यह कह कर रीता ने जब बक्सा खोला तो उसमें से बिकिनी निकली। बिकिनी दो हिस्से में थी। एक ऊपर का हिस्सा जो स्तनों को मुश्किल से ढके रखे और दूसरा नीचे का हिस्सा जो चूत को बड़ी ही मुश्किल से छिपा पाए। अगर रीता ने उस बिकिनी को पहना तो रीता का बाकी का पूरा बदन नंगा दिखना ही था। रीता ने जब उसे देखा तो चंद पलों के लिए उसके चेहरे से हवाइयां उड़ने लगीं। वह इस तरह के कपड़े को कैसे पहने?
रीता ने कुछ घबरा कर किरण की ओर देखा। किरण ने रीता के कंधे पर हाथ रख कर बड़ी ही सरलता से कहा, “यह तुम्हारा स्विमिंग कॉस्ट्यूम है। जब हम तैरने जाएंगे तब पहनना है। तुम अकेली ही नहीं होगी। मेरा भी एक कॉस्ट्यूम है। मैं भी उसे पहनूंगी। इसमें इतना घबराने की क्या बात है? वहाँ हम चारों को छोड़ कोई और नहीं होगा। हम सब अपने लोगों के बीच में ही है। यह पहनना तो आम बात है। सब पहनते है।”
रीता को वैसे तो पता था कि स्विमिंग पूल में ऐसे कपड़े लड़कियां आम पहनती हैं। रीता ने सूरज की और देखा। सूरज ने रीता को ढाढस देते हुए कहा, “यह तुम पर है कि तुम इसे पहनना चाहती हो या नहीं? तुम यह मत सोचना कि तुम्हें इसे पहनना ही है। यहां कोई जबरदस्ती नहीं है। इसे पहनोगी तो मुझे अच्छा लगेगा। बाकी तुम्हारी मर्जी।” यह सुन कर रीता ने किरण का हाथ थामा और अपने कमरे की ओर बढ़ गयी।
रीता के चेहरे से घबराहट जा नहीं रही थी। उसने उससे पहले इस तरह के कपड़े कभी नहीं पहने थे। रीता ने मेरी ओर देखा। वह मेरे करीब आयी और रीता ने कुछ गुस्से में कहा, “मैं इतने छोटे कपड़े सूरज के सामने कैसे पहन कर जाऊं? वह तो मुझे उस हाल में देखते ही खा जाएगा।”
मैंने रीता के कंधे पर हाथ रख कर कहा, “कुछ नहीं होगा तुम्हें। यहां सब वेजिटेरियन मतलब शाकाहारी हैं। तुम्हें कोई नहीं खा जाएगा। वैसे सूरज ने तुम्हारे बूब्स तो देख ही लिए है। देखो अब यह सब शर्म लजा छोड़ो, और जिंदगी एन्जॉय करना सीखो।”
अपने कमरे में हमनें कुछ देर विश्राम किया। कमरे में चाय नाश्ता करते-करते शाम के पांच बजने में भी कोई देर नहीं लगी। मैं और रीता फटाफट तैयार हो कर अपने-अपने स्विमिंग कॉस्ट्यूम लेकर ठीक पांच बजे बाहर निकले, तो किरण और सूरज को बाहर के कमरे में हमारा इंतजार करते हुए पाया।
सूरज हमें लेकर अपनी कार में चंद मिनटों में ही फार्म हाउस पर पहुंच गए। एक बड़ा सा दरवाजा दो चौकीदारों ने खोला। वह फार्महाउस क्या था, एक छोटे से महल की तरह था, जिसमें सब सुख सुविधाएं थी। काफी लम्बे चौड़े स्विमिंग पूल में कांच की तरह साफ़ पानी सब से गहरी जगह पर करीब साढ़े चार फ़ीट तक था, जो किसी भी मर्द की छाती तक ही था। साथ में ही शावर थे, और एक कपड़े बदलने का कमरा था। स्विंमिंग पूल से ही सटा हुआ एक क्लब हाउस था, जिसमें खेल के कुछ उपकरण और खाने-पीने की कुछ चीजें रखी हुई थीं।
स्विंमिंगपूल के किनारे पर कुछ लम्बी सी कुर्सियां थी, जिस पर लेट कर सर्दियों की मीठी धुप में कोई भी बदन को सेक सकता है, या फिर उस पर लेटे हुए पूल के आस-पास की हरियाली को देख सकता है, या फिर नींद की झपकी भी ले सकता है। कुर्सियों पर कई सफ़ेद तौलिए रखे हुए थे। मैंने और रीता ने पहुंच कर एक-एक तौलिया लिया और कपड़े बदलने के कमरे में जा पहुंचे।
मैंने सारे कपड़े निकाल कर छोटी सी निक्कर पहन ली, और मैं बाहर निकल कर शावर की ओर जा रहा था। तब रीता ने मुझे रोका। वह इस उथल-पुथल में थी कि इतनी छोटी बिकिनी पहन कर वह कैसे सूरज के सामने जाए। रीता ने कहा, “मैं यह पहन कर नहीं जा सकती। सूरज देखेंगे तो क्या सोचेंगे?”
मैंने कहा, ” सूरज जो सोचते रहे हैं वही सोचेंगे, पर यह सब सोचने का वक्त अब नहीं है। इसे पहनो और बाहर निकलो। वैसे भी सूरज ने चूत को छोड़ तुम्हारा सब कुछ तो देख ही लिया है। फिर अब झिझकने से क्या फायदा?” यह कह कर मैं बाहर निकल गया। बाहर निकल कर मैंने देखा तो किरण पहले से ही शावर में नहा कर स्विंमिंगपूल में छोटी सी कॉस्ट्यूम में अपने पांव पानी में मारती हुई अपनी गांड ऊपर की ओर की हुई पानी की सतह के ऊपर रहने की कोशिश कर रही थी।
शायद वह मेरा और रीता का इंतजार कर रही थी। सूरज वहां नहीं था। सर्दियों के मौसम में शाम को पांच बजे ही अंधेरा होने लगता है। उस समय करीब सवा पांच या साढ़े पांच बजे होंगे। मैं किरण को पहली बार बिकिनी में देख रहा था। किरण का पूरा बदन चंदन की सपाट लकड़ी की तरह चमकता चिकना, गोरा और कमल की तरह सुकोमल दिख रहा था।
किरण के गोरे चिकने बदन से फिसल कर नीचे गिर रहा पानी किरण की खूबसूरती में चार चाँद लगाता था। किरण के भीगे हुए केश, उसकी नशीली आँखें, बच्चे जैसी निखालस मासूम मुस्कान, गीली बिकिनी टॉप में से साफ़ दिखाई पड़ती नुकीली फूली निप्प्लें, टॉप में से उभर कर बाहर निकलने को आतुर भरे हुए फुले स्तन, एक-दम पतली कमर, गहरी नाभि के नीचे उभरता हुआ जाँघों के बीच वाला टीला जो बिकिनी के निचले हिस्से से मुश्किल से चूत को ढक पाता था देख कर मेरे पांव ढीले पड़ने लगे।
मैं वाकई किरण के पति होने के सूरज के नसीब को सराह रहा था। यह भी एक तरह से विधि की विडम्बना थी, कि सूरज मेरे रीता के पति होने पर मेरी ईर्ष्या कर रहा था और मैं किरण के पति होने पर सूरज की। उस समय जिस तरह किरण दिख रही थी, मैं उसे पाने के लिए कुछ भी कर सकता था।
मैंने देखा तो कुछ ही देर में रीता शावर में नहा कर अपने इर्द-गिर्द सफ़ेद तौलिया लपेटे हुए बाहर निकली और स्विंमिंगपूल के किनारे आ कर असमंजस में खड़ी हो गयी कि तौलिया हटा कर पानी में कूद कर अपना बदन दिखाए या फिर पूल में ना जाए और बाहर ही कोई कुर्सी पर तौलिया ही पहन कर बैठ जाए।
उतनी ही देर में सूरज भी छोटी सी निक्कर पहने शावर में नहा कर वहां आ पहुंचा। भीगी पतली निक्कर में से उसका सख्ती से खड़ा हुआ मोटा लंबा लंड साफ़ दिख रहा था। उसे देख कर मैं आश्चर्यचकित रह गया। सूरज पूल में उतर कर मैं और रीता पूल के किनारे खड़े थे उसके बिल्कुल करीब तैरता हुआ आ गया। नीचे से पास में ऊपर तौलिये में लिपटे खड़ी रीता के तौलिये के अंदर भी झांकता हुआ रीता की ओर देखने लगा।
सूरज की आँखें रीता को पूल में आने के लिए आमंत्रित कर रहीं थीं। सूरज का गोरा लंबा कद, काले बालों से आच्छादित चौड़ा सीना, उसके सुन्दर घुंघराले बाल और उसका निहायत की आकर्षक नाक-नक्श किसी भी स्त्री के बदन का तापमान बढ़ाने के लिए काफी था। सूरज का लंबा लंड उसकी छोटी निक्कर में एक बड़ा तम्बू बनाता हुआ कुछ बाहर भी निकला हुआ दिख रहा था। सूरज को अपने इतने करीब पूल में नीचे खड़े हुए देख कर और शायद हिलते हुए पानी में सूरज के लंड पर नजर पड़ते ही रीता अपने तौलिये को समभालती हुई पूल के किनारे अपना मुंह दूसरी ओर कर थोड़ी सी हट कर खड़ी हो गयी।
हालांकि रीता सफ़ेद तौलिये में अच्छी तरह से अपने बदन को छिपा पा रही थी, सूरज को फिर भी रीता का खुला बदन, जो नजर आ रहा था, उसका वह अपनी आँखों से भरपूर रसास्वादन कर रहा था। रीता समझ रही थी कि सूरज उसके बदन को घूरते हुए पूरे मजे ले रहा था। रीता की करारी जाँघें घुटनों से ऊपर तक दिख रहीं थी।
तौलिये और रीता की जाँघों के बीच के गैप में देखते हुए सूरज का दिमाग अजीबो-गरीब कल्पना करने में डूबा हुआ था। रीता के बिखरे हुए खुले बाल रीता के चेहरे पर बड़ी ही खूबसूरती से फैले हुए थे जिसे बार-बार रीता ठीक से बाँधने के लिए अपने हाथ या सर ऊपर-नीचे कर रही थी। इस तरह करने से रीता का तौलिया हिल जाता था, और देखने वाले को लगता था की शायद उसके हिलने से कहीं तौलिया रीता के हाथों से गिर जाए तो या तो तौलिये के हिलने से दो छौर के बीच की दरार में से रीता के यौवन की शायद कुछ और झांकी मिल जाए।
पर मैं सूरज को रीता के करारे और सेक्सी बदन के इस कदर अधूरे दर्शन कराने से संतुष्ट नहीं था। मैं जल्दी से जल्दी मेरी बीवी को सूरज की बाँहों में और सूरज के नीचे लेटे हुए चुदती हुई देखना चाहता था। मेरी बीवी थी कि बिकिनी पहन कर सूरज के सामने जाने में भी हिचकिचा रही थी। मैं रीता के अप्रतिम सेक्सी रूप और फिगर को अच्छी तरह से खुल कर प्रदर्शित करते हुए उस कॉस्ट्यूम में सूरज को दिखाना चाहता था।
मैं जानता था कि सूरज रीता को उस कॉस्ट्यूम में लगभग नग्न दशा में देख कर अपने आप को रोक नहीं पायेगा। वह कुछ ना कुछ शरारत जरूर करेगा। मैं यह भी जानता था कि रीता पहले के मुकाबले उस शाम तक सूरज के प्रति काफी नरम हो चुकी थी। मुझे यकीन था कि अगर सूरज ने पहल की तो रीता सूरज को रोक नहीं पाएगी।
सर्दियों का मौसम था। धीरे-धीरे अँधेरा घिर रहा था। मुझे लगा कि क्या पता, कहीं ऐसा ना हो कि सूरज रीता को उस बिकिनी में लगभग नंगी देख कर अपना आपा खो बैठे और हो रहे अंधेरे का फायदा उठा कर उसे उठा कर हमसे दूर वहीं क्लबहाउस की बिल्डिंग के कोई कमरे में ले जा कर चोदना शुरू ना कर दे।
उस हालात में काफी पिघली हुई मेरी पत्नी रीता सूरज का कोई विरोध कर ना पाए और अपने आप को सूरज के हवाले कर दे जैसा कि वह सोच रही थी, और उसने मुझे बातों-बातों में कह भी दिया था। फिर तो मेरी बीवी उसी शाम को स्विमिंग क्लब में ही चुद जायेगी। मेरे दिमाग में यह सब चल रहा था।
एक बार अगर युवा स्त्री को अपने मन पसंद, सशक्त, आकर्षक और सुन्दर पुरुष के साथ एकांत में कामवासना का मौक़ा मिले, और अगर पुरुष उस स्त्री की कामवासना को जागृत करने के लिए प्रयत्नशील हो जाए, तो वह स्त्री सारी मर्यादाओं और लाज शर्म को त्याग कर उस पुरुष के साथ कामक्रीड़ा करने के लिए बाध्य हो जायगी।
स्त्रियों का शरीर कामवासना प्रेरित करने वाले हॉर्मोन्स के प्रज्वलित होने के कारण उस हालात में सम्भोग के लिए अपने आपको पुरुष को समर्पित करने के लिए विवश हो जाता है। यह कुदरत का नियम है। स्त्रियां दबी हुई कमान की तरह होती हैं। अगर नियंत्रण की रोक हटी तो वह पुरुष से कहीं ज्यादा भोग विलास के लिए सदा तत्पर हो जाती है।
सूरज वहीं हमारे नजदीक स्विंमिंगपूल के पानी में खड़े हुए रीता के पानी में आने का इंतजार कर रहा था। मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मैं रीता के पास गया और उसे तौलिया मुझे दे कर स्विमिंग कॉस्ट्यूम में स्विंमिंगपूल में उतर कर पानी में हमारे साथ एन्जॉय करने के लिए कहा।
रीता ने मेरी बात सुनी और अपनी पलकें झुका सर हिला कर मुझे “हाँ” का इशारा भी किया पर “जाऊं, ना जाऊं” की उधेड़बुन में मूर्ति सी खड़ी वह बिना कुछ बोले कभी मुझे तो कभी पानी को तो कभी उसे घूरते हुए अपनी आँखों के इशारों से अपने करीब बुलाते हुए सूरज को देखती रही।
शायद वह मुझसे और आग्रह की अपेक्षा कर रही थी। वह शायद मेरा इम्तेहान ले रही थी, और मेरी धीरज जवाब दे रही थी। जब मुझ से रहा नहीं गया तब मैंने आगे बढ़ कर मेरी बीवी के पास जा कर, वह कुछ सोचे समझे उसके पहले रीता के तौलिये का एक छोर अपने हाथ में पकड़ा, उस तौलिये को जोर से खींचा, और रीता को एक हल्का सा धक्का मारा।
एक ही पल में तौलिया रीता के बदन से निकल पड़ा और रीता मेरे धक्के के जोर से बिकिनी में आधी नंगी अपने आपको समभालने की कोशिश करते हुए अपने हाथ-पांव हिलाती हुई पानी में धड़ाम से जा गिरी। रीता का तौलिया मेरे हाथ में रह गया।
अचानक पानी में गिरने से पानी में डूबने के डर से घबरा कर रीता चिल्लाने लगी। हालांकि पानी की गहराई बहुत ज्यादा नहीं थी पर वहां पानी कुछ गहरा तो था ही। पानी में गिरने से रीता लड़खड़ा रही थी और जल्दी से उठने की कोशिश करते हुए भी पानी के हिलने से उठ नहीं पा रही थी।
पानी में स्विमिंगपूल के अंदर की फर्श पर लुढ़क जाने और अफरा-तफरी के कारण साँस ना ले पाने से रीता पानी भी पीने लग गयी थी। रीता ने नजदीक में ही खड़े सूरज के पांव को पानी में देखा। उठने की कोशिश करते हुए रीता ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की।
पानी में सूरज और रीता का एक दूसरे से सामना जरूर होना था। अब आगे जो होना था वह उनको करना था। उनको अकेला छोड़ने की फिराक में तौलिये को वहीं फेंक कर मैं फ़ौरन वहां से भागता हुआ जहां किरण पानी में अपने पांव मार कर तैरने की कोशिश कर रही थी, वहां पानी में कूद कर उस लम्बे स्विमिंगपूल के दूसरे छौर पर जा पहुंचा।
जब डर होता है तो अक्सर इंसान की बुद्धि काम नहीं करती। डूबने के डर के मारे रीता ने नजदीक में ही खड़े सूरज के पांव को पानी में देख सूरज के पांव पकड़ लिए। उठ खड़े होने की कोशिश करते हुए अफरा-तफरी में अपने हाथों को सूरज की टांगों के ऊपर बढ़ाया तो रीता के हाथ में सूरज की निक्कर आ गयी जिसका छौर रीता ने कस कर पकड़ लिया। उसी वक्त वह फिर से संतुलन खो बैठी और रीता के नीचे की और सरकते ही सूरज की निक्कर पूरी तरह से नीचे खिसक गयी।
सूरज की जांघों को दोनों हाथों से पकड़ कर उसका सहारा लिए रीता ने जब खड़े होने की कोशिश की, तब सूरज का लम्बा लटक रहा लंड मेरी बीवी के हाथ में आ गया। मरता क्या ना करता? डूबने से बचने के चक्कर में रीता ने बिना कुछ सोचे समझे सूरज के लम्बे तगड़े लंड को फिर ऊपर उठने की कोशिश करते हुए उसे कोई रस्सी का लटकता टुकड़ा समझ कर कस कर पकड़ लिया।
सूरज ने अपने लंड पर जब रीता के हाथों का दबाव महसूस किया, तब नीचे झुक कर रीता की बगल में हाथ डाल कर रीता को अपने बदन से चिपका कर रखते हुए ऊपर उठाने की कोशिश की। रीता पानी में उठते हुए सूरज की दोनों जांघों के बीच अपने सर को रखते हुए ऊपर उठने की कोशिश करने लगी। अपने मुंह से पानी को निकालने के लिए जब रीता ने मुंह खोला, तब अनायास रीता के खुले मुंह में सूरज के लंड का टोपा घुस गया। रीता की सांसे सूरज के लंड के टोपे को मुंह में घुसने से रुंधने लगीं।
सूरज ने जैसे-तैसे करते हुए ताकत लगा कर रीता के मुंह से अपना लंड निकाल कर रीता को अपने पांव पर खड़ा किया। लड़खड़ाती हुई रीता किनारे को पकड़ कर खड़ी हो गयी। रीता के खूबसूरत बदन पर रीता के खुले बाल चारों तरफ बिखरे हुए थे। पानी में खड़ी रीता की बिकिनी का छोटी सी पट्टी जैसा टॉप रीता के जबरदस्त हाथ-पांव मारने से बदन से निकल कर नीचे कहीं गिर चुका था।
रीता के स्तनों की निप्पलों की अंधेरे में हलकी सी झांकि पानी की सतह पर आधीं बाहर और आधी अंदर इतनी सुन्दर दिख रहीं थी, कि उन्हें अच्छे से देखने के लिए इस विषम परिस्थिति में भी सूरज की ऑंखें उन पर बार बार जाती रहती थी। रीता के पेट में कुछ पानी चला गया था, जो रीता के खांसने से रीता के मुंह से निकल रहा था।
पूरा नंग-धडंग सूरज कूद कर किनारे पर चढ़ गया। रीता सांस ना ले पाने के कारण काफी घबड़ायी हुई थी। रीता की इस तरह बुरी हालत देख कर सूरज ने अफरा-तफरी में अपनी टांगों में फसी हुई अपनी निक्कर निकाल फेंकी। रीता की पैंटी भी अफरा-तफरी के कारण रीता की टांगों से निकल चुकी थी। पूरा नंग-धडंग सूरज कूद कर किनारे पर चढ़ गया। एक ही झटके में सूरज ने नंगी रीता को ऊपर उठा कर उसे वहीं स्विंमिंगपूल के किनारे फर्श पर लिटा दिया।
रीता भी सूरज की ही तरह बिल्कुल नंगी स्विमिंग पूल के साथ वाली फर्श पर लेट गयी। रीता के बदन को अपनी दोनों टांगों के बीच रख कर सूरज अपने घुटनों के बल रीता के बदन पर वजन दिए बिना सवार हो गया।
उस वक्त सूरज का सख्ती से खड़ा लंबा तगड़ा लंड रीता की चूत को टटोल रहा था। उससे बेखबर रीता की सांस रुक ना जाये इसलिए रीता के गोल गुम्बद के समान दोनों सख्ती से फुले हुए स्तनों की सख्त निप्प्लों पर अपने दोनों हथेलियां रख कर सूरज ने उनके ऊपर बारी-बारी से दबाव देना शुरू किया। इस तरह रीता की छाती दबाने और छोड़ने की प्रक्रिया से खांस रही रीता के पेट में जो पानी गया था, वह उल्टी के रूप में रीता के मुंह से निकल गया, और रीता की जान में जान आयी।
रीता अपनी आँखों को साफ़ करती हुई वहीं स्तब्ध सी लेटी हुई उसके बदन पर सवार नंग-धडंग सूरज को उस धुंधले अंधेरे में देखती रही। अचानक रीता को ख़याल आया कि डूबने से बचने की जद्दोजहद में उसके टॉप की पट्टी टूट जाने से टॉप उसके स्तनों के ऊपर से गायब था, और वह टॉपलेस मतलब ऊपर से बिल्कुल नंगी सूरज के सामने अपने सख्त गुब्बारे से फूले हुए अल्लड़ स्तनों के दर्शन कराती हुई वहां सूरज के नीचे लेटी हुई थी।
सूरज अचम्भे से नीचे लेटी रीता की खूबसूरती को दंग हो कर देखता ही रहा। हालांकि वहां काफी अंधेरा हो चुका था फिर भी थोड़े उजाले के कारण वह रीता की नग्नता देख और महसूस कर पा रहा था। उसकी समझ में यह नहीं आ रहा था की एक नीचे लेटी हुई लड़की के स्तन इतने सख्ती से बिना गुरुत्वाकर्षण के नियम को माने कैसे इस तरह सीधे सख्त खड़े रह सकते हैं?
फर्श पर पीठ कर नीचे लेटी हुई औरत के स्तन हमेशा उसकी छाती पर दब कर बैठ जाते है। पर रीता का ऐसा नहीं था। रीता के दोनों स्तन और उसकी निप्पलें ऐसे उद्द्ण्ड खड़ीं थी, जैसे उन पर कोई दबाव हो ही नहीं।
जब रीता ने अपनी जांघों के बीच में देखा तो पाया कि उसकी छोटी सी लंगोटी जैसी पट्टी भी खिसक कर नीचे उसकी टांगों के बीच से निकल गयी थी। रीता ने महसूस किया कि शायद उस धुंधले अंधेरे में भी सुरज रीता के पूरे नंगे बदन को देख पा रहा होगा। सूरज की दोनों हाथों की उंगलियां रीता के स्तनों की पूरी तरह से फूली हुई सख्त निप्पलों से खेल रही थी।
इतना ही नहीं, बल्कि रीता ने सूरज का लंबा लंड जिसे निक्कर में छिपे हुए देखने से भी वह कतरा रही थी वह उस समय रीता की फैलाई हुई जांघों के बीच में सख्ती से खड़ा रीता की चूत को कुरेदता हुआ रीता महसूस कर रही थी।
रीता को एहसास हुआ कि उस समय अगर सूरज चाहता तो अपनी जांघें फैलाये हुए सूरज के नीचे लेटी रीता की चूत में आसानी से अपना खड़ा हुआ लंड डाल कर उसे वहीं के वहीं चोदने लगता और उसे रीता रोक नहीं पाती। अंधेरा होने के कारण मैं और किरण भी उन्हें उस हालात में चुदाई करते हुए देख नहीं पाते।
रीता को यह भी याद आया कि जाने-अनजाने में ही सही पर उस शाम को रीता ने उस लंड को अपने मुंह में भी लिया हुआ था। पर सुरज ने कुछ नहीं किया। रीता के दिल में सूरज के लिए रीता की मज़बूरी का फायदा ना उठाने के लिए और उसे डूबने से बचाने के लिए सहज रूप से ही स्त्री सुलभ कृतज्ञता, ममत्व और काम भाव पैदा हुआ।
रीता अपने ऊपर चिंता ग्रस्त सूरज को देख कर थोड़ा सा मुस्कुरा दी। सूरज की गर्दन के इर्द-गिर्द अपनी बांहों का हार बना कर अपने बदन को ऊपर उठाने का प्रयास करते हुए अनायास ही रीता के होंठ सूरज के होंठों से मिल गए। सूरज ने भी अपना मुंह खोल कर रीता के होंठ और जीभ का बड़े ही प्यार और जोश से स्वागत करते हुए उन्हें चूसना और चाटना शुरू किया। इस तरह रीता और सूरज इस बार बिना कोई दबाव के एक-दूसरे की बांहों में लिपटे हुए बेतहाशा एक-दूसरे के होंठो का रसास्वादन करने लग गए।
सूरज के चुम्बन से अर्जित कामवासना से पूरी तरह से आच्छादित रीता की चूत में से उसका स्त्री रस रिसने लगा। रीता अपने नंगे कूल्हों को मचलते हुए रोक नहीं पा रही थी। सूरज का एक हाथ रीता के स्तनों को उत्तेजना से मसल रहा था और उसकी निप्पलों को पिचका रहा था। सूरज का दुसरा हाथ रीता की गांड के गालों को पिचकाता हुआ रीता के बदन को नीचे से ऊपर की और उठाने में लगा हुआ था।
रीता के स्तनों की चॉकलेट रंग के गोलाकार एरोला से घिरी मादक निप्पलें एक-दम सख्त फूली हुईं पूरी गोलाई में छोटी छोटी फुंसियों से भरी रीता की उन्मादक स्थिति की गवाही दे रही थी। काफी देर से दोनों एक-दूसरे के आलिंगन और चुंबन में व्यस्त रहने के बाद जब अलग हुए तब कुछ हद तक क्षोभित रीता उठ खड़ी हुई और सूरज को “थैंक यू” कहा।
उस समय काफी अंधेरा हो चला था और कोहरा फैला हुआ था। मैं और किरण सूरज और मेरी पत्नी रीता से दूर दूसरे छोर पर अठखेलियां खेल रहे थे। हालांकि रीता और सूरज शायद हमारी खिलखिलाते हुए हंसने की और पानी में खेलने की आवाज सुन पा रहे होंगे, पर रीता को उस अंधेरे में हम दिखाई नहीं दिए। उस समय पूल के आस-पास कोई लाइट नहीं जलाई गयी थी और ना ही वहां कोई सेवक नजर आ रहा था। शायद सूरज ने ही यह आदेश दिया होगा ताकि वह रीता के साथ अंधेरे का फायदा उठा सके।
रीता अपनी कामोत्तेजक स्थिति से उभरी तब उसने अपनी नग्न स्थिति देख कर खौफ और शर्म के मारे अपनी पैंटी और टॉप को ढूंढने की कोशिश की। जब रीता उस अंधेरे में उन्हें ढूंढ नहीं पायी तब
हालांकि काफी अंधेरा हो चुका था फिर भी टिमटिमाते सितारों के प्रकाश में सूरज की पैनी कामुक नजरें रीता की नग्नता को घूर कर देखना चाह रहीं थी। उन नजरों के वार से बचने के लिए रीता अपने स्तनों और अपनी चूत को अपने हाथों से छिपाने की कोशिश करने लगी। सूरज ने आगे बढ़ कर दोनों हाथों से रीता को अपनी बाहों में लिया और रीता के हाथों को हटाते हुए कहा, “रीता वैसे तो अब इस अंधेरे में कुछ ज्यादा नहीं दिखाई पड़ता है फिर भी अब तुम मुझसे यह शर्म और पर्दा मत करो।
आज विधाता ने ही तुम्हें मेरे पास इस हालत में भेजा है हम दोनों इस स्थिति को स्वीकार करें। तुमने मुझे वचन दिया है, कि तुम आज मुझे अपना पति जैसा मान कर मेरा धन्यवाद करोगी। मुझे पति ना सही तुम मुझे अपना मान कर मुझसे कोई शर्म और पर्दा किये बिना आज पूरी तरह से मेरी हो जाओ।”
रीता बिना बोले नंगी असहाय सी खड़ी हुई नंग-धड़ंग सूरज की आंखों में आंखें डाल कर उसे देखती रही। सूरज ने झुक कर रीता को अपनी बाहों में फिर से दोपहर की ही तरह ऊपर उठाया। इस बार रीता की नंगी चूत बिल्कुल सूरज के नंगे लंड के ऊपर टिकी हुई थी। सूरज ने रीता के होंठों से अपने होंठ मिलाये और रीता से कहा, “रीता इस बार तुम अपने पति के कहने पर नहीं पर अपनी मर्जी से मेरे होंठों को चूमो। मैं तुम्हारा चुम्बन पाकर धन्य हो जाऊंगा।”
बिना कोई उत्तर दिए कुछ क्षोभ में और कुछ सूरज के लंड के रीता की चूत के स्पर्श होने पर उत्तेजना के मारे अनायास ही रीता का मुंह सूरज के मुंह को चूमने के लिए खुल गया। रीता की नाक सूरज की नाक से कुछ समय तक रगड़ने के बाद उनके होंठ मिले और देखते ही देखते रीता के पूरे बदन में कामवासना की आग भड़क उठी। रीता ने अपनी चूत में से उसके स्त्री रस को उदारता से रिसते हुए महसूस किया। रीता की चूत और रीता के स्तनों में एक अजीब सी कामुक हलचल मचलने लगी।
सूरज के हाथ रीता के कूल्हों और गांड की दरार को कुरेदने लगे। सूरज ने अपना तगड़ा लंड रीता की चूत से रगड़ना शुरू किया। रीता ने सूरज के तगड़े लंड को अपनी चूत से रगड़ते हुए महसूस किया। स्विंमिंगपूल के पास की फर्श पर लेटे हुए रीता को सूरज के तगड़े लंड की मोटाई और लम्बाई का कुछ एहसास तो हो ही गया था।
उसे महसूस होते ही रीता के रोम-रोम में एक कंपन सी दौड़ पड़ी। कुछ पलों के लिए रीता को लगा की सूरज उसे चोदना चाहता है और इस अंधेरे का फायदा उठा कर वह रीता को अपनी कमर पर हवा में उठाये हुए रीता की कोमल सी नाजुक चूत में अपना सांड सा लम्बा और मोटा लंड डाल कर रीता को चोदना शुरू कर देगा।
रीता उस हाल में नहीं थी कि सूरज को उसे चोदने से रोक पाए। उसकी अपनी चूत अपना स्त्री रस निकाल रही थी। रीता खुद चाहती थी कि सूरज उसे चोदे। पर रीता ने कुछ डर के मारे और कुछ लाज और शर्म के मारे सूरज को आगे बढ़ने से रोका। अपनी टांगें खोल कर रीता सूरज की कमर से नीचे सरक फर्श पर खड़ी हो गयी। रीता के इस तरह रोक ने से हतप्रभ सूरज का हाथ थाम कर रीता ने सूरज को किनारे पर रखी हुई कुर्सी के पास ले जा कर उसके उपर लिटा दिया।
अपने घुटनों के नीचे एक तौलिये को डाल कर घुटनों के बल नीचे फर्श पर कुर्सी के करीब बैठ कर एक हाथ से सूरज का लंड अपने हाथ में ले कर रीता बोली, ” सूरज थोड़ा रुक जाइये। धीरज का फल मीठा होता है। मैं आपको वचन देती हूँ कि आज रात को मैं कमरे में पलंग पर आपका अच्छे तरीके से एक पत्नी जैसे ही धन्यवाद करूंगी। पर इस खुले माहौल में नहीं। जब तक मेरे पति या आपकी पत्नी यहां हमें ढूंढते हुए आ नहीं जाते तब तक आप इसी से काम चला लीजिये।”
यह कह कर रीता ने अपने चारों और देखा। अंधेरे में उसे कोई नजर नहीं आया। तब पहली बार बिना कोई डर, शर्म या दोष भाव के रीता ने झुक कर सूरज के लंड को अपने हाथ में पकड़ कर लंड की ऊपर वाली त्वचा को प्यार से अपनी हथेली में ले कर ऊपर-नीचे हिलाना शुरू किया। रीता के हाथ का स्पर्श पाते ही सूरज के मुंह से दबी हुई सिसकारियां निकलने लगी। रीता के बालों को अपने हाथों से संवारते हुए अपनी आंखें मूंदे हुए सूरज रीता के हस्त मैथुन का आनंद उठाने लगा।
जल्द ही रीता ने झुक कर सूरज का महाकाय लंड अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। तब जा कर रीता को सूरज के लंड की लम्बाई और मोटाई का अच्छा सा अंदाज हुआ। सूरज के लंड की मोटाई ऐसी थी कि रीता जान गयी कि उसके लिए उस लंड को मुंह में घुसा पाना नामुमकिन था।
रीता के मुंह की लार से लथपथ सूरज का वैसे ही चिकना गीला लंड उस अंधेरे में भी चमकने लगा। लंड के टोपे को चाटते हुए कुछ ही देर में रीता ने सूरज के लंड के टोपे के सिरे को धीरे-धीरे अपने मुंह में ले कर उसे चूसना शुरू किया, और अपना मुंह ऊपर-नीचे करते हुए अपने होंठों से उसे होंठ चुदाई का आनंद देने लगी।
रीता के मुंह में तो लंड नहीं गया पर टोपे की ही ऐसी सेवा समर्पण से सूरज के सारे रोंगटे खड़े हो गये। अपने लंड की इस कदर प्यार भरी सेवा रीता के मुंह से इतनी जल्दी होगी इसकी कल्पना भी सूरज ने नहीं की होगी।
रीता से नजरें बचाते हुए मैं जब किरण के पास स्विंमिंगपूल के दूसरे छोर पर पहुंचा तो मैंने उसे पानी में किनारे को पकड़ कर लंबा लेटे हुए अपने पांव पानी की सतह पर मारते हुए पाया। किरण की छोटी सी लंगोटी जैसी उसकी पैंटी इस तरह के प्रयोगों से कई बार थोड़ी सी हट जाती और मुझे एक पल के लिए ही सही पर किरण के मादक प्रेम-छिद्र की जरा सी झांकी का आभास महसूस होने लगता।
अगर रीता उस समय सूरज के बदन में आग लगा रही थी तो उसी समय पानी से खेल रही किरण भी मेरे जहन में ज्वाला पैदा कर रही थी। किरण के बदन के लिए मेरी प्यासी नज़रों को किरण अच्छी तरह भांप गयी थी।
पर उसे मेरी कामुक नज़रों से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। जैसे ही किरण पानी में उछलती, उसकी मदमस्त फूली हुई चूचियां इतनी मादक तरीके से उसकी छाती पर उछलती थीं कि जिसे देख कर अच्छे अच्छों का पानी निकल जाए।
थोड़ा सा भी इधर-उधर घूमते हुए किरण के सुआकार भरे हुए स्पष्ट दिख रहे कूल्हों के लाल गाल इस कदर मटकते थे कि किसी की भी नजर वहां से हट ही नहीं सकती थी। किरण के घुंघराले लम्बे बाल बार-बार उसके मादक स्तनों पर बिखरते हुए बड़े ही आकर्षक तरीके से आच्छादित हो कर उनको कुछ पलों के लिए उन चूचियों को छिपाने की नाकाम कोशिश करते रहते थे।
जब-जब भी किरण अपना सिर एक तगड़े झटके से हिला कर अपने बालों को ठीक से लगाने की कोशिश करती, पानी की एक बौछार किरण के बालों से निकल कर चारों और फ़ैल जाती और उस समय लगभग नग्न किरण के इर्द-गिर्द फैली पानी की बौछारों का दृश्य बड़ा ही कामुक और मर्दों के लंड को खड़ा कर देने वाला था। मैं बेचारा पानी में खड़ा हुआ जब किरण को इस तरह पानी से खेलते हुए देखा था तो मुझे ऐसे लगता था जैसे मेरे पांव के नीचे से जमीन खिसक रही हो।
मुझे उसे घूरते हुए देख खिलखिला कर हंसती हुई किरण आगे बढ़ी और पानी की सतह ऊपर जोर से हाथ घुमाते हुए किरण ने मेरे ऊपर पानी की एक जोरदार बौछार डाली। मैंने आगे बढ़ कर किरण के ऊपर भी उसी तरह से जब पानी की बौछारें डालना शुरू किया, तब पानी की मार से झुंझलाती हुई किरण मेरे करीब आयी और मेरे हाथ को पकड़ कर मुझे रोकने की कोशिश करने लगी।
उसी समय मैंने चारों तरफ छा रहे अंधेरे में दूर से एक हल्की सी झांकी जैसे देखा कि सूरज और मेरी पत्नी रीता पानी में कुछ जद्दोजहद में लगे हुए थे। क्या सूरज मेरी पत्नी को उस समय चोद रहा था? मैं इस बात को यकीन के साथ नहीं कह सकता था।
पर मुझे इस बात का यकीन हो गया कि मेरा करतब उसी शाम को रंग लाने वाला था। मुझे रीता के पानी में डूबने की कोई चिंता इस लिए नहीं थी, क्यूंकि मैं जानता था कि काफी सशक्त होने के उपरान्त सूरज एक अच्छा तैराक भी था। मेरी पत्नी रीता सूरज के वहां होते हुए बिल्कुल सुरक्षित थी।
मैंने मुश्किल से रीता और सूरज पर से नजर हटाई और मेरे सामने खड़ी परी सी किरण पर अपनी नजर डाली। एक तरफ मेरी बीवी के हाल देख कर मुझे लग रहा था कि उसी शाम रीता के जन्मदिवस के अवसर पर ही उसकी बढ़िया चुदाई सूरज से होने वाली है। हो सकता है उसी समय वहीं स्विंमिंगपूल में ही अंधेरा होते ही मौक़ा मिलने पर सूरज रीता को चोद ही डाले।
मुझे मन में कहीं ना कहीं यह भरोसा हो चला था कि सूरज मेरी बीवी के पतिव्रता होने के नखरों को अच्छी तरह से नेस्तो-नाबूद कर रीता को अपने वश में कर लेगा। दूसरी तरफ मुझे किरण की चूत मिलने की काफी उम्मीद थी। इन्हीं उम्मीदों से उस समय किरण को उस स्विमिंग कॉस्च्यूम में पानी से खेलते हुए देख कर मेरी निक्कर में मेरा लंड तन कर एक-दम सख्ती से खड़ा हो गया था।
अचानक ही किरण ने हंसते हुए पानी की एक जोरदार बौछार मुझ पर दे मारी। मैंने पानी में ही छलांग लगाते हुए आगे बढ़ कर किरण को अपनी बांहों में पकड़ना चाहा। पर किरण कोई कम नहीं थी। वह पानी में ही फुर्ती से तैरती हुई सीढ़ी से चढ़ कर भागी और स्विंमिंगपूल के क्लब हाउस में जा पहुंची। उस समय पूरे फ़ार्म हाउस में माली, दो नौकर और दो चौकीदारों को छोड़ कर और कोई नहीं था। सब कर्मचारियों को उस समय वहां से दूर रहने की हिदायत दी गयी थी। पूरा क्लब हाउस खाली था।
पर स्विंमिंगपूल की तरह क्लब हाउस में अन्धेरा नहीं था। वहां सारी लाइटें जल रहीं थीं। शायद सूरज ने स्टाफ को जान बूझ कर स्विंमिंगपूल पर लाइटें नहीं जलाने के आदेश दिए थे। मैंने क्लब हाउस की ओर भागते हुए अंधेरे में ही स्विंमिंगपूल में रीता और सूरज के सायों को पानी में बौछारें उड़ाते हुए कुछ खेल कर रहे देखा। उस समय मैं नहीं जानता था कि रीता वहां डूब रही थी और सूरज उसे निकालने की जद्दोजहद में लगा था।
भागने से हांफती हुई किरण जब थक कर लुढ़क कर क्लब हाउस के एक सोफे पर जा गिरी, तब मैं उसके पीछे भागता हुआ सोफे के ऊपर लेटी हुई किरण के ऊपर जा गिरा। मैंने किरण को पकड़ कर सोफे पर लम्बा कर लिटा दिया, और उसके ऊपर सवार हो कर उसके मुंह पर अपना मुंह रख कर किरण के होंठों पर मैंने अपने होंठ चिपका दिए।
लम्बी सांसे लेती हुई किरण अचम्भे से बड़ी-बड़ी खुली आंखों से मुझे देखती हुई अपना मुंह खोल कर मेरी जीभ को अंदर ले कर और मेरी गर्दन के इर्द-गिर्द अपनी बांहों को लिपट कर मेरी लार को चूसने लगी।
मैंने अपने हाथों से किरण के कूल्हों को दबाते हुए किरण की गांड की दरार में अपनी उंगली डाली जिसके कारण उत्तेजित किरण सोफे पर एक-दम उछल पड़ी। किरण ने मेरी आंखों में आंखे डालते हुए हल्के से मुस्काते हुए कुछ भी बोले बिना बड़े प्यार से अपना एक हाथ मेरी जांघों के बिच में मेरी निक्कर पर रखा और मेरे सख्ती से खड़े लंड से बने तम्बू को मेरी निक्कर के ऊपर से ही सहलाने लगी।
मैं और किरण अपने मुंह की पोज़िशन को बारी-बारी से बदलते हुए अपनी जीभ को एक दूसरे के मुंह में डाल कर उस जीभ को और होंठों को चाटने और चूसने लगे। किरण के मुंह की लार में गजब की मिठास मैंने महसूस की। किरण चुंबन में विशारद थी। काफी अरसे तक बिना रुके और बोले हम दोनों एक-दूसरे को चूमते रहे और मैं किरण की गांड को और किरण मरे लंड को सहलाते, दबाते और हिलाते रहे।
मैंने जब अपना मुंह ऊपर की और किया और किरण को सांस लेने दिया, तब किरण ने मेरी और देखा और बोली, “तुम तो गजब के किसर निकले राज! आज तक किसी ने मुझे इस तरह इतना कस कर, इतनी शिद्द्त से और इतनी देर तक नहीं चूमा। वैसे तुम्हारी बीवी रीता भी बड़ी बढ़िया किस करती है। मैंने उसे भी चूमा है।”
मैंने किरण के स्तनों के ऊपर से छोटी सी टॉप के आवरण को हटा कर, रीता के पके हुए खरबूजों से फूले हुए स्तनों के ऊपर नाचती हुई सख्त गुलाबी रंग की निप्पलों को अपनी उंगलियों में दबाते हुए किरण को कहा, “पता नहीं इस वक्त तुम्हारे पति सूरज मेरी पत्नी रीता को स्विंमिंगपूल में ही पकड़ कर हमारी ही तरह चूम ना रहे हों।”
किरण ने मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे लगता है की हमारी मेहनत आज जरूर रंग लाएगी, और तुम्हारी बीवी आज जरूर मेरे पति से चुदवायेगी। उस पार्टी में रीता ने सूरज का तगड़ा लंड महसूस किया है। मैं जानती हूं कि कोई भी स्वस्थ युवा स्त्री स्वाभाविक रूप से यदि मानसिक संकीर्णता से ऊपर उठने का मादा रखती हो, उसके लिए योग्य वातावरण हो, और उसे सही मौक़ा मिले, तो मेरे पति सूरज जैसे मनपसंद हैंडसम मर्द के तगड़े लंड से चुदवाने के लिए वह लालायित रहेगी ही। इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं है।”
मैंने किरण की छोटी सी पैंटी को नीचे उतारा और किरण ने उसे अपने पांव से नीचे की ओर खिसका कर निकाल फेंका। मैंने कहा, “किरण, मेरी पत्नी रीता को चुदवाना ही हमारा एक मात्र ध्येय नहीं है। मुझे भी तुम्हें चोदना है वह तुम क्यों भूल रही हो?”
किरण ने मुझे अपने बाहुपाश में और सख्ती से जकड़ते हुए मेरी आँखों में आँखें डालते हुए एक शरारती मुस्कान देते हुए कहा, “अगर मैं भूलना भी चाहूं तो तुम मुझे भूलने भी दोगे क्या?”
मैंने किरण की टांगों को फैलाया और उसकी जांघों के बीच किरण के प्रेम छिद्र की पंखुड़ियों को अपनी जीभ से चाटता हुआ बोला, “तुम्हें याद दिलाने के लिए मैं पहले यह तो देखूं कि तुम्हारी चूत से कितना स्त्री रस रिस रहा है और उसका स्वाद कैसा है?”
जैसे ही मेरी जीभ ने किरण की चूत की पंखुड़ियों को अपनी जीभ से कुरेदना और किरण की चूत से रिस रहे स्त्री रस को चाटना और निगलना शुरू किया, किरण की बोलती बंद हो गयी, और वह अपनी चूत पर पूरी तरह अपना पूरा ध्यान केंद्रित करती हुई अपने मुंह से सिकारियां निकालने लगी। जैसे-जैसे मैं किरण की चूत को और जोश से चाटता गया, वैसे-वैसे किरण का उन्माद बढ़ता ही गया, और उसके मुंह से निकल रही सिसकारियों की आवाज और तेज होती गयी।
कुछ ही पलों में वह क्लब हॉल किरण की सिसकारियों से गूंजने लगा। किरण मेरी चूत भक्ति देख कर हैरान रह गयी। कुछ ही देर में किरण से मेरी जीभ का कुरेदना बर्दाश्त से बाहर होने लगा। तब वह मुझे पकड़ कर हिलाती हुई बोली, “राज मुझे तुम्हारा लंड चूसना है यार! अब तुम मेरी चूत को कुछ आराम दो। उसे आज रात तुम्हारे लंड का पूरा रस निकाल लेना है।”
ऐसा कह कर किरण ने मेरी निक्कर निकाल दी, और खुद नीचे झुक कर बैठ गयी, और मेरा लंड अपने मुंह के करीब रख कर मेरे लंड का टोपा चाटने लगी।काफी समय से मेरी बीवी रीता ने मेरा लंड अपने मुंह में लिया नहीं था। मैं उसे बार-बार कहता रहता था पर वह कुछ ना कुछ बहाना कर मेरी बात को टाल देती थी। किरण की जीभ से मेरे लंड के टोपे को चाटने से मेरे पूरे बदन में जैसे एक बिजली का झटका सा लगा। मेरी कमर मारे उत्तेजना के बल खाने लगी। मैं अपने मुंह से “उन्ह… ओह… आह…” की आवाजें निकालने लगा।
किरण ने धीरे-धीरे मेरा लंड उसके मुंह में लेते हुए अपने होंठों से उसे ऐसा जबरदस्त उत्तेजक उन्माद पैदा किया कि मेरे लंड की रगों में मेरे वीर्य का उफान उठने लगा। किरण मेरे उन्माद से और भी उत्साहित हो कर और जोर से मेरे लंड को अपने मुंह से अपने होंठों के बीच से अंदर-बाहर करने लगी। मुझे मेरी पत्नी ने कभी इतना बढ़िया ओष्ठ मैथुन का अवसर नहीं दिया। मैं किरण की इस हरकत के कारण ही उसके ऊपर कुर्बान सा हो गया।
मुझे तब समझ में आया कि चुदाई में विविधता के क्या मायने होते हैं। हर पुरुष और स्त्री की चोदने और चुदवाने के अलग-अलग तरीके होते हैं, अलग-अलग लंड या चूत की अलग-अलग लम्बाई मोटाई या गहराई होती हैं। अलग-अलग स्तनों की अलग-अलग गोलाई, सख्ती या नरमी होती है। अलग-अलग जांघों के अलग-अलग आकार होते हैं। अलग-अलग गांड के अलग-अलग गालों की कोमलता या विशालता होती है।
अलग-अलग व्यक्तियों के अलग-अलग तरीके के केश होते हैं। अलग-अलग शरीर की अलग-अलग रचना होती है, और सब से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि चोदने और चुदवाने की हरेक स्त्री या पुरुष की अलग-अलग मानसिकताएं होती हैं, और ऐसी और भी कई तरह की विविधताएं होती है।
हर पुरुष और स्त्री इस विविधता से एक दूसरे को चोदना या एक-दूसरे से चुदवाना चाहते हैं। यह प्रकृति का नियम है। इस प्राकृतिक नियम को नजरअंदाज किया जाए तो कई विकृतियां होती हैं जैसे स्त्री और पुरुष का चोरी छिपे नाजायज सम्बन्ध स्थापित करना इत्यादि।
इसके कारण कभी-कभी गंभीर सामाजिक या आर्थिक या पारिवारिक संकट हो सकते हैं। इससे बेहतर है कि एक-दूसरे की सहमति से विवाहेतर सम्भोग तक का सम्बन्ध बनाना और उसे सम्भोग तक ही सीमित रखना और उसे सामाजिक, आर्थिक या पारिवारिक संबंधों से दूर रखना।
हालांकि हमारे मानसिक और सामाजिक परिपेक्ष में यह जरा सा भी आसान नहीं है, बल्कि बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। कुछ गिने-चुने लोग ही इसे सही तरीके से सफलतापूर्वक कर पाते हैं। पर यदि इरादा पक्का हो और सही मौक़ा हो तो यह हो सकता है।
शायद किरण के मुकाबले बहुत कम स्त्रियां इतनी दक्षता से ओष्ठ मैथुन करतीं होंगी। जो भी स्त्रियों से मेरा अनुभव रहा था वह किरण मुकाबले में कुछ भी नहीं थी। जिसमें मेरी पत्नी रीता को भी शामिल करूंगा।
मैं किरण के ओष्ठ मैथुन से झड़ने के कगार पर पहुंच रहा था। जिसके कारण मैंने किरण को रोका और मैंने किरण को अपने नीचे लिटा कर मैं उसके ऊपर सवार हो गया। किरण की दोनों टांगों को मेरे कन्धों पर टिका कर जैसे ही मैं किरण की चूत में मेरा लंड डालने वाला था कि स्विंमिंगपूल की तरफ से मुझे रीता और सूरज की कराहटें सुनाई दीं।
मुझे पूरा यकीन नहीं था पर जब किरण ने भी मुझे कहा कि उसने भी उन्हें सूना तब हमने अपनी चुदाई का कार्यक्रम रोकना सही समझा क्योंकि मुझे डर था कि कहीं रीता हम दोनों को इस हालत में देख कर कुछ उल्टा-पुल्टा ना कर बैठे।
हम दोनों ने फुर्ती से अपने कॉस्च्यूम पहने और तेजी से यह आवाज कैसी थी, यह जानने के लिए स्विंमिंगपूल की ओर चल पड़े। स्विमिंगपूल के इर्द-गिर्द अन्धेरा था, पर दूर आसमान के टिमटिमाते सितारों की हलकी सी रौशनी में मैं और किरण ने पूरी नंगी रीता को नंग-धड़ंग सूरज के नीचे लेटी हुई महसूस किया। मैंने उत्तेजना के मारे किरण का हाथ थामा और उसे कस कर दबाया। मैं सच कहता हूं कि उस दृश्य की हलकी सी झांकी को देख कर मुझ पर क्या बीत रही थी वह मेरे लिए कहना नामुमकीन होगा।
मैं प्रार्थना कर रहा था कि मेरी पत्नी को किसी तगड़े लंड से चुदवाने की मेरी बरसों की कामना उस शाम को सूरज पूरी करे। मेरी पत्नी रीता सूरज के नीचे लेटी हुई सूरज की बाहों में दिख रही थी और सूरज के होंठो से कस कर अपने होंठ चुसवा और चटवा रही थी।
किरण ने मेरी और देखा और अपने होंठों पर अपनी उंगली रख कर मुझे बिल्कुल आवाज ना कर, उन दो प्रेमी युगल के मैथुन में बाधा ना पहुंचे इसके लिए इशारा किया। मैं भी उनकी चुदाई के इंतजार में वहीं छिप कर उनकी प्रेम क्रीड़ा को देखता रहा। हम उतनी दूरी से उन दो प्रेमियों के बीच के वार्तालाप को नहीं सुन सकते थे। पर जैसे ही मैं सोच रहा था कि अब सूरज रीता की चूत में अपना लंड डालेगा, रीता उस पोजीशन से अचानक सूरज के साथ उठ खड़ी हुई। पता नहीं क्या हुआ था।
हमारे सारे उत्साह और उत्तेजना का मेरी पत्नी ने गुड़गोबर कर दिया था। पर कुछ ही पलों में फिर से हमारी जान में जान तब आयी, जब हमने उस अंधेरे में भी देखा कि मेरी नंगी पत्नी रीता कूद कर सूरज की कमर के इर्द-गिर्द अपनी टांगों को कस कर बांधती हुई बिल्कुल दोपहर की घटना को दोहराते हुए अपनी चूत को सूरज के लंड से सटा कर सूरज को चूमने लगी। सूरज भी रीता की गांड को अपनी हथलियों में पकड़े हुए अपने लंड को रीता की चूत के प्रेम छिद्र पर केंद्रित करने की कोशिश करने लगा। कुछ ही देर में हमें यकीन हो गया कि सूरज ने मेरी पत्नी को हवा में अपनी कमर पर रखते हुए चोदना शुरू कर दिया था।
हमें अंधेरे में ऐसा लगा भी जैसे सूरज ने मेरी बीवी को चोदना शुरू कर दिया था। तभी दोबारा रीता ने हमारा दिल तोड़ते हुए सूरज को रोक दिया। उसके कानों में कुछ बोला और सूरज का हाथ थाम कर सूरज को नजदीक की लम्बी सी कुर्सी पर लिटा दिया। उस समय मेरा बहुत मन किया कि मैं वहां जा कर उन दोनों को कुछ अच्छी सी गालियां दूं। पर किरण ने मेरा हाथ अपने एक हाथ से कस कर थाम रखा था, और दूसरे हाथ से मुझे चुप रहने का भी इशारा कर रही थी।
खैर हमें कुछ उम्मीद की किरण जगी, जब मेरी पत्नी ने सूरज के तगड़े लंड को गजब की तत्परता से चाटना और चूसना शुरू कर दिया, और सूरज मारे उत्तेजना से सिसकारियां भरने लगा। मैंने यह देख कर उत्तेजित होते हुए किरण की चूचियों को कस कर दबाया, और उसी तरह किरण ने भी मेरा लंड पकड़ा और उसे अपनी हथेली में हिलाना शुरू किया।
रीता और सूरज का तो मुझे पता नहीं पर किरण के मेरा लंड पकड़ कर हिलाने से मुझसे रहा नहीं गया और मेरे मुंह से अनायास ही एक थोड़ी तेज सी सिसकारी निकल गयी। मेरी चौकन्नी पत्नी ने उस आवाज को सुना और एक-दम सूरज के लंड को अपने मुंह से निकालती हुई बोली, “कोई है?”
किरण ने मेरा हाथ थामा और तेजी से मुझे खींच कर चेंज रूम में ले गयी। वहां हमने अपने कपड़ों को पहना और हम वहां से क्लब हाउस चल दिए। वहां फ्रिज में रखे हुए कुछ व्यंजन उठाये। दो प्लेटों में उन व्यंजनों को रख कर हमारे सामने एक टेबल पर रख कर यह दिखावा करने लगी, जैसे हम तैरने के बाद उन व्यजनों का आनंद ले रहे थे।
कुछ ही देर में हमने देखा की रीता और सूरज भी अपने कपड़े पहने हुए वहां आ पहुंचे और हमें देख कर हमारे पास आये। उनके चेहरों को देख कर यह भांपना कठिन नहीं था कि दोनों कुछ संवेदनशील समय से गुजरे हुए लग रहे थे। किरण ने हालांकि मुझे चुप्पी का इशारा कर कुछ भी बात करने से रोका।
उसी तरह वह दोनों भी क्या हुआ था उसके बारे में चुप्पी साधे हुए वहीं आ कर हमारे सामने बैठ गए। मैं समझ रहा था, कि रीता और सूरज के साथ जो हुआ था उसके बाद वह एक-दूसरे से क्या बात करें वह समझ नहीं पा रहे थे। किरण ने उन्हें कुछ जलपान दिए और सूरज और रीता कुछ जलपान कर एक-दूसरे की और देखते चुपचाप बैठे रहे।
कुछ देर बाद सूरज ने कहा, “रीता, अब हमें निकलना चाहिए क्योंकि अब कुछ ही वक्त में तुम्हारा प्रोग्राम होने वाला है, और तुम्हें मेकअप करके तैयार होना है।“
अपना सर हिलाते हुए रीता खड़ी हो गयी। हम सब वहां से रिसोर्ट वापस जाने के लिए निकल पड़े।
क्लब हाउस से निकलते हुए रीता से मैंने बात करने की कोशिश की, पर रीता मेरे धक्का देकर उसे पूल के पानी में गिराने से मुझसे बहुत ज्यादा नाराज थी। वह मुझ से बात नहीं करना चाहती थी। कार में भी वह सूरज के साथ आगे की सीट पर बैठ गयी, और मुझे और किरण को पीछे की सीट पर बैठने के लिए छोड़ दिया।
रीता के चेहरे से उसकी नाराजगी जाहिर हो रही थी। पूरे रास्ते में वह एक-दम चुप्पी साधे हुए थी। कार में वातावरण काफी गंभीर हो रहा था। किरण के सामने मैंने जब देखा तो किरण ने मेरा हाथ थाम कर अपनी आँखों से मुझे शांत रहने का इशारा किया।
कार जब रिसोर्ट के पास पहुंची, तब हमने पाया कि कार पार्क में काफी गाड़ियां आ जा रही थी। रीता ने इतनी सारी गाड़ियां देख कर कहा, “लगता है आज हमारे रिसोर्ट में कोई रईस घर की फैमिली में शादी का प्रोग्राम है।”
पर हमारी कार जब रिसोर्ट पर पहुंची तो वहां दो बड़े होर्डिंग और कई छोटे-छोटे बोर्ड लगे हुए थे जिसमें रीता के नृत्य करते हुए फोटो थे और उसके नीचे लिखा था कि उस शाम को भारत की एक उभरती नृत्य कलाकारा “रीता सचदेवा” का सार्वजनिक सम्मान समारोह था। उसमें समय इत्यादि कई और चीज़ें भी लिखी थी, जिसे पढ़ कर रीता स्तब्ध रह गयी।
रीता ने आश्चर्य में मेरी ओर देखा और कार से नीचे उतरते हुए ही पूछने लगी, “यह क्या है राज? मुझे तो कहा गया था कि यह हमारे स्कूल का कोई साधारण सा फंक्शन है।” मैंने अपने होंठों पर उंगली रखते हुए चुप्पी का इशारा कर सूरज की ओर इशारा किया और यह जताया कि सब सूरज को मालुम है।
रीता सूरज की और पलटी और पूछने लगी, “क्या बात है सूरज, आप मुझे कुछ बताते क्यों नहीं?”
सूरज ने एक छपा हुआ पर्चा रीता के हाथों में थमा दिया और कहा, “इसे पढ़ लेना। बाकी मैं तुम्हें ग्रीन रूम में मिलूंगा तब सब बताऊंगा।” यह कह कर रीता को उलझन में छोड़ कर किरण का हाथ थामे सूरज अपने कमरे की ओर बढ़ गया।
मैंने मेरी स्तब्ध सी खड़ी पत्नी रीता का हाथ थामा और रीता को अपने कमरे में ले गया। रीता पर्चा जोर से पढ़ने लगी, जिसमें लिखा था कि सूरज किरण इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की ओर से भारत की उभरती हुई महान नृत्य कलाकारा रीता सचदेवा का सार्वजनिक सम्मान होने जा रहा था। जिसमें राज्य के सम्मानित कलाकार, बड़े राजनीतिज्ञ, अफसर और शिक्षक-गण शामिल होंगे।
जिसमें सूरज किरण इवेंट मैनेजमेंट कंपनी मिस रीता को सम्मान करने के उपरांत उनके साथ एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट साइन करना चाहती है, जिसमें मिस रीता आने वाली कुछ चलचित्र मूवीज़ में अपनी नृत्य कला खुद दिखाएंगी, और कई बड़े कलाकारों को नृत्य का प्रशिक्षण भी देंगी।
इसमें कई बड़े गणमान्य व्यक्तियों के नाम भी आमंत्रण देने वालों में दिए गए थे। जिनमें सूरज राजवंशी और किरण राजवंशी दो नाम भी शामिल थे।
रीता के चेहरे पर उड़ती हवाइयां देख कर मुझे अजीब सा लगा। मैंने रीता को अपनी बाहों में लिया और बोला, “बेबी, तुम बिल्कुल चिंता मत करो। मैं सारी बात पहले से ही जानता था पर सूरज ने इसको तुम्हारे जन्म दिवस का एक बड़ा सरप्राइज़ उपहार के रूप में तुमसे छिपा के रखने के लिए बोला था।
यह सब सूरज और किरण ने किया है। वह तुम्हें बहुत चाहते हैं। सूरज तुम पर पागल है और तुम्हारा गजब का चाहने वाला है। उसने तुम्हारे लिए वह किया है जो मैं तुम्हारा पति तुम्हारे लिए नहीं कर पाता। उसने आज तुम्हारे पति का धर्म निभाया है और तुम्हें वह तोहफा देने वाला है जो तुम्हें जिंदगी से भी ज्यादा प्यारा है। उसने तुम्हारे लिए बहुत कुछ किया है।
तुम उसके लिए जो भी करोगी कम होगा। अब तुम ग्रीन रूम में मेकअप के लिए जाओ, और सूरज से बिना कोई रोक-टोक वह जो चाहे जैसे चाहे करो। मुझे उस पर पूरा भरोसा है और तुम भी उस पर 100 परसेंट भरोसा करो। आज का तुम्हारा प्रोग्राम सफल हो इसके लिए मेरी और से ढेर सारी शुभकामनाएं।”
रीता ने मेरी बात सुन कर गदगद होती हुई आँखों में पानी भरे हुए मेरे पांव छुए। मैंने उसे गले लगा कर होंठों पर एक हलकी सी किस की और फिर उसे एक धक्का मार कर ऑडिटोरियम के ग्रीन रूम की ओर भागने के लिए बाध्य किया। वहां दो मेकअप रूम थे। एक मुख्य मेकअप रूम रीता के लिए रखा गया था, और एक बाकी कलाकारों के लिए। रीता की सारी टीम और स्टूडेंट्स इत्यादि कलाकार वहां दूसरे मेकअप रूम में तैयार हो रहे थे।
रीता जब ग्रीन रूम में मेकअप मैन द्वारा तैयार हो रही थी तब सूरज ने प्रवेश किया। सूरज को देखते ही मेकअप मैन खड़ा हो गया। रीता ने आगे बढ़ कर झुक कर सूरज के पांव छूने चाहे तब सूरज ने रीता को अपने गले लगा लिया। सूरज के इशारे पर मेकअप मैन ग्रीनरूम के बाहर चला गया।
रीता की आँखों में फिर से आंसुओं की धारा बहने लगी। रीता ने सूरज की छाती पर नकली मुठी मारते हुए कहा, “सूरज, आप मुझ से यह सारी बातें क्यों छिपा रहे थे? क्या बात है मुझे साफ़-साफ़ बताइये। मैं आज से आपकी हो चुकी हूं, और आपके लिए सब कुछ करुंगी। आप मुझे जो करना चाहो करना और जो मुझसे करने के लिए कहोगे करुंगी।”
सूरज ने रीता के होंठों को चूमते हुए कहा, “रीता तुम्हें मैं प्यार से पाना चाहता हूं, जबरदस्ती से नहीं। तुम मेरी प्रेरणा हो। मैं उसी कॉलेज में पढ़ा था जिस कॉलेज में तुम पढ़ी थी। मैंने तुम्हारा अरंगेत्रम भी देखा था। उसके लिए मै माँ-बाप से झूठ बोल कर अपने घर से मुंबई गया था।
मैंने तब से तय किया था कि मैं तुम्हें एक ना एक दिन जरूर एक बड़े कलाकार के रूप में दुनिया के सामने लाऊंगा। मैं तुम्हारी सच्ची कला का जबरदस्त प्रशंसक रहा हूं। मैं तुम्हारे कॉलेज के समय से तुम्हारे डांस कला और तुम्हारे रूप के पीछे पागल था। पर जब जब मैं तुम्हारे करीब आना चाहता था, तब-तब तुम मुझसे दूर रहने की कोशिश करती थी।
मैं डील-डॉल से मोटा और निहायत ही अनाड़ी सा लड़का हुआ करता था। मैं तुमसे शादी करना चाहता था। पर तुम मुझे बिल्कुल पसंद नहीं करती थी और मुझे देखने के लिए भी तैयार नहीं थी।”
यह कहते हुए सूरज की आँखों में पानी भर गया। रीता ने अपनी हथेली से सूरज के आंसू पोंछे, उसे एक ग्लास में पानी दिया और उससे लिपट गयी और अपना सर उठा कर आगे की सूरज की जीवनी सुनने के लिए उत्सुकता से सुरज की ओर देखने लगी।
बड़ी मुश्किल से सूरज अपने आप पर नियंत्रण रखते हुए बोला, ” काफी हिम्मत जुटा कर मैंने एक दिन तुम्हें प्रोपोज़ किया। तब तुम ने मुझे एक ही झटके में रिजेक्ट कर दिया और बुरी तरह से डांट कर अपनी जिंदगी से अलग होने को कह दिया। यह सुन कर मैं अपना आपा खो बैठा। मेरे जीवन का सपना एक पल में ही चकनाचूर हो गया था। मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मैं क्या करूं। मैं ऐसे ही शराब पी कर तो कभी कोठे जा कर अपना समय बिताने लगा।
अचानक एक दिन तुम्हारी शादी की खबर मिली। मुझे बहुत दुःख हुआ जब मैंने यह सुना। मैं दरअसल यह सुन कर पूरी तरह टूट चुका था। मेरी बर्बादी की कब्र में वह आखरी कील ठुक चुकी थी। मैं तुम्हें बड़ी बेसब्री से पाना चाहता था। कभी मैं अपने आप को बर्बाद कर देना चाहता था तो कभी मैं तुम्हें गंभीर नुक्सान पहुंचाना चाहता था।”
सूरज की बात सुन कर रीता कांप उठी। सूरज ने रीता की प्रतिक्रया देख उसकी पीठ सहलाते हुए अपनी दास्तां आगे बढ़ाते हुए कहा, “मेरे माँ बाप मेरे ऐसे रवैये से काफी दुखी थे। उन्होंने पढ़ाई के बहाने मुझे विदेश भेजा। विदेश में भी मेरा पीना, आवारा गर्दी करना वगैरह चालू ही था।
वहां एक क्लब में मुझे किरण मिली। पता नहीं इस पागल लड़की को मुझमें क्या दिखा, कि वह मुझसे वैसे ही प्यार कर बैठी जैसे मैं तुमसे प्यार करता था। वह मेरे साथ रहने के लिए मेरे अपार्टमेंट में शिफ्ट हो गयी। मैं कोई झंझट नहीं चाहता था। मैंने किरण को भगाने के लिए कई हथकंडे अपनाये, किरण को तड़पाया, उससे बड़ा ही घिनौना व्यवहार किया, किरण से बहुत ज्यादा रफ़ सेक्स किया, कई बार उसे पीटा भी।
कॉलेज की कई लड़कियों को मैंने मेरे अपार्टमेंट में बुला कर किरण के सामने ही उनसे सेक्स किया। पर किरण ने कभी कोई शिकायत नहीं की। बल्कि वह मेरी सहायता करती रहती थी। वह मेरी शराब की, खाने की, कपड़ों की आदि की व्यवस्था करती रहती थी। वह मेरे साथ डटी रही।“
उसी वक्त किरण ने ग्रीन रूम में प्रवेश किया। उसे देखते ही रीता उठ कर किरण के पास गयी और रोती हुई किरण से लिपट गयी और बोली, “किरण मुझे माफ़ करना। मैंने तुम्हें अब तक गलत समझा था। तुमने मेरे सूरज को इतना प्यार दिया और अपना बना लिया। मैं बड़ी दुर्भागी हूं, और तुम बड़ी भाग्यशाली हो।”
किरण ने मेरी पीठ थपथपाते हुए कहा, “नहीं ऐसी कोई बात नहीं। अब तुम भी सूरज की उतनी ही प्राण प्यारी हो जितनी मैं हूं और सूरज भी तुम्हारा उतना ही है जितना मेरा है। बस मैं सूरज की पत्नी हूं और तुम राज की। यही फर्क है। किरण ने दाखिल होते हुए सूरज की कहानी का कुछ अंश सूना था।
वह हमारी कहानी में बाधा नहीं डालना चाहती थी। उसने ग्रीनरूम से बाहर निकलते हुए कहा, “मुझे बहुत काम है। मैं यही कहने आयी थी कि तैयार हो कर रीता को कुछ ही देर में स्टेज पर जाना है। आप लोग अपनी बात-चीत जल्दी ही खत्म कर दो वरना लेट हो जाओगे।”
सूरज ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “किरण मेरा बहुत ध्यान रखती थी। मेरे कारण कॉलेज और समाज में किरण बहुत बदनाम हुई पर किरण ने मुझे नहीं छोड़ा, ना दुत्कारा। वह मुझसे इस तरह बेतहाशा प्यार करती थी कि कई बार मेरा इंतजार करते हुए वह भूखी सो जाती। किरण मुझसे शादी कर मेरा जीवन साथी बन मेरे साथ रहना चाहती थी।
मैंने किरण से शादी के लिए कई मुश्किल शर्तें रखीं। मैंने किरण से कहा कि मैं उससे प्यार नहीं करता। मैं रीता से बेतहाशा प्यार करता था और उसे पाना चाहता था। मैंने उससे यह भी शर्त रखी कि मैं किसी भी लड़की से सेक्स करूंगा तो किरण कोई तरह की आपत्ति नहीं जतायेगी। किरण मेरे अलावा किसी से भी सेक्स नहीं करना चाहती थी।
मैंने उसे मजबूर किया कि वह मेरे अलावा दूसरे गैर मर्दों से भी सेक्स करेगी। किरण ने मेरी सारी शर्तें मान लीं। वह बार-बार पुराने जमाने वह सुरीला गाना गाया करती थी, “अगर मुझसे मोहब्बत है मुझे सब अपने ग़म दे दो, इन आँखों का हर इक आंसू मुझे मेरी कसम दे दो।” किरण ने अपने जीवन में मुझसे ऐसे ही प्यार किया। उसकी सिर्फ एक ही शर्त थी कि मैं उसे अपने जीवन साथी का दर्जा दूं और किसी और औरत से शादी कर के उसे अपने घर में ना बिठाऊं बस।“
रीता सूरज की बात सुन कर फफक-फफक कर रोने लगी। सूरज को गले लगा कर रीता ने कहा, “सूरज, आप मुझे वाकई में माफ़ कर देना, मैंने अपने अहंकार में आपके प्यार भरे दिल को रौंदा है। उसकी सजा मैं भुगतने के लिए तैयार हूँ।”
सूरज ने रीता के आंसू पोंछते हुए कहा, “जो हुआ सो अच्छा ही हुआ। एक बार मैं अचानक वैसे ही बैठे-बैठे तुम्हारे बारे में सोच रहा था। मैं सोच रहा था कि मैंने तुम्हें कितना ज्यादा प्यार किया था पर तुमने मेरे प्यार की कदर नहीं की और मुझे हमेशा ठुकराया। तब अचानक ही मुझे किरण के प्यार का अहसास हुआ। मेरे इतने जुल्म सह कर भी जो मुझे इतना प्यार कर सकता है जैसा कि मैंने तुमसे किया था, तो वह कितना महान प्यार था, जिसकी मैंने कदर नहीं की थी।
उस वक्त मुझे जबरदस्त पछतावा होने लगा। किरण का प्यार देख कर मेरा मन पसीज गया। उसने मुझे सिखाया कि प्यार किसे कहते हैं। किरण के मेरी जिंदगी में आने से मेरी जिंदगी में परिवर्तन होने लगा। किरण ने मुझे धीरे-धीरे अमानुष से मानुष बनाया। उसने मुझे सही कपड़े पहनना, व्यायाम कर फिट रहना, दूसरों के प्रति कैसा व्यवहार करना और दूसरों से जीवन में प्यार करने का फलसफा सिखाया। किरण का विश्वविद्यालय में काफी रसूख था। उसने कई रिसर्च पेपर लिखे थे।”
कहानी के इस मोड़पर सूरज की आँखें भी नम होने लगी। रीता सूरज के जीवन की कथा एक पलक भी झपकाये बगैर पूरे ध्यान से सुन रही थी। उसे कल्पना भी नहीं थी कि किसी के जीवन में इतना ज्यादा परिवर्तन लाने में रीता का इतना बड़ा योगदान रहा था। सूरज की बात सुन कर रीता की आँखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। कोई कैसे भला किसी को इतना ज्यादा प्यार कर सकता है?
रीता ने सूरज का हाथ थामा और अपने होंठ सूरज के सामने किये। सूरज ने धीरे से रीता के होंठों पर अपने होंठ चिपका दिए और रीता और सूरज घनिष्ठ चुम्बन करने में जुट गए। रीता पूरी तरह से सूरज को समर्पित हो चुकी थी। रीता ने चुंबन के समाप्त होते ही सूरज की ओर देखा ताकि सूरज उसकी दास्तान आगे बढ़ा सके।
सूरज ने अपनी कहानी जारी रखते हुए कहा, “किरण ने मुझसे कोई भी अत्याधिक कठोर निर्णय ना लेने का वचन लिया और मुझे अपना वचन दिया कि वह जी जान लगाकर रीता को मेरी बनाने तक चैन की सांस नहीं लेगी। मैं आखिर में इस लड़की से हार गया। मैंने किरण से शादी कर ली। तुम्हें राज मिल गया और मुझे किरण। दोनों ही हमारे बहुत ठोस साथी दार हैं।
मैंने मेरा अध्ययन पूरा किया और किरण को ले कर मैं भारत आया। मेरे भाई हमारा बिज़नेस संभाल रहे थे। मैंने किरण के साथ मिल कर यह कंपनी सूरज किरण एंटरटेनमेंट खोली जो देखते ही देखते आज देश की एक बड़ी जानी-मानी शो बिज़नेस की कंपनी मानी जाती है। इस कंपनी के विकास में किरण का भी उतना ही योगदान है जितना कि मेरा। किरण ने तुम्हें बहुत ढूंढा तो आखिर में तुम एक स्कूल में जॉब करती हुई हो यह पता लगा।”
रीता को तब समझ आया कि किरण का रीता की स्कूल में कम तनख्वाह पर ज्वाइन करना और इस तरह रीता के पीछे पड़ जाना कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि सोची-समझी साज़िश थी, जो सूरज को रीता से मिलाने के लिए सूरज और किरण ने रची थी। पर रीता को इससे कोई शिकायत नहीं थी। इस साज़िश से सब को फायदा ही फायदा था। सूरज को रीता मिल गयी, किरण को राज मिल गया और रीता को किरण मिली।
सूरज अपनी आपबीती रीता को सुनाये जा रहा था। सूरज ने कहा, “किरण पैसों की जरूरत ना होने पर भी अपनी क्वॉलिफिकेशन्स से कहीं नीची नौकरी तुम्हारे स्कूल में ले कर के तुम्हारे पीछे लग पड़ी और तुम्हें मेरी बनाने के लिए प्रयत्नशील हो गयी। इस बीच में किरण तुम्हारे पति से मिली और उसे आकर्षित कर उससे सेक्स करने का इशारा कर उसने तुम्हारे पति को भी अपने साथ शामिल कर दिया और किरण और राज तुम्हारे दिल में मेरे लिए जगह बनाने के लिए प्रयत्नशील हो गए।
पर मैं तुम्हें तुम्हारी नफरत के बदले में तुम्हें प्यार दे कर पाना चाहता था। मैं तैयार था कि फिर भी अगर तुम तैयार ना हुई तो मैं तुम्हारा पीछा छोड़ दूंगा और आगे से तुम्हारे रास्ते में नहीं आऊंगा।“
मेरी रीता ने तब सूरज से कहा, “नफ़रत मैं क्यों करुंगी आपसे, जब आपने मेरे लिए इतना कुछ खोया है और फिर भी मेरे लिए इतना कुछ किया भी है? मुझमें अभी भी इतनी इंसानियत तो बची है। हालांकि अब मुझे धीरे-धीरे समझ में आने लगा है कि सारा माजरा क्या है, आप मुझे बाकी का हिस्सा भी सुना ही दीजिये।”
सूरज ने अपनी बात को तात्कालिक रूप से समाप्त करते हुए कहा, “मुझे तुमसे मिलाने में तुम्हारे पति राज ने मेरा पूरा साथ दिया है। किरण और मेरी शादी बड़ी ही खुली किताब की तरह है। हमने शादी के समय ही तय किया था कि हम एक-दूसरे के सेक्सुअल रिलेशन के बारे में कोई विरोध नहीं करेंगे पर एक-दूसरे से पति और पत्नी के रूप में सामाजिक, आर्थिक और संतान के संबंधों से जुड़े रहेंगे।
किरण ने मेरे लिए तुम्हें फांसने के लिए पूरे हथकंडे अपनाये। मुझे पता लगा कि एक अच्छी नृत्य कलाकारा बनने का तुम्हारा सपना मैं पूरा कर सकता हूँ। तब मैंने यह प्रोग्राम फिक्स किया और बाकी सब तुम जानती हो। जो कुछ बाकी है वह जल्दी ही तुम प्रोग्राम में जान जाओगी। अब हम प्रोग्राम में मिलेंगे। आल द बेस्ट।”
कह कर सूरज रीता के होंठ पर एक हल्की सी किस कर उसे बड़ी उलझन में सोचती और रोती हुई छोड़ ग्रीन रूम से बाहर निकल गया।
रीता को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसने कब सूरज को दुत्कार दिया था। रीता ने अपने कॉलेज जीवन में इतने ज्यादा लड़कों के प्यार के प्रस्तावों को ठुकराया था कि उसे सूरज के बारे में कुछ भी याद ही नहीं आ रहा था। सूरज की कहानी रीता के लिए आँख खोलने वाली थी। रीता अपने दिमाग पर जोर देने लगी कि सूरज को कब उसने दुत्कार दिया था।
अचानक उसकी नज़रों के सामने एक मोटा सा, दाढ़ी मूंछ बढ़ी हुई, ठीक तरह से कपडे पहनने की भी जिसे तमीज़ नहीं थी वैसा एक लंबा रईस माँ बाप का बेटा याद आया। लडकियां कॉलेज में उसका मजाक करती रहती थी। उसका नाम सूरज तो नहीं था।
दिमाग पर कुछ जोर देने से रीता को याद आया कि एक सूर्य कुमार नाम का लड़का सुबह-शाम कॉलेज जाते-आते उसका पीछा करता था। रीता के शिकायत करने पर रीता के भाई ने उसे बुरी तरह से लताड़ दिया था। उसके बाद जब वह खुद रीता के सामने आया तब रीता को याद आया कि रीता ने चप्पल से पिटाई करने और पुलिस में शिकायत तक की धमकी उसे दे कर भगा दिया था।
हाँ वही सूर्य कुमार अब सूरज बन गया था और किरण के प्रभाव के कारण अब वह एक-दम स्मार्ट, हैंडसम, पतला, साफ़ दाढी मूंछ के बगैर अच्छे कपड़ों में सजा हुआ एक आकर्षक व्यक्तित्व वाला बड़ी एंटरटेनमेंट कंपनी का मालिक सूरज बन गया था जिसके पीछे कई लडकियां पागल हो जाती थी।
खैर, रीता के मेकअप मैन ने रीता को याद दिलाया कि प्रोग्राम को सिर्फ एक घंटा ही बाकी था, और उसे बहुत काम करना था।
रीता के डांस का प्रोग्राम बड़ा ही हिट रहा। रीता ने भारत नाट्यम और अलग-अलग आधुनिक डांस शैली में फिल्मी और कई और तरीके के नृत्य पेश किये जिसमें से कुछ में स्टूडेंट्स भी शामिल थे। आखिर में रीता को गुरूजी से ख़ास मेडल दिया गया। गुरूजी ने रीता की कला की भूरी-भूरी तारीफ़ करते हुए भविष्यवाणी की कि रीता जरूर कल की एक बहुत बड़ी कलाकारा बनेगी।
अंत में रीता को मंच पर बुला कर किरण और सूरज ने एक अनुबंध, माने एक कॉन्ट्रैक्ट टेबल पर रखा। माइक से लाउड स्पीकर द्वारा पूरी जनता को जाहिर करते हुए सूरज ने कहा कि उनकी कंपनी “सूरज किरण एंटरटेनमेंट” रीता सचदेवा के साथ तीन साल का एक अनुबंध साइन करने जा रही है, जिसके एडवांस के एवज में सूरज ने रीता के हाथ में दस लाख रुपये का चैक थमा दिया और कहा कि यह सिर्फ पेशगी की रकम है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत सूरज की कंपनी रीता को तीन साल तक काम देती रहेगी जिसके लिए रीता को अच्छी खासी राशि प्राप्त होगी।
सूरज की बात सुन कर रीता स्तब्ध सी खड़ी हो गयी। उसने सपने में भी सोचा नहीं था कि उसकी कला का इस तरह इतना ज्यादा सम्मान होगा। उस प्रोग्राम में देश के जाने-माने पत्रकार और टीवी कैमरा के साथ न्यूज़ मैन भी मौजूद थे जिन्होंने यह सारा प्रोग्राम रिकॉर्ड किया था।
सूरज ने जब रीता का परिचय कराया तब कहा कि रीता सचदेवा उस समय की सबसे चमकता सितारा सी कलाकारा थी जो अगले तीन वर्षों में ना सिर्फ फिल्म जगत पर बल्कि टीवी पर भी छा जायेगी। सूरज किरण कंपनी ने उसी शाम कितने सारे मूवी लॉन्च के प्रोग्राम जाहिर किये जिसमें रीता की काफी अहम भूमिका होगी।
रीता को यह सब सुनते-सुनते चक्कर आ रहे थे। यह सब उसकी कल्पना से बाहर था। जो आदमी को उसने रिजेक्ट किया था और जिसे वह ज़रा सा भी घास नहीं डालती थी, उस आदमी ने रीता की जिंदगी का सबसे बड़ा सपना पूरा किया था। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच रीता जब मंच से नीचे उतर रही थी, तब उसे होश नहीं था कि क्या वह इसी धरातल पर थी या आसमान में उड़ रही थी। वह शाम रीता की जिंदगी की सबसे अहम और सबसे बड़ी शाम थी।
सूरज ने पुराने ज़माने का एक गाना, “अगर मुझ से मोहब्बत है मुझे सब अपने ग़म देदो, इन आँखों का हरेक आंसू मुझे मेरी कसम दे दो, अगर मुझ से मोहब्बत है।” उस शाम को सार्थक कर दिखाया। सूरज ने अपना कोई ग़म रीता को नहीं दिया पर रीता के सारे ग़म सूरज ने अपने ऊपर ले लिए और उसे एक जबरदस्त भविष्य की और अग्रसर होने का मौक़ा दिया। सूरज ने रीता के दिल में अपने लिए प्यार पैदा किया। रीता के जीवन को फूलों से भर दिया।
जब सारे ही मेहमान, कलाकार इत्यादि जा चुके थे तब रीता सूरज से मिलने के लिए बड़ी ही बेसब्र हो रही थी। रीता के स्टेज से नीचे उतरते ही रीता ने जब मुझे सूरज के बारे में पूछा तब मैंने उसे याद दिलाया कि सूरज ने एक मीटिंग रखी थी और रीता से कहा था कि इस मीटिंग में वह कुछ कहेगा।
उस मीटिंग में कुछ साफ़ साफ़ बातें होंगीं जिसे रीता अश्लील भाषा भी कह सकती है। मैंने रीता से पूछा कि क्या रीता को याद था और क्या रीता उसके लिए तैयार थी?
रीता ने मेरे सामने बड़े ही विचित्र तरीके से देखा और कहा, “आपने मुझे बता ही दिया था ना? मैं जानती हूँ यह मीटिंग सेक्स के बारे में ही है शायद। और मैंने आपको कहा था कि मुझे सूरज की हर बात मंजूर है। मैं जरूर उस मीटिंग में हाजिर रहूंगी और चर्चा में जरूर भाग लूंगी।”
रीता की इजाजत मिलते ही मैं रीता की अगुआई करते हुए एक छोटे से मीटिंग रूम में ले गया। वहां किरण और सूरज हमारे इंतजार में बैठे हुए ही थे। वास्तव में वह कोई औपचारिक मीटिंग नहीं थी। सूरज हमें और ख़ास कर रीता को कुछ कहना चाहते थे। हमारे पहुंचते ही सूरज ने खुद ही कहा कि वह हम दोनों से कुछ साफ-साफ बातें करना चाहते थे।
सूरज ने रीता को देख कर कहा, “देखो वैसे तो आप दोनों अब हमें जान-पहचान गए हो। पर यह जानना जरुरी है कि मेरी और किरण की बाकी समाज से बिल्कुल अलग सी विचारधारा से आपके विचार मेल खाते हैं या नहीं। हमने यहां एक छोटा सा ग्रुप बनाया है जिसमें पांच दम्पति हैं, जो हमारी विचारधारा और हमारे सामाजिक और आर्थिक स्तर से मेल खाते हैं। हम सब ने मिल कर आप दोनों को हमारे ग्रुप में शामिल करने के लिए आमंत्रित किया है।
अगर आप दोनों को सही लगा हो तो आप मेरी बातें सुनने के बाद शामिल हो सकते हो। अगर आप को हमारी बात सही ना लगे और आप मना करोगे, तो भी यह स्वीकार्य होगा और यह बात यहीं समाप्त हो जायेगी और सिर्फ हमारे बीच ही रहेगी।“
यह कह कर सूरज ने अपने लैपटॉप से सामने के परदे पर पावर पॉइंट प्रोग्राम से एक प्रेजेंटेशन देना शुरू किया।
उस प्रेजेंटेशन का शीर्षक था “FUCKING”। इस नाम को पढ़ते ही रीता कुछ चौंक गयी। मैंने मेरी पत्नी का हाथ थाम कर उसे शांत किया। सूरज ने इसके बारे में बोलते हुए हमें कहा, “हम ने हमारा अपना एक छोटा सा ग्रुप बनाया है। हमारे इस छोटे से ग्रुप का नाम है “FUCKING” माने “चुदाई”। इस नाम को सुन कर चौंकिए मत। इसका मतलब है हमारा जो ग्रुप है वह मित्रता, समझदारी, संवेदनशीलता, दया, अत्यंत गुप्त रूप से घनिष्ठ मित्रता का प्रयोग करने वाला, शादी-शुदा दम्पतियों से बना ग्रुप है।
चूँकि यह ग्रुप शादी-शुदा दम्पतियों के लिए है, और इसमें चुदाई की प्राथमिकता को स्वीकार करता है, और शादी के अनुबंध को एक नया रूप देने का प्रयास करता है, इसी लिए इसका नाम “FUCKING” दिया गया है। इस वक्त इस ग्रुप में मुझे और किरण को मिला कर सिर्फ पांच दम्पति हैं। अगर आप दोनों शामिल होंगे तो हम छह दम्पति हो जाएंगे।
हमारे इस ग्रुप के सदस्य शादी के रीती रिवाज और बंधन को मानते हुए उसमें कुछ संशोधन के पक्षधर हैं और हमारा नजरिया पूर्व प्रस्थापित प्रणालियों से थोड़ा सा हट कर बाकी नियमावली का पालन करना है। हम शादी के बंधन को एक सीमित परिभाषा में जैसे सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक और संतति सम्बन्धी परिपेक्ष में प्रणाली गत व्यवस्था के पक्षधर हैं।
हमारी प्रणालीगत व्यवस्था से मात्र एक ही आपत्ति है और वह है सेक्स यानी चुदाई के मामले में। हम मानते हैं कि चुदाई में शादी की मर्यादाओं को ढील देनी चाहिए। मतलब यदि पति या पत्नी अपने मन पसंद किसी गैर आदमी या औरत को चोदना अथवा उन से चुदवाना चाहें तो बगैर परम्परागत शादी के बंधन को आहत किये हुए उन्हें यह छूट होनी चाहिए।”
रीता ने उठ कर पूछा, “यदि हमने ऐसे किया तो क्या पति और पत्नी के बीच के विश्वास का ढांचा टूट नहीं जाएगा?”
किरण ने मुस्कुराते हुए जवाब देते हुए कहा, “तुम्हारी बात बिल्कुल सही है। हमारे समाज ने शादी नामक एक सामान्य सामाजिक ढांचा स्त्री और पुरुष की काम वासना माने चुदाई की पूर्ति के लिए स्थापित किया। उसे बनाये रखने के लिए कुछ मर्यादाएं भी तय की। सदियों के परीक्षण में वह खरा भी उतरा है।
इसका उद्देश्य यह था कि स्त्री और पुरुष अपनी कामवासना की पूर्ति के लिए दोनों सामान्यतः एक ही जोड़ीदार के साथ बंधे रहें ताकि इर्षा, अधिकार भाव, संपत्ति लालसा, संतान मोह इत्यादि मामले में एक दूसरे के बिच संघर्ष ना हो। इस व्यवस्था को हम कहते हैं “Exclusive Only” माने एक ही।
परन्तु इस “बाहरी नहीं” सम्बन्ध में स्त्री और पुरुष की कामवासना में जोड़ीदार बदलने पर पाबंदी थी। इसका कारण था परम्परागत पुरुषों का स्त्रियों के ऊपर आधिपत्य का भाव। इसके अलावा स्त्रियों का भी दूसरी स्त्री के प्रति इर्षा और अपनी सामाजिक और आर्थिक असुरक्षा के भाव से ग्रसित होना। पर इस पाबंदी के कारण स्त्री और पुरुष की वासनापूर्ति में विविधता और प्रयोगशीलता (मतलब दूसरे स्त्री या पुरुष से चुदाई करना) का अभाव था जो हर मनुष्य कुछ समय के सहवास के बाद चाहता है।
एक ही पत्नी को सालों साल चोदते या एक ही पति से सालों साल चुदवाते हुए स्त्री या पुरुष दोनों ही ऊब जाते हैं। इसके कारण वैवाहिक जीवन में एक तरह की नीरसता पैदा हो जाती है। हमारा ग्रुप मानता है कि अगर विचारों में हम कुछ उदारता ला पाएं तो विवाहेतर चुदाई से शादी के संबंधों को आहत किये बिना “Inclusive Approach” माने “बाहरी भी नीति अपनाने से इस कमी को पूरा किया जा सकता है।
हम हमारे इस ग्रुप के द्वारा इसी विचार को आगे बढ़ाना चाहते हैं ताकि पति अथवा पत्नी किसी गैर मर्द या औरत को चोदते हुए अपने आप को दोषी महसूस ना करें और चोरी छिपके से ऐसा ना करना पड़े जिसके कारण एक दूसरे पर अविश्वास का वातावरण पैदा हो।”
सूरज ने मेरी और रीता की और देखा। सूरज की नजर को देख और सूरज की बात सुन कर रीता मेरी और देखने लगी। मैंने अपने कंधे हिलाते हुए कहा, “मैं तो पहले से ही ऐसी व्यवस्था का पक्षधर हूँ। मुझे इस में कोई आपत्ति नहीं। मैं तो रीता पर कब से दबाव डाल रहा था कि वह किसी गैर मर्द से चुदवाये।” रीता ने भी सूरज की और देख कर अपना सर हिला कर सूरज को आगे बढ़ने के लिए इंगित किया।
सूरज ने हमारे इशारे से प्रोत्साहित हो कर और जोश से कहना चालू रखा, “हमारे ग्रुप में हम अभी सिर्फ पांच दम्पति हैं। हम दसों इस सिद्धांत में मानते हैं। जब भी हम में से किसी को किसी की पत्नी या किसी के पति से चोदने या चुदवाने का मन होता है तो वह उनसे बात करके अपने पति या पत्नी से बात कर पुरुष उस महिला को चोद सकता है। या महिला उस पुरुष से जरुरी गुप्तता रखते हुए चुदवा सकती है। किसी भी पति या पत्नी को इसमें कोई आपत्ति नहीं होती। हम ऐसे माहौल को कहते हैं “बाहरी भी” माने “Inclusive Also”.
इसमें एक दूसरे की पहचान अत्यंत गुप्त रखना सबसे बड़ी योग्यता है और इसके कारण इसमें सिर्फ इतने ही दम्पति शामिल हैं। हम चाहते हैं कि आप दोनों भी हमारे इस ग्रुप में शामिल हो कर हमारे इस ग्रुप की विविधता बढ़ाएं।”
रीता ने सूरज की और प्रश्नात्मक दृष्टि से देखने पर सूरज ने कहा, “दाखिले के तौर पर मेरी शादी किरण से हुई है तो यह जरुरी नहीं कि मैं सिर्फ किरण को ही चोद सकता हूँ। मुझे यह स्वतन्त्रता है कि मैं किसी और स्त्री को भी चोदूँ तो वह बेईमानी नहीं माननी चाहिए। यही बात किरण पर भी लागू होती है। किरण को भी यह स्वतन्त्रता है कि वह अगर किसी से चुदवाना चाहती है तो वह बिना हमारी शादी को आहत करे चुदवा सकती है।
चुदाई को छोड़ बाकी सारे मामले में जैसे समाज से सम्बन्ध, जायदाद का सवाल हो या संतानों का सवाल हो तो अपने पति या पत्नी से ही वह संबंध हो दूसरे से नहीं। यही हमारे ग्रुप का मूल सिद्धांत है। तुमने जब इस ग्रुप में शामिल होना स्वीकार किया तो इसका मतलब यह है कि तुमने भी इस सिद्धांत को माना है।”
रीता ने मेरी और देखा। उसने कभी अपनी सबसे ज्यादा तरंगी कल्पना में भी नहीं सोचा होगा कि वह कभी ऐसे ग्रुप में शामिल हो सकती है। बल्कि ऐसा कोई ग्रुप हो भी सकता है यह रीता ने सोचा नहीं था। परन्तु मैं जानता था कि रीता को उस दिन कुछ ऐसे अनुभव हुए थे कि उस शाम उसे यह सब सुनने में कोई हिचकिचाहट नहीं महसूस हुई।
मैंने अपनी उंगली उठा कर कहा, “रीता और मुझे इस ग्रुप में शामिल होना मंजूर है। पर मेरा एक सवाल है। क्या हमें इसी सोसाइटी के सदस्यों से ही चुदाई करनी पड़ेगी या फिर किसी बाहरी को भी हम चोद सकते हैं या उनसे चुदवा सकते हैं?”
सूरज ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा, “बाहरी किसी भी व्यक्ति को आप चोद सकते हैं या उनसे चुदवा सकते हैं। उस पर कोई भी पाबंदी नहीं है। बल्कि हम चाहेंगे की हमारे सिद्धांत को मानने वाले, हमारे स्तर के और भी कई दम्पति जो हमारे ग्रुप की गुप्तता रख सकते हों वह ग्रुप को ज्वाइन करें। इस ग्रुप में सिर्फ दम्पति ही ज्वाइन कर सकते हैं। अकेला स्त्री या पुरुष नहीं।
हम मात्र चुदाई पर ही जोर नहीं देते हैं। हमारे ग्रुप के एक पति सदस्य का एक परायी पत्नी सदस्य से मेल और आकर्षण बढ़ाने का एक और प्रोग्राम है और वह है अंत्योदय सेवा। इसमें हम एक पति दूसरे की पत्नी के साथ चुने हुए समाज सेवा के कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं। इस तरह दोनों में मेलजोल बढ़ता है और आकर्षण पैदा होता है, जिससे अगर वह चाहें तो मौक़ा मिलने पर चुदाई भी कर सकते हैं।
इस तरह से हम समाज सेवा भी करते हैं और चुदाई में अलग-अलग साथी दारों को चोद कर या उनसे चुदवा कर विविधता का आनंद भी लेते हैं। इसी लिए हमने इस ग्रुप का नाम सेवा के गुणों के साथ-साथ FUCKING माने चुदाई पर रखा है।“
सूरज के बात पूरी होने पर रीता भाग कर सूरज के पास गयी और कुछ शर्म से मुस्कुराती हुई बोली, “मुझे कुछ कहना है। मैं चाहती हूँ कि अब हम सब आपस में खुल्लमखुल्ला चूत, लंड, चुदाई आदि शब्दों का खुल कर प्रयोग करने में ज़रा भी ना हिचकिचाएं। आप अभी हमें आपके ग्रुप में शामिल कर लो। मैं आज ही आप से बहुत तगड़े तरीके से चुदवाना चाहती हूँ।”
रीता की बात सुन कर पीछे खड़ी किरण आगे आयी और किरण ने रीता को सूरज से दूर हटाते हुए कहा, “तुमने आज के लिए यह शर्त रखी थी कि आज के दिन सिर्फ पति ही अपनी पत्नी को चोदेंगे, दूसरे की पत्नी को नहीं। तो आज की रात तुम मेरे पति से नहीं चुदवा सकती।
आज तुम्हें तुम्हारे पति से ही काम चलाना पड़ेगा।” यह कह कर किरण रीता की और देख कर कटाक्ष पूर्वक हंसती हुई सूरज का हाथ थामे रिसोर्ट के दूसरी तरफ स्थित रॉयल सुइट में अपने कमरे की और आगे बढ़ गयी।
रीता की शकल उस वक्त देखने जैसी थी। वह किरण की हरकत से काफी आहत हुई थी। रीता रोने जैसी हो रही थी। उस दिन तक रीता की एक नजर के लिए सारे मर्द तरसते रहते थे। दुत्कारने का, या भगा देने का काम रीता करती थी। उसी रीता की सूरज से चुदवा ने की बिनती को किरण ने इस तरह बेदर्दी से ठुकरा दिया। यह रीता के लिए कोई आघात से कम न था।
मैंने चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी। अगर उस समय मैं कुछ बोल देता तो शायद रीता रो ही पड़ती। रीता ने कल्पना भी नहीं की थी कि जो किरण उसे अपने पति से चुदवाने के लिए इतना उकसा रही थी, वहीं आज रात जब रीता सूरज से चुदवा ने के लिए तैयार हो गयी थी, तब सूरज को रीता से दूर कर देगी।
रीता मेरी और देख कर रुआंसी शकल बना कर बोली, “ठीक है, मैंने यह रूल जरूर बनाया था। पर सूरज ने यह रूल बदला था और यह कहा था कि हम दोनों कपल एक दूसरे के सामने ही अपनी-अपनी बीवियों को खूब और हर तरह से छेड़ेंगे। ठीक है ना?” फिर मेरी और मुड़ कर बोली, “आप ही बताओ, सूरज ने कहा था की नहीं?”
मैंने कहा, “हाँ यह तो सूरज ने ही कहा था कि दोनों कपल एक-दूसरे के देखते हुए ही अपने साथीदार को हर तरह से चोदेंगे।”
