रंडी खाना 5

बहन

बार बार की कोशिशें लेकिन हार नही मानने का जस्बा ,पुरानी आदतों ने कितना जकड़ रखा है की उनके चक्कर से छूटना बहुत ही मुश्किल सा हो जाता है.
मेरे हाथो में रखी उस सिगरेट को देखता हुआ मैं सोच रहा था की कैसे कुछ आदतें हमारे जीवन को बर्बाद जो कर देती है और हम उसे क्यो नही छोड़ पाते बस इसलिए क्योकि हममें वो इक्छा शक्ति नही होती,दो दिनों से मैं सिगरेट को हाथ नही लगा रहा था और उसके कारण किसी काम में मन नही जा रहा था ,लेकिन मैं सिख रहा था की आखिर उस खलिपन को कैसे भरे जो की सिगरेट ना पीने की वजह से हो गया था ,
“क्या देख रहे हो भइया पीना है तो पी भी लो हाथ में पकड़े हुए हो आधे घंटे हो गए “
पूर्वी मेरी गोद में आकर बैठ गई ,
“बस सोच रहा हु की ये एक छोटी सी चीज मुझे कितना कमजोर महसूस कराती है ,जब भी मैं सोचता हु की इसे नही पीना है तो मैं मन करता है की एक पी ले क्या होगा ,सोचो मैं अपने को कितना मजबूर पाता हु जब मेरे मन में ये उठता है की मैं इसे नही छोड़ पाऊंगा,नही पूर्वी मैं इतना कमजोर नही हो सकता की एक सिगरेट मुझे खुद को पीने में मजबूर कर दे ,अब तो बिल्कुल भी नही “
मैंने सिगरेट को तोड़कर फेक दिया ,सच में मन में एक मजबूती सी महसूस हुई
जीवन में अगर सबसे बड़ी कामयाबी अगर कुछ है तो वो है खुद पर काबू पा लेना…
अपनी मर्जी का जीवन जीना या ये कहे की अपने सभी कामनाओं को छोड़कर वो जीवन जीना जो की आपके लिए सही हो ,क्योकि कामनाएं तो गलत और सही दोनो की ही हो सकती है ,
पूर्वी खुसी में मेरे गाले से लग गई थी ,
मैं उसके बालो को सहला रहा था,
शबनम से बात करके आने के बाद से मुझे पता नही क्यो लेकिन ये जीवन बहुत ही खूबसूरत सा लग रहा था और मैं बस इसे भरपूर जीना चाहता था और इसके लिए सबसे पहला कदम मैंने सिगरेट और शराब से दूरी बनाकर लिया …
आगर शरीर अच्छा होगा तो ही मन शांत होगा और जब मन शांत होगा तो ही मैं इस जीवन को गहराई से जी पाऊंगा उसे गहराई से समझ सकूंगा ,
मैं जीवन के सबसे अहम चीजों को समझ और जान पाऊंगा ,
यही बात मेरे मन में घूम रही थी ,मैं पूर्वी के कोमल बदन को फील करने लगा,देखने लगा की आखिर मैं इस शरीर को लेकर हवस से क्यो भर गया था ,मैं उस हवस के कारण को जानना चाहता था मैं आंखे बंद किए उस सोर्स को खोज रहा था जंहा से हवस की काम की उतपत्ति होती है ,एक धार सी शरीर में घूम रही थी जो की मेरे लिंग को कड़ा करने की कोशिस कर रही थी लेकिन मेरे जगे हुए होने के कारण वो उसे छू भी नही पा रही थी,वो मेरे लिंग के पास ही अटकी हुई थी ना ही कही और जा रही थी ना ही लिंग को अकड़ने दे रहा था,
मैं उस धार के साथ साथ ही रहा,वो मेरे पूरे शरीर में बट गया और मैं मेरा मन और शरीर उस कोमल शरीर को स्पर्श करने के बाद भी किसी भी तरह के भावना के आवेग से नही भरा,इसका मतलब ये नही की भावना से नही भरा असल में उसका आवेग नही था भावना तो थी,उसका अहसास भी था,उसकी गर्मी उसकी हल्की शुष्कता और उसका नरम त्वचा का अहसास भी हो रहा था,पसीने से भीगा होने के कारण आने वाली थोड़ी आद्रता का भी आभास था लेकिन आवेग नही था,मैं इस सत्य को समझ पा रहा था मैं इस तकनीक को समझ पा रहा था ,कैसे कोई संवेदना हमारे शरीर में उभरती है और हम बस उसके गुलाम बने हुए उसके पीछे भागने लगते है ,अगर हमे उसका मालिक होना है तो उस संवेदना को आने दो लेकिन बिना किसी प्रतिक्रिया के उसे जाने भी दो बस देखते रहो दृस्टा बने हुए ……..
और जब वो संवेदना खत्म हो जाए तो मन भर जाना है बस एक अजीब से अहसास से एक शांति से ,,,,मन बिल्कुल शांत ,,शरीर शांत ..
बस मैं ही होता हु शांत दृष्टा बना हुआ ……..

स्थिरता….
मन की स्थिरता के प्रयास में लगा हुआ था लेकिन जीवन की आपाधापी भी तो बहुत थी ,फिर भी कुछ सीख गया था कुछ सीख रहा था …
भावनाओ से लड़ पाना तो कठिन था लेकिन भावनाओ के साथ चल पाना बहुत ही सरल ,उसी उम्मीद में की मेरा साथ देने वाले बहुत ही मैं थोड़ा एक्टिव होना चाहता था ,
अब जबकि मुझे कजल के बारे में भी पता चल चुका था और काजल को भी मेरे कारनामो के बारे में पता चल चुका था तो कुछ भी छुपाने को नही रह गया था ,अब कुछ करने का वक्त था ,,,,
मेरे दिमाग में सबसे बड़ा सवाल ये था की आखिर काजल ठाकुर ,कपूर और खान को कैसे बर्बाद करेगी..
क्या वो उन्हें बस सड़क पर लाकर छोड़ देना चाहती है या फिर भावनात्मक तौर पर तोड़ देना चाहती है …
अभी लगभग 4 बजे थे जब मेरी नींद खुली ,मैं पूर्वी और निशा के साथ सोया था लेकिन मेरी आंख खुलने पर मैंने खुद को काजल के साथ पाया ,वो बेफिक्र किसी बच्चों की तरह सो रही थी …
उसके प्यारे से चहरे को मैं बस देखता ही रह गया,
मैं उठा और बाथरूम की ओर जाने लगा ,मेरी नजर उसके पर्स पर पड़ी ,ना जाने क्यो मुझे वो आकर्षित कर रहा था…
मैं जानता था की उसके अंदर क्या हो सकता है ,
लेकिन फिर भी आज कल मैं काजल के दूसरे के साथ सम्बन्धो की बात सुनकर थोड़ा तो उतेजित हो ही जाता हु ,
ये अजीब सा नशा मेरे अंदर होने लगा है ,मैं अब इसे किसी सही या गलत के दायरे से बाहर ही रखना चाहता हु ,
हो सकता है की लोग अब मुझे नामर्द समझे या और कुछ लेकिन ये सही था की मैं काजल को पराए मर्द के साथ देखकर उत्तेजित हो रहा था,और ये भी सही था की इस ख्याल से भी की काजल किसी पराए मर्द के साथ सोकर आयी है ,मुझे एक उत्तेजना सी महसूस होती थी …
माना की ये गतल हो सकता है सामाजिक नजरिए से लेकिन ये मेरा व्यक्तिगत मामला था और मुझे कम से कम अब तो इस बात को स्वीकारने में कोई संकोच नही रह गया था ,मैं इस बात को लेकर बहुत कुछ खो चुका था लेकिन अब नही ,मेरा मन साफ था और मेरे इरादे भी ………
मैं पर्स को लेकर उसके अंदर देखने लगा,पहली चीज जो हाथ में लगी वो महिन कपड़ा था ,वो मुलायम कपड़ा जो की शायद आज ही काजल के योनि की दीवार को सुरक्षित करने को पहना गया था ,,
उसमें कुछ गीला सा और अब थोड़ी चिपचिपाहट के कारण थोड़ा सुख सा गया पदार्थ लगा था ,जिसे लोग वीर्य कहते थे ,सच पूछो तो इसका अहसास करके की काजल की पेंटी से किसी ने अपने वीर्य की धार को पोछा है मेरे लिंग में एक गजब का तनाव आ गया ..
मैं मुस्कुरा पड़ा
जिस चीज के लिए पहले मुझे गुस्सा और ग्लानि के भाव आते थे उसी चीज के लिए अब मुझे हँसी और उत्तेजना आ रही थी ,काजल ने मुझे वो बना ही दिया था जो वो मुझे बनाना चाहती थी ,लेकिन अब मैं इसे खुद ही कुबूल कर चुका था …
मैं पर्स के अंदर फिर से हांथ डाला तो मुझे एक कागज का अहसास हुआ ,असल में मैंने हाथ उसकी ब्रा को निकालने के लिए डाला था लेकिन ये जो मुझे मिला था वो एक लेटर था,कागज का एक टुकड़ा ..जो की उसके पर्स के अंदर एक छोटे से थैली में था जो की पर्स के अंदर बना हुआ था ,बाहर से मुझे बस उस कागज का अहसास हो रहा था ,मैं चैन खोलकर देखा तो वँहा कुछ भी नही था ,लेकिन एक छोटा खाना बना था जो की चैन से ढका हुआ था,चैन खोलकर मैं उस कागज तक पहुच गया ..
मैंने एक नजर काजल की ओर डाली वो अभी भी बेफिक्र सो रही थी ,मैंने वो कागज निकाला जो की एक लेटर की शक्ल में था ,
किसी के द्वारा उसे टाइप किया गया था …
लिखा था ..
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u3
530

लिखा था मैं तो चक्कर में ही पड़ गया लेकिन मैंने जल्दी से उसकी फ़ोटो उतार ली और उसे वैसे ही रख दिया …
मैं फिर से लेटा हुआ बस उस फ़ोटो को देख रहा था ,और ये सोच रहा था की आखिर इसमें लिखा क्या है और इसे काजल को किसने दिया है …
मैं कितना भी सोच कर किसी नतीजे में नही आ पा रहा था ,
बस इतना ही समझ आ पाया की ये कागज बस एक सिंपल A4 साइज का पेपर है जो की कोई अभी आम ऑफस में यूज़ होता है ,,,
मैं अपना दिमाग खुजाते हुए सो गया,ये कोई कोड था इतना तो मुझे समझ में आ गया था लेकिन इसे डिकोड कैसे किया जाए ये नही समझ आ रहा था ,ऐसे मुझे बहुत से ट्रिक पता थे लेकिन फिर भी इसे किस तरह से कोड किया गया है मैं सोच में ही पड़ा रहा,,,
आखिर मेरे दिमाग में एक ही नाम आया वो था शबनम…
जो भी हो वो जरूर मुझे इस बारे में बता सकती थी …

*************************
सुबह मेरी नींद काजल के ही प्यार भरे किस से खुली,
मैं उसे प्यार से ही देखता लेकिन मेरे दिमाग में वो कोड आ गया था ,मेरा चहरा थोड़ा उतर गया,
मुझे अब शबनम से मिलने की जल्दी थी ,मैंने होटल पहुचते ही शबनम से मिला और उसे सब कुछ बताया
उसने एक गहरी सांस ली …
“कोड का मतलब तो मुझे भी नही पता देव लेकिन काजल से मैंने कल बात की थी और वो बहुत ही खुश थी शायद उसे कुछ सबूत मिले है या हो सकता है की कोई ऐसा राज उसे पता चल गया हो जिससे उसे अपने दुश्मनों से लड़ने में आसानी हो …”
“शबनम अगर ऐसा है तब तो अच्छी बात है लेकिन ऐसी कौन सी बात है की काजल को कोई ऐसे कोड में कुछ लिखकर दे रहा है ,..”
मैं थोड़ा गंभीर हो गया था
“देव तुम बुरा ना मानो तो एक बात पुछु “
“पूछो ..”
शबनम थोड़ी देर तक मुझे देखती रही जैसे वो ये देखना चाह रही थी मैं उसके बात के लिए तैयार हु या नही ..
“क्या काजल ने तुम्हे निशा के बारे में कुछ कहा था “
ओह तो वो इसलिए इतनी घबराई हुई थी
“हा उसने बहुत कुछ बतलाया था “
“क्या ???”
“वही की निशा मेरे लिए पागल है और वो कुछ भी कर सकती है ,इसी लिए वो कुछ लड़को के चुंगल में भी फंस गई है लेकिन शायद अब सब कुछ ठीक है ,,,शायद नही अब सब कुछ ठीक है …काजल ने मुझे उसके पागलपन के बारे में बतलाया था ..”
वो मुझे गंभीरता से देखने लगी
“और काजल ने तुम्हे ये नही बतलाया था की निशा ने ही काजल को जिस्म फ़िरोसी के लिए उकसाया था “
मैं सन्न रह गया था क्योकि काजल ने मुझसे कुछ और ही कहा था उसने मुझे कहा था की काजल के बारे में निशा को पता चल गया था इसलिए वो उसे ब्लैक मेल करती थी और मुझसे दूर होने को मजबूर करती थी ,उसके जिस्म की आग थोड़ी कम हो जाए इसलिए वो कभी कभी लड़को से छेड़खानी कर लेती थी और काजल के साथ कभी होटल में भी चली जाती थी लेकिन इससे ज्यादा कुछ नही …
काजल ने मुझसे क्या छुपाया है ???
मेरी नजर को देखकर ही शबनम सब समझ गई थी की मुझे कुछ भी नही पता ..
“वो निशा ही थी जो पहले से ये काम कर रही थी …”
“लेकिन लेकिन जब मैंने उसके साथ सेक्स किया था तो तो वो कुवारी थी “
मैं हड़बड़ाकर ना जाने क्या बोल गया
“तुम्हे कैसे पता “
उसने तीखी निगाहों से मुझे देखा
“उसका खून आया था “
वो जोरो से हँसी
“तुम आज भी उन दकियानूसी बातो को मानते हो देव …दो बच्चों की मा का भी खून आ सकता है ,कई कारण हो सकते है ,इससे ये नही पता चलता की कोई वर्जिन है या नही “
मैं दंग सा रह गया ,मैं इतने दिनों से इसी कन्फ्यूज़न में था की आखिर अगर निशा के संबंध दूसरे लड़को से भी है तो मेरे द्वारा सेक्स करने पर उसका खून क्यो आया था …
शबनम मेरे चहरे को देखकर थोड़ी उदास सी हो गई
“मुझे माफ कर दो देव की मैं उन बातो पर पहुच गई जो तुम तक नही पहुचनी चाहिए थी ,लेकिन सच यही है निशा बहुत ही खतरनाक लड़की है और …….”
उसके चहरे पर असमंजस का भाव साफ साफ दिख रहा था ,वो अब भी डर रही थी की आखिर जो बात वो कहना चाहती थी वो कहे की नही ..
लेकिन मैंने अपना दिल मजबूत कर लिया था ,चाहे सच कितना भी कड़वा हो मुझे अब सच ही जानना था
“तुम कहो शबनम अब बहुत हो गया मैं और दुविधा में नही जी सकता मुझे सच सुनना है “
वो थोड़ी शांत हुई और गंभीर स्वर में बोलने लगी
“असल में काजल ने तुमसे दोस्ती और शादी भी निशा के कारण ही की थी “
मैं पास पड़े हुए चेयर में धम से बैठ गया
“काजल को लगने लगा था की तुम ही एक जरिया हो जिससे निशा उसके कंट्रोल में रह पाएगी ,लेकिन उसकी मजबूरी की उसे तुमसे प्यार हो गया ,निशा और काजल दोनो ही तुम्हे इन सबसे दूर रखना चाहते थे ,उन्होंने अपनी बहुत कोशिस भी की कई सालो तक तुमसे उनकी हर सच्चाई छुपी रही लेकिन ,,,लेकिन तुम इनसब में फंस ही गए …
देव मैं जानती हु की काजल ने निशा की वजह से तुमसे पहले तो प्यार का नाटक किया था ताकि निशा की मदद से वो अपने बदले को पूरा कर सके लेकिन वो तुमसे सच में प्यार करने लगी ,इसका सबूत ये है उसने तुमसे शादी कर ली ,निशा और काजल के बीच ये डील थी की वो तुम्हे दोनो की सच्चाई से दूर रखेंगे,और यही कारण था की जब पूर्वी के साथ वो हादसा हुआ तो निशा भड़क गई थी ,लेकिन …….वो अब भी तुमसे प्यार करती है देव …”
शबनम इतना ही बोल पाई थी
“लेकिन जब मैं कालेज में था और मेरी मुलाकात काजल से हुई थी तब तो निशा गांव में थी “
शबनम ने एक गहरी सांस ली
“इसका जवाब तो निशा काजल ही दे सकते है ,या फिर …”
”या फिर क्या शबनम “मैं जैसे चीख ही पड़ा
“वो कोड जो उस कागज में है ,क्योकि वो ना सिर्फ काजल से जुड़ा हुआ है बल्कि जैसा मुझे लगा वो शबनम से भी जुड़ा हुआ है ….”
वो इतना कह कर चुप हो गई …………

मैं और शबनम दोनो ही इस ख्याल में थे की आखिर इस कागज में लिखा क्या है ……
ये कोई कोड था जिसे तोड़ने की कोशिस में मेरा एक घण्टा निकल चुका था ..
आखिर थककर मैंने इसे छोड़ने की सोची और अपना लेपटॉप निकाल कर कुछ बिल का काम करने लगा,
मुझे कुछ टाइप करना था ,अचानक मेरा ध्यान फिर से उस कोड पर गया,
मैंने देखा की हर नंबर के आगे u m l लिखा हुआ है ,
u से अगर अपर हो ,m से मिडिल और l से लोवर तो अगर ये kyebord में जमे हुए अक्षरो के बारे में हो तो ..
मैं तुरंत फिर से उस कागज को खोलकर अपने सामने ले आया और उसे मिलाने लगा
l5 u9 m3 m9 u8
l7 m1 m6
u3
530

l5 मतलब अगर शुरू से गिना जाए तो लोवर रो का 5वा अक्षर मतलब b
u9 मतलब अपर रो का 9वा अक्षर मतलब o
मैं सभी को फिर के जमाते गया और मेरे सामने नया वाक्य बन गया जिसे देखकर मेरी आंखे ही चमक गई ,
bodli mhl e 530
बोदली महल मैं इस जगह को जानता था,या ये कहो की मैं यंहा ही पला बढ़ा था ,मैंने तुरंत ही शबनम को इस बारे में बतलाया की मुझे तुरंत ही निकलना होगा,क्योकि ये मेरे गांव से कुछ दूर एक खण्डर पड़े हुए जगह का नाम है ,बोदली महल और e 530 का मतलब हो सकता था की एविनिग के 5 बजकर 30 मिनट में …
शायद इसीलिए काजल अभी निकली थी क्योकि वो 4 बजे तक वँहा पहुच जाएगी …
मेरी धरती में ही कोई उसे कुछ राज बतलाना चाहता था और मुझे इसका आभास अभी हो रहा था,जरूर ये निशा से ही जुड़ा हुआ कोई तार था जिसको जानने के लिए काजल बेताब हो रही थी ,और अब मैं और शबनम भी ……..
मुझे तुरंत ही बोदली महल के लिए निकलना था और मैंने देरी करना जरूरी थी नही समझा,शबनम भी मेरे साथ जाने की जिद करने लगी लेकिन मैं उसे अपने साथ नही ले जाना चाहता था क्या पता की वँहा कौन सा नया खतरा मेरे सामने आ जाए …
मैं अब अपने घर के रास्ते में था ,वो घर जिससे मैंने अपना नाता पूरी तरह से ही तोड़ लिया था ना जाने कौन सी सच्चाई मेरे सामने आने वाली थी मैं बेताबी से गाड़ी चला रहा था ,मैं सालो बाद उस जगह में जा रहा था जंहा मैंने अपना बचपन गुजारा था ,मैं भविष्य की कल्पनाओं में डूबा हुआ बस बोदली महल की ओर गाड़ी को तेजी से भगा रहा था

बोदली महल ,बस नाम का ही महल था ,वो किसी जमाने में रौनक हुआ करता था आजकल वँहा बस सन्नाटा पसरा रहता था ,आसपास के लोग तो वँहा जाने से भी डरा करते थे दिन के उजाले में भी लोग उधर फटकते नही थे,मैं यहां आता ही इसलिए था क्योकि मुझे यंहा शांति का आभास होता था,मैं कभी कभी अपनी बहन निशा को भी यंहा लाया करता था,यंहा एक कहानी प्रचलित थी की इसी महल में कभी राजा की बेटी को अपने एक नॉकर से प्यार हो गया था और इसलिए उस राजा ने उस नॉकर को दीवार में चुनवा दिया था,राजकुमारी ने ही यही अपनी जान दे दी,और तब से राजा साहब इस महल को छोड़कर चले गए…
कालांतर में लोगो में ये अफवाह गर्म हो गई की यंहा पर अब भी उन दोनो की आत्मा का राज है ,और इसलिए ये धीरे धीरे खण्डर में तब्दील हो गया ,
लेकिन मैं यंहा अपने पूरे बचपन आता रहा ,मेरा और निशा के लिए ये फेवरेट जगह में से एक थी क्योकि हमे यंहा कोई भी डिस्टर्ब नही करता था और ना ही कोई ढूंढने आता था,हम यंहा घंटो बैठे रहते और बाते करते रहते,मुझे लगता था की मैं ही इस पूरे महल का राजा हु,क्योकि महल भले ही खण्डर हो गया हो लेकिन यंहा के दीवारे अब भी वैभव की गाथा गया करते थे,इतनी नक्काशियां आज भी बड़ी ही मनोरम लगती थी ,
खैर बीती बातो को याद करने से क्या मिलेगा,लेकिन फिर मेरे दिमाग में अचानक से ये बात भी कौंध गई की आखिर बोदली महल ही क्यो???????????
कोई काजल को यंही क्यो बुलाना चाहता है जबकि ये जगह पहुचने में दुर्गम भी थी और साथ ही बहुत ही सुनसान भी ,वो भी शाम के 5 बजे जब की थोड़ी ही देर में सूरज भी ढल जाएगा …
मेरे जिस्म में एक सुरसुरी सी हुई ,आजतक मैं भी कभी वँहा पर देर शाम तक नही रुका था, वो निशा के बारे में जानकारी देना चाहता था,और जगह भी ऐसी ही चुनी थी जो की निशा की सबसे फेवरेट जगह में से एक थी ,मैं तो कालेज की पढ़ाई के लिए शहर आ गया था लेकिन तब भी निशा वँहा जाया करती थी ,फिर मैंने बैचलर कंप्लीट किया और फिर MBA करने लगा जंहा मेरी मुलाकात काजल से हुई ,अगर शबनम की बात सच थी तो काजल और निशा एक दूसरे को मेरे MBA में आने से पहले से ही जानते थे मलतब मेरे ग्रेजुएशन के समय से ,उस समय भी निशा बोदली महल जरूर आती रही होगी ,
मुझे याद है की जब मैं एक बार छुट्टियों में घर आया था तब निशा के साथ बोदली महल गया था और उसने मुझे ऐसे उसे घुमाया था की मुझे लगा की मैं यंहा पहली बार ही आया हु जबकि निशा यही रहती है ,तब उसने मुझे बताया था की उसे जब भी मेरी याद आती है वो वही आ जाया करती है और घंटो यही बिताया करती है ………..
मेरे दिल में वँहा जल्दी से जल्दी पहुचने की बेताबी बढ़ती जा रही थी ,मैं जानता था की आज मुझे कुछ खास सच का पता चलने वाला है ………

वही सन्नाटा पसरा हुआ था जो की हमेशा से ही मुझे बोदली महल में महसूस होता था,जो पहले इतना सुहाना सा लगता था वो आज बहुत ही मनहूस और डरावना लग रहा था,
दिन ढलने को हो रहा था और शाम के 5 बज चुके थे,मैं वँहा से करीब 2 किलोमीटर की दूरी में अपने परिचित जगह में अपनी गाड़ी पार्क करके पैदल ही महल की तरफ निकल पड़ा था,मैं बहुत ही सतर्क था…मुझे पता था की काजल जरूर उस पगडंडी से वँहा पहुची होगी जो की कभी यंहा आने का एक मात्रा मार्ग था,मेरे लिए कोई कठिनाई नही थी लेकिन काजल के लिए जरूर ये कठिनाई पैदा करने वाला रहा होगा..
कुछ ही दूर तक गाड़ी वँहा आ सकती थी काजल ने वही अपनी गाड़ी खड़ी कर इधर का रुख किया होगा,
मैं दीवारों के सहारे से बहुत ही आहिस्ता से अंदर गया,मुझे बाहर ही काजल खड़ी हुई दिखी,मैं चुप चाप ही उसे देख रहा था,उसके चहरे में भी बेचैनी और डर साफ साफ दिखाई पड़ रहे थे,वो बार बार अपनी घड़ी की ओर देखती थी ,तभी किसी मोटरसाइकिल की आवाज आनी शुरू हुई ,वो जैसे जैसे पास आ रही थी वैसे वैसे ही हमारे दिल की धड़कने बढ़ रही थी ……..
कुछ ही देर में मुझे एक बुलेट में एक लंबा चौड़ा सा आदमी आता हुआ दिखा,उसके साथ ही पीछे की सीट में एक लड़की बैठी हुई थी ,दोनो को देखकर काजल के चहरे में थोड़ी शांति दिखाई दी …
लेकिन उस लड़के और लड़की को देखकर मेरा मुह सूखने लगा था ..
मैं दोनो को ही पहचानता था ,लड़की थी मेरी प्यारी बहन निशा और लड़का ..
लड़का था काजल के भाई वरुण का दोस्त सुशांत …
सुशांत के मैं अपनी शादी के दिन ही कोर्ट में मिला था(अपडेट 1) उसके बाद मैंने उसे कभी नही देखा था ,लेकिन मैं उसे पहचान गया …
दोनो के आते ही सुशांत आकर काजल के गले से लगा काजल ने भी हल्के से उसके पीठ को थपथपाया,लेकिन निशा और काजल के बीच कोई भी इंटरेक्शन अभी तक नही हुआ था …निशा काजल को देखे बिना ही खण्डर के अंदर चली गई ..
“तुमने मुझे यंहा क्यो बुलाया ,इतने दूर हम बात तो वँहा भी कर सकते थे ना “
काजल ने सुशांत की ओर थोड़े गुस्से में देखा
“अरे दीदी,वो पता नही क्यो आपसे पहले से ही नाराज है और जब मैंने निशा से कहा की दीदी तुमसे बात करना चाहती है तो पहले तो वो भड़क गई फिर उसने कहा की ये लेटर उसे दे देना वो समझ जाएगी की कहा और कितने समय आना है ,मुझे भी कहा पता था की वो इतने दूर बुलाएगी …”
काजल ने एक गहरी सांस छोड़ी
“आप दोनो तो एक ही घर में रहते हो फिर भी बात नही कर पाते “
सुशांत ने स्वाभाविक सा सवाल किया
“नही पता ये अब क्यो मुझसे गुस्सा हुई बैठी है ,मेरी तो बात ही नही सुनती इसलिए तुझे कहने को कहा “
“अच्छा चलो ठिक है अब अंदर चलते है “
दोनो अंदर चले गए मैं भी पीछे के रास्ते से अंदर पहुचा,जैसा की मैंने पहले भी कहा था की यंहा मैं सालो से आता रहा हु इसलिए मैं इस जगह के चप्पे चप्पे से परिचित था …
मैं एक कोने में छुपकर सभी को देख पा रहा था ,निशा बड़े ही तल्लीनता से सभी नक्काशियों को देख रही थी जो की वक्त की धुंध से बोझिल हो गए थे ..
वो एक दीवार को फूक मारकर साफ करती है और वँहा पर पत्थर से उकेरा गया एक दिल का निशान साफ हो जाता है ,जिसमे निशा और देव लिखा था …
मैंने उसे पहले भी देखा था लेकिन उस समय मुझे नही पता था की मेरे बहन के दिल में मेरे लिए ऐसा प्यार पल रहा है..
निशा पलटी तो सामने काजल और सुशांत थे …
“तुम बाहर जाओ मुझे इनसे अकेले में बात करनी है “
सुशांत बिना कुछ कहे ही बाहर चला गया ..
“जानती को काजल मैंने तुम्हे यंहा क्यो बुलाया है “
निशा के मुह से काजल सुनकर मुझे अजीब लगा क्योकि मुझे इसकी आदत नही थी मैंने अभी तक निशा के मुह से काजल के लिए बस भाभी ही सुना था ..
“बताओ “काजल ने एक सपाट जवाब दिया
“क्योकि यंहा से मेरी बहुत ही यादे जुड़ी हुई है जो मैं आज तुमसे शेयर करना चाहती हु,माना की तुम मुझसे बात करना चाहती थी लेकिन पहले मेरी बात सुन लो तो बेहतर होगा “
निशा शांत थी और साथ ही काजल भी
“ह्म्म्म “काजल बस इतना ही बोल पाई
“इतना तो तुम्हे पता ही होगा की मैं और भइया यंहा अक्सर आया करते थे ,यही मेरे दिल में भाई के लिए ऐसा प्यार पनपा जो भाई बहन के प्यार से अलग ही कुछ था “
“हम्म्म्म”
“मुझे ये जगह बहुत ही पसंद थी ,क्योकि भइया को ये जगह बहुत पसंद थी ,और इसलिए भी क्योकि यही तो जगह थी जंहा मैं उनके साथ बिल्कुल ही अकेले होती थी,हमारे बीच कोई भी नही आता था,काश मैं उस समय ही भाई से अपने प्यार का इजहार कर लेती तो शायद हमे ये दिन नही देखना पड़ता…शायद मैं कभी बहकी ही ना होती ,शायद मैं उस रास्ते जाती ही नही जिसने भाई के नजरो में मुझे गिरा दिया …”
निशा ने एक गहरी सांस ली
“वो आज भी तुमसे बहुत प्यार करते है निशा “
निशा के चहरे में एक फीकी सी मुस्कान आ गई
“हा मेरी हर गलतियों के बावजूद वो मुझसे बहुत प्यार करते है ,जैसे तुमसे करते है ,जबकि वो जानते है की हम दोनो ही रंडिया है …”
निशा के मुख से निकली बात ने काजल को चुप करा दिया था…….वो कुछ भी नही बोल पाई
“जब भइया कालेज की पढ़ाई के लिए शहर गए तब मैं बिल्कुल ही अकेली हो गई थी काजल,और यंहा मैं घंटो बैठी रहती थी ,उस समय पूर्वी बिल्कुल ही बच्ची थी की मैं उससे अपने दिल की बात शेयर कर सकू ,उसी समय मेरे स्कूल के कुछ लड़के जो की स्कूल से भाग कर यंहा आकर सिगरेट दारू या गंजा पिया करते थे ,उनसे मेरी दोस्ती हो गई ,वो यंहा आया करते थे लेकिन मैंने कभी किसी से नही कहा की वो यंहा आकर क्या करते है ,वो लोग मेरे अकेलेपन के साथी बने ,लेकिन मुझे इसकी एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ गई …अपने जिस्म की ..

जवानी के जोश में मैं उन लड़को के साथ इन्वाल्व हो गई लेकिन मुझे नही पता था की ये मेरी आदत बन जाएगी ,मैं नई नई जवान हुई थी और इस शराब गंजे के नशे में गिरफ्त होने लगी थी ,लड़के भी बेचारे आखिर कब तक एक जवान लड़की के साथ रह कर भी चुप रह पाते ,लेकिन फिर भी कोई भी मुझे हाथ लगाने से पहले सोचता जरूर था ,वक्त ने उनकी झिझक खत्म कर दी और मैंने भी अपनी जवानी के मजे उठाने की सोची ..
फिर भी मैं एक रांड नही बनी थी ,जबतक की मैं अजीम से नही मिली जो की उन लड़को में से एक को जानता था ,लड़के उसे अजीम भाईजान कहा करते थे ,वो एक डॉन की तरह था और सभी उससे डरते थे ,उसे भी नई जवानी चखने का शौक था और जब उसने मेरे दोस्तो के साथ मुझे देखा तो बस देखता ही रह गया,मुझे अब नया नशा लगा पॉवर का और मैं अजीम की गर्लफ्रैंड बन गई ,मुझमें इतनी समझ नही थी की मैं क्या कर रही हु ,असल में मुझे मजा आता था जब सभी लड़के जो की मेरे साथ बैठा करते थे अब मुझसे डरकर बात करते थे ,जब तक मैं नही कहती कोई मुझे छूने की हिम्मत भी नही करता था ,मेरे दिन अच्छे चल रहे थे जबतक की मेरी जिंदगी में तुम नही आयी …”
काजल उसके बातो को सुन रही थी ,जैसे उसे सब कुछ पहले से ही पता हो
“याद है तुम उस समय नई नई कालेज खत्म करके भइया के साथ MBA आयी थी और पूरे कालेज तुम अजीम के पास आने की कोशिस करती रही थी लेकिन डरते हुए ,मैं तुम्हे देखा करती थी की तुम उसके आसपास ही उसपर नजर रखे हुए हो लेकिन उससे मिलकर बात नही कर पाती हो “
“हा मुझे याद है मैंने तुम्हारे दोस्तो के गैंग में सुशांत को भी शामिल करवा दिया था ताकि वो अजीम के आसपास ही रहे ,लेकिन तुम्हे पता चल गया था की कुछ गड़बड़ है “
“हा मुझे पता चल गया था और साथ ही लेकिन 3 सालो तक तुम बस वैट ही करती रही किसी सही मौके का,तुम्हे तो ये भी नही पता था काजल की तुम्हे करना क्या है …लेकिन जब तुम्हे पता चला की मैं देव की बहन हु वो देव जो तुम्हारे साथ पढ़ता है तब तुमने मेरे पास जाने के लिए मेरे भाई से ही दोस्ती कर ली …वाह “
काजल की नजर नीची हो गई थी मानो वो इस बात से ग्लानि महसूस कर रही हो
“जब मुझे लगा की भइया भी तुम्हारे साथ खुस है और वो तुम्हे पसंद करने लगे है तो मुझे बहुत धक्का लगा ,लेकिन फिर मेरे दिल में भी आया की क्यो ना तुमसे एक डील की जाय ,और मैंने तुमसे बात की ,तुमने क्या कहा था काजल की देव से मुझे प्यार नही है ..ऐसा ही कुछ क्या था वो ..”
निशा के चहरे में एक जहरीली सी मुस्कान खिल गई थी ,और काजल जैसे जल रही हो ,पसीने से भीगी हुई सर नीचे किये बस खड़ी रही थी
“मेरे दिमाग में उस समय बस खान से बदला लेने की बात ही थी निशा ,और जब तुमने कहा की तुम्हे तुम्हारे भइया चाहिए बदले में तुम मेरी मदद करोगी अजीम के गढ़ में घुसने में और मेरा बदला पूरा करने में तो इससे अच्छी डील मेरे लिए कुछ नही हो सकती ही ,उस समय मैं देव से प्यार नही करती थी लेकिन …”
“लेकिन क्या ……”
निशा चिल्ला उठी
“मैंने तो सोचा था की ये करने से अजीम को एक नया खिलौना मिल जाएगा और वो मुझे भूल जाएगा,अजीम से पीछा भी छूट जाएगा और मेरे भइया भी मुझे मिल जाएंगे लेकिन तुमने क्या किया ….भइया तुम्हारे प्यार में गिरफ्तार होने लगे और तुमसे शादी भी करने की सोच ली और तुमने मुझे धोखा दे दिया ..”
“नही निशा मैं सच में देव से प्यार करने लगी थी ,मैं उससे अलग नही रह सकती थी ,”
“अजीम की रंडी बनने के बाद भी भाई से तुम कैसे प्यार कर सकती थी काजल “
निशा की आवाज में बौखलाहट थी
“जैसे तुमने किया है ,तूम भी तो कई मर्दों के साथ सोई हो निशा लेकिन सच बताओ की क्या तुमने देव के अलावा किसी और से प्यार किया है “
दोनो ही चुप थे जैसे कुछ सोच रहे हो…
“तुम्हे अजीम की जिंदगी में मेरी जगह ले ली और साथ ही भइया से भी शादी कर लिया ,तुमने अजीम के जीवन से रश्मि को भी निकाल फेका जो की मैं भी नही कर पाई ,मैं मानती हु की तुम मुझसे कही ज्यादा खूबसूरत हो लेकिन तुम्हे ये सब मैंने ही तो सिखाया था ,मैंने ही तो बतलाया था की तुम्हे क्या करना चाहिए कैसे करना चाहिए …”
काजल चुप थी
“तुम्हे तो सब मिल गया काजल लेकिन मुझे क्या मिला ??”
निशा रो पड़ी थी
“नही निशा मेरी बात सुनो “काजल उसके पास जाने को हुई लेकिन निशा ने तुरंत ही अपने जेब से एक पिस्तौल निकाल ली
“रुक जाओ काजल बहुत हुआ अब और नही अब या तो तुम रहोगी या मैं “
काजल के साथ साथ मेरे भी प्राण मानो उड़ गए थे
“माना मैं थोड़ी बहक गई थी ,माना की मैंने गलतियां की है लेकिन मेरा भाई आज भी मुझे प्यार करता है ,मैंने तो उसके सामने अपनी प्यारी बहन पूर्वी को भी कुछ नही समझा तू क्या चीज है ,तुझे तो पहले ही मार देना था लेकिन ये जगह सबसे सही है ,यही से मेरा प्यार शुरू हुआ था “
निशा के चहरे में आने वाला बदलाव मुझे डरा गया था ,हम दोनो ही जम चुके थे ,उसके चहरे में वो पागलपन फिर से आने लगा था जिसे मैं पहले भी देख चुका था ,,
“अब और नही काजल “
“निशा रुको “
मैं और सुशांत दोनो ही एक साथ काजल को बचने के लिए भागे लेकिन
‘धाय धाय ‘ दो गोलियां निशा की पिस्तौल से चल चुकी थी और सीधे जाकर सुशांत के कंधे में छेद कर गई …
जो की काजल को बचने के लिए कूदा था ,निशा और भी कुछ करती उससे पहले उसने मुझे देख लिया था जो की एक टूटे हुए दीवार से कूदकर वँहा आ गया था ,निशा का मुह बस खुला का खुला रह गया और वो पिस्तौल को वही छोड़ते हुए भागने लगी,
“निशा रुको …निशा रुको तो सही “
वो भागते हुए झड़ियो में ना जाने कहा गुम हो गई मैं उसके पीछे भागता रहा लेकिन मैं उसे ढूंढ ही नही पाया …
मैं जब वापस आया तो सुशांत की हालत बहुत ही खराब लग रही थी मैं जल्दी से उसे उसकी ही गाड़ी में बैठकर काजल की गाड़ी की तरफ भागा,काजल ने मुझसे एक भी शब्द नही कहा ना ही मैंने उसे कुछ कहा …
हम दोनो ही चुप थे शांत थे …..काजल ने सुशांत को गाड़ी में बिठाया और पास के ही हॉस्पिटल की तरफ निकल गई …

हॉस्पिटल में मैं और काजल दोनो ही शांत बैठे हुए थे ,ना ही मेरे पास कुछ कहने को था ना ही काजल के पास ,सुशांत ठीक था और उसे वही के एम्बुलेंस में बैठा कर शहर भेज दिया गया था ,मेरे और काजल के बीच कोई भी बातचीत नही हुई थी जबकि निशा के ऊपर केस नही किया गया,लेकिन पुलिस से उसे ढूंढने की बात जरूर कह दी गई थी,काजल ने इसके लिए कुछ बड़े अधिकारियों से बात की थी,और मामला वही दब गया था,साथ ही सुशांत ने भी इस मामले में निशा के पक्ष में ही बयान दिया था,
लेकिन काजल और मेरे बीच की बातचीत पूरी तरह से बंद हो चूकी थी ,निशा की तलास जारी थी लेकिन उसका कही कोई आता पता नही चल पा रहा था,काजल भी अब घर नही आती थी ,और मैं भी अब उसे घर आने को नही कहता ,…
सब कुछ अचानक से ही बहुत शांत हो चला था ,ना जाने निशा कहा थी,पोलिस के अलावा मैं भी उसे ढूंढने की भरपूर कोशिस में जुटा हुआ था ,लेकिन दो महीने खत्म हो चुके थे और मैं और पुलिस दोनो ही शांत हो चुके थे …
इन सब में पूर्वी अकेली हो गई थी ,मैं अपने काम में चला जाता और काजल तो घर में थी ही नही ,शाम जब आता तो काम से और जीवन में आये हुए इन झमेलों से परेशान हो चुका होता,पूर्वी बेचारी करती भी क्या,लेकिन फिर भी हम दोनो ही एक दूसरे का सहारा थे..
पूर्वी ने एक दो बार काजल से मिलकर उसे समझने की भी कोशिस की और उसे घर लाने की कोशिस की लेकिन वो अपने को मेरा गुनहगार मानती थी और मेरे सामने नही आना चाहती थी मैं भी उसे वापस लाना नही चाहता था जबकि निशा के साथ ये हादसा हो गया था ,सच कहु तो सबसे दूर होकर ही मैं खुस था और इस जॉब को छोड़कर पूर्वी के साथ दूसरे शहर जाने का प्लान बना लिया था ,मैं चैन का जीवन बिताना चाहता था उससे भी ज्यादा अपनी बहन को एक सुरक्षित जिंदगी देना चाहता था,मैंने शबनम और रश्मि के लाख मना करने के बाद भी अपने जॉब से रिजाइन कर दिया और वँहा से 80 किलो मीटर दूर दूसरे शहर में एक छोटे से होटल में मैनेजर की नॉकरी जॉइन कर ली ,साथ ही अपने घर में ताला लगा कर मैं चुपचाप ही इन सबसे दूर दूसरे शहर में चला गया ………………..
मैंने अपना नंबर भी बदल दिया था ,साथ ही किसी से ये भी नही कहा था की मैं कहा जा रहा हु …
पूर्वी और मैं बस एक दूसरे के लिए ही रह गए थे ,जीवन में हमारा एक दूसरे के सिवा और कोई नही बचा था,कभी कभी वो रोती तो मैं उसे सहारा दे देता कभी मैं रोता तो वो मुझे सहारा दे देती ,लेकिन फिर भी हम अच्छे थे ,15 दिन और बीत गए ,और सब कुछ बहुत हद तक ठीक होने लगा था लेकिन ……
उस दिन के अखबार में मुझे चौका दिया जब सुबह की न्यूज थी ,…
‘मशहूर कपूर होटल के मालिक मिस्टर कपूर की हत्या ,हत्या का शक उसकी बेटी रश्मि पर ,रश्मि अभी फरार है और पुलिस को उसकी तलास है ,हत्या की वजह ये बताई जा रही है की रश्मि को शक था की मिस्टर कपूर ने ही उनकी माँ की हत्या जायदाद के लालच में आकर की है …
बता दे की रश्मि कपूर साहब की सौतेली बेटी थी ,इसके साथ ही उन्हें लेकर और भी खुलासे हो रहे है,कहा जा रहा है की कपूर साहब का असली नाम रॉकी है जो कभी होटल आदित्य में मैंनेजर हुआ करता था और सालो से अपनी पत्नी नेहा के मर्डर के आरोप में फरार था ,उसने कपूर होटल के मालिक को फंसा कर उनकी बेटी से शादी की थी जिनकी पहले से एक बेटी रश्मि भी थी ……’
खबर पढ़ते ही मैं चौक कर उठा ,पूर्वी मेरे चहरे का भाव समझ चुकी थी,
“पूर्वी तुम्हारा फोन जो की हमने बंद करके रख दिया था जरा देना तो “
पूर्वी के चहरे में थोड़े आश्चर्य के बाद थोड़ी मुस्कान भी आ गई
“क्या हम फिर से वापस जा रहे है “
“पता नही लेकिन मुझे कुछ फोन करने है “
पूर्वी खुसी खुशी अपना फोन लेने चली गई …..

“हैल्लो मैं बोल रहा हु “
“कहा हो तुम इतने दिनों के बाद याद आयी पता है की सब कितना परेशान थे “
“क्या हो रहा है वँहा ये क्या पढ़ने को मिल रहा है “
“सब निधि का किया कराया है “
निधि का नाम सुनकर ही मैं बेचैन हो गया ,तो वो रश्मि से मिली थी ..
“या किया निधि ने “
मेरी बात पर शबनम थोड़ी देर तक चुप ही रही
“पता नही शायद उसे सच्चाई बता दी ,बस इतना ही काफी था बाकी का काम तो खुद रश्मि ने अपने हाथो से कर दिया “
शबनम की बात सुनकर मैं चौक गया मुझे भी तक यकीन नही हो रहा था की रश्मि ने ही कपूर को मारा है ..
“क्या सच में रश्मि ने ही …”
“हा रश्मि ने ही,अपनी माँ की मौत का बदला उसे अपने हाथो से लेना था लेकिन फिक्र मत करो ,कोर्ट में कुछ भी साबित नही हो पायेगा,वो आसानी से छूट जाएगी “
हा हमारी अदालतों में गवाहों और सबूतों को तोडना मरोड़ना कोई बड़ा काम तो नही था ,रश्मि भी बच ही जाएगी ऐसे भी उसने कौन से मासूम इंसान की हत्या की थी,जिसकी हत्या की गई वो भी एक गुनहगार ही था ,
“लेकिन उसे इतनी आसान मौत मिली शायद काजल को ये पसंद नही आया होगा”
शबनम ने मेरे मुह से काजल का नाम सुनकर थोड़ी हँसी बिखेर दी
“काजल का नशा अब भी तुम्हारे सर चढ़ा हुआ है देव “
“हम्म अब ये नशा है या आदत मुझे नही पता लेकिन हा रोज ही काजल और निशा की याद आया करती है “
थोड़ी देर तक कोई भी कुछ नही कह पाया
“कहा हो तुम “
“सोच रहा हु की वापस आ जाऊ ,निशा सही सलामत है ये सुनकर थोड़ी तसल्ली हुई लेकिन उससे मिलना चाहता हु “
“वो अभी रश्मि के साथ ही गायब है,दोनो का ही कोई अता पता नही चल रहा …”
“ह्म्म्म और काजल कैसी है “
ना चाहते हुए भी मेरे मुह से काजल का नाम निकल ही गया था
“ओह ये प्यार ,इतना ठोकर खाकर भी फिर से सर उसके पैरो में रखना चाहते हो ताकि फिर से तुम्हे ठोकर मार दे “
थोड़ा व्यंग थोड़ा अपनापन और थोड़ी खुसी सभी कुछ तो था शबनम की बात में
“यही समझ लो ,जब सर ओखली में दे ही दिया है तो फिर अंजाम से क्या डरना ,”
मैं थोड़े हल्के मूड में बोला
“ह्म्म्म बात तो सही है ,लेकिन काजल मेडम तो आजकल पूरी तरह से बस अपने काम में ही लगी हुई है ,ना जाने कौन सी रात अजीम ठाकुर और खान की आखिरी रात साबित होगी ,खासकर कपूर के मरने के बाद तो वो और भी देर नही करना चाहती ,क्योकि राज खुलने लगे है और पुलिस कपूर उर्फ रॉकी की हिस्ट्री खोजने में लगी हुई है ,काजल भी अपना काम जल्दी से खत्म कर तुम्हारे तरह ही चैन की जिंदगी बिताना चाहती है “
“चैन की जिंदगी ..??????
अपनो के बिना कही कोई जिंदगी चैन की होती है शबनम ?/
मेरी बहन मेरे पास नही है ,मेरा प्यार मेरे पास नही है तो ये जिंदगी चैन की कैसे हो गई,मैं अपने दोस्तो से अपने शहर से अलग होकर रह रहा हु ,मैं ये बोलना तो नही चाहता था लकिन हा जबसे आया हु लगता है की पल पल भारी है ,पता नही वो दोनो किस तकलीफ से गुजर रहे होंगे और मैं सब छोड़कर भाग आया हु …”
“ये लड़ाई तुम्हारी थी ही नही देव तुम आखिर कर भी क्या सकते हो ,इस हालात को बनाने वालो को ही इसे भुगतना होगा ,तुम या मैं चाहकर भी कुछ नही कर सकते “
कुछ देर तक हम दोनो में से किसी ने कुछ नही कहा …
“हा शबनम लेकिन मैं अब यंहा नही रहना चाहता “
“तो आ जाओ ,होटल में रहो ,मैं भी तो अकेली हो गई हु ,मुझे और इस होटल को तुम्हारी जरूरत है …”
कहते है ना की नशेड़ी को नशे का बहाना चाहिए…
मुझे भी काजल और निशा के नाम का नशा लगा हुआ था और मुझे बहाना मिल गया था ………

**************
होटल का माहौल बिल्कुल ही बदला हुआ था यंहा कस्टमर कम और पोलिश वाले ज्यादा दिखाई दे रहे थे,मेरे आने के बाद मेरा भी बयान लिया गया ,और मेरे ही कहने पर होटल की निगरानी पर बस कुछ सादे कपड़े में पोलिश वाले नियुक्त किये गए ,ताकि होतल में आने वाले कस्टमर को कोई परेशानी ना हो और पोलिस की तहकीकात में भी कोई बाधा ना पड़े …
शबनम बहुत ही खुश थी और पूर्वी भी लेकिन मेरे मन में कई संशय उमड़ रहे थे …

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मुझे आये एक ही दिन हुआ था और मैं अभी अपने होटल में ही था की मुझे कुछ पोलिश वालो के साथ इंस्पेक्टर ठाकुर भी आता हुआ दिखाई दिया ,मुझे देखकर उसके चहरे की चमक बढ़ गई ,वो मेरे पास आया …
“ओह देव तुम आखिर आ ही गए “
मैंने हल्के से सर हिलाया
“ऐसे काजल कह ही रही थी की तुम ज्यादा दिनों तक यंहा से देर नही रह पाओगे “
उसकी बात से मेरा खून ही जल गया ,उसके होठो में एक चिढ़ाने वाली मुस्कान थी
“चौक क्यो गए मुझे पता चल गया है की तुम काजल के पति देव हो ..वाह देखो ना पति देव जी देव जी ..हा हा हा “
वो इतनी गंदी हँसी हंसा की लगा की उसका जबड़ा ही निकाल लू ,मेरी मुठ्ठियां भिच गई थी ,जिसे देखकर वो फिर से एक कमीनी मुस्कान में मुस्काया
“देव बाबू जब पत्नी ही बेवफाई कर दे तो मुठ्ठी भिच कर क्या करोगे ..”
वो मेरे कानो के पास आय और फुसफुसाया
“ऐसे सच बताऊँ मखमल है तुम्हारी बीवी ,साली को जितना भी रगड़ो कम ही लगता है “
उसकी बाते जैसे मेरे कानो में पिघले हुए लोहे की तरह उतर रही थी
“मादरचोद “
मैं पलटा और उसके कॉलर को पकड़ कर खड़ा हो गया ,लेकिन तुरंत ही कुछ पोलिश वाले मेरे हरकत को देख वहां आकर हमे घेर कर खड़े हो गए
ठाकुर फिर से कमीनेपन से मुकुराय
“अपना गुस्सा सम्हाल कर रखो देव और मेरे रिश्ते में आने की सोचना ही मत वरना जो दो पैरो पर सही सलामत खड़े हो वो भी नही रह पाओगे “
वो मेरा हाथ अपने कॉलर से झटक कर हटा दिया और वँहा से चले गया ,मैं ठगा सा बस उसे देख रहा था ,गुस्से की आग ने मुझे जला रखा था पर इतनी हिम्मत भी नही रह गई थी की मैं उसका मुह तोड़ दु ………..

“हैल्लो साहब कहा हो आप दिखाई ही नही देते “
हरिया की आवाज में एक अजीब सी बात थी जो मैंने कभी नही देखी थी पता नही क्यो मुझे उसे काल करने का मन हुआ था …
“बस शहर में नही था “
“उस दिन तो आप इतने नशे में थे की आप अनब सनब बोले जा रहे थे ,क्या सच में काजल मेडम आपकी बीवी है “
काजल मेडम ,साला जो अभी तक काजल को बस रंडी कहा करता था आज वो काजल मेडम कह रहा था ..
“क्यो पूछ रहे हो “
“अपने ही नशे में बतलाया था ऐसे एक बात बता दु की वो आजकल ठाकुर के साथ यही रहती है ,इसी फॉर्महाउस में “
मैं कुछ भी नही बोला
“कोई हुक्म हो तो बताइए सरकार “
वो फिर से बोल पड़ा
“कुछ नही “
“तो कभी आइए अगर आप कहे तो इंतजाम करदु कुछ अंदर की चीज देखने या सुनने का “
“नही जरूरत नही है “
मैं थोड़ा चिढ़ गया था
“हजूर ये अजीब सा नशा है एक बार लग गया तो फिर जाता नही है ,आ जाइये आप मैं बंदोबस्त कर दूंगा “
इतना बोल कर उसने फोन रख दिया मैं अपने ही सोच में पड़ा हुआ था ,क्या सच में ये नशा ही अपनी बीवी को किसी और के साथ देखने का नशा …………

**********************
शाम रात की शक्ल ले रही थी और मैं गार्डन में हेडफोन लगाए हुए इंतजार कर रहा था,मेरी निगाहे उसी बेडरूम में टिकी हुई थी जंहा उस दिन थी ,काजल अभी अभी अपने काम से आकर कपड़े चेंजे करने बाथरूम में घुसी थी और ठाकुर हाल में शराब की चुस्कियां भर रहा था ,थोड़ी देर में वो भी लड़खड़ाता हुआ अंदर आया ,दोनो किसी पति पत्नी की तरह यंहा रहे थे ,मैं रोना चाहता था लेकिन अपने को अपनी ही नजर में गिरने नही देना चाहता था ,वो अलग बात थी की मैं पहले से ही अपनी नामर्दी के कारण अपनी नजर में गिर चुका था ,
काजल जैसे ही बाहर आयी ठाकुर ने उसे जकड़ लिया और उसके गले को चूमने लगा ,वो हँस रही थी ,और अपने को छुड़ाने की हल्की कोशिस कर रही थी जिसका कोई भी मतलब नही होता ..
उसके बदन में सिर्फ वो टॉवेल थी जो की अब पता नही कब उसके बदन से सरक जाए ,उसका दूध सा गोरा जिस्म उस दूधिया प्रकाश में चमक रहा था ,और शायद ठाकुर को काजल के बदन से वो खुशबू भी आ रही होगी जो की काजल के बदन से नहाने के बाद आया करती है ,उसके बाल फैले हुए थे और टॉवेल के छोरो से उसकी जांघ झांकने लगी थी ,ठाकुर का हाथ उसके जांघो को सहलाता हुआ उसके जांघो के बीच चला गया था और काजल किसी वैश्या की तरह हँस पड़ी थी ,उसके योनि के बाल साफ नजर आ रहे थे जो की छोटे छोटे तराशे गए थे और अभी ठाकुर की उंगलियों में नाच रहे थे ,
कुछ पानी की बूंदे भी योनि के उन बालो में चमक रही थी ,मैं देख रहा की कैसे ठाकुर ने मेरी बीवी के योनि में अपनी एक उंगली घुसा दी और काजल फिर से उचकी उसके मुह से मजे से लिपटी हुई सिसकारी निकली थी …
ठाकुर ,जो की काजल की मा की हत्या का दोषी था ,कैसे काजल उसके साथ भी ऐसे मजे ले सकती थी ,हा अब ये कहते हुए मुझे जरा भी संकोच नही की वो एक रंडी है ,उसने ऐसे ही मजे अजीम और खान के साथ भी लिया होगा..
मेरे लिए इतना ही देखना दिल को तोड़ने के लिए काफी था मैं पलटा और बाहर आने लगा मैंने देखा की हरिया अपना मोबाइल निकाल कर किसी के काल कर रहा है उसकी निगाहे मेरी ओर ही थी ,
वो मुझे देखकर मुस्कुराया था ,
मैं जल्दी से बाहर आने वाला था लेकिन कुछ गार्ड आकर मुझे पकड़ लिए ,
मैं हरिया को आश्चर्य से दिखने लगा उसके होठो की मुस्कान और भी फैल गई थी ..
“आज तो आपको जाने नही दे सकता साहब “
“क्या हुआ हरिया “
“थोड़ी देर में पता चल जाएगा “
तभी बंगले से ठाकुर बाहर आया उसे देखकर मानो मेरा ख़ून ही सुख गया था
उसके चहरे में वही कमीने वाली चमक थी
“तो अपनी बीवी को चुदवाते हुए देखने आया है ,भाग क्यो रहा है पूरा देख ले और हिला ले जैसे उस दिन हिलाया था ,सॉरी आज तेरे लिए तेरी बहन नही है जिसे तू चोद सके “
ठाकुर बोलकर जोरो से हंसा और मैं कांप गया था…
मैंने हरिया की ओर देखा
“साहब बोलो तो अपनी बीवी को भेज दु ,तुम्हारी बहन की जगह उसे चोद लेना “
वँहा खड़े गार्ड के साथ साथ ठाकुर भी हँसने लगा ..
मेरे सामने पूरा मजरा साफ था बस ये पता नही था की इन सबका पता काजल को है की नही …
“तेरी बीवी बहुत कामल की चीज है देव सोचती है की मुझे और खान को तुड़वा देगी ,इतने दिनों की दोस्ती को तुड़वा देगी ,लेकिन उसका प्लान सच में बहुत अच्छा है ,खान की दोस्ती में मुझे ऐसे भी कुछ नही मिला था ,इसलिए मैं उसके साथ हु ,लेकिन उस बेचारी को ये नही पता की मैं उसपर कितनी नजर रखे हुए हु …और उसकी मखमल चुद को चोदने का नशा भी ऐसा है की छूटता नही …”
वो जोरो से हँसा मैं गुस्से से भर कर उसे मारने को हुआ ही था की मेरे सर पर एक जोर की चोट लगी और मैं बेहोश होता गया ……………

मेरी आंख खुली तो मैं एक काल कोठारी की तरह के कमरे में था ,सामने एक बड़ा सा कांच लगा हुआ था जिसके पार वही बेडरूम था जिसे देखने के लिए मैं उस छोटे से झरोखे का इस्तेमाल किया करता था,वो दीवाल नुमा कांच था शायद एक तरफा कांच रहा हो जिससे मैं तो उधर देख पाऊ लेकिन मुझे और इस कमरे को कोई देख नही पाए ,कमरे की छोटी छोटी आवाज भी मेरे कानो में पड़ रही थी लगा की कोई स्पीकर फिट कर दिया गया हो ,मेरे कमरे में बहुत ही अंधेरा था इतना की मुझे मेरा हाथ भी नही दिखाई दे रहा था ,उधर से आने वाला प्रकाश भी छन कर ही आ रहा था जिससे थोड़ी रोशनी समय के साथ मेरे आंखों ने अनुभव की थी ,
मैं जब थोड़ा हिलने को हुआ तब मुझे मालूम हुआ की मेरे हाथ बंधे हुए है और साथ ही मेरा मुह भी मुझे एक कुर्सी में बांध दिया गया था ,मैं इतना बेसहारा था की ठिक से हिल भी नही पा रहा था,
ना जाने मैं कब तक बेहोश रहा था ,जब मैंने आगे देखा तो मुझे बिस्तर में काजल और ठाकुर नंगे लेटे हुए दिखाई दिए थे ,मैं टूट गया और रोने लगा लेकिन यंहा मेरी आवाज सुनने वाला कौन था ,मुह में कपड़ा घुसा दिया गया था मैं ठीक से रो भी तो नही पा रहा था ,
काजल के नंगे जिस्म को ठाकुर जकड़े हुए सो रहा था ,और काजल का हाथ भी ठाकुर के कंधे में थी ,स्वाभाविक है की मेरी बेहोशी में ही उन्होंने हवस का खेल खेल लिया था,
ठाकुर को काजल की मुलायम मखमली चुद पसंद थी …
वो उसके नशे में है …
ये सोचकर ही मुझे काजल और ठाकुर से घृणा आने लगी थी..
ना जाने वो कब तक ऐसे ही सोते रहे ,मेरा जागना और सोना दोनो ही बेमतलब था,
फिर भी मेरे लिए सो जाना ही आराम का एक मात्रा रास्ता बचा था …

मेरी नींद खुली काजल के गुनगुनाने की आवाज काजल मेरे ठीक सामने खड़ी होकर अपने बालो से खेल रही थी,असल में वो उस आदमकद कांच के सामने थी जिसके पीछे मैं था ,उसके चहरे से तो यही लग रहा था की वो इस बात से बेखबर है ,लेकिन मैं उसके नंगे जिस्म को देख पा रहा था ,वो अपने पेट में पड़े हुए उस दांत के निशान को देखती है जिसे शायद आज के हवस के खेल में ठाकुर ने उसे दिया था ,वो अब भी लाल और ताजा था ,वो थोड़ी डर होकर पास ड्रेसिंग से एक क्रीम ले आयी और फिर से उसे मेरे सामने ही लगाने लगी ,
तभी ठाकुर भी आ चुका था ,उसका काला लिंग किसी सांप की तरह उसके जांघो के बीच लटक रहा था और वो आकर काजल को पीछे से पकड़ कर उसकी योनि को सहलाने लगा ,
“रात भर तो इसे रगड़ लिए हो फिर से खेल रहे हो इससे “
काजल ने हल्के से हंसते हुए कहा,
ठाकुर दर्पण से ऐसे देखा जैसे मेरी आंखों में ही देख रहा हो,उसके होठो में एक बहुत ही कमीनी सी मुस्कान थी ,उसने अपनी उंगली उसकी योनि में घुसा दी …
“अरे जानेमन ये तो मख्खन है जितना भी घुसाओ साला फिर से टाइट हो जाता है,इतना नरम और गर्म तो मैंने आजतक किसी का नही देखा “
वो बड़े ही अदा से उसकी योनि को सहला रहा था ,काजल के होठो ने भी सिसकियां छोड़ दी ,उसकी आंखे बंद हो गई थी ,लेकिन ठाकुर मेरे आंखों में देखने लगा और उसके होठो की मुस्कान बहुत ही गहरी थी ..
“पता नही तेरा पति कैसा चुतिया है जो इस मखमली चुद को छोड़कर दुसरो के पीछे पड़ा हुआ है ..”
मैं शर्म से पानी पानी हो रहा था
लेकिन उसकी इस बात से काजल में तुरतं ही फर्क आया
वो उससे अलग हो गई
“कितनी बार कहा की उस चूतिए का नाम लेकर मेरा मूड खराब मत किया करो साले तो अपनी बहन चोदनी है उसे साथ लेकर भाग गया साला नामर्द ,हरिया ने बताया था ना की कैसे मुझे तुम्हारे साथ देखकर साला अपनी बहन के साथ छि ऐसे नामर्द का नाम मेरे सामने फिर कभी मत लेना “
काजल की बात सुनकर मैं बिल्कुल ही स्तब्ध रह गया ,शायद मेरे किसी पुराने कर्मो की ही सजा था ,या शायद उस बेवफा से इतना प्यार करने की सजा …
काजल मेरे बारे में ऐसा सोचती है ये सोच कर ही मैं टूट गया ,रही सही थोड़ी हिम्मत भी टूट ही गई ,अब बस यंहा पड़े हुए मुझे मौत का ही इंतजार था ना जाने वो किस रूप में आएगी …
ठाकुर ने उसका मूड ठीक करने के लिए उसे पुचकारने लगा और फिर मेरे ही सामने फिर से वो दो जिस्म मिल गए ,लेकिन इस बार ठाकुर ने काजल को उसी कांच में टिकाया था ,काजल का हाथ उस कांच को थामे हुए था और ठाकुर उसे पीछे से ही भरे जा रहा था ….
ठाकुर की आंखे मुझपर ही टिकी थी और काजल की आहो से पूरा कमरा गूंज रहा था ,लेकिन मुझे ना ही उनके इस कृत्य में कोई मजा आ रहा था ना ही मैं उसे दिखना चाहता था,मैं तो बस भगवान से अब अपनी मौत की ही दुवा कर रहा था …

***************
ठाकुर और काजल का खेल खत्म हो चुका था और दोनो एक साथ ही बाथरूम में घुस चुके थे ,…
ठाकुर जाने को तैयार हो चुका था ,मैंने कमरे की दीवार में लगी हुई घड़ी देखी,8 बज चुका था अभी तक किसी ने मेरी कोई सुध भी नही ली थी ,काजल अब भी एक नाइटी में ही थी ,ठाकुरर जाने लगा तभी काजल ने उसे रोका और अपने पर्स से एक पुड़िया निकाली
“अजीम को दे देना “
“कितना ख्याल रखती हो तुम उसका ,साले को मर जाने दो नशे के बिना “
काजल खिलखिला पड़ी
“इतना जल्दी मर जाएगा तो जायजाद हमारे नाम कैसे होगा “
काजल की कमीनी मुस्कान के साथ ही ठाकुर भी मुस्कुरा उठा और वो पुड़िया अपने जेब में डाल ली,दोनो एक दूसरे के होठो को किसी प्रेमी की तरह चूसते रहे और वो निकल गया …
उसके जाने के बाद काजल उस कांच तक आयी और अपने को निहारने लगी ,उसने अपनी नाइटी निकाल फेंकी थी और अपने जिस्म को ध्यान से देखने लगी फिर उसने अपनी ही आंखों को देखा ,उसके होठो में एक मुस्कान थी ……..
भयानक डरा देने वाली मुस्कान ………

काजल की आंखे भयावह थी ,लाल आंखे जैसे शैतान हँस रहा हो ,लेकिन फिर कुछ बूंदे पानी की भी उनमे आ गई थी ,
मैं स्तब्ध सा उसे देख रहा था ,उसके चहरे में मुस्कान खिल गई थी लेकिन ये मुस्कान भी बहुत ही डरावनी थी लगा जैसे किसी शैतान का कोई शैतानी मकसद पूरा हो गया हो …
वो जाकर अपने कपड़े पहन रही थी की दरवाजे में दस्तक हुई,जब दरवाजा खोला गया तो सामने अंजू (हरिया की बीवी) थी …
अंजू पसीने से सनी हुई थी ,उसकी सांसे उखड़ी हुई थी ,चहरा पिला था जैसे बहुत डरी हुई हो और हाथ में चाय की प्याली थी..
काजल उसकी हालत देखते ही समझ चुकी थी की डाल में कुछ काला है ..
“क्या बात है अंजू”
उसने बहुत धीरे से कहा था लेकिन मुझे उसकी आवाज सुनाई दी ,
“मेडम वो ..वो “
वो इधर उधर देखने लगी
“अंदर आओ “
उसके अंदर आते ही काजल ने दरवाजा बंद कर लिया..
अंदर आते ही अंजू ने तुरत ही चाय की ट्रे रखी और बोल पड़ी
“मेडम देव साहब कल आये थे,मैंने देखा था ..ठाकुर और हरिया उसे बांध के इस कमरे में बंद कर दिए थे ..”
उसने कांच की तरफ इशारा किया ,काजल अजीब सी निगाहों से कांच की ओर देखने लगी
“पहले क्यो नही बताया “
काजल चीखी
“वो हरिया…”
अंजू कुछ बोल पाती इससे पहले ही काजल कमरे से बाहर जा चुकी थी ,
थोड़ी ही देर में मेरे कमरे का दरवाजा खुला और काजल और अंजू ने मिलकर मुझे खोल दिया ..
रात के मार और मानसिक शारीरिक मानसिक पीड़ा से मैं टूट चुका था ,और बहुत ही थक चुका था,जैसे ही मैं खड़ा हो पाया था मेरे गालो से एक जोर का हाथ पड़ा …
“क्या जरूरत थी तुम्हे यंहा आने की ,हमारे बीच अब बचा ही क्या है जो तुम यंहा आये थे ..”
काजल की चीख से मैं बुरी तरह से झेंपा
“ये क्या कर रही है मेडम साहब को पता चला तो “
हरिया की आवाज आयी ,अबतक सभी कमरे से बाहर आ चुके थे ,
हरिया अंजू को लाल लाल आंखों से देख रहा था
“मैं उसे सम्हाल लुंगी इसे जाने दो “
“मैं इसे नही जाने दे सकता “इस बार हरिया की आवाज में दृढ़ता थी
“जाने दीजिये ना “अंजू ने थोड़ा सहमे आवाज में कहा
“चुप कर रांड साली तुझे तो मैं बाद में देखता हु “
हरिया चिल्लाया और अंजू बिल्कुल ही सहम सी गई ..
लेकिन काजल की आंखों में जैसे आग उतर आया था…
“जब मैंने कह दिया की ये जा रहा है तो तेरे बात समझ में नही आती “
“चुप कर साली ,”
हरिया भी तमतमाया
“दो कौड़ी की रांड मुझे सिखाएगी,जब तक ठाकुर साहब नही कह देते ये कही नही जाएगा “
काजल की आंखों में खून उतर आया था और उसने हरिया को मारने के लिए अपना हाथ उठाया लेकिन हरिया मजबूत आदमी था ,उसने उसका हाथ पकड़ लिया साथ ही उसे एक ओर धक्का देकर मुझे फिर से कमरे के अंदर ले जाने लगा ,
काजल ने पास से एक कुल्हाड़ी उठायी और ……
“नही …..”अंजू की चीख फिजा में गूंज गई ,काजल का चहरा खून से सना हुआ था ,और हरिया के सर के कई टुकड़े बिखर गए थे ,खून से जमीन लाल हो चुकी थी…
काजल ने कुल्हाड़ी एक ओर फेक दी …और अंजू की ओर देखा जो अभी बिल्कुल किसी मूर्ति सी जमी खड़ी थी …
मैं भी कुछ सोचने समझने की हालत में नही था …
“तू क्यो रो रही है ,यही तो है जो तुझे खान और ठाकुर के सामने नंगी करके नचवाता था,तेरी जैसी गांव की भोली भाली लड़की को साले ने रांड बना दिया,उसके लिए आंसू बहा रही है ……
काजल ने फिर से वो कुल्हाड़ी उठा ली
“ये ले जा अपने उस ससुर की भी लीला आज खत्म कर दे जो ये सब होंते हुए देखने के बाद भी चुप रहा ,और इन सबमे साथ देता रहा,और अपने कपड़े बांध ले ,बच्चों को स्कूल से ही उठा लेंगे …ये काम तो पहले ही कर देना था,थोड़ी देर हो गई …”
अंजू थोड़ा सम्हल गई थी और कुल्हाड़ी को अपने हाथो में पकड़ लिया ..लेकिन उसके होठ कुछ कहने को फड़फड़ा रहे थे…
“ठाकुर साहब …”
काजल के खून से सजे चहरे पर वो मुस्कान शैतान का भी दिल दहला देती ..
“उसका इंतजाम मैंने कर दिया है ,आज खान और ठाकुर खून के आंसू रोयेंगे ,”

***********************
थोड़ी ही देर में हम फॉर्महाउस से बाहर थे,मुझे मेरी कार तक छोड़कर काजल अंजू को लेकर चली गई थी ,मेरे दिमाग में बार बार काजल के वो शब्द गूंज रहे थे ……

‘क्या जरूरत थी तुम्हे यंहा आने की ,हमारे बीच अब बचा ही क्या है जो तुम यंहा आये थे ..’

‘उसका इंतजाम मैंने कर दिया है ,आज खान और ठाकुर खून के आंसू रोयेंगे’

हमारे बीच में अब बचा ही क्या है ?????????
ये सवाल मुझे खाये जा रहा था ……

आज खान और ठाकुर खून के आंसू रोयेंगे…..ऐसा क्या कर दिया था काजल ने ???

जिस्म की कमजोरी से बड़ी मन की कमजोरी होती है,मैं मन से थक गया था,जैसे ही मैं अपने होटल में पहुचा जो की आजकल मेरा ठिकाना था,शबनम ने मुझे रोक लिया,
“रात भर कहा थे और ये सब क्या है “
उसने मेरे कपड़े में लगे खून के धब्बो को देखकर कहा ..
अब मैं उसे क्या बतलाता की मैं आखिर कहा था,
“जानते हो क्या हुआ है ,??”
उसने फिर से सवाल किया,साला अब क्या हो गया है ???
मैंने ना में सर हिलाया
“अजीम को ठाकुर ने कुछ ऐसा खिला दिया जिससे उसकी तबियत बहुत ही ज्यादा खराब हो गई है ,सारे tv चैनल में ये सबसे बड़ी न्यूज़ बनी हुई है और तुम सबसे अनजान हो “
मैं चौक गया ,क्या वही पुड़िया थी जिसे आज काजल ने ठाकुर को दिया था ..
शबनम मेरा हाथ पकड़ कर खिंचते हुए मुझे केबिन में ले गई और tv ऑन कर दिया …
समाचार देखते देखते मेरी आंखे बड़ी हो गई
‘खान ग्रुप के मालिक मिस्टर खान के बेटे अजीम जो की ड्रग्स और कत्ल के जुर्म में कुछ दिनों से जेल में है को जेल इंचार्ज इंस्पेक्टर ठाकुर द्वारा जेल के अंदर ही ड्रग्स की सप्लाई की जाती थी और आज जहरीला ड्रग्स देकर मारने की कोशिस किया गया ,इससे शासन सकते में आ गया है ,जेल के अंदर इस तरह के भयानक गतिविधियों से पोलिस और जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है ,जेल के सीसीटीवी फुटेज में भी कई गड़बड़ियां पाई गई है ,कई घंटो का फुटेज गायब बताया जा रहा है ,कहा जा रहा है की अवैध तरीके से इंस्पेकटर ठाकुर अजीम को उसके पिता से मिलवाता था ,सारी घटना के बारे में हमने जेल IG से जानने की कोशिस की लेकिन कोई भी जिम्मेदार कुछ भी नही कह रहा है ,हालिया ख़बरो के अनुसार इंस्पेक्टर ठाकुर फरार है ,वही अजीम खान की तबियत गंभीर बताई जा रही है ,उन्हें ** अस्पताल में रखा गया है ….
क्या हमारे देश में भ्रस्टाचार का ऐसा नंगा चलता रहेगा ‘
मैंने tv बंद कर दिया …
“तो काजल ने अपनी चाल चल ही दी “
शबनम ने मुझे देखते हुए कहा ,मैंने हा में सर हिलाया
“लेकिन अब तो उसकी जान को ठाकुर और खान दोनो से ही खतरा होगा आखिर कहा है वो “
“मुझे नही पता “
मैंने सपाट सा जवाब दिया
वो फोन निकाल कर एक काल करती है
“हम्म ओके “
वो एक गहरी सांस लेती है
“वो अभी हॉस्पिटल में ही है ,अजीम के पास ,खान को भरोसा दिलाने की ठाकुर ही उसे मारने का षड्यंत्र कर रहा था ,ठाकुर का कोई पता नही है अभी भी …”
तभी फिर से उसका फोन घनघना उठा
“हैल्लो क्या ??”
उसके चहरे का रंग ही उड़ गया था
“क्या हुआ “
“पता नही ये क्या हो रहा है ,ठाकुर ने खान के फॉर्महाउस में जाकर वँहा के गार्ड और उसके बेटे को कुल्हाड़ी से मार डाला ,उसकी बीवी ही जान बचा कर भाग पाई है …”
वो उलझन में दिख रही थी लेकिन मुझे पता था की ये सब काजल का ही किया धरा है ..अब पुलिस और खान दोनो ही ठाकुर को ढूंढने में लगे हुए थे…
“क्या बोलते हो हॉस्पिटल चले “
शबनम की बात से मैं थोड़ा चौक गया
“क्यो ??”
“देखते है ना की आखिर अजीम को उसके पापों की क्या सजा मिली है ,और मुझे खान को रोता हुआ देखकर बहुत ही सुकून होगा “उसके होठो में एक मुस्कान आ गई ……

**************
हम दोनो ही ICU के बाहर खड़े थे ,खान साहब की आंखे र्रो रो कर सूज गई थी ,चहरा मरा हुआ मालूम हो रहा था ,उन्होंने हमे देखा तक नही चारो तरफ पुलिस वाले ही दिख रहे थे ,हमे अंदर जाने की इजाजत नही दी गई, लेकिन कुछ देर बाद काजल आ गई वो भी अंदर जाना चाहती थी , उसने पुलिस से बात करके हमे परमिशन दिलवा दिया ,काजल मेरी ओर देख भी नही रही थी ना ही मैं काजल को देख रहा था ऐसा लग रहा था जैसे हम नितांत अजनबी हो …
हम तीनो ही अंदर गए क्योकि खान की इतनी हिम्मत ही नही थी की वो उसे देख सके…
अजीम की हालत बहुत ही खराब थी ,लग रहा था जैसे उसका पूरा जिस्म ही गल गया हो,केवल आंखे ही सलामत दिख रही थी ,काजल को देख कर उसके आंखों में आंसू आ गए ,और काजल के होठो में मुस्कान ,उसके नाक में ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था और चारो तरफ ही बहुत से मशीन ,उसे बस जिंदा रखा गया था ,
डॉ ने हमे देखते ही कहा
“पता नही ये कौन सा ड्रग्स इसे खिलाया गया है और इतनी मात्रा में इसने इसे ले कैसे लिया ,जरूर ये ठाकुर पर बहुत ही भरोसा करता था ,”
“सच बतलाइए डॉ इसके बचने का कितना चांस है “
काजल ने डॉ की ओर देखा
“सच कहु हो एक दो दिनों तक मशीनों के भरोसे जिंदा रखा जा सकता लेकिन उससे ज्यादा …, खान साहब से ये बात ना कहे तो ही बेहतर होगा,और कोई अगर इनसे मिलना चाहे कोई करीबी हो तो प्लीज् उन्हें मिलवा दीजिये ,हम 1-2 दिन से ज्यादा इन्हें नही बचा पाएंगे ..”
डॉ के सामने तो काजल ने अफसोस जाहिर किया लेकिन उसके जाते ही उसके होठो में मुसकान गहरी हो गई वो अजीम के पास पहुची ..
“डॉ को नही पता की ये कौन सी ड्रग्स है ,ये वही ड्रग्स है जो तुमने बनवाई थी ,उन लड़कियों को अपने रास्ते से हटवाने के लिए जो तुम्हारे गले पड़ जाती थी …बहुत पाप किया है तुमने अब दो दिनों तक उसकी सजा भुगत लो ,मैं तुम्हे आसानी से मरना नही चाहती थी ,मैं यही चाहती थी की तुम अफसोस कर कर के मरो …”
इतना कहकर वो सीधे ही कमरे से बाहर निकल गई और अजीम के आंखों से एक पानी की बून्द नीचे गिर गई ….

मैं अभी नींद में ही था की पूर्वी ने मुझे झकझोर दिया ,
“भइया जल्दी से उठो शबनम बुला रही है “
“क्या हुआ अब उसे “
“रश्मि ने सिलेंडर कर दिया है “
मैं चौक कर उठ गया
“क्या “
मैं जल्दी के तैयार होकर नीचे आया तो शबनम मेरा इंतजार कर रही थी ,
“रश्मि ने अभी एक घंटे पहले ही सिलेंडर कर दिया है ,और वो हमसे मिलना चाहती है ,अपने वकील को भी बुलाया है ,अभी थाने में ही है “
बिना कुछ कहे ही हम दोनो उस ओर चल पड़े

*************
“फिक्र की कोई भी जरूरत नही है पुलिस अपना चार्जसीट जमा कर देगी और उनके पास आपके खिलाफ कोई ऐसा सबूत नही है की आपको दोषी माना जाय ,आप गोवा में जिस होटल में ठहरी थी उसका बिल जमा कर देंगे और कह देंगे की आपको अपने पिता की मौत का पता ही नही था क्योकि आप उसके दो दिन पहले ही गोवा के लिए निकल गई थी ,और कोई डिस्टर्ब ना करे इसलिए किसी को बतलाया नही था,और मोबाइल बंद कर दिया था ताकि काम का टेंसन ना हो और आप सकून से छुटिया माना सके ,आप अक्सर ऐसा करती है इसलिए किसी को भी शक नही हुआ की आप कहा है ,जब आप वापस आयी तो पता चला की पिता की हल्या हो गई है और आपको ही इसका दोषी माना जा रहा है ,तो अपने सिलेंडर कर दिया …और इन्हें भी मैं सबकुछ समझा दूंगा ….बाकी कुछ भी हो जाए आप अपने बयान पर अडिग रहिएगा …”
रश्मि ने वकील की बात पर हा में सर हिलाया,साथ ही वकील ने भी हमे कुछ बाते समझा दी और चला गया …
अब कमरे में मैं रश्मि और शबनम ही बचे थे ,रश्मि मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी ….
“निशा कहा है “
मैंने पहला प्रश्न किया
“तुम्हे बहुत याद करती है ,तुमसे बहुत प्यार जो करती है “
रश्मि ने उसी मुस्कान के साथ जवाब दिया
मैं चुप था
“लेकिन वो काजल से अब भी बहुत नाराज है क्योकि उसे लगता है की उसने अपने बदले की खातिर तुम्हारी जिंदगी को ही बर्बाद कर दिया है …”
“सही तो लगता है उसे ,मैं दोनो को ही बहुत प्यार करता हु और ये भी जानता हु की वो दोनो भी मुझे बहुत प्यार करते है लेकिन ….वक्त को शायद कुछ और ही मंजूर है जो हम साथ नही रह पा रहे है ,मेरी बहन को मुझसे ही मिलने में शर्म महसूस हो रही है और मेरी बीवी …………पता नही काजल के दिल में मेरे लिए क्या है ,अब तो मैं समझना भी नही चाहता ..”
रश्मि के चहरे पर गंभीरता थी ..
“पहले मैं भी काजल से नाराज थी लेकिन जब से मैं निशा से मिली मुझे अपने पर ही गुस्सा आया ,मेरे पिता ने मेरी जिंदगी बर्बाद की ,पहले मेरी मा को मार दिया सिर्फ दौलत की खातिर फिर मुझे अपने दोस्त के बेटे के चंगुल में फेक दिया वो भी दौलत की खातिर …अब मुझे किसी से कोई बदला नही लेना अब जाके मुझे सुकून मिला है ,अब शायद मैं अच्छे से बिना किसी गम के जीवन बिता पाऊंगी …मन का बोझ क्या होता है बदले की आग क्या होती है ये तुम शायद नही समझोगे देव ,तुम सीधे साधे आदमी हो और शायद तुम्हे यही लगता होगा की काजल ने तुम्हारा यूज़ किया है जैसा की निशा को लगता है ,हा ये बात सही ही है लेकिन मैं ये भी जानती हु की बदले की बोझ में वो भी दबी जा रही है जितना जल्दी ये बोझ खत्म हो वो अपनी जीवन को आराम से जी पाएगी ,ये बात अलग है की इस बदले की कीमत उसने बहुत ज्यादा दी है ..
लेकिन कीमत तो चुकानी ही पड़ती है मैंने भी चुकाई है ,निशा ने भी चुकाई है और काजल भी चुका रही है …”
थोड़ी देर तक कमरे में शांति ही रही
“तुमने इतनी जल्दी सिलेंडर क्यो कर दिया ,पहले से बतलाया होता तो हम जमानत की कागज बनवा कर रखते “
शबनम ने कहा ,जिससे रश्मि के होठो में मुस्कान बिखर गई
“मुझे अजीम का पता चला ,और मैं उससे मिलना चाहती हु ,माना की वो कितना भी बड़ा गुनहगार हो लेकिन मैं एक औरत हु और और वो मेरा पहला प्यार था ,मेरा पति था…उसके अंत समय में मुझे उसके साथ होना चाहिए ,ऐसे जमानत मुझे आज शाम तक मिल जाएगी ,क्योकि कोई सुबूत मेरे खिलाफ है भी नही ,और मुझे अभी पुलिस कस्टडी में अजीम से मिलने की भी इजाजत मिल गई है “
रश्मि के होठो में के फीकी मुस्कान आ गई ,मैं उसके मनोदशा को देखकर सोच में पड़ गया था की आखिर एक औरत सचमे प्यार की देवी होती है ,जो अपने उस पति का भी साथ नही छोड़ना चाहती जिसने कभी उससे प्यार नही किया है ,लेकिन काजल ….???
वो मेरा साथ छोड़ कर चली गई जबकि मैंने तो उसे दिलो जान से चाहा था …
रश्मि ने जैसे मेरे दिल का हाल जान लिया था
“देव वो ही तुमसे बहुत प्यार करती है ,लेकिन अभी उसके सामने प्यार का इन्तहां देने की नौबत नही आयी है,मुझे यकीन है की जब समय पड़ेगा तो वो तुम्हारे नजरो में खरी उतरेगी …”
पता नही रश्मि की बात कितनी सच्ची थी और कितनी झूठी लेकिन ये जरूर सच था की अभी तक मैं ही प्यार का इन्तहां दे रहा हु …उसके हर गलतियों के बावजूद उससे प्यार कर रहा हु ………….
*********************
अपने होटल में मैं और शबनम साथ साथ बैठे थे ,कोई कुछ भी नही कह पा रहा था …
“क्या तुम्हे नही लगता की हम भी गुनहगार है “
मैंने धीरे से कहा
“क्यो “
शबनम ने मुझे आश्चर्य से देखा
“क्योकी हमारे कारण भी तो कई लडकि इस धंधे में आयी है हमने भी तो कई लड़कियों को रंडी बना दिया है ,हमारे होटल में भी तो ये सब चलता है ,तो हममें और अजीम में फर्क ही क्या है “
शबनम मेरी बात को गौर से सुन रही थी और उसका चहरा थोड़ा गंभीर हो गया था ,उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खिंचते हुए ले गई ,वो होटल का पीछे वाला हिस्सा था जंहा कुछ सर्विस क्वाटर बने हुए थे ,उसने उनमे से एक में दस्तक दी और दरवाजा खुला ,दो लडकिया बैठी हुई थी,एक कुछ 20 साल की लग रही थी वही दूसरी 25-30 की ..
“आज से तुम दोनो को ये काम करने की कोई जरूरत नही है तुम दूसरा काम कर सकती हो या चाहो तो जा सकती हो “
दोनो लड़कियों का चहरा जैसे पिला पड़ गया और वो दौड़ती हुई शबनम के कदमो में आकर गिर गई ..
दोनो ही रोने लगी थी,20 साल की लड़की गिड़गिड़ाने लगी
“दीदी हमसे कोई गलती हो गई है क्या ये आप क्या कह रही है हम कहा जाएंगे ,मेरी माँ का क्या होगा दीद वो बिना इलाज के मर जाएगी दीदी प्लीज् हमे यही रहने दो ….”
दूसरी भी फफक पड़ी थी
“दीदी मेरी बेटी को मैं पढ़ना चाहती हु गांव में मजदूरी करती थी ,वँहा का ठेकेदार ही मुझपर नजर लगाए रखता था ,आज अपनी बेटी को अच्छे स्कूल में पढा पा रही हु ,पति तो दारू के पीछे ही दीवाना है ,मुझे निकाल दोगी तो वो मेरी बेटी को ही धंधे में बैठा देगा दीदी गलती हुई हो तो हमे मार लीजिए लेकिन यंहा से मत निकालिए “
मैं उन दोनो को बस देखता ही रह गया था ,जिस्म का धंधा करने वाली ये औरते किन मुस्किलो से गुजर रही थी इस बात को जानने की कभी मैंने कोशिस ही नही की थी ,
हम तो बस जिस्म का व्यापार करने वाली औरतों को रंडी बोल कर निकल जाते है लेकिन सोचा ही नही की ये रंडी क्यो बनी …
शबनम मेरी ओर देखने लगी
“देव मुझे बस एक चीज बताओ की इन्हें रंडी किसने बनाया है ,हम लोगो ने या उस ठेकेदार ने जो इसके जिस्म को हवस की नजर से देखता था ,या उस पति ने जो दारू के लिए अपनी बीवी और बेटी का भी सौदा कर सकता है ,या फिर उस स्कूल में जो इतना फीस लेते है की अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा के लिए इसे अपना जिस्म बेचना पड़ रहा है …और देव इसे किसने रंडी बनाया है हमने या उस सरकारी हॉस्पिटल ने जंहा इसकी माँ का अच्छे से इलाज नही हो पाया और उसे प्राइवेट हॉस्पिटल में दाखिला करवाना पड़ा ,और क्या उसे उस प्राइवेट हॉस्पिटल ने रंडी नही बनाया जंहा की फीस भरने के लिए ये अपने जिस्म का सौदा करने को बाध्य हो गई है ….
देव तुमने पूछा था ना की हममें और अजीम में क्या फर्क है ,फर्क बस इतना है की हम किसी को जिस्म बेचने पर मजबूर नही करते लेकिन अजीम लड़कियों को मजबूर और ब्लैकमेल करके उनसे ये धंधा करवाता था…
हा ये धंधा तो एक ही है लेकिन इसे चलाने वाले अलग अलग लोग है एक में लड़कियां अपनी मर्जी से आती है और जाती है ,लेकिन जैसा धंधा अजीम करता है वँहा लड़कियां ना तो मर्जी से आती है ना ही जा सकती है ,बस यही अंतर है ….”
मैं बस उन दोनो लड़कियों को देखता तो कभी शबनम को आज शबनम के लिए मेरा प्यार और बढ़ गया था और साथ ही इस धंधे को लेकर मेरी ग्लानि भी मिट गई थी …………….

शबनम मेरी तपती हुई जिंदगी में एक पेड़ की छाया की तरह आयी थी ,मैं से अपने बांहो में लिए लेटा हुआ था ,उसके प्यार भरे दिल ने मुझे जो सुकून दिया था मानो जीवन उठापटक में एक गहरा चैन था ..
उसके पास होने से ही मुझे अजीब सी शांति मिलती थी ,हम दोनो ही अभी अभी प्यार के दरिया में नहा कर निकले थे ,वो अब भी सोई हुई थी और बहुत प्यारी लग रही थी ,मैं उसके चहरे को ही देखे जा रहा था …
उसके मोबाइल में एक मेसेज आया ,
स्क्रीन लॉक था लेकिन वाट्सअप का नोटिफिकेशन दिखा रहा था ,कुछ लाइने साफ दिख रही थी …
मेसेज काजल का था और बस इतना ही दिखा की ..
‘आजा तेरा भी तो दोषी है …”
मैं कुछ समझ नही पाया शायद और भी मेसेज किये होंगे जिसमे एक को मैं पड़ पा रहा था …
शबनम उठाने के बाद मेसेज को देखी और उसके चहरे का रंग बदल गया
“क्या हुआ???”
मैंने सवाल किया
“कुछ नही ..”
उसने चहरे के भाव को छुपाते हुए अपने चहरे में मुस्कान लायी …
स्वाभाविक सी बात थी की वो मुझसे कुछ छुपा रही थी मैंने भी उसे जोर नही दिया ,वो थोड़ी देर में ही तैयार होकर निकल पड़ी लेकिन साला मुझे तो पीछा करने की आदत पड़ी हुई थी ,तो मैं पीछे लग गया …
वो एक गोदाम में पहुची जो की सालो से बंद थी जरूर कुछ कांड होने वाला था ,
मैं लुक छुप कर देखना चाहता था जैसे मेरी आदत बन रही थी ,…
मैं चुप चाप कोई खिड़की देखने लगा ताकि अंदर देख सकू एक छोटा सा दरवाजा मुझे दिख गया जो की पीछे की ओर खुलता था ,मैं हल्के से अंदर आया तो वँहा कबाड़ का ढेर पाया ,अंदर कुछ आवाजे आ रही थी मैं उन बड़े बड़े कबाड़ बन चुके मशीनों में छुपता हुआ आगे बढ़ रहा था …
“बैठ इसमें “
काजल की तेज आवाज ने मेरा ध्यान खिंचा ,मैं उस ओर बढ़ गया..
“ये तुम मेरे और मेरे बेटे के साथ क्यो कर रही हो काजल ..”
खान की दर्द भरी आवाज मेरे कानो के पड़ी सामने देखा तो दंग ही रह गया क्योकि सामने काजल और शबनम दोनो ही खड़े हुए थे और साथ ही खान बहुत ही गंभीर अवस्था में खड़ा हुआ था ,उसे जिस कुर्सी पर काजल बैठने को कह रही थी उसमे ना मालूम कितनी सुइयां लगी हुई थी ,खान उसे देखकर ही कांप रहा था लेकिन काजल के हाथो में पिस्तौल था ,
“बैठ जा मादरचोद “
इसबार शबनम ने कहा
“तुम लोग ये क्यो कर रहे हो ,मेरे बेटे के जाने के बाद ऐसे भी मेरा जीना व्यर्थ हो चुका है,तुम सारी दौलत ले लो लेकिन मुझे अब मेरी बाकी की जिंदगी शांति से बिताने दो “
काजल जोरो से हँस पड़ी लेकिन साथ ही उसके लाल लाल आंखों में आंसू भी छलक उठा था …
“शांति के साथ …वाह …तुम्हारे कारण हमारे जीवन की शांति चली गई और तुम अपनी जिंदगी शांति से बिताने की बात कर रहे हो …”
“आखिर हो कौन तुम .और क्या चाहते हो .”
खान झल्ला गया था
“वो भी पता चल जाएगा “
उसने खान को जोर का धक्का दिया और वो कुर्सी में जा बैठा ,उसके मुह से दिल दहला देने वाली चीख निकली क्योकि सारे सुइयां अब उसके पिछवाड़े में जा गड़े थे,फर्श पर खून फुट पड़ा और तुरंत ही शबनम ने रश्सी उठाकर उसे बांध दिया था ,खान मानो दर्द से मर ही जाने वाला था,
“तू जानना चाहता है ना की हम कौन है तो सुन …..”
काजल कहती चली गई और खान की आंखे बड़ी होती गई …
“तुम मुझे मार ही क्यो नही डालती “
खान रोया
“ऐसे नही तेरे दोस्त को तो बहुत आराम की मौत नसीब हो गई वो तो मेरे हाथो से बच गया लेकिन अब तुझे ही उसका कोटा भी पूरा करना होगा …”
काजल ने एक इंगजेक्शन अपने पर्स से निकाला और खान को दे दिया
“तेरा शरीर 3 दिनों में अब धीरे धीरे गलेगा ,शबनम इसे उठा कर हॉस्पिटल में डाल दो ,जंहा इसका बेटा पड़ा हुआ है ,और हा याद रखना एक घंटे से पहले मत ले जाना..”
दोनो मिलकर उसे गाड़ी में डालने लगे
“रुको ,मेरी पूरी दौलत ले लो लेकिन मुझे छोड़ दो ..”
“तेरे पास है ही क्या …तेरी पूरी दौलत अब मेरे और शबनम के नाम हो चुकी है ,और जो तेरे नाम पर है भी वो बिजनेस ही पूरी तरह से डूब चुका है ,कर्ज में वो भी बिक ही जाएगा “
उसे डालने के बाद शबनम चली गई और काजल बस अकेले ही एक कोने में बैठ गई ,उसका चहरा बस शांत था कोई भी भाव उसमे दिखाई नही दे रहे थे ,इसी दिन के लिए उसने इतनी मेहनत की थी और ये इतनी जल्दी और इतने आराम से खत्म हो जाएगा उसने सोचा भी नही होगा …

************

काजल शांत बैठी रही और मैं उसे देखता रहा ,जाने वो कौन दी दुनिया में थी और ना जाने मैं किस दुनिया में था…
मैं उसे अकेला छोड़कर जाने को मुड़ा ही था की मेरे पैरो से एक कुछ टकरा गया ,उस शांत वातावरण में वो आवज तेज हो गई थी ,
“कौन है ..”
काजल जैसे अपने विचारों के भवर से जगी होगी और तेजी से एक्टिव हो गई …
मैं भागने की कोशिस करता उससे पहले ही वो मेरे ऊपर पिस्तौल तान चुकी थी ,
“खबरदार जो एक भी कदम भी बढ़ाया तो ..”
मैं वही रुक गया ..और पीछे पलटा
मुझे देखते ही काजल ने अपने हाथ नीचे किया
“तुम यंहा पर ..”
“हम्म “
“चलो जो होना था हो चुका है ,अब जाओ यंहा से …”
काजल पीछे पटल गई थी
“काजल ,हम दोनो इसतरह दूर क्यो रह रहे है ,क्या तुम्हे पता नही की मैं तुम्हे कितना प्यार करता हु “
“जानती हु इसीलिए दूर हु ,कही तुम्हारा प्यार मेरी कमजोरी ना बन जाए…”
इतना ही बोलकर वो तेजी से वँहा से निकल गई थी …

**************
मैं होटल आया तो पूर्वी बहुत ही खुस दिख रही थी ,
“भइया जानते हो कौन आया है “
“कौन ..??”
“निशा दीदी “
वो उछली मैं भी उछल पड़ा…
मैं पूर्वी के साथ अपने कमरे में गया ,वँहा निशा डॉ चुतिया के साथ बैठी हुई थी ,और मुझे देखते ही मुझसे आकर लिपट गई …
हम दोनो ही रोने लगे थे
“कहा चली गई थी तू ,क्या तुझे मुझपर थोड़ा भी भरोसा नही था “
“जानती थी भइया की आप मुझे माफ कर दोगे लेकिन मैं डर गई थी “
मैं डॉ की ओर देखने लगा
“थैंक्स डॉ साहब इसे वापस लाने के लिए “
डॉ ने बस हा में अपना सर हिलाया
“मुझे शबनम ने बतलाया की ये गोवा में है और इसका एड्रेश दिया ,और मैं इसे समझने पहुच गया ,(ऐसे भी मेरा काम ही क्या रह गया है इस स्टोरी में )”
मैं हल्के से मुस्कुरा गया …
“काजल से भी मिलना था उसके अंतिम शिकार के लिए “
डॉ ने आराम से कहा …….

************
डॉ ने काजल और निशा की मीटिंग फिक्स की थी साथ मैं और पूर्वी थी थे ,साथ ही शबनम और डॉ भी थे लेकिन वो दोनो थोड़ी देर बाद ही चले गए ताकि हम आरम से बात कर सके …
“मैं आपसे माफी मांगना चाहती हु भाभी “
निशा का बदला हुआ रूप देखकर सभी दंग थे …
“मुझे तुमसे कोई भी गीला नही है निशा “
काजल ने भी आराम से कहा
“तो फिर हम फिर से पहले जैसे रह सकते है ,मतलब मैं आप पूर्वी और भइया एक साथ “
अचानक ही मैंने अपने बहन में एक बचपना देखा ..
“नही निशा अभी और कुछ काम करना बाकी है “
“क्या फिर से चुदवाने जाओगी क्या किसी से “
निशा फिर से अचानक ही भड़क उठी ,उसके ऐसा कहने से सभी सकते में आ गए थे
“निशा ये क्या बोल रही हो तुम “
मैंने निशा को धमकाने के अंदाज में कहा
“क्या गलत कहा है भइया इसके बदले के चक्कर में हमारा पूरा परिवार बिखर गया ,आप को इतनी तकलीफ हुई ,पूर्वी का ….भइया इसे तो मैं जान से मार देती लेकिन क्या करू आप इससे इतना प्यार जो करते हो “
क्या गलत कहा था मेरी बहन ने ,उसकी आंखों में आंसू की बूंदे आ गई थी वही काजल भी फफक पड़ी थी ,और जाने लगी लेकिन पूर्वी ने उसे रोक लिया …
“निशा माफी मांग भाभी से ,ये क्या बतमीजी है ,जो हुआ वो हो चुका है “
पूर्वी की बात ने मानो आग में घी का काम कर दिया
“हा तू तो इस रांड का साथ देगी ही ना ,तुझे ही जो चुदने मिल रहा है मेरे भइया से ,याद रखना तुम दोनो ये मेरे है और जब तक तुम दोनो जिंदा रहोगी तब तक इन्हें खुसी नही मिलने वाली ,तुम दोनो को तो मैं मार कर ही रहूंगी “
मेरे लिए अब सहना मुश्किल था ,मैंने निशा को घुमाया और एक जोर का झापड़ उसके गाल में लगा दिया ..
जैसे एक तूफान शांत हो गया हो ……
निशा के चहरे में एक मुस्कान आ गई
“भइया आप भी इसका ही साथ दोगे,लेकिन इसके कारण ही आपकी जिंदगी बर्बाद हुई है और मैं इसे छोडूंगी नही …”
“वो पुरानी बाते है निशा बहन तुम “
“नही भइया आप इसे माफ कर सकते हो मैं नही “
निशा ने घूरकर फिर के उन दोनो को देखा और वँहा से निकल गई ,मैं उसके पीछे भागा लेकिन वो कार से दूर जा चुकी थी और नजरो से गायब ही हो गई …….

मैं नर्वस सा बैठा था की मुझे निशा का काल आया ,
“भैया मैं आपसे मिलना चाहती हु “
“कहा है तू “मैं उठकर खड़ा हो चुका था..
उसने पता बताया साथ ही हिदायत दी की मैं किसी को भी कुछ ना कहु और अकेले ही आऊ ..
मैं बिना किसी से कुछ कहे उसके बतलाए जगह पर पहुच गया था ,वो एक होटल के कमरे में ठहरी हुई थी ,
मेरे जाते ही उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया ..
और रोने लगी ..
“भइया अपको मेरी बात पर यकीन नही होता ना ,की काजल सच में बेवफा है अगर आपको देखना है की वो कितनी बड़ी कमीनी है तो जाओ यंहा “
उसने मेरे सामने एक पता रख दिया ,
“आपको पता लग जाएगा की वो क्या है ,काजल असल में सिर्फ और सिर्फ ठाकुर की रंडी ही है और ये सब कुछ उन दोनो ने ही प्लान करके किया है …”
उसकी बात को सुनकर मुझे विस्वास तो नही हुआ लेकिन मैं उस जगह पर जाने को राजी हो गया…
वो वही जगह थी जंहा पर खान को मारा गया था ,
पिछली बार जंहा मुझे खान की चीख सुनाई दे रही थी वही इस बार हँसी की आवाज सुनाई दी ,
मैं थोड़ा और पास पहुचा तो काजल को ठाकुर की बांहो में देखा ,ठाकुर के पास ही एक पिस्तौल पड़ी थी लेकिन काजल अभी ठाकुर के बांहो में थी ..
“तुमने तो मुझे डरा ही दिया था मुझे लगा जैसे तुम डबल गेम खेल रही हो और मुझे फसाना चाहती हो “
“इतने दिन मेरे साथ रहकर भी तुम मुझे समझ नही पाए ना “
“लेकिन तुमने हरिया को क्या मार दिया “
“ताकि हमारे खिलाफ कोई सबूत ना रह जाए ,उस चुतिये देव को कैद करने की क्या जरूरत थी उसे इसी कारण हरिया की सच्चाई भी पता लग गई ,और मुझे उसे मरना पड़ा,वरना पुलिस उसके जरिये हरिया तक पहुच जाती और फिर तुमतक और मुझतक भी ,मैंने तुमसे कहा था की तुम फिर से फार्महाउस मत जाना तुम क्यो गए “
“अरे मुझे क्या पता था की तुमने उसे मार दिया है ,चलो ठीक ही हुआ क्योकि फिर उसका इल्जाम किसके ऊपर आता,अब कम से कम लोगो को ये लगेगा की उसे भी मैंने ही मारा है और पुलिस मेरी तलास में ही लगे रहेगी और हम दोनो …फुर्ररर “
दोनो ही जमकर हँस पड़े
“मेरा पासपोर्ट और वीसा कहा है “
काजल ने अपने पर्स से कुछ कागज निकाल कर उसे दिए …
“शेरखान वाह क्या नाम चूस किया है तुमने “
वो जोरो से हँस पड़ा ,साथ ही काजल के होठो में अपने होठ लगाने लगा काजल ने भी बिना किसी संकोच के अपने होठो को उसके होठो में लगा दिया ….
दोनो ही खिलखिला रहे थे लेकिन जैसे मेरा जिस्म आत्मा ही जल रही हो ………..मैं बौखला कर रह गया था ,मन कर रहा था की अभी उस पिस्तौल को जो की ठाकुर के बाजू में रखी हुई है उठाकर उन दोनो को ही सूट कर दु ……..

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दोनो ही के होठ एक दूजे से ऐसे चिपके हुए थे जैसे की कभी अलग ही नही होने वाले है ,वो दोनो ही थोड़ा आगे बढ़े और ठाकुर ने उसे उठा कर थोड़ी वही लिटा दिया वो जो खेल खेलने वाले थे उसमे मुझे कोई भी इंटरेस्ट नही था मुझे तो बस उन दोनो को मरना था यही मेरे सामने थी ठाकुर की बंदूख ..
मैं लपक कर आगे आया और बंदूख को अपने हाथो में थाम लिया ,
दोनो ही मेरे इस प्रयास से चौक पड़े थे ..
“देव तूम यंहा “
काजल ने मुझे आंखे फाड़ कर देखा
“हा साली रंडी मैं यंहा,सच कहती थी मेरी बहन की तू है ही रंडी तुझपर बहुत भरोसा कर लिया अब और नही “
“देव शांत हो जाओ और गन मुझे दे दो “
काजल के इतना बोलते ही मैं और भी भड़क गया और एक गोली उसके पैरो के पास चला दी ,
ठाकुर भी खोफ जदा खड़ा हुआ मुझे ही देख रहा था लेकिन वो भी मंझा हुआ खिलाड़ी था ,उसने अपनी चाल चल दी
“तू साले नपुंसक है तो तेरी बीवी क्या करेगी ,तू नामर्द है जो अपनी बीवी को दूसरे से चुदते हुए देखता है ,और हा अपनी बहनों को भी चोदता है ,साले भड़वे…तुझ जैसा पति काजल जैसी मतवली और चालाक लड़की का पति हो ही नही सकता उसे तो मेरी पत्नी होना चाहिए था…उसने ना सिर्फ दो लोगो को आसानी से मार दिया बल्कि उनकी सारी प्रॉपर्टी भी अपने नाम कर लिया ..”वो जोर से हँसने लगा ,वो बातो ही बातो में मेरे पास आ चुका था और वो घुमा और मेरे हाथो से पिस्तौल छीन ली …
इंस्पेक्टर ठाकुर के बंदूख कि नोक मेरे ही ओर थी ,
“बहुत खेल खेल लिया तुमने अब मेरी बारी है ,”
मैं बेखोफ खड़ा हुआ था,पास ही काजल स्तब्ध सी मुझे देख रही थी,
‘रुको ठाकुर ‘
वो चिल्लाई लेकिन तब तक ठाकुर की गोली चल गई ,काजल ने उसका हाथ उठा दिया था और मैं बचने के लिए थोड़ा दूर जा गिरा था,ठाकुर फिर से बौखला गया और मेरे ऊपर फिर से बंदूक तान दी इस बार उसका निशाना सही था लेकिन उसकी गोली चलती इससे पहले ही काजल बीच में आ गई ..
धाय धाय धाय
ऑटोमेटिक लोडिंग वाली बंदूक ने अपना काम कर दिया था ,लगातार तीन गोली सीधे जाकर काजल के सीने को चीरते हुए निकल गए मैं बौखला गया था ,जैसे कोई सुध ही ना बची हो ,वही ठाकुर भी स्तब्ध सा उसे देख रहा था वो तो मुझे मरना चाहता था ताकि काजल को पा सके लेकिन काजल ने ये गोलियां खाकर ये साबित कर दिया था की वो जिस्म से चाहे जिसकी भी हो लेकिन उसकी रूह सिर्फ मेरी है …..
मैं गुस्से से तिलमिलाया और पास ही पड़े एक पत्थर से ठाकुर पर वॉर कर दिया ,उसका सर जख्मी हो गया था ,मैं उसकी पत्थर से उसका सर फोड़ना शुरू कर दिया ,वो बेसुध हो गया था और मैं तो पहले से ही बेसुध था ,मैं चीख रहा था चिल्ला रहा था ,और पत्थर उसके सर पर मारे जा रहा था..
“नही देव मेरे पास आओ “काजल इस हालत में भी थोड़े होश में थी
मैं जल्दी से काजल के पास पहुचा ,मैंने उसे सीने से लपेट लिया था,मेरा पूरा कपड़ा खून के रंग से रंग चुका था ..
“आई लव यु देव ,हमेशा से तुम मेरे हीरो रहे हो हमेशा से मैंने सिर्फ और सिर्फ तुम्हे प्यार किया है “
काजल इतना ही बोलकर बेसुध हो गई ,मैं चीखा
“काजल ………..नही काजल तुम मुझे छोड़कर नही जा सकती काजल “
तभी
धाय ….
एक गोली मेरे पीठ में आकर धंस गई ,ठाकुर लेटे हुए था और उसके हाथो में बंदूक थी
मैं गुस्से से लाल हो चुका था और उसे जान से मार देना चाहता था .
मैंने पास ही पड़ा हुआ एक रॉड उठाया और उसके पैरो में घुसा दिया ,वो चीखा ही था की मैंने अपने पैरो से उसके मुह पर वॉर किया ,वो बेसुध हो गया मैं फिर से काजल के पास आया ,मैं रो रहा था मेरी काजल मुझे छोड़कर नही जा सकती थी ………
मैं होशं में आया तो मैंने अपने पास डॉ चुतिया को पाया ,
“काजल कहा है “
मेरा पहला सवाल यही था ..
“वो कोमा में है,गोलियां निकाल दी गई है लेकिन होश नही आया है ,खैरियत है की दिल को गोली नही लगी वरना”
मैं रोने लगा था
“ये सब मेरी ही गलती के कारण हुआ है डॉ ना मैं वो कदम उठता और ना ही ये हादसा होता “
डॉ मेरे पास आकर मेरे सर पर हाथ फेरा ..
“तुम्हारी गलती नही है देव अपने को दोष मत दो जो भी हुआ वो किस्मत का ही तो खेल था ,सब ठीक हो जाएगा “
“निशा कहा है ???”
मुझे अचानक ही निशा की याद आयी
“वो भी ठीक है और अभी जेल में है ,फिक्र मत करो वँहा हमारे लोग है उसे कोई तकलीफ नही होगी ,”
मैं थोड़ा शांत हुआ
“उसके खिलाफ कोई सबूत मिला ??”
मैंने फिर से कहा
“नही अभी तक तो नही ,सिर्फ पूर्वी की ही गवाही है उसके खिलाफ लेकिन उतना काफी नही है ,काजल के गवाही के बिना उसे जेल में ज्यादा दिनों तक नही रख पाएंगे उसके वकील भी बहुत ई स्ट्रांग है ,लेकिन अभी उसका छूटना ठीक नही होगा “
डॉ के चहरे में चिंता साफ झलक रही थी
“उसे बेल दिलवाओ डॉ वो मेरी बात सुनेगी ,मैं बहक गया था जो मैं उसकी बात नही सुना ,लेकिन इस हादसे से मुझे समझ आ चुका है की मुझे उसकी बातो को सिरियसली लेना चाहिए था “
“लेकिन उसके बाहर आने से काजल और पूर्वी दोनो के ही जान को खतरा है ??”
डॉ मेरी बातो से चकित दिख रहे थे ,
“मैं सम्हाल लूंगा ,मैं उसे अच्छे से समझता हूं आप उसे बाहर निकलवाये “
डॉ थोड़ी देर तक तो सोच में ही डूबा रहा लेकिन फिर वो बाहर चला गया ,मैं उठाकर उसके पीछे ही बाहर आया
“आप पागल हो गए हो क्या ये क्या कर रहे हो “
सामने पूर्वी और शबनम खड़ी थी
“मुझे काजल से मिलना है “
“अभी तुम आराम करो शाम को मिल लेना ,ऐसे भी उसे ज्यादा मिलने नही दिया जाता हम तम्हे स्ट्रेचर में ले जाएंगे “
शबनम की आंखों में भी पानी था और पूर्वी के भी ,मुझे शक था की कही काजल को कुछ हुआ तो नही है और ये लोग मुझसे झूट बोल रहे है ,मैंने शंका की नजर से दोनो को देखा ,
पूर्वी रोते हुए मेरे पास आयी और मुझसे लिपट गई ..
“भइया ये क्या हो गया “
“काजल ठीक तो है ना तुमलोग मुझसे कुछ छिपा तो नही रहे “
पास खड़े हुए डॉ के चहरे में मुस्कान गहरा गई
“छुपाने को बचा ही क्या है देव ,अभी आराम करो शाम को मिल लेना,फिक्र मत करो काजल हमे छोड़कर इतनी जल्दी नही जाने वाली “
डॉ के चहरे में दृढ़ता के भाव उभर गए जैसे उन्हें काजल पर बहुत ही ज्यादा यकीन हो ..

काजल मेरी काजल ,आंखे बंद किये ना जाने कीस दुनिया में खो गई थी ,उसे देखकर एक बार तो मूझे चक्कर ही आ गया,मैं वही था जो कुछ दिनों पहले उसे मारने का प्लान कर रहा था ,आज उसकी इस कुर्बानी ने मुझे फिर से याद दिलाया जो वो मुझे बोला करती थी ,
‘मैं तुम्हारी ही रहूंगी देव चाहे शरीर किसी और के पास ही क्यो ना रहे लेकिन रूह तलक बस तुम्हारी ही रहूंगी ‘
मेरी आंखे भीग गई थी और मैं सिसक रहा था ,मेरा हाथ अभी भी काजल के हाथो में था,वो ऑपरेशन थिएटर मुझे काटने को दौड़ रहा था ,
‘कितना पागल था तू देव जो अपनी जान की वफादारी पर उसके प्यार पर शक किया ‘
मैं अपनी अतीत की यादों से तब निकला जब पूर्वी ने मुझे बुलाया ,आज 3 दिनों से काजल को होशं नही आया था वो अब भी कोमा में ही थी ..
“भइया देखो तो कौन आया है “
बाहर निशा खड़ी थी वो मुझे देखते ही मेरे पास आयी और मुझे अपने गले से लगा लिया ,
“सॉरी भइया मेरे कारण भाभी की ये हालत हो गई मुझे नही पता था की भाभी का प्लान क्या है मुझे तो लगा की वो आपको धोखा देना चाहती है “
“कोई बात नही मेरी जान तू मुझसे प्यार ही इतना करती है की तू मेरे आगे कुछ सोच ही नही पाती “
वो थोड़ी देर मुझसे ऐसे ही चिपकी रही ..
“दीदी अब तो मुझे नही मरोगी ना “
पूर्वी ने हंसते हुए कहा
“चुप कर पगली तू मेरी प्यारी वाली बहन है,और काजल भाभी ने तो मेरे भाई के लिए खुद गोली खाई है उनका ये अहसान तो मैं जीवन भर नही भूलूंगी “
“आपका कोई भरोसा थोड़ी है भइया के बारे में थोड़ा भी कोई कुछ कहे तो आप प्यार व्यार सब भूल कर मारने को दौड़ पड़ती हो “
पूर्वी जोरो से हँस पड़ी साथ ही वँहा खड़े सभी लोग भी..
“मेरे भइया का बुरा सोचेगा उसे ये निशा कच्चा चबा जाएगी समझ लेना “
निशा ने ये बात थोड़े मजाकिया अंदाज में कहा था ..
“डॉ अब तो आपको मेरी बहन पर कोई शक नही है ना “
“हा नही तो है लेकिन जिस तरह से उस दिन इसने धमकी दी थी कोई भी डर जाए ,खैर पूर्वी की तरफ से तो केस वापस हो चुका है तो किसी तरह की कोई प्रॉब्लम अब नही होगा ..लेकिन निशा तुम्हे ये क्यो लगा की काजल देव को धोखा देने वाली है “
“क्योकि मुझे पता लगा था की काजल ने ठाकुर का जाली पासपोर्ट बनवाया है ,वो तो बाद में शबनम और पूर्वी ने मुझे बतलाए की वो सब ठाकुर को फसाने के लिए चला गया दाव था,अगर भइया वँहा नही जाते तो उसे भी वो वैसे ही मरती जैसे की खान और अजीम को मारा था लेकिन मेरी गलती की वजह से ..”
“कोई बात नही निशा शायद जो भी होता है वो अच्छे के लिए ही होता है,मुझे लगता है की ठाकुर को काजल की सच्चाई का पता चल चुका था हो सकता है की अगर देव वँहा नही होता तो ठाकुर ही काजल पर अटैक कर देता,और खान और अजीम की बात अलग थी वो दोनो ही कमजोर थे लेकिन ठाकुर मजबूत और मरने मारने वाला इंसान है ,पता नही काजल उससे अकेले निपट पाती की नही क्योकि हमे वँहा पहुचने में समय लगने वाला था …”
“जो हुआ वो हो गया अब बस काजल जल्दी से ठीक हो जाए …”
मैं गहरी सांस लेकर कहने लगा ..

****************
मलीना मेडम मेरे सर पर हाथ फेर रही थी ..
“मेरी दोनो बेटियो को बहुत प्यार देना देव ये दोनो ही अब तुम्हारे हवाले है ,इन्होंने जीवन भर बस बदले और गुलामी में निकाल दिए अब इनकी जिंदगी शुरू हो रही है ,मैं तुमपर भरोसा कर सकती हु …”
मलीना मेडम की आंखों में पानी था और साथ ही काजल और शबनम की आंखों में भी …
काजल ठीक हो चुकी थी लेकिन उसके फेफड़ो में छेद हो चुका था जो नही भर पाया था,एक महीने बीत चुके थे और आज उसे घर ले जाया जा रहा था ,यंहा सभी मौजूद थे ,डॉ,मलीना,मैं,निशा,पूर्वी ,काजल ,शबनम ,काजल के मुह बोले भाई और पिता साथ ही भाई का दोस्त सुशांत और रश्मि भी …
कुछ दिन पहले ही शबनम ने अपने पति को तलाक दिया था और वो मेरे साथ ही रहने वाली थी ,सुशांत और निशा का टाका भिड़ गया था,जिस लड़की ने उसे गोली मारी थी अब वही उसकी जीवन संगनी बनने वाली थी ,सुशांत को भी निशा का इतिहास पता था लेकिन फिर भी प्यार क्या देखता है ,??
पूर्वी अभी सिंगल थी ,मैंने सोचा था की शायद वो अजीम के भाई को डेट करेगी लेकिन उसने क्यो इंटरेस्ट नही दिखाया ..
मैंने निशा और सुशांत को होटल आदित्य को सम्हालने भेज दिया क्योकि अब वो भी हमारे नाम पर था,अजीम के भाई को जब उसके पिता और भाई की सच्चाई का पता चला वो भी खुशी खुशी होटल छोड़ने को तैयार हो गया,लेकिन उसके बदले हमने उसे एक दूसरी जगह पर होटल खोलकर दे दिया था ,
खान का होटल मैं और शबनम चलाने लगे थे,काजल को आराम की सख्त जरूरत थी ,वो बेहद ही कमजोर हो चुकी थी ,
रश्मि अपने होटल का कारोबार अच्छे से चला रही थी लेकिन अब दोनो होटल में कोई कंपीटिशन नही था बल्कि कई मामलों में एक दूसरे का सहयोग ही करते थे …
और डॉ चुतिया ..???
वो नई स्टोरी लिखने के सोच में लगा हुआ था…….

************* समाप्त *****************

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