दो गायें और दो सांड 1

बाप बेटी

तभी मुझे ख्याल आया कि नसरीन भी तो दूसरी गाये बन सकती थी। अगर छह महीने में भी उसकी चूत और गांड की मोटे लंड से एक बार बढ़िया रगड़ाई हो जाए, तो उसकी भी तसल्ली हो जाएगी और तो बाकी का काम तो रबड़ के लंड करते ही हैं।

मैंने सोचा कल कि दो गायें और दो सांड वाली चुदाई हो जाये तो उसके बाद असलम से बात करती हूं। संदीप का मोटा लंड लेकर तो नसरीन की तसल्ली हो जाएगी।

मैंने कहां, “असलम तुम चिंता मत करो। इस बारे में तुमसे बाद में बात करूंगी। जाने से पहले मुझसे एक बार मिलते हुए जाना। कल सुबह तैयार रहना। मैं और रागिनी तुम्हें होटल से ले लेंगे। बाकी सारी बातें तूने सुन ही ली है।”

अगले दिन ठीक साढ़े दस बजे रागिनी मेरी क्लिनिक में आ गयी। गाड़ी में बैठते हुए हंसी-हंसी में पूछा, “रागिनी बिकुल सही वक़्त पर आ गयी हो, क्या हुआ, चूत में संदीप के लंड के ख्यालों खुजली मची हुई है क्या?”

रागिनी बोली, “मालिनी जी खुजली तो मची हुई है लेकिन संदीप के नहीं, इस दूसरे सांड के लंड के ख्यालों से खुजली मची हुई है, देखें तो सही, कैसी चुदाई करता है आपका ये दूसरा सांड।”

मैंने कहा, “रागिनी मस्त चुदेगी आज तू। चुदाई के लिए लंड का मेरा चुनाव गलत कभी नहीं होता।”

ऐसे ही बातों-बातों में हम होटल पहुंच गए। कार में बैठे-बैठे ही मैंने असलम को फोन लगाया, “असलम आ जाओ, मैं और रागिनी बाहर कार में तुम्हारा इन्तजार कर रहे हैं।”

पांच मिनट में ही असलम आ गया। सफ़ेद टी-शर्ट और जींस में मस्त लग रहा था, बिल्कुल कालेज के स्टूडेंट की तरह। पीछे की सीट पर असलम बैठा ही था कि रागिनी बोली, “मालिनी जी संदीप के घर तक कार आप चला लीजिये मैं भी पीछे असलम के साथ बैठ जाती हूं?”

मैं समझ गयी रागिनी से रहा नहीं जा रहा और उसका मन असलम के लंड के साथ खिलवाड़ करने का हो रहा था। मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “जरा आराम से रागिनी। जाओ पीछे बैठ जाओ।” और मैंने एक आँख दबा दी।

रागिनी कार से उतरी और पीछे जा कर असलम के पास बैठ गयी। कार चलते-चलाते मैंने पीछे देखने वाले शीशे से देखा तो वही हो रहा था। रागिनी ने असलम का लंड पैंट में निकाल लिया था, और हाथ मैं पकड़ा हुआ था। तभी मैंने शीशे में देखा की रागिनी झुकी और असलम का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी।

दस मिनट ऐसे ही रागिनी असलम का लंड चूसती रही। हम संदीप के ऑफिस में पहुंचने ही वाले थे। मैंने रागिनी से कहा, “बस करो रागिनी, संदीप का ऑफिस आने वाला है। बाकी की चुसाई वहां जा कर कर लेना।”

रागिनी ने असलम का लंड मुंह में से निकाल दिया और बोली, “क्या मस्त लंड है।”

मैं जोर से हंस पडी। अगले पांच मिनट में हम संदीप के ऑफिस में थे। पहुंच कर मैंने संदीप और असलम की परिचय करवाया, “संदीप ये है आज के खेल का दूसरा सांड – असलम। और असलम है ये है संदीप। सारे रबड़ के चुदाई वाले खिलौने इन्हीं के यहां से जाते है।”

ऐसे साफ़-साफ़ परिचय से हम चारों ही हंस दिए। ऑफिस आगे के हिस्से में बैठ कर संदीप ने पूछा, “क्या लोगे असलम, जिन या विह्स्की?”

असलम बोला, “मैं बहुत कम पीता हूं। अगर है तो बियर दे दो।”

संदीप बोला, “सब कुछ है।” फिर हमारी और देखते हुए संदीप ने पूछा और आप तो जिन ही लेंगी?” फिर उठते हुए बोला, “चलिए पीछे के कमरे में बैठ कर आराम बातें करते हैं।”

हम चारों उठ गए और के कमरे में जो कमरा कम ऐशगाह ज्यादा था आ गए। मैं असलम और रागिनी सोफे पर बैठ गए और संदीप ने अलमारी में से जिन की बोतल निकाली और फ्रिज खोल कर जर्मनी के बनी हैनिकिन बियर का केन निकाल कर असलम के हाथ में दे दी।

चारों अपने अपने गिलासों में से हल्के-हल्के घूंट भरने लगे। असलम का बियर का केन आधा खाली हो चुका था। मैंने ही बात अपने हाथ में ली और असलम से कहा, “असलम जाओ रागिनी शायद तुम्हारा इंतजार कर रही हैं।”

असलम उठा और बियर का केन मेज पर रखते हुए रागिनी के सामने जा कर खड़ा हो गया और अपने पैंट की ज़िप खोल लंड रागिनी के सामने कर दिया। रागिनी ने एक हाथ से असलम का लंड पकड़ा और मुंह में डाल लिया। मैंने रागिनी के हाथ से जिन का गिलास लिया और बोली, “आराम से चूसो रागिनी।”

पांच ही मिनट में संदीप भी उठ खड़ा हुआ और मेरे हाथ से रागिनी और मेरा दोनों के गिलास लेकर मेज पर रखे और अपने पूरे कपड़े उतार दिए और बोले, “मैडम आप भी चुसाई का मजा ले लो।” ये कह कर संदीप ने लंड मेरे मुंह में डाल दिया।

कुछ देर मुझसे लंड चुसवाने के बाद संदीप बोला, “आईये मैडम, अब कुछ आगे का काम करते हैं।”

सब ने अपने-अपने कपड़े उतर दिए और लंड चुसाई एक बार फिर शुरू हो गयी। संदीप का मोटा लंड मेरे मुंह में था और असलम का रागिनी के मुंह में था।

रागिनी ने लंड मुंह में से निकाल लिया और बोली, “बस असलम और नहीं। मेरी चूत में बाढ़ आ चुकी है। लंड मांग रही है। डालो ये लंड उसमे।”

उधर मेरी चूत भी तैयार थी। मैंने भी संदीप का लंड मुंह में से निकाला और बोली, “चलो संदीप बताओ कैसे चोदनी है? पीछे से या ऊपर लेट कर टांगें उठा कर?”

संदीप बोला, “मैंडम जैसे पहले की थी। पहली चुदाई सीधे-सादे तरीके से – ऊपर नीचे से।”

मैं लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर टांगें चौड़ी कर दी। संदीप आया और मेरे ऊपर उलटा लेट गया। संदीप लंड मेरे मुंह में था और संदीप मेरी चूत चाट रहा था। एक मिनट के बाद रागिनी और असलम भी आ गए। वो भी हमारी तरह ही चुसाई-चटाई करने लगे। मेरी चूत गरम हो गयी और मेरे चूतड़ अपने आप ही हिलने लगे। संदीप उठा, एक तकिया संदीप ने मेरे चूतड़ों के नीचे लगाया, टांगें उठा कर फैला दीं और अपना मोटा लंड मेरी चूत में डाल कर चुदाई शुरू कर दी।

उधर असलम भी रागिनी के ऊपर से उतरा और हमारी तरह ही रागिनी के चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर टांगें चौड़ी की, और एक झटके से रागिनी की चूत में लंड घुसेड़ दिया।”

रगिनी बस इतना ही बोली, “आअह क्या रगड़ कर गया है।”

दो गायें और दो सांड, खेल शुरू हो चुका था।

तभी संदीप ने असलम से पूछा, “असलम तुम्हारा लंड जल्दी पानी तो नहीं छोड़ता?”

मुझे संदीप की इस बात पर हैरानी सी हुई, शायद रागिनी की को भी हुई होगी।

असलम ने कहा “नहीं , क्यों?”

संदीप बोला, “नहीं ऐसे ही।”

दोनों सांड दोनों गायों की चुदाई में मस्त हो गए। तभी असलम वही बातें बोलने लगा जो उसने मेरी चुदाई के वक़्त बोली थी। शायद उन बातों से आने वाला मजा याद आ गया होगा।

असलम बोल रहा था, “क्या मस्त फुद्दी है रागिनी जी। पूरा लंड जकड़ा पड़ा है फुद्दी में। आज रगडूंगा रागिनी जी आपको मस्त चूत फुला दूंगा आपकी। क्या मस्त चूतड़ झटका रही हैं आप, क्या टट्टे भी लेने हैं अपनी फुद्दी में?

रागिनी चुप थी, संदीप भी चुप था, सोच रहे होंगे ये क्या हो रहा था? पंद्रह मिनट की चुदाई के बाद रागिनी की चूत का पानी छूट गया। रागिनी ने एक जोरदार सिसकारी ली, “आह असलम मजा ही आ गया।” और रागिनी ढीली हो गयी।

असलम ने गधे के लंड जैसा लंड रागिनी की चूत में से निकाला और जा कर सोफे पर बैठ गया। जाते-जाते असलम रागिनी से बोला, “रागिनी जी अभी आता हूं। रागिनी ने अधखुली आखों से असलम को देखा और “हां” में सर हिला दिया।

असलम ने बियर का केन उठा और एक ही घूंट में खाली कर दिया। असलम उठा और फ्रिज में से बियर का दूसरा केन ले आया। तभी मेरी चूत भी पानी छोड़ गई। मेरे मुंह से भी निकला, “संदीप आ गया मजा मुझे।”

संदीप ने भी अपना मोटा खड़ा लंड मेरी चूत में से निकाला कुर्सी पर बैठ कर अपने गिलास में से जिन की चुस्कियां लेने लगा और असलम से बोला, “यार असलम तुमने तो कमाल कर दिया चुदाई में।” शायद उसका इशारा असलम की की हुई बातों से था।

रागिनी को तो असलम ही कह गया था, “रागिनी जी अभी आता हूं।” मुझे भी पता था संदीप फिर चढ़ेगा मेरे ऊपर।

चार-पांच घूंट भरने के बाद संदीप उठ गया और असलम से बोला, “असलम अब की चुदाई में सवारी की अदल-बदल भी करेंगे। अभी तू मैडम की चुदाई कर। मैं रागिनी जी को रगड़ता हूं।”

मैंने जब संदीप से कही बात ये सुनी, “असलम अब की चुदाई में सवारी की अदल-बदल भी करेंगे” तो मुझे समझ आया क्यों संदीप ने असलम से पूछा था कि “असलम तुम्हारा लंड जल्दी पानी तो नहीं छोड़ता।” रागिनी ने भी मेरे तरफ देखा और मुस्कुरा दी – शायद कहना चाह रही हो, “मालिनी जी आज आने वाला है असली चुदाई का मजा।”

संदीप रागिनी के ऊपर चढ गया और असलम मेरे ऊपर आ गया। असलम ने मुझे बाहों में जकड़ लिया, और चूत में धक्के लगाते-लगाते बोलने लगा ,”मैडम क्या मस्त चूत है। जरा जोर से चूतड़ झटकाओ।”

मैंने ये सुना तो मैंने भी चूतड़ घुमाते हुए बोल दिया, “मस्त लंड तो जा रहा है असलम मेरी चूत में अब क्या खुद भी घुसेगा इसमें?” इतना सुनना था कि असलम बोला, “मैडम आज फुद्दी में ना भी घुसा तो भी टट्टे तो फुद्दी में डाल ही दूंगा।” ये कह कर असलम ने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।

लगता है अब संदीप से नहीं रहा गया। वो भी रागिनी से बोला, “रागिनी जी आप भी तो चूतड़ घुमाईये।” रागिनी भी उसी लय में बोली, “क्यों संदीप क्या तुमने भी अपनी टट्टे मेरी फुद्दी में घुसेड़ने है?”

माहौल अब चुदाईमय हो चुका था और सब चुदाई वाली भाषा बोलने भी लग गए थे। इस दूसरे दौर की चुदाई में तो हमारे चूतड़ ऐसे ऊपर-नीचे हो रहे थे, जैसे चुदाई असलम और संदीप नहीं, हम कर रही हो। जल्दी ही असलम उठ गया और संदीप से बोला, “संदीप अब मुझे रागिनी को चोदने दो।”

संदीप रागिनी के ऊपर से उतरा और मेरे ऊपर आ गया। असलम रागिनी के ऊपर चला गया। मैंने संदीप की झिझक उतारने के लिए कहा, “संदीप तुझे भी टट्टे फुद्दी में घुसेड़ने हैं क्या?”

संदीप बोला, “मैडम आप कहेंगी तो टट्टे तो क्या मैं खुद भी आपकी चूत में घुस जाऊंगा।

ये चुदाई भी दस बारह मिनट ही चली, और असलम, संदीप रागिनी और मैंने हल्की फुल्की बातें भी शुरू कर दी। लेकिन हम अभी रंडी रांड तक नही पहुंचे थे। हम दोनों फिर झड़ गयी। दोनों संदीप और असलम ने लंड हमारी चूतों में से निकाल लिए और हमारे ऊपर से उठ गए। हैरानी की बात थी की दोनों सांड अभी भी खड़े लंड लिए घूम रहे थे।

दोनों चूतिये हमारे ऊपर से उतरे और जा कर अपना अपना ड्रिंक उठा कर बैठ गए। संदीप कुर्सी पर बैठ गया और असलम सोफे पर बैठ गया। हम भी कुछ देर के बाद उठे और जा कर अपना अपना गिलास उठा लिया।

संदीप असलम से बोला, “असलम दोनों गायें मस्त चुदाई करवाती हैं। जन्नत का मजा आने वाला है आज। अब अगला दौर अब पीछे से चोदने का चलेगा। चूत और गांड दोनों। ठीक है?”

असलम हंसते हुए बोला, “बिलकुल ठीक संदीप जी।”

संदीप बोला, “यार असलम अब ये संदीप जी संदीप जी मत बोलो, यहां हम दोनों एक जैसे चूतिये हैं।” ये कह कर संदीप अपनी ही बात पर हंस पड़ा। हंसी तो असलम, रागिनी की और मेरी भी छूट गयी – क्या बोला ये संदीप “चूतिये।”

और फिर संदीप बोला, “और असलम वो सवार के अदल-बदल मत भूलना। दोनों चूतों को दोनों गांडो को दोनों लंडों का मजा आना चाहिए।”

ये सुन कर मैंने हंसते हुए कहा, “और ये भी तो कहो सालो दोनों लंडों को दोनों चूतों का और दोनों गांडो का मजा आना भी आना चाहिए। हमे मजा आएगा तो क्या तुम सूखे ही रहोगे?”

एक बार फिर सब की हंसी छूट गयी।

चुदाई के पहले दौर के बाद सब लोग बैठे हुए थे। अचानक से रागिनी उठी और असलम के सामने बैठ कर असलम का लंड चूसने लगी। लगता था जैसे रागिनी को असलम का लंड कुछ ज्यादा ही पसंद आया था।

वैसे संदीप का लंड मोटा जरूर था, मगर मस्त चुदाई के लिए असलम का लंड ही बढ़िया था – कलाई जितना मोटा और आधे हाथ जितना लम्बा।

मैंने संदीप के तरफ देखा और सर का हल्का इशारा किया। संदीप समझ गया कि मैं भी लंड मुंह में लेना चाहती थी। संदीप आ कर मेरे सामने खड़ा हो गया और लंड मेरे मुंह में डाल दिया।

ये लंड चुसाई का चक्कर दस मिनट चला। दोनों सांडों के लंड तो तैयार ही थे, दोनों चूतें भी गीली हो चुकी थी।

असलम रागिनी के मम्मे दबाते हुए बोला, “चलिए रागिनी जी अब चूतड़ पीछे करके उल्टा लेट जाईये। आपकी चूत का रस तो पी लिया अब देखें गांड का स्वाद कैसा है।”

रागिनी तो उठी ही, संदीप ने मुझे भी उठा दिया और बोला, “आईये मैडम आप भी, चूतड़ चटवाईये।”

मैं सोच रही थी क्या है ये – “चूत का रस पी लिया – चूतड़ चटवाईये।” मगर मैंने सोचा मजे लेने के लिए लड़कियों को ऐसी ही चुदाई करवानी चाइये – “चूत का रस पी लिया – चूतड़ चटवाईये” जैसी।

मैं और रागिनी अगल-बगल में ही चूतड़ उठा कर उलटा लेट गयी। दोनों सांड संदीप और असलम बारी-बारी से हमारे चूतड़ खोल कर गांड के छेद पर जुबान फेर रहे थे। बड़ा ही मजा आ रहा था। तभी संदीप गया और अलमारी में रबड़ के दो लंड ले कर आ गया। एक लंड उसने मेरे सामने रख दिया, दूसरा रागिनी के सामने रख दिया। मैंने और रागिनी ने एक-दूसरे की तरफ देखा और मुस्कुरा दी।

अब असलम मेरे पीछे था और संदीप रागिनी के पीछे। असलम ने मेरे चूतड़ जरा से उठाए और अपना कलाई जितना मोटा लंड मेरी चूत में एक ही झटके के साथ डाल दिया। असलम ने मेरी कमर पकड़ी और जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी। उधर रागिनी भी आगे-पीछे हो रही थी, मतलब उसकी चुदाई भी मस्त चल रही थी।

अब बातों में भी दोनों खुल चुके थे। अगर एक बार भी असलम ने रंडी और बोला, तो संदीप को भी चालू होने में वक़्त नहीं लगने वाला था।

असलम बोल पड़ा, “ले मेरे जान मालिनी ले, मेरी चुदक्कड़ मालिनी साली ले अपनी चूत में।” और फिर पूरा लंड बाहर निकाल कर एक झटके से लंड चूत में डालता हुआ बोला, ले मेरी रंडी चुदक्कड़ ले, देख कैसे गया अंदर।”

मेरे मुंह से भी फूल झड़ रहे थे, “चोद मेरे राजा और जोर से चोद, घुस जा आज मेरी चूत में। फाड़ दे मेरी चूत आज।”

मेरी ये बातें सुन कर क्या कोइ कह सकता था कि ये औरत कानपुर की मशहूर मनोचिकित्स्क है, जिसकी आधी दुनियां में धूम है? मगर मैं बता ही चुकी हूं कि मैं चुदाई करवाती हूं तो एक रंडी की तरह ही करवाती हूं। चुदाई का पूरा मजा लेती भी हूं और पूरा मजा देती भी हूं।

रागिनी भी संदीप से चुदाई करवाते हुए बोल रही थी, “रगड़ संदीप और रगड़। यादगार बना आज की चुदाई। ऐसे धक्के लगा जैसे कुत्ता लगाता है कुतिया को चोदते वक़्त। ऐसे पकड़ लेता है कि कुतिया हिल भी नहीं पाती।” ये सुनते ही संदीप ने रागिनी की चूत में लंड की रफ़्तार बढ़ा दी और लम्बे-लम्बे धक्के लगाने लगा।”

रागिनी उसी मस्ती में बोली, “हां ऐसे ही संदीप। पूरा निकाल कर डाल संदीप, फुला दे मेरी चूत।”

असलम और संदीप बदल-बदल कर चुदाई कर रहे थे। जब संदीप का मोटा लंड चूत में जाता था तो चूत कुछ फ़ैल जाती थी और जब असलम का लंड जाता था तो पता चलता था कि कुछ-कुछ पूरी गहराई तक चूत में गया हुआ है।

मन कर रहा था ये चुदाई कभी बंद ही ना हो। बीस मिनट की चुदाई में मजा गया। हैरानी की बात थी संदीप और असलम अभी भी नहीं झड़े थे। मैंने सोचा इन मादरचोदों ने कही विआग्रा तो नहीं खा ली।

दोनों ने लंड हमारी चूतों में से निकाले और अपनी-अपनी जगह पर जा कर बैठ गए। संदीप कुर्सी पर बैठ गया और असलम सोफे पर बैठ गया। असलम ने अपना बियर का केन उठा लिया और संदीप ने अपना गिलास उठा लिया।

हम भी उठीं और जा कर सोफे पर बैठ गयी। रागिनी के मुंह से निकल गया, “कैसे चोदते हो सालो तुम लोग और ऊपर से झड़ते भी नहीं हो। मुझे तीन बार मजा आ भी चुका है।”

संदीप रागिनी की तरफ देखते हुए हंसते हुए बोला, “कैसे चोदते हैं? वैसे ही चोदते हैं जैसे तुम चुदवाना चाहती हो, कुत्ते की तरह – ऐसे पकड़ कर कि नीचे चुदाई कि वक़्त कुतिया हिल भी नहीं पाती।” संदीप की इस बात पर सब हंस दिए।

रागिनी जैसे अपने आप से बोली, “लगता है मेरी चूत तो फूलना शुरू हो गयी है।” फिर रागिनी मेरी और देखते हुए बोली, “आपकी चूत की क्या हालत है मालिनी जी।”

इससे पहले कि मैं रागिनी की बात का कोई जवाब देती, असलम बोला – मगर खुल कर बोला, “रागिनी अभी तो चूत फूलना शुरू हुई है, अभी तो फाड़नी बाकी है।”

मैंने असलम की तरफ देखते हुए कहा, वाह असलम ये हुई ना बात।” और फिर मैंने अपनी चूत को छूते हुए रागिनी की तरफ देखते हुए कहा, “मेरी चूत की भी वही हालत है जो तुम्हारी चूत की है।”

हम दोनों ने अपने-अपने गिलास उठा लिए और जिन की चुस्कियां लेने लगी। असलम और संदीप के लंड तो खड़े ही थे। हमारी चूतें भी पानी छोड़ ही चुकी थी। मैंने संदीप से पूछा, “अब संदीप?”

संदीप बोला, “मैडम अब मेरा इरादा तो अब पीछे से ही चूत और गांड चुदाई का है। और फिर आखिर में मुंह में।” फिर असलम की तरफ देखते हुए संदीप बोला, “असलम तुमने क्या करना है?”

असलम ने अपना हाथ मेरी चूत पर रखा और कहा, “जो ये कहें। हमें तो आज इनकी ही सेवा करनी है।”

संदीप उठते हुए बोला, “सही बोला असलम। तो फिर चलें?”

मैंने और रागिनी ने एक-दूसरे की तरफ देखा, और मैं बोली, “गांड में ही डालो अब।” फिर रुक कर बोली, “बारी-बारी से।” ये कह कर मैंने रागिनी की तरफ देखा और पूछा, “क्यों रागिनी?”

रागिनी ने भी हां में सर हिला दिया। हम दोनों फिर से चूतड़ उठा कर बेड के किनारे पर लेट गयी। संदीप मेरे पीछे आ गया और असलम रागिनी के पीछे चला गया। संदीप ने मेरे चूतड़ उठाए और एक झटके से लंड मेरी चूत में डाल दिया।

कुछ देर चूत की रगड़ाई करने के बाद संदीप ने क्रीम मेरी गांड के छेद पर लगाई और धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में बिठा दिया। मैंने रागिनी के तरफ देखा और बोली, “रागिनी संदीप ने तो लंड बिठा दिया मेरी गांड में, तुम कहां तक पहुंची?”

रागिनी ने जवाब दिया, ” मालिनी जी चूत तो चुद गयी अब असलम का पूरा लंड मेरी गांड में है। मालिनी जी सच बोलूं तो बड़ा मजा आ रहा है। मस्त है दूसरे सांड का लंड।”

जैसे ही दोनों सांडों ने लंड गांड में बिठा दिए हमने रबड़ के लंड उठा कर अपनी अपनी चूतों में डाल लिए। चूतों के बाद गांड रगड़ाई हो रही और इन भोसड़ी वालों के लंडों ने एक बार भी पानी नहीं छोड़ा था।

कुछ देर की गांड चुदाई बाद संदीप असलम से बोला, “असलम करें अदला-बदली?”

असलम बोला, “चलो।”

ये कह कर संदीप ने अपना मोटा लंड मेरी गांड में से बाहर निकाल लिया और रागिनी के पीछे चला गया। असलम मेरे पीछे आया। संदीप के मोटे लंड ने मेरी गांड का छेद फैला ही दिया था। असलम का लंड फिसल कर अंदर चला गया।

संदीप के मोटे लंड से गांड चुदाई का मजा तो आता था मगर असलम के लम्बे लंड का जलवा ही कुछ अलग था।

संदीप के मोटे लंड के चार-पांच धक्कों ने ही रागिनी को स्वर्ग दिखा दिया था। मैं तो पहले भी संदीप का लंड गांड में ले चुकी थी, मगर रागिनी की गांड में संदीप का मोटा डंडा पहली बार गया था। रागिनी जोर-जोर से सिसकारियां ले रही थी, “आह संदीप मजा आ गया। तुम्हारा लंड तो गांड में भी बड़ा मजा देता है। अब रगड़ो मेरी गांड को भी। पहले क्यों नहीं चोदी मेरी गांड।”

संदीप ने रागिनी की कमर पकड़ी और गांड में जोरदार धक्के लगाने लगा। रागिनी मस्ती में बोली,” हां संदीप ऐसे ही ही… और जोर से रगड़ो… फुला दो मेरी गांड।”

मैंने रागिनी के तरफ देखा। रागिनी की आखें बंद थी और वो जोर-जोर से चूतड़ आगे-पीछे कर रही थी। रागिनी की सिसकारियों से संदीप और भी मस्ती में आ गया और जोर-जोर से लम्बे-लम्बे धक्के लगाने लगा। तभी रागिनी एक जोर की सिसकारी ली , “आह संदीप… मेरी चूत फिर पानी छोड़ गयी… आह संदीप छोड़ना मत, मुझे चोद लो जितनी चोदनी है मेरी गांड… आह संदीप बड़ा मजा आ रहा है।”

मैं सोच रही थी ये क्या हो गया है रागिनी को। संदीप के मोटे लंड का इतना मजा आ रहा है इसको?

रागिनी के इस सिसकारी से मेरी अपनी चूत भी झड़ गयी और मुझे भी मजा आ गया। मैंने असलम से कहा , “असलम मेरी चूत का मजा फिर निकल गया। क्या जादू है सालो तुम लोगों की चुदाई में?” असलम ने ये सुना और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।

रागिनी की सिसकारियों के बीच संदीप ने रागिनी को कस कर कमर से पकड़ा हुआ था। संदीप और असलम को अदला-बदली का मौक़ा ही नहीं मिल रहा था। लेकिन मुझे असलम से ही गांड चुदवाने में ज्यादा मजा आ रहा था।

गांड चोदते हुए अब संदीप और असलम भी “आअह… आह… अब क्या चुदाई है। चुदाई क्या है या जन्नत है” जैसी बातें कर रहे थे।

संदीप बोल रहा था, “क्या मस्त गांड है रागिनी आपकी। एक-दम लंड जकड़ा पड़ा है।”

उधर असलम बोल रहा था, “मालिनी जी आपकी चूत तो मजा देती ही देती है, गांड भी कम नहीं है।”

फिर असलम ने मेरे चूतड़ों पर जोर का धप्प लगाते हुए कहा… आह मालिनी जी बस अब निकलने ही वाला है… आअह… आह।

मैं समझ गयी अब इन दोनों के लंड मलाई छोड़ने वाले है। मैं जोर-जोर से चूतड़ आगे-पीछे करने लगी। और वही हुआ। पंद्रह बीस जोरदार धक्कों से असलम का लंड पानी छोड़ गया। उसके मुंह से एक जोर की आवाज निकली, “ले मेरी मालिनी ले… गया तेरी गांड में।” और इसके साथ ही असलम के लंड की गर्म मलाई से मेरी गांड भर गयी।”

इतनी देर से घुटनों के बल लेटे मैं थक चुकी थी। जैसे ही असलम के लंड से पानी निकला और उसका लंड थोड़ा ढीला होना शुरू तो मैं आगे की तरफ ढेर हो गयी। असलम जा कर सोफे पर बैठ गया।

इसके पांच मिनट के बाद ही संदीप भी जोर से चिल्लाया, “ले रागिनी मेरी जान ले गया तेरी गांड में।”

चुदाई के मस्ती मैं असलम और संदीप हमें “जी” बुलाना ही भूल गए।

कुछ देर में संदीप ने भी लंड रागिनी की चूत में से निकाला और जा कर कुर्सी पर बैठ गया।

पहले रागिनी ही उठी और उठ कर बाथरूम की तरफ जाने लगी। तभी असलम भी उठ गया और रागिनी के चूतड़ों पर हाथ रख कर उंगली रागिनी की गांड में डाली और रागिनी के साथ साथ बाथरूम चला गया।

कुछ देर में मैं भी उठी और असलम और रागिनी को वहा ना देख कर मैंने संदीप से पूछा, संदीप कहां गए दोनों?”

संदीप हंसते हुए बोला, “मैडम दोनों बाथरूम गए हैं – इक्क्ठे।”

मैं भी हंसी और बोली, “लगता है असलम मुतवायेगा रागिनी से अपने लंड पर।”

संदीप ने पूछा , “मैडम आपने बताया था उनको कि मैंने आपसे अपने लंड पर मुतवाया था?”

मैंने कहा, “मैंने रागिनी को तो नहीं असलम को बताया था। असलम बोला था मजा आता होगा तभी कोइ मुतवाएगा अपने लंड पर। लगता है वही मजा लेने गया होगा।” मेरी फिर हंसी छूट गयी।

दस मिनट हो गए। वो दोनों अभी अंदर ही थे। मुझे भी पेशाब लगने लगा था।

मैंने संदीप से कहा, “संदीप बड़ी देर हो गयी इनको। मुझे भी पेशाब लग रहा है।”

संदीप बोला, “चूत में उंगली कर रही होंगी रागिनी जी। मजे लेने दीजिये उन्हें और पेशाब रोक कर रखिये। आपने भी तो मूतना है मेरे लंड पर।”

तभी रागिनी हंसती-हंसती बाथरूम से बाहर निकली। पीछे-पीछे असलम भी आ गया। मैंने पूछा, “क्या हुआ रागिनी, किस लिए इतनी हंस रही हो?”

“इसी से पूछ लीजिये।” रागिनी ने उसी तरह हंसते हुए असलम की तरफ इशारा कर दिया।”

असलम भी हंसने लगा, मगर बोला कुछ नहीं।

मैं उठी और बाथरूम की तरफ जाते-जाते बोली, “मुझे भी जोर का पेशाब लग रहा है।” फिर मैं संदीप की तरफ देखते हुए बोले, “चलो संदीप।”

संदीप खड़ा हो गया और रागिनी दोनों हंस दिए। बाथरूम में जा कर मैं टॉयलेट सीट पर बैठ गयी। संदीप बोला, “क्या हुआ मैडम आज मूतना नहीं लंड पर?”

संदीप से बोली, “संदीप पहले मेरी चूत पर मूत की धार डालो।” ये कह कर मैंने अपनी टांगें घुटनों से मोड़ी और उठा कर फैला दी। और टांगों के नीचे से हाथ डाल कर मैंने चूत की फांकें खोली और चूत भी फैला दी।

संदीप ने लंड पकड़ा और निशाना लगा कर मेरी चूत पर पेशाब की धार डालने लगा। गरम-गरम पेशाब जब मेरी चूत पर गिरने लगा तो मैंने दोनों हाथों से चूत की फांकें और चौड़ी कर दी। मूत की धार सीधी खुली चूत पर पड़ रही थी। अजीब सा ही मजा आ रहा था।

संदीप पेशाब कर के हटा तो मैं खड़ी हो गयी और संदीप बैठ गया, और टांगें चौड़ी कर के संदीप की गोद में बैठ गयी। पहले ही की तरह संदीप ने मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए और हाथ नीचे करके मेरी चूत मैं उंगली डालने लगा। मैने संदीप को कस कर पकड़ लिया और चूत ढीली छोड़ दी। मेरा पेशाब निकला और संदीप मेरी चूत थपथपाने लगा। छप छप की आवाज के साथ पेशाब निकल रहा था।

मेरा पेशाब निकला बंद हुआ तो मैं उठने लगी, मगर संदीप ने मुझे फिर बिठा दिया और मेरी चूत में उंगली से चूत का दाना रगड़ने लगा। मुझे लगा अगर संदीप ऐसा ही करता रहा तो मेरी चूत दुबारा गरम हो जाएगी। नीचे संदीप का लंड खड़ा हो कर मेरी चूतड़ों को छूने लगा।

तभी संदीप ने मुझे छोड़ दिया और मैं खड़ी हो गयी। संदीप उठा तो मैंने देखा उसका लंड फिर खड़ा ही चुका था। मैंने संदीप के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा, ”क्या हुआ संदीप ये फिर तैयार है?”

संदीप बोला, “मालिनी जी आपकी चूत की खुशबू ही इतनी मस्त है, मेरा लंड उसे सूंघते ही फिर हरकत में आ गया है।”

मैं हंसी और, हम बाहर आ गए। बाहर देखा तो असलम लेटा हुआ थी और रागिनी उसके ऊपर लेटी हुई थी। असलम का लंड रागिनी के मुंह में था और रागिनी की चूत असलम के मुंह पर थी। असलम ने रागिनी के चूतड़ पकडे हुए थे और अपना मुंह आगे पीछे करते हुए रागिनी की चूत चाट रहा था।

मैंने संदीप की तरफ देखते हुए कहा, “संदीप लेट जाओ।”

संदीप लेट गया। मैं रागिनी की ही तरह संदीप के ऊपर लेट गयी और संदीप का मोटा लंड अपने मुंह में ले लिया। संदीप ने मेरी चूत खोली और अपनी जुबान से मेरी चूत का छेद चाटने लगा।

रागिनी ने एक पल के लिए असलम का लंड अपने मुंह में से निकाला और मेरी तरफ मुंह करके बोली, “मालिनी जी आज की चुदाई मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी।”

इतना कह कर रागिनी ने फिर से असलम का लंड मुंह में ले लिया।

मैं सोचने लगी, “रागिनी सच ही बोल रही है। आज की चुदाई सच में ही यादगार चुदाई ही रहेगी।”

पंद्रह मिनट इस चुसाई चटाई में मेरी चूत पानी छोड़ गयी। मेरे मुंह से संदीप का लंड निकाला और मैंने एक सिसकारी ली, “आह संदीप मेरी चूत फिर पानी छोड़ गयी, मेरा फिर ने निकल गया।” इतना कह कर मैंने संदीप का लंड फिर मुंह में ले लिया।

कुछ ही देर मैं रागिनी भी जोर-जोर से हिलने लगी और हूं-हूं करने लगी। लगता था रागिनी को भी मजा आ गया था।
दस-पंद्रह मिनट ये चुसाई और चली। अचानक संदीप ने मेरे चूतड़ कस कर पकड़ लिए। मैं समझ गयी अब किसी भी वक़्त संदीप का लंड मलाई छोड़ सकता था। में संदीप के लंड की गर्म-गर्म मलाई पीने की लिये तैयार हो गयी।

तभी संदीप ने जोर की दहाड़ लगाई, “ले मालिनी ले मेरी रंडी साली चुदक्कड़।” और मेरा मुंह संदीप के लंड से निकली गरम-गरम मलाई से भर गया। मैंने संदीप की मलाई की एक एक बूंद गटक ली।

कुछ देर मैं ऐसे ही लेटी रही। जब संदीप का लंड ढीला हो हो गया तो मैं उसके ऊपर से उठी और जा कर सोफे पर बैठ गयी।
संदीप भी उठा और मेरे पास ही बैठ गया। संदीप ने मेरे मम्मे दबाते हुए कहा, “मैडम आज तो मजा ही आ गया। अब कब बनेगा ऐसा प्रोग्राम?”

मैंने कहा, “संदीप ये तो दुसरे सांड से पूछना पड़ेगा।” उस वक़्त मेरे ज़हन में नसरीन दूसरी गाये की तरह घूम रही थी।

तभी असलम के मुंह से एक जोरदार सिसकारी निकली, “आह भोसड़ी वाली रागिनी मेरी जान, मरी रंडी, ये लो निकला तेरे मुंह में।” असलम के चूतड़ जो से हिले और वो ढीला हो गया। रागिनी कुछ देर ऐसे ही असलम के ऊपर लेटी रही। मतलब उसने भी असलम के लंड से निकला सारा माल पी लिया था। रागिनी उठी और आ कर हमारे पास ही बैठ गयी।

रागिनी ने संदीप के होठों का एक चुम्मा ले कर कहा, क्या मस्त चोदते हो तुम लोग। झड़ने का नाम ही नहीं लेते तुम लोगों के लंड। मैं उठी और कपड़े पहनने लगी।

संदीप बोला, “क्या हुआ मालिनी जी, अभी तो साढ़े चार ही हुए हैं।”

साढ़े चार मतलब पांच घंटे चुदाई चली थी हमारी। मैंने कहा, “बस संदीप अब आज चुदाई के लिए और दम नहीं है।” फिर मैंने रागिनी की तरफ देखते हुए पूछा, “रागिनी तम्हें चुदवानी है?”

रागिनी बोली, “बस मालिनी जी अब हिम्मत नहीं। पता नहीं कितना चोदा यही आज इन लोगों ने। मेरी तो चूत, गांड, घुटने सब दुःख रहे हैं अब।”

फिर जैसे रागिनी अपने आप से ही बोली, “आज क्या मेरी तो चार दिन चुदवाने की भी हिम्मत नहीं है।” ये कह कर वो भी उठी और कपड़े पहनने लगी।

असलम भी उठ गया और बोला, “संदीप भाई आज का प्रोग्राम लाजवाब था। मैं आज की चुदाई नहीं भूलूंगा।”

संदीप बोला, “अब कब का प्रोग्राम है असलम?”

असलम बोला, “अभी तो कुछ कह नहीं सकता। जब बनेगा तो मालिनी जी को बताऊंगा।” कह कर उसने भी कपड़े पहन लिए।

संदीप भी उठा और कपड़े पहन कर बोला, “अब बताईये मालिनी जी अब क्या प्रोग्राम है? कुछ खाना या हल्का-फुल्का नाश्ता?”

मैंने कहा, “नहीं संदीप अब चलेंगे। बहुत टाइम हो गया है। आगे-पीछे सब जगह से थकी भी हुई हूं। जा कर नहा कर सोऊंगी।”

पांच घंटे की लगातार हुई चुदाई से थक तो सारे ही चुके थे। हम लोग उठे और बाहर आ गए और रागिनी की कार में बैठ गए। कार चलाते हुए रागिनी बोली, मालिनी जी आज का प्रोग्राम तो सच में ही याद रहेगा।”

फिर शीशे में असलम को देखते हुए बोली, “असलम तुमसे चुदाई करवा के मजा आ गया। तुम्हरा लंड गांड में डलवाने का तो मजा ही कुछ और है। पूरा अंदर तक जाता है।”

असलम हंस पड़ा। मैंने कहा, “बस कर रागिनी। कहीं फिर न तेरी चूत गरम हो जाए। और चुदवाने का मन है क्या?”

रागिनी बोली, “नहीं मालिनी जी अब दम नहीं हैं। लेकिन असलम की चुदाई है बहुत मजे वाली।”

ऐसे ही बातें करते करते हम असलम की होटल पहुंच गए। असलम उतरा और बोला, “मालिनी जी, रागिनी जी आज की चुदाई याद रहेगी।”

रागिनी असलम से बोली, “असलम कब तक हो यहां?” शायद एक बार और चुदवाने का मन था रागिनी का।

असलम बोला, “बस रागिनी जी, कल भर का काम है , परसों की गाड़ी से वापस जा रहा हूं। दिन का ही काम है।”

मैंने कहा, “चलो असलम चलते हैं जाने से पहले फोन कर लेना।”

असलम जाने की लिए मुड़ गया और रागिनी ने गाड़ी स्टार्ट कार दी।

क्लिनिक पहुंच मैं कार से उतरी और रागिनी से बोली, “अंदर आओ रागिनी।”

रागिनी बोली, “नहीं मालिनी जी आज नहीं। बहुत थकान सी हो रही है। अभी तो जा कर आलोक से भी चुदवानी। तीन दिनों से वो काम से लेट आ रहा और आते ही सो जाता था। आज अगर टाइम पर आ गया नहीं चोदे बिना नहीं मानेगा।” ये कह कर रागिनी हंस दी।

मैंने भी कहा, “चलो फिर आना किसी दिन। और हां मानसी को भेजना किसी दिन। उससे पूछूं उसका कैसा चल रहा है।”

“जरूर मालिनी जी ” कह कार रागिनी ने गाड़ी स्टार्ट कर दी और मैं ऊपर चली गयी। मैंने प्रभा को बुला और कुछ हल्का नाश्ता तैयार करने को कहा और नहाने चली गयी। आज हल्का खा कार जल्दी सोने का मन था।

संदीप के यहां चुदाई के बाद जब हम वापस आ रहे थे, तो मैंने असलम से कहा था कि जाने से पहले मुझे फोन करे। असल में मैं असलम से एक बार और चुदाई करवाना चाहती थी।

क्या मस्त चुदाई करता है ये असलम। सोमवार शाम को असलम का फोन आया, “मालिनी जी नमस्ते मैं मंगलवार रात की गाड़ी से वापस आगरा जा रहा हूं। आपने कहा था जाने से पहले आपको मिलता जाऊं।” फिर थोड़ा रुक कर बोला, “वैसे मालिनी जी अगर आप ना भी कहती तो भी आपसे मिलने जरूर आता, आपकी चिकनी गांड चाटनी है।”

चिकनी गांड चाटनी है, वाह! मैं तो तैयार ही थी – गांड चटवाने एक और चुदाई करवाने में हर्ज ही क्या है? ना तो कानपुर का रहने वाला है। कोइ रिस्क नहीं। लंड भी ऐसा है जैसा सब का नहीं होता “कलाई जितना मोटा और आधे हाथ जितना लम्बा।”

मैंने कहा, “ठीक है असलम आ जाओ। तुम्हारी अम्मी के बारे में ही बात करनी है।”

असलम बोला, “ठीक है मालिनी जी, कल सुबह दस बजे पहुंचता हूं।”

मंगलवार ठीक दस बजे असलम मेरे क्लिनिक में पहुंच गया। दुआ सलाम के असलम बोला, “मालिनी जी अम्मी के बारे में क्या बात करनी है? कुछ ख़ास बात है क्या?”

मैंने कहा, “हां असलम ख़ास ही समझो।” मैंने प्रभा को कुछ चाय-नाश्ता लाने को बोल दिया।

हम दोनों दो दिन पहले हुई चुदाई की बात करते रहे। असलम बोला, “मालिनी जी ये दो गाये और दो सांड वाला प्रोग्राम तो बड़ा मस्त था।। कभी मौक़ा मिले तो फिर बनाइये ऐस ही कोइ प्रोग्राम।”

मैंने कहा, “देखते हैं, कोइ नयी गाये मिले तो बनाते हैं।” ये दूसरी गए वाली बात मैंने जान बूझ कर बोली थी।

असलम बोला, “मालिनी जी रागिनी भी तो मस्त चुदाई करवाती है। पूरा लंड लेती है चूत में भी गांड में भी।”

मैंने कहा, “वो तो ठीक है असलम। लेकिन फिर भी जैसे रोज-रोज एक ही दाल खाने से उस दाल को खाने का मजा खत्म हो जाता है, इसी एक ही तरह की चुदाई का प्रोग्राम बार-बार दोहराने से उसका भी मजा खत्म हो जाता है।”

दस मिनट में प्रभा चाय लेकर आ गयी। चाय की चुस्कियां लेते हुए मैंने असलम से कहा, “असलम चलो अब काम की बात करते हैं।”

मैं कुछ रुक कर बोली, “देखो असलम औरत अगर जवानी में बेवा हो जाए तो साफ है कि चुदाई बंद हो जाती हैं। ऐसे में अगर दुबारा चुदाई ना हो तो धीरे-धीरे औरत की चुदाई की इच्छा मर जाती है। लेकिन अगर कहें चुदाई फिर से शुरू हो जाए तो फिर उस औरत को चुदाई चाहिए ही होती है, जब तक उम्र ही इतनी ना हो जाए की चुदाई करवाने का मन ही ना करे।”

असलम मेरी तरफ देख रहा था, मैंने बात जारी रखते हुए कहा, “मगर तुम्हारी अम्मी की उम्र भी अभी इतनी नहीं है, कि चुदाई करवाने का मन ना करे। दूसरा, तुम्हारे अब्बू बशीर के इंतकाल के बाद तुम्हारी अम्मी नसरीन जमाल और तुमसे हर तरह की चुदाई करवा चुकी है, हर जगह तुम दोनों का लंड ले चुकी है – चूत में भी, गांड में भी और मुंह में भी।”

“हालांकि नसरीन के पास चूत में लेने के लिए मेरे दिए हुए रबड़ के लंड हैं, मगर बात वहीं आती है। रबड़ का लंड चूत का पानी तो छुड़वा सकता है, मगर असली चुदाई जैसा मजा नहीं दे सकता, और तुमसे वो अब चुदाई करवाना नहीं चाहती।”

असलम ने हां में सर हिलाया। “असल में मर्द जब औरत के ऊपर लेट कर उसे बाहों में लेकर उसकी चूत में अपना लंड डालता है, उसकी चुदाई करता है, उसका मजा अलग ही होता है। और वो पीछे की चुदाई? जब मर्द के टट्टे औरत के चूतड़ों से टकराते है तो औरत को चुदाई का दुगना मजा आता है। इसके अलावा मर्द के लंड की गरम गरम मलाई जब चूत, गांड या मुंह में जाती है – असलम ये सब रबड़ के लंड से तो नहीं मिलता। असलम तुम भी तो अपनी अम्मी की ऐसी ही चुदाई करते हो।”

असलम ने फिर से सर हिला दिया। फिर मैंने असलम से कहा, “असलम अब तुम मुझे ही देख लो। मेरे पास हर तरह के लंड और चूत गांड में डालने के लिए दुनियां भर के दूसरे खिलौने है, चूत मे लेने वाला भी, गांड में लेने वाला भी और चूत का दाना चूसने वाला भी। मगर फिर भी मैं मर्दों से चुदवाती हूं, और मस्त चुदवाती हूं।”

फिर मैंने हंसते हुए असलम के लंड को हल्का सा छुआ और बोली, “तुम तो देख ही चुके हो असलम।”

असलम मुस्कुरा दिया और मेरा हाथ अपने लंड पर दबा दिया। अब असलम मेरी बात ध्यान से सुन रहा था। मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “मैं समझती हूं कि नसरीन भी किसी मर्द से चुदवाई करवाना चाहती है। उसे मर्द के नीचे लेट कर चुदाई चाहिए। मस्त चुदाई जिसमें चूतड़ अपने आप ही हिलने लग जाते हैं। नसरीन को लंड चाहिए चूत में गांड में और मुंह में। असलम तुमसे अब वो चुदाई करवा नहीं चाहती – निकहत के होते हुए उसे ये अच्छा नहीं लगता। मैं समझती हूं उसकी इस सोच में कोइ बुराई भी नहीं है। आखिर को निकहत है तो उसकी बेटी ही।”

मैंने बोलना जारी रक्खा, “असलम अब या तो नसरीन की तुम्हारे साथ चुदाई पहले की ही तरह शुरू हो जाये, या फिर किसी और मर्द के साथ उसकी चुदाई होने लग जाए। मगर तुम बता ही चुके हो कि आगरा में चुदाई का जुगाड़ हो नहीं सकता।” ये कह कर मैं चुप हुई।

असलम बोला, “मालिनी जी बात तो यही है, लेकिन इसका कोइ हल भी तो नहीं। मगर मालिनी जी मुझसे अम्मी की ये उदासी देखी नहीं जाती।”

फिर दुबारा असलम बोला, “मालिनी जी का किया जाए इसका कोई हल भी तो नहीं है, और मुझसे अम्मी की ये उदासी देखी भी नहीं जाती?”

मैंने कहा, “असलम इसका हल तो तुम्हें ही ढूंढना होगा। तुम्हारे अब्बू का कोइ रिश्तेदार, या तुम्हारा ही कोइ जानकार? अगर कोइ जमाल की तरह ऐतबार वाला हो तो बात बन सकती है।”

असलम बोला, “नहीं मालिनी जी, मुझे इसमें खतरा लगता है।”

मैंने फिर कहा, “फिर तो असलम, इसका एक हल तो है। मगर पहले तुम्हें मेरे कुछ सवालों का जवाब देना होगा।”

असलम मेरी तरफ देखने लगा। मैंने कहा, “असलम पहली बात तो ये है कि क्या निकहत तीन चार दिनों के लिए अपने मायके जा सकती है किसी को कोइ एतराज तो नहीं होता?”

असलम बोला, “नहीं-नहीं मालिनी जी निकहत तो वैसे भी महीने में एक-दो बार अपने मायके जाती ही है, दो-तीन दिन रहने के लिए। उल्टा वो लोग तो कहते है निकहत उनकी इकलौती बेटी है, उसे महीने में चार-पांच दिन के लिए रहने के लिया भेज दिया करूं।”

मैंने कहा, “असलम अब एक जरूरी सवाल है, हो सकता है तुम्हें ये कुछ अजीब सा सवाल लगे।”

असलम कुछ हैरान हुआ मगर बोला, “पूछिए मालिनी जी।”

मैंने कहा, “फर्ज़ करो असलम, जमाल दुबई से आये और तुम्हारी अम्मी कहे कि उसने जमाल से चुदाई करवानी है, या फिर तुम दोनों से इकट्ठे चुदाई करवानी है। या मान लो तुम ही अपनी अम्मी से कहो कि तुम और जमाल इकट्ठे उसे चोदना चाहते हो – या जमाल ही ऐसा कह दे तो?”

इस बार असलम कुछ देर सोचता रहा और फिर बोला, “मालिनी सवाल तो बड़ा ही टेढ़ा है मगर, अगर ऐसा होता ही है और अम्मी की भी ऐसी ही मर्जी हो तो मुझे क्या एतराज हो सकता है। मुझे और जमाल को तो मालूम ही है कि हम दोनों अम्मी को चोदते हैं। अम्मी को भी ये बात मालूम ही है। अगर अम्मी मान जाती है तो मैं और जमाल इकट्ठे अम्मी को चोद देंगे। एक नया तजुर्बा हे हो जाएगा।”

मैंने अपनी कुर्सी थोड़ी आगे सरकाई और असलम का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा, “असलम अब एक मिनट के लिए फर्ज़ करो, जमाल की जगह संदीप हो और नसरीन को तुमसे और संदीप से इकट्ठे चुदाई करवाने में कोइ एतराज ना हो तो?” असलम बोला, “मालिनी जी?” असलम ने अपनी बात अधूरी ही छोड़ दी।

मैंने फिर कुर्सी पीछे की और कहा, “हां असलम, मैं यही कह रही हूं। दूसरी गाये अगर नसरीन बन जाए तो? अगर ऐसा हो जाए तो बस तुम्हें और नसरीन को चार पांच छह महीने में एक बार यहां आना होगा। एक बार मोटे लंड की रगड़ाई वाली चूत और गांड की चुदाई छह महीने के लिए नसरीन की चूत और गांड तसल्ली कर देगी। और फिर बाकी दिनों के लिए रबड़ के लंड तो अपना काम करेंगे ही।”

अब असलम कुछ सोच में डूब गया। मैंने भी असलम को सोचने दिया। कुछ देर सोचने के बाद असलम बोला, “मगर मालिनी जी अम्मी मान जाएगी?”

मैंने कहा, “इसका मतलब तुम्हें कोइ एतराज नहीं। रही नसरीन की बात तो वो तुम मुझ पर छोड़ दो। वैसे असलम, इसके बिना कोइ चारा भी नही है। तुमसे तुम्हारी अम्मी तुमसे चुदाई करवाना नहीं चाहती, आगरा में कोइ चुदाई का जुगाड़ हो नहीं सकता। अब तुम खुद ही सोचो तुम्हारी अम्मी की चूत और गांड की आग ठंडी करने का और क्या रास्ता हो सकता है?”

असलम बोला, “आपकी बात ठीक है मालिनी जी, अगर यही रास्ता है तो ठीक है।”

फिर असलम बोला, “चार-छह महीने में नई दुकान के सामान के काम से अब मेरा कानपुर का चक्कर अब लगता ही रहेगा। अगली बार मैं अम्मी को भी साथ लेता आऊंगा।”

“नई चमड़े के सामान की दुकान वैसे भी अम्मी की देख-रेख में चलेगी। मुझे तो पुरानी दुकान से ही अब फुरसत नहीं मिलती। पहले मैं सोच रहा था निकहत को नई दुकान का काम देखने दिया जाए, मगर निकहत मानी नहीं। अम्मी भी इस बात के लिए राजी नहीं हुई। अम्मी का कहना था निकहत बहुत खूबसूरत है और उम्र की भी छोटी है। अम्मी को निकहत का दुकान पर बैठना ठीक नहीं लगा।”

“मालिनी जी अम्मी की बात मुझे भी समझ में आ गयी और मैंने अम्मी से कहा के फिर वो ही दुकान का काम संभाल लें। रोज़ दुकान पर जाने की जरूरत नहीं। कभी-कभी दो दिन तीन बाद दुकान पर चली जाया करें और अगर कुछ सामान मंगवाना है तो उसकी लिस्ट बनवा लिया करें और किस तरह का सामान चाहिए ये भी देख लिया करें।”

“मेरी इस बात के लिए अम्मी मान गयी। सो मालिनी जी, इसी बहाने जब भी मेरा कानपुर का चक्कर लगना होगा, मैं अम्मी को भी साथ ले आया करूंगा।”

मैंने कहा, “चलो एक बात तो तय हो गयी की नसरीन तुम्हारे साथ यहां आ सकती है। अब रही तुम्हारे सामने संदीप से चुदाई। वो मैं दो गाये और दो सांड वाली बात नसरीन से करूंगी।”

फिर मैंने कहा, “अब कब प्रोग्राम बनना है तुम्हारा?”

असलम बोला, “अभी दूकान शुरू ही हुई है। देखना है किस तरह का सामान ज्यादा बिकता है इस लिए कुछ टाइम तक तो सामान के लिए जल्दी-जल्दी आना पड़ेगा। हो सकता है मालिनी जी अगला प्रोग्राम अगले महीने ही बन जाए।”

मैंने कहा, “तो फिर ठीक है असलम, अगले महीने साथ अपनी अम्मी को भी लेते आना। अब चलो अंदर मेरी चूत और गांड की रगड़ाई करो।”

असलम भी उठ खड़ा हुआ। वो तो लगता था चुदाई करने के लिए मुझसे भी ज्यादा उतावला हो रहा था।

अंदर आ कर मैंने कपड़े उतरे और बेड पर बैठ गयी, “चलो असलम उतारो कपड़े और चुसवाओ लंड।”

असलम ने कपड़े उतारे और मेरे सामने खड़ा हो गया। मैंने भी असलम का लंड मुंह में ले लिया। थोड़ी चुसाई मैं ही मेरी चूत गरम हो गयी। मैंने लंड मुंह से निकाला और असलम से बोली, चलो असलम दिखाओ अपने लंड का जलवा।” ये कह कर मैं बेड के किनारे पर उलटा लेट गयी।

असलम मेरे पीछे आया और कुछ देर चूत और गांड चाटने के बाद खड़ा हो गया और चूत पर लंड ऊपर नीचे करते हुए चूत का छेद ढूंढने लगा। मैंने सर मोड़ कर असलम से कहा, “असलम चूत के बाद गांड में भी डालना है, क्रीम तो ले आओ अलमारी में से।”

असलम बोला, “मालिनी जी क्रीम की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।” ये कह कर असलम ने एक झटके से लंड मेरी चूत में बिठा दिया और धक्के लगाने लगा। असलम के बड़े-बड़े टट्टे चूत पर टकराने से ठप्प-ठप्प की आवाजें हो रही थी।

पंद्रह मिनट चली इस चुदाई मैं दो बार मेरा पानी छूट गया। असलम ने लंड चूत में से निकाला, ढेर सारा धूल मेरी गांड पर डाला और एक ही बार में लंड गांड के अंदर बिठा दिया। अब थूक में क्रीम जितनी चिकनाई तो होती नहीं। असलम के मोटे लम्बे लंड का झटका लगने से कुछ दर्द तो हुई, मगर मजा भी बहुत आया।

दस बारह मिनट की चुदाई के बाद असलम के लंड में से गरम-गरम चिकना पानी मेरी गांड में निकल गया। असलम कुछ देर ऐसे ही खड़ा रहा और फिर लंड निकाल कर खड़ा हो गया। मैं भी सीधी हुई और खड़ी हो गए।

असलम बोला, “चलिए मालिनी जी मूतिये मेरे लंड पर।”

मैं हंसी और बाथरूम की तरफ चल दी। असलम भी मेरे पीछे पीछे आ गया। बाथरूम में जा कर मैं टॉयलेट सीट पर बैठ गयी। मुझे टॉयलेट सीट पर बैठता देख कर असलम बोला, “क्या हुआ मालिनी जी आज नहीं मूतना मेरे लंड पर?”

मैंने कहा, “मूतना है असलम, पहले तुम तो मूत लो मेरी चूत पर।” ये कह कर दोनों हाथों से चूत की फांकें फैला कर गुलाबी चूत खोल दी। असलम ने लंड पकड़ा और निशाना लगा कर मेरी चूत पर पेशाब की धार डाल दी।

जब असलम के लंड से मूत निकलना बंद हुआ तो मैं उठ गयी और असलम सीट पर बैठ गया। मैं टांगें चौड़ी करके असलम के लंड पर बैठ गयी, असलम ने हाथ नीचे करके हाथ मेरी चूत पर रख दिया। मैंने चूत ढीली की और ढेर सारा पेशाब असलम के लंड पर निकाल दिया।

फारिग हो कर, कपड़े पहन कर हम क्लिनिक में आ गए। असलम बोला, “मालिनी जी बड़ा मजा अत है आपको चोदने में। पता नहीं क्या जादू है आपकी चुदाई में। ये मूतने वाला काम तो मैं भी करूंगा निकहत के साथ और अगर मौक़ा मिला तो अम्मी के साथ भी।”

मैं हंसी, “ठीक है असलम कर लेना मगर निकहत से पहले पूछ लेना। अगर वो माने तभी मूतना या मुतवाना। निकहत घरेलू लड़की है। हो सकता है उसे ये अच्छा ना लगे।”

असलम बोला, “निकहत की चुदाई के मजे में यही घरेलूपन तो आड़े आ जाता है। आप ही इसमें कुछ कर सकती हैं। आप ही उसे समझा सकती हैं कि लड़की को चुदाई एक रंडी की तरह करवानी चाहिए। चुदाई का पूरा मजा लेना भी चाहिए, मर्द को पूरा मजा देना भी चाहिए।”

मैंने कहा, “समझ गयी असलम। अगर अम्मी के साथ बात बने तो उनके साथ ये मूतने वाला काम कर लेना। निकहत की साथ देखेंगे क्या हो सकता है।”

असलम बोला, “ठीक है मालिनी जी ये मूतने वाला काम तो मैं निकहत से बात बात करके ही करूंगा, मगर मुझे मालूम है वो नहीं मानेगी, मगर अम्मी को कोइ एतराज नहीं होगा – ये मुझे मालूम है।”

फिर वो उठते हुए बोला, अब मैं चलता हूं मालिनी जी सफर तैयारी भी करनी है।”

मैंने असलम को पकड़ा और उसके होठ चूसे और बोली, “चलो शंकर छोड़ देगा तुम्हे होटल में।”

मैंने बाहर आ कर शंकर को असलम को होटल छोड़ने के लिए बोल दिया। असलम के जाने के बाद मैं सीधे ऊपर चली गयी। सुबह-सुबह की चूत और गांड चुदाई के कारण थकान सी हो गयी थी। थोड़ा लेटने का मन था।

ठीक डेढ़ महीने के बाद एक दिन असलम का फोन आ गया।

मैंने बोला, “हेलो असलम कैसे हो?” असलम बोला, “नमस्ते मालिनी जी, हम लोग, मैं और अम्मी इस मंगलवार शाम को पहुंच रहे हैं। कुल मिला कर चार दिनों का प्रोग्राम है, मंगल को तो हम पहुंचेंगे ही। शनिवार को रात की गाड़ी से वापिस जायेंगे। मेरा दो दिन का काम है जो मैं बुद्ध बृहस्पतिवार को निबटा दूंगा शुक्रवार को दो गाये और दो सांड का प्रोग्राम बनाएंगे अगर अम्मी मान गयी तो। शनिवार रात की गाड़ी है।”

ठीक है असलम आ जाओ, बाकी बातें जब यहां पहुंचोगे तभी करेंगे। और सुनो इस बीच तुम्हारी चुदाई हुई नसरीन के साथ?”

असलम बोला, “नहीं मालिनी जी, चुदाई तो नहीं हुई मगर एक दिन अम्मी खुद ही मेरे पास आ गयी और बोली चल असलम आज तुझे चूस कर मजा देती हूं।”

“बस मालिनी जी उस दिन हम दोनों ने एक-दूसरे की ऊपर लेट कर चूस-चाट कर एक-दूसरे का पानी छुड़ाया, मगर चुदाई अम्मी ने नहीं करवाई, अम्मी ने चुदाई के लिए साफ ही ना कर दी।

मैंने कहा, “ठीक है असलम आ जाओ, बाकी बातें बाद में करेंगे।”

बुधवार सुबह दस बजे असलम का फोन आ गया, “मालिनी जी कल रात हम लोग पहुंच गए थे। आज साढ़े दस ग्यारह बजे तक मैं अम्मी को आपके पास छोड़ कर शाम तक अपना काम निबटा लूंगा। बृहस्पीतवार को जहां-जहां हम सामान लेते हैं और कैसा सामान लेते हैं वो भी एक बार अम्मी को भी दिखा दूंगा। और शुक्र का दिन आपके लिए है ही, शनि को रात की हमारी वापसी की गाड़ी है।”

मैंने कहा, “ठीक है असलम मैं इंतज़ार करूंगी। और असलम, निकहत तो यहां होगी नहीं, तुम्हें दो वियाग्रा भी दे दूंगी। एक आज रात के लिए दूसरी शुक्रवार के लिए अगर दो गायों और दो सांडों वाली बात ना बनी तो खा कर चोदना अपनी अम्मी को। वैसे असलम मुझे यकीन है मैं नसरीन को मना लूंगी उस चुदाई के लिए।”

ग्यारह बजे असलम आ गया। नसरीन साथ ही थी। नसरीन थोड़ी पतली हो गयी थी। रेगुलर चुदाई ना होने की हल्की उदासी उसके चेहरे पर झलक रही थी, मगर नसरीन सुन्दर और सेक्सी अभी भी उतनी ही थी जितनी वो हमारे पहली मुलाकात के दौरान थी। मुझे देखते ही नसरीन की आखों में एक चमक आ गयी। लगता है मेरे अलग तरह के चूत गांड के मजे लेने वाले खिलौने उसकी आखों के आगे घूम गए थे।

आधा घंटा बैठे के बाद के बाद असलम बोला, “मालिनी जी मैं चलता हूं। चार-पांच बजे तक काम निबटा कर आता हूं। अम्मी यही हैं आपके पास।”

मैंने हंसते हुए कहा, “फ़िक्र मत करो असलम, पूरा-पूरा ख्याल रक्खूंगी मैं तुम्हारी अम्मी का। और हां, मैं शंकर को तुम्हारे साथ भेज देती हूं, जहा-जहां जाना होगा वो ले जाएगा। कहां बसों और ऑटो के चक्कर लगाते रहोगे। कानपुर की सड़कों का बड़ा बुरा हाल है।”

असलम बोला, “अरे मालिनी जी रहने दीजिये, क्यों तकलीफ करती है। मैं घूम लूंगा।।”

मैंने कहा, “कोई बात नहीं।” मैंने शंकर को बुला कर असलम को ले जाने के लिए बोल दिया।”

मेरी बात “फ़िक्र मत करो असलम पूरा-पूरा ख्याल रक्खूंगी मैं तुम्हारी अम्मी का” सुन कर नसरीन हल्का सा शर्मा गयी थी।

मैंने प्रभा को चाय नाश्ता लाने के लिए बोल दिया। प्रभा खाली बर्तन भी उठाने तब तक नहीं आते थी, जब तक मैं उसे बुलाती नहीं थी।

असलम चला गया और मैंने नसरीन का हाथ अपने हाथ में लेते हुए पूछा, “और सुनाओ नसरीन जिंदगी की गाड़ी कैसे चल रही है? असलम बता रहा था तुम लोगों ने अपने दुकान के साथ वाली दुकान भी खरीद ली है?”

नसरीन बोली, “जी मालिनी जी। पुरानी दूकान का काम भी बदल लिया है, और नाम भी। अब वहां जूतों का शोरूम है। करनाल के लिबर्टी वालों की एजेंसी है। अब दुकान का नाम है शाहजी शूज़। और मालिनी जी असलम ने गाड़ी भी ले ली है, बड़ी वाली गाड़ी।”

मैंने कहा, “वह नसरीन ये तो बड़ी अच्छी बात है। निकहत का क्या हाल है?”

नसरीन बोली, “निकहत ठीक है मालिनी जी, दोनों बड़े खुश हैं।”

मैंने नसरीन का हाथ दबाते हुए पूछा, “और असलम के साथ तुम्हारा कैसा चल रहा है?”

मैंने फैसला किया कि मैं नसरीन को असलम और उसके बीच कैसा चल रहा है, उसके बारे में कुछ नहीं बताऊंगी।

नसरीन थोड़ी सी उदासी के साथ बोली, “ठीक चल रहा है मालिनी जी।”

मैंने नसरीन का हाथ थोड़ा और दबाते हुए कहा, “नसरीन असलम के साथ चुदाई होती है तुम्हारी?”

नसरीन धीरे से बोली, “नहीं मालिनी जी चुदाई तो नहीं होती?”

फिर कुरेदते हुए पूछा, “क्यों? क्या बिल्कुल भी नहीं होती?”

नसरीन बोली, “बस मालिनी जी, एक बार ही हुई है।”

मैंने पूछा, “ऐसा क्यों नसरीन एक-दम चुदाई कैसे बंद हो गयी? क्या निकहत अपने मायके रहने के लिए नहीं जाती? क्या असलम नहीं चोदता तुम्हें या तुम ही नहीं चुदवाती असलम से?”

मैंने फिर से पूछा, “और वो एक बार भी कैसे हुई नसरीन?”

नसरीन कुछ नहीं बोली।

मैंने फिर कहा, “बताओ नसरीन, वो एक बार की चुदाई कैसे हो गयी जबकि तुम असलम से चुदाई करवाती ही नहीं। क्या असलम ने जबरदस्ती की?”

मुझे तो असलम उस एक बार की चुदाई के बारे में बता ही चुका था, मगर मैं नसरीन के मुंह से सुनना चाहती थी। चूत चुदाई के मामले में मैं ही कौन सी कम ठरकी हूं।

नसरीन ने एक बार चूत खुजलाई और बोली, “असल में मालिनी जी एक बार निकहत दो दिन के लिए मायके गयी हुई थी। उस दिन, दिन में ही मेरा चूत का पानी छुड़ाने का बहुत मन हो रहा था। मेरा दिल कर रहा था असलम से कहूं, आजा बेटा असलम अपने अम्मी की चूत की आग ठंडी कर दे। मगर वही बात, मेरा मन नहीं मान रहा था।”

“मैं कमरे में गयी और सलवार उतार कर रबड़ का लंड चूत में डाल लिया। अभी मैंने लंड चूत में ठीक से बिठाया भी नहीं था कि तभी असलम वहां आ गया और और मेरी चूत में से लंड निकाल कर बोला, ”क्या हुआ अम्मी चुदाई करवाने का मन हो रहा है? मालिनी जी ये कह कर असलम ने अपना पायजामा और अंडरवियर उतारे, मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया लगा दिया और मेरी टांगें चौड़ी कर के मेरे चूत में लंड डालने लगा।”

“मैंने टांगें फिर से बंद कर ली और असलम से बोली, “नहीं असलम अब तुमसे चुदाई नहीं, अगर तुम्हार साथ एक बार चुदाई शुरू हो गयी तो फिर रुकना मुश्किल हो जाएगा। अब यहां, इस घर में मेरी तुम्हारी ना ही हो तो अच्छा है।”

असलम मेरे ऊपर से नहीं उतरा और मुझसे बोला, “अम्मी अगर इस घर अगर मेरी आपकी चुदाई नहीं हो सकती तो मैं कहीं बाहर जगह ढूंढता हूं। फिर असलम बोला, अम्मी आज तो चुदाई करवा लो। आपके चूत गर्म हुई पड़ी है चूत के पानी भरी पड़ी है। इसे लंड चाहिए ही आज वो भी अभी।”

“अब मालिनी जी उस वक़्त चूत तो मेरी गर्म थी ही, ना ही मैंने असलम से चुदाई ना करवाने की कसम ही खाई हुई थी। मैंने असलम से कह दिया ठीक है असलम कर ले आज चुदाई। मगर ऐसी चुदाई कर कि चूत और गांड दोनों की तसल्ली हो जाए। असलम सच बताऊं निकहत के कारण मन नहीं मानता, मगर तुझसे चुदाई करवाने का मन भी बहुत करता है। कोइ ठीक जगह मिल जाए तो अच्छा है, मगर ध्यान रखना कोइ खतरा ना हो। चल उतर मेरे ऊपर से और कपड़े उतारने दे। तू भी कपड़े उतार और मस्त चुदाई कर अपनी अम्मी की।”

“मालिनी जी इसके बाद मैं के किनारे चूतड़ पीछे करके लेट गयी। असलम ने मेरी चूत और चूतड़ खूब चूसे चाटे। उस दिन तो मेरी और असलम की ऐसी चुदाई हुई कि मालिनी जी क्या बताऊं। असलम के साथ चली एक घंटे तक चुदाई में मेरी चूत तीन बार पानी छोड़ गयी। एक बार असलम के लंड का भी पानी छूट गया। उस दिन असलम ने मेरी गांड की भी मैंने खूब रगड़ाई की और आखिर में मेरे मुंह में अपने लंड का पानी निकाल दिया।”

“मैं बिस्तर पर लेट गयी। असलम भी मेरे पास ही लेट हुआ था। असलम अपने लंड को अपनी हाथ से मसल रहा था।”

असलम ने मुझसे से पूछा, “अम्मी अभी हो गया या और चुदाई करवानी है?”

नसरीन बोल रही थी , “मालिनी जी क्या बताऊं पता नहीं मुझे क्या हो गया था। मेरा मन एक बार और चुदने का हो रहा था। मैंने उठते हुए असलम से कहा, असलम मैं पेशाब करके आती हूं फिर देखते हैं। असलम समझ ही गया कि मैं अभी और चुदाई करवाना चाहती थी।”

नसरीन अपनी और असलम की चुदाई की कहानी सुना रही थी और मेरी चूत पानी छोड़ती जा रही थी। मैंने नसरीन की चूत में और अंदर तक उंगली डाली और उसे पकड़ कर उसके होठों पर एक जोरदार चुम्मा लिया और बोली, “नसरीन तेरी और असलम की चुदाई सुन कर मेरा अपना मन उससे चुदाई करवाने का होने लगा है – चल तू बता आगे क्या हुआ, हुई एक और चुदाई?”

नसरीन बता रही थी, “मालिनी जी मैं पेशाब करके आयी और हमारी एक चुदाई और हो गयी। बस मालिनी जी ये समझिये की वो चुदाई हमारी आख़री चुदाई ही थी।”

फिर नसरीन कुछ देर चुप रही और फिर बोली, “मालिनी जी असलम तो कभी-कभी, जब कभी निकहत अपने मायके गई होती है मुझे चुदाई के लिए बोलता है। मगर मेरा ही मन नहीं मानता। मुझे लगता है निकहत हमारी चुदाई देख रही है।”

मैंने नसरीन से पूछा, “नसरीन सच-सच बताना, क्या तुम्हारा मन चुदाई का नहीं करता?”

नसरीन कुछ रुक कर बोली, “अब आपसे क्या छुपाना मालिनी जी। मन तो बहुत करता है असलम का लम्बा मोटा लंड गांड में, चूत में लेने का, मगर फिर मन को मार कर रबड़ के लंड से चूत का पानी छुड़ा लेती हूं। या कभी-कभी असलम से चूत चुसवा लेती हूं। उस एक बार की चुदाई के बाद हम लंड चुसाई और चूत चुसाई से आगे नहीं बढ़े।”

मैंने कहा, “नसरीन ऐसे मन मारने से तो सेहत ही खराब हो जाएगी। और फिर रबड़ के लंड मर्द के लंड जैसा चुदाई का मजा तो नहीं देते।”

मैं बोल रही थी और नसरीन सुन रही थी, “तुम खुद ही सोचो नसरीन, मर्द जब औरत के ऊपर लेट कर उसे बाहों में लेकर उसकी चूत में अपना लंड डालता है, उसकी चुदाई करता है, उसका मजा अलग ही होता है। और वो पीछे की चुदाई? जब मर्द के टट्टे औरत के चूतड़ों से और चूत से टकराते है तो औरत को चुदाई का दुगना मजा आता है। हुए वो जो चुदाई के वक़्त मर्द बोलता है वो? इसके अलावा मर्द के लंड की गरम गरम मलाई जब चूत, गांड या मुंह में जाती है। नसरीन ये सब रबड़ के लंड से तो नहीं मिलता।”

नसरीन कुछ पल चुप रही और फिर बोली, “मालिनी जी आप कह तो ठीक रही हैं। मगर आप ही बताईये मैं क्या करूं?”

मैंने कहा, “नसरीन मुझे तो इसका एक हल दिखाई देता है। एक हल तो है मेरे पास।”

नसरीन मेरी तरफ देखने लगी। मैंने कहा, “देखो नसरीन असलम की चुदाई निकहत के साथ हो जाती है, उसे चुदाई के मजे के लिए तुम्हें चोदने की जरूरत नहीं। अगर वो तुम्हें चोदना चाहता है तो सिर्फ इस लिए क्यों की उसे लगता है तुम्हें मर्द की चुदाई का मजा चाहिए। अपनी शादी से पहले भी वो यही सोचता था और यही सोच कर वो शादी नहीं करना चाहता था।”

मैंने आगे नसरीन से कहा, “नसरीन तुम असलम से साफ़ कहो कि, असलम तुम्हारे पास चोदने के लिए निकहत की चूत है तुम्हें मेरी चुदाई की जरूरत नहीं। लेकिन जब मुझे चुदाई की तलब होगी मैं तुम्हें बोल दूंगी, तब तुम मुझे चोद लिया करना। नसरीन अगर असलम से कहने पर झिझक होती है तो मैं असलम को बोल दूंगी। ठीक है?”

नसरीन बोली, “नहीं मालिनी जी, ये मुझसे नहीं होगा। मैं निकहत के उस घर में रहते असलम से चुदाई नहीं करवा सकती। मेरा मन नहीं मानता।” ये कहते हुए नसरीन ने अपनी चूत जोर जोर से खुजलाई और बोली, “पानी छोड़ रही है मालिनी जी मेरी चूत।”

मैंने कहा, “इसका इलाज भी करते हैं, पहले असल बात पूरी कर लें।”

फिर मैंने नसरीन से पूछा, “अच्छा नसरीन एक बात बताओ।” मैंने नसरीन की चूत छूते हुए कहा, “नसरीन, इतने मोटे लंड से चुदाई करवानी है? लेना है चूत में, गांड में मुंह में?” मैंने अंगूठे उंगली से गोल बना कर इशारा किया।

नसरीन चूत को खुजलाते हुए बोली, “क्या मालिनी जी? इतना मोटा लंड भी मंगवाया है क्या आपने?”

मैंने नसरीन की चूत में उंगली डालते हुए कहा, “रबड़ का नहीं नसरीन असली लंड। असली का असली मर्द का लंड।”

नसरीन ने एक सिसकारी ली, “आअह आअह मालिनी जी बड़ा मजा आता होगा उसे जिसकी चूत में इतना मोटा डंडा जाता होगा।”

मैंने नसरीन से पूछा, “ठीक कहा तुमने नसरीन, जन्नत का मजा आता। मैं ले चुकी हूं इसे अपनी चूत में भी, गांड में भी और मुंह में भी। और जिसका ये लंड है वो चुदाई भी बड़ी मस्त करता है, जल्दी झड़ता भी नहीं असलम के तरह।”

फिर मैंने नसरीन की चूत पर हाथ फेरते हुए कहा, “नसरीन तुमने लेना है ये मोटा लंड, चूत में, गांड में, मुंह में?”

नसरीन की आंखें गुलाबी हो गयी। मेरा हाथ अपनी चूत पर दबाते हुए बोली, “मगर कैसे मालिनी जी? असलम भी तो यहीं है। फिर कैसे?”

मैंने कहा, “वो सब तुम मुझ पर छोड़ दो। बस ये बताओ लेना है? मस्त चुदाई करवानी है? ऐसी चुदाई जो तुमने कभी सोची भी नहीं होगी यादगार चुदाई – बल्कि चुदाई नहीं चुदाईयां। चार-पांच घंटे तक चलने वाली चुदाईयां, जिसमें चूत में गांड में मुंह में सब जगह लंड की गर्म-गर्म मलाई निकलेगी।”

नसरीन की आवाज चुदाई का सोच-सोच कर कांपने लगी और वो बोली, “मालिनी जी अपने तो मेरी चूत और गांड दोनों गर्म कर दी। अब बताईये कैसे होगी ऐसी चार-चार घंटे वाले चुदाई, जब असलम भी साथ है?”

मैंने नसरीन की चूत दबाते हुए कहा, “नसरीन पहले हां तो बोलो। बाकी मैं संभाल लूंगी। बाकी रही तुम्हारी चूत और गांड, तुम्हारी चूत और गांड का इलाज तो मैं अभी कर दूंगी।”

नसरीन बोली, “अगर ऐसा है मालिनी जी तो मैं भी ये चार-पांच घंटे वाली चुदाई करवाऊंगी।”

मैंने कहा, ठीक है नसरीन फिर तुम मेरी सवाल का जवाब दो, मगर ठीक-ठीक, सच-सच।”

नसरीन बोली, “पूछिए मालिनी जी। आपसे मैं कभी झूठ नहीं बोलती।”

मैंने नसरीन से कहा, “चलो नसरीन पहले कपड़े उतार लो। आराम से बैठ हल्के होकर बात करेंगे।”

ये कह कर मैं उठी और अपने कपड़े उतार दिए। मुझे नंगा देख नसरीन भी नंगी हो गई। मैंने नसरीन की टांगें चौड़ी करके उसकी चूत में उंगली डाल दी। चिकने पानी से भरी पड़ी थी नसरीन की चूत।

नसरीन मेरी तरफ देखने लगी। अब उसे मेरे सवाल का इंतजार। नसरीन मोटा लंड चूत और गांड में लेना चाहती थी।

मैंने नसरीन से पूछा, “नसरीन जमाल तुम्हें चोदता था, और वो असलम के कहने से चुदाई शुरू हुई थी?”

मैंने अपनी बात जारी रखते हुई कहा, “और नसरीन, जब जमाल ने दुबई जाना था तो तुम्हारे साथ असलम की चुदाई जमाल के कहने से शुरू हुई थी?”

नसरीन ने हां में सर हिला दिया। मैंने पूछा, “नसरीन इसका मतलब है जमाल और असलम दोनों उनसे तुम्हारी चुदाई की बात जानते हैं। अब एक आख़री सवाल, मगर इसका जवाब सोच कर देना।”

नसरीन मेरी तरफ देखने लगी। मैंने बात जारी रखते हुई कहा, “मान लो नसरीन जमाल दुबई से आता और कहता है कि उसने तुम्हें चोदना है, तो क्या तुम मान जाओगी? क्या असलम मान जाएगा?”

नसरीन बोली, “मालिनी जी दोनों को मेरी एक-दूसरे के साथ होती हुई चुदाई के बारे में मालूम ही है। मुझे क्या एतराज होगा। और मालिनी जी मुझे लगता है असलम को भी कोइ एतराज नहीं होगा।”

मैंने कहा, “और नसरीन अगर असलम कहता है कि वो और जमाल इकट्ठे तुम्हारे चुदाई करना चाहते हैं, एक-दूसरे के सामने। या फिर तुम्हारा ही मन उनसे इकट्ठे चुदाई करवाने का हो जाए एक-दूसरे के सामने तो?”

नसरीन कुछ सोचते हुई बोली, “मालिनी जी मैं तो दोनों से चुदाई करवा ही चुकी हूं। और दोनों एक-दूसरे के साथ होती मेरी चुदाई के बारे में भी जानते हैं। जमाल जानता ही है कि मेरा बेटा असलम मुझे चोदता है। अब उससे कैसी शर्म। मुझे उन से एक-दूसरे के सामने चुदाई करवाने से क्या एतराज हो सकता है।”

मैंने नसरीन का मम्मा दबाते हुए कहा, “अच्छा नसरीन अब बताओ अगर जमाल की जगह वो मोटे लंड मर्द हो तो? वो मोटे लंड वाला और असलम दोनों एक-दूसरे के सामने तुम्हारी चुदाई करें?”

नसरीन के चेहरा पर हैरानी थी, असमंजस वो कुछ नहीं बोली। मैंने ही कहा, “नसरीन मैं भी साथ रहूंगी। तुम मैं, असलम और वो मोटे लंड वाला – दो गायें और दो ही सांड। संदीप नाम है उस मोटे लंड वाले का। ये रबड़ के लंड उसी के पास से आते हैं। मस्त चुदाई करता है संदीप। गांड का छेद खोल कर रख देता है। जरा सोचो मैं तुम, असलम और संदीप। हर जगह लंड डलवाएंगी दोनों से। गांड में चूत में और मुंह में।”

नसरीन का चेहरा लाल हो गया। वो बाहर ही धीमे आवाज में बोली, “मगर मालिनी जी असलम? असलम आपको मेरे सामने चोदेगा? और मैं असलम के सामने संदीप से? असलम को बुरा नहीं लगेगा? और असलम चोद लेगा मुझे संदीप के सामने?”

मैंने कहा, “देखो नसरीन तुम खुद मेरी चुदाई असलम से करवा चुकी हो। वो चुदाई तुम्हारे सामने नहीं थी मगर तुम्हारी मौजूदगी में थी, इसी कमरे में हुई थी, जब तुम बाहर क्लिनिक में बैठी।”

मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “नसरीन मेरी चुदाई करने के बाद असलम नंगा ही तुम्हें देखने के लिए क्लिनिक में गया तो तुम रबड़ का लंड अपनी चूत में डाल कर चूत की चुदाई कर रही थी। असलम ने अपना लंड तुम्हारे मुंह में डाल कर तुम्हारे मुंह में अपनी लंड के मलाई निकाली थी। उस वक़्त मैं भी वहीं थी। अब बताओ नसरीन जब इतना कुछ हो चुका है तो फिर आपस में कैसी शर्म? चुदाई के मजे के बारे में सोच। रही असलम की बात, तो उसे मैं मना लूंगी।”

नसरीन चुप ही थी। मैंने ही कहा, “और नसरीन, असलम कह रहा था नयी दुकान की जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर आने वाली है। दुकान के सामान के सिलसिले में आगे से तुम भी असलम के साथ कानपुर आया करोगी। एक बार अगर ये एक-दूसरे के सामने वाले चुदाई हो गई तो हम तीनों, जब भी तुम कानपुर आओ, इस तरह का प्रोग्राम बना लिया करेंगे।”

“इस एक बार की चार घंटे चुदाई तुम्हारी तसल्ली भी कर देगी और असलम से चुदाई करवाने की तुम्हारी झिझक भी खत्म कर देगी। फिर जब तुम्हारा मन करे असलम को बोल दो वो तुम्हें चोद दिया करेगा। नसरीन इस तरह मन मार कर सिर्फ एक वहां के चक्कर में की असलम से चुदाई करवाते वक़्त तुम्हें ऐसा लगता है कि निकहत वहां मौजूद है, अपनी सेहत खराब मत करो।”

नसरीन उसी तरह धीमी आवाज में बोली, मगर साथ ही अपनी चूत में हाथ ऊपर नीचे करना नहीं भूली, “मगर मालिनी जी असलम / क्या असलम मान जाएगा?”

मैंने कहा, “नसरीन इन कहा ना के असलम को मनाने के जिम्मेदारी मुझ पर छोड़ दो। वैसे ही असलम को तुम्हारी बहुत फ़िक्र रहती है। तुम्हें खुश देखने के लिए वो कुछ भी कर सकता है। ज़रा सोचो जो लड़का तुम्हें खुश देखने के लिए तुम्हें अपनी दुकान में काम करने वाले से चुदवा सकता है और उसके कहने से तुम्हे चोद सकता है, उसे कितनी फ़िक्र है तुम्हारी।”

मेरी इस बात का नसरीन पर पूरा असर हुआ और आखिर नसरीन बोली, “मालिनी जी, अगर आप भी इस चुदाई में हिस्सा लेंगी और असलम को भी कोई एतराज़ नहीं होगा, तो फिर मैं भी तैयार हूं। मगर असलम को आपको ही राजी करना होगा। चलिए अब मेरी चूत का पानी निकालने का इंतजाम करिये।”

ये बोल कर नसरीन खड़ी हो गयी।
मैं भी उठी और नसरीन को बाहों में ले लिया और उसके होंठ अपनी होठों में ले लिए। मेरा एक हाथ नसरीन की चूत था और दूसरे हाथ से मैंने नसरीन को अपनी साथ चिपकाया हुआ था। हम दोनों के मम्मे एक-दूसरे के मम्मों के साथ गड़मगड़ हो रही थे। बस अब रबड़ के लंडों का इंतजार था।

मैंने सोचा दो गायें और सांड के खेल के लिए नसरीन और असलम तो तैयार ही हैं, बस असलम को ये बोलना है कि चुदाई के वक़्त नसरीन को अम्मी ना बुलाये और नसरीन को ये पता ना चले कि मैं और असलम दो गायें और दो सांडों का खेल पहले ही खेल चुके थे। संदीप को भी ये बताना था कि नसरीन को पता नहीं चलना चाहिए कि असलम हमारे साथ ये दो गायों और दो सांडों वाली चुदाई कर चुका था।

मैंने नसरीन को छोड़ा और बोली, “बोलो नसरीन, क्या चुदवानी है चूत या गांड?”

नसरीन बोली, “मालिनी जी, मैं तो पूरी की पूरी आपके हवाले हूं, जो मर्जी चोद लीजिये।”

मैंने कहा, “तो ठीक है नसरीन उल्टी हो कर चूतड़ पीछे करके लेट जा, आज तुम्हारे दोनों छेद चोदती हूं।” ये कह कर मैंने अलमारी में से एक मोटा ढाई इंच वाला लंड और नया वाला गांड में लेने वाला लंड और क्रीम निकाल ली।

मैंने नया वाला सात इंच लम्बा लंड अपनी कमर पर बांध लिया और नसरीन को कहा, “नसरीन ये जाएगा आज तुम्हारी गांड में।”
नसरीन बोली, “मालिनी जी ये नया आया है क्या?”

मैंने कहा, “नहीं नसरीन मार्किट में तो नया नहीं आया, मगर मैंने अभी अभी लिया है। ये देखो।” ये कह कर मैंने लंड कमर से बांध लिया। नसरीन बस इतना ही बोली, “कमाल है।”

मैंने नसरीन से कहा, “असल में नसरीन कुछ दिन पहले एक ऐसे ही लम्बे लंड वाले से मैंने गांड चुदवाई और मुझे बड़ा मजा आया। बस मैंने सोच लिया ऐसा ही लंड लूंगी मैं भी। चलो नसरीन लेट जाओ, डालो तुम्हारी गांड में। फिर तुमने मेरी गांड में भी डालना है।” नसरीन पीछे चूतड़ करके लेट गयी और चूतड़ उठा दिए।”

मैंने रबड़ का लंड नसरीन की चूत में डाल दिया। नसरीन ने मस्त चुदाई करवाई और नसरीन की चूत पानी छोड़ गई, तो मैंने लंड नसरीन की गांड में डाल दिया। नसरीन ने रबड़ का लंड अपनी चूत में डाल लिया और बोली, “चलिए मालिनी जी, सब तैयार है करिये मेरी गांड चुदाई।”

रबड़ के लंड की मेरी और नसरीन की ये चुदाई तकरीबन पंद्रह मिनट चली। नसरीन मस्ती में चुद रही थी और रबड़ के लंड के टट्टे मेरी चूत से टकरा रहे थे। नसरीन के चुदाई और टट्टों का मेरी चूत से टकराना – मुझे भी मजा आ गया। तभी नसरीन की चूत एक बार और पानी छोड़ गयी, तो मैं नसरीन के पीछे से हट गयी।

फिर वही लंड नसरीन ने अपनी कमर से बांध लिया और मेरी गांड चुदाई की। इसी बारी बटाई वाली चुदाई में एक घंटा निकल गया। असलम के आने का वक़्त भी हो गया था। हमने कपड़े पहने और क्लिनिक में आ गये।

मैंने नसरीन से कहा, “नसरीन असलम आये तो तुम पीछे कमरे में चली जाना। मैं असलम से बात करके तुम्हें बुला लूंगी।”

नसरीन बोली, “ठीक है मालिनी जी समझ गयी।”

कुछ ही देर में असलम आ गया। असलम को मैंने पूरी बात बताई और कहा, “असलम नसरीन तो तैयार हो गयी है, बस उसकी झिझक थोड़ी दूर करनी है। वो मैं अभी दूर कर दूंगी।”

असलम ने पूछा, “वो कैसे मालिनी जी?”

मैंने कहा, “बस देखते जाओ। और हां याद रखना, मैंने नसरीन को नहीं बताया कि तुम दो गायें और दो सांड वाला खेल खेल चुके हो। एक बात और याद रखना संदीप को पता नहीं चलना चाहिए नसरीन तुम्हारी अम्मी है। बाकी सब मुझ पर छोड़ दो। अब बताओ तुम्हारे लंड का क्या हाल है?”

असलम बोला, “क्यों मालिनी जी फिर चुदवानी है क्या?” मैंने असलम से कहा, “देखते जाओ, चलो पीछे के कमरे में चलते है।”

असलम उठा, उसकी पैंट में उसके आधे खड़े लंड का उभार साफ़ दिखाई पड़ रहा था। असलम ने लंड को पैंट में ठीक से बिठाया और मेरे पीछे पीछे चल पड़ा।

पीछे कमरे में जा कर मैंने बिना किसी लाग-लपेट के नसरीन को बोला, “नसरीन मैंने संदीप वाली सारी बात असलम से कर ली है, बस इसे तुम्हारी इजाज़त चाहिए।”

नसरीन अभी भी हिचकिचा रही थी। असलम भी शर्मा रहा था। मैंने सोचा, मुझे ही कुछ करना होगा। मैंने असलम से कहा, “क्या हुआ असलम चुप क्यों हो। बाहर तो मुझसे बात करते-करते तुम्हारा लंड खड़ा हो गया था और तुम मुझसे पूछ रहे थे मालिनी जी चुदवानी है क्या? फिर अब क्या हुआ?”

असलम और नसरीन, दोनों को ये उम्मीद नहीं थी कि मैं ऐसा कुछ बोल दूंगी।

असलम सिर्फ इतना ही बोला, “जी…. जी?”

मैंने सोचा, ये ऐसे नही शर्म छोड़ेगा। इन दोनों मां बेटों की शर्म मुझे ही दूर करनी होगी। मैं उठी और अपने कपड़े उतार कर बेड के किनारे पर सीधी लेट गयी, टांगें उठा ली और दोनों हाथ नीचे करके अपनी चूत की फाकें चौड़ी कर दी। मेरी गुलाबी चूत असलम के सामने थी और असलम मेरी चूत को घूर रहा था। नसरीन भी मेरी तरफ ही देख रही थी।

मैंने असलम से कहा, “असलम बाहर पूछ रहे थे ना मालिनी जी चुदवानी है क्या। हां चुदवानी है। लो आओ अब मेरी चूत तुम्हारे लंड को बुला रही है।”

असलम कुछ नहीं बोला, ना ही अपने जगह से हिला, बस मेरी चूत को घूरता रहा।

तभी नसरीन बोली, “असलम क्या हुआ, मालिनी जी तुमसे कुछ बोल रही है। उनकी चूत को तुम्हारा लंड चाहिए, जा कर डाल लंड मालिनी जी की चूत में, सोच क्या रहा है?”

नसरीन का इतना कहना था कि असलम ने अपने कपड़े उतार दिए और नीचे बैठ कर पागलों की तरह मेरी चूत चूसने लगा।

असलम के इस तरह चूत चूसने से मुझे बड़ा मजा मिल रहा था। अभी असलम मेरी चूत चूस चाट ही रहा था कि नसरीन ने भी अपने कपड़े उतार दिए और मेरी बगल में आ कर मेरी ही तरह टांगें उठा कर लेट गयी।

असलम को खड़े लंड के साथ मेरी चूत चूसते देख उससे रहा नहीं गया होगा। जैसे ही असलम ने अपनी अम्मी को भी नंगा लेटे हुए देखा, तो असलम नसरीन की चूत भी चूसने लगा। नसरीन के चूतड़ घूमने लगे। असलम उठा और नसरीन की टांगें पकड़ लंड एक ही झटके से नसरीन की चूत में डाल दिया और बोला, “लो अम्मी लो अपने बेटे का लंड अपनी फुद्दी में।”

नसरीन के मुंह से निकला, “आअह असलम मजा आ गया। एक बार फिर ऐसे ही कर। पूरा लंड निकाल कर ऐसे ही डाल।”

असलम ने आठ दस बार ऐसे ही लंड अपनी अम्मी की चूत में डाला। जल्दी ही नसरीन के चूत पानी छोड़ गयी। असलम फिर मेरे पास आ गया और वैसे ही मेरी चुदाई करने लगा। जल्दी ही मुझे भी मजा आ गया। मेरी चूत भी पानी छोड़ गयी।

असलम ने मेरी चूत से लंड निकाला और खड़ा हो गया। मैं उठ कर बैठ गयी। नसरीन भी उठ गयी। असलम मेरे सामने आया और लंड मेरे मुंह में डाल दिया।

थोड़ी चुसाई के बाद मैंने असलम का लंड मुंह से निकाला और कहा, “असलम जाओ अब, अपनी अम्मी को भी अपने लंड का मजा दो।” असलम नसरीन के सामने गया और नसरीन के मुंह में लंड डाल दिया। नसरीन असलम का लंड बहुत ही जोर-जोर से चूस रही थी।

असलम के मुंह से “आह अम्मी… बड़ा मजा आ रहा है आअह… अम्मी क्या चूसती हैं आप।” इतना सुनना था कि नसरीन चूसने के साथ-साथ मुंह में लंड को आगे-पीछे भी करने लगी।

जल्दी ही असलम का गर्म-गर्म लंड का पानी निकलने वाल हो गया। असलम नसरीन के मुंह में लंड जोर-जोर से आगे-पीछे करने लगा। असलम के मुंह से जोर के आवाज के साथ निकला, “आह मेरी प्यारी अम्मी, निकला। लो अम्मी पी लो मेरे लंड का गर्म-गर्म जूस… आअह… आह और असलम के लंड से मलाई निकली और नसरीन के मुंह में चली गयी। असलम का लंड जैसे जैनी पानी छोड़ता जा रहा था, नसरीन पीती जा रही थी।

असलम के लंड से आखरी बूंद भी निकल कर नसरीन के मुंह में चली गयी। जल्दी ही असलम का लंड ढीला हो गया और उसने लंड नसरीन के मुंह से निकाल मुंह से निकाल लिया। असलम जा कर सोफे पर बैठ गया। नसरीन उठी और बाथरूम की तरफ जाने लगी। मैंने असलम से कहा, “असलम सोच क्या रहे हो? जाओ अपनी अम्मी को अच्छे से मूत करवाओ।”

नसरीन ने हैरानी से पहले मेरी तरफ देखा और फिर असलम के तरफ देखा और खड़ी हो गई। सोच रही होगी, असलम कैसे पेशाब करवाएगा। असलम खड़ा हो गया और बोला, “चलिए अम्मी।” और असलम ने नसरीन के चूतड़ों की दरार मैं अपनी उंगलियां डाली और नसरीन को बाथरूम में ले गया। मैं उठी और जा कर सोफे पर बैठ गयी।

सात आठ मिनट के बाद दोनों बाहर आये। एक दुसरे के सामने के चुदाई से तो शर्म बिलकुल जा ही चुकी थी। नसरीन मेरे पास ही बैठ गयी और मेरी जांघ के ऊपर हाथ रख दिया। असलम भी आ गया और कपड़े पहनने लगा।

मैंने पुछा, “क्या हुआ नसरीन? असलम ने ठीक से मूत करवाया या नही?”

नसरीन हंसी और बोली, “मालिनी जी चुदाई में ये सब भी होता है क्या? असलम ने पहले मुझे बिठा कर मुझे कहा कि मैं अपनी टाँगें उठा कर चूत की दरार को चौड़ी कर दूं। फिर असलम ने मेरी चूत पर पेशाब किया फिर अपने लंड पर बिठा कर मुझसे मुतवाया।”

मैंने भी हंसते हुए कहा, “नसरीन हमारी चुदाई में सब कुछ होता है। वो तुमने सुना नहीं – मोहब्बत और जंग में सब जायज़ होता है। लेकिन ये बात अधूरी है। असल में मोहब्बत, जंग और चुदाई में सब जायज़ होता है।”

नसरीन भी उठी और कपड़े पहनने लगी। मैं भी उठी और बाथरूम में चली गयी। पेशाब करके बाहर आयी तो असलम नसरीन के होंठ चूस रहा था। मुझे बाहर आया देख कर दोनों मां-बेटा अलग हुए, और हम सब बाहर क्लिनिक में आ गए।

नसरीन बोली, “असलम निकहत की चूत पर भी मूतना और उससे अपने लंड पर मुतवाना।”

असलम बोला, “अम्मी निकहत गांड में तो लंड लेती नहीं चूत पर कैसे मुतवायेगी?”

मैंने नसरीन की चूत छूते हुए कहा, “हां तो नसरीन, अब तो असलम भी मान गया है, अब क्या इरादा है, लेना है मोटा लंड चूत में?”

नसरीन की शर्म और झिझक जा चुके थी। नसरीन असलम की तरफ देखते हुए बोली, “तुम क्या कहते हो असलम? ले लूं संदीप का मोटा लंड चूत में?”

असलम बोला, “बिलकुल अम्मी, चूत ही क्यों गांड में भी लेना, मुंह में भी लेना। मैं आप, मालिनी जी और वो संदीप। मजा आ जाएगा चुदाई का।”

मैंने कहा, “तो ठीक है मैं संदीप को फोन कर दूंगी। कल तो तुम लोग बिज़ी हो, परसों का प्रोग्राम बनाते हैं। संदीप से बात करके मैं असलम को फोन कर दूंगी।”

असलम और नसरीन खड़े हो गए। मैंने कहा, “एक मिनट देखती हूं शंकर अगर है तो तुम लोगों को छोड़ देगा। कल कितने बजे निकलोगे तुम लोग? मैं शंकर को भेज दूंगी।”

असलम बोला, “अरे मालिनी जी रहने दीजिये।”

मैंने कहा, “अरे असलम कोइ बात नहीं। कहां इतनी बढ़िया चूत को कहां ऑटो के झटके खिलवाओगे। कानपुर की सड़कों की हालत बड़ी खस्ता है।” मैं बाहर गयी शंकर अभी वहीं था। मैंने शंकर को असलम और नसरीन को होटल छोड़ने को कह दिया।”

नसरीन बाथरूम में अपने बाल ठीक करने गयी तो मैंने असलम से पूछा, “असलम दो वियाग्रा हैं ना तुम्हारे पास? एक आज खा कर अपनी अम्मी को चोदना, दूसरी दो गायें हुए दो सांड वाले दिन खा लेना। लंड सख्त बना रहेगा।

असलम ने हां में सर हिला दिया। नसरीन चेहरा और बाल ठीक करके आ गयी। मैंने दोनों को बाहर तक छोड़ा और जब वो चले गए तो मैं सीधे ऊपर चले गयी।

अगले दिन मैंने संदीप को फोन मिलाया। संदीप छूटते ही बोला, “मैडम जी क्या हाल हैं। अब कब दर्शन होंगे आपके? बड़ा मन कर रहा था आपकी गांड चोदने का।”

मैंने कहा, “भोसड़ी वाले लंगोट का बड़ा कच्चा है तू। पक्का गांडू लगता है मुझे तू। हर वक़्त चूत गांड के बारे में सोचता रहता हैं। अच्छा ये बता कल खाली है? असलम के साथ दूसरी गाये आयी है आगरा से। रागिनी की उम्र की ही है। घरेलू औरत है। गांड और चूत दोनों कसी हुई हैं। रिश्ते में असलम की मौसी लगती हैं। यहां कानपुर में किसी से मिले आयी हैं असलम के साथ। असलम से चुदवाती है।”

फिर मैं हंसते हुए बोली, “चोदते-चोदते असलम कई बार उसे अम्मी ही बोल देता है।”

संदीप भी हंस दिया, “इसमें क्या बात हैं मालिनी जी। यहां तो सगी मां-बेटे और सगी बाप-बेटी में भी चुदाई होना कोई बड़े बात नहीं रह गयी, फिर ये तो मौसी ही है। आप तो मनोचिकित्स्क हैं, आपके पास तो ऐसे बहुत केस आते होंगे?”

मैंने संदीप की इस बात का जवाब नहीं दिया मगर उससे बोली, “तो फिर बता कितने बजे आएं – और हां नसरीन को नहीं पता चलना चाहिए कि असलम दो गायें और दो सांड का खेल-खेल चुका है। और जिन भी मैं और तू ही पिएंगे, असलम बियर भी नहीं लेगा और नसरीन भी नहीं पीती।”

संदीप बोला, “ठीक हैं मैडम, सब समझ गया।”

फिर संदीप बोला, “मैडम असल में मुझे रबड़ के लंड खुद कहीं ले कर जाने हैं, न्यू कानपुर एरिया में। थोक का आर्डर है। ग्यारह लंडों का और ग्यारह ही गांड और चूत में लेने वाले लंडों का। इनका चलन बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। आप लोग साढ़े बारह एक बजे तक पहूंच जाईये। मैं इंतजार करूंगा। नई चूत की बात सुन कर मेरा तो लंड खड़ा भी हो गया।”

मैंने हंसते हुए कहा, “साले तेरा लंड बैठता ही कब है। और सुन, अब मुठ मत मार लेना। कल फिर चार घंटे चुदाई करनी हैं तूने।” संदीप इस बात पर हंसा और मैंने फोन काट दिया।

कुछ देर बाद मैंने असलम को फोन किया और बता दिया के दोपहर एक बजे संदीप के यहां पहुंचना हैं। और फिर मैंने पूछा, “नसरीन का क्या हाल हैं। चुदाई हुई रात को।”

असलम बोला, मस्त चुदाई हुई मालिनी जी। अम्मी ने मस्त हो कर चुदाई करवाई और चूत पर मुतवाया भी, साथ ही ये भी कह दिया के जब निकहत अपने मायके गयी हो तो मैं पूरी-पूरी रात अम्मी की चुदाई कर सकता हूं।”

मैंने कहा, “असलम ये तो अच्छी बात है। कम से कम अब नसरीन भी टेंशन में तो नहीं रहेगी। चल फिर कल सुबह आती हूं, होटल से तुम लोगों को ले लूंगी। इस बार कहां रुके हो।”

असलम बोला, “मालिनी जी उसे होटल में जहां पिछली बार रुका था।”

मैंने असलम से कहा, “और सुनो असलम संदीप के यहां से चुदाई के बाद तुम दोनों भी यही मेरे पास ही आ जाना और रात यहीं रुक जाना। कहां होटल में जाओगे। खाना ही तो खाना और फिर सोना है। ऊपर मेरे यहां बहुत से कमरे हैं मजा आ जाएगा।”

असलम हंसते हुए बोला “ठीक है मालिनी जी जैसा आप ठीक समझें। अब तो अम्मी भी खुल कर चुदाई करवाएगी – वो रंडी रांड वाली चुदाई।”

मैंने प्रभा को बुला कर बोला, “प्रभा कल रात को मेहमान यहीं रुकेंगे। आगरा से आये है असलम और उसकी अम्मी नसरीन। तुम ऐसा करना चिकन बिरयानी, रायता और चने की दाल बना देना साथ में थोड़ी सी चपातियां भी बना लेना।”

प्रभा, “जी ठीक है” बोल कर चली गयी।

अगले दिन मैं ठीक साढ़े बारह बजे मैं होटल बजे होटल पहूंच गयी। मैंने फोन किया और असलम और नसरीन बाहर आ गए। नसरीन आगे मेरी बगल में ही बैठ गयी। मैंने नसरीन से पूछा, “नसरीन असलम ने रात को तंग तो नहीं किया?”

नसरीन पीछे असलम के तरफ देखती हुई बोली, “तंग मालिनी जी? इसने मुझे पूरे दो घंटे रगड़ा। गांड सुजा दी इसने मेरी चोद चोद कर। मुझे ही हटाना पड़ा इसे, बड़ी मुश्किल से चूस-चूस कर इसके लंड का पानी छुड़ाया।”

सच में ही नसरीन अब चुदाई की मामले में असलम की साथ खुल चुकी थी। मैंने समझ गयी कि असलम ने विआग्रा खाई होगी। मैंने असलम से पूछा, “क्या बात है असलम, ऐसी चुदाई क्यों की तूने अपने अम्मी की?”

असलम बोला, “क्या करता मालिनी जी, पूरे एक साल तरसाया है अम्मी ने मुझे। चुदाई ही नहीं करवाती थी। पूरे साल में बस एक बार ही चुदवाई। पूछ लीजिये आप अम्मी से ही। अब मुझे मौक़ा मिला तो रहा नहीं गया।”

नसरीन बोली, “चल अब तो चोद लिया ना तूने अच्छी तरह। अब आगे जब भी निकहत मायके जाए मेरे साथ ही सो जाया करना और चोदते रहना पूरी रात? ये कह कर नसरीन हंस दी और मेरी भी हंसी छूट गयी।

मैं समझ गयी की आज खुल कर मस्त चुदाई करवाने वाली है नसरीन। ऐसे ही हंसी मजाक में हम संदीप के निजी ऑफिस पहुंच गए। संदीप हमारा ही इंतजार कर रहा था। संदीप के ऑफिस पहुंच कर मैंने नसरीन का परिचय करवाया असलम को तो संदीप जानता ही था।

मैंने संदीप से कहा, “संदीप ये असलम है और ये इसकी दूर के रिश्तेदार नसरीन है। नसरीन यहां कानपुर अपने किसी रिश्तेदार को मिलने आयी है। मेरे पास आयी तो मैंने तुम्हारे मोटे लंड का बहुत गुणगान किया। अब ये भी तुम्हार मोटे लंड का मजा लेने यहां आयी है।”

संदीप नसरीन की तरफ देखता हुआ बोला, “मेरी किस्मत जो आप मुझे सेवा का मौक़ा देने यहां आयी हैं। मैं भी आपकी हर तरह से हर तरह से तरफ से – आगे से, पीछे से पूरी सेवा करूंगा। आईये बैठिये। आओ असलम, आईये मैडम।”

संदीप की बात सुन कर नसरीन शर्मा गयी। अब इतनी भी चुदक्कड़ वो नहीं थी। संदीप पिछली बार की तरह ही कुर्सी पर बैठ गया, मैं और नसरीन सोफे पर बैठ गए और असलम दूसरी कुर्सी पर बैठ गया।
संदीप बोला, “मैडम आप तो जिन ही लेंगी। असलम तुम क्या लोगे और नसरीन जी आप क्या लेंगी। नसरीन बोली, “पेप्सी या कोला।” फिर संदीप असलम की तरफ देखते हुए बोला, “और असलम तुम?”

असलम बोला, मैं भी पेप्सी या कोला ही ले लूंगा।” जब संदीप उठा तो असलम भी साथ ही उठ गया। संदीप तले हुए काजू और जिन की बोतल ले आया और दो गिलासों में दो पेग बना दिए। असलम ने पेप्सी गिलासों में डाल दी और एक गिलास नसरीन के हाथ में दे दिया।”

संदीप ने एक ही घूंट मैं अपना गिलास खाली कर दिया। पांच मिनट में नसरीन का गिलास भी खाली हो गया। जैसे ही नसरीन का गिलास खाली हुआ, संदीप उठ कर नसरीन के आगे आ कर खड़ा हो गया और बोला, “नसरीन जी निकालिये मेरा लंड पैंट से बाहर और दिखाईये अपने होठों का जलवा।”

नसरीन ने एक बार मेरी और देखा फिर असलम के तरफ देखा और संदीप की पैंट की ज़िप खोल कर लंड बाहर निकाल दिया। संदीप का मोटा लंड देख के नसरीन ने अपनी चूत खुजलाई और मेरी तरफ देख बोली, “मालिनी जी आप ठीक ही बोल रही थी।” इतना कह कर नसरीन ने लंड मुंह में ले लिया।

संदीप के मुंह से निकला, “आह क्या नाम नाजुक होंठ है।”

उधर असलम का लंड भी तैयार हो चुका था। असलम भी मेरे आगे आ कर खड़ा हो गया मगर लंड बाहर नहीं निकाला। मैं समझ गयी कि असलम भी चाहता था कि मैं भी नसरीन की तरह उसका लंड पैंट में से बाहर निकालूं।

मैंने भी असलम की पैंट की ज़िप खोली और लंड बाहर निकाल कर मुंह में ले लिया। लंड चुसाई शुरू हो चुकी थी। अब अगले चार घंटों तक चुसाई चटाई और चुदाई का खेल चलने वाला था।

संदीप ने नसरीन को खड़ा किया और कमीज उठा कर सलवार का नाडा खोल दिया। नसरीन ने उस दिन मेरी तरह चड्ढी भी नहीं हुई थे। चुदाई के दिन औरतें अक्सर चड्ढी और ब्रा नहीं पहनती। कौन उतारने पहनने का झंझट करे।

संदीप ने नसरीन की टांगें फैलाई और उसकी चिकनी चूत में उंगली डाल दी। नसरीन के मुंह से निकला “आआह’। फिर संदीप ने नसरीन की कमीज भी उतार दी और नसरीन का मम्मा मुंह में लेकर चूसने लगा। नसरीन मस्त होने लगी थी। नसरीन ने संदीप का सर अपने मम्मे पर दबा दिया।

कुछ देर ऐसे ही संदीप नसरीन का मम्मा चूसता रहा फिर नसरीन को बोला, “चलिए नसरीन जी अपनी चूत का स्वाद चखाइये मेरे लंड को। लेटिए बेड पर। नसरीन बेड पर सीधी लेट गयी और संदीप ने नसरीन की चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर नसरीन की चूत ऊपर उठा दी। संदीप ने नसरीन की टांगें फैलाई और अपना मुंह नसरीन की चूत में घुसेड़ दिया। नसरीन के मुंह से आह आअह की सिसकारियां निकले लगी।

संदीप की पांच मिनट की चूत चुसाई में ही नसरीन के चूतड़ हिलने लगे। संदीप उठा, टांगें थोड़ी और फैलाई, और लंड नसरीन की चूत पर रख कर एक जोर का धक्का लगाया और लंड एक ही झटके से नसरीन की चूत में बिठा दिया। नसरीन के मुंह से निकला “आअह संदीप” और नसरीन ने संदीप को कस कर पकड़ लिया।

संदीप ने भी नसरीन के होंठ अपने होठों में ले लिए और जबरदस्त चुदाई करने लगा। नसरीन भी चूतड़ उठा-उठा कर चुदाई में संदीप का साथ देने लगी।

उधर असलम मेरे ऊपर आ चुका था और मेरी चुदाई कर रहा था। मैंने नसरीन को चूतड़ झटका-झटका कर चुदाई करवाते देख असलम के कान में कहा, “असलम लगता है नसरीन को संदीप के मोटे लंड से चुदाई का बड़ा मजा आ रहा है।”

असलम ने भी एक बार नसरीन की चुदाई देखी और बोला, “हां मालिनी जी, लगता तो ऐसा ही है। आज रात को जब अम्मी को चोदूंगा, तो अम्मी से पूछूंगा कैसी चुदाई हुई।”

मैंने पुछा, “क्या? इतनी चुदाई के बाद फिर नसरीन को चोदोगे?”

असलम बोला, “मालिनी जी अगर अम्मी जरूर चोदने के लिए कहेगी। पूरा एक साल हो गया अम्मी ने ढंग के मर्द से चुदाई का मजा नहीं लिया। तभी तो अम्मी संदीप से भी इतने मस्ती से चुदाई करवा रही है। चुदाई की लिए पागल हुई पड़ी है अम्मी।” ये बोल कर असलम मेरी चूत में लंड के धक्के लगाने लगा।

तभी नसरीन ने एक जोर की सिसकारी ली, “आअह संदीप निकला गया मेरा, मजा आ गया। क्या मस्त चुदाई थी।” और नसरीन ढीली हो गयी। संदीप ने खड़ा गधे जैसा लंड नसरीन की चूत में से निकाला और नसरीन की चूत का एक चुम्मा लेकर मेज से अपना गिलास उठाया और जा कर सोफे पर बैठ गया।

मेरी चूत भी पानी छोड़ चुकी थी, मगर असलम का लंड अभी खड़ा ही था। असलम ने भी लंड मेरी चूत में से निकाला और संदीप के पास की जा कर बैठ गया। संदीप ने गिलास में से घूंट भरते हुए असलम से कहा, “असलम बड़ा मस्त चुदवाती है यार तुम्हारी ये नसरीन। तुम तो खूब मजे लेते होंगे नसरीन की चुदाई के?”

फिर असलम से संदीप ने पूछा, “असलम गांड चोदते हो नसरीन की?”

असलम ने कहा, “ज्यादा तो नहीं, मगर कभी-कभी, क्यों?”

संदीप बोला, “ऐसे ही पूछ रहा था। अब मैंने पीछे से चोदना है, इसलिए पूछ रहा था के मेरा लंड झेल लेगी नसरीन गांड में?”

असलम बोला, “डाल कर देख लेना, जाता हो तो ठीक, नहीं तो मत चोदना। देखना कचरा ही मत कर देना इनकी गांड का।”

संदीप हंसते हुए बोला, “नहीं-नहीं मैं गांड में जबरदस्ती नहीं करता। मैडम मालिनी से भी मैंने पूछ कर ही गांड में डाला था। फ़िक्र मत करो, जैसी नसरीन को तुम यहां लाये हो वैसी ही वापस जाएगी कोइ जोर जबरदस्ती नहीं। आगे भी तो चोदनी है नसरीन की चूत और गांड।”

तब तक मैं और नसरीन उठ चुकी थी। नसरीन जा कर संदीप के आगे बैठ गयी और उसक लंड मुंह में ले लिया। मैं कुर्सी पर बैठ कर जिन के घूंट भरने लगी। नसरीन जोर-जोर से संदीप का लंड चूस रही थी। असलम का लंड तो खड़ा ही था। नसरीन को इस तरह संदीप का लंड चूसते देख असलम का मन भी लंड चुसवाने का हो गया। असलम मुझसे बोला, “मालिनी जी आप भी तो आईये।”

मैंने गिलास मेज पर रखा और बैठ कर असलम का लंड चूसने लगी। उधर संदीप का लंड नसरीन की चुदाई से सख्त हो चुका था। संदीप ने लंड नसरीन के मुंह से निकाला और बोला, “चलिए नसरीन जी अपनी चूत का रस पिलवाईये, चूतड़ चटवाईये अपने। चलिए चूतड़ पीछे करके बेड पर उल्टी लेट जाईये।”

नसरीन ने ऐसा ही किया और बेड के किनारे पर लेट उल्टी हो कर चूतड़ पीछे करके लेट गयी। संदीप ने नसरीन के चूतड़ खोले और जुबान से गांड का छेद चाटने लगा। फिर संदीप ने चूतड़ थोड़े ऊपर उठाए और अपना मुंह नसरीन की चूत में घुसेड़ दिया।

असलम ने भी मुझे वैसे ही लिटा दिया, और मेरे चूतड़ और चूत चाटने लगा। संदीप असलम से बोला, “असलम आओ तुम भी नसरीन जी की चूत और गांड चुसाई के मजे कर लो। मुझे मैडम के चूतड़ चाटने है।

संदीप अब मेरे पीछे आ गया और असलम नसरीन के पीछे चला गया। कुछ देर चूसने के बाद संदीप फिर नसरीन के पीछे चला गया। मगर इस बार संदीप नसरीन की चूत और गांड चूसने चाटने नहीं चोदने गया था।

संदीप अलमारी में से गांड चोदने वाली क्रीम छोटा तौलिया ले आया। मैंने सोचा साला नसरीन के चूत सुजायेगा। संदीप ने नसरीन के चूतड़ थोड़ा ऊपर उठाए, चूत को थोड़ा सा साफ़ करके थोड़ा सा चूत का पानी पोंछा। मगर चूत पूरी तरह सुखाया नहीं। और फिर संदीप ने नसरीन के चूतड़ थोड़े ऊपर उठाये, दोनों हाथों से नसरीन की कमर पकड़ी और और अपना लंड चूत के छेद पर रख कर एक ही झटके में चूत के अंदर डाल दिया।

नसरीन की चूत पूरी नहीं सूखी थी। चूत का थोड़ा-थोड़ा चिकना पानी चूत में ही था। मगर फिर भी संदीप का मोटे लंड जब झटके के साथ चूत में बैठा तो नसरीन चिहुंकी और सर मोड़ कर सदीप को देखा, मगर बोली कुछ नहीं।

शायद नसरीन कह रही थे इतना मोटा लंड है थोड़ा आराम से डालो संदीप। या शायद कह रही थी आह मजा आ गया फिर से ऐसे ही डालो संदीप।

इधर असलम का लंड मेरी चूत में था। कमर पकड़ कर असलम दबा-दबा कर, जोर-जोर के धक्के लगा रहा था। नसरीन की और मेरी चुदाई फुल स्पीड से चालू हो चुकी थी। अब हमारे चूतड़ हिलने लग गए थे और अपनी जुबान पर से हमारा कंट्रोल खत्म हो चुका था। हमारे मुंह सी आवाजें और सिसकारियां होने आप निकल रही थी।

नसरीन चूतड़ हिलाते-हिलाते बोल रही थी, “आअह संदीप मजा आ गया आअह क्या रगड़ कर चुदाई हो रही है। लगाओ संदीप, रगड़ो मेरी चूत आअह फुला दो मेरी फुद्दी आआह। ये है असली चुदाई आअह।”

यही हाल मेरा भी था। मैं भी यही कुछ बोली जा रहे थी। साला ये चुदाई का मजा भी क्या मजा होता है। नसरीन की चूत चुदाई करके खड़े लंड के साथ संदीप सोफे पर बैठ गया। उधर असलम ने भी लंड मेरी चूत में से निकाला और जा कर संदीप के पास ही बैठ गया। संदीप जिन की चुस्कियां ले रहा था। संदीप असलम से बोला, “असलम यार मस्त चुदवाती है तेरी ये नसरीन। क्या चूतड़ झटकाती है चुदाई करवाते हुए। चूत कसी हुई है, मालिनी मैडम की तरह। लगता है अभी तक ज्यादा नहीं चुदी। चूत तो चोद ली, अब गांड में डालूंगा नसरीन की।”

बेड पर मैं और नसरीन अभी उल्टा लेटी ही हुई थी – चूतड़ उठा कर। मैंने नसरीन की तरफ मुंह घुमाते हुए पोछा, “नसरीन कैसा मजा आया संदीप के मोटे लंड की चुदाई का?”

नसरीन बोली, “मस्त लंड है मालिनी जी संदीप का। मस्त रगड़ाई होती है चूत की।”

मैंने पूछा, “अब? अभी नहीं उठना? क्या अभी भी चूत में मजा आ रहा है?”

नसरीन बोली, “नहीं मालिनी जी चूत का मजा तो निकल गया। मैं तो अब गांड चुदाई का इंतजार कर रही हूँ। संदीप का लंड तो खड़ा ही है। अभी तक झड़ा भी नही संदीप का। बस उसके लंड का गांड में जाने का ही इंतजार कर रही हूं।”

नसरीन ने सर घुमा कर संदीप की तरफ देखा, जैसे कह रही हो, “आओ संदीप, डालो मेरी गांड में।” संदीप ने जब नसरीन को पीछे के तरफ देखते हुए देखा तो उठ कर खड़ा हो गया। अलमारी में से रबड़ के दो मोटे का लंड और क्रीम निकाल कर ले आया और नसरीन की पीछे चला गया। एक लंड उसने नसरीन के हाथ में दी दिया, दूसरा उसने मुझे दी दिया।

नीचे बैठ कर संदीप ने नसरीन के चूतड़ खोले और गांड का छेद चाटने लगा।
नसरीन आह आह कर रही थी। संदीप खड़ा हो गया। रबड़ का लंड संदीप ने नसरीन के हाथ में पकड़ा दिया। संदीप ने क्रीम नसरीन की गांड के छेद पर मल अच्छे से दी और उंगली से थोड़ी क्रीम गांड के अंदर भी लगा दी।

जैसे ही नसरीन की गांड में संदीप की उंगली गई तो नसरीन ने पीछे सर करके कहा, “आह संदीप मजा आ गया। थोड़ी उंगली ऐसे ही बाहर करो।”

संदीप जोर-जोर से उंगली उसकी गांड में अंदर-बाहर करने लगा। नसरीन आह आअह कर रही थी और साथ ही चूतड़ घुमा रही थी। मैंने नसरीन की सिसकारियां सुनी तो मैं समझ गयी के नसरीन चुदाई का पूरा मजा ले रही थी। तब तक असलम भी मेरे पीछे आ चुका था।

ऊंगली-बाजी और चूतड़ चटाई के बाद चुदाई का वक़्त आ गया। मैं अपनी चुदाई से ज्यादा नसरीन के चुदाई का लुत्फ़ उठा रही थी। संदीप ने नसरीन की गांड पर लंड रक्खा और हल्का सा अंदर धकेल दिया। नसरीन ने “आअह” की आवाज की और चूतड़ थोड़ा पीछे के तरफ किये। नसरीन का ये संदीप को इशारा था कि संदीप थोड़ा और डालो।

उधर असलम का लंड पूरा मेरी गांड में जा चुका था और चुदाई चालू थी। संदीप ने लंड नसरीन की गांड में थोड़ा और धकेला और रुक गया। ये एक तजुर्बेकार गांडू की निशानी थी। संदीप रुका था कि लंड नसरीन की टाइट गांड में अपने जगह बना ले।

संदीप ने असलम की तरफ देखा और बोला, “असलम नसरीन की गांड बहुत टाइट है। या तो ये ज्यादा चुदती नहीं या गांड में लंड बहुत दिनों से नहीं गया नहीं है।” फिर संदीप हंसते हुए बोला, “डर लग रहा है गांड कहीं फट ही ना जाये।”

असलम संदीप के लंड की तरफ देखते हुए बोला, “थोड़ा रुक जाओ लंड को जगह बनाने दो। आधा लंड तो चला ही गया है, थोड़ा रुक कर एक जोर का झटका लगाओ और डाल दो पूरा लंड इनकी गांड में। अगर गांड आधा लंड जाने तक नहीं फटी तो अब क्या फटेगी।”

संदीप बोला, “हां असलम गांड का छेद तो खुल गया है। मैं इस लिए रुका हुआ हूं कि लंड अपने जगह बना ले। अब क्रीम से गांड चिकनी करके अब पूरा ही डालूंगा।”

ये कह कर संदीप ने लंड नसरीन की गांड में से निकाल लिया। ढेर सारी क्रीम संदीप ने नसरीन की गांड पर लगाई और कुछ क्रीम उसने अपने लंड पर भी लगा दी। संदीप ने नसरीन की कमर पकड़ एक करारा झटका लगाया और चुदाई चालू कर दी। नसरीन हल्के से चिल्लाई, “संदीप ये तो दर्द कर रहा है।” मगर संदीप नहीं रुका तो मतलब नहीं रुका।

एक बार नसरीन दर्द के कारण आगे की तरफ हुई, मगर संदीप ने नसरीन की कमर पकड़ी हुई थी। उसने नसरीन को हिलने ही नहीं दिया। संदीप थोड़ा रुका, फिर नसरीन के चूतड़ पर एक धप्प लगा कर बोला, “नसरीन पूरा ले लिया तुमने मेरा लंड अपनी गांड में। कोइ प्रॉब्लम तो नहीं है?”

नसरीन ने ना में सर हिला दिया और बोली, “संदीप चोदो भी अब। फाड़ दो आज मेरी गांड।”

बस इसके बाद संदीप ने नसरीन की ऐसी गांड चुदाई चालू कर दी, जैसे शायद संदीप ने मेरी भी नहीं की होगी।

असलम भी मेरी मस्त गांड चुदाई कर रहा था। मैं नसरीन की तरफ ही देख रही थी। नसरीन के आंखें बंद थी। तभी नसरीन ने रबड़ का लंड उठाया और अपनी चूत में डाल लिया। मेरा रबड़ का लंड पहले ही मेरे चूत में था।

क्या सीन था। बेटा एक गैर औरत की गांड चोद रहा था और उसकी अम्मा उसी बेड पर उसके सामने ही किसी और मर्द से गांड चुदवा रही थी।

इसी गांड चुदाई में एक घंटा निकल गया। हमें संदीप के घर आये हे साढ़े तीन घंटे हो चुके थे। पहले का आधा घंटा छोड़ दो तो बाकी के ढाई घंटे हमारी रगड़ाई ही हुई थी। मतलब शाम के पांच बजने वाले थे।

संदीप तगड़े रगड़े लगा रहा था नसरीन की गांड में। नसरीन भी मस्त हो कर संदीप के मोटे लंड से गांड चुदवा रही थी। तभी संदीप बोला, “नसरीन जी मेरा निकलेगा अब। थोड़ा रोकूं या निकल जाने दूं। आपका मजा पूरा हुआ या कुछ और गांड चुदाई करवानी है?”

नसरीन बोली, “बस संदीप गांड दुखने लग गयी है। डालो अपने लंड की गर्म-गर्म गाढ़ी मलाई मेरी गांड में।”

इतना सुनते ही संदीप ने नसरीन की कमर को पकड़े हुए चार-पांच ऐसे धक्के लगाए कि नसरीन की चीख निकल गयी, “आह संदीप क्या कर रहे हो फाड़ोगे क्या?”

संदीप बोला, “नहीं फटेगी मेरी जान नसरीन, पूरा तो लंड ले रखा है तुमने अपनी गांड में। ऐसे ही ताबड़-तोड़ चार-पांच और धक्कों में संदीप के मुंह से दहाड़ सी निकली – ले गया मेरी जान नसरीन गया तेरे गांड में आअह – ये निकला। साली क्या मस्त गांड है, क्या मस्त गांड चुदवाती है।” और ये कहते ही संदीप ढीला हो गया।

संदीप का लंड नसरीन की गांड में ढीला हो गया। संदीप लंड नसरीन की गांड में से निकला और सोफे पर बैठ गया। असलम का लंड भी मेरी गांड में मलाई निकाल चुका था। असलम भी लंड मेरी गांड में से निकाला और जा कर संदीप के पास ही बैठ गया। कुछ देर में पहले नसरीन उठी और गांड को हाथ लगाया तो हाथ पूरी तरह संदीप के लंड की मलाई से भर गया।

नसरीन उठी और बाथरूम की तरफ जाने लगी। नसरीन को बात रूम जाते देख संदीप भी उठ गया और नसरीन के चूतड़ों पर हाथ फेरता हुई बाथरूम की तरफ चल पड़ा। नसरीन ने एक बार संदीप की तरफ देखा, फिर असलम के तरफ देखा और संदीप के आगे-आगे बाथरूम में चली गयी।

मैं भी उठी और तौलिये से गांड पांच कर असलम के पास जा कर बैठ गयी। मैंने असलम से कहा, “असलम, संदीप को तो लगता है जैसे नसरीन को चोदने का बहुत मजा आया। वो तो आज ज्यादा उसी की चूत और गांड चोद रहा था। अब लगता है उसकी चूत पर मूतेगा और अपने लंड पर मुतवायेगा।

असलम बोला, “मालिनी जी अम्मी भी तो संदीप का चुदाई में पूरा साथ दे रही थी। लगता है साल भर मर्द का लंड ना मिलने की कसर आज ही पूरी करना चाहती थी। एक बात है मालिनी जी अब अम्मी मुझसे फिर चुदाई शुरू कर देगी।”

मैंने कहा, “असलम वो तो नसरीन कह ही चुकी है कि आगे से जब निकहत अपने मायके जायगी तब तुम उसके साथ ही सो जाया करना। चलो अच्छा है चुदाई भी अपनी जगह जरूरी है।”

दस मिनट से ऊपर हो गए थे। संदीप और नसरीन अभी तक बाथरूम में ही थे। मैंने असलम से कहा, “असलम क्या हो गया? मूतने में इतना टाइम तो नहीं लगता। मुझे भी पेशाब आया हुआ है।”

असलम उठा और बाथरूम का दरवाजा खोला और अंदर झांक कर मुझे बुला लिया। नसरीन टॉयलेट सीट पर बैठी थी और संदीप नसरीन के सामने खड़ा था। संदीप का लंड नसरीन के मुंह में था और संदीप लंड नसरीन के मुंह में आगे-पीछे कर रहा था। संदीप नसरीन का मुंह चोद रहा था।

मैं अंदर गयी और मैंने संदीप से कहा, “संदीप सोफे पर बैठ कर आराम से चुसवाओ, नसरीन भी तो आराम से बैठे।”

दोनों उठ गए। मैं टॉयलेट सीट पर बैठ गई और असलम से बोली, “आओ असलम चलो मूतो मेरी चूत पर, नहलाओ मेरी चूत को।” संदीप तो बाहर चला गया मगर नसरीन वहीं रुक गयी। जैसे ही असलम ने मेरी चूत पर मूतना शुरू किया तो नसरीन आ गयी और बड़े गौर से ये नजारा देखने लगी।

असलम मेरी चूत पर मूत कर हटा और टॉयलेट सीट पर बैठ गया। मैं असलम की टांगों पर असलम की तरफ मुंह करके बैठ गयी और मूतने लगी। नसरीन आयी और पीछे से मेरी चूत पर हाथ रख कर मेरी चूत को थपथपाने और एक-दम से मेरी गांड में पूरी उंगली डाल दी। नसरीन आज की दो गायें और दो सांडों के चुदाई के पूरे मजे ले रही थी।

मूत मुताई से फारिग हो कर हम तीनों बाहर आये। संदीप का लंड खड़ा था। नसरीन सोफे पर बैठ गयी और संदीप की तरफ देखने लगी। संदीप समझ गया कि नसरीन लंड मुंह में डलवाना चाह रही थी।

संदीप ने लंड नसरीन के मुंह में डाल दिया। संदीप और नसरीन की लंड चुसाई को देख कर असलम का लंड भी खड़ा हो गया। मैं नसरीन के पास ही बैठ गयी और असलम ने अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया।

नसरीन अपना मुंह संदीप के लंड पर आगे-पीछे कर रही थी। कुछ ही देर में संदीप और असलम के लंड हमारे मुंह में मलाई छोड़ गए। संदीप के मुंह से निकला, “लो नसरीन निकला मेरे लंड का पानी। अब पी लो मेरे लंड की मलाई चूस लो पूरी मलाई।” संदीप नसरीन के साथ चुदाई का पूरा मजा ले रहा था।

मैंने तो असलम के लंड का पानी पी लिया। नसरीन ने भी संदीप के लंड का पानी पी लिया होगा, क्योंकि संदीप का लंड अभी भी नसरीन के मुंह में ही था। दोनों के लंड ढीले हुए तो दोनों ने लंड हमारे मुंह में से निकाल लिए और जा कर कुर्सियों पर बैठ गए।

मैं सोफे से उठी और कपड़े उठा कर बाथरूम की तरफ जाते हुए संदीप से बोली, “संदीप आज की चुदाई का तुमने और नसरीन ने पूरा-पूरा मजा लिया है।”

संदीप बोला, “सच में ही मैडम, नसरीन मस्त चुदवाती है मजा आ गया आज।”

नसरीन ने भी अपने कपड़े उठाये और मेरे साथ ही बाथरूम में आ गयी। तौलिया गीला करके हमने अपने चूत गांड और टाँगे साफ़ की, मुंह धोया, कुल्ला किया और कपड़े पहन लिये।

मैंने नसरीन से पूछा, “नसरीन चुदाई के तसल्ली हो गई या एक बार संदीप का मोटा लंड और लेना है?”

नसरीन बोली, “बस मालिनी के बाकी चुदाई असलम से करवाएंगे आज रात को आपके घर में।” फिर नसरीन ने पूछा, “मालिनी जी एक बात बताएं ये जो आप जिन पी रही थी, ये शराब थी?”

मैंने कहा, “हां नसरीन, औरतें अक्सर यही पीती हैं। मैं भी चुदाई से पहले पीती हूं। इसका हल्का नशा चुदाई के मजे को बढ़ा देता है।”

नसरीन बोली, “मालिनी जी आपके घर पर है ये जिन?”

मैंने कहा, “हां नसरीन है, मैं तो थोड़ी से रोज़ ही पीते हूं। क्या तुमने भी पीनी है?”

नसरीन बोली, “हां मालिनी जी मन तो कर रहा है। आज रात असलम से चुदाई से पहले थोड़ी सी पीने का।”

हम बाहर आये तो संदीप और आलम भी कपडे पहन चुके थे। संदीप हंसते हुए बोला, “क्या हुआ मैडम इतना टाइम कैसे लग गया? क्या आप लोग भी एक-दूसरे के ऊपर मूतने लग गए थे?”

मैं और नसरीन दोनों हंस दी। मैं बोली, “हम नहीं मूत रहे थे, हम तुम्हारा मूत साफ़ कर रहे थे जो हमारी चूतों की आस-पास गिरा था। लंड की मलाई साफ़ कर रहीं थी जो तुमने हमारी गांड में डाली था।”

सब लोग बैठ कर हल्की-फुल्की बातें करने लगे। संदीप असलम से बोला, “असलम अब कब लाओगे नसरीन जी को? मस्त चुदाई करवाती हैं ये तो, चूतड़ झटक-झटका कर। करके मजा आ गया। और इनकी गांड तो एक-दम लाजवाब है मुलायम और कसी हुई।”

असलम बोला, “मैं तो आगरा की अपनी दुकान के सिलसिले मैं आता ही रहूंगा, इनका पता नहीं। लेकिन अगर प्रोग्राम बना तो मालिनी जी को बता दूंगा।”

संदीप बोला, “चलो तुम ही आ जाया करना। मालिनी जी दूसरी गाये ढूंढ ही लेंगी।”

मैंने सोचा चुदाई के मामले में संदीप एक-दम सुलझा हुआ है। असलम मेरी और रागिनी की चुदाई का जिक्र नहीं किया। संदीप फिर मुझसे बोला, “मैडम कभी आप ही दर्शन दे दो – “वैसी” वाली मस्त चुदाई करेंगे मैं और आप।”

मैंने हंस कर कहा, “सब्र करले संदीप। इतनी चुदाई तूने मेरी और ख़ास कर नसरीन की कर ली, अभी भी चुदाई का ही सोच रहा है। साले अब आज तो तेरा लंड भी खड़ा नहीं होने वाला।”

संदीप हंसते हुए बोला, “ऐसी बात नहीं है मालिनी जी। ये संदीप का लंड है‌। हमेशा ही तैयार रहता है।” ये कह कर संदीप ने लंड पैंट से बाहर निकाल लिया।

सच ही कहा था संदीप ने। उसका लंड अगर पूरा खड़ा नहीं था तो पूरा बैठा भी नहीं था। मोटा लंड देख कर नसरीन से रहा नहीं गया और उसने झुक कर संदीप का लंड मुंह में ले लिया।

मैंने कहा, “बस कर नसरीन, तुझे लंड चूसता देख कर कहीं मेरा भी मन लंड चूसने का हो जाये। तुझे चुदाई करवानी है क्या?”

चूत और गांड चुदाई का दौर खत्म हो चुका था। सब चलने की तैयार में थे। चलते-चलते भी नसरीन ने संदीप का लंड मुंह में ले लिया। मैंने हंसते हुए नसरीन से पूछा, “नसरीन क्या हुआ, और चुदाई का मन हो रहा है?”

नसरीन ने संदीप का लंड मुंह में से निकालते हुए कहा, “आज नहीं मालिनी जी अब और चुदाई नहीं, कम से कम अभी तो नहीं। अभी चूत और गांड को थोड़ा आराम के जरूरत है। इतनी चुदाई हुई है आज कि चूत और गांड दोनों में हल्का हल्का मस्ती वाला दर्द सा भी है। ये तो संदीप का मोटा लंड देख कर मुंह में लेने का मन हो गया।”

सब हंस पड़े। संदीप मेरी तरफ देखते हुए बोला, “अरे मैडम आपका मन नहीं कर रहा मेरा मोटा लंड मुंह में लेने का?”

मैंने उठते हुए कहा, “भोसड़ी वाले मेरे लिए तो तू घर की मुर्गी है, जब भी तेरा लंड चूसने का मन होगा आ जाऊंगी मुंह में लेने के लिए – तू तो हमेशा खड़े लंड लिए तैयार ही मिलता है।” नसरीन और असलम भी सोच रहे होंगे, ‘ये भाषा बोलती है ये देश विदेश के मशहूर मनोचिकित्स्क’?

फिर मैंने कहा, “आज के लिए बस चलते हैं संदीप सात बजने वाले हैं। प्रभा भी इंतजार कर रही होगी।”

संदीप भी बोला, “ठीक है मैडम, मगर जल्दी कोइ प्रोग्राम बनाओ। अगर दो गायें और दो सांडों वाला ना भी बने तो आप ही आ जाना।”

मैंने हंसते हुए कहा, “एक बात बता भोसड़ी वाले संदीप, दुनिया भर के रबड़ के लंड रबड़ की चूतें, रबड़ के चूतड़, मम्मे, होंठ सब कुछ तो तू सप्लाई करता है। तुझे चूतों की कमी है क्या? तू हर वक़्त मेरी चूत के पीछे क्यों पड़ा रहता है?”

अब संदीप थोड़ा सा संजीदा हो गया फिर बोला, “मैडम वैसे तो मुझे हमेशा से ही अच्छी लगती रही हैं। मैंने सैकड़ों चूतें, फुद्दियां चोदी हैं। मगर जब से मैंने आपकी की फुद्दी की झलक देखी, मैं आपकी फुद्दी का दीवाना हो गया। आपकी जैसी फुद्दी लाखों में नहीं तो हजारों में तो एक होती ही है – ऊंची फुद्दी, जिसमे लंड कर चुदाई करने का मजा ही का मजा ही अलग होता है, और आपकी फुद्दी की फांकें – मन करता है चूसते ही जाओ, चूसते ही जाओ। बस मैडम, तब से हमेशा मैं आपको चोदना चाहता था। मुझे आज तक भी ऐसी फुद्दी चोदने के लिए नहीं मिली।” ये कह कर संदीप ने अपना लंड जोर से खुजला दिया।

“ऊंची फुद्दी या ऊपर वाली चूत, और उभारदार फांके। लंड खड़ा करके ऊपर लेटो, और लंड चूत की फांकों पर रखो और अंदर की तरफ करके धकेल दो। लंड चूत में जाएगा ही जायेगा। चूत का छेद ढूंढने की भी जरूरत नहीं।”

मुझे अपनी चूत की ये खासियत मालूम ही थी, मगर असलम और नसरीन एक-दूसरे की तरफ हैरानी से देखने लगे। हम उठे और चलने के लिए तैयार हो गए। जाते जाते मैंने संदीप से कहा, “संदीप फ़िक्र ना कर जल्दी ही चुसवाऊंगी भी और चुदवाऊंगी तुझ से।” और हम संदीप के ऑफिस से निकल गए।

कार में बैठते ही नसरीन ने पूछा, “मालिनी जी ये संदीप आपकी फुद्दी के बारे में क्या बता रहा था, कि आपकी फुद्दी अलग तरह की है?”

मैंने सोचा नसरीन का ज्ञानवर्धन करना चाहिए, साथ ही हमारे पाठकों का भी ज्ञानवर्धन हो जाएगा।

मैंने नसरीन से कहा, “देखो नसरीन लंड और चूत यानी फुद्दी कि बनावट अलग-अलग तरह की होती है। जैसे लंड छोटा मगर मोटा, छोटा और पतला, लम्बा मोटा या लम्बा पतला, आगे से फूला हुआ या आगे से कुछ पतला और पीछे से मोटा होता है, मतलब लंड की बनावट कई तरह की हो सकती है। ऐसे ही फुद्दी मोटी-मोटी तीन तरह की होती है। ऊंची फुद्दी, नीची फुद्दी या आम फुद्दी जिसे बीच की फुद्दी भी कह सकते हैं।

इनमें ऊंची फुद्दी और नीची फुद्दी किसी किसी-किसी की होती है मगर बीच की फुद्दी ज्यादा औरतों की होती है। मगर इसके उलट लंड चाहे जैसा भी हो वो मर्दों में एक ही जगह लगा होता है, जबकि तीनों किस्म की फुद्दियों में फुद्दी के छेद की जगह थोड़ी बदल जाती है।”

असलम और नसरीन सुन रहे थे। मैंने कहा, अब तीन तरह कि तीन तरह की फुद्दीयों का फर्क समझो। इन फुद्दियों में फर्क ये होता है कि नीची फुद्दी। इस फुद्दी के छेद और गांड के छेद में बहुत कम फर्क होता है – लगभग सवा इंच से डेढ़ इंच। बीच की फुद्दी में यही फ़र्क़ दो इंच आस-पास होता और ऊंचे फुद्दी में ये दो इंच से भी ज्यादा होती है। ऊंची फुद्दी की फांकें भी बहुत उभरी हुई होती हैं, और दरार भी सामने दिखाई पड़ती है। चूत की फांकें चूसने का मर्द को बहुत मजा आता है।”

मैं असलम और नसरीन को बता रही थी, “और बीच की फुद्दी में यही फांकों का उभार थोड़ा कम होता है, और नीचे की फुद्दी में ये फांकें दिखाई ही नहीं देती। नीचे की फुद्दी में चूत की दरार भी ढूंढ़नी पड़ती है। नीची फुद्दी में एक और भी बात होती है कि ऐसी चूत का दाना छेद के बिलकुल पास होता है – लगभग एक इंच के दूरी पर, जबकि दूसरी दो फुद्दियों में ये फर्क एक डेढ़ इंच या उससे भी थोड़ा सा ज्यादा तक भी हो सकता है।”

मैं बोल रही थी, “अब आते हैं इन फुद्दियों की चुदाई में। चुदाई में क्या फर्क होता है। ऊंची फुद्दी वाले औरत को जब मर्द ऊपर लेट कर चोदता है तो टाँगें उठाने साथ ही लंड बिलकुल छेद के सामने ही आ जाता है, जबकि आम फुद्दी मैं जरा सा लंड को ऊपर नीचे करके छेद ढूढ़ना होता है।”

“नीची फुद्दी वाले औरत में टाँगे और चूतड़ ज्यादा उठाने पड़ते हैं, तब कहीं जा कर चूत का छेद लंड के सामने आता है।”

“एक बात और, नीची फुद्दी वाली औरत को पीछे से चोदने और चुदवाने ज्यादा मजा आता है। एक तो चूतड़ों के पास होने के कारण लंड बिलकुल सीधा चूत में जाता है दूसरे चूत – फुद्दी का छेद और फुद्दी का दाना भी पास-पास होते हैं, इसलिए लंड की रगड़े चूत के छेद के साथ-साथ के दाने पर भी लगते हैं। दूसरी ओर ऊंची फुद्दी वाली औरत को जब पीछे से चोदते हैं तो चूतड़ ऊपर उठाने पड़ते हैं जिससे चूत का छेद लंड की सामने आ जाये।”

मैं कहा, “नसरीन मेरी फुद्दी ऊंची फुद्दी है, तुम्हारी बीच की फुद्दी हैं और मेरी एक जानकार हैं, रागिनी नाम है उसका, उसकी नीची फुद्दी है। संदीप को मुझे मेरे ऊपर लेट कर मुझे चोदना ज्यादा अच्छा लगता हैं, मगर जब वो रागिनी को चोदता हैं तो उसे पीछे से चोदता है।”

नसरीन हैरानी की साथ बोली, “मालिनी जी क्या आप इस रागिनी से साथ संदीप से चुदाई करवा चुके हैं?”

मैंने कहा, “हां नसरीन करवा चुकी हूं आज की तरह ही दो गायें और दो सांड थे। नसरीन, मैं चुदाई की शौकीन भी हूं और मस्त चुदवाती भी करवाती हूं। मुझे चुदाई की वक़्त कहीं भी लंड लेने से परहेज़ नहीं होता। चूत गांड मुंह में। जब चुदवानी ही है तो पूरा मजा तो लो।”

नसरीन बोली, “ये तो आप ठीक ही कह रही हैं।”

मैंने असलम की तरफ मुड़ कर पूछा, “असलम निकहत कि फुद्दी किस किस्म कि है ऊंची, बीच की या नीचे वाली?”
असलम थोड़ा शरमाया और नसरीन की तरफ देखने लगा।

मैंने असलम से कहा, “असलम अब शर्माओ मत। मेरी ऊंची फुद्दी, नसरीन की बीच की फुद्दी का मजा तुम ले ही चुके हो। नीचे कि फुद्दी भी तुमने चोदी ही होगी।” ये कहते हुए मैंने एक आंख दबा दी। असलम भी समझ गया मेरा इशारा रागिनी की तरफ था।

असलम बोला, मगर मुझसे नहीं नसरीन से, “अम्मी निकहत की फुद्दी नीचे की फुद्दी है। तभी वो अक्सर मुझे पीछे से चोदने के लिए बोलती है। पीछे से चोदते हुए, उसके मुलायम चूतड़ देख कर ही तो उसकी गांड चोदे का मन होने लगता है।”

नसरीन बोली, “वाह असलम बड़ा किस्मत वाला है तू, ऐसी सुन्दर और ऐसे बढ़िया फुद्दी वाली बीवी मिली तुझे। चल अगर सब ठीक रहा तो निकहत की गांड में भी तेरा लंड चला ही जाएगा।”

असलम अब मुझसे बोला, ” सच बताऊं मालिनी जी मेरा मन निकहत की गांड चोदने का बहुत करता है। क्या मस्त नरम नरम चूतड़ हैं उसके। एक बार लंड डालने की कोशिश भी की थी मगर उसने तो अम्मी से मेरी शिकायत ही लगा दी।”

नसरीन बोली, “तो मैं क्या करती? उसे बोलती फड़वा ले अपनी गांड असलम से? लंड देखा है अपना कितना मोटा और लम्बा है?” हम सब हंस दिए।

नसरीन मुझसे बोली, “मालिनी जी वैसे कमाल है आप भी। जितनी बार भी आपसे मिलो हर बार आपकी कुछ अलग ही खासियत सामने आती है।”

फिर नसरीन असलम कि तरफ देखते हुए बोली, “असलम सच बताना, निकहत भी तुझसे ऐसे ही बेशर्म हो कर चुदवाती है, जैसे मैं और मालिनी जी चुदवाती हैं, या उसे एक बार मालिनी जी के पास ट्रेनिंग की लिए भेजना पड़ेगा।”

असलम कुछ सोचने लग गया। सोच रहा होगा कहीं मैं निकहत को संदीप से ही ना चुदवा दूं?

नसरीन ने असलम को सोचते हुए देखा तो सब समझ गयी। वो बोली, “क्या हुआ असलम, मैं तो मजाक कर रही थी। लेकिन तू कही ऐसा तो नहीं सोच रहा कि मालिनी जी निकहत को संदीप से ही ना चुदवा दें?”

असलम हड़बड़ा कर बोला, “नहीं-नहीं अम्मी, ऐसा मैं कैसे सोच सकता हूं। मैं मालिनी जी को अच्छे से जानता हूं, वो ऐसा कर ही नहीं सकती।”

मैंने ही बात की कमान संभाली, “नसरीन, अगर निकहत असलम को चुदाई का पूरा मजा दे रही है तो उसे मेरे पास उस किसी वजह से लाने की कोइ जरूरत नहीं। हां वैसे मैं निकहत से मिलना जरूर चाहूंगी, और अगर वो आती ही है, तो मैं उसे गांड चुदाई के लिए भी राजी कर लूंगी। जब से इस दुनिया में चुदाई शुरू हुई है, तब से ही चूत चुदाई के साथ-साथ गांड चुदाई भी तो होती रही है।”

मैंने आगे कहा, “अब देखो तुम भी गांड चुदवाती हो, वो रागिनी भी चुदवाती है और मैं भी चुदवाती हूं, तो फिर निकहत ही क्यों ना चुदवाए। रही बात निकहत को संदीप से चुदवाने की, तो निकहत मेरी बेटी की तरह नहीं मेरी बेटी ही है।”

नसरीन ने मेरे जांघ पर हाथ रखा और असलम की तरफ देखते हुए मेरी जांघ दबा दी और लोग कार में मेरे घर की तरफ निकल पड़े। रास्ते में मैंने नसरीन से कहा, “नसरीन असलम ऐसा करते हैं तुम्हारे होटल चलते हैं वहां से कुछ कपड़े ले लो। इन कपड़ों में तो ना जाने किस-किस का पेशाब और लंड का पानी लगा हुआ होगा। मेरे घर चल कर नहा कर कपड़े बदल लेना। इन कपड़ों को धुलने के लिए डाल देंगे, साथ ही साथ सूख भी जायेंगे।”

असलम और नसरीन दोनों ने हंसते हुए ही हां कर दी। होटल पहुंच कर मैंने कहा, “असलम मैं यहीं गाड़ी में बैठती हूं, तुम जरूरी सामान ले कर आ जाओ।”

असलम बोला, “मालिनी जी ऐसे-कैसे आप यहां क्यों बैठेंगी। हमारे साथ ही चलिए, दस मिनट ही तो लगेंगे।”

मैंने कहा, “ठीक है चलो।”

हम रिसेप्शन के आगे से गुजर ही रहे थे कि मैनेजर भागता हुआ आया और हाथ जोड़ कर मेरे सामने खड़ा हो गया और बोला, “नमस्ते डाक्टर जी आप यहां? आइये पधारिये।” मैंने उस मैनेजर को नहीं पहचाना। मैंने असलम और नसरीन की तरफ इशारा करते हुए कहा, “मैं इनके साथ आयी हूं। आज इनको यहां कानपुर में कुछ काम था तो मैं इनको ले गयी थी। ये आज की रात मेरे यहां मेहमान हैं।”

मैनेजर असलम को बोला, “सर आपने मैडम के बारे में बताया ही नहीं? आगे से आप जब भी हमारे होटल में आएं तो मैडम का नाम ले दें बस। आपको पच्चीस परसेंट डिस्काउंट मिलेगा। इस बार भी जिस दिन आपका चेकआउट होगा तो बस मैडम का रेफरेंस दे दीजियेगा, आपको डिस्काउंट मिल जाएगा।”

मैंने भी मैनेजर को कह दिया, “थैंक यू।”
मैनेजर बोला, “थैंक यू कैसा मैडम आपके तो बहुत एहसान हैं हम पर। क्या पियेंगी मैडम जी?”

मैंने कहा, “नही-नहीं कुछ नहीं, बस कुछ जरूरी सामान लेना है।” ये कह कर हम आगे बढ़ गए और मैनेजर अपनी जगह पर चला गया।

कमरे में पहुंचते ही नसरीन बोली, “मालिनी जी आपकी तो बड़ी वाह-वाह है। यहां कानपुर में आपको देखते ही होटल के मैनेजर ने इतनी छूट दे दी। जबकि लग रहा थी के आप उसे पहचान भी नहीं रही थी।”

मैंने कहा, “ये सच है नसरीन मैंने उसे नहीं पहचाना। किसी मशवरे के सिलसिले में मुझसे कभी मिला होगा। कानपुर में ऐसे बहुत लोग होंगे तो मुझे जानते होंगे। मगर मैं उन्हें नहीं जानती। यही एक वजह है कि मैं यहां इस शहर में चुदाई करवाने से परहेज करती हूं।”

नसरीन और असलम ने अपना जरूरी सामान उठाया और हम लोग घर पहुंचे। फिर ऊपर जा कर मैंने नसरीन और असलम को उनका कमरा दिखाया और प्रभा को बुला कर रात के खाने के बारे में पूछा। आठ बज चुके थे। प्रभा ने बताया खाना बिलकुल तैयार था।

मैंने कहा, “प्रभा ऐसा करो, खाना डाइनिंग टेबल पर लगा दो और तुम आराम करो। हमें जब खाना होगा हम गरम करके खा लेंगे।”

मैंने असलम और नज़रें को उनका कमरा दिखाया और बोली, “नसरीन तुम लोग नहा कर फ्रेश हो जाओ असलम को भी साथ ही ले जाओ। इकट्ठे नहाओ, एक-दूसरे को आगे से पीछे से अच्छी तरह साफ़ करो। मैं भी नहा लेती हूं। फिर बैठ कर बातें करेंगे।”

नसरीन बोली, “अरे मालिनी जी आप भी आइये ना, आप भी हमारे साथ ही नहा लीजिये। इकट्ठे नाहते हुए थोड़े मस्ती भी कर लेंगे।” मैंने हंसते हुए कहा, “ठीक है मैं कपड़े लेकर आती हूं।”

मैं गयी और अपना नाईट गाऊन ले कर आ गयी। हम तीनों बाथ रूम में चले गए और कपडे उतार कर गर्म पानी का शावर चालू कर दिया। अच्छी तरह नहाने के बाद नसरीन ने असलम का लंड पकड़ लिया और मलते हुए बोली, “ला असलम इसकी अच्छे से सफाई कर दूं।”

असलम ने भी नसरीन को पकड़ कर उसकी गांड में उंगली डाल दी और बोला, “अम्मी आपकी गांड का क्या हाल है?”

नसरीन बोली, “ठीक ही होगी, बाकी खुद देख लेना जब इसमें लंड डालोगे। आज तुमसे गांड ही चुदवानी हैं।”

असलम बोला, “क्यों अम्मी संदीप का लंड गांड में लेने मजा नहीं आया?”

नसरीन बोली, “असलम, संदीप का लंड चूत के लिए तो ठीक है – मोटा है इसलिये रगड़ कर चूत में जाता है, और चूत को चुदाई के वक़्त फैला देता है। अगर असलम गांड के लिए तेरा लंड ही बढ़िया है, लम्बा है इसलिए गांड में पूरी गहराई तक जाता है।”

इतना सुनना था कि असलम ने नसरीन की गांड में उंगली और गहरे तक घुसेड़ दी और मेरे तरफ मुंह करके बोला, “और मालिनी जी आप? आप क्या चुदवाएंगी?”

मैंने कहा, “मैं भी गांड में ही लूंगी तुम्हारा लम्बा मोटा लंड। नसरीन ठीक कह रही है। तुम्हारा लंड गांड में बढ़िया काम करता है, अंदर तक जाता है तो महसूस होता है अंदर कुछ गया हुआ है।”

इतना सुनना था कि असलम ने नसरीन के गांड में से उंगली निकाल कर मेरी गांड में डाल दी। नसरीन मेरे पीछे आयी और हाथ डाल कर मेरे मम्मे पकड़ लिए और अपने मम्मे मेरी पीठ पर रगड़ते हुए बोली, “मालिनी जी आपका जिस्म कमाल का चिकना है। जो भी आपकी चुदाई करता होगा उसे मजा तो बड़ा आता होगा।”

मैंने हंसते हुए कहा, “असलम से पूछ लो कितना मजा आता है।” ये कह कर मैं हंस दी और नसरीन भी हंस दी और अपने मम्मे मेरी पीठ दबा दिए। असलम ने मेरे होंठ अपने होठों में ले लिए और चूसने लगा।
ऐसे ही मस्ती में हम नहाये और कपड़े पहन कर बाहर आ गये। नसरीन बोली, “मालिनी जी अपने तो इस गाऊन के नीचे कुछ भी नहीं पहना – ना चड्ढी ना ब्रा।”

मैंने कहा, “नसरीन जा थोड़ी देर में दोनों उतारनी ही हैं फिर डालनी ही क्यों।”

नसरीन हंस दी और बोली, “ये बात भी ठीक है।”

आधे दिन की चुदाई के बाद सब को भूख लगी हुई थी। प्रभा सारा सामान डाइनिंग टेबल पर रख गई थी।

इस बीच मैं थोड़ा ऊपर बने कमरों के बारे में बता दूं। रसोई को छोड़ कर ऊपर कुल पांच कमरे हैं। तीन बेड रूम, एक ड्राइंग रूम और पांचवां कमरा प्रभा का है। ऊपर दो गलियारे हैं। जो मेन गलियारा है उसके दोनों और दो-दो कमरे हैं दोनों कमरों के अंत में किचन है। एक छोटा गलियारा ड्राइंग रूम के साथ है जिसका रास्ता पीछे बने कमरे में जाता है जिसमे प्रभा रहती है सभी पांचों कमरों के साथ बाथरूम सटे हुए हैं। गलियारे के शुरू में में ही नीचे क्लिनिक में सीढ़ियां जाती हैं।

नसरीन खाना गर्म करने लगी और मैंने असलम से कहा, “असलम चलो नीचे क्लिनिक से कुछ सामान ले आएं।”

असलम मेरे साथ चल पड़ा। नीचे आ कर मैंने जिन की बोतल निकाली और अलमारी में से रबड़ के दो लंड निकाल लिए।
असलम से मैंने पूछा, “असलम विआग्रा लेनी है? जिस तरीके से नसरीन मस्त हुई पड़ी है और चुदवा रही है, मुझे नहीं लगता आज वो तुम्हें सोने भी देगी।”

असलम बोला, “मुझे भी ऐसा ही लगता है मालिनी जी। अम्मी तो आज जैसे चुदाई की दीवानी हुई पड़ी है। पता नहीं कितनी चुदवायेगी, आधी विआग्रा खा लेता हूं।”

मैंने कहा, “आधी नहीं फिर मैं तुम्हें देसी विआग्रा देती हूं – सुहागरा 50, ये विआग्रा से कुछ कम पावर वाली है, मगर तुम्हारा काम चला देगी। वैसे भी तुम्हारा लंड ही जल्दी कहां झड़ता है।”

ये कहते हुए मैंने असलम के लंड पर हाथ फेर दिया। असलम ने भी मेरे मम्मे दबा दिए और मेरे होंठ चूसते हुए बोला, “चलिए मालिनी जी, कहीं अम्मी ये ना समझे कि हम दोनों फिर चुदाई करने लग गए हैं।”

मैंने हंसते हुए कहा, “चलो।” और हम ऊपर आ गए। नसरीन माइक्रो-वेव में खाना गरम कर चुकी थी। मैंने फ्रिज में से पेप्सी की बोतल निकाली और तीन गिलासों में जिन डाल कर उसमें पेप्सी मिला दी।

एक गिलास मैंने असलम को दे दिया और एक नसरीन को। नसरीन असलम की तरफ देखने लगी। असलम बोला, “थोड़ी पी लो अम्मी, रात को चुदाई का मजा दुगना हो जाएगा।”

नसरीन गिलास पकड़ते हुए बोली, “और कितना मजा देगा असलम अपनी अम्मी को आज, और कितना चोदेगा बेटा?”

असलम भी उसे लहजे में बोला, “जितना आप कहेंगी अम्मी। आज जितना आप कहेंगी उतनी चुदाई करूंगा आपकी, कहेंगी तो चोद-चोद कर फुला दूंगा आपकी चूत और गांड।”

नसरीन ने बस इतना ही कहा, “वाह, आज तो पूरी मस्ती में है मेरा बेटा।”

प्रभा ने चिकन बिरयानी बहुत बढ़िया बनाई थी। हम खाना खाते रहे और साथ जिन कि घूंट भरते रहे। खाना खत्म करके बर्तन डिश वॉशर – बर्तन धोने की मशीन में डाल दिए और मेरे साथ वाले कमरे में आ गए जिसमें असलम और नसरीन ने सोना था।

सभी कमरों सभी चार कमरों में बड़े साइज – 75 इंच कि TV लगी हुए हैं, साथ ही DVD प्लेयर भी हैं। मैंने DVD प्लेयर में चुदाई की फिल्म लगा दी और अपना गाऊन उतार कर नंगी सोफे पर बैठ गई।
नसरीन ने कहा, “क्या हुआ मालिनी जी गाऊन क्यों उतार दिया?”

मैंने कहा, “क्यों नसरीन क्या अकेले-अकेले चुदवाओगी अपने बेटे से?”

नसरीन हंस दी और उसने भी अपने कपड़े उतर दिए। और असलम से बोली, “असलम अब तू क्यों कपड़े पहन कर बैठा है चल उठ उतार तू भी कपड़े।”

हंसते हुए असलम ने भी कपड़े उतार दिए। चुदाई की फिल्म टीवी पर चालू थी। कमाल था कि उस फिल्म में भी दो गायें और दो सांड – दो लड़के, दो लड़कियां – की ही फिल्म चल रही थी।

जिन पीते पीते हम फिल्म देख रहे थी। हमारा जिन का पहला गिलास खत्म हो चूका था। मैंने सब कि गिलासों में दुबारा जिन डाल दी। इस बार मैंने जिन का बड़ा बड़ा सा पेग बनाया। फिल्म में लड़कियों कि चुदाई देख कर हमारी चूतें गीली होने लगी थीं।

उधर सुहागरा भी अपना असर दिखा रही थी। असलम का लंड भी खड़ा हो कर सख्त होने लगा था।

एक सीन चल रहा था जिसमें लड़के को लड़का चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर टांगों में कुहनियां फंसा कर जोर-जोर से चोद रहा था। लड़की सिसकारियां ले रही थी। नसरीन ने एक में गिलास पकड़ा हुआ था, दूसरे हाथ से उसने असलम का लंड पकड़ लिया।

नसरीन बहुत बड़े-बड़े जिन के घूंट भर रही थी। नसरीन की नजरें TV पर से हट ही नहीं रही थी। जल्दी ही नसरीन को सुरूर हो गया। वो उठी और बेड पर अपने चूतड़ों कि नीचे तकिया लगा कर लेट गयी और टांगें उठा कर फैला दी और असलम से बोली, “असलम आओ डालो मेरे फुद्दी में लंड और ठंडा करो इसकी आग को इस चुदाई की फिल्म को देख कर ये आग लग गयी है इसमें।”

असलम ने मेरी तरफ देखा, हम दोनो मुस्कुराये। असलम उठा और सीधा नसरीन कि ऊपर लेट गया। फिल्म की ही तरह असलम ने भी नसरीन की टांगों के नीचे अपनी बाहें डाल नसरीन की टांगें ऊपर उठा दी – बिलकुल उस फिल्म के सीन की तरह।

असलम का लंड नसरीन की चूत के छेद के बिलकुल ऊपर था। असलम ने एक जोर का झटका लगाया और पूरा लंड नसरीन की चूत के अंदर टट्टों तक बिठा दिया। नसरीन की आवाज निकली, “आह मेरा बेटा …. मजा आ गया। चल अब चुदाई शुरू कर। दिखा अपनी अम्मी को चुदाई क्या होती है। दिखा अपनी अम्मी को अपने लंड का दम और करवा अपनी अम्मी को जन्नत की सैर।”

असलम ने मेरी और देखा और एक इशारा किया जैसे कह रहा हो, “देख लिया मालिनी जी, एक साल तक चूत में लंड ना लेने का नतीजा?”

असलम ने नसरीन की चुदाई शुरू की और बोलते बोलते ऐसे जोरदार धक्के लगाए की पंद्रह-पंद्रह मिनट तक लंड झेलने वाली नसरीन जोर-जोर से चूतड़ हिलाने लगी, “आह मेरे राजा असलम क्या मस्त चोदता है बेटा तू।”

असलम जोर-जोर से धक्के लगाते हुए बोला, “अम्मी आज रंडी समझ कर चोदूंगा आपको, वो भी पूरी रात। आपकी चूत को चोद-चोद कर उसका भोसड़ा बना दूंगा। गांड फाड़ दूंगा आज आपकी। पूरे एक साल से चुदाई नहीं करवाई आपने, आज पूरे एक साल की कसर निकालूंगा।”

असलम की इन बातों से अगले पांच मिनट में ही नसरीन ठंडी हो गयी। पांच मिनट में ही नसरीन की चूत पानी छोड़ गयी। पांच मिनट में ही नसरीन को मजा आ गया।
उधर असलम की बातों ने मेरी चूत में भी आग लगा दी। मैंने रबड़ का लंड उठाया और अपनी चूत में घुसेड़ लिया और आगे-पीछे करने लगी।

असलम खड़े लंड के साथ अभी नसरीन के ऊपर ही था। नसरीन बोली, “असलम क्या चुदाई की तूने इतनी जल्दी मजा आ गया। चल उतर मेरे ऊपर से और ऐसी ही चुदाई मालिनी जी की भी कर। वो देख रबड़ का लंड डाला हुआ है उन्होंने अपने चूत में करा उनको भी जन्नत की सैर।”

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