मस्त मेनका

खुले में चुदाई

आज राजपुरा गाओं के राजा यशवीर सिंग का महल दुल्हन की तरह सज़ा हुई है & क्यू ना सजता, आज राजा साहब का बेटा विश्वजीत शादी करने के बाद अपनी नयी-नवेली दुल्हन को लेकर आया था.राजा साहब के घर मे अरसे बाद खुशियों ने कदम रखा था वरना पिच्छले दो सालों मे तो उन्हे बस दुख ही देखने को मिले थे.

मेहमानों की भीड़ हवेली के बड़े से बाग मे दूल्हा-दुल्हन को बधाई दे रही थी & पार्टी का लुत्फ़ उठा रही थी.राजा साहब ने मेहमानों की खातिर मे कोई कसर नही छ्चोड़ी थी.

जब तक राजा साहब मेहमानों की खातिर करते हैं,आइए तब तक हम उनके बारे मे तफ़सील से जान लेते हैं.राजा साहब अपने पिता की एकलौती औलाद थे.उनके पिता पूरे राजपुरा के मलिक थे.उन्होने राजा साहब को विदेश मे तालीम दिलवाई पर हुमेशा से 1 बात उन्होने यशवीर सिंग के दिमाग़ मे डाली कि चाहे कुच्छ भी हो जाए रहना उन्हे राजपुरा मे अपनी जनता के बीच मे ही रहना होगा.पर फिर रजवाड़ों का चलन ख़तम हो गया तो बाप-बेटे ने बड़ी होशियारी से अपने को बिज़्नेस्मेन मे तब्दील कर लिया.जहा कई राजाओं की हालत आम आदमियो से भी बदतर हो गई वोही राजा साहब & उनके पिता ने अपनी पोज़िशन और भी मज़बूत कर ली.

गाओं मे गन्ने की खेती होती थी तो राजा साहब ने शुगर मिल लगा दी & गाओं वालों को उसमे रोज़गार दे दिया.उनकी ज़मीन पे बड़े जंगल थे तो 1 पेपर मिल भी स्टार्ट कर दी,वाहा भी गाओं वाले ही काम करते थे.खेतों मे तो वो पहले से ही लगे हुए थे.
इस तरह पिता की मौत के बाद राजा यशवीर राजपुरा के बेताज बादशाह बन गये.लोकल एमलए & एंपी भी उनके आगे हाथ जोड़े खड़े रहते थे.वक़्त के साथ-2 राजा साहब करीब 15 मिल्स के मलिक बन गये.

राजा साहब का विवाह 1 बड़ी ही धर्म परायण महिला सरिता देवी से हुआ.राजा साहब व्यभिचारी तो नही थे फिर भी आम मर्दों की तरह सेक्स मे काफ़ी दिलचस्पी रखते थे,पर पत्नी के लिए चुदाई बस वंश बढ़ने का ज़रिया था और कुच्छ नही.इसलिए राजा साहब अपने शौक शहर मे पूरे करते थे.पर उन्होने अपनी पत्नी को कभी इसकी भनक भी नही लगने दी ना ही उन शहरी रांडों से कोई बहुत गहरा संबंध बनाया.वो तो बस उनके कुच्छ शौक पूरे करती थी जो उनकी पत्नी नही करती थी.अगर रानी साहिबा राजा साहब की इच्छायें पूरी करती तो राजा साहब कभी किसी और औरत के पास नही जाते.राजा साहेब अपने गाओं के किसी औरत को भी गंदी दृष्टि से नही देखते थे.

पर इस अच्छे इंसान को पहला बड़ा झटका उपरवाले ने आज से 2 साल पहले दिया.राजा साहब का बड़ा बेटा यूधवीर 1 कार आक्सिडेंट मे मारा गया.लोग कहते हैं कि वो आक्सिडेंट नही बलकी मर्डर था-किसी ने यूधवीर की कार के साथ च्छेदखानी की थी.खैर इस बारे मे हम कहानी मे आयेज बात करेंगे.बेटे की मौत का सदमा रानी सरिता देवी सह नही पाई और उसका नाम ले-2 कर भगवान को प्यारी हो गयी.यह सब 1 साल के भीतर-2 घटनाए घट गई.उस समय विश्वजीत विदेश से पढ़ाई करके लौटा था & आते ही उसे पिता का सहारा बनना पड़ा.

ऐसा नही है कि राजपुरा मे राजा साहब का एकच्छात्रा राज्य है.जब्बार सिंग नाम का एक ठाकुर बहुत दिनों से उनसे उलझता आ रहा है.लोग तो कहते हैं केयूधवीर की मौत मे उसी का हाथ था.जब्बार राजा साहब के दबाव को ख़तम कर खुद राजपुरा का बेताज बादशाह बनाना चाहता है.पर राजा साहब ने अभी तक उसके मन की होने नही दी है.

चलिए अब वापस चलते हैं महल को.
अरे ये क्या!पार्टी तो ख़तम हो गयी…सारे मेहमान भी चले गये. नौकर-नौकरानी भी महल के कॉंपाउंड मे ही बने अपने कमरों मे चले गये हैं.रात के खाने के बाद महल के अंदर केवल राजा साहब & उनके परिवार एवं खास मेहमानों को ही रहने का हुक्म है.

पर मैं आपको महल के अंदर ले चलता हूँ,सीधे विश्वजीत के कमरे क्यूकी अब मेनका से मिलने का वक़्त आ गया है.

मेनका-विश्वजीत की दुल्हन, नाम के जैसे ही बला की खूबसूरत…गोरा रंग,खड़ी नाक बड़ी-2 काली आँखें, कद 5’5″ …मस्त फिगर की मल्लिका.बड़े लेकिन बिल्कुल टाइट चुचियों & गांद की मालकिन. मेनका 1 बहुत कॉन्फिडेंट लड़की है जो कि अपने मन की बात सॉफ-2 लेकिन शालीनता से कहने मे बिल्कुल नही हिचकति.

मेनका सुहाग सेज पे सजी-धजी बैठी अपने पति का इंतेज़ार कर रही है.ये लीजिए वो भी आ गया.

मेनका & विश्वजीत शादी के पहले कई बार 1 दूसरे से मिले थे सो अजनबी तो नही थे पर अभी इतने करीबी भी नही हुए थे.विश्वा ने 4-5 बार उसके गुलाबी रसीले होठों को चूमा था…उसके नशीले कसे बदन को अपनी बाहों मे भरा था पर इससे ज़्यादा मेनका कुच्छ करने नही देती थी…पर आज तो वो सोच कर आया था कि उसे पूरी तरह से अपनी बना के रहेगा.

विश्वा पलंग पे मेनका के पास आकर बैठ गया.

“शादी मुबारक हो,दुल्हन”,कह के उसने मेनका का गाल चूम लिया.

“मुबारकबाद देने का ये कौन सा तरीका है?”,मेनका बनावटी नाराज़गी से बोली.

“अरे,मेरी जान.ये तो शुरूआर् है,पूरी मुबारका बाद देने मे तो हम रात निकाल देंगे”.कह के उसने मेनका को बाहों मे भर लिया & उसे बेतहाशा चूमने लगा..गालों पे माथे पे .उसकी लंबी सुरहिदार गर्दन पे.उसके होठों को चूमते हुए वो उनपर अपनी जीभ फिराने लगा & उसे उसके मुँह मे डालने की कोशिश करने लगा.

मेनका इतनी जल्दी इतने तेज़ हमले से चौंक & घबरा गई & अपने को उससे अलग करने की कोशिश करने लगी.

“क्या हुआ जान?अब कैसी शरम!चलो अब और मत तद्पाओ”,विश्वा उसके होठों को आज़ाद लेकिन बाहो की गिर्सफ़्त और मज़बूत करते हुए बोला.

“इतनी जल्दी क्या है?”

“मैं अब और इंतेज़ार नही कर सकता,मेनका.प्लीज़…”कहके वो फिर अपनी पत्नी को चूमने लगा.
पर इस बार जुंगली की तरह नही बल्कि आराम से थोड़ा धीरे-2.

थोड़ी ही देर मे मेनका ने अपने होठ खोल दिए & विश्वा ने अपनी जीभ उसके मुँह मे दाखिल करा दी और उसे बिस्तर पे लिटा दिया..उसकी बाहें अभी भी मेनका को कसे हुए थी & उसकी जीभ मेनका की जीभ के साथ खेल रही थी.उसका सीना मेनका की चूचियो को दबा रहा था & दाईं टाँग उसकी टाँगों के उपर थी..

थोड़ी देर ऐसे ही चूमने के बाद वो अपने हाथ आगे ले आया और ब्लाउस के उपर से ही अपनी बीवी की चूचिया दबाने लगा …फिर उसने अपने होत उसके क्लीवेज पर रख दिए…मेनका की साँसें भारी हो गयी..धीरे-2 वो भी गरम हो रही थी.

पर विश्वजीत बहुत बेसबरा था और उसने जल्दी से मेनका का ब्लाउस खोल दिया & फिर रेड ब्रा मे क़ैद उसकी चूचियों पर टूट पड़ा….मेनका की नही-2 का उसके उपर कोई असर नही था.

मेनका के लिए ये सब बड़ा जल्दी था.वो 1 कॉनवेंट मे पढ़ी लड़की थी..सेक्स के बारे मे सब जानती थी पर कुच्छ शर्म & कुच्छ अपने खानदान की मर्यादा का ख़याल करते हुए उसने अबी तक किसी से चुडवाया नही था.विदेश मे कॉलेज मे कभी-कभार किसी लड़के के साथ किस्सिंग की थी बस.विश्वा को भी उसने शादी से पहेले किस्सिंग से आगे नही बढ़ने दिया था.

सो उसके हमले से वो थोड़ा अनसेटल्ड हो गयी.इसी का फायडा उठा कर विश्वजीत ने उसके सारी & पेटीकोआट को भी उसके खूबसूरत बदन से अलग कर दिया.अब वो केवल रेड ब्रा & पॅंटी मे थी.टांगे कस कर भीची हुई..हाथों से अपने सीने को ढकति हुई…शर्म से उसका चेहरा ओर गुलाबी हो गया था & आँखें बंद थी-मेनका सच मच भगवान इन्द्र के दरबार की अप्सरा मेनका जैसी लग रही थी.

विश्वा ने 1 नज़र भर कर उसे देखा और अपने कपड़े निकाल कर पूरा नंगा हो गया.उसका 4 1/2 इंच का लंड प्रिकम से गीला था.उसने उसी जल्दबाज़ी से मेनका के ब्रा को नोच फेका और उसका मुँह उसकी चूचियो से चिपक गया.वो उसके हल्के गुलाबी रंग के निपल्स को कभी चूस्ता तो कभी अपनी उंगलियों से मसलता.मेनका उसकी इन हरकतों से और गरम हो रही थी.फिर विश्वा उसकी चूचियो को छ्चोड़ उसके पेट को चूमता उसकी गहरी नाभि तक पहुचा.

जब उसने जीभ उसकी नाभि मे फिराई तो वो सीत्कार कर उठी,”आ….अहह..”

फिर वो और नीचे पहुचा,पॅंटी के उपर से उसकी चूत पर 1 किस ठोकी तो मेनका मारे शर्म के उठती हुई उसका सर पकड़ कर अपने से अलग करने लगी पर वो कहा मानने वाला था.उसने उसे फिर लिटाया & झटके के साथ उसकी पॅंटी खीच कर फेक दी.मेनका की चूत पे झाँत हार्ट शेप मे कटी हुई थी.ये उसकी सहेलियों के कहने पर उसने किया था.

“वाह!मेरी जान”,विश्वा के मुँह से निकला,”वेरी ब्यूटिफुल पर प्लीज़ तुम इन बालों को सॉफ कर लेना.मुझे सॉफ बिना बालों की चूत पसंद है.”

ये बात सुनकर मेनका की शर्म और बढ़ गयी.1 तो वो पहली बार किसी के सामने ऐसे नंगी हुई थी उपर से ऐसी बातें!

विश्वा ने 1 उंगली उसकी चूत मे डाल दी और दूसरे हाथ से उसके बूब्स मसल्ने लगा.मेनका पागल हो गयी.तभी वो उंगली हटा कर उसकी टाँगो के बीच आया और उसकी चूत मे जीभ फिराने लगा.अब तो मेनका बिल्कुल ही बेक़ाबू हो गयी.उसे अब बहुत मज़ा आ रहा था.वो चाहती थी की विश्वजीत ऐसे ही देर तक उसकी चूत चाटता रहे पर उसी वक़्त विश्वा ने अपना मुँह उसकी चूत से हटा लिया.

मेनका ने आँखें खोली तो देखा कि वो अपना लंड उसकी चूत पर रख रहा था.

वो मना करने के लिए नही बोलते हुए उसके पेट पर हाथ रखने लगी पर बेसब्र विश्वा ने 1 झटके मे उसकी कुँवारी नाज़ुक चूत मे अपना लंड आधा घुसेड दिया.यूँ तो मेनका की चूत गीली थी पर फिर भी पहल्ली चुदाई के दर्द से उसकी चीख निकल गयी,”उउउइईईईई……..माअ…..अनन्न्न्न्न…न्न्न्न…ना…शियीयियी ”

विश्वा उसके दर्द से बेपरवाह धक्के मारता रहा & थोड़ी देर मे उसके अंदर झाड़ गया.फिर वो उसके सीने पे गिर कर हाँफने लगा.

मेनका ने ऐसी सुहागरात की कल्पना नही की थी, उसने सोचा था कि विश्वा पहले उससे प्यारी-2 बातें करेगा.फिर जब वो थोड़ा कंफर्टबल हो जाए तब बड़े प्यार से उसके साथ चुदाई करेगा.पर विश्वा को तो पता नही किस बात की जल्दी थी.

“अरे…तुम्हारी खूबसूरती का रस पीने के चक्कर मे तो मैं ये भूल ही गया!”,विश्वा अपने ज़मीन पर पड़े कुर्ते को उठा कर उसकी जेब से कुच्छ निकालते हुए बोला तो मेनका ने 1 चादर खीचकर अपने नंगे पन को ढँकते हुए उसकी तरफ देखा.

“ये लो.अपना वेड्डिंग गिफ्ट.”,कहते हुए उसने 1 छ्होटा सा बॉक्स मेनका की तरफ बढ़ा दिया.

मेनका ने उसे खोला तो अंदर 1 बहुत खूबसूरत & कीमती डाइमंड ब्रेस्लेट था.ऐसा लगता था जैसे किसी ने मेनका से ही पसंद करवा के खरीदा हो.वो बहुत खुश हो गयी & अपना दर्द भूल गयी.उसे लगा कि अभी बेसब्री मे विश्वजीत ने ऐसा प्यार किया.

“वाउ!इट’स सो ब्यूटिफुल.आपको मेरी पसंद कैसे पता चली?”,उसने ब्रेस्लेट अपने हाथ मे डालते हुए पूचछा.

“अरे भाई,मुझे तो तुमहरे गिफ्ट का ख़याल भी नही था”,विश्वा ने उसकी बगल मे लेटते हुए जवाब दिया.”वो तो मेरे कज़िन्स शादी के 1 दिन पहले मुझ से पुच्छने लगे कि मैने उनकी भाभी के लिए क्या गिफ्ट लिया तो मैने कह दिया कि कुच्छ नही.यार,मुझे लगा कि अब गिफ्ट क्या देना.पर पिताजी ने मेरी बात सुन ली.वो उसी वक़्त शहर गये ओर ये ला कर मुझे दिया.कहा कि बहू को अपनी तरफ से गिफ्ट करना.”,इतना कह कर वो सोने लगा.

मेनका निराश हो गयी,उसने तो सोचा था कि उसका पति उसके लिए प्यार से तोहफा लाया है पर उसे तो तोहफे का ध्यान भी नही था.मेनका ने भी विश्वा के लिए गोल्ड चैन ली थी जो उसने सोते हुए विश्वा के गले मे डाल दी & खुद भी सो गयी.

उसी वक़्त महल के उसी उपरी मंज़िल जिसमे मेनका & विश्वा का कमरा था,के एक दूसरे हिस्से मे राजा यशवीर अपने पलंग पर लेट सोच रहे थे कि आज कितने दीनो बाद उनके महल मे फिर रौनक हुई.”प्रभु,इसे बनाए रखना.”,उन्होने मन ही मन भगवान से प्रार्थना की.

अब उनका ध्यान अपने बेटे-बहू पर गया.इस वक़्त दोनो एक-दूसरे मे खोए होंगे.उन्हे अपनी सुहागरात याद आ गयी.सरिता देवी के आती धार्मिक होने के कारण उन्हे चुदाई के लिए तैइय्यार करने मे उन्हे काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी थी.ज़बरदस्ती उन्हे पसंद नही थी,वरना जो 6’2″ लंबा-चौड़ा इंसान आज 52 वर्ष की उम्र ने भी 45 से ज़्यादा का नही लगता था वो जवानी मे किसी औरत को काबू करने मे कितना वक़्त लेता!

अपनी सुहागरात याद करके उनके होठों पे मुस्कान आ गयी ओर अनायास ही वो अपने बेटे-अभू की सुहागरात के बारे मे सोचने लगे.उनका ध्यान मेनका की ओर गया.

“कितनी खूबसूरत है.विश्वा बहुत लकी है बस इस बात को वो खुद भी रीयलाइज़ कर ले.”,फिर वो भी सो गये.

आइए चलते हैं हम अब राजपुरा के 1 दूसरे कोने मे.वाहा 1 बड़ी कोठी अंधेरे मे डूबी है.लेकिन उपरी मंज़िल के 1 कमरे से कुच्छ आवाज़ें आ रही हैं.देखते हैं कौन है वाहा.

उस कमरे के अंदर 1 काला ,भद्दा & थोड़ा मोटा आदमी नगा बिस्तर पर बैठा है.उसके सर के काफ़ी बाल उड़ गये हैं & चेहरे पर दाग भी है.मक्कारी और क्रूरता उसकी आँखो मे सॉफ झलकती है.यही है जब्बार जिसका बस 1 मक़सद है-राजा साहब की बर्बादी.

वो शराब पी रहा है & एक बला की सुंदर नंगी लड़की उसके लंड को अपनी चूचियों के बीच रगड़ रही है.वो लंड रगड़ते-2 बीच-2 मे झुक कर उसे अपने पतले गुलाबी होठों से चूस भी लेती है.दूर से देखने से लगता है जैसे कि एक राक्षस & 1 परी जिस्मों का खेल खेल रहे हैं.

अचानक जब्बार ने अपना ग्लास बगल की तिपाई पर रखा और उस खूबसूरत लड़की को उसके बालों से पकड़ कर खीचा & उसे बिस्तर पर पटक दिया.

“औ..छ्ह”,वो कराही पर बिना किसी परवाह के जब्बार ने उसकी टांगे फैलाई & अपना मोटा लंड उसकी चूत मे पेल दिया.

“आ…आहह……हा…ईईईईईई……रा….आमम्म्ममम…”,वो चिल्लाई.

जब्बार ने बहुत बेरहमी से उसे चोदना शुरू कर दिया.उस लड़की के चेहरे पर दर्द & मज़े के मिले-जुले भाव थे.उसे भी इस जुंगलिपने मे मज़ा आ रहा था 7 वो नीचे से अपनी कमर हिल-2 कर जब्बार का पूरा साथ दे रही थी.थोड़ी ही देर मे उसने अपनी बाहें जब्बार की पीठ पर & सुडोल टाँगें उसकी कमर के गिर्द लपेट दी & चिल्लाने लगी,”हा…..आई….से….हीईीईई…..ज़ो…र्र…. से …कर….ते…रहो!”

“आ..हह…एयेए…हह!”

जब्बार उसकी चूचियो को काटने & चूसने लगा & अपने धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी.थोड़ी ही देर मे वो लड़कीजद गयी,”ऊऊऊओ…..एयेए….हह….!”

और साथ-साथ जब्बार भी.

उसकी चूत मे से लंड निकाल कर जब्बार बिस्तर से उतरा & तिपाई पे रखे ग्लास मे शराब डालने लगा.उस लड़की ने अपना बाया हाथ बढ़ा कर जब्बार के सिकुदे हुए लॅंड & बॉल्स को पकड़ किया & मसालने लगी,”ज़ालिम तो तू बहुत है पर आज कुच्छ ज़्यादा ही हैवानियत दिखा रहा था.वजह?”

ग्लास खाली करके जब्बार ने जवाब दिया,”मुझे उंगली कर रही है ना,मलिका.”

” साली,ये ले.”,कहते हुए उसने अपना अपने ही वीर्य & मलिका के रस भीगा लंड फिर से मालिका के मुँह मे घुसा दिया.अपने मोटे हाथों से उसे बालों से पकड़ कर उसका सिर उपर किया और उसके मुँह को ही चोदने लगा,”राजा के यहा खुशी मने & मैं यहा संत बना रहूं..हैं!”

जवाब मे मलिका ने हाथों से उसकी कमर को पकड़ा & अपनी दो उंगलियाँ जब्बार की गांद मे घुसा दी.वो चिहुका लेकिन उसने अपनी रखैल का मुँह चोदना नही छ्चोड़ा.

मलिका उसकी रखैल थी.उसके ही जैसी निर्दयी & ज़ालिम.भगवान जितनी खूबसूरती उसे बक्शी थी उतनी ही कम उसके दिल मे दया & प्यार भरा था.

इन ज़ालिमों को इनके जुंगलिपने पे छ्चोड़ हम आगे बढ़ते हैं आने वाली सुबह की ओर जब विषजीत अपनी दुल्हन को लेकर हनिमून के लिए स्विट्ज़र्लॅंड को जाने वाला है.

सुबह सूरज की रोशनी चेहरे पर पड़ने से मेनका की आँख खुली.विश्वजीत कमरे मे नहीं था & वो पलंग पर अकेली नंगी पड़ी थी.वो उठकर बाथरूम मे आ गयी.नौकरानियों ने कल ही उसका सारा समान उसकी ज़रूरत के हिसाब से उसको रूम मे अरेंज कर दिया था.

बाथरूम मे घुसते ही वो चौंक पड़ी-आदम कद शीशे मे अपने अक्स को देख कर..उसे लगा कि कोई और खड़ा है पर जब रीयलाइज़ किया कि ये तो उसी का अक्स है तो हंस पड़ी.वो शीशे मे अपने नंगे बदन को निहारने लगी…….अपना परियो जैसा खूबसूरत चेहरा,कमर तक लहराते घने,काले बाल…मांसल बाहें,लंबी सुरहिदार गर्दन…उसके 36 साइज़ के बूब्स बिना ब्रा के भी बिल्कुल टाइट और सीधे तने हुए थे..उसे खुद भी हैरत होती थी कि इतने बड़े साइज़ के होने के बावजूद उसकी चूचिया ऐसी कसी थी ज़रा भी नही झूलती थी…ब्रा की तो जैसे उन्हे ज़रूरत ही नही थी….उसने धीरे से उन्हे सहलाया और अपने हल्के गुलाबी रंग के निपल्स को हल्का सा मसला..अब उसके हाथ अपनी सपाट पेट पर गये जिसके बीच मे उसकी गोल,गहरी नाभि चमक रही थी .अब उसने अपना बदन घुमा कर अपनी मखमली पीठ का मुआयना किया,नीचे अपनी 26 इंच की कमर को देखा & फिर अपनी मस्त 34 साइज़ की गांद को निहारा जो की उसकी चूचियो की तरह ही बिल्कुल पुष्ट & कसी थी.उसकी मांसल ,भारी जांघे & उसके सुडोल टाँगें तो ऐसे चमक रही थी जैसे संगमरमर की बनी हो.

उसे अपनी सुंदरता पर थोड़ा गुरूर हो आया पर उसी वक़्त उसकी नज़र उसकी छातियो पर बने विश्वजीत के दांतो के निशान पर पड़ी & उसे कल की रात याद आ गयी & 1 परच्छाई सी उसके चेहरे पर से गुज़र गयी-उसकी छातियो को देख कर ऐसा लगता था जैसे चाँद पे दाग पड़ा हो…फ़र्क बस इतना था कि यहा 2-2 चाँद थे.

वो एक गहरी सांस भर के पानी भरे बाथ-टब मे बैठ गयी.उसके हाथ अपनी जांघों पर से होते हुए उसकी झांतों भरी चूत से टकराए & उसे रात को विश्वा की कही बात याद आ गयी.उसने हाथ बढ़ा कर बगल के शेल्फ से हेर-रिमूविंग क्रीम निकाली & अपनी झाँटें सॉफ करने लगी.

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बेटे-बहू को हनिमून के लिए विदा करके राजा यशवीर अपने ऑफीस पहुचे.उनकी 15 मिल्स तो राजपुरा के अंदर & आसपास के इलाक़े मे फैली थी पर राजपुरा के उत्तरी हिस्से मे 1 ओर उनकी 6 मिल्स का 1 बहुत बड़ा कॉंप्लेक्स था(उनका महल राजपुरा के पूर्वी बोर्डर्पे था).इसी के अंदर उन्होने मिल्स मे काम करने वाले उनके स्टाफ मेंबर्ज़ के लिए रेसिडेन्षियल कॉंप्लेक्स,हॉस्पिटल & स्टाफ के बच्चों के लिए स्कूल बनवाया था.साथ ही यहा उनके बिज़्नेस का सेंट्रल ऑफीस भी था जहा से राजा साहब अपने कारोबार को चलाते थे.

ऑफीस मे अपने चेंबर मे बैठते ही उनके राजकुल मिल्स ग्रूप के CMड सेशाद्री उनके पास सारी रिपोर्ट्स ले कर आ गये.सेशाद्री उनका बहुत वफ़ादार एंप्लायी था & राजा साहब उसके बिना बिज़्नेस चलाना तो सोच भी नही सकते थे.

“नमस्कार,सेशाद्री साहब.आइए बैठिए.”

“कुंवर साहब & कुँवरनी साहिबा रवाना हो गये,राजा साहब?’

“जी हां,सेशाद्री जी.उपरवाले की कृपा & आप सबकी शुभकामनाओं से शादी ठीक तरह से निपट गयी.”

“हम तो हुमेशा आपका शुभ ही चाहेंगे सर.”,सेशाद्री नेउनकी तरफ लॅपटॉप घूमाते हुए कहा.

“वो जर्मन कंपनी जिसे हम अपनी शुगर मिल्स मे पार्ट्नर बनाना चाहते हैं,उनके साथ 4थ राउंड की मीटिंग कैसी रही?”

“बहुत बढ़िया सर.पेपर मिल्स के लिए 1 अमेरिकन कंपनी से भी बात की है.जैसा आप चाहते हैं हुमारी ग्रूप कॉस. मे फॉरिन पार्ट्नर्स लेकर हम अपने प्रॉडक्ट्स का एक्सपोर्ट तो आसान कर ही लेंगे,साथ-2 हुमारे ग्रूप मे भी कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर तैयार हो जाएगा.”

“हा,हम चाहते हैं कि हुमारा ग्रूप आगे भी 1 वेल-आय्ल्ड मशीन की तरह चले & आपके जैसे क्वालिफाइड लोग ही हुमेशा इसकी बागडोर संभाले रहे.”

“पर राजा साहब,आपको डर नही लगता कि आपके परिवार का कंट्रोल ख़तम हो गया तो..”

“..अगर ऐसा होता है उसका मतलब है कि हुमारे परिवार मे किसी मे को. चलाने की काबिलियत नही है.ऐसे मे उन्हे पैसों से कॉमपेनसेट किया जाएगा ओर कंपनी. को सो कॉल्ड बाहर के लोग सुचारू रूप से चलाते रहेंगे.”,राजा साहब ने उनकी बात बीच मे ही काटते हुए जवाब दिया.

“सेशाद्री साहब,क्या आप आउटसाइडर हैं.आपका हुमारा खून का रिश्ता नही है पर आपने तो हमसे भी ज़्यादा इस ग्रूप की सेवा की है.”

“सर,प्लीज़ डॉन’ट एंबरस्स मी.”

“सेशाद्री साहब,हम तो आपकी तारीफ करते रहेंगे,आप ही तारीफ पर फूलना सीख जाए!”

कह कर दोनो हंस पड़े.

“अच्छा,वो अमेरिकन कंपनी भरोसे की तो है?”

एस,सर.जबसे जब्बार वाला केस हुआ है मैं इस मामले मे डबल सावधान हो गया हूँ.”

जब तक ये दोनो और बात करते है मैं आपको “जब्बार वाले केस” से रूबरू करवा दू.

जब से राजा साहब ने अपनी कंपनियो.का कॉर्पोरेटिसेशन करना प्लान किया उनके पास पार्ट्नर्स बनाने के लिए कई लोग आने लगे.बस यही जब्बार को उनके किले मे सेंध लगाने का मौका मिल गया.उसने कुच्छ लोगों को बहुत अट्रॅक्टिव ऑफर के साथ राजा साहेब के पास भेजा.बड़ी चालाकी से उसने अपना नाम सामने ना आने दिया पर राजकुल ग्रूप की खुसकिस्मती की उसके भेजे प्यादों मे से 1 के मुँह से नशे मे कहीं उसका नाम निकल गया & राजा साहब सचेत हो गये.

अब तो जर्मन कंपनी. & अमेरिकन कंपनी. से बातें ऑलमोस्ट फाइनल हो गयी थी.

आइए वापस चले दोनो के पास.

“जब्बार तो लगता है सबक सीख कर शांत हो गया सर.”

“नही,सेशाद्री साहब दुश्मन को कभी कम नही आँकना चाहिए & खास कर जब वो जब्बार जैसा है.उसकी ये चुप्पी तो हमे तूफान से पहले की खामोशी लग रही है.बहुत सावधान रहना होगा हम सब्को.”

यशवीर सिंग ने इससे सही बात शायद कभी कही हो.

रात हो चली है.अब हम राजपुरा की उस बड़ी आलीशान मगर मनहूस लगने वाली कोठी मे चलते हैं.

मलिका बड़े से पलंग पर बिल्कुल नगी होकर अपनी घोड़ी बनी हुई थी & अपनी चौड़ी,मखमली गांद जब्बार की तरफ करके हवा मे घुमा रही थी.उसने गर्दन घुमाई & जब्बार की तरफ देख कर अपनी जीभ अपने गुलाबी होठों पर फिराते हुए 1 हाथ से अपनी बड़ी-2 चूचियो को मसल्ने लगी.जब्बार उसे ऐसे देख रहा था जैसे भेड़िया अपने शिकार को.

वो केवल पाजामे मे था.उसने उसे उतार फेंका & पलंग पर चढ़ कर मालिका के पीछे पोज़िशन ले ली.मलिका अब अपनी गांद उसके लंड से टकराने लगी.जब्बार ने 1 हाथ उसकी कमर पकड़ी & दूसरे से अपना काला मोटा लंड पकड़ कर उसकी गांद के छेद मे अपना सूपड़ा घुसा दिया.

“ऊऊ…ययइईई!”,मालिका आगे को हो गयी पर जब्बार ने उसकी कमर पर पकड़ & मज़बूत कर दी और अगले झटके मे पूरे का पूरा लंड अंदर पेल दिया.

“आ….आहह….मार……गा….ईए!”

जब्बार अब ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा & बीच-2 मे मलिका के गोरे चूतदों पर थप्पड़ लगाने लगा.

“ऊओ….ऊओवववववव!”,हर थप्पड़ पर मलिका चीखती थी पर सॉफ ज़ाहिर था कि उसका मज़ा और बढ़ रहा था.वो राक्षस वैसे ही उसकी गांद चोद्ता रहा & 1 हाथ से उसकी चूचिया मसल्ने लगा.फिर थप्पड़ मारना बंद करके उसने उसकी चूत के दाने को दूसरे हाथ से रगड़ना शुरू कर दिया.

मालिका पागल हो गयी,”हा….अन्णन्न्…और ज़ोर ….से..फ…आ…आद्दद्ड….दे…मे…री…गा…आन्न्न्ड्ड…आई..से…ही चूऊऊऊद्द्द्द्द्द्दद्ड,साआआआअ…..ले!”

सुनते ही जब्बार ने छाती मसलना छ्चोड़ उसके लंबे बालों को घोड़ी की लगाम की तरह पकड़ कर खीच दिया..मालिका का चेहरा उपर को हो गया & उसपे दर्द की रेखाएँ दिखने लगी पर मलिका अब पूरी तरह से गरम हो गयी थी,”चूओत…मे….उन..ग्ली ..कर…नाआ!”

जब्बार ने उसकी चूत मे 3 उंगलिया घुसेड कर बेदर्दी से रगड़ना शुरू कर दिया.वो भी झड़ने के करीब था,धक्कों की स्पीड ओर बढ़ गयी मालिका भी अपनी कमर हिला कर उसकी ताल से ताल मिलने लगी..चूत मे उंगलियों की रगड़ ने भी रफ़्तार पकड़ ली की तभी..”ऊओ….ईईई मा..आआअन्न्‍ननणणन्!”,कहते हुए मलिका झाड़ गयी,उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया & वो निढाल हो कर आगे गिर गयी….जब्बार ने भी 5-6 धक्कों के बाद अपने पानी से उसकी गांद को भर दिया & मलिका की पीठ पर गिर कर हाँफने लगा.

तभी बगल की तिपाई पे रखा उसका मोबाइल जोकि वाइब्रटर मोड पर था, हिलने लगा.जब्बार ने वैसे ही मालिका के उपर पड़े-2 उसे उठा कर नंबर. देखा & फोन काट दिया.उसके बाद झटके से उसने अपना सिकुदा लंड मालिका की गॅंड से निकाला & अपना पाजामा पहन कर भागता हुआ कोठी के पीछे आया & वाहा बने लॉन को पार किया & पीछे बने छ्होटे से दरवाज़े को बस इतना खोला कि बाहर खड़ा काले शॉल मे लिपटा आदमी अंदर आ सके.जैसे ही वो घुसा,जब्बार उसका हाथ पकड़ कर उसे कोठी के अंदर ले आया.कोठी के सारे दरवाज़े बंद & खिड़कियाँ पर्दे से ढाकी हैं,उसने सुनिश्चित किया & उस आदमी को लेकर हॉल मे आकर बैठ गया.

“तुम्हे यहा आते किसी ने देखा तो नही?”,जब्बार ने उसकी तरफ पानी की बॉटल बढ़ाई.

“नही”,शॉल उतारते हुए & बॉटल खोलते हुए उसने जवाब दिया.

वो 1 6फ्ट से कुछ लंबा गोरा,तगड़ा इंसान था.उसके कंधे तक लंबे बाल & चेहरे पर घनी दाढ़ी थी.जब्बार 1 सोफे पर बैठ गया & वो इंसान उसके सामने वाले सोफे पर.

तभी मालिका हॉल मे आई.उसके बाल वैसे ही अस्त-व्यस्त थे उसने 1 ब्लॅक माइक्रो-मिनी स्कर्ट ओर उपर 1 बहुत टाइट वाइट गॅंजी पहनी थी जिसके नीचे ब्रा नही थी & चुदाई के वक़्त से कड़ी हुई उसकी घुंडिया उस गॅंजी को फाड़ कर बाहर आने को बेताब लग रही थी.गॅंजी बेपरवाही से पहनी गयी थी और उसका पेट & नाभि सॉफ दिख रहे थे.गॅंजी के गले से उसकी बड़ी चूचियो का काफ़ी हिस्सा दिख रहा था & जब वो चलती थी तो बड़े मादक ढंग से हिलता था.उसकी हालत देखकर कोई भी कह देता कि वो 1 रंडी है & अभी चुद कर आ रही है.

वो आकर जब्बार के सोफे के हटते पर बैठ गयी & उस अजनबी को सर से पैर से तक 1 बाज़ारु औरत की तरह देखने लगी.बैठते ही उसकी स्कर्ट पूरी उपर हो गयी & उसकी गांद दिखने लगी बस चूत ही धकि रही.

“ये कल्लन है & ये मेरी रखैल मलिका.”,जब्बार ने दोनो का परिचय कराया.जवाब मे कल्लन ने सिर्फ़ सिर हिलाया.मलिका उसे वैसे ही चालू निगाहों से देखती रही.

“इसकी रांड़ छाप हरकतों पर मत जाना.इसका दिमाग़ हुमेशा अलर्ट रहता है.”,जब्बार ने कल्लन को कहा.

मलिका ने हँसते हुए अपने दाँतों से जब्बार के कान पे काटने लगी.

“हुउँ!बस,अब काम का टाइम आ गया है.”,जब्बार ने उसे रोकते हुए कहा.

फिर जब्बार दोनो को अपना प्लान सुमझने लगा.

उसके चुप होते ही मलिका ने उसकी तरफ तारीफ भरी नज़रों से देखा,”हरामीपन मे तेरा जवाब नही!इस बार तो राजा गया.”

“हा,पर 1 बात हम तीनो अच्छी तरह समझ ले.कल्लन,तुम हुमलोगों से कभी नही मिलोगे & इस गाओं मे कभी नज़र आओगे.”,जब्बार उठ कर अंदर गया & 2 नये मोबाइल लेकर आया.1 उसने कल्लन को दिया,”इन दोनो मोबाइल्स बस 1 दूसरे का नंबर.सेव्ड है.जब भी ज़रूरत हो हम इसी पर बात करेंगे.प्लान कामयाब करने के लिए हुमारी सावधानी बहुत ज़रूरी है.”

“और हां तू भी सुन ले मलिका,मैं जानता हूँ इस को देख कर तेरी चूत लार टपका रही है पर जब तक हम अपने मक़सद मे कामयाब नही हो जाते तुझे इसे कंट्रोल मे रखना होगा”,वो उसकी चूत थपथपाते हुए बोला.

कल्लन पे मालिका की जिस्म की नुमाइश का कोई असर नही हुआ या यू कहें कि उसने अपने भाव बड़ी सफाई से च्छूपा लिए थे,’क्या गॅरेंटी है जब्बार कि काम ख़तम होने के बाद तुम मुझे दूध से मक्खी की तरह नही निकाल फेंकोगे?”

“इस गुनाह मे हम तीनो बराबर के भागीदार रहेंगे ,कल्लन.हम तीनो 1 दूसरे के राज़दार हैं & यही हम तीनो की सलामती की गॅरेंटी है.”

तब तक मलिका अंदर से विस्की ले आई थी.उसने 3 पेग बनाए,1 खुद लिया & बाकी 2 दोनो मर्दों को दिया,”चियर्स 2 और सक्सेस.”

ग्लास खाली करते ही कल्लन ने शॉल वापस लपेटी और उसी रास्ते वापस लौट गया.

दरवाज़ा बूँद करके जब्बार अंदर आया तो देखा की मलिका सोफे पर फिर से नंगी पड़ी अपनी चूत मे उंगली कर रही है & अपनी चूचिया दबा रही है.

“साली छिनाल,हुमेशा गरम रही है!”,जब्बार मन ही मन बड़बड़ाया & अपना पाजामा उतार कर सोफे की तरफ बढ़ गया.

…………..

प्लेन के बिज़्नेस क्लास की अपनी सीट को मेनका ने बटन दबा कर फुल्ली रिक्लाइन कर दिया & लेट गयी.एर-होस्टेस्स ने मुस्कुराते हुए उसे कंबल ओढ़ाया & “गुड नाइट” कह कर,लाइट ऑफ की & चली गयी.

मेनका आज स्विट्ज़र्लॅंड से अपना हनिमून मना कर लौट रही थी.पीछे की सीट पर विश्वजीत ऑलरेडी सो चुका थापर मेनका की आँखों से नींद अभी दूर थी.उसने खिड़की का फ्लॅप सरकया & बाहर देखा की चाँद की रोशनी बादलों को नहला रही थी…लग रहा था कि प्लेन बर्फ़ीले पहाड़ों के उपर चल रहा है.पहाड़ों के ध्यान से उसे अपने हनिमून का पहला दिन याद आ गया.

विश्वा & वो ज़ुरी के पास 1 पास अपने शेलेट(कॉटेज मे पहुचे).मेनका ने 1 टॉप & फुल-लेंग्थ फ्लोयिंग स्कर्ट पहना हुआ था.वो शेलेट के अंदर आई जब अपने बेडरूम की खिड़की से परदा हटाया तो कुदरत की खूबसूरती का अद्भुत नज़ारा देख कर उसका मुँह खुला का खुला रह गया.सामने ही आल्प्स रेंज के पहाड़ दिख रहे थे जोकि सूरज की रोशनी मे चमक रहे थे & पहाड़ों के नीचे दूर-2 तक फैले हरी मखमली घास के मैदान.

तभी पीछे से उसे विश्वा ने अपनी बाहों मे जाकड़ लिया &उसकी गर्दन पे किस करने लगा.

“छ्चोड़िए ना!देखिए कितनी सुंदर जगह है”,मेनका कसमसाते हुए बोली.

“ह्म्म.”,जवाब मे विश्वा ने उसकी स्कर्ट उठा दी,उसकी पॅंटी 1 तरफ खिसकाई & अपना पहले से निकाला लंड उसकी चूत मे घुसने लगा.

“प्लीज़,अभी नही,विश्वा”,मेनका ने अलग होने की कोशिश करते हुए कहा.

पर विश्वा ने अनसुना करते हुए अपना हाथ उसके टॉप मे घुसा दिया & ब्रा के अंदर हाथ डाल कर उसकी बड़ी-2 चूचिया मसल्ने लगा,उसने अपना लंड पूरा का पूरा मेनका की चूत मे घुसा दिया & तेज़ी से धक्के लगाने लगा.मेनका ने सहारे के लिए आगे झुक कर खिड़की के सिल को पकड़ लिया.उसे इस चुदाई मे कोई मज़ा नही आ रहा था बल्किस्तेमाल किए जाने का एहसास हो रहा था जैसे की वो 1 बाज़ारु औरत हो & विश्वा उसका ग्राहक.

थोड़ी ही देर मे विश्वा उसके अंदर झाड़ गया,उस से अलग हुया & बोला,”तैय्यार हो जाओ.घूमने चलते हैं…”

मेनका ने फिर आँखें बंद करके नींद की बाहों मे जाना चाहा पर फिर उसे वो वाक़या याद आया जिसने उसके दिल मे विश्वा के लिए इज़्ज़त ओर भी ज़्यादा कम कर दी.

वो शेलेट के कार्पेट पे नंगी पड़ी थी.बगल मे फाइयर्प्लेस मे आग जल रही थी पर उसकी बेपर्दा जवानी की भदक्ति चमक के आगे आग भी बेनूर लग रही थी.विश्वा भी नंगा था ओर उसकी चूत मे अपनी जीभ डाल कर चाट रहा था.मेनका पागल हो रही थी..उसे बहुत अच्छा लगता था जब उसका पति उसकी चूत पे अपने मुँह से मेहरबान होता था.

पर हर बार की तरह मेनका का मन भरने से पहले ही विश्वा ने अपने होठ उसकी चूत से अलग कर दिया.मेनका का सिर 2 कुशान्स पर था,जिसके कारण उसका उपरी बदन थोडा उठा हुआ था.उसने आँखें खोली तो देखा कि विश्वा अपना लंड पकड़ कर हिला रहा है &उसकी तरफ देख रहा है.उसने गहरी साँस ली & उसका इशारा समझते हुए अपनी टांगे ओर फैला दी.

पर वो चौंक गई जब विश्वा अपना लंड उसकी चूत मे घुसाने के बजाय उसे सीने के दोनो ओर पैर करके बैठ गया ओर अपना लंड उसके मुँह के सामने हिलाने लगा,”इसे लो.”

मेनका ने उसके लंड को अपने हान्थो मे पकड़ा ओर हिलाने लगी.विश्वा अक्सर उसे अपना लंड पकड़ने को कहता था पर उस वक़्त वो पीठ के बल लेटा होता था.आज की तरह उसने कभी नही किया था.

“हाथ मे नही मुँह मे लो.”

“क्या?!!”,मेनका ने पुचछा.

“हाँ,मुँह मे लो”,कहकर उसने अपना लंड उसके हाथों से लिया & उसके बंद होठों पर से छुआने लगा.

“नही,मैं ऐसा नही करूँगी”,मेनका ने उसे हल्के से धकेला & करवट लेकर उसके नीचे से निकल गयी.

“क्यू?”

“मुझे पसंद नही बस.”

“अरे,क्या पसंद नही?”

“मुझे घिन आती है.मैं ऐसे नही करूँगी.”

“जब मैं तुम्हारी चूत चाटता हूँ तब तो तुम्हे बड़ा मज़ा आता है &जब मैं वोही तुमसे चाहता हूँ तो तुम्हे घिन आती है!”

“देखिए,मैं आपसे बहस नही करूँगी.आप जो चाहते हैं वो मैं कभी नही कर सकती बस!”

“ठीक है,तो सुन लो आज के बाद मैं भी कभी तुम्हारी चूत नही चाटूँगा.”कह कर विश्वा ने उसे लिटाया & उसके उपर आकर अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया& कुच्छ ज़्यादा ही तेज़ धक्के लगाने लगा जैसे उसे जानकार तकलीफ़ पहुँचना चाहता हो.मेनका ने अफ तक नही की ओर उसके झड़ने का इंतेज़ार करने लगी.

अभी भी इंडिया पहुँचने मे बाबाहुत वक़्त था पर मेनका अभी तक नही सो पाई थी.उस दिन के बाद विश्वा ने सच मे उसकी चूत पे अपने होठों को नही लगाया.

मेनका अब आगेके बारे मे सोचने लगी.राजपुरा पहुँचने के बाद 2 दिन वाहा रहना था & फिर उसे मायके जाना था.अपने माता-पिता का ख़याल आते ही उसके चेहरे पे मुस्कान आ गयी& वो उनकेलिए खरीदे गये तॉहफ़ों के बारे मे सोचने लगी & थोड़ी ही देर मे सो गयी.

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शहर के उस घटिया से होटेल के उस रूम मे वो आदमी पलंग पर नंगा पड़ा था.उसके दोनो हाथ बेडपॉस्ट्स से सिल्क स्कार्व्स से बँधे थे और उसके सामने 1 खूबसूरत, सेक्सी लड़की धीरे-2 अपने कपड़े उतार रही थी.थोड़ी ही देर मे वो पूरी नंगी हो गयी &उसकी तरफ बोझिल पलकों से देख कर अपने गुलाबी होठों पे जीभ फेरी & 2 कदम आगे बढ़ कर अपना 1 पैर पलंग पर रख दिया & पैर के अंगूठे के नाख़ून से उस आदमी के तलवे गुदगुदाने लगी,फिर उसने अपनी दाए हाथ की उंगलिया अपने चूत मे डाल दी & बाए हाथ से अपनी भारी छातियो को मसल्ने लगी.

वो आदमी जोश से पागल हो गया & अपने हाथ च्छुदाने की कोशिश करने लगा.उसका लंड पूरा तन चुका था.पर उसकी हालत से बेपरवाह वो लड़की अपने बदन से खेलते रही,”ऊऊहह….आआ…ह..हह…..बत्रा साहब,ऐसे ही आप मेरी चूचिया दबाना चाहते हैं ना?”उसने अपने बूब्स को बेरहमी से मसालते हुए पुचछा.

“हा..हा..मलिका मेरी जान मेरे हाथ तो खोलो.”

“क्यू?बर्दाश्त नही हो रहा?”,मलिका वैसे ही अपने जिस्म से खेलती हुई & उसे और तड़पाते हुए बोली.

“नही,,नही!!!!!!!!!!!!प्लीज़ खोलो मलिका.”

पर मलिका ने तो उसे और तड़पाना था.वो उसके बदन के दोनो तरफ घुटने रख कर उसके लंड के ठीक उपर अपनी चूत लहराने लगी.बत्रा अपनी गंद उठा कर अपने लंड को उसमे घुसाने की कोशिश करने लगा.पर मलिका हंसते और उपर उठ गयी & अपने हाथ से उसे फिर वापस बिस्तर पर सुला दिया.फिर अपने हाथ उसके सीने पे रखे & यूँ बैठने लगी जैसे उसके लंड को लेने वाली हो.बत्रा मुस्कुराने लगा…मलिका की चूत उसके लंड के सूपदे से सटी..बत्रा को लगा कि अब उसकी मुराद पूरी हुई & ये कसी चूत अब उसके लंड को निगल लेगिपर उसके सपने को तोड़ते हुए मलिका फिर उठ गयी.]

बत्रा रुवासा हो गया,”प्लीज़ मलिका और मत तड़पाव..प्लीज़!!!!प्लीज़!!”

मलिका फिर बेदर्दी से हँसी & इस बार उसके लंड पे बैठ गयी,जैसे ही पूरा लंड उसकी चूत के अंदर गया बत्रा नीचे से ज़ोर-2 से गांद हिलाने लगा.मलिका ऩेफीर उसे मज़बूती से अपने बदन से दबा दिया & बहुत ही धीरे-2अपनी गंद हिला कर उसे चोदने लगी.

बत्रा अब बिल्कुल पागल हो गया.जोश के मारे उसका बुरा हाल था & उसने फिर नीचे से अपनी गंद ज़ोर-2 से हिला कर धक्के मारने लगा.मलिका पागलों की तरह हँसने लगी & थोड़ी ही देर मे बत्रा झाड़ गया.

तब मालिका ने वैसे ही उसके उपर बैठे-2 उसके हाथ खोले.हाथ खुलते ही बत्रा ने उसे पकड़ कर नीचे गिरा दिया &फिर उसके उपर चढ़ गया.उसका सिकुदा लंड अभी भी मालिका की चूत मे ही था.

“साली,तू बहुत तड़पति है…बहुत मज़ा आता है ने तुझे इसमे…ये ले..ये ले!”,कह के वो अपने सिकुदे लंड से ही धक्के लगाने लगा.थोड़ी ही देर मे लंड फिर तन गया & बत्रा के धक्कों मे भी ओर तेज़ी आ गयी.

वो बहुत बेदर्दी से धक्के मार रहा था पर मलिका वैसे ही पागलों की तरह हँसती रही.थोड़ी ही देर मे उसके बदन ने झटके खाए & वो झाड़ कर मलिका के उपर ही ढेर हो गया.

“अब थोड़ी काम की बातें हो जाए,बत्रा साहब?.मलिका ने उसके कन मे कहा.

बत्रा राजकुल ग्रूप मे मॅनेजर था.सेशाद्री को उस पर बहुत भरोसा था & बत्रा आदमी था भी भरोसे के लायक पर फिर 1 दिन उसकी मुलाकात मलिका से हुई & उस दिन सेओ राजा साहेब के बिज़्नेस के अंदर जब्बार का भेड़िया बन गया.

बत्रा को जैसे सेक्स करना पसंद था,उसकी बीवी को वो बिल्कुल भी अच्छा नही लगता था.बत्रा रफ सेक्स& सडो-मासकिज़म का शौकीन था.दर्द के साथ सेक्स ही उसे पूरी तरह संतुष्ट कर पाता था.किसी तरह जब्बार को उसकी ये कमज़ोरी पता चल गयी &मलिका के ज़रिए उसने उसे अपना जासूस बना लिया.मज़े की बात ये थी, बत्रा ये समझता था कि वो राजा साहब के बिज़्नेस राइवल पॅंट ग्रूप के लिए काम करती थी.इस तरह से जब कभी पोल खुलती भी तो नुकसान केवल बत्रा का था.जब्बार का नाम भी सामने नही आता & मलिका-मलिका को तो किसी चीज़ की परवाह नही थी सिवाय इसके कि उसके डेबिट & क्रेडिट कार्ड हुमेशा काम करते रहें & उसके जिस्म की आग रोज़ बुझती रहे.

जब्बार टी-शर्ट & शॉर्ट्स मे अपनी कोठी के किचन मे खड़ा फ्रिड्ज से बॉटल निकाल कर पानी पी रहा था जब मलिका हॉल मे दाखिल हुई.उसने अपना हॅंड बॅग 1 तरफ फेका & जब्बार को हॉल से किचन मे खुलते दरवाज़े से देखते हुए बेडरूम मे घुस गयी.जब्बार बॉटल लेकर हॉल मे आया & बड़े सोफे पर बैठ गया.

“क्या पता चला?”

सुनकर मलिका बेडरूम से हॉल मे खुलने वाले दरवाज़े पे आकर खड़ी हुई,”यही कि बत्रा का लंड तुमसे बड़ा है”,हंसकर अपना टॉप उतारते हुए अंदर चली गयी.

“उंगली मत कर.”

“क्यू ना करू?सिर्फ़ तू ही कर सकता है.”,वो वापस दरवाज़े पे आई & अपने हाथ पीछे ले जा कर अपने ब्रा के हुक्स खोल कर उसे अपने बदन से अलग कर दिया,उसकी भारी चूचिया थरथरती हुई आज़ाद हो गयी.

“राजा की पोज़िशन दिन पर दिन मज़बूत हो रही है & तू बस यहा जासूसी ही करता रह!पता है राजकुल ग्रूप का 49% शेर 1 जर्मन कंपनी. खरीद रही है.बत्रा कह रहा था कि राजकुल ग्रूप की टोटल वॅल्यू 200 करोड़ है,जर्मन कंपनी.से राजा को 98 करोड़ मिल रहे हैं.अभी ऑडिटिंग वगेरह चल रही है,2-3 महीने मे डील हो जाएगी.”,उसने अपनी स्किन-टाइट जीन्स & पॅंटी1 साथ उतरी & अपनी मस्त गांद मटकाते हुए वापस रूम मे चली गयी.

“हा..हा…हा!इसका मतलब है कि राजकुल की असल वॅल्यू है 280 करोड़ रुपये.राजा को 30 करोड़ रुपये और मिले होंगे.”,जब्बार हंसा.

“क्या?”,मलिका 1 ओवरसाइज़ सफेद ट-शर्ट पहन कर आई,साफ पता चल रहा था कि उसके नीचे उसने कुछ नही पहना था.उसकी चूचियो की गोलाई & निपल्स के उभार & चौड़ी गांद के कटाव कपड़े मे से सॉफ झलक रहे था.उसने जब्बार के हाथ से बॉटल ली & उसकी गोद मे पैर रख कर सोफे पे लेट गयी & पानी पीने लगी.

“मलिका,ये बिज़्नेसमॅन जितना पैसा कमाते हैं,वो असल रकम कभी नही बताते.ये बॅलेन्स शीट,ऑडिटिंग सब होती है पर कुच्छ पैसा ये हमेशा अपने सीक्रेट अकाउंट्स मे रखते हैं.ये 200 करोड़ तो दुनिया के लिए है.डील से जो पैसा ग्रूप को मिलेगा,दिखाया जाएगा कि सारे पैसे एंप्लायीस के बोनस & मिल्स के अपग्रडेशन मे लग गये & 98 करोड़ मे से 4-5 करोड़ राजा को मिले.पर ग्रूप की वॅल्यू जान कर कम दिखाई जाएगी ताकि वो 30 करोड़ राजा को बिना किसी परेशानी के मिले जिन्हे वो कही विदेशी बॅंक मे च्छूपा देगा.और तो और तुझे पता है कि सालाना मुनाफ़ा भी हुमेशा थोड़ा कम दिखाया जाता है & वो च्छुपाई हुई रकम भी राजा के पेट मे जाती है”

“ठीक है पर अपने फ़ायडे की बात तो समझा मुझको.”,कहते हुए मलिका ने अपने पैर से जब्बार के शॉर्ट्स को नीचे सरका दिया & वैसे लेते हुए ही अपने पैरों से उसके लंड को रगड़ने लगी.बॉटल को किनारे रखा,अपनी शर्ट उपर की & अपनी उंगलियों से अपने निपल्स रगड़ने लगी.

“राजपरिवार की बर्बादी ही मेरा सबसे बड़ा फाय्दा है.तुझे लगता है कि मैं हाथ पे हाथ धरे बैठा हूँ”,जब्बार ने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत मे घुसाते हुए कहा,”ये मेरा प्लान है,साली.मैं ऐसी चाल चलूँगा कि राजा यशवीर & उसका परिवार अपने हाथों अपनी जान लेगा & अपने बिज़्नेस की धज्जियाँ उड़ाएगा.”,उसने मलिका के दाने को रगड़ते हुए कहा.

“ऊऊ…हह!पर तुझे तो 1 पैसा भी नही मिलेगा इसमे…एयेए…ययईईए…..बस राजा की बर्बादी होगी.”

“कहा ना राजा की बर्बादी ही मेरा सबसे बड़ा फयडा है.तुझे क्या चिंता है मैं जानता हूँ छिनाल!परेशान मत हो तेरी भूख शांत करने लायक पैसे मेरे पास अभी भी हैं & हमेशा रहेंगे.बदले की आग मे खुद को भी राख करू ऐसा चूतिया नही हूँ मैं.,”मालिका की चूत पे चिकोटी काटते हुए उसके मुँह से निकल गया .

“ऊउउउउ…कचह!हा…हा…बदला!तो ये बात है,क्या हुआ था कुत्ते?राजा ने तेरी मा की गांद मार ली थी क्या?!!हा..हा..हा..एयाया…..यययययईईई!मलिका दर्द से चीख पड़ी.जब्बार ने बेरहमी से उसकी चूत नोच ली थी.

“हरमज़ड़ी,रंडी!आज के बाद मुझसे कभी मेरे बदले के बारे मे मत पुच्छना?ओर अगर बाहर किसी से भी कहा तो तुझे ऐसी मौत मारूँगा कि यमराज भी दहल जाएगा.”उसने लेटी हुई मलिका के 2-3 झापड़ बी रसीद कर दिए.

“ठीक है दरिंदे.ये ले साले.”,जवाब मे मालिका ने उसके आंडो को अपने पैरो तले कुचल दिया,”साला नमर्द मुझ पे हाथ उठाता है!”

“एयेए..हह!”,जब्बार करहा,उसने मालिका की टाँगों को अपने आंडो से हटाया & उन्हे चौड़ी करके उसके उपर सवार हो गया & अपना लंड उसकी चूत पे रगड़ने लगा,”मुझसे बदतमीज़ी करती है,रांड़!”,कह कर पागलों की तरह वो उसके बदन को नोचने लगा.

“मुझे नमर्द कहती है.ये ले!”,थोड़ी देर मे लंड खड़ा हो गया & उसने उसे मलिका की चूत मे पेल दिया & ज़ोरदार धक्के मारने लगा.उसने अपने दाँत उसकी बड़ी,गोल चूची मे गढ़ा दिए.

मलिका पागलों की तरह हँसने लगी & अपनी टाँगें उसकी कमर पे लपेट दी & नीचे से अपनी कमर हिलाने लगी & फिर जब्बार के कंधे पे इतनी ज़ोर से काटा की उसके खून निकल आया.

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मेनका अपने मायके से वापस राजपुरा आ गयी थी.सवेरे उठ कर वो नीचे रसोई मे खानसमे से बात करने पहुचि.

“नमस्कार,कुँवरनी जी.”

“नमस्कार,खानसमा साहेब.आज का मेनू डिसाइड कर ले.”

“कुँवरनी जी,नाश्ते का हुक्म तो राजा साहेब ने कल रात आपके वापस आने के पहले ही दे दिया था.आप दिन के बाकी खाने का मेनू हमे हुक्म कर दें.”

मेनका ने बाकी मेनू डिसाइड कर के जब नाश्ते का मेनू देखा तो उसे प्लेज़ेंट सर्प्राइज़ हुआ.उसके ससुर ने केवल उसकी पसंद की चीज़ें बनाने का हुक्म दिया था.तभी उसके दिमाग़ मे 1 ख़याल आया.

“खानसमा साहब,हमे पिताजी की पसंद-नापसंद के बारे मे तफ़सील से बताएँ & साथ-साथ ये भी कि मेडिकल रीज़न्स की वजह से तो उन्हे कोई परहेज़ तो नही करना पड़ता.”

थोड़ी देर बाद मेनू रिवाइज़ किया गया.

नाश्ते के बाद दोनो बाप-बेटे ऑफीस चले गये & मेनका महल का सारा सिस्टम समझने लगी.हर काम के लिए नौकर-नौकरानी थे.उन्हे पता भी था कि उन्हे क्या करना है.शाम तक मेनका ने पूरा सिस्टम समझ लिया & पूरे स्टाफ को कुच्छ न्‍नई बातें समझा दी.

रात के खाने पे राजा साहब खुशी से उच्छल पड़े.केवल उनके पसंद की चीज़ें थी टेबल पर.

“खानसमा साहब,आज आप हम पर इतने मेहेरबान कैसे हो गये,भाई?”

“महाराज.ये सब हमने कुँवरनी साहिबा के कहने पे बनाया है.”

“दुल्हन,आपको हुमारी पसंद के बारे मे कैसे पता चला?”

“जैसे आपको हुमारी पसंद के बारे मे.”,मेनका ने जवाब दिया & दोनो हंस पड़े.

शाम के 7 बजे थे,अंधेर गहरा रहा था जब राजपुरा से निकल कर वो ग्रे कलर की लंदक्रुसेर ने 5 मिनट के बाद हाइवे छ्चोड़ दिया ओर 1 पतली सड़क पे चलने लगी & 15 मिनट बाद कुच्छ झोपड़ियों के पास पहुच कर रुक गयी.ड्राइवर साइड का शीशा 4 इंच नीचे हुआ & 1 50 का नोट बाहर निकला जिसे उस आदिवासी ने लपक के पकड़ लिया जो गाड़ी देख कर भागता हुआ आया था.बदले मे उसने 1 छ्होटी बॉटल गाड़ी के अंदर दे दी.

उसके बाद वो ग्रे कलर की, गहरे काले शीशों वाली लंदक्रुसेर वापस लौटने लगी.हाइवे से थोड़ा पहले कार रुक गयी.अंदर बैठे विश्वजीत ने बॉटल खोल ले अपने मुँह से लगा ली.सस्ती शराब जब हलक से नीचे उतरी तो उसे जलन महसूस हुई पर इसी जलन मे उसे सुकून मिलता था.

राजा यशवीर का बेटा,भावी राजा,अकूत दौलत का मलिक जो चाहे थे दुनिया की महँगी से महँगी शराब पी सकता था आदिवासियों द्वारा घर मे बनाई हुई 50 रुपये की शराब मे चैन पाता था.वाकाई इंसान भगवान की सबसे अजीबो-ग़रीब ईजाद है.

विश्वा को वो दिन याद आया जब वो अपने बड़े भाई के साथ घूमते हुए यहा आया था & उन्होने इन आदिवासियों से जुंगली खरगोश पकड़ना सीखा था.अपने गुज़रे हुए भाई की याद आते ही उसकी आँखो मे पानी आ गया.

“क्यू चले गये तुम भाई?क्यू.तुम गये और मैं यहा अकेला रह गया इन झंझटों के बीच मे.तुम जानते थे मुझे ये बिज़्नेस & राजाओं की तरह रहना कितना नापसंद था.फिर भी मुझे छ्चोड़ कर चले गये.”,विश्वा बुदबुडाया & 1 घूँट और भरी.

“मर्यादा,शान….डिग्निटी!बस यही रह गया है मेरी लाइफ मे.चलो तो ख्याल रहे कि हम किस ख़ानदान के हैं,बात करो तो ध्यान रहे कि हुमारी मर्यादा क्या है…यहा तक की शादी भी करो तो ….हुन्ह.”

विश्वा हुमेशा सोचता था कि यूधवीर राजा बनेगा & वो आराम से जैसे मर्ज़ी विदेश मे रह सकता था.शादी मे तो उसे विश्वास ही नही था.उसका मानना था कि जब तक जी करे साथ रहो & जिस दिन डिफरेन्सस हो अलग हो जाओ.शादी तो बस मर्द-औरत के ऐसे सिंपल रिश्ते को कॉंप्लिकेट करती थी.

उसने बॉटल ख़तम करके बाहर फेंकी की तभी 1 लंबा,गोरा छ्होटे-2 बालों वाला क्लीन शेवन इंसान उसके पास पहुचा,”सलाम,साब.”

उस अजनबी को देखते ही विश्वा के हाथ अपने कोट मे रखे पिस्टल पर चले गये.

“सलाम,साब.मेरा नाम विकी है.मुझे लगता है कि मेरे पास आपके काम की चीज़ है.”

“दफ़ा हो जाओ.”,कहकर विश्वा गाड़ी गियर मे डालने लगा.

“साहब,बस 1 बार मेरा समान देख लीजिए.कसम से मैं आपका दुश्मन नही बस 1 छ्होटा सा व्यापारी हू जिसे लगता है कि उसके माल के असल कदरदन आप ही है.”

विश्वा ने बिना कुच्छ बोले गाड़ी रोकी पर बंद नही की & उसका 1 हाथ कोट के अंदर ही रहा.

विकी ने अपनी जेब से 2 छ्होटे पॅकेट्स निकाले जिसमे 1 मे सफेद पाउडर था & दूसरे मे छ्होटे-2 टॅब्लेट्स.

विश्वा समझ गया कि विकी 1 ड्रग डीलर था & ये सिकैने & एकस्टसी थे.

“मैं ये सब नही लेता.”

“साहब,ना तो मैं पोलीस का आदमी हू ना तो आपको फँसाने की कोशिश कर रहा हूँ.आपके जैसे मैं भी इन लोगों से महुआ लेने आता हूँ.आज आपको देखा तो मेरे अंदर का बिज़्नेसमॅन कहने लगा कि इतने मालदार आदमी को 50 रुपये की शराब क्यू चाहिए….इसीलिए ना कि वो कोई नया नशा चाहता है.”

विश्वा ने विकी की आँखों मे घूर के देखा.सच कह रहा था वो.वो नशे मे सुकून ही तो तलाश रहा था.

“..मैं यही नाथुपुरा का रहनेवाला हूँ.शहर मे मेरी मोबाइल शॉप है.थोड़ी एक्सट्रा इनकम के लिए ये धंधा करता हू.भरोसे का आदमी हू साहब.माल भी असली देता हूँ.1 बार ट्राइ करो साहब.”

“कीमत क्या है?”

विकी के चेहरे पर मुस्कान फैल गयी.

——————————————————————————-

वो मोबाइल जिसमे बस 1 ही नंबर. सेव्ड था अचानक बजने लगा.जब्बार चौंक कर उठा,रात के 12 बाज रहे थे.मालिका एकद्ूम नंगी बेसूध उसके बगल मे सोई पड़ी थी.

“हुऊँ”,उसने फोन उठाया.

“चिड़िया ने आज दाना चुग लिया.”

“वेरी गुड.उसे जाल मे फँसा कर ही छ्चोड़ना.”

“डॉन’ट वरी.”

जब्बार ने फोन काट दिया.कल्लन ने पहली सीधी चढ़ ली थी.अब देखना था आगे क्या होता है.

राजा यशवीर ने महसूस किया कि मेनका के आने के बाद उनका शानदार महल फिर से उन्हे घर लगने लगा था वरना तो पिच्छले 2 सालों से बस वो यहा जैसे बस सोने & खाने के लिए आते थे.

पर अब उन्हे घर पहुँचने का इंतेज़ार रहता था.मेनका से बातें करने के लिए.वो भी उनसे हर मुद्दे पर बात कर लेती थी.उन्हे वो काफ़ी समझदार & सुलझी हुई लड़की लगती थी.राजा साहब उसे कंपनी. के बारे मे भी बताते थे & उसके बिज़्नेस के बारे मे ओपीनियन्स सुन कर प्रभावित हुए बिना नही रह सके थे.महल की ज़िम्मेदारी तो उसने बखूबी सम्भहाल ली थी.

मेनका को भी अपने ससुर के साथ वक़्त बिताना अच्छा लगता था.उनके पास बताने को इतनी इंट्रेस्टिंग बातें थी & वो कितने नालेजबल थे.पर सबसे अच्छा लगता था जैसे वो उसके बारे मे केअर करते थे.

धीरे-2 करके 1 महीना गुज़र गया.जहा राजा साहब & मेनका 1 दूसरे से काफ़ी फ्री हो गये थे.वही मेनका महसूस कर रही थी कि उसका पति उससे दूर होता जा रहा है.वैसे तो अपना मन टटोलने पर वो भी पाती थी कि वाहा विश्वा के लिए प्यार नही है-होता भी कैसे जिस इंसान ने उसे बस अपनी प्यास बुझाने का ज़रिया समझा हो,उसके लिए प्यार कहा से आता.पर था तो वो उसका पति & उसे हो ना हो मेनका को उसकी फ़िक्र ज़रूर थी.

पिच्छले 1 महीने से वो रात मे देर से आता,पुच्छने पर काम का बहाना बना देता.मेनका को शक़ हुआ कि कही कोई दूसरी औरत का चक्कर तो नही पर ऐसा नही था कि विश्वा को उसमे दिलचस्पी नही थी.रोज़ रात वो उसे पहले जैसे ही चोद्ता था,पर अब वो और बेचैन & बेसबरा रहने लगा था.उसकी आँखों मे जैसे कोई नशा हर वक़्त दिखता था.

मेनका बिस्तर पर पड़ी हुई यही सब सोच रही थी,बगल मे विश्वा उसे चोदकर अभी-2 सोया था.उसका ध्यान अपने ससुर की ओर गया,कितना फ़र्क था बाप-बेटे मे.राजा साहब उसकी कितनी चिंता करते थे…..अगर विश्वा की जगह उसकी शादी राजा साहब से हुई होती तो?ख़याल आते ही मेनका को अपने बच्पने पर हँसी भी आई & थोड़ी शर्म भी.आख़िर वो उसके ससुर थे..उसने करवट लेकर विश्वा की तरफ पीठ की & सोने लगी.

वही राजा साहब विश्वा के बारे मे सोच रहे थे.उन्हे आजकल वो थोड़ा अजीब लगने लगा था.नयी शादी थी पर बहू मे उसे कोई खास दिलचस्पी नही थी.1-2 बार उन्होने उसे बहू को घुमाने के लिए शहर ले जाने कहा था पर उसने काम का बहाना कर बात टाल दी.इतनी अच्छी बीवी पाकर तो लोग निहाल हो जाते हैं.उन्होने सोच लिया था कि विश्वा से खुल कर बात करेंगे.मेनका जैसी लड़की किस्मत वालों को मिलती है.उन्हे भी तो ऐसी ही बीवी चाहिए थी जो सिर्फ़ पत्नी ही नही दोस्त भी हो,उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर चलने का हौसला रखती थी.सरिता देवी 1 बहुत अच्छी स्त्री,अच्छी मा थी पर राजा साहब की मित्र बनने की कोशिश उन्होने कभी नही की.इसीलिए तो वो शहर मे उन रखाइलॉं को रखने लगे थे,”कितनी पुरानी बात है…”,उन्होने सोचा.बेटे की मौत के बाद तो सेक्स की तरफ उनका ध्यान भी नही गया.

और फिर उन्हे भी ख़याल आया,”अगर मेनका हुमारी बीवी होती तो?….”& उनके होटो पे मुस्कान आ गयी. “छी छीए!अपनी बहू के बारे मे ऐसे ख़याल….पर गैर होती तो..”सोचते हुए वो भी सो गये.

अगले दिन वो सुबह होनी थी जो दोनो की ज़िंदगी का रुख़ बदलने का आगाज़ करनेवाली थी.

सुबह राजा साहब लॉन मे चाइ पीते हुए अख़बार पढ़ रहे थे.मेनका वही उनसे कुच्छ 24 फीट की दूरी पर मालियों को कुच्छ समझा रही थी.राजा साहब ने अख़बार के कोने से उसे देखा,पीले रंग की सारी मे वो बहुत सुंदर लग रही थी.राजा साहब उसका साइड प्रोफाइल देख रहे थे जिस वजह से उसके बड़ी छातियो & गांद के उभार का पूरा पता चल रहा था.आज पहली बार राजा साहब ने उसके फिगर को ढंग से देखा & रीयलाइज़ की खूबसूरत होने के साथ-2 मेनका बहुत सेक्सी भी है.

तभी मेनका का हाथ अपने माथे पर गया,माली उसके आदेशानुसार लॉन के दूसरे कोने पर चले गये थे.आस-पास कोई नौकर नही था,सभी किसी ना किसी काम मे लगे थे.मेनका को चक्कर आ रहा था,अचानक उसकी आँखों के सामने अंधेरा च्छा गया.

राजा साहब ने उसे गिरते देखा & बिजली की फुर्ती से उसे ज़मीन पर गिरने से पहले ही सामने से अपनी बाहों मे थाम लिया,”क्या हुआ,दुल्हन?”वो उसे इस तरह से पकड़े थे कि दूर से कोई देखता तो समझता कि दोनो गले लग रहे हैं.उन्होने नीचे उसके चेहरे को थपथपाया.मेनका ने आँखें खोली तो देखा कि उसके ससुर ने उसे गिरने से रोक लिया था.कितना आराम लग रहा था उसे इन मज़बूत बाहों मे,हिफ़ाज़त महसूस हो रही थी,उसने सहारे के लिए राजा साहब के कंधों को पकड़ लिया.उसका दिल किया कि बस ऐसे ही उन बाहों के सहारे खड़ी रहे,राजा साहब की शर्ट के उपर के 2 बटन खुले थे & उनके चौड़े,बालों भरे सीने का कुच्छ हिस्सा नज़र आ रहा था.मेनका ने सिर झुकाया & उनके सीने मे अपना मुँह च्छूपा लिया.उनकी मर्दाना खुसबु उसे मदहोश करने लगी.

राजा साहब की नज़र नीचे पड़ी तो पारदर्शी आँचल मे से उन्हे ब्लाउस के गले से झँकता मेनका का मस्त क्लीवेज नज़र आया जो कि उनके सीने से दबने के कारण & उभर गया था.उनके हाथ ब्लाउस के नीचे से उसकी नंगी पीठ & कमर पर थे & उसकी कोमलता महसूस कर रहे थे.राजा साहब का लंड खड़ा हो गया था जिसे सटे होने के कारण मेनका ने भी अपने पेट पे महसूस किया & वो अपने ससुर से थोड़ा और सॅट गयी.दोनो का दिल कर रहा था कि ऐसे ही पूरी उम्र खड़े रहे पर तब तक नौकर-नौकरानी भागते हुए वाहा आने लगे थे.राजा साहब ने 1 हाथ अपनी बहू की कमर से हटा कर उसके चेहरे को उपर उठाया,”होश मे आयो दुल्हन.”

नौकरानियों की मदद से मेनका को उन्होने उसके कमरे तक पहुचेया & विश्वा को डॉक्टर बुलाने को कहा.राजा साहब ने अपने मिल स्टाफ की सुविधा के लिए जो हॉस्पिटल बनाया था उसकी देख-रेख की ज़िम्मेदारी डॉक्टर,सिन्हा की थी.उनकी बीवी डॉक्टर.लता भी उसी हॉस्पिटल ज्ञानेकोलोगी डिपार्टमेंट. देखती थी.विश्वा का फोन मिलते ही वो तुरंत महल पहुचि & मेनका का चेक-अप करने लगी.थोड़ी देर बाद वो राजा साहब & विश्वा के पास आई,”बधाई हो राजा साहब,आप दादा बनाने वाले हैं.”

“क्या?सच!डॉक्टर.साहिबा आपने तो हुमारा मन खुश कर दिया.दुल्हन बिल्कुल ठीक तो हैं ना?”

“हा,राजा साहब.आपकी इजाज़त हो तो मैं कुंवर-कुँवारानी से ज़रा एक साथ बात कर लूँ?”

“हा,हा.ज़रूर.जाइए कुंवर.”

मेनका के बेडरूम मे पहुच कर उन्होने कहा,”कुँवरनी बिल्कुल ठीक हैं,कुंवर.बस आप इनका रेग्युलर चेक-अप करवाते रहिए.बस एक बात का ख़याल रखे.अभी कमसे कम 45 डेज़ तक आप दोनो फिज़िकल रिलेशन्स मत बनाइएगा.ये होने वाली मा के लिए बहुत ज़रूरी है.एक डॉक्टर.होने के नाते मेरा फ़र्ज़ था कि मैं आपको ये बता दूं.होप यू डिड्न’ट माइंड इट.”

“नोट अट ऑल,ड्र.आंटी.आपने बचपन से हमे देखा है,आप इतना फॉर्मल होकर हमे शर्मिंदा कर रही हैं.”

विश्वा राजा साहब के कहने पर डॉक्टर. को छ्चोड़ने बाहर तक आया.

“कुंवर,आपकी तबीयत तो बिल्कुल ठीक है ना?”,विश्वा की आँखें देख कर डॉक्टर.लता को कुच्छ शक़ हुआ था.

“हा,आंटी.ऐसा क्यू लगा आपको?”

“बस ऐसे ही.कोई परेशानी हो तो आप जानते हैं कि आपके डॉक्टर.अंकल & मैं हमेशा मौजूद हैं.”

“हा,आंटी.आप फ़िक्र ना करें.”

जब से मेनका प्रेग्नेंट हुई थी राजा साहब तो उसका और ख़याल रखने लगे थे.अगर उसे 1 फूल भी उठाकर यहा से वाहा रखते देखते तो नौकरों को डाँटने लगते.उसे अपने हाथों से काम तो पहले भी नही करना पड़ता था & अब तो लगता था कि राजा साहब का बस चलता तो उसे हर वक़्त बिठा कर ही रखते.पर विश्वा वैसे का वैसा था बस अब उसे चोद नही सकता था.पर मेनका को उसकी चिंता होती थी,इधर वो उसे और अजीब लगने लगा था.राजा साहब जर्मन कंपनी. से डील मे बिज़ी थे.अब पेपर & शुगर-दोनो मिल्स मे हिस्सेदारी अकेली वो जर्मन कंपनी. खरीद रही थी.

ऐसे मेनका की प्रेग्नेन्सी को 1 महीना पूरा हो गया.

“दुल्हन,जर्मन डील के लिए हमे 2-3 दिनों के लिए शहर जाना पड़ेगा?पीछे आप अपना ख़याल रखिएगा.और हाँ कोई भी काम बिल्कुल नही करना है,बस हुक्म देना है.सारे नौकरों को भी हमने ताकीद कर दी है.”

“आप हुमारी चिंता मत करिए,पिताजी.आप बस डील के टर्म्ज़ ध्यान से फाइनलाइस करिएगा.वो क्लॉज़ ज़रूर डलवायएएगा जिसमे मेन्षंड है कि उनके स्टाफ के ग्रूप मे आने के बाद भी हमारे एग्ज़िस्टिंग एंप्लायीस को 6 मंत्स तक नही हटाया जा सकता,केवल हटाने के लिए शॉर्टलिस्ट किया जा सकता है.और हा,उनकी कॉंपेन्सेशन अमाउंट भी अभी ही फाइनल कर लीजिएगा.”,राजा साहब के कार मे बैठते-2 मेनका बोली.

“ओके,दुल्हन.अब अंदर जाकर आराम कीजिए.”

“कार मे बैठे-2 राजा साहब सोच रहे थे कि वो कितने किस्मतवाले हैं कि मेनका जैसी बहू मिली.और फिर वोही ख़याल आया उन्हे,”अगर वो उनकी पत्नी होती तो?”

पर उन्होने अपना सर झटका और कुच्छ पेपर्स देखने लगे.

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“कैसा चल रहा है?चिड़िया को दाने की आदत लग गयी?”

“हा,अब तो पन्छि एक दिन भी बिना दाने के नही रह पाता.इतने ही दीनो मे ऐसा आदि हो जाएगा मैने तो सोचा ही नही था.”

“तो अब उसे थोड़ा तड़पाओ.कुच्छ दीनो के लिए दानो की सप्लाइ रोक दो.थोड़ा तडपेगा तो जो हम कहेंगे वो करेगा.”

“ओके.”

और जब्बार & कल्लन उर्फ विकी की बात ख़तम हो गयी.

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और फिर वो दिन आया जिसने इन तीनो किरदारों की ज़िंदगी पूरी की पूरी बदल दी.

उस दिन मेनका अकेली ही डॉक्टर.लता से मिलने गयी थी.चेक अप मे सब कुच्छ नॉर्मल था बस उन्होने अभी भी चुदाई से परहेज़ करने को कहा.

रात के 11 बज रहे थे.मेनका ने कपड़े बदल कर नाइटी पहन ली थी.विश्वा का कही पता नही था.वो मोबाइल भी नही उठा रहा था.सारे नौकर महल के नियमानुसार महल से बाहर अपने क्वॉर्टर्स मे चले गये थे.मेनका को अब बहुत चिंता होने लगी.राजा साहब भी आज वापस नही आए थे ना ही उनका फोन आया था.ऐसे तो दिन मे कम से कम 4-5 बार फोन पे उससे उसका हाल लेते थे.मेनका को घबराहट होने लगी.

और विश्वा…वो देखिए वाहा राजपुरा के बाहर हाइवे पे अपनी लंदक्रुसेर दौड़ाता हुआ सेल पे किसी का नंबर.ट्राइ कर रहा है.आइए ज़रा करीब से देखें चलें कार के अंदर….

“डॅम इट!ये हरमज़ड़ा विकी कहा मर गया.अपनी हालत खराब हो रही है & ये साला पता नही कहाँ अपनी मरा रहा है!”,& अपनी गाड़ी आदिवासियों के गाओं की ओर मोड़ दी.

“क्या साहब आजकल आप आता नही.”,आदिवासी बंद काले शीशे के अंदर विश्वा से बोला.जवाब मे 3 इंच खिड़की नीचे हुई & 200 रुपये बाहर आए.आदिवासी की बाचेँ खिल गयी & उसने 4 बॉटल्स अंदर दे दी.

इंतेज़ार करते-करते कब मेनका की आँख लग गई,उसे पता भी नही चला.जब धड़ाक से कमरे का दरवाज़ा खुला तो वो चौंक कर उठी.

“कहा थे आप?मैं कितना परेशान थी.”

विश्वा नशे मे चूर लड़खदाता हुआ अंदर आया.महुआ पूरी तरह उसके दिमाग़ पर हावी थी.उसे मेनका की कोई बात नही सुनाई दे रही थी बस उसका कातिल जिस्म नज़र आ रहा था.वो आगे बढ़ा & उसे खीच कर चूमने लगा,अपने हाथ उसकी छाती पर रख दिए.

“नही डॉक्टर.ने मना किया है.”

“चुप.”,& उसकी नाइटी उतारने लगा.

“नही.अभी आप होश मे नही हैं. जाइए.आज से पहले तो आप कभी पी कर नही आए.”, वो अपने को छुड़ाते हुए बोली.

“चुप,साली”,विश्वा पागल हो गया”मैं जो मर्ज़ी करूँगा & अभी तुझे चोदुन्गा.भाड़ मे जाए डॉक्टर.”

“नही.”मेनका उससे बचने के लिए भागी पर विश्वा ने उसे ज़बरदस्ती पकड़ कर उसकी नाइटी फाड़ दी.

“प्लीज़,अपने बच्चे के बारे मे तो सोचिए.”मेनका रोने लगी.

पर विश्वा ने पूरी नाइटी फाड़ कर फेक दी.नाइटी के नीचे कुच्छ नही था.मेनका भागते हुए कुच्छ ढूँदने लगी जिससे अपना ननगपन च्छूपा सके.

पर तभी विश्वा आगे बढ़ा & पीछे से उसे दबोच लिया & पॅंट से अपना लंड निकाल कर वैसे ही घुसाना चाहा पर मेनका उसकी पकड़ से निकल भागी.विश्वा इस हरकत से बौखला गया & लपक कर उसे फिर पकड़ा.इस बार मेनका ने उसके हाथ पे काट लिया.

अब तो वो गुस्से से पगा हो गया.उसने मेनका के बाल पकड़ कर उसे 2 थप्पड़ लगाए & फिर उसे बेड पे धकेल दिया.मेनका पेट के बल पलंग के साइड पे इस तरह गिरी कि उसका पूरा पेट पलंग से ज़ोर से टकराया & उसके बदन मे दर्द की तेज़ लहर दौड़ गयी.

“मा…एयेए!”वो दर्द से चीखी”बचाओ..”वो बस इतना ही कह पाई & फिर दर्द से वो बेहोश होने लगी.उसकी टाँगो के बीच से खून की एक पतली धार उसकी जांघों पर फैलने लगी.ओर सबसे बेपरवाह नशे मे धुत विश्वा पीछे से उसकी चूत मे लंड डालने लगा,”ना..ही..प्लीज़..ईयीज़ी”,मेनका कराही & जैसे ही लंड उसके अंदर गया & उसे लगा कि जैसे उसका बदन कोई चीर रहा है.

“बचाओ”,वो चीखी & उसी वक़्त भागते हुए राजा यशवीर कमरे मे दाखिल हुए.उन्होने विश्वा का कॉलर पकड़ कर उसे मेनका से अलग किया & 1 ज़ोरदार थप्पड़ लगाया.विश्वा वही कोने मे बेहोश होकर ढेर हो गया.

“दुल्हन,आँखें खोलो?”,मेनका को उठाते हुए बोले.

“आ..प आ गा..ये.”,कह कर मेनका उन्हे पकड़ कर बेहोश हो गयी.

मेनका की आँखें खुली तो उसने अपने को हॉस्पिटल के कमरे मे पाया.डॉक्टर.लता उसके बगल मे चेर पे बैठी थी.

“हाउ आर यू फीलिंग नाउ?”,उन्होने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए पूचछा.

मेनका अब पूरी तरह होश मे आई & उसका हाथ अपने पेट पर चला गया.

“सॉरी,बेटा.”,डॉक्टर.लता इतना ही कह पाई.मेनका की आँखों से आँसू बहने लगे तो डॉक्टर.लता ने प्यार से उसे गले लगा लिया.थोड़ी देर मे जब वो चुप हुई तो डॉक्टर.लता बोली,”मैं राजा साहब को भेजती हू,कल रात से वो 1 मिनिट भी नही सोए हैं.तुम्हारे होश मे आने का इंतेज़र कर रहे थे.”कह के वो बाहर चली गयी.

मेनका को याद आया,कल रात राजा साहब ने ही उसे बचाया था….उस वक़्त वो पूरी नंगी थी…. तो क्या राजा साहब ने उसे वैसे देखा.शर्म से उसकी आँखें बंद हो गयी.उसका पति ऐसा दरिन्दा बन जाएगा,उसको तो अभी भी यकीन नही आ रहा था.आँखें खोल कर उसने कमरे मे नज़र घुमाई तो 1 तरफ 1 डस्टबिन मे उसे अपनी 1 नाइटी नज़र आई..”यानी राजा साहब ने उसके कपड़े बदले.”

तभी दरवाज़ा खुला & राजा यशवीर दाखिल हुए.मेनका ने अपनी नज़ारे नीची कर ली & उसका गला फिर भरने लगा.थोड़ी देर तक कमरे मे खामोशी च्छाई रही.

“हम क्या कहें,दुल्हन & कैसे कहें?हुमारा अपना खून हमे अपनी ही नज़रों मे इस कदर गिरा देगा!हम आपसे माफी माँगते हैं.”

मेनका वैसे ही खामोश रही.

“दुल्हन,चुकी आपकी शादी को ज़्यादा वक़्त नही हुआ है तो क़ानून के मुताबिक हॉस्पिटल वालों को पोलीस को खबर करनी पड़ी है कि आपका …..मिसकॅरियेज हो गया है..”राजा साहब कांपति आवाज़ मे बोले,”हम चाहते हैं कि-..”

“..-मैं पोलीस को आपके बेटे की हैवानियत के बारे मे ना बताऊं ना.नही बताऊंगी.प्लीज़ लीव मी अलोन!”,मेनका चीखी & फूट-2 कर रोने लगी.उसका दबा गुस्सा फॅट कर बाहर आ गया था.

राजा साहब भागते हुए उसके पास पहुँचे & उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोले,”नही,दुल्हन.आप हमे ग़लत समझ रही हैं.हम ये कह रहे थे कि आप पोलीस को पूरी सच्चाई बता दें.विश्वा ने महपाप किया है & उसकी सज़ा उसे ज़रूर मिलनी चाहिए.अगर पोलीस नही देगी तो हम देंगे अपने हाथों से.”,राजा साहब की आवाज़ा कठोर हो गयी.

मेनका ने चौंक कर अपने ससुर की ओर देखा.वो कितना ग़लत समझ रही थी.राजा साहब का इलाक़े मे इतना प्रभाव था.अगर वो चाहते तो पोलीस को यहा कभी नही आने देते.बल्कि उनकी जगह कोई और होता तो बात महल की दीवारों के बीच ही दब कर रह जाती.

तभी दरवाज़ा खुला & मेनका के माता-पिता अंदर आए.मेनका की मा अपनी बेटी से लिपट गयी,मेनका की रुलाई फिर शुरू हो गयी पर मा की गोद मे उसे बहुत सहारा मिल रहा था.उसके पिता की भी आँखें नम हो चली थी.

थोड़ी देर मे जब सब थोड़े शांत हुए तो मेनका के पिता राजा अर्जन सिंग ने सारे वाकये के बारे मे पूचछा,”आख़िर ये सब हुआ कैसे,राजा साहब?”

राजा साहब के बोलने से पहले मेनका बोली,”हमारे पैर कार्पेट मे फँस गया & हम गिर गये जिसकी वजह से हम ऐसे गिरे की हमारा-…”

“…-दुल्हन हमे शर्मिंदा होने से बचाना चाहती हैं & इसीलिए झूठ बोल रही हैं.”,राजा साहब उसकी बात बीच मे ही काटते हुए बोले & फिर उन्होने सारी बात राजा अर्जन & उनकी पत्नी को बता दी.

दोनो गुस्से से उबाल पड़े,”हम अपनी बेटी को यहा 1 पल भी नही रहने देंगे.ठीक होती है मेनका वापस जाएगी हुमारे साथ.और आपके बेटे-..”

“बस,डॅडी.मैं कोई गाय-बकरी हूँ जब जी चाहा शादी कर दी ,जब चाहा वापस ले जाएँगे.”,फिर वो अपनी माँ की तरफ घूमी,”मा,आपने कहा था कि हम राजघराने वालों के यहा शादी बस एक बार होती है & हम स्त्रियाँ अपनी ससुराल अर्थी पर ही छ्चोड़ती हैं.”

“पर बेटी,यहा इन हालत मे कैसे छ्चोड़ दे तुम्हे?”

“डॅडी,मैं इतनी भी कमज़ोर नही हू.”

ये बहस चल रही थी कि दरवाज़े पे किसी ने नॉक किया.डॉक्टर.सिन्हा & उनकी वाइफ डॉक्टर.लता आए थे,”राजा साहब हम आप सबसे कुच्छ ज़रूरी बात करना चाहते हैं.”,डॉक्टर.सिन्हा राजा अर्जन & उनकी पत्नी को नमस्कार करते हुए राजा यशवीर से मुखातिब होकर बोले.

“जी,ज़रूर डॉक्टर.साब.बैठिए.”

“राजा साहब.आपके कहे मुताबिक कल से कुंवर हमारे हॉस्पिटल मे हैं.हमने उनका पूरे चेक-अप करलिया है.वो अडिक्षन के शिकार हैं.”

“क्या?”

“जी.वो ड्रग अडिक्ट हो गये हैं & कल रात की उनकी हरकत ड्रग्स ना मिलने पर उनका रिक्षन था.उनका अपने उपर कोई कंट्रोल नही रह गया है.”

“राजा साहब,हम ये कहने आए हैं कि जल्द से जल्द उन्हे रीहॅबिलिटेशन सेंटर मे भरती करवा दे.बस यही 1 रास्ता है.”,डॉक्टर.लता अपने पति की बात पूरी करते हुए बोली.

राजा साहब के माथे पे चिंता की लकीरें & गहरा गयी,”डॉक्टर.साहब,आप ही हमे रास्ता दिखाएँ.”

“राजा साहब,हमे 1 वीक का समय दीजिए.हम आपको बेस्ट सेंटर्स की लिस्ट दे देंगे.”,कह कर दोनो पति-पत्नी जाने के लिए उठ गये,”कुंवर को अपनी ग़लती का एहसास है कि नही पता नही.राजा साहब आपको उनसे बात करके थेरपी के लिए तैय्यर करना होगा.और अगर इस बीच आप उन्हे ड्रग्स लेते पाए तो रोके मत वरना कहीं वो फिर वाय्लेंट होकर किसिको या खुद को नुकसान ना पहुँचा ले.”

शाम को मेनका अपने हॉस्पिटल रूम मे अकेली थी.वो उठी & बाथरूम मे गयी,अपना चेहरा धोया & शीशे मे देखा,एक रात मे ही उसकी दुनिया उथल-पुथल हो गयी थी,”आख़िर क्यू हुआ ऐसा?उसकी अपनी कमज़ोरी की वजह से.”जवाब उसके अंदर से ही आया,”नही अब वो ऐसे नही रहेगी.अपनी ज़िंदगी के फ़ैसले वो खुद लेगी.उसकी मर्ज़ी के बिना अब उस से कोई भी कुच्छ भी नही करवा सकता.”

उसने कमरे मे लौटकर डॉक्टर.लता को बुलाया.

“बोलिए,कुँवारानी.”

“डॉक्टर.आंटी,हमे कॉंट्रॅसेप्टिव पिल्स के बारे मे बताएँ.”

“कुँवारानी..”

“जी आंटी,हम नही चाहते कि हमारे पति की ग़लतियों का खामियाज़ा हमे भुगतना पड़े.”

“जी,कुँवारानी.”,& वो उसे समझने लगी.

पर मेनक को उन गोलियों की ज़रूरत नही पड़ी क्यूकी इसके बाद सब कुच्छ बड़ी तेज़ी से हुआ.डॉक्टर.साहब ने बॅंगलुर के पास देवनहल्ली मे डॉक्टर.पुरन्दारे के रहाब सेंटर को रेकमेंड किया.राजा यशवीर & राजा अर्जन विश्वा को वाहा अड्मिट करा आए.इस पूरे समय मे मेनका अपनी मा के साथ महल मे थी.पता नही राजा साहब ने विश्वा को जाने के लिए कैसे मनाया.बिज़्नेस पे कोई बुरा असर ना पड़े इसके लिए पहले जर्मन पार्ट्नर्स को पूरी बात बताई गयी & फिर 1 प्रेस रिलीस दी गयी.राजा साहब ने इस मुसीबत का भी बड़ी समझदारी से सामना किया था.

पर बात पूरी दुनिया के सामने खुलने से पहले उनके दुश्मन को पता चल गयी थी.

जब्बार सोफे पे नंगा बैठा था & उसकी गोद मे मलिका भी.मलिका के हाथ मे बियर की बॉटल थी जिस से उसने 1 घूँट भरा & फिर जब्बार को पिलाया.उसके दूसरे हाथ मे जब्बार का लंड था जिसे वो हिला रही थी.थोड़ी ही देर मे लंड पूरा खड़ा हो गया,तब मलिका जब्बार की तरफ पीठ करके उसकी गोद मे उसके लंड पर बैठ गयी.उसने अपनी दाई बाँह उसके गले मे इस तरह डाल दी कि जब्बार का मुँह उसकी दाई चूची से आ लगा.जब्बार ने उसका निपल मुँह मे लेकर काट लिया.

“ऊओ..व्व”,मलिका ने बाल पकड़ कर उसका सिर अपने सीने से अलग किया & मुँह मे बची हुई बियर उडेल दी & फिर बॉटल को दूसरे सोफे पर फेक दिया.जब्बार ने बियर अपने हलाक से नीचे उतरी & फिर अपना मुँह मलिका की छाती से चिपका दिया.उसका बाया हाथ उसकी रखैल के बाए उरोज़ को बेरहमी से मसल रहा था तो दाया हाथ उसकी लंड भरी चूत के दाने को.मलिका जोश से पागल होकर लंड पे ज़ोर-2 से कूद रही थी.

“एयेए…आहह..आअहह…अहहह!”,वो मज़े से चिल्ला रही थी,”ऊ…ईईई… .”,ज़ोर की चीख के साथ वो जब्बार के उपर लेट गयी & उसके कान मे अपनी जीभ फिराने लगी.वो झड़ने के बहुत करीब थी..& 5-6 धक्कों के बाद 1 और आह के साथ उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया.जब्बार ने भी नीचे से 3-4 धक्के लगाए & मालिका की चूत को अपने वीर्या से भर दिया.दोनो सोफे की पीठ पे उसी पोज़िशन मे टिक कर अपनी साँस संभालने लगे कि तभी मलिका का सेल बज उठा.मालिका ने वैसे ही टेबल से फ़ोन उठा कर अपने कान से लगाया,”हेलो…बोलिए बत्रा साब..”

थोड़ी देर के बाद उसने फ़ोन रखा & वैसे ही जब्बार की गोद मे बैठे हुए उसे सारी बात बताई.

“क्या?”,जब्बार ने उसे सोफे पर 1 तरफ धकेला & अपना सिकुदा लंड उसकी चूत मे से निकाल कर खड़ा हो गया.

उसने उस 1 नंबर.वाले मोबाइल से कल्लन को फ़ोन कर के सारी बात बताई,”सुनो,राजा ज़रूर पता लगाएगा कि उसके बेटे को ये लत लगी कैसे & इसके लिए सबसे पहले उस इंसान को ढूंदेगा जो उसके बेटे तक ड्रग्स पहुँचाता था.इसलिए तुम अब उंड़र-ग्राउंड हो जाओ.फ़िक्र मत करना,तुम्हारे पैसे तुम्हे मिल जाएँगे.”,&उसने फोन बंद कर के वापस लेटी हुई मलिका की टाँगों के बीच बैठ कर अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा.

जब पोलीस हॉस्पिटल मे मेनका का बयान लेने आई तो राजा साहब की बात ना मानते हुए मेनका ने वही फिसल कर गिरने वाली कहानी बताई.राजा साहब के पूच्छने पर उसने कहा कि विश्वा को उसके किए की सज़ा मिल रही है फिर दुनिया को सच बताकर परिवार को और बेइज़्ज़त क्यू करें.

जहाँ इस बात ने राजा साहब के दिल मे मेनका के लिए और इज़्ज़त भर दी वही मेनका भी राजा साहब की ईमानदारी से प्रभावित हुए बिना नही रह सकी.पूरे मामले मे उन्हे सिर्फ़ मेनका की चिंता थी,उनका बेटा गुनेहगर था & उसे बचाने के लिए वो बिल्कुल तैय्यार नही थे-उनका बस चलता तो विश्वा जैल मे होता.उसके पिता & डॉक्टर्स के समझने पर ही वो उसे जैल के बजाय रहाब मे भेजने को तैय्यार हुए थे.

जब राजा साहब बॅंगलुर से वापस आए तो मेनका की मा ने उसे अपने साथ ले जाने की इजाज़त माँगी,राजा साहब फ़ौरन तैय्यार हो गये पर मेनका अपने ससुर को अकेला छ्चोड़ कर जाने को बिल्कुल तैय्यार नही हुई.लाख समझाने पर भी वो नही मानी & राजा साहब के कहेने पर उसने बोला,”अपने घर को छ्चोड़कर मैं कही नही जाऊंगी.”

राजा साहब सवेरे नाश्ते की टेबल पर यही सब सोच रहे थे कि मेनका नौकर के हाथ से डिश लेकर उन्हे परोसने लगी,”पिताजी,एक बात पूच्छें?”

“हा,दुल्हन.”

“क्या हम ऑफीस आ सकते हैं?”

“बिल्कुल,दुल्हन.इसमे पूच्छने वाली क्या बात है?आपका अपना ऑफीस है.”

“आप समझे नही.हम ऑफीस जाय्न करने की बात कर रहे हैं.”

राजा साहब थोड़े परेशान दिखे,”दुल्हन महल & ऑफीस दोनो की ज़िम्मेदारी कहीं आप को…-”

“-…मुझे एक बार ट्राइ तो करने दीजिए.प्लीज़!”

“ओके,कल से चलिए हमारे साथ.”

“कल से नही.आज से प्लीज़!”,मेनका बच्चों की तरह मचलते हुए बोली.

“ठीक है,जाकर रेडी हो जाइए.”,राजा साहब हंसते हुए बोले.

——————————————————————————-

“कल्लन,जल्दी पता लगाओ कि आख़िर राजा ने अपने लौंदे को कहा भेजा है.प्रेस रिलीस क्या अपने ऑफीस मे भी साले ने रहाब सेंटर का नाम नही बताया है!”,जब्बार बिस्तर पर अढ़लेता फोन पे बात कर रहा था,मलिका की चौड़ी गांद उसकी आँखों के सामने लहरा रही थी,वो घुटनो के बल बैठी थी & उसका मुँह जब्बार के लंड पे उपर-नीचे हो रहा था.

“डॉन’ट वरी.जब तक विश्वा का पता नही लगा लेता,मैं चैन से नही बैठूँगा.”,& फोन कट गया.जब्बार ने फोन किनारे रखा & हाथ बढ़कर मलिका की कमर जकड़ते हुए उसे अपने उपर ले लिया,अब उसकी चिकनी चूत उसकी आँखों के सामने थी & दोनो 69 पोज़िशन मे आ गये थे.

उसने अपने दाँत उसकी गांद की 1 फाँक मे गाड़ाते हुए पूचछा,”बत्रा को भी कुच्छ नही पता चला?”

“उउन्ण..हुउँ”,मलिका चिहुनकि & उसके लंड भरे मुँह से सिर्फ़ इतना ही निकला.जब्बार ज़ोर से उसकी चूत चाटने लगा.

जब्बार ने उसकी कमर पे अपनी पकड़ & मज़बूत कर दी,”राजा की औलाद बर्बादी की कगार से वापस आ जाए,ऐसा मैं कभी नही होने दूँगा.”,&उसने अपना मुँह उसकी चूत मे घुसा दिया & अपनी जीभ से उसे चोदने लगा.मालिका ने भी अपनी चूसने की स्पीड बढ़ा दी & दोनो अपने क्लाइमॅक्स की ओर बढ़ने लगे.

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कुच्छ ही दीनो मे मेनका ने ऑफीस का सारा काम समझ लिया.विश्वा के जाने के बाद जो जगह खाली हुई थी,उसे उसने बखूबी भर दिया था.ज़िम्मेदारी बढ़ने के बावजूद महल के काम-काज पर उसने ज़रा भी असर नही पड़ने दिया था.अब वो पहले से ज़्यादा खुश नज़र आती थी…बस 1 प्राब्लम थी.उस हादसे के बाद से रात को उसे बुरे सपने आने लगे थे & अक्सर बीच मे ही उसकी नींद टूट जाती थी.

उस सुबह भी वो सपने की वजह से जल्दी उठ गयी तो उसने सोचा की नौकरों से थोडा काम ही निपट वाया जाए.रात के खाने के बाद महल का सारा स्टाफ महल के कॉम्पोन्ड मे बने अपने क्वॉर्टर्स मे चला जाता था & सुबह महल के अंदर से हुक्म आने पर ही अंदर जाता था.मेनका ने इंटरकम से अंदर आने का ऑर्डर दिया & बटन दबा कर सारे एलेक्ट्रॉनिक लॉक्स खोल दिए.थोड़ी ही देर मे महल के अंदर रोज़मर्रा की चहल-पहल होने लगी.

ऐसे ही किसी काम से मेनका अकेली ही उस हिस्से मे पहुँची जहा जिम था,उसने जिम की सफाई कल ही करने का ऑर्डर दिया था & उसी का मुआयना करने आई थी.

जिम के अंदर कदम रखते ही उसका मुँह खुला रह गया……सामने राजा साहब उसकी तरफ पीठ करके वेट ट्रैनिंग कर रहे थे-केवल 1 अंडरवेर मे.वो उनके गथिले बदन को देखने लगी.मज़बूत कंधे & विशाल बाहें जब वेट उपर उठाती थी तो 1-1 मसल का शेप सॉफ दिखाई देता था,नीचे बिल्कुल सीधी पीठ,पतली कमर & नीचे पुष्ट गांद…..मेनका को टाँगों के बीच गीलापन महसूस हुआ & ऐसा लगा जैसे की पैरों मे जान ही ना हो.उसने दीवार को पकड़ कर सहारा लिया पर तभी राजा साहब पीछे घूमने लगे तो वो उसी दीवार की ओट मे हो गयी.

थोड़ी देर बाद उसने वैसे ही ओट मे च्छुपकर फिर से अंदर झाँकना शुरू किया,…अब उसके ससुर का मुँह उसकी तरफ था पर वो उसे देख नही सकते थे.अब उनके हाथों मे डमबेल थे जिन्हे वो बारी-2 से उपर नीचे कर रहे थे & उनके सीने की मछ्लिया पसीने से चमक रही थी.मेनका ने उनके चौड़े सीने को देखा & उसे वो सुबह याद आई जब उन्होने उसे गिरने से बचाया था & उसने इसी सीने मे पनाह ली थी.वो मर्दाना खुश्बू फिर उसे महसूस हुई & टाँगो के बीच गीलापन बढ़ गया.उनके सीने पे काफ़ी बाल थे & मेनका की निगाहें बालों की लकीर को फॉलो करने लगी जो नीचे जा रही थी……& उनके अंडरवेर मे गुम हो गयी थी.मेनका की नज़रे अंडरवेर पर टिक गयी….कितना फूला हुआ था…..कितना बड़ा होगा……उसका हाथ सारी से उपर ही उसकी जाँघो के बीच के हिस्से को सहलाने लगा &थोड़ी ही देर मे उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया.

“मालिकन..”,कोई नौकर उसे ढूंढता उधर आ रहा था.वो वापस होश मे आई & अपने को सायंत करके आवाज़ की दिशा मे चली गयी.

………………………….

“कल सुबह ही हमे बॉमबे रवाना होना होगा.जर्मन पार्ट्नर्स से फाइनल राउंड की बात करके डील पे साइन करना है.”,राजा साहब अपने चेंबर मे बैठे थे & सामने मेनका,सेशाद्री & 4 स्टाफ मेंबर्ज़ उन्हे सुन रहे थे.

“कल सवेरे 5 बजे कार्स से हम शहर जाएँगे & 6:15-6:30 तक हमारा चार्टर्ड प्लेन बॉमबे के लिए तक-ऑफ करेगा जहा हम 10 बजे तक पहुँचेंगे.मीटिंग 11 बजे शुरू होगी.कल की रात हम सब वही रुकेंगे & परसों होप्फुली डील साइन कर के वापस आ जाएँगे.”

“सर,मुझे & बाकी मेंबर्ज़ को तो कल ही वापस आना होगा क्यूकी परसो से ऑडिट शुरू होनी है.”,सेशाद्री बोले.

“अरे,ये बात तो हमारे दिमाग़ से उतर ही गयी थी.तो ठीक है आप सब शाम को उसी प्लेन से वापस रवाना हो जाइएगा.हम परसों डील साइन कर के वापस आएँगे.दुल्हन हुमारे साथ ही वापस आएँगी”

सारे स्टाफ मेंबर्ज़ बाहर चले गये तो मेनका भी जाने लगी,”मैं महल जाकर अपनी पॅकिंग कर लेती हूँ.”

“हा.ठीक है.”,& राजा साहब अपने लॅपटॉप पे फाइल्स चेक करने लगे.

रात करीब 10 बजे राजा साहब महल पहुँच कर सीढ़िया चढ़ कर अपने कमरे की तरफ जा रहे थे जब वाहा से कुच्छ आवाज़ें आती सुनाई दी.अंदर जाने पर उन्होने देखा की मेनका 1 नौकर के साथ उनके वॉक-इन क्लॉज़ेट से कपड़े निकलवा कर पॅकिंग करवा रही है.

“अरे आपने क्यू तकलीफ़ की दुल्हन?हुमारे नौकर को कह देती…बस 2 ही दीनो के लिए तो जाना है.”

“हा,कह ही देना चाहिए था.सारे कपड़े तो आपके एक जैसे हैं.कोई फ़र्क ही नही है.”

“तो इस उम्र मे हम तरह-2 के कपड़े पहन कर क्या करेंगे?”,उन्होने हंसते हुए पूचछा.

“काम करने मे तो आप जवानो को भी मात देते हैं तो कपड़े क्यू बूढो जैसे पहनेंगे….अफ”,एक गिरी हुई शर्ट को उठाने के लिए मेनका झुकी तो उसका पल्लू ढालक गया & राजा साहब के सामने उसका बड़ा,मस्त क्लीवेज छलक उठा.वो उनकी नज़रो से बेपरवाह उस शर्ट को तह करने लगी.उसका पेट भी नुमाया हो रहा था & राजा साहब की नज़रे उसके क्लीवेज से फिसल कर उसके चिकने,सपाट पेट के बीचोबीच उसकी गोल नाभि पर टिक गयी.उनका लंड पॅंट के अंदर हरकत मे आने लगा था.

तभी मेनका पलटी & क्लॉज़ेट के अंदर जाने लगी,जैसे ही राजा साहब ने सारी मे कसी अपनी बहू की टाइट गांद को देखा उनका लंड पूरा खड़ा हो गया & पॅंट से निकलने को च्चटपटाने लगा.

“खाना तैय्यार है हुज़ूर..”,1 नौकर ने दरवाज़े पे आके कहा.

“हम अभी आते हैं”, कह कर राजा साहब तेज़ी से मुड़े & बाथरूम मे चले गये.

खाने के टेबल पर दोनो मे कुच्छ खास बात नही हुई.थोड़ी देर बाद सारा स्टाफ भी अपने कमरों को चला गया.

“गुड नाइट,पिताजी.आप भी जाकर सो जाइए.कल बहुत सवेरे उठना है”,मेनका ने पहली सीढ़ी पर पैर रखा कि ना जाने कैसे उसका पैर मूड गया & वो गिर पड़ी.

“अरे संभाल के दुल्हन……चलिए उठिए”,राजा साहब उसे सहारा देकर उठाने लगे पर मेनका दर्द से कराह उठी,”आउच..!पैर सीधा रखने मे दर्द होता है”

“अच्छा..”,राजा साहब उसके पैर को देखने लगे,टखने मे मोच आई थी,”..हम..कमरे मे चल कर इसका इलाज करते हैं.खड़े होने की कोशिश कीजिए.”

“नही हो रहा.बहुत दर्द है.”मेनका दर्द से परेशान हो बोली.

“ओके”,राजा साहब ने उसकी दाई बाँह अपने गले मे डाली & उसे अपनी गोद मे उठा लिया.शर्म के मारे मेनका के गाल और लाल हो गये.राजा साहब सीढ़ियाँ चढ़ने लगे.वो उसकी तरफ नही देख रहे थे….पर वोही मर्दाना खुश्बू मेनका को महसूस हुई,अपने ससुर के गले मे बाँह डाले मेनका को बहुत अच्छा लग रहा था.उसे उन्होने ऐसे उठा रखा था जैसे उसका वजन ही ना हो.कमरे तक पहुँचने मे ना तो वो हांफे ना ही पसीने की 1 भी बूँद उनके माथे पे छल्कि”…..इस उम्र भी इतनी ताक़त”,मेनका तो उनकी फिटनेस की कायल हो गयी.

कमरे मे पहुँच कर उन्होने मेनका को पलंग पे ऐसे लिटाया जैसे किसी फूल को रख रहे हैं.फिर उसके ड्रेसर से 1 बॉम लेकर आए & उसकी तरफ पीठ करके उसके पाओं के पास बैठ गये.सारी थोड़ी सी उपर खिसका कर उसके टखने को देखने लगे,”…उफ़फ्फ़..कितनी कोमल है..”राजा साहब उसके टखने को सहलाने लगे.मेनका की आँखें मूंद गयी.उसे बहुत अच्छा लग रहा था.

“जब हम फुटबॉल खेलते थे तो ऐसी चोट बड़ी आम थी.”,उन्होने वैसे ही सहलाना जारी रखा.

“ह्म्म…”,मेनका बस इतना ही कह पाई.

और तभी राजा साहब ने उसके टखने को अपने दोनो हाथों मे पकड़ कर 1 झटका दिया.

“औउउ…छ्च!”,मेनका उठ कर बैठ गयी & दर्द से तड़प कर पीछे से उसने अपने ससुर को पकड़ लिया & उसका सर उनकी पीठ से जा लगा.”बस ठीक हो गया.”,कह कर वो उसके टखने पर बॉम की मालिश करने लगे.मेनका वैसे ही अपने ससुर से सटी रही.राजा साहब भी मालिश करते-2 उसके पैर को सहलाने लगे.दोनो को एक दूसरे का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था.राजा साहब का हाथ अपनी बहू के टखने से उपर आने लगा….मेनका भी आँखें बंद कर इस लम्हे का लुत्फ़ उठा रही थी…

“टॅनन्न्न….!”,महल के बड़े घारियल मे 12 बाज गये थे.दोनो चौंक कर अलग हो गये.

“आराम कीजिए दुल्हन.सुबह तक दर्द ठीक हो जाएगा.”,कहकर बिना उसकी तरफ़ देखे वो वापस अपने कमरे मे आ गये.उनका लंड पाजामे मे पूरा खड़ा था.उन्होने उसे उतार फेंका & अपना लंड तेज़ी से हिलाने लगे….

मेनका तो जल रही थी.राजा साहब ने उसके अंदर वो आग भड़काई थी जो आज से पहले उसने कभी महसूस ना की थी.उसने अपनी नाइटी अपने बदन से अलग की & बगल मे पड़े 1 बड़े तकिये से चिपक कर अपनी चूत उस पे रगड़ने लगी.

अगली सुबह दोनो एक-दूसरे से नज़रें चुरा रहे थे,बातें भी बस कम भर हो रही थी.सभी लोग प्लेन मे बैठे & डील के बारे मे चर्चा होने लगी.मेनका अब राजपरिवार की ही नही बल्कि राजकुल ग्रूप की भी 1 अहम सदस्य बन गयी थी.सारे ज़रूरी पायंट्स डिसकस किए जा रहे थे & मेनका का पैना दिमाग़ बारीक से बारीक ग़लती को पकड़ कर उसे सही कर रहा था.राजा साहब ने फिर से उसे 1 ससुर की नज़रो से देखा…यह लड़की अगर ना होती तो शायद आज वो ये डील करने ना जा रहे होते.अपने दर्द को भूल कर मेनका ने केवल उनके परिवार के हित & मान का ध्यान रखा था.

फ्लाइट के बॉमबे पहुँचने तक दोनो बहुत हद तक नॉर्मल हो गये थे & नज़रें चुराना भी बंद कर दिया था.

11 बजे जर्मन पार्ट्नर्स एबेरहर्ट कॉरपोरेशन. के ऑफीस मे मीटिंग शुरू हो गयी.2 बजे लंच के लिए मीटिंग को रोका गया पर 1 घंटे बाद सभी लोग वापस डील के पायंट्स फाइनल करने मे लग गये.शाम 7 बजे मीटिंग ख़तम हुई,”मिस्टर.सिंग.वी’वे आ डील.”,जर्मन पार्ट्नर फ्रॅन्ज़ एबेरहर्ट ने राजा साहब से हाथ मिलाते हुए कहा,”..& मिसेज़.सिंग,युवर फादर-इन-लॉ हॅज़ नोथिन्ग टू वरी अबौट एज लोंग एज यू आर विथ दा राजकुल ग्रूप.”

तारीफ सुन कर खुशी & शर्म से मेनका के गालों का रंग & गुलाबी हो गया.”..लुकिंग फॉर्वर्ड टू वर्क विथ यू.”,एबेरहर्ट ने झुकते हुए मेनका से हाथ मिलाया.राजा साहब को अपनी बहू पर बहुत गर्व & प्यार आ रहा था.

थोड़ी देर बाद ये डिसाइड हुआ कि सारे पेपर्स तैय्यार करके कल सवेरे 11 बजे दोनो पार्टीस उन पर साइन कर ले.सेशाद्री साहब & बाकी स्टाफ के लोग वही से वापसी के लिए एरपोर्ट रवाना हो गये.अब मेनका अपने ससुर के साथ अकेली रह गयी.दोनो कार मे बैठ कर जुहू मे होटेल मेरियट की तरफ चल दिए.

कार की बॅक्सीट पे राजा साहब ने चुप्पी तोड़ी,”अगर आप हमारे साथ नही होती दुल्हन,तो शायद आज हम इस खुशी को महसूस नही कर रहे होते.”

“अब आप हमे शर्मिंदा कर रहे हैं.एक तरफ तो दुल्हन बोलते हैं & दूसरी तरफ ऐसी फॉरमॅलिटी भरी बातें करते हैं.”

“नही,दुल्हन.हमे बोलने दीजिए.आपकी जगह कोई भी लड़की होती तो जो आपने झेला है,उसके बाद कभी भी राजपुरा मे नही रहती.हम आपके एहसानो का क़र्ज़…-”

“..-बस!अगर आपने ऐसी बातें की तो मैं ज़रूर राजपुरा छ्चोड़ कर चली जाऊंगी.आप ऐसे क्यू कह रहे हैं,जैसे राजपुरा हमारा घर नही है.”,उसने अपने ससुर का हाथ अपने हाथ से दबाया,”राजपुरा हमारा घर है & अपने घर के बारे मे सोचना कोई तारीफ की बात नही.”

जवाब मे राजा साहब बस प्यार भरी निगाहों से उसे देखते रहे.

तभी मेनका चिल्लाई,”ड्राइवर कार ज़रा साइड मे लो….हा..हा..इसी माल मे ले चलो.”

“अभी शॉपिंग करनी है दुल्हन.हम कल करवा देंगे.अभी होटेल चल कर आराम करते हैं.”

“नही.शॉपिंग तो अभी ही होगी.चलिए.”,मेनका कार से उतरने लगी.

“आप हो आइए हम यहा केफे मे बैठ कर आपका इंतेज़ार करते हैं.”,माल मे दाखिल होकर राजा साहब ने कहा.

“बिल्कुल नही.चलिए हमारे साथ.”,मेनका ने उनका हाथ पकड़ा & खींचते हुए लिफ्ट मे ले गयी.

दोनो वैसे ही एक दूसरे का हाथ थामे मेन’स सेक्षन मे दाखिल हुए.,”अरे,दुल्हन हमे कुच्छ नही चाहिए?”,मेनका का मक़सद समझते हुए राजा साहब हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगे.

“बिल्कुल चुप.”,मेनका ने और मज़बूती से अपने ससुर का हाथ पकड़ते हुए कहा.

“हाउ मे आइ हेल्प यू?”,1 सेलेज़्गर्ल उनके पास आई.

मेनका उसके साथ राजा साहब के लिए कपड़े सेलेक्ट करने लगी.राजा साहब का हाथ अभी भी उसकी पकड़ मे था.वो उपर से तो मना कर रहे थे पर मन ही मन,उन्हे ये सब बहुत अच्छा लग रहा था.इस तरह तो उनकी परवाह आज तक किसी औरत ने नही की थी.उनकी पत्नी उनका बहुत ख़याल रखती थी पर उस ख़याल मे अपनेपन से ज़्यादा ड्यूटी पूरी करने का एहसास था….& ऐसे सर्प्राइज़ देकर अचानक शॉपिंग करवाना…ये तो उन्होने सोचा भी नही था…दिल कर रहा था कि बस इसी तरह सारी उम्र उसका हाथ थामे खड़े रहें”…लीजिए ये सारे कपड़े ट्राइ करिए…जाइए”

जब राजा साहब ट्राइयल रूम से बाहर निकले तो सेलेज़्गर्ल ने उनके हाथों से सारे कपड़े ले लिए,”युवर वाइफ लव्स यू ए लॉट सर & वॉट गुड टेस्ट हॅज़ शी गॉट!”,राजा साहब एक पल को चौंक गये पर फिर तुरत उन्हे बात समझ मे आ गयी…ये मेनका को उनकी पत्नी समझ रही है….उन्होने बस हल्के से सर हिला दिया,वो लड़की भी कपड़े लेकर दूसरी ओर चली गयी.मेनका थोड़ी दूरी पर खड़ी कुच्छ कपड़े देख रही थी…”लगता है उसने ये बात नही सुनी.”

सारी शॉपिंग के बाद दोनो पेमेंट काउंटर पे पहुँचे.राजा साहब जेब से अपना वॉलेट निकालने लगे तो मेनका ने उन्हे रोक दिया,”नही.आप नही मैं पेमेंट करूँगी.ये आपको गिफ्ट है मेरी तरफ से.”

“पर दुल्हन…”

“श्ह.”,उसने अपने होठों पे उंगली रखकर उन्हे चुप रहने का इशारा किया & अपने हॅंडबॅग से कार्ड निकाल कर काउंटर पे बैठे आदमी की तरफ बढ़ाया.

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>माल से होटेल जाते वक़्त कार मे बैठे-2 राजा साहेब ने अपने मोबाइल से फ़ोन मिलाया,”डॉक्टर.पुरन्दरे.हम यशवीर सिंग बोल रहे हैं.”

मेनका खिड़की से बाहर देखने लगी,उसके ससुर उसके पति का हाल पूच्छ रहे थे.इतने दीनो मे उसने 1 बार भी विश्वा के बारे मे नही सोचा था.अगर मन मे ख़याल आता भी तो जल्दी से अपना ध्यान दूसरी ओर कर उस ख़याल को दिमाग़ से निकाल फेंकती थी.”कैसा आदमी था उसका ‘सो-कॉल्ड पति’.जब वो हॉस्पिटल मे थी तो एक बार भी उसे देखने नही आया….ना कभी उस से माफी माँगने की कोशिश की और क्यू करता वो तो उसके लिए बस एक खिलोना थी….हवस मिटाने की चीज़,उसने उसे कभी पत्नी थोड़े ही समझा था.”,मेनका सोच रही थी,”जब वो ठीक होकर वापस आ जाएगा तो वो कैसे करेगी उसका सामना…फिर से उस हैवान के साथ रहना पड़ेगा…”,उसने अपने सर को झटका,”..जब आएगा तब सोचेंगे…आज तो इतनी खुशी का दिन है.डील फाइनल हो गयी है.आज कोई बुरा ख़याल मन मे नही लाऊंगी”,अपने ससुर की तरफ देखा तो वो मोबाइल बंद करके जेब मे डाल रहे थे.वो उसे कभी भी विश्वा के बारे मे नही बताते थे…शायद जानते थे कि उसका ज़िक्र उसे फिर से वो दर्द याद दिला देगा.वो उनकी ओर देख कर मुस्कुराइ & फिर खिड़की से बाहर देखने लगी.

आइए अब हम बॅंगलुर चलते हैं,डॉक्टर.पुरन्दारे के रहाब सेंटर मे,विश्वा को देखने…..वो देखिए बाकी पेशेंट्स के साथ बैठ कर खा रहा है…& डॉक्टर.पुरन्दारे कहाँ है?….हाँ..वहाँ अपने चेंबर मे कंप्यूटर पर कुच्छ देख रहे हैं…क्या देख रहें है आख़िर?….अच्छा!विश्वा के थेरपी सेशन्स के टेप हैं.डॉक्टर.साहब अपने सारे पेशेंट्स से जो भी बात करते हैं उसे वीडियो रेकॉर्ड कर लेते हैं,इस से उन्हे बाद मे मरीज़ को अनल्ये करने मे आसानी होती है.चलिए,हम भी उनके साथ ये वीडियोस देखते हैं.

पेशेंट नंबर.45681,विश्वजीत सिंग

सेशन 1

डॉक्टर.:हेलो,विश्वजीत.

विश्वा बस सिर हिलाता है.

डॉक्टर.”देखो,विश्वा-आइ कॅन कॉल यू विश्वा…ओके.देखो,मेरा मानना है कि हर आदमी जो किसी बुरी लत का शिकार है खुद अपने को सुधार सकता है अगर वो खुद के अंदर झाँक कर अपनेआप को समझने की कोशिश करे.मैं चाहता हू कि तुम भी यही करो.

विश्वा एक तरफ सर घुमा कर दीवार की ओर देख रहा है.पता नही डॉक्टर.की बातों पर ध्यान दे भी रहा है या नही..

डॉक्टर.:..इंसान नशे का सहारा लेता है किसी चीज़ से भागने के लिए & ये नही सोचता कि कुच्छ समय बाद वो उस नशे का गुलाम हो जाता है..उस के हाथ की कठपुतली बन कर रह जाता है बस…मेरी बात के बारे मे सोचना.यू मे गो नाउ.

डॉक्टर.कुच्छ फाइल्स स्किप कर आगे बढ़ते हैं.

सेशन 4

डॉक्टर.:हेलो,विश्वा.

विश्वा:हाई.डॉक्टर.

डॉक्टर.:कैसा लग रहा है यहा?

विश्वा:अच्छी जगह है डॉक्टर,पर जब तलब लगती है तो ये जगह जैल लगने लगती है.

डॉक्टर.:तुम चाहो तो कल ही यहा से जा सकते हो.तुम्हारी मर्ज़ी के खिलाफ ,अगर तुम्हारे परिवार वाले बोले, तो भी मैं तुम्हे यहा नही रोकुंगा.

विश्वा(खड़ा होकर खिड़की से बाहर देखते हुए):नही डॉक्टर,मैं ठीक होना चाहता हू.मैं किसी और चीज़ को अपनी लाइफ कंट्रोल करने नही दे सकता.

डॉक्टर.:दट’स दा स्पिरिट!मैं समझता हू,विश्वा, जब तलब लगती है तो बहुत मुश्किल होती है पर मैं जानता हु कि तुम इस से ज़रूर उबर जाओगे.

डॉक्टर.और आगे बढ़ते हैं,1 वीडियो देखना शुरू करते हैं & फास्ट फॉर्वर्ड कर वाहा से देखते हैं, जहाँ से विश्वा बोलता है,

विश्वा:..मेरे मा-पिता बहुत अच्छे हैं & हम दोनो भाइयों को कँहि भी बिगड़ने नही दिया & ना ही कभी हुमारी कोई जायज़ माँग को ठुकराया …& मेरा भाई तो मेरा दोस्त था.डॉक्टर,हम राजपरिवार के लड़को से कुच्छ खास उम्मीदें रखी जाती हैं-हमे अपने परिवार की मर्यादा का हर वक़्त ख़याल रखना पड़ता है-हर वक़्त.मुझ से ये सब उतना नही होता था,वैसे भी मेरा भाई भावी राजा था…उसे बिज़्नेस संभालना था & परिवार के मान की रखवाली करनी थी.

डॉक्टर.:तो तुम परिवार की इज़्ज़त का ख़याल नही करते?

विश्वा:करता हू.पर मैं राजपुरा मे नही रहना चाहता था,मैं तो अमेरिका मे अपने फ्रेंड्स के साथ अप्पर-एंड गॅडजेट्स का बिज़्नेस करना चाहता था.मेरे भाई को मेरे प्लॅन्स के बारे मे पता था & वो हुमेशा कहता था कि फॅमिली बिज़्नेस & ट्रेडिशन्स की देखभाल के लिए वो है,मैं तो बस वो करू जो मैं चाहता हू.मेरा भाई मेरा बहुत ख़याल रखता था डॉक्टर…पर भगवान ने उसे छ्चीन लिया & मुझे मजबूरन वापस आना पड़ा.पिता जी बिल्कुल अकेले थे & मा भी स्वर्ग सिधर गयी थी.

मैं आया था अपना फ़र्ज़ निभाने पर इधर कुच्छ महीनों से ये फ़र्ज़ मुझे बोझ लगने लगा था…

डॉक्टर. और आगे बढ़ते हैं….

सेशन 8

विश्वा:मुझे अपने पिता से कोई शिकायत नही डॉकटॉर पर शायद हम दोनो के रास्ते अलग हैं,राजपुरा उनकी ज़िंदगी है & मैं अब राजपुरा जाना नही चाहता.मेरा दम घुट ता है अब वहाँ.

सेशन 15

डॉक्टर.:सेक्स के बारे मे तुम्हारे क्या ख़याल हैं?

विश्वा;इंसानी ज़रूरत है जैसे खाना,पानी,हवा..

डॉक्टर.:और शादी?

विश्वा:बिल्कुल ज़रूरी नही.है अगर आप बच्चा पालना चाहते हैं तो अलग बात है वरना किसी लड़की के साथ आप शादी के बगैर भी वैसे ही रह सकते हैं.

डॉक्टर.:तो फिर तुमने शादी क्यू की?

विश्वा:क्यूकी राजकुनवर होने के नाते,दट वाज़ एक्सपेक्टेड ऑफ मी.

डॉक्टर.:तुमने अपनी बीवी के साथ जो किया…

विश्वा:मैं उसके लिए शर्मिंदा हू…यहा से जाते ही मैं मेनका से माफी माँगूंगा पर शायद हुमारी शादी अब मैं निभा नही पाऊँगा…(हंसता है)..मैं भी क्या कह रहा हू!जो उस रात हुआ उसके बाद तो वो ही मेरे साथ नही रहना चाहेगी….मैने बहुत कोशिश की उसके साथ एक एमोशनल रिश्ता बने,डॉक्टर…पर ऐसा कभी हो नही पाया…

डॉक्टर.:तो तुमने उसी से शादी क्यू की?किसी और राजकुमारी से भी कर सकते थे?

थोड़ी देर चुप रहने के बाद विश्वा बोला,”डॉक्टर,वो बहुत खूबसूरत है…मैं बस..मैं बस उसके साथ हुमबईस्तर होना चाहता था.उसे देखते ही मेरे दिल मे उसके जिस्म को हासिल करने का ख़याल आया था.शुरू मे मैने सोचा था कि इसी तरह हुमारे बीच प्यार भी हो जाएगा…वो बहुत अच्छी लड़की है…बहुत समझदार भी …पर पता नही मेरे लिए वो कभी भी एक…एक…हसीन जिस्म से ज़्यादा क्यू नही बन पाई..मुझे कभी उस से प्यार नही हुआ.

तभी डॉक्टर.का फोन बजता है.यह राजा साहब का है,होटेल को जाते हुए कार से कर रहे हैं.

“नमस्कार,राजा साब…हा,हा..विश्वा मे काफ़ी इंप्रूव्मेंट है.अभी मैं उसी की फाइल देख रहा था.सबसे बड़ी बात है कि वो खुद भी ठीक होना चाहता है…मैं कल आपको उसके बारे मे एक डीटेल्ड ई-मैल भेजता हू,फिर हम बात करेंगे….अच्छा राजा साहब,नमस्ते.”

चलिए वापस बॉमबे चलते हैं,मेनका & राजा यशवीर होटेल मेरियट पहुँच गये हैं & राजा साहब रिसेप्षन पर अपना परिचय दे रहे हैं..

“हम यशवीर सिंग हैं.हुमारे सेक्रेटरी ने राजपुरा से फोन पर यहा हुमारे नाम से 2 स्यूयीट्स बुक किए होंगे.”

“वेलकम सर.आपकी बुकिंग है पर 1 सूयीट की.मैने ही राजपुरा से कॉल रिसीव की थी & मुझे कहा गया था कि राजा यशवीर सिंग & मिसेज़.सिंग के लिए सूयीट बुक करना है & हमने लोटस सूयीट आपके लिए रेडी कर दिया है.”

“ये कैसे हो सकता है.हमने सॉफ कहा था कि 2..-”

“इट’स ओके.हमारा सूयीट हमे दिखा दीजिए.”,मेनका राजा साहब की बाँह पकड़ते हुए बोली,”चलिए.”

“शुवर मॅ’म.”,कह कर रिसेप्षनिस्ट ने 1 बेल बॉय को बुला कर उनके साथ कर दिया.

“आपने हमे बात क्यू नही करने दी?ऐसी ग़लती कोई कैसे कर सकता है..”,राजा साहब लिफ्ट मे घुसते हुए बोले.

“फोन पे अक्सर ऐसी ग़लत फहमी हो जाती है.सेक्रेटरी ने राजा साहब & मिसेज़.सिंग बोला होगा & इन्हे लगा होगा कि हम पति-पत्नी हैं.”,जवाब देते हुए शर्म से मेनका के गाल लाल हो गये.

“अरे,जब आप बात समझ गयी थी तो उस रिसेप्षनिस्ट को बताया क्यू नही?”

“आपने भी तो माल मे सेलेज़्गर्ल को नही बताया था.”,बेल्लबोय के पीछे सूयीट मे घुसते हुए मेनका बोली.

राजा साहब की बोलती बंद हो गयी,”… तो इसने सुन लिया था.”,उन्होने सोचा.

सूयीट मे दाखिल होते ही एक लाउंज था जहा एक सोफा सेट लगा था & उसके बाद बड़ा सा बेडरूम जिसमे एक तरफ 4 चेर्स & 1 टेबल थी & 1 स्टडी डेस्क था जिसपे कंप्यूटर & फोन थे & दूसरी तरफ था 1 विशाल पलंग जिसे देख कर बस यही ख़याल आता था कि यह तो चुदाइ के लिए ही बना है.

राजा साहब फ्रेश होने के लिए बाथरूम मे चले गये,तब तक मेनका ने भी कपड़े बदल कर खाने का ऑर्डर दे दिया.

थोड़ी देर मे राजा साहब के आने के बाद दोनो ने साथ मे खाना खाया.अब मेनका काले रंग का ड्रेसिंग गाउन पहने थी & राजा साहब कुर्ते-पाजामे मे थे.

“हम यहा लाउंज मे सो जाएँगे,आप बेड पर सो जाइए.”,राजा साहब ने अपनी बहू को कहा.

“जी नही,पलंग बहुत बड़ा है.एक तरफ आप सो जाइए,मैं दूसरी तरफ सो जाऊंगी.”

“पर..”

“पर-वॉर कुच्छ नही.चलिए सो जाइए.दिन भर ज़रा भी आराम नही किया है आपने & यहा लाउंज मे तो आपको बड़ी अच्छी नींद आएगी!.”,मेनका बाँह पकड़ कर अपने ससुर को ले गयी & पलंग पर बिठा दिया.,”चलिए,लेट जाइए.”,& उनके लेट ते ही उपर से चादर ओढ़ा दी.फिर फ्रिड्ज से 1 बॉटल निकाली & ग्लास के साथ उसे राजा साहब के तरफ की साइड टेबल पर रख दिया.,”गुड नाइट.”

“गुड नाइट.”,राजा साहब ने अपनी आँखे बंद कर ली.मेनका बाथरूम चली गयी थी.आँखें तो बंद कर ली पर राजा साहब की आँखों मे नींद थी कहा.उन्हे कल रात का वाक़या याद आया जिसके बाद उन्होने अपनी बहू को सोच कर मूठ मारी थी.उन्हे अपने उपर आश्चर्य हो रहा था.जब से उनका बेटा मरा था,सेक्स की ओर उनका ध्यान कभी नही गया था…& वो शहर की रखाइलों वाला किस्सा तो उन्होने यूधवीर के विदेश से पढ़ कर लौटने से पहले ही ख़तम कर दिया था.पर इस लड़की ने उनमे फिर वो भूख जगा दी थी.

तभी मेनका बाथरूम से बाहर आई & ड्रेसिंग टेबल के सामने चली गयी,राजा साहब की ओर उसकी पीठ थी & वो उसे देख रहे थे.मनका ने सॅश खोल कर गाउन उतार दिया,नीचे काले रंग की नाइटी थी.

“..उफ़फ्फ़…काले लिबास मे तो इसका गोरा रंग & निखर रहा है..”,मेनका ने अपने बाल सवार,बत्ती बुझाई & आकर पलंग पर लेट कर अपने उपर चादर डाल दी.

कमरे मे अंधेरा हो गया & बिल्कुल सन्नाटा च्छा गया.दोनो एक दूसरे की तरफ पीठ कर करवट से लेते हुए थे.बाहर सब शांत था पर दोनो के दिलों मे तूफान मचा हुआ था.राजा साहब का लंड पाजामे मे हरकते कर रहा था & बड़ी मुश्किल से उन्होने उसे काबू मे किया था.मेनका की भी हालत बुरी थी,उसे तो ये हल्की-फुल्की नाइटी भी बहुत ज़्यादा तंग लग रही थी,वो चाह रही थी कि इसे भी उतार दे…उसकी चूत मे खुजली सी होने लगी थी..

पर किसी तरह दोनो ने अपने दिलों को काबू मे रखा & सोने की कोशिश करने लगे.बहुत सवेरे से जागे होने के कारण & दिन भर की थकान ने असर दिखाया & थोड़ी देर बाद दोनो नींद की गोद मे थे.

क्रमशः……………………………..

रात अचानक राजा साहब को गर्मी महसूस हुई तो वो उठ बैठे,अपने बदन से चादर हटा दी & साइड टेबल पे रखा लॅंप ऑन कर दिया.फिर अपना कुर्ता उतार कर किनारे रख दिया & टेबल से बॉटल उठा कर पानी पीने लगे.घड़ी मे देखा तो 1 बज रहा था.उन्हे मेनका का ध्यान आया तो घूम कर उसकी ओर देखा.वो उनकी तरफ ही करवट कर लेटी हुई थी.

अपनी बहू को देखते ही राजा साहब के होठ फिर सूख गये,नाइटी के गले से मेनका की चूचियो का काफ़ी हिस्सा नज़र आ रहा था,बाहों के दबाव के कारण चूचियो का कटाव & बड़ा हो कर उभर रहा था.नींद मे चादर भी उसके शरीर से हट गयी थी & नाइटी उठ कर घुटनो के उपर तक आ गयी थी.उसकी गोरी टांगे & जांघों का थोड़ा सा हिस्सा लॅंप की रोशनी मे चमक रहे थे.राजा साहब का लंड पाजामे मे सुगबुगाने लगा.उनकी नज़रे मेनका के जिस्म से हट ही नही रही थी.उनकी आँखों ने उसके पैरों से उसका मुआयना करना शुरू किया और जैसे ही उसके चेहरे तक पहुँची तो उनके माथे पर सलवटें पड़ गयी.मेनका नींद मे थी पर कुच्छ बुदबुदा रही थी,चेहरे पर घबराहट भी झलक रही थी…

चारों तरफ घुप अंधेरा था & मेनका उस वीराने मे अकेली पूरी नंगी भाग रही थी.वो दैत्याकार आदमी काला लिबास पहने था & चेहरे पर भी काला मुखौटा था.वो हाथों मे तलवार ले उसका पीचछा कर रहा था.मेनका बदहवास सी बहुत तेज़ी से दौड़ रही थी पर तब भी उस हैवान को पीछे नही छ्चोड़ पा रही थी.तभी उसका पैर कही फँसता है & वो गिर जाती है.वो काला इंसान उसके पास पहुँच कर तलवार उठाता है,मेनका ज़ोर से चिल्लती है,”बचाओ!बचाओ!…”

“..दुल्हन..दुल्हन..आँखे खोलो…”,कही दूर से उसके कानो मे आवाज़ आती है.वो अपनी आँखे खोलती है & वो इंसान जिसे वो ज़रूरत के वक़्त हमेशा अपने पास पाती है-उसका ससुर, उसे अपने उपर झुका पाती है,”..आ गये आप.”

राजा साहब मेनका के उपर झुके हुए उसे जगाने की कोशिश कर रहे थे.मेनका ने उचक कर उनके गले मे बाँहें डाल दी & उनसे चिपक गयी,”मेरे पास रहिए.प्लीज़,मुझे छ्चोड़ कर मत जाइए.”

राजा साहब संभाल नही पाए & उसे पकड़ते हुए उसके उपर गिर गये.मेनका उनके गले से लगी हुई थी & उनका नंगा सीना मेनका की छातियो पे दबा हुआ था.राजा साहब का चेहरा उसके बालों मे था & उसकी खुश्बू उन्हे मदहोश कर रही थी,मेनका को भी बहुत भला लग रहा था.जिस इंसान के सपने वो देखने लगी थी,आज वो उसकी बाहों मे था.उसने अपना गाल हौले से राजा साहब के गाल पे रगड़ा.उसकी इस हरकत से राजा साहब & नशे मे आ गये& उसे वैसे ही थामे हुए अपना सर उठा कर मेनका को देखा.

मेनका की नशीली आँखें & अधखुले होठ उन्हे बुलावा दे रहे थे जिसे उन्होने खुशी के साथ कबूल किया & अपने होठ उसके तपते होठों पे रख दिए & अपनी बहू को चूमने लगे.मेनका भी उनकी किस का जवाब देने लगी & दोनो काफ़ी देर तक एक-दूसरे के होठों का मज़ा उठाते रहे.फिर राजा साहब ने धीरे से अपनी जीभ मेनका के मुँह मे डाल दी,वो तो जैसे इसी इंतेज़ार मे थी & उसने भी अपनी जीभ उनकी जीभ से टकरा दी.अब दोनो पूरे जोश के साथ एक-दूसरे को चूमने लगे.राजा साहब का लंड पाजामे मे पूरा तन चुका था & नीचे मेनका उसे अपनी कमर की साइड मे महसूस कर रही थी,उसकी चूत भी गीली हो गयी थी.दोनो की टाँगें भी नीचे मिल रही थी & राजा साहब अपने पैर से उसके पैरों को सहला रहे थे.

राजा साहब ने अपनी बहू के होठों को छ्चोड़ दिया & उसके गाल चूमते हुए उसकी लंबी गर्दन पर आ गये.वाहा से उनके होठ मेनका के क्लीवेज पर पहुँच गये & राजा साहब ने उस पर किस्सस की झड़ी लगा दी.अपना हाथ पीछे ले जाते हुए उन्होने मेनका की नाइटी का ज़िप खोला & उसे उसके कंधों से नीचे सरकाते हुए उसके सीने से हटा दिया.काले रंग के स्ट्रेप्लेस्स ब्रा मे कसा उसका सीना उसकी तेज़ साँसों के साथ उपर-नीचे हो रहा था.छातियो का उपरी हिस्सा खुला था & निपल्स & नीचे का हिस्सा ब्रा ने छुपा रखा था.राजा साहब ने उसकी चूचियों के उस खुले उपरी हिस्से को चूमना शुरू कर दिया.

“एयेए…आहह..!”,मेनका कराही,उसका बदन एक कमान की तरह उपर उठ गया,उसके हाथ अपने ससुर के सर को कस के पकड़े हुए थे.राजा साहब अब उसी जगह पर चूसने लगे थे,मेनका की हालत बुरी हो गयी,चूत तो पहले से ही गीली थी & राजा साहब की इस हरकत ने उसे & पागल कर दिया.राजा साहब वैसे ही चूस्ते रहे & मेनका की चूत ने पानी छ्चोड़ दिया.वो झाड़ गयी थी & अभी तक उसके ससुर ने उसकी चूत को तो च्छुआ तक नही था.राजा साहब ने उसकी नाइटी को ओर नीचे सरका कर कमर तक कर दिया.

अब वो उसके पेट को चूम रहे थे,मेनका वैसे ही उनके सर पर हाथ रखे हुए थी.चूमते-2 वो उसके सपाट पेट के बीचो-बीच गोल,गहरी नाभि तक पहुँच गये & अपनी जीभ उसमे फिराने लगे.मेनका फिर से मज़े मे कसमसने लगी.उसके ससुर अपनी जीभ से उसकी नाभि ऐसे चाट रहे थे जैसे वो उसकी चूत हो.यह ख़याल आते ही वो फिर गरम होने लगी.राजा साहब की जीभ उसकी नाभि से निकल कर नाभि & पॅंटी के बीच के हिस्से पर थी & तभी राजा साहब ने पॅंटी के उपर से ही उसकी चूत पर चुंबन ठोक दिया.मेनका ने लाज के मारे करवट ले अपने चेहरे को हाथों मे छुपा लिया.

अब राजा साहब के सामने उसकी पीठ थी.वो थोड़ी देर तक उसकी पतली कमर & चौड़ी गांद को निहारते रहे.फिर उन्होने अपना दाया हाथ उसकी कमर पर रख दिया & पीछे से उस से चिपक गये.उनका पाजामे मे क़ैद लंड मेनका की गांद से सटा था & उनका सीना मेनका की पीठ से.उनका हाथ उसकी कमर से फिसलता हुआ उसके पेट पे पहुँचा & उस हाथ की 1 उंगली उसकी नाभि को कुरेदने लगी.मेनका अपनी गांद पे राजा साहब के लंड को महसूस कर रही थी & उसने अपनी गांद पीछे कर के उस दबाव का जवाब दिया.राजा साहब उसकी गर्दन चूम रहे थे & उनका हाथ अब नाभि छ्चोड़ मेनका की ब्रा मे कसी चूचियों को दबा रहा था.मेनका ने अपना दया हाथ पीछे ले जाकर अपने ससुर के सर को पकड़ लिया.तब राजा साहब ने अपना हाथ उसके सीने से हटा लिया & उसमे उसके प्यारे चेहरे को भर कर अपनी तरफ घुमाया & उसे चूमने लगे .काफ़ी देर तक वो ऐसे ही अपनी बहू के होठों का रास्पान करते रहे & नीचे से अपना लंड उसकी गांद पे रगड़ते रहे .

राजा साहब ने उसके होठों को आज़ाद किया & उसे पेट के बल लिटा दिया & उसकी पीठ के 1-1 हिस्से को चूमने लगे.अपने दातों से उन्होने उसके ब्रा के हुक को खोल दिया & चूमते हुए नीचे उसकी गांद तक पहुँच गये.फिर उन्होने उसकी कमर पकड़ कर उसे घुमा कर सीधा पीठ के बल लिटा दिया.मेनका का खुला ब्रा उसके सीने पर अब भी पड़ा था,राजा साहब ने उसे किनारे फेंक दिया.मेनका की दूधिया रंग की बड़ी-2 सुडोल चूचिया & उन पर बने हल्के गुलाबी निपल्स अब उनके सामने थे.मेनका की आँखें शर्म के मारे बंद थी & साँसें और तेज़ हो गयी थी,जिसके कारण उसके उरोज़ उपर-नीचे हो रहे थे & राजा साहब को पागल किए दे रहे थे.

राजा साहब अपनी बहू की चूचियों पर टूट पड़े.वो कभी अपने हाथों से उन्हे दबाते ,मसलते तो कभी अपने होठों से चूमते & चूस्ते.उनकी इन हरकतों ने मेनका के सीने को लव बाइट्स से भर दिया.मेनका ने भी उन्हे अपनी बाहों मे कस लिया & उचक कर मानो अपना सीना उनके मुँह मे और घुसाने की कोशिश करने लगी.जब राजा साहब का मुँह उसके सीने से हट ता तो उनकी उंगलियाँ उसके निपल्स को मसालने लगती जो कि अब पूरे कड़े हो गये थे.मेनका अब बहुत गरम हो गयी थी & अपनी जांघें एक साथ रगड़ रही थी.उसकी चूत बहुत गीली हो गयी थी जब राजा साहब ने उसकी 1 चूची को अपने हाथ मे भरा & दूसरी को अपने मुँह मे & इतनी ज़ोर से चूस्सा & दबाया कि वो दूसरी बार झाड़ गयी.उसके ससुर ने बिना उसकी चूत छुए उसे 2 बार झाड़वा दिया था.वो अब पस्त हो गयी थी.उसने अद्खुलि आँखों से प्यार से अपनी ससुर को देखा.

राजा साहब उसके सीने को छ्चोड़ अपने घुटनो पर उसकी साइड मे बैठ गये.अपने दोनो हाथ की इंडेक्स फिंगर्स को उसकी सीने के बगलों से बहुत हल्के-2 फिराते हुए उसकी कमर तक ले आए & उन्हे उसकी पॅंटी के वेयैस्टबंड मे फँसा दिया & फिर हौले से उसे उसकी जांघों से सरकाने लगे.मेनका ने शर्म से आँखें बंद कर ली.अब वो अपने ससुर के सामने पूरी नंगी होने वाली थी.उसकी धड़कने तेज़ हो गयी.उसने महसूस किया कि पॅंटी उसकी गांद के नीचे फँस सी रही है तो उसने धीरे से अपनी कमर उठा दी & राजा साहब ने पॅंटी उसके जिस्म से अलग कर दी.

राजा साहब मेनका की खूबसूरती निहार रहे थे.मूठ मारते वक़्त जैसी कल्पना की थी मेनका उस से भी कहीं ज़्यादा खूबसूरत थी & उसकी छ्होटी सी,गुलाबी,बिना बालों की चूत कितनी प्यारी लग रही थी.उन्होने उसके पैर को उठा कर अपने होठों से लगा लिया & चूमते हुए उसकी जाँघ तक पहुँच गये.मेनका कसमसा रही थी.अब उसे बर्दाश्त नही हो रहा था.वो चाहती थी कि बस अब वो उसकी चूत को अपने मुँह से जी भर कर प्यार करे.

राजा साहब ने उसकी दोनो जांघों को जम कर चूमा & चूसा & उसकी चूचियो की तरह भी यहा भी लव नाइट्स के रूप मे अपने होठों के दस्तख़त छ्चोड़ दिए.मेनका की चूत बस गीली हुए चली जा रही थी.राजा साहब उसकी जांघों को फैला कर उनके बीच लेट गये & अपना मुँह उसकी चूत के आस-पास 1 दायरे मे फिराने लगे.धीरे-2 वो दायरा छ्होटा होने लगा & उनके होठ पहली बार उसकी चूत से जा लगे.मेनका ने अपनी टांगे उनके कंधे पर रख दी थी.अब वो नीचे से अपनी कमर उचकाने लगी.राजा साहब ने अपनी जीभ उसकी चूत की दरार पे फिराई & धीरे से उसे अंदर सरका दिया.

“उउंम….उन्न्ञनह.!,”मेनका पागल हो गयी & अपनी कमर & उचकाने लगी अपने हाथों से अपने ससुर के सर को अपनी जांघों मे भींचने लगी.राजा साहब अब पूरे जोश से उसकी चूत चाटने लगे & उसके दाने पे अपनी जीभ फिराने लगे.ऐसा करते ही मेनका फिर झाड़ गयी पर राजा साहब ने चाटना नही छ्चोड़ा.मेनका की तो हालत अब बिल्कुल ही खराब हो गयी थी. राजा साहब ने उसकी चूत के थोडा अंदर उसके जी स्पॉट को खोज लिया था & वही कभी जीभ से तो कभी उंगली से उसे रगड़ रहे थे.मेनका की चूत तो पानी छ्चोड़ती ही जा रही थी & उसे होश भी नही था कि अब तक वो कितनी बार झाड़ गयी थी.आखरी बार झड़ने के बाद उसने देखा कि राजा साहब उसकी टाँगों के बीच खड़े अपना पाजामा उतार रहे हैं.जैसे ही वो नंगे हुए उसकी आँखें जो अभी तक अधखुली थी आश्चर्य से फैल गयी.

राजा साहब का 7 1/2इंच लंबा & काफ़ी मोटा लंड उसके सामने था.राजा साहब घुटनो के बल उसकी टाँगों के बीच बैठे थे.मेनका सोचने लगी कि वो कैसे इतने बड़े लंड को अपने अंदर लेगी.राजा साहब ने उसकी टाँगें फैला कर उसके घुटनो को मोड़ दिया & अपना लंड उसकी चूत की दरार पर फिराया तो मेनका ने अपना निचला होठ अपने दातों तले दबा लिया.

राजा साहब के लंड का मट्ठा बहुत मोटा था & अब वो उसे हल्के से उसकी चूत मे घुसा रहे थे.दर्द से मेनका की आँखें बंद हो गयी,”आ..हह.”,पर राजा साहब ने बड़ी कोमलता से अपने मत्थे को उसके अंदर घुसा दिया.धीरे-2 करके 4 1/2 इंच लंड अंदर चला गया & वो वैसे ही घुटनो पर बैठे उतने लंड को अंदर बाहर करने लगे,अब मेनका का भी दर्द कम हो गया & उसे मज़ा आने लगा.वो अपने ससुर को देखने लगी & दोनो हाथ बढ़ा कर उनकी कलाईयों को पकड़ लिया.राजा साहब ने हल्के धक्कों के साथ अब अपना लंड और अंदर डालना शुरू किया.

मेनका आज तक केवल अपने पति से चूड़ी थी & इस से ज़्यादा अंदर उसका लंड कभी गया नही था.उसे फिर दर्द होने लगा.राजा साहब उसके उपर लेट गये & उसे चूमने लगे & बहुत धीमे-2 धक्कों के साथ अपना पूरा लंड उसकी चूत मे डाल दिया.थोड़ी देर वो स्थिर रहे & बस कभी उसके होठों तो काफ़ी चूचियो को चूमते रहे.मेनका का दर्द जब ख़तम हो गया तो वो नीचे से हल्के से अपनी कमर हिलाने लगी.

राजा साहब ने अपने बहू के इशारे को समझा & अपनी बाहों पे अपने वजन को लेते हुए उसके बदन से उठ गये.उसकी आँखों मे झाँकते हुए अपना पूरा लंड उन्होने ने बाहर खीच लिया & फिर 1 झटके मे अंदर पेल दिया.

“आ…ईईयईए.”,मेनका चिल्लाई & अपने ससुर को अपने उपर खींच उनसे लिपट गयी & अपनी टांगे भी उनकी कमर के गिर्द लपेट दी.अब राजा साहब ने धक्के लगा कर उसकी चुदाई शुरू कर दी.मेनका को बहुत मज़ा आ रहा था.उसे बहुत खुशी हो रही थी कि उसने अपने ससुर का इतना बड़ा लंड अपने अंदर ले लिया था.वो उन्हे चूमने लगी.उसकी चूत आज पूरी भरी थी,राजा साहब का लंड उसकी चूत की आनच्छुई गहराइयों को माप रहा था & ये एहसास उसे और भी पागल किए दे रहा था.उसने अपनी कमर नीचे से हिलाना शुरू कर दिया,राजा साहब ने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी.तभी मेनका उचक कर उनको पागलों की तरह चूमने लगी,उसकी कमर भी तेज़ी से हिलने लगी & वो फिर झाड़ गयी पर राजा साहब अभी भी लगे हुए थे.

मेनका की कसी चूत उनके लंड को पूरा लपेटे हुए थी.अपने पूरे जीवन मे उन्होने ऐसी टाइट चूत नही चोदि थी.उनकी पत्नी की कुँवारी चूत भी ऐसी ना थी.

कमरे मे मेनका की आहो & राजा साहब की साँसों का शोर था.मेनका फिर से गरम हो रही थी.इस लंड ने तो उसे पागल कर दिया था.लगता था जैसे उसकी चूत से होता हुआ सीधे उसकी कोख पे धक्के मार रहा है.उसने फिर अपनी कमर नीचे से हिलाना शुरू कर दिया.अपने ससुर के बदन को उसने अपनी बाहों & टाँगों मे क़ैद कर रखा था.वो अब बहुत तेज़ धक्के लगा रहे थे.उसने जोश मे अपने नाख़ून उनकी पीठ मे गाड़ा दिए,उसकी चूत फिर से पानी छ्चोड़ने वाली थी.नीचे से अपनी कमर और तेज़ी से हिलाते हुए,पलंग से उठ कर वो अपने ससुर के होठों को चूमने लगी…बस वो झड़ने ही वाली थी…राजा साहब को भी अब अपने उपर काबू रखना मुश्किल हो रहा था & वो भी अपनी बहू के चुंबन का जवाब देते हुए & तेज़ी से धक्के लगाने लगे.तभी मेनका का मज़ा चरम सीमा पर पहुँच गया & वो अपने ससुर से चिपक सी गयी,उसके नाख़ून उनकी पीठ मे और धँस गये & उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया.तभी उसने महसूस किया कि उसके ससुर ने उसके होठों को अपने होठों मे बुरी तरह कस लिया है & उनका बदन भी झटके खाने लगा & उसे अपनी छूट मे कुच्छ गरम सा महसूस किया…उसके झड़ने के साथ ही उसके ससुर भी झाड़ गये थे & उसकी चूत को अपने वीर्या से लबालब भर दिया था.

थोड़ी देर तक दोनो वैसे ही पड़े अपनी साँस संभालते रहे.फिर राजा साहब उसके उपर से, धीरे से अपना लंड उसकी चूत मे से खीचते हुए उठ गये & बाथरूम चले गये.लंड निकलते ही मेनका को 1 ख़ालीपन का एहसास हुआ.

पर आज वो बहुत खुश थी.चुदाई मे इतना मज़ा मिलता है,उसने तो सपने मे भी नही सोचा था.जितनी बार वो आज झड़ी थी उतनी बार तो वो अपनी पूरी शादीशुदा ज़िंदगी मे भी नही झड़ी थी.विश्वा तो उसे बस मज़े के समुंदर के किनारे पे ला कर छ्चोड़ देता था,पर आज पहली बार अपने ससुर के साथ इस समुंदर की गहराई मे कई बार डूब कर उसने पूरा लुफ्त उठाया था.

वो वैसे ही नंगी पड़ी इन ख़यालों मे खोई थी कि बाथरूम का दरवाज़ा खुला & राजा साहब बातरोब पहने बाहर आए.उसने मुस्कुरा कर उन्हे देखा पर वो उसे अनदेखा करते हुए लाउंज की ओर जाने लगे.

“सुनिए”,वो उठने लगी पर राजा साहब नही रुके.वो दौड़ती हुई उनके सामने जा कर खड़ी हो गयी.”क्या हुआ?कहाँ जा रहे हैं?”

“हमसे ग़लती हो गयी है.हमे जाने दीजिए.”

“कैसी ग़लती?क्या कह रहे हैं आप?अभी जो भी हुआ उसमे आपके साथ-2 मेरी भी मर्ज़ी शामिल थी.फिर ग़लती कैसी?”

“समझने की कोशिश कीजिए!”

“क्या समझने की कोशिश करू?यही कि जितना मैं आपको प्यार करती हू उतना ही आप भी मुझ से करते हैं?”

“होश मे आइए.अभी जो हुआ वो नही होना चाहिए था.”

“मैं पूरे होश मे हू बल्कि अब ही तो मैं होश मे आई हू.अभी जो हुआ उसमे वासना से कही ज़्यादा प्यार था.मैने आपकी आँखों मे मेरे लिए चाहत सॉफ देखी है.क्या ये सच नही हैं या मैं ग़लत हू…आप को भी बस मेरे बदन की भूख थी.”

“आप जानती हैं कि हम आपको चाह-…”राजा साहब की अधूरी बात मे दर्द & गुस्सा था.

“तो फिर क्यू जा रहें है हमसे दूर?”,मेनका ने उनके कंधों पे अपने हाथ दिए.

“आप…आप..हमारे बेटे की पत्नी हैं.समाज के भी कुच्छ नियम हैं.ये रिश्ता हम कैसे निभा सकते हैं?”

“समाज के नियम…पत्नी..हुन्ह!क्या है समाज के नियम!यही कि आग के चारो तरफ घूम के 7 फेरे ले,सिंदूर लगा कर किसी को भी अपनी पत्नी के शरीर को जब जी चाहे,जैसे चाहे रौंदने का मौका मिल जाता है !मैं नही मानती ऐसे नियम.”

“आप समझ नही रही है.”

“मैं सब समझ रही हू पर आप नही समझ रहे हैं.आपको समाज का डर है ना.मुझे भी राजकुल की मर्यादा का ख़याल है.आपको वचन देती हू कभी भी उस पर आँच नही आने दूँगी.कल को आपका बेटा ठीक होकर वापस आ जाएगा तो इस मर्यादा के लिए, समाज के लिए मैं उसकी ब्यहता बन जाऊंगी.पर राजा साहब,एक लड़की क्या चाहती है अपने पति से.बस प्यार,विश्वास & इज़्ज़त जोकि आपके बेटे ने मुझे कभी नही दिया.ये सब मुझे आपने दिया है & मैने तन & मन दोनो से आपको अपना पति मान लिया है.कल आपका बेटा वापस आएगा तो दुनिया के लिए मैं उसकी बीवी हूँगी पर मेरी आत्मा पर अगर किसी का अधिकार होगा तो वो बस आपका होगा.आज जो खुशी मैने पाई है वो पहले कभी किसी ने मुझे नही दी.प्लीज़…ये खुशी मुझ से मत छिनिये.चाहे थोड़े दीनो के लिए ही सही-ये…ये 1 सपना ही सही.. मुझे इस सपने मे अपने साथ जी लेने दीजिए…प्लीज़!”,मेनका की आँखें छल्छला आई & गला भर गया.

“क्या ग़लत कह रही है?क्या हमे हक़ नही है खुश रहने का & इसने तो हमारे घर मे कदम रखने के बाद बस दुख ही झेले हैं…और उसके कुच्छ ज़िम्मेदार तो हम भी हैं….क्या हुमारा फ़र्ज़ नही बनता इसकी इच्छाओं का मान रखने का.”,राजा साहब के मन मे सवाल उठ रहे थे.

मेनका उनसे अलग हो उनकी तरफ पीठ कर सूबक रही थी.राजा साहब ने उसे अपनी तरफ घुमाया & ठुड्डी पकड़ कर उसके झुके चेहरे को उपर किया,”हम भी आपको वचन देते हैं जब तक इस शरीर मे जान है तब तक आपकी हर खुशी का ख़याल रखेंगे & इन आँखों मे आज के बाद हुमारी वजह से आँसू नही आएँगे.”,राजा साहब ने उसके चेहरे पर बनी आँसू की लकीरों को अपने होठों से मिटा दिया & उसे अपनी बाहों मे भर लिया.मेनका उनके सीने मे मुँह छुपा फिर सुबकने लगी मगर इस बार आँसू खुशी के थे.

थोड़ी देर बाद जब वो चुप हो गयी तो उसने अपने ससुर की आँखों मे झाँका & अपने लिए सिर्फ़ प्यार पाया,”आइ लव यू.”,कह कर उसने उनके होठ हल्के से चूम लिए.फिर उनका बातरोब साष खोल कर उतार दिया & उन्हे बेड पे ले गयी.

राजा साहब लेट गये तो वो भी उनकी बगल मे लेट गयी.

राजा साहब पीठ के बल लेट गये & मेनका उनकी बगल मे करवट ले कर लेट गयी.दोनो के होठ 1 बार फिर जुड़ गये.राजा साहब की एक बाँह मेनका की कमर के गिर्द थी & उनका 1 हाथ उसकी कमर & गांद को सहला रहा था & दूसरा उसकी छातियो को.मेनका की उंगलियाँ उसके ससुर के सीने के बालों से खेल रही थी.काफ़ी देर तक दोनो एक दूसरे को ऐसे ही चूमते रहे.

फिर मेनका ने उनके होठों को छ्चोड़ उनके चेहरे को चूमना शुरू किया & चूमते हुए नीचे उनके सीने तक आ पहुँची.उसके होठ पहले तो हल्के से राजा साहब के काले निपल्स को छेड़ते रहे पर फिर अचानक उन्होने उन काले निपल्स को अपनी रेशमी गिरफ़्त मे भींच लिया.मेनका अपने ससुर के निपल्स चूसने लगी & वो अपने हाथ उसकी गांद & छाती से हटा उसके सर पर ले आए.उन्हे बहुत मज़ा आ रहा था.

मेनका उनके सीने को चूमते हुए उनके सीने के बालों का पीचछा करते हुए नीचे जाने लगी & उनके लंड तक पहुँच गयी.लंड फिर से पूरा तना हुआ था.मेनका उसे एक तक निहारने लगी.कुच्छ देर पहले राजा साहब ने इसी लंड के सहारे उसे जन्नत की सैर कराई थी.उसने एक हाथ बढ़ा कर उसे अपनी गिरफ़्त मे ले लिया.राजा साहब उसे देख रहे थे.लंड इतना मोटा था कि उसका छ्होटा सा हाथ उसे पूरा नही घेर पा रहा था.

मेनका को अपने ससुर का लंड बहुत प्यारा लग रहा था.वो उसे अपने मुलायम हाथों से पकड़ धीरे-2 सहलाने लगी….उसका चेहरा धीरे-2 करके लंड की ओर झुकता जा रहा था.उसने और झुक कर लंड के टोपे को बहुत हल्के से चूम लिया.उसे खुद पर बहुत हैरानी हुई.उसका पति यही चाहता था पर उसे इतनी घिन आती थी,सोचने भर से ही उसे उबकाई आती थी….वो अपने पति से उलझ भी पड़ी थी & सॉफ इनकार कर दिया था उसके लंड को अपने मुँह मे लेने से.

पर उसे आज कोई घिन महसूस नही हो रही थी बल्कि आज तो उसे ये सबसे नॅचुरल बात लग रही थी.जिस इंसान ने उसे प्यार, इतना सुख दिया था,उसके लंड को प्यार करना तो एक स्वावाभिक बात थी & फिर ये लंड कितना प्यारा लग रहा था..इतना बड़ा..इतना मोटा…अफ….यही सब सोचते हुए उसने लंड को इस बार थोड़ा & ज़ोर से चूम लिया.राजा साहब की आँखें नशे से बंद हो गयी & उनकी पकड़ अपनी बहू के सर पर & मज़बूत हो गयी.उनकी पत्नी ने ये कभी नही किया था & जिन रंडियों के पास जाते थे,वो तो पैसे के लिए कुच्छ भी कर सकती थी.ये पहली बार था जब किसी औरत ने अपनी मर्ज़ी से उनके लंड पे मुँह लगाया था.

मेनका ने अपने ससुर की टांगे फैलाई & उनके बीच अपने घुटनो पे बैठ गयी,अपने हाथों मे लंड को पकड़ा & होठ उस पर कस दिए.राजा साहब ने आँखे खोली & सामने का नज़ारा देख कर & गरम हो गये.मेनका का काले बालों से घिरा चेहरा उनके लंड पर झुका था,उसने नज़रे उठाई तो उसके गुलाबी होठों मे लिपटा उनका लंड उन्हे दिखा.घुटने पे झुके होने की वजह से उसकी चौड़ी गांद हवा मे उठ गयी थी.राजा साहब उसके बालों मे उंगलिया फिराते रहे &जोश से पागल होते रहे.

मेनका ने उनकेसुपादे को कस कर चूस लिया तो राजा साहब की आह निकल गयी.अब वो पूरे जोश के साथ उनका लंड चूसने लगी.वो उनका पूरा का पूरा लंड निगल जाना चाहती थी पर वो उसके छ्होटे से मुँह मे आ नही रहा था.मेनका ने उसे मुँह से निकाला & उसे चूमने लगी.सूपदे के उपर लंड के छेद से चूमती वो लंड की जड़ तक पहुँच गयी.राजा साहब की झाँते भी उसके होठ छ्छू रही थी.उसने उनके अंडों को हाथ मे ले कर दबाया तो राजा साहब ने जोश मे अपनी कमर उचका दी.

मेनका ने पहले 1 & फिर दूसरे अंडे को अपने मुँह मे ले कर चूस लिया.राजा साहब तो पागल हो गये.उन्होने अपनी बहू का सर पकड़ अपने लंड पर दबा दिया.मेनका ने उनके आंडो को छ्चोड़ अबकी लंड की जड़ से चूमना शुरू किया & सूपदे तक पहुँच गयी.इसी तरह चूम कर & चूस कर राजा साहब को पागल कर दिया.वो बेचैनी से अपनी कमर हिला रहे थे.मेनका समझ गयी कि अब उसके ससुर को अपने उपर काबू रखना मुश्किल हो रहा है.उसने अपने मुलायम हाथों से नीचे से लंड को पकड़ा& हिलाने लगी.हिलाते हुए उसने अपने होठ लंड के उपर लगा दिया & चूसने लगी.

राजा साहब इस दो तरफे हमले से पागल हो गये.उनके आंडो से एक सैलाब चल कर उनके लंड से बाहर निकलने को बेताब होने लगा,उन्होने मेनका के सर को पकड़ अपने लंड पर & दबा दिया,”..हम…झड़ने वाले हैं…”,उन्हे लग रहा था कि पता नही मेनका उनका पानी अपने मुँह मे लेना चाहे या नही.वो सोच रहे थे कि अब वो अपना मुँह हटा अपने हाथों से उन्हे झाड़वा देगी.

पर उनकी आशा के विपरीत मेनका ने अपने होठों की पकड़ & मज़बूत कर दी & और तेज़ी से उनके लंड को चूसने & हिलाने लगी.राजा साहब के सब्र का बाँध टूट गया,उनका शरीर झटके खाने लगा & नीचे से कमर हिला कर उन्होने अपनी बहू के मुँह को अपने पानी से भर दिया.मेनका उनका सारा वीर्या पीने लगी.उसने चूस-2 कर उनके लंड से विर्य की 1-1 बूँद निचोड़ ली.

राजा साहब झाड़ कर हान्फ्ते हुए लेट गये.उनका लंड सिकुड रहा था & मेनका उसे चाट कर सॉफ करने लगी.मेनका बहुत हैरान थी,उसने सपने मे भी नही सोचा था कि कभी वो ऐसे किसी लंड को मुँह मे लेगी & उसका पानी भी पी जाएगी….&वो भी अपने ससुर का.ऐसा सोचते ही उसे थोड़ी शर्म भी आ गयी.उसने लंड को अपने मुँह से अलग किया & धीमे से नज़रे उठा कर अपने ससुर से मिलाई.

राजा साहब को ऐसा मज़ा कभी भी महसूस नही हुआ था.उन्होने मेनका को अपनी ओर देखता पाया & हाथ बढ़ा कर उसे खीच कर अपने उपर लिटा लिया,फिर करवट ले उसे अपनी बगल मे किया & बाहों मे भींच कर उसके चेहरे पर चुम्मों की झड़ी लगा दी.फिर उसके चेहरे को अपने हाथों मे लिया & उसकी काली,बड़ी-2 आँखों मे झँकते हुए उनके होठों से निकला,”आइ लव यू…मेनका.”

शर्म & खुशी की लाली मेनका के चेहरे पर छा गयी & उसने अपने ससुर के सीने मे मुँह छुपा लिया.थोड़ी ही देर मे दोनो नींद के आगोश मे चले गये.

मेनका की आँख खुली तो उसने पाया कि वो करवट से लेटी हुई है & उसके ससुर भी वैसे ही लेते हैं.उनके होठ उसकी एक चूची से चिपके हुए थे & दूसरी को अपने हाथ से मसल रहा था.उसने खिड़की की ओर देखा तो पर्दे के पीछे अभी भी अंधेरे का एहसास हुआ.तभी राजा साहब ने उसके निपल को ज़ोर से चूस लिया,”ऊओ…ओवववव.”,मेनका ने आह भरी & राजा साहब को उपर लेती हुई पीठ के बल लेट गयी.राजा साहब के लिया बस इतना इशारा काफ़ी था,उन्होने मेनका की टांगे अपने घुटनो से फैलाई & अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.

“आ…आह.”,मेनका को फिर अपनी चूत मे वो मीठा दर्द महसूस हुआ.उसने अपने ससुर को अपनी बाहों & टाँगो मे भीच लिया & उसकी कमर खुद बा खुद हिलने लगी.राजा साहब उसकी चूचियो को छ्चोड़,उसके होठों पर झुक गये & एक बार फिर अपनी बहू की चुदाई मे जुट गये.
सवेरे मेनका की नींद खुली तो उसने पाया कि वो बिस्तर पे अकेली नगी पड़ी हुई है,राजा साहब वाहा नही थे.उसने घड़ी देखी तो 8 बज रहे थे.वो जल्दी से उठी,11 बजे डील साइनिंग के लिए पहुँचना था.वो बिस्तर से उतरने लगी तो उसका ध्यान अपनी चूचियो & जांघों पर गया.राजा साहब ने दोनो जगहों पर अपने होठों के निशान छ्चोड़ दिए थे.वो शर्मा गयी पर उसकी नज़रे राजा साहब को ढूँढने लगी.

बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी.वो वैसे ही नंगी उस तरफ चल पड़ी,हाथ लगाया तो पाया कि बाथरूम का दरवाज़ा खुला था.उसे धकेल कर वो अंदर दाखिल हुई तो देखा कि राजा साहब शेव कर रहें हैं,उनकी कमर के गिर्द 1 तौलिए के अलावा & कोई कपड़ा नही था.उन्होने घूम कर मेनका की तरफ देखा & मुस्कुरा दिए.

मेनका उनकी तरफ बढ़ने लगी.उसके ससुर की नज़रे उसके जिस्म के 1-1 अंग का मुआयना कर रही थी.उसके गाल शर्म से लाल हो गये,”ऐसे क्या देख रहे हैं?”,वो उनके सामने खड़ी हो गयी.

“देख रहें हैं कि आपको धरती पर भेज कर भगवान आज कितना पछ्ता रहा होगा.”

“धात!कैसी बातें करते हैं.”

राजा साहब ने हल्के से उसके होठों को चूम लिया.तभी नीचे उसके पेट पे कुच्छ चुबा तो उसने देखा कि राजा साहब के तौलिए के अंदर उनका लंड खड़ा हो गया था & उसे छेड़ रहा था.मेनका ने हाथ बढ़ा कर तौलिए को राजा साहब के बदन से अलग कर दिया.

फिर वो झुक कर बैठ गयी,लंड उसकी आँखों के सामने था.राजा साहब सोच रहे थे कि फिर वो उन्हे मुँह मे लेगी पर मेनका ने ऐसा कुच्छ ना किया,हाथ बढ़ा कर वॉशबेसिन के बगल मे रखे शेविंग फोम के कॅन को उठा लिया & उस से फोम निकाल कर राजा साहब के लंड & टट्टों के आस-पास के बालों पर लगा दिया.फिर उनके हाथ से उनका रेज़र लिया & बड़ी सावधानी से राजा साहब की सारी झाटों को सॉफ कर दिया.

राजा साहब की धड़कन तेज़ हो गयी थी.काम पूरा कर मेनका उठी & उनके गालों पे बची शेव पूरी करने लगी,”कल रात प्यार करते वक़्त आपके इन बालों हमे बहुत तंग किया.”,उसने एक हाथ से उनके लंड के पास की जगह को छुते हुए कहा.राजा साहब तो जोश से पागल हो गये.

उन्होने उसके हाथों से रेज़र छ्चीन कर फेंक दिया & उसे उठा कर वॉशबेसिन के बगल मे बने पलटफ़ॉर्म पे बिठा दिया,उसके घुटने मोड़ उसकी टाँगो को चौड़ा किया & अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया,”आ…अहह…”मेनका उनके सीने से लग गयी & दोनो फिर चुदाई का मज़ा उठाने लगे.वॉशबेसिन के उपर बने शीशे मे मेनका की नंगी पीठ की परच्छाई देख कर राजा साहब & गरम हो गये,उन्होने अपने हाथों मे उसकी चूचियाँ भींच ली.मेनका दर्द से तड़प कर उनसे चिपक गयी,”औ…च!”,अपने नाख़ून उनकी पीठ मे गाड़ा दिए & टांगे कमर पर कस दी.

राजा साहब ने हाथ चूचियो से हटा उसकी गांद की फांकों पर कस दिए & काफ़ी ज़ोर के झटके मारने लगे.इस पोज़िशन मे उनका लंड मेनका की चूत की दीवारों से ही नही रगड़ खा रहा था बल्कि उसकी चूत के दाने को भी रगड़ रहा था.मेनका भी अब अपनी कमर हिलाने लगी.वो सातवे आसमान मे पहुँच गयी थी.अपने ससुर की मर्दानगी की तो वो कायल हो गयी.कल रात ये शख्स 3 बार झाड़ा था पर अभी भी उसे ऐसे चोद रहा था जैसे पहली बार कर रहा हो.उसकी कमर और झटके खाने लगी & वो अपने ससुर से & चिपक गयी…..उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया था…वो झाड़ चुकी थी.राजा साहब को पता चल गया कि उनकी बहू झाड़ गयी है तो उन्होने भी 3-4 ज़ोर के धक्के मारे & 1 बार फिर से अपनी बहू की चूत मे अपना पानी छ्चोड़ दिया.

थोड़ी देर दोनो वैसे ही एक-दूसरे से लिपटे,एक दूसरे को चूमते सहलाते रहे.फिर राजा साहब ने उसकी चूत से अपना लंड खींचना शुरू किया तो मेनका ने सवालिया नज़रो से उन्हे देखा,”डील साइन करने भी तो जाना है”,उन्होने अपना लंड बाहर निकाल लिया,”जल्दी तैय्यर हो जाइए”,उसके होठों को चूमा & बाथरूम से बाहर चले गये.

मेनका थोड़ी देर तक वैसे ही बैठी रही,वो इस एहसास से बाहर ही नही आना चाहती थी.पर डील के लिए भी तो जाना था.वो उठी & नहाने की तैय्यारि करने लगी.

थोड़ी देर बाद राजा साहब & मेनका नाश्ते के लिए होटेल के रेस्टोरेंट की तरफ जा रहे थे.होटेल के शॉपिंग एरिया से गुज़रते हुए मेनका को एक ख़याल आया,”आप चलिए,हम अभी आते हैं.”

“अरे,क्या बात हो गयी?पहले तो नाश्ता तो कर लें फिर शॉपिंग कर लेना.”

“प्लीज़!आप चलिए ना.हम बस यूँ गये & यू आए.”

“ओके.जैसी आपकी मर्ज़ी.”,राजा साहब रेस्टोरेंट मे 1 टेबल पर बैठ गये & नाश्ते का ऑर्डर कर दिया.वो थोड़ी देर पहले होटेल सूयीट के कंप्यूटर पे पढ़े डॉक्टर.पुरन्दारे के ई-मैल के बारे मे सोचने लगे.उन्हे इस बात की तसल्ली थी कि विश्वा भी ठीक होना चाहता है पर शादी मे उसका विश्वास ना होने वाली बात से वो थोड़े चिंतित थे.वो मेनका को प्यार नही करता था,ये जान कर उनके मन के किसी कोने मे बहुत खुशी पैदा हुई थी पर वो जानते थे कि मेनका & उनका रिश्ता विश्वा के लौटने तक ही रह सकता है….”खैर,जब विश्वा आएगा तो देखेंगे..”,उन्होने एक ठंडी आह भरी.”अभी तक दुष्यंत ने भी कोई खबर नही दी है.”,वो सोच रहे थे.

अब आप सोचेंगे कि ये दुष्यंत कौन है.दुष्यंत वर्मा उन गिने-चुने लोगों मे से है जो राजा साहब को उनके नाम से पुकार सकते हैं.दोनो बोरडिंग स्कूल & कॉलेज मे साथ पढ़े थे & पक्के दोस्त थे.दुष्यंत वेर्मा 1 सेक्यूरिटी &डीटेक्टिव एजेन्सी चलाते थे जिसके क्लाइंट्स हिन्दुस्तान की जानी-मानी हस्तियाँ थी.राजा साहब ने उनसे उस इंसान का पता लगाने को कहा था जो उनके बेटे को ड्रग्स सप्लाइ करता था.उनकी सख़्त हिदायत थी कि इस पूरी जाँच को सीक्रेट रखा जाए & दुष्यंत,उनके इस काम पे लगे स्टाफ & राजा साहब के अलावा किसी को भी इस बात की भनक ना लगने पाए.ऐसा वो इसलिए चाहते थे क्यूकी उन्हे पूरा यकीन था कि इसके पीछे जब्बार का हाथ है & इस बार वो उसे आखरी सबक सिखाना चाहते थे.

“अरे,क्ये सोच रहें है?खाते क्यू नही?”,मेनका उनके सामने बैठी उनकी आँखों के आगे हाथ फिरा रही थी.वो अपने ख़यालों मे इतना खोए थे कि वो कब आई & वेटर कब खाना सर्व कर गया,उन्हे पता ही ना चला.

“कुच्छ खास नही,बस ऐसे ही.चलिए शुरू कीजिए.”,दोनो नाश्ता करने लगे

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जहा राजा साहब अपने दुश्मन को सबक सिखाने के ख़यालों मे डूबे थे वही उनका दुश्मन भी उनकी बर्बादी के इरादे से शहर आ पहुँचा था.आइए चल कर देखते हैं कि वो क्या कर रहा है.

शहर के बाहरी हिस्से मे जहा रोज़ नये फ्लॅट्स बन रहे हैं,वही 1 अपार्टमेंट कॉंप्लेक्स है जो कि अभी तक पूरी तरह से बसा नही है,उस कॉंप्लेक्स का 1 फ्लॅट जब्बार का शहर का अड्डा है.उसका फ्लॅट ग्राउंड फ्लोर पर है & उस बिल्डिंग के बाकी फ्लोर्स अभी खाली पड़े हैं.अभी दोपहर के वक़्त भी यहा वीरानी च्छाई है.बस एक लंबा-चौड़ा शख्स चलता हुआ उस फ्लॅट की ओर आ रहा है.

आप उस इंसान के बगल से भी गुज़र जाएँ तो आप कुच्छ खास बात नही नोटीस कर पाएँगे पर जब मैं आपसे पुछुन्गा कि उसकी शक्ल कैसी थी तब आपका ध्यान जाएगा कि आप पास से गुज़रते हुए भी उसका चेहरा सॉफ-2 नही देख पाए थे.जी,हाँ ये कल्लन है.सर पर कॅप,आँखों पे काला चश्मा,बदन पे जॅकेट जिसका कॉलर उठा हुआ है ताकि कोई भी उसका हुलिया ना जान पाए.

देखिए वो कॉल बेल बजा रहा है.चलिए देखते हैं क्या होता है…

बेल सुन मलिका ने दरवाज़ा खोला,”ओह,तुम हो”,एक कातिल मुस्कान उसने कल्लन की तरफ फेंकी.,”जब्बार तो बाहर गया है.”

“मैं वेट करूँगा.”,कल्लन ने अंदर आकर जॅकेट,चश्मा & कॅप उतार दिया था.उसके बाल फिर से बढ़ गये थे & चेहरे पर दाढ़ी भी वापस आ गयी थी.

“ड्रिंक लोगे?”,मलिका अपनी गांद मतकाते हुए बार की तरफ बढ़ी,कल्लन की तरफ उसकी पीठ थी & वो जान बुझ कर अपनी गांद थोड़ी ज़्यादा लचका रही थी.उसने 1 टॉप पहना था जो कि उसकी छातियो के बड़े साइज़ के कारण बहुत कसा हुआ था & उसके निपल्स का आकर सॉफ दिख रहा था,नीचे 1 मिनी स्कर्ट थी & जब वो चल रही थी तो तो उसमे से उसकी नंगी गांद का थोड़ा सा हिस्सा झलक रहा था.

बिना उसके जवाब का इंतेज़ार किए,वो बार पर आके ड्रिंक तैय्यार करने लगी.तभी कल्लन ने उसे पीछे से अपने मज़बूत बाज़ुओं मे जाकड़ लिया & टॉप के उपर से ही उसकी छातिया मसल्ने लगा.

“औच्च!…आ …..ज़ालिम ज़रा आराम से…तो तुझमे भी आग है…मैने तो सोचा था कि तू तो बर्फ की तरह ठंडा है…एयेए…अहह.”,कल्लन ने उसके गले मे काट लिया.अब उसके हाथ मलिका के टॉप के अंदर उसकी चूचियों & उन पर बने कड़े हो चुके निपल्स को मसल रहे थे.

मलिका ने 1 हाथ पीछे ले जाकर कल्लन के गले मे डाल दिया & अपना चेहरे घुमा कर उसे चूमने लगी,दूसरा हाथ उसने उस की पॅंट की ज़िप पर रख दिया.”उफ़फ्फ़…..बहुत बड़ा लगता है तेरा…”,उसके होठों को छ्चोड़ते हुए मलिका बोली & पॅंट की ज़िप खोल लंड को बाहर निकाल लिया.उसने सर नीचे कर देखा,सचमुच कल्लन का लंड बहुत बड़ा था.

बड़े लंड मालिका की कमज़ोरी थी.जब्बार का लंड बहुत मोटा था पर लंबाई कुच्छ खास नही थी.जब्बार की ख़ासियत थी उसका स्टॅमिना जो कि मलिका जैसी हर वक़्त गरम रहने वाली लड़की की प्यास बुझाने मे बहुत काम आता था.पर मलिका की नज़रों मे बड़े लड की बात ही कुच्छ और थी & वो कभी भी ऐसे लंडो को अपनी चूत मे लेने से नही चूकती थी.

उसने अपने हाथ से कल्लन के लंड को रगड़ना शुरू कर दिया,लंड देख ते ही उसकी चूत गीली हो गयी थी.कल्लन अब आपे से बाहर हो गया उसने मलिका के दाये घुटने को मोडते हुए उसकी जाँघ उठा कर बार पर रख दिया & वैसे ही खड़े-2 अपना लंड उसकी चिकनी चूत मे पेल दिया.

“आआ….ईिईययईईए!….फाड़ देगा क्या?….थोड़ा धीरे घुसा ना…ऊओवव्व!”,उसकी बातें कल्लन को और दीवाना कर रही थी & उसने अपना पूरा लंड उसके अंदर घुसा दिया & धक्के मारने लगा.”हा…अन्न….ऐसे ..ही….ज़ोर से….है….और…ज़ोर से कर…ना..!”

मलिका भी अपनी गांद हिला कर उसका पूरा साथ दे रही थी,उसकी एक बाँह कल्लन की गर्दन को घेरे थी & दूसरी बाँह पर उसके बदन को सहारा दे रही थी.कल्लन का एक हाथ उसकी चूचिया मसल रहा था & दूसरे की उंगलिया चूत के दाने को रगड़ रही थी,होठ कभी उसके चेहरे,कभी होठ चूचियों पे घूम रहे थे.बहुत ज़ोर की चुदाई चल रही थी…

“ट्र्न्न्न!”,कॉल बेल चीख उठी तो दोनो चौंक गये & मलिका की चूत ने पानी छ्चोड़ दिया.कल्लन की कमर ने भी 2-3 झटके खाए & उसका लंड मलिका की चूत मे झाड़ गया.

मलिक ने बार से 1 नॅपकिन उठाया & कल्लन से अलग हो गई.दरवाज़े तक जाते हुए उसने अपनी जांघों पर बह आए कल्लन के & अपने पानी को सॉफ कर लिया.दरवाज़े पर जब्बार था.

अंदर आया तो उसने देखा की कल्लन सोफे पर बैठा ड्रिंक कर रहा था.थोड़ी देर पहले मचे वासना के तूफान का नाम ओ निशान उसके चेहरे पर नही था.

“क्यू बुलाया था?”,उसने जब्बार से पुचछा.

“1 छ्होटी-सी मछ्लि हाथ लगी है जिसके ज़रिए हम बड़ी मछ्लि तक पहुँच सकते हैं.”,उसने मलिका के हाथ से ड्रिंक लेते हुए जवाब दिया.,”हमे बहुत शॉर्ट नोटीस पर भी काम करने को तैय्यार रहना होगा.आज से तुम यही रहो पर ध्यान रहे किसी को इस बात का पता नही चलना चाहिए कि तुम यहा हो.”,जब्बार कह तो कल्लन से रहा था पर उसकी नज़रे मलिका पर थी जो कि बड़े सोफे पर लेट कर उनकी बातें सुन रही थी.

“अब क्या करना है?”,कल्लन अपना खाली ग्लास फिर भरने के लिए उठा.

“उस छ्होटी मछ्लि को चारा डालना है.”,जब्बार मलिका की तरफ देख कर कुटिलता से मुस्कुराया.

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डील साइन करने के बाद राजा साहब & मेनका वापस होटेल आए.थोड़ी देर बाद ही उन्हे राजपुरा के लिए रवाना होना था.इस बार राजा साहब ने प्लेन चार्टर नही किया था बल्कि एरलाइन फ्लाइट से जाने वाले थे.चेक आउट करते वक़्त मेनका फिर उन्हे रिसेप्षन पे छ्चोड़ शॉपिंग एरिया मे चली गयी.

“ऐसा क्या है शॉपिंग सेंटर मे जो बार-2 वाहा जा रही हो?”,कार तेज़ी से एरपोर्ट की तरफ बढ़ रही थी.

“ये तो आपको घर चल कर ही पता चलेगा.”,मेनका शरारत से मुस्कुराइ.राजा साहब का दिल क्या कि उसी वक़्त उसे बाहों मे भींच कर प्यार करने लगे पर आगे ड्राइवर बैठा था.बड़ी मुश्किल से अपने जज़्बातों को उन्होने काबू मे किया.

एरपोर्ट मे चेक-इन काउंटर की ओर जाते हुए मेडिसिन स्टोर की विंडो मे लगे कॉंडम का पोस्टर देख राजा साहब के दिमाग़ मे 1 ख़याल आया.,”अरे,कल रात हम से 1 गड़बड़ हो गयी?”

“क्या?”

“हम..-”

“नमस्कार,राजा साहब.”,राजा साहब के जवाब देने के पहले 1 लग भाग 60 साल का काफ़ी अमीर दिखने वाला आदमी उनके सामने आ खड़ा हुआ.

“अरे,सपरू साहब!कैसे हैं आप?यहा कैसे आए?”

“बस आपकी दुआ है,राजा साहब.हुमारी बेटी यही ब्याही है उसी से मिलने आए थे,अब वापस देल्ही जा रहे हैं.”

“इनसे मिलिए.ये कुँवारानी हैं?…और ये सपरू साहब हैं.हुमारी तरह काग़ज़ & चीनी के व्यापारी पर इनका कारोबार हमसे कहीं ज़्यादा बड़ा & फैला हुआ है.”

मेनका ने उन्हे नमस्कार किया तो जवाब मे उन्होने भी हाथ जोड़ दिए.,”राजा साहब तो हमे शर्मिंदा कर रहे हैं.इनकी बातों पर मत जाइए.हम तो इनके सहभागी बन ने को बेताब थे पर तक़दीर ने हमारा साथ नही दिया.”

“हाँ,सपरू साहब.इस बात का मलाल तो हमे भी रहेगा कि आप & हम बिज़्नेस पार्ट्नर्स नही बन पाए.अगर आपकी कंपनी का पैसा उस चाइनीस डील मे नही फँसता तो आज हमे इन विदेशियो से डील करने की कोई ज़रूरत नही पड़ती.”

“सब उपरवाले की मर्ज़ी है,राजा साहब!पर क्या मालूम?हो सकता है आगे चल के वो हमारा रिश्ता और मज़बूती से जोड़ दे.”

“बहुत खूब कही,सपरू साहब आपने.”तभी अनाउन्स्मेंट हुई & दोनो 1 दूसरे से विदा ले अलग-2 दिशाओ मे चले गये.

प्लेन मे बैठे मेनका ने 1 मॅगज़ीन के पन्ने पलट ते हुए राजा साहब से पूचछा,”आप एरपोर्ट पे किस गड़बड़ का ज़िक्र कर रहे थे?”

राजा साहब थोड़े परेशान दिखे,”वो..हम…कल रात हमने…कोई..कोई प्रोटेक्षन इस्तेमाल नही किया & कही तुम प्रेग्नेंट..-”

“आप उस बात की चिंता मत कीजिए.आपने नही मैने किया था.”,धीरे से हँसती हुई वो वापस मॅगज़ीन पढ़ने लगी.राजा साहब को तसल्ली हुई.

मेनका शुक्र मना रही थी कि पति के जाने के बाद भी उसने कॉंट्रॅसेप्टिव पिल्स खाना नही छ्चोड़ा था नही तो जैसे उसके ससुर ने उसकी चूत को 3 बार भरा था,वो तो शर्तिया प्रेग्नेंट हो चुकी होती.

शहर के एरपोर्ट पे राजा साहब के स्टाफ मेंबर्ज़ उनकी अगुआई के लिए खड़े थे.शाम घिरने लगी थी & स्टाफ मेंबर्ज़ ने उनसे शहर मे उनके बुंगलोव पर रुकने को कहा.पर राजा साहब जल्द से जल्द राजपुरा पहुँचना चाहते थे सो उन्होने उनसे अपनी कार ली और मेनका के साथ राजपुरा की ओर चल पड़े.वैसे भी रास्ता बस 1-1 1/2 घंटे का ही था.

राजा साहब को ड्राइव करना बहुत पसंद था & बहुत मजबूरी मे ही अपने ड्राइवर को ड्राइव करने देते थे.आज तो उन्हे बहुत अच्छा लग रहा था,ड्राइव करते वक़्त उनके साथ उनकी प्रेमिका जो बैठी थी.

कार के शीशे गहरे काले रंग के थे & अंदर का नज़ारा कोई बाहर से देख नही सकता था.इसी बात का फयडा उठाते हुए जैसे ही कार शहर से निकल कर हाइवे पर आई मेनका खिसक कर राजा साहब से सॅट कर बैठ गयी.उन्होने ने भी अपनी बाईं बाँह के घेरे मे मेनका को समेट लिया.मेनका अपने ससुर के कंधे पे सर रख सामने देखने लगी.करीब 15-20 मिनिट तक दोनो ऐसे ही बैठे रहे.फिर मेनका को शरारत सूझने लगी.उसने राजा साहब के गाल पर चूम लिया तो राजा साहब ने भी 1 पल के लिए रास्ते से नज़र हटा कर उसकी किस का जवाब उसके गालों पर छ्चोड़ दिया.

मेनका ने अपने ससुर की शर्ट के उपर के 2 बटन खोल दिए & उसकी उंगलियाँ उनके सीने के बालों से खेलने लगी.उनके सीने को सहलाते हुए उसने अपने नाखूनों से राजा साहब के निपल्स को छेड़ना शुरू कर दिया.,”क्या कर रही हो?अगर हुमारा ध्यान इधर-उधर हुआ तो कही आक्सिडेंट ना हो जाए.”

“यही तो आपका इम्तिहान है,राजा साहब.मैं तो ऐसे ही करती रहूंगी,आप बिना होश खोए कार चला कर दिखाएँ तो मानु.”

“हमे चॅलेंज कर रही हो…ठीक है.जो मर्ज़ी कर लो,हम भी हार नही मानेंगे.अब तो कार महल पर ही रुकेगी.”

जवाब मे मेनका ने थोड़ा झुक कर शर्ट के गले से झँकते उनके सीने पर चूम लिया.कार मे ऑटोमॅटिक ट्रॅन्समिशन होने की वजह से राजा साहब को गियर बदलने की ज़रूरत तो थी नही,उनका दाया हाथ स्टियरिंग को & बाया मेनका को संभाले हुए था.मेनका चूमते हुए नीचे उनकी गोद मे पहुँच गयी & उनकी पॅंट का ज़िप खोल दिया & हाथ घुसा कर अपने ससुर के लंड को बाहर निकल लिया.लंड पहले से ही तना हुआ था.मेनका ने उसे हाथ मे थमा & राजा साहब की ओर देख कर मुस्कुराइ.राजा साहब भी मुस्कुरा दिए & फिर अपनी नज़रे रोड पर जमा दी.

मेनका ने लंड को हिलाना शुरू कर दिया.उसे अपने हाथ मे इस लंड का एहसास बहुत अच्छा लगता था & इसको छुने भर से ही वो गरम होने लगे थी.राजा साहब ने अपने बाए हाथ को नीचे कर झुकाते हुए मेनका के घुटने पकड़ कर उसकी टाँगें सीट पर कर दी,फिर सीधे हो बैठ गये & उसकी सारी उठा कर उसकी कमर तक ले आए.इस सब के दौरान उन्होने कार को ज़रा भी नही लड़खड़ाने दिया.

मेनका झुक कर अपने ससुर के लंड को चूसने लगी थी.राजा साहब ने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी पॅंटी की साइड मे से अपनी उंगलिया उसकी चूत मे घुसा दी & उसके दाने को रगड़ने लगे.मेनका तो जोश से पागल हो गयी पर राजा साहब की हालत तो और भी खराब थी.उनकी बहू उनके लंड को मसल & चूस रही थी & उनका दिल कर रहा था कि बस कार रोक उसे लिटा कर उस पर सवार हो जाएँ पर उन्हे मेनका का दिया हुआ चॅलेंज पूरा करना था.राजपुरा बस 10 मिनट दूर रह गया था.उन्होने बड़ी मुश्किल से अपने उपर काबू किया था & अपने पानी को छूटने से रोका हुआ था.

राजा साहब अपनी उंगलियों से उसके जी स्पॉट को ढूँढने लगे & जैसे ही उन्होने उसे खोज कर उस पे अपनी उंगली फिराई,मेनका झाड़ गयी.मेनका को बहुत मज़ा आ रहा था.वो अभी भी वैसे ही राजा साहब के लंड पर लगी हुई थी पर राजा साहब ने भी सोच लिया था कि महल पहुँच कर ही झड़ेंगे.

मेनका की जीभ राजा साहब के अंदो पर घूमने लगी,झाँते सॉफ करने के बाद अब वो काफ़ी आसानी से उन गोलों को चूस पा रही थी.कार महल के गेट पर पहुँच गयी थी.दरबान ने राजा साहब की कार के हॉर्न को दूर से ही पहचान लिया & गेट खोल दिया.मेनका ने लंड को वापस मुँह मे लेकर चूसना & हाथों से रगड़ना शुरू कर दिया था.राजा साहब की उंगली ने फिर से उसे जन्नत की सैर करना शुरू कर दिया था.

कार महल के कॉंपाउंड के अंदर दाखिल होकर बस अब मैं गेट तक पहुँचने वाली ही थी जब राजा साहब की उंगलियों की रगड़ से मेनका दुबारा झाड़ गयी.उसने अपनी जांघें भींचते हुए अपने ससुर की उंगलियो को अपनी चूत मे ही क़ैद कर लिया.उसके होठ उनके लंड को और तेज़ी से चूसने लगे & राजा साहब ने भी अपना पानी उसके मुँह मे छ्चोड़ दिया.मेनका सारा पानी पी गयी & चाट कर पूरा लंड सॉफ कर दिया,फिर उठ कर अपनी सारी & बाल ठीक करने लगी.

राजा साहब ने कार महल के पोर्च मे रोक दी,अपना लंड पॅंट के अंदर किया और मुस्कुरा कर मेनका की ओर देखा,”तो हम इम्तिहान मे पास हो गये?कितने नंबर मिले हमे?”

मेनका ने अपना आँचल सर पर ले लिया,”हां हो गये.100 मे से 101.”,& दोनो कार से बाहर आ गये.

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थोड़ी देर पहले मैने आपको बताया था कि जब्बार 1 छ्होटी मछ्लि के बारे मे बात कर रहा था जिसे वो फाँसना चाहता था.आइए जानते हैं आख़िर उस छ्होटी मछ्लि के बारे मे उसे पता कैसे चला.इसके लिए हमे समय मे थोडा पीछे जाना पड़ेगा….तो चलें…

जब्बार अभी तक इस बात पे कॉन्सेंट्रेट कर रहा था कि विश्वा इलाज के लिए कहा जा सकता है & इसमे उसका समय भी बर्बाद हो रहा था,उपर से नाकामयाबी झेलनी पड़ रही थी.पर फिर उसके शैतानी दिमाग़ ने थोडा दूसरी तरह से सोचना शुरू किया.उसने सोचा कि जहा भी गया हो राजा जाएगा तो प्लेन से ही & प्लेन या तो एरलाइन्स के पास होता है या फिर चार्टर कंपनी के पास.जब उसे दुनिया से ये बात च्छुपनी थी की उसका बेटा इलाज के लिए कहा जा रहा है तो वो एरलाइन्स तो कभी नही इस्तेमाल करेगा.

और फिर चार्टर को. का नाम पता लगा कर वाहा पहुँचना तो उसके बाए हाथ का खेल था.जब शाम को दफ़्तर खाली हो गया तो वो 1 ड्यूप्लिकेट चाबी (जिनका 1 गुच्छा हुमेशा उसकी जेब मे रहता था),की मदद से अंदर घुस गया.ये चाबियाँ वो क्यू रखता था,आगे आपको ज़रूर पता चलेगा.

आइए अभी अंदर चल कर देखते हैं वो क्या कर रहा है.अंदर जब्बार कंप्यूटर के सामने बैठा था पर पासवर्ड ना मालूम होने के कारण वो फाइल्स खोल नही पा रहा था.झल्ला कर उसने मशीन बंद की & उठ कर गुस्से से एक फाइलिंग कॅबिनेट पर हाथ मारा.कॅबिनेट खुल गया & उसमे से कुच्छ कागज़ात गिर गये.उसने जल्दी से दरवाज़े की तरफ देखा-कहीं किसी ने कुच्छ सुना तो नही था.

वो पेपर्स उठा कर वापस रखने लगा की 1 फाइल पर उसकी नज़र गयी.उसने उसे खोला तो उसकी बाँछें खिल गयी.

पाइलट:माजिद सुलेमान

लास्ट चार्टर:मुंबई

करेंट स्टेटस:ऑन रेस्ट

लास्ट चार्टर क्लाइंट्स:राजकुल ग्रूप

नेक्स्ट चार्टर:न्यू देल्ही

ये राजकुल ग्रूप के चार्ट्स की फाइल थी,उसने पलट ते हुए वो डेट खोजनी शुरू की जब राजा अपने बेटे को लेकर गया होगा,पर उस दिन की एंट्री थी ही नही.कहीं राजा ने दूसरी चार्टर सर्विस तो नही उसे की….नही वो हुमेशा इसी को उसे करता है…तो फिर जान बुझ कर उस फ्लाइट की एंट्री नही की गयी है.उसने फिर से फाइल को स्टडी करना शुरू किया & पिच्छले 3 महीनो मे राजा की फ्लाइट्स उड़ाने वाले पाइलट्स का नाम,पता & फोन नंबर. नोट कर लिया.सबसे ज़्यादा बार इसी माजिद सुलेमान ने फ्लाइट्स पाइलट की थी,उस मिस्सिंग एंट्री के पहले वाली फ्लाइट & उस मिस्सिंग एंट्री के बाद वाली फ्लाइट जो की आखरी फ्लाइट भी थी,भी उसी ने पाइलट की थी….उसे अंधेरे मे रोशनी की बस एक किरण नज़र आ गयी & ये उस हैवान के लिए काफ़ी था.

अब अतीत से वापस वर्तमान मे आ जाते हैं & महल चलते हैं जहा 2 बेचैन दिल बस इस बात का इंतेज़ार कर रहे हैं की कब नौकर-चाकर बाहर जाएँ & वो फिर से एक-दूसरे मे खो जाएँ.रात के 10:30 बज गये हैं & नौकर बस दिन के काम निपटाने वाले हैं,मेनका अपने कमरे मे है & राजा साहब नीचे बेचैनी से चहलकदमी कर रहे हैं…

जैसे ही नौकर काम ख़तम कर के बाहर निकले,राजा साहब ने बटन दबा कर सारे दरवाज़े बंद कर दिए & सारी लाइट्स भी बुझा दी,सिर्फ़ 2 हल्की रोशनी वाले लॅंप्स जलने दिए.वो उपर जाने के लिए मुड़े तो देखा मेनका सीढ़ियों से उतर रही है.राजा साहब तो उसे देखते ही रह गये.वो साक्षात स्वर्ग की अप्सरा मेनका लग रही थी.

मेनका ने लाल रंग की स्लीव्ले नाइटी पहनी थी जिसमे स्ट्रॅप्स की जगह कंधों पे 2 पतले स्ट्रिंग्स थे.नाइटी का गला भी गहरा था जिसमे उसका क्लीवेज इस मद्धम रोशनी मे भी चमक रहा था,बाई टाँग पर 1 स्लिट था जो की उसके घुटने के उपर जाँघ तक चला गया था & जब वो सीढ़ियाँ उतर रही थी तो उसमे से उसकी गोरी टाँग & जाँघ का हिस्सा झलक रहा था.उसके लंबे बाल खुले थे & कमर पर लहरा रहा थे.

राजा साहब की नज़रों की गर्मी ने मेनका के दिल मे हलचल मचा दी & उसके चेहरे पर हया की लाली च्छा गयी पर उसे ये भी अच्छा लग रहा था कि उसके प्रेमी को उसका ये रूप बहुत भा रहा था.राजा साहब आगे बढ़े & मेनका को अपनी बाहों मे भर लिया & अपने तपते होठों से उसे चूमने लगे,मेनका ने भी अपनी बाहें उनके गले मे दल दी & किस का जवाब देने लगी.दोनो थोड़ी देर तक ऐसे ही एक दूसरे से चिपके अपने होठों & जीभ से खेलते रहे.

फिर राजा साहब ने चूमना छ्चोड़ उसे अपनी गोद मे उठा लिया,मेनका ने अपनी बाहें उनके गले मे डाल दी & फिर से उन्हे चूमने लगी.राजा साहब वैसे ही चूमते हुए उसे उठा कर सीढ़ियाँ चढ़ने लगे.उपर पहुँच कर वो अपने कमरे की तरफ मुड़े तो मेनका ने चूमना छ्चोड़ शरमाते हुए कहा,”मेरे कमरे मे चलिए ना.”

“अरे,कमरा क्या पूरा का पूरा महल आपका है.फिर क्या आपका क्या मेरा.आज अपने इस कमरे,जिसे नाचीज़ अपना कहता है,चल कर इसे भी स्वर्ग बना दीजिए.”& दोनो हंस पड़े.राजा साहब उसे अपने कमरे मे ले आए & अपने बिस्तर पर लिटा दिया & उसके उपर झुक कर उसे चूमने लगे.मेनका के हाथ उनके सर के बालों से खेलने लगे.राजा साहब ने उसके होठों को छ्चोड़ एक बार पूरे चेहरे को चूमा & फिर नीचे उसकी गर्दन पर पहुँच गये.मेनका ने अपने हाथ उनके कुर्ते के अंदर घुसा दिए & उनकी पीठ सहलाने लगी.

राजा साहब थोड़ा उपर हुए & अपना कुर्ता उतार फेंका & फिर से अपनी बहू की गर्दन पर झुक गये.अपने हाथों से उन्होने उसके कंधों से दोनो स्ट्रिंग्स नीचे सरका दी & उसके नंगे कंधों को चूमने लगे,मेनका की चूत गीली होने लगी थी & उसने अपनी जांघे बेचैनी से रगड़ना शुरू कर दिया.उसके नाख़ून अभी भी अपने ससुर की पीठ पर फिर रहे थे.राजा साहब मेनका के क्लीवेज पर आ गये & दीवानो की तरह चूमने लगे.उनसे बर्दाश्त करने मुश्किल हो रहा था,वो जल्द से जल्द अपनी बहू के नंगे जिस्म का दीदार करना चाहते थे.

अपने हाथ पीछे ले जाकर उन्होने उसकी नाइटी का ज़िप खोल दिया,फिर उठे & 1 झटके मे उसे उसके शरीर से अलग कर दिया.नीचे मेनका ने कुच्छ नही पहना था.राजा साहब उसके उपर झुक गये तो मेनका ने शर्म से आँखें बंद कर ली & सर 1 तरफ घुमा लिया.

“मेनका..”,राजा साहब ने अपने हाथ से उसकी ठुड्डी पकड़ चेहरे को सीधा किया.मेनका ने अधखुली आँखों से उन्हे देखा.

“अपने होठों से हुमारा नाम लो ना.”,सुनकर मेनका और शर्मा गयी & फिर से मुस्कुराते हुए अपने चेहरे को अपने हाथों से च्छूपा लिया.

“प्लीज़,मेनका..बस 1 बार..हुमारा नाम लो…प्लीज़.”

मेनका ने वैसे ही मुँह च्छुपाए हुए सर हिला कर मना कर दिया.

“प्लीज़,तुम्हे हमारी कसम.”,उन्होने उसके हाथ उसके चेहरे से हटा दिए.

मेनका ने बहुत धीरे से कहा,”..यश..”

“1 बार और,मेरी जान,प्लीज़..”राजा साहब ने बेताबी से उसके गाल चूम लिए.

इस बार मेनका ने अपनी आँखें खोल अपने प्रेमी की आँखों मे देखा,”आइ लव यू,…यश.”

इस बात ने तो राजा साहब को खुशी से पागल कर दिया & वो उसके जिस्म पर टूट पड़े.उसके गुलाबी निपल्स अब उनकी जीभ & होठों की रहम पर थे.”एयेए…ह..”,मेनका का बदन कमान की तरह मूड गया & छाती बिस्तर से उपर उठ गयी.उसने अपने ससुर के सर को अपने सीने पर कस के भींच लिया.राजा साहब ने एक चूची मुँह मे ली & दूसरी को हाथ मे & लगे उन्हे चूसने & दबाने.मेनका का जिस्म पूरी तरह से जोश मे डूब गया था & अब तो वो झड़ने ही वाली थी.राजा साहब ने चूचियो की पोज़िशन बदल दी,पहले बाई मुँह मे थी,अब दाई आ गयी,पर उनका चूसा जाना & दबाया जाना वैसे ही जारी रहा.मेनका ने हाथ नीचे ले जाकर पाजामे के उपर से ही अपने ससुर के खड़े लंड को पकड़ लिया & मसालने लगी.थोड़ी ही देर बाद मेनका का जिस्म आकड़ा & उसने अपनी जीभ दांतो तले दबा ली-उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया था.

राजा साहब पलंग पर खड़े हो गये & अपना पाजामा भी उतार दिया & अपनी बहू के सामने पूरे नंगे हो गये.वो झुक कर घुटनो पर खड़े हुए-उनका इरादा फिर से अपनी बहू के उपर चढ़ने का था,पर तभी मेनका की नज़र अपने ससुर के लंड पर पड़ी जिसने उसे पागल कर दिया था.

वो झट से उठी और अपने ससुर के लंड को अपने मुँह मे ले लिया & चूसने लगी.अब राजा साहब बिस्तर पर अपने घुटनो पे खड़े थे & मेनका बैठ कर उनके लंड को चूस रही थी,साथ-2 उसके हाथ लंड & नीचे लटक रहे अंदो को सहला & हिला रहे थे.राजा साहब ने अपने हाथ उसके सर पर रख दिए & खुद भी हौले-2 कमर हिला कर उसके मुँह को चोदने लगे.मेनका ने अपने हाथ उनके लंड पर से हटा लिए & पिछे ले जाकर उनकी गांद को पकड़ लिया.अपने नाखूनओ से वो हल्के-2 उनकी गांद सहलाने लगी.राजा साहब को बहुत मज़ा आ रहा था.उनकी पकड़ अपनी बहू के सर पर और मज़बूत हो गयी & वो थोड़ी और तेज़ी के साथ उसके मुँह को चोदने लगे.मेनका को तो ये लंड वैसे ही बहुत प्यारा लगता था.उसका तो दिल करता था की बस हर वक़्त वो इस से खेलती रहे.उसने भी राजा साहब की गांद & मज़बूती से पकड़ अपना मुँह उनकी जाँघो के बीच थोड़ा और घुसा दिया.राजा साहब झड़ने ही वाले थे पर उनका इरादा आज मेनका के मुँह मे अपना पानी छ्चोड़ने का नही था.

उन्होने अपना लंड मेनका के मुँह से बाहर खींच लिया तो मेनका ने सवालिया नज़रो से उन्हे देखा.राजा साहब ने उसकी बाँहे पकड़ उसे उपर उठा लिया,अब वो भी अपने ससुर जैसे उनके सामने घुटनो पे खड़े थी.राजा साहब ने अपने हाथ उसकी कमर पे लपेट दिए & उसे चूमने लगे.जवाब मे मेनका ने भी अपने ससुर की कमर के गिर्द अपने हाथ कस दिए.राजा साहब का प्रेकुं से गीला लंड दोनो के जिस्मो के बीच उसके पेट पे दबा हुआ था.चूमते हुए दोनो के हाथ एक-दूसरे की कमर से फिसल कर नीचे एक-दूसरे की गांडो से खेलने लगे.जहा राजा साहब अपनी बहू की गांद के फांको को जाम के मसल रहे थे वही मेनका उनकी गांद पे अपने नाखूनओ के निशान छ्चोड़ रही थी.

राजा साहब वैसे ही घुटनो पे खड़ी मेनका के होठों को छ्चोड़ नीचे आ उसकी चुचियों को चूसने लगे.थोड़ी देर चूसने के बाद वो और नीचे आए, उसके पेट को चूमा & फिर उस से भी नीचे उसकी चूत पे 1 किस ठोक दी.मेनका नीचे हो कर बैठने ही वाली थी की राजा साहब झट से उसके घुटनो के बीच लेट गये & उसकी कमर पकड़ उसे अपने मुँह पर बिठा लिया.

अब राजा साहब चित लेते थे & मेनका उनके मुँह पर बैठी थी.राजा साहब ने आँखे उठा कर अपनी बहू को देखा,उसके चेहरे पर हैरत & जोश की मिलीजुली मुस्कान थी.हाथ आयेज ला उन्होने उसकी छूट की फांको को फैलाया & अपनी जीभ उसके अंदर डाल दी & चाटने लगे.”..ऊओ…ऊओह…”,मेनका की आँखे बंद हो गयी,उसने अपने ससुर के सर को सहारे के लिए पकड़ लिया & अपनी कमर हिलाने लगी.राजा साहब उसकी चूत चाट ते हुए अपने हाथ उसकी कमर से हटा उपर ले जा उसकी चुचियाँ दबाने लगे.मेनका के लिए ये बहुत ज़्यादा था & वो दुबारा झाड़ गयी पर राजा साहब ने उसकी चूत चाटना नही छ्चोड़ा.वो उसी तरह अपने हाथों से उसकी चूचिया दबाते रहे,उसके निपल्स मसालते रहे.उन्होने ुआपनी बहू की चूत मे से जीभ तब तक नही निकाली जब तक की वो दो बार & नही झाड़ गयी.

आखरी बार झाड़ते ही मेनका निढाल हो आगे गिर गयी तो राजा साहब उसकी जांघों मे से सर निकाल उठ बैठे.मेनका पेट के बल लेट गहरी साँसे ले रही थी.राजा साहब अपने हाथों से उसकी पीठ & गांद सहलाने लगे.थोड़ी देर सहलाने के बाद उन्होने अपने होठ उसकी गांद पर रख दिए & वहाँ पर जम कर चूमा,चटा & चूसा.चूस-2 कर उसकी गांद की फांको & जांघों के पिच्छले हिस्से पर उन्होने लव बाइट्स छ्चोड़ दिए.

फिर उन्होने ने उसे कमर से पलट कर सीधा किया & उसकी जांघों पे चूमने & चूसने लगे.मेनका के बदन पर कल की लव बाइट्स के निशान अभी भी ताज़ा थे,राजा साहब ने उन मे कुच्छ और निशान जोड़ दिए.उसकी जांघों से उनके होठ उसकी चूत पर आए & जितना भी पानी अभी उसकी चूत ने छ्चोड़ा था,उसे पी गये.राजा साहब का अगला निशाना मेनका की नाभि थी.उनकी जीभ उसकी नही की गहराई नापने कागी तो मेनका फिर से गरम होने लगी.उसका दिल कर रहा था कि बस अब उसके ससुर उसकी चूत मे अपना लंड डाल दे.उसने हाथ बढ़ा कर अपने ससुर के बाल पकड़ कर खींचे,”इधर आइए ना…”.

राजा साहब उपर आकर उस पर लेट गये & उसकी चूचिया चूसने लगे.थोड़ी देर बाद उठे कर मेनका की जांघों पे हाथ रखा तो उसने खुद ही उन्हे फैला दिया.राजा साहब ने अपना लंड 1 झटके मे ही उसकी चूत मे दाखिल कर दिया.”ऊओ…ऊव्ववव!..”मेनका का सर पीछे मूड गया,छाती हवा मे उठ गयी & कम्र खुद बा खुद झटके खाने लगी.राजा साहब ने भी बहुत देर तक अपने उपर काबू रखा था.अब उन्होने भी जम कर उसकी चुदाई शुरू कर दी.

“आ…न्न्ह….आ…आन्न्न्नह..!कमरे मे मेनका की आनहें गूंजने लगी तो राजा साहब के धक्कों की रफ़्तार और भी बढ़ गयी.मेनका ने भी उनकी ताल से ताल मिलाते हुए अपनी कमर हिलाना भी तेज़ कर दिया.उसके हाथ जोकि अभी तक अपने ससुर की पीठ पर घूम रहे त,अब उनकी गांद पे जा लगे & उसने उसमे अपने नाख़ून गाड़ा दिए.उसकी इस हरकत से राजा साहब और जोश मे आ गये,उन्होने अपने होठ उसकी छाती पे और कस दिए & ज़ोर से चूसने लगे,फिर अपना लंड पूरा बाहर निकाल कर ज़ोर के धक्कों के साथ फिर अंदर पेलने लगे.

हर धक्के के साथ मेनका उनके लंड के टोपे को अपनी कोख पे लगता महसूस कर रही थी & उसे इतना मज़ा आ रहा था की पुछो मत.तभी राजा साहब ने वैसे ही उसकी चूची चूस्ते हुए फिर से 1 ज़ोर का धक्का मारा तो उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया,वो उचक कर अपने ससुर से चिपक गयी उनका जिस्म भी झटके खाने लगा & उसने उनके लंड से च्छूटता पानी अपनी चूत मे भरता महसूस किया.

थोड़ी देर दोनो वैसे ही पड़े रहे,फिर राजा साहब उसके उपर से उतर कर उसकी बगल मे लेट गये.मेनका भी करवट ले उनकी बाहों मे आ गयी & उनके सीने पर सर रख दिया.राजा साहब उसके बाल सहला रहे थे & बीच-2 मे उसके सर पर चूम रहे थे.मेनका उनके सीने के बालों मे उंगलिया फिरा रही थी.

थोड़ी देर बाद मनेका उठ कर बैठ गयी,उसका ध्यान अपनी चूची पर गया जहाँ राजा साहब ने थोड़ी देर पहले जम कर चूसा था.अब वाहा पर 1 बड़ा सा निशान पड़ गया था.

“क्या देख रही हो?”,राजा साहब ने लेते-2 ही पूचछा.

“आपकी कारस्तानी.”,मेनका बनावटी गुस्से से बोली.

“अब ये ऐसी खूबसूरत होंगी तो कारस्तानी तो ऐसी ही होगी.”,राजा साहब उठ कर उस जगह पर हाथ फिराते हुए बोले.

“आप भी ना!”,मेनका ने उनका हाथ 1 तरफ कर दिया.

“ये क्या आप-आप लगा रखा है.आज से तुम हमे सिर्फ़ तुम कह कर पुकरोगी.”राजा साहब ने उसे फिर अपनी बाहों मे भर लिया.

“आज क्या हो गया है आपको,ये..-..”

“-..फिर आप!तुम कहो.”

मेनका के गाल लाल हो गये,”प्लीज़ क्यू सता रहे हैं?”

“क्यू सता रहे हो?तुम्हे हमारी कसम चलो ऐसे बोल कर दिखाओ.”

“ये बात-2 पे अपनी कसम क्यू देते है?”

“फिर आप.”

“अच्छा बाबा!तुम…क्या तुम बात-2 पर कसम देने लगते हो?”

“हो गया.अब नही देंगे.”

दोनो हंस पड़े.,”ये कारस्तानी पसंद आई?”,उन्होने उस निशान को सहलाते हुए पूचछा.जवाब ने मेनका ने मुस्कुराते हुए हां मे सर हिला दिया.

“तब हम आपको 1 और कारस्तानी दिखाते हैं.”,राजा साहब उठे & मेनका के कुच्छ बोलने से पहले अपने वॉक-इन क्लॉज़ेट खोल उसके अंदर चले गये.थोड़ी देर बाद बाहर आए तो उनके हाथ मे 2 डब्बे थे.

वो मेनका के पास आकर बैठ गये.1 डब्बा उसको दिया,”खोलो.”

मेनका ने डब्बा खोला तो उसकी आँखें चौंधिया गयी,अंदर हीरो का 1 बहुत बेशक़ीमती जड़औ हार जगमगा रहा था.

“ये मेनका सिंग के लिए है जिसके इनवॅल्युवबल कॉंट्रिब्यूशन के बदौलत राजकुल ग्रूप डील कर पाया.”

“पर इतने कीमती तोहफे की क्या ज़रूरत थी?”

“ये तुमसे कीनती नही है.”,राजा साहब ने हार उठा कर उसके गले मे पहना दिया.,”अब ये दूसरा डिब्बा खोलो.”

उसको खोलते ही अंदर से एक गोल्ड चैन निकली जिसमे 1 हीरे का पेंडेंट लटका था.पेंडेंट मे हीरे से ‘एम’ बना था & ‘एम’ के बीच के ‘वी’ से 1 सीधी लाइन नीचे निकल कर ‘Y’ बना रही थी.जब तक कोई बहुत गौर से नही देखता तो उसे कभी नही पता चलता कि पेंडेंट मे दोनो लेटर्स एम & Y हैं.दूर से तो बस लगता था जैसे की एम बना है.

“और ये हमारी जान के लिए उसे हमारे प्यार का पहला तोहफा.”,& वो चैन भी उसके गले मे डाल दी.

मेनका की आँखो मे खुशी के आँसू छल्छला आए & वो आगे बढ़ कर अपने ससुर के गले लग गयी & सुबकने लगी.

“अरे क्या हुआ?”

“घबराईए मत..-आइ मीन घबराव मत,ये खुशी के आँसू हैं.”,राजा साहब हंसते हुए उसकी पीठ पर प्यार से हाथ फेरने लगे.

“हमने भी तुम्हारे लिए कुच्छ लिया है.हमारे कमरे मे रखा है.बस अभी लेकर आते हैं.”

“बाद मे ले आईएगा.पहले आपको कुच्छ और भी दिखना है-कुच्छ बहुत ज़रूरी बातें बतानी हैं.आइए.”,राजा साहब खड़े हो गये & अपना हाथ उसकी ओर बढ़ा दिया.मेनका उनका हाथ पकड़ खड़ी हो गयी & राजा साहब अपने कमरे के 1 कोने मे बने उस दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगे जिसके पीछे उनकी स्टडी थी.

आपको राजा साहब की स्टडी के बारे मे कुच्छ बता दू.यू तो महल के कर्मचारी सॉफ-सफाई & बाकी कामो के लिए कहीं भी आते जाते हैं पर राजपारियर के लोगों के कमरो मे बस उनके खास नौकर-नौकरानी ही आ-जा सकते थे.

पर ये स्टडी जोकि राजा साहब के बेडरूम के अंदर ही बनी हुई थी,उसमे उनके अलावा किसी को भी जाने की इजाज़त नही थी यहा तक की उनके अपने बेटे भी उन्हे वाहा डिस्टर्ब नही करते थे.कोई काम पड़ता & राजा साहब स्टडी के अंदर हो तो बस इंटरकम पे उनको खबर की जाती.

जब राजा साहब बाहर होते तो स्टडी मे ताला लगा होता & एकमत्रा चाभी राजा साहब के पास होती.मेनका को भी इन नियमो के बारे मे पता था & इसीलिए उसे आज बड़ी हैरत हो रही थी कि राजा साहब उसे वाहा ले जा रहे हैं.

क्रमशः…………..

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