मां को चोदने के लिए लोगों ने उकसाया 6

माँ बेटा

गार्गी की तरह ही इस औरत संपा से पहली बार ही मिल रहा था लेकिन कुतिया ने मेरे बारे में सारी जानकारी निकाल कर रखी थी। लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इस रंडी को मेरे बारे में किसने यह सब बताया। समझ में आ गया कि इस औरत से कुछ भी छिपाना बेकार था।

मैं: संपा मैडम, अभी नाम मत पूछना, आज एक नई औरत ने बुलाया है। उसने कहा कि पहले मेरे हाथ का खाना खाना और फिर मुझे जितना खाने का मन करे खाना। मैडम आज पूरी रात बाहर रहने का परमिशन लेने आया हूं। कल सुबह मेरी मां आ रही है। हेडमास्टर साहब ने कल का पूरा दिन और रात बाहर रहने का परमिशन दे दी है, वो भी बताने आया था।

संपा: ठीक है अभी तुम्हारी नई कुतिया का नाम नहीं पुछूंगी। मित्रा साहब अपने बेटे के साथ बाहर गये है, कल शाम को आयेंगे। तुम्हारी मां की ट्रेन कब आती है?

मैं: मां हावड़ा देहरादून मेल से आ रही है। 8 बजे आती है।

संपा: वो ट्रेन हमेशा डेढ़-दो घंटा लेट रहती है। नई कुतिया को चोद कर पहले मेरे घर आओगे, मुझे पूरी रिपोर्ट दोगे, और उसके बाद ही अपनी मां को चोदने जाना। अगर अभी तक अपनी मां को नहीं चोदा है, तो कल ही होटल में चोद लेना। मेरे जैसी औरत को सैकड़ों बार चोद कर जितना मज़ा आयेगा उससे ज़्यादा मज़ा अपनी मां को एक बार चोदने में ही आयेगा।

साली एक और औरत मां को चोदने के लिए उकसा रही थी।

नौकरानी: मैडम लेट हो रहा है।

संपा: अगर अपनी नई कुतिया को चोदना है, अपनी मां की गांड मारनी है, तो जल्दी से नंगे हो जाओ। नहीं तो यहां से जाने नहीं दूंगी। अभी शिकायत कर दूंगी कि घर में मुझे अकेला देख कर तुम ज़बरदस्ती कर रहे थे। जल्दी से कपड़े खोलो।

मैं बुरी तरह से फस गया था। एक तो इसे मालूम था कि मैं किस-किस को चोद रहा था। दूसरा ये हरामजादी धमकी भी दे रही थी। मैं क्या करता? तो मैं नंगा हो गया। संपा और नौकरानी दोनों ने एक साथ लंड को पकड़ा और साथ ही मसलने लगी।

नौकरानी: मैडम, सीमा ने ग़लत नहीं कहा था, ये घोड़े के लंड जैसा ही है।

संपा: अपनी मां से मुझे भी मिलाना, रंडी से पुछूंगी कि किस घोड़े से चुदवा कर हरामजादी ने तुम्हें पैदा किया। हम भी तो देखें कि ये सिर्फ़ देखने में ही बढ़िया है कि काम भी बढ़िया करता है। अभी 6 भी नहीं बजे है। हम दोनों को खुश कर दे और उसके बाद तुम्हें अपने सर से परमिशन लेने की ज़रूरत नहीं रहेगी। हर रात बाहर गुज़ारो लेकिन हर हफ़्ते कम से कम दो बार तुम हम दोनों को चोदोगे।

मेरा सोचना ग़लत नहीं था। चुदाई की ज़रूरत हम मर्दों से ज़्यादा औरतों को होती है। ये दो औरत जिनसे मैं पहली बार ही मिल रहा था मुझसे चुदवाना चाहती थी। मैं भी क्यों मौक़ा चूकता? मैंने पहले संपा को नंगा किया और थोड़ी देर उसकी मदमस्त जवानी को घूरता रहा। उसके बाद मैंने उसकी नौकरानी को भी नंगा किया।

नौकरानी: अमित, मेरा नाम सपना है, मैं सीमा की बड़ी बहन हूं और अपनी इस संपा दीदी की नौकरानी हूं।

संपा ने सपना की बूर को ज़ोर से दबाया।

संपा: कुतिया, झूठ क्यों बोल रही है रंडी? अमित, ये लड़की मुझे इतनी पसंद आई कि मैंने इसकी मां को एक लाख रुपया दिया और अब ये हर हमेशा हमारे साथ ही रहती है। ये साथ ही नहीं रहती, हम दोनों साथ ही तुम्हारे मित्रा साहब से चुदवाते हैं। मेरे दोनों बच्चों को भी हमारा ये रिश्ता मालूम है।

सपना 24 साल की थी और संपा 42 साल की। दोनों के बीच का प्रेम और स्नेह शायद कहीं और नहीं दिखता। सात साल से दोनों औरत साथ रह रही थी। दोनों एक ही आदमी से चुदवा रही थी।

मैं: मैडम आप दोनों की जवानी मुझे ललचा रही है। आप दोनों एक ही आदमी की पत्नी हैं। आप दोनों एक ही आदमी से प्यार करती हैं फिर मुझे क्यों पाप में डाल रही है?

संपा: बेटा, ज़्यादा शराफ़त दिखाने की ज़रूरत नहीं है। देखो तुम्हारा सांप ( लंड ) हमारी बिल ( बूर ) के अंदर घुसने के लिए कितना बेताब है। और तुम्हें यह सोच-सोच कर खुश होने की ज़रूरत नहीं कि हमारे घरवाले के अलावा तुम ही हमें चोद रहे हो। इससे पहले हमने ना यहां के किसी स्टूडेंट्स के साथ सेक्स किया है और ना यहां के चुदक्कड़ आदमियों के साथ ही चुदाई की है।

संपा: लेकिन हम दोनों बीच-बीच में शहर जाते हैं। एक ख़ास होटल में हमारे कस्टोमर हमें हमारी क़ीमत देकर चोदते हैं। हम औरतों के बूर की, हमारी जवानी की बहुत क़ीमत हैं। सिर्फ़ तुम्हारे जैसे सांड और घोड़ों के जैसे चोदने वाले के साथ ही मुफ़्त में चुदवाते है लेकिन बाज़ार में हमारी क़ीमत बहुत ज़्यादा है। हम दोनों को खुश करो और रात भर जिस रंडी को चोदना है चोदो। लेकिन याद रखो, सुबह 6 बजे मैं तुम्हारा इंतज़ार करुंगी।

वार्डन की घरवाली की बात सुन कर समझ गया कि ये दोनों बिना चुदवाये मुझे बाहर नहीं जाने देंगी। उस समय शाम का छह ( 6:00) ही हुआ था। गार्गी मैडम ने आठ बजे बुलाया था। लेकिन जब दो माल मेरे सामने नंगी थी तो उन्हें बिना चोदे कैसे जाता? मैंने संपा की दोनों चूचियों को सहलाना, मसलना शुरु किया। दोनों एक साथ ही मेरे लंड से खेल रही थी।

मैं: संपा रानी, जब 11-12 दिन पहले मेरे एक दोस्त ने यह कहा कि वो यहां की सबसे खूबसूरत औरत को चोदना चाहता है,‌ तब पहली बार मेरे मन में भी उसके लिए चाह जगी। अब तुम कहोगी कि मैं तुम्हारे मुंह पर कह रहा हूं। लेकिन अगर मुझे ये ऑप्शन दिया जाए कि तुम्हें या रेखा में से मैं सिर्फ़ एक ही औरत को चोद सकता हूं, तो मैं हर बार, बार-बार तुम्हें ही पसंद करुंगा, तुम्हें ही चोदूंगा।

मैं: संगीता, रेखा, या तुम्हारी इस सपना जैसी बदन वाली औरत हर दस औरत में 7-8 तो होंगी ही। मुझे पर हमेशा तुम्हारी जैसी मस्त-मस्त माल ही चाहिए थी। अब मुझे समझ में आया कि पहले मेरे मन में मां या अपनी दीदी को चोदने का ख़्याल क्यों नहीं आया? क्योंकि मेरी 40-41 साल की मां की‌‌ बॉडी भी तुम्हारी बॉडी जैसी मस्त और मालदार नहीं है। इस उम्र में भी तुम्हारी चूचियां कितनी टाईट है। पहले किसे चोदूं?

सपना: पहले इस आग की भट्टी मेरी घरवाली की बूर में लंड पेलो। अगर इस कुतिया के बूर की गर्मी से तेरा लंड सही सलामत बाहर निकल गया, फिर मुझे चोदना। मैं सात साल से इस हरामजादी को चुदवाते देख रही हूं, लेकिन ये रंडी किसी भी लंड को अपनी बूर में 10 मिनट भी टाईट नहीं रहने देती है। तुम्हारे सर हर बार मेरा बूर में 25-30 मिनट टाईट रहते हैं, लेकिन रंडी 7-8 मिनट में ही चूस कर ठंडा कर देती है। देखें तेरा लंड कितनी देर इस कुतिया की गर्मी संभाल सकता है। चल रंडी बेड पर लेट जा।

एक 24 साल की लड़की अपनी मालकिन को कुतिया, हरामजादी, रंडी बोल रही थी, बोल रही थी कि वो उसे चोदती थी। ऐसे बोल रही थी मानो संपा ही नौकरानी हो।

संपा: राजा, तू मुझे अपनी बूर चूसने दे तब चुदवाने में और मज़ा आयेगा।

संपा अपनी नौकरानी को “राजा” बोल रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि दोनों क्या बात कर रही थी।

सपना: आ जा रानी, तू किसी भी कुत्ते से ज़्यादा बढ़िया से चाटती है, आजा, आज इस मादरचोद के सामने तुझे पेशाब पिलाऊंगी।

पेशाब पिलाने की बात पर संपा ने सपना के दोनों जांघों को पकड़ा और बूर को चाटने लगी। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि कोई औरत दूसरी औरत की बूर चाट सकती है।

मैं: तुम दोनों बेड पर आओ, मुझे देर हो रही है, सपना तू मेरा लंड चूस और मुझे संपा रानी की मालपुआ जैसी बूर का स्वाद लेने दे।

मैं बेड पर लेट गया। मैंने संपा से कहा कि मेरे उपर उल्टा (69) लेट जाए। संपा मेरे उपर उल्टी हो गई। मैं उसकी दोनों जांघों को पकड़ कर बूर को चूसने-चाटने लगा और दोनों रंडी लंड को चूसने-चाटने लगी। मैं कभी क्लिट को चूसता था तो कभी बूर की पत्तियां चबाता था।

बीच-बीच में जीभ को भी बूर के अंदर डालता था। सच कह रहा हूं संपा की बूर का स्वाद बाक़ी सभी बूर का स्वाद से बढ़िया लग रहा था। कुछ देर, क़रीब 15 मिनट हम तीनों अपना काम शांति से करते रहे। कमरे में सिर्फ़ चाटने और चुभलाने की आवाज़ गूंज रही थी।

“अमित, बूर की आग बहुत भड़क गई है, इसे ठंडा करो।” बोल कर संपा बेड पर फ़्लैट लेट गई। मैंने उसकी मस्त हथिनी जैसी जांघों के बीच पोज़ीशन ली। एक हाथ से उसके एक कंधा को पकड़ा, और दूसरे हाथ से लंड को पकड़ कर बूर में दबाया। चूत्तड़ों को थोड़ा उपर कर फ़ोकस किया, और पूरी ताक़त से धक्का मारा।

“उफ़, बहुत मोटा है।” संपा ने मादक आवाज़ में कहा। मैं लगातार धक्के मारता रहा, और चौथे धक्का में लंड की पूरी लंबाई बूर के अंदर चली गई। मैं लगातार पूरी ताक़त से पेलता रहा, और सपना अपनी रानी के बदन को सहलाती रही। संपा के चेहरे को देख कर साफ़ दिख रहा था कि औरत को बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा है। सपना ने संपा की दोनों चूचियों को ज़ोर से दबाया।

सपना: साफ़ दिख रहा है कि तेरी बूर को ये घोड़े का लंड बहुत ज़्यादा पसंद आ गया है।

संपा: राजा, डिस्टर्ब मत कर। उफ़ अमित बहुत ही बढ़िया से चोद रहे हो। बहुत मज़ा आ रहा है यार। पहले ही क्यों नहीं चोदा? जब से सीमा ने तेरी चूदाई और लंड की बात की, तब से ही हम दोनों की बूर इस लंड को अंदर लेने के लिए तड़प रही थी। सीमा ने ग़लत नहीं कहा था। तेरे जैसा मर्द और कोई नहीं होगा।

मुझे भी उस मस्तानी माल को चोदने में बहुत मज़ा आ रहा था।

मैं: संपा, मेरी मां कल आ ही रही है। तुम्हारे पास लाऊंगा, फिर तुम ही उसकी बूर को धन्यवाद देना कि उसने एक घोड़े को पैदा किया।

सपना: तुमने अपनी मां को चोदा है ना?

मैं: सपना रानी, अपने इस लंड की क़सम अभी तक नहीं चोदा है। लेकिन मैं कल ही रंडी को अपना लंड दिखाऊंगा फिर देखता हूं कि कुतिया क्या करती है। लेकिन एक बात तो पक्की है कि दुनिया में कोई दूसरी कुतिया तुम्हारी इस रानी जैसी चूदाई का मज़ा नहीं दे सकती।

सपना: जो हालत तेरी है वही हालत मेरी हुई थी जब मैंने इसे पहली बार देखा था। मेरी मां जिसे तुमने चोद लिया है इस घर में काम करती थी। एक दिन मां ने अपनी जगह मुझे काम करने भेजा। उस समय तक मैं कुंवारी थी, किसी लंड को ठीक से देखा भी नहीं था। तुम्हारी इस माल पर नज़र पड़ते ही मालूम नहीं मुझे क्या हुआ। दूसरे रूम में दोनों भाई बहन पढ़ाई कर रहे थे, और मैंने अपने से 20-22 साल बड़ी औरत को नंगा कर दिया और पहले ही मौक़े में मैंने इसकी बूर को एक घंटा से ज़्यादा देर तक चूसा और चाटा।

सपना: जब मैं ठंडी हुई तो कपड़े पहन कर काम करने लगी। ये कुतिया किसी से कुछ बोले बिना घर के बाहर चली गई। क़रीब एक घंटा के बाद मेरी मां को साथ लेकर आई। जानते हो मेरी मां ने क्या कहा?

सपना जो कह रही थी उस पर मुझे विश्वास करना मुश्किल था। फिर भी मैंने पूछा कि उसकी मां ने क्या कहा।

सपना: मेरी मां ने कहा कि अब से मेरा उन सबसे कोई रिश्ता नहीं है। मुझे हर हमेशा संपा के साथ ही रहना है।

संपा: और अमित, उस बात को सात साल हो गये। हम दोनों साथ हैं। उसी रात मैंने सपना को तुम्हारे सर से चुदवाया और सपना की कुंवारी चूत का मज़ा लेकर मेरा घरवाला भी सपना का दीवाना हो गया। उस रात से ही हम तीनों साथ ही रात गुज़ारते है। इतना ही नहीं पिछले एक साल से मेरी बेटी रूपा भी हमारे साथ लेस्बियन मस्ती लेती है। मित्रा हम तीनों की बूर चूसता है। हम तीनों उसका लंड चूसते हैं। तेरा सर तो अपनी बेटी की बूर में लंड पेलना चाहता है लेकिन रूपा बोलती है कि अपने बाप से कभी नहीं चुदवायेगी। अगली बार जब आयेगी तब तुम्हें उससे मिलवा दूंगी। कितना चोदोगे यार !

सपना: रानी, ये घोड़ा 35 मिनट से चोद रहा है।

संपा: कॉलेज में एक बूढ़ा प्रोफ़ेसर था, जो 15-20 मिनट चोदता था। और अब 20-22 साल बाद तुम इतनी देर से पेल रहे हो। सपना ने ग़लत नहीं कहा है, उस प्रोफ़ेसर के बाद कोई भी मेरी बूर में 10 मिनट भी नहीं टीक पाता है। लेकिन तुमने कमाल कर दिया। मैं थक गई अब सपना को चोदो।

लेकिन मैं इतनी जल्दी इस मस्तानी माल को नहीं छोड़ने वाला था।

मैं: संपा रानी, दुनिया की सबसे मस्त बूर में लंड पहली बार घुसा है। अब जब तक ये प्यारी बूर मेरे लंड का सारा रस नहीं चूस लेगी लंड बाहर नहीं निकलेगा।

संपा ने ज़ोर से कमर उचकायी। मैंने और ज़ोरदार धक्का मारा।

संपा: कौन कुतिया तुम्हारे लंड को बूर से बाहर निकालना चाहेगी। अपनी नई माल को गोली मारो, हम दोनों रंडियों को ही रात भर चोदो।

बोलते हुए संपा ने अपनी दोनों मस्त हथिनी जैसी जांघों से मुझे टाईटली बांधा और मुझे अपनी बाहों में कस कर समेटा। उसकी पकड़ इतनी टाईट थी कि मैं धक्का नहीं मार पाया। संपा ही अपनी चूत्तड़ों को उछालती रही और 5-6 मिनट के बाद मैं झड़ने लगा। मैंने भी उसे अपनी बाहों में लेकर बेतहाशा चूमने लगा। थोड़ी देर बाद हम दोनों का जोश ठंडा हो गया।

संपा: मैं चाहती तो तुम्हें पहले ही ठंडा कर देती, लेकिन मुझे तुम और मेरी बूर को तुम्हारे लंड का धक्का और लंड दोनों बहुत पसंद आ गये हों, इसलिए इतनी देर तक चुदवाया। मैं अपने सभी मर्द को थोड़ा मौक़ा देती हूं। अगर उसकी चुदाई बढ़िया लगी तभी उसे आगे चोदने देती हूं। फिर भी एक प्रोफ़ेसर के अलावा तुम ही दूसरे मर्द हो जिसने 15 मिनट से ज़्यादा चोदा। बहुत मज़ा आया यार। अब मेरी राजा (सपना) को चोदो।

लेकिन मेरा जी चाह रहा था कि लंड को संपा के बूर में ही घुसाये रहूं।

मैं: संपा रानी, पकड़ थोड़ी ढीली कर ना, जी नहीं भरा, थोड़ी देर और चोदने दे। सपना की कुतिया, तू सच में सबसे बढ़िया माल है।

संपा: तो अमित, मैं ही अब कहां तुम्हें छोड़ने वाली हूं। तैयार रह, तेरे मित्रा सर ख़ुद तुझे कहेंगे कि सिर्फ़ मुझे और सपना को ही नहीं, उसकी बेटी, हमारी बेटी रूपा को भी चोदो। मैं 2 बार झड़ गई, और चुदवाती लेकिन देख इस हरामजादी की चूत कितने आंसू बहा रही है।

मैंने भी सपना की ओर देखा और सही में उसकी बूर से टप टप कर रस टपक रहा था। सपना बग़ल में लेट गई। लेकिन मैं कुछ और मस्ती चाहता था।

मैं: ऐसे नहीं सपना, तू अपनी रानी की बूर को चूस, मेरा लंड तेरी चूत का रस पियेगा लेकिन पहले लंड को तैयार तो कर।

संपा की बूर से लंड निकाल कर मैं सपना के चेहरे के पास हिलाने लगा।

सपना: तू चाहता है कि संपा की बूर से निकले इस लंड को मैं चूसूं, चाटूं, तो अमित जी सुन लो, हम तीनों, मैं, संपा और तुम्हारे सर एक-दूसरे का पेशाब पीते है। रानी के बूर के अंदर का माल है इसके उपर, मेरे लिए तो अमृत है। मुझे चूसने दे।

मैं देखता रहा और बिना लंड को किसी कपड़े से साफ़ किए हुए ही सपना ने हर तरफ़ से लंड को चाट कर साफ़ किया, और उसके बाद ख़ूब चुभला-चुभला कर चूसने लगी। ज़्यादा समय नहीं लगा। लंड फिर पहले जैसा टाईट हो गया। मुझे दुबारा बोलना नहीं पड़ा। मैं समझ गया कि 24 साल की लड़की को 42 साल की औरत की बूर और जवानी इतनी पसंद थी कि वो घर बार छोड़ कर संपा के साथ रहती थी। संपा के पति के साथ रहती थी, और संपा के साथ-साथ उसकी 19-20 साल की बेटी की जवानी का भी मज़ा लेती थी।

सपना ने संपा के जांघों के बीच पोज़ीशन बनाया। दोनों चूचियों को दबाते हुए बूर को चूसने-चाटने लगी। मैंने थोड़ी देर दोनों की लेस्बियन मस्ती देखी। उसके बाद मैंने सपना को चोदना शुरू किया। मैंने कहा नहीं लेकिन संपा को चोदने के बाद मुझे 24 साल की जवान सपना को चोदने में मज़ा नहीं आया। लेकिन लड़की जवान थी। बूर के अंदर बहुत गर्मी थी, तो बूर बहुत रसीली भी थी। मुझे कोई ख़ास मज़ा नहीं आ रहा था, लेकिन लंड को सपना का बूर बहुत पसंद आ गया था।

संपा: साली, तू मेरी सबसे बड़ी सौतन है। मेरे घरवाले को अपना बना ही लिया है, अमित को भी बूर से बाहर निकलने नहीं दे रही हो। मेरी बूर के अंदर अमित आधा ही घंटा रहा और तेरी बूर आंसू बहाने लगी और ख़ुद सवा घंटे से खा रही है।

सपना: जलो मत दीदी, पहली बार ही चुदाई का असल मज़ा मिल रहा है। वे सारे मादरचोद 10-15 हज़ार देते हैं,‌लेकिन किसी ने ऐसा मज़ा नहीं दिया। तुमने अपने घरवाला को भी मौगा बना दिया है। पहले तो ठीक-ठीक चोद लेता था, लेकिन जब से उसने अपनी बेटी रूपा का बूर चाटना शुरू किया है, साले के लंड में कोई दम ही नहीं रह गया है। अपनी बेटी की बूर में जब अमित के लंड को अंदर-बाहर होते देखेगा, तब साले को ख़ुशी मिलेगी।

मैं चाहता था कि सपना को जल्दी ठंडा कर संपा को एक बार और चोदूं, लेकिन ना तो सपना ही ठंडी हो रही थी, और ना मैं ही झड़ रहा था। मुझे लगा कि बाप के सामने बेटी को चुदवाने की बात सुन कर संपा नाराज़ होगी।

संपा: राजा, मैंने बेटीचोद को बेटी की चूत का स्वाद इसलिए दिलवाया कि हरामी का लंड शर्म से खड़ा ही ना हो। मैं भी चाहती हूं कि वो इतना मौगा हो जाये कि ख़ुद ही हमारे लिए, अपनी बेटी के लिए कस्टोमर ढूंढ कर लाए। अमित, अपने सर के सामने उनकी बेटी को चोदोगे?

संपा की इस बात ने मुझे इतना एक्साइट कर दिया कि मैं बहुत तेज़ी से लंड को बूर के अंदर-बाहर करने लगा। फिर कुछ देर बात झड़ने भी लगा।

सपना: बाप रे जान बची। अमित, किस जन्म की दुश्मनी निकाल रहे थे। इतनी बेदर्दी से कोई चोदता है क्या? सच अमित, झूठ नहीं कहती। पिछले सात साल में 5 लंड हम दोनों की बूर में घुसे है। संपा का नहीं मालूम लेकिन इस से पहले मुझे चुदाई में कभी कोई मज़ा नहीं आया था। अमित तुमने मेरा दिल जीत लिया। असल मर्द हो।

संपा: अमित, तुम्हें अजीब लगेगा। शहर में हम दोनों के 5 ही ग्राहक हैं जो पिछले सात साल से हमें चोद रहे हैं। हर महीने हम 2 बार ही होटल जाते हैं और बारी-बारी से सभी 5 ग्राहक से चुदवा कर आते हैं। हम 2 चुदासी औरतें और एक साधारण आदमी। हम दोनों मिल कर 25 हज़ार लेते हैं। यानी हर महीने हम ढाई लाख कमाते है। तुम्हारे सर को मालूम है कि हम धंधा करते हैं।

दोनों की बातें सुन कर मैं सकते में आ गया था। अपने को कंपोज़ करने में कुछ समय लगा। उसके बाद में बूर को सहलाते हुए दोनों की चूचियों को बारी-बारी से 5-7 मिनट चूसा। मैं कपड़े पहनने लगा।

मैं: संपा, तुम आदमियों से चुदवाओ या घोड़ों से, तुम मेरे लिए हर हमेशा के लिए सबसे बढ़िया माल रहोगी। कल मेरी मां आ रही है। कितने दिन रहेगी मालूम नहीं। लेकिन मां के जाने के बाद हर दिन तुम्हें चोदू्ंगा। तुम सोच नहीं सकती कि तुमने मुझे कितना खुश किया है। जैसे संगीता ने मुझसे चुदवाने के लिए अपने बाप हेडमास्टर से परमिशन ले लिया है, तुम भी मित्रा सर से परमिशन ले लो कि मैं जब चाहूं तुम्हारे घर आकर तुम्हें प्यार करूं, तुम्हें चोदूं अगर तुम्हारी बेटी रूपा को भी मेरा लंड पसंद आ गया तो उसे भी चोदूंगा।

वे दोनों चुप बैठी रही। मैंने दोनों को बारी बारी से चूमा और रूम के बाहर निकला। पीछे से मेरे कानों में आवाज़ आई,

“सुबह 6 बजे मेरी बूर में तेरा लंड चाहिए।” यह संपा की आवाज़ थी। दो नई माल को चोद कर मैं बहुत खुश था।

संपा के घर से मैं अपने रुम में गया। थैंक्स, सभी लड़के खाना खाने गये थे। मैंने नहा धोकर दूसरा सेट कपड़ा पहना और गार्गी के घर पर नॉक किया। गार्गी ने दरवाज़ा खोला।

गार्गी: मुझे तो डर लग रहा था कि तुम नहीं आओगे।

मैंने दरवाज़े पर ही दोनों चूचियों को पकड़ा और होंठों को चूमने लगा। कुछ देर चूमने के बाद एक हाथ पेटीकोट के अंदर घुसा दिया। बूर बहुत चिपचिपा लग रहा था।

मैं: रंडी किस से चुदवा रही थी?

गार्गी: तुम्हारे ही लंड और चुदाई के बारे में सोचती हुई चूत को मसल रही थी। पहले क्या खाओगे?

मैंने बूर को ज़ोर से मसला।

मैं: पहले तो यही बूर खाऊंगा। चल रानी अपनी जवानी का जलवा दिखला।

बोलते हुए दरवाज़े पर ही मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। गार्गी नंगी हो गई। उसने दरवाज़ा बंद किया और मेरा हाथ पकड़ कर बेडरूम में लेकर आई। गार्गी ने मुझे बेड पर लिटाया। अभी तक जितनी भी माल को चोदा था मैं ही उन्हें सहला कर नंगा करता था। लेकिन गार्गी ने सहलाते हुए, जहां-तहां चूमते हुए मुझे नंगा किया।

आख़िर में उसने अपना ब्रा खोला। चूचियों को देख कर दिल खुश हो गया। ऐसा लग रहा था मानो इस चूची की जोड़ी को किसी और ने कभी छुआ भी ना हो। देखने में चूची संपा की चूची जैसी बड़ी, कड़क और बहुत ही मांसल लग रही थी। निप्पलस बहुत ही छोटे थे और दोस्तों निप्पलस के चारों तरफ़ जो ब्राउन या डार्क रंग का घेरा होता था वो नहीं के बराबर था। तब तक जितनी भी माल को चोदा था, सबसे बड़ा घेरा रेखा का ही था।

संगीता का घेरा आधा इंच का होगा। नगमा का घेरा भी बहुत कम था। नगमा ने कहा कि असलम चूचियों को नहीं चूसता है, उसे सिर्फ़ बूर में लंड पेलना ही पसंद है। संपा और सपना का घेरा संगीता के घेरा से बड़ा था, लेकिन रेखा के घेरे से कम था।

इसमें कोई शक नहीं कि रेखा और नगमा दोनों ही बहुत ही सुंदर थी, लेकिन संगीता और संपा को चोदने में सबसे ज़्यादा मज़ा आया था। मैं अपनी दूसरी औरतों के बारे में सोच ही रहा था कि गार्गी की आवाज़ ने डिस्टर्ब कर दिया।

गार्गी: अमित, अब और मत तड़पाओ, जल्दी से बूर की आग बुझा दे। बहुत ही प्यारा लंड है। लेकिन सच बोलूं, इतना लंबा और मोटा लंड देख कर बहुत डर लग रहा है। जब गांव जाती हूं तो वहां के खेतों में अक्सर गधे के लंड को देखती हूं। बाबू जी घर में काम करने वाली नौकरानी को हमेशा बोलते थे कि बढ़िया से काम नहीं करेगी तो खेत में गधे से चुदवा देंगें। मुझे डर लग रहा है जल्दी से इसे बिल में घुसा दो।

मैंने गार्गी के उपर, उसकी मस्त जांघों के बीच पोज़ीशन लिया। गार्गी ने ख़ुद हाथ आगे बढ़ा कर लंड को पकड़ा और बहुत ही छोटी झांटो से भरी बूर के छेद में दबाया। मैंने चूत्तड़ उपर उचका कर पूरी ताक़त से धक्का मारा।

गार्गी: अमित बहुत दर्द कर रहा है निकाल लो। चूत फट रही है।

मैंने दूसरा धक्का मारा और गार्गी की आंखों से आंसू निकलने लगे। रेखा, सीमा और उसकी मां, संगीता, नगमा, संपा और सपना के बाद ये आठवीं औरत थी जिसकी बूर में लंड घुसाया था। सभी ने यह कहा कि लंड बहुत मोटा है। लेकिन गार्गी पहली औरत थी जो कह रही थी कि उसे दर्द हो रहा था। वो लंड निकालने के लिए बोल रही थी। लेकिन मेरा लंड बूर की बहुत ही संकरी गुफा में घुस गया था। मैंने निकालने का सोचा भी नहीं और लगातार धक्के मारता रहा।

बाक़ी सभी औरत की बूर में तीसरे या चौथे धक्के में लंड की पूरी लंबाई बूर में घुस जाती थी, लेकिन गार्गी की बूर में सातवें धक्के में लंड की पूरी लंबाई अंदर गई। इतना ही नहीं मुझे लगा कि मेरा लंड गर्म तेल में डूबा हुआ था। मैंने नीचे देखा और जो देखा उसे देख कर मैं बहुत डर गया। लंड लाल हो गया था। गार्गी के जांघों पर खून के धार थे। साली, 28 साल की गार्गी कुंवारी थी।

मैं: गार्गी लगता है कि कहीं ग़लत जगह धक्का लग गया है। तुम्हारी बूर से खून निकल रहा है। मैं लंड को बाहर निकालता हूं।

लेकिन गार्गी ने अपनी जांघो और बाहों में मुझे कस कर समेटा।

गार्गी: लंड बाहर निकाला तो लंड को काट कर अपनी बूर के अंदर रख लुंगी। फिर अपनी मां की बूर में क्या डालेगा? थोड़ी देर लंड को बूर में दबाये रखो, मुझे प्यार करो, चूची को चूसो, गाल और होंठों को चूसो।

वो पहला मौक़ा था जब हद से भी ज़्यादा पतली बूर की गुफा में मेरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था। लंड बूर की दीवार से रगड़ खाते हुए अंदर-बाहर हो रहा था।

मैं: गार्गी, तुम इतनी बढ़िया, इतनी मस्त माल हो फिर अपनी इस प्यारी बूर को भूखा क्यों रखा है? मुझे ही मालूम है कि कितना मुश्किल से मेरा लंड तेरी बूर के अंदर-बाहर हो रहा है। कोई साधारण आदमी तुम्हें नहीं चोद पायेगा।

गार्गी का बदन भी संपा जैसा मस्त और गदराया हुआ था। दोनों के चेहरे में बहुत फर्क था लेकिन अगर दोनों को अगल-बगल नंगा खड़ा दें तो सभी यही समझते की ये 28 साल की औरत 42 साल के संपा की सगी बहन है।

गार्गी: अमित, जैसा सोचा था वैसा मज़ा नहीं आ रहा है। इतनी ज़्यादा मज़ा आ रहा है कि पूछो मत! जी करता है ज़िंदगी भर ऐसे ही तुम्हारे लंड को बुर में लेकर चुदवातीं रहूं। तेरी रेखा की बूर चाटनी होगी कि उसने तुम्हारे साथ की अपनी चूदाई की कहानी सुनाई और तुमसे चुदवाने कहा। तुम आठवें आदमी हो जो मेरी जांघों के बीच नंगा लेटा है।

गार्गी: जवानी चढ़ी तो अपने ही गांव के, बाबू जी के एक ख़ास दोस्त को पसंद करने लगी। मालूम नहीं बाबू जी को कैसे मालूम हो गया कि उनका दोस्त मुझे अपने लंड पर बिठाता था। मैं उसका लंड सहलाती थी, वो मेरी बूर में अंगुली करता था। एक दिन घर में अकेली थी। बाबू जी मेरे साथ मज़ाक़ करने लगे। उन्होंने ने कहा,

“बेटी, अगर तुम्हें किसी बड़े उम्र के आदमी से ही चुदवाना था तो मैं क्या बूरा हूं? मुझसे ही चुदवा ले।”

गार्गी चुदवाते हुआ अपनी कहानी भी सुना रही थी।

गार्गी: बाबू जी ने जिस तरीक़े से कहा मुझे ग़ुस्सा तो बहुत आया, लेकिन मेरे उपर मस्ती भी चढ़ गई। जब बाप ही बेटी को चोदने की बात कर रहा था, तो फिर मैंने सोचा कि क्यों ना मैं भी बाप के सामने बेशर्म हो जाऊं। जानते हो मैंने बाप से क्या कहा?

गार्गी की बात सुन कर मुझे अपनी दीदी और बाबू जी के बीच हुई चुदाई की बात चीत याद आ गई। मैंने संगीता और रेखा से दीदी की बात बताई थी। शायद रेखा ने वो बात भी गार्गी को बता दी हो। मैंने गार्गी से अपनी दीदी की बात नहीं बताई। मैं ज़ोरदार धक्के मारता रहा।

मैं: तुमने बेटीचोद से क्या कहा?

गार्गी: मैंने बाबू जी से कहा कि वो मुझे अपने दोस्त घनश्याम से चुदवा दे, तो मैं उससे अपने बाप से चुदवा लूंगी। अमित, मुझे मारने-पीटने के बदले वो हरामी मेरी बात सुन कर बहुत ही ज़्यादा खुश हुआ। मेरे बाप ने मुझसे कहा कि रात को मैं अपने रुम का दरवाज़ा अंदर से बंद ना करूं।

मैं: घनश्याम तुम्हें चोदने आया?

गार्गी: वो खुद नहीं आया। घर में मेरी छोटी बहन, मेरी बड़ा भाई और मां सो रहे थे, और बाबू जी अपने दोस्त को लेकर मेरे रुम में आये। उसने मेरे सामने घनश्याम से कहा कि वो जितना चाहे मुझे चोदे, लेकिन तीन महीने के अंदर वो अपने बेटे की शादी मुझसे कर देगा। घनश्याम मान गया। बाबू जी उसे मेरे पास छोड़ कर बाहर चले गये। और अमित, घनश्याम रात भर कोशिश करता रहा।

गार्गी: मैंने चूस कर, मुठिया कर, चार बार उसका लंड टाईट किया। वो चार बार मेरे उपर ऐसे ही चढ़ा जैसे तुम चोद रहे हो। वो जब भी मेरी बूर में सुपाड़ा घुसाने की कोशिश करता था, उसका लंड उल्टी कर देता था। रात भर हम नंगे रहे, लेकिन वो लंड को मेरा बूर में नहीं पेल पाया। सुबह वो मेरा पांव पकड़ कर गिड़गिड़ाया कि मैं बाबू जी से यही कहूं कि उसने मुझे चोद चोद कर बहुत खुश किया।

गार्गी: मैं बहुत नाराज़ थी, कि मेरे चाहने पर भी वो मेरा पहला प्रेमी मुझे नहीं चोद पाया। लेकिन सुबह जब बाबू जी ने पूछा तो मैंने कह दिया कि घनश्याम ने मुझे बहुत बढ़िया से चोदा।

गार्गी को चोदने में बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था। मैं अपनी ज़िंदगी की पहली कुंवारी चूत का मज़ा ले रहा था। साथ ही मुझे गार्गी की कहानी भी बहुत ही ज़्यादा मस्त कर रही थी।

मैं: तुम्हारे बाबू जी ने तुम्हें घनश्याम से चुदवाया, तो उसने भी तुझे ज़रूर चोदा होगा?

गार्गी ने माथा हिलाया।

गार्गी: अगली ही रात बाबू जी मेरी नंगी जांघों के बीच थे। घनश्याम ने थोड़ी भी ओरल मस्ती नहीं मारी थी, लेकिन मेरे बाप ने मेरे अंग-अंग को चाटा। बहुत देर तक चूचियों को चूसा, बूर को भी बहुत देर चूसा। लेकिन मेरा बाप भी घनश्याम जैसा ना-मर्द निकला। उसने भी जितनी बार बूर में लंड घुसाने की कोशिश की, हर बार उसके लंड ने भी उल्टी कर दी। मैंने बाद में भी दोनों को कई बार मौक़ा दिया। कई बार दोनों, बाप और मेरा प्रेमी एक साथ मेरे साथ रात गुज़ारी। लेकिन दोनों में से किसी का सुपाड़ा भी बूर में नहीं घुस पाया।

मैं दना दन पेल रहा था। बीच-बीच में चूचियों को चूसता था।

मैं: तुम्हारी चूत पर मेरा नाम लिखा था, फिर कोई दूसरा लंड इस प्यारी चूत के अंदर कैसे घुसता?

गार्गी: उसके बाद मैंने ख़ुद ही दूसरे और पांच मर्दों को, अलग-अलग उम्र के मर्दों को पटाया। सबको चोदने का बहुत मौक़ा दिया। लेकिन मैं क्या करती, मेरी बूर की क़िस्मत में एक गधे का, तेरे लंड का घुसना था, तो दूसरा मुझे कैसे चोद पाता? तुम्हें क्या किसी को भी मेरी बात पर विश्वास नहीं होगा लेकिन ये सच है कि तुमसे पहले सात आदमियों ने मुझे चोदने की कोशिश की, लेकिन नहीं चोद पाये। और जब मैंने देखा कि मेरी क़िस्मत में लंड नहीं है, तो मैं लड़कियों को, जवान औरतों को अपना दोस्त बनाने लगी।

गार्गी: पिछले सात सालों में मैंने 70-75 माल को नंगी किया है। उनकी जवानी की मस्ती लेती हूं। अपनी नंगी जवानी का मज़ा देती हूं। मैं यहां तीन साल से हूं। 5 लड़कियां और 4 जवान औरतें मेरी माल है। रेखा की जवानी का मज़ा यहां आने के कुछ ही दिन बाद से लेना शुरू किया। उसने कभी अपने घरवाले अरविंद से भी चुदवाने नहीं कहा। लेकिन पिछले 5-6 दिन से मुझसे ज़िद कर रही है कि तुमसे चुदवा लूं।

गार्गी: तुम्हारे हेडमास्टर हर बार मुझे नंगा देखने का दस हज़ार देते हैं। परसों जब वे मेरी बूर चाट रहे थे, तभी मैंने उनसे कहा कि मुझे तुमसे चुदवाना है और वहीं तुमसे मुझे चोदने के लिए कहे। अमित बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा है। खूब जमा-जमा कर पेलते रहो।

गार्गी को चोदते हुए मैंने मन ही मन रेखा को थैंक्स किया कि उसने गार्गी को मुझसे चुदवाने कहा। आख़िरकार मस्ती से चुदाई करते-करते हम पस्त हो गये और झड़ने लगे। दोनों ने एक-दूसरे को बेतहाशा चूमा। थोड़ी देर एक दूसरे से चिपके हुए हम अपने-अपने घरों की, स्टूडेंट्स और टीज़र की बात करते रहे।

गार्गी: जानते हो, हेडमास्टर मेरी नंगी जवानी को चाटता है, और उसकी बेटी संगीता के साथ-साथ उसका दलाल असलम मुझसे धंधा करने के लिए कहता रहता है। लेकिन अमित, मैंने फ़ैसला कर लिया है कि कभी धंधा नहीं करूंगी। चलो मुंह हाथ धो लो, खाना लगाती हूं।

हम बेड से उतरे और उसने ज़ोर से लंड पकड़ कर मसला।

गार्गी: मादरचोद, क्या खाता है तू? लंड तो है गधे के जैसा, लेकिन चुदाई करता है कुत्ते जैसी। रेखा ने कहा तो विश्वास नहीं हुआ था लेकिन बहनचोद तुमने मुझे डेढ़ घंटा रगड़ा है। अपनी मां को मुझसे भी मिलाना। जितनी मस्ती उसे अपने बेटे के साथ चुदवा कर आयेगी, उससे ज़्यादा मज़ा उसे मैं उसे दू्ंगी। अपनी रेखा और दोस्त रचना से पूछ लेना। हर दूसरे तीसरे दिन अपनी बूर चुसवाने आ जाती है। साली अभी कुंवारी है। चोदेगा उसे? वैसे वो तेरी बहुत बात करती रहती है।

हम दोनों ने एक साथ अपने सामने खड़े हो कर पेशाब किया। हाथ मुंह धो कर गार्गी ने अपने बिस्तर के नीचे से निकाल कर मुझे तीन किताबें दी।

गार्गी: जब अकेली रहती हूं तो यही सब पढ़ कर, फ़ोटो देख कर मन बहलाती हूं। लेकिन अब नहीं, जब बूर की खुजली ज़्यादा बढ़ जायेगी, तब या तो तुझे बुला लूंगी या फिर खुद तेरे रुम में आ जाऊंगी।

गार्गी चूत्तड़ मटकाती हुई किचन में गई और मैं पॉर्न बुक देखने लगा। हम जितनी तरह की चूदाई के बारे में सोच सकते हैं, उन किताबों में वैसी हर तरह की चूदाई की तस्वीरें थी। कहानी बाली किताब में भी हर तरह की कहानियां थी। लेकिन मुझे वो किताबें पसंद नहीं आई। मैं किचन में गया और गार्गी के कमर में हाथ डाल कर उसके बग़ल में खड़ा हो गया।

मैं: गार्गी, मुझे जीती-जागती औरतों को पढ़ने का शौक़ है, औरतों को चोदने की कहानियों को पढ़ने का नहीं। गार्गी, मैंने सिर्फ़ रेखा और संगीता को ही नहीं, आज शाम संपा और उसकी नौकरानी सपना को भी चोदा। तुम्हें औरतों की जवानी के साथ खेलना पसंद है। रेखा बहुत सुंदर है। संगीता बहुत ही मस्त माल है।

मैं: लेकिन अगर कोई सबसे बढ़िया माल है तो वो संपा है। बहुत ही खुले दिल की और बिंदास औरत है। अकेले में उससे मिलेगी तो वो ज़रूर तुम्हारे सामने नंगी हो जायेगी। उसकी एक जवान बेटी भी है जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। तुम्हें चोदने के बाद सुबह संपा को भी चोदना है।

गार्गी: उससे बोलोगे कि तुमने गार्गी नाम की कुतिया को चोदा?

मैंने उसके मस्त और कड़क चूत्तड़ों को सहलाना शुरू किया।

मैं: बोलना ही पड़ेगा। मैं अगर अपनी सभी चुदाई की रिपोर्टिंग उसे नहीं करूंगा, तो कुतिया ने धमकी दी है कि ना मुझे रूम के बाहर जाने देगी, और ना किसी को मेरे रुम में आने देगी। आख़िर वार्डन की घरवाली है।

गार्गी: अमित, तुमने मुझे बहुत ही ज़्यादा खुश किया है। कल होटल में तू अपनी मां को चोद और मैं तेरी संपा कुतिया को चोदूंगी।

इस औरत को अपने उपर बहुत भरोसा था। गार्गी 28 साल की थी, 5 फ़ीट 4 इंच लंबी, साफ़ गोरा रंग, चांद सा गोल चेहरा, बहुत ही प्यारी बड़ी-बड़ी काली आंखें, गदराया बदन, 36 इंच की मस्त गुदाज़ चूचियां, 26-28 इंच की कमर, उभरे हुए 36 इंच के चूत्तड़ और लंबी मस्त, सुडौल और लंबी जांघे। तब तक जितनी औरतों को चोदा था, गार्गी के बाल सबसे घने और लंबे थे।

खाना खाने के बात उसने किताब से मुझे मां-बेटे, भाई -बहन और बाप और बेटी की चुदाई की कहानी पढ़ कर सुनाई। और दोस्तों, औरत की आवाज़ में चुदाई की कहानी सुनने का मज़ा चुदाई करने के जैसा ही है। हमने दो राउंड जम कर चुदाई की और ठीक 6 बजे संपा के घर पर नॉक किया। संपा ने डोर खोला। कुतिया नंगी ही थी। उसके बेडरूम में सपना सो रही थी तो वो मुझे अपनी बेटी के रुम के बेड पर ले गई।

संपा: आज बेटी के बेड पर मां को चोद लो। बहुत जल्दी बाप के सामने बेटी को तुमसे चुदवाऊंगी। अमित, तुमने कैसा चोदा यार, सपना के साथ आज कोई मज़ा नहीं आया। चोदो मुझे।

मैंने उसे बहुत चूमा, चूचियों को चूसा और सीधा चोदने लगा। चोदते हुए मैंने गार्गी के साथ की चुदाई की पूरी बात बताई।

मैं: संपा, कल किसी भी समय वो गधी मेरी इस कुतिया की जवानी को खायेगी।

मेरी बात सुन कर संपा नाराज़ नहीं हुई।

संपा: उस गधी को आने दो। तू अपनी मां को चोदना और हम तेरी गधी को ऐसा चोदेंगे की हरामजादी कपड़े पहनना भूल जायेगी। हम दोनों के सामने रंडी तेरे मित्रा सर से भी चुदवायेगी।

गार्गी की तरह इस औरत को भी अपने उपर बहुत भरोसा था। एक राउंड की चूदाई के बाद मैंने वहीं बाथ लिया। संपा ने खुद मेरे लिए चाय बनायी। सपना भी उठ गई थी। दोनों ने मुझे नंगा ही विदा किया।

संपा: मां की चूदाई की पूरी रिपोर्ट दोगे तभी अपनी बेटी को तुमसे चुदवाऊंगी।

मेन रोड पर आकर मैंने एक टैक्सी ली, और साढ़े आठ बजे स्टेशन पहुंच गया। संपा ने ठीक ही कहा था ट्रेन डेढ़ घंटा लेट थी। साढ़े नौ (9:30) बजे ट्रेन स्टेशन पर रुकी। जैसा मैंने सोचा था मां फर्स्ट क्लास से ही उतरी। आख़िर रेलवे के जीएम की घरवाली थी।

उनके साथ एक दूसरी 30-32 साल का जवान औरत थी। उनके साथ एक आदमी मां का एक सूटकेस लेकर उतरा। मैं आगे बढ़ कर मां के फ़ीट छूने के लिए झुका। मां ने मुझे बीच में रोक कर सबके सामने गले लगाया और धीमे से बोली, “जिसे चोदने के लिए, उसकी बूर में लंड पेलने के लिए बुलाया है, उसके पांव नहीं छूते। बूर बहुत खुजला रही है, जल्दी से होटल ले चल और चोद।”

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