया। मेरा बदन में करंट सा खेल गया। पूरा बदनकाँपने लगा। मैं झट से ज़िप खोलके अपना पेनिस को पक़डा। आज मेरा पेनिस एक दम फूल कर, खड़ा होके, फुल रहा था। मैं फुली हुई पेनिस को पकड़के ज़ोर ज़ोर से झटका देणे लगा। और लिप्स में फिर से किस करने लगा। जल्दी ही ओर्गास्म के तरफ पहुच गया। मैं सीधा होके बैठ के फुल स्पीड से हिलाने लगा। मेरा पूरे बॉडी से निचोड के सब सीमेन पेनिस की नली भर के तेजी से बाहर की तरफ आने लगा। मैं आँख बंध किया । ओर्गास्म चरम सीमा में पहुच गया। जस्ट मेरा सीमेन निकल ने से पहले मेरा मुह खुल गया , हवा लेने के लिए में मुह ऊपर के तरफ किया और मेरा मुह से निकल ने लगा ”मंजू आई लव यू” और पेनिस से सीमेन छिटक छिटक के गिरने लगा।
तीन महिना भी कट गया। इसी बीच मेरा फाइनल एग्जाम का रिजल्ट भी आगया। और मेरा जॉब ज्वाइन करने का टाइम भी आगया।
पहली बार में घर से दूर जाके रहने वाला हू। आज तक कभी नाना नानी और माँ को छोड़ के कहीं रहा नहि। एक दो बार स्कूल कॉलेज का ट्रिप में जाके दो चार दिन बाहर रात बिताया। पर वह रहना और अब बाहर अकेला रहने में बहुत ही अंतर है। लेकिन मुझे डर नहीं लगा। एक अलग चैलेंज जैसा मेरे सामने खड़ा हो गया। और में उस चैलेंज को मुकाबिला करने के लिए तैयार हूँ मेंटली। पर एक दुःख मुझे खाये जा रहा है।।।की मुझे मेरी माँ को बिना देख के वहां रहना पडेगा। नानाजी का स्ट्रिक्ट इंस्ट्रक्शन है की हर सैटरडे वापस आना पड़ेगा और फिर मंडे जाके ऑफिस ज्वाइन करना है। लेकिन बीच का ६ दिन मेरे पास ६ साल लगने लगा। जब माँ हर रात सोने से पहले मेरे पास आके मेरे बाल में उँगलियाँ फिराती है, और मेरे तरफ प्यार भरी नज़र से देख के स्माइल करती है-वह पल के लिए में कितना बेताब रहता था रोज। पर अब वह चीज़ से मुझे दूर रहना पडेगा। माँ ऐसे बोलती कम। बस देखती ऐसे है की जैसे आँखों में ही सब को कुछ बोल देती है। और अब मेरा जाने का वक़्त नज़्दीक आने में तो वह और भी चुप हो गई। बस नानीजी को किचन में हेल्प कर रही है, घर का बाकि काम कर रही है, टीवी देख रही है, मेरा जाने के लिए सब ज़रूरी चीज़ों को रेडी करके मेरे रूम में रख रही है। पर कभी कभी मायुस नज़र से मुझे एक पल देख के फिर चले जाती है। उनको भी तकलीफ हो रहा है होंगा। वह भी मेरे बगैर कभी रहा नहि। मेरे लिए ही उन्होंने ज़िन्दगी का सब सुख सब खुशियां विसर्जन कीया था। अब वह सोच के में भी मायुस होता हू।
पिछले ६ साल से में उनसे और एक दूसरे प्यार से अटैच हुआ हू जो खबर केवल मेरा मन ही जानता. और कभी कोई जान भी नहीं पायेगा. उनके प्यार मे में कब से मेरे अंदर एक अलग आदमी को जनम दे दिया है. जो आदमी माँ से प्यार करता है. उनके साथ एक अलग दुनिया में ही जीता है. लेकिन उसको भी मालूम है की यह मन की बात केवल मन में ही रहेगी पूरी ज़िंदगी.
ओर पिछला ६ साल से में अपनी ही माँ को सोच सोच के रोज रात में मस्टरबैट करते आ रहा हू उसमे मुझे दुनियाका सबसे ज़ादा ख़ुशी , और संतुष्टि मिलती है.
देखते देखते वह दिन भी आगया जिस दिन में कंपनी जाने के लिए. ट्रैन स्टेशन पे खड़ा है माँ, नानाजी, नानीजी सब आये है. कंपनी मुझे वहां रहने के लिए फिलहाल एक जगह प्रोवाइड कर रहा है. ज्वाइन करने के बाद में धीरे धीरे अपना रहने का बंदोबस्त खुद की करूंगा. इस्स लिए नानाजी मेरे साथ चल रहे है. नानीजी बार बार नानाजी को क्या क्या करना है वह याद दिला रही है. मुझे वहां में कोई तकलीफ न हो, इस लिए सब बंदोबस्त सही तरीके से करने के लिए उनको बार बार सब चीज़ों को एक एक करके बता रही है. लास्ट मोमेंट्स में सब को सब चीज़ बतानेका यह एक तरीका में बचपन से सब के अंदर देख ते रहा हू घर में भी यह सब डिस्कस हो चुका है. माँ मेरे पास मेरे सीट पे बैठ के मेरा एक एक हाथ उनकी दोनों हाथ के अंदर लेके चुप चाप बैठि है और नाना नानी का बाते सुन रही है. एक बार माँ मेरे तरफ देखी. उनकि आंखे गिली है. मन में कष्ट हो रहा है उनको . वह उस फीलिंग्स को दबा के रखा है सब के सामने. मुझे मालूम है माँ घर जाके रूम लॉक करके बहुत रोयेगी. मैं इतने सालों से उनको थोड़ा बहुत जानता तोह था. उनकी हर हरकत, हर अदा का क्या मीनिंग है वह में साफ समझ सकता था मैं उन्हें कभी दुःख पहुचाया नही, नाहीं की कभी दुःख दूंगा. यह मेरा खुद के साथ खुद का वादा है. मैं भी माँ को देख. उनका इनोसेंस फेस और नज़रियाँ मुझे हमेशा से अजीब फीलिंग्स देता है. वह मुझ से धीरे से बोली ‘ तुम मुझे रोज फ़ोन करना’. मैं स्माइल करके धीरे से गर्दन हिलाया हाँ में. उधऱ नानाजी नानाजी को सब समझा रहा है अभी भी. मेरा नाना हमेशा नानी से बेहद प्यार करते है. इस्स लिए उनका ज़ादा बोलना उनको कभी इर्रिटेट किया नही. वह खुद नानीजी से कम ही बोलते है. मेरी माँ शायद उनपे ही गई. इस्स लिए माँ नानाजी से भी कम बोलती है. सुनते और समझते ज्यादा. अचानक ट्रैन में एक झटका खाया. टाइम हो चुका है. अभी चलेगी. इस्स लिए सब उतरने लगे. नानीजी मेरा सर पकड़ के मेरा सर चूमा और उतरने लगी. माँ मेरा हाथ जो उनके हाथों से पकड़ा हुआ था वह मुह के सामने लाक़े मेरा हाथ चुमा. और मेरा गाल पे उनका दाया हात रख के एक बार फिराया और गिली आँखों से स्माइल किया. इस्स का मतलब मुझे मालूम है. मुझे ठीक से रहने का, ठीक टाइम पे खाने का, सोने का, ठीक से काम करने का, अपना ख्याल रखने का ..यह सब बाते वह बिना कुछ बोले मुझे समझा के गयी. . वह लोग बाहर जाके खिड़की के पास खड़ी हो गयी. और ट्रैन चल्ने लगी. नानी और माँ धिरे धिरे दूर होने लगी. ऐसा लगा की मेरा कुछ यहाँ रह गया और में कहीं चल पडा. क्या रह गया वह कह नहीं सकता. मेरा मन भारी हो गया. और ट्रैन रफ़्तार पकड़ने लगी.
ओफिस में पहला दिन थोड़ा डर लग रहा था सब बड़े बड़े इंजिनिअर्स और ऑफिसर्स के साथ परिचय हुआ. सब के बीच मुझे नेर्वेस फील हुआ. सब मेरा हालत समझ गये थे इस्स लिए वह लोग मेरे साथ ऐसा कम्फर्टेबले तरीके से मिल घुलने लगा की एक ही दिन में मुझे इनिशियल हेसिताशन और डर भूलके कॉन्फिडेंस आने लगा. लेकिन एक बात है.. कोई बिस्वास नहीं कर रहा था की में २० साल का था और जस्ट कॉलेज से पास आउट हुआ. मुझे देख के इतना मचुर्ड समज रहे थे, जब में असलियत बताया तब सब हास्के मुझे गले लगाने लगे. मैं गुजरात से हू पर वह लोग मेरी अच्छी हिंदी सुनके मेरी तारीफ भी करने लगे.
इधर नानाजी मैं ऑफिस निकल जाते ही वह भी निकल गये. मेरा रहने के लिए अच्छा बंदोबस्त ढूँढ़ने के लिये. शाम को दोनों एक साथ घर वापस आये..यानी की जहाँ कंपनी हमें रहने के लिए रूम दिया था नानाजी मेरा ऑफिस का पहला दिन का एक्सपीरियंस सुने. मुझे भी उनका दिन भर का करनामे का वर्णन किया. रात को खाना खाके हम सोने गये. एक रूम था अच्छा है. पर एक ही बेड़. इस्स लिए नानाजी और मुझे एक साथ सोना पड़ेगा. नानाजी दिन भर इधर उधर भटके ,मेरे रहने के लिए घर ढूँढ़ते बिजी रहे, तोह वह भी थोड़ा थके थे. इस्स लिए वह जल्दी सो गये. थोड़ी देर में उनकी गहरी नींद की आवाज़ नाक से निकल ने लगी.
पर कल से में थोड़ा व्याकुल था कल भी रात को सोने का यहि इन्तज़ाम था इस्स लिए मुझे मेरा पिछला ६ साल का आदत से छूट ना पड़ा. अभी तक पीसी का इन्तेज़ाम नहीं किया. नया घर मिलतेही सब कुछ कनेक्ट करुन्गा. पर मेरे मन में मेरा हर वक़्त का ख़ुशी का मूर्ति , हमेशा के लिए जल जल कर रही थी. आँख बंध करते ही वह पूरा तन्न मन में छा जाती थी. पर कुछ कर नहीं सकते क्यों की में बाथरूम में जाके वह सब करके मज़ा पाया नहीं कभी. मुझे तो मेरा कम्फर्टेबल प्लेस चाहिए होता है. उप्पर से रोज की तरह माँ की उंगलिया फ़िरने का सुख और प्यार भरी नज़रों से स्वीट स्माइल बहुत मिस किया. आज भी वही शामे हाल है. मैं चेयर पे बैठ के आँख बंध कर के मेरी प्यारी माँ को याद कर रहा था, अचानक याद आया की माँ मुझे रोज फ़ोन करने के लिए कही थी. कल तोह पहली रात थी स्टेशन से आके सब कुछ समेट्ने में देर रात हो चुका था , ऊपर से आज ऑफिस ज्वाइन करना था इस्स लिए कॉल करना भूल गया. अब याद आया. मैं झट से चेयर छोड़ के उठा और मेरा मोबाइल उठाया. आब रात ११ बज चुके है. माँ इस टाइम में सो जाते है हमारे घर में. फिर भी में एकबार ट्राय करने के लिए सोचा. नानाजी को प्रॉब्लम न हो इस लिए रूम का दरवाजा खोल के बाहर बालकनी में आया. मा को फ़ोन लगाया. एक बार रिंग होते ही वह फ़ोन उठा ली. मेरा दिमाग में फ्रैक्शन ऑफ़ सेकंड में यह खेल गया की माँ जरूर मेरा फ़ोन का इंतज़ार में बैठि थी. इस्स लिए इतनी जल्दी रिसीव करली और इतनी रात को भी जागी हुई है. माँ रिसीव करतेहि मैंने बोला
” हल्लो…मा…”.
मा के तरफ से कुछ रिप्लाई नहीं आई. मैं फिर से बोला
” मा…कैसी हो तुम्”
फिर से सन्नाता. मैं भी चुप होकर समझने की कोशिश कर रहा था की आखिर हुआ क्या. मैं फिर बोला
” क्या हुआ मा…तुम ठीक तो होना?” मेरा आवाज़ में चिंता थी अब माँ थोड़ी देर बाद बोली
” कल तुम फ़ोन क्यों नहीं किये?”
मा की आवाज़ में न जाने क्या था जो मेरे कान में आते ही मेरा पूरा बदन एक अनजानी फीलिंग्स से कांप उठा. दिल की धड़कन तेज हो गई. मुझे यह भी तसल्ली मिली की वह सही सलामत है. मैं खुद को सम्हलकर जबाब दिया
” सॉरी माँ..कल सब कुछ करते करते बहुत रात हो गया था और आज ऑफिस में पहला दिन……”
मेरी बात ख़तम होने से पहले ही उन्होंने मुझे रोक दिया और बोल ने लगी
” बस बेटा…इतनी सफाई की जरुरत नही”
फिर थोड़ा रुक के बोलने लगी
“मैं कल पापा को फ़ोन किआ था”
मैं सोचने लगा , माँ नानाजी को कब फोन किया. शायद में जब रात को बाहर खाना खरीदने गया था , तभी किया होगा. फिर मेरा दिमाग में यह स्ट्राइक किया की माँ को मेरा मोबाइल नम्बर मालूम है. तोह मुझे क्यों नहीं किया. हाँ…उनका एक ही बेटा हू उनसे दूर गया. तो मेरी खबर तो वह लेंगी ही किसी भी तरीके से. लेकिन मुझे क्यों नहीं किया. तभी माँ बोली
चलो यह बताओ ..वहा तुम्हे कुछ प्रॉब्लम तो नहीं हो रहा है ना?
“नही मा…नानाजी साथ में है ना.. . तुम तोह उनको जानती हो. सब वही देख रहे है”
लेकिन में यह बता नहीं सकता की माँ तुम से दूर रहके मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा है.
तभी माँ बोली
” और आज पहला दिन ऑफिस में कैसा रहा..?”
” ठीक था मा. सब मुझे अच्छे से बात किया. और मेरा जो बॉस है मुझे अपना कोई पुराण पहचान वाला जैसा मेरे से बात किया. सब बहुत अच्छे लोग है. लेकिन….”
मैन चुप हो गया तो माँ ने पूचि
“लेकिन क्या?”
“सब मुझे देखके मेरी उम्र ज़ादा सोच रहे थे. पर मेरी सही उम्र जान के सब हस पडे.” ऐसी बहुत सारी बाते माँ से होती रही.
माँ मुझ से बात करके खुश थी स्टार्टिंग में वह जैसे अभिमान लेके बात शुरू की थी , वह अंत में जाके एक प्यारी माँ आपने बेटे के लिए ढेर सारा प्यार उड़ेल कर मुझे भी एक सुकून सा दिया. मैं पता करने लगा की माँ से दूर रह के भी इस फ़ोन कन्वर्सेशन के जरिये उनको मेरे पास महसूस कर सकता हू अंत में माँ ने गुड नाईट बोलके फ़ोन काट दिया. मैं कभी माँ से बत्तमीज़ जैसा पेश नहीं हुआ, ना की माँ के साथ कभी लूसे टॉक किया, नाहीं कभी उनको ज़बर्दस्ती पकड़के हुग किया या गाल चुमके एक बेटा का प्यार दिखाया. मेरा परवरिष ही ऐसा था हमारे घर में हम सब के बीच गहरा प्यार बंधन है , साथ में सब सब को रेस्पेक्ट देते है. रेस्पेक्टफुल्ली पेश होते है. मेरे मन में माँ के लिए पिछला ६ साल से एक अजीब अद्भुत फीलिंग ग्रो किया, पर में कभी उनसे सेक्स लेके, या डबल मीनिंग बात लेके, या बिना कारन में उनको हुग करना या उनका टच पाने का कोशिश करना….यह सब कभी नहीं किया. नाही कभी करने का मन हुआ. हा…में उनसे प्यार करता हू रेस्पेक्ट भी करता हू पर वह प्यार में भाषा में बयां नहीं कर पाऊंगा. जो इंसान वह फील करता है, केवल वह उसको समझ सकता है.
आईसे ही एक हप्ता गुजर गया. ऑफिस में मेरा थोड़ा खुलापन आ चुका था मुझे काम करनेके लिए रिस्पांसिबिलिटी भी सौपा गया. और में ख़ुशी से वह करना भी सुरु कर दिया. इधर नानाजी मेरे लिए एक घर किराया में ले लिये. एक बेडरुम, छोटा सा एक ड्राइंग रुम, किचन और बाथरूम. एक आदमी के लिए काफी है. घर के लिए सब सामान भी खरीद के पूरा सजा डीए. मुझे बस ऑफिस जाना है और काम करना है. पहला संडे था मेरा. उस दिन शिफ़्ट करके में और नानाजी एकदम सब बंदोबस्त पक्का कर लिया. मेरा सब सामान सही जगह रख दिया. मेरा पीसी भी कनेक्ट कर दिए. रात को माँ से बात हुआ. वह जान के खुश हो गयी. मुझे अकेले रहने के लिए जो जरूरी चीज़ , वह सब थोड़ी बहुत बतायी. माँ कम ही बोलती है. पर उस दिन अपनी बेटे के लिए कंसर्नड थी. खाने के लिए एक आदमी ठीक किया नानाजी, जो दोनों टाइम टिफ़िन बॉक्स से खाना बना के देके जाएगा.
नानाजी अहमेदाबाद जाने के लिए निकल पड़े और में ऑफिस के लिये. उस दिन ऑफिस में एक कलीग की शादी थी सब लोग शाम को वहां जाने वाले थे. मुझे भी जाने के लिए कहा, में मना किया तोह वह लोग बताया की मेरा भी इनविटेशन है. वह कलीग एक हप्ते से छुट्टी लिया है, इस लिए मुझसे मुलाकात हुआ नहीं अब तक, पर उन्होंने फ़ोन करके मेरा जोईनिंग का खबर पाके मुझे भी जाने के लिए रिक्वेस्ट किया. वह मेरा की सेक्शन का कलीग है. नहीं जाउँगा तोह बाद में क्या सोचेग. इस्स लिए में भी उन सब के साथ शाम को शादी में गया.
आज तक में सब गुजराती शादी ही देखते आया. आज पहली बार और दूसरे कोम की शादी देखने को मिला. ऑफिस कलीग्स सब एक जगह पे बैठे है. और कोई कोई ड्रिंक भी कर रहे है, में आज तक कोई नशा किया नही. मुझे वह सब कभी अट्रॅक्ट नहीं किया. एक दो बार टेस्ट किया. पर परमानेंटली आदत नहीं बनाया. दूल्हा यानि की मेरा कलीगसे परिचय हुआ. दुलहन से भी मिल लिया. मैं अकेला बैठा था , सब को देख रहा था बैठे बैठे यहाँ एक नया अनुभुति हुआ. मुझे यहाँ सब लोग एक इंडिविजुअल पर्सन जैसा ट्रीट कर रहा है. आजतक जहाँ भी गया शादी में, पूरी फॅमिली के साथ जाते थे. यहाँ अकेला अपना एक नया परिचय के साथ, एक अलग रेस्पेक्ट के साथ बैठा हुण. अच्छा लगा…कयूं की में बड़ा हो गया. मुझे ऐसा लगा की में भी रिस्पांसिबिलिटी लेने के लायक हो गया हुण
मेरा दिमाग में आया की में भी इस तरह एकदिन शादी करुन्गा. मुझे ऎसी एक लड़की दुल्हन के रूप में मिलेगा. सब मेरे शादी पे आयेंगे. फिर मेरा खुद का फॅमिली बनेगा. यह सब सोचते सोचते में फ्रेश होके , कपड़े चेंज करके मेरा कम्प्यूटर ऑन किया. एक हप्ता बाद मुझे आज एकांत में मेरा पीसी के साथ टाइम मिला. मैं मोबाइल उठाके माँ से बात करने लगा. मैं आज का दिन कैसे गया बताया. शादी पे गया था , वह बात भी बताया.. माँ भी ऐसे इधर उधर की बात पूछ रहे थी. मैं मेरा पीसी का सीक्रेट फोल्डर खोल के माँ की तस्वीर देख रहा था और साथ में माँ से बात कर रहा था. मुझे अच्चा लग रहा था. जैसे उनसे में फेस टू फेस बात कर रहा हूण. वह कुछ भी बोलने के टाइम कैसे कैसे उनका अदा या पोस्चर क्या होता है, मुह, आंख, नाक कैसे रियेक्ट करते है , सब में जनता था. और उनकी बात सुनते सुनते में वैसा पिक्स देख रहा था. इस्स लिए मुझे लाइव कन्वर्सेशन जैसा मेहसुस हुआ. मैं एक सकुन और ख़ुशी की फीलिंग्स में डुबा हुआ था. थोड़ी देर बाद मेरा मन में एक अजीब प्यार आने लगा माँ के लिये. पर में उस को दबा के माँ से बात कंटिन्यू करने लगा. उनके सामने में वह ज़ाहिर नहीं कर सकता था किसी भी हाल में. सो मेरा बदन सिरसिर करने लगा. और तभी माँ बात ख़तम करके गुड नाईट कहके फोन काट दिया. मुझे एक नशा लग गया. आज इतना दिन बाद मेरा माँ का सुन्दर चेहरा का फोटोज और हर पोज़ में उनकी अलग अलग अदा देख के में धीरे धीरे उत्तेजित होने लगा. ७ दिन का इमोशन आज भर भर के रोम रोम में छाने लगा. मैं सपनो जैसा एक दुनिया में पहुच गया और माँ का तस्वीर गौर से देखने लगा. अचानक शाम को देखी हुई दुल्हन का चेहरा मेरी नज़र के सामने आने लगा. मैं माँ को देखते देखते वह दुल्हन की कल्पना किया. और मेरा पूरा बदन कापने लगा. मैं जोर जोर से स्वास छोड़ने लगा. मेरा राईट हैंड न जाने कब मेरा पेनिस को हिलने शुरू कर दिया. मैं माँ की एक मुस्कुराती हुई फोटो को नज़्दीक जाके देखने लगा. और ऐसे लगा की मेरा माँ ही उस दुल्हन का सज में है. वह दुल्हन की जैसे सज धज के मेरे तरफ देख के मुस्कुरा रही है. मेरे खून में ाग लग गायी. आज एक नया अनुभुति होने लगा. मैं जोर जोर से हिलने लगा. मेरा पेनिस का कैप अभी से एकदम फूल के गोल होगये. मैं चेयर में सीधे बैठके दो पेअर को पूरा फैला दिया टेबल के नीच. सामने माँ का फोटो और दिमाग में दुल्हन का बेष में माँ को कल्पना करके मेरा ओर्गास्म चरम सीमा पर आगया. मैं आँख बांध कर लिया. स्वस और गरम हवा छोङे लगा. मैं माँ को दुल्हन के रूप में कल्पना करके मेरा ओर्गास्म में पहुच गया. और में फुल स्ट्रोक के साथ साथ फुली हुई कैप को मुठ्ठी में ले लेके जोर जोर से हिलने लगा. जब मेरा सीमेन निकलने वाला है तब मेरा मुह से केवल ”मंजू…..मंजू…मंजू…” शब्द निकलने लगा. और अचानक मेरा दिमाग में अँधेरा फैलाके मेरा गरम गरम सीमेन चिरिक चरिक से निकलने लगा.१५ दिन बाद २ण्ड वीकेंड में में अहमदाबाद गया. माँ बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रही थी. कल रात फ़ोन पे वह मुझे बार बार पूछ रही थी की में कितने बजे का ट्रैन से आउंगा. कब पहुँचूंगा अहमदाबाद और ढेर सारे सवाल. तभी मुझे एह्सास हुआ की ज़िन्दगी में पहली बार १५ दिन तक में माँ से और माँ मुझसे दूर है. नानी जी ने दरवाजा खोलके मुझे वहीं गले लगा लिया. पीछे नाना जी खड़े थे. वह भी ख़ुश होकर मुझसे बात करने लगे. मैं अंदर आया. और अपना बैग कन्धे से उतार के नीचे रखा. माँ उन सब के पीछे खड़े होक मुझे देख रही थी. उनकी प्यार भरी नज़रों से जो ममता और अपना बेटे के लिए उदबेग और ख़ुशी नज़र आया, वह देख के मेरा दिल पिघल ने लगा. वह ऐसी एक सुंदरता और शान्ति की मूर्ति है, जिसको में ज़िन्दगी भर बिना पलक झपकाये देख सकता हू. माँ हमेशा घर पे साड़ी ही पहनती है. बहुत रेस्पेक्टफ़ुल्ली ड्रेस चूनती है और पहनती भी वैसेहि. रख धक् के ड्रेस पहन ना उनको पसंद था और कोई भी ड्रेस चुनती थी जो उनको पूरी तरह से धकके रखे. बचपन से में देखा केवल उनकी इनोसेंट फेस और नाक, पीछे का सुडौल गर्दन, एल्बो से नीचे का हाथ का हिसा, दोनों हाथ में दो सोने का चूडि, और लंबी लंबी गोल गोल उँगलियाँ , उन्होंने लेफ्ट हाथ की उँगलियाँ में हल्का सा लाइट कलर नेल पोलिश लगातीकभी कभी. मैं कभी कभी चुपके उनका पेट् का थोड़ा पोरशन देखा था, जो एकदम गोरा, मुलायम और फ्लैट था, यानि की उनका पेट् का जो हिस्सा मुझे नज़र आता है उसमे कोई फैट जमा नहीं आज तक्. पेट् नीचे जाके पतली कमर में समां गया. और साथ में स्लिम बॉडी होने के कारन उनका उम्र कभी पता नहीं लगता था. कोई भी देखता था तोह उनको २० – २२ साल की लड़की सोचता था. कोई नहीं बिस्वास करता था की वह मेरा माँ है और उनकी उम्र अब ३६ है. उनका पैर मुझे सबसे ज़ादा आकर्षित करता था. ऐसा सुन्दर छोटी छोटी मुलायम पैर और हल्का नेल पोलिश वाली उंगलिया देखके मुझे हमेशा एक नशा आजाता है. इस औरत को में जितना देखता हू, मेरा देखना कभी सम्पूर्ण होता नही. जितना जानता हूँ फिर भी लगता है में उन्हें पूरी तरह जान नहीं पाया. यह सबकुछ उनके लिए मेरे दिल में प्यार और रेस्पेक्ट बढा देता है. हमेशा उनके लिए एक अलग अनुभुति मेरे मन में छा जाता है. नाना-नानी पैर पढ़ने के बाद में माँ के पास गया . मैं भी उनसे मिलने के लिए बेताब था. मैं उनके पैर छुये. मैं जैसे ही खड़ा हुआ वह मुझको पकड़ के मेरे गले लगना चाही . पर उनका सर मेरे शोल्डर पे टिक गया. और दोनों हाथ से वह मुझे पीछे से बेडी लगाके कसके पकड़ली. वह इतने दिन की दूरि मुझसे ऐसे गले लगा के पूरी कर रही है. नाना – नानी हास्के बोलने लगे की “क्य मंजू…बेटे को और जाने नहीं देगी क्या?” माँ मेरे नज़्दीक रहकर, उनका ही हिस्सा, उनका ही खून, जो आज एक नौजवान पुरुष बन गया, उस को मेहसुस कर रही है एक अपने स्नेह के साथ.रात को डिनर के टाइम हमेशा की तरह सब लोग खाने बैठे. हमारे परिवार में सब डिनर एकसाथ करते थे. माँ जनरली सर्व करती है पर कभी कभी वह भी साथ में बैठ जाती थी और सेल्फ सर्विस चलता था. सब हसि मज़ाक़ और मस्ती के साथ वह पल बिताते है. आज भी सब लोग बैठे. माँ सर्व कर रही है. मैं पिछला ५ घंटे से आया. तब से सब लोग मेरे पीछे पड़ गये. मेरा शरीर और हालत १५ दिन में सुख सा गया, ऐसा लगा उन लोगों को. उनको लगता है में खाना नहीं खाया इन १५ दिन. बार बार पूछ रहे है ऑफिस में क्या खता हूण. वह खाना सप्लाई करनेवाला आदमी ठीक से खाना देता है क्य, में उसको ठीक से खाता हुन या नही. एक लौता पोता और एक लौते बेटे के लिये.. सब चिन्ता थी, यह में मेहसुस कर रहा था.
मा आज मेरे लिए मेरा सब पसन्दीदा खाना बनायीं है. ऐसा लगा माँ मुझे एक दिन में सब कुछ खिलाके पूरी हप्ते की कमी बराबर करना चाहती है. पर में माँ को दुःख नहीं पहुचाना चाहता था, इस लिए सब चाट पूस के खा लिया. मालूम है इससे माँ को ख़ुशी मिलेगी. उनकी ख़ुशी के लिए में कुछ भी कर सकता था.
ऐसेही ही ज़िन्दगी चल्ने लगा. वीकडेस में सब से दूर रहके काम करना. अपनी देख भाल खुद ही करना. माँ से फोन पे बात करना ..यह सब एक रूटीन बन रहा था. फिर वीकेंड में घर जाने में एक ख़ुशी महल बन जाता था. फिर सब का प्यार , ममता, सनेह और मेरे बारे में उनलोगों का चिंता के साथ दो दिन बिताके फिर वापस आना. ऑफिस में धीरे धीरे काम का प्रेशर बढ़ ने लगा. इस्स लिए शायद सच मुछ मेरे शरीर पे इस का प्रभाव पड़ने लगा. फिर से वीकेंड आया और में घर वापस आया. मेरी हालत देखके सब परेशान हो गए. माँ केवल पूछा में खाना खता हु क्या टाइम पे. उनके आँखों में एक ममता भरा चिन्ता दिखा. नाना नानी ज़ादा सोच में पड़ गये.
कईसे दो महिना कट गया मेरा ऑफिस मे. अब में कभी कभी मेरे सीनियर के साथ साइट में भी जाने लगा. मेरा काम में फुर्ती देख के सब मुझे और अच्चा करने का होसला देता है.
मैन जब यह सब साइट विसीत, नया नया चल्लेंजिंग काम करके अपना पैर जमा रहा था तब मेरे घर अहमेदाबाद में और कुछ चल रहा था.
उधर का बाते मुझे बाद में मालूम चला था..”कैसे क्या हुआ था?
नाना नानी इतना परेशान था मेरा हालत को लेके की उन लोगों ने मेरा इस प्रॉब्लम का सलूशन ढूँढ़ना सुरु कर दिया. वह दोनों रात में सोटे टाइम आपस में बात करने लगा. पहले यह तय किया की मेरी माँ मेरा पास जायेगी और मेरे साथ रहके मेरा देख भाल करेंगे. माँ को भी प्रॉब्लम नहीं होना चाहिए क्यों की वह हमेशा अपने बेटे के लियेही सब कुछ छोड़के आज ऐसा एक ज़िन्दगी चुना. तोह वह भी इस में खुश होके मेरे पास रहना पसंद करेंगे. फिर वह लोग सोचे की में अब २० साल का हो गया. बाकि सेम उम्र के लड़कों से में थोड़ा म्याचूर्ड भी दीखता हूण. साथ में जॉब करता हूण. अच्छा सैलरी भी मिल रहा है. साथ में नानाजी का सब कुछ मेरा ही है. और कोई वारिस नहीं मेरी माँ छोडकर. सो आखिर सब कुछ मेरे पास ही आयेगा. सो यह सब काउंट करेंगे तोह मेरे लिए आच्छे घर की एक अच्छी सुन्दर सुशिल लड़की मिल जाएगी. नाना नानी यह सोचे की जब ज़िन्दगी में शादी करवाना है और अब इस प्रॉब्लम का हल ढूँढ़ना है , तब क्यों ना अभी उसके लिए लड़की ढुंडके शादी न करवा दिया जाए. यह तरीका उनको सही लगा. पर जब नानी जी थोड़ा टाइम चुप रह, कुछ बोल नहीं रही थी तब नाना जी पूछे उनको की क्या कोई गलत सोचा वह लोग? नानी जी तब बोलने लगी की नहीं गलत कुछ नही. पर आज हीतेश का शादी करवाके उसका लाइफ सेट हो तो जाएगा. पर हम और कितने दिन जियेंगे? नानाजी ६० क्रॉस कर चुके है और नानीजी भी दो चार साल में ६० टच कर लेगी. वह लोग और जीतना दिन है, तब तक ठीक है. पर वह लोग जानेके बाद उनकी बेटी मंजु बिलकुल अकेली हो जाएगी. हीतेश है एक सहारा. पर बीवी आनेके बाद सब बेटा बीवी का ही हो जाता है. बीवी की ही सुनता है. तब माँ का सुन्ना , माँ का ओबीडियन्ट बेटा बनके रहने में बहुत सारा झमेला आजाता है. बीवी अपने पति के ऊपर और किसी का अधिकार सह नहीं सकती. बीवी हमेशा अपनी फॅमिली की लग़ाम अपनेहि हाथ में रखना चाहती है. अपनी सास, जो उसका पति को पाल पोश के आज इस लायक बनाया, उनको भी वहां घुसना पसंद नहीं करती. बेटा कितना भी चाहे, अपनी बीवी के खिलाफ जाना मतलब अपनी ही पैर में कुल्हाड़ी मारना यह समझ जाता है. इस्स लिए सब जानके भी शान्ति रखने के लिए दिल पे पथ्थर रखके सब कुछ मानने की कोशिस करते है. पर जो औरत अपने बेटे के लिए पूरी ज़िन्दगी विसर्जन दि, दोबारा अपनी ज़िन्दगी में सब कुछ पाने के मौके को अपने ही हाथ से गवाया केवल अपने बेटे का मुह देखके, जो अपनि पूरी जिंदगी की ख़ुशी अपने बेटे में ही ढूंडा–उस औरत के साथ अगर ऐसा होगा तोह इस दुनिया में अकेली कैसे जी पाएंगे? नानीजी ने बोला की जब तक हम इस दुनिया में है तब तक ठीक है. पर हमारे जाने के बाद कौन देखेगा उसको उसके बुढ़ापे मे. वह लोग जानता है हीतेश ऐसा लड़का नही. उसका परवरिश भी उस तरह हुआ नही. बचपन से वह सब कुछ देखते आया. हमारा प्यार, बॉन्डिंग वह अछि तरह से मेहसुस करते आया. वह कभी अपनी माँ को दुःख देगा नही. बिना बाप की ज़िन्दगी में वह अपनी माँ से जो प्यार, माँ की ममता उसको मिली है, उसमे कभी बाप की कमी शायद मेहसुस नहीं किया होगा. हा..यह बात सच है की उसने कभी किसीको ‘पापा’ कह के बुलाने का सौभाग्य प्राप्त नहीं कर पाया. नाना नानी बचपन से सब कुछ सपोर्ट देके आज ऐसा एक इंसान बनाया उसको. पर है तो वह एक लौता. उसी से ही इस खानदान की अगली पीढी आयेगा. इस्स लिए उसको शादी भी करना पडेगा. उसको अपने लिए बीवी भी चुननी पड़ेगी. आज कल की लड़की होते भी सब ऐसेही. अपना पति और अपने बच्चो को ही अपना दुनिया मानता है. परिवार के बाकि सब को लेके जो एक फॅमिली बनता है, और उसमे जो सुख मिलता है , वह सब आज कल की लड़की लोगों की मानसिकता में नहीं है. धीरे धीरे समाज ब्यबस्ता और शिक्षा का हाल भी दूसरी तरफ जा रहा है. सब इधर उधर भटक रहा है लगता है. कोई भी किसी भी दिशा में भाग रहा है. न इस पीडी का कोई लक्ष है न कोई भविष्य. नाना नानी यह सोच के मायुस हुआ की अगर वह लोग तभी माँ का न सुनके अगर उनका शादी फिर से करवा देते तोह आज यह दुश्चिंता उनलोगो को सताता नहीं . तब बाहर का कोई आदमी आके हमारि फॅमिली को अलग कर देंगा, हीतेश को उस से दूर कर देगा, हम को अकेला करके चले जायेंगे—यह सब सोच के उनकी बेटी अपना ज़िन्दगी का सब ख़ुशी अपने ही हाथ से दूर फ़ेक दिया. और आज वह घडी आगया फिर से वैसे एक परिस्थिति आनेका. आज एक लड़की इस फॅमिली में बहु बनके आयेगा. वह आके कैसे बर्ताव करेगी अपने सास से, अपने पति के नाना नानी से, यह सब सोच ते उनको दिल पे काला मेघ छा ने लगता है. लेकिन करे तो करे कया. शायद एहि दुनिया का नियम. आप जीस प्रॉब्लम से दूर भागते हो, वह प्रॉब्लम आगे आपके लिए वेट कर रहा है आपसे गले लगाने के लिये. यह सब चिंता में से वह लोग डूबे रहते थे. और हर रोज सोने के टाइम दो बूढ़ा बूढी एहि डिस्कुस करने लगे. ऐसे ही एक दिन उनलोगों के दिमाग में यह सब के अलावा और एक सोलुशन नज़र आया. पहले वह लोग खुद ही थोड़ा आचर्यचकित हो गए थे. बाद में बातों बातों में सब कुछ सही लगा. लगा के, सब ठीक विचार करके, सब का भलाई सोचके, सब का फ्यूचर का कुछ प्लानिंग ठीक करके धीरे धीरे एक फैसले में पहुच चुके. आखिर में उस बारे में बहुत उँछनिछ बाते होने के बाद नाना नानी एक डिसिशन पे पहुचे. लेकिन तब भी वह लोग भी नहीं जानते थे की सच में यह मुमकीन होगा या नही. और होगा भी तो उस के लिए किसको क्या क्या करना पड़ेगा, क्या सैक्रिफाइस करना पड़ेगा , या किस तरीके से मुमकीन होगा यह वह लोग बिलकुल नहीं जानते थे.
थोड़ी देर इधर उधर की बात होने के बाद नानी जी मेरा बात लेके वह उनका चिंता जताते रहे. मैं कितना प्रॉब्लम फेस कर रहा हू अकेला रहके. माँ भी समझती थी मेरी प्रॉब्लम क्यों की वह भी कुछ दिन से परेशान थी इस को लेके. उनके साथ इस कन्वर्सेशन में क्लियर पता चलता है वह आज कल किनता चिंतित है मुझे लेके. और यह होना जाएज भी है. उनका एक लोता बेटा हु में. सो नानी जी की बातों में माँ भी साथ देणे लगी. तब नानी जी बोलने लगी की अब हीतेश भी बड़ा हो गया है तो उसका शादी करवा देते है. यह सुन के माँ नानी की तरफ देख के हॅसने लागी. माँ हस्ते हस्ते बोली
” अब…..शादी… हीतेश की?”
नानी बोली
” हा…कयूं नहीं?”
” मम्मी … अब तो वह बच्चा है”
” हीतेश २० साल का हो चुका है… नौकरी भी करता है…. और उसको देख के कौन सा बच्चा लगता है तुझे?”
मां मुस्कुराके सब्जी काटने लगी… उनको भी यह सब मालूम है. तब नानी बोली
” हर माँ को उनके बेटा-बेटी हमेशा बच्चा ही लगता है..जब की वह कितना भी बड़ा हो जाए”सब्जी काट ते काट ते माँ बोली
” तो अब हीतेश को एकबार पुछ लेते है…”
नानी नमकिन का पैकेट्स काट के छोटा छोटा बरनि में भरते हुए कहा
” उससे क्या पूछना है…”
फिर माँ के ऊपर एक नज़र दाल के देखि. माँ नानी की तरफ बैक होक खडी है सब्जी काट ते हुए किचन स्लैब के पास . फिर अपनी हाथ में पकडे बरनि की तरफ देख के नानी बोली
” घर पे हम उसके बड़े है. क्या हम उसकी भलाई बुराई नहीं समझ ते है क्या?…. और वह भी ऐसा नही… हमेशा हमारी बात सुनता है”
मा का सब्जी काटना ख़त्म हो गया था वह मुड के नानी को देखते हुए किचन का दूसरा तरफ जाने लगी.
वह वहां रखा आटे का डिब्बा खोल रहे थे और बोली
” उसके लिए तो अब एक अच्छी लड़की ढूंढ़नी पड़ेगी मम्मी”
नानी अब बरनि का ढक्कन बंद करते हुए कही
” हाँ… यह एक बड़ा काम है. एक अच्छी लड़की ही तो चहिये”
नानी ढक्कन टाइट करते करते माँ की तरफ देखि और कहने लगी
” जो हीतेश का ठीक से देख भाल कर सके. अकेली हाथों से संसार बांध सके. बच्चे का देख भाल कर सके. और हमारे साथ मिलके हमारी एक फॅमिली जैसी बनके रहे….”
मा थोडी चिंतित दिख रही थी. वह आटा निकालते निकालते नानी को देख के बोली
” सही कहा तुमने मम्मी..”
फिर अपने काम की तरफ नज़र फिराके बोलने लगि
” ऐसी ही लड़की चाहिए हमारे हीतेश के लिये. जो हम सब को अपना सोच के हमारे तरह एक साथ रहे पर….”
मा थोडी चिंता के साथ अपने काम पे जुटी रही. शायद वह यही सोच रही होगी की उन्होंने दोबारा शादी नहीं की क्यों की बाहर से कोई नया आदमी आके उनकी फॅमिली को तोड़ ने की कोशिश ना करे अपना अधिकार जताके. और आज ऎसी एक नई बात जहाँ पात्र बदल गए पर सिचुएशन वही सामने है. आज कल की लड़की..बहु ससुराल में क्या क्या कारनामा करना चालू कर देती है.
नानी ने नोटिस किया माँ कुछ सोच में है. तो उन्होंने चुप्पी तोड़ के बोली
” और तो और देखने में भी अच्छी होनी चहिये…हमारे हीतेश के साथ
बिलकुल मैच हो पाये”
मा उठके एके आटे की थाली किचन स्लैब के ऊपर रखि. और उसमे पाणी ड़ालने लगी और बोली
” ऐसी लड़की मिले तब ना मम्मी….”
नानी को थोड़ा होसला मिला. माँ की साइड प्रोफाइल नानी को नज़र आ रही है. उन्होंने माँ से नज़र ना हटाके बोलते रहि
” हम भी एहि सोच रहे थे. आज कल जो लड़की लोगों को देखती हू, उनसे मन ही उठ जाता है. तेरा पापा के साथ इसको लेके बहुत बात हुइ. हम भी परेशान हो गए थे. कहाँ मिलेगी ऐसी लड़की. कौन खबर करेंगा. बहुत सारि बात चित होने के बाद हम यह तय किये की हम इतना क्यों सोच रहे.क्यों की हम सबकी भलाई के लिए ही चिंतित है. हमारे सब की भविष्य के बारे में सोच के चलना पड़ेगा. सब ठीक विचार करके हम ने सोचा की..हाँ है न… ऐसी ही लड़की है….जैसे हम सब को चहिये”
मां आटा गुंथते गुंथते रूक गई..और नानी की तरफ मुड़के आँखों में एक हैरत के साथ और होंठो पे मुस्कराहट लेके पूछि
” क्या मम्मी…. आप लोगों ने लड़की ढूंढ भी निकाली!!”
नानी अब एक स्माइल के साथ उठ के माँ जहाँ खडी थी स्लैब के पास वहां आने लगी. तब माँ फिर से पूछि
” कहाँ से ढुंडके निकाली मम्मी?”
नानी माँ के पास पहुछि और उनके सामने खडी होगई. नानी माँ का चेहरा गौर से देखने लगी. माँ भी थोड़ा एक्साइटेड हो रहे थी. नानी की आँखों में एक ममता और प्यार भरी मुस्कराहट छा गई. माँ फिर से पुछी
” कौन है वह लड़की मम्मी…और कहाँ की है?”
नानी देखा माँ नहाके फ्रेश होकर एक लाइट कलर की प्रिंटेड साड़ी में आज बहुत सुन्दर दिख रही है. उनके सर के बाल पे एक टॉवल लपेटा हुआ है. एक दो बाल टॉवल से निकल के उनकी फोरहेड के ऊपर पड़ा है. नानी अपने दोनो हाथ से माँ का वह बाल प्यार से फोरहेड से हटाके उनका चिन पकड़के बोली
” बाहर कहाँ ढूंढू ऐसी लड़की….जब हमारे ही घर में एक ऐसी सुन्दर लड़की है तो” बोलके नानी एक चौड़ी स्माइल करते रही.
मा इस बात को ठीक से समझ नहीं पाई. वह कोशिश कर रही है समझने की और जैसे की कुछ याद कर रही है. उन्होंने एक बड़ा सा पलक झपका के नानी को पुछी
” मलताब….कोन है मम्मी?”
नानी अपनी स्माइल बरक़रार रख के..आँखोँ में और प्यार और ममता लेके बोली
” क्यूँ !!…. हमारी मंजु सुन्दर नहीं है क्या?”
मा कुछ पल नानी को देखते रही और उनको कुछ समझ के. उनके फेस पे जो चमक थी वह ग़ायब हो गई अचनाक. उनकी आंख स्थिर हो गई ,जगह के उपर. वह बिलकुल स्तब्ध हो गई. वह नानी को एक दृष्टि से देख के बोली
” कैसी बात कर रही हो मम्मी!! ”
नानी अब एकदम शांत आवाज़ में लेकिन प्यार से कहने लगि
” देख मंजू.. मैं और तेरे पापा इस बारे में बहुत सोचे. हमको यह भी मालूम है इस के लिए हम सब को न जाने क्या क्या सैक्रिफाइस और एडजस्टमेंट करना पड़ेगा. न जाने क्या क्या असुबिधा झेल ना पड़ेगा. लेकिन इस में ही सब का भलाई है. सब का भविष्य हम को ही तो सोचना पड़ेगा मंजू. ……”
नानी इस तरह फिर से वहि सब बात बताने लगी. आज वह है तोह ठीक है. कल जब वह लोग नहीं रहेंगे तब क्या मंजु अकेली जी पायेगी? हीतेश और किसीसे शादी करेगा तोह क्या गारंटी की वह लड़की हमारे जैसी ही होगी. मंजु को वह कैसे ट्रीट करेगी उसकी गारंटी कौन देगा. फिर वहि पुरानी चिंता. और ऐसे होने में किसका क्या कैसे भलाई है, उसकी का फेरिस्त देणे लगी नानीजी. नानीजी यह भी बताई की खुद की भलाई और खुद की लाइफ सिक्योर्ड बनाने के लिए अगर समाज से थोड़ा दूर जाके एक अलग दुनिया बनाके हम खुश रहे , तोह इसमें कोई बुराई नहीं है. माँ एकदम हैरत से सब सुन रही थी. जैसे की उनको बिस्वास नहीं हो रहा है की नानी जी कुछ बोल रही है. वह खुद कुछ भी बोल नहीं पा रही थी. असल में उनका मुह तक कुछ आ नहीं रहा है बोलने के लिये. अन्दर ही अंदर एक तूफ़ान मचा हुआ है. भला , बुरा , पाप, पुण्य , न्याय, निती, समाज ,संस्कार सब ने उनके मन में भीड़ कर के उनका बोलना बंध करवाया था. वह केवल नानी को देखे जा रही है. उनकी आँख धीरे धीरे नम होके गिला हो रहा है. बहुत टाइम बाद जब नानी की बात धीरे धीरे कम होने लगा तब वह नानी की आँखों में आँखें डाल के, एक स्थिर दृस्टि होकर, एक शांत और कठिन आवाज़ से पूछि
” क्या यह सब हीतेश को भी बता दिया आप लोगों ने?”
नानी अब एक माँ का प्यार और ममता भरी आवाज़ से बोली
” नहीं बेटा… यह बात तुम्हारे बूढे माँ बाप, अपनी एक लौती बेटी के अपने एक मात्र पोते के, और अपनी फॅमिली की भलाई के लिए ही सोचे है. इस में अब सब कुछ तुम्हारे डिसिशन के ऊपर डेपेंट करता है बेटा.”
मा नानी को कुछ पल देख ते रही और जब आँखों से आसूं गिरने का वक़्त आगया तब मुड़के वहां से दौड़के अपने रूम में चलि गयी.
वहा क्या क्या हो रहा था. लेकिन मुझे भनक तक लगने नहीं दि. यह बात मुझे बाद में पता चली थी लेकिन एक बात में महसूस करने लगा था की घर पे कुछ तो हुआ होगा. क्यूँ की जब हर की तरह उस दिन रात में माँ को फोन किया. माँ पहले उठायी नहि. दोबारा ट्राय किया तब उठाया. और थोडी खामोश लगी. मेरे से बात कर रही थी , पर बोल तो में रहा था , उन्होंने केवल ‘हमम’, ‘हाण’, ‘यक’, ‘ठिक है’, अच्चा’ ऐसे बोलने लगी .
मैन सोचा उनका मूड ऑफ होगा शायद. मैं बड़ा होने के बाद कभी भी माँ को जबरदस्ती कुछ पूछता नहीं था हमेशा वह जो बोलती थी, में सुनता था और मुझे उनकी हर ख़ुशी का ख्याल रख के जैसे बात करना है वैसे ही करता थाऐसे तीन दिन चला. ऑफिस में काम का प्रेशर था सो उस बात को में ज़ादा खीचा नहि. पर
उस फ्राइडे रात को जब में माँ को फोन किया तोह माँ उठायी नहि. मैं सच मुच सोच में पड़ गया. माँ की तबियत तो ठीक है. फिर में नानाजी को फोन लगाया. नानाजी बोलै की घर पे सब ठीक है, चिंता की कोई बात नहि. तुम कल आजाओ आराम से. मैं सुन तो लिया पर मेरे मन में लगा था की जरूर कुछ बात होगी. जो सब मुझसे छुपाना चाहते है. एक चिंता दिमाग के अंदर लेके उस वीकेंड में यानि की शनिबार शाम को अहमदाबाद पहुंचा.दर असल में हुआ था यह की…उस दिन माँ किचन से दौर के , अपने रूम के जाके डोर लॉक कर दिया. दोपहर लंच करने भी बाहर नहीं आई. नानीजी जाकर बुलाई, दरवाज़ा खटखटायी, पर माँ खाने के लिए स्ट्रैट मना कर दि. जब रात में नाना नानी सब डिनर करके सो गए थे, उसके बाद माँ उठके किचन में गई और फ्रिज से कुछ खाना निकल के चुपचाप खाके फिर से रूम में चले गई. नाना नानी सोच में पड़गये. उनलोगों ने यह एक्सपेक्ट ही किया नहीं की सुरु में ही ऐसा रिएक्शन देखने को मिलेगा उन्को. उनलोग ने सोचा की शायद वह लोग यह एक बिलकुल गलत स्टेप लेने जा रहे थे. इस में उनकी बेटी इतनी हर्ट होगी. न जाने बेचारी को कितना दुःख पंहुचा होगा.
नानी चुप्पी तोड़के माँ के तरफ देख के बोली
” मंजू………बेटा…… हर माँ बाप अपने बच्चों की ख़ुशी के बारे में सोचते है. हम शायद कुछ ज़ादा सोच लिया था……..”
फिर जैसे ग़लती एक्सेप्ट करने का बॉडी पोस्चर होता है, वैसे नानी अपना सर थोड़ा झुका के , अपने दूसरी हाथ से साड़ी का आँचल मोड़ ते हुए कहि
” अपने नसीब में जो है, वहि होगा”
” आप लोग अकेले कैसे रहेंगे!!”
अचानक यह सुन के नानी झटके से अपना मुँह उठाके माँ की तरफ देखा. माँ नानी का लुक फील करती है और अपना सर थोड़ा झुका के अपनी पैरों की तरफ देखने लगी नानी को समझ ने में थोड़ा वक़्त लगा. फिर उनके होठो पे एक स्माइल खील गयी. उनकी अंख में ख़ुशी झलक उठि, धिरे से माँ के और नज़्दीक आई और माँ का चिन पकड़ के अपनी तरफ मोड़ ने की कोशिस की. माँ जैसे खड़ी थि, उनकी बॉडी का पोजीशन हिला नहीं , लेकिन उनका फेस नानी के तरफ मूड गया. उनकी आँख झुकि ही है. उन्होंने कोशिश करके भी उनके फेस पे शर्म आनी छुपा नहीं पाई नानी पूरी बात समझ गयी फिर भी प्यार से फुसफुसा के पूछि
“सच ?”
मा नानी की तरफ मुड़के उनके कंधो में अपना मुह छुपा ली. और नानी को दोनों हातो से बेडी लगाके पकड़ली. नानी हसके उनकी एक साथ माँ के पीठ के ऊपर रख के दूसरे हाथ से माँ की
बाल और पीठ सहलाने लगी एक माँ अपनी बेटी को परम ममता से प्यार कर रही है. नानी हस्ते हस्ते बोली
” अरे पगली….इस में शर्मा ने का क्या है. हम थोड़ी कोई अन्जान लोग है…..और नहीं तू किसी और के घर जा रही है…सब तो तेरा अपना हि लोग है…”
मा ने और शर्मा के नानी की छाती में मुह छूपा लीया.
हम सब ड्राइंग रूम के सोफे पे बैठे थे. नानीजी पानी लाक़े दिए पीने के लिए और फिर नाना नानी मेरे से हास् हास् के खुसी के साथ बात कर रही थे. वही सब पुराना टोपीक. मेरा हाल वगेरा पूछते रहे. मैं उनलोगे के सवाल का जवाब दे रहा था छोटी छोटी शब्द मे. क्यूँ की मेरा मन धीरे धीरे जिद्द पकड़ने लगा. अगर सच में अन्जाने में में कोई ग़लती कर भी लिया , तो माँ होकर उनका यह फ़र्ज़ नहीं बनता की वह सामने से आकर अपनी बेटे का वह दोष बतादे.. और चाहे तो जो मर्ज़ी सजा दे. ऐसा न करके वह पूरे हप्ताह मेरे से ठीक से बात भी नही की. और अभी तो वह मेरे सामने भी नही आइ . मेरा दिल उनके लिए जिद्दी होने लगा. मेरा आंख जलने लगी. मैंने सोचा की ठीक है, अगर वह माँ होकर अपनी बेटे के साथ ऐसा बर्ताव कर रही है, तोह में भी उनका बेटा हुण. मैं भी उनसे जाके मिलूँगा नहि, जब तक वह मेरे पास नही आती. मैं भी बहुत जिद्दी हुण. मैं बहुत भावुक बन रहा था. फिर भी में खुद को कण्ट्रोल करके नाना नानी से बात कर रहा था. इन सब बातों के बीच नानाजी मेरे तरफ देख के बोले
” बेटा.. तुमसे कुछ बात करना है.” मैं शांति से बोला
” कहिये नानाजी”
उनहोने एक बार नानीजी को देख, फिर मेरे तरफ देख के थोड़ा स्माइल के साथ बोलै
” इतना अर्जेंट भी नहीं है. तुम फ्रेश हो जाओ. खाना वाना खाके आराम से बैठ के बाते करेंगे.”
मैं मेरे रूम में जाकर फ्रेश होने लगा. नानाजी न जाने क्या बात करना चाहते है. लेकिन में माँ को लेके ज़ादा चिंतित था. ऐसे ही बहुत सारी चिंता से मन भरी था. कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. दिल बोल रहा था की है तो माँ इसी घर पर ही. दौड़ के जाके उनसे पुछु की क्या मेरा गुनाह है. पर मेरा जिद्द मेरा पैरों को बांध के रखा. मैं एक नया पाजामे और टी- शर्ट पेहेनके जैसे ही बाहर ड्राइंग रूम में आया, तब नानी डिनर के लिए बुलाया.
आज नानाजी और में बैठा. मालूम था की पहले जैसा आज सब कुछ होनेवाला नहीं था. नानी सर्व करने लगी. लेकिन में किचन में माँ की उपस्थिति फील कर रहा था. और एक दो बार तो नानी से बात भी करते हुए सुना. मुझे एक गुस्सा आया. सब तो ठीक ही है. तोह क्या में ही गुन्हेगार हूँ!! और नाना नानी को भी माँ का इस तरह से व्यवहार करना, या इस तरह से मेरे सामने पेश होना, जरूर नज़र आ रहा होगा. फिर भी कोई किसी को कुछ बोल भी नहीं रहा है. खाना खाते खाते सोचा की शायद नानाजी इस बारे में ही कुछ बताने वाले है.डिनर के बाद नानाजी मुझे टेरेस पे लेके गये. गर्मी का टाइम था. सो टेरेस पे एक अच्छा फील हो रहा था. थोड़ा थोड़ा हवा आ रहा था बीच बीच मे. आस पास का एरिया में ऐसे ही सब प्राइवेट मकान है. और ईस्ट साइड में ,हमारे महल्ले का रास्ता जाकर जहाँ बड़े रास्ते से मिला है, वहां कुछ फ्लैट बिल्डिंग है. बाकि तरफ दूर दूर तक मैदान दिखाइ देता है. उधऱ से हवा आरही है. नानाजी किनारे के तरफ जाकर , टेरेस की फेंसिंग में टेक लगाके एक सिगरेट निकाले. और बोलने लगे ” तुम्हारा नानी यहाँ नहीं है अब… तोह ठीक है….” बोलके हॅसने लगे और माचिस निकालकर सिगरेट जला लिये. मैं बोला
” नानाजी…डक्टर आप को स्मोक करने में मना किया है”
उन्होंने एक कस लगाके धुआं छोड़के बोला
” एक आध पिने में कुछ नहीं होता है…”
नानाजी हस्ते हस्ते ऐसे बाते सुनाने लगे. कुछ समय ऐसे ही बीत गया. पर मेरा मन यह सब सुन नहीं रहा था. मुझे बार बार यह चिंता सता रही है की नानाजी आखिर मुझे क्या बताना चाहते है.
ईस सब सोच के बीच नानीजी आवाज़ लगाई. हम नीचे गये. मैं नज़र घुमाके माँ को देख नहीं पाया. किचन में लाइट ऑफ है. माँ शायद डिनर करके अपने रूम में चलि गयी. मुझे बहुत ग़ुस्सा हुआ माँ के उपर. मैंने क्या ग़लती किया की उन्होंने मुझे ऐसे सजा दे रही है. नानाजी मुझे उनके कमरे में आने को कहे. नानीजी भी आ गई. नानाजी आकर दरवाज़ा थोड़ा बंध कर दिया.
मैं बेड के पास रखा कुरसी में बैठा. नाना नानी बेड पे आराम से बैठे. मेरा टेंशन बढ़ रहा है. आखिर क्या कहेंगे, और उस में माँ का क्या ताल्लुक है. यह सब हज़ारों चिंता जब मेरा दिमाग में भीड़ किया तब नानाजी बोलना सुरु किया.
“बेटा…हुम तुम्हारा परवरिश का कोई कमी नहीं रखा है. बचपन से सब कुछ देते आया. और आज तक तुम्हारा सब भावना चिंता हम करते है लेकिन अब तुम बड़े होगये हो. जॉब कर रहे हो. हम को छोड़के दूर जाकर अकेले रहने लगे हो. मालूम है वहां तुमको अकेले रहने में कुछ परेशानी फेस भी करना पडता है. तभी भी… यह सब से हम को बहुत ख़ुशी होता है. तुम अब तुम्हारी जिंदगी खुद जीने जा रहे हो. उस से हम को भी हटना पड़ेगा. और हम भी और कितना दिन रहेंगे. हमारा जाने के बाद भी तुम को अच्छी तरह ज़िन्दगी जीना है. अपना फॅमिली बनाना है. तो अब हम सोच रहे है की तुम्हारी शादी करवाने के लिये.”
नानाजी फिर बोले
“देखो बेटे ..तुमहारा लाइफ में कोई आकर तुम्हारे पास खड़े हो जाए, तुम्हारा हर इमोशन सही तरह से शेयर कर ले, हर चढाई उतराई में तुम्हारे साथ रहके ज़िन्दगी की राहों में चलना आसान कर दे. इस लिए सब के लाइफ में बीवी की जरूरत पड़ती है.”
मैं में जो सोच रहा था टेंशन के साथ, शायद उस का छाप मेरे फेस पे नज़र आया था. इस लिए नाना नानी हास पडा. नानाजी आगे बोलते रहै
” हमने आज तक तुमहारा सब भला बुरा सोच के ही काम किया. अब यह लास्ट ड्यूटी भी ठीक से पूरी हो जाये तो चैन से मर सकता हु.”
मैं माँ का बात सोच के बोलने लगा
” नानाजी….आप का बात ठीक है… लेकिन …….”
मैन रुक गया. मुझे पहले माँ से जानना है , क्या इस बात को लेके वह दुखी है !!. इस लिए मुझे गुस्सा होक मेरे से दूर है!! लेकिन नानाजी शायद मेरा द्विधा समझ गए और मेरा बात पकड़ के बोले
” बेटा पहले में जो बोल रहा हुन ..पुरा सुन लो. फिर तुम आराम से सोच समझ के मुझे बताना. अगर तुम को लगे की यह हमारा सब का भलाई के लिए है, तो वैसे सोच के बताना, नहीं तो जो मन में डिसाईड करोगे ,वईसे ही बताना. कोई प्रेशर नहीं तुम्हारे उपर. ”
यह बोलके नानाजी नानीजी को देखे. नानीजी भी सहमत होकर अपना सर हिलके मुझे आश्वसन दिलाया.
नानाजी फिर से बोलना शुरू किया
” बेटा…हुम तुम को सब चीज़ दिया बचपन से, जो हर कोई बच्चे को मिलता है, लेकिन एक चीज़ कभी नहीं दे पाये”
मैं नानाजी के तरफ देख के सुनने लगा
” हर बच्चे का नसीब में किसीको ‘पापा’ कहके बुलाने का सुख है, वह हम कभी तुम्हे प्राप्त करने का सौभाग्य नहीं दे पाया. और अब तुम्हारा शादी हो जाये तो तुम को एक नए मम्मी पापा भी मिलेंगे.”
फिर नानाजी थोड़ा आगे आके , मेरा हाथ अपना हाथ के अंदर लेके, दूसरी हाथ से मेरे हाथ को दो बार थप थपाया. और एक मुलायम स्नेह भरी आवाज़ से मुझे देख के बोलने लगे
” हम सब का भलाई सोच के ही यह सब कर रहा हु………अगर तुम को बोलू…मतलब…क्या तुम मुझे ‘पापा’ बोलके बुलाना पसंद करोगे?”
बोलके मेरे आँखों में अंख मिलके देखने लगे. मुझे इस बात को समझने में कुछ पल लग गया. जैसे ही इस का मतलब मुझे समझ में आया, तभी मेरा शरीर में एक अनजाना अनुभुति फ़ैलने लगाग. मैं फिर भी कन्फर्म होने के लिए , गले में उसका असर पड़ने ना देखे, पुछा
” मतलब आप क्या कहना चाहते है नानाजी ?”
नानाजी स्ट्रैट बोलने लाग
” बेटा अब में तुम्हारा नाना बनके नही, एक बेटी का बाप बनके तुमसे यह पुछ रहा हु की क्या तुम मेरी बेटी का हाथ थामोगे?”
अब मेरे अंदर एक अजीब सा, एक अद्भुत सा फीलिंग्स होने लगा. जो में बयां नहीं कर सकता. मैं केवल बोला
” एह्…यः….आप क्य…क्या कह रहे है नानाजी……”
“हम बहुत..बहुत सोच समझने के बाद यह बात तुमको बोलने का साहस किया”
मैं अपने आप को कण्ट्रोल करते हुए कह
“पर…पर….यह कैसे होगा…..कैसे मुमकीन है……”
” अगर हम चाहे तो सब हो सकता है बेटा”
मेरी माँ का चेहरा मेरे नज़र के सामने आया. मैं सोचने लगा की यह सब बात सुनने के बाद में माँ से कैसे फेस करूँगा अब. और नाना नानी मेरे से खुलके ऐसे बात कर रहे है की मुझे एक शरम, न जाने क्या , मुझ में छा ने लगाग. मैं बोला
” नानाजी हम कैसे ऐसे कर सकते है….ना की कहीं…कभी ऐसा हुआ!!”
नानाजी शांत आवाज़ से कहे
“बेटा…में और तुम्हारा नानी इस बारे में सोचा..हमसब का ख़ुशी के लिए हम कुछ भी सहने के लिए तैयार है. हम बस चाहते है की हमारा बेटी और हमारा पोता ज़िन्दगी में हमेशा खुश रहे…”
फिर थोड़ा रुक के बोले
” और…और तुम्हारी माँ भी इस रिश्ते के लिए राजी है.”
मैं चोंक गया. क्या माँ भी जानती है यह सब!! क्या इस लिए वह मेरे सामने नहीं आरही है!! इस लिए फ़ोन पे ठीक से बात नहीं कर पायी!! और तो और उन्होंने इस रिश्ते को अपनाने के लिए भी मंजूरी दे दि.. मेरा स्पाइन में के एक ठण्डी शीतल पर दिल में कम्पन देणे वाली एक अनुभुति धेरे धेरे नीचे जेक पूरा सरीर में फैल गया. मेरा सर झिमझिम करने लगा. फिर भी में थोड़ा आश्चर्य और डाउट के साथ धिरे से पुछा
” क्या आप लोग माँ से भी इस बारे में बात……और…..और उन्होंने ….”
बोलके में चुप हो गया. नानाजी बोले
” पहले तो वह हम से बहुत गुस्सा किया. एक दम ख़फ़ा हो गयी थी. तीन दिन ठीक से बात भी नहीं कि, खाना भी नहीं खायी. दिन भर रूम लॉक करके अंदर रहने लगी. फिर और दो दिन बाद सिचुएशन थोड़ा सहज हुआ. मंजु भी धिरे धिरे थोड़ा नरम होने लगी. और कल जब तुम्हारा नानी से मंजु का बात हुआ तो तभी हम जान पाये.”
मेरा दिमाग में बहुत सारे सोच्, चिंता भर के भीड़ करने लगा. मैं कुछ न बोलके बैठा था. नानाजी बोले
” हम तुम पर जबरदस्ती से हमारा इच्छा चढा नहीं रहा हु. इतना जल्दी जवाब देणे की जरुरत नही. तुम टाइम लेके सोचो. फिर बताओ. जो भी राय होगा तुम्हारा, उसको हम प्यार से एक्सेप्ट करेंगे”उस दिन में बहुत सारे चिंता और नए नए अनुभुति के साथ धिरे धिरे नाना जी के रूम से निकल के मेरे रूम में आया. मेरा अनुपस्थिति में , मेरा बिस्तर एक दम फिट फाट बनाके गयी है मा. मैं ज़ादा सोच भी नहीं पा रहा था. बस जाके सो गाया. नीद नहीं आ रही थी. बीच बीच में एक नइ उत्तेजना से कांपने लगा. जो भावना मेरे मन के अंदर थी, आज वह सच मुच घटने जा रहा है. एक रोमाँच में बन्द होकर आंख बंध करके पड़ा रहा. ऐसे कैसे टाइम चला गया पता नहीं चला. देर रात तक अकेला सो सो के कुछ डिसिशन लेनेका फैसला किया. पर हालत ऐसा था की उस से पहले खुदको हल्का करने के लिए पाजामे के अंदर से अपना पेनिस निकल के हिलाने लगा. पेनिस आज ज़ादा गरम मेहसुस हुआ. मैं जोर से झटका मार मार के गरम गरम सीमेन पूरा बॉडी में बारिश जैसा गिराया. मन शांत होने लगा क्यों की तब तक शायद मेरे अंदर अन्जाने में कोई डिसिशन हो चुका था. और धिरे धिरे एक चैन की नीद आने लगी.
सुबह नींद तूट ते ही देखा सूरज की पहली किरण खिड़की से अंदर लाक़े पूरा घर रौशनी से भर दिया. खिड़की से बाहर की कुछ आवाज़ें आ रहा है. ऊपर फैन घूम रहा है फुल स्पीड में, फिर भी गर्मी जा नहीं रही है. लेकिन यह सब के अलवा मेरे दिल में एक ठण्डी शीतल अनुभुति महसुस कर रहा हु, जो मेरे पूरे बदन को एक नशीली आवेश में भरके रखा है कल रात नानाजी नानीजी ने जो बात कही है, हो सकता है वह इस दुनिया में ऐसा होता नहीं है. समाज उस चीज़ को मान्यता देता नहीं है. पर हमारे घर में सब..यनि की नाना, नानी और मा…सब इस में सहमत है. सब हमारी खुद की भलाई के लिए ही यह चाहते है. और उसके लिए जो भी बाधा का सामना करना पड़ेगा, जो संकट सामने आकर खड़ा होगा, जो सैक्रिफाइस करना पड़ेगा, वह लोग सब कुछ सहने के लिये, सामना करने के लिए भी तैयार है. तो बाहर की दुनिया के बारे में क्या सोचना है !! और माँ भी एक नारी है. उनके अंदर जो औरत है, उस सुन्दर औरत को में पिछले ६ साल से, एक कल्पना की दुनिया बनाके, अपने ही अंदर छुपाके रख के प्यार करते आ रहा हु. बॉल अब मेरे कोर्ट में है. अगर में चाहू तो वह कोमल दिल की नाज़ुक औरत ज़िन्दगी भरके लिए मेरी हो सकती है इसी वास्तव दुनिया मे, मेरी जीवनसाथी बन सकती है, मेरी बीवी बन सकती है, मेरे बच्चों की माँ बन सकती है. एक ख़ुशी के आवेश मे में आँख मूंद के बिस्तर पर पड़ा रहा. तभी दरवाज़ा खट खटाके नानाजी नास्ते के लिए बुलाया.अब यह अबतक की मेरी ज़िन्दगी का सबसे कठिन समय है. ऐसी एक परिस्थिति हुई है, जहाँ हर कोई एक सीक्रेट को जानलिया. और ऊपर से इनमे से कोई भी एक इंसान यह भी जनता है की यह सीक्रेट बाकि सब को भी मालूम है. फिर भी कोई कुछ नहीं बोल पा रहा है इस बिषय मे. सब पहले जैसा रहने का, बोलने का कोशिस कर रहा है, पर अंदर ही अंदर न जाने क्या एक चीज़ सब को एक दूसरे से थोड़ा अलग कर के रख रही है. खाली एक ही डिफरेंस है. हम चरों में से, केवल माँ सब की नज़र से छुपके रह रही है. स्पेशली मेरे. नाश्ते की टेबल पे भी कल रात जैसी स्थिति थी. माँ किचन से नानी के हाथ से खाना भेज रही है. आज केवल सब लोग थोड़ा कम बोल रहे है.पुरा दिन ऐसे ही कट ता रहा. नाना नानी से में कम्फर्टेबल होने की कोशिश किया. फिर भी दिमाग का एक हिस्सा सब कुछ नार्मल बनाने में रोक रहा है. वह लोग भी आपस में बात कर रहे है लेकिन धीरे धीरे, कभी कभी मेरे से दूर रहके या मेरा नज़र से बाहर. पर सब कुछ मैं महसूस कर पा रहा था. ड्राइंग रूम में ज़ादा तर टाइम बिताने लगा. इस लिए माँ भी नज़र नहीं आइ. क्यूँ की में समझ गया माँ केवल अपने रूम और किचन में ही आना जाना कर रही है पीछे का बरंदाह से. सो वह मेरे सामने अने में हिचकिचा रही है. शायद शर्म उनको घिरके रखा है
मैं हमेशा की तरह संडे रात को निकल पड़ा स्टेशन जाने के लिए . मैं रात को ट्रेवल करता था एमपी जाने के लिये. क्यूँ की रात में में सोटे सोटे एमपी पहुच जाता था. इस में नीद भी हो जाती और टाइम भी मैनेज हो जात. हर बार की तरह इस बार सब कुछ पहले जैसे नहीं हुआ. इस बार में चुप चाप निकल ने की तैयारी करने लगा. नाना नानी भी मुह पे स्माइल लेके चुप चाप खड़े है. नानी का पैर छूटे ही उन्होंने सिलेंटली मुझे गले लगा लिया. और कुछ पल ऐसे ही वह पकड़ के रखी. जैसे उन्होंने मुझे कोई सहारा दे रही है. मेरे अंदर की सोच को एक परम ममता से भर दे रही है. जब उन्होंने मुझे छोड़ा तब एक माँ की स्नेह भरी आवाज़ से बोली ” अपना ख़याल रखना”. मैं ने खामोशी से सर हिलाया. नानाजी मेरे नज़्दीक आकर उनका राईट हैंड मेरे पीठ में रख के थप थपा दिए. मैं उनका पैर छुने गया तो उन्हों ने सिचुएशन इजी करने के लिए कहा ” क्या भाय…अपना हीतेश इतने बड़े ऑफिस में इतना बड़ा बड़ा काम कर रहा है, अब वह बच्चा नहीं है. वह अब अपनी ज़िन्दगी का भलाई बुराई खुद ही सोच सकता है….” . फिर मुझे देख के कहा ” है की नहीं ?” . मैं खामोशी से स्माइल देके मेरा बैग उठाने लगा. मेरा मन बहुत कह रहा था की में एक बार माँ से मिलके जाऊ. लेकिन कल रात से में खुद उनके सामने जा नहीं पा रहा हु जिद्द के लिए नहि, एक संकोच घेर के रखा है मुझे. एक शर्म मुझे दूर करके रखा है उनसे. चाह कर भी मेरा कदम उठाके उनके सामने जा नहीं पा रहा हु. शायद यह इस लिए की में मेरे से ज़ादा उनको शर्मिंदा नहीं करना चाहता था एक अजीब परिस्थिति में उनको डालके. ऐसे सिचुएशन में उनको नहीं ड़ालना चाहता था जहाँ वह शर्म और ग्लानी में खुद को दुःख पहुँचाए. तभी भी में जाने से पहले उनकी एक झलक देखने के लिए छट पटा रहा था. दरवाजे से निकल के पीछे मुड़के नाना नानी को “बाय” बोलते टाइम , उनकी नज़र चुराके अंदर की तरफ देखा था. मन सोच रहा था , शायद वह वहां कहीं खड़ी होगी. पर में निराश होके निकल गया
ओफिस में काम का प्रेशर था. मैं पूरा दम लगाके काम पे लग गया.
फिर भी हमेशा वह बात मेरा मन में रहता था. पूरे हप्ताह में इस को लेके सोचता रहा. ऑफिस में या साइट विजिट के टाइम भी मन में वह बात आजाती थी. जब भी उस बारे मे में थोड़ा गौर से सोचता था, तब ख़ुशी का एक आवेश मुझे पकड़ लेता था. पूरे हप्ता में ऐसे ही एक ख़ुशी और एक टेंशन में गुजर ता रहा
मैं वापस अने के बाद माँ को भी फ़ोन नहीं करता था. जब भी में फ़ोन करने के लिए सोचता था, मुझे एक शर्म और एक अन्जान अनुभुति घिरके रहता था. नानीजी एक बार फ़ोन करके मेरा हाल पूछे थे. बस…और न उनलोगों ने, ना में…हम कोई किसीसे बात नहीं कर रहा था.
ऐसे धीरे धीरे सब कुछ सोच के, सब ठीक विचार कर के, मेरे मन में एक रोशनाई पैदा होते रही. मेरा दिल भी अब एक पक्का डिसिशन में पहुच गया. और जैसे ही मेरा दिमाग उस डिसिशन को एक्सेप्ट किया, तभी से मेरे अंदर एक आनंद और सुख की अनुभुति फैली हुई है. मैं संकोच से बाहर आके मेरा डिसिशन नानाजी को बताना चाहा.
“हैल्लो.”
मैं तुरंत कुछ बोल नहीं पाया. कुछ पल बाद बोला
”हैल्लो नानाजी..आप लोग सो तो नहीं गए?”
”नही नहीं बेटा…. सोया नही..बस सोने की तैयारी कर रहा हु”.
मेरे दिमाग में बहुत कुछ चल रहा है. कैसे क्या कहुँ वह ठीक से मुह मे नहीं आरहा है. मैं जबाब में केवल ”आह अच्छा..” ही बोल पाया. फिर मेरी चुप्पी देख के नानाजी भी बात ढूंढ ने लगे और बोलै
”टीम कैसे हो बेटा?”
”में ठीक हुण”
“डिनर हो गया तुम्हारा?”
“हा जी….”
फर से चुप्पी छा गया. आज हज़ारों बाधा, हज़ारों चिंता, हज़ारों अनुभुति मेरे दिल के उप्पर भारी होके बैठा हुआ है. पर मुझे आज वह सबकुछ तोड़के, सब बाधा हटाके बोलना है जो में बोलने के लिए फ़ोन किया. मेरी इस तरह ख़ामोशी देखके नानाजी पुछै
”हितेश…बेटा तुम्…. कुछ कहना चाहोगे?”
मैने ने जैसे ही जवाब में ” ह्म्म्म” कहा, मेरे बदन में एक करंट सा खेल गया. पूरा शरीर कांपने लगा. खुद को कण्ट्रोल करते हुए मैंने कहा
” नानाजी,…..आप लोग मुझसे बहुत बड़े है. और हमेशा से मेरी भलाई बुराई सोचते आरहे है……”
फिर में रुक गया. बात सजाने लगा मन मे. पर में समझ गया नानाजी बहुत ध्यान से बिलकुल साइलेंट होक सुन्ने लगे. शायद वह मेरी ख़ामोशी की भाषा भी पड़ने की कोशिश कर रहे थे. मैं फिर बोलने लगा
”अगर….अगर….आप लोगों को लगता है की …..इस में ही सब का अच्छा है……इस में सब खुश रहेंगे ……. और ……. और ….. माँ भी इस से सेहमत है ……… तो …. …..”
मैं रुक गया. यह बताने के बाद एक खुशी और एक अद्धभुत फीलिंग्स मेरे पूरे शरीर के खून में दौड़ने लगी. नानाजी आवाज़ में थोड़ी हसि मिलाके अचानक बोले
” मैं समझ गया बेटा. तुम बिलकुल चिंता मत करो. सब ठीक हो जाएग.
तूम बस कल घर आओ . बाकि बाते घर पे बैठ के करेंगे”
उस रात मुझे न कोई तस्वीर, न कोई मन घड़ंत दुनिया की जरुरत पड़ी. मैं अपने ही बेड पे लेते लेते आनेवाले कल में जो होनेवाला है, वह सोच के बिलकुल रोमांचित हो गया. इतने दिन जो चीज़ केवल मेरे मन के अंदर एक छोटे कमरे में रखी हुई है. आज अचानक वह चीज़ इस बाहर की वास्तव दुनिया में सच होने जा रही है. मेरे रूम की ब्लू नाईट लैंप की रौशनी चारो तरफ फैली हुई है. मैं यह सब सोच के मेरे पाजामे का नाडा खोल. आलरेडी मेरा पेनिस उसके आनेवाले समय को मेहसुस करके खुद ही ख़ुशी से फूल रहा था. मैं पूरा मुठ्ठी से उसको पकड़के धीरे धीरे सहलाने लगा. आँख बंध करते ही मेरी माँ मेरी नज़र के सामने अपनी झुकि हुई नज़र से खड़ी है. मैं और उत्तेजित हो गया यह सोच के की यह खूबसूरत औरत कुछ दिनों में बस मेरी ही होने वाली है. मेरी बीवी बननेवाली है. मेरा पेनिस का कैप इस सोच में और फूल गया. मैं तेज़ी से हिलने लगा. और माँ का गले में मेरा दिया हुआ मंगलसूत्र और मांग में मेरे नाम का सिन्दूर कल्पना करके में ओर्गास्म की तरफ पहुच गया. मेरा बॉल्स फूल गया और सीमेन शूट करने के लिए तैयार हो गया. मैं तेज़ी से स्वास ले लेके केवल बोलने लगा ‘ मा..आई लव यू लव यु मा…आई.. लव यु’. माँ की कोमल पुसी , जिसको बस कुछ दिन बाद से केवल मुझे ही एक्सेस करने का अधिकार मिलेगा, उसको कल्पना करके उसके अंदर मेरा वीर्य छोड़ने का सुख मेहसुस करके, मेरा एकदम फुला हुआ मोटा पेनिस जोर जोर से झटके खाने लगा और अचानक फींकी लेके मेरा सीमेन मेरा फेस, गला ,छाती सब गिला करके भर भरके निकल ने लगा. आज पहली बार इतना सीमेन निकला की में खुद हैरान हो गया. जब मेरा ओर्गास्म पूरा होगया, में शान्ति से अंख बंध करके बेड पे पड़ा रहा.
पहले की तरह इस बार भी मुझे घर पे वार्म वेलकम मिला. पर फिर भी में थोड़ा डिफरेंस मेहसुस करने लगा. नाना नानी इस तरह मेरा स्वागत किया जैसे में कोई बाहर का आदमी हु एंड वेरी रेस्पेक्टड्. मैं यह सोच के थोड़ा शर्मा गया की वह लोग ऐसे कर रहे है शायद इस लिए की में कुछ दिन में उनलोगों का दमाद बन्ने जा रहा हु.मैं फ्रेश होने के लिए अपने रूम में गया. गर्मी का समय. तो में फिर से नहाना चाहताथा. शावर के नीचे खड़े होक नाहा रहा था. ठंडे पानी से नहाने में बहुत अच्चा लग रहा है. मैं पूरा बदन अपना हाथ से रगड रगड के आच्छे से नहाने लगा. जब मेरा हाथ मेरे पेनिस छुये, में नीचे की तरफ देखा. पेनिस अब अपना नार्मल साइज में था. उसको हाथ में लेके सोचा की बेटा, और कुछ दिन सेहलो, कल्पना में तुम जहाँ घुसके सबसे आराम और शान्ति मेहसुस करते हो, वह तुमको मिलने वाला है, पूरी ज़िन्दगी के लिये. यह सोचते ही पेनिस फूलने लगा. मैं तुरंत उसको छोड़ दिया और उसके आस पास सब साफ़ सफाई करके शावर से बाहर आगया.
एक पाजामा और टी-शर्ट पहेनके रूम से बाहर निकल तेहि माँ के रूम की तरफ देखा. यह सोच के रोमाँचित हो गया की मेरी होनेवाली बीवी मेरे आस पास ही घूम रही है. मुझे माँ से मिलने की एक चाहत होने लगी. पर अब शायद वह नानी के साथ ही होगी. सो में सोचने लगा की उनसे कैसे, कहाँ थोड़ा अकेले में मिल पाऊंगा.मैन ड्राइंग रूम में आके नाना जी के पास बैठ के टीवी न्यूज़ देखने लगा. तभी नानी जी एक प्लेट में कुछ मिठाई लेके मेरे सामनेवाली सेंटर टेबल पे रखदी. इस टाइम बराबर मुझे चाय मिलता था. आज भी वही एक्सपेक्ट किया था. अचानक आज इस तरह से मिठाई का प्लेट देखके में ऐसे ही कहा दिया
” यह क्या…. अभी यह मिठाई-फिटाई कौन खायेगा नानी जी ?”
नानीजी पाणी का गिलास आराम से रखते रखते बोली
” क्यूं….तुम खाओगे”
मैं क्यजुअली बोला
” अरे नानीजी मुझे यह मिठाई नहि…अब एक गरम चाय चहिये”
नानी मेरे तरफ देखके मुस्कुराके बोली
” चाय भी पिलायेंगे. लेकिन उससे पहले यह खालो. अब यह घर तुम्हारा अपना घर के साथ साथ तुम्हारा ससुराल भी बनने जा रहा है. सो शुरुवात मीठा खाके करोगे तो रिश्ता भी मीठा रहेंगा” बोलके चेहरे पे एक मुस्कराहट फैलाके जाने लगी. मैं एक दम ऐसे खुल्लम खुल्ला बाते सुनक, अपने आप थोड़ा शरमाने लगा. नानाजी मेरे तरफ देखके स्माइल करके बोल
” खा लो”
मैन इस बात को यही समेटने ने केलिए चुप चाप प्लेट उठाके खाने लगा और टीवी की तरफ नज़र तिकाके सिचुएशन सहज करनेकी कोशिश करने लगा.
कुछ देर बाद नानी फिरसे आई और आके नाना के पास बैठ गयी. फिर नानाजी टीवी ऑफ करके मेरे से बात करना चालू किया. वह लोग धीरे धीरे सीरियस होने लगे और मुझे बहुत सारी चीज़ों में मेरा राइ पुछने लगे. जैसे की शादी का प्रोग्राम कहाँ , कैसे किया जाए. हमारे ज़ादा रिश्तेदार कभी नहीं थे, और जो भी थे पिछले कुछ सालों मे न मिलने के कारण, सब बिछड गए. सो उसमे कोई प्रॉब्लम नहीं है. प्रॉब्लम है हमारा मुहल्ला और पड़ोसी और कुछ दोस्तोँ को लेके. इन लोगों से हमें बचके सब कुछ करना पड़ेगा. इस लिए तय हुआ की यहाँ नहि, और कहीं जाके शादी का प्रोग्राम बनाना पड़ेगा. यानि की कोई दूर जगह जाके, जहाँ हमारा रिलेशन्स वगेरा किसीको कुछ भी मालूम नहि. वहाँ जेक शादी का रसम सम्पन्न करना पड़ेगा. तब नानी को याद आया की कुछ साल पहले , नाना जी का बिज़नेस लाइन का कोई दोस्त की बेटी की शादी हम सब लोग मिलके अटेंड किया था मुंबई मे. एक्चुअली वह जगह मुंबई सिटी के अंदर नहीं था. मुंबई से कुछ किलोमीटर्स दूरि पे, मुंबई-गुजरात हाईवे के साइड में एक रिसोर्ट में हुआ था शादी. वहाँ की खास बात यह थी की एकदम अकेले में है वह रिसोर्ट और शादी में अटेंड करनेवाले सब को रहने का आवास भी प्रदान करता है. साथ में जो सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है यानि की शादी का रसम का अरेंजमेंट–पंडित से लेके रजिस्टर्ड साहब तक, सब वह लोग देते है. ..था वह एक बड़ा शादि, पर हम्मे तो वह सब कुछ नहीं चहिये. खाली शादी का रसम पूरा करने का बन्दोबस्त, हम चार लोगों का रहने का इन्तेज़ाम. बस और क्या. यह सब डिस्कशन में में थोड़ा संकोच करने लगा और खुलके बात नहीं कर पा रहा था. पर नाना जी बोले ” अरे बेटे यह सब तुम्हारी ज़िन्दगी की महत्वपूर्ण चीज़ें है. इस में तुमको खुलके आगे आना चहिये. और हम तुम्हारे साथ है.” तब में थोड़ा सहज होने लगा और नाना जी से सारे प्लानिंग करने लगा.
इन सब बातों के बीच मेरे दिमाग में यह सोच चल रहा है की कैसे भी करके माँ से एकबार मुलाकात करनी है. मुझे यह भी मालूम था की माँ से ऐसे आसानी से मुलाकात नहीं हो पायेगा. वह जानबूझ के मुझसे दूर रह रही है. बिलकुल कोई मौका नहीं देरही है आमने सामने आनेका. इस्स लिए में उनका चेहरा ठीक से देख भी नहीं पा रहा हु. पर नाना जी से बात करते करते ही मेरा दिमाग में एक झलक सी आइ. मुझे एक ही रात घर पे रुख ने को मिलता है. दूसरी रात में यानि की संडे रात को में निकल जाता हुन एमपी के लिये. सो मुझे आज रात में ही माँ से मिलना है. एकान्त मे. इतनी सब कुछ बाते हो रही है. शादी की प्लानिंग तक शुरु हो गया. और अभी तक दूल्हा और दुल्हन की एक बार बात भी नहीं हो पाई मुझे एक बार उनसे बात करनी है.
” बस और कुछ दीण….. नानी के हाथ का खाना खा लो… फिर तो तुम्हे साँस के हाथ का खाना खाना पड़ेगा.” बोलके थोड़ा हास् के किचन के तरफ चलि गई. नाना जी भी इस बात से हॅसने लगे. मैं शर्म के मारे अंदर घुसे जारहा था.मैं डिनर के बाद नाना जी के रूम में बैठके बात कर रहा था. नानाजी पूछे की अब मुझे नया घर पे शिफ़्ट करना है की उसी घर को रखना है, मैंने बताया की यह घर ही फिलहाल ठीक है . काफी बड़ा घर ही तो है. नानी जी बोलने लगी की अब तो में अकेला था, सब चल जाता था. लेकिन अब फॅमिली रहेगा. हा..होगा वह बहुत छोटी फॅमिलि, केवल पति पत्नी की, फिर भी फॅमिली ही है. सो उसके लिए सारे सामान का भी बंदोबस्त करना पडेगा. मैं ने बोला की उस बात पे कोई चिंता नहि. वह सब में खुद ही संभल सकता हु. तो फिर केवल यह सामने आया की मुंबई वाली रिसोर्ट और शादी को लेके ही जो भी कुछ चिंता है. नाना जी ने कहा की ठीक है, तुम्हारा अब तो ऑफिस भी है. साइट सुपरवाइजर भी है. तोह तुम एमपी में रहनेका सब इन्तेज़ाम को देखो. और में रिसोर्ट वगेरा फाइनल करता हु. लेकिन उस से पहले शादी का एक शुभ दिन, शुभ मुहूर्त भी ढूँढ़ना है. जब यह सब बातें हो रहा था, तब मेरे दिमाग में और कुछ चल रहा था. अगर वह चीज़ मिस होगया तो शायद माँ से मिलना ना-मुमकिन हो जाएगा. मैं फ़टाफ़ट डिस्कशन को एन्ड करके नाना जी के रूम से बाहर आगया. और जैसेही में ड्राइंग रूम की तरफ जाने लगा तब मुझे मेरे रूम की लाइट चालू दिखाइ दिया. मेरी छाती में झट से एक ऐसा फीलिंग्स हुआ की जैसे मेरी छाती से कुछ निकल ने लगा और अचानक मेरी बॉडी हल्का सा हो गया.मै धीरे से अपने रूम के तरफ चलने लगा. मुझे मालूम था जब में नहीं रहूँगा तब माँ आके मेरा बिस्तर ठीक करके जाएगी. और इस लिए में डिनर करके नानाजी के रूम में जाके वह मौके का इंतज़ार कर रहा था. जिंतना नजदीक जा रहा था , उतनाही नर्वस भी हो रहा था. एक अजीब अनुभुति भी हो रहा था और एक नशा भी. माँ को फेस करने के बाद क्या होगा, वह पता नहीं था. उनको देख के में कैसे रियेक्ट करूँगा या वह कैसे रियेक्ट करेंगी, यह सब अनजान था. फिर भी में उनको एकबार सामने से देखना चाहता हु. बात करना चाहता हु.
मै डोर के पास जातेहि वह मेरा प्रजेंस फील कर लि. वह मेरे तरफ पीठ करके , थोड़ा झुक के, मच्छर दानी सही से चारो तरफ से बिस्तर के साइड में घुसा रहे थी. मेरे आते ही वह अचानक वह सब बंद करके खड़ी हो गई उनका फुल बैक साइड मेरी तरफ है. एक हलकी येलो कलर की प्रिंटेड साड़ी और मैचिंग ब्लाउज पहनी हुई थी. ब्लाउज के ऊपर गोरी गोरि, क्रीम जैसा मूलयां, सुडौल गर्दन और पीथ के ऊपरी भाग नज़र आरहा था बाल एक जुड़ा बांधके रखा है. उनकी बॉडी कर्वे ढ़लान लेके दोनों साइड से आके उनकी पतली कमर में मिल गया. उनके नितम्ब के ऊपर से साड़ी टाइट होक बढ़ा हुआ है. उससे वह और भी उभर के सामने आगया. आज तक जो चीज़ मेरा फंतासी दुनिया में होता था, आज पहली बार यह हुआ की उनको देखके उनके सामने हि, पाजामे के अंदर मेरा पेनिस कठिन होने लगा. उन्होंने उनका राईट हैंड से पलंग का स्टैंड पकड़के स्थिर हो गयी. यह सब कुछ्, कुछ दिन से जो हो रहा है, उनसब के बीच आज पहली बार में माँ को एकांत में मेरे नजदीक पाया. उनको उसी तरह सर झुकाके खड़ी होदे देख के अचानक मेरे अंदर का सब नर्वस्नेस धीरे धीरे ग़ायब होने लगा और एक अजीब मदहोशी मेरे में छाने लगा. जो अनुभुति और प्यार में उनके लिए पिछले ६ साल से छुपाके रखा था, आज वह प्यार, वह अनुभुति पहली बार मेरे दिल में इस वास्तव दुनिया में आने लगा. दिन भर बहुत कुछ सोचा था माँ को लेके, लेकिन अब जब वह सामने खड़ी है तो में सब कुछ भूल गया . केवल मेरे छाती में वहि पाणी का तरंग जैसे कुछ बहने लगा. मैं रूम के अंदर गया. वह अपने राईट हैंड की थंब नेल से पलंग के स्टैंड के उप्पर रब करने लगी. मैं उनको देखते हुए कहा
“मा……अक्टुअली…..मतलब…….में तुमसे सच मुच बहुत प्यार करता हु”
येह सुनतेही माँ शायद थोड़ा काँप उठि. फिर खुद को कण्ट्रोल करके वहां खड़ी रहि. मुझे उनका चेहरा देखने का बहुत मन कीया. मैं धीरे धीरे चलके मेरे स्टडी टेबल के पास गया. वहाँ से उनका साइड प्रोफाइल नज़र आ रहा था उनके चेहरा पे शर्म छाया हुआ है. नज़र झुकि हुई है पैरों की उँगलियाँ के तरफ. यहाँ से मुझे उनके पेट् का कुछ हिस्सा नज़र आरहा है. एक दम फ्लैट है. मैं उस तरफ देख के सोचने लगा की उस पेट् के अंदर ही एकदिन मेरा बच्चा आएगा. मैं यह सोच के और भी रोमाँचित हो गया और पाजामे के अंदर मेरा अपना पेनिस सख्त हो गया. जैसे ही में डोर छोड़के अंदर आया और चुप चाप यह सब सोचने लगा, उन्होंने फट से मुड़के , मेरे तरफ बैक करके , तेज़ी से घर से निकल गई. मैं उनका जाना देखने लगा. ऐसी एक सुन्दर औरत, जिसको में प्यार भी करता हु, रेस्पेक्ट भी करता हु, चाहता भी हु, उनके साथ ही में पूरी ज़िन्दगी बिताने वाला हु. यह सोच के मन में ख़ुशी छा गया.
ओर मेरे आँख में नीद कब आके मुझे एक ख़ुशी के सागर में बहाके लेके गइ, वह मुझे पता नहीं चला.नेक्स्ट डे रात १० बाजे मेरी नीद टुटी. मैं ऑफिस के कपडे में ही हु अभी तक्. नीद टुटने के बाद सो सो के कुछ टाइम में कन्फ्यूज्ड था. समझ नहीं आ रहा था में कहाँ हु और अब क्या है–मॉर्निंग या रात!! और ऐसे कैसे हो गया!! प्रारंभिक विचलन कट ने के बाद में होश में आया.रात को देर नीद आने के कारन सुबह उठने में लेट हो गया. मोबाइल की रिंगिंग से नीद तूट गयी. ऑफिस का एक सीनियर कलीग का फोन. वह कुछ अर्जेंट काम के लिए कल छुट्टी ले रहा है. इसलिए वह कल साइट पे जा नहीं पाएँगे, सो मुझे जाने के लिए कहा. मैं जैसे ही उनको कन्फर्म किया वह मुझे थैंक्स बोले. और दो चार इधर उधर का बात करके फ़ोन कट दिए. मैं फ़टाफ़ट बिस्तर से निकल के बाथरूम जाके फ्रेश होने लगा. मेरे अंदर ऑफिस की बातें चल रही थी. जब में मिरर के सामने खड़े होके दाँत ब्रश कर रहा था तब खुद को मिरर में देख रहा था. अचानक दिमाग में आया, अरे में शादी कर रहा हु और चुप चाप शादी करके जब बीवी लेके एमपी पहुँचेंगे तब तो ऑफिस में सब को पता चलेगा. तब सब को कैसे सामना करूँगा? फिर सोचा की ठीक है जब होगा तब देखा जाएगा. पर इन सब बातों से ज़ादा मेरे दिमाग में कल रात के बारे में याद आया. कल मुझे माँ मिली थी वह भी एकांत मे. मुझे उनको बहुत कुछ बताना था बहुत कुछ पूछना भी था पर वह जब सामने आइ, में सब कुछ भूल गया. दिन भर कितना कुछ सोचके रखा था पर उनके सामने आके कुछ नहीं हो पाया. मैं एक अद्भुत फीलिंग्स में आजाता हु और सब गड़बड़ कर देता हुँ. मैं समझ गया की मेरे मन के एकदम अंदर जो एक अंतयुद्ध पिछले तीन-चार दिन से चल रहा है , यह उसी का फल है. हा….यह बात सही है की एक लड़की के लिए एक लड़के के मन में जैसा प्यार होता है, उनके लिए मेरे मन में वह प्यार है. पर जिनको बचपन से माँ के रूप में देखता आरहा हु, अब उनको बीवी के रूप में देखना पडेगा. पुराना रिश्ता भूल कर अब नए रिश्ते में कदम रखना है. जब वह सामने नहीं है, तब मन यह सब मान के चलता है. पर अब जब वह सामने आगयी तब पता चला की मुझे वास्तव दुनिया में उनके साथ वह नया रिश्ता अपनाने के लिए मेरे अंदर की बहुत सारी भावनाएं और संकोच को दूर करना पड़ेगा. मैं मन को जोर देने लगा. आज वापस जाने से पहले उनसे और एक मुलाकात होती तो दिल को थोड़ा सुकून मिलता पर में यह भी जानता हु की इसका चान्सेस बहुत ही कम है.मैं जब ड्राइंग रूम में आया , वहां नाना नानी के साथ माँ कुछ बात कर रही थी. सब की बॉडी लैंगवेज से समझ आ रहा है की कोई सीरियस बात नही, ऐसे ही बात चित कर रहे है. पर जैसे ही में ड्राइंग रूम में एंट्री लिया वह आँख उठाके एकबार मुझे देख लिया और जल्दी से शर्मा के फिर से नानी के तरफ देख के कुछ बोली और तुरंत वहां से जाने लगी. और किचन के तरफ के डोर से निकल गयी. मैं समझ गया माँ भी मेरे जैसे सिचुएशन में है. शायद उनका भी मन चाह रहा होगा की वह मुझसे मिले , बातें करे, पर उनकी अंदर की भावनाएं और संकोच वह सब करने में रोक लगा रहा है. उनको भी मेरी तरह खुद से जूझना पड़ रहा होगा. अब तक जो उनका बेटा था अपना खुन था जिसको बचपन से पाल पोस के एक नौजवान लड़का बनाया, जिसको माँ की ममता , प्यार और स्नेह देकर बड़ा किया है, उस नौजवान लड़के को अब उनके पति के रूप में मान ना पडेगा. उसको पति का अधिकार देना पडेगा. अपना तन मन उसको सोंप ना पडेगा. एक नये पवित्र रिश्ते में उससे जुड़ना पडेगा. लेकिन उनको देख के यह पता चलता है की वह भी जरूर यह सब सोच और संकोच से निकलने की कोशिश कर रही है. क्यूँ की उनकी नज़र में, उनके चलन में, और उनके इशारे में साफ़ साफ़ पता चलता है की वह अब एक माँ की तरह नही, एक अकेली दुखी औरत की तरह नही, वल्कि वह खुद को एक लड़की के तरह महसुस कर रही है. जिस की अभी शादी होनेवाली है और वह अपने होनेवाले पति से शर्मा रही है.
“बेटा , में तुम दोनों को मेरा दिल भरके अशीर्वाद देती हुँ. तुम लोग एक दूसरे को ज़िंदगी भर प्यार करते रहना. हँसी, खुशी, आनंद और शांति के साथ जीते रहना. अपनी फॅमिलि, अपने बच्चों के साथ एक नयी दुनिया बनाके खुश रहना. ….”
नानी के आँखों में पानी भरने लगा. “बेटा, हमारे सब के भलाई के लिये, तुम्हारे अपने फॅमिली के लिये, तुम आज जो कर रहे हो, इस के लिए में कैसे तुम्हें……”
नानी और बोल नहीं पायी. उनका गला बंध होने लगा. बस वह मेरे तरफ एक प्यार और ममता भरी, कृतज्ञता के नज़र से देख रही है. मैं भी भावुक हो गया. मैं उनका हाथ मेरे मुठ्ठी में लेके , थोड़ा दबाके मेरी स्वीकृति जताई और बोला
” नानी जी…आप बिलकुल परेशान मत होइये. आप की बेटी को में खुश रखुंगा. और हम सब मिलके खुश रहेंगे”
नानी जी के होठो पे एक मुस्कराहट आने लगी. और फिर थोड़ा हसके मेरे गाल पे प्यार से एक हल्का सा चाटा मारके बोली
” पागल लड़का…मुझे अब नानी क्यों !!!….मम्मी तो बोल”
वह हसने लगी और में शर्म में डुबा जा रहा थालंच के टाइम सिचुएशन कुछ और था नानाजी पण्डितजी से मिलके आकर बेफिकर अपना शर्ट खोल के उनके बेड रूम में कुरसी के ऊपर रख दिया था जब नानाजी नहाने गये थे तब नानी उस शर्ट को हंगर में डालके टाँगने गयी. और तभी शर्ट की पॉकेट से एक पैकेट सिगरेट मिला. नानाजी नानी से छुपा के यह सब करते है. पर आज ग़लती से यह भूल गये वह. और पकडे गये. और तब से नानी नानाजी को डाटना सुरु कर दिया. ऐसे तोह वह बोलती बहुत ज्यादा, ऊपर से आज यह पॉइंट मिलगया और भी बोलने के लिये. नानाजी चुप चाप चोर जैसे टेबल में बैठके खाना खा रहे थे मैं भी ज़ादा इंटरफेर न करके खाने लगा. नानी जब नाना को डाँट ती है, तब जो भी नाना को सपोर्ट करेगा, उसको नानी से रहम नहीं मिलेगा. बचपन से एहि देख ते आया था मैं. खाना खा रहा था और बीच बीच में आँख उठाके उन दोनों को देख रहा था अचानक मेरी नज़र उनलोगों के पीछे किचन डोर पे पड़ी. मैं देखा की माँ किचन डोर के पीछे छुपके सीधा मुझे गौर से देख रही है. उनकी आँखों में जो ख़ुशी की झलक थी , और होठो पे प्यार भरी मुस्कान, वह मुझे दिख गयी. पर जैसे ही उनके साथ मेरी नज़र मिली , वह झट से अंदर छुप गयी. जैसे कोई टीनएज गर्ल अपने प्रेमी को देख के शर्म से छुपती है. मेरे छाती में पानी के तरंग जैसी कोई एक अनुभुति मेरे दिल के अंदर जाके दिल को छुने लगी. मैं नाना नानी के इस झगडे के बीच में बैठके भी एक सुखानुभूति से बंध होकर खाने लगा.मैं जल्दी में था सुबह से साइट पे जाके सुपरवाइज़ करना है. इसलिए उस दिन जल्दी निकलने लगा घर से. मैं ज़ादा कुछ कैरी नहीं करता था एक छोटा रैक्सक बैग में अपनी जरूरी कुछ चीज़ें लेके चलता हुँ. मैं वह सब चीज़ें बैग में भरके स्टडी टेबल के पास चेयर पर रख दिया. एक जीन्स और पोलो टी-शर्ट पहनके बाहर ड्राइंग में आके चाय पी रहा था और नाना जी से लास्ट मिनट डिस्कशन कर रहा था नानी भी थी. अचनाक किचन से माँ की आवाज़ आयी और नानि को किचनमें बुलाया. कुछ ही देर में नानी कपड़े के एक छोटे बैग में टिफ़िन बॉक्स भरके लेके आयी और मुझे थमा दिया. इन लोगों का, स्पेशल माँ के प्यार का यह टार्चर हर बार मुझे सहना पडता है. रात में ट्रैन में खाने के लिए मुझे ले जाना पडता है. मैं घर से कैर्री करके लेके जाना नहीं चाहता हु, फिर भी इनसब को में दुःख नहीं देना चाहता हुँ.
नाना नानी ड्राइंगरूम में बैठे है. मेरा जाने का टाइम हो गया. मैं उठके अपने रूम की तरफ चला बैग लेके आने के लिये. मेरे दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था मैं मेरे रूम में एंट्री करके जैसे ही स्टडी टेबल की तरफ राईट मुडा, में चौंक गया. स्टडी टेबल के पास वाली दीवार से पीठ टिकाके माँ खड़ी है. मेरी नज़र उनपे टीकी हुई है. उनकी आँखो में पहली बार दिखाइ दिया वह प्यार जो एक लड़के के लिए एक लड़की के मन में होता है, एक प्रेमी के लिए उनके प्रेमिका के दिल में होता है. उनकी गुलाबी होठ पे एक मुस्कराहट झलक मार रहा है. साथ ही साथ उनके दो पतले होठ एक अद्भुत आवेश में थोड़ा थोड़ा कांप रहा है. पूरा चेहरा शर्म से लाल हो गया है. मैं उनसे नज़र मिलाके देखे जा रहा हु और अंदर ही अंदर बहुत कुछ बोले जा रहा हुँ. पर एक भी बात मुह तक आइ नही. नाहीं कुछ कर पा रहा हुँ. अचानक वह नज़र झुका ली. मेरी नज़र नीचे करतेहि उनके गले के नीचे छाती पर और मख़्खन जैसे मुलायम क्लीवेज एरिया में आके टिक गया. मेरा पेनिस जीन्स के अंदर छट फ़ट करना सुरु करदिया. और तभी माँ दौड़कर आके मेरी छाती में उनका मुह घुसा दिया और दोनों हाथ पीछे ले जाके पीठ के ऊपर रखके मुझे कसके पकड़ लिया. उनका पूरा शरीर मेरे शरीर से चिपका हुआ है. पहली बार इस तरह मुझे हग किया उन्होंने. एक माँ जैसा नही, एक नयी नवेली बीवी जैसे मुझे पकड़ के रखा. उनके नरम नरम बूब्स मेरे छाती के उप्पर चिपके हुये है. उनका ग्रोइन एरिया मेरा थाई के साथ चिपका हुआ है. उनका फ्लैट पेट् मेरा ग्रोइन एरिया के साथ चिपका हुआ है. वह मेरा तना हुआ पेनिस को मेरी जीन्स के ऊपर से अपने पेट में मेहसुस किया होगा. मैं उनके बालों में मेरा मुह घूसा के, उनको अपने दोनों हाथों से पकड़ के और जोर से मेरे साथ चिपकाने लगा. हम कोई कुछ बोल नहीं रहे थे, केवल एक दूसरे को महसुस कर रहे थे. ऐसा करके मुझे जो कहना था वह कह दिया और मुझे जो कुछ पुछ ना था उनको जवाब भी मिल गया. अचानक उनकी ग्रिप लूज हो गई और वह अपना चेहरा मेरी छाती से अलग करने का संकेत दि. मैंने मेरी पकड़ छोड़ दि. उन्होंने मेरे से थोड़ा अलग होकर मेरे सामने बस कुछ मोमेंट्स खड़ी रही नज़र नीचे करके, फिर तेजी से दौड के अपने रूम में चलि गयी.
अब हालत ऐसी है की इतना कुछ होने के बाद अब १६ दिन रहेंगे कैसे. अब मुझे एक भी पल उनको छोड़के रहने का मन नहीं कर रहा थापर हा…तब मुझे पता नहीं था की इन १६ दिनों में बहुत कुछ होगा, बहुत कुछ मिलेगा हमे, जो हमारे आगे की ज़िन्दगी जीने का रास्ता सहज कर देगा. और साथ में मुझे एक नई चीज़ भी मिलेगी, जो आज तक मेरे नसीब मेंनहीं हुआ था कुछ दिन के लिए मुझे अपनी ही होनेवाली बीवी के साथ छुप छुप के प्यार करने का मौका भी मिल गया थावास्तव में आज सुबह एमपी पहुँचके ,जल्दी जल्दी फ्रेश होकर दौड़ लगाया साइट की तरफ. ऑफिस की गाड़ी थी मुझे पहुचाने के लिये. मैं वह लेके जब साइट पंहुचा तब सब मेरे लिए ही वेट कर रहे थे ब्रिज कंस्ट्रक्शन चल रहा है. एक तरफ की एंट्री पूरी होने जा रही है , तो उसे सुपरवाइज़ करके देखना पड़ रहा था प्लानिंग और डिज़ाइन के मुताबित सब बराबर जा रहा है की नही. मैं इस काम में नया हुँ. पर कुछ काम ऐसे होते है जो इंसान अपनी बुध्धि, मेधा और कॉमन सेंस लगा के जल्दी पकड़ लेता है. आज का दिन बहुत भारी था पूरा दिन साइट पे बिताके शाम को जब वापस आया , तब बॉडी में कुछ बचा नहीं था घर आके बिस्तर पे लेट गया और बस अब नीद टुटा. दिन भर की थकावट के साथ साथ पिछले कुछ दिन से नीद भी कम हो रहा था आज उसी का असर एकसाथ पड़ गया.
तेज भूक लग रही थी जल्दी से फ्रेश होकर खाने गया तो फस गया. अब याद आया. जो आदमी टिफ़िन सप्लाई करता है, आज वह दिन में ही फ़ोन करके बता दिया था आज रात को खाना दे नहीं पायेगा. पर तब इतना बिजी था की में ‘हउम’, ‘हा’, ‘ठिक है’ बोलके काट दिया था और बाद में एकदम भूल गया. मैं यहाँ एक मोहल्ले के अंदर रहता हुँ. मार्किट थोडी दूर है. ऑफिस के रस्ते मे. सो अब इस हालत में इतनी रात में बाहर जाके खाना खाने को एनर्जी नहीं मिला. मैं किचन में गया. फ्रिज में केवल अंडा मिला. संडे रहने के कारन न दूध न ब्रेड कुछ था नही. उस अंडे और मैगी लेके बनाना शुरू किया. मुझे बस इतना ही पकाना आता है. कभी माँ किचन में जाने ही नहीं दिया. और बैचलर लाइफ का भरोसा मैगी अंडे से ही कभी कभी काम चलाता हुँ. पर अचानक मन में आया की अरे अब तो मेरी बैचलर लाइफ ही ख़तम होने जारही है. अब तो फॅमिली मैन बनने जा रहा हुँ. कुछ ही दिन में मुझे फिर से माँ के हाथ का खाना खाने का सौभाग्य होगा. लेकिन यहाँ मुझे माँ का नही, मेरा पत्नी का, शादी किया हुआ बीवी के हाथ का खाना मिलेगा. मैं मैगी बनाते बनाते कल के बारे में सोच रहा था माँ को मालूम था की में बैग लेने के लिए रूम मै जाऊंगा. इसलिए वह जल्दी से नानी के हाथ टिफ़िन बॉक्स भेजकर , फटा फट पीछे के बरामदे से जाके मेरे रूम में चलि गयी और मेरा इंतज़ार करती रहि. यह सब सोच के मन में एक ख़ुशी का आवेश आने लगा. माँ कल मुझे संमझा दिया की वह हमारे नये रिश्ते के लिए अब कितनी खुश है. वह मुझे दिल से चाहती है. मुझे अपने पति के रूप में प्यार करना शुरू किया. यह सब उनकी हरकतों से और उनकी नज़रों से मुझे संमझा दी. वह चाहती थी की मेरे मन में जो दुविधा, संकोच और बहुत सारे सवालों का तूफ़ान चल रहा था में इस बार एमपी आने से पहले वह सब क्लियर हो जाये. सो लास्ट मोमेंट में खुद आके वह सब कुछ जताके गयी. अब में उनको बीवी के रूप में सोचु यह बात भी उन्हेंने संमझा दी. आज दिन भर इस बारे में सोचने का टाइम ही नहीं था पर अब में उनको मिस करना शुरू किया. न जाने क्यों, अब मुझे उनको मेरी बाँहों में भरके, आँखों में आँखे डालके उनके चेहरे की तरफ बस देखते रहु..बस इस ख्वाब से मन चंचल होने लगा
div class=”content”>मैं तो पिछला ६ साल से उनको चाहते आया हु अपने मन ही मन मे. अब जब हमारा नसीब हमे एक साथ मिलाने जा रहा है, तब शायद में उनको मेरे नजदीक पाने केलिए इतना बेताब हो रहा हुँ. पर वह तो बस कुछ दिन से यह सब एडजस्ट करना सुरु किया है. मैं जानता हु उनको टाइम की जरुरत है. एक रूप से दूसरी रूप में आने के लिये, अपने तन मन को अपने होनेवाले पति के पास पूरी तरह सोंप ने के लिये, खुद को तैयार करना पड़ रहा है. मैं उनको पति का प्यार देके, उनके साथ पूरी ज़िन्दगी गुजरना चाहता हुँ. उनको दुनियाका सबसे ज़ादा खुश पत्नी बनाना चाहता हुँ. कभी भी में उनको ज़रा सा दुःख नहीं पहुचाना चाहता हुँ. मैं चाहता हु की अगले साथ जनम तक वह मेरा पत्नी बनके रहे. सो में अभी उनको उनके जैसा रहने देना चाहता हुँ. इस बार में फिलहाल अपने मन के उप्पर पत्थर रखके अपना बाउल उठाके किचन में चला. जैसेही किचन में पंहुचा बीप बीप आवाज़ सुनाई दि. मैं दौड़ के बेड रूम में आया और मोबाइल उठाके चेक किया. माँ रिप्लाई दिया ‘यक’ बोलके. फिर से एक अद्भुत सुरसुरी स्पाइन पकड़ के नीचे चली. मन् कांपने लगा. मैं बिस्तर पे बैठके तुरंत माँ को फ़ोन लगाया. और जैसेही रिंग होना चालू किया, माँ फ़ाटक से रिसीव करली. मैं उनके हेलो का इंतज़ार किया. पर उन्होंने कुछ बोला नही. लेकिन में उनकी उपस्थिति महसुस कर पा रहा हुँ. ऐसे तो रात है, चारो तरफ सन्नाटा है , कोई आवाज़ नही. मुझे उनके सांसो की आवाज़ भी सुनाई दे रही है. मैं समझ गया वह है लेकिन बोल नहीं रही है. मुझे एक हलकी हलकी कम्पन होने लगा यह सोचके की फ़ोन के उसतरफ मेरी होनेवाली बीवी है. मैं उसकी मीठी आवाज़ सुनने के लिए उसके बोलने का इंतज़ार कर रहा था असल में हम दोनों ही खामोश रह रहे थे और हम हमारे बीच की ख़ामोशी का भाषा पड़ने की कोशिश कर रहे थे पर जब उनकी तरफ से कुछ भी नहीं आया तो में बोला. मेरे दिल का दरवाजा उनके लिए खुला रखा. इसलिए खुद को कण्ट्रोल करके ढूँढ़ते रहा की कैसे शुरू करु, क्या पुछु. फिर में धीरे से पूछा
” नानाजी नानीजी सो गए?”
वह कुछ टाइम बाद धीरे से कहि
“हा”
उनकी मिठी आवाज़ में साफ़ साफ़ शर्म झलक रहा है. मेरा मन ख़ुशी से झूम उठा. उनकी आवाज़ सुनतेही मेरा मन का सब इमोशन का बांध तूट पड़ा. फिर भी यह सब उनको महसुस करने न देके बात घुमाया और हल्की हसि के साथ बोला
” मैंने अभी अभी डिनर किया”
वह थोड़ा चुप हो गई. और आवाज़ में थोड़ा चिंता मिलाके पुछी
” इतने लेट क्यों?”
मैं नार्मल रहके बोलते रहा
” वह एक्चुअली आज साइट पे दौड़ भाग की वजह से थक गया था और वापस आते ही सो गया था”
बोलके थोड़ा रुका और जैसे कुछ याद आया, इसी तरह फिर से बोला
” और आज वह टिफ़िनवाला भी खाना नहीं लाया.”
वह रुक रुक के बोल रही है. मैं समझ रहा था की अभी भी शर्म और संकोच उनको सहज होने में रोक रहा है. लेकिन इस बार वह टाइम न लेके तुरंत पुछी
” क्यूँ?”
” पता नही, उसका कुछ काम था इसलिए आज दिया नही” मैंने कहा.
वह थोड़ा टाइम चुप हो गई. फिर थोड़ा चिंतित होकर पुछी
” तोह खाना कैसे हुआ?”
मैं हस्ते हस्ते बोला
” मुझे जो बनाने आता है, वहि बनाया-मैगी और अंडा”
वह कुछ सोची और बोली” बाहर होटल में तो खाना मिलता है”
जैसे की मेरी ग़लती पकडी गई, उसी तरह सफाई देते हुए कहा
” हा…मिलता तो है. पर अभी..ईतने रात मे… जाने का मन नहीं किया”
वह उनकी आवाज़ में थोड़ा सा हल्का गुस्सा मिलाके कहि
” ऐसे करने से तबियत ख़राब हो जाती है”
अभी भी उनका बातों में माँ का प्यार और चिंता दिखाइ दे रहा है. और यह भी नज़र आया की आज अचानक उन्होंने धैर्ययुक्त आवाज में बात कर रही है. मैं क्या सफाई दु यह सोचते सोचते बोल दिया
” अच्छा और नहीं करुँगा.”
फिर क्या पता कैसे, में बोलते रहा
” और तो बस कुछ दिन. उसके बाद तो फिर से हमेशा तुम्हारा हाथ का ही….”
बोलके में रुक गया. पूरा नहीं कर पाया. पहली बार इस तरह बात निकल गया मुह से. मुझे शर्म भी आने लगा. ऐसे हमारी शादी के बारे में हम एक दूसरे को आज तक कुछ जिकर नहीं किया. सो में आधा अधुरा बोलके रुक गया. उधऱ माँ भी चुप हो गयी. इस बात से एक चीज़ हुआ. वह क्या की अब तक मेरा और माँ के बीच हमारे नए रिश्ते को लेके जो अदृश्य दीवार थी वह धीरे धीरे गिरना शुरू हुआ. मेरे अंदर वहि पुराणी एक अद्भुत ख़ुशी का जो फीलिंग्स आता है, वह मेरा पूरा बदन में छाने लगा. मैं मेरा दिल का द्वार पूरा खोल के एकदम भावुक हो गया. और उनके लिए मेरा प्यार बाहर निकलने लगा. मेरे गले से एक हलकी कपकपाती हुई आवाज़ निकाल के बोला
” आय लव यु”
div class=”content”>जैसे ही मैंने कहा, में फ़ोन के उसपार से माँ का एक तेज साँस की आवाज़ सुना. मुझे ऐसे इमोशन के साथ कहते हुए सुनके माँ शायद काप उठि होगी. इस लिए कुछ टाइम वह चुप हो गयी. हम दोनों ही फ़ोन पकड़ के बैठे है. जैसे की वह मेरे प्यार को महसुस कर रही है. थोडे टाइम बाद वह खुद को कण्ट्रोल करके धीरे धीरे अपने दिल का दरवाजा भी खोलने लगी. और यह मुझे पता चला तब, जब वह अपनी कपकपाती आवाज़ से फुसफुसाते बोली
” आय लव यु टू”
मा पहली बार अपने मुह से मेरे लिए प्यार जताई. और वह सुनके में ख़ुशी से पागल हो गया. मेरा खुन तेजी से दौड़ने लगा. और एक अजीब अनुभुति मेरे दिल में भरने लगी. मैं इमोशनल होकर आँख बंद करके थोड़ा पीछे हिलके अपने सर को दिवार पे टेक लगाया. जैसे की में हवा में बादल के साथ भागे जा रहा हु, ऐसे फील हुआ. मैं प्यार भरी आवाज़ से धीरे धीरे, आलमोस्ट फुफ्फुसाके बोलने लगा
“मैं हमेशा से मेरे मन में विश करके आया की मुझे एक खूबसूरत बीवी मिले…. और आज दुनिया की सबसे खुबसुरत, सबसे प्यारी लड़की….. मेरी बीवी बनने जा रही है. इससे ज़ादा मुझे कुछ नहीं चहिये”
ओर में चुप हो गया. थोड़ी देर बाद माँ रुक रुक के कहि
“ईससे पहले…. और एक बार…….सोच लेना चाहिये”
” क्या?…..कीस बारे में?”
” पापा मम्मी हमारे बीच……जो रिश्ता चाहते है”
” क्यों?”
इस बार वह थोड़ा टाइम चुप रहि. फिर से कहि
” हर जवान लड़का एक नवजवान लड़की पसंद करता है”
अब मुझे समझ आया माँकी दुविधा. वह सोच रही है नाना नानी की बातों में आके में राजि हुआ इस रिश्ते के लिये. लेकिन में उनको कैसे समझाऊ की मेरे अंदर में कब से उनको प्यार करते आ रहा हु, उनको चाहते आरहा हुँ. तोह मैंने आवाज़ में प्यार भर के कहा
” मुझे ना कभी कोई नवजवान लड़की दिखि, जिसको में चाहू, न कोई है, जो तुम जैसी प्यारी और खुबसुरत मेरे दिल में बस एक ही लड़की है…और रहेगी………वह है..तुम”
वह कुछ सोचके बोली
” लेकिन मेरे में भी …मुझमे भी .बहुत सारी खामिया है”
” मतलब… क्या?”
फिर चुप है. मैं सुनने के लिए बेताब हु की वह क्या बोलना चाहती है. कुछ मोमेंट्स बाद वह धीरे धीरे बोली
” मैं ३६ की हुँ. बस कुछ दिन मे…..में बूढी हो जाउंगी…..”
मैं तुरंत जवाब दिया
” तोह में उनको भी उतना ही प्यार दूँगा, उतनी ही ख़ुशीदूँगा, जो अब देना चाहता हुँ. और उतना ही चाहूंगा, जैसे अब चाहता हुँ”
शायद मेरी बात उनको अच्छा लगा. लेकिन फिर वह बिलकुल खोई हुई आवाज़ से संकोच करते करते बोली
“और अब…….अगर….अगर….में दोबारा माँ नहीं बन पाई तो!!”
मैं जैसे ही इस बात का मतलब समझा, अचानक मेरा ग्रोइन एरिया में एक अद्भुत सनसनी अनुभव करने लगा. जिसके फल स्वरुप मेरा पेनिस के अंदर खुन दौड़ने लगा. पर यह परिस्थिति उसके लिए नहीं है. इसलिए में खुद को कण्ट्रोल किया.
ओर अब यह भी मेहसुस किया की वह किस किस बातों को लेके अपने अंदर जूझ रही है. वह नहीं चाहती है अपने प्यारे बेटे की लाइफ कुछ पल के गलत डिशिजन से ख़तम हो जाए. इस रिश्ते को अपनाके, बाद में कोई भी कारन लेके पछतावा नहो. इस में वह भी दुखी होगी और में भी. लेकिन में इस बात को क्लियर करना चाहा. पर कैसे? मैं बस ऐसेही बोलना सुरु किया.
” मैं बचपन से जिनके साथ खुशियां बाट ते आ रहा हु, उनके साथ ही मेरा हर ग़म शेयर करता हुँ. मेरा हर सुख, दुख, हसि, रोना, आनंद, शान्ति सब कुछ उनके साथ ही जुड़ा हुआ है. न कभी किसी लड़की को आँख उठाके देखा, न किसीको चाहा. और न कभी किसीको चाहूंगा. मेरे दिल में, हरपल, जो मेरा दोस्त, मेरी प्रेरणा स्त्रोत है, उनको अपना जीवन साथी बनाके ज़िन्दगी गुजार ने में जो ख़ुशी है, उससे ज़ादा कुछ नहीं चाहिये. उसमे ही मुझे सब कुछ पाना हो जाएगा”
एक मोमेंट रुक के फिर से बोला
” अगर हमारा नसीब में कुछ लिखा है, तोह उसको हँसते मुह से स्वागत करेंगे, अगर कुछ लिखा नहीं है तोह उसको भी हँसते मुह से स्वीकार करेंगे, कभी ग़म नहीं आएगा.”
मैं चुप हो गया. मुझे खुद को मालूम नहीं था में इतनि सारी बात बोल पाऊंगा. पर यह बोलके दिल में सुकून मिल रहा है. मैं कभी किसीको प्यार का इज़्हार नहीं किया. आज मेरी होनेवाली बीवी को बोल दिया. मैं उस तरफ़ की भावनाएं जानने के लिए गौर से सुनने लगा की वह क्या कहती है. लेकिन सब चुप है. अचानक मुझे सिसकी लेने की आवाज़ मिली. मैं समझ नहीं पाया. फिर से वह आवाज़ आयी. अब में परेशान सा होने लगा. कुछ समझ नहीं आ रहा है. मैं उतावला हो गया. पर थोडे टाइम में जैसे ही सब कुछ क्लियर हुआ, मेरा छाती में पाणी का तरंग खेल गया. मेरा दिल पिघल ना शुरू हो गया. माँ उस तरफ रो रही है. मुझे मालूम है, मेरी बातों से उनको यह आँसू बहाना पड़ रहा है. मैं उनको कुछ कहना चाहा. पर मेरा गला भी बुजा हुआ है. कुछ नहीं आ रहा है. केवल एक इचछा मन में दौड़ने लगी.
div class=”content”>जैसे ही मैंने कहा, में फ़ोन के उसपार से माँ का एक तेज साँस की आवाज़ सुना. मुझे ऐसे इमोशन के साथ कहते हुए सुनके माँ शायद काप उठि होगी. इस लिए कुछ टाइम वह चुप हो गयी. हम दोनों ही फ़ोन पकड़ के बैठे है. जैसे की वह मेरे प्यार को महसुस कर रही है. थोडे टाइम बाद वह खुद को कण्ट्रोल करके धीरे धीरे अपने दिल का दरवाजा भी खोलने लगी. और यह मुझे पता चला तब, जब वह अपनी कपकपाती आवाज़ से फुसफुसाते बोली
” आय लव यु टू”
मा पहली बार अपने मुह से मेरे लिए प्यार जताई. और वह सुनके में ख़ुशी से पागल हो गया. मेरा खुन तेजी से दौड़ने लगा. और एक अजीब अनुभुति मेरे दिल में भरने लगी. मैं इमोशनल होकर आँख बंद करके थोड़ा पीछे हिलके अपने सर को दिवार पे टेक लगाया. जैसे की में हवा में बादल के साथ भागे जा रहा हु, ऐसे फील हुआ. मैं प्यार भरी आवाज़ से धीरे धीरे, आलमोस्ट फुफ्फुसाके बोलने लगा
“मैं हमेशा से मेरे मन में विश करके आया की मुझे एक खूबसूरत बीवी मिले…. और आज दुनिया की सबसे खुबसुरत, सबसे प्यारी लड़की….. मेरी बीवी बनने जा रही है. इससे ज़ादा मुझे कुछ नहीं चहिये”
ओर में चुप हो गया. थोड़ी देर बाद माँ रुक रुक के कहि
“ईससे पहले…. और एक बार…….सोच लेना चाहिये”
” क्या?…..कीस बारे में?”
” पापा मम्मी हमारे बीच……जो रिश्ता चाहते है”
” क्यों?”
इस बार वह थोड़ा टाइम चुप रहि. फिर से कहि
” हर जवान लड़का एक नवजवान लड़की पसंद करता है”
अब मुझे समझ आया माँकी दुविधा. वह सोच रही है नाना नानी की बातों में आके में राजि हुआ इस रिश्ते के लिये. लेकिन में उनको कैसे समझाऊ की मेरे अंदर में कब से उनको प्यार करते आ रहा हु, उनको चाहते आरहा हुँ. तोह मैंने आवाज़ में प्यार भर के कहा
” मुझे ना कभी कोई नवजवान लड़की दिखि, जिसको में चाहू, न कोई है, जो तुम जैसी प्यारी और खुबसुरत मेरे दिल में बस एक ही लड़की है…और रहेगी………वह है..तुम”
वह कुछ सोचके बोली
” लेकिन मेरे में भी …मुझमे भी .बहुत सारी खामिया है”
” मतलब… क्या?”
फिर चुप है. मैं सुनने के लिए बेताब हु की वह क्या बोलना चाहती है. कुछ मोमेंट्स बाद वह धीरे धीरे बोली
” मैं ३६ की हुँ. बस कुछ दिन मे…..में बूढी हो जाउंगी…..”
मैं तुरंत जवाब दिया
” तोह में उनको भी उतना ही प्यार दूँगा, उतनी ही ख़ुशीदूँगा, जो अब देना चाहता हुँ. और उतना ही चाहूंगा, जैसे अब चाहता हुँ”
शायद मेरी बात उनको अच्छा लगा. लेकिन फिर वह बिलकुल खोई हुई आवाज़ से संकोच करते करते बोली
“और अब…….अगर….अगर….में दोबारा माँ नहीं बन पाई तो!!”
मैं जैसे ही इस बात का मतलब समझा, अचानक मेरा ग्रोइन एरिया में एक अद्भुत सनसनी अनुभव करने लगा. जिसके फल स्वरुप मेरा पेनिस के अंदर खुन दौड़ने लगा. पर यह परिस्थिति उसके लिए नहीं है. इसलिए में खुद को कण्ट्रोल किया.
ओर अब यह भी मेहसुस किया की वह किस किस बातों को लेके अपने अंदर जूझ रही है. वह नहीं चाहती है अपने प्यारे बेटे की लाइफ कुछ पल के गलत डिशिजन से ख़तम हो जाए. इस रिश्ते को अपनाके, बाद में कोई भी कारन लेके पछतावा नहो. इस में वह भी दुखी होगी और में भी. लेकिन में इस बात को क्लियर करना चाहा. पर कैसे? मैं बस ऐसेही बोलना सुरु किया.
” मैं बचपन से जिनके साथ खुशियां बाट ते आ रहा हु, उनके साथ ही मेरा हर ग़म शेयर करता हुँ. मेरा हर सुख, दुख, हसि, रोना, आनंद, शान्ति सब कुछ उनके साथ ही जुड़ा हुआ है. न कभी किसी लड़की को आँख उठाके देखा, न किसीको चाहा. और न कभी किसीको चाहूंगा. मेरे दिल में, हरपल, जो मेरा दोस्त, मेरी प्रेरणा स्त्रोत है, उनको अपना जीवन साथी बनाके ज़िन्दगी गुजार ने में जो ख़ुशी है, उससे ज़ादा कुछ नहीं चाहिये. उसमे ही मुझे सब कुछ पाना हो जाएगा”
एक मोमेंट रुक के फिर से बोला
” अगर हमारा नसीब में कुछ लिखा है, तोह उसको हँसते मुह से स्वागत करेंगे, अगर कुछ लिखा नहीं है तोह उसको भी हँसते मुह से स्वीकार करेंगे, कभी ग़म नहीं आएगा.”
मैं चुप हो गया. मुझे खुद को मालूम नहीं था में इतनि सारी बात बोल पाऊंगा. पर यह बोलके दिल में सुकून मिल रहा है. मैं कभी किसीको प्यार का इज़्हार नहीं किया. आज मेरी होनेवाली बीवी को बोल दिया. मैं उस तरफ़ की भावनाएं जानने के लिए गौर से सुनने लगा की वह क्या कहती है. लेकिन सब चुप है. अचानक मुझे सिसकी लेने की आवाज़ मिली. मैं समझ नहीं पाया. फिर से वह आवाज़ आयी. अब में परेशान सा होने लगा. कुछ समझ नहीं आ रहा है. मैं उतावला हो गया. पर थोडे टाइम में जैसे ही सब कुछ क्लियर हुआ, मेरा छाती में पाणी का तरंग खेल गया. मेरा दिल पिघल ना शुरू हो गया. माँ उस तरफ रो रही है. मुझे मालूम है, मेरी बातों से उनको यह आँसू बहाना पड़ रहा है. मैं उनको कुछ कहना चाहा. पर मेरा गला भी बुजा हुआ है. कुछ नहीं आ रहा है. केवल एक इचछा मन में दौड़ने लगी.
” मुझे माफ़ कर दो”
वह समझ गयी की में समझ गया उस तरफ क्या हो रहा है. सो वह खुद को सम्भाला. और आवाज़ में थोडी हसि मिलाके प्यार से कहि
” क्यों?”
मैं चुप था उनके मन की भवनाओ को समझने की कोशिश किया. फिर अपनई ग़लती को सुधरने का प्रॉमिस करते हुए कहा
” मैं और कभी नहीं रुलाउंगा”
मा इस बार थोडी हास पडी. और एक परम तृप्ति के साथ कहा
” बुद्धु….ऐसे आंसू बार बार बहाने के लिए कोई भी लड़की खुद को सौभाग्यशाली महसुस करती है. मैं आज इतने दिन बाद खुद को एक सौभाग्यषाली मेहसुस कर रही हुं…क्यों की…..”
मैं फिसफिसाके कहा
“क्य?”
वह फिस्फीसके कपकपाती हुई मीठी स्वर में बोली
” मुझे …मुझे आप जैसा पति मिल रहा है”
येह सुनके मेरा दिल तेज धड़क ने लगा. अब तोह यह लग रहा है कि, उनसे ज़ादा में भाग्यवान हुँ. वह हमारे होनेवाले नये रिश्ते को अभी से इस तरह अपना लिया और उनकी दिल का दरवाजा मेरे लिए पूरा खोल दिया. उनकी आखरि बात मेरे मन में एक घंटी जैसा बार बार बजने लगा. मैं खुश होकर एक चीज़ जो मेरे कान में खटक गया, वही कह दिया उन्होंने सब ठीक कहा है पर एक मिस्टेक करदि. वह मुझे ग़लती से ‘आप’ कह दी. जब उनको बताया , तोह उंनका कहना है की वह ग़लती से नही, जान बूझ के जो कहना सही है, वहि बोली है. इस बारे में उनके साथ बात चित होने लगा और उनकी बात मुझे समझ आया. आखिर में मुझे एक साफ़ तस्वीर नज़र आया. वह अंदर से और बाहर से पूरी तरह भारतीय नारी है. नाना नानी भी उनका परवरिश वैसे ही किया है. उनके पास, पति उमर में बड़ा हो या छोटा, पति पति होता है, रिश्ते में बड़ा होता है. सो वह अपना पति को आप कहके ही बुलाना पसंद करेगि. ऐसे हम धीरे धीरे अपने दिल का दरवाजा एक दूसारी के लिए खोल दीए. एक दूसरे को जानने लगए. उस रात बहुत सारी बातों बातों में हमे वक़्त का पता ही नहीं चला. और हम सुबह ४ बजे तक बात करते रहे. जब में सोने गया, तब मुझ में बस वह छायी हुई थी. अब में उनको मेरी बीवी के रूप में हर तरीकेसे पाने की चाहत में डुबा हुआ हुँ. और हा…में उनको आज बार बार बोलने के लिए सोचा, फिर भी यह नहीं बोल पाया की में कब से, और कैसे उनको चाहते आ रहा हुँ. पता नहीं आखिर यह बात उनको कभी बता पाऊंगा या नही.
आज कल में खुद को एक स्वाधीन , परिपूर्ण आदमी जैसा मेहसुस कर रहा हुँ. अपनी लाइफ खुद कैसे बनायेंगे, उसके लिए लगा हुँ. और अब हर कदम में में जो डिसिशन ले रहा हु या जो भी कुछ करने जा रहा हु, वह सब मेरी होनेवाली बीवी के सपोर्ट और इज़ाज़त से हो रहा है. जब हमारी लाइफ हम दोनों को ही एकसाथ बीतानी है, एक साथ हर कदम मिलके चलना है, तब हम अभी से एक साथ हमारा घर , हमारा फॅमिली और हमारा फ्यूचर की सारी सोच एक ही साथ सोच रहे है. माँ की हर ख्वाइश, हर इच्छा पूरी करना चाहता हुँ. वह जो चाहेँगी, जैसे करना पसंद करेंगी, सब कुछ में वैसे ही करना चहुंगा. उनके सुख में ही में सुख ढूंढ लुंगा, उनकी ख़ुशी में ही में ख़ुशी पाऊंगा. वह मुझे अब पत्नी की तरह प्यार भी करती है, वैसे कभी कभी डाँटती भी है. मुझे उनकी वह चीज़ें बहुत पसंद है. हमेशा उनका प्यार , ममता, स्नेह के साथ डाँट भी मिला है. और आज नए रिश्ते में जुड़ने के बाद भी उनके हर बेहवे में वह सब का हल्का टच मेहसुस करता हुँ. पर फरक यह है की आज कल वह मुझे रेस्पेक्ट भी करती है और में यह मेहसुस भी कर पता हुँ. उनका इस तरीके से मेरे साथ पेश होना मुझे और प्यारा लगता है. शायद इस लिए मुझे और प्यार आता है उनके उपर.
आज लंच ऑवर के थोडे बाद उनका फ़ोन आया. मैं ऑफिस टॉयलेट में तब सुसु कर रहा था जैसे ही मोबाइल स्क्रीन पे उनके नाम के साथ साथ उनका स्माइल किया हुआ फोटो नज़र आया, मेरे अंदर एक अनुभुति झलक देके ग़ायब हो गया. और उसमे मेरा हाथ में पकड़ा हुआ पेनिस थोड़ा काप उठा. आज कल उनके साथ बात करते वक़्त या उनके बारे में सोचते वक़्त यह मेहसुस कर रहा हु की मेरा पेनिस हमेशा पहले के नार्मल साइज से थोड़ा फुला हुआ रहता है. पहले के जैसा नार्मल साइज में आज कल रहता ही नहीं है. और यह प्रॉब्लम शायद हमारी सुहागरात के बाद ही ठीक होगा.
मैने दूसरी हाथ से फ़ोन कांन पे टिकाके बोला
” हाँ माँ…बोलो”
जीसे ही बोला, तुरंत मुझे मेहसुस हुआ और में हास पडा. और माँ भी उधर से फ़ोन पे ही हास पड़ी और वह मुझे सुनाइ दिया. मैं परिस्थिति सँभालने के लिए बोलते रहा
” एक्चुअली वह क्या है की….पहले की आदत छूटने में टाइम तोह्….”
मेरा बात पूरी होने से पहले माँ बात काट दिया और हस्ते हस्ते बोलते रहि
” बस बस….और सफाई की जरुरत नही. मैंने आप को कह दिया था की मेरे मम्मी पापा ने मुझे एक अच्छा नाम देके रखा है. और क्या.बाबू को शायद मेरा वह नाम पसंद ही नही.”
बोलके फेक गुस्सा दिखाके माँ रुक गयी. मैं उनको कैसे समझाऊ की मुझे उनको नाम लेके पुकारने में उनकंफर्टबले लगता है. और नाना नानी के सामने तोह कभी वैसे बुला भी नहीं पौंउंगा. मैं कोशिश करके भी उनको संमझा नहीं पाया. शायद मुझे उनके लिए एक नाम ढूँढ़ना ही पडेगा. मैं टॉयलेट से बाहर आके ऑफिस के उप्पर फ्लोर में पीछे की बालकनी में आगया. यहाँ कोई आता जाता नहीं है. मैं सिचुएशन सहज करके बोला
” मैंने कब बोला की पसंद नही. तुम्हारे नाख़ून से लेके बाल तक सब कुछ दुनियाके सब चीज़ों से ज़ादा प्यारी है.”
इस में माँ थोडी खुश हुई और प्यार में पिघलते पिघलते बोली
” ठीक है ठीक है…और झूट बोलने की जरुरत नही. अब आप यह बताइये कहाँ है आप अभी?”
मै बोला
” ऑफिस में, बस अभी लंच करुन्गा”
मा तुरंत आवाज़ में विस्मय लेके बोली
” आप अभी भी ऑफिस में!!! और लंच भी नहीं किये!!!”
फिर गले में थोड़ा फेक गुस्सा लेक बोली
” कल भी तो शाम को जाके लंच किये!! और आज अभी भी…..आप मेरी बात कभी सुनेंगे नहीं क्या?…….अच्छा एक बात बताइये…में पहले जब पूछ्ती थी तो आप हमेशा बोलते थे की हाँ आप का खाना समयपर हो रहा है….”
मैं माँ का बात काट के बोला
” नहीं नही…में सच बोलता हुँ…पहले समयपर ही खाना खाता था पर….अभी….ऑफिस का काम और घर का काम …दोनो संभल के टाइम मैनेजमेंट ठीक से नहीं हो पा रहा है. अभी खाता हु और फिर ऑफिस से निकल के रानी साहेबा की सारी पसन्दीदा चीज़ें खरीद के लाता हुँ. ओके सोना?”
मैं माँ को प्यार से अब बुलाया तोह शायद उनको आअच्छा भी लगा. वह प्यार में हस्ते हस्ते केवल बोली
” ह्म्मम्……ठीक है….जाइये…जाके पहले खाना खाइये”
मैं पिछले दो दिनसे घर सजानेका सामान खरीद नेमे जूटा हुआ हुँ. मुझे इस बारे में कोई एक्सपीरियंस था नही. जब माँ को बोला तब उन्होंने मेरी सारी प्रॉब्लम खुद अपने सर पे ले लिया और मुझे बस खरीद फरोख्त करने में छोड़ दिया. हमारा नया घर बसाने के लिए जो छोटी छोटी चीज़ों से लेके बड़ी चीज़ों की जरुरत पडती है सब वह मुझे बता देती है. और में उनकी पसंद दीदा चीज़ें खरीद ने में जूटा हुँ. आज ऑफिस में काम कम था सो कल रात को ही उनको बोल दिया था की आज लंच के बाद मार्किट जाके सब लेके आऊंगा.
फर्निचर दुकान में एक ड्रेसिंग टेबल का आर्डर करना है, लम्बी मिरर वाली, जिसमे स्लाइडिंग मिरर डोर हो. एक मरून कलर की स्टिल आलमारी का भी आर्डर करना है. फिर सारे घर के पर्दे खरीद ने है आज. वह भी ब्राउन और पिंक विथ फ्लोरल डिजाइन. माँ मुझे फोन करके संमझा दिया की परदे के कपड़े की क्वालिटी कैसी होनी चहिये. वह सब देख के खरीद ना है. एक चीज़ में हर पल महसुस कर रहा हु की माँ की सोच पहले से कुछ बदली सी लग रही है. पिताजी की डेथ के बाद उनके लाइफ में सब कुछ बेरंग हो गया था सब चीज़ें लाइट या वाइट रेंज के अंदर लिमिटिड था लेकिन आज कल सब कुछ ब्राइट कलर में पसंद कर रही है. अब ज़िन्दगी में रंग लाकर जीना चाहती है. इस लिए अंदर तथा बाहर भी रंग से सजा रही है. इस नयी ज़िन्दगी को वह पूरी तरह हर खुशीओ के साथ जीना चाहती है. मैं उनको वह सब कुछ देणे के लिए मन ही मन कसम खाने लगा.
घर आने में ज़ादा लेट नहीं हुआ. सब काम ठीक से करके वापस आके डिनर भी कर लिया. माँ का एक मेसेज आया था जब मार्किट से वापस आ रहा था आनेके बाद उनसे बात भी कर लिया. आज बाकि दिनों से जल्दी उनसे बात ख़तम कर दि. हम दोनों को नीद की सख्त जरुरत है. पिछली ४ रातें हम बात ज़ादा किया है छुप छुप के और सोया कम. मुझे भी सुबह ऑफिस जाना पडता है और माँ को भी घर का काम वैगेरा संभल ने के लिए सुबह जल्दी उठना पडता है. पर आज हमारे दोनों की बॉडी थकी हुई थी और कल में अहमदाबाद जा रहा हुँ.
मा से आज देर रात तक बात नहीं होरही है, लेकिन में सो भी नहीं रहा हु इतनी जल्दी. अब में पीसी खोल के सामने बैठा हु. कल मैं उनसे बात करते वक़्त बहुत भावूक हो गया था और में उनके सामने एक चीज़ कन्फेशन भी किया. मैंने बता दिया की में कबसे उन्हें प्यार करते आ रहा हुँ. पिछला ६ साल से अपने मन में उन्हें एक दूसरी तरह प्यार करते आ रहा हु–यह बात साफ साफ बता दिया. मैंने यह भी बोला था की में कभी उस प्यार के बारे में किसी को जानने नहीं दिया, न देता कभी. पर आज हमारे नसीब में जब और कुछ लिखा हुआ है, तब में यह चीज़ उनको बताना जरुरी समझा क्यूंकि अब हमारे बीच कोई सीक्रेट नहीं रहना चहिये. माँ गौर से चुप होकर मेरी बात सुन रही थी और सरप्राइज भी हो गयी थी. मैंने बताया की हो सकता है मेरा वह सच्चा प्यार अन्जाने में हमारा नसीब में एहि परिणाम लिख दिया था लेकिन जब मैंने उन्हें कैसे प्यार करते आ रहा हु, यह चीज़ हसके हलके से बताने गया, तोह वह थोड़ा शर्मा गयी और फ़टाफ़ट टॉपिक चेंज कर दिया था मुझे मालूम है वह अभी भी कुछ चीज़ों में इतना भी सहज नहीं हो पाई मेरे पास की वह मेरे साथ सब कुछ खोलके चर्चा कर पाये. स्पेशली जहाँ सेक्स की बात जुड़ा है, उस जगह में वह अभी भी एक दिवार बनाके रखी है. पर में जानता हु वह इस बारे में कितनी प्यासी होंगी. पिछले अठरा साल उन्होंने अकेले गुजार दिये. ज़िन्दगी का अहम भाग उन्होंने वह सब के बिना काटी है. उनका भी तन चाहता होंगा एक परिपूर्ण तृप्ति. एक परिपूर्ण संतुष्टि. कुछ ही दिन में हमारी शादी होने जा रही है. और हम पति पत्नी बनके पूरा लाइफ गुजारने जा रहे है. मैं उन्हें वह सब कुछ देना चाहता हुँ. मैं अभी तक वर्जिन हुँ. और वह मुझसे १६ साल बड़ी है. मैं कभी इंटरनेट सेक्स में एडिक्टेड नहीं हुँ. पर में इस परिस्थिति में इंटरनेट से सेक्स एजुकेशन लेने का डिसिशन लिया. हस्बैंड वाइफ को क्या क्या करना चाहिए सुखी लाइफ बिताने के लिये. एक दूसरे को मेंटली, साथ साथ फिजिकली भी खुश रखना चहिये. सो में सेक्स गाइड पड़ना सुरु किया दो दिन से. स्पेशली में ज़ादा पड़ रहा हु ” “How to satisfy Older Women in Bed” और आज, अभी में यही पढ़ रहा हुँ.
दरवाजा खोलके नानीजी मुझे स्माइल के साथ स्वागत किया. पर उन्होंने मेरे चेहरे की तरफ देख के, थोड़ा चिंतित होकर पुछा
” क्या हुआ बेटा!! तुम्हारी तबियत तो ठीक है?”
मैं पहले चोंक गया था थोडा. पर बाद में रीलाईज़ किया की शायद मेरे आँखों के नीचे जो हल्का सा काला धब्बा दिख रहा है, उसी के कारन नानीजी चिंतित हो गई होंगी. पिछले ५ रात ठीक से नीद पूरी नहीं हुई. माँ और में दो प्रेमी के तरह रात भर बातें करते रहे. और साथ ही साथ ऑफिस का काम के अलावा घर सजानेकी खरीदारी में बहुत बीज़ी हो गया था पर में यह सब उनको कैसे बताऊँ की उनकी बेटी से शादी करके घर बसाने के लिये, उनकी बेटी के साथ मिलके में क्या क्या कर रहा हुँ. मैं परिस्थिति सँभालने के लिए कहा
” हाँ नानीजी…में बिलकुल ठीक हुं”
नानीजी मेरे चेहरे को गौर से देखि और फिर नानाजी के तरफ नज़र घुमाई. तब नानाजी उनको बोले
” अरे भाई इतना दूर से ट्रवेल करके आरहा है. थक तो गया होंगा.”
फिर मेरे तरफ देखके बोले
” आज रात कसके नीद ले लो, सुबाह एकदम फ्रेश्..है की नहीं?”
मैं थोड़ा हसके उनकी बातों को सहमति देणे लगा. मैं यह महसुस कर रहा हु कि, हालाँकि में उनलोगों का दमाद बनने जा रहा हुँ,पर में उनलोगों का पोता भी तो हुँ. सो आज तक नानीजी मुझे जिस नज़र से देखते आरहे है, जैसे मेरे बारे में चिंतित होती है आज भी वैसे ही प्यार, स्नेह और ममता के साथ मुझे देखा और अपनी चिंता बताई. यह भी सही है की माँ और में जैसे एक ट्रांसफॉर्मेशन के अंदर से गुजर रहे है, उन लोगों को भी तो टाइम लगेगा अपने पोते को पूरी तरह दामाद की नज़र से देखने के लिये. मैं सोचते सोचते दरवाजा खटखटाया था की क्या में माँ को सामने देख पाउँगा की नही. लेकिन नही. वह नज़्दीक कहीं दिखाइ नहीं दी.
div class=”content”>मैं ड्राइंग रूम में फैन के नीचे बैठा हुँ. नानाजी मेरे बगल में एक ही सोफे में बैठे है. नानी जी उनके साइड वाले सोफे मे. पूरे हप्ते में नानाजी से मेरी इतनी ज़ादा बात नहीं हो पाइ. एक बार फ़ोन पे बताये थे मुंबई वाली रिसोर्ट के बारे में सारी इनफार्मेशन उनको मिल चुकी है. अब वही बात छेड़ा है उन्होंने. उनके किसी जानने वाले से कुछ रिसोर्ट के बारे में इनफार्मेशन और कांटेक्ट नम्बर मिला है. उन्होंने इनिशियल पूछताछ कर लिया ऑलरेडी. केवल जाके एक बार सामने से देखके बुकिंग करके आना है. इन सब बातों के बीच अचानक माँ चाय लेके . मैं जहाँ बैठा हु , वहां से नानी को देखूँगा तो उनके पीछे किचन की तरफ का डोर है. मुझे मेरे पोजीशन से उस डोर के बाहर का पैसेज तक दिखाइ देता है और उस पैसेज के लेफ्ट में किचन का डोर है. मुझे यहाँ बैठके आवाज़ से पता चला था की वह किचन में थी. सो नानाजी से बात करते करते अन्जाने में मेरी नज़र बार बार उस पैसेज के तरफ जा रहा थी क्यूंकि मुझे अब मेरी बीवी का चेहरा देखने के लिए मन बहुत चंचल हो रहा था सो जब वह चाय लेके चलके आरही थी, में बात करते करते इधर उधर देखने की एक्टिंग कर रहा था और उनकी एक झलक सर से लेके पाओं तक देख लिया. वह चाय की ट्रे के ऊपर नज़र झुकाके चलते आरही थी. चेहरा बिलकुल नार्मल था विथाउट अन्य एक्सप्रेशण. समझ गया की वह सब के सामने सहज रहने का कोशिश कर रही है. पर फिर भी उनको चलते हुए आते देखके मेरी छाती में एक अजीब सिरसिरानी अनुभुति होती है और मेरे जीन्स के नीचे पेनिस के अंदर खुन भरके फुल्ने लगता है. वह नज़्दीक आयी तो में भी नाना नानी के सामने उनको डायरेक्टली ज़ादा देख नहीं पा रहा था पर बीच बीच में नज़र डाल रहा था उनके उपर. वह नानाजी को चाय दिया और मेरे सामने वाला सेंटर टेबल पे मेरा कप रख दिया. अभी तक मेरी तरफ नज़र नहीं उठाया. नानीजी तभी बोल पडी तो माँ नज़र उठाके उनको देखि. नानीजी बोली
” अरे मंजू…हितेश के लिए नास्ता बनादे”
फिर नानी मुझे देख के बोली
” बेटा क्या खाओगे….पराठे बनाऊ क्या अभी?”
मैने कह्
” हा. कुछ भी चलेगा”
नानी जब मेरे से बात कर रही थि, माँ तभी भी नानी को ही देख रही थी. फिर नानी माँ को देखके बोली
” मेथी है न…तोः मेथी का पराठा बनादे”
मा सर हिलाके हाँ बोलके चल पड़ी और किचन की तरफ डोर से बाहर निकल गयी. और वह जाके किचन में दाखिल हो गयी. माँ ऐसे आयी और गयी जैसे की में वहां हु ही नही. मेरी उपस्थिति को पूरा इग्नोर करके चलि गयी. मुझे बहुत गुस्सा आया. फ़ोन पे बात करके हम कितना एक दूसरे के नज़्दीक आने लगे , और अभी एकदम दूर कर रही है !! मुझे उनका दिया हुआ चाय भी पीने में गुस्सा आ रहा था पर क्या करूँ!! अब यहाँ से उठके जा नहीं सकता तुरंत. नाना नानी के सामने फिर एक दूसरी परिस्थितियां क्रिएट हो जायगी. फिर सोचा की ठीक है, अब दूर रह रही है, लेकिन कब तक दूर रहके भागेगी मेरे से. मैं भी जिद्दी हु, उनको जलद ही जलद मेरी बाँहों में होना चहिये. यह सोचके गुस्सा थोड़ा ठण्डा होने लगा और में चाय का कप उठाके नानीजी को देखते देखते सिप मारने लगा. नानी जी यह कह रही है की शादी के दो दिन पहले हमे रिसोर्ट पहुच जाना चाहिए और फिर शादी के बाद नेक्स्ट डे हम सब वहां से निकल जाएंगे. और नानाजी कहते है की इतना दिन वहां रहके क्या करना है. शादी का एक दिन पहले जाना है. नेक्स्ट डे शादी का मुहूर्त सुबह में है. सो शादी जल्दी जल्दी ख़तम हो जायेगा और उसी दिन दोपहर में हम निकल जाएंगे. जब यह लेके उनलोगों के अंदर बहस चल रहा था तब में केवल साइलेंट दर्शक बनके उनदोनों को देख रहा था मैं नानी को देख रहा था तभी माँ किचन से बाहर आके उस पैसेज में आई. आके नाना नानी की नज़र छिपाके दिवार पे टेक लगाके खड़ी होकर मुझे देखने लगी. मैं उनकी तरफ नज़र न देके भी यह सब मेरे साइड विज़न से देख पारहा हुँ. मेरे अंदर तभी भी थोड़ा गुस्सा भटक रहा था इस लिए मन में उनको देखने की प्रबल इच्छा था फिर भी में बहुत टाइम से खुद को कण्ट्रोल करके नहीं देख रहा था वह वही खड़ी खड़ी मुझे देख रही थी और उनके साड़ी का आँचल खुद की हाथ की उँगलियाँ में लेके गोल गोल घुमा रही थी. मैं खुद से जूझ रहा था की में उनकी तरफ देखूँगा नही. पर कुछ टाइम बाद जैसे ही में एकबार सर मोड़ ने गया, तोह आँख से आँख मिल गई. मेरे से नज़र मिलते ही एक शर्म की मुस्कराहट उनके होठ पे खील गया. और नज़र झुका लिया. लेकिन गयी नही. वहाँ खड़ी रहि. फिर मुझे देखा. मेरा गुस्सा फिर बढ़ गया. अभी थोडे देर पहले ऐसे इग्नोर करके गयी, और अभी चुप छुपके मुझे देखके मुस्कुरा भी रही है. मैं भी इग्नोर किया और मुह मोड़के नज़र नानी की तरफ टिकाया. पर मेरे ऑफ विज़न में मुझे पता चल रहा है की वह तभी भी वहां खड़ी होक मुझे देख रही है. अब मेरे खुद के ऊपर गुस्सा आया. मैं क्यों देखा अभी उनको. मेरी इस हरकत से उनको पता चल गया की में ग़ुस्से में हु और वह जान बुझके मुझे चिड़ानेके लिए अभी भी वहां खड़ी है. बचपन से सबसे अच्छी तरीके वह मुझे जानती है. मेरा हर नज़र का, हर बातों का, हर चुप्पी का मतलब मेरे से ज़ादा उनको पता है. मैं अब उनसे पकड़ा गया. अगर नहीं देखता तो ठीक था लेकिन क्या करे, इस नज़र का क्या गलति, जालिम मन ही नहीं मानता उनको बिना देखे.
” तोह ऐसे ही बुकिंग ले लेते है?”
मैं जैसे ही हाँ बोलने जा रहा था तभी बीप बीप करके एसएमएस आया. मैं “हा” बोलके मोबाइल चेक करने गया और नानीजी नानाजी को पूछि की मुंबई जायेंगे तो एक साथ पर वहां से कौन कहाँ लौटेगा? मैं इन्बॉक्स में देखा माँ का एसएमएस था उन्होंने लिखा था
“मम्मी सही कह रही है. आप को देख के लगता है आप बिमार पड़ गए”
कीचन से बीच बीच में हल्का आवाज़ आरही है पराठा बनाने का. मेरे अंदर का गुस्सा धीरे धीरे पिघलने लगा और मुझे माँ को तंग करने का मन किया. मैंने रिप्लाई किया
” तोह ठीक है. मैं नानी को बता देता हु की क्यों और कैसे यह सब हुआ”
मैने सेंड बटन दबाके सुनने की कोशिश कर रहा था की माँ को एसएमएस रिसीव हुआ की नही. कोई मेसेज टोन सुनाइ नहीं दिया. शायद अभी तक गया नही. पर तुरंत मेरा मोबाइल बीप बीप करने लगा. माँ का एसएमएस उन्होंने लिखा था
” अरे नहीं नही….ऐसा मत कीजिये. आप इतने ग़ुस्से में क्यों हो?”
मैं समझ गया माँ फ़ोन साइलेंट मोड़े पे रखी है. नाना नानी को पता न चाले. मैं भी मेरे मोबाइल को साइलेंट मोड़े पे दाल दिया. मैं नाना नानी का बात सुनने की एक्टिंग करके क्यजुअली जैसे कुछ करते है मोबाइल में, वैसे ही मोबाइल में एसएमएस टाइप करते करते माँ से मेसेज के जरिये बात करने लगा. मैं लिखा
” तुम जो मेरे से इतना दूर भाग रही हो”
उनका रिप्लाई तुरंत आया
” दूर कहाँ !! मैं तो इधर ही हुँ. इतनी पास.”
मैं थोड़ा सोच के टाइप किया
” नही…. मेरी बीवी को मेरे और पास चहिये.”
कुछ टाइम रिप्लाई नहीं आया. पर मालूम है यह मेसेज उन्होंने पड़ लिया. मेरी उँगलियाँ मोबाइल की प्याड के उप्पर नाच रही है इस टेंशन में की वह क्या रिप्लाई देती है. पर कुछ भी रेस्पोंस नहीं आया. किचन से अभी भी आवाज़ आरहा है. अचानक मोब वाइब्रेट हुआ. देखा की उन्होंने रिप्लाई दिया.
” टाइम आने दीजिये, आप को आप की बीवी जितनी पास चाहिए मिल जाएगी”
मा ने इस तरह बात पहली बार छेड़ी है. आज तक हमेशा इस डोमेन को प्यार से अवाइड करती थी. पर आज उन्होंने उनके दिल का दरवाजा पूरा खोलके कह दिया की वह अब खुद को पूरी तरह से मेरी बीवी मानने लगी है.
येह मेसेज पड़ते ऐसा लगा की मेरे शरीर का पूरा खुन आके मेरे पेनिस में जमा हो रहा है. वह फ़टाक से एक दम खड़ा हो गया. मैं अपना एक पैर दूसरे पैर के ऊपर रखके नाना नानी के सामने मेरा ग्रोइन एरिया को दबा के कण्ट्रोल करने लगा. उनलोगों को देखते देखते बोलने का मन कर रहा था की आज ही शादी का मुहूर्त निकाल लीजिये और आज रात में ही हमारी सुहागरात हो जाए. अचानक मेरी यह भावनाएं टुटी नानाजी के सवाल से. वह मेरी तरफ देख के पुछ रहे है
” तुम क्या बोलते हो बेटा?”
मैं एक दम ब्लेंक जैसा बन गया. समझ नहीं पाया की वह क्या पुछ रहे है. क्यूँ की पिछले कुछ पलों से में उनलोगों की बात चित नहीं सुन रहा था मुझे मालूम नहीं अब किस बारे में बात हो रहा थी जो नानाजी ऐसा सवाल पुछै. मैं फिर भी सिचुएशन सम्भालनेके लिए बोला
” मैं क्या बोलूँ नानाजी. आप लोग जो अच्छा समझेंगे”
नाना को यह पता नहीं चला की में हवा में तीर छोड. वह सीरियसली बोले
” नहीं नही..ऐसी बात नही. अगर तुम को ज़ादा छुट्टी मिले तो तुम दोनों मुंबई से वापस यहाँ आसकते हो. और नहीं तो में और तुम्हारी नानी यहाँ आएंगे और तुम लोग एमपी निकल सकते हो. तुम तो वहां रहने का सब बंदोबस्त कर ही रहे होंगे. और हम भी कुछ दिन बाद एक बार वहां जाके देख के भी आएंगे.”
तब में संमझा की शादी के बाद मुंबई रिसोर्ट से कौन कहाँ जायेंगे यह लेके पूछा होंगा उन्होंने. मैं बोला
” हमारे साथ आप लोग भी तो चल सकते है एमपी में?”
तब नानाजी रिप्लाई देणे में थोड़ा हिचकिचा रहे थे तो नानीजी उनसे बात पकड़ के बोली
” क्या है की बेटा.. अब से तुम दोनों को ही ज़िन्दगी में एकसाथ चलना है. सो तुम दोनों जाके अपना नया घर बसाना सुरु करो.”
फिर नाना को देखके हस्ते हस्ते मेरे तरफ मूड के बोली
” और हम तो आएंगे ही. हमारे बेटी का जो घर है — नहीं आयेंगे क्या? तुम्हारे नाना बोल रहे थे की कुछ दिन बाद आराम से टाइम लेके एक बडे घर में शिफ़्ट होजाओ. बीच बीच में हम भी जाके कुछ दिन रहके आएंगे उधर”
इस बात पे मेरे अंदर एक हल्का सा कम्पन अनुभव किया. मैं अब समझ गया की यह लोग मुझे और माँ को एमपी भेज के क्यों खुद अहमदाबाद वापस आना चाहते है. शादी के बाद मुझे और माँ को एकांत में छोडना चाहते है. नए मैरिड कपल के बीच कबाब में हड्डी नहीं बनने चाहते है. माँ के साथ मेरी शादीशुदा लाइफ सही तरह से बन जाए, इस लिए हमे अकेले छोड़ रहे है. उनको मालूम है अब उस घर पे बेड रूम एक है. अगर वह लोग वहां जायेंगे तो रात को सोने में भी प्रॉब्लम होगा. और यह भी जानते है की में एक जवान लड़का और माँ भी १८ साल से पति के प्यार के बिना गुजारे. शादी के बाद हम दोनों का एक दूसरे के लिए चाहत तो ज़ादा रेहगा ही. यह सब कारन के लिए वह लोग और कुछ बहाना बनाके हम दोनों को अकेले छोडना चाहते है. मुझे अंदर ही अंदर उनलोगों के सामने थोडी शर्म आरही थी इस मामले में और ज़ादा कुछ चर्चा नहीं हुआ. तय हुआ की शादी के दिन दोपहर को नाना नानी अहमदाबाद आजायेंगे और माँ मेरे साथ एमपी चलेंगे. और में फ्रेश होने के लिए अपने रूम में चला गया. पर मेरा मन अब एकदम रुकना नहीं चाहता है. मैं न जाने क्यों आज माँ को अपनी बाँहों में पाने के लिए बहुत उतावला हो रहा हुँ. मैं अपने रूम में जाते जाते सोचने लगा अब कैसे मेरे पास, एकदम पास, मेरे छाती के साथ एकदम मिलाके मेरी बीवी को पाके , मेरे मन को शांत करु.
div class=”content”>ट्रैन में सो सो के माँ के बारे में सोच रहा था अगर हमारी तक़दीर हमें आज ज़िन्दगी के इस मोड़ पे नहीं लाती, तोह बहुत कुछ मालूम नहीं पडता. माँ को बचपन से माँ के रूप में ही देखते रहा हु. वह हमेशा एक अच्छी माँ थी और साथ ही साथ एक अच्छी बेटी. फादर के डेथ के टाइम वह केवल १८ साल की थी. तभी इस दुनिया में खाली एक बेटे को सहारा करके जीने की कसम खाई दोबारा और किसीको उनके दिल में बिठाने के बारे में कभी सोचा नही. एक आदर्श माँ बनके, एक आदर्ष बेटी बनके रह गयी अपनी खुद की सारी खुशीओ को विसर्जन देकर. मुझे बड़ा करने में और खुद की मम्मी पापा के साथ रहके उनके देखभाल करने के अंदर ही वह अपना ख़ुशी ढूँढ़ती थी. नानी कितना बार कह चुकी है की घर का खाना बनाने के लिए एक बाई रख लेते है. पर माँ हमेशा कहती है की जब वह है ही तो बाहर के लोगों से खाना पकाने की क्या जरूरत और वह भी चाहती थी घर के काम काज में जुटे रहे तो अपना टाइम भी बित जायेगा और शरीर भी एक्टिव और फिट रहेगा. वह दिन भर कुछ न कुछ करती है लेकिन देखके लगता नही. उनका पूरा शरीर, हाथ, पैर इतना सुन्दर है, लगता है जैसे की वह उनके पापाकी लाडली बेटी है और आराम से ज़िन्दगी बिताती है, यानि की फिल्में देख के, नावेल पढ़कर, दोस्तोँ के साथ घूम फिरके, ब्यूटी पारलर और स्पा में टाइम बिताके, खुद को प्रोपरली मेन्टेन करके रखी है. उनके स्किन अभी भी टीनएज गर्ल जैसी है, देख के पता नहीं चलता वह ३६ की है. उनके हाथों की, पैरों की उँगलियाँ और नेल्स कितना सही तरीके से खुद ही मेन्टेन किया है. देखके लगता नहीं इन्ही हाथों से दिन भर कितना काम करती है. उनका पूरा शरीर कितना नरम और मुलायम है, यह कल रात मुझे पता चल गया. शायद नेचर ने उनको यह गिफ्ट दे रखा है. शायद उनके नसीब में यह शादी लिखी हुई थि, इस लिए वह आज भी एक नौजवान कुंवारी लड़की जैसी दीखती है. पहले से ही उनके सब चीज़ें मुझे अच्छी लगता थी पसंद थी पर जब से शादी की बात चल रही है, तब से उनके वह सब चीज़ें मुझे और खुबसुरत, प्यारी और सेक्सी लगती है. पहले नानी साथ में मिलके घर का काम काज करती थी, पर नानी की उमर बढ़ रही है. अब माँ अकेले ही पूरा घर का सब कुछ सँभालते आरही है. आज भी दोनों टाइम माँ प्यार से सब के लिए खाना बनाती है. और उनके हाथ का खाना मुझे दुनिया का सबसे स्वादिस्ट लगता है. और नसीब के फेरे में मुझे अब पूरी ज़िन्दगी उनके हाथ का खाना खाने का सौभाग्य हो रहा है.
इतना सैक्रिफाइस किया. शायद इस लिए आज उनको फिर से एक नई ज़िन्दगी मिलने जा रही है. केवल तीन ही साल उनको अपने पति का प्यार मिला. कितनी ख्वाहिशे, कितने सारे सपने सब दिल में दफ़न कर करके रख दिये थे लेकिन में चाहता हु उनकी सारी ख्वाइशे, सारे अधुरे सपने पूरे करनेका समय आया है. अभी वह एक माँ नही, एक पत्नी बन चुकी है. अपने बेटे को जो अब उनका पति बनने जा रहा है, उसको अपना तन मन सब कुछ सोंप ना चाहती है. वह भी पति के प्यार को प्यासी है. ज़िन्दगी का हर पल पति के प्यार से गुज़ार ना चाहती है. अपनी हर खुशी, हर ग़म पति से शेयर करना चाहती है. मैंने मन में कसम खा लिया. एक पत्नी को अपनी पति से जो जो मिलना चाहिये, में सब कुछ उन्हें देना चाहता हु. वह हमेशा से एक घरेलु औरत है. अपने घर संसार की देखभाल करना, पति सेवा करना, बच्चों का ख़याल रखना–इन सब में ख़ुशी से जीना चाहती है. मैं भी हमेशा जिस बीवी का ख्वाब देखता था, वह ऐसे ही एक घरेलु खूबसूरत लड़की का था मैं भी खुद को अब उनको बीवी के रूप में पाके दुनिया का सबसे खुश नसीब इंसान समझता हु.
आज ट्रैन में डिनर के लिए टिफ़िन में वहि मेथी पराठा बनाके दिया माँ ने. कल शाम मेथी का पराठा और दही खाया था फिर टीवी देखते देखते माँ को एसएमएस किया था की ” मेरी सारी थकान तुम्हारे हाथ का बना हुआ मेथी पराठा खाके दूर हो गई.”
तब तोह वह किचन में डिनर बना रही थी. मोबाइल चेक नहीं पर पायी. लेकिन बाद में भी उसका कोई रिप्लाई दिया नहीं था पर अब टिफ़िन खोलके पता चला वह उस बात को पढ़ा और मन में रख दिया था
काल शाम को नानाजी से यहि बात हुआ की आज जाके शेरवानी और अंगूठी का मेज़रमेंट देना है. नज़दीकी कोई भी दुकान में नही. सब नानाजी को जानते है. सब का शक़ होगा क्यों और किस लिए यह ले रहा हु. इस लिए अहमदाबाद सिटी में जाके लेना पडा फिर डिनर के बाद नानाजी और कुछ बाते किये नही. क्यूँ की वह जानते थे में थका हुआ था फिर सुबह उठके निकल ना है उनके साथ. इस लिए जल्दी वह भी सोने चले गए और मुझे भी सोने के लिए बोल दीये. सब जल्दी डिनर करके अपने अपने रूम में चले गये.
