मां को चोदने के लिए लोगों ने उकसाया 5

माँ बेटा

मैं अपने को बहुत ही लक्की समझने लगा था। पहले रेखा ने अपने पति के सामने मुझसे चुदवाया। अपनी बूर से निकले लंड को अरविंद से चुसवाया। अरविंद ने सिर्फ़ लंड ही नहीं चूसा, उसने लंड का सारा रस निगल लिया। अरविंद अपनी एक स्टूडेंट संगीता को चोदने गया और घर की नौकरानी, अरविंद की माल रमा मुझसे चुदवाने लगी, वो भी रेखा के सामने।

मैंने बहुत देर तक रेखा का बूर चूसा, और उसके बाद चोदने लगा। रमा भी पूरी तरह ठंडी हो गई। रमा ने नंगी रह कर ही घर का सारा काम किया। काम ख़त्म कर कपड़े पहन कर रमा चली गई। तब मैंने रेखा को फिर नंगा किया लेकिन चोदा नहीं।

जब मैं रमा को चोद रहा था तब रेखा ने भी मां के लिए चिट्ठी में अपनी तरफ़ से जोड़ा।

रेखा ने लिखा, “इंदिरा दीदी,

आप मुझे नहीं जानती हैं, लेकिन आपका बेटा सिर्फ़ मुझे ही बढ़िया से नहीं जानता है, मेरे शरीर के अंग-अंग को बढ़िया से पहचान गया है। आपके बेटे के घोड़े के लंड जैसे लंड को मेरा अंग-अंग बढ़िया से पहचान गया है। पिछले सोमवार की रात मादरचोद ने रात भर चोदा, अपना लंड चुसवाया, घंटो मेरी बूर चाटी। लेकिन आज तो हरामी मादरचोद ने हद ही कर दी।

मेरे मादरचोद पति के सामने चोदा तो चोदा, मेरे सामने मेरे पति अपने टीचर को लंड चुसवाया और लंड से निकला रस भी पिलाया। जब भी अमित चोदता है, तो बोलता है कि अपनी मां इंदिरा को चोद रहा है। मुझे ग़ुस्सा तो बहुत आता है, लेकिन मादरचोद इतना बढ़िया चोदता है कि उसे अपने से अलग नहीं करती हूं।

दीदी, हरामी बोलता है कि मैं बिल्कुल उसकी रंडी मां जैसी दिखती हूं। साला बोलता है कि तुम्हें चोदने में भी उसे वैसा ही मज़ा आयेगा जैसा मज़ा मुझे चोद कर आता है। दीदी, तुमने जो चिट्ठी अपने बेटे को लिखी उससे साफ़-साफ़ दिखता है कि तुम्हारी बूर भी अपनी बूर से निकले बेटे का मोटा और लंबा लंड को अपने अंदर लेना चाहती है।

दीदी, मैं गारंटी देती हूं कि भले ही तुम रोज़ सैंकड़ों लंड से चुदवाती हो, फिर भी तेरा बेटा चोद-चोद कर तुम्हें मस्त कर देगा। मैं अपने सामने देखना चाहती हूं कि कोई कुतिया अपने बेटे से कैसे चुदवाती है। इसके बदले तू अगर अपने पति या किसी यार से मुझे चुदवाना चाहती है तो मैं तैयार हूं। जल्दी आ जा मेरे अमित की कुतिया मां। तेरे रंडीबाज बेटे की सबसे प्यारी रंडी रेखा।”

मैंने चिट्ठी को पढ़ा।

मैं: तू भी मेरी मां जैसा इतना गंदा लिख सकती है!

रेखा: मैं भी तो तेरी मां ही हूं।

रेखा ने चिट्ठी को फ़ोल्ड कर लिफ़ाफ़े में रखी। मैंने उस पर मां के स्कूल का पता लिखा।

रेखा: मुझे कल पोस्ट ऑफिस जाना है, मैं पोस्ट कर दूंगी।

उसके बाद हम बातें करते रहे। क़रीब साढ़े 6:30 अरविंद घर वापस लौटा और आकर बिना कुछ बोले मेरा लंड चूसने लगे। 5-7 मिनट चूस कर छोड़ दिया। रेखा तब भी नंगी ही थी।

रेखा: बहुत खुश हो, संगीता ने कुछ इनाम दिया है क्या?

अरविंद: हां रेखा मैं बहुत ही ज़्यादा खुश हूं। मालूम नहीं उस रात क्या हो गया था। संगीता को तीन बार चोदा था, लेकिन एक बार भी 10 मिनट भी टाईट नहीं रह पाया। आज 2 बार ही चोदा और दोनों बार संगीता पस्त हुई और मेरा लंड चूस कर मुझे ठंडा किया। संगीता मुझसे बहुत खुश होकर गई है, और उसने अगले हफ़्ते का समय भी दिया है।

लेकिन मुझे यह सुन कर बढ़िया नहीं लगा कि संगीता इस टीचर की चुदाई से खुश होकर गई थी।

अरविंद: संगीता ने कहा है कि जैसे तुम्हारे ही बोलने पर संगीता ने दुबारा मुझसे चुदवाया, वैसे ही उसने मुझे कहा है कि मैं आज रात उसको चोदने के लिए तुम्हें उसके घर भेज दूं। उसने कहा है कि अगर आज रात तुम उसे नहीं चोदोगे, तो वो फिर मुझ से कभी नहीं चुदवायेगी। अमित मैं डेली तुम्हारा लंड चूस दूंगा, प्लीज़ आज रात संगीता को चोदो।

मैं: आज पूरी रात मैं अपनी प्यारी मां रेखा को चोदना चाहता हूं।

रेखा: अरविंद, सच-सच बोलो, संगीता को कितना दिया? वो दूसरी रंडियों की तरह 2-3 हज़ार नहीं लेती होगी, कितना रेट है उसका?

अरविंद: पिछली बार 25 हज़ार देकर रात भर चोदा था, लेकिन आज 3 घंटे के लिए 30 हज़ार दिए।

अरविंद की बात सुन कर रेखा को बहुत ही ज़्यादा ग़ुस्सा आ गया।

रेखा: मादरचोद, अपनी सारी कमाई रंडियों को दे देगा तो हम खायेंगे क्या? सालों से रंडियों को चोद रहे हो, फिर भी लंड को शांति नहीं मिली। कुत्ते की औलाद, अमित से सीखो कि कैसे मुफ़्त में रंडियों को चोदते हैं। तुमने जिसे तीस हज़ार देकर चोदा, अमित ने उसे मुफ़्त में चोदा, और कुतिया ने फिर उसे बुलाया है। अमित सच-सच बोल, क्या तुमने भी संगीता को तीस हज़ार दिया है।

मैंने रेखा को गोदी में बिठा कर खूब प्यार किया। मैंने उसे विश्वास दिलाया कि मैंने संगीता को एक पैसा भी नहीं दिया था।

मैं: मेरी प्यारी कुतिया रेखा, मेरी छोटी मां, जब मैंने तेरे जैसी हसीना को एक पैसा भी नहीं दिया, तो फिर दूसरी रंडियों को क्यूं दूंगा। मैंने संगीता को उसके दलाल असलम के सामने मुफ़्त में ही चोदा।

अरविंद बार-बार मुझे संगीता के घर जा कर उसे चोदने के लिए कहता रहा, लेकिन मैं भी ज़िद करता रहा कि रेखा को ही रात में चोदूंगा।

अरविंद: रेखा, अपने इस नए बेटे को बोल कि आज रात संगीता को चोदे, और बाद में जब भी चाहें पूरी रात तुम्हारे साथ गुज़ारे।

रेखा: अमित, इस हरामी की बात मान कर आज रात संगीता को चोद ले। मैं बहुत जल्दी तुम्हें बुलाऊंगी।

रेखा को चोद ही लिया था। मैं ख़ुद संगीता को दुबारा चोदना चाहता था। मैं डिनर से पहले होस्टल पहुंचा, तो मेरे ख़ास दोस्त मेरे रुम में आ गये। सबसे ज़्यादा दुखी विनोद था।

विनोद: तुमने रेखा को चोद लिया ना?

मैं: तू पागल है क्या? मुझे ख़ुद आश्चर्य है कि अरविंद सर ने मुझे घर बुलाया। रेखा मैडम ने भी बढ़िया से बात की। यार तुम लोग सोच भी नहीं सकते कि उस खूबसूरत औरत के साथ सात घंटा रह कर मेरी क्या हालत हो रही थी। बाथरूम में जाकर तीन बार मुठ भी मारा। सर नहीं रहते तो रेखा मैडम से खुल कर बात भी करता, लेकिन मादरचोद पूरे समय घरवाली के साथ ही बैठा रहा। रेखा मैडम ने मुझसे कहा कि जब भी अरविंद सर घर में हो, मैं उनके घर आ सकता हूं। अब तो यार मेरा भी जी करता है कि रेखा को चोदूं।

मेरी बात सुन कर सभी चले गये।

मैं बहुत खुश था लेकिन मेरे सारे दोस्त मुझसे जलने लगे थे। मैंने सब के साथ डिनर लिया, और वापस रुम में आया। बिस्तर के नीचे से निकाल कर मां की चिट्ठी पढ़ी, और पूरे समय यही प्रार्थना करता रहा कि मां जल्दी से देहरादून आ जाए। और अचानक मेरे दिल में ख़याल आया कि अब मैंने विनोद के सपनों की रानी रेखा को चोद लिया था, तो क्यों ना विनोद के साथ एक डील करुं।

अगर विनोद ये वादा करें कि वो मुझे अपनी मां को चोदने देगा, तो मैं अपने सामने विनोद से अपनी मां को चुदवाऊंगा। विनोद से पुछूंगा कि मेरी मां को चोदने की क्या क़ीमत देगा।

थोड़ी देर पढ़ाई की, और क़रीब साढ़े ग्यारह बजे रुम को लॉक कर बाहर आया। बनबारी की जगह असलम ड्यूटी पर था।

मैं: असलम भाई, याद है ना तुम्हारी माल ने चोदने के लिए बुलाया था? तुमने संगीता को चोदा कि नहीं?

असलम: नहीं साहब, मैं चोदना चाहता था लेकिन उसने मना कर दिया। आपकी बहुत तारीफ़ कर रही थी। मैंने घर जाकर अपनी बेगम और नफ़ीसा को आपके लंड के बारे में बताया। किसी को विश्वास नहीं हुआ। कल रात दोनों को आपके पास ले आऊं? शनिवार तक रात की ड्यूटी में मैं ही रहूंगा।

मैं: संगीता को चोद कर आता हूं तब बात करूंगा।

असलम: संगीता जब अरविंद से चुदवा रही थी, तब मैंने घर में संगीता की मां को चोदा। उन्हें भी आप के लंड के बारे में बताया। यह भी बताया कि आप ने रात भर संगीता को चोदा। वो भी आपसे चुदवाना चाहती है।

मैं: उसे भी चोदूंगा।

मैं 12 बजे के पहले संगीता के घर पहुंच गया। रेखा की तरह वो भी मेरा इंतज़ार कर रही थी। वहीं बरामदे पर हम दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया, चूमा, और मैंने चूचियों को खूब दबाया। मैंने झुक कर उसे बाहों पर उठाया और उसने जिस रुम की तरफ़ इशारा किया, मैं उसी रुम में ले गया। मैंने उसे बेड पर लिटाया और एक-दूसरे को खूब रगड़ते हुआ दोनों नंगे हुए।

मैं: रानी, मेरी चुदाई इतनी बढ़िया लगी कि तुमने अपने घर में मुझसे चुदवाने के लिए अपने बाप का लौडा चूसा? बेचारा असलम बहुत दुखी है कि तुमने उससे नहीं चुदवाया।

संगीता लंड को बहुत प्यार से मसल रही थी।

संगीता: इतनी जल्दी क्या है? साले ने मुझे घर पहुंचाया और मां को चोद लिया। असलम से भी चुदवा लुंगी। लेकिन तुम्हें मेरी जवानी इतनी बढ़िया लगी कि उस खूबसूरत हसीना रेखा की बूर में लंड पेलने के बाद भी मुझे पेलने आ गया।

संगीता की बात सुन कर मैं घबरा गया। मुझे लगा कि शायद अरविंद ने ही संगीता को बता दिया था कि मैं रेखा को चोद रहा था।

मैं: रानी, रेखा ने तेरा क्या बिगाड़ा है जो उसे बदनाम करने पर तुली हो? रेखा मुझसे क्यों चुदवायेगी?

संगीता: क्योंकि तू सबसे बढ़िया चोदता है। अच्छा किया जो तुमने मुझे अरविंद से चुदवाने कहा। मालूम नहीं उस दिन क्या हो गया था। लेकिन आज तो सर ने मुझे मस्त कर दिया। तेरे जैसा तो नहीं लेकिन आज अरविंद ने बहुत बढ़िया चोदा। बीच-बीच में उससे चुदवाती रहुंगी। जब रात में तुमने अरविंद से चुदवाने की ज़िद की, तभी मुझे संदेह हुआ कि आख़िर ये खूबसूरत लड़का अरविंद से चुदवाने की ज़िद क्यों कर रहा है।

संगीता: मैंने उसे प्यार से पूछा और उसने तोता जैसा सब बोल दिया कि सोमवार की रात को तुमने उसे कैसे चोदा और यह भी कहा कि आज तुमने सर के सामने ही उसकी घरवाली को चोदा और तुम दोनों को अकेले छोड़ कर वो मुझे चोदने आये था।

मैंने संगीता को सब कुछ बता दिया कि कैसे मैंने रेखा से बात की और कैसे उसने मुझे घर बुलाया। मैंने संगीता से बार-बार खुशामद किया कि ये बात किसी और को नहीं मालूम हो कि मैंने रेखा को चोदा है।

संगीता: जब तक मेरे गुलाम बन कर रहोगे, तब तक तुम्हारी रेखा मां की बदनाम नहीं होगी। मैं जिसे भी चोदने बोलूंगी तुम उसे चोदोगे। जहां साथ चलने बोलूंगी साथ चलोगे।

मैं: जो हुक्म मलिका, ये गुलाम हर हमेशा आपकी सेवा में है।

संगीता: अब पहले मलिका की बूर चूसो और जम कर चोदो। अरविंद को भी सिखाओ कि बूर चूस कर औरत को कैसे मस्त करते हैं। मुझे तुम्हारा बूर चूसना और चाटना भी बहुत ही ज़्यादा पसंद आया।

फिर अगले चार घंटा में मैंने बूर चूस कर उसे मस्त किया ही दो बार लंबी चुदाई की और दोनों बार उसकी बूर के अंदर ही रस गिराया। संगीता ने चुदाई के पहले भी और बाद में भी लंड को बढ़िया से चूसा, लेकिन पिछली रात जैसा उसने रस को निगला नहीं।

संगीता: सच अमित, तुम जादूगर हो। तुम सोच नहीं सकते की मैं कितनी संतुष्ट हूं, कितनी खुश हूं। बूर तो खुश हुई ही दिल भी खुश हो गया है। तुम्हारे रुम से आने के बाद मैंने मां को असलम के पास चुदवाने भेज दिया। असलम ने ठीक ही कहा कि वो मेरा मां को 22 साल से चोद रहा है। मां को भी असलम से चुदवाना बहुत पसंद है। मैं बाबू जी के पास रह गई। मैंने रुम में लाईट जला दी और नंगी हो गई।

संगीता: नंगे बदन को बाबू जी के बदन से रगड़ने लगी तो कुछ ही देर में उनकी नींद खुल गई। बाबू जी ने मुझे नंगा देखा तो चूचियों को दबाने लगे। मैंने उनसे कहा कि मुझे घर में ही अमित से चुदवाना है और बाबू जी तुरंत मान गये। मैं एक घंटा से ज़्यादा बाप के साथ नंगी रही। उसने चूचियों के साथ-साथ बूर भी चूसा लेकिन बेचारे का लंड ढीला का ढीला ही रहा। अब सो जाओ, कल क्लास भी करना है।

लेकिन मैं वापस होस्टल आ गया। असलम ने फिर पूछा तो मैंने कह दिया कि रोज़ रोज़ इतना चूदाई करुंगा तो मेरी तबियत ख़राब हो जायेगी। फिर भी उसने ज़िद की।

असलम: साहब, आज सिर्फ़ मेरी बेगम नगमा रहेगी। आप जितनी देर उसे रखना चाहो रखना। संगीता की मां से काफ़ी कम उम्र की है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि वो आपको हर तरह का मज़ा देगी। जो बोलिएगा सब करेगी। बाद में जब बोलिएगा अपनी बेटी नफ़ीसा को भी आपके पास ले आऊंगा।

असलम ने बहुत ज़िद की तो मैंने उसे उसकी बेगम “नगमा” को भेजने के लिए कह दिया। जब भगवान चाहता था कि मैं नई-नई माल को चोदूं तो मैं क्यों मौक़ा गवाऊँ।

मैं दो ढाई घंटा सोकर थोड़ा फ़्रेश हुआ। दिन में कुछ खास नहीं हुआ। संगीता मुझसे दूर रही लेकिन प्रैक्टिकल के समय देखा कि संगीता बहुत मुस्कुराते हुए अरविंद से बात कर रही थी। ग्यारह बजे असलम खुद अपनी बेगम नगमा को लेकर रुम में आया। संगीता की तरह उसने भी बुर्का पहना था। असलम ने दरवाज़ा बंद किया और उसने ख़ुद ही अपनी बेगम के बुर्का को निकाल दिया। नगमा बिल्कुल नंगी थी। उसने बुर्का के नीचे कुछ नहीं पहना था। मैं उस नंगी औरत को देख कर खड़ा हो गया।

मैं: असलम, ये तुम्हारी बेगम है? बाप रे, कितनी सुंदर है ये औरत! लोग बेकार ही रेखा मैडम को खूबसूरत कहते हैं। नगमा बेगम, आपसे ज़्यादा खूबसूरत और कोई हो ही नहीं सकती। इतने सालों से यहां हूं, कभी नहीं सुना कि असलम की बेगम इतनी ग़ज़ब की खूबसूरत है।

मैं बोल रहा था और असलम ने मेरा पाजामा खोल दिया और मेरे लंड को पकड़ लिया।

नगमा: सच असलम बहुत ही बढ़िया, बहुत ही प्यारा लंड है।

मैंने असलम को धक्का दिया।

मैं: असलम तुम बाहर जाओ। घर की औरत को कभी भी दूसरों के सामने नंगा नहीं करना चाहिए। अपने घर की औरतों के अलावा जिसे भी लाओगे उसे तुम्हारे सामने चोदूंगा लेकिन नगमा या नफ़ीसा को नहीं। तुम बाहर जाओ।

असलम दुखी होकर बाहर चला गया। मुझे लगा कि असलम ख़ुद तो बढ़िया चोदता ही था, इसे अपने घर की औरतों को दूसरे से चुदवाते देखना भी पसंद था।

नगमा सही में बहुत ही खूबसूरत औरत थी। 5 फ़ीट 5 इंच लंबी, बहुत ही गोरा प्यारा रंग, लचकदार बदन, वजन क़रीब 60 किलो, देखने से बहुत ही मुलायम लग रही थी। उसकी चूचियां रेखा की चूचियों से थोड़ी ढीली लग रही थी, फिर भी काफ़ी गुदाज़ थी, 34 इंच साईज़ की चूचियां थी। कमर भरा हुआ और आकर्षक था। लंबी और सुडौल जांघें बहुत ही मादक दिख रही थी।

मैं: अगर तुम्हारी बेटी भी तुम्हारी जैसी ही खूबसूरत है तो मैं उससे शादी कर लूंगा।

नगमा: चेहरे और बदन की ख़ूबसूरती पर मत फिसलो। शादी हमेशा किसी शरीफ़ घर की शरीफ़ लड़की से ही करना, जिसे ना धन दौलत का लालच हो और ना तुम्हारे जैसे बांका नौजवान को देख कर चुदवाने के लिए तरसे। हमारे और रेखा जैसी खूबसूरत औरतें सिर्फ़ चुदाई के लिए सही औरत है। चुदाई का जैसा मज़ा संगीता जैसी मस्त गदराई माल देंगी, वैसा मज़ा कोई भी खूबसूरत औरत नहीं दे सकती। नफ़ीसा को चोदना है तो पहले मुझे दिखाओ कि तुम्हारे इस डंडे में कुछ दम भी है कि नहीं। पहले मुझे चोदो।

अपनी बेगम की बात सुन असलम चला गया। मैंने दरवाज़ा बंद किया और 30-35 मिनट की ओरल के बाद मैंने नगमा को सीधा चोदना शुरु किया। कुछ ही देर चोदने के बाद लगा कि औरत की उम्र ज़्यादा नहीं है, 30 साल से कम ही होगी। नगमा की बूर भी रेखा की बूर जैसी ही बहुत टाईट तो थी ही, बहुत रसीली और गर्म भी थी। चूचियां भी गुदाज़ और कड़क थी। नगमा लगातार सिसकारी मार रही थी।

मैं: नगमा, तुम खुद किसी जवान लड़की जैसी चुदाई का मज़ा दे रही है, फिर तुम्हारी बेटी अभी चुदने लायक़ कैसे हो सकती है?

हर धक्के के साथ नगमा का चूत्तड़ उपर-नीचे हो रहे थे।

नगमा: तुमने ठीक ही समझा। मैं संगीता या रचना जैसी जवान तो नहीं हूं, लेकिन चुदाई के लायक़ बेटी की मां भी नहीं हूं। नफ़ीसा मेरा सौतेली बेटी है। मेरी अपनी बेटी अभी 8 साल की ही है। मेरा उम्र अभी 30-31 साल ही है। मैं आसिफ़ की चौथी बेगम हूं। उसकी पहले की तीनों बेगम उसे छोड़ कर भाग गई।

मुझे यह सुन कर अजीब सा लगा कि असलम जैसे बढ़िया चोदने वाले मर्द की औरत उसे छोड़ कर भाग जाए।

मैं: मैंने सुना है कि असलम बहुत बढ़िया चोदता है। उसने पिछली रात ही कहा कि उसने क़रीब 600 लड़कियों और औरतों को चोदा है, फिर ऐसे आदमी की घरवाली उसे क्यों छोड़ेगी?

नगमा: क्योंकि असलम मौगा है। आप लोग जिस औरत या लड़की को 3-4 हज़ार देकर चोदते हैं वैसी रंडियां हमारे घर आकर मुफ़्त में असलम से चुदवाती है। मादरचोद हर रोज़ घर में ही किसी ना किसी को चोदता है।

मैं: किसी भी औरत को बढ़िया नहीं लगेगा कि उसका घरवाला उसके सामने किसी को चोदे। तुम भी उसे छोड़ दोगी?

नगमा: पहली तीनों बेगम इसलिए नहीं भागी कि असलम ने उनके सामने दूसरों को चोदा। वो इसलिए भागी कि असलम उन सभी को दूसरों के सामने नंगा होने, उनसे चुदवाने बोलता था। मैं भी जब यहां आई तो असलम एक दिन तुम्हारी ही उम्र के तीन लड़को को लेकर घर आया और मुझे उनके सामने नंगा नाचने और उनसे चुदवाने बोला।

मैं: तुमने चुदवाया?

नगमा: चुदवाया, मैंने लड़कों के सामने असलम को चप्पल से बहुत मारा। साथ ही धमकाया कि आगे से कभी किसी लड़के को लेकर घर आया तो पुलिस में शिकायत कर दूंगी। वो बहुत डर गया और उस घटना के 10 साल बाद उसने आज तुम्हारे बारे में कहा। मुझे उसे नीचा दिखाने का मौक़ा मिला। मैं उसके सामने खुद भी और नफ़ीसा को भी चुदवाना चाहती थी, लेकिन तुम तो बहुत शरीफ़ निकले। किसी के सामने उसके घर की औरत को नहीं चोदोगे। बहुत ही बढ़िया से चोद रहे हो यार, बहुत मज़ा आ रहा है।

हमने एक-दूसरे को रगड़ते हुए खूब जम कर चुदाई की। फिर दोनों झड़ गये, पस्त हो गये। थोड़ी देर लंबी लंबी सांसें लेने के बाद हम दोनों नॉरमल हुए। मैं उसके उपर से उतर कर उसके बग़ल में लेटा और वो मेरे उपर आ गई। उसने कई बार होंठों और गालों को चूमा।

नगमा: बेटी के बारे में पूछना बेकार है। अपनी मां को चोदते हो या अपनी बहन को?

मैंने प्यार से उसके गोरे चिकनी गाल पर चपत लगाया।

मैं: ऐसा क्यों पूछ रही हो? कोई अपनी मां बहन को भी चोदता है क्या?

नगमा बूर को मेरे लंड पर रगड़ रही थी।

नगमा: सैकड़ों, हज़ारों लोग चोदते हैं। मैंने अपनी आंखों से सैकड़ों बार असलम को अपनी मां और बहन को चोदते देखती थी। एक बार उसने मुझसे परमिशन मांगी कि मैं दूसरों को घर में लाकर असलम की मां और बहन को चुदवाने दूं, लेकिन मैंने मना कर दिया। मैंने मना किया तो उसने अपनी मां और बहन को किसी होटल में बेच दिया है। अब वे दोनों मां-बेटी किसी होटल की रंडी है।

नगमा चुदाई की मस्ती दे ही रही थी। उसकी बातें भी बहुत मज़ेदार थी।

नगमा: मैंने यह भी सुना है कि अपने घर की औरतों यानी अपना मां, बहन और बेटी को चोदने से मर्द की ताक़त बढ़ती है, चोदने का स्टैमिना बढ़ता है। असलम को देख ही रहे कि इस उम्र में भी बेटी के उम्र की लड़कियां उससे चुदवाने के लिए मरती हैं। एक बार, तुम्हारे कॉलेज की एक लड़की के बहुत कहने पर मैंने तुम लोगों के अरविंद सर के साथ उनके ही घर में चुदवाया था। अरविंद और असलम, दोनों का लंड एक जैसा ही लंबा और मोटा है और दोनों से चुदवाने के लिए जवान लड़कियां मरती है।

नगमा: दोनों ने अपनी मां और बहन को खूब चोदा है। जो भी कारण रहा हो, मुझे तुम्हारे अरविंद सर के साथ चुदाई में कोई मज़ा नहीं आया था। ये तब की बात है जब उसने शादी नहीं की थी।

नगमा सिर्फ़ देखने में ही खूबसूरत नहीं थी, उसका दिल भी बहुत साफ़ था। उसके दिमाग़ में किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं था। जैसा संगीता से कहा था मैंने उससे कहा कि अरविंद अब ज़्यादा बढ़िया से चोदेगा। लेकिन उसने कहा कि उसके मायके ( मां के घर में ) एक यार था, जो बहुत बढ़िया चुदाई करता था। हमने एक राउंड और चूदाई की। सुबह जब असलम उसे लेने आया तो मेरे बहुत ज़िद करने पर भी नगमा ने एक रुपया भी नहीं लिया।

मेरी ज़िंदगी बहुत बढ़िया से चलने लगी। ये तीन औरतें संगीता, नगमा और रेखा मुझसे रेग्युलरली चुदवाती रही। मैंने किसी गार्ड से किसी और लड़की या औरत को मेरे पास भेजने नहीं कहा। जिस रविवार को रेखा ने मेरी मां को यहां बुलाने और बेटे से चुदवाने वाली चिट्ठी लिखी थी, उसके 15वें दिन मेरे लिए फ़ोन आया। शनिवार को दोपहर में, जब मैं क्लास कर रहा था तब फ़ोन आया। फ़ोन हेडमास्टर के ऑफिस में आया था। मैं हेडमास्टर की ऑफिस में गया तो हेडमास्टर साहब अपनी बेटी की बातें करने लगे।

हेडमास्टर: बहुत दिनों से तुमसे बात करना चाह रहा था। संगीता तुम्हारी तारीफ़ करते हुए थकती नही। बहुत प्यार करती है तुम्हें।

मैं: सर अब आपको सब मालूम है। उसे सिर्फ़ मेरे साथ का सेक्स पसंद है। अगर मुझे प्यार करती तो फिर होटलों में क्यों जाती? अरविंद से क्यों चुदवाती? आप हेडमास्टर हैं। आपकी बेटी को चुदवा कर रुपया कमाने की क्या ज़रूरत है?

हेडमास्टर: अमित, इस मामले में मेरी सोच अलग है। इस दुनिया में जो कुछ भी है सबकी अपनी वैल्यू है। जब मुझे मालूम है कि मेरे पास जो चीज है उसकी बाज़ार में बहुत डिमांड है, तो फिर मैं वो चीज़ किसी को मुफ़्त में क्यूं दूं। अपनी बायलॉजी टीचर तुम्हारे साथ समय चाहती है। वो तुम्हारे होस्टल के रुम में नहीं आ सकती। तुम उसे शहर के किसी बढ़िया होटल में ले जा कर चोदो या चाहो तो उसके घर में ही चोदो। मैं वार्डन से कह दूंगा कि तुम्हें रात में बाहर जाने दे।

हेडमास्टर: वैसे तुम्हारे वार्डन की घरवाली भी बहुत मस्त औरत है। उसे भी पटा कर चोदो। गार्गी यहां के किसी गार्ड की रंडी नहीं है। उसे मालूम है कि तुम संगीता को बहुत चोदते हो। संगीता ने तुमसे उसकी मां को चोदने के लिए बहुत कहा लेकिन तुम्हें मेरी घरवाली पसंद नहीं है तो कोई बात नहीं। असलम उसे खुद चोदता ही है हर दूसरे तीसरे रात किसी ना किसी स्टूडेंट्स के रुम में पहुंचाता है। तुम्हारे कई दोस्तों ने मेरी पत्नी को चोदा है। कभी-कभी तो कई स्टूडेंट्स एक साथ मिल कर उसे चोदते हैं। तुम भी एक बार चोद लो। 45-46 साल की है, लेकिन आज भी बहुत आग है उस औरत में।

मैं अचंभे से अपने हेडमास्टर को देखता रहा। 50-52 साल का आदमी कितनी आसानी से अपनी बेटी और घरवाली की चूदाई, उनकी रंडी-पने की बात कर रहा था। मैं चुप ही रहा।

हेडमास्टर: मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूं कि तुमसे चुदवाने के लालच में मेरी बेटी ने अपनी जवानी का मज़ा मुझे दिया। जिस रात तुम या अरविंद उसे नहीं चोदते हो संगीता पूरी रात मेरे साथ नंगी रहती है। मैं अब किसी को चोद नहीं सकता, लेकिन उसे मेरा अंगुली से चोदना बहुत पसंद है। अब तो संगीता भी अपने दलाल, अपनी मां के यार असलम से भी चुदवाने लगी है।

तभी फ़ोन की घंटी बजी। पहले हेडमास्टर ने उठाया। हेलो बोल कर रिसीवर मुझे दिया। मैंने हेलो कहा और सामने वाली की आवाज़ सुन कर मेरा दिल खुश हो गया। सामने से मेरी मां बोल रही थी।

मां: बेटा तेरी और तेरी उस रंडी मां, मेरी सौतन की चिट्ठी पढ़ कर मेरी जवानी में, मेरी बूर में आग जलने लगी है। अब बर्दाश्त नहीं कर सकती। कल सुबह की ट्रेन से आ रही हूं, अकेले। तुम मुझे स्टेशन लेने आओ। लेकिन एक पूरा दिन और रात मैं अपने बेटे के घोड़ा जैसे लंड से खेलूंगी। उसके बाद तू जिससे भी, तेरे दोस्त विनोद से, अरविंद से, या असलम से ही चोदने बोलेगा चुदवाऊंगी।

मां: रेखा ने ग्रुप, सामुहिक चुदाई की बात की है। मैं उसके लिए भी तैयार हूं। एक रात होटल में रहने के बाद रेखा के घर में ही रहुंगी। मैं भी तो देखूं कि कुतिया कितनी ख़ूबसूरत है कि मेरा बेटा हर समय उसकी बूर में घुसा रहता है।

मैं: में स्टेशन आ जाऊंगा, लेकिन तुम हेडमास्टर साहब से मेरे लिए कॉलेज से बाहर रहने की परमिशन ले लो।

रिसीवर सर को देते हुए मैंने सर से कहा कि मेरी मां उनसे बात करना चाहती थी। हेडमास्टर ने हेलो कहा। थोड़ी देर उन्होंने मां की बात सुनी।

हेडमास्टर: इंदिरा जी, आपसे बात कर बहुत बढ़िया लगा। हम वैसे स्टूडेंट्स को बाहर रात गुज़ारने की परमिशन नहीं देते हैं। लेकिन आपके बेटे के लिए रुल तोड़ दूंगा। कल पूरा दिन और रात अमित आपके साथ रहेगा और सोमवार से आप जितने दिन रहना चाहे गेस्ट हाउस में आपके लिए रुम रिज़र्व रहेगा। और सोमवार की रात का खाना आप हमारे साथ खाएंगी।

मां ने ज़रूर हां कहा होगा, तभी सर ने रिसीवर नीचे रख दिया।

हेडमास्टर: अमित, तुम्हारी मां की आवाज़ बहुत ही मीठी है।

मैं: सर आप असलम के बारे में कुछ कह रहे थे।

हेडमास्टर: मैंने असलम जैसा मर्द आदमी और कोई नहीं देखा और अब उसके बाद तुम मिले हो। वो कैसे क्या करता है मालूम नहीं। शायद कोई वशीकरण जादू जानता है, तभी वो जिसे चाहता है आसानी से चोद लेता है। मैं शादी करने के बाद सुषमा को, अपनी घरवाली को यहां लेकर आया और अमित एक महीना भी नहीं हुआ कि सुषमा ने सामने से कहा कि उसे असलम बहुत पसंद था, और वो उससे चुदवाना चाहती थी।

हेडमास्टर: मैं क्या बोलता, मैं ख़ुद असलम के कारण बहुत सी लड़की और औरतों को चोद रहा था। इतने सालों में 10-11 टीचर ही ऐसे होंगे जिनकी घरवाली, बहन, या बेटी को मैंने नहीं चोदा होगा। सुषमा ने कहा कि अगर मैं उसे असलम से चुदवाने नहीं दूंगा तो फिर मैं भी किसी और को नहीं चोद पाऊंगा। उसके सात-आठ साल तक सुषमा मेरे अलावा सिर्फ़ असलम से ही चुदवाती रही। संगीता जब 2 साल की हो गई तब असलम सुषमा को भी स्टूडेंट्स के पास भेजने लगा।

फिर हेडमास्टर ने ऐसी बात कही कि मेरा सर चकराने लगा।

हेडमास्टर: डाक्टर ने कहा था कि मैं बच्चा पैदा नहीं कर सकता हूं। ये बात किसी और को मालूम नहीं है। सुषमा ने असलम से चुदवा कर मेरी इज़्ज़त रख ली। प्लीज़ किसी को बोलना मत, मेरे तीनों बच्चों का बाप असलम ही है। ना तो ये बात सुषमा को मालूम है, ना ही असलम को। असलम अभी अपनी दोनों बेटियों को ही चोद रहा है। मेरी बड़ी बेटी सुजाता भी संगीता जैसे अपने बाप असलम से चुदवाती है। बेटा अमित, मेरे बोलने पर आज रात गार्गी को चोद लो।

और हेडमास्टर की बात सुन कर मुझे समझ आया कि असलम इतना बढ़िया क्यों चोदता था कि 50 साल का होने के बाद भी जवान लड़कियां उससे चुदवाने के लिए मरती थी। असलम की घरवाली नगमा ने कहा था कि बेटी को चोदने से आदमी की चूदाई की शक्ति के साथ चोदने का स्टैमिना भी बढ़ता है। और असलम एक नहीं अपनी दो बेटियों को चोद रहा था। सर ने मुझे कॉलेज की बायोलॉजी टीचर गार्गी को चोदने के लिए कहा। मैंने तब तक गार्गी से कभी बात भी नहीं की थी।

मैं क्या बोलता। अपने क्लास में वापस आ गया। क्लास में घुसा ही कि संगीता ने चुटकी ली।

संगीता: लगता है कि हेडमास्टर साहब को तुम्हारे कारनामों की खबर हो गई है। तुम्हें कॉलेज से निकालने के लिए ही बुलाया था ना।

पिछले 15-16 दिनों में मैंने संगीता को 8-10 बार चोद लिया था। मैंने भी मस्ती ली।

मैं: नहीं मेरी प्यारी संगीता रानी, तुम्हारे बाबू जी ने यह कहने के लिए बुलाया था कि बहुत जल्दी मेरी शादी तुमसे हो जायेगी और हनीमून मनाने हम स्विट्ज़रलैंड जायेंगे।

क्लास टीचर ने हमें चुप रहने के लिए कहा। शनिवार को 1 बजे ही छुट्टी हो जाती थी। जिस टीचर को चोदने के लिए हेडमास्टर कह रहे थे, मैं उनके ऑफिस में गया। मुझे देखते ही उन्होंने अंदर आने के लिए कहा। मैं उनके सामने बैठ गया। गार्गी मैडम सीधा मुद्दे पर आ गई।

गार्गी: मुझे मालूम है कि यहां पढ़ने वाले सभी बहुत ही अमीर घर के बिगड़े हुए बच्चे है। मैं चार दूसरे कॉलेज में पढ़ाने के बाद एक साल पहले ही यहां आई हूं। जब यहां के बारे में मालूम हुआ कि यहां पढ़ने वाले सभी लड़के मादरचोद है, अपनी मां से भी बड़ी उम्र की औरतों को चोदते हैं। यहां के टीचर अपनी स्टूडेंट्स को चोदते हैं, तो बहुत ग़ुस्सा भी आया और दुख भी हुआ।

मैं: फिर आप यहां की नौकरी छोड़ कहीं और चले जाइए। यह जगह आप जैसी शरीफ़ औरतों के लिए नहीं है।

गार्गी: क्योंकि यहां जितनी सुविधा है, जितनी सैलरी हैं, कहीं और नहीं है। इतनी सुविधा और बढ़िया सैलरी छोड़ कर मैं नहीं जा सकती।

मैं: मैडम, आप बायोलॉजी की टीचर है और मैंने बायोलॉजी नहीं लिया है। हेडमास्टर ने कहा कि आप मुझसे मिलना चाहती हैं। मुझसे आपको क्या काम है?

गार्गी: मुझे बहुत भूख लगी है। बहुत समय से भूखी हूं। मुझे मालूम हुआ है कि देखने में तुम साधारण मनुष्य हो, लेकिन असल में तुम घोड़ा हो। मैं भी तुम्हारी घोड़ी बनना चाहती हूं। लेकिन एक ही शर्त पर कि जब भी मुझे ज़रूरत होगी तुम मुझे चोदोगे।

गार्गी: मैं दूसरी रंडियों की तरह रुपया लेकर नहीं चुदवाऊंगी। ना ही किसी हालत में कभी तुम्हारे रुम में आऊंगी। कभी-कभी तुम्हारे साथ बाहर घूमने, होटल में रहने जा सकती हूं। अगर बोलोगे तो छुट्टियों में तुम्हारे घर भी चलूंगी। जब तक तुम यहां हो, तब तक मैं तुम्हारी प्रेमिका बन कर चुदवाऊंगी। एक बात पुछूं, सच-सच बताओगे?

मैंने नॉड किया।

गार्गी: मेरी एक बहुत ही बढ़िया सहेली मनोचिकित्सक है। उसका कहना है कि जो भी लड़के कम उम्र में ही चुदाई के शौक़ीन हो जाते हैं, बढ़िया चुदाई करते हैं, उनमें से अधिकतर लड़के अपनी मां से ही चुदाई सीखते हैं, अपनी मां को चोदते हैं। तुम भी अपनी मां को चोदते हो?

मैं: कल मेरी मां आ रही है, आप से मिलवा दूंगा, ख़ुद ही पूछ लीजिएगा। लगता है तुम्हें भी चुदवाने का बहुत शौक़ हैं। कितनों ने चोदा है अब तक?

गार्गी: गलती से भी ये सवाल अपनी घरवाली से मत पूछना। तुम्हें तलाक़ दे देगी। औरत से यह पुछना कि वो किससे चुदवाती है या उसे किसने चोदा है, यह औरत के लिए सबसे बड़ी गाली है।

रेखा ने भी बिल्कुल यही कहा था। मैंने अपने इस टीचर को उपर से नीचे तक देखा।

मैं: प्लीज़, थोड़ी देर के लिए मेरे सामने खड़ी हो जाइए।

गार्गी अपने चेयर से उठ कर मेरी तरफ़ आई और सामने खड़ी हो गई।

गार्गी: यही ऑफिस में चोदोगे! घर आओ, जो भी देखना है देख लेना। आठ बजे तुम्हारा इंतज़ार करूंगी। पहले मेरे हाथ का बना खाना खाना और बाद में जितना चाहो मुझे खाना।

मैं ऑफिस में बैठ ही रहा और गार्गी अपना हैंड बैग लेकर बाहर निकल गई। आज एक नई औरत की बूर में लंड पेलना था।

मैं इस बात से बहुत खुश था कि आख़िरकार मेरी मां अपने बेटे, मुझसे चुदवाने के लिए देहरादून आ रही थी। मां ने फ़ोन पर कहा कि एक पूरा दिन और रात मेरे साथ होटल में मस्ती मारेगी और उसके बाद रेखा के साथ रहेगी।

हेडमास्टर ने मां को गेस्टहाउस में रहने के लिए कहा और मुझसे कहा कि मैं बायोलॉजी टीचर गार्गी को चोदू। मैंने उस औरत से कभी बात भी नहीं की थी, लेकिन जब मैं गार्गी से मिला तो उसने खुल कर चुदवाने की बात की, और मुझे अपने घर में रात गुज़ारने के लिए आमंत्रित किया।

गार्गी के ऑफिस से कैंटीन आते समय मेरे दिमाग़ में ये बात आई कि लोग बेकार ही हम मर्दों को बदनाम करते हैं कि हम मर्दों को चुदाई की ज़्यादा ज़रूरत है। लेकिन ये ग़लत है। सच तो यह है कि औरतें ही ज़्यादा चुदासी होती है, बस उन्हें एक मौक़ा मिलना चाहिए, बढ़िया चोदने वाला मिलना चाहिए।

बड़े-बड़े घरों की बेटियों, घरवाली असलम जैसे गार्ड से मुफ़्त में चुदवाती है, तो इसका क्या मतलब हो सकता है?ख़ैर मैंने खाना खाया और रुम में जा कर आराम करने लगा। विनोद फिर रुम में आया।

विनोद: यार तुमने सब के उपर क्या जादू किया है कि सभी हेडमास्टर, अरविंद सर, और संगीता भी तुमसे बहुत हिल-मिल गये हैं? यार तुम रेखा के पास जाते हो। किसी तरह उसे मनाओ कि मुझसे चुदवा ले। यार अगर उसे नहीं चोद पाया तो पागल हो जाऊंगा। ना तो क्लास में मन लगता है, और ना पढ़ने में जी लगता है।

उस रविवार से, जब अरविंद के सामने रेखा को चोदा तब से उसे हर दूसरे दिन चोदता ही था। कभी-कभी एक दिन में ही चार बार चोदता था। मैंने सोचा कि अब जब मैं रेखा को लगातार चोद ही रहा था, तो क्यों ना अपने दोस्त विनोद को भी मौक़ा दूं।

मैं: रेखा को चोदने के लिए कितना देना चाहते हो? बनबारी और असलम ने कहा है कि 2-3 हज़ार में ही बढ़िया-बढ़िया माल रुम में आ जाती हैं। फिर क्यों उतनी चुदी हुई औरत को चोदना चाहते हो?

लेकिन विनोद रेखा को चोदने के लिए पागल हो रहा थ। मैं थोड़ी देर विनोद को ध्यान से देखता रहा।

मैं: तुम्हारी एक छोटी बहन भी है ना। अगर तुम अपना मां और बहन को मुझसे चुदवा दो,‌ तो उसके बाद मैं तुम्हें अपनी दोनों मां, रेखा और अपनी सगी मां को तुमसे चुदवा दूंगा। जितनी जल्दी अपनी मां और बहन को मुझसे चुदवाओगे, उतनी जल्दी तुम अपना लंड रेखा की बूर में डाल सकते हो। एक बात और, मेरी दोनों मां तुमसे चुदवाने का कितना लेंगी मैं नहीं जानता, लेकिन मैं तुम्हारी मां बहन को चोदने के लिए एक रुपया भी नहीं दूंगा। लेकिन मुझसे चुदवाने के बाद दोनों तुम्हारा थैंक्स करती रहेगी कि तुमने दोनों को मुझसे चुदवाया।

पिछले 20-21 दिनों से चुदाई कर मुझे अपने उपर बहुत भरोसा हो गया था, कि मैं किसी भी औरत को पूर्ण संतुष्टि प्रदान कर सकता था। मेरी बात सुन कुछ देर विनोद मुझे एक टक घूरता रहा।

विनोद: रेखा को चोदने के लिए मैं 2 लाख तक दे सकता हूं। तुम्हारी मां ज़रुर 40 साल से उपर की होंगी। अगर मुझे पसंद आई तो उन्हें भी 20-25 हजार दे दूंगा। लेकिन इससे पहले कि तुम मेरी बहन और मां को चोदो मुझे रेखा की या अपनी मां की नंगी जवानी दिखलाओ। उन दोनों को सिर्फ़ नंगा देखने के लिए 10-10 हज़ार दूंगा।

इतना बोल कर विनोद मेरे रुम के बाहर चला गया। मैंने विनोद की चाहत के बारे में बहुत सोचा और मैंने फ़ैसला किया कि विनोद की चाहत के बारे में मैं ख़ुद रेखा से बात करुंगा।

क़रीब पांच बजे शाम को मैं अपने होस्टल के वार्डन, जो होस्टल से ही जुड़े हुए तीन बेडरूम के मकान में रहते थे, उनके घर पहुंचा। पहले भी उनके घर कई बार आया था, लेकिन मित्रा सर ने कभी घर के अंदर भी आने नहीं कहा था। मेरे कॉल-बैल बजाने पर एक 24-25 साल की औरत ने दरवाज़ा खोला। ये ज़रूर मित्रा सर की नौकरानी होगी।

मैंने उसे अपना नाम और रुम नंबर बताया। वो मुझे बाहर रुकने बोल कर अंदर गई। थोड़ी देर बात ही वो वापस आई और मुझे आश्चर्य हुआ जब उसने मुझे अंदर आने कहा। “आप बैठिए, सर अभी आते हैं।”

मैं सोफ़ा पर बैठा और वो औरत अंदर से एक कोल्ड ड्रिंक से भरा ग्लास लेकर आई। उसके पीछे एक बहुत ही गोरी, हेल्दी, भरे-पूरे बदन वाली औरत आई। उस समय मैं जिस तीन माल को चोद रहा था, समझ लीजिए कि तीनों रेखा, नगमा और संगीता का बदन फ़िल्म की हीरोइन माधुरी दिक्षित जैसा था। जबकि इस औरत, वार्डन की घरवाली का बदन हेमा मालिनी जैसा था।

औरत: अमित, इससे पहले मैंने तुम्हें स्पोर्ट्स डे के फंक्शन में प्राइज़ लेते देखा था। मैं तो तुम्हें बहुत ही शरीफ़ लड़का समझती थी, लेकिन अब सुन रही हूं कि आज-कल तुम लड़कियों को बहुत तंग कर रहे हो, उन्हें डरा रहे हो।

मैं समझ गया कि इस औरत के कान में भी मेरी चुदाई की तारीफ़ पहुंच गई थी। मैंने मुस्कुराते हुए दोनों हाथ जोड़ कर प्रणाम किया।

मैं: मैडम, 2-3 लड़कियों और औरतों को छोड़ कर मैं किसी और से बात भी नहीं करता हूं, और वे सभी मेरी बहुत ही बढ़िया दोस्त हैं। आज भी उनसे बात की है। उनके बातों से नहीं लगा कि मैं उन्हें तंग करता हूं या वे मुझसे परेशान है।

यह बोल कर कि मैं 2-3 औरतों से ही बात करता हूं मैं फस गया।

औरत: तुम मुझसे पहली बार ही मिल रहे हो इसलिए अपना नाम बता देती हूं। मेरा नाम संपा है, संपा मित्रा। मेरे दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी है 19 साल की कानपुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। उससे छोटा एक बेटा है यहीं के स्कूल में 9वीं क्लास में है। मैं भी तो सुनूं कि तुम्हारी खास-खास दोस्त कौन हैं। उन तीनों का नाम बताओ।

मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता था। मैं चुप ही रहा।

संपा: लगता है कि तुम उन तीनों को खूब चोदते हो, इसलिए नाम नहीं ले रहे हो। घबराओ मत, यहां की ज़्यादातर औरतें रंडी है। कोई बदनाम नहीं होती। घबराओ मत, हम तुम्हारी माल को भी बदनाम नहीं करेंगे।

इस औरत को भी मालूम था कि यहां बहुत सी रंडियां थी। मुझे लगा कि ये औरत भी स्टूडेंट्स से चुदवाती थी।

संपा: तुम अगर यह सोच रहे हो कि यहां की दूसरी औरतों की तरह मैं भी तुम जैसे स्टूडेंट्स से चुदवाती हूं, तो बिल्कुल ग़लत है। मैं अपने आदमी से बहुत खुश हूं। जल्दी अपनी माल का नाम बताओ।

मैं फिर भी चुप रहा।

संपा: नहीं बताना है तो मत बताओ लेकिन आज से अभी से मैं सारे गार्ड को वार्न कर दूंगी कि ना तो कोई औरत तुम्हारे रुम में आ पाए, और ना तुम रात में बाहर जा सकोगे। सिर्फ़ पिछले 7 दिन में तीन रात कोई बुर्का पहन कर तुम्हारे रुम में आई और रात भर तुम्हारे साथ रही, और हर दूसरी रात तुम रात भर होस्टल से बाहर रहे। तुम्हें मालूम है ना कि रात में होस्टल से बाहर रहना सबसे बड़ा गुनाह है? कल ही तुम्हें यहां से निकलवा दूंगी।

वो मुझे निकलवा सकती थी कि नहीं मुझे नहीं मालूम था, लेकिन मैं बहुत ही डर गया। मैंने तीनों का नाम ले लिया। मैंने आगे बढ़ कर संपा के दोनों फ़ीट को पकड़ लिया।

मैं: मैडम प्लीज़, किसी को बदनाम मत कीजिए। मेरे रुम में आने वाली हेडमास्टर की बेटी संगीता और असलम गार्ड की चौथी बेगम नगमा है। मैं रात में या तो संगीता को चोदने जाता था, या फिर अरविंद सर की घरवाली रेखा को।

संपा: नगमा के बारे मैं नहीं जानती लेकिन संगीता को देख कर ही लगता है कि साली रंडी है। लेकिन विश्वास नहीं हो रहा है कि तुम रेखा को चोद रहे हो।

नौकरानी: मैडम, भूल गई कि सीमा ने क्या कहा था?

नौकरानी ने सीमा का नाम लिया लेकिन मुझे उस समय यह याद नहीं आया कि बनबारी ने जिस मां बेटी की जोड़ी को मेरे रुम में भेजा था उस जोड़ी की बेटी का नाम सीमा था।

संपा: अभी तुम सर से क्यों मिलने आये हो?

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