जब एक पत्नी का भरोसा अपने पति से उठ जाता है तो एक बहुत बड़े बदलाव की जरुरत महसूस होती हैं। मैंने भी फैसला कर लिया कि मुझे अपनी ज़िन्दगी खुद जीना सीखना होगा इसके बजाय कि पति पर निर्भर रहु।
कल का क्या भरोसा, मुझे मेरा पति छोड़ कर किसी और के साथ शादी कर ले या मेरा इस्तेमाल कर अपना मतलब निकाले। मुझे अपनी ज़िन्दगी की एक नयी पारी शुरू करनी थी और मैंने अपने लिए नौकरी ढूढ़ना शुरू कर दिया।
मेरे पति अशोक ने मेरी नौकरी ढूंढने में मदद देने की कोशिश की पर मैंने मना कर दिया, मुझे अपनी योग्यता से बिना सिफारिश की नौकरी चाहिए थी।
मुझे ऐसी जगह नौकरी चाहिए थी जहा मुझे मेरी खूबसूरती को देख कर काम नहीं दिया जाये, कोई भी ठरकी बॉस मेरे सेक्सी फिगर को देख कर मुझे काम दे सकता था पर मुझे अब किसी का शिकार नहीं बनना था।
सेक्रेटरी के जॉब के लिए मेरी शैक्षिक योग्यता देखे बिना सिर्फ मेरे शरीर को देखते ही दो तीन जगह नौकरी मिल भी गयी, पर उन ठरकी बॉस और मैनेजर की नीयत उनकी आँखों में ही दिख गयी और मैंने वहा काम ना करना ही ठीक समझा।
छोटे शहर में महिला बॉस मिलना बहुत मुश्किल था। मैंने कुछ बड़े ऑफिस में काम ढूंढना भी जारी रखा, थोड़ा समय और लग गया और मुझे वो जगह शायद मिल गयी जो मेरे मुताबिक थी।
मेरे साथ कुछ और उम्मीदवारो को भी लिखित परीक्षा से होकर गुजरना था, जिसके बाद साक्षात्कार का राउंड होने वाला था। जगह सिर्फ एक खाली थी और उम्मीदवारी थे कई।
मैंने अपनी मेहनत में कोई कमी नहीं छोड़ी थी और दो लोग़ जिनको साक्षात्कार राउंड के लिए चुन लिया गया उनमे मैं भी थी। साक्षात्कार कंपनी का बॉस राहुल खुद लेने वाला था जिसके लिए सेक्रेटरी चाहिए थी।
मेरे साथ जो लड़की चुनी गयी थी वो एक कुंवारी लड़की थी जो दिखने में अच्छी खासी थी और छोटे कपड़े पहन कर आयी थी। मुझे लग गया कि अगर ये भी दूसरे ठरकी बॉस जैसा होगा तो मेरा चुना जाना मुश्किल हैं।
हम दोनों को एक साथ इंटरव्यू के लिए अंदर बुलाया गया।
राहुल एक पच्चीस तीस की उम्र का नौजवान था, मुझे उम्मीद नहीं थी कि इतनी कम उम्र का बॉस भी हो सकता हैं। बॉस शब्द सुनते ही मुझे एक अधेड़ उम्र का ठरकी मर्द ही दिमाग में आता हैं।
राहुल की पिछली सेक्रटरी अचानक काम छोड़ कर चली गयी थी और उसको तुरंत किसी की जरुरत थी। पुरे साक्षात्कार के दौरान उसने एक नजर भी हम दोनों नारियो पर नहीं डाली बस हमारे दस्तावेज़ देखता रहा और सवाल पूछता रहा।
मेरे लिए ये बहुत अलग अनुभव था जब कोई मर्द खूबसूरत औरत को नहीं देख रहा था। मुझे भी ऐसी ही जगह पर काम की तलाश थी पर बीच का रौड़ा वो लड़की थी जो मेरी प्रतियोगी थी।
राहुल को हम दोनों की शैक्षिक योग्यता पर कोई शक नहीं था उसने हमसे सिर्फ हमारी महत्वकांक्षा पूछी और हम ये जॉब क्यों करना चाहते हैं। मेरा लक्ष्य साफ़ था कि मुझे अपने पैरो पर खड़ा होना हैं और बहुत आगे जाना हैं क्यों कि ज़िंदगी में बाकी सब तो वैसे भी पा लिया हैं।
मेरे साथ वाली उम्मीदवार के साथ ये समस्या था कि वो एक दो साल से ज्यादा प्रतिबद्धता नहीं दे सकती थी क्यों कि उसकी शादी होने वाली थी और फिर अपने होने वाले पति के साथ उसे काम छोड़ कर दूसरे शहर जाना था।
ये बात मेरे पक्ष में आ गयी और मुझे वो नौकरी दे दी गयी। मैं बहुत खुश हो कर घर आयी, अशोक को इतना फर्क नहीं पड़ा। मुझे खुश देख उसने मुझे बधाई जरूर दी। उसके लिए तो अच्छा ही था, दिन भर मेरे घर पर नहीं होने से उसको मौका मिल जायेगा अपनी किसी महिलामित्र को घर ला अपने अरमान पुरे करने का।
मुझे इस सब से अब जैसे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था, ये उसकी ज़िन्दगी हैं वो कैसे भी जीए पर मुझे अपनी ज़िन्दगी अपनी शर्तो पर जीनी थी।
मैंने ऑफिस में पहनने के हिसाब से कपड़ो की शॉपिंग कर ली और जल्द ही ऑफिस ज्वाइन कर लिया। वहा के महिला स्टाफ से मेरी पहले ही दिन अच्छी खासी बात हो गयी और मैंने अपना काम भी समझ लिया था।
मेरी सुन्दरता देख जरूर पुरुष कर्मचारी मुझसे बात करना चाह रहे थे पर मैंने शुरू से ही ऐसी अपेक्षा बना दी थी कि मैं किसी के झांसे में फंसने वाली नहीं हु।
एक दो बार राहुल के केबिन में जाने को भी मिला पर वो सिर्फ एक पल के लिए अपना सर उठा कर देखता कि कौन हैं और फिर नीचे टेबल पर अपना काम करता हुआ बात करता था जैसे सामने वाले की तो कोई औकात नहीं हैं।
या तो वो अपना बॉस होने का रौब दिखा रहा था या काम में सचमुच बिजी था या मुझे नया आया देख मुझे इम्प्रेस करने की कोशिश कर रहा था।
पर मेरे लिए तो अच्छा ही था, मैंने जो अपने लिए नयी ज़िन्दगी चुनी थी मुझे ऐसा ही बॉस चाहिए था। उसके जो भी इरादे हो मैं उससे पटने वाली नहीं थी।
दूसरे सहकर्मियों से पता चला कि पहले कंपनी का बॉस राहुल के पिता थे, उनकी तबियत ख़राब रहने लगी तो राहुल ने कम उम्र में ही उनका सारा कारोबार संभाल लिया था। उसके आने के बाद बिज़नेस और अच्छा चलने लगा था।
मुझे भी गर्व हुआ कि मैं ऐसे बॉस की सेक्रटरी हु, हम दोनों ही बहुत महत्वाकांक्षी थे। धीरे धीरे समय गुजरते हुए दो महीने हो गए पर राहुल के बर्ताव में कोई फर्क नहीं आया।
वो अब भी नज़रे उठा कर बात नहीं करता था। जब कोई बात समझानी होती थी तब भी सिर्फ मेरी आँखों में देखता था जरा भी नीचे की तरफ मेरा फिगर देखने की कोशिश नहीं की।
मुझे वो एक सामान्य मर्द नहीं लगा, वरना मुझ जैसी अच्छे फिगर वाली नारी को एक बार देख कर उसको निहारता ना रहे ये मुमकिन नहीं था। मुझे लगा जरूर इसकी बीवी बहुत खूबसूरत होगी इसलिए दूसरो की तरफ नजर नहीं डालता।
मेरी गलतफ़हमी जल्द ही दूर हो गयी जब पता चला उसकी अभी शादी नहीं हुई हैं। मुझे लगा फिर जरूर कोई खूबसूरत गर्लफ्रेंड होगी उसकी जो उसे किसी ओर की तरफ देखने से मना करती होगी।
वहा काफी सालो से काम करने वाली एक अधेड़ महिला सुधा आंटी ने बताया कि राहुल एक लड़की को चाहता था पर उस पर अपने पिता के बिज़नेस का भार आ पड़ा और धीरे धीरे दोनों अपनी महत्वाकांक्षा के साथ धीरे धीरे दूर हो गए।
अब थोड़ा समझ में आया कि राहुल के लिए उसका बिज़नेस और महत्वकांक्षाए उसकी ज़िन्दगी में लड़कियों से कही ज्यादा महत्त्व रखती हैं। इसलिए लड़कियों के प्रति उसका आकर्षण ही ख़त्म हो गया हैं।
समय इसी तरह गुजरता रहा और मैंने अपने आप को ऑफिस में स्थापित कर लिया था। राहुल का भरोसा मैंने जीत लिया था और वो ज्यादा जिम्मेदारी के काम सौपने लगा। शिकायत थी तो बस ये एक कि जब भी वो बात करे पुरे समय मेरी तरफ देख कर तो बात करे।
कही ना कही उसकी ये मुझे ना देखने की आदत मेरे अहम को चोट पंहुचा रही थी। एक खूबसूरत महिला जो अच्छे फिगर की मल्लिका हैं वो कम से कम अपनी ख़ूबसूरती की तारीफ़ की हकदार तो बनती हैं।
मुँह से ना सही कम से कम आँखों के इशारे से तो तारीफ़ कर दे पर वो भी नहीं। मुझे जब ढंग से देखता ही नहीं तो तारीफ़ क्या करेगा। जब भी मैं उसके केबिन में जाती एक आशा के साथ जाती कि आज तो वो मुझे देखेगा या मेरी तारीफ़ करेगा पर हमेशा खिसियाते हुए निराश हो कर ही बाहर आती।
ऐसी बात नहीं थी कि वो मेरी तारीफ़ नहीं करता था पर सिर्फ काम की तारीफ़ करता था। जिसकी मैं हकदार भी थी पर मेरी खूबसूरती की तारीफ़ कर देगा तो कौनसा उसकी इज्जत कम हो जाएगी या उसके उसूल टूट जायेंगे।
इसी तरह छह महीने बीत चुके थे और दिन पर दिन मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। मैं कोई भी कसर नहीं छोड़ती कि मैं अपने आप को उसके सामने प्रस्तुत करू पर वो हमेशा मुझे इग्नोर करता ही रहा।
अपनी जिंदगी में हमेशा ऐसे मर्दो से पाला पड़ा था जिन्होंने हमेशा मेरे शरीर को पाने की कोशिश की थी, मुझे घूरते हुए मेरे कपड़ो के अंदर झाँकने की कोशिश पर ये बिलकुल अलग था। मेरे लिए ये अब एक मिशन बन चूका था, ये मिशन था अपने बॉस के अंदर के मर्द को बाहर निकालने का या अपनी खूबसूरती की सत्ता राहुल के दिल पर जमाने का।
ऐसा नहीं था कि मैं उसके साथ सोना चाहती थी, बस मेरे ईगो को चोट पहुंची कि मुझे मेरे हिस्से की तारीफ़ राहुल से मिलनी ही चाहिए। ये मेरी अब जिद बन चुकी थी।
मैं अब क्या कर सकती थी, जिससे उसका ध्यान बात करते वक़्त मेरी आँखों के सिवाय मेरे शरीर पर भी जाये और तारीफ़ के बोल तो फूटे। क्या मुझे अपना पहनावा बदलना था!
अब तक मैं पूरा बदन ढक कर रखती थी, पैंट और पूरी बांह के शर्ट, या कभी कभी लंबी स्कर्ट के साथ। बिच में कभी कभी पूरा ढका हुआ कुर्ता। हमेशा सीने के उभार को ढकता हुआ एक स्कार्फ़।
शायद मैं ऐसा कुछ दिखाती ही नहीं जिससे राहुल मेरी तरफ देखे। पर इन्ही कपड़ो के बावजूद बाकी के पुरुष कर्मचारी तो मुझे घूरते रहते हैं। दोष कपड़ो का नहीं शायद नीयत का हो। पर फिर भी मुझे कोशिश तो करनी ही थी।
अगले ही वीकेंड पर मैंने नयी शॉपिंग की और ऑफिस वियर के ऐसे कपडे चुने जो तंग हो और थोड़ा शरीर भी दिखाए। पता नहीं मुझे पर कैसा भूत चढ़ गया था, जिन चीजों से मैं बचने का प्रयास करना चाहती थी वो ही मैं कर रही थी।
फिर अपने आप को समझाया कि एक बार की ही तो बात हैं। बस एक बार अपनी तारीफ़ सुन लू, राहुल का व्रत तोड़ दू तो मेरा काम हो जायेगा और फिर मैं अपने उसूलो पर लौट आउंगी।
अगले सोमवार को मैंने नयी खरीदी पेंसिल स्कर्ट पहन ली। उस तंग काली घुटनो से थोड़ा ऊपर तक की शार्ट स्कर्ट के पीछे से मेरे नितंबो का उभार और उस पर मेरी पतली कमर बहुत ही सेक्सी लग रही था।
सोचा ऊपर भी कोई स्किन दिखाऊ टॉप पहन लेती हु पर अपने आप को रोका कि एक साथ दो झटके ठीक नहीं होंगे। मैंने अपना बटन डाउन सफ़ेद तंग शर्ट पहना। उसमे से मेरे सीने का उभार जैसे फट कर बाहर आ रहा था तो मैंने गले में स्कार्फ़ डाल कर उससे सपना सीना ढक लिया।
ऑफिस में पहुंचने के बाद तो क़यामत ही आ गयी, पुरुष तो पुरुष महिलाये भी तारीफ़ करने लगी कि मुझे कभी ऐसे छोटे कपड़ो में नहीं देखा। पुरुष कर्मचारी में कोई नहीं बचा जो आकर मेरी तारीफ़ ना कर गया हो।
मुझे लगा कि इन लोगो पर असर तो पड़ा हैं मतलब राहुल भी मुझ पर ध्यान जरूर देगा।
मैं इंतज़ार करने लगी कि कब राहुल अपने केबिन में आएगा और मैं वहा जाकर उसको आश्चर्यचकित कर पाऊँगी। हमेशा की तरह बिना दाए बाए देखे राहुल अपने केबिन में चला गया। उसके कुछ मिनट के बाद मैंने ही कोई बहाना बना उसके केबिन में जाने का मन बनाया।
मैं पहले वाशरूम में हो आयी अपना मेकअप टच अप कर लिया और कपड़े देख लिए कि सब ठीक लग रहा हैं। सोचा सीने पर पड़ा स्कार्फ़ भी हटा लू और अपने सीने का उभार भी दिखा दू फिर सोचा ठीक नहीं रहेगा।
वाशरूम से जाने लगी फिर कुछ सोच स्कार्फ़ हटा लिया और मेरे टाइट शर्ट से मेरे मम्मो का उभार बहुत ही उत्तेजित लग रहा था। फिर कुछ मन में आया और ऊपर का एक बटन भी खोल दिया। बहुत हल्का सा मम्मो का नंगा उभार दिखने लगा।
मैंने दूसरा बटन भी खोल कर देखा और मेरा क्लिवेज दिखने लगा। ये ज्यादा हो जायेगा सोच दूसरा बटन फिर बंद कर दिया। एकदम से जो कुछ दिख रहा था बंद हो गया। अपने शर्ट के दोनों खुले हिस्सों को पकड़ थोड़ा चौड़ा कर अपना सीना दिखाया।
अब बाहर जाने की बारी थी, पर राहुल के केबिन के बाहर अपनी सीट तक जाते जाते मुझे दूसरे लोगो के सामने से जाना होगा। मैंने अपना स्कार्फ़ फिर से कंधे पर डाल अपना खुला सीना ढक लिया।
मैं अपनी सीट पर पहुंची। आस पास देखा, सब अपने क्यूबिकल में बैठे थे तो कोई नजर नहीं आया, मैंने अपना स्कार्फ़ रख दिया और अपने सीने को देखा और शर्ट को फिर इस तरह एडजस्ट कर लिया कि मेरा सीना दिखने लगे।
मैं फाइल उठा राहुल के केबिन की तरफ मुड़ी और एक दस्तक दी। राहुल ने अंदर आने को बोला और मैंने एक गहरी सांस भरी और अंदर घुसी। राहुल ने एक नजर देखा कौन आया हैं और फिर नीचे टेबल पर पड़े अपने लैपटॉप में देख अपना काम करने हुए पूछा कि मैं किस काम से आयी हूँ।
मुझे उस वक्त इतना गुस्सा आया कि मैं बता नहीं सकती। खैर मैं जिस बहाने से गयी वो बताया और उसने मुझे देखे बिना उसका समाधान कर दिया और मुझे एक हारे हुए खिलाडी की तरह वापिस वहा से जाना था।
दरवाजा खोलने से पहले एक हाथ से फिर अपने शर्ट के खुले हिस्से को पकड़ बंद किया और बाहर आकर अपनी कुर्सी की सीट में धंस गयी।
मेरी उस वक्त रोने की हालत हो गयी थी। इतनी तैयारी कर के मैं अंदर गयी और उस निष्ठुर ने एक झलक तक ध्यान से नहीं देखी। कम से कम दो तीन पलो के लिए ही देख लेता।
मैं अपने दोनों हाथ टेबल पर मोड़ कर अपने चेहरे को उस पर रख छुपा दिया। बिन कहे इतना अपमान तो मेरा कभी नहीं हुआ था। फिर सोचा मुझे कोई ऐसे देख ना ले।
मैंने फिर से अपना बटन बंद कर दिया और वो स्कार्फ़ फिर से लगा लिया। कुछ समय बाद राहुल ने मुझे एक क्लाइंट की फाइल ले मुझे किसी काम से केबिन में बुलाया। मैं सोचने लगी क्या ये मेरे लिए दूसरा अवसर हैं।
कही वो मुझे दुबारा तो देखना नहीं चाहता। मैंने फटाफट से अपना स्कार्फ़ हटाया और शर्ट का एक बटन फिर से खोल कर शर्ट को थोड़ा ऊपर से खोल चौड़ा कर दिया और वो फाइल लिए एक बार फिर अंदर पहुंची।
इस बार तो मेरे अंदर पहुंचने पर उसने देखा तक नहीं क्यों कि उसको पहले ही पता था कि मैं आने वाली थी। मैंने वो फाइल उसके सामने रख कर खड़ी हो गयी। उसने फाइल में नजरे गड़ाए मुझसे उस बारे में कुछ पूछा।
मैं उसके टेबल से घूमते हुए उसकी तरफ आयी और कुर्सी के करीब आ खड़ी हुई। फिर आगे झुक फाइल में ऊँगली लगा उसकी शंका का समाधान करने लगी। इस बीच मैं जितना हो सके उसके करीब गयी ताकि उसे मेरी परफ्यूम या बदन की खुशबु तो आये।
वो मेरी बातों से संतुष्ट हो गया और बोला ठीक हैं और आगे का काम बता दिया पर मेरी तरफ फिर भी नहीं देखा। मुझे इसी में संतोष मिल गया कि उसने कम से कम मेरी खुशबु तो महसूस की होगी।
फिलहाल मेरे लिए ये छोटी ख़ुशी ही मेरी जीत थी। वापिस आते वक्त मैंने फिर अपना शर्ट ऊपर से हाथ से बंद कर दिया ताकि बाहर बैठे लोग ना देखे।
अपनी कुर्सी पर बैठ अपना खुला बटन बंद कर और स्कार्फ़ वापिस लगाते मैं यही सोच रही थी कि आज की मेरी योजना कामयाब हुई भी या नहीं। मैंने सोच लिया कि अगली बार जब मैं अंदर जाउंगी तो राहुल से पूछ ही लू कि मेरे ऐसे कपड़े पहनने पर उसे कोई आपत्ति तो नहीं।
दोपहर के बाद मुझे एक बार फिर उसने किसी काम से अपने केबिन में बुलाया और अपनी आदत के अनुसार मेरी तरफ देखना भी गवारा नहीं समझा। उसने जो पूछा मैंने उसका जवाब दिया और मैं बाहर जाने के लिए फिर मुड़ी।
फिर मैं ठिठक कर रुकी और हिम्मत कर उसकी तरफ पीछे मुड़ी और अपना सोच कर रखा सवाल दाग दिया। मैं इस बार भी बिना स्कार्फ़ से अपना सीना ढके और ऊपर का बटन खोल अपना सीना थोड़ा दिखाए आयी थी।
मैं: “राहुल एक बात पूछनी थी।”
राहुल ने मेरी तरफ देख बिना पूछा : “बोलो”
मैं: “मेरे ऐसे कपड़े पहनने पर आपको कोई ऑब्जेक्शन तो नहीं हैं?”
राहुल ने एक नजर मुझ पर डाली, शायद पहली बार वो मेरे कपड़े देखने के लिए अपनी नजरे मुझ पर डाल रहा था। उसके मेरी तरफ देखते ही मैं शरमाते हुए धक्क से रह गयी।
उसने मेरी नजरो से नजरे मिलाई और बोला “हमारे ऑफिस में कोई ड्रेस कोड नहीं हैं, जब तक कि कोई क्लाइंट नहीं आने वाला हो। कोई भी कुछ भी पहन सकता हैं जब तक कि किसी की भावनाओ को ठेस ना पहुंचे।”
उसने एक बार फिर अपनी नज़रे अपने लैपटॉप पर डाली और अपना काम करते हुए पूछा “और कोई सवाल?”
मैंने हँसते हुए ना कहा और अपनी जीत जा जश्न मनाते हुए जैसे बाहर निकली। मैंने उसको अपनी तरफ देखने को मजबूर जो कर दिया था।
वापिस सीट पर आकर मैंने अपने शर्ट का बटन बंद कर स्कार्फ़ फिर लगा सीना ढक दिया। मैं सोचने लगी क्या राहुल ने थोड़े खुले शर्ट से मेरे मम्मो का उभार देखा होगा। शायद मुझे थोड़ा तिरछा खड़ा होना चाहिए था ताकि वो मेरे नितंबो और सीने के वक्र को और अच्छे से देख पाए।
राहुल ने हालाँकि मेरी तरफ देखा था पर अगले ही क्षण मेरी आँखों में देख बात कर रहा था। मतलब उसपर कोई असर नहीं पड़ा मेरे इस फिगर और छोटे कपड़ो का! शायद मुझे शर्ट का दूसरा बटन भी खोल देना चाहिए था, इससे तो राहुल पर जरूर फर्क पड़ता। शाम होने तक मैं इसी उधेड़बुन में रही।
रात को बिस्तर में सोते वक़्त भी यही ख्याल आ रहे थे कि मुझे आज और क्या क्या करना चाहिए था। साथ ही अगले दिन मैं क्या कर सकती हु ये सोचने लगी। इन्ही सारे ख्यालो के साथ मैं सो गयी।
अगली सुबह मैंने वो स्लीवलेस टॉप पहना जिसमे मेरी नाभी और पतली कमर दिख रही थी। कल के मुकाबले आज और भी छोटी स्कर्ट पहन ली। अपने आप को आईने में देखा और मुझे ये सब करना कुछ ठीक नहीं लगा और फिर से वो कपडे उतार कर हमेशा वाले पुरे ढके कपडे पहन लिए।
फिर मुझे लगा ये तो कदम पीछे खींचने वाली बात हुई, क्या मुझे इतनी आसानी से हार मान लेनी चाहिए या कोशिश करते रहना चाहिए, एक दिन तो राहुल खुल कर सामने आएगा। मैंने फिर से वैसे कपड़े पहने जैसे कल पहने थे, घुटनो तक स्कर्ट और टाइट टॉप।
उसके केबिन में जाते ही मैंने साइड पॉज में खड़े हो एक हाथ अपनी कमर पर रखा और अपने आगे और पीछे के कर्व दिखाने की कोशिश की। पर इन सब का भी उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा। पता नहीं किस मिट्टी का बना हुआ था राहुल।
अगले कई दिनों तक मैंने प्रयत्न किया कि कभी तो राहुल मेरी तरफ देख कर अपनी नजरे रोक देगा और मेरी खूबसूरती या बदन की तारीफ़ करेगा। पर वो दिन तो आ ही नहीं रहा था।
अब तक के सारे प्रयास विफल हो चुके थे। मैं अपने बॉस को मेरी तारीफ़ करने के लिए मजबूर नहीं कर पा रही थी।
धीरे धीरे मुझे कोफ़्त होने लगी थी। एक दिन सुबह तैयार होते वक़्त सोचा आज तो वो मिनी स्कर्ट पहन ही लेती हु। पर मन में कही एक डर भी था अगर इससे भी राहुल नहीं पिघला तो ख़ामखा दूसरे मर्दो को जरूर मजा मिल जायेगा।
इतने समय में मेरा राहुल से अच्छा सामंझस्य हो गया था और उसका मेरे पर भरोसा भी बढ़ गया था। ये सोचते हुए एक दूसरा धांसू प्लान मेरे दिमाग में आया।
मैं अपना सफ़ेद पतला टाइट शर्ट पहना मगर अंदर अपना ब्रा नहीं पहना। उस शर्ट का एक बटन खोला और फिर दो बटन खोल कर देखे, दो में कुछ ज्यादा ही क्लीवेज दिखने लगा था तो मैंने एक बटन ही खुला रखा और प्लान के मुताबिक एक चेन से लगा पेंडेंट पहन लिया।
मैंने वो स्कार्फ़ पहन अपना सीना ढक दिया और ऑफिस पहुंच गयी। राहुल के ऑफिस पहुंचते ही इंतजार करने लगी कब वो काम से मुझे बुलाये। उसका बुलावा आया भी। मैंने अपना स्कार्फ़ निकाला और शर्ट का ऊपर का एक बटन खोल दिया। शर्ट को वहा से थोड़ा हटा कर अपना थोड़ा सा क्लिवेज दिखाया और थोड़ा कांपते हुए उसके केबिन में दाखिल हुई .
पता था हमेशा की तरह वो मेरी तरफ ध्यान नहीं देगा। मैं फाइल समझने के लिए उसकी कुर्सी के पास गयी और काम ख़त्म होते ही मैंने अपना प्लान शुरू किया।
मैं: “राहुल, आपको कुछ दिखाना हैं। ”
वो मेरी तरफ बिना घूमे ही फाइल में देखते हुए बोला “क्या?”
मैं: “फाइल में नहीं इधर देखो।”
वो कुर्सी पर बैठा था और मैं खड़ी थी तो उसकी तरफ झुकते हुए मैंने अपनी दो उंगलियों में अपना पेंडेंट पकड़ा। वो मेरी तरफ घुमा और मेरे हाथ के इशारे के अनुसार मेरे सीने पर नजर गयी।
मैं: “मेरे हस्बैंड ने मुझे ये पेंडेंट गिफ्ट दिया हैं, कैसा लगा?”
पहली बार उसकी नजर मेरी आँखों के अलावा मेरे शरीर के किसी और हिस्से पर दो सेकण्ड्स से ज्यादा रही थी। उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हुई। शायद मेरे झुकने से मेरे शर्ट के खुले हिस्से से उसको मेरे बिना ब्रा के मम्मे की हलकी सी झलक मिल चुकी थी। पुरे पांच सेकण्ड्स के बाद उसकी नजरे वहा से हटी।
राहुल: “नाइस, अच्छा हैं। कल की मीटिंग की तैयारी कर लेना। ”
ये बोल कर वो फिर अपने लैपटॉप लगा। मैं वापिस अपने क्यूबिकल में लौट आयी।
मुझे नहीं पता मैंने अपना जो अंगप्रर्दशन किया वो ठीक था या नहीं, मेरे ऊपर बस ये भूत सवार था कि मैं राहुल की उस तपस्या को भंग करना चाहती थी। इतने दिनों के प्रयास के बाद आखिर मैंने उसको विचलित कर ही दिया था । इसके लिए मुझे भले ही अनुचित तरीके का उपयोग करना पड़ा।
मैं अपनी जीत पर बहुत खुश हुई। पर कही ना कही मेरे दिमाग में दो विरोधी बातें चल रही थी। एक ये कि मैंने जो भी किया वो गलत तरीका था, एक छल था। दूसरा ये कि उसने अभी भी मेरी खूबसूरती या कपड़ो की तारीफ़ नहीं की थी पर मेरे पेंडेंट की तारीफ की थी। वो तो उसको अच्छा नहीं लगा होता तो भी करता क्यों कि मैंने ही तो उसको पूछा था। तारीफ़ तो वो होती हैं जो सामने वाले से बिना पूछे मिल जाये।
कही राहुल को पता तो नहीं चल गया होगा कि मैं ऐसी हरकत क्यों कर रही हु। अगर पता चला होगा तो मेरे लिए बहुत बुरा होगा। मेरी अच्छी बनी बनाई इमेज ख़राब हो जाएगी।
मैंने ठरकी बॉस से बचने के लिए ये वाली नौकरी चुनी थी मगर अब मैं खुद राहुल जैसे सीधे इंसान को भ्रष्ट बनाने में लगी थी। मैंने फैसला कर लिया कि मैं अब और ऐसे प्रयोग नहीं करुँगी।
मैंने जो कपड़े ख़रीदे थे उनको पहनना जारी रखा पर बटन हमेशा बंद और स्कार्फ़ हमेशा सीने को ढके रहता था। जो चल रहा था मैंने उसी में सब्र कर लिए था। इस तरह कुछ समय और निकल गया गया और राहुल पहले की तरह जितनी बात करनी होती उतनी ही करता, उस पैंडेंट वाली घटना से उस पर कोई असर नहीं हुआ लगता था जो मेरे लिए भी ठीक था।
दो महीने बाद ऑफिस में एक हलचल होनी शुरू हो गयी थी। पता चला कंपनी का सालाना उत्सव होने वाला हैं। मेरे लिए तो ये पहली बार था पर बाकी के सहकर्मी काफी उत्साहित थे। बार बार इस चीज का जिक्र निकल ही आता था। हर बार की तरह इस बार भी ये उत्सव राहुल के फार्महाउस पर होनेवाला था।
मुझे बाकी लोगो की उत्सुकता देख थोड़ी हैरानी हुई, शायद काम के बाद एक मुफ्त की पार्टी और मजे करने को मिले तो लोग खुश ही होते हैं। हालांकि मुझे इस उत्सव से कोई लेना देना नहीं था और न ही कोई उत्साह था, शायद राहुल के साथ काम कर कर के मैं भी उसके जैसी वर्कहोलिक बन गयी थी।
उस पार्टी में अभी भी कुछ दिन बचे थे और बाकी लोग ये जानने में व्यस्त थे कि कौन कौन अपनी फॅमिली ला रहा हैं क्यों कि फॅमिली को भी ला सकते थे। पार्टी के दो दिन पहले रात को मेरे मन में एक और ख्याल आया और मेरा पुराना शरारती दिमाग फिर दौड़ने लगा। मैं जब भी राहुल से मिली हु तो ऑफिस में या फिर किसी क्लाइंट मीटिंग में जाते हैं तो भी ऑफिस के काम से। ये पहला मौका होगा जब राहुल बिना ऑफिस के काम के हमसे मिलेगा ।
मैंने सोचा शायद यही सबसे अच्छा मौका हो, जब राहुल काम के बारे में ना सोच थोड़े हलके मूड में होगा और उसके मुँह से मेरी तारीफ़ निकल जाए। मेरे मन में एक आशा की लहर जागी, जिस चीज की उम्मीद खो कर मैंने कोशिशे बंद कर दी थी उसका शायद सही वक्त आ गया था।
मैंने सोच लिया कि मैं अपने पति अशोक को पार्टी में साथ लेकर नहीं जाउंगी। मुझे क्या पहनना हैं और क्या बात करनी योजना बनाने लगी। ये मेरे लिए आखिरी मौका हो सकता हैं, वरना अगली सालाना पार्टी के लिए फिर एक साल इंतज़ार करना होगा।
आखिर वो शुक्रवार की पार्टी की रात भी आयी। अशोक को पहले ही बोल दिया था कि आज रात घर में खाना नहीं बनेगा तो वो बच्चे को लेकर अपनी मम्मी के यहाँ चला गया। मैं सब मनचाहे कपडे पहन सकती थी, हालाँकि अशोक की तरफ से कोई पाबंदी नहीं थी मेरे कोई भी कपड़े पहनने को लेकर।
मैंने गुलाबी साड़ी निकाली और नूडल स्ट्रैप वाला ब्लाउज निकाला जिसका वी शेप का गला बहुत गहरा था और मेरे मोटे मम्मो का क्लिवेज दिख रहा था। ब्लाउज आगे और पीछे काफी खुला था तो उसमे ब्रा भी नहीं पहन सकते थे। साड़ी को नाभी से चार इंच नीचे बांधा।
आज मैं कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती थी, मुझे आज वो तारीफ़ लेनी ही थी उस इंसान से जिसने मुझे इतने महीनो से तड़पाया था एक तारीफ़ सुनने के लिए। मैंने दसियो बार अभ्यास किया कि मुझे कितनी साड़ी पेट और सीने से हटानी हैं कि सामने वाला कुछ देख कर मेरी तारीफ़ कर पाए।
राहुल के साथ साथ मुझे दूसरे पुरुषो का भी सामना करना था तो थोड़ा ध्यान भी रखना था। दिखाने की चीज सिर्फ राहुल के लिए थी बाकी समय मुझे पूरा ढक कर रहना था। मैंने साडी दोनों कंधो पर डाल अपने दिखाऊ सीने और नंगी पीठ को ढक लिया था और साड़ी को पेट पर खिंच कर ढक लिया था।
कितना भी ढक लू पर मेरे साड़ी में लिपटे पतले सेक्सी फिगर को कोई अनदेखा कैसे कर सकता था। पार्टी में पहुंचते ही जैसे सारे मर्द मेरी ओर ही देख रहे थे। जो सामने आया मेरी साड़ी और खूबसूरती की तारीफ़ कर रहा था। पर मुझे ऐसी सौ तारीफों की परवाह नहीं थी, इसके बदले मुझे बस वो एक तारीफ़ मिल जाये राहुल के मुँह से।
इतनी भीड़ में राहुल शुरुआत में कही दिखाई नहीं दिया। तेज संगीत बज रहा था और सभी लोग खाने पीने और नाचने के मजे ले रहे थे। मेरी नजरे लगातार भीड़ में राहुल को खोज रही थी।
जो पुरुष सहकर्मी शादीशुदा थे और बीवियों के साथ आये थे वो दूर से ही मुझे देख तरस रहे थे पर जो कुंवारे थे या बीवियों को घर रख आये थे वो आ आकर मेरे साथ नाचने का प्रस्ताव बड़ी उम्मीद से रख रहे थे। पर मैंने उन सब को मना कर दिया।
थोड़ी देर में संगीत अचानक बंद हो गया और राहुल की आवाज माइक पर सुनाई दी। सब लोगो की नज़रे राहुल की तरफ गयी। उसने टीशर्ट और जीन्स पहना था और बहुत रिलैक्स लग रहा था।
पहली बार उसको केजुअल कपड़ो में देख एक सुखद अहसास हुआ। हमेशा उसको ऑफिस में सुटेड बूटेड देखने की आदत थी तो आज अलग ही आकर्षक लग रहा था।
शायद आज के दिन उसका मूड सचमुच अलग होगा। मेरा काम हो ही जायेगा। राहुल ने सबका पार्टी में आने का धन्यवाद दे स्वागत किया और अपनी दो मिनट के भाषण के बाद सबको पार्टी एन्जॉय करने को बोल दिया। तेज संगीत एक बार फिर से चलने लगा और लोग एक बार फिर अपने अपने मजे लेने में लग गए।
मैं एक मौके की तलाश में लग गयी कि मैं राहुल के सामने आउ और उसे मेरी तारीफ़ करने का अवसर दे पाऊ। कुछ सहकर्मी उसे अपनी फॅमिली से मिलवा रहे थे और मैं दूर से उसे देख इंतज़ार करती रही। थोड़ी देर में शायद उसका मोबाइल बजा और वो पार्टी हॉल के दरवाजे से बाहर निकल गया।
शायद मेरे लिए ये ही मौका था उसको भीड़ से दूर अकेले मिलने का। मैं भी उसी दरवाजे से हो बाहर निकली। वो गलियारे से होता हुआ बालकनी में चला गया और फ़ोन पर बात कर रहा था। मैं उसके फ़ोन बंद होने का इंतज़ार करने लगी अपनी साड़ी एडजस्ट करती रही जैसा कि मैंने प्लान किया था।
मैंने देखा उसने फ़ोन जेब में रख दिया था पर अभी भी बालकनी में खड़ा हो बाहर की ही तरफ देख रहा था। मैंने जल्दी से साड़ी का पल्लू दूसरे कंधे से हटाया और सीने पर इस तरह सेट किया कि मेरा आधा ब्लाउज साड़ी के बाहर रहे और मेरा थोड़ा सा क्लिवेज दीखता रहे। साड़ी को पेट से दूर हटाते हुए अपनी नाभी सहित पतले पेट की नुमाइश होती रहे इस तरह सेट किया ।
मैं अब धीरे धीरे चलते हुए उसकी तरफ बढ़ी। जब मैं उसके पीछे नजदीक पहुंची तो मेरी आहट से वो एकदम पीछे मुड़ा और मुझे वहा देख उसे थोड़ा आश्चर्य हुआ।
राहुल: “अरे प्रतिमा तुम पार्टी छोड़ कर यहाँ! ”
मैं “अंदर बहुत शोर हो रहा था तो मैं थोड़ा शांती के लिए बाहर आ गयी, आपको देखा तो यहाँ चली आयी।”
राहुल: “हां, मुझे भी शांति ज्यादा पसंद हैं। तुम मुझे ‘आप’ कह कर मत पुकारो , ‘तुम’ कहना ठीक रहेगा। ”
मैं: “आप…तुम इन कपड़ो में बहुत रिलैक्स और अच्छे लग रहे हो ”
राहुल “थैंक यू, वैसे तुम साड़ी में बहुत अच्छी लग रही हो।”
मैं: “थैंक यू, कही आप ऐसे ही तो नहीं कह रहे। क्यों कि मैंने आपकी तारीफ़ की हैं।”
राहुल: “मैं कभी झूठी तारीफ़ नहीं करता, मुझे अगर अच्छा नहीं लगता हैं तो मैं मुँह पर बोल देता हूँ।”
मैं: “ठीक हैं, फिर आपकी तारीफ़ मैं रख लेती हूँ।”
राहुल : “तुम्हारे घर से कोई नहीं आया?”
मैं: “नहीं, मेरे हस्बैंड को कुछ काम था तो नहीं आ पाए। ”
राहुल: “ओह, ओके , कोई बात नहीं। ”
मैं: “आपके घर से कोई आया हैं?”
राहुल: “नहीं, पापा को चलने में दिक्कत होती हैं तो मम्मी पापा ज्यादा बाहर नहीं जाते। ”
मैं: “ओह, आई ऍम सॉरी”
राहुल:”तुम्हारे हस्बैंड से याद आया, तुम्हारा वो पेंडेंट कहा हैं, मुझे पसंद आया, अपनी मम्मी को गिफ्ट करने की सोच रहा हूँ कोई पेंडेंट।”
आज मैंने पेंडेंट नहीं पहना था, क्यों कि पेंडंट तो सिर्फ मेरी उस दिन की योजना का ही हिस्सा था आज का नहीं। मैंने अपनी साड़ी अपने सीने से पूरी हटा ली और उसको दिखाया ।
मैं: “नहीं, आज नहीं पहना मैंने। ये दूसरा पहना हैं।”
मेरे खुले सीने पर ब्लाउज के बीच से झांकते मम्मो के उभारो को देख उसकी आँखों में एक चमक सी आ गयी थी और उसकी मुस्कान और चौड़ी हो गयी। मैंने अपनी साड़ी फिर ढक ली। मेरा काम हो चूका था। सिर्फ एक तारीफ़ सुननी थी वो मिल चुकी थी। हालांकि मेरी साड़ी की तारीफ़ हुई थी पर पहनी तो मैंने थी तो देखा जाये तो मेरी खूबसूरती की भी तारीफ़ हो चुकी थी।
राहुल: “चलो अंदर चलते हैं, पार्टी हैं तो पार्टी की तरह एन्जॉय करते हैं। ”
हम दोनों फिर पार्टी वाले हॉल की तरफ बढ़ने लगे और मैंने रास्ते में फिर अपना पल्लू दूसरे कंधे पर डाल अपना सीना और पीठ फिर ढक ली दूसरे लोगो के लिए। साथ ही साड़ी खिंच पकड़ अपनी पतली कमर को भी ढक लिया।
अंदर तेज संगीत में सब लोग नाचने और पीने में लगे थे। राहुल को भीड़ में फिर किसी ने पकड़ लिया और हम बिछड़ गए। मुझे वैसे भी सब कुछ मिल गया था जिसके लिए यहाँ आयी थी। वहा काफी कपल्स नाच रहे थे और मैं सोच रही थी काश मेरा पति अशोक यहाँ होता तो मैं भी उसके साथ नाच पाती।
मैं थोड़ा दूर खड़े ही उन लोगो को नाचते हुए देख रही थी कि पीछे से राहुल आकर मेरे पास खड़ा हो गया। मैं उसकी तरफ देख मुस्कराते हुए उसके लिए थोड़ी जगह बनाई। उसने कुछ कहा पर संगीत के तेज शोर में कुछ सुनाई नहीं दिया तो मैंने उसको इशारे में बोल दिया कुछ सुनाई नहीं दे रहा।
उसने अपना मुँह मेरे कान के पास ला बोलना शरू किया। पहली बार राहुल मेरे इतना करीब आया था। उसके मुँह से निकलती गर्म साँसे मेरे कान और गले को छू रही थी और मैं जैसे एक नशे में जा रही थी। वो मुझ अपने साथ नाचने के लिए कह रहा था। मैं हँसते हुए मुँह खोल उसकी तरफ देखती ही रह गयी।
क्या ये वही राहुल हैं जो ऑफिस में मेरी तरफ देखता भी नहीं और यहाँ मेरे साथ नाचना चाह रहा हैं। कही मेरा जादू इस पर चल तो नहीं गया। उसकी तरफ अचम्भे से देखते हुए मेरे मुँह से शब्द भी नहीं निकले और सिर्फ मेरी आँखों और चेहरे के हाव भाव ने हां बोला।
उसने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाया। आजतक उसने मुझसे हाथ तक नहीं मिलाया था और आज मैं उसे पहली बार छूने जा रही थी। उस वक्त मेरे दिल में घंटिया बजने लगी थी। मेरा हाथ उसके हाथ में छूते ही तो जैसे बिजली सी गिर गयी थी मुझ पर।
वो मेरा हाथ पकड़ मुझे थोड़ा आगे ले आया और मेरा हाथ अपने कंधे पर रख दिया और खुद का हाथ मेरी कमर पर लपेट दिया। मेरी पतली कमर पर उसके हाथ छूते ही तो मेरी आँखें कुछ क्षणों के लिए बंद हो गयी। एक बिजली का झटका सा लगा और मैं पूरा हिल गयी। आँखें खुली तो मेरे मन में एक अलग ही संगीत बजने लगा।
उसने मुझे कमर से पकड़ अपनी तरफ खिंचा और हमने मुस्कारते हुए एक दूसरे की आँखों में देखा। हम दोनों में से किसी ने भी बहुत देर तक पलकें तक नहीं झपकाई। जैसे एक दूसरे की आँखों में ही खो गए थे। कुछ समय के लिए हम सब कुछ भूल चुके थे।
आज ऊपर वाले ने मेरी इतनी मेहनत का क़र्ज़ जैसे ब्याज सहित चूका दिया था, न सिर्फ तारीफ़ मिली पर वो मुझे छू कर मेरे साथ डांस भी कर रहा था। उसका कमर पर रखा हाथ रह रह कर थोड़ा ऊपर खिसक कर मेरी पीठ पर ब्लाउज को बांधे डोरी को छू रहा था।
डांस करते करते पता ही नहीं चला कब मेरा आँचल मेरे दूसरे से कंधे से निकल गया और आगे से मेरा आधा ब्लाउज साड़ी से बाहर आ थोड़ा मम्मे का उभार नजर आने लगा। उस वक्त मुझे इस चीज की परवाह नहीं थी ।
मुझे पीछे की ओर थोड़ा झुकाते वक्त उसका एक हाथ मेरी कमर और दूसरा मेरी नंगी पीठ पर था और वो अपने दोनों हाथों से मेरे कोमल बदन को महसूस कर सकता था।
हम दोनों के चेहरे सिर्फ कुछ इंच की दुरी पर थे और मेरे मम्मे उसके सीने से काफी करीब थे। उसने जानबूझ कर अपना सीना मेरे सीने से छुआने की कोशिश नहीं की, हालांकि वो कर भी देता तो आज उसको माफ़ कर देती।
हम दोनों एक दूसरे में इतना खो गए कि याद ही नहीं रहा हम कहा हैं और किस हालत में हैं। जब अचानक संगीत रुका तो पता चला क्या हालत हैं। राहुल ने अचानक अपना हाथ मेरे शरीर से हटा मुझे छोड़ दिया। वो थोड़ा इस बात पर सकपकाया कि वो क्या हैं और क्या कर रहा था।
वो वहा से चला गया उसी दरवाजे से जहा से पहले फ़ोन के लिए गया था। मुझे लगा उसने जो किया उसके लिए थोड़ा शर्मिंदा हैं, क्यों कि ये उसकी आदत में शुमार नहीं था। उसने जो किया उसमे कोई बुरा नहीं था ये बताने के लिए मैं भी उसके पीछे गयी।
वो उसी बालकनी में खड़ा था जहा पहले था। मेरे अहम की इच्छापूर्ति तो हो चुकी थी, पर इस चक्कर में उसके अहम् को शायद चोट पहुंची थी। मेरा काम तो हो चूका तो इस बार मैं अपनी साड़ी अच्छे से ढक कर ही गयी थी। जैसे ही मैं उसके पीछे पहुंची मेरी आहट से वो एक बार फिर मेरी तरफ मुड़ा।
राहुल : “आई एम सॉरी, शायद डांस करते वक़्त मैंने कुछ ज्यादा ही लिमिट क्रॉस कर दी ! ”
मैं: “नहीं, ये तो एकदम नार्मल था। अजीब तो तुम्हारा वहा से एकदम से जाना लगा।”
उसने अपना एक हाथ अपनी आँखों पर फेरा जैसे अपनी भावनाये छुपाना चाहता हो। उसकी आँखें थोड़ी नम सी हो गयी थी
जाने अनजाने मैंने राहुल के व्यक्तित्व को ठेस पंहुचा दी और उसके दिल के तार बजा दिए थे। उसका असर अब हम दोनों की ज़िन्दगियों पर पड़ गया। मेरे सारे प्रयास अब मुझ पर भारी पड़ गए।
राहुल बालकनी में खड़ा मुझ से बात करते हुए भावुक सा हो गया था।
राहुल: “डांस करते वक़्त कुछ समय के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे सामने रूही आ गयी हो।”
मैं : “रूही?”
राहुल: “छोड़ो, मैं भी क्या लेकर बैठ गया।”
मै: “नहीं तुम बता सकते हो, तुम्हे थोड़ा अच्छा लगेगा।”
राहुल: “रूही मेरी गर्ल फ्रेंड थी, मैं बिज़नेस में क्या बिजी हुआ वो मुझे छोड़ कर चली गयी।”
मुझे याद आया सुधा आंटी जिस राहुल की जिस गर्ल फ्रेंड की बात कर रही थी उसी का नाम रूही था।
मैं: “चली गयी मतलब?”
राहुल: “उसके घर वाले उसकी शादी करवाना चाहते थे, और मैं उस वक्त अपने पापा के बिज़नेस को बचाने काम में डूबा हुआ था। उसने मेरी भावनाओ को समझा ही नहीं। ”
मैं: “वो तो अब भी मिल सकती हैं, तुमने बाद में उससे बात करने की कोशिश नहीं की। ”
राहुल: “थोड़े दिन बाद ही मुझे उसका शादी का कार्ड मिल गया था। मेरे लिए उसका अध्याय बंद हो गया हैं पर दिमाग से निकालना आसान नहीं हैं।”
मैं भी समझ गयी ये राहुल की एक अधूरी प्रेम कहानी हैं, जिसके गम में उसने ब्रह्मचर्य अपना लिया था, जिसे मैं अपने अहम के लिए तोड़ने की कोशिश कर रही थी।
राहुल: “डांस करते वक्त मुझे तुममे रूही की झलक दिखी और मैं थोड़ा बहक सा गया, पता नहीं तुमने मेरे बारे क्या सोचा होगा। ”
मैं: “नहीं, मुझे उल्टा अच्छा लगा तुम्हे इतना एन्जॉय करते देखते हुए।”
राहुल: “थैंक यू ”
हम दोनों एक दूसरे की आँखों में झांक रहे थे और वो धीरे धीरे मेरे करीब आता जा रहा था । नजदीक आकर उसने अपना एक हाथ मेरी कमर में डाला, मुझे लगा फिर से डांस करना चाहता हैं। मैं मुस्कुरा दी, और उसने अपना दूसरा हाथ मेरी पीठ पर लगा कर अपनी तरफ खिंचा। हम दोनों एकदम करीब आ गए थे।
हम दोनों एक दूसरे की आँखों में झांक रहे थे और वो धीरे धीरे मेरे करीब आता जा रहा था । नजदीक आकर उसने अपना एक हाथ मेरी कमर में डाला, मुझे लगा फिर से डांस करना चाहता हैं। मैं मुस्कुरा दी, और उसने अपना दूसरा हाथ मेरी पीठ पर लगा कर अपनी तरफ खिंचा। हम दोनों एकदम करीब आ गए थे।
खड़े खड़े ही उसने अपने होंठ मेरे होंठो के पास लाना शुरू कर दिया था। उसके होंठ मेरे होंठो से सिर्फ एक इंच की दुरी पर थे और मेरे मम्मे उसके सीने से टकरा गए । मेरे नाजुक मम्मे स्प्रिंग की तरह थोड़ा दब गए और उसके होंठ मेरे होंठो को चूमने ही वाले थे कि मुझे मेरी शपथ याद आ गयी।
मुझे अब इन सब एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की चीजों में नहीं पड़ना था। मैंने उसको दूर किया और मुड़ कर भागते हुए फिर पार्टी हॉल में आ गयी। सब लोग अभी खाना खाने की तैयारी कर रहे थे । वहा जाने के बाद सुधा आंटी मेरे पास आये।
सुधा आंटी: “तुम्हे पता हैं आज बरसो बाद राहुल ने सालाना पार्टी में डांस किया हैं। पिछली बार उसने अपनी गर्ल फ्रेंड रूही के साथ किया था जब उसके पापा बिज़नेस सँभालते थे,और उसके बाद जाकर आज तुम्हारे साथ। ”
मैं सोचने लगी शायद इस कारण से राहुल को मुझ में रूही की झलक मिली थी।
सुधा आंटी: “मैंने इस कंपनी में बरसो से काम किया हैं। काफी समय बाद उसको इस तरह खुश देखा मैंने। ”
उन्होंने मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा : “काश तुम शादी शुदा ना होती। ”
ये कहते हुए वो वहा से चली गयी । मैं सोच मैं पड़ गयी, जाने अनजाने में मैंने राहुल की दुखती रग छेड़ दी थी। मेरा ऐसा कोई मकसद तो नहीं था पर मैंने आग तो लगा ही दी थी जिसे बुझाना मेरे बस में भी नहीं था। मुझे अब बहुत संभल कर चलना था।
इसके बाद मैं पूरी पार्टी में राहुल से दूर दूर ही रही। उसने जरूरतमंद कर्मचारियों के लिए घर छोड़ने के लिए कैब की व्यवस्था भी कर रखी थी। मैं घर तो आ गयी पर गहरी सोच में डूबी थी। मैंने क्या अनर्थ कर दिया था।
पार्टी शुक्रवार को थी तो अच्छा था, अगले दो दिन छुट्टी थी और मुझे राहुल का सामना नहीं करना था। उन दो दिनों में भी मैं सोचती रही कि राहुल का व्यवहार कैसा होगा, कही वो फिर से मुझे पकड़ कर चूमने की कोशिश तो नहीं करेगा। अब आगे मुझे क्या करना चाहिए था इसकी रुपरेखा बनाने लगी।
सोमवार को भी आना ही था। मैंने अपने सारे छोटे कपड़े एक बेग में भर स्टोर रूम में छुपा दिए। मुझे अब इनकी कोई जरुरत नहीं थी और भूल कर भी उन्हें नहीं पहनना था। मैंने अपने पुराने वाले कपड़े जो बदन को पुरे ढकने वाले ऑफिस वियर थे निकाल लिए और गले में सीने को ढकता स्कार्फ़ पहन लिया।
अपनी कुर्सी पर बैठ मेरा दिल धक् धक् कर रहा था। राहुल आया और सीधा अपने केबिन में चला गया, अपनी आदत के अनुसार बिना दाएं बाएं देखे। मुझे डर था कि कही वो मुझे अंदर बुला ना ले। जल्द ही उसका बुलावा भी आया। मैंने अपना स्कार्फ़ थोड़ा और नीचे खिंच कर अपना पूरा सीना ढकने की कोशिश की और डरते हुए उसके केबिन में प्रवेश किया।
वो अपने लैपटॉप में डूबे हुए ही मुझे कुछ काम के निर्देश देने लगा। मेरी तरफ देखा तक नहीं। शायद ऑफिस वाला राहुल, पार्टी वाले राहुल से एकदम अलग था, जैसे दो जुड़वाँ भाई अलग अलग व्यवहार के साथ। मैं अब बाहर जाने लगी और उसकी आवाज सुन रुक गयी।
राहुल: “प्रतिमा, हो सके तो कल रात के लिए माफ़ कर देना। माफ़ी लायक तो नहीं हूँ, पर पता नहीं मुझे कल
रात क्या हो गया था।”
मैंने बिना पीछे मुड़े उसकी पूरी बात सुनी और केबिन के दरवाजे से बाहर आ गयी। अपनी सीट पर बैठे ये सोचने लगी मैंने जो प्रतिक्रिया दी वो सही थी या नहीं। मुझे कुछ जवाब तो देना चाहिए था, कही मैंने अशिष्ट व्यवहार तो नहीं किया था राहुल के साथ। क्या मुझे वापिस अंदर जाकर उसको माफ़ कर देना चाहिए या थोड़ा और इंतजार करना चाहिए।
तभी मुझे राहुल का एक ईमेल मिला, उसने मुझे उसके आज के सारे अपॉइंटमेंट कैंसिल करने को बोला। ईमेल पूरा पढ़ा ही था कि राहुल अपने केबिन से निकला और चला गया। शायद वो मुझसे नाराज था और गुस्से में घर चला गया।
अगले दिन भी वो ऑफिस नहीं आया और घर से ही ऑफिस का काम करता रहा। उसके फेस तो फेस मीटिंग्स सारे कैंसिल करने का ईमेल आया था। उसके जैसे चरित्रवान पुरुष से अगर कोई छोटी सी गलती हो जाये तो उसके लिए ये बहुत बड़ी बात थी। हालांकि उसने गलत कुछ किया नहीं था, बल्कि करने वाला था।
मैं अब क्या करू, उसने जो किया उसके लिए माफ़ करू या खुद माफ़ी मांगू अपने किये की। सोचा फ़ोन करू, पर शायद शब्द ही मुँह से ना निकले। अंत में मैंने उसको मैसेज किया कि उसने जो भी किया वो नेचुरल था, मैंने बुरा नहीं माना हैं और हम उस घटना से आगे बढ़ सकते हैं। उसका थैंक यू का मैसेज आया।
अगले दिन राहुल ऑफिस आया और फिर से पहले वाला राहुल बन चूका था। हमने सब कुछ भुला दिया था।
दो महीने बाद ऑफिस में काफी हलचल थी, कंपनी के एक पुराने क्लाइंट के साथ बहुत बड़ी डील होने वाली थी। ये डील कंपनी को बहुत फायदा पहुंचाने वाली थी वरना काफी नुकसान की उम्मीद थी क्यों कि इस डील को पाने के लिए काफी तैयारियां कर ली गयी थी ।
मुझे इस कंपनी में अब काफी महीने हो गए थे और मेरी मेहनत और राहुल के भरोसे के बल मैं अब सिर्फ एक सेक्रटरी नहीं रही थी पर राहुल का दायां हाथ बन चुकी थी। मेरी भी इस डील में काफी बड़ी भूमिका थी । ये एक विदेशी क्लाइंट था, नाम था बॉब।
अगले महीने वो यहाँ डील साइन करने आने वाला था। इस बीच हमारा काम काफी बढ़ गया था। फिर पता चला कि बॉब किसी और काम से नहीं आ पायेगा और इसके बदले उसकी बीवी सैंड्रा आने वाली थी, जो कंपनी की वीपी भी थी।
आखिर सैंड्रा हमारे शहर आयी और एक होटल में रुकी। अगले दिन हमारी मीटिंग होनी थी पर राहुल ने शिष्टाचार के नाते सुबह उसके होटल में जाकर उसको फूलो का गुलदस्ता दे स्वागत करने का निर्णय किया। राहुल चाहता था कि मैं भी उसके साथ जाऊ, ताकि वो मुझे उनसे मिलवा सके क्यों कि मैं पहली बार मिलूंगी उनसे।
सुबह नौ बजे के करीब उस होटल में पहुंचे। दरवाजे पर दस्तक दी पर कुछ देर तक किसी ने दरवाजा नहीं खोला। मैं चाहती थी कि फिर से दस्तक दी जाये पर राहुल ने मना कर दिया और हमने थोड़ा और इंतजार किया। राहुल सही था, एक महिला ने दरवाजा खोला।
सामने सैंड्रा खड़ी थी, एक पेंतीस के लगभग उम्र की एक बेहद खूबसूरत सी महिला थी। घुंघराले भूरे खुले बाल और भूरी आँखें, पूरा गौरा रंग बहुत ही आकर्षक थी । उसने एक छोटा सा गाउन पहन रखा था जो घुटनो के ऊपर ही ख़त्म हो गया था और ऊपर नूडल स्ट्रैप थे। गाउन का गला इतना गहरा था कि बीच से उसके दोनों मम्मो की घाटियां साफ़ दिखाई दे रही थी।
उसने गाउन में ब्रा नहीं पहना था ये साफ़ पता चल रहा था क्यों कि उसके तीखे तीखे निप्पल उसके गाउन से झांक रहे थे। मैंने उसका पहनावा देख थोड़ा असहज महसूस किया, शायद इन विदेशियों को इन सब चीजों से फर्क नहीं पड़ता हैं।
राहुल ने उसको बूके देकर स्वागत किया और मेरी और सैंड्रा की पहचान कराई।
सैंड्रा ने अब अंग्रेजी में हमसे बोला : “अंदर आओ, तुम्हे किसी से मिलवाती हु ”
वो हमें अंदर लेकर गयी। कमरे के अंदर दो बेड लगे थे, पहले बेड पर रजाई जो की त्यों सिमटी पड़ी थी, शायद किसी ने वो बेड इस्तेमाल ही नहीं किया था। दूसरे बेड पर एक बीस बाइस साल का लड़का आँख खोले लेटा था। उसने रजाई से अपने आप को ढका था और सिर्फ मुँह बाहर था।
सैंड्रा ने हमे आपस में मिलवाया, उसने बताया कि वो उसका बेटा जैक हैं। जैक के सुनहरे लम्बे बाल थे, नीली नीली आँखें और गुलाब की पंखुड़ियों की तरह पतले पतले हलके गुलाबी होंठ थे। उसने अपना एक हाथ रजाई से निकाल हमें देख अपना हाथ हिला कर हेलो बोला।
उसने हाथ बाहर निकाला तो उसका नंगा कंधा देख मैं समझ गयी कि उसने ऊपर कोई कपडे नहीं पहने थे। एक अजीब सी पहेली थी, सैंड्रा की उम्र के हिसाब से उसका इतना बड़ा लड़का तो नहीं हो सकता था। दूसरा ऐसा लग रहा था कि वो दोनों रात भर एक ही बेड पर सोये थे क्यों कि जैक के बगल में बेड पर चादर पर सिलवटे थी जैसे कोई वहा सोया था।
अभी सारे सवाल मेरे मन में ही थे कि एक और बड़ा सवाल सामने आ गया। वाशरूम से एक राक्षस से आकार का काला पहलवान आदमी बाहर निकला। उसने नीचे एक बॉक्सर के अलावा शरीर पर कुछ नहीं पहना था। उसकी भुजाए लगभग मेरी जांघो के बराबर थी और पुरे शरीर पर मसल्स बने थे।
मैं तो उसको देखते ही डर गयी, जब वो चलता हुआ आ रहा था तो उसके बॉक्सर के अंदर उसका लंबा मोटा लटकता हुआ लंड साफ़ महसूस हो रहा था जो एक पेंडुलम की तरह हिल रहा था। अगर नरम होकर लटकने पर ये छह इंच का हैं तो कड़क होने पर तो आठ नौ इंच का हो ही जायेगा। मैंने तो इतना बड़ा कभी नहीं देखा था।
सैंड्रा ने उससे हमारा परिचय कराया, वो जोसफ था, उसका साथी। उसने आगे बढ़ राहुल से हाथ मिलाया और मुझे देख अंग्रेजी में बोलने लगा “व्हाट ए फकिंग ब्यूटी” और मेरी तरफ बढ़ने लगा। मैं दो कदम पीछे हट गयी।
राहुल ने उसका हाथ पकड़ उसे रोका और अंग्रेजी में ही बोला : “ये भारत हैं, यहाँ ये सब नहीं चलता।”
जोसफ एकदम से रुक गया। उसने मेरी तरफ हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ाया। उसका विशालकाय हाथ देख मैंने अपने हाथ जोड़ लिए और नमस्ते किया। वो समझ गया और मुझसे भी नमस्ते बोला।
क्या जोसफ भी इनके साथ उसी कमरे में ठहरा था, पर दूसरा बिस्तर तो लग नहीं रहा था कि इस्तेमाल किया था, फिर ये तीनो क्या एक साथ सो रहे थे। एक माँ अपने जवान बेटे और अपने ऑफिस के कर्मचारी के साथ एक साथ सोई थी।
सैंड्रा जैसी नजाकत वाली महिला ने जोसफ का इतना बड़ा लंड कैसे लिया होगा और सहन किया होगा, वो भी अपने बेटे के सामने। मेरे सामने की पहेलियाँ बढ़ती ही जा रही थी। फिलहाल राहुल ने कल मीटिंग में मिलने का बोल वहा से विदा लिया।
सैंड्रा, जैक और जोसफ से विदा ले हम होटल से बाहर आये। हम पार्किंग तक आये और राहुल ने जोसफ के बर्ताव के लिए मुझसे माफ़ी मांगी कि वो मुझे यहाँ लेकर आया और मुझे ये सुनना पड़ा। मैंने भी सोचा नहीं था कि ऐसे किसी व्यक्ति से पाला पड़ेगा। मैं अब भी डर के मारे कांप रही थी।
मैंने कार में बैठने के बाद अपनी अनसुलझी पहेलियों को राहुल के सामने रख दिया।
मैं: “तुम्हे कुछ अजीब नहीं लगा होटल रूम में?”
राहुल: “तुम जोसफ की बात कर रही हो।”
मैं: “वो भी पर और भी बहुत कुछ, जैसे जैक और सैंड्रा को देख लगा नहीं कि वो माँ बेटे हैं। ”
राहुल: “जैक दरअसल बॉब की पहली बीवी का बच्चा हैं। बॉब ने उसको तलाक देकर अपने से बीस पच्चीस साल छोटी सैंड्रा से शादी कर ली।”
मैं: “ओह, अब समझ में आया। पर ये जोसफ इनके कमरे में इस हालत में ! ”
राहुल: “मैंने सुना हैं कि जोसफ भी बॉब की एक नाजायज औलाद हैं। अपनी शादी के पहले ही उसने अपने यहाँ काम करने वाली एक लड़की को माँ बना दिया, तब से जोसफ इनके साथ में ही फॅमिली की तरह हैं। सैंड्रा का दूसरा सौतेला बेटा कह सकते हैं। ”
मैं: “मुझे नहीं पता तुमने नोट किया या नहीं पर मुझे लगा वो तीनो एक ही बिस्तर पर सोये थे। ”
राहुल : “नो कमेंट, ये उनकी निजी ज़िन्दगी हैं। उनके बैडरूम में झाँकने से हमे क्या।”
भले ही राहुल ने इतना ध्यान नहीं दिया पर मुझे पूरा यकीन था उन माँ और सौतेले बेटो के बीच बहुत कुछ चल रहा था। सैंड्रा ने इतनी देर से दरवाजा खोला, मतलब उस वक्त भी वो लोग कुछ कर रहे थे और सैंड्रा को गाउन डाल कर आने में थोड़ा वक्त लगा होगा।
इन लोगो के रिश्ते भी कितने उलझे हुए थे। पता नहीं बॉब को अपने बेटो के बारे में पता हैं कि नहीं कि वो उसकी बीवी का इस्तेमाल कर रहे हैं। शायद बूढ़े हो चुके बॉब में वो शक्ति नहीं रही कि सैंड्रा की शारीरिक जरूरते पूरी कर सके इसलिए वो काम उसके दोनों बेटे कर रहे थे।
हम लोग ऑफिस पहुंच कल की बड़ी मीटिंग की तैयारियों में लग गए। रह रह कर मुझे जोसफ की विशालकाय काया और सैंड्रा के नाजुक बदन के बारे में सोच चिंता हो रही थी कि वो कैसे करते होंगे। फिर जैक के बारे में सोच मन प्यार से भर जाता, कितना आकर्षक लड़का था और किस मासूमियत से मुझे देख रहा था वो।
अगले दिन हम ऑफिस से चार लोग मीटिंग के लिए सैंड्रा के ऑफिस पहुंचे। मीटिंग अच्छे से संपन्न हुई, हमें भरोसा था कि जल्द ही हमारी डील साइन हो जाएगी। मीटिंग के बाद राहुल और मैं वही रुक गए और हमारे बाकी के दोनों कर्मचरियो को वापिस ऑफिस भेज दिया। कमरे में हम दोनों के अलावा सिर्फ सैंड्रा और उसका मैनेजर था।
उसका मैनेजर उठा और मेरी तरफ मुखातिब हो बोलने लगा : “अपनी कल की गुस्ताखी के लिए मुझे माफ़ कर देना। ”
मुझे उसकी तरफ देखते रह गयी वो मुझसे कब मिला और माफ़ी किस बात की मांग रहा हैं। गौर से देखने पर पता चला वो जोसफ ही था, आज सूट पहने एक दम सभ्य इंसान की तरह बैठा था तो मैं उसको पहचान ही नहीं पायी। मेरी आँखें खुली की खुली रह गयी। सिर्फ कपड़ो से आदमी में कितना फर्क पड़ जाता हैं। कल जिसे देख मैं डर रही थी आज वो हानिरहित लग रहा था।
मैं: “कोई बात नहीं। एक बार तो मैं तुम्हे पहचान ही नहीं पायी।”
अचानक मुझे जैक का ख्याल आया, उसकी वो नीली नीली आँखें मैं भूल नहीं पायी थी।
मैं: “जैक कहा हैं ? वो नहीं आया ?”
सैंड्रा : “उसकी बिज़नेस मीटिंग में कोई रूचि नहीं। वो मेरे ऑफिस में बैठा बोर हो रहा हैं। चलो मिलवाती हु तुम्हे।”
हम लोग मीटिंग रूम से निकल सैंड्रा के ऑफिस में आ गए। वहा जैक बैठा अपने टेबलेट पर कुछ कर रहा था। हमारे पहुंचते ही वो पीछे मुड़ा और हमें देखा। उसकी वो नीली नीली आँखें मुझे ही देख रही थी।
उसने राहुल से हाथ मिलाया और फिर मेरी तरफ देख कुछ सोचा और दोनों हाथ जोड़ नमस्ते करने ही वाला था कि मैंने तुरंत अपना हाथ मिलाने के लिए आगे कर दिया। उसने मुस्कुराते हुए मुझसे हाथ मिलाया। उसके गौरे गौरे मक्खन से मुलायम हाथ थे। छोड़ने की इच्छा नहीं थी पर छोड़ने पड़े।
कल सिर्फ चेहरा दिखा था, आज उसको पूरा देखा। पतले दुबले शरीर वाला एक गौरा चिट्टा लड़का था। उसकी आँखों में एक अजीब सी कशिश थी जो अपनी तरफ खिंच रही थी। उसने मेरी तरफ देखा और पूछने लगा।
जैक: “क्या तुम मुझे अपना शहर घुमाने ले जाओगी।”
सैंड्रा : “वाह , सुबह से मैं इसे ऑफिस के कई और लोगो के साथ घूमने भेजना चाहती थी पर इसने मना कर दिया और प्रतिमा को देखते ही आगे बढ़कर खुद पूछ रहा हैं।”
मैं तो हां बोलने वाली थी पर ऑफिस का समय था तो राहुल की तरफ देखने लगी।
राहुल: “ये तुम्हारी चॉइस हैं, कोई जबरदस्ती नहीं। अगर तुम्हे ठीक लगे तो ले जाओ वरना कोई बात नहीं। ऑफिस की चिंता मत करो, ख़ास मीटिंग हो गयी हैं। आज की तुम्हारी छुट्टी, घूमने के बाद सीधा घर चले जाना। ”
सैंड्रा ने फ़ोन कर बाहर कार और ड्राइवर का इंतजाम कर लिया था।
मैं और जैक अब बाहर आ गए। उसने ड्राइवर को साथ आने से मना कर दिया और खुद ही ड्राइवर सीट पर बैठ गया। मैं उसके बगल वाली सीट पर बैठ गयी।
जैक: “यू आर लुकिंग वैरी गॉर्जियस ”
मैं: “थैंक यू ”
राहुल ने मेरी एक तारीफ़ करने में महीनो लगा दिए थे जब कि जैक ने पहली ही मुलाकात में मेरी तारीफ़ कर दी थी। मैं फूली नहीं समाई और उसके होंठो, बालो और आँखों की तारीफ़ की।
मैं उसको रास्ता बताती गयी और वो वो ड्राइव करता रहा। हमें शहर के ख़ास जगहों पर घूमना था। बहुत जल्द ही हम दोनों की अच्छी दोस्ती हो गयी। बातों बातों में पता चला कि हमारी पसंद भी काफी मिलती हैं।
मैंने सोचा मैं इसकी माँ के इससे और जोसफ के बीच के संबंधो के बारे में भी थोड़ी जानकारी ले पाऊँगी। दिन भर हम घूमते रहे और लंच भी साथ में किया। हम दोनों ही खुश थे एक दूसरे के साथ घूम फिर कर। मौका देखकर मैंने जिक्र छेड़ दिया।
मैं: “तुम अपनी माँ के बहुत क्लोज हो?”
जैक:: “मेरी माँ तो दूसरी शादी करने के बाद मुझसे मिली तक नहीं। पर सैंड्रा मेरा काफी ध्यान रखती हैं। ”
मैं: “सैंड्रा बहुत खूबसूरत और आकर्षक हैं। ”
राहुल “हां, ये तो सच हैं, मैं भी सैंड्रा को बहुत पसंद करता हूँ। आई लव हर ”
खैर मुझे तो पूरा शक था ये कैसा वाला प्यार हैं। पर इससे आगे कैसे पुछु।
मैं: “जोसफ तुम लोगो के साथ ही रहता हैं?”
जैक: “वो हमारी फॅमिली की तरह हैं, बचपन से देखा हैं। हमारे साथ ही रहता हैं, खाता हैं , और सोता हैं । ”
काफी खुले विचारो वाले बेटे और माँ की जोड़ी थी। हमने सारी खास घूमने की जगह कवर कर ली थी।
दिन भर मैं उसके सुनहरे बालो और नीली नीली आँखों को देखने के आनंद लेती रही। आखिरी स्थान को घूमने के बाद हम कार में आये और वो मुझे घर पर छोड़ने वाला था। कार शुरू करने से पहले उसने मुझे धन्यवाद दिया कि मैंने पुरे दिन उसका साथ दिया और बोर नहीं होने दिया। उसको बहुत मजा आया।
जैक: “एक बात बोलू अगर बुरा ना मानो तो।”
मैं: “अब तुम मेरे एक दोस्त हो, कुछ भी बोल सकते हो।”
जैक: “कैन आई किस यू ?”
मैं एकदम सोच में पड़ गयी, उसके गुलाब की पंखुड़ियों से होंठो को देखा और मन किया कि उसको चूसने से कैसे मना कर सकती हु। फिर थोड़ी शर्म के साथ मैं सामने आगे की ओर नीचे देखने लगी। मैं अब हां बोलने ही वाली थी।
जैक: “कोई बात नहीं, तुम्हे समय चाहिए तो आराम से सोच कर कल बता देना।”
मैं: “हमने तो सारी ख़ास जगह आज ही घुम ली हैं। कल कहाँ घुमाऊ”
जैक: “मैं कल बोर हो जाऊंगा, प्लीज मेरे साथ कल भी टाइम स्पेंड करो। कम खास जगह भी घुम लेंगे कल।”
मैं: “मेरा ऑफिस भी हैं कल । अभी चलते हैं। ”
उसने कार चालू की और मुझे मेरे घर पर ड्राप कर दिया। घर आकर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने पूरा दिन जैक के साथ बिताया। थोड़ा अफ़सोस भी था कि जल्दी से हां नहीं बोल पायी वरना उसके चूमने का मजा भी ले पाती।
रात को ख्याल आया कि मैं फिर से क्या करने जा रही थी। मैंने शपथ ली थी कि मैं अब इन सब चक्करो में नहीं पड़ूँगी। फिर भी मैं जैक के साथ चूमने के बारे में सोच रही थी। फिर सोचा चूमने में क्या बुराई हैं। फिर तो मुझे राहुल को भी उस रात चूमने देना चाहिए था, उसको तो मना कर दिया।
शायद ये सब दिल की बातें थी, जैक के साथ मैं सीधा कनेक्ट कर पायी इसलिए तैयार हो गयी, जब कि राहुल के साथ सिर्फ एक स्पर्धा थी। इस हिसाब से अगर जैक मुझे चूमने के बाद मुझे चोदने के बारे में पूछेगा तो भी मैं क्या हां कर दूंगी । मैं कुछ निर्णय नहीं ले पा रही थी। एक तरफ मेरी शपथ थी तो दूसरी तरफ जैक का आकर्षण।
मैं सो गयी इस इंतजार में कि कल क्या होने वाला हैं , क्या मेरी शपथ टूटेगी या कायम रह पायेगी।
अगली सुबह मैंने अपना वो बेग निकाला जिसमे ऑफिस में पहनने के लिए छोटे कपड़े रख दो महीने पहले छिपा दिया था। मैंने उसमे से अपनी पेंसिल स्कर्ट निकाल पहन ली और एक तंग बटन वाला शर्ट पहन लिया। शायद आज जैक के साथ चूमने का अवसर मिलने वाला था।
ऑफिस पहुंच मैं अपने काम में झूट गयी। कुछ घंटो बाद राहुल ने अपने केबिन में बुलाया।
राहुल :”सैंड्रा का फ़ोन था, जैक कल की तरह आज भी तुम्हारे साथ बाहर घूमने जाना चाहता हैं। क्या तुम्हारी हां हैं?”
मैं मन ही मन थोड़ी ख़ुशी हुई, ये जानते हुए भी कि जैक आज फिर फरमाइश रखेगा मुझे चूमने की। पर जैक से मिलने की ख़ुशी ज्यादा थी।
मैं “पर ऑफिस का काम !”
राहुल: “उसकी चिंता मत करो, इसे ऑफिस का काम ही समझो।”
जैक के साथ जाना राहुल की नजरो में ऑफिस का काम था। क्या मुझे जैक के प्रस्ताव के बारे में राहुल को बता देना चाहिए। कहीं मेरे और जैक के चूमने से उस डील पर कोई विपरीत प्रभाव तो नहीं पड़ेगा। मैंने बताना ही उचित समझा।
मैं: “कल जैक ने मुझे चूमने का प्रस्ताव रखा था। ”
राहुल “क्या बात कर रही हो? अगर तुम कहो तो सैंड्रा को तुम्हे भेजने से मना बोल देता हूँ, कोई बहाना मार दूंगा।”
उसकी बातों में मेरे प्रति एक चिंता का भाव था। पर मेरा सवाल उसके लिए कुछ और था।
मैं “नहीं, मैं ये पूछना चाहती थी कि हम दोनों के चूमने से दोनों कंपनी की डील पर तो कोई अच्छा या बुरा असर होगा?”
राहुल: “मैं डील की वजह से तुम्हे उसके साथ नहीं भेज रहा हूँ। डील पाने के लिए तुम्हे उसको चूमने की कोई जरुरत नहीं हैं। तुम उसको मना बोल सकती हो। जैक और तुम्हारे बीच एक निजी मसला हैं , इसको डील से मत जोड़ो। ”
मैं: “फिर ठीक हैं, मैं उसके साथ जाना चाहती हु।”
मेरी बात सुन राहुल सदमे में आ गया। उस पार्टी की रात मैंने उसको चूमने से मना कर दिया था और आज मेरी बातों से उसे लगा कि मैं जैक को चूमने की इजाजत देने वाली थी।
एक दिन रूही उसको छोड़ गयी और अब जब वो मुझमे रूही की झलक देख रहा हैं तो मैंने भी उसको कैसे छोड़ दिया था। राहुल की आँखों में एक दर्द साफ़ दिखाई दे रहा था।
मैं जैक को किस करने देने वाली हु ये सुनकर राहुल को सदमा लगा। शायद मुझे प्यार करने लगा था या फिर एक अच्छा इंसान होने के नाते उसे लगा मैं गलत कर रही हु।
मैं भी क्या कर सकती थी, मैं जब अपने नए सफर पर निकली थी तो शपथ के अनुसार मैंने कभी राहुल को चाहा ही नहीं था। ये तो जैक था जिसने मेरा मन पहली ही नजर में मोह लिया था। ये मेरा निजी फैसला था कि मैं किसको चूमने की इजाजत दू। ना चाहते हुए भी मुझे राहुल का दिल तोड़ना था।
राहुल ने सैंड्रा को फ़ोन कर दिया कि मैं जैक के साथ जाने को रेडी हूँ। राहुल ने मुझे बताया कि थोड़ी देर में जैक मुझ लेने बाहर पार्किंग में आएगा। उसकी नज़रे अभी भी मुझे रोक रही थी। मेरा दिल भी उसकी हालत देख पिघल रहा था पर सामने जैक की नीली नीली आँखें आते ही सब बदल गया। मैं केबिन से बाहर गयी।
थोड़ी देर से मैं पार्किगं में आ गयी। जैक थोड़ी ही देर में मुझे लेने आ गया था। उसने आज बटन डाउन शर्ट पहन रखी थी और साथ में जीन्स।
जैक:: “वाह, आज तुम बहुत शानदार लग रही हो।”
मैं : “थैंक यू, तुम भी बहुत अच्छे लग रहे हो।”
जैक: “आओ बैठो, बताओ कहाँ जाना हैं?”
मैं उसे उस जगह पर ले गयी जहा कल नहीं गए थे। फिर हमने लंच किया और फिर घूमने निकल पड़े। आज ज्यादा जगह तो थी नहीं तो जल्द ही निपट गए। कार में बैठने से पहले मौका देख मैंने माउथ स्प्रे इस्तेमाल कर लिया, वो मुझे चूमने के लिए कभी भी बोल सकता था तो तैयार रहना था
हम कार में बैठे थे और फिर मौका देख कर उसने वो संवेदनशील मुद्दा निकाला।
जैक: “तुमने कुछ फैसला किया मेरे कल के प्रस्ताव के बारे में?”
उसने मुझे चूमने के लिए बोला तो था पर कहा चुमना चाहता हैं वो तो बताया ही नहीं। हो सकता हैं गालो पर, या माथे या हाथ पर चूमना चाहता हो। हालांकि मुझे भी पता था वो मेरे होंठो की ही बात कर रहा था। फैसला तो मैं बहुत पहले ही ले चुकी थी कि मुझे क्या करना हैं।
मैंने उसके हलके गुलाबी होंठो को देखा और शर्माते हुए हां बोल दिया। उसकी मुस्कान और चौड़ी हो गयी। मैंने अपने हाथ की हथेली को उल्टा कर उसकी तरफ बढ़ा दिया। उसने अपने नाजुक होंठ से मेरे हाथ को चूमा। वो अब थोड़ा आगे सर को लाया और मैंने अपना ललाट आगे कर दिया। उसने ख़ुशी ख़ुशी मेरे माथे को चुम लिया।
मैं फिर सीधा हो गयी। वो एक बार फिर आगे बढ़ा तो मैंने पहले दायां और फिर बायां गाल आगे कर दिया और उसने मेरे गालो को चुम लिया। मैंने उसको छेड़ते हुए कहा “ठीक हैं, हो गया ”
उसने शरारती मुस्कान के साथ अपने होंठो पर ऊँगली से इशारा किया। मैं अपनी आँखें बंद कर उसके होंठो का अपने होंठो से मिलने का इंतजार करने लगी। जब से उसके गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ देखे थे उनको चूमना चाहती थी , वो समय आ गया था ।
मैंने उसके मुलायम होंठो को अपने होंठो पर छूते हुए महसूस किया और मेरे रोंगटे खड़े हो गए। उसने दो पलो के लिए अपने होंठो में मेरे होंठ भरे और छोड़ कर पीछे हट गया। मैंने आश्चर्य से अपनी आँखें खोली, इतना इंतजार और फिर इतना सा छोटा चुंबन। मेरी तो तड़प भी पूरी नहीं मिटी थी।
शायद मेरी तरह वो भी मुझे तड़पा रहा था।
मैंने खुद ही अपने होंठ उसकी तरफ बढ़ाने शुरू कर दिए, ये देख वो भी अपने होंठ आगे बढ़ाने लगा। हम दोनों के होंठ आपस में टकराये और हमने एक दुसरे के होंठ को अपने होंठो में भरने की होड़ सी मचा दी । शुरू के एक दो मिनट तक हम सिर्फ एक दूसरे के होंठो का रस चुस रहे थे।
फिर हमारी प्यास और बढ़ने लगी और हम अपनी जुबान का इस्तेमाल करते हुए होंठो के साथ उसे भी चूसने लगे । वो मेरे जीवन का अब तक का सबसे अच्छा चुंबन था। उसके वो नाजुक होंठ मैं छोड़ना ही नहीं चाहती थी। मेरे टाइट शर्ट में मेरे मम्मे और भी फुल गए और मेरे शर्ट के बटन खिंच कर टूटने की स्तिथि में आ गए। शर्ट का कसाव मेरे सीने पर एक दम से बढ़ गया था।
लगभग पांच मिनट तक हम एक दूसरे के मुँह में मुँह डाले चुंबन लेते रहे। जब हम एक दूसरे से दूर हटे तब तक मेरे हाथ कापने लगे थे।
जैक: “ये चुम्बन मैं कभी नहीं भूलूंगा। ”
मैं: “मैं भी।”
जैक: “आज रात को ही मैं और सैंड्रा दूसरे शहर जा रहे हैं दूसरी जगह भी घुमनी हैं, इसीलिए इंडिया आया हूँ । काश तुम भी आ पाती मेरे साथ।”
मैं: “मैं भी तुम्हे मिस करुँगी।”
जैक: “तुम मेरे साथ अभी मेरे होटल रूम पर चलोगी?”
मैं: “क्यों क्या काम हैं?”
जैक: “ऐसे ही। शांती से बैठेंगे। चिंता मत करो हम दोनों ही होंगे वहा । सैंड्रा और जोसफ ऑफिस में ही होंगे अभी।”
क्या वो होटल रूम में मेरे साथ कोई शरारत करने वाला था। मैंने तो शपथ ली थी कि अब ऐसे किसी लफड़ो में नहीं पड़ूँगी। मैंने उसको मना कर दिया पर उसने एक बार फिर अपनी नीली आँखों का जादू चलाया और मुझे आग्रह किया और मैं मना ही नहीं कर पायी।
हम दोनों अब उसके होटल रूम में पहुंच गए थे। हम दोनों एक दूसरे के सामने मुँह कर पास पास बैठे थे और बिना बात किये एक दूसरे की आँखों में झांक रहे थे। जल्द ही हम दोनों के होंठ एक बार फिर एक दूसरे के करीब आये और हम एक और गहरे लम्बे चुंबन में खो गए।
पहले की तरह एक बार फिर मेरे शरीर में हलचल शुरू हो चुकी थी। मेरे मम्मे फुल गए थे और इच्छा हुई की अपना शर्ट खोल कर वो खिंचाव बंद कर दू। हमने अब चूमना बंद किया और मेरी नजर बिस्तर पर गयी। मुझे पुरानी बात याद आ गयी। अब मैं और जैक इतना खुल चुके थे कि मैं उससे बिना झिझक अपने सवाल पूछ सकती थी।
मैं: “तुम इतने बड़े होकर भी अपनी माँ के साथ सोते हो?”
जैक “सैंड्रा को मैं माँ की बजाय दोस्त मानता हु। ”
मैं: “मगर हैं तो तुम्हारी माँ, जवान बेटा अपनी माँ के साथ सो सकता हैं क्या?”
जैक:”मुझे पता हैं तुम क्या पूछना चाहती हो। हां, मैं सैंड्रा को चोदता हूँ। मैंने अपना कौमार्य सैंड्रा के साथ ही खोया था। उसके बाद अपनी कॉलेज की फ्रेंड को भी चोदा हैं। बस एक सपना हैं, तुम्हे चोदने का। ”
उसने बिना झिझक के सब कुछ बोल दिया।
मैं: “मैं शादी शुदा हु, मेरा एक बच्चा भी हैं। ”
जैक: “तो क्या हुआ, सैंड्रा भी शादीशुदा हैं। किसी से बात करते वक़्त आप अपना मुँह चलाते हो उसी तरह चोदते वक्त आप शरीर का दूसरा अंग चलाते हो। दोनों में कोई फर्क नहीं हैं। इतना मत सोचो, लाइफ को एन्जॉय करो।”
उसने बेधड़क अपने हाथों से मेरे शर्ट के सारे बटन खोल दिए और उसमे से मेरा ब्रा और झांकते मम्मे दिखने लगे। उसने अपने नाजुक होंठ मेरे झांकते मम्मो पर रखे और चूमना चाटना शुरू कर दिया। मैं आँख बंद किये सिसकिया भरने लगी।
तभी दरवाजा खुला और जोसफ कमरे में दाखिल हुआ। मेरी नजरे जोसफ की तरफ गयी और जैक ने मुझे चाटना छोड़ा।
जोसफ: “ओह, हो हो। ये क्या चल रहा हैं ?”
मैं तुरंत अपने शर्ट के बटन फिर से बंद करने लगी।
जैक:”जोसफ, प्लीज सैंड्रा को मत बताना। ”
जोसफ: “जैक तुम थोड़ी देर के लिए बाहर जाओ।”
जैक चुपचाप कमरे से बाहर चला गया।
मैंने अपना शर्ट बंद कर लिया था और उठ कर जाने लगी, पर जोसफ की भारी बाजुओं ने मुझे रोक लिया।
जोसफ: “तुम्हे जरूर राहुल ने भेजा होगा, जैक को फंसा कर डील पाने के लिए ।”
मैं अचम्भित हो उसे देखने लगी, वो क्या समझ रहा था।
मैं: “राहुल का इस से कोई लेना देना नहीं। ये मेरा और जैक का निजी फैसला था। डील का इससे कोई संबंध नहीं हैं।”
जोसफ: “मैं जैक नहीं हूँ, जो आसानी से उल्लू बन जाऊंगा। तुम्हे तुम्हारा बॉस राहुल इस्तेमाल कर रहा हैं। तुम एक अच्छी औरत हो सम्भल जाओ।”
मैं: “तुम गलत सोच रहे हो। ऐसा कुछ नहीं हैं। ”
जोसफ:: “राहुल को बोल देना, अगर सैंड्रा को तुम्हारे और जैक के बारे में पता चल गया तो डील कैंसल हो जाएगी।”
मैं: “क्या? प्लीज सैंड्रा को मत बताना फिर। राहुल को पता भी नहीं मैं यहाँ जैक के साथ क्या कर रही हु ।”
जोसफ: “तुम ये साबित कर दो, मैं सैंड्रा को नहीं बताऊंगा। सैंड्रा और जैक आज रात को ही कुछ दिनों के लिए घूमने जाने वाले हैं। उनके
वापिस आने तक डील पर फैसला होगा। कल तुम मुझे इसी रूम में दस बजे मिलो और साबित कर दो कि तुम सही और मैं गलत हु। ”
मैं परेशान सी कमरे से बाहर निकली। जैक ने मुझे रोका, मैंने परेशान निगाहो से उसकी तरफ देखा। उसने मुझसे पूछा क्या हुआ पर मैं कुछ जवाब नहीं दे पायी। उसने मुझे वही रुकने को बोला और अंदर कमरे में जोसफ से सवाल जवाब करने गया। मैं चुपचाप वहा से चली गयी । शायद मेरी गलती की वजह से राहुल की डील टूट सकती थी।
मेरी एक गलती की वजह से राहुल को बहुत बड़ा नुक्सान हो सकता था। अभी चार ही बजे थे, मुझे ऑफिस जाकर राहुल को ये नयी बात बतानी थी। मेरे एक कदम से वो और दूसरे कर्मचारी भी प्रभावित होने वाले थे।
मैं सीधा उसके केबिन में गयी। वो मुझे ऊपर से नीचे देखने लगा। आजतक उसने मुझे अपने केबिन में इस तरह ऊपर से नीचे नहीं देखा था। जैक ने जब मेरे शर्ट के बटन को खोल शर्ट मेरी स्कर्ट से बाहर निकाल दिया था उसके बाद वापिस आते वक्त मुझे मौका ही नहीं मिला शर्ट को वापिस स्कर्ट में डाल पाऊ।
शायद राहुल मेरे बिखरे कपड़े को देख अनुमान लगा रहा था कि मैं जैक के साथ क्या कर के आयी हु। उसकी रूही तो पहले ही किसी की हो चुकी थी, क्या उसकी दूसरी रूही भी बेवफा हो चुकी थी।
राहुल मेरे कपड़ो की हालत देख मेरे बारे में शायद कुछ और ही सोच रहा था। मैंने उसको सच्चाई बताने की कोशिश की।
राहुल: “क्या हुआ? तुम ठीक तो हो ?”
मैं: “तुम समझ रहे हो वैसा कुछ भी नहीं हैं। ”
मैंने उसको सब कुछ बता दिया कि कैसे बिना कुछ किये ही जोसफ ने मुझे जैक के काफी करीब देख लिया था और उसको ग़लतफ़हमी हो गयी कि ये तुम्हारी चाल हैं। राहुल भी सब बातें सुन थोड़ा परेशान हो गया था।
पता नहीं परेशानी डील के खतरे में पड़ने की थी या मेरे जैक के हाथों इज्जत गवा देने की संभावना में। शायद उसे ये लगा कि जोसफ ने मुझे और जैक को कही चुदते हुए रंगे हाथो तो नहीं पकड़ लिया।
मैं: “मुझे कल जोसफ ने होटल रूम में बुलाया हैं।”
राहुल: “क्यों?”
मैं: “वो चाहता हैं कि मैं उसे साबित करू कि इसमें तुम्हारी कोई चाल नहीं हैं, बल्कि ये मेरा निजी फैसला हैं।”
राहुल: “तुम्हे वहा जाने की कोई जरुरत नहीं। जोसफ का क्या भरोसा। सैंड्रा और जैक भी आज रात को बाहर जाने वाले हैं। जोसफ रूम में अकेला होगा।”
मैं: “राहुल, मैंने ही ये सब बिगाड़ा हैं अब मुझे ही सुधारना होगा।”
राहुल: “अगर डील बचाने के लिए तुम वहा जा रही हो तो उसकी कोई जरुरत नहीं। मैं सैंड्रा से बात कर सब संभाल लूंगा ज्यादा से ज्यादा क्या होगा डील नहीं मिलेगी तो भी कोई बात नहीं। हम सब लोग मेहनत कर एक डेढ़ साल में कवर कर लेंगे। तुम चिंता मत करो।”
मैं: “मुझे सिर्फ एक मौका दो, मैं शायद संभाल लुंगी। वरना होनी को टाल नहीं सकते।”
राहुल: “प्रतिमा मेरी बात मानो तो तुम मत जाओ। ”
मैं: “मेरी चिंता मत करो, मैं जोसफ को कल यकीन दिला दूंगी कि वो गलत हैं।”
राहुल: “अपना ध्यान रखना और जरुरत पड़े तो मुझे फ़ोन कर देना।”
मैं इसी उधेड़बुन में थी कि जोसफ मेरे साथ कल क्या करने वाला हैं। उसकी नजर तो पहली मुलाक़ात में ही मेरे शरीर पर थी। क्या वो मेरा फायदा उठाने की कोशिश करेगा। मुझे शायद राहुल की बात मान लेनी चाहिए थी।
पर मैं इतना स्वार्थी नहीं हो सकती। डील टूटने से हमारी कंपनी को अगले एक साल से भी ज्यादा मुसीबत झेलनी पड़ेगी और सबकी मेहनत जाया होगी। अब शायद मेरे त्याग की बारी थी। मुझे ही जोसफ को संभालना था।
मैं सीधा घर लौटने लगी। रास्ते में अशोक का फ़ोन आया कि वो अपनी माँ के घर जा रहा हैं बच्चे को लेने। आठ बजे तक घर आ जाएगा।
मैंने कुछ सोचा और घर पहुंचने से पहले मैं सुपर स्टोर गयी। किसी मुश्किल परिस्तिथि के लिए मुझे एक प्रयोग करना था।
मैंने अलग अलग साइज की ककड़िया खरीदी। शादी के कुछ समय बाद ही एक बार मजाक मजाक में मैंने अशोक के लंड को एक नापने के फीते से मापा था। उसका लंड पांच इंच लंबा और चारो तरफ से मोटाई चार इंच की थी ।
उसका लंड कई बार हाथ में लिया था तो नाप पता था, उसी आधार पर मैंने कुछ ककड़िया हाथ से नाप नाप कर खरीदी। ये अंदाज़ा लगाते हुए कि जोसफ का लंड कितना बड़ा हो सकता हैं। मैंने तीन अलग अलग मोटाई और मिलती हुई लंबाई की ककड़िया खरीद ली। जितनी ककड़ी की मोटाई थी उसके अनुपात में मैंने ककड़ी की लंबाई भी एक इंच ज्यादा रखी थी।
घर पहुंच कर मैंने कपड़े बदले और सोचने लगी जोसफ को कैसे संभालूंगी। अत्यंत विकट क्या होगा, जोसफ मुझे चोदना चाहेगा। हालांकि मैंने कसम खायी थी कि अब मैं ऐसे काम नहीं करूंगी पर मैं उससे चुदवा लुंगी, मेरी वजह से राहुल जैसे सच्चे इंसान को नुक्सान नहीं होना चाहिए।
मैं ककड़िया लेकर बैडरूम में आ गयी। मुझे जोसफ के लिए तैयार रहना था। मैंने अपना स्लीप शार्ट और पैंटी उतार नीचे से नंगी हो गयी और बिस्तर पर बैठ गयी।
पहले मैंने पांच इंच मोटी और छच इंच लंबी ककड़ी उठाई और अपने दोनों टांगो के बीच रख अपनी चूत में घुसाना शुरू किया। उस दिन जोसफ के बॉक्सर में से हिलता हुआ उसका जो नरम पड़ा लंड देखा था इस हिसाब से तो ये ककड़ी पतली ही थी पर मैं धीरे धीरे मोटाई को बढ़ाना चाहती थी।
मेरी चूत ने ज्यादा बिना परेशानी के थोड़ा बहुत एडजस्ट करते हुए ककड़ी को अपने अंदर ले लिया। चार इंच ककड़ी अंदर जाने तक ठीक था। फिर जैसे जैसे मैं अंदर डालने लगी मुझे अहसास हुआ कि अब मुश्किल होता जा रहा हैं। मैं थोड़ा हाथों का जोर लगाते हुए उसे अंदर डालती रही।
छह इंच ककड़ी अंदर जाने के बाद मुझे अब उसे अंदर बाहर कर देखना था। मैंने ककड़ी धीरे धीरे बाहर निकाल ली। ककड़ी मेरी अंदर के पानी से गीली होकर चिकनी हो गयी। हल्का जोर लगाते हुए वो ककड़ी एक बार फिर आराम से अंदर चली गयी। दो चार बार मैंने उसको अंदर बाहर कर अभ्यास कर लिया।
अब बारी थी उससे बड़ी, छह इंच मोटी और सात इंच लंबी ककड़ी की। उसको देख लगा शायद ये ही जोसफ के लंड की मोटाई होगी। इसे सहन कर लिया तो जोसफ को भी सह लुंगी। मैंने उसको अंदर डालना चाहा पर दो इंच के बाद ही वो ककड़ी अटक गयी . मैंने थोड़ा और जोर लगा घुमा घुमा कर अंदर घुसाने की कोशिश की पर एक इंच ही और अंदर गयी।
मैंने उसको बाहर निकाला और उठ कर थोड़ा लुब्रीकेंट ले आयी। वापिस बिस्तर पर बैठ कर मैंने ककड़ी पर वो लुब्रीकेंट लगाया और उसको मेरी चूत में घुसाना शुरू किया। थोड़ा जोर लगाना पड़ा और घुमा घुमा कर एक हलके दर्द के साथ अंदर उतरने लगी। दर्द के मारे मेरी हलकी सिसकी भी निकल रही थी और मैंने उसे चार पांच इंच चूत में उतार दिया।
उसको अब अंदर बाहर करना मुश्किल भरा होने वाला था। पर करना तो था, वरना कल मुश्किल होने वाली थी। वो ककड़ी जैसे मेरी चूत में अच्छे से फंस गयी थी, मैंने उसको धीरे धीरे दर्द से कराहते हुए खिंच कर बाहर निकाला।
फिर उतनी ही मेहनत से मैंने उसे फिर अंदर डाल तीन चार बार अंदर बाहर किया। वो बड़ी मुश्किल से अटकते अटकते अंदर बाहर हुई थी। धीरे धीरे अटक कर अंदर बाहर जाने से मजा तो इतना नहीं आ रहा था पर दर्द जरूर हो रहा था।
तीसरी ककड़ी की मोटाई को देख मेरी हिम्मत ही नहीं हो रही थी। सोचा इतना मोटा तो किसी का भी हो नहीं सकता। वो सात इंच मोटी और आठ नौ इंच लंबी ककड़ी थी। पर फिर सोचा अगर सचमुच उस राक्षस रूपी जोसफ का इतना मोटा हुआ तो। अभी प्रैक्टिस करके देख लेती हु, ताकि उसके लंड की मोटाई को देखकर मैं निर्णय ले पाऊ कि मुझे मना करना हैं या नहीं।
उस ककड़ी पर भी मैंने लुब्रीकेंट अच्छे से मला। उसके आगे का पतला हिस्सा ही अंदर जा पाया। मैंने अपने पाँव और चौड़े कर लिए पर फिर भी वो ककड़ी अंदर गयी ही नहीं।
मैं अब घुटनो के बल बैठ अपने पाव चौड़े कर बैठ गयी और ककड़ी को अपनी चूत के छेद पर अटका दिया। ककड़ी बिस्तर और चूत के बीच लंबी खड़ी थी। मैंने अब अपने शरीर को नीचे बैठाते हुए ककड़ी को अपनी चूत में घुसाना शुरू किया।
मैं दर्द से चीखने लगी और ककड़ी को धीरे धीरे अपनी चूत में घुसाती रही। दो इंच अंदर घुसने के बाद ही मेरी हालत ख़राब होने लगी और मैं रुक गयी। ये मेरे बस का नहीं था। मैं पसीना पसीना हो गयी थी।
मेरी चूत दर्द के मारे बुरी तरह से फड़क रही थी। मैंने वो ककड़ी बाहर निकालना चाहा पर वो तो जैसे अटक ही गयी। मैंने जोर लगा के खिंचा पर नहीं निकली। मैं बुरी तरह से फंस गयी। अब ये ककड़ी क्या अशोक आकर निकालेगा।
अशोक मुझसे पूछेगा ककड़ी क्यों डाली तो क्या बोलूंगी। राहुल को मदद के लिए बुला लू , उसे तो सब पता हैं जोसफ के बारे में। फिर सोचा मैं राहुल के सामने अपनी चूत कैसे दिखा सकती हु।
मैं एक बार फिर जुट गयी उस फंसी हुई ककड़ी को निकालने में। उसका दाए बाए , ऊपर नीचे कर और फिर घुमा घुमा कर धीरे धीरे कर कुछ मिनटों की मेहनत से बाहर निकाल ही लिया।
मेरी चूत में रह रह कर दर्द हो रहा था तो मैंने दर्द निवारक गोली ली जिससे थोड़ी राहत मिली।
मुझे पता था कि मैं कितना मोटा लंड ले सकती हूँ। कल मुझे क्या निर्णय लेना हैं ये आसान हो गया था। वो ककड़िया डस्टबिन में फेंक दी। अब अगली निर्णायक सुबह का इंतजार था। रात को मेरे सपने में जोसफ के बॉक्सर में लटकता उसका बड़ा सा लंड ही दिखाई दे मुझे डराता रहा।
सुबह ऑफिस जाने से पहले मुझे जोसफ के होटल रूम पर पहुंचना था। मैंने एक ड्रेस ज्यादा ले अपने बेग में डाल दी। अगर जोसफ के साथ कुछ करते वक़्त कपडे ख़राब भी हो गए तो दूसरे काम आएंगे। दर्दनिवारक गोली भी साथ में रख ली।
होटल में आने वाली हर परिस्तिथि के लिए मैं तैयार थी। होटल रूम के दरवाजे पर दस्तक दी। जोसफ ने दरवाजा खोला, वो एक बार फिर सिर्फ बॉक्सर में खड़ा था। उसके मांसल वाले शरीर को देख मैं एक बार फिर डर गयी। मुझे अंदर ले उसने दरवाजा बंद किया। दरवाजा बंद कर वो मेरी तरफ बढ़ने लगा और एक डर की लहर मेरे पुरे शरीर में दौड़ गयी।
जोसफ: “आर यू रेडी, शो मी ”
मैंने अपना बेग साइड में रख अपना हाथ अपने शर्ट के बटन पर रख खोलना चाहा।
फिर याद आया मैं कुछ जल्दबाजी कर रही हूँ। अपना हाथ फिर नीचे करते हुए उससे पूछा।
मैं: “क्या दिखाऊ? ”
जोसफ: “सबूत दिखाओ । साबित करो कि जैक के साथ तुम्हारा निजी मसला था, तुम्हारी कंपनी की चाल नहीं थी। ”
मैं:” मैं बोल तो रही हु, मेरा यकीन करो। अब कैसे साबित करूँ? तुम ही बताओ।”
जोसफ: “राहुल को नहीं पता था कि तुम जैक के साथ क्या करने वाली थी?”
मुझे झूठ बोलना पड़ा, हालांकि राहुल को मैंने सब बताया था।
मैं: “नहीं, राहुल को मेरे और जैक के बारे में कुछ पता नहीं। ”
जोसफ: “तो ये सारा आईडिया तुम्हारा था, जैक के साथ चुदवा के तुम्हे क्या लगा तुम्हे डील मिल जाएगी और राहुल खुश होकर तुम्हे तरक्की दे देगा।”
राहुल सही कह रहा था, ये जोसफ कूटनीति के मामले में बहुत तेज था। मगर था तो गलत ही।
जोसफ: “देखो अगर मैंने सैंड्रा को बोल दिया तुम्हारे बारे में तो तुम्हारी डील तो नहीं हो पाएगी। राहुल को पता चलेगा तुम्हारी वजह से डील गयी तो वो तुम्हे नौकरी से निकाल देगा ।”
मैं: “मुझे अपनी नौकरी की चिंता नहीं, मेरी वजह से मेरी कम्पनी को नुक्सान ना हो बस । ”
जोसफ: “ठीक हैं मैं नहीं बोलूंगा सैंड्रा को, तुम मुझे चोदने दो।”
मैं तो वैसे भी ये सोच कर आयी थी कि वो ज्यादा से ज्यादा मेरे साथ चोदने की मांग रखेगा। मैं मानसिक तौर पर तो वैसे भी तैयार होकर आयी थी। शारीरिक तौर पर तैयार होने का निर्णय उसके लंड के दर्शन के बाद ही ले पाऊँगी।
मुझे अपनी शपथ तोड़ कर एक गैर मर्द के साथ सोने का फैसला लेना ही था। मैं इतने लोगो की मेहनत ख़ास तौर से राहुल की मेहनत को ख़राब नहीं करना चाहती थी। राहुल ही वो था जिसने मेरी बुरे वक़्त में मदद की थी मुझे अपने पैरो पर खड़ा करने में।
मैं: “ओके, मैं तैयार हु, पर वादा करो सैंड्रा को मेरे और जैक के बारे में नहीं बताओगे और हम दोनों के बीच जो कुछ भी होने वाला हैं वो किसी को नहीं बताओगे। ”
जोसफ: “ठीक हैं वादा करता हूँ। खोलो अपने कपडे।”
मैंने दोनों हाथ से अपने शर्ट के बटन खोलना शरू किया और वो देखता रहा। ऊपर के तीन बटन खुल चुके थे और अंदर मेरे ब्रा के साथ उनमे से निकलते मेरे मोटे मम्मे दिखने लगे थे।
जोसफ: “रुको रुको, ना ना ना। कपड़े खोलने की जरुरत नहीं।”
मैं बटन खोलते खोलते रुक गयी कि उसको क्या हुआ और उसकी ओर आश्चर्य से देखने लगी।
जोसफ: “तुम अपनी तरक्की के लिए किसी के भी साथ चुदवाने के लिए तैयार हो जाती हो आसानी से ! मैं सिर्फ परीक्षा ले रहा था। तुम फेल हो गयी। तुम यहाँ से जाओ।”
मुझे कुछ समझ नहीं आया उसने मेरे साथ कैसा खेल खेला था। मैंने अपने शर्ट के बटन फिर से बंद कर दिए और अपना बेग उठा कर बाहर जाने लगी।
थोड़ा रुकी कि उससे फिर थोड़ी विनती करू पर बिना कुछ करे ही वो मेरी इज्जत उतार चूका था तो हिम्मत नहीं हुई और मैं वहा से निकल ऑफिस आ गयी।
राहुल को पता था कि मैं आज जोसफ से मिलने वाली थी , अब वो पूछेगा तो क्या जवाब दूंगी। थोड़ी देर में जैसे ही राहुल को पता चला मैं आ गयी हु तो उसने मुझे अंदर बुला लिया।
वो एक बार फिर से मेरा ऊपर से नीचे निरिक्षण करने लगा कही जोसफ ने मेरी हालत तो ख़राब नहीं की थी। इससे पहले कि वो कुछ पूछता मैं खुद ही बोल पड़ी।
मैं: “मैं जोसफ से मिलने नहीं गयी। ”
ये सुनते ही राहुल के चेहरे पर चिंता की लकीरे हट गयी। वो थोड़ा मुस्कुराया।
राहुल: “बहुत अच्छा किया, मैं भी तुम्हे ये ही बोल रहा था। तुम अब जाओ और चिंता मत करना, जो भी होगा मैं संभाल लूंगा।”
सैंड्रा और उसका सौतेला बेटा जैक वैसे भी शहर से बाहर गए थे। अगले हफ्ते सैंड्रा और जैक के आने तक कुछ भी होने वाला नहीं था। मैं खुश थी कि जोसफ के चंगुल में नहीं फंसी। पर रह रह कर जैक की याद आ रही थी। मैं उसके इतना करीब आ गयी थी।
उस दिन अगर जोसफ वहा नहीं आया होता तो जैक और मेरे बीच मामला थोड़ा आगे बढ़ सकता था, साथ ही ये सारी मुसीबत भी नहीं होती।
साथ ही मैं राहुल के बारे में भी सोच रही थी। वो मेरे लिए कितना चिंतित था और मेरे जैक या जोसफ के साथ समय बिताने पर उसको कितना फर्क पड़ रहा था। इतनी फिक्र तो मेरे पति को भी नहीं होती।
अगले हफ्ते जिस दिन सुबह जैक और सैंड्रा वापिस आने वाले थे, सुबह से ही मेरी चिंता बढ़ गयी थी। जोसफ अब सब कुछ सैंड्रा को बताने वाला था, पता नहीं सैंड्रा को कैसा लगेगा और क्या फैसला लेगी।
मैं ऑफिस में आ गयी थी और दिल धक धक कर रहा था कि पता नहीं कब राहुल तक फैसला पहुंच जाये कि डील कैंसल हो गयी हैं।
दोपहर बाद जब मैं वाशरूम से हो कर वापिस अपनी सीट पर गयी तो पता चला कि जैक आया हैं और राहुल के केबिन में हैं। मैं बहुत खुश हुई, इतने दिनों बाद जैक को देखूंगी।
मैं तेजी से चलते हुए राहुल के केबिन की तरफ बढ़ी। आज पहली बार उत्साह में बिना दस्तक के मैं अंदर दाखिल हो गयी। राहुल के टेबल के सामने वाली कुर्सी पर जैक बैठा था मेरी तरफ पीठ करके। मेरे अंदर आते ही जैक पीछे मुड़ा और मुझे देख कर खड़ा हो गया। वो मेरे थोड़ा करीब आया और मुझे जकड कर आलिंगन कर लिया।
उसने मुझे पीठ से कस कर पकड़ा हुआ था और मेरे मम्मे उसके सीने से दब गए थे। मेरे आँखों के सामने राहुल था जो ये दृश्य देख कर असहज हो रहा था। पहली बार जैक से गले लग मुझे भी अच्छा लग रहा था।
जैक मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगा और फिर हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए। हमने एक दूजे की आँखों में देखा और वो आगे बढ़ कर मेरे होंठो को गहराई से चूसने लगा । हमारे मुँह की लार से चूमते चूमते चप्प चप्प की आवाज आने लगी थी।
हम दोनों बिलकुल भूल ही गए थे कि हम कहा खड़े हैं। राहुल ने थोड़ा खांसते हुए हमें अहसास दिलाया कि वो भी वहा हैं और हमने एक दूसरे को चूमना छोड़ा और उसकी तरफ देखने लगे। वो दूसरी दिशा में देख रहा था ताकि हम शर्मिंदा ना हो ।
मुझे राहुल के लिए थोड़ा बुरा लगा, मुझे पता था कि वो रूही समझ कर मुझसे प्यार करने लगा था। उस दिन पार्टी वाली रात वो मुझे चूमना चाहता था और मैंने मना कर दिया था पर आज मुझे उसके सामने कोई और चुम रहा था और मैं मना नहीं कर रही थी।
जैक: “हम चले?”
मैं: “मेरा ऑफिस चालू हैं। ”
जैक: “छुट्टी ले लो, राहुल प्लीज आज उसको छुट्टी दे दो। ”
राहुल: “प्रतिमा वैसे भी छुट्टी नहीं लेती हैं, मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं। उससे पहले मुझे प्रतिमा से थोड़ी बात करनी हैं।”
जैक: “ओके, मैं तुम्हारा बाहर पार्किंग में वेट करता हूँ। ”
जैक केबिन से बाहर निकल गया। राहुल ने मुझे बैठने के लिए बोला और मैं उसके सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी।
अब राहुल ने समझाना शुरू किया “देखो मुझे नहीं पता तुम दोनों के बीच क्या चल रहा हैं। तुम दोनों के बीच प्यार हैं या सिर्फ आकर्षण हैं ये तुम्हारा निजी मामला हैं। अगर ये प्यार हैं तो इसका क्या भविष्य हैं? प्रतिमा तुम शादीशुदा हो, जैक को क्या पता हैं?”
मैं: “तुम सही बोल रहे हो पर शायद हमें भी नहीं पता ये क्या हैं। अभी हम सिर्फ एक दूसरे को ज्यादा जानने की कोशिश कर रहे हैं। मान लेते हैं कि अभी ये आकर्षण हैं। ”
राहुल: “ठीक हैं , पर थोड़ा ध्यान रखना, हमारे समाज में एक शादीशुदा औरत का इस तरह का रिश्ता… बाकी तुम खुद समझदार हो। मैं एक शुभचिंतक होने के नाते बता रहा हूँ। ”
मैं: “उस दिन पार्टी में जो तुमने करने की कोशिश की थी वो क्या था ?”
राहुल: “मैं मानता हु वो मेरी गलती थी, पर वो सिर्फ मेरा आकर्षण नहीं था। मैं किसी का इस्तेमाल कर फेंक दू ऐसा नहीं हैं। जैक कुछ दिनों बाद अपने वतन लौट जायेगा, मुझे लगता हैं ये जैक के लिए सिर्फ एक खेल हैं।”
मैं: “मुझे बस ये पता हैं कि वो मुझे पसंद करने लगा हैं।”
राहुल: “प्रतिमा सोच लो, जैक के आगे भी तुम्हारी ज़िन्दगी हैं।”
मैं: “मुझे पता हैं राहुल, मैं भी पूरी ज़िन्दगी जैक के साथ गुजारने क बारे में नहीं सोच रही हूँ। पर जब तक वो मेरे सामने हैं मैं उसको रोक भी नहीं पा रही हूँ।”
राहुल: “मुझे जो समझाना था समझा दिया, बाकी तुम दोनों का फैसला और जिंदगी।”
मुझे पता था जैक के साथ आगे बढ़ने का मेरा निर्णय गलत था पर उस वक्त मुझ पर उसका जादू चढ़ा था और मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही थी। मैं अब केबिन से बाहर आ कर जैक के पास पार्किंग में आ गयी।
मैं: “जैक, कहाँ जायेंगे? होटल नहीं जा सकते, फिर जोसफ आ गया तो ?”
जैक: “अब हम होटल में नहीं रहते, कुछ दिन पहले ही हमारा कंपनी गेस्ट हाउस क्लीन हो गया तो आज सुबह एयरपोर्ट से आने के बाद हम सीधा गेस्ट हॉउस ही गए थे । सैंड्रा और जोसफ अभी ऑफिस में होंगे तो हम गेस्ट हाउस चलते हैं।”
हम गेस्ट हाउस पहुंचे और जैक मुझे लेकर सीधा बैडरूम में आ गया । मैं अपनी शपथ जैक के आकर्षण में भूल चुकी थी। मुझे पता था कि मैं एक गलती करने जा रही थी पर एक रोमांच और उत्साह था जो कि मुझे रोक नहीं पा रहा था।
जैक: “उस दिन होटल में क्या हुआ था, जोसफ ने तुमसे क्या कहा। मेरे पूछने पर जोसफ ने टाल दिया कि कोई ऑफिस का काम था। मैं बाहर आया तब तक तुम भी चली गयी थी।”
मैंने जैक को सारी बात बता दी कि कैसे जोसफ हमारे बारे में सैंड्रा को शिकायत की धमकी दे रहा था।
जैक: “जब मैंने पहली बार सैंड्रा को चोदा था तब उसने भी मुझे धमकी दी कि वो मेरे बाप को बता देगी। इस डर को दिखा कर उसने मुझे कई बार और चोदने को मजबूर किया हैं। वो मुझे मेरी गर्लफ्रेंड के साथ भी नहीं रहने देती और बंदिशें लगाती हैं। फिर भी छुप छुप कर अपनी कॉलेज गर्लफ्रेंड के घर उसके साथ एक दो बार मैंने सेक्स किया हैं।”
मुझे उस पर और दया आने लगी। शायद मैं उसको वो सुख दे सकती थी जिसकी उसको तलाश थी।
बैडरूम में आते ही उसने मेरे सर के पीछे हाथ रखा और मुझे अपनी तरफ खिंच एक बार फिर अपने गुलाबी होंठ मेरे होंठो पर रख चूमना शुरू कर दिया। मैं भी एक सप्ताह से तड़प रही थी तो उसका साथ देते हुए उसके गुलाबी होंठो को चूसने लगी। एक बार फिर हमारे मुँह से चप्प चप्प की आवाज आनी शुरू हो गयी।
आज हमें जोसफ का भी डर नहीं था। हम अपने होंठ को सामने वाले के मुँह में घुसाते हुए एक दूजे की जीभ को चाटने लगे। अगले कुछ मिनटों तक हम चूमने का ही मजा लेते रहे। उत्तेजित हो मेरा शरीर थर थर कांपने लगा था। मेरा ब्रा मेरे लगातार फूलते हुए मम्मो को अब संभाल नहीं पा रहा था। कसे हुए ब्रा से मेरे मम्मो में दर्द होने लगा था। मैं इस दबाव को जल्दी से हटा अपने कपड़े खोल देना चाहती थी।
पर खुद अपने कपड़े कैसे खोलती। उसको कैसे बोलू कि मैं तैयार थी। मैंने तो उसको चूमने की ही इजाजत दी थी पर इतना कुछ हो चूका था कि मन में हम जानते थे कि हम दोनों ही चुदने के लिए तैयार थे।
उसने मेरे मन की बात पढ़ ली थी और मुझे चूमना छोड़ कर मेरे शर्ट के बटन खोलने लगा और स्कर्ट में फंसा शर्ट का हिस्सा भी निकाल दिया। वो मेरे ब्रा में से फूलकर बाहर आने को उतारू मम्मो को देख तारीफ़ करने लगा। उसने अपनी उंगलिया मेरे दीखते मम्मो पर रगड़नी शुरू कर दी।
उसने मुझे पीछे घुमाया और मेरा शर्ट कंधो से उतार पूरा निकाल दिया। फिर उसने मेरी ब्रा का हुक खोला जिससे मेरे मम्मो को सांस लेने की जगह मिलने से बहुत राहत मिली। उसने मेरी पीठ पर ऊपर से नीचे अपना हाथ फिराया। मुझे उसने फिर सीधा किया। वो अब मेरे मम्मो के पहले दीदार के लिए तैयार था।
उसने मेरे ब्रा को ऊपर उठा कर मेरे मम्मो को बाहर निकाल दिया। उसके मुँह से एक वाऊ निकली और उसने अपने एक हाथ से ब्रा पकड़े हुए दूसरे से मेरा एक मम्मा पकड़ लिया और हलके से दबा दिया। वो मेरे मम्मो की तारीफ़ करता रहा और मेरे मम्मे मसलता रहा।
उसने अपनी दो उंगलियों से मेरे निप्पल को घिसा और मेरी सिसकी निकल गयी। उसने अब झुक कर अपने नाजुक होंठो में मेरे निप्पल भर लिए और बच्चे की तरह चूसने लगा। मुझे एक करंट सा लगा और मैं आहें भरने लगी। मेरे शरीर पर रोंगटे खड़े हो गए थे।
वो लगातार मेरे बदन पर उंगलिया और अपने होंठ फिराते हुए मुझे पूरी तरह से तैयार कर रहा था। मैंने भी अब तक आत्मसमर्पण कर दिया था। मुझे पता था की आज तो मैं चुद कर ही रहूंगी। आज तक किसी गौरे से नहीं चुदवाया था तो मन में एक अजीब सी तरंग दौड़ रही थी। मेरी सिसकिया रह रह कर निकल रही थी।
जैक मेरे मम्मो में जैसे खो चूका था। मैं तड़प कर इंतजार कर रही थी की कब वो मुझे अपना गोरा लंड दिखायेगा और उसे में अपनी चुत में समा कर उसे ऐसा मजा दिलाऊ की वो ज़िन्दगी भर याद रखें। मुझे भी मेरा पहला अनुभव लेना था की ये गोरे किस तरह चोदते हैं।
मैंने और जैक ने अभी मजा लेना शुरू ही किया था कि बाहर का गेट बजा। कही जोसफ तो नहीं आ गया था । जैक ने मुझे तुरंत छुपने को कहा और बैडरूम की खिड़की से मुझे बाहर कर दिया। उसने मुझे मेरा पर्स और नीचे पड़ा शर्ट मेरे हाथों में थमा दिया।
जैक: “तुम यही छुपी रहना। मैं तुम्हे मौका देख कर बाद में बाहर निकाल दूंगा।”
मैं दीवार की ओट में आ गयी और बिना आवाज किए अपने खुले ब्रा का हुक फिर बंद कर लिया और शर्ट को फिर से पहनने लगी। वहा आठ दस फ़ीट की खुली जगह थी और उसके आगे एक ऊँची बॉउंड्री वाल थी। मैं वहा से भाग भी नहीं सकती थी। मैं वही खड़ी हो सुनने लगी।
जोसफ और सैंड्रा बैडरूम में आ गए थे।
जैक: “आप दोनों इस वक्त यहाँ कैसे, सब कुछ ठीक तो हैं?”
सैंड्रा : “कुछ नहीं स्वीटहार्ट, एक हफ्ते से जोसफ का लंड अपनी चूत में नहीं लिया था तो बहुत कमी खल रही थी। ”
मतलब मेरा शक ठीक था, जोसफ सैंड्रा को चोदता ही रहता हैं और वो भी जैक के सामने। जैक खुद तो अपनी सौतेली माँ को चोदता ही हैं उसने बताया था।
मेरे मन में एक उत्सुकता थी ये जानने की कि जोसफ का लण्ड कितना बड़ा होगा और सैंड्रा जैसी नाजुक औरत उसको कैसे सहन कर पायेगी।
मैंने छुपते हुए खिड़की से देखने का प्रयास किया। जैक बैठा हुआ था और जोसफ और सैंड्रा एक दूसरे की बाँहों में थे। जोसफ ने अपना सूट पहले ही खोल दिया था और उसने शर्ट पैंट और टाई पहनी थी।
सैंड्रा ने एक बॉडीकॉन ड्रेस पहनी थी जो उसकी आधी जांघो तक आ रही थी। वो एक अप्सरा की तरह लग रही थी। उसके पतले बदन से चिपकी ड्रेस बहुत सेक्सी लग रही थी और उसके गांड और सीने के उभार अच्छे से खिल रहे थे।
जोसफ ने अपने मोटे बड़े बड़े फुले हुए होंठो से सैंड्रा के पतले होंठो को पकड़ कर चूमना शुरू कर दिया था। ऐसा लग रहा था एक हाथी एक हिरणी का शिकार करने वाला हैं। थोड़े दिन पहले शायद वो शिकार हिरणी मैं हो सकती थी।
सैंड्रा भी बराबर जोसफ के होंठो को चूस बराबर मजे लेने की कोशिश कर रही थी। गहरे काले और गुलाबी होंठो का संगम एक अलग ही अजीब सा अहसास करा रहा था। जोसफ अपने बड़े बड़े हाथ सैंड्रा की छोटी सी गांड पर रख फिरा रहा था।
जोसफ कुछ दिन पहले मुझे डरा रहा था, मैंने सोचा आज मैं इसका सैंड्रा के साथ वीडियो बना इसको डरा सकती हूँ। मैंने अपना मोबाइल निकाल खिड़की के कोने से वीडियो बनाना शुरू किया।
थोड़ी देर में चूमते चूमते ही जोसफ ने एक हाथ सैंड्रा की पीठ पर ले जाकर उसकी ड्रेस की चैन नीचे खिंच खोल दी। फिर चूमना छोड़ दोनों हाथों से उसकी ड्रेस कंधो से उतार दी। सैंड्रा ने उसके बाद खुद ही अपनी ड्रेस नीचे खिसकाते हुए अपने पैरो से निकाल दी। वो अब सिर्फ एक ब्रा और पैंटी में खड़ी थी।
जोसफ ने एक बार फिर सैंड्रा को अपने से चिपका कर चूमना शुरू कर दिया। सैंड्रा के मम्मे जोसफ के सीने से पिचक से गए थे। जोसफ एक बार फिर सैंड्रा की गांड को पकड़ दबा रहा था। फिर उसने अपना हाथ उसकी पैंटी के पीछे अंदर डाल उसकी गांड मसलने लगा।
जोसफ चूमना छोड़ थोड़ा पीछे हटा तो सैंड्रा ने जोसफ के शर्ट के बटन खोल उसका शर्ट पूरा निकाल दिया और फिर उसका बनियान भी निकाल उसको ऊपर से नंगा कर दिया। सैंड्रा अब नीचे पंजो के बल बैठी और जोसफ की पैंट की बेल्ट ढीली कर उसने उसके पैंट का हुक खोला और चैन नीचे खिसका कर उसका पैंट पांवो से पूरा निकल दिया।
जोसफ अब सिर्फ बॉक्सर में खड़ा था। उपर से उसकी पहलवाननुमा कसरती बदन देख सैंड्रा उसके सीने और दूसरी मसल्स को चूमने लगी।
सैंड्रा अब जोसफ को ले बिस्तर पर आ गयी। सैंड्रा बिस्तर पर लेट गयी और जोसफ उसके बदन को चूमने लगा, उसके सीने, पेट और जांघो को चूमता ही रहा और सैंड्रा को उत्तेजित करता रहा।
उसने सैंड्रा की पैंटी को पकड़ कर नीचे खिंच निकाल दिया। उसकी टाँगे खिड़की की तरफ ही थी तो उसके पैर चौड़े करते ही उसकी गुलाबी चिकनी चूत दिखने लगी। उसने अपने घुटने मौडे तो उसकी चूत का छेद एक इंच गोलाई में गुफा की तरह खुला था। शायद जोसफ ने अपने मोटे लंड से चोद चोद कर उसका छेद हमेशा के लिए बड़ा कर दिया था।
बेचारा जैक, इसको इस बड़े छेद में चोदने से क्या मजा आता होगा, इसलिए शायद उसको मुझसे बड़ी उम्मीद हैं। जोसफ ने अपने काले राक्षसी हाथ की उंगलियों से सैंड्रा की चूत को रगड़ना शुरू किया। फिर जोसफ ने सैंड्रा के दोनों पांवो के बीच अपना सर किया और उसकी चूत को चाटना शुरू किया।
मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया क्यों कि खिड़की और सैंड्रा के बीच जोसफ का गंजा सर था। पर सैंड्रा की आती सिसकियों से पता चल रहा था कि सैंड्रा को मजे आ रहे थे ।
सैंड्रा की चूत को कुछ देर तक चाटते हुए मजे दिलाने के बाद जोसफ उठा। मैंने देखा सैंड्रा की चूत खुल कर पूरी गीली हो चुकी थी। वो अब उठने के लिए पलटी और थोड़ी देर घोड़ी की तरह बैठी। मैंने उसकी गांड का छेद देखा वो इतना खुला हुआ नहीं था। शायद आज तक जोसफ को उसने गांड नहीं मारने दी थी।
ये भी हो सकता हैं कि चूत का छेद जोसफ के लिए और गांड का छेद जैक के लिए रिजर्व्ड हो। वैसे भी जोसफ को गांड मारने देना मतलब अपनी मौत को दावत देना होगा। हालाँकि मैंने उसका लंड अभी तक देखा नहीं था। मैं उसी चीज का इंतजार कर रही थी।
जोसफ बिस्तर पर खड़ा हो गया और सैंड्रा उसके सामने घुटनो के बल बैठ गयी। उसने उसके बॉक्सर के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और थोड़ा हिला दिया। सैंड्रा के दोनों हाथ अब जोसफ की बॉक्सर की पट्टी पर थे। पर्दा गिरने वाला था और एक पहलवान के लंड के दर्शन खुलने वाले थे।
सैंड्रा ने जोसफ का बॉक्सर नीचे खींचना शुरू किया। मैंने देखा जोसफ का काला मोटा छह इंच लंबा लंड लटका हुआ था। ऐसा मोटा लंड तो चिड़ियाघर में एक गेंडे का देखा था।
मैंने उस दिन जो पहली ककड़ी अपनी चूत में डाली थी शायद उसके जितना मोटा लंड था जोसफ का। मैंने सोचा मैं उस दिन फ़ालतू में जोसफ से डर रही थी, ये वाला लंड तो मैं आसानी से ले सकती थी।
सैंड्रा ने जोसफ का बॉक्सर पूरा निकाल दिया और उसका काला लंड अपनी गौरे हाथ में पकड़ नीचे की तरफ खिंचा। फिर उसके लंड की चमड़ी ऊपर की तरफ खींची। अब वो ऐसे ही ऊपर नीचे उसके लंड को रगड़ने लगी जैसे गाय का दूध निकाल रही हो। सैंड्रा उसके लंड से बातें करे जा रही थी।
सैंड्रा: “ओह बेबी, तुम सो रहे हो, जग जाओ, तुम्हारी सहेली तुम्हारा इंतजार कर रही हैं, तुमने उसे मिस किया ना? ”
जोसफ: “हां, एक हफ्ते तक इसने बहुत मिस किया । ”
मुझे उनकी बातें सुन थोड़ी शर्म आयी, धीरे धीरे जोसफ का लंड लंबा और मोटा होने लगा। सैंड्रा जो जगने की बात कर रही थी वो जोसफ के लंड को जगाने की थी और उसके लंड को वो बेबी बोल रही थी। इसका मतलब उस बेबी की सहेली सैंड्रा की चूत थी।
मैंने देखा जोसफ का लंड उस दिन दूसरी बड़ी ककड़ी की मोटाई जितना हो गया था। उस दूसरी ककड़ी को अपनी चूत में ड़ालते वक्त मुझे उस दिन तकलीफ तो बहुत हुई थी। मैं जोसफ के लंड की मोटाई देख अब डरने लगी थी। सैंड्रा को आज मुश्किल होने वाली थी।
हालांकि उसका छेद मैंने देखा था मेरी चूत के मुकाबले ज्यादा ही खुला था पर जोसफ के लंड की मोटाई तो उस छेद के मुकाबले ज्यादा ही थी।
जोसफ के काले लंड पर सैंड्रा की गौरी उंगलिया एक अलग ही दृश्य पैदा कर रही थी। उसने अब उसका लंड अपने मुँह को चौड़ा करते हुए मुँह के अंदर धकेल दिया। सैंड्रा का मुँह जोसफ के लंड से पूरा भर गया और वो अब उसके लंड को अंदर बाहर कर रही थी।
जोसफ: “कम ऑन डार्लिंग, मजा आ रहा हैं, अच्छे से चुसो। आह ह हां ऐसे , वाह। ”
जैक चुपचाप बैठा उनकी हरकते देख रहा था। थोड़ी देर तक और चूसते रहने के बाद सैंड्रा ने जोसफ का लंड अपने मुँह से बाहर निकाला। उसका लंड सफ़ेद गाड़े चिकने पानी से लिपट गया था और उससे लारे छूटने लगी थी। पर मेरे लिए गौर देने वाली बात थी कि बाहर आने पर लंड और भी फूल गया था और लंबा हो गया था।
जोसफ का लंड किसी घोड़े के लंड की तरह दिखाई दे रहा था। उसकी लंबाई घोड़े से एक दो इंच कम होगी पर मोटाई उतनी ही या फिर थोड़ी ज्यादा ही थी। मुझे उस तीसरी ककड़ी की याद गयी। ये बिलकुल वैसा ही मोटा था। मैंने शुक्र मनाया कि उस दिन होटल रूम में जोसफ ने मेरे साथ कुछ नहीं किया वरना मेरा क्या होता, मेरी तो चूत ही फाड़ डालता।
उस दिन वो मोटी ककड़ी मेरी चूत में तीन इंच से ज्यादा नहीं जा पायी थी। मुझे सैंड्रा की चिंता होने लगी। क्या उसने पहले कभी जोसफ का सचमुच लिया होगा। मुझे यकीन नहीं हो पा रहा था। मैं बेसब्र हुए जा रही थी वो नजारा देखने के लिए।
जोसफ अब नीचे लेट गया, जोसफ की खुली टांगो के बीच में उसकी मोटी अंटिया और उसके ऊपर उगा हुआ उसका विशालकाय काला लंड एक डरावना मंजर था।
सैंड्रा बिस्तर से उतर कर कुछ ले लायी। उसके हाथ में एक डिब्बी थी जिसमे से उसने कुछ अपने हाथ में भरा। ये कोई जैल था जो उसने जोसफ के लंड पर अच्छे से लपेट दिया। उसका लंड उस जैल में लिपट कर और चमकने लगा। लुब्रीकेंट तो मैंने भी उस दिन ककड़ी पर लगाया था पर कोई फायदा नहीं हुआ था।
सैंड्रा अब जोसफ के लंड पर दोनों तरफ पाँव कर घुटनो के बल खड़ी हो गयी। उसकी पतली कमर और छोटी सी गांड के दोनों उभार दिख बहुत सेक्सी लग रही थी। उसकी चूत जोसफ के लंड से सात आठ इंच दूर थी।
जोसफ का लंड उसके पेट की तरफ झुक कर खड़ा था। सैंड्रा ने उसका लंड पकड़ा और सीधा खड़ा कर दिया। जोसफ का लंड सैंड्रा की चूत के एकदम पास था।
इतना चौड़ा लंड और सैंड्रा की गांड के बीच की छोटी सी दरार के बीच से नीचे की ओर दिखती उसकी छोटी पतली सी चूत, लंड का अंदर जाना नामुमकिन सा लग रहा था।
सैंड्रा ने लंड की टोपी अपनी चूत के छेद के पास लाकर अपना शरीर थोड़ा नीचे किया। अब जोसफ का लंड बिना पकड़े ही सैंड्रा की चूत से अटक कर सीधा कुतुबमीनार की तरह खड़ा था।
सैंड्रा अब धीरे धीरे नीचे होती जा रही थी और जोसफ का लंड उसकी चूत में घुसना शुरू हो गया था। लंड की टोपी सैंड्रा की चूत में घुस गयी थी और अब लंड का मोटाई वाला भाग धीरे धीरे अंदर जाने लगा और सैंड्रा के मुँह से कराहट निकलनी शुरू हो गयी। मुझे अपनी आँखों के ऊपर विश्वास नहीं हो रहा था। मेरी ककड़ी तो अटक अटक कर जा रही थी।
जैसा मैंने सोचा था तीन इंच अंदर जाने के बाद सैंड्रा कराहते हुए रुक गयी। जोसफ ने सैंड्रा का हौंसला बढ़ाया और अंदर घुसाते रहने को कहा।
जोसफ: “कम ऑन डार्लिंग, पुश इट फरदर। ”
सैंड्रा अब और जोर से चीखी और ऐसी आवाज निकलने लगी जैसे कोई बाहर भारी सामान उठा रही हो। आईईईई करते हुए वो नीचे बैठती रही और फिर धीरे धीरे जोसफ का लंड सैंड्रा की चूत में उतरता रहा। मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था और जल्द ही लंड का लगभग छह इंच हिस्सा सैंड्रा की चूत में गायब हो चूका था।
जरूर वो जैल उच्च श्रेणी का रहा होगा जो इतना मोटा लंड अंदर फिसलता हुआ जा रहा था। इतने मोटे लंड के अंदर जाने से नीचे से सैंड्रा की गांड के दोनों उभार फट कर एक दूसरे से दूर हो गए थे।
सैंड्रा की चूत अब जोसफ के लंड की जड़ो तक आ गयी, उसने उसको अपने में पूरा उतार लिया था। सैंड्रा ने एक चैन की सांस ली और ख़ुशी मनाई।
मैंने सोचा असली परीक्षा तो अब होने वाली थी। जिस तरह ककड़ी मेरी चूत में फंस गयी थी वैसे जोसफ का लंड भी सैंड्रा की चूत में अटक जायेगा। ऐसे में जैक को सहायता करनी पड़ेगी। जरुरत पड़ी तो मैं भी कमरे में जाकर सैंड्रा को खीचूँगी और लंड बाहर निकालने में मदद कर दूंगी।
सैंड्रा ने जोसफ के ऊपर चढ़ कर लंड तो काफी मुश्किल से अपनी चुत में ले लिया था पर मुझे डर था क्या वो मोटा लंड वापिस बाहर निकाल पायेगी।
सैंड्रा ने अपने दोनों हाथ जोसफ के पेट पर रखे और एक जोर की हुंकार भरी और अपना शरीर का जोर लगाते हुए ऊपर उठने लगी और उसके शरीर के ऊपर उठने के साथ ही जोसफ का गायब हो चूका लंड एक बार फिर बाहर आता दिखने लगा। मेरे लिए तो वो किसी जादू से कम नहीं था।
लंड लगभग पूरा बाहर आ चुका था और सैंड्रा की कराह भी जारी थी और उसी सांस में उसने फिर अपना शरीर नीचे करते हुए जोसफ का लंड अपनी चूत में छुपा दिया। अब वो बिना ज्यादा परेशानी के ऊपर नीचे हो पा रही थी, मगर उसकी कराह से पता चल रहा था कि दर्द तो हो रहा था।
मैंने वो जैल की डिब्बी को ढूंढना शुरू किया, ये सारा जादू शायद उसी का था। मगर मैं उस जैल का क्या करुँगी, मुझे कौनसा जोसफ जैसा लंड मिलने वाला था। मैंने फिर से उनकी चुदाई का मजा लेना शुरू किया।
सैंड्रा थोड़ी देर में जोसफ के ऊपर सीने से सीना मिला झुक गयी। उसके झुकते ही मुझे उसकी चूत साफ़ दिखाई देने लगी। इतना मोटा लंड अपने अंदर समाने के बाद उसकी छोटी सी चूत फटी पड़ी थी । जोसफ सैंड्रा की गांड अपने मोटे हाथों से सहला रहा था। शायद ऐसा करने से सैंड्रा का दर्द कम हो सके।
सैंड्रा अब आगे पीछे होने लगी और धीरे धीरे जोसफ का लंड दो तीन इंच उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा। सैंड्रा की चूत के पतले गुलाबी होंठ एक दम खींचे हुए थे। जोसफ ने अपना एक हाथ सैंड्रा की गांड से हटाते हुए ऊपर ले गया और सैंड्रा की ब्रा का हुक खोल कर ब्रा निकाल दिया।
अब सैंड्रा के शरीर पर सिर्फ उसके हाई हील सैंडल बचे थे। सैंड्रा अब इतना जोर नहीं लगा पा रही थी तो जोसफ ने उसकी पीठ को पकड़ा और खुद ही जोर लगा कर अपना लंड सैंड्रा की चूत में अंदर बाहर करने लगा। इससे उसका लंड अब पूरा अंदर बाहर हो सैंड्रा की चूत को रगड़ते हुए चोदने लगा।
ऐसा करने से सैंड्रा और जोर से आवाज निकाल आहें भरने लगी। ये सब देख मेरी तो पैंटी गीली होने लगी थी। जैक को तो कोई फरक ही नहीं पड़ा, उसके लिए तो ये शायद रोज का था।
जोसफ आराम से धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था और कुछ मिनटों में ही सैंड्रा की चूत से निकला पानी जोसफ के लंड की जड़ो में आकर इकट्ठा होना शुरू हो गया। मेरे हाथ पैर कांपने लगे ये नजारा देख कर। एक मोटा काला लंड एक गौरी सी चूत को भेद रहा था और एक गौरे काले का संगम बड़ा मनोहारी लग रहा था।
थोड़ी देर में सैंड्रा ने जोसफ को रुकने को बोला और उस पर से उतर कर साइड में लेट गयी। जोसफ भी उठा और सैंड्रा को दूसरी दिशा में लेटाया जिससे वो मेरी खिड़की के समानांतर हो लेटी थी।
साइड से लेटे हुए सैंड्रा के बड़े बड़े मम्मे बड़े आकर्षक लग रहे थे। उसने संभवत प्लाटिक सर्जरी से बड़े करवाए होंगे। वो बहुत ही चिकने थे। वो शायद कभी माँ नहीं बनी थी इसलिए उसके निप्पल मेरी तरफ मोटे और लम्बे नहीं थे। उसके सफ़ेद झक मम्मो पर गुलाबी निप्पल एक केक पर रखे अनारदाने की तरह थे। जोसफ ने आगे बढ़ कर अपने काले मोटे होंठो में उस अनारदाने को भर लिया।
थोड़ी देर एक ही निप्पल से खेलता रहा। सैंड्रा ने जैक की तरफ देखा और उसको भी बुलाने लगी।
सैंड्रा : “स्वीटहार्ट, तुम अपने हिस्से की चूंचियाँ चुसोगे? ”
जैक ने मना कर दिया, और मुझे अच्छा लगा कि उसको मेरी कुदरती चूंचियाँ ज्यादा पसंद थी। जोसफ ने दूसरे मम्मे को मुँह नहीं लगाया। शायद सैंड्रा ने अपने दोनों सौतेले बेटो में अपना एक एक मम्मा बाँट दिया था।
जोसफ अपने भद्दे होठो में सैंड्रा के मोटे मम्मे को भर भर के चूस कर छोड़ रहा था। और सैंड्रा को मजे आ रहे थे। मुझे ऐसा अहसास हो रहा था जैसे वो सैंड्रा के नहीं मेरे मम्मे को चूस रहा था, क्यों कि अब तक मेरे मम्मे भी एक बार फिर फूल चुके थे। मुझे दबाव कम करने के लिए अपने शर्ट के दो तीन बटन खोलने पड़े।
जोसफ अब सैंड्रा के पैरो की तरफ आया और उसके पैर चौड़े कर बीच में घुटनो के बल बैठ गया। सैंड्रा की दोनों टाँगे मौड़ कर अपनी तरफ खिंचा और और अपना लंड एक बार फिर सैंड्रा की चूत में घुसाना शुरू किया, मुझे सैंड्रा की जांघो के बीच में आ जाने से ज्यादा कुछ दिखा तो नहीं पर सैंड्रा की कराहटों और जोसफ की गति से पता चल रहा था।
सैंड्रा और जोसफ के बीच की दुरी कम होती जा रही थी और सैंड्रा की चीखे बढ़ती जा रही थी। थोड़ी देर बाद जोसफ का हिलना और सैंड्रा की आहें दोनों बंद हो गयी। लगता था जोसफ ने अपना पूरा लंड सैंड्रा की चूत में उतार दिया था। मेरी इच्छा हुई मैं अंदर जाकर उस नज़ारे को अच्छे से देख पाऊ पर कर नहीं सकती थी।
जोसफ की गोल गांड अब आगे पीछे हिल रही थी, उसने झटके मारना शुरू कर दिया था। वो झटके धीमे थे और सैंड्रा की आहें भी उस अनुसार धीमी थी। थोड़ी देर बाद सैंड्रा खुद ही जोसफ को जोर से चोदने को बोलने लगी। मुझे लगा वो पागल हो गयी हैं, इतने दर्द के बावजूद वो ऐसा कैसे कर सकती हैं।
जोसफ की गांड अब और तीव्र गति से आगे पीछे जल्दी जल्दी धक्के मारने लगी और सैंड्रा की आहें भी जल्दी जल्दी और तेज आवाज में आने लगी। उसकी कराहट अब शुरुआत जैसी नहीं थी।
पहले दर्द ज्यादा झलक रहा था पर अब उसमे मजा लेने का अहसास ज्यादा था। मैं मन ही मन सैंड्रा की हिम्मत की तारीफ़ किये बिना नहीं रह पायी। क्या इस मोटे लंड से चुदाना इतना आसान नहीं था जितना सैंड्रा दिखा रही थी।
सैंड्रा की मादक आहों के साथ अब जोसफ की भी आवाजे आने लगी थी। वो आहें नहीं थी, वो तो जैसे गुर्रा रहा था। कमरा सैंड्रा की तेज आहों और जोसफ की गुर्राहट से गूंज सा गया और एक अलग ही माहौल बन चूका था। जैक ने कुछ क्षणों के लिए मेरी तरफ देखा और मुस्कुराया।
मेरी इच्छा हुई अभी जैक मेरे पास आ जाये, वो मुझे चोदे या नहीं पर मैं जरूर उसको चोद दूंगी । शायद उस वक़्त वहा कोई और मर्द भी होता तो मैं अपनी किसी से ना चुदवाने की कसम भुला कर तैयार हो जाती। शायद राहुल होता तो उसको भी मना नहीं कर पाती । मेरे चेहरे पर तो ऐसे भाव थे जैसे उस वक्त मैं खुद चुदवा रही हूँ।
अंदर से अब फच्चाक फच्चाक की आवाज आने लगी थी । क्या सैंड्रा को गर्भवती होने की भी चिंता नहीं थी। जरूर कुछ साधन लगाती होगी या शायद माँ बनने में सक्षम नहीं होगी तभी बिना डर के चुदवाती रही हैं। वरना अब तक तो काले बच्चो की फ़ौज खड़ी कर देती। मैं सोचने लगी इतने मोटे लंड से पानी कितना निकलता होगा। खैर वो तो थोड़ी देर में पता लग ही जायेगा।
मैं अपना एक हाथ अपने स्कर्ट के ऊपर से ही अपनी चूत पर रख दबाये हुई थी। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। अंदर से आवाजे बढ़ती जा रही थी। आहहह आह्ह ओ हनी , फक मी हार्ड , ओ ओ ओ
मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैंने अपने स्कर्ट के नीचे से हाथ डालने की कोशिश की पर टाइट स्कर्ट को ज्यादा उठा नहीं पायी। मैंने वीडियो रिकॉर्ड कर रहे मोबाइल को नीचे रखा और अपनी स्कर्ट का हुक खोल दिया और उसे पांवो में नीचे गिरा दिया। अपना हाथ अपनी पैंटी में डाला और अपनी उंगलिया चूत की दरारों में रगड़ने लगी।
मुझे थोड़ी राहत मिली, चूत तो पहले ही गीली पड़ी थी और मेरी उंगलिया चिकनी हो आराम से फिसलने लगी। एक हाथ से मैं अपनी चूत रगड़ रही थी और दूसरे से अपना मुँह पकड़ बंद रखा था।
मैंने अपना काम जारी रखते हुए एक बार फिर खिड़की के कौने से अंदर देखना शुरू किया। जोसफ सैंड्रा के ऊपर पूरा लेट चूका था। नीचे सैंड्रा की सफ़ेद परत और उस पर चिपकी एक काली परत। जोसफ का भारी भरकम शरीर सैंड्रा को दबाये हुए बुरी तरह से चोद रहा था।
वो नजारा ऐसा था जैसे संगमरमर को एक काली मशीन घिस घिस कर चिकना बना रही थी। जोसफ बिस्तर का सहारा ले तेज झटके मार रहा था।
मैंने अपनी पैंटी को भी घुटनो के नीचे तक उतार दिया और पाँव चौड़े कर और तेज तेज अपनी उंगलिया अपनी चूत पर चलाने लगी। मुझे नहीं पता जैक ये सब कैसे सहन कर पा रहा था, उसकी इच्छा नहीं हो रही होगी !
जोसफ के तेज झटको से सैंड्रा जोर जोर से चीखते हुए झड़ने लगी और साथ ही जोसफ की गुर्राहट तेज हुई, शायद उसके झड़ने का ये ही तरीका था। उनकी आवाज सुन मेरी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया। मैं अब खिड़की से हटी।
मेरी उंगलिया चिकने पानी से पूरी गन्दी हो चुकी थी। मैं दूसरे हाथ से पर्स में से नैपकिन निकाला और हाथ पोंछा और फिर अपनी चूत को भी पोंछ दिया। अंदर से उन लोगो की बातें करने की आवाजे आ रही थी। मैंने अपनी पैंटी और स्कर्ट को ऊपर खिंच कर शर्ट अंदर डाल फिर पहन लिया। फिर अपने शर्ट के खुले बटन को भी बंद कर दिया।
जोसफ: “हम वापिस ऑफिस जाने वाले हैं?”
सैंड्रा : “तुमसे चुदवाने के दो घंटे बाद तक मैं कभी कोई काम कर पायी हूँ ! मुझे रेस्ट चाहिए।”
मैं घबरा गयी, ये लोग नहीं गए तो मैं बाहर कैसे निकलूंगी।
जोसफ: “चलो डार्लिंग, साथ में नहा कर साफ़ तो हो जाये।”
मैंने खिड़की के कोने से फिर देखना शुरू किया। जोसफ बिस्तर के पास खड़ा था और सैंड्रा आराम से लेटी थी, दोनों अभी भी नंगे थे । जोसफ ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और सैंड्रा को बिस्तर से उठा दिया और सहारा दे बाथरूम की ओर ले जाने लगा। उनकी पीठ मेरी तरफ थी।
जोसफ ने सैंड्रा के साथ चलते हुए उसकी गौरी छोटी सी गांड को दबा मजे लेता रहा जैसे किसी छोटे बच्चे के गाल दबाते हैं।
मुझे जोसफ किसी एक्शन मूवी के हीरो सा लग रहा था। मैंने सोचा क्या मुझे कभी उससे चुदवाने का सौभाग्य प्राप्त होगा। मेरा उसके मोटे लंड से डर थोड़ा बहुत निकल चूका था। उस दर्द से कही ज्यादा उसके लंड से मिलने वाला मजा होगा। बस वो जैल मिल जाये।
उन दोनों के बाथरूम में जाते ही जैक खिड़की में आया और मुझे अंदर आने को कहा। उसने पीछे का दरवाजा खोला और मुझे अंदर लिया आगे के दरवाजे से मुझे मैन गेट तक ले आया।
हम दोनों का काम आज भी नहीं हो पाया था, हालांकि मेरा काम मैंने खुद ही कर दिया था। शायद जैक और मैं करते तो भी इतना मजा नहीं आता जितना जोसफ और सैंड्रा को करते हुए देखा था।
जैक ने कहा वो मौका देख कर कल मुझे फ़ोन करेगा और हम मिलेंगे। मैं जैक से विदा ले वहा से सीधा ऑफिस चली गयी, अब छुट्टी मारने का क्या फायदा।
राहुल को भी आश्चर्य हुआ मैं वापिस कैसे आ गयी। मैंने उसको सारी बात बतायी कि मैंने भी वीडियो बना लिया हैं। अब जोसफ और सैंड्रा हमें डरा नहीं पाएंगे ।
राहुल: “अब हम बिज़नेस छोड़ लोगो को ब्लैकमेल करेंगे क्या?”
मैं: “इसमें क्या गलत हैं, वो भी तो यही कर रहे हैं। ”
राहुल: “ठीक हैं, मौका आने पर देखते हैं। तुम ठीक तो हो ना।”
उसका मतलब मैं समझ गयी थी, मेरे चेहरे पर चुदने के बाद की लाली थी।
मैं: “मेरे और जैक के बीच में ऐसा कुछ नहीं हुआ हैं। ”
अगले दिन दोपहर बाद ऑफिस में काम करते वक्त मुझे जैक का फ़ोन आया कि वो बाहर पार्किंग में मेरा इंतजार कर रहा हैं। मैंने उसे कहा मैं अभी आती हूँ। मैंने सोचा राहुल को बोलूंगी तो वो मुझे फिर भाषण सुना देगा। मैंने अपनी तबियत ख़राब होने का बहाना बना राहुल से छुट्टी ली और जैक के पास आ गयी।
जैक: “चलो हम गेस्ट हाउस चलते हैं ”
मैं: “नहीं, वो लोग फिर से आ गए तो।”
जैक: “तो क्या करे, तुम्हारे पास कोई ओर जगह हैं? ”
मैं: “हम लोग मेरे घर जा सकते हैं, यहाँ पास ही में हैं। इस वक्त वहा कोई नहीं होता हैं । ”
मैं और जैक मेरे घर पर आ गए। आज हमें जोसफ का कोई खतरा नहीं था। मैंने उसे कल के जोसफ और सैंड्रा के वीडियो के बारे में बता दिया। वो मेरी चतुराई पर हंसने लगा।
मैं उसे अपने बैडरूम में ले आयी। इतना खूबसूरत लड़का पहली बार मेरे बैडरूम में आया था। मैं उसके चेहरे को ही निहार रही थी। उसकी नीली आँखें मुझे बुला रही थी। मैं उसके नजदीक आ गयी।
मैंने आगे बढ़ उसके हलके गुलाबी होंठो को अपने लाल रंगे होंठो में भर लिए। वो भी मेरे होंठो को चूसने लगा। उसने चूमते चूमते ही मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए और शर्ट को मेरे कंधे से बाहर कर पूरा हाथों से निकाल दिया।
उसका चूमना अभी भी जारी था। एक दूसरे के होंठो को चूसने की आवाज सुनाई दे रही थी। उसने अब अपने हाथ मेरी पीठ ले जाकर मेरे ब्रा का हुक खोल दिया। चूमना जारी रख उसने मेरा ब्रा मेरे शरीर से हटा मुझे टॉपलेस कर दिया।
उसने मुझे चूमना छोड़ा और अपने होंठ मेरे दोनों मम्मो के बीच ऊपर रख दिये । मेरे दोनों मम्मे पकड़ साइड में किये और अपने होंठो के लिए मम्मो के बीच जगह बनाई और वहा चूसने लगा। चूसते चूसते वो मेरे एक मम्मे की मोटाई को दांतो से हलके से काटने लगा।
उसके होंठ अब मेरे निप्पल को अपने में दबा कामुक तरीके से चूसने लगे। मेरे मम्मे अब तक काफी फुल चुके थे और निप्पल भी तन कर खड़े हो गए थे। वो बारी बारी से मेरे कुदरती मम्मो को चूसने के मजे लेता रहा। वो बच्चो की तरह मेरे मम्मो से जैसे दूध पी रहा था, हालाँकि वहा दूध तो था नहीं। पर मुझे एक मीठी सी गुदगुदी हो रही थी।
जब उसका चूसने से मन भरा तो वो सीधा हुआ। मैंने उसका टीशर्ट निकाल दिया और उसको भी टॉपलेस कर दिया। बिना बालो वाला उसका गौरा और चिकना दूध सा सफ़ेद बदन देख मैं खुद को रोक ना पायी और उसको अपने गले से लगा कर अपने मम्में उसके सीने से दबा लिए।
हम दोनों एक दूसरे पीठ पर हाथ फेरते हुए एक दूसरे के शरीर को महसुस कर रहे थे।
अब हम अलग हुए और उसने मेरे स्कर्ट का साइड में लगा हुक खोल दिया। मेरी पेंसिल स्कर्ट थोड़ी ढीली हुई और उसने उसको नीचे खिसका दिया। मैंने उसे अपनी पांवो से बाहर निकाल दिया। उसने बिना देरी किये मेरी पैंटी भी निकाल दी। मैं अब पूरी नंगी उसके सामने चुदवाने को तैयार खड़ी थी।
उसने मुझे बिस्तर के कोने पर बैठाया और पाँव ऊपर उठा कर चौड़े कर दिए। मेरी गहरी गुलाबी चूत उसके सामने खुल गयी। वो अपनी एक गुलाबी ऊँगली मेरी चूत की दरार में फेराने लगा, मैं सिसकियाँ मारने लगी।
उसन आगे झुक का अब अपने वो पतले होंठ मेरी चूत के होंठो पर रख दिए। जिस तरह उसने मेरे मुँह के होंठो को चूसा था उसी तरह वो मेरे चूत के होंठो को भी चूस रहा था। मैं आहें निकाल मदहोश हुए जा रही थी, मेरा पानी निकलना शुरू हो गया। पता नहीं उसको मेरा पानी देख कही बुरा ना लग जाये, पर वो अब अपनी जबान को मेरी चूत की दरार में रगड़ चाटने लगा।
शायद उसको मेरे पानी का स्वाद भा रहा था। मैंने उसके सुनहरे लंबे बालों में अपनी उंगलिया उलझा दी और हाथ फेरने लगी। मजा तो बहुत आ रहा था पर मैं अब जल्दी से उसके लंड को देखना चाहती थी। वो इतना खूबसूरत हैं तो उसका लंड भी तो खूबसूरत होगा । पर उसका मन तो जैसे मेरी चूत को चाटने में ही लग गया था। मैंने उसको उसकी दिल की इच्छा पूरी करने दी।
तभी मेरे मोबाइल पर कॉल आया। मैंने बिस्तर पर पड़े अपने फ़ोन को उठाया तो अशोक का नाम था। उससे बात करते वक्त सिसकी ना निकल जाए इसलिए मैंने जैक को चाटने से रोका और बताया कि मेरे पति का फ़ोन आया हैं । वो रुक गया और मेरी चूत को निहारने लगा। मैंने फ़ोन उठाया।
मैं: “हां अशोक”
अशोक: “अरे तुम थोड़ी देर के लिए घर जा सकती हो क्या?”
मैं: “क्यों क्या हुआ ? ”
अशोक: “अरे वो चार बजे प्लंबर आने वाला था तो मैंने माँ को बोला था घर आने के लिए । माँ निकल गयी हैं घर आने के लिए पर मैं उनको चाबी देना भूल गया था सुबह। तुम्हारे ऑफिस के तो पास ही घर हैं, ज़रा चाबी दे आओ, माँ पहुंचने ही वाली होगी। ”
मैं: “क्या माँ यहाँ पहुंचने वाली हैं !”
अशोक: “तुम्हारे ऑफिस नहीं, हमारे घर पर। तुम क्या घर पर ही हो?”
मैं: “हां मेरी तबियत ख़राब थी तो अभी आयी ही थी।”
अशोक: “फिर ठीक हैं अपना ध्यान रखो, बाय”
मैंने जैक को जल्दी वहा से जाने को कहा। वो अपना टीशर्ट पहनने लगा और मैंने अपनी ब्रा और पैंटी पहन ली। फिर अपने बिखरे कपड़े अलमारी में डाल एक गाउन निकाल पहन लिया। तब तक जैक मुझसे विदा ले बाहर चला गया।
मैंने कपडे पहनने के बाद बाहर आकर देखा, जैक अपनी कार में बैठ वहा से निकल गया। मैंने चैन की सांस ली कि मेरी सासुमां अब तक नहीं पहुंची थी। मैं रंगे हाथों पकड़े जाने से बच गयी। मेरी आधी छुट्टी भी ख़राब हो गयी और काम भी पूरा नहीं हो पाया।
वो तो अच्छा हुआ की सासुमां के पास मेरे घर की चाबी नहीं थी वरना वो आज अपनी संस्कारी बहु की इज्जत को किसी विदेशी के हाथों लुटते हुए देख लेती।
शायद मेरी किस्मत में ही जैक के साथ संगम नहीं लिखा था, ये तीसरी बार था जब जैक और मुझे काम शुरू होने के पहले ही छोड़ना पड़ा था। अच्छी बात ये थी कि हर बार हम कुछ कदम आगे बढ़ रहे थे। शायद अगली बार मौका मिला तो हमारा पूरा मिलन हो जाए। हमारे पुरे मिलन में सबसे बड़ी बाधा था जोसफ।
अगले दिन मैं ऑफिस में पहुंची, इस डर के साथ कि आज शायद सैंड्रा का संदेशा आ जाये कि वो डील कैंसल कर रही हैं। राहुल को भी शायद ये अंदेशा था। जब कि असली स्तिथि से अनजान बाकी का सारा स्टाफ बेसब्री से डील मिलने की खबर का इंतजार कर रहा था । सबके पिछले कुछ समय के अधूरे सपने इस डील के बाद पुरे हो सकते थे।
वो लोग इतने समय से इस डील के लिए इतनी ज्यादा मेहनत कर रहे थे, मुझे अच्छा नहीं लग रहा था कि सिर्फ मेरी वजह से ना सिर्फ राहुल मगर उन सबके सपने भी टूट जायेंगे।
आधा दिन बित गया और मैं राहुल के केबिन में तीन चार बार जाकर पूछ चुकी थी कि कोई समाचार आया कि नहीं। उसने मुझे सांत्वना दी कि जो भी होगा देखा जायेगा, और कुछ खबर आते ही वो मुझे बता देगा। मैंने तो आज अपना लक्की शार्ट कुर्ता भी पहना था, ताकि बुरी खबर दूर रहे ।
दोपहर बाद राहुल ने मुझे केबिन में बुलाया। मेरे हाथ पैर कांप गए, लगता था खबर आ चुकी हैं। मैंने ऊपर वाले को याद किया और बेचैनी से राहुल के केबिन में पहुंची। उसने मुझे बैठने को कहा, उसका चेहरा गंभीर था। मतलब कोई बुरी खबर थी।
राहुल: “सैंड्रा का फ़ोन था, उसको तुम्हारे और जैक के बारे में सब पता चल गया हैं। ”
मैं: “ओह माय गॉड, इस जोसफ के पेट में कोई बात नहीं टिकती। क्या कहा सैंड्रा ने? डील पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ”
राहुल: “पता नहीं, उसने तुम्हे और मुझे अकेले में बुलाया हैं, कुछ बात करनी हैं। ”
मैं: “तो फिर, क्या करे हम?”
राहुल: “चल के देखते हैं, मनाने की कोशिश करते हैं, अगर मान जाए तो अच्छा हैं।”
मैं: “तो चलो उसके ऑफिस, मैं उसको सब बता दूंगी ”
राहुल: “वो कही अकेले में मिलना चाहती हैं। मैंने उसको अपने फार्महाउस पर बुला लिया हैं। तुम चलोगी?”
मैं: “मुझे बुलाया हैं तो जाना ही पड़ेगा, सारी परेशानी मेरी वजह से ही हुई हैं।”
राहुल: “तुम अपने आप को दोष मत दो, चलो चलते हैं।”
राहुल और मैं उसके फार्म हाउस पर पहुंचे। राहुल सोफे पर बैठ गया मगर मैं परेशान हो हॉल में इधर उधर टहल रही थी। वो मुझे शांत रहने की सलाह दे रहा था।
थोड़ी देर में सैंड्रा और जोसफ ने हॉल में प्रवेश किया। सैंड्रा ने एक नजर मुझे ऊपर से नीचे देखा जैसे मुझे अपनी बहु बना लेगी। मैंने भी एक अच्छी बहु की तरह मुस्कुराती रही।
सैंड्रा मुझे पार कर थोड़ा आगे बढ़ी जहा राहुल था और वो दोनों एक कौने में जाकर धीरे धीरे बात कर रहे थे जो मुझे सुनाई नहीं दे रही थी क्यों कि हॉल कुछ बड़ा था।
मैं एक नजर जोसफ को देखा, और नफरत की निगाहो से उसको घूरती रही, ये सब उसी का किया हुआ था। जोसफ अपनी आँखों और हाथों से मुझे कुछ इशारा कर रहा था जो मैं समझ नहीं पा रही थी। शायद मुझे चिढ़ा रहा था।
उसने सैंड्रा और राहुल से नज़रे बचाते हुए अपने दोनों हाथो को मिला इशारा किया, मैंने होंठ हिलाते हुए बिना आवाज के डील बोला, उसने हां में सर हिलाया। फिर वो अपनी तरफ इशारा कर ना का इशारा कर रहा था।
क्या वो ये कहना चाह रहा था कि उसकी वजह से डील कैंसिल हो गयी हैं। मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया। उसने सैंड्रा और राहुल की तरफ इशारा किया, मैंने मुँह बिचकाते हुए जताया कि मुझे उसकी बातों में कोई दिलचस्पी नहीं ।
उसने फिर इशारा करते हुए अचानक अपना हाथ नीचे कर दिया और पीछे से सैंड्रा की आवाज आयी, शायद उसने देख लिया था जोसफ को मुझे चिढ़ाते हुए ।
सैंड्रा : “जोसफ, तुम अभी ऑफिस जा सकते हो। ”
जोसफ: “कोई बात नहीं, मैं रुक सकता हूँ। ”
सैंड्रा : “उसकी जरुरत नहीं, तुम जाओ मैं कह रही हूँ । ”
मुझे अच्छा लगा उसे डांट पड़ी, मैंने थोड़ा मुँह बना कर उसको चिढ़ाया और जोसफ अपना सा मुँह लेकर वहा से चला गया।
अब सैंड्रा और राहुल मेरे पास आये और सैंड्रा ने मुझे देख अपना भाषण सुनाना शुरू किया।
सैंड्रा : “तो राहुल ने तुमको चुना मेरे बेटे को फंसाने के लिए। ”
मैं: “मगर मैं…. ”
सैंड्रा : “बीच में मत बोलो, तुम्हे मौका मिलेगा बोलने का। डील लेने के लिए तुम अपने शरीर को भी बेच देती हो। राहुल ने तुम्हे लालच दिया होगा, कितना धन मिला इसके बदले। बोलो”
मैं: “देखो सैंड्रा, राहुल का इससे कुछ लेना देना नहीं हैं । जो भी था मेरे और जैक के बीच में था, निजी था , डील का इससे कोई लेना देना नहीं।”
सैंड्रा : “डील, उसके बारे में तो तुम दोनों भूल ही जाओ। ”
मैं: “प्लीज, सैंड्रा। मेरी वजह से बहुत से लोगो की मेहनत पानी में चली जाएगी। मैं माफ़ी मांगती हु, अगर जैक के साथ समय बिताने से तुम्हे बुरा लगा हो।”
सैंड्रा : “तुम्हारे माफ़ी मांगने से जैक कैसे ठीक होगा, वो तो तुम्हारे पीछे पागल हो गया हैं।”
मैं: “तुम बोलो तो मैं अब उससे कभी नहीं मिलूंगी। पर डील कैंसल मत करो। ”
सैंड्रा : “ताकि, डील मिलते ही तुम फिर जैक से मिलना शुरू कर दो। ”
मैं: “नहीं, ऐसा नहीं होगा, मैं वादा करती हूँ।”
सैंड्रा : “मैं कैसे यकीन करू?”
मैं :””तुम ही बताओ, मैं कैसे यकीन दिलाऊ”
सैंड्रा : “तुम्हे जैक के मन में अपने लिए नफरत पैदा करनी होगी, ताकि वो खुद तुम्हे भूल जाये”
मैं: “वो कैसे?”
सैंड्रा : “तुम्हे जैक की आँखों के सामने किसी और से चुदवाना होगा, ताकि उसे ये यकीन हो कि तुम किसी के भी साथ सो सकती हो पैसो के लिए ”
राहुल: “सैंड्रा, ये बहुत ज्यादा हो रहा हैं। ये मांग नाजायज हैं। और तुम किसी की इज्जत पर कीचड़ नहीं उछाल सकती। ”
सैंड्रा : “तूम बीच में मत बोलो, ये कदम प्रतिमा का निजी था तो फैसला भी ये ही लेगी। ”
मैं: “तुम मुझे जैक की नजरो में इस तरह गिरा नहीं सकती। मुझे ये मंजूर नहीं। ”
सैंड्रा : “ठीक हैं, फिर डील के बार में भूल जाओ। मैं डील कैंसल करती हूँ, हम वैसे भी कुछ दिनों में अपने देश लौट जायेंगे तुम जैक से मिल तो नहीं पाओगी वैसे भी। मैं झूठा विश्वाश दिला दूंगी उसको तुम्हारे चरित्र के बारे में, और जोसफ उसकी गवाही दे देगा। डील भी जाएगी और जैक भी। ”
मैं सोच में पड़ गयी, ऑफिस के सारे स्टाफ की शक्ले मेरी आँखों के सामने घूम रही थी, राहुल का चेहरा भी उतरा हुआ था। वो मेरे लिए कितना चिंतित था और मेरी सहायता कर रहा था और अब मेरी गलती की सजा इन सबको मिलेगी।
मैं: “प्लीज सैंड्रा ऐसा मत करो, तुम कुछ और ले लो पर ये काम मत करवाओ ।”
सैंड्रा : “ये ही तरीका हैं, हां हैं तो बोलो। ”
मैं: “एक काम करो, तुम जैक को मेरे घर भेज दो, मैं उसके सामने अपने पति के साथ सेक्स करते हुए उसको दिखा दूंगी। उसे थोड़े ही पता की वो मेरे पति हैं। ”
सैंड्रा : “नहीं, कोई ऐसा मर्द होना चाहिए जिसे जैक जानता हो। तुम्हारे पास सिर्फ दो ऑप्शन हैं, जोसफ या राहुल।”
मैंने राहुल की तरफ देखा, उसने आँखें झुका ली। मैं अब उसी दोराहे पर खड़ी थी जहा से एक रास्ता वहा जाता हैं जहा जाने से बचने के लिए मैंने ये नौकरी और ये नयी ज़िन्दगी चुनी थी। अब सारा दारमदार मेरे ऊपर था।
मेरे एक निर्णय से इतने लोगो की खुशिया जुडी हुई थी। मुझे कड़ा फैसला करना था। मैंने सोच लिया मैं त्याग करुँगी। एक बार की ही तो बात थी, इसके बदले कुछ लोगो को हमेशा की खुशियाँ मिल जाएगी।
सवाल ये था कि किसको चुनु। सैंड्रा को उस दिन जोसफ से चुदते हुए देखने के दृश्य अब भी मेरी आँखों के सामने थे। उस दिन मैं मन में सोच रही थी कि काश सैंड्रा की जगह मैं होती, पर आज वो मौका सामने था।
जोसफ के मोटे लंड का अनुभव लेने का अवसर था तो उसके प्रति नफरत भी थी उसने ही मुझे इस मुसीबत में फंसाया था। दूसरी तरफ राहुल था, जिसके मुँह से एक तारीफ सुनने के लिए मैंने कितने पापड़ बेले थे और आज मुझे ऐसे ही सामने से मौका मिल रहा था।
फिर सोचा अगर राहुल को चुना तो रोज ऑफिस में मैं उसका सामना कैसे करुँगी। वैसे भी मुझे उसे जीतना था ना कि धोखे से पाना। वैसे भी मैं कौनसा उस से चुदवाना चाहती थी, उस दिन पार्टी में चूमने तक नहीं दिया था मैंने उसे।
जोसफ तो कल को चला जायेगा, मुझे फिर कभी उसके सामने भी नहीं आना पड़ेगा। जोसफ मेरे ऊपर अपने मोटे लंड का पूरा गुस्सा निकालेगा जब कि राहुल मेरा बहुत ध्यान रखेगा।
मैं: “मैंने फैसला कर लिया हैं, मैं तैयार हु।। ”
राहुल: “प्रतिमा क्या बोल रही हो। तुम्हे ये सब करने की जरुरत नहीं ”
मैं: “नहीं, मैंने बिगाड़ा था, अब मैं ही बनाउंगी। मैं स्वार्थी नहीं हो सकती। ”
सैंड्रा: “ठीक हैं, राहुल तुम तैयार हो ना?”
राहुल: “अगर प्रतिमा को कोई आपत्ति नहीं हैं तो मैं भी तैयार हु। ”
मैं: “मैं राहुल की नहीं, जोसफ की बात कर रही थी। ”
सैंड्रा और राहुल एक दूसरे की तरफ आश्चर्य से देखने लगे। उन्हें यकीन नहीं हुआ कि मैंने राहुल के होते हुए जोसफ को चुना था। पर मैंने काफी आगे का सोच कर बहुत सोच समझ कर ही फैसला लिया था ।
सैंड्रा : “ठीक हैं, कल ग्यारह बजे गेस्टहॉउस आ जाना, तुम्हे जोसफ वही मिलेगा। तुम उसके साथ चुदवाओगी और मैं जैक को ये सब दिखा, उसको तुमसे हमेशा के लिए दूर कर दूंगी ।
राहुल: “प्रतिमा, तुम ठीक तो हो, तुम जोसफ को कैसे चुन सकती हो। मैं तुम्हे ये सब नहीं करने दूंगा।”
मैं: “मुझे करना ही पड़ेगा, इतने लोग जुड़े हुए हैं मेरी इस हां से। ”
सैंड्रा : “वाह, लगता हैं तुम दोनों एक दूसरे को बहुत चाहते हो ”
मैं: “नहीं” राहुल: “हां”
हम दोनों ने एक साथ विपरीत जवाब दिये थे। राहुल ने स्वीकार किया कि वो मुझे प्यार करता हैं। मगर मैंने तो कभी उसे प्यार ही नहीं किया था।
सैंड्रा: “देखो मेरी नजर में तुम दोनों ने मिल कर जैक को फंसाने का प्लान किया था। गलती तुम दोनों ने की थी, सजा सिर्फ प्रतिमा को मिल रही हैं। राहुल को भी सजा मिलनी चाहिए। राहुल की सजा ये हैं कि वो अभी इसी जगह मुझे चोदेगा, और वो भी अपनी माशूका के सामने। ”
राहुल: “मैं ये नहीं कर सकता।”
सैंड्रा : “प्रतिमा तो जोसफ के साथ चुदने को तैयार हैं तो तुम मुझे क्यों नहीं चोद सकते ? तुम क्या नामर्द हो ! कही ये ही तो कारण नहीं कि प्रतिमा ने तुम्हारी बजाय जोसफ को चुना।”
ये सुनकर राहुल गुस्से में लाल हो गया, पर गुस्सा करके भी क्या उखाड़ लेता।
सैंड्रा : “मेरा शक शायद सही हैं, राहुल तुम्हे शर्मिंदा करने के लिए तो प्रतिमा ही काफी हैं। प्रतिमा जरा तुम्हारे आशिक को नंगा करके देखो वो मर्द भी हैं या नहीं। ”
मैं और राहुल एक दूसरे का चेहरा देखने लगे। मैं ये कैसे कर सकती हूँ, वो मेरा बॉस हैं और मैं उसकी इतनी इज्जत करती हूँ और आज वो ही उतार दू। ये शर्म भी एक कारण थी कि जिसके मारे मैंने उसकी बजाय जोसफ को चुना था। मैं वही खड़ी की खड़ी रह गयी।
सैंड्रा : “और फिर मैं फैसला करुँगी कि मुझे इसके साथ चुदवाना हैं या नहीं । मुझे पसंद नहीं आया तो तुम दोनों आपस में चोद के बताओगे ।”
मैं एकदम घबरा गयी, राहुल के साथ नहीं करना था इसी वजह से तो जोसफ के लंड का जोखिम मौल लिया था। मैंने एक नजर राहुल की तरफ़ देखा फिर नीचे देखने लगी । उस दिन पार्टी में उसको चूमने तक नहीं दिया था और आज उसको मज़बूरी में चोदना पड़ेगा।
कही सैंड्रा सच तो नहीं बोल रही, क्या इसी नामर्दी के कारण वो मुझ जैसी खूबसूरत और सेक्सी औरत को देखता भी नहीं था। यहाँ तक कि सैंड्रा जैसी गौरी चमड़ी वाली बला की खूबसूरत औरत को भी मना कर रहा था। शायद रूही इसी वजह से छोड़ कर गयी हो। तब तक राहुल मेरे करीब आ गया।
राहुल: “प्रतिमा तुम मेरे कपड़े उतार सकती हो, घबराओ मत। ”
मैं अब फंस चुकी थी, पहले ही राहुल को चुन लेती तो एक बार इज्जत गवा के बच जाती, पर अब राहुल के साथ साथ जोसफ के साथ भी करवाना पड़ेगा। मेरे लिए तो डबल सजा हो गयी। मगर बचने का कोई रास्ता तो था नहीं।
राहुल अपना सूट तो आते ही खोल चूका था तो मैंने पहले उसकी टाई निकाली और फिर उसके शर्ट को पैंट के बाहर खिंच कर एक एक कर सारे बटन खोलती गयी और अंदर से उसका बनियान दिखने लगा। मैंने उसको सबसे कम कपड़ो में उस पार्टी में हाफ स्लीव टीशर्ट में देखा था। और अब उसका शर्ट निकालने के बाद उसे बनियान में देखा।
उसके हाथो के मसल्स दिखने लगे। उस दिन हाफ स्लीव टीशर्ट में ही उसके मसल्स का अनुमान तो लग गया था पर पुरे आज देखने को मिले। जोसेफ जितनी बलशाली भुजाएं तो नहीं थी पर आम मर्दो से काफी अच्छी थी। वो जिम जाता हैं ये तो मुझे पता चला था , पर इतने समय से जा रहा होगा ये अब पता चल गया था।
मैंने नीचे नजरे झुका कर उसका बनियान भी निकाल दिया। मेरी नजर उसके पेट पर पड़ी, उसके एब्स देख कर मैं बहुत प्रभावित हुई। मेरी तरह वो भी फिटनेस का बहुत ध्यान रखता हैं। उसका सीना एकदम सफाचट था। लगता हैं उसको शरीर पर बाल बिलकुल पसंद नहीं । शायद उसके लंड के आस पास भी वो सफाचट ही होगा।
मैंने उसका बेल्ट खोलने के बहाने अपना हाथ उसके एब्स पर थोड़ा छू कर महसूस कर दिया, वो बहुत सख्त थे। उसके बदन को छूते ही मुझे जैसे करंट लगा और शायद उसको भी।
मैंने उसका बेल्ट का बकल खोल दिया और फिर उसने खुद ही अपने जूते निकाल दिए ताकि मुझे उसकी पैंट निकालने में दिक्कत ना हो। मैंने उसकी पैंट का हुक और चैन खोल धीरे धीरे नीचे बैठते हुए पैंट को नीचे करने लगी। जैसे ही पैंट जांघो तक नीचे आया मैंने देखा उसने अंदर बॉक्सर पहन रखा हैं और उसमे से उसका लंड कड़क हो आगे की ओर निकला हुआ था।
मेरे कपड़े खोलने के दौरान ही लगता था उसका लंड कड़क हो तैयार हो चूका था। मतलब वो नामर्द तो नहीं था। मैं थोड़ा शरमा गयी उसके उस उभार को देख कर। मैंने उसका पैंट पूरा पाँव से निकाल दिया। अब बारी उसके आखरी कपड़े यानी बॉक्सर की थी। उसमे से बाहर झूलता हुआ लंड देख मेरी वैसे ही शरम के मारे हिम्मत नहीं हो रही थी।
मैंने अपने दोनों हाथ उसके बॉक्सर के दोनों तरफ रखे, पता नहीं अनगिनत औरतो ने अपने बॉस का लंड देखा और लिया होगा, मैं उनमे कभी शामिल नहीं होना चाहती थी पर आज शायद वो दिन था। शायद मेरा पहना हुआ लक्की कुर्ता भी आज काम नहीं आया।
फिलहाल मैं उसका बॉक्सर धीरे धीरे नीचे खींचने लगी, और उसके नीचे आते ही उसका लंड स्प्रिंग की तरह उछलते हुए मेरे चेहरे की तरफ लपका। मैं डर के थोड़ा पीछे खिसकी और गौर से देखा। उसका लंबा लंड मेरे सामने था। वहा का हिस्सा भी सफाचट था। मैं भी अपनी चूत सहित शरीर के हर हिस्से की वैक्सिंग कर चिकना रखती हु। हमारी एक और आदत मिलती थी।
मोटाई जोसफ़ के लंड जितनी तो नहीं थी पर सामान्य मर्दो के लंड की साइज से लंबा और मोटा था। शायद ये मुझे उसी दिन मिल जाता अगर मैं उसको पार्टी में मुझे चूमने देती।
मैंने बॉक्सर पूरा निकाल दिया और खड़ी हो गयी। वो एक पहलवान की तरह सीना फुलाये और अपना लंड खड़ा किये दिखा रहा था। शायद सैंड्रा और मुझे साबित कर रहा था कि वो असली मर्द हैं।
सैंड्रा : “राहुल अब तुम्हारी बारी, तुम …”
इससे पहले की सैंड्रा अपनी बात पूरी करती राहुल मेरी तरफ आगे बढ़ा और मेरे कुरते को नीचे से पकड़ लिया। मैं डर के मारे उसकी आँखों में देखने लगी, क्या वो सच में मुझे नंगा करने वाला था।
राहुल: “हाथ ऊपर करो प्रतिमा।”
वो मुझे नंगा करने के लिए कितना उतावला हुए जा रहा था, मैंने उसकी आँखों में घूरते हुए अपने हाथ ऊपर किये। मैं तो उसे वैसे ही मिलने वाली थी फिर उतावलेपन का क्या फायदा, जो भी करना हैं प्यार से करे। मेरे हाथ ऊपर करते ही उसने मेरा कुर्ता ऊपर उठाना शुरू कर दिया और सर से पूरा निकाल दिया।
मुझे बहुत शर्म आयी, अपनी इच्छा से नंगा होना और किसी के हाथो जबर्दस्ती नंगे होने में फर्क होता हैं। मैं अब ब्रा में खड़ी थी। नजरे नीचे की तो राहुल का लंड नजर आया, तो शरमा के फिर ऊपर देखने लगी। उसकी आँखें मेरे ब्रा से झांकते हुए मम्मो पर ही थी। आज तो बड़ी बेशर्मी से मेरे शरीर को निहार रहा था और ऑफिस में जब मैं दिखाने की कोशिश करती थी तब क्या हुआ था इसे !
वो अब नीचे बैठ गया और मेरी कैप्री पैंट को नीचे खिसकाने लगा और मेरी पैंटी दिखने लगी। अब तक की घटनाओ से मेरा थोड़ा पानी निकल गया था और पैंटी भी गहरे रंग की थी तो उसको साफ़ दिख गया मेरी क्या हालत हैं। हम दोनों एक दूसरे में इतना खो गए कि हम भूल ही गए थे कि सैंड्रा भी वहा खड़ी हैं।
मैंने देखा उसका लंड अब फूल कर और भी मोटा और लंबा हो चूका हैं। वो मुझे पहली बार इतने कम कपड़ो में देख रहा था, पता था हालत तो उसकी खराब होनी ही थी। वो एक बार फिर खड़ा हुआ।
उसने मुझे पीछे घुमाया और मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। मेरे सीने पर कसाव ढीला करते ही उसने मुझे फिर अपनी तरफ घुमाया। वो मुझे नंगा करते हुए मेरा शर्माता चेहरा देखना चाहता था। उसने मेरे खुले लंबे स्ट्रैट किये हुए बालो को आगे से पीछे किया ताकि उसको मेरे मम्मे पुरे दिखे। मैंने शर्म के मारे नजरे नीचे ही की हुई थी।
उसने अपने दोनों हाथों की दो दो उंगलिया मेरे ढीले हो चुके ब्रा के नीचे रखी और ऊपर उठा मेरे मम्मे बाहर निकालने की कोशिश शरू करने ही लगा कि सैंड्रा की आवाज आयी।
सैंड्रा: “रुको”
हमने सैंड्रा की तरफ देखा, उसने अपने कपडे निकालना शुरू कर दिया था।
सैंड्रा: “मुझे यकीन हो गया हैं कि राहुल नामर्द नहीं। वैसे भी तुम दोनों के लिए ये सजा से ज्यादा मजा लग रहा हैं। राहुल की सजा तो मुझे चोदने में हैं। ”
सैंड्रा ने अपने ऊपर के कपड़े निकाल दिए थे और अब वो सिर्फ लैस वाले खूबसूरत काले ब्रा और पैंटी में थी। उसके संगरमर जैसे बदन पर काले ब्रा और पैंटी काफी आकर्षक लग रहे थे ऊपर से उसके गौरे गौरे बड़े वाले चिकने मम्मे क़यामत थे। उसके बदन को देख कर तो राहुल मुझे भी भूल जायेगा।
राहुल फिर मेरी तरफ मुड़ा और एक बार फिर अपने दोनों हाथ मेरी ब्रा की तरफ लाया। मुझे उस वक्त बहुत ख़ुशी हुई, सैंड्रा जैसी हसीना को छोड़ कर वो मेरी तरफ आकर्षित था ठीक जैक की तरह। पर इससे पहले कि वो मेरे ब्रा को हाथ भी लगा पाता सैंड्रा ने फिर रोक दिया।
तुम दोनों की इच्छा हैं तो और कभी कर लेना, पर फिलहाल मेरा मूड बन गया हैं तो राहुल तुम सिर्फ मुझे ही चोदोगे। राहुल झुँझला कर सैंड्रा की तरफ बढ़ा।
सैंड्रा : “प्रतिमा तुम जाना मत। तुम अपने आशिक को मुझे चोदते हुए देखने के मजे लो या जलो तुम्हारी इच्छा।”
राहुल ने सैंड्रा के करीब पहुंच गुस्से में उसके ब्रा और पैंटी को खिंच कर निकाला और उसे नंगा कर दिया। जोर से खींचने से सैंड्रा के मम्मे ऊपर नीचे जेली की तरह उछलने लगे। राहुल ने उसके मम्मो को काटा और खिंच कर छोड़ दिया।
मैंने अपने ब्रा को बांधते हुए देखा, सैंड्रा के गौरे मम्मे पर दाँतों के काटने से लाल रंग का घेरा बन गया था। मुझे लग गया आज वो अपनी मर्दानगी सैंड्रा को साबित करके रहेगा। उसने सैंड्रा के दूसरे मम्मे का भी यही हाल किया और सैंड्रा हल्का सा चीखने के अलावा कुछ न कर पायी।
मैंने शुक्र मनाया, एक तो मैं राहुल के कोप का शिकार नहीं बनूँगी वरना अशोक को क्या बोलती ये लव बाइट किसने दिया। दूसरा ये कि मुझे अब दो लोगो के साथ नहीं चुदवाना पड़ेगा। मैंने जल्दी से अपने बाकी के कपड़े भी पहन लिए।
राहुल अब सैंड्रा के मम्मो को बुरी तरह से अपने मुँह में भर भर के चूस रहा था और सैंड्रा आहें भरते हुए राहुल के लंड को अपने हाथो में पकड़े रगड़ रही था। वहां का माहौल बहुत गरम हो गया था।
राहुल से मुझे कोई प्यार तो था नहीं, तो मुझे कोई जलन नहीं हो रही थी। ये ख़ुशी जरूर थी कि मैं पहले बिना किसी सफलता के उसका ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास करती रहती थी और आज उसकी प्राथमिकता मैं थी।
जोसफ के मोटे लंड की तरह राहुल मजा तो नहीं दिला पाता मगर राहुल के गुस्से भरे जोश से वो कमी शायद पूरी हो सकती थी।
राहुल ने सैंड्रा के मम्मे छोड़े तो सैंड्रा ने नीचे बैठ कर राहुल का लंड अपने मुँह लिया और आगे का दो तीन इंच का हिस्सा अपने मुँह में अंदर बाहर कर रगड़ने लगी और पीछे के आधे हिस्से पर अपनी पतली उंगलियों से तेजी से आगे पीछे रगड़ने लगी।
सैंड्रा के इस आक्रमण से राहुल अब मुँह फाड़कर आहें भरने लगा। राहुल को पहली बार इस तरह चीखते देख मैं हिल गयी। मैं अपने आप पर काबू रख रही थी।
थोड़ी ही देर में लंड चूसने से सुड़प सुड़प की आवाजे आने लगी थी, शायद राहुल का पानी निकलना शुरू हो गया था, पर सैंड्रा थोड़ी देर और चूसती रही। जब उसने राहुल का लंड अपने मुंह से बाहर निकाला तो लंड पूरा चिकना हो चूका था और सैंड्रा के मुँह से राहुल के पानी की लारे छूटने लगी।
राहुल ने सैंड्रा को खड़े किया और मेरे एकदम नजदीक पड़े टेबल पर लेटा दिया और उसके पाँव टेबल के बाहर थे, जिन्हे राहुल ने अपने हाथों में पकड़ रखे थे।
उसने झुकते हुए अपना मुँह सैंड्रा की चूत पर रखा और उसकी चूत पर इस तरह मुँह मारने लगा जैसे मरे हुए जानवर पर पक्षी अपनी चोंच मार मांस नोचते हैं। वो जब भी अपना मुँह चूत से दूर हटाता तो सैंड्रा चीखती, क्यों कि वो मुँह उठाते वक्त उसकी चूत के होंठो का कोई हिस्सा अपने मुँह में भर कर बाहर खींच रहा था।
सैंड्रा बुरी तरह से सिसकिया मार तेज तेज आवाजे निकाल राहुल को और उकसा रही थी। चूत तो सैंड्रा की चूसी जा रही थी मगर महसूस मुझे भी हो रहा था।
राहुल अब खड़ा हो गया और सैंड्रा की चूत में अपना लंड घुसाने लगा। एक झटके में उसका लंड उसकी चूत में फिसल गया। ये सब जोसफ का किया कराया था, उसने ही सैंड्रा की चूत को बार बार चोद चोद कर पूरा खोल दिया था कि कोई दूसरा मर्द शायद उतने मजे नहीं ले पाए।
मगर मैंने देखा उसका लंड पूरा अंदर नहीं फिसला, तीन इंच जाने के बाद अपने आप रुक गया और राहुल को थोड़ा और जोर से धक्का मारना पड़ा।
राहुल का लंड इतना मोटा तो था कि जोसफ को थोड़ी बहुत टक्कर दे सकता था। मैं अपने बारे में सोचने लगी। कल जब जोसफ मुझे चोदेगा और मेरा छेद एक बार में ही बड़ा कर देगा तो ! मेरा पति अशोक तो फिर मेरे मजे ही नहीं ले पायेगा। अशोक का तो राहुल से थोड़ा पतला लंड हैं।
मेरी तो ज़िन्दगी भर की सेक्स लाइफ ख़राब हो जाएगी, क्यों कि मुझे भी मजा नहीं आएगा। शायद तब मुझे राहुल ही सहारा दे पायेगा, वैसे भी अब तो वो मुझे चोदने के लिए तैयार हो गया था। मेरे पास जरुरत पड़ने पर बैकअप प्लान था।
अपने बारे में सोचते सोचते मैं उन दोनों के बारे में भूल गयी जो वहा लगे पड़े थे। सैंड्रा अब दहाड़े मारते हुए चीख रही थी क्यों कि राहुल अब जानवरो की तरह उसे चोदते हुए उसको सबक सीखा रहा था। मेरा दिल दहल उठा उसका ये वहशी रूप देख कर। जोसफ का लंड जरूर जानवरो जैसा हैं पर उसने चुदाई इंसानो की तरह ही की थी।
शायद हर मर्द अपनी भड़ास औरतो की चूत पर ही निकालता हैं। ये राहुल क्या कभी मुझ पर भी इसी तरह जानवरो की तरह भड़ास निकालेगा। सैंड्रा को तो फिर भी जोसफ की आदत हैं वो सहन कर लेगी, पर मैं कैसे करुँगी। एक तरफ सैंड्रा की चीखें तो दूसरी राहुल के धक्को से ठाक ठाक की आवाजे तीव्र गति से ऊँची आवाजे। एक डरावना माहौल हो चूका था
मेरी चूत में किसी ने चींटिया छोड़ दी हो वैसा लगने लगा। ध्यान देने वाली बात थी सैंड्रा दर्द से चीख रही थी फिर भी राहुल को भड़काते हुए और जोर से करने को बोल रही थी। वो क्यों अपने पैरो पर पत्थर मार रही थी समझ नहीं आया, कुछ औरतो के अरमान बहुत ज्यादा ही जंगली होते हैं।
एक सामान्य आदमी इतनी देर में थक कर रुक जाता पर राहुल की गति में बिलकुल बदलाव नहीं आया। ऐ.सी. चालू होने के बावजूद राहुल के पसीना बहने लगा था। वो तो जैसे जिम में था और सैंड्रा कोई कसरत करने की मशीन थी। मैं अब राहुल की परफेक्ट शेप वाली गांड और जाँघे देख रही थी।
उसकी सारी मसल्स चोदने में लगी शक्ति से अकड़ कर फुल गयी थी। अब मेरी खुद की चुदने की इच्छा होने लगी थी, पिछली बार सैंड्रा को जोसफ के साथ करते देख मैंने अपने हाथों से अपना कर लिया था पर यहाँ तो मैं कही जा भी नहीं सकती थी सैंड्रा ने मना किया था।
थोडी देर इसी तरह चोदने के बाद राहुल ने सैंड्रा चोदना बंद कर उसी टेबल पर उल्टा लेटा दिया और उसके पाँव नीचे जमीन पर सीधे खड़े थे।
राहुल उसकी गांड के पीछे खड़ा हुआ और अपने एक हाथ से उसकी गांड को चौड़ा किया और दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़ कर उसकी चूत में गुसा दिया , लंड ज्यादा बिना परेशानी के बड़ी आसानी से अंदर चला गया था और राहुल ने अगले ही क्षण वापिस निकाल दिया।
उसको कुछ सुझा और उसने अपना लंड सैंड्रा की गांड के छेद में घुसाने की कोशिश की। मगर लंड की टोपी से ज्यादा अंदर जा ही नहीं पाया।
सैंड्रा एकदम चीखी और पीछे डालने से उसको मना किया । मुझे याद आया पीछे का छेद तो उसने जैक के लिए सुरक्षित रखा हुआ हैं ताकि किसी मोटे लंड से जैक वाला छेद चौड़ा ना हो जाये।
वैसे भी राहुल का लंड अभी गुस्से से फूलकर कुछ ज्यादा ही मोटा लग रहा था, सैंड्रा का छेद उसे सहन नहीं कर पायेगा। राहुल जबरदस्ती उसके गांड के छेद को भेदने की कोशिश कर रहा था और सैंड्रा अपना हाथ पीछे ले जाकर उसको रोक रही थी। राहुल ने सैंड्रा की पतली कलाइयों को पकड़ा और उसकी कमर पर रख अपने एक हाथ से दबोच लिया।
राहुल ने अब फिर अपना पूरा जोर लगा अपना लंड सैंड्रा की चूत में घुसाना शुरू किया और वो थोड़ा थोड़ा अंदर जाने लगा, मगर अब सैंड्रा के चीखे सबसे तेज थी, वो दर्द की चीखे थी ये पक्का था। मुझे उस पर दया आने लगी, राहुल को उस पर ऐसा जुल्म नहीं करना चाहिए था, भले ही उसने हमारे साथ कुछ भी किया हो।
सैंड्रा अपने जाल में खुद फंस चुकी थी और तड़प रही थी। दूसरी तरफ राहुल दो इंच से ज्यादा अपना लंड उसकी गाड में नहीं डाल पा रहा था। वो जितना जोर लगाता सैंड्रा उतना चीखती। राहुल से अब और अंदर नहीं डाल पा रहा था तो उसने मेरी तरफ देखा और मदद मांगी ।
राहुल:”प्रतिमा, तुम इस छिनल की गांड पकड़ कर चौड़ी करो मैं इसमें और अंदर डालता हूँ। ”
मैं सैंड्रा की हालत देख बिलकुल नहीं हिली, इस पर राहुल मुझ पर चिल्लाया।
राहुल: “करो ना, इसने हमारे साथ क्या किया नहीं पता क्या।”
मैं सहम कर पूरा हिल गयी। मैंने आगे बढ़ कर अपने दोनों हाथ सैंड्रा की गांड के दोनों हिस्सों पर रखे। उसकी गांड मेमोरी फोम की तरह नाजुक और मुलायम थी।
मैंने दबा के उसके गांड के दोनों हिस्सों को एक दूसरे से दूर कर उसकी दरार को चौड़ा किया। बड़ी आसानी से उसकी दरार खुल गयी और मैंने उसकी गांड का गुलाबी छेद देखा जो पूरी तरह से राहुल के मोटे लंड से भर कर फंसा हुआ था।
मैं जैसी ही दरार खोली तो राहुल का लंड खिसकता हुए थोड़ा और अंदर गया और साथ ही सैंड्रा जोर से चीखी।
राहुल ने मुझे और जोर लगा के गांड चौड़ी करने को कहा और मैंने मन मार कर अपना जोर लगाया और साथ ही साथ राहुल ने भी और एकदम से उसका लंड एक इंच एक साथ अंदर घुस गया और पीछे से सैंड्रा की दहाड़।
मैं ऐसे ही पकड़े खड़ी रही और अब राहुल थोड़ा बहुत आगे पीछे हो धक्के मारने लगा। उसका लंड अटक अटक कर सैंड्रा की गांड चोदने लगा। सैंड्रा अब लगभग रोते हुए चीख रही थी।
थोड़ देर में ही राहुल का लंड अब सैंड्रा की गांड को गीला कर चूका था तो ज्यादा आराम से आगे पीछे हो चोदने लगा। जिससे सैंड्रा की चीखे थोड़ी कम हो गयी और मैंने उसकी गांड को छोड़ दिया। राहुल अब भी जोर जोर से सैंड्रा की गांड पर चोट मार रहा था जिससे ठाप ठाप ठाप की आवाज आने लगी। राहुल इस बीच हिंदी में उसको गालियां देते हुए गुस्सा निकाल रहा था।
स्साली सफ़ेद चुड़ैल, बड़ा शौक था मुझसे चुदाने का अब ले। आज तेरी ऐसी गांड फाड़ूंगा कि दस दिन तक चुदाना तो दूर चल भी नहीं पाएगी।
राहुल के मुँह से पहली बार ऐसी भाषा सुन मैं शर्मिंदा हो गयी। उससे मुझे ये सब उम्मीद नहीं थी। शायद वो अपने साथ मेरा भी बदला सैंड्रा से निकाल रहा था।
सैंड्रा: “आअह्ह, क्या बोल रहा हैं दूसरी भाषा में, अहहह, गाली दे रहा हैं !”
राहुल: “नहीं, तुम्हारे फिगर की तारीफ़ कर रहा हूँ। ”
सैंड्रा : “प्रतिमा, अब तुम कल देखो, मैं तुम्हारी क्या हालत करवाती हूँ जोसफ से। राहुल की वजह से मैं दस दिन लंगड़ा के चलूंगी तो तुम जोसफ की वजह से एक महीना लंगड़ा के चलोगी। तुम्ही ने मेरी गांड पकड़ कर चौड़ी की थी ना।”
मैं अब थर थर कांपने लगी, मुझे तो उस पर दया आ रही थी, पर राहुल की वजह से मैं खुद अब फंस चुकी थी। कल तो जोसफ मेरी जान ही निकाल देगा। सैंड्रा ने कभी जोसफ का जानवर अपनी गांड में नहीं लिया, वो अब मेरी गांड में डलवायेगी ! इसके लिए तो दुनिया का कोई भी जैल लुब्रीकेंट नहीं बना हैं।
राहुल: “उसके साथ कुछ मत करना, उसको मैंने ही करने को बोला हैं। तुम वादा करो कल इसे ज्यादा परेशान नहीं करोगी तो मैं तुम्हे अभी छोड़ देता हूँ। तुम्हे लंगड़ा के नहीं चलना पड़ेगा। ”
सैंड्रा: “ठीक हैं छोडो मुझे। ”
राहुल ने उसे छोड़ दिया। सैंड्रा अब खड़ी हो गयी। उसका लुका पीटा चेहरा बता रहा था उसकी क्या हालत हुई थी। मैंने उसको भोली शकल बनाते हुए सॉरी कहा।
सैंड्रा : “कोई बात नहीं, इसमें तुम्हारी गलती नहीं। आओ राहुल ।”
ये कहते हुए उसने राहुल को सोफे पर बैठाया, और खुद उसकी गोद में दोनों तरफ पाँव चौड़े कर बैठ गयी। और उसका लंड अपनी चूत में घुसा दिया। सोफे का सहारा ले उसने ऊपर नीचे जोर जोर से उछलते हुए राहुल को चोदना शुरू कर दिया। ये नजारा दर्दनाक नहीं था पर प्यारा था। दोनों की मजे के मारे आहें निकलने लगी।
उनकी वो क्रिया और आवाजे सुन मेरे पुरे बदन में जैसे नशा चढ़ने लगा। मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था मेरी पैंटी काफी गीली हो चुकी थी। मैं बाथरूम में जाने लगी पर सैंड्रा ने देख रोक लिया।
सैंड्रा : “जब तक हमारा पूरा ना हो, तुम जा नहीं सकती। ”
मैं: “मुझे वाशरूम जाना हैं, अर्जेंट। ”
सैंड्रा : “मुझे पता हैं क्यों जाना हैं , शर्माओ मत , ये नेचुरल हैं। जो भी करना हैं यही कर लो। ”
उसकी बातें सुन मैं शरमा गयी। खड़ी हो तड़पती रही। उन लोगो ने चोदना जारी रखा।
आह्ह आह्ह ऊह्ह्ह ऊह्ह्ह उम्म आह्ह आह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह हम्म्म्म
राहुल के लंड पर फिसलती सैंड्रा की चूत का नजारा मैं देख देख कर अपने को रोक नहीं पा रही थी। राहुल से शर्म भी आ रही थी। मेरे सब्र का बांध अब टूटने लगा था।
मैं राहुल के पीछे की तरफ साइड में जाकर खड़ी हो गयी। सैंड्रा मुझे देख सकती थी पर राहुल नहीं। मैंने एक हाथ अपने मम्मे पर रख मसलना शुरू किया और दूसरा अपनी कैप्री पैंट के ऊपर से ही अपनी चूत पर रख हल्का रगड़ना शुरू किया।
सैंड्रा : “प्रतिमा, कपड़े खोल के कर लो, किसी को बुरा नहीं लगेगा। ”
उसके बोलने की ही देर थी और मैंने अपने नीचे वाले हाथ से अपनी पैंट को एक झटके में पैंटी सहित नीचे कर दिया।
सैंड्रा मेरी तरफ देख बोली: “क्या मस्त चूत हैं तुम्हारी।”
ये सुनते ही राहुल ने गर्दन मोड़ी और मेरी तरफ देखने लगा। वो मेरी चूत देख पाता उसके पहले ही मैंने अपना हाथ अपनी चूत पर रख छूपा लिया। फिर भी उसको मेरी चूत के साइड का नंगा एरिया और कूल्हों की हड्डी दिख गयी थी। मेरी नीचे की शेप का उसे अंदाजा हो गया था। वो मुझे ही घूर रहा था और मैंने शर्म के मारे अपना दूसरा हाथ भी नीचे ला ढक दिया।
मेरी तो जैसी सारी इच्छा ही मर गयी थी। मैंने सावधानी से एक हाथ से चूत ढकते हुए दूसरे से अपनी पैंट फिर ऊपर खिंच पहन ली। सैंड्रा और राहुल की आहें लगातार जारी थी और साथ ही मेरी चूत में चूल मच रही थी। मैं वापिस आकर सैंड्रा के पीछे आकर बैठ गयी।
मैंने देखा सैंड्रा की चूत से जैसे दुध की नदिया बह रही थी और सफ़ेद धाराएं राहुल के लंड को पूरा लपेट चुकी थी। यहाँ से राहुल सैंड्रा के पीछे छुपा था और सैंड्रा की पीठ मेरी तरफ थी। मैं सोफे पर पीछे खिसक कर पीठ टिकाये बैठ गयी। पैंट थोड़ी नीचे खिसका कर अपनी पैंटी में हाथ डाल रगड़ने लगी।
मेरे नीचे का माहौल पूरा बरसाती था। पैंटी नीचे पूरी गीली हो चुकी थी। मैं रगड़ रगड़ कर अपना काम पूरा करने लगी। उधर वो दोनों जोर जोर से चिखने लगे। शायद झड़ने वाले थे। अब भर भर के पानी सैंड्रा की चूत से निकल रहा था और राहुल की आहें भारी हो गयी थी उसने अपना पानी लगभग खाली कर दिया था। पर मेरा अभी नहीं हुआ था।
दोनों चीखते हुए झड़ कर शांत हो गए। मैं अभी भी अपनी चूत रगड़े जा रही थी। मेरे कुछ ही सेकंड बाकी थे। परन्तु सैंड्रा अब राहुल के ऊपर से उठने लगी।
मैंने जल्दी से उठ कर अपने कपड़े ऊपर कर लिए और उन दोनों ने शायद हलकी सी झलक देख ली थी कि मैंने अभी अभी बंद किया हैं। मैं वही खड़ी हो गयी। सैंड्रा ऐसे ही नंगी मेरे पास चलते हुए आयी और अपना हाथ हलके हलके से मेरी चूत पर रगड़ने लगी।
मैं तो झड़ने के एकदम मुहाने पर खड़ी थी तो उसके हाथ से होती रगड़ से मेरे अंदर कम्पन होने लगा और मैं खड़े खड़े ही आहें भरने लगी और सैंड्रा हंसने लगी। उसने मुश्किल से दस बार अपना हाथ मेरी कैप्री पैंट के ऊपर से ही मेरी चूत पर रगड़ा और मैं खड़े खड़े ही चीखते हुई झड़ गयी।
सामने से राहुल हम दोनों को देख रहा था, और मैं शर्म से जमीन में गड़ी जा रही थी। सैंड्रा मुझ पर खिलखिलाते हुए आगे बढ़ी और फ़ोन से उसने अपने ड्राइवर को बुला लिया लेने आने के लिए।
सैंड्रा: “राहुल वाशरूम किधर हैं?”
राहुल: “चलो मैं बताता हूँ, प्रतिमा तुम्हे भी जाना हैं वाशरूम।”
मैंने ना में सर हिला दिया।
सैंड्रा : “वो तो पहले ही कपड़ो सहित नहा चुकी हैं अपने ही पानी से । मैंने बोला था कपड़े निकाल कर कर ले। ”
राहुल और सैंड्रा ने अपने कपड़े उठाये, वाशरूम में गए और थोड़ी देर बाद कपड़े पहने हुए आये। मैं तब तक वही खड़ी थी। मेरे कपड़े नीचे से गीले थे और थोड़ा असहज महसूस हो रहा था। मेरा कुर्ता बिलकुल ठीक था। इस लक्की कुर्ते ने मेरी इज्जत बचा ली थी ।
सैंड्रा का ड्राइवर आ गया था वो वो जाने लगी।
सैंड्रा : “थैंक यू राहुल, इस मजेदार चुदाई के लिए। प्रतिमा कल ठीक ग्यारह बजे गेस्ट हाउस पहुंच जाना। आज तो तुम्हे कुछ नहीं मिला, कल बहुत कुछ मिलेगा। बाय ”
सैंड्रा चली गयी और मैं उसको ताकते रह गयी। शाम हो चुकी थी और ऑफिस बंद होने वाला था और अब वापिस ऑफिस नहीं जा सकते थे। सीधा घर ही जाना था पर फार्म हाउस काफी बाहरी इलाके में था तो रिक्शा कैब मिलना मुश्किल था। मैंने राहुल की तरफ देख फिर नीचे देखने लगी।
राहुल : “मेरे पास यहाँ रूही की एक दो ड्रेस पड़ी हैं। तुम वो पहन सकती हो। ”
वो अंदर गया और हाथ में रूही की एक फ्रॉक वाली ड्रेस लेकर आया। मैं वो ड्रेस लेकर बाथरूम में गयी, मेरा कुर्ता हालाँकि ख़राब नहीं था पर फ्रॉक के साथ कुर्ता पहन नहीं सकती थी तो खोल दिया।
कैप्री पैंट और पैंटी गीली थी तो उसको खोल अपना शरीर नीचे से साफ़ किया। फिर सीधा फ्रॉक पहन ली। अंदर पैंटी नहीं पहने होने से थोड़ा खाली खाली लग रहा था पर कोई उपाय नहीं था।
मैंने ऊपर से नीचे देखा, वो एक बहुत खूबसूरत ड्रेस थी और मुझ पर फब रही थी। हालांकि किसी और की ड्रेस थी पर रूही तो अब आने वाली नहीं, मेरी इच्छा थी मैं इसे रख लू। मैं ख़ुशी ख़ुशी बाहर आयी। मेरे सामने आते ही राहुल मुझे आँखें फाड़ एकटक देखता ही रह गया। उसके मुँह से एक बार सिर्फ “रूही” निकला।
वो मुझ में आज भी रूही को ही देखता हैं। मुझे उसके दर्द का अहसास हुआ पर मैं उसके दर्द का इलाज नहीं थी। उसने मेरी तारीफ़ की कि मैं उसे रूही की याद दिला रही हु और ये ड्रेस मेरे लिए ही बनी हैं।
उसने मुझे वो ड्रेस रखने की इजाजत दे दी। मैं बहुत खुश हुई। वो मुझे घर तक छोड़ने आया और पुरे रास्ते वो बार बार मुझ देख मुस्कुराते रहा और मैं भी उसको मुस्कुराते हुए जवाब देती रही।
राहुल ने विदा लेते वक्त मुझे कल के लिए बेस्ट ऑफ़ लक बोला और कहा कल जोसफ के साथ काम ख़त्म होने पर मैं सीधा घर पर जा सकती हूँ, मेरी तबियत ख़राब होने के चांस हैं।
अच्छा था कि अशोक नहीं था वरना क्या सोचता, गयी थी कुछ ओर पहन कर और आयी कुछ ओर पहन कर। मैंने कपड़े बदल लिए और फिर याद आया मेरे अपने कपड़े तो वहा बाथरूम में ही छोड़ आयी।
मेरा लक्की कुर्ता वहा छूट गया था, जिसकी मुझे कल जरुरत पड़ेगी। ये उसका अपशकुन था मेरे साथ कल जो होने वाला था।
ग्यारह बजे मुझे गेस्टहॉउस पहुंचना था और चिंता मेरे चेहरे पर साफ झलक रही थी।
मैंने अपनी पिछली तैयारी के हिसाब से दर्द निवारक गोली और एक्स्ट्रा कपड़े ले लिए। मैंने डॉक्टर के पास जाकर गर्भनिरोधक इंजेक्शन लगवा लिया जो मुझे गर्भवती नहीं होने देगा। मुझे वो लुब्रीकेंट जैल चाहिए था जो सैंड्रा ने इस्तेमाल किया था।
पर वो तो कोई विदेशी प्रोडक्ट था, इतना जल्दी मिलना मुश्किल था। फिर भी मैं थोड़ा जल्दी निकली और सुपर स्टोर और मेडिकल पर गयी पर वैसा कुछ नहीं मिला। इस तरह के सामान शायद खुले में नहीं बिकते हैं, ऑनलाइन ही खरीदने पड़ते हैं शायद।
मेरी उम्मीद सैंड्रा का जैल था, वो तो वही पड़ा होगा ले लुंगी। मैं ठीक ग्यारह बजे गेस्ट हाउस पहुंची। दरवाजा जोसफ ने खोला । कपड़ों के नाम पर उसने शरीर पर सिर्फ एक बॉक्सर पहना था, उसके घर का शायद यही पहनावा था।
मुझे देख आश्चर्य करने लगा, उसे उम्मीद नहीं थी की मैं आ जाउंगी। पर मैं भी हिम्मतवाली थी, उससे घबराने वाली नहीं थी। वो दरवाजा रोक कर मुझे ही घूर रहा था, जैसे वही खड़ा खड़ा ही मुझे चोद देगा।
पीछे से सैंड्रा के बुलाने पर वो हटा और मैं अंदर आ गयी। जैक वहां नहीं था। सैंड्रा मेरे पास आयी।
सैंड्रा : “तुम पांच मिनट लेट हो। जितना हो सके जैक को अहसास दिलाना कि तुम्हे उसमे रूचि नहीं। जरुरत पड़ने पर मैं तुमको निर्देश देती रहूंगी और तुम दोनों वैसा करते रहना। जोसफ आज तुम अपना पूरा जोर लगा देना। प्रतिमा तुम जैक को यकीन दिला दो कि तुम्हे जोसफ जैसे मर्द चाहिए ना कि जैक जैसे बच्चे। ”
जोसेफ : “इसकी क्या जरुरत हैं, समझा कर भी देख सकते हैं।”
सैंड्रा : “तुम अपना दिमाग मत लगाओ, जैसा बोला हैं वैसा करते रहना। जैक के आने के बाद मुझे तुम दोनों की ना नहीं सुननी हैं। अब जल्दी शुरू करो इसके पहले कि जैक वाशरूम से बाहर आ जाये।”
मैं: “मुझे वो जैल चाहिए। ”
सैंड्रा बैडरूम में जैल लेने गयी।
जोसफ : “आर यू सीरियस? तुम अपनी इच्छा से आयी हो?”
तभी सैंड्रा आ गयी हाथ में जैल की डिब्बी लेकर और मुझे दे दिया। जोसफ फिर चुप हो गया।
सैंड्रा:”जल्दी से पोजीशन लो, जैक बाथरूम से आता होगा।”
जोसफ: “मैं किसी के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकता। क्या ये अपनी इच्छा से आयी हैं ?”
सैंड्रा: “ये मेरा आर्डर हैं जोसफ। प्रतिमा तुम्हे करना हैं या नहीं?”
मैं: “जोसफ मैं अपनी इच्छा से आयी हु, तुम मेरी चिंता मत करो। ”
जोसफ : “जैसी तुम्हारी इच्छा।”
जोसफ जब मुझसे पहली बार मिला था तो मुझे देख कर उसने गंदा कमेंट किया था और आज जब उसे मौका मिल रहा था तो वो आनाकानी कर रहा था। ये बड़ा अजीब मामला था। फिलहाल वो तैयार हो गया था। सैंड्रा ने हम दोनों को अपने कपड़े जल्दी से निकालने को कहा।
मैं मिडी ड्रेस पहन कर आयी तो मैंने एक बार में उसे नीचे से उठा ऊपर कर सर से निकाला और मैं अब ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। जोसफ को भी सिर्फ बॉक्सर निकालना था उसने कर दिया। मेरी नजर उसके लंड पर गयी। मुझे मेरी ककड़ियो की याद आ गयी। मैं तो इस स्तिथि के लिए तैयार ही थी।
जोसफ ने मुझे पीछे मुड़ा कर सोफे के साइड से हेडरेस्ट पर झुकाया और मेरी पैंटी को निकाल दिया। फिर अपने लंड को एक डंडे की तरह इस्तेमाल करते हुए मुझे मेरी गांड पर हंटर मारने लगा। उसका लंड सच में बहुत भारी था और मेरी गांड पर पड़ते लंड रूपी हंटर से चटाक चटाक की आवाजे आने लगी।
उस मार से हल्का मीठा दर्द भी हो रहा था। थोड़ी देर चटाके मारने के बाद उसने मुझे सीधा कर दिया। मैंने देखा उसका लंड अब कड़क हो कर खड़ा हो गया था। वो अब थोड़ा और मोटा और लंबा हो चूका था। इतने मोटे लण्ड को इतने करीब से देख कर मैं थोड़ा डरी कि इसको अपने अंदर लेना होगा। मेरे मन में शंकाये उत्पन्न होने लगी।
उसने अब मेरा ब्रा भी निकाल कर पूरा नंगा कर दिया। वो अपने काले मोटे भद्दे होंठ आगे लाया, और मेरे मम्मो को अपने बड़े मुँह में भर दिया और चूसने के मजे लेने लगा। उसके होंठ खुरदरे थे तो मेरे मम्मो को रगड़ कर करंट पैदा कर रहे थे। तभी बाथरूम के दरवाजे की आहट हुई और सैंड्रा ने लंड चूसने को कहा।
मुझे बिलकुल सोचने का मौका नहीं मिला और अब जोसफ का मोटा लंड मुझे मुँह में लेना था। मैं जल्दी से नीचे बैठी और जोसफ के लंड की टोपी को अपने मुँह में डाल दिया।
उसका लंड पकड़ने पर ऐसा लगा जैसे किसी की कलाई पकड़ ली हो। आधा किलो वजन तो रहा होगा उसके लंड का। उसके लंड की टोपी ही इतनी बड़ी थी कि सिर्फ इसको चुसो तो ही आपका काम हो जाये।
जैक बाथरूम से बाहर आया, उसकी गर्लफ्रेंड जोसफ के लंड को चूस रही थी। मैंने उससे नज़रे नहीं मिलाई। मैं जोसफ के लंड के बाकी हिस्से को अपनी उंगलियों से रगड़ रही थी। मेरी उंगलिया उसके लंड को पूरा घेर भी नहीं पा रही थी। मैं अपनी उंगलिया उसके लंड के चारो तरफ घुमा घुमा कर लहरदार अंदाज़ में रगड़ती रही।
मेरा एक मकसद ये था कि जितना हो सके उसका लंड चाटने चूसने से ही काम हो जाये तो मैं चुदने से बच जाउंगी या फिर उसको झड़ने के जितना करीब हो ले आँऊगी ताकि चोदते हुए उसका काम जल्दी ख़त्म हो जायेगा तो मेरी तकलीफ कम होगी।
उसके लंड पर इतनी ज्यादा जगह थी कि सब तरफ हाथ फेरने के लिए कि थोड़ा समय लगा । फिर मैंने उसका लंड पकड़ एकदम ऊपर की तरफ खड़ा कर दिया और उसके नीचे लटका गुदगूदेदार गुब्बारा और उसमे फंसी अंटियो को देखा।
मैंने उसकी अंटियो को अपने मुँह में भर लिया और चूसती रही। अंटियो को चूसते हुए मैंने अपने हाथ से उसके लंड को रगड़ना जारी रखा।
मैंने जब उसको चूसना छोड़ा तो जोसफ ने मुझे पूरा मुँह खोलने को कहा और अब अपना लंड मेरे मुँह में तीन इंच अंदर डाल दिया। इतने मोटे लंड के मुँह में जाते ही मेरा मुँह पूरा सील हो गया।
वो अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर कर मेरे मुँह को चोदने लगा। मेरे मुँह की गरमी से वो अब गरम हो गया और अपना लंड थोड़ा और अंदर डाल दिया और अपनी गति भी बढ़ा दी।
उसका लंड कुछ ज्यादा ही मेरे मुँह में उतर गया और मेरा गला जैसे चॉक होने लगा और अंदर बने पानी से ग्वा ग्वा की आवाज आने लगी। शायद मेरी तकलीफ देख उसने थोड़ी ही देर में अपना लंड बाहर निकाल दिया। इसके बदले मैं उसकी लंड के नीचे की थैलियों पर बनी सिलवटों पर अपनी खुरदरी गीली जबान फेर चाटने लगी और पहली बार उसकी सिसकी निकली।
जैक का साया अभी भी वही खड़ा था, शायद यकीन नहीं कर पा रहा था कि मैं कुछ ऐसा भी कर सकती हूँ। मुझे तो उसका लंड चूसने का कभी मौका ही नहीं मिला था।
पीछे से सैंड्रा का आदेश आया “जोसफ तुमने पैसे चोदने के दिए हैं या चूसने के? चूसते ही रहोगे या चोदना भी शुरू करोगे ”
सैंड्रा मुझे अब जैक की नजरों में पैसा लेकर धंधा करने वाली दिखानी चाहती थी। उसको थप्पड़ मारने की इच्छा हुई। पर जोसफ ने मेरी मदद की।
जोसफ: “कोई मनी नहीं दी हैं, उसे सिर्फ बड़ा लंड अनुभव करना था।”
सैंड्रा: “जो भी हो, हर किसी के साथ चुदवाती तो हैं। तुम जल्दी करो। ”
जैक ये बात सुनकर बैडरूम में चला गया।
जोसफ: “जैक समझ गया हैं, अब हमें बंद कर देना चाहिए।”
सैंड्रा: “नहीं, तुम जोर से करो। और प्रतिमा तुम्हारी आवाज अंदर बैडरूम तक जानी चाहिए। ”
जोसफ ने मुझे सोफे पर बैठा दिया, सोफा काफी चौड़ा था और मैं अपनी कोहनियो के बल आधी लेटी थी। मेरे पैर आगे की तरफ थे। मैंने जोसफ को वो जैल लगाने को बोला और जोसफ ने अपने लंड पर अच्छे से लपेट दिया।
जोसफ ने मेरे दोनों पैर चौड़े कर खोल दिए और अपने लंड की टोपी अंदर डाल दी । उसने हल्का धक्का मार, दो इंच लंड अंदर डाल दिया।
मेरी आह आह चालू हो गयी। उस छह इंच मोटी ककड़ी के अंदर जाने जैसा अहसास हुआ। जोसफ ने अपना लंड फिर बाहर निकाल दिया, मुझे एक दम अधूरा अधूरा सा लगा।
अब उसने अपना लंड मेरी चूत पर रख टोपी अंदर डाली और अपने दोनों हाथ मेरे मेरी पतली कमर पर रख पकड़ लिया और आगे झुक कर अपना लंड और अंदर घुसाने लगा। मेरी फिर आह निकली और इस बार उसने ज्यादा जोर लगा के तीन इंच लंड अंदर घुसा और अंदर बाहर धक्का मारना शुरू किया। मेरी आवाज चालू हो गयी ओह या आह फ़क आह या या ओह या फ़क या या फ़क।
सैंड्रा मुझे और जोर से आवाज करने का इशारा कर रही थी। तब जोसफ ने गहराई बढ़ाते हुए चार इंच लंड अंदर बाहर करने लगा और मेरी हालत ज्यादा ख़राब हुई और मेरे मुँह से जोर से चीख निकली अह्हह्ह्ह्ह या ओह माय गॉड ओह माय गॉड, और मैं ऐसे ही कुदरती रूप से चीखती रही, नकली आवाज की जरुरत ही नहीं पड़ी।
मेरी तकलीफ देख एक बार फिर जोसफ ने मुझे थोड़ी राहत देते हुए अपना लंड बाहर निकाला और मेरे एक पैर को पकड़ अपन कंधे पर रख दिया और दूसरा सोफे पर लंबा लेटाए रखा। इससे मेरा छेद थोड़ा और खुल गया।
इस बीच मेरी चीखे सुन जैक फिर बाहर आ गया और देखने लगा। जोसफ ने एक बार फिर अपना लंड एक इंच अंदर डाला और और धीरे धीरे और भी बढ़ाते हुए दो इंच और फिर तीन इंच अंदर घुसा दिया। अब वो धक्के मारने लगा।
पिछली बार के मुकाबले इस बार दर्द थोड़ा कम था और मजा थोड़ा ज्यादा था। मेरी आहें निकलना जारी था उसके हर धक्के के साथ में लगातार आहें भरते जैसे गुनगुना रही थी।
सैंड्रा : “कुतिया बना कर चोद, इसे मजा नहीं आ रहा होगा।”
जोसफ ने अपना लंड बाहर निकाला और मुझे कुतिया बना कर सोफे पर बैठा दिया। मेरी जैक से नजरे मिली और मैंने अपना हाथ पीछे ले जाकर अपनी चुत पर रगड़ा और जैक को सुनाते हुए जोसफ को बोला कि वो मेरी चूत चोद दे।
जोसफ ने मुझे दोनों कूल्हों से पकड़ा और अपना लंड दो तीन इंच अंदर डाल कर अंदर बाहर धक्के मारने लगा। मेरी आहें फिर से चालू हो गयी आह या या आहआहआह हाह। जोसफ को भी इस स्तिथि में शायद मजा आया तो उसने और अंदर उतरते हुए पांच इंच लंड अंदर उतार कर धक्के मारने लगा।
मेरी बुरी तरह से जोर जोर की आहें शुरू हुई और रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी आआआआ ऊह ऊह ऊह ऊह।
जोसफ अब टॉप गियर मैं था और इसने छह सात इंच लंड अंदर घुसा दिया, उसकी लम्बाई के साथ मोटाई अब असहनीय थी मैं गला फाड़ चिल्ला रही थी आह्हः आह्हः आह्हः।
मैं उसे धीरे धीरे करने को कहते हुए रटने लगी उह या उह या। उसका लंड जैसे मेरी चूत का दोस्त बन गया था। अब दर्द धीरे धीरे मिट रहा था और मजा दोगुना और तिगुना होता जा रहा था।
उसने अब अपने हाथ छोड़ दिए जो मेरे कूल्हों पर थे और धक्का मारना भी बंद कर दिया। मुझे तो पूरा मजा आना ही अब शुरू हुआ था। मैं अब खुद ही आगे पीछे होती हुए चुदने लगी।
उसका लंड अब मेरी मर्जी से मेरी चूत में फिसलता हुआ आ जा रहा था। मेरी आहें तो अब नशीली हो गयी थी। मेरी सजा अब मजा में बदल गयी थी।
मैं लहराते हुए अपनी गांड को डांस करवा ऊपर नीचे आगे पीछे हो कर मरवा रही थी। बड़े मोटे लंड का क्या मजा होता हैं वो मुझे समझ में आ रहा था।
थोड़ी देर मैं ऐसे ही आगे पीछे हो मजे लेती रही पर फिर अचानक जोसफ पीछे हट गया और अपना लंड बाहर निकाल दिया, मैं हवा में आगे पीछे होती ही रह गयी।
जोसफ अब खुद सोफे के आगे अपनी पीठ सटा कर पंजो के बल नीचे बैठ गया और अपनी पीठ उसने पीछे झुका कर सोफे की सीट पर लेटा दी। मैं उसकी तरफ पीठ करके उसके लंड पर दोनों तरफ पाँव कर खड़ी हो गयी और उसका लंड एक बार फिर अपनी चूत के हवाले कर दिया।
मैं अब ऊपर नीचे उठक बैठक करते हुए चोदने लगी। मेरे लिए तो ये रोज की कसरत थी, इस बार कसरत करते हुए चुदाई का मजा भी आ रहा था।
इतनी देर से चुदते चुदते हमारा काफी सारा काम हो चूका था तो दोनों का पानी निकलने लगा था। मेरी सिसकियाँ जारी थी और उस बीच मेरी चूत में बने पानी की आवाजे आने लगी थी अहह अहह हाहहह छप छप्प छप्प ..
जोसफ ने मुझे फिर कूल्हों से पीछे पकड़ा और ऊपर नीचे करवाने लगा। शायद उसका होने वाला था। वो अब थोड़ा पीछे खिसक कर पूरा सोफे पर लेट गया और सोफे के आगे से उसके पाँव सोफे के नीचे खड़े थे। मैं उस पर फिर बैठ गयी और मेरे पाँव भी सोफे के ऊपर थे।।
उसने मेरे मम्मो के साइड से पीछे से पकडा और मुझे ऊपर नीचे करने लगा। मैं खुद भी अब पूरा जोर लगा रही थी मुझे अपना भी पूरा करना था। आह आह्ह ओह या हां हां अहा अहा आअहां हम्म्म्म ऊहू ऊहू ऊहू अहहहअहहहअहहह करते हुए झड़ गयी।
मुझे लगा मेरा काम अब ख़त्म हो गया हैं पर सैंड्रा के इरादे नेक नहीं थे। मेरी बैंड बजनी अभी बाकी थी।
जोसफ ने मुझे अच्छी तरह से चोद कर रख दिया था। इस जबरदस्त चुदाई को देख कर सैंड्रा अपने गाउन को ऊपर उठाये अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी।
सामने जैक खड़ा था, उसके शार्ट में उसका लंड खड़ा हो चूका था । वो तुरंत बाथरूम की तरफ गया। मेरे झड़ते ही जोसफ ने भी धक्का मारना बंद कर दिया था। मैं उसके ऊपर से उतरी तो देखा उसके काले लंड पर दूध की नदिया बह रही थी।
सैंड्रा: “जोसफ, मुझे पता हैं तुम्हारा नहीं हुआ हैं। ”
जोसफ: “कोई बात नहीं, मैं ठीक हूँ, जितना मजा आया ।”
सैंड्रा: “मेरा कल का बदला बाकी हैं, जोसफ तुम प्रतिमा की गांड मारो, तुम्हारा भी हो जायेगा और मेरा कल का बदला भी। ”
मैं भी चाहती थी उसका पूरा हो उसने मुझ पर इतनी मेहनत जो की थी पर अपनी गांड में उसका मोटा लंड लेना मतलब मौत को दावत देना था। मैं अपने कपड़े पहनने के लिए उठाने लगी। पर सैंड्रा ने आगे आकर मुझे पकड़ा और जोसफ को मुझे सोफे पर उल्टा लेटाने को कहा।
जोसफ ने वैसा ही किया, शायद उसको भी पूरा करना था। मैं उनको दुहाई देते मना ही करती रह गयी।
जोसफ ने मुझे उल्टा लेटा दिया। सैंड्रा ने आकर मेरी गांड़ के दोनों गालो को पकड़ दरार को चौड़ा कर जगह बनाई और जोसफ ने अपने लंड की टोपी को मेरे गांड के छेद के बाहर रखा। मैंने सोचा आज तो मेरी गांड फटने वाली हैं। यहाँ से सीधा अस्पताल जाना पड़ेगा टाँके लगवाने के लिए।
मैं: “सैंड्रा ये गलत हैं”
सैंड्रा : “ये तुम्हे कल सोचना चाहिए था, जब मुझे पकड़ कर राहुल का साथ दिया था। ”
मैं सैंड्रा को समझाती रही, जिस तरह वो कल मुझसे मिन्नतें कर रही थी आज मैं कर रही थी। मैंने राहुल की वजह से ही सैंड्रा को पकड़ा था, राहुल ने ही मुझे इस दर्दनाक गांड चुदाई की मुसीबत में फंसाया था ।
जोसफ: “छोड़ दो इसे, तुमने भी एक बार कोशिश की थी मेरा लंड अपनी गांड में लेने की याद हैं, बहुत दर्द होगा इसको। ”
सैंड्रा : “तुम ज्यादा मत सोचो, और डालो। ”
जोसफ ने अब अपना लंड मेरी गांड के छेद से छुआ दिया और मैं एकदम शांत हो गयी, मैंने सोच लिया अब मेरा कुछ नहीं हो सकता था। उसने अपने लंड की टोपी मेरी चौड़ी हो चुकी गांड के अंदर डाल दी। मेरी एक आह निकली, और उसने थोड़ा जोर लगा के बड़ी मुश्किल से अपने लंड की मोटाई वाला भाग आधा एक इंच और अंदर डाला और मेरी दर्द के मारे चीखे निकलने लगी।
मुझे तो सांस लेने में तकलीफ होने लगी और मुँह उठा कर खुला का खुला ही रह गया। मेरी भी रोने जैसी हालत थी। जो मैंने कल किया आज मैं भुगत रही थी। मेरी हालत पर तरस खा जोसफ ने अपना लंड थोड़ा बाहर खिंच कर सिर्फ टोपी वाला मोटा हिस्सा ही अंदर रखा और लंड की टोपी को ही मेरी गांड में अंदर बाहर कर चोदने लगा।
सैंड्रा उसको बोलती रही कि वो और अंदर लंड डाले, पर उसने अब मना कर दिया। पहली बार उसने अपनी मालकिन को मना किया था।
सैंड्रा अब मेरे से कहने लगी।
सैंड्रा: “मैंने लंड अपनी गांड में पूरा लिया था, अब तुम्हे भी लेना ही पड़ेगा। ”
मैं: “पर जोसफ और राहुल के लंड के साइज में अंतर तो देखो।”
सैंड्रा : “लेना तो पड़ेगा ही, जोसफ का ना सही राहुल का। बोलो किसका लोगी?”
इस बार अगर मैंने जोसफ चुना तो वो इसी वक़्त मेरी गांड फाड़ देगा, इसलिए मैंने बचने के लिए जवाब दे दिया।
मैं: “मैं राहुल का ले लुंगी।”
तभी जैक अपना काम ख़त्म करके बाथरुम से बाहर आया। उसे मेरी चीखे तो सुनाई दी होगी।
सैंड्रा : “फिर से कहो क्या कहा ?”
वो मुझे जैक के सामने कबूल करवाना चाहती थी।
मैं: “मैं राहुल का ले लुंगी।”
सैंड्रा : “क्या लोगी, जोर से पूरा वाक्य बोलो।”
मैं: “मैं अपनी गांड में राहुल का लंड लुंगी। ”
सैंड्रा ने मुझे छोड़ दिया, जोसफ अभी भी अपने लंड की टोपी को मेरी गांड मे हिला रहा था और उसके मुँह से ऐसी आवाज आ रही थी जैसे अभी उल्टी करने वाला हो। ऊहब्ब्ब ऊहब्ब्ब ऊहब्ब्ब और एक जोर की दहाड़ के साथ उसने एक इंच लंड और मेरी गांड में डाल दिया . इधर मेरी चीख निकली और उधर उसने अपना पानी मेरी गांड में खाली कर झड़ गया।
उसने अपना लंड मेरी गांड से बाहर निकाला और मेरी गांड ने जैसे काफी देर के बाद सांस ली। मेरी गांड अब फफक फफक कर धड़क रही थी। मेरे हाथ पैर भी कांप रहे थे। मैं थोड़ी देर लेटे रही और अपना संतुलन वापिस लाने लगी। मैं अब खड़ी हुई, सामने जैक को देखा, वो शरमा कर अपने कमरे में चला गया। मैं पूरी थक के चूर थी।
जोसफ बाथरूम से साफ़ होकर बाहर आया और मैं उठी और कपड़े उठा कर बाथरूम में साफ़ होने गयी। मैं थोड़ी देर अंदर ही बैठ गयी और आराम करने लगी। नहा धो कर पुरे तीस मिनट बाद अपने कपड़े पहनते हुए मैंने सोचा इतना बुरा भी नहीं था। उस गांड चुदाई का थोड़ा हिस्सा छोड़कर बाकी का जितना दर्दनाक सोचा था उससे काफी ज्यादा सुखद था।
मैं अब बाहर आयी तो देखा राहुल वहा मौजूद था। उसे देख मेरे चेहरे पर एक ख़ुशी आ गयी। मुझे देखते ही वो मेरे पास आया और मेरी तबियत पूछने लगा। मैंने उसको बताया कि मैं ठीक हूँ । वो मेरी ही चिंता कर रहा था और मुझे लेने ही आया था। वो अब मुझे लेकर जाने लगा तो सैंड्रा ने मुझको याद दिलाया।
सैंड्रा : “प्रतिमा तुम्हे अपनी गांड चुदवाना हैं। चलो आ जाओ। ”
राहुल: “ये क्या बोल रही हो?”
सैंड्रा : “पूछो इसको। बताओ प्रतिमा।”
मैं अपना सर झुकाये खड़ी हो गयी। मैंने उस वक्त बचने के लिए बोल दिया था, सोचा था ये बाद में भूल जाएगी। मगर राहुल तो यहाँ आ गया।
सैंड्रा: “राहुल कल अगर प्रतिमा ने तुम्हारा साथ नहीं दिया होता तो तुम मेरी गांड नहीं मार पाते। प्रतिमा को भी अपनी गांड मरवानी पड़ेगी। मुझे जो दर्द मिला उसका बदला दर्द से ही होगा। ”
राहुल:”पर मैंने तुमको छोड़ दिया था, इस वादे के साथ कि तुम प्रतिमा से बदला नहीं लोगी”
सैंड्रा : “बहुत देर से छोड़ा था, तुमने जितनी देर कल मेरी गांड मारी थी उतनी देर तो इसको भी मरवानी पड़ेगी।”
मैं: “मुझे अभी थोड़ा दर्द हैं”
राहुल; “प्रतिमा तुम्हे ये करने की जरुरत नहीं। सैंड्रा तुम्हारा असली काम हो चूका हैं, जैक वाला। अब क्या प्रॉब्लम हैं तुमको। छोड़ दो बेचारी को। ”
सैंड्रा : “मुझको भी बेचारी बनाया था। ये तो करना पड़ेगा वरना तुम दोनों की अब तक की मेहनत पानी में जाएगी। सोच लो। ”
राहुल: “डील को लेकर बहुत ब्लैकमेल कर लिया, नहीं चाहिए डील। चलो प्रतिमा। ”
मैंने अपनी इज्जत लुटा दी बाकी लोगो की ख़ुशी के लिए और अब मिलेगा क्या कुछ नहीं, मतलब मेरा सारा त्याग तो व्यर्थ जायेगा। एक बार करवाया हैं, एक बार और करवा लुंगी। राहुल ने मुझे बाहर चलने को कहा और हम वहा से जाने लगे।
सैंड्रा पीछे से चिल्लाई “प्रतिमा ने तुमको चुना हैं अपनी गांड मरवाने के लिए। कल दोपहर में तुम्हारे ऑफिस आउंगी, मेरे सामने उसकी गांड चुदाई करना या उसका वीडियो दिखा देना तो डील साइन हो जाएगी।”
बाहर लाकर उसने मुझे अपनी कार में बैठाया और कहा कि वो मुझे घर पर छोड़ देगा । कार में वो मुझसे बातें करने लगा।
राहुल :”तुम चिंता मर करो, डील को भूल जाते हैं, फिर से दो साल मेहनत कर लेंगे। ”
मैं: “मुझे अपने लिए फैसला लेना होता तो कब का मना कर दिया होता। मैं ये नहीं चाहती कि मेरी वजह से इतने लोगो का करियर और ज़िंदगी खराब हो।”
मैं अब चिंता में पड़ गयी, ये कैसी नयी मुसीबत मौल ले ली मैंने। राहुल के सामने शर्मिंदा ना होना पड़े इसलिए जोसफ को चुना था, और अब राहुल के साथ भी चुदवाना पड़ेगा।
राहुल : “तुम दूसरे लोगो का कितना सोचती हो। तुम्हे त्याग करना पड़ा, मुझे अच्छा नहीं लग रहा हैं। ”
मैं: “मुसीबत भी तो मेरी वजह से ही आयी थी न। ”
राहुल: “अपने आप को दोष मत दो।”
मैं: “राहुल मैंने सोच लिया हैं, इतना त्याग किया हैं, मैं एक बार और कर लुंगी। इतना आगे आकर पीछे नहीं हटना मुझे। ”
राहुल: “तुम स्योर हो? कल तुमने मेरी बजाय जोसफ को चुना था। कोई तो कारण रहा होगा। ”
मैं: “तुम्हारे साथ एक बार ये सब करवाउंगी तो फिर हमेशा ऑफिस में तुम्हारा सामना कैसे करूंगी । यही सोच कर जोसफ को चुना था। ”
राहुल: “तो ये फैसला आखिरी हैं ?”
मैं: “हां, मुझे तुम पर पूरा यकीन हैं। थैंक यू, इन दिनों में तुमने मेरा बहुत साथ दिया और ध्यान रखा।”
राहुल: “तुम वाकई बहुत महान हो। तुम्हारी तबियत कैसी ही? तुम कह रही थी थोड़ा दर्द हैं। ”
मैं: “नहीं, ऐसे ही कह रही थी, सैंड्रा को टालने के लिए। ”
राहुल: “तो फिर कब करना हैं। सैंड्रा के सामने कल ऑफिस में या पहले ही करके वीडियो सबूत दिखाना हैं।”
मैं: “आज नहीं, कल। वीडियो सबूत मैं अपने मोबाइल में ही रखूंगी।”
राहुल: “अवश्य, जैसी तुम्हारी मर्जी।”
राहुल: “तो फिर तुम्हारे घर या मेरे फार्म हाउस पर।”
मैं: “जैसा तुम्हे ठीक लगे।”
राहुल: “कल तुम्हारे कपड़े मेरे फार्म हाउस पर रह गए थे। मैंने धुलवा दिए हैं। कल वही चलते हैं, अपने कपड़े भी ले लेना और एक रिक्वेस्ट हैं”
मैं: “क्या?”
राहुल :”तुम्हे फार्म हाउस पर जो ड्रेस दी थी रूही की, वो पहन कर आना, मुझे अच्छा लगेगा।”
मैं: “ठीक हैं, और कुछ?”
राहुल: “कल सुबह मैं तुम्हे लेने तुम्हारे घर आऊंगा। तुम तैयार रहना। सीधा फार्म हाउस जायेंगे और काम होते ही वापिस ऑफिस आ जायेंगे। कल सैंड्रा डील को फाइनल कर देगी। ”
मेरा घर आ गया और मैंने राहुल से विदा ली। घर पर आकर मैं अपने आप को एक गुनहगार महसूस कर रही थी। मैंने अपनी शपथ तोड़ कर एक गैर मर्द के साथ संबंध बनाये थे। और मेरी शपथ कल दूसरी बार टूटने वाली थी जब मैं राहुल के साथ भी करुँगी। पर सान्तवना थी कि ये सब दुसरो के भले के लिए था ।
हालांकि जोसफ का मोटा लंड लेने के बाद भी ज्यादा कुछ दर्द नहीं था । मैंने दर्द निवारक दवाई ले ली दोपहर और फिर रात को। सामान्यतया दर्द सुबह उठने पर ही महसूस होता हैं तो ये एहतियात जरुरी थी।
अगली सुबह एक दर्द के साथ मेरी नींद खुली, मेरी गांड और चूत में हलकी सी टीस उठ रही थी। दर्द से मेरे दोनों छेद लपक झपक कर रहे थे।
मैंने उठ कर अपने काम निपटा कर पहले नाश्ता किया ताकि फिर से दर्द निवारक दवा ले सकू और इस दर्द से थोड़ी राहत मिले। मुझे आज उसी छेद में राहुल का लंड भी लेना था तो अपने आप को तैयार रखना था।
मैंने राहुल की दी हुई ड्रेस पहन ली। वो एक नीले रंग की फ्रॉक ड्रेस थी और उस पर सफ़ेद छोटे फूल बने थे। कमर से ऊपर वो बदन से चिपकी सी थी और कमर के नीचे हल्की ढीली थी और घुटनो तक आती थी। मैंने मेकअप करना शुरू कर दिया था, राहुल कभी भी आता होगा। धीरे धीरे दवा ने असर दिखाना शुरू कर दिया था और अब वो टीस थोड़ी हल्की पड़ गयी थी।
थोड़े इंतजार के बाद राहुल आ गया था, मुझे देख एक बार फिर ताकता ही रह गया। उसने ऑफिस के कपड़े ही पहन रखे थे क्यों कि फार्म हॉउस से सीधा हमें ऑफिस ही जाना था, जहा सैंड्रा आने वाली थी।
पुरे रास्ते बार बार वो मुझे ही देख कर मुस्कुरा रहा था और और उसे देख मैं भी हल्का शर्म से मुस्कुरा देती। हम दोनों को ही पता था हम क्या करने जा रहे हैं। दोनों की ही इच्छा तो नहीं थी पर फिर भी जो काम करना था उससे एक दूसरे के प्रति वासना उमड़ना तो स्वाभाविक था। मुझे तो हल्का दर्द भी था तो मुझे कुछ ज्यादा ही नियंत्रण में रहना था।
हम दोनों अब उसके फार्म हाउस पर पहुंचे। हॉल में आने के बाद वो मुझे सीधा उस बालकनी में ले गया जहा पार्टी वाली रात उसने मुझे चूमने की कोशिश की थी और हम पहली बार अन्तरंग हुए थे। हालांकि तब मैंने बहुत नियंत्रित किया था और बच गयी थी।
बालकनी में पहुंच कर वो मेरे सामने खड़ा हो गया और मुस्कराहट के साथ मेरी दोनों हथेलिया अपनी हथेली में ली और अपने अंगूठे से मेरी उंगलियों को सहलाते मुझे देखता रहा। मुझे समझ नहीं आया क्या कर रहा हैं। मैंने बस मुस्कुरा कर जवाब दिया। वो एक कदम और करीब आया और अपना सर थोड़ा सा तिरछा करते हुए अपने होंठ मेरे होंठो के करीब ले आया।
मेरी उसके करीब आते ही मेरी और उसकी मुस्कान गायब हो गयी। दोनों के होंठ बंद थे और एक बार तो मुझे कुछ सुझा ही नहीं मैं क्या करुं। तब तक उसके बंद होंठ मेरे बंद होंठो को हल्का सा छू गए। मेरे पुरे बदन में एक सिहरन सी उठी। उसने हल्का सा होंठ पीछे कर अपने होंठ थोड़े खोले और मेरे होंठ भी स्वतः ही खुल गए।
उसके होंठ एक बार फिर आगे बड़े और मेरे ऊपर के होंठ को छू अपने अंदर दबाने ही वाले थे कि मेरी गांड में उठे एक दर्द ने मुझे जगा दिया और मैं एकदम से पीछे हट गयी। उसके होंठ खुले के खुले रह गए।
मैं: “नहीं राहुल, ये ठीक नहीं।”
राहुल: “मैं इतना बुरा हु ! जैक को चूमा वो ठीक, पर मैं उसके जितना काबिल नहीं?”
मैं: “तुम गलत सोच रहे हो, तुम अच्छे इंसान हो मुझे पसंद हो, पर तुम मेरे बॉस हो। मैं बॉस के साथ कोई संबंध नहीं बना सकती। मुझे तुम्हारा सामना रोज ऑफिस में करना पड़ेगा। एक तरफ ऐसा रिलेशन दूसरी तरफ ऑफिस का, मैं दोनों हैंडल नहीं कर पाऊँगी। वैसे भी मैं शादीशुदा हु, मैं किसी और के साथ लंबा रिलेशन नहीं रखना चाहती।”
राहुल: “आई एम् सॉरी। तुम्हारे जैक के साथ रिश्ते को लेकर मैं इमोशनल हो गया था। थोड़ी जलन भी थी।”
मैं: “मैं किसी के साथ दिल नहीं लगाना चाहती, जैक के साथ लगाया था उसके परिणाम सामने हैं। अब और गलती नहीं करनी हैं। आज मेरी आखिरी गलती होगी। हम जिस काम के लिए आये हैं वो कर लेते हैं और फिर अपनी अपनी राह पकड़ लेते हैं, पहले की तरह।”
राहुल: “ठीक हैं मेरे बैडरूम में चलते हैं।”
राहुल और मैं अब उसके बैडरूम में आ गए थे। हम दोनों एक दूसरे की शक्ल ताक रहे थे कि आ तो गए अब शुरू कैसे करे। आज तो सैंड्रा भी नहीं जो आदेश देकर हमें शुरू करवा सके। कभी हम एक दूसरे को देखते तो कभी आस पास।
राहुल अब आगे बढ़ा और मुझे पीछे घुमा कर मेरी पीठ पर से ड्रेस की चैन नीचे खिंच खोल दी। मैं थोड़ा आगे हटी और फिर उसकी तरफ घूम कर हाथ पीछे ले जाकर अपनी चैन बंद कर दी।
मैं: “पुरे कपडे खोलने की क्या जरुरत हैं, तुम नीचे से कपडे थोड़े उठा कर ही पीछे से कर सकते हो। ”
राहुल: “मैंने सोचा तुम्हारे कपड़े गंदे हो जायेगे इसलिए.. ”
मैं: “अगर ख़राब भी हो गए तो कोई बात नहीं, मेरी पिछली बार के जो कपड़े रह गए थे वो मैं पहन लुंगी। वैसे भी मैं इन केजुअल कपड़ो में ऑफिस नहीं जा सकती।”
राहुल: “मेरे पास यहाँ कोई ऑफिस वियर नहीं हैं इसलिए मुझे मेरे कपड़े तो खोलने ही पड़ेंगे । तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं ?”
मैं: “मैं पीछे मुड़ जाती हूँ, तुम कपड़े खोल लो। ”
राहुल अपने कपड़े निकालने लगा और मैं उसकी तरफ पीठ कर खड़ी हो गयी। थोड़ी देर में उसने सब कपड़े निकाल दिए। हम दोनों बिस्तर के पास ही खड़े थे। मेरा मुँह बिस्तर की तरफ था।
राहुल ने बताया कि वो कपड़े खोल कर तैयार हैं तो मैंने अपना फ़ोन रिकॉर्डिंग के लिए राहुल को दे दिया। हमें वीडियो सैंड्रा को सबूत के तौर पर दिखाना था। राहुल ने मेरा मोबाइल एक टेबल पर सेट कर रख दिया। मैं अब भी उसकी तरफ पीठ घुमाये खड़ी थी और उसका इंतजार कर रही थी।
वो मेरे पीछे आकर खड़ा हुआ, और मैंने अपनी ड्रेस के नीचे से अंदर हाथ डाल कर अपनी पैंटी निकाल कर रख दी। मैं आगे की तरफ झुक कर उसकी ओर अपनी गांड कर दी और उसके हाथ के स्पर्श का इंतजार किया। उसका हाथ तो नहीं आया पर आवाज आ रही थी। वो अपना लंड रगड़ कर कड़क करने की कोशिश कर रहा था शायद।
राहुल: “मुझे कुछ समय दो, अपने आप को तैयार करने के लिए।”
मैं फिर सीधा खड़ी हो इंतजार करने लगी। एक दो मिनट के बाद वो फिर बोला।
राहुल: “अगर तुम्हे कोई आपत्ति ना हो तो मेरी मदद कर दोगी तैयार करने में। ”
मैं सकपका गयी, उसके लंड को कैसे हाथ लगा सकती हूँ। मगर समय बचाना था, जल्दी से इस स्तिथि से बाहर आना था। तो मैंने बिना मुड़े अपना हाथ पीछे किया और टटोलने लगी उसका लंड कहाँ हैं। उसने मेरा हाथ पकड़ा और रास्ता दिखाते हुए अपने नरम पड़े लंड पर रख दिया।
हाथ से उसके लंड को छूते ही मुझे जैसे करंट लगा और मैंने झटके से हाथ फिर खींच लिया। मैंने एक बार फिर प्रयास किया और इस बार बिना उसकी मदद के अपना हाथ पीछे ले जाकर उसके एब्स पर रख दिया, फिर बिना हाथ उठाये उसके बदन पर खिसकाते हुए उसके लंड तक ले आयी और उसे पकड़ लिया।
उसका तीन चार इंच का जेली समान नरम लंड था। मैंने उस पर अपना हाथ रगड़ना शुरू किया। हाथ पीछे की तरफ था तो संतुलन नहीं बैठ रहा था।
राहुल: “तुम मेरी तरफ घूम जाओ, नहीं देखना हो तो नीचे मत देखना। ”
मुझे उसकी बात समझ में आ गयी, मैं नजरे सीधी सामने रखते हुए उसकी तरफ मुड़ गयी। हम दोनों अब एक दूसरे के चेहरे पर देख रहे थे।
मैं एक बार फिर अपना हाथ अंदाज़े से नीचे ले गयी और एक बार में उसके लंड पर हाथ रख उसको पकड़ रगड़ने लगी।
जैसे जैसे मैं उसका लंड रगड़ रही थी वो मेरी तरफ देख हल्का सा मुस्कुरा रहा था, तो मैं भी शर्म के मारे मुस्कुरा रही थी। कुछ ही देर में उसका लंड बड़ा और कड़क होने लगा था। उसका लंड अब हल्का गरम हो चुका था पर थोड़ी नरमी अभी बाकी थी। मैंने उसके चेहरे पर देखा तो कभी एक शिकन आ जाती तो कभी उसका मुँह हल्का सा खुल जैसे सिसकी निकलने को होती और वो दबा लेता। उसकी हंसी अब गायब थी।
उसका ये मजा लेता चेहरा देख मुझे भी कुछ कुछ होने लगा, पर शरम ज्यादा थी। वो मेरी तरफ देख रहा था और मैं अपना चेहरा कैसे छुपाती। मैं बीच बीच में इधर उधर देखने लगती। उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझे दबाने लगा। मुझे भी लगा कि उसका सामना करू उससे अच्छा हैं नीचे बैठ कर रगड़ू।
मैं अब नीचे बैठ गयी और उसका लंड मेरे सामने था। उसके लंड के अंदर की नसे थोड़ी तन गयी थी। ये मेरी चूत में जाने के लायक तो था पर गांड के लिए थोड़ा और कड़क होना जरुरी था। मैं पंजो पर बैठे अपना संतुलन नहीं बना पा रही थी तो उसकी एक जांघ को पीछे से पकड़ लिया। एक इच्छा हुई उसका लंड मुँह में ले लू ताकि जल्दी कड़क हो जाये। पर आगे बढ़कर कैसे करूँ, वो क्या सोचेगा।
उसने अपना हाथ मेरे सर के पीछे रखा और आगे की तरफ अपनी ओर लाने लगा। शायद वो भी मेरी तरह यही चाहता था। मैंने अपने हाथ में पकड़ा लंड अपने मुँह में रख दिया और उसकी एक स्पष्ट आह निकली।
मैंने अब अपना दूसरा हाथ भी फ्री कर उसकी दूसरी जांघ को पीछे से पकड़ लिया।
उसका आधा लंड मेरे मुँह में था और मैं आगे पीछे हो उसे रगड़ रही थी और उसस्की सिसकिया चालू थी। थोड़ी देर में उसने मुझे मुँह में ही जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया। मैं भी अपना मुँह आगे पीछे कर रही थी और वो भी आगे पीछे हो रहा था तो इससे गति ज्यादा हुई। उसका लंड अब स्टील की भांति कड़क हो चूका था।
उसके लंड का टेस्ट मुझे अच्छा लग रहा था और उस पर उसकी सिसकिया, मैं उनमे गुम हो रुकी नहीं। फिर अचानक गप्प की आवाज आयी और उसने अपना पूरा लंड मेरे मुँह में उतार दिया और वही रुक गया, उसका लंड मेरे गले तक उतर गया था । मेरी तो सांस ही रुक गयी, और मैंने जल्दी से उसका लंड बाहर उगल दिया।
मैं अब खांसते हुए खड़ी हुई क्यों कि उसका थोड़ा पानी मेरे गले में अटक गया था। मैं अब थोड़ा सामान्य हुई, वो मुझे अब पोजीशन में लाने लगा। उसने मुझे बेड के किनारे पर घोड़ी की तरह घुटनो और कोहनियो के बल लेटा दिया। मेरे घुटने बेड के किनारे पर थे और गांड का हिस्सा बेड के बाहर लटका था। जब कि मेरा धड़ और सर बिस्तर पर था।
इस पोजीशन में आते ही मेरी ड्रेस नीचे से थोड़ी सी ऊपर हो गयी और जाँघे बाहर आ गयी। वो मेरी गांड की तरफ बिस्तर के पास नीचे खड़ा था। उसने मेरी ड्रेस नीचे से पकड़ी और ऊपर उठा कर मेरी गांड को नंगा कर दिया। ड्रेस हटते ही मेरी गांड और चूत के छेद पर हवा पड़ने लगी। मैं अपने बॉस के सामने पहली बार नंगी थी।
इस पोजीशन में जरूर उसको मेरी चूत का छेद भी दिख रहा होगा ये सोच कर मुझे और भी शरम आ रही थी। गांड मारते हुए वो मेरी शक्ल नहीं देख पायेगा बस ये ही अच्छी बात थी। मैंने सोचा मैं खड़े हो कर गांड मरवा लेती हु ताकि वो मेरी चूत को ना देख पाए। मैं खड़े होने को हुई और उसने मेरी ड्रेस को और भी ऊपर खिसका कर कमर से ऊपर कर दिया। अब मेरी नंगी गांड के साथ नंगी कमर भी उसके सामने थी।
वो नीचे खड़ा था और अपने हाथ की उंगलिया मेरे गांड के छेद पर रगड़ने लगा, चूत का छेद एकदम उसके नजदीक ही था तो उसकी
उंगलिया वहा भी छूने लगी। मेरा पानी निकलने लगा था उसकी उंगलिया भीग गयी थी और उसने वो पानी मेरी गांड के छेद पर लगा दिया। वो अपना उंगलिया मेरी चूत के छेद से शुरू करते हुए रगड़ता हुए गांड के छेद तक लाते हुए चिकनाई लगा रहा था।
अनायास ही उसकी उंगलियों की छुअन से मेरी चूत अपना थोड़ा पानी छोड़ रही थी। मुझे मेरी गांड पर भी उस सारे चिकने पानी के लगने से अब ठंडाई महसूस हो रही थी ।
तभी एक कड़क गरम लोहे की छड़ की तरह चीज मेरे गांड के छेद को छू गयी। उसका लंड अब मेरे अंदर प्रवेश को तैयार था। उसने अपने लंड की टोपी मेरे गांड के छेद में घुसा हल्का धक्का मारा और उसका दो इंच लंड मेरी गांड के अंदर घुस गया और मेरी एक आह निकली।
अब वो अपना लंड मेरी गांड के अंदर बाहर कर चोदने लगा। उसने अपने दोनों हाथ मेरी गांड के उभारो पर रख दिए और चोदता रहा। उसने मेरी गांड पर हाथ से एक चटाका मारा। इस चुदाई के बीच उसके हाथ अब मेरी नंगी पतली कमर को पकड़े थे।
इसके बाद उसकी स्पीड अचानक तेज होती गयी गपक गपक गपक की आवाज आने लगी और इसके साथ ही मेरी हलकी सिसकिया आने लगी आह आह। थोड़ी देर इसी रफ़्तार से मुझे चोदता रहा और उसका पानी छूटने लगा और गप्पक गप्पक तेज आवाज होने लगी। उससे उसका नशा और चढ़ा और मेरी सिसकिया बढ़ने के साथ अब फुचुक फुचुक फुचुक की आवाज आने लगी और मेरी लगातार आह्ह आह्ह की आवाजे आती रही।
एक बार फिर उसकी स्पीड बढ़ी और मेरी आहहह आहहह की आवाज बिना रुके लगातार आती रही । इस मजे से मैं खुद अब पीछे धक्का मारने लगी थी । इतनी देर से कोहनियो के बल बैठे रहने के बाद अब मैं अब हथेलियों के बल आ कर थोड़ा उपर उठी और उसने मेरे गले को दोनों हाथों से पकड़ थोड़ा उठा लिया।
मैं अब 45 डिग्री के कोण पर थी और उसके झटके और गहरे हो गए और पानी के छिछलने की आवाजे आने लगी। बीच बीच में उसके झटको से मैं थोड़ा उछलने लगी थी। उसन गले से हाथ हटा फिर कमर पकड़ी ।
उसने पहले स्पीड धीमे की और फिर अचानक एक के बाद एक तेज झटके मारने लगा और मेरी आह आह लगातार चलती रही। उसने इस तरह लगातार बिना रुके तीस चालिस झटके मार दिए। उसके बाद फिर एक बार वो थोड़ा धीरे हुआ और मुझे गले से पकड़ा और धक्के मारने लगा।
वो कल की तरह जानवरो की तरह नहीं चोद रहा था। इससे मुझे दर्द नहीं हो रहा था। उसने पहले पानी बनाया और फिर ही झटके मारे थे। अब वो एक स्पीड में गछाक गछाक गछाक मारता रहा। धीरे धीरे स्पीड बढ़ी और फिर गहरे और धीमे झटके पड़ने लगे।
वो फिर रुक गया और मैं एक दम स्लो मोशन में आगे पीछे हुई। जिससे पानी की चपड़ चपड़ आवाज हुई और उसकी स्पीड बढ़ने के साथ गचड़ गचड़ पानी की आवाज तेज आवाज आने लगी। वो मेरी गांड पूरी हिलाते हुए हुए कम्पन करवा रहा था।
मुझे तो मजा आ रहा था पर उसने अपना लंड अब बाहर निकाल दिया। उसने मुझे आगे खिसकाया और मैं घुटनो के बल चल कर बिस्तर के बीच में आ गयी। वो भी अब बिस्तर पर चढ़ मेरे पीछे आ गया। घुटनो के बल खड़े होने से मेरी ड्रेस फिर से नीचे हो गयी थी। उसने मेरी ड्रेस को नीचे से पकड़ा और एक बार फिर कमर तक ऊपर कर दिया।
मैं अभी भी घुटनो के बल खड़ी थी और उसने ड्रेस उठाते हुए एक झटके में पूरी सर से बाहर निकाल दी। मैं अब सिर्फ ब्रा में खड़ी थी। हम दोनों एक मजेदार काम के बीच में थे तो उसको मना नहीं किया और उसने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे पकडे रहने के बावजूद उसको पूरा निकाल दिया। मैंने जल्दी से आगे झुक कर वापिस कोहनी के बल डॉगी बन बैठी और वो अब बिस्तर पर घुटनो के बल मेरे पीछे बैठा था ।
उसने एक हाथ मेरी कमर पर रखा और इसबार अपना लंड मेरी चूत और गांड के छेद के बीच आस पास घुमा कर मुझे तड़पा रहा था। उसने झटके से अपना लंड मेरी चूत के छेद में डाला और चूत में होते पहले के दर्द से मैं कोहनियो से अपने हथेलियो के बल आ गयी।
उसने जल्दी से मुझे एक बार फिर दोनों हाथ से गले से पकड़ थोड़ा ऊपर आगे से उठा दिया। उसके लंड के मेरे अंदर होते झटको से मैं कमजोर पड़ गयी और चाहते हुए भी उसको रोक नहीं पायी। उसने अब अपना लंड अंदर गोल गोल घुमा कर जैसे अंदर के पानी को मथने लगा और लस्सी बनाने लगा।
मुझे असीम आनद की प्राप्ति हुई और एक हल्का दर्द भी उठा और मेरी तेज आवाज में आहहहहहहहहहहह निकली जो आठ दस सेकण्ड्स लम्बी आह थी और मैंने अपना एक हाथ बिस्तर पर तीन चार बार पटक अपनी स्तिथि बताई। मैं आगे बढ़ उससे अलग हुई।
मैं: “मैंने तुम्हे आगे डालने की इजाजत नहीं दी थी। ”
राहुल: “सॉरी, मैं वो रोक नहीं पाया। अभी पूरा करने दो।”
मैं: “अब आगे के छेद में मत डालना, तो पूरा करने दूगी।”
राहुल: ” ठीक हैं, तुम ही कर लो। ”
वो अब नीचे लेट गया। मैं उसे अपनी चूत सामने से दिखाने में शरमा रही थी तो मैं उसकी तरफ पीठ करके उसके लंड पर बैठ गयी। मेरे पाँव घुटनो से मुड़ कर पीछे की तरफ थे।
मैंने उसका लंड अपनी गांड में डाला और हम दोनों को फिर चैन मिला। मैंने अपने हाथ पीछे ले जाकर उसके सीने पर रख सहारा लिया और अपने शरीर को ऊपर नीचे कर उसे चोदने लगी। उसके हाथ मेरी पतली कमर को पकडे हुए थे।
मेरी गांड से अब पच्च पच्च की आवाज आने लगी और हम दोनों आहें भरने लगे। असहनीय मजा होने पर मैंने अपने दोनों मम्में दबाये और फिर आसमान में सर उठाये उसको चोदती रही।
थोड़ी ही देर में वो चीखते हुए आहें भर झड़ गया। मैं जब उस पर से उठी तो मेरी गांड और जाँघे फड़फड़ा रही थी और उसका छोड़ा पानी मेरी गांड से झर रहा था।
