मेरे कमर तक को चूमा फिर मेरी जांघों पर हाथ फेरने लगा तो मैं जांघें फैलाई लेटी थी और वो पूछा ” शीला क्यों इसको चाट दूं
( मैं बोली ) किसको चाटना चाहता है
( वो एक तकिया लेकर मेरी चूतड के नीचे लगाया ) आपकी चूत रानी को बीबी ” और फिर रामू मेरे मोटे जांघ को चूमने लगा तो मैं छटपटाने लगी ” आह उह उई रामू बूर चाट ना ” फिर भी रामू मेरे जांघो को चूमते हुए बूर में उंगली घुसाए कुरेदने लगा तो मैं खुद अपने बूब्स को पकड़ दबाने लगी, मेरी चूत में एक उंगली क्या खाक करती उसमें तो गधे का लन्ड ही कुछ कर सकता था और मैं बेड पर लेटी रही, चूत से उंगली निकाल रामू अब मेरी जांघो के बीच मुंह लगाया और मेरी चूत के फांकों को चूमने लगा तो मैं चूतड को ऊपर उठाने लगी, तभी रामू बूर से ऊंगली निकाल लिया फिर फांकों को फैलाकर उसमें जीभ घुसाए चाटने लगा तो मेरे कोमल जन्ननांग में मस्ती छाने लगी और उसका पूरा जीभ ही मेरी चूत में था जबकि उसकी नाक मेरे चूत के ऊपरी हिस्से पर और वो कुत्ते की तरह लपालप बूर चाटने लगा तो मैं आहें भरने लगी ” आह उई खुजली हो रही है रामू लेकिन मेरी चूत चाट चाटकर रस निकाल दे फिर तेरा लन्ड चूसूंगी ” और रामू बूर से जीभ निकाल दिया फिर एक साथ दो उंगली चूत में घुसाए उसे कुरेदने लगा तो मेरी चूत आग की भट्टी बन चुकी थी और वो मेरे चूत के ऊपरी भाग को जीभ से चाटना शुरु किया ” आह ओह आआअह्ह्ह्ह बस कर चाट साले क्या उंगली डाल रखा है
( वो उंगली निकाल मेरी ओर देखा ) बीबी तेरी चूत तो किसी लौंडिया की तरह है ” और मैं शर्मिंदिगी महसूस करते हुए चेहरा फेर ली, रामू मेरी चूत को दुबारा चाटने लगा तो लग रहा था मानो तुरंत ही रस फेंक देगा और मैं बिस्तर पर लेटकर मस्त थी, उसका जीभ मेरी चूत की गहराई तक जाकर चाटे जा रहा था तो मैं ” आह ओह उह उई आआह्ह्ह्ह मेरा निकला ” इतने में रामू मेरी चूत के फांकों को ओंठो के बीच लिए चूसने लगा और मुझे एहसास हुआ की बूर रस छोड़ चुकी है फिर वो मुंह से बूर को निकाला और जीभ से चूत के अंदर की रस को चाटने लगा तो मैं थोड़ी ढीली पड़ चुकी थी, रामू का लन्ड टाईट हो चुका था और अब मुझे तेज मुतवास लगी थी सो उठकर पेटीकोट को छाती के ऊपर से बांध ली फिर रूम से निकल गई, बाथरूम जाकर फ्रेश हुई और वापस रूम आई फिर रामू कमरे से निकल गया और मैं बेड पर लेटी हुई उसके आने का इंतजार करने लगी।
रामू आया फिर वो दरवाजा बंद कर अपना पैजामा उतार दिया तो उस देहाती का लन्ड १३-१४ सेंटीमीटर लंबा होगा जोकि टाईट था और मैं अब पेटीकोट को खोल नग्न हो गई तो रामू मेरे कमर के पास बैठकर मेरे जांघो को फैलाया फिर बूर पर हाथ फेरते हुए पूछा ” शीला तेरे कितने आशिक हैं
( मैं गुस्से से लाल हो गई ) तुझे मैं आसानी से बदन सौंप दी तो क्या समझा है मुझे निकल यहां से ” वो सहम गया और फिर अपना कान पकड़ बोला ” गलती हो गया शीला जी ” मैं मुस्कुराई ” ठीक है तो पहले तू लेट फिर लोलीपॉप चुस्ती हूं ” और रामू लेट गया तो मैं उसके कमर के पास बैठ गई, उसके लन्ड पकड़े सहलाने लगी फिर चेहरा को झुकाए लन्ड को चूमने लगी, उसके लन्ड का सुपाड़ा माँसल और लंबा था जिसे मैं अपने ओंठ पर रगड़ते हुए मुंह में भर ली और फिर मुंह खोले आधा लन्ड अंदर लिए चूसने लगी, रामू मेरे चूची को पकड़ दबाने लगा तो मैं लन्ड चूसते हुए मस्त थी और इतने में रामू उठकर बैठ गया तो भी उसके लन्ड चूसने में मुझे कोई कठिनाई नहीं हुई लेकिन रामू एक हाथ से मेरी बूब्स दबाते हुए चूतड को सहलाने लगा, मैं उसके लन्ड मुंह से निकाल दी और जीभ से चाटने लगी तो रामू मेरे चूतड की ओर से चूत में उंगली घुसाया फिर चूत को कुरेदने लगा और शीला दुबारा लन्ड मुंह में भर चूसते हुए मुंह का झटका देने लगी तो रामू आहें भरने लगा ” आह ओह शीला चूस साली रण्डी बहुत मजा आ रहा है ” और मैं उसके लन्ड को चूसते हुए मस्त थी तो रामू मेरे चूत से उंगली निकाल दिया और मैं मुखमैथुन करते हुए मस्त थी, देवर जी से बचने के लिए पीरियड का बहाना बनाई तो रामू से चुदाई की सोच रही थी।
मैं अब बेड पर जांघों को फैलाकर लेटी थी तो रामू मेरे जांघो के बीच लन्ड पकड़े बैठा हुआ था, वो अब चूत के अंदर लन्ड घुसाने लगा और मुझे तो उसका लंबा और मोटा लन्ड मजा देने लगा, कोमल योनि में लन्ड का धक्का शुरू हुआ तो रामू मेरे कमर पर हाथ रख धक्का दिए जा रहा था और मेरी परिपक्व चूत में उसका लन्ड पूरी तरह से अंदर बाहर होते हुए मुझे मस्ती देने लगा, मैं अब रामू के लन्ड का धक्का का मजा लेने लगी और वो मेरे ऊपर सवार होकर चोदने लगा। शीला के जिस्म पर रामू लेटा हुआ चोद रहा था तो मैं अब उसके गाल चूमते हुए चूतड को उछालना शुरू की और वो मेरे ओंठ चूमते हुए चुदाई करने में लीन था, मेरी रसीली चूत रामू के लन्ड के धक्के से गर्म हो चुकी थी और मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने में लगी हुई थी ” आह ओह उई बूर में गर्मी हो रही है जान
( रामू मेरे ओंठ चूम लिया ) तो क्या करूं जान थोड़ा धैर्य रख ” और मुझे कमर में थोड़ा दर्द होने लगा सो चूतड स्थिर किए चुदाने लगी तो रामू चोदता हुआ मेरे चेहरे को चूम रहा था, ५ मिनट की चुदाई किया होगा की मेरी चूत आग की भट्टी बन गई फिर वो मेरे बदन पर से हटा तो मैं लेटी रही और अब रामू मुझे बेड पर घुटने और कोहनी के बल होने को कहा तो मैं डॉगी स्टाइल में हुई और रामू मेरे चूतड के सामने बैठकर चूतड पर चुम्बन देने लगा साथ ही मेरे सीने से लटकते चूची को पकड़ दबाने लगा तो मैं पीछे मुड़कर बोली ” अरे बूर चट्टा अब तो चोद ” वो मेरे गांड़ के छेद में जीभ घुसाए चाटने लगा तो मैं चुदाई को आतुर थी और रामू मेरे गांड़ के छेद में उंगली घुसाए कुरेदने लगा तो मैं ” आह ओह उह उई साले गांड़ चोदेगा तो चोद ना क्यों चाट रहा है
( वो गांड़ के छेद से जीभ निकाल अब लन्ड को गांड़ में घुसाने लगा ) अब बताता हूं साली रण्डी तेरी गांड़ देख मेरा लन्ड टनटना उठता है ” और उसका २/३ लन्ड गांड़ में था तो मैं उसके धक्के का मजा लेने लगी साथ ही चूतड को हिलाना शुरु की तो वो मेरे कमर पकड़े धक्का देता हुआ गांड़ की चुदाई करने में मस्त था ” रामू जब बूर रस छोड़ दे फिर चुदाई करना तब तक गांड़ चोद
( रामू का लन्ड गांड़ में खंजर की तरह चुभने लगा ) ठीक है डार्लिंग लेकिन तेरी गांड़ में तेल डालकर एक बार जरूर चोदूंगा ” और वो मेरे सीने से लटकते चूची को पकड़ दबा रहा था तो मैं चूतड को हिलाते हुए चुदाने में मस्त थी। रामू का मोटा लन्ड मेरी गुदाज गांड़ को चोदता हुआ मस्त कर रहा था और मैं अब आहें भरने लगी ” आह ओह आआअह्ह्ह्हह और तेज चोद मेरी गांड़ लहर रही है ” तो रामू मेरी गांड़ से लन्ड निकाल बूर में घुसाने लगा फिर तो उसका लन्ड मानो चूत को गर्म करने में लग गया और मैं चूतड को हिलाते हुए चुदाने लगी तो रामू १० मिनट से मेरी चूत और गांड़ को चोदता हुआ हांफने लगा, मेरे बूब्स को दबाते हुए ” आह ओह उह बीबी जी मेरा लन्ड तो झड़ने पर है
( मैं चूतड को हिलाते हुए ) ठीक है साले अब परसों रात मेरी गांड़ चोदना ” तो लन्ड से वीर्य की धार निकल पड़ी और मेरी चूत गीली हो गई फिर वो मुझसे अलग हो गया तो मैं भी फ्रेश होकर सो गई।
प्रेम तुम अपनी भाभी को शहर क्यों नहीं ले जाते
( मैं प्रेम की ओर देखी ) ठीक है भाभी को आज शहर ले जाता हूं
मैं बोली ) शहर जाकर क्या करूंगी इससे अच्छा तो झील घूमने चलते हैं क्यों स्वेता
( श्वेता बोली ) आप जाइए भाभी मुझे घर में बहुत काम है ” , फिर मैं स्नान करने गई और नाश्ता करके मैं देवर जी के साथ घूमने निकल गई जबकि मेरा बेटा रवि जाने को तैयार नहीं था, मैं गुलाबी रंग की साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट पहन ली और फिर दोनों बाईक से झील की ओर चले गए, फरवरी का महीना तो मौसम खुशनुमा और मैं बाईक पर प्रेम के पीछे बैठकर एक हाथ उसके कंधे पर रखी थी, गांव से निकलते ही मैं उससे चिपक गई और मेरा दोनों पैर तो एक ही और था लेकिन मैं उसके कमर में हाथ डाल अपने दाहिने बूब्स को उसके पीठ से रगड़ने लगी तो प्रेम बोला ” क्या भाभी आप तो मुझे तड़पा रही हैं
( मैं बोली ) सड़क खराब है इसलिए चिपककर बैठी हूं कहीं गिर गई तो ” और फिर आधे घंटे में दोनों झील किनारे पहुंच गए, वहां कुछ लोग पहले से ही थे तो झील के एक ओर पहाड़ था और फिर प्रेम मेरे हाथ पकड़ मुझे पहाड़ की ओर ले जाने लगा तो मैं उसके साथ पहाड़ की ओर चली गई जहां की कुछ एक प्रेमी युगल बैठकर बातें कर रहे थे। दोनों वहीं पर बैठे तो प्रेम अपना हाथ मेरे कंधे में डाला, दोनों की उम्र में ७-८, साल का फर्क था इसलिए पति पत्नी के तरह भी नहीं दिख रहे थे और प्रेम झट से मेरे गाल चूम लिया तो उसका हाथ धीरे से मेरी बूब्स पर आ गया और वो ब्लाउज पर से ही चूची को पकड़ दबाने लगा तो मैं उसको बोली ” कोई देख लेगा प्रेम
( वो पूछा ) क्या आपकी इच्छा नहीं है
( मैं सर हिलाकर हामी भरी ) थोड़ा सुनसान इलाके में चलो तो ” फिर दोनों उठकर पहाड़ी के पीछे चले गए, पेड़ पौधे से भरा ये इलाका हम दोनों के लिए ठीक था और दोनों एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठ गए और इधर कोई था भी नहीं तो प्रेम मेरे साड़ी को सीने से नीचे करने लगा लेकिन मैं उसका हाथ पकड़ ली ” सासु मां तुमको मेरे साथ घूमने बोली ना की
( प्रेम मेरे साड़ी के पल्लू को नीचे किया फिर गाल चूमने लगा ) तो क्या हुआ डार्लिंग ” फिर दोनों एक दूसरे को चूमने लगे और प्रेम तो मेरे बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से ही पकड़े दबाने लगा, मैं बैठी हुई खुद उसके ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन दी और प्रेम मेरी साड़ी को पैर से ऊपर करता हुआ जांघ तक कर दिया, फिर तो दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए मस्त थे और मैं अपनी जीभ से उसके ओंठ को चाटने लगी, प्रेम मेरे जीभ को मुंह में लिए चूसने लगा तो उसका हाथ मेरी चूची को पकड़ दबाए जा रहा था और मेरा हाथ तो उसके जींस के जिप पर थी लेकिन फिलहाल ओरल सेक्स करती रही, जीभ को मुंह से निकाल बोली ” प्रेम साड़ी के लिबास में सेक्स करना आसान होता है
( प्रेम मेरे दोनों जांघो के बीच हाथ घुसाया और बूर को सहलाने लगा ) तुम तो सीधे वहीं पहुंच गए ” और वो कुछ नहीं बोला।
मैं तो जमीन पर पैर सीधा किए बैठी हुई थी तो प्रेम मेरे पीठ पर हाथ फेरने लगा फिर ब्लाउज का हुक खोल दिया तो मुझे लगा की निर्जन इलाके में कोई देखने वाला नहीं है इसलिए आराम से ब्लाउज सहित ब्रा निकालने दी फिर प्रेम मेरे नग्न स्तन को पकड़ दबाने लगा और बूब्स को मुंह में लिए चूसने लगा, अब मैं उसके बाल पर हाथ फेरने लगी और ” आह उह उई आआआह्ह प्रेम चूस चूस इसे बहुत मजा आ रहा है ” वो चूची चूसता हुआ मेरे दूसरे चूची को दबाने लगा और मैं बैठी रही फिर वो चूची मुंह से निकाल दिया, मैं लेट गई फिर वो मेरे सीने पर चेहरा किए बूब्स को मुंह में भर चूसने लगा तो मेरा हाथ उसके जींस के जिप पर था जिसे मैं खोलने लगी और प्रेम स्तनपान करता हुआ खुद जींस को थोड़ा नीचे कर दिया तो मैं उसके चढ्ढी को नीचे कर लन्ड पकड़ ली ” आआआहा ओह प्लीज अब मत चूसो यार ” और वो चूची को चूस चूसकर लाल कर दिया तो मैं लेटी रही फिर प्रेम साड़ी से मेरे छाती को ढक दिया और मेरे नग्न सपाट पेट से लेकर कमर तक पर चुम्बन देने लगा, अब तो मेरी चूत खुजलाने लगी और वो बोला ” डार्लिंग पहले चूत चाट दूं या
( मैं हंस दी ) तुम्हारी मर्जी ” फिर वो मेरी साड़ी सहित पेटीकोट को कमर तक कर दिया और जांघो को फैलाकर बूर सहलाने लगा तो मैं लेटी रही, प्रेम जींस सहित चढ्ढी को उतार दिया फिर मेरी चूत पर मुंह लगाए चूमने लगा, मेरी चूत ढीली भले थी लेकिन काम रस से भरी हुई, प्रेम फांकों को फैलाया और उसमें जीभ घुसाए चाटने लगा तो मैं सिसकने लगी ” आह ओह उह आआआह्हह चाट चाट साले कुत्ते मजा आ गया ” और प्रेम बूर से जीभ निकाल उसमें दो उंगली घुसाए कुरेदने लगा साथ ही मेरी चूत के ऊपरी हिस्से को जीभ से चाटे जा रहा था, मैं तो अर्ध नग्न अवस्था में घांस पर लेटी हुई थी और अब पूरा बदन कामुकता के आगोश में था ” , आह सी ओह उह निकल जायेगा अब उंगली निकाल मुझे चोद ना
( प्रेम चेहरा ऊपर किया फिर उंगली चूत से निकाल दिया ) अभी आया ” उसका निचला हिस्सा नंगा था और वो थोड़ी दूर पर जाकर मूतने लगा, वापस आकर पानी से लन्ड को साफ किया और मैं उठकर बैठी फिर बोली ” जरा ब्रा और ब्लाउज पहना दे प्रेम ” वो मुझे ब्रा और ब्लाउज पहनाया तो मैं उसके लन्ड पकड़ सहलाने लगी, वो बैठा हुआ था और मैं उसके सामने झुकी फिर लन्ड को चूमने लगी, १४-१५ सेंटीमीटर लंबा लन्ड को चूमते हुए उसके सुपाड़ा को मुंह में भर चूसने लगी और मुंह खोले उसका १/२ लन्ड अंदर लिए चूसने लगी तो मेरी चूची को पकड़ देवर जी दबाने लगे और मैं चेहरा का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी ” आह ओह उह आआआह्हह भाभी मजा आ गया ”
मैं प्रेम का लन्ड मुंह से निकाल उसे चाटने लगी और वो हाथ बढ़ाए मेरे बूब्स को पकड़ दबाने लगा तो मैं दुबारा से उसका लन्ड मुंह में भर चूसने लगी, मुझे तो मुखमैथुन करने में मजा ही आता था और प्रेम लेटे हुए मस्त था ” आह ओह उह उई आआह्ह शीला अब छोड़ो ” और फिर मैं उठकर थोड़ी दूरी पर जाकर मूतने लगी, मेरे जिस्म पर साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट था तो मैं चुदाई को आतुर थी और प्रेम के पास बैठकर उसके गाल चूम ली तो वो मेरे गाल चूम बोला ” अब खड़े खड़े या
( मैं हंस दी ) खड़े खड़े ही चलो पेड़ के नीचे ” और फिर मैं पेड़ के पास खड़ी हुई तो मेरा दोनों हाथ पेड़ के धड़ पर था, प्रेम मेरे चूतड के सामने खड़ा हुआ और फिर मेरी साड़ी सहित पेटीकोट को कमर तक उठा दिया, मैं किसी चौपाया जानवर की तरह खड़ी थी और प्रेम मेरे दोनों जांघो को फैलाकर लन्ड पकड़े चूत में घुसाने लगा, चूत तो रसीली थी सो आराम से उसका २/३ लन्ड घुस गया लेकिन वो पूरा अंदर डालना चाहता था इसलिए जोर का धक्का दे मारा फिर भी लन्ड तो बूर की गहराई तक जा चुका था और मैं चिंख उठी ” उई फट जायेगी आराम से चोद साले
( वो चोदते हुए मेरे पीठ सहलाने लगा ) डार्लिंग मेरा पूरा लन्ड अंदर नहीं घुस रहा है
( मैं पीछे मुड़कर बोली ) अबे साले चूत की गहराई उत्तेजना वश बढ़ती है फिर भी उसका दायरा सीमित होता है, श्वेता की चूत में ही तेरा लन्ड घुस पाएगा ” और प्रेम मेरे कमर पकड़े चोदने लगा तो मैं चूतड को हिलाना शुरु की और दोनों सम्भोग सुख लेने में मस्त थे, उसके लन्ड का धक्का चूत को गर्म कर चुका था लेकिन किसी औरत को पूरी तरह से उत्तेजित कर उसे शांत करना आसान नहीं होता और मैं चुदाते हुए मस्त थी ” चोद चोद साले और तेज आह उह मजा आ गया ” मेरी चूत तो आग की भट्टी बन चुकी थी और खड़े खड़े चुदाते हुए मैं असहज महसूस कर रही थी तो बोली ” क्यों ना आसन बदल दिया जाए ” तो प्रेम मेरी चूत से लन्ड निकाल लिया और मैं अब पेड़ के नीचे बैठी तो प्रेम भी बैठ गया फिर उसके गोद में बैठकर चुदाई की इच्छा हुई तो मैं साड़ी सहित पेटीकोट को कमर से लपेट उसके गोद में जांघें फैलाई बैठी और मेरी चूत के सामने लन्ड था तो मैं दोनों हाथ उसके कंधे पर रखी थी,
प्रेम मेरे कमर को पकड़ा तो मैं खुद लन्ड पकड़े अपने चूत में घुसाई फिर नितंब का दबाव नीचे की ओर देने लगी फिर लन्ड चूत में घुसने लगा और प्रेम नीचे से धक्का देकर चोदने लगा तो मैं उससे लिपटकर चूतड उछालना शुरू की और चुदाने लगी, मेरी बूब्स भले ही ब्लाउज में हो लेकिन उसके सीने से चिपकी हुई थी तो मैं प्रेम के ओंठ चूम चूतड उछाल उछाल कर चुदाने में मस्त हो गई। प्रेम नीचे से धक्का देते हुए मेरी चूत को गर्म कर चुका था और मैं उससे लिपटकर उसके गर्दन को चूमने लगी तो प्रेम धक्का देता हुआ हांफने लगा ” आह उह उई अब रस निकल जाएगा डार्लिंग ” और उसके लन्ड से गर्म चिपचिपा पदार्थ मेरी चूत को लबालब कर दिया तो वीर्य बूर से नीचे भी टपकने लगा और कुछ देर बाद दोनों अलग हुए फिर फ्रेश होकर दोनों कुछ देर वहीं बैठे और वापस घर चले गए।
मैं वापस आरा आते ही देवर जी को बोली ” देवर जी आप अपने दोस्तों से मिलवाने वाले थे कब मिलवा रहे हैं
( देवर जी हंस दिए ) भाभी मेरे दोस्त तो पटना में रहते हैं बोलिए तो किसी से बात करूं ताकि वो एक दो दिन के लिए होटल में आकर रुके और फिर आप
( मैं बोली ) ठीक है आप बात कीजिए फिर मैं कब आना है बताती हूं ” और शाम के वक्त प्रेम घूमने के लिए निकला तो मैं खाना बनाने में लग गई, कुछ देर के बाद प्रेम वापस आया और बोला ” भाभी मेरे लिए एक कप कॉफी बना दीजिए
( मैं किचन में थी ) ठीक है ” फिर मैं कॉफी बनाई और प्रेम को देने गई तो वो शायद रूम में था, ज्योंहि रूम के अंदर गई तो वो कपड़ा बदल रहा था, उसका लंबा मोटा लन्ड देख मुंह में पानी भर गया और वो जल्दी में शॉर्ट्स पहन लिया फिर कॉफी का प्याला मेरे हाथ से ले लिया तो मैं किचन दुबारा गई और बाकी काम निपटाने लगी, शाम के ०७:०० बजे होंगे फिर मेरे पति भी वापस ऑफिस से आए तो उन्हें चाय बनाकर दी और रूम जाकर अपना कपड़ा बदलने लगी, साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट उतार नाईटी पहन ली फिर डाइनिंग हॉल में बैठ पति से बातें करने लगी और रात दस बजे तक हम लोग खाना खा लिए फिर मैं अपने बेडरूम में जाकर लेट गई, बेटा रवि सो चुका था और देखी तो पति भी मुंह फेरकर सो गए और उनके साथ तो दो महीने से शारीरिक संबंध नहीं बना था,
फिर मैं बेड पर छटपट करती रही और आखिर में एक घंटे बाद रूम से निकल देवर जी के रूम गई तो वो भी गहरी निंद्रा में थे और मैं उनके पैर के पास बैठ उनके शॉर्ट्स के ऊपर से ही लन्ड के उभार को सहलाने लगी फिर भी उनकी नींद नहीं टूटी तो मैं प्रेम के शॉर्ट्स को कमर से नीचे करने लगी और उसे पैर से निकाल उसके निचले भाग को नंगा कर लन्ड पकड़ सहलाने लगी, प्रेम तो गहरी निंद्रा में था और मैं उसके लन्ड को पकड़ हिलाने लगी फिर उसे मुंह में भर चूसने लगी, उसका लन्ड मेरी मुंह में टाईट हो रहा था और मैं उसकी ओर देखी तो उसकी आंखें खुल चुकी थी, मैं बेशर्म की तरह सर का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी तो प्रेम हाथ बढ़ाए मेरे चूची को नाईटी पर से पकड़ दबाने लगा और मैं कुछ देर तक लन्ड को मुंह में भर चूसती रही फिर लन्ड मुंह से निकाल दी तो वो उठकर बैठा, शॉर्ट्स पहन रूम से निकल गया तो मैं बेड पर लेट गई।
देवर जी फ्रेश होकर आए फिर दरवाजा बंद कर मेरे बगल में बैठ गए, मेरे बूब्स की गोलाई को नाईटी के उपर से ही पकड़ दबाने लगे फिर पूछे ” लगता है बहुत खुजली हो रही है
( मैं शर्म के मारे चुप रही और उनके शॉर्ट्स पर से लन्ड पकड़े सहलाने लगी ) क्यों भाभी लगता है जल्दी ही आपके लिए कुछ करना होगा ” और फिर प्रेम मेरे नाईटी को उतार नंगा कर दिए तो मैं जांघ पर जांघ चढ़ाए लेटी थी और वो शॉर्ट्स उतार नग्न अवस्था में होकर मेरे ऊपर लेट गए, मेरे खूबसूरत जिस्म पर लेटकर मेरे रसीले ओंठ को चूमने लगे तो मैं उनके गाल चूमते हुए लन्ड चुभने का एहसास जांघो के बीच पा रही थी और फिर वो मेरे ओंठ मुंह में भर चूसने लगे तो मैं उनके पीठ से लेकर चूतड तक पर हाथ फेरने लगी और फिर मुंह से ओंठ निकाल ली तो देवर जी बोले ” अब मुंह में जीभ घुसाइए तो सही ” वो मुंह खोले तो मैं अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी,
वो मेरे जीभ चूस रहे थे तो मेरी बूब्स उनकी छाती से रगड़ खा रही थी और प्रेम मेरे गर्दन के नीचे हाथ लगाए मेरे चेहरे को थोड़ा उपर कर रखा था ताकि मेरी जीभ पूरी तरह से उसके मुंह में रहे जिसे वो चूसने में मस्त था और मेरे बदन में तो आग लगी हुई थी साथ ही चूत में गुदगुदी होने लगी तो मैं प्रेम का चेहरा पीछे कर जीभ मुंह से निकाल दी और वो मेरे बदन पर से उतरकर छाती के पास बैठा फिर चूची को पकड़ दबाने लगा, मैं आहें भरने लगी ” आह ओह उह उई आआआआह्ह्ह्ह प्रेम अब चूसो ना ” तो प्रेम मेरे सीने पर चेहरा लगाए मुंह में चूची को भरा फिर चूसना शुरु किया, मेरी चूचियां बड़ी बड़ी थी और उसके मुंह में २/३ हिस्सा था जिसे वो चूसता हुआ दूसरे स्तन को पकड़ दबाने लगा, मैं तो जांघ को जांघ से रगड़ने लगी और बुर से रस निकलने पर था तभी प्रेम चूची मुंह से निकाल लिया और मेरे पेट से लेकर कमर तक को चूमने लगा और मैं ” आह ओह उह मेरी चूत से रस निकल गई ” बुर से रस निकलने लगा और प्रेम मेरे कमर तक को चूम जांघो को फैलाया फिर बुर पर उंगली फेरने लगा ” ओह लगता है मुन्नी लॉलीपॉप खाने के लिए रो रही है अभी खिलाता हूं
( मैं चुप रही और देवर जी मेरी चूत में लन्ड घुसाने लगे ) उह आउच आराम से डाल ना फाड़ देगा क्या ” और उसका लन्ड मेरी चूत में था, प्रेम बैठकर धक्का देते हुए चूदाई करने लगा तो मैं लेटकर मस्त थी।
प्रेम मेरे बदन पर लेटकर चोद रहा था और मैं उसके गाल चूमने लगी साथ ही उसके पीठ पर नाखून गड़ा रही थी तो प्रेम मेरे ओंठ चूम लिया ” भाभी चूतड तो उछालिए ना
( मैं उसके ओंठ पर चुम्बन दी ) भाभी नहीं शीला बोलो प्रेम ” फिर मैं चूतड उछालना शुरू की तो वो धक्का देता हुआ चोदे जा रहा था, मेरी चूत तो रसीली थी इसलिए उसका लन्ड गपागप अंदर बाहर हो रहा था और मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने में मस्त थी ” आह ओह उह और तेज चोद ना प्रेम मजा आ रहा है
( प्रेम मेरे ऊपर से उतर गया ) चल अब डॉगी स्टाइल में हो जा ” और मैं बेड पर कोहनी और घुटनों के बल हुई तो प्रेम मेरे जांघो को फैलाया फिर लन्ड को चूत में घुसाने लगा, उसका १४ सेंटीमीटर लंबा और ६ सेंटीमीटर मोटा लन्ड मेरी चूत में था, वो मेरी कमर को पकड़े धक्का देने लगा तो मैं चूतड को हिलाते हुए चुदाने लगी, मेरी छाती से लटके स्तन को वो पकड़ दबाने लगा और मेरी चूत तो आग की भट्टी बन चुकी थी ” आह ओह उई देवर जी और तेज चोदिए ना
( प्रेम धकाधक चूदाई करता हुआ मेरे पीठ सहलाने लगा ) शीला तुझे अब एक साथ दो तीन लन्ड चाहिए तब ही तो तेरी चूत की खुजली शांत होगी ” मैं चूतड को स्थिर किए चुदाने में मस्त थी तो प्रेम चोदे जा रहा था और अब चूत को वीर्य की जरूरत थी इसलिए मैं दुबारा चूतड हिलाने लगी, प्रेम तो चोदते हुए हांफने लगा और फिर वो बोल पड़ा ” आह ओह मेरा निकल गया डार्लिंग ” फिर उसके लन्ड से वीर्य स्खलित होकर मेरी चूत को गीला कर दिया तो मैं कुछ देर वैसे ही रही फिर दोनों अलग हुए तो मैं टॉवल से चूत को साफ की फिर नाईटी पहने फ्रेश होने गई, उसके बाद अपने रूम में जाकर सो गई।
