हैलो दोस्तों, मेरा नाम दिव्या कुमारी है। मेरी उमर 26 साल है, लेकिन मैं दिखने में 20 साल की लगती हूं। मेरे स्तनों का साइज़ 36″ है, कमर का 24″ है, और गांड का 35″। मेरी इस कहानी में आपको बताऊंगी कि कैसे उस एक हादसे ने मेरे अंदर की रंडी को जगा दिया।
बात करीब 5 साल पहले की है। मेरी शादी को 2 साल पूरे हो गए थे। मेरे पति का नाम शेखर है। उनका बहुत बड़ा बिज़नेस है, और हम बहुत अमीर घराने से तालुक रखते है। मेरे पति ज्यादा तर काम से बाहर ही होते है, जिसके कारन मैं कई महीनों तक घर में अकेली रहती हूं। वैसे मेरे पति चुदाई में तो काफी अच्छे है, मगर बहुत ही कम बार मुझे चोदते है। यानि जब वो घर पर होते है तभी। लेकिन जो भी हो, मैं अपने पति से प्यार करती थी, और उनके आने तक उंगलियों से काम चला लेती थी।
हमारे बंगले के पड़ोस के बंगले में एक 60 साल के बूढ़े बुजुर्ग रहते थे। उनसे हमारे अच्छे संबंध थे, और वो मेरे पिता समान थे। वो भले ही 60 साल के थे, मगर दिखने में और तन्दरूस्ती में वो 40 साल के मर्द को भी हरा दे। उन्होंने मुझे एक बार कहा था कि वो जवानी में कुश्ती खेलते थे, और अब भी वो उसी तरह का खाना और व्यायाम करते थे। उनका नाम राजेश्वर सिंग है।
एक रात मैं और मेरे पति सोए हुए थे, और तभी हमने कुछ धमाके की आवाज़ सुनी। हम जल्दी से उठ गए, और बाल्कनी से देखा तो राजेश्वर जी का घर आग की लपटों में घिरा हुआ था। राजेश्वर जी बाहर खड़े फायर ब्रिगेड को फ़ोन लगा रहे थे। कुछ ही समय में फ़ायर ब्रिगेड आ गई, और आग को बुझाने में जुट गई।
हम दोनों भी नीचे राजेश्वर जी का हाल जानने चले गए। नीचे जाकर देखा तो राजेश्वर जी फूट-फूट कर रो रहे थे। मेरे पति ने उन्हें थोड़ी तसल्ली दी तो वो थोड़े शांत हो गए और बोले, “मेरा घर जल गया, मेरी यादें राख हो गई, मेरी सब चीजे जल गई।” ये कह कर वो फिर रोने लग गए। फिर मेरे पति ने उन्हें गले लगाया और बोले, “आप हमारे घर चलिये”। आग बुझने में फ़ायर ब्रिगेड को 5 बज गए, और हम वहीं खड़े रहे।
अगले दिन ये हादसे की खबर पूरे शहर में फैल गई। राजेश्वर जी अब भी उदास थे। हमने उन्हें हमारे घर में रहने के लिए बोला जब तक उनका घर बनके तैयार नहीं हो जाता। सुबह नाश्ता करते वक्त मेरे पति ने राजेश्वर जी से पुछा कि वो कुछ घर बनाने में मदद कर सकते थे क्या। तो राजेश्वर जी ने कहा, “अरे नहीं बेटा, तुमने मुझे रहने के लिये अपने घर में जगह दी बस वो ही काफी है।”
तो मैं बोली, “घर फिर से बनाने में बहुत खर्चा भी होगा ना?” उस पर राजेश्वर जी ने कहा, “अरे पैसे कि चिन्ता नहीं है, मेरा इतना बड़ा कारोबार है, मुझे पैसे की कमी नहीं है। बस दुख इस बात का है कि मेरी यादे जुड़ी थी उस घर से।” ये कह कर उनकी आंखे नम हो गई। तो मैंने उन्हें गले लगाया और शांत किया।
नाश्ता होने के बाद हम सो गए। राजेश्वर जी नीचे गेस्ट रुम में और हम दोनों उपर हमारे कमरे में सो गए। एक हफ्ते बाद उनके घर का काम शुरु हुआ, और मेरे पति को जरुरी काम से 2 महीनों के लिए अमेरिका जाना पड़ा। हम दोनों यानि राजेश्वर जी और मैं अकेले ही घर में रह गए। पहले दो-तीन दिन बिल्कुल सामान्य थे।
फिर एक रात राजेश्वर जी लिविंग रूम में टीवी देख रहे थे। हमारा खाना खा कर हो गया था। मुझे सोने से पहले नहाने की आदत थी, तो मैं हर रात की तरह इस रात भी नहा कर बाहर आई। लेकिन मैंने सोचा कि थोड़ी देर टीवी देखा जाए। तो मैं नीचे गई। मेरे बाल भीगे हुए थे, और मैंने नाइट गाउन पहना हुआ था, जिसके अंदर मैंने कुछ नहीं पहना था, और मेरी फिगर उसमें से साफ झलक रही थी।
मैं राजेश्वर जी के बगल के सोफा पे जाकर बैठ गई। मुझे देख राजेश्वर जी थोड़े अचम्भित हो गए। हम दोनों बातें कर रहे थे, और उनका ध्यान रह-रह कर मेरी खुली टांगो पर जा रहा था। कुछ देर बाद मैंने देखा कि उनका लंड एक-दम खड़ा हो गया था। मेरी नज़र वहां गई और फिर वहां से हट ही नहीं रही थी। मेरी नज़र उनके लंड पर थी, ये उन्होंने देख लिया और बोले, “अरे बेटी, मुझे माफ कर दो। मेरी पत्नी को मरे 20 साल हो गए है, इसलिये मेरी ये अवस्था है। मुझे माफ कर दो।”
मैंने कहा, “अरे नहीं, में समझ सकती हूं।” तभी टीवी पर कंडोम का ऐड आया, और माहौल और भी अजीब हो गया।
राजेश्वर जी ने कहा, “बेटी तुम टीवी देखो, मैं अपने कमरे में सो जाता हूं।” यह कह कर वो उठे तो उनका मोटा लम्बा लंड उनकी लुंगी से बाहर फुदक गया। उनका बड़ा लंड मेरे चहरे के सामने ही था। उन्होंने झट से लंड लुंगी के अंदर डाला, और माफी मांगने लगे। में उनका लंड देख कर गरम हो गई थी। मैंने कहा “क्या आप मुझे अपना लंड फिरसे दिखा सकते है?” तो वो बोले, “देखो बेटी ये गलत है।”
तो मैंने कहा, “बस मुझे सिर्फ देखना है”। तो वो झिझकते हुए अपना लंड बाहर निकालने लगे। उनका लंड 8 इंच लम्बा था, और मोटा भी था। लंड देख कर मेरी चूत गीली हो गई, और मेरा हाथ अपने आप उनके लंड को हिलाने लगा। कुछ पल के लिए राजेश्वर जी भी मजा ले रहे थे। फिर होश आने के बाद वो पीछे हो गए। मैं इतनी गरम हो गई थी कि उनका लंड फिर से हाथ में ले लिया। अब वो भी ज्यादा विरोध नहीं कर रहे थे।
राजेश्वर जी बोले, “बुरा ना मानो तो एक बात बोलूं?” मैं उनका लंड हिलाने में मग्न थी, तो मैंने हां में सिर हिलाया। तो वो बोले, “भीगे बालों में तुम बहुत सुंदर लग रही हो।” ये सुन कर मैं खुश हो गई, और उन्हें देख मुस्कुराने लगी।
कुछ पल हिलाने के बाद मैंने उनका लंड धीरे से अपने होठों से चूम लिया। वो बोले, “बेटी अब और ना तड़पाओ इस उम्र में।” ये सुनते ही मैं झट से लंड का टोपा मुंह में लेकर चूसने लगी। राजेश्वर जी से और रहा नहीं गया। उन्होंने मेरा सर पकड़ा और एक ही झटके में अपना पूरा लंड मेरे मुंह में भर डाला, और मेरे मुंह को जोर-जोर से चोदने लगे।
मेरी तो मानो सांस ही अटक गई थी। बस बीच-बीच में सांस लेने के लिए अपना लंड मेरे मुंह से बाहर निकालते, और फिर मुंह चोदने लगते। ऐसा करीब 15 मिनट चला, और उसके बाद एक जोर के झटके से अपना सारा पानी मेरे मुंह में छोड़ दिया। उन्होंने अपना लंड मेरे मुंह में रख कर मेरा सिर दबा कर रख दिया, और जब तक मेरी सांस फूल नहीं जाती, तब तक वैसे ही दबाए रखा।
जब उन्होने लंड बाहर निकाला, तब मैं जोर-जोर से हांफने लगी, और उनका पानी पी गई। मैंने देखा कि राजेश्वर जी का लंड अब भी खड़ा ही था। मैंने जल्दी से अपने कपड़े निकाल दिये, और नंगी हो कर सोफे पर अपने पैर फैला कर लेट गई। फिर चूत में उंगली डाल कर उन्हें इशारे करने लगी।
वो भी बिना किसी झिझक के मेरी चूत के सामने खड़े होकर मेरी चूत को देख रहे थे। राजेश्वर जी ने अपना लंड मेरी चूत के उपर थोड़ा रगड़ा, तो मैं पूरी तरह से हवस की दुनिया में खो गई। मैंने कहा-
मैं: अब आप मुझे मत तड़पाओ, मेरी चूत आपके लंड की भीख मांग रही है।
यह सुन कर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में थोडा अंदर डाला, और मेरी सिस्कारी निकल गई आह्ह। उन्होंने अपना लंड फिरसे बाहर निकाला और एक ही जोर के झटके से अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया। झटका इतना जोर का था कि मैं वहीं झड़ गई और चीखने लगी आआऊऊईई अरे मर गई आआ।
कुछ देर बाद दर्द थोड़ा कम हुआ, तो उन्होंने फिरसे धक्के लगाने शुरु कर दिये, और मैं भी मजे से उनसे चुदने लगी आ आ आ करके सिस्करियां लेने लगी। कुछ देर बाद उनके धक्के तेज हो गए, और में फिरसे झड़ने की कगार पे थी। उन्होंने एक जोर का झटका लगाया, और हम दोनों एक साथ झड़ गए। उनके लंड का सारा पानी मेरी चूत में बह गया।
वो मेरे उपर ही लेट गए, और कुछ पल बाद वो उठ गए, और अपना लंड मेरी चूत में से बाहर निकाला। मैं देख कर हैरान थी, कि उनका लंड अब भी शांत नहीं हुआ था। राजेश्वर जी ने मुझे बड़ी ही आसानी से गोद में उठा लिया, और अपने कमरे में लेकर गए। कमरे में ले जाने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर पर ऐसे फेंक दिया कि मानो मैं कोई छोटी गुड़िया थी। अब वो भी वासना से भर चुके थे।
वो बिस्तर पर चढ़ गए, और मेरे पैरों को फैलाया, और मेरी चूत में उंगली करने लगे। बाद में वो मेरी चूत को चाटने लगे, और मैं उउउम-उउउम करके मजा ले रही थी। कुछ देर बाद मैं फिरसे झड़ने वाली थी, तो मैंने उनका सर मेरी चूत में दबा के रखा, और मेरे पैर भी बंद कर दिये। फिर मैं इतनी जोर से झड़ी कि मेरा पूरा शरीर ढीला पड़ गया, और मैं कपकपाने लगी।
राजेश्वर जी उठ गए और अपना लंड चूत पर सेट किया, और धक्के देने लगे। करीब आधे घंटे बाद वो फिर मेरी चूत में झड गए। हमने उस रात सुबह 4 बजे तक सेक्स किया, और हम दोनों थकने के बाद खुद बा खुद सो गए। सुबह के 9:30 को मेरी आंख खुली। मैं नींद से उठी तो देखा कि राजेश्वर जी का लंड मेरे चेहरे के सामने था, और मेरी चूत उनके चेहरे के।
मैंने पिछली रात के बारे में सोचा कि मैंने कितनी बड़ी गलती कर दी और मैंने अपने पति को धोखा दे दिया। मेरे आंखों में आंसू आ गए। मैं बाथरूम जाने के लिए उठी तो लडखड़ा कर गिर गई। मेरे शरीर में जरा भी जान नहीं बची थी। मुझसे चला भी नहीं जा रहा था। मैं रेंग-रेंग कर रूम से बाहर निकल आई, और सीड़ियों पर लड़खड़ाते हुए चढ़ने लगी।
मैं बाथरुम में गई, और जैसे-तैसे दीवार के सहारे खड़े हो गई, और अपने आप को शीशे में देखा तो मेरे पूरे चेहरे और स्थानों पर राजेश्वर जी का वीर्य सूख गया था। मेरा पूरा बदन लाल हो गया था, और चूत भी सूझ गई थी। मैं अपने आप को इस तरह देख रोने लगी। बाथ टब में जब गरम पानी भर कर अंदर गई तो शरीर को सुकून महसूस हुआ।
मैंने अपनी आंखें बंद की तो पिछली रात की हर बात मेरे दिमाग से गुजरती, और मैं झट से अपनी आंखें खोल देती। मैं दो घंटे बाद बाथरूम से बाहर निकल गई, और मेरे कमरे में जाकर कपड़े पहनने लगी। अब मैं अपने कमरे में ही बैठ कर रो रही थी। थोड़ी देर बाद जब मैं शांत हुई तो नीचे चली गई। नीचे गई तो देखा कि कल रात को पहने हुए कपड़े फर्श पर थे।
करीब 12 बज गए थे, और राजेश्वर जी कहीं नज़र नहीं आए। मैंने उनके कमरे का दरवाजा देखा तो बंद था। मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला तो देखा कि राजेश्वर जी एक कोने में बैठ कर रो रहे थे। मैं अंदर गई तो वो मुझे देख कर बोले, “बेटी मुझे माफ कर दो। मुझसे गल्ती हो गई। मैं अभी घर छोड कर चला जाता हूं”। मैं कुछ नहीं बोली। फिर वो एक-दम से मेरे पैरों पर गिर पड़े और माफी मांगने लगे।
मैंने उन्हें खड़े होने के लिए कहा और बोली: बाहर जा कर बात करते है।
बाहर आकर वो मुझे बोले: देखो बेटी, मैं ये घर छोड़ कर चला जाता हूं।
मैं बोली: आप ऐसा मत किजीये। आप इस उम्र में कहा जाएंगे?”
मैंने उन्हें यहीं रुकने बोला और नाश्ता करने के बाद में बोली: दोष अपका नहीं है। कल रात पहल मैंने ही की।
वो बोले: बेटी लेकिन गलती मेरी भी उतनी ही है।
तो मैंने कहा: इस बात को यही मिटा देते है। ना ही आप कल रात टीवी देख रहे थे, और मैं भी बाथरुम से सीधा मेरे कमरे में सो गई। जो हुआ उसे भूल जाने की कोशिश करते है।
उन्होने हां में सिर हिलाया और बोले: ठीक है, मैं ऐसा ही करूंगा।
दोपहर को सोने के बाद मैं शाम को उठी तो देखा की राजेश्वर जी मेरे बगल में नहीं थे। मैं जल्दी से उठी और नंगी ही बाहर लिविंग रूम में गई। मैंने देखा की राजेश्वर जी किचन में चाय बना रहे थे।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे आप चाय भी बना लेते है। वाह पहलवान!” तो वो भी मुस्कुराने लगे और बोले, “वो सब छोड़ो, तुम अब भी नंगी क्यों हो?”
मैंने कहा, “क्या फरक पड़ता है? और वैसे भी मुझे नंगा रहने में अब मजा आ रहा है।” तो वो बोले, “तुम्हारे अंदर इतनी हवस भरी होगी, मुझे लगा नहीं था।” तो मैंने कहा, “सब आपके लंड का कमाल है।”
कुछ देर ऐसे ही बातें करने के बाद राजेश्वर जी ने मुझे पूछा, “क्या तुम सच में तुम्हारे पति आने तक मुझसे चुदना चाहती हो?” इस पर मैं बोली, “अरे हां बाबा, सच में। आप चिंता मत करो, हम दोनों मेरे पति आने तक खुब चुदाई करेंगे।”
फिर मैं किचन की स्लैब के उपर अपने पैर फैला कर बैठ गई और बोली, “अब चोदोगे नहीं?” दोस्तों मैं अब इस स्थिति में थी कि अगर मुझे कभी भी चोदने के लिये बोला जाए, तो मैं तुरंत मान जाऊं। राजेश्वर जी ने कहा कि, “अभी नहीं, पहले चाय पी लेते है, फिर करते है।”
मेरी शादी को 2 साल हो गए थे, लेकिन एक बार भी मेरे पति ने मेरे लिये चाय नहीं बनाई, और आज मेरे कुछ दिनों के लिये पति बने राजेश्वर जी ने मेरे लिये चाय बनाई।
चाय पीने के बाद मैं राजेश्वर जी की गोद में जाकर बैठ गई, और उन्हें चूमने लगी। वो भी मेरे होंठो को चूसने लगे, और मेरे मम्मों को धीरे-धीरे दबाने लगे। मैंने सिसकारियां लेते हुए कहा, “चलो अब चुदाई का खेल फिर शुरु करते है।”
ये कह कर मैं उठ गई और राजेश्वर जी भी अपना पजामा नीचे खिसका कर लंड बाहर निकाल कर तैयार हो गए। मैंने उनके लंड को हाथ में पकड़ कर सहलाना शुरु कर दिया, और मैं उनके लंड पर बैठने ही वाली थी कि वो बोले, “रुको दिव्या”।
मैंने कहा “क्या हुआ?” तो वो बोले, “तुम्हारी चूत भारी चुदाई की वजह से लाल हो गई है। अगर मैंने तुम्हें फिर चोदा तो तुम्हारी हालत बुरी हो जाएगी।” उनकी ये बात सच तो थी, मगर मुझ पर उनके लंड का ऐसा नशा चढ़ा था कि मैं उस बात पर गौर ही नहीं दे पा रही थी।
मैंने कहा, “अरे वो बाद में देख लेंगे, अभी तो बस मुझे आपका लंड मेरी चूत में चाहिये।” वो फिर भी थोड़ा चिंतित थे, तो मैंने ही पहल करने की ठानी। मैं घुटनों के बल बैठ गई, और उनके लंड के टोपे को मेरी जुबान सहलाने लगी। राजेश्वर जी भी सिसकियां ले रहे थे।
फिर मैंने धीरे-धीरे उनका लंड मुंह में लेना शुरु किया। मैं जान बूझ कर उनका लंड धीरे-धीरे चूस रही थी, तांकि वो पूरी तरह हवस के नशे में डूब जाए। फिर कुछ देर बाद ही वो मेरे बाल सहलाने लगे, और मेरा सर पकड़ कर लंड मेरे मुंह में और अंदर तक डालने लगे।
अब मैंने भी जोर-जोर से उनका लंड चूसना शुरु कर दिया, और थोड़ी ही देर में उनका लंड मेरे मुंह में फुदकने लगा। मैं समझ गई कि ये अब झड़ने वाले थे। मगर मुझे उनका लंड चूत में लेना था। मैंने जल्दी से लंड मेरे मुंह से बाहर निकाला, तो वो बोले, “अरे दिव्या, क्या कर रही हो? मेरा बस निकलने वाला था।” तो मैं बोली, “मुझे आपका लंड चूत में चाहिये।”
उनसे अब मेरी ये छेड़-खानी और बर्दाश्त नहीं हो रही थी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी गोद में बिठा दिया, और बोले, “अब तो तेरी चूत फाड़ कर ही दम लूंगा”।
मैं उनकी ये बात सुन कर खुश हो गई, और जल्दी से उनके लंड पर बैठ गई। मेरी चूत पहले से गीली थी, इसलिये मैं उनका लंड आसानी से ले पाई। उनका लंड अंदर जाते ही मेरी आंखे बंद हो गई, और मेरे चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान आ गई। जैसे कोई तड़पती मछली को पानी मिल जाए, मेरी लंड लेकर बिल्कुल वैसी ही हालत हो गई थी।
राजेश्वर जी सोफे पर बैठे थे, और मैं उनके लंड पर उछल-उछल कर मेरी चूत चुदवा रही थी। राजेश्वर जी बिल्कुल मजे से सिस्कारियां ले रहे थे, और मैं आअह उउह्ह्ह कर चिल्ला रही थी। करीब 15 मिनट बाद वो मेरी चूत में झड़ गए। मुझे भी बहुत मजा आया, और मैं उनका लंड अंदर लिये ही उनकी गोद में बैठ गई।
मैं हांफते हुए बोली, “बहुत मजा आया पतिदेव”। तो वो बोले, “अरे अभी तो बहुत मजा आना बाकी है।” ये कह कर मुझे उन्होनें गोद में से उठाया, और सोफा पर लिटा दिया। फिर मेरे उपर चढ़ कर मेरे बूब्स दबाने लगे, और मेरे होंठों को जोर से चूमने लगे। मैं अब फिर से गरम होने लगी, और उनका लंड भी फिर से खड़ा हो गया।
वो उठ गए और मेरी चूत पर अपना लंड सहलाने लगे, और फिर एक ही जोर के झटके से पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया। मेरी तो चीख निकल गई, “आआऊऊईई। मर गई आअह”। लेकिन वो मुझे जोर-जोर से चोदे जा रहे थे। मैं मिशनरी पोज़ीशन में थी, इसलिये वो मेरी चूत में और अंदर तक लंड डाल पा रहे थे।
उनकी चोदने की गती और बढ़ गई, और फिर वो मेरे बड़े बूब्स दबाने लगे। बीच-बीच में वो मेरे बूब्स को जोर से मारते थे, और मुझे उससे बहुत मजा आता था। उन्होंने मेरे बूब्स दबा-दबा कर लाल कर दिये थे। मेरी चूत में भी अब थोड़ा-थोड़ा दर्द होने लगा था। मगर मुझ पर लंड का ऐसा नशा चढ़ा था कि मुझे उस दर्द में भी मजा आ रहा था।
मैं उनसे कहने लगी, “और जोर से करो बहुत मजा आ रहा है।” ये सुन कर वो और जोर से मुझे चोदने लगे। ये खेल करीब आधे घंटे तक चला, और फिर वो जब झड़ने वाले थे, तब वो मेरे पेट पर उनका सारा वीर्य छोड़ दिया।
थोड़ा बहुत माल मेरे चेहरे पर और मेरे बूब्स पर भी गिर गया। झड़ने के तुरंत बाद उन्होंने लंड फिर से मेरी चूत में डाला, और मुझे चोदने लगे। मैंने कहा, “मन नहीं भरा?” उस पर उन्होंने कहा कि, “मन तो मेरा तेरी चूत से कभी नहीं भरेगा”। मैं मुस्कुराई और उनको किस्स करने लगी। कुछ देर किस्स करने के बाद उन्होंने मुझे कुत्ती बनने को कहा। मैं झट से डॉगी पोज़ीशन में आ गई, और राजेश्वर जी ने भी झट से अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया।
लंड चूत के अंदर घुसते ही मेरे मोबाइल की रिंग बजने लगी। मैं इस बात से बहुत गुस्सा हो गई और बोली, “यार अब किसका फ़ोन आगया!” मैं उठी और फोन की तरफ देखा तो मेरे पति का फ़ोन था। मैं थोड़ा हड़बड़ा गई लेकिन फिर मैंने उनका फ़ोन उठाया।
मैं: हैलो, कैसे हो?
मेरे पति: मैं ठीक हूं बेबी, तुम कैसी हो?
मैं: मैं बिल्कुल ठीक हूं।
मैं बोलते-बोलते राजेश्वर जी के बगल में जा कर बैठ गई। मैं फ़ोन पर बोल ही रही थी कि राजेश्वर जी ने अपना लंड मेरे हाथ में रखा, और हिलाने का इशारा किया। मैं उनका इशारा समझ गई और उनका लंड हिलाने लगी। मेरे मन में आया, “एक पति से फ़ोन पर बात कर रही हूं, और एक पति का लंड हिला रही हूं”। ये सोच कर मैं मुस्कुराने लगी।
पति: क्या हुआ, हस क्यों रही हो?
मैं: अरे कुछ नहीं, बस तुमसे बात करके अछा लगा।
पति: अरे मेरी शोना। अच्छा वैसे राजेश्वर जी कैसे है? कोई तकलीफ तो नहीं?
मैंने राजेश्वर जी के तरफ देखते हुए कहा-
मैं: अरे वो तो बहुत खुश है।
ऐसे ही करीब पांच मिनट बात करने के बाद मैंने काम का बहाना बना कर फ़ोन काट दिया। फ़ोन कटते ही मैं झट से राजेश्वर जी का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी। राजेश्वर जी, “अरे फ़ोन रखते ही शुरु हो गई, वाह क्या बात है!”
मैं चुप-चाप मजे से उनका लंड चूसे जा रही थी, और फिर कुछ ही देर में वो मेरे मुंह में झड़ गए, और मैंने भी उनका सारा पानी बड़े आराम से पी लिया। फिर हम दोनों ऐसे ही एक-दूसरे के बगल में बैठे रहे।
राजेश्वर जी बहुत खुश लग रहे थे। उन्हें खुश देख मुझे भी अच्छा लगा। राजेश्वर जी ने कहा, “वाह! दिव्या तूने तो मेरा सारा पानी निकाल दिया। ऐसा लग रहा है जैसे में फिरसे जवान हो गया हूं“।
मैंने कहा, “वो सब तो ठीक है। मगर आप मुझे दिन भर चोदने के बाद भी थके कैसे नहीं?”
इस पर वो हंसे और बोले, “मुझे भी नहीं पता। तुम इतनी हॉट हो कि मेरा मन ही नहीं भरता। मन करता है कि तुम्हें बस चोदते रहूं। या फिर पहले मैं पहलवानी करता था, इसलिये मेरा शरीर आज भी मेरा साथ दे रहा है”।
उनसे बात करके मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। ऐसे लगा के मानो वो मुझे समझ सकते थे। मेरी धड़कन तेज होने लगी, और मैंने झट से बोल दिया, “राजेश्वर जी क्या आप मेरे सच में पति बनेंगे?”
वो ये सुन कर शॉक हो गए और बोले, “दिव्या ये तुम क्या कह रही हो? तुम्हे मेरे बारे में ऐसा क्यूं लग रहा है?”
मैंने कहा, “आप तो मेरे झूठे पति होने के बाद भी मेरा खयाल रखते है, और मेरे असली पति को तो मेरे लिये टाईम ही नहीं रहता”। ये कह कर मैं उदास हो गई।
राजेश्वर जी हंसे और बोले, “अरे दिव्या, कितनी भोली हो तुम। हम दोनों का रिश्ता बस एक-दूसरे के शरीर को खुश रखने तक का ही है। और रही बात तुम्हारे पति की, तो वो तो तुम्हें सबसे ज्यादा प्यार करता है”।
मैंने गुस्से में कहा, “अगर उन्हें मुझसे इतना प्यार है, तो हर बार मुझे छोड़ कर क्यों चले जाते है?”
राजेश्वर जी बोले, “शेखर (मेरे पति का नाम) जब भी मुझसे मिलता है तो तुम्हारे बारे में बहुत बोलता है। वो सारी मेहनत बस तुम्हारे लिये कर रहा है”।
ये बात सुन कर मुझे अच्छा लगा और बुरा भी, कि कैसे मैं अपने पति के प्यार को कम समझ बैठी। लेकिन राजेश्वर जी ने मुझे अच्छे से समझाया और मुझे मेरी गलती का एहसास हुआ।
हम दोनों काफी देर नंगे ही सोफे पर बैठे थे, और मैंने तो दिन भर कोई कपड़ा ही नहीं पहना था। सच कहूं तो मुझे अब नंगी रहने में ही मजा आ रहा था।
कुछ देर बाद राजेश्वर जी ने मुझसे खाने के बारे में पूछा तो मैंने उन्हें कहा कि, “मैं अब खाना बनाने के हालत में नहीं हूं”। हम दोनों दिन भर चुदाई के बाद थक गए थे, और पसीने से लथपथ थे। तभी राजेश्वर जी ने कहा, “तुम भी थक गई हो और मैं भी। तो चलो आज बहार होटल में खाना खाते है”।
मैं ये सुन कर बहुत खुश हुई और जल्दी से हां कर दी। बस मैं कपड़े पहनने के लिए उठने ही वाली थी कि राजेश्वर जी का फ़ोन बजा। उन्होंने फ़ोन देखा तो खुश हो गए। दरसल उनके जिगरी दोस्त का फ़ोन था इसलिए वो खुश हो गए।
फिर क्या, दोस्त जैसे आपस में हसी-मज़ाक करके बात करते है, वैसे ही उनकी बातें शुरु हो गई। मैं राजेश्वर जी को हस्ता हुआ देख कर बहुत खुश हुई। क्योंकि शायद घर जलने के हादसे के बाद वो पहली बार इतना मन भर कर हस रहे थे। तो ये देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा।
मैं तो खैर वैसे ही नंगी राजेश्वर जी को फ़ोन पर बोलते हुए सुन रही थी, और मन में सोच रही कि यार कब खतम होगा इनका बोलना। बाहर खाने भी जाना था।
8:30 बज गए थे। मैं ये सब सोच ही रही थी कि राजेश्वर जी फ़ोन पर बात करते हुए बोले, “अरे अभी? अभी तो मुश्किल है। अच्छा कुछ अर्जेंट बात है? ठीक है फिर।” ये कह कर उन्होंने फ़ोन रख दिया।
मैं: किसका फ़ोन था जी?
राजेश्वर जी: अरे मेरे जिगरी दोस्त का फ़ोन था। संजय नाम है उसका।
मैं: अच्छा। तो क्या कह रहे थे वो?
राजेश्वर जी: दिव्या देखो गुस्सा मत होना। पर मुझे अभी जाना होगा। मेरे सारे दोस्तों ने मुझे मिलने बुलाया है। मुझे जाना ही होगा।
मैं: अरे आप मेरी चिंता मत किजीये। जाईये अपने दोस्तों से मिल कर आइये। हम किसी और दिन बाहर खाना खाते है।
राजेश्वर जी: तुम सच में गुस्सा नहीं हो ना?
मैं: गुस्सा तो नहीं हूं, पर नाराज हूं। लेकिन आप भी अपने दोस्तों से मिलने जा रहे है, तो मैं भी कैसे मना करूंगी।
राजेश्वर जी: दिव्या तुम कितनी समझदार हो। अब तो हम आज ही बाहर खाना खाएंगे।
मैं (खुश होकर): सच में!?
राजेश्वर जी: हां बाबा, मेरा इन्तज़ार करना।
मैंने राजेश्वर जी के कपड़े लाकर दिये, और वो उन्हें मेरे सामने पहनने लगे। कपड़े पहन कर तैयार होने के बाद वो निकल रहे थे, कि मैंने उनका हाथ पकड़ा और उनको रोक कर झट से उनके होंठों पर कस के किस्स किया और बोली, “जल्दी आना”।
उन्होंने मेरी गांड पर एक थप्पड़ मारा, और हां में सर हिलाया। फिर राजेश्वर जी चले गए और मैं अकेली ही घर पर नंगी रह गई। मैं नंगे बदन ही टीवी देख रही थी। अब तो मुझे नंगा रहने में शरम भी नहीं आ रही थी।
ऐसे ही बैठी थी कि मुझे राजेश्वर जी की बात याद आ गई। उन्होंने कहा था कि मेरे पति से ज्यादा मुझसे कोई प्यार नहीं कर सकता। मुझे भी मेरे पति से बहुत प्यार है। पर क्या करूं मेरी चूत की आग ही इतनी बढ़ गई कि में राजेश्वर जी से चुद गई। मुझे मेरे पति की याद आ रही थी। तो मैंने उन्हें फ़ोन किया।
(मैं और मेरे पति फ़ोन पर बात करते हुए)
मैं: हेलो।
पति: हेलो दिव्या, क्या हुआ फिरसे फ़ोन किया?
मैं: जी वो आपकी याद आ रही थी।
पति: मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आ रही है।
मैं: तो फिर यहां क्यों नहीं आते?
पति: आना तो चाहता हूं, पर तुम तो जानती हो
बिज़नेस को संभालना कितना मुश्किल है।
मैं (गुस्से में): तुम और तुम्हारा बिज़नेस।
पति: अरे तुमने मुझे डांटने के लिए कॉल किया है क्या?
मैं: नहीं जी, बस आप काम में लगे रहते हैं, और मेरी तरफ कुछ ध्यान नहीं देते इसलिये।
पति: मैं ये सब तुम्हारे लिये ही कर रहा हूं।
ऐसे ही बात करते-करते हमारी बात-चीत थोड़ी गरम हो गई और मैं अपनी चूत में उंगली करने लगी। फिर मेरे पति ने मुझसे पूछा कि, “राजेश्वर जी घर पर है कि नहीं?” तो मैंने उन्हें कहा कि, “वो बाहर गए है”। ये बोलते ही उन्होंने मुझे वीडियो कॉल करने बोला। उन्हें मुझे अच्छे से देखना था। वीडियो कॉल करते ही मेरे पति चौंक गए क्योंकि मैं नंगी ही थी। मुझे ऐसे देख वो बोले-
पति: वाह! मेरी बीवी तो तैयार बैठी है।
मैं इस बात पर मुस्कुराई। फिर उन्होंने भी अपने कपड़े निकाले, और हम दोनों अपने आप को खुश करने लगे। वो अपना लंड हिला रहे थे, और मैं अपनी चूत में उंगली कर रही थी। ये खेल करीब आधे घंटे तक चला। फिर हम दोनों शांत हो गए।
मैंने पूछा: कितने दिन बाद लौटोगे?
पति: पता नहीं बेबी। 1 या 2 महीने लग सकते है।
मैं: इतने दिन! (मैं ये सुन कर थोड़ी खुश भी हो गई कि और 1-2 महीने मैं और राजेश्वर जी पति पत्नी बन कर रह सकते है)
फिर कुछ और देर हमने बाते की, और मैंने बातों-बातों में बता दिया कि मैं और राजेश्वर जी बाहर खाना खाने जा रहे थे। मुझे लगा कि मेरे पति गुस्सा होंगे, पर वो उल्टा खुश हो गए। मेरे पति का मुझ पर पूरा विश्वास था। मुझे बुरा भी लगा कि मैं उनका विश्वास तोड़ रही थी। फिर हमने एक-दूसरे को बाय कहा, और फ़ोन कट कर दिया।
मैंने घड़ी देखी तो 9:30 बज गए थे। मैं बाथरुम में गई, और अच्छे से नहा लिया। पूरे आधे घंटे तक नहाने के बाद मैं अपने रूम में तैयार होने के लिये गई। मैंने लाल नेट की सारी पहन ली, और काले रंग का ब्लाऊज पहना, और एक सरप्राइज था, वो आपको बाद में पता चलेगा।
मैं बहुत ही अच्छे से सज-धज कर तैयार थी, और राजेश्वर जी का इन्तज़ार कर रही थी। करीब 11:00 बजे राजेश्वर जी घर आए।
मैं: इतनी देर क्यूं कर दी?
राजेश्वर जी मुझे देख कर एक-दम थम से गए और बोले, “दिव्या तुम कितनी सेक्सी लग रही हो! मन कर रहा है कि तम्हें फिर से चोदना शुरु करूं“।
मैं शर्मा गई और उनसे फिर पूछा कि, “देर क्यों हो गई?” उन्होंने कहा कि, “बातों-बातों में समय का पता नहीं चला।” और फिर मैंने भी ज्यादा कुछ पूछा नहीं। मैं राजेश्वर जी के सामने गई और उन्हें गले लगाया, और उन्होंने भी मेरी गांड और बूब्स को कस कर दबाया। मेरी तो आह निकल गई।
राजेश्वर जी: चलो दिव्या अब चलते है।
मैं: ठीक है।
हम दोनों घर के बाहर आ गए, और कार में बैठ गए।
