पति ने दोस्त को बुलाके पत्नी को प्रेग्नेट करवया 3

दोस्त की बीवी

आपने मेरी पिछली हिन्दी इरोटिक स्टोरी में पढ़ा था, कि एक सीक्रेट ग्रुप सेक्स के दौरान एक बड़ी गड़बड़ होते होते रह गयी। खैर उस घटना को कुछ समय बीत गया और इस बीच मेरी भैया भाभी से हमेशा की तरह बात होती रही और सब कुछ सामान्य चलता रहा।

मैंने भी उस अच्छे बुरे अनुभव को भूलाना शुरू कर दिया था और थोड़ा समय ओर बीत गया।

कुछ समय बाद, काफी उत्साह के साथ मैं अपना बेग पैक कर रही थी। आखिर कई बार मिन्नतें करने के बाद पति बाहर घूमने ले जाने को राजी हो गए थे। दो तीन दिनों के लिए हिल स्टेशन जाने का प्रोग्राम बन गया था।

पति काफी समय से दबाव डाल रहे थे कि हम मेरे भैया भाभी को साथ घूमने को लेकर जाए। पर मैं जानती थी इसका कारण क्या हैं, अगर आपने मेरी पिछली कहानी “पुराना प्यार चुदाई की बहार” पढ़ी हैं तो आपको भी पता ही होगा।

मैंने कोई बहाना मार कर हमेशा भैया भाभी के साथ ले जाने से मना कर दिया। इसी चक्कर में हमारे कार्यक्रम में थोड़ा विलंब हो रहा था।

इस प्रोग्राम में हमारे साथ उनके एक दोस्त राज अपनी पत्नी पायल के साथ आ रहे थे। हमने बच्चे को उसकी दादी के साथ छोड़ने का फैसला किया, क्यों की वो बहुत छोटा हैं और वहां बोर हो जाता और हमें पूरा लुत्फ़ नहीं उठाने देता, जैसा की पहले भी हो चूका था।

पहले राज और पायल हमारे ही शहर में रहते थे और काफी वक़्त साथ बिताया था, तो हम एक दूसरे के साथ काफी दोस्ताना और आरामदायक थे। वह लोग दूसरे शहर से सीधे हिल स्टेशन में मिलने वाले थे।

थकान न हो इसलिए हम सब लोग शाम के समय ही हिल स्टेशन पहुंचने का प्लान बना चुके थे, ताकि अगले दिन फ्रेश घूमने जा सके। हमने होटल में चेक इन किया तो पता चला राज पायल अभी तक नहीं पहुंचे हैं।

तक़रीबन 1 – 2 घंटे के बाद वह लोग पहुंच गए और हमारे रूम से कुछ कमरे दूर ही उनको रूम मिला। हम दोनों उनसे मिलने गए, बड़ी आत्मीयता से मिले और एक दूसरे की कुशलक्षेम पूछी।

हम लोग काफी समय बाद मिले थे। हालांकि सोशल मीडिया और फ़ोन के द्वारा कभी कभी बात हो जाती थी। इतने सालों के बाद भी राज अभी भी वैसा ही था छरहरा और हैंडसम। वो हमेशा ही आकर्षक व्यक्तित्व का धनी रहा हैं। पायल ने जरूर कुछ वजन बढ़ा लिया था पर अभी भी चेहरा उतना ही खूबसूरत था।

हम लोगो ने मिलकर अगले दिन के प्रोग्राम के बारे में विचार विमर्श करने की सोची। पायल सफर से थोड़ा थक चुकी थी और थोड़ा रेस्ट करना चाहती थी। तो पायल को वही छोड़कर बाकी हम लोग मेरे रूम में आ गए थे।

बड़े जोर शोर से अगले दिन का प्रोग्राम बनाने लग गए। हमने निर्णय लिया कि सुबह के समय फेमस जगह पर घूमेंगे और दोपहर के बाद किसी जंगल ट्रेल पर जायेंगे ताकि कुदरत की खूबसूरती देख सके और भीड़भाड़ से दूर थोड़ा सुकून का समय बिता सके।

थोड़े समय बाद रूम के फ़ोन की घंटी बजी। पति ने से फ़ोन उठाया और थोड़ी बात करने के बाद “अभी आता हूँ” बोल कर फ़ोन रख दिया।

उन्होंने कहा की रिसेप्शन से फ़ोन था, मैंने उनसे घूमने के लिए गाडी, कुछ जगह के ब्रॉउचर और मैप्स मांगे थे, वो आ गए हैं मैं लेकर आता हूँ और थोड़ी पूछताछ भी करके आऊंगा तब तक तुम लोग कल का प्रोग्राम बनाना जारी रखो।

अब कमरे में सिर्फ मैं और राज थे, हमने सोचा पति के आने तक इंतज़ार करते हैं, फिर ही अपना प्रोग्राम बनाना जारी करेंगे। जल्दी ही हम ज़िन्दगी से जुडी दूसरी बातों में मशगूल हो गए।

वो मेरे फिट शरीर की तारीफ़ करते हुए अपनी बीवी के बढे वजन की शिकायत कर रहा था। मैंने बताया कैसे मैं रेगुलर योगा और कसरत करती हूँ और फिटनेस का ध्यान रखती हूँ।

राज ने मेरी तारीफ़ की और कहा मुझे भी कुछ कसरत बताओ जो मैं पायल को करवा सकू। मैं बिस्तर से उतर कर नीचे जमीन पर आ गयी।

मैं राज को प्लैंक करके बताने लगी। इसमें शरीर को दोनों पाँव के पंजो और बाहों के बल रखना होता हैं। राज भी नीचे आकर मेरे सामने बैठ कर देखने लगा।

मैंने महसूस किया की राज कुछ विचलित हो रहा हैं, हालाँकि उसका मजाक और बातें जारी थे। मुझे कुछ शंका हुई, कही मैंने कुछ गलत तो नहीं किया।

मैंने बड़ी चालाकी से जल्दी से अपना चेहरा एक दो सेकंड के लिए नीचे करते हुए खुद को निहारा और वापिस ऊपर किया और अहसास हुआ की मेरे बटन-अप स्लीप शर्ट के ऊपर का हिस्सा खुला था जिससे मेरे दो गोल मम्मे झाँक रहे थे।

क्यों कि मैं सोने जाने वाली थी तो सफर से आने के बाद मैंने पजामा सेट पहनते वक़्त आदत के अनुसार अपनी ब्रा नहीं पहनी थी।

मैं झेप गयी, कही यह तो वो कारण नहीं जिससे वह विचलित हो रहा हैं।

मैंने यह दिखाने का प्रयास किया कि मुझे अभी पता नहीं चला हैं और उसी मुद्रा में रही। मैं यह छुपाने का काम कुछ चतुराई से करना चाहती थी।

अगर मैं अचानक से हटती तो उसको पता चल जाता कि मुझे पता हैं वो क्या देख रहा था और मेरे लिए ये शर्मनाक स्तिथि होती।

वो मुँह से गिनती बोलते हुए गिन रहा था कि मैं कितनी देर इस मुद्रा में रह सकती हूँ। बीच बीच में उसके चेहरे पे एक कुटिल मुस्कान आ जाती जैसे मुझे चिड़ा रहा हो की मैं छिपाने की चीज में सफल नहीं हो पायी।

हालांकि मैं काफी देर ओर इसी मुद्रा में रह सकती थी पर मेरी उस स्तिथि के कारण मैंने बीच में ही छोड़ दिया और सीधी बैठ गयी।

वो भी ये वाला आसन करने लगा और कुछ सेकंड में ही रुक गया और बोला ये तो पायल के लिए बहुत कठिन आसन होगा। इससे मिलता झूलता कोई दूसरा सरल वाला हो तो बताओ।

मुझे बड़ी ख़ुशी हुई कि मैं एक टीचर बन गयी हूँ फिटनेस के लिए और किसी की हेल्प कर रही हूँ। शुरुआत में मुझे भी प्लैंक कठिन लगता था, तब मैं उससे थोड़ा सरल सीधे हाथ वाला प्लैंक करती थी। तो मैंने उसको वो बताना शरू किया।

इसमें बाहों की बजाय हाथ सीधे रखते हुए हाथ और पाँव के पंजो को जमीन पर रखते हुए शरीर को उठाना होता हैं।

टीचर बनने की जल्दबाजी में, मैं भूल ही गयी कि मैं एक बार फिर उसी परिस्तिथि में थी। मेरा स्लीप शर्ट थोड़ा लटक कर नीचे हुआ और उस खुले हिस्से से मेरे दोनों गोल मम्मे आधे से ज्यादा दिखने लगे थे।

उसकी आँखें ओर भी बड़ी गोल हो गयी थी। तब मुझे पता चला कि मैंने क्या बेवकूफी कर दी हैं।

वो बोला “इस मुद्रा में तो पिछले वाले से भी ज्यादा देर रहोगी ना, क्यों कि ये ज्यादा सरल हैं”।

उसने गिनती गिनना शुरू कर दिया था। मैं जल्दी से सीधा होना चाहती थी पर उसको साबित भी करना था कि ये आसन ज्यादा सरल हैं तो हट भी नहीं पा रही थी।

वो उत्साह से मुझे इशारे कर रहा था कि मैं थोड़ी देर ओर इसी पोज़ में रहु और ज्यादा देर रहने का रिकॉर्ड बना दूँ। उसकी आँखें बता रही थी कि मुझे ऐसा रखने के पीछे उसका असली मकसद क्या था।

मुझे उसका तरसता हुआ चेहरा देख कर मजा भी आ रहा था। पर अब उसकी हंसी थोड़ी ग़ायब हो गयी। मुझे लगा मामला कुछ गंभीर हो चूका हैं तो तुरंत घुटनो के बल सीधा बैठ गयी। पर शायद आग तो लग चुकी थी।

वो मेरी चेहरे की तरफ घूर के देख रहा था और मैंने अपनी आँखें एक अपराधी की तरह नीची कर ली।

मेरी नजर उसके शॉर्टस पर गयी, उसमे उभार साफ़ नजर आ रहा था। क्या मेरे वो अंग देख कर वो इतना उत्तेजित हो गया था कि उसका लंड कड़क हो तैयार हो गया था।

मेरे पति भी कमरे में नहीं थे तो मुझे डर लगने लगा कही वो मुझपे हमला ना कर दे। दोनों दोस्तों में लड़ाई हो जायेगी और हमारी छुट्टिया बर्बाद हो जाएगी।

मैं इसी उधेड़बुन में थी कि उसने चुप्पी तोड़ते हुए पूछा ओर कोई सरल कसरत हो तो बताओ। मुझे लगा वो अब सामान्य हो रहा हैं। उसने पूछा कोई ऐसा आसन जिससे पायल की पेट की चर्बी कम हो जाये।

मुझे सबसे पहले चक्रासन की याद आयी और उसे बोल दिया। फिर लगा कही ये मुझे ही करने को ना बोल दे, वरना फिर से वही स्तिथि बन जाएगी।

मैंने उसको कहा कि ये शायद पायल के लिए थोड़ा कठिन होगा तो इसको छोड़ देते हैं।

शायद वो मेरी झिझक समझ गया था।

उसने कहा कि एक बार कर के बताओ तो पता चले कि कितना कठिन होगा।

मैंने उसको टालने की कोशिश कि पर मगर वो अड़ गया “अब आसन का नाम लिया हैं तो करके बता ही दो”।

अकेले कमरे में, मैं राज को उसकी बीवी के लिए दो कसरते बता चुकी थी और अनजाने में अपने अंगो का प्रदर्शन भी कर चुकी थी। वो अब मुझे तीसरा आसन चक्रासन कर के दिखाने को बोल रहा था।

मेरे पास कोई चारा नहीं था इससे बचने का। मैं उसको चक्रासन करके दिखाने लगी। इसमें भी शरीर को हाथ और पैर के पंजो के बल उठाना होता हैं पर शरीर की आकृति एक आधे चक्र की तरह वक्राकार होती हैं।

मैं नीचे लेट गयी और धीरे धीरे हाथ और पैर के पंजो के बल अपने शरीर को पेट से ऊपर उठा कर एक गुम्बद की आकृति बनाने लगी।

मैंने काले स्लीप शर्ट के साथ काले स्लीप शॉर्ट्स पहने थे। काले शॉर्ट्स में से मेरी चिकनी गोरी जाँघे चमक रही थी। चक्रासन में आते ही मेरी कमर से शर्ट थोड़ा खिसक कर हट गया, मेरी नाभी के साथ पतली गोरी कमर उसको दिख रही थी।

उसने मुझे बोला थोड़ी देर ऐसे ही रहना मैं चारो तरफ घूम कर देखता हूँ कि किस तरह से पोजीशन करना हैं।

वो मेरे पावों की तरफ गया। मेरे दोनों पावों के बीच एक फ़ीट की दुरी थी और आसन से कसाव के कारण मुझको पता था कि उसको मेरे शॉर्ट्स के बीच मेरी चुत की दरार और उसका उभार भी दिख रहा होगा।

उसने कहा कि “मैं हाथ लगा के देखता हूँ कि इस आसन से कहाँ कहाँ खिंचाव महसूस होता हैं”।

उसने अचानक मेरी जांघो पर हाथ रख दिया और मैं डर के मारे कांप उठी।

वो प्यार से मेरी जांघो पर हाथ फेरते हुए बोला “हां, यहाँ की मसल टाइट हुए हैं”।

अगले कुछ सेकण्ड्स वो मेरी जांघो पर हाथ फेरता रहा।

अब वो मेरे साइड में आया। मेरी पतली कमर उसको आकर्षित कर रही थी। उसने आते ही मेरी पेट पर हाथ रख दिया। उसके स्पर्श से मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो गए।

वो इत्मीनान से मेरे पेट पर हाथ फेरते हुए तारीफ़ करने लगा कि एब्स बने हैं। जब वो मेरे पेट और कमर पर हाथ फेर रहा था तो मेरे अंदर कुछ कुछ होने लगा।

अब वो मेरे चेहरे के पास आया और नीचे बैठ कर अपना चेहरा मेरे कंधे के करीब ले आया। मैं थोड़ा असहज महसूस करने लगी। मेरे छाती का हिस्सा ढलान में नीचे की तरफ था, जिससे मेरे मम्मे बिना ब्रा के बंधन के नीचे की तरफ आ शर्ट से बाहर निकलने को आतुर थे।

वो वही नीचे झुक कर बैठा रहा, मुझे पता था वो मेरे मम्मे झाँकने के लिए ही इतना नीचे हुआ हैं। मैंने फिर आसन ख़त्म किया और सीधा बैठ गयी। वो ओर आसन के बारे में पूछने लगा।

पर मैंने बहाना मार दिया कि गलत समय पर आसन करने से मेरे मसल थोड़े खिंच गए हैं और मैं उसको यकीन दिलाने के लिए मेरे कंधे और पाँव दबाने लगी।

उसको इसमें भी एक मौका नजर आया। आगे बढ़ते हुए उसने कहा “लाओ मैं मसाज कर देता हूँ, मैं अच्छी मसाज करता हूँ। पायल को मैं आये दिन मसाज देता हूँ और उसको बहुत रिलैक्स फील होता हैं”।

मैंने उसको मना किया कि अरे इसकी कोई जरुरत नहीं हैं, पर तब तक वो उठ कर मेरी पीठ के पीछे तक आ गया और मेरे कंधे को दबा कर मसाज देने लगा। सच में मेरी मसल्स को बहुत रिलैक्स फील हुआ। मेरी इच्छा हुई कि मैं सो जाऊ।

थोड़ी देर कंधे की मसाज के बाद वो बोला कि वो अब पाँव की मसाज करेगा।

मैंने उसको मना किया कि कोई मेरे पाँव दबाये मुझे अच्छा नहीं लगता, पर वो मानने वाला नहीं था। उसने मेरे पाँव का पंजा अपने हाथ में लिया और अपने हाथों के बीच रख दबाने लगा। मुझे बहुत अच्छा लगा। आज तक मुझे किसी ने मसाज नहीं दी थी।

मै अभी भी नीचे बैठी थी।

उसने कहा कि तुम आराम से बिस्तर पर लेट जाओ फिर मैं तुम्हारे पाँव की मसाज करता हूँ ज्यादा अच्छा लगेगा।

उसकी मसाज से मुझे भी नींद जैसा फील होने लगा था तो मैं उठ कर बिस्तर पर लेट गयी।

वो मेरे पांवो के पास आकर बैठ गया और मेरे पाँव उसकी गोदी में रखे और फिर मेरे पंजो की मसाज करने लगा।

मैं आँखें बंद कर उसका आनंद लेने लगी। मैं तो चाहती थी वो ऐसी मसाज करता ही रहे, पर मैंने उसको रोका कि अब मेरा पाँव सही हैं तो छोड़ दूँ।

उसने मेरे पंजे से हाथ हटा ऊपर करते हुए मेरे पाँव की मसल्स को दबा मसाज करने लगा। मैंने अपना पाँव खींच कर रोकने की कोशिश की, कि मुझे जरुरत नहीं पर वो फिर टांग अपनी तरफ खींच बोला “अरे तुम्हे अच्छा लगेगा करने दो”।

वो मेरे पैरो की मसल्स को दबा रहा था और सच पूछो तो मुझ बड़ा सुकून मिल रहा था।

शायद मेरे शरीर को छूने से उसको भी आनंद मिल रहा था तो हम दोनों के लिए ही फायदा था।

मैंने उससे पूछा, पायल के तो मजे हैं, उसको फ्री में मसाज मिलती हैं।

वो बोला “ऐसा नहीं हैं, इसके बदले वो भी मुझे कभी कभार मसाज देती हैं, तो बराबर हो जाता हैं”।

हालांकि मुझे उसकी मसाज से मजा आ रहा था, परंतु थोड़ी देर मसाज करने के बाद मैंने उसको रोका।

उसने मेरे पाँव छोड़े और बोला “तुमने चक्रासन किया तो तुम्हारे कमर में खिंचाव आ गया होगा, लाओ मैं कमर की भी मालिश कर देता हूँ”। ऐसा कहते हुए उसने मेरे कमर की तरफ हाथ बढ़ाया।

मैं तुरंत उठ बैठी और उसको रोका कि मैं तो ये आसन आये दिन करती रहती हूँ, मेरी कमर में कोई खिंचाव नहीं हैं।

उस पर उसने तर्क दिया कि “खिंचाव ना भी हो तो भी मालिश करवा सकते हैं, इससे आराम मिलता हैं। तुम घबराओ मत, मैं पायल की कमर की मालिश करता रहता हूँ, घर के कामों के बाद मेरी मालिश से उसको बहुत अच्छा लगता हैं। तुम भी करवा देखो मेरी गारंटी हैं बहुत अच्छा लगेगा”।

उसने इतने प्यार से बोला कि मैं उसको कैसे रोकती।

मैंने उसको बोला ठीक हैं और मैं उल्टा लेट गयी।

मैंने अपने दोनों हाथ अपने सर के नीचे रख कर बिस्तर के दूसरी तरफ देखने लगी जहां ड्रेसिंग टेबल था। मैं ड्रेसिंग टेबल के आईने में देख रही थी। मेरे शॉर्ट्स के अंदर के गोल नितम्बो का उभार बहुत सेक्सी लग रहा था।

आईने में साफ़ दिख रहा था कि राज मेरे नितम्बो को ही घूर रहा था। इसको इतना भी ध्यान नहीं था कि आईने के माध्यम से मैं देख रही हूँ।

मैंने उसका ध्यान तोड़ते हुए पूछा कि वह किसका इंतज़ार कर रहा हैं। उसका ध्यान टुटा कि उसको कमर की मालिश करनी हैं।

उसने मुझसे कहा कि वो शॉर्ट्स को कमर से थोड़ा ऊपर उठाएगा। उसकी जो मनोस्तिथि थी, उसमे मैं नहीं चाहती थी कि वो मेरी स्किन जरा सी भी देखे।

वैसे भी थोड़ी देर पहले मेरे पेट पर उसका हाथ लगते ही जैसे मुझे करंट सा लगा था और रोंगटे खड़े हो गए थे.

मैंने उसको कहा कि शर्ट के ऊपर से ही मसाज कर लो।

वो बोला “नहीं, मालिश करनी हैं तो कपड़ो के ऊपर नहीं कर सकते है”।

मैंने कहा कि मेरे पति आ जायेंगे तो उन्हें ये देख अच्छा नहीं लगेगा, रहने देते हैं।

उसने बताया कि मेरे पति रूम की चाबी साथ लेकर नहीं गए हैं तो जब तक हम अंदर से नहीं खोलेंगे वो नहीं आएंगे।

मुझे उसको इजाजत देनी ही पड़ी। उसने मेरा स्लीप शर्ट ऊपर करने की कोशिश की पर शर्ट मेरे शरीर के नीचे दबा होने से वो उठा नहीं पाया।

मैंने कहा “रुको, मैं थोड़ा ऊपर हट कर शर्ट ऊपर कर देती हूँ” । मैंने अब एक करवट ली और शर्ट थोड़ा ऊपर खिसकाने लगी तो उसने रोका।

वो बोला “एक काम करो, शर्ट के नीचे के एक आध बटन खोल दो, इससे शर्ट ऊपर करने में आसानी होगी”।

मुझे लगा शर्ट तो वैसे भी ऊपर हो ही जाता पर एक दो बटन खोलने में भी कोई हर्ज नहीं था, वैसे भी बटन वाला हिस्सा मेरे शरीर के नीचे दबने वाला था।

मेरे स्लीप शर्ट में सिर्फ चार बटन थे, एक वक्षो के ठीक ऊपर बीच मे, दूसरा वक्षो के ठीक नीचे, एक नाभी के ठीक ऊपर और एक नाभी के एक दो इंच ऊपर। मैंने नाभी के वाला बटन खोल दिया और उसका पूछा “अब ठीक हैं?”

उसने कहा, एक ओर बटन खोल दो ताकि शर्ट फिसल फिसल कर वापिस नीचे ना आये।

मैंने कहना मानते हुए नाभी से ऊपर वाला बटन भी खोल दिया और उस हिस्से के शर्ट के दो पल्लो को दोनों तरफ फैलाते हुए फिर उलटा लेट गयी।

उसने अब निकले हुए शर्ट के दोनों पल्लो को पकड़ा और कमर से पीठ की तरफ ऊपर की ओर फोल्ड करने लगा।

मैंने आईने में देखा मेरी पतली, नाजुक गौरी कमर दिखने लगी थी।

वो कुछ क्षणों के लिए रुक गया और मेरी नंगी कमर को निहारने लगा।

मैंने भी सोचा किस बन्दर के हाथ में तलवार पकड़ा दी मैंने। देखने से ही इसकी हालत ख़राब हो रही हैं तो छूने पर इसका क्या होगा।

अब उसने अपने दोनों हाथ मेरी कमर के दोनों तरफ रखे, जिससे मेरी पतली कमर उसके हाथों में समा गयी और उसके इस जादुई स्पर्श से मुझे एक गुदगुदी सी हुई और पुरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।

मैंने सोचा मेरी ये हालत हैं तो उसका क्या हुआ होगा, उसको भी करंट तो जरूर लगा होगा।

अब वो कभी कमर के साइड्स को पकड़ के दबाता तो कभी मेरी कमर के बीचो बीच मालिश करता। उसकी मालिश से मुझे भी मजा आने लगा। बहुत रिलैक्सिंग लग रहा था।

उसने मुझको पूछा कि मुझे कैसा लग रहा हैं।

मैंने कहा कि बहुत अच्छा लग रहा हैं, ऐसा लग रहा हैं कि सो जाऊ।

उसने पूछा “तुम्हारे पास कोई तेल हो तो दे दो, उससे मालिश का ज्यादा प्रभाव पड़ेगा”।

मैंने उसको टेबल की तरफ इशारा किया जहा तेल की छोटी सी शीशी थी। उसने फिर थोड़ी देर तक तेल से मेरी कमर की पूरी मालिश कर दी।

उसने आगे प्रस्ताव रखा कि “तुम कहो तो, तुम्हारे कूल्हों के साइड की हड्डी की भी मालिश कर दूँ। वहां पर जॉइंट हैं तो मसाज से बहुत अच्छा लगेगा”।

अब तक उसने जितनी भी मसाज की थी वो सब बहुत अच्छी थी, तो मुझे यकीन था ये भी अच्छा ही होगा।

मैंने कहा ठीक हैं कर दो।

उसने कहा कि शॉर्ट्स को कूल्हों की हड्डी के नीचे तक थोड़ा खींचना पड़ेगा। मैं घबराई कही ये पूरा ही न खोल दे। मैंने उसको मना बोल दिया कि कूल्हों की मसाज की जरुरत नहीं हैं अभी।

उसने आग्रह किया कि “अरे, कुछ नहीं होगा। तुम एक बहुत अच्छी मसाज मिस कर दोगी, करवा लो।”

वो मेरे शॉर्ट्स के ऊपर कूल्हों की हड्डी पर हाथ रखते हुए बोला “चलो, थोड़ा सा ही तो खिसकाना हैं, यहाँ तक”।

उसके आग्रह के आगे मैंने फिर हार मान ली और उसको बोल दिया ठीक हैं। उसने अपनी दोनों हाथों की दो दो उंगलिया मेरे शॉर्ट्स के साइड में हुक की तरह डाली और नीचे खींचने लगा।

मैंने डर के मारे जान बुझ कर वहा से अपने शरीर को बिस्तर पर दबा दिया ताकि शॉर्ट्स ज्यादा नीचे ना खिसके। इस चक्कर में शॉर्ट्स सिर्फ पीछे की तरफ से थोड़ा खिसका और उसके छोड़ते ही एलास्टिक की वजह से फिर पुरानी जगह पर आ गया।

उसने कहा कि शॉर्ट्स को चारो तरफ से एक साथ नीचे खिसकाना होगा।

उसने इस बार शॉर्ट्स को ओर भी नीचे से पकड़ा ओर अपनी उंगलिया शॉर्ट्स में डाल नीचे खिसकाना शुरू किया, मैंने अभी भी प्रेशर पूरा रिलीज़ नहीं किया था और उसने भी ज्यादा जोर नहीं लगाया तो वो हिला भी नहीं पाया।

ये देख मैंने शरीर को उस भाग से थोड़ा ऊपर उठाया और उसी वक्त उसने भी पिछली बार से ज्यादा जोर लगाया। नतीजा ये निकला कि उसने शॉर्ट्स कुछ ज्यादा ही नीचे खींच दिया और मेरे लगभग आधे नितंब से शॉर्ट्स हट गया।

मैं आईने में देख रही थी और इस हास्यादपद स्तिथि को देख कर हम दोनों की हंसी छूट गयी।

खैर उसने जल्दी से कूल्हों की हड्डी के नीचे तक फिर शॉर्ट्स को ऊपर खींच लिया।

मैंने आईने में देखा, मेरी कमर से लेकर कूल्हों तक का बदन पीछे से नंगा था। वो दृश्य बहुत ही उत्तेजक था। अब मुझे भी थोड़ा डर लगने लगा। कही मैं कोई गलती तो नहीं कर रही।

जल्द ही उसने अपने एक एक हाथ से मेरी दोनों कूल्हों की हड्डी को साइड से दबोचा और दबाने लगा। एक हलके मीठे दर्द के साथ बड़ी राहत सी मिली। थोड़े कपडे नीचे हटाने पड़े पर ये मसाज बहुत ही आनंददायक थी।

अगले कुछ मिनट तक वो ऐसे ही कूल्हे की मसाज करता रहा और बीच बीच में, मैं सुकून भरी आ ह आ ह करने लगी। उसका ओर उत्साहवर्धन हुआ और अच्छे से मसाज करता रहा।

अब वो वापिस कमर के मध्य भाग की मालिश करने लगा। हाथ फेरते हुए वो मेरे नितंब तक ले आया और शॉर्ट्स के थोड़ा अंदर भी उंगलिया मलने लगा।

वो अब अपने हाथ के बीच वाली दो उंगलियों से, वो हड्डी दबाने लगा जहा नितंबो की दरार शुरू होती हैं। उसकी उंगलिया लगभग मेरी दरार को छू रही थी।

हड्डी दबते ही हलके मीठे दर्द के साथ एक मजेदार झौंका लगा और मैंने एक गहरी आह भरी।

वह अब वही हड्डी के ऊपर दरार में ऊँगली दबाए अपना हाथ हिलाने लगा, जिसके कम्पन से एक मसाज सी महसूस हुई और मैं कहने लगी आ हा हा मजा आ गया।

थोड़ी देर इसी तरह वह मुझे उस एरिया में मसाज करता रहा और फिर वापिस कमर के मध्य भाग पर आ गया।

उसने कहा की अब वो पीठ की मसाज करेगा।

अब उसने कमर पर दोनों हाथ रख शुरू किया और हाथ रगड़ते हुए मेरे शर्ट के अंदर होते हुए पीठ तक चला गया, और ऊपर ले जाकर मेरे कंधे की हड्डी पकड़ कर दबाने लगा।

कंधे दबते ही मुझे फिर आराम मिला। उसने अब हाथ फिर खींचते हुए शर्ट के बाहर निकाल कमर तक आ गया। उसने एक बार फिर वही रिपीट किया और कंधे दबते ही मैं आ हा हा की आवाज करने लगी।

कमर पर वापिस हाथ लाने के बाद वो बोला “शर्ट के अंदर हाथ जाने से शर्ट बहुत टाइट हो जाता हैं जिससे हाथ अंदर बाहर करने में परेशानी हो रही हैं। हाथ आसानी से आये जाए इसके लिए एक काम करो, बाकी बचे बटन भी खोल ही दो। मसाज हो रही हैं तो अच्छे से हो जाए”।

इतनी अच्छी मसाज के बाद मैं मना ही नहीं कर पायी। मुझे पता था मेरे मम्मे आगे की ओर से वैसे भी नीचे दबे रहने से उसे नहीं दिखेंगे। मैंने अपना एक हाथ सर के नीचे से हटाया और अपने सीने पर ले जाकर बाकी के दोनों बटन भी खोल दिए।

मैंने अपना शरीर थोड़ा ऊपर उठाया और एक एक करके शर्ट के खुले दोनों पल्लो को शरीर के आगे से सावधानी से हटा दिया।

मेरा शर्ट अब आगे से पूरा खुल चूका था और मेरे मम्मे अब बिना कपड़ो के बिस्तर से नीचे चिपके थे। शर्ट अब काफी ढीला हो चूका था तो राज ने मसाज करना शुरू किया।

कमर से होते हुए वो अपना हाथ आराम से पीठ पर ला पा रहा था और कंधे दबा रहा था। उसके हाथ अब आराम से मेरी पीठ पर घूम पा रहे थे।

अब वो मेरे कंधे से लेकर कूल्हों तक की मसाज कर रहा था और मैं आराम से रिलैक्स अंदाज़ में दोनों हाथ सर के नीचे रख लेटी थी।

उसने मेरा शर्ट पीछे से काफी ऊपर उठा दिया था, मैंने आईने में देखा मेरे हाथ ऊपर होने से मेरे मम्मे नीचे बिस्तर से दबकर साइड से थोड़े दिख रहे हैं। मैं बड़े आराम से लेटी थी तो हाथ नीचे कर कुछ ढकने का मन भी नहीं हो रहा था।

जल्द ही मसाज करते करते उसने मेरी कमर के साइड से होते हुए अपना हाथ ऊपर लाते हुए मेरी कांख के नीचे तक लाया, जिससे उसकी उंगलिया मेरे फुले हुए मम्मे जो बाहर झांक रहे थे उनसे छू गयी।

मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, पर वो अब उसी हिस्से में ज्यादा मसाज करने लगा और इस बहाने मेरे मम्मो को छू रहा था।

उसके इरादे भांपते ही मैंने कहा “बस, अब हो गयी सारी बॉडी मसाज” । उसने अपने हाथ मेरे शरीर से हटा लिए।

राज बोला, “कोई बात नहीं, पीठ की मसाज वैसे भी ख़त्म होने ही वाली थी। मैं अब पेट की मालिश शुरू करने वाला था”।

मैंने आश्चर्य से पूछा “पेट की मालिश ! मुझे थोड़े ही कोई पेट दर्द हैं “.

उसने कहा “अरे, मेरी इतनी बात मानी, अब बस पेट ही बचा हैं, उसको क्यों छोड़ दे। मेरा यकीन मानो ये आखिरी हैं। चलो अब सीधी लेट जाओ “।

उसने जब तक मेरे मम्मे के साइड में हाथ नहीं लगाया था, तब तक वैसे भी सब सही चल रहा था, तो मैंने सोचा चलो अब एक आखिरी मालिश बची हैं तो मौका दे देते हैं।

क्यों कि मेरा शर्ट आगे से पूरा खुला था तो मैंने अपने शर्ट के दोनों पल्लो को पकड़ा और अपने शरीर के नीचे घुसाना शुरू किया, ताकि फिर से बटन लगा सकू।

उसने मुझे सँभलने का मौका भी नहीं दिया और मेरी कूल्हे की हड्डी से पकड़ मुझे करवट दे सीधा करने लगा। मैंने जल्दी से अपने दोनों हाथों से शर्ट के पल्लो को अपने सीने से चिपका अपना शरीर ढक लिया।

मैंने उससे शिकायत की कि “मुझे शर्ट के बटन तो लगाने देते”।

वो बोला “पेट की मालिश करनी हैं तो वैसे भी बटन नीचे से खुले ही रखने होंगे”।

मैं अब दोनों हाथों से अपना शर्ट पकडे सीने से लगाए लेटी थी। उसने शीशी से थोड़ा तेल मेरी नाभी पर डाल दिया। मुझे ठंडा ठंडा अहसास हुआ। उसने अब शीशी साइड में रखी और अपना एक हाथ मेरी नाभी पर रख दिया।

एक बार फिर उसके हाथ मेरे पेट पर छूते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए। वो अब अपने हाथ की उंगलिया गोल गोल नाभी के चारो तरफ घुमाने लगा।

धीरे धीरे वो घेरा बड़ा करता रहा। मेरा शार्ट अभी भी कुल्हो की हड्डी के नीचे खिसका था, तो उसको हाथ फेरने के लिए नाभी के नीचे भी काफी जगह मिली थी। मेरा शार्ट मेरी नाभी से चार इंच या शायद उससे भी थोड़ा ज्यादा नीचे था।

मुझे शर्म भी आ रही थी और उसके हाथों की मेरे पेट पर ऊपर नीचे होती हलचल से मीठी गुदगुदी भी हो रही थी।

मेरा पेट रह रह कर फड़क रहा था और ऊपर नीचे कूदते हुए धक् धक् कर रहा था। मेरी साँसे और गहरी होती जा रही थी। इस मधुर अहसास से मैं थोड़ा बेचैन सा होने लगी।

मैंने अपना एक हाथ फ्री किया और अपने सर पर रख दिया ताकि शायद इससे मेरी भावनाये थोड़ी काबू हो जाए। दूसरे हाथ से मैंने अब अपने शर्ट के दोनों पल्ले पकड़ रखे थे।

उसकी उंगलियों की अठखेलियों से मेरा शरीर ऊपर से नीचे थोड़ा थोड़ा हिल रहा था। मेरे पाँव थोड़ा बहुत ऊपर नीचे हो बिस्तर को रगड़ रहे थे। मैंने महसूस किया मैं तड़प रही हूँ।

उस वक्त अगर वो अपना हाथ मेरे शॉर्ट्स में डाल देता, तो भी शायद मैं उसको नहीं रोक पाती। मगर मेरी बदनसीबी या खुशनसीबी उसने ऐसा कुछ नहीं किया।

वो मेरी पतली कमर और तड़पते पेट पर हाथ फेराये जा रहा था। वो अब हाथ फेराता फेराता नाभी के ऊपर की तरफ काफी आगे बढ़ आया और मेरे मम्मो के उभार की तलहटी तक आ गया।

आधा इंच भी उसका हाथ आगे होता तो उसकी ऊँगली मेरे उभार को छू जाती।

अब मामला मेरी बर्दाश्त के बाहर होता जा रहा था। मैंने पकडे हुए शर्ट को छोड़ अपने दूसरे हाथ को भी सर पर रख दिया। मेरे शर्ट के पल्ले छूटते ही छाती पर से एक दूसरे से दूर हो गये।

शर्ट के दोनों पल्लो के बीच की बनी दरार से मेरे मम्मो के दोनों उभारो के बीच की घाटी दिखने लगी थी। मैं चाहते हुए भी उनको छिपाने के लिए अपनी सहायता नहीं कर पा रही थी।

मैंने देखा उसकी नजरे अब मेरे सीने पर ही थी और शर्ट के बीच की बनी दरार से वो मेरे अंग को ही निहार रहा था। उसके मसाज करते हुए हाथ अब धीरे धीरे पेट से चलते हुए मेरे मम्मो की तरफ बढ़ने लगे।

मेरे मन के किसी कोने से कोई एक आवाज आयी और मेरी नींद जैसे टूटी और मैंने जल्दी अपना हाथ फिर नीचे करते हुए अपने शर्ट के पल्ले फिर पकड़ के बंद कर दिए।

उसका हाथ जो धीरे धीरे मेरे मम्मो की तरफ बढ़ रहा था वो रुक कर फिर नीचे की तरफ मुड़ गया।

मैंने उसको बोला “अब मुझे मेरे पेट की ओर मालिश नहीं करवानी”।

उसने हाथ रोक दिए और बोला “अभी पूरा नहीं हुआ हैं, क्या हुआ तुम्हे नींद आ रही हैं”।

मैंने बहाना बनाया “नहीं, ऐसे ही गुदगुदी हो रही हैं”।

उसने बोला “सिर्फ पेट पर गुदगुदी हो रही हैं ! तो ठीक हैं मैं कंधो की मालिश कर देता हूँ, पीठ पर मसाज के समय तुमने बीच में रोक दिया था, वहा वैसे भी अधूरा छूट गया था”।

मैं अब ओर क्या बहाना बनाती। वैसे भी पेट के मुकाबले कंधे पर मसाज ज्यादा सुरक्षित थी। मैंने आँखों के इशारे से हां बोला।

राज के जादुई हाथों, मेरी पेट की मालिश से मैं तड़पने के बाद एक बार तो गिव अप कर चुकी थी। मगर किसी तरह मैंने खुद को संभाला। पर वो फिर मेरी पीठ की मसाज करना चाहता था।

मैं एक बार फिर पलट कर उलटा लेट गयी और लेटते लेटते एक बार फिर अपने शर्ट के दोनों पल्लो को आगे से खोल कर साइड में फैला दिया।

मेरे मम्मे एक बार फिर से बिना कपड़ो के बिस्तर से चिपके थे। उसने मेरे दोनों हाथ नीचे शरीर के सहारे सीधे कर दिए।

उसने अब मेरी शर्ट की कॉलर पकड़ी और नीचे खिसका कर कंधो से निकाल कर थोड़ी नीचे कर दी। उसने अब मेरे दोनों कंधो को पकड़ कर दबाया। कंधे दबते ही बहुत रिलैक्स फील हुआ।

वो अब कंधो से लेकर गर्दन तक दबा दबा कर अच्छे से मालिश कर रहा था। उस सुकून भरी मसाज से मैं मदहोश होने लगी और आधी नींद में लेटी थी। मेरी आँखें बंद थी और थोड़ी थोड़ी देर में आंखें खोल कर ड्रेसिंग टेबल के आईने में देख रही थी।

थोड़ी देर में उसने मेरा शर्ट कंधो से थोड़ा ओर नीचे खिसका दिया, मैंने आईने में देखा मेरी पीठ का थोड़ा ओर हिस्सा नंगा हो बाहर दिखने लगा था। मैंने फिर आँखें बंद कर ली और आनंद लेने लगी।

अब उसने शर्ट को ओर नीचे खिसका कर कोहनियो से नीचे ले आया। मैंने फिर आँखें खोल कर आईने में देखा मेरी लगभग पूरी पीठ नंगी हो चुकी थी।

मुझे अब कोई चिंता नहीं थी। मदहोशी में मैंने फिर आँखें बंद कर ली। थोड़ी देर वो ऐसे ही पीठ और कंधे की मसाज करता रहा।

अब उसने शर्ट पकड़ कर ओर नीचे खींचा और पूरा हाथों से बाहर निकाल लिया। मैं अब टॉपलेस हो चुकी थी। मेरी आँखें खुली थी पर किसी लाचारी में हिल भी न पायी।

उसने मुझसे पूछा वो मेरे ऊपर बैठ कर सीधा मालिश करना चाहता हैं। मैंने बस पलक भर झपका दी जैसे नींद में थी।

वो अब अपने घुटनो के बल बैठा और पैरो को मेरे शरीर के दोनों तरफ फैलाकर मेरी जांघो के ऊपर बैठ गया। आगे झुककर वो मेरी पूरी नंगी पीठ की मालिश करने लगा। मैं अपनी गांड पर उसका कड़क हो चूका लंड चुभता हुआ महसूस कर पा रही थी।

जैसे ही वो आगे पीछे हो मालिश करने लगा उसका लंड कपड़ो के अंदर से ही मेरी गांड की दरार में जाने लगा।

उसको भी मेरी गांड को कपड़ो सहित चोदने में जैसे मजा आ रहा था। मैं आँखें बंद किये इन सब का आनंद लिए जा रही थी।

अब उसको यकीन हो गया था कि मैंने हथियार डाल दिए हैं। मैं अब कोई ओर विरोध नहीं करूंगी, ये सोचकर उसने अगला कदम उठाया। उसने मुझे मालिश देना बंद किया और मेरे पीठ, गर्दन और कंधो पर चूमने लगा।

मेरे तन बदन में आग लग गयी। मैं सी सी करते हुए आवाजे निकालने लगी। वो चूमते चूमते कंधो से कमर तक आ गया। मजे के मारे मेरी तो पेन्टी ही गीली हो गयी।

अब वो सीधा बैठ गया और मेरी जांघो से उतर कर मेरे घुटनो पर आकर बैठ गया। उसने अपनी उंगलिया एक बार फिर मेरे शॉर्ट्स के दोनों सिरों में हुक की तरह डाली और धीरे धीरे एक एक सेंटीमीटर शॉर्ट्स को पेन्टी सहित नीचे खिसकाने लगा।

मैं आईने में देख रही थी, धीरे धीरे काले रंग के शॉर्ट्स के खिसकने के साथ ही उसका स्थान मेरी गोरी गोरी गांड के उभार ले रहे थे।

जल्द ही मेरी गांड के उभार पुरे दिखने लगे थे। राज अब भी मेरे शॉर्ट्स को नीचे खिसकाए जा रहा था, वो अब जांघो से निकलते हुए घुटनो तक आ गए।

इस मोड़ पर राज मेरे ऊपर से उतरा और शॉर्ट्स को पेन्टी सहित मेरे पैरो से पूरा बाहर निकाल दिया।

मैं अपने आप को नंगी होते हुए आईने में देखेते ही रह गयी। खुद को पूरी नंगी देख मैं शरमा गयी।

राज अब अपना एक हाथ नीचे मेरे पावो से रगड़ना शुरू करते हुए जाँघों से होते हुए मेरी गांड की उभारो पर चढ़ाते हुए कमर के उतार पर लाते हुए पीठ से गर्दन तक ले आया। इस पुरे सफर के दौरान उसका हाथ जहा जहा से गुजरा मेरे शरीर में जैसे आग लगा दी।

उसका हाथ एक बार फिर उसी रास्ते से वापस लौटा, पर इस बार मेरी गांड पर आकर रुक गया और गांड के उभार से अभिभूत होकर वही हाथ फेरने लगा।

उसकी एक ऊँगली गांड की दरारों में ऊपर नीचे हो रही थी। धीरे धीरे उसका हाथ नीचे जाता रहा और मेरी गीली चुत को छू गया।

इस सब में मैं ये तो भूल ही गयी थी कि पति अब तक नहीं लोटे थे। मैं उनके दोस्त के साथ पूरी नंगी हो लेटी थी। मुझे ऐसे देख तो वो पागल ही हो जायेंगे।

इतनी गरमा गरम मसाज के बाद वो मुझे चुदाई के लिए मजबूर कर चूका था। राज ने अब मुझे छूना बंद दिया और बिस्तर से उतर गया। मैंने आईने में देखा वो अपने कपडे निकाल रहा था। टीशर्ट निकलने के बाद उसने अपना शार्ट निकाला।

उसके अंडरवियर के अंदर से उसका शैतान बाहर आने को आतुर हो रहा था, जो की मेरी चुत का साथी बनने का सपना देख रहा था, और जो अब शायद जल्द ही पूरा होने वाला था।

उसने जैसे ही अपनी अंडरवियर निकाला उसका लंड उछलता हुआ बाहर आ आया और स्प्रिंग की तरह ऊपर नीचे डोलने लगा।

राज का लंड काफी लम्बा था, वो खुद भी छह फ़ीट जितंना लम्बा था तो उसका लंड कम से कम छह इंच लम्बा तो रहा होगा।

काफी समय पहले ही मुझे अहसास हो गया कि आज उसके इरादे मुझे चोदने के हैं, और वो मेरे साथ कुछ तो करके ही रहेगा।

आसन से होते हुए मसाज और अब उसने मुझे अपने जाल में फंसा ही लिया था। उसने मुझे मसाज देकर इतना मदमस्त कर दिया था कि मुझे उसके सामने झुकना ही पड़ा।

अब उस कमरे में दो नंगे बदन, एक नंगा लड़का अपने दोस्त की नंगी बीवी के पास था। धमाका होना तय था।

वो बिस्तर पर आया और मुझ पर चढ़ कर लेट गया। दो गरम बदन एक दूसरे से मिले फिर भी दोनों को ठंडक मिली।

मैं आईने में देख पा रही थी कि दो नंगे बदन एक दूसरे पर चिपके पड़े थे।

उसका गरमा गरम कड़क लंड मैं अपनी गांड पर महसूस कर पा रही थी। उसने अपने लंड को पकड़ा और मेरी चूत में घुसाने लगा।

मेरी गीली चूत का छेद ढूंढने में उसको ज्यादा समय नहीं लगा।

उसके लंड की टोपी मेरी चूत के छेद में जा चुकी था। उसने अपना हाथ अपने लंड से हटा दिया और अपने दोनों हाथ मेरे हाथो पर रख पकड़ लिये।

उसने अब हलके हलके धक्के मारते हुए अपने लंड की टोपी को अंदर बाहर करते रहा, और फिर अचानक एक जोर के झटके से अपना लम्बा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। इस जोर के झटके से मेरे मुँह से आउच अह्ह्हह्ह्ह्ह निकली गयी।

उसका लंड भी मेरी चूत के लिए इतने मिनटों से तड़प रहा था, तो उसको भी एक सुकून मिला और लंड के अंदर जाते ही उसकी भी भावनाये बाहर निकली और एक लम्बी आहह्ह्ह्हह निकली।

अब वो अपना लंबा लंड मेरी चुत में झटके मारते हुए अंदर बाहर करने लगा, हर झटके के साथ मैं उइ माँ आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सीईईईइ यही पे, हां यही पे की रट लगाने लगी।

हम दोनों ही पिछले कुछ मिनटों में इतना तड़पे थे, कि प्यास मिटाने लिए अधीर हो रहे थे।

अगले कुछ मिनटों तक वो मुझे ऐसे ही जोर जोर से चोदता रहा। थोड़े समय बाद ही मेरा थोड़ा थोड़ा पानी छूटने लगा और उसमे सांप की तरह लौटते उसके लंड की वजह से चप्प चप्प की आवाज आने लगी। उस आवाज ने एक अलार्म का काम किया।

मैं अब धीरे धीरे होश में आने लगी। मेरी थोड़ी बहुत प्यास मिट गयी थी। मुझे ध्यान आया कि उसने प्रोटेक्शन तो इस्तेमाल ही नहीं किया था। शायद इसी वजह से मैं उसके लंड को इतने अच्छे से अपनी चूत में महसूस कर पा रही थी।

आखिर मेरी सुरक्षा मामला था, मैंने उसको टोंका कि वो बिना प्रोटेक्शन के ऐसे मुझको नहीं चोद सकता।

मेरी बातें अनसुना करते हुए वो मुझे ओर जोर से चोदता रहा। जिससे एक बार तो मैं फिर अपने होश खोने लगी और आहह्ह्ह्ह आहह्ह्ह्ह कर चीखने लगी।

पर मुझे इसके बुरे परिणाम भी पता थे, तो जल्द ही अपनी भावनाओ पर काबू पाया। मैंने ही अब जोर लगा के पलट कर उसको अपने ऊपर से गिरा दिया। उसका लंड मेरी चूत से बाहर आ गया। उसकी तरह मुझे भी बुरा लगा था इस तरह अधूरा छूटना।

उसकी तो हालत ही ख़राब थी, इतने जतनो से वो यहाँ तक पंहुचा था, कि मुझे तैयार कर पाया और मैंने ही उसे मना कर दिया।

उसने कहा कि उसके पास प्रोटेक्शन नहीं हैं, उसके रूम में हैं और मुझसे मांगने लगा।

मैं उसको कैसे बताती कि मेरे पति प्रोटेक्शन लगाए या ना लगाए सामने वाली चूत पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।

मैंने भी उसको देख ना ने सर हिला दिया। वो इस हालत में नहीं था कि इस सुनहरे अवसर को जाने देता।

मैं भी उससे काफी समय से थोड़ा बहुत आकर्षित थी और जिस तरह से आज उसने किया था, मैं भी उसके साथ पूरा करना चाहती थी।

उसने मुझसे गुजारिश की कि मैं उसे बिना प्रोटेक्शन के चोदने की इजाजत दूँ। वो तर्क देने लगा एक बार करने से जरुरी नहीं कि बच्चा हो ही जाए। वैसे भी कुछ होने पर अपने पति पर इल्जाम डाल सकती हूँ।

काश उसको पता होता कि मैं चाहते हुए भी अपने पति पर कभी प्रेग्नेंट करने का इल्जाम नहीं डाल सकती।

मैंने उसको ना बोल दिया, कि पति पर नहीं डाल सकती वो बहुत ध्यान रखते हैं।

उसने ओर कुछ बात नहीं बनते देख पूछा “तुम्हारा पीरियड कब गया था?”

मैंने कहा “चार पांच दिन पहले ही ख़त्म हुआ हैं”।

उसने कहा “मैं पायल को भी पीरियड के एक हफ्ते बाद तक कभी कभार बिना प्रोटेक्शन के चोदा करता हूँ और ज्यादा रिस्क नहीं होता हैं इस दरमियान। इतना ही हैं तो मैं ध्यान रखूँगा और पानी निकलने के पहले ही लंड चूत से बाहर निकाल दूंगा”।

मुझे लगा उसको इस चीज का काफी अनुभव हैं। उसके मसाज का अनुभव तो मैं पहले ही देख चुकी थी, तो मैंने उसका यकीन कर लिया। या फिर मैं खुद उसके लंड से अपनी चूत पूरी चूदवाना चाहती थी, इसके लिए मैंने उसको इजाजत दे दी।

पर मैंने इसको कड़ी हिदायत दे दी कि वो समय रहते अपना लंड मेरी चूत से निकाल देगा और पानी अंदर नहीं छोड़ेगा।

मेरी हां सुनते ही उसकी तो बांछे खिल गयी। उसने इतनी मेहनत की थी तो उसको इसका इनाम भी मिलना चाहिए था।

वो एकदम भोली शकल बनाते हुए वादा करने लगा कि वो मुझे चोदने के बाद कुछ नहीं होने देगा और ध्यान रखेगा कि पानी निकलने के पहले ही लंड चूत से बाहर निकाल देगा।

अब मैं एक बार फिर से तैयार हो गई राज के लम्बे लण्ड से अपनी चूत की एक असुरक्षित चुदाई के लिए।

राज : “मुझे तुम्हारा चक्रासन अच्छा लगा। तुम वो आसन फिर से करो और मैं तुम्हे उसी स्तिथि में चोदूंगा”।

मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि योग के आसन करते हुए भी चोदा जा सकता हैं। उसकी नयी सोच को सुन मैं भी रोमांचित हो गयी।

मैं अब बिस्तर से नीचे उतरी और एक बार फिर चक्रासन की स्तिथि में आ गयी। उसने मुझे पाँव ओर चौड़े करने को कहा, मैंने वैसा ही किया।

बिना कपड़ो के चक्रासन करना ही अपने आप में बहुत गरम मामला था। मेरी चिकनी चूत को इस तरह देखकर वो शायद बावरा हो गया।

वह मेरे दोनों पांवो के बीच आकर खड़ा हो गया और अपना लंड पकड़ कर अपने हाथ से रगड़ते हुए ओर कड़क और लम्बा करने लगा।

वो अपने लंड को पकड़, उससे मेरी चूत पर थप्पड़ मारने लगा। चटाक चटाक की आवाजे आने लगी। उसका लंड बहुत भारी था और वो मिला मिला कर मार रहा था तो थोड़ा दर्द भी हो रहा था और उस चटाक की आवाज से मजा भी आ रहा था।

जो अरमान वो पहले पुरे नहीं कर पाया था अब पुरे करने लगा। उसने अब मेरी चूत पर हाथ लगाया और ऊपर नीचे रगड़ने लगा। मेरे मुँह से सिसकिया छूटने लगी।

वो अब नीचे बैठ गया और दोनों हाथों से मेरी चूत के दोनों होंठ को चौड़ा कर अंदर छेद में अपनी जबान रगड़ने लगा।

मैं: “आहह, रा अ ज, हम्म, ओह माय गॉड। अब ओर मत तड़पाओ, कोई मोटी चीज़ डालो प्लीज।”

राज: “अभी डालता हूँ”

यह कह कर वो उठा और मेरे चेहरे की तरफ आ गया और नीचे बैठ कर अपना कड़क कठोर लंड मेरे मुँह के पास ले आया।

मैंने भी अपना मुँह खोलकर उसका स्वागत किया। उसने तो पूरा छह इंच का लोहा मेरी मुँह में घुसा दिया। वह अब अपने हाथों से मेरे मम्मे दबाने लगा। मैं जितना हो सकता था उसका लंड अपने मुँह से चूस रही थी।

थोड़ी ही देर में मैं चक्रासन करते थक गयी और मैं धीरे धीरे अपने शरीर को नीचे लाते हुए पीठ के बल लेटने लगी।

मैंने उसका लंड मुँह से नहीं छोड़ा, जिससे वो भी मेरे साथ ही नीचे होता गया और मेरी कमर के दोनों तरफ अपने हाथों के बल मेरे ऊपर था।

मैं नीचे लेटी थी और उसका लंड मेरे मुँह में था। उसने अपने हाथों को मोड़ा और मेरे ऊपर पूरा लेट गया। हम 69 पोजीशन में आ गए। मेरी ये पसंदीदा पोजीशन थी। उसने अपने होठ मेरी चिकनी चूत पर रख दिए और मेरी चूत की पंखुडिया को नोचने लगा।

थोड़ी देर हम दोनों ने एक दूसरे के अंगो को चूसने का आनंद लिया। जब मेरा मन भर गया तो मैंने उसको उठने को बोला।

उसने कहा कि उसको तो अभी अंदर डालना बाकी हैं। उसने मुझे फिर तैयार किया चक्रासन में आने को। मैं एक बार फिर अपनी हिम्मत झूटा कर उसी स्तिथि में आ गयी।

वो एक बार फिर मेरे पैरो के पास आया और इस बार जो मैं चाहती वो चीज़ सही जगह डाली।

उसने अपने हाथों में मेरी नाजुक पतली कमर पकड़ी और मुझे थोड़ा सहारा दिया। अब वो तेजी से अंदर बाहर धक्के मारता हुआ मुझे चोदने लगा। उसने अगर मेरी कमर को पकड़ सहारा नहीं दिया होता तो उसके जोर के झटको की वजह से मेरा संतुलन बिगड़ जाता और मैं गिर जाती।

उसका लंड इतना लम्बा था कि मुझसे तो सहन ही नहीं हो रहा था। ऐसा लगा जैसे मेरी चूत में ड्रिल करते हुए खड्डा खोद रहा था। मेरे मुँह से दर्द के साथ मजे से भरी सिसकिया निकल रही थी।

धीरे, आहह्ह्ह अम्म ओहह्ह्ह ओह हो हो धीरे धीरे चोद आहहह फट जायेगा। लंड डाला हैं हमम्म अम्म या लोहे की रॉड, आह्ह।

कुछ मिनट बात ही इस पोजीशन के कारण मेरी कमर जवाब देने लगी। मैंने उसको मुझे छोड़ने को कहा। अनिच्छा से उसने मुझे छोड़ा।

मैं अब बिस्तर पर जा सीधा लेट गयी और अपने पाँव चौड़े कर लिए। वो मेरे पास आया, मेरी चूत की दरार खुली पड़ी थी उसके लिए।

उसने अपना अंगूठा मेरी चूत के छेद पर रखा और अंगूठा ऊपर करते हुए जैसे मेरी चूत की दरार को तिलक कर रहा हो।

उसका अंगूठा मेरी दरार को रगड़ता हुआ नीचे से ऊपर आता रहा और मैं लंबी लंबी आहें भरने लगी। वह अब मेरे ऊपर आया अपना लंड मेरी चूत में फिर घुसा दिया।

अब उसका सीना मेरे छाती पर आ मेरे मम्मो को दबा रहा था। मैं मुँह खोल कर आह आह करने लगी। उसके तेज तेज झटके शुरू हो गए। उसका हर एक झटका मेरे अंदर तक जा रहा था, और मस्ती के मारे मेरे मुँह से सिसकिया झर झर बह रही थी।

इस वक्त मैं बिलकुल नहीं चाहती थी कि पति वापिस आ जाये।

थोड़ी ही देर में मेरी चूत से चप्प चप्प की आवाज आने लगी। हम दोनों उस नशीली आवाज में खोने लगे।

उसने अब अपने हाथ सीधे खड़े कर सारा वजन अपने हाथों के पंजो पर ले लिया, जिससे उसका सीना मेरी छाती से थोड़ा दूर हो गया।

इससे वो ओर भी जोर के झटके मार पा रहा था। मेरा तो पानी निकलना शुरू गया था। जल्दी ही फचाक फचाक की आवाज़े आने लगी। मेरी चूत के अंदर सब चिकना चिकना हो चूका था।

मेरे मुँह से लगातार आ अहह्ह्ह आ अहहह की रट निकलने लगी। झड़ने के करीब आयी तो मेरे मुंह से निकलने लगा “हां, यही पे , यही पे , जोर से कर लो , हा ह हा ह… जल्दी… हा ऐसे वाला… आहह्ह्ह जल्दी… आह्ह्हह। उई माँ… हां ये वाला… उईमाँ… उईमाँ उई माँ… आह्ह्ह अ उम्म” और चीखते हुए मैं झड़ गयी।

राज अब भी मुझे बेतहाशा चोदे जा रहा था। मुझे अच्छा लगा कि उसने अभी तक पानी नहीं छोड़ा था मेरे अंदर।

मैंने उसको फिर से याद दिला दिया कि उसको पानी अंदर नहीं छोड़ना हैं। पता नहीं उसने मुझे सुना कि नहीं, वो अपना काम करे जा रहा था।

मेरा काम तो पूरा हो चूका था, अब वो जो भी कर रहा था वो मेरे लिए बोनस था। वो भी अब सिसकिया निकालने लगा।

धीरे धीरे उसकी सिसकिया भी बढ़ने लगी। जब जब उसका लंड मेरी चूत में जाकर झटके मारता उसके मुँह से एक अह्ह्ह की आवाज निकलती।

उसके झटके बड़ी जल्दी जल्दी लग रहे थे, पर अब इतना अंदर नहीं जा रहे थे। थोड़ी ही देर में उसके झटको की गति धीमी हो गयी पर अंदर जाने की गहराई बढ़ गयी।

मुझे लगा इतनी देर से करने के कारण थक गया होगा, तो अपनी एनर्जी इकठ्ठी कर रहा होगा। उसके झटके अब भी धीमे पर गहरे थे।

झटको की गहराई के साथ उसके सुर भी बदल गये थे। पहले हा अ हा अ की तेज आवाज निकाल रहा था तो अब आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह बोलते हुए गहराइयों के मजे ले रहा था।

थोड़ी देर में देखा वो थक कर रुक गया और अपना लंड मेरी चूत में डाले रहने दिया। मैंने उसकी तबियत पूछने के लिए पूछा “क्या हुआ थक गए क्या?”

वो पूरा पसीना पसीना हो गया था और बोला “नहीं, मेरा हो गया हैं। आई एम सॉरी, मैं इतना खो गया कि समय पर बाहर निकाल ही नहीं पाया।”

मेरा तो दिमाग जैसे सुन्न हो गया। मैंने उसको कंधे से धक्का देते हुए साइड में गिराया और उठ कर बैठ गयी और अपनी चूत को देखने लगी। वो पूरी चिकने पानी से लथपथ थी और रह रह कर थोड़ा पानी रिस रहा था।

मैंने चिंता के मारे अपने दोनों हाथ सर पर रख दिए और उसकी तरफ खा जाने वाली नजरो से घूर के देखने लगी।

वो अपनी सफाई देने लगा “देखो, तुम्हे कुछ नहीं होगा चिंता मत करो। वैसे मैं निकाल देता हूँ, पर तुम्हारा ये फिगर देख कर, पता नहीं क्या हो गया, और मैं कंट्रोल नहीं कर पाया”।

दो यारों की सांझ इतनी गहरी की उनका बिस्तर भी साँझा और बीवियां भी सांझी, पढ़िए आई लव आल द्वारा लिखित देसी हिन्दी स्टोरी!

मैने कहा “कम से कम झड़ते वक्त थोड़ी जोर की आवाज तो निकालते ताकि मुझे पता तो चलता और तुम्हे रोक पाती”।

उसने बून्द बून्द करते अपना सारा पानी छोड़ा तो मुझे भी पता नहीं चला। एक साथ पिचकारी छोड़ता तो मुझे मालूम पड़ जाता।

वो बोला “सॉरी, पर झड़ते वक्त मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था। मेरी तो आवाज भी नहीं निकल पा रही थी। शादी के बाद पहली बार जब पायल को चोदा था तब ऐसी हालत हुई थी और उसके बाद अब”।

मेरा गुस्सा देख कर वो अपने कपडे समेट बाथरूम को भागा। मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी आँखें बंद कर ली।

मुझे तो आज तक कभी इमरजेंसी पिल की जरुरत भी नहीं पड़ी, सिर्फ अपनी सहेलियों से सुना भर था। अगले दो दिन तक हम यहाँ घूम रहे होंगे तो फिर पिल ले भी नहीं ले पाउंगी। मैं चिंता में घुली जा रही थी।

थोड़ी देर में ही राज बाथरूम से बाहर आया।

मैंने बिस्तर पर देखा थोड़ा वीर्य गिरा था, मैंने उसको पोंछा और अपना स्लीप शर्ट और शार्ट उठा कर बाथरूम को भागी। मैं अब अपनी चूत को धो धो कर उसका पानी निकालने का प्रयास करने लगी, जब कि मुझे भी पता था कि अगर कुछ हुआ होगा तो मेरे धोने से कुछ नहीं होने वाला।

मैं अब अपनी साफ़ सफाई करके अपना स्लीप वियर पहन कर फिर बाहर आ गयी। राज वही मुजरिम की भांति बैठा था।

वो मुझे फिर दिलासा देने लगा कि मैं चिंता ना करू, कुछ नहीं होगा। मैंने देखा कि बिस्तर पर वीर्य साफ़ करने से अभी भी थोड़ा गीला दिख रहा था। मैंने वहा रजाई डाल कर छुपा दिया ताकि पति ना देख सके।

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। राज और मैं दोनों घबरा गए। मेरी हिम्मत नहीं थी कि दरवाजा खोल सकू। राज ने ही आगे बढ़कर दरवाजा खोला।

पति अंदर आये, थोड़े थके हुए लग रहे थे। हम कुछ पूछते इतनी देर क्यों लगी, उसके पहले ही वो बताने लगे।

उन्होंने कहा “कल के लिए मैंने सब सेट कर दिया हैं, कहाँ और कैसे जाना हैं। इन्ही सब चीजों के कारण बहुत देर लग गयी।”

हम भी थोड़े खुश थे, क्युकी हमने तो उनके जाने के बाद कुछ घूमने के प्लान की बजाय कोई दूसरा ही प्लान तामील कर लिया था।

राज बोला “सब सेट हैं तो ठीक हैं, अब मैं चलता हूँ अशोक, कल सुबह मिलते हैं”।

अशोक ने कहा “ठीक हैं गुड नाईट, कल सुबह नीचे कैंटीन में नाश्ते के लिए आ जाना साढ़े आठ बजे तक और फिर हम नौ बजे तक निकल जायेंगे घूमने को”।

राज अब गुड नाईट बोल कर चला गया।

अशोक ने बोला “चलो बहुत देर हो गयी हैं, अब हम सो जाते हैं”।

मैं पति से पहले, बिस्तर के उस हिस्से में जाकर सो गयी जहा वीर्य की वजह से गीला हो गया था। मैं अब थोड़ा डर भी रही थी।

डर की वजह प्रेगनेंसी नहीं, ये थी कि कही पति मुझे चोदने की ज़िद ना कर बैठे, जैसा की हर बार होटल में ठहरने के दौरान वो करते हैं। थोड़ी देर पहले ही करने से मेरी चूत अभी भी गीली थी, वो एक मिनट में पकड़ लेंगे मेरी कारस्तानी।

मगर उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया, उन्होंने लाइट बंद कर दी और अपनी जगह लेटकर बेड के पास वाला नाईट लैंप भी बंद कर दिया।

वो चुपचाप दूसरी ओर करवट लेकर सो गए। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ, आजतक पहले कभी उन्होंने ऐसा नहीं किया था। हमेशा जिद करके जबरदस्ती कर ही लेते थे।

अब मुझे शंका होने लगी। मैं लेटे हुए पीछे से उनके नजदीक गयी और उनके शॉर्ट्स में हाथ डालने की कोशिश की। पर उन्होंने रोक लिया, तो मेरी शंका ओर बढ़ गयी। मैंने अपना हाथ पीछे लिया तो उन्होंने छोड़ दिया।

मैंने अब जबरदस्ती अपना हाथ तेजी से उनके शॉर्ट्स के अंदर डाल ही दिया। उन्होंने मुझे सोने की हिदायत देते हुए मेरा हाथ फिर बाहर निकाल दिया। मेरा हाथ जब उनके शॉर्ट्स के अंदर गया था तो अंदर थोड़ा गीला था।

मैं सोच में पड़ गयी, वो अब तक कहा थे? जिस तरह मैं राज के साथ मिल उन्हें धोखा दे रही थी क्या वो भी किसी के साथ थे। कही वो पायल के साथ तो नहीं थे? जिसने ख़राब तबियत का बहाना बनाया था?

क्या वह फ़ोन रिसेप्शन से आया था या पायल ने किया था। बाहर जाते वक़्त उन्होंने यह भी कहा था कि राज जाना मत जब तक मैं वापिस न आ जाऊ। क्या मेरे पति मुझसे हिल स्टेशन में बेवफाई कर रहे थे?

फिर मैं शांत हो गयी क्यों की मैं खुद भी वह गलती कर चुकी थी उसी दौरान। फिलहाल मेरी बड़ी समस्या पति की बेवफाई नहीं, मेरी संभावित प्रेगनेंसी थी।

देर रात तक मैं यह सोचती रही कि मेरे पति का कमरे से बाहर इतनी देर के लिए जाना क्या पहले से ही प्लान था। क्या पायल मेरे पति के साथ मिली हुई हैं?

या हो सकता हैं कि राज और मेरे पति आपस में मिले हुए हो और एक प्लान के तहत एक दूसरे की बीवियों के कमरे में अकेले में भेजा और हम दोनों पत्नियों को फंसा रहे हो।

कुछ भी निर्णय पर पहुंचना मुश्किल था। पति कमरे में तभी लौटे जब मैं और राज अपना काम समाप्त कर चुके थे। शायद जब में वाशरूम में गयी थी तब पीछे से राज ने ही मेरे पति को फ़ोन या मैसेज कर सूचित किया था कि अब आ जाओ हमारा काम हो गया हैं।

फिर सोचा मेरे पति दूसरे पे मुंह मार सकते हैं, पर अपनी बीवी को सिर्फ मजे के लिए दूसरे के हवाले तो नहीं करेंगे। यही सब सोचते सोचते मेरी आँख लग गयी।

सपने में भी राज का लंबा लंड मुझे परेशान कर रहा था। मैंने देखा कि वो मुझे पीछे से बेतहाशा चोद रहा हैं और मेरे पति सामने से मुझे देख रहे हैं। जैसे ही मैं झड़ी, तो उन्होंने आकर मुझे तमाचा मार दिया।

इससे मेरी नींद खुल गयी। घडी में देखा सुबह के पांच बजे थे। सुना था कि सुबह के सपने वैसे भी सच होते हैं। मैं तो डर गयी।

मैंने सोचा पता नहीं आज का दिन कैसा जायेगा। कही मेरा सपना सच ना जाये।

मुझे नहीं पता कि राज ने जो मुझे चोदा, वो एक संयोग था या फिर इसके पीछे कोई साजिश? अगर ये साजिश हैं तो इनमे कौन कौन शामिल हैं?

मुझे ये नहीं पता था कि ये नया दिन मेरी ज़िन्दगी का एक कभी न भुलने वाला दिन साबित होने वाला हैं।

दोपहर से होते हुए रात और फिर अगली सुबह तक जो हम चारो के साथ होने वाला था, उसकी कल्पना हम चारो ने यहाँ आने से पहले नहीं की थी।

मैं वापिस आ गयी हूँ अपनी इंडियन सेक्स स्टोरीज इन हिन्दी का अगले एपिसोड आपके लिए लेकर!

अगले दिन सुबह उठ कर नहा धो कर हम दोनों तैयार होने लगे. मेरे दिमाग में अभी भी कल रात की घटनाये घूम रही थी.

एक तरफ प्रेग्नेंसी का डर तो दूसरी तरफ ये सोच कर चिंतित थी, कि बाकि तीन लोगो में से कौन किस से मिला हुआ हैं.

पति का मोबाइल लॉक्ड था तो कल रात के मैसेज और कॉल लॉग भी नहीं देख पायी.

मैंने घूमने के लिए कपडे पहनना शरू कर दिया. मैंने पहले से पसंद की हुई काऊ गर्ल वाली ड्रेस पहनी. मैंने डेनिम का हॉट शॉर्ट्स पहना और साथ में शार्ट शर्ट पहना.

शर्ट कुछ ऐसी डिज़ाइन का था कि उस को पहनने के लिए उसके दोनों हिस्से एक एक मम्मे पर लपेट कर दोनों सिरों को आगे से गांठ से बांधना था. वो गांठ मम्मो के एकदम नीचे बंधी थी.

मैंने आईने में देखा, मेरा गोरा गोरा पतली कमर वाला पेट उन शर्ट और शार्ट के बीच से दिख कर बहुत सेक्सी लग रहा था.

कस कर बंधे शर्ट से मेरे मम्मो का उभार निखर कर आ रहा था. काऊ गर्ल से मैच करती हुई हैट और बूट पहने.

साढ़े आठ बजने को थे और पति भी टीशर्ट और शॉर्ट्स पहन तैयार हो गए. हम लोग नीचे होटल की कैंटीन में पहुंचे नाश्ता करने के लिए. वहा पर पायल और राज पहले से मौजूद थे और नाश्ता कर रहे थे.

पायल चाह कर भी अपनी चर्बी की वजह से मेरी तरह खुले कपडे नहीं पहन सकती थी. उसने स्कर्ट पहन रखा था और ऊपर एक पतला टॉप था.

उसके बड़े मम्मे टॉप के अंदर से उभर कर काफी बाहर आ रहे थे. राज ने पति की ही तरह टीशर्ट और घुटनो तक के शॉर्ट्स पहने थे.

मुझे वहा उन सेक्सी कपड़ो में देख राज का मुँह खुला का खुला ही रह गया.

पायल को मेरी पतली कमर देख थोड़ी जलन तो हुई, कि वो मेरी तरह कमर दिखाने वाले कपडे नहीं पहन सकती थी.

हम लोगो ने हाय हेलो किया, पर मैंने राज को अवॉयड किया.

मैंने देखा पायल प्लेट भरकर नाश्ता कर रही थी. वो देख मुझे आश्चर्य नहीं था की वो फिट क्यों नहीं हैं.

हम दोनों भी नाश्ता लाकर उनके पास बैठ गए.

पायल ने मेरे कपड़ो की तारीफ़ की और अपनी मज़बूरी भी बताई.

मैंने उसको दिलासा दिया कि वो भी थोड़ी मेहनत करने के बाद ऐसे कपडे पहन पाएगी.

मेरे पति काफी अच्छे फोटोग्राफर भी हैं और ये बात हम चारो को पता थी. पायल शिकायत कर रही थी कि वो जब भी घूमने जाते हैं तो डीपू उसके फोटो बिगाड़ देता है, इसलिए आज उसके सारे फोटो अशोक ही खींचे इस का अनुरोध करने लगी.

अशोक ने आश्चर्य से पूछा ये डीपू कौन हैं?

पायल ने समझाया कि राज का पूरा नाम राजदीप हैं, दोस्त और घर वाले उसको राज कहते हैं पर पायल उसको दीप बुलाना पसंद करती हैं और अंग्रेजी में नाम बदल कर डीप से डीपू कर दिया.

मेरे पति ने भी बोला ये नाम अच्छा हैं, अब हम तुम्हे डीपू कहके ही बुलाएँगे.

मुझे पता था कि कल रात को राज ने अपना लंड मेरी चूत के कितना अंदर उतार दिया था, तो शायद इस कारण ही उसका नाम डीप से डीपू रखा होगा.

डीपू ने पायल की टांग खींचने के लिए कहा कि पायल ने अपना फिगर ही ढंग से मेन्टेन नहीं किया तो फोटो या फोटोग्राफर का क्या दोष.

पायल चिढ गयी और डीपू को बोली की “आज तुम मुझसे दूर ही रहना और हाथ भी मत लगाना”.

मेरे पति ने भी पायल को वादा कर दिया कि वो ही उसकी फोटो खींचेंगे.

पायल को छोड़ हम तीनो ने नाश्ता ख़त्म कर लिया था. वो शायद बातों की वजह से पीछे रह गयी या ज्यादा खाना लेने की वजह से.

अशोक ने प्लान बताया कि पहले हम लोग आस पास की जगहों पर घूमेंगे जो बहुत फेमस हैं.

दोपहर लंच के बाद हम लोग थोड़ा दूर कुदरत के बीच जंगल ट्रेल पर जायेंगे जिसका पता उन्होंने कर लिया हैं. वहा बहुत कम लोग जाते हैं क्यों कि वो फेमस नहीं हैं पर खूबसूरत और शांत जगह हैं.

नाश्ता ख़त्म कर नौ बजे के बाद हम लोग किराए पर ली गाड़ी से अपनी पहली मंजिल की तरफ निकल पड़े.

डीपू ने खुद गाडी चलाने का फैसला किया और मेरे पति उसके साथ आगे की सीट पर बैठ गए.

आधे घंटे बाद हम एक पहाड़ी एरिया में थे. वहा वाहनों का जमावड़ा था. काफी फेमस जगह थी तो भीड़ की उम्मीद भी थी.

गाड़ी पार्क कर हम लोग पैदल ही दूसरे कई लोगो की भीड़ के बीच उस जगह की खूबसूरती का आनंद लेने लगे.

पायल अपने फोटो अच्छे निकलवाने की जिद में मेरे पति का हाथ पकड इधर उधर खींचते हुए ले जा रही थी और अपने फोटो निकालने को बोल रही थी.

मेरे पति भी वादे के अनुसार उसका साथ दे रहे थे.

मुझे फोटो का इतना शोक नहीं था तो मैं उनसे थोड़ा दूर ही थी.

डीपू को पायल से दूर रहने की सजा मिली थी तो वो मेरे साथ रहने की कोशिश कर रहा था.

मैं उसकी कल रात की गलती के बाद माफ़ करने के मूड में नहीं थी और उसको इग्नोर कर रही थी.

वो मेरे छोट कपड़ो से झांकते बदन को घूर भी रहा था.

वैसे वो अकेला नहीं था, वहा भीड़ में कुछ लोग मेरे छोटे कपड़ो को मौका देख ताड़ रहे थे, और उनकी बीवियां उनको खिंच कर दूर ले जा रही थी.

ऐसा नहीं था कि मैंने अकेली ने ही ऐसे कपडे पहने थे, ओर भी लड़किया थी पर बहुत कम का फिगर सेक्सी था.

मैंने सोचा कही मैंने ऐसे कपडे पहन कर गलती तो नहीं कर दी, अगर ये इसी तरह घूरता रहा तो पायल या मेरे पति को शक हो जायेगा.

पर फिर सोचा किसी ओर के गलत सोचने की वजह से मैं अपने पसंद के कपडे पहनना क्यों छोड़ू.

पायल बीच बीच में मेरे पति को भी अपने साथ में खड़ा कर सेल्फी ले रही थी. सेल्फी लेते वक्त वो दोनों बहुत करीब होते.

कई बार पति ने पायल के कंधो और कमर पर भी हाथ रखा. मेरा शक फिर गहराने लगा कही कल रात को ये दोनों साथ में तो नहीं थे.

डीपू भी उनको इस तरह देख सकता था पर उसको तो अपनी पत्नी पर कोई शक ही नहीं था.

शायद उसको मुझे देखने से ही फुर्सत नहीं थी.

डीपू ने अब मेरे साथ अपनी सेल्फी लेनी चाही और मेरे पास आकर खड़ा हो गया.

मैंने उसको हल्का धक्का देते हुए अपने से दूर कर दिया. आस पास खड़े लोगो को लगा इन दोनों पति पत्नी में झगड़ा हुआ लगता हैं. वो लोग हम दोनों का तमाशा देखने लगे.

मुझे बड़ी शरम महसूस हुई. डीपू पर तो जैसे कोई असर ही नहीं हुआ. उसने एक बार फिर प्रयास किया और मेरे पास आ सेल्फी लेने को फ़ोन ऊपर उठाया.

आस पास के कुछ लोग अभी भी हमें देख रहे थे. मुझे तमाशा बनना अच्छा नहीं लगा और उसको सेल्फी लेने दी.

डीपू ने इसका फायदा उठाया और मेरे कंधो पर अपना हाथ रख दिया. मैंने अपने गुस्से को पीते हुए उसका हाथ सहन कर लिया.

दूसरे लोग खुश हो अब अपने अपने काम में लग गए.

डीपू ने एक ओर सेल्फी लेनी चाही पर पर मैं अब मुड़ कर वहा से चली गयी. पायल और अशोक अभी भी आपस में लगे हुए थे.

बीच बीच में वो आकर हमें अपने फोटो दिखाते कि कैसी आयी. इसी तरह हम वहा घूमते रहे और फोटो सेशन चलते रहे.

बारह बज चुके थे और हमने फैसला लिया कि अब हम यहाँ से अपनी दूसरी मंजिल की तरफ निकलते हैं जो कि थोड़ी दुरी पर हैं तो समय लगेगा. उससे पहले हम बीच में कही लंच के लिए रुकेंगे.

हम लोग अब एक रेस्टॉरेंट में आ गये. मैं वाशरूम में हो आयी. बाकी तीनो ने तब तक खाना आर्डर कर दिया. मैं आकर बैठी और पायल वाशरूम में जाने को निकली.

पति ने भी बोला कि वो बाहर की शॉप से बाद में काम आने लायक कुछ छोटा मोटा सामान खरीद कर गाडी में रखने जा रहे हैं.

अब टेबल पर सिर्फ मैं और डीपू थे. उसने टेबल पर रखे मेरे हाथों पर अपना हाथ रख दिया.

मैंने तुरंत उसका हाथ झटक दिया और उसको गुस्से से देखा.

उसने फिर मुझको समझाना शुरू किया. उसने अपने फ़ोन पर मुझको एक आर्टिकल की दो तीन लाइन भी पढाई.

उसमे लिखा था कि दो पीरियड के एक दम बीच के पांच दिन गर्भधारण के लिए उपयुक्त होते हैं. ये सब तो मुझे भी थोड़ा पता था अपने पहले बच्चे के लिए ट्राय कर चुकी थी.

वैसे भी एक बार चुदने से पिछली बार मुझे कुछ नहीं हुआ था, अगर आपने मेरी पिछली कहानी “समझौता साजिश और सेक्स” पढ़ी हो तो पता होगा कि हमारा पहला शिकार मुझे गर्भवती नहीं कर पाया था.

सान्या खान और उसके सगे भाई के बिच लिखी उनकी इंडियन सेक्स स्टोरीज इन हिन्दी कर मजा लीजिये, सानिया की कहानी उसकी जिबानी.

डीपू मुझे विश्वास दिलाने लगा कि मैं प्रेगनेंट नहीं होउंगी. अगर चाहिए तो वो मेरे लिए इमरजेंसी पिल भी खरीद लेगा.

मैं उसकी तरफ विश्वास भरी नजरो से देखने लगी. उसने दर्द दिया हैं तो दवा भी उसी को देनी होगी. उसने मुझे आगाह भी किया कि इन दवाओं के कभी साइड इफ़ेक्ट भी होते हैं. मेरे लिए वो पिल लाने की बात कर रहा था उसी से मुझे संतुष्टि मिल गयी थी.

तभी सामने से पायल आते हुए दिखाई दी. हम लोग फिर संभल गए और डीपू ने टॉपिक बदल लिया. थोड़ी देर में अशोक भी आ गए और वेटर खाना लगा गया.

हम लोग खाना खाने लगे. खाना खाते वक्त मेरे पेरो पर कोई अपना पैर रगड़ रहा था और मुझे गुदगुदी हो रही थी.

पति मेरे साथ वाली सीट पर बैठे थे, तो सामने की तरफ बैठे पायल और डीपू ही ऐसा कर सकते थे. मैं और डीपू, आमने सामने बैठे थे तो शक उसी पर था, वैसे भी पायल ये नहीं कर सकती थी.

वह अब अपने पाँव ओर भी ऊपर ले कर मेरी जांघो तक ले आया और रगड़ने लगा. मुझे खाना खाते बड़ी मुश्किल से गुदगुदी से होने वाली अपनी हंसी दबा रही थी.

तभी पायल एकदम जोर से खिलखिलाने लगी. गुदगुदी मुझे हो रही थी पर खिलखिला वो रही थी, कही उसे पता तो नहीं चल गया था कि राज मेरे साथ क्या कर रहा हैं.

राज ने भी अपना पैर पीछे खींच लिया और हम दोनों पायल की तरफ देखने लगे. पति को तो कोई फर्क ही नहीं पड़ा और अपना खाना खाते रहे.

पायल बोली कि उसे कोई पुरानी फनी बात याद आ गयी थी.

मुझे फिर शक हुआ, कही अशोक भी तो टेबल के नीचे से पायल की स्कर्ट के अंदर पाँव डाल गुदगुदी नहीं कर रहे थे?

राज ने भी राहत की सांस ली.

मैं, मेरे पति और पायल के ही बारे में सोच रही थी कि मैंने राज का पाँव फिर अपनी टांगो पर फिरते हुए महसूस किया.

मेरी दोनों टाँगे खुली थी तो वो अपना पाँव मेरी दोनों टांगो के बीच चूत तक ले आया और मलने लगा.

मैं उसको सजा देने के लिए दोनों घुटनो की हड्डियों से उसकी टांग को जोर से दबा दिया.

उसके चेहरे को देख कर लगा था कि उसको दर्द तो हुआ होगा. जैसे ही मैंने पकड़ छोड़ी उसने अपना पाँव पीछे खींच लिया.

पुरे खाने के दौरान राज ने फिर मेरे पाँव को छूने की कोशिश नहीं की, पर उस दौरान पायल रह रह कर खिलखिलाती रही.

उसकी इस हंसी से, मेरे दिल पर छुरियां चल रही थी. एक बार तो मन किया चम्मच नीचे गिरा के टेबल के नीचे झाँक ही लू कि क्या चल रहा हैं.

खाना ख़त्म करने के बाद हम लोग वहा से निकले. इस बार अशोक ने कार चलाना शुरू किया और राज उसके साथ में बैठा क्यों कि अशोक ने मैप्स पर रास्ता देखा था.

तक़रीबन एक घंटे का ड्राइव था और जैसे जैसे हम आगे बढ़ रहे थे ट्राफिक कम होता जा रहा था, हम शहर से काफी दूर आ गए थे और जंगल जैसा रास्ता शुरू हो गया था.

हम लोग पहाड़ी के दामन में थे. गाडी पार्क की, वहा सिर्फ दो गाड़िया खड़ी थी. मतलब वहा पिछली जगह की तरह भीड़ नहीं होने वाली थी इसकी हमें ख़ुशी थी. वहा पहाड़ थे और वहा एक छोटी नदी भी थी जो पहाड़ो के साथ चल रही थी.

पत्थरो और कंकरो की मदद से एक कच्चा रास्ता बना था चलने के लिए हम उसी के ऊपर चल रहे थे.

थोड़ा आगे जाकर हमने निर्णय लिया कि हम लोग इस रास्ते को छोड़ कर पेड़ो और घाटियों से होते हुए जाते हैं तो ज्यादा रोमांच होगा.

पायल पिछली बार की तरह रुक रुक कर मेरे पति से अपना फोटो खिचवा रही थी और चिपक चिपक कर सेल्फी भी ले रही थी.

अशोक और पायल आगे आगे चल रहे थे और मैं और राज उनके पीछे.

थोड़ा नीचे हमें पानी दिखाई दिया तो हमने नीचे उतरने का फैसला किया.

अशोक ने पायल को सहारा देते हुए नीचे उतरने में मदद की. उन दोनों ने उतरने के बाद आगे चलना शुरू कर दिया था.

डीपू अब नीचे उतरा और उसने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाया मुझे सहारा देने को. मैंने इंकार कीया और नीचे उतरना जारी रखा.

नीचे उतर कर देखा पायल और अशोक थोड़ा आगे निकल गए थे. हम दोनों भी अब धीरे धीरे आगे बढ़ने लगे.

चारो तरफ बहुत शांति थी और कुदरत का बहुत खूबसूरत नजारा था.

डीपू ने मेरे साथ फोटो खिचवाने की गुजारिश की.

मैंने बोल दिया अभी नहीं.

वो बोला “अब नाराजगी छोड़ भी दो, क्यों छुट्टिया और अपना मूड ख़राब कर रही हो.”

मैं अनसुना कर आगे बढ़ गयी. वो वही खड़ा रह गया और मुझे जाते देखता रहा.

थोड़ा आगे जाने पर भी मुझे अशोक और पायल दिखाई नहीं दिये. मैं अपनी नजरे इधर उधर घुमा उन्हें ढूंढ रही थी.

तभी मुझे पायल थोड़ी सी दिखाई दी. मुझे कुछ शंका हुई. मैंने अपने आप को पेड़ के पीछे छुपा देखने का प्रयास किया.

पायल और अशोक एक दूसरे से लिपट होठों को चुम रहा थे. अपने दोनों हाथो से उन्होंने एक दूसरे की पीठ को कसकर अपने सीने से चिपका रखा था.

मतलब मेरा जो शक था सच था. रात को जरूर इन दोनों के बीच कुछ हुआ होगा. रेस्टोरेंट में भी वो ही मस्ती कर रहे थे.

मुझे तभी डिपू का ख्याल आया, वो इधर आता ही होगा और अगर उसने अपनी बीवी और मेरे पति को चूमते हुए देख लिया तो यही जंगल में झगड़ा हो जायेगा.

मैंने मुड़ कर देखा डीपू उसी तरफ आ रहा था. खतरे को देखते हुए मैंने उसकी तरफ चलना शुरू कर दिया. मुझे अपनी ओर आते देख डीपू वही रुक गया.

मैंने उसके समीप जाकर कहा “यही रुको, यहाँ तुम मेरे साथ सेल्फी ले सकते हो”.

वो बहुत खुश हो गया. मुझे किसी तरह कुछ मिनट बिताने थे ताकि तब तक पायल और अशोक चूमना बंद कर दे.

डीपू अब मेरे साथ अलग अलग एंगल से सेल्फी लेने लगा, फोटो लेते वक़्त वो जानबूझकर कभी कंधे पर तो कभी मेरी पतली नंगी कमर को पकड़ लेता.

थोड़े फोटो हो जाने के बाद हम फिर आगे बढे. मैं आशा कर रही थी कि अब तक वो लोग अपना काम ख़त्म कर चुके होंगे.

हम उसी जगह पहुंचे पर अब वहा कोई नहीं था. मुझे थोड़ी राहत मिली.

डीपू ने बोला “लगता हैं वो लोग थोड़ा आगे निकल गए हैं”.

मैंने उसकी हां में हां मिलाया. उसने आगे कहना जारी रखा.

डीपू: “यहाँ आस पास कोई नहीं हैं, क्या मैं तुम्हे एक बार गले लगा सकता हूँ”.

मैं: “तुम्हे जो भी करना था वो तो तुम कल रात को ही कर चुके हो. अब उससे ज्यादा क्या हो सकता हैं”.

डीपू: “लगता हैं तुमने मुझे अभी तक माफ़ नहीं किया, वो मेरी एक मासूम सी गलती थी. चलो अब भूल भी जाओ. मैं तुम्हारी सहायता करूँगा अगर कुछ भी गड़बड़ होती हैं तो”.

मैं: “हमारे बीच कुछ ओर नहीं हो सकता हैं. जो भी हुआ भावनाओ में बह के मैं थोड़ा भटक गयी थी”.

डीपू: “क्या मैं इतना बुरा हूँ कि तुम मुझे दूसरा मौका नहीं दे सकती”.

मैं:”बात मौका देने की नहीं हैं. मैं तुम्हे सौ मौके दे सकती हूँ. पर इस मामले में नहीं. हम दोनों अच्छे दोस्त बन सकते हैं. पर मुझसे कल रात वाली उम्मीद मत रखना”.

डीपू: “प्लीज, मुझे अब ओर मत तड़पाओ. मैं पूरी रात ढंग से सो नहीं पाया तुम्हारे बारे में सोच कर. ऊपर से तुम सुबह से मेरे साथ बात भी नहीं कर रही थी”.

मैं: “पर अब तो मैं बात कर रह रही हूँ ना, फिर गले लगने की बात कहा से आ गयी”.

डीपू: “मैं तुमसे झूठ नहीं बोलूंगा. मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ. इनफैक्ट जब तुम्हे पहली बार देखा था तब से ही चाहता हूँ. पर कभी कहने की हिम्मत नहीं हुई. कल रात हमारे बीच की शर्म की दीवार ढह गयी, इसलिए मैं ये सब कहने की हिम्मत कर रहा हूँ”.

ये कह कर उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचकर अपने सीने से चिपका दिया.

मेरे मम्मे दब गए और उसने अपने होठ मेरे होठों पर लगाने की कोशिश की.

मैंने अपना हाथ बीच में लाकर उसको रोका और उसकी पकड़ से अपने आप को छुड़ाया.

मैंने कहा :”अगर तुम मुझसे इस तरह की हरकत करोगे तो मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी हैं. मैं जा रही हूँ”.

मेरी बातों से उसको झटका लगा और वो वही रुक गया. मैं उसको वही छोड़ आगे बढ़ गयी.

आगे चलते चलते मैं एक छोटी चढ़ाई पर पहुंची जिसके आगे एक छोटा गढ्ढा सा था. वहा से कुछ फुसफुसाने की आवाजे आ रही थी. मैंने सोचा कही ये पायल और अशोक तो नहीं.

मैं नीचे बैठ गयी और उस घाटी के किनारे तक खिसक कर आयी. मैं अब उस खड्डे में देखने लगी तो मेरे होश उड़ गए.

पायल का टॉप उसके ब्रा सहित उसके मम्मो से ऊपर उठा हुआ था और मेरे पति बार बार उसकी चूँचियों को अपने मुँह में दबा अपनी तरफ खिंच कर छोड़ रहे थे. पायल रह रह कर सिसकिया निकाल रही थी.

पहली बार मैं पायल के छोटे खरबूज की साइज के गोल गोल मम्मे देख रही थी.

मैंने पीछे मुड़ कर देखा डीपू कही नजर नहीं आया. मैंने फिर खड्डे में नजरे डाली. पायल अशोक की तरफ पीठ कर खड़ी थी और अशोक अपना शार्ट अंडरवियर सहित नीचे खिसका कर नंगा खड़ा था.

अशोक ने अब पायल की स्कर्ट ऊपर उठा दी और उसकी पैंटी नीचे उतार दी.

पायल कमर से थोड़ा झुककर खड़ी हो गयी.

अशोक अब उसके उसके पीछे से प्रवेश करने को तैयार था. उन्होंने अब आगे पीछे हो झटके मारने शुरू कर दिए और पायल की सिसकियों की आवाज आने लगी.

अपनी भाभी के अलावा पहली बार अशोक को किसी दूसरी स्त्री के साथ चुदवाते देख मेरा दिमाग ख़राब हो गया. मैं ये दृश्य ओर नहीं देख पायी.

अब तो मुझे पूरा यकीन हो गया कि कल रात को भी इन दोनों बीच कुछ हुआ ही होगा. मैं वहा से निकली और दौड़ते हुए पीछे की तरफ जाने लगी. कुछ दूर जाकर डीपू खड़ा हुआ दिखाई दिया.

मैं पति के हाथों दिल पर चोट खाये हुई थी. हालांकि मैंने खुद ने भी उनके साथ कल रात को बेवफाई की थी.

मुझे अपनी तरफ दौड़ते हुए आता देख डीपू खुश हो गया. मेरा मकसद फिर वही था. उसको आगे बढ़ने से रोकना ताकि वो दृश्य ना देख पाए.

सदियों से चला आ रहा हैं कि बीविया अपने पति को बचाने के लिए अपना सब कुछ त्याग देती हैं. मुझे आज शायद अपनी इज्जत त्यागनी थी अपने पति के गुनाह को छुपाने के लिए.

मेरे पास वापिस आने का कोई बहाना नहीं था. पर उसे तो ग़लतफ़हमी थी. मेरे नजदीक आते ही उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया और अपने होंठ मेरे होठों पर रख मेरा मुंह ही बंद कर दिया.

शायद इसी बहाने थोड़ा समय कट जाये ये सोच कर मैंने भी मना नहीं किया. उसके नरम गीले होंठ मेरे होठों पर पर रस छोड़ रहे थे. मुझे उसकी चुम्मी में एक सच्चा प्यार दिखा और मैं भी उसके होठों को चूस रस लेने लगी.

मेरी इस हरकत से उसको ओर मजा आने लगा और वो मुझे सीने से लगाए ही खींचते हुए एक बड़े पेड़ के नीचे ले आया.

वह अब नीचे बैठ गया और मेरी नाभी और पेट पर चूमने लगा. उसकी इस छुअन की वैसे भी दीवानी हो चुकी थी.

मैं आसमान में सर उठाये मुँह खोल कर सिसकिया निकालने लगी. उसने अपने दोनों हाथ मेरी गांड पर रख दिए.

कुदरत के बीच इंसानो के शरीर के मिलन की कुदरती क्रिया के बारे में सोचते ही मैं रोमांचित हो गयी.

उसकी वो छुअन थी या पति की बेवफाई के ताजा जख्म मैं आत्मसमर्पण को तैयार थी. उसने अब मेरे डेनिम शॉर्ट्स का बटन खोल दिया.

बटन खुलते ही मेरी कमर पर से शार्ट का कसाव ढीला हो गया. उसने अब शॉर्ट्स की चैन खोल दी, और शॉर्ट्स को धीरे धीरे नीचे खिसकाने लगा.

मेरी पैंटी भी टाइट शॉर्ट्स के साथ ही नीचे खिसक रही थी. जल्द ही मेरे नीचे के कपड़े घुटनो तक आ गए.

उसने अब अपने दोनों हाथ मेरी नंगी गांड के दोनों उभारो पर रख दिये और अपने होंठ मेरी चूत के ऊपर रख चूमते हुए ऊपर नीचे रगड़ने लगा. मेरी सिसकिया फिर शुरू हो गयी.

उसने अपना सर ऊपर उठाया और मेरे शर्ट की गाँठ खोल दी. मेरा शर्ट आगे से खुल चूका था और मेरी ब्रा और उसमे से झांकते मम्मे दिखने लगे.

डीपू ने मेरे शॉर्ट्स को पैंटी सहित मेरे पावो से निकाल दिया.

उसने मेरा हाथ पकड़ कर एक बड़ी चट्टान के पीछे ले गया जो थोड़ी सी उचाई पर थी. मैं नीचे से नंगी ही ऊपर चढ़ कर उसके साथ उस चट्टान की ओट में आ गयी.

हम दोनों चट्टान के पीछे छुपकर बैठ गए. वह कोहनी के बल आधा लेट गया. मैंने देखा उसके शॉर्ट्स में उसका लंड खड़ा हो चुका था.

खुले में मैंने आज तक कभी भी नहीं चूदवाया था. आज मुझको वो अवसर मिल रहा था. मेरे सामने दो समस्याए थी.

एक ये कि उसके पास यहाँ कंडोम नहीं था और दुसरा कही पायल या अशोक यहाँ ना आ जाए और हमको इस हालत में देख ले.

हालांकि वो दोनों भी वहा आपस में लगे हुए थे, पर मन में कही ना कही डर था कि मैं अपने पति की नजरो के सामने गिर ना जाऊ.

मैं अपने पति की नजरो में हमेशा सती सावित्री की छवि बनाये रखना चाहती थी. जहा तक कंडोम की बात थी, कल तो वैसे भी वो मुझे बिना प्रोटेक्शन के चोद चूका था साथ ही उसने मुझको बोला था कि वो मेरे लिए इमरजेंसी पिल ले आएगा. तो मैं तैयार हो गयी अपने पहले आउटडोर चुदाई के लिए..

जब किसी देसी लड़की की चुदाई करने का मोका मिलता है, तो वो रात भुलाना बहुत मुश्किल होता है. पढ़िए ऐसी ही एक सची हिन्दी सेक्स स्टोरी.

उसने मुझको इशारा किया की मैं भी उसका शार्ट खोलू. थोड़ा शर्माते हुए मैंने उसके शॉर्ट्स का बटन और चैन खोलते हुए नीचे खींचा.

उसके अंडरवियर में उसके विशाल कड़क लंड की मोटाई और गोलाई दिख रही थी. उसका लंड कपड़ो के अंदर से ही बहुत आक्रामक लग रहा था.

मैंने अब उसका अंडरवियर भी निकाल दिया और उसका शैतान बाहर आ गया. जंगल का प्रभाव था या कुछ ओर मगर उसका लंड कल रात से भी लंबा लग रहा था.

उसके लंड के नीचे लटकती थैलिया धड़कते हुए फूल रही थी. उनमे काफी पानी भरा था, ये सोच कर डर भी लगा कि वो ये सारा पानी मेरी चूत के अंदर भर देगा.

उसने अपना लंड मुझे मुँह में लेने को कहा. पर मैं इसके लिए अभी तैयार नहीं थी.

मैंने कहा कि मैं सिर्फ हाथ लगा सकती पर मुंह में नहीं लुंगी.

वो मान गया कि कुछ् तो मिलेगा.

मैंने अब उसका लंड अपने एक हाथ में भर लिया. मेरे हाथों में ही उसका लंड कम्पन करता हुआ धक् धक् कर रहा था.

मेरे उसके लंड को पकड़ते ही उसकी सिसकी निकलनी शुरू हो गयी. उसको तड़पाने के लिए मैंने उसके लंड को ऊपर नीचे रगड़ना शुरू कर दिया और वो पागलो की तरह जोर जोर से आवाज निकालते हुए आअह, आअह करने लगा. उसने मुझे उस पर बैठ कर चोदने को कहा.

मैंने अपने पति द्वारा पायल को चोदते हुए दृश्य को याद किया और डीपू के ऊपर चढ़ कर बैठ गयी. मेरे पास ज्यादा समय नहीं था, ये डर था कि उन दोनों का हो चूका होगा तो कही फिर पीछे ना लौट आये हमें ढूंढते हुए.

मैंने उसका लंबा लंड अपने हाथों में पकड़ा और जल्दी से अपनी चूत में गुसा दिया.

डीपू के मुँह से आउच निकला और मैंने ऊपर नीचे हो चोदना शुरू कर दिया. उसका लंबा लंड मेरी चूत में काफी गहराई तक चला गया था.

हम दोनों की ही मजे के मारे सिसकिया निकलने लगी थी.

थोड़ी देर बाद उसने मुझको कहा कि हम जंगल में हैं तो जंगली तरीके से चोदते हैं.

मैं उसका मतलब नहीं समझी, तो उसने मुझे नीचे उतरने को बोला. मैंने उसका लंड चूत से निकाला और उसके ऊपर से हट गयी.

उसने मुझे कहा “हम जंगल में हैं तो जंगली जनवरी की तरह चोदते हैं, बहुत मजा आएगा”.

मैंने कहा “तुम्हारी जैसी इच्छा हैं कर लो, मैं तैयार हूँ”.

वो मुझे डॉगी स्टाइल में चोदना चाहता था. मेरा ऊपर का थोड़ा शरीर चट्टान से ऊपर था और उस ऊंचाई से मैं नीचे देख पा रही थी. मेरे धड़ से नीचे का शरीर चट्टान के पीछे छुपा हुआ था.

उसने मुझे चट्टान की तरफ मुँह रख कर झुका कर खडी कर दिया. मैं झुक कर उसके लंड का इंतज़ार करने लगी.

तभी उसने पीछे से मेरे ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे मना करने के बावजूद मेरी ब्रा और शर्ट पूरी निकाल कर नीचे रख दी.

उसने अपना टी शर्ट भी निकाल कर पूरा नंगा हो गया और बोला “जंगलियो की तरह चोदना हैं तो कपड़ो का क्या काम.”

अब उसने अपना लंड पीछे से मेरी चूत में गुसा दिया. लंड अंदर जाते ही मेरे मुँह से एक लंबी आहह्ह्ह निकली क्यों कि एक जंगली जानवर की तरह उसका लंड भी घोड़े की तरह लंबा था.

उसको अहसास नहीं था कि उसका लंबा लंड मेरे अंदर कितना गहरा जा रहा था. वो तो बिना चिंता के मुझे जोर जोर से चोदे जा रहा था.

दर्द के मारे मेरी हालत खराब हो रही थी. होटल रूम में उसने कल रात को चोदा तो इतना दर्द नहीं दिया था.

काफी देर तक वो ऐसे ही बिना थके और रुके चोदे जा रहा था. नीचे झुके होने से मुझे अब चट्टान के पार दिखाई नहीं दे रहा था.

मैंने अब खड़े हो कर चुदवाने का सोचा, ताकि मैं निगरानी भी रख पाउ. शायद खड़े होने से मेरा थोड़ा दर्द भी थोड़ा कम हो.

मैं अब चट्टान के ऊपर मुँह निकाले खड़ी थी और वो पीछे से मुझे लगातार झटके पे झटके मार चोद रहा था.

खड़े होने से मेरा दर्द कम हो गया था और मैं चुदाई का मजा ले पा रही थी. हम दोनों की ही आह्ह्ह्ह ऊ आह्ह्ह्ह ऊ चालू थी.

मेरा पानी छूटने से फचाक फचाक, फच्च फच्च की आवाज़ आस पास पक्षियों के कलरव के साथ मिल सुनाई दे रही थी.

थोड़ी ही देर में मैं झड़ने के करीब आयी. तभी मैंने देखा दूर से अशोक और पायल आते हुए दिखाई दिए. मैं थोड़ा झुक गयी ताकि सिर्फ मेरा मुँह दिखाई दे वरना उनको पता चल जाता कि मैं टॉपलेस हूँ.

मैंने डीपू को आगाह किया कि वो लोग आ रहे हैं. पर उस पर तो भूत सवार था मुझे पूरा चोदने का.

मुझे जल्दी से कपडे पहनने थे पर वो मुझे चोदने के चक्कर में छोड़ने को ही तैयार नहीं था. तभी उन दोनों की नजर चट्टान से झांकते मेरे चेहरे पर पड़ी.

उन्होंने अपना हाथ हिला मुझे इशारा किया. मैंने भी अपना आधा हाथ ऊपर कर उनको वही रुकने का इशारा किया और कहा कि हम नीचे ही आ रहे हैं.

मेरी आवाज सुन जैसे डीपू की नींद खुली और उसने जल्दी जल्दी झटके मारने शुरू कर दिए. मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी चीख पर कण्ट्रोल किया. उसके झटके इतने जबरदस्त थे कि मैं वही झड़ गयी और साथ ही साथ वो भी.

इधर जब मैं झड़ रही थी तो उसी दौरान पायल मुझे पूछ रही थी कि वहा ऊपर से क्या अच्छा देखने का हैं तो वो भी आते हैं.

झड़ते वक़्त मेरे चेहरे के एक्सप्रेशन ऐसे तनाव के थे कि पायल घबरा गयी कि मुझे क्या हो गया हैं जो मैं ऐसा चेहरा बना रही हूँ.

पर झड़ते ही मैंने अपने आप को संभाला और पायल और अशोक को कहा कि यहाँ ऊपर से कुछ ख़ास नहीं दिख रहा, तुम लोग वही ठहरो हम नीचे आ रहे हैं.

वो लोग वही रुक गए. मैं नीचे झुकी और अपने कपडे जल्दी जल्दी पहनने लगी.

डीपू के पास बैकपैक था तो उसने उसमे से निकाल कर नैपकिन दिए जिससे हम दोनों ने अपने अंगो पर लगे पानी को साफ़ किया. डीपू ने भी अपने कपडे पहन लिए.

हम लोग नीचे आये तो पायल ने पूछा तुम आ रहे हैं बोलकर भी पांच मिनट के बाद आये हो, ऐसा क्या कर रहे थे वहा?

मैं उसको क्या बोलती, तुम लोग जो काम खड्डे में उतर कर रहे थे वही हम चट्टान के पीछे कर रहे थे.

डीपू बहाने के साथ तैयार था और बोला “बेग में से लिप बाम ढूंढ रहे थे तो पूरा बेग खाली कर दिया था तो वापिस सामान भरने में टाइम लग गया.”

उन्होंने बताया कि वो लोग हमें पिछले कुछ मिनटों से ढूंढ रहे थे. हमने कहा कि हम भी उनको ढूंढने के लिए चट्टान के ऊपर चढ़े थे.

वैसे भी वहा मोबाइल नेटवर्क ठीक नहीं था, तो हम लोग वापिस कही जंगल में खो न जाये इसके लिए फिर साथ साथ ही घुमते रहे.

शाम को छह बजे हम जंगल से निकले. लौटते में हमने रास्ते में कही डिनर किया और फिर होटल की तरफ लौटने लगे. सभी लोग दिन भर चल चल कर थक गये थे.

पायल ने डीपू को कहा “होटल पहुंच कर प्लीज मेरी मसाज कर देना बहुत दर्द हो रहा हैं. मैं भी तुम्हारी मसाज कर दूंगी”.

डीपू बोला “तुमने सुबह ही मुझको पुरे दिन अपने से दूर रहने को कहा था भूल गयी. उस शर्त के अनुसार अब मैं तुम्हारी मसाज नहीं कर सकता. एक काम करो, तुम अपने दोस्त अशोक को ही बोल दो, जैसे फोटो लिए हैं वैसे मसाज भी कर देगा”.

पायल शरमा गयी.

कल रात को डीपू ने जिस तरह मेरी मसाज की थी, उसकी जरुरत तो मुझे आज थी. मेरे शरीर में भी दिन भर की थकान थी.

मैंने सोचा काश आज भी मुझे कल जैसा मौका मिल जाए.

पायल : “डीपू, तुम मेरी मसाज नहीं करोगे तो मैं मर नहीं जाउंगी. मुझे किस से मसाज करानी हैं, ये तुमसे पूछ कर नहीं कराउंगी. अशोक से मेरी अब अच्छी दोस्ती हो गयी हैं तो वो मेरी मसाज कर भी सकता हैं, समझे. क्यों अशोक सही कहा न?”.

अशोक: “अरे यार, तुम मिया बीवी अपने झगडे में मुझे मत फसाओ प्लीज”.

डीपू: “नहीं, अब तो मैं देखना चाहता हूँ कि पायल ने जो कहा हैं वो कर के दिखाती हैं या नहीं. ये सिर्फ बड़ी बड़ी बातें बोलना जानती हैं”.

पायल: “तुम्हे क्या लगता हैं डीपू, मैं अशोक से मसाज नहीं करवा सकती. पहले तो मैंने यु ही कह दिया था. पर अब तुम देखो. तुम्हारी आँखों के सामने मैं अशोक से मसाज करवाउंगी.”

डीपू: “ठीक हैं, कर के बताओ. फिर मैं भी किसी ओर को मसाज दूंगा.”

पायल: “हा हा, किसे दोगे? प्रतिमा को?”

मैं: “गाइज, तुम क्या बच्चो की तरह झगड़ रहे हो. कैसी बातें कर रहे हो.”

पायल : “नहीं, आई एम सिरियस. ये मर्द लोग पता नहीं क्या समझते हैं अपनी बीवियों को. अशोक, तुम आज मुझे मसाज दे रहे हो बस. चाहिए तो, इसके बदले मैं भी तुम्हे मसाज दे दूंगी. मेरी नाक अब तुम्हारे हाथ में हैं. प्लीज प्लीज प्लीज (दोनों हाथ जोड़ते हुए)”

अशोक : “अच्छा ठीक हैं, देखते हैं.”

पायल : “येस, तुम लोग कपडे चेंज करके हमारे रूम में ही आ जाना. मैं डीपू का चेहरा देखना चाहती हूँ जब अशोक मुझे मसाज देगा”.

अशोक : “पायल, मुझे पहले अपनी होम मिनिस्टर प्रतिमा से इजाजत लेनी होगी”.

पायल : “प्लीज प्रतिमा. अशोक को अलाउ कर दो”.

मैं: “मेरा क्या लेना देना, तुम तीनो को कोई आपत्ति नहीं तो मैं कौन होती हूँ, बीच में बोलने वाली.”

पायल बचे हुए पुरे रास्ते में डीपू को चिढ़ाती रही और वो अपना सा मुँह लेके बैठा रहा.

अब हम होटल पहुंच गए थे. अपने अपने रूम में जाने से पहले पायल ने याद दिलाया कि तुम दोनों तैयार होकर आ जाना हमारे रूम में.

दिन भर की थकान के बाद हम लोग नहाये. अशोक ने अपना नाईट पजामा सूट पहन लिया और मैंने कल रात की तरह ही बटनअप स्लिप शर्ट और शार्ट पहन लिए. आदत के अनुसार मैंने ब्रा नहीं पहना था.

हम लोग पायल-डीपू के रूम पर पहुंचे. दरवाजा डीपू ने खोला. पायल बेड पर आराम से पाँव पसार कर हमारा ही इंतज़ार कर रही थी.

पायल ने नूडल स्ट्रैप वाला टैंक टॉप पहन रखा था. उसके सीने के उभार से टॉप के अंदर तीखे तीखे निप्पल साफ़ नजर आ रहे थे.

मेरी तरह उसको भी शायद रात को ब्रा पहनने की आदत नहीं थी.

पायल: “अशोक, जरा डीपू से पूछो तो उसकी तबियत तो ठीक हैं न”

अशोक: “कम ऑन गाइज, तुम लोग अभी भी वही अटके हो. मुझे लगा वो सब मजाक था.”

पायल: “नहीं मैं सीरियस हूँ, चलो इधर आओ”.

अशोक: “अरे डीपू, आ जाओ ना, कर दो पायल की मसाज. ख़त्म करो.”

डीपू: “मैं ठीक हूँ, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं अगर तुम पायल को मसाज दोगे तो. मैं भी तो पास में बैठा हूँ, आगे बढ़ो.”

अशोक: “वो तो ठीक हैं पर मुझे मसाज करना नहीं आता. अगर कुछ गलत नस दब गयी तो लेने के देने पड़ जायेंगे.”

पायल: “डीपू को बहुत अच्छी मसाज करनी आती हैं, वो बता देगा तुम्हे कहा से और कैसे पकड़ना हैं.”

डीपू: “मगर मैं तो तुम्हे हाथ भी नहीं लगा सकता फिर कैसे बताऊ कि कैसे मसाज करते हैं.”

पायल: “अरे मुझे हाथ नहीं लगा सकते तो क्या हुआ, प्रतिमा तो है. तुम उसको मसाज करके बताओ और अशोक वैसे ही तुम्हे फॉलो करेगा.”

मैं: “मुझे बीच में खींचने की कोशिश भी मत करो. तुम आपस में निपटाओ.”

डीपू: “फिर मैं डेमो दे नहीं सकता, अशोक कर नहीं पायेगा, तो प्रोग्राम कैंसिल”

पायल: “अरे मेरा शरीर दर्द से फटा जा रहा हैं. कुछ तो रहम करो. प्रतिमा प्लीज मान जाओ ना. मसाज ही तो हैं. स्पा में जाकर भी तो लोग अनजाने लोगो से मसाज लेते ही हैं.”

मैं: “पर वहा तो लड़किया भी होती हैं मसाज देने के लिए”.

पायल : “इसका मतलब तुम्हे डीपू पर भरोसा नहीं. अरे यार हम सब दोस्त हैं, कम ऑन.”

मैं: “अरे यार, बात भरोसे की नही हैं. बस मुझे ठीक नहीं लगता”.

पायल : “डीपू बहुत अच्छी मसाज करता हैं, तुम्हारे दिन भर की थकान मिट जाएगी. लगता हैं अशोक यहाँ हैं इस वजह से तुम शरमा रही हो.”

अशोक: “प्रतिमा तुम मेरी वजह से मत हिचकिचाओ. तुम अभी हमारे रूम में बोल रही थी कि तुम थक गयी हो और तुम्हारी बॉडी में दर्द हो रहा हैं. इसमें कोई बुराई नहीं हैं. मैं बोल रहा हूँ, इट्स ओके. बाकी तुम्हारी मर्जी.”

पायल : “चलो अब इतना नाटक मत करो, इधर आके लेट जाओ.”

उन सब के दबाव में आके मैं तैयार हो गयी.

दिल से तो मैं भी यही चाहती थी, थकान के बाद डीपू के हाथ की मसाज, ओर क्या चाहिए.

मैं पायल के पास जाकर बेड पर लेट गयी. अशोक पायल के पाँवों के पास जाकर बैठ गया और डीपू मेरे पाँवों के पास.

डीपू ने कल रात की तरह मेरे पंजो को अपने हाथों में लिया और अशोक को बताने लगा कैसे करना हैं.

जैसे ही उसने मेरा पाँव दबाया मेरी तो सिसकी निकल गयी. मुझे बहुत आराम मिला.

डीपू समझाता जा रहा था और दोनों साथ साथ एक दूसरे की बीवियों को पाँव की मसाज दे रहे थे.

मसाज के दौरान पायल और मैं दोनों मजे लेते हुए सिसकिया निकाल रहे थे. पायल तो कुछ ज्यादा ही जोर से बोल रही थी “आह ह हा हा हा , मजा आ गया अशोक, क्या मसाज हैं सब दर्द निकल रहा हैं. तुम तो डीपू से भी ज्यादा अच्छा करते हो”.

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मैं मन ही मन हसने लगी, मझे पता था मसाज हो या चूदाई दोनों में डीपू ज्यादा अच्छा था. शायद बाहर का खाना घर के खाने से स्वादिष्ट ही लगता हैं.

पायल: “पाँव अब ठीक लग रहे हैं, चलो अब कमर और पीठ की भी मसाज भी कर दो.”

अशोक ने पाँव छोड़ा और पायल पलट कर सो गयी और गर्दन मेरी तरफ मोड़ कर मुझे देखने लगी. पायल की मोटी गांड का उभार उसके पाजामे में साफ़ दिख रहा था. मैं हेड रेस्ट के सहारे पीठ लगा कर बैठ गयी.

पायल : “अरे प्रतिमा उल्टी लेटो ना मेरी तरह”.

मैं: “पांव की मसाज तक ठीक था पर कमर और पीठ कुछ ज्यादा नहीं हो जाएगा?”

पायल : “अरे कुछ ज्यादा नहीं हो जायेगा, मेरी पीठ और कमर में बहुत दर्द हैं. जैसे पाँव हैं वैसे पीठ और कमर भी हैं. चल आजा लेट जा. अशोक तूम बोलो ना. ये सिर्फ तुम्हारी बात ही मानती हैं”.

अशोक: “प्रतिमा, तुम्हारी पीठ में दर्द हैं तो लेट जाओ, इस बहाने मैं भी सीख जाऊंगा कैसे मसाज करते हैं. आगे कभी काम आएगा.”

मेरे पति ने आगे हाथ बढ़ाया, और मेरा हाथ पकड़ खिंच कर लेटने को कहा. मैं भी वैसे चाहती थी पीठ की मसाज हो जाये तो मजा आ जाये पर भाव नहीं खाती तो पति को अहसास कैसे दिलाती कि मैं पतिव्रता हूँ.

मैं लेटने वाली थी कि डीपू ने रोका.

डीपू: “तुम्हारा बटन वाला शर्ट हैं तो ऊपर आसानी से खिसकेगा नहीं. हो सके तो बटन खोल कर शर्ट ढीला कर दो.

मैंने भोली बनने का नाटक करते हुए पूछा “एक बटन खोल दूं?”

पायल : “अरे सारे बटन खोल दो, वैसे भी उलटी ही तो लेटना हैं. इतना क्या शर्माती हो तुम”.

मैं शर्ट के नीचे के सिर्फ दो बटन खोल कर लेट गयी. पर पायल के टोकने पर मैंने हाथ नीचे डाल कर बाकी के दो बटन भी खोल कर शर्ट नीचे से पूरा खोल दिया. अब मेरे मम्मे बिना कपड़ो के नीचे दबे थे.

दोनों मर्द अब एक ही बिस्तर पर एक दूसरे की बीवियों की नंगी पीठ और कमर की मसाज कर रहे थे.

थोड़ी देर बाद पायल बोली “थोड़ा ओर जोर लगाओ अशोक, दर्द पूरा नहीं जा रहा”.

डीपू: “अशोक एक काम करो, पायल की जांघो पर बैठ कर पीठ की मसाज करो, ज्यादा अच्छे से जोर लगेगा”.

अशोक: “मगर पायल मेरा वजन सहन कर पाएगी?”

डीपू: “अरे जांघो में वैसे भी ज्यादा जान होती हैं. पायल हट्टी कट्टी हैं. वैसे प्रतिमा जैसी दुबली पतली भी जांघो पर वजन सह सकती हैं.”

अशोक: “तुम पायल पर बैठ कर बताओ, किस जगह, कैसे बैठना हैं, कि उसको वजन ना लगे”.

पायल: “मुझे छूना भी मत, आज के दिन की कसम हैं.”

अशोक: “अरे तुम प्रतिमा पर बैठ कर बताओ”.

डीपू अब मेरी जांघो पर आकर बैठ बताने लगा कि अशोक को क्या करना हैं.

अशोक बताये अनुसार पायल की जांघो पर बैठ जाता है. पायल और मुझे दोनों को जांघो के दबने की मसाज से बहुत सुकून मिला.

मैंने डीपू के नरम पड़े लंड को अपनी गांड पर महसूस किया.

पायल :”अरे तेल के साथ मसाज करो, हाथ ओर अच्छे से चलेंगे”.

डीपू मेरे ऊपर से उतर कर तेल ले आया और अशोक को थमा दिया.

डीपू: “पायल, इस तेल के दाग तुम्हारे नए टैंक टॉप को लग जायेंगे, इसलिए पहले उसे उतार दो.”

पायल: “मैं लेटी हुई हूँ, तुम उतार दो.”

डीपू : “मुझे तो कसम हैं न, तुम्हे हाथ नहीं लगा सकता.”

पायल: “मैंने तुम्हे नहीं, अशोक को बोला हैं, समझे.”

अशोक थोड़ा झिझका और मेरी तरफ देखने लगा. पायल ने मेरी तरफ वाला शरीर का हिस्सा थोड़ा ऊपर उठाया. मैंने ही अपना हाथ लंबा करते हुए उसके टॉप को उसके मम्मे से ऊपर कर दिया.

इससे उसका एक मोटा गोरा मम्मा बाहर आ गया. पहली बार उसका मम्मा मैंने इतने करीब से देखा. जरूर बाकी दोनों लोगो ने भी देख ही लिया होगा.

मैंने उसका टॉप उस तरफ से उठा कर उसके सर से निकाल दिया. पायल ने दूसरी तरफ से भी अपना शरीर ऊपर उठाया तो अशोक ने आगे झुकते हुए उसके दूसरे हाथ से भी टॉप निकाल दिया.

अशोक को जरूर दूसरा मम्मा भी दिखा होगा. उसने टॉप बिस्तर के साइड में रख दिया. पायल ने मुंह मेरी तरफ घुमाया, मैं अब भी उसकी बेशर्मी पर उसे घूर रही थी.

पायल: “तुम क्या देख रही हो, निकालो ना अपनी शर्ट, तुम्हे तेल से मालिश नहीं करवानी क्या?”

मैं: “मेरी जितनी मालिश हुई काफी हैं, मुझे तेल नहीं लगवाना.”

पायल: “अरे ऐसे कैसे, चलो उतारो इसे.”

ये कहते हुए उसने लेटे लेटे ही अपना हाथ लम्बा कर मेरी शर्ट का कालर पकड़ मेरे एक कंधे से नीचे उतार दिया. उस तरफ से मेरी पीठ और कन्धा थोड़ा बहुत नंगा हो गया. डीपू ने उसको रोका.

डीपू : “ये क्या खींचा तानी कर रहे हो तुम. चलो छोडो शर्ट.”

ये कहते हुए डीपू ने मेरा कालर पकड़ा, मुझे लगा वो फिर से सीधा कर रहा होगा पर उसने दोनों तरफ से मेरा शर्ट नीचे खिसकाना शुरू कर दिया और मैं उसको रुकने को कहने लगी, पर तब तक उसने मेरा पूरा शर्ट निकाल कर बिस्तर के साइड में रख दिया. मैं भी अब पायल की तरह टॉपलेस उल्टी बिस्तर पर लेटी थी.

अशोक ने पायल की पीठ पर तेल डाला और तेल डीपू को पास किया. उसने भी तेल की बुँदे मेरी पीठ पर डाली.

वो शायद स्पेशल मालिश का तेल था तो उसकी बूंदें पड़ते ही ऐसा लगा जैसे आइस क्यूब रख दी हो. दोनों मर्द अब पीठ और कमर की तेल मालिश करने लगे.

मालिश के वक्त मजे में पायल इस तरह चीख रही थी जैसे मालिश नहीं करवा रही, चुदवा रही हो. “आ अ ह हा हा, जोर से करो अशोक, ओर जोर से , मजा आ रहा हैं. आ हा, ऐसे , वाह, आ हा हा , उम्म उम्म , आ हा हा”.

उसकी आवाजे सुन कर वहा का माहौल गरम होने लगा था, क्यों कि डीपू का नरम पड़ा लंड अब कड़क हो चूका था और उसके आगे पीछे होने के साथ ही मेरी गांड में कपड़ो सहित घुस रहा था और मुझे चोद रहा था.

मुझे पूरा यकीन था पायल का भी यही हाल होगा. उसकी तो गांड की दरार भी चौड़ी थी तो वो ओर भी अच्छे से चुदवा रही होगी.

दोनों पति एक दूसरे की पत्नियों को पीठ पर मसाज करने के साथ साथ कपड़ों में ही उनकी गांड चोद रहे थे. मेरी सिसकियों और पायल की चीखो से कमरे का माहौल गरम हो चूका था.

बहुत देर तक ऐसे ही गरमा गरम मसाज चलती रही फिर वो दोनों मर्द रुक गए. हम दोनों बीविया लेटी रही क्योंकि हमारे कपड़े हमसे दूर थे. उन दोनों ने हमारे कपडे उठा के हमारे पास रखे.

डीपू : “हम लोग तेल के चिकने हाथ धोने बाथरूम में जा रहे हैं. तुम दोनों कपडे पहन लो तो आवाज लगा देना हम बाहर आ जायेंगे.”

उनके बाथरूम में जाते ही हम दोनों उठी और अपने कपडे पहनने लगी.

पायल : “देखो, तुम्हारी चुचीयां कैसे तनी हुई हैं. लगता हैं तुमको बहुत मजा आया हैं. आज तो तुम अशोक को छोड़ोगी नहीं.”

मैं: “कैसी गन्दी गन्दी बातें करती हो तुम. थोड़े बहुत तो संस्कार रखों. वो लोग अंदर से सुन लेंगे तो.”

पायल: “अरे हम सब शादी शुदा हैं, समझदार हैं. ऐसी बातें हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा?”

तभी बाथरूम से आवाज आयी कि क्या बाहर आ सकते हैं. हम लोग कपडे पहन चुके थे तो हां बोल दिया.

पायल: “तुम क्या संस्कारो की पीपड़ी बजा रही हो. संस्कार सिर्फ किताबों और टी वी पर दिखाते हैं. असल ज़िन्दगी में ऐसी परिस्थितियां आती हैं कि सारे संस्कार धरे रह जाते हैं.”

अशोक: “क्या सीरियस डिस्कशन चल रहा हैं? संस्कारो की क्या बातें हो रही हैं भाई?”

पायल: “मैं प्रतिमा को समझाने की कोशिश कर रही थी कि आजकल संस्कार सिर्फ बोलने की चीज़ हैं, असल ज़िन्दगी में लोग निभा नहीं पाते हैं”.

डीपू: “ये तो पर्सन तो पर्सन डिपेंड करता हैं और किस तरह की परिस्थितियां हैं. सब इच्छाशक्ति पर निर्भर हैं.”

अशोक: “बात तो सही हैं.”

मैं: “इंसान चाहे तो, कैसी भी परिस्थितियां हो, संस्कार निभा सकता हैं.”

पायल: “मैं नहीं मानती. मैं किसी को भी चेलेंज कर सकती हूँ.”

अशोक : “क्या बात हैं, माहौल गरम हैं. चेलेंज की बात हो रही हैं.”

पायल: “बोलो, संस्कार टेस्ट चेलेंज मंजूर हो तो”

मैं: “मुझे चेलेंज मंजूर हैं पर करना क्या हैं?”

पायल: “बहुत कठिन हैं, तुमसे नहीं हो पायेगा.”

मैं: “चेलेंज कभी आसान थोड़े ही होता हैं, तुम बताओ.”

पायल: “रहने दो, मुझे खुद को बताते हुए थोड़ी शर्म आ रही हैं.”

डीपू: “तुम लड़किया डरपोक होती हो.”

मैं: “एक्सक्यूज़ मी, क्या कहा तुमने?”

डीपू :”दिल पर मत लो, मैं तो बस ये कह रहा था कि लड़किया कुछ भी बोलने या कोई भी स्टेप लेने से पहले बहुत ज्यादा ही सोचती हैं”.

पायल : “अच्छा ठीक हैं, मैं थोड़ा अलग तरह से बताती हूँ. दो लेवल होंगे इस चेलेंज के. पहला थोड़ा कम कठिन, और दूसरा ज्यादा कठिन. दोनों लेवल में मसाज होगी और लड़की को कोशिश करनी हैं कि वो अपनी इच्छाशक्ति से अपनी शरीर की भूख या जरुरत को मन के नियंत्रण में रखें.”

अशोक: “साउंडस इंट्रेस्टिंग.”

मैं: “मसाज !! पर ये तो हम करवा ही चुके हैं, अब क्या बचा हैं.”

पायल: “सुनो ये वो वाली मसाज नहीं. पहले लेवल पर छाती की मसाज होगी. और दूसरे में योनी की.”

चारो चुप हो गए और थोड़ी देर के लिए एक सन्नाटा सा छा गया.

पायल: “हम दोनों ये चेलेंज लेंगे. देखते हैं कौन पूरा कर पाता हैं.”

मैं: “कैसा बेशर्म चेलेंज हैं.”

पायल: “मैंने पहले ही बोला था, चेलेंज कठिन होगा. हवाइयाँ उड़ गयी ना?”

मैं: “ठीक हैं, दोनों मर्दो को बाहर भेज दो, फिर तुम्हे जो मसाज देनी हो दे दो मुझे , मैं तैयार हूँ.”

पायल: “फिर चेलेंज कहा रहा. अपने पति के सामने ही मसाज लेना हैं और वो भी दूसरे किसी मर्द से. जैसा अभी थोड़ी देर पहले हो रहा था”

डीपू: “पायल, ये अब ज्यादा हो रहा हैं.”

अशोक: “सही कहा, नार्मल मसाज के लिए ही वो मना बोल रही थी तो ये तो बहुत मुश्किल हैं.”

पायल: “जिसको चेलेंज लेना हैं, उसको बोलने दो. बोलो प्रतिमा, चेलेंज मंजूर हैं?”

मेरे मुँह पे तो ताला लग गया था. ये सब लोग कही मिलकर मुझे फंसा तो नहीं रहे थे. जरूर इसमें इन तीनो की साजिश हैं. मैं अपने पति की मौजूदगी में कैसे अपने नाजुक अंग किसी अजनबी के सामने खोल दूँ. मैं तो शर्म से पानी में ही डूब मरू.

मैं: “कुछ ओर चेलेंज होता तो मैं ले लेती, पर ये नंगी होकर अपने अंग ओरो को दिखाना और दबवाना कैसा चेलेंज हैं.”

पायल: “चेलेंज मुश्किल हैं तो क्या हुआ, संस्कारो को संभालना भी कौनसा आसान हैं. तुम मना बोल रही हो तो इसका मतलब मैं ये समझू कि तुम फ़ैल रही.”

मैं: “तुम्हे जो मानना हैं वो मान लो, पर मैं ये टेस्ट नही दे सकती हैं.”

पायल: “मैंने ये चेलेंज दिया हैं तो शायद मुझे पहले ये टेस्ट देना होगा. कम से कम टेस्ट के लेवल वन की तो कोशिश मैं कर ही सकती हूँ.”

अशोक: “पायल ये तुम्हारे अकेले का फैसला नहीं हो सकता. तुम्हारे खुद के बाद तुम्हे अपने पति से पूछना होगा कि उसे कोई आपत्ति तो नहीं. फिर मुझे, और मेरे इसमें शामिल होने के लिए मुझे मेरी पत्नी की इजाजत लेनी होगी.”

डीपू: “अगर पायल ने फैसला कर लिया हैं तो मैं उसको रोकूंगा नहीं. मैं ही पहले कह रहा था कि लड़कियों में हिम्मत नहीं होती. अब इसने हिम्मत की हैं तो मैं रोड़ा नहीं बनूँगा. मेरी तरफ से हां हैं.”

अशोक: “अगर पायल के पति को कोई आपत्ति नहीं तो मैं भी तैयार हूँ, अगर प्रतिमा को कोई ऐतराज ना हो तो.”

मैंने तो दोपहर में ही उनको इससे काफी ज्यादा करते हुए देख लिया था, तो मेरे लिए तो उनकी ये मसाज कुछ भी नहीं थी. वैसे भी मेरी वजह से उनका ये मजा क्यों छूटे.

दोपहर में तो मैं अपने पति को डीपू के कहर से बचा रही थी, पर अब वो खुद ही तैयार था अपनी पत्नी को सौपने के लिए. इसलिए मैंने भी इजाजत दे दी. हम सब लोग बिस्तर पर आकर बैठ गए.

पायल: “एक टाइम निर्धारित कर लेते हैं. अगर इस समय अवधि तक मैं अपने आप पर नियंत्रण रख पायी तो इसका मतलब ये लेवल पार कर लिया.”

हम सब ने मिलकर 10 मिनट का समय निर्धारित किया.

पायल लेट गयी, और अशोक उसकी बगल में बैठ गए. मैं और डीपू पास में बैठे देखने लगे. अशोक ने आगे बढ़ कर पायल का टैंक टॉप ऊपर उठाना शुरू किया.

सीने से टॉप हटते ही उसके बड़े गोल मम्मे और उन पर गहरी गुलाबी लम्बी मोटी निप्पल थी. वहा का मौसम एकदम बदल गया.

किसी ने सोचा भी नहीं था कि हम यहाँ पहुंच जायेंगे कि दुसरो के सामने कोई नंगा हो अपने बदन का ये हिस्सा दिखायेगा.

डीपू को टाइमर की जिम्मेदारी दी गयी. जैसे ही अशोक ने पायल के मम्मो को छुआ टाइमर शुरू कर दिया गया. अशोक ने अपने हाथों से पायल के दोनों मम्मो को दबोचा और पायल की एक आह निकली.

अशोक: “तुम्हे दर्द तो नहीं हो रहा ना? इतना जोर से ठीक हैं ना?”

पायल: “दर्द नहीं हो रहा. दर्द होगा तभी तो चेलेंज पूरा होगा.”

अशोक अब उसके मम्मो को दबा कर थोड़ा खींचता और फिर छोड़ता. धीर धीरे वो अपना बल बढ़ा रहा था और ओर भी ज्यादा जोर से दबा कर छोड़ रहा था. जिससे पायल की उह आउच चालू हो गयी.

पांच मिनट तक ऐसे ही चलता रहा और अब वो ओर भी तड़पने लगी. वो अब आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह की लंबी रट लगा रही थी.

पायल के मम्मे काफी बड़े थे और अशोक के हाथों में नहीं समा रहे थे. अशोक ने अपने दोनों हाथों से एक साथ उसके एक मम्मे को घेरा और दबा दिया. उसका निप्पल फुल कर ऊपर आ गया और निप्पल का ऊपरी हिस्सा और भी चौड़ा हो गया.

उसने पायल के मम्मे को ऊपर की तरफ उठा खींचना शुरू किया जिससे दर्द के मारे पायल चीख पड़ी. जैसे ही उसने मम्मे को छोड़ा वो नीचे जाकर पूरा फेल गया और दो बार ऊपर नीचे उछला. अशोक ने उसके दूसरे मम्मे के साथ भी यही किया.

मैने दोनों मर्दो को देखा, उनका लंड कपड़ो में ही खड़ा हो चूका था. आखिर के दो मिनटों में वो ऐसे तड़प रही थी जैसे मसाज ऊपर की नहीं, नीचे की करवा रही हो.

एक वक्त ऐसा लगने लगा जैसे वो अब झड़ ही जायेगी कि तभी डीपू का लगाया टाइमर बोल गया और अशोक ने पायल को छोड़ दिया.

पायल के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी. उसने चेलेंज पार कर लिया था. वह उठ कर बैठ गयी और टैंक टॉप नीचे कर अपने मम्मे ढक दिए. दोनों मर्द ताली बजा उसकी विजय का जश्न मना रहे थे तो मुझे भी ताली बजानी पड़ी.

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डीपू: “माय गॉड, बहुत हॉट मसाज थी. देख कर मेरी हालत ख़राब हो गयी तो तुम्हारा क्या हुआ होगा. हैट्स ऑफ पायल.”

अशोक: “वाकई इसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए. बधाई हो पायल.”

पायल: “थैंक यू, मेरे से ज्यादा सहनशक्ति प्रतिमा के पास हैं. क्या बोलती हो प्रतिमा, तुम लोगी ये चेलेंज?”

मैं: “तुमने अच्छे से हैंडल किया पर मुझमे इतनी हिम्मत नहीं कि सबके सामने अपने कपडे खोल सकू.”

पायल: “तुम्हे एक छूट देते हैं, तुम अपने सीने पे एक कपडा ढक कर रखना.”

मैं: “उससे क्या होगा? मेरे सीने को तो कोई छुएगा ही ना?”

पायल: “छूट दे दी फिर भी मंजूर नहीं. तुम दरअसल डरती हो कि तुम चेलेंज हार जाओगी.”

मैं: “नहीं ऐसी बात नहीं हैं. मैं अंदर से बहुत मजबूत हूँ. मुझे एक बार बस अशोक से पूछना हैं.”

पायल: “चलो एक बार फिर से सभी की हामी पूछ लेते हैं. सबसे पहले प्रतिमा, तुम्हे चेलेंज लेना हैं तो सबसे पहले तुम बताओ. अशोक से हम बाद में पूछ लेंगे. अगर उसने ना बोला तो वैसे भी अपने आप पूरा ना हो ही जायेगा.”

मैं अब एक संकट में फंस गयी. मैं ये निर्णय पति पर छोड़ना चाहती थी ताकि मुझ पर दोष ना आये.

मैं: “मैं कभी हार नहीं मानती, सिर्फ इस कारण से मेरी तरफ से हां हैं”

पायल: “अशोक तुम बताओ, हां या ना?”

अशोक: “मैंने अभी अभी तुम्हारे साथ किया हैं तो अब अपने पर आयी हैं तो कैसे मना बोल दूँ. मेरी तरफ से प्रतिमा को इजाजत हैं ”

डीपू: “मैं मसाज देने को तैयार हूँ.”

पायल: “मैं तो पहले से तैयार हूँ. चलो शुरू करते हैं. अशोक तुम टाइमर सम्भालो.”

मैं अब बिस्तर पर लेट गयी और डीपू मेरी कमर के पास बैठा था. मेरे सर के दोनों तरफ पायल और अशोक थे.

पायल को मैंने कपडा लाने को कहा जिससे मैं अपना सीना ढक सकू. वो एक पतली सफ़ेद पारदर्शी चुनरी ले आयी. मुझे उसकी नीयत समझ आ गयी पर डूबते को तिनके का सहारा.

पायल ने वो चुनरी मेरे सीने पर ओढ़ा दी. उसमें से मेरा गुलाबी स्लीप शर्ट आसानी से दिख रहा था. वो चुनरी ज्यादा कुछ छिपा नहीं पाएगी ये मुझे पता था.

मेरे हाथ पैर कांप रहे थे. मैंने अपने दोनों हाथ अपने पेट पर रख अपने शर्ट को दबा रखा था, ताकि डीपू शर्ट को सिर्फ ऊपर से ही खोले, पुरा न खोले.

पायल ने मेरा हाथ पकड़ लिया, दुसरा हाथ अशोक को पकड़ने को कहा. उन दोनों ने मेरे हाथ को मेरे कान के नजदीक ला बिस्तर पर दबा दिया. डीपू का हाथ मेरी शर्ट की तरफ बढ़ा और नीचे से एक बटन खोला.

पहले बटन के बाद दूसरे बटन के लिए उसको चुनरी में हाथ डालना पड़ा. आगे क्या होने वाला था ये सोच डर के मारे मेरा पेट धक् धक् करने लगा. चौथा बटन खुलते ही मेरे मम्मे बीच से थोड़े दिखने लगे.

डीपू ने अब मेरे शर्ट के खुले दोनों हिस्सों को दूर करते हुए साइड में कर दिया. मेरी सांस तो जैसे रुक ही गयी. उन दोनों ने मेरा हाथ अब छोड़ दिया क्यों कि शर्ट खुल चूका था.

डीपू ने अपने हाथों पर तेल लगाया. पति टाइमर के साथ तैयार थे और तीन.. दो.. एक.. गो के साथ टाइमर चला दिया.

अब डीपू ने अपने दोनों हाथ सीधे रखते हुए चुनरी में घुसा कर हलके से मेरे मम्मो पर रख दबा दिया और हाथ ऊपर नीचे मज़ाक करने लगा.

उसको पता था कितना जोर लगाना हैं और कितना रगड़ना हैं. मेरी थोड़ी देर में ही सिसकियाँ छूटने लगी.

इतनी उत्तेजना के मारे तो मेरे सीने और पेट पर रोंगटे खड़े हो गए थे और चूंचीया खड़ी हो गयी थी. मम्मे फूल कर बड़े हो गए थे जो कि डीपू के हाथ में पुरे नहीं आ पा रहे थे. वो अब ऊपर नीचे, दाए बाए से हाथ लाते हुए मम्मो को दबोच रहा था.

इस हलचल से चुनरी भी थोड़ी हिल चुकी थी. मैं जितना हो सके अपने मुँह को बंद रखे आवाज दबा रही थी. फिर भी रह रह कर मेरे संघर्ष की आहें निकल रही थी.

पांच मिनट तक वो ऐसे ही मेरे मम्मो का मान मर्दन करता रहा. मैं जैसे तैसे सब सहन कर रही थी, पर रह रह कर मेरी सिसकिया जरूर निकल रही थी.

शायद पति के साथ होने से मैं डर के मारे उतना आनंद नहीं उठा पा रही थी. ये मेरे लिए अच्छा भी था. ज्यादा मजे लेती तो पति मेरे बारे में क्या सोचते.

पायल : “डीपू क्या कर रहे हो, मर्द बनो. कम से कम अशोक ने किया उतना अच्छा तो करो.”

डीपू की मर्दानगी को चोट पहुंची और उसने मेरे मम्मे ओर भी ताकत से दबोच लिए जैसे आम को निचोड़ कर जूस निकाल रहा हो.

उसके आघात को कम करने के लिए मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी कलाइयां पकड़ ली. पायल ने अशोक को बोला और दोनों ने फिर से मेरा हाथ पकड़ कर कान के पास ला दबा दिया.

मैं अब तड़पने लगी और तड़प कर चीखने लगी. पायल को मेरी चीखें सुन मजा आने लगा और वो डीपू को उत्साहित करने लगी.

पायल ने अब एक ओर बदमाशी की और अपने दूसरे हाथ से मेरे सीने पर रखी चुनरी निकाल फेंकी.

अब वो लोग मेरे मम्मो को निचुड़ते हुए साफ़ साफ़ देख पा रहे थे.

डीपू अब मेरी जांघो पर आकर बैठ गया. उसका कड़क लंड मेरी चूत को चुभ रहा था.

वो जानबूझ कर आगे पीछे हो, कपड़ो सहित मेरी चूत को ज्यादा चोद रहा था, जब कि उसको सिर्फ मेरे मम्मे दबाने थे. उससे बचने के लिए मैंने नाटक किया.

मैं: “डीपू धीरे करो, आउच मुझे बहुत दर्द हो रहा हैं. तुम बहुत जोर से दबा रहे हो. आई, उफ्फ माँ ”

डर के मारे डीपू ने अपनी पकड़ ढीली कर दी नीचे से लंड रगड़ना भी भूल गया.

पति ने बताया कि अब सिर्फ दो मिनट बचे हैं.

डीपू ने अब नई चाल चली. उसने अपना पुराना अनुभव इस्तेमाल किया और मेरे मम्मे छोड़ दिए और अपने दोनों हाथों की एक एक ऊँगली से मेरे तने हुए निप्पलों को दाए से बाए और बाए से दाए ठोकर मारने लगा, जैसे बिजली का स्विच बंद चालू कर रहा हो.

उसने अब ठोकर मारने की गति बढ़ा दी. मेरे निप्पल अब लगातार दाए बाए हो कर मुझे गुदगुदी कर रहे थे.

इससे मेरी हालत ओर ख़राब हो गयी. मेरे निप्पल फूल कर ओर मोटे हो गये. उसकी बाकी की मुड़ी हुई उंगलिया जब भी मेरे मम्मो के उभार को छूती मुझे अहसास होता कि मेरे मम्मो के उभार कुछ ज्यादा ही कठोर हो गए थे.

इतना कठोर कि वहां से स्किन खींचने लगी थी. मेरे मम्मे छाती फाड़ कर बाहर आने को उतारू थे.

मेरी पैंटी काफी गीली हो चुकी थी. मुझे लगा अब तो मुझे झड़ने से कोई नहीं रोक सकता, और पायल के सामने मैं चेलेंज हार जाउंगी.

मेरे हाथ उन दोनों ने दबा रखे थे और पाँव पर डीपू बैठा था. मैं बाकी बचे शरीर को दाए बाये हिलाते हुए तड़प रही थी.

मेरे मुँह से लगातार शब्द झरने की तरह बह रहे थे. “ह ह ह, आ ह, आ अ ह, हम्म , हा हा, मत करो, प्लीजजज, उप्स, अहा , माय गॉड”.

अचानक पति के मोबाइल का स्टॉप टाइमर बज उठा, और डीपू को मुझे छोड़ना पड़ा. उन दोनों ने मेरा हाथ भी छोड़ दिया.

पायल: “क्या यार, इसका होने ही वाला था. बस दस पंद्रह सेकण्ड्स ओर मिल जाते तो मैं जीत जाती. पर तुमने बहुत अच्छा नियंत्रण किया, क्यों कि डीपू ये काम बहुत अच्छे से करता हैं.”

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