अगली सुबह मेरी नींद खुली जब श्वेता चाय का प्याला लेकर आई ” भाभी जान गुड मॉर्निंग
( मैं आंखें खोली ) हां श्वेता कितना समय हो रहा है
( श्वेता ) अभी तो ०७:०० बजे हैं वैसे भैया तो हैं नहीं फिर जागने में इतनी देर
( मैं उठकर बैठी ) श्वेता भैया नहीं हैं तो क्या, यात्रा में थकान तो हुई थी ” फिर मैं रूम से निकल बाथरूम चली गई, फ्रेश होकर आई फिर दोनों साथ में चाय पीने लगे तो मैं श्वेता को बोली ” क्या बात है ननद रानी, आप किसी लड़का को पसंद नहीं कर रही हैं
( श्वेता थोड़ा झेंप गई ) भाभी कोई ढंग का लड़का रहेगा तो जरूर पसंद करूंगी
( मैं चाय की चुस्की लेते हुए पूछी ) कोई लड़का हो जिससे तुमको प्यार है तो बताओ, मैं भैया से बात करूंगी ” वो चुप रही फिर मैं चाय का प्याला रख बाथरूम चली गई फिर फ्रेश होकर आई तो सासु मां बेड पर उठकर बैठी थी जिन्हें मैं और मेरी ननद पकड़ कर बाथरूम ले गए फिर मैं आकर बरामदे पर बैठी, मैं तो नाईटी उतार साड़ी सहित पेटीकोट और ब्लाउज पहन ली थी तभी देवर जी छत पर से नीचे आए और मुझे देख ” और भाभी बहुत जल्दी आप जाग गई
( मैं हंस दी ) हां देवर जी दरअसल रात को कोई परेशान करने वाला नहीं था ” फिर मैं उनके लिए चाय बनाने गई, देवर जी बरामदे पर कुर्सी पर बैठ गए तो मैं चाय बनाकर प्याला लिए उनके पास आई फिर उनके सामने झुकी, उन्हें प्याला हाथ में दी तो उनकी नजर मेरे बूब्स पर थी, थोड़ा सा साड़ी नीचे हुआ की ब्लाउज से बूब्स बाहर निकलने को आतुर हो गई फिर मैं सीधे बाथरूम की ओर गई, सासु मां बाहर निकली तो उन्हें मैं और श्वेता पकड़ कर ले आए फिर मैं उनके पास बैठी तो श्वेता बोली ” भाभी आप भी स्नान ध्यान कर नाश्ता कर लीजिए ” मैं कमरे में आई और बैग से एक पीले रंग की साड़ी निकाली साथ ही ब्लाउज और पेटीकोट फिर मैं बाथरूम की ओर गई, जोकि घर के पिछले हिस्से में था और फिर उधर बागान था तो मैं बाथरूम के बाहर लगे टंगनी पर कपड़ा रखी फिर सोची की इधर तो कोई आता नहीं तो क्यों ना कपड़े उतार बाथरूम में स्नान कर लें फिर मैं साड़ी खोल टंगनी पर डाल दी और अब ब्लाउज के हुक पर हाथ लगाई ही थी कि किसी के आने की आहट सुनाई दी,
मैं तुरंत ही सारा कपड़ा लिए बाथरूम घुसी फिर अंदर से दरवाजा बंद कर दी, अब मैं अपने पेटीकोट और ब्लाउज उतार फर्श पर रहने दी फिर नल खोलकर बाल्टी में पानी भरने दी, मेरे जिस्म पर रामू रात को लेटे चुदाई किया था साथ ही मेरे बदन को प्यार दिया था, मेरे जिस्म में अब भी वो सुखद अहसास था और अब मैं बाल्टी से पानी लेकर स्नान करने लगी, अपने गर्दन से लेकर पैर तक भिंगोई फिर साबुन लिए अपने शरीर पर लगाने लगी इतने में मेरा चेहरा थोड़ा उपर की ओर हुआ तो मैं बाथरूम के वेंटिलेशन से देवर जी को अंदर झांकते देखी लेकिन ज्योंहि मेरी नजर प्रेम पर गई वो वहां से हट गया,
देखो साला को सब कुछ प्यार से दे दी फिर भी छुपकर मुझे स्नान करते देखता है, मैं कुछ देर बाद बदन को टॉवल से पोंछ कर कपड़ा पहन ली फिर वापस बरामदे पर आई तो देवर जी मोबाइल में कुछ पढ़ रहे थे और मैं किचन की ओर गई जहां श्वेता नाश्ता बनाने में लगी हुई थी तो मैं बोली ” ननद रानी लाइए मैं भी नाश्ता बनाने में आपकी हेल्प कर देती हूं
( श्वेता हंस दी ) भाभी फिलहाल मुझे सब काम करने दीजिए फिर तो भैया के पास जाते ही सारा काम आपको ही करना होगा ” [मैं किचन से एक प्लेट में दो आलू के पराठे लिए बाहर निकली फिर कुर्सी पर बैठकर खाने लगी ” क्यों देवर जी स्नान ध्यान नहीं होगा बस मोबाइल ही देखते रहिएगा
( वो मेरी ओर देखा ) हां भाभी, नाश्ता करके मैं थोड़ा शहर जाऊंगा फिर आकर स्नान करूंगा
( मैं उसे देख धीमे स्वर में बोली ) अंदर झांक रहे थे क्यों सासु मां को बताऊं या श्वेता को ” वो चुप रहा फिर दिन तो सासु मां से बातें करने और कई काम में बीत गया, शाम को मैं किचन में चाय बना रही थी और श्वेता किसी सहेली के घर गई थी तो नौकर भी घर में नहीं था तभी मुझे किचन में किसी के आने की आहट सुनाई दी, पीछे मुड़कर देखी तब तक तो देवर जी मुझे पीछे से ही दबोच लिए और मेरे गर्दन को चूमने लगे तो मैं ” ओह ये क्या कर रहे हैं देवर जी कोई देख लिया तो
( मैं उनके सामने की ओर हो गई तो वो मेरे गाल चूम मुझे बाहों में भर चूमने लगे ) भाभी कोई नहीं है लेकिन आज रात आपको बहुत तंग करूंगा ” और वो मेरे चूतड की गोलाई को पकड़ दबाने लगा तो मैं उसके गाल चूम ली फिर उससे अलग होकर चाय को प्याला में कर ली ” जाकर मां जी को दे आओ फिर तुम्हें पिलाती हूं ” प्रेम चाय का प्याला लिए चला गया तो मैं किचन में ही सब्जी काटने लगी और रात के खाने का इंतजाम करने लगी, तभी देवर जी वापस आए तो मैं बोली ” चाय पीकर काम चला लो और रात के लिए कुछ खास इंतजाम किए हो क्या
( वो मेरे साड़ी पर से ही बूब्स पकड़े दबाने लगा ) हां व्हिस्की और सोडा लाकर रखा हूं लेकिन डर लगता है
( मैं उसके गाल चूम ली फिर साड़ी पर से उसका हाथ हटाई ) अभी जाकर कुछ और करो, रात को तेरा हाल क्या करूंगी तुम देखना ” और वो किचन से चला गया तो मैं खाना बनाई, श्वेता भी आकर मेरे काम में हाथ बटाई फिर तो सासु मां, श्वेता और रामू को खाना खिला दी और आज रात बरामदे पर ही सोने का इंतजाम की तो श्वेता भी अपने रूम में सोने को तैयार थी, मैं सासु मां को दवाई खिलाई फिर श्वेता के रूम घुसते ही मैं बेड पर लेट गई।
रात के १०:३० बजे होंगे की श्वेता रूम से बाहर निकली और बाथरूम की ओर चली गई तो दुसरी ओर मेरी सासू मां गहरी निंद्रा में सो रही थी, मैं बेड पर नींद में होने का नाटक की फिर श्वेता ने रूम का दरवाजा बंद किया तो मैं कुछ देर बाद ऊपर के मंजिल पर चली गई, देवर जी के रूम का दरवाजा धकेली तो देवर जी तो नशे में चूर थे और मुझे देख बोले ” भाभी टॉप फ्लोर पर चलिए ना वहीं ड्रिंक्स लेंगे ” और दोनों टॉप फ्लोर पर आ गए, फरबरी का महीना तो बसंत ऋतु का आगमन साथ ही थोड़ी ठंडी हवा मैं तो मस्त थी, प्रेम ड्रिंक्स बनाकर मुझे दिया तो मैं व्हिस्की पीने लगी और साथ में सिगरेट भी फूंकने लगी, सच पूछो तो बिस्तर पर लेटने से पहले नशा जरूरी था कारण की गैर मर्द के साथ अपनी हवस को मिटाना चाहती थी और फिर मैं दुबारा एक ड्रिंक्स ली,
मैं तो नशे में झूमते हुए प्रेम से लिपट गई तो वो मेरे चेहरे को चूमने लगा साथ ही मेरे चूतड को सहलाने लगा तो मैं उसकी छाती से बूब्स रगड़ते हुए उसमें सामना चाहती थी तभी प्रेम मेरे ओंठ को चूमने लगा साथ ही मेरे साड़ी सहित पेटीकोट को कमर तक उठाने लगा तो मैं उसके मुंह में ओंठ घुसाई और थोड़ी देर तक मेरे ओंठ को चूसा की मैं उसे बोली ” चलो प्रेम बेड पर ही फिर मेरी बदन को रात भर प्यार देना ” उसके रूम आई फिर प्रेम दरवाजा बंद कर दिया तो मैं खुद अपने साड़ी उतार फैंकी ” देखो देवर जी अपनी भाभी के मस्त बूब्स, लो इसे भी खोल दी ” फिर पेटीकोट के नाड़ा को खोल निचले भाग को नग्न कर दी तो प्रेम मेरे करीब आया और मेरे बूब्स दबाने लगा साथ ही मेरे ओंठ को जीभ से चाटने लगा तो मेरा हाथ उसके पैजामा की डोरी को खोज रहा था,
उसे खोल उसके लन्ड को पकड़ ली फिर हिलाते हुए प्रेम के जीभ को मुंह में लिए चूसने लगी तो दोनों नग्न अवस्था में एक दूसरे से लिपटे थे, वो मेरे चूतड को सहलाने लगा तो मैं उसके लन्ड का एहसास जांघो के बीच पा रही थी, कुछ देर जीभ मुंह में भर चूसा फिर मेरी कमर में हाथ डाले मुझे गोद में लेकर बिस्तर पर लिटा दिया तो मैं नशे में इतनी चूर थी की किसी वैश्या की तरह टांगे फैला बूर सहला रही थी, प्रेम मेरे बगल में बैठा फिर मेरी चूची दबाने लगी ” तुम बहुत सेक्सी और हॉट हो
( मैं हंस दी ) सही बोले मेरी जैसी औरत वो भी नग्न अवस्था में, हॉट तो लगेगी
छत पर मैं दो पैक व्हिस्की पीकर नशे में चूर हुई फिर बिस्तर पर तो नंगे ही लेट प्रेम को प्यार करने का आमंत्रण दी और वो मेरे बूब्स पकड़ मुंह में भर चूसने लगा तो उसका एक हाथ मेरी दूसरे बूब्स को दबाए जा रहा था और मैं उसके लन्ड को पकड़ इस कदर नीचे ऊपर करने लगी मानो गाय के थन से दूध निकाल रही हूं और प्रेम मेरी चूची चूसने में मस्त था तो मैं आहें भर रही थी ” उह उफ उई आराम से चूस प्रेम दांत मत लगाओ प्लीज आआआआह्हह्ह मेरी चूत
( देवर जी चूची मुंह से निकाल दिया फिर दूसरे चूची को पकड़ लिया ) इतनी जल्दी चूत को क्या ” मैं शर्म के मारे चेहरा फेर ली, देवर जी मेरी बाईं चूची मुंह में भर चूसने लगा तो मैं उसके पीठ पर हाथ फेरने लगी और तभी प्रेम का हाथ मेरी जांघो के बीच था, मेरी चूत के दरार में उंगली वो रगड़ने लगा तो मैं उसके जांघो के बीच हाथ लगाए लन्ड पकड़े हिलाने लगी और तभी देवर जी की उंगली मेरी चूत में थी और मैं कामुक हुए तेजी से सांस लेने लगी तो मेरा गोरा चेहरा लाल हो चुका था ” आह ओह उह प्रेम अब बूब्स छोड़ ना चूत को चाट प्लीज ” फिर भी प्रेम मेरी चूची चूसता रहा साथ ही मेरे चूत को उंगली से कुरेद रहा था, उसका १४-१५ सेंटीमीटर लम्बा लन्ड मेरे हाथ में था जिसे हिलाते हुए मैं चूसने को आतुर थी और फिर उसने मेरी चूची को मुंह से निकाला ” क्या भाभी आपके जैसी खेली खाई औरत इतनी जल्दी….
( मैं बोली ) तो फिर रात भर मेरी चूची को ही चूसो ” और देवर जी मेरे बूब्स को पकड़ उसके निप्पल को जीभ से चाटने लगे, काले रंग की निप्पल टाईट थी जिसे वो चाटने लगा और फिर मैं तो उम्र में ०७ साल छोटे लड़के के साथ बिस्तर पर संतुष्ट थी, मेरे पेट से लेकर कमर तक वो चूमने लगा साथ ही मेरे गाल पर हाथ फेर रहा था तो मैं उसके हाथ पकड़ अपने बूब्स पर लगाई जिसे वो दबाने लगा और फिर कमर तक चूमने के बाद देवर जी मेरी ओर देखे ” तकिया दीजियेगा
( मैं पास पड़े तकिया उठाकर उसको दे दी जिसे वो मेरी चूतड के नीचे लगाया तो मैं पूरी तरह से जांघो को फैला दी ) ले अब चाट चाट कर इसका रस निकाल दे फिर
( देवर जी मेरे जांघो पर हाथ फेरने लगे ) क्यों शीला बिना लन्ड चूसे चुदाई का मजा लेगी ” मैं सर हिलाकर हामी भर दी फिर देवर जी मेरी जांघो के बीच चेहरा लगाए और मेरी चूत पर चुम्बन देना शुरू किए तो मेरा पूरा बदन कामाग्नि के गिरफ्त में था, प्रेम मेरी चूत जिसकी फांकें मोटी थी उसको अलग कर जीभ से गुदाज अंग को चाटने लगा तो मैं आहें भरने लगी ” आह उह ओह आआआह्हह पूरा जीभ डालो ना डियर ” और मेरी चूत जोकि ढीली थी में उसका पूरा जीभ था जिसे वो नचाने लगा तो मेरी जान निकलने लगी ” आह ओह उह अब बस करो नहीं तो मुंह में ही मूत दूंगी ” प्रेम कुत्ते की तरह जीभ से लपलप चूत चाटने लगा और मैं रह रहकर चूतड को ऊपर की ओर उठाती, मुझे तो तेज मुतवास लगी थी और प्रेम अब मेरी चूत के फांकों को उंगलियों के बीच लेकर दबाने लगा ” आह ओह ये क्या कर रहे हो प्रेम तेरी श्वेता की चूत नहीं है
( देवर जी हंस दिए ) उसकी बात क्यों कर रही हैं आप ” और फिर मैं उनके हाथ हटाई फिर नंगे ही टॉप फ्लोर पर जाकर मूतने लगी, वापस आई और पानी का बोतल लिए बरामदे पर ही बूर को साफ की फिर बेड पर प्रेम के पास आई।
प्रेम लेटा हुआ था तो उसका लन्ड पूरी तरह से टाईट था जिसे मैं पकड़ चूमने लगी फिर सुपाड़ा को मुंह में भर चूसने लगी, प्रेम मेरे सीने से लटकते स्तन को पकड़ दबाने लगा चूंकि मैं लन्ड मुंह में लेते वक्त अपना जिस्म उसके चेहरे की ओर कर रखी थी तो देवर जी मेरे बूब्स को दबाते हुए मस्त थे और मैं मुंह खोल उसका लन्ड अंदर ली फिर चूसने लगी, प्रेम अपना दूसरा हाथ मेरी चूतड के दरार में डाल दिया और उंगली रगड़ते हुए गांड़ के छेद को फैलाया तो मैं लन्ड मुंह में भर चूस रही थी तभी मेरे दिमाग में आया की क्यों ना देवर जी के ऊपर ही सवार हो जाऊं और मैं लन्ड को मुंह से निकाल उनके बदन पर सवार हुई लेकिन चेहरा उनके लन्ड की ओर था, बिल्कुल ही डॉगी स्टाइल में थी तो मेरी फैली हुई जांघो के बीच प्रेम का चेहरा था और मैं अब पीछे मुड़कर बोली ” देवर जी दोनों एक ही साथ एक दूसरे के योनि /लन्ड को चूम चाटकर मजे करें
( प्रेम मेरे चूतड पर हाथ रख उसे थोड़ा और नीचे किया ) हां भौजी अब तो आपकी चूत चाटकर रस निकाल दूंगा ” और मैं व्हिस्की के नशे मे चूर हुए उसके लन्ड मुंह में लिए चूसने लगी तो एहसास हुआ की प्रेम मेरे चूत को चूम रहा है, मैं तो उसके २/३ लन्ड मुंह में भर चूस रही थी की देवर जी मेरी चूत को उंगली से फैलाकर जीभ से चाटने लगे, अब तो मेरी चूत रस भी आसानी से नहीं छोड़ती कारण की लंबे अरसे से शारीरिक संबंध बना रही हूं और उसका जीभ मेरी चूत को चाटने में मस्त था की मैं मुंह का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी, देवर और भाभी अपने संबंध को भूल हमबिस्तर हो रहे थे, अब मेरी गांड़ के मुहाने को फैलाकर प्रेम उसमें जीभ घुसाया और चाटना शुरु किया तो मैं मुखमैथुन करते हुए मस्त थी, मेरी चूत में खुजली होने लगी तो अब मेरे चूत की चुदाई शेष थी और मैं लन्ड मुंह से निकाल सिसकने लगी ” आह ओह उह उई आआहाह चाट साले अब तो रस निकलने पर है ” फिर चूत से रस निकल पड़ा जिसे प्रेम चाट रहा था और मैं उसके बदन पर से हटकर देखी तो उसके चेहरे पर बूर से रस निकल चेहरा को गीला कर चुकी थी, मैं उसका चेहरा देख हंस पड़ी तो देवर जी मुझे छोड़ रूम से निकल गए फिर मैं लेटकर उनका इंतजार करने लगी।
मैं अपने बदन पर चादर ओढ़े लेटी थी तभी देवर जी रूम में आए और वो कमर से टॉवल लपेटे थे, दरवाजा को बंद कर मेरे पास आए फिर मेरे बदन पर से चादर हटा दिए, मैं खुद ही जांघो को फैला दी तो प्रेम अपना टॉवेल हटाया फिर मेरे दोनों पैर को घुटने के बल मोड़ दिया, मैं समझ गई की मेरी चुदाई वो करेगा फिर प्रेम अपना लन्ड पकड़े चूत पर रगड़ने लगा तो मेरी फांकों के बीच लन्ड था और सुपाड़ा सहित थोड़ा लन्ड अंदर गया की वो आहिस्ते आहिस्ते मेरी चूत में लन्ड घुसाने लगा, उसका २/३ लन्ड चूत में था तभी प्रेम जोर से धक्का दिया और चोदने लगा तो मैं ” आह ओह उई बहुत मजा आ रहा है ” आहें भरने लगी और देवर जी तो मेरे चूत में धक्का देते हुए चुदाई करने लगे, मैं तो रसीली चूत में लन्ड पाकर मस्त थी और प्रेम तभी मेरे जिस्म पर लेटकर चोदने लगा तो मैं उसके चेहरे को चूमने लगी और फिर धक्का सहते हुए चूतड उछालना शुरू की तो देवर जी मेरी चूत चुदाई में मस्त थे, मेरे गुलाबी ओंठ को चूम बोले ” क्यों शीला कल रात गांड़ चुदवाना है
( मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदाने में लीन थी ) कल नहीं आज रात देवर जी क्यों दुबारा आपका लन्ड खड़ा नहीं होगा ” ∆प्रेम चुदाई करता हुआ मस्त था तो मेरी रसीली चूत गर्म होने लगी थी फिर मैं चूतड स्थिर कर उसके गाल चूम ली तो प्रेम बूर से लन्ड निकाल बेड पर लेट गया और मैं अब उसके लन्ड पर बैठ चुदाई कराने को तैयार थी, शीला के लिए देवर जी हां या रामू सब गैर थे फिर भी बदन की आग बुझाने के लिए कुछ तो करना पड़ता और मैं प्रेम के लन्ड पकड़ बोली ” अब तेरे लन्ड पर बैठकर ही…. ” वो मेरे गाल चूम लिया, फिर मैं उठकर बैठी और देवर जी चित लेटे हुए थे और मैं उनके लन्ड के ऊपर चूत किए बैठ गई, मेरी दोनों जांघें फैली हुई थी तो चूतड को उसके लन्ड के ऊपर रखी थी और देवर जी मेरे कमर पकड़ बोले ” शीला अब लन्ड खुद से डालो और चुदाई कराओ
( मैं लन्ड पकड़े चूत में घुसाने लगी ) हां साले सब कुछ मैं ही करूं और तुम मजे लो ” मैं प्रेम के लन्ड चूत में घुसाने लगी और आधा लन्ड चूत में घुसते ही अपने गोल गद्देदार नितंब को नीचे की ओर करने लगी तो प्रेम नीचे से धक्का दिया और उसका लन्ड मेरी चूत में खसख्साता हुआ घुसा फिर मैं चूतड को ऊपर नीचे करते हुए चुदाने लगी तो प्रेम मेरी कमर में हाथ डाले नीचे से धक्का देने लगा और मेरी बूब्स दबाने लगा, मैं तो उसके लन्ड पर बैठ चुदाने लगी और अब प्रेम मेरे कमर को पकड़े नीचे से जोर का धक्का देने लगा तो मैं ” आह ओह उह उई आआआह्ह बूर में तो आग लगी है डियर
( प्रेम चोदता हुआ मस्त था ) सब बुझा दूंगा साली रण्डी तुझे तो चोद चोदकर रण्डी बना दूंगा ” और उसका लन्ड चूत में चुभने लगा तो मैं चूतड दुबारा ऊपर नीचे करते हुए मस्त थी, सम्भोग के चरम पर दोनों थे लेकिन बिना वीर्य स्खलित हुए इसका अंत नहीं होता और अब प्रेम भी चोदता हुआ हांफने लगा तो मैं भी ” आह ओह उह आआह्हह्हह बूर में तो आग लगी है प्रेम
( प्रेम चोदता हुआ बोला ) ये लो डार्लिंग आग बुझा लो ” और उसके लन्ड से वीर्य स्खलित होकर मेरी चूत को गीला कर दिया तो मैं उसके ऊपर लेट उसके गाल चूम ली ” क्या एक बार और ” फिर रात को मेरी गांड़ चुदाई हुई, इंतजार कीजिए।
मेरी सासु मां दो दिन में ही स्वस्थ हो गई तो मैं भी राहत महसूस की और एक शाम मैं अपनी ननद श्वेता, सासु मां के साथ बैठकर चाय पी रहे थे की तभी देवर जी आए फिर कुर्सी पर बैठ बोले ” क्यों भाभी एक प्याला चाय मिलेगा क्या
( मैं हंस दी ) जरूर देवर जी ” और मैं चाय का प्याला लिए किचन गई फिर उनके लिए चाय बनाने लगी, आज रात तो मुझे नौकर रामू के साथ मजा लेना था तो देवर जी को शक नही हो इसलिए कुछ बहाना बनाना होता, वैसे भी लड़की हो या औरत वो तो महावारी का बहाना बना सकती है और मैं चाय का प्याला लेकर किचन से निकलने वाली थी की प्रेम वहां आ गया और मैं ” देवर जी चाय ले लीजिए मैं जरा रूम से आई
( वो हंस दिया ) क्या हुआ भाभी, मैं किचन से निकलने लगी तो मेरा हाथ पकड़ लिया तो मैं धीरे से बोली ” देवर जी अभी जरूरी काम है छोड़िए ना ” फिर रूम आकर दरवाजा बंद की और बेड पर कुछ देर लेटी, थोड़ी देर बाद दरवाजा खोल बाहर निकली तो श्वेता उधर से आई ” क्या भाभी आपकी तबीयत ठीक तो है
( मैं बोली ) पीरियड आ गया है श्वेता थोड़ी देर आराम करती हूं फिर खाना…
( श्वेता मेरा हाथ पकड़ बोली ) जाकर आराम कीजिए भाभी खाना मैं बनाऊंगी और रामू भी आता होगा ” मैं रूम में आई फिर लेट गई तो थोड़ी देर बाद देवर जी अंदर आए और मैं बेड पर उठकर बैठ गई तो प्रेम मुझे देख मुस्कुराया ” समझ गया भाभी आखिर आपको क्या हुआ है
( मैं बोली ) अच्छा तो क्या हुआ
( वो बोला ) वही जो हरेक महीने आता है शायद ” मैं सर हिलाकर हामी भर दी और वो रूम से चला गया, मैं बेड पर लेटी रही फिर अपने पति और बेटा से भी बात की, रात के ०८:४५ बजे होंगे की मैं रूम से निकली फिर फ्रेश होने के लिए बाथरूम चली गई, वापस आई तो देखी की देवर जी, ननद और सासु मां खाना खा रही हैं तो रामू वहीं पर खड़ा है, मैं बोली ” रामू इधर सुनो
( वो बोला ) हां दीदी * ” और मेरे पास आया तो मैं बोली ” खाना मेरे रूम में ही लेते आओ ” फिर मैं अपने रूम चली आई और बेड पर लेटकर मोबाइल में कुछ देखने लगी, थोड़ी देर बाद रामू खाना लिए रूम मे आया तो मैं उसे बोली ” खाना को टेबल पर रख ढक दो और इधर सुनो
( वो आया ) सब लोग नींद में रहेंगे तो फिर ” वो मेरा इशारा समझ सर हिलाया और मैं दुबारा लेट गई तो कुछ देर बाद श्वेता मेरे रूम में आई ” क्या भाभी अधिक परेशानी हो रही है
( मैं बोली ) पहला दिन तो थोड़ा दर्द पेट में होता ही है, तुम जाकर आराम से सो जाओ
( श्वेता बोली ) हां भाभी आज रात तो कई दिन बाद इत्मीनान से रूम में सोऊंगी ” और वो चली गई तो मैं बेड पर लेट गई, आधे घंटे बाद मैं उठकर फ्रेश हुई फिर खाना खाई और बरामदे पर देखी की रामू तो अपने बेड पर लेटकर खर्राटे भर रहा है, मैं रूम में आई और बेड पर जाकर लेट गई अभी तो रात के १०:३० बजे थे और मुझे रामू के साथ सेक्स करना था।
मैं रूम का दरवाजा सटाकर छोड़ दी थी ताकि रामू अंदर आ सके और मैं कुछ देर में ही गहरी निंद्रा में सो गई फिर मेरी आंखें तब खुली जब मेरे कमर के पास बैठकर रामू मेरे साड़ी को खोल रहा था, नाईट बल्ब ऑन था तो रामू मेरे सीने पर से साड़ी हटाए कमर से उसे निकाल रहा था और मैं हंस दी ” क्या रामू तुम सो गए थे क्या ” लेकिन वो चुप रहा और मेरे बदन से साड़ी निकाल मुझे पेटीकोट और ब्लाउज में रहने दिया तो मैं उठकर बैठ गई, उसके गाल पर हाथ फेरते हुए उसके पैजामा की डोरी को खोलने लगी तो वो मेरे करीब होकर मेरे चेहरे को चूमने लगा और उसका हाथ मेरे पीठ पर था, मैं उसके पैजामा को कमर से निकाल दी तो रामू खुद नंगा हो गया फिर मेरे ब्लाउज की डोरी खोल मेरे ऊपरी भाग को नंगा कर दिया। मैं उसे बाहों मे लेकर उसके ओंठ पर चुम्बन देने लगी तो रामू मेरे पीठ सहलाते हुए मेरे रसीले ओंठ मुंह में भर चूसने लगा और उसका लन्ड मेरी कमर से चिपका हुआ था, रामू भले ही नौकर था लेकिन काफी साफ सफाई से रहता था और मेरे ओंठ छोड़ वो मेरे पेटीकोट के नाड़ा को खोल दिया, दोनों नंगे थे और मैं उसके ओंठ पर जीभ फेरने लगी तो वो मुंह खोल मेरे जीभ अंदर लिया फिर चूसने लगा और मैं उसके गोद में पैर फैलाए बैठी तो दोनों पैर उसके कमर से लपेट जीभ चुसवाने लगी, मेरे बदन में तो आग लगी हूई थी और रामू थोड़ी देर जीभ चूसा फिर मुझे बेड पर लिटा दिया। शिला तो नंगे अपने जिस्म को देख रही थी और रामू मेरे छाती के ऊपर चेहरा कर बूब्स पकड़े दबाने लगा ” इसको चूसता हूं दीदी
( मैं हंस दी ) अबे साले दीदी नहीं बीबी बोल ” और वो मेरे चूची को मुंह में लिए चूसने लगा साथ ही दूसरे चूची को पकड़ दबाने लगा, मेरी चूत तो खुजलाने लगी और मैं जांघ पर जांघ चढ़ाए चूत को रगड़ने लगी ” आह ओह उह उई आआआह्ह रामू चूस यार चूस मेरी चूची ” रामू मेरे चूची को मुंह से निकाल दिया फिर दूसरे चूची को पकड़ मुंह में भर लिया और चूसने लगा, मैं तो बेड पर चुदवाने को तड़प रही थी की वो मेरे जांघो पर हाथ फेरने लगा और मैं जांघो को फैलाई तो उसका हाथ मेरी चूत पर था, जिसकी फांकों के बीच उंगली डाल रगड़ने लगा और मैं तो कामुकता वश सिसकने लगी ” आह उई मां मर गई अब चोद दे रामू उह आआआह्हह मेरी चूत ” और रामू कुछ देर तक चूची को चूस चूसकर लाल कर दिया फिर मेरे छाती से लेकर पेट तक पर चुम्बन देने लगा,
