“एयाया..हह..इसस्सस्स…” हल्की से आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी और मेरे लंड ने
पानी छोड़ दिया..वो आवाज़ दीदी के खुले होंठो से निकली थी ..शायद उनको भी
ऑर्गॅज़म हुआ था..मैने अपने आप को संभाला और घर के बाहर आ गया..बाहर आकर
मैने देखा कि वो बुढ्ढा अंकल भी जा चुका था..
अगले दिन मेरी स्कूल बस मिस हो गयी थी.क्योंकि मैं सही से सो नही पाया था
सारी रात दीदी के बारे मे सोचता रहा था .करीब 10 मिनट मे बस आई मैं फटा
फट बस मे चढ़ गया.बस मे काफ़ी भीड़ थी .मैं साइड मे खड़ा था कि तभी कोई
मुझ से टकराया..मैने मूड कर देखा तो पाया कि ये वही अंकल थे जो उस दिन घर
के साइड मे पेशाब कर रहे थे.वो अंकल देखने मे बड़ा झगड़ालु टाइप लग रहा
था..रह रह कर वो लोगो को गंदी गंदी गालिया दे रहा था..बस मे लड़कियाँ और
औराते भी थी ..पर वो किसी की शर्म नही कर रहा था.उसकी बॉडी लॅंग्वेज देख
कर वो मुझे अभी भी थोड़ा नशे मे लग रहा था उसके मूह से शराब की बदबू भी आ
रही थी.. खैर वो थोड़ा आगे निकल गया .और मैं खिड़की से बाहर देखने
लगा..तकरीबन 5 मिनट के बाद मेरी नज़र उस अंकल पर दोबारा गयी..और जो सीन
मैने देखा वो मेरे लंड को खड़ा करने के लिए काफ़ी था..अंकल एक 30-32 साल
की शादी शुदा और्रत की पीछे चिपका खड़ा था.उसका अगला हिस्सा साड़ी के
उप्पर से उस और्रत के कूल्हे से बिकुल चिपका था और वो धीरे धीरे धक्के
लगा रहा था..मैने औरत के चेहरे की तरफ़ देखा तो पाया कि उसके चेहरे पर जो
एक्सप्रेशन था वो उसकी माजबूरी बयान कर रहा था..अंकल उस औरत की मजबूरी और
बस की भीड़ का पूरा फ़ायदा उठा रहा था..अब मैं समझ गया था कि अंकल तो
पक्का हारामी इंसान है. शायद ये उसका रोज का काम था . वो उस औरत के साथ
लगभग 15 मिंट्स तक ऐसे ही साडी की उप्पर से मज़े लेता रहा ..फिर मेरा
स्टॅंड आ गया और मैं बस से उतर गया.
आज कल स्कूल मे मेरा मन नही लग रहा था और लगता भी कैसे हर वक्त तो दिमाग़
मे सेक्स की बाते ही चलती रहती थी. मैं चाहे कितना भी कोशिस कर लू अपना
दिमाग़ इस चीज़ से हटाने मे पर फिर भी कुछ ना कुछ ऐसा हो जाता था जिसकी
वजह से मेरे अंदर का छुपा हुआ हवस का शैतान जागने लगता था. उप्पर से
अंजलि दीदी के बारे मे भी मेरा नज़रिया बदलने लगा था..अब वो मुझे अपने
बड़ी बहन ना लग कर एक जवानी से भरपूर लड़की नज़र आने लगी थी जो अपनी
मदमस्त जवानी लुटवाने को तैयार बैठी थी. अब हालत ये होगये थे कि अब जब भी
दीदी घर पर होती तो ना जाने दिन मे कितनी बार उनको चुपके चुपके देख कर
मूठ मारने लगा था….जैसे जैसे दिन बीतने लगे वैसे वैसे मेरी हवस भी बढ़ने
लगी..और इसी दौरान एक दिन अंजलि दीदी ने मुझसे बोला कि उनको कॉलेज से एक
सर्वे करने का असाइनमेंट मिला है .
सर्वे मे उनको झुग्गी झोपड़ी मे रहने वाले ग़रीब तबके के लोगो को सॉफ
सफाई के बारे मे जागरूक करना है. दीदी बोली के उनके साथ सर्वे पर जाने
वाली पार्ट्नर ( रीमा ) बीमार हो गयी है और वो मुझे अपने साथ ले जाना
चाहती है. मेरे भी एग्ज़ॅम्स ख़तम हो गये थे सो मैने हा कर दी. अगली सुबा
करीब 9 बजे मैं दीदी के साथ सर्वे पर निकल गया. दीदी ने उस दिन ब्लॅक सूट
और वाइट कलर की चूड़ीदार पजामि पहनी थी और अपने सेक्सी लंबे बालो का
उन्होने जुड़ा बनाया हुआ था .ब्लॅक ड्रेस मे दीदी का गोरा बदन एक अलग ही
रंगत बिखेर रहा था. हम कुछ देर बाद एक स्लम एरिया मे पहोच गये ….और जैसे
सोचा था वैसी ही गंदगी वाहा फेली हुई थी..हर जगह कूड़ा …गंदी नालिया
…वाहा से आ आ रही बदबू की वजह से दीदी ने अपना मूह अपनी चुन्नी से कवर कर
लिया था. ज़्यादा तर मर्द अपने घर से जा चुके थे रॉटी पानी का जुगाड़
करने के लिए और जो कुछ बचे थे वो अपनी भूकी आँखो से दीदी की जवानी को
निहार रहे थे. उनको शायद ये यकीन नही हो रहा था कि इतनी खूबसूरत जवान
लड़की उनकी इस गंदी सी बस्ती मे क्या कर रही है….
” अरे कहा जा रही है..आजा…मेरे पास..मेरी जान” एक आदमी कुछ पीता हुआ
बोला..वो शायद चरस पी रहा था..
“बेह्न्चोद रंडी की. गंद देख…क्या उभरी हुए गांद है…आजा रानी तुझे मस्त
कर दूँगा अपने लंड से..”.दोसरा आदमी अपना लंड दीदी को देख खुजलाता हुआ
बोला.
दीदी और मैं ये सब सुन रहे थे..पर क्या करते ..उन ..बेकार लोगो से और
क्या उम्मीद की ज़ा सकती है..सो दीदी ने उनकी बातो को इग्नोर कर दिया और
हम बस्ती के अंदर घुस गये. बस्ती तो मानो एक भूल भुलैया थी ..छोटी छोटी
तंग गलिया..
“अनुज चल इस घर मे चलते है.” दीदी एक झोपड़ पट्टी की तरफ़ इशारा करते हुए बोली.
हम अंदर दाखिल हो गये . अंदर एक बुढ्ढि औरत रोटी बना रही थी..हमे अंदर
आता देख बोली ” कोन हो और क्या चाहिए”
“कुछ नही माता जी हम एक सर्वे कर रहे है और हमे आपको सफाई के बारे मे कुछ
बाते बतानी है” दीदी मुस्कुराती हुई बोली.
“ये सर्वे क्या होता है..देखो मेरे पास टाइम नही है..मुझे काम करने जाना
है..तुम लोग जाओ” वो औरत झेन्प्ते हुए बोली. दीदी ने उसको बहुत समझाया पर
वो ना मानी सो हम वाहा से बाहर आ गये. इसी तरह हम हर झुगी मे जाकर लोगो
को साफाई की इंपॉर्टेन्स बताने लगे कुछ लोगो ने हमारी बात सुनी और कुछ नी
नही. खैर ये सब करते करते हमे दोपहर के 2 बज गये.
“दीदी और कितना घूमना पड़ेगा..मैं थॅंक गया हू” मैं दीदी की तरफ़ देखता हुआ बोला.
“ओह्ह..मेरा प्यारा भाई थक्क गया…आइएम सो सॉरी तुम मेरी वजह से कितना
परेशान हो गये ना..” दीदी बड़े प्यार से मेरी तरफ़ देखते हुए बोली. तभी
मैने देखा कि सामने से कोई लड़खदाता हुआ हमारी तरफ़ आ रहा है..जैसे ही वो
साया हमारे करीब आया . उसको देखते ही मेरे पैरो के नीचे से ज़मीन निकल
गयी…
…और ये हाल सिर्फ़ मेरा ही नही बल्कि अपने चेहरे पर डर से आया पसीना
पोछती हुई अंजलि दीदी का भी था दीदी ने भी उसको पहचान लिया था..वो इंसान
कोई और नही बल्कि वोही अंकल था जिसको दीदी अपने रूम से नीचे झाक कर पेशाब
करते हुए देखती थी..शायद अंकल भी दीदी को पहचान गये थे क्योंकि वो रुक
गया था और दीदी को देख कर उसके गंदे चेहरे पर शैतानी हसी आ गयी थी..
” अरे वाह किसी ने सही कहा है जब भगवान देता है तो झप्पड़ फाड़ कर देता
है..आज जुए मे भी मे 10’000 रुपेये जीता और अब…” अंकल मुस्कुराता हुआ
बोला
“बेटे पहचाना मुझे ..कुछ याद आया ..” वो बड़ी बेशर्मी से अपना लंड अपनी
पॅंट के उप्पर से खुजलाता हुआ बोला.
अंजलि दीदी तो मानो सुन्न पड़ गयी थी..उनका खूबसूरत चेहरा शर्म से लाल हो
गया था..वो दोनो कुछ सेकेंड तक लगातार एक दूसरे की आखो मे देखते रहे ..वो
शायद ये भी भूल गये थी कि मैं भी वही साथ मे खड़ा हू. अंकल तो मानो आखो
ही आखो मे दीदी से कुछ कह रहा था…तभी दीदी ने अपनी नज़रे नीची कर ली..
“भाई क्या हुआ..यहा कैसे..” अंकल बोला
दीदी ने कुछ ना बोला ..दीदी को कोई जवाब ना देते देख मे बोल उठा.” हम यहा
सर्वे करने आए है…”
“वाह वाह..अच्छा है…किस चीज़ का सर्वे” वो अब मेरी तरफ़ देखता हुआ
बोला. अंकल की आखो मे अब चमक आ चुकी थी..
“हम यहा लोगो को सफाई की इंपॉर्टेन्स बताने आए है” मैने तुरंत जवाब दिया.
“बहुत अछा .कितना नेक काम कर रहे हो आप लोग …मेरी खोली यही पास मे है
मुझे भी कुछ बता दो…”
“नाअ..नही हमे अब घर जाना है..” दीदी काँपती आवाज़ मे बोली.
अंकल एक बड़ा हारामी इंसान था इतना अच्छा मौका भला वो कैसे छोड़ता. उसने
फॉरन अंजलि दीदी का गोरा हाथ अपने गंदे से हाथ ले लिया और बोला ” अरे ऐसे
कैसे..आप लोग मेरे मेहमान है मुझे भी मेहमान नवाज़ी का मोका दो..” दीदी
तो मानो उसके हाथ की गुड़िया सी बन गयी थी. अंकल तो मुझे ऐसे इग्नोर कर
रहा था जैसे कि मैं वाहा हू ही नही उसका सारा ध्यान दीदी पर ही केंद्रित
था. मुझे अंकल की ये हरकत बुरी लग रही थी..और मैं चाहत्ता तो उनको रोक भी
सकता था ..पर ना जाने क्यू मेरे अंदर छुपा वो हवस का भूका शैतान मुझे से
सब करने से रोक रहा था..और कुछ ही देर मे हम दोनो अंकल के झोपडे के अंदर
थे. झोपड़ी कुछ ज़्यादा बड़ी ना थी फिर भी उसमे दो हिस्से थे..यहा वाहा
कुछ खाली शराब की बोटले पड़ी थी..समान के नाम पर एक पुरानी चारपाई .एक
लकड़ी की मेज , एक बड़ा सा बक्सा और कुछ छोटा मोटा घरेलू समान था…दीदी और
मैं चारपाई पर बैठे थे…
“देख लो ये है मेरा हवा महल..हा हा हा ..” वो अपनी जेब से एक शराब की
बॉटल निकाल कर मैंज पर रखता हुआ बोला.
दीदी अब भी उस आदमी से नज़रे नही मिला पा रही थी..अंकल कुछ देर के लिए
झोपड़ी के दूसरे हिस्से मे गया और थोड़ी देर बाद वापस आया तो उसके बदन पर
सिर्फ़ लूँगी बँधी थी…अंकल बिल्कुल दुब्ब्ला पतला था ..उसके सीने पर उगे
सफेद होते बॉल काफ़ी घने थे .
” अरे भाई मुझे भी तो बताओ..सफाई के फ़ायदे ..देखो मेरा घर कितना गंदा है
..और मेरे यहा सफाई करने वाला भी कोई नही..” वो पास पड़े इस्तूल को दीदी
के बिल्कुल पास रख उसपर बैठता हुआ बोला. अब मेरी नज़र दीदी पर थी दीदी की
साँसे तेज चल रही थी जिसकी गवाही सूट मे क़ैद उनकी छातियाँ ज़ल्दी ज़ल्दी
उप्पर नीचे होकर दे रही थी. दीदी की घबराहट सिर्फ़ मैने ही नही बल्कि
उनके पास बैठे अंकल की पारखी नज़र ने भी देख ले थी.” अरे बिटिया क्या हुआ
तुमने तो कोई जवाब ही नही दिया..” और अंकल ने अपना उल्टा हाथ खाट पे बैठी
दीदी की राइट जाँघ पर रख दिया. दीदी को तो मानो 11’000 वॉल्ट का करेंट
लगा गया और उनके बदन ने एक झटका खाया..
” उन्न..अंकल हम लेट हो रहे है..हम आपको किसी और दिन समझा देंगी” दीदी ने
पहली बार अंकल की आँखो मे देखते हुए बोला.
“अरे अभी तो सिर्फ़ दोपहर के 2 बजे है. और बाहर बहुत गर्मी है थोड़ी देर
बाद चले जाना बिटिया..” अंकल अपना हाथ जो कि अभी भी दीदी की जाँघो पर रखा
था उसको धीरे धीरे से सहलाते हुए बोले. दीदी ने अपने हाथो मे पकड़े हुए
रेजिस्टर ( जो कि उन्होने सर्वे की इंपॉर्टेंट जानकारी लेने के लिए लिया
हुआ था ) उसको जोरो से जाकड़ लिया.
“तुम्हारा नाम क्या है.” अंकल सीधा दीदी की ऊपर नीचे होती हुई छातियो को
देखते हुए बोला.
“जीई..मेरा..ना..नामाम है …अंजलि ”
दीदी को अपने इतना पास देख वो अंकल बहुत ही उतावला लग रहा था.अगर मैं
वाहा मोजूद ना होता तो शायद अब तक वो दीदी के कपड़े फाड़ उनकी जवानी
लूटना शुरू भी कर चुका होता.
“तुम इतना क्यो डर रही हो बिटिया..इसमे डरने वाली क्या बात है….” बोलकर
अब अंकल स्टूल से उठकर चारपाई पर दीदी की लेफ्ट साइड मे खाली पड़ी जगह पर
बैठ गया.वो जब उठ रहा था तो मेरी नज़र यका यक उसकी लूँगी पर बनते हुए
टेंट पर गयी..वो टेंट अभी ज़्यादा बड़ा नही बना था फिर भी अंकल के खड़े
होने पर वो सॉफ नज़र आ रहा था…और ये सिर्फ़ मैने नही दीदी ने भी देखा था.
“पानी पीओगी..” अंकल बोला.
दीदी ने सोचा कि अगर वो हा करती है तो अंकल उठ कर पानी लेने चला गाएगा
जिससे कि उनको थोड़ा सकून मिलेगा.
“हंजी” दीदी धीरे से बोली
पर अंकल तो मंझा हुआ शिकारी था उसने तुरंत मेरी तरफ देखा और बोला ” अरे
बेटा छोटू जा अंदर जा एक ग्लास पानी ले आ..ग्लास अलमारी से निकाल लेना और
पानी का मटका वही नीचे रखा है “. मैं भी क्या करता उठ कर झोपड़ी के दूसरे
हिस्से मे चला गया.अब मेरी बड़ी बहन उस अंजान अंकल के साथ अकेली थी मेरा
दिल जोरो से धड़कने लगा..फिर मैने सामने अलमारी मे रखे एक पीतल के ग्लास
को हाथ मे उठाया ही था कि मुझे..अचानक दीदी की हाथो मे पहने कड़ो की खनक
ने की आवाज़ आई..मानो दीदी अपने हाथो को जोरो से हिला रही है…मेरे दिमाग़
मे ख़तरे की घंटी बजने लगी …और फिर ‘”आआ..इसस्स्शह…..” दीदी के मूह से
निकली ये सीत्कार बहुत धीरे होने के बावजूद मेरे अब तक सतर्क हो चुके
कानो मे आई. दूसरी तरफ़ क्या हो रहा होगा..ये सोचते ही मेरे लंड मे करेंट
फैलने लगा. जो दीवार झोपडे को बाटती थी मैं चुप चाप उसके पास जाकर खड़ा
हो गया अब मैं देख तो कुछ नही पा रहा था पर हल्की हल्की आवाज़े मुझे
ज़रूर सुनाई दे रही थी..
और मैने सुना
दीदी : आह..अंकल….प्लीज़ अब घर जाने दो..’
अंकल: ” इस.हह..ऐसे कैसे जाने दू मेरी जान…..मुझे तो अपने किस्मत पर यकीन
ही नही हो रहा है..जिस लड़की को सोच सोच कर मैने इतना मूठ मारा ..वो आज
मेरे घर मे..आहह..”
दीदी : “उन..ह…अंदर ..मेरा छोटा भाई है प्लीज़…..अहह..मे बदनाम हो जाउन्गी…”
अंकल : “क्यो क्या हुआ जब तू मुझे पेशाब करते हुए देखती थी…तब तुझे शर्म
नही आती थी..साली तेरे बारे मे सोच सोच कर मैने कितनी रंडिया चोदी है
.क्या तुझे इस बात का ज़रा भी इल्म है”
तभी दीदी के काँपते होटो से फिर एक सिसकारी निकली.”आहह.इसस्स्स्स्शह….वो
मेरा भाई उन..अंदर…….आईशह…”.
अंकल : “अच्छा..अब समझ आया ..तू अपने भाई के पास होने से डर रही है..तू
रुक मे कुछ करता हू अभी..”
दीदी कुछ ना बोली..
मैं सोच मे पड़ गया क्या वाकई दीदी मेरी वजह से हिचाक रही है..??
मैं तुरंत पानी का ग्लास लेकर उस तरफ़ निकला ही था कि मेरे पैर से एक
शराब की खाली पड़ी बॉटल टकरा गयी..इस आवाज़ से कुछ पल के लिए सब शांत हो
गया और मैं उस तरफ़ जहा वो दोनो थे..चल पड़ा ..उधर आते ही मैने देखा कि
दीदी के बालो का जुड़ा खुला हुआ है.और उनके बाल फेले हुए है और दीदी अपना
दुपट्टा सही कर रही है. अंकल अभी भी दीदी की बगल मे बैठे थे और वो अपने
लूँगी मे खड़े लंड को शायद मुझसे छुपाने की कोशिश कर रहे थे.
“ला इधर ला पानी..” अंकल मेरे हाथ से पानी का ग्लास लेते हुए बोले.
मेरे नज़र अभी भी दीदी पर ही थी जो कि मुझसे नज़र नही मिला पा रही थी.
” ले बिटिया.पानी पी ले..” अंकल पानी का ग्लास दीदी की तरफ़ बढ़ाते हुए बोले.
पर दीदी ने पानी नही पिया. इस पर अंकल ने थोड़ी देर तक कुछ सोचा और
बोला..” चल तेरे लेए ठंडा मँगाता हू”
फिर उसने मुझे पेप्सी की बॉटल लाने के लिए कुछ पैसे दिए और बोला कि
नुक्कड़ पर एक पान की दुकान है वाहा से एक ठंडी पेप्सी ले आओ. वो तो मुझे
एक नोकर के तरह ट्रीट कर रहा था..पर मुझे उसका मकसद समझ आ गया था..सो मैं
तुरंत बाहर जाने की लिए बढ़ा ही था कि ..अचानक दीदी मुझे कुछ बोलने को
हुई..शायद बोलना चाह रही थी कि ” अनुज मुझे इस आदमी के साथ अकेला मत छोड़
कर जा ” पर अंकल ये भाप गये वो तुरंत बोल पड़ा जल्दी जा बेटा नही तो
दुकान बंद हो जाएगी..फिर मैं बाहर आ गया..पर मेरे दिमाग़ मे भी कुछ चल
रहा था..और इस बार मैं किसी भी हालत मे ऐसा सुनहरा मौका छोड़ना नही चाहता
था.. मैं घूम कर उस झुगी की दोसरि तरफ़ चला गया..और अंदर झाँकने के लिए
कोई जगह ढूँढने लगा…मैं अंदर क्या हो रहा होगा सोच सोच कर बहुत ज़्यादा
एग्ज़ाइटेड होने लगा था..ज़ल्दी ही मुझे एक जगह मिल गयी ..दीवार मे एक
छेद हुआ पड़ा था .वो छेद कोई ज़्यादा बड़ा तो नही था पर फिर भी मुझे अंदर
का नज़ारा सॉफ नज़र आ रहा था…अंकल की खोली (रूम ) बिल्कुल कोने मे थी सो
कोई मुझे वाहा उधर झाँकते हुए देख भी नही सकता था..फिर मैने अंदर देखना
शुरू किया..और जैसा मैने सोचा था वैसा ही हो रहा था..अंकल ने अंजलि दीदी
को अपनी बाहो मे जकड़ा हुआ था..उसका एक हाथ दीदी की कमर को उपर से नीचे
तक सहला रहा था..
“अब तो शाराम छोड़ दे मेरी जान…अब तो तेरे भाई को भी मैने बाहर भेज दिया
है” अंकल दीदी की जांझो(थाइस) को सहलाते हुए बोले.
“अंकल..प्लस्सस्स…आह..प्ल्ज़्ज़ मुझे घर जाने दो” दीदी अंकल का हाथ अपने
जाँघो से हटाने की कोशिस करते हुए बोल रही थी.
” इन सेक्सी बालो को क्यू बाँध रखा है तूने..बह्न्चोद..खोल इन्हे..”वो
दीदी की जुड़ी को खोलते हुई बोला.
शायद उसको भी लड़कियो के लंबे बाल बहुत पसंद थी..और दीदी के बाल लंबे
होने के साथ साथ एकदम सिल्की भी थे. बालो की चमंक ओर शाइन ये बता रही थी
कि दीदी उनकी कितनी देख रेख करती है.अंकल के लिए ये सब मानो सपना सा ही
था जिसका वो पूरा फ़ायदा उठना चाह रहे थे. जोश मे आकर अंकल ने दीदी के अब
तक बिखर चुके बालो को अपने हाथो मे भर कर उनमे अपना मूह डाल दिया और बालो
की खुशुबू सुघने लगे..जैसे जैसे दीदी के बालो से आती खुशुबू उस गंदे आदमी
के दिमाग़ मे जाने लगी वैसे वैसे उसका लंड लूँगी मे खड़ा होने लगा..ये
देख सिर्फ़ अंकल ही नही दीदी भी हैरान थी..अब तो दीदी को भी अपने बालो की
इंपॉर्टेन्स का पता चल गया था..और शायद वो अपने आप पर थोड़ा घमंड भी करने
लगी थी..हालाँकि वो घमंड थोड़ी देर के लिए ही था..क्योंकि अंकल अब दीदी
के बालो को अपने बालो से भरी छाती पर रगड़ने लगा ..और इससे दीदी के बॉल
खिचने लगे तो दीदी कराह उठी.”आआऐसशह…धीरे कारू….दर्द होता है..”
अंकल का जोश अब बढ़ता ही जा रहा था..और जिस तरह से वो दीदी के जाँघो को
सहला रहा था दीदी भी थोड़ा थोड़ा बहकने लगी थी ..अब दीदी के हाथो ने अंकल
के हाथो को पकड़ा तो हुआ था पर वो उनको रोक नही रही थी
“तेरी उम्र क्या है..”
“जी..तीइश्ह्ह्ह्ह्ह…23” अंजलि दीदी काँपती आवाज़ मे बोली.
“किसी ने तुझे पहले चोदा है…” अंकल दीदी की गर्दन पर आए पसीने को अपने
खुरदूरी जीब से चाट ते हुए बोला. अंकल की खुरदरी जीब अपनी गर्देन पर लगते
ही दीदी के बदन ने एक झटका खाया..और दीदी की आँखे इस अनोखे मज़े के आनंद
मे बंद होने लगी.
“बोला साली…चुदी है किसी से पहले….वैसे तुझे देख कर लगता नही की तू अभी
ताक चुदाई से बची होगी…”
“आआअहह…नही मैं कवारी हू…”दीदी ने अपनी बंद आखो को और ज़्यादा बंद करते
हुए जवाब दिया.
अंकल को तो मानो कुबेर का ख़ज़ाना मिल गया जब दीदी ने बताया कि वो अभी
कवारी है.वो जल्दी खड़ा हुआ और फटाफट अपनी लूँगी खोल एक तरफ़ फैंक दी वो
अब पूरा नंगा दीदी के सामने खड़ा था दीदी अभी भी चारपाई पर बैठी थी. उसका
लंड रुक रुक कर झटके खा रहा था ..ये देख मेरा हलक सुख गया था तो आप समझ
सकते है कि दीदी की क्या हालत हुई होगी. लंड काफ़ी बड़ा लग रहा था ..
“हाथ मे ले इसे..” अंकल को दोबारा नही बोलना पड़ा और ना चाहते हुए भी
दीदी का हाथ अपने आप उस विशाल लंड पर चला गया. और क्यू ना जाता इसी को तो
वो अपने रूम से चुपके चुपके देख कर अपने बदन को सहलाती थी..
दीदी के ठंडे नरम नरम हाथो को स्पर्श पाकर लंड ने एक ज़ोर का झटका मारा.
और अंकल के मूह से निकला “एयेए.हह…साली…क्या नरम हाथ है तेरे..रंडी…अहह.”
अपनी बड़ी बहन को उस अंजान बुढ्ढे आदमी का लंड इस तरह से हिलाते देख
मुझसे कंट्रोल नही हुआ और मैने भी आना लंड पॅंट का जिपपर खोल बाहर निकाल
लिया और मूठ मारने लगा..
तभी मेरी किस्मत ने मुझे फिर से धोका दिया..और अंकल ने दीदी को चारपाई से
उठा कर एक तरफ़ खड़ा किया..वो पता नही क्या करना चाह रहा था.फिर वो झुका
और चारपाई को वाहा से उठाने लगा..मैने देखा की दीदी की आँखो मे मानो नशा
फेला हुआ था..वो लगातार अंकल की टाँगो मे लटकते लंड को बिना पलके बंद किए
देखती ही जा रही थी..शायद दीदी ने पहली बार लंड इतना पास देखा था..कुछ इस
मिनिट बाद अंकल ने खाट झुग्गी ( रूम ) के दूसरी तरफ़ वाले हिस्से मे बिछा
डी और फिर वो दीदी का हाथ पकड़ उन्हे उसे हिस्से मे ले गया…अब मुझे कुछ
भी नज़र नही आ रहा था..मुझे अपनी किस्मत पर गुस्सा आने लगा…इतना अच्छा
मोका मेरे हाथ लगा था..मैं ये सोच ही रहा था कि तभी मुझे ..चारपाई के
ज़ोर ज़ोर से हिलने के आवाज़ आने लगी…चर…चार..चार” और बीच बीच मे दीदी की
सिसकिया भी आने लगी…”अहह…इस्शह….”
क्या अंकल दीदी की चुदाई करने लगा है..ये सोचते ही बेचैन होने लगा..मैने
फटा फॅट अपना लंड वापस अपने पॅंट मे डाला..और कोई जगह अंदर देखने के लिए
ढूढ़ने लगा…
फिर तभी मेरी किस्मत दोबारा खुली और मैने देखा कि दीदी भागती हुई दोबारा
झुगी के उसी हिस्से मे आ गयी जहा वो पहले थी…उन्होने अपने दोनो हाथो से
अपनी सफेद चूड़ीदार पाजामी पकड़ी हुई थी.नीचे लटकता हुआ नाडा से बता रहा
था कि दीदी की पाज़ामी खुली हुई है….
“नही मैं ये सब नही करवाउंगी..प्लज़्ज़्ज़….छोड़ दो मुझे..अंकल..आपको
पैसे चाहये तो वो ले लो….प्ल्ज़ मेरी जिंदगी मत बर्बाद करो” दीदी की आँखो
मे अब आसू आ चुके थे..तभी दूसरी तरफ़ से अंकल बाहर आया …अंकल की आँखे हवस
के नसे से लाल हो रही थी..
“साली…थोड़ी देर पहले तो बड़े मज़े से करवा रही थी..अब क्या हुआ तुझे
..तुझे लगता है कि मैं तेरे जैसा कोरा और जवान माल बिना चोदे जाने
दूँगा…” अंकल दीदी के तरफ बढ़ते हुए बोला..दीदी धीरे धीरे पीछे होने लगी
और वो शैतान आगे बढ़ने लगा…दीदी की ऐसी हालत देख मैं सोच मे पड़ गया कि
आज की तारीख मे लड़की होना कितना बड़ा गुनाह है और उपर से अगर लड़की दीदी
जैसी खूबसूरत हो तो क्या कहना…..
फिर मैने दोबारा अंदर चलते हवस के नंगे नाच पर अपना ध्यान केन्दरित किया
.और जो मैने देखा उससे मेरा हाथ दोबारा मेरे लंड पर चला गया …दीदी दीवार
से सटी खड़ी थी और अंकल का एक हाथ सूट के उप्परसे उनकी लेफ्ट चूची को दबा
रहा था और दूसरे हाथ से वो दीदी की पाजामी के अंदर हाथ डालने की कोशिश कर
रहा था….
“बह्न्चोद …क्या..मुलायाम चुची है तेरी रानी.आज तक मैने इतनी चूचिया दबाई
पर तेरे जैसी कड़क और मुलायम चुचि किसी की ना थी .आइ….” वो दीदी की
चूचिया दबाता हुआ बोला..
उधर दीदी अपनी पूरी ताक़त के साथ अपनी पाजामी मे घुसने की कोशिस करते
अंकल के हाथो को रोक रही थी..जब उनको लगा के वो अंकल के हाथ को नही रोक
पाएगी तब वो अचानक दीवार की तरफ मूड गयी….अब दीदी की पीठ अंकल और मेरी
तरफ़ थी…
“मुझे छटपटती लड़किया बहुत पसंद है..साली ..कुतिया आज तो मैं तेरी चूत को
चोद चोद कर भोसड़ा बना दूँगा…” वो बुढ्ढा अंकल फिर पीछे से ही दीदी से
लिपट गया और अपने दोनो हाथो से दीदी को अपने गिरफ़्त मे ले लिया…दीदी की
अब ऐसी हालत देख मुझे उन पर दया भी आ रही थी…पर मेरे अंदर पैदा हो चुकी
हवस मुझे ये सब देखने के लिए उकसा रही थी..तभी एक ही झटके मे अंकल ने
दीदी की पाजामी को अपने अनुभवी हाथो से सरका कर नीचे कर दिया और फिर नीचे
बैठ कर दीदी के गोरे गोरे चूतड़ पर चढ़ि हरी (ग्रीन ) कछि (पॅंटी ) देख
ने लगा…उसने फिर कछि पर हल्का सा किस किया और अपने दोनो हाथो से कछि के
उप्पर से दीदी के चूतड़ो को मसलने लगा..फिर एक झटके मे दीदी की हरी कछि
को उसने नीचे सरका दिया..अब चूतड़ पूरे नंगे हो चुके थे…दीदी के चूतड़ तो
ब्लू फिल्म वाली लाकियो से भी अच्छे थे एक दम गोल और सुडोल..उभरे हुए
बाहर की तरफ़ निकले हुए दीदी के चूतड़ देख मेरा लंड पागल हो गया था तो आप
सोच भी सकते है कि अंकल का क्या हाल हुआ होगा क्योंकि दीदी तो उनकी पास
ही खड़ी थी.फिर बिना कोई वक्त गवाए अंकल ने अपने गंदा सा मूह दीदी के
गोरे गोरे चुतदो मे घुसा दिया और वो उन्हे चाटने लगा..अंकल की खुरदूरी
जीब, मूह पर आई दाढ़ी (बियर्ड) और उनके मूह से आती गरम गर्म सासो को
महसूस कर दीदी के मूह से ना चाह कर भी एक सिसकारी निकल गई
…”आआ..इसस्स्स्स्स्स्स्सश….मा….इसस्शह…” दीदी के लिए ये एक नया अनुभव था
और उनके चूतड़ अपने अप अंकल के जीभ का सपर्श पाने के लिए..अंकल के मूह मे
घुसने की जदोजहद करने लगे..अंकल की जीभ दीदी के चुतड़ों की दरारो मे
उप्पर से नीचे उनकी चूत तक घूम घूम कर अपना कमाल दिखाने लगी…अब दीदी की
आखे मस्ती मे फिर से बंद होने लगी थी और उन्होने प्रतिरोध बंद कर दिया
था..दीदी की कवारी चूत चाट चाट कर उसका रस पीते ही अंकल जोश से भर गया
…लड़की अब उसके काबू मे दोबारा आ गयी थी…इस बार उसने समय गवाने की कोशिश
ना की और खड़ा होकर उसने अपना तना हुआ लोड्ा अब तक झूक चुकी अंजलि दीदी
की चूत (पुसी) पर रख दिया..ये सोच कर कि अब तो दीदी कोई कोई चुदने से नही
बचा पाएगा…तभी मुझे लगा कोई मेरे अलावा भी शायद कोई और ये सब देख रहा
है..वो जो कोई भी था वो बंद दरवाजे से अंदर झाक रहा था..क्योंकि दरवाजा
थोड़ा थोड़ा हिल रहा था.( मानो की कोई बड़ा उत्सुक था अंदर देखने के लिए
) .पर .मेरे लंड ताव मे आ गया और ..””फाकच्छ..फ़ाच्छ..मेरे लंड ने पानी
छोड़ दिया..इतना तेज ऑर्गॅज़म मुझे पहले कभी नही हुआ था….मेरी टाँगे काप
रही थी. तभी फॅट की ज़ोर से आवाज़ हुई और मैने देखा कि अंकल ज़मीन पर
बेहोश पड़ा है..उसका सर खून से लत्पथ है…और दीदी के हाथ मे एक टूटी काच
की बॉटल है….
हुआ ये था कि जैसे ही अंकल अपना लंड दीदी की चूत मे डालने वाला था तभी
दीदी का हाथ साइड मे रखी शराब की बॉटल पर आ गया और उन्होने वो बॉटल अंकल
के सर पर दे मारी थी…दीदी फटाफट अपनी पाजामी पहनने लगी…मैं भी अब वकाई मे
घबरा गया था..सो मैं भी अपने छुपी हुई जगह से बाहर आगेया और दीदी की तरफ़
बढ़ा. मैं जैसे ही झुगी के गेट पर पहुचा..दीदी बाहर आ रही थी फिर वो मेरे
पास आई और बोली अनुज ज़ल्दी चल यहा से…मैने कुछ और नही पूछा और फिर फटाफट
हम वाहा से निकल कर अपने घर आ गये..पर घर आते आते भी मेरे दिमाग़ मे एक
सवाल चल रहा था..कि..आख़िर वो कोन था जो दरवाजे से अंदर झाक कर ये सब देख
रहा था….
“अरे अंजलि तुम्हारा सरवे कैसा रहा आज” चाचा जी रोटी का टुकड़ा तोड़ते
हुए बोले. हम सब रात का खाने खा रहे थे.
“जीई…जी अच्छा था” दीदी हकलाती ज़बान से बोली.
“अरे बेटा तुम इतनी परेशान क्यू लग रही हो..तबीयत तो ठीक है ना तुम्हरी’
चाचा जी दीदी की तरफ़ देखते हुए बोले.
“हाँ..हॅंजी..पापा..जी.. बस मुझे थोड़ा सा सर मे दर्द है” दीदी नज़रे
नीची करती हुई बोली.
” और तुम्हारी गर्दन पर ये निशान कैसा है” चाचा जी दीदी की गर्दन के
निचले हिस्से पर पड़े निशान की तरफ़ इशारा करते हुए बोले. आप लोग तो अब
समझ ही गये होंगे के वो निशान किसने दीदी को दिया था. दीदी तो मानो सुन्न
ही पड़ गयी थी.
“जी वो एयेए…वाहा काफ़ी गंदगी थी इसी वजह से कोई कीड़ा काट गया था” दीदी
निशान को अपने हाथो से छुपाते हुए बोली.
मैं ये सब चुप चाप देख रहा था और खाना खा रहा था.
” भाई. मैने ये भी सुना है तुम्हरे छोटे भाई ने तुम्हारी बहुत मदद की आज
सरवे मे ‘ चाचा जी मुस्कुराते हुए मेरी तरफ़ देखते हुए बोल रहे थे.
“हा.. बहुत मुदद की मैने ..उस शराबी गंदे बुढ्ढे को अपने जवान बहन थाली
मे परोस कर दे दी थी आज…बलात्कार होता होता बचा था आज दीदी का..”…मैने मन
मन मे अपने आप से कहा.और फिर मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया. दीदी सूप पीते
पीते मुझे देख रही थी. मानो कि जान ना चाहती हो कि मैं क्या जवाब दूँगा..
“पापा मेरे सर मे बहुत दर्द हो रहा है मैं दवाई ले कर सोने जा रही हू”
दीदी नॅपकिन से अपना हाथ पोछ्ते हुए बोली और उठी कर उपर रूम मे चली गयी
कुछ देर बाद मैं भी सोने के लिए रूम मे आ गया.
“अनुज तुझसे एक बात पूछूँ..प्ल्स सच सच बताना” दीदी की आवाज़ मेरे कानो मे आई.
रूम की लाइट्स बंद थी और रात के शायद 11 बज रहे थे. मैं डर गया और सोचने
लगा कही दीदी जानती तो नही है कि मैने उनका वो नंगा नाच देखा है.
“आ..हा हाजी दीदी पूछो” मैं झिझकते हुए बोला.
“तूने इतनी देर क्यो लगाई थी वाहा आने मे..और तू कब वापस आया था” दीदी भी
थोड़ा हिचकिचाते हुए बोली
“मैं तभी तभी ही आया था दीदी”मैने फटाक से जवाब दिया.
“पर तेरे पास कोल्ड ड्रिंक तो नही थी” दीदी बोली
अब मैं फस गया ….मैने अपने आप से कहा . पर फिर मैने समय की गंभीरता को
समझते हुए जवाब दिया ” दीदी सभी दुकाने बंद थी ..मैं बहुत घुमा पर कही भी
कोल्ड ड्रिंक नही मिली थी. सो खाली हाथ वापस आ गया .”
दीदी को अब शायद यकीन हो गया था कि मैने वो सब नही देखा था क्योंकि फिर
दोबारा उन्होने कोई सवाल नही किया. और दिन की बात याद करते करते मुझे ना
जाने कब नींद आ गयी पता ही ना चला.
अगली सुबह मेरी आँख 9 बजे खुली.मैं बेड पर उठ कर बैठा ही था कि मेरी नज़र
दीदी के बॅड पर पड़े न्यूज़ पेपर पर गयी..हालाकी मैं ज़्यादा न्यूज़ पेपर
पढ़ने का शॉकिन नही था पर फिर भी ना जाने क्यो आज मेरा मन पेपर पढ़ने का
होने लगा. मैं उठा और पेपर लेने के लिए दीदी के बिस्तर की तरफ़ गया और
जैसे ही मैने पेपर की हाइडलाइन पढ़ी तो मेरा सर चकरा गया… मुझे लगा कि
जैसे मैं बेहोश हो जाउंगा.. न्यूज़ पेपर की हाइडलाइन थी ” दिन दहाड़े एक
बुढ्ढे आदमी की हत्या..” साथ मे एक फोटो भी छपी हुई थी. फोटो देखते ही
मैं समझ गया कि ये वोही अंकल था जिसके साथ हम कल थे..फिर मैने अख़बार वही
फेक नीचे डाइनिंग रूम की तरफ़ बढ़ चला . और जैसा मैने एक्सपेक्ट किया था
अंजलि दीदी टी.वी मे आती न्यूज़ को बड़े गोर से देख रही थी..उनके
खूबसुर्रत चेहरे का रंग उड़ा हुआ था और पसीने की हल्की हल्की बूंदे उनके
चेहरे पर आई हुई थी..मैं भी दीदी के पास बैठ गया..दीदी तो मानो रोने ही
वाली थी…
“अ..अनुज ये क्या होगया..मैने एक खून कर दिया…” दीदी मेरी तरफ़ देखते हुए बोली
“छ्ह्ह…ऐसे मत बोलो आप..” मैं दीदी के पास सोफे पर बैठता हुआ बोला.
अंजलि दीदी बहुत इमोशनल हो गयी थी.
‘अनुज मुझे बहुत डर लग रहा है” दीदी मेरी तरफ़ झुकते हुए बोली मानो कह
रही हो कि मुझे अपनी बाँहो मे ले लो. और मैं ऐसा सुनेहरा मौका कैसे हाथ
से जाने देता.मैने भी अपनी बाँहे खोल डी ..अब अंजलि दीदी मेरी बाहो मे
थी. हालाकी मैं सेक्षुयली एग्ज़ाइटेड नही होना चाह रहा था.पर ऐसा मौका भी
तो बार बार नही आता दीदी अपने नाइट ड्रेस मे ही थी ( लूज़ टी-शर्ट और
पाजामा ) बालो का जुड़ा बना हुआ था.पर मन पर किसका ज़ोर चलता है दीदी के
बदन की गर्मी महसूस करते ही मेरे दिमाग़ मे कल वाला सीन दौड़ गया और मैने
थोड़ी सी हिम्मत कर कर अपना उल्टा हाथ फेलाकर दीदी की पीठ (बेक) पर रख
दिया. मेरा हाथ काप रहा था..पर दीदी को तो मानो कुछ होश ही ना था उनकी
नज़र अब भी टीवी स्क्रीन पर ही थी..मेरा जोश बढ़ने लगा ..मेरे अंदर छुपा
शैतान मुझे बार बार बोल रहा था कि “अनुज तुझे ऐसा मौका दोबारा नही
मिलेगा..फ़ायदा उठा ले इसका…” पर जैसे कि सिक्के के दो पहलू होते है उस
तरह मेरे अंदर भी एक अच्छी आत्मा थी वो मुझे बोल रही थी ” नही..ये सब
ग़लत है..ये तेरी बड़ी बहन है..और तेरी बहन कितनी परेशान है ..क्या तू
मदद करने के बजाय उसकी मजबूरी का फ़ायदा उठाएगा ” .कुछ मिनिट्स तक मेरे
दिमाग़ मे कस्माकस होती रही.
और जैसा हर बार होता था शैतान जीत गया और मेरी हवस मुझ पर हावी हो
गयी.मैने धीरे से अपना हाथ दीदी की टी-शर्ट के उपर से उनकी पीठ पर फेरना
शुरू कर दिया. इस हरकत का सीधा असर मेरे लंड पर पड़ा और वो खड़ा होने लगा
. मैं अब दीदी की ब्रा स्ट्रॅप्स को उनकी टी-शर्ट्स के उपर से फील कर
सकता था. दीदी का ध्यान तो टीवी पर आ रही न्यूज़ पर था पर अगर कोई तीसरा
आदमी ये सब देख लेता तो उसको पूरा यकीन हो जाता के मैं जिस तरह से दीदी
की कमर को सहला रहा हू उसका मतलब क्या है. सो मैने दीदी से पूछा ” चाची
जी नज़र नही आ रही ”
“वो..पड़ोस वाली शर्मा आंटी के यहा गयी है..अगले हफ्ते उनके यहा शादी है
ना..” दीदी बोली
अब जब मुझे पता चल गया था कि दीदी और मैं अकेले है तो मेरी हिम्मत बढ़ने
लगी..दीदी का सर मेरे सीने पर रखा हुआ था ..तो मैने अपना मूह थोड़ा नीचे
किया और उनके बालो से आती खुसबु को सूंघने लगा…मेरा राइट हॅंड जो कि दीदी
के बॅक पर था वो अब उनकी लोवर बेक तक पहूच चुका था..दीदी का ध्यान तो
टीवी पर केंद्रित था पर उनका बदन मेरे हाथ की हरकत बखूबी समझ रहा
था..इसका पता मुझे तब लगा जब लोवर बेक से मैने दीदी की टी-शर्ट के छोर (
कॉर्नर) को थोड़ा उठा या और अपना हाथ उनकी नंगी कमर पर रखा. एक हाइ टच मे
दीदी का बदन थोड़ा आकड़ा और उन्होने हल्का सा झटका खाया.मैं डर गया और
मुझे लगा कि शायद अब मेरी चोरी पकड़ी जाएगी पर ऐसा कुछ ना हुआ दीदी थोड़ा
कसमासाई और दोबारा मेरे सीने पर सर रख कर टीवी देखने लगी..इसी दौरान मेरे
हाथ की कोहनी पर मुझे कुछ बहुत नरम नरम महसूस होने लगा. मानो कि कोई
स्पंज मेरी कोहनी से लगा हो. मैने चुपके से नज़रे नीची की तो देखा कि
दीदी की लेफ्ट चूची मेरी कोहनी से लग गयी है..दोस्तो अब आप खुद ही इमॅजिन
कर सकते है मेरी हालत को …ये पहली बार था जब मैने अंजलि दीदी की चूचियो
की नर्माहट महसूस की थी..मैं अब होश और हवास खोने लगा था..दिल कर रहा था
अभी दीदी को अपने बाहो मे कस लू और उनकी इन मदमस्त चुचियो को दबा दबा कर
उनसे रस निकाल लू और फिर उस रस को पी जाऊ. पर दोस्तो आपको तो पता ही है
मेरी किस्मत तो गधे( डोंकी ) के लंड से लिखी है..बेहन की लोदी हमेशा एन
मोके पर धोका दे देती है.
“टिंग टॉंग” दरवाजे की घंटी बज गयी.
दीदी को एकदम से झटका सा लगा और वो फॉरन मुझसे अलग होने के लिए उठी..पर
किसी ने सही कहा है कि बंद घड़ी (क्लॉक) भी दिन मे एक बार सही टाइम बताती
है सो उठते हुए अचानक ही दीदी का हाथ मेरे पाजामे मे खड़े लंड पर लग गया
उनको तो पता नही पर मुझे वो स्प्रश कमौतेजित कर गया.
चाची घर आ गयी थी.
“ये क्या सुबह सुबह मर्डर की ख़बरे सुन रहे हो…..कुछ और काम नही है तुम
भाई बेहन के पास….जब से तुम लोगो की छुट्टियाँ (हॉलिडेज़) पड़ी है ..सारा
दिन टीवी ही देखते रहते हो” चाची सोफे पर बैठते हुए बोली
दीदी किचिन से पानी का ग्लास ले आई थी चाची के लिए. तभी न्यूज़ रिपोर्टर
ने बोला कि खून की वजह धार दार चाकू है . चाकू दिल के आरपार होने की वजह
से ही मौत हुई है” ये न्यूज़ सुनते ही अंजलि दीदी के आँखे चमक उठी थी..और
एक हल्की सी मुस्कुराहट उनके खूबसुर्रत चेहरे पर आ गयी थी. पर इस हादसे
की वजह से दीदी अब काफ़ी चोकस हो गयी थी .जिस खिड़की की वजह से दीदी बहक
गयी थी अब दीदी उस खिड़की को कभी नही खोलती थी चाहे कितनी ही गर्मी हो…और
इसका रीज़न मैं अच्छी से समझता था.
अगले दो दिन नॉर्मल रहे और कुछ ख़ास्स नही हुआ..तीसरे दिन मैं स्कूल से
घर आया तो मुझे किसी के ज़ोर ज़ोर से हस्ने की आवाज़ आई. आवाज़ उपर रूम
से आ रही थी..मैं उपर जाने लगा . रूम मे पहूच कर मैने देखा की चाची ,
दीदी और रेखा भाभी रूम मे बैठी है और किसी बात पर हसी मज़ाक चल रहा है.
रेखा भाभी हमारे पड़ोस मे ही रहती थी. रूप रंग उनका भी कुछ कम ना था उनकी
उम्र 30-32 के आस पास होगी. उनके पति जतिन किसी MणC कंपनी मे काम करते थे
और अक्सर वो काम के सिलसिले मे बाहर जाते रहते थे. मैने रेखा भाभी के
बारे मे कुछ बाते सुनी थी कि उनका चाल चलन अच्छा नही है पर मुझे ऐसा कुछ
नही लगता था क्योंकि वो मुझसे बड़े अच्छे से बात करती थी और कभी कभी हसी
मज़ाक भी कर लेती थी. उनके रूप रंग को देख कई औरते उनसे जलती थी शायद
उन्होने ही ये अफवाह फैलाई थी. खैर हमारे घर पर कोई भी इन अफवाहॉ पर
ध्यान नही देता था सो हमारे घर भाभी का आना जाना लगा ही रहता था.
“आओ जी मिस्टर शर्मीले कैसे हो…” रेखा भाभी मुझे चिड़ाते हुए बोली.
अब तीन्नो लोग मेरी तरफ़ देख कर हस्ने लगे. मैं शर्मा गया और अपना स्कूल
बॅग अपने बॅड पर रखने लगा..
“भाभी आप मेरे भाई को ऐसे मत चिड़ाया करो…देखो उसका मूह टमाटर की तारह
लाल हो गया है ” दीदी मुस्कुराते हुए मेरी वकालत करते हुए बोली.
“ओह..हो क्या प्यार है भाई बेहन का..देखो जी कही मेरी नज़र ना लग जाय”
रेखा भाभी अपने आँखे मतकाते हुए बोली.
“अरे भाई मैं चलती हू ….. अनुज का खाना लगा दो..बेचारा कितना भूका लग रहा
है….” चाची वाहा से उठती हुई बोली.
फिर चाची नीचे चली गयी और मैं भी नीचे बाथरूम मे फ्रेश होने के लिए चला
गया. मैं खाना खा रहा था . दीदी और भाभी उप्पर रूम मे ही थी. तभी चाची
मेरे पास आई और मेरे सर को प्यारसे सहलाते हुए बोली ..”बेटा अनुज मैं
शर्मा आंटी के साथ शॉपिंग पर जा रही हू..उनकी बेटी की शादी है ना अगले
हफ्ते” फिर चाची चली गयी. मैं खाना खाकर टीवी देखने लगा फिर तकरीबान 10
मिनट बाद ब्रेक हुआ तो मुझे याद आया कि मुझे कुछ नोट्स की फोटोकॉपी कराना
है सो मैं फटा फॅट उपर रूम की तरफ़ बढ़ चला. रूम का दरवाजा थोड़ा झुका
हुआ था. रूम से आती धीमी धीमी आवाजो ने मेरा ध्यान खिचा
“अरे उसका बहुत लंबा है..” भाभी की आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी.
“सच मे …कितना ..लंबा हाई” दीदी की आवाज़ धीरे से आई.
अब मैं वही रुक गया और कान लगाकर कर सुनने लगा.
“तेरी कभी थुकाइ हुई है ..” भाभी दीदी की तरफ़ देखते हुए बोली
. “थुकाइ …कहा पर ” दीदी कन्फ्यूज़ होती बोली
तभी रेखा भाभी मुस्कुराइ और उन्होने पाजामी के उपर से दीदी की चूत को
अपने हाथो से दबा दिया और बोली ” यहा पर ”
दीदी को तो मानो करेंट लग गया अपनी इज़्ज़त पर इसतरह से हमला होते देख वो
सकपका गयी और भाभी का हाथ अपनी चूत से हटाती हुई बोली ” क्या करती हो
भाभी….नीचे मम्मी और अनुज है”
“अरे नीचे ही तो है ना …तू डरती बहुत है..अरी मैं जब तेरी उम्र की थी तो
मुहल्ले के सारे मर्दो का लंड खड़ा करवा कर रखती थी. इतनी भरी जवानी को
ऐसे मत बर्बाद कर अंजलि…”
“अच्छा अपनी फिगर बता तू..” भाभी अपने सूट पर से चुननी को हटा साइड मे
रखते हुए बोली.
“जी..34-26-36…” दीदी बोली
“वाह वाह…तुझे मेरी फिगर पता है क्या है….” भाभी बोली
“जीई..नही..और मुझे जाननी भी नही है..” दीदी थोड़ा घबराती हुई बोली
“अरे तू डरती क्यू है मैं तेरी बड़ी बहन की तरह हू…मुझसे तू बाते शेर नही
करेगी तो किससे करेगी पग्ली..”रेखा भाभी दीदी को कन्विन्स करने के कोशिश
करते हुए बोली. मुझसे अब रहा नही जा रहा था और मैने अंदर झाँकना शुरू कर
दिया था साइड से चुपके चुप्पके. रेखा भाभी और अंजलि दीदी आमने सामने बैठी
थी बेड पर .
“तेरे इन्न आमो को किसी ने दबा दबा कर इनका रस पीया है क्या” भाभी ने
अपने दोनो हाथो को टी-सीर्ट के उप्पर से दीदी की तन्नी हुई दोनो चुचियो
पर रख दिया . घबराहट और शर्म से अपने आप ही दीदी के दोनो हाथ अपने खाजने
की रक्षा करने के लिए उठ गये और दीदी ने भाभी का हाथ पक्कड़ लिया..
“अब ये मत बोलना कि तूने इनको अभी तक नही मसलवाया है” भाभी ताना सा मारते हुए बोली.
दीदी को शायद अब जलन होने लगी थी रेखा भाभी की इस बात पर और उनके दिमाग़
मे वो बॅंक वाली और उस बुढ्ढे अंकल वाली बात आ गयी. पर वो ये बात भाभी को
कैसे बताती सो कसमसाकर चुप हो गयी. रेखा भाभी के हाथ अब भी अंजलि दीदी की
दोनो चूचियो पर रखे थे.
“चल कोई बात नही मैं तो हू ना तेरी हिल्प के लिए” और भाभी ने दीदी की
चुचियो को टी-शर्ट के उप्पर से सहलाना शुरू कर दिया. दीदी का गोरा चेहरा
फिर से लाल पड़ने लगा था. हलाकी दूसरी लड़की का हाथ अपने बदन पर ईस्तरह
से चलते देख उनको बड़ा आजीब लग रहा था पर इस से मस्ती की जो लहर पैदा हो
रही थी वो सीधा उनकी टाँगो के बीच छिपी उनकी योनि मे खलबली मचाने लगी थी.
“भाभी..बस करो…नीचे सब है…आहह.इसस्स्शह..…” दीदी की आँखे तो मस्ती मे बंद
होने लगी थी पर उनका दिमाग़ उनको बार बार ये बता रहा था कि वो लोग अकेले
नही है.
“रुक मैं दरवाजा बंद करते हू” भाभी बेड से उठती हुई बोली.
मुझमे भी मस्ती छाने लगी थी और इस मस्ती की खुमारी थोड़ी अलग थी क्योंकि
इस बार दीदी के साथ कोई आदमी ना होकर एक औरत थी..रूम का दरवाजा बंद हो
गया..पर वो कहते है ना जहा चाह वाहा राह..मुझे भी अंदर देखने के लिए के
होल मिल गया था.मैने फटाफट अपना लंड बाहर निकाला और उस पर अपना हाथ
फिराते हुए अंदर झाँकने लगा…अंदर का सीन देखते ही मेरा आधा खड़ा लंड पूरा
खड़ा हो गया..भाभी ने दीदी के दोनो हाथ अपने खरबूजे के आकार वाली चूचियो
पर रखे हुए थे और खुद के हाथ दीदी के आम के आकार वाली चुचियो पर..
“दबा इन्हे..” भाभी बोली
“ये कितनी बड़ी और नरम है भाभी” दीदी भाभी की चूचियो को दबाती हुई बोली
“अरे इन पर ही तो आदमी लोग मरते है ….औरत के बदन पर यही तो आदमी को सबसे
ज़्यादा उत्तेजित करती है ” भाभी दीदी की अब तक मस्ती मे आकर फूल चुकी
चूचियो को थोड़ा ज़ोर से दबाते हुए बोली
“आपके पति तो बाहर रहते है…तो….एयेए..आप…” दीदी शायद कुछ बोलन चाहती थी
पर चूप हो गयी.
“शर्मा मत ….तो मैं किस से चुदवाती हू…यही पूछना चाहती है ना तू..” भाभी
के चेहरे पर हवस की मस्ती छाने लगी थी.
चुदाई का नाम सुनते ही दीदी के बदन मे एक झुरजुरी सी हुई..और उनकी चूत
पन्याने लगी..
“हा जीई…” दीदी शरमाती हुई बोली
“देख किसी को बताना मत.. वो हमारी गली के कोने मे जो बिजली की दुक्कान है
ना….जो आदमी वाहा बैठता है…क्या नाम है उसका….हा …जावेद…उससे करवाती
हू…साला बहुत लाइन मारता था मुझ पर…” भाभी बोली
“क्याअ…पर .पर वो तो मुस्लिम है…और आप ब्रामिन” दीदी चोकते हुए बोली.
“अरे पगली तुझे क्या पता ..अरे मुस्लिम आदमी का लंड बहुत तगड़ा होता
है…बड़ा मस्त कर कर चुदाई करते है वो… ” और भाभी ने इसी के साथ अपना एक
हाथ नीचे कर अंजलि दीदी के पाजामे मे छुपी चूत पर रख दिया और धीरे धीरे
वो उसको सहलाने लगी. दीदी की फिर से आँख बंद हो चुकी थी और अचानक ही उनके
मूह से निकल गया..”कितना लंबा है जावेद का…..”
दीदी की ये बात सुनते ही रेखा भाभी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी थी और
उन्होने अपना हाथ जो कि दीदी की चूत के साथ खेल रहा था पाजामे के उप्पर
से अपनी मुथि मे कस कर पकड़ लिया और बोली “पूरा गधे (डोंकी) के जितना है
…9 इंच का “.
घोड़ी बन-ना अंजलि दीदी को रोमांचित भी कर रहा था और आगे भाभी क्या करने
वाली है उसको सोच सोच कर उनकी लटकती चुचिया सख़्त हो गयी थी और निपल्स
खड़े होने लगे थे…रेखा भाभी मन ही मन खुश हो रही थी कि वो दीदी को
सिड्यूस करने मे कामयाब हो रही है. अंजलि दीदी घोड़ी बनी अपनी चूत को
रेखा भाभी के मुट्ठी मे दबा होने से दीदी के मूह से कराह निकल
गयी”अहह….इस्सह”
“तुझे बटाऊ वो मुझे कैसे चोदता है “. रेखा भाभी भी मस्ती मे आ गयी थी.
दीदी ने कोई जवाब नही दिया और देती भी कैसे उन पर तो सेक्स की खुमारी
छाने लगी थी.तब रेखा भाभी खड़ी हुई और उन्होने अंजलि दीदी को घोड़ी(फीमेल
हॉर्स ) बना दिया . अब रेखा भाभी दीदी के साथ क्या करेंगी ये सब सोचते
सोचते मैं अपने फूल कर सख़्त होते लंड को ज़ोर ज़ोर से हिलाने
लगा..दोस्तो मैं जो मस्ती फील कर रहा था उस वक्त मे आपको शब्दो मे बता
नही सकता…. बहुत ही ज़्यादा सेक्सी लग रही थी. उनके उभरे हुए कूल्हे मेरे
खड़े लंड को पागल कर रहे थे. मेरा मन कर रहा था कि अभी अंदर जाकर उनकी
गांद मे लंड डाल कर उनकी सेक्सी गांद मार लू. अब रूम का सीन्न कुछ ऐसा था
कि दीदी झुकी हुई घोड़ी बनी खड़ी थी बॅड पर और रेखा भाभी दीदी की सेक्सी
बॉडी को निहारती निहारती अपने हाथ को अपनी सलवार के उपर से अपनी चूत पर
रख उसको सहला रही थी..मुझे भाभी को ये सब करते देख यकीन हो गया था कि
दीदी का बदन अदमिओ को ही नही बल्कि औरतो को भी उत्तेजित करता है.
“इतनी सेक्सी है तू …ना जाने अब तक तू चूदी क्यो नही….क्या तेरा कोई बॉय
फ्रेंड नही है..” भाभी अपनी चूत को थोड़ा ज़ोर से दबाते हुए बोली
“नही ..भाभी..” दीदी बंद दरवाजे की तरफ देखते हुए बोली..मानो कि ये पक्का
करना चाहती हो कि वाहा कोई उन्हे देख तो नही रहा है. पर उनको क्या पता था
कि कोई और नही बल्कि उनका छोटा भाई ही उनके ये कारनामे देख देख कर मूठ
मार रहा है.
“ज़…ज़ल्दी..बताओ भाभी…जावेद कैसे करता है..” दीदी घोड़ी बने बने ही पीछे
मूड कर देखती हुई बोली.
“बड़ी बेचैन हो रही है…रानी..सच मे अगर मैं कोई मर्द होती तो तुझे आज जम
कर चोदती” भाभी दीदी की तरफ बढ़ती हुई बोली.
फिर वो दीदी के पास बेड पर चढ़ कर घुटनो के बल खड़ी हुई और दीदी की कमर
को सहलाते हुए बोली. ” जावेद मुझे घोड़ी बना कर ऐसे मेरी कमर सहलाता है…”
“फिर ऐसे वो मेरे चूतड़ को दबाता है” भाभी अब दीदी के उभरे हुए चुतदो को
दबाने लगी..
दीदी की तो मज़े मे आँखे बंद हो गयी उनके चूतड़ अपने आप ही आगे पीछे
हिलने लगे.. “आअहह..इसस्शह..भाभी….फिर क्या करता है वो…” दीदी अपने बदन
मे करेंट महसूस करते हुए बोली.
फिर रेखा भाभी दीदी के ठीक पीछे आ गयी .
“फिर वो इसको अपने हाथो से सहला सहला कर मसलता है ” भाभी दीदी की चूत को
पाजामा के उपर से सहलाते हुए बोली..
रेखा भाभी अब कभी कभी अंजलि दीदी की चूत को अपने मुथि मे भर कर कस कर दबा
भी देती थी..
“और फिर वो पता है क्या करता है..” रेखा भाभी दीदी को तड़पाती बोली
“हाई…रेखा भाभी अब बोलो भी….” दीदी बदहवासी मे अपने झुके बदन को हिलाती बोली.
इसके के साथ भाभी ने पीछी से दीदी के मस्ती मे थिराक्ते चुतदो को उनके
कपड़ो के उपर से ही चाटना शुरू कर दिया और अपने हाथो से वो अपनी चूत को
अपने सलवार के उप्पर से ही सहलाने लेगिइ.
“आहह…भब…भाभी…इष्ह” भाभी की ज़बान अपने चूतड़ की दरारो पर महसूस करते ही
दीदी के होठ खुल गये और एक तेज सिसकारी उनके खुले मूह से निकल गयी.
दोस्तो जितना ये नया अनुभव अंजलि दीदी के लिए अनोखा था उसी तारह मेरे लिए
भी. एक औरत एक लड़की की चूत चाट रही थी हलाकी वो सिर्फ़ कपड़ो के उपर से
ही चाट रही थी फिर भी..मेरे लिए ये नज़ारा बहुत अनोखा था. दोनो हसिनाओ को
सेक्स की ये अनोखी मस्ती चढ़ चुकी थी..और फिर अचानक मैने देखा कि रेखा
भाभी अब दीदी को कमर से पकड़ कर खड़ी हुई और फिर अपने अगले हिस्से ( यानी
अपनी चूत को ) अंजलि दीदी की गांद पर रगड़ने लगी..
“फिर जावेद मेरे साथ ऐसे करता है..” और भाभी अपनी चूत को जोरो से दीदी की
गांद पर रगड़ने लगी’
