दो गायें और दो सांड

गांड की चुदाई

आज मैं एक नई रचना के साथ उपस्थित हुआ हूं – मेरी गांड फाड़ चुदाई। उम्मीद है ये रचना भी आपको पसंद आएगी। तो शुरू करते हैं-

मैं हूं मालिनी अवस्थी। उम्मीद है आप मुझे भूले नहीं होंगे। अजब गांडू की गजब कहानी, मां बेटी की चुदाई और बाप बेटी की चुदाई में मेरी आपकी मुलाक़ात हो चुकी है। “मेरी गांड फाड़ चुदाई” की ये कहानी असल में बाप-बेटी की चुदाई से ही शुरू को गयी थी, जब मेरी पुरानी जानकार रागिनी, अपने पति आलोक और बेटी मानसी के बीच हो रही चुदाई से परेशान हो कर मुझसे मिली थी।

थोड़ा मैं रागिनी के बारे में भी बता दूं। जब मैं कानपुर के जीवन ज्योति हस्पताल में मनोचिकित्सक थी, तब रागिनी वहां नई-नई नर्स भर्ती हुई थी (मेरे और रागिनी के बारे में अधिक जानने के लिए कहानी मां बेटे की चुदाई पढ़ें)।

रागिनी बला की खूबसूरत थी और बला की चुदक्कड़ भी। गांड चूत सब चूसती चुसवाती और चुदवाती थी और साथ ही समलिंगी भी थी। साथ की नर्सों के साथ खूब चूत, गांड चुसाई करती थी। इसी चुदाई के चक्कर में उसकी आलोक के साथ शादी हो गई थी और मानसी उनकी इकलौती बेटी थी।

मानसी के अपने पिता आलोक के साथ चुदाई के सम्बन्ध बन गए थे, और इसी से परेशान हो कर रागिनी मेरे पास आयी थी। बातों-बातों में ही आलोक के ज्यादा ही लम्बे लंड के बारे मैं मुझे बताया। इन्हीं चूत चुदाई और लम्बे लंड की बातों के बीच तभी मेरी और रागिनी की भी चूत हुए गांड चुसाई हो गयी।

जब रागिनी आलोक के लम्बे लंड के बारे मैं बताया तो मैंने भी आलोक से चुदाई का मन बना लिया, और इस चुदाई को अंजाम भी दे दिया। आलोक के साथ मेरी चुदाई में रागिनी का भी हाथ था। आलोक के साथ मेरी चूत और गांड चुदाई मस्त थी। अब क्या बताऊं, लम्बा लंड चूत में तो मजा देता ही है, गांड में और भी ज्यादा मजा देता है, जब पूरी गेहराई तक गांड में जाता है।

आपको तो पता ही होगा कि मैं इन तीन तरह के रबड़ के लंड अपने पास रखती हूं, और जब चूत या गांड चुदाई की ठरक लगे तो इन्हीं रबड़ के लंडों से मजा लेती हूं। चूत चुसाई के दौरान मैंने रागिनी की गांड और चूत में भी ये लंड डाल कर उसे असली चुदाई जैसा मजा दिया था। रागिनी को इन लंडों से इतना मजा आया कि वो खुद ही इन्हें लेने के लिए उतावली हो गयी।

मुझे ये लंड कानपुर का ही संदीप सोलंकी ला कर देता है। अब ये संदीप सोलंकी कौन है? संदीप सोलंकी भी मेरा पुराना जानकार है। बाजार मैं जब भी कोइ नई तरह का रबड़ का लंड आता है तो संदीप मुझे जरूर बताता है। संदीप अभी 32-35 जवान है और मेरी चूत का बड़ा दीवाना है। मेरी उसके साथ चुदाई तो नहीं हुई, मगर जब रागिनी संदीप के पास रबड़ का लंड लेने गयी, तो उसकी संदीप के साथ चुदाई हो गयी।

जिस तरीके की संदीप ने रागिनी की चुदाई की थी उससे रागिनी की चूत का भोसड़ा बन गया था। मगर रागिनी की इस तरह हुई चुदाई का किस्सा जब रागिनी ने मुझे बताया तो मेरी इच्छा संदीप से चुदाई करवाने की होने लगी।‌ बस मौक़ा ही चाहिए था…. और अब मुझसे रहा भी नहीं जा रहा था, बस मैंने संदीप को फोन मिला ही दिया।

मेरी के साथ हुई चुदाई की ही ये कहानी है – “मेरी गांड फाड़ चुदाई।”

संदीप ने फोन उठाया और जैसे मैंने उसकी हेलो का जवाब दिया तो वो चहकते हुई बोला, “अरे मैडम मालिनी जी, नमस्ते। आज तो भाग ही खुल गए इस गरीब के, मैं बस आपके ही बारे में सोच रहा था। कहिये कैसे याद किया?”

मैंने भी सोचा साला कितना ड्रामा करता है – “मेरे बारे में ही सोच रहा था।”

मैंने कहा, “बस ऐसे ही याद कर लिया तुझसे बात करने का मन हो रहा था।”

संदीप बोला, “तो फिर यहीं आ जाइये मेरे पर्सनल ऑफिस मैं। यही बैठ कर बातें करेंगे।”

मैंने कुछ सेकण्ड रुक कर कहा, “ठीक है आती हूं। बारह बजे तक पहुंचती हूं।”

संदीप चहकता हुआ बोला, “अरे मैडम, आप क्या तकलीफ करेंगी, क्यों टेंशन ले रही हैं, मैं ड्राइवर भेजता हूं, आपको ले भी आएगा छोड़ भी आएगा।”

मैंने कहा, “नहीं संदीप, शंकर, मेरा ड्राइवर है, वो ले आएगा।”

संदीप बोला, “छोड़िये मैडम क्यों शंकर को तकलीफ देनी? क्या पता कितना टाइम लगेगा आपको। ऐसे ही कुछ-कुछ सोचेगा शंकर। मैं ही गाड़ी भेजता हूं बारह के बजाए ग्यारह बजे आ जाईये।”

मैंने घड़ी देखी साढ़े दस बजे थे। मैं मन ही मन हंसी और साथ ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, “साला कहां-कहां दिमाग चलाता है। लगता है आज चोदे बिना नहीं मानने वाला। पक्का दारू-वारू का प्रोग्रम बना के बैठा होगा।”

मैंने हंसते हुए कह दिया, “ठीक है, भेज दे ड्राइवर ग्यारह बजे ही आती हूं।” मैं बाथरूम चली गयी और आधे घंटे के बाद तैयार हो कर निकली और प्रभा को बुला लिया और कहा, “प्रभा मैं अभी थोड़ी देर मैं कहीं जा रही हूं। शंकर को बोल देना आज कोइ काम नहीं। अगर वो छुट्टी करना चाहे तो कर ले। शाम को लौटने में हो सकता है देर हो जाए। छह सात भी बज सकते हैं तुम खाना बना कर खा कर आराम करना, मैं अपने आप खा लूंगी।”

प्रभा ने हां में सर हिलाया और चली गयी। प्रभा मेरी ख़ास थी। कभी इस बारे में बात तो नहीं हुई, मगर मेरी आदतों के बारे में उसे पता ही होगा। एक तरह से मेरी निजी कामवाली थी। मगर मैंने उसे कभी कामवाली नहीं समझा और उसकी सुख सुविधा का पूरा पूरा ध्यान रखा है।

पौने ग्यारह बजे संदीप का ड्राइवर आ गया, और बीस मिनट में हम लोग संदीप के निजी ऑफिस में थे। जैसे ही मैं संदीप के दफ्तर में पहुंची, संदीप एक-दम खड़ा हो गया और नमस्ते-नमस्ते के बाद चहकता हुआ बोला, “मैडम आप पहली बार यहां आई हैं, आज तो मेरा ऑफिस पवित्र हो गया आपके कदमों से।”

इसके साथ ही संदीप ने मेरी चूत की तरफ देखते हुए अपना लंड खुजला दिया। संदीप का ये प्राइवेट ऑफिस बहुत ही उम्दा तरीके से सजाया हुआ था। आगे ऑफिस था और पीछे की तरफ भी एक दरवाजा नज़र आ रहा था। शायद दूसरा ऑफिस होगा या फिर कमरा होगा था जो ठरकी संदीप शायद चुदाई के लिये इस्तेमाल करता होगा।

आगे ऑफिस में एक बड़ी से मेज थी। उसके एक कोने में एक सोफा था। ऑफिस का सारा सामान कीमती लग रहा था। इधर-उधर की बातें करने के बाद संदीप बोला, “कहिये क्या सेवा करूं आपकी, आज कैसे याद किया?”

फिर कुछ रुक कर बोला, “अच्छा मैडम पहले तो ये बताईये कि क्या पियेंगी आप? चाय कॉफी या कुछ और?”

संदीप के उतावलेपन पर मैं हंसती हुई बोली, “अरे संदीप बैठ जा, इतनी भी क्या जल्दी है।”

संदीप मेज के पीछे वाली अपनी कुर्सी पर ना बैठ कर मेरे बराबर वाली कुर्सी पर ही बैठ गया। पैंट में उसके लंड का उभार साफ़ दिखाई दे रहा था। उधर मैं तो आयी ही चुदाई करवाने थी। मेरी चूत भी फुर्र-फुर्र पानी छोड़ रही थी। अब इतना भी नासमझ संदीप नहीं था कि इतनी सी बात भी ना समझ सके कि उसकी और रागिनी के बीच हुई चुदाई के बात रागिनी ने मुझे ना बताई हो। वो भी तब जब रागिनी मेरे कहने से ही प्लास्टिक के लंड लेने उसके पास गयी थी।

संदीप ने एक बार अपना लंड खुजलाया और बोला, “कहिये मैडम क्या सेवा करूं आपकी?”

उधर मेरी चूत में खुजली मची हुई थी। मेरा मन हो रहा था संदीप से कहूं, “इधर आ भोसड़ी के रगड़ाई कर मेरी चूत की, जैसे रागिनी की की थी।”

मैंने चूत की ऊपर साड़ी ठीक करते हुए कहा, “संदीप कोइ नई चीज आई है इन दिनों में?”

संदीप ने एक बार फिर लंड खुजलाया और बोला, “मैडम जब भी कोइ नई चीज आती है, सबसे पहले आपके पास पहुंचती है। फिर भी मैं आपको पूरे हर तरह की खिलौने दिखा देता हूं, आप देख लीजिये। अगर मेरे पास होगा तो ठीक है नहीं तो मंगवा दूंगा।” ये कह कर संदीप उठा और बोला, “चलिए मैडम पीछे वाले रूम में चलते हैं।”

मैं भी उठ गयी। पीछे वाला कमरा पूरी तरह से अय्याशी के हिसाब से बनाया सजाया हुआ था। एक तरफ बड़ा बेड, एक तरफ सोफा, एक छोटी मेज और तीन कुर्सियां। मेज पर ही लैपटॉप पड़ा था। संदीप ने अपना लैपटॉप खोल दिया और चुदाई की खिलौनों साइट खोल कर लैपटॉप मेरी तरफ घुमा दिया, और मेरे साथ वाली कुर्सी पर बैठ ही गया।

चुदाई की तरह तरह की खिलौनों की फोटो मेरे सामने थे। हर साइज़ के लंड, चोदने की लिए छोटी बड़ी चूतें, चूतड़ों की साथ गांड की छेद, अधखुले होठ अगर किसी का मन मुंह में लंड डालने का हो उसके लिए, और बड़े-बड़े मम्मे अगर मम्मों पर लंड रगड़-रगड़ कर पानी छुड़वाना हो उसके लिए।

मैं देखती भी जा रही थी और अपनी चूत भी खुजला रही थी। तभी मुझे आलोक की लंड की तरह का लम्बा लंड मिल गया गांड में लेने की लिए। लगभग डेढ़ इंच मोटा और सात इंच लम्बा। आगे का टोपा थोड़ा फूला-फूला सा। लंड के पीछे की तरफ दो झूलते हुए टट्टे भी थे। साथ ही बेल्ट जैसी कुछ चीज़ थी।

मैंने संदीप से पूछा, संदीप ये क्या बेल्ट जैसा क्या है?”

“मैडम अगर आपने किसी की गांड या चूत में ये डालना हो, या किसी से अपनी गांड या चूत मैं डलवाना हो, तो ये लंड इस बेल्ट में लगा कर गांड या फिर चूत चुदाई करते हैं।”

मैंने सोचा यही चाहिए था मुझे। मैंने संदीप की तरफ लैपटॉप घुमाते हुए हुए कहा, “संदीप, ये वाला है तेरे पास?”

संदीप ने लैपटॉप की तरफ देखा और मेरी तरफ देखते हुए बोला, “मैडम इससे बड़े वाले साइज के तो पहले ही से ही हैं आपके पास, फिर ये?” फिर दो सेकंड सोचते हुए शरारत से बोला, “मैडम ये पीछे की लिए तो नहीं चाहिए?”

संदीप की लंड का उभार बढ़ता जा रहा था और मेरी चूत में बाढ़ आ चुकी थी। मैंने कहा, “हां संदीप, पीछे के लिए ही चाहिए।”

संदीप कुर्सी पर पीछे की तरफ हुआ और बोला, ये है मेरे पास, अभी मंगवाता हूं।” ये कह कर संदीप ने फोन मिलाया और किसी से कुछ बात की। फोन बंद करके बोला, “मैडम दस मिनट में आ जाएगा।”

अब संदीप भी समझ चुका था कि मैं चुदाई की लिए ही वहां आई थी। संदीप पूरी तरह मुझे चोदने की मूड में आ चुका था। संदीप ने एक बार और लंड को पैंट में ठीक से बिठाया और आगे झुक कर बोला, “मैडम जब तक शोरूम से “वो” आता है, एक-एक ड्रिंक हो जाए?”

मैं भी पूरी मस्ती मैं आ चुकी थी। मैंने बिना ना-नुकर के कह दिया, “ठीक है जिन ले आ।”

संदीप ने कोने में लगी अलमारी में से “कोवाल जिन” की बोतल निकाल कर ले आया। बड़ी मंहगी वाली जिन थी – दस हजार की बोतल।

दो पेग बना कर संदीप ने एक गिलास मेरी और सरका दिया। गिलास में से एक घूंट लेते हुए मैंने कहा, “और सुना संदीप, काम का क्या हाल है?”

संदीप भी सहजता के साथ बोला, “बस मैडम आप के आर्शीवाद से बढ़िया चल रहा है। आज कल लोग बहुत शौक़ीन हो गए हैं – तरह-तरह के शौक रखते हैं, चूत, गांड का छेद, बड़े-च्बड़े मम्मे और अधखुले होंठ। अब तो परिवार वाले शादी-शुदा भी इनका इस्तेमाल करते हैं। मगर सब से ज्यादा डिमांड इनकी कालेज के लड़के-लड़िकयों में है, जो अमीर मां-बाप की संतानें है और हॉस्टल में या शहर में कमरे किराए पर ले कर रहते हैं।”

ऐसे ही बातें करते-करते पहला पेग खत्म हो गया। संदीप ने दूसरा पेग बना दिया। तभी घंटी बजी। उठते हुए संदीप बोला, शायद आ गया है।”

संदीप वापस आया तो उसके हाथ में एक डिब्बा था। बैठते हुए संदीप बोला, “लीजिये मैडम – खोल कर देख लीजिये। फोटो में बहुत अच्छा अंदाजा नहीं लगता।” ये कह कर संदीप ने डिब्बा मेरे हाथ में दे दिया।

मैंने डिब्बा खोला और रबड़ का लंड बाहर निकाल कर हाथ में ले लिया। बिलकुल आलोक के लंड जैसा ही था, वैसा ही लम्बा, वैसे ही बड़े-बड़े लटकते हुए टट्टे। बस इस लंग का टोपा थोड़ा फूला-फूला सा था, और साथ ही एक बेली भी थी।

ये लंड बेल्ट में अटक जाता था और इसे अपनी कमर से बांध कर रक लड़की दूसरी लड़की की चुदाई करती थी। मेरी चूत में तो खुजली हो ही रही थी। ये लंड देख कर मेरी गांड में भी खुजली मच गयी। मन करने लगा अभी के अभी गांड में ले लूं। मैंने संदीप से कहा, “संदीप बिलकुल वैसा ही है, जैसा मुझे चाहिए था।”

जैसे ही मैंने ये कहा, संदीप ने अपना खड़ा लंड पैंट में से बाहर निकल लिया और मेरी तरफ देखते हुए बोला, मैडम एक बार इसको भी देख लीजिये।”

सच में ही संदीप का लंड मोटा था जैसा रागिनी ने बताया था। मैंने हंसते हुए कहा, “क्या हुआ संदीप, इसको क्या हो गया है? रागिनी की याद आ गई क्या इसको?”

जब मैंने कहा, “रागिनी की याद आ गयी क्या इसको,” तो संदीप पूरी तरह मेरा इरादा समझ गया और बोला, “नहीं मैडम रागिनी की नहीं आज ये आपकी सेवा करना चाहता है।” ये कहते हुए संदीप खड़ा हो गया और मेरे सामने आ गया। संदीप का मोटा लंड मेरे मुंह के बिलकुल सामने था। मैंने संदीप का लंड मुंह में तो नहीं लिया मगर हाथ में पकड़ लिया और पूरे कामुक अंदाज से बोली, “भोसड़ी के संदीप, कहां छुपा रखा था ये हथियार अब तक?”

मेरा ये कहना ही था की संदीप ने लंड अपने हाथ में लिया और मेरे मुंह में डाल दिया। मैंने जरा सा ही संदीप का लंड चूसा और बोली, “थोड़ा सब्र करले संदीप, जल्दी क्या है? बैठ जा।”

“सॉरी मैडम, रहा नहीं गया,” ये कह कर संदीप वापस कुर्सी पर बैठ गया।

मैंने अपना जिन का गिलास उठा और एक घूंट भर कर बोली, “संदीप क्या बात है, चुदाई का मन हो रहा है क्या?”

संदीप ने लंड हाथ में ले कर कहा, मैडम आपको चोदने का मन तो सालों से हो रहा है, जब से आपसे मिला हूं तब से, बस कहने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी – और आप भी तो आप भी तो घास नहीं डाल रही थी, आज आप आयी हैं, तो रहा नहीं गया। सच कहूं तो मैडम बहुत तरसा हूं आपकी चुदाई की लिए। आज तो मौक़ा दे ही दीजिये।”

मैंने कह ही दिया, “ठीक है संदीप, कर ले आज मेरी चुदाई। मगर बात बता रागिनी बहुत तारीफ़ कर रही थी तेरी, ऐसा भी क्या किया तूने उसके साथ?”

संदीप ने एक हाथ मैं अपना लंड पकड़ा कर कहा, “रागिनी जी क्यों मेरी तारीफ़ कर रही थी ये तो मुझे मालूम नहीं अब आप खुद ही देख लीजियेगा।” ये कह कर संदीप ने अपना गिलास खाली कर दिया और तीसरा पेग बना दिया।

दो पेग का सुरूर मुझे भी आ चुका था। संदीप का मोटा लंड देख कर रगड़ाई वाली चुदाई का मन हो रहा था। मैंने संदीप से कहा, “इधर आ संदीप।”

संदीप मेरे सामने आ कर खड़ा हो गया।

संदीप खड़े लंड के साथ मेरे सामने आ गया। संदीप का लंड बिलकुल मेरे होठों को छू रहा था। अब मैं भी और इंतज़ार नहीं कर सकती थी और मैंने संदीप का लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी। जल्दी ही संदीप का लंड लकड़ी की तरह सख्त हो गया। रागिनी ठीक ही कह रही थी, संदीप का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था। मेरा मुंह संदीप के लंड से भर गया।

जल्दी ही संदीप ने मेरा सर पकड़ा और अपने लंड पर आगे-पीछे करने लगा। मेरी चूत गर्म हो चुकी थी और लंड मांग रही थी। मैंने संदीप के चूतड़ पकड़े और खुद ही संदीप का लंड जो जोर से अंदर-बाहर करने लगे। संदीप आह आह कर रहा था।

मुझे लगा कहीं संदीप के लंड पानी मेरे मुंह में ही ना छूट जाए। मैं संदीप का लंड चूत में लेना चाहती थी। मैंने लंड मुंह से निकाला और संदीप की तरफ देखने लगी। संदीप समझ गया की मैं अब चुदाई चाहती थी।

संदीप ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और मुझे खड़ा कर दिया। संदीप ने मेरी साड़ी खोल दी और मुंह घुमा कर मेरे ब्लाऊज़ के बटन खोल दिए हुए मेरी ब्रा भी उतार दी। अब मैं खाली एक चड्ढी में खड़ी थी। संदीप ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ कर लिया और मेरे होंठ चूसने लगा। संदीप के जिस्म पर खूब सारे बाल थे। मेरे मम्मे संदीप की छाती से टकरा रहे थे।

संदीप का एक हाथ मेरी चड्ढी के अंदर था और संदीप मेरी गांड के छेद में उंगली डालने की कोशिश कर रहा था। मैंने अपनी टांगें खोल दी। संदीप ने अपनी उंगली मेरी गांड के छेद में घुसेड़ दी। मुझसे अब और रहा नहीं जा रहा था, मैं चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार थी।

मैंने संदीप को अपने से अलग किया और कहा, “बस संदीप, चलो अब।”

संदीप भी चुदाई के लिए तैयार ही था। बोला, “चलिए मैडम”, और हम कमरे में लगे बेड की तरफ बढ़ गए।

मैंने संदीप से पूछा, “बोलो संदीप, कैसे चोदना है, कैसे लेटूं?”

संदीप बोला, “मैडम पहली चुदाई आपकी मर्जी से होगी, उसके बाद देखेंगे कैसे करना है।”

मैं चुदाई तो रागिनी की तरह रगड़वा कर ही करवाना चाहती थी, मगर फिर सोचा आज पता नहीं संदीप कितनी बार रगड़ेगा। वैसे भी मैं तो तीन चार घंटे का सोच कर ही आयी थी। पहली चुदाई मैं सीधे सादे तरीके से ही करवाना चाहती थी।

मैंने कहा, “संदीप, सीधी सादी चुदाई ही करते हैं।”

संदीप आया और मेरी चड्ढी उतार कर मेरी चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर मेरी टाँगें खोल दी और अपना मुंह मेरी चूत में घुसेड़ दिया। संदीप कभी अपनी जुबान मेरी चूत के अंदर डाल रहा था और कभी मेरी चूत का दाना चूस रहा था। बीच-बीच में संदीप “आह मैडम ओह मैडम” भी बोलता जा रहा था।

मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था। मैं संदीप का मोटा लंड चूत में डलवाना चाहती थी। मेरी चूतड़ खुद-ब-खुद घूमने लग गए। संदीप भी समझ गया कि मैं लंड मांग रही थी। संदीप उठा मेरे ऊपर लेट कर लंड मेरी चूत में ऊपर नीचे किया और जैसे ही चूत के छेद पर लंड रुका, संदीप ने एक झटका लगाया और पूरा लंड मेरी चूत में बिठा दिया।

लंड रगड़ कर चूत में घुसा। वो पल तो जैसे जन्नत की तरह था। संदीप ने मुझे बाँहों में जकड़ा मेरे होंठ अपने होठों में लिए और जोरदार चुदाई चालू कर दी। संदीप बहुत जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। संदीप के हर धक्के साथ ऐसा लगता था जैसे बेड भी हिल रहा है।

वो ऐसे मुझे चोद रहा था जैसे पहली बार चूत चोदने के लिए मिली हो। वैसे बात तो यही थी। संदीप की पहली चुदाई ना भी हो तब भी संदीप मुझे तो पहली बार ही चोद रहा था। संदीप तो न जाने कब से मुझे चोदना चाहता था, मैं ही उसे लिफ्ट नहीं दे रही थी। संदीप ने मेरे होंठ छोड़े और जोर-जोर से धक्के लगाते हुए बोला, “आह मैडम, लो मैडम, गया पूरा आपकी फुद्दी में, आह मैडम क्या चूत है आपकी, मजा ही आ गया। मैडम बड़ा ही तरसाया है आपने। अब तक क्यों नहीं चुदवाई आपने?”

मुझे भी मजा तो आ ही रहा था। मैं भी चूतड़ घुमाते-घुमाते बोलने लगी, “ले भोसड़ी के, अब आ तो गयी तेरे पास, आज कर ले जितनी चुदाई करनी है। रगड़ ले मेरी चूत को जितना रगड़ना है – खुद भी मजा ले हुए मुझे भी मजा दे।” इसके साथ ही मैंने अपनी टांगें संदीप के पीछे कर दी और संदीप को टांगों में जकड़ लिया।

बीस मिनट चली इस चुदाई में दो बार मेरी चूत का पानी छूट गया, मगर संदीप एक बार भी नहीं छूटा। मैंने ही कहा, “बस संदीप निकाल ले पानी अपने लंड का फिर थोड़ा आराम कर लेते हैं।”

मेरे ये कहते ही संदीप ने लंड के धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी और बोला, “ऐसे कैसे निकाल लूं मैडम, चूत के अंदर ही मजा निकालूंगा।” ये कह कर संदीप ने और भी कस कर मुझे पकड़ लिया और मेरे होंठ चूसने लगा। पांच मिनट की चुदाई के बाद एकाएक संदीप बोला, “लो मैडम निकला आपकी फुद्दी मैं, गया ये।”

और इसके साथ ही संदीप के लंड से निकले गर्म-गर्म पानी से मेरी चूत भर गयी। एक मिनट ऐसे ही मेरे ऊपर लेटने के बाद संदीप ने लंड मेरी चूत में से निकाला और पलट कर मेरे साथ ही लेट गया।

मेरे मुंह से अपने आप ही निकल गया, “संदीप, मस्त चुदाई करता है तू।” ये सुनते ही संदीप फिर से मेरे ऊपर आ गया और मेरे होंठ चूसने लगा।

मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। मुझे लगा अगर संदीप ऐसे ही मेरे होंठ चूसता रहा तो मेरी चूत फिर लंड मांगने लगेगी, लेकिन मैं बोली कुछ नहीं।

कुछ देर मेरे होंठ चूसने के बाद संदीप मेरे ऊपर से उतरा और जा कर सोफे पर बैठ गया। मैं भी उठी और बाथरूम में चली गई। पेशाब करके चूत की धुलाई करके मैं बाहर आयी और संदीप के पास ही बैठ गयी। मैंने संदीप के ढीले पड़े लंड को पकड़ा और कहा, “संदीप, मजा आ गया आज चुदाई का।”

संदीप ने भी मेरी चूत पर हाथ फेरते हुए कहा, “मैडम, चूत तो कसी हुई है आपकी। चोदने में मुझे भी बड़ा ही मजा आया।”
थोड़ी देर ऐसे ही हम एक-दूसरे के लंड चूत के साथ खिलवाड़ करते रहे। संदीप का लंड खड़ा होने लगा। मैंने मस्ती में संदीप की तरफ देखा और कहा, “संदीप ये फिर तैयार हो रहा है क्या?”

संदीप ने बस इतना ही कहा,”जी मैडम”, और उठ कर दोनों गिलासों में जिन डालने लगा। मैंने भी संदीप को मना नहीं किया। मैं भी संदीप के मोटे लंड की चुदाई का पूरा मजा लेना चाहती थी।

दो बड़े-बड़े घूंट भरने के बाद संदीप ने अपना गिलास मेज पर रख दिया और खड़ा हो गया और अपने खड़े लंड को हाथ मैं लेकर बोला, “चलिए मैडम, अब बताईये कैसे मजा लेना है, कैसे चुदवानी है?”

मैंने अपने गिलास में से घूंट भरते हुए कहा, “अब जैसे तेरी मर्जी है वैसे चोद संदीप, बस यादगार बना दे आज की चुदाई।”

“चलिए मैडम आइये फिर, यादगार बनाता हूं चुदाई।” इतना बोल कर संदीप मेरे सामने खड़ा हो गया। इशारा साफ़ था कि मैं संदीप का लंड मुंह में लूं।

मैंने गिलास मेज पर रखा और संदीप का मोटा लंड मुंह में ले लिया। पांच मिनट की चुसाई के बाद ही संदीप बोला, “बस मैडम उठिये और चूतड़ पीछे कर के बेड के किनारे पर उल्टा लेट जाईये। जरा आपके चूतड़ चाटूं।”

मैंने लंड मुंह में से निकाला और जैसा संदीप ने कहा था वैसे ही चूतड़ पीछे की तरफ करके घुटनों बल बेड के किनारे पर लेट गयी। संदीप मेरे पीछे आया हुए अपना लंड मेरे चूतड़ों पर रगड़ने लगा। कुछ देर ऐसे ही करने के बाद संदीप नीचे बैठ गया और उसने मेरे चूतड़ चौड़े किये और मेरी गांड का छेद चाटने लगा।

संदीप फिर खड़ा हो गया और बोला, “मैडम मस्त चूतड़ हैं आपके। मैडम गांड में लेना है?”

मैंने हंसते हुए कहा, “साले फाड़ेगा क्या मेरी गांड? तेरा मोटा लंड मेरी गांड में जा भी पायेगा? चल कोशिश करके देख ले, मगर जबरदस्ती मत करना।”

संदीप बोला, “चलिए मैडम पहले एक बार चूत चुदाई तो कर लें, फिर देखेंगे।”

ये कह कर संदीप ने मेरे चूतड़ थोड़ा ऊपर उठा दिए। मेरी चूत बिलकुल संदीप के लंड के सामने थी। संदीप ने अपना लंड चूत के दरार में ऊपर नीचे किया और जैसे ही लंड चूत के छेद पर बैठा, संदीप ने एक झटका लगाया लंड अंदर बिठा दिया। चिकने पानी से भरी मेरी चूत में संदीप का लंड फिसलता हुआ अंदर चला गया।

संदीप लंड चूत में डाले कुछ देर ऐसे ही खड़ा रहा, मगर चुदाई शुरू नहीं की।

मुझे कुछ हैरानी सी हुई के संदीप चुदाई क्यों नहीं कर रहा। तभी संदीप ने लंड चूत में से बाहर निकाल लिया और अलमारी की तरफ चला गया। मैंने सर मोड़ कर देखा के ये संदीप क्या कर रहा था। संदीप मुड़ा तो उसके हाथ में एक छोटा तौलिया था। मैं समझ गयी अब मेरी रगड़ाई वाली चुदाई होने वाली थी। मेरे सामने रागिनी की फूली हुई चूत घूम गयी। ऐसे ताबड़-तोड़ चुदाई के ख्याल भर से ही मेरी चूत ने फिर फव्वारा छोड़ दिया।

संदीप मेरे पीछे आया और मेरी चूत तौलिये पोंछने लगा। मैंने अनजान बनते हुए संदीप से पूछा, “संदीप ये क्या कर रहे हो?”

संदीप ने जवाब दिया, “मैडम यादगार चुदाई के तैयारी कर रहा हूं, आप बस आप देखती जाईए।”

अच्छी तरह चूत का पानी पोंछ कर संदीप ने अपने उंगली चूत के छेद मैं डाली, ये देखने के लिए के चूत बिलकुल सूख गयी है। चूत बिलकुल सूखी हो चुकी थी, संदीप ने चूत का पूरा पानी सुखा दिया था। संदीप ने तौलिया एक तरफ रख दिया और लंड को फिर से चूत के छेद पर बिठा दिया और दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली। मैं समझ गई की अब संदीप क्या करने वाला था। मैं बस उस पल का इंतजार कर रही थी जब संदीप का मोटा लंड मेरी चूत के परखच्चे उड़ाने वाला था।

तभी संदीप बोला, “लो मैडम लो यादगार होने वाली चुदाई के मजे”, और इतना कहते ही संदीप ने एक जोर का झटका लगाया और लंड मेरी चूत को जैसे छीलता हुआ अंदर चला गया।

मेरे मुंह से मस्ती भरी एक सिसकारी निकली, “आह संदीप”, और मैं दर्द के मारे थोड़ा आगे की तरफ हुई। मगर संदीप ने मेरी कमर पकड़ी हुई थी। संदीप ने मुझे हिलने नहीं दिया और चुदाई चालू कर दी। लंड के हर धक्के के साथ संदीप बोलता जा रहा था, “लो मैडम लो मेरा लंड। अब होगी आपकी यादगार चुदाई।”

एक मिनट की चुदाई के बाद हे मेरा दर्द ग़ायब हो गया और दर्द की जगह जन्नत के मजे ने ले ली। मेरे मुंह से बरबस ही निकल गया, “भोसड़ी के इतने दिन कहां था? क्यों अब तक नहीं की मेरी चुदाई? आह मजा आ गया संदीप, रगड़ दे आज मेरी चूत फुला दे इसे, फाड़ दे।”

इतना सुनना था के संदीप ने जोर-जोर से लम्बे-लम्बे धक्के लगाने शुरू कर दिए। सूखी चूत की चुदाई मैं पांच मिनट नहीं झेल पायी और झड़ गयी, निकल गया मेरी चूत का पानी। मेरे मुंह से बस इतना ही निकला, “संदीप निकल गया मेरा, क्या मजा दिया है तूने।”

संदीप ने लंड बाहर निकाल लिया। उसका एक हाथ मेरी कमर पर ही था, मतलब मुझे अभी ऐसे ही लेटी रहना था। दूसरे हाथ से सदीप ने तौलिये से फिर मेरी चूत साफ़ की। चुदाई और मजा आने के दौरान जो पानी चूत ने छोड़ा था, संदीप ने उसे साफ़ किया और फिर से झटके के साथ लंड चूत में बिठा दिया और चुदाई चालू कर दी। सूखी चूत की चुदाई का ये सिलसिला बीस मिनट तक चला। इस दौरान मेरी चूत दो बार और पानी छोड़ गयी।

हर बार मुझे मजा आने पर संदीप तौलिये से चूत पोंछ कर चूत का पानी सुखाता और चुदाई चालू कर देता। इस सूखी चुदाई से मेरी चूत सुन्न हो चुकी थी। अब चूत में हल्का-हल्का दर्द भी होने लगा था। मैंने सर मोड़ कर संदीप से पूछा, “और कितना रगड़ोगे संदीप, तुम्हारा नहीं निकल रहा?”

संदीप ने धक्के लगाते हुए कहा, “मैडम मेरा नहीं निकलेगा। आप अगर थक गई हैं तो मैं बस करता हूं, मगर लंड का पानी या तो अपनी गांड में निकालूंगा या मुंह में।”

मैंने इतना ही कहा, “संदीप थक तो गयी हूं। तीन बार मजा भी आ चुका है।”

मेरा इतना कहते ही संदीप ने चुदाई रोक दी, मगर लंड बाहर नहीं निकाला। संदीप बोला, “तो मैडम बताईये कहाँ छुड़ाऊं, गांड में छुड़वाना है या मुंह में?”

मैंने वैसे लेटे लेटे पूछा, “संदीप गांड में कैसे छुडवाओगे? तुम्हारा लंड गांड में जाएगा ही कैसे।”

संदीप बोला, “वो आप मत सोचो मैडम, जितना जाएगा उतना डाल कर ही छुड़वा दूंगा। मैडम में गांड में गरम-गरम छुड़वाने का भी अपना ही मजा है।”

मैंने कह दिया, “ठीक है संदीप, फिर गांड में ही निकाल दे, मुंह में बाद में देखेंगे।”

मैंने वैसे लेटे लेटे पूछा, “संदीप गांड में कैसे छुड़वाओगे? तुम्हारा डंडे जैसा मोटा लंड गांड में जाएगा ही कैसे?”

संदीप बोला, “वो आप मत सोचो मैडम, जितना जाएगा उतना डाल कर ही छुड़वा दूंगा। मैडम गांड में गरम-गरम छुड़वाने का भी अपना ही मजा है।”

मैंने कह दिया, “ठीक है संदीप, फिर गांड में ही निकाल दे, मुंह में बाद में देखेंगे।”

संदीप बोला, “ठीक है मैडम, ऐसे ही लेटे रहिये।”

मैं वैसे ही बेड के किनारे पर चूतड़ पीछे करके लेटी रही। संदीप अलमारी में से गांड चुदाई में इस्तेमाल होने वाली क्रीम निकाल कर लाया और मेरी गांड के छेद पर लगा दी। थोड़ी क्रीम उंगली से गांड के अंदर भी लगा दी। फिर संदीप ने लंड को गांड के छेद पर बिठाया, और हल्का सा अंदर की तरफ दबा दिया। मुझे दर्द तो हुई मगर मैं बोली कुछ नहीं। संदीप ने लंड को थोड़ा और दबाया। मझे साफ़ पता चल रहा था के मेरी गांड का छेद थोड़ा सा फ़ैल रहा था। संदीप ने थोड़ा और लंड अंदर दबाया और पूछा, “मैडम ठीक हो, कोइ प्रॉब्लम तो नहीं?”

मैंने कहा, “संदीप दुःख तो रहा है, मगर ठीक है। कितना अंदर चला गया है? मेरी गांड का छेद तो लग रहा है फ़ैल गया है।”

संदीप बोला, “मैडम लंड का टोपा बैठ गया है। थोड़ा सा और अंदर डाल कर लंड का पानी छुड़ाता हूं।” ये कह संदीप ने लंड थोड़ा और अंदर कर दिया।

संदीप रुक कर बोला, “मैडम आधा अंदर चला गया है। कहो तो रुक जाऊं?”

मुझे अब मजा आने लग गया था। मैंने कहा, “थोड़ा और डाल ले अब तो दर्द के साथ-साथ मजा भी आने लग गया है।”

संदीप ने लंड बाहर निकाल लिया और गांड के छेद के ऊपर और अंदर ढेर सारी क्रीम लगा दी। संदीप ने लंड फिर गांड के छेद पर रखा और अंदर की तरफ दबाने लगा। कुछ ही देर मैं मुझे लगा के संदीप के टट्टे मेरे चूतड़ों को छू रहे थे। क्या संदीप का मोटा लंड पूरा मेरी गांड में बैठ गया था?

मैंने सर पीछे की तरफ मोड़ कर संदीप को पूछा, “संदीप क्या लंड पूरा अंदर बैठ गया है? तेरे टट्टे तो लग रहा है मेरी गांड को छू रहे हैं।”

संदीप ने धीरे-धीरे धक्के लगाते हुए कहा, “मैडम आपने पूरा लंड ले लिया है , जकड़ा पड़ा है आपकी गांड में मेरा लंड।” ये कह कर संदीप ने लंड आधा बाहर निकाला और झटके के साथ गांड में धकेल दिया।

इस पर मुझे बहुत दर्द हुआ और मैंने संदीप से कहा, “नहीं संदीप ऐसे नहीं, ऐसे बहुत दर्द करता है, धीरे-धीरे धक्के लगा और छुड़ा दे पानी।”

उधर एक हाथ नीचे करके मैं अपनी चूत का दाना रगड़ने लगी।

“ठीक है मैडम”, कह कर संदीप ने लंड पूरा गांड में बिठा दिया और धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। बीच-बीच में संदीप पूरा लंड बाहर निकाल कर एक झटके के साथ गांड में बिठाता था। जब संदीप ऐसा करता था तो दर्द के साथ साथ जन्नत जैसा मजा मिलता था। कुछ ही देर में संदीप को मजा आने वाला हो गया।

संदीप धक्के भी लगाता जा रहा था और बोलता भी जा रहा था, “मैडम आज तो मजा ही आ गया। ऐसा मजा तो अब तक नहीं आया। मन कर रहा है पूरी रात चुदाई करूं आपकी।” बोलते-बोलते अचानक से संदीप ने लंड पूरा बाहर निकाला और एक ही झटके में गांड में डालता हुआ बोला, “लो मेरी जान मैडम, निकला अब आपकी गांड में।”

ये बोलते ही संदीप के लंड में से ढेर सारी गरम गरम मलाई निकली और मेरी गांड उस मलाई से भर गयी। नीचे मेरी चूत भी पानी छोड़ने ही वाली थी। मैंने जोर-जोर से चूत का दाना रगड़ना शुरू किया और मुझे भी मजा आ गया। मजा आते ही मैं आगे की तरफ ढेर हो गयी। संदीप का आधा खड़ा लंड पल्प की आवाज के साथ मेरी गांड में बाहर निकल गया।

संदीप जा कर सोफे पर बैठ गया और पांच मिनट लेटने के बाद मैं सीधी हुई और गांड को हाथ लगाया तो मेरा हाथ संदीप के लेसदार पानी से भर गया। मैंने हाथ संदीप की तरफ करते हुए कहा, “ये देख संदीप।”

संदीप ने लंड हाथ में ले कर कहा, “मैडम आज की चुदाई मैं नहीं भूल पाऊंगा। मेरा तो लंड भी दुःख रहा है।” ये कह कर संदीप बाथरूम की तरफ चला गया। मैंने पास पड़े तौलिये से गांड साफ़ की और चूत को हाथ लगाया तो हल्की सी दर्द हुई। रागिनी ठीक ही कह रही थी, संदीप के मोटे लंड की चुदाई से उसकी चूत फूल गयी थी। यही हाल अब मेरी चूत का भी था। चूत ही क्यों, मुझे तो लग रहा था मेरी गांड का छेद भी हल्का फूल गया था।

एक घंटे की लगातार की चुदाई और ऊपर से जिन, मुझे जोर का पेशाब लग रहा था। मैं उठी और संदीप का इंतजार किये बिना ही बाथरूम में चली गयी। संदीप पेशाब कर रहा था। मुझे देख कर बोला, “क्या हुआ मैडम पेशाब आ गया है क्या जोर का?”

मैंने हंसते हुए कहा, “और क्या, दो घंटों की चुदाई और जिन। अगर मैं पांच मिनट भी और रुकी तो निकल जाएगा मेरा।”

संदीप पेशाब कर चुका था। लंड को हिला कर बचा खुचा पेशाब निकाला हुए टॉयलेट सीट पर बैठ गया।

मैंने कहा, “गांडू संदीप मुझे पेशाब तो करने दे, निकल जाएगा मेरा।”

ही-ही करके हंसते हुए संदीप बोला, “मैडम आपको पेशाब करवाने के लिए ही तो बैठा हूं। आईये बैठिये मेरी गोद में और डालिए अपनी फुद्दी का गर्म-गर्म अमृत मेरे लंड के ऊपर।”

मैं संदीप की बात से हैरान हुई, लेकिन मुझे भी मस्ती आ गई। मैं टांगें चौड़ी करके संदीप की गोद में संदीप की तरफ मुंह करके बैठ गयी।

संदीप ने मेरे होंठ अपने होठों में ले लिए और एक हाथ नीचे करके मेरी चूत पर रख दिया। संदीप ने मेरी चूत को थपथपाया – मतलब इशारा था कि मैं अब मूतूं।

मैंने चूत ढीली छोड़ दी। सुर्र-सुर्र करता हुआ पेशाब निकलने लगा। इधर मेरा पेशाब निकल रहा था, उधर संदीप चूत को थपथपा रहा था। ठप्प-ठप्प की मस्त आवाजे आ रही थ। ढेर सारा पेशाब निकला मेरी चूत में से।

पेशाब करके जैसे ही मैं उठने लगी, संदीप ने मझे फिर बिठा लिया और हाथ की उंगली मेरी चूत में अंदर-बाहर करने लगा। मुझ में अब और चुदाई करवाने की हिम्मत नहीं थी, मगर मुझे मजा आने लग गया था।

मैंने संदीप को जकड़ लिया और चूतड़ हिलाने लगी। संदीप भी जोर-जोर से उंगली चूत में अंदर-बाहर करने लगा। उधर मुझे संदीप का लंड नीचे महसूस होने लगा था। संदीप का लंड फिर से खड़ा होने लग गया था। मैं ना तो उठी, ना मैंने संदीप को चूत में उंगली करने से रोका, उल्टा चूतड़ हिलाने के साथ-साथ अपने मम्मे संदीप के बालों से भरी छाती पर रगड़ने लगी।

पांच-सात मिनट में ही मेरा पानी निकल गया। मुझे फिर मजा आ गया था। मुंह तो मेरा बंद था, बस “हूं हूं हूं” की आवाज ही मेरे मुंह से निकली। मुझे समझ नही आ रहा था की मुझे क्या हो गया था। अब तक मेरी चूत छह-सात बार पानी छोड़ चुकी थी।

संदीप समझ गया कि मुझे फिर मजा आ गया था। संदीप ने मेरे होठों से अपने होंठ हटा लिया और बोला, “क्या हुआ मैडम फिर से मजा आ गया? मगर मेरा लंड अब खड़ा हो गया है, इसका क्या करूं?”

मैंने कहा, “संदीप अब चुदवाने का दम नहीं हैं मुझमें। मेरे दोनों छेद दुःख रहे हैं। उल्टा तू मेरी गांड और चूत देख कर बता क्या हालत क्या हालत बनाई है तूने इनकी।”

फिर मैं कुछ रुक कर बोली, “और संदीप तू अपने लंड की चिंता मत कर, अभी एक और जगह है तेरा लंड लेने के लिये।” ये कह कर मैंने “आआ,,, आ” करके मुंह खोल दिया और संदीप की गोद से उठ गयी।

तौलिये से चूत पोंछ कर मैंने तौलिया संदीप की तरफ बढ़ा दिया। संदीप ने भी अपनी टांगें और लंड पोंछा और खड़ा हो गया। हम दोनों फिर कमरे में आ गये। घड़ी की तरफ देखा तो चार बज गये थे। मतलब चार साढ़े चार घंटे हमारी चुदाई हुई थी। मैं सोफे पर बैठ गयी। संदीप मेरे पास ही बैठ गया और बोला, “मैडम कैसी रही आज की चुदाई, यादगार बनी या नहीं चुदाई?”

मैंने जवाब दिया, ये तो तू मेरी चूत और गांड देख कर बता।” ये कह कर मैं बिस्तर के किनारे पर सीधी लेट गयी और टांगें उठा कर टांगें चौड़ी कर दी।

संदीप उठा और नीचे बैठ कर पहले मेरी चूत और फिर गांड को देखा। संदीप ने दोनों छेदों का चुम्मा लिया, थोड़ा चूत और गांड को चाटा और मोबाइल के कैमरे से चूत और गांड दोनों की फोटो खींच कर मोबाइल मेरे हाथ मैं पकड़ा दिया और बोला, “लो मैडम खुद ही देख लो और बताओ, यादगार चुदाई हुई या नहीं?”

मैंने मोबाइल में फोटो देखी चूत हल्की से फूली हुई थी। मगर गांड का छेद कुछ ज्यादा ही फूला-फूला लग रहा था। संदीप भी नीचे ही बैठा हुआ था। मैंने कहा, “संदीप, चुदाई तो तूने यादगार ही की है, पता नहीं कितनी बार पानी छुड़ा दिया – छह बार या शायद सात बार।” ये सुनते ही संदीप फिर से मेरी चूत और गांड चाटने लगा।

मुझे लगा अगर संदीप ऐसे ही चाटता रहा तो मेरी चूत फिर गरम हो जाएगी। अब मुझमें एक और चुदाई के हिम्मत नहीं थी। मैंने कहा, “नहीं संदीप, अब और मत चाट, नहीं तो एक और चुदाई करनी पड़ जाएगी – चल तुझे चूस कर मजा देती हूं।”

संदीप उठ कर खड़ा हो गया और मैं बेड पर ही बैठ गयी। संदीप ने लंड मेरे मुंह के आगे कर दिया। मैंने संदीप का लंड मुंह में लिया और अपना हाथ संदीप के पीछे करके उंगली संदीप की गांड में घुसेड़ दी। मेरी उंगली खड़े संदीप की गांड में जा नहीं रही थी। संदीप समझ गया कि मैं उसकी गांड में उंगली डालना चाहती थी। संदीप ने अपने एक टांग उठाई और बेड पर रख दी। अब ठीक था। अब मेरी उंगली संदीप की गांड के अंदर चली गयी थी।

अजीब नजारा था। संदीप का लंड मेरे मुंह में और मेरी उंगली संदीप की गांड में। मैं लंड चूसते-चूसते सोच रही थी, आज की चुदाई जैसा मजा तो कभी भी नहीं आया, ना असलम के साथ के साथ ना आलोक के साथ और ना ही किसी और के साथ। लेकिन इसका मतलब ये नहीं था कि मैं अब संदीप से जब उसका मन आये चुदवाने ही लग जाऊंगी। हां कुछ ख़ास तरह का प्रोग्राम बन जाए तो बात अलग है।

संदीप जोर-जोर से लंड में मुंह में आगे-पीछे कर रहा था। मेरी चूत में भी खुजली मचने लगी थी। मैंने अपनी उंगली संदीप की गांड में से निकाली और टांगें चौड़ी करके उंगली अपनी चूत में डाल ली। थोड़ी ही देर में मुझे मजा आने वाला हो गया। मैंने संदीप का लंड जोर-जोर से चूसते हुए मुंह को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।

जल्दी ही संदीप का छूटने वाला हो गया। संदीप बोला, “मैडम मेरा लंड पानी छोड़ने वाला है, आप कहें तो लंड मुंह में से निकाल लूं?” मैं मस्ती से भरी पड़ी थी। मेरी चूत भी पानी छोड़ने वाली थी। मैंने बिना लंड मुंह से निकाले ना में सर हिला दिया।
दो ही मिनट में मेरी चूत का पानी निकल गया। मजे के मारे मैंने और “हूं-हूं” करते हुए जोर-जोर से संदीप का लंड चूसना शुरू कर दिया। संदीप बोलने लगा, “आह मैडम, निकला, निकला मैडम आपके मुंह में।”

और संदीप के गले से आवाज निकली, “आह, घररर्र, आह, ये गया, आह” और इसके साथ ही संदीप के लंड से ढेर सारा गरम पानी निकला और मेरा मुंह उससे भर गया। मैंने एक बार संदीप की तरफ देखा और पूरा पानी गटक लिया। लंड का हल्का नमकीन गर्म-गर्म पानी गले से नीचे उतरते ही मुझे लंड के पानी में से मस्त करने वाली खुशबू आयी।

संदीप के लंड ने पानी छोड़ना बंद कर दिया था, मगर संदीप ने लंड मेरे मुंह से बाहर नहीं निकाला और लंड को चूसती रही। जल्दी ही संदीप का लंड ढीला हो गया। संदीप बोला, “मैडम आज तो मजा ही आ गया, मस्त यादगार चुदाई हुई है आज।”

मैंने संदीप का लंड मुंह में से निकाल लिया और बोली, “संदीप बहुत मस्त चोदता है तू, मुझे भी आज बहुत मजा आया है। पता नहीं कितनी बार मेरी चूत ने पानी छोड़ा है आज? अभी तेरा लंड चूसते-चूसते मुझे फिर से मजा आ गया। मैंने कपडे उठाए और बाथरूम की तरफ चल पड़ी। जाते जाते मैंने संदीप से कहा, “संदीप, मैं नहा कर निकलूंगी, किसी को चाय के लिए बोल दे।”

संदीप ने हां में सर हिलाया और मैं बाथरूम में चली गयी। पंद्रह मिनट के बाद मैं पूरी तरह तैयार हो कर बाथरूम से निकली। संदीप भी तैयार हो चुका था। हम दोनों आगे वाले ऑफिस में आ गए। दो मिनट के बाद ही एक लड़का ट्रे में चाय ले कर है आ गया।

चाय की चुस्कियां लेते-लेते मैंने संदीप से पूछा, “संदीप, तू जब भी मिलता था मेरी चूत को घूरता था, चोदना चाहता था मुझे। अब बता आज तेरी मुझे चोदने की इच्छा अच्छे से पूरी हो गयी या नहीं?” फिर मैंने घड़ी की तरफ नज़र डालते हुए कहा, “पूरे पांच घंटे चोदा है साले तूने आज मुझे, वो भी हर तरह से। गांड भी नहीं छोड़ी तूने।”

संदीप हंसते हुए बोला, “मैडम सच कहूं तो आज आपको चोदने का इतना मजा मुझे आया है, आज से पहले इतना मजा कभी भी किसी के साथ भी चुदाई करने का नहीं आया।” फिर कुछ रुक कर बोला, “मैडम अब अगली चुदाई कब होगी?”

मैंने कप मेज पर रखा और कहा, “नहीं संदीप, अब नहीं होगी। हां कुछ ख़ास ही प्रोग्राम बन जाए तो बात अलग है। हम दोनों एक ही शहर में रहते हैं, इसलिए जितना हो गया यही बहुत है। बाकी तू जब मर्जी मेरे क्लिनिक में आ जितना दिल चाहे मेरी चूत को घूर, मगर चुदाई नहीं।”

संदीप कुछ मायूस सा हो गया। कुछ देर तो संदीप चुप रहा और फिर बोला, “ठीक है मैडम। मगर आप जब भी आना चाहें मेरे ऑफिस में आपका स्वागत है।

मैंने कहा, “रहने दो संदीप, ड्राइवर छोड़ देगा।”

संदीप बोला, “अरे मैडम ऐसे कैसे? बातें करते हुए जाएंगे, इतनी अच्छी चुदाई हुई आज, मैं ही जाऊंगा आपको छोड़ने।”

मैंने भी कह दिया, “चल ठीक है।”

हम दोनों कार में बैठ कर निकल पड़े। रास्ते में संदीप ने पूछा, “मैडम वो जो आप कह रही थी, कुछ ख़ास प्रोग्राम बना तो देखेंगे। मैडम क्या होगा वो ख़ास प्रोग्राम?”

मेरी हंसी छूट गयी। मैंने कहा, “क्या बात है संदीप, इतनी चुदाई करके भी मन नहीं भरा? हर जगह तो लंड डाल लिया तूने। हर जगह अपने लंड का पानी छुड़ा लिया – चूत में, गांड में, मुंह में। अभी भी कुछ रह गया है?”

संदीप ने अपना एक हाथ मेरी जांघ पर रखा और चूत को हल्का दबाते हुए कहा, “मैडम सच कहूं, आज की चुदाई तो सच में ही गज़ब की चुदाई थी। मैंने आज तक ऐसी मस्त चुदाई नहीं की। मस्त चुदाई करवाती हैं आप। तभी तो पूछ रहा हूं, क्या ख़ास प्रोग्राम हो सकता है जिसकी आप बात कर रही थी?”

मैंने संदीप का हाथ अपनी चूत पर दबाते हुए कहा, “दो गाये और दो सांड।”

संदीप एक पल के लिए चुप हुआ जैसे मेरी बात दो गाय और दो सांड का मतलब समझने की कोशिश कर रहा हो। फिर जब वो बात को समझा तो बिला, “वह मैडम, मजा ही आ जाएगा। मगर दूसरी गाय और दूसरा सांड?”

मैंने कहा, “संदीप दूसरी गाय को तो जानता ही है, उसे चोद भी चुका है। बस दूसरा सांड ढूढ़ना है।”

संदीप हैरानी से बोला, “दूसरी गाय को मैं जानता हूँ, और चोद भी चुका हूं?” फिर कुछ सोचते हुए बोला, “मैडम कहीं आप रागिनी जी की बात तो नहीं कर रही?” ये कह कर संदीप ने अपन हाथ मेरी चूत से हटा कर अपना लंड खुजला लिया।

मैंने अपने हाथ से संदीप का लंड दबाते हुए कहा, “बिलकुल, दूसरी गाये रागिनी ही होगी – क्यों अच्छा नहीं है क्या?”

संदीप ने मेरा हाथ अपने लंड पर दबाते हुए कहा, बिलकुल अच्छा है मैडम, मस्त हो कर चुदती हैं रागिनी जी। और मैडम दूसरा सांड?”

मैंने कहा, “वो दूसरा सांड मुझे ढूढ़ना पड़ेगा।”

संदीप बोला, “मैडम अगर आप कहें तो मैं ढूंढूं?”

मैंने कहा, “नहीं संदीप, कानपुर का नहीं होना चाहिए, मुझ पर छोड़ दे, मैं ही ढूंढूंगी।”

इसी तरह बाते करते-करते मेरा क्लिनिक आ गया। मैं उतरी और संदीप से बोली, “आओ संदीप।”

संदीप बोला, नहीं मैडम आज नहीं। अंदर जा कर कहीं फिर ना चुदाई का मूड बन जाय। अब और चुदाई की हिम्मत नहीं है। मेरा तो लंड भी दुख रहा है।”

संदीप की क्या बात थी, मेरी तो अपनी चूत और गांड फूली पड़ी थी। मैंने हंसते हुए कहा, “मेरी तो अपनी भी यही हालत है। दोनों छेद लगता है फूले हुए हैं। चल फिर बनाते हैं कोइ बढ़िया सा प्रोग्राम।”

संदीप भी हंसते हुए बोला, “वो दो गाये और दो सांड वाला?”

मैंने भी “हां” कहा और अंदर जाने के लिए मुड़ गयी। शाम हो ही गयी थी। प्रभा खाना बना कर अपने कमरे में जा चुकी था। मेरा मन भी खाने का नहीं था। मैंने कपड़े बदले, नाईटी पहनी और लेट गई। लेटे-लेटे संदीप के साथ हुई ताबड़तोड़ चुदाई का ध्यान आ गया और मैंने एक बार अपनी चूत को छुआ तो लगा सच में ही फूली हुई थी। मैंने गांड पर उंगली चलाई। तो वहां का भी यही हाल था। मुंह में अभी भी संदीप के लंड का स्वाद आ रहा था। ताबड़तोड़ चुदाई का सोचते-सोचते ही मुझे नींद आ गयी।

मैंने सदीप को कहा के अगर कोइ ख़ास प्रोग्राम बना तो मैं उसके साथ चुदाई जरूर करवाऊंगी। और वो ख़ास प्रोग्राम मेरे दिमाग में था दो गायें और दो सांड, मतलब दो चूतें और दो लंड। अदल-बदल कर चुदाई – एक-दूसरे के सामने।

जब मैंने संदीप को ये बताया तो संदीप को भी ये आईडिया बहुत पसंद आया। वो बोला, “जल्दी से बनाईये प्रोग्राम मैडम, मेरा तो लंड अभी से खड़ा होने लगा है।”

मैंने हंसते हुए कहा, “संदीप तेरा लंड बैठता ही कब है साले ये तो हमेशा ही खड़ा रहता है। थोड़ा सब्र कर ले। दूसरी गाये और दूसरा सांड तो ढूंढने दे।”

दूसरी गाये तो सामने थी रागिनी, बस अब दूसरा सांड ढूंढना था।

अब आगे का हाल जानिये इस कहनी “दो गाये और दो सांड” में।

पिछले दिन की संदीप के साथ हुई चुदाई की थकान से बढ़िया नींद आयी। सुबह नौ बजे मैं सो कर उठी और प्रभा को कॉफी लाने के लिए बोल कर मैं बाथरूम में चली गयी। कॉफी पीने के बाद मैं नहा कर तैयार हो कर दस बजे नीचे क्लिनिक में पहुंच गयी। लम्बे लंड का डिब्बा मेरे हाथ में ही था। मैंने रबड़ का लम्बा लंड बाहर निकाला। हाथ में लंड लेते ही मेरी गांड में खुजली मच गयी। अगर मेरी गांड कल के चुदाई से फूली हुई ना होती तो मैंने ये लंड गांड में लेने में ज़रा सी भी देर नहीं लगानी थी।

तभी मुझे दो गाये और दो सांड वाली बात याद आ गयी। साथ ही मेरे सामने दूसरी गाये यानि रागिनी का चेहरा घूम गया। मैंने तुरंत ही रागिनी को फोन मिला दिया। रागिनी तो जैस मेरे फोन का ही इंतज़ार कर रही थी। चहकते हुए रागिनी बोली, “अरे मालिनी जी, मैं आपको ही याद कर रही थी। आप गयी थी संदीप के पास?”

मैंने हंसते हुए कहा, “हां गयी थी, और बढ़िया से मस्त चुदी भी।”

रागिनी बोली, “वाह मालिनी जी कैसी हुई आपकी चुदाई? जो भी कह लो मालिनी जी ये संदीप चुदाई तो मस्त करता है।”

मैंने कहा, “हां रागिनी मस्त चुदाई हुई – आगे की भी और पीछे की भी। मगर पूरी बात जानने के लिए तुझे यहां आना होगा, मेरे क्लिनिक में। मेरे पास तेरे लिए एक सरप्राईज़ भी है।”

रागिनी बोली, “मालिनी जी अगर ऐसा है तो आज ही आती हूं। मेरी शिफ्ट चार बजे खत्म होगी, मगर मैं दो घंटे की छुट्टी ले कर दो बजे निकलूंगी – ढाई बजे तक पहुंचती हूं आपके पास।”

मैंने कह दिया, “ठीक हैं, मैं तेरा इंतज़ार करूंगी।”

पूरे ढाई बजे रागिनी मेरे क्लिनिक में पहुंच गयी। नमस्ते नमस्ते के बाद रागिनी बोली, “मालिनी जी अब बताईये कैसी रही आपकी चुदाई? और वो सरप्राईज़ वाली बात?”

मैंने कहा, “चलो पीछे के कमरे में बैठ कर बातें करते हैं।”

पीछे कमरे में जा कर हम बैठी ही थी कि रागिनी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली, “मालिनी जी, अब बताईये मालिनी जी कैसी रही आपकी चुदाई?”

मैंने कहा, “सब्र करो रागिनी। सब बताती हूं, पहले सरप्राइज तो देख लो जिसके बारे में मैंने तुमसे फोन पर बात की थी।”

ये कह कर मैंने रागिनी के हाथ में रबड़ के लंड वाला डिब्बा दे दिया। चुदक्क्ड़ एक मिनट में समझ गयी कि डिब्बे में क्या होगा। डिब्बा देखते ही बोली, “ये तो लंड लगता है मालिनी जी।”

ये कह कर रागिनी ने डिब्बा खोला लिया। लंड और बेल्ट हाथ में ले कर बोली, “मालिनी जी ये तो बड़ा लम्बा है बिलकुल आलोक के लंड जैसा। और यह बेल्ट, ये क्या है? और ये आप आया आपके पास?”

मैंने कहा, “सारे सवाल एक बार में ही पूछ लोगी?” फिर मैं बोली, “असल मैं ये लंड ही लेने कल गयी थी संदीप के ऑफिस में। एक तो जब से आलोक ने मेरी गांड में अपना लम्बा लंड डाला, तभी से मैं ऐसा लंड मंगवाने के चक्कर में थी। दूसरे जिस तरह संदीप ने रगड़-रगड़ कर तेरी चूत फुला दी थी, मैं भी ऐसे ही एक बार संदीप से चुदाई करवाना चाहती थी – रगड़वा रगड़वा कर। चूत फुलाने वाली चुदाई।”

रागिनी एक-दम उछल कर बोली, “वह मालिनी जी फिर, फिर रगड़वाई आपने? कि चुदाई संदीप ने की आपकी? रगड़ी संदीप ने आपकी फुद्दी?”

मैंने हंसते हुए कहा, “चुदाई नहीं चुदाईयां हुई और रगड़-रगड़ कर हुई। और पूरे चार घंटे तक ये चुदाईयां चली।”

रागिनी लगभग चिल्लाते हुए बोली, “चार घंटे? कमाल है?”

मैंने कहा, “हां कमाल ही है, और बाकी का कमाल तू खुद देख ले।” ये बोल कर मैंने अपने कपड़े उतर दिए और रागिनी से बोली, “ले खुद देख मेरा चूत और गांड का हाल।”

ये कह कर मैं लेट गयी, और टांगे उठा कर टांगें फैला दी। रागिनी आगे आई और मेरी टांगें चौड़ी कर के पहले चूत को देखी फिर टांगें थोड़ी और ऊपर करके गांड को देखा, और चूत और गांड को चाटते हुए बोली, “मालिनी जी ये तो दोनों फूली हुई हैं। लगता है संदीप ने मेरी चुदाई के तरह ही आपकी भी सूखी चुदाई की है।”

और फिर कुछ रुक कर बोली, “और मालिनी जी ये आपकी गांड? ये क्यों फूली हुई है? क्या इसमें भी संदीप ने लंड डाल दिया?”

मैंने हां में सर हिलाया तो रागिनी बोली, “मगर संदीप का लंड तो बड़ा मोटा है। आपकी गांड में गया ही कैसे?”

अब बोलने की बारी मेरी थी। मैंने कहा, “रागिनी चुदाई के मामले में संदीप बहुत तजुर्बे वाला है – और झड़ता भी जल्दी नहीं है। चार घंटे की चुदाई मैं उसने मेरी चूत, गांड, मुंह, सब में लंड डाल दिया।” और ये कह कर मैंने अपनी और संदीप की चुदाई की पूरी कहानी रागिनी को सुना दी।

रागिनी अपनी चूत खुजलाते हुए बोली, “कमाल है, फिर तो मैं भी एक बार संदीप का लंड गांड में लूंगी। पिछली बार तो मुझे डर लगा कहीं गांड का कचरा ही ना कर दे संदीप।” फिर रागिनी बोली, “और मालिनी जी ये रबड़ का लम्बा लंड?”

मैंने कहा, “रागिनी ये लंड तो मैंने उसी दिन लाने का सोच लिया था जिस दिन तुम्हारे आलोक ने मेरी गांड चुदाई की थी। और जहां तक संदीप से गांड चुदाई करवाने की बात है, तो एक बार के लिए तो संदीप के मोटे लंड जैसे लंड से चुदाई करवाना ठीक है, मगर बार-बार नहीं। बार-बार गांड में लेने के लिए ये लंड ही ठीक है, आलोक के लंड जैसा लंड।”

फिर रागिनी बेल्ट को हाथ में ले कर बोली, “और ये बेल्ट मालिनी जी, इसे कमर में बांध कर उसमे लंड लगा कर गांड चोदते है?” मैंने हंसी हुए कहा, “तुम्हें तो सब कुछ ही पता है।”

रागिनी बोली, “तो फिर मालिनी जी कहिये, लगाऊं मैं इसे अपनी कमर में और डालूं आपकी गांड में?”

मैंने कहा, “रागिनी अभी तुमने देखा तो है क्या हालत है मेरी गांड की। अभी एक हफ्ता तो इसको आराम के जरूरत है। तुम कहो तो मैं बांध कर तुम्हारी गांड चुदाई कर देती हूं।”

रागिनी बोली, “नेकी और पूछ-पूछ? ये कह कर उसने अपनी कपड़े उतर दिए और चूतड़ पीछे करके बेड के किनारे पर लेट गयी। मैंने बेल्ट कमर से बांध कर लंड उसमें लगा लिया और क्रीम लगा कर रागिनी के चूतड़ चौड़े करके एक ही झटके से लंड गांड में बिठा दिया। रागिनी चिहुंकी, “आह मालिनी जी क्या मस्त गया है अंदर।” मैंने रागिनी के कमर पकड़ी और रागिनी की गांड में लम्बे लंड के धक्के लगाने शुरू कर दिए।

लंड के अंत में लटकते हुए टट्टे जब रागिनी के चूतड़ों के साथ टकराते थे तो बिलकुल वैसी ही ठप्प-ठप्प की आवाज करते थे जैसे आलोक के टट्टे, जैसे संदीप के टट्टे गांड चुदाई के वक़्त मेरे चूतड़ों के साथ टकराने पर आवाज करते थे। रागिनी मस्त हो चुकी थी। रागिनी ने एक हाथ नीचे किया और उंगली अपनी चूत में डाल दी।

मैंने ये देखा तो मैंने सोचा रागिनी को उंगली से क्या मजा आएगा, इसे रबड़ का मोटा लंड देती हूं चूत में डालने के लिए। मैंने लंड रागिनी की गांड में से निकाल लिया। रागिनी सर घुमा कर बोली, “मालिनी जी निकाल क्यों लिया बड़ा मजा आ रहा था।”

मैंने कहा, “चिंता ना कर मेरी जान, अभी दुबारा डालती हूं तेरी गांड में, पहले थोड़ा तेरी चूत का इलाज कर लूं।”

ये कह कर मैं अलमारी में से रबड़ का मोटे वाला लंड निकाल लाई और रागिनी के हाथ मैं पकड़ा कर बोली, “ले डाल इसको अपनी फुद्दी मैं।” ये कह कर मैंने लंड दुबारा रागिनी की चूत में डाल दिया। बीस मिनट तक ये चुदाई चली। रागिनी की चूत का पानी दो बार निकला। लंड के टट्टों पिछला हिस्सा मेरी चूत से भी टकरा रहा था। टट्टों के चूत के टकराने भर से ही मुझे भी एक बार मजा आ गया।

इस चुदाई के बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और बाहर क्लिनिक में आ गाये। मैंने प्रभा को चाय लाने के लिए बोल दिया।

मैं रागिनी से बोली, “रागिनी तुमसे एक बात करनी है।” रागिनी बोली, “तो करिये मालिनी जी इसमें पूछना कैसा।”

मैंने बोलना शुरू किया, रागिनी तू तो जानती हो संदीप बड़े अरसे से मुझे चोदना चाहता था, मगर मैं ही इसे शहर में तब तक चुदाई नहीं करवाती जब तक मुझे ये यकीन ना हो जाए कि सामने वाला चोदू जोंक के तरह चिपक ही नहीं जाएगा। संदीप से भी मैं इसीलिए चुदाई नहीं करवा रही थी। मगर जब तुमने मुझे उसके साथ हुई सूखी चूत चुदाई की बात बताई तो मेरा मन भी उससे उसी तरह की चुदाई करवाने का हो गया – और बस कल ये चुदाई हो गयी।”

मैंने बात जारी रखते हुए कहा, “चुदाई के बाद संदीप ने अगली चुदाई के प्रोग्राम के बारे में पूछा, तो मैंने साफ कह दिया कि इस तरह के चुदाई के रिश्ते मैं इसी शहर में नहीं बनाती।” संदीप की शक्ल देख कर ही लग रहा था कि मेरी इस बात से वो मायूस सा हो गया है। मगर मैंने संदीप को कहा, कि संदीप मायूस होने के जरूरत नहीं। अब कुछ ख़ास प्रोग्राम बनाएंगे।”

मैनें बात जारी रखते हुए कहा, “संदीप तो मुझे दुबारा चोदने के लिए उतावला था ही, मगर मेरी बात सुन कर मायूस हो गया था। मेरी “खास प्रोग्राम” वाली बात पर बोल पड़ा – ख़ास प्रोग्राम मतलब?”

मैंने संदीप से कहा, “दो गाये और दो सांड।” एक बार तो संदीप को समझ में नहीं आया। मगर जब वो समझा तो खुश हो गया और बोला, ये तो बढ़िया रहेगा मैडम। अब संदीप ये तो समझ गया दो गाये में से एक गाये मैं हूं, और एक सांड वो है। उसने फिर पूछा कि मैडम दूसरी गाये कहां है, कौन सी है?”

मैंने रागिनी का हाथ अपनी हाथ में लेकर कहा, “तो रागिनी मैंने संदीप से कह दिया दूसरी गाये रागिनी होगी। मेरा इतना कहना था के रागिनी ने भी मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली, “मालिनी जी ये तो मजा ही आ जायेगा, और दूसरा मालिनी जी, दूसरा सांड?

मैंने रागिनी से कहा, “रागिनी यही सवाल संदीप ने भी किया था। मैंने कह दिया दूसरा सांड ढूंढना पड़ेगा। तब संदीप बोला कि वो ढूंढ लेगा दूसरा सांड। इस पर मैंने इस बात से उसे मना कर दिया। कारण वही, इसी शहर में चुदाई इस तरह से ठीक नहीं।”

ये कह कर मैं चुप हो गयी। रागिनी बोली, “तो फिर मालिनी जी कहां से आएगा दूसरा सांड?”

मैंने कहा, “देखते हैं। इस बीच अगर तुमने संदीप का लंड गांड में लेना है तो तुम चली जाना।” रागिनी कुछ सोचने लगी।

तभी फोन की घंटी बजी। फोन उठाया तो आगरा से असलम का फोन था। असलम बोला, “नमस्ते मालिनी जी।”

मैं हैरान सी हुई, असलम का फोन? मैंने पूछा, “अरे असलम आज कैसे फोन किया?” असलम और निकहत की शादी के पूरे एक साल बाद फोन आया था असलम का।

असलम बोला, “मालिनी जी मैंने इसलिए फोन किया कि हमने साथ वाली दुकान भी खरीद ली है और उसमे चमड़े से बनी चीज़े – पर्स, जैकट वगैरह का काम शुरू किया है। ये सामान कानपुर में थोक में मिलता है। बस उसी सिलसिले में आना है।”

मैंने कहा, “ये तो बहुत अच्छी बात है। कब आ रहे हो?”

असलम ने कहा, “मालिनी जी मैंने यही बताने कि लिए फोन किया कि अगले हफ्ते शनिवार को मैं तीन-चार दिनों के लिए कानपुर आ रहा हूं। आपसे मिलने का बड़ा मन है।”

मैंने सोचा लो जी आ गया दूसरा सांड, साथ ही मैंने हिसाब लगाया अगले हफ्ते शनिवार – मतलब आठ दिन हैं। तब तक तो मेरी संदीप के चुदाई से फूली चूत और गांड दोनों चुदाई के किये ठीक हो जाएंगी।

मैंने कहा, “ठीक है असलम मुझे भी तुमसे कुछ बात करनी है। और सुनाओ निकहत कैसी है नसरीन कैसी है?” (असलम निकहत और नसरीन के बारे में जानने के लिए कहानी पढें मां बेटे की चुदाई)

असलम बोला सब ठीक है मालिनी जी” फिर कुछ रुक कर बोला, ” मालिनी जी अम्मी के बारे में भी आपसे कुछ बातें करनी है। बाकी बातें वहां आ कर ही करूंगा। कानपुर पहुंच कर फोन करूंगा आपको।”

मैंने कहा, “ठीक है असलम।” और मैंने फोन काट दिया।

मैंने रागिनी की तरफ देखा और बोली, “लो रागिनी मिल गया दूसरा सांड – कलाई जितने मोटे और आधे हाथ जितने लम्बे लंड वाला सांड।”

रागिनी बोली, “दूसरा सांड? जिसका ये फोन था मालिनी जी?”

मैंने कहा “हां रागिनी यही बनेगा दूसरा सांड। ये असलम था आगरा से। किसी पारिवारिक समस्या के सिलसिले में मेरे पास आया था। तभी मैंने इससे चुदवाई करवाई थी। मस्त चोदता है लड़का। जवान लड़का है, संदीप की तरह ही सख्त लंड है इसका – मगर संदीप के लंड से लम्बा, आलोक के लंड जितना लम्बा।”

रागिनी ने अपनी चूत खुजलाई और बोली, “मालिनी जी कब आएगा?”

मैंने कहा, “अगले हफ्ते। मगर अगर तुमने ‘दो गाये दो सांड’ की चुदाई का सही मजा लेना है तो इस बीच संदीप से चुदाई मत करवाना। गांड की चुदाई तो बिलकुल ही नहीं। अगर गांड फूल गयी तो दो गाये दो सांड” के खेल का मजा नहीं आएगा।”

चुदाई की माहिर रागिनी बोली, “समझ गयी मालिनी जी।” रागिनी चूत खुजलाती खुजलाती चली और मैंने संदीप को फोन मिला दिया। संदीप चहकते हुए बोला, “नमस्ते मैडम कहिये कैसे याद आ गयी?”
मैंने कहा “संदीप दूसरा सांड मिल गया है। आगरा का रहने वाला है किसी काम से सिलसिले में मेरे एक साल पहले उससे मुलाकात हुई थी। अगले हफ्ते आ रहा है। तुम्हारे लंड के तरह ही मस्त लंड है उसका और मस्त चुदाई भी तुम्हारी तरह ही करता। चूत गांड मुंह में डालने का सब जगह का शौक़ीन है।”

संदीप उसी तरह चहकते हुए बोला, “वाह मैडम मजा आ गया आप और रागिनी जी, और साथ वो दूसरा सांड। एक-दूसरे के सामने की चुदाई का मजा ही आ जाएगा।”

दो गाये दो सांड के मेरे विचार से रागिनी तो खुश थी हुई, संदीप भी मस्त हो गया था कि दो-दो चूतें और दो-दो गांड के छेद चुदाई के लिए सामने होंगे। दूसरा साद भी जल्दी ही मिल गया जब आगरा से असलम का फोन आ गया। असलम ही होने वाला था दूसरा सांड। जब मैंने असलम के बारे में रागिनी और संदीप को बताया तो रागिनी की चूत तो तभी गीली हो गयी, पक्की बात है संदीप का लंड भी हरकत में आ गया होगा।

अब अगले शनिवार का इंतजार था जिस दिन असलम ने कानपुर पहुंच कर मुझे फोन करना था।

शनिवार भी आ गया। दोपहर दो बजे असलम का फोन आ गया, “नमस्ते मालिनी जी, मैं असलम।”

मैंने कहा, “हेलो असलम, पहुंच गए कानपुर?”

असलम बोला, “जी मालिनी जी। आपसे मिलना चाहता था। कब आऊं?”

मेरी चूत में तो खुजली मची ही हुई थी। मैंने कहा, “जब मर्जी आ जाओ, मैं यहीं हूं।”

असलम भी जैसे घोड़े पर सवार था। बोला, “ठीक है मालिनी जी आधे घंटे में पहुंचता हूँ।”

मैंने पूछा, “ढाई बजे? असलम क्या कहीं पास के होटल में ही रुके हो क्या?”

असलम बोला, “हां मालिनी जी आपके क्लिनिक से कोइ डेढ़ दो किलोमीटर की दूरी पर ही होटल है, होटल सरताज।”

होटल सरताज? ये तो मेरे क्लिनिक के बहुत पास था। मैंने कहा, “ठीक है असलम आ जाओ।”

असलम का फोन आते ही मैंने सोच लिया था दो गाये तो सामने ही थी – एक मैं और दूसरी रागिनी। अब दूसरा सांड भी मिल गया था – मस्त लंड वाला असलम। एक सांड तो था ही, मोटे लंड वाला संदीप।

कानपुर पहुंचते ही सरताज होटल से उसने मुझे फोन किया। दो बजे थे और असलम मुझसे मिलना चाहता था। कलाई जितने मोटे और आधे हाथ जितने लम्बे लंड वाले असलम से मिलने के लिए मैं भी बेताब थी। मैंने कह दिया, “आ जाओ असलम, मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं।”

ढाई बजे से ही असलम पहुंच गया। शरीर थोड़ा भर गया था, लेकिन बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने सोचा निकहत मस्त चुदवाती होगी इससे।

जैसे ही असलम बैठा और मेरी चूत में खुजली मच गई। मैंने पूछा, “कहो असलम कैसे हो? निकहत कैसी है? लगता है खूब मजे देती है। मस्त चुदवाती है? और नसरीन कैसी है?”

जैसे ही मैंने कहा, निकहत मस्त चुदवाती होगी, तो एक पल के लिये तो असलम शर्मा गया, फिर अपना लंड पैंट में ठीक से बिठाता हुआ बोला, “निकहत ठीक है मालिनी जी।”

निकहत के बारे में तो असलम ने बता दिया, मगर नसरीन के बारे में कुछ नहीं बताया।

मैंने फिर पूछा, “और नसरीन कैसी है असलम? कोइ दिक्कत है क्या? तुम कह रहे थे उसके बारे में कुछ बात करनी है? क्या बात है?”

असलम बोला, “नहीं मालिनी जी, दिक्कत तो कोइ नहीं। बस ऐसे ही कुछ बात करनी है।” फिर कुछ रुक कर मेरी चूत को देखता हुआ अपना लंड खुजलाते हुए बोला, “आप कैसी हैं मालिनी जी?”

असलम की पैंट में उसके लंड का उभार साफ नज़र आने लगा था। मैंने भी चूत में से साड़ी निकालने का बहाना करते हुए कहा, “मैं भी ठीक हूं असलम, तुम्हें कैसी दिख रही हूं?”

असलम बोला, “मालिनी जी आप भी वैसी ही फिट दिखाई दे रही हैं।” फिर कुछ रुक कर बोला, “मालिनी जी आपकी बहुत याद आती है। अम्मी भी आपको बहुत याद करती है।”

यह बोल कर असलम चुप हो गया और कुर्सी में इधर-उधर होने लगा। साफ़ पता चल रहा था कि असलम कुछ कहना चाहता था। आखिर एक मनोचकित्स्क से कोइ कैसे कोइ अपने दिल की बात छुपा सकता है?

मैंने कहा, “क्या बात है असलम? कुछ कहना चाहते हो?”

असलम ने फिर अपने लंड को खुजलाया मगर बोला कुछ नहीं। असलम की पैंट में उसके लंड का उभार बढ़ता जा रहा था। मुझे लगा असलम मुझे चोदना चाहता था, मगर हिचकिचा रहा था। आखिर असलम से पहले बार की चुदाई मैं भी तो मैंने ही पहल की थी। मैंने फिर से पहल करने की सोची। आखिर चूत तो असलम के लंड के लिए मेरी भी कुलबुला ही रही थी।

मैंने साफ़ ही बोल दिया, “क्या बात है असलम, चोदना चाहते हो मुझे? चुदाई का मन कर रहा है?”

ये सुनते ही असलम उठ कर मेरे सामने आ गया और लंड पैंट में से निकाल कर मेरे मुंह के आगे कर दिया। मतलब साफ़ था असलम मुझे चोदना ही चाहता था, मगर कह नहीं पा रहा था। मैंने असलम का लंड मुंह में लिया और मेरी आखों के आगे मेरी और असलम लम्बे और मोटे लंड की चुदाई घूम गयी।

मैंने असलम का लंड जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया। जल्दी ही असलम‌ का लंड सख्त हो गया। असलम बोला, “बस मालिनी जी अब रहा नहीं जा रहा, चलिए अब।” ये कह कर असलम ने लंड मेरे मुंह में से निकाल लिया।

मैं भी उठी और असलम का हाथ पकड़ कर बोली, “चलो।”

हम लोग पीछे कि कमरे मैं आ गये। मैंने अपने कपड़े उतारे और असलम से कहा, “बोलो असलम कैसे चोदनी है – चूत में डालना है या गांड में?” मगर इससे पहले कि असलम कुछ बोलता मैंने कहा, “आज ऐसे चोदो जैसे निकहत को चोदते हो।”

असलम बोला, “मालिनी जी निकहत को मैं पीछे से ज्यादा चोदता हूँ। उसे भी पीछे से चुदाई करवाने में मजा आता है। निकहत के चूतड़ देख कर मन तो बहुत करता है निकहत की गांड चोदने का, मगर वो चुदवाती ही नहीं। निकहत के चूतड़ इतने नरम और मुलायम हैं कि चाटने में भी मजा आ जाता है। छोटा सा गांड का छेद है, उंगली डलने पर भी निकहत चिहुंक जाती है। निकहत पीछे से चुदवाना ही पसंद करती है। एक बार पीछे से चूत चोदते चोदते मैंने ज़बरदस्ती गांड में डालने के कोशिश की, मगर उसे बहुत दर्द हुआ और उसने उस दिन चूत चुदाई भी नहीं करवाई और गांड वाली बात अम्मी को भी बता दी।”

“अम्मी ने भी मुझे हंसते हुए कह दिया, असलम निकहत इसलिए नहीं चुदवाती होगी कि उसकी गांड का छेद टाइट होगा, तुम्हारा मोटा लंड उसकी गांड में जाता नहीं होगा। वरना लड़कियां तो गांड चुदवाती ही हैं।”

फिर अम्मी बोली, “अगर बहुत गांड चोदने मन है तो किसी दिन अगर मौक़ा मिला, तो मेरी गांड चोद लेना। बस मालिनी जी उसके बाद मैंने निकहत की गांड चोदने का ख्याल छोड़ तो दिया। मगर हर बार चूत में लंड डालने से पहले थोड़ा सा लंड निकहत कि गांड में जरूर डालता हूं। बस इतना है कि पूरा लंड गांड में कभी नहीं डाला। हर बार कोशिश करता हूं, हर बार निकहत मना करती है। मगर मेरा मन नहीं मानता।”

फिर असलम कुछ रुक कर बोला, “मालिनी जी जैसे ही निकहत चूतड़ पीछे करके चूतड़ उठा कर लेटती है, उसकी चूत का छेद बिलकुल मेरे लंड के सामने आ जाता है और लंड बैठता भी पूरा है चूत के अंदर तक।” ये कह कर असलम ने भी अपने कपड़े उतार दिए।

पीछे से चुदाई करवाना सभी लड़कियों को अच्छा लगता है। चूत में लंड पूरी गहराई तक बैठता है, और मस्त मजा आता है। लड़कियों को ही क्यों इस दुनिया के हर प्राणी को, चाहे वो इंसान हो या जानवर, पीछे से लंड लेने का ही मजा आता है। ये कुदरती है। खाली इंसान ही ऐसा एक मात्र प्राणी है जो कुदरत के इस नियम के विरुद्ध जा कर औरत के ऊपर लेट कर उसकी चुदाई करता है।

मैंने असलम से कहा, “वैसे असलम कई लड़कियों की चूत की बनावट ऐसी होती है की ऊपर लेट कर चोदो तो चूतड़ और टांगें ज्यादा उठाने पड़ते हैं। ऐसी चूतें पीछे से चोदने पर ही असली मजा मिलता है। निकहत की चूत भी ऐसी ही होगी।”

असलम बोला, “बिलकुल ऐसा ही है मालिनी जी निकहत को ऊपर लेट कर चोदने के लिए चूतड़ भी ज्यादा उठाने पड़ते है और टांगें भी ज्यादा उठानी पड़ती हैं। इसीलिए निकहत को पीछे से चोदने पर लंड आराम से चूत में बैठ जाता है। मगर पीछे निकहत की मुलायम चूतड़ देख कर गांड चोदने का मन हो जाता हैं।”

मुझे लगा असलम कुछ ज्यादा ही पागल हुआ पड़ा था निकहत की गांड चोदने के लिए। मैंने कहा, “क्या बात हैं असलम, बहुत गांड चोदने का मन करता हैं निकहत की?” ये कह कर मैं भी बेड के किनारे पर चूतड़ पीछे करके उल्टा लेट गयी। असलम नीचे बैठा और मेरी चूत और गांड का छेद चूसने चाटने लगा।

मैंने सोचा अब ये साले सारे मर्द चूत और गांड को चोदने से पहले सूंघते, चूसते चाटते क्यों है? असल में ये भी कुदरत का ही नियम है, चूत गांड की खुशबू मर्द की चुदाई की ताकत को दुगना कर देती है। मेरी चूत जल्दी ही गरम हो गयी और लंड मांगने लगी। निकहत की गांड वाली बात सुन कर मेरी गांड में भी खलबली मची हुई थी। मेरे चूतड़ अपने आप हिलने लगे।

असलम समझ गया मैं लंड मांग रही थी। असलम खड़ा हुआ, जरा से मेरे चूतड़ ऊपर किये और मेरी जानी पहचानी चूत के छेद पर अपना लंड डाला और चुदाई चालू कर दी। क्या मस्त चोदता है असलम, आलोक की चुदाई से बढ़िया – बिलकुल संदीप की चुदाई जैसा। शायद मोटे लंड का कमाल था। मैं सोच रही थी दो गाये और दो सांड के खेल में इस बार रागिनी को असली मजा आने वाला था।

असलम के लम्बे मोटे लंड की चुदाई के पंद्रह मिनट में ही मेरी चूत पानी छोड़ गयी। मेरे चूतड़ अपने आप ही जोर से हिले और मैं ढीली हो गयी।

असलम समझ गया मुझे मजा आ चुका था। असलम खड़ा लंड चूत में डाले ही ऐसे ही खड़ा रहा। जब मेरा मजा थोड़ा कम हुआ तो मैंने अपनी चूत को सिकुड़ना खोलना शुरू कर दिया। ये साफ़-साफ़ असलम को निमंत्रण था, “अब आगे भी तो कुछ करो असलम।”

असलम अब मुझे अच्छी तरह जान समझ चुका था। वो जानता था मैं कैसी ताबड़तोड़ चुदाई करवाती हूं। असलम ने मेरी चूत में से लंड निकाला और पूछा, “मालिनी जी आपको चूत में तो मजा आ गया, अब?”

मैंने पूछा, “अब क्या असलम? जा उधर अलमारी में से गांड चोदने वाली क्रीम लेकर आ और डाल अपना लंड मेरी गांड में, रगड़ इसको।” असलम जैसे ही मुड़ा मैंने असलम को कहा, “और असलम, अलमारी में रबड़ का लंड भी पड़ा है, वो भी लेता आ – मोटे वाला।”

असलम तो जैसे सब समझ रहा था। वो हां में सर हिलाता हुआ चला गया। आ कर असलम ने मोटा रबड़ का लंड मेरे हाथ में दिया और क्रीम मेरी गांड के छेद में लगा कर लंड पूरा मेरी गांड में बिठा दिया। क्या मस्त मजा आया। मैंने रबड़ का लंड अपनी चूत में डाला और असलम से कहा, “असलम दिखा अपने लंड का जलवा। ”

बीस मिनट की इस गांड चुदाई में मजा ही आ गया। संदीप के मोटे लंड से गांड चुदाई कभी-कभी के लिए तो ठीक है, मगर अगर ज़्यादा ही गांड चुदाई की ठरक है तो फिर असलम का लंड ही सब से अच्छा है। अगर असलम का लंड ना मिले तो आलोक का लंड भी गांड के लिए कम नहीं।

असलम के लंड के धक्के मेरी गांड में राजधानी गाड़ी के रफ्तार से लग रहे थे। लगता ही रहा था असलम ने बहुत दिनों से गांड नहीं चोदी थी। निकहत ने तो गांड चुदवाने से मना ही कर दिया था, मगर मुझे तो ऐसा लग रहा था के असलम अपनी अम्मी की गांड भी नहीं चोद पाया था।

जो भी हो इस बीस मिनट की गांड चुदाई और रबड़ का मोटा लंड मेरी चूत में – दोनों छेद भरे हुए थे। जन्नत ही थी ये। तेज रफ़्तार गांड रगड़ाई के बाद असलम के लंड से गरम-गरम चिकना पानी मेरी गांड में निकल गया। मजा आ गया। कुछ देर लंड गांड के अंदर ही रखने के बाद असलम ने लंड मेरी गांड में निकाला और बाथरूम चला गया।

रबड़ का लंड अपनी चूत में से निकाल लिया। मैंने भी रबड़ का लंड अपनी चूत में से निकाला और असलम के पीछे-पीछे मैं भी बाथरूम मैं चली गयी। असलम खड़ा पेशाब कर रहा था। असलम ने मुझे देखा और पेशाब करता रहा। जैसे ही असलम के लंड से पेशाब की आख़री बूंद निकली और असलम ने लंड झाड़ा, मैंने असलम को टॉयलेट सीट पर बैठा दिया और खुद टांगें चौड़ी करके उसकी टांगों पर बैठ गयी। असलम हैरानी से मुझे देखने लगा, के मैं ये क्या कर रही थी।

असल में मुझे संदीप की वो हरकत याद आ गयी थी जब उसने मुझे अपनी टांगों पर बिठा कर पेशाब करने के लिए बोला था। मैंने असलम के होंठ अपने होठों में ले लिए और असलम का एक हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रख दिया। दोनों हाथों से मैंने असलम को कस कर पकड़ लिया और चूत ढीली छोड़ कर पेशाब की धार असलम की टांगों और लंड पर डाल दी।

असलम भी अपने हाथ से मेरी चूत थपथपाने लगा। पेशाब करके मैं उठी और तौलिया उठा अपनी चूत पोंछी और तौलिया असलम को दे दिया, “असलम अपनी टांगें और लंड साफ़ साफ कर लो।”

ये कह कर मैं बाहर आ गयी और कपड़े पहन लिए। असलम भी बाहर आया और कपडे पहनता हुआ बोला, “मालिनी जी आज जैसा चुदाई का मजा तो कभी भी नहीं आया। और ये जो आपने मेरे लंड पर बैठ कर मूता, इसने तो अजीब ही मजा दिया। गर्म-गर्म मूत जब सुर्र-सुरर्र की आवाज के साथ लंड पर गिरा मेरा तो लंड जी फिर खड़ा होने लगा था। अब तो मैं भी निकहत से अपने लंड पर मुतवाया करूंगा।”

मैंने हंसते हुए पूछा, “और नसरीन से? अपनी अम्मी से नहीं?”

मेरे इस सवाल का असलम ने कोई जवाब नहीं दिया। मैं समझ गयी कुछ तो गड़बड़ थी। खैर।

मैंने कहा, “असलम अभी तो असली चुदाई का मजा बाकी है।”

असलम हैरानी से मुझे हैरानी से देखता बोला, “क्या मालिनी जी अभी और चुदाई होगी?” ये कहते हुए असलम ने अपना लंड खुजला दिया।

मैंने कहा, “नहीं असलम मैं आज एक और चुदाई का बात नहीं कर रही, मगर एक और मस्त चुदाई होगी – इधर बैठो बताती हूं।”

असलम मेरे सामने हे बैठ गया और मैंने उसे दो गाये और दो सांड वाली बात बता दी। साथ ही मैंने उसे बता दिया की संदीप का लंड कैसा है और वो कैसे सूखी चुदाई करता है। और साथ ही मैंने असलम को ये भी बता दिया के रागिनी कैसी रगड़ाई वाली चुदाई की शौक़ीन है।

असलम के मुंह से बस यही निकला “कमाल है।”

मैंने असलम से पूछा, “तो असलम पक्का करूं प्रोग्राम?”

असलम अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए बोला, “बिलकुल मालिनी जी, मेरा लंड तो आपकी और वो आपकी रागिनी जी चुदाई का सोच-सोच कर अभी से खड़ा होने लगा है।”

मैंने असलम से कहा, “तो असलम बताओ, कब का प्रोग्राम बनाऊं।”

असलम बोला, “मालिनी जी मैंने तो एक दिन इसी लिए खाली रक्खा था के आपके साथ पूरा दिन चुदाई करूंगा, मगर आपके साथ तो आज ही चुदाई हो गयी। अब कल का दिन मैं पूरा खाली हूं, कल का ही बना लीजिये, अगर बनता है तो, नहीं तो अगर आपको कोइ एतराज ना हो तो मैं कल फिर आ जाऊंगा।”

मैंने कहा, “ठीक है असलम मैं बात करती हूं। अगर बन गया तो ठीक, नहीं तो रागिनी को भी यहीं बुला लेंगे। तुम्हारे लंड में तो अच्छा खासा दम है, दो चूतें तो संभाल ही लेगा।” ये कह कर फोन स्पीकर पर डाल दिया और को रागिनी को फोन मिला दिया।

उधर रागिनी ने फोन उठाया तो नमस्ते नमस्ते के बाद रागिनी बोली, “मालिनी जी कहिये।”

मैंने रागिनी से हंसते हुए कहा, “रागिनी दूसरा सांड आ गया है। मगर वो कल के दिन ही खाली है। तुम्हारा कल का क्या प्रोग्राम है। तुम कहो तो संदीप से बात करूं कल के लिए?”

रागिनी चहकते हुए बोली, “वह मालिनी जी, आप करिये बात संदीप से। मेरी चूत तो दूसरे सांड की खबर सुन कर ही गीली हो रही है।”

रागिनी के बात सुन कर मेरी हंसी छूट गयी और असलम का लंड खड़ा हो गया। असलम ने लंड पैंट में से बाहर निकल कर हाथ में ले लिया और इधर मैंने संदीप को फोन मिला दिया।

फोन अभी भी स्पीकर पर ही था। संदीप ने फोन उठाया और बोला, “अरे मैंडम आप? हुकुम करिए मैडम, क्या सेवा है मेरे लिए?”

मैंने उसी तरह हंसते हुए कहा, “सेवा ये है संदीप के दूसरा सांड आया हुआ है। मगर दिक्कत ये है के वो कल का दिन ही खाली है। रागिनी से मेरी बात हो गयी है। वो कल के लिए तैयार है। बस अब तुम बताओ, कल का प्रोग्राम बन सकता है?”

संदीप बोला, “वह मैडम, आपने तो कमाल कर दिया हफ्ते भर में ही दूसरे सांड का जुगाड़ कर लिया। कल का पक्का करिये मैडम। आपकी चुदाई के लिए तो मैं हमेशा तैयार हूं, मजा आ जाएगा। कुछ और चाहिए तो बता दीजिये मालिनी जी?”

मैंने हंसते हुए कहा, “और क्या चाहिए संदीप, सब कुछ तो है तेरे ऑफिस में रबड़ के लंड और गांड चुदाई की क्रीम तो है ही। बस तू कल का टाइम बता दे ताकि मैं रागिनी को फोन कर दूं।”

संदीप बोला, “मैडम जब मर्जी आईये। बस इतना ध्यान रखिये के कम से कम चार पांच घंटे हों हमारे पास। आखिर को दो गायें और दो सांड होंगे, इतना टाइम तो होना ही चाहिए।”

मेरी हंसी बंद नहीं हो रही थी। उधर असलम अपने लंड को हाथ से मसल रहा था। मैंने कहा, “तो फिर ठीक संदीप, ग्यारह बजे का रखते हैं, मैं रागिनी को फोन कर देती हूं। हम ग्यारह बजे तुम्हारे पास आ जायेंगे, तैयार रहना।”

संदीप बोला, “मैडम।”

मैंने कहा, “हां संदीप बोलो।”

संदीप बोला, “मैडम मेरा लंड तो अभी से तैयार ही गया है फुंफकारे मारने लगा है इसका क्या करूं।”

मैंने हंसते हुए कहा, “इसको अभी सुला दे, इसने कल बहुत मेहनत करनी है।” ये कह कर मैंने फोन काट दिया और रागिनी को फोन मिला दिया।

रागिनी ने फोन उठा तो मैंने कहा, “रागिनी संदीप से बात हो गयी है। कल ग्यारह बजे का प्रोग्राम बना है। संदीप कह रहा था चार पांच घंटे का प्रोग्राम बनाना। दो गायें और दो सांड हैं इतना टाइम तो चाहिए ही।”

रागिनी बोली, “मालिनी जी ठीक ही कह रहा था संदीप। दो-दो चूतों का पानी निकालना है, वो भी दो-दो तीन-तीन बार, इतना टाइम तो लगेगा ही। वैसे भी जल्दी पानी भी तो नहीं छोड़ता उसका लंड। बताईये कैसे चलना है?”

मैंने कहा, ”तुम यहीं आ जाना। यहां से असलम को होटल से लेते हुए चलेंगे।”

रागिनी ने कहा, “ठीक है मालिनी जी, साढ़े दस पौने ग्यारह पहुंचती हूं।” फिर कुछ रुक कर बोले, “मालिनी जी आपके पास तो आज सांड है, मुझे लगता है रबड़ का लंड लेना पड़ेगा चूत में।” ये कह कर रागिनी हंसी और फोन काट दिया।

मैंने भी फोन बंद करके असलम की तरफ देखा। असलम का खड़ा लंड उसके हाथ में ही था। असलम बिना कुछ बोले मेरे सामने आ कर खड़ा हो गया और पैंट खोल कर नीचे गिरा दी और लंड मेरे मुंह के आगे कर दिया। मेरी चूत भी रागिनी की और संदीप की बातों से गरम हो चुकी थी।

असलम मेरे सामने आ कर खड़ा हो गया। मैंने असलम का लंड मुंह में लिया। कुछ देर लंड चूसने के बाद मैंने असलम को बोला, “चलो असलम अंदर चलो और मेरी चूत का पानी छुड़ाओ, रगड़ाई वाली चुदाई का मजा दो मुझे।”

अंदर जा कर मैंने साड़ी चूतड़ों से ऊपर कर दी और चड्ढी उतार दी। चूतड़ पीछे करके मैं बेड के किनारे पर उल्टा लेट गयी। असलम पीछे खड़ा हो कर और मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरते-फेरते मेरी गांड के साथ खिलवाड़ कर रहा था, और साथ ही साथ बोल रहा था, “क्या मस्त चूतड़ हैं। दिल करता है दिन भर चाटता चोदता ही रहूं।”

जैसे ही असलम मेरी कमर पकड़ कर चूत में लंड डालने लगा, मैंने पीछे मुंह मोड़ कर असलम से कहा, “असलम इस बार की चुदाई में तुम कुछ भूल रहे हो।”

असलम मेरी चूत में लंड डालते-डालते रुक गया और मेरे सामने आ कर बोला, “कुछ भूल रहा हूं? क्या मालिनी जी, क्या भूल रहा हूं?”

मैंने कहा, “असलम तुम भूल रहे हो – ले मेरी जान आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा, गांड फाड़ दूंगा, रंडी कैसे चुदाई करवाती है चूतड़ घुमा-घुमा कर। पूरा लंड ले रखा है तूने अपनी चूत में। साली कैसे अपनी चूत में लंड जकड़ रही हैं, बड़ा मजा आ रहा है।”

असलम ने भी हंसते हुए अपनी पैंट और अंडरवियर उतर दिए और मेरे पीछे आ कर एक ही झटके से लंड चूत में बिठाया, और बोला, “लेले अब पूरा मेरा लौड़ा लेले अपनी भोसड़ी में। गया तेरी चूत में लौड़ा जड़ तक। ले अब टट्टे भी लेले अपनी चूत में।” और ये कहते हुए असलम ने चुदाई चालू कर दी। लगता था मेरी बातें सुन कर चुदाई के लिए उतावला हो चुका था।

बीस मिनट असलम ने मेरी चूत की ऐसे रगड़ाई की, कि मुझे मजा ही आ गया। दो बार मेरी चूत का पानी छूट गया। असलम ने खड़ा लंड चूत से बाहर निकाला और ढेर सारा थूक मेरी गांड पर लगा कर बोला, “ले मेरी जान अब फाड़ता हूं तेरी गांड भी। परखच्चे ना उड़ा दिए तेरी गांड के आज तो मेरा नाम भी असलम नहीं।”

ये बोल एक ही बार में लंड गांड के अंदर धकेल दिया। असलम का मोटा लंड रगड़ कर गांड में गया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ। क्रीम भी नहीं लगी थी गांड के छेद पर। मैंने असलम को कहा ,”क्या कर रहा है असलम। साले क्या सच में ही फाड़ेगा?”

असलम बोला, “हां फाड़ूंगा आज तेरी गांड आज।” ये कह कर आधी सूखी गांड की चुदाई, चुदाई क्या रगड़ाई चालू कर दी। सच में ही असलम गांड चुदाई का शौक़ीन था। मुझे लगा मुझे ही कुछ ऐसा करना पड़ेगा कि निकहत भी असलम से गांड चुदाई करवाने लग जाए। उसे भी तो पता चले गांड चुदाई क्या होती है।

दस मिनट गांड चुदाई के बाद असलम के लंड ने पानी छोड़ा। असलम ने गांड से लंड निकाला और बाथरूम की तरफ चला गया। मैंने भी चड्ढी पहनी रुमाल से चूत साफ़ की और साड़ी नीचे करके आगे क्लिनिक में आ गयी।

असलम आया और मेरे सामने बैठ कर बोला, “मालिनी जी पता नहीं क्या कारण है। आपको चोदने का मजा बहुत आता है। आज तो अलग सा ही मजा आया। पूरे चूतड़ झटका-झटका कर चुदवाती हैं आप।”

मैंने हंसते हुए कहा, “अच्छा? चूतड़ घुमा घुमा कर चुदवाती हूं मैं? और निकहत, नसरीन?” और आज मजा इसलिए आया कि तुमने चुदाई करते-करते वो बोला जो तुम चूत, गांड चोदने के वक़्त सोचते हो।
मगर जब असलम से मैंने पूछा “और निकहत, नसरीन?” तो इस पर असलम चुप रहा, कुछ नहीं बोला।

मैं हंसी, “चल ठीक है असलम अब तुम मुझे एक बात बताओ, नसरीन के साथ तुम्हारा ठीक-ठाक चल रहा है? कुछ गड़बड़ तो नहीं है?”

असलम नीचे की तरफ देखता हुआ बोला, “नहीं मालिनी जी ऐसी तो कोइ बात नहीं।”

मैंने असलम से कहा, “असलम तुम एक मनोचिकित्सक के सामने बैठे हो। कोइ समस्या हो तो मुझे बताओ। शायद मैं कुछ मदद कर सकूं।

असलम बोला, “मालिनी जी अम्मी ने मुझसे शादी के बाद चुदाई करवानी बंद कर दी थी। मगर अम्मी की उदासी देख कर मैं समझ चुका था कि ये असली लंड से चुदाई ना होनी वाली उदासी है। अम्मी को मर्द का लंड चाहिए। असली मर्द के असली लंड की चुदाई चाहिए।”

“मालिनी जी, “निकहत का मायका आगरा में ही है। जब भी उसे अपने मायके वालों से मिलना होता है अक्सर वो सुबह जा कर शाम को वापस आ जाती है, मगर महीने में एक आध बार वो दो-तीन दिन वहां रहने के लिए भी चली जाती है। एक दिन निकहत अपने मायके गयी हुई थी तो रात को मैं अम्मी के कमरे में चला गया, यही सोच कर के आज बात करूंगा और अगर उनका चुदाई का मन हुआ तो चोद भी दूंगा।”

अंदर अम्मी बेड पर लेटी हुई थी और अपनी सलवार उतारी हुई थी। रबड़ का लंड अम्मी की चूत में था और अम्मी उसे आगे-पीछे कर रही थी। मैं अम्मी के पास बैठ गया और अम्मी की चूत में से लंड निकाल कर उनकी चूत चूसने लगा। अम्मी ने मुझे मना नहीं किया। मेरा लंड खड़ा हो चुका था। मैं अम्मी की टांगें उठाई और चौड़ी करके जैसे ही अम्मी की चूत में लंड डालने लगा, तो अम्मी ने मुझे रोक कर अपनी टांगें सिकोड़ ली और बोली, “नहीं असलम, अब चुदाई नही।”

मैंने कहा, “अम्मी क्या हुआ। आपकी चूत तो लंड मांग ही रही है। रबड़ का लंड डाला तो हुआ था चूत में।”

अम्मी बोली, “हां असलम, चूत का पानी छुड़ाने का मन हो रहा था, मगर अब चुदाई नहीं।” कह कर अम्मी ने मुझे थोड़ा सा धकेला। मैंने अपना लंड अम्मी की चूत पर से नहीं हटाया और बोला, “क्या बात है अम्मी, मुझे नाराज हो क्या क्योंकि मैं आपकी चुदाई नहीं करता?”

अम्मी बोली, “नहीं असलम वो बात नहीं। अब मेरा तुझ से चुदाई करवाने का मन ही नहीं करता। असल में मैं जब भी तुझसे चुदाई करवाने का सोचती हूं, तो लगता है निकहत हमारी चुदाई देख रही है। नहीं असलम, अब मेरी तुम्हारी चुदाई नहीं हो सकती, कम से कम इस घर में तो नहीं।”

मैंने सोचा एक तरीके से अम्मी बात तो ठीक कर रही थी, मगर लंड के लिए तरस भी रही थी।

मैंने कहा, “चलो अम्मी एक मिनट के लिए आपकी बात मान लेता हूं, मगर अम्मी आपकी चूत तो मर्द की चुदाई तो मांगती ही है। तभी आप उदास-उदास सी रहती हैं। जहां तक इस घर के चुदाई का सवाल है तो अम्मी, हम कहीं होटल वगैरह में जा भी तो नहीं सकते। पुरानी दूकान होने के कारण आधा आगरा मुझे जानता है। दुकान में भी अब चुदाई नहीं हो सकती चार-चार तो अब नौकर हैं। फिर आप बताइये क्या चारा है?”

अम्मी बोली, “वो सब तो ठीक है असलम, लेकिन मुझे अच्छा नहीं लगता, मेरा मन नहीं मानता।”

मैं कुछ सोच में पड़ गया फिर बोला, “चलो अम्मी आपकी बात मान ली। मगर तीन-चार महीने में एक बार चुदाई करने में क्या हर्ज है? आपको लंड चाहिए वो आपको मिल जाया करेगा। तीन-चार महीने की चुदाई भी मैं आपकी जोरदार कर दिया करूंग। चूत में भी लंड डाल दिया करूंगा, गांड में भी चोद दिया करूंगा और मुंह में भी पानी निकल दिया करूंगा।”

अम्मी बोली, “नहीं असलम, अगर एक बार चुदाई शुरू हो गयी तो फिर रुकना मुश्किल हो जाएगा। अब यहां, इस घर में मेरी तुम्हारी चुदाई ना ही हो तो अच्छा है।”

जब दो बार अम्मी ने कहा इस घर में तो मुझे समझ आया के अम्मी को मुझसे चुदाई करवाने से परहेज़ नहीं, वो बस इस घर में चुदाई नहीं करवाना चाहती। मैंने सोचा इस पर कुछ सोचता हूं। सोचता हूं कहीं किसी जगह का जुगाड़ हो जाए।

मैंने अम्मी से कहा, “ठीक है अम्मी मैं कहीं बाहर जगह ढूंढता हूं जहां कोई खतरा ना हो। मगर अम्मी आज तो चुदाई करवा लो, आपकी चूत गरम हुई पड़ी है चूत के पानी भरी पड़ी है। अब इसे लंड चाहिए ही वो भी अभी।”

असलम बोला, “मालिनी जी, अब अम्मी ने भी मुझसे चुदाई ना करवाने के कसम तो खाई नहीं हुई थी।

अम्मी कुछ देर चुप रही, फिर बोली, “ठीक है असलम कर ले आज चुदाई। मगर आज ऐसी चुदाई कर की चूत और गांड दोनों की तसल्ली हो जाए। असलम सच बताऊं निकहत के कारण मन नहीं मानता। मगर तुझसे चुदाई का मन भी बहुत करता है। कोइ ठीक जगह मिल जाए तो अच्छा है, मगर ध्यान रखना कोइ खतरा ना हो। चल उतर मेरे ऊपर से और कपड़े उतारने दे। तू भी कपड़े उतार और मस्त चुदाई कर अपनी अम्मी की।”

असलम बता रहा था, “और मालिनी जी इसके बाद अम्मी बेड के किनारे चूतड़ पीछे करके लेट गयी। मैंने अम्मी के चूत और चूतड़ खूब चूसे चाटे। अम्मी के मुंह आआह असलम आआह असलम की आवाजें निकल रही थी। उस दिन तो मेरी और अम्मी की ऐसी चुदाई हुई जैसी मेरी निकहत की साथ भी नहीं हुई थी। एक घंटे तक चली इस चुदाई में अम्मी की चूत चार बार पानी छोड़ गयी। दो बार मेरी लंड का भी पानी छूट गया। उस दिन अम्मी की गांड की भी मैंने खूब रगड़ाई की और अंत में अम्मी के मुंह में पानी निकाल दिया।”

मैंने अम्मी से पूछा, “अम्मी अभी हो गया या और चुदाई करवानी है?”

अम्मी बोली, “असलम मैं पेशाब करके आती हूं, फिर देखते हैं।” मैं समझ गया अभी अम्मी और चुदाई करवाना चाहती थी।

मैंने कहा, “ठीक है अम्मी आप पेशाब करके आओ तब तक मेरा लंड भी तैयार हो जाएगा।”

असलम अपनी और नसरीन की चुदाई की कहानी सुना रहा था मेरी चूत पानी छोड़ती जा रही। असलम बोला, “मालिनी जी अम्मी पेशाब करके आई और बिस्तर पर सीधी लेट गयी। अम्मी ने अपनी टांगें उठा ली और मेरा लंड पकड़ कर बोली, “असलम तेरा खड़ा हुआ या नहीं। अगर हो गया है तो आजा।”

मैंने अम्मी से कहा, “पूरा खड़ा तो नहीं हुआ मगर हो जाएगा।” ये कह कर मैं अम्मी के ऊपर उलटा लेट गया – मतलब मेरा लंड अम्मी के मुंह की तरफ था और मेरा मुंह अम्मी की चूत के ऊपर था।

असलम बता रहा था, “मालिनी जी दस मिनट की इन लंड चूत चुसाई में लंड एक-दम फिर से चुदाई के लिए तैयार हो गया। उधर अम्मी भी चूतड़ ऊपर-नीचे करने लगी। मैं समझ गया अम्मी के चूत तैयार हो चुकी थी। मैं अम्मी के ऊपर से उतरा और अम्मी की टांगें उठा कर एक ही झटके से लंड अम्मी के चूत में डाल दिया।

अम्मी के मुंह से बस इतना ही निकला “आअह असलम।” और इसके बाद मेरी औरत अम्मी की वो चुदाई हुई के मालिनी जी क्या बताऊं। अम्मी की चूत फिर दो बार पानी छोड़ गई और मेरे लंड ने भी अम्मी की चूत गरम मलाई से भर दी। बस मालिनी जी ये समझिये कि वो चुदाई हमारी आख़री चुदाई ही थी।”

असलम बोल रहा था, “अब मालिनी जी अगर जमाल होता तो मैं अम्मी को जमाल से चुदवा भी देता, मगर वो तो यहां है नहीं। अगर अम्मी मुझ से चुदाई नही करवाती, तो चुदाई के इस चक्कर में अम्मी सेहत ही खराब ना कर ले। बस यही सोचता रहता हूं।”

ये कह कर असलम चुप हो गया।

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