बुलबुल हैरानी से मुझे देख रही थी और मैंने अब अपने दोनों हाथ उसकी चूचियों पर रखे और उसके होंठ चूसने लगा। अब मैं बुलबुल को चोद्ने की तैयारी करने लगा। मैंने देखा कि साधना बाथरूम से वापस आ गयी थी और हमारी टांगों की तरफ़ आकर बैठ गयी थी। अब वह मेरे बॉल्ज़ का मसाज़ करने लगी। मैं अब बहुत मस्त हो कर उसे चोदने की तैयारी करने लगा।
राज रुका और शशी को अपना लौड़ा चूसते देखकर उसकी चूचि दबाकर बोला: मज़ा आ रहा है चूसने में?
शशी: चूसने में तो आ ही रहा है पर आपकी बात में ज़्यादा मज़ा आ रहा है। आगे क्या हुआ ?
राज आगे बोलता चला गया…
अब बुलबुल की बुर में मैंने दो उँगलियाँ डालकर उसकी बुर और clit रगड़ने लगा और एक चूचि मुँह में और एक हाथ में लेकर उसके निप्पल्स को दबाने लगा। साधना मेरे बॉल्ज़ चाटने लगी। फिर मैं नीचे आया और बुलबुल की मस्त पूरी तरह से पनियाई हुई बुर को देखकर मस्ती से उसे चूम उठा। वह बहुत गरम होकर अपनी बुर को मेरे मुँह में अपने कमर उछालकर दबाने लगी।
अब साधना बोली: क्यों तड़पा रहे हो बच्ची को ,
अब डाल भी दो ना। ये कहते हुए वह मेरे अकड़ा हुआ लौड़ा मसल दी। मैंने अब बुलबुल की दोनों टाँगें पूरी तरह से फैलायी और उसके बीच में आकर अपना लौड़ा उसकी बुर के ऊपर सेट करके अपने लौड़े के सुपाडे से उसकी बुर के पूरे छेद और clit को लम्बाई में रगड़ने लगा। वह उइइइइइइइइ माँआऽऽ कर उठी।
मैं: बुलबुल बेटा, बोलो चोदूँ? बोलो ना।
बुलबुल: आऽऽहहह हाँ अंकल हाँ।
मैं : हाँ क्या? बोलो चोदूँ ?
बुलबुल: हाऽऽयय्यय क्यों तड़पा रहे हैं अंकल । चोदिए ना प्लीज़ आऽऽऽऽऽऽऽहहह
मैं: ठीक है तो डाल दूँ ना अब अंदर अपना लौड़ा ?
बुलबुल: हाय्य्य्य्य्य डालिए नाआऽऽऽऽ।
मैं: क्या डालूँ?
बुलबुल: हाऽऽऽऽऽय्यय आऽऽऽऽऽऽपका गरम लौड़ाआऽऽऽऽ आऽऽह और क्या।
साधना: क्यों तड़पा रहे हो चोदो ना अब उसको। देखो कैसी मरी जा रही है ये चुदवाने के लिए ।
मैंने मुस्कुराते हुए अपना लौड़ा उसकी गीली बुर में पेलना शुरू किया और टाइट जवान बुर मुँह खोलकर मेरा लौड़ा गपकते चली गयी। आऽऽहहह क्या ज़बरदस्त अनुभव था । उसकी बुर पूरे तरह से मेरे लौड़े को अपनी ग्रिप में जकड़ ली और मुझे बरसों के बाद बहुत मज़ा आया। अब मैंने चोदना शुरू किया। पहले धीरे धीरे से उसके होंठ और चूचि चूसते हुए और जल्दी ही ज़ोर से पिलाई करने लगा। वह पागलों की तरह चिल्ला कर आऽऽऽहहह हाय्य्यय और उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ कहकर अपनी गाँड़ उठाकर चुदवा रही थी।साधना उसके सिर के पास बैठ कर उसकी छाती सहला रही थी।
अचानक मुझे लगा की वह मुझसे बुरी तरह चिपक रही है और चिल्लाई : उओइइइइओओओओ हाऽऽऽऽऽऽय्य। मुझे लगा कि वह झड़ रही है। पर मैं रुका नहीं और चुदाई चालू रखा। अब मैं भी झड़ने वाला था पर मैं रुका और उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूतरों को दबाने लगा। और बोला: बुलबुल मज़ा आ रहा है।
बुलबुल: आऽऽऽह बहुत मजाऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहा है। मैं तो एक बार झड़ भी गयी। अब दूसरी बार झड़ूँगी । आऽऽह आप चोदते रहिए। हाय्ययय क्या मस्त चोदते हैं आऽऽप। आऽऽऽहह।
मैं अब ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। मैंने उसकी टाँगें उठाकर उसकी छाती पर रख दी और पूरी ताक़त से धक्के मारने लगा। पूरा पलंग हिल रहा था और फ़च फ़च के साथ ही हाय्य्य्य्यय मरीइइइइइइइइ की आवाज़ें गूँज रही थीं।
साधना: थोड़ा धीरे से चोदो ना । क्या लड़की की फाड़ ही डालोगे।
बुलबुल: आऽऽऽऽऽह माँ चोदने दो ऐसे है , हाय्य्य्य्य क्या मजाऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाऽऽऽऽऽ है माँआऽऽऽऽऽऽ। सच ऐसे मैं कभी भी नहीं चुदीं। हूँ। उइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽ । ये कहकर वो अपनी गाँड़ उठा के मेरे धक्कों का जवाब देने लगी। अब मैंने भी उसके दोनों चूतरों को एक एक हाथ में लिया और ज़बरदस्त धक्के मारने लगा। साधना अब उसके निप्पल्स दबाने लगी
मेरी एक ऊँगली उसकी गाँड़ के छेद को सहलाती हुई कब उसके छेद में घुस गयी मुझे भी पता नहीं चला। वह अब आऽऽऽहहह कर उठी। शायद उसका यह पहला अनुभव था गाँड़ में ऊँगली करवाने का ।
चुदाई अपने पूरे शबाब पर थी और साधना की साँसे फिर से फूलने लगी थी हमारी चुदाई देखकर। वह अब अपनी बुर में दो ऊँगली डालके मज़े ले रही थी। बुलबुल की मस्ती से भरी चीख़ें जैसे रुकने का नाम ही नहीं के रही थी। फिर अचानक वह चिल्लाई: आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह मैं गइइइइइओओइओओओ । अब मैं भी झड़ने लगा। मैंने उसकी बुर के अंदर उसकी बच्चेदानी के मुँह पर ही अपना वीर्य छोड़ना शुरू किया। पता नहीं कितनी देर तक हम दोनों एक दूसरे से चिपके हुए अपने अपने ऑर्गैज़म का आनंद लेते रहे। साधना बोली: अब उठो भी क्या ऐसे ही चिपके पड़े रहोगे?
मैं धीरे से उसके ऊपर से उठा और उसके बग़ल में लेट गया और बोला: आऽऽहहह आज बहुत दिन बाद असली चुदाई का मज़ा आया। साधना , बुलबुल तो बनी ही है चुदवाने के लिए। तुम इसे कहाँ छुपा कर रखी थी।
बुलबुल मेरे नरम लौड़े से खेलते हुए बोली: मुझे क्यों ऐतराज़ होगा। उनका बेटा पहले है , मेरा पति तो बाद में बना है।
साधना उलझन के साथ बोली: बुलबुल क्या तुम भी यही चाहती हो?
बुलबुल: माँ आज की चुदाई के बाद तो मुझे ऐसी चुदाई की ज़रूरत पड़ेगी ही। अब वो आपका बेटा करे तो ठीक नहीं तो अंकल तो हैं ही मेरे लिए। क्यों अंकल आप मुझे ऐसे ही चोदेंगे ना हमेशा? वो मुझसे चिपकते हुए और मेरी छाती को चूमते हुए बोली। उसका हाथ अभी भी मेरे लौड़े को सहला रहा था।
साधना को सोच में देखकर मैं बोला: साधना, ज़्यादा सोचो मत । तुम दोनों उसको अच्छी तरह से सिखा दो और फिर मज़े लो घर के घर में।
साधना: हाँ लगता है आप ठीक ही कह रहे हो। अब बच्चा होने के बाद बुलबुल आपसे हमेशा तो चुदवा नहीं सकती ना।
बुलबुल: अंकल आपका फिर से खड़ा हो रहा है।
मैं: चलो चूसो इसको। साधना तुम भी आओ और दोनों मिलके चूसो। वह दोनों मिलकर मेरे लौड़े और बॉल्ज़ को चूसने लगीं और मैं आनंद से भर उठा। आऽऽह क्या दृश्य था सास और बहू दोनों मेरे को अद्भुत मज़ा दे रहीं थीं। फिर मैंने साधना को घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी ज़बरदस्त चुदाई की , उसकी लटकी हुई चूचियाँ अब बुलबुल दबा रही थी। साधना उइइइइइइइइ आऽऽऽऽऽहहह उन्ह्ह्ह्ह्ह करके जल्दी ही झड़ गयी। अब मैंने बुलबुल को घोड़ी बनाया और उसकी भूरि गाँड़ के छेद को देखकर वहाँ जीभ डालके उसे चाटने लगा।वह आऽऽऽह कर उठी। फिर मैंने उसकी बुर में लौड़ा पेला और उसकी गाँड़ में दो ऊँगली डालके उसे ज़बरदस्त तरीक़े से चोदने लगा। क़रीब २० मिनट की घिसाई के बाद हम दोनों झड़ गए।
बाद में साधना अपने कपड़े पहनते हुए बोली: मुझे तो लागत है कि बुलबुल को आज ही गर्भ ठहर गया होगा। आप ऐसी चुदाई किए हो आज कि मैं भी हिल गयी।
बुलबुल मुझसे लिपट कर बोली: थैंक यू अंकल । इतना मज़ा दिया और अगर माँ भी बन गयी तो सोने पे सुहागा हो जाएगा।
मैं: अगर का क्या मतलब बेटा, माँ तो बनोगी ही। देखना भगवान ने चाहा तो इस महीने तुम्हारा पिरीयड आएगा ही नहीं।
साधना मेरे लौड़े को पैंट के ऊपर से दबाके बोली: सब इसका कमाल है । आह क्या मस्ताना हथियार है आपका।
हम तीनों हँसने लगे। फिर अगले दिन मिलने का कहकर वो चली गयीं।
शशी ने लौंडे को चूसते हुए पूछा : फिर क्या हुआ ?
मैं: बस इसी तरह चूदाई चलती रही और उसका अगले महीने पिरीयड नहीं आया। फिर दो तीन महीने बाद वह चुदवाना बंद कर दी। बाद में साधना बताई कि वह भी अपने बेटे से ही चुदावाने लगी थी, और अब बुलबुल और वह दोनों उससे ही अपनी बुर की प्यास बुझवाते थे। समय पर उसके एक बेटा हुआ और वो मुझे उसे दिखाने मेरी दुकान पर आयीं। बहुत सुंदर और प्यारा लड़का था । बस इसके बाद कभी कभी वो दुकान पर आतीं हैं तो मुलाक़ात हो जाती है ,वरना वह अपने घर ख़ुश और मैं अपने घर ख़ुश ।
यही कहानी है बुलबुल के माँ बनने की, अब तुम्हारी बारी है , तुम भी इसी महीने गर्भ से हो जाओगी, देखना?
फिर मैंने उसका सिर अपने लौंडे से हटाया और उसको लिटाकर उसकी ज़बरदस्त चूदाई की। अपना वीर्य मैंने उसकी बच्चेदानी के मुँह पर ही छोड़ा ताकि वो भी जल्दी से माँ बन जाए।
शशी को चोदने के बाद राज जैसे बाथरूम से बाहर आया उसका फ़ोन बजा। रश्मि थी वो बोली: नमस्ते भाई साब , कैसे हैं?
राज: नमस्ते भाभी जी बढ़िया हूँ। आपको मिस कर रहा हूँ। आप और डॉली बिटिया की बड़ी याद आ रही थी।
रश्मि: मैंने कूरीयर से डॉली की कुंडली भेज दी है। आप पंडित जी से मिलवा लीजिएगा।
राज: अरे अब उन दोनों के दिल मिल गए हैं कुंडली भी मिल ही जाएगी। और शादी के बाद वैसे भी बाक़ी सब का भी मिलन हो ही जाएगा। यह कहते हुए वह कमिनी हँसी हँसा।
रश्मि: भाई सांब आप भी क्या क्या बोलते हैं । सगाई की कोई तारीख़ का सोचा आपने?
राज: अरे आप कल आ जाइए ना फिर हम दोनों पंडित से कुंडली भी मिलवा लेंगे और सगाई की तारीख़ भी तय कर लेंगे। और फिर हम अपनी भी दोस्ती और पक्की कर लेंगे। वह फिर से फूहड़ सी हँसी हँसा। रश्मि को उसके इरादों में गड़बड़ी दिखाई दी पर वह क्या कर सकती थी।
राज भी बाई करके फ़ोन काटा और अपने लौड़े को सहलाते हुए सोचा कि साली क्या माल है, मज़े तो लूँगा ही।
शशी जो उसे ध्यान से देख रही थी बोली: आप समधन को ठोकने का प्लान बना रहे हैं। है ना?
राज: साली मस्त माल है और अपने जेठ से ठुकवा रही है। मैं भी लाइन लगा लिया हूँ। यह कहते हुए वह हँसने लगा।
रात को जय से बात हुई तो वह बोला: आज मेरी डॉली से बात हुई । वह बहुत संस्कारी लड़की है।
राज : हाँ बहुत प्यारी लड़की है। उसकी माँ एक दो दिन में आएगी और हम पंडित से मिलेंगे तुम्हारी सगाई की तारीख़ के लिए।
जय: ठीक है पापा अब मैं सोता हूँ।
राज हँसते हुए: क्या डॉली से रात भर बात करनी है?
जय: नहीं पापा वो ऐसे ही, हाँ उसको गुड नाइट तो करूँगा ही। फिर वह हँसते हुए अपने कमरे में चला गया। उसके जाने के बाद वह भी सो गया । अगले दिन रश्मि का फ़ोन आया : नमस्ते भाई सांब ।
राज: नमस्ते जी। क्या प्लान बनाया है आपने?
रश्मि: जी कल आऊँगी और पंडित जी से सगाई की बात भी कर लेंगे।
राज: कौन कौन आएँगे?
रश्मि: मैं और जेठ जी आएँगे।
राज : चलिए बढ़िया है आइए और कल ही प्लान फ़ाइनल करते हैं। बस एक रिक्वेस्ट है?
रश्मि: कहिए ना , आप आदेश दीजिए। रिक्वेस्ट क्यों कर रहे हैं?
राज: आप गुलाबी साड़ी पहन कर आइएगा। आप पर बहुत जँचेगी।
रश्मि: ओह,आप भी ना, ये कैसी फ़रमाइश है भला? देखती हूँ , मेरे पास है कि नहीं। बाई।
राज भी अपना लौड़ा दबाते हुए सोचा कि क्या मस्त लगेगी वह गुलाबी साड़ी में।
राज सोचने लगा कि ये तो जेठ के साथ आ रही है । उसकी बात कैसे बनेगी? वह बहुत सावधानी से धीरेधीरे आगे बढ़ना चाहता था। उसने सोचा चलो देखा जाएगा।
राज ने जय को बताया कि कल उसकी होने वाली सास आ रही है। जय मुस्कुरा कर दुकान चला गया और शशी राज की खिंचाई करने लगी, रश्मि को लेकर। राज ने उस दिन शशी की ज़बरदस्त चुदाई की उसको रश्मि का सोचकर।
शशी की ज़बरदस्त चुदाई
अगले दिन जय के जाने के बाद अमित और रश्मि आए। राज ने रश्मि को देखा और देखता ही रह गया । वह गुलाबी साड़ी में मस्त क़ातिल माल लग रही थी। अमित भी जींस और शर्ट में काफ़ी स्मार्ट लग रहा था। उसकी और राज की उम्र में कोई ज़्यादा अंतर नहीं था। हाँ रश्मि उनसे छोटी थी करीब ४५ की तो वो भी थी।
साड़ी उसने नाभि दर्शना ही पहनी थी और ब्लाउस भी छोटा सा था और पीछे से पीठ भी करीब पूरी नंगी ही थी। ब्लाउस में से उसके कसे स्तन देखकर राज के लौड़े ने अंगड़ाई लेना शुरू कर दिया था। उससे तेज़ सेण्ट की ख़ुशबू भी आ रही थी।
राज: आप लोग कैसे आए?
अमित: बस से आए। अब सब बैठ गए।
राज ने शशी को आवाज़ दी और वह पानी लाई।
राज ने देखा कि अमित शशी के ब्लाउस के अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था। वह समझ गया कि ये भी उसके जैसे ही कमीना है। वह मन ही मन मुस्कुराया।
रश्मि: भाई सांब , पंडित जी से बात हुई क्या?
राज: हाँ हुई है ना। अभी चाय पीकर वहाँ जाएँगे।
फिर सब चाय पीने लगे। इधर उधर की बातें भी होने लगी।
अमित: बस से आए। अब सब बैठ गए।
राज ने शशी को आवाज़ दी और वह पानी लाई।
राज ने देखा कि अमित शशी के ब्लाउस के अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था। वह समझ गया कि ये भी उसके जैसे ही कमीना है। वह मन ही मन मुस्कुराया।
रश्मि: भाई सांब , पंडित जी से बात हुई क्या?
राज: हाँ हुई है ना। अभी चाय पीकर वहाँ जाएँगे।
फिर सब चाय पीने लगे। इधर उधर की बातें भी होने लगी।
पंडित को राज ने एक दिन पहले ही सेट किया था। देखना था कि पंडित कितना मेनेज कर पाता है रश्मि को।
कार पंडित के घर के पास रुकी और रश्मि अपना पल्लू ठीक करते हुए कार से उतरी और उसके बड़े दूध राज को मस्त कर गए। पंडित की उम्र क़रीब ६५ साल की थी। उसके घर में बैठने के बाद राज ने कुंडलियाँ देखीं और थोड़ी देर में ही गुँण मिलने की घोषणा कर दिया। अब अमित और राज एक दूसरे को बधाई देने लगे। रश्मि ने भी बधाई दी।
अब राज रश्मि को बोला: भाभी जी , ये बहुत पहुँचे हुए ज्ञानी पंडित जी हैं। आप अपना हाथ इसे दिलाइए। बहुत सटीक भविष्य वाणी करते हैं।
रश्मि बहुत उत्सुकता से अपना हाथ उनको दिखाई।
पंडित ने उसका हाथ देखा और बोला: मैं आपको अकेले में बताऊँगा । आप दोनों थोड़ा बाहर जाइए।
राज और अमित बाहर आ गए।
पंडित उसके मुलायम हाथ को सहला कर बोला: देखो बेटी, मैंने तुम्हारे हाथ को रेखाओं में कुछ अजीब चीज़ देखी है, इसीलिए तुमको बता रहा हूँ।
रश्मि: क्या हुआ पंडितजी ? कुछ गड़बड़ है क्या?
पंडित: अरे नहीं बेटी, अब तुम बिना पति के अपनी बिटिया की शादी करने जा रही हो ना? तो तुम बहुत ख़ुश क़िस्मत हो कि तुमने बहुत अच्छा परिवार मिला है रिश्ते के लिए।
रश्मि ख़ुश होकर: जी पंडित जी , आप सही कह रहे हैं।
पंडित: एक बात और ये रेखा बता रही है कि तुम्हें अब एक नया प्रेमी मिलने वाला है जो तुमको बहुत प्यार करेगा।
रश्मि चौंक कर बोली: छि पंडित जी , ये क्या कह रहे हैं? भला इस उम्र में मुझे ये सब करना शोभा देता है क्या? ये नहीं हो सकता।
पंडित: बेटी, मैं तो वही बताऊँगा जो कि रेखाएँ दर्शा रही है। तुम्हारे जीवन में अब कोई पुरुष आने वाला है जो कि तुम्हें बहुत प्यार करेगा ।
रश्मि: आपने तो मुझे उलझन में डाल दिया। अच्छा सगाई की तारीख़ कब की निकली?
पंडित: अगले महीने की दस को।
रश्मि ने पंडित के पैर छुए और उसे दक्षिणा दी। पंडित मन ही मन मुस्कुराया और सोचा किउसने राज का काम शायद सही तरीक़े से कर दिया है।
रश्मि बाहर आइ और बोली: चलिए सगाई की तारीख़ अगले महीने की १० को निकली है।
अमित: पंडित ने तुमको अकेले में क्या बताया?
राज ने ध्यान से देखा कि उसके गाल शर्म से लाल हो गए थे। वह बोली: बस ऐसे ही कुछ डॉली और जय के बारे में बता रहे थे। कुछ ख़ास बात नहीं है। चलिए अब ।
राज ने देखा किपंडित ने अपना काम ठीक से कर दिया है। अब उसका काम है दाना डालने का। वो कमिनी मुस्कान लाकर सोचा कि अब इसे पटाना है।
मुझे नाम से ही बुलाइए
राज : चलो कहीं कॉफ़ी हाउस में कॉफ़ी पीते हैं।
फिर वो सब एक कॉफ़ी हाउस पहुँचे।
बहुत सही जा रहे हो डिअर…
अपडेट बड़े नहीं ले रहा तो कोई बात नहीं… आप छोटे छोटे अपडेट डालते रहो…’मज़ा आ रहा हँ…
इस वक़्त जब कोई भी लेखक बहे अपडेट नहीं डाल प् रहा होगा तो आपके छोटे छोटे अपडेट सभी पाठकगण
बड़े चाव से पड़ेंगे… यानि मामला टी आर पि का हँ बॉस….
जितने ज्यादा अपडेट उतनी थी ज्यादा व्यूज मिलेगी…
बेस्ट ऑफ़ लक…
कॉफ़ी हाउस में अमित और राज रश्मि के आजु बाजु बैठे। इन्होंने एक कैबिन लिया था ।
राज: भाभी जी क्या लेंगीं?
रश्मि: आप मुझे भाभीजी मत कहिए , मैं तो आपसे छोटी हूँ। आप मुझे नाम से ही बुलाइए।
राज: अच्छा रश्मि क्या लोगी कॉफ़ी के साथ?
रश्मि: मुझे तो सिर्फ़ कॉफ़ी पीनी है।
तभी अमित का फ़ोन बजा और वह बाहर चला गया कहकर कि एक मिनट में आया।
राज : आप कुछ खाती नहीं क्योंकि आपको अपना फिगर बनाए रखना है ना ?
रश्मि: काहे का फ़िगर ? कितनी मोटी तो हूँ मैं?
राज: तुम और मोटी? तुम्हारा फ़िगर तो किसी को भी पागल कर दे रश्मि। सच कहता हूँ कि तुममें जो बात है ना वह मुश्किल से किसी में मिलती है। मैं बताऊँ मुझे तो तुम्हारी जैसी भरी हुई औरतें ही अच्छी लगती हैं । मेरी वाइफ़ का भी फ़िगर बिलकुल तुम्हारे जैसे ही था । मस्त भरा हुआ बदन।
ये सब उसने उसकी चूचि को घूरते हुए कहा।
रश्मि की हालत काफ़ी ख़राब हो रही थी, इस तरह की तारीफ़ सुनकर। आख़िर तो वह भी एक औरत ही थी, जिसे अपने रूप का बखान अच्छा लगता है।
रश्मि: क्या भाई सांब आप तो मेरे पीछे ही पड़ गए।
राज ने हिम्मत की और उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बोला: रश्मि सच में तुम्हें देखकर मुझे अपनी स्वर्गीय बीवी की याद आती है । वह भी बिलकुल तुम्हारी जैसी प्यारी थी।
ये कहते हुए उसने अपने आँसू पोछने की ऐक्टिंग की ।
रश्मि भावुक हो गयी और बोली: आप बहुत अच्छे हैं, भाई सांब । कई लोग तो बीवी के जाते ही नयी शादी कर लेते हैं । आपने ऐसा नहीं किया।
राज: अगर तुम जैसी कोई मिल जाती तो मैं वो भी कर लेता।
रश्मि: क्या भाई सांब आप भी कुछ भी बोल देते हैं?
राज : मैं तो दिल की बात कर रहा हूँ। वैसे एक विचार आया है, क्यों ना हम दोनों भी उसी मंडप में शादी कर लें जिसने जय और डॉली की शादी होगी? क्या कहती हो?
उसने रश्मि का हाथ सहलाते हुए कहा।
रश्मि हंस दी: आप भी ना , कोई ऐसा मज़ाक़ भी करता है?
राज: रश्मि, जब तुम हँसती हो तो और भी सेक्सी लगती हो।
रश्मि: छी ये क्या बोल रहे हैं। राज ने देखा कि वह अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ाने का कोई प्रयास नहीं कर रही थी ।
रश्मि सोचने लगी किक्या पंडित जी ने राज के बारे में ही कहा था कि उसके ज़िंदगी में प्यार आएगा।
तभी अमित अंदर आया और अपनी कुर्सी ओर बैठ गया। रश्मि ने अपना हाथ राज के हाथ से छुड़ा लिया था। अमित के बैठने के बाद राज ने रश्मि का हाथ टेबल के नीचे से फिर पकड़ लिया था। रश्मि ने भी मना नहीं किया। अब वह उसकी नरम और गुदाज कलाई को सहलाए जा रहा था। तभी राज की नज़र अमित के पीछे रखे आइने पर पड़ी और वह चौक गया। अमित ने भी उसकी एक कलाई को अपने हाथ में लेकर सहलाना शुरू कर दिया था।
बेचारी रश्मि दो दो मर्दों के हाथों में अपना हाथ दे रखी थी। तभी कोफ़्फ़ी आयी और रश्मि ने बेज़ारगी से राज को देखा और उसने उसका हाथ छोड़ दिया।
राज ने देखा की अमित अब भी उसकी कलाई सहला रहा था ।फिर वो उसकी जाँघ भी सहलाने लगा ।
राज ने भी हिम्मत की और अपना एक हाथ उसके घुटने पर रख दिया। रश्मि चौक कर उसकी ओर देखी। पर कुछ नहीं बोली।
फिर जब अमित का हाथ उसकी जाँघ पर ज़्यादा ही ऊपर की ओर आ गया तब वह अमित से बोली: भाई सांब , आपकी कुर्सी पीछे करिए ना मुझसे टकरा रही है। अमित समझ गया कि वह कुर्सी के बहाने उसे जाँघ से हाथ हटाने को कह रही है। उसने हाथ भी हटा लिया और कुर्सी भी खिसका ली।
राज ने आइने में सब देखा और फिर अपना हाथ धीरे से उसकी जाँघ पर फेरने लगा , रश्मि ने उसकी तरफ़ देखा पर वह चुपचाप उसकी जाँघ सहलाता रहा। अब रश्मि के चुप रहने से उसकी हिम्मत भी बढ़ी और वह जाँघ को हल्के से दबाने भी लगा। रश्मि की बुर में हलचल होने लगी।
अमित तो उसको चोदते ही रहता था पर राज का स्पर्श नया था और पंडित भी बोला था कि नया प्रेमी मिलेगा। तभी राज ने अपना चम्मच नीचे गिरा दिया और उसको उठाने के बहाने रश्मि की साड़ी को भी थोड़ा सा उठा दिया और उसकी पिंडलियां सहलाने लगा। नरम नरम भरी हुई पिंडली और घुटना मस्त लगा उसको।
रश्मि भी उसकी हिम्मत की दाद देने लगी। उसने अपना हाथ राज के हाथ पर रखा और उसे हटाने को इशारा किया। पर राज की तो हिम्मत जैसे और बढ़ गयी। वो उसकी साड़ी को और उठाके उसकी नरम गुदाज जाँघ सहलाने लगा। रश्मि की आह निकल गयी। अमित ने पूछा क्या हुआ?
रश्मि: कुछ नहीं मुँह जल गया थोड़ी ज़्यादा गरम है कोफ़्फ़ी ।
तभी राज का हाथ उसकी जाँघ में और आगे बढ़ता हुआ उसकी पैंटी से थोड़ा ही दूर था । तभी वेटर बिल ले आया और उसने अपना हाथ बाहर निकाल लिया और अपनी उँगलियाँ चाट लिया। रश्मि उसके इशारों को समझ गयी और उसका चेहरा लाल हो चुका था । उसकी बुर पैंटी को गीला करने लगी थी । फिर वो कोफ़्फ़ी हाउस से बाहर आए।
राज बाहर आते हुए बोला: चलिए आपको दुकान दिखाया जाए और जय से भी मिल लेना।
मस्त नरम कमर है तुम्हारी
रश्मि: हाँ हाँ मुझे दामाद से तो मिलना ही है चलिए। कोफ़्फ़ी हाउस बाहर आते आते राज ने उसकी नंगी कमर को हल्के से छुआ और वो सिहर उठी। राज धीरे से उसके पीछे चलते हुए बोला: मस्त नरम कमर है तुम्हारी।
रश्मि: आप अब बच्चों जैसी हरकत बन्द करिए आपको शोभा नहीं देती ।
अमित आगे चल रहा था अब राज ने उसके चूतड़पर भी हल्के से हाथ फेरा। वह मुड़कर उससे बोली: क्या कर रहे हैं। कोई देख लेगा।
राज: सॉरी । और फिर वो कार में बैठकर दुकान की ओर चल पड़े।
दुकान में जय ने उनका स्वागत किया और उसने अमित और रश्मि के पैर छुए। रश्मि ने उसे आशीर्वाद दिया और प्यार से उसका माथा चूमा। ऐसा करते हुए उसकी बड़ी चूचियाँ जय की ठुड्डी को छू गयीं और राज को जय से जलन होने लगी।
जय उन दोनों को बड़े उत्साह से दुकान दिखा रहा था। और राज की नज़र अपनी समधन के बदन से हट ही नहीं रही थी। फिर अमित जय के साथ men सेक्शन में कपड़े देखने लगा और राज रश्मि को बोला: चलो मैं तुम्हें कुछ ख़ास साड़ियाँ दिखाता हूँ। वह उसे लेकर साड़ी के काउंटर में पहुँचा और उसको कई शानदार साड़ियाँ दिखाकर बोला: ये सब तुमको बहुत अच्छी लगेंगी। अपने ऊपर लपेट कर देखो।
रश्मि उदास होकर बोली: भाई सांब, अभी तो मुझे डॉली के लिए कपड़े लेने है और शादी में बहुत ख़र्च होगा इसलिए मैं अपने लिए तो अभी कुछ नहीं खरिदूँगी।
राज: अरे तुमसे पैसे भला कौन माँग रहा है। तुम बस साड़ी पसंद करो मेरी ओर से गिफ़्ट समझना।
रश्मि: नहीं नहीं मैं आपसे कैसे गिफ़्ट ले सकती हूँ? हम तो लड़की वाले हैं।
राज: अगर डॉली के पापा होते तो तुम्हारी बात सही होती पर अभी इसका कोई मतलब नहीं है। ठीक है? मैं चाहता हूँ कि ये गिफ़्ट तुम मेरी प्रेमिका बन कर लो।
रश्मि हैरानी से बोली: ये आप क्या बोल रहे हैं? मैं कैसे आपकी प्रेमिका हो सकती हूँ भला?
राज: क्यों मर्द और औरत ही तो प्रेम करते हैं । तो हम क्यों नहीं कर सकते?
रश्मि उठकर जाने लगी तब राज बोला: तुम्हें मेरी क़सम है अगर तुम बिना साड़ी लिए गई तो ।
रश्मि फिर से बैठ गयी और बोली; सब पूछेंगे तो मैं क्या बोलूँगी कि गिफ़्ट क्यों ली?
राज ने जेब से ५४००/ निकाले और उसको देकर बोला: कहना कि तुमने साड़ी अपने बचाए हुए पैसों से ख़रीदी है।
वो चुपचाप पैसे रख ली और फिर २ साड़ियाँ ली एक अपने लिए और एक डॉली के लिए।
अपनी साड़ी उसने राज की पसंद की ही ली थी। राज ने उसे साड़ी के ऊपर ही साड़ी पहनने में मदद भी की और इस बहाने उसके गुदाज बदन का भी मज़ा लिया। उसके हाथ एक बार उसकी चूचि पर भी पड़े और दोनों सिहर उठे।
काउंटर पर पैसे देने के समय राज बोला: क्यों जय अपनी सास और बीवी की साड़ियों के पैसे लेगा
जय ने पैसे नहीं लिए और साड़ियाँ पैक करके रश्मि को दे दीं।
रश्मि धीरे से बोली: और वो पैसे जो आपने मुझे दिए उनका क्या?
राज: मेरी तरफ़ से कुछ अच्छी सी झूमके ले लेना। तुम पर बहुत सजेंगे।
रश्मि मुस्कुराती हुए बोली: शादी मेरी नहीं मेरी बेटी की हो रही है।
राज अब ख़ुश था उसको पता चल गया था कि उसे पैसों की ज़रूरत है और वह रश्मि को पटाने में क़रीब क़रीब सफल होने जा रहा था।
समधन को कहाँ छोड़ आए
अमित बोला: अब चलते हैं, आप हमें बस स्टॉप पर छोड़ दो।
राज : खाना खा कर जाना अभी इतनी जल्दी क्या है।
रश्मि: नहीं अभी जाना होगा। अब सगाई की तैयारी भी तो करनी है।
राज उनको बस स्टॉप तक ले गया। जब अमित टिकट लेने गया तब राज ने रश्मि का हाथ पकड़ लिया और बोला: रश्मि मुझे तुमसे प्यार हो गया है। तुम चाहो तो मैं तुमसे शादी करने को तैयार हूँ।
रश्मि: काश आप मुझे पहले मिले होते तो मैं आपसे शादी कर लेती पर अब तो बहुत देर हो चुकी है।
राज: तो क्या हमारा प्यार ऐसे ही दम तोड़ देगा। कमसे कम कुछ समय तो हमें एकांत में आपस में बातें करते हुए बिताना चाहिए।
रश्मि: मैं भी आपसे मिलना चाहती हूँ, पर देखिए भाग्य को क्या मंज़ूर है।
राज: हम चाहें तो हम ज़रूर मिल सकते हैं। मैं तुम्हें फ़ोन करूँगा ठीक है?
रश्मि: फ़ोन नहीं SMS करिएगा।
फिर अमित को आते देख राज ने रश्मि के हाथ को एक बार और दबाया और फिर उसका हाथ छोड़ दिया।
अब अमित बस में चढ़ गया पर साड़ी के कारण रश्मि को चढ़ने में थोड़ी दिक़्क़त हो रही थी। राज ने उसकी कमर और चूतरों को दबाकर उसको ऊपर चढ़ा दिया। वो मुस्कुरा कर पलटी और प्यार से थैंक्स बोलकर गाड़ी में बैठ गयी और बस चली गयी।
राज रश्मि के बारे में सोचते हुए अपने घर को वापस आया। घर पर शशी खाना लगा रही थी।
वो आँख मारकर बोली: समधन को कहाँ छोड़ आए?
राज उसको खींचकर अपनी गोद में बिठाया और बोला: समधन को मारो गोली। यहाँ तू तो है ना मेरे लिए । ये बोलते हुए उसकी छातियाँ दबाते हुए उसके होंठ चूसने लग। शशी ने कोई विरोध नहीं किया। वो भी सुबह से चुदासि थी। उसको अपनी गोद से हटाकर राज खड़ा हुआ और अपनी पैंट और चड्डी निकाल दिया। उसका खड़ा लौड़ा बुरी तरह से अकड़ा हुआ था ।
वह वापस सोफ़े पर बैठा और शशी को ज़मीन में बिठाया और वह उसकी जाँघों के बीच आके उसका मोटा लौड़ा चूसने लगी। थोड़ी देर बाद वह शशी को सोफ़े पर उलटा लिटाया और उसकी साड़ी और पेटिकोट को एक साथ ऊपर चढ़ाया और उसके नंगे चूतरों को दबाकर उसको सोफ़े के किनारे पर लाया और उसकी कमर को पकड़कर उसकी टाँगे फैलाकर उसकी बुर में पीछे से अपना लौड़ा पेल दिया। वो अब उसे चौपाया बनाकर बुरी तरह से चोदने लगा। उसने आँखें बन्द की और रश्मि के चेहरे को याद किया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा।
शशी की चीख़ें निकलने लगी और वह आऽऽऽऽहहह मरीइइइइइइओइ उइइइइइइइ कहकर मज़े से चुदवाने लगी। जल्दी ही शशी झड़ने लगी। अब उसने रस से सना अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसने उसपर थूक लगाया और ऊँगली में ढेर सारा थूक लेकर उसकी गाँड़ में दो ऊँगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा। शशी चीख़ी :आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जलन हो रही है।
पर आज तो राज कुछ भी सुनने को जैसे तैयार नहीं था । वह सामने पड़ी क्रीम की शीशी से क्रीम निकाला और शशी की गाँड़ में लगाया और अपने लौड़े पर भी मला और फिर उसकी गाँड़ में अपने लौड़े का सुपाड़ा अंदर करने लगा।
शशी चिल्लाई: आऽऽऽऽंह दर्द हो रहा है।
पर राज आज कुछ अलग ही मूड में था। उसने आधा लौड़ा एक धक्के में ही अंदर कर दिया। और अगले धक्के में पूरा लौड़ा आँड तक पेल दिया।
अब वह शशी की गाँड़ को ज़बरदस्त तरीक़े से चोदने लगा। कमरा ठप ठप की आवाज़ों से और शशी की हाय्य्यय उइइओओइओओ मरीइइइइइइइ गूँजने लगा।
जल्दी ही शशी भी मज़े में आ गयी और अपने चूतरों को पीछे दबाके पूरा मज़ा लेने लगी। अब राज ने अपनी चुदाई की गति बढ़ाई और वह आऽऽहहहह ह्म्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा। उसने नीचे हाथ बढ़ाकर शशी की बुर में भी तीन ऊँगली डाली और उसकी clit को भी रगड़ा। शशी भी उइइइइइइइओ माँआऽऽऽऽऽऽ कहकर झड़ गयी। अब राज उसके अंदर से अपना लौड़ा निकाला और बाथरूम में जाकर सफ़ाई करके बाहर आकर नंगा ही सोफ़े पर बैठा। शशी भी बाथरूम से आयी और उसंके पास बैठ गयी।
इतनी बुरी तरह से चोद रहे थे
शशी: आज आपको क्या हो गया था? इतनी बुरी तरह से चोद रहे थे?
राज: बस ऐसे ही , सुबह से रश्मि ने बहुत गरम कर दिया था। वैसे तुम्हारी गाँड़ बहुत मस्त है। दुःख रही होगी ना?
शशी: नहीं दुखेगी? पूरी फाड़ दी है आपने। ख़ून भी आ गया है।
राज: क्या करूँ? इतनी सुंदर दिख रही थी कि रहा नहीं गया और पेल दिया। पर बहुत मज़ा आया । और हाँ मज़ा तो तुमको भी आया क्योंकि चूतड़ दबाकर पूरा लौड़ा निगल रही थी तुम भी।
शशी: जी मज़ा तो आया पर अब दुःख रही है।
राज उठा और एक मलहम लेकर आया और बोला: चलो साड़ी उठाओ मैं ये मलहम लग देता हूँ। जब मैं पायल याने अपनी बीवी की गाँड़ मारता था तब भी ये क्रीम लगा देता था।
शशी उठी और अपनी साड़ी उठायी और अपने चूतरों को उसके सामने करके आगे को झुकी और अपने चूतरों को फैला दी। उसकी बुरी तरह से लाल गाँड़ का छेद उसके सामने था । उसने छेद को फैलाकर उसकी गाँड़ में उँगली से क्रीम डाली और बाद में उसके छेद के ऊपर भी क्रीम लगा दिया। शशी: आह अब आराम मिल रहा है। ये कहकर उसने अपनी साड़ी नीचे गिरा दी।
अब वह बाथरूम जाकर हाथ धोया और फिर जाकर लेट गया और रश्मि के बदन की ख़ुशबू को याद करते हुए सो गया।
शाम को उसने रश्मि को sms किया: हाई , क्या हो रहा है?
रश्मि का जवाब थोड़ी देर से आया: बस सगाई की प्लानिंग।
राज: हम्म और मुझे मिस कर रही हो?
रश्मि: आप मिस कर रहे हैं क्या?
राज: बहुत ज़्यादा मिस कर रहा हूँ।
रश्मि: मैं भी मिस कर रही हूँ।
राज: अच्छा मैं तुमको कैसा लगता हूँ?
रश्मि: अच्छे लगते हैं।
राज: मेरा क्या अच्छा लगता है?
रश्मि: आपकी बातें और आपका अपनापन दिखाना।
राज: बस और कुछ नहीं?
रश्मि: और अभी देखा ही क्या है अभी तक?
राज: तुम मौक़ा तो दो, और सब भी दिखा देंगे।
रश्मि: छी , कैसी बातें कर रहे हैं? कुछ तो उम्र का लिहाज़ कीजिए।
राज: उम्र का क्या हुआ? ना मैं अभी बूढ़ा हुआ हूँ और तुम तो अभी बिलकुल जवान ही धरी हो।
रश्मि: मेरी बेटी जवान हो गयी है और आपका बेटा भी जवान हो गया है और आप मुझे जवान कह रहे हैं?
राज: ज़रा शीशे में देखो क्या मस्त जवान हो तुम। तुम्हारे सामने तो आज की जवान लड़कियाँ भी पानी भरेंगी।
रश्मि: आप भी मुझे शर्मिंदा करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ते।
राज: मैं सही कह रहा हूँ। तुम्हारे सामने तो अब क्या बोलूँ? तुम बुरा मान जाओगी।
रश्मि: नहीं मानूँगी, बोलिए क्या बोलना है?
राज: तुम डॉली से भी ज़्यादा हसीन हो जानेमन। रश्मि इस सम्बोधन से चौंकी और लिखी: अच्छा अब रखती हूँ।
राज: नाराज़ हो गयी क्या?
रश्मि: अब आप माँ बेटी में तुलना कर रहे हो, तो क्या कहूँ?
राज: अच्छा चलो जाने दो, ये बताओ अब कब मिलना होगा?
रश्मि: अभी तो कुछ पक्का नहीं है। देखिए कब भाग्य मिलाता है हमें।
राज: ठीक है , इंतज़ार रहेगा। बाई ।
रश्मि: बाई।
राज ने सोचा कि गाड़ी सही लाइन पर है।
अगले कुछ दिन राज ने पूरा दिन सगाई की प्लानिंग में लगाया। वह चाहता था कि पूरा फ़ंक्शन बढ़िया से हो। रश्मि से वह sms के द्वारा बात करते रहता था। तभी अमित का एक दिन फ़ोन आया कि वह राज के शहर आ रहा है ताकि सारी बातें सगाई की अच्छी तरह से हो जाएँ। रश्मि नहीं आ रही है ये जान कर वह काफ़ी निराश हुआ।
अगले दिन अमित आया और दिन भर दोनों सगाई की तैयारीयों का जायज़ा लिया और फिर दोपहर को खाना एक रेस्तराँ में खाया। राज ने बीयर ऑर्डर की तो अमित बोला किमैं तो जिन पियूँगा। राज बीयर और अमित जिन पीने लगा। जल्दी ही अमित को चढ़ गयी।
राज ने सोचा कि इससे नशे की हालत में रश्मि की कुछ बातें की जाएँ।
राज: अमित भाई ये तो बताओ कि रश्मि इस उम्र में भी इतनी सुंदर कैसे है?
अमित थोड़े से सरूर में आकर: पता नहीं यार, मगर भगवान उसपर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान हैं। देखो ना इस उम्र में भी क्या क़यामत लगती है।
राज: वही तो देखा जाए तो इस उम्र में औरतें मोटी और बेडौल हो जाती हैं, पर वह तो अभी भी मस्त फ़िगर मेंटेंन की है।
अमित: हाँ भाई सच है अभी भी मस्ती से भरी हुई लगती है।
राज: एक बात पूँछुँ बुरा तो नहीं मानोगे?
अमित नशे में : पूछो यार अब तो हम दोस्त हो गए।
राज: वो विधवा है और तुम दोनों एक ही घर में रहते हो। तुम्हारा ईमान नहीं डोलता ?
वह जान बूझकर पूछा हालाँकि उसको तो पता था कि वो रश्मि की चुदाई करता रहता है।
अमित झूमते हुए : अब यार तुमसे क्या छपाऊँ, सच तो ये है जब मेरा भाई इसको ब्याह के लाया था तभी से मैं उसका दीवाना हो गया था।
राज: ओह तो क्या तुम उसकी इसके पति के जीते जी ही पटा चुके थे।
अमित: हाँ यार , मेरी बीवी बीमार रहती थी और जवानी का मज़ा नहीं देती थी। और मेरा छोटा भाई भी इसे ज़्यादा सुख नहीं दे पाता था। सो ये मुझसे जल्दी ही आसानी से पट गयी। सच तो ये है कि डॉली मेरी ही बेटी है।
राज उसका मुँह देखता रह गया।
राज: ओह ये बात है। तो क्या अभी भी तुम उसको चो- मतलब करते हो?
अमित: हाँ यार पर सबसे छुपाकर। मगर मुझे शक है कि घर में सबको पता है और सब चुप रहते हैं। पर हम अभी भी खूल्लम ख़ूल्ला कभी नहीं करते।
राज: यार तुम तो बहुत लकी हो ।
अमित: लगता है कि तुमको भी पसंद है वो। है ना? मैंने तुमको उसे कई बार घूरते देखा है।
राज: हाँ यार सच में बोम्ब है वो, मेरी नींद ही उड़ा दी है उसने।
अमित: तुम चाहो तो उसे पटा सकते हो?
राज: वो कैसे?
अमित: देखो अभी हमें पैसों की बहुत ज़रूरत है अगर तुम इस समय उसकी मदद कर दोगे तो वह तुम्हारे सामने समर्पण कर देगी।
राज: ओह ऐसा क्या?
अमित: वो इस समय ज़ेवरों को लेकर बहुत चिंतित है। तुम इसमे उसकी मदद कर सकते हो।
राज: अरे ये तो बहुत ही सिम्पल सी बात है। मैं अपनी बीवी के ज़ेवर पोलिश करवा के उसे दे दूँगा और वो उसे मेरी बहु को दे देगी। इस तरह घर का माल घर में वापस आ जाएगा। और सबकी इज़्ज़त भी रह जाएगी।
अमित: वाह क्या सुझाव है। वो तो तुम्हारे अहसान तले दब ही जाएगी। तुम उससे मज़े कर लेना।
राज: तुमको बुरा तो नहीं लगेगा।
अमित: यार इसमें बुरा लगने की क्या बात है? यार औरत होती है चुदाई के लिए। तुमसे भी चूद जाएगी तो क्या उसकी बुर घिस जाएगी?
राज: आऽऽह यार तुमने तो मस्त कर दिया। अभी उसे फ़ोन लगाऊँ क्या?
अमित: लगाओ इसमे क्या प्रॉब्लम है।
राज रश्मि को फ़ोन लगाया।
रश्मि: हाय ।
राज: हाय कैसी हो?
रश्मि: ठीक हूँ।
अमित ने इशारा किया कि स्पीकर मोड में डालो और मेरे बारे में यहाँ होने की बात ना करो। ये कहते हुए उसने आँख मारी।
राज: क्या कर रही हो? अमित बोल रहा था कि तुम सगाई की तैयारी में लगी हो।
रश्मि: हाँ बहुत काम है अभी। अमित भाई सांब चले गए क्या वापस?
राज ने आँख मारते हुए कहा: हाँ वो वापस चले गए। वो बता रहे थे कि तुम ज़ेवरों के लिए बहुत परेशान हो?
रश्मि: वो क्या है ना मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि बहुत महँगे ज़ेवर ख़रीद सकूँ तो थोड़ी सी परेशान हूँ।
राज: अरे इसमे परेशानी की क्या बात है। तुम ऐसा करो कि कल यहाँ आ जाओ और मेरी बीवी के ज़ेवर पसंद कर लो। तुम उनको ही अपनी बेटी को दे देना। वह आख़िर मेरे घर में वापस आ जाएँगे। मुझे पैसे का कोई लालच नहीं है। मुझे तो बस अपने बेटे की ख़ुशी के लिए डॉली जैसी प्यारी बहु चाहिए।
रश्मि: ये क्या कह रहे हैं आप । क्या आप सच में ऐसा करेंगे? मेरी तो सारी परेशानी ही दूर हो जाएगी।
राज: अरे मैं यही तो चाहता हूँ कि तुम्हारी सारी परेशानी दूर हो जाए। तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। और तुमको परेशान नहीं देख सकता।
अमित मुस्कुराया और आँख मारी।
रश्मि: तो मैं कब आऊँ?
राज : अरे कल ही आ जाओ और ज़ेवर पसंद कर लो तो मैं उनको पोलिश करवा दूँगा।
रश्मि: ठीक है मैं कल अमित भाई सांब के साथ आ जाऊँगी।
राज : अरे वो तो अभी वापस गया है क्या फिर से कल वापस आ पाएगा?
रश्मि: ओह हाँ देखिए मैं उनको बोलूँगी आ सके तो बढ़िया वरना अकेली ही आ जाऊँगी।
राज: तुम मुझे बता देना तो मैं तुमको लेने बस अड्डे आ जाऊँगा। बस एक रिक्वेस्ट है।
रश्मि: बोलिए ना ?
राज: कल आप काली साड़ी और स्लीव्लेस ब्लाउस में आओगी।
रश्मि: आप भी ना , मुझे हमेशा हेरोयन की तरह सजने को कहते रहते हैं।
राज: क्या करूँ? दिल से मजबूर हूँ ना। आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
रश्मि: भाई सांब आप भी ना ।
राज: एक बात बोलूँ अमित बहुत लकी है जो हमेशा तुम्हारे साथ रहता है। मुझे तो उससे जलन हो रही है।
रश्मि हड़बड़ाकर : उन्होंने ऐसा कुछ कहा क्या?
राज: क्या कहा? किस बारे में पूछ रही हो?
रश्मि: वो कुछ नहीं।
अमित मुस्कुराया और फिर आँख मारी।
राज: एक बात पूछूँ ? बुरा ना मानो तो?
रश्मि: पूछिए।
राज: देखो तुम्हारे पति के जाने के बाद अमित तुम्हारा बहुत ख़याल रखता है । वह तुमको बहुत घूरता भी है। तुम दोनों में कुछ चल रहा है क्या?
रश्मि: क्या भाई सांब , आप भी, ऐसा कुछ नहीं है। वो मेरे जेठ जी हैं।
अमित फिर से मुस्कुराया।
राज: अच्छा चलो छोड़ो ये सब ,कल मिलते है। हाँ काली साड़ी याद रखना।
रश्मि हँसते हुए : ठीक है काली साड़ी ही पहनूँगी। बाई।
राज: बाई ड़ीयर । उसने फ़ोन काट दिया।
अमित: अरे अपने मुँह से थोड़े मानेगी। वह बहुत तेज़ औरत है।
राज: चुदाई में मज़ा देती है?
अमित: अरे बहुत मज़ा देती है। वह बहुत प्यासी औरत है। पटा लो और ठोको।
राज: देखो कल क्या होता है? वैसे तुम वापस आओगे क्या उसके साथ?
अमित: अरे नहीं। तुम मज़े लो। मैं आऊँगा तो तुम्हारा काम बिगड़ जाएगा।
राज : थैंक्स यार।
अमित: अब वापस जाता हूँ।
राज: चलो तुमको बस अड्डे छोड़ देता हूँ।
राज उसे छोड़कर घर जाते हुए सोचने लगा कि कल देखो रश्मि का बैंड बजता है कि नहीं।
सुबह शशी के हाथ की चाय पीते हुए राज पूछा: शशी तुम्हारा पिरीयड कब आता है?
शशी: जी अगले चार पाँच दिन में आ जाना चाहिए।
राज मुस्कुराया: इस बार नहीं आएगा। मुझे पक्का विश्वास है कि तुम गर्भ से हो जाओगी।
शशी ख़ुशी से उसकी गोद में बैठ कर उसको चूम ली और बोली: बस राजा आपकी बात सच हो जाए तो मेरा जीवन ही सँवर जाएगा।
राज: उसकी चूचि दबाते हुए बोला: अच्छा अपने पति से भी चुदवाती रहती हो कि नहीं?
शशी मुँह बना कर: हाँ वह भी तीन चार दिन में एक बार कर ही लेता है पर पाँच मिनट में आहह्ह करके साला खलास हो जाता है।
राज: चलो ना मैं तो तुमको एक एक घंटे रगड़ता ही हूँ ना। वो चोदे या ना चोदे क्या फ़र्क़ पड़ता है।
तभी रश्मि का sms आया: अभी बात कर सकती हूँ?
राज ने शशी की बुर को सलवार के ऊपर से दबाकर आँख मारकर कहा: समधन से बात करूँगा।
शशी: हमको भी सुनना है प्लीज़।
राज ने फ़ोन लगाया और स्पीकर मोड में डाल दिया। शशी की सलवार का नाड़ा खोला और उसकी पैंटी में हाथ डालकर उसकी बुर को सहलाते हुए बोला: हाय रश्मि कैसी हो?
रश्मि : मैं ठीक हूँ, आपको ये बताना था कि अमित भाई सांब तो मना कर दिए आने के लिए। अब मैं अकेली ही आऊँगी ।
राज ने शशी की बुर में दो ऊँगली डाली और बोला: कितने बजे तक आ जाओगी?
रश्मि: मैं क़रीब ११ बजे तक तो आ ही जाऊँगी। मैं आपको फ़ोन कर दूँगी बस अड्डे से।
राज: नहीं, तुम मुझे पहले फ़ोन कर देना, ताकि तुम्हें बस अड्डे पर इंतज़ार ना करना पड़े।
फिर राज ने उसके बुर से उँगलियाँ निकाली और उनको चाट लिया। शशी ने उसके हाथ में हाथ मारा और कान में कहा: छी क्या गंदे आदमी हो।
रश्मि: ठीक है भाई सांब।
शशी की चूचि दबाते हुए राज बोला: वो काली साड़ी याद है ना और स्लीव्लेस ब्लाउस भी। तुम्हें इस रूप में देखने की बहुत इच्छा है।
रश्मि: अब मैं आपको क्या बोलूँ, साड़ी तो है पर ब्लाउस चार साल पुराना है छोटा हो गया है। उसमें साँस रुक रही है। समझ नहीं आ रहा है कि क्या करूँ।
राज: अरे ये समस्या तो सरिता को भी आती थी, हर दो साल में उसका बदन भर जाता था और ब्लाउस यहाँ तक की ब्रा भी छोटी हो जाती थी। वो इसका दोष मुझे देती थी हा हा कहती थी कि मैंने दबा दबा कर बड़ा कर दिया, हा हा । बहुत मज़ाक़िया थी वो।
बातों बातों में राज कमीनेपन पर उतर आया था।
रश्मि: क्या भाई सांब कैसी बातें कर रहे हैं वह भी स्वर्गीय भाभी जी के बारे में।
राज: अरे वही तो, फिर वह ब्लाउस की सिलाई खोल लेती थी और फिर से सिल लेती थी ढीला करके। पर ब्रा तो नई लाता था मैं बड़े साइज़ की, हा हा।
शशी उसको देखते हुए फुसफुसाई : बहुत कमीने साहब हो आप।
रश्मि: आप भी ना कुछ भी बोले जा रहे हैं। मैं समझ गयी कि मुझे क्या करना है। अच्छा अब रखती हूँ, बाई।
राज : ठीक है मिलते हैं। बाई।
अब फ़ोन काटकर वह शशी को बोला: आज रश्मि आ रही है क़रीब १२ बजे। मैं चाहता हूँ कि तुम अपना काम करके खाना लगा कर ११:३० बजे तक चले जाना।
शशी: तो आज समधन की चुदाई का प्लान है, है ना?
राज: सही सोचा तुमने, कोशिश तो करूँगा ही। अब चुदाई होगी या नहीं यह तो रश्मि पर निर्भर है।
शशी: ठीक है मैं जल्दी चली जाऊँगी आप मज़े करना। वह यह कहकर उसकी गोद से उठी और किचन में जाने लगी।
राज: शशी आज तुमको नहीं चोदूंग़ा । मैं चाहता हूँ कि अपना माल बचा कर रखूँ रश्मि के लिए।
शशी हंस कर बोली: कहीं उसको भी प्रेगनेंट मत कर देना?
राज: हा हा नहीं अब इस उम्र में क्या होगा उसका?
फिर वह नहाने चला गया। थोड़ी देर बाद जय भी उठकर आया और शशी ने उसे भी चाय दी।
राज: आज तुम्हारी सास आ रही है।
जय: हाँ डॉली का SMS आया है अभी। क्यों आ रहीं हैं?
राज: सगाई के बारे में कुछ बात करनी है उसने।
जय: ओह तो क्या मेरा होना भी ज़रूरी है?
राज: अरे नहीं बेटा तुम उसमें क्या करोगे? वैसे मैं उनको तुमसे मिलवाने दुकान में ले आऊँगा ।
जय: ठीक है पापा अब मैं नहा लेता हूँ।
फिर बाद में दोनों नाश्ता किया और जय दुकान चला गया। शशी भी खाना बनाने लगी।
राज ने अपने बेडरूम का दरवाज़ा बंद किया और तिजोरी से हीरे के तीन सेट निकाले और कुछ सोने के भी निकाले । फिर वह उनको देखकर सोचने लगा कि रश्मि पर कौन सा ear ring अच्छा लगेगा। फिर उसने एक हीरे का कान का झुमका पसंद किया। अब वह तैयार था रश्मि का दिल जीतने के लिए।
राज ने आज एक बढ़िया टी शर्ट और जींस पहनी और सेंट लगाकर स्पोर्ट्स शू पहने। आज वह रश्मि को पटाने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ना चाहता था।
शशी जा चुकी थी और वह अब तैयार था तभी रश्मि का फ़ोन आया : मैं बस अड्डे पहुँचनी वाली हूँ।
राज: बस मैं अभी दस मिनट मे पहुँच रहा हूँ।
राज की कार जब बस अड्डे पहुँची तो बस अभी आइ नहीं थी।
वह इंतज़ार कर रहा था तभी बस आयी और फिर उसमें से रश्मि उतरी काली साड़ी में। आह क्या जँच रही थी। उसका गोरा दूधिया बदन मस्त दिख रहा था काली साड़ी में। कसी साड़ी में छातियों का उभार पहाड़ सा दिख रहा था। जब वह पास आइ तो पारदर्शी साड़ी से उसका गोरा पेट और गहरी नाभि देखकर राज का लौड़ा झटके मार उठा।
तभी एक स्कूटर उसके पास आकर हॉर्न बजाया और वह पलटी उससे दूर होने के लिए और राज की तो जैसे साँस ही रुक गयी। क्या मस्त बड़े बड़े गोल गोल चूतड़ थे। बहुत ही आकर्षक दिख रहे थे।टाइट पहनी साड़ी से पैंटी की लकीरें भी साफ़ दिख रही थीं। अब तो उसको अपना लौड़ा पैंट में अजस्ट करना ही पड़ा।
जब वह पास आइ तो उसने हाथ जोड़कर उसे नमस्ते की और उसने भी उसके हाथ को पकड़कर कहा: नमस्ते। सफ़र में कोई परेशानी तो नहीं हुई?
रश्मि: दो घंटे में क्या परेशानी होगी?
राज: अरे इतनी हॉट दिख रही हो किसी ने रास्ते में तंग तो नहीं किया?
रश्मि: आप भी ना ,मेरे साथ एक महिला ही बैठी थी ।
राज : चलो तब ठीक है, अगर कोई आदमी होता तो तुमको तंग कर डालता।
रश्मि: अब चलिए यहाँ से पता नहीं क्या क्या बोले जा रहे हैं।
राज: चलो,कार वहाँ है।
फिर राज ने कार चालू की और बातें करने लगा।
राज: तो काली साड़ी पहन ही ली। थैंक्स मेरी बात रखने के लिए।
रश्मि: अब आप इतनी बार बोले थे तो आपकी बात तो रखनी ही थी।
राज उसकी ब्लाउस को देखते हुए बोला: पर वो ब्लाउस का हल कैसे निकला?
रश्मि हँसकर: वैसे ही जैसे आपने कहा था। साइड से थोड़ा ढीला करी हूँ।
राज: और ब्रा का ? अब तुम काले ब्लाउस के नीचे सफ़ेद ब्रा तो पहन नहीं सकती ना?
रश्मि शर्माकर: आप भी ना, कोई महिला से ऐसा सवाल करता है भला?
राज: फिर भी बताओ ना ?
रश्मि: डॉली के पास काली ब्रा थी वही पहनी हूँ।
राज चौंक कर: डॉली बेटी की? पर उसके तो तुमसे काफ़ी छोटे हैं ना ? उसकी ब्रा तुमको कैसे आएगी?
रश्मि: वह कोई बच्ची नहीं है २२ साल की लड़की है। मेरा और उसके साइज़ में दो नम्बर का ही अंतर है।इसलिए उसकी मुझे थोड़ी टाइट है पर काम चला ली हूँ। राज बेशर्मी से उसकी छाती को देखकर बोला: तुम्हें तो ४० की आती होगी?
रश्मि: आप भी ना, कोई ४० का साइज़ नहीं है।
राज: तो ३८ तो होगा ही, मेरी बीवी का भी यही साइज़ था।
रश्मि: अब आप सही बोल रहे हैं।
राज : इसका मतलब डॉली का भी ३६ के आसपास होगा। हालाँकि लगता नहीं उसका इतना बड़ा । तो डॉली की ब्रा भी तुमको तंग तो होगी ही ना।
रश्मि: पर मेरी पुशशी ३४ वाली से तो बेटर है।
राज: हाँ वो तो है।
रश्मि: आप डॉली की ब्रा का साइज़ भी भाँप रहे थे क्या? ये तो बड़ी ख़राब बात है।
राज: अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं है। पर तुम्हारे और उसके साइज़ की तुलना की बात कर रहा था।
रश्मि: चलिए अब इस बात को ख़त्म कीजिए।
राज: मैं तुम्हें घर जाकर सरिता की ब्रा दे दूँगा वो तुमको बिलकुल फ़िट आ जाएगी। हाँ कप साइज़ थोड़ा तुम्हारा बड़ा लगता है। चलो अभी के लिए चला लेना।
और सुनाओ सगाई की तैयारियाँ कैसी चल रही है?
रश्मि: ठीक ही चल रही है। बस अमित भाई सांब काफ़ी मदद कर रहे हैं।
राज: अमित भी तुम्हारी बड़ी तारीफ़ कर रहा था।
रश्मि चौंक कर: कैसी तारीफ़?
राज: अरे ऐसे ही जैसे तुम बहुत समझदार और शांत हो वगेरह वगेरह।
रश्मि : ओह , वो भी तो बहुत अच्छे हैं।
राज: वो तो है। पर बिचारा पत्नी के स्वास्थ्य को लेकर बहुत दुखी रहता है। पता नहीं उसका विवाहित जीवन कैसा होगा? उसकी बीवी को देखकर तो लगता है कि वो पता नहीं बिस्तर पर उसका साथ भी दे पाती होगी कि नहीं?
रश्मि थोड़ी सी परेशान हो गयी, वो बोली: चलिए छोड़िए ना कोई और बात करिए ना।
राज: तुम्हें तो ऐसा नहीं कहना चाहिए, क्योंकि हम तीनों की एक जैसी हालत है। तुम्हारे पति नहीं है , मेरी पत्नी नहीं रही और अमित की पत्नी होकर भी ना होने के बराबर है। सही कह रहा हूँ ना?
रश्मि: हाँ ये तो है।
राज: मुझे तो बहुत परेशानी होती है अकेले रहने में। मुझे तो औरत की कमी बहुत खलती है। पता नहीं तुम्हारा और अमित की क्या हालत है।
रश्मि: देखिए सभी को अकेलापन बुरा लगता है, पर किया क्या जाए?
राज: करने को तो बहुत कुछ किया जा सकता है, पर थोड़ी हिम्मत करनी पड़ती है।क्यों ठीक कहा ना?
रश्मि: मैं क्या कह सकती हूँ।
घर पहुँचकर राज उसे सोफ़े पर बिठाकर उसे पानी पिलाता है। फिर रश्मि: आपकी मेड शशी नहीं दिख रही है?
राज: आज उसे कुछ काम था इसलिए वो खाना बनाके जल्दी चली गयी है।
रश्मि: मैं आपके लिए चाय बना दूँ?
राज : अरे आप क्यूँ बनाएँगी? मैं आपके लिए बना देता हूँ।
रश्मि उठी और किचन की ओर जाते हुए बोली: आप बैठिए मैं बनाती हूँ। वह जब उठ कर जाने लगी तो उसकी चौड़ी मटकती गाँड़ देखकर वह पागल सा हो गया और उसके चूतरों में थोड़ी सी साड़ी भी फँस गयी थी। वह अपना लौड़ा मसलने लगा।
तभी किचन से आवाज़ आइ: भाई सांब थोड़ा आइए ना।
राज अपना लौड़ा अजस्ट करते हुए किचन में गया।
रश्मि एक चाय के डिब्बे को निकालने की कोशिश कर रही थी जो की काफ़ी ऊपर रखा था। राज उसके पीछे आकर उसके चूतरों में अपना लौड़ा सटाते हुए उस डिब्बे को निकाला और उसके बदन से आ रही मस्त गंध को सूंघकर जैसे मस्त हो गया। रश्मि ने भी उसके डंडे का अहसास किया और काँप उठी।
फिर वह चाय बना कर लाई। राज कमरे में नहीं था।
तभी वह बेडरूम से बाहर आया और उसके हाथ में एक काली ब्रा थी। वो बोला: देखो, ये ट्राई कर लो , इसमें तुम्हें आराम मिलेगा।
रश्मि लाल होकर: ओह आप भी , मुझे बड़ी शर्म आती है। ठीक है बाद में पहन लूँगी।
राज: अरे जाओ अभी बदल लो। इसने शर्म की क्या बात है।
रश्मि उठी और उसके बेडरूम में जाकर ब्रा बदल कर वापस बाहर आइ तो वह बेशर्मी से उसकी छाती को घूरते हुए बोला: हाँ अभी ठीक है। आराम मिला ना? डॉली के इतने बड़े थोड़ी है, इसी लिए उसमें तुम्हारी साँस रूकती होगी। सरिता और तुम्हारा एक साइज़ है तो आराम मिल रहा होगा। हैं ना?
रश्मि सिर झुका कर: हाँ ये ठीक है।
अब दोनों चाय पीने लगे।
रश्मि जय और उसके बिज़नेस का पूछने लगी। वो बातें करते रहे। राज को नज़र बार बार उसके उभरे हुए पेट और नाभि पर जाती थी।
राज: चलो अब तुम्हें गहने दिखाता हूँ।
वह बेडरूम की ओर चला। रश्मि थोड़ा हिचकते हुए उसके पीछे वहाँ पहुँची।
राज ने उसे बेड पर बैठने का इशारा किया और वह सेफ़ खोला और उसमें से ज़ेवर के डिब्बे निकाल कर लाया। फिर उसने सब डिब्बे खोकर बिस्तर पर फैला दिए । रश्मि की आँखें फट गयीं इतने ज़ेवर देख कर।
रश्मि: भाई सांब ये तो एक से एक बढ़िया हैं।
राज : इनमे से कौन सा डॉली बिटिया पर जँचेगा बोलो।
रश्मि: ये बहुत बढ़िया है। देखिए ।
राज: हाँ सच कह रही हो। और ये वाला तुमपर जचेंगा । ये कहते हुए उसने एक सेट उसको दिखाया।
रश्मि: मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप मेरे ऊपर बहुत बड़ा अहसान कर रहे हो डॉली को सेट देकर। अब मैं आपसे ये कैसे ले सकती हूँ।
राज: चलो छोड़ो ये ear rings देखो । ये तुम्हारे कान में बहुत जचेंगा।
रश्मि: मैं नहीं ले सकती।
राज: चलो मैं ही पहना देता हूँ।
यह कहकर वो उसके कान के पास आकर उसे ख़ुद पहनाने लगा। वह अब मना नहीं कर रही थी। उसकी साँसे रश्मि की साँस से टकरा रही थीं। उसकी नज़दीकियाँ उसे गरम कर रही थीं। उसका लौड़ा अब कड़ा होने लगा था। रश्मि भी गरम हो रही थी। उसकी छाती भी अब उठने बैठने लगी थी। राज को उसके बदन की मादक गंध जैसे मदहोश कर रही थी।
राज उसे रिंग्स पहना कर बोला: देखो कितनी सुंदर लग रही है तुमपर।
रश्मि ड्रेसिंग टेबल के शीशे में देखकर बोली: सच ने बहुत सुंदर है।
राज उसके पास आकर उसका हाथ पकड़ा और बोला: पर तुमसे ज़्यादा सुंदर नहीं है। यह मेरे तरफ़ से तुमको सगाई का गिफ़्ट है। मना मत करना।
रश्मि: पर ये तो बहुत महँगा होगा।
राज: अरे तुम्हारे सामने इसकी क्या हैसियत है।
यह कहकर उसने रश्मि को अपनी बाँहों में खिंचा और उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए। रश्मि एक मिनट जे लिए चौकी पर फिर चुपचाप उसके चुम्बन को स्वीकार करने लगी। कमरा गरम हो उठा था।
( Adultery मस्ती का धमाल मस्त मस्त माल Running)….( मटकनी गांड का कमाल(इन्सेस्ट) Running)….(Incest पहाडी आम (इन्सेस्ट) Running)….(Incest आनंद और तड़प (तन में उत्तेजना की हलचल ) Running)….(Romance स्वप्न सुंदरी (नई जिंदगी की ओर) Running)….(संयोग का सुहाग)….(भाई की जवानी Complete)……..(खाला जमीला running)……(याराना complete)….
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Re: बहू की चूत ससुर का लौडा
राज की बाहों में आकर रश्मि जैसे पिघलने लगी। राज उसके होंठों को चूसे जा रहा था। उनका पहला चुम्बन क़रीब पाँच मिनट तक चला, जिसमें राज की जीभ रश्मि के मुँह के अंदर थी और रश्मि भी उसे चूसे जा रही थी। अब राज ने भी अपना मुँह खोला और अनुभवी रश्मि ने भी अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी। अब राज उसकी जीभ चूस रहा था। राज के हाथ रश्मि के गालों पर थे और रश्मि के हाथ उसकी पीठ से चिपके हुए थे ।अब राज और रश्मि हाँफते हुए अलग हुए और राज ने अब उसके गरदन और कंधे को चूमना शुरू किया ।जल्दी ही राज गरम हो गया और उसने रश्मि की साड़ी का पल्लू गिरा दिया। अब उसके तने हुए चूचे जो कि मानो ब्लाउस फाड़ने को बेचैन थे, उसके सामने थे।
वह थोड़ी देर उनको देखा और फिर आगे झुक कर चूचियों के ऊपर के नंगे हिस्से को चूमने लगा। गोरे गोरे मोटे दूध को देखकर वह मस्त हो गया। अब वह दोनों हाथों से उसकी चूचियाँ दबाया और बोला: आऽऽऽह जाऽऽंन क्या चूचियाँ है। मस्त नरम और सख़्त भी।
वह अब उनको थोड़ा ज़ोर से दबाने लगा। रश्मि हाऽऽऽय्य कर उठी और बोली: धीरे से दबाओ ना। वह फिर से आऽऽऽऽऽह कर उठी । और अपने नीचे के हिस्से को मस्ती में आकर राज के नीचे के हिस्से से चिपकाने लगी। तभी उसको अपने पेट पर राज के डंडे का अहसास हुआ, वह सिहर उठी।
राज भी अब उसके नंगे पेट को सहलाया और नाभि में ऊँगली डालने लगा।
राज: रश्मि, साड़ी खोल दूँ?
रश्मि मुस्कुराकर बोली: मैं मना करूँगी तो नहीं खोलेंगे?
राज हँसकर उसकी साड़ी को कमर से खोला और एक झटके में साड़ी उसके पैरों पर थी। क्या माल लग रही थी वो ब्लाउस और पेटिकोट में।
राज ने उसको अपने से चिपका लिया और फिर से होंठ चूसने लगा। अब उसके हाथ उसकी पीठ , नंगी कमर और फिर पेटिकोट के ऊपर से उसके मस्त मोटे उठान लिए चूतरों पर पड़े और वह उनको दबाने लगा।
रश्मि की आह निकल गयी।
राज: आऽऽऽऽह जाऽऽऽन क्या मस्त चूतड़ है तुम्हारे।
रश्मि मुस्कुराकर: और क्या क्या मस्त है मेरा?
राज: अरे जाऽऽंन तुम तो ऊपर से नीचे तक मस्ती का पिटारा हो।
रश्मि हंस दी और राज की गरदन चूमने लगी।
राज ने ब्लाउस के हुक खोले और रश्मि ने हाथ उठाकर अपना सहयोग दिया ब्लाउस उतारने में। उसकी चिकनी बग़ल देख कर वह मस्त हुआ और उसके हाथ को उठाकर बग़ल को सूँघने लगा और फिर जीभ से चाटने लगा। दोनों बग़लों को चूमने के बाद वह उसका पेटिकोट का नाड़ा भी खोल दिया और अब रश्मि सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी।
अब वो पीछे हटा और थोड़ी दूर से उसके गोरे बदन को काली ब्रा और काली ही पैंटी में देखकर मस्ती से अपना लौड़ा मसलने लगा। रश्मि की निगाहें भी उसके फूले हुए हथियार पर थी और उसकी पैंटी गीली होने लगी थी।
रश्मि: वाह मेरे कपड़े तो उतारे जा रहे हैं और ख़ुद पूरे कपड़े में खड़े हैं।
राज: लो मैं भी उतार देता हूँ। ये कहते हुए उसने अपनी टी शर्ट उतार दी। उसका चौड़ा सीना रश्मि की बुर को और भी गीला करने लगा।फिर उसने पैंट भी उतारी और अब बालों से भरी पुष्ट जाँघों के बीच फूली हुई चड्डी को देखकर उसकी आँखें चौड़ी हो गयी।
अब रश्मि के पास आकर वह उसको बाहों में ले लिया और उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। उसकी ब्रा निकालकर वह उसकी चूचियों को और उसके खड़े निपल्ज़ को नंगा देख कर वह मस्त हो गया। फिर वह झुक कर घुटने के बल बैठा और उसकी पैंटी भी धीरे से उतार दिया। अब उसके सामने रश्मि की मस्त फूली हुई बुर थी। उसने देखा कि उसके पेड़ू पर बालों को दिल का शेप दिया हुआ था। हालाँकि बुर बिलकुल बाल रहित थी।
राज ने उसके दिल के शेप के बालों को सहलाते हुए बोला: वाह जान क्या शेप बनाई हो? फिर वह आगे होकर उसके उस दिल को चूमने लगा। फिर वह नीचे होकर उसकी बुर को सहलाया और उसे भी चूम लिया। फिर वह उसे घुमाया और और उसके बड़े चूतरों को दबाने लगा और चूमने भी लगा। रश्मि आऽऽहहह कर उठी। फिर वह उठा और उसके दूध दबाकर उनको भी मुँह में लेकर चूसने लगा। उसके निप्पल्स को दबाया और रश्मि हाऽऽऽऽऽय्यय कर उठी। रश्मि भी उससे चिपक रही थी और चड्डी में से उसका लौड़ा उसकी नंगी जाँघों पर रगड़ रहा था। रश्मि ने हाथ बढ़ाकर राज की चड्डी के ऊपर से उसका लौड़ा पकड़ लिया, और बोली: आऽऽऽऽह आपका तो बहुत बड़ा है।
राज उसकी चूचि दबाके बोला: तुम्हारे पति से भी बड़ा है?
रश्मि: आऽऽऽह उनका तो बहुत कमज़ोर था। आऽऽहहह आपके वाले से तो आधा भी नहीं होगा। वह उसके चड्डी में हाथ डालकर उसकी पूरी लम्बाई को फ़ील करते हुए बोली।
राज: तुम्हारे दूध बहुत ही मस्त है। चलो अब बिस्तर में लेटो। राज ने भी चड्डी उतार दी। रश्मि ने उसके लौड़े को देखा और एक बार उसकी लम्बाई और मोटाई को सहला कर और दबाकर बिस्तर पर लेट गयी।
रश्मि के लेटने के बाद राज भी उसकी बग़ल में आकर लेटा और उसको अपनी बाहों में लेकर चूमने लगा। वह भी उससे लिपट कर उसको चूमने लगी।
अब वह उसकी चूचियाँ दबाते हुए चूसने लगा। रश्मि की हाऽऽऽऽऽऽयययय निकलने लगी। अब उसके हाथ उसके पेट से होते हुए उसकी बुर पर घूमने लगे। उसकी दो उँगलियाँ उसकी बुर की गहराई नापने लगी। वह हैरान हो गया कि उसकी उम्र के हिसाब से उसकी बुर भी काफ़ी टाइट थी। फिर वह उठकर उसके ऊपर आया और उसकी टाँगें सहलाकर फैलाया और मस्त गीली बुर देखकर वह झुका और उसको चूमने लगा। जल्दी ही उसकी जीभ उसके बुर के अंदर थी और वहाँ हलचल मचाने लगा। रश्मि चीख़ी: उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽऽ।
राज: जाऽऽऽऽंन मज़ा आऽऽऽया ना?
रश्मि: आऽऽऽह वहाँ जीभ डालोगे तो मज़ा नहीं आऽऽऽऽऽऽयेगाआऽऽऽऽ क्याआऽऽऽऽऽ उइइइइइइइ ।
अब वह उसके चूतरों को दबाते हुए उसकी गाँड़ के छेद को देखकर मस्ती से भर गया और उसकी गाँड़ की पूरी दरार को जीभ से चाटने लगा। उसकी जीभ बुर की clit से होकर उसकी बुर को चाटा और नीचे जाकर गाँड़ के छेद को भी चाटा। रश्मि हाऽऽऽऽय्य्य्य्य्य आऽऽऽऽऽऽज माऽऽऽऽर ड़ालोगेएएएएएए क्याआऽऽऽऽऽऽ।
वह बोला: जाऽऽऽंन क्या माल हो तुम? अब मेरा लौड़ा चूसोगी या अभी चोदूँ पहले।
रश्मि: आऽऽऽह चोद दीजिए आऽऽऽह अब नहीं रुक सकती। बाद में आपका चूस दूँगी। हाऽऽय्यय ड़ालिए नाऽऽऽऽऽऽ ।प्लीज़ आऽऽहहह ।
राज ने अब पोजीशन बनाई और रश्मि भी अपनी टाँगे घुटनो से मोड़कर अपनी छाती पर रखी और पूरा खेत उसे जोतने को ऑफ़र कर दिया। राज ने अपने लौड़े पर ढेर सा थूक लगाकर उसकी बुर के मुँह पर रखा और दबाने लगा। जैसे जैसे सुपाड़ा अपनी जगह बुर के अंदर बनाकर उसमें समाने लगा। रश्मि की आऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह निकलने लगी।फिर जब पूरा लौड़ा अंदर समा गया तो वह झुक कर उसके होंठ चुमते हुए उसकी चूचियाँ मसलने लगा और निपल्ज़ को ऐंठने लगा।साथ ही अब उसने धक्के भी लगाने शुरू कर दिए।
रश्मि: हाय्य्य्य्य्य्य। करके अपनी कमर उछालकर मज़े से चुदवाने लगी।
कमरे में फ़च फ़च की आवाज़ें और पलंग की चूँ चूँ की आवाज़ भी गूँजने लगी।
राज: आऽऽऽहब जाऽऽन क्या टाइट बुर है तुम्हारी?एक बात बताओ दो दो बच्चे पैदा करने के बाद भी बुर इतनी टाइट कैसी है?
रश्मि. आऽऽऽह मेरे दोनों बच्चे सिजेरीयन से हुए है।
राज: आऽऽऽहहह तभी तो, पायल की बुर तो काफ़ी ढीली पड़ गयी थी मेरी बड़ी बेटी के जन्म के बाद। और जय के जन्म के बाद और भी ढीली पड़ गयी। तुम्हारी मस्त है जानू।
ये कहते हुए वह और ज़ोर से रश्मि के चूतरों को दबाकर धुआँ धार चुदाई करने लगा। अब रश्मि भी हाऽऽऽऽय्यय मरीइइइइइइइ उईइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ कहकर नीचे से अपनी गाँड़ उछालकर बड़बड़ाती हुई चुदवाने लगी।
थोड़ी देर बाद रश्मि और राज दोनों आऽऽऽहहह मेरा होने वाला है , कहते हुए झड़ने लगे।
दोनों पस्त होकर अग़ल बग़ल लेट गए। फिर राज बाथरूम से फ़्रेश होकर आया और बाद ने रश्मि भी फ़्रेश होकर आयी और अपने कपड़े की ओर हाथ बढाइ।
राज: अरे जानू अभी कपड़े कैसे पहनोगी? अभी तो एक राउंड और होगा। तुम्हारे जैसे माल से एक बार में दिल कहाँ भरेगा।
रश्मि हँसकर बोली: मैं सोची कि आप शांत हो गए तो अब बस करें।
राज ने हाथ बढ़ाकर उसको अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठ चूसने लगा। उसके हाथ रश्मि की पीठ और गोल गोल चूतरों पर घूम रहे थे।
राज: एक बात बताओ कि डिलीवरी के समय सिजेरीयन करना किसका सुझाव था? तुम्हारा , तुम्हारे पति का या अमित का?
रश्मि: इसमे अमित भाई सांब कहाँ से आए?
राज उसकी गाँड़ में ऊँगली करते हुए बोला: मुझे पता है कि तुम अपने जेठ अमित से शादी के बाद से ही चुदवा रही हो। और उस समय तुम्हारे पति का ऐक्सिडेंट भी नहीं हुआ था।
रश्मि: आऽऽह ऊँगली निकालिए ना, सूखी ही डाल दिए हैं। जलन होती है ना।ये आप क्या कह रहे है, अमित भाई सांब से मेरा कोई चक्कर नहीं है।
राज : जानू झूठ मत बोलो, जब मैं तुम्हारे घर गया था तभी मैंने तुमको और अमित को लिपट कर चूमा चाटी करते देखा था। जब मैंने कल अमित से पूछा तो शराब के नशे में वह सब बक गया और यह भी की डॉली और उसका भाई अमित के ही बच्चें हैं।
रश्मि का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। वह गिड़गिड़ाते हुए बोली: आप ये सब किसी को नहीं बताओगे ना। प्लीज़ प्लीज़।
राज ने अपनी ऊँगली ने थूक लगाया और फिर से उसकी गाँड़ में डालकर बोला: नहीं जानू किसी को नहीं बताऊँगा।
रश्मि: आऽऽह मैं आपसे बहुत प्यार करने लगी हूँ, प्लीज़ मेरा ये राजीवराजीवही रहने दीजिएगा। हाय्य्य्य्य्य।
वह अपनी गाँड़ उठाकर उसकी ऊँगली का मज़ा लेने लगी।
राज उसके होंठ चूसते हुए बोला: बिलकुल निश्चिन्त रहो जानू किसिको नहीं बताऊँगा। पर ये तो बताओ कि क्या डॉली बेटी को तुम्हारे अमित से सम्बन्धों के बारे में पता है?
रश्मि; मुझे लगता है कि उसे शक तो है पर पक्का नहीं कह सकती।
राज उसकी चूचि दबाते हुए बोला: आह क्या बड़ी बड़ी चूचियाँ है तुम्हारी। एक बात बताओ अगर डॉली का साइज़ तुमसे दो नम्बर ही छोटा है इसका मतलब वह भी किसी से चु मतलब उसका भी कोई बोय फ़्रेंड तो होगा, जिसने दबा दबा कर उसकी चूचियाँ इतनी बड़ी कर दी होंगी। ये कहते हुए वह अब दो ऊँगली उसकी गाँड़ में डालकर अंदर बाहर करने लगा।
रश्मि आऽऽऽऽऽह करके बोली: आप भी उसके बारे में ऐसा कैसे बोल सकते हैं। उसका कोई बोय फ़्रेंड नहीं है। आह वह बहुत सीधी लड़की है।
राज: ओह पर चूचि तो उसकी काफ़ी बड़ी है, हालाँकि पता नहीं चलता पर अब तुमने ही उसका साइज़ बताया है कि ३४ का है।
फिर वह उसके दिल के आकर की झाँट को सहलाकर पूछा: ये कौन बनाया है इस आकर का? तुम ख़ुद तो ऐसे काट नहीं सकती अपनी झाँट को।
रश्मि शर्मा कर बोली: ये अमित भाई सांब का काम है। उनको मेरी झाँटें बनाने में बहुत मज़ा आता है। ये उन्होंने ही बनाया है।
ओह , कहते हुए वह बोला: चलो मेरा लौड़ा चूसो।
रश्मि : पहले ऊँगली तो निकालो बाहर।
राज ने उँगलियाँ बाहर निकाली और उनको सूँघने लगा। रश्मि चिल्लाई: छी छी क्या करते हो? फिर वह उसके लौंडे को सहलाकर बोली: हाय ये तो खड़ा हो गया। फिर उसने अपनी जीभ निकाली और उसके लौड़े के एक एक हिस्से को चाटा और चूमने लगी। फिर उसके बॉल्ज़ को सहलायी और बोली: बाप रे कितने बड़े है ये। फिर वह उनको भी चाटने लगी। फिर वह पूरा लौड़ा मुँह में लेकर डीप थ्रोट देने लगी। अब राज अपनी कमर उछालकर उसके मुँह को चोदने लगा।
राज ने उसे रोका और पेट के बल लिटाया और उसके मस्त चूतरों को दबाकर चूमने लगा। फिर वह उसे अपने चूतरों को उठाने को बोला: जानू क्या मस्त चूतड़ हैं । फिर वह उसकी गाँड़ का छेद चाटने लगा और बोला: जानू तुम्हारा छेद देख कर लगता है कि अमित तुम्हारी गाँड़ भी मारता होगा। दरसल सरिता की भी मैं गाँड़ मारता था और उसका छेद भी ऐसे ही दिखता था। सही कहा ना? फिर वह उसकी गाँड़ में क्रीम डाला और उँगलियाँ डालकर क्रीम को अच्छी तरह से छेद में लगा दिया।
रश्मि: आऽऽह हाँ अमित को मेरी गाँड़ मारना बहुत पसंद है।
राज: और तुम्हें गाँड़ मरवाने में मज़ा आता है ना?
उसकी गाँड़ में अब वो तीन ऊँगलियाँ डाल कर हिला रहा था।
रश्मि: आऽऽह। हाँ बहुत मज़ा आता है । पर आपका बड़ा ही मोटा और लम्बा है शायद दुखेगा।
राज : अरे नहीं मेरी जान नहीं दुखेगा। मैं बहुत धीरे से करूँगा। तो डालूँ अंदर?
रश्मि: आऽऽऽह डालिए ना अब क्यों तड़पा रहे हैं।
राज मुस्कुराया और अपना क्रीम से चुपड़ा हुआ लौड़ा उसकी गाँड़ में डाला और वह चिल्लाने लगी : आऽऽऽह धीइइइइइइइरे से डालो। राज ने अपना दबाव बढ़ाया और उसका लौड़ा उसकी गाँड़ में घुसता चला गया। अब रश्मि की चीख़ें बढ़ गयीं और वह चिल्लाई: उइइइइइइइइ मरीइइइइइइइइइ । आऽऽऽऽह मेरीइइइइइइइ फटीइइइइइइइइइ ।
अब राज ने उसकी गाँड़ मारनी शुरू की और साथ ही अपना एक हाथ उसकी बुर में लेज़ाकर उसकी clit को रगड़कर उसकी बुर में तीन उँगलियाँ डालकर उसकी बुर को गीली करने लगा।
बुर से पानी निकले ही जा रहा था
अब ठप ठप की आवाज़ के साथ वह पूरे ज़ोरों से गाँड़ मारने लगा। अब रश्मि भी बुर में ऊँगली और गाँड़ में मोटे लौड़े की चुदाई से मस्त हो कर अपनी गाँड़ पीछे दबा दबा कर अपनी मस्ती दिखाई और गाँड़ मरवाने लगी।
जल्दी ही उसकी बुर ने पानी छोड़ना शुरू किया और वह आऽऽऽक़्ह्ह्ह्ह मैं गईइइइइइइइइइइ कहकर गाँड़ हिला हिला कर झड़ने लगी। इधर राज के हाथ में जैसे पानी का सैलाब भरने लगा। उसकी बुर से पानी निकले ही जा रहा था तभी वह भी झड़ने लगा और आऽऽह्ह्ह्ह्ह ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर उसकी पीठ पर लेट सा गया।
अब वह अपना वज़न उसके ऊपर से हटाकर उसकी बग़ल ने लेट गया। वह आँखें बंद करके उन लमहों को याद करके मस्त होने लगा जब वह उसकी गाँड़ मार रहा था। आह क्या मस्त टाइट गाँड़ और बुर हैं। बहुत दिन बाद वह इतनी मज़ेदार चुदाई का आनंद लिया था।
उधर रश्मि भी लेटे हुए सोच रही थी कि क्या मस्त मर्द है , कितना मज़ा दिया है इन्होंने। अमित से भी ज़्यादा मज़ा दिया है इन्होंने।
वह पलटी और राज को अपनी ओर देखते हुए देख कर बोली: आज बहुत मज़ा आया सच में आपने जो मज़ा दिया है , मैं तो आपकी ग़ुलाम हो गयी हूँ।
राज: इसका मतलब जब चाहूँ तुमको चोद सकता हूँ।
रश्मि हँसकर: ये भी कोई पूछने की बात है।
ये कहते हुए उसने उसके लटके हुए लौड़े को सहलाया और उसे दबा दिया। फिर बोली: ये जब चाहे मेरे अंदर जाकर मज़ा कर सकता है।
राज मस्ती से उसके होंठों को चूम लिया। और वो दोनों एक दूसरे से चिपक गए और चुम्बन में लीन हो गए।
दोनों दो राउंड की चुदाई के बाद थकान महसूस कर रहे थे। रश्मि उठकर बाथरूम से फ़्रेश होकर आइ और ब्रा और पैंटी पहनकर ब्लाउस और पेटिकोट भी पहन ली। फिर वह किचन में जाकर फ्रिज से जूस निकाल कर लाई तब तक राज भी फ़्रेश होकर आ गया था। वह अभी भी नंगा था और फिर दोनों जूस पीने लगे। राज अभी भी नंगा पड़ा था और उसका लंड साँप की तरह उसकी एक जाँघ पर पड़ा था और उसके बॉल्ज़ लटके से थे।
रश्मि उसकी कमर के पास बैठी और उसकी छाती को सहला कर बोली: यहाँ आइ हूँ तो दामाद से भी मिलवा दीजिए ना।
राज: हाँ हाँ क्यों नहीं? अभी खाना खाकर चलते हैं।
रश्मि अब अपना हाथ उसकी छाती से नीचे लाकर उसके पेट से होते हुए उसके लौड़े के पास लाई। अब वो उसकी छोटी कटी झाँटों से खेलने लगी । फिर उसने लौड़े को दबाया और बॉल्ज़ को भी सहला कर बोली: आपके बॉल्ज़ बहुत बड़े हैं।
राज: अरे इसी बॉल्ज़ की सहायता से मैंने कई लड़कियों को माँ बनाया है।
रश्मि चौंक कर: मतलब? मैं समझी नहीं। वह अभी भी उसके बॉल्ज़ को सहलाए जा रही थी।
राज: लम्बी कहानी है । असल में मैंने तीन लड़कियों को माँ बनाया है उनके अनुरोध पर ही।
रश्मि: उनको कैसे पता चला कि आपसे अनुरोध करना है इसके लिए?
राज: देखो हुआ ये कि एक लड़की को मैंने फँसाया और वह एक महीने में ही प्रेगनेंट हो गयी। उसका तो मैंने गर्भपात करवा दिया। जब मैंने ये बात एक और औरत साधना को बताई जो उन दिनो मेरे से फँसी हुई थी तो वह अपनी बहू बुलबुल को मुझसे चुदवाइ और वो भी एक महीने में ही प्रेगनेंट हो गई।
रश्मि: वो अपनी बहू को आपसे चुदवाइ ? क्यों भला?
राज: क्योंकि उसका बेटा बाप नहीं बन सकता था और वो दोनों नहीं चाहतीं थीं कि ये बात लड़के को पता चले क्योंकि उसके डिप्रेशन में जाने का डर था।
रश्मि: ओह तो आप उस लड़की से बाद में मिले जब वह माँ बन गयी थी?
राज: हाँ सास बहू दोनों उसे लेकर मेरे पास आइ थीं। बहुत ही प्यारा बच्चा था। उस दिन मैंने जिभरके बहू का दूध पिया और उन दोनों को भरपूर चोदा । वो तो मेरी अहसान मंद थीं ना। बस उस दिन के बात कभी नहीं मिला।
रश्मि: आपने तीन लड़कियाँ कहीं, दो और कौन थीं?
राज: असल में साधना जो कि तुम्हारी उम्र की थी अपनी बहू बुलबुल को जब मुझे चुदवा कर माँ बना ली तो ये बात उसने एक औरत को बताई जो कि अपनी बेटी के माँ ना बन पाने के कारण परेशान थी। उस औरत का नाम काजल था और उसकी बेटी का नाम आकाक्षा था।
रश्मि: ओह फिर क्या हुआ? वो अब राज के लौड़े को सहलाने लगी थी। राज ने भी उसके ब्लाउस के ऊपर से उसकी चूचि दबायी और बोला: साधना और काजल एक क्लब की मेमबर थीं। वहाँ काजल ने अपना दुखड़ा सुनाया कि उसके बेटी के ससुराल वाले उसको ताने मारते हैं कि वो बाँझ है और उसकी दूसरी शादी की धमकी देते हैं। जबकि उसकी बेटी में कोई कमी नहीं है। वो लोग उसके पति का चेकअप भी नहीं करवा रहे हैं।
रश्मि: ओह फिर ?
राज: काजल की बात सुनकर साधना उसे मेरे बारे में बतायी और काजल अपनी बेटी से बात की और वह मुझसे चुदवा कर मॉ बनने तो तैयार हो गयी। इसी सिलसिले में साधना काजल को लेकर मेरे पास मेरे दोस्त के ख़ाली फ़्लैट में आयी। वहीं मैं उनका इंतज़ार कर रहा था। साधना और काजल अंदर आइ। साधना ने मुझे पहले फ़ोन पर बता दिया था कि वो काजल को बता दी है कि वो भी मुझसे चुदवाती थी। इसलिए मैंने साधना को अपनी बाहों में लेकर चूम लिया। वह। भी मुझसे चिपक गयी। काजल ये सब देखकर शर्मा रही थी।
रश्मि: आप उस औरत के सामने ही साधना से चिपक गए। ये कहकर वह राज के लौड़े को दबाई और वह अब खड़ा होने लगा था। फिर वो पूछी: फिर क्या हुआ?
राज: फिर मैं साधना से अलग हुआ और वो मेरा परिचय काजल से करवाई। काजल एक गोरी दुबली औरत थी और उसने सलवार कुर्ता पहना था। वह चेहरे से सुंदर थी और उसकी छातियाँ भी उसके दुबले शरीर के लिहाज़ से काफ़ी बड़ी थीं जो डुपट्टे के नीचे से झाँक रही थीं।हम सब बैठे और साधना ने काजल के बारे में बताया कि वो एक आर्मी ऑफ़िसर की बीवी है और उसकी बेटी आकाक्षा शादी के ५ साल भी माँ नहीं बन पा रही है और जैसे आपने मेरी बहू को माँ बनाया है वह भी अपनी बेटी आकाक्षा को मुझसे गर्भवती करवाना चाहती है।
रश्मि: वाह आपके तो मज़े ही मज़े हो गए होंगे?
राज: हाँ , मैंने पूछा कि आकाक्षा की उम्र क्या है? वो बोली कि २६ साल की है। मेरा लौड़ा जींस के अंदर खड़ा होने लगा। और मेरी पैंट के ऊपर से उसको दबाया। मैंने देखा कि काजल और साधना की आँखें मेरे लौड़े पर ही थी।
रश्मि: हाय बड़े बेशर्म हो आप? फिर क्या हुआ?
राज: अब तुम मेरा लौड़ा चूसो और बीच में नहीं बोलना तो मैं पूरी कहानी सुनाऊँगा।
रश्मि ख़ुशी से उसका लौड़ा चूसने और चाटने लगी और राज ने बोलना चालू किया |
मैं: आकाक्षा मान गयी है इसके लिए?
काजल : हाँ वो मान गयी है।
मैं: फिर ठीक है, तो आज ही उसे ले आना था? मैंने अपना लौड़ा मसल कर कहा।
काजल: जी मैं पहले आपसे मिलकर ये देखना चाहती थी कि आप कैसे हैं, वगेरह । आख़िर मेरी बेटी का सवाल है ।
मैं अपना लौड़ा दबाते हुए बोला: आपने मुझे देख लिया अब आपका क्या इरादा है?
काजल: जी मैं कल उसे ले आऊँगी।
मैं मुस्कुराकर: पर आपने मेरी असली काम की चीज़ तो देखी नहीं है, जिसकी मदद से आपकी बेटी माँ बनेगी?
काजल झेपकर: उसकी कोई ज़रूरत नहीं है।
मैं: पर मुझे तो आपको दिखाना ही होगा ताकि बाद में आप कोई शिकायत ना करो। ये कहते हुए मैंने अपनी जीन के बटन खोले और ज़िपर नीचे किया और अपनी जीन बैठे बैठे ही नीचे कर दी।अब मेरी चड्डी में खड़ा हुआ लौड़ा उनके सामने था। काजल उसे ग़ौर से देख रही थी। इसके पहले कि वह कुछ और सोच पाती मैंने अपनी चड्डी भी नीचे कर दी और जींस और चड्डी मेरे पैरों पर आ गयी और मेरे नीचे का पूरा हिस्सा नंगा उन दोनों औरतों के सामने था।
काजल की तो जैसे आँखें ही फट गयीं , वो बोली: इतना बड़ा?
मैंने उसे सहलाया और काजल को दिखाकर बोला: अरे ऐसा कोई बड़ा नहीं है , साधना तो बड़े आराम से ले लेती है। क्यों साधना?
साधना: हाऽऽय सच में बहुत मस्त मज़ा देता है। इसको मैं बहुत मिस करती हूँ।
मैंने देखा की काजल सबकी नज़र बचा कर अपनी सलवार से बुर को खुजा रही थी। मैं मन ही मन मुस्कुराया।
मैं: आओ ना साधना एक बार चुदवा लो इसके बाद काजल को भी मज़ा दे देंगे।
साधना: आह नहीं मुझे यूरीनरी इन्फ़ेक्शन हो गया है, अभी मैं नहीं ले सकती आपको भी इन्फ़ेक्शन हो जाएगा।
मैं: ओह फिर इसका क्या होगा? मैंने लौड़ा दबाकर कहा|
साधना: चूस दूँ क्या?
मैं: अरे इसे मुँह से ज़्यादा बुर की ज़रूरत है। काजल तुम ही अपनी बुर से दो ना।
काजल एकदम से चौक गयी और इस तरह की भाषा से भी वह हड़बड़ा गयी।
वह: नहीं नहीं ये कैसे हो सकता है? मैं शादी शूदा हूँ और मैं तो यहाँ अपनी बेटी की मजबूरी के वजह से ही आयी हूँ।
मैं: अरे तो ये तो देख लो कि मैं तुम्हारी बेटी को कैसे चोदूँगा । तुम पर प्रैक्टिकल कर के बता देता हूँ।
काजल: नहीं नहीं इसकी कोई ज़रूरत नहीं है।
तब मैं खड़ा हो गया और अपने पैरों से पैंट और चड्डी निकालकर सोफ़े पर बैठी काजल के पास आकर उसके मुँह के पास अपना लौड़ा लहराकर उसके होंठों से अपना लौड़ा छुआ दिया।
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वह एक मिनट के लिए सिहर गई और अपना मुँह पीछे कर लिया। अब मैं झुका और उसकी छातियों को कुर्ते के ऊपर से दबाने लगा और उसके होंठों पर अपना होंठ रखकर उनको चूसने लगा। वह मुझसे अलग होने के लिए छटपटाने लगी। मैंने अब भी उसकी छाती को दबाना जारी रखा। अब मैंने सलवार के ऊपर से उसकी बुर भी दबाने लगा। मैंने देखा कि उसकी सलवार नीचे से गीली थी।
अब उसका विरोध कम होने लगा था। तभी साधना उठकर आयी और बोली: काजल क्यों मना कर रही है, चुदवा ले ना , मैं ठीक होती तो मैं ही इसका मज़ा ले लेती। साधना मेरे लौड़े को सहलाकर बोली।
अब काजल ने मानो सरेंडर कर दिया। वह मेरा विरोध बंद कर दी। अब मैंने उसको अपनी बाँह में उठा लिया किसी बच्चे की तरह और जाकर बेडरूम में बिस्तर पर लिटा दिया। सबसे पहले मैंने अपनी शर्ट उतारी और पूरा नंगा हो गया। मैंने उसकी आँखों में अपने कसरती बदन के लिए प्रशंसा के भाव देखे। तभी मैंने देखा कि साधना भी वहाँ खड़ी थी।
मैंने साधना से कहा: तुम क़ुरती उतारो मैं सलवार उतारता हूँ। वह मुस्कुरा कर मेरा साथ देने लगी। जल्दी ही वह अब ब्रा और पैंटी में थी। पूरी तरह स्वस्थ बदन कोई चरबी नहीं। मज़ा आ गया देखकर। फिर मैं उसके ऊपर आकर उसके होंठ चूसने लगा और वह भी अपना हाथ मेरी कमर पर ले आयी और मेरी पीठ सहलाने लगी ।
अब मैंने उसकी ब्रा के हुक खोले और उसकी ३४ साइज़ की चूचियाँ दबाने और चूसने लगा। वह मस्ती से आहबह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठी। फिर मैंने उसके पेट को चूमते हुए उसकी गीली पैंटी उतारी और उसे सूँघने लगा। वह शर्माकर मेरी हरकत देख रही थी।
मैंने उसकी जाँघों को सहलाया और चूमा और फिर उसकी जाँघें फैलाके उसकी ४७ साल की बुर को देखा। पूरी चिकनी बुर थी और साफ़ दिख रहा था कि अच्छेसे चुदीं हुई बुर है। उसमें से गीला पानी निकल रहा था। मैंने झुक कर उसे चूमा और जीभ से कुरेदने लगा। वह उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ कर उठी। मैंने समय ख़राब किए बग़ैर अपना लौड़े का सुपाड़ा उसकी बुर के छेद में रखा और वह कांप उठी और बोली: आऽऽऽऽह धीरे से डालिएगा। आपका बहुत बड़ा है , मैंने इतना बड़ा कभी नहीं लिया है।
मैं: सच क्या तुम्हारे पति का छोटा है?
वो: उनका नोर्मल साइज़ का है पर आपका तो ज़्यादा ही बड़ा है और मोटा भी बहुत है ।
मैं: ठीक है मैं धीरे से शुरू करूँगा।
अब मैं धीरे से सुपाड़ा दबाया और वह उसकी बुर में धँसता चला गया। वह हाऽऽऽऽऽऽऽय्य कर उठी।
मैं : अरे तुम तो इसमे से आकाक्षा को भी बाहर निकाली हो इसलिए कोई समस्या नहीं होगी।
वो: आकाक्षा सिजेरीयन से हुई थी।
साधना: अरे मुझे भी पहली बार इनका लेने में थोड़ी तकलीफ़ हुई थी पर बाद में कोई समस्या नहीं थी और मज़ा ही मज़ा किया।
अब काजल के होंठ चूसते हुए और उसकी चूचियाँ दबाते हुए मैंने अपना लौड़ा अंदर करना शुरू किया। आधा लौड़ा अंदर जा चुका था और तभी मैंने ज़ोर से धक्का मारा और पूरा लौड़ा अंदर जड़ तक समा गया। वह अब हाऽऽऽऽऽय्य्य्य्य मरीइइइइइइइइइइइ कहकर थोड़ी सी छटपटाई और फिर शांत हो गयी। मैं भी रुककर उसके होंठ चूसता रहा और चूचियाँ भी चूसने लगा। निपल्ज़ को दबाने से उसकी मस्ती वापस आने लगी और जल्दी ही वह ख़ुद कमर हिलाकर मुझे इशारा कि चलो अब मुझे चोदो।
पर मैं उसके मुँह से सुनना चाहता था सो बोला: शशी मज़ा आ रहा है कि नहीं।
वो: आऽऽऽह हाँ आ रहा है।
मैं: तो चोदूँ अब?
वो : हाऽऽऽऽक्ययय हाँ।
मैं: हाँ क्या करूँ? साफ़ साफ़ बोलो।
वो: उइइइइइइइओ आऽऽऽऽह चोओओओओओओओओदो मैं मुस्कुराकर अब ज़ोर से चुदाई में लग गया और मेरे धक्कों से पलंग बिचारा भी कराह उठा और चूँ चूँ करने लगा। साधना वहाँ पलंग पर बैठ कर चुदाई का मज़ा ले रही थी, और अपनी बुर सहला रही थी।
अब काजल भी अपनी गाँड़ उछालकर चुदाई में मेरा साथ देने लगी। हम दोनों पसीने से भीग गए थे और तभी वो और मैं दोनों एक साथ चिल्लाए : हाऽऽऽऽऽऽय्य मैं झड़ीइइइइइइइइइइइइ और मैं भी ह्म्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा। वो चिल्लाई: मेरे अंदर मत गिराना।
मैंने समय रहते उसे निकाला और उसके दूध पर अपना वीर्य गिराने लगा और फिर उसके मुँह की तरफ़ भी अपना लौड़ा किया और उसका मुँह खुला और उसके अंदर मेरे वीर्य की एक पिचकारी चली गयी। वह उसे निगल गयी। अब मैंने अपना लौड़ा उसके मुँह में ठूँस दिया और वह प्यार से उसपर लगा वीर्य चाटने लगी और फिर चूस कर और चाट कर मेरे लौड़े को साफ़ कर दी। उसने अपनी छातियों के ऊपर गिरा वीर्य भी ऊँगली में लिया और चाटने लगी।
साधना: मज़ा आया काजल?
काजल शर्माकर: हाँ बहुत मज़ा आया। सच में आकाक्षा को बहुत मज़ा मिलने वाला है। पहली बार तो उसको लेने में थोड़ा दर्द होगा पर बाद में मज़े करेगी। वैसे इनका जूस भी बहुत गाढ़ा और स्वाद है। वह अपनी ऊँगली चाट कर बोली।
मैं: आकाक्षा के साथ तुम भी आ जाना और मज़े कर लेना माँ बेटी दोनों एक साथ। बिर्य उसके अंदर डालूँगा और चुदाई दोनों की करूँगा। बोलो ठीक है ना ?
काजल: नहीं नहीं आप उसे नहीं बताना कि मैं आपसे करवा चुकी हूँ वरना उसे बुरा लगेगा।
मैं: एक बात बताओ, तुम दोनों क्लब जाती हो माडर्न हो और ज़रूर बाहर भी मुँह मारती होगी।
वो दोनों एक दूसरे के देखने लगीं।
साधना: अब आपसे क्या छिपाना , हाँ हम शादी के बाहर भी मज़े ले रहे हैं। मेरा तो आपको पता ही है।
आजकल घर का घर में ही चल रहा है।मैं और बहू दोनों मेरे बेटे से चुदवा रही हैं। तुम भी बता दो काजल या मैं बोलूँ?इसका पति तो आर्मी में है यहाँ कम ही रहता है।
काजल: मैंने भी घर का घर में ही इंतज़ाम किया हुआ है। मेरा एक २२ साल का नौकर है वही मुझे मज़ा देता है। मैंने उससे बेटी को नहीं चूदवया क्योंकि वह काला है और मुझे गोरा बच्चा चाहिए। साधना मुझे बतायी थी कि आप बहुत गोरे हैं इसीलिए आपके पास आयी हूँ।
मैं: ओह तो तुम दोनों मज़े से चुदवा रही हो। बिलकुल सही है अगर मर्द मज़ा ना दे पाएँ तो क्या किया जाए।
काजल बोली: अब मैं बाथरूम जाती हूँ।
फिर हम सब अपने घर चले गए। आकाक्षा की चुदाई का कार्यक्रम अगले दिन १२ बजे दिन का बना था।
यह कहकर राज बोला: आऽऽऽऽऽऽहहह क्या चूस रही हो। हाऽऽय्य्य्य्य मैं गयाआऽऽऽऽऽऽ । और वह उसके मुँह में झड़ने लगा। रश्मि ने एक बूँद भी बाहर गिरने नहीं दिया और पूरा वीर्य गटक गयी। फिर रश्मि ने उसके लौड़े को बड़े प्यार से चाटकर साफ़ किया।
राज बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा।
राज: चलो खाना खाते हैं उसके बाद हम दुकान चलते हैं।
रश्मि: नीरू की चुदाई का क़िस्सा नहीं सुनाओगे?
राज: फिर कभी , वैसे उसमें कुछ ख़ास नहीं है ।वह मुझसे चुदीं और एक महीने में माँ बन गयी। प्यारी लड़की थी मज़े से चुदवाती थी।
फिर दोनों खाना खाकर जय से मिलने दुकान की ओर चल पड़े।
उधर जय खाना खाकर डॉली को फ़ोन किया।
जय: डॉली, कैसी हो?
डॉली: ठीक हूँ , आप मम्मी से मिले क्या?
जय: नहीं तो वो यहाँ हैं क्या?
डॉली: हाँ आपके पापा से मिलने गयी हैं।
जय: सिर्फ़ मेरे पापा तुम्हारे नहीं?
डॉली: सॉरी मेर भी पापा हैं।
जय : मैं अभी फ़ोन करके पूछता हूँ कहाँ है दोनों?
तभी उसने देखा कि रश्मि और राज अंदर आ रहे हैं।
वो: अरे वो दोनों आ गए हैं। मैं बाद में फ़ोन करता हूँ।
बाई।
डॉली: बाई।
जय ने देखा कि उसकी सास काली साड़ी में बहुत सुंदर लग रही थी। उसे लगा कि पापा का हाथ शायद उनके हिप्स पर थे, पर वह पक्का नहीं था।
जय आगे बढ़ा और अपनी सास के पैर छूये ।रश्मि ने उसे झुक कर उठाया और अपने गले से लगा ली। रश्मि की साड़ी का पल्लू गिरा और जय के सामने उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ थीं, गोरी और आधी ब्लाउस के बाहर ,मोटे चूचे । उसे अचानक याद आया कि वह उसकी सास है तो वो झेंपकर अपनी आँखें वहाँ से हटाया। सास के गले लगने पर उसके बदन की गंध और उसके बड़े चूचे जो उसकी छाती से थोड़ी देर के लिए ही सटे उसे बेचैन कर दिए।
अब वो सब काउंटर के पीछे बने ऑफ़िस में बैठे और चाय पीने लगे।
जय चाय पीते हुए बोला: मम्मी आप वापस जाओगी क्या आज? या रात रुकोगी?
रश्मि: अरे बेटा बस अभी वापस जाऊँगी। मेरा काम तो हो गया है। मैं तो समधी जी की अहसान मंद हूँ कि उन्होंने मेरी ज़ेवर को लेकर पूरी परेशानी को दूर कर दिया है।
राज: अरे रश्मि जी, सब कुछ इन बच्चों का ही तो है । जय , डॉली और रचना का।
रश्मि: रचना और उसके पति कब तक आएँगे?
जय: पापा, मेरी रचना दीदी से बात हुई है वह अकेली ही आएँगी शादी में । जीजा जी नहीं आ पा रहे हैं।
रश्मि: सगाई में भी वो रहती तो अच्छा होता।
जय: अरे USA से आना कौन सी छोटी बात है।
रश्मि: हाँ ये तो है। वो वहाँ जॉब करती हैं क्या?
राज: हाँ वो और दामाद दोनों बैंक में जॉब करते हैं।
अब दुकान पर आइ हो तो एक साड़ी अपने लिए और एक बहू के लिए पसंद करिए।
रश्मि: नहीं नहीं आप पैसे नहीं लोगे और मुझे बड़ा अजीब लगता है।
जय: मम्मी अपनी ही दुकान है, आप ऐसा मत बोलिए।
फिर जय रश्मि को साड़ी के काउंटर पर ले गया और रश्मि साड़ी का सिलेक्शन करके अपने ऊपर रख कर देखने लगी। जय ने देखा कि इस दौरान उसका पल्लू बार बार गिर जाता था। और जय के सामने उसकी भारी छातियाँ आ जाती थीं। वह थोड़ा बेचेंन होकर दूसरी तरफ़ देखने लगता। तभी रश्मि ने शीशे के सामने एक साड़ी लपेट कर अपने पिछवाड़े को देखा कि कैसी लगती है साड़ी। क्या दृश्य था जय का लौड़ा कड़ा होने लगा। क्या उभार था गाँड़ का आऽऽऽऽह। वो सोचा कि मम्मी इस उम्र में भी मस्त माल है।
फिर वह अपने को कोसने लगा कि छि कितनी गंदी बात है। डॉली को कितना ख़राब लगेगा अगर उसे भनक भी मिल गयी उसके विचारों की।
रश्मि: ठीक है बेटा ये ही रख लूँ ना? तुम्हें कैसी लगी?
जय हकलाकर: जी जी अच्छी है। आप ये भी रख लीजिए। यह कहकर उसने एक पैकेट रश्मि को दिया।
रश्मि: ये क्या है?
जय: डॉली की साड़ी, मैंने पसंद की है।आप उसे दे दीजिएगा।
रश्मि: अभी सगाई भी नहीं हुई और ये सब शुरू हो गया?
जय झेंप कर: क्या मम्मी जी आप भी मेरी टाँग खींच रही हैं।
उधर अमित का फ़ोन राज को आया।
अमित: क्या हाल है।
राज : बढ़िया।
अमित: दोनों काम हो गए?
राज: हाँ रश्मि ने ज़ेवर पसंद कर लिए हैं। और कौन सा दूसरा काम?
अमित: अरे उसे पटाने का काम और क्या?
राज हँसते हुए: हाँ यार वह भी हो गया। और बहुत अच्छे से हो गया। मैंने उसके तीनों छेदों का मज़ा ले लिया। क्या माल है यार।
अमित: यार बड़े बदमाश हो जो इतनी जल्दी से इतना मज़ा ले लिए।
राज हँसते हुए: अपना काम तो ऐसा ही है।
अमित: अरे भाई अब उसको वापस तो भेजो या वहाँ ही रात भर रख कर ठोकने का इरादा है?
राज कमिनी हँसी हँसकर : यार मन तो यही कर रहा है पर क्या किया जाए। वापस भेजता हूँ उसे । चलो फिर बात करेंगे।
फिर राज जय और रश्मि के पास आया और बोला: चलो सब काम हो गया? अमित का फ़ोन आया था , कह रहा था कि रश्मि जी को जल्दी से भेज दो। सो ,चलो अब मैं आपको बस अड्डे तक छोड़ आता हूँ।
रश्मि ने जय को गले लगाया और उसका माथा चूमा और राज के साथ साड़ियों के पैकेट लेकर कार में बैठी और कर बस अड्डे को चल पड़ी।
रश्मि: अमित भाई सब क्या बोले?
राज: वो पूछ रहा था कि रश्मि की चुदाई कर दी ना?
रश्मि: छी क्या बोल रहे हैं? वो ऐसा कभी नहीं पूछेंगे। आपने क्या बात दिया।
राज: हाँ मैंने बता दिया किहमारे सम्बंध अब बहुत मधुर हो गए हैं। आज मैंने तुम्हारे तीनों छेदों का मज़ा ले लिया है।
रश्मि: ही भगवान । आप कितनी गंदी बातें करते हो। कोई ऐसा भी बोलता है भला? भाई सब क्या बोले?
राज: वो बोला कि प्यासे को पानी देना पुण्य का काम है। हम दोनों प्यासे हैं और अपनी अपनी प्यास बुझा लिए तो उसने बुराई क्या है।
रश्मि उसकी जाँघ पर हाथ रखकर: आप किसी और को तो नहीं बताएँगे ना?
राज उसके हाथ को सहलाया और फिर उसके हाथ को उठाकर अपने लौड़े के ऊपर रखकर बोला: जानू, बस तुम इसकी प्यास बुझाती रहो, बाक़ी जो तुम चाहोगी, सब हो जाएगा।
रश्मि ने प्यार से लौड़े को पैंट के ऊपर से दबाकर कहा: मैंने कभी मना किया है। आप जब कहेंगे हाज़िर हो जाऊँगी।
राज ने भी हाथ बढ़ाकर उसकी साड़ी के ऊपर से बुर को दबाकर कहा: सच आज का मज़ा हमेशा याद रहेगा। क्या मस्त बुर और गाँड़ है तुम्हारी। चूसती भी बहुत बढ़िया हो। अमित की ट्रेनिंग पक्की है।
रश्मि: चूसना तो मैंने शादी के पहले ही सीख लिया था ।
राज: सच मे ? कौन था?
रश्मि हंस कर : अगली बार मिलूँगी तो बताऊँगी। चलिए आप हाथ हटाइए नहीं तो साड़ी भी गीली हो जाएगी।
राज: क्यों पैंटी तो पहनी हो? पेटिकोट भी है।
रश्मि: आपके छूने से बाढ़ आ जाती है वहाँ। बस अब हाथ हटायिए। यह कहकर वह अपना हाथ भी उसके पैंट से हटा लेती है।
बस अड्डे पहुँचकर राज बोला: अरे पैंट में लौड़ा अजस्ट करना पड़ेगा , ये तो एकदम खड़ा हो गया है।
रश्मि हँसते हुए बाहर आ गयी और राज भी पैंट ठीक करके बाहर आया।
फिर वह उसको बस पर चढ़ाकर वापस घर को चला गया।
शाम को शशी आइ तो वह अभी भी नींद में था। शशी चाय बनाकर लाई । राज फ़्रेश होकर सोफ़े पर बैठा था। उसने शशी को गोद में खींचकर कहा: और पिरीयड तो नहीं आया।
शशी: नहीं अभी तक नहीं आया।
राज : भगवान ने चाहा तो आएगा भी नहीं।
राज उसके पेट को सहलाते हुए उसकी चूचि दबाने लगा।
शशी: आऽऽऽह क्या कर रहे हैं। समधन को नहीं चोद पाए क्या? जो मेरे पीछे पड़े हो।
राज: अरे उसकी तो तीनों छेद का मज़ा के लिया। वो तो ४५ साल की है और तू तो अभी भी जवान है मेरी जान। ये कहते हुए उसने उसकी सलवार के ऊपर से उसकी बुर दबा दी।
शशी: आऽऽह तीन बार झड़ने के बाद अभी भी गरम हो रहे हैं। आप आदमी हो या राक्षश ?
राज: वो मेरी समधन जाते जाते भी मेरा लौड़ा गरम कर गई है , अब तुम ही उसे ठण्डा कर दो।
शशी मुस्कुरा कर बोली: मैं तो इसको शांत करने को हमेशा तैयार हूँ। ये कहते हुए उसने अपनी गाँड़ उठायी और लौड़े को दबा दिया।
राज मुस्कुरा कर उसकी सलवार खोल दिया और उसने पैंटी भी निकाल दी। राज उसको अपने सामने खड़ा करके उसकी बुर को चाटने लगा । वह जल्दी ही गरम होकर हाऽऽऽय्यय करने लगी। अब राज ने बैठे हुए अपनी पैंट और चड्डी उतार करके नीचे खिसका दी। उसने शशी को खींचकर अपने लौड़े को चूसने का इशारा किया। वह अब उसके पैरों के बीच घुटने के बल बैठ कर उसका लौड़ा चूसने लगी। अब राज ने उसको अपनी गोद में खींच कर उसकी टांगों को अपनी गोद के दोनों ओर किया और शशी ने भी अपनी गाँड़ उठाकर अपनी बुर के मुँह में लौड़े को रखा और धीरे से उसपर बैठने लगी। अब वह पूरा नीचे होकर उसका मोटा लौड़ा अपनी बुर में निगल चुकी थी।
राज ने उसके दोनों चूतरों को पकड़ा और उसकी कमर को उछालकर अपने लौड़े पर दबाकर चुदाई करने लगा। शशी भी हाऽऽऽऽय करके अपनी गाँड़ उछालकर उसके लौड़े पर ऊपर नीचे हो रही थी। राज ने अपनी एक ऊँगली में थूक लगाया और उसकी गाँड़ में डाल दिया। वह आऽऽऽऽऽऽह कर उठी और भी ज़ोर ज़ोर से चुदाई करने लगी। उसकी टाइट बुर में उसका मोटा लौड़ा जैसे फँस सा रहा था। राज ने महसूस किया कि जवान बुर आख़िर जवान ही होती है। सच में शशी की बुर रश्मि की बुर से बहुत टाइट थी। वह अब मस्ती से नीचे से धक्के मारने लगा और शशी की सिसकारियाँ निकलने लगीं। वह अब कुर्ते को उठाकर उसकी चूचियाँ भी ब्रा के अंदर हाथ डाल कर मसलने लगा था। उसके निपल्ज़ भी तन गए थे जिसे उसने मसल कर शशी को मस्ती से भर दिया।
वह उइइइइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ करके झड़ने लगी।
राज भी अपना लौड़ा उछालकर उसकी बुर में झड़ गया। अब शशी जब उसके लौड़े के ऊपर से उठी तो उसकी जाँघों से उसका और राज का काम रस बह रहा था।
अब दोनों फ़्रेश होकर बैठे तो शशी ने रश्मि की चुदाई की पूरी कहानी सुनी और हँसकर बोली: आप भी एक दिन में बिचारि का कोई छेद नहीं छोड़े। सभी में लौड़ा पेल दिए।
राज भी कमीनी हँसी हँसने लगा। उस दिन और कुछ ख़ास नहीं हुआ।
रात को राज ने रचना से बात की फ़ोन पर जय के सामने। वह बोली: पापा मैं शादी में पक्का आऊँगी। सगाई में मुझे माफ़ कर दो।
जय: ठीक है दीदी शादी में ख़ूब मस्ती करेंगे। जीजा जी को भी ले आओ ना।
रचना: वो नहीं आ पाएँगे। लो पापा उनसे बात करो।
राजीव( रचना का पति) : नमस्ते पापा जी, सच में मुझे छुट्टी नहीं मिल रही है। पर मैं अभी भी कोशिश कर रहा हूँ। अगर छुट्टी मिली तो मैं ज़रूर आऊँगा।
राज: ठीक है बेटा कोशिश करना। अच्छा अब रखता हूँ।
जय: पापा लगता है जीजा जी भी आ ही जाएँगे।
राज: उसका पक्का नहीं है।पर हमारी दुलारि बेटी तो आएगी ही।
तभी उसकी निगाह एक ग्रूप फ़ोटो पर पड़ी जिसमें पायल अपने दोनों बच्चों के साथ थी। उस फ़ोटो में जय बहुत शांत दिख रहा था और रचना बहुत चुलबुली दिख रही थी। रचना की बड़ी बड़ी छातियाँ टी शर्ट में जैसे फटी जा रही थी। राज को अपने लौड़े में थोड़ी सी अकड़न महसूस हुई पर उसने अपने सिर को झटका और अपने आप पर कंट्रोल करके सोने चला गया।
अगले कुछ दिनों में सब सगाई की तैयारी में व्यस्त रहे। जय और डॉली प्यारी प्यारी बातें करते रहते। उधर राज रश्मि से गंदी बातें करता रहता। शशी की चुदाई चालू थी और आख़िर एक दिन शशी बोली: साहब , एक महीने से ऊपर हो गया है मेरे पिरीयड को आए हुए।
राज: ओह बढ़िया, चलो मैं अभी मेडिकल स्टोर से प्रेग्नन्सी टेस्टिंग की किट लेकर आता हूँ। यह कहकर वो किट लेने गया और लेकर वापस आया। वो शशी को समझाने की कोशिश किया कि उसको कैसे उपयोग करना है, पर शशी परेशान होकर बोली: मुझे समझ नहीं आ रहा है।
राज: अच्छा चलो बाथरूम में चलते हैं। वहाँ पहुँचकर वह उसको सलवार और पैंटी खोलने को बोला। वह दोनों खोल दी और कमर के नीचे नंगी हो गयी। अब वह उसको नीचे बैठ कर मूतने को बोला और किट की स्ट्रिप हाथ में ले लिया और उसके सामने ख़ुद भी बैठ गया ।वह सी सी की आवाज़ के साथ मूतने लगी और राज ने स्ट्रिप को उसके पिशाब की धार के सामने रखा। अब राज ने देखा कि स्ट्रिप गीली हो गयी है और उसका हाथ भी पेशाब से गीला हो चुका था। उसने खड़ा होकर स्ट्रिप को ध्यान से देखा। थोड़ी ही देर में स्ट्रिप ने रंग बदला और राज मुस्कुरा उठा। अब वह अपना हाथ धोया और कमर से नीचे नंगी खड़ी शशी को गोद में उठाकर चूमने लगा।
फिर वह उसे बिस्तर पर लिटाया और बोला: शशी तू प्रेगनेनेट हो गयी मेरी जान। यह कहकर वह उसे बेतहाशा चूमने लगा।
शशी भी ख़ुशी के मारे उससे लिपट गयी और उसको चूमते हुए बोली: साहब, आपने अपना वादा निभा दिया और मुझे एक महीने ही में गर्भ से कर दिया। मैं ये आपका अहसान कभी नहीं भूल पाऊँगी। अब शशी उठी और उसका पजामा खोल दिया और चड्डी नीचे करके उसके नरम सोए हुए लौड़े पर चुंबनों की बरसात कर दी। फिर नीचे जाकर उसके बड़े बॉल्ज़ को भी चूमे जा रही थी। फिर वह बोली: सच में मेरा तो जीवन ही आपने बचा लिया। अब वह मेरी कुतिया सास मुझे ताना नहीं दे सकेगी। मेरा पति भी बहुत ख़ुश होगा। यह कहकर वह फिर लौड़े और बॉल्ज़ को चूमने लगी।
राज उसे खींच कर अपने गले से लगा लिया और बिस्तर से उठके अपना पजामा पहना और फिर किचन से मिठाई लाया और शशी को अपनी गोद में बिठाकर खिलाया और ख़ुद भी खाया। थोड़ी देर तक उसने शशी को चूमा और प्यार किया । फिर वह उठकर तिजोरी खोला और उसमें से सोने की एक चेन निकाल कर शशी को अपनी गोद में बिठाकर उसके गले में पहना दिया और बोला: शशी, मेरी तरफ़ से गर्भवति होने की बधाई और उपहार।
शशी की आँख में आँसू आ गए , वह बोली: माँ भी बनाया और उपहार भी दे दिया। आप कितने अच्छें हैं।
राज उसकी चूचि दबाकर बोला: देखो वैसे मैं हूँ तो कमीना पर इन बातों में मेरा विश्वास है कि बच्चा तो भगवान की मर्ज़ी से ही होता है। और सच में आज मैं बहुत ख़ुश हूँ।
उस दिन शशी बड़े देर तक चुदवाइ और उसके जाने के बाद राज सोचने लगा कि अभी भी इस उम्र में मर्दानगी है मुझमें। और वो मुस्कुरा उठा और अपने लौड़े पर हाथ फेर कर अपनी ख़ुशी को महसूस करने लगा।
सगाई के एक दिन पहले रश्मि का फ़ोन आया : कैसे है आप?
राज: बस तुम्हारे ख़यालों में गुम हूँ।
रश्मि: यहाँ मेरी जान निकले जा रही है और आप हैं कि बस मस्ती कर रहे हैं।
राज: अरे मुझे बताओ ना क्या समस्या है।
रश्मि: बस सहमी हुई हूँ कि सब कुछ ठीक से हो जाए।
राज: अरे घर की ही बात है, अगर कुछ गड़बड़ हो भी गयी तो तुम सब तो अपने ही हो। चिंता छोड़ो।
रश्मि: यह कह कर आपने मेरा बोझ कम कर दिया ।
राज: तो कल तुम सब कितने बजे आ जाओगे?
रश्मि: हम सब दो कार से करीब ६ बजे शाम को होटेल रॉयल में पहुँचेंगे। आप वहाँ कितने बजे पहूँचोगे?
राज: हम लोग एक घंटे पहले पहुँच कर पूरा इंतज़ाम चेक कर लेंगे। हमारे तरफ़ से हमने क़रीब १० परिवारों को बुलाया है। और तुम लोग भी क़रीब १० लोग होगे तो एक अच्छा सा पारिवारिक महोल में सगाई की रस्म हो जाएगी।
रश्मि: ठीक है बस सब कुछ बढ़िया से हो जाए।
राज: सब बढ़िया ही होगा। मैंने दो कमरे भी होटेल में बुक किए हैं। एक में दारू पार्टी होगी, सगाई के बाद और दूसरा कमरे में मैं और तुम मस्ती करेंगे।
रश्मि: आप भी ना, मस्ती फिर कभी कर लीजिएगा। बस सगाई अच्छी तरह से हो जाए। और हाँ आपने वो सेट जो पोलिश करके भिजवाया था डॉली को बहुत पसंद आया है।
राज: अरे अब सब कुछ तो बच्चों का ही है। चलो कल मिलते है। बहुत दिन हो गए तुमको देखे हुए।
राज ने फ़ोन काटकर अमित को लगाया। वो बोला: हाय अमित क्या हाल है? उसने उसे भाई सांब बोलना बन्द कर दिया था।
अमित: बढ़िया है , बस सगाई की तैयारी में लगे हैं।
राज: यार मैंने कल दारू और रश्मि की चुदाई का भी इंतज़ाम किया है। ठीक है ना?
रश्मि: दारू तो सही है, पर सबकी मौजूदगी में चुदाई कैसे करोगे?
राज: मैंने प्लान बनाया है। मिलने पर बताऊँगा।
अगले दिन सगाई थी। राज ने सारा समान सूट्केस में पैक किया और जय और शशी को लेकर होटेल पहुँचा। वहाँ होटेल वालों ने सभी तैयारियाँ पूरी कर रखीं थीं। वह शशी को सामान का ध्यान रखने को बोलकर बाक़ी का इंतज़ाम चेक करने लगा और पंडित को भी फ़ोन कर दिया।
ठीक समय पर अमित , रश्मि, डॉली , उसका भाई और अमित की बीवी और दो बच्चे जो की नौकरी करते थे वहाँ पहुँच गए। सब एक दूसरे से मिले। फिर जय के दोस्त और उनके पारिवारिक मित्र भी आ गए। राज रश्मि से मिला और उसे बधाई दिया। आज वह गुलाबी रंग की एक बहुत सुंदर साड़ी में थी जो कि उसकी दुकान से ही ली थी। उसने कान में वो ear rings भी पहने थे ज़ो राज ने उसे उपहार में दिए थे। डॉली भी बहुत सुंदर लग रही थी और उसने भी राज के दिए हुए ज़ेवर ही पहने थे और साड़ी भी जय की भेंट की हुई पहनी थी।
राज ने ध्यान दिया कि सच में आज दोनों माँ बेटी बहुत सुंदर लग रहीं थीं।
वो अमित से बोला: यार आज रश्मि तो मस्त दिख रही है।
अमित: सगाई पर ध्यान दो भाई मेरे।
राज: जब इतनी सुंदर चीज़ हो तो साला ध्यान तो भटकेगा ही ना? देखो क्या मस्त पिछवाड़ा है साला मेरा तो खड़ा होने लगा है।
अमित: चलो अभी सगाई पूरी करते हैं। ये सब बाद में देखेंगे।
राज: ठीक है यार यही सही।
सगाई की रीति चालू हुई। पंडित ने मंत्र पढ़े और छोटा सा हवन हुआ। फिर जय और डॉली ने एक दूसरे को अँगूठी पहनाई। सबने तालियाँ बजाईं और अब वो दोनों सबसे आशीर्वाद लेने लगे। राज के जब वो दोनों पैर छुए तो उसने उन दोनों की पीठ पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। तभी राज का हाथ डॉली की ब्रा के स्ट्रैप पर पड़ा और वह सोचा कि ३४ की ब्रा है। फिर जब डॉली उठने लगी तो वह झाँककर अन्दाज़ लगाने की कोशिश किया कि दूध सच में ३४ साइज़ के हैं क्या। और उसको साड़ी के साइड से उसके ब्लाउस में कसे दूध दिखे और वो रश्मि की बात से सहमत हो गया कि साइज़ तो वही है। पर क्या बिना चुदवाए उसके इतने बड़े हो गए हैं? फिर उसने अपने सिर को झटका दिया और सबको बधाइयाँ देने लगा। चाय नाश्ता के बाद सब मेहमान चले गए ख़ाली जय का एक दोस्त और उसकी बहन वहाँ रह गए। राज ने शशी को भी मिठाई और कुछ पैसा दिया और ऑटो से घर जाने को कह दिया।
अब राज ने सबको एक सुईट में आने को बोला। वहाँ होटेल के कमरे में कुर्सियाँ और सोफ़े लगे थे। वहाँ बग़ल के कमरे से खाने और पीने का इंतज़ाम किया हुआ था। सब लोग बैठ गए । अमित और रश्मि का परिवार और राज और जय का दोस्त और उसकी बहन ही थे।
वेटर ने सबको ड्रिंक्स दिया। किसी ने कोल्ड ड्रिंक लिया और किसी ने वाइन और किसी ने विस्की। अमित और राज विस्की लिए । अमित के बेटे और बेटी ने वाइन ली और उन दोनों ने रश्मि को भी वाइन का ग्लास पकड़ा दिया। डॉली और जय ने कोल्ड ड्रिंक लिया। जय के दोस्त और उसकी बहन ने भी कोल्ड ड्रिंक लिया। स्नैक्स सर्व हो रहे थे और हँसी मज़ाक़ चल रहा था। राज की नज़र बार बार जय के दोस्त की बहन पर थी। वह क़रीब १८ साल की थी और उसने मिनी स्कर्ट और टॉप पहना था और बहुत सेक्सी थी।
राज उठकर दूसरे कमरे में गया और वेटर को बोला: वो जो लड़का और लड़की एक साथ बैठे हैं उनकी कोल्ड ड्रिंक में विस्की मिला दो और कम से कम दो गिलास पिला दो।
इधर रश्मि और अमित के बेटा और बेटी वाइन पीकर बहकने लगे थे। और जल्दी ही जय का दोस्त प्रकाश और उसकी बहन पंडित भी नशे में झूमने लगे। अब राज ने जय और डॉली से कहा: बेटा तुम दोनों मेरी कार ले कर जाओ और एक दूसरे को और अच्छी तरह से जानो। वो दोनों ख़ुश होकर चले गए।
अब राज उठकर पंडित के बग़ल में बैठा और उससे सामान्य बातें करने लगा। वह ११ वीं में पढ़ती थी। जल्दी ही वह उसके जाँघ पर हाथ रखा और वह भी नशे के कारण मज़े में थी। राज ने म्यूज़िक बजवाया और सब झूमने लगे। जल्दी ही प्रकाश सोफ़े पर लुढ़क गया। अब राज ने देखा कि रश्मि और अमित भी नाच रहे थे। उधर अमित के बच्चे भी नशे में लुढ़क रहे थे। राज ने अमित और रश्मि को कहा: चलो दूसरे कमरे में चलते हैं। और पंडित को भी क़रीब घसीटते हुए अपना सहारा देकर पास के कमरे में ले गया। अब चारों एक कमरे में थे और राज ने पंडित को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर आकर उसे चूमने लगा। बेचारी मासूम लड़की नशे में थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। तभी उसने उसका टॉप ऊपर किया और ब्रा के अंदर हाथ डालके उसकी छोटी सी चूचियाँ बाहर की और आधे बने छोटे से निपल्ज़ को चूसने और मसलने लगा।
अमित और रश्मि आँखें फाड़े उसकी हरकत देख रहे थे। फिर वह नीचे आकर उसका स्कर्ट ऊपर किया और उसकी गोरी जाँघों को चूमते हुए उसकी पैंटी नीचे कर दिया। अब उसके सामने काले और भूरे रोयों वाली मासूम से बुर थी। वह पागल होकर उसे चूसने लगा। अब पंडित भी हाऽऽयय्यय करने लगी और वह चूसता ही चला गया और पंडित हाय्ह्य्य्य्य्यू कहकर झड़ने लगी। फिर उसने एक उँगली उसकी टाइट बुर में डाली और बोला: आऽऽऽह ये तो कुँवारी है। वह अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया और उसको मसलने लगा।
अब रश्मि बोली: आप अभी इसको वापस कमरे में छोड़ कर आओ। बहुत छोटी है यह, आपके ऊपर रेप का केस बनेगा। वह आपका मोटा वाला नहीं ले पाएगी। फट जाएगी उसकी। ये कहते हुए उसने क़रीब ज़बरदस्ती उसका हाथ उसकी बुर से हटाया। फिर वह लड़की को सहारा देकर उठायी और उसके कपड़े ठीक कर के दूसरे कमरे में छोड़ कर वापस आइ।
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अब भी राज कमर के नीचे नंगा था और अमित को बोल रहा था: क्या यार इस रश्मि ने सारा मज़ा ख़राब कर दिया। क्या मस्त माल थी चोदने में मज़ा आ जाता।
अमित रश्मि को देखकर: अरे यार रश्मि ने ठीक किया तुमको बचा लिया। वो बहुत ही मासूम सी बच्ची थी, फट जाती उसकी।
राज अपना लौड़ा हिलाकर रश्मि को बोला: चलो अब तुम ही इसका इलाज करो।
रश्मि हड़बड़ाकर अमित को देखी और अमित मुस्कुराया और बोला: अरे इसमें क्या शर्माना चलो शांत कर दो इसके लौड़े को। मैं बाहर जाता हूँ।
राज: अरे तुम क्यों बाहर जाओगे? कभी थ्रीसम नहीं किया क्या?
अमित: नहीं यार नहीं किया।
राज : तो आज कर लो, बहुत मज़ा आएगा। रश्मि , तुमको कोई ऐतराज़ है क्या हम दोनों से एक साथ चुदवाने में?
रश्मि: हे भगवान। ऐसे भी कोई किसी औरत से पूछता है भला?
राज: इसका मतलब नहीं है। अब वह दोनों बिस्तर के पास रखे सोफ़े पर बैठी रश्मि के पास आते हैं। अमित उसकी एक तरफ़ और राज दूसरी तरफ़ बैठ जाते हैं। राज उसके गाल चूमने लगता है। अमित भी उसका दूसरा गाल चूमता है। फिर दोनों उसकी गरदन और बारी बारी से होंठ चूसते हैं।
अब राज उसकी साड़ी का पल्लू गिरा देता है। ब्लाउस में तने उसके विशाल दूध देखकर दोनों उसको दबाने लगते हैं। रश्मि भी अपना हाथ बढ़ाकर राज का नंगा लौड़ा सहलाती है और दूसरे हाथ से अमित के लौड़े को भी पैंट के ऊपर से दबाती है । अमित उसके ब्लाउस के हुक खोलता है और ब्लाउस निकाल देता है। दोनों उसकी एक एक नंगी बग़ल चाटने लगते हैं। फिर उसकी ब्रा भी निकाल कर दोनों एक एक दूध मुँह में लेकर चूसने लगते हैं। रश्मि आऽऽऽऽऽऽहहहह करने लगती है। राज और अमित उसकी साड़ी और पेटिकोट को टांगों से ऊपर उठाकर उसकी जाँघ सहलाते है और पूरे टाइम दूध पीते रहते हैं। राज का पंजा उसकी पैंटी में क़ैद बुर पर पड़ता है और वह उसे दबाकर रश्मि की हाऽऽऽऽऽऽयययय निकाल देता है।
अमित उसकी साड़ी खोलता है और पेटीकोट का नाड़ा खोलता है और रश्मि अपनी गाँड़ उठाकर पेटिकोट और पैंटी भी निकल जाने देती है। अब अमित उसकी चूचि दबाकर चूसता है और राज पूरा नंगा होकर उसके सामने कारपेट पर बैठ कर उसकी टाँगें अपने कंधे पर रखता है और उसकी बुर चूसने लगता है। रश्मि हाय्य्य्य्य्य्य्यू मरीइइइइइइइइइइइइइ चिल्लाकर मज़े से अपनी गाँड़ उछालकर अपनी बुर उसके मुँह में दबाती है। अमित भी खड़ा होकर पूरा नंगा हो जाता है। उसका लौंडा सामान्य ६ इंच का और थोड़ा मोटा था। रश्मि उसका लौड़ा चूसने लगती है। फिर राज अपने मुँह को और नीचे करके उसकी गाँड़ के छेद पर ले जाता है और उसकी गाँड़ को जीभ से चाटने और चोदने लगता है। रश्मि बेहाल होकर गूँ गूँ करती है और तभी राज खड़े होकर रश्मि को बिस्तर पर आने को कहकर ख़ुद बिस्तर पर लेट जाता है। रश्मि राज के ऊपर आकर उसके होंठ चूमने लगती है और राज उसके चूतरों को दबाकर उसको फैलाता है और गाँड़ में एक ऊँगली डालता है। रश्मि उइओइइइइइओ करती है।
राज: मैं बुर में डालता हूँ तुम गाँड़ में थूक लगा कर डालो।
रश्मि: आऽऽऽह नहीं, मेरे पर्स में क्रीम है प्लीज़ उसको लगाइए, सूखे में दर्द होता है।
अब रश्मि राज के लौंडे को चूसकर गीला करती है और उस पर बैठकर अपनी बुर खोलकर लौड़े को अंदर करती हुई उस पर बैठती चली जाती है। तब तक अमित भी क्रीम लेकर अपने लौड़े पर मलता है और फिर दो ऊँगली में क्रीम लेकर उसकी गाँड़ के अंदर भी डाल देता है। फिर वह ऊपर आकर उसकी गाँड़ में अपना लौड़ा डालता है और दबाते हुए पूरा अंदर कर देता है। तभी उसको राज के लौंडे का भी अंदर ही अंदर अहसास होता है। अब रश्मि उछल कर अपनी बुर और गाँड़ चुदवाने लगती है। उसकी वासना अब अपनी चरम सीमा पर थी और वह उइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ और जोओओओओओओओर से चोओओओओओओओओदो आऽऽऽऽहहहह फ़ाआऽऽऽऽऽऽड़ दो। हाऽऽऽऽयय्यय कितना मज़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ है चिल्ला रही थी। पलंग तोड़ चुदाई चालू थी और दोनों मर्द पूरे ज़ोर से उसकी चुदाई में लगे हुए थे। सबकी कमर बुरी तरह से हिल रही थी। कमरे में पलंग भी आवाज़ कर रहा था और वह तीनों भी सिसकारियाँ भर रहे थे। रश्मि की चूचियाँ उछलने से ऊपर नीचे हो रहीं थीं। उनको कभी अमित और कभी राज दबाकर या चूसकर उसकी हालत और ख़राब कर दिए थे। अचानक रश्मि चिल्लाई: उइइइइइइइइ मैं तो गईइइइइइइइइइइ। अब अमित और राज भी अपनी गति बढ़ा दिए और ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगे। फिर तीनों लेटकर सुस्ताने लगे।
राज रश्मि की चूची दबाते हुए: जान मज़ा आया?
रश्मि: आऽऽऽऽह हाँ बहुत मज़ा आया। सच मुझे पता नहीं था कि थ्रीसम में इतना आनंद आता है।
अमित: सच यार हम दोनों का लौड़ा एक पतली सी दीवार से अलग था और मुझे लग रहा था कि वो आपस में रगड़ भी रहे थे। क्या फ़ीलिंग थी।
रश्मि उठी और उसकी जाँघों में सफ़ेद रस लगा हुआ था। वह फ़्रेश होकर आयी और कपड़े पहनने लगी। अब अमित भी बाथरूम में गया और राज उठकर ब्लाउस और पेटिकोट पहन रही रश्मि के पीछे आया और उसकी चूचियाँ दबाते हुए अपना लौड़ा उसके चूतरों पर रगड़ते हुए बोला: अभी रुको ना एक राउंड और करते हैं।
तभी अमित बाहर आया और बोला: यार देर हो जाएगी वापस भी जाना है। फिर आ जाएँगे हम दोनों।
रश्मि: हाँ इस बार आपके घर आएँगे और फिर हम तीनों दिन भर मस्ती करेंगे। ठीक है?
राज उसके होंठ चूमा और बोला: ठीक है जान जैसे तुम कहो। फिर सबने कपड़े पहने और दूसरे कमरे में पहुँचे और तभी जय और डॉली भी आ गए। फिर सबको उठाया गया और सब झूमते हुए कार में आकर बैठे और रश्मि अपने परिवार के साथ वापस चली गयी और राज पंडित को सहारा देकर कार के पीछे बैठा और राकेश और जय सामने बैठे। जय कार चलाते हुए बातें कर रहा था और राज फिर से अधलेटि पंडित की जाँघ सहलाने लगा और उसकी बुर में पैंटी को साइड करके ऊँगली फेरने लगा। वह फिर से गीली हो गयी और आऽऽझ की आवाज़ निकालने ही वाली थी कि उसके मुँह में हाथ रखकर उसकी आवाज़ को रोकने में सफल हो गया। वह उसकी चूचि दबाकर उसकी बुर में ऊँगली करके उसको दस मिनट में फिर से झाड़ दिया। वह नींद में लग रही थी। अब राज ने अपने जेब से अपना विज़िटिंग कार्ड निकाला और उसके पर्स में डाल दिया।
जब उनका घर आया तो दोनों भाई बहन उतरे तब पंडित मुस्कुरा कर बोली: अंकल थैंक्स । फिर वह गाँड़ मटकाते हुए चली गयी। राज को समझ नहीं आया कि क्या वो होश में थी और मज़े से उसे सब कुछ करने दे रही थी। राज सोचने लगा कि मेरा नम्बर तो मैंने उसे दे ही दिया गई अगर चुदवाना होगा तो साली फ़ोन करेगी। अब वह अपना लौड़ा मसल कर उसकी छोटी मगर टाइट चूचियों का सोचने लगा। तभी घर आ गया।
राज घर में जय से बोला: सगाई ठीक से हो गई ना?
जय: जी पापा, सब बड़े ख़ुश थे। आपने दारू का चक्कर क्यों चलाया?
राज: अरे मेरे इकलौते बेटे की सगाई थी कोई कमी थोड़ी करनी थी। ये बताओ डॉली और तुम्हारे में क्या रहा?
जय: पापा आप भी ना, बस सब नोर्मल था और हम एक दूसरे को समझने की कोशिश कर रहे थे।
राज: शाबाश बेटा जितना एक दूसरे को समझोगे उतनी ही शादी सफल होगी।
जय: जी पापा अब सोया जाए। गुड नाइट कहकर वो चला गया।
राज भी अपना लौड़ा दबाकर पंडित की कुँवारी जवानी का सोचकर सो गया।
पर जय की आँखों में नींद कहाँ थी। आज का दिन उसके लिए बहुत ख़ास था। वह याद करने लगा कि आज क्या क्या हुआ। नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी।
जय को नींद नहीं आ रही थी, उसकी आँखों के सामने डॉली का चेहरा और उसका कसा हुआ बदन आ रहा था । दरअसल में जय एक शरीफ़ लड़का था और उसने कभी भी किसी लड़की के साथ प्यार या सेक्स नहीं किया था। आज जब उसके पापा सगाई के बाद उसे डॉली को घुमाने को बोले, तो वह थोड़ा नर्वस सा हो गया था। पर डॉली के सरल स्वभाव ने उसे जल्दी ही सामान्य कर दिया। वह डॉली को कार से एक पार्क में ले गया , जहाँ उनके जैसे ही और जोड़े भी थे।
पार्क में वो दोनों एक अलग सी बेंच पर बैठे और बातें करने लगे। डॉली उसे अपने भाई अपनी माँ और अपने स्वर्गीय पापा के बारे में बताने लगी। फिर वह अपनी पढ़ाई और अपने दोस्तों के बारे में बताई ।
तभी जय ने उसको टोका: क्या तुम्हारा कोई बॉय फ़्रेंड भी था?
डॉली: नहीं कभी नहीं, इस बारे में शुरू से ही पक्के इरादे की थी कि मैं उसी से प्यार करूँगी जिससे मेरी शादी होगी। आपकी कोई गर्ल फ़्रेंड है?
जय: मैं भी तुम्हारी तरह सोचता हूँ। अब तुम ही मेरी गर्ल फ़्रेंड होगी। इस पर दोनों हँसने लगे। वह बोला: डॉली जब तुम हँसती हो तो बड़ी प्यारी लगती हो।
डॉली: इसका मतलब वैसे प्यारी नहीं लगती?
जय: अरे नहीं, मेरा ये मतलब नहीं था। वो दोनों फिर से हँसने लगे। तभी अचानक थोड़ी हवा चलने लगी और मौसम ख़राब होने लगा। शाम का समय था और पार्क में काफ़ी रौशनी थी। हवा चलने से डॉली का पल्लू उड़ा और नीचे को गिर गया। जय की आँखें उसके कसे हुए ब्लाउस पर गयीं और वह थोड़ा सा उत्तेजित महसूस करने लगा। अब डॉली ने अपना पल्लू ठीक किया। तभी हल्की सी बारिश होने लगी। वो दोनों भाग कर थ्रीडी दूर पर एक पेड़ के नीचे आ गए। अब पार्क ख़ाली सा हो गया था। जय ने डॉली का हाथ पकड़ा और कहा: देखो मौसम भी आशिक़ाना हो रहा है।
डॉली: सर्दी लग गयी तो छींकते रहना। तभी जय ने उसको अपने पास खिंचा और बोला: लगने दो सर्दी, तुम इलाज कर देना। डॉली भी उसकी छाती पर सिर रख कर बोली: अब तो सर्दी लग ही नहीं रही।
जय उसकी पीठ सहलाकर बोला: अब तुम्हारे बदन की गरमी जो महसूस हो रही है।
डॉली हँसकर: धत्त ऐसा क्यों बोले?
इसी तरह वो दोनों छोटी छोटी मीठी सी बातें कर रहे थे तभी उनको कुछ आवाज़ सुनाई पड़ी जो कुछ दूरी पर एक पेड़ के पास से आ रही थी। वो समझ गए की उस पेड़ के पीछे भी उनकी तरह एक जोड़ा है। जिस पेड़ के नीचे ये दोनों खड़े थे उसने एक बड़ी शाखा V के आकर की थी और और उसके पीछे से वो दूसरे पेड़ को देख पा रहे थे। ये कुछ अंधेरे में थे , इसलिए दूसरा जोड़ा इनको अब तक नहीं देख पा रहा था।
अब जय ने उस V के गैप से झाँका और सन्न रह गया। वहाँ एक क़रीब उसकी उम्र का ही एक नौजवान एक जवान लड़की का कुर्ता उठाकर उसकी ब्रा में से उसके गोल गोल संतरों को दबाकर चूस रहा था।
लड़की भी उसके सिर को अपनी छाती पर दबाए जा रही थी।
डॉली : क्या देख रहे हो?
जय ने उसे चुप रहने का इशारा किया और देखने को बोला: अब डॉली भी देखी और बुरी तरह से चौक गयी। उसने जय को देखा जिसकी आँखें वहीं चिपकी हुई थीं। वो भी देखने लगी। अब वह लड़का नीचे बैठा और उसने उसकी सलवार खोल दी। अब वह पैंटी को नीचे किया और उसकी बुर में अपना मुँह घुसेड़ दिया। अब लड़की की हल्की सी सिसकारियाँ सुनाई पड़ने लगी।
इधर जय का लौड़ा भी तन गया था और उससे सटी डॉली की जाँघ पर रगड़ रहा था। डॉली की भी सांसें फूलने लगी थीं। अब डॉली भी जय से और ज़ोर से चिपक गयी थी। जय के हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुए नीचे जाकर उसकी नंगी कमर पर घुमने लगे थे। उधर वो लड़का उसके चूतरों को दबाकर उसकी बुर चाटे जा रहा था। अब वह उठा और उसने अपनी पैंट का ज़िपर खोला और अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया। जय ने देखा कि सामान्य साइज़ का ही था।
अब डॉली ने अपना मुँह घुमा लिया और जय से बोली: चलिए यहाँ से अब । बहुत हो गया।
जय उसको अपने से लपेट कर बोला: फ़्री में ट्रेनिंग मिल रही है , ले लेते हैं ना। मैंने कभी ये सब किया नहीं है। और शायद तुमने भी नहीं किया होगा।
डॉली: शायद का क्या मतलब? मैंने सच में ऐसा कुछ नहीं किया है।
जय : देखो वो क्या कर रही है? अब डॉली ने मुँह घुमाया और देखा कि अब लड़की नीचे बैठी है और उसके लौड़े को प्यार से चूस रही है। फिर उस लड़के ने लड़की को उठाया और पेड़ के सहारे से उलटा होकर झुकने को बोला। फिर वह उसके पीछे से आकर उसकी बुर में अपना लौड़ा डाला और उसकी चूचियों को दबाकर उसे चोदने लगा। वह लड़की अब आऽऽऽह और हाऽऽय्यय करके अपनी गाँड़ पीछे करके चुदवाने लगी । जय और डॉली की आँखें जैसे वहाँ उसके अंदर बाहर हो रहे लौड़े पर ही चिपक गयीं।अब जय का हाथ डॉली के उभरे हुए चूतरों को दबा रहा था और डॉली की बुर भी गीली हुए जा रही थी। अब जय ने उसका हाथ पकड़कर अपने पैंट के ऊपर से लौड़े पर रखा और डॉली भी उत्तेजनावश उसका विरोध ना कर उसे दबाने लगी। जय का एक हाथ ब्लाउस में गया और वह उसकी चूचि को हल्के से दबाने लगा। अब डॉली भी मस्ती में आकर हाऽऽऽय्य कहकर बोली: आऽऽहाह क्या कर रहे हैं? शादी के पहले ये सब ठीक नहीं है।
तभी वहाँ वह जोड़ा फ़च फ़च की आवाज़ के साथ ज़बरदस्त चुदाई किए जा रहा था। और फिर वो लड़की चिल्लाई : उईइइइइइइइइइइइइ मैं गयीइइइइइइइइइ।
उधर लड़का भी ह्म्म्म्म्म्म्म्म आऽऽऽऽऽह करके उसकी बुर में अपना माल गिराने लगा। फिर वह उसकी छोड़कर ज़मीन में बैठ गया और उसका नरम होता लौड़ा अभी भी गीला होकर लटका सा दिख रहा था।
लड़की भी अब अपना रुमाल लेकर अपनी बुर साफ़ की और फिर झुक कर बड़े प्यार से उसका नरम लौड़ा भी साफ़ की। फिर दोनों ने अपने कपड़े पहने और एक दूसरे के होंठों को चूमा और वहाँ से चलने लगे। लड़के ने पूछा: भाभी मज़ा आया?
लड़की: तुम्हारे भय्या जो मज़ा देते हैं उसका डबल मज़ा आया। और फिर दोनों हँसते हुए पानी में भीगते हुए चले गए।
अब जय ने उसके होंठ को चूमा और बोला: डॉली अब तो हम शादी करने वाले हैं तुम क्यों इतना सोचती हो?
डॉली: मैं शादी के पहले इस सबको ग़लत समझती हूँ।यह कहते हुए उसने अपना हाथ उसके लौड़े से हटा लिया। फिर वह बोली: ये दोनों भाभी और देवर थे? है ना?
जय: हाँ उनकी बातों से तो ऐसा ही लगा।
डॉली: चलो अब चलते हैं। थोड़ा भीगेंगे और क्या होगा।
जय उसके क़मर को सहला कर: सच कहूँ मज़ा आ गया उनकी मस्ती देख कर । क्या मज़े से चु- मतलब सेक्स किया उन्होंने। क्या हम भी इतना ही मज़ा लेंगे?
डॉली शर्माकर: आप बहुत बेशर्म हो । मुझे नहीं पता।
जय: अच्छा ये बताओ कि तुम भी उतनी ही गरम ही गयी हो जितना मैं हो गया हूँ?
डॉली: ये सब देखकर तो दिमाग़ ख़राब होता ही है। अब चलिए पानी बंद हो गया है।
जय ने उसके गाल को चूमा और बोला: चलो चलते हैं। अब वो वापस आने लगे, शाम के आठ बज चुके थे और वो रास्ता भूल गए। थोड़ी दूर जाने के बाद जय बोला: लगता है रास्ता भूल गए हैं। पानी रुक गया है , चलो किसी से पूछते हैं कि बाहर जाने का रास्ता किधर है।
डॉली: ये सुनिए उधर से कुछ आवाज़ आ रही है, वहाँ चलते हैं। उनसे पूछते हैं रास्ता।
उस तरफ़ जाते हुए उन्होंने देखा कि उस तरफ थोड़ा अँधेरा सा था। वहीं पहुँच करके उन्होंने देखा कि आवाज़ एक बेंच में बैठे हुए दो लोगों के पास से आ रही थी। अभी वो एक पेड़ के पास ही पहुँचे थे कि उनको आवाज़ अब साफ़ सुनाई पड़ी और जय ने डॉली को रोका और उसे भी पेड़ के पीछे कर लिया ।अब वो दोनों उनकी बातें सुनने लगे।
आदमी: आह बहू आज कितने दिन बाद तू मेरा लौड़ा चूस रही है। मैं तो तरस ही गया था इस सुख के लिए। ये घर में साले इतने मेहमान आ गए हैं की हमारी चुदाई भी नहीं हो पा रही है।
अब जय ने डॉली को दिखाया और कहा: देखो , ऐसा लगता है कि बहू अपने ससुर का लिंग चूस रही है।
डॉली: छी , ऐसा भी होता है क्या? मुझे तो सोच कर भी गन्दा लगता है। ससुर तो पिता समान होते हैं।
तभी वो आदमी बोला: आह चलो अब उठो और चोदने दो।
अब वो लड़की मुँह ऊपर को और उन्होंने देखा कि मस्त गोरी सुंदर जवान लड़की थी। वह अपनी सलवार उतारी और कुर्ता ऊपर करके अपनी बुर अपने ससुर के आगे करके बोली: लीजिए बाबूजी इसे थोड़ा सा प्यार कर दीजिए। अब वह उसकी बुर में अपना मुँह घुसेड़ दिया और उसके चूमने की आवाज़ साफ़ आ रही थी। जय के लौड़े ने फिर से अंगड़ाई लेनी शुरू की और वह डॉली के चूतरों से उसको सटा कर वहाँ रगड़ने लगा। डॉली का ध्यान उधर था और वह देखी कि अब उस आदमी ने उस लड़की को घुमाया और उसके चूतरों को दबाकर चूमने लगा और फिर उसने उसकी चूतरों की दरार में भी मुँह घुसा दिया और गाँड़ को चाटने लगा।
डॉली के मुँह से फिर निकला : छी कितना गन्दा आदमी है, कोई उस जगह को भी चाटता है भला?
जय: हाँ सच में बड़ा अजीब लग रहा है, पर उसे तो बहुत मज़ा आ रहा है। यह कहते हुए जय अपने लौड़े को उसकी गाँड़ पर रगड़ कर अब उसकी चूचि सहलाने लगा। तभी वह आदमी लड़की से बोला: आओ बेटी मेरी गोद में बैठो और चुदवाओ। वह लड़की उसके लौड़े पर अपनी बुर रखकर बैठने लगी और फिर वह उछल उछल कर चुदवाने लगी। वह कुर्ते को उठा कर उसकी चूचियाँ दबाए जा रहा था। फ़च फ़च की आवाज़ें आ रही थीं और लड़की की ऊहन ऊहन उइइइइइइइ की भी आवाज़ निकाल रही थी। फिर वो बोला: आऽऽऽह बेटी क्या बुर है तेरी, चल अब उठ मैं चोदता हूँ। वह खड़ी हुई और बेंच को पकड़कर झुकी और वह पीछे से उसकी बुर में लौड़ा डालकर उसकी ज़बरदस्त चुदाई करने लगा।
जय ने उत्तेजना ने आकर अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसे डॉली की गाँड़ में साड़ी के ऊपर से रगड़ने लगा। लौड़ा उसकी गाँड़ की दरार से होकर उसकी पतली सी पैंटी के अंदर उसकी बुर को छूने लगा था। डॉली की बुर एकदम से पनिया गयी थी। उसकी साँसे भी तेज़ चलने लगी थी।
उधर वह लड़की अब बड़बड़ा रही थी: आऽऽऽऽह और ज़ोर से हाय्य इसी मज़े के लिए मरी जा रही थी हाय्य बाऊजी क्या चोद रहे हैं। और जोओओओओओओओर से आऽऽऽऽऽऽह फ़ाआऽऽऽड़ दोओओओओओओओओ मेरीइइइइइइइइ। अब वह अपनी गाँड़ पीछे करके अपनी ओर से भी धक्का दे रही थी। फिर वो दोनों सिसकियाँ भरते हुए झड़ने लगे। जय भी अपने लौड़े को रगड़ते हुए अपनी मूठ मारने लगा और झड़ने लगा। उसने डॉली की साड़ी ख़राब नहीं होने दी। डॉली आँखें फाड़कर उसके मोटे और लम्बे लौड़े को झटके मारते हुए सफ़ेद वीर्य छोड़ते हुए देखा। डॉली का हाथ भी अपनी बुर पर चला गया और वह वहाँ खुजा बैठी।
उधर से आवाज़ आयी। लड़की: बाऊजी आज तो आपने बहुत मज़ा दिया ,सच में तरस गयी थी ऐसी चुदाई के लिए।
ससुर: मुझे भी बहुत मज़ा आया बेटी, बस ये मेहमान जाएँ तो हमारी रेग्युलर चुदाई फिर से चालू ही जाएगी। और हाँ मेरा दोस्त नज़ीर भी तुझे याद कर रहा था।
लड़की अपने कपड़े पहनती हुई बोली: बाऊजी नज़ीर अंकल तो उस दिन मेरी चूचि दबाए थे और पैंट के ऊपर से अपना लौड़ा भी पकड़ाए थे मुझे।
ससुर: अरे बेटी वो तुमको चोदने को मरा जा रहा है। मेहमानों के जाते ही हम दोनों मिलकर तेरी चुदाई करेंगे।
लड़की: बाऊजी मुझे भी इसी दिन का इंतज़ार है। फिर वो दोनों एक दूसरे से लिपटकर चूमे और जाने लगे।
डॉली: चलिए ये बाहर जा रहें हैं, हम इनके पीछे पीछे बाहर निकल जाएँगे। वो दोनों बाहर आकर कार ने बैठे। डॉली: आज जो देखा, मेरा तो सिर ही घूम गया। क्या ससुर और बहू भी इतनी नीच हरकत कर सकते हैं।
जय: हैरानी तो मुझे भी बहुत हुई और फिर वो कमीना अपने किसी दोस्त से भी उसे चु– मतलब करवाने के लिए बोल रहा था।
डॉली: सच बड़ा ही कमीना आदमी था और लड़की भी उतनी ही रँडी थी, है कि नहीं?
जय : हाँ सच में वो भी ऐसी ही थी। बेकार सी।
डॉली हँसकर बोली:: पर आपका तो उसको देख कर रस ही छोड़ दिया था ।बहुत पसंद आयी थी ना आपको?
जय: अरे नहीं , पर बहुत गरम दृश्य था ना वो। तुम भी तो अपनी वहाँ खुजा रही थी।
डॉली शर्माकर: धत्त गंदे कहीं के । कुछ भी बोलते हैं। और ये बताइए की आपने मेरे यहाँ क्यों हाथ रखा था! वो अपनी छाती की ओर इशारा करके बोली।
जय: सॉरी वो सब देखकर मैं बहुत उत्तेजित हो गया था। मुझे माफ़ कर दो।
डॉली: धत्त सॉरी क्यों बोल रहे हो। आख़िर ये हैं तो तुम्हारे ही ना। तुम इन्हें छू लिए तो क्या हुआ।
जय: सच तुम बहुत प्यारी हो। इसका मतलब ये मेरे हैं, यही ना? और तुमने इनको इतना बड़ा मेरे लिए ही किया है, है ना? यह कहकर उसने हाथ बढ़ाया और उसकी छाती दबा दिया।
डॉली उसके हाथ पर अपना हाथ मारकर बोली: धत्त अभी हटाओ अपना हाथ । मैं शादी के बाद की बात कर रही थी, बदमाश कहीं के। और एक बात आज मैंने आपका वो देखा, बाप रे कितना बड़ा है? उन दोनों आदमियों से भी बड़ा है जिनको आज हमने नंगा देखा है। मुझे तो डर लग रहा है।
शिवस अरे अभी सुहाग रात में बहुत समय है, अभी से क्यों डर रही हो।
फिर दोनों हँसने लगे और तभी होटेल आ गया और वो दोनों सबके पास वापस आ गए थे और बाद में डॉली अपने परिवार के साथ वापस अपने शहर चली गयी थी।
इधर जय अब अपना लौड़ा दबाया और नींद में समा गया।
इधर जय और राज को तो नींद आ गयी थी, पर रश्मि और डॉली की आँखों से नींद अभी भी ग़ायब थी। वो तो अपने घर रात को ११ बजे ही पहुँची थीं।
रश्मि अपने बिस्तर पर करवट बदल रही थी।
वह अभी नायटी पहनी थी। उसकी आँखों में आज की पूरी घटनाएँ घूम रही थी। वो संतुष्ट थी कि सगाई अच्छी तरह से हो गयी थी। सच में राज कितने अच्छें है जिनकी मदद से सब कुछ आराम से निपट गया। और फिर उसे शाम की चुदाई याद आ गयी। बहुत मज़ा आया था। सच में अमित और राज ने क्या मस्त चुदायी की थी। उसका हाथ अपनी नायटी के अंदर से अपने निपल्ज़ पर चला गया और वह राज के मस्त लौड़े को याद करने अपना दूसरा हाथ अपनी पैंटी में डालकर अपनी बुर को सहलाने लगी।
फिर उसे राज की पहली चुदाई की याद आ गयी और वो उन पलों को याद करके अपनी बुर में तीन उँगलियाँ डालकर अंदर बाहर करने लगी।उसकी ऊँगली clit को भी रगड़ रही थी। अपने निपल को मसलते हुए और अपनी बुर में अंगुलियाँ चलाते हुए वह सीइइइइइइइइ आऽऽऽऽऽहहह करने लगी। फिर उसे वह पल याद आया जब अमित उसकी गाँड़ में और राज उसकी बुर में अपना अपना गरम माल छोड़ रहे थे। वह अब उइइइइइइइइओओ करके अपनी गीली बुर में और ज़ोर से उँगलियाँ चलाने लगी और फिर उइइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। शांत होकर वह करवट बदली और तकिए से चिपक कर सो गयी।
उधर डॉली का भी यही हाल था। वह आज दिन भर की बातें याद कर रही थी। उसे सगाई की वो रस्म याद आइ जब जय ने उसकी ऊँगली में अँगूठी पहनाई थी। उसने वह अँगूठी चूम ली जैसे वह जय को चूम रही हो। फिर उसे वह दृश्य याद आया जिसमें वो पार्क में बैठे हुए जय से मीठी बातें कर रही थी। फिर उसे अचानक देवर भाभी की चुदाई याद आयी। कैसे वो दोनों एक दूसरेमें समाए जा रहे थे। और कैसे वह लड़की उसका लिंग चूस रही थी। उसे याद आया कि वह लड़की प्यासी थी क्योंकि वह बोली थी कि उसका पति उसे वह सुख नहीं दे पाता जो उसका देवर देता है। फिर उसे अपनी माँ का चक्कर याद आया । उसे पता था कि उसकी माँ के अपने जेठ यानी की ताऊजी से सम्बंध हैं। उसने कई बार दोनों को प्यार करते देखा है। वो उन दोनों को दो बार सेक्स करते भी देख चुकी थी। शायद पापा की कमी वो ताऊजी से पूरा करती हैं। यह सब सोचकर उसकी बुर भी गीली होने लगी। वह अपनी नायटी के ऊपर से अपनी चूचियाँ दबाने लगी। तभी उसको याद आया कि कैसे जय ने भी उसकी चूचियाँ दबायीं थीं। अब वो गरम होने लगी और उसने अपनी नायटी सामने से खोली और अपनी ब्रा के अंदर हाथ डालकर अपनी चूचियाँ दबाने लगी और निपल्ज़ भी मसलने लगी। उसके मुँह से सीइइइइइ और हाऽऽय्य निकल रही थी।
फिर उसको याद आया किकैसे ससुर अपनी बहूके साथ लगा हुआ था। और कितनी गंदी बातें कर रहा था।
उनकी बातों से साफ़ पता चल रहा था कि ससुर और बहू का खेल कई दिनों से चला आ रहा है। और वो बहू को अपने दोस्त के साथ शेयर करने की बात भी किया जो उसको बहुत हैरान कर गयी थी। ऐसा भी कोई अपनी बहू के साथ करता है भला। फिर उस ससुर और बहू का सेक्स आ गया और वह फिर से गरम होने लगी। अब वह अपना हाथ अपनी पेंटी के अंदर लेकर अपनी बुर के साथ खेलने लगी। एक हाथ से वह बारी बारी से अपने निपल मसल रही थी और दूसरे हाथ से वह अपनी बुर में एक ऊँगली डाल कर रगड़ रही थी। उसकी आँखों के सामने बहू का अपने ससुर के लौड़े पर उछलकर चुदवाना और चिल्लाकर और ज़ोर से चोदो बोलना घूम रहा था। वह अब पूरी तरह से गीली हो चुकी बुर की clit भी रगड़ कर मस्ती से भर रही थी। अचानक उसके दिमाग़ में एक विचार आया कि क्या उसके ससुर भी उसके साथ ऐसा करेंगे? नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता। पर फिर उसे याद आया किउसने राज को उसकी छातियों को घूरता पाया था। पर यह सोचकर कि वो उसका वहम होगा , उसने ध्यान नहीं दिया था। पर अब उसे शक सा होने लगा। तभी उसको ध्यान आया कि आज जब वह उनके पैर छू रही थी तो वह उसकी चूचि को घूर रहे थे। उसने सोचा कि ही भगवान क्या ये भी मुझे ऐसी ही नज़र से देखते हैं? कहीं मेरे ससुर भी मेरा वही हाल तो नहीं करेंगे जैसा कि उस आदमी ने अपनी बहू का किया हुआ है।
फिर वह यह सोचकर कि जय के रहते शायद वह ऐसा नहीं कर पाएँगे, वो जय के बारे में सोचने लगी। फिर उसे याद आया कि कैसे उसने उसकी छाती सहलायी थी और उसके पिछवाड़े में अपना लिंग रगड़ा था। अब वह बहुत गरम हो चुकी थी और जय का बड़ा सा लिंग उसकी आँखों के सामने झूलने लगा। वह रोमांच से भरने लगी। उसकी बुर में ऊँगली अब और तेज़ी से हिल रही थी और वह अब उइइइइइइइइ हाऽऽऽय्य कर रही थी। तभी उसे याद आया कि कैसे उसके लिंग ने सफ़ेद पिचकारी छोड़ी थी गाढ़ी सी । जिस तरह से उसके लिंग ने झटके मारे थे वो याद करके वह झड़ने लगी। उसकी सिसकियाँ गूँज रही थी और वह अपनी कमर उछालकर अपनी ऊँगली के दबाव को बढ़ाकर मस्ती से झड़ी जा रही थी।
झड़ने के बाद वह भी तकिए से चिपक कर सो गयी।
अगले दिन सुबह शशी आयी और राज को चाय बना कर दी। राज ने शशी को कहा: आज तुम मुझसे पैसे ले लेना और डॉक्टर को दिखा देना । अब तुमको समय समय पर डॉक्टर को दिखाना होगा, समझी?
शशी: जी अच्छा दिखा दूँगी। आप ये तो बताओ कि कल रश्मि को ठोके कि नहीं?
राज हँसते हुए: अरे उसे ठोके बिना मुझे चैन कहाँ। वैसे कल उसकी मैंने और उसके जेठ दोनों ने मिलकर चुदाई की।
शशी: दोनों ने एक साथ ? हे भगवान ! आप भी ना क्या क्या करते रहते हो? वो तैयार हो गई इसके लिए?
राज: अरे वो तो मस्त मज़े से चुदवाई किसी रँडी की तरह। मज़ा आ गया।
शशी: और वो पंडित का क्या चक्कर था, आप उसकी तरफ़ भी बहुत गंदी नज़रों से देख रहे थे ?
राज: अरे कुछ नहीं उसकी बुर चाटी और कुछ ख़ास नहीं।
शशी: एक बात बोलूँ ? नाराज़ मत होना!
राज: बोलो।
शशी: मैंने देखा था कि आप बहु की भी छाती को अजीब नज़रों से देख रहे थे। आपके मन में उसके लिए भी कहीं कुछ तो नहीं चल रहा?
राज: नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है। वह असल में क्या हुआ था कि रश्मि ने उसकी ब्रा का साइज़ ३४ बताया था। मुझे लगा कि वह बढ़ाकर बोल रही है, इसलिए मैं चेक कर रहा था कि क्या वाक़ई उसके इतने बड़े हैं क्या। और कुछ नहीं ।
शशी: वाह जी वाह क्या ससुर हैं जो बहू की ब्रा का नाप चेक कर रहे हैं वो भी सगाई के दिन। तो क्या परिणाम निकला जाँच का?
राज: हाँ उसके बड़े हैं ३४ से कम नहीं होंगे।
शशी: हाथ से पकड़कर देख लेते क्या साइज़ है?
राज झल्लाकर उसके पिछवाड़े पर एक हल्का सा थप्पड़ लगाया और बोला: साली मेरा मज़ाक़ उड़ाती है? चल जा एक कप और चाय ला। शशी हँसती हुई अपने चूतड़ सहलाते हुए भाग गयी।
जय भी उठा और तैयार होकर दुकान चला गया।
राज नहाकर रश्मि को फ़ोन लगाया: हाय मेरी जान कैसी हो?
रश्मि: ठीक हूँ, आपका बहुत धन्यवाद सगाई अच्छी तरह से हो गयी। सब कुछ बहुत बढ़िया रहा।
राज: हाँ सब कुछ बढ़िया था ,तुम्हारी चुदाई भी।
रश्मि: छि आपको तो बस एक ही बात आती है। और कल जो आप उस बच्ची पंडित के साथ करने जा रहे थे ना वो आपको हवालात की सैर करा देती।
राज: अरे जिसे तुम बच्ची कह रही हो वह कार में एक बार फिर से मुझे मज़ा दी। चालू चीज़ है। जल्दी ही चोदूंग़ा उसे। छोड़ो उसे, तुम बताओ तुमको तो मज़ा आया ना डबल धमाके का?
रश्मि हँसते हुए: इसका जवाब तो मैंने कल ही दे दिया था कि मुझे बहुत मज़ा आया।
राज: तो फिर कब इस मज़े को रीपीट करेंगे? एक बार फिर से वही मज़ा अपने घर पर लेंगे, प्रोग्राम बनाओ अमित के साथ?
रश्मि: ठीक है बात करूँगी और बताऊँगी। जय कैसा है?
राज: ठीक है और दुकान चला गया है। डॉली बेटी कैसी है?
रश्मि: वह भी ठीक है किचन में कुछ बना रही है। चलिए मैं रखती हूँ।
राज: अरे मेरी जान एक पप्पी तो दे दो और फिर वह एक चुम्बन की आवाज़ निकाला। उधर से रश्मि ने भी वही पुच्हह मी आवाज़ निकाली और फ़ोन रख दिया।
उधर डॉली किचन में आकर खाना बनाने लगी, तभी उसको याद आया कि उसने अपने ज़ेवरों का डिब्बा तायी जी को दिया था , वो उसे वापस माँ को देना है। वह अमित के कमरे की ओर चल पड़ी। जैसे ही वह उनके कमरे के पास पहुँची उसे माँ की आवाज़ सुनाई दी। वह हंस रही थी और धीमी आवाज़ में बात कर रही थी। उसने खिड़की से देखा कि ताऊजी ने मम्मी को अपनी बाँहों में जकड़ रखा था और उनके हाथ उनकी चूतरों पर घूम रहे थे। बग़ल में बिस्तर पर ताई जो सोई हुई थी या पता नहीं सोने का नाटक कर रहीं थीं। जब ताऊजी की उँगलियाँ उनके पिछवाड़े से होकर नीचे उनकी बुर या गाँड़ में जाने लगी तो डॉली शर्म से वहाँ से हट गई। वह सोच रही थी कि इस उम्र में भी मम्मी को कितनी गरमी चढ़ी हुई है।
ये अच्छा ही हुआ कि डॉली वहाँ से चली आयी वरना वो जो उनकी बातें सुन लेती तो उसका दिमाग़ ही घूम जाता।
रश्मि फुसफुसाकर बोली: राज जी का फ़ोन आया था, वह हम दोनों को फिर से बुला रहे हैं वही थ्रीसम के लिए।
अमित उसकी चूचियाँ दबाते हुए: हाँ यार जल्दी ही प्रोग्राम बनाते है। सच बहुत मज़ा आया था कल। हैं ना?
रश्मि: हाँ आया तो था, पर ऐसे रोज़ रोज़ थोड़े ही जा सकते हैं? अगले हफ़्ते का प्रोग्राम बनाएँगे।
अमित: ठीक है जैसा तुम कहो। तभी अमित का फ़ोन बजा और रश्मि भी बाहर आ गयी और अपने काम में लग गयी।
उधर जय ने दुकान से रश्मि को फ़ोन किया: कैसी हो मेरी जान?
रश्मि: ठीक हूँ मेरे जानू , आप कैसे हैं?
जय: कल की सगाई का नशा अभी भी नहीं उतरा।
रश्मि: अच्छा सगाई का या पार्क का?
जय हँसते हुए: पार्क का भी नहीं उतरा। क्या लोग हैं इस दुनिया में? ससुर बहु से लगा हुआ है और देवर भाभी से।
रश्मि: रिश्तों का तो जैसे महत्व ही नहीं रह गया हो। यह बोलते हुए इसे थोड़ी देर पहले का माँ और ताऊजी का आलिंगन याद आ गया। वह सकपका गयी।
जय: मुझे तो ऐसा लगता है कि वासना इंसान को रिश्तों को भूलने के लिए मज़बूर कर देती है , तुमको क्या लगता है?
रश्मि: सिर्फ़ वासना नहीं कभी कभी मजबूरियाँ भी हो सकती हैं। अब जिसने जो करना है करे , हम कौन होते हैं दूसरों की ज़िंदगी का फ़ैसला करने वाले, है कि नहीं?
जय: सही कहा तुमने। हर कोई फ़्री है अपने जीवन के फ़ैसले लेने के लिए? जिसे जो सही लगे वह वही करेगा। चलो छोड़ो ये सब , पर कल तुम साड़ी में बहुत मस्त लग रही थी। बहुत प्यार आ रहा था तुमपर।
डॉली हँसते हुए: तभी शायद अपने प्यार को मेरे पिछवाड़े से रगड़ रहे थे।
जय झेंपकर बोला: अरे वो तो ऐसे ही पार्क में वो सब देखकर मेरा दिमाग़ ख़राब हो गया था वरना मैं ऐसा करने का सोच भी नहीं सकता ।
डॉली: कोई बात नहीं फिर क्या हुआ? अब तो मैं आपकी ही होने वाली हूँ , थोड़ी बहुत शरारत कर भी ली तो क्या हुआ? वैसे आपने एक बार मेरी छाती ज़रा ज़ोर से ही दबा दी थी, मुझे दुःख गया था।
जय: सॉरी वो पार्क में साला वो सब देखकर मैं ज़्यादा ही उत्तेजित हो गया था। अच्छा एक बात बताओ , मैंने सुना है कि लड़कियाँ एक दूसरे की छातियाँ दबाती है मज़ाक़ मज़ाक़ में ,ये सही है क्या?
डॉली: सब ऐसी नहीं होतीं पर हाँ कुछ को ज़्यादा ही गरमी रहती है। मेरी भी एक दो लड़कियों ने दबाई थीं पर ज़ोर से नहीं।
जय: कई बार बदमाश लड़के भीड़ का फ़ायदा उठाकर दबा देते हैं, ऐसा कभी हुआ तुम्हारे साथ?
डॉली: हाँ हुआ है जब मैं ट्रेन से उतर रही थी तो एक अधेड़ आदमी ने भीड़ का फ़ायदा उठाकर बहुत ज़ोर से दबा दिया। मैं तो मारे दर्द के रोने लगी थी। तब मेरे साथ में ताऊजी भी थे । मम्मी मुझे संभाल रही थी और ताऊजी ने उसकी बहुत पिटायी की थी। आपको बताऊँ लड़कों से ज़्यादा कमीने बड़ी उम्र के आदमी होते हैं। मेरा और मेरी सहेलियों का तो यही अनुभव है।
जय: ओह तुम्हारी सहेलियों के साथ भी ये हुआ है ?
डॉली: हाँ सबके साथ कुछ ना कुछ हुआ ही है। कई सहेलियों को तो घर के आदमी भी ग़लत तरीक़े से छूते हैं।
जैसे पद्मा बता रही थी उसके मामा ही उसकी छाती और नीचे भी सहलाने की कोशिश करते हैं। वो जब छोटी थी तो उनके गोद में बैठती थी पर अब जब वो जवान हो चुकी है तब भी वो उसे अपनी गोद में बैठा लेते हैं और फिर यहाँ वहाँ छूते हैं।
जय: ओह ये तो बड़ी अजीब बात है। चलो दूसरों का छोड़ो और ये बताओ की मैं तुमको कैसा लगा?
डॉली: बहुत अच्छे है आप। सच कह रही हूँ।
जय : और मेरा कैसा है?
डॉली: आपका क्या कैसा है?
जय शरारत से हँसते हुए: हथियार और क्या?
डॉली: छि आप बहुत बिगड़ रहे हैं। मैं आपको शरीफ़ समझती थी। कोई लड़की से ऐसे पूछता है भला?
जय: अरे मैं तो तुम्हारा इम्प्रेशन पूछ रहा हूँ उसके बारे में? और कुछ नहीं।
डॉली: तो सुनिए मुझे तो वह ज़्यादा ही भयानक लगा है। और वो मेरी फाड़ ही देगा। आप ऐसा करना सुहाग रात को एक डॉक्टर बुला कर रखना क्योंकि बाद में सिलाई की ज़रूरत पड़ेगी। यह कहते हुए वह हँसने लगी और जय को भी हँसी आ गयी। फिर डॉली ने आइ लव यू कहकर फ़ोन काट दिया। फिर उसे अहसास हुआ कि जय से बात करते करते उसकी बुर गीली हो गई थी। उधर दुकान में काउंटर के नीचे से जय ने भी अपना खड़ा लौड़ा अजस्ट किया। जय सोच रहा था कि अभी शादी में १५ दिन हैं कैसे कटेंगे ये दिन?
इधर जय का लौड़ा भी तन गया था और उससे सटी डॉली की जाँघ पर रगड़ रहा था। डॉली की भी सांसें फूलने लगी थीं। अब डॉली भी जय से और ज़ोर से चिपक गयी थी। जय के हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुए नीचे जाकर उसकी नंगी कमर पर घुमने लगे थे। उधर वो लड़का उसके चूतरों को दबाकर उसकी बुर चाटे जा रहा था। अब वह उठा और उसने अपनी पैंट का ज़िपर खोला और अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया। जय ने देखा कि सामान्य साइज़ का ही था।
अब डॉली ने अपना मुँह घुमा लिया और जय से बोली: चलिए यहाँ से अब । बहुत हो गया।
जय उसको अपने से लपेट कर बोला: फ़्री में ट्रेनिंग मिल रही है , ले लेते हैं ना। मैंने कभी ये सब किया नहीं है। और शायद तुमने भी नहीं किया होगा।
डॉली: शायद का क्या मतलब? मैंने सच में ऐसा कुछ नहीं किया है।
जय : देखो वो क्या कर रही है? अब डॉली ने मुँह घुमाया और देखा कि अब लड़की नीचे बैठी है और उसके लौड़े को प्यार से चूस रही है। फिर उस लड़के ने लड़की को उठाया और पेड़ के सहारे से उलटा होकर झुकने को बोला। फिर वह उसके पीछे से आकर उसकी बुर में अपना लौड़ा डाला और उसकी चूचियों को दबाकर उसे चोदने लगा। वह लड़की अब आऽऽऽह और हाऽऽय्यय करके अपनी गाँड़ पीछे करके चुदवाने लगी । जय और डॉली की आँखें जैसे वहाँ उसके अंदर बाहर हो रहे लौड़े पर ही चिपक गयीं।अब जय का हाथ डॉली के उभरे हुए चूतरों को दबा रहा था और डॉली की बुर भी गीली हुए जा रही थी। अब जय ने उसका हाथ पकड़कर अपने पैंट के ऊपर से लौड़े पर रखा और डॉली भी उत्तेजनावश उसका विरोध ना कर उसे दबाने लगी। जय का एक हाथ ब्लाउस में गया और वह उसकी चूचि को हल्के से दबाने लगा। अब डॉली भी मस्ती में आकर हाऽऽऽय्य कहकर बोली: आऽऽहाह क्या कर रहे हैं? शादी के पहले ये सब ठीक नहीं है।
तभी वहाँ वह जोड़ा फ़च फ़च की आवाज़ के साथ ज़बरदस्त चुदाई किए जा रहा था। और फिर वो लड़की चिल्लाई : उईइइइइइइइइइइइइ मैं गयीइइइइइइइइइ।
उधर लड़का भी ह्म्म्म्म्म्म्म्म आऽऽऽऽऽह करके उसकी बुर में अपना माल गिराने लगा। फिर वह उसकी छोड़कर ज़मीन में बैठ गया और उसका नरम होता लौड़ा अभी भी गीला होकर लटका सा दिख रहा था।
लड़की भी अब अपना रुमाल लेकर अपनी बुर साफ़ की और फिर झुक कर बड़े प्यार से उसका नरम लौड़ा भी साफ़ की। फिर दोनों ने अपने कपड़े पहने और एक दूसरे के होंठों को चूमा और वहाँ से चलने लगे। लड़के ने पूछा: भाभी मज़ा आया?
लड़की: तुम्हारे भय्या जो मज़ा देते हैं उसका डबल मज़ा आया। और फिर दोनों हँसते हुए पानी में भीगते हुए चले गए।
अब जय ने उसके होंठ को चूमा और बोला: डॉली अब तो हम शादी करने वाले हैं तुम क्यों इतना सोचती हो?
डॉली: मैं शादी के पहले इस सबको ग़लत समझती हूँ।यह कहते हुए उसने अपना हाथ उसके लौड़े से हटा लिया। फिर वह बोली: ये दोनों भाभी और देवर थे? है ना?
जय: हाँ उनकी बातों से तो ऐसा ही लगा।
डॉली: चलो अब चलते हैं। थोड़ा भीगेंगे और क्या होगा।
जय उसके क़मर को सहला कर: सच कहूँ मज़ा आ गया उनकी मस्ती देख कर । क्या मज़े से चु- मतलब सेक्स किया उन्होंने। क्या हम भी इतना ही मज़ा लेंगे?
डॉली शर्माकर: आप बहुत बेशर्म हो । मुझे नहीं पता।
जय: अच्छा ये बताओ कि तुम भी उतनी ही गरम ही गयी हो जितना मैं हो गया हूँ?
डॉली: ये सब देखकर तो दिमाग़ ख़राब होता ही है। अब चलिए पानी बंद हो गया है।
जय ने उसके गाल को चूमा और बोला: चलो चलते हैं। अब वो वापस आने लगे, शाम के आठ बज चुके थे और वो रास्ता भूल गए। थोड़ी दूर जाने के बाद जय बोला: लगता है रास्ता भूल गए हैं। पानी रुक गया है , चलो किसी से पूछते हैं कि बाहर जाने का रास्ता किधर है।
डॉली: ये सुनिए उधर से कुछ आवाज़ आ रही है, वहाँ चलते हैं। उनसे पूछते हैं रास्ता।
उस तरफ़ जाते हुए उन्होंने देखा कि उस तरफ थोड़ा अँधेरा सा था। वहीं पहुँच करके उन्होंने देखा कि आवाज़ एक बेंच में बैठे हुए दो लोगों के पास से आ रही थी। अभी वो एक पेड़ के पास ही पहुँचे थे कि उनको आवाज़ अब साफ़ सुनाई पड़ी और जय ने डॉली को रोका और उसे भी पेड़ के पीछे कर लिया ।अब वो दोनों उनकी बातें सुनने लगे।
आदमी: आह बहू आज कितने दिन बाद तू मेरा लौड़ा चूस रही है। मैं तो तरस ही गया था इस सुख के लिए। ये घर में साले इतने मेहमान आ गए हैं की हमारी चुदाई भी नहीं हो पा रही है।
अब जय ने डॉली को दिखाया और कहा: देखो , ऐसा लगता है कि बहू अपने ससुर का लिंग चूस रही है।
डॉली: छी , ऐसा भी होता है क्या? मुझे तो सोच कर भी गन्दा लगता है। ससुर तो पिता समान होते हैं।
तभी वो आदमी बोला: आह चलो अब उठो और चोदने दो।
अब वो लड़की मुँह ऊपर को और उन्होंने देखा कि मस्त गोरी सुंदर जवान लड़की थी। वह अपनी सलवार उतारी और कुर्ता ऊपर करके अपनी बुर अपने ससुर के आगे करके बोली: लीजिए बाबूजी इसे थोड़ा सा प्यार कर दीजिए। अब वह उसकी बुर में अपना मुँह घुसेड़ दिया और उसके चूमने की आवाज़ साफ़ आ रही थी। जय के लौड़े ने फिर से अंगड़ाई लेनी शुरू की और वह डॉली के चूतरों से उसको सटा कर वहाँ रगड़ने लगा। डॉली का ध्यान उधर था और वह देखी कि अब उस आदमी ने उस लड़की को घुमाया और उसके चूतरों को दबाकर चूमने लगा और फिर उसने उसकी चूतरों की दरार में भी मुँह घुसा दिया और गाँड़ को चाटने लगा।
डॉली के मुँह से फिर निकला : छी कितना गन्दा आदमी है, कोई उस जगह को भी चाटता है भला?
जय: हाँ सच में बड़ा अजीब लग रहा है, पर उसे तो बहुत मज़ा आ रहा है। यह कहते हुए जय अपने लौड़े को उसकी गाँड़ पर रगड़ कर अब उसकी चूचि सहलाने लगा। तभी वह आदमी लड़की से बोला: आओ बेटी मेरी गोद में बैठो और चुदवाओ। वह लड़की उसके लौड़े पर अपनी बुर रखकर बैठने लगी और फिर वह उछल उछल कर चुदवाने लगी। वह कुर्ते को उठा कर उसकी चूचियाँ दबाए जा रहा था। फ़च फ़च की आवाज़ें आ रही थीं और लड़की की ऊहन ऊहन उइइइइइइइ की भी आवाज़ निकाल रही थी। फिर वो बोला: आऽऽऽह बेटी क्या बुर है तेरी, चल अब उठ मैं चोदता हूँ। वह खड़ी हुई और बेंच को पकड़कर झुकी और वह पीछे से उसकी बुर में लौड़ा डालकर उसकी ज़बरदस्त चुदाई करने लगा।
जय ने उत्तेजना ने आकर अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसे डॉली की गाँड़ में साड़ी के ऊपर से रगड़ने लगा। लौड़ा उसकी गाँड़ की दरार से होकर उसकी पतली सी पैंटी के अंदर उसकी बुर को छूने लगा था। डॉली की बुर एकदम से पनिया गयी थी। उसकी साँसे भी तेज़ चलने लगी थी।
उधर वह लड़की अब बड़बड़ा रही थी: आऽऽऽऽह और ज़ोर से हाय्य इसी मज़े के लिए मरी जा रही थी हाय्य बाऊजी क्या चोद रहे हैं। और जोओओओओओओओर से आऽऽऽऽऽऽह फ़ाआऽऽऽड़ दोओओओओओओओओ मेरीइइइइइइइइ। अब वह अपनी गाँड़ पीछे करके अपनी ओर से भी धक्का दे रही थी। फिर वो दोनों सिसकियाँ भरते हुए झड़ने लगे। जय भी अपने लौड़े को रगड़ते हुए अपनी मूठ मारने लगा और झड़ने लगा। उसने डॉली की साड़ी ख़राब नहीं होने दी। डॉली आँखें फाड़कर उसके मोटे और लम्बे लौड़े को झटके मारते हुए सफ़ेद वीर्य छोड़ते हुए देखा। डॉली का हाथ भी अपनी बुर पर चला गया और वह वहाँ खुजा बैठी।
उधर से आवाज़ आयी। लड़की: बाऊजी आज तो आपने बहुत मज़ा दिया ,सच में तरस गयी थी ऐसी चुदाई के लिए।
ससुर: मुझे भी बहुत मज़ा आया बेटी, बस ये मेहमान जाएँ तो हमारी रेग्युलर चुदाई फिर से चालू ही जाएगी। और हाँ मेरा दोस्त नज़ीर भी तुझे याद कर रहा था।
लड़की अपने कपड़े पहनती हुई बोली: बाऊजी नज़ीर अंकल तो उस दिन मेरी चूचि दबाए थे और पैंट के ऊपर से अपना लौड़ा भी पकड़ाए थे मुझे।
ससुर: अरे बेटी वो तुमको चोदने को मरा जा रहा है। मेहमानों के जाते ही हम दोनों मिलकर तेरी चुदाई करेंगे।
लड़की: बाऊजी मुझे भी इसी दिन का इंतज़ार है। फिर वो दोनों एक दूसरे से लिपटकर चूमे और जाने लगे।
डॉली: चलिए ये बाहर जा रहें हैं, हम इनके पीछे पीछे बाहर निकल जाएँगे। वो दोनों बाहर आकर कार ने बैठे। डॉली: आज जो देखा, मेरा तो सिर ही घूम गया। क्या ससुर और बहू भी इतनी नीच हरकत कर सकते हैं।
जय: हैरानी तो मुझे भी बहुत हुई और फिर वो कमीना अपने किसी दोस्त से भी उसे चु– मतलब करवाने के लिए बोल रहा था।
डॉली: सच बड़ा ही कमीना आदमी था और लड़की भी उतनी ही रँडी थी, है कि नहीं?
जय : हाँ सच में वो भी ऐसी ही थी। बेकार सी।
डॉली हँसकर बोली:: पर आपका तो उसको देख कर रस ही छोड़ दिया था ।बहुत पसंद आयी थी ना आपको?
जय: अरे नहीं , पर बहुत गरम दृश्य था ना वो। तुम भी तो अपनी वहाँ खुजा रही थी।
डॉली शर्माकर: धत्त गंदे कहीं के । कुछ भी बोलते हैं। और ये बताइए की आपने मेरे यहाँ क्यों हाथ रखा था! वो अपनी छाती की ओर इशारा करके बोली।
जय: सॉरी वो सब देखकर मैं बहुत उत्तेजित हो गया था। मुझे माफ़ कर दो।
डॉली: धत्त सॉरी क्यों बोल रहे हो। आख़िर ये हैं तो तुम्हारे ही ना। तुम इन्हें छू लिए तो क्या हुआ।
जय: सच तुम बहुत प्यारी हो। इसका मतलब ये मेरे हैं, यही ना? और तुमने इनको इतना बड़ा मेरे लिए ही किया है, है ना? यह कहकर उसने हाथ बढ़ाया और उसकी छाती दबा दिया।
डॉली उसके हाथ पर अपना हाथ मारकर बोली: धत्त अभी हटाओ अपना हाथ । मैं शादी के बाद की बात कर रही थी, बदमाश कहीं के। और एक बात आज मैंने आपका वो देखा, बाप रे कितना बड़ा है? उन दोनों आदमियों से भी बड़ा है जिनको आज हमने नंगा देखा है। मुझे तो डर लग रहा है।
शिवस अरे अभी सुहाग रात में बहुत समय है, अभी से क्यों डर रही हो।
फिर दोनों हँसने लगे और तभी होटेल आ गया और वो दोनों सबके पास वापस आ गए थे और बाद में डॉली अपने परिवार के साथ वापस अपने शहर चली गयी थी।
इधर जय अब अपना लौड़ा दबाया और नींद में समा गया।
इधर जय और राज को तो नींद आ गयी थी, पर रश्मि और डॉली की आँखों से नींद अभी भी ग़ायब थी। वो तो अपने घर रात को ११ बजे ही पहुँची थीं।
रश्मि अपने बिस्तर पर करवट बदल रही थी।
वह अभी नायटी पहनी थी। उसकी आँखों में आज की पूरी घटनाएँ घूम रही थी। वो संतुष्ट थी कि सगाई अच्छी तरह से हो गयी थी। सच में राज कितने अच्छें है जिनकी मदद से सब कुछ आराम से निपट गया। और फिर उसे शाम की चुदाई याद आ गयी। बहुत मज़ा आया था। सच में अमित और राज ने क्या मस्त चुदायी की थी। उसका हाथ अपनी नायटी के अंदर से अपने निपल्ज़ पर चला गया और वह राज के मस्त लौड़े को याद करने अपना दूसरा हाथ अपनी पैंटी में डालकर अपनी बुर को सहलाने लगी।
फिर उसे राज की पहली चुदाई की याद आ गयी और वो उन पलों को याद करके अपनी बुर में तीन उँगलियाँ डालकर अंदर बाहर करने लगी।उसकी ऊँगली clit को भी रगड़ रही थी। अपने निपल को मसलते हुए और अपनी बुर में अंगुलियाँ चलाते हुए वह सीइइइइइइइइ आऽऽऽऽऽहहह करने लगी। फिर उसे वह पल याद आया जब अमित उसकी गाँड़ में और राज उसकी बुर में अपना अपना गरम माल छोड़ रहे थे। वह अब उइइइइइइइइओओ करके अपनी गीली बुर में और ज़ोर से उँगलियाँ चलाने लगी और फिर उइइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। शांत होकर वह करवट बदली और तकिए से चिपक कर सो गयी।
उधर डॉली का भी यही हाल था। वह आज दिन भर की बातें याद कर रही थी। उसे सगाई की वो रस्म याद आइ जब जय ने उसकी ऊँगली में अँगूठी पहनाई थी। उसने वह अँगूठी चूम ली जैसे वह जय को चूम रही हो। फिर उसे वह दृश्य याद आया जिसमें वो पार्क में बैठे हुए जय से मीठी बातें कर रही थी। फिर उसे अचानक देवर भाभी की चुदाई याद आयी। कैसे वो दोनों एक दूसरेमें समाए जा रहे थे। और कैसे वह लड़की उसका लिंग चूस रही थी। उसे याद आया कि वह लड़की प्यासी थी क्योंकि वह बोली थी कि उसका पति उसे वह सुख नहीं दे पाता जो उसका देवर देता है। फिर उसे अपनी माँ का चक्कर याद आया । उसे पता था कि उसकी माँ के अपने जेठ यानी की ताऊजी से सम्बंध हैं। उसने कई बार दोनों को प्यार करते देखा है। वो उन दोनों को दो बार सेक्स करते भी देख चुकी थी। शायद पापा की कमी वो ताऊजी से पूरा करती हैं। यह सब सोचकर उसकी बुर भी गीली होने लगी। वह अपनी नायटी के ऊपर से अपनी चूचियाँ दबाने लगी। तभी उसको याद आया कि कैसे जय ने भी उसकी चूचियाँ दबायीं थीं। अब वो गरम होने लगी और उसने अपनी नायटी सामने से खोली और अपनी ब्रा के अंदर हाथ डालकर अपनी चूचियाँ दबाने लगी और निपल्ज़ भी मसलने लगी। उसके मुँह से सीइइइइइ और हाऽऽय्य निकल रही थी।
फिर उसको याद आया किकैसे ससुर अपनी बहूके साथ लगा हुआ था। और कितनी गंदी बातें कर रहा था।
उनकी बातों से साफ़ पता चल रहा था कि ससुर और बहू का खेल कई दिनों से चला आ रहा है। और वो बहू को अपने दोस्त के साथ शेयर करने की बात भी किया जो उसको बहुत हैरान कर गयी थी। ऐसा भी कोई अपनी बहू के साथ करता है भला। फिर उस ससुर और बहू का सेक्स आ गया और वह फिर से गरम होने लगी। अब वह अपना हाथ अपनी पेंटी के अंदर लेकर अपनी बुर के साथ खेलने लगी। एक हाथ से वह बारी बारी से अपने निपल मसल रही थी और दूसरे हाथ से वह अपनी बुर में एक ऊँगली डाल कर रगड़ रही थी। उसकी आँखों के सामने बहू का अपने ससुर के लौड़े पर उछलकर चुदवाना और चिल्लाकर और ज़ोर से चोदो बोलना घूम रहा था। वह अब पूरी तरह से गीली हो चुकी बुर की clit भी रगड़ कर मस्ती से भर रही थी। अचानक उसके दिमाग़ में एक विचार आया कि क्या उसके ससुर भी उसके साथ ऐसा करेंगे? नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता। पर फिर उसे याद आया किउसने राज को उसकी छातियों को घूरता पाया था। पर यह सोचकर कि वो उसका वहम होगा , उसने ध्यान नहीं दिया था। पर अब उसे शक सा होने लगा। तभी उसको ध्यान आया कि आज जब वह उनके पैर छू रही थी तो वह उसकी चूचि को घूर रहे थे। उसने सोचा कि ही भगवान क्या ये भी मुझे ऐसी ही नज़र से देखते हैं? कहीं मेरे ससुर भी मेरा वही हाल तो नहीं करेंगे जैसा कि उस आदमी ने अपनी बहू का किया हुआ है।
फिर वह यह सोचकर कि जय के रहते शायद वह ऐसा नहीं कर पाएँगे, वो जय के बारे में सोचने लगी। फिर उसे याद आया कि कैसे उसने उसकी छाती सहलायी थी और उसके पिछवाड़े में अपना लिंग रगड़ा था। अब वह बहुत गरम हो चुकी थी और जय का बड़ा सा लिंग उसकी आँखों के सामने झूलने लगा। वह रोमांच से भरने लगी। उसकी बुर में ऊँगली अब और तेज़ी से हिल रही थी और वह अब उइइइइइइइइ हाऽऽऽय्य कर रही थी। तभी उसे याद आया कि कैसे उसके लिंग ने सफ़ेद पिचकारी छोड़ी थी गाढ़ी सी । जिस तरह से उसके लिंग ने झटके मारे थे वो याद करके वह झड़ने लगी। उसकी सिसकियाँ गूँज रही थी और वह अपनी कमर उछालकर अपनी ऊँगली के दबाव को बढ़ाकर मस्ती से झड़ी जा रही थी।
झड़ने के बाद वह भी तकिए से चिपक कर सो गयी।
अगले दिन सुबह शशी आयी और राज को चाय बना कर दी। राज ने शशी को कहा: आज तुम मुझसे पैसे ले लेना और डॉक्टर को दिखा देना । अब तुमको समय समय पर डॉक्टर को दिखाना होगा, समझी?
शशी: जी अच्छा दिखा दूँगी। आप ये तो बताओ कि कल रश्मि को ठोके कि नहीं?
राज हँसते हुए: अरे उसे ठोके बिना मुझे चैन कहाँ। वैसे कल उसकी मैंने और उसके जेठ दोनों ने मिलकर चुदाई की।
शशी: दोनों ने एक साथ ? हे भगवान ! आप भी ना क्या क्या करते रहते हो? वो तैयार हो गई इसके लिए?
राज: अरे वो तो मस्त मज़े से चुदवाई किसी रँडी की तरह। मज़ा आ गया।
शशी: और वो पंडित का क्या चक्कर था, आप उसकी तरफ़ भी बहुत गंदी नज़रों से देख रहे थे ?
राज: अरे कुछ नहीं उसकी बुर चाटी और कुछ ख़ास नहीं।
शशी: एक बात बोलूँ ? नाराज़ मत होना!
राज: बोलो।
शशी: मैंने देखा था कि आप बहु की भी छाती को अजीब नज़रों से देख रहे थे। आपके मन में उसके लिए भी कहीं कुछ तो नहीं चल रहा?
राज: नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है। वह असल में क्या हुआ था कि रश्मि ने उसकी ब्रा का साइज़ ३४ बताया था। मुझे लगा कि वह बढ़ाकर बोल रही है, इसलिए मैं चेक कर रहा था कि क्या वाक़ई उसके इतने बड़े हैं क्या। और कुछ नहीं ।
शशी: वाह जी वाह क्या ससुर हैं जो बहू की ब्रा का नाप चेक कर रहे हैं वो भी सगाई के दिन। तो क्या परिणाम निकला जाँच का?
राज: हाँ उसके बड़े हैं ३४ से कम नहीं होंगे।
शशी: हाथ से पकड़कर देख लेते क्या साइज़ है?
राज झल्लाकर उसके पिछवाड़े पर एक हल्का सा थप्पड़ लगाया और बोला: साली मेरा मज़ाक़ उड़ाती है? चल जा एक कप और चाय ला। शशी हँसती हुई अपने चूतड़ सहलाते हुए भाग गयी।
जय भी उठा और तैयार होकर दुकान चला गया।
राज नहाकर रश्मि को फ़ोन लगाया: हाय मेरी जान कैसी हो?
रश्मि: ठीक हूँ, आपका बहुत धन्यवाद सगाई अच्छी तरह से हो गयी। सब कुछ बहुत बढ़िया रहा।
राज: हाँ सब कुछ बढ़िया था ,तुम्हारी चुदाई भी।
रश्मि: छि आपको तो बस एक ही बात आती है। और कल जो आप उस बच्ची पंडित के साथ करने जा रहे थे ना वो आपको हवालात की सैर करा देती।
राज: अरे जिसे तुम बच्ची कह रही हो वह कार में एक बार फिर से मुझे मज़ा दी। चालू चीज़ है। जल्दी ही चोदूंग़ा उसे। छोड़ो उसे, तुम बताओ तुमको तो मज़ा आया ना डबल धमाके का?
रश्मि हँसते हुए: इसका जवाब तो मैंने कल ही दे दिया था कि मुझे बहुत मज़ा आया।
राज: तो फिर कब इस मज़े को रीपीट करेंगे? एक बार फिर से वही मज़ा अपने घर पर लेंगे, प्रोग्राम बनाओ अमित के साथ?
रश्मि: ठीक है बात करूँगी और बताऊँगी। जय कैसा है?
राज: ठीक है और दुकान चला गया है। डॉली बेटी कैसी है?
रश्मि: वह भी ठीक है किचन में कुछ बना रही है। चलिए मैं रखती हूँ।
राज: अरे मेरी जान एक पप्पी तो दे दो और फिर वह एक चुम्बन की आवाज़ निकाला। उधर से रश्मि ने भी वही पुच्हह मी आवाज़ निकाली और फ़ोन रख दिया।
उधर डॉली किचन में आकर खाना बनाने लगी, तभी उसको याद आया कि उसने अपने ज़ेवरों का डिब्बा तायी जी को दिया था , वो उसे वापस माँ को देना है। वह अमित के कमरे की ओर चल पड़ी। जैसे ही वह उनके कमरे के पास पहुँची उसे माँ की आवाज़ सुनाई दी। वह हंस रही थी और धीमी आवाज़ में बात कर रही थी। उसने खिड़की से देखा कि ताऊजी ने मम्मी को अपनी बाँहों में जकड़ रखा था और उनके हाथ उनकी चूतरों पर घूम रहे थे। बग़ल में बिस्तर पर ताई जो सोई हुई थी या पता नहीं सोने का नाटक कर रहीं थीं। जब ताऊजी की उँगलियाँ उनके पिछवाड़े से होकर नीचे उनकी बुर या गाँड़ में जाने लगी तो डॉली शर्म से वहाँ से हट गई। वह सोच रही थी कि इस उम्र में भी मम्मी को कितनी गरमी चढ़ी हुई है।
ये अच्छा ही हुआ कि डॉली वहाँ से चली आयी वरना वो जो उनकी बातें सुन लेती तो उसका दिमाग़ ही घूम जाता।
रश्मि फुसफुसाकर बोली: राज जी का फ़ोन आया था, वह हम दोनों को फिर से बुला रहे हैं वही थ्रीसम के लिए।
अमित उसकी चूचियाँ दबाते हुए: हाँ यार जल्दी ही प्रोग्राम बनाते है। सच बहुत मज़ा आया था कल। हैं ना?
रश्मि: हाँ आया तो था, पर ऐसे रोज़ रोज़ थोड़े ही जा सकते हैं? अगले हफ़्ते का प्रोग्राम बनाएँगे।
अमित: ठीक है जैसा तुम कहो। तभी अमित का फ़ोन बजा और रश्मि भी बाहर आ गयी और अपने काम में लग गयी।
उधर जय ने दुकान से रश्मि को फ़ोन किया: कैसी हो मेरी जान?
रश्मि: ठीक हूँ मेरे जानू , आप कैसे हैं?
जय: कल की सगाई का नशा अभी भी नहीं उतरा।
रश्मि: अच्छा सगाई का या पार्क का?
जय हँसते हुए: पार्क का भी नहीं उतरा। क्या लोग हैं इस दुनिया में? ससुर बहु से लगा हुआ है और देवर भाभी से।
रश्मि: रिश्तों का तो जैसे महत्व ही नहीं रह गया हो। यह बोलते हुए इसे थोड़ी देर पहले का माँ और ताऊजी का आलिंगन याद आ गया। वह सकपका गयी।
जय: मुझे तो ऐसा लगता है कि वासना इंसान को रिश्तों को भूलने के लिए मज़बूर कर देती है , तुमको क्या लगता है?
रश्मि: सिर्फ़ वासना नहीं कभी कभी मजबूरियाँ भी हो सकती हैं। अब जिसने जो करना है करे , हम कौन होते हैं दूसरों की ज़िंदगी का फ़ैसला करने वाले, है कि नहीं?
जय: सही कहा तुमने। हर कोई फ़्री है अपने जीवन के फ़ैसले लेने के लिए? जिसे जो सही लगे वह वही करेगा। चलो छोड़ो ये सब , पर कल तुम साड़ी में बहुत मस्त लग रही थी। बहुत प्यार आ रहा था तुमपर।
डॉली हँसते हुए: तभी शायद अपने प्यार को मेरे पिछवाड़े से रगड़ रहे थे।
जय झेंपकर बोला: अरे वो तो ऐसे ही पार्क में वो सब देखकर मेरा दिमाग़ ख़राब हो गया था वरना मैं ऐसा करने का सोच भी नहीं सकता ।
डॉली: कोई बात नहीं फिर क्या हुआ? अब तो मैं आपकी ही होने वाली हूँ , थोड़ी बहुत शरारत कर भी ली तो क्या हुआ? वैसे आपने एक बार मेरी छाती ज़रा ज़ोर से ही दबा दी थी, मुझे दुःख गया था।
जय: सॉरी वो पार्क में साला वो सब देखकर मैं ज़्यादा ही उत्तेजित हो गया था। अच्छा एक बात बताओ , मैंने सुना है कि लड़कियाँ एक दूसरे की छातियाँ दबाती है मज़ाक़ मज़ाक़ में ,ये सही है क्या?
डॉली: सब ऐसी नहीं होतीं पर हाँ कुछ को ज़्यादा ही गरमी रहती है। मेरी भी एक दो लड़कियों ने दबाई थीं पर ज़ोर से नहीं।
जय: कई बार बदमाश लड़के भीड़ का फ़ायदा उठाकर दबा देते हैं, ऐसा कभी हुआ तुम्हारे साथ?
डॉली: हाँ हुआ है जब मैं ट्रेन से उतर रही थी तो एक अधेड़ आदमी ने भीड़ का फ़ायदा उठाकर बहुत ज़ोर से दबा दिया। मैं तो मारे दर्द के रोने लगी थी। तब मेरे साथ में ताऊजी भी थे । मम्मी मुझे संभाल रही थी और ताऊजी ने उसकी बहुत पिटायी की थी। आपको बताऊँ लड़कों से ज़्यादा कमीने बड़ी उम्र के आदमी होते हैं। मेरा और मेरी सहेलियों का तो यही अनुभव है।
जय: ओह तुम्हारी सहेलियों के साथ भी ये हुआ है ?
डॉली: हाँ सबके साथ कुछ ना कुछ हुआ ही है। कई सहेलियों को तो घर के आदमी भी ग़लत तरीक़े से छूते हैं।
जैसे पद्मा बता रही थी उसके मामा ही उसकी छाती और नीचे भी सहलाने की कोशिश करते हैं। वो जब छोटी थी तो उनके गोद में बैठती थी पर अब जब वो जवान हो चुकी है तब भी वो उसे अपनी गोद में बैठा लेते हैं और फिर यहाँ वहाँ छूते हैं।
जय: ओह ये तो बड़ी अजीब बात है। चलो दूसरों का छोड़ो और ये बताओ की मैं तुमको कैसा लगा?
डॉली: बहुत अच्छे है आप। सच कह रही हूँ।
जय : और मेरा कैसा है?
डॉली: आपका क्या कैसा है?
जय शरारत से हँसते हुए: हथियार और क्या?
डॉली: छि आप बहुत बिगड़ रहे हैं। मैं आपको शरीफ़ समझती थी। कोई लड़की से ऐसे पूछता है भला?
जय: अरे मैं तो तुम्हारा इम्प्रेशन पूछ रहा हूँ उसके बारे में? और कुछ नहीं।
डॉली: तो सुनिए मुझे तो वह ज़्यादा ही भयानक लगा है। और वो मेरी फाड़ ही देगा। आप ऐसा करना सुहाग रात को एक डॉक्टर बुला कर रखना क्योंकि बाद में सिलाई की ज़रूरत पड़ेगी। यह कहते हुए वह हँसने लगी और जय को भी हँसी आ गयी। फिर डॉली ने आइ लव यू कहकर फ़ोन काट दिया। फिर उसे अहसास हुआ कि जय से बात करते करते उसकी बुर गीली हो गई थी। उधर दुकान में काउंटर के नीचे से जय ने भी अपना खड़ा लौड़ा अजस्ट किया। जय सोच रहा था कि अभी शादी में १५ दिन हैं कैसे कटेंगे ये दिन?
राज आज बहुत ध्यान से काम कर रहा था क्योंकि शादी में बस सिर्फ़ १५ दिन बचे थे। बहुत लिस्ट वो बना चुका था पर जब लड़की और उसके रिश्तेदारों को क्या उपहार देना है सोचा तब उसका दिमाग़ चलना बन्द हो गया। काश आज पायल होती तो कुछ भी परेशानी नहीं होती। तभी उसको अपनी बेटी का ख़याल आया और वह उसी समय उसको फ़ोन लगाया।
राज उसके दामाद ने फ़ोन उठाया: नमस्ते पापा जी।
राज : नमस्ते बेटा, फिर क्या प्रोग्राम बना?
राजीव: पापा मेरा अभी भी डांवाडोल है ओर रचना की बुकिंग हो गयी है।लो रचना से बात करो।
रचना: नमस्ते पापा जी, मैं आऽऽऽऽऽऽ रही हूँ एक हफ़्ते में। ख़ूब मज़ा आएगा जय की शादी में। ख़ूब धमाल करेंगे।
राज: बेटी जल्दी से आओ और सब सम्भालो, तुम्हारी माँ के बिना बड़ी दिक़्क़त हो रही है। वैसे भी अपने परिवार की शायद आख़री शादी है। क्योंकि तुमने तो शायद बच्चे पैदा करने नहीं है और पता नहीं जय भी क्या सोचता है इस बारे में। तो मेरे जीवन में तो पोता पोती की शादी का नसीब होगा ही नहीं।
रचना: क्या पापा आप क्या उलटा पुल्टा सोच रहे हैं। आप नाती पोता की शादी ज़रूर देखेंगे।
राज : हाँ अगर होंगे तो ही ना देखूँगा। तुम लोग अब ये फ़ैमिली प्लानिंग बंद करो मुझे नाती चाहिए समझी?
रचना की आवाज़ इस बार थोड़ी सी उदास होकर आइ: ठीक है पापा। अब रखती हूँ, बाई।
राज ने भी बाई करके फ़ोन काटा और सोचने लगा कि रचना अचानक उदास क्यों हो गयी? फिर वह ख़ुश होकर जय को फ़ोन कर बताया कि रचना अगले हफ़्ते ही आ रही है। जय भी इस समाचार से ख़ुश हो गया।
तभी शशी आइ और बोली: मैंने खाना बना दिया है, आप खा लेना।
राज: बड़ी जल्दी है जाने की। चल जाते जाते अपनी गाँड़ दिखा कर जा।
शशी हँसने लगी और बोली: देखने से क्या होगा?
राज: मैंने कहा ना दिखा। वह हँसते हुए अपनी साड़ी लहंगे के साथ उठा दी और घूम गयी। अब उसकी पैंटी में क़ैद चूतड़ राज के सामने थे। वह अपना लौड़ा मसलते हुए बोला: चल पैंटी नीचे कर ताकि उनको नंगा देख सकूँ।
शशी ने मुस्कुरा कर पैंटी को नीचे किया और उसके गोल गोल चूतड़ उसके सामने थे। शशी का रंग गहुआं था पर चूतड़ काफ़ी गोरे थे।
राज: सामने झुक और चूतरों को फैला।
शशी ने सोफ़े का सहारा लिया और आगे झुकी और फिर हाथ पीछे करके अपने चूतरों को फैलाया। आह क्या दृश्य था उसकी सूजी हुई बुर और टाइट गाँड़ का छेद मस्त लग रहा था। वह अब अपना संयम खो दिया और अपने नीचे का हिस्सा नंगा करके अपने लौड़े को मसल कर झुकी हुई शशी के गाँड़ के सामने घुटने के बल बैठा और अपना मुँह उसकी दरार ने डाल कर उसकी बुर को चूसने लगा और जीभ से चोदने लगा।
शशी उइइइइइइइइइइ कर उठी और फिर वह अपना लौड़ा उसके मुँह के सामने किया और वो उसे भूक़े की तरह चूसने लगी। फिर वह थूक से सने लौड़े को उसकी बुर में फ़िट किया और पीछे से दबाकर उसकी चुदाई में लग गया। अब ठप ठप की आवाज़ के साथ उसकी मज़बूत जाँघें शशी के चूतरों से टकरा रही थीं और फ़च फ़च की आवाज़ भी बुर से आ रही थी।
शशी भी हाय्य्य्य्य और जोओओओओओओओओओर सेएएएएएए चोओओओओओओओदो कहकर चिल्लाई जा रही थी। अब जैसे जैसे वो अपनी चरम सीमा पर पहुँचने लगी वह उन्न्न्न्न्न्न्न्न हुन्न्न्न्न्न्न करने लगी और फिर वह अपनी जाँघों को आपस में भींचकर उसके लौड़े को जकड़ ली और राज भी इतना मज़ा बर्दाश्त नहीं कर पाया और वो दोनों झड़ने लगे।
शशी बाथरूम से बाहर आयी और बोली: अब जाऊँ?
राज ने उसे प्यार से चूमा और कहा: जाओ मेरी जान, पर डॉक्टर को शाम को ज़रूर दिखा देना और ये लो पैसे।
शशी भी उसको चूमकर पैसे लेकर चली गयी।
राज अब आराम करने लगा।
अगले दो दिन कुछ ख़ास नहीं हुआ। शशी डॉक्टर को दिखा आइ थी और टोनिक और दूसरी दवाइयाँ लेने लगी थी । राज दिन में एक बार उसको चोद देता था।
उस दिन राज नाश्ता करके शशी से शादी के कपड़े संभलवा रहा था तभी फ़ोन बजा। उसने हेलो कहा और दूसरी तरफ़ से एक लड़की की पतली सी आवाज़ आयी: हेलो, कौन बोल रहे हैं?
राज: मैं राज बोल रहा हूँ, आप कौन बोल रही हैं?
लड़की: अंकल जी मैं पंडित बोल रही हूँ।
राज हैरानी से फ़ोन को देखा और बोला: अरे पंडित बेटी, कैसी हो? बोलो आज हमारी याद कैसे आ गयी।
पंडित: अंकल वो आपने अपना विज़िटिंग कार्ड रख दिया था ना मेरे पर्स में , वहीं से आपका नम्बर मिला है। इसलिए फ़ोन किया है।
राज का लौड़ा खड़ा होने लगा। वह बोला: हाँ हाँ बेटी क्यों नहीं, बोलो क्या हाल है? आज स्कूल नहीं गयी?
पंडित: जी अंकल आज स्कूल की छुट्टी हो गयी है , हमारे प्रिन्सिपल की माता जी का निधन हो गया है।
राज: बेटी इस समय तुम कहाँ हो?
पंडित: जी स्कूल से बाहर आ रही हूँ।
राज: तो यहाँ आ जाओ हमारे घर , तुम्हें शशी बढ़िया पकोड़े खिलाएगी।
पंडित: जी मैं तो स्कूल बस से आती हूँ, मैं आपके घर कैसे आऊँगी?
राज: अरे बेटी ऑटो कर लो और हमारे घर तक आ जाओ। नीचे शशी खड़ी रहेगी वो पैसे दे देगी। ठीक है ना? उसने अपना लौड़ा मसलते हुए कहा।
पंडित: जी अंकल मैं आती हूँ, पर आप शशी दीदी को तो बाहर भेज दीजिएगा।
राज: हाँ हाँ तुम बिलकुल फ़िकर ना करो वह घर के सामने खड़ी मिलेगी पैसों के साथ। फिर उसने फ़ोन काट दिया।
शशी उसकी बात सुन रही थी , वो बोली: ये क्यों आ रही है यहाँ? पकोड़े खाने, या कुछ और खाने?
राज कुटिल हँसी हंस कर बोला: साली पकोड़े नहीं मेरा लौड़ा खाने आ रही है। और तुम मेरी मदद करोगी उसकी बुर फाड़ने में, समझी?
शशी: वह थोड़ी छोटी नहीं है आपके इस मोटे हथियार के लिए? उसको अपनी उम्र के लौंडों से चुदवाना चाहिए जिनके छोटे और पतले हथियार होते हैं। पता नहीं वो आपका कैसे लेगी?
राज: अरे बहुत प्यार से मस्त गीला करके क्रीम लगाकर लेंगे उसकी। आह देखो मेरा लौड़ा कैसे अकड़ गया है? मैंने तो उसे फ़ोन किया नहीं वो ख़ुद ही चुदवाने आ रही है तो क्या मैं उसे छोड़ दूँ?
शशी ने प्यार से उसके लौड़े को लोअर के ऊपर से सहलाया और बोली: आप ऐसा करो लूँगी पहन लो और चड्डी भी खोल दो ताकि उसको आपके लौड़े का अहसास हो जाए। वो मस्त गरम हो जाएगी।
राज: वाह क्या सुझाव दिया है, बल्कि अब तो मैं लूँगी में हीं रहना शुरू कर देता हूँ। चड्डी भी नहीं पहनूँगा । शाबाश क्या मस्त सेक्सी लड़की हो तुम। सोचकर ही मज़ा आ गया, जाओ लूँगी लाओ।
शशी जब लूँगी लायी तो वह नीचे से पूरा नंगा था और उसका लौड़ा ऊपर नीचे हो रहा था। शशी आकर झुकी और उसके लौड़े के टोप को चूम ली। फिर वह लूँगी डाला और उसका खूँटा लूँगी से अलग से दिख रहा था। शशी इस सेक्सी दृश्य को देखकर मुस्कुराई। तभी पंडित की मिस्ड कोल आयी। उसने जल्दी से शशी को पैसे देकर बाहर पंडित को लाने भेजा।
>जब पंडित शशी के साथ अंदर आया, तो वो सोफ़े पर अपनी गोद में एक किताब रख कर बैठा था। पंडित आकर उसे नमस्ते की और सामने वाले सोफ़े पर बैठ गयी। वह स्कर्ट और टॉप की स्कूल यूनीफ़ॉर्म में थी। उसकी गदराइ जाँघें साफ़ दिखाई पड़ रही थीं। टॉप उसकी चूचियो पर कसा हुआ था। क्या ग़ज़ब कि लौड़ियाँ थी, राज के लौड़े ने प्रीकम छोड़ना शुरू कर दिया।
राज: बेटी, बताओ क्या खाओगी? शशी बहुत अच्छे पकोड़े बनाती है।
पंडित: जी अंकल खा लूँगी।
राज ने शशी को पकोड़े बनाने को बोला। फिर वह उससे स्कूल की और उसकी सहेलियों की बातें करने लगा। जब उसकी बातों से वो सहज हो गयी तब वह उससे जय की शादी की बातें करने लगा। उसने देखा कि अब वो पूरी तरह से सहज हो चुकी थी।
तभी शशी पकोड़े की प्लेट लायी और राज पंडित को बोला: आओ बेटी मेरे पास बैठ जाओ, यहाँ से पकोड़े उठाने में मुश्किल नहीं होगी।
अब वह उठकर उसके पास आकर बैठ गयी। राज ने पकोड़े उठाए और उसे दिया। वह उसकी प्लेट से लेकर खाने लगी। तभी शशी चटनी भी लायी और राज एक पकोड़े में चटनी लगाकर अपने हाथ से उसके मुँह में डालने लगा। वह हँसती हुई बोली: अंकल मैं कोई बच्ची थोड़ी हूँ, जो आप मुझे ऐसे खिला रहे हैं!
राज हँसते हुए बोला: ये तो सच है कि तुम अब बच्ची नहीं रही पूरी जवान हो गयी हो। उस दिन होटेल में मैंने ख़ुद सब कुछ जाँच करके देख लिया था। ठीक है ना?
पंडित: अंकल उस दिन पता नहीं मुझे ऐसा लगता है कि कुछ नशा सा हो गया था। मुझे कुछ ठीक से याद नहीं है।
राज: होटेल का याद नहीं है पर कार का याद है क्या?
पंडित अबके शर्मा कर: हाँ वो थोड़ा थोड़ा याद है।
अब राज ने एक हाथ उसकी नंगी जाँघ पर रखा और उसे सहलाते हुए बोला: सच में बेटी तुम मस्त जवान हो गयी हो और अब तुमको जवानी के मज़े लूटने चाहिए।
तभी शशी चाय लायी। राज: शशी, बोलो तो हमारी पंडित जवान हो गयी है कि नहीं?
शशी हँसकर: हाँ जी पूरी जवान हो गयी है यह तो।
राज: देखो इसकी टॉप के ऊपर से इसके दूध कितने बड़े दिख रहे हैं। यह कहते हुए उसने उसकी छातियों को सहला दिया। पंडित का बदन सिहर उठा। अब वह झुका और उसकी स्कर्ट को थोड़ा सा उठाकर उसकी जाँघ सहलाने लगा। वह फिर से सिहर उठी।
पंडित: आप ये कौन सी किताब पढ़ रहे हैं अंकल जी? वह उसकी गोद में रखी किताब को देखकर बोली जो राज ने अपने लौड़े का कड़ापन छिपाने के लिए रखी हुआ था।
राज: बस बेटी ऐसी ही एक कहानी की किताब है। उसे छोड़ो , लो तुम पकोड़े खाओ। यह कहकर उसके मुँह में चटनी लगा के एक और पकोडा डाला । उसका दूसरा हाथ अब उसकी पैंटी के आसपास आ चुका था। आऽह क्या चिकनी जाँघ है, सोचकर उसके लौड़े ने फिर से एक झटका मारा और किताब भी हिल गयी। अब शशी ने ही उसकी एक चूचि दबाई और बोली: आह सच में ये जवान हो गयी है, तुम यहाँ अंकल से मज़ा लेने आयी जो ना पंडित?
पंडित शर्माकर: मैं तो बस ऐसे ही मिलने आयी हूँ।
शशी: पंडित अगर तुमको मज़ा चाहिए तो अंकल की गोद में बैठ जाओ।
राज: हाँ बेटी आओ मेरी गोद में बैठकर पकोड़े खाओ।
पंडित शर्माकर उसकी गोद में बैठी और फिर उछल गयी और बोली: बाप रे ये क्या चुभा?
राज हँसते हुए: अरे बेटी कुछ नहीं, ये तो मेरा डंडा है जो सब आदमियों के पास होता है। यह कह कर उसने अपने लौंडे को लूँगी के ऊपर से दबाकर उसे उसका अहसास कराया। वह उसे फिर से अपनी गोद में खिंचा और इस बार उसको अपने लौड़े को ऐसे दबाकर रखा ताकि वह उसकी गाँड़ में ना चुभे। बल्कि वह उसकी बुर को लम्बाई में छू जाए।
पंडित अब गरम होने लगी क्योंकि उसकी पैंटी पर उसका लौड़ा लम्बाई में पूरी तरह से रगड़ रहा था और वह अब गीली होने लगी थी। तभी राज ने उसकी दोनों छातियाँ अपने हाथों में ले लिया और उनको दबाकर उसे और मस्ती से भरने लगा। अब पंडित की सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसकी कमर अपने आप हिलने लगी और पैंटी के ऊपर से वह अपनी बुर उसके लौड़े पर रगड़ने लगी। राज उसके गालों को चूमते हुए,उसके होंठ भी चूमने लगा।
अब शशी अपनी बुर खुजाते हुए बोली: चलिए ना इसे बिस्तर पर ले चलिए और इसकी जवानी की प्यास बुझा दीजिए। इसीलिए तो यह यहाँ आयी है।
राज ने उसको बच्चे की तरह गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर उसके होंठ चूसते हुए उसकी चूचियाँ दबाने लगा। फिर वह बोला: बेटी, तुम्हारा कोई बोय फ़्रेंड है क्या?
पंडित: जी अंकल है।
राज: उसने तुम्हें चोदा है क्या, बेटी?
पंडित शर्माकर: जी हाँ कई बार।
राज: ये बढ़िया है कि तुम कुँवारी नहीं हो? अच्छा जब वह तुमको चोदता है तो मेरे पास क्यों आइ हो चुदवाने?
पंडित: जी उसके साथ मज़ा नहीं आता, और उस दिन आप जो मेरी नीचे वाली चूसे थे और सहलाए थे , मुझे उसमें बहुत मज़ा आया था।
अब राज ने अपने कपड़े उतारे और उसका लौड़ा देखकर उसकी आँखें फैल गयी। वो बोली: बाप रे इतना बड़ा? रितेश का बहुत छोटा और पतला है।
शशी: अरे ये मर्द का लौड़ा है कोई बच्चे की नूनी थोड़े है। वह उसको सहलाकर बोली।
राज अब झुक कर उसकी टॉप को निकाला और उसकी स्कर्ट भी उतार दिया। वाह क्या माल लग रही थी वह ब्रा और पैंटी में। वह पागल सा होकर उसके पेट को चूमने लगा फिर ऊपर जाकर उसकी ब्रा पर से चूचियाँ दबाके उसके होंठ और गाल चूमने लगा। फिर उसने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और पंडित उसे चूसने लगी। अब वो उसकी ब्रा भी निकाला और उसके मस्त संतरों को देखकर वह मज़े से चूसने लगा। अभी अधबने निपल्ज़ को चूसते हुए वह पंडित की बुर को गीला कर दिया। फिर नीचे आकर उसकी जाँघों को चूमा और चाटा। अब पंडित भी मज़े में आकर हाय्य कर उठी। अब वो उसकी पैंटी नीचे किया और उसकी हल्के काले बालों वाली बुर देखा और उसकी चुम्मियाँ लेने लगा। उसकी जीभ उसकी बुर के अंदर जाकर उसे पागल कर रही थी और वह उइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽ कर उठी।
अब पंडित बुरी तरह गीली हो चुकी थी और अपनी कमर उछालकर अपनी वासना का प्रदर्शन कर रही थी।
शशी: लीजिए क्रीम लगा लीजिए , बहुत टाइट है , ऐसे नहीं घुसेगा। शशी उसके लौड़े पर क्रीम लगायी और फिर उसने पंडित की बुर में भी दो ऊँगली डालकर क्रीम चुपड़ा। फिर बोली: बहुत टाइट है , आराम से करिएगा।
अब राज ने उसकी गाँड़ के नीचे एक तकिया रखा और फिर उसकी टाँगे घुटनो से मोड़कर उनको फैलाके ऊपर कर दिया। शशी ने उसके दोनों पैर पकड़ लिए ।अब वो अपना लौड़ा हाथ में लेकर दूसरे हाथ से उसकी बुर की पुत्तियों को फैलाया। अब अपना मोटा सुपाड़ा उसकी तंग छेद पर रखा और हल्के से दबाने लगा। मोटा लौड़ा क्रीम के कारण अंदर को जैसे धँसने लगा। फिर उसने एक धक्का मारा और वह चिल्लाई: आऽऽऽऽहहहह मरीiiiiiii। उइइइइइइइइ अंकल जी निकालो नाआऽऽऽऽऽऽ आह्ह्ह्ह्ह्ज।
पंडित के चिल्लाने पर ध्यान ना देकर वह अब आख़री धक्का मारा और पूरा लौड़ा उसकी बुर में पेल दिया। पंडित अब गिड़गिड़ाने लगी: प्लीज़ निकाऽऽऽऽऽऽऽऽल लो बहुत दर्द हो रहा है। आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह प्लीज़ प्लीज़ ।
राज ने आगे होकर उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए और वह अब गन्न्न्न्न्न्न करने लगी और फिर वह उसके निपल्ज़ को मसल कर उसकी मस्ती जगाने में लग गया। पंडित भी अब थोड़ा शांत हो गयी थी।
राज: बेटी, दर्द कम हुआ?
पंडित: जी अंकल, पर आपका बहुत बड़ा है ना उफ़्फ़् बहुत दुख रहा था।
राज: बस बेटी अब मज़ा लो , तुम नीचे से धीरे धीरे अपनी कमर हिलाओ और देखो तुमको कैसा लगता है?
पंडित वैसे ही करी और बोली: हाऽऽऽऽऽय अंकल अच्छा लग रहा है।
राज: फिर मैं अब चुदाई शुरू करूँ मेरी गुड़िया?
पंडित: जी अंकल करिए।
राज मुस्कुरा के: क्या शुरू करूँ?
पंडित शर्माकर: : चुदाई ।
अब राज मस्त हो गया और उसने चुदाई चालू की और उसकी कमर अब ऊपर नीचे होकर उसे मस्ती से भर रही थी। वह अब भी उसके होंठ चूस रहा था और उसके निपल्ज़ दबा रहा था। उसका पूरा बदन पंडित के बदन के ऊपर था पर वज़न उसने अपनी कुहनियों और घुटने पर के रखा था। उसके बालों से भरे विशाल चूतड़ ऊपर नीचे होकर पंडित की बुर में मानो आग लगा रहे थे। शशी उसके बड़े बड़े बॉल्ज़ को सहला रही थी जो कि इस चुदाई के प्रत्यक्ष दर्शी थे।
अब वो चिल्लाने लगी: उइइओइइइइइ उम्म्म्म्म्म्म्म हाऽऽऽऽऽय्यय उइइइइइइइइ ओओओओओओओओओ । और वह अब झड़ने लगी और राज भी उसकी टाइट बुर की जकड़न को और बर्दाश्त नहीं कर सका और उसकी बुर में अपना माल गिराने लगा। दोनों एक दूसरे से बुरी तरह से चिपक कर अपने अपने ऑर्गैज़म का आनंद लेने लगे।फिर पूक्क की आवाज़ से उसका लौड़ा बाहर आ गया। पंडित बुरी तरह से थक कर लस्त होकर पड़ी थी। शशी ने उसकी बुर की जाँच की, वहाँ उसे कुछ बूँदें ख़ून की भी वीर्य से सनी हुई दिखी। वह बोली: पंडित , आज तुम्हारी असली चुदाई हुई है , इसके पहले तुम्हारे दोस्त ने बस तुम्हारी बुर का उद्घाटन किया था , चुदाई तो आज ही हुई है।
पंडित उठी और बाथरूम से आकर बोली: आऽऽह मुझे बात दर्द हो रहा है नीचे में। चला भी नहीं जा रहा ।
शशी: पहली चुदाई में ऐसा होता है। आज घर में बहाना बना देना कि स्कूल में गिर गयी तो पैर में मोच आ गयी है, समझी?
पंडित: जी समझी। वह अब कपड़े पहन रही थी।
राज भी बाथरूम से बाहर आया और बोला: बेटी एक बार और हो जाए?
पंडित: नहीं अंकल मैं तो ऐसे ही दर्द के मारे मरी जा रही हूँ, अब और नहीं। फिर राज उसके पास आया और उसके चूतरों को सहलाया और उसकी चुम्मी लेकर बोला: बेटी जब भी चुदाई का मन हो फ़ोन कर देना, मैं सब इंतज़ाम कर दूँगा, ठीक है? और हाँ एंटी प्रेग्नन्सी पिल्ज़ खा लेना। अभी बहुत छोटी हो अभी से माँ तो नहीं बनना है ना?
पंडित: जी अभी कई दिन तक हिम्मत ही नहीं होगी। आपका यह मोटू इतना दुखाया है कि क्या बोलूँ। ये कहते हुए उसने उसके लौड़े को लूँगी के ऊपर से पकड़ कर दबा दिया। फिर बोली:और हाँ , मैं अभी माँ नहीं बनूँगी, मैं वो गोली खा रही हूँ।
राज हँसने लगा।
शशी उसे नीचे जाकर ऑटो में बिठा आयी और उसके पैसे भी दे दिए।
जब शशी वापस आयी तो उसके हाथ में एक बंडल था। वह बोली: लीजिए शादी के कार्ड छप कर आ गए। अब लड़कियों को चोदना छोड़िए और कार्ड बाँटिये वरना कोई भी शादी में नहीं आएगा।
राज: आह रचना की शादी में भी सबसे परेशानी वाला काम यही था और अब जय की शादी में भी यही काम सबसे कष्टप्रद है।
शशी: पर कार्ड तो बाटना ही होगा ना?
राज: हाँ सच है, पर इसमें भी कभी कभी मज़ा मिलता है। कई घरों में अकेली औरतें रहतीं हैं , उनके साथ थोड़ी सी चूहल हो जाती है। और कभी कोई पुराना माल अकेला मिल जाए तो ठुकाई भी हो सकती है।
शशी: हे भगवान, कमसे काम कार्ड तो सही मन से बाट आओ आप। सब जगह बस एक ही जुगाड़ में रहते हैं, चुदाई की।
अब दोनों हँसने लगे।
रश्मि और अमित कार्ड बाँट कर पूरी तरह से थक चुके थे, पिछले तीन दिनों से वो कार्ड ही बाँट रहे थे।
अमित: चलो थोड़ा आराम कर लेते हैं एक एक कॉफ़ी पी लेते हैं इस रेस्तराँ में। वो अंदर जाकर कॉफ़ी ऑर्डर करते हैं।
रश्मि: भाई सांब, चलो कार्ड बाटने का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। अब थोड़ी चैन की साँस के सकते हैं।
अमित: राज का भी फ़ोन आया था । वह भी कार्ड बाट बाट कर पूरी तरह से थक चुका है।
रश्मि: उनके कार्ड बट गए?
अमित: हाँ उनके कल ही पूरे बट गए थे। असल में वो हमको वहाँ बुला रहे हैं कल मज़े लेने के लिए। उसने रश्मि के हाथ को अपने हाथ में लिया और एक ऊँगली से उसकी हथेली से रगड़ कर चुदाई का सिग्नल दिया।
रश्मि लाल होकर : अभी उनको इसकी सूझ रही है? अब शादी को आठ दिन बचे हैं इनको मस्ती सूझ रही है। इनको बोल दो अब शादी के बाद ही प्रोग्राम बनाएँ।
अमित: तुम ही बोल दो ना। मेरी कहाँ मानेंगे।
रश्मि ने राज को फ़ोन किया: हाय नमस्ते कैसे हैं?
राज: पागल हो रहा हूँ तुम्हारी याद में। बस अब आ जाओ अमित के साथ।
रश्मि: क्या भाई सांब ? आप भी क्या बोल रहे हो? शादी को बस आठ दिन बचे हैं। इतना काम पड़ा है और आपको ये सब सूझ रहा है? रचना बेटी कब आ रही है?
राज: वह परसों आ रही है, तभी तो कह रहा हूँ कि कल आ जाओ और इसके बाद और कोई मौक़ा नहीं मिलेगा।
रश्मि: पर यहाँ बहुत काम बचा है। दो दिनो के बाद रिश्तेदार भी आने लगेंगे। शादी के बाद प्रोग्राम जमा लीजिएगा ना प्लीज़।
राज: देखो रश्मि, अब कोई बहाना नहीं, कल आना ही होगा। अगर अमित के पास समय नहीं है तो तुम अकेली आ जाओ।
रश्मि : आप भी बड़े ज़िद्दी हैं। फिर वह अमित को बोली: आप ही समझाइए ना ये तो मान ही नहीं रहे हैं।
अमित फ़ोन लेकर: देखो यार मन तो हमारा भी है पर टाइमिंग सही नहीं है। बहुत काम हैं यहाँ ।
राज: चलो ऐसा करो कल १० बजे आ जाना और खाना खा कर दो बजे वापस चले जाना। आधा दिन तो मिल ही जाएगा। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। रश्मि को मनाओ।
अमित: ठीक है भाई कल हम यहाँ से ८ बजे निकलते हैं और दो बजे तुम हमें फ़्री कर देना।
रश्मि: पर कल के काम ?
अमित: चलो अब जैसे भी होगा काम चला लेंगे। ठीक है भाई, कल का पक्का।
राज: एक बार रश्मि से बात करा दो।
रश्मि फ़ोन पर आके: तो आपने अपनी बात मनवा ही ली?
राज: मेरी जान। तुम्हें चोदने को मरा जा रहा हूँ। इतना भी ना तड़पाओ ग़रीब को। आ जाओ कल और मजे से डबल चुदाई का आनंद लो। तुम कहोगी तो शशी को भी इसमे शामिल कर सकते है।
रश्मि: नहीं नहीं, जितने कम लोग जाने इसके बारे ने उतना ही भला है।
राज: ठीक है मेरी जान जैसा तुम चाहोगी वैसा ही सही। अब एक चूम्मा दे दो।
रश्मि: धत्त हम कोफ़ी पी रहे हैं बाहर। आप दे दो ।
राज: मुआ मुआ करके चुम्मी दिया। रश्मि ने कहा मिल गया। अब रखती हूँ।
अमित: बड़ा ही सेक्सी आदमी है यह बंदा। कल लगता है तुम्हारी ज़ोर से चुदाई करेगा।
रश्मि: छी आप लोगों को गंदी बातें करने में मज़ा आता है ना? चलो अब चलें यहाँ से। रश्मि उठने लगी पर वह महसूस कर रही थी कि राज से बात करने के दौरान उसकी बुर पनियाने लगी थी और वह अपनी साड़ी ठीक करने के बहाने अपनी बुर को खुजा बैठी।
अमित उसको बरसों से जानता था वो मुस्कुराया और बोला: लगता है खुजा रही है कल की चुदाई का सोचकर।
रश्मि लाल होकर: चुपचाप चलिए यहाँ से । ख़ुद तो कुछ करते नहीं और मुझे उलटा पुल्टा बोल रहें हैं।
अमित: अरे क्या नहीं करता? अपने घर में मौक़ा ही मुश्किल से मिलता है । आज रात को आ जाना , तुम्हारी भाभी को नींद की गोली खिला दूँगा फिर मस्ती से चोदूँगा तुमको, ठीक है।
रश्मि: रहने दीजिए अब कल का प्रोग्राम तो बन ही गया है , आज आराम से सोते हैं, वैसे भी कार्ड बाट कर बहुत थक गयी हूँ।
अमित: जब मैं प्रोग्राम बनाता हूँ तो तुम पीछे हट जाती हो, और मुझे ही सुनाती हो।
अब रश्मि हंस दी और बोली: सॉरी बाबा, ग़लती से बोल दिया। आप बहुत अच्छे हैं एंड आइ लव यु । यह कहकर उसने उसका हाथ दबा दिया।
अब दोनों घर के लिए निकल पड़े।
राज बहुत ख़ुश था कि सब कार्ड बट ही गए। साथ ही कल रश्मि और अमित आएँगे और बहुत मज़ा लेंगे। वह अपना लौड़ा दबाकर मस्ती से भर उठा।
अगले दिन उसने शशी को बताया कि रश्मि और अमित आ रहे हैं और मस्त चुदाई का प्लान है। इसलिए वह खाना बना कर १० बजे के आसपास चले जाये।
अगले दिन जब रश्मि ने डॉली को बताया कि वो और अमित उसके ससुराल जा रहे हैं तो वो हैरानी से पूछी: ऐसा क्या काम आ गया है?
रश्मि: बस कुछ ज़ेवर फ़ाइनल करने हैं, तेरे ससुर जी थोड़ी मदद कर देंगे । उनकी अच्छी पहचान है वहाँ। हम शाम तक वापस आ जाएँगे।
डॉली: क्या मम्मी, ज़ेवर तो हमारे शहर में भी मिलते हैं। इसके लिए भला वहाँ जाने की क्या ज़रूरत है?
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अब रश्मि क्या कहती अपनी बेटी से कि उसके ससुर की ज़िद के आगे उसकी नहीं चली और वह अभी उससे चुदवाने जा रही है। और तो और आज रश्मि ने अपनी झाँटें भी साफ़ की थी क्योंकि वो भी काफ़ी बड़ी हो गयीं थीं। वह बोली: चलो देख आते हैं, पसंद नहीं आएँगे तो नहीं लेंगें। तभी अमित आ गया और उसकी आँखें रश्मि की सुंदरता देख कर चमक उठीं। आज रश्मि ने नाभि दर्शना साड़ी पहनी थी जो कि स्लीव्लेस ब्लाउस और उसकी छाती की गहराइयों को भी काफ़ी कुछ दिखा रहे थे। अमित का लंड सरसरा उठा। उसके चूतरों में भी साड़ी का उठान बहुत ही मादक दिखाई दे रहा था।
जब दोनों बाहर आए और पास के बस स्टैंड के लिए चल पड़े। अमित: आज तो बहुत मस्त माल दिख रही हो? क्या सजी हुई हो? लाल होंठों के लिपस्टिंक को तो देख कर ही मेरे खड़ा हो गया है।
रश्मि: अच्छा फिर शुरू हो गयी गंदी बातें।
अमित: इसमें गन्दा क्या है, तुम दिख ही रही हो इतनी मस्त। देखो वो काली क़मीज़ में बूढ़ा तुमको कैसे देख रहा है जैसे खा ही जाएगा। देखो अब अपना लंड भी खुजाने लगा।
रश्मि उसको देखकर मुस्कुराती हुए बोली: आप बस भी करो ।
अमित: अच्छा छोड़ो ये सब, बताओ झाटें साफ़ की या नहीं? परसों जब चोदा था तो साली गड़ रहीं थीं।
रश्मि आँख मटका कर बोली: हाँ साफ़ कर ली हैं आज सुबह नहाने के पहले।
अमित: चलो, अच्छा किया , राज को चिकनी बुर पसंद है।
रश्मि: और आपको बालों वाली पसंद है क्या? थोड़े से भी बढ़ जाते हैं तो हल्ला मचाने लगते हैं आप।
अमित हँसने लगा। वो बस स्टैंड पहुँच गए थे। एक बस आइ तो उसमें बहुत भीड़ थी। अमित बोला: जाने दो और आएँगी। पर पता नहीं क्या बात थी कि सभी बसें भरी हुई ही आ रही थी। आख़िर में रश्मि बोली: अब जो भी बस आएगी ऊसीमे घुस जाएँगे, वरना देर हो रही है।
अमित : ठीक है अब जो भी आएगी उसमें ही चलते हैं।
तभी एक बस आयी और अमित भाग कर उसमें चढ़ गया और रश्मि भी किसी तरह जगह बना कर अंदर आ गयी। तभी भीड़ आइ और अमित आगे को हो गया। रश्मि के आस पास १८/१९ साल के दो लड़के खड़े थे जो उसे घूरने लगे। रश्मि समझ गयी कि ये लड़के उसको आज छोड़ेंगे नहीं। एक लड़के का हाथ तो उसकी नंगी कमर पर आ भी चुका था,
और दूसरा भी उसके चूतरों को छू लेता था।
तभी रश्मि ने देखा कि अगले स्टॉप पर एक आदमी उतरने के लिए खड़ा हुआ तो वो जल्दी से उसकी सीट पर बैठ गयी। अब उसने देखा कि उसकी बग़ल में एक क़रीब ४० साल का बंदा बैठा था जो कि उसे बड़ी ही गंदी नज़र से देख रहा था। उधर वो दोनों लड़के अब उसके सीट के साथ आ कर खड़े हो गए थे। एक लड़के ने रश्मि के पीठ के पास वाली रोड पकडली और उसका हाथ बार बार उसकी पीठ से टकराने लगा। दूसरा लड़का अपना अगला भाग रश्मि की गरदन से बार बार छुआ रहा था । अब बग़ल में बैठा आदमी भी उसकी तरफ़ सरका और दोनों की जाँघें रगड़ने लगीं।
फिर वह लड़का अपने पैंट के आगे के भाग को उसके कंधे पर चुभाने लगा। दूसरे लड़के ने अब उसकी गरदन और पीठ सहलाना शुरू किया और उसका पड़ोसी अब उसकी जाँघ सहलाने लगा। रश्मि एक मिनट के लिए तो ग़ुस्सा हुई फिर मन ही मन सोची की क्यों ना मज़ा लिया जाए इस परिस्थिति का भी। फिर वह रिलैक्स हो गयी और उसने इन सबको मज़ा सिखाने का सोचा। उसने अपना पल्लू ठीक करने के बहाने उसको नीचे किया और अब उसकी बड़ी बड़ी आधी नंगी छातियाँ उन तीनों के सामने थी। फिर वह पल्लू को वापस इस तरह से रखी कि उसकी एक छाती साड़ी के बाहर थी। अब वह आगे होकर सामने की सीट का रॉड पकड़ ली और अब उसकी नंगी गदराई बाँह के नीचे एक चूचि कसे ब्लाउस में फँसी हुई थी। वो लड़का जो उसके कंधे पर अपना लण्ड रगड़ रहा था , अब उसके ब्लाउस पर लण्ड रगड़ने लगा । रश्मि को अपनी पैंटी गीली होती महसूस हुई।
उधर दूसरा लड़का पीछे से हाथ लगाकर उसकी साड़ी के अंदर हाथ डाला और दूसरी चूचि के नंगे भाग को छुआ। पड़ोसी तो जाँघ सहला ही रहा था। अब रश्मि ने अपना ख़ाली हाथ अपनी छाती के पास मोड और पहले लड़के के लण्ड को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया। अब उस लड़के की हालत ख़राब होने लगी। इस बात की उसने कल्पना नहीं की थी जो हो रहा था। अब रश्मि बग़ल वाले का अपनी जाँघ पर रखा हाथ पकड़ी और उसको दबाने लगी। वह भी बुरी तरह से उत्तेजित हो गया। तभी पीछे वाला लड़का उसकी चूचि दबाने लगा। अब रश्मि ने अपने हाथ का लंड ज़ोर ज़ोर से दबाना चालू किया और जल्दी ही वह लड़का अपना पानी छोड़ दिया और उसके पैंट के ऊपर एक धब्बा सा बन गया।
रश्मि मुस्कुराई और उसको पीछे को धक्का दी और फिर मुँह मोड़कर दूसरे लड़के को आगे आने का इशारा की। वह फट से आगे आया और अपना लंड उसके दूध पर दबाने लगा। रश्मि उसके भी पैंट के ऊपर से लंड पकड़ ली और तीन चार बार दबाने से ही वह भी झड़ गया। वह भी अब पीछे हट गया। रश्मि अपनी मस्ती से बहुत ख़ुश थी।
अब उसने अपने बग़ल वाले को देखा और अपनी साड़ी का पल्लू फिर से ठीक करने के बहाने अपनी एक चूची उसके सामने कर दी। वह तो आधी नंगी चूची देखकर ही बुरी तरह से उत्तेजित हो गया। अब रश्मि उससे सट कर बैठी और अपना साड़ी का पल्लू उसकी पैंट के ऊपर गिरा दी। अब वह अपनी साड़ी के पल्लू के नीचे से उसकी पैंट पर हाथ ले गयी और उसका लंड दबाने लगी। वह आदमी तो जैसे मस्ती के मारे उछल ही पड़ा। अब वह भी रश्मि की जाँघ को दबाते हुए उसकी चूचि को घूरते हुए अपनी कमर को हिलाने लगा , मानो उसके हाथ को चोद रहा हो। वह भी अब इस विकट परिस्थिति में झड़ने लगा। पैंट के ऊपर बन गए धब्बे को छुपाने जे लिए वह रुमाल निकाला और धब्बे के ऊपर रख दिया । रश्मि भी टिशू पेपर निकाली और अपना हाथ साफ़ की जिसने तीनों का थोड़ा सा वीर्य लगा था। फिर उसने वह किया जिसकी कल्पना भी उस आदमी ने कभी नहीं की थी। वह अपनी साड़ी के ऊपर से अपनी बुर को अच्छी तरह से खुजाई और ये करते हुए वह मुस्कुराते हुए उस आदमी की आँखों में देखती रही। उस आदमी के पैंट में फिर से तंबू बनने लगा। अबके रश्मि ने ऐसे मुँह फेर लिया जैसे उस आदमी का अस्तित्व ही इस दुनिया ने नहीं है। अब वह चुप चाप बैठे हुए था। रश्मि अपनी बिजय पर मुस्कुराई।
थोड़ी देर में अमित आया और उतरने को बोला। रश्मि उठी और अपने पिछवाड़े को उस आदमी की तरफ़ करके अपनी साड़ी ठीक करने के बहाने अपनी गाँड़ अच्छी तरह से खुजाई । फिर वह मुड़कर उसे देखी तो हँसने लगी क्योंकि वह फिर से अपना लौड़ा दबाकर झड़ रहा था , उसका चेहरा इस बात की गवाही दे रहा था।
रश्मि और अमित उतरे तो अमित बोला: भीड़ बहुत थी, कोई परेशानी तो नहीं हुई।
रश्मि मन ही मन मुस्कुराकर बोली: नहीं मुझे तो कोई परेशानी नहीं हुई। हाँ तीन लोगों को ज़रूर हुई।
अमित: कौन तीन लोग?
रश्मिटालते हुए बोली: अरे वही जिन्होंने मुझे बैठने के लिए जगह दी।
अमित को कुछ समझ नहीं आया और उसने भी आगे कुछ नहीं पूछा।
फिर अमित बोला: मैंने फ़ोन किया है राज आता ही होगा। तभी उसे वह दिख गया। वह फिर से बोला: देखो तुम्हारा आशिक़ आ गया। क्या जींस और टी शर्ट में अपनी मसल दिखा रहा है, इस उम्र में भी।
रश्मि हँसने लगी और मस्ती से बोली: मसल क्या अभी तो और बहुत कुछ दिखाएगा।
अमित चौक कर उसे देखा और सोचने लगा कि इसे क्या हुआ है, एकदम से मस्ती के मूड में आ गई है। उसे भला क्या पता था कि यह औरत अपनी मस्ती में इसलिए है कि वह अभी तीन तीन लंडों का रस निकाल कर आइ है। और ख़ुद भी अपनी पैंटी गीली कर चुकी है।
तभी राज आया और अमित से गले मिला और रश्मि के पास आकर उसकी कमर सहला कर बोला: क्या हाल है मेरी जान। बहुत ख़ुश दिख रही हो?
रश्मि चहक के बोली: बिलकुल बहुत ख़ुश हूँ आपसे मिलने जो आयी हूँ। इतने दिनों के बाद आपको देखकर अच्छा लग रहा है।
राज: आज तो तुम एकदम चक्कू ( चाक़ू) लग रही हो मेरी जान। पता नहीं किसको किसको कटोगी।
रश्मि: चक्कू तो आपके पास है मेरे जानू, मैं तो बस कटने आइ हूँ।
राज हँसते हुए : एक चक्कू साथ में भी तो लाई हो? उसने रास्ते में काटा तो नहीं?
रश्मि: वह चक्कू तो मेरे पास बैठा ही नहीं था, कैसे काटता ?
अमित: चलो अभी घर चलो , वहाँ चक्कू और ख़रबूज़ा की बातें कर लेना।
तीनों हँसते हुए कार में बैठे और घर की तरफ़ चल पड़े। रश्मि की बुर बहुत गरम थी और वह घर पहुँचने का इंतज़ार कर रही थी। वह अकेली पीछे बैठ कर अपनी बुर को खुजा कर थोड़ी शांत हुई।
घर पहुँचकर राज सबको कोल्ड ड्रिंक दिया। फिर शादी की बातें होने लगीं। तभी रश्मि ने सबको हैरान कर दिया। वो बोली: आपने ये सब बातें करने को बुलाया था मुझे? ये सब बातें तो फ़ोन पर भी हो जातीं।
अमित हैरान होकर: रश्मि तुम्हें क्या हो गया है? चुदाई के लिए ऐसा उतावलापन तो मैंने कभी तुममें देखा ही नहीं। उसे क्या पता था कि बस में तीन लोगों को झाड़ कर वो ख़ुद भी बहुत गरम हो चुकी थी।
राज: अरे सही है यार , बुलाया तो चुदाई के लिए है और फ़ालतू की बातें कर रहें हैं हम लोग। ये कहते हुए वह उठकर रश्मि के पास आकर बैठ गया और उसकी साड़ी का पल्लू गिरा दिया । अब ब्लाउस में से उसकी बड़ी सी अधनंगी चूचियाँ उन दोनों के सामने थीं। राज झुका और उसकी चूचियों के नंगे हिस्से को चूमने लगा। अमित भी अपने जूते उतारा और अपनी क़मीज़ उतारने लगा। अब वह पैंट उतार कर सिर्फ़ चड्डी में था और उसका फूला हुआ लौड़ा उसमें से साफ़ दिखाई पड़ रहा था।
राज भी खड़ा हुआ और अपनी चड्डी में आ गया। अब दोनों अपने अपने लौड़े को उसके सामने रख कर खड़े थे।
चड्डी के सामने हिस्से में उनका प्रीकम साफ़ दिख रहा था। रश्मि ने हाथ बढ़ाकर दोनों के लौड़े पकड़े और फिर आगे झुक कर उसने उनके प्रीकम को बारी बारी से चड्डी पर जीभ लगकर चाटी। अब वह बारी बारी से उनकी चड्डी उतारी और उनके खड़े हुए लौड़ों को सहलाने लगी। फिर वह झुकी और राज के लौड़े को चाटने लगी। सुपाडे से लेकर नीचे बॉल्ज़ तक चाटी और फिर अमित के लौड़े के साथ भी वही की। फिर दोनों बारी बारी से उसके मुँह को चोदने लगे। वह भी अब उनको डीप थ्रोट देने लगी। उनके हाथ उसकी चूचियों को ब्लाउस के ऊपर से दबा रहे थे।
अब राज और अमित ने मिलकर उसका ब्लाउस और ब्रा उतार दी। अब वो उसकी चूचियाँ मसलने लगे। फिर अमित बोला: चलो यार बिस्तर पर अब रहा नहीं जा रहा है।
राज ने कहा: हाँ रश्मि चलो अब सच में मस्त चुदाई करेंगे। फिर तीनों बेडरूम में पहुँचे और वहाँ रश्मि के पेटिकोट का नाड़ा अमित ने खोला और राज उसकी पैंटी निकाल दिया। अब वह पूरी नंगी खड़ी थी और उसकी बुर में मानो आग सी लगी हुई थी। राज ने उसे बिस्तर पर लिटाया और अमित और राज साइड में लेटकर उसकी एक एक चूचि चूसने लगे। राज का हाथ अब उसकी जाँघों और उसके बीच बुर में चला गया। अमित भी उसके पेट को सहला रहा था। रश्मि उनके लौड़े को अपने हाथ में लेकर दबा रही थी। अब राज नीचे जाकर उसकी बुर को चाटने लगा। रश्मि की उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ कहकर चीख़ निकल गई। अमित उसकी चूचि चूस भी रहा था और दबा भी रहा था।
राज: अमित, बुर चोदोगे या गाँड़ मारोगे?
अमित: आप जो चाहोगे वैसा ही करेंगे।
राज : मैं तो बुर चोदूंग़ा। बाद में गाँड़ भी मारूँगा। चलो अब सैंडविच चुदाई करते हैं। मैं और अमित ब्रेड की तरह बाहर रहेंगे , तुम बीच में सब्ज़ी की तरह अंदर रहना। सब हंस पड़े।
अब राज ने उसे अपने बग़ल में लिटा लिया और रश्मि ने अपनी एक टाँगउठा दी। राज ने अपना लौड़ा उसकी बुर के छेद में डाला और फिर एक झटके में पूरा लौड़ा अंदर कर दिया । रश्मि आऽऽऽँहह कर उठी। फिर उसकी दूसरी तरफ़ से अमित भी अपने लौड़े पर क्रीम लगाया। उसने उसकी गाँड़ के अंदर २ ऊँगली डाली क्रीम लगाकर और फिर अपना लौड़ा उसकी गाँड में अंदर करने लगा। जल्दी ही दोनों के लौड़े उसकी दोनों छेदों में घुस चुके थे। अब भरपूर चुदाई शुरू हुई।अब रश्मि भी उई उई ऊँननन उन्न्न्न्न्न और हाऽऽऽयययय फ़ाआऽऽऽड़ो आऽऽऽऽऽहहहह आऽऽऽऽऽऽऽ मरीइइइइइइइ चोओओओओओओओदो चिल्लाए जा रही थी। उसकी कमर आगे पीछे हुई जा रही थी। फिर वह उन्न्न्न्न्न्न्न्न्न कहकर झड़ने लगी। राज और अमित भी अपना अपना वीर्य उसके अंदर डालकर शांत हो गए।
बाद में फ़्रेश होकर रश्मि आइ और कपड़े की तरफ़ हाथ बधाई।, राज ने उसका हाथ पकड़कर उसे नंगी ही बिस्तर पर गिरा गया और और बोला: मेरी जान अभी तो और राउंड करेंगे अभी से कपड़ा कैसे पहनोगी? फिर वह उसे अपने बग़ल में लिटाकर उसके होंठ चूसने लगा। अमित भी उसके शरीर पर हाथ फेरने लगा।
राज: रश्मि, तुम बता रही थीं कि तुम शादी के पहले चुदवा चुकी हो, बताओ ना किसने तुम्हें चोदा था? और कैसे हुआ ये सब?
रश्मि: बहुत पुशशी बात है, छोड़िए ना ये सब । ये कहते हुए वह एक हाथ से राज का और दूसरे हाथ से अमित का लौड़ा सहलाने लगी।
अमित: हाँ जानू सुनाओ ना, कैसे चुदीं तुम पहली बार? बताओ ना प्लीज़।
रश्मि: अच्छा चलिए बतातीं हूँ।
मैं एक किसान परिवार से हूँ और एक गाँव में ही पली बड़ी हूँ। मेरे घर में बाबा और माँ के अलावा मेरा एक छोटा भाई भी था। जीवन आराम से कट रहा था। पास के गाँव में एक स्कूल में हम पढ़ते थे। जब मेरे शरीर में जवानी के लक्षण उभरने लगे तो माँ ने सब कुछ बताया और पिरीयड्ज़ का भी बताया। गाँव में अब आदमियों की नज़र मुझे बदली हुई सी लगने लगीं। लड़कों ने तो मेरे साथ छेड़ छाड़ भी शुरू कर दी थी। हमारे गाँव के पास एक नदी बहती थी। एक बार शाम को मैं और मेरा भाई पास के गाँव में सगाई के कार्यक्रम के लिए गए । वापसी में हमें देर हो गयी। जब हम नदी के पास पहुँचे तो उस समय क़रीब शाम के ८ बजे थे।
हम वहाँ खड़े होकर नदी का बहाव देख रहे थे। तभी वहाँ जंगल से कुछ आवाज़ें आयीं। हम भाई बहन डर गए। तभी किसी के हँसने की आवाज़ आयी। हे भगवान! ये तो काली की आवाज़ है। काली मेरे से २ साल बड़ी थी और ११ वीं में पढ़तीं थीं। तभी वो भागते हुए सामने आयी और उसके पीछे दो लड़के भागते आए और उसको पकड़ लिए और उसे चूमने लगे।मुझे याद आया कि मेरा छोटा भाई भी ये सब देख रहा है। तभी वो हमको देख लिए। काली मेरे पास आइ और बोली: अरे तुम यहाँ क्या कर रही हो?
मैं: बग़ल के गाँव में सगाई थी वहीं से आ रही हूँ।
काली: अपने भाई को भेज दो घर , हम दोनों थोड़ी देर में आ जाएँगी। फिर मेरे भाई से बोली: तुम जाओ , हम अभी आते हैं।
भाई के जाने के बाद काली उन लड़कों से बोली: अब हम भी दो हैं। अब मुझे अकेली को तंग नहीं कर सकते? वो हँसने लगे। मैं उन दोनों को जानती थी । वो दोनों पढ़ाई छोड़ कर खेतों में काम करते थे और हमसे काफ़ी बड़े थे। वो दोनों कई बार मुझे छेड़ चुके थे। अब एक लड़का कबीर मेरे पास आया और मुझे बोला: तुम तो अब मस्त जवान हो गयी हो, मज़ा लिया की नहीं अपनी जवानी का? वो मेरे संतरों को घूरते हुए बोला।
काली: अरे एकदम भोली है मेरी सहेली। अभी कहाँ लिया है मज़ा । तभी दूसरे लड़के मोहन ने काली को पीछे से पकड़ा और उसके गाल चूमते हुए उसकी बड़ी बड़ी छातियों को दबाने लगा। वह घाघरा चोली में थी। और आऽऽऽह करने लगी। तभी कबीर ने मुझे पकड़कर अपनी बाहों में ले लिया और मुझे चूमने लगा। मुझे झटका लगा। तभी काली बोली: देख कबीर आराम से करना वो ये सब अभी तक करी नहीं है।
तभी मोहन ने काली की चोली उठा दी और उसकी बड़ी छातियाँ ब्रा से दिख रहीं थीं। वह अब उनकी काफ़ी बेहरमी से दबा रहा था। वह अब सीइइइइइइ कर उठी। मेरी आँखें भी भारी होने लगी थी ये सब देखकर। तभी कबीर के हाथ भी मेरी छातियों पर आ गए थे। अब मुझे भी अच्छा लग रहा था। फिर वह मुझे भी चूमने लगा। मैं भी काली की तरफ़ देख रही थी। तभी मोहन ने अपनी धोती निकाल दी और उसकी नाड़े वाली चड्डी के एक साइड से उसका बड़ा सा लिंग निकला हुआ दिख रहा था। तभी काली ने उसके लिंग को पकड़ लिया और दबाने लगी। मेरी अब सांसें फूलने लगी थीं। तभी कबीर मेरी फ़्रोक़ उठा कर मेरी चूचियाँ दबाने लगा। अब मैं भी मज़े से भरने लगी। अचानक मोहन ने काली की चूचिया ब्रा से निकाली और उनको चूसने लगा। तभी कबीर ने भी अपनी लूँगी और चड्डी खोल दी और उसका बड़ा सा लिंग मेरी आँखों के सामने थी। उसने मेरे हाथ को खींचकर अपना लिंग मेरे हाथ में दे दिया। उसका गरम और कड़ा लिंग मुझे बेक़रार कर दिया। तभी मैंने देखा कि मोहन ने काली को पेड़ के सहारे झुका दिया और उसके घाघरे को उठाकर उसकी चड्डी नीचे किया और अपना कड़ा लिंग उसकी बुर में डालकर मज़े से चोदने लगा। मेरी आँखें फैल गयीं थीं। मैं पहली बार किसी की चुदाई देख रही थी। मेरी बुर भी गीली हो चुकी थी।
तभी कबीर ने मेरी चड्डी में हाथ डालकर मेरी बुर को पकड़ लिया और दबाने लगा। मेरी तो मस्ती से हालत ख़राब हो रही थी। तभी मुझे समझ में आ गया कि मैं अब चुदने वाली हूँ। मैंने अपना हाथ छुड़ाया और वहाँ से दौड़कर भाग गयी। उस रात भर मुझे काली की चुदाई याद आती रही। और कबीर और मोहन के लिंग मेरी आँखों के सामने झूलते रहे।
अमित: अरे तो उस दिन तुम्हारी बुर का उद्घाटन नहीं हुआ? वो अब रश्मि की चूचि दबा रहा था।
राज ने भी उसकी चूचि चूसते हुए कहा: फिर तुमको पहली बार किसने चोदा?
रश्मि आगे बताने लगी…. अब मैं अक्सर चुदाई के बारे में सोचती रहती थी। एक दिन माँ ने कहा कि जाओ मंदिर में पुजारी के पास जाओ और उनको ये लड्डू दे दो भगवान को चढ़ाने को। मैं जब मंदिर पहुँची तो पुजारी वहाँ नहीं थे और मंदिर बंद था। वहीं एक औरत मंदिर की सफ़ाई कर रही थी।
मैं: पुजारी जी कहाँ हैं ?
औरत: वह उधर अपने घर ने हैं । अभी मंदिर खुलने में समय है।
मैं उनके घर की तरफ़ गयी, पुजारी जी की पत्नी को मैं अच्छी तरह से जानती थी, वो मेरे माँ की अच्छी सहेली भी थी।
मैं उनके घर पहुँचकर दरवाज़ा खटखटाई और बोली: मौसी , मैं रश्मि हूँ ज़रा दरवाज़ा खोलिए। तभी मैंने दरवाजे को धक्का दिया और मेरे सामने पुजारी जी थे जो सिर्फ़ चड्डी पहने आँगन में नहा रहे थे। मैं उनका बालों से भरा सीना और पुष्ट शरीर देखकर थोड़ा सा सकपका गयी। तभी वो खड़े हुए और उनकी गीली चड्डी में से लम्बा लिंग साफ़ दिखाई दे रहा था। मैं शर्म से दोहरीहो गयी। वो बोले: बेटी , आ जाओ अंदर,तुम कैसी हो?
मैं: जी ठीक हूँ। फिर मैं मौसी से मिलने अंदर चली गयी। वहाँ कोई नहीं था। तभी पुजारी जी बदन पोछते हुए आए। अब वह एक तौलिए में थे। उनका लिंग तौलिए से साफ़ उभरा हुआ दिख रहा था।
मैं: मौसी कहाँ हैं?
पुजारी: वो तो मायक़े गयी है। बैठो ना बेटी , बोलो कैसे आना हुआ?
मैं: वो लड्डू लायी थी चढ़ावे के लिए। माँ ने भेजा है। मेरी नज़र बार बार तौलिए के उभार पर जा रही थी।
पुजारी जी फ़्रोक़ में से मेरे संतरों को घूरे और बोले: बेटी ठीक है अभी चलते हैं। आज मैंने पहली बार तुम्हें ध्यान से देखा है, बेटी तुम अब मस्त जवान हो गयी हो और बहुत सुंदर भी। वो अभी भी मेरे संतरों को घूरे जा रहे थे। मैंने देखा कि अब उनका तौलिया ऊपर की ओर उठने लगा , मैं समझ गयी कि उनका लिंग वैसे ही खड़ा हो रहा है जैसे उस दिन मोहन और कबीर का खड़ा था। मेरी बुर गीली होने लगी।
तभी पुजारी मेरे पास आए और मेरे कंधों पर हाथ रखकर बोले: बेटी क्या खाओगी? चलो तुमको मिठाई खिलाते हैं। फिर वो मुझे मिठाई दिए और मेरे कंधों और हाथों को सहलाने लगा। फिर वो वहाँ रखे एक कुर्सी पर बैठे और मुझे बोले: बेटी आओ मेरी गोद में बैठो । आज तुम पर बहुत प्यार आ रहा है।
मैं: नहीं पुजारी जी मुझे जाना है।
वो: बेटी क्यों घबरा रही हो? अब तुम बच्ची नहीं हो मस्त जवान हो गयी ही। डरो मत मज़ा लो अपनी जवानी का। ये कहते हुए उसने मुझे अपनी गोद में खिंचा और मेरे चूतड़ उसके लौड़े पर टिक गए ।मैं उई करके उठी और उसने मेरी फ़्रोक़ ऊपर करके मुझे फिर से अपनी गोद में बिठा लिया। अब मेरी चड्डी में उनके खड़े लिंग का अहसास मुझे हो रहा था। अब वो मुझे चूमने लगे। मैं भी मज़े से आँख बंद कर ली। फिर जब उन्होंने मेरे संतरों को दबाया तो बस मैं बहक गयी। नीचे से लौड़े की चुभन और ऊपर से उनके हाथ मेरे निप्पल को दबाकर मुझे मस्ती से भर दिए थे। अब वो मुझे चूमे जा रहे थे।
फिर वो मेरी फ़्रोक़ को निकालकर मेरी ब्रा में क़ैद संतरों को चूमने लगे और मसलने लगे। फिर उन्होंने मेरी ब्रा भी खोल दी और मेरे संतरों को निचोड़ना शुरू किया। मेरी हाऽऽऽय्य निकल गयी। तभी उनका एक हाथ मेरे पेट को सहलाते हुए मेरी चड्डी पर घूमने लगा। मेरी गीली चड्डी देखकर बोले: बेटी, पिशाब कर दिया क्या? चड्डी गीली हो गई है?
मैं शर्माकर: नहीं, पर पता नहीं कैसे गीली हो गयी।
वो: बेटी, देखूँ अंदर सब ठीक है ना? ये कहकर उन्होंने अपने हाथ मेरी चड्डी में डाला और मेरी बुर और उसके आसपास के रोये जैसे नरम बालों को सहलाने लगे। मेरी अब सिस्कारी निकल गयी।
वो बोले: बेटी अच्छा लग रहा है ना?
मैं: जी बहुत अच्छा लग रहा है। वो मेरी बुर में ऊँगली डालकर उसे छेड़ने लगे और बोले: बेटी कभी किसी से चुदवाई है क्या?
मैं: : जी नहीं कभी नहीं किया।
वो :बेटी तभी तुम्हारी बुर बड़ी टाइट है , मैं तुम्हारी सील तोड़ूँगा। तुमको पहले थोड़ा सा दर्द बर्दाश्त करना होगा। फिर उसके बाद मज़े ही मज़े। ठीक है ना?
मैं: जी ठीक है। मेरी बुर पनिया चुकी थी और अब मैं चुदवाने को मरी जा रही थी।
वो: ठीक है बेटी फिर उठो और नीचे ज़मीन पर बने बिस्तर को दिखा कर बोले: चलो यहाँ लेट जाओ।
मैं वहीं लेट गयी । अभी मैंने सिर्फ़ चड्डी पहनी थी। उन्होंने भी अपना तौलिया खोलकर निकाला और उनका लौड़ा देखकर मेरे प्राण निकल गए कि इतना बड़ा मूसल मेरे अंदर जाएगा कैसे?( उनका आपके जितना ही बड़ा था, वो अमित से बोली। )
तभी उन्होंने किचन से तेल लाकर मेरी बुर में डाला और ऊँगली से मेरी बुर को फैलाकर उसमें दो उँगलियाँ डाली और फिर अपने लौड़े पर भी तेल मला। फिर मेरी टाँगे घुटनों से मोड़कर पूरा फैलाया और बीच में बैठकर अपना लौड़ा मेरी बुर के मुँहाने में लगाया और धीरे धीरे से दबाने लगा। मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी। मुझे लगा कि मेरे अंदर जैसे कोई कील गड़े रहा है। मैंने उनसे अलग होने की कोशिश की जो नाकयाब साबित हुई। अब मेरे रोने का उनपर कोई असर नहीं हो रहा था। वो अपना पूरा लौड़ा अंदर करके मेरे होंठ और मेरी चूचि चूसने लगे। जल्द ही मेरा दर्द कम होने लगा। फिर वो पूछे: बेटी अब दर्द कम हुआ?
मैं: जी दर्द अब कम हुआ है।
वो: तो फिर चुदाई शुरू करूँ?
मैं शर्माकर बोली: जी करिए।
वो मुस्कुराकर मेरे संतरों को दबाकर चूसे और फिर अपनी क़मर हिलाकर मेरी चुदाई शुरू किए। मेरी टाइट बुर में उनका लौड़ा फँस कर अंदर बाहर हो रहा था । अब मुझे फिर से दर्द भी हो रहा थ और मज़ा भी आ रहा था। मैं उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ करके चिल्ला रही थी। पर अब वो पूरी तरह से चुदाई में लग गए थे और मेरी बुर की धज्जियाँ उड़ रही थी। आधा घंटा चुदाई के बाद वो झड़कर मेरे ऊपर से उठे। मैं भी दो बार झड़ी थी। मैं चुदाई के बाद एक लाश की तरह चुपचाप पड़ी थी। मेरी बुर में बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था। वो उठकर एक गीला तौलिया लाए और बड़े प्यार से मेरी बुर को साफ़ किए और बोले: देखो बेटी, कितना ख़ून निकला है , पहली बार ऐसा होता है। अब तुम्हारी बुर मस्त खुल गयी है , अब आराम से चुदवा सकती हो। ठीक है ना? आज तुमको चलने में थोड़ी तकलीफ़ होगी, घर में बोल देना की पैर में मोच आ गयी है। ठीक है ना बेटी?
मैं: जी पुजारी जी।
जब मैं वापस आने लगी तो वो प्यार करते हुए बोले: बेटी जब चुदवाने की मर्ज़ी हो तो आ जाना। ऐसा कहते हुए उन्होंने मेरे संतरे दबा दिए और मेरे चूतरों पर हाथ भी फेर दिया।
मैं कई बार उनसे चुदवाई थी शादी के पहले। मेरे पति चुदाई के मामले में ज़्यादा मज़ा नहीं दिए पर मैं उनके साथ गुज़रा करती रही। बाद में उनकी मृत्यु के बाद अमित जी ने मुझे संतुष्ट किया। और अब आप दोनों मुझे सुख दे रहे हो। यही मेरी कहानी है।
रश्मि की कहानी सुनकर दोनों गरम हो चुके थे । राज तो उसकी बुर में मुँह घुसाकर उसकी बुर चाटने लगा था। अब अमित नीचे लेटा और रश्मि अपनी बुर में उसका लौड़ा घुसेड़ ली। फिर पीछे से राज ने उसकी गाँड़ में क्रीम लगाकर उसकी गाँड़ में अपना लौड़ा पेल दिया। अब रश्मि की फिर से डबल चुदाई चालू हुई। रश्मि चिल्लाने लगी। उन्न्न्न्न्न्न्न्न उइइइइइइ और फ़च फ़च और ठप्प ठप्प की आवाज़ें कमरे में भर गयीं थीं।
राज उसकी चूचियाँ भी मसल रहा था और रश्मि के कान में बोला: आऽऽऽह क्या मस्त गाँड़ है तुम्हारी । क्या टाइट है जानू। फिर वो उसके चूतरों को दबाकर उसपर थप्पड़ मारने लगा। वह चिल्ला कर अपनी गरमी को व्यक्त कर रही थी। अब चुदाई पूरी जवानी पर थी। पलंग भी चूँ चूँ कर रहा था। तभी रश्मि जो अमित के लौड़े पर उछल उछल के चुदवा रही थी, बड़बड़ाने लगी : आऽऽऽह मज़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है। मैं गईइइइइइइइइ कहते हुए झड़ने लगी। उधर अमित और राज भी झड़ गए। सब अग़ल बग़ल लेटकर सब एक दूसरे का बदन सहलाने लगे। राज रश्मि के भरे हुए बदन पर हाथ फेरते हुए बोला: बहुत मज़ा आया जानू , क्या भरा बदन है तुम्हारा। एकदम मख़मल सा बदन है । वह उसके बड़े चूतरों को सहलाते हुए बोला: म्म्न्म्म्म मज़ा आ जाता है इनपर हाथ फेरने में। फिर उसके पेट से लेकर उसकी छाती सहलाकर बोला: ये दूध कितने रसभरे हैं। रश्मि हँसने लगी।
उस दिन और कुछ ख़ास नहीं हुआ। रश्मि और अमित वापस अपने शहर आ गए।
अगले दिन शादी को सिर्फ़ सात दिन रहे थे। दोनों बाप बेटा बड़े ख़ुश थे क्योंकि आज रचना अमेरिका से आने वाली थी। जय को दीदी और राज की इकलौती लाड़ली बेटी। जय और राज एयरपोर्ट पहुँचे उसे लेने के लिए।
रचना जब एयरपोर्ट से बाहर आइ तो जय की आँखें ख़ुशी से चमक उठी। उसकी प्यारी दीदी जो आयी थी वो भी काफ़ी दिनों के बाद। वो उससे जाकर लिपट गया और वह भी उसे गले लगाकर प्यार करने लगी। राज भी बहुत ख़ुश हुआ इतने दिनों कि बाद अपनी बेटी को देखकर। पर उसकी आँखें उसकी टॉप पर भी थी जिसमें से उसकी मस्त गदराइ हुई छातियाँ बिलकुल मादक लग रही थी। उसकी टॉप से झाँकती हुई अधनग्न छातियाँ उसे और भी सेक्सी बना रही थी। उसकी हिप हगिंग जींस भी बहुत कामुक दृश्य प्रस्तुत कर रही थी। उसके चुतरों के उभार और भी सेक्सी लग रहे थे । जब वह जय से लिपटी और उसके बाद वह अपना समान लेने के लिए झुकी , उसकी जींस नीचे खिसकी और उसकी गाँड़ की दरार सबके सामने थी। आते जाते लोग भी उसकी मस्त गोरी गाँड़ की दरार देख रहे थे और अपना लौंडा अपने पैंट में अजस्ट कर रहे थे। उसे अपने लौंडे में भी हरकत सी महसूस हुई। अब वो आकर पापाआऽऽऽऽ कहकर राज से लिपट गई। उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ राज के चौड़े सीने से टकरा कर राज के पैंट में और ज़ोर से हलचल मचा दीं।उसका हाथ रचना की कमर पर पड़ा और वहाँ के चिकनी त्वचा को सहला कर राज के लौंडे को पूरा खड़ा कर बैठा। रश्मि अब राज के गाल को चूम रही थी और बोली: पापा कैसे हैं आप?
राज के हाथ उसकी कमर से खिसक कर उसकी चुतरों पर पहुँच गया, क्योंकि वह उछल कर उसकी गर्दन से चिपक गयी थी। राज अपने हाथ को उसके चुतरों से हटा कर बोला: बेटी मैं बिलकुल मज़े में हूँ। हम सब तुमको बहुत मिस करते हैं।वह उसके गाल चूमते हुए बोला और उसके बालों पर भी प्यार से हाथ फेरा। इसके साथ ही वह ख़ुद अपना निचला हिस्सा पीछे किया ताकि रचना को उसके लौंडे की हालत का पता नहीं चले।
फिर रचना अलग होकर अपना समान उठाने लगी और फिर से उसकी आधी छातियाँ उसके सामने झूल गयी थीं साथ ही उसकी गाँड़ की दरार भी फिर से उसकी आँखों के सामने थी। इस बार तो जय की भी आँखें उसके जवान बदन पर थीं।
फिर सब बाहर आए और जय ने कार में सामान डाला और कार चलाकर घर की ओर चल पड़ा। राज और रचना पीछे की सीट पर बैठे थे। रचना ने राज का हाथ अपने हाथ ने ले लिया और बोली: पापा। आप माँ को बहुत मिस करते होगे ना?
राज की आँखों के आगे रश्मि और शशी का नंगा बदन आ गया। वो सोचने लगा कि मेरे जैसा कमीना उसको क्या मिस करेगा? पर वह बोला: हाँ बहुत याद आती है उसकी। एकदम से मुझे अकेला छोड़ गयी वह।
रचना: पापा , मुझे भी मॉ की बहुत याद आती है। ये कहते हुए उसकी आँख भर आइ और वो अपना सिर राज के कंधे पर रखी । अब उसकी एक छाती राज की बाँह से सट गयी थी। राज के बदन में उसकी मस्त और नरम छाती का अहसास उसे फ़िर से उत्तेजित करने लगा। रचना के बदन से आती गन्ध भी उसे पागल करने लगी। उसने देखा कि रचना की आँखें बन्द थीं और राज ने उसका फ़ायदा उठाते हुए अपनी पैंट में लौंडे को ऐडजस्ट किया। अब वह अपनी बाँह उसके कंधे पर ले गया और उसे शान्त करने लगा। उसका हाथ उसकी छाती के बहुत क़रीब था। तभी वह अपनी आँख खोली और जय को बोली: और मेरे भय्या का क्या हाल है। शादी के लिए रेडी हो गए हो ना? ये कहते हुए वह आगे को झुकी और राज का हाथ उसकी छाती से टकराया। राज ने अपना हाथ नहीं हटाया और रचना ने भी ऐसा दिखाया जैसे उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
थोड़ी देर तक वो जय और राज से अब तक की तैयारियों का अपडेट ली और बोली: बाप रे, अभी बहुत काम बाक़ी है। चलो अब मैं आ गयी हूँ , अब सब ठीक कर दूँगी। कहते हुए वह राज का हाथ जो उसकी छाती को छू रहा था , उसे अपने हाथ में लेकर वह उसे चूम ली और बोली: पापा आइ लव यू।
राज ने भी उसे अपने से सटाकर कहा: बेबी आइ लव यू टू।
जय: दीदी मेरा क्या? मुझसे कोई प्यार नहीं करता क्या?
दोनों हँसने लगे और बोले: वी लव यू टू ।
तभी वह सब घर पहुँच गए।
घर पहुँचने पर शशी ने सबको नाश्ता कराया और सब चाय पीते हुए बातें करने लगे। शादी की तैयारियाँ बहुत डिटेल में डिस्कस हुई। फिर रचना बोली: मैं अभी सोऊँगी बहुत थक गयीं हूँ। शाम को हम होटेल जाकर मिनु फ़ाइनल करेंगे।
जय: और खाना भी वहीं खा लेंगे। ठीक है ना पापा?
राज: बिलकुल ठीक है, रचना के आने का सेलब्रेशन भी हो जाएगा।
रचना: पापा मेरा कमरा ठीक है ना?
शशी: जी आपका कमरा बिलकुल साफ़ और तैयार है।
फिर रचना उठी और एक बार उसकी गाँड़ की दरार राज और जय की आँखों के सामने थीं। इस बार राज से रहा नहीं गया और वह बोला: बेटी, इस तरह की पैंट क्यों पहनती हो? पीछे से पूरी नंगी हो रही हो।
वो हँसकर बोली: पापा आपने तो मुझे पूरा नंगा देखा है, आपको क्या फ़र्क़ पड़ता है। पर अब मैं इंडिया में ऐसे कपड़े नहीं पहनूँगी। ठीक है ना?
राज ने उसकी कमर सहला कर कहा: ठीक है बेटी, जाओ अब आराम कर लो। वह शशी के साथ चली गयी।
थोड़ी देर में जय भी दुकान चला गया। क़रीब आधे घंटे के बाद शशी राज के कमरे में आइ और मुस्कुरा कर बोली: आपको शर्म नहीं आती , अपनी बेटी की गाँड़ को घूरते हुए।
राज बेशर्मी से बोला: वह भी तो अपनी गाँड़ दिखाए जा रही थी। मेरी क्या ग़लती है? उसने अपना लौंडा दबाकर बोला: देखो इस बेचारे की क्या हालत ही गयी है ?
शशी हँसती हुई बोली: ये और बेचारा? इसका बस चले तो यह रचना की गाँड़ में भी समा जाता।
राज ने अपनी पैंट उतारी और चड्डी भी उतारा और शशी को लौड़ा चूसने का इशारा किया। शशी उसके लौंडे को सहलाकर बोली: आपको पता है रचना ने अपनी पैंट और टॉप उतार दिया है और सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में सो रही है। देखना है क्या?
राज के लौंडे ने ये सुनकर झटका मारा और राज बोला: सच में ? मगर उसने चद्दर ओढ़ी होगी ना? दिखेगा थोड़ी?
शशी उसके लौंडेको चूसते हुए बोली: उसे बहुत गरमी लगती है इसलिए उसने कुछ भी नहीं ओढ़ा है।
राज उठते हुए बोला: चलो वहीं चलते हैं, उसे देखते हैं की जवान होकर वह अब कैसी दिखती है?
वो दोनों उसके कमरे की खिड़की के पास आकर पर्दा हटाकर झाँके और आऽऽऽह सामने रचना ब्रा और पैंटी में करवट लेकर सोयी हुई थी। ब्रा से उसकी बड़ी छातियाँ आधी बाहर दिखाई दे रही थीं। उसका नंगा गोरा पेट और उसकी गदराइ जाँघें भी बहुत मादक दिख रही थीं। उसका मुँह खिड़की की तरफ़ था। शशी धीरे से बोली: मज़ा आ रहा है ना? राज ने उसकी गर्दन पकड़ी और उसको अपने घुटनों पर झुका दिया और वह उसके लौंडे को चूसने लगी। राज रचना को देखते हुए शशी के मुँह को चोदने लगा। उसकी कमर हिले जा रही थी और अब शशी ने भी डीप थ्रोट से चूसना शुरू कर दिया था। वह अपनी जीभ से उसके मोटे सुपाडे को भी रगड़ रही थी। उसके बॉल्ज़ को भी चाटे जा रही थी।
तभी अचानक राज की नज़र ड्रेसिंग टेबल के शीशे पर पड़ी और वहाँ उसे शीशे में रचना की मोटी मोटी गाँड़ दिखाई दे गयी। आऽऽऽऽऽऽह क्या मस्त गदराइ हुई गाँड़ थीं। दोनों चूतड़ मस्त गोरे और नरम से दिख रहे थे और उनके बीच में एक छोटी सी पट्टी नुमा रस्सी थी जो गाँड़ की दरार में गुम सी हो गयी थी। क्या दृश्य था और राज अब ह्म्म्म्म्म्म करके शशी के मुँह में झड़ने लगा। शशी ने उसका पूरा रस पी लिया।
अब राज वहाँ से हटा और अपने कमरे में आ गया। अब जब उसकी वासना का ज्वार शान्त हो चला था तो उसे अपने आप पर शर्म आयी और वह सोचने कहा कि कितनी गंदी बात है, वो अपनी प्यारी सी शादीशुदा बेटी के बारे में कितना गंदा सोच रहा है। उसने अपने सिर को झटका और फ़ैसला किया कि ऐसे गंदे विचार अब अपने दिमाग़ में नहीं आने देगा आख़िर वो उसकी इकलौती बेटी है। अब उसे थोड़ा अच्छा महसूस हुआ और वो शादी के बजट वग़ैरह की योजना बनाने में लग गया। तभी शशी आइ और बोली: तो कब चोदोगे अपनी बेटी को?
राज: देखो शशी, आज जो हुआ सो हुआ । अब हम इसकी बात भी नहीं करेंगे। वो मेरी बेटी है और मैं उसे कैसे चोद सकता हूँ? ठीक है ?
शशी हैरान होकर: ठीक है साहब जैसा आप चाहें।
अब राज अपने काम में लग गया।
जय ने दुकान से डॉली को फ़ोन किया: कैसी हो मेरी जान।
डॉली: ठीक हूँ। आज बड़े सबेरे फ़ोन किया सब ख़ैरियत?
जय: सब बढ़िया है। आज दीदी भी आ गयीं हैं। अब शादी की रौनक़ लगेगी घर पर। और तुम्हारे यहाँ क्या चल रहा है?
डॉली: सब ठीक है, मम्मी और ताऊजी टेन्शन में हैं शादी की।
जय: अरे सब बढ़िया होगा। मैं मम्मी को फ़ोन कर देता हूँ कि टेन्शन ना लें।
डॉली: प्लीज़ कर देना उनको अच्छा लगेगा। अरे हाँ मेरी सहेलियाँ पूछ रहीं थीं कि हनीमून पर कहाँ जा रही हूँ? क्या बोलूँ?
जय: बोलो कहाँ जाना है?
डॉली: आप बताओ मुझे क्या पता?
जय : मुझे तो शिमला जाने का मन है या फिर गोवा चलते हैं। तुम बताओ कहाँ जाना है?
डॉली: गोवा चलते हैं। वैसे मेरी एक सहेली बोली की कहीं भी जाओ , एक ही चीज़ देखोगी और कुछ देखने को तो मिलेगा नहीं। मैंने पूछा कि क्या देखने को मिलेगा? तो वो जानते हो क्या बोली?
जय: क्या बोली?
डॉली: वो बोली कि होटेल के कमरे का पंखा देखोगी और कुछ नहीं।
जय हैरानी से: क्या मतलब ? होटल का पंखा?
डॉली हँसने लगी और बोली: आप भी बहुत भोले हैं जी। मतलब मैं बिस्तर में पड़ी रहूँगी और आप मेरे ऊपर रहोगे और मैं सिर्फ़ पंखा ही देखूँगी।
अब बात जय को समझ में आइ और वो हँसने लगा और बोला: हा हा , क्या सोचा है। कोई इतना भी तो नहीं लगा रहता है दिन रात इस काम में। हा हा गुड जोक।
वैसे मुझे भी लगता है कि शायद तुम पंखा ही देखोगी। ठीक है ना?
डॉली हंस कर: मैं तो जाऊँगी ही नहीं अगर सिर्फ़ पंखा ही दिखाना है। वैसे भी पार्क में जो उस दिन आपका बड़ा सा देखा था, वह अभी भी सपने में आता है और मेरी नींद खुल जाती है उस दर्द का सोचकर जो आप मुझे सुहाग रात में देने वाले हो।
जय हँसकर: मैं कोई दर्द नहीं देने वाला हूँ। तुम भी बेकार में ही डरी जा रही हो। वैसे हम सुहाग रात में करेंगे क्या? मुझे तो कोई अनुभव ही नहीं है। चलो कुछ दोस्तों से पूछता हूँ कि कैसे और क्या करना होगा?
डॉली: हाँ ये भी पूछ लेना कि बिना दर्द के ये काम कैसे होता है।
जय: क्या तुम भी ? बस एक दर्द का ही क़िस्सा लेकर बैठी हो। एक बात बोलूँ, दीदी से पूछ लूँ क्या?
डॉली: छी वो तो एक लड़की हैं , उनसे कैसे पूछोगे? वैसे आपने बताया था कि आपने ब्लू फ़िल्मे देखीं हैं तो वहीं से सीख लो ना।
जय: अरे उसमें तो सब उलटा सीधा दिखाते हैं, एक बात बोलूँ मैं दीदी से बात करता हूँ और तुमको भी फ़ोन पर ले लेता हूँ। चलेगा?
डॉली: छी कुछ भी बोलते हो? बिलकुल नहीं, मैं तो मारे शर्म के मर ही जाऊँगी। आप अपने दोस्तों से ही पूछ लो।
जय: चलो दोस्तों से ही पूछता हूँ। तो फिर गोवा पक्का ना, बुकिंग करा लूँ।
डॉली: हाँ करवा लीजिए। पर कमरे में पंखा नहीं होना चाहिए सिर्फ़ एसी होना चाहिए। हा हा ।
दोनों हँसे और फ़ोन रख दिया।
जय ने सुहाग रात की डिटेल जानने के लिए अपने दोस्त मंगेश को फ़ोन किया। उसकी पास ही अनाज की दुकान थी और उसकी शादी को १ साल हो चुका था।
मंगेश: वाह आज इतने दिन बाद कैसे याद आइ?
जय: बस ऐसे ही , अगर बहुत व्यस्त ना हो तो चलो कॉफ़ी पीते हैं।
फिर वो और मंगेश कॉफ़ी हाउस में मिले और कुछ इधर उधर की बातें करने के बाद जय बोला: यार अगले हफ़्ते मेरी शादी है, और मुझे सच में सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं आता। थोड़े टिप्स दे देना यार।
मंगेश हँसते हुए: तू भी इतना बड़ा हो गया है और बच्चों के जैसी बातें करता है।अरे ब्लू फ़िल्म तो देखा होगा ना अगर चुदाई नहीं की है तो। देख भाई मैंने तो शादी के पहले ही तीन लड़कियाँ चोद रखीं थीं सो मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। तू भी किसी को चोद ले आजकल में और फिर मना सुहागरत मज़े से ।
जय : नहीं ये मैं कभी भी नहीं करूँगा। यार तू बता ना कि कैसे शुरू करते हैं ?
मंगेश: मैं तो प्रेक्टिकल करके बता सकता हूँ अगर तू चाहे तो। मेरी एक गर्ल फ़्रेंड है उसे बोल दूँगा वो रोल प्ले कर देगी मेरी दुल्हन का। बोल इंतज़ाम करूँ?
जय: पर मैं कैसे देखूँगा? मतलब तुम दोनों को शर्म नहीं आएगी? और फिर तुम अपनी पत्नी को धोका भी तो दोगे?
मंगेश: बाप रे इतने सवाल !! तुम उसी कमरे में कुर्सी में बैठ कर देखोगे। हमको कोई शर्म नहीं आएगी। और हाँ शादी के बाद थोड़ा बहुत ये सब चलता है। ये लड़की नर्गिस मुझसे हफ़्ते में एक बार तो चुदवाती ही है।
जय हैरान होकर: उसी कमरे में ? क्या यार मुझे शर्म आएगी।
मंगेश: मैं शर्त लगाता हूँ कि तुम भी मज़े में आकर मेरे सामने उसे चोदोगे। तो बताओ कब का प्रोग्राम रखें?
जय: कल दोपहर का रख लो।
मंगेश: चलो उसको पूछता हूँ, वो भी फ़्री होनी चाहिए। उसने नर्गिस को फ़ोन लगाया और स्पीकर मोड में डाल दिया। मंगेश: कैसी हो मेरी जान?
नर्गिस: बस ठीक हूँ , आज कैसे मेरी याद आइ?
मंगेश: यार तुमको मेरे एक दोस्त की मदद करनी है। वो शादी कर रहा है। तुम्हें उसके सामने मेरी बीवी बनकर मेरे साथ सुहाग रात मनानी होगी। बोलो ये रोल प्ले करोगी?
नर्गिस: याने कि वह ये सब देखेगा?
मंगेश: और क्या ? उसके लिए ही तो कर रहे हैं।
नर्गिस: फिर तो उसे मुझे कोई महँगी गिफ़्ट देनी पड़ेगी।
मंगेश: कैसी गिफ़्ट?
नर्गिस: उसको फ़ैसला करने दो ओर मेरा दिल Apple के फ़ोन पर आया हुआ है।
मंगेश ने प्रश्न सूचक निगाहों से जय को देखा तो वो हाँ में सिर हिला दिया। मंगेश: ठीक है ले लेना। तो फिर कल १२ बजे मिलें तुम्हारे घर पर?
नर्गिस: ठीक है आ जाओ। यह कहकर उसने फ़ोन काट दिया।
फिर वो दोनों कल मिलने का तय करके वापस अपने दुकान आ गए।
जय ने डॉली को फ़ोन किया: देखो तुम्हारे साथ सुहाग रात कितनी महोंगी पड़ी अभी से । वो लड़की जो सुहागरत में दुल्हन की ऐक्टिंग करेगी मेरे दोस्त के साथ उसे एक स्मार्ट फ़ोन ख़रीद कर देना पड़ेगा।
डॉली: ओह तो आपने इंतज़ाम कर ही लिया? मुझे तो लगता है कि कल आपका भी उस लड़की के साथ सब कुछ हो ही जाएगा।
जय: सवाल ही नहीं पैदा होता। मैंने अपने कुँवारेपन को तुम्हारे लिए बचा के रखा है मेरी जान। सुहागरात में हम दोनों कुँवारे ही होंगे। ठीक है?
डॉली: देखते है कल के बाद आप कुँवारे रहते भी हो या नहीं।
जय: देख लेना। फिर दोनों ने फ़ोन रख दिया।
शाम को जय ज़रा जल्दी घर आ गया और फिर रचना और राज के साथ सब उस होटेल गए जहाँ शादी होनी थी। रचना ने मिनु फ़ाइनल किया और सजावट की भी बातें मैनेजर को समझाईं। फिर वो सब वहाँ डिनर किए। सबने ख़ूब बातें की और राज ने पारिवारिक सुख का बहुत दिन बाद आनंद लिया। रचना भी सलवार कुर्ते में बहुत प्यारी लग रही थी। जय भी काफ़ी हैंडसम था और राज को अपने बच्चों के ऊपर घमंड सा हो आया। जय रचना को जिजु की बातें करके छेड़ रहा था। सब हंस रहे थे और मज़े से खाना खा रहे थे। घर आकर सब सोने चले गए।
अगले दिन दोपहर को मंगेश का फ़ोन आया और उसने जय को एक पते पर आने को कहा। जब वो उस फ़्लैट में पहुँचा तो मंगेश और नर्गिस वहाँ पहले से पहुँचे हुए थे। नर्गिस ने लाल साड़ी पहनी थी वो क़रीब २६/२७ साल की लड़की थी और शरीर से थोड़ी मोटी थी। पता नहीं मंगेश ने उसमें क्या देखा जो अपनी बीवी छोड़कर इसके पीछे फ़िदा है- जय ने सोचा। यह तो उस बाद में पता चलने वाला था कि नर्गिस में क्या ख़ास है। जय ने नर्गिस को हेलो कहा और उसका गिफ़्ट स्मार्ट फ़ोन उसे दे दिया। वह ख़ुश होकर जय के गाल चूम ली। जय शर्मा गया।
मंगेश बोला: चल नर्गिस ज़्यादा समय नहीं है, हमें दुकान वापस भी जाना है। चल सुहागरत का डेमो दे देते हैं इसको। वह हँसने लगी और सब बेडरूम में चले गए। जय वहाँ बेड के पास रखी एक कुर्सी पर बैठ गया। नर्गिस अपना घूँघट निकालकर बिस्तर पर बैठ गयी। मंगेश बाहर से अंदर आने का अभिनय किया और आकर बिस्तर के पास आकर उसके पास बैठ गया। फिर उसने जय की गिफ़्ट को नर्गिस के हाथ में देकर कहा: जानेमन, ये लो मेरी ओर से सुहाग रात की गिफ़्ट। फिर उसने उसका घूँघट उठाया और उसके हुस्न की तारीफ़ करने लगा। वह अब उसके पास आके उसके हाथ को चूमा और फिर उसके हाथ को चूमते हुए उसकी गरदन के पास जाकर उसके गाल चूमा। नर्गिस शर्मायी सी बैठी थी। फिर वह उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिया और उसे चूमने लगा। फिर उसने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली और उसके निचले होंठ को चूसने लगा। जय ग़ौर से ये सब देख रहा था और उसके लौड़े ने अँगडाइयाँ लेनी शुरू कर दी थी।
अब मंगेश ने उसकी साड़ी का पल्लू नीचे किया और नर्गिस की भारी छातियाँ ब्लाउस से बाहर झाँकने लगीं। अब उसने ब्लाउस के ऊपर से उसके दूध को दबाया और नर्गिस ने झूठ मूठ में हाऽऽऽय करके अपना भोलापन दिखाया। अब नर्गिस की भी सांसें तेज़ चलने लगीं थीं। फिर मंगेश ने अपनी क़मीज़ उतार दी और अब नर्गिस को बिस्तर पर लिटा दिया और उससे चिपक कर उसके होंठ चूसते हुए उसके बदन पर हाथ फिराने लगा। फिर बड़ी देर तक चुम्बन लेने के बाद वह उसके ब्लाउस के हुक खोला और उसको उतार दिया । अब ब्रा में क़ैद उसके मोटे मम्मों को दबाकर उसने नर्गिस की हाऽऽऽय निकाल दी। फिर उसने साड़ी उतारी और पेटिकोट का नाड़ा भी खोला और नर्गिस अब सिर्फ़ ब्रा और पैंटी ने थी। उसका थोड़ा मोटापा लिया हुआ बदन सेक्सी लग रहा था। बस पेट और जाँघों पर एक्स्ट्रा चरबी थी। मंगेश अब उसके बदन को सहलाने लगा। नर्गिस शर्माने की ऐक्टिंग कर रही थी। फिर मंगेश ने अपने पूरे कपड़े खोले और उसका सामान्य साइज़ का लौड़ा जय के सामने था। उसने नर्गिस के हाथ में लौड़ा देने की कोशिश की पर नर्गिस थोड़ी देर बाद उसे छोड़ दी। अब मंगेश ने ब्रा का हुक खोला और उसकी मोटी छातियाँ मंगेश और जय के सामने थीं। नर्गिस उनको अपने हाथ से छुपाने की ऐक्टिंग कर रही थी। अब मंगेश ने उसका हाथ हटाया और उसकी छातियाँ दबाने लगा और फिर मुँह में लेकर चूसने भी लगा।
अब नर्गिस की हाऽऽऽऽऽऽऽयह उइइइइइइइइइ निकलने लगी।
अब जय का लौड़ा बहुत टाइट हो गया था और वह उसे सहलाने लगा। उधर मंगेश नीचे आकर उसकी पैंटी निकाला और उसकी जाँघें फैलाकर उसने ऊँगली डालकर हिलाने लगा। अब नर्गिस उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्ग कर उठी। फिर उसने नर्गिस की गाँड़ के नीचे तकिया रखा और उसकी टाँगें मोड़कर अपना लौड़ा उसके छेद में लगाकर धक्का दिया और लौड़ा उसकी बुर में घुस गया। फिर वह उसके ऊपर आकर उसकी चुदाई करने लगा। जय को लगा कि ये सब देखना बेकार ही हो गया क्योंकि सभी ब्लू फ़िल्म में भी कुछ ऐसा ही होता है। अब वह अपने लौड़े को मसल रहा था।
थोड़ी देर बाद दोनों चिल्लाकर झड़ने लगे। जय ये सब देख कर बहुत उत्तेजित हो चुका था। अब मंगेश नर्गिस के ऊपर से हटकर बग़ल में लेट गया। नर्गिस की फैली जाँघों के बीच में सफ़ेद वीर्य चमक रहा था। उसने एक कपड़े से अपनी बुर को पोंछा। फिर जय के पैंट के उभार को देख कर बोली: कुछ सीखा आपने? ऐसे होती है चुदाई। आओ अपना भी डाल दो मेरी बुर में। एकदम रेडी है चुदवाने के लिए। ये कहकर उसने अपनी बुर में दो उँगलियाँ डाली और जय को आँख मारी।
मंगेश भी हँसकर बोला: हाँ यार आज तू भी प्रैक्टिकल कर ले। वह भी अपना सुकडा हुआ लौड़ा कपड़े से पोंछने लगा।
जय: नहीं मुझे नहीं करना। मैंने जो देखना था देख लिया है। अब मैं चलता हूँ।
मंगेश: अरे यार अभी तूने नर्गिस का नक़ली रूप देखा है, अब तू इसका असली रूप देख ले फिर चले जाना। फिर वह नर्गिस से बोला: चल अब अपना असली रूप दिखा जिसने मुझे दीवाना बना दिया है।
नर्गिस हँसकर उठी और बोली: देखो राजा , मज़ा कैसे लेते हैं चुदाई का।
फिर नर्गिस ने मंगेश का लौड़ा ऊपर से नीचे तक चाटा और फिर उसे चूसने लगी। अब उसका लौड़ा उसके मुँह में बड़ा होता चला गया। फिर उसने क़रीब १५ मिनट उसे चूसा और चाटा। फिर वह आकर उसके लौड़े पर बैठी और उसे अपनी बुर में अंदर करके उछल कर चुदवाने लगी। फ़च फ़च और ठप्प ठप्प की आवाज़ के साथ पलंग भी चूँ चूँ कर उठा। फिर वह ६९ की पोजीशन में आकर अपनी बुर चटवाते हुए उसका लौड़ा चूसने लगी। फिर मंगेश ने उसे पलटा और वह उसके ऊपर आकर उसे चोदने लगा। वह भी अपनी गाँड़ उठाकर उसका साथ देनी लगी। फिर आख़िर में उसने उसको कुतिया बनाकर पीछे से चोदा और उसके अंदर झड़ गया।
हाँफते हुए उसके बग़ल ने लेटकर मंगेश बोला: देखा साली कैसी रँडी के माफ़िक़ चुदवाती है? मेरी बीवी को साली अभी तक मुझसे शर्म आती है। ना वो कमर उछालती है और ना ही मुँह में लेती है। इस तरह मेरे ऊपर आकर चोदना तो बहुत दूर की बात है। समझा, मैं क्यों इसके पास आता हूँ? जो बीवी से नहीं मिलता वो ये देती है।
जय अपना लौड़ा पैंट में ऐडजस्ट किया और बोला: मैं समझ गया। अब चलता हूँ। ये कहकर वो बाहर आया और सोचने लगा कि अगर मंगेश की बीवी उसका ठीक तरह से साथ देती तो शायद वो नर्गिस के चक्कर में नहीं पड़ता।
दुकान में आकर वह बाथरूम में गया और मूठ्ठ मारा और अपने काम में लग गया। शाम को डॉली का फ़ोन आया: कैसे हो?
जय: मज़े में हूँ।
डॉली: वो तो होंगे ही, मज़ा जो करके आ रहे है । कैसा रहा प्रैक्टिकल अनुभव ?
जय: सिर्फ़ देखा, किया कुछ नहीं।
डॉली: क्या पता ? वैसे हुआ क्या ये तो बताइए ?
जय: मेरा दोस्त अपनी गर्ल फ़्रेंड के पास ले गया था। वहीं पर उन्होंने मुझे सेक्स करके दिखाया और क्या?
डॉली: फिर आपका मन नहीं किया?
जय: मेरा मन तो सिर्फ़ तुम्हारे साथ करने का है। वो बोली थी पर मैंने मना कर दिया।
डॉली: आप सच में बहुत अच्छे हो। बहुत प्यारे। ये कहते हुए उसने पहली बार उसे फ़ोन पर किस्स किया मुआआऽऽऽऽ बोलके।
जय: ओह थैंक्स ड़ीयर । मुआआऽऽऽऽ ।
डॉली: चलो अब रखती हूँ। उसने फ़ोन काट दिया।
रात को सब एक साथ खाना खा रहे थे और हँसी मज़ाक़ चल रहा था। राज सोच रहा था कि रचना के आने से घर में कितनी चहल पहल हो गयी थी। अभी वह नायटी में थी और जब वो हँसती थी तो उसके बड़े बड़े दूध ब्रा में उछलते थे जो जय और राज की आँखों को अपनी ओर आकर्षित कर ही लेते थे। फिर वह दोनों वहाँ से आँखें हटा लेते थे और मन में ग्लानि के भाव से भर उठते थे।
राज खाने के बाद थोड़ी देर बाद सोने चला गया। जय और रचना अमेरिका की बातें करने लगे।
अचानक जय बोला: दीदी एक बात बोलूँ, आप नाराज़ मत होना।
रचना: अरे बोल ना? क्या बात है?
जय: वो क्या है ना दीदी , मैंने कभी सेक्स किया नहीं है और मुझे सुहाग रात का सोचकर थोड़ा नरवसनेस हो रही है। पता नहीं कैसे होगा?
रचना हँसते हुए: अरे मेरे बुध्धू भाई , इसमे नर्वस होने वाली क्या बात है।
जय: फिर भी दीदी , पता नहीं क्यों मैं बहुत सहज नहीं हो पा रहा हूँ।
रचना: अच्छा चल पूछ क्या जानना है?
जय: यही कि शुरुआत कैसे करेंगे? मतलब अब आपसे कैसे कहूँ ?
रचना: ओह बस इतनी सी बात है, चल अभी समझा देती हूँ, टेन्शन मत ले। सुन, सुहागरत में जितना तू डरा होगा उससे ज़्यादा तो डॉली डरी होगी। तुझे सबसे पहले उसे सहज करना होगा। अंदर जाकर तुझे उसे सबसे पहले गिफ़्ट देनी होगी। फिर घूँघट हटा कर उसकी सुंदरता की बहुत तारीफ़ करनी होगी। समझा कि नहीं?
जय: जी दीदी समझ रहा हूँ, फिर?
रचना: फिर उससे ख़ूब सारी बातें करना और फिर ख़ुद लेट जाना और उसे भी लेटने को बोलना। अब दोनों लेट कर बातें करना और अपना हाथ उसके हाथ में लेकर उसे चूमना और फिर उसके गाल वगेरह को चूम कर अपना प्यार प्रदर्शित करना। फिर उसके लिप्स को भी चूमना। जब वो नोर्मल हो जाए तो फिर उसके बदन पर हाथ फिराना। किसी भी लड़की के होंठ और उसके बूब्ज़ उसके शरीर के ऐसे अंग हैं जिनको छूने , चूमने और चूसने से वो गरम हो जाती है। तुम्हें यही करना होगा। प्यार से उसके ब्लाउस को और बाद में ब्रा भी निकालना होगा और होंठ और बूब्ज़ को चूस कर उसे गरम करना होगा। नीचे का हिस्सा आख़िर में नंगा करना होगा। फिर उसकी पुसी में ऊँगली से उसे और भी गरम करना होगा। जब वह वहाँ पर गीली हो जाए तब उसको सेक्स की अवस्था में लाकर उसकी पुसी में अपना हथियार डालना होगा।
एक बात बता दूँ, ये काम बहुत धीरे से और धैर्य से करना होगा। जब उसे दर्द हो तब रुकना भी होगा। और फिर से अंदर डालना होगा। फिर उसके साथ सेक्स करना। हमेशा याद करते हुए की तुम उसे सुख दे रहे हो। सिर्फ़ अपने मज़े के लिए मत करना। कोशिश हो कि वह पहले शांत हो और तुम उसके बाद ।
हाँ एक बात और सेक्स के बाद जो लोग मुँह फेर के सो जाते हैं, लड़की उनको पसंद नहीं करती। वह सेक्स के बाद ख़ूब सारा प्यार और दुलार चाहती है। बहुत सारी बातें करो और उसे बताओ के तुम्हें क्या अच्छा लगा और उससे पूछो कि उसे क्या अच्छा या बुरा लगा। बस इतना ही मैं बता सकती हूँ।
जय: ओह दीदी , आपने बहुत अच्छी तरह से समझा दिया, थैंक्स । बस एक बात और ओरल सेक्स के बारे में बताओ प्लीज़।
रचना: देखो यह सेक्स लड़के और लड़की की मर्ज़ी पर निर्भर करता है। तुम इसके लिए किसी पर दबाव नहीं डाल सकते। और इसके लिए दोनों के अंगों का साफ़ होना बहुत ज़रूरी है। ये तो धीरे धीरे सेक्स करते हुए अपने आप अच्छा या बुरा लगने लगता है।
जय: और दीदी वो जो कई आसन होते है ? उनका क्या?
रचना हंस कर: अरे जैसे जैसे समय बीतेगा, तुम दोनों सब सीख जाओगे।
जय भी हँसने लगा। फिर दोनों गुड नाइट करके सोने के लिए अपने अपने कमरे में चले गए।
जय सोने के समय सोचने कहा कि दीदी ने कितने अच्छी तरह से समझाया और एक बार भी उसका लौंडा खड़ा नहीं हुआ। सच में दीदी कितनी परिपक्व है। फिर उसके आँखों के सामने दीदी के दूध आए,जो कि उसके हँसने से उछल रहे थे । अब उसके लौड़े में हरकत हुई और वह शर्मिंदा होकर अपना सिर झटक कर सो गया।
जब जय दीदी से सुहागरत की ट्रेनिंग ले रहा था तभी डॉली किचन में पानी पीकर किचन बंद करके सोने के लिए जाने लगी। तभी उसको एक कमरे के सामने से फुसफुसहाट सुनाई दी। वह रुक कर सुनने की कोशिश की। अमित: अरे जान आज बहुत इच्छा हो रही है, रात को साथ सोते हैं। मैं उसको नींद की दवाई खिला देता हूँ और फिर रात को मज़े करते हैं। ठीक है?
रश्मि: आऽऽह धीरे से दबाओ ना। अच्छा चलो एक घंटे में आती हूँ। तब तक भाभी सो जाएगी ना?
अमित: बिलकुल मेरी जान। आ जाना।
रश्मि: हाऽऽऽऽय क्या कर रहे हो अभी, उसी समय कर लेना ना ये सब । आऽऽऽह छोड़ो।
डॉली ने धीरे से झाँक कर देखा । रश्मि को अमित पीछे से पकड़ा हुआ था और उसके दोनों बूब्ज़ उसके पंजों में थे और शायद वह उनको ज़ोर से दबा रहा था तभी रश्मि की आऽऽऽह निकल रही थी। जब अमित ने रश्मि को छोड़ा तो उसके लूँगी का तंबू साफ़ दिख रहा था। वह शायद उसे रश्मि के चूतरों पर रगड़ रहा था। अब रश्मि ने बड़ी बेशर्मी से उस तंबू को दबाकर कहा: थोड़ी देर और धीरज रखो फिर शांत हो जाओगे। और यह कहकर हँसती हुई वहाँ से अपने कमरे में चली गयी। अमित के जाने के बाद डॉली भी चली आयी।
डॉली को नींद नहीं आ रही थी। बार बार उसके कान में ये बात गूँज रही थी कि माँ अभी थोड़ी देर में अमित ताऊजी से चुदेगी। आज तक जब भी वह उनको साथ देखी थी तब जल्दी से शर्माकर हट जाती थी। आज उसका मन कर रहा था कि पूरा खेल देखे। ये सोचकर वह उठी और माँ जे कमरे में झाँकी। मम्मी वहाँ नहीं थीं। वो अब अमित के कमरे की ओर गयी। खिड़की के परदे को हटाया और अंदर का दृश्य उसकी आँखों के सामने था।
ताई सोयी हुई थी। और ताऊ जी बिस्तर पर बैठे थे और मम्मी नीचे में ज़मीन पर गद्दा बिछा रही थी। फिर वह वहीं लेट गयीं। नायटी में उनकी विशाल छातियाँ ऊपर नीचे हो रही थीं। अब वह अमित को देख कर मुस्कुराई। अमित आकर उसके साथ लेट गया। अब रश्मि ने अपनीं बाहें उसकी गरदन में डाली और उससे लिपट गयी। वह। ही उसको अपने आप से चिपका लिया। अब उनके होंठ एक दूसरे से मानो चिपक से गए थे। अमित की जीभ रश्मि के मुँह में थी और अमित के हाथ उसकी पीठ और कमर सहला रहे थे।
अमित के हाथ इसकी नायटी को उठाए जा रहे थे और जल्दी ही रश्मि नीचे से नंगी हो गयी। उसके बड़े चूतरों को वो दबाने लगा। और उसकी दरार में हाथ डालकर वह उसकी बुर और गाँड़ सहलाने लगा। रश्मि भी उसकी लूँगी निकाल दी और उसके लौड़े को मसलने लगी। ताऊजी का लौड़ा उसे जय के लौड़े से थोड़ा छोटा ही लगा। अब रश्मि उठी और अपनी नायटी उतार दी। वह नीचे पैंटी और ब्रा नहीं पहनी थी। ताऊजी भी चड्डी नहीं पहने थे। शायद ये उनका पहले से तय रहता है कि चुदाई के समय ये सब नहीं पहनेंगे।
डॉली की हालत ख़राब होने लगी और उसका हाथ अपनी चूचियों पर चला गया और वह उनको दबाने लगी। तभी रश्मि नीचे को झुकी और अपनी चूचि अपने हाथ में लेकर अमित के मुँह में डाल दी। वह उसको चूसने लगा और दूसरी चूचि को दबाने लगा। अब रश्मि आऽऽहहह कर उठी। फिर रश्मि उसके लौड़े को सहलाने लगी। फिर वह झुकी और उसके लौंडे को चाटी जीभ फिराके, और फिर उसे चूसने लगी। अमित भी मज़े से उसके मुँह को चोदे जा रहा था। फिर रश्मि उसके ऊपर आ गयी और अपनी बुर को उसके मुँह पर रखी और अब ६९ की चुसाइ चालू हो गयी।
डॉली की आँखें वहाँ जैसे चिपक सी गयी थीं। अब वह अपनी नायटी उठाकर पैंटी के अंदर उँगली डालकर अपनी बुर सहलाने लगी।
उसकी बुर पूरी गीली हो गयी थी।
अब रश्मि उठी और उसके लौड़े पर बैठी और उसे अंदर लेकर चुदाई में लग गयी। अमित उसके लटके हुए आमों को दबा और चूस रहा था। वह भी नीचे से धक्का मार रहा था। डॉली को उसका लौड़ा मम्मी की बुर में अंदर बाहर होते हुए साफ़ दिख रहा था । फिर रश्मि उसको कुछ बोली। वह उसको अपने से चिपकाए हुए ही पलट गया और अब ऊपर आकर उसकी मम्मी को ज़बरदस्त तरीक़े से चोदने लगा। रश्मि अब उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽऽहहह और जोओओओओओओओओओर से चोओओओओओओओदो चिल्ला रही थी। अब रश्मि के चूतड़ भी नीचे से ज़ोर ज़ोर से उछल रहे थे। दोनों पसीने पसीने हो चुके थे । फिर वह दोनों चिल्लाकर झड़ने लगे। ऊपर ताई जी इन सबसे बेख़बर सोई हुई थी। फिर दोनों चिपक बातें करने लगे । रश्मि अब उसके सुकड़े पड़े लौड़े को सहलाने लगी थी और वह भी फिर से चूची चूसने लगा था। डॉली समझ गयी कि अगले राउंड की तैयरियाँ करने लगे हैं। अब उसकी बुर पूरी तरह गीली हो चुकी थी। वह कमरे में आयी और नायटी उठाकर अपनी बुर में ऊँगली करने लगी। और फिर clit को सहलाकर झड़ने लगी। वह अब शांत हो चुकी थी, पर उसे बड़ी शर्म आइ कि वह अपनी मम्मी और ताऊ की चुदाई देखी। फिर वह सो गयी।
अगले दिन सुबह शशी आइ , हमेशा की तरह दरवाज़ा राज ने खोला और फिर वह किचन में जाकर चाय बनाई। राज फ़्रेश होकर बिस्तर पर बैठा था, तभी वह चाय लेकर आयी। राज ने उससे चाय ली और बग़ल के टेबल पर रख दी और उसको अपनी गोद में खींच लिया और उसको चूमने लगा। वह भी उससे लिपट गयी और उसको चूमने लगी। अब वह चाय पीते हुए उसकी चूचि दबाकर बोला: डॉक्टर के पास जाती रहती हो ना?
शशी: जी हाँ, बराबर जा रही हूँ । वो बोली कि सब ठीक ठाक है।
राज उसकी जाँघ सहलाकर बोला: लड़का होगा देखना?
शशी: जो भी हो मुझे तो बस एक बच्चा चाहिए बस।
राज उसकी जाँघ से हाथ ले जाकर उसकी बुर सहलाकर बोला: हाँ जान बच्चा तो निकलेगा ही यहाँ से ।
शशी: आज सुबह सुबह गरम हो रहें हैं, क्या बात है? वह उसके लौड़े को लूँगी के ऊपर से सहला कर बोली।
राज: अरे तुम माल ही इतना बढ़िया हो जो लौड़े को खड़ा कर दे। चलो आज सुबह सुबह ही चुदाई कर लेते हैं। बाद में बच्चे उठ जाएँगे फिर मौक़ा नहीं मिलेगा।
शशी हँसती हुई खड़ी हुई तो उसने उसके चूतरों को दबोच लिया और ज़ोर से दबाने लगा। वह भी मस्ती में आकर चुपचाप खड़ी रही और मज़े लेती रही।
फिर दोनों बेडरूम की ओर चल दिए।
लगभग इसी समय रचना की नींद खुली , उसे ज़ोर की पेशाब लगी थी। वह बाथरूम से निपटकर बाहर आइ और फिर उसे प्यास लगी तो वह किचन में जाकर पानी पीकर अपने कमरे में जाने लगी तब अचानक उसे एक औरत के हँसने की आवाज़ आइ । वह रुकी और पलट कर वापस अपने पापा के कमरे की ओर गयी । तभी उसे अंदर से उइइइइइइइ की आवाज़ आयी तो वह हैरान होकर खिड़की से अंदर झाँकी। उसकी आँखें फटी की फटी रह गयीं। अंदर उनकी नौकशशी शशी पूरी नंगी बिस्तर पर घोड़ी बनी हुई थी और उसके पीछे उसके पापा ज़मीन में खड़े होकर उसकी बुर में अपना मोटा और लम्बा लौड़ा डालकर उसे बुरी तरह से चोद रहे थे और उसकी लटकी हुई चूचियाँ मसल रहे थे।
रचना की आँखें पापा के लौड़े से, जो कि शशी की बुर के अंदर बाहर हो रहा था, हट ही नहीं पा रही थी। पापा का लंड पूरा गीला सा होकर चमक रहा था। शशी की घुटी हुई चीख़ें गूँज
रही थीं। उइइइइइइइ आऽऽऽऽह और जोओओओओओओओर से चोओओओओओओओओदो । मैं गईइइइइइइइइइइ। ।अब राज भी ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा और जब वह अपना लौड़ा वहाँ से निकाला तो रचना की जैसे साँस ही रुक गयी। क्या मस्त लौड़ा था और पूरा काम रस से भीगा हुआ और अभी भी पूरी तरह खड़ा था। मोटे सुपाडे पर अभी भी गीली बूँदें चमक रही थीं। तभी शशी उठी और उसके लौड़े को चाटकर साफ़ करने लगी। जैसे आख़िरी बूँद भी निचोड़ कर पी जाएगी।
रचना की बुर पूरी गीली हो चुकी थी और उसका हाथ अपने आप ही अपनी बुर को दबाने लगा। जब शशी ने मुँह हटाया तो उसके पापा का लौड़ा अब मुरझाने लगा था। इस अवस्था में भी बहुत सेक्सी लग रहा था। कितना मोटा और लम्बा सा लटका हुआ और नीचे बड़े बड़े बॉल्ज़ भी बहुत ही कामुक लग रहे थे। रचना की आँखें अपने पापा के लौड़े से जैसे हटने का नाम ही नहीं ले रही थी। अब अचानक राज की नज़र खिड़की पर पड़ी और उसकी आँखें रचना की आँखों से टकरा गयीं। रचना को तो काटो ख़ून नहीं, वह वहाँ से भागकर अपने कमरे में आ गयी। उसकी छाती ऊपर नीचे हो रही थीं। उसकी बुर में भी जैसे आग लगी हुई थी। उसकी आँख के सामने बार बार पापा का मदमस्त लौड़ा आ रहा था और फिर उसे अपने पापा की आँखें याद आयीं जिन्होंने उसको झाँकते हुए देख लिया था। वह अपनी बुर में ऊँगली करने लगी।
उधर राज भी रचना को उनकी चुदाई देखते हुए देखकर हड़बड़ा गया। उसे बड़ी शर्म आयी कि रचना ने उसे शशी के साथ इस अवस्था में देख लिया। पर उसे एक बात की हैरानी थी कि वह उसके लौड़े को इतनी प्यासी निगाहों से क्यों देख रही थी। आख़िर वो शादी शुदा थी और उसके पति का लौड़ा उसे मज़ा देता ही होगा। वो थोड़ी सी उलझन में पड़ गया था। पता नहीं अपनी बेटी से नज़रें कैसे मिलूँगा, वह सोचा। शशी भी थोड़ी परेशान थी। राज ने कहा: शशी मैं सम्भाल लूँगा , तुम परेशान मत हो।
शशी सिर हिलाकर किचन में जाकर अपने काम में लग गयी।क़रीब एक घंटे के बाद राज ड्रॉइंग रूम में सोफ़े पर बैठा और चाय माँगा। तभी जय बाहर आया और चाय माँगा। दोनो बाप बेटे चाय पी रहे थे। जय: पापा , दीदी अभी तक नहीं उठी? मैं उसे उठाता हूँ।
राज: ठीक है जाओ उठा दो।
जय रचना के कमरे में जाकर सोई हुई दीदी को उठाने अंदर पहुँचा। रचना अपनी बुर झाड़कर फिर से सो गयी थी। वो करवट में सो रही थी और उसकी बड़ी सी गाँड़ देखकर जय के लौड़े में हलचल होने लगी। वह सामने से आकर बोला: दीदी, उठो ना सुबह हो गयी है। रचना ने एक क़ातिल अंगड़ाई ली और उसके बड़े बड़े बूब्ज़ जैसे नायटी से बाहर आने को मचल से गए। अब उसके आधे नंगे बूब्ज़ नायटी से बाहर आकर राज को पागल कर दिए। उसका लौड़ा पूरा खड़ा हो गया। वह अपने लौड़े को छुपाकर बोला: चलिए अब उठिए, पापा इंतज़ार कर रहे हैं।
रचना: आऽऽऽऽह अच्छा आती हूँ। तू चल।
जय अपने लौड़े को छुपाकर जैसे तैसे बाहर आया और सोफ़े में बैठकर चाय पीने लगा। उसे अपने आप पर ग्लानि हो रही थी कि वह अपनी दीदी के बदन को ऐसी नज़र से देखा । तभी रचना आयी और शशी उसे भी चाय दे गयी। शशी रचना से आँखें नहीं मिला पा रही थी। राज ने भी रचना को देखा और बोला: (झेंप कर) गुड मॉर्निंग बेटा ।
रचना ने ऐसा दिखाया जैसे कुछ हुआ ही नहीं, और बोली: गुड मोर्निंग पापा।
फिर सब चाय पीने लगे और शादी की डिटेल्ज़ डिस्कस करने लगे। फिर जय तैयार होकर दुकान चला गया। शशी भी खाना बना कर चली गयी।
राज: बेटी, ज़ेवरों को आज सुनार के यहाँ पोलिश करने देना है। चलो ज़ेवर पसंद कर लो, जो तुम पहनोगी।
रचना पापा के साथ उनके कमरे में पहुँची और राज ने तिजोरी खोलकर गहने निकाले और रचना उनमें से कुछ पसंद की और अपनी मम्मी को याद करके रोने लगी। राज ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे चुप कराने लगा।
रचना: पापा इन गहनों को देखकर मम्मी की याद आ गयी। पापा, आपको उनकी याद नहीं आती?
राज: ऐसा क्यों बोल रही हो बेटी, उसकी याद तो हमेशा आती है।
रचना: इसलिए आज आप शशी के साथ वो सब कर रहे थे?
राज थोड़ा परेशान होकर बोला: बेटी, तुम्हारी मम्मी को याद करता हूँ, मिस भी करता हूँ। पर बेटी, ये शरीर भी तो बहुत कुछ माँगता है , उसका क्या करूँ ?
रचना: पर पापा, वो एक नौकशशी है, आपको बीमारी दे सकती है, पता नहीं किस किस के साथ करवाती होगी?
राज: नहीं बेटी, शशी बहुत अच्छी लड़की है, वो मेरे सिवाय सिर अपने पति से ही चुद– मतलब करवाती है। इस शरीर की प्यास बुझाने के लिए मैं रँडी के पास तो नहीं गया।
रचना: आपको कैसे पता? हो सकता है वो झूठ बोल रही हो।
राज: बेटी, अब तुमसे क्या छुपाना? दरअसल उसका पति उसको माँ नहीं बना पा रहा था तो मैंने उसे वादा किया कि मैं उसे एक महीने में ही गारण्टी से मॉ बना दूँगा। इसीलिए वो मेरे साथ करवाने के लिए राज़ी हुई।
रचना: ओह, तो क्या वो प्रेगनेंट हो गयी?
राज: हाँ बेटी, वादे के अनुसार एक महीने में ही वो प्रेगनेंट हो गयी। वो अब जल्दी ही माँ बनेगी।
रचना की आँखों के सामने पापा का बड़ा सा लौड़ा और बड़े बड़े बॉल्ज़ घूम गए। वह सोचने लगी कि इतना मर्दाना हथियार और ऐसे बड़े बॉल्ज़ की चुदाई से बच्चा तो होगा ही।
रचना: ओह, पर उसके मर्द को तो शक नहीं होगा ना?
राज : उसे कैसे शक होगा क्योंकि वह तो उसको हफ़्ते में एक दो बार चो- मतलब कर ही रहा था ना। वो तो यही सोचेगा ना कि उसकी चुदा- मतलब उसका ही बच्चा है वो।
रचना देख रही थी कि पापा चुदायी और चोदने जैसे शब्द का उपयोग करने की कोशिश कर रहे थे। वह अब उत्तेजित होने लगी थी।
तभी राज ने एक अजीब बात बोली: एक बात और शशी के पति का हथियार बहुत छोटा और कमज़ोर है और वह उसे बिस्तर पर संतुष्ट भी नहीं कर पाता।
रचना की बुर अब गीली होने लगी थी। बातें अब अश्लीलता की हद पार कर रहीं थीं। वह बोली: ओह । और शर्म से लाल हो गयी। उसकी आँख अब अचानक पापा की लूँगी पर गयी तो वहाँ एक तंबू देखकर वह बहुत हैरान रह गयी। वह समझ गयी कि पापा भी उत्तेजित हो चले हैं। उसे बड़ा अजीब लग रहा था कि बाप बेटी की बातें अब इतनी बेशर्म हो गयीं थीं कि वह दोनों उत्तेजित हो चुके थे।
रचना ने बात बदलने का सोचा और बोली: ओह अच्छा चलिए मैं ये ज़ेवर पहनूँगी , इसे ही पोलिश करवा लेती हूँ।
राज : ठीक है बेटी। पर तुम मुझसे नाराज़ तो नहीं हो? मेरे और शशी के बारे में जान कर।
रचना : पापा आप बड़े हैं और अपना अच्छा बुरा समझ सकते हैं। इसलिए आपको जो सही लगता है वह करो। पर एक बात है डॉली के इस घर में आने के बाद यह सब कैसे करेंगे शशी के साथ?
राज : बेटी सब मैनिज हो जाएगा। तब की तब देखेंगे।
तभी कॉल बेल बजी। रचना ने दरवाज़ा खोला । सामने शशी खड़ी थी।
रचना: अरे तुम वापस आ गयी? क्या हुआ?
शशी: दीदी मेरा मोबाइल यहीं रह गया है।
रचना: ओह ठीक है ले लो। वह अब सोफ़े पर बैठ गयी।
शशी किचन में जाकर मोबाइल खोजी पर उसे नहीं मिला। उसने रचना से कहा: दीदी आप मिस्ड कॉल दो ना । फिर उसने नम्बर बोला।
रचना ने कॉल किया और घंटी पापा के कमरे में बजी। शशी थोड़ा सा डरकर राज के कमरे में पहुँची।
रचना दौड़कर दरवाज़े के पीछे खड़ी होकर उनकी बातें सुनने लगी।
राज: अरे शशी क्या हुआ? तुम्हारे फ़ोन की घंटी यहाँ बजी अभी।
शशी: मेरा फ़ोन यहाँ आपके कमरे में ही गिर गया है। फिर वह बिस्तर में खोजी तो उसे तकिए के नीचे मिल गया।
शशी: दीदी ने कुछ कहा क्या आपसे हमारी चुदाई के बारे में? और ये आपका फिर से खड़ा क्यों है? वह लूँगी के तंबू को देखकर बोली।
राज अपने लौड़े को मसल कर बोला: वो रचना से तुम्हारी चुदाई की बातें कर रहा था तो खड़ा हो गया।
शशी: अपनी बेटी से हमारी चुदाई की बातें कर रहे थे? हे भगवान, कितने कमीने आदमी हो आप?
राज: अरे वो भी तो बड़े मज़े से सब पूछ रही थी।
शशी: तो अब क्या हमारी चुदाई बंद?
राज: अरे नहीं मेरी जान, उसे कोई इतराजीवनहीं है। चल अब तू आइ है तो मेरा लौड़ा चूस दे अभी।
शशी हँसती हुई नीचे बैठी और उसकी लूँगी हटाई और उसके मोटे लौड़े पर नाक लगाकर सूंघी और बोली: आऽऽह क्या मस्त गंध है आपकी। फिर वह अपनी जीभ से उसके सुपाडे को चाटने लगी और बोली: म्म्म्म्म्म्म क्या स्वाद है। म्म्म्म्म।
